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सोडियम क्लोराइड

सूची सोडियम क्लोराइड

सोडियम क्लोराइड सोडियम का एक अकार्बनिक यौगिक है। इसका रासायनिक सूत्र NaCl होता है, जो 1:1 अनुपात में सोडियम और क्लोराइड के आयन को दर्शाता है। .

9 संबंधों: ठोस, जठराम्ल, जैवोपचारण, खारा जल, आहारीय सोडियम, काला नमक, क्रिस्टलीय ठोस, क्षार धातु, अकार्बनिक यौगिकों की सूची

ठोस

ठोस (solid) पदार्थ की एक अवस्था है, जिसकी पहचान पदार्थ की संरचनात्मक दृढ़ता और विकृति (आकार, आयतन और स्वरूप में परिवर्तन) के प्रति प्रत्यक्ष अवरोध के गुण के आधार पर की जाती है। ठोस पदार्थों में उच्च यंग मापांक और अपरूपता मापांक होते है। इसके विपरीत, ज्यादातर तरल पदार्थ निम्न अपरूपता मापांक वाले होते हैं और श्यानता का प्रदर्शन करते हैं। भौतिक विज्ञान की जिस शाखा में ठोस का अध्ययन करते हैं, उसे ठोस-अवस्था भौतिकी कहते हैं। पदार्थ विज्ञान में ठोस पदार्थों के भौतिक और रासायनिक गुणों और उनके अनुप्रयोग का अध्ययन करते हैं। ठोस-अवस्था रसायन में पदार्थों के संश्लेषण, उनकी पहचान और रासायनिक संघटन का अध्ययन किया जाता है। .

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जठराम्ल

जठराम्ल (.

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जैवोपचारण

तेल रिसावजैवोपचारण (जीव+उपचार+ण .

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खारा जल

खारा जल अथवा नमकीन पानी प्रकृति में पाए जाने वाले नमक युक्त जल को कहते हैं। सामान्यतः जल में घुले नमक में सोडियम क्लोराइड की प्रधानता होती है लेकिन अन्य लवण भी महत्वपूर्ण होते हैं। पानी में घुले नमक की मात्रा को लवणता कहते हैं और यह सामन्यतः ग्राम/किलोग्राम जल या अंश प्रतिहजार (‰) के रूप में व्यक्त की जाती है। खारा जल मुख्यतः समुद्री जल के रूप में पाया जाता है लेकिन अन्य रूपों brackish जल जिसकी लवणता समुद्री जल से कम होती है तथा briny जल के रूप में भी पाया जाता है जिनकी लवणता समुद्री जल से काफ़ी आधिक पाई जाती है। .

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आहारीय सोडियम

आहारीय सोडियम शरीर की कोशिकाओं के अन्दर और बाहर जल के सन्तुलन को बनायें रखने में सहायक होता है। इसकी कमी से मांसपेशियों में ऐठन एडेमा, हो सकता है, किन्तु इसकी अधिकता से हानिकारक परिणाम जैसे उच्च रक्तचाप, गुर्दे की बीमारियां, यकृत का सूत्रणरोग और संकुलन संबंधी हृदय रोग हो सकते है। सोडियम मूत्र और विशेषतः पसीने में सोडियम क्लोराइड के रूप में निकलता है। कभी-कभी आहारों में जैव सोडियम आवश्यकता की पूर्ति के लिये पर्याप्त नही होता। अतः सोडियम क्लोराइड या खाने का नमक भोजन में शामिल करना पडता है। .

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काला नमक

काला नमक के टुकड़े काला नमक का पाउडर काला नमक (बंगला: बिट लबन (বিট লবণ); नेपाली: बिरे नुन; Hindi काला नमक; गुजराती: સંચળ संचल) भारतीय उपमहाद्वीप में निर्मित और भारतीय भोजन में बड़े पैमाने पर प्रयोग किया जाने वाला खाद्य नमक है। काले नमक का प्रयोग चाट, चटनी, रायता और कई अन्य भारतीय व्यंजनों में किया जाता है। भारतीय चाट मसाला, अपनी खुशबू और स्वाद के लिए काले नमक पर निर्भर करता है। काले नमक में मुख्यतः सोडियम क्लोराइड होता है। इसके अतिरिरिक्त इसमें सोडियम सल्फेट, आइरन सल्फाइड, हाइड्रोजन सल्फाइड आदि की कुछ मात्रा भी मिश्रित होती है। सोडियम क्लोराइड के कारण ही यह नमकीन स्वाद देता है, आइरन सल्फाइड के कारण इसका गहरा बैंगनी रंग दिखता है और सभी सल्फर लवण इसके विशिष्ट स्वाद और गंध के लिये जिम्मेदार हैं। इनमें से हाइड्रोजन सल्फाइड मुख्यत: इसके गंध का कारण है। .

