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सागर

सूची सागर

कोई विवरण नहीं।

192 संबंधों: चंद्रकांत देवताले, चौदहवीं लोकसभा, चेन्नई, टीरोब्रैकिया, एलियट बीच, एकियूरा, ऐरण, ड्यूटीरियम, डॉ॰ हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय, तट, तटबन्ध, तात्या टोपे, तारण तरण महासभा, ताजमहल पैलेस एंड टॉवर, तिरुवन्मियूर बीच, तुर्कमेनिस्तान, तूफ़ान, द्वीपसमूह, नदी, नारियल, नाकाबन्दी, निडारिया, न्यायालयिक भूकम्प विज्ञान, नौरादेही संरक्षित वन और अभयारण्य, नेल्लनकरै बीच, पद्माकर, पन्नालाल जैन, पलवक्कम बीच, पशु बीमा, पहला विश्व युद्ध, पारिस्थितिकी, पुलीकट, प्रांगार चक्र, प्राकृतिक दृश्य, प्रवाल द्वीप, प्रवेशिका, प्रकाशस्तम्भ, पृथ्वी प्रणाली विज्ञान, पृथ्वी का वायुमण्डल, पृथ्वी की आतंरिक संरचना, पेबल बीच, चेन्नई, पेलैजिक क्षेत्र, बन्द जलसम्भर, बमोरी, बाल्टिक सागर, बालूतट, बिस्मिल, बगुला, बुन्देलखण्ड, बुंदेलखंड के शासक, ..., ब्र.जयसागर जी, ब्रोमीन, बोहोल सागर, बीना, बीमा का इतिहास, भारत में राष्ट्रीय राजमार्गों की सूची - प्रदेश अनुसार, भारत में स्मार्ट नगर, भारत में विश्वविद्यालयों की सूची, भारत के राष्ट्रीय राजमार्गों की सूची - संख्या अनुसार, भारत २०१०, भारतीय थलसेना, भारतीय रसायन का इतिहास, भूमध्य सागर, भूमि उद्धार, मध्य प्रदेश, मध्य प्रदेश के शहरों की सूची, महाद्वीपीय ताक, महाभारत, महाश्वेता देवी, माणिकचंद्र वाजपेयी, मामल्लपुरम, मालवा, मित्र वरुण, मकर संक्रान्ति, मछली प्रव्रजन, मुहाना, मैग्नीसियम, मेक्सिको की खाड़ी, यार्चा गुम्बा, युरिप्टेरिडा, रामेश्वरम तीर्थ, रामेश्वरम शहर, राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान, रूड़की, राष्‍ट्रीय समुद्र प्रौद्योगिकी संस्‍थान, राहतगढ़, राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, रक्षाबन्धन, रुडॉल्फ डीजल, रेती (बैकशोर), रॉबिन्सन हेलीकॉप्टर कंपनी, रॉस सागर, लहरबाज़ी, लैगून, लूटजैनिडाए, शाहगढ़, शिमला, शिलांग के पर्यटन स्थल, शीतोष्ण कटिबन्ध, शीर्षपाद, समानता की प्रतिमा, समुद्र तल, समुद्र विज्ञान, समुद्र विज्ञानी, समुद्री डकैती, समुद्री पठार, समुद्री पुरातत्व, समुद्री मकड़ी, समुद्री युद्ध, समुद्री सर्प, समुद्री जीवविज्ञान, समुद्रीय मानचित्र, साधारण नमक, सार्क, सागर झील (लाखा बंजारा झील), सागर पब्लिक स्कूल भोपाल, सागर शहर, सागर ज़िला, सागर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र, सागरतट, सागरतह, सागरगत ज्वालामुखी, साइफोजोआ, सुलावेसी सागर, सुलु सागर, सुंदरी, स्वदेश (हिन्दी समाचारपत्र), स्कोशिया सागर, सैल्मन, सेतु, सोडियम, सीमांत समुद्र, हरिसिंह गौर, हिमानी शिवलिंग, होटल द पार्क कैलन्गुटे गोवा, जल (अणु), जल प्रदूषण, जल मार्ग, जल सर्वेक्षण, जलमण्डल, जलक्रीड़ाओं की सूची, जहाजरानी का इतिहास, जापान, जापान का इतिहास, जिब्राल्टर, ज्वारनदीमुख, ज्वारीय शक्ति, जीवाश्म, ईस्ट कोस्ट रोड, विश्व के प्रमुख सागरों की सूची, वेडेल सागर, वॉयेजर द्वितीय, खनित्रपाद, खाड़ी, गंगासागर, गोल्डन बीच, चेन्नई, ऑस्कर के लिए भारत की आधिकारिक प्रविष्टियों की सूची, ओडिआ चलचित्र सूची, ओख़ोत्स्क सागर, आबचंद की गुफ़ाएँ, आराफ़ूरा सागर, आहारीय आयोडीन, कच्छ का रण, कमल हासन, कालपी, काला सागर, कालिंजर दुर्ग, किला, कुम्भलगढ़ दुर्ग, क्लोरीन, कृंतक, कैसर विल्हेम द्वितीय (जर्मनी), कोरल सागर, कोरो सागर, कोजीकोड बन्दरगाह, कोवेलॉन्ग, अड्यार बीच, अति-खारी झील, अन्तर्जलीय उच्चभूमि, अनूप झील, अपरदन, अपस्मार, अपवाह तन्त्र, अम्बैसिडाए, अगस्त २०१०, अक्षय तृतीया, अकूत, उत्प्लव, उद्धार, छांदोग्य उपनिषद, १९७७, २५ अगस्त, ७ अगस्त सूचकांक विस्तार (142 अधिक) »

चंद्रकांत देवताले

चन्द्रकांत देवताले चंद्रकांत देवताले (जन्म १९३६) का जन्म गाँव जौलखेड़ा, जिला बैतूल, मध्य प्रदेश में हुआ। उच्च शिक्षा इंदौर से हुई तथा पी-एच.डी.

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चौदहवीं लोकसभा

भारत में चौदहवीं लोकसभा का गठन अप्रैल-मई 2004 में होनेवाले आमचुनावोंके बाद हुआ था। .

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चेन्नई

चेन्नई (पूर्व नाम मद्रास) भारतीय राज्य तमिलनाडु की राजधानी है। बंगाल की खाड़ी से कोरोमंडल तट पर स्थित यह दक्षिण भारत के सबसे बड़े सांस्कृतिक, आर्थिक और शैक्षिक केंद्रों में से एक है। 2011 की भारतीय जनगणना (चेन्नई शहर की नई सीमाओं के लिए समायोजित) के अनुसार, यह चौथा सबसे बड़ा शहर है और भारत में चौथा सबसे अधिक आबादी वाला शहरी ढांचा है। आस-पास के क्षेत्रों के साथ शहर चेन्नई मेट्रोपॉलिटन एरिया है, जो दुनिया की जनसंख्या के अनुसार 36 वां सबसे बड़ा शहरी क्षेत्र है। चेन्नई विदेशी पर्यटकों द्वारा सबसे ज्यादा जाने-माने भारतीय शहरों में से एक है यह वर्ष 2015 के लिए दुनिया में 43 वें सबसे अधिक का दौरा किया गया था। लिविंग सर्वेक्षण की गुणवत्ता ने चेन्नई को भारत में सबसे सुरक्षित शहर के रूप में दर्जा दिया। चेन्नई भारत में आने वाले 45 प्रतिशत स्वास्थ्य पर्यटकों और 30 से 40 प्रतिशत घरेलू स्वास्थ्य पर्यटकों को आकर्षित करती है। जैसे, इसे "भारत का स्वास्थ्य पूंजी" कहा जाता है एक विकासशील देश में बढ़ते महानगरीय शहर के रूप में, चेन्नई पर्याप्त प्रदूषण और अन्य सैन्य और सामाजिक-आर्थिक समस्याओं का सामना करता है। चेन्नई में भारत में तीसरी सबसे बड़ी प्रवासी जनसंख्या 2009 में 35,000 थी, 2011 में 82,7 9 0 थी और 2016 तक 100,000 से अधिक का अनुमान है। 2015 में यात्रा करने के लिए पर्यटन गाइड प्रकाशक लोनली प्लैनेट ने चेन्नई को दुनिया के शीर्ष दस शहरों में से एक का नाम दिया है। चेन्नई को ग्लोबल सिटीज इंडेक्स में एक बीटा स्तरीय शहर के रूप में स्थान दिया गया है और भारत का 2014 का वार्षिक भारतीय सर्वेक्षण में भारत टुडे द्वारा भारत का सबसे अच्छा शहर रहा। 2015 में, चेन्नई को आधुनिक और पारंपरिक दोनों मूल्यों के मिश्रण का हवाला देते हुए, बीबीसी द्वारा "सबसे गर्म" शहर (मूल्य का दौरा किया, और दीर्घकालिक रहने के लिए) का नाम दिया गया। नेशनल ज्योग्राफिक ने चेन्नई के भोजन को दुनिया में दूसरा सबसे अच्छा स्थान दिया है; यह सूची में शामिल होने वाला एकमात्र भारतीय शहर था। लोनाली प्लैनेट द्वारा चेन्नई को दुनिया का नौवां सबसे अच्छा महानगरीय शहर भी नामित किया गया था। चेन्नई मेट्रोपॉलिटन एरिया भारत की सबसे बड़ी शहर अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। चेन्नई को "भारत का डेट्रोइट" नाम दिया गया है, जो शहर में स्थित भारत के ऑटोमोबाइल उद्योग का एक-तिहाई से भी अधिक है। जनवरी 2015 में, प्रति व्यक्ति जीडीपी के संदर्भ में यह तीसरा स्थान था। चेन्नई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्मार्ट सिटीज मिशन के तहत एक स्मार्ट शहर के रूप में विकसित किए जाने वाले 100 भारतीय शहरों में से एक के रूप में चुना गया है। विषय वस्तु 1 व्युत्पत्ति 2 इतिहास 3 पर्यावरण 3.1 भूगोल 3.2 भूविज्ञान 3.3 वनस्पति और जीव 3.4 पर्यावरण संरक्षण 3.5 जलवायु 4 प्रशासन 4.1 कानून और व्यवस्था 4.2 राजनीति 4.3 उपयोगिता सेवाएं 5 वास्तुकला 6 जनसांख्यिकी 7 आवास 8 कला और संस्कृति 8.1 संग्रहालय और कला दीर्घाओं 8.2 संगीत और कला प्रदर्शन 9 सिटीस्केप 9.1 पर्यटन और आतिथ्य 9.2 मनोरंजन 9.3 मनोरंजन 9.4 शॉपिंग 10 अर्थव्यवस्था 10.1 संचार 10.2 पावर 10.3 बैंकिंग 10.4 स्वास्थ्य देखभाल 10.5 अपशिष्ट प्रबंधन 11 परिवहन 11.1 एयर 11.2 रेल 11.3 मेट्रो रेल 11.4 रोड 11.5 सागर 12 मीडिया 13 शिक्षा 14 खेल और मनोरंजन 14.1 शहर आधारित टीम 15 अंतर्राष्ट्रीय संबंध 15.1 विदेशी मिशन 15.2 जुड़वां कस्बों - बहन शहरों 16 भी देखें 17 सन्दर्भ 18 बाहरी लिंक व्युत्पत्ति इन्हें भी देखें: विभिन्न भाषाओं में चेन्नई के नाम भारत में ब्रिटिश उपस्थिति स्थापित होने से पहले ही मद्रास का जन्म हुआ। माना जाता है कि मद्रास नामक पुर्तगाली वाक्यांश "मैए डी डीस" से उत्पन्न हुआ है, जिसका अर्थ है "भगवान की मां", बंदरगाह शहर पर पुर्तगाली प्रभाव के कारण। कुछ स्रोतों के अनुसार, मद्रास को फोर्ट सेंट जॉर्ज के उत्तर में एक मछली पकड़ने वाले गांव मद्रासपट्टिनम से लिया गया था। हालांकि, यह अनिश्चित है कि क्या नाम यूरोपियों के आने से पहले उपयोग में था। ब्रिटिश सैन्य मानचित्रकों का मानना ​​था कि मद्रास मूल रूप से मुंदिर-राज या मुंदिरराज थे। वर्ष 1367 में एक विजयनगर युग शिलालेख जो कि मादरसन पट्टणम बंदरगाह का उल्लेख करता है, पूर्व तट पर अन्य छोटे बंदरगाहों के साथ 2015 में खोजा गया था और यह अनुमान लगाया गया था कि उपरोक्त बंदरगाह रोयापुरम का मछली पकड़ने का बंदरगाह है। चेन्नई नाम की जन्मजात, तेलुगू मूल का होना स्पष्ट रूप से इतिहासकारों द्वारा साबित हुई है। यह एक तेलुगू शासक दमारला चेन्नाप्पा नायकुडू के नाम से प्राप्त हुआ था, जो कि नायक शासक एक दमनदार वेंकटपति नायक था, जो विजयनगर साम्राज्य के वेंकट III के तहत सामान्य रूप में काम करता था, जहां से ब्रिटिश ने शहर को 1639 में हासिल किया था। चेन्नई नाम का पहला आधिकारिक उपयोग, 8 अगस्त 1639 को, ईस्ट इंडिया कंपनी के फ्रांसिस डे से पहले, सेन्नेकेसु पेरुमल मंदिर 1646 में बनाया गया था। 1 99 6 में, तमिलनाडु सरकार ने आधिकारिक तौर पर मद्रास से चेन्नई का नाम बदल दिया। उस समय कई भारतीय शहरों में नाम बदल गया था। हालांकि, मद्रास का नाम शहर के लिए कभी-कभी उपयोग में जारी है, साथ ही साथ शहर के नाम पर स्थानों जैसे मद्रास विश्वविद्यालय, आईआईटी मद्रास, मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मद्रास मेडिकल कॉलेज, मद्रास पशु चिकित्सा कॉलेज, मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज। चेन्नई (तमिल: சென்னை), भारत में बंगाल की खाड़ी के कोरोमंडल तट पर स्थित तमिलनाडु की राजधानी, भारत का पाँचवा बड़ा नगर तथा तीसरा सबसे बड़ा बन्दरगाह है। इसकी जनसंख्या ४३ लाख ४० हजार है। यह शहर अपनी संस्कृति एवं परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। ब्रिटिश लोगों ने १७वीं शताब्दी में एक छोटी-सी बस्ती मद्रासपट्ट्नम का विस्तार करके इस शहर का निर्माण किया था। उन्होंने इसे एक प्रधान शहर एवं नौसैनिक अड्डे के रूप में विकसित किया। बीसवीं शताब्दी तक यह मद्रास प्रेसिडेंसी की राजधानी एवं एक प्रमुख प्रशासनिक केन्द्र बन चुका था। चेन्नई में ऑटोमोबाइल, प्रौद्योगिकी, हार्डवेयर उत्पादन और स्वास्थ्य सम्बंधी उद्योग हैं। यह नगर सॉफ्टवेयर, सूचना प्रौद्योगिकी सम्बंधी उत्पादों में भारत का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक शहर है। चेन्नई एवं इसके उपनगरीय क्षेत्र में ऑटोमोबाइल उद्योग विकसित है। चेन्नई मंडल तमिलानाडु के जीडीपी का ३९% का और देश के ऑटोमोटिव निर्यात में ६०% का भागीदार है। इसी कारण इसे दक्षिण एशिया का डेट्रॉएट भी कहा जाता है। चेन्नई सांस्कृतिक रूप से समृद्ध है, यहाँ वार्षिक मद्रास म्यूज़िक सीज़न में सैंकड़ॊ कलाकार भाग लेते हैं। चेन्नई में रंगशाला संस्कृति भी अच्छे स्तर पर है और यह भरतनाट्यम का एक महत्त्वपूर्ण केन्द्र है। यहाँ का तमिल चलचित्र उद्योग, जिसे कॉलीवुड भी कहते हैं, भारत का द्वितीय सबसे बड़ा फिल्म उद्योग केन्द्र है। .

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टीरोब्रैकिया

रैब्डोप्लूरा नार्मनी टीरोब्रैंकिया (Pterobranchia) एक प्रकार के जीव हैं, जो केवल समुद्र में पाए जाते हैं। ये हेमिकॉर्डा (Hemichorda) वर्ग के होते हैं। इनकी साधारण संरचना एंटेरोनेन्स्टा (Enteropnensta) जैसी होती है, किंतु इनमें केवल एक जोड़ा क्लोम छिद्र (gill slit) होता हैं या वह भी नहीं। संस्पर्शक भुजाएँ ओर प्रतिवर्तित पाचक क्षेत्र (recurved digestive tract) होते हैं तथा मुख और गुदा अत्यंत निकट होते हैं। इनका जनन दोनों प्रकार से होता है-लैंगिक जनन तथा समुद्भवन द्वारा। .

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एलियट बीच

एलियट बीच चेन्नई का एक सागर तट है। श्रेणी:चेन्नई में सागर तट.

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एकियूरा

कोरिया के बाजार में एकियूरा एकियूरा (Echiura; एकवचन: एकियूरस) या 'सर्पपुच्छ' समुद्री जन्तुओं का एक छोटा समूह है। इस जन्तु-समूह को पहले एनेलिडा संघ के अन्तर्गत माना जाता था किन्तु अब इन्हें एक अलग संघ के रूप में मान्यता प्राप्त है। तथापि डीएनए के जातिवृत्‍तीय (phylogenetic) विश्लेषण से यही निष्कर्ष निकलता है कि इन्हें एनेलिडा के अन्तर्गत ही रखा जाना चाहिए। एकियूरा सामान्यत: केवल समुद्र में रहते हैं और अधिकतर उष्णकटिबंधी (tropical) और उपोष्णकटिबंधी (subtropical) प्रदेश में समुद्रतल पर चट्टानों के सुराख में और पत्थरों के बीच पतली फाँक में छिपे रहते हैं। एकियूरस बालू या कीचड़ में दो मुँह वाली नलियों का निर्माण करता है और उसी में रहता है। सर्पपुच्छों की आदत है कि ये अपना निवासस्थान बारंबार बदलते रहते हैं। .

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ऐरण

एरण स्थित वराह की विशालकाय प्रतिमा एरण का विष्णु मंदिर मण्डप एरण नामक ऐतिहासिक स्थान मध्य प्रदेश के सागर जिले में स्थित है। प्राचीन सिक्कों पर इसका नाम ऐरिकिण लिखा है। एरण में वाराह, विष्णु तथा नरसिंह मन्दिर स्थित हैं। एरण, सागर से करीब 90 किमी दूर स्थित है। यहां पहुंचने के लिए सड़क मार्ग के अलावा ट्रेन का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। सागर-दिल्ली रेलमार्ग के एक महत्वपूर्ण जंक्शन बीना से इसकी दूरी करीब 25 किमी है। बीना और रेवता नदी के संगम पर स्थित एरण का नाम यहां अत्यधिक मात्रा में उगने वाली प्रदाह प्रशामक तथा मंदक गुणधर्म वाली 'एराका' नामक घास के कारण रखा गया है। कुछ लोगों का यह भी मानना है कि एरण के सिक्कों पर नाग का चित्र है, अत: इस स्थान का नामकरण एराका अर्थात नाग से हुआ है। .

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ड्यूटीरियम

ड्यूटीरियम अथवा ड्यूटेरियम हाइड्रोजन का एक स्थिर समस्थानिक है। इसकी प्राकृतिक उपलब्धता पृथ्वी के सागरओं में हाइड्रोजन के लगभग एक परमाणु प्रति (~) है। .

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डॉ॰ हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय

डॉ॰ हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय भारत के मध्य प्रदेश के सागर जिले में स्थित एक सार्वजनिक विश्वविद्यालय है। इसको सागर विश्वविद्यालय के नाम से भी जाना जाता है। इसकी स्थापना डॉ॰ हरिसिंह गौर ने १८ जुलाई १९४६ को अपनी निजी पूंजी से की थी। अपनी स्थापना के समय यह भारत का १८वाँ विश्वविद्यालय था। किसी एक व्यक्ति के दान से स्थापित होने वाला यह देश का एकमात्र विश्वविद्यालय है। वर्ष १९८३ में इसका नाम डॉ॰ हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय कर दिया गया। २७ मार्च २००८ से इसे केन्द्रीय विश्वविद्यालय की श्रेणी प्रदान की गई है। .

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तट

किसी नदी, सागर, तालाब, अथवा झील के किनारे स्थित जमीनी भाग को तट कहा जाता हैं। यह भाग जलीय तथा सूखे भू-भाग के बीच सूखे भाग में स्थित होता हैं। .

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तटबन्ध

तटबन्ध तटबंध (embankment), ऐसे बाँध अर्थात् पत्थर या कंक्रीट के पलस्तर से सुरक्षित, मिट्टी या मिट्टी तथा कंकड़ इत्यादि के मिश्रण से बनाए तटों या ऊँचे, लंबें टीलों, को कहते हैं, जिनसे पानी के बहाव को रोकने अथवा सीमित करने का काम लिया जाता है, जैसे.

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तात्या टोपे

तात्या टोपे (1814 - 18 अप्रैल 1859) भारत के प्रथम स्वाधीनता संग्राम के एक प्रमुख सेनानायक थे। सन १८५७ के महान विद्रोह में उनकी भूमिका सबसे महत्त्वपूर्ण, प्रेरणादायक और बेजोड़ थी। सन् सत्तावन के विद्रोह की शुरुआत १० मई को मेरठ से हुई थी। जल्दी ही क्रांति की चिन्गारी समूचे उत्तर भारत में फैल गयी। विदेशी सत्ता का खूनी पंजा मोडने के लिए भारतीय जनता ने जबरदस्त संघर्ष किया। उसने अपने खून से त्याग और बलिदान की अमर गाथा लिखी। उस रक्तरंजित और गौरवशाली इतिहास के मंच से झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई, नाना साहब पेशवा, राव साहब, बहादुरशाह जफर आदि के विदा हो जाने के बाद करीब एक साल बाद तक तात्या विद्रोहियों की कमान संभाले रहे।nice and thanks .

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तारण तरण महासभा

तारण तरण महासभा एक मंंडल है।इसका मुख्यालय निसईजी मल्हारगढ़ और सागर है।यह मंडल ही तारण पंथ में पदवी देता है।.

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ताजमहल पैलेस एंड टॉवर

ताज महल पैलेस का एक दृश्य ्ताजमहल पैलेस का रात्रि अवलोकन मुंबई की कोलाबा नमक जगह पर स्थित ताज महल पैलेस होटल पांच सितारा होटल है जो कि गेटवे ऑफ़ इंडिया के पास है। ‘ताज होटल, रिसॉर्ट्स एंड पैलेस’ का एक हिस्सा, यह इमारत इस समूह की प्रमुख संपत्ति मानी जाती है, जिसमे ५६० कमरे एवं ४४ सुइट्स हैं। ताज महल होटल १०५ साल पुरानी इमारत है। मुंबई की पहचान बन चुकी इस इमारत में महानगर के अमीर और संभ्रांत लोग आते-जाते रहते हैं। विदेशी पर्यटकों में भी गेटवे ऑफ़ इंडिया के पास स्थित ताज महल होटल काफ़ी लोकप्रिय है। ताज महल होटल से समुद्र का दृश्य दिखाई देता है। २६ नवम्बर २००८ मुंबई में श्रेणीबद्ध गोलीबारी के समय यह होटल लगभग ६० घंटों तक आतंकवादियों ने अपने कब्ज़े में कर रखा था। .

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तिरुवन्मियूर बीच

तिरुवन्मियूर बीच चेन्नई का एक सागर तट है। श्रेणी:चेन्नई में सागर तट.

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तुर्कमेनिस्तान

तुर्कमेनिस्तान (तुर्कमेनिया के नाम से भी जाना जाता है) मध्य एशिया में स्थित एक तुर्किक देश है। १९९१ तक तुर्कमेन सोवियत समाजवादी गणराज्य (तुर्कमेन SSR) के रूप में यह सोवियत संघ का एक घटक गणतंत्र था। इसकी सीमा दक्षिण पूर्व में अफ़ग़ानिस्तान, दक्षिण पश्चिम में ईरान, उत्तर पूर्व में उज़्बेकिस्तान, उत्तर पश्चिम में कज़ाख़िस्तान और पश्चिम में कैस्पियन सागर से मिलती है। 'तुर्कमेनिस्तान' नाम फारसी से आया है, जिसका अर्थ है, 'तुर्कों की भूमि'। देश की राजधानी अश्गाबात (अश्क़ाबाद) है। इसका हल्के तौर पर "प्यार का शहर" या "शहर जिसको मोहब्बत ने बनाया" के रूप में अनुवाद होता है। यह अरबी के शब्द 'इश्क़' और फारसी प्रत्यय 'आबाद' से मिलकर बना है।, Bradley Mayhew, Lonely Planet, 2007, ISBN 978-1-74104-614-4,...

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तूफ़ान

तूफ़ान या आँधी पृथ्वी या किसी अन्य ग्रह के वायुमंडल में उत्तेजना की स्थिति को कहते हैं जो अक्सर सख़्त मौसम के साथ आती है। इसमें तेज़ हवाएँ, ओले गिरना, भारी बारिश, भारी बर्फ़बारी, बादलों का चमकना और बिजली का चमकना जैसे मौसमी गतिविधियाँ दिखती हैं। आमतौर पर तूफ़ान आने से साधारण जीवन पर बुरा असर पड़ता है। यातायात और अन्य दैनिक क्रियाओं के अलावा, बाढ़ आने, बिजली गिरने और हिमपात से जान व माल की हानि भी हो सकती है। रेगिस्तान जैसे शुष्क क्षेत्रों में रेतीले तूफ़ान और समुद्रों में ऊँची लहरों जैसी ख़तरनाक स्थितियाँ भी पैदा हो सकती हैं। इसके विपरीत बारिश व हिमपात से कुछ इलाक़ों में सूखे की समस्या में मदद भी मिल सकती है। मौसम-वैज्ञानिक अनुमान लगाते हैं कि हर साल पृथ्वी पर लगभग १.६ करोड़ गरज-चमक वाले तूफ़ान आते हैं।, Seymour Simon, pp.

