लोगो
यूनियनपीडिया
संचार
Google Play पर पाएं
नई! अपने एंड्रॉयड डिवाइस पर डाउनलोड यूनियनपीडिया!
डाउनलोड
ब्राउज़र की तुलना में तेजी से पहुँच!
 

शरीरक्रिया विज्ञान

सूची शरीरक्रिया विज्ञान

शरीरक्रियाविज्ञान या कार्यिकी (Physiology/फ़िज़ियॉलोजी) के अंतर्गत प्राणियों से संबंधित प्राकृतिक घटनाओं का अध्ययन और उनका वर्गीकरण किया जाता है, साथ ही घटनाओं का अनुक्रम और सापेक्षिक महत्व के साथ प्रत्येक कार्य के उपयुक्त अंगनिर्धारण और उन अवस्थाओं का अध्ययन किया जाता है जिनसे प्रत्येक क्रिया निर्धारित होती है। शरीरक्रियाविज्ञान चिकित्सा विज्ञान की वह शाखा है जिसमें शरीर में सम्पन्न होने वाली क्रियाओं का अध्ययन किया जाता है। इसके अन्तर्गत मनुष्य या किसी अन्य प्राणी/पादप के शरीर में मौजूद भिन्न-भिन्न अंगों एवं तन्त्रों (Systems) के कार्यों और उन कार्यों के होने के कारणों के साथ-साथ उनसे सम्बन्धित चिकित्सा विज्ञान के नियमों का भी ज्ञान दिया जाता है। उदाहरण के लिए कान सुनने का कार्य करते है और आंखें देखने का कार्य करती हैं लेकिन शरीर-क्रिया विज्ञान सुनने और देखने के सम्बन्ध में यह ज्ञान कराती है कि ध्वनि कान के पर्दे पर किस प्रकार पहुँचती है और प्रकाश की किरणें आंखों के लेंसों पर पड़ते हुए किस प्रकार वस्तु की छवि मस्तिष्क तक पहुँचती है। इसी प्रकार, मनुष्य जो भोजन करता है, उसका पाचन किस प्रकार होता है, पाचन के अन्त में उसका आंतों की भित्तियों से अवशोषण किस प्रकार होता है, आदि। .

26 संबंधों: चिंता, तंत्रिका शरीर विज्ञान, दीर्घकालिक थकान संलक्षण, पशु चिकित्सा विज्ञान, पशुधन, पादपकार्यिकी, बालचिकित्सा, बैचलर ऑफ़ आयुर्वेद मेडिसिन एंड सर्जरी, मानव शरीर, मृत्यु, यूज़र इंटरफ़ेस, लड़ो-या-भागो अनुक्रिया, लिओनार्दो दा विंची, शारीरिक शिक्षा, शारीरिकी, साहित्य में नोबेल पुरस्कार, हाइपरप्लासिया, जैवसांख्यिकी, वातानुकूलन, वाल्व, विलियम बाउमैन, वेटिंग फ़ॉर गोडोट, आयुर्विज्ञान, आकृति-विज्ञान, काव्यशास्त्र, उद्दीपक (शरीरविज्ञान)

चिंता

चिंता संज्ञानात्मक, शारीरिक, भावनात्मक और व्यवहारिक विशेषतावाले घटकों की मनोवैज्ञानिक और शारीरिक दशा है।सेलिगमैन, एम्.इ.पी., वॉकर, इ.ऍफ़.

नई!!: शरीरक्रिया विज्ञान और चिंता · और देखें »

तंत्रिका शरीर विज्ञान

तंत्रिका शरीर विज्ञान (Neurophysiology) शरीर क्रिया विज्ञान और तंत्रिका विज्ञान की एक शाखा है जो तन्त्रिका तन्त्र के चलन से सम्बन्धित है। इसके अध्ययन में शारिरिक विद्युत का मापन विशेष महत्व रखता है, हालांकि अणुजैविकी और अन्य क्षेत्र भी महत्वपूर्ण हैं। .

