लोगो
यूनियनपीडिया
संचार
Google Play पर पाएं
नई! अपने एंड्रॉयड डिवाइस पर डाउनलोड यूनियनपीडिया!
इंस्टॉल करें
ब्राउज़र की तुलना में तेजी से पहुँच!
 

सम्भोग

सूची सम्भोग

सम्भोग (अंग्रेजी: Sexual intercourse या सेक्सुअल इन्टरकोर्स) मैथुन या सेक्स की उस क्रिया को कहते हैं जिसमे नर का लिंग मादा की योनि में प्रवेश करता हैं। सम्भोग अलग अलग जीवित प्रजातियों के हिसाब से अलग अलग प्रकार से हो सकता हैं। सम्भोग को योनि मैथुन, काम-क्रीड़ा, रति-क्रीड़ा भी कहते हैं। संभोग की क्रिया केवल पति-पत्नी के बीच ही हो सकती है । यदि कोई महिला या पुरुष अपने पति-पत्नी के अलावा किसी और से संबंध बनाता है । तो वह अपराध की श्रेणी में आता है। इस अपराध की सजा भारत मे 30 साल की उम्रकैद है। यदि कोई स्त्री पुरुष अपने पति पत्नी को छोड़कर किसी अन्य से संबंध बनाता बनाती है । तो उस स्त्री अथवा पुरुष का उसकी पति अथवा पत्नी से तलाक हो जाता है । तथा उस स्त्री अथवा पुरुष को 30 साल की जेल होती है। विवाह से पूर्व संभोग करने भी अपराध की श्रेणी में आता है । इसकी दज यह है कि उस उन दोनों का विवाह करना अनिवार्य हो जाता है । तथा वे एक-दूसरे से जीवन भर तलाक नही ले सकते है । और किसी अन्य से संभोग भी नही कर सकते है । सृष्टि में आदि काल से सम्भोग का मुख्य काम वंश को आगे चलाना व बच्चे पैदा करना है। जहाँ कई जानवर व पक्षी सिर्फ अपने बच्चे पैदा करने के लिए उपयुक्त मौसम में ही सम्भोग करते हैं वहीं इंसानों में सम्भोग इस वजह के बिना भी हो सकता हैं। सम्भोग इंसानों में सुख प्राप्ति या प्यार या जज्बात दिखाने का भी एक रूप हैं। सम्भोग अथवा मैथुन से पूर्व की क्रिया, जजिसे अंग्रेजी में फ़ोर प्ले कहते हैं, के दौरान हर प्राणी के शरीर से कुछ विशेष प्रकार की गन्ध (फ़ीरोमंस) उत्सर्जित होती है जो विषमलिंगी को मैथुन के लिये अभिप्रेरित व उत्तेजित करती है। कुछ प्राणियों में यह मौसम के अनुसार भी पाया जाता है। वस्तुत: फ़ोर प्ले से लेकर चरमोत्कर्ष की प्राप्ति तक की सम्पूर्ण प्रक्रिया ही सम्भोग कहलाती है बशर्ते कि लिंग व्यवहार का यह कार्य विषमलिंगियों के बीच हो रहा हो। कई ऐसे प्रकार के सम्भोग भी हैं जिसमें लिंग का उपयोग नर और मादा के बीच नहीं होता जैसे मुख मैथुन, हस्तमैथुन अथवा गुदा मैथुन उन्हें मैथुन तो कहा जा सकता है परन्तु सम्भोग कदापि नहीं। उपरोक्त प्रकार के मैथुन अस्वाभाविक अथवा अप्राकृतिक व्यवहार के अन्तर्गत आते हैं या फिर सम्भोग के साधनों के अभाव में उन्हें केवल मनुष्य की स्वाभाविक आत्मतुष्टि का उपाय ही कहा जा सकता है, सम्भोग नहीं। .

45 संबंधों: एत्ची, द गॉडफ़ादर, पुरुष नसबंदी, पोर्नोग्राफ़िक अभिनेता, बलात्कार, बुद्धि लब्धि, भारत का लैंगिक इतिहास, मस्तीज़ादे, मानव कामुक क्रिया, मुखाभिगम, मैडोना (मनोरंजनकर्ता), मैथुन, यार्चा गुम्बा, यौन शिक्षा, यौन आसनों की सूची, योनि, योनि स्नेहन, रेड लाइट एरिया, लैंगिक जनन, लैंगिक व्यसन, शिश्न, शव कामुकता, शुक्राणु, समागम, सम्भोग, सिंह (पशु), संचार, स्तंभन, स्तंभन दोष, स्तंभास्थि, हस्तमैथुन, जन्तुओं का काम-व्यवहार, विवाह की संसिद्धि, वीर्य स्खलन, वीर्यपान, गर्भावस्था, ग़ुस्ल, गुदा मैथुन, ग्रैण्ड थैफ्ट ऑटो (शृंखला), इरुमेशियो, कामसूत्र, कुमारसम्भव, कौमार्य, कौमार्य परीक्षण, अंडाणु

एत्ची

जापानी भाषा में लैंगिक क्रियाओं के लिए हँसी में अक्सर काम में लिया जाने वाला कठबोली शब्द है। विशेषण के रूप में यह शब्द "कामुक", "अश्लील" या "नटखट" के अर्थ में काम में लिया जाता है; क्रिया के रूप में एत्ची सुरु (エッチする) शब्द का प्रयोग यौन सम्बंध के लिए; संज्ञा के रू.

नई!!: सम्भोग और एत्ची · और देखें »

द गॉडफ़ादर

द गॉडफ़ादर एक 1972 की अमेरिकी थ्रिलर फ़िल्म है, जो मारियो प्युज़ो के इसी नाम के उपन्यास पर आधारित है और प्यूज़ो, कोपोला और रॉबर्ट टाउन (श्रेयरहित) की पटकथा के आधार पर फ्रांसिस फोर्ड कोपोला द्वारा निर्देशित की गई है। इसके सितारे हैं मार्लन ब्रैंडो, ऍल पचीनो, जेम्स कान, रिचर्ड एस. कैस्टेलानो, रॉबर्ट डुवाल, स्टर्लिंग हेडन, जॉन मार्ले, रिचर्ड कॉन्टी और डैयान कीटन, तथा इसमें जॉन कैज़ेल, टालिया शैर, ऍल मार्टिनो और एब विगोडा ने भी अभिनय किया है। कहानी 1945 से 1955 तक दस वर्षों की अवधि में विस्तृत है और एक काल्पनिक इतालवी अमेरिकी अपराधी परिवार कोरलियॉन का इतिवृत्त दर्शाती है। दो उत्तरकथाएं बाद में प्रस्तुत हुईं: 1974 में गॉडफ़ादर भाग II और 1990 में गॉडफादर भाग III.

नई!!: सम्भोग और द गॉडफ़ादर · और देखें »

पुरुष नसबंदी

पुरुष नसबंदी.

नई!!: सम्भोग और पुरुष नसबंदी · और देखें »

पोर्नोग्राफ़िक अभिनेता

पोर्नोग्राफिक अभिनेता या अभिनेत्रियां वे व्यक्ति अथवा औरतें होते हैं जो पोर्न अर्थात नग्नता, सम्भोग अथवा सम्भोग से जुड़ी हुई फ़िल्में और चलचित्र अथवा फो़टो का हिस्सा बनते हैं। श्रेणी:अभिनय.

नई!!: सम्भोग और पोर्नोग्राफ़िक अभिनेता · और देखें »

बलात्कार

स्त्री रोग संबंधी विकार प्रजनन विकार यौन रोग बांझपन श्रोणि सूजन की बीमारी गर्भावस्था जटिलताओं गर्भपात यौन रोग एचआईवी सहित यौन संचारित संक्रमण प्राप्त करना चोटों से मृत्यु दर आत्महत्या के जोखिम में वृद्धि डिप्रेशन पुराना दर्द मनोदैहिक विकार असुरक्षित गर्भपात अवांछित गर्भावस्था श्रेणी:अपराध श्रेणी:प्रखर दर्द.

