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सत्यजित राय

सूची सत्यजित राय

सत्यजित राय (बंगाली: शॉत्तोजित् राय्) (२ मई १९२१–२३ अप्रैल १९९२) एक भारतीय फ़िल्म निर्देशक थे, जिन्हें २०वीं शताब्दी के सर्वोत्तम फ़िल्म निर्देशकों में गिना जाता है। इनका जन्म कला और साहित्य के जगत में जाने-माने कोलकाता (तब कलकत्ता) के एक बंगाली परिवार में हुआ था। इनकी शिक्षा प्रेसिडेंसी कॉलेज और विश्व-भारती विश्वविद्यालय में हुई। इन्होने अपने कैरियर की शुरुआत पेशेवर चित्रकार की तरह की। फ़्रांसिसी फ़िल्म निर्देशक ज़ाँ रन्वार से मिलने पर और लंदन में इतालवी फ़िल्म लाद्री दी बिसिक्लेत (Ladri di biciclette, बाइसिकल चोर) देखने के बाद फ़िल्म निर्देशन की ओर इनका रुझान हुआ। राय ने अपने जीवन में ३७ फ़िल्मों का निर्देशन किया, जिनमें फ़ीचर फ़िल्में, वृत्त चित्र और लघु फ़िल्में शामिल हैं। इनकी पहली फ़िल्म पथेर पांचाली (পথের পাঁচালী, पथ का गीत) को कान फ़िल्मोत्सव में मिले “सर्वोत्तम मानवीय प्रलेख” पुरस्कार को मिलाकर कुल ग्यारह अन्तरराष्ट्रीय पुरस्कार मिले। यह फ़िल्म अपराजितो (অপরাজিত) और अपुर संसार (অপুর সংসার, अपु का संसार) के साथ इनकी प्रसिद्ध अपु त्रयी में शामिल है। राय फ़िल्म निर्माण से सम्बन्धित कई काम ख़ुद ही करते थे — पटकथा लिखना, अभिनेता ढूंढना, पार्श्व संगीत लिखना, चलचित्रण, कला निर्देशन, संपादन और प्रचार सामग्री की रचना करना। फ़िल्में बनाने के अतिरिक्त वे कहानीकार, प्रकाशक, चित्रकार और फ़िल्म आलोचक भी थे। राय को जीवन में कई पुरस्कार मिले जिनमें अकादमी मानद पुरस्कार और भारत रत्न शामिल हैं। .

96 संबंधों: चारुलता, चिड़ियाखाना (१९६७ फ़िल्म), चिनमूल (1950 फ़िल्म), टार्गेट (1995 फ़िल्म), टू (१९६५ फ़िल्म), तीन कन्या (१९६१ फ़िल्म), द इनर आइ (१९७२ फ़िल्म), दादासाहेब फाल्के पुरस्कार, देवी (१९६० फ़िल्म), नायक (१९६६ फ़िल्म), पथेर पांचाली (1955 फ़िल्म), पद्म श्री पुरस्कार (१९५४-५९), पद्म विभूषण धारकों की सूची, पश्चिम बंगाल, पारश पत्थर (1958 फ़िल्म), पिकूर डायरी (१९८१ फ़िल्म), प्रतिद्वंद्वी (१९७२ फ़िल्म), प्रेमचंद, पीकू, फटिक चन्द (1983 फ़िल्म), फ़ारुख़ शेख़, फ़िल्म, फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ निर्देशक पुरस्कार, फेलुदा, बाला (१९७६ फ़िल्म), बिभूतिभूषण बंधोपाध्याय, बिरजू महाराज, बिजोय राय, बंगला भाषा के साहित्यकारों की सूची (कालक्रमानुसार), बक्सा बादल (1970 फ़िल्म), बैरी जॉन, बॉम्बईयर बॉम्बेटे (2003 फ़िल्म), भारत रत्न पुरस्कार विजेताओं की सूची, भारत रत्‍न, भारत की संस्कृति, भारतीय सिनेमा, भारतीय सिनेमा के सौ वर्ष, भारतीय इतिहास की समयरेखा, महानतम भारतीय (सर्वेक्षण), महानगर (१९६३ फ़िल्म), महापुरुष (१९६५ फ़िल्म), राय, राजकमल प्रकाशन पुस्तक सूची, रवीन्द्रनाथ टैगोर (फ़िल्म), रवीन्द्रनाथ ठाकुर (१९६१ फ़िल्म), रवींद्र संगीत, रे, लखनऊ, लखनऊ की संस्कृति, लीसा रे, ..., शतरंज के खिलाड़ी, शतरंज के खिलाड़ी (कहानी), शतरंज के खिलाड़ी (१९७७ फ़िल्म), शाखा प्रशाखा (१९९० फ़िल्म), सत्यजित राय को मिले सम्मान, सत्यजित राय की फ़िल्में, सत्यजीत रे फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान, सदगति (१९८१ फ़िल्म), सिक्किम (१९७१ फ़िल्म), सुकुमार राय (१९८७ फ़िल्म), स्वतन्त्रता के बाद भारत का संक्षिप्त इतिहास, सोनार केल्ला (1974 फ़िल्म), हिन्दी पुस्तकों की सूची/प, हिन्दी पुस्तकों की सूची/श, हिन्दी पुस्तकों की सूची/क, हिन्दी सिनेमा, हीरक राजार देशे (१९८० फ़िल्म), जन अरण्य (१९७६ फ़िल्म), जयाप्रदा, जलसाघर (1958 फ़िल्म), जॉय बाबा फेलुनाथ (१९७८ फ़िल्म), घरे बाइरे (1984 फ़िल्म), वाराणसी, विश्व-भारती विश्वविद्यालय, गणशत्रु (१९८९ फ़िल्म), गुपी गाइन बाघा बाइन (1968 फ़िल्म), गूपी बाघा फिरे एलो (1991 फ़िल्म), आवर फ़िल्म्स, देयर फ़िल्म्स, आगन्तुक (१९९१ फ़िल्म), कापुरुष (१९६५ फ़िल्म), कालका मेल, कांचनजंघा (१९६२ फ़िल्म), कोलकाता, कोलकाता की संस्कृति, अपराजितो, अपु त्रयी, अभियान (१९६२ फ़िल्म), अमिताभ बच्चन, अरण्येर दिनरात्रि (१९७० फ़िल्म), अशनि संकेत (१९७३ फ़िल्म), उत्तोरण (1994 फ़िल्म), उदय शंकर, ऋत्विक घटक, १९२१, १९६५ में पद्म भूषण धारक, २ मई सूचकांक विस्तार (46 अधिक) »

चारुलता

चारुलता 1964 में बनी बांग्ला भाषा की फिल्म है।.

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चिड़ियाखाना (१९६७ फ़िल्म)

चिड़ियाखाना 1967 में बनी बंगाली भाषा की फिल्म है। .

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चिनमूल (1950 फ़िल्म)

चिनमूल 1950 में बनी बंगाली भाषा की फिल्म है। .

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टार्गेट (1995 फ़िल्म)

टार्गेट 1995 में बनी बंगाली भाषा की फिल्म है। .

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टू (१९६५ फ़िल्म)

टू 1965 में बनी बांग्ला भाषा की फिल्म है। .

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तीन कन्या (१९६१ फ़िल्म)

तीन कन्या 1961 में बनी बांग्ला भाषा की फिल्म है। .

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द इनर आइ (१९७२ फ़िल्म)

द इनर आइ 1972 में बनी बांग्ला भाषा की फिल्म है। .

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दादासाहेब फाल्के पुरस्कार

दादा साहेब फाल्के पुरस्कार, भारत सरकार की ओर से दिया जाने वाला एक वार्षिक पुरस्कार है, को कि किसी व्यक्ति विशेष को भारतीय सिनेमा में उसके आजीवन योगदान के लिए दिया जाता है। इस पुरस्कार का प्रारंम्भ दादा साहेब फाल्के के जन्म शताब्दी वर्ष 1969 से हुआ। यह पुरस्कार उस वर्ष के अंत में रास्ट्रीय पुरस्कार के साथ प्रदान किया जाता है। इस पुरस्कार में 10 लाख रुपया और सुवणॅ कमल दिया जाता है। .

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देवी (१९६० फ़िल्म)

देवी 1960 में बनी बांग्ला भाषा की फिल्म है। .

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नायक (१९६६ फ़िल्म)

नायक 1966 में बनी बांग्ला भाषा की फिल्म है। .

