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हिन्दी चिट्ठाजगत

सूची हिन्दी चिट्ठाजगत

हिन्दी चिट्ठाकार समुदाय का प्रचलित लोगो हिन्दी चिट्ठाजगत से आशय है हिन्दी भाषी चिट्ठों का ऑनलाइन समुदाय जो कि बृहतर भारतीय चिट्ठाजगत का एक भाग है। .

32 संबंधों: चिट्ठा, चिट्ठा विश्व, चिट्ठाजगत, चिट्ठाजगत.इन, चिट्ठाकार, देसीपण्डित, नारद, नारद (ब्लॉग ऍग्रीगेटर), निरन्तर, परिचर्चा फोरम, पंजाबी चिट्ठाजगत, पूर्णिमा वर्मन, बांग्ला चिट्ठाजगत, ब्लॉगर (सेवा), ब्लॉगिंग शब्दावली, ब्लॉगवाणी, भारतीय चिट्ठाजगत, भोमियो, मराठी चिट्ठाजगत, रवीन्द्र प्रभात, रोमनागरी, सर्वज्ञ विकि, संस्कृत चिट्ठाजगत, स्थानीकरण (सॉफ्टवेयर), हिन्दी चिट्ठाजगत, हिन्दी कम्प्यूटिंग का इतिहास, हिंदी साहित्य, जाल पत्रिका, जाल-नियतकालिक, जाल-पत्रिका, गुजराती चिट्ठाजगत, अक्षरग्राम नेटवर्क

चिट्ठा

चिट्ठा (अंग्रेज़ी:ब्लॉग), बहुवचन: चिट्ठे (अंग्रेज़ी:ब्लॉग्स) एक प्रकार के व्यक्तिगत जालपृष्ठ (वेबसाइट) होते हैं जिन्हें दैनन्दिनी (डायरी) की तरह लिखा जाता है।। चिट्ठाजगत संकलक हर चिट्ठे में कुछ लेख, फोटो और बाहरी कड़ियाँ होती हैं। इनके विषय सामान्य भी हो सकते हैं और विशेष भी। चिट्ठा लिखने वाले को चिट्ठाकार (ब्लॉगर) तथा इस कार्य को चिट्ठाकारी अथवा चिट्ठाकारिता (ब्लॉगिंग) कहा जाता है। कई चिट्ठे किसी खास विषय से संबंधित होते हैं, व उस विषय से जुड़े समाचार, जानकारी या विचार आदि उपलब्ध कराते हैं। एक चिट्ठे में उस विषय से जुड़े पाठ, चित्र/मीडिया व अन्य चिट्ठों के लिंक्स मिल सकते हैं। चिट्ठों में पाठकों को अपनी टीका-टिप्पणियां देने की क्षमता उन्हें एक संवादात्मक (इंटरैक्टिव) प्रारूप प्रदन प्रदान करती है।। हिन्दुस्तान लाइव। अधिकतर चिट्ठे मुख्य तौर पर पाठ रूप में होते हैं, हालांकि कुछ कलाओं (आर्ट ब्लॉग्स), छायाचित्रों (फोटोग्राफ़ी ब्लॉग्स), वीडियो, संगीत (एमपी३ ब्लॉग्स) एवं ऑडियो (पॉडकास्टिंग) पर केन्द्रित भी होते हैं। अंग्रेजी शब्द ब्लॉग वेब लॉग (web log) शब्द का सूक्ष्म रूप है, इसे एक आरम्भिक ब्लॉगर द्वारा मजाक में वी ब्लॉग (We blog) की तरह प्रयोग किया गया था, बाद में इसका केवल 'ब्लॉग' (blog) शब्द रह गया तथा बाद में यह शब्द इण्टरनेट पर प्रचलित हो गया। हिन्दी शब्द 'चिट्ठा' पहले हिन्दी चिट्ठाकार आलोक कुमार द्वारा प्रतिपादित किया गया था जो कि अब इण्टरनेट पर हिन्दी दुनिया में प्रचलित हो गया है। यह शब्द अब गूगल द्वारा भी अपने शब्दकोश में शामिल किया जा चुका है। हिन्दी का पहला चिट्ठा नौ दो ग्यारह माना जाता है जिसे आलोक कुमार ने पोस्ट किया था। ब्लॉग के लिये चिट्ठा शब्द भी उन्हीं ने प्रदिपादित किया था जो कि अब इण्टरनेट पर इसके लिये प्रचलित हो चुका है। चिट्ठा बनाने के कई तरीके होते हैं, जिनमें सबसे सरल तरीका है, किसी अंतर्जाल पर किसी चिट्ठा वेसाइट जैसे या या आदि जैसे स्थलों में से किसी एक पर खाता खोल कर लिखना शुरू करना। एक अन्य प्रकार की चिट्ठेकारी सूक्ष्म चिट्ठाकारी कहलाती है। इसमें अति लघु आकार के पोस्ट्स होते हैं। दिसंबर २००७ तक, चिट्ठा सर्च इंजिन टेक्नोरैटी द्वारा ११२,०००,००० चिट्ठे ट्रैक किये जा रहे थे। आज के संगणक जगत में चिट्ठा का भारी चलन चल पड़ा है। कई प्रसिद्ध मशहूर हस्तियों के चिट्ठा लोग बड़े चाव से पढ़ते हैं और उन पर अपने विचार भी भेजते हैं। चिट्ठों पर लोग अपने पसंद के विषयों पर लिखते हैं और कई चिट्ठे विश्व भर में मशहूर होते हैं जिनका हवाला कई नीति-निर्धारण मुद्दों में किया जाता है। चिट्ठा का आरंभ १९९२ में लांच की गई पहली जालस्थल के साथ ही हो गया था। आगे चलकर १९९० के दशक के अंतिम वर्षो में जाकर चिट्ठाकारी ने जोर पकड़ा। आरंभिक चिट्ठा संगणक जगत संबंधी मूलभूत जानकारी के थे। लेकिन बाद में कई विषयों के चिट्ठा सामने आने लगे। वर्तमान समय में लेखन का हल्का सा भी शौक रखने वाला व्यक्ति अपना एक चिट्ठा बना सकता है, चूंकि यह निःशुल्क होता है और अपना लिखा पूरे विश्व के सामने तक पहुंचा सकता है। चिट्ठों पर राजनीतिक विचार, उत्पादों के विज्ञापन, शोधपत्र और शिक्षा का आदान-प्रदान भी किया जाता है। कई लोग चिट्ठों पर अपनी शिकायतें भी दर्ज कर के दूसरों को भेजते हैं। इन शिकायतों में दबी-छुपी भाषा से लेकर बेहद कर्कश भाषा तक प्रयोग की जाती है। वर्ष २००४ में चिट्ठा शब्द को मेरियम-वेबस्टर में आधिकारिक तौर पर सम्मिलित किया गया था। कई लोग अब चिट्ठों के माध्यम से ही एक दूसरे से संपर्क में रहने लग गए हैं। इस प्रकार एक तरह से चिट्ठाकारी या चिट्ठाकारी अब विश्व के साथ-साथ निजी संपर्क में रहने का माध्यम भी बन गया है। कई कंपनियां आपके चिट्ठों की सेवाओं को अत्यंत सरल बनाने के लिए कई सुविधाएं देने लग गई हैं। .