नई!!: सम्भोग और बलात्कार · और देखें »

बुद्धि लब्धि

एक बहुत बड़ी आबादी के IQs एक सामान्य वितरण के साथ मोडेल्ड किया जा सकता है। बुद्धि लब्धि या इंटेलिजेंस कोशेंट (Intelligence quotient / IQ) कई अलग मानकीकृत परीक्षणों से प्राप्त एक गणना है जिससे बुद्धि का आकलन किया जाता है। "IQ" पद की उत्पत्ति जर्मन शब्द Intelligenz-Quotient से हुई है जिसका पहली बार प्रयोग जर्मन मनोवैज्ञानिक विलियम स्टर्न ने 1912 में 20वीं सदी की शुरुआत में अल्फ्रेड बाईनेट और थेओडोर सिमोन द्वारा प्रस्तावित पद्धतियों के लिए किया, जो आधुनिक बच्चों के बौद्धिक परीक्षण के लिए अपनाया गया था। हालांकि "IQ" शब्द का उपयोग आमतौर पर अब भी होता है किन्तु, अब वेचस्लेर एडल्ट इंटेलिजेंस स्केल जैसी पद्धतियों का उपयोग आधुनिक बौद्धिक स्तर (IQ) परीक्षण में किया जाता है जो गौस्सियन बेल कर्व (Gaussian bell curve) किसी विषय के प्रति झुकाव पर नापे गये रैंक के आधार पर किया जाता है, जिसमें केन्द्रीय मान (औसत IQ)100 होता है और मानक विचलन 15 होता है। हालांकि विभिन्न परीक्षणों में मानक विचलन अलग-अलग हो सकते हैं। बौद्धिक स्तर (IQ) की गणना को रुग्णता और मृत्यु दर, अभिभावकों की सामाजिक स्थिति और काफी हद तक पैतृक बौद्धिक स्तर (IQ) जैसे कारकों के साथ जोड़कर देखा जाता है। जबकि उसकी विरासत लगभग एक सदी से जांची जा चुकी है फिर भी इस बात को लेकर विवाद बना हुआ है कि उसकी कितनी विरासत ग्राह्य है और विरासत के तंत्र अभी भी बहस के विषय बने हुए हैं.

नई!!: सम्भोग और बुद्धि लब्धि · और देखें »

भारत का लैंगिक इतिहास

खजुराहो में अप्सराओं का चित्रण सनातन धर्म में काम को चार पुरुषार्थों में स्थान प्राप्त है। सेक्स के इतिहास में भारत की भूमिका अति महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत में ही पहले ऐसे ग्रन्थ (कामसूत्र) की रचना हुई जिसमें संभोग को विज्ञान के रूप में देखा गया। यह भी कहा जा सकता है कि कला और साहित्य के माध्यम से यौन शिक्षा का अग्रदूत भारत ही था। इसी प्रकार, .

नई!!: सम्भोग और भारत का लैंगिक इतिहास · और देखें »

मस्तीज़ादे

मस्तीज़ादे (अंग्रेजी:Mastizaade) एक आगामी भारतीय हिन्दी वयस्क हास्य फ़िल्म है जिनका निर्देशन मिलाप ज़ावेरी ने किया है। फ़िल्म २९ जनवरी २०१६ को सिनेमाघरों में प्रदर्शित हुई। .

नई!!: सम्भोग और मस्तीज़ादे · और देखें »

मानव कामुक क्रिया

मानव कामुक क्रिया, मानव कामुक विधि या मानव कामुक व्यवहार वह तरीका है जिसमें मनुष्य अपनी कामुकता को अनुभव और व्यक्त करते हैं। लोग विभिन्न प्रकार के यौन कृत्यों में संलग्न होते हैं, जिसमें अकेले की गई क्रियाओं (जैसे, हस्तमैथुन) से लेकर अन्य व्यक्ति के साथ की गई क्रियाएँ (उदाहरण के लिए, संभोग, अप्रवेशीय मैथुन, मुख मैथुन, आदि) शामिल होती हैं, जो आवृत्ति के विभिन्न पैटर्नों में, व्यापक विविध कारणों के लिए की जाती हैं। .

नई!!: सम्भोग और मानव कामुक क्रिया · और देखें »

मुखाभिगम

मुखमैथुन का चित्र विकिमीडिया कॉमन्स से मुखाभिगम (अंग्रेजी: Oral Sex) भी मैथुन का एक तरीका है जिसे प्राय: सम्भोग से पूर्व योनांगों को मुख, जीभ, होंठ के प्रयोग से उत्तेजित किया जाता है। इसे आम बोलचाल की भाषा में मुख मैथुन कहते हैं। यह सामान्यत: स्त्री की योनि में पुरुष लिंग के प्रवेश करने से पूर्व तक ही सीमित रहती है। स्त्री-पुरुष दोनों के पूर्णतया उत्तेजित हो जाने के बाद तो सारा काम लिंग ही करता है। आजकल समलैंगिकता के कारण इस प्रकार का मैथुन प्रचलित है। कामसूत्र के प्रणेता वात्स्यायन ने इस प्रकार के मैथुन को प्रकारान्तर से कुकृत्य कहा है और हेय (वर्जित) बताया है। इसे जब किसी स्त्री पर् पुरुष करता है या जब किसी पुरुष पर कोई स्त्री करती है तो इन दोनों प्रक्रियाओं हेतु भिन्न भिन्न नाम अंगरेजी में प्रयोग करने की परम्परा रही है लेकिन हिन्दी में इसके लिए कोई शब्द नही है| कभी गुदा पर भी इसे किया जाता है, शरीर के अन्य भागो का चुम्बन और उन्हें चाटना इस क्रिया में शामिल नही माना जाता वे पूर्वक्रिया का अंग तो हो सकते है लेकिन मुखमैथुन नही कहला सकते, लोग इसे मैथुन से पहले क्रिया के रूप में कर सकते है, वे इसे मैथुन के बीच अथवा पश्चात् भी कर सकते है या कभी कभी इसे सिर्फ़ स्वतंत्र रूप से किया जाता है महिलाएं मुख मैथुन पसंद करती हैं, इसलिए उन्हें दिखाइए कि आप उन्हें कितना ‘प्यार’ करते हैं और अपने मुख मैथुन (oral sex) ज्ञान के द्वारा उसे परिपूर्णता के निकट पहुंचा कर एक बेहतरीन पार्टनर होने का परिचय दें.

नई!!: सम्भोग और मुखाभिगम · और देखें »

मैडोना (मनोरंजनकर्ता)

मैडोना (मैडोना लुईस चिकोने जन्म, 16 अगस्त 1958) एक अमेरिकी रिकॉर्डिंग कलाकार, अभिनेत्री और उद्यमी है। बह सिटी, मिशिगन में जन्मी और रोचेस्टर हिल्स, मिशिगन में पली-बड़ी, वह सन् 1977 में न्यूयार्क शहर में आधुनिक नृत्य में करियर के लिए स्थानांतरित हो गई। पॉप संगीत समूहों के ब्रेकफास्ट क्लब तथा एम्मी के एक सदस्य के रूप में प्रदर्शन करने के बाद उसने अपने ही नाम मैडोना की टाइटल (शीर्षक) अपना पहला ऐल्बम सन् 1983 में सर रिकॉर्ड्स से रिलीज़ किया गया। लाइक अ वर्जिन (1984) और ट्रू ब्लू (1986) जैसे स्टूडियो ऐल्बमों से उसके हिट गानों की श्रृंखला ने गीतात्मक तत्व की सीमाओं को तोड़कर मुख्यधारा के लोकप्रिय संगीत और संगीत वीडियो की कल्पना में स्थापित कर उन्हें पॉप आइकॉन के रूप में वैश्विक मान्यता दिलाई, जो एमटीवी (MTV) पर एक नियमित कार्यक्रम बन गया। उसकी पहचान को डेस्परेटली सीकिंग सुज़ान (1985) फिल्म से बढ़ावा मिला, जिसमें मैडोना की मुख्य भूमिका नहीं होने के बावजूद भी उसे व्यापक रूप से मैडोना को प्रसिद्धि दिलाने का साधन माना गया। 'लाइक अ प्रेयर ' में धार्मिक कल्पना के व्यापक प्रयोग से, मैडोना को उसकी विविध संगीत प्रस्तुतियों के लिए उसे सकारात्मक समीक्षा प्राप्त हुई, जबकि उसी समय धार्मिक परंपरावादियों और वेटिकन से समालोचना का सामना करना पड़ा.

