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विक्रम संवत

सूची विक्रम संवत

विक्रम संवत हिन्दू पंचांग में समय गणना की प्रणाली का नाम है। यह संवत 57 ई.पू.

3380 संबंधों: चतुर्भुज सहाय, चैत्र शुक्ल चतुर्थी, चैत्र शुक्ल चतुर्दशी, चैत्र शुक्ल त्रयोदशी, चैत्र शुक्ल तृतीया, चैत्र शुक्ल दशमी, चैत्र शुक्ल द्वादशी, चैत्र शुक्ल नवमी, चैत्र शुक्ल पञ्चमी, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, चैत्र शुक्ल षष्ठी, चैत्र शुक्ल सप्तमी, चैत्र शुक्ल अष्टमी, चैत्र कृष्ण चतुर्थी, चैत्र कृष्ण चतुर्दशी, चैत्र कृष्ण एकादशी, चैत्र कृष्ण त्रयोदशी, चैत्र कृष्ण तृतीया, चैत्र कृष्ण दशमी०, चैत्र कृष्ण द्वादशी, चैत्र कृष्ण द्वितीया, चैत्र कृष्ण नवमी, चैत्र कृष्ण पञ्चमी, चैत्र कृष्ण प्रतिपदा, चैत्र कृष्ण षष्ठी, चैत्र कृष्ण सप्तमी, चैत्र कृष्ण अष्टमी, चैत्र अमावास्या, दिगंबर तेरापंथ, देवनारायण, नेपाल का इतिहास, पञ्चाङ्गम्, प्राचीन सप्तर्षि संवत, पौष शुक्ल चतुर्थी, पौष शुक्ल एकादशी, पौष शुक्ल त्रयोदशी, पौष शुक्ल तृतीया, पौष शुक्ल दशमी, पौष शुक्ल द्वादशी, पौष शुक्ल द्वितीया, पौष शुक्ल नवमी, पौष शुक्ल पञ्चमी, पौष शुक्ल प्रतिपदा, पौष शुक्ल षष्ठी, पौष शुक्ल सप्तमी, पौष शुक्ल अष्टमी, पौष कृष्ण चतुर्थी, पौष कृष्ण चतुर्दशी, पौष कृष्ण एकादशी, पौष कृष्ण त्रयोदशी, ..., पौष कृष्ण तृतीया, पौष कृष्ण 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ईसा पूर्व, १०६४ ईसा पूर्व, १०६५ ईसा पूर्व, १०६६ ईसा पूर्व, १०६७ ईसा पूर्व, १०६८ ईसा पूर्व, १०६९ ईसा पूर्व, १०७ ईसा पूर्व, १०७० ईसा पूर्व, १०७१ ईसा पूर्व, १०७२ ईसा पूर्व, १०७३ ईसा पूर्व, १०७४ ईसा पूर्व, १०७५ ईसा पूर्व, १०७६ ईसा पूर्व, १०७७ ईसा पूर्व, १०७८ ईसा पूर्व, १०७९ ईसा पूर्व, १०८ ईसा पूर्व, १०८० ईसा पूर्व, १०८१ ईसा पूर्व, १०८२ ईसा पूर्व, १०८३ ईसा पूर्व, १०८४ ईसा पूर्व, १०८५ ईसा पूर्व, १०८६ ईसा पूर्व, १०८७ ईसा पूर्व, १०८८ ईसा पूर्व, १०८९ ईसा पूर्व, १०९ ईसा पूर्व, १०९० ईसा पूर्व, १०९१ ईसा पूर्व, १०९२ ईसा पूर्व, १०९३ ईसा पूर्व, १०९४ ईसा पूर्व, १०९५ ईसा पूर्व, १०९६ ईसा पूर्व, १०९७ ईसा पूर्व, १०९८ ईसा पूर्व, १०९९ ईसा पूर्व, ११ ईसा पूर्व, ११० ईसा पूर्व, ११०० ईसा पूर्व, ११०१ ईसा पूर्व, ११०२ ईसा पूर्व, ११०३ ईसा पूर्व, ११०४ ईसा पूर्व, ११०५ ईसा पूर्व, ११०६ ईसा पूर्व, ११०७ ईसा पूर्व, ११०८ ईसा पूर्व, ११०९ ईसा पूर्व, १११ ईसा पूर्व, १११० ईसा पूर्व, ११११ ईसा पूर्व, १११२ ईसा पूर्व, १११३ ईसा पूर्व, १११४ ईसा पूर्व, १११५ ईसा पूर्व, १११६ ईसा पूर्व, १११७ ईसा पूर्व, १११८ ईसा पूर्व, १११९ ईसा पूर्व, ११२ ईसा पूर्व, ११२० ईसा पूर्व, ११२१ ईसा पूर्व, ११२२ ईसा पूर्व, ११२३ ईसा पूर्व, ११२४ ईसा पूर्व, ११२५ ईसा पूर्व, ११२६ ईसा पूर्व, ११२७ ईसा पूर्व, ११२८ ईसा पूर्व, ११२९ ईसा पूर्व, ११३ ईसा पूर्व, ११३० ईसा पूर्व, ११३१ ईसा पूर्व, ११३२ ईसा पूर्व, ११३३ ईसा पूर्व, ११३४ ईसा पूर्व, ११३५ ईसा पूर्व, ११३६ ईसा पूर्व, ११३७ ईसा पूर्व, ११३८ ईसा पूर्व, ११३९ ईसा पूर्व, ११४ ईसा पूर्व, ११४० ईसा पूर्व, ११४१ ईसा पूर्व, ११४२ ईसा पूर्व, ११४३ ईसा पूर्व, ११४४ ईसा पूर्व, ११४५ ईसा पूर्व, ११४६ ईसा पूर्व, ११४७ ईसा पूर्व, ११४८ ईसा पूर्व, ११४९ ईसा पूर्व, ११५ ईसा पूर्व, ११५० ईसा पूर्व, ११५१ ईसा पूर्व, ११५२ ईसा पूर्व, ११५३ ईसा पूर्व, ११५४ ईसा पूर्व, ११५५ ईसा पूर्व, ११५६ ईसा पूर्व, ११५७ ईसा पूर्व, ११५८ ईसा पूर्व, ११५९ ईसा पूर्व, ११६ ईसा पूर्व, ११६० ईसा पूर्व, ११६१ ईसा पूर्व, ११६२ ईसा पूर्व, ११६३ ईसा पूर्व, ११६४ ईसा पूर्व, ११६५ ईसा पूर्व, ११६६ ईसा पूर्व, ११६७ ईसा पूर्व, ११६८ ईसा पूर्व, ११६९ ईसा पूर्व, ११७ ईसा पूर्व, ११७० ईसा पूर्व, ११७१ ईसा पूर्व, ११७२ ईसा पूर्व, ११७३ ईसा पूर्व, ११७४ ईसा पूर्व, ११७५ ईसा पूर्व, ११७६ ईसा पूर्व, ११७७ ईसा पूर्व, ११७८ ईसा पूर्व, ११७९ ईसा पूर्व, ११८ ईसा पूर्व, ११८० ईसा पूर्व, ११८१ ईसा पूर्व, ११८२ ईसा पूर्व, ११८३ ईसा पूर्व, ११८४ ईसा पूर्व, ११८५ ईसा पूर्व, ११८६ ईसा पूर्व, ११८७ ईसा पूर्व, ११८८ ईसा पूर्व, ११८९ ईसा पूर्व, ११९ ईसा पूर्व, ११९० ईसा पूर्व, ११९१ ईसा पूर्व, ११९२ ईसा पूर्व, ११९३ ईसा पूर्व, ११९४ ईसा पूर्व, ११९५ ईसा पूर्व, ११९६ ईसा पूर्व, ११९७ ईसा पूर्व, ११९८ ईसा पूर्व, ११९९ ईसा पूर्व, १२ ईसा पूर्व, १२० ईसा पूर्व, १२०० ईसा पूर्व, १२०१ ईसा पूर्व, १२०२ ईसा पूर्व, १२०३ ईसा पूर्व, १२०४ ईसा पूर्व, १२०५ ईसा पूर्व, १२०६ ईसा पूर्व, १२०७ ईसा पूर्व, १२०८ ईसा पूर्व, १२०९ ईसा पूर्व, १२१ ईसा पूर्व, १२१० ईसा पूर्व, १२११ ईसा पूर्व, १२१२ ईसा पूर्व, १२१३ ईसा पूर्व, १२१४ ईसा पूर्व, १२१५ ईसा पूर्व, १२१६ ईसा पूर्व, १२१७ ईसा पूर्व, १२१८ ईसा पूर्व, १२१९ ईसा पूर्व, १२२ ईसा पूर्व, १२२० ईसा पूर्व, १२२१ ईसा पूर्व, १२२२ ईसा पूर्व, १२२३ ईसा पूर्व, १२२४ ईसा पूर्व, १२२५ ईसा पूर्व, १२२६ ईसा पूर्व, १२२७ ईसा पूर्व, १२२८ ईसा पूर्व, १२२९ ईसा पूर्व, १२३ ईसा पूर्व, १२३० ईसा पूर्व, १२३१ ईसा पूर्व, १२३२ ईसा पूर्व, १२३३ ईसा पूर्व, १२३४ ईसा पूर्व, १२३५ ईसा पूर्व, १२३६ ईसा पूर्व, १२३७ ईसा पूर्व, १२३८ ईसा पूर्व, १२३९ ईसा पूर्व, १२४ ईसा पूर्व, १२४० ईसा पूर्व, १२४१ ईसा पूर्व, १२४२ ईसा पूर्व, १२४३ ईसा पूर्व, १२४४ ईसा पूर्व, १२४५ ईसा पूर्व, १२४६ ईसा पूर्व, १२४७ ईसा पूर्व, १२४८ ईसा पूर्व, १२४९ ईसा पूर्व, १२५ ईसा पूर्व, १२५० ईसा पूर्व, १२५१ ईसा पूर्व, १२५२ ईसा पूर्व, १२५३ ईसा पूर्व, १२५४ ईसा पूर्व, १२५५ ईसा पूर्व, १२५६ ईसा पूर्व, १२५७ ईसा पूर्व, १२५८ ईसा पूर्व, १२५९ ईसा पूर्व, १२६ ईसा पूर्व, १२६० ईसा पूर्व, १२६१ ईसा पूर्व, १२६२ ईसा पूर्व, १२६३ ईसा पूर्व, १२६४ ईसा पूर्व, १२६५ ईसा पूर्व, १२६६ ईसा पूर्व, १२६७ ईसा पूर्व, १२६८ ईसा पूर्व, १२६९ ईसा पूर्व, १२७ ईसा पूर्व, १२७० ईसा पूर्व, १२७१ ईसा पूर्व, १२७२ ईसा पूर्व, १२७३ ईसा पूर्व, १२७४ ईसा पूर्व, १२७५ ईसा पूर्व, १२७६ ईसा पूर्व, १२७७ ईसा पूर्व, १२७८ ईसा पूर्व, १२७९ ईसा पूर्व, १२८ ईसा पूर्व, १२८० ईसा पूर्व, १२८१ ईसा पूर्व, १२८२ ईसा पूर्व, १२८३ ईसा पूर्व, १२८४ ईसा पूर्व, १२८५ ईसा पूर्व, १२८६ ईसा पूर्व, १२८७ ईसा पूर्व, १२८८ ईसा पूर्व, १२८९ ईसा पूर्व, १२९ ईसा पूर्व, १२९० ईसा पूर्व, १२९१ ईसा पूर्व, १२९२ ईसा पूर्व, १२९३ ईसा पूर्व, १२९४ ईसा पूर्व, १२९५ ईसा पूर्व, १२९६ ईसा पूर्व, १२९७ ईसा पूर्व, १२९८ ईसा पूर्व, १२९९ ईसा पूर्व, १३ ईसा पूर्व, १३० ईसा पूर्व, १३०० ईसा पूर्व, १३०१ ईसा पूर्व, १३०२ ईसा पूर्व, १३०३ ईसा पूर्व, १३०४ ईसा पूर्व, १३०५ ईसा पूर्व, १३०६ ईसा पूर्व, १३०७ ईसा पूर्व, १३०८ ईसा पूर्व, १३०९ ईसा पूर्व, १३१ ईसा पूर्व, १३१० ईसा