नई!!: शरीरक्रिया विज्ञान और तंत्रिका शरीर विज्ञान · और देखें »

दीर्घकालिक थकान संलक्षण

दीर्घकालिक थकान संलक्षण (क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम) (सीएफएस) कई प्रकार से कमजोरी पैदा करने वाले विकार या विकारों को दिया जाने वाला सबसे आम नाम है, जिन्हें सामान्यतः परिश्रम से असंबंधित और निरंतर बनी रहने वाली थकान के रूप में परिभाषित किया जाता है; ऐसी थकान में विश्राम द्वारा अधिक कमी नहीं होती है एवं कम से कम छः महीने की अवधि तक अन्य विशेष रोग लक्षण भी मौजूद रहते हैं। इस विकार को पोस्ट वायरल फटीग सिंड्रोम (पीवीएफएस, जब फ्लू जैसी बीमारी के बाद यह स्थिति उत्पन्न होती है), मायाल्जिक एन्सिफेलोमाइलाइटिस (एमई) या कई अन्य नामों द्वारा भी संदर्भित किया जा सकता है। सीएफएस में रोग प्रक्रिया विभिन्न किस्म की तंत्रिका संबंधी, रोगप्रतिरक्षा संबंधी एवं अंत:स्रावी प्रणाली की असामान्यताओं को प्रदर्शित करती है। हालांकि इसे विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा तंत्रिका तंत्र के रोग रूप में वर्गीकृत किया गया है, सीएफएस रोग के कारणों का इतिहास (कारण या उत्पत्ति) अभी ज्ञात नहीं है एवं कोई निदानकारी प्रयोगशाला परीक्षण या शारीरिक संकेतक भी ज्ञात नहीं है। थकान कई बीमारियों का आम लक्षण है, लेकिन सीएफएस एक बहु-प्रणालिक रोग है एवं तुलनात्मक रूप से अपेक्षाकृत दुर्लभ है। सीएफएस के रोग लक्षणों में परिश्रम संबंधी रुग्णता; ताजगी रहित निद्रा; मांसपेशी और जोड़ों में व्यापक दर्द; संज्ञानात्मक कठिनाइयां, क्रॉनिक (चिरकालिक), अक्सर तीव्र, मानसिक और शारीरिक थकावट; एवं पहले स्वस्थ तथा क्रियाशील रहने वाले व्यक्ति में अन्य लाक्षणिक रोगलक्षण.

नई!!: शरीरक्रिया विज्ञान और दीर्घकालिक थकान संलक्षण · और देखें »

पशु चिकित्सा विज्ञान

एक गधे के घाव को साफ करने का तरीका सिखाते हुए पशु-तकनीशियन पशु-चिकित्सा-विज्ञान (Veterinary medicine) में मनुष्येतर जीवों की शरीररचना (anatomy), शरीरक्रिया (physiology), विकृतिविज्ञान (pathology), भेषज (medicine) तथा शल्यकर्म (surgery) का अध्ययन होता है। पशुपालन शब्द से साधारणतया स्वस्थ पशुओं के वैज्ञानिक ढंग से आहार, पोषण, प्रजनन, एवं प्रबंध का बोध होता है। पाश्चात्य देशों में पशुपालन एवं पशुचिकित्सा दोनों भिन्न-भिन्न माने गए हैं पर भारत में ये दोनों एक दूसरे के सूचक समझे जाते हैं। .

नई!!: शरीरक्रिया विज्ञान और पशु चिकित्सा विज्ञान · और देखें »

पशुधन

घरेलू भेड़ और एक गाय (बछिया) दक्षिण अफ्रीका में एक साथ चराई करते हुए एक या अधिक पशुओं के समूह को, जिन्हें कृषि सम्बन्धी परिवेश में भोजन, रेशे तथा श्रम आदि सामग्रियां प्राप्त करने के लिए पालतू बनाया जाता है, पशुधन के नाम से जाना जाता है। शब्द पशुधन, जैसा कि इस लेख में प्रयोग किया गया है, में मुर्गी पालन तथा मछली पालन सम्मिलित नहीं है; हालांकि इन्हें, विशेष रूप से मुर्गीपालन को, साधारण रूप से पशुधन में सम्मिलित किया जाता हैं। पशुधन आम तौर पर जीविका अथवा लाभ के लिए पाले जाते हैं। पशुओं को पालना (पशु-पालन) आधुनिक कृषि का एक महत्वपूर्ण भाग है। पशुपालन कई सभ्यताओं में किया जाता रहा है, यह शिकारी-संग्राहक से कृषि की ओर जीवनशैली के अवस्थांतर को दर्शाता है। .

