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२००९

सूची २००९

२००९ ग्रेगोरी कैलंडर का एक साधारण वर्ष है। वर्ष २००९ बृहस्पतिवार से प्रारम्भ होने वाला वर्ष है। संयुक्त राष्ट्र संघ, यूनेस्को एवं आइएयू ने १६०९ में गैलीलियो गैलिली द्वारा खगोलीय प्रेक्षण आरंभ करने की घटना की ४००वीं जयंती के उपलक्ष्य में इसे अंतर्राष्ट्रीय खगोलिकी वर्ष घोषित किया है। .

659 संबंधों: चन्द्रयान, चन्द्रशेखर वेंकटरमन, चमगादड़, चिरौंजी, चिली की कम्युनिस्ट पार्टी, चेन्नई, चेन्नई की संस्कृति, टॉम हैंक्स, टोंगीयाई विकिपीडिया, टीवी कॉम्बो बॉक्स, एन्ड्रेस इनिएस्‍टा, एलिजाबेथ ब्लैकबर्न, एशियाई शीतकालीन खेल, एस एम कृष्णा, एस के मिश्र, एस्टोनीयाई विकिपीडिया, एवेंज्ड सेवनफोल्ड, एंजल्स एंड डीमन्स (फ़िल्म), एंजियोग्राफी, एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में एक पारी में ४००+ रनों की सूची, एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के कीर्तिमानों की सूची, एक मामूली आदमी, एक कहानी यह भी, एकलव्य, ए॰ आर॰ रहमान, झलकारी बाई, झील, डच निम्न सैक्सन विकिपीडिया, डल झील, डहेलिया, डायनासौर ट्रेन, डायलिसिस, डायोफैंटीय समीकरण, डांस इण्डिया डांस, डिफेंडर ऑफ डेमोक्रेसी पुरस्कार, डिजास्टर फ्लिक 2012, डेड स्नो, डेनमार्क, डॉ. नैयर मसूद, डॉ. जॉर्ज ग्रियर्सन पुरस्कार, डॉ॰ बी॰आर॰ अम्बेडकर राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, जालंधर, डॉ॰ हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय, डी जयकांतन, डीप इम्पैक्ट (फिल्म), तत्ती तवी दा सच्च, तपन सिन्हा, तमांग रिपोर्ट, ताजिक विकिपीडिया, तागलोग विकिपीडिया, तितली, ..., तुर्क विकिपीडिया, 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जनवरी, १९ जनवरी, १९ अक्टूबर, १९२२, २० नवंबर, २००९, २०१०, २०१० फीफा विश्व कप, २१ जनवरी, २२ मई, २२ जनवरी, २२ जुलाई २००९ का सूर्यग्रहण, २३ नवम्बर, २३ जनवरी, २५ जून, २७ जनवरी, ३ मार्च, ३ ईडियट्स, ३ अगस्त, ३० अगस्त, ५ अप्रैल, ६ अप्रैल, ७ सितम्बर, ९ दिसम्बर, 2007-2009 का वित्तीय संकट, 2009 अमरीकी ओपन टेनिस प्रतियोगिता, 2019 एशियाई खेल, 4G सूचकांक विस्तार (609 अधिक) »

चन्द्रयान

चन्द्रयान (अथवा चंद्रयान-१) भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के चंद्र अन्वेषण कार्यक्रम के अंतर्गत द्वारा चंद्रमा की तरफ कूच करने वाला भारत का पहला अंतरिक्ष यान था। इस अभियान के अन्तर्गत एक मानवरहित यान को २२ अक्टूबर, २००८ को चन्द्रमा पर भेजा गया और यह ३० अगस्त, २००९ तक सक्रिय रहा। यह यान ध्रुवीय उपग्रह प्रमोचन यान (पोलर सेटलाईट लांच वेहिकल, पी एस एल वी) के एक संशोधित संस्करण वाले राकेट की सहायता से सतीश धवन अंतरिक्ष केन्द्र से प्रक्षेपित किया गया। इसे चन्द्रमा तक पहुँचने में ५ दिन लगे पर चन्द्रमा की कक्षा में स्थापित करने में १५ दिनों का समय लग गया। चंद्रयान का उद्देश्य चंद्रमा की सतह के विस्तृत नक्शे और पानी के अंश और हीलियम की तलाश करना था। चंद्रयान-प्रथम ने चंद्रमा से १०० किमी ऊपर ५२५ किग्रा का एक उपग्रह ध्रुवीय कक्षा में स्थापित किया। यह उपग्रह अपने रिमोट सेंसिंग (दूर संवेदी) उपकरणों के जरिये चंद्रमा की ऊपरी सतह के चित्र भेजे। भारतीय अंतरिक्षयान प्रक्षेपण के अनुक्रम में यह २७वाँ उपक्रम था। इसका कार्यकाल लगभग २ साल का होना था, मगर नियंत्रण कक्ष से संपर्क टूटने के कारण इसे उससे पहले बंद कर दिया गया। चन्द्रयान के साथ भारत चाँद को यान भेजने वाला छठा देश बन गया था। इस उपक्रम से चन्द्रमा और मंगल ग्रह पर मानव-सहित विमान भेजने के लिये रास्ता खुला। हालाँकि इस यान का नाम मात्र चंद्रयान था, किन्तु इसी शृंखला में अगले यान का नाम चन्द्रयान-२ होने से इस अभियान को चंद्रयान-१ कहा जाने लगा। .

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चन्द्रशेखर वेंकटरमन

सीवी रमन (तमिल: சந்திரசேகர வெங்கடராமன்) (७ नवंबर, १८८८ - २१ नवंबर, १९७०) भारतीय भौतिक-शास्त्री थे। प्रकाश के प्रकीर्णन पर उत्कृष्ट कार्य के लिये वर्ष १९३० में उन्हें भौतिकी का प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार दिया गया। उनका आविष्कार उनके ही नाम पर रामन प्रभाव के नाम से जाना जाता है। १९५४ ई. में उन्हें भारत सरकार द्वारा भारत रत्न की उपाधि से विभूषित किया गया तथा १९५७ में लेनिन शान्ति पुरस्कार प्रदान किया था। .

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चमगादड़

चमगादड़ चमगादड़ आकाश में उड़ने वाला एक स्तनधारी प्राणी है, जो अपनी १००० से भी अधिक प्रजातियों के साथ स्तनधारियों के दूसरे सबसे बडे़ कुल का निर्माण करता है। ये पूर्ण रूप से निशाचर होते हैं और पेड़ों की डाली अथवा अँधेरी गुफाओं के अन्दर उल्टा लटके रहते हैं। इनको दो समूहों मे विभाजित किया जाता है, पहला समूह फलभक्षी बडे़ चमगादड़ का होता है, जो देख कर और सूंघ कर अपना भोजन ढूंढते हैं जबकि दूसरा समूह् कीटभक्षी छोटे चमगादड़ का होता है, जो प्रतिध्वनि द्वारा स्थिति निर्धारण विधि के द्वारा अपना भोजन तलाशते हैं। यह एकमात्र ऐसा स्तनधारी है जो उड़ सकता है तथा रात में भी उड़ सकता है। इसके अग्रबाहु पंख मे परिवर्तित हो गये हैं जो देखने में झिल्ली (पेटाजियम) के समान लगते हैं। त्वचा की यह झिल्ली गरदन से लेकर हाथ की अँगुलियों तथा शरीर के पार्श्वभाग से होती हुई पूँछ तक चली जाती है एवं पंख का निर्माण करती है। पिछली टाँगें पतली, छोटी और नखयुक्त होती हैं। इसके शरीर पर बाल कम ही होते हैं। सिर के दोनों ओर बड़े-बड़े कर्णपल्लव पाये जाते हैं। चमगादड़ के पंखो का आकार २.९ सेण्टीमीटर से लेकर १५०० सेण्टीमीटर तक तथा इनका वजन २ ग्राम से १२०० ग्राम तक होता है। चमगादड़ उलटे लटकते हैं क्यों कि उल्टे लटके रहने से वे बड़ी आसानी से उड़ान भर सकते हैं। पक्षियों की तरह वे ज़मीन से उड़ान नहीं भर पाते, क्योंकि उनके पंख भरपूर उठान नहीं देते और उनके पिछले पैर इतने छोटे और अविकसित होते हैं कि वो दौड़ कर गति नहीं पकड़ पाते। चमगादड़ आमतौर पर अंधेरी गुफ़ाओं में दिनभर आराम करते हैं, सोते हैं और रात को ही निकलते हैं। ये सोते हुए गिर क्यों नहीं जाते इसका कारण ये है कि चमगादड़ के पैरों की नसें इस तरह व्यवस्थित हैं, कि उनका वज़न ही उनके पंजों को मज़बूती के साथ पकड़ने में मदद करता है। .

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चिरौंजी

चिरौंजी चिरौंजी या चारोली पयार या पयाल नामक वृक्ष के फलों के बीज की गिरी है जो खाने में बहुत स्वादिष्ट होती है। इसका प्रयोग भारतीय पकवानों, मिठाइयों और खीर व सेंवई इत्यादि में किया जाता है। चारोली वर्षभर उपयोग में आने वाला पदार्थ है जिसे संवर्द्धक और पौष्टिक जानकर सूखे मेवों में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। चिरौंजी दो प्रकार की वस्तुओं को कहते हैं एक तो जो मंदिर में प्रसाद के रूप में चढ़ाई जाती है वह है चिरौंजी दाना। और दूसरी है वह मिलती है हमें एक वृक्ष के फलों की गुठली से। जो फलों की गुठली फोड़कर निकाली जाती है। जिसे बोलचाल की भाषा में पियाल, प्रियाल या फिर चारोली या चिरौंजी भी कहा जाता है। चारोली का वृक्ष अधिकतर सूखे पर्वतीय प्रदेशों में पाया जाता है। दक्षिण भारत, उड़ीसा, हिमाचल प्रदेश, मध्यप्रदेश, छोटा नागपुर आदि स्थानों पर यह वृक्ष विशेष रूप से पैदा होता है। इस वृक्ष की लंबाई तकरीबन ५० से ६० फीट के आसपास की होती है। इस वृक्ष के फल से निकाली गई गुठली को मींगी कहते हैं। यह मधुर बल वीर्यवर्द्धक, हृदय के लिए उत्तम, स्निग्ध, विष्टंभी, वात पित्त शामक तथा आमवर्द्धक होती है। जिसका सेवन रूग्णावस्था और शारीरिक दुर्बलता में किया जाता है। चारोली का यह पका हुआ फल भारी होने के साथ-साथ मधुर, स्निग्ध, शीतवीर्य तथा दस्तावार और वात पित्त, जलन, प्यास और ज्वर का शमन करने वाला होता है। इस वृक्ष के फल की गुठली से निकली मींगी और छाल दोनों मानवीय उपयोगी होती है। चिरौंजी का उपयोग अधिकतर मिठाई में जैसे हलवा, लड्डू, खीर, पाक आदि में सूखे मेवों के रूप में किया जाता है। सौंदर्य प्रसाधनों में भी इसका उपयोग किया जाता है। .

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चिली की कम्युनिस्ट पार्टी

right चिली की कम्युनिस्ट पार्टी (Partido Comunista de Chile) चिली का एक साम्यवादी दल है। चिली की कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) चिली के एक राजनीतिक पार्टी लुइस एमिलिओ रेकाबार्रेन, कार्ल मार्क्स, लेनिन के विचार से प्रेरित है। इस दल का नेता गुइजेर्मो तेल्लेर है। यह 4 जून, 1912 को सोशलिस्ट वर्कर्स पार्टी के रूप में स्थापित किया गया था और इसके वी कांग्रेस कम्युनिस्ट इंटरनेशनल में शामिल होने को गोद ले, चिली की कम्युनिस्ट पार्टी का नाम अपनाने लुइस एमिलिओ रेकाबार्रेन, पाब्लो नेरूदा, विक्टर झारा, ग्लाद्य्स मरीन, वोलोडिया टेइतेल्बोइम और दूसरों के बीच कैमिला वल्लेजो: इसकी सबसे प्रमुख सदस्यों और परिचितों के बीच में शामिल हैं। इसकी युवा शाखा चिली (JJCC) की कम्युनिस्ट यूथ है। चिली में 13 दिसम्बर 2009 पर अंतिम विधायी चुनावों में पार्टी जीता "Juntos Podemos Mas" के भाग के रूप में 3 एंथोनी के चैंबर में 120 सीटों के बाहर की सूची.

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चेन्नई

चेन्नई (पूर्व नाम मद्रास) भारतीय राज्य तमिलनाडु की राजधानी है। बंगाल की खाड़ी से कोरोमंडल तट पर स्थित यह दक्षिण भारत के सबसे बड़े सांस्कृतिक, आर्थिक और शैक्षिक केंद्रों में से एक है। 2011 की भारतीय जनगणना (चेन्नई शहर की नई सीमाओं के लिए समायोजित) के अनुसार, यह चौथा सबसे बड़ा शहर है और भारत में चौथा सबसे अधिक आबादी वाला शहरी ढांचा है। आस-पास के क्षेत्रों के साथ शहर चेन्नई मेट्रोपॉलिटन एरिया है, जो दुनिया की जनसंख्या के अनुसार 36 वां सबसे बड़ा शहरी क्षेत्र है। चेन्नई विदेशी पर्यटकों द्वारा सबसे ज्यादा जाने-माने भारतीय शहरों में से एक है यह वर्ष 2015 के लिए दुनिया में 43 वें सबसे अधिक का दौरा किया गया था। लिविंग सर्वेक्षण की गुणवत्ता ने चेन्नई को भारत में सबसे सुरक्षित शहर के रूप में दर्जा दिया। चेन्नई भारत में आने वाले 45 प्रतिशत स्वास्थ्य पर्यटकों और 30 से 40 प्रतिशत घरेलू स्वास्थ्य पर्यटकों को आकर्षित करती है। जैसे, इसे "भारत का स्वास्थ्य पूंजी" कहा जाता है एक विकासशील देश में बढ़ते महानगरीय शहर के रूप में, चेन्नई पर्याप्त प्रदूषण और अन्य सैन्य और सामाजिक-आर्थिक समस्याओं का सामना करता है। चेन्नई में भारत में तीसरी सबसे बड़ी प्रवासी जनसंख्या 2009 में 35,000 थी, 2011 में 82,7 9 0 थी और 2016 तक 100,000 से अधिक का अनुमान है। 2015 में यात्रा करने के लिए पर्यटन गाइड प्रकाशक लोनली प्लैनेट ने चेन्नई को दुनिया के शीर्ष दस शहरों में से एक का नाम दिया है। चेन्नई को ग्लोबल सिटीज इंडेक्स में एक बीटा स्तरीय शहर के रूप में स्थान दिया गया है और भारत का 2014 का वार्षिक भारतीय सर्वेक्षण में भारत टुडे द्वारा भारत का सबसे अच्छा शहर रहा। 2015 में, चेन्नई को आधुनिक और पारंपरिक दोनों मूल्यों के मिश्रण का हवाला देते हुए, बीबीसी द्वारा "सबसे गर्म" शहर (मूल्य का दौरा किया, और दीर्घकालिक रहने के लिए) का नाम दिया गया। नेशनल ज्योग्राफिक ने चेन्नई के भोजन को दुनिया में दूसरा सबसे अच्छा स्थान दिया है; यह सूची में शामिल होने वाला एकमात्र भारतीय शहर था। लोनाली प्लैनेट द्वारा चेन्नई को दुनिया का नौवां सबसे अच्छा महानगरीय शहर भी नामित किया गया था। चेन्नई मेट्रोपॉलिटन एरिया भारत की सबसे बड़ी शहर अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। चेन्नई को "भारत का डेट्रोइट" नाम दिया गया है, जो शहर में स्थित भारत के ऑटोमोबाइल उद्योग का एक-तिहाई से भी अधिक है। जनवरी 2015 में, प्रति व्यक्ति जीडीपी के संदर्भ में यह तीसरा स्थान था। चेन्नई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्मार्ट सिटीज मिशन के तहत एक स्मार्ट शहर के रूप में विकसित किए जाने वाले 100 भारतीय शहरों में से एक के रूप में चुना गया है। विषय वस्तु 1 व्युत्पत्ति 2 इतिहास 3 पर्यावरण 3.1 भूगोल 3.2 भूविज्ञान 3.3 वनस्पति और जीव 3.4 पर्यावरण संरक्षण 3.5 जलवायु 4 प्रशासन 4.1 कानून और व्यवस्था 4.2 राजनीति 4.3 उपयोगिता सेवाएं 5 वास्तुकला 6 जनसांख्यिकी 7 आवास 8 कला और संस्कृति 8.1 संग्रहालय और कला दीर्घाओं 8.2 संगीत और कला प्रदर्शन 9 सिटीस्केप 9.1 पर्यटन और आतिथ्य 9.2 मनोरंजन 9.3 मनोरंजन 9.4 शॉपिंग 10 अर्थव्यवस्था 10.1 संचार 10.2 पावर 10.3 बैंकिंग 10.4 स्वास्थ्य देखभाल 10.5 अपशिष्ट प्रबंधन 11 परिवहन 11.1 एयर 11.2 रेल 11.3 मेट्रो रेल 11.4 रोड 11.5 सागर 12 मीडिया 13 शिक्षा 14 खेल और मनोरंजन 14.1 शहर आधारित टीम 15 अंतर्राष्ट्रीय संबंध 15.1 विदेशी मिशन 15.2 जुड़वां कस्बों - बहन शहरों 16 भी देखें 17 सन्दर्भ 18 बाहरी लिंक व्युत्पत्ति इन्हें भी देखें: विभिन्न भाषाओं में चेन्नई के नाम भारत में ब्रिटिश उपस्थिति स्थापित होने से पहले ही मद्रास का जन्म हुआ। माना जाता है कि मद्रास नामक पुर्तगाली वाक्यांश "मैए डी डीस" से उत्पन्न हुआ है, जिसका अर्थ है "भगवान की मां", बंदरगाह शहर पर पुर्तगाली प्रभाव के कारण। कुछ स्रोतों के अनुसार, मद्रास को फोर्ट सेंट जॉर्ज के उत्तर में एक मछली पकड़ने वाले गांव मद्रासपट्टिनम से लिया गया था। हालांकि, यह अनिश्चित है कि क्या नाम यूरोपियों के आने से पहले उपयोग में था। ब्रिटिश सैन्य मानचित्रकों का मानना ​​था कि मद्रास मूल रूप से मुंदिर-राज या मुंदिरराज थे। वर्ष 1367 में एक विजयनगर युग शिलालेख जो कि मादरसन पट्टणम बंदरगाह का उल्लेख करता है, पूर्व तट पर अन्य छोटे बंदरगाहों के साथ 2015 में खोजा गया था और यह अनुमान लगाया गया था कि उपरोक्त बंदरगाह रोयापुरम का मछली पकड़ने का बंदरगाह है। चेन्नई नाम की जन्मजात, तेलुगू मूल का होना स्पष्ट रूप से इतिहासकारों द्वारा साबित हुई है। यह एक तेलुगू शासक दमारला चेन्नाप्पा नायकुडू के नाम से प्राप्त हुआ था, जो कि नायक शासक एक दमनदार वेंकटपति नायक था, जो विजयनगर साम्राज्य के वेंकट III के तहत सामान्य रूप में काम करता था, जहां से ब्रिटिश ने शहर को 1639 में हासिल किया था। चेन्नई नाम का पहला आधिकारिक उपयोग, 8 अगस्त 1639 को, ईस्ट इंडिया कंपनी के फ्रांसिस डे से पहले, सेन्नेकेसु पेरुमल मंदिर 1646 में बनाया गया था। 1 99 6 में, तमिलनाडु सरकार ने आधिकारिक तौर पर मद्रास से चेन्नई का नाम बदल दिया। उस समय कई भारतीय शहरों में नाम बदल गया था। हालांकि, मद्रास का नाम शहर के लिए कभी-कभी उपयोग में जारी है, साथ ही साथ शहर के नाम पर स्थानों जैसे मद्रास विश्वविद्यालय, आईआईटी मद्रास, मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मद्रास मेडिकल कॉलेज, मद्रास पशु चिकित्सा कॉलेज, मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज। चेन्नई (तमिल: சென்னை), भारत में बंगाल की खाड़ी के कोरोमंडल तट पर स्थित तमिलनाडु की राजधानी, भारत का पाँचवा बड़ा नगर तथा तीसरा सबसे बड़ा बन्दरगाह है। इसकी जनसंख्या ४३ लाख ४० हजार है। यह शहर अपनी संस्कृति एवं परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। ब्रिटिश लोगों ने १७वीं शताब्दी में एक छोटी-सी बस्ती मद्रासपट्ट्नम का विस्तार करके इस शहर का निर्माण किया था। उन्होंने इसे एक प्रधान शहर एवं नौसैनिक अड्डे के रूप में विकसित किया। बीसवीं शताब्दी तक यह मद्रास प्रेसिडेंसी की राजधानी एवं एक प्रमुख प्रशासनिक केन्द्र बन चुका था। चेन्नई में ऑटोमोबाइल, प्रौद्योगिकी, हार्डवेयर उत्पादन और स्वास्थ्य सम्बंधी उद्योग हैं। यह नगर सॉफ्टवेयर, सूचना प्रौद्योगिकी सम्बंधी उत्पादों में भारत का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक शहर है। चेन्नई एवं इसके उपनगरीय क्षेत्र में ऑटोमोबाइल उद्योग विकसित है। चेन्नई मंडल तमिलानाडु के जीडीपी का ३९% का और देश के ऑटोमोटिव निर्यात में ६०% का भागीदार है। इसी कारण इसे दक्षिण एशिया का डेट्रॉएट भी कहा जाता है। चेन्नई सांस्कृतिक रूप से समृद्ध है, यहाँ वार्षिक मद्रास म्यूज़िक सीज़न में सैंकड़ॊ कलाकार भाग लेते हैं। चेन्नई में रंगशाला संस्कृति भी अच्छे स्तर पर है और यह भरतनाट्यम का एक महत्त्वपूर्ण केन्द्र है। यहाँ का तमिल चलचित्र उद्योग, जिसे कॉलीवुड भी कहते हैं, भारत का द्वितीय सबसे बड़ा फिल्म उद्योग केन्द्र है। .

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चेन्नई की संस्कृति

एक भरतनाट्यम नर्तकी चेन्नई भारत की सांस्कृतिक एवं संगीत राजधानी है। शहर शास्त्रीय नृत्य-संगीत कार्यक्रमों और मंदिरों के लि प्रसिद्ध है। प्रत्येक वर्ष चेन्नई में पंच-सप्ताह मद्रास म्यूज़िक सीज़न कार्यक्रम का आयोजन होता है। यह १९२७ में मद्रास संगीत अकादमी की स्थापना की वर्षगांठ मानने के साथ आयोजित होता है। इसमें शहर और निकट के सैंकड़ों कलाकारों के शास्त्रीय कर्नाटक संगीत के कार्यक्रम आयोजित होते हैं। एक अन्य उत्सम चेन्नई संगमम प्रत्येक वर्ष जनवरी में तमिल नाडु राज्य की विभिन्न कलाओं को दर्शाता है। चेन्नई को भरतनाट्यम के लिए भी जाना जाता है। यह दक्षिण-भारत की प्रसिद्ध नृत्य शैली है। शहर के दक्षिणी भाग में तटीय क्षेत्र में कलाक्षेत्र नामक स्थान भरतनाट्यम का प्रसिद्ध सांस्कृतिक केन्द्र है।चेन्नई में भारत के कुछ सर्वोत्तम कॉयर्स हैं, जो क्रिसमस के अवसर पर अंग्रेज़ी और तमिल में विभिन्न कैरल कार्यक्रम करते हैं। मद्रास म्यूज़िकल असोसियेशन भारत के सबसे पुराने और प्रतिष्ठावान क्वायर्स में से एक हैं और इन्होंने विश्व भर में कार्यक्रम दिये हैं। चेन्नई तमिल चलचित्र उद्योग, जिसे कॉलीवुड भी कहते हैं, का आधार शहर है। यह उद्योग कोडमबक्कम में स्थित है, जहां अधिकांश फिल्म स्टूडियों हैं। इस उद्योग के द्वारा आजकल १५० से अधिक फिल्में वार्षिक बनायी जाती हैं और इनके साउण्डट्रैक के एल्बम भी शहर को संगीतमय करते हैं। इस उद्योग से जुड़े कुछ व्यक्तियों के नामों में इलैयाराजा, के बालाचंदर, शैवाजी गणेशन, एम जी रामचंद्रन, रजनीकांत, कमल हसन, मणि रत्नम और एस शंकर हैं। सांभर वड़ा और इडलीए आर रहमान ने चेन्नई को अन्तर्राष्ट्रीय प्रसिद्धि दिलायी है। रहमान को २००९ में स्लमडॉग मिलेनियर के लिए दो ऑस्कर सम्मान मिले थे। चेन्नई में रंगमंच पर तमिल नाटक मंचित किये जाते हैं, जिनमें राजनीतिक, व्यंग्य, हास्य, पौराणिक, आदि सभी रसों का मिश्रण होता है। इनके अलावा अंग्रेज़ी नाटकों का भी मंचन आयोजित होता है। शहर के उत्सवों में जनवरी माह में आने वाला पंच-दिवसीय पोंगल प्रमुख है। इसके अलावा सभि मुख्य त्यौहार जैसे दीपावली, ईद, क्रिसमस आदि भी हर्षोल्लास से मनाये जाते हैं। तमिल व्यंजनों में शाकाहारी और मांसाहारी दोनों ही व्यंजनों का सम्मिलन है। शहर में विभिन्न स्थानों पर अल्पाहार या टिफिन भी उपलब्ध है, जिसमें पोंगल, दोसा, इडली, वड़ा, आदि मिलते हैं, जिसको गर्मा गर्म या ठंडी कॉफी के संग परोसा जाता है। .

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टॉम हैंक्स

थॉमस जेफ्री "टॉम " हैंक्स (जन्म 9 जुलाई 1956) एक अमेरिकी अभिनेता, निर्माता, लेखक और निर्देशक हैं। एक नाटकीय अभिनेता के रूप में कई उल्लेखनीय भूमिका में सफलता प्राप्त करने के पूर्व हैंक्स ने एंड्रयू बेकेट की फिलाडेल्फिया, फॉरेस्ट गंप (Forrest Gump) में शीर्षक पात्र की भूमिका, अपोलो 13 में कमांडर जेम्स ए लवेल, सेविंग प्राइवेट रायन में कप्तान जॉन एच.

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टोंगीयाई विकिपीडिया

टोंगीयाई विकिपीडिया विकिपीडिया का टोंगीयाई भाषा का संस्करण है। यह जनवरी, २००४ में आरंभ किया गया था। २८ मार्च, २००९ तक इस विकिपीडिया पर लेखों की कुल संख्या १,४९४+ है और यह विकिपीडिया का १५९वां सबसे बड़ा संस्करण है।.

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टीवी कॉम्बो बॉक्स

सेट्टौप बौक्स टीवी कॉम्बो बॉक्स कम्प्यूटर पर जुड़ने वाला एक ऐसा बाहरी उपकरण है जिसे कंप्यूटर मॉनीटर से जोड़ा जा सकता है। यह कंप्यूटर की स्क्रीन पर टीवी के प्रोग्राम देखने के काम आता है।।हिन्दुस्तान लाइव।।१ नवंबर, २००९ यह कार्य प्रायः टीवी ट्यूनर कार्ड से ही लिया जाता है। इससे भी मॉनीटर स्क्रीन पर टीवी देखा जा सकता है, लेकिन, टीवी कांबो बॉक्स से बिना कंप्यूटर चलाए (सीपीयू की पॉवर ऑन किए बिना) ही टीवी के कार्यक्रम देखे जा सकते हैं। इस कोंबो बॉक्स में अंदर स्थित स्पीकर भी लगे होते हैं, जिनकी मदद से टीवी की आवाज भी सुनी जा सकती है, तथा इसमें बाहरी स्टीरियो स्पीकर जोड़कर आवाज सुनने का भी विकल्प होता है। इसके अलावा इसमें कैलकुलेटर, कंप्यूटर गेम्स और टाइमर जैसे प्रकार्य-प्रोग्राम भी उपलब्ध होते हैं। इसका प्रयोग इसके साथ उपलब्ध रिमोट नियंत्रण से किया जाता है। रिमोट पर सभी विकल्प उपलब्ध होते हैं। यह टीवी और कंप्यूटर के प्रकार्यों को बिना जोड़े या हटाये उपयोक्ता की इच्छानुसार रिमोट से बदल कर देखने के काम आता है। यानी जब चाहें टीवी देखें और जब मन हो कंप्यूटर पर काम करें। रिमोट पर ही इसके लिए विकल्प उपलब्ध होता है। इसके रिमोट पर ही सब तरह के नियंत्रक बटन उपल्ब्ध होते हैं। जिनमें सामान्य केबल या डिश टीवी रिमोट जैसी सभी सुविधाएं होती हैं। कोंबो बॉक्स में ऑपरेटर से प्राप्त केबल, डीटीएच केबल, यूएसबी केबल को जोड़ा जा सकता है। कोंबो बॉक्स के रिमोट की मदद से ऐसे १००० तक चैनल तक देख सकते हैं, जिनकी सेवा स्रोत से उपलब्ध हो। .

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एन्ड्रेस इनिएस्‍टा

एन्ड्रेस इनिएस्‍टा लुहान; (11 मई 1984 को फुएन्टिलबिला (Fuentealbilla), एल्बाकेट (Albacete) (कैस्टिले-ला मांचा (Castile-La Mancha) में जन्‍म लिया) एक स्पेनी फ़ुटबॉल मिडफील्‍डर खिलाडी है जो वर्तमान में स्‍पेन के ला लिगा क्‍लब एफ सी बार्सिलोना के लिए खेलते हैं। स्‍वाभाविक विनम्रता के साथ, पिच पर कहीं भी खेलने की उनकी इच्‍छा ने उन्हें स्‍पेनिश प्रेस से एल इल्‍यूजनिस्‍टा (El Ilusionista) (जादूगर), एल एंटी-ग्‍लैटिको (El Anti-Galáctico) द एंटी ग्‍लैक्टिको (The Anti-Galáctico) सेरेब्रो (Cerebro), (मष्‍तिष्‍क) और सबसे हाल ही में डॉन ऐंड्रेस (Don Andrés) से सम्मान अर्जित कराया है। 2009 के यूइएफए (UEFA) चैंपियंस लीग फाइनल के बाद, मैनचेस्टर यूनाइटेड के स्ट्राइकर वेन रूनी ने कहा कि उनका मानना है एन्ड्रेस मिडफील्डरों की दुनिया में सबसे अच्छा खिलाड़ी है। बार्सिलोना के साथ उनका वर्तमान अनुबंध 2015 तक है। .

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एलिजाबेथ ब्लैकबर्न

ऑस्ट्रेलियाई मूल की एलिजाबेथ ब्लैकबर्न नोबेल पुरस्कार प्राप्त जीव वैज्ञानिक हैं जिनको कोशिका विभाजन के दौरान गुणसूत्रों की प्रतिकृति तथा इस दौरान उसमें विकृति से होने वाले स्वत: बचाव की प्रक्रिया पर शोध के लिए यह प्राप्त हुआ। .

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एशियाई शीतकालीन खेल

एशियाई शीतकालीन खेल एक बहु-क्रीड़ा खेल प्रतियोगिता है जिसमे एशियाई ओलम्पिक परिषद के सदस्य भाग लेते हैं। जापानी ओलम्पिक समिति ने सबसे पहले १९८२ में एशियाई खेलों के शीतकालीन रुपान्तर को सुझाया था। उनका प्रयास रंग लाया और जापान को १९८६ में पहले शीतकालीन एशियाई खेलों की मेज़बानी मिली, क्योंकि जापान के सपोरो नगर पास १९७२ शीतकालीन ओलम्पिक खेलों का अनुभव और खेल-ढाँचा उपलब्ध था। पहले खेलों में एशियाई ओलम्पिक परिषद के सात सदस्यों की भागीदारी से लेकर अब तक भाग लेने वाले देशों की संख्या बढ़ी है। चांग्चुन में सबसे हाल के एशियाई शीतकालीन खेलों में एशिया के ४५ में से २७ देशों ने रिकॉर्ड संख्या में खिलाड़ियों को भेजा और सभी ४५ राओस ने प्रतिनिधि मण्डल भेजे, जो इन खेलों के इतिहास में पहली बार हुआ था। यद्यपि २००९ में लेबनान में खेलों का आयोजन करने कि सोची गई लेकिन फिर यह खेल नहीं हो सके। .

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एस एम कृष्णा

एस एम कृष्णा, जन्म1932, पूरा नाम- सोमनाहल्ली मल्लैया कृष्णा, वर्ष1999 से 2004 कर्नाटक के मुख्यमंत्री रहे और वर्ष 2004 से 2008 तक महाराष्ट्र के राज्यपाल रहे। 22 मई 2009 को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कृष्णा को केंद्रीय कैबिनेट में शामिल किया गया और 23 मई 2009 विदेश मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी .

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एस के मिश्र

एस के मिश्र को सन २००९ में भारत सरकार द्वारा प्रशासकीय सेवा के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये हरियाणा राज्य से हैं। .

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एस्टोनीयाई विकिपीडिया

एस्टोनीयाई विकिपीडिया विकिपीडिया का एस्टोनीयाई भाषा का संकरण है। यह २४ जुलाई, २००२ में आरंभ किया गया था और इस पर लेखों की कुल संख्या २५ मई, २००९ तक ६३,५००+ है। यह विकिपीडिया का चौतीसवां सबसे बड़ा संकरण है।.

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एवेंज्ड सेवनफोल्ड

एवेंज्ड सेवनफोल्ड (Avenged Sevenfold) हंटिंग्टन बीच, कैलिफोर्निया में स्थित एक अमेरिकी रॉक बैंड है, जिसका गठन 1999 में हुआ था। बैंड में गायक एम.

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एंजल्स एंड डीमन्स (फ़िल्म)

एंजल्स एंड डीमन्स डैन ब्राउन के इसी नाम के उपन्यास का अमेरिकी फ़िल्म रूपांतरण है। यह दा विंची कोड की अगली कड़ी है, हालांकि उपन्यास एंजल्स एंड डीमन्स पहले प्रकाशित हुआ था और दा विंची कोड से पहले घटित होता है। इसका फ़िल्मांकन रोम, इटली और कल्वर सिटी, कैलिफ़ोर्निया के सोनी पिक्चर्स स्टूडियो में किया गया। टॉम हैंक्स ने रॉबर्ट लैंगडन की मुख्य भूमिका दोहराई है, जबकि निर्देशक रॉन हावर्ड, निर्माता ब्रायन ग्रेज़र, संगीतकार हैन्स ज़िम्मर और पटकथा लेखक अकिवा गोल्ड्समैन की भी वापसी हुई है। .

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एंजियोग्राफी

जाँघ से किये गये एक एन्जियोग्राफ के ट्रान्स्वर्स प्रोजेक्शन में वर्टीब्रो बेसीलर तथा पोस्टीरियर सेरेब्रल एंजियोग्राफी (अंग्रेजी: Angiography), वाहिकाचित्रण अथवा वाहिकालेख रक्त वाहिनी नलिकाओं धमनी व शिराओं का एक प्रकार का एक्सरे जैसा चिकित्सकीय अध्ययन है, जिसका प्रयोग हृदय रोग, किडनी संक्रमण, ट्यूमर एवं खून का थक्का जमने आदि की जाँच करने में किया जाता है। एंजियोग्राफ में रेडियोधर्मी तत्व या डाई का प्रयोग किया जाता है, ताकि रक्त वाहिनी नलिकाओं को एक्स रे द्वारा साफ साफ देखा जा सके। डिजिटल सबस्ट्रेक्शन एंजियोग्राफी नामक एक नयी तकनीक में कंप्यूटर धमनियों की पृष्ठभूमि को गायब कर देता है जिससे चित्र ज्यादा साफ दिखने लगते हैं। यह तकनीक रक्त वाहिकाओं में अवरोध होने की स्थिति में ही की जाती है। इससे हृदय की धमनी में रुकावट एवं सिकुड़न की जानकारी का तत्काल पता चल जाता है। एंजियोग्राफी के बाद बीमारी से ग्रसित धमनियों को एंजियोप्लास्टी द्वारा खोला जाता है। इस उपचार के बाद रोगी के हृदय की रक्तविहीन मांसपेशियों में खून का प्रवाह बढ़ जाता है और उसे तत्काल आराम मिल जाता है। यही नहीं, हृदयाघात की सम्भावना में भी भारी कमी आ जाती है। याहू जागरण सितंबर, २००८ एंजियोग्राफी दो यूनानी शब्दों ‘एंजियॉन’ यानी वाहिकाओं और ‘ग्रेफियन’ यानी रिकॉर्ड करने से मिलकर बना है। यह तकनीक १९२७ में पहली बार एक पुर्तगाली फिज़ीशियन व न्यूरोलॉजिस्ट इगास मोनिज ने खोजी थी। इगास मोनिज को१९४९ में इस उल्लेखनीय कार्य के लिये नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। .

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एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में एक पारी में ४००+ रनों की सूची

एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में पहले ५५ - ६० ओवर हुआ करते थे लेकिन वर्तमान में ५० ओवरों का मैच होता है। वनडे में सबसे पहले ४०० या ४०० से अधिक रन ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट टीम ने दक्षिण अफ्रीका क्रिकेट टीम के खिलाफ २००५-०६ में जोहान्सबर्ग में ४३४ रन बनाए थे और उसी मैच में अफ्रीका ने ४३८ रन बनाए थे। ४०० या इससे अधिक बार रन भारतीय क्रिकेट टीम ने बनाए जो अभी तक ६ बार बना चूका है। सर्वाधिक रन इंग्लैंड क्रिकेट टीम ने पाकिस्तान क्रिकेट टीम के खिलाफ अगस्त २०१६ में ४४४/३ रन बनाए। .

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एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के कीर्तिमानों की सूची

एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट जिसे अंग्रेजी में (वनडे/ODI) के नाम से जाना जाता है। इस प्रारूप में प्रायः पूर्ण सदस्यता वाली राष्ट्रीय क्रिकेट टीमें खेलती हैं। एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वर्तमान में 50 ओवर रखे गए गए हैं हालांकि पूर्व में 55 तथा 60 ओवरों के मैच खेले जाते थे जो बाद में 50 ओवरों के कर दिए गए। एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का पहला मैच ऑस्ट्रेलिया बनाम इंग्लैंड के बीच जनवरी १९७१ को खेला गया था। वनडे क्रिकेट अर्थात एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा शतक तथा सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर के नाम है, सचिन ने कुल  १८,४२६ बनाए है। जबकि सबसे ज्यादा विकेट लेने का श्रेय श्रीलंका क्रिकेट टीम के मुथैया मुरलीधरन को जाता है। इनके अलावा सबसे ज्यादा लगातार मैच जीतने का रिकॉर्ड ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट टीम का है जिन्होंने लगातार २१ मैच जीते थे और लगातार सबसे हारने वाली टीम बांग्लादेश है जो लगातार २७ मैच हारी थी। व्यक्तिगत कीर्तिमानों में सचिन तेंदुलकर और मुथैया मुरलीधरन के अलावा रोहित शर्मा का नाम भी आता है जिन्होंने एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट २ दोहरे शतक लगाए तथा एक मैच में सबसे ज्यादा रन भी इन्होंने ने ही बनाए है जो २६४ रन बनाए थे। गेंदबाजी में श्रीलंका क्रिकेट टीम के चमिंडा वास ने १९ रन देकर ०८ विकेट लिए थे। एक ओवर में सबसे ज्यादा रन दक्षिण अफ्रीका के हर्शल गिब्स ने ३६ रन बनाए है तथा सबसे तेज शतक एबी डी विलियर्स ने मात्र ३१ गेंदों पर बनाया है। .

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एक मामूली आदमी

न स डी सादगी इकिरू अका १९५२ भलाई और दया अशोक लाल का नाटक 'एक मामूली आदमी' अकिरा कुरोसावा की फ़िल्म ‘इकिरू’(Ikiru, aka To Live, 1952) से प्रेरित है। 'एक मामूली आदमी 'नाटक को निदेशक अरविन्द गौड़ ने गत दशक में ८० से अधिक बार मंचित किया है। अस्मिता थियेटर ग्रुप ने 'एक मामूली आदमी' का मंचन रा ना वि (NSD) के भारत रंग महोत्सव और सन्गीत नाटक अकादमी महोत्सव मे भी किया है। स्वदेश दीपक के कोर्ट मार्शल के बाद निदेशक अरविन्द गौड़ का यह सर्वाधिक चर्चित व सफल नाटक है। 'एक मामूली आदमी' के नायक ईश्वर चन्द अवस्थी की भूमिका दिल्ली-६ फिल्म से चर्चित,ओमकारा के लिए फिल्म फेयर अवार्ड पाने वाले अभिनेता दीपक डोबरियाल ने की है। .

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एक कहानी यह भी

एक कहानी यह भी पुस्तक में लेखिका मन्नू भंडारी ने अपने लेखकीय जीवन की कहानी उतार दी हैं। यह उनकी आत्मकथा तो नहीं है, लेकिन इसमें उनके भावात्मक और सांसारिक जीवन के उन पहलुओं पर भरपूर प्रकाश पड़ता है जो उनकी रचना-यात्रा में निर्णायक रहे। एक ख्यातनामा लेखक की जीवन-संगिनी होने का रोमांच और एक जिद्दी पति की पत्नी होने की बाधाएँ, एक तरफ अपनी लेखकीय जरूरतें (महत्त्वाकांक्षाएँ नहीं) और दूसरी तरफ एक घर को सँभालने का बोझिल दायित्व, एक मधुर आम आदमी की तरह जीवन की चाह और महान उपल्ब्धियों के लिए ललकता, आसपास का साहित्यिक वातावरण—ऐसा कई-कई विरोधाभासों के बीच से मन्नूजी लगातार गुजरती रहीं, लेकिन उन्होंने अपनी जिजीविषा, अपनी सादगी, आदमीयत और रचना-संकल्प को नहीं टूटने दिया। आज भी जब वे उतनी मात्रा में नहीं लिख रही हैं, ये चीजें उनके साथ हैं, उनकी सम्पत्ति हैं। यह आत्मस्मरण मन्नूजी की जीवन-स्थितियों के साथ-साथ उनके दौर की कई साहित्यिक-सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों पर भी रोशनी डालता है और नई कहानी दौर की रचनात्मक बेकली और तत्कालीन लेखकों की ऊँचाइयों-नीचाइयों से भी परिचित करता है। साथ ही उन परिवेशगत स्थितियों को भी पाठक के सामने रखता है जिन्होंने उनकी संवेदना को झकझोरा। मन्नू जी की यह कहानी, उनकी लेखकीय यात्रा के कोई छोटे मोटे उतार चढ़ावों की ही कहानी नहीं है, अपितु जीवन के उन बेरहम झंझावातों और भूकम्पों की कहानी भी है, जिनका एक झोंका, एक झटका ही व्यक्ति को तहस नहस कर देने के लिए काफ़ी होता है। मन्नू जी उन्हें भी झेल गईं। कुछ तड़की, कुछ भड़की -फिर सहज और शान्त बन गईं। आज उन्हीं संघर्षों के बल पर वे उस तटस्थ स्थिति में पहुँच गई हैं, जहाँ उन्हें न दुख सताता है, न सुख ! एक शाश्वत सात्विक भाव में बनीं रहती हैं और शायद इसी कारण वे फिर से लेखन के क्षेत्र में सक्रिय हो गई हैं। .

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एकलव्य

गुरु द्रोण को गुरुदक्षिणा में अपना अंगुठा भेंट करता एकलव्य। एकलव्य महाभारत का एक पात्र है। वह हिरण्य धनु नामक निषाद का पुत्र था। एकलव्य को अप्रतिम लगन के साथ स्वयं सीखी गई धनुर्विद्या और गुरुभक्ति के लिए जाना जाता है। पिता की मृत्यु के बाद वह श्रृंगबेर राज्य का शासक बना। अमात्य परिषद की मंत्रणा से उसने न केवल अपने राज्य का संचालन करता है, बल्कि निषाद भीलों की एक सशक्त सेना और नौसेना गठित कर के अपने राज्य की सीमाओँ का विस्तार किया। महाभारत में वर्णित कथा के अनुसार एकलव्य धनुर्विद्या सीखने के उद्देश्य से द्रोणाचार्य के आश्रम में आया किन्तु निषादपुत्र होने के कारण द्रोणाचार्य ने उसे अपना शिष्य बनाना स्वीकार नहीं किया। निराश हो कर एकलव्य वन में चला गया। उसने द्रोणाचार्य की एक मूर्ति बनाई और उस मूर्ति को गुरु मान कर धनुर्विद्या का अभ्यास करने लगा। एकाग्रचित्त से साधना करते हुये अल्पकाल में ही वह धनु्र्विद्या में अत्यन्त निपुण हो गया। एक दिन पाण्डव तथा कौरव राजकुमार गुरु द्रोण के साथ आखेट के लिये उसी वन में गये जहाँ पर एकलव्य आश्रम बना कर धनुर्विद्या का अभ्यास कर रहा था। राजकुमारों का कुत्ता भटक कर एकलव्य के आश्रम में जा पहुँचा। एकलव्य को देख कर वह भौंकने लगा। कुत्ते के भौंकने से एकलव्य की साधना में बाधा पड़ रही थी अतः उसने अपने बाणों से कुत्ते का मुँह बंद कर दिया। एकलव्य ने इस कौशल से बाण चलाये थे कि कुत्ते को किसी प्रकार की चोट नहीं लगी। कुत्ते के लौटने पर कौरव, पांडव तथा स्वयं द्रोणाचार्य यह धनुर्कौशल देखकर दंग रह गए और बाण चलाने वाले की खोज करते हुए एकलव्य के पास पहुँचे। उन्हें यह जानकर और भी आश्चर्य हुआ कि द्रोणाचार्य को मानस गुरु मानकर एकलव्य ने स्वयं ही अभ्यास से यह विद्या प्राप्त की है। कथा के अनुसार एकलव्य ने गुरुदक्षिणा के रूप में अपना अँगूठा काटकर द्रोणाचार्य को दे दिया था। इसका एक सांकेतिक अर्थ यह भी हो सकता है कि एकलव्य को अतिमेधावी जानकर द्रोणाचार्य ने उसे बिना अँगूठे के धनुष चलाने की विशेष विद्या का दान दिया हो। कहते हैं कि अंगूठा कट जाने के बाद एकलव्य ने तर्जनी और मध्यमा अंगुली का प्रयोग कर तीर चलाने लगा। यहीं से तीरंदाजी करने के आधुनिक तरीके का जन्म हुआ। निःसन्देह यह बेहतर तरीका है और आजकल तीरंदाजी इसी तरह से होती है। वर्तमान काल में कोई भी व्यक्ति उस तरह से तीरंदाजी नहीं करता जैसा कि अर्जुन करता था। .

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ए॰ आर॰ रहमान

अल्लाह रक्खा रहमान लोकप्रिय रूप से ए॰ आर॰ रहमान भारतीय फिल्मों के प्रसिद्ध संगीतकार हैं, जिन्होंने मुख्य रूप से हिन्दी और तमिल फिल्मों में संगीत दिया है। इनका जन्म 6 जनवरी, 1967 को चेन्नई, तमिलनाडु, भारत में हुआ। जन्मतः उनका नाम ‘अरुणाचलम् शेखर दिलीप कुमार मुदलियार’ रखा गया। धर्मपरिवर्तन के पश्चात उन्होंने अल्लाह रक्खा रहमान नाम धारण किया। ए. आर.

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झलकारी बाई

झलकारी बाई (२२ नवंबर १८३० - ४ अप्रैल १८५७) झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई की नियमित सेना में, महिला शाखा दुर्गा दल की सेनापति थीं। वे लक्ष्मीबाई की हमशक्ल भी थीं इस कारण शत्रु को धोखा देने के लिए वे रानी के वेश में भी युद्ध करती थीं। अपने अंतिम समय में भी वे रानी के वेश में युद्ध करते हुए वे अंग्रेज़ों के हाथों पकड़ी गयीं और रानी को किले से भाग निकलने का अवसर मिल गया। उन्होंने प्रथम स्वाधीनता संग्राम में झाँसी की रानी के साथ ब्रिटिश सेना के विरुद्ध अद्भुत वीरता से लड़ते हुए ब्रिटिश सेना के कई हमलों को विफल किया था। यदि लक्ष्मीबाई के सेनानायकों में से एक ने उनके साथ विश्वासघात न किया होता तो झांसी का किला ब्रिटिश सेना के लिए प्राय: अभेद्य था। झलकारी बाई की गाथा आज भी बुंदेलखंड की लोकगाथाओं और लोकगीतों में सुनी जा सकती है। भारत सरकार ने २२ जुलाई २००१ में झलकारी बाई के सम्मान में एक डाक टिकट जारी किया है, उनकी प्रतिमा और एक स्मारक अजमेर, राजस्थान में निर्माणाधीन है, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उनकी एक प्रतिमा आगरा में स्थापित की गयी है, साथ ही उनके नाम से लखनऊ में एक धर्मार्थ चिकित्सालय भी शुरु किया गया है। .

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झील

एक अनूप झील बैकाल झील झील जल का वह स्थिर भाग है जो चारो तरफ से स्थलखंडों से घिरा होता है। झील की दूसरी विशेषता उसका स्थायित्व है। सामान्य रूप से झील भूतल के वे विस्तृत गड्ढे हैं जिनमें जल भरा होता है। झीलों का जल प्रायः स्थिर होता है। झीलों की एक महत्वपूर्ण विशेषता उनका खारापन होता है लेकिन अनेक झीलें मीठे पानी की भी होती हैं। झीलें भूपटल के किसी भी भाग पर हो सकती हैं। ये उच्च पर्वतों पर मिलती हैं, पठारों और मैदानों पर भी मिलती हैं तथा स्थल पर सागर तल से नीचे भी पाई जाती हैं। किसी अंतर्देशीय गर्त में पाई जानेवाली ऐसी प्रशांत जलराशि को झील कहते हैं जिसका समुद्र से किसी प्रकार का संबंध नहीं रहता। कभी-कभी इस शब्द का प्रयोग नदियों के चौड़े और विस्तृत भाग के लिए तथा उन समुद्र तटीय जलराशियों के लिए भी किया जाता है, जिनका समुद्र से अप्रत्यक्ष संबंध रहता है। इनके विस्तार में भिन्नता पाई जाती है; छोटे छोटे तालाबों और सरोवर से लेकर मीठे पानीवाली विशाल सुपीरियर झील और लवणजलीय कैस्पियन सागर तक के भी झील के ही संज्ञा दी गई है। अधिकांशत: झीलें समुद्र की सतह से ऊपर पर्वतीय प्रदेशों में पाई जाती हैं, जिनमें मृत सागर, (डेड सी) जो समुद्र की सतह से नीचे स्थित है, अपवाद है। मैदानी भागों में सामान्यत: झीलें उन नदियों के समीप पाई जाती हैं जिनकी ढाल कम हो गई हो। झीलें मीठे पानीवाली तथा खारे पानीवाली, दोनों होती हैं। झीलों में पाया जानेवाला जल मुख्यत: वर्ष से, हिम के पिघलने से अथवा झरनों तथा नदियों से प्राप्त होता है। झीले बनती हैं, विकसित होती हैं, धीरे-धीरे तलछट से भरकर दलदल में बदल जाती हैं तथा उत्थान होंने पर समीपी स्थल के बराबर हो जाती हैं। ऐसी आशंका है कि संयुक्त राज्य अमेरिका की बृहत झीलें ४५,००० वर्षों में समाप्त हो जाएंगी। भू-तल पर अधिकांश झीलें उत्तरी गोलार्ध में स्थित हैं। फिनलैंड में तो इतनी अधिक झीलें हैं कि इसे झीलों का देश ही कहा जाता है। यहाँ पर १,८७,८८८ झीलें हैं जिसमें से ६०,००० झीलें बेहद बड़ी हैं। पृथ्वी पर अनेक झीलें कृत्रिम हैं जिन्हें मानव ने विद्युत उत्पादन के लिए, कृषि-कार्यों के लिए या अपने आमोद-प्रमोद के लिए बनाया है। झीलें उपयोगी भी होती हैं। स्थानीय जलवायु को वे सुहावना बना देती हैं। ये विपुल जलराशि को रोक लेती हैं, जिससे बाढ़ की संभावना घट जाती है। झीलों से मछलियाँ भी प्राप्त होती हैं। .

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डच निम्न सैक्सन विकिपीडिया

डच निम्न सैक्सॉन विकिपीडिया विकिपीडिया का डच निम्न सैक्सॉन भाषा का संस्करण है। यह २४ मार्च २००६ में आरंभ किया गया था और २६ मई, २००९ तक इस पर लेखों की कुल संख्या ३,८००+ है। यह विकिपीडिया का १२१वां सबसे बड़ा संस्करण है।.

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डल झील

डल झील श्रीनगर, कश्मीर में एक प्रसिद्ध झील है। १८ किलोमीटर क्षेत्र में फैली हुई यह झील तीन दिशाओं से पहाड़ियों से घिरी हुई है। जम्मू-कश्मीर की दूसरी सबसे बड़ी झील है। इसमें सोतों से तो जल आता है साथ ही कश्मीर घाटी की अनेक झीलें आकर इसमें जुड़ती हैं। इसके चार प्रमुख जलाशय हैं गगरीबल, लोकुट डल, बोड डल तथा नागिन। लोकुट डल के मध्य में रूपलंक द्वीप स्थित है तथा बोड डल जलधारा के मध्य में सोनालंक द्वीप स्थित है। भारत की सबसे सुंदर झीलों में इसका नाम लिया जाता है। पास ही स्थित मुगल वाटिका से डल झील का सौंदर्य अप्रतिम नज़र आता है। पर्यटक जम्मू-कश्मीर आएँ और डल झील देखने न जाएँ ऐसा हो ही नहीं सकता। डल झील के मुख्य आकर्षण का केन्द्र है यहाँ के शिकारे या हाउसबोट। सैलानी इन हाउसबोटों में रहकर झील का आनंद उठा सकते हैं। नेहरू पार्क, कानुटुर खाना, चारचीनारी आदि द्वीपों तथा हज़रत बल की सैर भी इन शिकारों में की जा सकती है। इसके अतिरिक्त दुकानें भी शिकारों पर ही लगी होती हैं और शिकारे पर सवार होकर विभिन्न प्रकार की वस्तुएँ भी खरीदी जा सकती हैं। तरह तरह की वनस्पति झील की सुंदरता को और निखार देती है। कमल के फूल, पानी में बहती कुमुदनी, झील की सुंदरता में चार चाँद लगा देती है। सैलानियों के लिए विभिन्न प्रकार के मनोरंजन के साधन जैसे कायाकिंग (एक प्रकार का नौका विहार), केनोइंग (डोंगी), पानी पर सर्फिंग करना तथा ऐंगलिंग (मछली पकड़ना) यहाँ पर उपलब्ध कराए गए हैं। डल झील में पर्यटन के अतिरिक्त मुख्य रूप से मछली पकड़ने का काम होता है। .

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डहेलिया

डहेलिया डैलिया या डहेलिया (Dahlia) सूर्यमुखी कुल, द्विदली वर्ग का पौधा है। इसका वितरणकेंद्र मेक्सिको तथा मध्य अमरीका में है। यह बड़े आकार का अनेक रंगों और आकारों में पाया जाने वाला ऐसा आकर्षक फूल है जिसमें नीले रंग को छोड़कर विभिन्न रंगों और रूपाकारों की ५०,००० से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं। रंगबिरंगे फूलों के कारण डैलिया के पौधे बागों की शेभा बढ़ाने के लिये लगाए जाते हैं। 'डाह्ल' (Dahl) नामक स्वीडिश वृक्षविशेषज्ञ की स्मृति में लिनीयस ने इस पौधे का नाम 'डैलिया' या 'डाहलिया' रखा। इसके पौधे दो-ढाई मीटर तक ऊँचे होते हैं, परंतु एक बौनी जाति केवल आधा मीटर ऊँची होती है। डैलिया के पौधों की जड़ों में खाद्य पदार्थ एकत्र होकर उन्हें मोटी बना देते हैं। इनके फूल सूर्यमुखी के सदृश होते हैं। इनकी नई किस्मों में गेंद के समान गोल तथा रंग बिरेंगे फूल जगते हैं। डैलिया की नई किस्में बीज से पैदा की जाती हैं। डैलिया की जड़ें, जिनमें छोटी छोटी कलियाँ होती है, पौधों का रूप लेने की क्षमता रखती हैं। ये जड़ें छोटे छोटे टुकड़ों में इस प्रकार काटी जाती हैं कि हर टुकड़े में एक कली हो। इन टुकड़ों को जमीन में बोने पर, कलियों से नए पौधे निकलते हैं। कभी कभी इसके तने की कलम भी काटकर लगाई जाती है और उससे भी नए पौधे पैदा किए जाते हैं। डैलिया के पौधे अधिकतर खुली जगह तथा खादयुक्त, बलुई मिट्टी में भली भूंति विकसित होते हैं। अधिक शीत पड़ने पर इसके फुल मर जाते है। ऐसी दशा में इसकी जड़ें साफ करके दूसरे मौसम में बोने के लिये रख ली जाती है इसके पौधों पर कीड़े भी लगते हैं, जो संखिया के छिड़काव से मारे जाते हैं। .

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डायनासौर ट्रेन

डायनासौर ट्रेन (अंग्रेजी: Dinosaur Train) एक अमेरिकी-कनाडा-सिंगापुर एनिमेटेड पूर्वस्कूली बच्चों के टेलीविजन श्रृंखला है। यह क्रेग बार्टलेट द्वारा बनाया गया था। श्रृंखला एक उत्सुक युवा टायरानोसोरस रेक्स सुविधाएँ बडी जो नाम है, एक साथ उसके अपनाया पटेरनोदों परिवार के साथ, डायनासोर के सभी प्रकार के साथ रोमांच अपने समय की अवधि का पता लगाने, और है कि डायनासौर ट्रेन लेता है। श्रृंखला २६ अगस्त, २०१३ को भारत में प्रीमियर हुआ। यह भी हिंदी में डब किया गया था। .

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डायलिसिस

रक्तापोहन की एक मशीन अपोहन (डायलिसिस) रक्त शोधन की एक कृत्रिम विधि होती है। इस डायलिसिस की प्रक्रिया को तब अपनाया जाता है जब किसी व्यक्ति के वृक्क यानि गुर्दे सही से काम नहीं कर रहे होते हैं। गुर्दे से जुड़े रोगों, लंबे समय से मधुमेह के रोगी, उच्च रक्तचाप जैसी स्थितियों में कई बार डायलसिस की आवश्यकता पड़ती है। स्वस्थ व्यक्ति में गुर्दे द्वारा जल और खनिज (सोडियम, पोटेशियम क्लोराइड, फॉस्फोरस सल्फेट) का सामंजस्य रखा जाता है। डायलसिस स्थायी और अस्थाई होती है। यदि अपोहन के रोगी के गुर्दे बदल कर नये गुर्दे लगाने हों, तो अपोहन की प्रक्रिया अस्थाई होती है। यदि रोगी के गुर्दे इस स्थिति में न हों कि उसे प्रत्यारोपित किया जाए, तो अपोहन अस्थायी होती है, जिसे आवधिक किया जाता है। ये आरंभ में एक माह से लेकर बाद में एक दिन और उससे भी कम होती जाती है। सामान्यतः दो तरह की अपोहन की जाती है,; उदरावरणीय अपोहन उदरावरणीय अपोहन घर में रोगी द्वारा अकेले या किसी की मदद से की जा सकती है। इसमें ग्लूकोज आधारित उदर समाधान में तकरीबन दो घंटे तक रहता है, उसके बाद उसे निकाल दिया जाता है। इस प्रक्रिया में सर्जन रोगी के एब्डोमेन के अंदर टाइटेनियम प्लग लगा देता है। यह प्रक्रिया उनके लिए असरदार साबित नहीं होती, जिनका इम्यून सिस्टम सिकुड़ चुका है। इस प्रक्रिया में अपोहन प्रतिदिन नहीं करानी पड़ती। यह रक्तापोहन की तुलना में कम प्रभावी होती है।। पत्रिका.कॉम पर उदरावरणीय अपोहन घर पर ही किया जा सकता है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रणाली दस वर्ष से अधिक समय से उपलब्ध है, किन्तु महंगी होने के कारण इसका प्रयोग नहीं किया जाता।। याहू जागरण। १९ जुलाई, २००९। देशब्म्धु.को.इन। ३१ अगस्त, २००९; रक्तापोहन रक्तापोहन प्रक्रिया का आरेख रक्तापोहन आम प्रक्रिया है, ज्यादातर रोगी इसी का प्रयोग करते हैं। इसमें रोगी के खून को डायलाइजर द्वारा पंप किया जाता है। इसमें खून साफ करने में तीन से चार घंटे लगते है। इसे सप्ताह में दो-तीन बार कराना पड़ता है। इसमें मशीन से रक्त को शुद्ध किया जाता है। उदरावरणीय अपोहन बेहतर सिद्ध हुआ है। यह निरंतर होने वाला अपोहन है, इसलिए इससे गुर्दे बेहतर तरीके से काम करती है। रू बिन ऎट ऑल द्वारा किए गए अघ्ययन से पता लग कि इसका प्रयोग करने वाले मरीजों का उपचार हीमो करने वालों के मुकाबले अधिक अच्छा हो रहा है। चॉइस कहलाने वाली यह अध्ययन चिकित्सा अमेरिकी संघ पत्रिका में प्रकाशित हुई थी। आठ वर्ष से कम आयु के मरीजों के लिए पीडी की सिफारिश की जाती है। भारत में लगभग सभी बड़े शहरों में अपोहन की सुविधा पर्याप्त उपलब्ध है। देश का सबसे बड़ा अपोहन केन्द्र चंडीगढ़ में संजय गाँधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान में खुलने वाला है। इसमें वृक्कीय निवेश विफलता के प्रतीक्षा के मरीजों के अलावा पुरानी विफलता के मरीजों की भी अपोहन हो सकेगी। .

