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हारमोनियम

सूची हारमोनियम

भारत-पाकिस्तान-अफ़्ग़ानिस्तान में लोकप्रीय हस्त-चालित शैली का एक हारमोनियम हारमोनियम (Harmonium) एक संगीत वाद्य यंत्र है जिसमें वायु प्रवाह किया जाता है और भिन्न चपटी स्वर पटलों को दबाने से अलग-अलग सुर की ध्वनियाँ निकलती हैं। इसमें हवा का बहाव पैरों, घुटनों या हाथों के ज़रिये किया जाता है, हालाँकि भारतीय उपमहाद्वीप में इस्तेमाल होने वाले हरमोनियमों में हाथों का प्रयोग ही ज़्यादा होता है। हारमोनियम का आविष्कार यूरोप में किया गया था और १९वीं सदी के बीच में इसे कुछ फ़्रांसिसी लोग भारत-पाकिस्तान क्षेत्र में लाए जहाँ यह सीखने की आसानी और भारतीय संगीत के लिए अनुकूल होने की वजह से जड़ पकड़ गया। हारमोनियम मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं। ये विभाजन संभवता उनके निर्माण स्थान अथवा निर्माण में पर्युक्त सामिग्री की गुणवत्ता के आधार पर होता है। इसके प्रकार है - १.ब्रिटिश २.जर्मन ३.खरज। अपने निर्माण की शैली या स्थान के अनुसार इनके स्वरों की मिठास में अंतर होता है जिसे योग्य संगीतज्ञ ही पहचान सकता है। हारमोनियम भारतीय शास्त्रीय संगीत का अभिन्न हिस्सा है। हारमोनियम को सरल शब्दों में "पेटी बाजा" भी कहा जाता है। .

27 संबंधों: चरी नृत्य, दामोदर राव, नुसरत फतह अली खान, नौटंकी, नोरा (बिल्ली), बंदिश, भारतीय वाद्य यंत्र, राहत फ़तेह अली खान, राजस्थान का संगीत, शास्त्रीय संगीत, सतिन्दर सरताज, हिन्दी सिनेमा, जगजीत सिंह, वी दक्षिणामूर्ति, ख्याल (मालवी गीत), ग़ुलाम मुस्तफ़ा दुर्रानी, गिरिजा देवी, गोपाल बाबू गोस्वामी, गीत बैठकी, आबिदा परवीन, आर्य कन्या गुरुकुल, लुधियाना, इलैयाराजा, कुमाऊँनी होली, केदार शर्मा, कीबोर्ड उपकरण, अदिति महसिन, अहमद और मुहम्मद हुसैन

चरी नृत्य

चरी नृत्य चरी नृत्य भारत में राजस्थान का आकर्षक व बहुत प्रसिद्ध लोक नृत्य है। यह महिलाओं द्वारा किया जाने वाला सामूहिक लोक नृत्य है। यह राजस्थान के अजमेर और किशनगढ़ में अति प्रचलित है। चरी नृत्य राजस्थान में किशनगढ़ और अजमेर के गुर्जर और सैनी समुदाय की महिलाओं का एक सुंदर नृत्य है। चेरी नृत्य राजस्थान में कई बड़े समारोहों, त्योहारों, लडके के जन्म पर, शादी के अवसरों के समय किया जाता है। फलकू बाई इसकी प्रसिद्ध नृत्यांगना हैं .

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दामोदर राव

दामोदर  राव (जन्म २१ अगस्त १९७७)  एक भारतीय गायक, संगीतकार व अभिनेता हैं, इनके पिता का नाम रामधनी राव और माता का नाम लालपरी देवी है, इन्होंने गायकी और संगीत में लगभग ९५ भोजपुरी और हिंदी सिनेमा तथा ८०० वीडियो एल्बम किये है और इन्हें भोजपुरी के सर्वश्रेष्ठ संगीतकारों में से जाना जाता है, इनका संगीत मधुर और कर्णप्रिय होता है।  .

