लोगो
यूनियनपीडिया
संचार
Google Play पर पाएं
नई! अपने एंड्रॉयड डिवाइस पर डाउनलोड यूनियनपीडिया!
डाउनलोड
ब्राउज़र की तुलना में तेजी से पहुँच!
 

१८८३

सूची १८८३

1883 ग्रेगोरी कैलंडर का एक साधारण वर्ष है। .

18 संबंधों: चतुर्भुज सहाय, चन्द्रशेखर धर मिश्र, पदार्थ प्रौद्योगिकी की समय रेखा, पिनोकियो, प्रसिद्ध पुस्तकें, मराठा साम्राज्य, शिवसिंह सरोज, स्वामी दयानन्द सरस्वती, हल्द्वानी, ग्रैंड स्लैम टेनिस विजेताओं की सूची, गूओ संग्लिंग, कासा विसेंस, अमेरिकी ओपन टेनिस के पुरुष एकल विजेताओं की सूची, १ अगस्त, १५ जुलाई, २१ जुलाई, २२ अक्टूबर, ६ जनवरी

चतुर्भुज सहाय

डॉ चतुर्भुज सहाय (Chaturbhuj Sahay);(1883 -1957) भारत के एक महान सन्त पुरुष एवं समर्थ गुरु थे जिन्होने अपने गुरु परम संत महात्मा रामचंद्र जी महाराज के नाम पर मथुरा में रामाश्रम सत्संग,मथुरा की स्थापना की। आपका यह कहना था कि - ईश्वर तो एक शक्ति (पावर) है, न उसका कोई नाम है न रूप। जिसने जो नाम रख लिया वही ठीक है। उसको प्राप्त करने के लिए गृहस्थी त्याग कर जंगल में भटकने की आवश्यकता नहीं,वह घर में रहने पर भी प्राप्त हो सकता है। .

नई!!: १८८३ और चतुर्भुज सहाय · और देखें »

चन्द्रशेखर धर मिश्र

पण्डित चन्द्रशेखर धर मिश्र (१८५९-१९४९) आधुनिक हिंदी साहित्य में भारतेन्दु युग के अल्पज्ञात कवियों में से एक हैं। खड़ी बोली हिन्दी-कविता के बिकास में अपने एटिहासिक योगदान के लिए ये आचार्य रामचन्द्र शुक्ल द्वारा प्रशंसित हैं। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के अनुसार चंपारण के प्रसिद्ध विद्वान पण्डित चन्द्रशेखर धर मिश्र' जो भारतेन्दु जी के मित्रों में से थे, संस्कृत के अतिरिक्त हिन्दी में भी बड़ी सुंदर आशु कविता करते थे। मैं समझता हूँ कि हिन्दी साहित्य के आधुनिक काल में संस्कृत वृत्तों में खड़ी बोली के कुछ पद्य पहले-पहल मिश्र जी ने ही लिखे थे। .

नई!!: १८८३ और चन्द्रशेखर धर मिश्र · और देखें »

पदार्थ प्रौद्योगिकी की समय रेखा

कोई विवरण नहीं।

नई!!: १८८३ और पदार्थ प्रौद्योगिकी की समय रेखा · और देखें »

पिनोकियो

मूल चित्र रचना एनरिको मजा़न्ति द्वारा पिनोकियो (अंग्रेजी:Pinocchio) एक इतालवी काल्पनिक चरित्र है जिसकी रचना 1883 में कार्लो कोल्लोडी ने की थी। यह पहली बार १८८३ में पिनोकियो के कारनामे या द एडवेंचर ऑफ पिनोकियो मे अवतरित हुआ था। कथा के अनुसार इसकी रचना एक काष्ठकार गपीतो ने एक छोटे गांव में चीड़ की लकड़ी से की थी। पर अपनी रचना के पश्चात पिनोकियो एक असली लड़का बनने की सोचने लगा। पिनोकियो जब लड़का बन गया तब, वह जब भी झूठ बोलता था तो उसकी नाक लम्बी होने लगती थी। पिनोकियो का अर्थ तश्कन भाषा में चीड़ का बीज होता है। मानक इतालवी भाषा मे इसे पिनोलो कहा जाता है जो दो शब्दों, पिनो अर्थार्थ चीड़ और ओकियो यानि आँख होता है। .

