लोगो
यूनियनपीडिया
संचार
Google Play पर पाएं
नई! अपने एंड्रॉयड डिवाइस पर डाउनलोड यूनियनपीडिया!
डाउनलोड
ब्राउज़र की तुलना में तेजी से पहुँच!
 

१९५०

सूची १९५०

1950 ग्रेगोरी कैलंडर का एक साधारण वर्ष है। .

140 संबंधों: चण्डीगढ़, चिनमूल (1950 फ़िल्म), चीनी जनवादी गणराज्य, झारखंड आंदोलन, तिराना, त्रिआयामी चलचित्र, दास्तान (1950 फ़िल्म), दक्षिण कोरिया, नारा चंद्रबाबू नायडू, निराला (1950 फ़िल्म), निशाना (1950 फ़िल्म), नृत्य चिकित्सा, नॉटिंग हिल (फ़िल्म), पनडुब्बी, परदेस (1950 फ़िल्म), परेश रावल, पश्चिम बंगाल अग्नि-शमन सेवा, पंजाब इंजिनियरिंग कॉलेज, पुरुषोत्तम दास टंडन, प्यार (1950 फ़िल्म), प्रभु लाल भटनागर, प्रसिद्ध पुस्तकें, प्रामाणिक हिंदी कोश, फ़िरोज़ खान नून, फ़ॉर्मूला वन, फ्रांसिस कोलेंस, फ्लाइंग रानी एक्सप्रेस, बरमूडा त्रिभुज, बावरे नयन (1950 फ़िल्म), बिनाका गीत माला, बेकसूर (1950 फ़िल्म), बीरबल साहनी पुरावनस्पतिविज्ञान संस्थान, बीसवीं शताब्दी, भँवरा (1950 फ़िल्म), भारत, भारत निर्वाचन आयोग, भारत रत्‍न, भारत का ध्वज, भारत के महाराज्यपाल, भारत के राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों की स्थापना तिथि अनुसार सूची, भारत के अभयारण्य, भारत के उप प्रधानमंत्री, भारतीय इतिहास तिथिक्रम, भोजेश्वर मन्दिर, मद्रास स्टेट, मधुबाला (1950 फ़िल्म), मशाल (1950 फ़िल्म), महावीर चक्र, मिनियापोलिस, मुम्बई, ..., मुहब्बत के सिवा, मुंबई का इतिहास, यदुनाथ सिंह, यूसुफ़ मेहर अली, रामधारी सिंह 'दिनकर', राष्ट्रपति भवन, राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला, भारत, राजेन्द्र प्रसाद, राइबोसोम, लखनऊ, लॉस एंजेल्स लेकर्स, शबाना आज़मी, शहबाज़ शरीफ़, शिवमूर्ति, शंकर रामचन्द्र, श्री रामअवतार (1950 फ़िल्म), श्रीभार्गवराघवीयम्, शीश महल (1950 फ़िल्म), सत्यजित राय, समाधि (1950 फ़िल्म), सरगम (1950 फ़िल्म), संयुक्त महाराष्ट्र समिति, संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय, संग्राम (1950 फ़िल्म), स्पेन की संस्कृति, हँसते आँसू (1950 फ़िल्म), हरिकृष्ण प्रसाद गुप्ता अग्रहरि, हिन्दी वर्तनी मानकीकरण, ह्राज़दान, जान पहचान (1950 फ़िल्म), जव्वाद एस ख्वाजा, वल्लभ भाई पटेल, विनायक दामोदर सावरकर, विष्णु नागर, व्यवसायिक अर्थशास्त्र, वेल्लोडी नारायण मेनन के., वीरेन्द्र कुमार भट्टाचार्य, खिलाड़ी (1950 फ़िल्म), खेल (1950 फ़िल्म), गणतन्त्र दिवस (भारत), गजानन विश्वनाथ केटकर, ग्रैंड स्लैम टेनिस विजेताओं की सूची, गैलापागोस द्वीपसमूह, गेब्रियल गार्सिया मार्ख़ेस, गोपीनाथ बोरदोलोई, ओड़िशा का इतिहास, ओडिआ चलचित्र सूची, ओम पुरी, आधी रात (1950 फ़िल्म), कन्नड साहित्य सम्मेलन, कन्वेंशन ड्यू मेत्रे, कमल के फूल (1950 फ़िल्म), कश्मीर का इतिहास, कहानी, कार्बन-१४ द्वारा कालनिर्धारण, काकविन, केन रोसेवाल, कोपनहेगन, अफ़सर (1950 फ़िल्म), अमेरिकी ओपन टेनिस के पुरुष एकल विजेताओं की सूची, अरुण बालाकृष्णन, अरुन्धती (महाकाव्य), अर्धायु काल, अस्तित्ववाद, १ जनवरी, १० जुलाई, ११ मई, १३ नवम्बर, १४ जनवरी, १५ दिसम्बर, १५ जून, १६ जुलाई, १७ जून, १८ सितम्बर, १९ अक्टूबर, २०१०, २१ जनवरी, २२ नवम्बर, २४ सितम्बर, २५ नवंबर, २५ जून, २६ जनवरी, २७ जून, ३१ जनवरी, ५ नवम्बर, ७ जनवरी, ७ अक्तूबर, ८ मार्च, ८ अप्रैल, 1951 एशियाई खेल सूचकांक विस्तार (90 अधिक) »

चण्डीगढ़

चण्डीगढ़, (पंजाबी: ਚੰਡੀਗੜ੍ਹ), भारत का एक केन्द्र शासित प्रदेश है, जो दो भारतीय राज्यों, पंजाब और हरियाणा की राजधानी भी है। इसके नाम का अर्थ है चण्डी का किला। यह हिन्दू देवी दुर्गा के एक रूप चण्डिका या चण्डी के एक मंदिर के कारण पड़ा है। यह मंदिर आज भी शहर में स्थित है। इसे सिटी ब्यूटीफुल भी कहा जाता है। चंडीगढ़ राजधानी क्षेत्र में मोहाली, पंचकुला और ज़ीरकपुर आते हैं, जिनकी २००१ की जनगणना के अनुसार जनसंख्या ११६५१११ (१ करोड़ १६ लाख) है। भारत की लोकसभा में प्रतिनिधित्व हेतु चण्डीगढ़ के लिए एक सीट आवण्टित है। वर्तमान सोलहवीं लोकसभा में भारतीय जनता पार्टी की श्रीमति किरण खेर यहाँ से साँसद हैं। इस शहर का नामकरण दुर्गा के एक रूप ‘चंडिका’ के कारण हुआ है और चंडी का मंदिर आज भी इस शहर की धार्मिक पहचान है। नवोदय टाइम्स इस शहर के निर्माण में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की भी निजी रुचि रही है, जिन्होंने नए राष्ट्र के आधुनिक प्रगतिशील दृष्टिकोण के रूप में चंडीगढ़ को देखते हुए इसे राष्ट्र के भविष्य में विश्वास का प्रतीक बताया था। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शहरी योजनाबद्धता और वास्तु-स्थापत्य के लिए प्रसिद्ध यह शहर आधुनिक भारत का प्रथम योजनाबद्ध शहर है।, चंडीगढ़ के मुख्य वास्तुकार फ्रांसीसी वास्तुकार ली कार्बूजियर हैं, लेकिन शहर में पियरे जिएन्नरेट, मैथ्यु नोविकी एवं अल्बर्ट मेयर के बहुत से अद्भुत वास्तु नमूने देखे जा सकते हैं। शहर का भारत के समृद्ध राज्यों और संघ शसित प्रदेशों की सूची में अग्रणी नाम आता है, जिसकी प्रति व्यक्ति आय ९९,२६२ रु (वर्तमान मूल्य अनुसार) एवं स्थिर मूल्य अनुसार ७०,३६१ (२००६-०७) रु है। .

नई!!: १९५० और चण्डीगढ़ · और देखें »

चिनमूल (1950 फ़िल्म)

चिनमूल 1950 में बनी बंगाली भाषा की फिल्म है। .

नई!!: १९५० और चिनमूल (1950 फ़िल्म) · और देखें »

चीनी जनवादी गणराज्य

चीनी जनवादी गणराज्य (चीनी: 中华人民共和国) जिसे प्रायः चीन नाम से भी सम्बोधित किया जाता है, पूर्वी एशिया में स्थित एक देश है। १.३ अरब निवासियों के साथ यह विश्व का सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश है और ९६,४१,१४४ वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल के साथ यह रूस और कनाडा के बाद विश्व का तीसरा सबसे बड़ा क्षेत्रफल वाला देश है। इतना विशाल क्षेत्रफल होने के कारण इसकी सीमा से लगते देशों की संख्या भी विश्व में सर्वाधिक (रूस के बराबर) है जो इस प्रकार है (उत्तर से दक्षिणावर्त्त): रूस, मंगोलिया, उत्तर कोरिया, वियतनाम, लाओस, म्यान्मार, भारत, भूटान, नेपाल, तिबत देश,पाकिस्तान, अफ़्गानिस्तान, ताजिकिस्तान, किर्गिस्तान और कज़ाख़िस्तान। उत्तर पूर्व में जापान और दक्षिण कोरिया मुख्य भूमि से दूरी पर स्थित हैं। चीनी जनवादी गणराज्य की स्थापना १ अक्टूबर, १९४९ को हुई थी, जब साम्यवादियों ने गृहयुद्ध में कुओमिन्तांग पर जीत प्राप्त की। कुओमिन्तांग की हार के बाद वे लोग ताइवान या चीनी गणराज्य को चले गए और मुख्यभूमि चीन पर साम्यवादी दल ने साम्यवादी गणराज्य की स्थापना की। लेकिन चीन, ताईवान को अपना स्वायत्त क्षेत्र कहता है जबकि ताइवान का प्रशासन स्वयं को स्वतन्त्र राष्ट्र कहता है। चीनी जनवादी गणराज्य और ताइवान दोनों अपने-अपने को चीन का वैध प्रतिनिधि कहते हैं। चीन विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यताओं में से एक है जो अभी भी अस्तित्व में है। इसकी सभ्यता ५,००० वर्षों से अधिक भी पुरानी है। वर्तमान में यह एक "समाजवादी गणराज्य" है, जिसका नेतृत्व एक दल के हाथों में है, जिसका देश के २२ प्रान्तों, ५ स्वायत्तशासी क्षेत्रों, ४ नगरपालिकाओं और २ विशेष प्रशासनिक क्षेत्रों पर नियन्त्रण है। चीन विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और यह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थाई सदस्य भी है। यह विश्व का सबसे बड़ा निर्यातक और दूसरा सबसे बड़ा आयातक है और एक मान्यता प्राप्त नाभिकीय महाशक्ति है। चीनी साम्यवादी दल के अधीन रहकर चीन में "समाजवादी बाज़ार अर्थव्यवस्था" को अपनाया जिसके अधीन पूंजीवाद और अधिकारवादी राजनैतिक नियन्त्रण सम्मित्लित है। विश्व के राजनैतिक, आर्थिक और सामाजिक ढाँचे में चीन को २१वीं सदी की अपरिहार्य महाशक्ति के रूप में माना और स्वीकृत किया जाता है। यहाँ की मुख्य भाषा चीनी है जिसका पाम्परिक तथा आधुनिक रूप दोनों रूपों में उपयोग किया जाता है। प्रमुख नगरों में बीजिंग (राजधानी), शंघाई (प्रमुख वित्तीय केन्द्र), हांगकांग, शेन्ज़ेन, ग्वांगझोउ इत्यादी हैं। .

नई!!: १९५० और चीनी जनवादी गणराज्य · और देखें »

झारखंड आंदोलन

झारखंड का अर्थ है "वन क्षेत्र", झारखंड वनों से आच्छादित छोटानागपुर के पठार का हिस्सा है जो गंगा के मैदानी हिस्से के दक्षिण में स्थित है। झारखंड शब्द का प्रयोग कम से कम चार सौ साल पहले सोलहवीं शताब्दी में हुआ माना जाता है। अपने बृहत और मूल अर्थ में झारखंड क्षेत्र में पुराने बिहार के ज्यादतर दक्षिणी हिस्से और छत्तीसगढ, पश्चिम बंगाल और उड़ीसा के कुछ आदिवासी जिले शामिल है। देश की लगभग नब्बे प्रतिशत अनुसूचित जनजाति का यह निवास स्थल है। इस आबादी का बड़ा हिस्सा 'मुंडा', 'हो' और 'संथाल' आदि जनजातियों का है, लेकिन इनके अलावे भी बहुत सी दूसरी आदिवासी जातियां यहां मौजूद हैं जो इस झारखंड आंदोलन में काफी सक्रिय रही हैं। चूँकि झारखंड पठारी और वनों से आच्छादित क्षेत्र है इसलिये इसकी रक्षा करना तुलनात्मक रूप से आसान है। परिणामस्वरुप, पारंपरिक रूप से यह क्षेत्र सत्रहवीं शताब्दी के शुरुआत तक, जब तक मुगल शासक यहाँ नहीं पहुँचे, यह क्षेत्र स्वायत्त रहा है। मुगल प्रशासन ने धीरे धीरे इस क्षेत्र में अपना प्रभुत्व स्थापित करना शुरु किया और फलस्वरुप यहाँ की स्वायत्त भूमि व्यवस्था में आमूल चूल परिवर्तन हुआ, सारी व्यवस्था ज़मींदारी व्यवस्था में बदल गयी जबकि इससे पहले यहाँ भूमि सार्वजनिक संपत्ति के रूप में मानी जाती थी। यह ज़मींदारी प्रवृति ब्रिटिश शासन के दौरान और भी मज़बूत हुई और जमीने धीरे धीरे कुछ लोगों के हाथ में जाने लगीं जिससे यहाँ बँधुआ मज़दूर वर्ग का उदय होने लगा। ये मजदू‍र हमेशा कर्ज के बोझ तले दबे होते थे और परिणामस्वरुप बेगार करते थे। जब आदिवासियों के ब्रिटिश न्याय व्यवस्था से कोई उम्मीद किरण नहीं दिखी तो आदिवासी विद्रोह पर उतर आये। अठारहवीं शताब्दी में कोल्ह, भील और संथाल समुदायों द्वारा भीषण विद्रोह किया गया। अंग्रेजों ने बाद मेंउन्निसवीं शताब्दी और बीसवीं शताब्दी में कुछ सुधारवादी कानून बनाये। 1845 में पहली बार यहाँ ईसाई मिशनरियों के आगमन से इस क्षेत्र में एक बड़ा सांस्कृतिक परिवर्तन और उथल-पुथल शुरु हुआ। आदिवासी समुदाय का एक बड़ा और महत्वपूर्ण हिस्सा ईसाईयत की ओर आकृष्ट हुआ। क्षेत्र में ईसाई स्कूल और अस्पताल खुले। लेकिन ईसाई धर्म में बृहत धर्मांतरण के बावज़ूद आदिवासियों ने अपनी पारंपरिक धार्मिक आस्थाएँ भी कायम रखी और ये द्वंद कायम रहा। झारखंड के खनिज पदार्थों से संपन्न प्रदेश होने का खामियाजा भी इस क्षेत्र के आदिवासियों को चुकाते रहना पड़ा है। यह क्षेत्र भारत का सबसे बड़ा खनिज क्षेत्र है जहाँ कोयला, लोहा प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है और इसके अलावा बाक्साईट, ताँबा चूना-पत्थर इत्यादि जैसे खनिज भी बड़ी मात्रा में हैं। यहाँ कोयले की खुदाई पहली बार 1856 में शुरु हुआ और टाटा आयरन ऐंड स्टील कंपनीकी स्थापना 1907 में जमशेदपुर में की गई। इसके बावजूद कभी इस क्षेत्र की प्रगति पर ध्यान नहीं दिया गया। केंद्र में चाहे जिस पार्टी की सरकार रही हो, उसने हमेशा इस क्षेत्र के दोहन के विषय में ही सोचा था। .

नई!!: १९५० और झारखंड आंदोलन · और देखें »

तिराना

तिराना (अल्बानियाई: Tiranë) अल्बानिया की राजधानी और सबसे बड़ा नगर है। २००८ के अनुमान के अनुसार यहाँ की जनसंख्या लगभग ९ लाख है। तिराना की स्थापना सुलेज्मन पाशा द्वारा १६१४ में की गई थी और १९२० यह नगर अल्बानिया की राजधानी बना। यह नगर १६१४ में सुलेज्मान पाशा द्वारा स्थापित किया गया था और १९२० में अल्बानिया की राज्धानी बना। तिराना नगरपालिका इशेम नदी के किनारे स्थित है और तिराना जिले में स्थित है। तिराना समुद्र तल से १०० मीटर की ऊँचाई पर स्थित है और अधिकत ऊँचाई वाला बिन्दू १,८२८ मीटर पर स्थित है। इसके अतिरिक्त दो मुख्य नदियां यहाँ से होकर बहती हैं: लाने और तिराने। नगर में चार कृत्रिम झीले भी हैं: तिराना झील, कोदर-कामेज़ झील, फारका झील और टुफिना झील। यह नगर उसी समानान्तर पर स्थित है जिस पर नेपल्स, मैड्रिड और इस्तांबुल स्थित हैं और इसकी मध्याह्न रेखा वही है जो बुडापेस्ट और क्राकौव की है। .