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नुसरत फतह अली खान

नुसरत फतह अली खान सूफी शैली के प्रसिद्ध कव्वाल थे। इनके गायन ने कव्वाली को पाकिस्तान से आगे बढ़कर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।कव्वालों के घराने में 13 अक्टूबर 1948 को पंजाब के फैसलाबाद में जन्मे नुसरत फतह अली को उनके पिता उस्ताद फतह अली खां साहब जो स्वयं बहुत मशहूर और मार्रुफ़ कव्वाल थे, ने अपने बेटे को इस क्षेत्र में आने से रोका था और खानदान की 600 सालों से चली आ रही परम्परा को तोड़ना चाहा था पर खुदा को कुछ और ही मंजूर था, लगता था जैसे खुदा ने इस खानदान पर 600 सालों की मेहरबानियों का सिला दिया हो, पिता को मानना पड़ा कि नुसरत की आवाज़ उस परवरदिगार का दिया तोहफा ही है और वो फिर नुसरत को रोक नहीं पाए और आज इतिहास हमारे सामने है। .

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नौटंकी

'सुल्ताना डाकू' नामक मशहूर नौटंकी के एक प्रदर्शन में देवेन्द्र शर्मा और पलक जोशी एक और नौटंकी का नज़ारा नौटंकी (Nautanki) उत्तर भारत, पाकिस्तान और नेपाल के एक लोक नृत्य और नाटक शैली का नाम है। यह भारतीय उपमहाद्वीप में प्राचीनकाल से चली आ रही स्वांग परम्परा की वंशज है और इसका नाम मुल्तान (पाकिस्तानी पंजाब) की एक ऐतिहासिक 'नौटंकी' नामक राजकुमारी पर आधारित एक 'शहज़ादी नौटंकी' नाम के प्रसिद्ध नृत्य-नाटक पर पड़ा।, Don Rubin, Taylor & Francis, 2001, ISBN 978-0-415-26087-9,...

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नोरा (बिल्ली)

नोरा एक बिल्ली का नाम है जिसका जन्म 2006 में हुआ था। द टाइम्स ऑफ़ लंदन के अनुसार यह हारमोनियम बजाती है। .

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बंदिश

हिन्दुस्तानी गायन या वादन में बंदिश से तात्पर्य एक निश्चित सुरसहित रचना से है। बंदिश किसी विशेष राग में निर्मित होती है। इसे गाने/बजाने के साथ तबला या पखावज द्वारा ताल मिलाया जाता है और सारंगी, वायलिन अथवा हारमोनियम द्वारा सुस्वरता प्रदान की जाती है। बंदिश मानक संरचित गायन हेतु संगीत को साहित्यिकता प्रदान करती है। भूतकाल में कई घरानों ने अपनी बंदिशों को अपने घराने से बाहर जाने से रोकने के उपाय किए। गायन में 'बंदिश' को 'चीज़' कहते हैं। हिन्‍दुस्‍तानी शास्‍त्रीय संगीत में राग संरक्षण हेतु पारम्‍पारिक बन्दिशो की महत्‍वूपर्ण भूमिका रही है। भारतीय रागदारी संगीत में रागों को निर्धारित नियमावली के अन्‍तर्गत गाया जाता है, जिनको राग के सर्वसाधारण नियम कहते है। तथा यह पारम्‍पारिक शास्‍त्रीय बन्दिशों में अत्‍यन्‍त सुव्‍यवस्थित एवं सुगठीत रूप में विद्यमान है। इन बन्दिशों के माध्‍यम से राग को सहजतापूर्वक पहचाना भी जा सकता है और राग विस्‍तार करने हेतु बन्दिश मार्गदर्शक का भी कार्य करती है। ए‍क-एक बन्दिश के अन्‍तर्गत राग का संपूर्ण शास्‍त्र समाहित है, जो गेय स्‍वरुप में जल्‍दही कंठस्‍थ हो जाता है। रागो के नियमों का निर्वाह इन बन्दिशों द्वारा किया जाता है। उन नियमों को बन्दिश द्वारा गेय रूप में निबद्ध करके रागों को कैसे सुराक्षित किया गया है। इनमें सदारंग-अदारंग इनकी कुछ पारम्‍पारिक बन्दिशों का उदाहरण स्‍वरुप कुछ विलंबित तथा मध्‍यलय के ख्‍याल बन्दिशपर विचार प्रस्‍तुत किये जायेंगे। श्रेणी:भारतीय संगीत.