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डायोफैंटीय समीकरण

पूर्णांक भुजाओं वाले सभी समकोण त्रिभुज प्राप्त करना एक प्रकार से डायोफैंटीय समीकरण a^2+b^2.

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डांस इण्डिया डांस

डांस इण्डिया डांस एक भारतीय हिंदी डांस शॉ है जो ज़ी टीवी पर 2009 से चल रहा है। डांस इण्डिया डांस सबसे लंबा चलने वाला डांस शॉ है। इस कार्यक्रम में मिथुन चक्रवर्ती ग्रेंडमास्टर है। इसी वर्ज़न का कार्यक्रम ज़ी बांग्ला पर "डांस बांग्ला डांस" नामक आता था और इस कार्यक्रम में भी मिथुन चक्रवर्ती ग्रेंडमास्टर थे। यह पहली बार टेलीविज़न पर 30 जनवरी 2009 को दिखाया गया। यह ज़ी टीवी के द्वारा बनाया गया एक वास्तविक कार्यक्रम है। इस वास्तविक कार्यक्रम में विभिन्न शहरों के डांसर भाग लेते हैं तथा अपने कला का जलवा दिखाते हैं। डांस इण्डिया डांस के ऑडियंस देश के बड़े-बड़े शहरों दिल्ली,मुम्बई,कोलकाता तथा चेन्नई में शुरू हो जाते हैं। .

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डिफेंडर ऑफ डेमोक्रेसी पुरस्कार

यह पुरस्कार हर वर्ष अमेरिकी सांसदों द्वारा वैश्विक स्तर पर किए गए काम के लिए दिया जाता है। 2009 में यह पुरस्कार भारत के प्रख्यात बाल अधिकारकर्मी कैलाश सत्यार्थी को तथा पाकिस्तान में परवेज मुसर्रफ के खिलाफ वकीलों का आंदोलन चलाने वाले चौधरी ए अहसन को संयुक्त रूप से दिया गया। श्रेणी:पुरस्कार.

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डिजास्टर फ्लिक 2012

नवंबर 2009 के दूसरे सप्ताह में जारी की गई इस फिल्म में एक अश्वेत अमेरिकी राष्ट्रपति को यह आभास होता है कि 2112 में इस दुनिया का अंत हो जाएगा। लेकिन जो वैज्ञानिक शोध दुनिया की रक्षा कर सकते हैं, वे शोध अमेरिका में नहीं, बल्कि हिंदुस्तान में हुए हैं। आवागमन की बड़ी-बड़ी नौकाएं जो लोगों को सुरक्षित ले जा सकती हैं, वे चीन में बनाई गई हैं। इस सारे काल्पनिक वैज्ञानिक तामझाम और दहलाने वाले सिनेमाई प्रभाव के साथ कहानी की मुख्य अंतर्वस्तु यह है कि 2012 में अमेरिका वैश्विक सत्ता का केंद्र नहीं रह गया है। ताकत का यह पांसा उलट गया है। .

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डेड स्नो

डेड स्नो (नॉर्वेजियाई: Død snø) एक २००९ नार्वेजियन ज़ोंबी कॉमेडी फिल्म द्वारा निर्देशित टॉमी वीरकोला। फिल्म नॉर्वे के पहाड़ों में एक नाजी ज़ोंबी हमले के जीवित रहने के छात्रों के एक समूह पर केंद्रित है। .

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डेनमार्क

डेनमार्क या डेनमार्क राजशाही (डैनिश: Danmark या Kongeriget Danmark) स्कैंडिनेविया, उत्तरी यूरोप में स्थित एक देश है। इसकी भूसीमा केवल जर्मनी से मिलती है, जबकी उत्तरी सागर और बाल्टिक सागर इसे स्वीडन से अलग करते हैं। यह देश जूटलैंड प्रायद्वीप पर हज़ारों द्वीपों में फैला हुआ है। डेनमार्क ने लंबे समय तक बाल्टिक सागर को जाने वाले मार्गों को नियंत्रित किया है और इस जलराशी को डैनिश खाड़ी के नाम से जाना जाता है। इसके छोटे आकार के विपरीत इसकी समुद्री सीमा बहुत लम्बी है लगभग ७,३१४ किमी। डेनमार्क अधिकांशतः एक समतल देश है और समुद्र तल से अधिकतम ऊँचाई वाला स्थान केवल १७० मीटर ऊँचा है। फ़रो द्वीप समूह और ग्रीनलैंड डेनमार्क के अधीनस्थ है। २००८ के वैश्विक शांति सूचकांक के अनुसार डेनमार्क, आइसलैंड के बाद विश्व का सबसे शांत देश है। २००८ के ही भ्रष्टाचार दृष्टिकोण सूचकांक के अनुसार यह विश्व के सबसे कम भ्रष्ट देशों में से है और न्यूज़ीलैंड और स्वीडन के साथ पहले स्थान पर है। मोनोक्ल पत्रिका के २००८ के एक सर्वेक्षण के अनुसार इसकी राजधानी कॉपनहेगन रहने योग्य सर्वाधिक उपयुक्त नगर है। वर्ष २००९ में देश की अनुमानित जनसंख्या ५५,१९,२५९ है। .

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डॉ. नैयर मसूद

लखनऊ में १९३६ में जन्मे डॉ॰ मसूद उर्दू के जाने-माने साहित्यकार हैं। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से स्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण की और इसके बाद इसी विश्वविद्यालय से १९५७ में फारसी साहित्य में स्नातकोत्तर उपाधि हासिल की। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से १९६५ में उन्होंने उर्दू में और लखनऊ विश्वविद्यालय से फारसी में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। मसूद ने २१ से अधिक पुस्तकों का लेखन, संपादन और प्रकाशन किया है और उर्दू तथा फारसी में उनके लगभग दो सौ से अधिक लेख प्रकाशित हुए हैं। डॉ॰ मसूद को उत्तर आधुनिक उर्दू तथा कथा साहित्य के प्रवर्तकों में से एक माना जाता है। उन्हें उर्दू अकादमी के कई पुरस्कारों और प्रतिष्ठित साहित्य अकादमी पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। ताऊस चमन की मैना उर्दू का लघु कथा संग्रह है, जिसमें परिवर्तन तथा अस्तित्व के ह्रास की तरफ बढ़ने के बारे में प्रभावशाली कल्पनाएँ की गई हैं। उन्हें २००७ में सरस्वती सम्मान से भी सम्मानित किया गया है। .

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डॉ. जॉर्ज ग्रियर्सन पुरस्कार

डॉ॰ जॉर्ज ग्रियर्सन पुरस्कार केन्द्री हिन्दी संस्थान द्वारा किसी जाने माने विदेशी को उसकी हिन्दी सेवाओं के लिए प्रदान किया जाता है। इसे १९९४ में प्रारंभ किया गया था। अभी तक इसे प्राप्त करनेवाले प्रमुख हिन्दी विद्वान इस प्रकार हैं- .

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डॉ॰ बी॰आर॰ अम्बेडकर राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, जालंधर

संस्थान का मुख्य भवन। डॉ॰ बी.

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डॉ॰ हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय

डॉ॰ हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय भारत के मध्य प्रदेश के सागर जिले में स्थित एक सार्वजनिक विश्वविद्यालय है। इसको सागर विश्वविद्यालय के नाम से भी जाना जाता है। इसकी स्थापना डॉ॰ हरिसिंह गौर ने १८ जुलाई १९४६ को अपनी निजी पूंजी से की थी। अपनी स्थापना के समय यह भारत का १८वाँ विश्वविद्यालय था। किसी एक व्यक्ति के दान से स्थापित होने वाला यह देश का एकमात्र विश्वविद्यालय है। वर्ष १९८३ में इसका नाम डॉ॰ हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय कर दिया गया। २७ मार्च २००८ से इसे केन्द्रीय विश्वविद्यालय की श्रेणी प्रदान की गई है। .

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डी जयकांतन

डी जयकांतन को सन् २००९ में भारत सरकार द्वारा साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये तमिलनाडु राज्य से हैं। .

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डीप इम्पैक्ट (फिल्म)

डीप इम्पैक्ट (अंग्रेज़ी: Deep Impact) एक 1998 विज्ञान कथा फिल्म आपदा नाटक है। एक अन्य फिल्म के रूप में जाना जाता है: आर्मागेडन इस फिल्म है, जो उत्तरी अमेरिका में जारी किया गया था के बाद के बारे में दो महीने जारी है। दोनों फिल्मों को इसी तरह से आलोचकों के द्वारा प्राप्त किया गया आर्मागेडन 41% अंक और गहरा प्रभाव पर 46% अंक के साथ: सड़े टमाटर। .

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तत्ती तवी दा सच्च

तत्ती तवी दा सच्च पंजाबी भाषा के विख्यात साहित्यकार आतमजीत द्वारा रचित एक नाटक है जिसके लिये उन्हें सन् 2009 में पंजाबी भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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तपन सिन्हा

तपन सिन्हा (তপন সিন্‌হা)(२ अक्टूबर १९२४ – १५ जनवरी २००९) बांग्ला चलचित्र एवं हिन्दी चलचित्र के प्रसिद्ध निर्देशक थे। इन्हें २००६ का दादा साहेब फाल्के पुरस्कार भी मिला था। तपन सिन्हा की फिल्में भारत के अलावा बर्लिन, वेनिस, लंदन, मास्को जैसे अंतरराष्ट्रीय ‍फिल्म समारोहों में भी सराही गई थीं। इन्होंने भौतिकी विषय में स्नातकोत्तर किया था। ये सबसे अधिक गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर के कार्यो से प्रभावित थे। तपन सिन्हा ने बांग्ला फ़िल्म अभिनेत्री अरुंधती देवी से विवाह किया था। इनके पुत्र अनिन्द्य सिन्हा भारतीय वैज्ञानिक हैं। तपन जी अपने जीवन की संध्या में हृदय रोग से पीड़ित हो गये थे और अन्ततः १५ जनवरी, २००९ को परलोक सिधार गये। इनकी पत्नी की मृत्यु १९९० में ही हो चुकी थी। सगीना महतो और सफेद हाथी जैसी उल्लेखनीय फिल्में बनाने वाले सिन्हा विभिन्न श्रेणियों में अभी तक १९ राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किए जा चुके हैं। स्वतंत्रता की ६०वीं जयंती पर भारत सरकार ने उन्हें फिल्म जगत में अद्वितीय योगदान के लिए अवार्ड फॉर लाइफ टाइम अचीवमेंट से सम्मानित किय़ा था। तपन जी की पहली फिल्म उपहार थी जो १९५५ में रिलीज़ हुई थी। १९५६ मे रिलीज़ हुई फिल्म काबुलीवाला दूसरी फिल्म थी। इसके अलावा एक डॉक्टर की मौत, सगीना और आदमी और औरत इनकी बेहतरीन फिल्मों में गिनी जाती हैँ। इन्होंने बावर्ची जैसी कई फिल्मों की कहानी भी लिखी है। .

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तमांग रिपोर्ट

तमांग रिपोर्ट, मैट्रोपोलिटन मजिस्‍ट्रेट एस पी तमांग द्वारा बनाई गई रिपोर्ट हैं। इस रिपोर्ट में गुजरात पुलिस पर आरोप लगाए गए थे कि पुलिस ने जून 2004 में कालेज छात्रा इशरत जहां और उसके तीन दोस्‍तों जावेद गुलाम उर्फ प्रनेश कुमार पिल्‍ले, अमजद अली उर्फ राजकुमार अली राणा और जीशान जौहर, अब्‍दुल गनी को फर्जी मुठभेड़ में मार गिराया था। इस रिपोर्ट पर गुजरात उच्च न्यायालय ने ९ सितंबर, २००९ को रोक लगा दी। .

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ताजिक विकिपीडिया

ताजिक विकिपीडिया विकिपीडिया का ताजिक भाषा का संस्करण है। २८ मार्च, २००९ तक इस विकिपीडिया पर लेखों की कुल संख्या ८,८६७+ है और यह विकिपीडिया का ९०वां सबसे बड़ा संस्करण है।.

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तागलोग विकिपीडिया

तागलोग विकिपीडिया विकिपीडिया का तागलोग भाषा का संस्करण है। यह दिसंबर २००३ में आरंभ किया गया था और २६ मई, २००९ तक इस पर लेखों की कुल संख्या २२,०००+ है। यह विकिपीडिया का बासठवां सबसे बड़ा संस्करण है।.

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तितली

तितली कीट वर्ग का सामान्य रूप से हर जगह पाया जानेवाला प्राणी है। यह बहुत सुन्दर तथा आकर्षक होती है। दिन के समय जब यह एक फूल से दूसरे फूल पर उड़ती है और मधुपान करती है तब इसके रंग-बिरंगे पंख बाहर दिखाई पड़ते हैं। इसके शरीर के मुख्य तीन भाग हैं सिर, वक्ष तथा उदर। इनके दो जोड़ी पंख तथा तीन जोड़ी सन्धियुक्त पैर होते हैं अतः यह एक कीट है। इसके सिर पर एक जोड़ी संयुक्त आँख होती हैं तथा मुँह में घड़ी के स्प्रिंग की तरह प्रोवोसिस नामक खोखली लम्बी सूँड़नुमा जीभ होती है जिससे यह फूलों का रस (नेक्टर) चूसती है। ये एन्टिना की मदद से किसी वस्तु एवं उसकी गंध का पता लगाती है। केरल में तितली तितली एकलिंगी प्राणी है अर्थात नर तथा मादा अलग-अलग होते हैं। मादा तितली अपने अण्डे पत्ती की निचली सतह पर देती है। अण्डे से कुछ दिनों बाद एक छोटा-सा कीट निकलता है जिसे कैटरपिलर लार्वा कहा जाता है। यह पौधे की पत्तियों को खाकर बड़ा होता है और फिर इसके चारों ओर कड़ा खोल बन जाता है। अब इसे प्यूपा कहा जाता है। कुछ समय बाद प्यूपा को तोड़कर उसमें से एक सुन्दर छोटी-सी तितली बाहर निकलती है। तितली का दिमाग़ बहुत तेज़ होता है। देखने, सूंघने, स्वाद चखने व उड़ने के अलावा जगह को पहचानने की इनमें अद्भुत क्षमता होती है। वयस्क होने पर आमतौर पर ये उस पौधे या पेड़ के तने पर वापस आती हैं, जहाँ इन्होंने अपना प्रारंभिक समय बिताया होता है। तितली का जीवनकाल बहुत छोटा होता है। ये ठोस भोजन नहीं खातीं, हालाँकि कुछ तितलियाँ फूलों का रस पीती हैं। दुनिया की सबसे तेज़ उड़ने वाली तितली मोनार्च है। यह एक घंटे में १७ मील की दूरी तय कर लेती है। कोस्टा रीका में तितलियों की १३०० से ज्यादा प्रजातियां पाई जाती हैं। दुनिया की सबसे बड़ी तितली जायंट बर्डविंग है, जो सोलमन आईलैंड्स पर पाई जाती है। इस मादा तितली के पंखों का फैलाव १२ इंच से ज्यादा होता है। .

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तुर्क विकिपीडिया

तुर्क विकिपीडिया विकिपीडिया का तुर्क भाषा का संकरण है। इस पर लेखों की कुल संख्या २५ मई, २००९ तक १,२९,०००+ है। यह विकिपीडिया का सत्रहवां सबसे बड़ा संकरण है।.

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तुर्कमैनी विकिपीडिया

तुर्कमैनी विकिपीडिया विकिपीडिया का तुर्कमैनी भाषा का संस्करण है। २८ मार्च, २००९ तक इस विकिपीडिया पर लेखों की कुल संख्या ३,८६६+ है और यह विकिपीडिया का ११९वां सबसे बड़ा संस्करण है।.

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तुलसी (पौधा)

तुलसी का पौधा तुलसी - (ऑसीमम सैक्टम) एक द्विबीजपत्री तथा शाकीय, औषधीय पौधा है। यह झाड़ी के रूप में उगता है और १ से ३ फुट ऊँचा होता है। इसकी पत्तियाँ बैंगनी आभा वाली हल्के रोएँ से ढकी होती हैं। पत्तियाँ १ से २ इंच लम्बी सुगंधित और अंडाकार या आयताकार होती हैं। पुष्प मंजरी अति कोमल एवं ८ इंच लम्बी और बहुरंगी छटाओं वाली होती है, जिस पर बैंगनी और गुलाबी आभा वाले बहुत छोटे हृदयाकार पुष्प चक्रों में लगते हैं। बीज चपटे पीतवर्ण के छोटे काले चिह्नों से युक्त अंडाकार होते हैं। नए पौधे मुख्य रूप से वर्षा ऋतु में उगते है और शीतकाल में फूलते हैं। पौधा सामान्य रूप से दो-तीन वर्षों तक हरा बना रहता है। इसके बाद इसकी वृद्धावस्था आ जाती है। पत्ते कम और छोटे हो जाते हैं और शाखाएँ सूखी दिखाई देती हैं। इस समय उसे हटाकर नया पौधा लगाने की आवश्यकता प्रतीत होती है। .

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त्र्यम्बक शर्मा

त्र्यम्बक शर्मा त्र्यम्बक शर्मा (५ सितम्बर १९७०) भारत के युवा कार्टूनिस्ट हैं। उन्हें विशेष रूप से कार्टून आधारित एकमात्र मासिक पत्रिका कार्टून वाच के संस्थापक के रूप में जाना जाता है। शंकर्स वीकली के बाद भारत में कार्टून पत्रिका प्रारंभ करने वाले त्र्यम्बक शर्मा का जन्म छत्तीसगढ़ में और शिक्षा दुर्ग-भिलाई और रायपुर में हुई। भिलाई के कल्याण महाविद्यालय से विज्ञान में स्नातक होने के बाद त्र्यम्बक ने रायपुर से पत्रकारिता में स्नातक डिग्री प्राप्त की। कार्टून वाच पत्रिका के प्रकाशन के चलते वे सपरिवार रायपुर में ही बस गए। त्र्यम्बक कार्टूनिस्ट की नज़र से उन्होंने तीन वर्ष रायपुर के सुप्रसिद्ध अंग्रेज़ी दैनिक़ द हितवाद मे तथा एक वर्ष हिंदी दैनिक देशबंधु में मे बतौर संवाददाता कार्य भी किया। रायपुर में दैनिक नवभारत में काम करते हुए उन्होंने १९९१ में दैनिक कार्टून बनाना प्रारंभ किया। १९९२ से उनके कार्टून दैनिक भास्कर के रायपुर संस्करण में प्रथम पृष्ठ पर प्रकाशित होना प्रारंभ हुए। १९९६ में उन्होंने दैनिक भास्कर की नौकरी छोड़कर मासिक पत्रिका कार्टून वाच का प्रकाशन रायपुर से आरम्भ किया। कार्टून वाच राजनीतिक और सामाजिक कार्टूनों पर आधारित भारत की एक मात्र हिंदी कार्टून मासिक पत्रिका है। यह पत्रिका जहाँ पुराने कार्टूनिस्टों के कार्टूनों का पुनः प्रकाशन करती है वहीं नए कार्टूनिस्टों की प्रतिभा को सामने लाने का लिए भी मंच प्रदान करती है। देश-विदेश में अपनी प्रदर्शनियाँ करने वाले त्र्यंबक रायपुर में एक कार्टून संग्रहालय बनाने में लगे हैं। .

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तृकोट्टूर नोवल्लकळ

तृकोट्टूर नोवल्लकळ मलयालम भाषा के विख्यात साहित्यकार यू.ए. खादर द्वारा रचित एक उपन्यास है जिसके लिये उन्हें सन् 2009 में मलयालम भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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तोमोजी तनाबे

तोमोजी तनाबे (१८ सितंबर १८९५ - १९ जून २००९) विश्व के सर्वाधिक आयु वाले जीवित व्यक्ति हैं। वे मियाकाजी (जापान) में रहते हैं और २००८ में उन्होंने अपना ११३वां जन्मदिन मनाया। गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने प्यूर्तो रिको के ११५ वर्षीय एमिलियो मेरकाडो डेल तोरो के निधन के बाद इसी साल जनवरी में तनाबे को दुनिया का सबसे उम्रदराज़ व्यक्ति घोषित किया था। तनाबे के जन्मदिन पर मियाकोनोजो के मेयर ने उन्हें एक गुलदस्ता और एक लाख येन यानी लगभग 36000 रुपए भी दिए। .

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तीन मूर्ति भवन

तीन मूर्ति भवन में भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पं.

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तीजनबाई

तीजनबाई (जन्म- २४ अप्रैल १९५६) भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के पंडवानी लोक गीत-नाट्य की पहली महिला कलाकार हैं। देश-विदेश में अपनी कला का प्रदर्शन करने वाली तीजनबाई को बिलासपुर विश्वविद्यालय द्वारा डी लिट की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया है। वे सन १९८८ में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री और २००३ में कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से अलंकृत की गयीं। उन्हें १९९५ में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार तथा २००७ में नृत्य शिरोमणि से भी सम्मानित किया जा चुका है। भिलाई के गाँव गनियारी में जन्मी इस कलाकार के पिता का नाम हुनुकलाल परधा और माता का नाम सुखवती था। नन्हीं तीजन अपने नाना ब्रजलाल को महाभारत की कहानियाँ गाते सुनाते देखतीं और धीरे धीरे उन्हें ये कहानियाँ याद होने लगीं। उनकी अद्भुत लगन और प्रतिभा को देखकर उमेद सिंह देशमुख ने उन्हें अनौपचारिक प्रशिक्षण भी दिया। १३ वर्ष की उम्र में उन्होंने अपना पहला मंच प्रदर्शन किया। उस समय में महिला पंडवानी गायिकाएँ केवल बैठकर गा सकती थीं जिसे वेदमती शैली कहा जाता है। पुरुष खड़े होकर कापालिक शैली में गाते थे। तीजनबाई वे पहली महिला थीं जो जिन्होंने कापालिक शैली में पंडवानी का प्रदर्शन किया।। देशबन्धु।६ अक्टूबर, २००९ एक दिन ऐसा भी आया जब प्रसिद्ध रंगकर्मी हबीब तनवीर ने उन्हें सुना और तबसे तीजनबाई का जीवन बदल गया। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी से लेकर अनेक अतिविशिष्ट लोगों के सामने देश-विदेश में उन्होंने अपनी कला का प्रदर्शन किया। प्रदेश और देश की सरकारी व गैरसरकारी अनेक संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत तीजनबाई मंच पर सम्मोहित कर देनेवाले अद्भुत नृत्य नाट्य का प्रदर्शन करती हैं। ज्यों ही प्रदर्शन आरंभ होता है, उनका रंगीन फुँदनों वाला तानपूरा अभिव्यक्ति के अलग अलग रूप ले लेता है। कभी दुःशासन की बाँह, कभी अर्जुन का रथ, कभी भीम की गदा तो कभी द्रौपदी के बाल में बदलकर यह तानपूरा श्रोताओं को इतिहास के उस समय में पहुँचा देता है जहाँ वे तीजन के साथ-साथ जोश, होश, क्रोध, दर्द, उत्साह, उमंग और छल-कपट की ऐतिहासिक संवेदना को महसूस करते हैं। उनकी ठोस लोकनाट्य वाली आवाज़ और अभिनय, नृत्य और संवाद उनकी कला के विशेष अंग हैं। भारत भवन भोपाल में पंडवानी प्रस्तुति के दौरान .

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थाई विकिपीडिया

थाई विकिपीडिया विकिपीडिया का थाई भाषा का संस्करण है। यह दिसंबर २००३ में आरंभ किया गया था और २६ मई, २००९ तक इस पर लेखों की कुल संख्या ४६,५००+ है। यह विकिपीडिया का बयालीसवां सबसे बड़ा संस्करण है।.

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थैलासीमिया

थेलेसीमिया (अंग्रेज़ी:Thalassemia) बच्चों को माता-पिता से अनुवांशिक तौर पर मिलने वाला रक्त-रोग है। इस रोग के होने पर शरीर की हीमोग्लोबिन निर्माण प्रक्रिया में गड़बड़ी हो जाती है जिसके कारण रक्तक्षीणता के लक्षण प्रकट होते हैं। इसकी पहचान तीन माह की आयु के बाद ही होती है। इसमें रोगी बच्चे के शरीर में रक्त की भारी कमी होने लगती है जिसके कारण उसे बार-बार बाहरी खून चढ़ाने की आवश्यकता होती है। .

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थोमस कैलाथ

थोमस कैलाथ को सन २००९ में भारत सरकार द्वारा विज्ञान एवं अभियांत्रिकी के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये राज्य से हैं। .

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द चिल्ड्रेन्स लीगल सेंटर

यह ब्रिटेन स्थित दुनिया भर में बच्चों के मानवाधिकार को बढ़ावा देने के लिए काम करने वाला एक गैर-सरकारी संगठन है। यह गैर लाभकारी संगठन बच्चों तथा उनकी देखभाल करने वाले लोगों के लिए कानूनी सलाह की व्यवस्था करता है। इसे वर्ष 2009 में गांधी अंतरराष्ट्रीय शांति पुरस्कार प्रदान किया गया। श्रेणी:गैर-सरकारी संगठन.

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द पिंक पैंथर २

द पिंक पैंथर २ एक २००९ की हैराल्ड ज़्वार्ट द्वारा निर्देशित एक हास्य चलचित्र है। श्रेणी:अंग्रेज़ी फ़िल्में श्रेणी:2009 की फ़िल्में.

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द महाभारत : एन इंक्वायरी इन ह्यूमन कंडिशन

द महाभारत: एन इंक्वायरी इन ह्यूमन कंडिशन अंग्रेज़ी भाषा के विख्यात साहित्यकार चतुर्वेदी बद्रीनाथ द्वारा रचित एक समालोचनात्मक अध्ययन है जिसके लिये उन्हें सन् 2009 में अंग्रेज़ी भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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द जेनेसिस ऑफ साउथ एशियन न्यूक्लियर डिटरेन्स पाकिस्तान्स परस्पेक्टिव

पाकिस्तान के रणनीतिक योजना प्रखंड में शस्त्र नियंत्रण और निशस्त्रीकरण के पूर्व निदेशक ब्रिगेडियर नईम अहमद सालिक द्वारा लिखी गई इस पुस्तक का प्रकाशन 2009 में हुआ। उन्होंने इसमें दावा किया है कि पाकिस्तान द्वारा परमाणु बम के परीक्षण का उद्देश्य दक्षिण एशिया में एक बार फिर से सामरिक संतुलन को बहाल करना था। उन्होंने इसमें इसका भी खुलासा किया है कि देश के तत्कालीन वित्त मंत्री सरताज अजीज ने परमाणु बम के परीक्षण का विरोध किया था। श्रेणी:पुस्तक.

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द अंडरटेकर

मार्क विलियम कैलावे (जन्म - 24 मार्च 1965) एक अमेरिकी पेशेवर पहलवान हैं, अपने रिंग नाम 'द अंडरटेकर ' से बेहतर जाने जाते हैं। वह वर्ल्ड रेसलिंग एंटरटेनमेंट (डब्ल्यूडब्ल्यूई (WWE)) के साथ अनुबंधित है, फिलहाल वह स्मैकडाउन (SmackDown) ब्राण्ड के अंतर्गत मल्लयुद्ध लड़ रहे हैं जिसमें वे मौजूदा वर्ल्ड हेवीवेट चैम्पियन हैं। कैलावे ने सन् 1984 में वर्ल्ड क्लास चैम्पियनशिप रेसलिंग के साथ अपनी मल्लयुद्ध कॅरियर की शुरुआत की। सन् 1989 में, वे "मीन" मार्क कैलस के नाम से वर्ल्ड चैम्पियनशिप रेसलिंग (डब्ल्यूसीडब्ल्यू (WCW)) में शामिल हुए.

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दाइनि?

दाइनि? बोडो भाषा के विख्यात साहित्यकार *मनोरंजन लाहारी द्वारा रचित एक उपन्यास है जिसके लिये उन्हें सन् 2009 में बोडो भाषा के लिए मरणोपरांत साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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दिल्ली मेट्रो रेल

दिल्ली मेट्रो रेल भारत की राजधानी दिल्ली की मेट्रो रेल परिवहन व्यवस्था है जो दिल्ली मेट्रो रेल निगम लिमिटेड द्वारा संचालित है। इसका शुभारंभ २४ दिसंबर, २००२ को शहादरा तीस हजारी लाईन से हुई। इस परिवहन व्यवस्था की अधिकतम गति ८०किमी/घंटा (५०मील/घंटा) रखी गयी है और यह हर स्टेशन पर लगभग २० सेकेंड रुकती है। सभी ट्रेनों का निर्माण दक्षिण कोरिया की कंपनी रोटेम (ROTEM) द्वारा किया गया है। दिल्ली की परिवहन व्यवस्था में मेट्रो रेल एक महत्वपूर्ण कड़ी है। इससे पहले परिवहन का ज्यादतर बोझ सड़क पर था। प्रारंभिक अवस्था में इसकी योजना छह मार्गों पर चलने की थी जो दिल्ली के ज्यादातर हिस्से को जोड़ते थे। इस प्रारंभिक चरण को २००६ में पूरा किय़ा गया। बाद में इसका विस्तार राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से सटे शहरों गाजियाबाद, फरीदाबाद, गुड़गाँव और नोएडा तक किया गया। इस परिवहन व्यवस्था की सफलता से प्रभावित होकर भारत के दूसरे राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक ७ अप्रैल, २००६ बीबीसी, हिन्दी, आंध्र प्रदेश एवं महाराष्ट्र में भी इसे चलाने की योजनाएं बन रही हैं। दिल्ली मेट्रो रेल व्यव्स्था अपने शुरुआती दौर से ही ISO १४००१ प्रमाण-पत्र अर्जित करने में सफल रही है जो सुरक्षा और पर्यावरण की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। सितंबर २०११ में संयुक्त राष्ट्र ने "स्वच्छ विकास तंत्र" योजना के तहत हरित गृह गैसों में कमी लाने के लिए दिल्ली मेट्रो को दुनिया का पहला "कार्बन क्रेडिट" दिया जिसके अंतर्गत उसे सात सालों के लिए 95 लाख डॉलर मिलेंगे। .

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दिल्ली सरकारी स्कूल भगदड़ २००९

दिल्ली सरकारी स्कूल भगदड़ २००९ १० सितंबर, २००९ को दिल्ली के उत्तर-पूर्वी जिले स्थित खजूरी खास के उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मे हुई घटना हैं। इसमें सात छात्राओं की मौत हो गई। स्कूल में छात्रों द्वारा धर-पकड़ और बदतमीजी से बचने के लिए छात्राओं में भगदड़ मची थी। .

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दक्षिण पूर्वी एशियाई राष्ट्रों का संगठन

दक्षिण पूर्वी एशियाई राष्ट्रों का संगठन (अंग्रेज़ी:एसोसिएशन ऑफ साउथ ईस्ट एशियन नेशंस, लघु:आसियान) दस दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों का समूह है, जो आपस में आर्थिक विकास और समृद्धि को बढ़ावा देने और क्षेत्र में शांति और स्थिरता कायम करने के लिए भी कार्य करते हैं। इसका मुख्यालय इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में है। आसियान की स्थापना ८ अगस्त, १९६७ को थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में की गई थी। इसके संस्थापक सदस्य थाईलैंड, इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलिपींस और सिंगापुर थे। ब्रूनेई इस संगठन में १९८४ में शामिल हुआ और १९९५ में वियतनाम। इनके बाद १९९७ में लाओस और बर्मा इसके सदस्य बने। १९७६ में आसियान की पहली बैठक में बंधुत्व और सहयोग की संधि पर हस्ताक्षर किए गए। १९९४ में आसियान ने एशियाई क्षेत्रीय फोरम (एशियन रीजनल फोरम) (एआरएफ) की स्थापना की गई, जिसका उद्देश्य सुरक्षा को बढ़ावा देना था। अमेरिका, रूस, भारत, चीन, जापान और उत्तरी कोरिया सहित एआरएफ के २३ सदस्य हैं। अपने चार्टर में आसियान के उद्देश्य के बारे में बताया गया है। पहला उद्देश्य सदस्य देशों की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और स्वतंत्रता को कायम रखा जाए, इसके साथ ही झगड़ों का शांतिपूर्ण निपटारा हो। सेक्रेट्री जनरल, आसियान द्वारा पारित किए प्रस्तावों को लागू करवाने और कार्य में सहयोग प्रदान करने का काम करता है। इसका कार्यकाल पांच वर्ष का होता है। वर्तमान में थाईलैंड के सूरिन पिट्स्वान इसके सेक्रेट्री जनरल है। आसियान की निर्णायक बॉडी में राज्यों के प्रमुख होते हैं, इसकी वर्ष में एक बार बैठक होती है। भारत आसियान देशों से सहयोग करने और संपर्क रखने का सदा ही इच्छुक रहा है। हाल ही में १३ अगस्त,२००९को भारत ने आसियन के संग बैंगकॉक में सम्मेलन किया, जिसमें कई महत्त्वपूर्ण समझौते हुए थे। भारतीय अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार मेला 2008, नई दिल्ली में आसियान मुख्य केन्द्र बिन्दु रहा था। नई व्यापार ब्लॉक के तहत दस देशों की कंपनियों और कारोबारियों ने मेले में भाग लिया था। थाइलैंड, इंडोनेशिया, मलेशिया, म्यांमार, वियतनाम, फिलिपींस, ब्रुनेई, कंबोडिया और लाओस आसियान के सदस्य देश हैं, जिनके उत्पाद व्यापार मेले में खूब दिखे थे। आसियान भारत का चौथा सबसे बडा व्यापारिक भागीदार है। दोनों पक्षों के बीच २००८ में ४७ अरब डॉलर का व्यापार हुआ था। फिक्की के महासचिव अमित मित्रा के अनुसार भारत और आसियान के बीच हुआ समझौता दोनों पक्षों के लिए उत्तम होगा। समझौता जनवरी २००९ से लागू हुआ था। .

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दक्षिण अमेरिका

दक्षिण अमेरिका (स्पेनी: América del Sur; पुर्तगाली: América do Sul) उत्तर अमेरिका के दक्षिण पूर्व में स्थित पश्चिमी गोलार्द्ध का एक महाद्वीप है। दक्षिणी अमेरिका उत्तर में १३० उत्तरी अक्षांश (गैलिनस अन्तरीप) से दक्षिण में ५६० दक्षिणी अक्षांश (हार्न अन्तरीप) तक एवं पूर्व में ३५० पश्चिमी देशान्तर (रेशिको अन्तरीप) से पश्चिम में ८१० पश्चिमी देशान्तर (पारिना अन्तरीप) तक विस्तृत है। इसके उत्तर में कैरीबियन सागर तथा पनामा नहर, पूर्व तथा उत्तर-पूर्व में अन्ध महासागर, पश्चिम में प्रशान्त महासागर तथा दक्षिण में अण्टार्कटिक महासागर स्थित हैं। भूमध्य रेखा इस महाद्वीप के उत्तरी भाग से एवं मकर रेखा मध्य से गुजरती है जिसके कारण इसका अधिकांश भाग उष्ण कटिबन्ध में पड़ता है। दक्षिणी अमेरिका की उत्तर से दक्षिण लम्बाई लगभग ७,२०० किलोमीटर तथा पश्चिम से पूर्व चौड़ाई ५,१२० किलोमीटर है। विश्व का यह चौथा बड़ा महाद्वीप है, जो आकार में भारत से लगभग ६ गुना बड़ा है। पनामा नहर इसे पनामा भूडमरुमध्य पर उत्तरी अमरीका महाद्वीप से अलग करती है। किंतु पनामा देश उत्तरी अमरीका में आता है। ३२,००० किलोमीटर लम्बे समुद्रतट वाले इस महाद्वीप का समुद्री किनारा सीधा एवं सपाट है, तट पर द्वीप, प्रायद्वीप तथा खाड़ियाँ कम हैं जिससे अच्छे बन्दरगाहों का अभाव है। खनिज तथा प्राकृतिक सम्पदा में धनी यह महाद्वीप गर्म एवं नम जलवायु, पर्वतों, पठारों घने जंगलों तथा मरुस्थलों की उपस्थिति के कारण विकसित नहीं हो सका है। यहाँ विश्व की सबसे लम्बी पर्वत-श्रेणी एण्डीज पर्वतमाला एवं सबसे ऊँची टीटीकाका झील हैं। भूमध्यरेखा के समीप पेरू देश में चिम्बोरेजो तथा कोटोपैक्सी नामक विश्व के सबसे ऊँचे ज्वालामुखी पर्वत हैं जो लगभग ६,०९६ मीटर ऊँचे हैं। अमेजन, ओरीनिको, रियो डि ला प्लाटा यहाँ की प्रमुख नदियाँ हैं। दक्षिण अमेरिका की अन्य नदियाँ ब्राज़ील की साओ फ्रांसिस्को, कोलम्बिया की मैगडालेना तथा अर्जेण्टाइना की रायो कोलोरेडो हैं। इस महाद्वीप में ब्राज़ील, अर्जेंटीना, चिली, उरुग्वे, पैराग्वे, बोलिविया, पेरू, ईक्वाडोर, कोलोंबिया, वेनेज़ुएला, गुयाना (ब्रिटिश, डच, फ्रेंच) और फ़ाकलैंड द्वीप-समूह आदि देश हैं। .

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दुश्चिंता

दुश्चिंता (या, व्यग्रता विकार या घबराहट) (अंग्रेज़ी:Anxiety disorder) एक प्रकार का मनोरोग है। साधारण शब्दों में चिंता या घबराहट आने वाले समय में कुछ बुरा या खराब घटने की आशंका होना है जबकि इनका कोई वास्तविक आधार नहीं होता। थोड़ी-बहुत चिन्ता सभी को होती है और यह हमारे लक्ष्य की प्राप्ति या सफलता के लिए आवश्यक भी है। यदि चिंता बहुत बढ़ जाती है और इसके व्यापक दुष्प्रभाव व्यक्ति के पारिवारिक, सामाजिक और आर्थिक जीवन पर पड़ने लगता है तो हम इसे घबराहट और चिंता रोग (Anxiety Disorder) कहते हैं। .

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द्रोणाचार्य

द्रोणाचार्य ऋषि भरद्वाज तथा घृतार्ची नामक अप्सरा के पुत्र तथा धर्नुविद्या में निपुण परशुराम के शिष्य थे। कुरू प्रदेश में पांडु के पाँचों पुत्र तथा धृतराष्ट्र के सौ पुत्रों के वे गुरु थे। महाभारत युद्ध के समय वह कौरव पक्ष के सेनापति थे। गुरु द्रोणाचार्य के अन्य शिष्यों में एकलव्य का नाम उल्लेखनीय है। उसने गुरुदक्षिणा में अपना अंगूठा द्रोणाचार्य को दे दिया था। कौरवो और पांडवो ने द्रोणाचार्य के आश्रम मे ही अस्त्रो और शस्त्रो की शिक्षा पायी थी। अर्जुन द्रोणाचार्य के प्रिय शिष्य थे। वे अर्जुन को विश्व का सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर बनाना चाहते थे। महाभारत की कथा के अनुसार महर्षि भरद्वाज एकबार नदी ने स्नान करने गए। स्नान के समाप्ति के बाद उन्होंने देखा की अप्सरा घृताची नग्न होकर स्नान कर रही है। यह देखकर वह कामातुर हो परे और उनके शिश्न से बीर्ज टपक पड़ा। उन्हीने ये बीर्ज एक द्रोण कलश में रखा, जिससे एक पुत्र जन्मा। दूसरे मत से कामातुर भरद्वाज ने घृताची से शारीरिक मिलान किया, जिनकी योनिमुख द्रोण कलश के मुख के समान थी। द्रोण (दोने) से उत्पन्न होने का कारण उनका नाम द्रोणाचार्य पड़ा। अपने पिता के आश्रम में ही रहते हुये वे चारों वेदों तथा अस्त्र-शस्त्रों के ज्ञान में पारंगत हो गये। द्रोण के साथ प्रषत् नामक राजा के पुत्र द्रुपद भी शिक्षा प्राप्त कर रहे थे तथा दोनों में प्रगाढ़ मैत्री हो गई। उन्हीं दिनों परशुराम अपनी समस्त सम्पत्ति को ब्राह्मणों में दान कर के महेन्द्राचल पर्वत पर तप कर रहे थे। एक बार द्रोण उनके पास पहुँचे और उनसे दान देने का अनुरोध किया। इस पर परशुराम बोले, "वत्स! तुम विलम्ब से आये हो, मैंने तो अपना सब कुछ पहले से ही ब्राह्मणों को दान में दे डाला है। अब मेरे पास केवल अस्त्र-शस्त्र ही शेष बचे हैं। तुम चाहो तो उन्हें दान में ले सकते हो।" द्रोण यही तो चाहते थे अतः उन्होंने कहा, "हे गुरुदेव! आपके अस्त्र-शस्त्र प्राप्त कर के मुझे अत्यधिक प्रसन्नता होगी, किन्तु आप को मुझे इन अस्त्र-शस्त्रों की शिक्षा-दीक्षा देनी होगी तथा विधि-विधान भी बताना होगा।" इस प्रकार परशुराम के शिष्य बन कर द्रोण अस्त्र-शस्त्रादि सहित समस्त विद्याओं के अभूतपूर्व ज्ञाता हो गये। शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात द्रोण का विवाह कृपाचार्य की बहन कृपी के साथ हो गया। कृपी से उनका एक पुत्र हुआ। यह महाभारत का वह महत्त्वपूर्ण पात्र बना जिसका नाम अश्वत्थामा था। द्रोणाचार्य ब्रह्मास्त्र का प्रयोग जानते थे जिसके प्रयोग करने की विधि उन्होंने अपने पुत्र अश्वत्थामा को भी सिखाई थी। द्रोणाचार्य का प्रारंभिक जीवन गरीबी में कटा उन्होंने अपने सहपाठी द्रु, पद से सहायता माँगी जो उन्हें नहीं मिल सकी। एक बार वन में भ्रमण करते हुए गेंद कुएँ में गिर गई। इसे देखकर द्रोणाचार्य का ने अपने धनुषर्विद्या की कुशलता से उसको बाहर निकाल लिया। इस अद्भुत प्रयोग के विषय में तथा द्रोण के समस्त विषयों मे प्रकाण्ड पण्डित होने के विषय में ज्ञात होने पर भीष्म पितामह ने उन्हें राजकुमारों के उच्च शिक्षा के नियुक्त कर राजाश्रय में ले लिया और वे द्रोणाचार्य के नाम से विख्यात हुये। .

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द्वादश ज्योतिर्लिंग

हिन्दू धर्म में पुराणों के अनुसार शिवजी जहाँ-जहाँ स्वयं प्रगट हुए उन बारह स्थानों पर स्थित शिवलिंगों को ज्योतिर्लिंगों के रूप में पूजा जाता है। ये संख्या में १२ है। सौराष्ट्र प्रदेश (काठियावाड़) में श्रीसोमनाथ, श्रीशैल पर श्रीमल्लिकार्जुन, उज्जयिनी (उज्जैन) में श्रीमहाकाल, ॐकारेश्वर अथवा अमलेश्वर, परली में वैद्यनाथ, डाकिनी नामक स्थान में श्रीभीमशंकर, सेतुबंध पर श्री रामेश्वर, दारुकावन में श्रीनागेश्वर, वाराणसी (काशी) में श्री विश्वनाथ, गौतमी (गोदावरी) के तट पर श्री त्र्यम्बकेश्वर, हिमालय पर केदारखंड में श्रीकेदारनाथ और शिवालय में श्रीघुश्मेश्वर। हिंदुओं में मान्यता है कि जो मनुष्य प्रतिदिन प्रात:काल और संध्या के समय इन बारह ज्योतिर्लिंगों का नाम लेता है, उसके सात जन्मों का किया हुआ पाप इन लिंगों के स्मरण मात्र से मिट जाता है। .

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दून विश्वविद्यालय

दून विश्वविद्यालय एक विश्वविद्यालय है जो भारत के उत्तराखण्ड राज्य की राजधानी देहरादून में स्थित है। विश्वविद्यालय की स्थापना उत्तराखण्ड विधानसभा के अक्टूबर २००५ के एक अधिनियम के बाद हुई थी। इसका पहला अकादमिक सत्र ९ मई, २००९ से प्रारम्भ हुआ। .

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देव (अभिनेता)

देव (अभिनेता) भारत की सोलहवीं लोकसभा में सांसद हैं। 2014 के चुनावों में इन्होंने पश्चिम बंगाल की घाटल सीट से सर्वभारतीय तृणमूल कांग्रेस की ओर से भाग लिया। .

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देव-डी

देव-डी, 6 फ़रवरी 2009 को प्रदर्शित एक हिन्दी रोमांटिक नाटक फिल्म है। फिल्म का लेखन और निर्देशन अनुराग कश्यप ने किया है। फिल्म शरतचंद्र चट्टोपाध्याय के कालजयी बंगाली उपन्यास देवदास का आधुनिक संस्करण है। इसके अलावा इस उपन्यास पर आधारित अन्य फ़िल्में पी सी ब्रूवा, बिमल रॉय और संजय लीला भंसाली बना चुके हैं। इस फ़िल्म को समालोचकों और जनता ने पसंद किया और जिस तरीके से इसने अपने आप को पेश किया उसके लिए इसे हिंदी की पथ तोड़ने वाली फिल्मों में से एक माना गया। .

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दीपक डोबरियाल

दीपक डोबरियाल - नई पीढ़ी के युवा सिनेमा अभिनेता, फिल्म 'दिल्ली -6' मे जलेबी वाला और ओमकारा मे राज्जू से चर्चित। अरविन्द गौड़ के निर्देशन मे ६ वर्ष तक नाटको मे काम करने के बाद गत सालो मे दीपक डोबरियाल ने अपने ताजगी भरे सनसनाते अभिनय से बॉलीवुड मे अलग पहचान बनाई है। 'मकबूल' से लेकर ओमकारा, 1971, शौर्य, दिल्ली-६ तक हर फिल्म में दीपक डोबरियाल ने खुद को साबित किया है। दीपक को ओमकारा के लिये फिल्म फेयर अवार्ड भी मिला है। .

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दीपक शर्मा

दीपक शर्मा दीपक शर्मा (जन्म ३० नवंबर १९४६) हिन्दी की जानी मानी कथाकार हैं। उन्होंने चंडीगढ़ स्थित पंजाब विश्वविद्यालय से अँग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की। उनके पिता आल्हासिंह भुल्लर पाकिस्तान के लब्बे गाँव के निवासी थे तथा माँ मायादेवी धर्मपरायण गृहणी थीं। १९७२ में उनका विवाह श्री प्रवीण चंद्र शर्मा से हुआ जो भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी थे। संप्रति वे लखनऊ क्रिश्चियन कॉलेज के अंग्रेज़ी विभाग में वरिष्ठ प्रवक्ता हैं। .

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धनतेरस

कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन भगवान धन्वन्तरि का जन्म हुआ था इसलिए इस तिथि को धनतेरस या धनत्रयोदशी के नाम से जाना जाता है। भारत सरकार ने धनतेरस को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। जैन आगम में धनतेरस को 'धन्य तेरस' या 'ध्यान तेरस' भी कहते हैं। भगवान महावीर इस दिन तीसरे और चौथे ध्यान में जाने के लिये योग निरोध के लिये चले गये थे। तीन दिन के ध्यान के बाद योग निरोध करते हुये दीपावली के दिन निर्वाण को प्राप्त हुये। तभी से यह दिन धन्य तेरस के नाम से प्रसिद्ध हुआ। .

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नचिकेत दिघे

नचिकेत दिघे (बोर्न: ११ नवम्बर १९८७) एक भारतीय अभिनेता और आवाज अभिनेता है। उसकी मातृभाषा भाषाओं हिंदी और मराठी हैं। वह सबसे अच्छा उसकी हिन्दी रॉन वीज़्ली के रूप में रूपर्ट ग्रिंट भूमिका पर हैरी पॉटर फ़िल्म श्रृंखला में, आवाज की डबिंग के लिए जाना जाता है। वह दूसरी फ़िल्म और बाद के बाद से यह कर गया है। वह आधिकारिक तौर पर करने के लिए आधिकारिक हिन्दी आवाज डब से अधिक कलाकार होने की पुष्टि की है: केविन जोनास और टोबी अमीईसु.

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नाहरगढ़ दुर्ग

नाहरगढ़ का किला जयपुर को घेरे हुए अरावली पर्वतमाला के ऊपर बना हुआ है। आरावली की पर्वत श्रृंखला के छोर पर आमेर की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस किले को सवाई राजा जयसिंह द्वितीय ने सन १७३४ में बनवाया था। यहाँ एक किंवदंती है कि कोई एक नाहर सिंह नामके राजपूत की प्रेतात्मा वहां भटका करती थी। किले के निर्माण में व्यावधान भी उपस्थित किया करती थी। अतः तांत्रिकों से सलाह ली गयी और उस किले को उस प्रेतात्मा के नाम पर नाहरगढ़ रखने से प्रेतबाधा दूर हो गयी थी। १९ वीं शताब्दी में सवाई राम सिंह और सवाई माधो सिंह के द्वारा भी किले के अन्दर भवनों का निर्माण कराया गया था जिनकी हालत ठीक ठाक है जब कि पुराने निर्माण जीर्ण शीर्ण हो चले हैं। यहाँ के राजा सवाई राम सिंह के नौ रानियों के लिए अलग अलग आवास खंड बनवाए गए हैं जो सबसे सुन्दर भी हैं। इनमे शौच आदि के लिए आधुनिक सुविधाओं की व्यवस्था की गयी थी। किले के पश्चिम भाग में “पड़ाव” नामका एक रेस्तरां भी है जहाँ खान पान की पूरी व्यवस्र्था है। यहाँ से सूर्यास्त बहुत ही सुन्दर दिखता है। .

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नागनाथ नायकवाडी

नागनाथ नायकवाडी को सन २००९ में भारत सरकार द्वारा समाज सेवा के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये महाराष्ट्र राज्य से हैं। .

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नितिन गडकरी

नितिन गडकरी (जन्म: २७ मई १९५७) एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं। वो भाजपा सरकार में सोलहवीं लोक सभा में परिवहन मंत्री हैं। इससे पहले दिसम्बर २००९ में भारतीय जनता पार्टी के नौंवें राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए। बावन वर्ष की आयु में भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष बनने वाले वे इस पार्टी के सबसे कम उम्र के अध्यक्ष हैं। उनका जन्म महाराष्ट्र के नागपुर ज़िले में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ। वे कामर्स में स्नातकोत्तर हैं इसके अलावा उन्होंने कानून तथा बिजनेस मनेजमेंट की पढ़ाई भी की है। वो भारत के एक उद्योगपति हैं। गडकरी सफल उद्यमी हैं। वह एक बायो-डीज़ल पंप, एक चीनी मिल, एक लाख २० हजार लीटर क्षमता वाले इथानॉल ब्लेन्डिंग संयत्र, २६ मेगावाट की क्षमता वाले बिजली संयंत्र, सोयाबीन संयंत्र और को जनरेशन ऊर्जा संयंत्र से जुड़े हैं। गडकरी ने १९७६ में नागपुर विश्वविद्यालय में भाजपा की छात्र शाखा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से अपने राजनीतिक जीवन की शुरूआत की। बाद में वह २३ साल की उम्र में भारतीय जनता युवा मोर्चा के अध्यक्ष बने। अपने ऊर्जावान व्यक्तित्व और सब को साथ लेकर चलने की ख़ूबी की वजह से वे सदा अपने वरिष्ठ नेताओं के प्रिय बने रहे। १९९५ में वे महाराष्ट्र में शिव सेना- भारतीय जनता पार्टी की गठबंधन सरकार में लोक निर्माण मंत्री बनाए गए और चार साल तक मंत्री पद पर रहे। मंत्री के रूप में वे अपने अच्छे कामों के कारण प्रशंसा में रहे। १९८९ में वे पहली बार विधान परिषद के लिए चुने गए, पिछले २० वर्षों से विधान परिषद के सदस्य हैं और आखिरी बार २००८ में विधान परिषद के लिए चुने गए। वे महाराष्ट्र विधान परिषद में विपक्ष के नेता भी रहे हैं। उन्होंने अपनी पहचान ज़मीन से जुड़े एक कार्यकर्ता के तौर पर बनाई है और वे एक राजनेता के साथ-साथ एक कृषक और एक उद्योगपति भी हैं। .

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निम्न घनत्व कोलेस्ट्रॉल

कोलेस्ट्रॉल रक्त में घुलनशील नहीं होता है। उसका कोशिकाओं तक एवं उनसे वापस परिवहन लिपोप्रोटींस नामक वाहकों द्वारा किया जाता है। निम्न-घनत्व लिपोप्रोटीन या एलडीएल, बुरे कोलेस्ट्रॉल के नाम से जाना जाता है। उच्च-घनत्व लिपोप्रोटीन या एचडीएल, अच्छे कोलेस्ट्रॉल के नाम से जाना जाता है। ट्राइग्लीसिराइड्स एवं Lp (a) कोलेस्ट्रॉल के साथ ये दो प्रकार के लिपिड, कुल कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बनाते हैं, जिसे रक्त परीक्षण के द्वारा ज्ञात किया जा सकता है। न्यूनघनत्व लिपोप्रोटीन (लो डेनसिटी लिपोप्रोटीन्स) कोलेस्ट्रॉल को सबसे ज्यादा नुकसानदायक माना जाता है। इसका उत्पादन लिवर द्वारा होता है, जो वसा को लिवर से शरीर के अन्य भागों मांसपेशियों, ऊतकों, इंद्रियों और हृदय तक पहुंचाता है। यह बहुत आवश्यक है कि एल डी एल कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम रहे, क्योंकि इससे यह पता चलता है कि रक्त के प्रवाह में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा आवश्यकता से अधिक हो गई है। ऐसे में यह रक्तनली की दीवारों पर यह जमना शुरू हो जाता है और कभी-कभी नली के छिद्र बंद हो जाते हैं। परिणामस्वरूप हार्टअटैक की संभावना बढ़ जाती है। राष्ट्रीय कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण कार्यक्रम के अनुसार शरीर में एल डी एल कोलेस्ट्रॉल का स्तर १०० मिली ग्राम/डीएल से कम होना चाहिए। एलडीएल (बुरा) कोलेस्ट्रॉल अत्यधिक होता है, तो यह धीरे-धीरे हृदय तथा मस्तिष्क को रक्त प्रवाह करने वाली धमनियों की भीतरी दीवारों में जमा होता जाता है। यदि एक थक्का (क्लॉट) जमकर संकरी हो चुकी धमनी में रुकावट डाल देता है, तो इसके परिणामस्वरूप हृदयाघात या स्ट्रोक हो सकता है। .

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निरन्तर

right निरंतर हिन्दी चिट्ठाकारों के एक समूह द्वारा प्रकाशित विश्व की पहली ज्ञात हिन्दी ब्लॉगज़ीन और जाल-पत्रिका थी। गैरपेशेवर प्रकाशकों द्वारा निकाली जाने वाली इस पत्रिका के प्रकाशकों का दावा था कि यह पाठकों को प्रकाशित लेखों पर त्वरित टिप्पणी करने का मौका देती है। निरंतर की स्थापना 2005 में की गई, पहले यह पंकज नरूला द्वारा स्थापित अक्षरग्राम डोमेन के अंतर्गत प्रकाशित होती थी परंतु बाद में अपने ही डोमेन से प्रकाशित होने लगी। जाल पर हिन्दी के बढ़ते प्रयोग के मद्देनज़र यह प्रयास शुरु किया गया था। निरंतर से जुड़े लोग वैसे तो चिट्ठाकारी से जुड़े थे पर यह पत्रिका उनके औपचारिक लेखन को प्रस्तुत करने का एक मंच बनी। अगस्त 2005 में निरंतर का प्रकाशन 6 अंकों के उपरांत बंद हो गया था। 1 साल बाद अगस्त 2006 में इसका प्रकाशन नये कलेवर में दुबारा शुरु हुआ और अगस्त, अक्टूबर व दिसम्बर में तीन अंक प्रकाशित होने के बाद बंद हो गया। मई 2007 से जुलाई 2008 के मध्य इसके अंक यदा कदा पुनः प्रकाशित हुये। पत्रिका के कुल दस अंक प्रकाशित हुये हैं। जनवरी 2009 में निरंतर पत्रिका को बंद कर इसके प्रकाशन मंडल ने इसे एक नई जालपत्रिका सामयिकी में सामहित करने की घोषणा की। निरंतर के मानद मुख्य संपादक हैं अनूप शुक्ला। पत्रिका का प्रकाशन व प्रबंध संपादन इसके संस्थापक देबाशीष चक्रवर्ती करते हैं। निरंतर के कोर संपादन टीम में शामिल हैं डॉ सुनील दीपक, रविशंकर श्रीवास्तव, रमण कौल, अतुल अरोरा, प्रत्यक्षा, शशि सिंह, ईस्वामी, पंकज नरूला, जीतेन्द्र चौधरी और आलोक कुमार। .

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निशात (फिल्म निर्देशिका)

अपनी पहली फिल्म वुमेन विदआउट मैन से ही चर्चित होने वाली ईरान की फिल्म निर्देशिका जिन्हें इस फिल्म के लिए इस साल विंसी फिल्म महोत्सव में प्रतिष्ठित सिल्वर पुरस्कार प्रदान किया गया। शहरमुश पर्सीपुर के उपन्यास पर आधारित इस फिल्म में निशात ने अपने देश ईरान की राजनीति को फिल्म का विषय बनाया है। यह फिल्म 1953 की ईरान की उन राजनीतिक स्थितियों को प्रदर्शित करती है, जिन्हें ब्रिटेन और अमेरिका ने अपने फायदे के लिए सृजित किया था और जिनकी वजह से ईरान की लोकतांत्रिक ढंग से निर्वाचित सरकार का स्थान राजशाही ने ले लिया था। इस फिल्म ने निशात को गंभीर विषय पर सशक्त फिल्में बनाने वाले निर्देशकों की श्रेणी में शामिल कर दिया है। .

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नक्की झील

नक्की झीलनक्की झील माउंट आबू का एक सुंदर पर्यटन स्थल है। मीठे पानी की यह झील, जो राजस्थान की सबसे ऊँची झील हैं सर्दियों में अक्सर जम जाती है। कहा जाता है कि एक हिन्दू देवता ने अपने नाखूनों से खोदकर यह झील बनाई थी। इसीलिए इसे नक्की (नख या नाखून) नाम से जाना जाता है। झील से चारों ओर के पहाड़ियों का दृश्य अत्यंत सुंदर दिखता है। इस झील में नौकायन का भी आनंद लिया जा सकता है। नक्की झील के दक्षिण-पश्चिम में स्थित सूर्यास्त बिंदू से डूबते हुए सूर्य के सौंदर्य को देखा जा सकता है। यहाँ से दूर तक फैले हरे भरे मैदानों के दृश्य आँखों को शांति पहुँचाते हैं। सूर्यास्त के समय आसमान के बदलते रंगों की छटा देखने सैकड़ों पर्यटक यहाँ आते हैं। प्राकृतिक सौंदर्य का नैसर्गिक आनंद देनेवाली यह झील चारों ओऱ पर्वत शृंखलाओं से घिरी है। यहाँ के पहाड़ी टापू बड़े आकर्षक हैं। यहाँ कार्तिक पूर्णिमा को लोग स्नान कर धर्म लाभ उठाते हैं। झील में एक टापू को ७० अश्वशक्ति से चलित विभिन्न रंगों में जल फव्वारा लगाकर आकर्षक बनाया गया है जिसकी धाराएँ ८० फुट की ऊँचाई तक जाती हैं। झील में नौका विहार की भी व्यवस्था है। झील के किनारे एक सुंदर बगीचा है, जहाँ शाम के समय घूमने और नौकायन के लिए पर्यटकों का हुजूम उमड़ पड़ता है। पास ही में बनी दुकानों से राजस्थानी शिल्प का सामान खरीदा जा सकता है। यहाँ संगमरमर पत्थर से बनी मूर्तियों और सूती कोटा साड़ियाँ काफी लोकप्रिय है। यहाँ की दुकानों से चाँदी के आभूषणों की खरीददारी भी की जा सकती है। .

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नेत्र शोथ

नेत्र शोथ (अंग्रेज़ी: Conjunctivitis या "pink eye" या "Madras eye") जिसे 'पिंक आई' या 'कंजंक्टिवाइटिस' भी कहा जाता है; आँख की बाहरी पर्त कंजंक्टिवा और पलक के अंदरूनी सतह के संक्रमण को कहते हैं। साधारण भाषा में इसे "आँख आना" भी कहते हैं। यह प्रायः एलर्जी या संक्रमण (सामान्यतः विषाणु किंतु यदा-कदा जीवाणु से) द्वारा होता है। यह संक्रमण अधिकांशतः मानवों में ही होता है, किंतु कहीं कहीं कुत्तों में भी पाया गया है। कंजंक्टिवाइटिस को बोलचाल की भाषा में आँख आना कहते हैं। इसकी वजह से आँखें लाल, सूजन युक्त, चिपचिपी होने के साथ-साथ उसमें बाल जैसी चुभने की समस्याएं हो सकती हैं। .

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नेपाल भाषा विकिपीडिया

नेपाल भाषा विकिपीडिया विकिपीडिया का नेपाल भाषा का अवतरण है। ६ जून, २००९ तक इस विकिपीडिया पर लेखों की संख्या ७०,०००+ और सदस्य संख्या ३,०००+ है जिनमें से १ संपादक है। यह विकिपीडिया का ३८वां सबसे बड़ा संस्करण है। .

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नेशनल सेमीकंडक्टर

नेशनल सेमीकंडक्टर्स एक अर्धचालक युक्ति निर्माता कंपनी है। इसका मुख्यालय सैंटा क्लारा, कैलीफोर्निया, संयुक्त राज्य में स्थित है। .