नई!!: १९५० और तिराना · और देखें »

त्रिआयामी चलचित्र

त्रिआयामी चलचित्र (अंग्रेज़ी:थ्री-डी फिल्म) एक चलचित्र होता है, जिसकी छवियां आम चलचित्रों से कुछ भिन्न बनती हैं। चित्रों की छाया अंकित (रिकॉर्ड) करने के लिए विशेष मोशन पिक्चर कैमरे का प्रयोग किया जाता है।। हिन्दुस्तान लाइव। २० दिसम्बर २००९ त्रि-आयामी चलचित्र १८९० के दौरान भी हुआ करते थे, लेकिन उस समय के इन चलचित्रों को थिएटर पर दिखाया जाना काफी महंगा काम होता था। मुख्यत: १९५० से १९८० के अमेरिकी सिनेमा में ये फिल्में प्रमुखता से दिखने लगी। सैद्धांतिक त्रि-आयामी चलचित्र (थियोरिटिकल थ्री-डी इमेज) प्रस्तुत करने का आरंभिक तरीका एनाजिफ इमेज होता है। इन तरीकों को इसलिये प्रसिद्धि मिली, क्योंकि इनका निर्माण और प्रदर्शन सरल था। इसके अलावा, इकलिप्स मैथड, लेंटीकुलर और बैरियर स्क्रीन, इंटरफेरेंस फिल्टर प्रौद्योगिकी और ध्रुवीकरण प्रणाली (पोलराइजेशन सिस्टम) इसकी प्रचलित तकनीक हुआ करती थी। मोशन पिक्चर का स्टीरियोस्कोपिक युग १८९० के दशक के अंतिम दौर में आरंभ हुआ जब ब्रिटिश फिल्मों के पुरोधा विलियम ग्रीन ने त्रि-आयामी प्रक्रिया का पेटेंट फाइल किया। फ्रेडरिक युजीन आइव्स ने स्टीरियो कैमरा रिग का पेटेंट १९०० में कराया। इस कैमरे में दो लैंस लगाये जाते थे जो एक दूसरे से तीन-चौथाई इंच की दूरी पर होते थे। २७ सितंबर, १९२२ को पहली बार दर्शकों को लॉस एंजिल्स के एंबैसेडर थिएटर होटल में द पावर ऑफ लव का प्रदर्शन आयोजित किया गया था। सन १९५२ में प्रथम रंगीन त्रिविम यानि कलर स्टीरियोस्कोपिक फीचर, वान डेविल बनाई गई। इसके लेखक, निर्माता और निर्देशक एम.एल.गुंजबर्ग थे। स्टीरियोस्कोपिक साउंड में बनी पहली थ्री-डी फीचर हाउस ऑफ वैक्स थी। २८ मई, १९५३ से वॉल्ट डिजनी इंका.

नई!!: १९५० और त्रिआयामी चलचित्र · और देखें »

दास्तान (1950 फ़िल्म)

दास्तान 1950 में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। .

नई!!: १९५० और दास्तान (1950 फ़िल्म) · और देखें »

दक्षिण कोरिया

दक्षिण कोरिया (कोरियाई: 대한민국 (देहान् मिन्गुक), 大韩民国 (हंजा)), पूर्वी एशिया में स्थित एक देश है जो कोरियाई प्रायद्वीप के दक्षिणी अर्धभाग को घेरे हुए है। 'शान्त सुबह की भूमि' के रूप में ख्यात इस देश के पश्चिम में चीन, पूर्व में जापान और उत्तर में उत्तर कोरिया स्थित है। देश की राजधानी सियोल दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा महानगरीय क्षेत्र और एक प्रमुख वैश्विक नगर है। यहां की आधिकारिक भाषा कोरियाई है जो हंगुल और हंजा दोनो लिपियों में लिखी जाती है। राष्ट्रीय मुद्रा वॉन है। उत्तर कोरिया, इस देश की सीमा से लगता एकमात्र देश है, जिसकी दक्षिण कोरिया के साथ २३८ किलिमीटर लम्बी सीमा है। दोनो कोरियाओं की सीमा विश्व की सबसे अधिक सैन्य जमावड़े वाली सीमा है। साथ ही दोनों देशों के बीच एक असैन्य क्षेत्र भी है। कोरियाई युद्ध की विभीषिका झेल चुका दक्षिण कोरिया वर्तमान में एक विकसित देश है और सकल घरेलू उत्पाद (क्रय शक्ति) के आधार पर विश्व की तेरहवीं और सकल घरेलू उत्पाद (संज्ञात्मक) के आधार पर पन्द्रहवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।कोरिया मे १५ अंतराष्ट्रीय बिमानस्थल है और करीब ५०० विश्वविद्यालय है लोग बिदेशो यहा अध्ययन करने आते है। यहा औद्योगिक विकास बहुत हुऐ है और कोरिया मे चीन सहित १५ देशो के लोग रोजगार अनुमति प्रणाली(EPS) के माध्यम से यहा काम करते है। जिसमे दक्षिण एशिया के ४ देशो नेपाल बांग्लादेश श्रीलंका पाकिस्तान है। .

नई!!: १९५० और दक्षिण कोरिया · और देखें »

नारा चंद्रबाबू नायडू

नारा चंद्रबाबू नायडू(तेलुगू:నారా చంద్రబాబు నాయుడు) (जन्म: 20 अप्रैल, 1950) वर्तमान आन्ध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। उनके नाम आन्ध्र प्रदेश में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का कीर्तिमान भी है। वर्तमान में वे आन्ध्र प्रदेश विधान सभा में सदन के नेता हैं। चंद्रबाबू का जन्म चित्तूर जिले के नारावारिपल्ली नामक गाँव में 20 अप्रैल 1950 को हुआ था। उन्होंने श्री वेंकटेश्वर विश्वविद्यालय तिरुपति से अर्थशास्त्र में मास्टर्स की उपाधि हासिल की और आजकल इसी विश्वविद्यालय से पीएचडी के लिए अपना शोध कार्य कर रहे हैं। .

नई!!: १९५० और नारा चंद्रबाबू नायडू · और देखें »

निराला (1950 फ़िल्म)

निराला 1950 में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। .

नई!!: १९५० और निराला (1950 फ़िल्म) · और देखें »

निशाना (1950 फ़िल्म)

निशाना 1950 में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। .

नई!!: १९५० और निशाना (1950 फ़िल्म) · और देखें »

नृत्य चिकित्सा

नृत्य चिकित्सा या डांस थेरेपी भावनात्मक, संज्ञानात्मक, सामाजिक व्यवहार और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए गति और नृत्य का उपयोग करने वाली चिकित्सा शैली है। यह शारिरिक गति और मानसिक भावना के संबंध की धारणा पर आधारित है। १९५० में अपनी उत्पत्ति के बाद से इस चिकित्सा शैली ने काफी लोकप्रियता हासिल की है। इस बीच इसमें अनेक तकनीकी विकास हुए हैं। .

नई!!: १९५० और नृत्य चिकित्सा · और देखें »

नॉटिंग हिल (फ़िल्म)

नॉटिंग हिल लन्दन के नॉटिंग हिल में बनी 1999 की एक रोमांटिक हास्य फ़िल्म है, जो 21 मई 1999 को रिलीज़ की गई। इसकी पटकथा फोर वेडिंग्स एंड अ फ्यूनरल के लेखक रिचर्ड कर्टिस ने लिखी थी। इसके निर्माता डंकन केन्वर्दी तथा निर्देशक रॉजर मिशेल थे। इस फ़िल्म में ह्यूग ग्रांट, जूलिया रॉबर्ट्स, रिज़ इफांस, एम्मा चेम्बर्स, टीम मैकइनरनी, गिना मैककी तथा हग बॉनविले ने अभिनय किया है। इस फ़िल्म को समीक्षकों से काफी सराहना मिली तथा इसने अब तक जारी ब्रिटिश फ़िल्मों में सबसे ज्यादा कमाई करते हुए बॉक्स ऑफिस पर अपना कमाल दिखाया.

नई!!: १९५० और नॉटिंग हिल (फ़िल्म) · और देखें »

पनडुब्बी

सन् १९७८ में ''एल्विन'' प्रथम विश्व युद्ध में प्रयुक्त जर्मनी की यूसी-१ श्रेणी की पनडुब्बी पनडुब्बी(अंग्रेज़ी:सबमैरीन) एक प्रकार का जलयान (वॉटरक्राफ़्ट) है जो पानी के अन्दर रहकर काम कर सकता है। यह एक बहुत बड़ा, मानव-सहित, आत्मनिर्भर डिब्बा होता है। पनडुब्बियों के उपयोग ने विश्व का राजनैतिक मानचित्र बदलने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई है। पनडुब्बियों का सर्वाधिक उपयोग सेना में किया जाता रहा है और ये किसी भी देश की नौसेना का विशिष्ट हथियार बन गई हैं। यद्यपि पनडुब्बियाँ पहले भी बनायी गयीं थीं, किन्तु ये उन्नीसवीं शताब्दी में लोकप्रिय हुईं तथा सबसे पहले प्रथम विश्व युद्ध में इनका जमकर प्रयोग हुआ। विश्व की पहली पनडुब्बी एक डच वैज्ञानिक द्वारा सन १६०२ में और पहली सैनिक पनडुब्बी टर्टल १७७५ में बनाई गई। यह पानी के भीतर रहते हुए समस्त सैनिक कार्य करने में सक्षम थी और इसलिए इसके बनने के १ वर्ष बाद ही इसे अमेरिकी क्रान्ति में प्रयोग में लाया गया था। सन १६२० से लेकर अब तक पनडुब्बियों की तकनीक और निर्माण में आमूलचूल बदलाव आया। १९५० में परमाणु शक्ति से चलने वाली पनडुब्बियों ने डीज़ल चलित पनडुब्बियों का स्थान ले लिया। इसके बाद समुद्री जल से आक्सीजन ग्रहण करने वाली पनडुब्बियों का भी निर्माण कर लिया गया। इन दो महत्वपूर्ण आविष्कारों से पनडुब्बी निर्माण क्षेत्र में क्रांति सी आ गई। आधुनिक पनडुब्बियाँ कई सप्ताह या महिनों तक पानी के भीतर रहने में सक्षम हो गई है। द्वितीय विश्व युद्ध के समय भी पनडुब्बियों का उपयोग परिवहन के लिये सामान को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने के लिए किया जाता था। आजकल इनका प्रयोग पर्यटन के लिये भी किया जाने लगा है। कालपनिक साहित्य संसार और फंतासी चलचित्रों के लिये पनडुब्बियों का कच्चे माल के रूप मे प्रयोग किया गया है। पनडुब्बियों पर कई लेखकों ने पुस्तकें भी लिखी हैं। इन पर कई उपन्यास भी लिखे जा चुके हैं। पनडुब्बियों की दुनिया को छोटे परदे पर कई धारावाहिको में दिखाया गया है। हॉलीवुड के कुछ चलचित्रों जैसे आक्टोपस १, आक्टोपस २, द कोर में समुद्री दुनिया के मिथकों को दिखाने के लिये भी पनडुब्बियो को दिखाया गया है। .

नई!!: १९५० और पनडुब्बी · और देखें »

परदेस (1950 फ़िल्म)

परदेस 1950 में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। .

नई!!: १९५० और परदेस (1950 फ़िल्म) · और देखें »

परेश रावल

परेश रावल (जन्म: 30 मई, 1950) हिन्दी फ़िल्मों के एक अभिनेता हैं। 2014 में उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया गया। यह 1994 में राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार सहायक किरदार के लिए से सम्मानित हुए। इसके बाद इन्हें सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता का फ़िल्मफेयर पुरस्कार भी मिल चुका है। यह केतन मेहता की फ़िल्म सरदार में स्वतंत्रता सेनानी वलभभाई पटेल की मुख्य किरदार में नजर आए थे। .

नई!!: १९५० और परेश रावल · और देखें »

पश्चिम बंगाल अग्नि-शमन सेवा

पश्चिम बंगाल अग्नि-शमन सेवा पश्चिम बंगाल सरकार की अग्नि-शमन सेवा है। इसका कार्य-क्षेत्र राज्य सहित कोलकाता शहर भी है। इस सेवा के अधीन ९५ फायर-स्टेशन, ७५०० कर्मचारी और ३५० अग्नि-शामक यंत्र हैं। यह सेवा देश की प्राचीनतम अग्नि-शमन सेवा है। १९५० में कैल्कटा फायर ब्रिगेड और बंगाल फायर सर्विस को जोड़ कर पश्चिम बंगाल अग्नि-शमन सेवा संगठन की स्थापना की गई थी। यह बहुत ही महत्वपुर्ण सेवा है। .

नई!!: १९५० और पश्चिम बंगाल अग्नि-शमन सेवा · और देखें »

पंजाब इंजिनियरिंग कॉलेज

पंजाब इंजिनियरिंग कॉलेज आदर्शतमसो मा ज्योतिर्गमय (संस्कृत)अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो (हिन्दी)Lead Us From Darkness to Light (अंग्रेजी) स्थापन१९२१-१९४७ लाहौर१९४७-१९५४ रुड़की१९५४-वर्तमान चंडीगढ प्रकारसार्वजनिक संचालकडॉक्टर विजय गुप्ता स्थानचंडीगढ, भारत परिसर१४६ एकड़ (०.६ km²), शहरी पूर्वस्नातक१५०० वेबसाइट पंजाब इंजिनियरिंग कॉलेज, या पेक चंडीगढ स्थित एक प्रमुख अभियांत्रिकी एवं तकनिकी महाविद्यालय हैं। यह १९२१ से १९४७ तक लाहौर में स्थपित था। भारत के विभाजन के बाद १९४७ से १९५४ तक रुड़की में स्थापना कि गई। १९५४ से वर्तमान तक कॉलेज चंडीगढ में स्थित हैं। २००४ तक पंजाब विश्वविद्यालय से सम्बद्ध के बाद कॉलेज स्नातक एवं अन्य उच्च उपाधियाँ प्रदान कर सकता है। .

नई!!: १९५० और पंजाब इंजिनियरिंग कॉलेज · और देखें »

पुरुषोत्तम दास टंडन

पुरूषोत्तम दास टंडन (१ अगस्त १८८२ - १ जुलाई, १९६२) भारत के स्वतन्त्रता सेनानी थे। हिंदी को भारत की राष्ट्रभाषा के पद पर प्रतिष्ठित करवाने में उनका महत्त्वपूर्ण योगदान था। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में हुआ था। वे भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन के अग्रणी पंक्ति के नेता तो थे ही, समर्पित राजनयिक, हिन्दी के अनन्य सेवक, कर्मठ पत्रकार, तेजस्वी वक्ता और समाज सुधारक भी थे। हिन्दी को भारत की राजभाषा का स्थान दिलवाने के लिए उन्होंने महत्वपूर्ण योगदान किया। १९५० में वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष बने। उन्हें भारत के राजनैतिक और सामाजिक जीवन में नयी चेतना, नयी लहर, नयी क्रान्ति पैदा करने वाला कर्मयोगी कहा गया। वे जन सामान्य में राजर्षि (संधि विच्छेदः राजा+ऋषि.

नई!!: १९५० और पुरुषोत्तम दास टंडन · और देखें »

प्यार (1950 फ़िल्म)

प्यार 1950 में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। .

नई!!: १९५० और प्यार (1950 फ़िल्म) · और देखें »

प्रभु लाल भटनागर

प्रभुलाल भटनागर, (8 अगस्त, 1912 - 5 अक्टूबर, 1976) विश्वप्रसिद्ध भारतीय गणितज्ञ थे। इन्हें गणित के लैटिस-बोल्ट्ज़मैन मैथड में प्रयोग किये गए भटनागर-ग्रॉस-क्रूक (बी.जी.के) कोलीज़न मॉडल के लिये जाना जाता है।। इंडियन मैथ सोसायटी। ऑब्सोल्यूट एस्ट्रॉनोमी .

नई!!: १९५० और प्रभु लाल भटनागर · और देखें »

प्रसिद्ध पुस्तकें

कोई विवरण नहीं।

नई!!: १९५० और प्रसिद्ध पुस्तकें · और देखें »

प्रामाणिक हिंदी कोश

प्रामाणिक हिंदी कोश हिन्दी भाषा का एक शब्दकोश है। इसकी रचना से आचार्य रामचंद्र वर्मा जुड़े हैं। इसकी रचना १९५० में हुई थी। .