नई!!: सम्भोग और मैडोना (मनोरंजनकर्ता) · और देखें »

मैथुन

मैथुन जीव विज्ञान में आनुवांशिक लक्षणों के संयोजन और मिश्रण की एक प्रक्रिया है जो किसी जीव के नर या मादा (जीव का लिंग) होना निर्धारित करती है। मैथुन में विशेष कोशिकाओं (गैमीट) के मिलने से जिस नये जीव का निर्माण होता है, उसमें माता-पिता दोनों के लक्षण होते हैं। गैमीट रूप व आकार में बराबर हो सकते हैं परन्तु मनुष्यों में नर गैमीट (शुक्राणु) छोटा होता है जबकि मादा गैमीट (अण्डाणु) बड़ा होता है। जीव का लिंग इस पर निर्भर करता है कि वह कौन सा गैमीट उत्पन्न करता है। नर गैमीट पैदा करने वाला नर तथा मादा गैमीट पैदा करने वाला मादा कहलाता है। कई जीव एक साथ दोनों पैदा करते हैं जैसे कुछ मछलियाँ। .

नई!!: सम्भोग और मैथुन · और देखें »

यार्चा गुम्बा

यार्चा गुम्बा यार्चा गुम्बा एक आयुर्वेदिक जड़ि-बुटि है जिसे अंग्रेजी में Cordyceps Sinensis कहा जाता है। यार्चा गुम्बा नेपाली नाम है जो समुद्र तल से 3800 मिटर ऊपर नेपाल और तिब्बत के हिमालय पर पाया जाता है। यह एक High Value Traditional Medicine है। यार्चा गुम्बा एक फिल्म किट (movie insect) और एक प्रकार के पौधे के प्रतिक्रिया के द्वारा सर्दियोँ के दिनोँ में बनता है। यह भूरे रंग का होता है तथा यह 2 ईंच लम्बा होता है तथा इसका स्वाद मीठा होता है। .

नई!!: सम्भोग और यार्चा गुम्बा · और देखें »

यौन शिक्षा

यौन शिक्षा (Sex education) मानव यौन शरीर रचना विज्ञान, लैंगिक जनन, मानव यौन गतिविधि, प्रजनन स्वास्थ्य, प्रजनन अधिकार, यौन संयम और गर्भनिरोध सहित विभिन्न मानव कामुकता से सम्बंधित विषयों सम्बंधित अनुदेशों को कहा जाता है। यौन शिक्षा का सबसे सरलतमा मार्ग माता-पिता अथवा संरक्षक होते हैं। इसके अलावा यह शिक्षा औपचारिक विद्यालयी कार्यकर्मों और सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियानों से भी दी जाती है। पारम्परिक रूप से अधिकतर संस्कृतियों में युवाओं को के बारे में इन सभी शिक्षा नहीं दी जाती और इसे वर्जित माना जाता है। ऐसी परम्पराओं में बच्चे के माता पिता बच्चे की शादी तक उसे नहीं देते थे। १९वीं सदी में प्रगतिशील शिक्षा आंदोलनों ने इस शिक्षा को सामाजिक स्वच्छता के परिचय के रूप में उत्तर अमेरिका के कुछ विद्यालयों में यौन शिक्षा का शिक्षण आरम्भ किया .

नई!!: सम्भोग और यौन शिक्षा · और देखें »

यौन आसनों की सूची

यहाँ मानवों के बीच प्रचलित विभिन्न प्रकार के संभोग एवं रति क्रियाओं का वर्णन किया जायेगा। यौन क्रियाएँ प्रायः उन आसनों से वर्णित की जाती हैं जो इनके दौरान प्रतिभागियों द्वारा अपनायी जाती हैं। इन्हें यौन आसन (सेक्स पोजिशन) कहते हैं। वैसे तो कहा जा सकता है कि यौन आसन असीमित होसकते हैं किन्तु उनमें से कुछ अधिक प्रचलित हैं। मिशनरी आसान में प्रेमी युगल; गुस्टाव लिम्ट 1914.

नई!!: सम्भोग और यौन आसनों की सूची · और देखें »

योनि

मादा के जननांग को योनि (वेजाइना) कहा जाता है। इसके पर्यायवाची शब्द भग, आदि हैं। सामान्य तौर पर "योनि" शब्द का प्रयोग अक्सर भग के लिये किया जाता है, लेकिन जहाँ भग बाहर से दिखाई देने वाली संरचना है वहीं योनि एक विशिष्ट आंतरिक संरचना है। .

नई!!: सम्भोग और योनि · और देखें »

योनि स्नेहन

बायें चित्र में सामान्य अवस्था योनि में स्नेहक की स्थिति, तथा, दायें- कामोत्तेजना की स्थिति में स्नेहक की स्थिति। स्त्रियों की योनि में प्राकृतिक रूप से एक तरल निकलता है जो योनि को नम और चिकना बनाये रखता है। इसे ही योनि स्नेहन (Vaginal lubrication) कहते हैं। सामान्यतः योनि स्नेहित ही रहती है किन्तु संभोग के समय अण्डोत्सर्ग की स्थिति में या संभोग की तीव्र इच्छा होने पर योनि में स्नेहक की मात्रा अत्यधिक बढ़ जाती है। कुछ रोग होने पर योनि में पर्याप्त स्नेहक नहीं बनता, जिसे योनि शुष्कता कहा जाता है। इससे संभोग कष्टकारी हो सकता है। अतः कृत्रिम स्नेहक का उपयोग करना पड़ता है। श्रेणी:कामोत्तेजन.

नई!!: सम्भोग और योनि स्नेहन · और देखें »

रेड लाइट एरिया

दुनिया भर में वेश्यावृत्ति और वेश्यालयों की वैधता: हरे रंग की देशों और क्षेत्रों के स्थानों पर जहां वेश्यावृत्ति कानूनी और विनियमित है, नीले देशों और क्षेत्रों में जहां वेश्यावृत्ति कानूनी है लेकिन अनियमित है। और वेश्यालयों के रूप में संगठित गतिविधियों अवैध रूप से कर रहे हैं, लाल देश जहां पर वेश्यावृत्ति अवैध है। सभ्यता और संस्कृति के विकास के साथ वेश्यावृत्ति का भी पूरी दुनिया में चरम उभार हो चुका है। पोस्ट मॉडर्न सोसाइटी में वेश्यावृत्ति के अलग-अलग रूप भी सामने आए हैं। रेड लाइट इलाकों से निकल कर वेश्यावृत्ति अब मसाज पार्लरों एवं एस्कार्ट सर्विस के रूप में भी फल-फूल रही है। देह का धंधा कमाई का चोखा जरिया बन चुका है। गरीब और विकासशील देशों जैसे भारत, थाइलैंड, श्रीलंका, बांग्लादेश आदि में सेक्स पर्यटन का चलन शुरू हो चुका है। जिस्मफरोशी दुनिया के पुराने धंधों में से एक है। बेबीलोन के मंदिरों से लेकर भारत के मंदिरों में देवदासी प्रथा वेश्यावृत्ति का आदिम रूप है। गुलाम व्यवस्था में गुलामों के मालिक वेश्याएं रखते थे। उन्होंने वेश्यालय भी खोले। तब वेश्याएं संपदा और शक्ति की प्रतीक मानी जाती थीं। मुगलों के हरम में सैकड़ों औरतें रहती थीं। जब अंग्रेजों ने भारत पर अधिकार किया तो इस धंधे का स्वरूप बदलने लगा। राजाओं ने अंग्रेजों को खुश करने के लिए तवायफों को तोहफे के रूप में पेश करना शुरू किया। पुराने वक्त के कोठों से निकल कर देह व्यापार का धंधा अब वेबसाइटों तक पहुंच गया है। इन्फॉरमेशन टेक्नोलॉजी के मामले में पिछड़ी पुलिस के लिए इस नेटवर्क को भेदना खासा कठिन है। सिर्फ नेट पर अपनी जरूरत लिखकर सर्च करने से ऐसी दर्जनों साइट्स के लिंक मिल जाएंगे जहां हाईप्रोफाइल वेश्याओं के फोटो, फोन नंबर और रेट तक लिखे होते हैं। इन पर कालेज छात्राएं, मॉडल्स और टीवी-फिल्मों की नायिकाएं तक उपलब्ध कराने के दावे किए जाते हैं। .

नई!!: सम्भोग और रेड लाइट एरिया · और देखें »

लैंगिक जनन

फूल, पौधों का जनन अंग प्रजनन की वह क्रिया जिसमें दो युग्मकों के मिलने से बनी रचना युग्मज (जाइगोट) द्वारा नये जीव की उत्पत्ति होती है, लैंगिक जनन (sexual reproduction) कहलाती है। यदि युग्मक समान आकृति वाले होते हैं तो उसे समयुग्मक कहते हैं। समयुग्मकों के संयोग को संयुग्मन कहते हैं। युग्मनज या तो सीधे पौधे को जन्म देता है या विरामी युग्मनज बन जाता है जिसे जाइगोस्पोर कहते हैं। इस प्रकार के लैंगिक जनन को 'समयुग्मी' कहते हैं। लैंगिक जनन की प्रक्रिया के दो मुख्य चरण हैं - अर्धसूत्री विभाजन तथा निषेचन (fertilization)। लैंगिक जनन की उत्पत्ति कैसे हुई, यह एक पहेली है। इस विषय में कई व्याख्याएँ प्रस्तुत की गईं हैं कि अलैंगिक जनन से लैंगिक जनन क्यों विकसित हुआ। .