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चिट्ठा विश्व

चिट्ठा विश्व चिट्ठा विश्व हिन्दी का पहला ज्ञात ब्लॉग एग्रीगेटर था। इसे हिन्दी चिट्ठाकार द्वारा जून 2004 में बनाया गया था। इसने हिन्दी चिट्ठाकारी के आरम्भिक दिनों में हिन्दी चिट्ठाकारों को एकजुट करने तथा हिन्दी चिट्ठाकारी के प्रचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चिट्ठा विश्व नामक मुफ्त जावा होस्टिंग सेवा पर होस्ट था। दिसम्बर 2006 के आसपास यह सेवा तकनीकी रूप से बाधित हो गई। इसके साथ चिट्ठा विश्व भी इतिहास का एक हिस्सा बन कर रह गया। अक्टूबर 2007 में माईजावासर्वर कुछ हद तक फिर सुचारु हुई तो चिट्ठा विश्व भी पुनः लाइव हो गया। हालांकि अब इसका अद्यतनीकरण नहीं होता है। शुरुआत में जब महज पाँच-दस चिट्ठे हुआ करते थे तब चिट्ठाकार एक-दूसरे के चिट्ठों पर जाकर ताज़ा सामग्री पढ़ लिया करते थे। संख्या बढ़ने पर इस कल्पना ने जन्म लिया कि अलग-अलग चिट्ठों पर होने वाले अपडेट की सूचना एक ही जगह मिला करे। इसी कल्पना ने चिट्ठा-विश्व का रूप लिया। चिट्ठा-विश्व के बारे देबाशीष बताते हैं:चिट्ठा-विश्व पूर्णतः हैंडब्लेंडेड जावा कोड पर आधारित था, इसमें किसी विजेट या बने बनाए कोड का प्रयोग नहीं किया गया (न ही हो सकता था)। डेटा रखने हेतु इसमें किसी प्रकार के डेटाबेस का नहीं बल्कि रिसोर्स बण्डल का प्रयोग किया गया। तथा की मुफ्त सुविधा पर निर्भर ये सेवा ज़ाहिर तौर पर धीमी थी। नारद के जन्म के बाद ये ठप्प सा पड़ गया और फिर माईजावासर्वर की कृपा से बन्द। इसमें चिट्ठाकारों के प्रोफाईल, ब्लॉगजगत के आँकड़ें, रोचक तथ्य और टैगक्लाउड जैसी सुविधायें थीँ। नेपाली, मराठी व गुजराती जैसी अन्य भारतीय भाषाओं को जोड़ने की योजना भी थी। विगत एक साल से ये जालस्थल बन्द था, किसी नेकदिल ने शायद पुनः पैबन्द लगा कर इसे चालू कर दिया। साइडबार पर लगे चिट्ठों की सूची में पहले सभी चिट्ठों के नाम होते थे, जिसे चिट्ठों की लगातार बढ़ती संख्या के कारण अब कर पाना असंभव है। .