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द्वीपसमूह

भारत के पड़ौसी देश बर्मा में स्थित मेरगुई द्वीपसमूह द्वीपसमूह किसी सागर, महासागर या झील में स्थित द्वीपों की शृंखला को कहते हैं। भारत के अण्डमान, निकोबार और लक्षद्वीप द्वीपसमूहों के उदहारण हैं। .

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नदी

भागीरथी नदी, गंगोत्री में नदी भूतल पर प्रवाहित एक जलधारा है जिसका स्रोत प्रायः कोई झील, हिमनद, झरना या बारिश का पानी होता है तथा किसी सागर अथवा झील में गिरती है। नदी शब्द संस्कृत के नद्यः से आया है। संस्कृत में ही इसे सरिता भी कहते हैं। नदी दो प्रकार की होती है- सदानीरा या बरसाती। सदानीरा नदियों का स्रोत झील, झरना अथवा हिमनद होता है और वर्ष भर जलपूर्ण रहती हैं, जबकि बरसाती नदियाँ बरसात के पानी पर निर्भर करती हैं। गंगा, यमुना, कावेरी, ब्रह्मपुत्र, अमेज़न, नील आदि सदानीरा नदियाँ हैं। नदी के साथ मनुष्य का गहरा सम्बंध है। नदियों से केवल फसल ही नहीं उपजाई जाती है बल्कि वे सभ्यता को जन्म देती हैं अपितु उसका लालन-पालन भी करती हैं। इसलिए मनुष्य हमेशा नदी को देवी के रूप में देखता आया है। .

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नारियल

नारियल के पेड़ नारियल (Cocos nucifera, कोकोस् नूकीफ़ेरा) एक बहुवर्षी एवं एकबीजपत्री पौधा है। इसका तना लम्बा तथा शाखा रहित होता है। मुख्य तने के ऊपरी सिरे पर लम्बी पत्तियों का मुकुट होता है। ये वृक्ष समुद्र के किनारे या नमकीन जगह पर पाये जाते हैं। इसके फल हिन्दुओं के धार्मिक अनुष्ठानों में प्रयुक्त होता है। बांग्ला में इसे नारिकेल कहते हैं। नारियल के वृक्ष भारत में प्रमुख रूप से केरल, पश्चिम बंगाल और उड़ीसा में खूब उगते हैं। महाराष्ट्र में मुंबई तथा तटीय क्षेत्रों व गोआ में भी इसकी उपज होती है। नारियल एक बेहद उपयोगी फल है। नारियल देर से पचने वाला, मूत्राशय शोधक, ग्राही, पुष्टिकारक, बलवर्धक, रक्तविकार नाशक, दाहशामक तथा वात-पित्त नाशक है। .

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नाकाबन्दी

नाकाबन्दी का अर्थ है किसी भूभाग से आपूर्ति, युद्ध सामग्री या संचार व्यवस्था को काट देने का प्रयास। यह कार्य पूर्णतः बल द्वारा या अंशतः बल द्वारा किया जाता किया जाता है। ध्यान रहे कि नाकाबन्दी तथा इम्बार्गो (सैंक्शन) में बहुत अन्तर है क्योंकि ये व्यापार में रुकावट डालते हैम किन्तु कानूनी तरीके से, बल द्वारा नहीं। नाकाबन्दी, घेराबंदी (siege) से भी अलग है क्योंकि घेराबन्दी में घेरा गया क्षेत्र बहुत छोटा होता है (जैसे एक दुर्ग)। ऐतिहासिक रूप से अधिकांश नाकेबन्दियाँ समुद्र में हुईं किन्तु थल पर भी नाकेबन्दी की जाती है। .

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निडारिया

निडारिया (Cnidaria) १०,००० जीववैज्ञानिक जातियों से भी अधिक सदस्यों वाला प्राणियों का एक जीववैज्ञानिक संघ है जो समुद्री व मीठे जलाश्यों में मिलते हैं, हालांकि इनमें से अधिकतर समुद्रवासी हैं। यह अपनी निडोसाइट नामक विशेष कोशिकाओं के लिये जाने जाते हैं जो सुई जैसी विषैली वस्तुएँ विस्फोटक रूप से छोड़कर अन्य प्राणियों का शिकार करते हैं। इनके शरीर का अधिकांश भाग मीसोग्लीया (mesoglea) नामक अवलेह (जेली) जैसी सामग्री का बना होता है जो एक पतली त्वचा के अन्दर बन्द होता है। इनके शरीरों में व्यासीय सममिति (radial symmetry) दिखती है और एक मुख होता है जिसके इर्द-गिर्द निडोसाइट कोशिकाएँ धारण किये हुए टेन्टेकल होते हैं। जेलीमछली सबसे अधिक पहचानी जाने वाली निडारिया संघ की श्रेणी है। .

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न्यायालयिक भूकम्प विज्ञान

फोरेंसिक भूकम्प विज्ञान एक न्यायालयिक विज्ञान की साखा है जो इस्तेमाल होती है भूकम्प विज्ञान की तकनीक का पता लगाने के लिए और दूर घटनाओं का अध्ययन करने के लिए, विशेष रूप से विस्फोट और परमाणु हथियारों का अध्ययन करने के लिए भी। दक्षता के साथ जो भूकंपीय तरंगों पृथ्वी और विस्फोट दसगुणा उनकी भूकंपीय विकिरण को कम करने की तकनीकी कठिनाइयों के माध्यम से प्रचार की वजह से, फोरेंसिक भूकम्प विज्ञान भूमिगत परमाणु परीक्षण पर प्रतिबंध को लागू करने में एक महत्वपूर्ण तकनीक है। परमाणु विस्फोट के अलावा, विस्फोट के कई अन्य प्रकार के हस्ताक्षर भी पता चला है और न्यायालयिक भूकम्प विज्ञान से विश्लेषण किया जा सकता है। जैसे सागर की लहरों के रूप में भी अन्य घटना, या पनडुब्बियों के भीतर विस्फोट। न्यायालयिक भूकम्प विज्ञान में विशेषज्ञता के साथ संगठन एडब्ल्यूई ब्लैकनेस्ट, लॉस एलामोस नेशनल लेबोरेटरी, सन्डिया राष्ट्रीय प्रयोगशाला, और लॉरेंस लिवरमोर राष्ट्रीय प्रयोगशाला में शामिल हैं। .

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नौरादेही संरक्षित वन और अभयारण्य

अपनी बायो डायवर्सिटी के कारण नौरादेही वन्य जीव सेंक्चुरी का स्थान सबसे अलग है। सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिलों में फैली इस वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी में ट्रैकिंग, एडवेंचर और वाइल्ड सफारी का आनंद लिया जा सकता है। नौरादेही सेंक्‍चुरी की स्‍थापना सन् 1975 में की गई थी। यह करीब 1200 वर्ग किमी क्षेत्र में फैली है। इस सेंक्चुरी में वन्यजीवों की भरमार है, जिनमें तेंदुआ मुख्य है। एक समय यहां कई बाघ भी पाए जाते थे लेकिन संरक्षण नहीं मिलने के कारण अब वे लुप्त हो चुके हैं। तेंदुआ भी इसी हश्र की ओर अग्रसर है। चिंकारा, हरिण, नीलगाय, सियार, भेडि़या, जंगली कुत्ता, रीछ, मगर, सांभर, चीतल तथा कई अन्य वन्य जीव इस क्षेत्र में पाए जाते हैं। वनविभाग इसके संरक्षण का काम करता है। यहां पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कुछ नई योजनाएं बनाई गई हैं। नौरादेही सेंक्‍चुरी में पहुंचने के लिए डीजल या पैट्रोल स चलने वाले ऐसे किसी भी वाहन के प्रयोग की छूट है जो पांच वर्ष से अधिक पुराना ना हो। श्रेणी:सागर जिला.

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नेल्लनकरै बीच

नेल्लनकरै बीच चेन्नई का एक सागर तट है। श्रेणी:चेन्नई में सागर तट.

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पद्माकर

रीति काल के ब्रजभाषा कवियों में पद्माकर (1753-1833) का महत्त्वपूर्ण स्थान है। वे हिंदी साहित्य के रीतिकालीन कवियों में अंतिम चरण के सुप्रसिद्ध और विशेष सम्मानित कवि थे। मूलतः हिन्दीभाषी न होते हुए भी पद्माकर जैसे आन्ध्र के अनगिनत तैलंग-ब्राह्मणों ने हिन्दी और संस्कृत साहित्य की श्रीवृद्धि में जितना योगदान दिया है वैसा अकादमिक उदाहरण अन्यत्र दुर्लभ है। .

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पन्नालाल जैन

साहित्याचार्य डॉ.

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पलवक्कम बीच

पलवक्कम बीच चेन्नई का एक सागर तट है। श्रेणी:चेन्नई में सागर तट.

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पशु बीमा

परवरिश पशुओ और बेचने के लिए पोल्ट्री अप्रत्याशित और जोखिम भरा हो सकता है। यही कारण है कि एक ठोस और पशुधन या मुर्गी बीमा पॅलिसी एक आवश्यकता है वह है। यह बीमा उन अप्रत्याशित घटनाओं और दुर्घटनाओं कि अपने जानवरों और अपनी आजीविका तबाह कर सकते हैं से अपने निवेश की सुरक्षा करता है। फ़ार्म पशु बीमा अपने विशेष पशु समूह को कवर के लिए अनुकूलित किया जा सकता है, तो पशु, सूअर, भेड, एमु, बकरी, मुर्गी या अपने खेत पर इनमें से किसी भी संयोजन है या नहीं। भारतीय कृषि उद्योग, एक और हरित क्रांति कि इसे और अधिक आकर्षक और लाभदायक बनाता के कगार पर भारत में कुल कृषि उत्पादन के रूप में अगले दस साल में दोगुना होने की संभावना है और वह भी एक जैविक तरीके से| पशु बीमा पॉलिसी अपने मवेशियों है, जो एक ग्रामीण समुदाय की सबसे मूल्यवान संपत्ति है कि मृत्यु के कारण वित्तीय नुकसान से भारतीय ग्रामीन लोगों की सुरक्षा के लिए प्रदान की जाती है। नीति होने गाय, बैल या तो सेक्स एक पशु चिकित्सक/ सर्जन द्वारा ध्वनि और उत्तम स्वास्थ्य और चोट या रोग से मुक्त होने के रूप में प्रमाणित की भैंस और जो माइक्रो फ़ाइनेंस संस्थानों, गैर सरकारी संगठनों के सदस्य कर रहे हैं व्यक्तियों को शामिल किया, सरकार प्रायोजित संगठनों और इस तरह के संबंध समूहों/ ग्रामीण और सामाजिक क्षेत्र में संस्थानों| पशु बीमा .

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पहला विश्व युद्ध

पहला विश्व युद्ध 1914 से 1918 तक मुख्य तौर पर यूरोप में व्याप्त महायुद्ध को कहते हैं। यह महायुद्ध यूरोप, एशिया व अफ़्रीका तीन महाद्वीपों और समुंदर, धरती और आकाश में लड़ा गया। इसमें भाग लेने वाले देशों की संख्या, इसका क्षेत्र (जिसमें यह लड़ा गया) तथा इससे हुई क्षति के अभूतपूर्व आंकड़ों के कारण ही इसे विश्व युद्ध कहते हैं। पहला विश्व युद्ध लगभग 52 माह तक चला और उस समय की पीढ़ी के लिए यह जीवन की दृष्टि बदल देने वाला अनुभव था। क़रीब आधी दुनिया हिंसा की चपेट में चली गई और इस दौरान अंदाज़न एक करोड़ लोगों की जान गई और इससे दोगुने घायल हो गए। इसके अलावा बीमारियों और कुपोषण जैसी घटनाओं से भी लाखों लोग मरे। विश्व युद्ध ख़त्म होते-होते चार बड़े साम्राज्य रूस, जर्मनी, ऑस्ट्रिया-हंगरी (हैप्सबर्ग) और उस्मानिया ढह गए। यूरोप की सीमाएँ फिर से निर्धारित हुई और अमेरिका निश्चित तौर पर एक 'महाशक्ति ' बन कर उभरा। .

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पारिस्थितिकी

260 px 95px 173px 115px 125px पारिस्थितिकी का वैज्ञानिक साम्राज्य वैश्विक प्रक्रियाओं (ऊपर), से सागरीय एवं पार्थिव सतही प्रवासियों (मध्य) से लेकर अन्तर्विशःइष्ट इंटरैक्शंस जैसे प्रिडेशन एवं परागण (नीचे) तक होता है। पारिस्थितिकी (अंग्रेज़ी:इकोलॉजी) जीवविज्ञान की एक शाखा है जिसमें जीव समुदायों का उसके वातावरण के साथ पारस्परिक संबंधों का अध्ययन करतें हैं। प्रत्येक जन्तु या वनस्पति एक निशिचत वातावरण में रहता है। पारिस्थितिज्ञ इस तथ्य का पता लगाते हैं कि जीव आपस में और पर्यावरण के साथ किस तरह क्रिया करते हैं और वह पृथ्वी पर जीवन की जटिल संरचना का पता लगाते हैं।। हिन्दुस्तान लाइव। २ मई २०१०। पारिस्थितिकी को एन्वायरनमेंटल बायोलॉजी भी कहा जाता है। इस विषय में व्यक्ति, जनसंख्या, समुदायों और इकोसिस्टम का अध्ययन होता है। इकोलॉजी अर्थात पारिस्थितिकी (जर्मन: Oekologie) शब्द का प्रथम प्रयोग १८६६ में जर्मन जीववैज्ञानिक अर्नेस्ट हैकल ने अपनी पुस्तक "जनरेल मोर्पोलॉजी देर ऑर्गैनिज़्मेन" में किया था। बीसवीं सदी के आरम्भ में मनुष्य और उसके पर्यावरण के बीच संबंधों पर अध्ययन प्रारंभ हुआ और एक साथ कई विषयों में इस ओर ध्यान दिया गया। परिणामस्वरूप मानव पारिस्थितिकी की संकलपना आयी। प्राकृतिक वातावरण बेहद जटिल है इसलिए शोधकर्ता अधिकांशत: किसी एक किस्म के प्राणियों की नस्ल या पौधों पर शोध करते हैं। उदाहरण के लिए मानवजाति धरती पर निर्माण करती है और वनस्पति पर भी असर डालती है। मनुष्य वनस्पति का कुछ भाग सेवन करते हैं और कुछ भाग बिल्कुल ही अनोपयोगी छोड़ देते हैं। वे पौधे लगातार अपना फैलाव करते रहते हैं। बीसवीं शताब्दी सदी में ये ज्ञात हुआ कि मनुष्यों की गतिविधियों का प्रभाव पृथ्वी और प्रकृति पर सर्वदा सकारात्मक ही नहीं पड़ता रहा है। तब मनुष्य पर्यावरण पर पड़ने वाले गंभीर प्रभाव के प्रति जागरूक हुए। नदियों में विषाक्त औद्योगिक कचरे का निकास उन्हें प्रदूषित कर रहा है, उसी तरह जंगल काटने से जानवरों के रहने का स्थान खत्म हो रहा है। पृथ्वी के प्रत्येक इकोसिस्टम में अनेक तरह के पौधे और जानवरों की प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनके अध्ययन से पारिस्थितिज्ञ किसी स्थान विशेष के इकोसिस्टम के इतिहास और गठन का पता लगाते हैं। इसके अतिरिक्त पारिस्थितिकी का अध्ययन शहरी परिवेश में भी हो सकता है। वैसे इकोलॉजी का अध्ययन पृथ्वी की सतह तक ही सीमित नहीं, समुद्री जनजीवन और जलस्रोतों आदि पर भी यह अध्ययन किया जाता है। समुद्री जनजीवन पर अभी तक अध्ययन बहुत कम हो पाया है, क्योंकि बीसवीं शताब्दी में समुद्री तह के बारे में नई जानकारियों के साथ कई पुराने मिथक टूटे और गहराई में अधिक दबाव और कम ऑक्सीजन पर रहने वाले जीवों का पता चला था। .

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पुलीकट

पुलीकट झील तमिलनाडु के तट पर 60 किलोमीटर लम्बी और 5 से 15 किलोमीटर चौड़ी एक झील है। यह एक छिछली अनूप है। इस झील की औसत गहराई 18 मीटर है। यह समुद्र से बालू की भित्ति द्वारा अलग होने से बनी है। सतीश धवन अंतरिक्ष केन्द्र इसी झील के निकट श्री हरिकोटा द्वीप पर स्थित है श्री हरिकोटा द्वीप में अवसादी निक्षेप के कई स्तर मिलते हैं जिन्हें समुद्री लहरों ने बिछाया है। .

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प्रांगार चक्र

कार्बन चक्र आरेख. काली संख्याएं बिलियन टनों में सूचित करती हैं कि विभिन्न जलाशयों में कितना कार्बन संग्रहीत है ("GtC" से तात्पर्य कार्बन गिगाटन और आंकडे लगभग 2004 के हैं). गहरी नीली संख्याएं सूचित करती हैं कि प्रत्येक वर्ष कितना कार्बन जलाशयों के बीच संचालित होता है। इस चित्र में वर्णित रूप से अवसादों में कार्बोनेट चट्टान और किरोजेन के ~70 मिलियन GtC शामिल नहीं हैं। कार्बन चक्र जैव-भूरासायनिक चक्र है जिसके द्वारा कार्बन का जीवमंडल, मृदामंडल, भूमंडल, जलमंडल और पृथ्वी के वायुमंडल के साथ विनिमय होता है। यह पृथ्वी के सबसे महत्वपूर्ण चक्रों में एक है और जीवमंडल तथा उसके समस्त जीवों के साथ कार्बन के पुनर्नवीनीकरण और पुनरुपयोग को अनुमत करता है.

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प्राकृतिक दृश्य

स्विस आल्प्स की ऐशिना झील, एक अत्यंत विविधतापूर्ण प्राकृतिक दृश्य का एक उदाहरण. तोलिमा कोलम्बिया की प्राकृतिक दृश्य संबंधी तस्वीर बर्न में आरे नदी प्राकृतिक दृश्य भूमि के किसी एक हिस्से की सुस्पष्ट विशेषताएं हैं, जिनमें इसके प्राकृतिक स्वरूपों के भौतिक तत्त्व, जल निकाय जैसे कि नदियाँ, झीलें एवं समुद्र, प्राकृतिक रूप से उगनेवाली वनस्पतियों सहित धरती पर रहने वाले जीव-जंतु, मिट्टी से बनी उपयोगी मानव निर्मित वस्तुओं सहित भवन एवं संरचनाएं और अस्थायी तत्त्व जैसे कि विद्युत व्यवस्था एवं मौसम संबंधी परिस्थितियाँ शामिल हैं | मानवीय संस्कृति की छवि, जो बनने में सहस्राब्दियाँ लग जाती हैं, दोनों मिलकर दृश्य किसी भी स्थल के लोग तथा वह स्थल दोनों की स्थानीय तथा राष्ट्रीय पहचान को प्रतिबिंबित करते हैं। प्राकृतिक दृश्य, इनकी विशेषता और गुणवत्ता, किसी क्षेत्र की आत्म छवि और, उस स्थान की भावनात्मक अनुभूतियाँ, जो इसे दूसरे क्षेत्रों से अलग करती है, को परिभाषित करने में मदद करती है। यह लोगों के जीवन की गतिशील पृष्ठभूमि है। पृथ्वी पर प्राकृतिक दृश्यों का एक व्यापक विस्तार है जिसमें ध्रुवीय क्षेत्रों के बर्फीले प्राकृतिक दृश्य, पहाड़ी प्राकृतिक दृश्य, विस्तृत मरुस्थलीय प्राकृतिक दृश्य, द्वीपों और समुद्रतटों केप्राकृतिक दृश्य, घने जंगलों या पेड़ों के प्राकृतिक दृश्यों सहित पुराने उदीच्य वन एवं उष्णकटिबंधीय वर्षावन और शीतोष्ण एवं उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों के कृषि योग्य प्राकृतिक दृश्य शामिल हैं। प्राकृतिक दृश्यों की समीक्षा आगे 2 श्रेणी:प्राकृतिक दृश्य (लैंडस्केप) श्रेणी:सांस्कृतिक भूगोल श्रेणी:भूदृश्य ar:منظر طبيعى bg:Пейзаж ca:Paisatge (geografia) cs:Krajina da:Landskab de:Landschaft en:Landscape eo:Pejzaĝo es:Paisaje et:Maastik fi:Maisema fr:Paysage hr:Krajolik id:Lanskap it:Paesaggio ja:ランドスケープ lt:Kraštovaizdis lv:Ainava mwl:Paisage nds:Landschap nl:Landschap nn:Landskap pl:Kraina geograficzna pt:Paisagem ro:Peisaj ru:Ландшафт sk:Geografická krajina sr:Пејзаж sv:Landskap (terräng) uk:Ландшафт yi:לאנדשאפט zh:风景.

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प्रवाल द्वीप

प्रशांत महासागर में टोकेलाऊ में https://www.google.co.in/maps/place/%E0%A4%9F%E0%A5%8B%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%8A/@-9.166827,-171.8882544,12z/data.

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प्रवेशिका

प्रवेशिका (inlet) या पतली खाड़ी किसी तट पर एक लम्बी और पतली खाड़ी होती है जिसमें सागर का पानी कुछ दूरी तक भूमीय क्षेत्र में अंदर आया हुआ होता है। जब किसी पहाड़ी क्षेत्र में यह हिमानी द्वारा बनता है जो ऐसी प्रवेशिकाओं को फ़्योर्ड कहा जाता है। .

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प्रकाशस्तम्भ

सन् १९०९ में फिनलैण्ड में दीपस्तम्भों के विभिन्न शिल्प दीपस्तंभ, दीपघर, या प्रकाशस्तंभ (Light house), समुद्रतट पर, द्वीपों पर, चट्टानों पर, या नदियों और झीलों के किनारे प्रमुख स्थानों पर जहाजों के मार्गदर्शन के लिए बनाए जाते हैं। इनसे रात के समय प्रकाश निकलता है। यह किसी भी प्रणाली से प्रकाश किरण प्रसारित करती है। पुराने समय में आग जला कर यह काम होते थे, क्योंकि वर्तमान समय में विद्युत एवं अन्य कई साधन हैं। इसका उद्देश्य सागर में जहाजों के चालकों या नाविकों को खतरनाक चट्टानों से आगाह करना होता है। ये पथरीली तटरेखा, खतरनाक चट्टानों व बंदरगाहों की सुरक्षित प्रवेश को सूचित करने के लिए होते हैं। पहले काफी प्रयोग होते रहे इन प्रकाश दीपों का प्रयोग इनके महंगे अनुरक्षण एवं जी पी आर एस तकनीक सहित अन्य उन्नत सुविधाओं के आने से बहुत ही कम हो गया है। .

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पृथ्वी प्रणाली विज्ञान

पृथ्वी प्रणाली विज्ञान (Earth system science) के अंतर्गत पृथ्वी के विभिन्न घटकों, अर्थात वातावरण, समुद्रों, क्रायोस्फीयर, भूमंडल और जीवमंडल के बीच जटिल संबंधों की समझ शामिल है। पृथ्वी प्रणाली के बारे में जानकारी से, जलवायु, मौसम और प्राकृतिक खतरों की भविष्यवाणी में सुधार करने में मदद प्राप्त होती है। .

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पृथ्वी का वायुमण्डल

अंतरिक्ष से पृथ्वी का दृश्य: वायुमंडल नीला दिख रहा है। पृथ्वी को घेरती हुई जितने स्थान में वायु रहती है उसे वायुमंडल कहते हैं। वायुमंडल के अतिरिक्त पृथ्वी का स्थलमंडल ठोस पदार्थों से बना और जलमंडल जल से बने हैं। वायुमंडल कितनी दूर तक फैला हुआ है, इसका ठीक ठीक पता हमें नहीं है, पर यह निश्चित है कि पृथ्वी के चतुर्दिक् कई सौ मीलों तक यह फैला हुआ है। वायुमंडल के निचले भाग को (जो प्राय: चार से आठ मील तक फैला हुआ है) क्षोभमंडल, उसके ऊपर के भाग को समतापमंडल और उसके और ऊपर के भाग को मध्य मण्डलऔर उसके ऊपर के भाग को आयनमंडल कहते हैं। क्षोभमंडल और समतापमंडल के बीच के बीच के भाग को "शांतमंडल" और समतापमंडल और आयनमंडल के बीच को स्ट्रैटोपॉज़ कहते हैं। साधारणतया ऊपर के तल बिलकुल शांत रहते हैं। प्राणियों और पादपों के जीवनपोषण के लिए वायु अत्यावश्यक है। पृथ्वीतल के अपक्षय पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ता है। नाना प्रकार की भौतिक और रासायनिक क्रियाएँ वायुमंडल की वायु के कारण ही संपन्न होती हैं। वायुमंडल के अनेक दृश्य, जैसे इंद्रधनुष, बिजली का चमकना और कड़कना, उत्तर ध्रुवीय ज्योति, दक्षिण ध्रुवीय ज्योति, प्रभामंडल, किरीट, मरीचिका इत्यादि प्रकाश या विद्युत के कारण उत्पन्न होते हैं। वायुमंडल का घनत्व एक सा नहीं रहता। समुद्रतल पर वायु का दबाव 760 मिलीमीटर पारे के स्तंभ के दाब के बराबर होता है। ऊपर उठने से दबाव में कमी होती जाती है। ताप या स्थान के परिवर्तन से भी दबाव में अंतर आ जाता है। सूर्य की लघुतरंग विकिरण ऊर्जा से पृथ्वी गरम होती है। पृथ्वी से दीर्घतरंग भौमिक ऊर्जा का विकिरण वायुमंडल में अवशोषित होता है। इससे वायुमंडल का ताप - 68 डिग्री सेल्सियस से 55 डिग्री सेल्सियस के बीच ही रहता है। 100 किमी के ऊपर पराबैंगनी प्रकाश से आक्सीजन अणु आयनों में परिणत हो जाते हैं और परमाणु इलेक्ट्रॉनों में। इसी से इस मंडल को आयनमंडल कहते हैं। रात्रि में ये आयन या इलेक्ट्रॉन फिर परस्पर मिलकर अणु या परमाणु में परिणत हो जाते हैं जिससे रात्रि के प्रकाश के वर्णपट में हरी और लाल रेखाएँ दिखाई पड़ती हैं। .