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पथेर पांचाली (1955 फ़िल्म)

पाथेर पांचाली (পথের পাঁচালী,, लघु पथगीत) बंगाली सिनेमा की 1955 में बनी एक नाट्य फ़िल्म है। इसका निर्देशन सत्यजित राय ने एवं निर्माण पश्चिम बंगाल सरकार ने किया था। यह फ़िल्म बिभूतिभूषण बंधोपाध्याय के इसी नाम के उपन्यास पर आधारित है। पाथेर पांचाली (हिन्दी अनुवाद-पथगीत) 1955 मे बनी बंगाली भाषा की नाटक-फिल्म है, जिसे सत्यजीत रे द्वारा लिखित और निर्देशित किया गया है। इस फिल्म का प्रॉडक्शन पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा किया गया था। यह बिभूतिभूषण बंदोपाध्याय के 1929 के बंगाली उपन्यास पर आधारित है। रे ने इसी फिल्म से निर्देशन मे पदार्पण किया था। इसमें सुबीर बनर्जी, कानू बनर्जी, करुणा बनर्जी, उमा दासगुप्त और चुनिबाला देवी शामिल हैं। अपु-रचनात्रय में पहली फिल्म, पाथेर पांचाली मे नायक अपु (सुबीर बनर्जी), उनकी बड़ी बहन दुर्गा (उमा दासगुप्त) और उनके गरीब परिवार के कठोर गांव जीवन के बचपन को दर्शाया गया है। प्रॉडक्शन का काम पैसो की कमी की वजह से कई बार रुका और फिल्म को पूरा होने मे लगभग तीन साल लगे। फिल्म सिर्फ कुछ ही जगहो पर फिल्मायी गयी। कम बजट होने के कारण ज्यादातर नए कलाकार और अनुभवहीन कर्मचारी थे। फिल्म का साउंडट्रैक मशहूर सितार प्लेयर रवि शंकर ने किया था। फिल्म का प्रीमीयर 3 मई 1955 को न्यू यॉर्क म्यूजियम मे एक प्रदर्शिनी के दौरान किया गया था। पाथेर पांचाली 1955 मे ही कलकत्ता मे बड़े उत्साह के साथ रिलीज़ की गयी और फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग मे पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री और भारत के प्रधानमंत्री ने भी शिरकत की। .

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पद्म श्री पुरस्कार (१९५४-५९)

पद्म श्री पुरस्कार, भारत का चौथा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान है। जिसके ई॰ सन् १९५४ से १९५९ के प्राप्त कर्ता निम्न हैं: .

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पद्म विभूषण धारकों की सूची

यह भारत सरकार द्वारा पद्म विभूषण से अलंकृत किए गए लोगों की सूची है: .

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पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल (भारतीय बंगाल) (बंगाली: পশ্চিমবঙ্গ) भारत के पूर्वी भाग में स्थित एक राज्य है। इसके पड़ोस में नेपाल, सिक्किम, भूटान, असम, बांग्लादेश, ओडिशा, झारखंड और बिहार हैं। इसकी राजधानी कोलकाता है। इस राज्य मे 23 ज़िले है। यहां की मुख्य भाषा बांग्ला है। .

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पारश पत्थर (1958 फ़िल्म)

पारश पत्थर 1958 में बनी बांग्ला भाषा की फिल्म है। .

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पिकूर डायरी (१९८१ फ़िल्म)

पिकूर डायरी 1981 में बनी बांग्ला भाषा की फिल्म है। .

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प्रतिद्वंद्वी (१९७२ फ़िल्म)

प्रतिद्वंद्वी 1972 में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। .

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प्रेमचंद

प्रेमचंद (३१ जुलाई १८८० – ८ अक्टूबर १९३६) हिन्दी और उर्दू के महानतम भारतीय लेखकों में से एक हैं। मूल नाम धनपत राय प्रेमचंद को नवाब राय और मुंशी प्रेमचंद के नाम से भी जाना जाता है। उपन्यास के क्षेत्र में उनके योगदान को देखकर बंगाल के विख्यात उपन्यासकार शरतचंद्र चट्टोपाध्याय ने उन्हें उपन्यास सम्राट कहकर संबोधित किया था। प्रेमचंद ने हिन्दी कहानी और उपन्यास की एक ऐसी परंपरा का विकास किया जिसने पूरी सदी के साहित्य का मार्गदर्शन किया। आगामी एक पूरी पीढ़ी को गहराई तक प्रभावित कर प्रेमचंद ने साहित्य की यथार्थवादी परंपरा की नींव रखी। उनका लेखन हिन्दी साहित्य की एक ऐसी विरासत है जिसके बिना हिन्दी के विकास का अध्ययन अधूरा होगा। वे एक संवेदनशील लेखक, सचेत नागरिक, कुशल वक्ता तथा सुधी (विद्वान) संपादक थे। बीसवीं शती के पूर्वार्द्ध में, जब हिन्दी में तकनीकी सुविधाओं का अभाव था, उनका योगदान अतुलनीय है। प्रेमचंद के बाद जिन लोगों ने साहित्‍य को सामाजिक सरोकारों और प्रगतिशील मूल्‍यों के साथ आगे बढ़ाने का काम किया, उनमें यशपाल से लेकर मुक्तिबोध तक शामिल हैं। .

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पीकू

पिकू एक भारतीय हास्य फिल्म है जो 08 मई 2015 को सिनेमाघरों में प्रदर्शित हो चुकी है। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन दीपिका पादुकोण के पिता का किरदार निभा रहे हैं। पिकु बनर्जी (दीपिका पादुकोण) दिल्ली में रहने वाले एक बंगाली वास्तुकार हैं, उनके 70 वर्षीय पिता भशकोर (अमिताभ बच्चन) के साथ। भष्कर को पुरानी कब्ज के साथ समस्याएं होती हैं और हर आंत को उनके आंत्र आंदोलनों में निशान मिलती है। उनकी आदतें अक्सर नौकरों के साथ झगड़ा करती हैं और छोबी माशी (मौशमी चटर्जी) को परेशान करती हैं, जो अक्सर उनसे मिलने जाते हैं। पिकू अपने पिता से प्यार करता है और, क्योंकि उसकी मां की मृत्यु हो गई है, उसकी अच्छी देखभाल करता है लेकिन कभी-कभी उसकी विलक्षणता के कारण उसके साथ बेहद परेशान हो जाता है। उनके सहयोगी सैयद अफ्रोज़ (जिशु सेनगुप्ता) एक अच्छे दोस्त हैं, और वह सैयद के दोस्त, राणा चौधरी (इरफान खान) टैक्सी व्यवसाय का नियमित ग्राहक हैं। राणा की अपनी मां और बहन के साथ अपनी पारिवारिक समस्याएं हैं। पिकु कोलकाता, चंपकुनज में अपने पैतृक घर बेचना चाहता है, लेकिन भष्कर जोरदार वस्तुओं को बेचता है और कोलकाता जाने का फैसला करता है। पिकू को उसके साथ जाना है, क्योंकि वह उसे अकेले यात्रा नहीं कर सकती है। भशकोर अपनी कब्ज की समस्या लाता है और सड़क से यात्रा करने का फैसला करता है। राणा के अन्य चालकों के साथ पिकू बहुत ही समस्याग्रस्त होने के कारण, वे पिकू की यात्रा से पहले वापस चले गए। पिकू, एजेंसी से निराश एक उड़ान बुक करने की कोशिश करता है, लेकिन जल्द ही, राणा अपने परिवार को कोलकाता में ले जाने के लिए अपने परिवार में यात्रा के बारे में सूचित किए बिना खुद को ले जाती है। वैसे, समूह भस्मकोर के उग्र व्यवहार और कब्ज के कारण धैर्य खोने के कगार पर राणा समेत कई घटनाओं से मुकाबला करता है। अंततः वे कोलकाता पहुंचे, जहां पिकू के रिश्तेदार पुराने घर में रहते हैं और भशकोर राणा से कुछ समय तक रहने के लिए कहते हैं। पिकु और राणा शहर में बाहर निकलते हैं और धीरे-धीरे करीब आते हैं। राणा भी चर्चा के दौरान घर बेचने के लिए संकेत देते हैं। राणा अगले दिन कोलकाता छोड़ती है और भास्कर से अपनी विलक्षणता को रोकने के लिए कहती है जिसे वह अंततः सुनता है। पिकू अपने दिमाग को बदलता है और घर बेचने का फैसला नहीं करता है। इस बीच, भास्कर की साइकिल की अचानक इच्छा बढ़ जाती है क्योंकि वह अकेले शहर के एक हिस्से के माध्यम से चक्र चलाता है, जिससे हर कोई तनाव महसूस करता है क्योंकि उसने उन्हें इसके बारे में नहीं बताया था। जब भष्कर लौटता है, तो पिकू उसे सड़क के भोजन खाने और गैर जिम्मेदार होने के लिए बाध्य करता है, लेकिन वह बस कहता है कि उसकी कब्ज साफ हो गई है और उसे हर दिन साइकिल की जरूरत है। वह राणा को याद करता है जिसने उसे सबकुछ खाने के लिए कहा था और भोजन के बारे में चुने और चुस्त नहीं होना चाहिए। पिकु गुप्त रूप से खुश है लेकिन ज्यादा भावना नहीं करता है। अगले दिन, हर कोई पता चलता है कि भोकर की नींद में उसकी मृत्यु हो गई है, शायद एपने या कार्डियाक एराइथेमिया से सो जाओ। पिकू कहता है कि वह हमेशा शांतिपूर्ण मौत चाहता था। वह दिल्ली लौटती है, जहां वह अपने अंतिम संस्कार की व्यवस्था करती है। वहां, भास्कर के डॉक्टर डॉ श्रीवास्तव (रघुबीर यादव) ने उन्हें बताया कि सैयद को भी कब्ज है और भास्कर लंबे समय से इसके बारे में जानते थे। कुछ दिनों बाद, वह राणा का भुगतान करने के लिए जो भी देय करती है, वह भुगतान करती है। उन्होंने दिल्ली के घर "भास्कर विला" को अपने पिता की स्मृति में नामित किया और नौकरानी, ​​जो भशकोर के मंत्रमुग्ध होने के कारण चली गईं, काम पर लौट आईं। .