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चिट्ठाजगत

चिट्ठाजगत (अथवा ब्लॉगजगत) अन्तर्जाल पर मौजूद चिट्ठों की आभासी दुनिया को कहा जाता है। अंग्रेजी में इसे ब्लॉगोस्फीयर कहा जाता है। हिन्दी के लिये चिट्ठाजगत शब्द प्रथम हिन्दी चिट्ठाकार आलोक कुमार द्वारा प्रतिपादित शब्द चिट्ठा से बना है। चिट्ठाजगत विभिन्न चिट्ठों तथा उनके परस्पर लिंकों से बना है। यह शब्द बताता है कि चिट्ठे एक परस्पर लिंकित समुदाय (अथवा समुदायों के समूह) की तरह है अथवा एक सोशल नेटवर्क है जहाँ कि सभी लेखक (चिट्ठाकार) अपनी राय प्रकाशित कर सकते हैं। .

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चिट्ठाजगत.इन

चिट्ठाजगत.इन एक लोकप्रिय हिन्दी ब्लॉग यानि चिट्ठों की एक ऍग्रीगेटर सेवा है जो कि विभिन्न हिन्दी चिट्ठों पर प्रकाशित होने वाली पोस्टों को एक जगह पर दिखाती है। पाठक पंजीकृत ब्लॉग में चिट्ठाकारों द्वारा लिखे गये ताजा चिट्ठों की जानकारी व झलक पा सकते हैं। इसके अतिरिक्त इसमें सर्च इंजन एवं डाइरॅक्ट्री भी निहित हैं। चिट्ठाजगत.इन की शुरुआत सन् 2007 में आलोक कुमार एवं डॉ॰ विपुल जैन द्वारा की गई। यह पीऍचपी में बनाया गया है। यह अनेक सुविधाएँ प्रदान करता है जिनमें निम्न शामिल हैं:-.

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चिट्ठाकार

चिट्ठाकार (अंग्रेज़ी:ब्लॉगर) ब्लॉगिंग करने वाले यानि चिट्ठा या ब्लॉग लिखने वाले व्यक्ति को कहा जाता है। इण्टरनेट के संसार में चिट्ठाकार उस व्यक्ति को कहा जाता है जो अपने चिट्ठे पर लगातार लेख, ऑडिया या वीडियो आदि पोस्ट करता है। व्लॉगर वीडियो पाठ और अन्य सामग्री के साथ या उनसे अलग पोस्ट करता है।। हिन्दुस्तान लाईव। १३ मई २००५ कुछ व्लॉगर निजी लेखन करते हैं, जबकि अन्य किसी खास विधा जैसे हास्य, विज्ञान या खेल के बारे में लिखते हैं। विश्व का पहला चिट्ठा ‘दि जर्नी’ माना जाता है जिसे व्लॉगर एडम कोन्ट्रास ने पोस्ट किया था। ‘दि जर्नी’ में कोन्ट्रास की लॉस एंजिलिस तक की यात्रा दिखाई गई है। कोन्ट्रास को इसके लिए विश्व भर में इस माध्यम के अनोखे प्रयोग के लिए प्रसिद्धि मिली थी। इसके बाद से व्लॉगर एक वार्षिक सम्मेलन व्लॉगरकॉन के माध्यम से अपनी बात विश्व के समक्ष रखते हैं। इस सम्मेलन में ‘दि व्लॉगीज़’ नामक पुरस्कार भी दिया जाता है। कई व्लॉगर्स यू ट्यूब के माध्यम से अपने वीडियो पोस्ट करते हैं। यू ट्यूब पर प्रतिमाह लगभग सात करोड़ लोग वीडियो देखते हैं। इसके अतिरिक्त जूमला, वर्डप्रेस, ब्लॉगर और अन्य वेब २.० उपकरण भी सामग्री प्रबंधन प्रणाली (कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम या सीएमएस) से वीडियो पोस्ट करने में सहायक होते हैं। विभिन्न मामलों में चिट्ठाकारी के माध्यम से मुख्यधारा पत्रकारों और स्वायत्त नागरिक पत्रकारों और चिट्ठाकारों के मध्य मुक्त वाचन यानि फ्री स्पीच अधिकारों को लेकर भी विवाद उठे हैं। सन् २००६ में व्लॉगर जॉश वुल्फ को जी८ समूह के विरुद्ध प्रदर्शनों के वीडियो फिल्मांकन के सदर्भ में गिरफ्तारी ऐसा ही एक मामला था। वायरल वीडियो को मिलने वाली प्रसिद्धी से कई चिट्ठाकारों और निगमों ने अपने जालस्थलों पर चिट्ठाकारी आरंभ कर दी है। किसी प्रसिद्ध वायरल वीडियो को उसके शीर्ष काल में जालस्थल पर डालकर उस पर आने वाले हिट्स बढ़ जाते हैं। जो चिट्ठाकार चाहते हैं कि उनकी साइटों को अधिकाधिक लोग देखें, वह इसके लिए अपनी साइट को यूटय़ूब के साथ जोड़ देते हैं और उस पर इससे मिलते-जुलते वीडियो देखें जैसा कैप्शन उस पर लिख देते हैं। हिन्दी का पहला चिट्ठा नौ दो ग्यारह माना जाता है जिसे आलोक कुमार ने पोस्ट किया था। ब्लॉग के लिये चिट्ठा शब्द भी उन्हीं ने प्रदिपादित किया था जो कि अब इण्टरनेट पर इसके लिये प्रचलित हो चुका है। .