नई!!: १९५० और प्रामाणिक हिंदी कोश · और देखें »

फ़िरोज़ खान नून

फिरोज खान नून, एक पाकिस्तानी राजनेता, एवं पाकिस्तान के ७वें प्रधानमंत्री थे। उनका जन्म 7 मई 1893 ई। को पाकीसतान के जिला सरगोधा की तहसील भलवाल के गांव हमोकह में हुआ था। वह सिर मोहम्मद हेयान नून के पुत्र थे। उनहोंने प्रारंभिक शिक्षा पब्लिक स्कूल भेरह जिले सरगोधा से प्राप्त की। 1905 में उन्होंने, एॅलिसन कॉलेज लाहौर में दाखिला लिया। 1912 में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए इंग्लैंड चले गए। 1916 में विलियम कॉलेज ऑक्सफोर्ड से हिस्ट्री में बीए किया। 1917 में बैरिस्टर बनकर वापस भारत चले आए। जन 1918 ई। में सरगोधा से अपनी प्रैक्टिस शुरू की। जन 1921 से जनवरी 1927 हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करते रहे। .

नई!!: १९५० और फ़िरोज़ खान नून · और देखें »

फ़ॉर्मूला वन

The formula was defined in 1946; the first Formula One race was in 1947; the first World Championship season was 1950.

नई!!: १९५० और फ़ॉर्मूला वन · और देखें »

फ्रांसिस कोलेंस

फ्रांसिस एस कॉलिन्स (जन्म 14 अप्रैल, 1950), एम.डी., पी.एच.डी, एक अमेरिकी चिकित्सक, जेनेटिसिस्ट थे, जिन्हें उनके जीन संबंधी रोगों पर महान खिज कार्य के लिए याद किया जाता है। इसके साथ ही वे मानव जीनोम परियोजना के अध्यक्ष भि थे। वे नेशनल ह्यूमन जीनोम रिसर्च इन्स्टीट्यूट के निदेशक भी रहे हैं। .

नई!!: १९५० और फ्रांसिस कोलेंस · और देखें »

फ्लाइंग रानी एक्सप्रेस

बॉम्बे, बरोडा एण्ड सेंट्रल इंडिया रेलवे द्वारा सन् 1906 में शुरु की गयी फ्लाइंग रानी एक्सप्रेस, भारत की मध्यम दूरी की तीव्रतम रेलगाड़ी है। इस रेलगाड़ी का संचालन महाराष्ट्र के मुंबई सेंट्रल और गुजरात के सूरत स्टेशनों के मध्य, पश्चिम रेलवे द्वारा किया जाता है। यह रेलगाड़ी मुख्यत: दैनिक रूप से दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों और कारोबारियों के बीच बहुत लोकप्रिय है। इस रेलगाड़ी को एक सप्ताहांत विशेष के तौर पर शुरू किया गया था लेकिन आज इसका संचालन दैनिक रूप से किया जाता है। यह रेलगाड़ी 263 किलोमीटर की दूरी तय करती है और मार्ग में पड़ने वाले प्रमुख स्टेशन हैं; अंधेरी, बोरीवली, पालघर, दहानु, वापी और वलसाड। .

नई!!: १९५० और फ्लाइंग रानी एक्सप्रेस · और देखें »

बरमूडा त्रिभुज

यह, जिसे शैतान के त्रिकोण के रूप में भी जाना जाता है, उत्तर पश्चिम अटलांटिक महासागर का एक क्षेत्र है जिसमे कुछ विमान और सतही त्रुटि (human error) या प्रकृति के कृत्यों (acts of nature) की सीमाओं के परे है। लोकप्रिय संस्कृति ने गायब होने की कुछ घटनाओं को अपसामान्य (paranormal), भौतिकी के नियमों (laws of physics) के निलंबन, या भूमि से परे की जीवित वस्तुओं (extraterrestrial beings)। की गतिविधियों से सम्बद्ध बताया। हालांकि बाद के लेखकों द्वारा अस्पष्ट रूप से सूचित या सृजित अनेक घटनाओं को प्रदर्शित करते हुए वास्तविक दस्तावेज उपलब्ध हैं और अनेक सरकारी एजेंसियों ने समुद्र के अन्य क्षेत्र के समान गायब होने की प्रकृति और उल्लेखित संख्या और दस्तावेजों पर कार्य किया है, परन्तु यथोचित जांच के बाद भी अनेक अवर्णित रह गए हैं। .

नई!!: १९५० और बरमूडा त्रिभुज · और देखें »

बावरे नयन (1950 फ़िल्म)

बावरे नयन किदार नाथ शर्मा द्वारा निर्देशित 1950 में बनी हिन्दी भाषा की प्रेमकहानी फिल्म है। .

नई!!: १९५० और बावरे नयन (1950 फ़िल्म) · और देखें »

बिनाका गीत माला

अमीन सयानी; बिनाका गीत माला के उद्धोषक जिनके मनमोहक अंदाज़ ने सबको दीवाना बना दिया था बिनाका गीतमाला भारतीय फिल्मी संगीत का सबसे पहला काउंट डाउन (count down) कार्यक्रम था रेडियो पर| 1950 और 1960 के दशक फिल्म, फिल्म संगीत और रेडियो के दशक थे| फिल्म और रेडियो के अलावा कोई और विशेष साधन नहीं था उन दिनों मनोरंजन का| लोकप्रिय फिल्मी गीतों पर आधारित एक कार्यक्रम प्रसारित होता था उन दिनों रेडियो सीलोन से - बिनाका गीतमाला| फिल्मी गीतों से सम्बंधित सबसे लोकप्रिय कार्यक्रम था ये उस समय का| हर बुधवार को रात 8 बजे से 9 बजे तक बिनाका गीतमाला सुनने के लिये लोग रेडियो से चिपक जाया करते थे| मेलोडियस धुनों और मधुर कंठस्वरों का संगम श्रोताओं को पूरे एक घंटे तक भाव विभोर बनाये रखता था। .

नई!!: १९५० और बिनाका गीत माला · और देखें »

बेकसूर (1950 फ़िल्म)

बेकसूर 1950 में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। .

नई!!: १९५० और बेकसूर (1950 फ़िल्म) · और देखें »

बीरबल साहनी पुरावनस्पतिविज्ञान संस्थान

बीरबल साहनी पुरावनस्पतिविज्ञान संस्थान लखनऊ का एक पुरावनस्पतिविज्ञान पर अनुसंधान संस्थान है। यह भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत एक स्वायत्त संस्थान है। से बीरबल साहनी: संस्थापक एवं प्रथम मानित निदेशक यह ५३, विश्वविद्यालय मार्ग, लखनऊ पर स्थित है। इसका नाम इसके संस्थापक श्री बीरबल साहनी, प्रसिद्ध परावनस्पति वैज्ञानिक के नाम पर रखा गया है। सितंबर, १९३९ में इनको अध्यक्ष बनाकर एक पुरावनस्पतिज्ञों की समिति अनुसंधान हेतु गठित हुई थी। इसकी प्रथम रिपोर्ट १९४० एवं अंतिम रिपोर्ट १९५० में प्रकाशित हुई। ३ जून, १९५३ को आठ वैज्ञानिकों के नाम से एक न्यास की स्थापना भारतीय सोसायटी पंजीकरण धारा-२१ (१८६०) के अंतर्गत हुई। इसका उद्देश्य पुरावनस्पति विज्ञान पर प्रो॰ बीरबल साहनी एवं सावित्री साहनी के मूल शोध में एकत्रित किए गये जीवाश्म संग्रह एवं एक सन्दर्भ पुस्त्तकालय के गठन हेतु फंड जुटाना था। और अंततः इस संस्थान की स्थापना १० सितंबर, १९४६ को हुई। इसके प्रथम मानित निदेशक बीरबल साहनी को बनाया गया। सरकार ने इसके लिए ३.५ एकड़ भूमि भी आवंटित की। संस्थान की इमारत ३ अप्रैल, १९४९ को इसकी नींव प्रथम प्रधान मंत्री जवाहर लाल नेहरू ने रखी। हालाँकि दुर्भाग्य से बीरबल साहनी की मृत्यु १० अप्रैल, १९४९ को ही हो गयी। किंतु १९५२ के अंत तक इसकी इमारत भी बनकर तैयार हो गयी। १९५१ में यूनेस्को ने इसे अपने तकनीकी सहयोग कार्यक्रम में भी सम्मिलित कर लिया। इतिहास .

नई!!: १९५० और बीरबल साहनी पुरावनस्पतिविज्ञान संस्थान · और देखें »

बीसवीं शताब्दी

ग्रेगरी पंचांग (कलेंडर) के अनुसार ईसा की बीसवीं शताब्दी 1 जनवरी 1901 से 31 दिसम्बर 2000 तक मानी जाती है। कुछ इतिहासवेत्ता 1914 से 1992 तक को संक्षिप्त बीसवीं शती का नाम भी देते हैं। (उन्नीसवी शताब्दी - बीसवी शताब्दी - इक्कीसवी शताब्दी - और शताब्दियाँ) दशक: १९०० का दशक १९१० का दशक १९२० का दशक १९३० का दशक १९४० का दशक १९५० का दशक १९६० का दशक १९७० का दशक १९८० का दशक १९९० का दशक ---- समय के गुज़रने को रेकोर्ड करने के हिसाब से देखा जाये तो बीसवी शताब्दी वह शताब्दी थी जो १९०१ - २००० तक चली थी। मनुष्य जाति के जीवन का लगभग हर पहलू बीसवी शताब्दी में बदल गया।.

नई!!: १९५० और बीसवीं शताब्दी · और देखें »

भँवरा (1950 फ़िल्म)

भँवरा 1950 में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। .

नई!!: १९५० और भँवरा (1950 फ़िल्म) · और देखें »

भारत

भारत (आधिकारिक नाम: भारत गणराज्य, Republic of India) दक्षिण एशिया में स्थित भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे बड़ा देश है। पूर्ण रूप से उत्तरी गोलार्ध में स्थित भारत, भौगोलिक दृष्टि से विश्व में सातवाँ सबसे बड़ा और जनसंख्या के दृष्टिकोण से दूसरा सबसे बड़ा देश है। भारत के पश्चिम में पाकिस्तान, उत्तर-पूर्व में चीन, नेपाल और भूटान, पूर्व में बांग्लादेश और म्यान्मार स्थित हैं। हिन्द महासागर में इसके दक्षिण पश्चिम में मालदीव, दक्षिण में श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व में इंडोनेशिया से भारत की सामुद्रिक सीमा लगती है। इसके उत्तर की भौतिक सीमा हिमालय पर्वत से और दक्षिण में हिन्द महासागर से लगी हुई है। पूर्व में बंगाल की खाड़ी है तथा पश्चिम में अरब सागर हैं। प्राचीन सिन्धु घाटी सभ्यता, व्यापार मार्गों और बड़े-बड़े साम्राज्यों का विकास-स्थान रहे भारतीय उपमहाद्वीप को इसके सांस्कृतिक और आर्थिक सफलता के लंबे इतिहास के लिये जाना जाता रहा है। चार प्रमुख संप्रदायों: हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख धर्मों का यहां उदय हुआ, पारसी, यहूदी, ईसाई, और मुस्लिम धर्म प्रथम सहस्राब्दी में यहां पहुचे और यहां की विविध संस्कृति को नया रूप दिया। क्रमिक विजयों के परिणामस्वरूप ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कंपनी ने १८वीं और १९वीं सदी में भारत के ज़्यादतर हिस्सों को अपने राज्य में मिला लिया। १८५७ के विफल विद्रोह के बाद भारत के प्रशासन का भार ब्रिटिश सरकार ने अपने ऊपर ले लिया। ब्रिटिश भारत के रूप में ब्रिटिश साम्राज्य के प्रमुख अंग भारत ने महात्मा गांधी के नेतृत्व में एक लम्बे और मुख्य रूप से अहिंसक स्वतन्त्रता संग्राम के बाद १५ अगस्त १९४७ को आज़ादी पाई। १९५० में लागू हुए नये संविधान में इसे सार्वजनिक वयस्क मताधिकार के आधार पर स्थापित संवैधानिक लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित कर दिया गया और युनाईटेड किंगडम की तर्ज़ पर वेस्टमिंस्टर शैली की संसदीय सरकार स्थापित की गयी। एक संघीय राष्ट्र, भारत को २९ राज्यों और ७ संघ शासित प्रदेशों में गठित किया गया है। लम्बे समय तक समाजवादी आर्थिक नीतियों का पालन करने के बाद 1991 के पश्चात् भारत ने उदारीकरण और वैश्वीकरण की नयी नीतियों के आधार पर सार्थक आर्थिक और सामाजिक प्रगति की है। ३३ लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल के साथ भारत भौगोलिक क्षेत्रफल के आधार पर विश्व का सातवाँ सबसे बड़ा राष्ट्र है। वर्तमान में भारतीय अर्थव्यवस्था क्रय शक्ति समता के आधार पर विश्व की तीसरी और मानक मूल्यों के आधार पर विश्व की दसवीं सबसे बडी अर्थव्यवस्था है। १९९१ के बाज़ार-आधारित सुधारों के बाद भारत विश्व की सबसे तेज़ विकसित होती बड़ी अर्थ-व्यवस्थाओं में से एक हो गया है और इसे एक नव-औद्योगिकृत राष्ट्र माना जाता है। परंतु भारत के सामने अभी भी गरीबी, भ्रष्टाचार, कुपोषण, अपर्याप्त सार्वजनिक स्वास्थ्य-सेवा और आतंकवाद की चुनौतियां हैं। आज भारत एक विविध, बहुभाषी, और बहु-जातीय समाज है और भारतीय सेना एक क्षेत्रीय शक्ति है। .

नई!!: १९५० और भारत · और देखें »

भारत निर्वाचन आयोग

भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) एक स्वायत्त एवं अर्ध-न्यायिक संस्थान है जिसका गठन भारत में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष रूप से विभिन्न से भारत के प्रातिनिधिक संस्थानों में प्रतिनिधि चुनने के लिए गया था। भारतीय चुनाव आयोग की स्थापना 25 जनवरी 1950 को की गयी थी। .

नई!!: १९५० और भारत निर्वाचन आयोग · और देखें »

भारत रत्‍न

भारत रत्न भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। यह सम्मान राष्ट्रीय सेवा के लिए दिया जाता है। इन सेवाओं में कला, साहित्य, विज्ञान, सार्वजनिक सेवा और खेल शामिल है। इस सम्मान की स्थापना 2 जनवरी 1954 में भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति श्री राजेंद्र प्रसाद द्वारा की गई थी। अन्य अलंकरणों के समान इस सम्मान को भी नाम के साथ पदवी के रूप में प्रयुक्त नहीं किया जा सकता। प्रारम्भ में इस सम्मान को मरणोपरांत देने का प्रावधान नहीं था, यह प्रावधान 1955 में बाद में जोड़ा गया। तत्पश्चात् 13 व्यक्तियों को यह सम्मान मरणोपरांत प्रदान किया गया। सुभाष चन्द्र बोस को घोषित सम्मान वापस लिए जाने के उपरान्त मरणोपरान्त सम्मान पाने वालों की संख्या 12 मानी जा सकती है। एक वर्ष में अधिकतम तीन व्यक्तियों को ही भारत रत्न दिया जा सकता है। उल्लेखनीय योगदान के लिए भारत सरकार द्वारा दिए जाने वाले सम्मानों में भारत रत्न के पश्चात् क्रमशः पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्मश्री हैं। .

नई!!: १९५० और भारत रत्‍न · और देखें »

भारत का ध्वज

भारत के राष्ट्रीय ध्वज जिसे तिरंगा भी कहते हैं, तीन रंग की क्षैतिज पट्टियों के बीच नीले रंग के एक चक्र द्वारा सुशोभित ध्वज है। इसकी अभिकल्पना पिंगली वैंकैया ने की थी।। भास्‍कर डॉट कॉम। १५ अगस्त २००९ इसे १५ अगस्त १९४७ को अंग्रेजों से भारत की स्वतंत्रता के कुछ ही दिन पूर्व २२ जुलाई, १९४७ को आयोजित भारतीय संविधान-सभा की बैठक में अपनाया गया था।। भारत के राष्ट्रीय पोर्टल पर इसमें तीन समान चौड़ाई की क्षैतिज पट्टियाँ हैं, जिनमें सबसे ऊपर केसरिया, बीच में श्वेत ओर नीचे गहरे हरे रंग की पट्टी है। ध्वज की लम्बाई एवं चौड़ाई का अनुपात ३:२ है। सफेद पट्टी के मध्य में गहरे नीले रंग का एक चक्र है जिसमें २४ आरे होते हैं। इस चक्र का व्यास लगभग सफेद पट्टी की चौड़ाई के बराबर होता है व रूप सारनाथ में स्थित अशोक स्तंभ के शेर के शीर्षफलक के चक्र में दिखने वाले की तरह होता है। भारतीय राष्ट्रध्वज अपने आप मै ही भारत की निति को दर्शाता हुआ दिखाई देता है। आत्मरक्षा, शांति, समृद्धि और सदैव विकास की ओर अग्रसर। राष्ट्रीय झंडा निर्दिष्टीकरण के अनुसार झंडा खादीमें ही बनना चाहिए। यह एक विशेष प्रकार से हाथ से काते गए कपड़े से बनता है जो महात्मा गांधी द्वारा लोकप्रिय बनाया गया था। इन सभी विशिष्टताओं को व्यापक रूप से भारत में सम्मान दिया जाता हैं भारतीय ध्वज संहिता के द्वारा इसके प्रदर्शन और प्रयोग पर विशेष नियंत्रण है। ध्वज का हेराल्डिक वर्णन इस प्रकार से होता है: .