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फटिक चन्द (1983 फ़िल्म)

फटिक चन्द 1983 में बनी बंगाली भाषा की फिल्म है। .

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फ़ारुख़ शेख़

फ़ारुख़ शेख़ (२५ मार्च १९४८ - २७ दिसम्बर २०१३) एक भारतीय अभिनेता, समाज-सेवी और एक टेलीविजन प्रस्तोता थे। उन्हें ७० और ८० के दशक की फ़िल्मों में अभिनय के कारण प्रसिद्धि मिली। वो सामान्यतः एक कला सिनेमा में अपने कार्य के लिए प्रसिद्ध थे जिसे समानांतर सिनेमा भी कहा जाता है। उन्होंने सत्यजित राय और ऋषिकेश मुखर्जी के निर्देशन में भी काम किया। .

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फ़िल्म

फ़िल्म, चलचित्र अथवा सिनेमा में चित्रों को इस तरह एक के बाद एक प्रदर्शित किया जाता है जिससे गति का आभास होता है। फ़िल्में अकसर विडियो कैमरे से रिकार्ड करके बनाई जाती हैं, या फ़िर एनिमेशन विधियों या स्पैशल इफैक्ट्स का प्रयोग करके। आज ये मनोरंजन का महत्त्वपूर्ण साधन हैं लेकिन इनका प्रयोग कला-अभिव्यक्ति और शिक्षा के लिए भी होता है। भारत विश्व में सबसे अधिक फ़िल्में बनाता है। फ़िल्म उद्योग का मुख्य केन्द्र मुंबई है, जिसे अमरीका के फ़िल्मोत्पादन केन्द्र हॉलीवुड के नाम पर बॉलीवुड कहा जाता है। भारतीय फिल्मे विदेशो में भी देखी जाती है .

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फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ निर्देशक पुरस्कार

फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म पुरस्कार फ़िल्मफ़ेयर पत्रिका द्वारा प्रति वर्ष दिया जाने वाला पुरस्कार है। .

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फेलुदा

फेलू दा सत्यजित राय की कहानियों का एक पात्र है। जो जासूसी करके सत्य की खोज करता है। उसकी उम्र 27 वर्ष है तथा उसका सहायक साढ़े तेरह साल का तपेशरंजन बोस है।.

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बाला (१९७६ फ़िल्म)

बाला 1976 में बनी बांग्ला भाषा की फिल्म है। .

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बिभूतिभूषण बंधोपाध्याय

बिभूतिभूषण बंद्योपाध्याय (बांग्ला: বিভুতিভূষণ বন্দ্যোপাধ্যায়) बांग्ला के सुप्रसिद्ध लेखक और उपन्यासकार थे। वे अपने महाकाव्य पाथेर पांचाली के लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं। जिसके ऊपर प्रसिद्ध फ़िल्मकार सत्यजित राय ने एक लोकप्रिय फ़िल्म का निर्माण भी किया था। श्रेणी:व्यक्तिगत जीवन श्रेणी:बांग्ला साहित्यकार.

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बिरजू महाराज

पंडित बृजमोहन मिश्र (जिन्हें बिरजू महाराज भी कहा जाता है)(जन्म: ४ फ़रवरी १९३८) प्रसिद्ध भारतीय कथक नर्तक एवं शास्त्रीय गायक हैं। ये शास्त्रीय कथक नृत्य के लखनऊ कालिका-बिन्दादिन घराने के अग्रणी नर्तक हैं। पंडित जी कथक नर्तकों के महाराज परिवार के वंशज हैं जिसमें अन्य प्रमुख विभूतियों में इनके दो चाचा व ताऊ, शंभु महाराज एवं लच्छू महाराज; तथा इनके स्वयं के पिता एवं गुरु अच्छन महाराज भी आते हैं। हालांकि इनका प्रथम जुड़ाव नृत्य से ही है, फिर भी इनकी हिन्दुस्तानी शास्त्रीय गायन पर भी अच्छी पकड़ है, तथा ये एक अच्छे शास्त्रीय गायक भी हैं। इन्होंने कत्थक नृत्य में नये आयाम नृत्य-नाटिकाओं को जोड़कर उसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।।बीबीसी हिंदी। प्रीति मान, फ़ोटो पत्रकार।21 नवंबर 2015 इन्होंने कत्थक हेतु '''कलाश्रम''' की स्थापना भी की है। इसके अलावा इन्होंने विश्व पर्यन्त भ्रमण कर सहस्रों नृत्य कार्यक्रम करने के साथ-साथ कत्थक शिक्षार्थियों हेतु सैंकड़ों कार्यशालाएं भी आयोजित की हैं। अपने चाचा, शम्भू महाराज के साथ नई दिल्ली स्थित भारतीय कला केन्द्र, जिसे बाद में कत्थक केन्द्र कहा जाने लगा; उसमें काम करने के बाद इस केन्द्र के अध्यक्ष पर भी कई वर्षों तक आसीन रहे। तत्पश्चात १९९८ में वहां से सेवानिवृत्त होने पर अपना नृत्य विद्यालय कलाश्रम भी दिल्ली में ही खोला। .

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बिजोय राय

बिजोया राय (विवाहपूर्व बिजोया दास; १९१६ – २ जून २०१५) भारतीय फ़िल्म निर्माता निर्देशक सत्यजित राय पत्नी थीं। उनका विवाह 1949 में हुआ। उनका पुत्र सन्दीप राय भी फ़िल्म निर्देशक हैं। सत्यजीत राय और बिजोय राय दूर के भाई-बहन थे। बिजोया दास ने 1944 में शेष रक्षक नाम की एक बांग्ला फ़िल्म में काम किया था और एक गीत भी गाया था। 1998 में उन्होंने कैथरीन बर्ज द्बारा निर्मित गाछ (पेड़) नामक एक वृत्तचित्र में भी अभिनय किया। .

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बंगला भाषा के साहित्यकारों की सूची (कालक्रमानुसार)

यहाँ पर कालक्रम के अनुसार बांग्ला भाषा के साहित्यकारों की सूची दी गयी है। इस सूची में अन्तरराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त करने वालों को भी चिन्हित किया गया है। .

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बक्सा बादल (1970 फ़िल्म)

बक्सा बादल 1970 में बनी बंगाली भाषा की फिल्म है। .

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बैरी जॉन

बैरी जॉन (जन्म: १९४४) (Barry John) ब्रिटेन में जन्मे एक भारतीय थियेटर निर्देशक और शिक्षक हैं, जो कि दिल्ली में स्थित शुरुआती थियेटर समूहों में से एक, थिएटर एक्शन ग्रुप (टीएजी) (१९७३) के संस्थापक-निदेशक रह चुके हैं। १९९७ में उन्होंने संजय सुगितभ के साथ मिलकर दिल्ली में इमागो मीडिया कंपनी और इमागो एक्टिंग स्कूल खोला था; दोनों ही मार्च २००७ में मुंबई स्थानांतरित कर दिए गए। इस स्कूल से उन्हें काफी प्रसिद्धि मिली, क्योंकि उनके कुछ छात्र आगे चलकर बॉलीवुड अभिनेता बने, जिनमें शाहरुख खान, मनोज वाजपेयी, समीर सोनी, शाइनी आहूजा, और फ्रीडा पिंटो प्रमुख हैं। १९९३ में उन्हें संगीत नाटक अकादमी द्वारा साहित्य कला परिषद पुरस्कार और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वह १९६९ के बाद से ही भारत में रह रहे हैं। मुंबई के अंधेरी में उनका एक अभिनय स्कूल स्थित है, जिसका नाम 'द बैरी जॉन एक्टिंग स्टूडियो' है। .