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देसीपण्डित

देसीपण्डित एक लोकप्रिय भारतीय फिल्टर ब्लॉग है जो कि भारतीय चिट्ठाकार (pseudonym) in June 2005 तथा द्वारा प्रबन्धित किया जाता है। यह सामूहिक ब्लॉग भारतीय चिट्ठाजगत से मुख्य ब्लॉग पोस्टों को संक्षिप्त टिप्पणियों के साथ लिंकित करता है। अंग्रेज़ी के अतिरिक्त देसीपण्डित में विभिन्न भारतीय भाषाओं हिन्दी, तमिल, मराठी, तेलुगू, कन्नड़ तथा बांग्ला आदि में लिखी ब्लॉग पोस्टों के लिये चैनल हैं। देसीपण्डित ने "Best Designed Blog" तथा "Best Directory/Clique/Service" श्रेणी में इण्डीब्लॉगीज २००६ पुरुस्कार प्राप्त किया है। अक्टूबर २००६ में देसीपण्डित बन्द होने की कगार पर था क्य़ोंकि इसके संस्थापक तथा योगदानकर्ता इसके लिये समय निकालने में कठिनता महसूस कर रहे थे परन्तु पाठकों से मिली भारी प्रतिक्रिया के फलस्वरुप वेबसाइट को जारी रखने का निर्णय लिया गया। .

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नारद

कोई विवरण नहीं।

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नारद (ब्लॉग ऍग्रीगेटर)

नारद एक पुराना एवं अपने समय का सर्वाधिक लोकप्रिय हिन्दी ब्लॉग ऍग्रीगेटर है। यह हिन्दी चिट्ठाजगत में प्रकाशित सभी प्रविष्टियों को एक ही जगह एकीकृत रूप में दिखाने का उपाय है जहाँ पाठक पंजीकृत ब्लॉग में चिट्ठाकारों द्वारा लिखे गये ताजा चिट्ठों की जानकारी व झलक पा सकते हैं। .

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निरन्तर

right निरंतर हिन्दी चिट्ठाकारों के एक समूह द्वारा प्रकाशित विश्व की पहली ज्ञात हिन्दी ब्लॉगज़ीन और जाल-पत्रिका थी। गैरपेशेवर प्रकाशकों द्वारा निकाली जाने वाली इस पत्रिका के प्रकाशकों का दावा था कि यह पाठकों को प्रकाशित लेखों पर त्वरित टिप्पणी करने का मौका देती है। निरंतर की स्थापना 2005 में की गई, पहले यह पंकज नरूला द्वारा स्थापित अक्षरग्राम डोमेन के अंतर्गत प्रकाशित होती थी परंतु बाद में अपने ही डोमेन से प्रकाशित होने लगी। जाल पर हिन्दी के बढ़ते प्रयोग के मद्देनज़र यह प्रयास शुरु किया गया था। निरंतर से जुड़े लोग वैसे तो चिट्ठाकारी से जुड़े थे पर यह पत्रिका उनके औपचारिक लेखन को प्रस्तुत करने का एक मंच बनी। अगस्त 2005 में निरंतर का प्रकाशन 6 अंकों के उपरांत बंद हो गया था। 1 साल बाद अगस्त 2006 में इसका प्रकाशन नये कलेवर में दुबारा शुरु हुआ और अगस्त, अक्टूबर व दिसम्बर में तीन अंक प्रकाशित होने के बाद बंद हो गया। मई 2007 से जुलाई 2008 के मध्य इसके अंक यदा कदा पुनः प्रकाशित हुये। पत्रिका के कुल दस अंक प्रकाशित हुये हैं। जनवरी 2009 में निरंतर पत्रिका को बंद कर इसके प्रकाशन मंडल ने इसे एक नई जालपत्रिका सामयिकी में सामहित करने की घोषणा की। निरंतर के मानद मुख्य संपादक हैं अनूप शुक्ला। पत्रिका का प्रकाशन व प्रबंध संपादन इसके संस्थापक देबाशीष चक्रवर्ती करते हैं। निरंतर के कोर संपादन टीम में शामिल हैं डॉ सुनील दीपक, रविशंकर श्रीवास्तव, रमण कौल, अतुल अरोरा, प्रत्यक्षा, शशि सिंह, ईस्वामी, पंकज नरूला, जीतेन्द्र चौधरी और आलोक कुमार। .

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परिचर्चा फोरम

परिचर्चा अक्षरग्राम नेटवर्क द्वारा संचालित इण्टरनेट की पहली हिन्दी फोरम (बुलेटिन बोर्ड) थी जो पूर्णतया देवनागरी लिपि में थी। .

