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उल्लू और क्रस्टेशिया

शॉर्टकट: मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ

उल्लू और क्रस्टेशिया के बीच अंतर

उल्लू vs. क्रस्टेशिया

उल्लू एक ऐसा पक्षी है जिसे दिन कि अपेक्षा रात में अधिक स्पष्ट दिखाई देता है। इसके कान बेहद संवेदनशील होते हैं। रात में जब इसका कोई शिकार (जानवर) थोड़ी सी भी हरकत करता है तो इसे पता चल जाता है और यह उसे दबोच लेता हैl इसके पैरों में टेढ़े नाखूनों-वाले चार पंजे होते हैं जिससे इसे शिकार को दबोचने में विशेष सुविधा मिलती हैl चूहे इसका विशेष भोजन हैंl उल्लू लगभग संसार के सभी भागों में पाया जाता हैl जिन पक्षियों को रात में अधिक दिखाई देता है, उन्हें रात का पक्षी (Nocturnal Birds) कहते हैं। बड़ी आंखें बुद्धिमान व्यक्ति की निशानी होती है और इसलिए उल्लू को बुद्धिमान माना जाता है। हालांकि ऐसा जरूरी नहीं है पर ऐसा विश्वास है। यह विश्वास इस कारण है, क्योंकि कुछ देशों में प्रचलित पौराणिक कहानियों में उल्लू को बुद्धिमान माना गया है। प्राचीन यूनानियों में बुद्धि की देवी, एथेन के बारे में कहा जाता है कि वह उल्लू का रूप धारकर पृथ्वी पर आई हैं। भारतीय पौराणिक कहानियों में भी यह उल्लेख मिलता है कि उल्लू धन की देवी लक्ष्मी का वाहन है और इसलिए वह मूर्ख नहीं हो सकता है। हिन्दू संस्कृति में माना जाता है कि उल्लू समृद्धि और धन लाता है। डरावने दिखने के कारण कुछ लोग उल्लू से डरते भी हैं। . कुछ क्रस्टेशी जन्तु कठिनी या क्रस्टेशिया (Crustacea) जीवजगत्‌ में संधिपाद जीवों (फ़ाइलम ऑर्थ्रोपोडा, phylum Arthropoda) का एक मुख्य विभाग है, जिसमें बड़े केकड़ (Crabs), झींगे (Prawns), चिंगट (श्रृंप, Shrimp), प्रचिंगट (क्रे-फ़िश, cray-fish), महाचिंगट (लॉब्स्टर, lobster), खंडावर (बार्नेकिल, barnacle), काष्ठ यूका (वुड लाउस, wood louse) तथा जलपिंशु (वाटर फ़्ली, water flea) इत्यादि हैं, परंतु इसके सबसे छोटे जीवों को देखने के लिए अणुवीक्षण यंत्र का सहारा लेना पड़ता है। कठिनी की भिन्न-भिन्न जातियों के आकर प्रकार में बहुत ही अंतर होता है जिस कारण इसकी संक्षिप्त परिभाषा देना अत्यंत कठिन है। कठिनी का प्रत्येक लक्षण, विशेषकर इसके पराश्रयी तथा उच्च विशेष जीवों में तो, पूर्ण रूप से किसी न किसी प्रकार बदल जाता है। क्रस्टेशिया शब्द का उपयोग प्रारंभ में उन जीवों के लिए किया जाता रहा है जिनका कवच कठोर तथा नम्य हो। इसके विपरीत दूसरे जीव वे हैं जिनका कवच तथा भंगुर होता है, जैसे सीप तथा घोंघे इत्यादि। परंतु अब यह ज्ञात है कि सब संधिपाद जीवों का बहि:कंकाल (Fxoskeleton) कठोर तथा नम्य होता है। इस कारण अब कठिनी को अन्य लक्षणों के पृथक किया जाता है। इस वर्ग के जीव प्राय: जलनिवासी होते हैं और संसार में कोई भी ऐसा जलाशय नहीं है जहाँ इनकी कोई न कोई जाति न पाई जाती हो। इस कारण कठिनी वर्ग के जीव प्राय: जलश्वसनिका (गिलस, gills) अथवा त्वचा से श्वास लेते हैं। इनमें दो जोड़ी श्रृंगिका (Antennae) जैसे अवयव मुख के सामने और तीन जोड़ी हनु (mandibles) मुख के पीछे होते हैं। कठिनी वर्ग के मुख्य परिचित जीव तो झींगें और केकड़े हैं जिनका उपयोग मानव अपने खाद्य रूप में करता है, परंतु इनसे कहीं अधिक आर्थिक महत्व के इसके निम्न जीव ऐंफ़िपाड्ज़, (Amphipods), आइसोपाइड्ज़, (Isopods) इत्यादि, हैं जो उथले जलाशयों में समूहों में रहते हुए सम्मार्जक का काम करते हैं। इन निम्न जीवों का भोजन दूसरे जीव तथा वनस्पतियों की त्यक्त वस्तुएँ हैं और साथ ही यह स्वयं उच्च प्राणियों, जैसे मत्स्य इत्यादि, का भोजन बनते हैं। इसके कई तलप्लावी सूक्ष्म जीव ऐसे भी हैं जिनके समूह मीलों तक सागर के रंग को बदल देते हैं, जिससे मछुओं को उचित मत्स्यस्थानों का ज्ञान हो जाता है। इस प्रकार यह मत्स्य का भोजन बनकर और साथ ही मछुओं की सहायता करके आर्थिक लाभ पहुँचाते हैं। .

उल्लू और क्रस्टेशिया के बीच समानता

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उल्लू और क्रस्टेशिया के बीच तुलना

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संदर्भ

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