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नेहरू तारामंडल, दिल्ली

300px नेहरू तारामंडल तीन मूर्ति भवन में वह जगह है जहां जाकर ब्रह्मांड, तारों, सितारों और खगोलीय घटनाओं से जुड़ी जिज्ञासा को शांत कर सकते हैं। भारत के अन्य शहरों के तारामंडलों की अपेक्षा इस तारामंडल के पास बहुत ज्यादा सुविधाएं नहीं हैं तो भी वह लोगों को इस रहस्यमय दुनिया की झलक दिखाता है। नेहरू तारामंडल की कल्पना एवं योजना पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने बनायी थी। वे चाहती थीं कि बच्चों में विज्ञान को बढ़ावा दिया जाए। जवाहर लाल नेहरू का साइंस और बच्चों में रुझान था। इसी को देखते हुए इंदिरा गांधी ने सोचा कि उन्हीं के नाम पर कुछ ऐसा किया जाए जिसमें बच्चों और साइंस दोनों को लाभ हो। सो, इस तरह नेहरू तारामंडल अस्तित्व में आया। तारामंडल जवाहर लाल नेहरू मेमोरियल फंड के पैसे से बनाया गया था पर आज इसे नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी चलाती है। तारामंडल को बनाने की शुरुआत सन् १९८२ में हुई थी और सन् १९८४ में इसका पहला प्रोग्राम शुरू कर दिया गया था। इसका उद्घाटन भी खुद इंदिरा गांधी ने किया था। पहले शो का नाम था अवर कॉस्मिक हेरिटेज। इस शो में ब्रह्मांड के बनने के बारे में अब तक मान्य सिद्घांत बिग बैंग के जरिए ग्रहों, उपग्रहों और आकाशगंगा के अस्तित्व में आने की कहानी बताई गई थी। तारामंडल के पहले डायरेक्टर कर्नल सिंह थे। उनके बाद डॉ॰ निरुपमा राघवन आईं और आज इसकी डायरेक्टर हैं डॉ॰ एन.

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नोकिया के उत्पादों की सूची

नोकिया का लोगो यहां नोकिया के उत्पादों की आंशिक सूची दी जा रही है। यह सूची नोकिया के आधुनिक फ़ोन व मोबाइल उत्पादों पर केंद्रित है। नोकिया अन्य विधूत उपकरण जैसे की टेलीविजन वगरह भी बनाता है। .

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नोकिया ५०३० एक्सप्रेस म्यूजिक

नोकिया ५०३० एक्सप्रेस म्यूजिक, नोकिया द्वारा बनाया गया एक मोबाइल फ़ोन उपकरण है। इसे सन २००९ में बाज़ार में उपलब्ध कराया गया। यह जीएसएम तकनीक पर कार्य करता है। यह नोकिया ५००० एक्टिव श्रृंखला का केंडीबार बनावट वाला, ६५५३६ रंग दिखाने में सक्षम - १२८X१६० पिक्सल की स्क्रीन लगा उत्पाद है। श्रेणी:नोकिया के मोबाइल फ़ोन.

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नोकिया ५३३० एक्सप्रेस म्यूजिक

नोकिया ५३३० एक्सप्रेस म्यूजिक, नोकिया द्वारा बनाया गया एक मोबाइल फ़ोन उपकरण है। इसे सन २००९ में बाज़ार में उपलब्ध कराया गया। यह युएम्टीएस तकनीक पर कार्य करता है। यह नोकिया ५००० एक्टिव श्रृंखला का स्लाइड बनावट वाला, १६७७२१६ रंग दिखाने में सक्षम - २४०X३२० पिक्सल की स्क्रीन लगा उत्पाद है। इसमें ३.१५ मेगापिक्सल का कैमरा रंगीन फोटो खेचने व संग्रहण के लिए लगा है। श्रेणी:नोकिया के मोबाइल फ़ोन.

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नोकिया ५६३० एक्सप्रेस म्यूजिक

नोकिया ५६३० एक्सप्रेस म्यूजिक, नोकिया द्वारा बनाया गया एक मोबाइल फ़ोन उपकरण है। इसे सन २००९ में बाज़ार में उपलब्ध कराया गया। यह युएम्टीएस तकनीक पर कार्य करता है। यह नोकिया ५००० एक्टिव श्रृंखला का केंडीबार बनावट वाला, १६७७२१६ रंग दिखाने में सक्षम - २४०X३२० पिक्सल की स्क्रीन लगा उत्पाद है। इसमें ३.५ मेगापिक्सल का कैमरा रंगीन फोटो खेचने व संग्रहण के लिए लगा है। श्रेणी:नोकिया के मोबाइल फ़ोन.

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नोकिया ५७३० एक्सप्रेस म्यूजिक

नोकिया ५७३० एक्सप्रेस म्यूजिक, नोकिया द्वारा बनाया गया एक मोबाइल फ़ोन उपकरण है। इसे सन २००९ में बाज़ार में उपलब्ध कराया गया। यह युएम्टीएस तकनीक पर कार्य करता है। यह नोकिया ५००० एक्टिव श्रृंखला का स्लाइड बनावट वाला, १६७७२१६ रंग दिखाने में सक्षम - २४०X३२० पिक्सल की स्क्रीन लगा उत्पाद है। इसमें ३.१५ मेगापिक्सल का कैमरा रंगीन फोटो खेचने व संग्रहण के लिए लगा है। श्रेणी:नोकिया के मोबाइल फ़ोन.

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नीपोलिटाई विकिपीडिया

नीपोलिटाई विकिपीडिया विकिपीडिया का नीपोलिटाई भाषा का संस्करण है। यह २१ दिसंबर २००६ में आरंभ किया गया था और २६ मई, २००९ तक इस पर लेखों की कुल संख्या १३,०००+ है। यह विकिपीडिया का छिहत्तरवां सबसे बड़ा संस्करण है।.

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नीबू

नीबू का वृक्ष नीबू (Citrus limon, Linn.) छोटा पेड़ अथवा सघन झाड़ीदार पौधा है। इसकी शाखाएँ काँटेदार, पत्तियाँ छोटी, डंठल पतला तथा पत्तीदार होता है। फूल की कली छोटी और मामूली रंगीन या बिल्कुल सफेद होती है। प्रारूपिक (टिपिकल) नीबू गोल या अंडाकार होता है। छिलका पतला होता है, जो गूदे से भली भाँति चिपका रहता है। पकने पर यह पीले रंग का या हरापन लिए हुए होता है। गूदा पांडुर हरा, अम्लीय तथा सुगंधित होता है। कोष रसयुक्त, सुंदर एवं चमकदार होते हैं। नीबू अधिकांशत: उष्णदेशीय भागों में पाया जाता है। इसका आदिस्थान संभवत: भारत ही है। यह हिमालय की उष्ण घाटियों में जंगली रूप में उगता हुआ पाया जाता है तथा मैदानों में समुद्रतट से 4,000 फुट की ऊँचाई तक पैदा होता है। इसकी कई किस्में होती हैं, जो प्राय: प्रकंद के काम में आती हैं, उदाहरणार्थ फ्लोरिडा रफ़, करना या खट्टा नीबू, जंबीरी आदि। कागजी नीबू, कागजी कलाँ, गलगल तथा लाइम सिलहट ही अधिकतर घरेलू उपयोग में आते हैं। इनमें कागजी नीबू सबसे अधिक लोकप्रिय है। इसके उत्पादन के स्थान मद्रास, बंबई, बंगाल, पंजाब, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र हैदराबाद, दिल्ली, पटियाला, उत्तर प्रदेश, मैसूर तथा बड़ौदा हैं। नीबू की उपयोगिता जीवन में बहुत अधिक है। इसका प्रयोग अधिकतर भोज्य पदार्थों में किया जाता है। इससे विभिन्न प्रकार के पदार्थ, जैसे तेल, पेक्टिन, सिट्रिक अम्ल, रस, स्क्वाश तथा सार (essence) आदि तैयार किए जाते हैं। .

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पत्तदकल

पत्तदकल (कन्नड़ - ಪಟ್ಟದಕಲ್ಲು) भारत के कर्नाटक राज्य में एक कस्बा है, जो भारतीय स्थापत्यकला की वेसर शैली के आरम्भिक प्रयोगों वाले स्मारक समूह के लिये प्रसिद्ध है। ये मंदिर आठवीं शताब्दी में बनवाये गये थे। यहाँ द्रविड़ (दक्षिण भारतीय) तथा नागर (उत्तर भारतीय या आर्य) दोनों ही शैलियों के मंदिर हैं। पत्तदकल दक्षिण भारत के चालुक्य वंश की राजधानी बादामी से २२ कि॰मी॰ की दूरी पर स्थित हैं। चालुक्य वंश के राजाओं ने सातवीं और आठवीं शताब्दी में यहाँ कई मंदिर बनवाए। एहोल को स्थापत्यकला का विद्यालय माना जाता है, बादामी को महाविद्यालय तो पत्तदकल को विश्वविद्यालय कहा जाता है। पत्तदकल शहर उत्तरी कर्नाटक राज्य में बागलकोट जिले में मलयप्रभा नदी के तट पर बसा हुआ है। यह बादामी शहर से २२ कि.मि.

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पत्तदकल स्मारक परिसर

पत्तदकल स्मारक परिसर भारत के कर्नाटक राज्य में एक पत्तदकल नामक कस्बे में स्थित है। यह अपने पुरातात्विक महत्व के कारण प्रसिद्ध है। चालुक्य वंश के राजाओं ने सातवीं और आठवीं शताब्दी में यहाँ कई मंदिर बनवाए। एहोल को स्थापत्यकला का विद्यालय माना जाता है, बादामी को महाविद्यालय तो पत्तदकल को विश्वविद्यालय कहा जाता है। यहाँ कुल दस मंदिर हैं, जिनमें एक जैन धर्मशाला भी शामिल है। इन्हें घेरे हुए ढेरों चैत्य, पूजा स्थल एवं कई अपूर्ण आधारशिलाएं हैं। यहाँ चार मंदिर द्रविड़ शैली के हैं, चार नागर शैली के हैं एवं पापनाथ मंदिर मिश्रित शैली का है। पत्तदकल को १९८७ में युनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया था। विरुपाक्ष मंदिर यहाँ का सर्वश्रेष्ठ मंदिर है। इसे महाराज विक्रमादित्य द्वितीय की पत्नी लोकमहादेवी ने ७४५ ई. में अपने पति की कांची के पल्लव वंश पर विजय के स्मारक रूप में बनवाया था। यह मंदिर कांची के कैलाशनाथ मंदिर से बहुत मिलता जुलता है। वही मंदिर इस मंदिर की प्रेरणा है। यही विरुपाक्ष मंदिर एल्लोरा में राष्ट्रकूट वंश द्वारा बनवाये गये कैलाशनाथ मंदिर की प्रेरणा बना। इस मंदिर की शिल्पाकृतियों में कुछ प्रमुख हैं लिंगोद्भव, नटराज, रावाणानुग्रह, उग्रनृसिंह, आदि। इसके अलावा संगमेश्वर मंदिर भी काफी आकर्षक है। यह मंदिर अधूरा है। इसे महाराज विजयादित्य सत्याश्रय ने बनवाया था। यहाँ के काशी विश्वनाथ मंदिर को राष्ट्रकूट वंश ने आठवीं शताब्दी में बनवाया था। निकटस्थ ही मल्लिकार्जुन मंदिर है। इसे विक्रमादित्य की द्वितीय रानी त्रिलोकमहादेवी द्वारा ७४५ ई. में बनवाया गया था। यह विरुपाक्ष मंदिर का एक छोटा प्रतिरूप है। गल्गनाथ मंदिर में भगवान शिव को अंधकासुर का मर्दन करते हुए दिखाया गया है। कदासिद्धेश्वर मंदिर में शिव की त्रिशूल धारी मूर्ति है। जम्बुलिंग मंदिर में शिवलिंग स्थापित है। ये सभी नागर शैली में निर्मित हैं। यहां के जैन मंदिर पत्तदकल-बादामी मार्ग पर स्थित है। ये मयनाखेत के राष्ट्रकूटों द्वारा द्रविड़ शैली में निर्मित हैं। यहां नौवीं शताब्दी के कुछ बहुत ही सुंदर शिल्प के नमूने हैं। इन्हे अमोघवर्षा प्रथम या उसके पुत्र कृष्ण द्वितीय ने बनवाया था। यहां का पापनाथ मंदिर वेसारा शैली में निर्मित है। ६८० ई. में निर्मित यह मंदिर पहले नागर शैली में आरम्भ हुआ था, पर बाद में द्रविड़ शैली में बदला गया। यहां के शिल्प रामायण एवं महाभारत की घटनाओं के बारे में बताते हैं। इस मंदिर में आलमपुर, आंध्र प्रदेश के नवब्रह्म मंदिर की झलक दिखाई देती है। यह मंदिर भी इसी वंश ने बनवाया था। यहाँ के बहुत से शिल्प अवशेष यहाँ बने प्लेन्स के संग्रहालय तथा शिल्प दीर्घा में सुरक्षित रखे हैं। इन संग्रहालयों का अनुरक्षण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग करता है। ये भूतनाथ मंदिर मार्ग पर स्थित हैं। इनके अलावा अन्य महत्त्वपूर्ण स्मारकों में, अखण्ड एकाश्म स्तंभ, नागनाथ मंदिर, चंद्रशेखर मंदिर एवं महाकुटेश्वर मंदिर भी हैं, जिनमें अनेक शिलालेख हैं। File:Kasivisvanatha_temple_at_Pattadakal.jpg|काशीविश्वनाथ मंदिर File:Temple_Pattadakal.JPG|पापनाथ मंदिर चित्र:Mallikarjuna_and_Kasivisvanatha_temples_at_Pattadakal.jpg|मल्लिकार्जुन एवं काशीविश्वनाथ मंदिर File:Jain_Narayana_temple_at_Pattadakal.JPG|जैन नारायण मंदिर .

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पद्म भूषण

पद्म भूषण सम्मान भारत सरकार द्वारा दिया जाने वाला तीसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जो देश के लिये बहुमूल्य योगदान के लिये दिया जाता है। भारत सरकार द्वारा दिए जाने वाले अन्य प्रतिष्ठित पुरस्कारों में भारत रत्न, पद्म विभूषण और पद्मश्री का नाम लिया जा सकता है। पद्म भूषण रिबन .

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पनडुब्बी

सन् १९७८ में ''एल्विन'' प्रथम विश्व युद्ध में प्रयुक्त जर्मनी की यूसी-१ श्रेणी की पनडुब्बी पनडुब्बी(अंग्रेज़ी:सबमैरीन) एक प्रकार का जलयान (वॉटरक्राफ़्ट) है जो पानी के अन्दर रहकर काम कर सकता है। यह एक बहुत बड़ा, मानव-सहित, आत्मनिर्भर डिब्बा होता है। पनडुब्बियों के उपयोग ने विश्व का राजनैतिक मानचित्र बदलने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई है। पनडुब्बियों का सर्वाधिक उपयोग सेना में किया जाता रहा है और ये किसी भी देश की नौसेना का विशिष्ट हथियार बन गई हैं। यद्यपि पनडुब्बियाँ पहले भी बनायी गयीं थीं, किन्तु ये उन्नीसवीं शताब्दी में लोकप्रिय हुईं तथा सबसे पहले प्रथम विश्व युद्ध में इनका जमकर प्रयोग हुआ। विश्व की पहली पनडुब्बी एक डच वैज्ञानिक द्वारा सन १६०२ में और पहली सैनिक पनडुब्बी टर्टल १७७५ में बनाई गई। यह पानी के भीतर रहते हुए समस्त सैनिक कार्य करने में सक्षम थी और इसलिए इसके बनने के १ वर्ष बाद ही इसे अमेरिकी क्रान्ति में प्रयोग में लाया गया था। सन १६२० से लेकर अब तक पनडुब्बियों की तकनीक और निर्माण में आमूलचूल बदलाव आया। १९५० में परमाणु शक्ति से चलने वाली पनडुब्बियों ने डीज़ल चलित पनडुब्बियों का स्थान ले लिया। इसके बाद समुद्री जल से आक्सीजन ग्रहण करने वाली पनडुब्बियों का भी निर्माण कर लिया गया। इन दो महत्वपूर्ण आविष्कारों से पनडुब्बी निर्माण क्षेत्र में क्रांति सी आ गई। आधुनिक पनडुब्बियाँ कई सप्ताह या महिनों तक पानी के भीतर रहने में सक्षम हो गई है। द्वितीय विश्व युद्ध के समय भी पनडुब्बियों का उपयोग परिवहन के लिये सामान को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने के लिए किया जाता था। आजकल इनका प्रयोग पर्यटन के लिये भी किया जाने लगा है। कालपनिक साहित्य संसार और फंतासी चलचित्रों के लिये पनडुब्बियों का कच्चे माल के रूप मे प्रयोग किया गया है। पनडुब्बियों पर कई लेखकों ने पुस्तकें भी लिखी हैं। इन पर कई उपन्यास भी लिखे जा चुके हैं। पनडुब्बियों की दुनिया को छोटे परदे पर कई धारावाहिको में दिखाया गया है। हॉलीवुड के कुछ चलचित्रों जैसे आक्टोपस १, आक्टोपस २, द कोर में समुद्री दुनिया के मिथकों को दिखाने के लिये भी पनडुब्बियो को दिखाया गया है। .

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परम योद्धा: अमेरिका बनाम ब्रिटेन

परम योद्धा: अमेरिका बनाम ब्रिटेन अल्टीमेट फाइटिंग चैम्पियनशिप (यू एफ सी) का नौंवा भाग है, जो रियल्टी टीवी श्रृंखला द अल्टीमेट द्वारा निर्मित है, जिसका निर्माण जनवरी २००९ में आरम्भ कर दिया गया था और १ अप्रैल, २००९ से स्पाइक पर प्रसारित किया जायेगा। इस भाग का केंद्र बिंदु हल्के लड़ाकू विमान और वेल्टरवेट सेनानी हैं। शो में भाग लेने के लिए योद्धा द्वारा कम से कम तीन बार अक्टूबर २००८ में हुए ट्रायआउट पेशेवर बाऊट में भाग लिया हुआ होना चाहिए। यू एफ सी मिडलवेट योद्धा माइकल बिस्पिंग दो में से एक कोच होंगे। दुसरे कोच हैंडरसन हैं। वे यू एफ सी ९३: फ्रेंकलिन बनाम हैंडरसन में रिच फ्रेंकलिन को हरा कर कोच बनें हैं। .

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परमाणु परीक्षण

२७ मार्च, १९५४ को अमरीका द्वारा किये गये कैसल रोमियो नाभिकीय परीक्षण का चित्र "बेकर शॉट", संयुक्त राष्ट्र द्वारा किया गया ऑपरेशन क्रॉसरोड्स अभियान का एक भाग, १९४६ नाभिकीय अस्त्र परीक्षण (अंग्रेज़ी:Nuclear weapons tests) या परमाण परीक्षण उन प्रयोगों को कहते हैं जो डिजाइन एवं निर्मित किये गये नाभिकीय अस्त्रों के प्रभाविकता, उत्पादकता एवं विस्फोटक क्षमता की जाँच करने के लिये किये जाते हैं। परमाणु परीक्षणों से कई जानकारियाँ प्राप्त होतीं हैं; जैसे - ये नाभिकीय हथियार कैसा काम करते हैं; विभिन्न स्थितियों में ये किस प्रकार का परिणाम देते हैं; भवन एवं अन्य संरचनायें इन हथियारों के प्रयोग के बाद कैसा बर्ताव करतीं हं। सन् १९४५ के बाद बहुत से देशों ने परमाणु परीक्षण किये। इसके अलावा परमाणु परीक्षणों से वैज्ञानिक, तकनीकी एवं सैनिक शक्ति का प्रदर्शन करने की कोशिश भी की जाती है। .

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पर्ल टावर

पर्ल टावर एक ७० तलीय २७४ मीटर ऊँची एक गगनचुम्बी इमारत है, जो पनामा नगर, पनामा में निर्माणाधीन है। इसका निर्माण कार्य दिसम्बर २००९ तक पूरा होना था। श्रेणी:पनामा नगर श्रेणी:गगनचुम्बी अट्टालिकाएँ.

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पल्स पोलियो प्रतिरक्षण अभियान

पल्स पोलियो प्रतिरक्षण अभियान भारत ने डब्‍ल्‍यूएचओ वैश्विक पोलियो उन्‍मूलन प्रयास के परिणाम स्‍वरूप 1995 में पल्‍स पोलियो टीकाकरण (पीपीआई) कार्यक्रम आरंभ किया ' इस कार्यक्रम के तहत 5 वर्ष से कम आयु के सभी बच्‍चों को पोलियो समाप्‍त होने तक हर वर्ष दिसंबर और जनवरी माह में ओरल पोलियो टीके (ओपीवी) की दो खुराकें दी जाती हैं' यह अभियान सफल सिद्ध हुआ है और भारत में पोलियो माइलिटिस की दर में काफी कमी आई है' पीपीआई की शुरुआत ओपीवी के तहत शत प्रतिशत कवरेज प्राप्‍त करने के उद्देश्‍य से की गई थी' इसका लक्ष्‍य उन्‍नत सामाजिक प्रेरण, उन क्षेत्रों में मॉप अप प्रचालनों की योजना बनाकर उन बच्‍चों तक पहुंचना है जहां पोलियो वायरस लगभग गायब हो चुका है और यहां जनता के बीच उच्‍च मनोबल बनाए रखना है' 2009 के दौरान हाल ही में भारत में विश्‍व के पोलियो के मामलों का उच्‍चतम भार (741) था, यहां तीन अन्‍य महामारियों से पीडित देशों की संख्‍या से अधिक मामले थे' यह टीका बच्‍चों तक पहुंचाने के असाधारण उपाय अपनाने से भारत में पश्चिम बंगाल राज्‍य की एक दो वर्षीय बालिका के अलावा कोई अन्‍य मामला नहीं देखा गया जिसे 13 जनवरी 2011 को लकवा हो गया था 'आज भारत ने पोलियो के खिलाफ अपने संघर्ष में एक महत्‍वपूर्ण पड़ाव प्राप्‍त किया है, चूंकि अब पोलियो का अन्‍य कोई केन्‍द्र नहीं है' भारत में 13 जनवरी 2011 के बाद से सीवेज के नमूनों में न तो वन्‍य पोलियो वायरस और न ही अन्‍य पोलियो वायरस का मामला दर्ज किया गया है 'इसकी असाधारण उपलब्धि लाखों टीका लगाने वालों, स्‍वयं सेवकों, सामाजिक प्रेरणादायी व्‍यक्तियों,अभिनेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और धार्मिक नेताओं के साथ सरकार द्वारा लगाई गई ऊर्जा,समर्पण और कठोर प्रयास का परिणाम है ' पोलियो उन्‍मूलन के प्रयास देश में सर्वाधिक मान्‍यता प्राप्‍त ब्रांड हैं, जिसमें फिल्‍म उद्योग के चर्चित सितारे जनता को संदेश देते हैं 'ग्रामीण क्षेत्रों के लिए राष्‍ट्रीय ग्रामीण स्‍वास्‍थ्‍य मिशन का प्रयास एक वरदान सिद्ध हुआ है ' सरकार को तकनीकी और रसद संबंधी सहायता प्रदान करने के लिए 1997 में राष्‍ट्रीय पोलियो निगरानी परियोजना आरंभ की गई और अब यह राज्‍य सरकारों के साथ नजदीकी से कार्य करती है और देश में पोलियो उन्‍मूलन का लक्ष्‍य पूरा करने के लिए भागीदारी एजेंसियों की एक बड़ी श्रृंखला इसमें संलग्‍न है ' .

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पालि विकिपीडिया

पालि विकिपीडिया विकिपीडिया का पालि भाषा का संस्करण है। २८ मई, २००९ तक इस विकिपीडिया पर लेखों की संख्या २,३१६+ है और यह विकिपीडिया का १४६वां सबसे बड़ा संस्करण है।.

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पाकिस्तान पर अमरीकी मिसाइल हमला २००९

पाकिस्तान के क़बायली इलाक़े में शनिवार, जनवरी 24, 2009 को अमरीकी चालक रहित विमान से किए गए दो मिसाइल हमलों में कम से कम 14 लोगों की मौत हुई है। उत्तरी वज़ीरिस्तान में एक मिसाइल ने एक घर को निशाना बनाया.

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पाकिस्तान बम धमाके २००९

इसी दिन नवाज शरीफ के नेतृत्‍व में एक बड़ी रैली इस्‍लामाबाद पहुंचने वाली थी जिसमें राष्‍ट्रपति जरदारी का विरोध किया जा रहा था और उनसे बर्खास्‍त जजों की तुरंत बहाली करने को भी कहा जा रहा था। पाकिस्‍तान की सरकार ने नवाज शरीफ की मांगों को मान लिया था जिसकी वजह से रैली को इस्‍लामाबाद पहुंचने की जरूरत ही नहीं पड़ी.

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पंद्रहवीं लोकसभा

पंद्रहवीं लोकसभा के मंत्री मंडल सहित २२ मई, २००९ की शाम राष्ट्रपति भवन के अशोक हॉल में आयोजित एक समारोह में राष्ट्रपति प्रतिभा देवीसिंह पाटिल ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। जवाहर लाल नेहरू के बाद मनमोहन सिंह पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जो पाँच साल का पहला कार्यकाल पूरा करने के बाद फिर प्रधानमंत्री बने हैं। अप्रैल-मई २००९ में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव २००९ में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी और संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) को 250 से ज़्यादा सीटें मिली थीं। मनमोहन सिंह के बाद प्रणब मुखर्जी, शरद पवार, ए के एंटनी और पी चिदंबरम ने शपथ ली। प्रधानमंत्री कार्यालय ने पहले ही एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करके बता दिया था कि प्रधानमंत्री के साथ 19 मंत्रियों को शपथ ग्रहण कराई जाएगी। जिन नामों की मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है उनमें प्रणब मुखर्जी, पी चिदंबरम, एके एंटनी, कपिल सिब्बल, कमलनाथ, शरद पवार, ममता बनर्जी के नाम प्रमुखता से शामिल हैं। उत्तर प्रदेश से कांग्रेस के 21 सांसद चुनकर आए हैं मगर उनमें से किसी का भी नाम इस सूची में नहीं है। शेष मंत्रिमंडल के विस्तार के लिए 26 मई की तारीख बताई गई है। प्रधानमंत्री कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार अगले विस्तार में अन्य कैबिनेट मंत्रियों के साथ ही राज्य मंत्रियों (स्वतंत्र प्रभार) और अन्य राज्य मंत्रियों को शपथ दिलाई जाएगी। .

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पंद्रहवीं लोकसभा का मंत्रिमंडल

२२ और २८ मई २००९ को शपथ ग्रहण की। भारत की पंद्रहवीं लोकसभा के मंत्रियों ने २२ और २८ मई २००९ को शपथ ग्रहण की। इस प्रकार प्रधान मंत्री के मंत्रीमंडल में कुल ५९ मंत्रियों को शामिल किया गया है। इनकी सूची इस प्रकार से है:- .

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पंकज आडवाणी

पंकज आडवाणी (सिंधी:पंकज आडवाणी, پنڪج آڏواڻي,कन्नड़:ಪಂಕಜ್ ಅಡ್ವಾಣಿ) (जन्म २४ जुलाई १९८५, पुणे) स्नूकर और बिलियर्ड्स के विश्व विजेता हैं। पंकज ने पहला पेशेवर बिलियर्ड्स विश्व खिताब २००९ में जीता। इससे पहले वह एमेच्योर विश्व बिलियर्ड्स और स्नूकर चैंपियनशिप जीत चुके थे। पंकज ने 2006 में दोहा में हुए एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता। .

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पुरन पोली

पुरन पोली (मराठी और कोंकणी: पुरणपोळी/पुरणाची पोळी, गुजराती: પોળી, तमिल: போளி पोली, कन्नड़: ಹೋಳಿಗೆ ओबट्टु/होलिगे, तेलुगु:बूरेलु या बोब्बाटु या बोब्बाटलु या पोलेय्लु, भाकशालू), महाराष्ट्र का प्रसिद्ध मीठा पकवान है। निशा मधुलिका द्वारा यह हरेक तीज त्योहार आदि के अवसरों पर बनाया जाता है। इसे आमटी के साथ खाया जाता है। गुड़ीपडवा पर्व पर इसे विशेष रूप से बनाया जाता है। पुरन पोली की मुख्य सामग्री चना दाल होती है और इसे गुड़ या शक्कर से मीठा स्वाद दिया जाता है। इसे भरवां मीठा परांठा कहा जा सकता है। हिन्दी भाषी इस स्वादिष्ट व्यंजन को पूरनपोली कहते हैं क्योंकि मराठी के ळ व्यंजन का उच्चारण हिन्दी में नहीं होता है तो इसकी निकटतम ध्वनि ल से काम चलाया जाता है। पूरणपोळी चने की दाल को शक्कर की चाशनी में उबालकर बनाई गयी मीठी पिट्ठी से बनती है। यह पिठ्ठी ही भरावन होता है जिसमें जायफल, इलायची, केसर और यथासंभव मेवा डाल कर सुस्वादु बनाया जाता है। इसमें पीले रंग के लिए चुटकी भर हल्दी भी डाली जा सकती है। चूंकि इसे ही मैदा या आटे की लोई में पूरा या भरा जाता है इसलिए पूरण नाम मिला। संस्कृत की पूर् धातु से बना है पूरण शब्द जिसका अर्थ ऊपर तक भरना, पूरा करना, आदि हैं। चूंकि ऊपर तक भरा होना ही सम्पूर्ण होना है सो पूरण में संतुष्टिकारक भाव भी हैं। मराठी में रोटी के लिए पोळी शब्द है। भाव हुआ भरवां रोटी। पोळी शब्द बना है पल् धातु से जिसमें विस्तार, फैलाव, संरक्षण का भाव निहित है इस तरह पोळी का अर्थ हुआ जिसे फैलाया गया हो। बेलने के प्रक्रिया से रोटी विस्तार ही पाती है। इसके बाद इसे तेल या शुद्ध घी से परांठे की तरह दोनों तरफ घी लगाकर अच्छी तरह लाल और करारा होने तक सेक लेते हैं। वैसे इसे महाराष्ट्र में करारा होने तक सेका जाता है, वहीं कर्नाटक और आंध्र प्रदेश आदि में इसे मुलायम ही रखते हैं। सिकने के बाद इसे गर्म या सामान्य कर परोसा जाता है। इसके साथ आमटी या खीर भी परोसी जाती है। चार सदस्यों के लिए पुरनपोली बनाने का समय है ४० मिनट। इसे बना कर ३-४ दिनों तक रखा भी जा सकता है। कड़ाले बेल ओबट्टु (चना दाल ओबट्टु) .

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प्रचालन तन्त्र

प्रचालन तंत्र (अंग्रेज़ी:ऑपरेटिंग सिस्टम) साफ्टवेयर का समूह है जो कि आंकड़ों एवं निर्देश के संचरण को नियंत्रित करता है। यह हार्डवेयर एवं साफ्टवेयर के बीच सेतु का कार्य करता है और कंप्यूटर का सॉफ्टवेयर घटक होता है। इसी की सहायता से ही कंप्यूटर में स्थापित प्रोग्राम चलते हैं। ऑपरेटिंग सिस्टम कंप्यूटर का मेरुदंड होता है, जो इसके सॉफ्टवेयर व हार्डवेयर को नियंत्रण में रखता है। यह अनधिकृत व्यक्ति को कंप्यूटर के गलत प्रयोग करने से रोकता है।। हिन्दुस्तान लाइव।। प्रमोद पंत।२५ अक्टूबर, २००९ वह इसमें भी विभेद कर सकता हैं कि कौन सा निवेदन पूरा करना है और कौन सा नहीं, इसके साथ ही इनकी वरीयता भी ध्यान रखी जाती है। इसकी मदद से एक से ज्यादा सीपीयू में भी प्रोगाम चलाए जा सकते हैं। इसके अलावा संगणक संचिका को पुनः नाम देना, डायरेक्टरी की विषय सूची बदलना, डायरेक्टरी बदलना आदि कार्य भी प्रचालन तंत्र के द्वारा किए जाते है। डॉस (DOS), यूनिक्स, विंडोज़ ऑपरेटिंग सिस्टम (३.१, ९५, ९८, २०००, एक्स पी, विस्ता, विंडोज ७) और लिनक्स आदि कुछ प्रमुख प्रचालन तंत्र हैं।। तकनीक.कॉम।२ जुलाई, २००८।। कमल विभिन्न प्रचालन तंत्रों में से कुछ हैं:लिनक्स, मैक ओएस एक्स, डॉस, आईबीएम ओएस/2 (IBM OS/2), यूनिक्स, विन्डोज सीई, विन्डोज 3.x, विन्डोज ९५, विन्डोज ९८, विन्डोज मिलेनियम, विन्डोज़ एनटी, विन्डोज २०००, विन्डोज़ एक्स पी, विन्डोज़ विस्टा, विन्डोज़ 7। उबंटु प्रचालन तंत्र कंप्यूटर से जुड़े कई मौलिक कार्यों को संभालता है, जैसे की-बोर्ड से इनपुट लेना, डिस्प्ले स्क्रीन को आउटपुट भेजना, डाइरेक्टरी और संगणक संचिका को डिस्क में ट्रेक करना, इत्यादि। बड़े कंप्यूटरों में इसका काम और अधिक होता है। वह इनमें लगातार यह जांच करता है कि एक ही समय पर कंप्यूटर में चलने वाले प्रोगामों, फाइलों और एक ही समय पर खुलने वाली साइटों में दोहराव न हो। आरंभिक दौर में यह मेनफ्रेम कंप्यूटरों पर बड़े कामों के लिए ही हुआ करता था। बाद में धीरे-धीरे माइक्रोकम्प्यूटर्स में भी मिलने लगा, लेकिन उस समय इसमें एक समय पर केवल एक ही प्रोगाम रन करा सकते थे। मेनफ्रेम कंप्यूटर में १९६० में पहली बार बहुकार्यिक (मल्टीटास्किंग) सिस्टम आया था। इससे एक समय में एक से ज्यादा उपयोक्ता काम कर सकते थे। १९७० लिनक्स ने पहली बार पीडीपी-७ में प्रचालन तंत्र निकाला, जो मुख्यतया मल्टीटास्किंग, स्मृति प्रबंधन (मेमोरी मैनेजमेंट), स्मृति संरक्षण (मेमोरी प्रोटेक्शन) जैसे कार्य करता था। .

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प्रतिभा देवीसिंह पाटिल

प्रतिभा देवीसिंह पाटिल (जन्म १९ दिसंबर १९३४) स्वतन्त्र भारत के ६० साल के इतिहास में पहली महिला राष्ट्रपति तथा क्रमानुसार १२वीं राष्ट्रपति रही हैं। राष्ट्रपति चुनाव में प्रतिभा पाटिल ने अपने प्रतिद्वंदी भैरोंसिंह शेखावत को तीन लाख से ज़्यादा मतों से हराया था। प्रतिभा पाटिल को ६,३८,११६ मूल्य के मत मिले, जबकि भैरोंसिंह शेखावत को ३,३१,३०६ मत मिले। उन्होंने २५ जुलाई २०१२ को संसद के सेण्ट्रल हॉल में आयोजित समारोह में नव निर्वाचित राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी को अपना कार्यभार सौंपते हुए राष्ट्रपति भवन से विदा ली। .

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प्रफुल्ल चाकी

प्रफुल्ल चाकी क्रांतिकारी प्रफुल्ल चाकी (बांग्ला: প্রফুল্ল চাকী) (१० दिसंबर १८८८ - १ मई १९०८) का नाम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में अत्यंत सम्मान के साथ लिया जाता है। प्रफुल्ल का जन्म उत्तरी बंगाल के बोगरा जिला (अब बांग्लादेश में स्थित) के बिहारी गाँव में हुआ था। जब प्रफुल्ल दो वर्ष के थे तभी उनके पिता जी का निधन हो गया। उनकी माता ने अत्यंत कठिनाई से प्रफुल्ल का पालन पोषण किया। विद्यार्थी जीवन में ही प्रफुल्ल का परिचय स्वामी महेश्वरानन्द द्वारा स्थापित गुप्त क्रांतिकारी संगठन से हुआ। प्रफुल्ल ने स्वामी विवेकानंद के साहित्य का अध्ययन किया और वे उससे बहुत प्रभावित हुए। अनेक क्रांतिकारियों के विचारों का भी प्रफुल्ल ने अध्ययन किया इससे उनके अन्दर देश को स्वतंत्र कराने की भावना बलवती हो गई। बंगाल विभाजन के समय अनेक लोग इसके विरोध में उठ खड़े हुए। अनेक विद्यार्थियों ने भी इस आन्दोलन में बढ़-चढ़कर भाग लिया। प्रफुल्ल ने भी इस आन्दोलन में भाग लिया। वे उस समय रंगपुर जिला स्कूल में कक्षा ९ के छात्र थे। प्रफुल्ल को आन्दोलन में भाग लेने के कारण उनके विद्यालय से निकाल दिया गया। इसके बाद प्रफुल्ल का सम्पर्क क्रांतिकारियों की युगान्तर पार्टी से हुआ। .

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प्रभाष जोशी

प्रभाष जोशी (जन्म १५ जुलाई १९३६- निधन ५ नवंबर २००९) हिन्दी पत्रकारिता के आधार स्तंभों में से एक थे। वे राजनीति तथा क्रिकेट पत्रकारिता के विशेषज्ञ भी माने जाते थे। दिल का दौरा पड़ने के कारण गुरुवार, ५ नवम्बर २००९ मध्यरात्रि के आसपास गाजियाबाद की वसुंधरा कॉलोनी स्थित उनके निवास पर उनकी मृत्यु हो गई। .

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प्रसाद बर्वे

प्रसाद बर्वे (जन्म: १० अप्रैल, १९८१ में मुंबई) भारतीय टेलीविजन अभिनेता, आवाज डबिंग अभिनेता और फ़िल्म अभिनेता है। .

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प्राचीन चीनी विकिपीडिया

प्राचीन चीनी विकिपीडिया विकिपीडिया का प्राचीन चीनी भाषा का संस्करण है। यह ३१ जुलाई २००६ में आरंभ किया गया था और २६ मई, २००९ तक इस पर लेखों की कुल संख्या २,२००+ है। यह विकिपीडिया का १४७वां सबसे बड़ा संस्करण है।.

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प्राजक्ता (फूल)

प्राजक्ता एक पुष्प देने वाला वृक्ष है। इसे हरसिंगार, शेफाली, शिउली आदि नामो से भी जाना जाता है। इसका वृक्ष 10 से 15 फीट ऊँचा होता है। इसका वानस्पतिक नाम 'निक्टेन्थिस आर्बोर्ट्रिस्टिस' है। पारिजात पर सुन्दर व सुगन्धित फूल लगते हैं। इसके फूल, पत्ते और छाल का उपयोग औषधि के रूप में किया जाता है। यह सारे भारत में पैदा होता है। यह पश्चिम बंगाल का राजकीय पुष्प है। .

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प्रियंका चोपड़ा

प्रियंका चोपड़ा (जन्म: १८ जुलाई, १९८२) हिन्दी फ़िल्मों की एक अभिनेत्री हैं। .

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प्रज्ञा पांड्या शाह

प्रज्ञा पांड्या शाह (जन्म: ९ नवंबर, १९८५) एक भारतीय अभिनेत्री, आवाज-डबिंग अभिनेत्री और प्रशिक्षित शास्त्रीय गायक.

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प्रवेश राणा

प्रवेश राणा एक पुरुष मॉडल और मिस्टर इण्डिया २००८ और रिएलिटी टीवी शो प्रतिभागी हैं। २००९ में उन्होंने एक रिएलिटी टीवी श्रृंखला, बिग बॉस में अपूर्वानुमेय प्रविष्टि पाई थी। .

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प्रकाश मेहरा

प्रकाश मेहरा (जन्म: 13 जुलाई, 1939 मत्यु: 17 मई2009) हिन्दी फ़िल्मों के एक निर्माता एवं निर्देशक हैं। प्रकाश मेहरा का जन्म उत्तरप्रदेश के बिजनौर में हुआ था। मेहरा ने 50 के दशक में अपने फ़िल्मी जीवन की शुरूआत एक प्रोडक्शन कंट्रोलर की हैसियत से की थी। 1968 में उन्होंने शशि कपूर की फ़िल्म हसीना मान जाएगी का निर्देशन किया जिसमें शशि कपूर ने दोहरी भूमिका निभाई थी। इसके बाद 1971 में उन्होंने में मेला का निर्देशन किया जिसमें फिरोज खान और संजय खान ने मुख्य भूमिका निभाई थी। 1973 में उन्होंने जंजीर का निर्माण और निर्देशन किया। यह फ़िल्म जबरदस्त हिट रही और इस फ़िल्म ने अमिताभ के डवांडोल कैरियर को पटरी पर ला दिया.

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पैन्सिलवेनियाई जर्मन विकिपीडिया

पैन्सिलवेनियाई जर्मन विकिपीडिया विकिपीडिया का पैन्सिलवेनियाई जर्मन भाषा का संस्करण है। यह मार्च २००६ में आरंभ किया गया था। २७ मई, २००९ तक इस विकिपीडिया पर लेखों की संख्या १,७६१+ है और यह विकिपीडिया का १५३वां सबसे बड़ा संस्करण है।.

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पेनिसिलियम

पेनिसिलयम एक साधारण फफूँद है। यह एक प्रकार का कवक श्रेणी का मृतजीवी वनस्पति है। इसे नीली यी हरी फफूँद भी कहा जाता है। यह सड़ी-गली सब्जियों, कटे हुए फलों, रोटी, सड़े हुए मांस, चमड़े आदि पर उगता है। विशेष कर यह नींबू के ऊपर बहुत ही सहज रूप से उगता है। पेनिसिलियम पौधे का शरीर पतले सूते जैसी रचनाओं से बना होता है। इन रचनाओं को हाइफी कहते हैं। इसके सारे शरीर को माइसेलियम कहते हैं। इसका कवक जाल अनेक शाखाओं में बँटा रहता है। इसमें विखंडन द्वारा वर्धी प्रजनन होता है। पेनिसियम में स्पोर नाम कोनिडिया की शृंखला पाई जाती है जिसके द्वारा यह अलैंगिक प्रजनन करता है। पेनिसिलियम के पौधे से पेनिसिलीन नामक उपक्षार प्राप्त होता है। यह एक चमत्कारी औषधि है। इसका व्यवहार तपेदिक तथा अन्य विभिन्न रोगों में किया जाता है। पेनिसिलीन का आविष्कार ब्रिटेन के वैज्ञानिक सर अलेक्जेंडर फ्लेमिंग ने १९२९ में किया था। इस खोज के लिए १९५४ में उन्हें चिकित्सा शास्त्र के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। पेनिसिलीन पहला आधुनिक प्रतिजैविक था। पेनिसिलियम की कई जातियाँ पनीर-व्यवसाय में पनीर तैयार करने में व्यवहृत होती हैं। कार्बनिक अम्ल के संश्लेषण में भी इसका उपयोग होता है। एल्कोहल बनाने में भी इसका इस्तेमाल किये जाते हैं। रंग तैयार करने में भी इसका उपयोग होता है। .

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पॉप अप विज्ञापन

कई बार दर्जनों पॉप अप विंडोज़ डेस्कटॉप को घेर कर गति धीमी कर देती हैंhttp://kaulonline.com/chittha/2006/05/toi-popup/ टाइम्ज़ ऑफ इंडिया के पॉप-अप। इधर उधर की।हिन्दी चिह्न।१२ मई, २००९। रमण कौल पॉप अप विज्ञापन इंटरनेट उपयोक्ताओं को आकर्षित करने के लिए बनाये गए ऑनलाइन विज्ञापन का एक तरीका है। कई बार उपयोक्ताओं के द्वारा वांछित जालस्थल खुलने के साथ ही एक विज्ञापन विंडो भी खुलती है, उसे ही पॉपअप कहते हैं।। माइक्रोसॉफ्ट। कई बार विज्ञापनों के अलावा वेबपेज पर माउस के कहीं और क्लिक करने से भी पॉपअप आ जाते हैं।। हिन्दुस्तान लाइव।।१८ अक्टूबर, २००९ इंटरनेट पर इन विज्ञापनों की प्रोग्रामिंग जावास्क्रिप्ट के द्वारा की जाती है। कई बार किसी वेबसाइट पर जाते हुए इतने अधिक पॉप अप्स खुल जाते हैं, कि काम करना मुश्किल हो जाता है। कुछ पॉप-अप काम के होते हैं, जैसे यदि किसी चित्र पर क्लिक करते हैं उसका बड़ा रूप देखने के लिए, तो वह पॉप-अप विंडो में खुल सकता है, या कोई सूचना प्रारूप भी किसी दूसरी पॉप अप विंडो में खुल सकता है। वहीं कुछ पॉप-अप विंडो में अनुपयुक्त सामग्री भी हो सकती है या अनचाहे ही कंप्यूटर पर कुछ खतरनाक सॉफ़्टवेयरों (जिन्हे स्पाईवेयर या ऐडवेयर कहा जाता है) को डाउनलोड करने के लिए मार्ग बन सकती हैं।। माइक्रोसॉफ्ट सपोर्ट। ये पॉपअप विंडो कई प्रकार की होती हैं।.

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पॉल न्युमैन

पॉल लियोनार्ड न्युमैन (26 जनवरी 1925 - 26 सितंबर 2008) एक अमेरिकी अभिनेता, फिल्म निर्देशक, उद्यमी, मानवतावादी और ऑटो रेसिंग के शौक़ीन व्यक्ति थे। उन्होंने कई पुरस्कार जीते, जिनमें 1986 की मार्टिन स्कौर्सेसे की फिल्म द कलर ऑफ मनी में उनके अभिनय के लिए दिया गया सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का अकादमी पुरस्कार और आठ अन्य नामांकन, तीन गोल्डन ग्लोब पुरस्कार, एक बाफ्टा (BAFTA) पुरस्कार, एक स्क्रीन एक्टर्स गिल्ड पुरस्कार, एक कान फिल्म समारोह पुरस्कार, एक एमी पुरस्कार और कई मानद पुरस्कार शामिल थे। उन्होंने स्पोर्ट्स कार क्लब ऑफ अमेरिका की रोड रेसिंग में एक ड्राइवर के रूप में कई राष्ट्रीय चैंपियनशिप भी जीते और उनकी रेसिंग टीमों ने ओपन व्हील इंडीकार रेसिंग में कई प्रतियोगिताओं में जीत हासिल की। न्युमैन अपनी खुद की एक फ़ूड कंपनी के सह-संस्थापक भी थे, जहां से उन्होंने अपने समस्त कर पश्चात लाभ एवं रॉयल्टी चैरिटी को दान कर दिया। Newman's Own.com.

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पॉलीमर

रिअल लीनिअर पॉलीमर कड़ियां, जो परमाणिव्क बल सूक्ष्मदर्शी द्वारा तरल माध्यम के अधीन देखी गयी हैं। इस बहुलक की चेन लंबाई ~२०४ नैनो.मीटर; मोटाई is ~०.४ नै.मी.वाई.रोइटर एवं एस.मिंको, http://dx.doi.org/10.1021/ja0558239 ईफ़एम सिंगल मॉलिक्यूल एक्स्पेरिमेंट्स ऐट सॉलिड-लिक्विड इंटरफ़ेस, अमरीकन कैमिकल सोसायटी का जर्नल, खण्ड १२७, ss. 45, pp. 15688-15689 (2005) वहुलक या पाॅलीमर बहुत अधिक अणु मात्रा वाला कार्बनिक यौगिक होता है। यह सरल अणुओं जिन्हें मोनोमर कहा जाता; के बहुत अधिक इकाईयों के पॉलीमेराइजेशन के फलस्वरूप बनता है।। नैनोविज्ञान। वर्ल्डप्रेस पर पॉलीमर में बहुत सारी एक ही तरह की आवर्ती संरचनात्मक इकाईयाँ यानि मोनोमर संयोजी बन्ध (कोवैलेन्ट बॉण्ड) से जुड़ी होती हैं। सेल्यूलोज, लकड़ी, रेशम, त्वचा, रबर आदि प्राकृतिक पॉलीमर हैं, ये खुली अवस्था में प्रकृति में पाए जाते हैं तथा इन्हें पौधों और जीवधारियों से प्राप्त किया जाता है। इसके रासायनिक नामों वाले अन्य उदाहरणों में पालीइथिलीन, टेफ्लान, पाॅली विनाइल क्लोराइड प्रमुख पाॅलीमर हैं। कृत्रिम या सिंथेटिक पॉलीमर मानव निर्मित होते हैं। इन्हें कारखानों में उत्पादित किया जा सकता है। प्लास्टिक, पाइपों, बोतलों, बाल्टियों आदि के निर्माण में प्रयुक्त होने वाली पोलीथिन सिंथेटिक पॉलीमर है। बिजली के तारों, केबलों के ऊपर चढ़ाई जाने वाली प्लास्टिक कवर भी सिंथेटिक पॉलीमर है। फाइबर, सीटकवर, मजबूत पाइप एवं बोतलों के निर्माण में प्रयुक्त होने वाली प्रोपाइलीन भी सिंथेटिक पॉलीमर है। वाल्व सील, फिल्टर क्लॉथ, गैस किट आदि टेफलॉन से बनाए जाते हैं। सिंथेटिक रबर भी पॉलीमर है जिससे मोटरगाड़ियों के टायर बनाए जाते हैं। हॉलैंड के वैज्ञानिकों के अनुसार मकड़ी में उपस्थित एक डोप नामक तरल पदार्थ उसके शरीर से बाहर निकलते ही एकप प्रोटीनयुक्त पॉलीमर के रूप में जाला बनाता है। पॉलीमर शब्द का प्रथम प्रयोग जोंस बर्जिलियस ने १८३३ में किया था। १९०७ में लियो बैकलैंड ने पहला सिंथेटिक पोलीमर, फिनोल और फॉर्मएल्डिहाइड की प्रक्रिया से बनाया। उन्होंने इसे बैकेलाइट नाम दिया। १९२२ में हर्मन स्टॉडिंगर को पॉलीमर के नए सिद्धांत को प्रतिपादित करने के लिए नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इससे पहले यह माना जाता था कि ये छोटे अणुओं का क्लस्टर है, जिन्हें कोलाइड्स कहते थे, जिसका आण्विक भार ज्ञात नहीं था। लेकिन इस सिद्धांत में कहा गया कि पाॅलीमर एक शृंखला में कोवेलेंट बंध द्वारा बंधे होते हैं। पॉलीमर शब्द पॉली (कई) और मेरोस (टुकड़ों) से मिलकर बना है। एक ही प्रकार की मोनोमर इकाईयों से बनने वाले बहुलक को होमोपॉलीमर कहते हैं। जैसे पॉलीस्टायरीन का एकमात्र मोनोमर स्टायरीन ही है। भिन्न प्रकार की मोनोमर इकाईयों से बनने वाले बहुलक को कोपॉलीमर कहते हैं। जैसे इथाइल-विनाइल-एसीटेट भिन्न प्रकार के मोनोमरों से बनता है। भौतिक व रासायनिक गुणों के आधार पर इन्हें दो वर्गों में बांटा जा सकता है: right.

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पीताम्बर दत्त बड़थ्वाल

डॉ॰ पीताम्बरदत्त बड़थ्वाल (१३ दिसंबर, १९०१-२४ जुलाई, १९४४) हिंदी में डी.लिट.

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पीपल

''पीपल की कोपलें'' पीपल (अंग्रेज़ी: सैकरेड फिग, संस्कृत:अश्वत्थ) भारत, नेपाल, श्री लंका, चीन और इंडोनेशिया में पाया जाने वाला बरगद, या गूलर की जाति का एक विशालकाय वृक्ष है जिसे भारतीय संस्कृति में महत्त्वपूर्ण स्थान दिया गया है तथा अनेक पर्वों पर इसकी पूजा की जाती है। बरगद और गूलर वृक्ष की भाँति इसके पुष्प भी गुप्त रहते हैं अतः इसे 'गुह्यपुष्पक' भी कहा जाता है। अन्य क्षीरी (दूध वाले) वृक्षों की तरह पीपल भी दीर्घायु होता है। इसके फल बरगद-गूलर की भांति बीजों से भरे तथा आकार में मूँगफली के छोटे दानों जैसे होते हैं। बीज राई के दाने के आधे आकार में होते हैं। परन्तु इनसे उत्पन्न वृक्ष विशालतम रूप धारण करके सैकड़ों वर्षो तक खड़ा रहता है। पीपल की छाया बरगद से कम होती है, फिर भी इसके पत्ते अधिक सुन्दर, कोमल और चंचल होते हैं। वसंत ऋतु में इस पर धानी रंग की नयी कोंपलें आने लगती है। बाद में, वह हरी और फिर गहरी हरी हो जाती हैं। पीपल के पत्ते जानवरों को चारे के रूप में खिलाये जाते हैं, विशेष रूप से हाथियों के लिए इन्हें उत्तम चारा माना जाता है। पीपल की लकड़ी ईंधन के काम आती है किंतु यह किसी इमारती काम या फर्नीचर के लिए अनुकूल नहीं होती। स्वास्थ्य के लिए पीपल को अति उपयोगी माना गया है। पीलिया, रतौंधी, मलेरिया, खाँसी और दमा तथा सर्दी और सिर दर्द में पीपल की टहनी, लकड़ी, पत्तियों, कोपलों और सीकों का प्रयोग का उल्लेख मिलता है। .

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फरहान अख्तर

फरहान अख्तर (فرحان اختر, जन्म - 9 जनवरी 1974), एक भारतीय फ़िल्म निर्माता, पटकथा लेखक, अभिनेता, पार्श्वगायक, गीतकार, फ़िल्म निर्माता और टीवी होस्ट है। निर्देशक के रूप में उनकी पहली फ़िल्म (दिल चाहता है, 2001) की काफी प्रशंसा की गई थी और तभी से एक खास दर्शक वर्ग में उनकी अलग पहचान है। आनंद सुरापुर की फ़िल्म, द फकीर ऑफ वेनिस (2007) और रॉक ऑन!! (2008) से उन्होंने अपने अभिनय करियर की शुरुआत की। 2008 .

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फ़िराक़ गोरखपुरी

फिराक गोरखपुरी (मूल नाम रघुपति सहाय) (२८ अगस्त १८९६ - ३ मार्च १९८२) उर्दू भाषा के प्रसिद्ध रचनाकार है। उनका जन्म गोरखपुर, उत्तर प्रदेश में कायस्थ परिवार में हुआ। इनका मूल नाम रघुपति सहाय था। रामकृष्ण की कहानियों से शुरुआत के बाद की शिक्षा अरबी, फारसी और अंग्रेजी में हुई। .

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फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ संगीतकार पुरस्कार

फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ संगीतकार पुरस्कार फ़िल्मफ़ेयर पत्रिका द्वारा प्रति वर्ष दिया जाने वाला पुरस्कार है। .

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फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ गीतकार पुरस्कार

फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ गीतकार पुरस्कार फ़िल्मफ़ेयर पत्रिका द्वारा प्रति वर्ष दिया जाने वाला पुरस्कार है। .

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फ़्रियुलियाई विकिपीडिया

फ़्रियुलियाई विकिपीडिया विकिपीडिया का फ़्रियुलियाई भाषा का संस्करण है। यह २५ जनवरी २००५ में आरंभ किया गया था और २६ मई, २००९ तक इस पर लेखों की कुल संख्या २,७००+ है। यह विकिपीडिया का १३७वां सबसे बड़ा संस्करण है।.

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फ़ोटोबकिट

फ़ोटोबकिट (Photobucket) एक छवि होस्टिंग, वीडियो होस्टिंग, स्लाइडशो निर्माण और छवि साझा करने वाला जालपृष्ठ है। इसकी स्थापना २००३ में एलेक्स वेल्च और डेरेन क्रिस्टल द्वारा की गई थी और ट्रिनिटि वेन्चर्स से कोषीय सहायता मिली थी। २००७ में फ़ॉक्स इण्टरेक्टिव मीडिया ने इसका अधिग्रहण कर लिया। दिसंबर २००९ में फ़ॉक्स की मूल कम्पनी, न्यूज़ कॉर्प ने फ़ोटोबकिट को सिएटल मोबाइल इमेजिंग के स्टार्टअप ऑण्टेला को बेच दिया। फ़ोटोबकिट को निजी छायाचित्र अलबम, संजाल फोरमों पर प्रदर्शित अवतारों के दूरस्थ संचयन और वीडियों संचयन के लिए उपयोग में लाया जाता है। फ़ोटोबकिट की छवि होस्टिंग का बहुधा ईबे, माइस्पेस, बीबो, नियोपेट्स और फेसबुक खातों, लाइवजर्नल, खुली डायरियों, या अन्य चिठ्ठों, संदेश बोर्डों पर भी उपयोग किया जाता है। प्रयोक्ता अपनी अलबमों को निजि, कूटशब्द-रक्षित आगंतुक अभिगमित, या सभी के लिए खुला रख सकते हैं। फ़ोटोबकिट पर ५०० मेबा की निशुल्क संचयन सुविधा प्राप्त है (१९ अगस्त २००९ को १ गीबा से कम किया गया)। इस कमी के कारण बहुत से प्रयोक्ता निराश हुए, जिन्हें नई छवियां जोड़ने से पहले अपग्रेड शुल्क देने के लिए बाधित किया गया। .

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फुलेरेन

कार्बन नैनोनली का त्रिआयामी मॉडल फुलेरेन्य (या फुलेरीन, अंग्रेज़ी: Fullerene फुलरीन) कार्बन का बहुत ही उपयोगी अपररूप है। कार्बन के इस जटिल रूप में कार्बन परमाणु एक दूसरे से षटफलाकार या पंच भुजाकार रूप में जुड़ कर एक पिंजड़ा की रचना बनाते हैं। इसे १९९५ ई. में राइस विश्वविद्यालय के प्रोफेसर आर इ स्मैली तथा उनके सहकर्मियों द्वारा बनाया गया। इस खोज के लिए उन्हें वर्ष १९९६ ई. का नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ। फुलेरेन्य का सबसे साधारण रूप बकमिनिस्टर है। यह एक रवेदार बहुरूप है, जिसका प्रत्येक अणु ६० कार्बन परमाणुओं का गोलाकार समूह होता है। इसकी ज्यामिति अमेरिकी कलाकार आर.

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फ्रेंच ओपन

फ्रेंच ओपन (Les Internationaux de France de Roland Garrosअथवा टूर्नोई डी रोलां-गेर्रोस) एक मुख्य टेनिस टूर्नामेंट है जो मई के अंत तथा जून की शुरुआत के दो सप्ताह के मध्य पेरिस, फ्रांस में स्टेड रोलैंड गर्रोस में खेला जाता है। यह वार्षिक टेनिस कैलेंडर में दूसरा ग्रैंड स्लैम है तथा दुनिया का प्रमुख क्ले कोर्ट टेनिस टूर्नामेंट है। रोलां गर्रोस ही एकमात्र ऐसा ग्रैंड स्लैम है जो अभी भी मिट्टी पर आयोजित किया जाता है और वसंत क्ले कोर्ट काल को समाप्त करता है। यह टेनिस की सबसे प्रतिष्ठित प्रतियोगितायों में से एक है, और यह एक ऐसा खेल है जिसका दुनिया भर में व्यापक प्रसारण होता है साथ ही इस खेल में सभी नियमित प्रतियोगितायों के श्रोता सम्मिलित होते हैं। धीमी खेल धरातल और फाइनल सेट में बिना किसी टाईब्रेक के पांच सेट के पुरुष सिंगल मैचों के कारण, इस प्रतियोगिता को व्यापक रूप से दुनिया का सर्वाधिक शारीरिक रूप से आकांक्षित टेनिस टूर्नामेंट माना जाता है। 2009 के एकल चैम्पियन पुरुष में स्विस के रोजर फेडरर और महिला में रूसी महिला स्वेतलाना कुजनेत्सोवा हैं। .

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फेरारी

फेरारी S.p. A., इटली के मैरानेलो स्थित एक स्पोर्ट्स कार निर्माता है। इसकी स्थापना, 1929 में स्क्यूडेरिया फेरारी के रूप में एंज़ो फेरारी द्वारा की गई। 1947 में फेरारी S.p. के रूप में कानूनी तौर पर चलने वाले वाहनों का उत्पादन करने से पहले इस कंपनी ने चालकों को प्रायोजित किया और दौड़ में भाग लेने वाली गाड़ियों का उत्पादन किया।A. अपने सम्पूर्ण इतिहास के दौरान,दौड़ प्रतियोगिता, खास करके फ़ॉर्मूला वन Formula One में अपनी निरंतर भागीदारी के लिए यह कंपनी प्रसिद्ध रहा है जहां इसे अपार सफलता मिली.

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फोबिया

दुर्भीति या फोबिया (Phobia) एक प्रकार का मनोविकार है जिसमें व्यक्ति को विशेष वस्तुओं, परिस्थितियों या क्रियाओं से डर लगने लगता है। यानि उनकी उपस्थिति में घबराहट होती है जबकि वे चीजें उस वक्त खतरनाक नहीं होती है। यह एक प्रकार की चिन्ता की बीमारी है। इस बीमारी में पीड़ित व्यक्ति को हल्के अनमनेपन से लेकर डर के भयावह दौरा तक पड़ सकता है। दुर्भीति की स्थिति में व्यक्ति का ध्यान कुछ एक लक्षणों पर केन्द्रित हो सकता है, जैसे-दिल का जोर-जोर से धड़कना या बेहोशी लगना। इन लक्षणों से जुड़े हुए कुछ डर होते है जैसे-मर जाने का भय, अपने उपर नियंत्रण खो देने या पागल हो जाने का डर। .