नई!!: १९५० और भारत का ध्वज · और देखें »

भारत के महाराज्यपाल

भारत के महाराज्यपाल या गवर्नर-जनरल (१८५८-१९४७ तक वाइसरॉय एवं गवर्नर-जनरल अर्थात राजप्रतिनिधि एवं महाराज्यपाल) भारत में ब्रिटिश राज का अध्यक्ष और भारतीय स्वतंत्रता उपरांत भारत में, ब्रिटिश सम्प्रभु का प्रतिनिधि होता था। इनका कार्यालय सन 1773 में बनाया गया था, जिसे फोर्ट विलियम की प्रेसीडेंसी का गवर्नर-जनरल के अधीन रखा गया था। इस कार्यालय का फोर्ट विलियम पर सीधा नियंत्रण था, एवं अन्य ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के अधिकारियों का पर्यवेक्षण करता था। सम्पूर्ण ब्रिटिश भारत पर पूर्ण अधिकार 1833 में दिये गये और तब से यह भारत के गवर्नर-जनरल बन गये। १८५८ में भारत ब्रिटिश शासन की अधीन आ गया था। गवर्नर-जनरल की उपाधि उसके भारतीय ब्रिटिश प्रांत (पंजाब, बंगाल, बंबई, मद्रास, संयुक्त प्रांत, इत्यादि) और ब्रिटिष भारत, शब्द स्वतंत्रता पूर्व काल के अविभाजित भारत के इन्हीं ब्रिटिश नियंत्रण के प्रांतों के लिये प्रयोग होता है। वैसे अधिकांश ब्रिटिश भारत, ब्रिटिश सरकार द्वारा सीधे शासित ना होकर, उसके अधीन रहे शासकों द्वारा ही शासित होता था। भारत में सामंतों और रजवाड़ों को गवर्नर-जनरल के ब्रिटिश सरकार के प्रतिनिधि होने की भूमिका को दर्शित करने हेतु, सन १८५८ से वाइसरॉय एवं गवर्नर-जनरल ऑफ इंडिया (जिसे लघुरूप में वाइसरॉय कहा जाता था) प्रयोग हुई। वाइसरॊय उपाधि १९४७ में स्वतंत्रता उपरांत लुप्त हो गयी, लेकिन गवर्नर-जनरल का कार्यालय सन १९५० में, भारतीय गणतंत्रता तक अस्तित्व में रहा। १८५८ तक, गवर्नर-जनरल को ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के निदेशकों द्वारा चयनित किया जाता था और वह उन्हीं को जवाबदेह होता था। बाद में वह महाराजा द्वारा ब्रिटिश सरकार, भारत राज्य सचिव, ब्रिटिश कैबिनेट; इन सभी की राय से चयन होने लगा। १९४७ के बाद, सम्राट ने उसकी नियुक्ति जारी रखी, लेकिन भारतीय मंत्रियों की राय से, ना कि ब्रिटिश मंत्रियों की सलाह से। गवर्नर-जनरल पांच वर्ष के कार्यकाल के लिये होता था। उसे पहले भी हटाया जा सकता था। इस काल के पूर्ण होने पर, एक अस्थायी गवर्नर-जनरल बनाया जाता था। जब तक कि नया गवर्नर-जनरल पदभार ग्रहण ना कर ले। अस्थायी गवर्नर-जनरल को प्रायः प्रान्तीय गवर्नरों में से चुना जाता था। .

नई!!: १९५० और भारत के महाराज्यपाल · और देखें »

भारत के राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों की स्थापना तिथि अनुसार सूची

भारत के राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों की स्थापना तिथि अनुसार सूची में भारत के राज्य और केन्द्र शासित प्रदेश अपनी स्थापना तिथि के साथ दिए गए हैं। .

नई!!: १९५० और भारत के राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों की स्थापना तिथि अनुसार सूची · और देखें »

भारत के अभयारण्य

भारत में 500 से अधिक प्राणी अभयारण्य हैं, जिन्हें वन्य जीवन अभयारण्य (IUCN श्रेणी IV सुरक्षित क्षेत्र) कहा जाता है। इनमें से 28 बाघ अभयारण्य बाघ परियोजना द्वारा संचालित हैं, जो बाघ-संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण हैं। कुछ वन्य अभयारण्यों को पक्षी-अभयारण्य कहा जाता रहा है, (जैसे केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान) जब तक कि उन्हें राष्ट्रीय उद्यान का दर्ज़ा नहीं मिल गया। कई राष्ट्रीय उद्यान पहले वन्य जीवन अभयारण्य ही थे। कुछ वन्य जीवन अभयारण्य संरक्षण हेतु राष्ट्रीय महत्व रखते हैं, अपनी कुछ मुख्य प्राणी प्रजातियों के कारण। अतः उन्हें राष्ट्रीय वन्य जीवन अभयारण्य कहा जाता है, जैसे.

नई!!: १९५० और भारत के अभयारण्य · और देखें »

भारत के उप प्रधानमंत्री

भारत के उपप्रधानमंत्री का पद, तकनीकी रूप से एक एक संवैधानिक पद नहीं है, नाही संविधान में इसका कोई उल्लेख है। परंतु ऐतिहासिक रूप से, अनेक अवसरों पर विभिन्न सरकारों ने अपने किसी एक वरिष्ठ मंत्री को "उपप्रधानमंत्री" निर्दिष्ट किया है। इस पद को भरने की कोई संवैधानिक अनिवार्यता नहीं है, नाही यह पद किसी प्रकार की विशेष शक्तियाँ प्रदान करता हैं। आम तौर पर वित्तमंत्री या रक्षामंत्री जैसे वरिष्ठ कैबिनेट मंत्रियों को इस पद पर स्थापित किया जाता है, जिन्हें प्रधानमंत्री के बाद, सबसे वरिष्ठ माना जाता है। अमूमन इस पद का उपयोग, गठबंधन सरकारों में मज़बूती लाने हेतु किया जाता रहा है। इस पद के पहले धारक सरदार वल्लभभाई पटेल थे, जोकि जवाहरलाल नेहरू की कैबिनेट में गृहमंत्री थे। कई अवसरों पर ऐसा होता रहा है की प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति में उपप्रधानमंत्री संसद या अन्य स्थानों पर उनके स्थान पर सर्कार का प्रतिनिधित्व करते हैं, एवं कैबिनेट की बैठकों की अध्यक्षता कर सकते हैं। भारत के उपप्रधानमंत्री भारतीय सरकार के मंत्रीमंडल के उपाध्यक्ष होते है। .

नई!!: १९५० और भारत के उप प्रधानमंत्री · और देखें »

भारतीय इतिहास तिथिक्रम

भारत के इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाएं तिथिक्रम में।;भारत के इतिहास के कुछ कालखण्ड.

नई!!: १९५० और भारतीय इतिहास तिथिक्रम · और देखें »

भोजेश्वर मन्दिर

भोजेश्वर मन्दिर (जिसे भोजपुर मन्दिर भी कहते हैं) मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से लगभग ३० किलोमीटर दूर स्थित भोजपुर नामक गांव में बना एक मन्दिर है। यह मन्दिर बेतवा नदी के तट पर विन्ध्य पर्वतमालाओं के मध्य एक पहाड़ी पर स्थित है। --> मन्दिर का निर्माण एवं इसके शिवलिंग की स्थापना धार के प्रसिद्ध परमार राजा भोज (१०१० - १०५३ ई॰) ने करवायी थी। उनके नाम पर ही इसे भोजपुर मन्दिर या भोजेश्वर मन्दिर भी कहा जाता है, हालाँकि कुछ किंवदंतियों के अनुसार इस स्थल के मूल मन्दिर की स्थापना पाँडवों द्वारा की गई मानी जाती है। इसे "उत्तर भारत का सोमनाथ" भी कहा जाता है। यहाँ के शिलालेखों से ११वीं शताब्दी के हिन्दू मन्दिर निर्माण की स्थापत्य कला का ज्ञान होता है व पता चलता है कि गुम्बद का प्रयोग भारत में इस्लाम के आगमन से पूर्व भी होता रहा था। इस अपूर्ण मन्दिर की वृहत कार्य योजना को निकटवर्ती पाषाण शिलाओं पर उकेरा गया है। इन मानचित्र आरेखों के अनुसार यहाँ एक वृहत मन्दिर परिसर बनाने की योजना थी, जिसमें ढेरों अन्य मन्दिर भी बनाये जाने थे। इसके सफ़लतापूर्वक सम्पन्न हो जाने पर ये मन्दिर परिसर भारत के सबसे बड़े मन्दिर परिसरों में से एक होता। मन्दिर परिसर को भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा राष्ट्रीय महत्त्व का स्मारक चिह्नित किया गया है व इसका पुनरुद्धार कार्य कर इसे फिर से वही रूप देने का सफ़ल प्रयास किया है। मन्दिर के बाहर लगे पुरातत्त्व विभाग के शिलालेख अनुसार इस मंदिर का शिवलिंग भारत के मन्दिरों में सबसे ऊँचा एवं विशालतम शिवलिंग है। इस मन्दिर का प्रवेशद्वार भी किसी हिन्दू भवन के दरवाजों में सबसे बड़ा है। मन्दिर के निकट ही इस मन्दिर को समर्पित एक पुरातत्त्व संग्रहालय भी बना है। शिवरात्रि के अवसर पर राज्य सरकार द्वारा यहां प्रतिवर्ष भोजपुर उत्सव का आयोजन किया जाता है। .

नई!!: १९५० और भोजेश्वर मन्दिर · और देखें »

मद्रास स्टेट

मद्रास स्टेट भारत के वर्तमान राज्य तमिल नाडु को २६ जनवरी, १९५० से १९६८ तक बुलाया जाने वाला नाम था। मूल रूप में इस राज्य में वर्तमान आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्र, उत्तरी केरल (मालाबार) और कर्नाटक से बेल्लारी, दक्षिण कन्नड़ आदि क्षेत्र आते थे। इस राज्य को १९५६ में वर्तमान स्थिति में घटा दिया गया था। १९५३ में इस राज्य का भाषा कारण विभाजन किया गया। राज्य पुनर्संगठन अधिनियम, १९५६ के अन्तर्गत केरल और मैसूर राज्यों को इससे अलग निकाल लिया गया था। १९६८ में इसे तमिल नाडु क वर्तमान नाम मिला। इन्हें भी देखें: चेन्नई का इतिहास, मद्रास प्रेसिडेंसी श्रेणी:चेन्नई का इतिहास श्रेणी:तमिल नाडु का इतिहास श्रेणी:भारत का इतिहास.

नई!!: १९५० और मद्रास स्टेट · और देखें »

मधुबाला (1950 फ़िल्म)

मधुबाला 1950 में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। .

नई!!: १९५० और मधुबाला (1950 फ़िल्म) · और देखें »

मशाल (1950 फ़िल्म)

मशाल 1950 में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। .

नई!!: १९५० और मशाल (1950 फ़िल्म) · और देखें »

महावीर चक्र

महावीर चक्र भारत का युद्ध के समय वीरता का पदक है। यह सम्मान सैनिकों और असैनिकों को असाधारण वीरता या प्रकट शूरता या बलिदान के लिए दिया जाता है। यह मरणोपरान्त भी दिया जा सकता है। वरीयता क्रम में यह परमवीर चक्र के बाद आता है। .

नई!!: १९५० और महावीर चक्र · और देखें »

मिनियापोलिस

मिनियापोलिस "झीलों का शहर" और "मिलों का शहर" के रूप में उपनाम सहित हेन्नेपिन काउंटी का काउंटी सीट है, जो अमेरिकी राज्य मिनेसोटा का सबसे बड़ा शहर और अमेरिका का 47वां बड़ा शहर है। इसके नाम का श्रेय शहर के पहले स्कूल टीचर को दिया जाता है, जिन्होंने पानी के लिए डकोटा शब्द mni को, तथा शहर के लिए ग्रीक शब्द polis को जोड़ा.

नई!!: १९५० और मिनियापोलिस · और देखें »

मुम्बई

भारत के पश्चिमी तट पर स्थित मुंंबई (पूर्व नाम बम्बई), भारतीय राज्य महाराष्ट्र की राजधानी है। इसकी अनुमानित जनसंख्या ३ करोड़ २९ लाख है जो देश की पहली सर्वाधिक आबादी वाली नगरी है। इसका गठन लावा निर्मित सात छोटे-छोटे द्वीपों द्वारा हुआ है एवं यह पुल द्वारा प्रमुख भू-खंड के साथ जुड़ा हुआ है। मुम्बई बन्दरगाह भारतवर्ष का सर्वश्रेष्ठ सामुद्रिक बन्दरगाह है। मुम्बई का तट कटा-फटा है जिसके कारण इसका पोताश्रय प्राकृतिक एवं सुरक्षित है। यूरोप, अमेरिका, अफ़्रीका आदि पश्चिमी देशों से जलमार्ग या वायुमार्ग से आनेवाले जहाज यात्री एवं पर्यटक सर्वप्रथम मुम्बई ही आते हैं इसलिए मुम्बई को भारत का प्रवेशद्वार कहा जाता है। मुम्बई भारत का सर्ववृहत्तम वाणिज्यिक केन्द्र है। जिसकी भारत के सकल घरेलू उत्पाद में 5% की भागीदारी है। यह सम्पूर्ण भारत के औद्योगिक उत्पाद का 25%, नौवहन व्यापार का 40%, एवं भारतीय अर्थ व्यवस्था के पूंजी लेनदेन का 70% भागीदार है। मुंबई विश्व के सर्वोच्च दस वाणिज्यिक केन्द्रों में से एक है। भारत के अधिकांश बैंक एवं सौदागरी कार्यालयों के प्रमुख कार्यालय एवं कई महत्वपूर्ण आर्थिक संस्थान जैसे भारतीय रिज़र्व बैंक, बम्बई स्टॉक एक्स्चेंज, नेशनल स्टऑक एक्स्चेंज एवं अनेक भारतीय कम्पनियों के निगमित मुख्यालय तथा बहुराष्ट्रीय कंपनियां मुम्बई में अवस्थित हैं। इसलिए इसे भारत की आर्थिक राजधानी भी कहते हैं। नगर में भारत का हिन्दी चलचित्र एवं दूरदर्शन उद्योग भी है, जो बॉलीवुड नाम से प्रसिद्ध है। मुंबई की व्यवसायिक अपॊर्ट्युनिटी, व उच्च जीवन स्तर पूरे भारतवर्ष भर के लोगों को आकर्षित करती है, जिसके कारण यह नगर विभिन्न समाजों व संस्कृतियों का मिश्रण बन गया है। मुंबई पत्तन भारत के लगभग आधे समुद्री माल की आवाजाही करता है। .

नई!!: १९५० और मुम्बई · और देखें »

मुहब्बत के सिवा

मुहब्बत के सिवा राही मासूम रज़ा का प्रथम उपन्यास था। यह १९५० में उर्दू में प्रकाशित हुआ।.

नई!!: १९५० और मुहब्बत के सिवा · और देखें »

मुंबई का इतिहास

date.

नई!!: १९५० और मुंबई का इतिहास · और देखें »

यदुनाथ सिंह

नायक यदुनाथ सिंह परमवीर चक्र से सम्मानित भारतीय सैनिक हैं। इन्होने भारत-पाकिस्तान युद्ध 1947 में अद्वितीय साहस का योगदान दिया तथा वीरगति को प्राप्त हुए। इन्हे यह सम्मान सन 1950 में मरणोपरांत मिला था। श्री सिंह को 1941 में ब्रिटिश भारतीय सेना में शामिल किया गया था। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इन्होने बर्मा में जापान के खिलाफ लड़ाई में भाग लिया था। उन्होंने बाद में भारतीय सेना के सदस्य के रूप में 1947 में भारत-पाकिस्तान युद्ध में भाग लिया। 6 फरवरी 1948 को नौशेरा, जम्मू और कश्मीर के उत्तर में युद्ध में योगदान के कारण नायक सिंह को परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। .

नई!!: १९५० और यदुनाथ सिंह · और देखें »

यूसुफ़ मेहर अली

यूसुफ़ मेहर अली (23 सितंबर, 1903 - 2 जुलाई, 1950) एक स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारक थे। वे राष्ट्रीय मीलीशिया, बंबई चुथ लीग और कांग्रेस सोशिलिस्ट पार्टी में शामिल थे। उसने मज़दूर और किसान संगठन को मज़बूत कराने में योगदान दिये। उसने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान आठ बार जेल में जीना पड़ा। वे 1942 में लाहौर जेल से बहार आए और फिर मुंबई के मेयर के रूप में चुने गये। उसने 'भारत छोड़ो' आंदोलन में ँभी महत्वपूर्ण योगदान दिये। .