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बॉम्बईयर बॉम्बेटे (2003 फ़िल्म)

बॉम्बईयर बॉम्बेटे 2003 में बनी बंगाली भाषा की फिल्म है। .

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भारत रत्न पुरस्कार विजेताओं की सूची

भारत रत्न भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। इस पुरस्कार को पाने वालों की सूची निम्न है: .

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भारत रत्‍न

भारत रत्न भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। यह सम्मान राष्ट्रीय सेवा के लिए दिया जाता है। इन सेवाओं में कला, साहित्य, विज्ञान, सार्वजनिक सेवा और खेल शामिल है। इस सम्मान की स्थापना 2 जनवरी 1954 में भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति श्री राजेंद्र प्रसाद द्वारा की गई थी। अन्य अलंकरणों के समान इस सम्मान को भी नाम के साथ पदवी के रूप में प्रयुक्त नहीं किया जा सकता। प्रारम्भ में इस सम्मान को मरणोपरांत देने का प्रावधान नहीं था, यह प्रावधान 1955 में बाद में जोड़ा गया। तत्पश्चात् 13 व्यक्तियों को यह सम्मान मरणोपरांत प्रदान किया गया। सुभाष चन्द्र बोस को घोषित सम्मान वापस लिए जाने के उपरान्त मरणोपरान्त सम्मान पाने वालों की संख्या 12 मानी जा सकती है। एक वर्ष में अधिकतम तीन व्यक्तियों को ही भारत रत्न दिया जा सकता है। उल्लेखनीय योगदान के लिए भारत सरकार द्वारा दिए जाने वाले सम्मानों में भारत रत्न के पश्चात् क्रमशः पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्मश्री हैं। .

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भारत की संस्कृति

कृष्णा के रूप में नृत्य करते है भारत उपमहाद्वीप की क्षेत्रीय सांस्कृतिक सीमाओं और क्षेत्रों की स्थिरता और ऐतिहासिक स्थायित्व को प्रदर्शित करता हुआ मानचित्र भारत की संस्कृति बहुआयामी है जिसमें भारत का महान इतिहास, विलक्षण भूगोल और सिन्धु घाटी की सभ्यता के दौरान बनी और आगे चलकर वैदिक युग में विकसित हुई, बौद्ध धर्म एवं स्वर्ण युग की शुरुआत और उसके अस्तगमन के साथ फली-फूली अपनी खुद की प्राचीन विरासत शामिल हैं। इसके साथ ही पड़ोसी देशों के रिवाज़, परम्पराओं और विचारों का भी इसमें समावेश है। पिछली पाँच सहस्राब्दियों से अधिक समय से भारत के रीति-रिवाज़, भाषाएँ, प्रथाएँ और परंपराएँ इसके एक-दूसरे से परस्पर संबंधों में महान विविधताओं का एक अद्वितीय उदाहरण देती हैं। भारत कई धार्मिक प्रणालियों, जैसे कि हिन्दू धर्म, जैन धर्म, बौद्ध धर्म और सिख धर्म जैसे धर्मों का जनक है। इस मिश्रण से भारत में उत्पन्न हुए विभिन्न धर्म और परम्पराओं ने विश्व के अलग-अलग हिस्सों को भी बहुत प्रभावित किया है। .

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भारतीय सिनेमा

भारतीय सिनेमा के अन्तर्गत भारत के विभिन्न भागों और भाषाओं में बनने वाली फिल्में आती हैं जिनमें आंध्र प्रदेश और तेलंगाना, असम, बिहार, उत्तर प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, जम्मू एवं कश्मीर, झारखंड, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और बॉलीवुड शामिल हैं। भारतीय सिनेमा ने २०वीं सदी की शुरुआत से ही विश्व के चलचित्र जगत पर गहरा प्रभाव छोड़ा है।। भारतीय फिल्मों का अनुकरण पूरे दक्षिणी एशिया, ग्रेटर मध्य पूर्व, दक्षिण पूर्व एशिया और पूर्व सोवियत संघ में भी होता है। भारतीय प्रवासियों की बढ़ती संख्या की वजह से अब संयुक्त राज्य अमरीका और यूनाइटेड किंगडम भी भारतीय फिल्मों के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार बन गए हैं। एक माध्यम(परिवर्तन) के रूप में सिनेमा ने देश में अभूतपूर्व लोकप्रियता हासिल की और सिनेमा की लोकप्रियता का इसी से अन्दाजा लगाया जा सकता है कि यहाँ सभी भाषाओं में मिलाकर प्रति वर्ष 1,600 तक फिल्में बनी हैं। दादा साहेब फाल्के भारतीय सिनेमा के जनक के रूप में जाना जाते हैं। दादा साहब फाल्के के भारतीय सिनेमा में आजीवन योगदान के प्रतीक स्वरुप और 1969 में दादा साहब के जन्म शताब्दी वर्ष में भारत सरकार द्वारा दादा साहेब फाल्के पुरस्कार की स्थापना उनके सम्मान में की गयी। आज यह भारतीय सिनेमा का सबसे प्रतिष्ठित और वांछित पुरस्कार हो गया है। २०वीं सदी में भारतीय सिनेमा, संयुक्त राज्य अमरीका का सिनेमा हॉलीवुड तथा चीनी फिल्म उद्योग के साथ एक वैश्विक उद्योग बन गया।Khanna, 155 2013 में भारत वार्षिक फिल्म निर्माण में पहले स्थान पर था इसके बाद नाइजीरिया सिनेमा, हॉलीवुड और चीन के सिनेमा का स्थान आता है। वर्ष 2012 में भारत में 1602 फ़िल्मों का निर्माण हुआ जिसमें तमिल सिनेमा अग्रणी रहा जिसके बाद तेलुगु और बॉलीवुड का स्थान आता है। भारतीय फ़िल्म उद्योग की वर्ष 2011 में कुल आय $1.86 अरब (₹ 93 अरब) की रही। जिसके वर्ष 2016 तक $3 अरब (₹ 150 अरब) तक पहुँचने का अनुमान है। बढ़ती हुई तकनीक और ग्लोबल प्रभाव ने भारतीय सिनेमा का चेहरा बदला है। अब सुपर हीरो तथा विज्ञानं कल्प जैसी फ़िल्में न केवल बन रही हैं बल्कि ऐसी कई फिल्में एंथीरन, रा.वन, ईगा और कृष 3 ब्लॉकबस्टर फिल्मों के रूप में सफल हुई है। भारतीय सिनेमा ने 90 से ज़्यादा देशों में बाजार पाया है जहाँ भारतीय फिल्मे प्रदर्शित होती हैं। Khanna, 158 सत्यजीत रे, ऋत्विक घटक, मृणाल सेन, अडूर गोपालकृष्णन, बुद्धदेव दासगुप्ता, जी अरविंदन, अपर्णा सेन, शाजी एन करुण, और गिरीश कासरावल्ली जैसे निर्देशकों ने समानांतर सिनेमा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और वैश्विक प्रशंसा जीती है। शेखर कपूर, मीरा नायर और दीपा मेहता सरीखे फिल्म निर्माताओं ने विदेशों में भी सफलता पाई है। 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के प्रावधान से 20वीं सेंचुरी फॉक्स, सोनी पिक्चर्स, वॉल्ट डिज्नी पिक्चर्स और वार्नर ब्रदर्स आदि विदेशी उद्यमों के लिए भारतीय फिल्म बाजार को आकर्षक बना दिया है। Khanna, 156 एवीएम प्रोडक्शंस, प्रसाद समूह, सन पिक्चर्स, पीवीपी सिनेमा,जी, यूटीवी, सुरेश प्रोडक्शंस, इरोज फिल्म्स, अयनगर्न इंटरनेशनल, पिरामिड साइमिरा, आस्कार फिल्म्स पीवीआर सिनेमा यशराज फिल्म्स धर्मा प्रोडक्शन्स और एडलैब्स आदि भारतीय उद्यमों ने भी फिल्म उत्पादन और वितरण में सफलता पाई। मल्टीप्लेक्स के लिए कर में छूट से भारत में मल्टीप्लेक्सों की संख्या बढ़ी है और फिल्म दर्शकों के लिए सुविधा भी। 2003 तक फिल्म निर्माण / वितरण / प्रदर्शन से सम्बंधित 30 से ज़्यादा कम्पनियां भारत के नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध की गयी थी जो फिल्म माध्यम के बढ़ते वाणिज्यिक प्रभाव और व्यसायिकरण का सबूत हैं। दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योग दक्षिण भारत की चार फिल्म संस्कृतियों को एक इकाई के रूप में परिभाषित करता है। ये कन्नड़ सिनेमा, मलयालम सिनेमा, तेलुगू सिनेमा और तमिल सिनेमा हैं। हालाँकि ये स्वतंत्र रूप से विकसित हुए हैं लेकिन इनमे फिल्म कलाकारों और तकनीशियनों के आदान-प्रदान और वैष्वीकरण ने इस नई पहचान के जन्म में मदद की। भारत से बाहर निवास कर रहे प्रवासी भारतीय जिनकी संख्या आज लाखों में हैं, उनके लिए भारतीय फिल्में डीवीडी या व्यावसायिक रूप से संभव जगहों में स्क्रीनिंग के माध्यम से प्रदर्शित होती हैं। Potts, 74 इस विदेशी बाजार का भारतीय फिल्मों की आय में 12% तक का महत्वपूर्ण योगदान हो सकता है। इसके अलावा भारतीय सिनेमा में संगीत भी राजस्व का एक साधन है। फिल्मों के संगीत अधिकार एक फिल्म की 4 -5 % शुद्ध आय का साधन हो सकते हैं। .

