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श्वसन तंत्र

सूची श्वसन तंत्र

श्वसन तंत्र का योजनामूलक चित्र श्वसन तंत्र या 'श्वासोच्छ्वास तंत्र' में सांस संबंधी अंग जैसे नाक, स्वरयंत्र (Larynx), श्वासनलिका (Wind Pipe) और फुफ्फुस (Lungs) आदि शामिल हैं। शरीर के सभी भागों में गैसों का आदान-प्रदान (gas exchange) इस तंत्र का मुक्य कार्य है। .

9 संबंधों: दीर्घकालिक थकान संलक्षण, बाल्यकाल स्थूलता (बच्चों में मोटापा), श्वसन तंत्र के रोग, श्वसन पथ, श्वास कष्ट (डिस्पनिया), स्वायत्त तंत्रिका प्रणाली, ओजोन थेरेपी, आत्महत्या के तरीके, अंग तंत्र

दीर्घकालिक थकान संलक्षण

दीर्घकालिक थकान संलक्षण (क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम) (सीएफएस) कई प्रकार से कमजोरी पैदा करने वाले विकार या विकारों को दिया जाने वाला सबसे आम नाम है, जिन्हें सामान्यतः परिश्रम से असंबंधित और निरंतर बनी रहने वाली थकान के रूप में परिभाषित किया जाता है; ऐसी थकान में विश्राम द्वारा अधिक कमी नहीं होती है एवं कम से कम छः महीने की अवधि तक अन्य विशेष रोग लक्षण भी मौजूद रहते हैं। इस विकार को पोस्ट वायरल फटीग सिंड्रोम (पीवीएफएस, जब फ्लू जैसी बीमारी के बाद यह स्थिति उत्पन्न होती है), मायाल्जिक एन्सिफेलोमाइलाइटिस (एमई) या कई अन्य नामों द्वारा भी संदर्भित किया जा सकता है। सीएफएस में रोग प्रक्रिया विभिन्न किस्म की तंत्रिका संबंधी, रोगप्रतिरक्षा संबंधी एवं अंत:स्रावी प्रणाली की असामान्यताओं को प्रदर्शित करती है। हालांकि इसे विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा तंत्रिका तंत्र के रोग रूप में वर्गीकृत किया गया है, सीएफएस रोग के कारणों का इतिहास (कारण या उत्पत्ति) अभी ज्ञात नहीं है एवं कोई निदानकारी प्रयोगशाला परीक्षण या शारीरिक संकेतक भी ज्ञात नहीं है। थकान कई बीमारियों का आम लक्षण है, लेकिन सीएफएस एक बहु-प्रणालिक रोग है एवं तुलनात्मक रूप से अपेक्षाकृत दुर्लभ है। सीएफएस के रोग लक्षणों में परिश्रम संबंधी रुग्णता; ताजगी रहित निद्रा; मांसपेशी और जोड़ों में व्यापक दर्द; संज्ञानात्मक कठिनाइयां, क्रॉनिक (चिरकालिक), अक्सर तीव्र, मानसिक और शारीरिक थकावट; एवं पहले स्वस्थ तथा क्रियाशील रहने वाले व्यक्ति में अन्य लाक्षणिक रोगलक्षण.

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बाल्यकाल स्थूलता (बच्चों में मोटापा)

बाल्यकाल स्थूलता एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर में उपस्थित अतिरिक्त वसा बच्चे के स्वास्थ्य को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती है। चूंकि प्रत्यक्ष रूप से शारीरिक वसा के मापन की विधियां कठिन हैं, मोटापे या स्थूलता का निदान अक्सर बीएमआई पर आधारित होता है। बच्चों में स्थूलता या मोटापे की स्थिति बढती जा रही है और मोटापा स्वास्थ्य पर कई प्रतिकूल प्रभाव डालता है। इसीलिए इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य से सम्बंधित एक गंभीर चिंता का विषय माना जाता है। ऐसे बच्चों को अक्सर स्थूलता से पीड़ित नहीं कहा जाता बल्कि ऐसा कहा जाता है कि उनका वजन अधिक है या वे ओवरवेट हैं, क्योंकि यह सुनने में कम बुरा लगता है। .

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श्वसन तंत्र के रोग

श्वसन तंत्र के रोगों में फेफड़ों के रोग, श्वासनली के रोग सहित इस तंत्र के अन्य रोग शामिल हैं। श्वसन तंत्र के रोगों में स्वयंसीमित सर्दी-जुकाम से लेकर जीवाणुजन्य न्यूमोनिया जैसे घातक रोग हैं। .

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श्वसन पथ

मानव में श्वसन पथ (respiratory tract), श्वसन तंत्र का वह भाग है जो साँस लेने और छोड़ने से सम्बन्धित है। श्रेणी:श्वसन en:Respiratory tract.