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बड़े ग़ुलाम अली ख़ान

बड़े गुलाम अली खां उस्ताद बड़े ग़ुलाम अली ख़ां (२ अप्रैल १९०२- २३ अप्रैल १९६८) हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत के पटियाला घराने के गायक थे। उनकी गणना भारत के महानतम गायकों व संगीतज्ञों में की जाती है। इनका जन्म लाहौर के निकट कसूर नामक स्थान पर पाकिस्तान में हुआ था, पर इन्होने अपना जीवन अलग समयों पर लाहौर, बम्बई, कोलकाता और हैदराबाद में व्यतीत किया। प्रसिद्ध ग़जल गायक गुलाम अली इनके शिष्य थे। इनका परिवार संगीतज्ञों का परिवार था। बड़े गुलाम अली खां की संगीत की दुनिया का प्रारंभ सारंगी वादक के रूप में हुआ बाद में उन्होंने अपने पिता अली बख्श खां, चाचा काले खां और बाबा शिंदे खां से संगीत के गुर सीखे। इनके पिता महाराजा कश्मीर के दरबारी गायक थे और वह घराना "कश्मीरी घराना" कहलाता था। जब ये लोग पटियाला जाकर रहने लगे तो यह घराना "पटियाला घराना" के नाम से जाना जाने लगा। अपने सधे हुए कंठ के कारण बड़े गुलाम अली खां ने बहुत प्रसिद्ध पाई। सन १९१९ के लाहौर संगीत सम्मेलन में बड़े गुलाम अली खां ने अपनी कला का पहली बार सार्वजनिक प्रदर्शन किया। इसके कोलकाता और इलाहाबाद के संगीत सम्मेलनों ने उन्हें देशव्यापी ख्याति दिलाई। उन्होंने अपनी बेहद सुरीली और लोचदार आवाज तथा अभिनव शैली के बूते ठुमरी को एकदम नये अंदाज में ढाला जिसमें लोक संगीत की मिठास और ताजगी दोनों मौजूद थी। संगीत समीक्षकों के अनुसार उस्ताद खां ने अपने प्रयोगधर्मी संगीत की बदौलत ठुमरी की बोल बनाव शैली से परे जाकर उसमें एक नयी ताजगी भर दी। उनकी इस शैली को ठुमरी के पंजाब अंग के रूप में जाना जाता है। वे अपने खयाल गायन में ध्रुपद, ग्वालियर घराने और जयपुर घराने की शैलियों का खूबसूरत संयोजन करते थे। बड़े गुलाम अली खां के मुँह से एक बार "राधेश्याम बोल" भजन सुनकर महात्मा गाँधी बहुत प्रभावित हुए थे। मुगले आजम फिल्म में तानसेन पात्र के लिए उन्होंने ही अपनी आवाज़ दी थी। भारत सरकार ने १९६२ ई. में उन्हें "पद्मभूषण" से सम्मानित किया था। २३ अप्रैल १९६८ ई. को बड़े गुलाम अली खां का देहावसान हो गया। .

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बयकाल झील

बयकाल झील (रूसी: о́зеро Байка́л ओज़ेरो बयकाल, बुर्यात: Байгал нуур बयगाल नुउर, अर्थ: प्रकृति झील) दुनिया की सब से प्राचीन और गहरी झील है। यह झील ३ करोड़ वर्ष से लगातार बनी हुई है और इसकी औसत गहराई ७४४.४ मीटर है। हालाँकि कैस्पियन सागर विश्व की सबसे ज़्यादा पानी वाली झील है, बयकाल का स्थान दुसरे नंबर पर आता है। क्योंकि कैस्पियन का पानी खारा है, इसलिए बयकाल दुनिया की सब से बड़ी मीठे पानी की झील है। अगर बर्फ़ में जमे हुए पानी और ज़मीन के अन्दर बंद हुए पानी को अलग छोड़ दिया जाए, तो दुनिया की सतह पर मौजूद २०% मीठा पानी इसी एक झील में समाया हुआ है। बयकाल झील रूस के साइबेरिया क्षेत्र के दक्षिण भाग में, रूस के दो राज्यों (इरकुत्स्क ओब्लास्त और बुर्यात गणतंत्र) की सीमा पर स्थित है। इस झील को यूनेस्को ने विश्व की अनूठी प्राकृतिक विरासतों की सूची में शामिल कर रखा है। इस झील की लम्बाई ६३६ किलोमीटर है और इस झील में दुनिया में उपस्थित कुल पीने लायक पानी का पाँचवा हिस्सा और रूस में उपस्थित कुल पीने लायक पानी का ९०% हिस्सा सुरक्षित है। इस झील में पाए जान वाले बहुत-से जीव और बहुत-सी वनस्पतियाँ दुनिया भर में किसी अन्य जलाशय में नहीं पाए जाते। बयकाल की सबसे अधिक गहराई १,६४२ मीटर है (यानि ५,३८७ फ़ुट) और इसका पानी विश्व की सब झीलों में साफ़ माना जाता है। इस झील का अकार एक पतले, लम्बे नए चाँद की तरह है। .

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बराक ओबामा

बराक हुसैन ओबामा (Barack Hussein Obama, जन्म: ४ अगस्त, १९६१) अमरीका के ४४वें राष्ट्रपति रहे हैं। वे इस देश के प्रथम अश्वेत (अफ्रीकी अमरीकन) राष्ट्रपति हैं। उन्होंने २० जनवरी, २००९ को राष्ट्रपति पद की शपथ ली। ओबामा इलिनॉय प्रांत से कनिष्ठ सेनेटर तथा २००८ में अमरीका के राष्ट्रपति पद के लिए डेमोक्रैटिक पार्टी के उम्मीदवार थे। ओबामा हार्वर्ड लॉ स्कूल से १९९१ में स्नातक बनें, जहाँ वे हार्वर्ड लॉ रिव्यू के पहले अफ्रीकी अमरीकी अध्यक्ष भी रहे। १९९७ से २००४ इलिनॉय सेनेट में तीन सेवाकाल पूर्ण करने के पूर्व ओबामा ने सामुदायिक आयोजक के रूप में कार्य किया है और नागरिक अधिकार अधिवक्ता के रूप में प्रेक्टिस की है। १९९२ से २००४ तक उन्होंने शिकागो विधि विश्वविद्यालय में संवैधानिक कानून का अध्यापन भी किया। सन् २००० में अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेसेंटेटिव में सीट हासिल करने में असफल होने के बाद जनवरी २००३ में उन्होंने अमरीकी सेनेट का रुख किया और मार्च २००४ में प्राथमिक विजय हासिल की। नवंबर २००३ में सेनेट के लिये चुने गये। १०९वें काँग्रेस में अल्पसंख्य डेमोक्रैट सदस्य के रूप में उन्होंने पारंपरिक हथियारों पर नियंत्रण तथा संघीय कोष के प्रयोग में अधिक सार्वजनिक उत्तरदायित्व का समर्थन करते विधेयकों के निर्माण में सहयोग दिया। वे पूर्वी युरोप, मध्य पूर्व और अफ्रीका की राजकीय यात्रा पर भी गये। ११०वें काँग्रेस में लॉबिंग व चुनावी घोटालों, पर्यावरण के बदलाव, नाभिकीय आतंकवाद और युद्ध से लौटे अमेरीकी सैनिकों की देखरेख से संबंधित विधेयकों के निर्माण में उन्होंने सहयोग दिया। विश्वशांति में उल्लेखनीय योगदान के लिए बराक ओबामा को वर्ष 2009 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए चुना गया है। .

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बाँस

बाँस, ग्रामिनीई (Gramineae) कुल की एक अत्यंत उपयोगी घास है, जो भारत के प्रत्येक क्षेत्र में पाई जाती है। बाँस एक सामूहिक शब्द है, जिसमें अनेक जातियाँ सम्मिलित हैं। मुख्य जातियाँ, बैंब्यूसा (Bambusa), डेंड्रोकेलैमस (नर बाँस) (Dendrocalamus) आदि हैं। बैंब्यूसा शब्द मराठी बैंबू का लैटिन नाम है। इसके लगभग २४ वंश भारत में पाए जाते हैं। बाँस एक सपुष्पक, आवृतबीजी, एक बीजपत्री पोएसी कुल का पादप है। इसके परिवार के अन्य महत्वपूर्ण सदस्य दूब, गेहूँ, मक्का, जौ और धान हैं। यह पृथ्वी पर सबसे तेज बढ़ने वाला काष्ठीय पौधा है। इसकी कुछ प्रजातियाँ एक दिन (२४ घंटे) में १२१ सेंटीमीटर (४७.६ इंच) तक बढ़ जाती हैं। थोड़े समय के लिए ही सही पर कभी-कभी तो इसके बढ़ने की रफ्तार १ मीटर (३९ मीटर) प्रति घंटा तक पहुँच जाती है। इसका तना, लम्बा, पर्वसन्धि युक्त, प्रायः खोखला एवं शाखान्वित होता है। तने को निचले गांठों से अपस्थानिक जड़े निकलती है। तने पर स्पष्ट पर्व एवं पर्वसन्धियाँ रहती हैं। पर्वसन्धियाँ ठोस एवं खोखली होती हैं। इस प्रकार के तने को सन्धि-स्तम्भ कहते हैं। इसकी जड़े अस्थानिक एवं रेशेदार होती है। इसकी पत्तियाँ सरल होती हैं, इनके शीर्ष भाग भाले के समान नुकीले होते हैं। पत्तियाँ वृन्त युक्त होती हैं तथा इनमें सामानान्तर विन्यास होता है। यह पौधा अपने जीवन में एक बार ही फल धारण करता है। फूल सफेद आता है। पश्चिमी एशिया एवं दक्षिण-पश्चिमी एशिया में बाँस एक महत्वपूर्ण पौधा है। इसका आर्थिक एवं सांस्कृतिक महत्व है। इससे घर तो बनाए ही जाते हैं, यह भोजन का भी स्रोत है। सौ ग्राम बाँस के बीज में ६०.३६ ग्राम कार्बोहाइड्रेट और २६५.६ किलो कैलोरी ऊर्जा रहती है। इतने अधिक कार्बोहाइड्रेट और इतनी अधिक ऊर्जा वाला कोई भी पदार्थ स्वास्थ्यवर्धक अवश्य होगा। ७० से अधिक वंशो वाले बाँस की १००० से अधिक प्रजातियाँ है। ठंडे पहाड़ी प्रदेशों से लेकर उष्ण कटिबंधों तक, संपूर्ण पूर्वी एशिया में, ५०० उत्तरी अक्षांश से लेकर उत्तरी आस्ट्रेलिया तथा पश्चिम में, भारत तथा हिमालय में, अफ्रीका के उपसहारा क्षेत्रों तथा अमेरिका में दक्षिण-पूर्व अमेरिका से लेकर अर्जेन्टीना एवं चिली में (४७० दक्षिण अक्षांश) तक बाँस के वन पाए जाते हैं। बाँस की खेती कर कोई भी व्यक्ति लखपति बन सकता है। एक बार बाँस खेत में लगा दिया जायें तो ५ साल बाद वह उपज देने लगता है। अन्य फसलों पर सूखे एवं कीट बीमारियो का प्रकोप हो सकता है। जिसके कारण किसान को आर्थिक हानि उठानी पड़ती है। लेकिन बाँस एक ऐसी फसल है जिस पर सूखे एवं वर्षा का अधिक प्रभाव नहीं पड़ता है। बाँस का पेड़ अन्य पेड़ों की अपेक्षा ३० प्रतिशत अधिक ऑक्सीजन छोड़ता और कार्बन डाईऑक्साइड खींचता है साथ ही यह पीपल के पेड़ की तरह दिन में कार्बन डाईऑक्साइड खींचता है और रात में आक्सीजन छोड़ता है। .

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बादल फटना

बादल फटना, (अन्य नामः मेघस्फोट, मूसलाधार वृष्टि) बारिश का एक चरम रूप है। इस घटना में बारिश के साथ कभी कभी गरज के साथ ओले भी पड़ते हैं। सामान्यत: बादल फटने के कारण सिर्फ कुछ मिनट तक मूसलाधार बारिश होती है लेकिन इस दौरान इतना पानी बरसता है कि क्षेत्र में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है। बादल फटने की घटना अमूमन पृथ्वी से १५ किलोमीटर की ऊंचाई पर घटती है। इसके कारण होने वाली वर्षा लगभग १०० मिलीमीटर प्रति घंटा की दर से होती है। कुछ ही मिनट में २ सेंटी मीटर से अधिक वर्षा हो जाती है, जिस कारण भारी तबाही होती है। .

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बान्द्रा-वर्ली समुद्रसेतु

बांद्रा-वर्ली समुद्रसेतु (आधिकारिक राजीव गांधी सागर सेतु) ८-लेन का, तार-समर्थित कांक्रीट से निर्मित पुल है। यह बांद्रा को मुम्बई के पश्चिमी और दक्षिणी (वर्ली) उपनगरों से जोड़ता है और यह पश्चिमी-द्वीप महामार्ग प्रणाली का प्रथम चरण है। १६ अरब रुपये (४० करोड़ $) की महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम की इस परियोजना के इस चरण को हिन्दुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा पूरा किया गया है। इस पुल का उद्घाटन ३० जून, २००९ को संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन प्रमुख श्रीमती सोनिया गांधी द्वारा किया गया लेकिन जन साधारण के लिए इसे १ जुलाई, २००९ को मध्य-रात्रि से खोला गया। साढ़े पांच किलोमीटर लंबे इस पुल के बनने से बांद्रा और वर्ली के बीच यात्रा में लगने वाला समय ४५ मिनट से घटकर मात्र ६-८ मिनट रह गया है। इस पुल की योजना १९८० के दशक में बनायी गई थी, किंतु यह यथार्थ रूप में अब जाकर पूर्ण हुआ है। यह सेतु मुंबई और भारत में अपने प्रकार का प्रथम पुल है। इस सेतु-परियोजना की कुल लागत १६.५० अरब रु है। इस पुल की केवल प्रकाश-व्यवस्था करने के लिए ही ९ करोड़ रु का व्यय किया गया है। इसके कुल निर्माण में ३८,००० कि.मी इस्पात रस्सियां, ५,७५,००० टन कांक्रीट और ६,००० श्रमिक लगे हैं। इस सेतु में लगने वाले इस्पात के खास तारों को चीन से मंगाया गया था। जंग से बचाने के लिए इन तारों पर खास तरह का पेंट लगाने के साथ प्लास्टिक के आवरण भी चढ़ाए गए हैं। अब तैयार होने पर इस पुल से गुजरने पर यात्रियों को चुंगी (टोल) कर देना तय हुआ है। यह चुंगी किराया प्रति वाहन ४०-५० रु तक होगा। इस पुल की कुल ७ कि.मी (ढान सहित) के यात्रा-समय में लगभग १ घंटे की बचत और कई सौ करोड़ वाहन संचालन व्यय एवं ईंधन की भी कटौती होगी। इस बचत को देखते हुए इसकी चुंगी नगण्य है। प्रतिदिन लगभग सवा लाख वाहन इस पुल पर से गुजरेंगे। File:Bandra_Worli_Sea_Link_at_night.jpg|रात्रि दृश्य File:Sealinkup.JPG|माहिम से दृश्य File:Bandra-Worli_Sea_Link_8.jpg|दूर-दृश्य .

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बाबा फकीर चंद

बाबा फकीर चंद (१८ नवंबर, १८८६ - ११ सितंबर, १९८१) सुरत शब्द योग अर्थात मृत्यु अनुभव के सचेत और नियंत्रित अनुभव के साधक और भारतीय गुरु थे। वे संतमत के पहले गुरु थे जिन्होंने व्यक्ति में प्रकट होने वाले अलौकिक रूपों और उनकी निश्चितता के छा जाने वाले उस अनुभव के बारे में बात की जिसमें उस व्यक्ति को चैतन्य अवस्था में इसकी कोई जानकारी नहीं थी जिसका कहीं रूप प्रकट हुआ था। इसे अमरीका के कैलीफोर्निया में दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर डॉ॰ डेविड सी. लेन ने नई शब्दावली 'चंदियन प्रभाव' के रूप में व्यक्त किया और उल्लेख किया। राधास्वामी मत सहित नए धार्मिक आंदोलनों के शोधकर्ता मार्क ज्यर्गंसमेयेर ने फकीर का साक्षात्कार लिया जिसने फकीर के अंतर्तम को उजागर किया। यह साक्षात्कार फकीर की आत्मकथा का अंश बना। .

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बार्सिलोना महिलाओं खुला

बार्सिलोना ओपन टूर्नामेंट देवियों एक टूर्नामेंट सर्किट डब्ल्यूटीए को बार्सिलोना, स्पेन के शहर में आयोजित किया जा रहा है टेनिस, पहला आईटीएफ के नाम के तहत 2003 में मंचन Ciutat बार्सिलोना डे Fraga मार्ता आरागॉन क्लब टेनिस ला Salut में अंतिम जीतकर टूर्नामेंट के पहले चैंपियन बने 2007 में उन्होंने सोनी एरिक्सन डब्ल्यूटीए टूर टीयर चतुर्थ श्रेणी में शामिल हो गए डब्ल्यूटीए वर्ष 2009 (इंटरनेशनल डब्ल्यूटीए वर्ग के साथ प्रथम वर्ष) में BTO Vall d 'बगुला पटरियों की सीट है कि ओलंपिक खेलों बार्सिलोना 92 की टेनिस प्रतियोगिता की साइट किया गया था 2011 में रिटर्न .

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बाल झड़ना

गंजापन, केशाभाव या बालों का झड़ना (अंग्रेज़ी: Hair loss या Alopecia) हल्के से लेकर सिर के पूरी तरह गंजा होने तक का हो सकता है। सामान्यतः हमारे लगभग 50 से 100 बाल हर दिन टूटते-झड़ते हैं। यदि इससे ज्यादा बाल झड़ते हैं, तो यह गंजेपन का विषय हो सकता है। यह भी देखा जा सकता है कि बाल पतले होने लगते है और एक या अधिक जगह पर गंजापन आ जाता है। बाल गिरने के कई अलग-अलग कारण होते है। चिकित्सा विज्ञान के आधार पर बालों का झड़ना कई प्रकार के हो सकते हैं.

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बासमती चावल

लाल बासमती चावल बासमती (Basmati,, باسمتى) भारत की लम्बे चावल की एक उत्कृष्ट किस्म है। इसका वैज्ञानिक नाम है ओराय्ज़ा सैटिवा। यह अपने खास स्वाद और मोहक खुशबू के लिये प्रसिद्ध है। इसका नाम बासमती अर्थात खुशबू वाली किस्म होता है। इसका दूसरा अर्थ कोमल या मुलायम चावल भी होता है। भारत इस किस्म का सबसे बड़ा उत्पादक है, जिसके बाद पाकिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश आते हैं। पारंपरिक बासमती पौधे लम्बे और पतले होते हैं। इनका तना तेज हवाएं भी सह नहीं सकता है। इनमें अपेक्षाकृत कम, परंतु उच्च श्रेणी की पैदावार होती है। यह अन्तर्राष्ट्रीय और भारतीय दोनों ही बाजारों में ऊँचे दामों पर बिकता है। बासमती के दाने अन्य दानों से काफी लम्बे होते हैं। पकने के बाद, ये आपस में लेसदार होकर चिपकते नहीं, बल्कि बिखरे हुए रहते हैं। यह चावल दो प्रकार का होता है:- श्वेत और भूरा। के अनुसार, बासमती चावल में मध्यम ग्लाइसेमिक सूचकांक ५६ से ६९ के बीच होता है, जो कि इसे मधुमेह रोगियों के लिये अन्य अनाजों और श्वेत आटे की अपेक्षा अधिक श्रेयस्कर बनाता है। .

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बांग्लादेश के राष्ट्रपति

बांग्लादेश के राष्ट्रपति का पद गणप्रजातंत्री बांग्लादेश का सर्वोच्च संवैधानिक पद है। वर्तमान नियमों के अनुसार, राष्ट्रपति को बांग्लादेश की राष्ट्रीय संसद द्वारा, खुले चुनाव प्रक्रिया द्वारा निर्वाचित होते हैं। राष्ट्रपति, बांग्लादेश की कार्यपालिका न्यायपालिका एवं विधानपालिका के सर्व शाखाओं के, पारंपरिक, प्रमुख एवं बांग्लादेश के सारे सशस्त्र बलों के सर्वादिनायक हैं। इस पद पर नियुक्त प्रत्येक राष्ट्रपति का कार्यकाल 5 वर्ष होता है। संसदीय बहुमत द्वारा निर्वाचित होने के कारण इस पद पर साधारण तौर पर शासक दल के प्रतिनिधि ही चुने जाते हैं। हालाँकि, एक बार निर्वाचित हो चुके पदाधिकारी चुनाव में पुनः खड़े होने के लिए मुक्त होते हैं। वर्ष 1991 में संसदीय गणतंत्र की शुरुआत से पूर्व, राष्ट्रपति का चुनाव जनता के मतों द्वारा होता था। संसदीय प्रणाली के पुनर्स्थापन के पश्चात से यह पद मूलतः एक पारंपरिक पद रह गया है, जिसकी, विशेषतः कोई सार्थक कार्यकारी शक्तियाँ नहीं हैं। प्रत्येक संसदीय साधारण चुनाव के पश्चात संसद की प्रथम अधिवेशन में राष्ट्रपति अपना उद्घाधाटनी अभिभाषण देते हैं। प्रत्येक वर्ष के प्रथम संसदीय अधिवेशन में भी राष्ट्रपति अपना उद्घाटनी अभिभाषण देते हैं। इसके अतिरिक्त, संसद में पारित हुई किसी भी अधिनियम को कानून बनने के लिए राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त करना आवश्यक होता है। इसके अलावा राष्ट्रपति अपने विवेक पर क्षमादान भी दे सकते हैं। सन 1956 में संसद में नए कानून पारित किए, जिनके द्वारा राष्ट्रपति की, संसद के भंग होने के बाद की कार्यकारी शक्तियों को, संवैधानिक प्रावधानों के अंतर्गत बढ़ाया गया था। बांग्लादेश के राष्ट्रपति आधिकारिक तौर पर ढाका के बंगभवन में निवास करते हैं। कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी वह अपने पद पर तब तक विराजमान रहते हैं जब तक उनका उत्तराधिकारी पद पर स्थापित नहीं हो जाता। .

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बांग्लादेश के राष्ट्रपतिगण की सूची

बांग्लादेश के राष्ट्रपतियों की सूची .

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बिम्बाणु

हल्के सूक्ष्मदर्शी (40x) द्वारा दिखाई देते दो बिम्बाणु, जिन्हें ला.र.को. ने घेर रखा है बिम्बाणु, या प्लेटेलेट, या थ्रॉम्बोसाइट, रक्त में उपस्थित अनियमित आकार की छोटी अनाभिकीय कोशिका (यानि वे कोशिकाएं, जिनमें नाभिक नहीं होता, मात्र डीएनए ही होता है) होती है, व इनका व्यास २-३ µm होता है। एक प्लेटेलेट कोशिका का औसत जीवनकाल ८-१२ दिन तक होता है। सामान्यत: किसी मनुष्य के रक्त में एक लाख पचास हजार से लेकर 4 लाख प्रति घन मिलीमीटर प्लेटलेट्स होते हैं। ये बढोत्तरी कारकों का प्राकृतिक स्रोत होती हैं। जीवित प्राणियों के रक्त का एक बड़ा अंश बिम्बाणुओं (जिनमें लाल रक्त कणिकाएं और प्लाविका शामिल हैं) से निर्मित होता है। दिखने में ये नुकीले अंडाकार होते हैं और इनका आकार एक इंच का चार सौ हजारवां हिस्सा होता है। इसे सूक्ष्मदर्शी से ही देखा जा सकता है। यह अस्थि मज्जा (बोन मैरो) में उपस्थित कोशिकाओं के काफी छोटे कण होते हैं, जिन्हें तकनीकी भाषा में मेगा कार्योसाइट्स कहा जाता है। ये थ्रोम्बोपीटिन हार्मोन की वजह से विभाजित होकर खून में समाहित होते हैं और सिर्फ १० दिन के जीवनकाल तक संचारित होने के बाद स्वत: नष्ट हो जाते हैं। शरीर में थ्रोम्बोपीटिन का काम बिम्बाणुओं की संख्या सामान्य बनाना होता है। रक्त में उपस्थित बिम्बाणुओं का एक महत्त्वपूर्ण काम शरीर में उपस्थित हार्मोन और प्रोटीन उपलब्ध कराना होता है। रक्त धमनी को नुकसान होने की स्थिति में कोलाजन नामक द्रव निकलता है जिससे मिलकर बिम्बाणु एक अस्थाई दीवार का निर्माण करते हैं और रक्त धमनी को और अधिक क्षति होने से रोकते हैं। शरीर में आवश्यकता से अधिक होना शरीर के लिए कई गंभीर खतरे उत्पन्न करता है। इससे खून का थक्का जमना शुरू हो जाता है जिससे दिल के दौरे की आशंका बढ़ जाती है। बिम्बाणुओं की संख्या में सामान्य से नीचे आने पर रक्तस्नव की आशंका बढ़ती है। रक्त में बिम्बाणुओं की संख्या किसी खास रोग या आनुवांशिक गड़बड़ी की वजह से होती है। किसी इलाज या शल्यक्रिया की वजह से भी ऐसा होता है। अंग प्रत्यारोपण, झुलसने, मज्जा प्रत्यारोपण (मैरो ट्रांसप्लांट), हृदय की शल्यक्रिया या कीमोचिकित्सा (कीमोथेरेपी) के बाद अकसर खून की जरूरत होती है। ऐसे में कई बार बिम्बाणुआधान (प्लेटलेट्स ट्रांसफ्यूजन) की भी जरूरत पड़ती है। प्रायः प्रचलित रोग डेंगू जैसे विषाणु जनित रोगों के बाद बिम्बाणुओं की संख्या में गिरावट आ जाती है। .

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बिहार के राज्यपालों की सूची

कोई विवरण नहीं।

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बिग बैंग सिद्धांत

महाविस्फोट प्रतिरूप के अनुसार, यह ब्रह्मांड अति सघन और ऊष्म अवस्था से विस्तृत हुआ है और अब तक इसका विस्तार चालू है। एक सामान्य धारणा के अनुसार अंतरिक्ष स्वयं भी अपनी आकाशगंगाओं सहित विस्तृत होता जा रहा है। ऊपर दर्शित चित्र ब्रह्माण्ड के एक सपाट भाग के विस्तार का कलात्मक दृश्य है। ब्रह्मांड का जन्म एक महाविस्फोट के परिणामस्वरूप हुआ। इसी को महाविस्फोट सिद्धान्त या बिग बैंग सिद्धान्त कहते हैं।।अमर उजाला।। श्य़ामरत्न पाठक, तारा भौतिकविद, जिसके अनुसार से लगभग बारह से चौदह अरब वर्ष पूर्व संपूर्ण ब्रह्मांड एक परमाण्विक इकाई के रूप में था।।बीबीसी हिन्दी।। बीबीसी संवाददाता, लंदन:ममता गुप्ता और महबूब ख़ान उस समय मानवीय समय और स्थान जैसी कोई अवधारणा अस्तित्व में नहीं थी।।हिन्दुस्तान लाइव।।२७ अक्टूबर, २००९ महाविस्फोट सिद्धांत के अनुसार लगभग १३.७ अरब वर्ष पूर्व इस धमाके में अत्यधिक ऊर्जा का उत्सजर्न हुआ। यह ऊर्जा इतनी अधिक थी जिसके प्रभाव से आज तक ब्रह्मांड फैलता ही जा रहा है। सारी भौतिक मान्यताएं इस एक ही घटना से परिभाषित होती हैं जिसे महाविस्फोट सिद्धांत कहा जाता है। महाविस्फोट नामक इस महाविस्फोट के धमाके के मात्र १.४३ सेकेंड अंतराल के बाद समय, अंतरिक्ष की वर्तमान मान्यताएं अस्तित्व में आ चुकी थीं। भौतिकी के नियम लागू होने लग गये थे। १.३४वें सेकेंड में ब्रह्मांड १०३० गुणा फैल चुका था और क्वार्क, लैप्टान और फोटोन का गर्म द्रव्य बन चुका था। १.४ सेकेंड पर क्वार्क मिलकर प्रोटॉन और न्यूट्रॉन बनाने लगे और ब्रह्मांड अब कुछ ठंडा हो चुका था। हाइड्रोजन, हीलियम आदि के अस्तित्त्व का आरंभ होने लगा था और अन्य भौतिक तत्व बनने लगे थे। महाविस्फोट सिद्धान्त के आरंभ का इतिहास आधुनिक भौतिकी में जॉर्ज लिमेत्री ने लिखा हुआ है। लिमेत्री एक रोमन कैथोलिक पादरी थे और साथ ही वैज्ञानिक भी। उनका यह सिद्धान्त अल्बर्ट आइंसटीन के प्रसिद्ध सामान्य सापेक्षवाद के सिद्धांत पर आधारित था। महाविस्फोट सिद्धांत दो मुख्य धारणाओं पर आधारित होता है। पहला भौतिक नियम और दूसरा ब्रह्माण्डीय सिद्धांत। ब्रह्माण्डीय सिद्वांत के मुताबिक ब्रह्मांड सजातीय और समदैशिक (आइसोट्रॉपिक) होता है। १९६४ में ब्रिटिश वैज्ञानिक पीटर हिग्गस ने महाविस्फोट के बाद एक सेकेंड के अरबें भाग में ब्रह्मांड के द्रव्यों को मिलने वाले भार का सिद्धांत प्रतिपादित किया था, जो भारतीय वैज्ञानिक सत्येन्द्र नाथ बोस के बोसोन सिद्धांत पर ही आधारित था। इसे बाद में 'हिग्गस-बोसोन' के नाम से जाना गया। इस सिद्धांत ने जहां ब्रह्मांड की उत्पत्ति के रहस्यों पर से पर्दा उठाया, वहीं उसके स्वरूप को परिभाषित करने में भी मदद की।। दैट्स हिन्दी॥।१० सितंबर, २००८। इंडो-एशियन न्यूज सर्विस। .

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बिग शो

पॉल वेइट, जूनियर (जन्म 8 फ़रवरी 1972), जो अपने रिंग नाम (द) बिग शो के रूप में बेहतर जाने जाते हैं, एक अमेरिकीपेशेवर पहलवान और अंशकालिक अभिनेता हैं और वर्तमान में वर्ल्ड रेसलिंग इंटरटेनमेंट(WWE) के अपनेस्मैकडाउन नामी ब्रांड के लिए अनुबंधित हैं। पेशेवर कुश्ती में बिग शो पांच बार विश्व चैंपियन रह चुके है और उन्होंने दो बार डब्ल्यूसीडब्ल्यू वर्ल्ड हेवीवेट चैंपियनशिप जीता है। इसके अलावा उन्होंनेदो बार डब्ल्यूडब्ल्यूएफ/ई चैंपियनशिप औरईसीडब्ल्यू वर्ल्ड हेवीवेट चैंपियनशिपएक बार जीती है, जिससे वे सभी तीन चैम्पियनशिप जीतने वाले इतिहास के पहले पेशेवर कुश्तीबाज बन गये हैं। इन प्रतियोगिताओंके अलावा उन्होंने एक बार अमेरिकी चैम्पियनशिप, पांच बार वर्ल्ड टैग टीम चैम्पियनशिप(अंडरटेकर के साथ दो बार,केन के साथ एक बार, क्रिस जेरिको के साथ एक बार और एक बार मिज के साथ), दो बारडब्ल्यूडब्ल्यूई वर्ल्ड टैग टीम चैम्पियनशिप(क्रिस जेरिको के साथ एक बार और द मिज के साथ एक बार) और तीन बार हार्डकोर चैम्पियनशिप जीती है। "विश्व के सबसे बड़े एथलीट" कहे जाने वाले बिग शो को अपने करियर में प्रमुखता 1995 से 1996 तक अब भंग हो चुके वर्ल्ड चैम्पियनशिप रेसलिंग(WCW) के दौरान मिली, जब उन्हें जायंट कहा जाता है। दो बार डब्ल्सूसीडब्ल्यू वर्ल्ड हैवीवेट चैम्पियन और यह टाइटिल पाने वाले सबसे कम उम्र के कुश्तीबाज होने के अलावा वे तीन बार डब्ल्यूसीडब्ल्यू वर्ल्ड टैग टीम चैम्पियनशिपविजेता और 1996 के वर्ल्ड वार 3 के विजेता हैं। कुश्ती के अलावा, वेइट फीचर फिल्मों और टेलीविजन सीरियल जैसे एडम सैंडलर के द वाटरब्याय और यूएसए नेटवर्क के आपराधिक हास्य-ड्रामासाइक में अभिनय किया। उम्मीदों के विपरीत बिग शो ने ग्रेटेस्ट रॉयल रम्बल मैं भाग नहीं लिया .

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बुद्ध पूर्णिमा

बुद्ध पूर्णिमा (वेसक या हनमतसूरी) बौद्ध धर्म में आस्था रखने वालों का एक प्रमुख त्यौहार है। यह बैसाख माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है। बुद्ध पूर्णिमा के दिन ही गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था, इसी दिन उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई थी और इसी दिन उनका महानिर्वाण भी हुआ था। ५६३ ई.पू.

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बुलन्द दरवाज़ा

बुलन्द दरवाजा़ आगरा शहर से ४३ किमी दूर फतेहपुर सीकरी नामक स्थान पर स्थित एक दर्शनीय स्मारक है। इसका निर्माण अकबर ने १६०२ में करवाया था। बुलन्द शब्द का अर्थ महान या ऊँचा है। अपने नाम को सार्थक करने वाला यह स्मारक विश्व का सबसे बडा़ प्रवेशद्वार है। हिन्दू और फारसी स्थापत्य कला का अद्भुत उदाहरण होने के कारण इसे "भव्यता के द्वार" नाम से भी जाना जाता है। sumanअकबर पर विजय प्राप्त करने की स्मृति में बनवाए गए इस प्रवेशद्वार के पूर्वी तोरण पर फारसी में शिलालेख अंकित हैं जो १६०१ में दक्कन पर अकबर की विजय के अभिलेख हैं। ४२ सीढ़ियों के ऊपर स्थित बुलन्द दरवाज़ा ५३.६३ मीटर ऊँचा और ३५ मीटर चौडा़ है। यह लाल बलुआ पत्थर से बना है जिसे सफेद संगमरमर से सजाया गया है। दरवाजे के आगे और स्‍तंभों पर कुरान की आयतें खुदी हुई हैं। यह दरवाजा एक बड़े आँगन और जामा मस्जिद की ओर खुलता है। समअष्टकोणीय आकार वाला यह दरवाज़ा गुम्बदों और मीनारों से सजा हुआ है। दरवाजे़ के तोरण पर ईसा मसीह से संबंधित कुछ पंक्तियाँ लिखी हैं जो इस प्रकार हैं: "मरियम के पुत्र यीशु ने कहा: यह संसार एक पुल के समान है, इस पर से गुज़रो अवश्य, लेकिन इस पर अपना घर मत बना लो। जो एक दिन की आशा रखता है वह चिरकाल तक आशा रख सकता है, जबकि यह संसार घंटे भर के लिये ही टिकता है, इसलिये अपना समय प्रार्थना में बिताओ क्योंकि उसके सिवा सब कुछ अदृश्य है" बुलंद दरवाज़े पर बाइबिल की इन पंक्तियों की उपस्थिति को अकबर को धार्मिक सहिष्णुता का प्रतीक माना जाता है। .

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बुल्गारियाई विकिपीडिया

बुल्गारियाई विकिपीडिया विकिपीडिया का बुल्गारियाई भाषा का संकरण है। इस पर लेखों की कुल संख्या २५ मई, २००९ तक ७२,०००+ है। यह विकिपीडिया का तेतीसवां सबसे बड़ा संकरण है।.

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ब्रह्म मुद्रा

ब्रह्म मुद्रा पद्मासन में बैठ कर की जाती है ब्रह्म मुद्रा योग की एक अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्रा है। यह योग की लुप्त हुई क्रियाओं में से एक है और इसके बारे में बहुत कम ज्ञान उपलब्ध है। इसके अंतर्गत ब्रह्ममुद्रा के तीन मुख और भगवान दत्तात्रेय के स्वरूप को स्मरण करते हुए कोई साधक तीन दिशाओं में अपना सिर घुमाता है। इसी कारण इसे ब्रह्ममुद्रा कहा जाता है। यह मुद्रा गर्दन के लिए विशेष लाभदायक तो है ही,। वेब दुनिया।।११ दिसंबर, २००८। पं.राजेश शास्त्री। ज्योतिष ऑनलाइन।।१० जुलाई, २००९ और जन साधारण लोगों के लिए जबकि लोग अनिद्रा, तनाव, मानसिक अवसाद जैसे रोगों से ज्यादा घिर रहे हैं एक अचूक उपाय है। ब्रह्म मुद्रा में कमर सीधी रखते हुए पद्मासन में बैठना होता है।। दरबारु ब्लॉग।।२० अगस्त, २००९। वैसे वज्रासन या सिद्धासन में भी बैठा जा सकता है।। वेब दुनिया। फिर अपने हाथों को घुटनों पर और कंधों को ढीला छोड़कर गर्दन को धीरे-धीरे दस बार ऊपर-नीचे करना होता है। सिर को पीछे की झुकने देते हैं। गर्दन को चलाते समय श्वास क्रिया को सामान्य रूप से चलने देते हैं और आंखें खुली रखते हैं। इस के साथ ही गर्दन को झटका दिए बिना दाएं-बाएं भी बारी-बारी से चलाना होता है। ब्रह्म मुद्रा के अंतर्गत ब्रह्ममुद्रा के तीन मुख और भगवान दत्तात्रेय के स्वरूप को स्मरण करते हुए कोई साधक तीन दिशाओं में अपना सिर घुमाता है। इसी कारण इसे ब्रह्ममुद्रा कहा जाता है। ठोड़ी कंधे की सीध में रखते हैं। दाएं-बाएं दस बार गर्दन घुमाने के बाद पूरी गोलाई में यथासंभव गोलाकार घुमाकर इस क्रम में कानों को कंधों से छुआते हैं। इसी का अभ्यास लगातार करने को ब्रह्ममुद्रा योग कहा जाता है। इसके चार से पांच चक्र तक किये जा सकते हैं। यह मुद्रा करते हुए ध्यान रखना चाहिये कि मेरुदंड पूर्ण रूप से सीधा रहना चाहिये। इसके अलावा जिस गति से गर्दन ऊपर जाये, उसी गति से गर्दन नीचे भी लानी चाहिये। सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस या अवटु ग्रंथि की निम्नसक्रियता तथा अतिसक्रियता (थायरॉयड) के रोगियों को ध्यान रखना चाहिये कि वे ठोड़ी को ऊपर की ओर दबायें। गर्दन को नीचे की ओर ले जाते समय कंधे न झुकायें, कमर, गर्दन व कंधे सीधे रखें। गले या गर्दन का कोई गंभीर रोग होने पर चिकित्सक की सलाह के बाद ही अभ्यास करें। ब्रह्ममुद्रा योग करने से आवश्यकता से अधिक नींद आने या नींद न आने की समस्या दूर होती है। ध्यान या साधना और अपने काम में मन लगने लगता है और आलस्य भी कम होता जाता है। अध्ययन करने वाले छात्रों के लिए यह विशेष लाभदायक होता है, क्योंकि इससे पढ़ाई की थकान दूर होती ह और आंखों की कमजोरी भी दूर होती है। इससे चक्कर नहीं आते। जिन्हें ज्यादा सपने आते हैं उन्हें इससे विशेष लाभ होता है तथा बदलते मौसम के सर्दी-जुकाम और खांसी से छुटकारा भी मिलता है। .

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ब्रह्मोस प्रक्षेपास्त्र

'''ब्रह्मोस''' विश्व की सबसे तीव्रगामी मिसाइल है। ब्रह्मोस एक कम दूरी की रैमजेट, सुपरसॉनिक क्रूज मिसाइल है। इसे पनडुब्बी से, पानी के जहाज से, विमान से या जमीन से भी छोड़ा जा सकता है। रूस की एनपीओ मशीनोस्ट्रोयेनिया (NPO Mashinostroeyenia) तथा भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने संयुक्त रूप से इसका विकास किया है। यह रूस की पी-800 ओंकिस क्रूज मिसाइल की प्रौद्योगिकी पर आधारित है। ब्रह्मोस के समुद्री तथा थल संस्करणों का पहले ही सफलतापूर्वक परीक्षण किया जा चुका है तथा भारतीय सेना एवं नौसेना को सौंपा जा चुका है। ब्रह्मोस भारत और रूस के द्वारा विकसित की गई अब तक की सबसे आधुनिक प्रक्षेपास्त्र प्रणाली है और इसने भारत को मिसाइल तकनीक में अग्रणी देश बना दिया है। .

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ब्रिटन विकिपीडिया

ब्रिटन विकिपीडिया विकिपीडिया का ब्रिटन भाषा का संकरण है। यह जून, २००४ में आरंभ किया गया था और इस पर लेखों की कुल संख्या २५ मई, २००९ तक २५,०००+ है। यह विकिपीडिया का चौवनवां सबसे बड़ा संकरण है।.

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ब्रिक

ब्रिक यानी बीआरआईसी विश्व की सर्वाधिक तेजी से विकसित होती अर्थव्यवस्थाओं वाले विकासशील देशों- ब्राजील, रूस, भारत और चीन का संगठन है। इस शब्द का पहली बार प्रयोग 2001 में गोल्डमैन शश ने किया था। ये चारों देश संयुक्त रूप से विश्व का एक-चौथाई क्षेत्र घेरते हैं और इनकी जनसंख्या विश्व की कुल आबादी का 40 प्रतिशत से अधिक है। इन देशों का सकल घरेलु उत्पाद 15.435 ट्रिलियन डॉलर है।। वॉयस ऑफ रशिया। 14 सितंबर 2009 गोल्डमैन शश का तर्क था कि ब्राजील, रूस, चीन और भारत की अर्थव्यवस्थाएं आर्थिक रूप से इतनी मजबूत हैं कि 2050 तक ये चारों अर्थव्यवस्थाएं वैश्विक परिदृश्य पर हावी होगी। हालांकि शश का ये उद्देश्य कतई नहीं था कि ये चारों देश राजनीतिक गठजोड़ कर किसी संगठन का निर्माण करें। शश का आकलन था कि भारत और चीन उत्पादित वस्तुओं और सर्विस के सबसे बड़े प्रदाता होंगे, वहीं ब्राजील और रूस कच्चे माल के सबसे बड़े उत्पादक हैं। ब्राजील जहां लौह अयस्कों की आपूर्ति में प्रथम है तो रूस तेल एवं प्राकृतिक गैस के मामले में शीर्ष पर है। ब्रिक देशों की पहली आधिकारिक बैठक 16 जून, 2009 को रूस के येकेटिनबर्ग में हुई थी। 17 जून, 2009 को हुई बैठक में इन देशों ने आपसी सहयोग बढ़ाने पर बल दिया। इसमें एक वैश्विक मुद्रा बनाने की बात कही गई थी। 4 सितंबर, 2009 में इसकी बैठक लंदन में हुई थी। इसमें यह तय हुआ कि स्थिर वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए विश्व मुद्रा कोष जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में बदलावों की ज़रूरत है। साथ ही बदलाव की इस प्रक्रिया में विकासशील देशों की बराबर हिस्सेदारी होनी चाहिए। 2010 की बैठक ब्राजील में आयोजित की जाएगी। File:Ponte estaiada Octavio Frias - Sao Paulo.jpg|साओ पाउलो, ब्राज़ील File:Moscow International Business Centre, Marc 2008.JPG|मॉस्को, रूस File:Mumbai Skyline at Night.jpg|मुंबई, भारत File:Shanghai Skyline 2009.jpg|शंघाई, चीन .

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ब्रेट ली

ब्रेट ली (जन्म 8 नवम्बर 1976 को वॉलोन्गॉन्ग, न्यू साउथ वेल्स में) एक ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट खिलाड़ी हैं। ऑस्ट्रेलियाई टेस्ट टीम में शामिल होने के बाद, ली को विश्व क्रिकेट में सबसे तेज गेंदबाजों में से एक के रूप में मान्यता मिली। अपने पहले दो वर्षों में से प्रत्येक में उन्होंने गेंद के साथ 20 से कम का औसत पाया, लेकिन उसके बाद से ज़्यादातर प्रारंभिक 30 अंक हासिल किया। वे एक पुष्ट क्षेत्ररक्षक हैं और उपयोगी निचले-क्रम के बल्लेबाज़, जिनका टेस्ट क्रिकेट में औसत 20 से अधिक रहा है। माइक हसी के साथ मिल कर, उन्होंने 2005-06 के बाद से एकदिवसीय मैचों में ऑस्ट्रेलिया के लिए सबसे अधिक 7वें विकेट की भागीदारी (123) का रिकॉर्ड संभाल रखा है। .

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ब्लैकबेरी

ब्लैकबेरी वायरलेस मोबाइल उपकरण की एक श्रेणी है, जिसे 1999 में दो-तरफ़ा पेजर के रूप में पेश किया गया था। 2002 में, आमतौर पर स्मार्टफ़ोन के नाम से विख्यात ब्लैकबेरी जारी किया गया, जो पुश ई-मेल, मोबाइल फोन, टेक्स्ट मैसेजिंग, इंटरनेट फैक्स, वेब ब्राउज़िंग और अन्य वायरलेस सूचना सेवाओं की सुविधाओं का समर्थन करता है। यह अभिसारी डिवाइस का एक उदाहरण है। कनाडा की कंपनी रिसर्च इन मोशन(RIM) द्वारा इसे विकसित किया गया है, यह मोबाइल फोन सेवा कंपनियों के वायरलेस डाटा नेटवर्क पर जानकारी देने का काम करती है। ब्लैकबेरी ने पहले बाजार में ई मेल पर ध्यान केंद्रित करके प्रगति की। रिम (RIM) वर्तमान में ब्लैकबेरी कनेक्ट सॉफ्टवेयर के माध्यम से गैर-ब्लैकबेरी उपकरणों, जैसे कि पाम ट्रेओ को ब्लैकबेरी ई-मेल सेवा प्रदान करने का काम करती है। मूल ब्लैकबेरी उपकरण का डिस्प्ले मोनोक्रोम हुआ करता था, लेकिन अब सभी मॉडल के डिस्प्ले रंगीन हैं और नवप्रवर्तन में बाज़ार का अगुवा है, विशेष रूप से बहुद्देशीय ऑपरेटिंग सिस्टम और बैकेंड संदेश के साथ समाकलन और सहयोग और अनुकूलित अनुप्रयोग सिस्टम के मामले में.

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बृहन्मुंबई महानगर पालिका

बी.एम.सी का प्रशासनिक मुख्यालय बी.एम.सी की सील बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बी.एम.सी.) मुम्बई महानगर की मुख्य नगर पालिका है। इसका पूर्व नाम बंबई नगर निगम था और इसकी स्थापना १८८९ में हुई थी। .

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बृजेम्द्र कुमार राव

बृजेम्द्र कुमार राव को सन २००९ में भारत सरकार द्वारा चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये दिल्ली राज्य से हैं। .

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बोस्नियाई विकिपीडिया

बोस्नियाई विकिपीडिया विकिपीडिया का बोस्नियाई भाषा का संकरण है। यह १२ दिसंबर, २००२ में आरंभ किया गया था और इस पर लेखों की कुल संख्या २५ मई, २००९ तक २६,७५०+ है। यह विकिपीडिया का बावनवां सबसे बड़ा संकरण है।.

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भटनागर वार्ता

भटनागर वार्ता भारत में प्रकाशित होने वाला भटनागर कायस्थों के समाज का प्रमुख पत्र है। इसका प्रकाशन ऑल इंडिया भटनागर उपकारक फंड ट्रस्ट द्वारा अगस्त, २००९ से किया जा रहा है। .

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भानुमंत

भानुमंत प्राचीन दक्षिण कोशल का शासक था। इतिहास प्रसिद्ध राजा राम की माता कौशल्या कोसल के राजा भानुमंत की पुत्री थीं। भानुमंत का कोई पुत्र नहीं होने के कारण राजा दशरथ को कोशल का भी राज्य मिला। .

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भारत में रेल दुर्घटना

भारत का रेल तन्त्र दुनिया के सबसे बड़े तन्त्रों में से एक हैं। भारतीय रेलगाड़ियों में हर दिन सवा करोड़ से अधिक लोग यात्रा करते हैं। एक अनुमान के अनुसार देश में प्रति वर्ष औसतन ३०० छोटी-बड़ी रेल दुर्घटनाएँ होती हैं। भारत में वर्ष २००० से बाद घटित हुई रेल दुर्घटनाओं का घटनाक्रम इस प्रकार है:- .

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भारत के प्रधान मंत्रियों की सूची

भारत के प्रधानमंत्री भारत गणराज्य की सरकार के मुखिया हैं। भारत के प्रधानमंत्री, का पद, भारत के शासनप्रमुख (शासनाध्यक्ष) का पद है। संविधान के अनुसार, वह भारत सरकार के मुखिया, भारत के राष्ट्रपति, का मुख्य सलाहकार, मंत्रिपरिषद का मुखिया, तथा लोकसभा में बहुमत वाले दल का नेता होता है। वह भारत सरकार के कार्यपालिका का नेतृत्व करता है। भारत की राजनैतिक प्रणाली में, प्रधानमंत्री, मंत्रिमंडल में का वरिष्ठ सदस्य होता है। .

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भारत की स्वास्थ्य समस्याएँ (2009)

वर्ष 2009 में भारत के लोगों को पोलियो, एचआईवी और मलेरिया जैसी चिरपरिचित बिमारियों के साथ ही स्वाइन फ्लू नामक नई बीमारी का भी सामना करना पडा। इस वर्ष की दस प्रमुख स्वास्थ्य समस्याएँ निम्नलिखित हैं- .

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भारत २००९

कोई विवरण नहीं।

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भारत २०१०

इन्हें भी देखें 2014 भारत 2014 विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी 2014 साहित्य संगीत कला 2014 खेल जगत 2014 .

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भारतीय रेल (पत्रिका)

“भारतीय रेल” का मुखपृष्ठभारतीय रेल पत्रिका रेल मंत्रालय (रेलवे बोर्ड) द्वारा प्रकाशित मासिक हिंदी पत्रिका है। इस पत्रिका का पहला अंक १५ अगस्त १९६० को प्रकाशित हुआ था और इस पत्रिका की शुरूआत के पीछे तत्कालीन रेल मंत्री स्व.श्री लाल बहादुर शास्त्री तथा बाबू जगजीवन राम का विशेष प्रयास था। इस पत्रिका का उद्देश्य भारतीय रेलवे में कार्यरत लोगों में साहित्य के प्रति रुचि बढ़ाना, लेखकों को प्रोत्साहित करना, भारतीय रेल से संबंधित जानकारी और सूचनाओं का प्रकाशन करना तथा हिंदी का विकास करना था। इस वर्ष २००९ में यह पत्रिका अपनी गौरवशाली यात्रा के स्वर्ण जयंती वर्ष में प्रवेश कर रही है। बीते पांच दशकों में इस पत्रिका ने रेल कर्मियों के साथ अन्य पाठक वर्ग में भी अपनी एक विशिष्ट पहचान कायम की है। इसकी साज-सज्जा, विषय सामग्री और मुद्रण में भी निखार आया है। इसके पाठकों की संख्या में भी निरंतर वृद्धि हुई है। रेलों में हिंदी के प्रचार-प्रसार में इस पत्रिका का ऐतिहासिक योगदान रहा है। रेल प्रशासन, रेलकर्मियों और रेल उपयोगकर्ताओं के बीच भारतीय रेल पत्रिका एक मजबूत संपर्क-सूत्र का काम कर रही है। भारतीय रेल पत्रिका तथा उसके संपादकों को पत्रकारिता और साहित्य में विशेष योगदान के लिए उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान तथा हिंदी अकादमी, दिल्ली समेत कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया है। इस पत्रिका के प्रतिष्ठित लेखकों में स्व.श्री विष्णु प्रभाकर, श्री कमलेश्वर, डॉ॰प्रभाकर माचवे, श्री पुरुषोत्तम दास टंडन, श्री रतनलाल शर्मा, श्री श्रीनाथ सिंह, श्री रामदरश मिश्र, डॉ॰शंकर दयाल सिंह, श्री विष्णु स्वरूप सक्सेना, डॉ॰ महीप सिंह, श्री यशपाल जैन, सुश्री आशारानी व्होरा, श्री शैलेन चटर्जी, श्री लल्लन प्रसाद व्यास, श्री शेर बहादुर विमलेश, श्री अक्षय कुमार जैन, श्री प्रेमपाल शर्मा, श्री आर.के.

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भारतीय आम

आम अत्यंत उपयोगी, दीर्घजीवी, सघन तथा विशाल वृक्ष है, जो भारत में दक्षिण में कन्याकुमारी से उत्तर में हिमालय की तराई तक (3,000 फुट की ऊँचाई तक) तथा पश्चिम में पंजाब से पूर्व में आसाम तक, अधिकता से होता है। अनुकूल जलवायु मिलने पर इसका वृक्ष 50-60 फुट की ऊँचाई तक पहुँच जाता है। वनस्पति वैज्ञानिक वर्गीकरण के अनुसार आम ऐनाकार्डियेसी कुल का वृक्ष है। आम के कुछ वृक्ष बहुत ही बड़े होते हैं। .

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भारतीय कवियों की सूची

इस सूची में उन कवियों के नाम सम्मिलित किये गये हैं जो.

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भारतीय क्रिकेट टीम

भारतीय क्रिकेट टीम भारत की राष्ट्रीय क्रिकेट टीम है। भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (बीसीसीआई) द्वारा संचालित भारतीय क्रिकेट टीम अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद की पूर्णकालिक सदस्य है। भारतीय टीम दो बार क्रिकेट विश्वकप (१९८३ और २०११) अपने नाम कर चुकी है। वर्तमान में भारतीय क्रिकेट टीम के कोच रवि शास्त्री हैं। .

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भारतीय क्रिकेट टीम का श्रीलंका दौरा - २००९

श्रीलंका भारत 2009 क्रिकेट श्रृंखला श्रीलंका और भारत के मध्य खेली जाने वाले 4 एकदिवसीय क्रिकेट की और 1 T20 मैच की श्रृंखला है। यह २८ जनवरी से १० फरवरी २००९ तक श्रीलंका में खेली जा रही हैं। .

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भांग का पौधा

भांग का पौधा और उसके विभिन्न भाग भांग (वानस्पतिक नामः Cannabis indica) एक प्रकार का पौधा है जिसकी पत्तियों को पीस कर भांग तैयार की जाती है। उत्तर भारत में इसका प्रयोग बहुतायत से स्वास्थ्य, हल्के नशे तथा दवाओं के लिए किया जाता है। भारतवर्ष में भांग के अपने आप पैदा हुए पौधे सभी जगह पाये जाते हैं। भांग विशेषकर उत्तर प्रदेश, बिहार एवं पश्चिम बंगाल में प्रचुरता से पाया जाता है। भांग के पौधे 3-8 फुट ऊंचे होते हैं। इसके पत्ते एकान्तर क्रम में व्यवस्थित होते हैं। भांग के ऊपर की पत्तियां 1-3 खंडों से युक्त तथा निचली पत्तियां 3-8 खंडों से युक्त होती हैं। निचली पत्तियों में इसके पत्रवृन्त लम्बे होते हैं। भांग के नर पौधे के पत्तों को सुखाकर भांग तैयार की जाती है। भांग के मादा पौधों की रालीय पुष्प मंजरियों को सुखाकर गांजा तैयार किया जाता है। भांग की शाखाओं और पत्तों पर जमे राल के समान पदार्थ को चरस कहते हैं। भांग की खेती प्राचीन समय में 'पणि' कहे जानेवाले लोगों द्वारा की जाती थी। ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने कुमाऊँ में शासन स्थापित होने से पहले ही भांग के व्यवसाय को अपने हाथ में ले लिया था तथा काशीपुर के नजदीक डिपो की स्थापना कर ली थी। दानपुर, दसोली तथा गंगोली की कुछ जातियाँ भांग के रेशे से कुथले और कम्बल बनाती थीं। भांग के पौधे का घर गढ़वाल में चांदपुर कहा जा सकता है। इसके पौधे की छाल से रस्सियाँ बनती हैं। डंठल कहीं-कहीं मशाल का काम देता है। पर्वतीय क्षेत्र में भांग प्रचुरता से होती है, खाली पड़ी जमीन पर भांग के पौधे स्वभाविक रूप से पैदा हो जाते हैं। लेकिन उनके बीज खाने के उपयोग में नहीं आते हैं। टनकपुर, रामनगर, पिथौरागढ़, हल्द्वानी, नैनीताल, अल्मोडा़, रानीखेत,बागेश्वर, गंगोलीहाट में बरसात के बाद भांग के पौधे सर्वत्र देखे जा सकते हैं। नम जगह भांग के लिए बहुत अनुकूल रहती है। पहाड़ की लोक कला में भांग से बनाए गए कपड़ों की कला बहुत महत्वपूर्ण है। लेकिन मशीनों द्वारा बुने गये बोरे, चटाई इत्यादि की पहुँच घर-घर में हो जाने तथा भांग की खेती पर प्रतिबन्ध के कारण इस लोक कला के समाप्त हो जाने का भय है। होली के अवसर पर मिठाई और ठंडाई के साथ इसका प्रयोग करने की परंपरा है। भांग का इस्तेमाल लंबे समय से लोग दर्द निवारक के रूप में करते रहे हैं। कई देशों में इसे दवा के रूप में भी उपलब्ध कराया जाता है। .

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भक्त बी रथ

भक्त बी रथ को सन २००९ में भारत सरकार द्वारा विज्ञान एवं अभियांत्रिकी के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये राज्य से हैं। .

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भुवन चन्द्र खण्डूरी

भुवन चन्द्र खण्डूरी जिन्हें मेजर जनरल (से.नि.) बी.

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भूख

भूख उस समय अनुभव होती है, जब खाना खाने की इच्छा होती है। परितृप्ति भूख का अभाव है। भूख की अनुभूति हाइपोथैल्मस से शुरु होती है जब यह हार्मोन छोड़ता है। यह हार्मोन यकृत के अभिग्राहक पर प्रतिक्रिया करती है। हालांकि एक सामान्य वयक्ति बिना भोजन के कई सप्ताहों तक जिंदा रह सकता है। भूख की अनुभूति भोजन के कुछ घंटों बाद शुरू हो जाती है और व्यक्ति असहज महसूस करने लगता है। भूख शब्द का इस्तेमाल व्यक्ति के सामाजिक स्तर को बताने के लिए किया जाता है। .

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भोजली देवी

भुजरियाँ भारत के अनेक प्रांतों में सावन महीने की सप्तमी को छोटी॑-छोटी टोकरियों में मिट्टी डालकर उनमें अन्न के दाने बोए जाते हैं। ये दाने धान, गेहूँ, जौ के हो सकते हैं। ब्रज और उसके निकटवर्ती प्रान्तों में इसे 'भुजरियाँ` कहते हैं। इन्हें अलग-अलग प्रदेशों में इन्हें 'फुलरिया`, 'धुधिया`, 'धैंगा` और 'जवारा`(मालवा) या भोजली भी कहते हैं। तीज या रक्षाबंधन के अवसर पर फसल की प्राण प्रतिष्ठा के रूप में इन्हें छोटी टोकरी या गमले में उगाया जाता हैं। जिस टोकरी या गमले में ये दाने बोए जाते हैं उसे घर के किसी पवित्र स्‍थान में छायादार जगह में स्‍थापित किया जाता है। उनमें रोज़ पानी दिया जाता है और देखभाल की जाती है। दाने धीरे-धीरे पौधे बनकर बढ़ते हैं, महिलायें उसकी पूजा करती हैं एवं जिस प्रकार देवी के सम्‍मान में देवी-गीतों को गाकर जवांरा– जस – सेवा गीत गाया जाता है वैसे ही भोजली दाई (देवी) के सम्‍मान में भोजली सेवा गीत गाये जाते हैं। सामूहिक स्‍वर में गाये जाने वाले भोजली गीत छत्‍तीसगढ की शान हैं। खेतों में इस समय धान की बुआई व प्रारंभिक निराई गुडाई का काम समापन की ओर होता है। किसानों की लड़कियाँ अच्‍छी वर्षा एवं भरपूर भंडार देने वाली फसल की कामना करते हुए फसल के प्रतीकात्‍मक रूप से भोजली का आयोजन करती हैं। सावन की पूर्णिमा तक इनमें ४ से ६ इंच तक के पौधे निकल आते हैं। रक्षाबंधन की पूजा में इसको भी पूजा जाता है और धान के कुछ हरे पौधे भाई को दिए जाते हैं या उसके कान में लगाए जाते हैं। भोजली नई फ़सल की प्रतीक होती है। और इसे रक्षाबंधन के दूसरे दिन विसर्जित कर दिया जाता है। नदी, तालाब और सागर में भोजली को विसर्जित करते हुए अच्छी फ़सल की कामना की जाती है। .

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भीष्म साहनी

रावलपिंडी पाकिस्तान में जन्मे भीष्म साहनी (८ अगस्त १९१५- ११ जुलाई २००३) आधुनिक हिन्दी साहित्य के प्रमुख स्तंभों में से थे। १९३७ में लाहौर गवर्नमेन्ट कॉलेज, लाहौर से अंग्रेजी साहित्य में एम ए करने के बाद साहनी ने १९५८ में पंजाब विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि हासिल की। भारत पाकिस्तान विभाजन के पूर्व अवैतनिक शिक्षक होने के साथ-साथ ये व्यापार भी करते थे। विभाजन के बाद उन्होंने भारत आकर समाचारपत्रों में लिखने का काम किया। बाद में भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) से जा मिले। इसके पश्चात अंबाला और अमृतसर में भी अध्यापक रहने के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय में साहित्य के प्रोफेसर बने। १९५७ से १९६३ तक मास्को में विदेशी भाषा प्रकाशन गृह (फॉरेन लॅग्वेजेस पब्लिकेशन हाउस) में अनुवादक के काम में कार्यरत रहे। यहां उन्होंने करीब दो दर्जन रूसी किताबें जैसे टालस्टॉय आस्ट्रोवस्की इत्यादि लेखकों की किताबों का हिंदी में रूपांतर किया। १९६५ से १९६७ तक दो सालों में उन्होंने नयी कहानियां नामक पात्रिका का सम्पादन किया। वे प्रगतिशील लेखक संघ और अफ्रो-एशियायी लेखक संघ (एफ्रो एशियन राइटर्स असोसिएशन) से भी जुड़े रहे। १९९३ से ९७ तक वे साहित्य अकादमी के कार्यकारी समीति के सदस्य रहे। भीष्म साहनी को हिन्दी साहित्य में प्रेमचंद की परंपरा का अग्रणी लेखक माना जाता है। वे मानवीय मूल्यों के लिए हिमायती रहे और उन्होंने विचारधारा को अपने ऊपर कभी हावी नहीं होने दिया। वामपंथी विचारधारा के साथ जुड़े होने के साथ-साथ वे मानवीय मूल्यों को कभी आंखो से ओझल नहीं करते थे। आपाधापी और उठापटक के युग में भीष्म साहनी का व्यक्तित्व बिल्कुल अलग था। उन्हें उनके लेखन के लिए तो स्मरण किया ही जाएगा लेकिन अपनी सहृदयता के लिए वे चिरस्मरणीय रहेंगे। भीष्म साहनी हिन्दी फ़िल्मों के जाने माने अभिनेता बलराज साहनी के छोटे भाई थे। उन्हें १९७५ में तमस के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार, १९७५ में शिरोमणि लेखक अवार्ड (पंजाब सरकार), १९८० में एफ्रो एशियन राइटर्स असोसिएशन का लोटस अवार्ड, १९८३ में सोवियत लैंड नेहरू अवार्ड तथा १९९८ में भारत सरकार के पद्मभूषण अलंकरण से विभूषित किया गया। उनके उपन्यास तमस पर १९८६ में एक फिल्म का निर्माण भी किया गया था। .