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पृथ्वी की आतंरिक संरचना

पृथ्वी की आतंरिक संरचना शल्कीय अर्थात परतों के रूप में है, जैसे प्याज के छिलके परतों के रूप में होते हैं। इन परतों की मोटाई का सीमांकन रासायनिक अथवा यांत्रिक विशेषताओं के आधार पर किया जा सकता है। की सबसे ऊपरी परत एक ठोस परत है, मध्यवर्ती अत्यधिक गाढ़ी परत है और बाह्य तरल तथा आतंरिक ठोस अवस्था में है। की आतंरिक संरचना के बारे में जानकारी के स्रोतों को दो हिस्सों में विभक्त किया जा सकता है। प्रत्यक्ष स्रोत, जैसे से निकले पदार्थो का अध्ययन, से प्राप्त आंकड़े इत्यादि, कम गहराई तक ही जानकारी उपलब्ध करा पाते हैं। दूसरी ओर अप्रत्यक्ष स्रोत के रूप में का अध्ययन अधिक गहराई की विशेषताओं के बारे में जानकारी देता है। .

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पेबल बीच, चेन्नई

पेबल बीच, चेन्नई चेन्नई का एक सागर तट है। श्रेणी:चेन्नई में सागर तट.

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पेलैजिक क्षेत्र

पेलैजिक क्षेत्र (pelagic zone) किसी महासागर, सागर या झील के जल का वह भाग होता है जो न तो नीचे के फ़र्श के समीप हो और न ही उस जलसमूह के तट के समीप। इसे कभी-कभी खुला पानी (open water) भी कहा जाता है। पृथ्वी पर पेलैजिक क्षेत्र का कुल आयतन लगभग 13,300 लाख किमी3, औसत गहराई 3.68 किमी (2.29 मील) और अधिकतम गहराई 11 किमी (6.8 मील) है। पेलैजिक क्षेत्र में रहने वाली मछलियाँ पेलैजिक मछलियाँ कहलाती हैं। पृथ्वी के वायुमंडल की तरह पेलैजिक क्षेत्र को भी परतों में बाँटा जा सकता है। इस क्षेत्र के किसी भाग में एक काल्पनिक पानी का स्तम्भ के बारे में सोचा जाए तो जैसे-जैसे उसमें नीचे की ओर जाया जाए वैसे-वैसे दबाव बढ़ता, तापमान घटता और प्रकाश घटता जाता है। बढ़ती गहराई के साथ पेलैजिक जीवन भी घटता जाता है। .

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बन्द जलसम्भर

मंगोलिया का एक बंद जलसंभर जहाँ सारा बहता जल समुद्र की बजाय उएउएरेग नूर झील में आकर ठहर जाता है बंद जलसंभर या समावृत जलसंभर भूगोल में ऐसे जलसंभर क्षेत्र को कहा जाता है जिसमें वर्षा अथवा पिघलती बर्फ़ का पानी एकत्रित हो कर किसी नदी के ज़रिये समुद्र या महासागर में बहने की बजाय किसी सरोवर, दलदली क्षेत्र या शुष्क क्षेत्र में जाकर वहीँ रुक जाता है। आम तौर पर जो भी पानी धरती पर बारिश या हिमपात के कारण पड़ता है वो नदियों, नेहरों और झरनों के द्वारा ऊंचे इलाकों से निचले इलाकों की ओर बहता है। यह चलते पानी के समूह एक-दुसरे से संगम करते रहते हैं जब तक के एक ही बड़ी नदी न बन जाए। फिर यह नदी आगे चलकर किसी सागर में मिल जाती है। लेकिन जो क्षेत्र सागरों से ढलान, पहाड़ों या रेगिस्तानों की वजह से पृथक हैं वहाँ पर पानी सब से निचले स्थान पर पहुँच कर रुक जाता है। ऐसे स्थानों पर या तो झीलें बन जाती हैं या धरती पानी को सोख लेती है। दुनिया की सब से बड़ी झीलों में ऐसे ही बंद जलसंभारों की वजह से बनी हुई कुछ झीलें हैं, जैसे की अरल सागर और कैस्पियन सागर। .

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बमोरी

बमोरी मध्यप्रदेश में स्थित एक ग्राम है जो सागर जिले कि केसली तहसील में आता है .

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बाल्टिक सागर

बाल्टिक सागर का भौगोलिक मानचित्र बाल्टिक उत्तरी यूरोप का एक सागर है जो लगभग सभी ओर से जमीन से घिरा है। इसके उत्तर में स्कैडिनेवी प्रायद्वीप (स्वीडन), उत्तर-पूर्व में फ़िनलैंड, पूर्व में इस्टोनिया, लिथुआनिया, लाटविया, दक्षिण में पोलैंड तथा दक्षिण-पश्चिम में जर्मनी है। पश्चिम में डेनमार्क तथा छोटे द्वीप हैं जो इसे उत्तरी सागर तथा अटलांटिक महासागर से अलग करते हैं। जर्मानी भाषाओं, जैसे डच, डेनिश, फ़िन्नी में इसको पूर्वी सागर (Ostsee) के नाम से जाना जाता है। इसमें गौरतलब है कि यह फ़िनलैंड के पश्चिम में बसा हुआ है। यह एक छिछला सागर है जिसका पानी समुद्री जल से कम खारा है। कृत्रिम नहर द्वारा यह श्वेत सागर से जुड़ा हुआ है। फिनलैंड की खाड़ी, बोथ्निया की खाड़ी, रिगा की खाड़ी इत्यादि इसके स्थानीय निकाय हैं। इसकी औसत गहराई ५५ मीटर है तथा यह कोई १६०० किलोमीटर लम्बा है। .

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बालूतट

बालूतट या सैकत (Beach) किसी समुद्र का ऐसा किनारा होता है जो रेतीला या कंकड़ों का बना हो। .

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बिस्मिल

भारतीय क्रान्तिकारी बिस्मिल के बारे में जानने के लिये कृपया रामप्रसाद 'बिस्मिल' देखें। बिस्मिल (तुर्क: Bismil) तुर्की के दियारबाकिर राज्य का एक जिला है। 2012 की जनगणना के मुताबिक इसकी कुल जनसंख्या (ग्रामीण व शहरी क्षेत्र को मिलाकर)1,11,746 है। यहाँ के अधिकांश निवासी कुर्द लोग हैं। इस जिले के मुख्यालय का नाम भी बिस्मिल के ही नाम पर रखा गया है। ठीक उसी तरह जैसे भारत में शाहजहाँपुर जिला व उसके मुख्यालय दोनों का ही नाम शाहजहाँपुर है। बिस्मिल शहर की जनसंख्या 60,150 है। इस शहर के मेयर केमिले एमिनोग्लू हैं जो पीस एण्ड डिमोक्रेसी पार्टी से ताल्लुक रखते हैं। .

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बगुला

बगुला (Herons) नदियों, झीलों और समुद्रों के किनारे मिलने वाले लम्बी टांगों व गर्दनों वाले पक्षियों का एक कुल है। .

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बुन्देलखण्ड

बुन्देलखण्ड मध्य भारत का एक प्राचीन क्षेत्र है।इसका प्राचीन नाम जेजाकभुक्ति है.

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बुंदेलखंड के शासक

' बुंदेलखंड के ज्ञात इतिहास के अनुसार यहां ३०० ई. प सौरभ तिवारी ब्राह्मण सासक मौर्य शासनकाल के साक्ष्‍य उपलब्‍ध है। इसके पश्‍चात वाकाटक और गुप्‍त शासनकाल, कलचुरी शासनकाल, चंदेल शासनकाल, खंगार1खंगार शासनकाल, बुंदेल शासनकाल (जिनमें ओरछा के बुंदेल भी शामिल थे), मराठा शासनकाल और अंग्रेजों के शासनकाल का उल्‍लेख मिलता है। .

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ब्र.जयसागर जी

ब्र.

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ब्रोमीन

ब्रोमीन आवर्त सारणी (periodic table) के सप्तम मुख्य समूह का तत्व है और सामान्य ताप पर केवल यही अधातु द्रव अवस्था में रहती है। इसके दो स्थिर समस्थानिक (isotopes) प्राप्य हैं, जिनकी द्रव्यमान संख्याएँ 79 और 81 है। इसके अतिरिक्त इस तत्व के 11 रेडियोधर्मी समस्थानिक निर्मित हुए हैं, जिनकी द्रव्यमान संख्याएँ 75, 76, 77, 78, 80, 82, 83, 84, 85, 86 और 88 हैं। फ्रांस के वैज्ञानिक बैलार्ड ने ब्रोमीन की 1826 ई. में खोज की। इसकी तीक्ष्ण गंध, के कारण ही उसने इसका नाम 'ब्रोमीन' रखा, जिसका अर्थ यूनानी भाषा में 'दुर्गंध' होता है। ब्रोमीन सक्रिय तत्व होने के कारण मुक्त अवस्था में नहीं मिलता। इसके मुख्य यौगिक सोडियम, पोटैशियम और मैग्नीशियम के ब्रोमाइड हैं। जर्मनी के शटासफुर्ट (Stassfurt) नामक स्थान में इसके यौगिक बहुत मात्रा में उपस्थित हैं। समुद्रतल भी इसका उत्तम स्रोत है। कुछ जलजीव एवं वनस्पति पदार्थो में ब्रोमीन यौगिक विद्यमान हैं। .

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बोहोल सागर

बोहोल सागर दक्षिणपूर्वी एशिया के फ़िलिपीन्ज़ देश के दक्षिणपश्चिमी भाग से सटा हुआ एक सागर है। यह मिन्दनाओ द्वीप और विसाया द्वीपसमूह के बीच में स्थित है। .

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बीना

कोई विवरण नहीं।

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बीमा का इतिहास

बीमा की उत्पत्ति का कोई प्रामाणिक उल्ले ख या इतिहास नहीं मिलता है परन्तु विभिन्न वर्णनों से यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि बीमा की उत्पति अति प्राचीन काल में सभ्यता के विकास के साथ हुई। पहले संयुक्त परिवार प्रथा भी बीमा का ही एक स्वरूप था यदि परिवार में कोई मर जाता, अपंग हो जाता, बेरोजगार हो जा उस व्यक्ति को उसकी पत्नी व बच्चों की देखभाल परिवार के अन्य लोग करते, परन्तु वर्तमान में यह व्यवस्था विघटित होने से बीमे की आवश्यकता उत्पन्न होने लगी। जीवन बीमा का प्रादुर्भाव भी ईसा पूर्व माना जाता है। रोम के लोग जीवन बीमा से परिचित थे परन्तु आधुनिक स्वरूप का प्रारम्भ 1583 को ही हुआ जबकि लन्दन के श्री विलियम गिब्बन्स के जीवन का एक वर्ष का बीमा किया गया। कहा जाता है कि मेसोपोटामिया व बेबीलोन नें 3000 वर्ष पूर्व में प्रथम बार बीमा प्रारम्भ किया गया। आधुनिक बीमा का विकास 13वीं शताब्दी में हुआ माना जाता है। प्राचीनकाल में विदेशों के साथ माल का आवागमन अधिकांश समुद्री मार्ग से ही होता था, जो अनेक जोखिम से भरपूर था। इन जोखिमों से बचाव हेतु व्यापारी एक समझौता कर लेते थे कि मार्ग में होने वाली हानि को व्यापारी हितों के अनुसार बांट लेंगे इसी प्रकार ऋण देने की प्रथा भी थी जिसे बौटमरी बॉण्ड कहा जाता है। इस प्रकार सर्वप्रथम सामुद्रिक बीमा व फिर अग्नि बीमा का विकास हुआ। एडर्क्ड लायड नामक काफी विक्रेता ने लंदन में समुद्री बीमा को आधुनिक रूप प्रदान किया। 1666 में हुए लंदन के महान अग्निकाण्ड में जिसमें 13000 घर जलकर स्वाहा हो गये थे, ने बीमा को बढ़ावा दिया और 1680 में 'फायर आफिस’ नामक पहली अग्नि बीमा कम्पनी का श्री गणेश हुआ। .

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भारत में राष्ट्रीय राजमार्गों की सूची - प्रदेश अनुसार

भारत में राष्ट्रीय राजमार्गों का संजाल भारत में राष्ट्रीय राजमार्गों की सूची भारतीय राजमार्ग के क्षेत्र में एक व्यापक सूची देता है, द्वारा अनुरक्षित सड़कों के एक वर्ग भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण। ये लंबे मुख्य में दूरी roadways हैं भारत और के अत्यधिक उपयोग का मतलब है एक परिवहन भारत में। वे में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा भारतीय अर्थव्यवस्था। राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 2 laned (प्रत्येक दिशा में एक), के बारे में 65,000 किमी की एक कुल, जिनमें से 5,840 किमी बदल सकता है गठन में "स्वर्ण Chathuspatha" या स्वर्णिम चतुर्भुज, एक प्रतिष्ठित परियोजना राजग सरकार द्वारा शुरू की श्री अटल बिहारी वाजपेयी.

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भारत में स्मार्ट नगर

भारत में स्मार्ट नगर की कल्पना प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की है जिन्होंने देश के १०० नगरों को स्मार्ट नगरों के रूप में विकसित करने का संकल्प किया है। सरकार ने २७ अगस्त २०१५ को ९८ प्रस्तावित स्मार्ट नगरों की सूची जारी कर दी। .

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भारत में विश्वविद्यालयों की सूची

यहाँ भारत में विश्वविद्यालयों की सूची दी गई है। भारत में सार्वजनिक और निजी, दोनों विश्वविद्यालय हैं जिनमें से कई भारत सरकार और राज्य सरकार द्वारा समर्थित हैं। इनके अलावा निजी विश्वविद्यालय भी मौजूद हैं, जो विभिन्न निकायों और समितियों द्वारा समर्थित हैं। शीर्ष दक्षिण एशियाई विश्वविद्यालयों के तहत सूचीबद्ध विश्वविद्यालयों में से अधिकांश भारत में स्थित हैं। .

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भारत के राष्ट्रीय राजमार्गों की सूची - संख्या अनुसार

भारत के राष्ट्रीय राजमार्गों की सूची (संख्या के क्रम में) भारत के राजमार्गो की एक सूची है। .

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भारत २०१०

इन्हें भी देखें 2014 भारत 2014 विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी 2014 साहित्य संगीत कला 2014 खेल जगत 2014 .

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भारतीय थलसेना

भारतीय थलसेना, सेना की भूमि-आधारित दल की शाखा है और यह भारतीय सशस्त्र बल का सबसे बड़ा अंग है। भारत का राष्ट्रपति, थलसेना का प्रधान सेनापति होता है, और इसकी कमान भारतीय थलसेनाध्यक्ष के हाथों में होती है जो कि चार-सितारा जनरल स्तर के अधिकारी होते हैं। पांच-सितारा रैंक के साथ फील्ड मार्शल की रैंक भारतीय सेना में श्रेष्ठतम सम्मान की औपचारिक स्थिति है, आजतक मात्र दो अधिकारियों को इससे सम्मानित किया गया है। भारतीय सेना का उद्भव ईस्ट इण्डिया कम्पनी, जो कि ब्रिटिश भारतीय सेना के रूप में परिवर्तित हुई थी, और भारतीय राज्यों की सेना से हुआ, जो स्वतंत्रता के पश्चात राष्ट्रीय सेना के रूप में परिणत हुई। भारतीय सेना की टुकड़ी और रेजिमेंट का विविध इतिहास रहा हैं इसने दुनिया भर में कई लड़ाई और अभियानों में हिस्सा लिया है, तथा आजादी से पहले और बाद में बड़ी संख्या में युद्ध सम्मान अर्जित किये। भारतीय सेना का प्राथमिक उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रवाद की एकता सुनिश्चित करना, राष्ट्र को बाहरी आक्रमण और आंतरिक खतरों से बचाव, और अपनी सीमाओं पर शांति और सुरक्षा को बनाए रखना हैं। यह प्राकृतिक आपदाओं और अन्य गड़बड़ी के दौरान मानवीय बचाव अभियान भी चलाते है, जैसे ऑपरेशन सूर्य आशा, और आंतरिक खतरों से निपटने के लिए सरकार द्वारा भी सहायता हेतु अनुरोध किया जा सकता है। यह भारतीय नौसेना और भारतीय वायुसेना के साथ राष्ट्रीय शक्ति का एक प्रमुख अंग है। सेना अब तक पड़ोसी देश पाकिस्तान के साथ चार युद्धों तथा चीन के साथ एक युद्ध लड़ चुकी है। सेना द्वारा किए गए अन्य प्रमुख अभियानों में ऑपरेशन विजय, ऑपरेशन मेघदूत और ऑपरेशन कैक्टस शामिल हैं। संघर्षों के अलावा, सेना ने शांति के समय कई बड़े अभियानों, जैसे ऑपरेशन ब्रासस्टैक्स और युद्ध-अभ्यास शूरवीर का संचालन किया है। सेना ने कई देशो में संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशनों में एक सक्रिय प्रतिभागी भी रहा है जिनमे साइप्रस, लेबनान, कांगो, अंगोला, कंबोडिया, वियतनाम, नामीबिया, एल साल्वाडोर, लाइबेरिया, मोज़ाम्बिक और सोमालिया आदि सम्मलित हैं। भारतीय सेना में एक सैन्य-दल (रेजिमेंट) प्रणाली है, लेकिन यह बुनियादी क्षेत्र गठन विभाजन के साथ संचालन और भौगोलिक रूप से सात कमान में विभाजित है। यह एक सर्व-स्वयंसेवी बल है और इसमें देश के सक्रिय रक्षा कर्मियों का 80% से अधिक हिस्सा है। यह 1,200,255 सक्रिय सैनिकों और 909,60 आरक्षित सैनिकों के साथ दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी स्थायी सेना है। सेना ने सैनिको के आधुनिकीकरण कार्यक्रम की शुरुआत की है, जिसे "फ्यूचरिस्टिक इन्फैंट्री सैनिक एक प्रणाली के रूप में" के नाम से जाना जाता है इसके साथ ही यह अपने बख़्तरबंद, तोपखाने और उड्डयन शाखाओं के लिए नए संसाधनों का संग्रह एवं सुधार भी कर रहा है।.

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भारतीय रसायन का इतिहास

भारतीय धातुकर्म का एक नमूना है। भारत में रसायन शास्त्र की अति प्राचीन परंपरा रही है। पुरातन ग्रंथों में धातुओं, अयस्कों, उनकी खदानों, यौगिकों तथा मिश्र धातुओं की अद्भुत जानकारी उपलब्ध है। इन्हीं में रासायनिक क्रियाओं में प्रयुक्त होने वाले सैकड़ों उपकरणों के भी विवरण मिलते हैं। वस्तुत: किसी भी देश में किसी ज्ञान विशेष की परंपरा के उद्भव और विकास के अध्ययन के लिए विद्वानों को तीन प्रकार के प्रमाणों पर निर्भर करना पड़ता है-.

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भूमध्य सागर

भूमध्य सागर (Mediterranean sea) पृथ्वी का एक सागर है, जो उत्तरी अफ्रीका, यूरोप, अनातोलिया तथा मध्य पूर्व के बीच स्थित है। इसका क्षेत्रफल लगभग २५ लाख वर्ग किलोमीटर है, जो भारत के क्षेत्रफल का लगभग तीन-चौथाई है। प्राचीन काल में यूनान, अनातोलिया, कार्थेज, स्पेन, रोम, यरुशलम, अरब तथा मिस्र जैसे प्रदेशों तथा नगरों के बीच स्थित होने की वजह से इसे भूमध्य (धरती के बीच का) सागर कहते थे। यह अटलांटिक महासागर से जिब्राल्टर द्वारा जुड़ा है, जो केवल १४ किलोमीटर चौड़ा एक जलडमरूमध्य है। भूमध्य सागर का मानचित्र .

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भूमि उद्धार

समुद्र, नदी या झील की भूमि से नयी भूमि बनाना भूमि उद्धार (Land reclamation) कहलाता है। जलक्षेत्रों के निचले या आसपास के क्षेत्रों में कृत्रिम भूमि के सृजन और भूमि के स्तर को उठाने की प्रक्रिया को “भूमि उद्धार” कहते हैं।उसमें भरने की मिट्टी को साधारणतया आसपास के जलीय क्षेत्रों से लिया जाता है ताकि जलीय क्षेत्रों की गहराई को सुधारा जा सके और साथ ही भूमि के सृजन के लिए उसका प्रयोग किया जा सके। श्रेणी:पर्यावरणीय मृदा विज्ञान.

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मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश भारत का एक राज्य है, इसकी राजधानी भोपाल है। मध्य प्रदेश १ नवंबर, २००० तक क्षेत्रफल के आधार पर भारत का सबसे बड़ा राज्य था। इस दिन एवं मध्यप्रदेश के कई नगर उस से हटा कर छत्तीसगढ़ की स्थापना हुई थी। मध्य प्रदेश की सीमाऐं पांच राज्यों की सीमाओं से मिलती है। इसके उत्तर में उत्तर प्रदेश, पूर्व में छत्तीसगढ़, दक्षिण में महाराष्ट्र, पश्चिम में गुजरात, तथा उत्तर-पश्चिम में राजस्थान है। हाल के वर्षों में राज्य के सकल घरेलू उत्पाद की विकास दर राष्ट्रीय औसत से ऊपर हो गया है। खनिज संसाधनों से समृद्ध, मध्य प्रदेश हीरे और तांबे का सबसे बड़ा भंडार है। अपने क्षेत्र की 30% से अधिक वन क्षेत्र के अधीन है। इसके पर्यटन उद्योग में काफी वृद्धि हुई है। राज्य में वर्ष 2010-11 राष्ट्रीय पर्यटन पुरस्कार जीत लिया। .

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मध्य प्रदेश के शहरों की सूची

1.

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महाद्वीपीय ताक

प्रावार विश्वभर के महाद्वीपीय ताक, हलके नीले रंग में महाद्वीपीय ताक (Continental shelf) सागर या महासागर में जल के भीतर धरती का एक ताक होता है जो किसी महाद्वीप का समुद्रतल से कम ऊँचाई वाला अंश हो। महाद्वीपीय ताक पर पानी की गहराई कम होती है और ताक के अन्त से आगे महाद्वीपीय ढलान में गहराई बढ़ने लगती है। हिमयुगों के दौरान, जब समुद्रजल का कुछ हिस्सा ब़र्फ में जमा होने के कारण समुद्रतल गिर जाता है, जो महाद्वीपीय ताक का एक बड़ा भाग पानी से ऊपर निकलकर धरती बन जाता है। .

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महाभारत

महाभारत हिन्दुओं का एक प्रमुख काव्य ग्रंथ है, जो स्मृति वर्ग में आता है। कभी कभी केवल "भारत" कहा जाने वाला यह काव्यग्रंथ भारत का अनुपम धार्मिक, पौराणिक, ऐतिहासिक और दार्शनिक ग्रंथ हैं। विश्व का सबसे लंबा यह साहित्यिक ग्रंथ और महाकाव्य, हिन्दू धर्म के मुख्यतम ग्रंथों में से एक है। इस ग्रन्थ को हिन्दू धर्म में पंचम वेद माना जाता है। यद्यपि इसे साहित्य की सबसे अनुपम कृतियों में से एक माना जाता है, किन्तु आज भी यह ग्रंथ प्रत्येक भारतीय के लिये एक अनुकरणीय स्रोत है। यह कृति प्राचीन भारत के इतिहास की एक गाथा है। इसी में हिन्दू धर्म का पवित्रतम ग्रंथ भगवद्गीता सन्निहित है। पूरे महाभारत में लगभग १,१०,००० श्लोक हैं, जो यूनानी काव्यों इलियड और ओडिसी से परिमाण में दस गुणा अधिक हैं। हिन्दू मान्यताओं, पौराणिक संदर्भो एवं स्वयं महाभारत के अनुसार इस काव्य का रचनाकार वेदव्यास जी को माना जाता है। इस काव्य के रचयिता वेदव्यास जी ने अपने इस अनुपम काव्य में वेदों, वेदांगों और उपनिषदों के गुह्यतम रहस्यों का निरुपण किया हैं। इसके अतिरिक्त इस काव्य में न्याय, शिक्षा, चिकित्सा, ज्योतिष, युद्धनीति, योगशास्त्र, अर्थशास्त्र, वास्तुशास्त्र, शिल्पशास्त्र, कामशास्त्र, खगोलविद्या तथा धर्मशास्त्र का भी विस्तार से वर्णन किया गया हैं। .