नई!!: शरीरक्रिया विज्ञान और पशुधन · और देखें »

पादपकार्यिकी

पादप क्रिया विज्ञान या पादपकार्यिकी (Plant physiology), वनस्पति विज्ञान की वह शाखा है जो पादपों के कार्यिकी (physiology) से सम्बन्धित है। .

नई!!: शरीरक्रिया विज्ञान और पादपकार्यिकी · और देखें »

बालचिकित्सा

बाल बहुनिद्रांकन (Pediatric polysomnography) बालचिकित्सा (Pediatrics) या बालरोग विज्ञान चिकित्सा विज्ञान की वह शाखा है जो शिशुओं, बालों एवं किशोरों के रोगों एवं उनकी चिकत्सा से सम्बन्धित है। आयु की दृष्टि से इस श्रेणी में नवजात शिशु से लेकर १२ से २१ वर्ष के किशोर तक आ जाते हैँ। इस श्रेणी के उम्र की उपरी सीमा एक देश से दूसरे देश में अलग-अलग है। .

नई!!: शरीरक्रिया विज्ञान और बालचिकित्सा · और देखें »

बैचलर ऑफ़ आयुर्वेद मेडिसिन एंड सर्जरी

बैचलर ऑफ आयुर्वेद मेडिसिन एंड सर्जरी (Bachelor of Ayurvedic Medicine and Surgery (B.A.M.S.)) भारत में चिकित्सा की एक डिग्री है। यह १२वीं कक्षा के बाद साढ़े पाँच वर्ष की अवधि में पूरी की जाती है, जिसमें एक वर्ष का इंटर्नशिप भी सम्मिलित है। बीएएमएस का डिग्रीधारी व्यक्ति भारत में कहीं भी प्रैक्टिस कर सकता है। इस पाठ्यक्रम में शरीररचना विज्ञान, शरीरक्रिया विज्ञान, चिकित्सा के सिद्धान्त, रोगों से बचाव तथा सामाजिक चिकित्सा, फर्माकोलोजी, विषविज्ञान (toxicology), फोरेंसिक चिकित्सा, कान-नाक-गले की चिकित्सा, आँख की चिकित्सा, शल्यक्रिया के सिद्धान्त आदि का पठन-पाठन होता ही है इसके साथ ही आयुर्वेद की भी शिक्षा दी जाती है। कुछ विशेषज्ञों का मत है कि भविष्य में बीएएमएस और एमबीबीएस का एकीकरण किया जा सकता है। .

नई!!: शरीरक्रिया विज्ञान और बैचलर ऑफ़ आयुर्वेद मेडिसिन एंड सर्जरी · और देखें »

मानव शरीर

मानव शरीर मानव शरीर एक मानव जीव की संपूर्ण संरचना है, जिसमें एक सिर, गर्दन, धड़, दो हाथ और दो पैर होते हैं। किसी मानव के वयस्क होने तक उसका शरीर लगभग 50 ट्रिलियन कोशिकाओं, जो कि जीवन की आधारभूत इकाई हैं, से मिल कर बना होता है। इन कोशिकाओं के जीववैज्ञानिक संगठन से अंतत: पूरे शरीर की रचना होती है। .

नई!!: शरीरक्रिया विज्ञान और मानव शरीर · और देखें »

मृत्यु

मानव खोपड़ी मौत के लिए एक सार्वभौमिक प्रतीक है। किसी प्राणी के जीवन के अन्त को मृत्यु कहते हैं। मृत्यु सामान्यतः दुर्घटना, चोट, बीमारी, कुपोषण के परिणामस्वरूप होती है। आँख "अनन्त जीवन के लिए प्राचीन मिस्र के प्रतीक है।" वे और कई अन्य संस्कृतियों के बाद से एक पोर्टल के रूप में एक जीवन के बाद में जैविक मौत देखी है। .