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मथुरा रेल दुर्घटना २००९

मथुरा रेल दुर्घटना २००९ २१ अक्टूबर, २००९ को भारत में हुई एक रेल दुर्घटना है जिसमें लगभग २२ लोग मारे गए थे। बुधवार सुबह दिल्ली जाने वाली गोवा संपर्कक्रांति एक्सप्रेस का इंजन मेवाड़ एक्सप्रेस की आख़िरी बोगी से टकरा गया। दुर्घटना के तुरन्त बाद रेल मन्त्रालय द्वारा जांच के आदेश दे दिए गए और यह जांच रेलवे आयोग द्वारा की गई। .

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मथुरा की मूर्तिकला

यक्षिणी- मथुरा चित्रकलामथुरा में लगभग तीसरी शती ई०पू० से बारहवीं शती ई० तक अर्थात डेढ़ हजार वर्षों तक शिल्पियों ने मथुरा कला की साधना की जिसके कारण भारतीय मूर्ति शिल्प के इतिहास में मथुरा का स्थान महत्त्वपूर्ण है। कुषाण काल से मथुरा विद्यालय कला क्षेत्र के उच्चतम शिखर पर था। सबसे विशिष्ट कार्य जो इस काल के दौरान किया गया वह बुद्ध का सुनिचित मानक प्रतीक था। मथुरा के कलाकार गंधार कला में निर्मित बुद्ध के चित्रों से प्रभावित थे। जैन तीर्थंकरों और हिन्दू चित्रों का अभिलेख भी मथुरा में पाया जाता है। उनके प्रभावाशाली नमूने आज भी मथुरा, लखनऊ, वाराणसी, इलाहाबाद में उपस्थित हैं। इतिहास पर दृष्टि डालें तो स्पष्ट हो जाता है कि मधु नामक दैत्य ने जब मथुरा का निर्माण किया तो निश्चय ही यह नगरी बहुत सुन्दर और भव्य रही होगी। शत्रुघ्न के आक्रमण के समय इसका विध्वंस भी बहुत हुआ और वाल्मीकि रामायण तथा रघुवंश, दोनों के प्रसंगों से इसकी पुष्टि होती है कि उसने नगर का नवीनीकरण किया। लगभग पहली सहस्राब्दी से पाँचवीं शती ई० पूर्व के बीच के मृत्पात्रों पर काली रेखाएँ बनी मिलती हैं जो ब्रज संस्कृति की प्रागैतिहासिक कलाप्रियता का आभास देती है। उसके बाद मृण्मूर्तियाँ हैं जिनका आकार तो साधारण लोक शैली का है परन्तु स्वतंत्र रूप से चिपका कर लगाये आभूषण सुरुचि के परिचायक हैं। मौर्यकालीन मृण्मूर्तियों का केशपाश अलंकृत और सुव्यवस्थित है। सलेटी रंग की मातृदेवियों की मिट्टी की प्राचीन मूर्तियों के लिए मथुरा की पुरातात्विक प्रसिद्ध है। लगभग तीसरी शती के अन्त तक यक्ष और यक्षियों की प्रस्तर मूर्तियाँ उपलब्ध होने लगती हैं। मथुरा में लाल रंग के पत्थरों से बुद्ध और बोद्धिसत्व की सुन्दर मूर्तियाँ बनायी गयीं। महावीर की मूर्तियाँ भी बनीं। मथुरा कला में अनेक बेदिकास्तम्भ भी बनाये गये। यक्ष यक्षिणियों और धन के देवता कुबेर की मूर्तियाँ भी मथुरा से मिली हैं। इसका उदाहरण मथुरा से कनिष्क की बिना सिर की एक खड़ी प्रतिमा है। मथुरा शैली की सबसे सुन्दर मूर्तियाँ पक्षियों की हैं जो एक स्तूप की वेष्टणी पर खुदी खुई थी। इन मूर्तियों की कामुकतापूर्ण भावभंगिमा सिन्धु में उपलब्ध नर्तकी की प्रतिमा से बहुत कुछ मिलती जुलती है। .

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मनु ऋषि

मनु ऋषि एक भारतीय फिल्म अभिनेता, गीतकार, पटकथा और संवाद लेखक है। इन्होंने दिल्ली में अरविन्द गौड़ के निर्देशन में ६ वर्ष तक नाटकों मंे काम किया। मनु ऋषि को ओए लक्की! लक्की ओए! फिल्म के लिये वर्ष २००९ का फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ संवाद लेखन पुरस्कार मिला है। .

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मन्नू भंडारी

मन्नू भंडारी मन्नू भंडारी (जन्म ३ अप्रैल १९३१) हिन्दी की सुप्रसिद्ध कहानीकार हैं। मध्य प्रदेश में मंदसौर जिले के भानपुरा गाँव में जन्मी मन्नू का बचपन का नाम महेंद्र कुमारी था। लेखन के लिए उन्होंने मन्नू नाम का चुनाव किया। उन्होंने एम ए तक शिक्षा पाई और वर्षों तक दिल्ली के मीरांडा हाउस में अध्यापिका रहीं। धर्मयुग में धारावाहिक रूप से प्रकाशित उपन्यास आपका बंटी से लोकप्रियता प्राप्त करने वाली मन्नू भंडारी विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन में प्रेमचंद सृजनपीठ की अध्यक्षा भी रहीं। लेखन का संस्कार उन्हें विरासत में मिला। उनके पिता सुख सम्पतराय भी जाने माने लेखक थे। .

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मनोविकार

मनोविकार (Mental disorder) किसी व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य की वह स्थिति है जिसे किसी स्वस्थ व्यक्ति से तुलना करने पर 'सामान्य' नहीं कहा जाता। स्वस्थ व्यक्तियों की तुलना में मनोरोगों से ग्रस्त व्यक्तियों का व्यवहार असामान्‍य अथवा दुरनुकूली (मैल एडेप्टिव) निर्धारित किया जाता है और जिसमें महत्‍वपूर्ण व्‍यथा अथवा असमर्थता अन्‍तर्ग्रस्‍त होती है। इन्हें मनोरोग, मानसिक रोग, मानसिक बीमारी अथवा मानसिक विकार भी कहते हैं। मनोरोग मस्तिष्क में रासायनिक असंतुलन की वजह से पैदा होते हैं तथा इनके उपचार के लिए मनोरोग चिकित्सा की जरूरत होती है। .

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मराठी विकिपीडिया

मराठी विकिपीडिया विकिपीडिया का मराठी भाषा का संस्करण है। २८ मई, २००९ तक इस विकिपीडिया पर लेखों की संख्या २३,१७६+ है और यह विकिपीडिया का ५७वां सबसे बड़ा संस्करण है।.

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मरिन ले पेन

मरिन ले पेन (फ़्रांसिसी: Marine Le Pen, जन्म ५ अगस्त १९६८) से फ्रांस के राजनीतिज्ञ हैं। वह ज़्याँ-मेरी ले पेन की कनिष्ठ पुत्री हैं। .

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मरूद्भिद

एक मरूद्भिद् वे पौधे जो शुष्क स्थानों में उगते हैं, मरूद्भिद कहलाते हैं। ये पौधे जिन स्थानों पर उगते हैं, वहाँ पर प्राप्य जल या तो बहुत कम होता है या इस प्रकार का होता है कि पौधे उसे प्रयोग नहीं करते। नागफनी, यूफोर्बिया, एकासिया, कैजुराइना आदि कैक्टस वर्गीय शुष्क स्थानों एवं रेगिस्तानों में उगने वाले पौधे मरूद्भिदों के सुन्दर उदाहरण हैं। ये पौधे प्रायः आकार में छोटे एवं बहुवर्षीय होते हैं। कैक्टस की कुछ प्रजातियाँ तो ८० वर्षों तक जीवित रहती हैं। शुष्क स्थानों में पाये जाने वाले ये पौधे विपरीत परिस्थितियों से बचने के लिए अनुकूलित होते हैं। इनकी जड़े जल की खोज में अति विकसित एवं शाखान्वित हो जाती हैं। जड़ों पर मूलरोम एवं मूलटोप पाये जाते हैं जिससे इनकी जल-अवशोषण क्षमता अधिक होती है। तने शाखान्वित तथा छोटे होते हैं जिन पर रोम व क्यूटिकिल की परत रहती है जससे जल का क्षय कम से कम होता है। नागफनी, कोकोलोबा व सतावर के पौधों में तने मांसल या पत्ती के सदृश्य होकर जल का संचय करते हैं। वाष्पोत्सर्जन की दर को कम करने के लिए पत्तियाँ छोटी होती हैं या शल्कों में रूपान्तर हो जाती हैं, कुछ मरूद्भिद जैसे करोल में तो पत्तियाँ पूर्णरूप से अनुपस्थित होती हैं। मरूद्भिदों में आन्तरिक संवहन के लिए आवश्यक जाइलम एवं फ्लोएम ऊतक सुविकसित होते हैं। स्टोमेटा की संख्या कम होती है तथा ये रोमयुक्त और अन्दर की ओर धँसे होते हैं। .

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मलय विकिपीडिया

मलय विकिपीडिया विकिपीडिया का मलय भाषा का संस्करण है। यह २६ अक्टूबर २००२ में आरंभ किया गया था और २६ मई, २००९ तक इस पर लेखों की कुल संख्या ३९,०००+ है। यह विकिपीडिया का पैंतालीसवां सबसे बड़ा संस्करण है।.

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मस्तिष्क

मानव मस्तिष्क मस्तिष्क जन्तुओं के केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र का नियंत्रण केन्द्र है। यह उनके आचरणों का नियमन एंव नियंत्रण करता है। स्तनधारी प्राणियों में मस्तिष्क सिर में स्थित होता है तथा खोपड़ी द्वारा सुरक्षित रहता है। यह मुख्य ज्ञानेन्द्रियों, आँख, नाक, जीभ और कान से जुड़ा हुआ, उनके करीब ही स्थित होता है। मस्तिष्क सभी रीढ़धारी प्राणियों में होता है परंतु अमेरूदण्डी प्राणियों में यह केन्द्रीय मस्तिष्क या स्वतंत्र गैंगलिया के रूप में होता है। कुछ जीवों जैसे निडारिया एंव तारा मछली में यह केन्द्रीभूत न होकर शरीर में यत्र तत्र फैला रहता है, जबकि कुछ प्राणियों जैसे स्पंज में तो मस्तिष्क होता ही नही है। उच्च श्रेणी के प्राणियों जैसे मानव में मस्तिष्क अत्यंत जटिल होते हैं। मानव मस्तिष्क में लगभग १ अरब (१,००,००,००,०००) तंत्रिका कोशिकाएं होती है, जिनमें से प्रत्येक अन्य तंत्रिका कोशिकाओं से १० हजार (१०,०००) से भी अधिक संयोग स्थापित करती हैं। मस्तिष्क सबसे जटिल अंग है। मस्तिष्क के द्वारा शरीर के विभिन्न अंगो के कार्यों का नियंत्रण एवं नियमन होता है। अतः मस्तिष्क को शरीर का मालिक अंग कहते हैं। इसका मुख्य कार्य ज्ञान, बुद्धि, तर्कशक्ति, स्मरण, विचार निर्णय, व्यक्तित्व आदि का नियंत्रण एवं नियमन करना है। तंत्रिका विज्ञान का क्षेत्र पूरे विश्व में बहुत तेजी से विकसित हो रहा है। बडे-बड़े तंत्रिकीय रोगों से निपटने के लिए आण्विक, कोशिकीय, आनुवंशिक एवं व्यवहारिक स्तरों पर मस्तिष्क की क्रिया के संदर्भ में समग्र क्षेत्र पर विचार करने की आवश्यकता को पूरी तरह महसूस किया गया है। एक नये अध्ययन में निष्कर्ष निकाला गया है कि मस्तिष्क के आकार से व्यक्तित्व की झलक मिल सकती है। वास्तव में बच्चों का जन्म एक अलग व्यक्तित्व के रूप में होता है और जैसे जैसे उनके मस्तिष्क का विकास होता है उसके अनुरुप उनका व्यक्तित्व भी तैयार होता है। मस्तिष्क (Brain), खोपड़ी (Skull) में स्थित है। यह चेतना (consciousness) और स्मृति (memory) का स्थान है। सभी ज्ञानेंद्रियों - नेत्र, कर्ण, नासा, जिह्रा तथा त्वचा - से आवेग यहीं पर आते हैं, जिनको समझना अर्थात् ज्ञान प्राप्त करना मस्तिष्क का काम्र है। पेशियों के संकुचन से गति करवाने के लिये आवेगों को तंत्रिकासूत्रों द्वारा भेजने तथा उन क्रियाओं का नियमन करने के मुख्य केंद्र मस्तिष्क में हैं, यद्यपि ये क्रियाएँ मेरूरज्जु में स्थित भिन्न केन्द्रो से होती रहती हैं। अनुभव से प्राप्त हुए ज्ञान को सग्रह करने, विचारने तथा विचार करके निष्कर्ष निकालने का काम भी इसी अंग का है। .

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महात्मा रामचन्द्र वीर

रामचन्द्र वीर (जन्म १९०९ - मृत्यु २००९) एक लेखक, कवि तथा वक्ता और धार्मिक नेता थे। उन्होंने 'विजय पताका', 'हमारी गोमाता', 'वीर रामायण' (महाकाव्य), 'हमारा स्वास्थ्य' जैसी कई पुस्तकें लिखीं। भारत के स्वतन्त्रता आंदोलन, गोरक्षा तथा अन्य विविध आन्दोलनों में कई बार जेल गये। विराट नगर के पंचखंड पीठाधीश्वर आचार्य धर्मेन्द्र उनके पुत्र हैं। .

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महाराज सिंह कॉलेज, सहारनपुर

महाराज सिंह कॉलेज, सहारनपुर, सहारनपुर उत्तर प्रदेश का एक प्रमुख स्नातकोत्तर महाविद्यालय है जिसका यह नाम इसके संस्थापक बाबू महाराज सिंह, एडवोकेट के नाम पर दिया गया है जिन्होंने वर्ष १९५७ में सहारनपुर में इस कॉलेज की स्थापना की। विज्ञान विषय की विभिन्न शाखाओं - यथा - भौतिकी, रसायनशास्त्र, जन्तु विज्ञान, जीव विज्ञान, पादप विज्ञान आदि की स्नातकोत्तर कक्षाओं के अतिरिक्त यहां पर हिन्दी, अंग्रेज़ी, राजनीति शास्त्र आदि विषय की भी कक्षायें चलती हैं। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ के आधीन चल रहे महाराज सिंह कॉलेज, सहारनपुर में लगभग ४००० छात्र एवं छात्रायें अध्ययनरत हैं। .

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माचू पिच्चू

माचू पिच्चू (क्वेशुआ: Machu Pikchu, 'पुरानी चोटी") दक्षिण अमेरिकी देश पेरू मे स्थित एक कोलम्बस-पूर्व युग, इंका सभ्यता से संबंधित ऐतिहासिक स्थल है। यह समुद्र तल से 2,430 मीटर की ऊँचाई पर उरुबाम्बा घाटी, जिसमे से उरुबाम्बा नदी बहती है, के ऊपर एक पहाड़ पर स्थित है। यह कुज़्को से 80 किलोमीटर (50 मील) उत्तर पश्चिम में स्थित है। इसे अक्सर “इंकाओं का खोया शहर “ भी कहा जाता है। माचू पिच्चू इंका साम्राज्य के सबसे परिचित प्रतीकों में से एक है। 7 जुलाई 2007 को घोषित विश्व के सात नए आश्चर्यों में माचू पिच्चू भी एक है। 1430 ई. के आसपास इंकाओं ने इसका निर्माण अपने शासकों के आधिकारिक स्थल के रूप में शुरू किया था, लेकिन इसके लगभग सौ साल बाद, जब इंकाओं पर स्पेनियों ने विजय प्राप्त कर ली तो इसे यूँ ही छोड़ दिया गया। हालांकि स्थानीय लोग इसे शुरु से जानते थे पर सारे विश्व को इससे परिचित कराने का श्रेय हीरम बिंघम को जाता है जो एक अमेरिकी इतिहासकार थे और उन्होने इसकी खोज 1911 में की थी, तब से माचू पिच्चू एक महत्वपूर्ण पर्यटन आकर्षण बन गया है। माचू पिच्चू को 1981 में पेरू का एक ऐतिहासिक देवालय घोषित किया गया और 1983 में इसे यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल की दर्जा दिया गया। क्योंकि इसे स्पेनियों ने इंकाओं पर विजय प्राप्त करने के बाद भी नहीं लूटा था, इसलिए इस स्थल का एक सांस्कृतिक स्थल के रूप में विशेष महत्व है और इसे एक पवित्र स्थान भी माना जाता है। माचू पिच्चू को इंकाओं की पुरातन शैली में बनाया था जिसमें पॉलिश किये हुए पत्थरों का प्रयोग हुआ था। इसके प्राथमिक भवनों में इंतीहुआताना (सूर्य का मंदिर) और तीन खिड़कियों वाला कक्ष प्रमुख हैं। पुरातत्वविदों के अनुसार यह भवन माचू पिच्चू के पवित्र जिले में स्थित हैं। सितम्बर 2007, पेरू और येल विश्वविद्यालय के बीच एक सहमति बनी की वो सभी शिल्प जो हीरम बिंघम माचू पिच्चू की खोज के बाद अपने साथ ले गये थे वो पेरू को लौटा दिये जायेंगे। .

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मातृ दिवस

आधुनिक मातृ दिवस का अवकाश ग्राफटन वेस्ट वर्जिनिया में एना जार्विस के द्वारा समस्त माताओं तथा मातृत्व के लिए खास तौर पर पारिवारिक एवं उनके आपसी संबंधों को सम्मान देने के लिए आरम्भ किया गया था। यह दिवस अब दुनिया के हर कोने में अलग-अलग दिनों में मनाया जाता हैं। जैसे कि पिताओं को सम्मान देने के लिए पितृ दिवस की छुट्टी मनाई जाती हैं। यह छुट्टी अंततः इतनी व्यवसायिक बन गई कि इसकी संस्थापक, एना जार्विस, तथा कई लोग इसे एक "होलमार्क होलीडे", अर्थात् एक प्रचुर वाणिज्यिक प्रयोजन के रूप में समझने लगे। एना ने जिस छुट्टी के निर्माण में सहयोग किया उसी का विरोध करते हुए इसे समाप्त करना चाहा। .

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माधवराव सप्रे

माधवराव सप्रे माधवराव सप्रे (जून १८७१ - २६ अप्रैल १९२६) हिन्दी के आरंभिक कहानीकारों में से एक, सुप्रसिद्ध अनुवादक एवं हिन्दी के आरंभिक संपादकों में प्रमुख स्थान रखने वाले हैं। वे हिन्दी के प्रथम कहानी लेखक के रूप में जाने जाते हैं। .

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मार्डी फ़िश

मार्डी सिम्पसन फिश (जन्म 9 दिसम्बर 1981) एक अमरीकी टेनिस खिलाड़ी हैं और ओलम्पिक रजत पदक विजेता हैं। वह हार्डकोर्ट के माहिर खिलाड़ी हैं और 2000 के दशक में उभर कर आने वाले कई अमरिकी खिलाड़ियों में से एक हैं। .

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मालाबार

मालाबार केरल राज्य में अवस्थित पश्चिमी घाट और अरब सागर के बीच भारतीय प्रायद्वीप के पश्चिम तट के समानांतर एक संकीर्ण तटवर्ती क्षेत्र है। जब स्‍वतंत्र भारत में छोटी रियासतों का विलय हुआ तब त्रावनकोर तथा कोचीन रियासतों को मिलाकर १ जुलाई, १९४९ को त्रावनकोर-कोचीन राज्य बना दिया गया, किंतु मालाबार मद्रास प्रांत के अधीन रहा। राज्य पुनर्गठन अधिनियम, १९५६ के तहत त्रावनकोर-कोचीन राज्य तथा मालाबार को मिलाकर १ नवंबर, १९५६ को केरल राज्य बनाया गया। केरल के अधिकांश द्वीप जो त्रावणकोर-मालाबार राज्य में आते थे, अब एर्नाकुलम जिले में आते हैं। मालाबार क्षेत्र के अंतर्गत पर्वतों का अत्यधिक आर्द्र क्षेत्र आता है। वनीय वनस्पति में प्रचुर होने के साथ-साथ इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण वाणिज्यिक फसलों, जैसे नारियल, सुपारी, काली मिर्च, कॉफी और चाय, रबड़ तथा काजू का उत्‍पादन किया जाता है। मालाबार क्षेत्र केरल का बड़ा व्यावसायिक क्षेत्र माना जाता है। यहाँ उच्चकोटि के कागज का भी निर्माण होता है। यहां पर एशिया की सबसे मशहूर प्लाईवुड फैक्टरी भी स्थित है। इसके अलावा यहां के निकटवर्ती स्थानों पर फूलों के उत्पादन तथा उनके निर्यात के प्रमुख केंद्र भी स्थित हैं। हस्तकला की वस्तुओं तथा बीड़ी आदि का उत्पादन भी मालाबार में काफी होता है। मालाबार तट पर बसे हुए कण्णूर नगर में पयंबलम, मुझापूलंगड तथा मियामी जैसे सुंदर बीच हैं जो अभी पर्यटकों में अधिक प्रसिद्ध नहीं हैं, अतएव शांत वातावरण बनाए हुए हैं। यहां पायथल मलै नामक आकर्षक पर्वतीय स्थल भी है। निकट ही यहां का सर्प उद्यान है जहां पर अनेक प्रकार के सांपों का प्रदर्शन किया गया है। इस स्थान पर सर्पदंश चिकित्सा केंद्र भी बना है। मालाबार में मलावलतम नदी के किनारे पर परासनी कडायू का प्रसिद्ध मंदिर है, जो केवल हिंदू ही नहीं बल्कि अन्य सभी जातियों के लिए भी समान रूप से खुला है। यह मुथप्पन भगवान का मंदिर माना जाता है जो शिकारियों के देवता हैं। इसीलिए इस मंदिर में कांसे के बने हुए कुत्तों की मूर्तियां हैं। यहां ताड़ी तथा मांस का प्रसाद मिलता है तथा यहां के पुजारी दलित वर्ग के होते हैं। केरल की अधिकांश मुस्लिम आबादी, जिन्हें मप्पिला कहते हैं इसी क्षेत्र में निवास करती हैं। मालाबार के हिन्दुओं में गुड़ी पड़वा उत्सव का विशेष महत्त्व है। मालाबार क्षेत्र के प्राकृतिक सौंदर्य, संस्कृति तथा प्रदूषण रहित वातावरण को देख कर मन खुश हो जाता है। वास्को डा गामा की यात्रा के ५०० वर्ष पूरे होने के कारण यह स्थान विश्व प्रसिद्धि प्राप्त कर चुका है। मालाबार में कालीकट से १६ कि॰मी॰ दूर कापड़ बीच है, जहां २१ मई, १४९८ को वास्को दा गामा ने पहला कदम भारत की भूमि पर रखा था। प्रभासाक्षी पर .

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मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, जयपुर

मालवीय राष्ट्रीय तकनीकी संस्थान, जयपुर, राजस्थान की स्थापना १९६३ में की गई थी और २६ जून २००२ को इसे मालवीय राष्‍ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान का दर्जा दिया गया। यह संस्थान नौ अवर स्नातक पाठयक्रम तथा १० पूर्णकालिक एवं पांच अंशकालिक स्नातकोत्तर पाठयक्रमों का संचालन करता है। यह संस्थान सिविल इंजीनियरी, रसायन इंजीनियरी, विद्युत इंजीनियरी, इलैक्ट्रॉनिकी तथा संचार इंजीनियरी, सूचना प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी इंजीनियरी तथा धातुकर्मीय इंजीनियरी में चार वर्षीय अवर स्नातक पाठयक्रमों और एक पांच वर्षीय बी.

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माल्टी विकिपीडिया

माल्टी विकिपीडिया विकिपीडिया का माल्टी भाषा का संस्करण है। यह १० सितंबर २००४ में आरंभ किया गया था। २७ मई, २००९ तक इस विकिपीडिया पर लेखों की संख्या २,३८५+ है और यह विकिपीडिया का १४४वां सबसे बड़ा संस्करण है।.

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माओरी विकिपीडिया

माओरी विकिपीडिया विकिपीडिया का माओरी भाषा का संस्करण है। यह नवंबर २००३ में आरंभ किया गया था। २७ मई, २००९ तक इस विकिपीडिया पर लेखों की संख्या ६,४९३+ है और यह विकिपीडिया का ९९वां सबसे बड़ा संस्करण है।.

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माइकल डगलस

माइकल कर्क डगलस (जन्म 25 सितंबर 1944) मुख्यतः फिल्मों और टेलीविजिन के एक अमरीकी अभिनेता और निर्माता हैं। उन्हें एक एमी, एक गोल्डन ग्लोब और दो एकेडमी अवार्ड्स, पहला 1975 की सर्वश्रेष्ठ फिल्म वन फ़्लियु ओवर द कुकूज़ नेस्ट के निर्माता के रूप में और 1987 में वॉल स्ट्रीट में उनकी भूमिका के लिये सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के रूप में, से सम्मानित किया गया था। 2009 में डगलस ने AFI जीवन उपलब्धि पुरस्कार प्राप्त किया। .

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माइकल रुदअस

माइकल रुदअस - Trendy महोत्सव, Sopot २००९ माइकल रुदअस (१४ अगस्त १९८१, वार्सज़ावा -): पॉलिश पॉप गायक। माइकल राग का अध्ययन भारत में। अनूप मिश्र अपने शिक्षक था। .

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माइकल जैक्सन

माइकल जोसेफ जैक्सन (२९ अगस्त, १९५८ - २५ जून, २००९), लोकप्रिय अमरीकी पॉप गायक थे, जिन्हें किंग ऑफ पॉप भी कहा जाता है। माइकल, जैक्सन दंपति की सातवीं संतान थे, जिन्होंने मात्र ग्यारह वर्ष की आयु में ही व्यवसायिक रूप से गायकी आरंभ कर दी थी। उस समय वे जैक्सन-५ समूह के सदस्य हुआ करते थे। १९७१ में उन्होंने अपना व्यक्तिगत कैरियर प्रारंभ किया, हालाँकि उस समय भी वे ग्रुप के सदस्य थे। जैक्सन ने गायकी की दुनिया में शीघ्र ही सिक्का जमा लिया और किंग ऑफ पॉप के नाम से प्रसिद्ध हो गए। उनके सबसे अधिक बिक्री वाले अल्बमों में, ऑफ द वाल (१९७९), बैड (१९८७), डैंजरस (१९९१) और हिस्ट्री (१९९५) प्रमुख हैं। हालाँकि १९८२ में जारी थ्रिलर उनका अब तक के सबसे अधिक बिकने वाला एल्बम माना जाता है। १९८० के प्रारंभिक वर्षों में ही जैक्सन अमेरिकी पॉप गायकी और मनोरंजन की दुनिया के सबसे लोकप्रिय सितारे बनकर उभरे थे। एमटीवी पर उनके वीडियो ने बहुत धूम मचाई। थ्रिलर ने तो वीडियो संगीत की अवधारणा ही बदल दी थी। नब्बे के दशक में ब्लैक ऑर ह्वाइट और स्क्रीम ने उन्हें अच्छी प्रसिद्धि दिलाई। मंच प्रदर्शनों के द्वारा उनकी नृत्य शैली प्रसिद्ध हो गई। वे एक चमकते सितारे बन गए। माइकल जैक्सन कई बार गिनीज बुक में स्थान प्राप्त कर चुके हैं। अब तक के सबसे सफल मनोरंजनकर्ता के १३ ग्रैमी अवार्ड जीतने वाले जैक्सन अकेले कलाकार है। २५ जून २००९ को दिल का दौरा पड़ने के कारण जैक्सन का निधन हो गया। .

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माउज़र पिस्तौल

माउज़र पिस्तौल (अंग्रेजी: Mauser C96) मूल रूप से जर्मनी में बनी एक अर्द्ध स्वचालित पिस्तौल है। इस पिस्तौल का डिजाइन जर्मनी निवासी दो माउज़र बन्धुओं ने सन् 1895 में तैयार किया था। बाद में 1896 में जर्मनी की ही एक शस्त्र निर्माता कम्पनी माउज़र ने इसे माउज़र सी-96 के नाम से बनाना शुरू किया। 1896 से 1937 तक इसका निर्माण जर्मनी में हुआ। 20वीं शताब्दी में इसकी नकल करके स्पेन और चीन में भी माउज़र पिस्तौलें बनीं। इसकी मैगज़ीन ट्रिगर के आगे लगती थी जबकि सामान्यतया सभी पिस्तौलों में मैगज़ीन ट्रिगर के पीछे और बट के अन्दर होती है। इस पिस्तौल का एक अन्य मॉडल लकड़ी के कुन्दे के साथ सन 1916 में बनाया गया। इसमें बट के साथ लकड़ी का बड़ा कुन्दा अलग से जोड़ कर किसी रायफल या बन्दूक की तरह भी प्रयोग किया जा सकता था। विंस्टन चर्चिल को यह पिस्तौल बहुत पसन्द थी। भारतीय क्रान्तिकारी रामप्रसाद 'बिस्मिल' ने महज़ 4 माउज़र पिस्तौलों के दम पर 9 अगस्त 1925 को काकोरी के पास ट्रेन रोक कर सरकारी खजाना लूट लिया था। स्पेन ने सन् 1927 में इसी की नक़ल करते हुए अस्त्र मॉडल बनाया। रेलवे गार्डों की सुरक्षा हेतु सन् 1929 में चीन ने इसकी नकल करके.45 कैलिबर का माउज़र बनाया। .

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माउंट आबू

समुद्र तल से १२२० मीटर की ऊंचाई पर स्थित आबू पर्वत (माउण्ट आबू) राजस्थान का एकमात्र पहाड़ी नगर है। यह अरावली पर्वत का सर्वोच्च शिखर, जैनियों का प्रमुख तीर्थस्थान तथा राज्य का ग्रीष्मकालीन शैलावास है। अरावली श्रेणियों के अत्यंत दक्षिण-पश्चिम छोर पर ग्रेनाइट शिलाओं के एकल पिंड के रूप में स्थित आबू पर्वत पश्चिमी बनास नदी की लगभग १० किमी संकरी घाटी द्वारा अन्य श्रेणियों से पृथक् हो जाता है। पर्वत के ऊपर तथा पार्श्व में अवस्थित ऐतिहासिक स्मारकों, धार्मिक तीर्थमंदिरों एवं कलाभवनों में शिल्प-चित्र-स्थापत्य कलाओं की स्थायी निधियाँ हैं। यहाँ की गुफा में एक पदचिहृ अंकित है जिसे लोग भृगु का पदचिह् मानते हैं। पर्वत के मध्य में संगमरमर के दो विशाल जैनमंदिर हैं। राजस्थान के सिरोही जिले में स्थित अरावली की पहाड़ियों की सबसे ऊँची चोटी पर बसे माउंट आबू की भौगोलिक स्थित और वातावरण राजस्थान के अन्य शहरों से भिन्न व मनोरम है। यह स्थान राज्य के अन्य हिस्सों की तरह गर्म नहीं है। माउंट आबू हिन्दू और जैन धर्म का प्रमुख तीर्थस्थल है। यहां का ऐतिहासिक मंदिर और प्राकृतिक खूबसूरती सैलानियों को अपनी ओर खींचती है। माउंट आबू पहले चौहान साम्राज्य का हिस्सा था। बाद में सिरोही के महाराजा ने माउंट आबू को राजपूताना मुख्यालय के लिए अंग्रेजों को पट्टे पर दे दिया। ब्रिटिश शासन के दौरान माउंट आबू मैदानी इलाकों की गर्मियों से बचने के लिए अंग्रेजों का पसंदीदा स्थान था। .

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मिथक

नरक के मिथक। नरक के मिथक प्राचीन पुराकथाओं का तत्त्व जो नवीन स्थितियों में नये अर्थ का वहन करे मिथक कहलाता है। मिथकों का जन्म ही इसलिए हुआ था कि वे प्रागैतिहासिक मनुष्य के उस आघात और आतंक को कम कर सकें, जो उसे प्रकृति से सहसा अलग होने पर महसूस हुआ था-और मिथक यह काम केवल एक तरह से ही कर सकते थे-स्वयं प्रकृति और देवताओं का मानवीकरण करके। इस अर्थ में मिथक एक ही समय में मनुष्य के अलगाव को प्रतिबिम्बित करते हैं और उस अलगाव से जो पीड़ा उत्पन्न होती है, उससे मुक्ति भी दिलाते हैं। प्रकृति से अभिन्न होने का नॉस्टाल्जिया, प्राथमिक स्मृति की कौंध, शाश्वत और चिरन्तन से पुनः जुड़ने का स्वप्न ये भावनाएँ मिथक को सम्भव बनाने में सबसे सशक्त भूमिका अदा करती हैं। सच पूछें, तो मिथक और कुछ नहीं प्रागैतिहासिक मनुष्य का एक सामूहिक स्वप्न है जो व्यक्ति के स्वप्न की तरह काफी अस्पष्ट, संगतिहीन और संश्लिष्ट भी है। कालान्तर में पुरातन अतीत की ये अस्पष्ट गूँजें, ये धुँधली आकांक्षाएँ एक तर्कसंगत प्रतीकात्मक ढाँचे में ढल जाती हैं और प्राथमिक यथार्थ की पहली, क्षणभंगुर, फिसलती यादें महाकाव्यों की सुनिश्चित संरचना में गठित होती हैं। मिथक और इतिहास के बीच महाकाव्य एक सेतु है, जो पुरातन स्वप्नों को काव्यात्मक ढाँचे में अवतरित करता है। ऐसा भी माना गया है कि जितने मिथक हैं, सब परिकल्पना पर आधारित हैं। फिर भी यह मूल्य आधारित परिकल्पना थी जिसका उद्देश्य सामाजिक व्यवस्था को मजबूत करना था। प्राचीन मिथकों की खासियत यही थी कि वह मूल्यहीन और आदर्शविहीन नहीं थे। मिथकों का जन्म समाज व्यवस्था को कायम रखने के लिए हुआ। मिथक लोक विश्वास से जन्मते हैं। पुरातनकाल में स्थापित किये गये धार्मिक मिथकों का मंतव्य स्वर्ग तथा नरक का लोभ, भय दिखाकर लोगों को विसंगतियों से दूर रखना था। मिथ और मिथक भिन्न है। मिथक असत्य नहीं है। इस शब्द का प्रयोग साहित्य से इतर झूठ या काल्पनिक कथाओं के लिए भी किया जाता है। .

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मिनोरु हारा

मिनोरु हारा को सन २००९ में भारत सरकार द्वारा साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये विदेशी हैं। .

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मिस्र के पिरामिड

गीज़ा, मिस्र के एक पिरामिड समूह का दृश्य मिस्र के पिरामिड वहां के तत्कालीन फैरो (सम्राट) गणों के लिए बनाए गए स्मारक स्थल हैं, जिनमें राजाओं के शवों को दफनाकर सुरक्षित रखा गया है। इन शवों को ममी कहा जाता है। उनके शवों के साथ खाद्यान, पेय पदार्थ, वस्त्र, गहनें, बर्तन, वाद्य यंत्र, हथियार, जानवर एवं कभी-कभी तो सेवक सेविकाओं को भी दफना दिया जाता था। भारत की तरह ही मिस्र की सभ्यता भी बहुत पुरानी है और प्राचीन सभ्यता के अवशेष वहाँ की गौरव गाथा कहते हैं। यों तो मिस्र में १३८ पिरामिड हैं और काहिरा के उपनगर गीज़ा में तीन लेकिन सामान्य विश्वास के विपरीत सिर्फ गिजा का ‘ग्रेट पिरामिड’ ही प्राचीन विश्व के सात अजूबों की सूची में है। दुनिया के सात प्राचीन आश्चर्यों में शेष यही एकमात्र ऐसा स्मारक है जिसे काल प्रवाह भी खत्म नहीं कर सका। यह पिरामिड ४५० फुट ऊंचा है। ४३ सदियों तक यह दुनिया की सबसे ऊंची संरचना रहा। १९वीं सदी में ही इसकी ऊंचाई का कीर्तिमान टूटा। इसका आधार १३ एकड़ में फैला है जो करीब १६ फुटबॉल मैदानों जितना है। यह २५ लाख चूनापत्थरों के खंडों से निर्मित है जिनमें से हर एक का वजन २ से ३० टनों के बीच है। ग्रेट पिरामिड को इतनी परिशुद्धता से बनाया गया है कि वर्तमान तकनीक ऐसी कृति को दोहरा नहीं सकती। कुछ साल पहले तक (लेसर किरणों से माप-जोख का उपकरण ईजाद होने तक) वैज्ञानिक इसकी सूक्ष्म सममिति (सिमट्रीज) का पता नहीं लगा पाये थे, प्रतिरूप बनाने की तो बात ही दूर! प्रमाण बताते हैं कि इसका निर्माण करीब २५६० वर्ष ईसा पूर्व मिस्र के शासक खुफु के चौथे वंश द्वारा अपनी कब्र के तौर पर कराया गया था। इसे बनाने में करीब २३ साल लगे। म्रिस के इस महान पिरामिड को लेकर अक्सर सवाल उठाये जाते रहे हैं कि बिना मशीनों के, बिना आधुनिक औजारों के मिस्रवासियों ने कैसे विशाल पाषाणखंडों को ४५० फीट ऊंचे पहुंचाया और इस बृहत परियोजना को महज २३ वर्षों में पूरा किया? पिरामिड मर्मज्ञ इवान हैडिंगटन ने गणना कर हिसाब लगाया कि यदि ऐसा हुआ तो इसके लिए दर्जनों श्रमिकों को साल के ३६५ दिनों में हर दिन १० घंटे के काम के दौरान हर दूसरे मिनट में एक प्रस्तर खंड को रखना होगा। क्या ऐसा संभव था? विशाल श्रमशक्ति के अलावा क्या प्राचीन मिस्रवासियों को सूक्ष्म गणितीय और खगोलीय ज्ञान रहा होगा? विशेषज्ञों के मुताबिक पिरामिड के बाहर पाषाण खंडों को इतनी कुशलता से तराशा और फिट किया गया है कि जोड़ों में एक ब्लेड भी नहीं घुसायी जा सकती। मिस्र के पिरामिडों के निर्माण में कई खगोलीय आधार भी पाये गये हैं, जैसे कि तीनों पिरामिड आ॓रियन राशि के तीन तारों की सीध में हैं। वर्षों से वैज्ञानिक इन पिरामिडों का रहस्य जानने के प्रयत्नों में लगे हैं किंतु अभी तक कोई सफलता नहीं मिली है। .

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मिस्री अरबी विकिपीडिया

मिस्री अरबी विकिपीडिया विकिपीडिया का मिस्र में बोली जाने वाली अरबी भाषा का संस्करण है। यह २४ नवंबर २००८ में आधिकारिक घोषित किया गया था और २६ मई, २००९ तक इस पर लेखों की कुल संख्या २,७५०+ है। यह विकिपीडिया का १३३वां सबसे बड़ा संस्करण है।.

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मंजुल

कार्टूनिस्ट मंजुल ने १९८९ में कार्टून बनाने के शुरुआत की.

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मआसिर तनक़ीदी रवय्ये

मआसिर तनक़ीदी रवय्ये उर्दू भाषा के विख्यात साहित्यकार अबुल कलाम क़ासमी द्वारा रचित एक समालोचनात्मक अध्ययन है जिसके लिये उन्हें सन् 2009 में उर्दू भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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मुद्रा वायदा

मुद्रा वायदा, जिसे एफएक्स फ़्यूचर (FX future) या विदेशी विनिमय (एक्सचेंज) भी कहते हैं, भविष्य में होनेवाले एक-दूसरे के साथ मुद्रा के विनिमय का एक ऐसा अनुबंध है, जो खरीदारी करने की तारीख़ पर, किसी निर्धारित तारीख़ और निर्धारित विनिमय दर (एक्सचेंज रेट) पर तय किया गया हो; विदेशी मुद्रा विनिमय व्युत्पन्न देखें.

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मुन्नालाल गर्ल्स कॉलेज, सहारनपुर

मुन्नालाल एवं जयनारायण खेमका गर्ल्स कालेज भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में स्थित सहारनपुर जिले का एक महिला विद्यालय है जिसमें स्नातकोत्तर शिक्षा तक की व्यवस्था है। इस विद्यालय की स्थापना पद्मश्री सेठ बद्री प्रसाद बाजोरिया की प्रेरणा से बृज ट्रांसपोर्ट कम्पनी, सहारनपुर के मालिक स्वर्गीय सेठ मुन्ना लाल द्वारा दान की गई एक लाख रुपये की धनराशि से हुआ था। स्थानीय जे.

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मुम्बई

भारत के पश्चिमी तट पर स्थित मुंंबई (पूर्व नाम बम्बई), भारतीय राज्य महाराष्ट्र की राजधानी है। इसकी अनुमानित जनसंख्या ३ करोड़ २९ लाख है जो देश की पहली सर्वाधिक आबादी वाली नगरी है। इसका गठन लावा निर्मित सात छोटे-छोटे द्वीपों द्वारा हुआ है एवं यह पुल द्वारा प्रमुख भू-खंड के साथ जुड़ा हुआ है। मुम्बई बन्दरगाह भारतवर्ष का सर्वश्रेष्ठ सामुद्रिक बन्दरगाह है। मुम्बई का तट कटा-फटा है जिसके कारण इसका पोताश्रय प्राकृतिक एवं सुरक्षित है। यूरोप, अमेरिका, अफ़्रीका आदि पश्चिमी देशों से जलमार्ग या वायुमार्ग से आनेवाले जहाज यात्री एवं पर्यटक सर्वप्रथम मुम्बई ही आते हैं इसलिए मुम्बई को भारत का प्रवेशद्वार कहा जाता है। मुम्बई भारत का सर्ववृहत्तम वाणिज्यिक केन्द्र है। जिसकी भारत के सकल घरेलू उत्पाद में 5% की भागीदारी है। यह सम्पूर्ण भारत के औद्योगिक उत्पाद का 25%, नौवहन व्यापार का 40%, एवं भारतीय अर्थ व्यवस्था के पूंजी लेनदेन का 70% भागीदार है। मुंबई विश्व के सर्वोच्च दस वाणिज्यिक केन्द्रों में से एक है। भारत के अधिकांश बैंक एवं सौदागरी कार्यालयों के प्रमुख कार्यालय एवं कई महत्वपूर्ण आर्थिक संस्थान जैसे भारतीय रिज़र्व बैंक, बम्बई स्टॉक एक्स्चेंज, नेशनल स्टऑक एक्स्चेंज एवं अनेक भारतीय कम्पनियों के निगमित मुख्यालय तथा बहुराष्ट्रीय कंपनियां मुम्बई में अवस्थित हैं। इसलिए इसे भारत की आर्थिक राजधानी भी कहते हैं। नगर में भारत का हिन्दी चलचित्र एवं दूरदर्शन उद्योग भी है, जो बॉलीवुड नाम से प्रसिद्ध है। मुंबई की व्यवसायिक अपॊर्ट्युनिटी, व उच्च जीवन स्तर पूरे भारतवर्ष भर के लोगों को आकर्षित करती है, जिसके कारण यह नगर विभिन्न समाजों व संस्कृतियों का मिश्रण बन गया है। मुंबई पत्तन भारत के लगभग आधे समुद्री माल की आवाजाही करता है। .

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मुहम्मद शाह, सैयद

मुहम्मद शाह, सय्यद सय्यद वंश का तीसरा शासक था। जिनका शासन १४३४-४४ तक रहा। इनका शासन काल इसलिए भी जाना जाता है कि उस दौरान सरहिंद के अफगान सूबेदार बहलोल लोधी ने पंजाब के बाहर अपने प्रभाव को बढ़ा लिया था। वह लगभग स्वतंत्र हो गया था। इसी दौरान मुहम्मद शाह का पुत्र और उनका उत्तराधिकारी अलाउद्दीन आलम शाह दिल्ली के शासन का भार अपने एक साले और शहर पुलिस अधीक्षक का भार दूसरे साले पर छोड़कर बदायूं चला गया था। उसके जाने के बाद दोनों ही अलग-थलग पड़ गए और १४५१ में बहलोल लोधी ने सिंहासन पर कब्जा कर लिया।, अभिगमन तिथि ८ अगस्त, २००९ .

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मुग़ल उद्यान, दिल्ली

भारत की राजधानी नई दिल्ली में राष्ट्रपति भवन के पीछे के भाग में स्थित मुगल उद्यान अपने किस्म का अकेला ऐसा उद्यान है, जहां विश्वभर के रंग-बिरंगे फूलों की छटा देखने को मिलती है। यहां विविध प्रकार के फूलों और फलों के पेड़ों का संग्रह है। भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ॰राजेंद्र प्रसाद ने इस उद्यान को जन साधारण के दर्शन हेतु खुलवाया था। इस उद्यान को देखने वालों की संख्या प्रतिवर्ष बढ़ती जा रही है। २३ जनवरी,०९ को यहां ९५,५३७ दर्शक आए थे। इसकी अभिकल्पना ब्रिटिश वास्तुकार सर एडविन लुटियंस ने लेडी हार्डिग के आदेश पर की थी। १३ एकड़ में फैले इस उद्यान में ब्रिटिश शैली के संग-संग औपचारिक मुगल शैली का मिश्रण दिखाई देता है।। भारत के बारे में जानें। राष्‍ट्रीय पोर्टल विषयवस्‍तु प्रबंधन दल यह उद्यान चार भागों में बंटा हुआ है और चारों एक दूसरे से भिन्न एवं अनुपम हैं। यहां कई छोटे-बड़े बगीचे हैं जैसे पर्ल गार्डन, बटरफ्लाई गार्डन और सकरुलर गार्डन, आदि। बटरफ्लाई गार्डन में फूलों के पौधों की बहुत सी पंक्तियां लगी हुई हैं। यह माना जाता है कि तितलियों को देखने के लिए यह जगह सर्वोत्तम है। मुगल उद्यान में अनेक प्रकार के फूल देखे जा सकते हैं जिसमें गुलाब, गेंदा, स्वीट विलियम आदि शामिल हैं। इस बाग में फूलों के साथ-साथ जड़ी-बूटियां और औषधियां भी उगाई जाती हैं। इनके लिये एक अलग भाग बना हुआ है, जिसे औषधि उद्यान कहते हैं। मुगल उद्यान वसंत ऋतु में एक माह के लिये पर्यटकों के लिए खुलता है। .

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मुंबई की संस्कृति

बंबई एशियाटिक सोसाइटी शहर की पुरातनतम पुर्तकालयों में से एक है। मुंबई की संस्कृति परंपरागत उत्सवों, खानपान, संगीत, नृत्य और रंगमंच का सम्मिश्रण है। इस शहर में विश्व की अन्य राजधानियों की अपेक्षा बहुभाषी और बहुआयामी जीवनशैली देखने को मिलती है, जिसमें विस्तृत खानपान, मनोरंजन और रात्रि की रौनक भी शामिल है। मुंबई के इतिहास में यह मुख्यतः एक प्रधान व्यापारिक केन्द्र रहा है। इस कारण विभिन्न क्षेत्रों के लोग यहां आते रहे, जिससे बहुत सी संस्कृतियां, धर्म, आदि यहां एक साथ मिलजुलकर रहते हैं। मुंबई भारतीय चलचित्र का जन्मस्थान है।—दादा साहेब फाल्के ने यहां मूक चलचित्र के द्वारा इस उद्योग की स्थापना की थी। इसके बाद ही यहां मराठी चलचित्र का भी श्रीगणेश हुआ था। तब आरंभिक बीसवीं शताब्दी में यहां सबसे पुरानी फिल्म प्रसारित हुयी थी। मुंबई में बड़ी संख्या में सिनेमा हॉल भी हैं, जो हिन्दी, मराठी और अंग्रेज़ी फिल्में दिखाते हैं। विश्व में सबसे बड़ा IMAX डोम रंगमंच भी मुंबई में वडाला में ही स्थित है। मुंबई अंतर्राष्ट्रीय फिल्म उत्सव और फिल्मफेयर पुरस्कार की वितरण कार्यक्रम सभा मुंबाई में ही आयोजित होती हैं। हालांकि मुंबई के ब्रिटिश काल में स्थापित अधिकांश रंगमंच समूह १९५० के बाद भंग हो चुके हैं, फिर भी मुंबई में एक समृद्ध रंगमंच संस्कृति विकसित हुयी हुई है। ये मराठी और अंग्रेज़ी, तीनों भाषाओं के अलावा अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में भी विकसित है। गणेश चतुर्थी, मुंबई का सबसे अधिक हर्षोल्लास से मनाया जाने वाला उत्सव यहां कला-प्रेमियों की कमी भी नहीं है। अनेक निजी व्यावसायिक एवं सरकारी कला-दीर्घाएं खुली हुई हैं। इनमें जहांगीर कला दीर्घा और राष्ट्रीय आधुनिक कला दीर्घा प्रमुख हैं। १८३३ में बनी बंबई एशियाटिक सोसाइटी में शहर का पुरातनतम पुस्तकालय स्थित है। छत्रपति शिवाजी महाराज वास्तु संग्रहालय (पूर्व प्रिंस ऑफ वेल्स म्यूज़ियम) दक्षिण मुंबई का प्रसिद्ध संग्रहालय है, जहां भारतीय इतिहास के अनेक संग्रह सुरक्षित हैं। मुंबई के चिड़ियाघर का नाम जीजामाता उद्यान है (पूर्व नाम: विक्टोरिया गार्डन्स), जिसमें एक हरा भरा उद्यान भी है। नगर की साहित्य में संपन्नता को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति तब मिली जब सल्मान रश्दी और अरविंद अडिग को बुकर सम्मान मिले थे। यही के निवासी रुडयार्ड किपलिंग को १९०७ में नोबल पुरस्कार भी मिला था। मराठी साहित्य भी समय की गति क साथ साथ आधुनिक हो चुका है। यह मुंबई के लेखकों जैसे मोहन आप्टे, अनंत काणेकर और बाल गंगाधर तिलक के कार्यों में सदा दृष्टिगोचर रहा है। इसको वार्षिक साहित्य अकादमी पुरस्कार से और प्रोत्साहन मिला है। एलीफेंटा की गुफाएं विश्व धरोहर स्थ घोषित हैं। मुंबई शहर की इमारतों में झलक्ता स्थापत्य गोथिक, इंडो रेनेनिक, आर्ट डेको और अन्य समकालीन स्थापत्य शैलियों का संगम है। ब्रिटिश काल की अधिकांश इमारतें, जैसे विक्टोरिया टर्मिनस और बंबई विश्वविद्यालय, गोथिक शैली में निर्मित हैं। इनके वास्तु घटकों में यूरोपीय प्रभाव साफ दिखाई देता है, जैसे जर्मन गेबल, डच शैली की छतें, स्विस शैली में काष्ठ कला, रोमन मेहराब साथ ही परंपरागत भारतीय घटक भी दिखते हैं। कुछ इंडो सेरेनिक शैली की इमारतें भी हैं, जैसे गेटवे ऑफ इंडिया। आर्ट डेको शैली के निर्माण मैरीन ड्राइव और ओवल मैदान के किनारे दिखाई देते हैं। मुंबई में मायामी के बाद विश्व में सबसे अधिक आर्ट डेको शैली की इमारतें मिलती हैं। नये उपनगरीय क्षेत्रों में आधुनिक इमारतें अधिक दिखती हैं। मुंबई में अब तक भारत में सबसे अधिक गगनचुम्बी इमारतें हैं। इनमें ९५६ बनी हुई हैं और २७२ निर्माणाधीन हैं। (२००९ के अनुसार) १९९५ में स्थापित, मुंबई धरोहर संरक्षण समिति (एम.एच.सी.सी) शहर में स्थित धरोहर स्थलों के संरक्षण का ध्यान रखती है। मुंबई में दो यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल हैं – छत्रपति शिवाजी टर्मिनस और एलीफेंटा की गुफाएं शहर के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में नरीमन पाइंट, गिरगौम चौपाटी, जूहू बीच और मैरीन ड्राइव आते हैं। एसेल वर्ल्ड यहां का थीम पार्क है, जो गोरई बीच के निकट स्थित है। यहीं एशिया का सबसे बड़ा थीम वाटर पार्क, वॉटर किंगडम भी है। मुंबई के निवासी भारतीय त्यौहार मनाने के साथ-साथ अन्य त्यौहार भी मनाते हैं। दिवाली, होली, ईद, क्रिसमस, नवरात्रि, दशहरा, दुर्गा पूजा, महाशिवरात्रि, मुहर्रम आदि प्रमुख त्यौहार हैं। इनके अलावा गणेश चतुर्थी और जन्माष्टमी कुछ अधिक धूम-धाम के संग मनाये जाते हैं। गणेश-उत्सव में शहर में जगह जगह बहुत विशाल एवं भव्य पंडाल लगाये जाते हैं, जिनमें भगवान गणपति की विशाल मूर्तियों की स्थापना की जाती है। ये मूर्तियां दस दिन बाद अनंत चौदस के दिन सागर में विसर्जित कर दी जाती हैं। जन्माष्टमी के दिन सभी मुहल्लों में समितियों द्वारा बहुत ऊंचा माखान का मटका बांधा जाता है। इसे मुहल्ले के बच्चे और लड़के मुलकर जुगत लगाकर फोड़ते हैं। काला घोड़ा कला उत्सव कला की एक प्रदर्शनी होती है, जिसमें विभिन्न कला-क्षेत्रों जैसे संगीत, नृत्य, रंगमंच और चलचित्र आदि के क्षेत्र से कार्यों का प्रदर्शन होता है। सप्ताह भर लंबा बांद्रा उत्सव स्थानीय लोगों द्वारा मनाया जाता है। बाणागंगा उत्सव दो-दिवसीय वार्षिक संगीत उत्सव होता है, जो जनवरी माह में आयोजित होता है। ये उत्सव महाराष्ट्र पर्यटन विकास निगम (एम.टी.डी.सी) द्वारा ऐतिहाशिक बाणगंगा सरोवर के निकट आयोजित किया जाटा है। एलीफेंटा उत्सव—प्रत्येक फरवरी माह में एलीफेंटा द्वीप पर आयोजित किया जाता है। यह भारतीय शास्त्रीय संगीत एवं शास्त्रीय नृत्य का कार्यक्रम ढेरों भारतीय और विदेशी पर्यटक आकर्षित करता है। शहर और प्रदेश का खास सार्वजनिक अवकाश १ मई को महाराष्ट्र दिवस के रूप में महाराष्ट्र राज्य के गठन की १ मई, १९६० की वर्षागांठ मनाने के लिए होता है। मुंबई के भगिनि शहर समझौते निम्न शहरों से हैं.

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मुक्त स्रोत

फ्री एवं मुक्त स्रोत सॉफ्टवेयर का सैद्धांतिक आरेख मुक्त स्रोत (अंग्रेज़ी:ओपन सोर्स) किसी भी सामग्री के उत्पादन, विस्तार एवं विकास की वह प्रक्रिया है जिसमें उत्पादन की प्रक्रिया पूरी तरह से खुली व्यवस्था होती है। इसमें स्रोत को प्रकाशित किया एवं बढ़ावा दिया जाता है। इस विचारधारा के आरंभ के समय यह केवल कंप्यूटर सॉफ्टवेयर तक ही सीमित थी, जिसके अंतरगत विभिन्न सॉफ्टवेयर के सोर्स कोड को निःशुल्क वितरित किया जाता था और इस प्रकार उपयोक्ता की पहुंच सॉफ्टवेयर के सोर्स कोड तक होती थी। इसके अंतर्गत उपयोक्ताओं को किसी भी अनुप्रयोग के विकास की प्रक्रिया में भाग लेने, इसे बदलने व इसमें किसी भी प्रकार का सुधार कर फिर स्वयं वितरित करने का अधिकार भी मिलता था। इस प्रकार उसे कोई भी व्यक्ति अपनी सुविधानुसार नये और परिवर्तित सॉफ्टवेयर को बनाने के लिये प्रयोग करने हेतु मुक्त होता था। इसके किसी प्रकार के प्रयोग पर कोई निषेध नहीं होता है।।हिन्दुस्तान लाइव।५ नवंबर, २००९ इस तरह से ओपन सोर्स केवल सोफ्टवेयर तक सीमित न रहकर हर प्रकार की रचना तक पहुंच गया है, जैसे लेख, चित्र, संगीत और चलचित्र आदि।। सूचना एवं पुस्तकालय नेटवर्क केन्द्र। सॉफ्टवेयर उद्योग में मुक्त स्रोत का विचार सर्वप्रथम १९९० के दशक में आया था, जब कई कंपनियों ने अपने सॉफ्टवेयर, प्रचालन तंत्र आदि मुक्त स्रोत रूप में जारी किये थे। इसका आरंभ लाइनेक्स से हुआ था। पहली बार वृहत स्तर पर १९९८ में दिखा जब नेविगेटर (मोज़िला) का सोर्स कोड जारी किया। इसके कई स्तर होते हैं। कई कंपनियां मुक्त स्रोत को जारी करते समय उसके साथ कुछ कुछ प्रतिबंध या शर्तें आदि लगा देती हैं ताकि उसका दुरुपयोग न हो सके। मुक्त स्रोत का मुख्य लाभ होता है कि उपभोक्ता के पास इसका सोर्स कोर्ड उपलब्ध होने के कारण वह इसका प्रयोग अपनी इच्छा और आवश्यकतानुसार कर सकता है। एप्पल आदि कई कंपनियां अपनी तकनीकों को मुक्त स्रोत लाइसेंस के द्वारा जारी करती हैं जिसके ऐवज में उपभोक्ताओं से वो पैसे लेती हैं। लगभग एक वर्ष पूर्व बाजार में गूगल फोन आया था जिसमें एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम का प्रयोग किया गया था। इसका प्रचालन तंत्र भी मुक्त स्रोत ही था और जिसमें डेवलपर परिवर्तन करके इसके प्रकार्यों और कुछ सुविधाओं को को बढ़ा और घटा भी सकते थे, जैसे फोन के मीडिया प्लेयर में इच्छानुसार परिवर्तन करना संभव था। मुक्त स्रोत के पीछे का उद्देश्य है, कि किसी भी उत्पाद के बारे में विकास और उसमें निहित त्रुटियां और कमियां जितनी अधिक और जल्दी उपयोक्ता बता सकते हैं, उतना अधिक उसके निर्माता नहीं कर सकते हैं। निर्मातागण मात्र सीमित दिशा में ही सोच सकते हैं, किन्तु बड़ी संख्या में उपयोक्ता असीमित आयामों सहित विकास कर सकते हैं, जिनको अध्ययन कर बाद में निर्माताओं का विकास अनुभाग नया और उत्कृष्ट वर्ज़न निकाल सकते हैं। लिनक्स, विकिपीडिया, फेडोरा, फ़ायरफ़ॉक्स आदि की सफलता ने मुक्त स्रोत की विचारधारा को मुख्यधारा में ला दिया है।। दैट्स हिन्दी।२६ मई, २००९। राजेश रंजन। वर्तमान युग में ये प्रणाली सॉफ्टवेयरों के अलावा बहुत जगह प्रयोग की जाने लगी है। इसका एक जीवंत उदाहरण है विकिपीडिया। इसे कोई भी कभी और कहीं भी संपादित कर सकता है। जिसका अध्ययन कर प्रबंधकवर्ग संशोधित संस्करण निकालते रहते हैं और ध्वंसकारी बदलाव वापस करते रहते हैं। .

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मुक्त व्यापार क्षेत्र

वर्तमान मुक्त व्यापार क्षेत्र ''एफ़टीए'' मुक्त व्यापार क्षेत्र (अंग्रेज़ी: फ्री ट्रेड एरिया; एफटीए) को परिवर्तित कर मुक्त व्यापार संधि का सृजन हुआ है। विश्व के दो राष्ट्रों के बीच व्यापार को और उदार बनाने के लिए मुक्त व्यापार संधि की जाती है। इसके तहत एक दूसरे के यहां से आयात-निर्यात होने वाली वस्तुओं पर सीमा शुल्क, सब्सिडी, नियामक कानून, ड्यूटी, कोटा और कर को सरल बनाया जाता है। इस संधि से दो देशों में उत्पादन लागत बाकी के देशों की तुलना में काफ़ी सस्ती होती है। १६वीं शताब्दी में पहली बार इंग्लैंड और यूरोप के देशों के बीच मुक्त व्यापार संधि की आवश्यकता महसूस हुई थी। आज दुनिया भर के कई देश मुक्त व्यापार संधि कर रहे हैं। यह समझौता वैश्विक मुक्त बाजार के एकीकरण में मील का पत्थर सिद्ध हो रहा है। इन समझौतों से वहां की सरकार को उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण में मदद मिलती है। सरल शब्दों में यह कारोबार पर सभी प्रतिबंधों को हटा देता है। इस समझौते के बहुत से लाभ हैं। हाल में भारत ने १० दक्षिण एशियाई देशों के समूह आसियान के साथ छह वर्षो की लंबी वार्ता के बाद बैंकॉक में मुक्त व्यापार समझौता किया है। इसके तहत अगले आठ वर्षों के लिए भारत और आसियान देशों के बीच होने वाली ८० प्रतिशत उत्पादों के व्यापार पर शुल्क समाप्त हो जाएगा। इससे पूर्व भी भारत के कई देशों और यूरोपियन संघ के साथ मुक्त व्यापार समजौते हो चुके हैं। यह समझौता गरीबी दूर करने, रोजगार पैदा करने और लोगों के जीवन स्तर को सुधारने में काफी सहायक हो रहा है। मुक्त व्यापार संधि न सिर्फ व्यापार बल्कि दो देशों के बीच राजनैतिक संबंध के बीच कड़ी का काम भी करती है। कुल मिलाकर यह संधि व्यापार में आने वाली बाधाओं को दूर करने और दोतरफा व्यापार को सुचारू रूप से चलाने में सहायक सिद्ध होती है। इस दिशा में अमरीका-मध्य पूर्व एशिया में भी मुक्त क्षेत्र की स्थापना की गई है। सार्क देशों और शेष दक्षिण एशिया में भी साफ्टा मुक्त व्यापार समझौता १ जनवरी, २००६ से प्रभाव में है। इस समझौते के तहत अधिक विकसित देश- भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका अपनी उत्पाद शुल्क को घटाकर २०१३ तक ० से ५ प्रतिशत के बीच ले आएंगे। कम विकसित देश- बांग्लादेश, भूटान, मालदीव और नेपाल को भी २०१८ तक ऐसा ही करना होगा। भारत और स्विट्ज़रलैंड के बीच भी प्रयास जारी हैं। .