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पंजाबी चिट्ठाजगत

पंजाबी चिट्ठाजगत से आशय है पंजाबी भाषी चिट्ठों का ऑनलाइन समुदाय जो कि बृहतर भारतीय चिट्ठाजगत का एक भाग है। .

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पूर्णिमा वर्मन

पूर्णिमा वर्मन (जन्म २७ जून १९५५, पीलीभीत, उत्तर प्रदेश), जाल-पत्रिका अभिव्यक्ति और अनुभूति की संपादक है। पत्रकार के रूप में अपना कार्यजीवन प्रारंभ करने वाली पूर्णिमा का नाम वेब पर हिंदी की स्थापना करने वालों में अग्रगण्य है। उन्होंने प्रवासी तथा विदेशी हिंदी लेखकों को प्रकाशित करने तथा अभिव्यक्ति में उन्हें एक साझा मंच प्रदान करने का महत्वपूर्ण काम किया है। माइक्रोसॉफ़्ट का यूनिकोडित हिंदी फॉण्ट आने से बहुत पहले हर्ष कुमार द्वारा निर्मित सुशा फॉण्ट द्वारा उनकी जाल पत्रिकाएँ अभिव्यक्ति तथा अनुभूति अंतर्जाल पर प्रतिष्ठित होकर लोकप्रियता प्राप्त कर चुकी थीं। वेब पर हिंदी को लोकप्रिय बनाने के अपने प्रयत्नों के लिए उन्हें २००६ में भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद, साहित्य अकादमी तथा अक्षरम के संयुक्त अलंकरण अक्षरम प्रवासी मीडिया सम्मान, २००८ में रायपुर छत्तीसगढ़ की संस्था सृजन सम्मान द्वारा हिंदी गौरव सम्मान, दिल्ली की संस्था जयजयवंती द्वारा जयजयवंती सम्मान तथा केन्द्रीय हिन्दी संस्थान के पद्मभूषण डॉ॰ मोटूरि सत्यनारायण पुरस्कारसे विभूषित किया जा चुका है। उनके तीन कविता संग्रह "पूर्वा", "वक्त के साथ" और "चोंच में आकाश" नाम से प्रकाशित हुए हैं। संप्रति शारजाह, संयुक्त अरब इमारात में निवास करने वाली पूर्णिमा वर्मन हिंदी के अंतरराष्ट्रीय विकास के अनेक कार्यों से जुड़ी हुई हैं। .

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बांग्ला चिट्ठाजगत

बांग्ला चिट्ठाजगत से आशय है बांग्ला भाषी चिट्ठों का ऑनलाइन समुदाय जो कि बृहतर भारतीय चिट्ठाजगत का एक भाग है। .

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ब्लॉगर (सेवा)

ब्लॉगर (पूर्व नाम: ब्लॉगस्पॉट) एक चिट्ठा होस्टिंग सेवा है जो गूगल ब्लॉगर प्रोग्राम के द्वारा उपलब्ध कराई जाती है, व जिसके द्वारा ब्लॉगर्स अपने नए ब्लॉग शीघ्र ही बना सकते हैं। इसकी मदद से डोमेन नेम और होस्टिंग जब तक ब्लॉगर चाहे निःशुल्क उपलब्ध रहती है। गूगल के एडसेंस कार्यक्रम के द्वारा ब्लोगर्स अपने ब्लॉग से आय भी कर सकते हैं।। हिन्दुस्तान लाईव। २२ अप्रैल २०१० यह सुविधा अन्य चिट्ठाकारी कार्यक्रमों पर निर्भर नहीं होती। एक ब्लॉग किसी भी कार्य के लिए प्रयोग किया जा सकता है, चाहे वह निजी दैनंदिनी के रूप में हो या व्यावसायिक कार्य के लिए या सामान्य रूप में अपने विचार दूसरों तक पहुंचाने के लिए ब्लॉग्गिंग का ज्यादा उपयोग किया जाता है। ब्लॉगस्पॉट का आरंभ १९९९ में एक होस्टिंग टूल के रूप में पायरा लैब्स ने की थी। सन् २००३ में इसे गूगल ने खरीद लिया था, और तब से यह इंटरनेट पर सबसे प्रसिद्ध शुल्करहित होस्टिंग वेबसाइट बनी हुई है। .

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ब्लॉगिंग शब्दावली

ब्लॉगिंग आज के ज़माने मे बहुत प्रसिद्ध है। यह चिट्ठाकारी (ब्लॉगिंग) सम्बन्धी शब्दों की एक सूची है। किसी अन्य हॉबी की तरह ब्लॉगिंग ने भी एक खास तरह की शब्दावली विकसित की है। निम्नलिखित कुछ सर्वाधिक प्रचलित शब्द एवं वाक्यांश हैं जिनमें से कुछ की व्युत्पत्ति भी दी गयी है। इनमें से अधिकतर अंग्रेजी मूल के हैं जबकि कुछ हिन्दी चिट्ठाजगत से उपजे हैं। .