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भारतीय वाद्य यंत्र

राजा रवि वर्मा द्वारा चित्रित कादम्बरी '''सितार''' बजाते हुए पुलुवन् पुत्तु बजाती एक महिला जलतरंग Chenda (top) and Chande (below) are different drums. Chande 200 ईसा पूर्व से 200 ईसवीं सन् के समय में भरतमुनि द्वारा संकलित नाट्यशास्‍त्र में ध्‍वनि की उत्‍पत्ति के आधार पर संगीत वाद्यों को चार मुख्‍य वर्गों में विभाजित किया गया है.

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राहत फ़तेह अली खान

राहत फ़तह अली खान(जन्म 1974, फैसलाबाद, पाकिस्तान) एक पाकिस्तानी संगीतकार हैं। वह विश्व प्रसिद्ध सूफी गायक नुसरत फतह अली खान के भतीजे है । राहत भी मुख्य रूप से सूफी गीतकार हैं। कव्वाली के अलावा वह गजल भी गाते हैं। राहत भारतीय फिल्म उद्योग बालीवुड के एक जाने माने पार्श्वगायक हैं। .

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राजस्थान का संगीत

राजस्थान का संगीत एक संगीत है राजस्थान जो भारत का एक राज्य है। इसके प्रमुख संगीत के क्षेत्र जोधपुर,जयपुर,जैसलमेर तथा उदयपुर इत्यादि माने जाते हैं। ऐसा ही संगीत नज़दीकी राष्ट्र पाकिस्तान (सिंध) में भी सुनने को मिलता है। .

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शास्त्रीय संगीत

भारतीय शास्त्रीय संगीत या मार्ग, भारतीय संगीत का अभिन्न अंग है। शास्त्रीय संगीत को ही ‘क्लासिकल म्जूजिक’ भी कहते हैं। शास्त्रीय गायन ध्वनि-प्रधान होता है, शब्द-प्रधान नहीं। इसमें महत्व ध्वनि का होता है (उसके चढ़ाव-उतार का, शब्द और अर्थ का नहीं)। इसको जहाँ शास्त्रीय संगीत-ध्वनि विषयक साधना के अभ्यस्त कान ही समझ सकते हैं, अनभ्यस्त कान भी शब्दों का अर्थ जानने मात्र से देशी गानों या लोकगीत का सुख ले सकते हैं। इससे अनेक लोग स्वाभाविक ही ऊब भी जाते हैं पर इसके ऊबने का कारण उस संगीतज्ञ की कमजोरी नहीं, लोगों में जानकारी की कमी है। .

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सतिन्दर सरताज

सतिंदर सरताज (पंजाबी: ਸਤਿੰਦਰ ਸਰਤਾਜ),आधिकारिक नाम सतिंदर पाल सिंह, एक भारतीय पंजाबी गायक, गीतकार, अभिनेता और कवि है। (हिन्दी:डॉ सतिंदर सरताज दुनिया भर में संगीत प्रेमियों को सूफीवाद दिया है। उन्होने अपने हिट गीत "साईं" से प्रसिद्धि प्राप्त की। तब से उनके शो पंजाबी प्रवासी भारतीयों के बीच दुनिया भर के कई देशों में आयोजित हुये हैं। 9 फरवरी, 2017 को उन्हें ड्रग्स और अपराध पर संयुक्त राष्ट्र संघ कार्यालय के ब्लू हॉर्ट अभियान नामक मानव तस्करी के विरुद्ध जागरूकता अभियान में शामिल किया गया। वे अभियान के तहत लोंगो के बीच संगीत के माध्यम से मानव तस्करी के विरुद्ध जागरूकता लाएंगे तथा समाज पर इससे पड़ने वाले प्रभाव के बारे में बताएंगे। संगीत के माध्यम से मानव तस्करी पर लोगों में जागरूकता फैलाने एवं इसके विरूद्ध आवाज उठाने के लिए ‘म्यूजिक दू इंस्पायर’ नाम से एक एलबम 31 जनवरी, 2016 को ब्लू हार्ट द्वारा जारी किया गया था। यह एलबम आईट्यून्स अमेजन और गूगल प्ले पर आनलाइन उपलब्ध है। इस एलबम को प्रसिद्ध संगीतकार ए आर रहमान, गायक सोनू निगम सहित विश्व भर के 60 से अधिक कलाकारों ने मिलकर बनाया है। उल्लेखनीय है कि ब्लू हॉर्ट अभियान संयुक्त राष्ट्र के ड्रग्स एवं क्राइम ऑफिस द्वारा संचालित किया जा रहा है। .