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म्यूचुअल फंड

म्यूचुअल फंड (अंग्रेज़ी:Mutual fund) जिसे हिन्दी में पारस्परिक निधि कहते हैं, किन्तु इसका अंग्रेज़ी नाम अधिक प्रचलित है, एक प्रकार का सामुहिक निवेश होता है। निवेशकों के समूह मिल कर स्टॉक, अल्प अविधि के निवेश या अन्य प्रतिभूतियों (सेक्यूरीटीज) मे निवेश करते है।। यूटीआई एएमसी भारत की सबसे पुरानी म्यूचुअल फंड कंपनी है।।नवभारत टाइम्स-हिन्दी।९ अक्टूबर, २००९ म्यूचुअल फंड मे एक फंड प्रबंधक होता है जो फंड के निवेशों को निर्धारित करता है और लाभ और हानि का हिसाब रखता है। इस प्रकार हुए फायदे-नुकसान को निवेशको मे बाँट दिया जाता है। स्टॉक बाजार की पर्याप्त जानकारी न होने पर भी निवेश की इच्छा रखने वालों के लिए एक सुलभ मार्ग म्यूचुअल फंड होता है।।इकोनॉमिक टाइम्स।२० जुलाई, २००९।हिन्दुस्तान लाइव।१५ अक्टूबर, २००९ म्यूचुअल फंड संचालक (कंपनी) सभी निवेशकों के निवेश राशि को लेकर इकट्ठे करती है और उनसे कुछ सुविधा शुल्क भी लेती है। फिर इस राशि को उनके लिए बाजार में निवेश करती है। इनमें में निवेश करने का फायदा यह है कि निवेशक को इस बात की चिंता करने की जरूरत नहीं होती कि आप कब शेयर खरीदें या बेचें, क्योंकि यह चिंता फंड मैनेजर की होती है। वही निवेशक के निवेश का रखरखाव करने वाला होता है। एक दूसरा लाभ ये भी होता है, कि छोटे निवेशक बहुत कम राशि जैसे १०० रु.प्रतिमाह तक निवेश कर सकते हैं। ऐसे में उन्हें सिस्टेमेटिक इनवेस्टमेंट प्लान लेना होता है, जिसमें बैंक से ये राशि मासिक सीधे फंड में स्थानांतरित होती रहती है।।यूटीआई एमएफ पर म्यूचुअल फंड के शेयर की कीमत नेट ऐसेट वैल्यु या एनएवी (NAV) कहलाती है। इसकी गणना के लिए फंड के कुल मूल्य को निवेशको द्वारा खरीदे गए कुल शेयरो की संख्या से भाग दिया जाता है।।हिन्दुस्तान लाइव।६ नवंबर, २००९ .

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म्यूज़िक का महा मुक़ाबला

म्यूज़िक का महा मुक़ाबला हिन्दी टीवी चैनल स्टार प्लस पर प्रसारित होने वाला एक धारावाहिक कार्यक्रम है, जिसका प्रथम एपिसोड १९ दिसंबर २००९ को प्रसारित हुआ था। यह कार्यक्रम १३ सप्ताह के लिये प्रसारित होना निश्चित हुआ था। इस कार्यक्रम में ६ टीमें, अपने कप्तानों के साथ हर शनिवार और रविवार प्रतियोगिता किया करते थे। कप्तानों में मीका सिंह, हिमेश रेशमिया, मोहित चौहान, श्रेया घोषाल, शान और शंकर महादेवन हैं। आयुशमान खुराना इस कार्यक्रम के प्रस्तुतकर्ता हैं। प्रत्येक शनिवार और रविवार दो कप्तानों और उनके टीमों के बीच मुकाबला होता है और अधिक अंक लेने वाले जीतते हैं। जो काप्तान नहीं लड़ते है वे अन्य गायकों के प्रदर्शन का निर्णय करते है। हर मुक़ाबला में ५ दौर होते है। दर्शक और निर्णायक मिलकर अंक देते है। यह कार्यक्रम मुंबई के एक बड़े आउटडोर स्टेडियम में होता है। हर दर्शक सदस्य के पास एक "वोटिंग मीटर" होता है, जिसके द्वार वह वोट कर सकते है। हर दिन एक "सिंगर ऑफ़ द डे" का पुरस्कार एक निर्णायक देता है। .

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मौर्य कला

मौर्य कलाकृतियों के नमूनेमौर्य कला का विकास भारत में मौर्य साम्राज्य के युग में (चौथी से दूसरी शदी ईसा पूर्व) हुआ। सारनाथ और कुशीनगर जैसे धार्मिक स्थानों में स्तूप और विहार के रूप में स्वयं सम्राट अशोक ने इनकी संरचना की। मौर्य काल का प्रभावशाली और पावन रूप पत्थरों के इन स्तम्भों में सारनाथ, इलाहाबाद, मेरठ, कौशाम्बी, संकिसा और वाराणसी जैसे क्षेत्रों में आज भी पाया जाता है। मौर्यकला के नवीन एवं महान रूप का दर्शन अशोक के स्तम्भों में मिलता है। पाषाण के ये स्तम्भ उस काल की उत्कृष्ट कला के प्रतीक हैं। मौर्ययुगीन समस्त कला कृतियों में अशोक द्वारा निर्मित और स्थापित पाषाण स्तम्भ सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण एवं अभूतपूर्व हैं। स्तम्भों को कई फुट नीचे जमीन की ओर गाड़ा जाता था। इस भाग पर मोर की आकृतियाँ बनी हुई हैं। पृथ्वी के ऊपर वाले भाग पर अद्भुत चिकनाई तथा चमक है। मौर्यकाल के स्तम्भों में से फाह्यान ने ६ तथा युवानच्वांग ने १५ स्तम्भों का उल्लेख किया है। गुहा निर्माण कला भी इस काल में चरम पर थी। अशोक के पौत्र दशरथ ने गया से १९ मील बाराबर की पहाड़ियों पर श्रमणों के निवास के लिए कुछ गुहाएँ बनवाईं। इनकी भीतरी दीवार पर चमकीली पालिश है। लोमश ऋषि की गुफा मौर्यकाल में सम्राट अशोक के पौत्र सम्पत्ति द्वारा निर्मित हुई। यह गुफा अधूरी है। इसके मेहराब पर गजपंक्ति की पच्चीकारी अब भी मौजूद है। ऐसी पच्चीकारी प्राचीन काल में काष्ठ पर की जाती थी। सारनाथ का मूर्ति शिल्प और स्थापत्य मौर्य कला का एक अतिश्रेष्‍ठ नमूना है। विनसेन्ट स्मिथ नामक प्रसिद्ध इतिहासकार के अनुसार, किसी भी देश के पौराणिक संग्रहालय में, सारनाथ के समान उच्च श्रेष्‍ठ और प्रशंसनीय कला के दर्शन दुर्लभ हैं क्‍योंकि इनका काल और शिल्प कड़ी छनबीन के बाद प्रमाणित किया गया है। मौर्य काल के दौरान मथुरा कला का एक दूसरा महत्त्वपूर्ण केन्द्र था। शुंग-शातवाहन काल के काल में इस राजवंश की प्रेरणा से कला का अत्यंत विकास हुआ। बड़ी संख्या में इमारतें बनी, अन्य पौराणिक कलाएँ विकसित हुईं जो सारनाथ की पिछली पीढियों के विकास को दरशाती हैं। इस युग की मजबूत जड़ अर्ध वृत्तीय मन्दिर वाली उसी पीढ़ी की नींव पर टिकी है। कला क्षेत्र में विख्यात भारत-सांची विद्यालय मथुरा का एक अनमोल केन्द्र कहा जाता है। जिसकी अनेक छवियां इन विद्यालयों में आज भी देखने को मिलती हैं। .

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मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, भोपाल

---- मौलाना आजाद राष्ट्रीय तकनीकी संस्थान, भोपाल की स्थापना १९६० में की गई थी और २६ जून २००२ को इसे राष्‍ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान का दर्जा दिया गया। इस संस्थान में 8 विभाग हैं। यह संस्थान सिविल इंजीनियरी, अभियांत्रिकी इंजीनियरी, विद्युत इंजीनियरी, इलैक्टोनिकी तथा संचार इंजीनियरी, कम्प्यूटर विज्ञान तथा इंजीनियरी, सूचना प्रौद्योगिकी में चार वर्षीय बी.टेक कार्यक्रम और एक पांच वर्षीय बी.आर्क.

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मृत सागर

मृत सागर के तट पर नमक का जमाव मृत सागर समुद्र तल से ४०० मीटर नीचे, दुनिया का सबसे निचला बिंदु कहा जाने वाला सागर है। इसे खारे पानी की सबसे निचली झील भी कहा जाता है। ६५ किलोमीटर लंबा और १८ किलोमीटर चौड़ा यह सागर अपने उच्च घनत्व के लिए जाना जाता है, जिससे तैराकों का डूबना असंभव होता है। मृत सागर में मुख्यत: जॉर्डन नदी और अन्य छोटी नदियाँ आकर गिरती हैं। इसके उच्च घनत्व के कारण इसमें कोई मछली जिंदा नहीं रह सकती, लेकिन इसमें जीवाणुओं की ११ जातियाँ पाई जाती हैं। इसके अतिरिक्त मृत सागर में प्रचुर मात्रा में खनिज पाए जाते हैं। ये खनिज पदार्थ वातावरण के साथ मिल कर स्वास्थ्य के लिए लाभदायक वातावरण बनाते हैं। मृत सागर अपनी विलक्षणताओं के लिए कम से कम चौथी सदी से जाना जाता रहा है, जब विशेष नावों द्वारा इसकी सतह से शिलाजीत निकालकर मिस्रवासियों को बेचा जाता था। यह चीजों को सड़ने से बचाने, सुगंधित करने के अलावा अन्य दूसरे कार्यों के उपयोग में आता था। इसके अतिरिक्त मृत सागर के अंदर की गीली मिट्टी को क्लेयोपेट्रा की खूबसूरती के राज से भी जोड़ा जाता है। यहाँ तक कि अरस्तू ने भी इस सागर के भौतिक गुणों का जिक्र किया है। हाल के समय में इस जगह को हेल्थ रिज़ॉर्ट के तौर पर विकसित किया गया है। आम पानी की तुलना में मृत सागर के पानी में २० गुना ज्यादा ब्रोमीन, ५० गुना ज्यादा मैग्नीशियम और १० गुना ज्यादा आयोडीन होता है। ब्रोमीन धमनियों को शांत करता है, मैगनीशियम त्वचा की एलर्जी से लड़ता है और श्वासनली को साफ करता है, जबकि आयोडीन कई ग्रंथियों की क्रियाशीलता को बढ़ाता है। सौंदर्य और स्वास्थ्य के लिए मृत सागर के गुणों की सिद्धि की वजह से ही कई प्र कंपनियां मृत सागर से ली गईं चीजों पर आधारित सौंदर्य प्रसाधन बनाती हैं। इसके गर्म सल्फर सोते और कीचड़ कई बीमारियों के इलाज में अहम भूमिका निभाते हैं, खासकर आर्थराइटिस और जोड़ों से संबंधित बीमारियों के इलाज में। लेकिन पिछले कुछ सालों से मृत सागर तेज़ गति से सिमट रहा है। पिछले ४० सालों में इसके पानी का तल २५ मीटर कम हो गया है। ऐसा अनुमान लगाया जाता है कि २०५० तक शायद यह पूरी तरह गायब हो जाएगा। .

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मृगया

मृगया ओड़िया भाषा के विख्यात साहित्यकार फनि मोहांती द्वारा रचित एक कविता–संग्रह है जिसके लिये उन्हें सन् 2009 में ओड़िया भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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मैथन बांध

मैथन बांध भारतवर्ष के झारखंड प्रदेश में स्थित धनबाद से ५२ किमी दूर मैथन बांध दामोदर वैली कारपोरेशन का सबसे बड़ा जलाशय है। इसके आस-पास का सौंदर्य पर्यटकों को बरबस ही अपनी ओर आकर्षित कर लेता है। बराकर नदी के ऊपर बने इस बाँध का निर्माण बाढ़ को रोकने के लिए किया गया था। बाँध के नीचे एक पावर स्‍टेशन का भी निर्माण किया गया है, जो दक्षिण पूर्व एशिया में अपने आप में आधुनिकतम तकनीक का उदाहरण माना जाता है। इसकी परिकल्पना जवाहरलाल नेहरू ने की थी। इसके पास ही माँ कल्‍याणेश्‍वरी का एक अति प्राचीन मंदिर भी है। लगभग ६५ वर्ग कि॰मी॰ में फैले इस बाँध के पास एक झील भी है जहाँ नौकायन और आवासीय सुविधाएँ उपलब्‍ध है। इसके अतिरिक्त एक मृगदाव तथा पक्षी विहार भी है, जहाँ पर्यटक जंगल के प्राकृतिक सौन्‍दर्य तथा विभिन्‍न किस्‍म के पशु-पक्षियों को देख सकते है। १५,७१२ फीट लंबे और १६५ फीट ऊँचे इस बाँध से ६०,००० किलोवाट बिजली का उत्‍पादन होता है। वैसे य़े इलाका नक्सली प्रभावित भी है----इसलिए जाने से पहले थोड़ा सावधान .

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मैनचेस्टर यूनाइटेड एफ़.सी.

मैनचेस्टर युनाइटेड फुटबॉल क्लब ग्रेटर मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रेफोर्ड में स्थित एक इंग्लिश फुटबॉल क्लब है जो दुनिया में सबसे अधिक लोकप्रिय फुटबॉल क्लबों में से एक है। क्लब 1992 में प्रीमियर लीग का एक संस्थापक सदस्य था और सिवाए 1974-75 के सत्र के, 1938 के बाद से ही, इंग्लिश फुटबॉल की शीर्ष श्रेणी में खेलता रहा है। 1964-65 के बाद से ही सभी छह सत्रों के दौरान क्लब में दर्शकों की औसत उपस्थिति इंग्लिश फुटबॉल की किसी भी अन्य टीम के मुकाबले अधिक रही है। 2008-09 प्रीमियर लीग और 2008 फीफा क्लब विश्व कप जीतने के साथ ही मैनचेस्टर युनाइटेड इंग्लिश चैंपियन और क्लब विश्व कप के श्रेष्ठ धारक बन गये हैं। क्लब इंग्लिश फुटबॉल क्लब के इतिहास में सबसे सफल क्लबों में से एक है और नवंबर 1986 में एलेक्स फर्ग्यूसन के मैनेजर बनने के बाद इसने 22 बड़े पुरस्कार अर्जित किये हैं। सन् 1968 में बेन्फिका को 4-1 से हरा कर यूरोपीय कप जीतने वाला यह पहला इंग्लिश क्लब बना.

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मैसिडोनियाई विकिपीडिया

मैसिडोनियाई विकिपीडिया विकिपीडिया का मैसिडोनियाई भाषा का संस्करण है। यह जून २००३ में आरंभ किया गया था और २६ मई, २००९ तक इस पर लेखों की कुल संख्या ३२,०००+ है। यह विकिपीडिया का अड़तालीसवां सबसे बड़ा संस्करण है।.

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मैं बोरिशाइल्ला

महुआ माझी का उपन्यास मैं बोरिशाइल्ला बांग्लादेश की मुक्ति-गाथा पर केंद्रित है। यह उपन्यास बहुत ही कम समय में खासा चर्चित हुआ है और इस कृति को सम्मानित भी किया गया है। इस उपन्यास के असामान्य शीर्षक के बारे में स्पष्टीकरण देती हुई वे, उपन्यास के प्राक्कथन में कहती हैं - “...जिस तरह बिहार के लोगों को बिहारी तथा भारत के लोगों को भारतीय कहा जाता है, उसी प्रकार बोरिशाल के लोगों को यहाँ की आंचलिक भाषा में बोरिशाइल्ला कहा जाता है। उपन्यास का मुख्य पात्र केष्टो, बोरिशाल का है। इसीलिए वह कह सकता है - मैं बोरिशाइल्ला।” इस उपन्यास में १९४८ से १९७१ तक के बांग्ला देश के ऐतिहासिक तथ्यों, पाकिस्तानी हुकूमत द्वारा बांग्लादेशी जनता पर किए अत्याचारों की घटनाओं तथा मुक्तिवाहिनी के संघर्ष गाथाओं को कथा सूत्र में पिरोया गया है। इस उपन्यास की रचना प्रक्रिया के विषय में वे कहती हैं कि बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम को अपने पहले ही उपन्यास का विषय बनाने का कारण था कि मैं नई पीढ़ी के लिए उसे एक दृष्टांत के रूप में पेश करना चाहती थी कि आज बेशक पूरी दुनिया में सारी लड़ाइयाँ धर्म के नाम पर ही लड़ी जा रही हैं, लेकिन सच तो ये हैं कि सारा खेल सत्ता का है। ये लड़ाइयाँ अब बंद होनी चाहिये। भाषा और शैली की दृष्टि से इस उपन्यास के अति साधारण व नीरस होने बात कही जाती है। आलोचकों का मानना है कि उपन्यास की भाषा अत्यंत साधारण है और समूचे उपन्यास में कहीं भी कोई भाषाई शिल्प दिखाई नहीं देता। कथन में प्रवाह नहीं है और उपन्यास घटना-प्रधान होते हुए भी आमतौर पर बोझिल-सा बना रहता है। जिसके कारण इसके कई खण्ड घोर अपठनीय ही बने रहते हैं। लेखिका ने शायद पाकिस्तानी सैनिकों तथा उर्दूभाषी नागरिकों द्वारा बांग्लाभाषियों पर किए गए अत्याचारों तथा मुक्तिवाहिनी के कार्यों के बहुत प्रामाणिक विवरण देने के लोभ में उपन्यास को बिखरा सा दिया है। घटना प्रधान कथानक में रहस्य का सर्वथा अभाव भी आगे पढ़ने की जिज्ञासा बनाए रखने में सहायक नहीं होता। .

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मैकमहोन रेखा

मैकमोहन रेखा पूर्वी-हिमालय क्षेत्र के चीन-अधिकृत एवं भारत अधिकृत क्षेत्रों के बीच सीमा चिह्नित करती है। यही सीमा-रेखा १९६२ के भारत-चीन युद्ध का केन्द्र एवं कारण थी। यह क्षेत्र अत्यधिक ऊंचाई का पर्वतीय स्थान है, जो मानचित्र में लाल रंग से दर्शित है। मैकमहोन रेखा भारत और तिब्बत के बीच सीमा रेखा है। यह अस्तित्व में सन् १९१४ में भारत की तत्कालीन ब्रिटिश सरकार और तिब्बत के बीच शिमला समझौते के तहत आई थी। १९१४ के बाद से अगले कई वर्षो तक इस सीमारेखा का अस्तित्व कई अन्य विवादों के कारण कहीं छुप गया था, किन्तु १९३५ में ओलफ केरो नामक एक अंग्रेज प्रशासनिक अधिकारी ने तत्कालीन अंग्रेज सरकार को इसे आधिकारिक तौर पर लागू करने का अनुरोध किया। १९३७ में सर्वे ऑफ इंडिया के एक मानचित्र में मैकमहोन रेखा को आधिकारिक भारतीय सीमारेखा के रूप में पर दिखाया गया था। इस सीमारेखा का नाम सर हैनरी मैकमहोन के नाम पर रखा गया था, जिनकी इस समझौते में महत्त्वपूर्ण भूमिका थी और वे भारत की तत्कालीन अंग्रेज सरकार के विदेश सचिव थे। अधिकांश हिमालय से होती हुई सीमारेखा पश्चिम में भूटान से ८९० कि॰मी॰ और पूर्व में ब्रह्मपुत्र तक २६० कि॰मी॰ तक फैली है। जहां भारत के अनुसार यह चीन के साथ उसकी सीमा है, वही, चीन १९१४ के शिमला समझौते को मानने से इनकार करता है। चीन के अनुसार तिब्बत स्वायत्त राज्य नहीं था और उसके पास किसी भी प्रकार के समझौते करने का कोई अधिकार नहीं था। चीन के आधिकारिक मानचित्रों में मैकमहोन रेखा के दक्षिण में ५६ हजार वर्ग मील के क्षेत्र को तिब्बती स्वायत्त क्षेत्र का हिस्सा माना जाता है। इस क्षेत्र को चीन में दक्षिणी तिब्बत के नाम से जाना जाता है। १९६२-६३ के भारत-चीन युद्ध के समय चीनी फौजों ने कुछ समय के लिए इस क्षेत्र पर अधिकार भी जमा लिया था। इस कारण ही वर्तमान समय तक इस सीमारेखा पर विवाद यथावत बना हुआ है, लेकिन भारत-चीन के बीच भौगोलिक सीमा रेखा के रूप में इसे अवश्य माना जाता है। .

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मूर्तिदेवी पुरस्कार

मूर्तिदेवी पुरस्कार भारतीय ज्ञानपीठ समिति के द्वारा दिया जानेवाला प्रतिष्ठित साहित्य सम्मान है। पुरस्कार में दो लाख रूपए, प्रशस्ति पत्र, प्रतीक चिह्न और वाग्देवी की प्रतिमा दी जाती है। नीचे पुरस्कार प्राप्त करनेवालों की सूची है। इसके अतिरिक्त सी के नागराज राव, जयदेव तनेजा, कुबेरनाथ राय, शिवाजी सामन्त, श्यामाचरण दुबे, विद्यानिवास मिश्र, वीरेन्द्र जैन और विष्णु प्रभाकर को भी मूर्तिदेवी पुरस्कार प्रदान किया गया है। .

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मूल्य वर्धित कर

मूल्य वर्धित कर (Value Added Tax, VAT, संक्षेप में - वैट), या वस्तु और सेवा कर (Goods and Services Tax, GST) एक उपभोग कर (CT) है, किसी भी मूल्य पर जो एक उत्पाद में जोड़ी जाती है। बिक्री कर के विपरीत, वैट, उत्पादक और अंतिम उपभोक्ता के बीच मार्ग की संख्या के संबंध में तटस्थ है; जहां बिक्री कर प्रत्येक चरण में कुल मूल्य पर लगाया जाता है (हालांकि अमेरिकी और कई अन्य देशों में बिक्री कर सिर्फ अंतिम उपभोक्ता को अंतिम बिक्री पर लगाया जाता है और अंतिम उपयोगकर्ता उपयोग कर, इस तरह वहां थोक या उत्पादन स्तर पर कोई बिक्री कर नहीं दिया जाता), इसका परिणाम एक सोपान है (नीचे के कर ऊपर के करों पर लगाए जाते हैं)। वैट एक अप्रत्यक्ष कर है, इस रूप में कि कर को ऐसे किसी से एकत्र किया जाता है जो कर का पूरा खर्च नहीं उठाता.

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मेरी क्युरी

मेरी क्युरी मैरी स्क्लाडोवका क्यूरी (लघु नाम: मैरी क्यूरी) (७ नवम्बर १८६७ - ४ जुलाई १९३४) विख्यात भौतिकविद और रसायनशास्त्री थी। मेरी ने रेडियम की खोज की थी। विज्ञान की दो शाखाओं (भौतिकी एवं रसायन विज्ञान) में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित होने वाली वह पहली वैज्ञानिक हैं। वैज्ञानिक मां की दोनों बेटियों ने भी नोबल पुरस्कार प्राप्त किया। बडी बेटी आइरीन को १९३५ में रसायन विज्ञान में नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ तो छोटी बेटी ईव को १९६५ में शांति के लिए नोबेल पुरस्कार मिला। .

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मेहरानगढ़

मेहरानगढ़ दुर्गचामुंडा माता मंदिर मेहरानगढ दुर्ग भारत के राजस्थान प्रांत में जोधपुर शहर में स्थित है। पन्द्रहवी शताब्दी का यह विशालकाय किला, पथरीली चट्टान पहाड़ी पर, मैदान से १२५ मीटर ऊँचाई पर स्थित है और आठ द्वारों व अनगिनत बुर्जों से युक्त दस किलोमीटर लंबी ऊँची दीवार से घिरा है। बाहर से अदृश्य, घुमावदार सड़कों से जुड़े इस किले के चार द्वार हैं। किले के अंदर कई भव्य महल, अद्भुत नक्काशीदार किवाड़, जालीदार खिड़कियाँ और प्रेरित करने वाले नाम हैं। इनमें से उल्लेखनीय हैं मोती महल, फूल महल, शीश महल, सिलेह खाना, दौलत खाना आदि। इन महलों में भारतीय राजवेशों के साज सामान का विस्मयकारी संग्रह निहित है। इसके अतिरिक्त पालकियाँ, हाथियों के हौदे, विभिन्न शैलियों के लघु चित्रों, संगीत वाद्य, पोशाकों व फर्नीचर का आश्चर्यजनक संग्रह भी है। यह किला भारत के प्राचीनतम किलों में से एक है और भारत के समृद्धशाली अतीत का प्रतीक है। राव जोधा जोधपुर के राजा रणमल की २४ संतानों मे से एक थे। वे जोधपुर के पंद्रहवें शासक बने। शासन की बागडोर सम्भालने के एक साल बाद राव जोधा को लगने लगा कि मंडोर का किला असुरक्षित है। उन्होने अपने तत्कालीन किले से ९ किलोमीटर दूर एक पहाड़ी पर नया किला बनाने का विचार प्रस्तुत किया। इस पहाड़ी को भोर चिडिया के नाम से जाना जाता था, क्योंकि वहाँ काफ़ी पक्षी रहते थे। राव जोधा ने १२ मई १४५९ को इस पहाडी पर किले की नीव डाली महाराज जसवंत सिंह (१६३८-७८) ने इसे पूरा किया। मूल रूप से किले के सात द्वार (पोल) (आठवाँ द्वार गुप्त है) हैं। प्रथम द्वार पर हाथियों के हमले से बचाव के लिए नुकीली कीलें लगी हैं। अन्य द्वारों में शामिल जयपोल द्वार का निर्माण १८०६ में महाराज मान सिंह ने अपनी जयपुर और बीकानेर पर विजय प्राप्ति के बाद करवाया था। फतेह पोल अथवा विजय द्वार का निर्माण महाराज अजीत सिंह ने मुगलों पर अपनी विजय की स्मृति में करवाया था। राव जोधा को चामुँडा माता मे अथाह श्रद्धा थी। चामुंडा जोधपुर के शासकों की कुलदेवी होती है। राव जोधा ने १४६० मे मेहरानगढ किले के समीप चामुंडा माता का मंदिर बनवाया और मूर्ति की स्थापना की। मंदिर के द्वार आम जनता के लिए भी खोले गए थे। चामुंडा माँ मात्र शासकों की ही नहीं बल्कि अधिसंख्य जोधपुर निवासियों की कुलदेवी थी और आज भी लाखों लोग इस देवी को पूजते हैं। नवरात्रि के दिनों मे यहाँ विशेष पूजा अर्चना की जाती है। मेहरानगढ दुर्ग की नींव में ज्योतिषी गणपत दत्त के ज्योतिषीय परामर्श पर ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी (तदनुसार, 12 मई 1459 ई) वार शनिवार को राजाराम मेघवाल को जीवित ही गाड़ दिया गया। राजाराम के सहर्ष किये हुए आत्म त्याग एवम स्वामी-भक्ति की एवज में राव जोधाजी राठोड़ ने उनके वंशजो को मेहरानगढ दुर्ग के पास सूरसागर में कुछ भूमि भी दी (पट्टा सहित), जो आज भी राजबाग के नाम से प्रसिद्ध हैं। होली के त्यौहार पर मेघवालों की गेर को किले में गाजे बाजे के साथ जाने का अधिकार हैं जो अन्य किसी जाति को नही है। राजाराम का जन्म कड़ेला गौत्र में केसर देवी की कोख से हुआ तथा पिता का नाम मोहणसी था। .

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मेघदूतम्

कालिदास रचित मेघदूतम् मेघदूतम् महाकवि कालिदास द्वारा रचित विख्यात दूतकाव्य है। इसमें एक यक्ष की कथा है जिसे कुबेर अलकापुरी से निष्कासित कर देता है। निष्कासित यक्ष रामगिरि पर्वत पर निवास करता है। वर्षा ऋतु में उसे अपनी प्रेमिका की याद सताने लगती है। कामार्त यक्ष सोचता है कि किसी भी तरह से उसका अल्कापुरी लौटना संभव नहीं है, इसलिए वह प्रेमिका तक अपना संदेश दूत के माध्यम से भेजने का निश्चय करता है। अकेलेपन का जीवन गुजार रहे यक्ष को कोई संदेशवाहक भी नहीं मिलता है, इसलिए उसने मेघ के माध्यम से अपना संदेश विरहाकुल प्रेमिका तक भेजने की बात सोची। इस प्रकार आषाढ़ के प्रथम दिन आकाश पर उमड़ते मेघों ने कालिदास की कल्पना के साथ मिलकर एक अनन्य कृति की रचना कर दी। मेघदूत की लोकप्रियता भारतीय साहित्य में प्राचीन काल से ही रही है। जहाँ एक ओर प्रसिद्ध टीकाकारों ने इस पर टीकाएँ लिखी हैं, वहीं अनेक संस्कृत कवियों ने इससे प्रेरित होकर अथवा इसको आधार बनाकर कई दूतकाव्य लिखे। भावना और कल्पना का जो उदात्त प्रसार मेघदूत में उपलब्ध है, वह भारतीय साहित्य में अन्यत्र विरल है। नागार्जुन ने मेघदूत के हिन्दी अनुवाद की भूमिका में इसे हिन्दी वाङ्मय का अनुपम अंश बताया है। मेघदूतम् काव्य दो खंडों में विभक्त है। पूर्वमेघ में यक्ष बादल को रामगिरि से अलकापुरी तक के रास्ते का विवरण देता है और उत्तरमेघ में यक्ष का यह प्रसिद्ध विरहदग्ध संदेश है जिसमें कालिदास ने प्रेमीहृदय की भावना को उड़ेल दिया है। कुछ विद्वानों ने इस कृति को कवि की व्यक्तिव्यंजक (आत्मपरक) रचना माना है। "मेघदूत" में लगभग ११५ पद्य हैं, यद्यपि अलग अलग संस्करणों में इन पद्यों की संख्या हेर-फेर से कुछ अधिक भी मिलती है। डॉ॰ एस.

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मेघनाद साहा

मेघनाद साहा (६ अक्टूबर १८९३ - १६ फरवरी, १९५६) सुप्रसिद्ध भारतीय खगोलविज्ञानी (एस्ट्रोफिजिसिस्ट्) थे। वे साहा समीकरण के प्रतिपादन के लिये प्रसिद्ध हैं। यह समीकरण तारों में भौतिक एवं रासायनिक स्थिति की व्याख्या करता है। उनकी अध्यक्षता में गठित विद्वानों की एक समिति ने भारत के राष्ट्रीय शक पंचांग का भी संशोधन किया, जो २२ मार्च १९५७ (१ चैत्र १८७९ शक) से लागू किया गया। इन्होंने साहा नाभिकीय भौतिकी संस्थान तथा इण्डियन एसोसियेशन फॉर द कल्टिवेशन ऑफ साईन्स नामक दो महत्त्वपूर्ण संस्थाओं की स्थापना की। .

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मोदीनगर

मोदीनगर की स्थिति यह २६.८६ उत्तर अक्षांश एवं ८०.९१ पूर्व रेखांश में है। यह शहर गाजियाबाद के उत्तर-पश्चिम में राष्ट्रीय राजमार्ग- ५८ (गाजियाबाद-देहरादून) पर मेरठ व गाजियाबाद के ठीक बीच में स्थित है। इससे लगा तीसरा शहर है हापुड़। राजमार्ग के समानांतर ही उत्तर रेलवे का दिल्ली-सहारनपुर रेल मार्ग भी जाता है। मोदीनगर से ही एक पक्की सड़क हापुड़ (२३ कि.मी) को भी जाती है। सन २०११की जनगणना अनुसार, मोदीनगर की जनसंख्या १३०३२५ है, जिसमें से ५३%पुरुष एवं ४७% स्त्रियां हैं। मोदीनगर का औसत साक्षरता दर ८८.४३% है। यहां हिंदुओं की जनसंख्या लगभग ९३.०४%है इस शहर की स्थापना १९३३ में रायबहादुर गूजर मल मोदी ने यहां मोदी चीनी मिल के आरंभ से की थी। इसका नाम अपने वंशनाम मोदी पर मोदीनगर बना कर रखा था। यहां मूलतः बेगमाबाद गाँव था, जिसका ५७१ एकड़ भाग अब इस कस्बे में आता है। बेगमाबाद की स्थापना नवाब ज़ाफर अली ने अपनी एक दिल्ली की बेगम के नाम पर की थी। इसका महत्व व मूल नाम मोदीनगर की औद्योगिक प्रगति के चलते समाप्त सा ही हो गया है। इसके साथ ही १९३९ में कोटोजेम वनस्पति और १९४० में साबुन उद्योग आरंभ किया। इस कंपनी के साबुन में खास बात यह थी, कि अबतक निर्मित साबुनों में चर्बी प्रयोग होती थी, किंतु गूजर मल जी के निर्देश पर पहली बार वनस्पति से पूर्ण हर्बल साबुन का निर्माण हुआ। उसके बाद यहां १९४१ में टिन उद्योग तथा खाद्य पदार्थ उद्योग स्थापित हुए, जिसमें से खाद्य पदार्थों की आपूर्ति भारतीय सेना के लिए की जाती थी। १९४३ में यहां बिस्कुट फैक्ट्री लगाई गई। १९४४में मोती ऑयल मिल की स्थापना हुई। मोदीनगर में मोदी के उद्योगों में मुख्यतः चीनी, खाद्य तेल, कपड़ा (रेयॉन एवं रेशम सहित), साबुन, पेण्ट-रोगन, वार्निश, लालटेन, ग्लीसरीन, सूती धागे, कार्बन डाइ ऑक्साइड एवं आटा का उत्पादन होता है। रानी बाला बाई सिंधिया द्वारा बनवाया गया एक मंदिर, जो पूर्व बेगमाबाद में आता था, अब मोदीनगर के क्षेत्र में आता है। यह मोदीनगर पुलिस स्टेशन के सामने रुक्मिणी देवी कन्या इंटर कॉलिज के निकट बना हुआ है। .

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मोबाइल नम्बर पोर्टेबिलिटी

मोबाइल नम्बर पोर्टेबिलिटी (एम॰एन॰पी) या मोबाइल अंक सुवाह्यता वह सेवा है जिसके द्वारा उपभोक्ताओं को अपना मोबाइल नम्बर बदले बिना सेवा प्रदाता कम्पनी बदलने की सुविधा मिलती है। भारत में यह सेवा २० जनवरी, २०११ को लागू की गई थी। इससे पूर्व छोटे स्तर पर भारत में यह सेवा सबसे पहले हरियाणा राज्य से आरम्भ हुई। .

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मोम की पर्त

वैक्स कोटिंग वाले फल चमकदार होने से मन लुभाते हैं मोम की पर्त (अंग्रेज़ी:वैक्स कोटिंग) फलों और सब्जियों को अधिक दिनों तक सुरक्षित रखने का आधुनिक तरीका है, किंतु इसे प्रेज़र्वेशन से भिन्न समझें।।हिन्दुस्तान लाइव।।३ अक्टूबर,२००९। सौरभ सुमन इसका प्रयोग विशेषकर परिवहन के समय फलों और सब्जियों को सड़ने और गलने से बचाने के लिए किया जाता है। इसमें एक प्रकार का खाद्य मोम (एडीबल वैक्स) का प्रयोग होता है। इस खाद्य मोम की एक महीन पर्त फलों और सब्जियों के छिलके के ऊपर चढ़ाई जाती है। इससे ये फल, इत्यादि आठ से बारह दिनों तक मौसम के प्रभाव से बचे रहते हैं व सड़ते या गलते नहीं हैं।।। बिज़नेस भास्कर।२१ सितंबर, २००९। डॉ॰ एस मुखर्जी, कृषि अनुसंधान केंद्र दुर्गापुरा, जयपुर यह मोम स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालता है, यदि खाद्य मोम ही प्रयोग किया गया है। एक सर्वेक्षण के अनुसार कृषि उत्पादों का लगभग ६५ प्रतिशत ही बाजारों तक पहुंच पाता है, बाकी परिवहन के दौरान खराब होकर बेकार हो जाता है। इस प्रकार किसानों के लाभ में भी फर्क पड़ता है, व दूसरी ओर ये फलों के मूल्व की वृद्धि करता है। इस प्रक्रिया के लिए प्रयोग होने वाला के खाद्य श्रेणी का मोम सेंपरफ्रेश है, जिससे फलों और सब्जियों पर कोटिंग करने से इनकी ताजगी कई दिनों तक बनी रहती है। फलों और सब्जियों पर पर्त चढ़ाने का यह बहुत सस्ता तरीका है। साधारण मोम की पर्त मात्र उन फलों व सब्जियों पर चढ़ायी जाती थीं, जिनके छिलके मोटे होते थे, जैसे लौकी, तुरई आदि, किंतु बाजारों में उपलब्ध नये मोम सेंपरफ्रेश को किसी भी तरह के छिलके (मोटे हों या पतले) वाले फलों और सब्जियों पर चढ़ाई जा सकती है। सेंपरफ्रेश से पर्त चढ़ाने के लिए उसमें ओलिक एसिड और ट्राईइथेलॉल एमाइन का मिश्रण बनाते हैं। फिर इस घोल से फलों और सब्जियों पर छिड़काव किया जाता है। अन्य खाद्य मोम की पर्त चढ़ाने के लिए सब्जियों को मोम के पिछले घोल में डुबाकर निकाल लिया जाता है और इसे छाया में सूखा लिया जाता है। इस प्रक्रिया से सब्जियों पर जल्दी फफूंद नहीं लगती। यहां ये ध्यानयोग्य है, कि सेंपरफ्रेश की पर्त चढ़ाने के बाद भी फलों और सब्जियों को छाया में सुखाना उतना ही आवश्यक होता है। इस प्रकार रखरखाव व परिवहन की असुविधा के कारण किसानों को होने वाले भारी नुकसान से बचने का यह बेहतर तरीका है। सेंपरफ्रेश एवं अन्य खाद्य मोम आसानी से बाजार में उपलब्ध होते हैं। फलों और सब्जियों पर इस मोम की पर्त चढ़ाने का खर्च लगभग १५-१५ पैसे प्रति किलो आता है। इसके अलावा इस पर्त को चढ़ाने के बाद फलों में चमक भी आ जाती है, जो ग्राहकों को लुभाती हैं। कृषि अनुसंधानों में यह पाया गया है कि कानरेवा वैक्स की पर्त चढ़ाने से सब्जियों की चमक तो बढ़ती ही है, साथ ही नमी बरकरार रहने से लंबी अवधि तक इनको भंडारगृह में रख कर किसान इनको ओने-पौने दामों पर बेचने की मजबूरी से बच सकते हैं। मानक मोम की पर्त के अलावा अन्य सस्ते उपलब्ध मोम स्वास्थ्य के लिए हानिकारक भी हो सकते हैं। इनमें खासकर विदेशों से आने वाले फलों आदि से सावधाण रहना चाहिये। छत्रपति शाहूजी महराज चिकित्सा विश्वविद्यालय, लखनऊ के औषधि विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो॰ सी.जी.

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मोहनदास नैमिशराय

मोहनदास नैमिषराय विचारात्मक लेखन के लिए सृजन गाथा द्वारा प्रदत्त महेश तिवारी सम्मान ग्रहण करते हुए। मोहनदास नैमिशराय ख्यातनाम दलित साहित्यकार एवं बयान के संपादक हैं। झलकारी बाई के जीवन पर वीरांगना झलकारी बाई नामक एक पुस्तक सहित उनकी ३५ से अधिक कृतियाँ प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें उपन्यास, कथा संग्रह, आत्म कथा तथा आलेख इत्यादि शामिल हैं। वे सामाजिक न्यास संदेश के संपादक भी हैं। उनका बचपन गरीबी में बीता। वे मेरठ में रहते थे। मिट्टी का कच्चा घर था। विशेष कपड़े भी उस समय पहनने के लिए नहीं थे। बिना चप्पल या जूते के भी आना-जाना पड़ता था। उनकी शिक्षा मेरठ में कुमार आश्रम में हुई। यह आश्रम लाला लाजपत राय ने दलितों की शिक्षा के लिए बनवाया था। उनके पिता आरंभ में सामाजिक कार्यकर्ता थे। वे डिप्रेस्ड लीग के चेयरमेन रहे और जब उन्होंने हायस्कूल किया तो वे पूरे जिले में हायस्कूल करने वाले दूसरे व्यक्ति थे। पिताजी नाटकों में भूमिका भी करते थे। .

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मोहम्मद अलबारदेई

मोहम्मद अलबारदेई अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा अभिकरण महासचिव रहे हैं। इनका कार्यकाल १९९७ - २००९ रहा। श्रेणी:आईएईए महासचिव श्रेणी:नोबल शांति पुरस्कार के प्राप्तकर्ता.

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यिद्दी विकिपीडिया

यिद्दी विकिपीडिया विकिपीडिया का यिद्दी भाषा का संस्करण है। यह ३ मार्च, २००४ में आरंभ किया गया था लेकिन इस पर पहला लेख उसी वर्ष २८ नवंबर को ही लिखा गया। २८ मार्च, २००९ तक इस विकिपीडिया पर लेखों की कुल संख्या ६,२६४+ है और यह विकिपीडिया का १००वां सबसे बड़ा संस्करण है।.

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युकिया अमानो

युकिया अमानो अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा अभिकरण महासचिव रहे हैं। इनका कार्यारंभ: दिसंबर, २००९ से होगा। श्रेणी:आईएईए महासचिव.

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यूनानी विकिपीडिया

यूनानी विकिपीडिया विकिपीडिया का यूनानी भाषा का संकरण है। यह १ दिसंबर, २००२ में आरंभ किया गया था और इस पर लेखों की कुल संख्या २५ मई, २००९ तक ४२,०००+ है। यह विकिपीडिया का चौवालीसवां सबसे बड़ा संकरण है।.

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यूनेस्को मदनजीत सिंह पुरस्कार

संयुक्त राष्ट्र का प्रतिष्ठित पुरस्कार जिसकी स्थापना शांति दूत महात्मा गांधी के जीवन से प्रेरित होकर की गई थी। महात्मा गांधी की 125वीं जयंती पर वर्ष 1995 में शुरु किए गए इस प्रतिष्ठित पुरस्कार की स्थापना में भारतीय राजनयिक तथा यूनेस्को के सदभावना राजदूत मदनजीत सिंह ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी। सहिष्णुता और अहिंसा को प्रोत्साहित करने के लिए हर दो वर्ष पर यह पुरस्कार व्यक्तियों या संस्थानों को प्रदान किया जाता है। इसमें पुरस्कार स्वरूप दस हजार डॉलर की राशि दी जाती है। यह पुरस्कार 16 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय सहिष्णुता दिवस पर दिया जाता है। .

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यूरिया

यूरिया (Urea या carbamide) एक कार्बनिक यौगिक है जिसका रासायनिक सूत्र (NH2)2CO होता है। कार्बनिक रसायन के क्षेत्र में इसे कार्बामाइड भी कहा जाता है। यह एक रंगहीन, गन्धहीन, सफेद, रवेदार जहरीला ठोस पदार्थ है। यह जल में अति विलेय है। यह स्तनपायी और सरीसृप प्राणियों के मूत्र में पाया जाता है। कृषि में नाइट्रोजनयुक्त रासायनिक खाद के रूप में इसका उपयोग होता है। यूरिया को सर्वप्रथम १७७३ में मूत्र में फ्रेंच वैज्ञानिक हिलेरी राउले ने खोजा था परन्तु कृत्रिम विधि से सबसे पहले यूरिया बनाने का श्रेय जर्मन वैज्ञानिक वोहलर को जाता है। इन्होंने सिल्वर आइसोसाइनेट से यूरिया का निर्माण किया तथा स्वीडेन के वैज्ञानिक बर्जेलियस के एक पत्र लिखा कि मैंने वृक्क (किडनी) की सहायता लिए बिना कृत्रिम विधि से यूरिया बना लिया है। उस समय पूरी दुनिया में बर्जेलियस का सिद्धान्त माना जाता था कि यूरिया जैसे कार्बनिक यौगिक सजीवों के शरीर के बाहर बन ही नहीं सकते तथा इनको बनाने के लिए प्राण शक्ति की आवश्यकता होती है। बड़े पैमाने पर यूरिया का उत्पादन द्रव अमोनिया तथा द्रव कार्बन डाई-आक्साइड की प्रतिक्रिया से होता है। यूरिया का उपयोग मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने में होता है। इसका प्रयोग वाहनों के प्रदूषण नियंत्रक के रूप में भी किया जाता है। यूरिया-फार्मल्डिहाइड, रेंजिन, प्लास्टिक एवं हाइड्राजिन बनाने में इसका उपयोग किया जाता है। इससे यूरिया-स्टीबामिन नामक काला-जार की दवा बनती है। वेरोनल नामक नींद की दवा बनाने में उसका उपयोग किया जाता है। सेडेटिव के रूप में उपयोग होने वाली दवाओं के बनाने में भी इसका उपयोग किया जाता है। .

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येलो लाइन (दिल्ली मेट्रो)

right right दिल्ली की दिल्ली मैट्रो प्रणाली में 15 मैट्रो स्टेशन हैं, जो कि जहांगीरपुरी से केंद्रीय सचिवालय तक जाती है। इसके द्वारा तय की गई कुल दूरी है 17.36 कि.मी। यह लाइन पूर्णतया प्रचालन में है।.

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योरूबा विकिपीडिया

योरूबा विकिपीडिया विकिपीडिया का योरूबा भाषा का संस्करण है। २८ मार्च, २००९ तक इस विकिपीडिया पर लेखों की कुल संख्या ६,२४३+ है और यह विकिपीडिया का १०१वां सबसे बड़ा संस्करण है। en:Main Page.

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रब ने बना दी जोड़ी

रब ने बना दी जोड़ी वर्ष २००८ में बनी एक हिन्दी फ़िल्म है। फिल्म के मुख्य कलाकार शाहरुख खान और अनुष्का शर्मा हैं। यह नवोदित तारिका अनुष्का शर्मा की पहली फ़िल्म है। फ़िल्म में अमृतसर के एक दफ्तर के बाबू को दिखाया गया है, जिसकी शादी से पहले किसी भी लड़की से कोई पहचान तक नहीं होती। .

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रमनलाल सी मेहता

रमनलाल सी मेहता (३१ अक्टूबर १९१८ – १८ अक्टूबर २०१४) को सन २००९ में भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये गुजरात राज्य से हैं। १८ अक्टूबर २०१४ को उनका निधन हो गया। .

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रमेश पोखरियाल

रमेश पोखरियाल "निशंक" (जन्म 15 जुलाई १९५८) एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं। वे उत्तराखण्ड भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख नेता हैं और एक हिन्दी कवि भी हैं।वे वर्तमान समय में हरिद्वार क्षेत्र से लोक सभा सांसद है और लोक सभा आश्वासन समिति के अध्यक्ष हैं। डाॅ0 रमेश पोखरियाल जी उत्तराखण्ड राज्य के पाँचवे मुख्यमंत्री रहे हैं। .

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रानी लक्ष्मीबाई

रानी लक्ष्मीबाई (जन्म: 19 नवम्बर 1828 के अनुसार रानी लक्ष्मीबाई की जन्मतिथि 19 नवम्बर 1835 है – मृत्यु: 18 जून 1858) मराठा शासित झाँसी राज्य की रानी और 1857 के प्रथम भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम की वीरांगना थीं। उन्होंने सिर्फ़ 23 साल की उम्र में अंग्रेज़ साम्राज्य की सेना से जद्दोजहद की और रणभूमि में उनकी मौत हुई थी। .

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राम जन्मभूमि

हिन्दुओं की मान्यता है कि श्री राम का जन्म अयोध्या में हुआ था और उनके जन्मस्थान पर एक भव्य मन्दिर विराजमान था जिसे मुगल आक्रमणकारी बाबर ने तोड़कर वहाँ एक मसजिद बना दी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी की अगुवाई में इस स्थान को मुक्त करने एवं वहाँ एक नया मन्दिर बनाने के लिये एक लम्बा आन्दोलन चला। ६ दिसम्बर सन् १९९२ को यह विवादित ढ़ांचा गिरा दिया गया और वहाँ श्री राम का एक अस्थायी मन्दिर निर्मित कर दिया गया। .

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रामस्वामी वेंकटरमण

रामस्वामी वेंकटरमण, (रामास्वामी वेंकटरमन, रामास्वामी वेंकटरामण या रामास्वामी वेंकटरमण)(४ दिसंबर १९१०-२७ जनवरी २००९) भारत के ८वें राष्ट्रपति थे। वे १९८७ से १९९२ तक इस पद पर रहे। राष्ट्रपति बनने के पहले वे ४ वर्षों तक भारत के उपराष्ट्रपति रहे। मंगलवार को २७ जनवरी को लंबी बीमारी के बाद उनका निधन हो गया। वे ९८ वर्ष के थे। राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री समेत देश भर के अनेक राजनेताओं ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है। उन्होंने २:३० बजे दिल्ली में सेना के रिसर्च एंड रेफरल हॉस्पिटल में अंतिम साँस ली। उन्हें मूत्राशय में संक्रमण (यूरोसेप्सिस) की शिकायत के बाद विगत १२ जनवरी को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वे साँस संबंधी बीमारी से भी पीड़ित थे। उनका कार्यकाल १९८७ से १९९२ तक रहा। राष्ट्रपति पद पर आसीन होने से पूर्व वेंकटरमन करीब चार साल तक देश के उपराष्ट्रपति भी रहे। .

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रामविलास शर्मा

डॉ॰ रामविलास शर्मा (१० अक्टूबर, १९१२- ३० मई, २०००) आधुनिक हिन्दी साहित्य के सुप्रसिद्ध आलोचक, निबंधकार, विचारक एवं कवि थे। व्यवसाय से अंग्रेजी के प्रोफेसर, दिल से हिन्दी के प्रकांड पंडित और महान विचारक, ऋग्वेद और मार्क्स के अध्येता, कवि, आलोचक, इतिहासवेत्ता, भाषाविद, राजनीति-विशारद ये सब विशेषण उन पर समान रूप से लागू होते हैं। .

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रायबहादुर गूजर मल मोदी

गूजर मल मोदी (९ अगस्त, १९०२ - २२ जनवरी, १९७६) भारत के एक उद्योगपति थे। इन्होंने मोदी उद्योग गृह की स्थापना की। इन्होंने ही उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में बेगमाबाद गाँव को मोदीनगर नामक एक औद्योगिक टाउनशिप का रूप दिया। इनको उद्योग एवं व्यापार के क्षेत्र में सन १९६८ में भारत सरकार ने पद्म भूषण से सम्मानित किया था। ये उत्तर प्रदेश राज्य से हैं। गूजरमल मोदी के नाम का शिलालेख, गूजरमल मोदी अस्पताल, साकेत, नई दिल्ली में स्थित .

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राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, तिरुचिरापल्ली

राष्ट्रीय तकनीकी संस्थान, तिरुचिरापल्ली, तमिल नाडु की स्थापना १९६४ में की गई थी और २८ जुलाई २००३ को इसे राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान का दर्जा दिया गया था। संस्थान में १३ विभाग हैं और यह सिविल इंजीनियरिंग, कम्प्यूटर विज्ञान इंजीनियरिंग, विद्युत और इलैक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, इलैक्ट्रॉनिक्स और संचार इंजीनियरिंग, धातुकर्मीय उत्पादन इंजीनियरिंग, रसायन इंजीनियरिंग, इंस्ट्रूमैन्टेशन और कंट्रोल इंजीनियरिंग, विषयों में चार वर्षीय अवर स्नातक पाठयक्रमों और बी.आर्क.

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राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दुर्गापुर

राष्ट्रीय तकनीकी संस्थान, दुर्गापुर राष्ट्रीय तकनीकी संस्थान, दुर्गापुर, पश्चिम बंगाल की स्थापना १९६० में की गई थी और ३ जुलाई २००३ को इसे राष्‍ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के रूप में परिवर्तित किया गया था। इस संस्थान में १५ विभाग हैं। यह संस्थान सिविल इंजीनियरी, विद्युत इंजीनियरी, अभियांत्रिकी इंजीनियरी, रसायन इंजीनियरी, धातुकर्मीय इंजीनियरी, इलैक्ट्रॉनिकी तथा संचार इंजीनियरी, कम्प्यूटर विज्ञान तथा इंजीनियरी, जैब प्रौद्योगिकी तथा सूचना प्रौद्योगिकी जैसे विषयों मे चार-वर्षीय अवर-स्नातक पाठयक्रम चलाता है। यह संस्थान एमबीए तथा एमसीए सहित नौ विषयों में एम.टेक पाठयक्रमों का भी संचालन करता है। यह संस्थान विदेशी विद्यार्थियों के लिए १२० विद्यार्थी क्षमता वाला एक पुरूष छात्रावास, तीन १२० बिस्तर वाले लेक्चरर दीर्घाएं, कम्प्यूटर केन्द्र विस्तार, विद्युत यंत्र प्रयोगशाला, हाई पावर प्रयोगशाला का निर्माण करेगा। .

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राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, पटना

राष्ट्रीय तकनीकी संस्थान, पटना, बिहार मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा सृजित अठारहवाँ राष्ट्रीय संस्थान है जो पूर्व में बिहार इंजीनियरी कालेज, पटना था। संस्थान, विद्युत इंजीनियरी, अभियांत्रिकी इंजीनियरी, सिविल इंजीनियरी, इलैक्ट्रानिक एवं संचार इंजीनियरी, आर्कीचेक्टर में अवर स्नातक पाठयक्रम और विद्युत इंजीनियरी, अभियांत्रिकी इंजीनियरी एवं सिविल इंजीनियरी में स्नातकोत्तर पाठयक्रम संचालित करता है। संस्थान आंशिक रूप से आवासीय है जो कुछ छात्रों और शिक्षण स्टाफ को आवास के लिए सीमित सुविधाएं प्रदान करता है। संस्थान में लड़कों के लिए तीन छात्रावास और लड़कियों के लिए एक छात्रावास है। संस्थान परिसर में सात अनिवार्य सेवाएं अर्थात २४ घंटे बिजली की आपूर्ति, उपयुक्त पेयजल, सफाई एवं स्वच्छता का रख-रखाव, सुरक्षा प्रबंध, चिकित्सा आकस्मिक सहायता के लिए एम्बुलेंस सेवा, ईपीएबी एक्स.

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राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रायपुर

राष्ट्रीय तकनीकी संस्थान, रायपुर, छत्तीसगढ़ को दिनांक १ दिसम्बर २००५ से केन्द्रीय सरकार के पूर्णत: वित्तपोषित संस्थान के रूप में अधिग्रहित किया गया और राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान का दर्जा प्रदान किया गया। वर्तमान में संस्थान अवर स्नातक स्तर पर १२ पाठयक्रम और ६ स्नातकोत्तर पाठयक्रम संचालित कर रहा है। संस्थान में दूरस्थ शिक्षा प्रदान करने की सुविधा है। संस्थान में ८२ प्रयोगशालाएँ हैं जो बहुत बड़ी हैं। कॉलेज में एक बालिका छात्रावास सहित ६ छात्रावास हैं। इस संस्थान में एक सुसज्जित पुस्तकालय हैं। .

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राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, श्रीनगर

एनाअईटी के शैक्षणिक ब्लॉक का मुख्य भवन राष्ट्रीय तकनीकी संस्थान, श्रीनगर, कश्मीर की स्थापना १९६० में की गई थी तथा ७ अगस्त २००३ को इसे राष्‍ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान का दर्जा दिया गया था। संस्थान सिविल इंजीनियरिंग, विद्युत इंजीनियरिंग, इलैक्ट्रानिक तथा संचार इंजीनियरिंग, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, रसायन तथा धातुकर्मीय इंजीनियरिंग, विषयों में अवर स्नातक पाठयक्रम तथा संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी और मैकेनिकल सिस्टम डिजाईन में एमई पाठयक्रम संचालित करता है। संस्थान सभी विज्ञान विभागों तथा कुछ इंजीनियरिंग विभागों हेतु एम.फिल तथा पी.एच-डी.

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राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, सूरतकल

राष्ट्रीय तकनीकी संस्थान, सूरतकल की स्थापना १९६० में की गई थी तथा २६ जून २००२ को इसे राष्‍ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, सूरतकल के रूप में स्तरोन्नत किया गया था। संस्थान, सिविल इंजीनियरिंग, मैकेनिकल इंजीनियरिंग तथा संचार इंजीनियरिंग, धातुकर्मीय इंजीनियरिंग, खनन इंजीनियरिंग, कम्प्यूटर इंजीनियरिंग तथा सूचना प्रौद्योगिकी विषयों में अवर स्नातक पाठयक्रम संचालित करता है। रिपोर्टाधीन वर्ष के दौरान अवर स्नातक पाठयक्रमों हेतु कुल लगभग ४८० छात्र दाखिल किए गए थे। संस्थान २१ स्नातकोत्तर कार्यक्रम भी संचालित करता है। इस संस्थान में पीएच डी कार्यक्रम भी संचालित किए जाते हैं। .

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राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, हमीरपुर

राष्ट्रीय तकनीकी संस्थान, हमीरपुर (NIT Hamirpur) की स्थापना, १९८५ में की गई थी और २६ जून २००२ को इसे राष्‍ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान का दर्जा प्रदान किया गया। बुनियादी सुविधाओं को उपलब्ध करवाने के लिहाज से विश्व बैंक द्वारा इस कालेज को सबसे अच्छी एनआईटी का दर्जा प्रदान किया जा चुका है। नेशनल इंस्टीच्यूट ऑफ टेक्नोलाजी, हमीरपुर इंजीनियरिंग, सैद्धांतिक विज्ञान के कार्यक्रमों के साथ व्यवहारिक विज्ञान के पाठ्यक्रमों का संचालन करता है। एनआईटी में अंडर ग्रेजुएट छात्रों को दाखिला भारतीय इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा द्वारा प्राप्त होता है। छात्रों को बैचलर ऑफ टेक्नोलाजी (बीटेक) की डिग्री आठ समेस्टर उत्तीर्ण करने के बाद प्राप्त होती है। स्नातकोत्तर कार्यक्रम (एमटेक) डिग्री 2005 से प्रारंभ हुई,2009 बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (एमबीए) डिग्री शुरू हुई। एनआईटी बेहतरीन एजुकेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए पूरे भारत में जाना जाता है। शांत परिवेश में स्थित इसका कैम्पस उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थिंयों के लिए बेहतरीन भौगोलिक माहौल उपलब्ध करवाता है। संस्थान में पुस्तकालय की अलग से 1986 में स्थापना की गई। इस पुस्तकालय में लगभग सौ विद्यार्थियों की एक साथ बैठने की सुव्यवस्था है। एनआईटी हमीरपुर इनडोर और आउटडोर खेलों के लिए खेल सुविधाएं प्रदान करता है। खेल सुविधाओं के अतिरिक्त कालेज छात्रों को समय-समय पर ऐतिहासिक भ्रमण या एजुकेशनल टूर के लिए बाहर भी ले जाता है। तकनीकी शिक्षा के लिहाज से इसे हिमाचल का सर्वश्रेष्ठ संस्थान माना जा सकता है। .

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राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, जमशेदपुर

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, जमशेदपुर भारत के लगभग बीस राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (एन आई टी) में से एक है। पहले इसे क्षेत्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, जमशेदपुर (Regional Institute of Technology (RIT)) के नाम से जाना जाता था। इसकी स्थापना १९६० में की गई थी तथा २७ दिसम्बर २००२ को इसे राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के रूप में स्तरोन्नत किया गया था। यह संस्थान जमशेदपुर के बाहरी क्षेत्र में अदित्यपुर के पास है। इसके आस-पास अनेक लघु औद्योगिक इकाइयाँ स्थापित हैं। संस्थान में १३ विभाग हैं। यह सिविल, मैकेनिकल, इलैक्ट्रीकल, धातुकर्म तथा कम्प्यूटर विज्ञान और इंजीनियरिंग जैसे विषयों में अवर-स्नातक पाठयक्रम संचालित करता है। संस्थान स्नातकोत्तर पाठयक्रम और एम.सी.ए. भी संचालित करता है। संस्थान में एक सुसज्जित पुस्तकालय है। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, जमशेद्पुर का प्रशासकीय भवन एवं मुख्य प्रवेश-द्वार .