पूर्व, १३११ ईसा पूर्व, १३१२ ईसा पूर्व, १३१३ ईसा पूर्व, १३१४ ईसा पूर्व, १३१५ ईसा पूर्व, १३१६ ईसा पूर्व, १३१७ ईसा पूर्व, १३१८ ईसा पूर्व, १३१९ ईसा पूर्व, १३२ ईसा पूर्व, १३२० ईसा पूर्व, १३२१ ईसा पूर्व, १३२२ ईसा पूर्व, १३२३ ईसा पूर्व, १३२४ ईसा पूर्व, १३२५ ईसा पूर्व, १३२६ ईसा पूर्व, १३२७ ईसा पूर्व, १३२८ ईसा पूर्व, १३२९ ईसा पूर्व, १३३ ईसा पूर्व, १३३० ईसा पूर्व, १३३१ ईसा पूर्व, १३३२ ईसा पूर्व, १३३३ ईसा पूर्व, १३३४ ईसा पूर्व, १३३५ ईसा पूर्व, १३३६ ईसा पूर्व, १३३७ ईसा पूर्व, १३३८ ईसा पूर्व, १३३९ ईसा पूर्व, १३४ ईसा पूर्व, १३४० ईसा पूर्व, १३४१ ईसा पूर्व, १३४२ ईसा पूर्व, १३४३ ईसा पूर्व, १३४४ ईसा पूर्व, १३४५ ईसा पूर्व, १३४६ ईसा पूर्व, १३४७ ईसा पूर्व, १३४८ ईसा पूर्व, १३४९ ईसा पूर्व, १३५ ईसा पूर्व, १३५० ईसा पूर्व, १३५१ ईसा पूर्व, १३५२ ईसा पूर्व, १३५३ ईसा पूर्व, १३५४ ईसा पूर्व, १३५५ ईसा पूर्व, १३५६ ईसा पूर्व, १३५७ ईसा पूर्व, १३५८ ईसा पूर्व, १३५९ ईसा पूर्व, १३६ ईसा पूर्व, १३६० ईसा पूर्व, १३६१ ईसा पूर्व, १३६२ ईसा पूर्व, १३६३ ईसा पूर्व, १३६४ ईसा पूर्व, १३६५ ईसा पूर्व, १३६६ ईसा पूर्व, १३६७ ईसा पूर्व, १३६८ ईसा पूर्व, १३६९ ईसा पूर्व, १३७ ईसा पूर्व, १३७० ईसा पूर्व, १३७१ ईसा पूर्व, १३७२ ईसा पूर्व, १३७३ ईसा पूर्व, १३७४ ईसा पूर्व, १३७५ ईसा पूर्व, १३७६ ईसा पूर्व, १३७७ ईसा पूर्व, १३७८ ईसा पूर्व, १३७९ ईसा पूर्व, १३८ ईसा पूर्व, १३८० ईसा पूर्व, १३८१ ईसा पूर्व, १३८२ ईसा पूर्व, १३८३ ईसा पूर्व, १३८४ ईसा पूर्व, १३८५ ईसा पूर्व, १३८६ ईसा पूर्व, १३८७ ईसा पूर्व, १३८८ ईसा पूर्व, १३८९ ईसा पूर्व, १३९ ईसा पूर्व, १३९० ईसा पूर्व, १३९१ ईसा पूर्व, १३९२ ईसा पूर्व, १३९३ ईसा पूर्व, १३९४ ईसा पूर्व, १३९५ ईसा पूर्व, १३९६ ईसा पूर्व, १३९७ ईसा पूर्व, १३९८ ईसा पूर्व, १३९९ ईसा पूर्व, १४ ईसा पूर्व, १४० ईसा पूर्व, १४०० ईसा पूर्व, १४०१ ईसा पूर्व, १४०२ ईसा पूर्व, १४०३ ईसा पूर्व, १४०४ ईसा पूर्व, १४०५ ईसा पूर्व, १४०६ ईसा पूर्व, १४०७ ईसा पूर्व, १४०८ ईसा पूर्व, १४०९ ईसा पूर्व, १४१ ईसा पूर्व, १४१० ईसा पूर्व, १४११ ईसा पूर्व, १४१२ ईसा पूर्व, १४१३ ईसा पूर्व, १४१४ ईसा पूर्व, १४१५ ईसा पूर्व, १४१६ ईसा