नई!!: सम्भोग और लैंगिक जनन · और देखें »

लैंगिक व्यसन

लैंगिक व्यसन या यौन आसक्ति (Sexual addiction या sex addiction) किसी व्यक्ति की उस अवस्था को कहते हैं जब यौन क्रिया (विशेषकर, यौन संभोग) के बुरे प्रभावों के बारे में जानते हुए भी वह यौनक्रियाओं को करने के लिए व्यग्र रहता है। .

नई!!: सम्भोग और लैंगिक व्यसन · और देखें »

शिश्न

शिश्न की संरचना: 1 — मूत्राशय, 2 — जघन संधान, 3 — पुरस्थ ग्रन्थि, 4 — कोर्पस कैवर्नोसा, 5 — शिश्नमुंड, 6 — अग्रत्वचा, 7 — कुहर (मूत्रमार्ग), 8 — वृषणकोष, 9 — वृषण, 10 — अधिवृषण, 11— शुक्रवाहिनी शिश्न (Penis) कशेरुकी और अकशेरुकी दोनो प्रकार के कुछ नर जीवों का एक बाह्य यौन अंग है। तकनीकी रूप से शिश्न मुख्यत: स्तनधारी जीवों में प्रजनन हेतु एक प्रवेशी अंग है, साथ ही यह मूत्र निष्कासन हेतु एक बाहरी अंग के रूप में भी कार्य करता है। शिश्न आमतौर स्तनधारी जीवों और सरीसृपों में पाया जाता है। हिन्दी में शिश्न को लिंग भी कहते हैं पर, इन दोनो शब्दों के प्रयोग में अंतर होता है, जहाँ शिश्न का प्रयोग वैज्ञानिक और चिकित्सीय संदर्भों में होता है वहीं लिंग का प्रयोग आध्यात्म और धार्मिक प्रयोगों से संबंद्ध है। दूसरे अर्थो में लिंग शब्द, किसी व्यक्ति के पुरुष (नर) या स्त्री (मादा) होने का बोध भी कराता है। हिन्दी में सभी संज्ञायें या तो पुल्लिंग या फिर स्त्रीलंग होती हैं। .

नई!!: सम्भोग और शिश्न · और देखें »

शव कामुकता

1896 की इस इतालियन पेंटिंग में आप देख सकते हैं एक सरफिरे शवप्रेमी को शैतान नर तेगु मरी हुई मादा तेगु के साथ मज़े ले रहा है किसी शव के साथ सेक्स करने की इच्छा को शव कामुकता कहते हैं। रोज़्मैन और रेज़्निक नामक दो विद्वानों ने 1989 में इस मानसिक रोग के 34 मामलों का अध्धयन किया। उन्होंने पाया कि शवप्रेमी कई कारणों से लाश के साथ सेक्स करते हैं -.

नई!!: सम्भोग और शव कामुकता · और देखें »

शुक्राणु

नर शुक्राणु का मादा के अंडाणुओं से मिलन शुक्राणु(स्पर्म) शब्द यूनानी शब्द (σπέρμα) स्पर्मा से व्युत्पन्न हुआ है जिसका अर्थ है 'बीज' जिसका अर्थ पुरुष की प्रजनन कोशिकाओं से है। विभिन्न प्रकार के यौन प्रजननो जैसे एनिसोगैमी (anisogamy) और ऊगैमी (oogamy) में एक चिह्नित अंतर है, जिसमें छोटे आकार के युग्मकों (gametes) को 'नर' या शुक्राणु कोशिका कहा जाता है। पुरुष शुक्राणु अगुणित होते है इसलिए पुरुष के २३ गुण सूत्र (chromosome) मादा के अंडाणुओं के २३ गुणसूत्रों के साथ मिलकर द्विगुणित बना सकते है। एक मानव शुक्राणु सेल के आरेख अवधि शुक्राणु यूनानी (σπέρμα) शब्द sperma से ली गई है (जिसका अर्थ है "बीज") और पुरुष प्रजनन कोशिकाओं को संदर्भित करता है। यौन प्रजनन anisogamy और oogamy के रूप में जाना जाता है के प्रकार में, वहाँ छोटे "पुरुष" या शुक्राणु सेल कहा जा रहा है एक के साथ gametes के आकार में एक स्पष्ट अंतर है। एक uniflagellar शुक्राणु सेल चलता - फिरता है, एक शुक्राणु के रूप में जाना जाता है, जबकि एक गैर motile शुक्राणु सेल एक spermatium रूप में करने के लिए भेजा है। शुक्राणु कोशिकाओं के विभाजन और एक सीमित जीवन काल है, कर सकते हैं लेकिन अंडे की कोशिकाओं के साथ निषेचन के दौरान विलय के बाद, एक नया जीव के विकास, एक totipotent युग्मनज के रूप में शुरू शुरू होता है मानव शुक्राणु सेल अगुणित है, ताकि अपने 23 क्रोमोसोम में शामिल कर सकते हैं। मादा अंडे के 23 गुणसूत्रों एक द्विगुणित सेल बनाने के लिए। स्तनधारियों में, शुक्राणु अंडकोष में विकसित और है लिंग से जारी है। .

नई!!: सम्भोग और शुक्राणु · और देखें »

समागम

समागम का अर्थ है- मिलन, मिलाप, मेल, साथ आना, सम्मेलन, सहवास, सम्भोग आदि।.

नई!!: सम्भोग और समागम · और देखें »

सम्भोग

सम्भोग (अंग्रेजी: Sexual intercourse या सेक्सुअल इन्टरकोर्स) मैथुन या सेक्स की उस क्रिया को कहते हैं जिसमे नर का लिंग मादा की योनि में प्रवेश करता हैं। सम्भोग अलग अलग जीवित प्रजातियों के हिसाब से अलग अलग प्रकार से हो सकता हैं। सम्भोग को योनि मैथुन, काम-क्रीड़ा, रति-क्रीड़ा भी कहते हैं। संभोग की क्रिया केवल पति-पत्नी के बीच ही हो सकती है । यदि कोई महिला या पुरुष अपने पति-पत्नी के अलावा किसी और से संबंध बनाता है । तो वह अपराध की श्रेणी में आता है। इस अपराध की सजा भारत मे 30 साल की उम्रकैद है। यदि कोई स्त्री पुरुष अपने पति पत्नी को छोड़कर किसी अन्य से संबंध बनाता बनाती है । तो उस स्त्री अथवा पुरुष का उसकी पति अथवा पत्नी से तलाक हो जाता है । तथा उस स्त्री अथवा पुरुष को 30 साल की जेल होती है। विवाह से पूर्व संभोग करने भी अपराध की श्रेणी में आता है । इसकी दज यह है कि उस उन दोनों का विवाह करना अनिवार्य हो जाता है । तथा वे एक-दूसरे से जीवन भर तलाक नही ले सकते है । और किसी अन्य से संभोग भी नही कर सकते है । सृष्टि में आदि काल से सम्भोग का मुख्य काम वंश को आगे चलाना व बच्चे पैदा करना है। जहाँ कई जानवर व पक्षी सिर्फ अपने बच्चे पैदा करने के लिए उपयुक्त मौसम में ही सम्भोग करते हैं वहीं इंसानों में सम्भोग इस वजह के बिना भी हो सकता हैं। सम्भोग इंसानों में सुख प्राप्ति या प्यार या जज्बात दिखाने का भी एक रूप हैं। सम्भोग अथवा मैथुन से पूर्व की क्रिया, जजिसे अंग्रेजी में फ़ोर प्ले कहते हैं, के दौरान हर प्राणी के शरीर से कुछ विशेष प्रकार की गन्ध (फ़ीरोमंस) उत्सर्जित होती है जो विषमलिंगी को मैथुन के लिये अभिप्रेरित व उत्तेजित करती है। कुछ प्राणियों में यह मौसम के अनुसार भी पाया जाता है। वस्तुत: फ़ोर प्ले से लेकर चरमोत्कर्ष की प्राप्ति तक की सम्पूर्ण प्रक्रिया ही सम्भोग कहलाती है बशर्ते कि लिंग व्यवहार का यह कार्य विषमलिंगियों के बीच हो रहा हो। कई ऐसे प्रकार के सम्भोग भी हैं जिसमें लिंग का उपयोग नर और मादा के बीच नहीं होता जैसे मुख मैथुन, हस्तमैथुन अथवा गुदा मैथुन उन्हें मैथुन तो कहा जा सकता है परन्तु सम्भोग कदापि नहीं। उपरोक्त प्रकार के मैथुन अस्वाभाविक अथवा अप्राकृतिक व्यवहार के अन्तर्गत आते हैं या फिर सम्भोग के साधनों के अभाव में उन्हें केवल मनुष्य की स्वाभाविक आत्मतुष्टि का उपाय ही कहा जा सकता है, सम्भोग नहीं। .