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महाश्वेता देवी

महाश्वेता देवी (14 जनवरी 1926 – 28 जुलाई 2016) रेमन मैगसेसे पुरस्कार.

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माणिकचंद्र वाजपेयी

माणिकचन्द्र वाजपेयी (7 अक्टूबर 1919 - 27 दिसम्बर 2005) भारत के राष्ट्रवादी एवं ध्येयनिष्ठ पत्रकार थे। मध्यप्रदेश शासन द्वारा ध्येयनिष्ठ पत्रकारिता और मूल्याधारित पत्रकारिता के लिये स्व.

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मामल्लपुरम

मामल्लपुरम चेन्नई का एक सागर तट है। श्रेणी:चेन्नई में सागर तट.

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मालवा

1823 में बने एक एक ऐतिहासिक मानचित्र में मालवा को दिखाया गया है। विंध्याचल का दृश्य, यह मालवा की दक्षिणी सीमा को निर्धारित करता है। इससे इस क्षेत्र की कई नदियां निकली हैं। मालवा, ज्वालामुखी के उद्गार से बना पश्चिमी भारत का एक अंचल है। मध्य प्रदेश के पश्चिमी भाग तथा राजस्थान के दक्षिणी-पूर्वी भाग से गठित यह क्षेत्र प्राचीन काल से ही एक स्वतंत्र राजनीतिक इकाई रहा है। मालवा का अधिकांश भाग चंबल नदी तथा इसकी शाखाओं द्वारा संचित है, पश्चिमी भाग माही नदी द्वारा संचित है। यद्यपि इसकी राजनीतिक सीमायें समय समय पर थोड़ी परिवर्तित होती रही तथापि इस छेत्र में अपनी विशिष्ट सभ्यता, संस्कृति एंव भाषा का विकास हुआ है। मालवा के अधिकांश भाग का गठन जिस पठार द्वारा हुआ है उसका नाम भी इसी अंचल के नाम से मालवा का पठार है। इसे प्राचीनकाल में 'मालवा' या 'मालव' के नाम से जाना जाता था। वर्तमान में मध्यप्रदेश प्रांत के पश्चिमी भाग में स्थित है। समुद्र तल से इसकी औसत ऊँचाई ४९६ मी.

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मित्र वरुण

मित्र और वरुण दो हिन्दू देवता है। ऋग्वेद में दोनों का अलग और प्राय: एक साथ भी वर्णन है, अधिकांश पुराणों में 'मित्रावरुण' इस एक ही शब्द द्वारा उल्लेख है।। ये द्वादश आदित्य में भी गिने जाते हैं। इनका संबंध इतना गहरा है कि इन्हें द्वंद्व संघटकों के रूप में गिना जाता है। इन्हें गहन अंतरंग मित्रता या भाइयों के रूप में उल्लेख किया गया है। ये दोनों कश्यप ऋषि की पत्नी अदिति के पुत्र हैं। ये दोनों जल पर सार्वभौमिक राज करते हैं, जहां मित्र सागर की गहराईयों एवं गहनता से संबद्ध है वहीं वरुण सागर के ऊपरी क्षेत्रों, नदियों एवं तटरेखा पर शासन करते हैं। मित्र सूर्योदय और दिवस से संबद्ध हैं जो कि सागर से उदय होता है, जबकि वरुण सूर्यास्त एवं रात्रि से संबद्ध हैं जो सागर में अस्त होती है। मित्र द्वादश आदित्यों में से हैं जिनसे वशिष्ठ का जन्म हुआ। वरुण से अगस्त्य की उत्पति हुई और इन दोनों के अंश से इला नामक एक कन्या उस यज्ञकुंड से प्रगट हुई जिसे प्रजापति मनु ने पुत्रप्राप्ति की कामना से रचाया था। स्कन्दपुराण के अनुसार काशी स्थित मित्रावरुण नामक दो शिवलिंगों की पूजा करने से मित्रलोक एवं वरुणलोक की प्राप्ति होती है। दोनों देवता पृथ्वी एवं आकाश को जल से संबद्ध किये रहते हैं तथा दोनों ही चंद्रमा, सागर एवं ज्वार से जुड़े रहते हैं। भौतिक मानव शरीर में मित्र शरीर से मल को बाहर निकालते हैं जबकि वरुण पोषण को अंदर लेते हैं, इस प्रकार मित्र शरीर के निचले भागों (गुदा एवं मलाशय) से जुड़े हैं वहीं वरुण शरीर के ऊपरी भागों (मुख एवं जिह्वा) पर शासन करते हैं। मित्र, वरुण एवं अग्नि को ईश्वर के नेत्र स्वरूप माना जाता है। वरुण की उत्पत्ति व्रि अर्थात संयोजन यानि जुड़ने से हुई है। इसी प्रका मित्र की उत्पत्ति मींय अर्थात संधि से हुई है। .

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मकर संक्रान्ति

मकर संक्रान्ति हिन्दुओं का प्रमुख पर्व है। मकर संक्रान्ति पूरे भारत और नेपाल में किसी न किसी रूप में मनाया जाता है। पौष मास में जब सूर्य मकर राशि पर आता है तभी इस पर्व को मनाया जाता है। वर्तमान शताब्दी में यह त्योहार जनवरी माह के चौदहवें या पन्द्रहवें दिन ही पड़ता है, इस दिन सूर्य धनु राशि को छोड़ मकर राशि में प्रवेश करता है। एक दिन का अंतर लौंद वर्ष के ३६६ दिन का होने ही वजह से होता है | मकर संक्रान्ति उत्तरायण से भिन्न है। मकर संक्रान्ति पर्व को कहीं-कहीं उत्तरायणी भी कहते हैं, यह भ्रान्ति गलत है कि उत्तरायण भी इसी दिन होता है । उत्तरायण का प्रारंभ २१ या २२ दिसम्बर को होता है | लगभग १८०० वर्ष पूर्व यह स्थिति उत्तरायण की स्थिति के साथ ही होती थी, संभव है की इसी वजह से इसको व उत्तरायण को कुछ स्थानों पर एक ही समझा जाता है | तमिलनाडु में इसे पोंगल नामक उत्सव के रूप में मनाते हैं जबकि कर्नाटक, केरल तथा आंध्र प्रदेश में इसे केवल संक्रांति ही कहते हैं। .

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मछली प्रव्रजन

मछली प्रव्रजन (fish migration) कई मछली जातियों के जीवनक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। कुछ मछलियाँ अपनी दिनाचार्या में प्रत्येक दिन एक स्थान से कुछ मीटर दूर किसी दूसरे स्थान और फिर वापस प्रव्रजन करती हैं और कुछ ऋतुक्रम के अनुसार हज़ारों मील की दूर तय करती हैं। अधिकतर मछलियाँ आहार-प्राप्ति या प्रजनन के लिए विधिवत स्थानांतरण करती हैं लेकिन कुछ जातियों में प्रव्रजन के लिए कोई स्पष्ट कारण ज्ञात नहीं है। .

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मुहाना

मुहाना सभी नदियाँ किसी न किसी समुद्र में मिलती हैं। जहाँ पर नदी सागर से मिलती है, उस जगह खारे और मीठे पानी के मिलने से, नदी द्वारा बहा कर लाई गई मिट्टी आदि जमा होने लगती है। इस कारण धीरे धीरे नदी की धारा कई छोटे छोटे भागों में बँट जाती है। इस क्षेत्र को नदी का मुहाना कहते हैं।.

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मैग्नीसियम

मैग्नेशियम एक रासायनिक तत्त्व है, जिसका चिह्न है Mg, परमाणु संख्या १२ एवं सामान्य ऑक्सीडेशन संख्या +२ है। है। यह कैल्शियम और बेरियम की तरह एक एल्केलाइन अर्थ धातु है एवं पृथ्वी पर आठवाँ बहुल उपलब्ध तत्त्व है तथा भार के अनुपात में २% है, और पूरे ब्रह्माण्ड में नौंवा बहुल तत्त्व है। इसके बाहुल्य का संबंध ये तथ्य है, कि ये सुपरनोवा तारों में तीन हीलियम नाभिकों के कार्बन में शृंखलागत तरीके से जुड़ने पर मैग्नेशियम का निर्माण होता है। मैग्नेशियम आयन की जल में उच्च घुलनशीलता इसे सागर के जल में तीसरा बहुल घुला तत्त्व बनाती है। मैग्नीशियम सभी जीव जंतुओं के साथ मनुष्य के लिए भी उपयोगी तत्त्व है। यह प्रकाश का स्नोत है और जलने पर श्वेत प्रकाश उत्सर्जित करता है। यह मानव शरीर में पाए जाने वाले पांच प्रमुख रासायनिक तत्वों में से एक है। मानव शरीर में उपस्थित ५०% मैग्नीशियम अस्थियों और हड्डियों में होता है जबकि शेष भाग शरीर में हाने वाली जैविक कियाओं में सहयोगी रहता है। left एक स्वस्थ आहार में इसकी पर्याप्त मात्रा होनी चाहिये। इसकी अधिकता से अतिसार और न्यूनता से न्यूरोमस्कुलर समस्याएं हो सकती है। मैग्नीशियम हरी पत्तेदार सब्जियों में पाया जाता है।|हिन्दुस्तान लाईव। २४ मई २०१० इसकी खोज सर हंफ्री डेवी ने १८०८ में की थी। असल में डेवी ने वास्तव में धातु के एक ऑक्साइड को खोजा था, जो बाद में एक तत्व निकला। एक अन्य मान्यता अनुसार कि मैग्नीशियम की खोज १८वीं शताब्दी के मध्य में हुई थी। वैसे इसके एक यौगिक एप्सम लवण की खोज १७वीं शताब्दी में हो चुकी थी और वह आज भी प्रयोग में आता है। इसका एक अन्य यौगिक मिल्क ऑफ मैग्नीशिया कहलाता है। मैग्नीशियम अन्य तत्वों के साथ सरलता से अभिक्रिया कर यौगिक बना लेता है, जिस कारण यह प्रकृति में सदा यौगिकों के रूप में उपस्थित होता है। सागर का जल मैग्नीशियम का एक बड़ा स्रोत है, अतः कई धातु-शोधक कंपनियां इसे सागर से शोधित कर इसका औद्योगिक प्रयोग करती हैं। विलयन पर यह चांदी जैसा सफेद और भार में अपेक्षाकृत हल्का हो जाता है। धातु रूप में यह विषैला (टॉक्सिक) नहीं होता, किन्तु जलाने पर यह विषैला प्रभाव छोड़ता है। इसीलिए गर्म मैग्नीशियम का प्रयोग करते समय नाक को सावधानी से बचाकर काम करना चाहिए। मैग्नीशियम हल्का तत्व होने पर भी काफी मजबूत होता है। इस कारण ही इसे मिश्र धातुओं और अंतरिक्ष उद्योग के लिए उपयोगी माना जाता है। कुछ उच्च क्षमता वाले स्वचालित यंत्रों में भी इसका प्रयोग किया जाता है। .

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मेक्सिको की खाड़ी

मेक्सिको की खाड़ी का नक़्शा मेक्सिको की खाड़ी (स्पेनी: Golfo de México, गोल्फ़ो दे मेहिको) पश्चिमी अंध महासागर का एक समुद्र है। यह उत्तर अमेरिका और क्यूबा से घिरा हुआ है और कैरिबियाई सागर के पश्चिम में स्थित है। इसका क्षेत्रफल लगभग १६ लाख वर्ग किमी है और इसका सबसे गहरा स्थान सतह से १४,३८३ फ़ुट (४,३८४ मीटर) की गहराई पर स्थित सिग्स्बी खाई है। माना जाता है के इस सागर की द्रोणी का निर्माण आक्ज से लगभग ३० करोड़ वर्ष पूर्व इसके फ़र्श के नीचे धंसने से हुआ। उस से पहले यह एक ज़मीनी क्षेत्र था। इस समुद्र में विलय होने वाली सबसे बड़ी नदी मिसिसिप्पी नदी है। इसके पश्चिमोत्तर छोर पर संयुक्त राज्य अमेरिका का फ़्लोरिडा राज्य और उत्तर में अमिका के ही अलाबामा, मिसिसिप्पी, लुइज़ियैना और टॅक्सस राज्य हैं। दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम में मेक्सिको के तामाउलिपास, वेराक्रूस, ताबास्को, काम्पेचे, यूकातान और किन्ताना रू राज्य हैं। इसके दक्षिण-पूर्व में क्यूबा पड़ता है। इस समुद्र में मछलियों, झींगों और अन्य समुद्री जीवों की भरमार है और अमेरिका, मेक्सिको और क्यूबा के मछुआरे उद्योग यहाँ पर बहुत पनपे हैं। .

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यार्चा गुम्बा

यार्चा गुम्बा यार्चा गुम्बा एक आयुर्वेदिक जड़ि-बुटि है जिसे अंग्रेजी में Cordyceps Sinensis कहा जाता है। यार्चा गुम्बा नेपाली नाम है जो समुद्र तल से 3800 मिटर ऊपर नेपाल और तिब्बत के हिमालय पर पाया जाता है। यह एक High Value Traditional Medicine है। यार्चा गुम्बा एक फिल्म किट (movie insect) और एक प्रकार के पौधे के प्रतिक्रिया के द्वारा सर्दियोँ के दिनोँ में बनता है। यह भूरे रंग का होता है तथा यह 2 ईंच लम्बा होता है तथा इसका स्वाद मीठा होता है। .

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युरिप्टेरिडा

युरिप्टेरिडा या समुद्री बिच्छु आर्थ्रोपोडा का एक विलुप्त जीववैज्ञानिक गण है जो अरैकनिडा (मकड़ी और सम्बन्धित प्राणी) से सम्बन्धित है और जिसमें विश्व के सबसे बड़े ज्ञात आर्थ्रोपोड थे। हालांकि इनका नाम "समुद्री बिच्छु" है, यह बिच्छु नहीं थे और इनकी केवल सबसे पहली उत्पन्न हुई जातियाँ ही सागर में रहती थीं (बाद में विकसित हुई जातियाँ मीठे पानी या अर्ध-खारे पानी में रहती थीं)। इसकी अधिकांश जातियाँ 20 सेंटीमीटर से कम थी लेकिन सबसे बड़ी जाति की लम्बाई 2.5 मीटर (8 फ़ुट 2 इंच) थी। .

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रामेश्वरम तीर्थ

रामेश्वरम हिंदुओं का एक पवित्र तीर्थ है। यह तमिल नाडु के रामनाथपुरम जिले में स्थित है। यह तीर्थ हिन्दुओं के चार धामों में से एक है। इसके अलावा यहां स्थापित शिवलिंग बारह द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। भारत के उत्तर मे काशी की जो मान्यता है, वही दक्षिण में रामेश्वरम् की है। रामेश्वरम चेन्नई से लगभग सवा चार सौ मील दक्षिण-पूर्व में है। यह हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी से चारों ओर से घिरा हुआ एक सुंदर शंख आकार द्वीप है। बहुत पहले यह द्वीप भारत की मुख्य भूमि के साथ जुड़ा हुआ था, परन्तु बाद में सागर की लहरों ने इस मिलाने वाली कड़ी को काट डाला, जिससे वह चारों ओर पानी से घिरकर टापू बन गया। यहां भगवान राम ने लंका पर चढ़ाई करने से पूर्व एक पत्थरों के सेतु का निर्माण करवाया था, जिसपर चढ़कर वानर सेना लंका पहुंची व वहां विजय पाई। बाद में राम ने विभीषण के अनुरोध पर धनुषकोटि नामक स्थान पर यह सेतु तोड़ दिया था। आज भी इस ३० मील (४८ कि.मी) लंबे आदि-सेतु के अवशेष सागर में दिखाई देते हैं। यहां के मंदिर के तीसरे प्राकार का गलियारा विश्व का सबसे लंबा गलियारा है। .

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रामेश्वरम शहर

रामेश्वरम् (तमिळ - इरोमेस्वरम्) दक्षिण भारत के तट पर स्थित एक द्वीप-शहर है जो हिंदुओं का पवित्र तीर्थ भी है। उत्तर भारत में काशी (वाराणसी या बनारस) की जो मान्यता है, वही दक्षिण में रामेश्वरम् की है। धार्मिक हिंदुओं के लिए वहां की यात्रा उतना की महत्व रखती है, जितना कि काशी की। रामेश्वरम् मद्रास से कोई ६०० किमी दक्षिण में है। रामेश्वरम् एक सुन्दर टापू है। हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी इसको चारों ओर से घेरे हुए हैं। यहाँ पर रामायण से संबंधित अन्य धार्मिक स्थल भी हैं। यह तमिळनाडु के रामनाथपुरम ज़िले का तीसरा सबसे बड़ा शहर है जिसकी देखरेख १९९४ में स्थापित नगरपालिका करती है। पौराणिक कथाओं के अतिरिक्त यहाँ पर श्रीलंक के जाफ़ना के राजा, चोळ और अलाउद्दीन खिलजी के सेनापति मलिक काफूर की भी उपस्थिति रही है। श्रीलंका के गृहयुद्ध के दौरान विस्थापित तमिलों, ईसाई मिशनरियों और रामसेतु को तोड़कर नौवहन का रास्ता तैयार करने के लिए भी यह शहर चर्चा में रहा है। जिला मुख्यालय, रामनाथपुरम से यह कोई ५० किलेमीटर पूर्व की दिशा में पड़ता है। पर्यटन तथा मत्स्यव्यापार यहाँ के वासियों की मुख्य आजीविका है। .

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राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान, रूड़की

राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान (National Institute of Hydrology (NIH)) भारत सरकार के जल संसाधन मंत्रालय के अन्तर्गत एक सोसायटी है जो जलविज्ञान के क्षेत्र में कार्यरत एक अनुसंधान संस्थान है। इसका मुख्यालय रुड़की में स्थित है और १९८७ से कार्यरत है। इस संस्थान का उद्देश्‍य जलविज्ञान के समस्‍त पहलुओं पर वैज्ञानिक कार्यों में सहयोग देने के साथ-साथ व्‍यवस्‍थित रूप से इनका समन्‍वयन तथा प्रसार करना है। संस्‍थान का मुख्‍यालय रूड़की (उत्‍तराखंड) में स्‍थित है तथा बेलगांव, जम्‍मू, काकीनाडा एवं सागर में इसके चार क्षेत्रीय केंद्र तथा गुवाहटी एवं पटना में दो बाढ़ प्रबंधन अध्‍ययन केंद्र स्‍थित हैं। .

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राष्‍ट्रीय समुद्र प्रौद्योगिकी संस्‍थान

राष्‍ट्रीय समुद्र प्रौद्योगिकी संस्‍थान (National Institute of Ocean Technology / रासप्रौस) भारत सरकार के पृथ्‍वी विज्ञान मंत्रालय के तकनीकी स्‍कन्‍ध के रूप में विद्यमान है। यह संस्‍थान समुद्र के संसाधनों की फसल काटने से संबंधित तकनीकी विकासात्‍मक गतिविधियां संचालित करने के काम में लगा हुआ है। इस संस्थान के लक्ष्यक्षेत्र हैं - ऊर्जा व समुद्र जल से शुद्ध जल संगृहित करना, गहन सागर प्रौद्योगिकी, तटीय व पर्यावरणात्‍मक इन्‍जीनियरिंग, समुद्री ध्‍वनिकी, द्वीपों के लिए समुद्री विज्ञान व प्रौद्योगिकी और समुद्र परिवेक्षण प्रणाली आदि। इनके अलावा रासप्रौस के जलपोत प्रबंधन कक्ष दो तटीय अनुसन्‍धानात्‍मक जलपोतों का एक उत्‍फुल्‍लक टेन्‍डर व अनुसन्‍धानात्‍मक जलपोत और प्राद्योगिकी प्रदर्शनात्‍मक जलपोत का सन्‍धारण कर रहा है और उनके द्वारा, गृहाधीन कार्यक्रम अनुसन्‍धान संगठन व विश्‍व विद्यालयों को सेवाएं प्रदान कर रहा है। .

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राहतगढ़

राहतगढ़ सागर जिला की एक तहसील है। सागर-भोपाल मार्ग पर लगभग 40 किमी की दूरी पर स्थित यह कस्‍बा एक बरसाती जलप्रपात‎ के कारण प्रसिद्ध पिकनिक स्‍थल के रूप में विख्‍यात है। श्रेणी:सागर जिले की तहसीलें श्रेणी:सागर जिला.

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राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय

राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) भारत के मध्य प्रदेश राज्य में स्थित प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय है। इस विश्वविद्यालय के कैम्पस एवं इससे सम्बद्ध महाविद्यालय भोपाल, सागर, इन्दौर, जबलपुर, ग्वालियर आदि नगरों में हैं। .

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रक्षाबन्धन

रक्षाबन्धन एक हिन्दू व जैन त्योहार है जो प्रतिवर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। श्रावण (सावन) में मनाये जाने के कारण इसे श्रावणी (सावनी) या सलूनो भी कहते हैं। रक्षाबन्धन में राखी या रक्षासूत्र का सबसे अधिक महत्त्व है। राखी कच्चे सूत जैसे सस्ती वस्तु से लेकर रंगीन कलावे, रेशमी धागे, तथा सोने या चाँदी जैसी मँहगी वस्तु तक की हो सकती है। राखी सामान्यतः बहनें भाई को ही बाँधती हैं परन्तु ब्राह्मणों, गुरुओं और परिवार में छोटी लड़कियों द्वारा सम्मानित सम्बंधियों (जैसे पुत्री द्वारा पिता को) भी बाँधी जाती है। कभी-कभी सार्वजनिक रूप से किसी नेता या प्रतिष्ठित व्यक्ति को भी राखी बाँधी जाती है। अब तो प्रकृति संरक्षण हेतु वृक्षों को राखी बाँधने की परम्परा भी प्रारम्भ हो गयी है। हिन्दुस्तान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पुरुष सदस्य परस्पर भाईचारे के लिये एक दूसरे को भगवा रंग की राखी बाँधते हैं। हिन्दू धर्म के सभी धार्मिक अनुष्ठानों में रक्षासूत्र बाँधते समय कर्मकाण्डी पण्डित या आचार्य संस्कृत में एक श्लोक का उच्चारण करते हैं, जिसमें रक्षाबन्धन का सम्बन्ध राजा बलि से स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर होता है। भविष्यपुराण के अनुसार इन्द्राणी द्वारा निर्मित रक्षासूत्र को देवगुरु बृहस्पति ने इन्द्र के हाथों बांधते हुए निम्नलिखित स्वस्तिवाचन किया (यह श्लोक रक्षाबन्धन का अभीष्ट मन्त्र है)- इस श्लोक का हिन्दी भावार्थ है- "जिस रक्षासूत्र से महान शक्तिशाली दानवेन्द्र राजा बलि को बाँधा गया था, उसी सूत्र से मैं तुझे बाँधता हूँ। हे रक्षे (राखी)! तुम अडिग रहना (तू अपने संकल्प से कभी भी विचलित न हो।)" .

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रुडॉल्फ डीजल

रुडॉल्फ डीजल रुडॉल्फ डीज़ल (सन् 1858 - 1913), जर्मनी के प्रसिद्ध इंजीनियर थे। इनकी खोजों के आधार पर ही डीजल इंजन बना। .

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रेती (बैकशोर)

रेती रेती (backshore), किसी जलनिकाय के अन्दर या उससे बाहर की ओर विस्तारित होने वाला, एक रेखीय (कुछ हद तक) स्थलरूप है जिसके संघटक आम तौर पर रेत, गाद या छोटे कंकड़ होते हैं। एक स्पिट या संकरी रेती, रेती का एक प्रकार है। रेतियों की विशेषता इनका लंबा और संकीर्ण (रैखिक) होना है और इनकी रचना उन स्थानों पर होती है जहाँ कोई जलधारा या समुद्रीधारा दानेदार (कणिकामय) पदार्थों के निक्षेपण को प्रेरित करती है। इन निक्षेपणों के फलस्वरूप उस स्थान विशेष पर जल उथला हो जाता है और धीरे-धीरे रेती का निर्माण होता है। रेतियां, समुद्र, झील या नदी सब स्थानों पर पाई जाती हैं। कई बार जब एक रेती किसी झील से समुद्र को अलग करती है तब इसे आयर कहा जाता है। रेतियां मुख्यत: रेत या बालू से बनी होती है इसीलिए इन्हें रेती कहा जाता है, पर इनके संधटन में वो सभी दानेदार वस्तुएं शामिल होती है जिन्हें कोई धारा बहा कर एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जा सकती है (जैसे मिट्टी, गाद, कंकड़, बटिया, समुद्री कंकड़ और कई बार तो गोलाश्म भी)। रेती की निर्माण सामग्री के कणों का आकार लहरों के आकार और जलधारा के वेग पर निर्भर करता है पर, निर्माण सामग्री की उपलब्धता जिसे कोई जलधारा स्थानांतरित करती है भी, समान रूप से महत्वपूर्ण है। .

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रॉबिन्सन हेलीकॉप्टर कंपनी

लोगो रॉबिन्सन हेलीकॉप्टर कंपनी टोंरेंस, कैलिफोर्निया स्थित एक हेलीकॉप्टर निर्माता है।https://www.bloomberg.com/research/stocks/private/snapshot.asp?privcapId.

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रॉस सागर

रॉस सागर (Ross Sea) अंटार्कटिका के साथ लगा हुआ दक्षिणध्रुवीय महासागर का एक सागर है, जो उस महाद्वीप के विक्टोरिया धरती और मारी बर्ड धरती क्षेत्रों के बीच स्थित है। इस सागर के पश्चिम में रॉस द्वीप, पूर्व में रूज़वेल्ट द्वीप और दक्षिण में रॉस हिमचट्टान है। अपने सब से समीपी बिन्दु पर रॉस सागर दक्षिण ध्रुव से ३२० किमी (२०० मील) दूर है। .