नई!!: शरीरक्रिया विज्ञान और मृत्यु · और देखें »

यूज़र इंटरफ़ेस

मानव-मशीन अन्योन्यक्रिया के औद्योगिक डिज़ाइन क्षेत्र में यूज़र इंटरफ़ेस वह स्थल है जहां इंसान और मशीनों के बीच अन्योन्यक्रिया स्थापित होती है। यूज़र इंटरफ़ेस में एक इंसान और एक मशीन के बीच अन्योन्यक्रिया का लक्ष्य मशीन का प्रभावी संचालन, नियंत्रण और मशीन की प्रतिक्रिया है जिससे ऑपरेटर को प्रचालनात्मक निर्णय लेने में सहायता मिलती है। यूज़र इंटरफ़ेस की इस व्यापक अवधारणा के उदाहरणों में कंप्यूटर ऑपरेटिंग सिस्टम, हैंड टूल्स, भारी मशीनरी संचालन नियंत्रण और प्रक्रिया नियंत्रण शामिल हैं। यूज़र इंटरफ़ेस बनाते समय डिज़ाइन संबंधी आवश्यक बातें कर्मचारी परिस्थिति विज्ञान और मनोविज्ञान जैसी विधाओं से संबंधित या के रूप में शामिल होती हैं। एक यूज़र इंटरफ़ेस वह प्रणाली है जिसके द्वारा लोगों (उपयोगकर्ता) की मशीन के साथ अन्योन्यक्रिया होती हैं। यूज़र इंटरफ़ेस में हार्डवेयर (भौतिक) और सॉफ्टवेयर (तार्किक) घटक शामिल होते हैं। विभिन्न सिस्टम के लिए यूज़र इंटरफ़ेस होते हैं और ये माध्यम बनते हैं.

नई!!: शरीरक्रिया विज्ञान और यूज़र इंटरफ़ेस · और देखें »

लड़ो-या-भागो अनुक्रिया

लड़ो-या-भागो अनुक्रिया (Fight-or-flight response) शरीर-क्रियात्‍मक एक प्रतिक्रिया है जो किसी अनुमानित हानिकारक घटना, हमले, या अस्तित्व के लिए खतरे के प्रति अनुक्रिया के रूप में घटती है। वाल्टर ब्रैडफोर्ड कैनन ने इसका पहली बार वर्णन किया था। .

नई!!: शरीरक्रिया विज्ञान और लड़ो-या-भागो अनुक्रिया · और देखें »

लिओनार्दो दा विंची

फ्लोरेंस में लिओनार्दो की मूर्ति लिओनार्दो दा विंची (Leonardo da Vinci, 1452-1519) इटलीवासी, महान चित्रकार, मूर्तिकार, वास्तुशिल्पी, संगीतज्ञ, कुशल यांत्रिक, इंजीनियर तथा वैज्ञानिक था। .

नई!!: शरीरक्रिया विज्ञान और लिओनार्दो दा विंची · और देखें »

शारीरिक शिक्षा

शारीरिक शिक्षा की सामग्री शारीरिक शिक्षा (Physical education) प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा के समय में पढ़ाया जाने वाला एक पाठ्यक्रम है। इस शिक्षा से तात्पर्य उन प्रक्रियाओं से है जो मनुष्य के शारीरिक विकास तथा कार्यों के समुचित संपादन में सहायक होती है। .