नई!!: १९५० और यूसुफ़ मेहर अली · और देखें »

रामधारी सिंह 'दिनकर'

रामधारी सिंह 'दिनकर' (२३ सितंबर १९०८- २४ अप्रैल १९७४) हिन्दी के एक प्रमुख लेखक, कवि व निबन्धकार थे। वे आधुनिक युग के श्रेष्ठ वीर रस के कवि के रूप में स्थापित हैं। बिहार प्रान्त के बेगुसराय जिले का सिमरिया घाट उनकी जन्मस्थली है। उन्होंने इतिहास, दर्शनशास्त्र और राजनीति विज्ञान की पढ़ाई पटना विश्वविद्यालय से की। उन्होंने संस्कृत, बांग्ला, अंग्रेजी और उर्दू का गहन अध्ययन किया था। 'दिनकर' स्वतन्त्रता पूर्व एक विद्रोही कवि के रूप में स्थापित हुए और स्वतन्त्रता के बाद राष्ट्रकवि के नाम से जाने गये। वे छायावादोत्तर कवियों की पहली पीढ़ी के कवि थे। एक ओर उनकी कविताओ में ओज, विद्रोह, आक्रोश और क्रान्ति की पुकार है तो दूसरी ओर कोमल श्रृंगारिक भावनाओं की अभिव्यक्ति है। इन्हीं दो प्रवृत्तिय का चरम उत्कर्ष हमें उनकी कुरुक्षेत्र और उर्वशी नामक कृतियों में मिलता है। उर्वशी को भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार जबकि कुरुक्षेत्र को विश्व के १०० सर्वश्रेष्ठ काव्यों में ७४वाँ स्थान दिया गया। .

नई!!: १९५० और रामधारी सिंह 'दिनकर' · और देखें »

राष्ट्रपति भवन

राष्ट्रपति भवन भारत सरकार के राष्ट्रपति का सरकारी आवास है। सन १९५० तक इसे वाइसरॉय हाउस बोला जाता था। तब यह तत्कालीन भारत के गवर्नर जनरल का आवास हुआ करता था। यह नई दिल्ली के हृदय क्षेत्र में स्थित है। इस महल में ३४० कक्ष हैं और यह विश्व में किसी भी राष्ट्राध्यक्ष के आवास से बड़ा है। वर्तमान भारत के राष्ट्रपति, उन कक्षों में नहीं रहते, जहां वाइसरॉय रहते थे, बल्कि वे अतिथि-कक्ष में रहते हैं। भारत के प्रथम भारतीय गवर्नर जनरल श्री सी राजगोपालाचार्य को यहां का मुख्य शयन कक्ष, अपनी विनीत नम्र रुचियों के कारण, अति आडंबर पूर्ण लगा जिसके कारण उन्होंने अतिथि कक्ष में रहना उचित समझा। उनके उपरांत सभी राष्ट्रपतियों ने यही परंपरा निभाई। यहां के मुगल उद्यान की गुलाब वाटिका में अनेक प्रकार के गुलाब लगे हैं और यह कि जन साधारण हेतु, प्रति वर्ष फरवरी माह के दौरान खुलती है। इस भवन की खास बात है कि इस भवन के निर्माण में लोहे का नगण्य प्रयोग हुआ है। .

नई!!: १९५० और राष्ट्रपति भवन · और देखें »

राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला, भारत

राष्ट्रीय भौतिकी प्रयोगशाला, भारत में नई दिल्ली में स्थित देश की मापन्मानक प्रयोगशाला है। ये भारत में एस आई इकाइयों का अनुरक्षण तथा राष्ट्रीय भार तथा माप के मानकों का कैलीब्रेशन करती है। इस प्रयोगशाला की स्थापना वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद के अधीन भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु द्वाआ ४ जनवरी, १९४७ को हुई थी। डॉ॰ के एस कृष्णन इस प्रयोगशाला के प्रथम निदेशक थे। प्रयोगशाला की मुख्य इमारत औपचारिक तौर पर भारत के उपप्रधानमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा २१ जनवरी, १९५० को आरंभ की गई थी। पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी द्वारा प्रयोगशाला की रजत जयंती का उद्घाटन २३ दिसम्बर १९७५ को किया गया था। लगभग हरेक आधुनिकीकरण हुए राष्ट्र में एक राष्ट्रीय मेट्रोलॉजिकल संस्थान होता है, जो मापन मानक की देखरेख करता है। भारत में ये उत्तरदायित्व राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला को मिला हुआ है। प्रयोगशाला में अनुसंधान कार्य भी होते हैं। इसके द्वारा प्रतिपादित एक महत्त्वपूर्ण अनुसंधान गतिविधि में भारतीय चुनाव में प्रयोग की जाने वाली स्याही के लिये रासायनिक सूत्र ढूंढना है, जिससे कि चुनावों में फर्जी मतदान एवं धोखाधड़ी आदि से बचाव हो सके। ये स्याही मैसूर पेंट्स एण्ड वार्निश वर्क्स लि.

नई!!: १९५० और राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला, भारत · और देखें »

राजेन्द्र प्रसाद

राजेन्द्र प्रसाद (3 दिसम्बर 1884 – 28 फरवरी 1963) भारत के प्रथम राष्ट्रपति थे। वे भारतीय स्वाधीनता आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से थे जिन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में प्रमुख भूमिका निभाई। उन्होंने भारतीय संविधान के निर्माण में भी अपना योगदान दिया था जिसकी परिणति २६ जनवरी १९५० को भारत के एक गणतंत्र के रूप में हुई थी। राष्ट्रपति होने के अतिरिक्त उन्होंने स्वाधीन भारत में केन्द्रीय मन्त्री के रूप में भी कुछ समय के लिए काम किया था। पूरे देश में अत्यन्त लोकप्रिय होने के कारण उन्हें राजेन्द्र बाबू या देशरत्न कहकर पुकारा जाता था। .

नई!!: १९५० और राजेन्द्र प्रसाद · और देखें »

राइबोसोम

लयनकाय (13) तारककाय थेर्मस थर्मोफाइलस की एक ३०एस उपैकाई का परमाणु ढांचा। प्रोटीन-नीले में एवं एकल सूत्र आर.एन.ए नारंगी रंग में दिखाए गये हैं राइबोसोम सजीव कोशिका के कोशिका द्रव में स्थित बहुत ही सूक्ष्म कण हैं, जिनकी प्रोटीनों के संश्लेषण में महत्त्वपूर्ण भूमिका है। ये आनुवांशिक पदार्थों (डीएनए या आरएनए) के संकेतों को प्रोटीन शृंखला में परिवर्तित करते हैं। ये एण्डोप्लाज्मिक रेटिकुलम के ऊपरी सतह पर पाये जाते हैं, इसके अलावा ये माइटोकाण्ड्रिया तथा क्लोरोप्लास्ट में भी पाये जाते हैं। राइबोसोम एक संदेशधारक राईबोस न्यूक्लिक अम्ल (एमआरएनए) के साथ जुड़े रहता है जिसमें किसी विशेष प्रोटीन के निर्माण के लिए आवश्यक अमीनो अम्ल को सही क्रमानुसार लगाने का संदेश रहता है। अमीनो अम्ल संदेशवाहक आरएनए अणुओं के साथ संलग्न रहते हैं। इस प्रकार राइबोसोम प्रोटीन के संश्लेषण में तो सहायता करता ही है लिपिड के उपापचयी क्रियाओं में भी सहायता करता है। राइबोसोम की खोज १९५० के दशक में रोमानिया के जीववैज्ञानिक जॉर्ज पेलेड ने की थी। उन्होंने इस खोज के लिए इलैक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी का प्रयोग किया था जिसके लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। राइबोसोम नाम १९५८ में वैज्ञानिक रिचर्ड बी.

नई!!: १९५० और राइबोसोम · और देखें »

लखनऊ

लखनऊ (भारत के सर्वाधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश की राजधानी है। इस शहर में लखनऊ जिले और लखनऊ मंडल के प्रशासनिक मुख्यालय भी स्थित हैं। लखनऊ शहर अपनी खास नज़ाकत और तहजीब वाली बहुसांस्कृतिक खूबी, दशहरी आम के बाग़ों तथा चिकन की कढ़ाई के काम के लिये जाना जाता है। २००६ मे इसकी जनसंख्या २,५४१,१०१ तथा साक्षरता दर ६८.६३% थी। भारत सरकार की २००१ की जनगणना, सामाजिक आर्थिक सूचकांक और बुनियादी सुविधा सूचकांक संबंधी आंकड़ों के अनुसार, लखनऊ जिला अल्पसंख्यकों की घनी आबादी वाला जिला है। कानपुर के बाद यह शहर उत्तर-प्रदेश का सबसे बड़ा शहरी क्षेत्र है। शहर के बीच से गोमती नदी बहती है, जो लखनऊ की संस्कृति का हिस्सा है। लखनऊ उस क्ष्रेत्र मे स्थित है जिसे ऐतिहासिक रूप से अवध क्षेत्र के नाम से जाना जाता था। लखनऊ हमेशा से एक बहुसांस्कृतिक शहर रहा है। यहाँ के शिया नवाबों द्वारा शिष्टाचार, खूबसूरत उद्यानों, कविता, संगीत और बढ़िया व्यंजनों को हमेशा संरक्षण दिया गया। लखनऊ को नवाबों के शहर के रूप में भी जाना जाता है। इसे पूर्व की स्वर्ण नगर (गोल्डन सिटी) और शिराज-ए-हिंद के रूप में जाना जाता है। आज का लखनऊ एक जीवंत शहर है जिसमे एक आर्थिक विकास दिखता है और यह भारत के तेजी से बढ़ रहे गैर-महानगरों के शीर्ष पंद्रह में से एक है। यह हिंदी और उर्दू साहित्य के केंद्रों में से एक है। यहां अधिकांश लोग हिन्दी बोलते हैं। यहां की हिन्दी में लखनवी अंदाज़ है, जो विश्वप्रसिद्ध है। इसके अलावा यहाँ उर्दू और अंग्रेज़ी भी बोली जाती हैं। .

नई!!: १९५० और लखनऊ · और देखें »

लॉस एंजेल्स लेकर्स

श्रेणी:नेशनल बास्केटबॉल असोसिएशन - पैसिफिक डिवीज़न श्रेणी:नेशनल बास्केटबॉल असोसिएशन - पश्चिमी कांफ्रेंस श्रेणी:नेशनल बास्केटबॉल असोसिएशन.

नई!!: १९५० और लॉस एंजेल्स लेकर्स · और देखें »

शबाना आज़मी

शबाना आज़मी (जन्म: 18 सितंबर, 1950) हिन्दी फ़िल्मों की एक अभिनेत्री हैं। .

नई!!: १९५० और शबाना आज़मी · और देखें »

शहबाज़ शरीफ़

मियां मोहम्मद शाहबाज शरीफ पाकिस्तान के प्रसिद्ध राजनेता, पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज समूह) के प्रमुख सदस्य और पाकिस्तान प्रधानमंत्री मियां मोहम्मद नवाज शरीफ के भाई हैं। 1950 में लाहौर में पैदा हुए। वह पाकिस्तान के सबसे घनी आबादी वाले प्रांत पंजाब के मुख्यमंत्री हैं। शाहबाज शरीफ 20 फरवरी 1997 से 12 अक्टूबर 1999 तक भी पंजाब के मुख्यमंत्री रहे। 1999 में मुशर्रफ सरकार पर कब्जा कर लेने के बाद वह सऊदी अरब, में निर्वासित रहे। 11 मई 2004 को उन्होंने पाकिस्तान वापस आने की कोशिश की मगर लाहौर के अल्लामा इकबाल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उन्हें वापस भेज दिया गया। .

नई!!: १९५० और शहबाज़ शरीफ़ · और देखें »

शिवमूर्ति

हिन्दी कथाकार व्यक्तिगत जीवन मूल निवास- सुल्तानपुर (उत्तर प्रदेश) का एक अत्यंत पिछड़ा गांव कुरंग.

नई!!: १९५० और शिवमूर्ति · और देखें »

शंकर रामचन्द्र

शंकर रामचंद्र या मामाराव दांते (२८ सितंबर, १८९८-), ने पुणे से १९२० में कला स्नातक किया। १९२०-१९२३ तक लोक-संग्रह समाचार पत्र के संपादकीय विभाग में कार्यरत रहे। १९२३ के बाद इन्होंने देवनागरी लिपि के अक्षरों के मुद्रण एवं टंकण पर शोध किया और देवनागरी लिपि का मोनो-टाइप पर मुद्रण संभव हुआ। १९२४-१९३० तक पुणे हिन्दू महासभा के सचिव रहे थे। इस दौरान शुद्धि कार्यक्रम किए थे। १९२८ में दंगा प्रभावित महाद का सर्वेक्षण किया। १९३८ में इन्होंने निज़ाम के शासन में हिन्दुओं की स्थिति का सर्वेक्षण किया तथा सरकार को अवगत कराया। ये १९४०-१९४५ तक महाराष्ट्र हिन्दू महासभा के सचिव रहे थे। १९३८ में भागनगर (हैदराबाद) के अहिंसक प्रतिरोध के बाद १९३९ में इन्हें कारावास भोगना पड़ा। १९५० में ये अखिल भारतीय हिन्दू महासभा के सचिव निर्वाचित हुए। बाद में १९७५ में उपाध्यक्ष भी बने। इन्होंने चित्तराव शास्त्री के ऋगवेद के मराठी अनुवाद, मेट्स बुक ऑन द प्लाइट ऑफ अनटचेबल्स, बलशास्त्री हरिदास के पुणे में दिए व्याख्यानों व सावरकर के कार्यों का प्रकाशन भी किया। ये १९४०-५५ तक काल- समाचारपत्र के संपादक भी रहे। १९६७ में इन्होंने काल-साप्ताहिक निकाला। गणपत महादेव नलदाड़े (१० फरवरी-) इनका जन्म पुणे में हुआ। आरंभ में इन्होंने अपने पिता के तंबाकू के व्यापार में सहओग किया। १९२२ में मुद्रणालय खोला। १९२५-३२ तक संग्राम-साप्ताहिक पत्र का प्रकाशन किया। १९२८-५४ तक पुणे नगर निगम के अध्यक्ष भी रहे। १९४२ में ये पुणे शहर के महापौर भी चुने गए थे। १९६४ में ये मुंबई विधान परिषद के सदस्य चुने गए। मर्चेन्ट्स कोऑपरेटिव बैंक के अध्यक्ष रहे थे। गांधी हत्याकाण्ड के दंगों के दौरान इनकी प्रिंटिंग प्रेस जला दी गई। १९४८ एवं १९५० में ये ४-४ महीनों के लिए जेल भी गए। १९७५ में पुणे में आयोजित हिन्दू महासभा सत्र की स्वागत समिति के अध्यक्ष भी रहे थे। .

नई!!: १९५० और शंकर रामचन्द्र · और देखें »

श्री रामअवतार (1950 फ़िल्म)

श्री रामअवतार 1950 में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। .

नई!!: १९५० और श्री रामअवतार (1950 फ़िल्म) · और देखें »

श्रीभार्गवराघवीयम्

श्रीभार्गवराघवीयम् (२००२), शब्दार्थ परशुराम और राम का, जगद्गुरु रामभद्राचार्य (१९५०-) द्वारा २००२ ई में रचित एक संस्कृत महाकाव्य है। इसकी रचना ४० संस्कृत और प्राकृत छन्दों में रचित २१२१ श्लोकों में हुई है और यह २१ सर्गों (प्रत्येक १०१ श्लोक) में विभक्त है।महाकाव्य में परब्रह्म भगवान श्रीराम के दो अवतारों परशुराम और राम की कथाएँ वर्णित हैं, जो रामायण और अन्य हिंदू ग्रंथों में उपलब्ध हैं। भार्गव शब्द परशुराम को संदर्भित करता है, क्योंकि वह भृगु ऋषि के वंश में अवतीर्ण हुए थे, जबकि राघव शब्द राम को संदर्भित करता है क्योंकि वह राजा रघु के राजवंश में अवतीर्ण हुए थे। इस रचना के लिए, कवि को संस्कृत साहित्य अकादमी पुरस्कार (२००५) तथा अनेक अन्य पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। महाकाव्य की एक प्रति, कवि की स्वयं की हिन्दी टीका के साथ, जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय, चित्रकूट, उत्तर प्रदेश द्वारा प्रकाशित की गई थी। पुस्तक का विमोचन भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा ३० अक्टूबर २००२ को किया गया था। .

नई!!: १९५० और श्रीभार्गवराघवीयम् · और देखें »

शीश महल (1950 फ़िल्म)

शीश महल 1950 में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। .