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क्रिस्टलीय ठोस

क्रिस्टलीय ठोस साधारणतः लघु क्रिस्टलों की अत्यधिक संख्या से बना होता है, उनमें प्रत्येक क्रिस्टल का निश्चित ज्यामितीय आकार होता है। क्रिस्टल में परमाणुओं, अणुओं अथवा आयनों का क्रम सुव्यवस्थित होता है। इसमें दीर्घ परासी व्यवस्था होती है अर्थात् कणों की व्यवस्थाका खास पैटर्न होता है जिसकी निस्चित क्रम से पुनरावृत्ति होती है। क्रिस्टलीय ठोसो का गलनांक निश्चित होता है। क्रिस्टलीय ठोस विषमदैशिक प्रकृति के होते हैं अर्थात् उनके कुछ भौतिक गुण जैसे विद्युतीय प्रतिरोधकता और अपवर्तनांक एक ही क्रिस्टल में भिन-भिन दिशाओं में मापने पर भिन-भिन मान प्रदर्शित करते हैं। यह अलग- अलग दिशाओं में कणों की भिन व्यवस्था से उत्पन्न होता है। भिन-भिन दिशाओं में कणों की व्यवस्था अलग होने पर एक ही भौतिक गुण का मान प्रत्येक दिशा में भिन पाया जाता है। उदाहरण- सोडियम क्लोराइड, क्वार्ट्ज आदि। अधिकतर ठोस पदार्थ क्रिस्टलीय प्रकृति के होते हैं। उदाहरण के लिए सभी धात्विक तत्व; जैसे- लोहा, ताँबा और चाँदी; अधात्विक तत्व; जैसे-सल्फर, फॉसफोरस और आयोडीन एवं यौगिक जैसे सोडियम क्लोराइड, जिंक सल्पाइड और नेप्थेलीन क्रिस्टलीय ठोस हैं। .

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क्षार धातु

आवर्त सारणी के तत्त्व लिथियम (Li), सोडियम (Na), पोटैशियम (K), रुबिडियम (Rb), सीजियम (Cs) और फ्रांसियम (Fr) के समूह को क्षार धातुएँ (Alkali metals) कहते हैं। यह समूह आवर्त सारणी के एस-ब्लॉक में स्थित है। क्षार धातुएँ समान गुण वाली हैं। वे सभी मुलायम, चमकदार तथा मानक ताप तथा दाब पर उच्च अभिक्रियाशील होती हैं तथा कोमलता के कारण एक चाकू से आसानी से काटी जा सकती हैं। चूंकि ये शीघ्र अभिक्रिया करने वाले हैं, अत: वायु तथा इनके बीच की रासायनिक अभिक्रिया को रोकने हेतु इन्हें तेल आदि में संग्रहित रखना चाहिये। यह गैर मुक्त तत्व के रूप में प्राकृतिक रूप से लवण में पाए जाते हैं। सभी खोजे गये क्षार धातुएँ अपनी मात्रा के क्रम में प्रकृति में पाए जाते हैं जिनमें क्रमवार सोडियम जो सबसे आम हैं, तथा इसके बाद पोटैशियम, लिथियम, रुबिडियम, सिज़ियम तथा अंतिम फ्रांसियम, फ्रांसियम अपने उच्च रेडियोधर्मिता के कारण सबसे दुर्लभ है। .

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अकार्बनिक यौगिकों की सूची

इस सूची में अधिकांश रासायनिक यौगिकों के नाम आईयूपीएसी (IUPAC) नाम दिये गये हैं किन्तु कहीं-कहीं उनके पारम्परिक नाम भी साथ में दे दिये गये हैं।.

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