नई!!: सम्भोग और सम्भोग · और देखें »

सिंह (पशु)

सिंह (पेन्थेरा लियो) पेन्थेरा वंश की चार बड़ी बिल्लियों में से एक है और फेलिडे परिवार का सदस्य है। यह बाघ के बाद दूसरी सबसे बड़ी सजीव बिल्ली है, जिसके कुछ नरों का वजन २५० किलोग्राम से अधिक होता है। जंगली सिंह वर्तमान में उप सहारा अफ्रीका और एशिया में पाए जाते हैं। इसकी तेजी से विलुप्त होती बची खुची जनसंख्या उत्तर पश्चिमी भारत में पाई जाती है, ये ऐतिहासिक समय में उत्तरी अफ्रीका, मध्य पूर्व और पश्चिमी एशिया से गायब हो गए थे। प्लेइस्तोसेन के अंतिम समय तक, जो लगभग १०,००० वर्ष् पहले था, सिंह मानव के बाद सबसे अधिक व्यापक रूप से फैला हुआ बड़ा स्तनधारी, भूमि पर रहने वाला जानवर था। वे अफ्रीका के अधिकांश भाग में, पश्चिमी यूरोप से भारत तक अधिकांश यूरेशिया में और युकोन से पेरू तक अमेरिका में पाए जाते थे। सिंह जंगल में १०-१४ वर्ष तक रहते हैं, जबकि वे कैद मे २० वर्ष से भी अधिक जीवित रह सकते हैं। जंगल में, नर कभी-कभी ही दस वर्ष से अधिक जीवित रह पाते हैं, क्योंकि प्रतिद्वंद्वियों के साथ झगड़े में अक्सर उन्हें चोट पहुंचती है। वे आम तौर पर सवाना और चारागाह में रहते हैं, हालांकि वे झाड़ी या जंगल में भी रह सकते हैं। अन्य बिल्लियों की तुलना में सिंह आम तौर पर सामाजिक नहीं होते हैं। सिंहों के एक समूह जिसे अंग्रेजी मे प्राइड कहॉ जाता में सम्बन्धी मादाएं, बच्चे और छोटी संख्या में नर होते हैं। मादा सिंहों का समूह प्रारूपिक रूप से एक साथ शिकार करता है, जो अधिकांशतया बड़े अनग्युलेट पर शिकार करते हैं। सिंह शीर्ष का और कीस्टोन शिकारी है, हालांकि वे अवसर लगने पर मृतजीवी की तरह भी भोजन प्राप्त कर सकते हैं। सिंह आमतौर पर चयनात्मक रूप से मानव का शिकार नहीं करते हैं, फिर भी कुछ सिंहों को नर-भक्षी बनते हुए देखा गया है, जो मानव शिकार का भक्षण करना चाहते हैं। सिंह एक संवेदनशील प्रजाति है, इसकी अफ्रीकी रेंज में पिछले दो दशकों में इसकी आबादी में संभवतः ३० से ५० प्रतिशत की अपरिवर्तनीय गिरावट देखी गयी है। ^ डाटाबेस प्रवेश में एस बात का एक लंबा औचित्य सम्मिलित है कि यह प्रजाति संवेदनशील क्यों है। क्यों इस प्रजाति की दुर्दशा का एक भी सम्मिलित है सिंहों की संख्या नामित सरंक्षित क्षेत्रों और राष्ट्रीय उद्यानों के बहार अस्थिर है। हालांकि इस गिरावट का कारण पूरी तरह से समझा नहीं गया है, आवास की क्षति और मानव के साथ संघर्ष इसके सबसे बड़े कारण हैं। सिंहों को रोमन युग से पिंजरे में रखा जाता रहा है, यह एक मुख्य प्रजाति रही है जिसे अठारहवीं शताब्दी के अंत से पूरी दुनिया में चिडिया घर में प्रदर्शन के लिए रखा जाता रहा है। खतरे में आ गयी एशियाई उप प्रजातियों के लिए पूरी दुनिया के चिड़ियाघर प्रजनन कार्यक्रमों में सहयोग कर रहे हैं। दृश्य रूप से, एक नर सिंह अति विशिष्ट होता है और सरलता से अपने अयाल (गले पर बाल) द्वारा पहचाना जा सकता है। सिंह, विशेष रूप से नर सिंह का चेहरा, मानव संस्कृति में सबसे व्यापक ज्ञात जंतु प्रतीकों में से एक है। उच्च पाषाण काल की अवधि से ही इसके वर्णन मिलते हैं, जिनमें लॉसकाक्स और चौवेत गुफाओं की व नक्काशियां और चित्रकारियां सम्मिलित हैं, सभी प्राचीन और मध्य युगीन संस्कृतियों में इनके प्रमाण मिलते हैं, जहां ये ऐतिहासिक रूप से पाए गए। राष्ट्रीय ध्वजों पर, समकालीन फिल्मों और साहित्य में चित्रकला में, मूर्तिकला में और साहित्य में इसका व्यापक वर्णन पाया जाता है। .

नई!!: सम्भोग और सिंह (पशु) · और देखें »

संचार

संचार प्रेषक का प्राप्तकर्ता को सूचना भेजने की प्रक्रिया है जिसमे जानकारी पहुंचाने के लिए ऐसे माध्यम (medium) का प्रयोग किया जाता है जिससे संप्रेषित सूचना प्रेषक और प्राप्तकर्ता दोनों समझ सकें यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिस के द्वारा प्राणी विभिन्न माध्यमों के द्वारा सूचना का आदान प्रदान कर सकते हैं संचार की मांग है कि सभी पक्ष एक समान भाषा का बोध कर सकें जिस का आदान प्रदान हुआ हो, श्रावानिक (auditory) माध्यम हैं (जैसे की) बोली, गान और कभी कभी आवाज़ का स्वर एवं गैर मौखिक (nonverbal), शारीरिक माध्यम जैसे की शारीरिक हाव भाव (body language), संकेत बोली (sign language), सम भाषा (paralanguage), स्पर्श (touch), नेत्र संपर्क (eye contact) अथवा लेखन (writing) का प्रयोग संचार की परिभाषा है - एक ऐसी क्रिया जिस के द्वारा अर्थ का निरूपण एवं संप्रेषण (convey) सांझी समझ पैदा करने का प्रयास में किया जा सके इस क्रिया में अंख्या कुशलताओं के रंगपटल की आवश्यकता है अन्तः व्यक्तिगत (intrapersonal) और अन्तर व्यक्तिगत (interpersonal) प्रक्रमण, सुन अवलोकन, बोल, पूछताछ, विश्लेषण और मूल्यांकनइन प्रक्रियाओं का उपयोग विकासात्मक है और जीवन के सभी क्षेत्रों के लिए स्थानांतरित है: घर, स्कूल, सामुदायिक, काम और परे.संचार के द्बारा ही सहयोग और पुष्टिकरण होते हैं संचारण विभिन्न माध्यमों द्बारा संदेश भेजने की अभिव्यक्ति है चाहे वह मौखिक अथवा अमौखिक हो, जब तक कोई विचारोद्दीपक विचार संचारित (transmit) हो भाव (gesture) क्रिया इत्यादि संचार कई स्तरों पर (एक एकल कार्रवाई के लिए भी), कई अलग अलग तरीकों से होता है और अधिकतम प्राणियों के लिए, साथ ही कुछ मशीनों के लिए भी.यदि समस्त नहीं तो अधिकतम अध्ययन के क्षेत्र संचार करने के लिए ध्यान के एक हिस्से को समर्पित करते हैं, इसलिए जब संचार के बारे में बात की जाए तो यह जानना आवश्यक है कि संचार के किस पहलू के बारे में बात हो रही है। संचार की परिभाषाएँ श्रेणी व्यापक हैं, कुछ पहचानती हैं कि पशु आपस में और मनुष्यों से संवाद कर सकते हैं और कुछ सीमित हैं एवं केवल मानवों को ही मानव प्रतीकात्मक बातचीत के मापदंडों के भीतर शामिल करते हैं बहरहाल, संचार आमतौर पर कुछ प्रमुख आयाम साथ में वर्णित है: विषय वस्तु (किस प्रकार की वस्तुएं संचारित हो रहीं हैं), स्रोत, स्कंदन करने वाला, प्रेषक या कूट लेखक (encoder) (किस के द्वारा), रूप (किस रूप में), चैनल (किस माध्यम से), गंतव्य, रिसीवर, लक्ष्य या कूटवाचक (decoder) (किस को) एवं उद्देश्य या व्यावहारिक पहलू.पार्टियों के बीच, संचार में शामिल है वेह कर्म जो ज्ञान और अनुभव प्रदान करें, सलाह और आदेश दें और सवाल पूछें यह कर्म अनेक रूप ले सकते है, संचार के विभिन्न शिष्टाचार के कई रूपों में से उस का रूप समूह संप्रेषण की क्षमता पर निर्भर करता हैसंचार, तत्त्व और रूप साथ में संदेश (message) बनाते हैं जो गंतव्य (destination) की ओर भेजा जाता हैलक्ष्य ख़ुद, दूसरा व्यक्ति (person) या हस्ती, दूसरा अस्तित्व (जैसे एक निगम या हस्ती के समूह) हो सकते हैं संचार प्रक्रियासूचना प्रसारण (information transmission) के तीन स्तरों द्वारा नियंत्रित शब्दार्थ वैज्ञानिक (semiotic) नियमों के रूप में देखा जा सकता है.