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भारतीय सिनेमा के सौ वर्ष

3 मई 2013 (शुक्रवार) को भारतीय सिनेमा पूरे सौ साल का हो गया। किसी भी देश में बनने वाली फिल्में वहां के सामाजिक जीवन और रीति-रिवाज का दर्पण होती हैं। भारतीय सिनेमा के सौ वर्षों के इतिहास में हम भारतीय समाज के विभिन्न चरणों का अक्स देख सकते हैं।उल्लेखनीय है कि इसी तिथि को भारत की पहली फीचर फ़िल्म “राजा हरिश्चंद्र” का रुपहले परदे पर पदार्पण हुआ था। इस फ़िल्म के निर्माता भारतीय सिनेमा के जनक दादासाहब फालके थे। एक सौ वर्षों की लम्बी यात्रा में हिन्दी सिनेमा ने न केवल बेशुमार कला प्रतिभाएं दीं बल्कि भारतीय समाज और चरित्र को गढ़ने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। .

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भारतीय इतिहास की समयरेखा

पाकिस्तान, बांग्लादेश एवं भारत एक साझा इतिहास के भागीदार हैं इसलिए भारतीय इतिहास की इस समय रेखा में सम्पूर्ण भारतीय उपमहाद्वीप के इतिहास की झलक है। .

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महानतम भारतीय (सर्वेक्षण)

सबसे महान भारतीय या महानतम भारतीय (अंग्रेजी:The Greatest Indian) एक सर्वेक्षण जो रिलायंस मोबाइल द्वारा प्रायोजित है और सीएनएन आईबीएन और हिस्ट्री चैनल के साथ साझेदारी में, आउटलुक पत्रिका द्वारा आयोजित किया गया था। आधुनिक भारत के विभिन्न क्षेत्रों में महत्त्वपुर्ण योगदान और भारतीयों के जीवन में अद्वितीय असाधारन बदलाव लाने वाला महानतम शख्सियत खोजने के लिए भारत में दि ग्रेटेस्ट इंडियन या सबसे महानतम भारतीय इस कार्यक्रम का जनमत सर्वेक्षण जून 2012 से अगस्त 2012 दौरान आयोजित किया गया था, इसके विजेता, डॉ॰ भीमराव आंबेडकर हैं, 11 अगस्त को इसकी घोषणा हुई थी। इस सर्वेक्षण में करीब 2 करोड़ वोटिंग डॉ॰ आंबेडकर को हुई थी। इस सर्वेक्षण में पहले भारत के विभिन्न छेत्रों (जैसे, कला, राजनिती, अर्थशास्त्र, समाज सेवा, खेल, उद्योग, संगीत आदी) के 100 महान हस्तियों में से ज्यूरी के जरीये उनमें से 50 महान भारतीयों को चूना गया। बाद में 50 नामों में से वोटिंग के जरीये जवाहरलाल नेहरू से ए.पी.जे. अब्दुल कलाम तक के 10 नाम रखे गये और एक बार फिर सभी नागरिकों द्वारा की गई अंतरराष्ट्रीय ऑनलाईन वोटिंग ओपन की गई, इसमें सर्वाधिक मतदान या मतदान डॉ॰ भीमराव आंबेडकर को मिले, वे दस में नंबर वन पर ही चुने गयें। भारत की स्वतंत्रता के बाद सबसे महान या महानतम भारतीय डॉ॰ भीमराव आंबेडकर हैं। वे स्वतंत्र्यता पूर्व के भी महानतम भारतीय है। महानतम ब्रिटेन स्पिन (Greatest Britons spin-offs) नापसंद के अन्य संस्करणों के विपरीत, महानतम भारतीय इतिहास के सभी समय अवधि से लोगों को शामिल नहीं किया था। दो कारणों से इस चुनाव के लिए दिए गए थे। इसमें महात्मा गांधी को नहीं लिया गया, उन्हें बिना सर्वेक्षण के महान बना दिया, नहीं तो विशेष रूप से डॉ.

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महानगर (१९६३ फ़िल्म)

महानगर 1963 में बनी बांग्ला भाषा की फिल्म है। .

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महापुरुष (१९६५ फ़िल्म)

महापुरुष 1965 में बनी बंगाली भाषा की फिल्म है। .

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राय

१. एक भारतीय उपनाम।- यह पूर्वी उत्तर प्रदेश की भूमिहार जाति के लोगो का प्रमुख उप नाम है। इस उपनाम को और भी बहुत सी जातिया प्रयुक्त करती है। उदाहरण: सत्यजीत राय, राजा राम मोहन राय इत्यादि। २. मत | .

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राजकमल प्रकाशन पुस्तक सूची

राजकमल प्रकाशन हिन्दी पुस्तकों को प्रकाशित करने वाला प्रकाशन संस्थान है। इसका मुख्यालय दिल्ली, भारत, में स्थित है। 1949 में स्थापित यह प्रकाशन प्रति वर्ष लगभग चार सौ से अधिक पुस्तकों का प्रकाशन करता है। .

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रवीन्द्रनाथ टैगोर (फ़िल्म)

रवीन्द्रनाथ टैगोर 1961 में बंगाली साहित्यकार के जीवन और कार्यों पर आधारित वृत्तचित्र है। यह उनकी जन्म शताब्दी के अवसर पर सत्यजित राय द्बारा बनाया गया था। .

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रवीन्द्रनाथ ठाकुर (१९६१ फ़िल्म)

रवीन्द्रनाथ ठाकुर 1961 में बनी बांग्ला भाषा की फिल्म है। .

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रवींद्र संगीत

कोलकाता में रवीन्द्र संगीत का अनुष्ठान रवीन्द्र संगीत बांग्ला: রবীন্দ্রসঙ্গীত), जिसे अंग्रेजी में टैगोर सांस (टैगोर के गीत) के रूप में जाना जाता है, रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा रचित एक संगीत विधा है, जिन्होंने सामान्य रूप से भारत और विशेष रूप से बंगाल की संगीत अवधारणा में एक नया आयाम जोड़ा. रवीन्द्र संगीत में स्रोतों के रूप में भारतीय शास्त्रीय संगीत और पारंपरिक लोक संगीत का उपयोग किया जाता है। टैगोर ने लगभग 2230 गीत लिखे थे। .

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रे

रे के कई अर्थ हो सकते हैं.