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लहरबाज़ी

समुद्री लहर के ऊपरी हिस्से पर सवारी करता एक लहरबाज़ लहर टूटते ही लहरबाज़ नीचे की तरफ आ जाता है - इसे 'देर से उतरने वाली' (लेट ड्रॉप) लहरबाज़ी कहते हैं १९७५ में कैलिफ़ोर्निया के ओक्सनार्ड बीच पर लहरबाज़ी कैलिफ़ोर्निया के सांता क्रूज़ तट पर वेटसूट पहने एक लहरबाज़ शरीर के सामनांतर सतह पर और हाथों को फैलाये हुए एक लहरबाज़ तुरंत उलट गए तख़्ते से गिरा एक लहरबाज़ अशांत जल में लहर के टूटने की तस्वीर मानव-लंबाई से कहीं बड़ी टूटती हुई लहर में जूझते लहरबाज़ को किनारे से देखते दर्शक लहरबाज़ी या लहरसवारी या तरंगक्रीडा (अंग्रेज़ी: surfing, सरफ़िंग) समुद्र की लहरों पर किया जाने वाला एक खेल है जिसमें लहरबाज़ (सरफ़र) एक फट्टे पर संतुलन बनाकर खड़े रहते हुए तट की तरफ़ आती किसी लहर पर सवारी करते हैं। लहरबाज़ों के फट्टों को 'लहरतख़्ता' या 'सर्फ़बोर्ड' (surfboard) कहा जाता है। लहरबाज़ी का आविष्कार हवाई द्वीपों के मूल आदिवासियों ने किया था और वहाँ से यह विश्वभर में फैल गया।, Ben R. Finney, James D. Houston, Pomegranate, 1996, ISBN 978-0-87654-594-2 .

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लैगून

लैगून किसी विस्तृत जलस्रोत जैसे समुद्र या महासागर के किनारे पर बनने वाला एक उथला जल क्षेत्र होता है जो किसी पतली स्थलीय पेटी या अवरोध (रोध, रोधिका, भित्ति आदि) द्वारा सागर से अंशतः अथवा पूर्णतः अलग होता है। इसका निर्माण अधिकांशतः अपतट रोधिका, रोध, प्रवालभित्ति अथवा प्रवाल वलय द्वारा तटवर्ती जल को मुख्य सागर से पृथक् कर देने से होता है। किसी खाड़ी या लघु निवेशिका के सम्मुख पंक, रेत, बजरी आदि के निक्षेप से जब किसी रोधिका या रोध का निर्माण होता है, सागर तट और रोधिका या रोध के मध्य उथला सागरीय जल बन्द हो जाता है तथा लैगून बनता है। उड़ीसा के तट पर चिलका झील इसका उदाहरण है। इसी प्रकार तटीय प्रवाल भित्ति, अवरोधक भित्ति अथवा प्रवाल वलय से घिरा समुद्री जल लैगून बनाता है। .

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लूटजैनिडाए

स्नैपर (Snapper), जो जीववैज्ञानिक रूप से लूटजैनिडाए (Lutjanidae) कहलाता है, हड्डीदार मछलियों के पर्सिफ़ोर्मेज़ गण का एक कुल है। इस कुल की जातियाँ अधिकतर सागर में रहती हैं लेकिन कुछ आहार पाने के लिए ज्वारनदीमुखों (एस्चुएरियों) में भी जाती हैं। लूटजैनिडाए कुल में ११३ ज्ञात जातियाँ हैं, जिनमें से लाल स्नैपर सबसे अधिक जानी जाती है और मत्स्योद्योग में एक महत्वपूर्ण मछली है। .

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शाहगढ़

बुंदेलखंड के राजा छत्रसाल शाहगढ़ सागर जिला की एक तहसील है। इसे हाल ही में तहसील का दर्जा प्राप्‍त हुआ है। शाहगढ़ का बुंदेलखंड के इतिहास में महत्‍वपूर्ण स्‍थान है और यह कई बुंदेला शासकों की कर्मस्‍थली रहा है। सागर जिले के उत्तर पूर्व में सागर-कानपुर मार्ग पर करीब ७० किमी की दूरी पर स्थि‍त यह कस्‍बा कई ऐतिहासिक घटनाओं का साक्षी है। वनाच्‍छादित उत्तुंग शैलमाला की तराई में लांच नदी के दक्षिणी किनारे पर बसे शाहगढ़ का इतिहास बुंदेलों की वीरता का महत्‍वपूर्ण साक्ष्‍य है। .

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शिमला

शिमला, हिमाचल प्रदेश की राजधानी है। 1864 में, शिमला को भारत में ब्रिटिश राज की ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया गया था। एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल, शिमला को अक्सर पहाड़ों की रानी के रूप में जाना जाता है। .

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शिलांग के पर्यटन स्थल

शिलांग एक छोटा-सा शहर है जिसे पैदल घूमकर देखा जा सकता है। अपनी सुविधा के अनुसार सिटी बस या दिनभर के लिए ऑटो या टैक्सी किराए पर लेकर भी घूमा जा सकता है। शिलांग और उसके आसपास अनेक दर्शनीय स्थल है जैसे- .

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शीतोष्ण कटिबन्ध

विश्व मानचित्र जिसमें समशीतोष्ण कटिबन्ध '''हरे रंग''' से दिखाया गया है। शीतोष्ण कटिबन्ध या समशीतोष्ण कटिबन्ध (temperate zone) ऊष्णकटिबन्ध और शीत कटिबन्ध के बीच का क्षेत्र कहलाता है। इस क्षेत्र की विशेषता यह है कि यहाँ गर्मी और सर्दी के मौसम के तापमान में अधिक अन्तर नहीं होता। लेकिन यहाँ के कुछ क्षेत्रों में, जैसे मध्य एशिया और मध्य उत्तरी अमेरिका, जो समुद्र से काफ़ी दूर हैं, तापमान में काफ़ी परिवर्तन होता है और इन इलाकों में महाद्वीपीय जलवायु पाया जाता है। समशीतोष्ण कटिबन्धीय मौसम ऊष्णकटिबन्ध के कुछ इलाकों में भी पाया जा सकता है, खासतौर पर ऊष्णकटिबन्ध के पहाड़ी इलाकों में, जैसे एन्डीज़ पर्वत शृंखला। उत्तरी समशीतोष्ण कटिबन्ध उत्तरी गोलार्द्ध में कर्क रेखा (तकरीबन २३.५° उ) से आर्कटिक रेखा (तकरीबन ६६.५° उ) तक तथा दक्षिणी समशीतोष्ण कटिबन्ध दक्षिणी गोलार्द्ध में मकर रेखा (तकरीबन २३.५° द) से अंटार्कटिक रेखा (तकरीबन ६६.५° द) तक का क्षेत्र होता है। विश्व की बहुत बड़ी जनसंख्या समशीतोष्ण कटिबन्ध में— खासतौर पर उत्तरी समशीतोष्ण कटिबन्ध में— रहती है क्योंकि इस इलाके में भूमि की बहुतायत है। .

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शीर्षपाद

कुछ शीर्षपाद जन्तु शीर्षपाद या सेफैलोपोडा (Cephalopoda) अपृष्ठवंशी प्राणियों का एक सुसंगठित वर्ग जो केवल समुद्र ही में पाया जाता है। यह वर्ग मोलस्का (mollusca) संघ के अंतर्गत आता है। इस वर्ग के ज्ञात जीवित वंशों की संख्या लगभग १५० है। इस वर्ग के सुपरिचित उदाहरण अष्टभुज (octopus), स्क्विड (squid) तथा कटल फिश (cuttlefish) हैं। सेफैलोपोडा के विलुप्त प्राणियों की संख्या जीवितों की तुलना में अधिक है। इस वर्ग के अनेक प्राणी पुराजीवी (palaeozoic) तथा मध्यजीवी (mesozoic) समय में पाए जाते थे। विलुप्त प्राणियों के उल्लेखनीय उदाहरण ऐमोनाइट (Ammonite) तथा बेलेम्नाइट (Belemnite) हैं। सेफैलोपोडा की सामान्य रचनाएँ मोलस्का संघ के अन्य प्राणियों के सदृश ही होती हैं। इनका आंतरांग (visceral organs) लंबा और प्रावार (mantle) से ढका रहता है। कवच (shell) का स्राव (secretion) प्रावार द्वारा होता है। प्रावार और कवच के मध्य स्थान को प्रावार गुहा (mantle cavity) कहते हैं। इस गुहा में गिल्स (gills) लटकते रहते हैं। आहार नाल में विशेष प्रकार की रेतन जिह्वा (rasping tongue) या रैड्डला (redula) होता है। सेफोलोपोडा के सिर तथा पैर इतने सन्निकट होते हैं कि मुँह पैरों के मध्य स्थित होता है। पैरों के मुक्त सिरे कई उपांग (हाथ तथा स्पर्शक) बनाते हैं। अधिकांश जीवित प्राणियों में पंख (fins) तथा कवच होते हैं। इन प्राणियों के कवच या तो अल्प विकसित या ह्रसित होते हैं। इस वर्ग के प्राणियों का औसत आकार काफी बड़ा होता है। अर्किट्यूथिस (architeuthis) नामक वंश सबसे बड़ा जीवित अपृष्ठवंशी है। इस वंश के प्रिंसेप्स (princeps) नामक स्पेशीज की कुल लंबाई (स्पर्शक सहित) ५२ फुट है। सेफैलोपोडा, ह्वेल (whale), क्रस्टेशिआ (crustacea) तथा कुछ मछलियों द्वारा विशेष रूप से खाए जाते हैं। .

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समानता की प्रतिमा

समानता की प्रतिमा या डॉ॰ बाबासाहेब आम्बेडकर स्मारक, मुम्बई' 106.68 मीटर (350 फीट) ऊँचा महाराष्ट्र सरकार द्वारा प्रस्तावित भारत के प्रथम कानून मंत्री तथा भारतीय संविधान के पिता डॉ॰ भीमराव आंबेडकर जी का स्मारक है। भारत के प्रधानमंत्री श्री॰ नरेन्द्र मोदी ने अक्टूबर 2015 को डॉ॰ भीमराव आंबेडकर जी की इस विशालकाय मूर्ति एवं विश्व-स्मारक के निर्माण का मुंबई में शिलान्यास किया। इंदू मिल की 12 एकड भूमि पर यह भव्य स्मारक बनेगा। समानता का यह स्मारक डॉ॰ आंबेडकर के समाधि स्थल चैत्य भूमि के करीब है। डॉ॰ भीमराव आंबेडकर जी ने करोड़ो देशवासियों के समानता के पूरे जीवन भर संघर्ष किया, इसलिए भीमराव को समानता का प्रतीक (सिम्बॉल ऑफ इक्वेलिटी) कहा जाता है। .

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समुद्र तल

समुद्र तल से ऊँचाई दिखाता एक बोर्ड समुद्र तल या औसत समुद्र तल (अंग्रेज़ी:Mean sea level) समुद्र के जल के उपरी सतह की औसत ऊँचाई का मान होता है। इसकी गणना ज्वार-भाटे के कारण होने वाले समुद्री सतह के उतार चढ़ाव का लंबे समय तक प्रेक्षण करके उसका औसत निकाल कर की जाती है। इसे समुद्र तल से ऊँचाई (MSL-Metres above sea level) में व्यक्त किया जाता है। इसका प्रयोग धरातल पर स्थित बिंदुओं की ऊँचाई मापने के लिये सन्दर्भ तल के रूप में किया जाता है। इसका उपयोग उड्डयन में भी होता है। उड्डयन में समुद्र की सतह पर वायुमण्डलीय दाब को वायुयानों के उड़ान की उँचाई के सन्दर्भ (डैटम) के रूप में उपयोग किया जाता है। .

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समुद्र विज्ञान

समुद्र विज्ञान (Oceanography या oceanology या marine science) भूविज्ञान की एक शाखा है जो समुद्रों का अध्ययन करती है। इसके अन्तर्गत समुद्र, तटीय क्षेत्र, एस्ट्युरीज (नदी मुख), तटीय जल, शेलव्ज और ओशन बेड, समुद्री जीवों, समुद्री धाराओं, तरंगों, भूभौतिकीय तरलगतिकी एवं अनेक अन्यान्य विषयों का अध्ययन किया जता है। इसमें जीवविज्ञान, रसायन विज्ञान, जिओलोजी, भौतिकी आदि सबकी आवश्यकता पड़ती है। इस क्षेत्र में काम करने वालों को ओशनोग्राफर कहते हैं। ओशियनोग्राफी वह विज्ञान है जिसमें सागरों तथा महासागरों के हरपहलू का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाता है। ओशियनोग्राफी में समुद्र, उसके तट, समुद्री शाखाओं से लेकर कोस्टल वाटरऔर समुद्री चट्टानों की गहराई का जायजा लेना होता है। ओशियनोग्राफी कभी न खत्म होने वाली जिज्ञासाओं का समंदरहै। महासागरमें ढेरों जानकारी के खजाने छिपे हैं जिनके रहस्य पर से परदा उठना बाकी है। इस काम में समुद्र के भीतर घंटों गुजारकर सेंपल जुटाना, सर्वे करना, डाटा विश्लेषित करना होता है। यह खोज आधारित क्षेत्र है इसलिए इसमें काम करने वाले लोगों को समुद्र के आस-पास के इलाकों में लंबा समय गुजारना पड़ता है। ओशियनोग्राफर महासागरों व कोस्टल वाटर के रहस्य बारीकी से जाँचता है। वह महासागरीय जल की गति, जल के वितरण और उसके फिजिकल व केमिकल गुण व लक्षण का अध्ययन करता है औरयह जानने की कोशिश करता है कि इनका समुद्र के तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों और जलवायु परक्या असर पड़ता है। यह क्षेत्र शोध आधारित है जहां एक लंबा समय समुद्री उथल-पुथल के बीच बिताना होता है। मिलने वाली चुनौतियों व खतरों के करीब से गुजरना होता है। .

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समुद्र विज्ञानी

समुद्र विज्ञान के क्षेत्र में काम करने वाले समुद्र विज्ञानी (ओशनोग्राफर) कहलाते हैं। .

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समुद्री डकैती

सन् १७१८ में ब्लैकबियर्ड (अर्थ: काली दाढ़ी) नामक समुद्री डाकू पर धावे और गिरफ़्तारी का दृश्य पुराने ज़माने में समुद्री डाकू अपनी नौकाओं से अक्सर इस 'जॉली रॉजर' नामक ध्वज को फहराया करते थे समुद्री डकैती समुद्र पर यात्रा कर रही नौका और उसके मुसाफ़िरों पर हुई डकैती या हिंसात्मक चोरी को कहा जाता है। समुद्री डकैती करने वाले अपराधियों को समुद्री डाकू या जल दस्यु कहा जाता है। ऐसे अपराध की रोकथाम करना अक्सर मुश्किल होता है क्योंकि समुद्र का क्षेत्रफल विशाल है (पूरे भूमि के क्षेत्रफाल से तीन गुना) और ऐसे समुद्री डाकू अक्सर अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं के पार काम करते हैं, यानि किसी एक देश की पुलिस या सेना उन्हें रोक नहीं पाती। मसलन पूर्वी अफ़्रीका के सोमालिया देश के अड्डों से आने वाले समुद्री डाकुओं ने भारत के तट के पास से समुद्री जहाज़ों का अपहरण किया है।, Angus Konstam, Osprey Publishing, 2008, ISBN 978-1-84603-240-0 .

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समुद्री पठार

समुद्री पठार (oceanic plateau) समुद्र के नीचे स्थित एक ऐसे बड़े समतल क्षेत्र को कहते हैं जो अपने आसपास के इलाक़े से काफ़ी ऊपर उठा हुआ हो। .

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समुद्री पुरातत्व

समुद्री पुरातत्व (Maritime archaeology या marine archaeology), पुरातत्व की एक शाखा है जो प्राचीन मानव का समुद्रों, झीलों एवं नदियों से सम्बन्धित क्रियाकलापों का अध्ययन करती है। इस कार्य में प्राचीन जलयान, समुद्र के किनारे स्थित बन्दरगाह एवं अन्य निर्माण, डूबे हुए लैण्डस्केप आदि बहुत सहायक होते हैं। श्रेणी:पुरातत्व.

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समुद्री मकड़ी

समुद्री मकड़ी (Sea spider), जो जीववैज्ञानिक वर्गीकरण में पिक्नोगोनीडा (Pycnogonida) नामक वर्ग है, समुद्र में रहने वाले आर्थ्रोपोड प्राणियों का एक समूह है। इसकी लगभग 1300 जीववैज्ञानिक जातियाँ ज्ञात हैं। यह सार्वत्रिक रूप से लगभग हर सागर व महासागर में मिलते हैं हालांकि इन्हें विशेष रूप से भारी मात्रा में भूमध्य सागर, कैरिबियाई सागर, अटलांटिक महासागर और आर्कटिक महासागर में मिलते हैं। इनका आकार विविध है और इसमें 1 मिलिमीटर से लेकर गहरे पानी में बसने वाली 90 सेंटीमीटर से भी बड़ी जातियाँ मिलती हैं। अधिकतर जातियों का आकार छोटा होता है और वे कम गहराई वाले पानी में रहती हैं। अपने नाम के बावजूद यह वास्तविक मकड़ी से भिन्न है और न ही यह अरैकनिड की श्रेणी में आती है, हालांकि केलीसेराटा संघ होने के कारण यह अन्य आर्थ्रोपोडों (जैसे कि कीट और क्रस्टेशियाई) की तुलना में मकड़ियों से अधिक क़रीबी सम्बन्ध रखती हैं। .

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समुद्री युद्ध

ट्रफ़ैलगर का युद्ध समुद्र या किसी विशाल जलराशि के भीतर और सतह पर किये जाने वाले युद्ध समुद्री युद्ध या नौसैनिक युद्ध (Naval warfare) कहलाते हैं। श्रेणी:सेना.

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समुद्री सर्प

हाइड्रोफ़ीनाए (Hydrophiinae), जिन्हें समुद्री सर्प (sea snakes) भी कहते हैं, इलापिडाए सर्प कुल की एक उपशाखा है जिसके सदस्य विषैले और अपना अधिकांश जीवन समुद्र व अन्य जलीय स्थानों पर व्यतीत करने वाले होते हैं। इन में से ज़्यादातर का शरीर समुद्री जीवन के अनुकूल होता है और वे धरती पर अधिक समय नहीं रह पाते हालांकि लातिकाउडा (Laticauda) वंश के सर्प कुछ हद तक धरती पर चलने में सक्षम हैं। इनकी पूँछ का अंतिम भाग चपटा होता है, जो उन्हें तैरने में सहायक होता है। समुद्री सर्प हिन्द महासागर से लेकर प्रशांत महासागर के गरम जलीय क्षेत्रों में पाये जाते हैं। आनुवंशिकी (जेनेटिक) दृष्टि से समुद्री साँप औस्ट्रेलिया के विषैले सर्पों से सम्बन्धित हैं। .

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समुद्री जीवविज्ञान

समुद्री जीवविज्ञान (Marine Biology) के अंतर्गत महासागरों, सागरों के अन्दर के एवं उनके तटों के पादप एवं प्राणियों की संरचना, जीवनवृत्त तथा उनकी प्रकृति का अध्ययन किया जाता है। ऐसे अध्ययन वैज्ञानिक तथा आर्थिक महत्व के होते हैं, जैसे खाद्य मछलियों के प्रवास (migration) का अध्ययन। समुद्री जीवविज्ञान के अध्ययन से समुद्री जीवों के जीवनवृत्त पर विभिन्न भौतिक एवं रासायनिक कारकों (जैसे ताप, दाब, प्रकाश, धारा, पादप पोषक, लवणता आदि) के विभिन्न प्रभावों को जानने में सहायता मिलती है। .

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समुद्रीय मानचित्र

समुद्रीय मानचित्र (Naval Chart) वह मानचित्र है, जो विशेषतया नाविकों के उपयोग के लिए तैयार किया जाता है। यह समुद्रतल के स्वरूप एवं उसकी विषमताओं को अभिव्यक्त करता है और नाविकों के लिए अधिकतम उपयोगी सूचना देता है। यह नाविकों को सागर और महासागर में नौचालन एवं एक बंदरगाह से दूसरे बंदरगाह तक जल पर यात्रा करने में सहायता करता है। इसकी सहायता से नाविकों को जहाज की भूमि से सापेक्ष स्थिति, स्टियरिंग की दिशा, जलयात्रा की दूरी और संकटक्षेत्र का ज्ञान होता है। मानचित्र में जलक्षेत्र छोटे छोटे अंकों से अंकित रहता है। ये अंक, जो फ़ैदम अथवा फुट, अथवा दोनों में किसी विशेष स्थिति में औसत ज्वार भाटा के जल की गहराई को अभिव्यक्त करते हैं। स्थल का सर्वेक्षण कितनी ही सावधानी से क्यों न किया गया हो, परंतु यदि चार्ट में गहराई की माप न दिखाई जाए, तो चार्ट व्यर्थ रहता है। समुद्र की गहराई गहराई-मापी-डोर, तार अथवा ध्वानिक विधि से ज्ञात की जाती है। गहराई की माप को ज्ञात करने में प्रतिध्वनिक विधि का अनुप्रयोग निरंतर बढ़ता जा रहा है। इस विधि में पोतजल से एक विद्युत्‌ आवेग संचारित किया जाता है, जो समुद्रतल पर आघात कर प्रतिध्वनिक के रूप में परावर्तित होता है और जलफोन (hydrophone) से प्राप्त कर लिया जाता है। यदि समयांतर को ठीक प्रकार से माप लिया जाए, जल में ध्वनिवेग की जानकारी की सहायता से समुद्र की गहराई का मापन किया जा सकता है। अक्षांश के प्रेक्षण के लिए अंगीकृत विधियों में से एक, कृत्रिम क्षितिज में सेक्सटैंट द्वारा प्रेक्षित नक्षत्रों का परियाम्योत्तर (circum meridian) उन्नतांश ज्ञात करना है। कालमापी (chronometer) त्रुटि प्राप्त करने के लिए सेक्सटैट और कृत्रिम क्षितिज द्वारा सूर्य अथवा नक्षत्रों की समान ऊँचाई का उपयोग करते हैं। असर्वेक्षित, अथवा सर्वेक्षित, क्षेत्रों के चार्ट को प्राय: बारीक रेखा में खींचते हैं, जिसको केवल देखने मात्र से अनुभवी नाविक समझ जाते हैं कि सावधानी की आवश्यकता है। समुद्रीय तथा सामान्य चार्ट जलसर्वेक्षण विभाग द्वारा संकलित किए जाते और खींचे जाते हैं तथा प्रकाशन के समय शुद्धता का ध्यान रखते हैं। एक समुद्रीय मानचित्र .

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साधारण नमक

नमक (Common Salt) से साधारणतया भोजन में प्रयुक्त होने वाले नमक का बोध होता है। रासायनिक दृष्टि से यह सोडियम क्लोराइड (NaCl) है जिसका क्रिस्टल पारदर्शक एवं घनाकार होता है। शुद्ध नमक रंगहीन होता है, किंतु लोहमय अपद्रव्यों के कारण इसका रंग पीला या लाल हो जाता है। समुद्र के खारापन के लिये उसमें मुख्यत: सोडियम क्लोराइड की उपस्थिति कारण होती है। भौमिकी में लवण को हैलाइट (Halite) कहते हैं। .

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सार्क

कोई विवरण नहीं।

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सागर झील (लाखा बंजारा झील)

सागर झील (लाखा बंजारा झील) का मनोरम दश्‍य .

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सागर पब्लिक स्कूल भोपाल

सागर पब्लिक स्कूल मध्य प्रदेश राज्य के भोपाल नगर में स्थित एक विद्यालय है। यह सागर ग्रुप ऑफ़ इंस्टीट्यूशन्स द्वारा संचालित विद्यालयों की शृंखला में एक है। .

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सागर शहर

सागर, मध्य प्रदेश का एक महत्‍वपूर्ण शहर है। सागर का इतिहास सन् १६६० से आरंभ होता है, जब ऊदनशाह ने तालाब के किनारे स्थित वर्तमान किले के स्थान पर एक छोटे किले का निर्माण करवा कर उस के पास परकोटा नाम का गांव बसाया था। निहालशाह के वंशज ऊदनशाह द्वारा बसाया गया वही छोटा सा गांव आज सागर के नाम से जाना जाता है। परकोटा अब शहर के बीचों-बीच स्थित एक मोहल्ला है। वर्तमान किला और उसके अंदर एक बस्ती का निर्माण पेशवा के एक अधिकारी गोविंदराव पंडित ने कराया था। सन् १७३५ के बाद जब सागर पेशवा के आधिपत्य में आ गया, तब गोविंदराव पंडित सागर और आसपास के क्षेत्र का प्रभारी था। समझा जाता है कि इसका नाम ‘सागर’ उस विशाल सरोवर के कारण पड़ा, जिसके किनारे नगर स्थित है। सागर को प्र्धानमन्त्रि के स्मार्त सहर योजना मे शामिल किया गया है। .