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राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, वारांगल

राष्ट्रीय तकनीकी संस्थान, वारांगल, आंध्र प्रदेश की स्थापना १९५९ में की गई थी और १० सितम्बर २००२ को इसे राष्‍ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, वारंगल को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान का दर्जा दिया गया था। यह संस्थान, क्षेत्रीय इंजीनियरी कालेजों की श्रृंखला में प्रथम था। संस्थान इंजीनियरी, विज्ञान और मानविकी की सभी शाखाओं में ८ अवर स्नातक कार्यक्रम, स्नातकोतर कार्यक्रम तथा पीएच डी कार्यक्रम संचालित करता है। संस्थान का केन्द्रीय पुस्तकालय, आन्ध्र प्रदेश राज्य के तकनीकी पुस्तकालय में से सबसे उत्तम माना जाता है। संस्थान के परिसर को नेटवर्क से जोड़ा गया है और सभी स्टाफ और विद्यार्थियों के लिए इंटरनेट सुविधाएं उपलब्ध हैं। सभी विद्यार्थियों और स्टाफ के अधिकतर सदस्यों को परिसर में आवासीय सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। .

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राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कालीकट

राष्ट्रीय तकनीकी संस्थान, कालीकट, केरल की स्थापना १९६१ में की गई थी और २६ जून २००२ को इसे राष्‍ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान का दर्जा प्रदान किया गया है। इस संस्थान में आठ विभाग हैं। यह संस्थान सिविल इंजीनियरी, रसायन इंजीनियरी, विद्युत तथा इलैक्ट्रॉनिकी इंजीनियरी, इलैक्ट्रॉनिकी तथा संचार इंजीनियरी, अभियांत्रिकी इंजीनियरी, उत्पादन इंजीनियरी तथा प्रबंधन, कम्प्यूटर विज्ञान तथा इंजीनियरी, सूचना प्रौद्योगिकी में चार वर्षीय अवर स्नातक पाठयक्रम और वी.आर्क.

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राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कुरुक्षेत्र

राष्ट्रीय तकनीकी संस्थान, कुरुक्षेत्र, हरियाणा क्षेत्रीय इंजीनियरिंग कालेज, कुरूक्षेत्र की स्थापना १९६३ में की गई थी तथा इसे २६ जून २००२ को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कुरूक्षेत्र के रूप में स्तरोन्नत किया गया था। संस्थान सिविल इंजीनियरिंग, इलैक्ट्रीकल इंजीनियरिंग, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, इलैक्ट्रॅनिक्स तथा संचार इंजीनियरिंग, औद्योगिक इंजीनियरिंग, सूचना प्रौद्योगिकी तथा कम्प्यूटर इंजीनियरिंग जैसे विषयों में ७ अवर स्नातक पाठयक्रम संचालित करता है। संस्थान इन विषयों में स्नातकोत्तर पाठयक्रम भी संचालित करता है। संस्थान के पास सुविकसित कैंपस तथा फाइवर आपटिक के माध्यम से कम्प्यूटर नेटवर्किंग भी है। .

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राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, अगरतला

राष्ट्रीय तकनीकी संस्थान, अगरतला, त्रिपुरा की स्थापना वर्ष १९५५ में की गई थी और दिनांक १ अप्रैल २००६ को केन्द्र सरकार के पूर्णत: वित्त पोषित संस्थान के रूप में अधिग्रहित किया गया और राष्‍ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, अगरतला बनाया गया। संस्थान अवर-स्नातक स्तर पर प्रति वर्ष २६६ विद्यार्थियों की भर्ती कर ७ कोर्स संचालित करता है। .

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राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार २००७

7 सितम्बर, 2009 को वर्ष 2007 के लिए 55वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार की घोषणा की गई। ये पुरस्कार 21 अक्टूबर को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल द्वारा प्रदान किया जाएगा। .

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राष्ट्रीय कुष्ठ रोग उन्मूलन कार्यक्रम

राष्ट्रीय कुष्ठ रोग उन्मूलन कार्यक्रम health राष्‍ट्रीय कुष्‍ठ रोग उन्‍मूलन कार्यक्रम सन 1955 में सरकार द्वारा शुरू की गयी एक योजना है।इस कार्यक्रम को विश्व बैंक की सहायता से 1993-94 से बढ़ाकर 2003-04 तक कर दिया गया और इसका उद्देश्य सार्वजनिक स्वास्थ्य से 2005 तक कुष्ठ उन्मूलन था और इस 1,10,000 की संख्या को कम करना था। एनएलईपी को राज्य /ज़िला स्तर पर विकेंद्रीकृत किया गया और कुष्ठ रोग सेवाओं को 2001-2002 के बाद सामान्य देखभाल प्रणाली के साथ एकीकृत किया गया। इससे कुष्ठ (पीएएल) से प्रभावित व्यक्तियों के कलंक और भेदभाव को कम करने में मदद मिली। मल्टी ड्रग थेरेपी (एमडीटी) सभी उपकेंद्रों,प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों,सरकारी अस्पतालों और औषधालयों में सभी कार्य दिवसों पर निःशुल्क प्रदान की जा रही है। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन की शुरूआत के बाद कुष्ठ कार्यक्रम भी मिशन का अनिवार्य हिस्सा रहा है। एनआरएचएम के तहत उपलब्ध संस्थागत तंत्र जैसे रोगी कल्याण समिति, ग्राम स्वास्थ्य समिति एवं स्वच्छता समिति और पंचायती राज संस्थाओं का उपयोग कुष्ठ रोगियों को सेवाएं प्रदान करने के लिए किया जा रहा है। संदिग्ध कुष्ठ मामलों में निकटतम स्वास्थ्य सुविधा की सिफारिश और अनुवर्ती इलाज पूरा करने में आशा भी शामिल है। उन्हें इन सेवाओं के लिए प्रोत्साहन भुगतान किया जाता है। भारत ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2002 में सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर दिसंबर 2005 तक कुष्ठ उन्मूलन (1,10,000 जनसंख्या पर) का लक्ष्य हासिल करना निर्धारित किया। मार्च 2009 तक देश में कुष्ठ रोग की व्यापकता दर (पीआर) 10,000 की आबादी पर 9.72 प्रतिशत रह गया। आईईसी गतिविधियों को तेज किया गया है और विशेष आईईसी जनवरी 2008 के बाद से कुष्ठ मुक्त भारत की विषय वस्तु के साथ शुरू किया गया। यह कुष्ठ बोझ को कम करने, मामलों की जल्दी पहचान और कुष्ठ सेवाओं के गुणवत्ता परक उपचार और कुष्ठ के कलंक और भेदभाव को दूर करने पर केंद्रीत है। .

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राहतगढ़ जलप्रपात

राहतगढ़ जलप्रपात भारत के मध्य प्रदेश प्रदेश मे स्थित एक जलप्रपात है। राहतगढ़ का सुंदर जलप्रपात सागर-भोपाल मार्ग पर करीब ४० किमी दूर स्थित राहतगढ़ कस्बा वॉटरफॉल के कारण अब एक बेहद लोकप्रिय पिकनिक स्पॉट है। प्राचीन काल में यह अपने कंगूरेदार दुर्ग, प्राचीर द्वारों, महल और मंदिरों-मस्जिदों के लिए प्रसिद्ध था। कालांतर में सब नष्ट होता चला गया और अब यहाँ दुर्ग के सिर्फ अवशेष बचे हैं। बीना नदी के ऊँचे किनारे पर स्थित राहतगढ़ कस्‍बा पुरावशेषों के अनुसार ग्यारहवीं शताब्दी में परमारों के शासनकाल में बहुत अच्छी स्थिति में था। कस्बे से करीब ३ किमी दूर स्थित किले की बाहरी दीवारों में कभी बड़ी-बड़ी २६ मीनारें थीं। भीतर पहुँचने के लिए ५ बड़े दरवाजे थे। कालांतर में यहां हुई लड़ाइयों और देखरेख के अभाव में राहतगढ़ का वैभव अतीत की काली गुफा में दफन हो गया। सागर के स्थानीय निवासी वर्षा-ऋतु में यहाँ छुट्टी के दिन समय बिताने के लिए बड़ी संख्या में जाते हैं। शहर के आस-पास ऐसे स्थलों का अभाव होने के कारण यह पिकनिक मनाने का अत्यंत लोकप्रिय स्‍थान है। श्रेणी:मध्य प्रदेश श्रेणी:सागर जिला श्रेणी:भारत के जल प्रपात.

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राजभवन (नागालैण्ड)

राजभवन कोहिमा भारत के नागालैण्ड राज्य के राज्यपाल का आधिकारिक आवास है। यह राज्य की राजधानी कोहिमा में स्थित है और निखिल कुमार यहाँ के वर्तमान राज्यपाल हैं जिन्होंने १५ अक्टूबर २००९ को राज्यपाल का पदभार ग्रहण किया था। .

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राजेन्द्र अवस्थी

राजेन्द्र अवस्थी (२५ जनवरी, १९३० - ३० दिसंबर, २००९) हिंदी के प्रख्यात पत्रकार और लेखक थे। उनका जन्म मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के ज्योतिनगर गढा इलाके में हुआ था। वे नवभारत, सारिका, नंदन, साप्ताहिक हिन्दुस्तान और कादम्बिनी के संपादक रहे। उन्होंने अनेक उपन्यासों कहानियों एवं कविताओं की रचना की। वह ऑथर गिल्ड ऑफ इंडिया के अध्यक्ष भी रहे। दिल्ली सरकार की हिन्दी अकादमी ने उन्हें १९९७-९८ में साहित्यिक कृति से सम्मानित किया था। .

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राजेश जोशी

राजेश जोशी, जुलाई २०१७राजेश जोशी (जन्म १९४६) साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत हिन्दी साहित्यकार हैं। उनका जन्म मध्य प्रदेश के नरसिंहगढ़ जिले में हुआ। उन्होंने शिक्षा पूरी करने के बाद पत्रकारिता शुरू की और कुछ सालों तक अध्यापन किया। राजेश जोशी ने कविताओं के अलावा कहानियाँ, नाटक, लेख और टिप्पणियाँ भी लिखीं। साथ ही उन्होंने कुछ नाट्य रूपांतर तथा कुछ लघु फिल्मों के लिए पटकथा लेखन का कार्य भी किया। उनके द्वारा भतृहरि की कविताओं की अनुरचना भूमिका "कल्पतरू यह भी" एवं मायकोवस्की की कविता का अनुवाद "पतलून पहिना बादल" नाम से किए गए है। कई भारतीय भाषाओं के साथ-साथ अँग्रेजी, रूसी और जर्मन में भी उनकी कविताओं के अनुवाद प्रकाशित हुए हैं। राजेश जोशी के चार कविता-संग्रह- एक दिन बोलेंगे पेड़, मिट्टी का चेहरा, नेपथ्य में हँसी और दो पंक्तियों के बीच, दो कहानी संग्रह - सोमवार और अन्य कहानियाँ, कपिल का पेड़, तीन नाटक - जादू जंगल, अच्छे आदमी, टंकारा का गाना। इसके अतिरिक्त आलोचनात्मक टिप्पणियों की किताब - एक कवि की नोटबुक प्रकाशित हुए हैं। उन्हें शमशेर सम्मान, पहल सम्मान, मध्य प्रदेश सरकार का शिखर सम्मान और माखनलाल चतुर्वेदी पुरस्कार के साथ केन्द्र साहित्य अकादमी के प्रतिष्ठित सम्मान से सम्मानित किया गया है। राजेश जोशी की कविताएँ गहरे सामाजिक अभिप्राय वाली होती हैं। वे जीवन के संकट में भी गहरी आस्था को उभारती हैं। उनकी कविताओं में स्थानीय बोली-बानी, मिजाज़ और मौसम सभी कुछ व्याप्त है। उनके काव्यलोक में आत्मीयता और लयात्मकता है तथा मनुष्यता को बचाए रखने का एक निरंतर संघर्ष भी। दुनिया के नष्ट होने का खतरा राजेश जोशी को जितना प्रबल दिखाई देता है, उतना ही वे जीवन की संभावनाओं की खोज के लिए बेचैन दिखाई देते हैं। .

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राजेश खट्टर

राजेश खट्टर (जन्म: १९६६, मुंबई) एक भारतीय अभिनेता, पटकथा लेखक और डबिंग कलाकार हैं। खट्टर अंग्रेजी, हिंदी, पंजाबी और उर्दू भाषा में दक्षता रखते हैं। एक फ़िल्म अभिनेता के रूप में वे मुख्यतः हिंदी बोलते हैं और उन्होंने हिंदी भाषा की कई भारतीय फ़िल्मों में अभिनय किया है। साथ ही अंग्रेजी और अन्य भाषाओं की कुछ फ़िल्मों में भी अभिनय किया है। एक हिंदी बहुमुखी डबिंग कलाकार के रूप में खट्टर ने हिंदी में कई हॉलीवुड हस्तियों - टॉम हैंक्स, जॉनी डेप, ह्यू जैकमैन, रॉबर्ट डॉनी जुनियर, ड्वेन जॉनसन, निकोलस केज, लैम्बर्ट विल्सन और माइकल फस्स्बेंदर आदि - को अपनी आवाज दी है। .

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राजेश काव

राजेश काव (जन्म: १८ मार्च, १९७९ में गुजरात) एक भारतीय है आवाज अभिनेता, जो हिंदी बोलती है। वह सबसे अच्छा जाना जाता है होने के लिए, तीसरे स्थायी और फाइनल हिंदी डबिंग से अधिक आवाज आर्टिस्ट के लिए की भूमिका डैनियल रैडक्लिफ के रूप में हैरी पॉटर में पिछले तीन हैरी पॉटर फ़िल्मों, यह से पर पारित किया गया था के बाद अमी त्रिवेदी के भाई करण त्रिवेदी। .

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राजेश कुमार

राजेश कुमार - जनवादी नाटककार। जन्म -११ जनवरी १९५८ पटना, बिहार। राजेश कुमार नुक्कड़ नाटक आंदोलन के शुरुआती दौर १९७६ से सक्रिय है। अब तक दर्जनों नाटक एवं नुक्कड़ नाट्य संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। आरा की नाट्य संस्था युवानीति, भागलपुर की दिशा और शाहजहाँपुर की नाट्य संस्था अभिव्यक्ति के संस्थापक सदस्य। पेशे से ईन्जीनियर है। इन दिनो लखनऊ में कार्यरत। .

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राईज़ ऑफ़ द गार्गोय्ल्स

राईज़ ऑफ़ द गार्गोय्ल्स (फ्रेंच: La fureur des gargouilles, अंग्रेजी: Rise of the Gargoyles) एक २००९ टीवी फिल्म बिल कोरकोरन द्वारा निर्देशित और Syfy चैनल के लिए उत्पादन किया। इस में १८ फिल्म है मनेअटर श्रृंखला.

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राग हिंडोल

राग हिंडोल 16वीं शती का एक लघुचित्रराग हिंडोल या राग हिंदोल का जन्म कल्याण थाट से माना गया है। इसमें मध्यम तीव्र तथा निषाद व गंधार कोमल लगते हैं। ऋषभ तथा पंचम वर्जित है। इसकी जाति ओड़व ओड़व है तथा वादी स्वर धैवत व संवादी स्वर गांधार है। गायन का समय प्रातःकाल है। शुद्ध निषाद, रिषभ और पंचम इस स्वर इसमें वर्ज्य हैं। तीव्र मध्यम वाला यह एक ही राग है जिसको प्रातःकाल गाया जाता है। अन्य सभी तीव्र मध्यम वाले रागों का गायन समय रात्रि में होता है। राग हिंदोल में निषाद को बहुत कम महत्व दिया गया है। इतना ही नहीं, आरोह में उसे वर्ज्य करके अवरोह में भी सां ध इन दो स्वरों के बीच में छुपाना पड़ता है क्यों कि म ध नि सा लेने से सोहनी और सां नि, ध म लेने से पूरिया राग की छाया इसमें आने लगती है। इसको सोहनी और पूरिया से बचाने के लिए मध सांध, धम गसा ध सां ऐसी पकड़ लेने से इसका स्वरूप स्पष्ट होता है। इस राग में जब सां ध ऐसे स्वर आते हैं तब सां से ध स्वर पर आते समय बीच के निषाद को धैवत में जोड़ दिया जाता है। राग चिकित्सा में इस राग को जोड़ों के दर्द के लिए लाभकारी माना गया है। .

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राइबोसोम

लयनकाय (13) तारककाय थेर्मस थर्मोफाइलस की एक ३०एस उपैकाई का परमाणु ढांचा। प्रोटीन-नीले में एवं एकल सूत्र आर.एन.ए नारंगी रंग में दिखाए गये हैं राइबोसोम सजीव कोशिका के कोशिका द्रव में स्थित बहुत ही सूक्ष्म कण हैं, जिनकी प्रोटीनों के संश्लेषण में महत्त्वपूर्ण भूमिका है। ये आनुवांशिक पदार्थों (डीएनए या आरएनए) के संकेतों को प्रोटीन शृंखला में परिवर्तित करते हैं। ये एण्डोप्लाज्मिक रेटिकुलम के ऊपरी सतह पर पाये जाते हैं, इसके अलावा ये माइटोकाण्ड्रिया तथा क्लोरोप्लास्ट में भी पाये जाते हैं। राइबोसोम एक संदेशधारक राईबोस न्यूक्लिक अम्ल (एमआरएनए) के साथ जुड़े रहता है जिसमें किसी विशेष प्रोटीन के निर्माण के लिए आवश्यक अमीनो अम्ल को सही क्रमानुसार लगाने का संदेश रहता है। अमीनो अम्ल संदेशवाहक आरएनए अणुओं के साथ संलग्न रहते हैं। इस प्रकार राइबोसोम प्रोटीन के संश्लेषण में तो सहायता करता ही है लिपिड के उपापचयी क्रियाओं में भी सहायता करता है। राइबोसोम की खोज १९५० के दशक में रोमानिया के जीववैज्ञानिक जॉर्ज पेलेड ने की थी। उन्होंने इस खोज के लिए इलैक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी का प्रयोग किया था जिसके लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। राइबोसोम नाम १९५८ में वैज्ञानिक रिचर्ड बी.

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राइबोज़ न्यूक्लिक अम्ल

आर एन ए एक अकेली बहु न्यूक्लियोटाइड शृंखला वाला लम्बा तंतुनुमा अणु, जिसमें फॉस्फेट और राइबोज़ शर्करा की इकाइयां एकांतर में स्थापित होतीं हैं। इसका पूर्ण नाम है राइबोज़ न्यूक्लिक अम्ल। डी एन ए की तरह आर एन ए में भी राइबोज़ से जुड़े चार क्षारक होते हैं। अंतर केवल इतना है, कि इसमें थाइमीन के स्थान पर यूरासिल होता है। किसी भी जीवित प्राणी के शरीर में राइबोन्यूलिक अम्ल भी उतनी ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है जितनी डी एन ए। आरएनए शरीर में डीएनए के जीन्स को नकल कर के व्यापक तौर पर प्रवाहित करने का काम करता है। इसके साथ ही यह कोशिकाओं में अन्य आनुवांशिक सामग्री पहुंचाने में भी सहायक होता है। आरएनए की खोज सेवेरो ओकोआ, रॉबर्ट हॉली और कार्ल वोसे ने की थी। आरएनए के महत्त्वपूर्ण कार्यो में जीन को सुचारू बनाना और उनकी प्रतियां तैयार करना होता है। यह विभिन्न प्रकार के प्रोटीनों को जोड़ने का भी कार्य करता है। इसकी कई किस्में होती हैं जिनमें रिबोसोमल आरएनए, ट्रांसफर आरएनए और मैसेंजर आरएनए प्रमुख हैं। आरएनए की श्रृंखला फॉस्फेट्स और राइबोस के समूहों से मिलकर बनती है, जिससे इसके चार मूल तत्व, एडेनाइन, साइटोसाइन, गुआनाइन और यूरासिल जुड़े होते हैं। डीएनए से विपरीत, आरएनए एकल श्रृंखला होती है जिसकी मदद से यह खुद को कोशिका के संकरे आकार में समाहित कर लेता है। आरएनए का स्वरूप एक सहस्राब्दी यानी एक हजार वर्षो में बहुत कम बदलता है। अतएव इसका प्रयोग विभिन्न प्राणियों के संयुक्त पूर्वजों की खोज करने में किया जाता है। डीएनए ही आरएनए के संधिपात्र की भूमिका अदा करता है। मूलत: डीएनए में ही आरएनए का रूप निहित होता है। इसलिए आवश्यकतानुसार डीएनए, जिसके पास आरएनए बनाने का अधिकार होता है, आवश्यक सूचना लेकर काम में लग जाता है। .

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रिचर्ड गेयर

रिचर्ड टिफेनी गेयर (जन्म - 31 अगस्त,1949) एक अमेरिकी अभिनेता हैं। उन्होंने अपने अभिनय की शुरुआत 1970 के दशक में की और अमेरिकन जिगोलो ' नामक फ़िल्म में अपने किरदार से 1980 में वे प्रमुखता में आये, जिसने उन्हें एक अग्रणी अभिनेता और एक यौन प्रतीक के रूप में स्थापित किया। इसके बाद उन्होंने ऍन ऑफिसर एंड अ जेंटलमैन, प्रीटी वुमन, प्राइमल फियर तथा शिकागो आदि कई सफल फ़िल्मों में अभिनय किया, जिनके लिए उन्होंने सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के रूप में एक गोल्डेन ग्लोब अवार्ड तथा साथ ही सर्वश्रेष्ठ कास्ट के हिस्से के रूप में स्क्रीन एक्टर्स गिल्ड अवार्ड जीता.

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रिश्तन जी सियासत

रिश्तन जी सियासत सिन्धी भाषा के विख्यात साहित्यकार आनंद खेमानी द्वारा रचित एक कहानी–संग्रह है जिसके लिये उन्हें सन् 2009 में सिन्धी भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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रिक्टर पैमाना

चार्ल्स रिक्टर रिक्टर पैमाना (अंग्रेज़ी:Richter magnitude scale) भूकंप की तरंगों की तीव्रता मापने का एक गणितीय पैमाना है। किसी भूकम्प के समय भूमि के कम्पन के अधिकतम आयाम और किसी यादृच्छ (आर्बिट्रेरी) छोटे आयाम के अनुपात के साधारण लघुगणक को 'रिक्टर पैमाना' कहते हैं। रिक्टर पैमाने का विकास १९३० के दशक में किया गया था। १९७० के बाद से भूकम्प की तीव्रता के मापन के लिये रिक्टर पैमाने के स्थान पर 'आघूर्ण परिमाण पैमाना' (Moment Magnitude Scale (MMS)) का उपयोग किया जाने लगा। 'रिक्तर पैमाने' का पूरा नाम रिक्टर परिमाण परीक्षण पैमाना (रिक्टर मैग्नीट्यूड टेस्ट स्केल) है और लघु रूप में इसे स्थानिक परिमाण (लोकल मैग्नीट्यूड) (M_L) लिखते हैं। .

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रंगोली

अधिक विकल्पों के लिए यहाँ जाएँ - रंगोली (बहुविकल्पी) रंगोली पर जलते दीप। रंगोली भारत की प्राचीन सांस्कृतिक परंपरा और लोक-कला है। अलग अलग प्रदेशों में रंगोली के नाम और उसकी शैली में भिन्नता हो सकती है लेकिन इसके पीछे निहित भावना और संस्कृति में पर्याप्त समानता है। इसकी यही विशेषता इसे विविधता देती है और इसके विभिन्न आयामों को भी प्रदर्शित करती है। इसे सामान्यतः त्योहार, व्रत, पूजा, उत्सव विवाह आदि शुभ अवसरों पर सूखे और प्राकृतिक रंगों से बनाया जाता है। इसमें साधारण ज्यामितिक आकार हो सकते हैं या फिर देवी देवताओं की आकृतियाँ। इनका प्रयोजन सजावट और सुमंगल है। इन्हें प्रायः घर की महिलाएँ बनाती हैं। विभिन्न अवसरों पर बनाई जाने वाली इन पारंपरिक कलाकृतियों के विषय अवसर के अनुकूल अलग-अलग होते हैं। इसके लिए प्रयोग में लाए जाने वाले पारंपरिक रंगों में पिसा हुआ सूखा या गीला चावल, सिंदूर, रोली,हल्दी, सूखा आटा और अन्य प्राकृतिक रंगो का प्रयोग किया जाता है परन्तु अब रंगोली में रासायनिक रंगों का प्रयोग भी होने लगा है। रंगोली को द्वार की देहरी, आँगन के केंद्र और उत्सव के लिए निश्चित स्थान के बीच में या चारों ओर बनाया जाता है। कभी-कभी इसे फूलों, लकड़ी या किसी अन्य वस्तु के बुरादे या चावल आदि अन्न से भी बनाया जाता है। .

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रक्तचाप

रक्तचापमापी या स्फाइगनोमैनोमीटर, रक्तचाप मापने के यंत्र को कहते हैं। ऊपर देखें एक मर्करी रक्तचापमापी रक्तचाप (अंग्रेज़ी:ब्लड प्रैशर) रक्तवाहिनियों में बहते रक्त द्वारा वाहिनियों की दीवारों पर द्वारा डाले गये दबाव को कहते हैं। धमनियां वह नलिका है जो पंप करने वाले हृदय से रक्त को शरीर के सभी ऊतकों और इंद्रियों तक ले जाते हैं। हृदय, रक्त को धमनियों में पंप करके धमनियों में रक्त प्रवाह को विनियमित करता है और इसपर लगने वाले दबाव को ही रक्तचाप कहते हैं। किसी व्यक्ति का रक्तचाप, सिस्टोलिक/डायास्टोलिक रक्तचाप के रूप में अभिव्यक्त किया जाता है। जैसे कि १२०/८० सिस्टोलिक अर्थात ऊपर की संख्या धमनियों में दाब को दर्शाती है। इसमें हृदय की मांसपेशियां संकुचित होकर धमनियों में रक्त को पंप करती हैं। डायालोस्टिक रक्त चाप अर्थात नीचे वाली संख्या धमनियों में उस दाब को दर्शाती है जब संकुचन के बाद हृदय की मांसपेशियां शिथिल हो जाती है। रक्तचाप हमेशा उस समय अधिक होता है जब हृदय पंप कर रहा होता है बनिस्बत जब वह शिथिल होता है। एक स्वस्थ वयस्क व्यक्ति का सिस्टोलिक रक्तचाप पारा के 90 और १२० मिलिमीटर के बीच होता है। सामान्य डायालोस्टिक रक्तचाप पारा के ६० से ८० मि.मि.

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रुखसाना कौसर

रुखसाना कौसर, भारतीय राज्य जम्मू और कश्मीर के कश्मीर के राजौरी जिले के अंतर्गत स्थित कलसियां गांव की एक बहादुर लड़की है। उसने 27 सितंबर 2009 की रात को अपने घर में घुसे लश्कर-ए-तैयबा के एक शीर्ष पाकिस्तानी आतंकवादी को मार गिराया, तथा एक अन्य को घायल कर दिया था। उसने और उसके भाई बहनों ने मिलकर आतंकवादियों से जमकर टक्कर ली थी। रुखसाना ने एक आतंकवादी की राइफल छीनकर उसे घटनास्थल पर ही ढेर कर दिया था। इस घटना में रुखसाना के माता-पिता राशिदा और नूर हुसैन घायल हो गए थे। 27 सितंबर की इस घटना से पहले रुखसाना ने कभी बंदूक नहीं पकड़ी थी, लेकिन उस दिन उसने बहादुरी की मिसाल कायम की। भारत की राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल तथा गृहमंत्री पी चिदंबरम ने भी उसके बहादुरी की तारीफ की। .

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रेड लाइन (दिल्ली मेट्रो)

दिल्ली की दिल्ली मैट्रो प्रणाली में 21 मैट्रो स्टेशन हैं, जो कि दिलशाद गार्डन से रिठाला तक जाती है। इसके द्वारा तय की गई कुल दूरी है 25.15 कि.मी। यह लाइन अधिकतर प्रचालन में है। यह अधिकांश लाइन उपरिगामी है। यह लाइन उत्तर, उत्तर-पूर्व और उत्तर-पश्चिम और पश्चिम दिल्ली को जोड़ती है। यह लाइन दिल्ली में पहली लाइन थी, जो जनता के लिए आरंभ हुई। .

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रेत (कथा)

हिन्दी कथा में अपनी अलग और देशज छवि बनाए और बचाए रखने वाले चर्चित लेखक भगवानदास मोरवाल के इस नये उपन्यास के केन्द्र में है - माना गुरु और माँ नलिन्या की संतान कंजर और उसका जीवन। कंजर यानी काननचर अर्थात् जंगल में घूमने वाला। अपने लोक-विश्वासों व लोकाचारों की धुरी पर अपनी अस्मिता और अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष करती एक विमुक्त जनजाति। राजकमल से प्रकाशित इस उपन्‍यास में कहानी है कंजरों की - एक ऐसी घुमंतू जाति जो समूचे दक्षिण-पश्चिमी एशिया में कमोबेश फैली हुई है। कहानी घूमती है कमला सदन नाम के एक मकान के इर्द-गिर्द, जो परिवार की मुखिया कमला बुआ के नाम पर रखा गया है और जहां रुक्मिणी, संतो, पिंकी आदि तमाम महिलाओं का जमघट है। ये सभी पारंपरिक यौनकर्मी हैं और जिस कंजर समाज से वे आती हैं, वहां इस पेशे को लंबे समय से मान्‍यता मिली हुई है। समूचे परिदृश्‍य में सिर्फ एक पुरुष पात्र है जिसे सभी बैदजी कह कर पुकारते हैं। यह पात्र वैसे तो दूसरी जाति का है, लेकिन घर-परिवार के मामलों में इसे सलाहकार और हितैषी की भूमिका में दिखाया गया है। यहीं से शुरू होती है स्‍त्री विमर्श के निम्‍नवर्गीय प्रसंगों की दास्‍तान - जहां स्‍त्री की देह को पुरुष समाज के खिलाफ लेखक ने एक औजार और हथियार के रूप में स्‍थापित किया है। गाजूकी और कमला सदन के बहाने यह कथा ऐसे दुर्दम्य समाज की कथा है जिसमें एक तरफ़ कमला बुआ, सुशीला, माया, रुक्मिनी, वंदना, पूनम हैं; तो दूसरी तरफ़ हैं संतो और अनिता भाभी। 'बुआ' यानी कथित सभ्य समाज के बर-अक्स पूरे परिवार की सर्वेसर्वा, या कहिए पितृसत्तात्मक व्यवस्था में चुपके से सेंध लगाते मातृसत्तात्मक वर्चस्व का पर्याय और 'गंगा नहाने' का सुपात्र। जबकि 'भाभी' होने का मतलब है घरों की चारदीवारी में घुटने को विवश एक दोयम दर्जे का सदस्य। एक ऐसा सदस्य जो परिवार का होते हुए भी उसका नहीं है। रेत भारतीय समाज के उन अनकहे, अनसुलझे अंतर्विरोधों व वटों की कथा है, जो घनश्याम 'कृष्ण' उर्फ़ वैद्यजी की 'कुत्ते फेल' साइकिल के करियर पर बैठ गाजूकी नदी के बीहड़ों से होते हुए आगे बढ़ती है। यह सफलताओं के शिखर पर विराजती रुक्मिणी कंजर का ऐसा लोमहर्षक आख्यान है जो अभी तक इतिहास के पन्नों में रेत से अटा हुआ था। जरायम-पेशा और कथित सभ्य समाज के मध्य गड़ी यौन-शुचिताओं का अतिक्रमण करता, अपनी गहरी तरल संलग्नता, सूक्ष्म संवेदनात्मक रचना-कौशल तथा ग़ज़ब की क़िस्सागोई से लबरेज़ लेखक का यह नया शाहकार, हिन्दी में स्त्री-विमर्श के चौखटों व हदों को तोड़ता हुआ इस विमर्श के एक नये अध्याय की शुरुआत करता है। इस उपन्यास को २००९ में यू के कथा सम्मान द्वारा सम्मानित किया गया है। .

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रेस तीसरी दुनिया तक

रेस तीसरी दुनिया तक (Race to Witch Mountain) २००९ की एक विज्ञान कथा/थ्रिलर फिल्म है जो १९७५ की डिज्नी फिल्म एस्केप टु विच माउंटेन नामक फ़िल्म का रीमेक है। इस श्रेणी की सभी तीनों फ़िल्में 'अलेक्ज़ेंडर की' के १९६८ के उपन्यास "एस्केप टु विच माउंटेन" पर आधारित हैं। फ़िल्म का निर्देशन एंडी फ़िकमान ने किया है। .

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रोमान्श विकिपीडिया

रोमांश विकिपीडिया विकिपीडिया का रोमांश भाषा का संस्करण है। यह दिसंबर २००३ में आरंभ किया गया था। २७ मई, २००९ तक इस विकिपीडिया पर लेखों की संख्या ३,१६८+ है और यह विकिपीडिया का १२८वां सबसे बड़ा संस्करण है।.

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रोहू मछली

रोहू मछली रोहू (वैज्ञानिक नाम - Labeo rohita) पृष्ठवंशी हड्डीयुक्त मछली है जो ताजे मीठे जल में पाई जाती है। इसका शरीर नाव के आकार का होता है जिससे इसे जल में तैरने में आसानी होती है। इसके शरीर में दो तरह के मीन-पक्ष (फ़िन) पाये जाते हैं, जिसमें कुछ जोड़े में होते हैं तथा कुछ अकेले होते हैं। इनके मीन पक्षों के नाम पेक्टोरेल फिन, पेल्विक फिन, (जोड़े में), पृष्ठ फिन, एनलपख तथा पुच्छ पंख (एकल) हैं। इनका शरीर साइक्लोइड शल्कों से ढँका रहता है लेकिन सिर पर शल्क नहीं होते हैं। सिर के पिछले भाग के दोंनो तरफ गलफड़ होते हें जो ढक्कन या अपरकुलम द्वारा ढके रहते हैं। गलफड़ों में गिल्स स्थित होते हैं जो इसका श्वसन अंग हैं। ढक्कन के पीछे से पूँछ तक एक स्पष्ट पार्श्वीय रेखा होती है। पीठ के तरफ का हिस्सा काला या हरा होता है और पेट की तरफ का सफेद। इसका सिर तिकोना होता है तथा सिर के नीचे मुँह होता है। इसका अंतः कंकाल हड्डियों का बना होता है। आहारनाल के ऊपर वाताशय अवस्थित रहता है। यह तैरने तथा श्वसन में सहायता करता है। भोजन के रूप में इसका विशेष महत्व है। भारत में उड़ीसा, बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल तथा असम के अतिरिक्त थाइलैंड, पाकिस्तान और बांग्लादेश के निवासियों में यह सर्वाधिक स्वादिष्ट व्यंजनों में से एक समझी जाती है। उड़िया और बंगाली भोजन में इसके अंडों को तलकर भोजन के प्रारंभ में परोसा जाता है तथा परवल में भरकर स्वादिष्ट व्यंजन पोटोलेर दोलमा तैयार किया जाता है, जो अतिथिसत्कार का एक विशेष अंग हैं। बंगाल में इससे अनेक व्यंजन बनाए जाते हैं। इसे सरसों के तेल में तल कर परोसा जाता है, कलिया बनाया जाता है जिसमें इसे सुगंधित गाढ़े शोरबे में पकाते हैं तथा इमली और सरसों की चटपटी चटनी के साथ भी इसे पकाया जाता है। पंजाब के लाहौरी व्यंजनों में इसे पकौड़े की तरह तल कर विशेष रूप से तैयार किया जाता है। इसी प्रकार उड़ीसा के व्यंजन माचा-भाजी में रोहू मछली का विशेष महत्व है। ईराक में भी यह मछली भोजन के रूप में बहुत पसंद की जाती है। रोहू मछली शाकाहारी होती है तथा तेज़ी से बढ़ती है इस कारण इसे भारत में मत्स्य उत्पादन के लिए तीन सर्वश्रेष्ठ मछलियों में से एक माना गया है। .

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रोजर फ़ेडरर

रॉजर फ़ेडरर (उच्चारण / rɒdʒə fɛdərər /) (जन्म 8 अगस्त 1981) एक व्यवसायिक स्विस टेनिस खिलाड़ी हैं, जिनकी वर्तमान में एटीपी वरीयता 2 है। उनके नाम 2 फ़रवरी 2004 से 17 अगस्त 2008 तक 237 हफ़्तों तक प्रथम वरीयता पर रहने का रिकॉर्ड है। फ़ेडरर को व्यापक रूप से इस युग के महानतम एकल खिलाड़ी के रूप में जाना जाता है। फ़ेडरर ने 17 ग्रैंड स्लैम एकल खिताब (4 ऑस्ट्रेलियन ओपन, 7 विम्बलडन, 5 अमरीकी ओपन) | उन्होंने 4 टेनिस मास्टर्स कप खिताब, 16 एटीपी मास्टर्स श्रृंखलाएं, तथा एक ओलम्पिक युगल स्वर्ण पदक जीते हैं। उनके नाम कई रिकॉर्ड हैं, जिसमें लगातार 10 ग्रैंड स्लैम फ़ाईनलों (2005 विम्बलडन प्रतियोगिता से 2007 अमेरिकी ओपन प्रतियोगिता तक) तथा लगातार 19 ग्रैंड स्लैम सेमीफ़ाइनल मुकाबलों (2004 विम्बलडन से वर्तमान तक) में शामिल होना भी सम्मिलित है। .

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लाडिनो विकिपीडिया

लाडिनो विकिपीडिया विकिपीडिया का लाडिनो भाषा का संस्करण है। २७ मई, २००९ तक इस विकिपीडिया पर लेखों की संख्या १,९५०+ है और यह विकिपीडिया का १५२वां सबसे बड़ा संस्करण है।.

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लातिन विकिपीडिया

लैटिन विकिपीडिया विकिपीडिया का लैटिन भाषा का संकरण है। यह २२ मई, २००२ में आरंभ किया गया था और इस पर लेखों की कुल संख्या २५ मई, २००९ तक २८,२५०+ है। यह विकिपीडिया का इक्यावनवां सबसे बड़ा संकरण है।.

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लातवियाई विकिपीडिया

लाट्वियाई विकिपीडिया विकिपीडिया का लाट्वियाई भाषा का संस्करण है। यह जून २००३ में आरंभ किया गया था और २६ मई, २००९ तक इस पर लेखों की कुल संख्या २१,५००+ है। यह विकिपीडिया का तिरेसठवां सबसे बड़ा संस्करण है।.

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लाभांश

लाभांश (अंग्रेज़ी:Dividend / डिविडेंड) किसी कंपनी के लाभ में भागीदारों का अंश होता है जो वह कंपनी लाभ कमाने पर अपने शेयरधारकों को देती है। किसी ज्वाइंट स्टॉक कंपनी में लाभांश, शेयरों के निश्चित मूल्य के आधार पर मिलता है। इस मामले में शेयरधारक उसके शेयर के अनुपात में डिविडेंड ग्रहण करता है। डिविडेंड पैसे, शेयर या अन्य कई रूपों में दिया जा सकता है। किसी व्यापारिक कंपनी के अंशधारियों में लाभ के जिस भाग का विभाजन किया जाता है उसे लाभांश कहते है। प्रत्येक व्यापारिक कंपनी को लाभांश वितरण करने का समवायी अधिकार होता है। संचालक इस बात की सिफारिश करते हैं कि कितनी राशि लाभांश के रूप में घोषित की जाए। उसके पश्चात्‌ कंपनी अपनी सामान्य बैठक में लाभांश की घोषणा करती है, किंतु यह राशि संचालकों द्वारा सिफारिश की गई राशि से अधिक नहीं होनी चाहिए। इसके अतिरिक्त अंतर्नियमों द्वारा अधिकृत होने पर संचालक दो सामान्य बैठकों के बीच में ही अंतरिम लाभांश की घोषणा भी कर सकते है। यत: लाभांश कंपनी के लाभ का ही भाग होता है, अत: इसे केवल लाभ से ही दिया जा सकता है, न कि पूँजी से। लाभांश के विषय में अंशधारियों के सामान्य अधिकारों, जैसे लाभांश की दर तथा पूर्वाधिकार आदि का प्रकथन कभी कभी सीमानियम में ही कर दिया जाता है जिससे यथासंभव, उन अधिकारों में परिवर्तन न हो सके। कई बार इनका प्रकथन अंतर्नियमों में किया जात है और कभी कभी दोनों प्रलेखों में भी इनका प्रकथन होता है। किस ढंग से लाभांश की घोषणा तथा अदायगी की जाएगी, इसका प्रकथन साधारणतया अंतर्नियमों में ही होता है। जब तक कंपनी चालू रहती है, वह पूरा लाभ अंशधारियों में वितरण करने के लिए बाध्य नहीं होती। लाभांश वितरण करने के स्थान पर, अंतर्नियमों में इसकी व्यवस्था होने पर यह अपने लाभ को पूँजी में परिवर्तित (Capitalise) कर सकती है। लाभांश को इसकी घोषणा के दिन से ऋण माना जाता है तथा यह देय हो जाता है। कभी कभी अंतर्नियमों में यह भी प्रावधान होता है कि घोषणा के बाद निश्चित समय तक लाभांश के अयाचित रहने पर इसे जब्त किया जा सकता है। कंपनी से सदस्य अंतर्नियमों के नियमानुसार लाभांश की अधियाचना कर सकते हैं किंतु यह आवश्यक है कि ऐसे सदस्यों का नाम लाभांश घोषणा के दिन कंपनी के रजिस्टर में दर्ज हो। जब अंशों का हस्तांतरण लाभांश घोषित करने पर उसके बहुत निकट किस तिथि को हो, तो हस्तांतरक तथा हस्तांतरी यह भी संविदा कर सकते हैं कि लाभांश किसको मिले। .

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लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर

लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर या वृहद हैड्रॉन संघट्टक (Large Hadron Collider; LHC के रूप में संक्षेपाक्षरित) विश्व का सबसे विशाल और शक्तिशाली कण त्वरक है। यह सर्न की महत्वाकांक्षी परियोजना है। यह जेनेवा के समीप फ़्रान्स और स्विट्ज़रलैण्ड की सीमा पर ज़मीन के नीचे स्थित है। इसकी रचना २७ किलोमीटर परिधि वाले एक छल्ले-नुमा सुरंग में हुई है, जिसे आम भाषा में लार्ड ऑफ द रिंग कहा जा रहा है। इसी सुरंग में इस त्वरक के चुम्बक, संसूचक (डिटेक्टर), बीम-लाइन एवं अन्य उपकरण लगे हैं। सुरंग के अन्दर दो बीम पाइपों में दो विपरीत दिशाओं से आ रही ७ TeV (टेरा एले़ट्रान वोल्ट्) की प्रोट्रॉन किरण-पुंजों (बीम) को आपस में संघट्ट (टक्कर) किया जायेगा जिससे वही स्थिति उत्पन्न की जायेगी जो ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति के समय बिग बैंग के रूप में हुई थी। ग्यातव्य है कि ७ TeV उर्जा वाले प्रोटॉन का वेग प्रकाश के वेग के लगभग बराबर होता है। एल एच सी की सहायता से किये जाने वाले प्रयोगों का मुख्य उद्देश्य स्टैन्डर्ड मॉडेल की सीमाओं एवं वैधता की जाँच करना है। स्टैन्डर्ड मॉडेल इस समय कण-भौतिकी का सबसे आधुनिक सैद्धान्तिक व्याख्या या मॉडल है। १० सितंबर २००८ को पहली बार इसमें सफलता पूर्वक प्रोटान धारा प्रवाहित की गई। इस परियोजना में विश्व के ८५ से अधिक देशों नें अपना योगदान किया है। परियोजना में ८००० भौतिक वैज्ञानिक कार्य कर रहे हैं जो विभिन्न देशों, या विश्वविद्यालयों से आए हैं। प्रोटॉन बीम को त्वरित (accelerate) करने के लिये इसके कुछ अवयवों (जैसे द्विध्रुव (डाइपोल) चुम्बक, चतुर्ध्रुव (quadrupole) चुमबक आदि) का तापमान लगभग 1.90केल्विन या -२७१.२५0सेन्टीग्रेड तक ठंडा करना आवश्यक होता है ताकि जिन चालकों (conductors) में धारा बहती है वे अतिचालकता (superconductivity) की अवस्था में आ जांय और ये चुम्बक आवश्यक चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न कर सकें।"".

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लिथुआनियाई विकिपीडिया

लिथुआनियाई विकिपीडिया विकिपीडिया का लिथुआनियाई भाषा का संकरण है। यह २० फरवरी, २००३ में आरंभ किया गया था और इस पर लेखों की कुल संख्या २५ मई, २००९ तक ८६,५००+ है। यह विकिपीडिया का उनतीसवां सबसे बड़ा संकरण है।.

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लिबरेशन टाइगर्स ऑफ़ तमिल ईलम

कोई विवरण नहीं।

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लिम्बुर्गियाई विकिपीडिया

लिम्बुर्गियाई विकिपीडिया विकिपीडिया का लिम्बुर्गियाई भाषा का संस्करण है। यह दिसंबर २००४ में आरंभ किया गया था। २७ मई, २००९ तक इस विकिपीडिया पर लेखों की संख्या ४,६५०+ है और यह विकिपीडिया का ११२वां सबसे बड़ा संस्करण है।.

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लियोनेल मेस्सी

लियोनेल आंद्रेस मेस्सी (जन्म 24 जून 1987) अर्जेंटीना के फ़ुटबॉल खिलाड़ी हैं, जो इस समय ला लिगा टीम बार्सिलोना और अर्जेंटीना की राष्ट्रीय टीम के लिए खेलते हैं। मेस्सी को अपनी पीढ़ी के सर्वश्रेष्ठ फ़ुटबॉल खिलाड़ियों में से एक माना जाता है, जिसने 21 साल की उम्र में ही कई बैलन डी'ऑर और FIFA वर्ष का विश्व खिलाड़ी नामांकन प्राप्त किए। उनकी खेल शैली और क्षमता की वजह से, फ़ुटबॉल के दिग्गज डिएगो मारडोना के साथ उनकी तुलना की जाने लगी, जिन्होंने ख़ुद मेस्सी को अपना "उत्तराधिकारी" घोषित किया है। मेस्सी ने कम उम्र में ही फ़ुटबॉल खेलना शुरू किया और जल्द ही बार्सिलोना ने उनकी क्षमता पहचान ली। उन्होंने 2000 में रोसारियो-आधारित न्यूवेल्स ओल्ड बॉय्स युवा दल को छोड़ा और अपने परिवार के साथ यूरोप आए, चूंकि बार्सिलोना ने उनके विकास हार्मोन की कमी के लिए इलाज की पेशकश की। 2004-05 सीज़न में पहली बार मैदान में उतरते हुए, उन्होंने सबसे कम उम्र के लीग खेल खेलने वाले फ़ुटबॉलर का ला लिगा रिकॉर्ड तोड़ दिया और साथ ही, सबसे कम उम्र के लीग गोल स्कोर करने वाले बने। मेस्सी के प्रथम प्रदर्शन के दौरान बार्सिलोना ने ला लिगा जीता और 2006 में दोहरा लीग और UEFA चैंपियन्स लीग जीतने के साथ ही, जल्द ही प्रमुख सम्मान मिलने लगे। 2006-07 उनकी सफलता का सीज़न था: एल क्लासिको में लगातार तीन गोल करते हुए और 26 लीग मैचों में 14 गोल की फ़िनिशिंग के साथ, उन्होंने नियमित रूप से फ़र्स्ट टीम में जगह बनाई। संभवतः 2008-09 का सीज़न उनका सबसे सफल सीज़न था, जिसमें मेस्सी 38 गोल करते हुए तिगुने विजय अभियान का अभिन्न अंग बने। मेस्सी, 2005 FIFA वर्ल्ड यूथ चैम्पियनशिप में छह गोल के साथ, जिसमें अंतिम खेल के दो गोल शामिल हैं, शीर्ष स्कोरर बने। उसके शीघ्र बाद, वे अर्जेंटीना के वरिष्ठ अंतर्राष्ट्रीय टीम के एक सदस्य के रूप में स्थापित हुए.

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लियोपोल्ड कैफ़े

रेस्तरां अंदर से, सितंबर,२००७ कैफ़े लियोपॉल्ड दक्षिण मुंबई के कोलाबा उपनगर में स्थित लोकप्रिय रेस्तराँ और बार है जहाँ बहुत बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक खाने-पीने आते हैं। यह मुंबई के सबसे पुराने ईरानी रेस्त्रांओं में से एक है और सुबह आठ बजे से रात १२ बजे तक खुला रहता है। इसकी हॉल (वॉल) ऑफ़ फेम पर मीरा नायर से लेकर हितेश देशमुख तक के फोटो देखे जा सकते हैं। यह रेस्त्राँ अपने अतिथयों से आग्रह करता है कि यदि आप उभरते हुए कवि, लेखक फ़िल्मी सितारे, विदेशी पर्यटक या संगीतकार हैं तो अपने फ़ोटो के साथ एक वाक्य लिखकर भेजें कि आपको यह रेस्त्रां-बार क्यों पसंद है और आपको वॉल ऑफ फ़ेम पर स्थान दिया जाएगा। अपने प्रचार के लिए यह अपने अतिथियों को चित्रित टीशर्ट, मग, गिलास और तश्तरियों की बिक्री भी करता है। ग्रेगोरी डेविड रॉबर्टस के उपन्यास शांताराम में इसकी विस्तार से चर्चा की गई है। .

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लिखथाप

कुमाऊँ की देहरी और दीवार सजाने की कला 'लिख थाप' या थापा कहलाती हैं, इनको ऐपण, ज्यूँति या ज्यूँति मातृका पट्ट भी कहा जाता है। इसकी रचना में अलग अलग समुदायों में अनेक प्रकार के प्रतीक व लाक्षणिक अन्तर दृष्टिगोचर होते हैं। साहों व ब्राह्मणों के ऐपणों में सबसे बड़ा अन्तर यह है कि ब्राह्मणों में चावल की पिष्ठि निर्मित घोल द्वारा धरातलीय अल्पना अनेक आलेखन प्रतीकों, कलात्मक डिजाइनों, बेलबूटों में प्रकट होती है। साहों में धरातलीय आलेखन ब्राह्मणों के समान ही होते हैं परन्तु इनमें भिप्ति चित्रों की रचना की ठोस परम्परा है। थापा श्रेणी में चित्रांकन दीवलों या कागज में होता है। यह शैली ब्राह्मणों में नहीं के बराबर है। जिन आलेखनों या चित्रों की रचना कागज में की जाती है। उन्हें पट्टा कहते हैं। इसी प्रकार नवरात्रि पूजन के दिनों में दशहरे का पट्टा केवल साह लोग बनाते हैं। ऐपणों में एक स्पष्ट अन्तर यह है कि ब्राह्मण गेरु मिट्टी से धरातल का आलेपन कर चावल के आटे के घोल से सीधे ऐपणों का आलेखन करते हैं परन्तु साहों के यहाँ चावल की पिष्टि के घोल में हल्दी डालकर उसे हल्का पीला अवश्य किया जाता हैं तभी ऐपणों का आलेखन होता है। कुमाऊँ की ज्यूति मातृका पट्टों, थापों तथा वर बूदों में श्वेताम्बर जैन अपभ्रंश शैली का भी स्पष्ट प्रभाव दिखाई देता है। श्वेताम्बर जैन पोथियों की श्रृंखला में बड़ौदा के निकट एक जैन पुस्तकागार में ११६१ ई. की एक ही पुस्तक में औधनियुक्ति आदि सात ग्रंथ मिले, जिनमें १६ विद्या देवियों, सरस्वती, लक्ष्मी, अम्बिका, चक्र देवी तथआ यक्षों के २१ चित्र बने हैं। इन ग्रंथ चित्रों में चौकोर स्थान बनाकर एक चौखट सी बनाई गई हैं और इनके मध्य में आकृतियाँ बिठाई गई हैं। ठीक इसी प्रकार का चित्र नियोजन कुमाऊँ के समस्त ज्यूति पट्टो, थापों व बखूदों में किया जाता है। कुमाऊँ में ज्यूति पट्टों में महालक्ष्मी, महासरस्वती व महाकाली ३ देवियाँ बनाई जाती है साथ में १६ षोडश मातृकाएं तथा गणेश, चन्द्र व सूर्य निर्मित किये जाते हैं। अपभ्रंश शैली में रंग व उनकी संख्या भी निश्चित है। जैसे लाल, हरा, पीला, काला, बैगनी, नीला व सफेद। इन्हीं सात रंगों का प्रयोग कुमाऊँ की भिप्ति चित्राकृतियों अथवा थापों व पट्टों में किया जाता है।, कुमाऊँ में किसी भी मांगलिक कार्य के अवसर पर अपने अपने घरों को ऐपण द्वारा सजाने की पुराणी परंपरा रही है। ऐपण शब्द का उद्गम संस्कृत शब्द अर्पण से माना जाता है। इसमें घरों के आंगन से लेकर मंदिर तक प्राकृतिक रंगों जैसे गेरू एवं पिसे हुए चावल के घोल (बिस्वार) से विभिन्न आकृतियां बनायी जाती है। दीपावली में बनाए जाने वाले ऐपण में मां लक्ष्मी के पैर घर के बाहर से अन्दर की ओर को गेरू के धरातल पर विस्वार (चावल का पिसा घोल) से बनाए जाते है। दो पैरों के बीच के खाली स्थान पर गोल आकृति बनायी जाती है जो धन का प्रतीक माना जाता है। पूजा कक्ष में भी लक्ष्मी की चौकी बनाई जाती है। इनके साथ लहरों, फूल मालाओं, सितारों, बेल-बूटों व स्वास्तिक चिन्ह की आकृतियां बनाई जाती है। पारंपरिक गेरू एवं बिस्वार से बनाए जाने वाले ऐपण की जगह अब सिंथेटिक रंगो से भी ऐपण बनाने लगे है। २०१५ में उत्तराखण्ड के तत्कालीन मुख्यमंत्री, हरीश रावत ने राज्य के सभी सरकारी कार्यालयों में ऐपण के चित्र रखवाने के निर्देश दिये थे। .

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लिंगला विकिपीडिया

लिंगला विकिपीडिया विकिपीडिया का लिंगला भाषा का संस्करण है। यह जनवरी २००४ में आरंभ किया गया था। २७ मई, २००९ तक इस विकिपीडिया पर लेखों की संख्या १,१३०+ है और यह विकिपीडिया का १६९वां सबसे बड़ा संस्करण है।.

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लव आज कल (2009 फ़िल्म)

लव आज कल 2009 में बनी निर्देशक इम्तियाज़ अली की हास्य-प्रेम ड्रामा आधारित हिन्दी भाषा की फिल्म है। मुख्य भूमिकाओं में सैफ़ अली खान और दीपिका पादुकोण ने अदायगी की है। सह-भूमिकाओं में ऋषि कपूर, राहुल खन्ना, डाॅली आहलूवालिया एवं राजेन्द्रनाथ ज़ुत्शी शामिल है। .

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लखनऊ

लखनऊ (भारत के सर्वाधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश की राजधानी है। इस शहर में लखनऊ जिले और लखनऊ मंडल के प्रशासनिक मुख्यालय भी स्थित हैं। लखनऊ शहर अपनी खास नज़ाकत और तहजीब वाली बहुसांस्कृतिक खूबी, दशहरी आम के बाग़ों तथा चिकन की कढ़ाई के काम के लिये जाना जाता है। २००६ मे इसकी जनसंख्या २,५४१,१०१ तथा साक्षरता दर ६८.६३% थी। भारत सरकार की २००१ की जनगणना, सामाजिक आर्थिक सूचकांक और बुनियादी सुविधा सूचकांक संबंधी आंकड़ों के अनुसार, लखनऊ जिला अल्पसंख्यकों की घनी आबादी वाला जिला है। कानपुर के बाद यह शहर उत्तर-प्रदेश का सबसे बड़ा शहरी क्षेत्र है। शहर के बीच से गोमती नदी बहती है, जो लखनऊ की संस्कृति का हिस्सा है। लखनऊ उस क्ष्रेत्र मे स्थित है जिसे ऐतिहासिक रूप से अवध क्षेत्र के नाम से जाना जाता था। लखनऊ हमेशा से एक बहुसांस्कृतिक शहर रहा है। यहाँ के शिया नवाबों द्वारा शिष्टाचार, खूबसूरत उद्यानों, कविता, संगीत और बढ़िया व्यंजनों को हमेशा संरक्षण दिया गया। लखनऊ को नवाबों के शहर के रूप में भी जाना जाता है। इसे पूर्व की स्वर्ण नगर (गोल्डन सिटी) और शिराज-ए-हिंद के रूप में जाना जाता है। आज का लखनऊ एक जीवंत शहर है जिसमे एक आर्थिक विकास दिखता है और यह भारत के तेजी से बढ़ रहे गैर-महानगरों के शीर्ष पंद्रह में से एक है। यह हिंदी और उर्दू साहित्य के केंद्रों में से एक है। यहां अधिकांश लोग हिन्दी बोलते हैं। यहां की हिन्दी में लखनवी अंदाज़ है, जो विश्वप्रसिद्ध है। इसके अलावा यहाँ उर्दू और अंग्रेज़ी भी बोली जाती हैं। .

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लखनऊ मेट्रो

लखनऊ शहर के लिए उच्च क्षमता मास ट्रांज़िट प्रणाली यानि लखनऊ मेट्रो की योजना अंतिम रूप ले चुकी है। इसके लिए दिल्ली मेट्रो रेल कार्पोरेशन ही योजनाएं बना रहा है। डीएमआरसी ने यह काम श्रेई इंटरनेशनल को दिया है। इनकी रिपोर्ट के अनुसार लखनऊ में जमीन पर एक कि॰मी॰ मेट्रो पर १५ करोड़ रु का व्यय आयेगा, वहीं भूमिगत लाइन में यह बढ़कर २७ करोड़ हो जायेगा। | याहू जागरण|३ फरवरी, २००९) मेट्रो रेल के संचालन को मूर्त रूप देने और उस पर आने वाले खर्च को पूरा करने की व्यवस्था के लिए राज्य सरकार ने वित्त, नगर विकास, आवास, ऊर्जा, लोक निर्माण, परिवहन ओर पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिवों और लखनऊ के मंडलायुक्त की एक समिति बना दी है। लखनऊ और कानपुर में मेट्रो रेल शुरु होने के बाद सड़कों पर यातायात काफी कम हो सकेगा। वर्तमान में इन दोनों शहरों में हर महीने लगभग १००० नए चौपहिया वाहनों का पंजीकरण कराया जाता रहा है। लखनऊ में सभी राष्ट्रीय राजमार्गों पर बाइपास बना दिए जाने के बावजूद सड़कों पर गाड़ियों का दबाव बढ़ता ही जा रहा है। इस कारण से यहां मेट्रो का त्वरित निर्माण अत्यावश्यक हो गया है। लखनऊ शहर में आरंभ में चार गलियारे निश्चित किये गए हैं.

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लखनऊ में यातायात

चारबाग रेलवे स्टेशन लखनऊ में कई रेलवे स्टेशन हैं। शहर में मुख्य रेलवे स्टेशन चारबाग रेलवे स्टेशन है। इसकी शानदार महल रूपी इमारत १९२३ में बनी थी। मुख्य टर्मिनल उत्तर रेलवे का है (स्टेशन कोड: LKO)। दूसरा टर्मिनल पूर्वोत्तर रेलवे (एनईआर) मंडल का है। (स्टेशन कोड: LJN)। लखनऊ एक प्रधान जंक्शन स्टेशन है, जो भारत के लगभग सभी मुख्य शहरों से रेल द्वारा जुड़ा हुआ है। यहां और १३ रेलवे स्टेशन हैं.

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लखनऊ विश्वविद्यालय

लखनऊ विश्वविद्यालय लखनऊ विश्वविद्यालय भारत के प्रमुख शैक्षिक-संस्थानों में से एक है। यह लखनऊ के समृद्ध इतिहास को तो प्रकट करता ही है नगर के प्रमुख दर्शनीय स्थलों में से भी एक है। इसका प्राचीन भवन मध्यकालीन भारतीय स्थापत्य का सुंदर उदाहरण है। इसमें पढ़ने और पढाने वाले अनेक शिक्षक और विद्यार्थी देश और विदेश में प्रसिद्धि प्राप्त कर चुके हैं। .

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लखनऊ का रोटी बाजार

लखनऊ के अवधी व्यंजन जगप्रसिद्ध हैं। यहां के नवाबों ने खानपान के बहुत से व्यंजन चलाये हैं। इनमें बहुत प्रकार की रोटियां भी होती हैं। ऐसी ही रोटियां यहां के एक पुराने बाज़ार में आज भी मिलती हैं, बल्कि ये बाजार रोटियों का बाजार ही है। अकबरी गेट से नक्खास चौकी के पीछे तक यह बाजार है, जहां फुटकर व सैकड़े के हिसाब से शीरमाल, नान, खमीरी रोटी, रूमाली रोटी, कुल्चा जैसी कई अन्य तरह की रोटियां मिल जाएंगी। पुराने लखनऊ के इस रोटी बाजार में विभिन्न प्रकार की रोटियों की लगभग १५ दुकानें हैं, जहां सुबह नौ से रात नौ बजे तक गर्म रोटी खरीदी जा सकती है। कई पुराने नामी होटल भी इस गली के पास हैं, जहां अपनी मनपसंद रोटी के साथ मांसाहारी व्यंजन भी मिलते हैं।, राष्ट्रीय सहारा हिंदी दैनिक, प्रस्तुतकर्ता:अविनाश वाचस्पति, अभिगमन तिथि: २४ अगस्त, २००९ रोटियों में शीरमाल, कुल्चा, रूमाली की मांग सबसे ज्यादा होती है, अन्य तरह की रोटियों की मांग मोहर्रम व रमजान में बढ़ जाती है। आर्डर तैयार करने में कारीगरों को 12 घंटों के बजाय 18 घंटे या उससे अधिक काम करना पड़ता है। क्योंकि रमजान के महीने में बिक्री का समय दिन में न होकर देर शाम से पूरी रात चलता है यानी शाम चार बजे से सुबह चार बजे तक। इस इलाके में बनने वाली तमाम रोटियों में से सर्वाधिक बिक्री शीरमाल की ही होती है। केसरी रंग वाली शीरमाल मैदे, दूध व घी से बनती है, जो बहुत ही खास्ता और सुस्वादु होती है। तंदूर में पकाने के बाद इन पर खुशबू के लिए घी लगाया जाता है। शीरमाल ‘कबाब’ और कोरमे की लज्जत बढ़ाती है। शीरमाल का वजन के हासिब से रेट तय होता है यानी 110 ग्राम से 200 ग्राम की शीरमाल 4 से 7 रूपये प्रति पीस बिकती है। इस गली के बाहर ही कई नामी होटल है। जहां स्पेशल शीरमाल तैयार की जाती है, जिनका दाम 16 व 20 रूपये है। इन्हें देशी घी व केसर में तैयार किया जाता है। विशेषज्ञ के अनुसार शाही खाने में गिनी जाने वाली बाकरखानी रोटी अमीरों के दस्तरखान की बहुत ही विशष्टि रोटी थी। इसमें मेवे और मलाई का मिश्रण होता है। ये नाश्ते में चाय का आनन्द बढ़ा देती है। कारीगर बताते हैं कि बाकरखानी व ताफतान की मांग अब कम ही हो चली है। नान की मांग आम दिनों में कम रहती है। लोग शादी-ब्याह या खास अवसर पर आर्डर देकर नान बनवाते है। नान को नर्म व स्वादष्टि बनाने के लिए मैदे में दूध, दही, घी और रवा मिलाया जाता है। एक उक्ति के अनुसार लखनऊ के व्यंजन विशेषज्ञों ने ही परतदार पराठे की खोज की है, जिसको तंदूरी परांठा भी कहा जाता है। इन पराठों को तंदूर में तैयार किया जाता है। पराठे नर्म रहे इसलिए इन्हें पानी की छीटें दे कर उस पर घी से तर किया जाता है। ईरान से आई रोटी यानी कुलचा पर स्थानीय प्रभाव रहता है। इसी तरह लखनऊवालों ने भी कुलचे में विशेष प्रयोग किये। कुलचा नाहरी के विशेषज्ञ कारीगर हाजी जुबैर अहमद के अनुसार कुलचा अवधी व्यंजनों में शामिल खास रोटी है, जिसका साथ नाहरी बिना अधूरा है। लखनऊ के गिलामी कुलचे यानी दो भाग वाले कुलचे उनके परदादा ने तैयार किये। कुलचे रिच डाइट में आते हैं और जुबैर साहब के अनुसार अच्छी खुराक वाला आदमी भी तीन से अधिक नहीं खा सकता है। ये पांच रूपये प्रति पीस मिलते हैं। कुलचे गर्म खाने में ही मजा है यानी तंदूर से निकले और परोसा जाये। .