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लखनऊ

लखनऊ (भारत के सर्वाधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश की राजधानी है। इस शहर में लखनऊ जिले और लखनऊ मंडल के प्रशासनिक मुख्यालय भी स्थित हैं। लखनऊ शहर अपनी खास नज़ाकत और तहजीब वाली बहुसांस्कृतिक खूबी, दशहरी आम के बाग़ों तथा चिकन की कढ़ाई के काम के लिये जाना जाता है। २००६ मे इसकी जनसंख्या २,५४१,१०१ तथा साक्षरता दर ६८.६३% थी। भारत सरकार की २००१ की जनगणना, सामाजिक आर्थिक सूचकांक और बुनियादी सुविधा सूचकांक संबंधी आंकड़ों के अनुसार, लखनऊ जिला अल्पसंख्यकों की घनी आबादी वाला जिला है। कानपुर के बाद यह शहर उत्तर-प्रदेश का सबसे बड़ा शहरी क्षेत्र है। शहर के बीच से गोमती नदी बहती है, जो लखनऊ की संस्कृति का हिस्सा है। लखनऊ उस क्ष्रेत्र मे स्थित है जिसे ऐतिहासिक रूप से अवध क्षेत्र के नाम से जाना जाता था। लखनऊ हमेशा से एक बहुसांस्कृतिक शहर रहा है। यहाँ के शिया नवाबों द्वारा शिष्टाचार, खूबसूरत उद्यानों, कविता, संगीत और बढ़िया व्यंजनों को हमेशा संरक्षण दिया गया। लखनऊ को नवाबों के शहर के रूप में भी जाना जाता है। इसे पूर्व की स्वर्ण नगर (गोल्डन सिटी) और शिराज-ए-हिंद के रूप में जाना जाता है। आज का लखनऊ एक जीवंत शहर है जिसमे एक आर्थिक विकास दिखता है और यह भारत के तेजी से बढ़ रहे गैर-महानगरों के शीर्ष पंद्रह में से एक है। यह हिंदी और उर्दू साहित्य के केंद्रों में से एक है। यहां अधिकांश लोग हिन्दी बोलते हैं। यहां की हिन्दी में लखनवी अंदाज़ है, जो विश्वप्रसिद्ध है। इसके अलावा यहाँ उर्दू और अंग्रेज़ी भी बोली जाती हैं। .

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लखनऊ की संस्कृति

लखनऊ अपनी विरासत में मिली संस्कृति को आधुनिक जीवनशैली के संग बड़ी सुंदरता के साथ संजोये हुए है। भारत के उत्कृष्टतम शहरों में गिने जाने वाले लखनऊ की संस्कृति में भावनाओं की गर्माहट के साथ उच्च श्रेणी का सौजन्य एवं प्रेम भी है। लखनऊ के समाज में नवाबों के समय से ही पहले आप वाली शैली समायी हुई है। हालांकि स्वार्थी आधुनिक शैली की पदचाप सुनायी देती है, किंतु फिर भी शहर की जनसंख्या का एक भाग इस तहजीब को संभाले हुए है। यह तहजीब यहां दो विशाल धर्मों के लोगों को एक समान संस्कृति से बांधती है। ये संस्कृति यहां के नवाबों के समय से चली आ रही है। .

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लीसा रे

लीजा रे (बंगाली: লিসা রায়), जन्म 4 अप्रैल 1972, एक कैनेडियन अभिनेत्री तथा पूर्व फैशन मॉडल हैं। 23 जून 2009 को उनका डाइग्नोसिस करने पर उन्हें मल्टीपल मायेलोमा से ग्रस्त पाया गया और 2 जुलाई 2009 को उनके उपचार का पहला उपक्रम शुरू किया गया। .

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शतरंज के खिलाड़ी

कोई विवरण नहीं।

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शतरंज के खिलाड़ी (कहानी)

शतरंज के खिलाड़ी मुंशी प्रेमचंद की हिन्दी कहानी है। इसकी रचना उन्होने अक्टूबर १९२४ में की थी और यह 'माधुरी' पत्रिका में छपी थी। 1977 में सत्यजीत राय ने इसी नाम से इस कहानी पर आधारित एक हिन्दी फिल्म बनायी। .

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शतरंज के खिलाड़ी (१९७७ फ़िल्म)

शतरंज के खिलाड़ी 1977 में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। इसी नाम से मुंशी प्रेमचंद द्वारा लिखी गई कहानी पर आधारित इस फिल्म के निर्देशक थे प्रसिद्ध बांग्ला फिल्मकार सत्यजित रे। इसकी कहानी १८५६ के अवध नवाब वाजिद अली शाह के दो अमीरों के इर्द-गिर्द घूमती है। ये दोनों खिलाड़ी शतरंज खेलने में इतने व्यस्त रहते हैं कि उन्हें अपने शासन तथा परिवार की भी फ़िक्र नहीं रहती। इसी की पृष्ठभूमि में अंग्रेज़ों की सेना अवध पर चढ़ाई करती है। फिल्म का अंत अंग्रेज़ों के अवध पर अधिपत्य के बाद के एक दृश्य से होता है जिसमें दोनों खिलाड़ी शतरंज अपने पुराने देशी अंदाज की बजाय अंग्रेज़ी शैली में खेलने लगते हैं जिसमें राजा एक दूसरे के आमने सामने नहीं होते। इस फिल्म को फिल्मकारों तथा इतिहासकारों दोनों की समालोचना मिली थी। फ़िल्म को तीन फिल्मपेयर अवार्ड मिले थे जिसमें सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार भी शामिल था। .

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शाखा प्रशाखा (१९९० फ़िल्म)

शाखा प्रशाखा 1990 में बनी बांग्ला भाषा की फिल्म है। .

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सत्यजित राय को मिले सम्मान

निम्नांकित सूची विख्यात भारतीय फ़िल्म निर्देशक सत्यजित राय को मिले सम्मानों को प्रदर्शित करती है। इससे उनके विश्वव्यापी ख्याति, उनकी दृष्टि एव्ं उनके कार्यों का परिचय मिलता है़। .

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सत्यजित राय की फ़िल्में

सत्यजित राय प्रमुख रूप से फ़िल्मों में निर्देशक के रूप में जाने जाते हैं, लेकिन लेखक और साहित्यकार के रूप में भी उन्होंने फ़िल्मों और साहित्य में ख्याति अर्जित की है। अनेक फ़िल्मों की कहानी और पटकथा के साथ साथ संगीत और निर्माण के क्षेत्र में उन्होंने स्वयं काम किया है। यह विवरण संक्षेप यहाँ प्रस्तुत है। .

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सत्यजीत रे फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान

सत्यजीत राय फ़िल्म एवं टेलीवीजन संस्थान (एस.आर.एफ़.टी.आई) कोल्काता, पश्चिम बंगाल में एक चलचित्र संस्थान है। इस संस्थान की स्थापना १९९५ में हुई थी और इसे सोसाइटी के रूप में १८ अगस्त, १९९५ में पश्चिम बंगाल सोसाइटीज़ पंजीकरण अधिनियम १९६१ के तहत पंजीकृत किया गया था। यह संस्थान एक स्वायत्त संस्थान है, जिसका भरण-पोषण सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा किया जाता है। इसको प्रसिद्ध बंगाली चलचित्र निर्देशक सत्यजीत राय के नाम पर रखा गया है। .

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सदगति (१९८१ फ़िल्म)

सद्गति 1981 में बनी हिन्दी भाषा की फ़िल्म है। .

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सिक्किम (१९७१ फ़िल्म)

सिक्किम 1971 में बनी बांग्ला भाषा की फिल्म है। .

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सुकुमार राय (१९८७ फ़िल्म)

सुकुमार राय 1987 में बनी बांग्ला भाषा की फिल्म है। .

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स्वतन्त्रता के बाद भारत का संक्षिप्त इतिहास

कोई विवरण नहीं।

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सोनार केल्ला (1974 फ़िल्म)

सोनार केल्ला 1974 में बनी बांग्ला भाषा की फिल्म है। .

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हिन्दी पुस्तकों की सूची/प

* पंच परमेश्वर - प्रेम चन्द्र.

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हिन्दी पुस्तकों की सूची/श

संवाद शीर्षक से कविता संग्रह-ईश्वर दयाल गोस्वाामी.