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हिन्दी सिनेमा

हिन्दी सिनेमा, जिसे बॉलीवुड के नाम से भी जाना जाता है, हिन्दी भाषा में फ़िल्म बनाने का उद्योग है। बॉलीवुड नाम अंग्रेज़ी सिनेमा उद्योग हॉलिवुड के तर्ज़ पर रखा गया है। हिन्दी फ़िल्म उद्योग मुख्यतः मुम्बई शहर में बसा है। ये फ़िल्में हिन्दुस्तान, पाकिस्तान और दुनिया के कई देशों के लोगों के दिलों की धड़कन हैं। हर फ़िल्म में कई संगीतमय गाने होते हैं। इन फ़िल्मों में हिन्दी की "हिन्दुस्तानी" शैली का चलन है। हिन्दी और उर्दू (खड़ीबोली) के साथ साथ अवधी, बम्बईया हिन्दी, भोजपुरी, राजस्थानी जैसी बोलियाँ भी संवाद और गानों में उपयुक्त होते हैं। प्यार, देशभक्ति, परिवार, अपराध, भय, इत्यादि मुख्य विषय होते हैं। ज़्यादातर गाने उर्दू शायरी पर आधारित होते हैं।भारत में सबसे बड़ी फिल्म निर्माताओं में से एक, शुद्ध बॉक्स ऑफिस राजस्व का 43% का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि तमिल और तेलुगू सिनेमा 36% का प्रतिनिधित्व करते हैं,क्षेत्रीय सिनेमा के बाकी 2014 के रूप में 21% का गठन है। बॉलीवुड भी दुनिया में फिल्म निर्माण के सबसे बड़े केंद्रों में से एक है। बॉलीवुड कार्यरत लोगों की संख्या और निर्मित फिल्मों की संख्या के मामले में दुनिया में सबसे बड़ी फिल्म उद्योगों में से एक है।Matusitz, जे, और पायानो, पी के अनुसार, वर्ष 2011 में 3.5 अरब से अधिक टिकट ग्लोब जो तुलना में हॉलीवुड 900,000 से अधिक टिकट है भर में बेच दिया गया था। बॉलीवुड 1969 में भारतीय सिनेमा में निर्मित फिल्मों की कुल के बाहर 2014 में 252 फिल्मों का निर्माण। .

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जगजीत सिंह

जगजीत सिंह (८ फ़रवरी १९४१ - १० अक्टूबर २०११) का नाम बेहद लोकप्रिय ग़ज़ल गायकों में शुमार हैं। उनका संगीत अंत्यंत मधुर है और उनकी आवाज़ संगीत के साथ खूबसूरती से घुल-मिल जाती है। खालिस उर्दू जानने वालों की मिल्कियत समझी जाने वाली, नवाबों-रक्कासाओं की दुनिया में झनकती और शायरों की महफ़िलों में वाह-वाह की दाद पर इतराती ग़ज़लों को आम आदमी तक पहुंचाने का श्रेय अगर किसी को पहले पहल दिया जाना हो तो जगजीत सिंह का ही नाम ज़ुबां पर आता है। उनकी ग़ज़लों ने न सिर्फ़ उर्दू के कम जानकारों के बीच शेरो-शायरी की समझ में इज़ाफ़ा किया बल्कि ग़ालिब, मीर, मजाज़, जोश और फ़िराक़ जैसे शायरों से भी उनका परिचय कराया। जगजीत सिंह को सन २००३ में भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। फरवरी २०१४ में आपके सम्मान व स्मृति में दो डाक टिकट भी जारी किए गए। .