नई!!: सम्भोग और संचार · और देखें »

स्तंभन

स्तम्भन क्रम (लिंग बृद्धि की चार अवस्थाओं के चित्र) स्तम्भन से अभिप्राय शिश्न (लिंग) के आकार में बढ़ने और कड़ा होने से है, जो यौनिच्छा करने पर शिश्न के उत्तेजित होने के कारण होता है, यद्यपि यह गैर यौन स्थितियों में भी हो सकता है। प्राथमिक शारीरिक तन्त्र जिसके चलते स्तम्भन होता है, में शिश्न की धमनियाँ स्वतः फैल जाती हैं, जिसके कारण अधिक रक्त शिश्न के तीन स्पंजी ऊतक कक्षों में भर जाता है जो इसे लम्बाई और कठोरता प्रदान करता है। यह रक्त से भरे ऊतक रक्त को वापस ले जाने वाली शिराओं पर दबाव डाल कर सिकोड़ देते हैं, जिसके कारण अधिक रक्त प्रवेश करता है और कम रक्त वापस लौटता है। थोड़ी देर बाद एक साम्यावस्था अस्तित्व में आ जाती है जिसमें फैली हुई धमनियों और सिकुडी़ हुई शिराओं में रक्त की समान मात्रा बहने लगती है और इस साम्यावस्था के कारण शिश्न को एक निश्चित स्तम्भन आकार स्वत: ही मिल जाता है। स्तम्भन यद्यपि संभोग के लिये आवश्यक है पर विभिन्न अन्य यौन गतिविधियों के लिए यह आवश्यक नहीं है। .

नई!!: सम्भोग और स्तंभन · और देखें »

स्तंभन दोष

स्तंभन दोष या नपुंसकता (Erectile dysfunction) एक प्रकार का यौन अपविकास है। यह संभोग के दौरान शिश्न के उत्तेजित न होने या उसे बनाए न रख सकने के कारण पैदा हुई यौन निष्क्रियता की स्थिति है। इसके मुख्य जैविक कारणों में हृदय और तंत्रिकातंत्र संबंधी बिमारियाँ, मधुमेह, संवेदनामंदक पदार्थों के दुष्प्रभाव आदि शामिल हैं। मानसिक नपुंसकता शारीरिक कमियों की वजह से नहीं बल्कि मानसिक विचारों और अनुभवों के कारण पैदा होती है। .

नई!!: सम्भोग और स्तंभन दोष · और देखें »

स्तंभास्थि

रैकून की स्तंभास्थि. स्तंभास्थि (अंग्रेजी:baculum) जिसे शिश्नास्थि या लिंग की हड्डी, भी कहा जाता है प्रायः सभी स्तनधारियों के शिश्न में पायी जाती है। परन्तु यह मनुष्यों, अश्व परिवार के सदस्यों (घोडा़, गधा आदि), शिशुधानी वाले जीवों (कंगारू), शशक परिवार के सदस्यों (खरगोश, खरहा) और लकड़बग्घों मे अनुपस्थित होती है। इसका प्रयोग संभोग के लिए किया जाता है और अलग प्रजातियों मे इसका आकार और आकृति अलग अलग होती है। इसकी विशेषताओं का उपयोग कभी कभी प्रजातियों के बीच अंतर करने के लिए किया जाता है। बड़े उत्तरी मांसाहारी जानवरों जैसे वॉलरस आदि की एक चमकाई हुई और नक़्क़ाशीदार स्तंभास्थि को अलास्काई संस्कृति मे उसिक (oosik) कहा जाता है। रैकून की स्तंभास्थि को कभी कभी किस्मत या यौनाकर्षण के लिए पहना जाता है। .

नई!!: सम्भोग और स्तंभास्थि · और देखें »

हस्तमैथुन

गुस्टाव क्लिम्ट की चित्रकारी जिसमें ''एक महिला अपनी जांघों को दूर किये बैठी है'' (1916) हस्तमैथुन (अंग्रेजी: Masturbation) शारीरिक मनोविज्ञान से सम्बन्धित एक सामान्य प्रक्रिया का नाम है जिसे यौन सन्तुष्टि हेतु पुरुष हो या स्त्री, कभी न कभी सभी करते है। इसे केवल युवा ही नहीं बल्कि बुड्ढे-बुड्ढे लोग भी लिंगोत्थान हेतु करते हैं इससे उन्हें यह अहसास होता है कि वे अभी भी यौन-क्रिया करने में सक्षम हैं। अपने यौनांगों को स्वयं उत्तेजित करना युवा लड़कों तथा लड़कियों के लिये उस समय आवश्यक हो जाता है जब उनकी किसी कारण वश शादी नहीं हो पाती या वे असामान्य रूप से सेक्सुअली स्ट्रांग होते हैं। अब तो विज्ञान द्वारा भी यह सिद्ध किया जा चुका है कि इससे कोई हानि नहीं होती। पुरुषों की तरह महिलाएँ भी अपने यौनांगों को स्वयं उत्तेजित करने के तरीके खोज लेती हैं जो उन्हें बेहद संवेदनशील अनुभव और प्रबल उत्तेजना प्रदान करते हैं। फिर चाहें वे अकेली हों या अपनी महिला पार्टनर के साथ। महिलाएँ यदि अपने यौनांगों को स्वयं उत्तेजित न करें तो इस बात की भी सम्भावना बनी रहती है कि विवाह के बाद सेक्स क्रिया के दौरान उन्हें पर्याप्त उत्तेजना से वंचित रहना पड़े। औसत तौर पर पुरुष 12-13 वर्ष की उम्र में ही हस्तमैथुन शुरू कर देते हैं जबकि महिलाएँ तरुणाई (13 से 19 वर्ष) के अन्तिम दौर में हस्तमैथुन का आनन्द लेना शुरू करती हैं, लेकिन उनमें यह मामला इतना ढँका और छिपा हुआ रहता है कि कभी किसी चर्चा में भी सामने नहीं आ पाता। पूर्ण तरुण होने पर हस्तमैथुन का मामला खुले रहस्य की ओर झुकाव तो लेने लगता है पर ज्यादातर लोग इस मामले पर पर्दा ही पड़े रहना देना बेहतर समझते हैं। लेकिन अब जमाना बिल्कुल बदल गया है। अब कुछ ऐसे युवा तैयार हो रहे हैं जो इन वर्जनाओं को तोड़ कर हस्तमैथुन के तरीकों पर चर्चा में खुलकर हिस्सा ले रहे हैं। .