नई!!: १८८३ और पिनोकियो · और देखें »

प्रसिद्ध पुस्तकें

कोई विवरण नहीं।

नई!!: १८८३ और प्रसिद्ध पुस्तकें · और देखें »

मराठा साम्राज्य

मराठा साम्राज्य या मराठा महासंघ एक भारतीय साम्राज्यवादी शक्ति थी जो 1674 से 1818 तक अस्तित्व में रही। मराठा साम्राज्य की नींव छत्रपती शिवाजी महाराज जी ने १६७४ में डाली। उन्होने कई वर्ष औरंगज़ेब के मुगल साम्राज्य से संघर्ष किया। बाद में आये पेशवाओनें इसे उत्तर भारत तक बढाया, ये साम्राज्य १८१८ तक चला और लगभग पूरे भारत में फैल गया। .

नई!!: १८८३ और मराठा साम्राज्य · और देखें »

शिवसिंह सरोज

शिवसिंह सरोज किसी भारतीय द्वारा लिखी गई हिन्दी साहित्य के इतिहास की पहली पुस्तक है। इसके लेखक शिवसिंह सेंगर हैं। 1883 ई० मे लिखि गई इस पुस्तक में ५ हजार साहित्यकारों का परिचय दिया गया है। इसमें वास्तव में हिंदी साहित्य के इतिहास का एक ढाँचा तैयार करने का प्रयास मिलता है। श्रेणी:हिंदी साहित्य का इतिहास श्रेणी:पुस्तक.

नई!!: १८८३ और शिवसिंह सरोज · और देखें »

स्वामी दयानन्द सरस्वती

स्वामी दयानन्द सरस्वती महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती (१८२४-१८८३) आधुनिक भारत के महान चिन्तक, समाज-सुधारक व देशभक्त थे। उनका बचपन का नाम 'मूलशंकर' था। उन्होंने ने 1874 में एक महान आर्य सुधारक संगठन - आर्य समाज की स्थापना की। वे एक संन्यासी तथा एक महान चिंतक थे। उन्होंने वेदों की सत्ता को सदा सर्वोपरि माना। स्वामीजी ने कर्म सिद्धान्त, पुनर्जन्म, ब्रह्मचर्य तथा सन्यास को अपने दर्शन के चार स्तम्भ बनाया। उन्होने ही सबसे पहले १८७६ में 'स्वराज्य' का नारा दिया जिसे बाद में लोकमान्य तिलक ने आगे बढ़ाया। स्वामी दयानन्द के विचारों से प्रभावित महापुरुषों की संख्या असंख्य है, इनमें प्रमुख नाम हैं- मादाम भिकाजी कामा, पण्डित लेखराम आर्य, स्वामी श्रद्धानन्द, पण्डित गुरुदत्त विद्यार्थी, श्यामजी कृष्ण वर्मा, विनायक दामोदर सावरकर, लाला हरदयाल, मदनलाल ढींगरा, राम प्रसाद 'बिस्मिल', महादेव गोविंद रानडे, महात्मा हंसराज, लाला लाजपत राय इत्यादि। स्वामी दयानन्द के प्रमुख अनुयायियों में लाला हंसराज ने १८८६ में लाहौर में 'दयानन्द एंग्लो वैदिक कॉलेज' की स्थापना की तथा स्वामी श्रद्धानन्द ने १९०१ में हरिद्वार के निकट कांगड़ी में गुरुकुल की स्थापना की। .