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ब्लॉगवाणी

ब्लॉगवाणी हिन्दी ब्लॉग यानी चिट्ठों का एक ऍग्रीगेटर है जहाँ पाठक पंजीकृत ब्लॉग में चिट्ठाकारों द्वारा लिखे गये ताजा चिट्ठों की जानकारी व झलक पा सकते हैं। .

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भारतीय चिट्ठाजगत

भारतीय चिट्ठाजगत से आशय है भारतीयों या भारतवंशी चिट्ठाकारों द्वारा लिखे जाने वाले चिट्ठों का ऑनलाइन समुदाय जो कि बृहतर चिट्ठाजगत का एक भाग है। .

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भोमियो

भोमियो भारतीय लिपियों के मध्य लिप्यन्तरण हेतु एक ऑनलाइन सेवा थी। पीयूष भट्ट द्वारा बनायी गयी यह पहली मशीनी लिप्यन्तरण सेवा थी जो पाठ को कॉपी-पेस्ट करने की बजाय वेबपेजों को सीधे ही एक लिपि से दूसरी लिपि में बदल सकती थी। तब तक गिरगिट का नया वेबपेज लिप्यन्तरण संस्करण एवं गूगल लिपि परिवर्तक भी नहीं आया था। विभिन्न भारतीय लिपियों के अतिरिक्त भोमियो में उर्दू एवं हिन्दी के मध्य लिप्यन्तरम की भी सुविधा थी। इसके अतिरिक्त विभिन्न लिपियों से आइट्रान्स में भी लिप्यन्तरण की सुविधा थी। अपनी तरह की पहली सेवा होने के कारण यह हिन्दी चिट्ठाजगत में काफी लोकप्रिय हुयी। परन्तु बाद में अज्ञात कारणों से यह बन्द हो गयी। बाद में इससे प्रेरित होकर आलोक कुमार एवं डॉ॰ विपुल जैन ने मिलकर गिरगिट का नया संस्करण जावा में तैयार किया जो कि किसी वेबपेज को सीधे ही लिप्यन्तरित करने में सक्षम है। .

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मराठी चिट्ठाजगत

मराठी चिट्ठाजगत से आशय है मराठी भाषी चिट्ठों का ऑनलाइन समुदाय जो कि बृहतर भारतीय चिट्ठाजगत का एक भाग है। .

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रवीन्द्र प्रभात

रवीन्द्र प्रभात (जन्म: ५ अप्रैल १९६९) भारत के हिन्दी कवि, कथाकार, उपन्यासकार, व्यंग्यकार, स्तंभकार, सम्पादक और ब्लॉग विश्लेषक हैं। उन्होंने लगभग सभी साहित्यिक विधाओं में लेखन किया है परंतु व्यंग्य और गज़ल में उनकी प्रमुख उपलब्धियाँ हैं। १९९१ में प्रकाशित अपने पहले गज़ल संग्रह "हमसफर" से पहली बार वे चर्चा में आये। लखनऊ से प्रकाशित हिन्दी दैनिक 'जनसंदेश टाईम्स' और 'डेली न्यूज एक्टिविस्ट' के वे नियमित स्तंभकार रह चुके हैं। .

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रोमनागरी

रोमनागरी रोमन तथा देवनागरी का मिश्रित शब्द (en: Portmanteau; उच्चारण: पोर्टमेंटॉ) है। यह शब्द हिन्दी चिट्ठाकारों (ब्लॉगर्स) द्वारा प्रतिपादित किया गया था। यह चिट्ठाजगत में एक प्रचलित अपशब्द (स्लैंग) है। रोमनागरी का आशय है हिन्दी को रोमन लिपि में लिखना। उदाहरण के लिये: mera desh bharat hai.

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सर्वज्ञ विकि

सर्वज्ञ विकि का लोगो सर्वज्ञ हिन्दी चिट्ठाकारों का एक सामुदायिक विकि है। यह हिन्दी भाषा, हिन्दी ब्लॉगिंग तथा हिन्दी कम्प्यूटिंग पर केन्द्रित है। यह अक्षरग्राम नेटवर्क द्वारा संचालित किया जाता है। .

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संस्कृत चिट्ठाजगत

संस्कृत चिट्ठाजगत से आशय है संस्कृत भाषी चिट्ठों का ऑनलाइन समुदाय, जो कि बृहतर भारतीय चिट्ठाजगत का एक भाग है। शास्त्री नित्यगोपाल कटारे संस्कृत भाषा के प्रथम चिट्ठाकार माने जाते हैं। उनका चिट्ठा संस्कृत का अब तक का प्रथम ज्ञात संस्कृत चिट्ठा है। आरम्भ में संस्कृत टाइपिंग की जटिलताओं के चलते काफी कम लोग संस्कृत में लिखते थे। धीरे-धीरे संस्कृत चिट्ठों की संख्या बढ़ने लगी। सन २००९ में संस्कृत चिट्ठों की संख्या कुछ बढ़ी। इसका कारण विविध ब्लॉगिंग सेवाओं में इण्डिक यूनिकोड का समर्थन आना, नए संस्कृत टंकण औजारों का आना आदि रहा। वर्तमान में सक्रिय-निष्क्रिय मिलाकर लगभग १५ के करीब संस्कृत चिट्ठे हैं। अधिकतर संस्कृत चिट्ठे संस्कृत भाषा के पठन-पाठन सम्बन्धी प्रकृति के हैं। आरंभिक समय में संस्कृत चिट्ठाकारों की कम संख्या को देखते हुए आरम्भिक चिट्ठाकारों ने इस माध्यम के प्रचार के लिये अनेक समुदाय बनाए ताकि संस्कृत चिट्ठाकारी का प्रचार किया जा सके। .

