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सेतुसमुद्रम जहाजरानी नहर परियोजना

सूची सेतुसमुद्रम जहाजरानी नहर परियोजना

सेतुसमुद्रम जहाजरानी नहर परियोजना भारत एवं श्रीलंका के मध्य पाक जलडमरूमध्य और मन्नार की खाड़ी को जोड़ने का प्रस्ताव है। इसके द्वारा सेतुसमुद्रम क्षेत्र के छिछले सागर में एक जहाजरानी उपयुक्त नहर बनाकर भारतीय प्रायद्वीप की परिधि पर एक नौवहन मार्ग सुलभ होगा। अभी यह मार्ग छिछले सागर एवं उसमें स्थित द्वीपों एवं चट्टानों की शृंखल जिसे रामार पालम (तमिल: இராமர் பாலம் Rāmar pālam), रामसेतु और ऍडम्स ब्रिज कहा जाता है, के कारण यह मार्ग सुलभ नहीं है और जहाजों को श्रीलंका द्वीप का पूरा चक्कर लगाकर अनावश्यक लम्बा मार्ग तय करना पड़ता है। इस परियोजना में 44.9 नॉटिकल मील (83 कि.मी) लम्बा एक गहरा जल मार्ग खोदा जायेगा जिसके द्वारा पाक जलडमरुमध्य को मनार की खाड़ी से जोड़ दिया जायेगा। १८६० में अल्फ़्रेड डुन्डास टेलर द्वारा इसकी अभिकल्पना पहली बार की गयी थी, जिसे हाल ही के वर्षों में भारत सरकार द्वारा स्वीकृति मिली है। इस परियोजना के तहत रामसेतु के चूनापत्थर की शिलाओं को तोड़ा जायेगा, जिसके कारण कुछ संगठनों ने विरोध जताया है। उनका कहना है कि इससे हिन्दुओं की धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचेगी, साथ ही पर्यावरण और आर्थिक स्तर पर भी हानि होगी। इसके अलावा कुछ सुरक्षा कारण भि बताये गए हैं। इनमें से कई पार्टियां या संगठन इस परियोजना का कार्यान्वयन पहले दिये गए ५ वैकल्पिक तरीकों से करने का अनुमोदन करती हैं। इन वैकल्पिक तरीकों से श्रीरामसेतु को हानि भी नहीं पहुंचेगी जिससे उसे पवित्र मानने वाले हिन्दुओं की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचेगी। फ़िल्हाल निर्धारित परियोजना में एक मध्य मार्ग चुना गया है जिससे लघुतम मार्ग सुलभ होगा और साथ ही न्यूनतम रखरखाव एवं अनुरक्षण व्यय होगा। इससे पूर्व विश्व के अन्य जहाजरानी नहर परियोजनाएं जैसे स्वेज नहर एवं पनामा नहर भूमि स्थित नहर परियोजनाएं थी। .

2 संबंधों: बंगाल की खाड़ी, रामसेतु

बंगाल की खाड़ी

बंगाल की खाड़ी विश्व की सबसे बड़ी खाड़ी है और हिंद महासागर का पूर्वोत्तर भाग है। यह मोटे रूप में त्रिभुजाकार खाड़ी है जो पश्चिमी ओर से अधिकांशतः भारत एवं शेष श्रीलंका, उत्तर से बांग्लादेश एवं पूर्वी ओर से बर्मा (म्यांमार) तथा अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह से घिरी है। बंगाल की खाड़ी का क्षेत्रफल 2,172,000 किमी² है। प्राचीन हिन्दू ग्रन्थों के अन्सुआर इसे महोदधि कहा जाता था। बंगाल की खाड़ी 2,172,000 किमी² के क्षेत्रफ़ल में विस्तृत है, जिसमें सबसे बड़ी नदी गंगा तथा उसकी सहायक पद्मा एवं हुगली, ब्रह्मपुत्र एवं उसकी सहायक नदी जमुना एवं मेघना के अलावा अन्य नदियाँ जैसे इरावती, गोदावरी, महानदी, कृष्णा, कावेरी आदि नदियां सागर से संगम करती हैं। इसमें स्थित मुख्य बंदरगाहों में चेन्नई, चटगाँव, कोलकाता, मोंगला, पारादीप, तूतीकोरिन, विशाखापट्टनम एवं यानगॉन हैं। .

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रामसेतु

आकाश से रामसेतु का दृश्य रामसेतु (तमिल: இராமர் பாலம், मलयालम: രാമസേതു,, अंग्रेजी: Adam's Bridge; आदम का पुल), तमिलनाडु, भारत के दक्षिण पूर्वी तट के किनारे रामेश्वरम द्वीप तथा श्रीलंका के उत्तर पश्चिमी तट पर मन्नार द्वीप के मध्य चूना पत्थर से बनी एक शृंखला है। भौगोलिक प्रमाणों से पता चलता है कि किसी समय यह सेतु भारत तथा श्रीलंका को भू मार्ग से आपस में जोड़ता था। हिन्दू पुराणों की मान्यताओं के अनुसार इस सेतु का निर्माण अयोध्या के राजा राम श्रीराम की सेना के दो सैनिक जो की वानर थे, जिनका वर्णन प्रमुखतः नल-निल नाम से रामायण में मिलता है, द्वारा किये गया था, यह पुल ४८ किलोमीटर (३० मील) लम्बा है तथा मन्नार की खाड़ी (दक्षिण पश्चिम) को पाक जलडमरूमध्य (उत्तर पूर्व) से अलग करता है। कुछ रेतीले तट शुष्क हैं तथा इस क्षेत्र में समुद्र बहुत उथला है, कुछ स्थानों पर केवल ३ फुट से ३० फुट (१ मीटर से १० मीटर) जो नौगमन को मुश्किल बनाता है। यह कथित रूप से १५ शताब्दी तक पैदल पार करने योग्य था जब तक कि तूफानों ने इस वाहिक को गहरा नहीं कर दिया। मन्दिर के अभिलेखों के अनुसार रामसेतु पूरी तरह से सागर के जल से ऊपर स्थित था, जब तक कि इसे १४८० ई० में एक चक्रवात ने तोड़ नहीं दिया। .

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