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हिन्दी पुस्तकों की सूची/क

कोई विवरण नहीं।

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हिन्दी सिनेमा

हिन्दी सिनेमा, जिसे बॉलीवुड के नाम से भी जाना जाता है, हिन्दी भाषा में फ़िल्म बनाने का उद्योग है। बॉलीवुड नाम अंग्रेज़ी सिनेमा उद्योग हॉलिवुड के तर्ज़ पर रखा गया है। हिन्दी फ़िल्म उद्योग मुख्यतः मुम्बई शहर में बसा है। ये फ़िल्में हिन्दुस्तान, पाकिस्तान और दुनिया के कई देशों के लोगों के दिलों की धड़कन हैं। हर फ़िल्म में कई संगीतमय गाने होते हैं। इन फ़िल्मों में हिन्दी की "हिन्दुस्तानी" शैली का चलन है। हिन्दी और उर्दू (खड़ीबोली) के साथ साथ अवधी, बम्बईया हिन्दी, भोजपुरी, राजस्थानी जैसी बोलियाँ भी संवाद और गानों में उपयुक्त होते हैं। प्यार, देशभक्ति, परिवार, अपराध, भय, इत्यादि मुख्य विषय होते हैं। ज़्यादातर गाने उर्दू शायरी पर आधारित होते हैं।भारत में सबसे बड़ी फिल्म निर्माताओं में से एक, शुद्ध बॉक्स ऑफिस राजस्व का 43% का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि तमिल और तेलुगू सिनेमा 36% का प्रतिनिधित्व करते हैं,क्षेत्रीय सिनेमा के बाकी 2014 के रूप में 21% का गठन है। बॉलीवुड भी दुनिया में फिल्म निर्माण के सबसे बड़े केंद्रों में से एक है। बॉलीवुड कार्यरत लोगों की संख्या और निर्मित फिल्मों की संख्या के मामले में दुनिया में सबसे बड़ी फिल्म उद्योगों में से एक है।Matusitz, जे, और पायानो, पी के अनुसार, वर्ष 2011 में 3.5 अरब से अधिक टिकट ग्लोब जो तुलना में हॉलीवुड 900,000 से अधिक टिकट है भर में बेच दिया गया था। बॉलीवुड 1969 में भारतीय सिनेमा में निर्मित फिल्मों की कुल के बाहर 2014 में 252 फिल्मों का निर्माण। .

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हीरक राजार देशे (१९८० फ़िल्म)

हीरक राजार देशे 1980 में बनी हिन्दी भाषा की फ़िल्म है। .

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जन अरण्य (१९७६ फ़िल्म)

जन अरण्य 1976 में बनी बांग्ला भाषा की फिल्म है। .

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जयाप्रदा

जयाप्रदा (జయప్రద) (जन्म 3 अप्रैल 1962) एक भारतीय फ़िल्म अभिनेत्री और राजनीतिज्ञ हैं। .

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जलसाघर (1958 फ़िल्म)

सत्यजित राय की एक प्रसिद्ध फ़िल्म। यह 1958 में विमोचित हुई थी। अंग्रेजीभाषी जगत् में कहीं कहीं Jalsaghar: The Music Room के नाम से चली। सत्यजित राय निर्देशित चतुर्थ फिल्म। यह ताराशंकर बंधोपाध्याय कृत इसी नाम के उपन्यास पर आधारित है, तथा जमींदार (बंगाल का अर्धसामंती भूस्वामी) के अंतिम दिनों के विस्तृत नाटकीय अध्ययन पर आधारित है। रे की फिल्मों की चिरपरिचित सहानुभूति तथा विवरणों से युक्त यह फिल्म अंतर्राष्ट्रीय जगत में प्रभूत प्रशंसित हुई (यथा न्यूयार्क टाइम्स में बोसले क्राउथर, द गार्जियन में डेरेक मैल्कम)। साथ ही यह रोजर एबर्ट के "ग्रेट मूवीज", द्वितीय भाग में वैश्विक सिनेमा में एक अलग पहचान-चिह्न के रूप में वर्णित है। फिल्म में हिंदुस्तानी शास्त्रीय गीत-संगीत तथा वाद्य-संगीत के उत्कृष्ट फुटेज परिलक्षित होते हैं, साथ ही शास्त्रीय नृत्य के भी। संगीत विलायत खान का है। साथ ही अन्य कलाकारों में बेगम अख्तर (गायिका), रोशन कुमारी (कथक नृत्यांगना), उस्ताद बिस्मिल्ला खान व साथी, वहीद खान (सुरबहार वादक), सलामत अली खान (खयाल गायक) भी फिल्म में हैं। .

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जॉय बाबा फेलुनाथ (१९७८ फ़िल्म)

जॉय बाबा फेलुनाथ 1978 में बनी बांग्ला भाषा की फिल्म है। .

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घरे बाइरे (1984 फ़िल्म)

घरे बाइरे 1984 में बनी बांग्ला भाषा की फिल्म है। .

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वाराणसी

वाराणसी (अंग्रेज़ी: Vārāṇasī) भारत के उत्तर प्रदेश राज्य का प्रसिद्ध नगर है। इसे 'बनारस' और 'काशी' भी कहते हैं। इसे हिन्दू धर्म में सर्वाधिक पवित्र नगरों में से एक माना जाता है और इसे अविमुक्त क्षेत्र कहा जाता है। इसके अलावा बौद्ध एवं जैन धर्म में भी इसे पवित्र माना जाता है। यह संसार के प्राचीनतम बसे शहरों में से एक और भारत का प्राचीनतम बसा शहर है। काशी नरेश (काशी के महाराजा) वाराणसी शहर के मुख्य सांस्कृतिक संरक्षक एवं सभी धार्मिक क्रिया-कलापों के अभिन्न अंग हैं। वाराणसी की संस्कृति का गंगा नदी एवं इसके धार्मिक महत्त्व से अटूट रिश्ता है। ये शहर सहस्रों वर्षों से भारत का, विशेषकर उत्तर भारत का सांस्कृतिक एवं धार्मिक केन्द्र रहा है। हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत का बनारस घराना वाराणसी में ही जन्मा एवं विकसित हुआ है। भारत के कई दार्शनिक, कवि, लेखक, संगीतज्ञ वाराणसी में रहे हैं, जिनमें कबीर, वल्लभाचार्य, रविदास, स्वामी रामानंद, त्रैलंग स्वामी, शिवानन्द गोस्वामी, मुंशी प्रेमचंद, जयशंकर प्रसाद, आचार्य रामचंद्र शुक्ल, पंडित रवि शंकर, गिरिजा देवी, पंडित हरि प्रसाद चौरसिया एवं उस्ताद बिस्मिल्लाह खां आदि कुछ हैं। गोस्वामी तुलसीदास ने हिन्दू धर्म का परम-पूज्य ग्रंथ रामचरितमानस यहीं लिखा था और गौतम बुद्ध ने अपना प्रथम प्रवचन यहीं निकट ही सारनाथ में दिया था। वाराणसी में चार बड़े विश्वविद्यालय स्थित हैं: बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइयर टिबेटियन स्टडीज़ और संपूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय। यहां के निवासी मुख्यतः काशिका भोजपुरी बोलते हैं, जो हिन्दी की ही एक बोली है। वाराणसी को प्रायः 'मंदिरों का शहर', 'भारत की धार्मिक राजधानी', 'भगवान शिव की नगरी', 'दीपों का शहर', 'ज्ञान नगरी' आदि विशेषणों से संबोधित किया जाता है। प्रसिद्ध अमरीकी लेखक मार्क ट्वेन लिखते हैं: "बनारस इतिहास से भी पुरातन है, परंपराओं से पुराना है, किंवदंतियों (लीजेन्ड्स) से भी प्राचीन है और जब इन सबको एकत्र कर दें, तो उस संग्रह से भी दोगुना प्राचीन है।" .

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विश्व-भारती विश्वविद्यालय

विश्वभारती विश्वविद्यालय की स्थापना 1921 में रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने पश्चिम बंगाल के शान्तिनिकेतन नगर में की। यह भारत के केन्द्रीय विश्वविद्यालयों में से एक है। अनेक स्नातक और परास्नातक संस्थान इससे संबद्ध हैं। शान्ति निकेतन के संस्थापक रवीन्द्रनाथ टैगोर का जन्म १८६१ ई में कलकत्ता में एक सम्पन्न परिवार में हुआ था। इनके पिता महर्षि देवेन्द्रनाथ ठाकुर ने १८६३ ई में अपनी साधना हेतु कलकत्ते के निकट बोलपुर नामक ग्राम में एक आश्रम की स्थापना की जिसका नाम `शांति-निकेतन' रखा गया। जिस स्थान पर वे साधना किया करते थे वहां एक संगमरमर की शिला पर बंगला भाषा में अंकित है--`तिनि आमार प्राणेद आराम, मनेर आनन्द, आत्मार शांति।' १९०१ ई में गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर ने इसी स्थान पर बालकों की शिक्षा हेतु एक प्रयोगात्मक विद्यालय स्थापित किया जो प्रारम्भ में `ब्रह्म विद्यालय,' बाद में `शान्ति निकेतन' तथा १९२१ ई। `विश्व भारती' विश्वविद्यालय के नाम से प्रख्यात हुआ। टैगोर बहुमुखी प्रतिभा के व्यक्ति थे। .

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गणशत्रु (१९८९ फ़िल्म)

गणशत्रु 1989 में बनी बांग्ला भाषा की फिल्म है। .

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गुपी गाइन बाघा बाइन (1968 फ़िल्म)

गुपी गाइन बाघा बाइन 1968 में बनी बांग्ला भाषा की फिल्म है। यह सत्यजित राय की एक प्रसिद्ध बांग्ला फिल्म है। इसका हिन्दी सम्स्करण भी बना है जिसका नाम है- हिंदी में बनी सत्यजित राय की फिल्म का नाम है " गोपी गवैया बाघा बवैया "। .