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सागर ज़िला

सागर जिले में प्रमुख रूप से धसान, बेबस, बीना, बामनेर और सुनार नदियां निकलती हैं। इसके अलावा कड़ान, देहार, गधेरी व कुछ अन्य छोटी बरसाती नदियां भी हैं। अन्य प्राकृतिक संसाधनों के मामले में सागर जिले को समृद्ध नहीं कहा जा सकता लेकिन वास्तव में जो भी संसाधन उपलब्ध हैं, उनका बुद्धिमत्तापूर्ण दोहन बाकी है। कृषि उत्पादन में सागर जिले के कुछ क्षेत्रों की अच्छी पहचान हैं। खुरई तहसील में उन्नत किस्म के गेहूं का उत्पादन बड़ी मात्रा में होता है। अक्षांश - 23.10 से 24.27 उत्तर देशांतर - 78.5 से 79.21 पूर्व औसत वर्षा - 1252 मि.मी.

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सागर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र

सागर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र, २३० विधानसभा, का एक निर्वाचन क्षेत्र है.

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सागरतट

सागरतट (coastline या coast) ऐसे भौगोलिक क्षेत्र को बोलते हैं जहाँ धरती किसी सागर या महासागर से मिलती है। .

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सागरतह

सागरतह (seabed) या सागर फ़र्श (seafloor) किसी सागर या महासागर के नीचे के फ़र्श को कहते हैं। यह तरह-तरह के क्षेत्रों व स्थलाकृतियों में विभाजित है, जिसमें महाद्वीपीय ताक, अतल मैदान और मध्य-महासागर पर्वतमालाएँ शामिल हैं। .

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सागरगत ज्वालामुखी

सागरगत ज्वालामुखी (submarine volcanoes) सागर और महासागरों में पृथ्वी की सतह पर स्थित में चीर, दरार या मुख होते हैं जिनसे मैग्मा उगल सकता है। बहुत से सागरगत ज्वालामुखी भौगोलिक तख़्तों के हिलने वाले क्षेत्रों में होते हैं, जिन्हें मध्य-महासागर पर्वतमालाओं के रूप में देखा जाता है। अनुमान लगाया गया है कि पृथ्वी पर उगला जाने वाला 75% मैग्मा इन्हीं मध्य-महासागर पर्वतमालाओं में स्थित सागरगत ज्वालामुखियों से आता है।Martin R. Speight, Peter A. Henderson, "Marine Ecology: Concepts and Applications", John Wiley & Sons, 2013.

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साइफोजोआ

जेली मॉन्टेरी साइफ़ोज़ोआ (Scyphozoa) प्राणिजगत के निडारिया (Cnidaria) संघ का एक वर्ग है जिसके अंतर्गत वास्तविक जेलीफिश (Jellyfish) आते हैं। ये केवल समुद्र ही में पाए जाने वाले प्राणी हैं। इस वर्ग के जेलीफिश तथा अन्य वर्गों के जेलीफिशों के शारीरीय लक्षणों में अंतर होता है। साधारणतया ये बड़े तथा हाइड्रोजोआ (Hydrozoa) के मेडुसी (medusae) से भारी होते हैं। अधिकांश साइफ़ोज़ोआ के स्पीशीज़ समुद्र के ऊपरी स्तर पर पाए जाते हैं। ये जलधारा के साथ एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते रहते हैं। ये शिकार को दंशकोशिकाओं (nematocysts) की सहायता से शक्तिहीन करके पकड़ लेते हैं। दंशकोशिकाएँ स्पर्शकों (tentacles) के बाहरी हिस्से में पाई जाती हैं। इस प्रकार शक्तिहीन किए गए शिकार को स्पशंक मुँह के पास ले आते हैं, जहाँ वे चूसकर निगल लिए जाते हैं। .

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सुलावेसी सागर

सुलावेसी सागर (Sulawesi Sea) या सेलेबीस सागर (Celebes Sea) दक्षिणपूर्वी एशिया का एक सागर है। यह उत्तर में मिन्दनाओ द्वीप और सुलु द्वीपसमूह द्वारा सुलु सागर से और पूर्व में सांगीहे द्वीपसमूह और सुलावेसी के मिनाहासा प्रायद्वीप द्वारा मलक्का सागर से विभाजित है। पश्चिम में कालिमंतान इसका छोर है। .

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सुलु सागर

सुलु सागर दक्षिणपूर्वी एशिया के फ़िलिपीन्ज़ देश के दक्षिणपश्चिमी भाग से सटा हुआ एक सागर है। यह पश्चिमोत्तर में पलावन द्वीप द्वारा दक्षिण चीन सागर से और दक्षिणपूर्व में सुलु द्वीपसमूह और मिन्दनाओ द्वीप के ज़म्बोआंगा प्रायद्वीप द्वारा सुलावेसी सागर (सेलेबीस सागर) से विभाजित है। सुलु सागर के दक्षिणपश्चिम में बोर्नियो और पूर्वोत्तर में विसाया के द्वीप हैं। .

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सुंदरी

सुन्दरी वृक्ष गंगा नदी के सुन्दरवन डेल्टा में उगने वाला हैलोफाइट पौधा है। यह समुद्र के किनारे की नमकीन मिट्टी में उगता है। सुन्दरवन में इस वृक्ष की अधिकता है तथा इसी के कारण सुन्दरवन का नामकरण हुआ है। इस वृक्ष में श्वसन जड़े पायी जाती हैं। श्रेणी:गंगा नदी श्रेणी:वनस्पति विज्ञान.

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स्वदेश (हिन्दी समाचारपत्र)

स्वदेश राष्ट्रीय भावनाओं से ओत-प्रोत हिन्दी का दैनिक समाचार पत्र है। यह इन्दौर, ग्वालियर, भोपाल सहित कई नगरों से प्रकाशित होता है। ग्वालियर से प्रकाशन शुरू करने वाले 'दैनिक स्वदेश' छत्तीसगढ़ के रायपुर, बिलासपुर; मध्य प्रदेश के इन्दौर, भोपाल, सागर, जबलपुर, सतना; महाराष्ट्र के नागपुर संस्करण अभी प्रकाशित हो रहे हैं। अखबार को गुजरात की राजधानी अहमदाबाद से शुभारम्भ करने की सभी तैयारियां लगभग पूरी कर ली गयी हैं। .

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स्कोशिया सागर

स्कोशिया सागर (Scotia Sea) दक्षिणध्रुवीय महासागर के उत्तरी छोर पर स्थित एक सागर है। पश्चिम में यह ड्रेक जलमार्ग तक सीमित समझा जाता है जबकि पूर्व में यह स्कोशिया चाप (Scotia Arc) तक फैला हुआ है, जो चाप के आकार की एक द्वीपों व जल के नीचे उभरी चट्टानों की एक शृंखला है। भौगोलिक दृष्टि से यह समुद्र स्कोशिया प्लेट के ऊपर स्थित है। .

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सैल्मन

मुख्य पेसिफिक सैल्मन प्रजातियां: सोकाई, चम, कोस्टल, कटथ्रोट ट्राउट, चिनूक, कोहो, स्टीलहेड और पिंक सैल्मोनिडे परिवार की विभिन्न प्रजातियों की मछली के लिए दिया जाने वाला आम नाम है सैल्मन.

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सेतु

thumb सेतु एक प्रकार का ढाँचा जो नदी, पहाड़, घाटी अथवा मानव निर्मित अवरोध को वाहन या पैदल पार करने के लिये बनाया जाता है। .

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सोडियम

सोडियम (Sodium; संकेत, Na) एक रासायनिक तत्त्व है। यह आवर्त सारणी के प्रथम मुख्य समूह का दूसरा तत्व है। इस समूह में में धातुगण विद्यमान हैं। इसके एक स्थिर समस्थानिक (द्रव्यमान संख्या २३) और चार रेडियोसक्रिय समस्थानिक (द्रव्यमन संख्या २१, २२, २४, २४) ज्ञात हैं। .

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सीमांत समुद्र

समुद्र विज्ञान में सीमांत समुद्र (marginal sea) ऐसा सागर होता है जिसका कुछ भाग द्वीपों, द्वीपसमूहों, प्रायद्वीपों, महाद्वीपों की मुख्यभूमि के कुछ अंशों या मध्य-महासागर पर्वतमालाओं द्वारा घिरा हो लेकिन जिसका कुछ भाग कम-से-कम सतह पर खुले महासागर के साथ मिलता हो। इसकी परिभाषा पर समुद्र वैज्ञानिकों में कुछ मतभेद है। .

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हरिसिंह गौर

सागर विश्वविद्यालय के संस्थापक '''डॉ हरिसिंह गौर''' डॉ॰ हरिसिंह गौर, (२६ नवम्बर १८७० - २५ दिसम्बर १९४९) सागर विश्वविद्यालय के संस्थापक, शिक्षाशास्त्री, ख्यति प्राप्त विधिवेत्ता, न्यायविद्, समाज सुधारक, साहित्यकार (कवि, उपन्यासकार) तथा महान दानी एवं देशभक्त थे। वह बीसवीं शताब्दी के सर्वश्रेष्ठ शिक्षा मनीषियों में से थे। वे दिल्ली विश्वविद्यालय तथा नागपुर विश्वविद्यालय के उपकुलपति रहे। वे भारतीय संविधान सभा के उपसभापति, साइमन कमीशन के सदस्य तथा रायल सोसायटी फार लिटरेचर के फेल्लो भी रहे थे।उन्होने कानून शिक्षा, साहित्य, समाज सुधार, संस्कृति, राष्ट्रीय आंदोलन, संविधान निर्माण आदि में भी योगदान दिया। उन्होने अपनी गाढ़ी कमाई से 20 लाख रुपये की धनराशि से 18 जुलाई 1946 को अपनी जन्मभूमि सागर में सागर विश्वविद्यालय की स्थापना की तथा वसीयत द्वारा अपनी पैतृक सपत्ति से 2 करोड़ रुपये दान भी दिया था। इस विश्वविद्यालय के संस्थापक, उपकुलपति तो थे ही वे अपने जीवन के आखिरी समय (२५ दिसम्बर १९४९) तक इसके विकास व सहेजने के प्रति संकल्पित रहे। उनका स्वप्न था कि सागर विश्वविद्यालय, कैम्ब्रिज तथा ऑक्सफोर्ड जैसी मान्यता हासिल करे। उन्होंने ढाई वर्ष तक इसका लालन-पालन भी किया। डॉ॰ सर हरीसिंह गौर एक ऐसा विश्वस्तरीय अनूठा विश्वविद्यालय है, जिसकी स्थापना एक शिक्षाविद् के द्वारा दान द्वारा की गई थी। .

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हिमानी शिवलिंग

अमरनाथ स्थित हिमानी शिवलिंगहिमानी शिवलिंग अमरनाथ की गुफा में हिम से अपने आप बनने वाले शिवलिंग को कहले हैं जिसका भारतीय जीवन में धार्मिक महत्व है और जिसे देखने दूर-दूर से लोग आते हैं। यह शिवलिंग मौसम में बदलाव के अनुसार चंद्रमा की कलाओं के रूप में घटता बढ़ता रहता है और पूर्णिमा के दिन लगभग 10 या 12 फीट की ऊंचाई तक बनता है। हर साल श्रावण पूर्णिमा के दिन जुलाई-अगस्त माह में शिवलिंग अपनी अधिकतम ऊँचाई पाता है और इस दिन संसार भर के श्रद्धालु गुफा में स्थित मंदिर में इकट्ठा होते हैं। अमरनाथ श्रीनगर के पूर्व में १४५ किलोमीटर दूर स्थित है। अमरनाथ गुफा जहां स्थित है वह जगह बर्फ से ढकी घाटी है और समुद्र तल से १३७०० फीट ऊँचाई पर स्थित है। सितंबर से जून तक यह पूरी घाटी बर्फ से ढकी होती है और यहां पहुँचना दुष्कर ही नहीं नामुमकिन होता है। अमरनाथ गुफा लगभग १५० फीट ऊंची और ९० फीट लंबी है। .

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होटल द पार्क कैलन्गुटे गोवा

होटल द पार्क कैलन्गुटे गोवा पार्क समूह के स्वामित्व वाली एक होटल हैं जो भारत के गोवा राज्य में स्थित हैं। गोवा राज्य अपने समुद्र तट एवं खुबसूरत नजारों के लिए प्रसिद्ध हैं। यहाँ पर सबसे विदेशी पर्यटक आते हैं एवं किसी जमाने में यह हिप्पी संस्कृति के लिए प्रसिद्ध था। यह होटल अपनी आकर्षक साज सज्जा एवं अत्याधुनिक सुविधाओं के चलते काफी लोकप्रिय हैं। .

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जल (अणु)

जल पृथ्वी की सतह पर सर्वाधिक मात्रा में पाया जाने वाला अणु है, जो इस ग्रह की सतह के 70% का गठन करता है। प्रकृति में यह तरल, ठोस और गैसीय अवस्था में मौजूद है। मानक दबावों और तापमान पर यह तरल और गैस अवस्थाओं के बीच गतिशील संतुलन में रहता है। घरेलू तापमान पर, यह तरल रूप में हल्की नीली छटा वाला बेरंग, बेस्वाद और बिना गंध का होता है। कई पदार्थ, जल में घुल जाते हैं और इसे सामान्यतः सार्वभौमिक विलायक के रूप में सन्दर्भित किया जाता है। इस वजह से, प्रकृति में मौजूद जल और प्रयोग में आने वाला जल शायद ही कभी शुद्ध होता है और उसके कुछ गुण, शुद्ध पदार्थ से थोड़ा भिन्न हो सकते हैं। हालांकि, ऐसे कई यौगिक हैं जो कि अनिवार्य रूप से, अगर पूरी तरह नहीं, जल में अघुलनशील है। जल ही ऐसी एकमात्र चीज़ है जो पदार्थ की सामान्य तीन अवस्थाओं में स्वाभाविक रूप से पाया जाता है - अन्य चीज़ों के लिए रासायनिक गुण देखें. पृथ्वी पर जीवन के लिए जल आवश्यक है। जल आम तौर पर, मानव शरीर के 55% से लेकर 78% तक का निर्माण करता है। .

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जल प्रदूषण

जल प्रदूषण, से अभिप्राय जल निकायों जैसे कि, झीलों, नदियों, समुद्रों और भूजल के पानी के संदूषित होने से है। जल प्रदूषण, इन जल निकायों के पादपों और जीवों को प्रभावित करता है और सर्वदा यह प्रभाव न सिर्फ इन जीवों या पादपों के लिए अपितु संपूर्ण जैविक तंत्र के लिए विनाशकारी होता है। जल प्रदूषण का मुख्य कारण मानव या जानवरों की जैविक या फिर औद्योगिक क्रियाओं के फलस्वरूप पैदा हुये प्रदूषकों को बिना किसी समुचित उपचार के सीधे जल धारायों में विसर्जित कर दिया जाना है। .

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जल मार्ग

यह जल परिवहन का एक चिरकालीन एवं महत्वपूर्ण साधन है। जलमार्ग एक पानी का नौगम्य शरीर हैं। एक या कई जलमार्ग का एक नौवहन मार्ग होते हैं। जलमार्ग मे नदियो,समुद्रों, महासागरों, और नहरें शामिल कर सकते हैं। अगर जलमार्ग को नौगम्य बनाने के लिए यह कई मापदंड से मिलने चाहिए। प्रागैतिहासिक समय, पुरुषों और माल दोनों को ले जाने के लिए जल परिवहन का उपयोग किया गया है। जल परिवहन संभवतः जानवरों के उपयोग से पहले विकसित हो गया था क्योंकि जलमार्ग उन जगहों पर यात्रा का आसान साधन बना था जहां भूमि पर घने जंगलों ने आंदोलन में बाधा डाली थी। नौकाओं या किसी अन्य माध्यम के उपयोग से हवा की शक्ति का उपयोग किया गया था जब पानी के परिवहन की सीमा और महत्व बढ़ गया। सबसे पहले, नावें मुख्य रूप से अंतर्देशीय जल और आश्रय तटीय क्षेत्रों के लिए छोटे और सीमित थीं। नौकायन शिल्प के आकार और जटिलता में क्रमिक वृद्धि ने व्यापार की स्थापना की अनुमति दी। फोनिशियन, मिस्र, ग्रीक और रोम के साथ-साथ अरब और भारतीयों के पास व्यापक व्यापारिक संपर्क थे। भाप के उपयोग ने लंबी दूरी पर बड़े सामान को लाने के लिए एक नया आयाम, अधिक शक्ति और गति को जल परिवहन प्रदान किया है। डीजल और अन्य प्रकार की शक्तियों के इस्तेमाल ने जल परिवहन के पूरे परिदृश्य को बदल दिया है और आज दुनिया भर में अधिकांश व्यापार जल-जनित है। जल परिवहन के दो सबसे बड़ा फायदे यह है कि यह महासागरों, नदियों, समुद्रों और विशेषताओं की जरूरतों का उपयोग करता है, और यह बड़े और भारी भार के लिए परिवहन का सबसे सस्ता प्रकार है। दो प्रमुख श्रेणियां जिनके तहत जल परिवहन विभाजित किया जा सकता है, निम्नानुसार हैं: - 1.

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जल सर्वेक्षण

निजी सर्वेक्षण पोत-नेप्च्यून जल सर्वेक्षण या हाइड्रोग्राफिक सर्वे सागर का वैज्ञानिक मानचित्र होता है, जिसमें सागर की गहराई, उसकी आकृति, उसका तल, उसमें किस दिशा से और कितनी धाराएं बहती हैं, का ज्ञान होता है। इसके साथ ही उसमें आने वाले ज्वारों का समय और परिमाण भी पता लगाया जाता है। झीलों और नदियों का जल सर्वेक्षण केवल उस स्थिति में किया जाता है जब उनमें जहाज चलते हों। इससे अभियांत्रिकी और नौवहन के काम में सहायता मिलती है। जल सर्वेक्षण में पानी की वर्तमान मात्र और रिजर्वायर के के बारे में जानकारी मिलती है। जल सर्वेक्षण सागर की तह में होने वाले दैनिक परिवर्तनों के और इसके अंदर के रहस्यों के ज्ञान हेतु किया जाता है। इस सर्वेक्षण की सहायता से समुद्र में मौजूद खनिजों, धातुओं, गैस आदि के भंडार पता लगाने में मदद मिलती है। साथ-साथ ही समुद्र के भीतर केबल, पाइपलाइन बिछाने, ड्रेजिंग जैसे कार्यो के लिए उसमें लगातार होने वाले परिवर्तनों के बारे में जानकारी करना बेहद आवश्यक हो जाता है। भारत में पहली बार नौसैनिक जल सर्वेक्षण विभाग, जो मैरीन सर्वे ऑफ इंडिया के नियंत्रण में था, की स्थापना १७७० में ईस्ट इंडिया कंपनी ने की थी। १८७४ में कैप्टन डुंडस टेलर ने मेरीन सर्वे ऑफ इंडिया को कोलकाता में स्थापित किया। १९४७ में भारत की स्वतंत्रता उपरान्त इस विभाग को मेरीन सर्वे ऑफ इंडिया के अन्तर्गत्त कर दिया गया। इसके बाद इसे १९५४ में देहरादून में स्थापित किया गया और इसका नाम नौसैनिक जल सर्वेक्षण कार्यालय (नेवल हाइड्रोग्राफिक ऑफिस) कर दिया गया। इसके बाद में १९९६ में इसका नाम नेशनल हाइड्रोग्राफिक ऑफिस कर दिया गया। नेशनल हाइड्रोग्राफिक सर्वे मार्च १९९९ में आईएसओ ९००२ का स्तर प्रदान किया गया। .

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जलमण्डल

पृथ्वी पर पाए जाने वाले महासागर जलमण्डल से अर्थ जल की उस परत से है जो पृथ्वी की सतह पर महासागरों, झीलों, नदियों, तथा अन्य जलाशयों के रूप में फैली है। पृथ्वी की सतह के कुल क्षेत्रफल के लगभग ७१% भाग पर जल का विस्तार हैं, इसलिए पृथ्वी को जलीय ग्रह भी कहते हैं। समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पृथ्वी पर सबसे बड़ा पारितंत्र भी है। .

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जलक्रीड़ाओं की सूची

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जहाजरानी का इतिहास

नदियों और समुद्रों में नावों और जहाजों से यात्रा तथा व्यापार का प्रारंभ लिखित इतिहास से पूर्व हो गया था। प्राय: साधारण जहाज ऐसे बनाए जाते थे कि आवश्यकता पड़ने पर उनसे युद्ध का काम भी लिया जा सके, क्योंकि जलदस्युओं का भय बराबर बना रहता था और इनसे जहाज की रक्षा की क्षमता आवश्यक थी। ये जहाज डाँड़ों या पालों अथवा दोनों से चलाए जाते थे और वांछित दिशा में ले जाने के लिये इनमें किसी न किसी प्रकार के पतवार की भी व्यवस्था होती थी। स्थलमार्ग से जलमार्ग सरल और सस्ता होता है, इसलिये बहुत बड़ी या भारी वस्तुओं को बहुत दूर के स्थानों में पहुँचाने के लिये आज भी नावों अथवा जहाजों का उपयोग होता है। प्राचीन काल में सभ्यता का उद्भव नौगम्य नदियों या समुद्रतटों पर ही विशेष रूप से हुआ और ये ही वे स्थान थे जहाँ विविध संस्कृतियों की, जातियों के सम्मिलन से, परवर्ती प्रगति का बीजारोपण हुआ। .

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जापान

जापान, एशिया महाद्वीप में स्थित देश है। जापान चार बड़े और अनेक छोटे द्वीपों का एक समूह है। ये द्वीप एशिया के पूर्व समुद्रतट, यानि प्रशांत महासागर में स्थित हैं। इसके निकटतम पड़ोसी चीन, कोरिया तथा रूस हैं। जापान में वहाँ का मूल निवासियों की जनसंख्या ९८.५% है। बाकी 0.5% कोरियाई, 0.4 % चाइनीज़ तथा 0.6% अन्य लोग है। जापानी अपने देश को निप्पॉन कहते हैं, जिसका मतलब सूर्योदय है। जापान की राजधानी टोक्यो है और उसके अन्य बड़े महानगर योकोहामा, ओसाका और क्योटो हैं। बौद्ध धर्म देश का प्रमुख धर्म है और जापान की जनसंख्या में 96% बौद्ध अनुयायी है। .

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जापान का इतिहास

जापान के प्राचीन इतिहास के संबंध में कोई निश्चयात्मक जानकारी नहीं प्राप्त है। जापानी लोककथाओं के अनुसार विश्व के निर्माता ने सूर्य देवी तथा चन्द्र देवी को भी रचा। फिर उसका पोता क्यूशू द्वीप पर आया और बाद में उनकी संतान होंशू द्वीप पर फैल गए। हँलांकि यह लोककथा है पर इसमें कुछ सच्चाई भी नजर आती है। पौराणिक मतानुसार जिम्मू नामक एक सम्राट् ९६० ई. पू.

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जिब्राल्टर

जिब्राल्टर औबेरियन प्रायद्वीप और यूरोप के दक्षिणी छोर पर भूमध्य सागर के प्रवेश द्वार पर स्थित एक स्वशासी ब्रिटिश विदेशी क्षेत्र है। 6.843 वर्ग किलोमीटर (2.642 वर्ग मील) में फैले इस देश की सीमा उत्तर में स्पेन से मिलती है। जिब्राल्टर ऐतिहासिक रूप से ब्रिटेन के सशस्त्र बलों के लिए एक महत्वपूर्ण आधार रहा है और शाही नौसेना (Royal Navy) का एक आधार है। जिब्राल्टर की संप्रभुता आंग्ल-स्पेनी विवाद का एक प्रमुख मुद्दा रहा है। उत्रेच्त संधि 1713 के तहत स्पेन द्वारा ग्रेट ब्रिटेन की क्राउन को सौंप दिया गया था, हालांकि स्पेन ने क्षेत्र पर अपना अधिकार जताते हुए लौटाने की मांग की है। जिब्राल्टर के बहुसंख्यक रहवासियों ने इस प्रस्ताव के साथ-साथ साझा संप्रभुता के प्रस्ताव का विरोध किया। यह चट्टानी प्रायद्वीप है, जो स्पेन के मूल स्थल से दक्षिण की ओर समुद्र में निकला हुआ है। इसके पूर्वं में भूमध्यसागर तथा पश्चिम में ऐलजेसियरास की खाड़ी है। १७१३ ई. से यह अंग्रेजी साम्राज्य के उपनिवेश तथा प्रसिद्ध छावनी के रूप में है। जिब्राल्टर के चट्टानी प्रायद्वीप को चट्टान (दी रॉक) कहते हैं। चट्टान समुद्र की सतह से एकाएक ऊपर उठती दृष्टिगोचर होती है। यह चट्टानी स्थलखंड उत्तर-दक्षिण फैली हुई पतली श्रेणी द्वारा बीच में विभक्त होता है, जिसपर कई ऊँची चोटियाँ हैं। चट्टानें चूना पत्थर की बनी हैं, जिनमें कई स्थलों पर प्राकृतिक गुफाएँ निर्मित हो गई हैं। कुछ गुफाओं में प्राचीन जीव-जंतुओं के चिह्न भी पाए गए हैं। जिब्राल्टर नगर नया बसा है। प्राचीन नगर की प्राय: सभी पुरानी महत्वपूर्ण इमारतें युद्ध (१७७-८३) में नष्ट हो गई। वर्तमान नगर 'राक' के उत्तरी-पश्चिमी भाग में ३/१६ वर्ग मील के क्षेत्रफल में फैला है। इसके अतिरिक्त समुद्र का कुछ भाग सुखाकर स्थल में परिणत कर लिया गया है। नगर का मुख्य व्यापारिक भाग समतल भाग में है। समतल के उत्तर की ओर ऊँचे असमतल भागों में लोगों के निवासस्थान तथा दक्षिण की ओर सेना के कार्यालय तथा बेरक हैं। यहाँ एक सैनिक हवाई अड्डा भी है। जिब्राल्टर कोयले के व्यापार का मुख्य केंद्र था, पर तेल से जलयानों के चलने के कारण इस व्यापार में अब अधिक शिथिलता आ गई है। .