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श्वास कष्ट (डिस्पनिया)

डिस्पनिया (Dyspnea) (जिसकी अंग्रेज़ी वर्तनी dyspnoea भी है) या (श्वास की लघुता (एसओबी), श्वास क्षुधा), श्वासल्पता का व्यक्तिपरक लक्षण है। यह अत्यधिक श्रम का एक आम लक्षण होता है तथापि यदि यह अप्रत्याशित स्थिति में उत्पन्न हो तो यह एक रोग बन जाता है। 85% मामलों में इसका कारण होता है: अस्थमा, निमोनिया, हृदय इशेमिया, छिद्रपूर्ण फेफड़ों के रोग, रक्तसंलयी हृदय विफलता, क्रोनिक प्रतिरोधी फेफड़े का रोग, या कुछ कारण साइकोजेनिक होते हैं। आमतौर पर इसका उपचार अंतर्निहित कारणों पर निर्भर करता है। .

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स्वायत्त तंत्रिका प्रणाली

स्वायत्त तंत्रिका प्रणाली (एएनएस या सहज-ज्ञान तंत्रिका प्रणाली) मुख्य तंत्रिका प्रणाली का एक भाग है जो मूल रूप से चेतना के स्तर के नीचे नियंत्रण तंत्र के रूप में कार्य करती है और सहज प्रकार्यों को नियंत्रित करती है। एएनएस का प्रभाव ह्रदय गति, पाचन क्रिया, श्वांस गति, लार निकलना, पसीना निकलना, आंख की पुतलियों का व्यास, मिक्टूरीशन (मूत्र), तथा यौन उत्तेजना पर पड़ता है। हालांकि इसके अधिकांश कार्य अवचेतन रूप से होते हैं, फिर भी कुछ चेतन मस्तिष्क द्वारा नियंत्रित किये जा सकते हैं जैसे श्वांस लेना.

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ओजोन थेरेपी

एक चिकित्सकीय ओज़ोन जनरेटर।सौजन्य: http://www.medpolinar.com/eng_version/ozon.htm www.medpolinar.com ओजोन थेरेपी में ओजोन और ऑक्सीजन के मिश्रण को मनुष्य के शरीर के लाभ हेतु प्रयोग किया जाता है। ओजोन एंटीऑक्सीडेंट प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने में सक्षम है, इसलिए यह ऑक्सीडेटिव मानसिक तनाव को कम कर सकता है। ओजोन का यह एंटीऑक्सीडेंट प्रतिरोधक तंत्र विकिरण और कीमोथेरेपी के दौरान पैदा होने वाले रेडिकल्स को संतुलित करता है।। हिन्दुस्तान लाइव। ९ मई २०१० चाहे शरीर में शीघ्र थकान होने की शिकायत हो, सुस्ती अनुभव होती हो, छाती में दर्द की समस्या हो या उच्च रक्तचाप, कोलेस्ट्राल वृद्धि, मधुमेह आदि की चिंता हो, या कैंसर से लेकर एचआईवी जैसे घातक रोगों में, ओजोन थेरेपी इन सभी में वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति के रूप में समान रूप से सहायक हो सकती है। यह अल्पजीवी गैस शरीर के अंदर जाकर ऑक्सीकरण प्रक्रिया को तेज करने के साथ-साथ ऑक्सीजन को फेफड़ों से लेकर शरीर की सभी कोशिकाओं तक ले जाने की क्षमता बढ़ा देती है। इससे शरीर द्वारा बनाये गए अफल विषैले तत्वों को बाहर निकालने एवं क्षय हो रही ऊर्जा के पुनर्संचय में मदद मिलती है। .

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आत्महत्या के तरीके

आत्महत्या का तरीके खोजने वालों को भारत में आसरा नामक संस्था परामर्श देती हैं जिसका दूरभाष क्रमांक 022 2754 6669 है। उस संस्था का अधिकृत जालस्थान www.aasra.info है। आत्महत्या का तरीका ऐसी किसी भी विधि को कहते हैं जिसके द्वारा एक या अधिक व्यक्ति जान-बूझकर अपनी जान ले लेते हैं। आत्महत्या के तरीकों को जीवन लीला समाप्त करने की दो विधियों के अनुसार वर्गीकृत किया जा सकता है: शारीरिक या रासायनिक.

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अंग तंत्र

तंत्र का एक उदाहरण - तंत्रिका तंत्र; इस चित्र में दिखाया गया है कि यह तंत्र मूलत: चार अंगों से मिलकर बना है: मस्तिष्क, प्रमस्तिष्क (cerebellum), मेरुदण्ड (spinal cord) तथा तंत्रिकाएं (nerve) नाना प्रकार के ऊतक (tissue) मिलकर शरीर के विभिन्न अंगों (organs) का निर्माण करते हैं। इसी प्रकार, एक प्रकार के कार्य करनेवाले विभिन्न अंग मिलकर एक अंग तंत्र (organ system) का निर्माण करते हैं। कई अंग तंत्र मिलकर जीव (जैसे, मानव शरीर) की रचना करते हैं। .

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