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लखनऊ की संस्कृति

लखनऊ अपनी विरासत में मिली संस्कृति को आधुनिक जीवनशैली के संग बड़ी सुंदरता के साथ संजोये हुए है। भारत के उत्कृष्टतम शहरों में गिने जाने वाले लखनऊ की संस्कृति में भावनाओं की गर्माहट के साथ उच्च श्रेणी का सौजन्य एवं प्रेम भी है। लखनऊ के समाज में नवाबों के समय से ही पहले आप वाली शैली समायी हुई है। हालांकि स्वार्थी आधुनिक शैली की पदचाप सुनायी देती है, किंतु फिर भी शहर की जनसंख्या का एक भाग इस तहजीब को संभाले हुए है। यह तहजीब यहां दो विशाल धर्मों के लोगों को एक समान संस्कृति से बांधती है। ये संस्कृति यहां के नवाबों के समय से चली आ रही है। .

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लग्ज़म्बर्गी विकिपीडिया

लग्ज़म्बर्गी विकिपीडिया विकिपीडिया का लग्ज़म्बर्गी भाषा का संस्करण है। यह २१ जुलाई २००४ में आरंभ किया गया था और २६ मई, २००९ तक इस पर लेखों की कुल संख्या २६,७५०+ है। यह विकिपीडिया का तिरेपनवां सबसे बड़ा संस्करण है।.

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लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर

लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से १२० कि॰मी॰ तथा संस्कारधानी शिवरीनारायण से ३ कि॰मी॰ की दूरी पर बसे खरौद नगर में स्थित है। यह नगर प्राचीन छत्तीसगढ़ के पाँच ललित कला केन्द्रों में से एक हैं और मोक्षदायी नगर माना जाने के कारण इसे छत्तीसगढ़ की काशी भी कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि यहाँ रामायण कालीन शबरी उद्धार और लंका विजय के निमित्त भ्राता लक्ष्मण की विनती पर श्रीराम ने खर और दूषण की मुक्ति के पश्चात 'लक्ष्मणेश्वर महादेव' की स्थापना की थी। यह मंदिर नगर के प्रमुख देव के रूप में पश्चिम दिशा में पूर्वाभिमुख स्थित है। मंदिर में चारों ओर पत्थर की मजबूत दीवार है। इस दीवार के अंदर ११० फीट लंबा और ४८ फीट चौड़ा चबूतरा है जिसके ऊपर ४८ फुट ऊँचा और ३० फुट गोलाई लिए मंदिर स्थित है। मंदिर के अवलोकन से पता चलता है कि पहले इस चबूतरे में बृहदाकार मंदिर के निर्माण की योजना थी, क्योंकि इसके अधोभाग स्पष्टत: मंदिर की आकृति में निर्मित है। चबूतरे के ऊपरी भाग को परिक्रमा कहते हैं। मंदिर के गर्भगृह में एक विशिष्ट शिवलिंग की स्थापना है। इस शिवलिंग की सबसे बडी विशेषता यह है कि शिवलिंग में एक लाख छिद्र है इसीलिये इसका नाम लक्षलिंग भी है। सभा मंडप के सामने के भाग में सत्यनारायण मंडप, नन्दी मंडप और भोगशाला हैं। मंदिर के मुख्य द्वार में प्रवेश करते ही सभा मंडप मिलता है। इसके दक्षिण तथा वाम भाग में एक-एक शिलालेख दीवार में लगा है। दक्षिण भाग के शिलालेख की भाषा अस्पष्ट है अत: इसे पढ़ा नहीं जा सकता। उसके अनुसार इस लेख में आठवी शताब्दी के इन्द्रबल तथा ईशानदेव नामक शासकों का उल्लेख हुआ है। मंदिर के वाम भाग का शिलालेख संस्कृत भाषा में है। इसमें ४४ श्लोक है। चन्द्रवंशी हैहयवंश में रत्नपुर के राजाओं का जन्म हुआ था। इनके द्वारा अनेक मंदिर, मठ और तालाब आदि निर्मित कराने का उल्लेख इस शिलालेख में है। तदनुसार रत्नदेव तृतीय की राल्हा और पद्मा नाम की दो रानियाँ थीं। राल्हा से सम्प्रद और जीजाक नामक पुत्र हुए। पद्मा से सिंहतुल्य पराक्रमी पुत्र खड्गदेव हुए जो रत्नपुर के राजा भी हुए जिसने लक्ष्मणेश्वर मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। इससे पता चलता है कि मंदिर आठवीं शताब्दी तक जीर्ण हो चुका था जिसके उद्धार की आवश्यकता पड़ी। इस आधार पर कुछ विद्वान इसको छठी शताब्दी का मानते हैं लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर में स्थित शिवलिंग मूल मंदिर के प्रवेश द्वार के उभय पार्श्व में कलाकृति से सुसज्जित दो पाषाण स्तम्भ हैं। इनमें से एक स्तम्भ में रावण द्वारा कैलासोत्तालन तथा अर्द्धनारीश्वर के दृश्य खुदे हैं। इसी प्रकार दूसरे स्तम्भ में राम चरित्र से सम्बंधित दृश्य जैसे राम-सुग्रीव मित्रता, बाली का वध, शिव तांडव और सामान्य जीवन से सम्बंधित एक बालक के साथ स्त्री-पुरूष और दंडधरी पुरुष खुदे हैं। प्रवेश द्वार पर गंगा-यमुना की मूर्ति स्थित है। मूर्तियों में मकर और कच्छप वाहन स्पष्ट दिखाई देते हैं। उनके पार्श्व में दो नारी प्रतिमाएँ हैं। इसके नीचे प्रत्येक पार्श्व में द्वारपाल जय और विजय की मूर्ति है। लक्ष्मणेश्वर महादेव के इस मंदिर में सावन मास में श्रावणी और महाशिवरात्रि में मेला लगता है। .

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लक्ष्मीमल्ल सिंघवी

लक्ष्मीमल्ल सिंघवी - डाकटिकट लक्ष्मीमल्ल सिंघवी (या लक्ष्मीमल सिंघवी) (९ नवंबर १९३१- ६ अक्टूबर २००७) ख्यातिलब्ध न्यायविद, संविधान विशेषज्ञ, कवि, भाषाविद एवं लेखक थे। उनका जन्म भारत के राजस्थान प्रांत में स्थित जोधपुर नगर में हुआ। १९६२ से १९६७ तक तीसरी लोक सभा के सदस्य श्री सिंघवी ने १९७२ से ७७ तक राजस्थान के एडवोकेट जनरल तथा अनेक वर्षों तक यूके में भारत के राजदूत पद पर कार्य किया। उन्हें १९९८ में पद्म भूषण से अलंकृत किया गया तथा १९९९ में वे राज्य सभा के सदस्य भी चुने गए। डॉ॰ लक्ष्मीमल सिंघवी ने नेपाल, बांग्लादेश और दक्षिण अफ्रीका के संविधान रचे। उन्हें भारत में अनेक लोकपाल, लोकायुक्त संस्थाओं का जनक माना जाता है। डॉ॰ सिंघवी संयुक्त राष्ट्र संघ मानवाधिकार अधिवेशन और राष्ट्रकुल (कॉमनवेल्थ) विधिक सहायता महासम्मेलन के अध्यक्ष, विशेषज्ञ रहे। वे ब्रिटेन के सफलतम उच्चायुक्त माने जाते हैं। वे सर्वोच्च न्यायालय बार एसोसिएशन के चार बार अध्यक्ष रहे। उन्होंने विधि दिवस का शुभारंभ किया। डॉ॰ लक्ष्मीमल्ल सिंघवी ने हिंदी के वैश्वीकरण और हिंदी के उन्नयन की दिशा में सजग, सक्रिय और ईमानदार प्रयास किए। भारतीय राजदूत के रूप में उन्होंने ब्रिटेन में भारतीयता को पुष्पित करने का प्रयास तो किया ही, अपने देश की भाषा के माध्यम से न केवल प्रवासियों अपितु विदेशियों को भी भारतीयता से जोड़ने की कोशिश की। वे संस्कृतियों के मध्य सेतु की तरह अडिग और सदा सक्रिय रहे। वे भारतीय संस्कृति के राजदूत, ब्रिटेन में हिन्दी के प्रणेता और हिंदी-भाषियों के लिए प्रेरणा स्रोत थे। विश्व भर में फैले भारत वंशियों के लिए प्रवासी भारतीय दिवस मनाने की संकल्पना डॉ॰ सिंघवी की ही थी। वे साहित्य अमृत के संपादक रहे और अपने संपादन काल में उन्होने श्री विद्यानिवास मिश्र की स्वस्थ साहित्यिक परंपरा को गति प्रदान की। भारतीय ज्ञानपीठ को भी श्री सिंघवी की सेवाएँ सदैव स्मरण रहेंगी। भारतीय डायसपोरा की अनेक संस्थाओं के अध्यक्ष श्री सिंघवी ने अनेक पुस्तकों की रचना भी की है। वे कई कला तथा सांस्कृतिक संगठनों के संरक्षक भी थे। जैन इतिहास और संस्कृति के जानकार के रूप में मशहूर श्री सिंघवी ने कई पुस्तकें लिखीं जिनमें से अनेक हिंदी में हैं। श्री सिंघवी प्रवासी भारतीयों की उच्च स्तरीय समिति के अध्यक्ष भी रहे। विधि और कूटनीति की कूट एवं कठिन भाषा को सरल हिन्दी में अभिव्यक्त करने में उनका कोई सानी नहीं था। विश्व हिन्दी सम्मेलन के आयोजनों में सदा उनकी अग्रणी भूमिका रहती थी। संध्या का सूरज: हिन्दी काव्य, पुनश्च (संस्मरणों का संग्रह), भारत हमारा समय, जैन मंदिर आदि उनकी प्रसिद्ध हिन्दी कृतियाँ हैं। अंग्रेज़ी में टुवर्डस ग्लोबल टुगैदरनेस (Towards Global Togetherness), डेमोक्रेसी एंड द रूल ऑफ़ द लॉ (Democracy and the Rule of the Law), फ्रीडम ऑन ट्रायल (Freedom on trial) आदि उनकी प्रसिद्ध अंग्रेज़ी पुस्तकें हैं। ८ दिसम्बर २००८ को भारतीय डाकतार विभाग ने उनके सम्मान में एक डाक-टिकट तथा प्रथम दिवस आवरण प्रकाशित किया है। .

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लुम्बार्ट विकिपीडिया

लैम्बार्ड विकिपीडिया विकिपीडिया का लैम्बार्ड भाषा का संस्करण है। २७ मई, २००९ तक इस विकिपीडिया पर लेखों की संख्या ५,७२०+ है और यह विकिपीडिया का १०४वां सबसे बड़ा संस्करण है।.

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लुईस हैमिल्टन

लुईस कार्ल डेविडसन हैमिल्टन MBE (इंग्लैंड के हर्टफोर्डशायर के स्टेवेनेज में 7 जनवरी 1985 में जन्म) फॉर्मूला वन रेसिंग के ब्रिटिश ड्राइवर हैं, जो वर्तमान में मैकलेरन मर्सिडीज टीम के लिए रेसिंग करते हैं और फार्मुला वन के आज तक के सबसे युवा विश्व चैम्पियन हैं। दस वर्ष की उम्र में हैमिल्टन ने ऑटोस्पोर्ट पुरस्कार समारोह में मैकलेरन टीम के प्रमुख रोन डेनिस से संपर्क किया और उनसे कहा कि, "एक दिन मैं आपके लिए रेस करना चाहता हूं...मैं मैकलेरन के लिए रेस करना चाहता हूं.

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लोधी उद्यान, दिल्ली

लोधी उद्यान (पूर्व नाम:विलिंग्डन गार्डन, अन्य नाम: लोधी गार्डन) दिल्ली शहर के दक्षिणी मध्य इलाके में बना सुंदर उद्यान है। यह सफदरजंग के मकबरे से १ किलोमीटर पूर्व में लोधी मार्ग पर स्थित है। पहले ब्रिटिश काल में इस बाग का नाम लेडी विलिंगटन पार्क था। यहां के उद्यान के बीच-बीच में लोधी वंश के मकबरे हैं तथा उद्यान में फव्वारे, तालाब, फूल और जॉगिंग ट्रैक भी बने हैं। यह उद्यान मूल रूप से गांव था जिसके आस-पास १५वीं-१६वीं शताब्दी के सैय्यद और लोदी वंश के स्मारक थे। अंग्रेजों ने १९३६ में इस गांव को दोबारा बसाया। यहां नेशनल बोंजाई पार्क भी है जहां बोंज़ाई का अच्छा संग्रह है। इस उद्यान क्षेत्र का विस्तार लगभग ९० एकड़ में है जहां उद्यान के अलावा दिल्ली सल्तनत काल के कई प्राचीन स्मारक भी हैं जिनमें मुहम्मद शाह का मकबरा, सिकंदर लोदी का मक़बरा, शीश गुंबद एवं बड़ा गुंबद प्रमुख हैं। इन स्मारकों में प्रायः मकबरे ही हैं जिन पर लोधी वंश द्वारा १५वीं सदी की वास्तुकला का काम किया दिखता है। लोधी वंश ने उत्तरी भारत और पंजाब के कुछ भूभाग पर और पाकिस्तान में वर्तमान खैबर पख्तूनख्वा पर वर्ष १४५१ से १५२६ तक शासन किया था। अब इस स्थान को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षण प्राप्त है। यहाँ एक उद्यान (बोटैनिकल उद्यान) भी है जहां पेड़ों की विभिन्न प्रजातियां, गुलाब उद्यान (रोज गार्डन) और ग्रीन हाउस है जहां पौधों का प्रतिकूल ऋतु बचाकर रखा जाता है। पूरे वर्ष यहां अनेक प्रकार के पक्षी देखे जा सकते हैं। द हिन्दु, १६ अक्टूबर, २००२.

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लीला नायडू

लीला नायडू (१९४०-२८ जुलाई, २००९) हिन्दी चलचित्र की पुरानी अभिनेत्री रही हैं। ये १९५४ में मिस इंडिया भी रही हैं। इन्हें मधुबाला एवं सुचित्रा सेन के अपवाद को छोड़कर अपने समय में किसी भी हिन्दी फिल्म अभिनेत्री से अधिक सुंदर कहा गया है। इन्हें १९५४ में ही वॉग पत्रिका द्वारा गायत्री देवी के साथ विश्व की दस सर्वश्रेष्ठ सुंदरियों में शामिल किया गया। इनके पिता प्रख्यात भारतीय वैज्ञानिक रमैया नायडू (आंध्र प्रदेश) से एवं माता आयरिश थीं। हिन्दी फिल्मों में लीला नायडू का सफर १९६० में ऋषिकेश मुखर्जी द्वारा बनाई गई फिल्म अनुराधा से शुरू हुआ। १९६३ में आर के नैय्यर द्वारा निर्देशित फिल्म ये रास्ते हैं प्यार के ने इन्हें ख्याति दिलाई, फिल्म में सुनील दत्त के साथ उन्होंने प्रमुख भूमिका निभाई थी। इसी साल मर्चेंट आइवोरी प्रोडक्शन द्वारा निर्मित फिल्म 'द हाउसहोल्डर' में अभिनय किया, जिसका निर्देशन जेम्स आइवोरी ने किया था। १९६९ में द गुरू फिल्म में काम करने के बाद फिल्मी दुनिया को अलविदा कह होटल व्यवसायी तिलक राज ओबराय (टिक्की ओबराय) से शादी कर ली। बाद में दोनों में तलाक हो गया। कुछ समय बाद इन्होंने अपने बचपन के मित्र और साहित्यकार डॉम मॉरिस से शादी कर ली एवं हांग कांग चली गईं। दस वर्ष वहाँ बिताने के बाद फिर भारत वापस आ गईं। १९८५ में श्याम बेनेगल की फिल्म त्रिकाल से इन्होंने हिंदी फिल्मी दुनिया में फिर प्रवेश किया। १९९२ में प्रदीप कृष्णन द्वारा निर्देशित फिल्म 'इलेक्ट्रिक मून' में इन्होंने आखिरी बार अभिनय किया था। लंबी बीमारी के बाद मुंबई में २८ जुलाई, २००९ को इनकी मृत्यु हो गई। .

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शचीन्द्रनाथ बख्शी

शचीन्द्रनाथ बख्शी (जन्म: 25 दिसम्बर 1904, मृत्यु: 23 नवम्बर 1984) भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के एक प्रमुख क्रान्तिकारी थे। ब्रिटिश साम्राज्य के विरुद्ध सशस्त्र क्रान्ति के लिये गठित हिन्दुस्तान रिपब्लिकन ऐसोसिएशन के सक्रिय सदस्य होने के अलावा इन्होंने रामप्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में काकोरी काण्ड में भाग लिया था और फरार हो गये। बख्शी को भागलपुर से पुलिस ने उस समय गिरफ्तार किया जब काकोरी-काण्ड के मुख्य मुकदमे का फैसला सुनाया जा चुका था। स्पेशल जज जे॰आर॰डब्लू॰ बैनेट की अदालत में काकोरी षड्यन्त्र का पूरक मुकदमा दर्ज़ हुआ और 13 जुलाई 1927 को उन्हें आजीवन कारावास की सजा दी गयी। 1937 में जेल से छूटकर आये तो काँग्रेस पार्टी के लिये जी-जान से काम किया। स्वतन्त्र भारत में काँग्रेस से उनका मोहभंग हुआ और वे जनसंघ में शामिल हो गये। उन्होंने उत्तर प्रदेश विधान सभा का चुनाव जीता और लखनऊ जाकर रहने लगे। अपने जीवन काल में उन्होंने दो पुस्तकें भी लिखीं। सुल्तानपुर (उत्तर प्रदेश) में 80 वर्ष का आयु में 23 नवम्बर 1984 को उनका निधन हुआ। .

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शमशाद बेगम

शमशाद बेगम (अप्रैल १४, १९१९ – अप्रैल २३, २०१३India Post, South Asia Bureau, August 1998) एक भारतीय गायिका थीं, जो हिन्दी सिनेमा उद्योग में आरंभिक पार्श्वगायिका के रूप में आयी थीं। शमशाद बेगम एक बहुमुखी कलाकारा थीं, जिन्होंने हिन्दी के अलावा बंगाली, मराठी, गुजराती, तमिल एवं पंजाबी भाषाओं में लगभग ६००० से अधिक गाने गाये थे। इन्हें सन २००९ में भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये महाराष्ट्र राज्य से हैं। .

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शरण रानी

शरण रानी (९ अप्रैल १९२९ - ८ अप्रैल २००८) हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत की विद्वान और सुप्रसिद्ध सरोद वादक थीं। गुरु शरन रानी प्रथम महिला थीं जिन्होंने सरोद जैसे मर्दाना साज को संपूर्ण ऊँचाई दी। वे प्रथम महिला थीं जो संगीत को लेकर पूरे भूमंडल में घूमीं, विदेश गईं, जिन्हें सरोद के कारण विभिन्न‍ प्रकार के सम्मान मिले और सरोद पर डॉक्टलरेट की उपाधियों से नवाज़ा गया। वे प्रथम महिला थीं जिन्होंडने पंद्रहवीं शताब्दी के बाद बने हुए वाद्य यंत्रों को न केवल संग्रहीत किया बल्कि राष्ट्री य संग्रहालय को दान में दे दिया। उन्होंने यूनेस्को के लिए रिकार्डिग भी की। इसलिए पं॰ नेहरू ने उन्हें 'सांस्कृतिक राजदूत' और पं॰ ओंकार नाथ ठाकुर ने 'सरोद रानी' का खिताब दिया था। दिल्ली में पैदा हुई सरोद साम्राज्ञी ने उस्ताद अलाउद्दीन खां और उस्ताद अली अकबर खां जैसे गुरुओं से सरोद की शिक्षा ग्रहण की थी। वह मैहर सेनिया घराने से ताल्लुक रखती थीं। पद्मभूषण से अलंकृत शरण रानी ने कई रागों की रचना की थी। वाद्य संगीत तथा सरोद वादन के क्षेत्र में वह देश की पहली महिला कलाकार थीं, जिन्होंने अमेरिका तथा ब्रिटेन की संगीत कंपनियों के साथ रिकार्डिंग कीं। पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू उन्हें ‘भारत की सांस्कृतिक दूत’ कहा करते थे। शरण रानी ने "दि डिवाइन सरोद: इट्स आ॓रिजिन एंटिक्विटी एंड डेवलपमेंट इन इंडिया सिंस बीसी सेकेंड सेंचुरी" किताब लिखी थीं। वे दुर्लभ वाद्यों का संग्रह करती थीं। उन्होंने ‘शरण रानी बाकलीवाल वीथिका’ की स्थापना भी की जिसमें ४५० शास्त्रीय संगीत के वाद्यों को प्रदर्शित किया गया है। संगीत के प्रति समर्पण के कारण उन्हें १९६८ में पद्मश्री, १९७४ में साहित्य कला परिषद, १९८६ में संगीत नाटक अकादमी, २००० में पद्मभूषण व २००४ में राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया। १९९२ में उन्होंने सरोद के उद्भव, इतिहास व विकास पर किताब भी लिखी। उन्हें सरकार की ओर से ‘राष्ट्रीय कलाकार’, ‘साहित्य कला परिषद पुरस्कार’ और ‘राजीव गांधी राष्ट्रीय उत्कृष्टता पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया था। उनकी वीथिका से चार वाद्य लेकर वर्ष १९९८ में डाक टिकट भी जारी किए गए थे। .

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शरत्चन्द्र चट्टोपाध्याय

शरत्चन्द्र चट्टोपाध्याय (१५ सितंबर, १८७६ - १६ जनवरी, १९३८) बांग्ला के सुप्रसिद्ध उपन्यासकार थे। उनका जन्म हुगली जिले के देवानंदपुर में हुआ। वे अपने माता-पिता की नौ संतानों में से एक थे। अठारह साल की अवस्था में उन्होंने इंट्रेंस पास किया। इन्हीं दिनों उन्होंने "बासा" (घर) नाम से एक उपन्यास लिख डाला, पर यह रचना प्रकाशित नहीं हुई। रवींद्रनाथ ठाकुर और बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय का उन पर गहरा प्रभाव पड़ा। शरतचन्द्र ललित कला के छात्र थे लेकिन आर्थिक तंगी के चलते वह इस विषय की पढ़ाई नहीं कर सके। रोजगार के तलाश में शरतचन्द्र बर्मा गए और लोक निर्माण विभाग में क्लर्क के रूप में काम किया। कुछ समय बर्मा रहकर कलकत्ता लौटने के बाद उन्होंने गंभीरता के साथ लेखन शुरू कर दिया। बर्मा से लौटने के बाद उन्होंने अपना प्रसिद्ध उपन्यास श्रीकांत लिखना शुरू किया। बर्मा में उनका संपर्क बंगचंद्र नामक एक व्यक्ति से हुआ जो था तो बड़ा विद्वान पर शराबी और उछृंखल था। यहीं से चरित्रहीन का बीज पड़ा, जिसमें मेस जीवन के वर्णन के साथ मेस की नौकरानी से प्रेम की कहानी है। जब वह एक बार बर्मा से कलकत्ता आए तो अपनी कुछ रचनाएँ कलकत्ते में एक मित्र के पास छोड़ गए। शरत को बिना बताए उनमें से एक रचना "बड़ी दीदी" का १९०७ में धारावाहिक प्रकाशन शुरु हो गया। दो एक किश्त निकलते ही लोगों में सनसनी फैल गई और वे कहने लगे कि शायद रवींद्रनाथ नाम बदलकर लिख रहे हैं। शरत को इसकी खबर साढ़े पाँच साल बाद मिली। कुछ भी हो ख्याति तो हो ही गई, फिर भी "चरित्रहीन" के छपने में बड़ी दिक्कत हुई। भारतवर्ष के संपादक कविवर द्विजेंद्रलाल राय ने इसे यह कहकर छापने से मना कर दिया किया कि यह सदाचार के विरुद्ध है। विष्णु प्रभाकर द्वारा आवारा मसीहा शीर्षक रचित से उनका प्रामाणिक जीवन परिचय बहुत प्रसिद्ध है। .

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शलाका सम्मान

शलाका सम्मान हिंदी अकादमी को ओर से दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान है। हिन्दी जगत में सशक्त हस्ताक्षर के रूप में विख्यात तथा हिन्दी भाषा और साहित्य के क्षेत्र में समर्पित भाव से काम करने वाले मनीषी विद्वानों, हिन्दी के विकास तथा संवर्धन में सतत संलग्न कलम के धनी, मानव मन के चितरों तथा मूर्धन्य साहित्यकारों के प्रति अपने आदर और सम्मान की भावना को व्यक्त करने के लिए हिन्दी अकादमी प्रतिवर्ष एक श्रेष्ठतम साहित्यकार को शलाका सम्मान से सम्मानित करती है। सम्मान स्वरूप, १,११,१११/-रुपये की धनराशि, प्रशस्ति-पत्र एवं प्रतीक चिह्‌न आदि प्रदान किये जाते हैं। अकादमी द्वारा अब तक निम्नलिखित साहित्यकारों को शलाका सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है:- .

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शाय साहेंद

शाय साहेंद संताली भाषा के विख्यात साहित्यकार दमयंती बेश्रा द्वारा रचित एक कविता–संग्रह है जिसके लिये उन्हें सन् 2009 में संताली भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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शांता धनंजय

शांता धनंजय को सन २००९ में भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये तमिलनाडु राज्य से हैं। .

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शिव मंदिर,बेलसर हर्राटोला,सरगुजा

छत्तीसगढ़ राज्य के संरक्षित स्मारकयह जीर्ण प्राचीन शिव मंदिर, सरगुजा जिले में अंबिकापुर-कुसमी रोड पर स्थित शंकरगढ़, विकासखण्ड मुख्यालय से 8 किलोमीटर दूर स्थित बेलसर गांव के हर्राटोला मुहल्ला में महा नदी तथा केरछान नामक नाला के संगम पर स्थित है। यहां पर 8वीं शती ईस्वी में निर्मित एक प्रस्तर निर्मित प्राचीन मंदिर एवं अन्य दो-तीन मंदिरों के भग्नावशेष विद्यमान हैं जो ईंट एवं प्रस्तर निर्मित थे। कार्तिकेय, गौरी, उमा-महेश्वर एवं हरिहर की प्रतिमायें यहाँ प्राप्त हुई है। इस मंदिर का शिखर भाग अत्याधिक जीर्ण स्थिति में हैं और प्रवेशद्वार बहुत छोटा है। इसके सिरदल पर वरेश्वर शिव, गणेश, कार्तिकेय तथा अन्य दृश्यांकन दर्शनीय हैं। यह मंदिर छत्तीसगढ़ राज्य द्वारा संरक्षित है। .

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शंघाई गौरव

शंघाई गौरव (सरलीकृत चीनी: 上海骄傲周) सप्ताह भर तक चलने वाला समलैंगिक गौरव उत्सव है जो अभी शंघाई, चीन में चल रहा है। यह पहली बार है जब इस नगर में इस प्रकार का वृतांत हो रहा है और चीनी मुख्यभूमि पर पहली बार इतना बड़ा समलैंगिक आयोजन हो रहा है। यह उत्सव ७ जून, २००९ को आरम्भ हुआ था और १३ जून, २००९ तक चलेगा। आयोजकों से कानूनी परामर्श लिया गया था और उन्हें ये सूचित किया गया था की संभवतः चीनी अधिकारी इस परेड के नगर में आयोजित किए जाने को अनुमति नहीं देंगे। .

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शंकर अन्तर्राष्ट्रीय गुड़िया संग्रहालय, नई दिल्ली

शंकर अन्तर्राष्ट्रीय गुड़िया संग्रहालय नई दिल्ली में स्थित है। इस संग्रहालय की स्थापना मशहूर कार्टूनिस्ट के शंकर पिल्लई-(१९०२-१९८९) ने की थी। यहाँ विभिन्न परिधानों में सजी गुड़ियों का संग्रह विश्व के सबसे बड़े संग्रहों में से एक है। यह संग्रहालय बहादुर शाह जफर मार्ग पर चिल्ड्रन बुक ट्रस्ट के भवन में स्थित है। इस गुड़िया घर के निर्माण के पीछे एक रोचक घटना है। जवाहरलाल नेहरू जब देश के प्रधानमंत्री थे तो देश के प्रसिद्ध कार्टूनिष्ट के० शंकर पिल्लै उनके साथ जाने वाले पत्रकारों के दल के सदस्य थे। वे हर विदेश यात्रा में नेहरू जी के साथ जाया करते थे। कार्टूनिष्ट के० शंकर पिल्लै की रुचि गुड़ियों में थी। वे प्रत्येक देश की तरह-तरह की गुड़ियाँ एकत्र किया करते थे। धीरे-धीरे उनके पास ५०० तरह की गुड़ियाँ इकट्ठी हो गईं। वे चाहते थे कि इन गुड़ियों को देश भर के बच्चे देखें। उन्होंने जगह-जगह अपने कार्टूनों की प्रदर्शनी के साथ-साथ इन गुड़ियों की भी प्रदर्शनी लगाई। बार-बार गुड़ियों को लाने ले जाने में कई गुड़ियाँ टूट फूट जाती थीं। एक बार पं० नेहरू अपनी बेटी इन्दिरा गाँधी के साथ प्रदर्शनी देखने गए। गुड़ियों को देखकर वे बहुत खुश हुए। उसी समय शंकर ने गुड़ियों को लाने ले जाने में होने वाली परेशानी की ओर नेहरू जी का ध्यान खींचा। चाचा नेहरू ने गुड़ियों के लिए एक स्थाई घर का सुझाव दिया। दिल्ली में जब चिल्ड्रन्स बुक ट्रस्ट के भवन का निर्माण हुआ तो उसके एक भाग में गुड़ियों के लिए उनका घर बनाया गया। इस तरह दुनिया भर की गुड़ियों को रहने के लिए एक अनोखा घर मिल गया। दिल्ली में बहादुरशाह जफर मार्ग पर बने इस संग्रहालय का नाम "गुड़िया घर" है। यहाँ विभिन्न परिधानों में सजी गुडि़यों का संग्रह विश्व के सबसे बड़े संग्रहों में से एक है। ५१८४.५ वर्ग फुट आकार वाले इस संग्रहालय में १००० फीट की लम्बाई में दीवारों पर १६० से अधिक काँच के केस बने हुए हैं। यह संग्रहालय दो हिस्सों में बँटा है। एक हिस्से में यूरोपियन देशों, इंग्लैंड, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, राष्ट्र मंडल देशों की गुडि़याँ रखी गई हैं। दूसरे भाग में एशियाई देशों, मध्यपूर्व, अफ्रीका और भारत की गुडि़याँ प्रदर्शित की गई हैं। इन गुड़ियों को खूब सजाकर रखा गया है। इस गुड़िया घर का प्रारम्भ १००० गुड़ियों से हुआ था। वर्तमान समय में यहाँ ८५ देशों की करीब ६५०० गुडि़यों का संग्रह देखा जा सकता है। यह संग्रहालय सुबह १० बजे से शाम ६ बजे तक दर्शकों के लिए खुला रहता है। प्रवेश शुल्क बड़ों के लिए १५ रुपए प्रति व्यक्ति तथा बच्चों के लिए ५ रुपए है। बच्चे यदि २० के समूह में गुड़िया घर देखने आयें तो प्रति बच्चे के लिए टिकिट का मूल्य मात्र ३ रुपए है। सोमवार को गुड़िया घर बंद रहता है। .

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शंकर्स वीकली

हिन्दी शंकर्स वीकली का आवरण पृष्ठ शंकर्स वीकली भारत में प्रकाशित पहली कार्टून पत्रिका थी। इसकी आवृत्ति साप्ताहिक हुआ करती थी। शंकर्स वीकली का प्रकाशन भारत में कार्टून कला के पितामह कहे जाने वाले कार्टूनिस्ट के शंकर पिल्लई ने प्रारंभ किया था। शंकर्स वीकली, शंकर का सपना था जो १९४८ में साकार हुआ। भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के हाथों शंकर्स वीकली का विमोचन हुआ। शंकर्स वीकली में भारत के कई जाने-माने कार्टूनिस्टों के राजनैतिक और सामाजिक कार्टून प्रकाशित होते थे जिनमें रंगा, कुट्टी, बाल ठाकरे और काक-कार्टूनिस्ट जैसे अनेक कार्टूनिस्टों के कार्टून शामिल होते थे। अपने लम्बे कार्यकाल में इस पत्रिका ने चर्चित कार्टूनिस्टों के कार्टूनों के प्रकाशन के साथ ही नए कार्टूनिस्टों को भी मंच प्रदान किया। शंकर्स वीकली ने ऐसे कई कार्टूनिस्ट दिए जिन्होंने आगे चलकर काफी प्रसिद्धि पाई। जाने-माने कार्टूनिस्ट रंगा और वी जी नरेन्द्र ने तो शंकर्स वीकली से ही अपने कार्टूनिस्ट जीवन की शुरुआत की थी। शंकर्स वीकली विशुद्ध भारतीय राजनैतिक कार्टूनों पर आधारित साप्ताहिक पत्रिका थी जिसमें भारतभर के कार्टूनिस्टों के नेताओं और सरकार के क्रिया-कलापों पर तीखे कार्टून होते थे। यही कारण था कि आपातकाल के दौरान इस पत्रिका को भी परेशानी का सामना करना पड़ा और दबाव के चलते २७ साल बाद १९७५ में इस अनोखी और एक मात्र पत्रिका का प्रकाशन बंद हो गया। यह भारतीय पत्रकारिता के इतिहास में आज भी हिन्दी व्यंग्य पत्रिका के रूप में सम्मान के साथ याद की जाती है। .

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शकीरा

शकीरा इसाबेल मेबारक रिपोल (जन्म - २ फ़रवरी १९७७), जो शकीरा नाम से प्रसिद्ध हैं, एक कोलंबियन गायिका-गीतकार, संगीतकार, रिकॉर्ड निर्माता, नृत्यांगना और लोकोपकारक हैं, जो लैटिन अमेरिका के संगीत परिदृश्य में १९९० के दशक में एक संगीत प्रतिभा के रूप में उभरी। बेरेंकिया, कोलम्बिया में जन्मी और बड़ी हुई शकीरा ने विद्यालय में ही अपनी कई प्रतिभाओं को प्रदर्शित किया जिनमे रॉक एंड रोल, लैटिन तथा अरब में गायन क्षमता और गर्भ-नृत्य (बेली डांस) शामिल हैं। शकीरा की मातृभाषा स्पेनिश है पर वह सहज अंग्रेजी और पुर्तगाली और इतालवी, फ्रेंच तथा कातालान भी बोल लेती है। वह अरब शास्त्रीय संगीत भी जानती हैं। स्थानीय निर्माताओं के साथ किए उनके पहले दो एल्बम असफल हुए। उस वक्त शकीरा कोलंबिया के बाहर मशहूर नहीं थी। उन्होंने अपने खुद के ब्रांड के संगीत का निर्माण करने का फैसला किया। १९९५ में उन्होने पीएस देस्काल्सोस एल्बम निकला जिसने उन्हे लैटिन अमेरिका और स्पेन में खूब प्रसिद्धि दिलायी। १९९८ में उन्होंने ¿दोंदे एस्तन लोस लाद्रोनेस? (स्पेन: Dónde Están los Ladrones?) नामक एल्बम निकाला जिसके दुनिया भर में ७० लाख से अधिक प्रतियां बिकीं और उन्हे एक महत्वपूर्ण सफलता दिलाई। सन् २००१ में अपने संगीत वीडियो "व्हेनेवर, व्हेरेवर" (अनुवाद: जब भी, जहाँ भी) के जबर्दस्त सफलता के साथ, उन्होंने अपने एल्बम लांड्री सर्विस (अनुवाद: धुलाई - सेवा) से अंग्रेजी-बोलने वाली दुनिया में कदम रखा और दुनिया भर में १.३ करोड़ से अधिक प्रतियां बिकीं।, BMI.com चार साल बाद शकीरा ने दो एल्बम परियोजनाओं,ओरल फिक्सेशन खंड १ और ओरल फिक्सेशन खंड २ को जारी किया। दोनों ने उनकी सफलता को बल दिया विशेषतः २१वीं सदी का सबसे सफल गीत "हिप्स डोंट लाय"। अक्टूबर-नवम्बर 2009 के बाद शकीरा ने अपना नवीनतम एल्बम "शी वूल्फ " दुनिया भर में जारी किया। उन्होंने दो ग्रैमी पुरस्कार, सात लैटिनग्रैमी पुरस्कार जीते हैं और वह गोल्डन ग्लोब पुरस्कार के लिए भी नामांकित की गयी हैं। वह आज तक की सर्वाधिक-बिक्री वाली कोलंबियाई कलाकार और ग्लोरिया स्टेफान से पीछे दूसरी सबसे सफल लैटिन गायिका है, जिनके ५० मिलियन से अधिक एल्बम दुनिया भर में बिक चुके हैं। इसके अतिरिक्त वह दक्षिण अमेरिका की एकमात्र कलाकार है जो अमेरीकी बिलबोर्ड हॉट 100, ऑस्ट्रेलियाई ARIA चार्ट और ब्रिटेन सिंगल चार्ट में पहले स्थान तक पहुंच चुकी है। शकीरा का मशहूर गाना "वाका वाका"२०१० फुटबॉल विश्व कप के अधिकृत गाने के रूप में चुना गया था। शकीरा को हॉलीवुड वॉक ऑफ फेम में एक स्टार मिला है। .

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श्याम बहादुर वर्मा

श्याम बहादुर वर्मा (जन्म: 10 अप्रैल 1932 बरेली मृत्यु: 20 नवम्बर 2009 दिल्ली) हिन्दी के उद्भट विद्वान थे। उन्होंने विवाह नहीं किया। पुस्तकें ही उनकी जीवन संगिनी थीं। तीन कमरों वाले फ्लैट में श्याम बहादुर अकेले रहते थे। उनके प्रत्येक कमरे में फर्श से लेकर छत तक पुस्तकें ही पुस्तकें नज़र आती थीं। उन्होंने हिन्दी साहित्य को कई शब्द कोश प्रदान किये। दिल्ली विश्वविद्यालय से विजयेन्द्र स्नातक के मार्गदर्शन में उन्होंने हिन्दी काव्य में शक्तितत्व विषय पर शोध करके पीएच॰डी॰ की और डी॰ए॰वी॰ कॉलेज में प्राध्यापक हो गये। परन्तु अध्ययन का क्रम फिर भी न टूटा। गणित में एम॰एससी॰ से लेकर अंग्रेजी, संस्कृत, हिन्दी और प्राचीन भारतीय इतिहास जैसे अनेकानेक विषयों में उन्होंने एम॰ए॰ की परीक्षाएँ न केवल उत्तीर्ण कीं अपितु प्रथम श्रेणी के अंक भी अर्जित किये। बौद्धिक साधना के साक्षात् स्वरूप थे। उनकी सम्पूर्ण साहित्यिक सेवाओं के लिये हिन्दी अकादमी, दिल्ली ने वर्ष 1997-98 में साहित्यकार सम्मान प्रदान किया। 20 नवम्बर 2009 को नई दिल्ली में उनका निधन हुआ। .

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श्रीलंकाई गृहयुद्ध का इतिहास

श्रीलंकाई गृहयुद्ध श्रीलंका में बहुसंख्यक सिंहला और अल्पसंख्यक तमिलो के बीच २३ जुलाई, १९८३ से आरंभ हुआ गृहयुद्ध है। मुख्यतः यह श्रीलंकाई सरकार और अलगाववादी गुट लिट्टे के बीच लड़ा जाने वाला युद्ध है। ३० महीनों के सैन्य अभियान के बाद मई २००९ में श्रीलंकाई सरकार ने लिट्टे को परास्त कर दिया। लगभग २५ वर्षों तक चले इस गृहयुद्ध में दोनों ओर से बड़ी संख्या में लोग मारे गए और यह युद्ध द्वीपीय राष्ट्र की अर्थव्यस्था और पर्यावरण के लिए घातक सिद्ध हुआ। लिट्टे द्वारा अपनाई गई युद्ध-नीतियों के चलते ३२ देशों ने इसे आतंकवादी गुटो की श्रेणी में रखा जिनमें भारत, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, यूरोपीय संघ के बहुत से सदस्य राष्ट्र और अन्य कई देश हैं। एक-चौथाई सदी तक चले इस जातीय संघर्ष में सरकारी आँकड़ों के अनुसार ही लगभग ८०,००० लोग मारे गए हैं। .

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श्रीकांत वर्मा

श्रीकांत वर्मा (Shrikant verma) (१८ नवंबर १९३१- १९८६) का जन्म बिलासपुर (bilaspur), मध्य प्रदेश में हुआ। वे गीतकार, कथाकार तथा समीक्षक के रूप में जाने जाते हैं। ये राजनीति से भी जुडे थे तथा लोकसभा के सदस्य रहे। १९५७ में प्रकाशित भटका मेघ, १९६७ में प्रकाशित मायादर्पण और दिनारम्भ, १९७३ में प्रकाशित जलसाघर और १९८४ में प्रकाशित मगध इनकी काव्य-कृतियाँ हैं। 'झाडियाँ तथा 'संवाद इनके कहानी-संग्रह है। 'बीसवीं शताब्दी के अंधेरे में एक आलोचनात्मक ग्रंथ है। उनकी प्रारंभिक शिक्षा बिलासपुर(bilaspur) तथा रायपुर(raipur) में हुई तथा नागपुर विश्वविद्यालय से १९५६ में उन्होंने हिन्दी साहित्य में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की। इसके बाद वे दिल्ली चले गए और वहाँ विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में लगभग एक दशक तक पत्रकार के रूप में कार्य किया। १९६६ से १९७७ तक वे दिनमान के विशेष संवाददाता रहे। १९७६ में काँग्रेस के के टिकट पर चुनाव जीतकर वे राज्य सभा के सदस्य बने। और सत्तरवें दशक के उत्तरार्ध से ८०वें दशक के पूर्वार्ध तक पार्टी के प्रवक्ता के रूप में कार्य करते रहे। १९८० में वे इंदिरा गांधी के राष्ट्रीय चुनाव अभियान के प्रमुख प्रबंधक रहे और १९८४ में राजीव गांधी के परामर्शदाता तथा राजनीतिक विश्लेषक के रूप में कार्य करते रहे। कांग्रेस को अपना "गरीबी हटाओ" का अमर स्लोगन दिया.

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शैलाश्रय,सिंघनपुर,रायगढ़

छत्तीसगढ़ राज्य के संरक्षित स्मारक छत्तीसगढ़ राज्य के रायगढ़ जिले में सिंघनपुर नामक स्थान पर एक चित्रित शैलाश्रय स्थित है। यह शैलाश्रय दक्षिणाभिमुखी है और रायगढ़ से २० किलोमीटर पश्चिम में एक पहाड़ी पर वर्षों पूर्व प्रकृति द्वारा निर्मित है। मध्य दक्षिण पूर्वी रेलमार्ग के बिलासपुर झारसगुड़ा सेक्शन पर स्थित भूपदेवपुर नामक स्टेशन से यह स्थल दक्षिण में एक किलो मीटर की दूरी पर है। यह छत्तीसगढ़ में प्राप्त प्राचीन शैलचित्र युक्त शैलाश्रयों में से एक है, जिसकी तिथि लगभग ईसापूर्व ३० हज़ार वर्ष निर्धारित की गई है। इनकी खोज एंडरसन द्वारा १९१० के आसपास की गई थी। इंडिया पेंटिग्स १९१८ में तथा इन्साइक्लोपिडिया ब्रिटेनिका के १३वें अंक में रायगढ़ जिले के सिंघनपुर के शैलचित्रों का प्रकाशन पहली बार हुआ था। तत्पश्चात श्री अमरनाथ दत्त ने 1923 से 1927 के मध्य रायगढ़ तथा समीपस्थ क्षेत्रों में शैल चित्रो का सर्वेक्षण किया। डॉ एन.

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शेखर गुप्ता

शेखर गुप्ता (जन्म 26 अगस्त 1957) एक भारतीय पत्रकार हैं, जो वर्तमान में द प्रिन्ट के अध्यक्ष और संपादक-इन-चीफ हैं, एक रोमांचक समाचार मीडिया की शुरूआत है। वे पहले इंडिया टुडे समूह के उपाध्यक्ष थे। जून 2014 तक, उन्होंने भारतीय एक्सप्रेस के संपादक-इन-चीफ के रूप में 1 9 वर्ष की सेवा की। शेखर एक साप्ताहिक "राष्ट्रीय ब्याज" नामक कॉलम लिखते हैं उनके "राष्ट्रीय ब्याज" कॉलम को उनकी 2014 किताब आक्षेप भारत में एकत्र किए गए थे। वह एक साक्षात्कार आधारित टेलीविजन शो वॉक द टॉक ऑन एनडीटीवी 24x7 भी आयोजित करता है। शेखर गुप्ता को सन २००९ में भारत सरकार द्वारा पत्रकारिता के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये दिल्ली राज्य से हैं। .

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सतीश नाम्बियार

सतीश नाम्बियार को सन २००९ में भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये दिल्ली राज्य से हैं। .

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समय राज ठक्कर

समय राज ठक्कर (मुंबई में पैदा हुए 21 अक्टूबर 1966) एक नर भारतीय अभिनेता है और एक आवाज अभिनेता जो विदेशी मीडिया डब करने के लिए विशेष है, हिंदी में। वह कभी कभी के रूप में उल्लेख किया है: समय वी.

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समुद्र विज्ञानी

समुद्र विज्ञान के क्षेत्र में काम करने वाले समुद्र विज्ञानी (ओशनोग्राफर) कहलाते हैं। .

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सम्मोह

सम्मोह (या मनोग्रस्ति) (अंग्रेज़ी:ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसॉर्डर या ओसीडी) एक प्रकार का मनोरोग है। .

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समोसा

समोसा एक तला हुआ या बेक किया हुआ भरवां अल्पाहार व्यंजन है। इसमें प्रायः मसालेदार भुने या पके हुए सूखे आलू, या इसके अलावा मटर, प्याज, दाल, कहीम कहीं मांसा भी भरा हो सकता है। इसका आकार प्रायः तिकोना होता है किन्तु आकार और नाप भिन्न-भिन्न स्थानों पर बदल सकता है। अधिकतर ये चटनी के संग परोसे जाते हैं। ये अल्पाहार या नाश्ते के रूप में भारतीय उपमहाद्वीप, दक्षिण पूर्व एशिया, मध्य एशिया, दक्षिण पश्चिम एशिया, अरब प्रायद्वीप, भूमध्य सागर क्षेत्र, अफ़्रीका का सींग, उत्तर अफ़्रीका एवं दक्षिण अफ़्रीका में प्रचलित हैं। .

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सरस्वती सम्मान

Saraswathi samman 1.jpg सरस्वती सम्मान के.

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सरसों

भारतीय सरसों के पीले फूल सरसों क्रूसीफेरी (ब्रैसीकेसी) कुल का द्विबीजपत्री, एकवर्षीय शाक जातीय पौधा है। इसका वैज्ञानिक नाम ब्रेसिका कम्प्रेसटिस है। पौधे की ऊँचाई १ से ३ फुट होती है। इसके तने में शाखा-प्रशाखा होते हैं। प्रत्येक पर्व सन्धियों पर एक सामान्य पत्ती लगी रहती है। पत्तियाँ सरल, एकान्त आपाती, बीणकार होती हैं जिनके किनारे अनियमित, शीर्ष नुकीले, शिराविन्यास जालिकावत होते हैं। इसमें पीले रंग के सम्पूर्ण फूल लगते हैं जो तने और शाखाओं के ऊपरी भाग में स्थित होते हैं। फूलों में ओवरी सुपीरियर, लम्बी, चपटी और छोटी वर्तिकावाली होती है। फलियाँ पकने पर फट जाती हैं और बीज जमीन पर गिर जाते हैं। प्रत्येक फली में ८-१० बीज होते हैं। उपजाति के आधार पर बीज काले अथवा पीले रंग के होते हैं। इसकी उपज के लिए दोमट मिट्टी उपयुक्त है। सामान्यतः यह दिसम्बर में बोई जाती है और मार्च-अप्रैल में इसकी कटाई होती है। भारत में इसकी खेती पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और गुजरात में अधिक होती है। .

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सर्पगन्धा

सर्पगन्धा एपोसाइनेसी परिवार का द्विबीजपत्री, बहुवर्षीय झाड़ीदार सपुष्पक और महत्वपूर्ण औषधीय पौधा है। इस पौधे का पता सर्वप्रथम लियोनार्ड राल्फ ने १५८२ ई. में लगाया था। भारत तथा चीन के पारंपरिक औषधियों में सर्पगन्धा एक प्रमुख औषधि है। भारत में तो इसके प्रयोग का इतिहास ३००० वर्ष पुराना है। सर्पगन्धा के पौधे की ऊँचाई ६ इंच से २ फुट तक होती है। इसकी प्रधान जड़ प्रायः २० से.

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सर्बो-क्रोएशियाई विकिपीडिया

सर्बो-क्रोएशियाई विकिपीडिया विकिपीडिया का सर्बो-क्रोएशियाई संस्करण है। २६ मई, २००९ तक इस पर लेखों की कुल संख्या २२,०००+ है। यह विकिपीडिया का इक्सठवां सबसे बड़ा संस्करण है।.

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सर्वज्ञ सिंह कटियार

सर्वज्ञ सिंह कटियार को सन २००९ में भारत सरकार द्वारा विज्ञान एवं अभियांत्रिकी के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये उत्तर प्रदेश राज्य से हैं। .

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सरोजिनी नायडू

महात्मा गांधी के साथ सरोजिनी नायडू सरोजिनी नायडू (१३ फरवरी १८७९ - २ मार्च १९४९) का जन्म भारत के हैदराबाद नगर में हुआ था। इनके पिता अघोरनाथ चट्टोपाध्याय एक नामी विद्वान तथा माँ कवयित्री थीं और बांग्ला में लिखती थीं। बचपन से ही कुशाग्र-बुद्धि होने के कारण उन्होंने १२ वर्ष की अल्पायु में ही १२हवीं की परीक्षा अच्छे अंकों के साथ उत्तीर्ण की और १३ वर्ष की आयु में लेडी ऑफ दी लेक नामक कविता रची। वे १८९५ में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए इंग्लैंड गईं और पढ़ाई के साथ-साथ कविताएँ भी लिखती रहीं। गोल्डन थ्रैशोल्ड उनका पहला कविता संग्रह था। उनके दूसरे तथा तीसरे कविता संग्रह बर्ड ऑफ टाइम तथा ब्रोकन विंग ने उन्हें एक सुप्रसिद्ध कवयित्री बना दिया। १८९८ में सरोजिनी नायडू, डॉ॰ गोविंदराजुलू नायडू की जीवन-संगिनी बनीं। १९१४ में इंग्लैंड में वे पहली बार गाँधीजी से मिलीं और उनके विचारों से प्रभावित होकर देश के लिए समर्पित हो गयीं। एक कुशल सेनापति की भाँति उन्होंने अपनी प्रतिभा का परिचय हर क्षेत्र (सत्याग्रह हो या संगठन की बात) में दिया। उन्होंने अनेक राष्ट्रीय आंदोलनों का नेतृत्व किया और जेल भी गयीं। संकटों से न घबराते हुए वे एक धीर वीरांगना की भाँति गाँव-गाँव घूमकर ये देश-प्रेम का अलख जगाती रहीं और देशवासियों को उनके कर्तव्य की याद दिलाती रहीं। उनके वक्तव्य जनता के हृदय को झकझोर देते थे और देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने के लिए प्रेरित कर देते थे। वे बहुभाषाविद थी और क्षेत्रानुसार अपना भाषण अंग्रेजी, हिंदी, बंगला या गुजराती में देती थीं। लंदन की सभा में अंग्रेजी में बोलकर इन्होंने वहाँ उपस्थित सभी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया था। अपनी लोकप्रियता और प्रतिभा के कारण १९२५ में कानपुर में हुए कांग्रेस अधिवेशन की वे अध्यक्षा बनीं और १९३२ में भारत की प्रतिनिधि बनकर दक्षिण अफ्रीका भी गईं। भारत की स्वतंत्रता-प्राप्ति के बाद वे उत्तरप्रदेश की पहली राज्यपाल बनीं। श्रीमती एनी बेसेन्ट की प्रिय मित्र और गाँधीजी की इस प्रिय शिष्या ने अपना सारा जीवन देश के लिए अर्पण कर दिया। २ मार्च १९४९ को उनका देहांत हुआ। १३ फरवरी १९६४ को भारत सरकार ने उनकी जयंती के अवसर पर उनके सम्मान में १५ नए पैसे का एक डाकटिकट भी जारी किया। .

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सरोजिनी वरदप्पन

सरोजिनी वरदप्पन(२१ सितम्बर १९२१ − १७ अक्टूबर २०१३) तमिलनाडु से एक भारतीय सामाजिक कार्यकर्ता थी। वो मद्रास राज्य के मुख्यमंत्री एम भक्तवत्सलम की पुत्री और जयंती नटराजन की बड़ी बहन थी। सरोजिनी को वर्ष 1973 में पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया था। उन्हें वर्ष 2004 और 2009 के लिए जानकी देवी बजाज पुरस्कार भी दिया गया था। सरोजिनी को सन २००९ में भारत सरकार द्वारा समाज सेवा के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। उनका १७ अक्टूबर २०१३ को भारतीय समयानुसार सुबह सात बजकर 50 मिनट पर निधन हो गया। .

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सलीम चिश्ती की दरगाह

शेख सलीम चिश्ती की समाधि। शेख सलीम चिश्ती की समाधि भारत के आगरा जिले में नगर से ३५ किलो मीटर दूर फतेहपुर सीकरी शहर में, ज़नाना रौजा के निकट, दक्षिण में बुलन्द दरवाजे़ की ओर मुख किये हुये, जामी मस्जिद की भीतर स्थित है। शेख सलीम चिश्ती एक सूफी संत थे उन्होंने अकबर और उसके बेटे को आशीर्वाद दिया था कि भविष्य में सलीम, जहांगीर के नाम से पहचाना जाएगा। जून १५७३ में अकबर ने गुजरात विजय के साथ इस क्षेत्र को भी जीत लिया तो इसका नाम फतेहपुर सीकरी रखा गया और अकबर ने इस समाधि का निर्माण संत के सम्मान में वर्ष १५८० और १५८१ के बीच करवाया। आज यह समाधि वास्तुकला और धर्म निरपेक्षता का अनुपम उदाहरण है जहाँ इसके दर्शनार्थ विभिन्न समुदायों के लोग आते हैं। .

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सहारा मरुस्थल

पाठ.

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साँप

साँप साँप या सर्प, पृष्ठवंशी सरीसृप वर्ग का प्राणी है। यह जल तथा थल दोनों जगह पाया जाता है। इसका शरीर लम्बी रस्सी के समान होता है जो पूरा का पूरा स्केल्स से ढँका रहता है। साँप के पैर नहीं होते हैं। यह निचले भाग में उपस्थित घड़ारियों की सहायता से चलता फिरता है। इसकी आँखों में पलकें नहीं होती, ये हमेशा खुली रहती हैं। साँप विषैले तथा विषहीन दोनों प्रकार के होते हैं। इसके ऊपरी और निचले जबड़े की हड्डियाँ इस प्रकार की सन्धि बनाती है जिसके कारण इसका मुँह बड़े आकार में खुलता है। इसके मुँह में विष की थैली होती है जिससे जुडे़ दाँत तेज तथा खोखले होते हैं अतः इसके काटते ही विष शरीर में प्रवेश कर जाता है। दुनिया में साँपों की कोई २५००-३००० प्रजातियाँ पाई जाती हैं। इसकी कुछ प्रजातियों का आकार १० सेण्टीमीटर होता है जबकि अजगर नामक साँप २५ फिट तक लम्बा होता है। साँप मेढक, छिपकली, पक्षी, चूहे तथा दूसरे साँपों को खाता है। यह कभी-कभी बड़े जन्तुओं को भी निगल जाता है। सरीसृप वर्ग के अन्य सभी सदस्यों की तरह ही सर्प शीतरक्त का प्राणी है अर्थात् यह अपने शरीर का तापमान स्वंय नियंत्रित नहीं कर सकता है। इसके शरीर का तापमान वातावरण के ताप के अनुसार घटता या बढ़ता रहता है। यह अपने शरीर के तापमान को बढ़ाने के लिए भोजन पर निर्भर नहीं है इसलिए अत्यन्त कम भोजन मिलने पर भी यह जीवीत रहता है। कुछ साँपों को महीनों बाद-बाद भोजन मिलता है तथा कुछ सर्प वर्ष में मात्र एक बार या दो बार ढेड़ सारा खाना खाकर जीवीत रहते हैं। खाते समय साँप भोजन को चबाकर नहीं खाता है बल्कि पूरा का पूरा निकल जाता है। अधिकांश सर्पों के जबड़े इनके सिर से भी बड़े शिकार को निगल सकने के लिए अनुकुलित होते हैं। अफ्रीका का अजगर तो छोटी गाय आदि को भी नगल जाता है। विश्व का सबसे छोटा साँप थ्रेड स्नेक होता है। जो कैरेबियन सागर के सेट लुसिया माटिनिक तथा वारवडोस आदि द्वीपों में पाया जाता है वह केवल १०-१२ सेंटीमीटर लंबा होता है। विश्व का सबसे लंबा साँप रैटिकुलेटेड पेथोन (जालीदार अजगर) है, जो प्राय: १० मीटर से भी अधिक लंबा तथा १२० किलोग्राम वजन तक का पाया जाता है। यह दक्षिण -पूर्वी एशिया तथा फिलीपींस में मिलता है। .

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साधारण अंग्रेज़ी विकिपीडिया

साधारण अंग्रेज़ी विकिपीडिया विकिपीडिया का अंग्रेज़ी भाषा का संकरण है जो एकदम सरल और मौलिक अंग्रेज़ी में लिखा गया है। यह मुख्यतः उन लोगों के लिए हैं जो अभी अंग्रेज़ी में आरंभिक स्तर का ज्ञान रखते हैं और सीखने की प्रक्रिया में हैं। यह २००४ में आरंभ किया गया था और इस पर लेखों की कुल संख्या २५ मई, २००९ तक ५९,०००+ है। यह विकिपीडिया का सैंतीसवां सबसे बड़ा संकरण है।.

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साबुन

तरह-तरह के सजावटी साबुन साबुन उच्च अणु भार वाले कार्बनिक वसीय अम्लों के सोडियम या पोटैशियम लवण है। मृदु साबुन का सूत्र C17H35COOK एवं कठोर साबुन का सूत्र C17H35COONa है। साबुनीकरण की क्रिया में वनस्पति तेल या वसा एवं कास्टिक सोडा या कास्टिक पोटाश के जलीय घोल को गर्म करके रासायनिक प्रतिक्रिया के द्वारा साबुन का निर्माण होता तथा ग्लीसराल मुक्त होता है। साधारण तापक्रम पर साबुन नरम ठोस एवं अवाष्पशील पदार्थ है। यह कार्बनिक मिश्रण जल में घुलकर झाग उत्पन्न करता है। इसका जलीय घोल क्षारीय होता है जो लाल लिटमस को नीला कर देता है। .

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सामोगितियाई विकिपीडिया

सामोगितियाई विकिपीडिया विकिपीडिया का आयरिश भाषा का संस्करण है। यह २५ मार्च २००६ में आरंभ किया गया था। २७ मई, २००९ तक इस विकिपीडिया पर लेखों की संख्या १०,७१३+ है और यह विकिपीडिया का चौरासीवां सबसे बड़ा संस्करण है।.

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साहित्य संगीत कला २०१०

इन्हें भी देखें 2010 भारत 2010 विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी 2010 साहित्य संगीत कला 2010 खेल जगत 2010 .

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सिन्धी विकिपीडिया

सिन्धी विकिपीडिया विकिपीडिया का सिन्धी भाषा का संस्करण है। २८ मई, २००९ तक इस पर लेखों की संख्या ३२८ है और यह विकिपीडिया का २०७वां सबसे बड़ा संस्करण है।.

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सिलीसियाई विकिपीडिया

सिलीसियाई विकिपीडिया