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चलावयव

सूची चलावयव

कार्बनिक यौगिकों के उन संरचनात्मक समावयवों को चलावयव (Tautomers) कहते हैं जो आसानी से परस्पर परिवर्तित हो जाते हैं। इस क्रिया में अधिकतर प्रोटॉन का पुनर्विन्यास होता है। यद्यपि यह एक जटिल कॉन्सेप्ट है किन्तु चलावयवता अमीनो अम्लों एवं न्युक्लिक अम्लों के सन्दर्भ में बहुत महत्व रखती है क्योंकि दोनों ही जीवन के मूलभूत निर्माण-इकाई हैं। .

1 संबंध: आइसोसायनिक अम्ल

आइसोसायनिक अम्ल

आइसोसायनिक अम्ल (Isocyanic acid) एक कार्बनिक यौगिक है जिसका रासायनिक सूत्र HNCO है। इसको सन् १८३० में वोलर (Wohler) और लीबिग ने ज्ञात किया था। यह रंगहीन, वाष्पशील तथा विषैला पदार्थ है। इसका क्वथनांक 23.5 °C होता है। इसके निर्माण की सबसे सरल विधि इसके बहुलकीकृत रूप सायन्यूरिक अम्ल (cyanuric acid) को कार्बन डाईऑक्साइड की उपस्थिति में आसवन करके तथा इससे प्राप्त वाष्पों को हिमकारी मिश्रण (freezing mixture) में संघनित करके इकट्ठा करने की है। यह बहुत ही तीव्र वाष्पशील द्रव पदार्थ है जो ० डिग्री सेल्सियस से नीचे ही स्थायी रहता है तथा इसकी अम्लीय अभिक्रिया काफी तीव्र होती है। इसमें ऐसीटिक अम्ल की सी गंध होती है। ० डिग्री सेल्सियस पर यह बहुलकीकृत होकर सायन्यूरिक अम्ल (CNOH)2 बनाता है। हाइड्रोसायनिक अम्ल या मरक्यूरिक सायनाइड पर क्लोरीन की अभिक्रिया से सायनोजन क्लोराइड (CN Cl) बनता है जो वाष्पशील विषैला द्रव है और जहरीली गैस के रूप में प्रयुक्त होता है। HCNO के दो चलावयवीय (tautomeric) रूप होते हैं। सामान्य रूप का ऐस्टर नहीं मिलता परंतु आइसोसायनेट के ऐस्टर ऐल्किल हैलाइड पर सिलवर सायनेट की अभिक्रिया से प्राप्त होते हैं। R-X + AgN .

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चलावयवता

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