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स्थानीकरण (सॉफ्टवेयर)

इतालवी भाषा में स्थानीकृत ''उबन्तू'' का स्क्रीनशॉट किसी सॉफ्टवेयर उत्पाद को किसी भौगोलिक क्षेत्र (जैसे देश, राज्य, भाषा) की भाषायी, सांस्कृतिक एवं तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप परिवर्तित करने या ढ़ालने को उस सॉफ्टवेयर का स्थानीकरण (localization) कहते हैं। ऐसे बहुत से लोकप्रिय सॉफ्टवेयर हैं जो दुनिया की अनेक भाषाओं में 'प्रयोक्ता इन्टरफेस', 'सहायता' एवं अन्य सुविधाएँ प्रदान करते हैं। उदाहरण के लिये लिनक्स एवं फायरफाक्स का हिन्दी सहित अनेकानेक भाषाओं में स्थानीकरन हो चुका है। .

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हिन्दी चिट्ठाजगत

हिन्दी चिट्ठाकार समुदाय का प्रचलित लोगो हिन्दी चिट्ठाजगत से आशय है हिन्दी भाषी चिट्ठों का ऑनलाइन समुदाय जो कि बृहतर भारतीय चिट्ठाजगत का एक भाग है। .

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हिन्दी कम्प्यूटिंग का इतिहास

सबसे पहले हिन्दी टाइप शायद वर्डस्‍टार (वर्जन III प्लस) जैसे एक शब्द संसाधक ‘अक्षर’ में आया। फिर विंडोज़ आया और पेजमेकर व वेंचुरा का समय आया। इस सारी यात्रा में कम्प्‍यूटर केवल प्रिटिंग की दुनिया की सहायता भर कर रहा था। यूनिकोड के आगमन एवं प्रसार के पश्चात हिन्दी कम्प्यूटिंग प्रिंटिंग तक सीमित न रहकर संगणन के विभिन्न पहलुओं तक पहुँच गयी। अब भाषायी संगणन के सभी क्षेत्रों में हिन्दी अपनी पहुँच बना रही है। हिन्दी कम्प्यूटिंग को वर्तमान स्थिति तक पहुँचाने में सरकार, अनेक संस्थाओं, समूहों एवं प्रोग्रामरों-डैवलपरों का योगदान रहा। .

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हिंदी साहित्य

चंद्रकांता का मुखपृष्ठ हिन्दी भारत और विश्व में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है। उसकी जड़ें प्राचीन भारत की संस्कृत भाषा में तलाशी जा सकती हैं। परंतु हिन्दी साहित्य की जड़ें मध्ययुगीन भारत की ब्रजभाषा, अवधी, मैथिली और मारवाड़ी जैसी भाषाओं के साहित्य में पाई जाती हैं। हिंदी में गद्य का विकास बहुत बाद में हुआ और इसने अपनी शुरुआत कविता के माध्यम से जो कि ज्यादातर लोकभाषा के साथ प्रयोग कर विकसित की गई।हिंदी का आरंभिक साहित्य अपभ्रंश में मिलता है। हिंदी में तीन प्रकार का साहित्य मिलता है। गद्य पद्य और चम्पू। हिंदी की पहली रचना कौन सी है इस विषय में विवाद है लेकिन ज़्यादातर साहित्यकार देवकीनन्दन खत्री द्वारा लिखे गये उपन्यास चंद्रकांता को हिन्दी की पहली प्रामाणिक गद्य रचना मानते हैं। .