पूर्व, १४१७ ईसा पूर्व, १४१८ ईसा पूर्व, १४१९ ईसा पूर्व, १४२ ईसा पूर्व, १४२० ईसा पूर्व, १४२१ ईसा पूर्व, १४२२ ईसा पूर्व, १४२३ ईसा पूर्व, १४२४ ईसा पूर्व, १४२५ ईसा पूर्व, १४२६ ईसा पूर्व, १४२७ ईसा पूर्व, १४२८ ईसा पूर्व, १४२९ ईसा पूर्व, १४३ ईसा पूर्व, १४३० ईसा पूर्व, १४३१ ईसा पूर्व, १४३२ ईसा पूर्व, १४३३ ईसा पूर्व, १४३४ ईसा पूर्व, १४३५ ईसा पूर्व, १४३६ ईसा पूर्व, १४३७ ईसा पूर्व, १४३८ ईसा पूर्व, १४३९ ईसा पूर्व, १४४ ईसा पूर्व, १४४० ईसा पूर्व, १४४१ ईसा पूर्व, १४४२ ईसा पूर्व, १४४३ ईसा पूर्व, १४४४ ईसा पूर्व, १४४५ ईसा पूर्व, १४४६ ईसा पूर्व, १४४७ ईसा पूर्व, १४४८ ईसा पूर्व, १४४९ ईसा पूर्व, १४५ ईसा पूर्व, १४५० ईसा पूर्व, १४५१ ईसा पूर्व, १४५२ ईसा पूर्व, १४५३ ईसा पूर्व, १४५४ ईसा पूर्व, १४५५ ईसा पूर्व, १४५६ ईसा पूर्व, १४५७ ईसा पूर्व, १४५८ ईसा पूर्व, १४५९ ईसा पूर्व, १४६ 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ईसा पूर्व, १९१५ ईसा पूर्व, १९१६ ईसा पूर्व, १९१७ ईसा पूर्व, १९१८ ईसा पूर्व, १९१९ ईसा पूर्व, १९२ ईसा पूर्व, १९२० ईसा पूर्व, १९२१ ईसा पूर्व, १९२२, १९२२ ईसा पूर्व, १९२३ ईसा पूर्व, १९२४ ईसा पूर्व, १९२५ ईसा पूर्व, १९२६ ईसा पूर्व, १९२७ ईसा पूर्व, १९२८ ईसा पूर्व, १९२९ ईसा पूर्व, १९३ ईसा पूर्व, १९३० ईसा पूर्व, १९३१ ईसा पूर्व, १९३२ ईसा पूर्व, १९३३ ईसा पूर्व, १९३४ ईसा पूर्व, १९३५ ईसा पूर्व, १९३६ ईसा पूर्व, १९३७ ईसा पूर्व, १९३८ ईसा पूर्व, १९३९ ईसा पूर्व, १९४ ईसा पूर्व, १९४० ईसा पूर्व, १९४१ ईसा पूर्व, १९४२ ईसा पूर्व, १९४३ ईसा पूर्व, १९४४ ईसा पूर्व, १९४५ ईसा पूर्व, १९४६ ईसा पूर्व, १९४७ ईसा पूर्व, १९४८ ईसा पूर्व, १९४९ ईसा पूर्व, १९५ ईसा पूर्व, १९५० ईसा पूर्व, १९५१ ईसा पूर्व, १९५२ ईसा पूर्व, १९५३ ईसा पूर्व, १९५४ ईसा पूर्व, १९५५ ईसा पूर्व, १९५६ ईसा पूर्व, १९५७ ईसा पूर्व, १९५८ ईसा पूर्व, १९५९ ईसा पूर्व, १९६ ईसा पूर्व, १९६० ईसा पूर्व, १९६१ ईसा पूर्व, १९६२ ईसा पूर्व, १९६३ ईसा पूर्व, १९६४ ईसा पूर्व, १९६५ ईसा पूर्व, १९६६ ईसा पूर्व, १९६७ ईसा पूर्व, १९६८ ईसा पूर्व, १९६९ ईसा पूर्व, १९७ ईसा पूर्व, १९७० ईसा 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पूर्व, २३६७ ईसा