नई!!: १९५० और शीश महल (1950 फ़िल्म) · और देखें »

सत्यजित राय

सत्यजित राय (बंगाली: शॉत्तोजित् राय्) (२ मई १९२१–२३ अप्रैल १९९२) एक भारतीय फ़िल्म निर्देशक थे, जिन्हें २०वीं शताब्दी के सर्वोत्तम फ़िल्म निर्देशकों में गिना जाता है। इनका जन्म कला और साहित्य के जगत में जाने-माने कोलकाता (तब कलकत्ता) के एक बंगाली परिवार में हुआ था। इनकी शिक्षा प्रेसिडेंसी कॉलेज और विश्व-भारती विश्वविद्यालय में हुई। इन्होने अपने कैरियर की शुरुआत पेशेवर चित्रकार की तरह की। फ़्रांसिसी फ़िल्म निर्देशक ज़ाँ रन्वार से मिलने पर और लंदन में इतालवी फ़िल्म लाद्री दी बिसिक्लेत (Ladri di biciclette, बाइसिकल चोर) देखने के बाद फ़िल्म निर्देशन की ओर इनका रुझान हुआ। राय ने अपने जीवन में ३७ फ़िल्मों का निर्देशन किया, जिनमें फ़ीचर फ़िल्में, वृत्त चित्र और लघु फ़िल्में शामिल हैं। इनकी पहली फ़िल्म पथेर पांचाली (পথের পাঁচালী, पथ का गीत) को कान फ़िल्मोत्सव में मिले “सर्वोत्तम मानवीय प्रलेख” पुरस्कार को मिलाकर कुल ग्यारह अन्तरराष्ट्रीय पुरस्कार मिले। यह फ़िल्म अपराजितो (অপরাজিত) और अपुर संसार (অপুর সংসার, अपु का संसार) के साथ इनकी प्रसिद्ध अपु त्रयी में शामिल है। राय फ़िल्म निर्माण से सम्बन्धित कई काम ख़ुद ही करते थे — पटकथा लिखना, अभिनेता ढूंढना, पार्श्व संगीत लिखना, चलचित्रण, कला निर्देशन, संपादन और प्रचार सामग्री की रचना करना। फ़िल्में बनाने के अतिरिक्त वे कहानीकार, प्रकाशक, चित्रकार और फ़िल्म आलोचक भी थे। राय को जीवन में कई पुरस्कार मिले जिनमें अकादमी मानद पुरस्कार और भारत रत्न शामिल हैं। .

नई!!: १९५० और सत्यजित राय · और देखें »

समाधि (1950 फ़िल्म)

समाधि 1950 में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। .

नई!!: १९५० और समाधि (1950 फ़िल्म) · और देखें »

सरगम (1950 फ़िल्म)

सरगम 1950 में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। .

नई!!: १९५० और सरगम (1950 फ़िल्म) · और देखें »

संयुक्त महाराष्ट्र समिति

संयुक्त महाराष्ट्र समिति, एक संगठन था, जिसका गठन १९५० में तत्कालीन द्विभाषी बॉम्बे राज्य से मराठी बोले जाने वाले क्षेत्रों का अलग राज्य बनाने के उद्देश्य से किया गया था। बाद में संगठन, इस राज्य के महाराष्ट्र नाम से गठन के बाद भंग की गयी। श्रेणी:महाराष्ट्र का इतिहास.

नई!!: १९५० और संयुक्त महाराष्ट्र समिति · और देखें »

संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय

संयुक्त राष्ट्र संगठन का मुख्यालय अमेरिका के न्युयॉर्क शहर में स्थित है। इसका भवन आधिकारिक रूप से 9 जनवरी 1951 को खुला। इस भवन का निर्माण 1949-1950 में हुआ। इसके लिए विलियम जेकेंडॉफ से नदी के पूर्वी किनारे पर 17 एकड़ जमीन खरीदी गई। इस सौदे में नेल्सन रॉकफेलर की अहम भूमिका थी। .

नई!!: १९५० और संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय · और देखें »

संग्राम (1950 फ़िल्म)

संग्राम 1950 में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। .

नई!!: १९५० और संग्राम (1950 फ़िल्म) · और देखें »

स्पेन की संस्कृति

श्रेणी:विभिन्न देशों की संस्कृति.

नई!!: १९५० और स्पेन की संस्कृति · और देखें »

हँसते आँसू (1950 फ़िल्म)

हँसते आँसू 1950 में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। .

नई!!: १९५० और हँसते आँसू (1950 फ़िल्म) · और देखें »

हरिकृष्ण प्रसाद गुप्ता अग्रहरि

डॉ हरिकृष्ण प्रसाद गुप्ता अग्रहरि का जन्म 25 फरवरी 1950 को परसौनी भाटा नेपाल में हुआ। इनहोने भारत और हंगरी से पी एच डी किया है। इनके अनुसंधात्मक शोध-पत्र बुडापेस्ट विश्व विद्यालय हंगरी द्वारा पुरस्कृत है। इनकी विभिन्न विधाओं में लगभग दो दर्जन पुस्तकें प्रकाशित हैं। ये नेपाल सरकार की सेवा में अभियंता के पद पर कार्यरत हैं। .

नई!!: १९५० और हरिकृष्ण प्रसाद गुप्ता अग्रहरि · और देखें »

हिन्दी वर्तनी मानकीकरण

भाषा की वर्तनी का अर्थ उस भाषा में शब्दों को वर्णों से अभिव्यक्त करने की क्रिया को कहते हैं। हिन्दी में इसकी आवश्यकता काफी समय तक नहीं समझी जाती थी; जबकि अन्य कई भाषाओं, जैसे अंग्रेजी व उर्दू में इसका महत्त्व था। अंग्रेजी व उर्दू में अर्धशताब्दी पहले भी वर्तनी (अंग्रेज़ी:स्पेलिंग, उर्दू:हिज्जों) की रटाई की जाती थी जो आज भी अभ्यास में है। हिन्दी भाषा का पहला और बड़ा गुण ध्वन्यात्मकता है। हिन्दी में उच्चरित ध्वनियों को व्यक्त करना बड़ा सरल है। जैसा बोला जाए, वैसा ही लिख जाए। यह देवनागरी लिपि की बहुमुखी विशेषता के कारण ही संभव था और आज भी है। परन्तु यह बात शत-प्रतिशत अब ठीक नहीं है। इसके अनेक कारण है - क्षेत्रीय आंचलिक उच्चारण का प्रभाव, अनेकरूपता, भ्रम, परंपरा का निर्वाह आदि। जब यह अनुभव किया जाने लगा कि एक ही शब्द की कई-कई वर्तनी मिलती हैं तो इनको अभिव्यक्त करने के लिए किसी सार्थक शब्द की तलाश हुई (‘हुई’ शब्द की विविधता द्रष्टव्य है - हुइ, हुई, हुवी)। इस कारण से मानकीकरण की आवश्यकता महसूस की जाने लगी। हिन्दी शब्द लिखने की दो प्रचलित वर्तनियाँ (ऊपर), (नीचे)हिन्दी फोनोलॉजी सारणी (बाएं), आर्यभाट्ट सारणी (दाएं) .

नई!!: १९५० और हिन्दी वर्तनी मानकीकरण · और देखें »

ह्राज़दान

आर्मेनिया का मानचित्र ह्राज़दान आर्मेनिया का एक समुदाय है। यह कोटायक मर्ज़ (प्रांत) में आता है। इसकी स्थापना 1950 में हुई थी। यहां की जनसंख्या 42,150 है। श्रेणी:आर्मेनिया.

नई!!: १९५० और ह्राज़दान · और देखें »

जान पहचान (1950 फ़िल्म)

जान पहचान 1950 में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। .

नई!!: १९५० और जान पहचान (1950 फ़िल्म) · और देखें »

जव्वाद एस ख्वाजा

जस्टिस जव़्व़ाद एस ख्वाजा 10 सितंबर 1950 को पैदा हुए।, उन्होंने बतौर पाकिस्तान के 23 वें मुख्य न्यायाधीश सेवाओं का आयोजन किया। वजीराबाद में जन्मे जवाद एस ख्वाजा ने प्रारंभिक शिक्षा मिशन स्कूल वजीराबाद से प्राप्त की। इसके बादकालज शिक्षा लॉरेंस कॉलेज घोड़ा गली, मरी, ाैचेसन कॉलेज लाहौर और फोरमैन क्रिश्चियन कॉलेज लाहौर से प्राप्त की.जसटस जवाद एस ख्वाजा ने अपना एलएलबी पु लाहौर कॉलेज से किया। एलएलएम के लिए उन्होंने कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय बार्कले का रुख किया। 1975 में उन्होंने लाहौर हाई कोर्ट में बतौर वकील प्रैक्टिस शुरू की.वह कारनीलस, लेन और मुफ्ती साथी थे, जो पाकिस्तान की बड़ी कानूनी कंपनी है। 1999 में वह लाहौर हाई कोर्ट के जज बन गए। 9 मार्च 2007 को उन्होंने जस्टिस इफ़्तिख़ार को मजबूर रिटायर करने पर इस्तीफा दे दया.ागसत 2007 में उन्होंने लाहौर विश्वविद्यालय प्रबंधन विज्ञान नीति विभाग में शामिल हो गए ली.ाकतोबर 2007 मई 2009 तक वह विभाग के प्रमुख रहेास के बाद वह सुप्रीम कोर्ट ऑफ पाकिस्तान का हिस्सा बन गए। न्यायमूर्ति जवाद एस ख्वाजा कुछ महत्वपूर्ण मुकदमों का भी हिस्सा रहे। एस एच सी बी ए मामले में उन्होंने मुशर्रफ के 3 नवंबर 2007 केाीमरजंसी के कदम को असंवैधानिक करार दिया। उन्होंने कई जज को भी बहाल, जिन्हें उनकी सीट से जबरन हटा दिया गया था। वह एनआरओ मकदमेका भी हिस्सा भी रहे। .

नई!!: १९५० और जव्वाद एस ख्वाजा · और देखें »

वल्लभ भाई पटेल

श्रेणी: सरदार वल्लभ भाई पटेल (સરદાર વલ્લભભાઈ પટેલ; 31 अक्टूबर, 1875 - 15 दिसंबर, 1950) भारत के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। भारत की आजादी के बाद वे प्रथम गृह मंत्री और उप-प्रधानमंत्री बने। बारडोली सत्याग्रह का नेतृत्व कर रहे पटेल को सत्याग्रह की सफलता पर वहाँ की महिलाओं ने सरदार की उपाधि प्रदान की। आजादी के बाद विभिन्न रियासतों में बिखरे भारत के भू-राजनीतिक एकीकरण में केंद्रीय भूमिका निभाने के लिए पटेल को भारत का बिस्मार्क और लौह पुरूष भी कहा जाता है। .

नई!!: १९५० और वल्लभ भाई पटेल · और देखें »

विनायक दामोदर सावरकर

विनायक दामोदर सावरकर (जन्म: २८ मई १८८३ - मृत्यु: २६ फ़रवरी १९६६) भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन के अग्रिम पंक्ति के सेनानी और प्रखर राष्ट्रवादी नेता थे। उन्हें प्रायः स्वातंत्र्यवीर, वीर सावरकर के नाम से सम्बोधित किया जाता है। हिन्दू राष्ट्र की राजनीतिक विचारधारा (हिन्दुत्व) को विकसित करने का बहुत बडा श्रेय सावरकर को जाता है। वे न केवल स्वाधीनता-संग्राम के एक तेजस्वी सेनानी थे अपितु महान क्रान्तिकारी, चिन्तक, सिद्धहस्त लेखक, कवि, ओजस्वी वक्ता तथा दूरदर्शी राजनेता भी थे। वे एक ऐसे इतिहासकार भी हैं जिन्होंने हिन्दू राष्ट्र की विजय के इतिहास को प्रामाणिक ढँग से लिपिबद्ध किया है। उन्होंने १८५७ के प्रथम स्वातंत्र्य समर का सनसनीखेज व खोजपूर्ण इतिहास लिखकर ब्रिटिश शासन को हिला कर रख दिया था।वे एक वकील, राजनीतिज्ञ, कवि, लेखक और नाटककार थे। उन्होंने परिवर्तित हिंदुओं के हिंदू धर्म को वापस लौटाने हेतु सतत प्रयास किये एवं आंदोलन चलाये। सावरकर ने भारत के एक सार के रूप में एक सामूहिक "हिंदू" पहचान बनाने के लिए हिंदुत्व का शब्द गढ़ा । उनके राजनीतिक दर्शन में उपयोगितावाद, तर्कवाद और सकारात्मकवाद, मानवतावाद और सार्वभौमिकता, व्यावहारिकता और यथार्थवाद के तत्व थे। सावरकर एक नास्तिक और एक कट्टर तर्कसंगत व्यक्ति थे जो सभी धर्मों में रूढ़िवादी विश्वासों का विरोध करते थे । .

नई!!: १९५० और विनायक दामोदर सावरकर · और देखें »

विष्णु नागर

विष्णु नागर 1950- हिन्दी लेखक.

नई!!: १९५० और विष्णु नागर · और देखें »

व्यवसायिक अर्थशास्त्र

व्यावसायिक अर्थशास्त्र जिसे आमतौर पर प्रबंधकीय अर्थशास्त्र के रूप में भी जाना जाता है, अर्थशास्त्र की एक संप्रयोग शाखा है जो व्यापार प्रबंधन के साथ जुड़ा हुआ है। .

नई!!: १९५० और व्यवसायिक अर्थशास्त्र · और देखें »

वेल्लोडी नारायण मेनन के.

वेल्लोडी नारायण मेनन के. (1896 - अज्ञात), आन्ध्र प्रदेश के राजनैतिक नेता, वे 26 जनवरी, 1950 से 6 मार्च, 1952 तक आन्ध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। उनका जन्म केरल में हुआ था। .

नई!!: १९५० और वेल्लोडी नारायण मेनन के. · और देखें »

वीरेन्द्र कुमार भट्टाचार्य

वीरेन्द्र कुमार भट्टाचार्य (१ अप्रैल, १९२४ - ६ अगस्त, १९९७) असमिया साहित्यकार थे। इनके द्वारा रचित एक उपन्यास इयारुइंगम के लिये उन्हें सन् १९६१ में साहित्य अकादमी पुरस्कार (असमिया) से सम्मानित किया गया। इन्हें १९७९ में ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। समाजवादी विचारों से प्रेरित श्री भट्टाचार्य कहानीकार, कवि, निबंधकार और पत्रकार थे। वे साहित्य अकादमी, दिल्ली और असम साहित्य सभा के अध्यक्ष रहे। उन्होंने १९५० में संपादित असमी पत्रिका रामधेनु का संपादन कर असमिया साहित्य को नया मोड़ दिया। इनके चर्चित उपन्यासों इयारूंगम, मृत्युंजय, राजपथे, रिंगियाई, आई, प्रितपद, शतघ्नी, कालर हुमुनियाहहैं। इनके दो कहानी संग्रह भी प्रकाशित हुए, कलंग आजियो बोइ और सातसरी। .

नई!!: १९५० और वीरेन्द्र कुमार भट्टाचार्य · और देखें »

खिलाड़ी (1950 फ़िल्म)

खिलाड़ी 1950 में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। .

नई!!: १९५० और खिलाड़ी (1950 फ़िल्म) · और देखें »

खेल (1950 फ़िल्म)

खेल 1950 में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। .

नई!!: १९५० और खेल (1950 फ़िल्म) · और देखें »

गणतन्त्र दिवस (भारत)

गणतन्त्र दिवस भारत का एक राष्ट्रीय पर्व है जो प्रति वर्ष 26 जनवरी को मनाया जाता है। इसी दिन सन् 1950 को भारत सरकार अधिनियम (एक्ट) (1935) को हटाकर भारत का संविधान लागू किया गया था। एक स्वतंत्र गणराज्य बनने और देश में कानून का राज स्थापित करने के लिए संविधान को 26 नवम्बर 1949 को भारतीय संविधान सभा द्वारा अपनाया गया और 26 जनवरी 1950 को इसे एक लोकतांत्रिक सरकार प्रणाली के साथ लागू किया गया था। 26 जनवरी को इसलिए चुना गया था क्योंकि 1930 में इसी दिन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आई० एन० सी०) ने भारत को पूर्ण स्वराज घोषित किया था। यह भारत के तीन राष्ट्रीय अवकाशों में से एक है, अन्य दो स्‍वतंत्रता दिवस और गांधी जयंती हैं। .

नई!!: १९५० और गणतन्त्र दिवस (भारत) · और देखें »

गजानन विश्वनाथ केटकर

गजानन विश्वनाथ केटकर हिन्दू महासभा के एक वरिष्ठ कार्यकर्ता रहे हैं। लोकमान्य तिलक के पौत्र थे। इन्होंने कला से स्नातक करने के उपरांत विधि स्नातक किया। ये केसरी एवं महारत्ता पत्रों के संपादक भी रहे हैं। इन्होंने हिन्दू महासभा का कार्य १९३८ में भागनगर (हैदराबाद) के अहिंसक प्रतिरोध के दौरान भी जारी रखा था। १९४१ में हुए हिन्दू महासभा के भागलपुर में हुए सत्र में भाग भी लिया, जिसे ब्रिटिश सरकार ने प्रतिबंधित कर दिया था। ये कई वर्षों तक महाराष्ट्र हिन्दू सभा के कोषाध्यक्ष भी रहे। गांधी हत्या काण्ड के अंतर्गत नेहरू सरकार द्वारा जब वीर सावरकर गिरफतार हुए, तब उनके मुकदमें के लिए धन का प्रबंध भी किया। १९४८ में केटकर ने नेहरू सरकार एवं प्रतिबंधित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बीच वार्ता में मध्यस्थता की। १९५० में और फिर १९६४ में जेल भी गए। .