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जाल पत्रिका

हिंदी चिट्ठे याने की जाल पत्रिका हिंदी मे लिखे ब्लॉग या 'चिट्ठे' है। हिंदी में कुछ चिट्ठे केवल कविताओं पर केन्द्रित हैं, कुछ संगीत शास्त्र, ज्योतिष, यात्राओं और फ़ोटोग्राफी पर भी हैं। कुछ चिट्ठों पर संगीत सुना भी जा सकता है और फ्लैश चलचित्र भी देखे जा सकते हैं। हिन्दी रचनाकारों के लिए तो यह सर्वोत्तम माध्यम है। अपनी कविता, कहानी, उपन्यास, व्यंग्य और ललित निबंध सब इस पर निरंतर लिखते हैं और लगातार प्रकाशित करते हैं, यानी चिट्ठाकारों की अपनी पत्रिका। जो साहित्य आंतरजालपर नियमित रूप से प्रकाशित होता हैं, उसे कहते हैं। इसी लिए हम ब्लॉग को जालपत्रिका कह सकते हैं, जो शायद अनियमित रूप से भी प्रकाशित हो सकता हैं। शंख बजे ज्यों ही ठण्डी के, मौसम ने यूं पलट खाया, शीतल हो उठा कण-कण धरती का, कोहरे ने बिगुल बजाया!! हीटर बने हैं भाग्य विधाता, चाय और कॉफी की चुस्की बना जीवनदाता, सुबह उठ के नहाने वक्त, बेचैनी से जी घबराता!! घर से बाहर निकलते ही, शरीर थरथराने लगता, लगता सूरज अासमां में आज, नहीं निकलने का वजह ढूढ़ता!! कोहरे के दस्तक के आतंक ने, सुबह होते ही हड़कंप मचाया, शंख बजे ज्यों ही ठण्डी के मौसम ने यूं पलटा खाया!! दुबक पड़े इंसान रजाईयों में, ठण्ड की मार से, कांप उठा कण-कण धरती का मौसम की चाल से!! बजी नया साल की शहनाईयां, और क्रिसमस के इंतज़ार में, झूम उठा पूरा धरती, अपने-अपने परिवार में!! शंख बजे ज्यों ही ठण्डी के, मौसम ने यूं ही पलट खाया, शीतल हो उठा कण-कण धरती का, कोहरे ने बिगुल बजाया!! .

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जाल-नियतकालिक

जाल-नियतकालिक छापेखाने में परंपरागत रूप से कागज़ पर छापे जाने की बजाय अंतर्जाल (world wide web) पर इलेक्ट्रानिक माध्यम से स्थापित की जाती है। अंतर्जाल पर स्थित होने के कारण इसको दुनिया के किसी भी कोने से अपने कंप्यूटर पर पढ़ा जा सकता है। इसमें आलेख और चित्रों के साथ-साथ ध्वनि और चलचित्रों का भी समावेश किया जा सकता है। इसकी देखभाल के लिए एक संपादक मंडल भी होता है। इसके प्रकाशन का समय निर्धारित होता है जैसे साप्ताहिक, पाक्षिक, मासिक या द्विमासिक। निरंतर नामक जाल-नियतकालिक के उदय के पश्चात शब्दावली का भी प्रयोग होने लगा है जिसका आशय है पत्रिका और ब्लॉग के तत्वों, जैसे पाठक का किसी लेख पर फार्म का उपयोग कर टिप्पणी कर पाना, का मिलाप। कुछ जाल-नियतकालिक परंपरागत रूप से मुद्रित भी होते हैं, जैसे हंस और वागार्थ, यानि इनका प्रिंट एडीशन या अंक भी निकलता है। कई पत्रिकायें अपने अंतर्जाल और छपे अंकों की सामग्री में फर्क भी रखती हैं क्योंकि दोनों माध्यमों के पाठकों के पठन का ढंग अलग होता है। माईक्रोसॉफ्ट फ्रंटपेज जैसे वेब पब्लिशिंग के औजारों के अलावा जाल-नियतकालिक प्रकाशित करने के लिये संप्रति ड्रीम वीवर और या जैसे भी बाज़ार में उपलब्ध हैं। .

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जाल-पत्रिका

या हिंदी चिट्ठे हिंदी मे लिखे ब्लॉग या 'चिट्ठे' है। हिंदी में कुछ चिट्ठे केवल कविताओं पर केन्द्रित हैं, कुछ संगीत शास्त्र, ज्योतिष, यात्राओं और फ़ोटोग्राफी पर भी हैं। कुछ चिट्ठों पर संगीत सुना भी जा सकता है और फ्लैश चलचित्र भी देखे जा सकते हैं। हिन्दी रचनाकारों के लिए तो यह सर्वोत्तम माध्यम है। अपनी कविता, कहानी, उपन्यास, व्यंग्य और ललित निबंध सब इस पर निरंतर लिखते हैं और लगातार प्रकाशित करते हैं, यानी चिट्ठाकारों की अपनी पत्रिका। मराठी में भी ब्लॉग को ही कहतें है। और जालपत्रिका (ब्लॉग) के लेखक को (ब्लॉगर) कहतें है। .

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गुजराती चिट्ठाजगत

गुजराती चिट्ठाजगत से आशय है गुजराती भाषी चिट्ठों का ऑनलाइन समुदाय जो कि बृहतर भारतीय चिट्ठाजगत का एक भाग है। .

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अक्षरग्राम नेटवर्क

अक्षरग्राम नेटवर्क हिन्दी चिट्ठाकारों एवं तकनीकिज्ञों का एक गैरलाभकारी सामुदायिक स्वयंसेवक समूह है जो कि कम्प्यूटर एवं इण्टरनेट पर हिन्दी के प्रयोग को बढ़ावा देने हेतु कार्य करता है। यह समूह हिन्दी चिट्ठाकारी से सम्बंथित विभिन्न सेवाएँ संचालित करता है। शुरुआती दिनों में इण्टरनेट पर हिन्दी के प्रचार-प्रसार में इस समूह ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसकी विभिन्न सेवाओं नारद, सर्वज्ञ, परिचर्चा आदि ने नए चिट्ठाकारों को स्थापित होने में काफी सहायता की। .

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