नई!!: सम्भोग और हस्तमैथुन · और देखें »

जन्तुओं का काम-व्यवहार

अंगूठाकार शेर-शेरनी का मैथुन विभिन्न जन्तुओं में भिन्न-भिन्न प्रकार का काम-व्यवहार (sexual behaviour) पाया जाता है। यहाँ तक कि एक ही प्रजाति (स्पिसीज़) में कई तरह के काम-व्यवहार देखने को मिलते हैं। मैथुन के भी अनेक प्रकार हैं, जैसे- एकसंगमन (monogamy), बहुसंगमन (polygamy), बहुपतित्व (polyandry), तथा स्वैरिता (promiscuity)। .

नई!!: सम्भोग और जन्तुओं का काम-व्यवहार · और देखें »

विवाह की संसिद्धि

कई परंपराओं या सामाजिक प्रथाओं में और सिविल कानून या धार्मिक कानून के अनुसार विवाह को संसिद्ध (consummated) तभी माना जाता है जब विवाह के बाद पति और पत्नी पहली बार सम्भोग करते हैं (यौन सम्बन्ध बनाते हैं)। दूसरे शब्दों में, संसिद्धि के बिना, कानूनी रूप से विवाह 'अपूर्ण' माना जाता है। कुछ सम्प्रदायों में संसिद्धि के लिए एक अतिरिक्त शर्त भी होती है कि शिश्न के योनि में प्रवेश के समय किसी गर्भ निरोधक का प्रयोग न किया गया हो। हिन्दू विवाह अधिनियम कि धारा १२ के अनुसार, यदि नपुंसकता के कारण विवाह की संसिद्धि न हुई हो तो विवाह शुन्यकरीण हो सकता है। .

नई!!: सम्भोग और विवाह की संसिद्धि · और देखें »

वीर्य स्खलन

यौन संगम या हस्त मैथुन के समय जब पुरुष के शिश्न (पुरुष जननांग या लिंग) में यौन उत्तेजना होती है और यौन-उत्तेजना के चरम बिन्दु पर शिश्न से वीर्य निकलता है, इसे ही वीर्यपात या वीर्यस्खलन (ejaculation) कहते हैं। वीर्यपात के समय पुरुष को चरमानन्द प्राप्त होता है। स्खलन शूरू होने की उम्र क्या है? सामान्यतः 10 से 15 वर्ष की आयु में बच्चा प्रथम बार हस्त मैथुन करता है। स्खलन में वीर्य की मात्रा 5ml से 20ml तक होती है। .

नई!!: सम्भोग और वीर्य स्खलन · और देखें »

वीर्यपान

वीर्यपान (संस्कृत: वीर्य+पान) यौन संतुष्टि और/या आध्यात्मिक संतुष्टि के लिए वीर्य को पीने को कहते हैं। वीर्य के स्रोत मानव पुरुष या नर पशु होते हैं। वीर्यपान करने का सबसे आम तरीका मुखमैथुन (फेलाशियो या इरुमेशियो) के द्वारा प्राप्त चरमोत्कर्ष पर हुए स्खलन से निकलने वाले वीर्य की निगल लेना होता है। वीर्यपान दोनों लिंगों के व्यक्तियों द्वारा किया जाता है। पुरुष अपना खुद का वीर्य, हस्तमैथुन, संभोग, या स्वतःफेलाशियो के बाद निगल सकते हैं। .

नई!!: सम्भोग और वीर्यपान · और देखें »

गर्भावस्था

गर्भवती महिला प्रजनन सम्बन्धी अवस्था, एक मादा के गर्भाशय में भ्रूण के होने को गर्भावस्था (गर्भ + अवस्था) कहते हैं, तदुपरांत महिला शिशु को जन्म देती है। आमतौर पर यह अवस्था मां बनने वाली महिलाओं में ९ माह तक रहती है, जिसे गर्भवधी कहते है। कभी कभी संयोग से एकाधिक गर्भावस्था भी अस्तित्व में आ जति है जिस्से जुडवा एक से अधिक सन्तान कि उपस्थिति होती है। .

नई!!: सम्भोग और गर्भावस्था · और देखें »

ग़ुस्ल

(غسل) एक अरबी भाषा शब्द का है। जिसका मतलब पुरे शरीर को नहलाना अर्थात स्नान होता है, अगर वयस्क व्यक्ति अपनी पाकीज़गी (शुद्धता) खो चुका है तो इस्लाम में नमाज और अन्य इस्लामी अनुष्ठानो (Rituals) के समय सबसे पहले करना ज़रूरी है।  Sahih Muslim, Hadith number 616ग़ुस्ल करना ज़रूरी है हर उस वयस्क इन्सान पर जो कि.

नई!!: सम्भोग और ग़ुस्ल · और देखें »

गुदा मैथुन

पुरुष से गुदा मैथुन करते हुए पुरुष का चित्र गुदा मैथुन एक प्रकार का मैथुन ही है। इस प्रकार के मैथुन में शिश्न, उँगली, डिल्डो या अन्य किसी वस्तु को योनि की बजाय गुदा में प्रविष्ट किया जाता है। दूसरे शब्दों में कहा जाय तो गुदा में लिंग डालकर सम्भोग करने की प्रक्रिया को ही गुदा मैथुन कहते हैं।.

नई!!: सम्भोग और गुदा मैथुन · और देखें »

ग्रैण्ड थैफ्ट ऑटो (शृंखला)

ग्रैंड थेफ्ट ऑटो (GTA) एक वीडियो गेम है, जिसे पहले डेव जोन्स द्वारा तैयार किया गया था, बाद में डैन हाउसर और सैम हाउसर ने इसे विकसित किया, इस गेम के डिजाइनर ज़ैचारी क्लार्क हैं, लेकिन इसे मुख्य रूप से रॉकस्टार नॉर्थ (पूर्व का DMA डिजाइन) ने विकसित किया और रॉकस्टार गेम श्रृंखला के रूप में रिलीज़ किया। इस गेमप्ले में एक्शन, एडवेंचर, ड्राइविंग और कभी-कभी रोल प्लेइंग, चालबाज़ी और रेसिंग जैसी खासियतें भी हैं, इस गेम के कुछ विषय वयस्क और हिंसक प्रकृति के होने के कारण यह विवादास्पद बन गया। यह श्रृंखला विभिन्न मुख्य पात्रों के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अंडरवर्ल्ड के आपराधिक गिरोहों के जरिए ऊपर उठना चाहते है, हालांकि हरेक खेल में उनके उद्देश्य अलग-अलग होते है। आम तौर पर विपक्षी ऐसे चरित्र के है जो सरदार या उनके संगठन के साथ विश्वासघात करते हैं या उनकी प्रगति में अड़चन डालते हैं। इस श्रृंखला में ग्रैंड थेफ्ट ऑटो IV की शुरुआत होने से लेकर अब तक इसके नौ स्टैंड-अलोन गेम्स, दो विस्तार पैक नवीनतम किस्त के साथ रिलीज़ किया जा रहा है। माइकल मैडसेन, बर्ट रेनॉल्ड्स, डेनिस होप्पर, गैरी बसी, सामुएल एल जैक्सन, क्रिस पेन्न, जेम्स वुड्स, जो पॅनटोलिअनो, फ्रैंक विन्सेन्ट, रॉबर्ट लोग्जिया, केली माक्लाचलन, पीटर फोंडा, रे लिओट्टा जैसे प्रमुख फ़िल्मी चरित्र इस श्रृंखला की अलग-अलग किश्तों में हैं। इस श्रृंखला का नाम और इसके गेम ग्रैंड थेफ्ट ऑटो से निकले हैं, गाड़ियों की चोरी के सन्दर्भ में इस शब्दावली का उपयोग होता है। .

नई!!: सम्भोग और ग्रैण्ड थैफ्ट ऑटो (शृंखला) · और देखें »

इरुमेशियो

इरुमेशियो इरुमेशियो (Irrumatio) संभोग का एक प्रकार है जिसमे एक साथी दूसरे साथी के मुँह और गले में अपना लिंग यौन आन्नद के लिए सक्रिय रूप से ढकेलता (घुसेड़ता) है। इसे लिंग को पैरों, तलवों, ऊपरी जांघों, या दो भागीदारों के पेट के बीच ढकेल कर भी किया जा सकता है। .