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वी दक्षिणामूर्ति

वेंकटेश्वरन दक्षिणमूर्ति (വി ദക്ഷിണാമൂര്‍ത്തി.; 9 दिसम्बर 1919 – 2 अगस्त 2013) मलयाली, तमिल एवं हिन्दी सिनेमा के एक अनुभवी कर्नाटक संगीतकार एवं संगीत निर्देशक थे जो मुख्यतः मलयाली सिनेमा में काम करते थे। उन्होंने लगभग 125 फ़िल्मों में काम किया। उन्होंने अपने ५० वर्ष के कार्यकाल में 859 गानों पर का निर्माण किया। .

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ख्याल (मालवी गीत)

हास्य प्रधान मालवी गीत और चित्र को ख्याल कहते हैं। किंतु इसका अभिप्राय राजस्थान में एक प्रकार के लोकनाट्य से समझा जाता है जो उत्तर प्रदेश की नौटंकी तथा मालवा के माच से मिलता जुलता है। यह खुले प्रांगण में खेला जाता है। चारों ओर दर्शक बैठते हैं, बीच में रंगमंच के लिए स्थान खाली रहता है। वहाँ ख्याल प्रदर्शित करने वाली मंडली बैठती है; नगाड़ा, ढोल, सारंगी और हारमोनियम का बाजे के रूप में प्रयोग किया जाता है। ख्याल की कथा की अभिव्यक्ति लावनी, दूहा, दोहा, चौबोला, चौपाई, छंद, शेर, कवित्त, छप्पय आदि छंदो तथा पांड, सोरठ, कालंगड़ा, आसावरी अदि किसी राग रागनी में गाकर की जाती है। अभिनेता ऊँचे स्वर से गाता हुआ भूमिका के अनुरूप अभिनय करता है। ख्याल के अभिनेता मंच से बाहर रहकर गणपति और सरस्वती पूजन करते हैं। तदनंतर मंच पर एक एक कर भंगी, भिश्ती आदि आकर मंच की सफाई, झाड़पोेंछ का अभिनय करते हैं। तदनंतर आख्यान का मुख्य नायक उपस्थित होकर आत्मपरिचय देता है और ख्याल आरंभ होता हैं। ख्याल का विषय पौराणिक, ऐतिहासिक अथवा प्रेम कथा होते है। इस नाटक का आरंभ मूलत: वीरपूजा की भावना से हुआ था। अनेक कवियों ने राजस्थानी भाषा में ख्यालों की रचना की है। .

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ग़ुलाम मुस्तफ़ा दुर्रानी

ग़ुलाम मुस्तफ़ा दुर्रानी, सामान्यतः संक्षिप्त रूप में जी॰एम॰ दुर्रानी (1919 – 8 सितम्बर 1988) (درانى مصطفى غلام, دراني مصطفی غلام, ਗੁਲਾਮ ਮੁਸਤਫਾ ਦੁੱਰਾਨੀ) लोकप्रिय और प्रसिद्ध भारतीय पार्श्वगायक, अभिनेता और संगीत निर्देशक थे। .

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गिरिजा देवी

गिरिजा देवी (8 मई 1929 - 24 अक्टूबर 2017) सेनिया और बनारस घरानों की एक प्रसिद्ध भारतीय शास्त्रीय गायिका थीं। वे शास्त्रीय और उप-शास्त्रीय संगीत का गायन करतीं थीं। ठुमरी गायन को परिष्कृत करने तथा इसे लोकप्रिय बनाने में इनका बहुत बड़ा योगदान है। गिरिजा देवी को सन २०१६ में पद्म विभूषण एवं १९८९ में भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। .

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गोपाल बाबू गोस्वामी

गोपाल बाबू गोस्वामी (1941 - 1996) उत्तराखण्ड राज्य के एक सुविख्यात व लोकप्रिय कुमाऊँनी लोकगायक थे। .