नई!!: १९५० और गजानन विश्वनाथ केटकर · और देखें »

ग्रैंड स्लैम टेनिस विजेताओं की सूची

List of Men's Singles Grand Slam tournaments tennis champions: .

नई!!: १९५० और ग्रैंड स्लैम टेनिस विजेताओं की सूची · और देखें »

गैलापागोस द्वीपसमूह

गैलापागोस द्वीप समूह (आधिकारिक नाम: Archipiélago de Colón; अन्य स्पेनिश नाम: Islas de Colón या Islas Galápagos) प्रशांत महासागर में भूमध्य रेखा के आसपास फैले ज्वालामुखी द्वीपों का एक द्वीपसमूह है, जो महाद्वीपीय ईक्वाडोर के 972 किमी पश्चिम में स्थित है। यह एक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है: वन्यजीवन इसकी सबसे प्रमुख विशेषता है। गैलापागोस द्वीप समूह ईक्वाडोर के गैलापागोस प्रांत का निर्माण करते हैं साथ ही यह देश की राष्ट्रीय उद्यान प्रणाली का हिस्सा हैं। इस द्वीप की प्रमुख भाषा स्पेनिश है। इस द्वीपों की जनसंख्या 40000 के आसपास है, जिसमें पिछले 50 वर्षों में 40 गुना वृद्धि हुई है। भौगोलिक रूप से यह द्वीपसमूह नये हैं और स्थानीय प्रजातियों की अपनी विशाल संख्या के लिए प्रसिद्ध है, जिनका चार्ल्स डार्विन ने अपने बीगल के खोजी अभियान के दौरान अध्ययन किया था। उनकी टिप्पणियों और संग्रह ने डार्विन के प्राकृतिक चयन द्वारा क्रम-विकास के सिद्धांत के प्रतिपादन में योगदान दिया। विश्व के नये सात आश्चर्य फाउंडेशन द्वारा गैलापागोस द्वीपसमूह को प्रकृति के सात नए आश्चर्यों में से एक के लिए एक उम्मीदवार के रूप में सूचीबद्ध किया गया था। फ़रवरी 2009 तक द्वीप की श्रेणी, समूह बी में द्वीपसमूह की वरीयता प्रथम थी। .

नई!!: १९५० और गैलापागोस द्वीपसमूह · और देखें »

गेब्रियल गार्सिया मार्ख़ेस

गेब्रियल गार्सिया मार्केज़ (6 मार्च 1927 – 17 अप्रैल 2014) नोबेल पुरस्कृत विश्वविख्यात साहित्यकार थे। १९५० में रोम और पेरिस में स्पेक्टेटर के संवाददाता रहे। १९५९ से १९६१ तक क्यूबा की संवाद एजेंसी के लिए हवाना और न्यूयार्क में काम किया। वामपंथी विचारधारा की ओर झुकाव के कारण उन पर अमेरिका और कोलम्बिया सरकारों द्वारा देश में प्रवेश करने पर प्रतिबंध लगया गया। उनका प्रथम कहानी-संग्रह लीफ स्टार्म एंड अदर स्टोरीज १९५५ में प्रकाशित: नो वन नाइट्, टु द कर्नल एंड अदर स्टोरीज और आइज़ ऑफ ए डॉग श्रेष्ठ कहानी संग्रह है। उनके उपन्यास सौ साल का एकांत (वन हंड्रेड इयर्स ऑफ सालीच्यूड) को १९८२ में नोबल पुरस्कार प्राप्त हुआ। १७ अप्रैल २०१४ को ८७ वर्ष की आयु में मैक्सिको नगर में उनका निधन हो गया। गेब्रियल गर्सिया मार्ख़ेस .

नई!!: १९५० और गेब्रियल गार्सिया मार्ख़ेस · और देखें »

गोपीनाथ बोरदोलोई

गोपीनाथ बोरडोलोई गोपीनाथ बोरदोलोई (1890-1950) भारत के स्वतंत्रता सेनानी और असम के प्रथम मुख्यमंत्री थे। भारत की स्वतंत्रता के वाद उन्होने सरदार वल्लभ भाई पटेल के साथ नजदीक से कार्य किया। उनके योगदानो के कारण असम चीन और पूर्वी पाकिस्तान से बच के भारत का हिस्सा बन पाया। वे 19 सितंबर, 1938 से 17 नवंबर, 1939 तक असम के मुख्यमंत्री रहे। .

नई!!: १९५० और गोपीनाथ बोरदोलोई · और देखें »

ओड़िशा का इतिहास

प्राचीन काल से मध्यकाल तक ओडिशा राज्य को कलिंग, उत्कल, उत्करात, ओड्र, ओद्र, ओड्रदेश, ओड, ओड्रराष्ट्र, त्रिकलिंग, दक्षिण कोशल, कंगोद, तोषाली, छेदि तथा मत्स आदि नामों से जाना जाता था। परन्तु इनमें से कोई भी नाम सम्पूर्ण ओडिशा को इंगित नहीं करता था। अपितु यह नाम समय-समय पर ओडिशा राज्य के कुछ भाग को ही प्रस्तुत करते थे। वर्तमान नाम ओडिशा से पूर्व इस राज्य को मध्यकाल से 'उड़ीसा' नाम से जाना जाता था, जिसे अधिकारिक रूप से 04 नवम्बर, 2011 को 'ओडिशा' नाम में परिवर्तित कर दिया गया। ओडिशा नाम की उत्पत्ति संस्कृत के शब्द 'ओड्र' से हुई है। इस राज्य की स्थापना भागीरथ वंश के राजा ओड ने की थी, जिन्होने अपने नाम के आधार पर नवीन ओड-वंश व ओड्र राज्य की स्थापना की। समय विचरण के साथ तीसरी सदी ई०पू० से ओड्र राज्य पर महामेघवाहन वंश, माठर वंश, नल वंश, विग्रह एवं मुदगल वंश, शैलोदभव वंश, भौमकर वंश, नंदोद्भव वंश, सोम वंश, गंग वंश व सूर्य वंश आदि सल्तनतों का आधिपत्य भी रहा। प्राचीन काल में ओडिशा राज्य का वृहद भाग कलिंग नाम से जाना जाता था। सम्राट अशोक ने 261 ई०पू० कलिंग पर चढ़ाई कर विजय प्राप्त की। कर्मकाण्ड से क्षुब्द हो सम्राट अशोक ने युद्ध त्यागकर बौद्ध मत को अपनाया व उनका प्रचार व प्रसार किया। बौद्ध धर्म के साथ ही सम्राट अशोक ने विभिन्न स्थानों पर शिलालेख गुदवाये तथा धौली व जगौदा गुफाओं (ओडिशा) में धार्मिक सिद्धान्तों से सम्बन्धित लेखों को गुदवाया। सम्राट अशोक, कला के माध्यम से बौद्ध धर्म का प्रचार करना चाहते थे इसलिए सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म को और अधिक विकसित करने हेतु ललितगिरि, उदयगिरि, रत्नागिरि व लगुन्डी (ओडिशा) में बोधिसत्व व अवलोकेतेश्वर की मूर्तियाँ बहुतायत में बनवायीं। 232 ई०पू० सम्राट अशोक की मृत्यु के पश्चात् कुछ समय तक मौर्य साम्राज्य स्थापित रहा परन्तु 185 ई०पू० से कलिंग पर चेदि वंश का आधिपत्य हो गया था। चेदि वंश के तृतीय शासक राजा खारवेल 49 ई० में राजगद्दी पर बैठा तथा अपने शासन काल में जैन धर्म को विभिन्न माध्यमों से विस्तृत किया, जिसमें से एक ओडिशा की उदयगिरि व खण्डगिरि गुफाऐं भी हैं। इसमें जैन धर्म से सम्बन्धित मूर्तियाँ व शिलालेख प्राप्त हुए हैं। चेदि वंश के पश्चात् ओडिशा (कलिंग) पर सातवाहन राजाओं ने राज्य किया। 498 ई० में माठर वंश ने कलिंग पर अपना राज्य कर लिया था। माठर वंश के बाद 500 ई० में नल वंश का शासन आरम्भ हो गया। नल वंश के दौरान भगवान विष्णु को अधिक पूजा जाता था इसलिए नल वंश के राजा व विष्णुपूजक स्कन्दवर्मन ने ओडिशा में पोडागोड़ा स्थान पर विष्णुविहार का निर्माण करवाया। नल वंश के बाद विग्रह एवं मुदगल वंश, शैलोद्भव वंश और भौमकर वंश ने कलिंग पर राज्य किया। भौमकर वंश के सम्राट शिवाकर देव द्वितीय की रानी मोहिनी देवी ने भुवनेश्वर में मोहिनी मन्दिर का निर्माण करवाया। वहीं शिवाकर देव द्वितीय के भाई शान्तिकर प्रथम के शासन काल में उदयगिरी-खण्डगिरी पहाड़ियों पर स्थित गणेश गुफा (उदयगिरी) को पुनः निर्मित कराया गया तथा साथ ही धौलिगिरी पहाड़ियों पर अर्द्यकवर्ती मठ (बौद्ध मठ) को निर्मित करवाया। यही नहीं, राजा शान्तिकर प्रथम की रानी हीरा महादेवी द्वारा 8वीं ई० हीरापुर नामक स्थान पर चौंसठ योगनियों का मन्दिर निर्मित करवाया गया। 6वीं-7वीं शती कलिंग राज्य में स्थापत्य कला के लिए उत्कृष्ट मानी गयी। चूँकि इस सदी के दौरान राजाओं ने समय-समय पर स्वर्णाजलेश्वर, रामेश्वर, लक्ष्मणेश्वर, भरतेश्वर व शत्रुघनेश्वर मन्दिरों (6वीं सदी) व परशुरामेश्वर (7वीं सदी) में निर्माण करवाया। मध्यकाल के प्रारम्भ होने से कलिंग पर सोमवंशी राजा महाशिव गुप्त ययाति द्वितीय सन् 931 ई० में गद्दी पर बैठा तथा कलिंग के इतिहास को गौरवमयी बनाने हेतु ओडिशा में भगवान जगन्नाथ के मुक्तेश्वर, सिद्धेश्वर, वरूणेश्वर, केदारेश्वर, वेताल, सिसरेश्वर, मारकण्डेश्वर, बराही व खिच्चाकेश्वरी आदि मन्दिरों सहित कुल 38 मन्दिरों का निर्माण करवाया। 15वीं शती के अन्त तक जो गंग वंश हल्का पड़ने लगा था उसने सन् 1038 ई० में सोमवंशीयों को हराकर पुनः कलिंग पर वर्चस्व स्थापित कर लिया तथा 11वीं शती में लिंगराज मन्दिर, राजारानी मन्दिर, ब्रह्मेश्वर, लोकनाथ व गुन्डिचा सहित कई छोटे व बड़े मन्दिरों का निर्माण करवाया। गंग वंश ने तीन शताब्दियों तक कलिंग पर अपना राज्य किया तथा राजकाल के दौरान 12वीं-13वीं शती में भास्करेश्वर, मेघेश्वर, यमेश्वर, कोटी तीर्थेश्वर, सारी देउल, अनन्त वासुदेव, चित्रकर्णी, निआली माधव, सोभनेश्वर, दक्क्षा-प्रजापति, सोमनाथ, जगन्नाथ, सूर्य (काष्ठ मन्दिर) बिराजा आदि मन्दिरों को निर्मित करवाया जो कि वास्तव में कलिंग के स्थापत्य इतिहास में अहम भूमिका का निर्वाह करते हैं। गंग वंश के शासन काल पश्चात् 1361 ई० में तुगलक सुल्तान फिरोजशाह तुगलक ने कलिंग पर राज्य किया। यह वह दौर था जब कलिंग में कला का वर्चस्व कम होते-होते लगभग समाप्त ही हो चुका था। चूँकि तुगलक शासक कला-विरोधी रहे इसलिए किसी भी प्रकार के मन्दिर या मठ का निर्माण नहीं हुअा। 18वीं शती के आधुनिक काल में ईस्ट इण्डिया कम्पनी का सम्पूर्ण भारत पर अधिकार हो गया था परन्तु 20वीं शती के मध्य में अंग्रेजों के निगमन से भारत देश स्वतन्त्र हुआ। जिसके फलस्वरूप सम्पूर्ण भारत कई राज्यों में विभक्त हो गया, जिसमें से भारत के पूर्व में स्थित ओडिशा (पूर्व कलिंग) भी एक राज्य बना। .

नई!!: १९५० और ओड़िशा का इतिहास · और देखें »

ओडिआ चलचित्र सूची

ओड़िआ चलचित्र की सारणी ओड़िआ भाषा .

नई!!: १९५० और ओडिआ चलचित्र सूची · और देखें »

ओम पुरी

ओम पुरी हिन्दी फिल्मों के एक प्रसिद्ध अभिनेता थे। इनका जन्म 18 अक्टूबर 1950 में अम्बाला, पंजाब (अब हरियाणा) में हुआ। इन्होने ब्रिटिश तथा अमेरिकी सिनेमा में भी योगदान किया है। ये पद्मश्री पुरस्कार विजेता भी हैं, जोकि भारत के नागरिक पुरस्कारों के पदानुक्रम में चौथा पुरस्कार है। दिल का दौरा पड़ने के कारण 6 जनवरी 2017 को 66 साल की उम्र में इनका निधन हो गया। - नवभारत टाइम्स - 6 जनवरी 2016 .

नई!!: १९५० और ओम पुरी · और देखें »

आधी रात (1950 फ़िल्म)

आधी रात 1950 में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। .

नई!!: १९५० और आधी रात (1950 फ़िल्म) · और देखें »

कन्नड साहित्य सम्मेलन

कन्नड साहित्य सम्मेलन कन्नड साहित्यकारों, लेखकों तथा कननाडिगारु लोगों का सम्मेलन है। इसका लक्षय कन्नड भाषा, कन्नड साहित्य, कला, संगीत और संस्कृति का विकास करना है। इसका आरम्भ १९१५ में एच वी नान्जुनैया ने किया था। पहला सम्मेलन बंगलुरु में हुआ था। १९४८ तक इसका उद्घाटन किसी सुप्रसिद्ध कवि या लेखक द्वारा किया जाता था कि्न्तु १९४८ के बाद से कर्नाटक के मुख्यमंत्री इसका उद्घाटन करते हैं। इस सम्मेलन का आयोजन कन्नड साहित्य परिषद करती है। .

नई!!: १९५० और कन्नड साहित्य सम्मेलन · और देखें »

कन्वेंशन ड्यू मेत्रे

कन्वेंशन ड्यू मेत या फ्रेंच में Convention du Mètre 20 मई, 1875 को हुई एन अन्तर्राष्ट्रीय संधि थी, जिसमें मीट्रिक मानकों पर नजर रखने हेतु तीन संगठनों की स्थापना की गयी थी। यह फ़्रेंच भाषा में लिखी गयी है और इसे अंग्रेजी भाषा में Metre Convention या मीटर सम्मेलन कहा जाता है। संयुक्त राज्य में इसे मीटर की संधि भी कहते हैं। इसे 1921 में छठी CGPM में पुनरावलोकित किया गया था। इस सम्मेलन में तीन संगठनों का प्रादुर्भाव हुआ थ। वे हैं.

नई!!: १९५० और कन्वेंशन ड्यू मेत्रे · और देखें »

कमल के फूल (1950 फ़िल्म)

कमल के फूल 1950 में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। .

नई!!: १९५० और कमल के फूल (1950 फ़िल्म) · और देखें »

कश्मीर का इतिहास

भारत के उत्तरतम राज्य जम्मू और कश्मीर का इतिहास अति प्राचीन काल से आरंभ होता है। राजधानी में डल झील में एक शिकारे से दृश्य .