नई!!: शरीरक्रिया विज्ञान और शारीरिक शिक्षा · और देखें »

शारीरिकी

अंगूठाकार शारीरिकी, शारीर या शरीररचना-विज्ञान (अंग्रेजी:Anatomy), जीव विज्ञान और आयुर्विज्ञान की एक शाखा है जिसके अंतर्गत किसी जीवित (चल या अचल) वस्तु का विच्छेदन कर, उसके अंग प्रत्यंग की रचना का अध्ययन किया जाता है। अचल में वनस्पतिजगत तथा चल में प्राणीजगत का समावेश होता है और वनस्पति और प्राणी के संदर्भ में इसे क्रमश: पादप शारीरिकी और जीव शारीरिकी कहा जाता है। जब किसी विशेष प्राणी अथवा वनस्पति की शरीररचना का अध्ययन किया जाता है, तब इसे विशेष शारीरिकी (अंग्रेजी:Special Anatomy) अध्ययन कहते हैं। जब किसी प्राणी या वनस्पति की शरीररचना की तुलना किसी दूसरे प्राणी अथवा वनस्पति की शरीररचना से की जाती है उस स्थिति में यह अध्ययन तुलनात्मक शारीरिकी (अंग्रेजी:Comparative Anatomy) कहलाता है। जब किसी प्राणी के अंगों की रचना का अध्ययन किया जाता है, तब यह आंगिक शारीरिकी (अंग्रेजी:Regional Anatomy) कहलाती है। .

नई!!: शरीरक्रिया विज्ञान और शारीरिकी · और देखें »

साहित्य में नोबेल पुरस्कार

1901 में सुली प्रुधोम (1839-1907), एक फ्रांसीसी कवि और निबंधकार, साहित्य में नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाले प्रथम व्यक्ति थे। 1901 से, साहित्य के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार (Nobelpriset i litteratur) वार्षिक रूप से किसी भी देश के उस लेखक को दिया जाता है जिसने, सर अल्फ्रेड नोबेल की वसीयत के अनुसार, "साहित्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया हो" (मूल स्वीडिश den som inom litteraturen har producerat det utmärktaste i idealisk riktning)। यद्यपि व्यक्ति का काम कभी कभी विशेष रूप से उल्लेखनीय नहीं होता, यहां पर काम से तात्पर्य पूरी तरह से लेखक के काम से है। इस बात का निर्णय स्वीडिश अकादमी ही लेती है कि किस वर्ष में यह पुरस्कार किसे दिया जाये.

नई!!: शरीरक्रिया विज्ञान और साहित्य में नोबेल पुरस्कार · और देखें »

हाइपरप्लासिया

हाइपरप्लासिया या अतिवर्धन (या "अतिजननता") एक सामान्य शब्द है जो किसी अंग या ऊतक के भीतर कोशिकाओं की वृद्धि को संदर्भित करता है जिसके परे इसे सामान्य रूप से देखा जाता है। हाइपरप्लासिया (अतिविकसन) के परिणामस्वरूप किसी अंग की अति वृद्धि हो सकती है एवं इस शब्द को कभी-कभी सुसाध्य नीओप्लासिया/सुसाध्य ट्यूमर (अर्बुद) के साथ मिश्रित किया जाता है। हाइपरप्लासिया उद्दीपन के प्रति एक सामान्य पूर्व-नीओप्लास्टिक प्रतिक्रिया है। सूक्ष्मदर्शी रूप से कोशिकाएं सामान्य कोशिकाओं के समान होती हैं लेकिन वे संख्याओं में बढ़ी हुई होती हैं। कभी-कभी कोशिकाएं आकार में भी बढ़ी हुई (हाइपरट्रॉफिया-अतिवृद्धि) हो सकती हैं। हाइपरप्लासिया, अतिवृद्धि से इस अर्थ में भिन्न होती है कि अतिवृद्धि में अनुकूल कोशिका परिवर्तन के रूप में कोशिका के आकार में परिवर्तन होता है, जबकि हाइपरप्लासिया में कोशिकाओं की संख्या में वृद्धि होती है।हाइपरप्लासिया तथा हाइपरट्रॉफी के बीच अंतर को दिखाने के लिए एक सरल उदाहरण. .