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ज्वारनदीमुख

ज्वारनदीमुख (estuary, एस्चुएरी) सागर तट पर स्थित एक आधा-बंद खारे जल का समूह होता है जिसमें एक या एक से अधिक नदियाँ और झरने बहकर विलय होते हैं, और जो दूसरे अंत में खुले सागर से जुड़ा होता है। समय-समय पर ज्वारभाटा (टाइड) आकर इस से पानी व पानी में उपस्थित अन्य ढीला मलबा बाहर समुद्र में खींच लेता है। इस कारण से ज्वारनदीमुखों में साधारण नदीमुख (डेल्टा) की तरह मलबा एकत्रित नहीं होता, जो नदीतल पर जमा होने से उन्हें कई घाराओं में बिखरने को मजबूर कर देता है, जिससे कि उन धाराओं के बिखराव का आसानी से पहचाना जाने वाला त्रिकोण (डेल्टा) भौगोलिक रूप बन जाता है। उनके विपरीत ज्वारनदीमुख अक्सर एक ही लकीर में सागर में जल ले जाता है। ज्वारनदीमुख समुद्री और नदीय वातावरणों का मिश्रण होता है इसलिए इनमें ऐसे कई प्राणी व वनस्पति पनपते हैं जो और कहीं नहीं मिलते। .

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ज्वारीय शक्ति

सेंट मोलो का ज्वार-केन्द्र समुद्र में आने वाले ज्वार-भाटा की उर्जा को उपयुक्त टर्बाइन लगाकर विद्युत शक्ति में बदल दिया जाता है। इसमें दोनो अवस्थाओं में विद्युत शक्ति पैदा होती है - जब पानी ऊपर चढ़ता है तब भी और जब पानी तरने लगता है तब भी। इसे ही ज्वारीय शक्ति (tidal power) कहते हैं। यह एक अक्षय उर्जा का स्रोत है। ज्वारीय शक्ति का अभी भी बहुत कम उपयोग आरम्भ हो पाया है किन्तु इसमें भविष्य के लिये अपार उर्जा प्रदान करने की क्षमता निहित है। ज्वार-भाटा के आने और जाने का समय काफी सीमा तक पहले से ही ज्ञात होता है जबकि इसके विपरीत पवन उर्जा और सौर उर्जा का पूर्वानुमान अपेक्षाकृत कठिन कार्य है। ज्वार के उठने और गिरने से शक्ति उत्पन्न होने की ओर अनेक वैज्ञानिकों का ध्यान समय समय पर आकर्षित हुआ है और उसको काम में लाने की अनेक योजनाएँ समय समय पर बनी हैं। पर जो योजना आज सफल समझी जाती है, वह ज्वार बेसिनों का निर्माण है। ये बेसिन बाँध बाँधकर या बराज बनाकर समुद्रतटों के आसपास बनाए जाते हैं। ज्वार आने पर इन बेसिनों को पानी से भर लिया जाता है, फिर इन बेसिनों से पानी निकालकर जल टरबाइन चलाए जाते और शक्ति उत्पन्न की जाती है। अब तक जो योजनाएँ बनी हैं वे तीन प्रकार की है। एक प्रकार की योजना में केवल एक जलबेसिन रहता है। बाँध बाँधकर इसे समुद्र से पृथक् करते हैं। बेसिन और समुद्र के बीच टरबाइन स्थापित रहता है। ज्वार उठने पर बेसिन को पानी से भर लिया जाता है और जब ज्वार आधा गिरता है तब टरबाइन के जलद्वार का खोलकर उससे टरबाइन का संचालन कर शक्ति उत्पन्न करते हैं। एक अन्य बेसिन में ज्वार के उठने और गिरने दोनों समय टरबाइन कार्य करता है। जल नालियों द्वारा बेसिन भरा जाता है और दूसरी नालियों से टरबाइन में से होकर खाली किया जाता है। दूसरे प्रकार की योजना में प्राय: एक ही क्षेत्रफल के दो बेसिन रहते हैं। एक बेसिन ऊँचे तल पर, दूसरा बेसिन नीचे तल पर होता है। दोनों बेसिनों के बीच टरबाइन स्थापित रहता है। उपयुक्त नालियों से दोनों बेसिन समुद्र से मिले रहते हैं तथा सक्रिय और अविरत रूप से चलते रहते हैं। ऊँचे तलवाले बेसिन को उपयुक्त तूम फाटक (Sluice gates) से भरते और नीचे तलवाले बेसिन के पानी को समुद्र में गिरा देते हैं। तीसरे प्रकार की योजना में भी दो ही बेसिन रहते हैं। यहाँ समुद्र से बेसिन को अलग करनेवाली दीवार में टरबाइन लगी रहती है। एक बेसिन से पानी टरबाइन में आता और दूसरे बेसिन से समुद्र में गिरता है। दोनों बेसिनों के शीर्ष स्थायी रखे जाते हैं। एक बेसिन से पानी टरबाइन में आता और दूसरे बेसिन से समुद्र में गिरता है। दोनों बेसिनों के शीर्ष स्थायी रखे जाते हैं। .

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जीवाश्म

एक जीवाश्म मछली पृथ्वी पर किसी समय जीवित रहने वाले अति प्राचीन सजीवों के परिरक्षित अवशेषों या उनके द्वारा चट्टानों में छोड़ी गई छापों को जो पृथ्वी की सतहों या चट्टानों की परतों में सुरक्षित पाये जाते हैं उन्हें जीवाश्म (जीव + अश्म .

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ईस्ट कोस्ट रोड

ईस्ट कोस्ट रोड चेन्नई का एक सागर तट है। श्रेणी:चेन्नई में सागर तट.

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विश्व के प्रमुख सागरों की सूची

विश्व में बहुत बड़े-बड़े सागर है। .

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वेडेल सागर

वेडेल सागर (Weddell Sea) अंटार्कटिक प्रायद्वीप से पूर्व में और कोट्स धरती से पश्चिम में स्थित दक्षिणी महासागर का एक सागर है। इसका पूर्वतम बिन्दु रानी मौड धरती का नॉर्वेजिआ अंतरीप (Cape Norvegia) है। अपने सबसे चौड़े मापन पर यह २,००० किमी तक फैला हुआ है। भूमि के साथ लगे इसके कई क्षेत्रों पर हिमचट्टाने स्थित हैं, मसलन फ़िल्च्नर-रोन हिमचट्टान, और वेडेल सागर का दक्षिणी भाग स्थाई और भीमकाय हिमचट्टानों से ढका हुआ लगता है। वेडेल सागर का जल विश्व के सबसे साफ़ समुद्री जलों में गिना जाता है और इसमें बहुत सीलों और व्हेलों की आबादी है। लेकिन साथ-ही-साथ नाविकों के लिये इसे अधिक ख़तरनाक बताया गया है। इतिहासकार थोमस हेन्री ने अपनी १९५० की किताब "श्वेत महाद्वीप" (द व्हाइट कोन्टीनेन्ट) में लिखा कि "वेडेल सागर के हिमशैल-ग्रस्त जल से निकलने वाले सभी नाविक कहते हैं कि यह पृथ्वी का सबसे जोखिम-मय और डरावना स्थान है। इसके मुक़ाबले में रॉस सागर स्थाई, शान्त और सुरक्षित है।" .

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वॉयेजर द्वितीय

वायेजर द्वितीय एक अमरीकी मानव रहित अंतरग्रहीय शोध यान था जिसे वायेजर १ से पहले २० अगस्त १९७७ को अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा द्वारा प्रक्षेपित किया गया था। यह काफी कुछ अपने पूर्व संस्करण यान वायेजर १ के समान ही था, किन्तु उससे अलग इसका यात्रा पथ कुछ धीमा है। इसे धीमा रखने का कारण था इसका पथ युरेनस और नेपचून तक पहुंचने के लिये अनुकूल बनाना। इसके पथ में जब शनि ग्रह आया, तब उसके गुरुत्वाकर्षण के कारण यह युरेनस की ओर अग्रसर हुआ था और इस कारण यह भी वायेजर १ के समान ही बृहस्पति के चन्द्रमा टाईटन का अवलोकन नहीं कर पाया था। किन्तु फिर भी यह युरेनस और नेपच्युन तक पहुंचने वाला प्रथम यान था। इसकी यात्रा में एक विशेष ग्रहीय परिस्थिति का लाभ उठाया गया था जिसमे सभी ग्रह एक सरल रेखा मे आ जाते है। यह विशेष स्थिति प्रत्येक १७६ वर्ष पश्चात ही आती है। इस कारण इसकी ऊर्जा में बड़ी बचत हुई और इसने ग्रहों के गुरुत्व का प्रयोग किया था। .

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खनित्रपाद

खनित्रपाद (Seaphopoda) समुद्र में रहनेवाले द्विपार्श्वीय सममितवाले मोलस्का (Mollusca) हैं, जिनका शरीर और कवच अग्रिम-पश्च-अक्ष की दिशा में लंबा होकर बर्तुलाकार हो जाता है। इनका सिर छोटा होता है, आँखें नहीं होती और वर्तुलाकार होता है, जो खोदने के काम आता है। इसलिये खनित्रपाद नाम रखा गया है। .

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खाड़ी

अरब सागर की दो खाड़ियाँ गुजरात से लगती हैं: खम्भात की खाड़ी और कच्छ की खाड़ी खाड़ी समुद्री पानी के ऐसे जलाशय को कहते हैं जो किसी ओर से सागर या महासागर से तो जुड़ी हो लेकिन जिसके इर्द-गिर्द काफ़ी हद तक धरती का घेरा हो। ध्यान दें कि समुद्री तट में छोटे-से मोड़ को यह दर्जा नहीं दिया जाता और केवल महत्वपूर्ण क्षेत्रफल वाले जलाशयों को ही 'खाड़ी' बुलाया जाता है।, pp.

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गंगासागर

गंगासागर (सागर द्वीप या गंगा-सागर-संगम भी कहते हैं) बंगाल की खाड़ी के कॉण्टीनेण्टल शैल्फ में कोलकाता से १५० कि॰मी॰ (८०मील) दक्षिण में एक द्वीप है। यह भारत के अधिकार क्षेत्र में आता है और पश्चिम बंगाल सरकार के प्रशासनिक नियंत्रण में है। इस द्वीप का कुल क्षेत्रफल ३०० वर्ग कि॰मी॰ है। इसमें ४३ गांव हैं, जिनकी जनसंख्या १,६०,००० है। यहीं गंगा नदी का सागर से संगम माना जाता है। इस द्वीप में ही रॉयल बंगाल टाइगर का प्राकृतिक आवास है। यहां मैन्ग्रोव की दलदल, जलमार्ग तथा छोटी छोटी नदियां, नहरें हीं। इस द्वीप पर ही प्रसिद्ध हिन्दू तीर्थ है। प्रत्येक वर्ष मकर संक्रांति के अवसर पर लाखों हिन्दू श्रद्धालुओं का तांता लगता है, जो गंगा नदी के सागर से संगम पर नदी में स्नान करने के इच्छुक होते हैं। यहाँ एक मंदिर भी है जो कपिल मुनि के प्राचीन आश्रम स्थल पर बना है। ये लोग कपिल मुनि के मंदिर में पूजा अर्चना भी करते हैं। पुराणों के अनुसार कपिल मुनि के श्राप के कारण ही राजा सगर के ६० हज़ार पुत्रों की इसी स्थान पर तत्काल मृत्यु हो गई थी। उनके मोक्ष के लिए राजा सगर के वंश के राजा भगीरथ गंगा को पृथ्वी पर लाए थे और गंगा यहीं सागर से मिली थीं। कहा जाता है कि एक बार गंगा सागर में डुबकी लगाने पर 10 अश्वमेध यज्ञ और एक हज़ार गाय दान करने के समान फल मिलता है। जहां गंगा-सागर का मेला लगता है, वहां से कुछ दूरी उत्तर वामनखल स्थान में एक प्राचीन मंदिर है। उसके पास चंदनपीड़िवन में एक जीर्ण मंदिर है और बुड़बुड़ीर तट पर विशालाक्षी का मंदिर है। कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट का यहां एक पायलट स्टेशन तथा एक प्रकाशदीप भी है। पश्चिम बंगाल सरकार सागर द्वीप में एक गहरे पानी के बंदरगाह निर्माण की योजना बना रही है। गंगासागर तीर्थ एवं मेला महाकुंभ के बाद मनुष्यों का दूसरा सबसे बड़ा मेला है। यह मेला वर्ष में एक बार लगता है। गंगा-डेल्टा, सुंदरवन का उपग्रह चित्र, यहीं बीच में गंगा-सागर द्वीप स्थित है। यह द्वीप के दक्षिणतम छोर पर गंगा डेल्टा में गंगा के बंगाल की खाड़ी में पूर्ण विलय (संगम) के बिंदु पर लगता है। बहुत पहले इस ही स्थानपर गंगा जी की धारा सागर में मिलती थी, किंतु अब इसका मुहाना पीछे हट गया है। अब इस द्वीप के पास गंगा की एक बहुत छोटी सी धारा सागर से मिलती है। यह मेला पांच दिन चलता है। इसमें स्नान मुहूर्त तीन ही दिनों का होता है। यहां गंगाजी का कोई मंदिर नहीं है, बस एक मील का स्थान निश्चित है, जिसे मेले की तिथि से कुछ दिन पूर्व ही संवारा जाता है। यहां स्थित कपिल मुनि का मंदिर सागर बहा ले गया, जिसकी मूर्ति अब कोलकाता में रहती है और मेले से कुछ सप्ताह पूर्व पुरोहितों को पूजा अर्चना हेतु मिलती है। अब यहां एक अस्थायी मंदिर ही बना है। इस स्थान पर कुछ भाग चार वर्षों में एक बार ही बाहर आता है, शेष तीन वर्ष जलमग्न रहता है। इस कारण ही कह जाता है: बाकी तीरथ चार बार, गंगा-सागर एक बार॥ वर्ष २००७ में मकर संक्रांति के अवसर पर लगभग ३ लाख लोगों ने यहां स्नान किया। यह संख्या अगले वर्ष घटकर २ लाख रह गई। ऐसा कुंभ मेले के कारण हुआ। शेष वर्ष पर्यन्त ५० हजार तीर्थयात्रियों ने स्नान किए। २००८ में पांच लाख श्रद्धालुओं ने सागर द्वीप में स्नान किया। यहां आने वाले श्रद्धालुओं से १० भारतीय रुपए कर लिया जाता है। .

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गोल्डन बीच, चेन्नई

गोल्डन बीच, चेन्नई चेन्नई का एक सागर तट है। श्रेणी:चेन्नई में सागर तट.

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ऑस्कर के लिए भारत की आधिकारिक प्रविष्टियों की सूची

ऑस्कर पुरस्कार के लिए विदेशी भाषा में बनी चलचित्र वर्ग में भारत की ओर से प्रविष्टित चलचित्रों की सूची। भारत १९५७ से इसमें नामांकित करता आ रहा है। .

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ओडिआ चलचित्र सूची

ओड़िआ चलचित्र की सारणी ओड़िआ भाषा .

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ओख़ोत्स्क सागर

ओख़ोत्स्क सागर का नक़्शा रूस के मागादान शहर के पास ओख़ोत्स्क सागर का हिमाच्छादित एक तट ओख़ोत्स्क सागर (रूसी: Охо́тское мо́ре, ओख़ोत्स्कोए मोरे) प्रशांत महासागर के उत्तरपश्चिमी भाग का एक समुद्र है। यह पूर्व में कमचातका प्रायद्वीप, दक्षिणपूर्व में कुरील द्वीपसमूह, दक्षिण में जापान के होक्काइदो द्वीप, पश्चिम में रूस के साख़ालिन द्वीप और पश्चिमोत्तर में साइबेरिया के तटीय इलाक़े से घिरा हुआ है। इसका नाम रूस के ओख़ोत्स्क शहर पर पड़ा है जो सुदूर पूर्व में रूस का पहला क़स्बा था। .

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आबचंद की गुफ़ाएँ

सागर से करीब 35 किमी पूर्व की ओर सागर-दमोह मार्ग पर लगभग एक दर्जन शैल गुफाएं हैं। ये गुफाएं गधेरी नदी की घाटी में आबचंद के रक्षित वन की घनी झाड़ियों वाले क्षेत्र में सुरक्षित हैं। इन गुफाओं में पाए गए शैल चित्रों में भी उसी प्रकार की रंगीन चित्रकारी की गई है, जैसी सिंघनपुर और आदमगढ़ में प्राप्त हुई है। सबसे बड़ी गुफा करीब 40 फुट लंबी है। यहां साल में एक बार मकर संक्रांति पर मेला लगता है जिसे गुफा मेला कहते हैं। आबचंद के शैलचित्रों में पुरामानव की लोकचित्रकला के दर्शन होते हैं। इससे सिद्ध है कि बुंदेलखंड में लोकसंस्कृति की आदिम स्थिति वर्तमान थी। आपचॅद। आबचॅद क़ी ग़ुफाऎ ग़िरबर रेलवे स्टेश्न से ३क़िमी दूर है। य़े ग़ुफाऎ ग़देरी ऩदी क़े पानी से पहाड़ क़ट क़र बनी है। .

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आराफ़ूरा सागर

आराफ़ूरा सागर, प्रशांत महासागर के पश्चिम में स्थित है और यह ऑस्ट्रेलिया और नया गिनी के बीच के सहूल महाद्वीपीय ताक पर आच्छादित है। .

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आहारीय आयोडीन

आहारीय आयोडीन मानव शरीर के अत्यावश्यक भौतिक तत्त्व है। ये अवटु ग्रंथि के सम्यक, कार्यविधि के लिए आवश्यक है जो शक्ति का निर्माण करती है, हानिप्रद कीटाणुओं को मारती है और इसके हार्मोन थांयरांक्सीजन की कमी पूरी करती है। आयोडीन मन को शांति प्रदान करती है, तनाव कम करती है, मस्तिष्क को सतर्क रखती है और बाल, नाखून, दांत और त्वचा को उत्तम स्थिति में रखने में मदद करता है। आयोडिन की कमी से गर्दन के नीचे अवटु ग्रंथि की सूजन (गलगंड) हो सकती है और हार्मोन का उत्पादन बन्द हो सकता है जिससे शरीर के सभीसंस्थान अव्यवस्थित हो सकते हैं। इसकी कमी से मन्द मानसिक प्रतिक्रियायें, धमनियों में सख्ती एवं मोटापा हो सकता है। मानव शरीर में केवल १०-१२ मिलीग्राम आयोडिन होती है किन्तु इसके बिना जीवित रहना सम्भव नही है। आयोडिन कोलेस्ट्रॉल की रासायनिक संशलेषण में सहायता करती है और धमनियों में कोलेस्ट्रॉल चर्बी को भी बढ़ाती है। शरीर में आयोडिन की अधिकता होने से नाक में नमी अधिक हो जाती है। जल में ली गई क्लोरीन शरीर से आयोडिन अधिकता को निकालने का कारण होती है। अधिक मात्रा में आयोडीन वाले आहार है मूली, शतावर (एस्पेरेगस रेसिमोसस), गाजर, टमाटर, पालक, आलू, मटर, खुंभी, सलाद, प्याज, केला, स्ट्राबेरी, समुद्र से प्राप्त होने वाले आहार, अंडे की जर्दी, दूध, पनीर और कॉड-लिवर तेल। आयोडिन की कमी से उत्पन्न विकारों पर नियंत्रण के लिये १९८६ में न्यूसेफ़ और आस्ट्रेलिया की सरकार के समर्थन से तीसरी दुनिया के देशों को सहायता देने के लिये एक अन्तराष्ट्रीय परिषद स्थापित की गई थी। भारत ने १९९२ से पहले व्यापक आयोडिन युक्त नमक की नीति अपनाई थी। श्रेणी:पोषण श्रेणी:आयोडीन श्रेणी:आहार श्रेणी:अवटु ग्रंथि श्रेणी:चित्र जोड़ें.

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कच्छ का रण

कच्छ का रन कच्छ का रन तथा महान कच्छ का रन गुजरात प्रांत में कच्छ जिले के उत्तर तथा पूर्व में फैला हुआ एक नमकीन दलदल का वीरान प्रदेश है। यह लगभग 23,300 वर्ग कि॰मी॰ क्षेत्रफल में फैला हुआ है। यह समुद्र का ही एक सँकरा अंग है जो भूचाल के कारण संभवत: अपने मौलिक तल को ऊपर उभड़ आया है और परिणामस्वरूप समुद्र से पृथक हो गया है। सिकंदर महान्‌ के समय यह नौगम्य झील था। उत्तरी रन, जो लगभग 257 कि॰मी॰ में फैला हुआ है। पूर्वी रन अपेक्षाकृत छोटा है। इसका क्षेत्रफल लगभग 5,178 वर्ग कि॰मी॰ है। मार्च से अक्टूबर मास तक यह क्षेत्र अगम्य हो जाता है। सन्‌ 1819 ई. के भूकंप में उत्तरी रन का मध्य भाग किनारों की अपेक्षा अधिक ऊपर उभड़ गया। इसके परिणामस्वरूप मध्य भाग सूखा तथा किनारे पानी, कीचड़ तथा दलदल से भरे हैं। ग्रीष्म काल में दलदल सूखने पर लवण के श्वेत कण सूर्य के प्रकाश में चमकने लगते हैं। नाम "रण" हिन्दी शब्द से आता है (रण) अर्थ "रेगिस्तान" है। कच्छ के रन की पश्चिमी सीमा पाकिस्तान से मिलती है। 9 अप्रैल 1965 को पाकिस्तान ने अचानक आक्रमण करके इसके एक भाग पर कब्जा कर लिया। भारतीय सैनिकों ने अपना क्षेत्र वापस लेने के लिए कार्रवाई की तो युद्ध छिड़ गया। लेकिन ब्रिटेन के हस्तक्षेप से युद्ध विराम हुआ और मामला फैसले के लिए अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में ले जाया गया। अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के निर्णय (19 फ़रवरी 1968) के अनुसार कच्छ के रन का लगभग एक तिहाई भाग पाकिस्तान को वापस मिल गया। .

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कमल हासन

कमल हासन (जन्म 7 नवम्बर 1954 को परमकुडी, मद्रास राज्य, भारत में) एक भारतीय फ़िल्म अभिनेता, पटकथा लेखक और फ़िल्म निर्माता, भारतीय सिनेमा के प्रमुख, किरदार को जीने वाले अभिनेताओं में से एक माने जाते हैं। कमल हासन, राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार और फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार सहित कई भारतीय फ़िल्म पुरस्कारों के विजेता के तौर पर जाने जाते हैं और उन्हें सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा फ़िल्म के लिए अकादमी पुरस्कार प्रतियोगिता में भारत द्वारा प्रस्तुत सर्वाधिक फिल्मों वाले अभिनेता होने का गौरव प्राप्त है। अभिनय और निर्देशन के अलावा, वे एक पटकथा लेखक, गीतकार, पार्श्वगायक और कोरियोग्राफर हैं। उनकी फ़िल्म निर्माण कंपनी, राजकमल इंटरनेशनल ने उनकी कई फ़िल्मों का निर्माण किया। कमल हासन ने अपने 63वें जन्मदिन पर एक ऐप लॉन्च किया, जिसका नाम है 'मय्यम व्हिसल'.

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कालपी

कालपी उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में स्थित एक नगर है। यह यमुना नदी के तट पर बसा हुआ है। माना जाता है कि कालपी, प्राचीन काल में 'कालप्रिया' नगरी के नाम से विख्यात थी, समय के साथ इसका नाम संक्षिप्त होकर कालपी हो गया। कहा जाता है कि इसे चौथी शती में राजा वसुदेव ने बसाया था। यह नगर यमुना नदी के किनारे कानपुर-सागर राजमार्ग पर स्थित है। .

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काला सागर

नासा के वर्ल्ड विंड ग्लोब सॉफ्टवेयर द्वारा कृष्ण सागर का दृश्य कृष्ण सागर या काला सागर एक महाद्वीपीय समुद्र है जो दक्षिण-पूर्वी यूरोप, कॉकेशस और अनातोलिया के प्रायद्वीप (तुर्की) से घिरा है। अंध महासागर में यह भूमध्य और एजियन सागरों और विभिन्न जलडमरूमध्यों के माध्यम से जुड़ा हुआ है। इसमें बोस्पोरस की जलसंयोगी मारमरा सागर का नाम उल्लेखनीय है। कृष्ण सागर, 436,400 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल का जलाशय है, जिसकी अधिकतम गहराई 2212 मीटर है। इसमें समाहित जल का आयतन लगभग 5,47,000 घन किमी है। कृष्ण सागर पश्चिम में बुल्गारिया, रोमानिया, उत्तर-पूर्व में रूस और यूक्रेन, दक्षिण में तुर्की के बीच स्थित है। इसके पूर्व में जॉर्जिया तथा कॉकेशस की पर्वतमालाएँ हैं जो इसे कैस्पियन सागर से अलग करती हैं। पूर्व से पश्चिम की सबसे अधिक लंबाई लगभग 1175 किमी है। '''कृष्ण सागर''' का क्रीमिया गणराज्य के एक गांव से दृश्य इस तट के साथ लगे महत्वपूर्ण शहरों में शामिल हैं: कॉस्टैंटा (306000 550000 के एक मेट्रो के साथ), इस्तांबुल (11372613), ओडेसा (1001000), मंगालिया (41153), बुर्गास (229250), वार्ना (357752 416000 के एक मेट्रो के साथ), खेरसॉन (358000), सेवास्टॉपॉल (379200), याल्टा (80552), कर्च (158165), नोवोरोसीस्क (281400), सोची (328809), सूखुमी (43700), नैवोदारी (34669), पोती (47149), बातुमी (121806), ट्रैबज़ॉन (275137), सैमसन (439000) ओर्दू (190143) और जोंगूल्दाक (104276).