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गूपी बाघा फिरे एलो (1991 फ़िल्म)

गूपी बाघा फिरे इलो 1991 में बनी बंगाली भाषा की फिल्म है। .

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आवर फ़िल्म्स, देयर फ़िल्म्स

आवर फ़िल्म्स, देयर फ़िल्म्स सत्यजित राय की एक प्रसिद्ध पुस्तक है। .

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आगन्तुक (१९९१ फ़िल्म)

आगन्तुक 1991 में बनी बांग्ला भाषा की फिल्म है। यह सत्यजित राय की एक प्रसिद्ध बांग्ला फिल्म है। .

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कापुरुष (१९६५ फ़िल्म)

कापुरुष 1965 में बनी बांग्ला भाषा की फिल्म है। .

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कालका मेल

1906 में कालका स्टेशन से रवाना होती ईस्ट इंडिया रेलवे मेल। कालका मेल, भारतीय रेल द्वारा संचालित एक रेलगाड़ी है जो भारत के पूर्वी राज्य पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के निकट स्थित हावड़ा को एक अन्य राज्य हरियाणा के पंचकुला में स्थित कालका, रेलवे स्टेशन से जोड़ती है, जो एक समय भारत की ग्रीष्मकालीन राजधानी शिमला, जाने वाली रेलवे लाइन का प्रारंभिक स्टेशन भी है। .

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कांचनजंघा (१९६२ फ़िल्म)

कांचनजंघा 1962 में बनी बांग्ला भाषा की फिल्म है। .

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कोलकाता

बंगाल की खाड़ी के शीर्ष तट से १८० किलोमीटर दूर हुगली नदी के बायें किनारे पर स्थित कोलकाता (बंगाली: কলকাতা, पूर्व नाम: कलकत्ता) पश्चिम बंगाल की राजधानी है। यह भारत का दूसरा सबसे बड़ा महानगर तथा पाँचवा सबसे बड़ा बन्दरगाह है। यहाँ की जनसंख्या २ करोड २९ लाख है। इस शहर का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। इसके आधुनिक स्वरूप का विकास अंग्रेजो एवं फ्रांस के उपनिवेशवाद के इतिहास से जुड़ा है। आज का कोलकाता आधुनिक भारत के इतिहास की कई गाथाएँ अपने आप में समेटे हुए है। शहर को जहाँ भारत के शैक्षिक एवं सांस्कृतिक परिवर्तनों के प्रारम्भिक केन्द्र बिन्दु के रूप में पहचान मिली है वहीं दूसरी ओर इसे भारत में साम्यवाद आंदोलन के गढ़ के रूप में भी मान्यता प्राप्त है। महलों के इस शहर को 'सिटी ऑफ़ जॉय' के नाम से भी जाना जाता है। अपनी उत्तम अवस्थिति के कारण कोलकाता को 'पूर्वी भारत का प्रवेश द्वार' भी कहा जाता है। यह रेलमार्गों, वायुमार्गों तथा सड़क मार्गों द्वारा देश के विभिन्न भागों से जुड़ा हुआ है। यह प्रमुख यातायात का केन्द्र, विस्तृत बाजार वितरण केन्द्र, शिक्षा केन्द्र, औद्योगिक केन्द्र तथा व्यापार का केन्द्र है। अजायबघर, चिड़ियाखाना, बिरला तारमंडल, हावड़ा पुल, कालीघाट, फोर्ट विलियम, विक्टोरिया मेमोरियल, विज्ञान नगरी आदि मुख्य दर्शनीय स्थान हैं। कोलकाता के निकट हुगली नदी के दोनों किनारों पर भारतवर्ष के प्रायः अधिकांश जूट के कारखाने अवस्थित हैं। इसके अलावा मोटरगाड़ी तैयार करने का कारखाना, सूती-वस्त्र उद्योग, कागज-उद्योग, विभिन्न प्रकार के इंजीनियरिंग उद्योग, जूता तैयार करने का कारखाना, होजरी उद्योग एवं चाय विक्रय केन्द्र आदि अवस्थित हैं। पूर्वांचल एवं सम्पूर्ण भारतवर्ष का प्रमुख वाणिज्यिक केन्द्र के रूप में कोलकाता का महत्त्व अधिक है। .

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कोलकाता की संस्कृति

श्रेणी:कोलकाता.

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अपराजितो

अपराजितो 1956 में बनी बांग्ला भाषा की फिल्म है। यह सत्यजित राय की एक प्रसिद्ध बांग्ला फ़िल्म है। .

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अपु त्रयी

अपु त्रयी सत्यजित राय द्वारा निर्देशित तीन फ़िल्मों की शृंखला है। ये तीन फ़िल्में हैं पाथेर पांचाली, अपराजितो और अपूर संसार। ये फ़िल्में 1955 से 1960 के बीच बनीं। ये बांग्ला के सुप्रसिद्ध लेखक बिभूतिभूषण बंद्योपाध्याय के लेखन पर आधारित थीं। इनमें हॉलिवुड और जाँ रेन्वर का प्रभाव देखा जा सकता है। .

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अभियान (१९६२ फ़िल्म)

अभियान 1962 में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। .

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अमिताभ बच्चन

अमिताभ बच्चन (जन्म-११ अक्टूबर, १९४२) बॉलीवुड के सबसे लोकप्रिय अभिनेता हैं। १९७० के दशक के दौरान उन्होंने बड़ी लोकप्रियता प्राप्त की और तब से भारतीय सिनेमा के इतिहास में सबसे प्रमुख व्यक्तित्व बन गए हैं। बच्चन ने अपने करियर में कई पुरस्कार जीते हैं, जिनमें तीन राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार और बारह फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार शामिल हैं। उनके नाम सर्वाधिक सर्वश्रेष्ठ अभिनेता फ़िल्मफेयर अवार्ड का रिकार्ड है। अभिनय के अलावा बच्चन ने पार्श्वगायक, फ़िल्म निर्माता और टीवी प्रस्तोता और भारतीय संसद के एक निर्वाचित सदस्य के रूप में १९८४ से १९८७ तक भूमिका की हैं। इन्होंने प्रसिद्द टी.वी.

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अरण्येर दिनरात्रि (१९७० फ़िल्म)

अरण्येर दिनरात्रि 1970 में बनी बांग्ला भाषा की फिल्म है। .

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अशनि संकेत (१९७३ फ़िल्म)

अशनि संकेत 1973 में बनी बांग्ला भाषा की फिल्म है। .

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उत्तोरण (1994 फ़िल्म)

उत्तोरण 1994 में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। .

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उदय शंकर

उदय शंकर (8 दिसम्बर 1900 - 26 सितंबर 1977) (উদয় শংকর) भारत में आधुनिक नृत्य के जन्मदाता और एक विश्व प्रसिद्ध भारतीय नर्तक एवं नृत्य-निर्देशक (कोरियोग्राफर) थे जिन्हें अधिकतर भारतीय शास्त्रीय, लोक और जनजातीय नृत्य के तत्वों में पिरोये गए पारंपरिक भारतीय शास्त्रीय नृत्य में पश्चिमी रंगमंचीय तकनीकों को अपनाने के लिए जाना जाता है; इस प्रकार उन्होंने आधुनिक भारतीय नृत्य की नींव रखी और बाद में 1920 और 1930 के दशक में उसे भारत, यूरोप और संयुक्त राज्य अमेरिका में लोकप्रिय बनाया और भारतीय नृत्य को दुनिया के मानचित्र पर प्रभावशाली ढंग से स्थापित किया। न्यूयॉर्क टाइम्स, 6 अक्टूबर 1985.

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ऋत्विक घटक

ऋत्विक घटक (ঋত্বিক (কুমার) ঘটক, ऋतिक (कुमार) घोटोक; 4 नवम्बर 1925 से 6 फ़रवरी 1976) एक बंगाली भारतीय फिल्म निर्माता और पटकथा लेखक थे। भारतीय फिल्म निर्देशकों के बीच घटक का स्थान सत्यजीत रे और मृणाल सेन के समान है। .

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१९२१

1921 ग्रेगोरी कैलंडर का एक साधारण वर्ष है। .

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१९६५ में पद्म भूषण धारक

श्रेणी:पद्म भूषण श्रेणी:चित्र जोड़ें.

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२ मई

२ मई ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का १२२वॉ (लीप वर्ष मे १२३वॉ) दिन है। साल मे अभी और २४३ दिन बाकी है। .

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