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गीत बैठकी

गीत बैठकी खड़ी होली या गीत बैठकी उत्तराखंड के कुमाऊँ मंडल की सरोवर नगरी नैनीताल और अल्मोड़ा जिले में होली के अवसर पर आयोजित की जाती हैं। यहाँ नियत तिथि से काफी पहले ही होली की मस्ती और रंग छाने लगते हैं। इस रंग में सिर्फ अबीर-गुलाल का टीका ही नहीं होता बल्कि बैठकी होली और खड़ी होली गायन की शास्त्रीय परंपरा भी शामिल होती है। बरसाने की लठमार होली के बाद अपनी सांस्कृतिक विशेषता के लिए कुमाऊंनी होली को याद किया जाता है। वसंत के आगमन पर हर ओर खिले फूलों के रंगों और संगीत की तानों का ये अनोखा संगम दर्शनीय होता है। शाम के समय कुमाऊं के घर घर में बैठक होली की सुरीली महफिलें जमने लगती है। गीत बैठकी में होली पर आधारित गीत घर की बैठक में राग रागनियों के साथ हारमोनियम और तबले पर गाए जाते हैं। इन गीतों में मीराबाई से लेकर नज़ीर और बहादुर शाह ज़फ़र की रचनाएँ सुनने को मिलती हैं। गीत बैठकी में जब रंग छाने लगता है तो बारी बारी से हर कोई छोड़ी गई तान उठाता है और अगर साथ में भांग का रस भी छाया तो ये सिलसिला कभी कभी आधी रात तक तो कभी सुबह की पहली किरण फूटने तक चलता रहता है। होली की ये परंपरा मात्र संगीत सम्मेलन नहीं बल्कि एक संस्कार भी है। ये बैठकें आशीर्वाद के साथ संपूर्ण होती हैं जिसमें मुबारक हो मंजरी फूलों भरी...या ऐसी होली खेले जनाब अली...जैसी ठुमरियाँ गई जाती हैं। गीत बैठकी की महिला महफ़िलें भी होती हैं। पुरूष महफिलों में जहाँ ठुमरी और ख़याल गाए जाते हैं वहीं महिलाओं की महफिलों का रुझान लोक गीतों की ओर होता है। इनमें नृत्य संगीत तो होता ही है, वे स्वांग भी रचती हैं और हास्य की फुहारों, हंसी के ठहाकों और सुर लहरियों के साथ संस्कृति की इस विशिष्टता में नए रोचक और दिलकश रंग भरे जाते हैं। देवर भाभी के हंसी मज़ाक से जुड़े गी तो होते ही हैं राजनीति और प्रशासन पर व्यंग्य भी होता है। होली गाने की ये परंपरा सिर्फ कुमाऊं अंचल में ही देखने को मिलती है।” इसकी शुरूआत यहां कब और कैसे हुई इसका कोई ऐतिहासिक या लिखित लेखाजोखा नहीं है। कुमाऊं के प्रसिद्द जनकवि गिरीश गिर्दा ने होली बैठकी के सामाजिक शास्त्रीय संदर्भों और इस पर इस्लामी संस्कृति और उर्दू के असर के बारे में गहराई से अध्ययन किया है। वो कहते हैं कि “यहां की होली में अवध से लेकर दरभंगा तक की छाप है। राजे-रजवाड़ों का संदर्भ देखें तो जो राजकुमारियाँ यहाँ ब्याह कर आईं वे अपने साथ वहाँ के रीति रिवाज भी साथ लाईं। ये परंपरा वहां भले ही खत्म हो गई हो लेकिन यहां आज भी कायम हैं। यहां की बैठकी होली में तो आज़ादी के आंदोलन से लेकर उत्तराखंड आंदोलन तक के संदर्भ पाए जाते हैं।” .