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कालिंजर दुर्ग

कालिंजर, उत्तर प्रदेश के बुन्देलखण्ड क्षेत्र के बांदा जिले में कलिंजर नगरी में स्थित एक पौराणिक सन्दर्भ वाला, ऐतिहासिक दुर्ग है जो इतिहास में सामरिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण रहा है। यह विश्व धरोहर स्थल प्राचीन मन्दिर नगरी-खजुराहो के निकट ही स्थित है। कलिंजर नगरी का मुख्य महत्त्व विन्ध्य पर्वतमाला के पूर्वी छोर पर इसी नाम के पर्वत पर स्थित इसी नाम के दुर्ग के कारण भी है। यहाँ का दुर्ग भारत के सबसे विशाल और अपराजेय किलों में एक माना जाता है। इस पर्वत को हिन्दू धर्म के लोग अत्यंत पवित्र मानते हैं, व भगवान शिव के भक्त यहाँ के मन्दिर में बड़ी संख्या में आते हैं। प्राचीन काल में यह जेजाकभुक्ति (जयशक्ति चन्देल) साम्राज्य के अधीन था। इसके बाद यह दुर्ग यहाँ के कई राजवंशों जैसे चन्देल राजपूतों के अधीन १०वीं शताब्दी तक, तदोपरांत रीवा के सोलंकियों के अधीन रहा। इन राजाओं के शासनकाल में कालिंजर पर महमूद गजनवी, कुतुबुद्दीन ऐबक, शेर शाह सूरी और हुमांयू जैसे प्रसिद्ध आक्रांताओं ने आक्रमण किए लेकिन इस पर विजय पाने में असफल रहे। अनेक प्रयासों के बाद भी आरम्भिक मुगल बादशाह भी कालिंजर के किले को जीत नहीं पाए। अन्तत: मुगल बादशाह अकबर ने इसे जीता व मुगलों से होते हुए यह राजा छत्रसाल के हाथों अन्ततः अंग्रेज़ों के अधीन आ गया। इस दुर्ग में कई प्राचीन मन्दिर हैं, जिनमें से कई तो गुप्त वंश के तृतीय -५वीं शताब्दी तक के ज्ञात हुए हैं। यहाँ शिल्पकला के बहुत से अद्भुत उदाहरण हैं। .

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किला

राजस्थान के '''कुम्भलगढ़ का किला''' - यह एशिया के सबसे बड़े किलों में से एक है। शत्रु से सुरक्षा के लिए बनाए जानेवाले वास्तु का नाम किला या दुर्ग है। इन्हें 'गढ़' और 'कोट' भी कहते हैं। दुर्ग, पत्थर आदि की चौड़ी दीवालों से घिरा हुआ वह स्थान है जिसके भीतर राजा, सरदार और सेना के सिपाही आदि रहते है। नगरों, सैनिक छावनियों और राजप्रासादों सुरक्षा के लिये किलों के निर्माण की परंपरा अति प्राचीन काल से चली आ रही है। आधुनिक युग में युद्ध के साधनों और रण-कौशल में वृद्धि तथा परिवर्तन हो जाने के कारण किलों का महत्व समाप्त हो गया है और इनकी कोई आवशकता नहीं रही। .

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कुम्भलगढ़ दुर्ग

कुम्भलगढ़ दुर्ग का विशालकाय द्वार; इसे '''राम पोल''' कहा जाता है। कुम्भलगढ़ का दुर्ग राजस्थान ही नहीं भारत के सभी दुर्गों में विशिष्ठ स्थान रखता है। उदयपुर से ७० किमी दूर समुद्र तल से १,०८७ मीटर ऊँचा और ३० किमी व्यास में फैला यह दुर्ग मेवाड़ के यशश्वी महाराणा कुम्भा की सूझबूझ व प्रतिभा का अनुपम स्मारक है। इस दुर्ग का निर्माण सम्राट अशोक के द्वितीय पुत्र संप्रति के बनाये दुर्ग के अवशेषों पर १४४३ से शुरू होकर १५ वर्षों बाद १४५८ में पूरा हुआ था। दुर्ग का निर्माण कार्य पूर्ण होने पर महाराणा कुम्भा ने सिक्के डलवाये जिन पर दुर्ग और उसका नाम अंकित था। वास्तुशास्त्र के नियमानुसार बने इस दुर्ग में प्रवेश द्वार, प्राचीर, जलाशय, बाहर जाने के लिए संकटकालीन द्वार, महल, मंदिर, आवासीय इमारतें, यज्ञ वेदी, स्तम्भ, छत्रियां आदि बने है। बादल महल .

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क्लोरीन

क्लोरीन (यूनानी: χλωρóς (ख्लोरोस), 'फीका हरा') एक रासायनिक तत्व है, जिसकी परमाणु संख्या १७ तथा संकेत Cl है। ऋणात्मक आयन क्लोराइड के रूप में यह साधारण नमक में उपस्थित होती है और सागर के जल में घुले लवण में प्रचुर मात्रा में पाई जाती है।। हिन्दुस्तान लाइव। ३१ मई २०१० सामान्य तापमान और दाब पर क्लोरीन (Cl2 या "डाईक्लोरीन") गैस के रूप में पायी जाती है। इसका प्रयोग तरणतालों को कीटाणुरहित बनाने में किया जाता है। यह एक हैलोजन है और आवर्त सारणी में समूह १७ (पूर्व में समूह ७, ७ए या ७बी) में रखी गयी है। यह एक पीले और हरे रंग की हवा से हल्की प्राकृतिक गैस जो एक निश्चित दाब और तापमान पर द्रव में बदल जाती है। यह पृथ्वी के साथ ही समुद्र में भी पाई जाती है। क्लोरीन पौधों और मनुष्यों के लिए आवश्यक है। इसका प्रयोग कागज और कपड़े बनाने में किया जाता है। इसमें यह ब्लीचिंग एजेंट (धुलाई करने वाले/ रंग उड़ाने वाले द्रव्य) के रूप में काम में लाई जाती है। वायु की उपस्थिति में यह जल के साथ क्रिया कर हाइड्रोक्लोरिक अम्ल का निर्माण करती है। मूलत: गैस होने के कारण यह खाद्य श्रृंखला का भाग नहीं है। यह गैस स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती है। तरणताल में इसका प्रयोग कीटाणुनाशक की तरह किया जाता है। साधारण धुलाई में इसे ब्लीचिंग एजेंट रूप में प्रयोग करते हैं। ब्लीच और कीटाणुनाशक बनाने के कारखाने में काम करने वाले लोगों में इससे प्रभावित होने की आशंका अधिक रहती है। यदि कोई लंबे समय तक इसके संपर्क में रहता है तो उसके स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है। इसकी तेज गंध आंखों, त्वचा और श्वसन तंत्र के लिए हानिकारक होती है। इससे गले में घाव, खांसी और आंखों व त्वचा में जलन हो सकती है, इससे सांस लेने में समस्या होती है। .

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कृंतक

गिलहरी '''कैपीबारा''': सबसे बड़ा जीवित कृंतक प्राणी वर्तमान स्तनधारियों में सर्वाधिक सफल एवं समृद्ध गण कृंतक (Rodentia) का है, जिसमें १०१ जातियाँ जीवित प्राणियों की तथा ६१ जातियाँ अश्मीभूत (Fossilized) प्राणियों की रखी गई हैं। जहाँ तक जातियों का प्रश्न है, समस्त स्तनधारियों के वर्ग में लगभग ४,५०० जातियों के प्राणी आजकल जीवित पाए जाते हैं, जिनमें से आधे से भी अधिक (२,५०० के लगभग) जातियों के प्राणी कृंतकगण में ही आ जाते हैं। शेष २,००० जातियों के प्राणी अन्य २० गणों में आते हैं। इस गण में गिलहरियाँ, हिममूष (Marmots), उड़नेवाली गिलहरियाँ (Flyiug squirrels) श्वमूष, (Prairie dogs) छछूँदर (Musk rats), धानीमूष, (Pocket dogs) ऊद (Beavers), चूहे (Rats), मूषक (Mice), शाद्वलमूषक (Voles), जवितमूष (Gerbille), वेणमूषक (Bamboo rats), साही (Porcupines), बंटमूष (Guinea pigs), आदि स्तनधारी प्राणी आते हैं। पृथ्वी पर जहाँ भी प्राणियों का आवास संभव है वहाँ कृंतक अवश्य पाए जाते हैं। ये हिमालय पर्वत पर २०,००० फुट की ऊँचाई तक और नीचे समुद्र तल तक पाए जाते हैं। विस्तार में ये उष्णकटिबंध से लेकर लगभग ध्रुवीयप्रदेशों तक मिलते हैं। ये मरु स्थल उष्णप्रधान वर्षावन, दलदल और मीठे जलाशय-सभी स्थानों पर मिलते हैं: कोई समुद्री कृंतक अभी तक देखने में नहीं आया है। अधिकांश कृंतक स्थलचर हैं और प्राय: बिलों में रहते हैं, किंतु कुछेक जैसे गिलहरियाँ आदि, वृक्षाश्रयी हैं। कुछ कृंतक उड़ने का प्रयत्न भी कर रहे हैं, फलत: उड़नेवाली गिलहरियों का विकास हो चुका है। इसी प्रकार, यद्यपि अभी तक पूर्ण रूप से जलाश्रयी कृंतकों का विकास नहीं हो सका है, फिर भी ऊद तथा छछूँदर इस दिशा में पर्याप्त आगे बढ़ चुके हैं। .

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कैसर विल्हेम द्वितीय (जर्मनी)

विल्हेम द्वितीय या विलियम द्वितीय (जर्मन: Friedrich Wilhelm Viktor Albrecht von Preußen; अंगरेजी: Frederick William Victor Albert of Prussia; 27 जनवरी 1859 – 4 जून 1941) जर्मनी का अन्तिम सम्राट (कैसर) तथा प्रशा का राजा था जिसने जर्मन साम्राज्य एवं प्रशा पर १५ जून १८८८ से ९ नवम्बर १९१८ तक शासन किया। विलियम प्रथम की मृत्यु के उपरान्त उसका पुत्र फैड्रिक तृतीय जर्मनी के राजसिंहासन पर 9 मार्च 1888 ई. को आसीन हुआ। किन्तु केवल 100 दिन राज्य करने के बाद उसकी मृत्यु हो गई। उसकी मृत्यु होने पर उसका पुत्र विलियम द्वितीय राज्य सिंहासन पर आसीन हुआ। वह एक नवयुवक था। उसमें अनेक गुणों और दुर्गुणों का सम्मिश्रण था। वह कुशाग्र बुद्धि, महत्वकांक्षी आत्मविश्वासी तथा असाधारण नवयुवक था। वह स्वार्थी और घमण्डी था तथा उसका विश्वास राजा के दैवी सिद्धांत में था। किसी अन्य व्यक्ति के नियंत्रण में रहना उसको असह्य था जिसके कारण कुछ ही दिनों के उपरांत उसकी अपने चांसलर बिस्मार्क से अनबन हो गई। परिस्थितियों से बाध्य होकर बिस्मार्क को त्याग-पत्र देना पड़ा। बिस्मार्क के पतन के उपरांत विलियम ने समस्त सत्ता को अपने हाथों में लिया और उसके मंत्री आज्ञाकारी सेवक बन गये और वह स्वयं का शासन का कर्णधार बना। .

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कोरल सागर

कोरल सागर (Coral Sea) दक्षिणी प्रशांत महासागर का एक सीमांत सागर है, जो ऑस्ट्रेलिया के उत्तरी तट पर यॉर्क अंतरीप प्रायद्वीप से पूर्वोत्तर में स्थित है। इसके पश्चिम में क्वीन्सलैण्ड का पूर्वी तट है और पूर्व में वानूआतू स्थित है। पश्चिमोत्तर में यह पूर्वी नया गिनी के दक्षिण तट से मिलता है और टोरेस जलसन्धि द्वारा आराफ़ूरा सागर से जुड़ा हुआ है। पूर्व में यह प्रशांत महासागर और सोलोमन सागर से जुड़ा हुआ है। विश्व-प्रसिद्ध ग्रेट बैरियर रीफ, जो दुनिया का सबसे बड़ा प्रवाल शैल-श्रेणी मंडल है, कोरल सागर में ही स्थित है। .

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कोरो सागर

कोरो सागर (Koro Sea) प्रशांत महासागर का एक सागर है। इसके पश्चिम में फ़िजी का विति लेवु द्वीप और पूर्व में फ़िजी का ही लाउ द्वीपसमूह स्थित है। सागर का नाम लोमइवीती द्वीपसमूह के कोरो द्वीप पर पड़ा है। .

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कोजीकोड बन्दरगाह

कोजीकोड बन्दरगाह कोच्चि से 144 किलोमीटर उत्तर में है। मानसून के आरम्भ में यह बन्द रहता है। यहाँ समुद्र छिछला है। इस कारण जहाजों को बन्दरगाह से 5 किलोमीटर दूर समुद्र में खड़ा होना पड़ता है। यहाँ से नारियल की रस्सी, खोपरा, कहवा,चाय, सोंठ, मूँगफली तथा मछली की खाद निर्यात की जाती है। मुख्य आयात अनाज, मिट्टी का तेल, मशीनों और सूती वस्त्रों का होता है। श्रेणी:बन्दरगाह.

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कोवेलॉन्ग

कोवेलॉन्ग चेन्नई का एक सागर तट है। श्रेणी:चेन्नई में सागर तट.

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अड्यार बीच

अड्यार बीच चेन्नई का एक सागर तट है। श्रेणी:चेन्नई में सागर तट श्रेणी:चित्र जोड़ें.

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अति-खारी झील

अति-खारी झील (Hypersaline lake, हाइपरसैलाइन लेक) ऐसी झील को कहा जाता है जिसमें नमक की सान्द्रता (कॉन्सन्ट्रेशन) समुद्र से भी अधिक हो, यानि जिसका पानी समुद्र के पानी से भी अधिक खारा हो। मात्रा मापन के हिसाब से ३.५% से अधिक सान्द्रता (अर्थात ३५ ग्राम प्रति लीटर से अधिक) होने पर किसी झील को अति-खारी कहा जा सकता है। अति-खारी झीलों में आम जीवों का पनपना कठिन होता है लेकिन कुछ चरमपसंदी जीव इसमें फलते-फूलते हैं। दुनिया की सबसे खारी झील अंटार्कटिका में स्थित डॉन हुआन झील (Don Juan Pond) है जिसकी सान्द्रता ४४% से भी ऊपर है। नमकीन पानी को जमने के लिये शून्य से भी कम तापमान चाहिए होता है और इस अत्यधिक खारेपन के कारण अंटार्कटिका की यह झील -५०° सेन्टीग्रेड तक तापमान गिरने पर भी नहीं जमती।, Jamie Frater, pp.

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अन्तर्जलीय उच्चभूमि

अन्तर्जलीय उच्चभूमि (underwater bank) किसी सागर, महासागर या अन्य बड़े जलसमूह के नीचे स्थित किसी विस्तत भूमि के क्षेत्र को कहते हैं जिसकी गहराई उसके आसपास के समुद्री फ़र्श की तुलना में कम हो। अक्सर यह पानी की ऊपरी सतह से ज़रा ही कम ऊँचा होता है। ऐसी उच्चभूमियाँ अलग कारणों से बन सकती हैं और कुछ स्थानों पर यह पानी के नीचे के पर्वतों की शिखरों पर स्थित होती हैं। अन्तर्जलीय उच्चभूमियों का मत्स्योद्योग में बहुत महत्व होता है क्योंकि यह अक्सर मछली पकड़ने के लिये अच्छे स्थान होते हैं।Farallones Marine Sanctuary Association.

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अनूप झील

एक अनूप झील नदियों के मुहाने पर समुद्र की धाराएँ या पवनें बालू मिट्टी के टीले बनाकर जल के क्षेत्र को समुद्र से अलग कर देती हैं, इन्हें अनूप कहते हैं। भारत के पूर्वी तट पर उड़ीसा की चिल्का और नेल्लोर की पुलीकट झीलें, गोदावरी और कृष्णा नदी के डेल्टाओं में कोलेरू झील (आन्ध्र प्रदेश) इसी प्रकार वनी हैं। भारत के पश्चिमी तट पर केरल राज्य में भी असंख्य अनूप या कयाल पाये जाते हैं। श्रेणी:झीलें श्रेणी:जलसमूह श्रेणी:भूगोल शब्दावली * श्रेणी:समुद्र-वैज्ञानिक पारिभाषिकी.

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अपरदन

गेहूँ के एक खेत में अत्यधिक भूक्षरण का दृष्य अपरदन (Erosion) या वह प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिसमें चट्टानों का विखंडन और परिणामस्वरूप निकले ढीले पदार्थ के जल, पवन, इत्यादि प्रक्रमों द्वारा स्थानांतरण होता है। अपरदन के प्रक्रमों में वायु, जल तथा हिमनद और सागरीय लहरें प्रमुख हैं। .

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अपस्मार

अपस्मार या मिर्गी (वैकल्पिक वर्तनी: मिरगी, अंग्रेजी: Epilepsy) एक तंत्रिकातंत्रीय विकार (न्यूरोलॉजिकल डिसॉर्डर) है जिसमें रोगी को बार-बार दौरे पड़ते है। मस्तिष्क में किसी गड़बड़ी के कारण बार-बार दौरे पड़ने की समस्या हो जाती है।, हिन्दुस्तान लाइव, १८ नवम्बर २००९ दौरे के समय व्यक्ति का दिमागी संतुलन पूरी तरह से गड़बड़ा जाता है और उसका शरीर लड़खड़ाने लगता है। इसका प्रभाव शरीर के किसी एक हिस्से पर देखने को मिल सकता है, जैसे चेहरे, हाथ या पैर पर। इन दौरों में तरह-तरह के लक्षण होते हैं, जैसे कि बेहोशी आना, गिर पड़ना, हाथ-पांव में झटके आना। मिर्गी किसी एक बीमारी का नाम नहीं है। अनेक बीमारियों में मिर्गी जैसे दौरे आ सकते हैं। मिर्गी के सभी मरीज एक जैसे भी नहीं होते। किसी की बीमारी मध्यम होती है, किसी की तेज। यह एक आम बीमारी है जो लगभग सौ लोगों में से एक को होती है। इनमें से आधों के दौरे रूके होते हैं और शेष आधों में दौरे आते हैं, उपचार जारी रहता है। अधिकतर लोगों में भ्रम होता है कि ये रोग आनुवांशिक होता है पर सिर्फ एक प्रतिशत लोगों में ही ये रोग आनुवांशिक होता है। विश्व में पाँच करोड़ लोग और भारत में लगभग एक करोड़ लोग मिर्गी के रोगी हैं। विश्व की कुल जनसँख्या के ८-१० प्रतिशत लोगों को अपने जीवनकाल में एक बार इसका दौरा पड़ने की संभावना रहती है।, वेब दुनिया, डॉ॰ वोनोद गुप्ता। १७ नवम्बर को विश्व भर में विश्व मिरगी दिवस का आयोजन होता है। इस दिन तरह-तरह के जागरुकता अभियान और उपचार कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।।। द टाइम्स ऑफ इंडिया।, याहू जागरण, १७ नवम्बर २००९ .

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अपवाह तन्त्र

डेल्टाई भाग में अपवाह तंत्र अपवाह तन्त्र या प्रवाह प्रणाली (drainage system) किसी नदी तथा उसकी सहायक धाराओं द्वारा निर्मित जल प्रवाह की विशेष व्यवस्था है।सोनल गुप्ता - यह एक तरह का जालतन्त्र या नेटवर्क है जिसमें नदियाँ एक दूसरे से मिलकर जल के एक दिशीय प्रवाह का मार्ग बनती हैं। किसी नदी में मिलने वाली सारी सहायक नदियाँ और उस नदी बेसिन के अन्य लक्षण मिलकर उस नदी का अपवाह तन्त्र बनाते हैं। .

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अम्बैसिडाए

एशियाई शीशमीन (Asiatic glassfishes) या अम्बैसिडाए (Ambassidae) हड्डीदार मछलियों के पर्सिफ़ोर्मेज़ गण का एक कुल है जो समुद्र व मीठे पानी दोनों में मिलती हैं। इसके ८ वंशों में ४९ जातियाँ हैं। एशियाई शीशमीन एशिया, ओशिआनिया, हिन्द महासागर और पश्चिमी प्रशांत महासागर में मिलती है। इनमें से कुछ की लम्बाई २६ सेंटीमीटर तक होती है। इन मछलियों की कई जातियों के शरीर शीशे जैसे पारदर्शी या अर्ध-पारदर्शी होते हैं, जिसके कारण इन्हें मीनशालाओं में पालतु रूप से रखा जाता है। पहले इन्हें रंगों के टीके लगाकर मछली रखने वालों को बेचा जाता था लेकिन इस से मछली को भयंकर पीढ़ा होती है और जल्दी मृत्यु भी हो जाती है, और इस क्रूरता की वजह से लोगों ने इन्हें ख़रीदना कम कर लिया है। .

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अगस्त २०१०

कोई विवरण नहीं।

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अक्षय तृतीया

अक्षय तृतीया या आखा तीज वैशाख मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को कहते हैं। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार इस दिन जो भी शुभ कार्य किये जाते हैं, उनका अक्षय फल मिलता है।। वेब दुनिया इसी कारण इसे अक्षय तृतीया कहा जाता है।। नवभारत टाइम्स। २७ अप्रैल २००९। पं.केवल आनंद जोशी वैसे तो सभी बारह महीनों की शुक्ल पक्षीय तृतीया शुभ होती है, किंतु वैशाख माह की तिथि स्वयंसिद्ध मुहूर्तो में मानी गई है। .

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अकूत

अकूत का अर्थ है - असीमित या अमित। .

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उत्प्लव

मौसम से संबन्धित आंकड़े जुटाने वाला एक उत्प्लव उत्प्लव (बॉय / buoy) उन पिंडों का नाम है जो समुद्रतल से बँधे रहते हैं और समुद्रपृष्ठ पर उतराते रहकर जहाजों को मार्ग की विपत्तियों या सुविधाओं की सूचना देते रहते हैं। उदाहरण के लिए, उत्प्लव संकीर्ण समुद्रों को नौपरिवहन योग्य सीमा सूचित करते हैं, या यह बताते हैं कि मार्ग उपयुक्त है, या यह कि उसके अवरोध कहाँ हैं, जैसे पानी के भीतर डूबी हुई विपत्तियाँ या बिखरे हुए चट्टान, सुरंग या टारपीडो के स्थल, तार भेजने के समुद्री तार, या लंगर छोड़कर चले गए जहाजों के छूटे हुए लंगर। कुछ उत्प्लवों से यह भी काम निकलता है कि लंगर डालने के बदले जहाज को उनसे बाँध दिया जा सकता है। इनको नौबंध उत्प्लव (मूरिंग बॉय) कहते हैं। उद्देश्य के अनुसार उत्प्लवों के आकार और रंग में अंतर होता है। ये काठ के कुंदे से लेकर इस्पात की बड़ी बड़ी संरचनाएँ हो सकती हैं, जिनमें जहाज बाँधे जाते हैं। उत्प्लव को अंग्रेजी में 'बॉय' कहते हैं और लश्करी हिंदी मे इसे 'बोया' कहा जाता है। अंग्रेजी शब्द बॉय उस प्राचीन अंग्रेजी शब्द से व्युत्पन्न है जिससे आधुनिक अंग्रेजी शब्द बीकन (beacon, आकाशदीप) की भी उत्पत्ति हुई है। परंतु अब बॉय का अर्थ हो गया है उतराना और उत्प्लव शब्द का भी अर्थ है वह जो उतराता रहे। .

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उद्धार

Defense.gov News Photo 001030-M-0557M-006.jpg समुद्र पर दुर्घटना के समय लोगों की जान बचाने या माल बचाने उद्धार को कहत समुद्र पर दुर्घटना के समय लोगों की जान बचाने या माल बचाने उद्धार (salvage) को कहते हैं। भूमि पर अग्नि से जान अथवा माल बचाने को भी उद्धार (सैलवेज) कह सकते हैं, परंतु इस संबंध में यह शब्द बहुत प्रचलित नहीं है। समुद्र पर उद्धार के दो विभाग हैं: (1) नागरिक, (2) सैनिक .

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छांदोग्य उपनिषद

छांदोग्य उपनिषद् समवेदीय छान्दोग्य ब्राह्मण का औपनिषदिक भाग है जो प्राचीनतम दस उपनिषदों में नवम एवं सबसे बृहदाकार है। इसके आठ प्रपाठकों में प्रत्येक में एक अध्याय है। .

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१९७७

1977 ग्रेगोरी कैलंडर का एक साधारण वर्ष है। .

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२५ अगस्त

25 अगस्त ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का 237वॉ (लीप वर्ष मे 238 वॉ) दिन है। साल मे अभी और 128 दिन बाकी है। .

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७ अगस्त

7 अगस्त ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का 219वॉ (लीप वर्ष मे 220 वॉ) दिन है। साल मे अभी और 146 दिन बाकी है। .

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यहां पुनर्निर्देश करता है:

समुद्र, समुद्रों, समुंदर

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