नई!!: १८८३ और स्वामी दयानन्द सरस्वती · और देखें »

हल्द्वानी

हल्द्वानी, उत्तराखण्ड के नैनीताल ज़िले में स्थित एक नगर है जो काठगोदाम के साथ मिलकर हल्द्वानी-काठगोदाम नगर निगम बनाता है। हल्द्वानी उत्तराखण्ड के सर्वाधिक जनसँख्या वाले नगरों में से है और इसे "कुमाऊँ का प्रवेश द्वार" भी कहा जाता है। कुमाऊँनी भाषा में इसे "हल्द्वेणी" भी कहा जाता है क्योंकि यहाँ "हल्दू" (कदम्ब) प्रचुर मात्रा में मिलता था। सन् १८१६ में गोरखाओं को परास्त करने के बाद गार्डनर को कुमाऊँ का आयुक्त नियुक्त किया गया। बाद में जॉर्ज विलियम ट्रेल ने आयुक्त का पदभार संभाला और १८३४ में "हल्दु वनी" का नाम हल्द्वानी रखा। ब्रिटिश अभिलेखों से हमें ये ज्ञात होता है कि इस स्थान को १८३४ में एक मण्डी के रूप में उन लोगों के लिए बसाया गया था जो शीत ऋतु में भाभर आया करते थे। .

नई!!: १८८३ और हल्द्वानी · और देखें »

ग्रैंड स्लैम टेनिस विजेताओं की सूची

List of Men's Singles Grand Slam tournaments tennis champions: .

नई!!: १८८३ और ग्रैंड स्लैम टेनिस विजेताओं की सूची · और देखें »

गूओ संग्लिंग

गूओ संग्लिंग (Traditional Chinese: 郭松齡; Simplified Chinese: 郭松龄; Hanyu Pinyin: Guō Sōnglíng; Wade-Giles: Kuo Sung-ling) (1883 – 24 दिसम्बर 1925) चीन में एक मुखिया था जळि बिसवान शताब्दी मैं। .

नई!!: १८८३ और गूओ संग्लिंग · और देखें »

कासा विसेंस

कासा विसेंस बार्सिलोना(कातालोनिया, स्पेन) की एक रहायशी इमारत है। यह आंतोनी गौदी द्वारा उद्योगपती मानुएल विसेंस के लिए डिज़ाइन की गई थी।यह गौदी की पहिली महत्वपूर्ण इमारत है। 2005 में इसको यूनेस्को विश्व विरासत स्थान 'आंतोनी गौदी के कारज' में शामिल किया गया। इस इमारत का निर्माण 1883-1889 के बीच हुआ। यह बार्सिलोना के गरासिया जिले में कारेर दे लेस कारोलिनेस 24 पर स्थित है। .

नई!!: १८८३ और कासा विसेंस · और देखें »

अमेरिकी ओपन टेनिस के पुरुष एकल विजेताओं की सूची

* 1881 - रिचर्ड सीअर्स.

नई!!: १८८३ और अमेरिकी ओपन टेनिस के पुरुष एकल विजेताओं की सूची · और देखें »

१ अगस्त

1 अगस्त ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का 213वॉ (लीप वर्ष मे 214 वॉ) दिन है। साल मे अभी और 152 दिन बाकी है। .

नई!!: १८८३ और १ अगस्त · और देखें »

१५ जुलाई

१५ जुलाई ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का १९वॉ (लीप वर्ष मे १९७वॉ) दिन है। साल मे अभी और १६९ दिन बाकी है। .

नई!!: १८८३ और १५ जुलाई · और देखें »

२१ जुलाई

२१ जुलाई ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का २०२वॉ (लीप वर्ष में २०३ वॉ) दिन है। साल में अभी और १६३ दिन बाकी है। .

नई!!: १८८३ और २१ जुलाई · और देखें »

२२ अक्टूबर

22 अक्टूबर ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का 295वॉ (लीप वर्ष मे 296 वॉ) दिन है। साल मे अभी और 70 दिन बाकी है। .

नई!!: १८८३ और २२ अक्टूबर · और देखें »

६ जनवरी

6 जनवरी ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का 6वाँ दिन है। साल में अभी और 359 दिन बाकी हैं (लीप वर्ष में 360)।.

नई!!: १८८३ और ६ जनवरी · और देखें »

यहां पुनर्निर्देश करता है:

1883

निवर्तमानआने वाली
अरे! अब हम फेसबुक पर हैं! »