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आबिदा परवीन

आबिदा परवीन (जन्म 20 फ़रवरी 1954), पाकिस्तान से दुनिया के सबसे बड़े सूफी गायकों में से एक, संगीतकार, चित्रकार और उद्यमी है। उसे अक्सर 'सूफी संगीत की रानी' कहा जाता है। सार्क द्वारा उन्हें 'शांति राजदूत' बनाया जा रहा है। वह लार्काणा में एक सिंधी सूफी परिवार में पैदा हुई और पली। उनके पिता गुलाम हैदर, एक प्रसिद्ध गायक और संगीत शिक्षक थे। उन्होंने उसे प्रशिक्षित किया। वह पंप आर्गन, कीबोर्ड और सितार बजाती है।1970 के दशक के शुरूआत में परवीन ने प्रदर्शन करना शुरू कर दिया और 1990 के दशक में वैश्विक प्रमुखता में आई। 1993 से, परवीन ने विश्व स्तर पर दौरे करना शुरू किया, जब उसने कैलिफ़ोर्निया के ब्यूना पार्क में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय संगीत कार्यक्रम किया। परवीन पाकिस्तान के लोकप्रिय संगीत शो कोक स्टूडियो में भी आती हैं और वह दक्षिण एशिया प्रतियोगिता में सुर क्षेत्र पर एक जज रही हैं, जिसमें रूणा लैला और आशा भोसले के साथ आयशा टाकिया द्वारा होस्ट किया गया है। इसमें आतिफ असलम और हिमेश रेशमिया भी शामिल हैं। वह कई भारतीय और पाकिस्तानी संगीत रियलिटी शो में प्रकाशित हुई थी जिसमें पाकिस्तान आइडोल, छोटे उस्ताद और स्टार वॉयस ऑफ इंडिया शामिल हैं। सूफी सनसनी होने के कारण वह दुनिया के 500 सबसे प्रभावशाली मुसलमानों में से एक है। अपने दर्शकों में हिस्टीरिया को प्रेरित करने की शक्ति के साथ परवीन एक "ग्लोबल मिस्टिक सूफी एंबेसडर" है। परवीन को दुनिया के सबसे महान रहस्यवादी गायकों में से एक के रूप में जाना जाता है। वह, मुख्य रूप से गजल, ठुमरी, ख़याल, कव्वाली, राग, सूफी रॉक, शास्त्रीय, अर्द्ध-शास्त्रीय संगीत ख़याल गाती है और एक एकल शैली के साथ तबला और हारमोनियम का उपयोग कर सूफी कवियों की शाइरी को लेकर काफ़ी गायन उस की ख़ास ख़ास ताकत है। परवीन उर्दू, सिंधी, सरायकी, पंजाबी, अरबी और फारसी में गाती है। नेपाल में काठमांडू में एक संगीत कार्यक्रम जिसमें गोविंदा ने भाग लिया था, में नेपाली गायक तारा देवी के नेपाली भाषा में एक प्रसिद्ध गीत "उकली ओरारी हारुमा" को भी उसने गाया था। परवीन को अपने गीतों  एल्बम राक-ए-बिस्मिल से यार को हमने, बुलेह शाह की कविता तेरे इश्क नाचाया  का गायन बेहद ज़ोर की आवाज से करने के लिए सबसे बिहतर जाना जाता है।  पाकिस्तान का दूसरा सबसे बड़ा नागरिक पुरस्कार हिलाल-ए-इम्तियाज़ उसको 2012 में पाकिस्तान के राष्ट्रपति द्वारा प्रदान किया गया। .

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आर्य कन्या गुरुकुल, लुधियाना

लुधियाना का आर्य कन्या गुरुकुल लड़कियों का गुरुकुल है। पंजाब में यह अपने तरह का अकेला गुरुकुल है जहाँ लड़कियाँ अध्ययन के साथ-साथ वैदिक परम्पराएँ भी सीखतीं हैं। यह गुरुकुल लुधियाना के शास्त्रीनगर क्षेत्र में स्थित आरएस मॉदल सेनियर सेकेण्डरी स्कूल (R.S.MODEL SR.SEC.SCHOOL) के प्रांगण (CAMPUS) में स्थित है। इस GURUKUL विद्यालय का उद्देश्य वैदिक एवं नैतिक मूल्यों के साथ-साथ आधुनिक शिक्षा देना है। छात्राएँ चार बजे सुबह उठ जातीं हैं और सन्ध्या करतीं हैं। इन्हें हार्मोनियम बजाना एवं हवन करना सिखाया जाता है। बच्चियाँ शाम की 'संध्या' के समय (VEDIC MANTRA) पढ़तीं हैं और इसकी व्याख्या (EXPLANATION) भी करतीं हैं। .