नई!!: शरीरक्रिया विज्ञान और हाइपरप्लासिया · और देखें »

जैवसांख्यिकी

जीवसांख्यिकी (Biometry) जीवसांख्यिकी का शाब्दिक अर्थ होता है जीवधारियों से संबंधित संख्या का विज्ञान। यह जीव विज्ञान की एक शाखा है। गणित और आँकड़े की विधि के प्रयोग द्वारा जीवित वस्तुओं के जैव गुणों का वर्णन और वर्गीकरण जीवसांख्यिकी कहलाता है। इसका संबंध विशेषत: आँकड़े (Statistics) की विधि से जैव पदार्थों में विभिन्नता, उनकी आबादी संबंधी समस्याएँ और उनमें किस आवृत्ति (frequency) से घटनाएँ घटित होती हैं, इत्यादि के विश्लेषण से हैं। जीवसांख्यिकी का क्षेत्र सीमित और केवल जैव वस्तुओं से संबंधित है। सांख्यिकीविद् प्रथम बड़े पैमाने पर प्रेक्षण करते हैं। वे इन प्रेक्षणों को क्रमबद्ध करके इनका सारांश निकालने की चेष्टा करते हैं। इस सारांश के आधार पर प्रेक्षित जाति (species) के जीव का एक ऐसा साधारण और व्यापक वर्णन करते हैं जो उस पूरे जीवसमूह पर लागू हो। चूँकि जैव आँकड़े बहुत ही परिवर्ती होते हैं, अतएव इस विभिन्नता से उत्पन्न कठिनाइयों को सुलझाने और ठीक ठीक तर्क स्थापित करने के हेतु ही मुख्यत: जीवसांख्यिकी विधि का विकास हुआ है। .

नई!!: शरीरक्रिया विज्ञान और जैवसांख्यिकी · और देखें »

वातानुकूलन

वातानुकूलक उपकरण का वह भाग जो कमरों के अन्दर लगाया जाता है किसी निश्चित क्षेत्र अथवा कक्षा के ताप, आर्द्रता, वायु की गति तथा वायुमंडल के स्तर के स्वतंत्र अथवा एक साथ की नियंत्रण क्रिया को वातानुकूलन (Air-conditoning) कहा जाता है। वातानुकूलित क्षेत्र के ताप, आर्द्रता, वायु की गति तथा वायुमंडल के स्तर में विभिन्न कारकों का नियंत्रण आवश्यकतानुसार विभिन्न स्तरों पर किया जाता है। सामान्यत; वातानुकूलन का उद्देश्य शारीरिक सुख तथा औद्योगिक सुविधा प्रदान करना होता है। शारीरिक सुख के लिए ऊष्मा-संबंधी उपयुक्त एवं सुखप्रद परिस्थितियों को उत्पन्न करने में कक्ष के ताप, आर्द्रता, वायु की गति एवं वायुमंडल के स्तर को शरीरक्रिया विज्ञान की दृष्टि से निश्चित सीमाओं के भीतर नियंत्रित किया जाता है। जब औद्योगिक उद्देश्यों के लिए, जैसे विभिन्न संगृहीत पदार्थों की सुरक्षा के लिए, वस्त्र एवं सूत तथा संश्लिष्ट रेशों के उत्पादन में, अथवा छपाई में, वातानुकूलन का उपयोग होता है, उस समय प्रक्रम तथा औद्योगिक आवश्यकतानुसार विभिन्न स्तरों पर उपर्युक्त वातानुकूलन कारकों का निर्धारण किया जाता है। .

नई!!: शरीरक्रिया विज्ञान और वातानुकूलन · और देखें »

वाल्व

एक वाल्व और उसकी आन्तरिक संरचना वाल्व (Valve) वे यांत्रिक युक्तियाँ हैं जिनका उपयोग पाइप तथा जैविक वाहिकाओं (vessels) में तरल के प्रवाह को रोकने के लिए किया जाता है1 शरीर-क्रिया विज्ञान (physiology) में भी इस शब्द (वाल्व) का प्रयोग उन प्राकृतिक युक्तियों के लिए किया जाता है, जो शरीर में वे ही कार्य करती हैं जिन्हें यांत्रिक वाल्व करते हैं। इन प्राकृतिक युक्तियों में हृदय के वाल्व उल्लेखनीय हैं, जो खुलकर या बंद होकर हृदयकोष्ठ से रक्त के प्रवाह को नियंत्रित करते हैं। .