पूर्व, २३६८ ईसा पूर्व, २३६९ ईसा पूर्व, २३७ ईसा पूर्व, २३७० ईसा पूर्व, २३७१ ईसा पूर्व, २३७२ ईसा पूर्व, २३७३ ईसा पूर्व, २३७४ ईसा पूर्व, २३७५ ईसा पूर्व, २३७६ ईसा पूर्व, २३७७ ईसा पूर्व, २३७८ ईसा पूर्व, २३७९ ईसा पूर्व, २३८ ईसा पूर्व, २३८० ईसा पूर्व, २३८१ ईसा पूर्व, २३८२ ईसा पूर्व, २३८३ ईसा पूर्व, २३८४ ईसा पूर्व, २३८५ ईसा पूर्व, २३८६ ईसा पूर्व, २३८७ ईसा पूर्व, २३८८ ईसा पूर्व, २३८९ ईसा पूर्व, २३९ ईसा पूर्व, २३९० ईसा पूर्व, २३९१ ईसा पूर्व, २३९२ ईसा पूर्व, २३९३ ईसा पूर्व, २३९४ ईसा पूर्व, २३९५ ईसा पूर्व, २३९६ ईसा पूर्व, २३९७ ईसा पूर्व, २३९८ ईसा पूर्व, २३९९ ईसा पूर्व, २४ ईसा पूर्व, २४० ईसा पूर्व, २४०० ईसा पूर्व, २४०१ ईसा पूर्व, २४०२ ईसा पूर्व, २४०३ ईसा पूर्व, २४०४ ईसा पूर्व, २४०५ ईसा पूर्व, २४०६ ईसा पूर्व, २४०७ ईसा पूर्व, २४०८ ईसा पूर्व, २४०९ ईसा पूर्व, २४१ ईसा पूर्व, २४१० ईसा पूर्व, २४११ ईसा पूर्व, २४१२ ईसा पूर्व, २४१३ ईसा पूर्व, २४१४ ईसा पूर्व, २४१५ ईसा पूर्व, २४१६ ईसा पूर्व, २४१७ ईसा पूर्व, २४१८ ईसा पूर्व, २४१९ ईसा पूर्व, २४२ ईसा पूर्व, २४२० ईसा पूर्व, २४२१ ईसा पूर्व, २४२२ ईसा 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ईसा पूर्व, २९३३ ईसा पूर्व, २९३४ ईसा पूर्व, २९३५ ईसा पूर्व, २९३६ ईसा पूर्व, २९३७ ईसा पूर्व, २९३८ ईसा पूर्व, २९३९ ईसा पूर्व, २९४ ईसा पूर्व, २९४० ईसा पूर्व, २९४१ ईसा पूर्व, २९४२ ईसा पूर्व, २९४३ ईसा पूर्व, २९४४ ईसा पूर्व, २९४५ ईसा पूर्व, २९४६ ईसा पूर्व, २९४७ ईसा पूर्व, २९४८ ईसा पूर्व, २९४९ ईसा पूर्व, २९५ ईसा पूर्व, २९५० ईसा पूर्व, २९५१ ईसा पूर्व, २९५२ ईसा पूर्व, २९५३ ईसा पूर्व, २९५४ ईसा पूर्व, २९५५ ईसा पूर्व, २९५६ ईसा पूर्व, २९५७ ईसा पूर्व, २९५८ ईसा पूर्व, २९५९ ईसा पूर्व, २९६ ईसा पूर्व, २९६० ईसा पूर्व, २९६१ ईसा पूर्व, २९६२ ईसा पूर्व, २९६३ ईसा पूर्व, २९६४ ईसा पूर्व, २९६५ ईसा पूर्व, २९६६ ईसा पूर्व, २९६७ ईसा पूर्व, २९६८ ईसा पूर्व, २९६९ ईसा पूर्व, २९७ ईसा पूर्व, २९७० ईसा पूर्व, २९७१ ईसा पूर्व, २९७२ ईसा पूर्व, २९७३ ईसा पूर्व, २९७४ ईसा पूर्व, २९७५ ईसा पूर्व, २९७६ ईसा पूर्व, २९७७ ईसा पूर्व, २९७८ ईसा पूर्व, २९७९ ईसा पूर्व, २९८ ईसा