नई!!: सम्भोग और इरुमेशियो · और देखें »

कामसूत्र

मुक्तेश्वर मंदिर की कामदर्शी मूर्ति कामसूत्र महर्षि वात्स्यायन द्वारा रचित भारत का एक प्राचीन कामशास्त्र (en:Sexology) ग्रंथ है। कामसूत्र को उसके विभिन्न आसनों के लिए ही जाना जाता है। महर्षि वात्स्यायन का कामसूत्र विश्व की प्रथम यौन संहिता है जिसमें यौन प्रेम के मनोशारीरिक सिद्धान्तों तथा प्रयोग की विस्तृत व्याख्या एवं विवेचना की गई है। अर्थ के क्षेत्र में जो स्थान कौटिल्य के अर्थशास्त्र का है, काम के क्षेत्र में वही स्थान कामसूत्र का है। अधिकृत प्रमाण के अभाव में महर्षि का काल निर्धारण नहीं हो पाया है। परन्तु अनेक विद्वानों तथा शोधकर्ताओं के अनुसार महर्षि ने अपने विश्वविख्यात ग्रन्थ कामसूत्र की रचना ईसा की तृतीय शताब्दी के मध्य में की होगी। तदनुसार विगत सत्रह शताब्दियों से कामसूत्र का वर्चस्व समस्त संसार में छाया रहा है और आज भी कायम है। संसार की हर भाषा में इस ग्रन्थ का अनुवाद हो चुका है। इसके अनेक भाष्य एवं संस्करण भी प्रकाशित हो चुके हैं, वैसे इस ग्रन्थ के जयमंगला भाष्य को ही प्रामाणिक माना गया है। कोई दो सौ वर्ष पूर्व प्रसिद्ध भाषाविद सर रिचर्ड एफ़ बर्टन (Sir Richard F. Burton) ने जब ब्रिटेन में इसका अंग्रेज़ी अनुवाद करवाया तो चारों ओर तहलका मच गया और इसकी एक-एक प्रति 100 से 150 पौंड तक में बिकी। अरब के विख्यात कामशास्त्र ‘सुगन्धित बाग’ (Perfumed Garden) पर भी इस ग्रन्थ की अमिट छाप है। महर्षि के कामसूत्र ने न केवल दाम्पत्य जीवन का शृंगार किया है वरन कला, शिल्पकला एवं साहित्य को भी सम्पदित किया है। राजस्थान की दुर्लभ यौन चित्रकारी तथा खजुराहो, कोणार्क आदि की जीवन्त शिल्पकला भी कामसूत्र से अनुप्राणित है। रीतिकालीन कवियों ने कामसूत्र की मनोहारी झांकियां प्रस्तुत की हैं तो गीत गोविन्द के गायक जयदेव ने अपनी लघु पुस्तिका ‘रतिमंजरी’ में कामसूत्र का सार संक्षेप प्रस्तुत कर अपने काव्य कौशल का अद्भुत परिचय दिया है। रचना की दृष्टि से कामसूत्र कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' के समान है—चुस्त, गम्भीर, अल्पकाय होने पर भी विपुल अर्थ से मण्डित। दोनों की शैली समान ही है— सूत्रात्मक। रचना के काल में भले ही अंतर है, अर्थशास्त्र मौर्यकाल का और कामूसूत्र गुप्तकाल का है। .

नई!!: सम्भोग और कामसूत्र · और देखें »

कुमारसम्भव

कुमारसंभवम् महाकवि कालिदास विरचित कार्तिकेय के जन्म से संबंधित महाकाव्य है जिसकी गणना संस्कृत के 'पंच महाकाव्यों' में की जाती है। यह महाकाव्य 17 सर्गों में समाप्त हुआ है, किंतु लोक धारणा है कि केवल प्रथम सर्ग ही कालिदास रचित है। बाद के अन्य नौ सर्ग अन्य कवि की रचना है। कुछ लोगों की धारणा है कि काव्य आठ सर्गों में ही शिवपार्वती समागम के साथ कुमार के जन्म की पूर्वसूचना के साथ ही समाप्त हो जाता है। कुछ लोग कहते हैं कि आठवें सर्ग में शिवपार्वती के संभोग का वर्णन करने के कारण कालिदास को कुष्ठ हो गया और वे लिख न सके। एक मत यह भी है कि उनका संभोगवर्णन जनमानस को रुचि नहीं इसलिए उन्होंने आगे नहीं लिखा। .

नई!!: सम्भोग और कुमारसम्भव · और देखें »

कौमार्य

कौमार्य (Virginity) एक ऐसी अवस्था होती है जिसमें व्यक्ति ने कभी भी संभोग नहीं किया होता है। सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं में विशेष रूप से अविवाहित महिलाओं, निजी पवित्रता के विचार के साथ जुड़े मामलों और मूल्यों आदि को विशेष मूल्य और महत्व दिया गया है। सतीत्व अथवा शुद्धता की तरह ही, कौमार्य की अवधारणा में भी परंपरागत रूप से शादी से पहले यौन संयम रखना शामिल है और शादी के बाद ही अपने जीवन साथी के साथ यौन क्रियाओं में संलग्न होना है। शादी से पहले संभोग (Premarital Sex), जो यौन गतिविधियों के एक से अधिक अवसर को इंगित करता है, इसके विपरीत, कौमार्य की अवधारणा को आम तौर पर नैतिक या धार्मिक मामलों या सामाजिक हैसियत के संदर्भ में और पारस्परिक संबंधों में परिणामों के रूप में देखा जा सकता है। शब्द मूल रूप से केवल यौन अनुभवहीन महिलाओं के लिए जाना जाता है, लेकिन विभिन्न परिभाषाओं की एक विस्तृत श्रृंखला शामिल है, जो इसे पारंपरिक, आधुनिक और नैतिक अवधारणाओं के रूप में परिभाषित करते हैं।See and for male virginity, how gay and lesbian individuals define virginity loss, and for how the majority of researchers and heterosexuals define virginity loss/"technical virginity" by whether or not a person has engaged in vaginal sex.

नई!!: सम्भोग और कौमार्य · और देखें »

कौमार्य परीक्षण

योनिच्छद की विभिन्न स्थितियाँ कौमार्य परीक्षण यह निर्धारित करने की प्रक्रिया है कि क्या कोई महिला कुंवारी है या नहीं, यानी कि क्या उसने कभी भी संभोग किया है या नहीं? इस परीक्षण में महिला की योनिद्वार की झिल्ली (अर्थात् योनिच्छद / hymen) का परीक्षण इस धारणा पर किया जाता है कि उसकी योनिद्वार की झिल्ली केवल संभोग के परिणामस्वरूप ही फट सकती है। इस परीक्षण को सामान्यतः दो उँगली परीक्षण (Two Finger Test) के नाम से भी जाना जाता है। जे॰एन॰यू॰ के सेंटर फॉर लॉ ऐंड गवर्नेंस में प्राध्यापक प्रतीक्षा बख्शी के अनुसार फ्रांसीसी मेडिकल विधिवेत्ता एल॰ थोइनॉट ने 1898 के आसपास नकली और असली कुंआरी लड़कियों में फर्क करने वाली जाँच के लिए इस तरह का टेस्ट ईजाद किया था। नकली कुंआरी उस महिला को कहा जाता था, जिसकी हाइमन लचीलेपन के कारण सेक्स के बाद भी नहीं टूटती है। भारत में मेडिकल विधिशास्त्र की लगभग हर पुस्तक में टी॰एफ॰टी॰ को बढ़ावा दिया गया है, जिनमें जयसिंह पी॰ मोदी की लिखी किताब ए टेक्स्ट बुक ऑफ मेडिकल ज्यूरिसप्रूडेंस ऐंड टॉक्सीकोलॉजी भी शामिल है। लड़कियों के लिए इसके विपरीत प्रभाव और इस जाँच में प्रमाणिकता एवं सटीकता का अभाव होने के कारण कौमार्य परीक्षण एक बहुत ही विवादास्पद जाँच है।.

नई!!: सम्भोग और कौमार्य परीक्षण · और देखें »

अंडाणु

अंडाणु अंडा कोशिका, या डिंब, ओगमास जीवों में मादा प्रजनन कोशिका (gamete) है। अंडा कोशिका आम तौर पर सक्रिय आंदोलन के लिए सक्षम नहीं है, और यह मोटीयल शुक्राणु कोशिकाओं की तुलना में बहुत अधिक (नग्न आंखों में दिखाई देता है) जब अंडा और शुक्राणु फ्यूज, एक द्विगुणित कोशिका (युग्मज) का गठन होता है, जो तेजी से एक नए जीव में बढ़ता है। नर शुक्राणु का मादा के अंडाणुओं से मिलन .

नई!!: सम्भोग और अंडाणु · और देखें »

यहां पुनर्निर्देश करता है:

योनि मैथुन, सम्भोग्, सहवास, संभोग, सेक्स

निवर्तमानआने वाली
अरे! अब हम फेसबुक पर हैं! »