नई!!: शरीरक्रिया विज्ञान और वाल्व · और देखें »

विलियम बाउमैन

विलियम बाउमैन (सन् १७८५ - १८५३) अमरीकी सेना में शरीरक्रिया वैज्ञानिक थे जो 'जठर क्रियाविज्ञान के जनक' (Father of Gastric Physiology) कहे जाते हैं।, National Library of Medicine इनहोने मानव के पाचनतंत्र पर बहुत महत्वपूर्ण कार्य किया था। इनका जन्म कृषक परिवार में हुआ था। यह कुशाग्रबुद्धि बालक आगे चलकर प्रसिद्ध वैज्ञानिक हुआ। चिकित्सा विज्ञान की शिक्षा इन्होंने वैयक्तिक रूप से एक चिकित्सक से पाई और वरमांट राज्य की तृतीय मेडिकल सोसायिटी से चिकित्सावृत्ति का लाइसेंस प्राप्त किया। बाद में ये अमरीकी सेना में सर्जन के पद पर नियुक्त हो गए। शरीररचना और उसके कार्य से संबंधित अनेक बातें उन दिनों अज्ञात थीं। बाउमैंन ने अनुसन्धान किया और बताया कि आमाशय के पाचक रस क्या कार्य करते हैं और कब तक किन अवस्थाओं में यह रस नहीं बनता। बाउमैन ने पाचन के रासायनिक रूप की सूत्रमाण स्थापना की। इन कार्यों की उनके शोधप्रबंध एक्सपेरिमेंट्स ऐंड आब्ज़रवेशंस में विस्तार से चर्चा है। शरीर क्रिया विज्ञान में बाउमैन का अनुदान महत्त्वपूर्ण है। इन्होंने प्रयोग और अवलोकन को नई दिशा प्रदान की। .

नई!!: शरीरक्रिया विज्ञान और विलियम बाउमैन · और देखें »

वेटिंग फ़ॉर गोडोट

वेटिंग फॉर गोडोट शमूएल बेकेट द्वारा रचित एक बेतुका नाटक है, जिसमें दो मुख्य पात्र व्लादिमीर और एस्ट्रागन एक अन्य काल्पनिक पात्र गोडोट के आने की अंतहीन व निष्फल प्रतीक्षा करते हैं। इस नाटक के प्रीमियर से अब तक गोडोट की अनुपस्थिति व अन्य पहलुओं को लेकर अनेक व्याख्यायें की जा चुकी हैं। इसे "बीसवीं सदी का सबसे प्रभावशाली अंग्रेजी भाषा का नाटक" भी बुलाया जा चुका है। असल में वेटिंग फॉर गोडोट बेकेट के ही फ्रेंच नाटक एन अटेंडेंट गोडोट का उनके स्वयं के द्वारा ही किया गया अंग्रेजी अनुवाद है तथा अंग्रेजी में इसे दो भागों की त्रासदी-कॉमेडी का उप-शीर्षक दिया गया है".

नई!!: शरीरक्रिया विज्ञान और वेटिंग फ़ॉर गोडोट · और देखें »

आयुर्विज्ञान

आधुनिक गहन चिकित्सा कक्ष (ICU) आयुर्विज्ञान, विज्ञान की वह शाखा है जिसका संबंध मानव शरीर को निरोग रखने, रोग हो जाने पर रोग से मुक्त करने अथवा उसका शमन करने तथा आयु बढ़ाने से है।आयुर्विज्ञान विज्ञान की वह शाखा है, जिसका संबंध मानव शरीर को निरोग रखने, रोग हो जाने पर रोग से मुक्त करने अथवा उसका निदान करने तथा आयु बढ़ाने से है। भारत आयुर्विज्ञान का जन्मदाता है। अपने प्रारम्भिक समय में आयुर्विज्ञान का अध्ययन जीव विज्ञान की एक शाखा के समान ही किया गया था। बाद में 'शरीर रचना' तथा 'शरीर क्रिया विज्ञान' आदि को इसका आधार बनाया गया। .