नई!!: १९५० और कश्मीर का इतिहास · और देखें »

कहानी

कथाकार (एक प्राचीन कलाकृति)कहानी हिन्दी में गद्य लेखन की एक विधा है। उन्नीसवीं सदी में गद्य में एक नई विधा का विकास हुआ जिसे कहानी के नाम से जाना गया। बंगला में इसे गल्प कहा जाता है। कहानी ने अंग्रेजी से हिंदी तक की यात्रा बंगला के माध्यम से की। कहानी गद्य कथा साहित्य का एक अन्यतम भेद तथा उपन्यास से भी अधिक लोकप्रिय साहित्य का रूप है। मनुष्य के जन्म के साथ ही साथ कहानी का भी जन्म हुआ और कहानी कहना तथा सुनना मानव का आदिम स्वभाव बन गया। इसी कारण से प्रत्येक सभ्य तथा असभ्य समाज में कहानियाँ पाई जाती हैं। हमारे देश में कहानियों की बड़ी लंबी और सम्पन्न परंपरा रही है। वेदों, उपनिषदों तथा ब्राह्मणों में वर्णित 'यम-यमी', 'पुरुरवा-उर्वशी', 'सौपणीं-काद्रव', 'सनत्कुमार- नारद', 'गंगावतरण', 'श्रृंग', 'नहुष', 'ययाति', 'शकुन्तला', 'नल-दमयन्ती' जैसे आख्यान कहानी के ही प्राचीन रूप हैं। प्राचीनकाल में सदियों तक प्रचलित वीरों तथा राजाओं के शौर्य, प्रेम, न्याय, ज्ञान, वैराग्य, साहस, समुद्री यात्रा, अगम्य पर्वतीय प्रदेशों में प्राणियों का अस्तित्व आदि की कथाएँ, जिनकी कथानक घटना प्रधान हुआ करती थीं, भी कहानी के ही रूप हैं। 'गुणढ्य' की "वृहत्कथा" को, जिसमें 'उदयन', 'वासवदत्ता', समुद्री व्यापारियों, राजकुमार तथा राजकुमारियों के पराक्रम की घटना प्रधान कथाओं का बाहुल्य है, प्राचीनतम रचना कहा जा सकता है। वृहत्कथा का प्रभाव 'दण्डी' के "दशकुमार चरित", 'बाणभट्ट' की "कादम्बरी", 'सुबन्धु' की "वासवदत्ता", 'धनपाल' की "तिलकमंजरी", 'सोमदेव' के "यशस्तिलक" तथा "मालतीमाधव", "अभिज्ञान शाकुन्तलम्", "मालविकाग्निमित्र", "विक्रमोर्वशीय", "रत्नावली", "मृच्छकटिकम्" जैसे अन्य काव्यग्रंथों पर साफ-साफ परिलक्षित होता है। इसके पश्‍चात् छोटे आकार वाली "पंचतंत्र", "हितोपदेश", "बेताल पच्चीसी", "सिंहासन बत्तीसी", "शुक सप्तति", "कथा सरित्सागर", "भोजप्रबन्ध" जैसी साहित्यिक एवं कलात्मक कहानियों का युग आया। इन कहानियों से श्रोताओं को मनोरंजन के साथ ही साथ नीति का उपदेश भी प्राप्त होता है। प्रायः कहानियों में असत्य पर सत्य की, अन्याय पर न्याय की और अधर्म पर धर्म की विजय दिखाई गई हैं। .

नई!!: १९५० और कहानी · और देखें »

कार्बन-१४ द्वारा कालनिर्धारण

accessdate.

नई!!: १९५० और कार्बन-१४ द्वारा कालनिर्धारण · और देखें »

काकविन

काकविन प्राचीन जावा और बाली के कावी भाषा में लिखे काव्य को कहते हैं। काकविन ८वीं से १९वीं शताब्दी तक लिखे गये। यह वेद, पुराण, इतिहास की कथाओं से सम्बन्धित हैं। इनमें इंदोनेशिया के रामायण और महाभारत के भी रूपान्तर मिलते हैं। इनमें संस्कृत काव्य के छन्दों का प्रयोग होता है। .

नई!!: १९५० और काकविन · और देखें »

केन रोसेवाल

श्रेणी:टेनिस खिलाड़ी श्रेणी:पुरुष टेनिस खिलाड़ी श्रेणी:टेनिस ग्रैंड स्लैम विजेता.

नई!!: १९५० और केन रोसेवाल · और देखें »

कोपनहेगन

कोपनहेगन (डैनिश: København), डेनमार्क की राजधानी और सबसे बड़ा नगर है, जिसकी नगरीय जनसंख्या ११,६७,५६९ (२००९) और महानगरीय जनसंख्या १८,७५,१७९ (२००९) है। कोपेनहेगन जीलण्ड और अमागर द्वीपों पर बसा हुआ है। इस क्षेत्र के प्रथम लिखित दस्तावेज ११वीं सदी के हैं और कोपनहेगन १५वीं सदी के आरम्भ में और क्रिस्चियन चतुर्थ के शासनकाल में डेनमार्क की राजधानी बना। वर्ष २००० में ओरेसण्ड सेतु के पूरा होने के साथ ही कोपनहेगन ओरेसण्ड क्षेत्र का केन्द्र बन गया है। इस क्षेत्र में, कोपनहेगन और स्वीडन का माल्मो नगर मिलकर एक आम महानगरीय क्षेत्र बनने की प्रकिया में है। ५० किमी के अर्धव्यास में २७ लाख लोगों के साथ, कोपनहेगन उत्तरी यूरोप के सबसे सघन क्षेत्रों में से एक है। नॉर्डिक देशों में कोपनहेगन सर्वाधिक पधारा जाने वाला देश है जहाँ पर २००७ में १३ लाख विदेशी पर्यटक आए। कोपनहेगन को बारम्बार एक ऐसे नगर के रूप में पहचान मिली है जहाँ का जीवन स्तर विश्व में सर्वश्रेष्ठ में से एक है। यह दुनिया के सबसे पर्यावरण-अनुकूल नगरों में से एक माना जाता है। भीतरी बन्दरगाह का पानी इतना साफ़ है की उसमें तैरा जा सकता है और प्रतिदिन ३६% निवासी साइकिल से काम पर जाते हैं, यानी की प्रतिदिन ११ लाख किमी की साइकिल यात्रा यहाँ की जाती है। यहाँ कोपेनहेगन विश्वविद्यालय, इंस्टिट्यूट फ़ॉर थियोरेटिकल फ़िजिक्स (१९२० ई.), रॉयल डैनिश जीओग्राफ़िकल सोसायटी (१८७६ ई.), अनेक शिक्षण एवं गवेषणा संस्थाएँ तथा तीन प्रमुख संग्रहालय हैं। यहाँ के रॉयल पुस्तकालय में लगभग १५,००,००० पुस्तकें हैं। नगर में अनेक प्रमोद वन, झीलें एवं भव्य भवन हैं जिनका निर्माण क्रिश्चियन चतुर्थ (१५८८-१६४८ ई.) तथा फ्रेंडरिक पंचम (१७४६-१७६६ ई.) के शासनकाल में हुआ था। .

नई!!: १९५० और कोपनहेगन · और देखें »

अफ़सर (1950 फ़िल्म)

अफ़सर 1950 में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। .

नई!!: १९५० और अफ़सर (1950 फ़िल्म) · और देखें »

अमेरिकी ओपन टेनिस के पुरुष एकल विजेताओं की सूची

* 1881 - रिचर्ड सीअर्स.

नई!!: १९५० और अमेरिकी ओपन टेनिस के पुरुष एकल विजेताओं की सूची · और देखें »

अरुण बालाकृष्णन

अरुण बालकृष्णन, (जन्मः २५ जुलाई १९५०) 1 अप्रैल 2007 से हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक हैं। इससे पहले श्री बालकृष्णन हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड के मानव संसाधन निदेशक रह चुके हैं। एक रसायन इंजीनियर और भारतीय प्रबंधन संस्थान, बंगलौर से डिप्लोमा प्राप्त, अरुण बालकृष्णन ने हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड को 1976 में एक प्रबंधन प्रशिक्षु के रूप में ज्वाइन किया था।.

नई!!: १९५० और अरुण बालाकृष्णन · और देखें »

अरुन्धती (महाकाव्य)

अरुन्धती हिन्दी भाषा का एक महाकाव्य है, जिसकी रचना जगद्गुरु रामभद्राचार्य (१९५०–) ने १९९४ में की थी। यह महाकाव्य १५ सर्गों और १२७९ पदों में विरचित है। महाकाव्य की कथावस्तु ऋषिदम्पती अरुन्धती और वसिष्ठ का जीवनचरित्र है, जोकि विविध हिन्दू धर्मग्रंथों में वर्णित है। महाकवि के अनुसार महाकाव्य की कथावस्तु का मानव की मनोवैज्ञानिक विकास परम्परा से घनिष्ठ सम्बन्ध है।रामभद्राचार्य १९९४, पृष्ठ iii—vi। महाकाव्य की एक प्रति का प्रकाशन श्री राघव साहित्य प्रकाशन निधि, हरिद्वार, उत्तर प्रदेश द्वारा १९९९४ में किया गया था। पुस्तक का विमोचन तत्कालीन भारत के राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा द्वारा जुलाई ७, १९९४ के दिन किया गया था। .

नई!!: १९५० और अरुन्धती (महाकाव्य) · और देखें »

अर्धायु काल

अर्धायु काल, क्षय होते हुए किसी तत्त्व का वो काल होता है; जिसमें वो तत्त्व मूल मात्रा से आधा हो जाये। ये नाम पहले अस्थिर परमाणुओं (रेडियोधर्मी क्षय) के लिए प्रयोग किया जाता था, किन्तु अब इसे किसी भी निश्चित क्षय वाले तत्त्व के लिए प्रयोग किया जाता है। यह मूल शब्द १९०७ में अर्धायु काल के नाम से प्रयुक्त हुआ था, जिसे बाद में १९५० में घटा कर अर्धायु कर दिया गया। .

नई!!: १९५० और अर्धायु काल · और देखें »

अस्तित्ववाद

किर्कगार्द, दास्त्रावस्की, नीत्शे तथा सार्त्र (बाएँ से दाएँ, ऊपर से नीचे) अस्तित्ववाद (एग्जिस्टेशन्शिएलिज़्म / existentialism) एक ऐसी विचारधारा है जिसमें अस्तित्व को तत्व से ऊपर समझा जाता है। इसके अनुसार मानव अपने पर्यावरण की निर्जीव वस्तुओं से आत्मबोध का उत्तरदायित्व पूर्णतया स्वयं लेता है। अतः उसे अपने पर्यावरण में तत्वज्ञान की अपेक्षा नहीं होती। 1940 व 1950 के दशक में अस्तित्ववाद पूरे यूरोप में एक विचारक्रांति के रूप में उभरा। यूरोप भर के दार्शनिक व विचारकों ने इस आंदोलन में अपना योगदान दिया है। इनमें ज्यां-पाल सार्त्र, अल्बर्ट कामू व इंगमार बर्गमन प्रमुख हैं। कालांतर में अस्तित्ववाद की दो धाराएं हो गई।.

नई!!: १९५० और अस्तित्ववाद · और देखें »

१ जनवरी

१ जनवरी ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का पहला दिन है। वर्ष में अभी और ३६४ दिन बाकी है (लीप वर्ष में ३६५)। .

नई!!: १९५० और १ जनवरी · और देखें »

१० जुलाई

१० जुलाई ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का १९१वॉ (लीप वर्ष मे १९२ वॉ) दिन है। साल मे अभी और १७४ दिन बाकी है। .

नई!!: १९५० और १० जुलाई · और देखें »

११ मई

11 मई ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का 131वॉ (लीप वर्ष मे 132 वॉ) दिन है। साल मे अभी और 234 दिन बाकी है। .

नई!!: १९५० और ११ मई · और देखें »

१३ नवम्बर

१३ नवंबर ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का ३१७वॉ (लीप वर्ष मे ३१८ वॉ) दिन है। साल मे अभी और ४८ दिन बाकी है। .

नई!!: १९५० और १३ नवम्बर · और देखें »

१४ जनवरी

१४ जनवरी ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का १४वाँ दिन है। वर्ष में अभी और ३५१ दिन बाकी है (लीप वर्ष में ३५२)। .

नई!!: १९५० और १४ जनवरी · और देखें »

१५ दिसम्बर

१५ दिसंबर ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का ३४९वॉ (लीप वर्ष मे ३५० वॉ) दिन है। साल में अभी और १६ दिन बाकी है। .

नई!!: १९५० और १५ दिसम्बर · और देखें »

१५ जून

15 जून ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का 166वाँ (लीप वर्ष में 167 वाँ) दिन है। साल में अभी और 199 दिन बाकी हैं। .

नई!!: १९५० और १५ जून · और देखें »

१६ जुलाई

१६ जुलाई ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का १९७वॉ (लीप वर्ष में १९८ वॉ) दिन है। साल में अभी और १६८ दिन बाकी है। .

नई!!: १९५० और १६ जुलाई · और देखें »

१७ जून

17 जून ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का 168वाँ (लीप वर्ष में 169 वाँ) दिन है। साल में अभी और 197 दिन बाकी हैं। .

नई!!: १९५० और १७ जून · और देखें »

१८ सितम्बर

18 सितंबर ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का 261वॉ (लीप वर्ष मे 262 वॉ) दिन है। साल मे अभी और 104 दिन बाकी है। .

नई!!: १९५० और १८ सितम्बर · और देखें »

१९ अक्टूबर

19 अक्टूबर ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का 292वॉ (लीप वर्ष मे 293 वॉ) दिन है। साल मे अभी और 73 दिन बाकी है। .

नई!!: १९५० और १९ अक्टूबर · और देखें »

२०१०

वर्ष २०१० वर्तमान वर्ष है। यह शुक्रवार को प्रारम्भ हुआ है। संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष २०१० को अंतराष्ट्रीय जैव विविधता वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। इन्हें भी देखें 2010 भारत 2010 विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी 2010 साहित्य संगीत कला 2010 खेल जगत 2010 .

नई!!: १९५० और २०१० · और देखें »

२१ जनवरी

२१ जनवरी ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का २१वाँ दिन है। वर्ष में अभी और ३४४ दिन बाकी हैं (लीप वर्ष में ३४५)। .

नई!!: १९५० और २१ जनवरी · और देखें »

२२ नवम्बर

२२ नवंबर ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का ३२६वॉ (लीप वर्ष मे ३२७ वॉ) दिन है। साल मे अभी और ३९ दिन बाकी हैं। .

नई!!: १९५० और २२ नवम्बर · और देखें »

२४ सितम्बर

24 सितंबर ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का 267वॉ (लीप वर्ष मे 268 वॉ) दिन है। साल मे अभी और 98 दिन बाकी है। .

नई!!: १९५० और २४ सितम्बर · और देखें »

२५ नवंबर

२५ नवंबर ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का ३२९वॉ (लीप वर्ष में ३३० वॉ) दिन है। साल में अभी और ३६ दिन बाकी है। .

नई!!: १९५० और २५ नवंबर · और देखें »

२५ जून

25 जून ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का 176वाँ (लीप वर्ष में 177 वाँ) दिन है। साल में अभी और 189 दिन बाकी हैं। .

नई!!: १९५० और २५ जून · और देखें »

२६ जनवरी

26 जनवरी ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का 26वाँ दिन है। साल में अभी और 339 दिन बाकी हैं (लीप वर्ष में 340)।.

नई!!: १९५० और २६ जनवरी · और देखें »

२७ जून

२७ जून ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का १७८वाँ (लीप वर्ष में १७९ वाँ) दिन है। साल में अभी और १८७ दिन बाकी हैं। .

नई!!: १९५० और २७ जून · और देखें »

३१ जनवरी

31 जनवरी ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का 31वाँ दिन है। साल में अभी और 334 दिन बाकी हैं (लीप वर्ष में 335)। .

नई!!: १९५० और ३१ जनवरी · और देखें »

५ नवम्बर

५ नवंबर ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का ३०९वॉ (लीप वर्ष मे ३१० वॉ) दिन है। साल मे अभी और ५६ दिन बाकी है। .

नई!!: १९५० और ५ नवम्बर · और देखें »

७ जनवरी

7 जनवरी ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का 7वाँ दिन है। साल में अभी और 358 दिन बाकी हैं (लीप वर्ष में 359)। .

नई!!: १९५० और ७ जनवरी · और देखें »

७ अक्तूबर

7 अक्टूबर ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का 280वॉ (लीप वर्ष में 281 वॉ) दिन है। साल में अभी और 85 दिन बाकी है। .

नई!!: १९५० और ७ अक्तूबर · और देखें »

८ मार्च

8 मार्च ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का 67वॉ (लीप वर्ष में 68 वॉ) दिन है। साल में अभी और 298 दिन बाकी है। अंतराष्ट्रीय नारी दिवस (संयुक्त राष्ट्र संघ) .

नई!!: १९५० और ८ मार्च · और देखें »

८ अप्रैल

8 अप्रैल ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का 98वां (लीप वर्ष में 99वां) दिन है। साल में अभी 267 दिन और बाकी है। .

नई!!: १९५० और ८ अप्रैल · और देखें »

1951 एशियाई खेल

प्रथम एशियाई खेल ४ मार्च से ११ मार्च, १९५१ में दिल्ली, भारत में हुए थे। मूल रूप से इन खेलों का आयोजन १९५० में होना तय किया गया था, लेकिन तैयारियों की देरी के चलते इन्हें १९५१ तक स्थगित करना पड़ा। महाराजाधिराज महाराजा यादवेन्द्र सिंह ने इन खेलों के संगठन में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। यद्यपि जापान को लन्दन में आयोजित १९४८ ग्रीष्मकालीन ओलम्पिक में नहीं खेलने दिया गया और एशियाई खेल संघ की बैठक में भी नहीं बुलाया गया, लेकिन अभिषेकात्मक एशियाई खेलों में स्पर्धा करने दिया गया। कोरिया, कोरियाई युद्ध के चलते भाग नहीं ले सका। .

नई!!: १९५० और 1951 एशियाई खेल · और देखें »

यहां पुनर्निर्देश करता है:

1950

निवर्तमानआने वाली
अरे! अब हम फेसबुक पर हैं! »