लोगो
यूनियनपीडिया
संचार
Google Play पर पाएं
नई! अपने एंड्रॉयड डिवाइस पर डाउनलोड यूनियनपीडिया!
मुक्त
ब्राउज़र की तुलना में तेजी से पहुँच!
 

वित्त अधिनियम (भारत)

सूची वित्त अधिनियम (भारत)

वित्त अधिनियम (Finance Act) भारत का महत्वपूर्ण अधिनियम है। इस अधिनियम के द्वारा भारत सरकार प्रत्येक वित्त वर्ष के आरम्भ में वित्तीय प्रस्ताव रखती है। यह अधिनियम भारत के सभी राज्यों एवं केन्द्र शाशित प्रदेशों पर भी लागू होता है। प्रत्येक वर्ष वित्तमन्त्री द्वारा संसद में आय-व्यय का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया जाता है। भाग A में सरकार के वित्तीय क्षेत्र में प्रस्तावित नीतियों को दर्शाया जाता है। भाग B में प्रस्तावित कर बजट का वर्णन रहता है। इसे लागू करने के लिए संसद में वित्त विधेयक प्रस्तुत किया जाता है। जब इसे संसद से स्वीकृति मिल जाती है और राष्ट्रपति की सहमति प्राप्त हो जाती है तब यह 'वित्त अधिनियम' बन जाता है। वित्त अधिनियम की प्रथम अनुसूची में चार भाग होते हैं जिनमें दरें निर्दिष्ट होती हैं.

2 संबंधों: भारत में आयकर, भारतीय आयकर अधिनियम, १९६१

भारत में आयकर

भारत सरकार व्यक्तियों, हिंदू अविभाजित परिवारों (एचयूएफ), कंपनियां, फर्मों, सहकारी समितियों और ट्रस्टों (जिन्हें व्यक्तियों और लोगों के समूह के रूप में पहचान प्राप्त है) और किसी भी की अन्य कृत्रिम व्यक्ति के कर योग्य आय पर एक आयकर लगाता है। कर का भार प्रत्येक व्यक्ति पर अलग होता है। यह उदग्रहण भारतीय आय कर अधिनियम, 1961 द्वारा शासित किया जाता है। भारतीय आयकर विभाग, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) द्वारा संचालित है और भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के अधीन राजस्व विभाग का हिस्सा है। .

नई!!: वित्त अधिनियम (भारत) और भारत में आयकर · और देखें »

भारतीय आयकर अधिनियम, १९६१

आयकर अधिनियम, 1961 भारत में आयकर निर्धारण का प्रमुख कानून है। यह अधिनियम 1 अप्रैल, 1962 से प्रभाव में आया। इस अधिनियम में कुल 298 धाराएं तथा XIV अनुसूचियां शामिल हैं। संसद द्वारा पारित वित्त अधिनियम द्वारा इसमें सम्वर्धन और विलोपन के साथ प्रतिवर्ष परिवर्तित होता है। आयकर अधिनियम 1961 को सही ढंग से संचालित करने के लिए अधिकारियों को उपयुक्त अधिकार दिये गये हैं। .

नई!!: वित्त अधिनियम (भारत) और भारतीय आयकर अधिनियम, १९६१ · और देखें »

यहां पुनर्निर्देश करता है:

वित्त अधिनियम

निवर्तमानआने वाली
अरे! अब हम फेसबुक पर हैं! »