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इलैयाराजा

इलैयाराजा (तमिल: இளையராஜா) (जन्म: डेनियल राजैया २ जून, १९४३) भारतीय फिल्मों के संगीतकार, गीतकार तथा गायक हैं। इन्होने मुख्यतः दक्षिण भारतीय भाषाओं में बनी फ़िल्मों में संगीत दिया है। इनकी कर्मभूमि चेन्नई है। ये जन्म से दलीत थे। .

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कुमाऊँनी होली

उत्तराखण्ड राज्य के कुमाऊँ क्षेत्र में होली का त्यौहार एक अलग तरह से मनाया जाता है, जिसे कुमाऊँनी होली कहते हैं। कुमाऊँनी होली का अपना ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्त्व है। यह कुमाऊँनी लोगों के लिए सबसे महत्वपूर्ण त्यौहारों में से एक है, क्योंकि यह केवल बुराई पर अच्छाई की जीत का ही नहीं, बल्कि पहाड़ी सर्दियों के अंत का और नए बुआई के मौसम की शुरुआत का भी प्रतीक है, जो इस उत्तर भारतीय कृषि समुदाय के लिए बहुत महत्व रखता है। होली का त्यौहार कुमाऊँ में बसंत पंचमी के दिन शुरू हो जाता है। कुमाऊँनी होली के तीन प्रारूप हैं; बैठकी होली, खड़ी होली और महिला होली। इस होली में सिर्फ अबीर-गुलाल का टीका ही नहीं होता, वरन बैठकी होली और खड़ी होली गायन की शास्त्रीय परंपरा भी शामिल होती है। बसंत पंचमी के दिन से ही होल्यार प्रत्येक शाम घर-घर जाकर होली गाते हैं, और यह उत्सव लगभग २ महीनों तक चलता है। .

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केदार शर्मा

केदार शर्मा (संवत् 1954 - संवत् 2023) चित्रकार एवं हिन्दी साहित्यकार थे। .

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कीबोर्ड उपकरण

पियानो, एक आम कीबोर्ड उपकरण कीबोर्ड उपकरण एक ऐसा संगीत उपकरण है जिसे संगीतमय कीबोर्ड के प्रयोग से बजाया जाता है। इनमें से सबसे सामान्य पियानो है। व्यापक रूप से इस्तेमाल किए जाने वाले अन्य कीबोर्ड उपकरणों में विभिन्न प्रकार के यंत्रों के साथ-साथ अन्य यांत्रिक, विद्युत यांत्रिक और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण शामिल हैं। प्रचलित भाषा में, ज्यादातर इसे कीबोर्ड-शैली सिंथेसाइज़र के रूप में संदर्भित किया जाता है। पाइप यंत्र, हर्डी गर्डी, क्लेवीकोर्ड और हार्पसीकोर्ड आरम्भिक कीबोर्ड उपकरण हैं। ऑर्गन निस्संदेह इनमें से सबसे पुराना है, जो ई.पू.

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अदिति महसिन

अदिति महसिन (Aditi Mohsin; जन्म: ढाका) एक बांग्लादेशी गायक हैं। वह एक मधुर रवींद्र संगीत गायक है। .

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अहमद और मुहम्मद हुसैन

उस्ताद अहमद हुसैन और मुहम्मद हुसैन भारत के राजस्थान सूबे के शहर जयपुर से दो भाई हैं जो क्लासिकी ग़ज़ल गायकी करते हैं। उनके वालिद साहिब का नाम उस्ताद अफ़्ज़ल हुसैन है जो ग़ज़ल और ठुमरी के उस्ताद माने जाते थे। .

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