नई!!: शरीरक्रिया विज्ञान और आयुर्विज्ञान · और देखें »

आकृति-विज्ञान

आकृति-विज्ञान (अंग्रेजी: Morphology मॉर्फोलॉजी), जीव विज्ञान की एक शाखा है जिसके अंतर्गत किसी जीव की आकृति, उसकी संरचना और उसके विशिष्ट संरचनात्मक गुणों का अध्ययन किया जाता है। आकृति-विज्ञान के अंतर्गत किसी जीव की बाहरी रचना जैसे कि उसकी आकृति, संरचना, रंग, पैटर्नआदि पहलुओं के अतिरिक्त उसके आंतरिक अंगों जैसे कि अस्थियां, यकृत इत्यादि की आकृति और संरचना को भी शामिल किया जाता है। आकृति-विज्ञान, जीव विज्ञान की एक अन्य शाखा शरीर क्रिया विज्ञान (अंग्रेजी: Physiology फिजियोलॉजी), का ठीक विपरीत होता है, जिसमें विभिन्न अंगों के कार्यों का अध्ययन किया जाता है। .

नई!!: शरीरक्रिया विज्ञान और आकृति-विज्ञान · और देखें »

काव्यशास्त्र

काव्यशास्त्र काव्य और साहित्य का दर्शन तथा विज्ञान है। यह काव्यकृतियों के विश्लेषण के आधार पर समय-समय पर उद्भावित सिद्धांतों की ज्ञानराशि है। युगानुरूप परिस्थितियों के अनुसार काव्य और साहित्य का कथ्य और शिल्प बदलता रहता है; फलत: काव्यशास्त्रीय सिद्धांतों में भी निरंतर परिवर्तन होता रहा है। भारत में भरत के सिद्धांतों से लेकर आज तक और पश्चिम में सुकरात और उसके शिष्य प्लेटो से लेकर अद्यतन "नवआलोचना' (नियो-क्रिटिसिज्म़) तक के सिद्धांतों के ऐतिहासिक अनुशीलन से यह बात साफ हो जाती है। भारत में काव्य नाटकादि कृतियों को 'लक्ष्य ग्रंथ' तथा सैद्धांतिक ग्रंथों को 'लक्षण ग्रंथ' कहा जाता है। ये लक्षण ग्रंथ सदा लक्ष्य ग्रंथ के पश्चाद्भावनी तथा अनुगामी है और महान्‌ कवि इनकी लीक को चुनौती देते देखे जाते हैं। काव्यशास्त्र के लिए पुराने नाम 'साहित्यशास्त्र' तथा 'अलंकारशास्त्र' हैं और साहित्य के व्यापक रचनात्मक वाङमय को समेटने पर इसे 'समीक्षाशास्त्र' भी कहा जाने लगा। मूलत: काव्यशास्त्रीय चिंतन शब्दकाव्य (महाकाव्य एवं मुक्तक) तथा दृश्यकाव्य (नाटक) के ही सम्बंध में सिद्धांत स्थिर करता देखा जाता है। अरस्तू के "पोयटिक्स" में कामेडी, ट्रैजेडी, तथा एपिक की समीक्षात्मक कसौटी का आकलन है और भरत का नाट्यशास्त्र केवल रूपक या दृश्यकाव्य की ही समीक्षा के सिद्धांत प्रस्तुत करता है। भारत और पश्चिम में यह चिंतन ई.पू.

नई!!: शरीरक्रिया विज्ञान और काव्यशास्त्र · और देखें »

उद्दीपक (शरीरविज्ञान)

शरीरविज्ञान में उद्दीपक (stimulus) बाहरी या भीतरी परिवेश में हुए ऐसे किसी प्रतीत हो सकने वाले बदलाव को कहते हैं। उद्दीपन के जवाब में किसी जीव या अंग की प्रतिक्रिया करने की क्षमता को संवेदनशीलता (sensitivity) कहते हैं। .

नई!!: शरीरक्रिया विज्ञान और उद्दीपक (शरीरविज्ञान) · और देखें »

यहां पुनर्निर्देश करता है:

फ़िज़ियॉलोजी, शरीर क्रिया विज्ञान, शरीरविज्ञान, शरीरक्रियाविज्ञान, कार्यिकी

निवर्तमानआने वाली
अरे! अब हम फेसबुक पर हैं! »