पूर्व, २९८० ईसा पूर्व, २९८१ ईसा पूर्व, २९८२ ईसा पूर्व, २९८३ ईसा पूर्व, २९८४ ईसा पूर्व, २९८५ ईसा पूर्व, २९८६ ईसा पूर्व, २९८७ ईसा पूर्व, २९८८ ईसा पूर्व, २९८९ ईसा पूर्व, २९९ ईसा पूर्व, २९९० ईसा पूर्व, २९९१ ईसा पूर्व, २९९२ ईसा पूर्व, २९९३ ईसा पूर्व, २९९४ ईसा पूर्व, २९९५ ईसा पूर्व, २९९६ ईसा पूर्व, २९९७ ईसा पूर्व, २९९८ ईसा पूर्व, २९९९ ईसा पूर्व, ३ ईसा पूर्व, ३० ईसा पूर्व, ३०० ईसा पूर्व, ३००० ईसा पूर्व, ३०१ ईसा पूर्व, ३०२ ईसा पूर्व, ३०३ ईसा पूर्व, ३०४ ईसा पूर्व, ३०५ ईसा पूर्व, ३०६ ईसा पूर्व, ३०७ ईसा पूर्व, ३०८ ईसा पूर्व, ३०९ ईसा पूर्व, ३१ ईसा पूर्व, ३१० ईसा पूर्व, ३११ ईसा पूर्व, ३१२ ईसा पूर्व, ३१३ ईसा पूर्व, ३१४ ईसा पूर्व, ३१५ ईसा पूर्व, ३१६ ईसा पूर्व, ३१७ ईसा पूर्व, ३१८ ईसा पूर्व, ३१९ ईसा पूर्व, ३२ ईसा पूर्व, ३२० ईसा पूर्व, ३२१ ईसा पूर्व, ३२२ ईसा पूर्व, ३२३ ईसा पूर्व, ३२४ ईसा पूर्व, ३२५ ईसा पूर्व, ३२६ ईसा पूर्व, ३२७ ईसा पूर्व, ३२८ ईसा पूर्व, ३२९ ईसा पूर्व, ३३ ईसा पूर्व, ३३० ईसा पूर्व, ३३१ ईसा पूर्व, ३३२ ईसा पूर्व, ३३३ ईसा पूर्व, ३३४ ईसा पूर्व, ३३५ ईसा पूर्व, ३३६ ईसा पूर्व, ३३७ ईसा पूर्व, ३३८ ईसा पूर्व, ३३९ ईसा पूर्व, ३४ ईसा पूर्व, ३४० ईसा पूर्व, ३४१ ईसा पूर्व, ३४२ ईसा पूर्व, ३४३ ईसा पूर्व, ३४४ ईसा पूर्व, ३४५ ईसा पूर्व, ३४६ ईसा पूर्व, ३४७ ईसा पूर्व, ३४८ ईसा पूर्व, ३४९ ईसा पूर्व, ३५ ईसा पूर्व, ३५० ईसा पूर्व, ३५१ ईसा पूर्व, ३५२ ईसा पूर्व, ३५३ ईसा पूर्व, ३५४ ईसा पूर्व, ३५५ ईसा पूर्व, ३५६ ईसा पूर्व, ३५७ ईसा पूर्व, ३५८ ईसा पूर्व, ३५९ ईसा पूर्व, ३६ ईसा पूर्व, ३६० ईसा पूर्व, ३६१ ईसा पूर्व, ३६२ ईसा पूर्व, ३६३ ईसा पूर्व, ३६४ ईसा पूर्व, ३६५ ईसा पूर्व, ३६६ ईसा पूर्व, ३६७ ईसा पूर्व, ३६८ ईसा पूर्व, ३६९ ईसा पूर्व, ३७ ईसा पूर्व, ३७० ईसा पूर्व, ३७१ ईसा पूर्व, ३७२ ईसा पूर्व, ३७३ ईसा पूर्व, ३७४ ईसा पूर्व, ३७५ ईसा पूर्व, ३७६ ईसा पूर्व, ३७७ ईसा पूर्व, ३७८ ईसा पूर्व, ३७९ ईसा पूर्व, ३८ ईसा पूर्व, ३८० ईसा पूर्व, ३८१ ईसा पूर्व, ३८२ ईसा पूर्व, ३८३ ईसा पूर्व, ३८४ ईसा पूर्व, ३८५ ईसा पूर्व, ३८६ ईसा पूर्व, ३८७ ईसा पूर्व, ३८८ ईसा पूर्व, ३८९ ईसा पूर्व, ३९ ईसा पूर्व, ३९० ईसा पूर्व, ३९१ ईसा पूर्व, ३९२ ईसा पूर्व, ३९३ ईसा पूर्व, ३९४ ईसा पूर्व, ३९५ ईसा पूर्व, ३९६ ईसा पूर्व, ३९७ ईसा पूर्व, ३९८ ईसा पूर्व, ३९९ ईसा पूर्व, ४ ईसा पूर्व, ४० ईसा पूर्व, ४०० ईसा पूर्व, ४०१ ईसा पूर्व, ४०२ ईसा पूर्व, ४०३ ईसा पूर्व, ४०४ ईसा पूर्व, ४०५ ईसा पूर्व, ४०६ ईसा पूर्व, ४०७ ईसा पूर्व, ४०८ ईसा पूर्व, ४०९ ईसा पूर्व, ४१ ईसा पूर्व, ४१० ईसा पूर्व, ४११ ईसा पूर्व, ४१२ ईसा पूर्व, ४१३ ईसा पूर्व, ४१४ ईसा पूर्व, ४१५ ईसा पूर्व, ४१६ ईसा पूर्व, ४१७ ईसा पूर्व, ४१८ ईसा पूर्व, ४१९ ईसा पूर्व, ४२ ईसा पूर्व, ४२० ईसा पूर्व, ४२१ ईसा पूर्व, ४२२ ईसा पूर्व, ४२३ ईसा पूर्व, ४२४ ईसा पूर्व, ४२५ ईसा पूर्व, ४२६ ईसा पूर्व, ४२७ ईसा पूर्व, ४२८ ईसा पूर्व, ४२९ ईसा पूर्व, ४३ ईसा पूर्व, ४३० ईसा पूर्व, ४३१ ईसा पूर्व, ४३२ ईसा पूर्व, ४३३ ईसा पूर्व, ४३४ ईसा पूर्व, ४३५ ईसा पूर्व, ४३६ ईसा पूर्व, ४३७ ईसा पूर्व, ४३८ ईसा पूर्व, ४३९ ईसा पूर्व, ४४ ईसा पूर्व, ४४० ईसा पूर्व, ४४१ ईसा पूर्व, ४४२ ईसा पूर्व, ४४३ ईसा पूर्व, ४४४ ईसा पूर्व, ४४५ ईसा पूर्व, ४४६ ईसा पूर्व, ४४७ ईसा पूर्व, ४४८ ईसा पूर्व, ४४९ ईसा पूर्व, ४५ ईसा पूर्व, ४५० ईसा पूर्व, ४५१ ईसा पूर्व, ४५२ ईसा पूर्व, ४५३ ईसा पूर्व, ४५४ ईसा पूर्व, ४५५ ईसा पूर्व, ४५६ ईसा पूर्व, ४५७ ईसा पूर्व, ४५८ ईसा पूर्व, ४५९ ईसा पूर्व, ४६ ईसा पूर्व, ४६० ईसा पूर्व, ४६१ ईसा पूर्व, ४६२ ईसा पूर्व, ४६३ ईसा पूर्व, ४६४ ईसा पूर्व, ४६५ ईसा पूर्व, ४६६ ईसा पूर्व, ४६७ ईसा पूर्व, ४६८ ईसा पूर्व, ४६९ ईसा पूर्व, ४७ ईसा पूर्व, ४७० ईसा पूर्व, ४७१ ईसा पूर्व, ४७२ ईसा पूर्व, ४७३ ईसा पूर्व, ४७४ ईसा पूर्व, ४७५ ईसा पूर्व, ४७६ ईसा पूर्व, ४७७ ईसा पूर्व, ४७८ ईसा पूर्व, ४७९ ईसा पूर्व, ४८ ईसा पूर्व, ४८० ईसा पूर्व, ४८१ ईसा पूर्व, ४८२ ईसा पूर्व, ४८३ ईसा पूर्व, ४८४ ईसा पूर्व, ४८५ ईसा पूर्व, ४८६ ईसा पूर्व, ४८७ ईसा पूर्व, ४८८ ईसा पूर्व, ४८९ ईसा पूर्व, ४९ ईसा पूर्व, ४९० ईसा पूर्व, ४९१ ईसा पूर्व, ४९२ ईसा पूर्व, ४९३ ईसा पूर्व, ४९४ ईसा पूर्व, ४९५ ईसा पूर्व, ४९६ ईसा पूर्व, ४९७ ईसा पूर्व, ४९८ ईसा पूर्व, ४९९ ईसा पूर्व, ५ ईसा पूर्व, ५० ईसा पूर्व, ५०० ईसा पूर्व, ५०१ ईसा पूर्व, ५०२ ईसा पूर्व, ५०३ ईसा पूर्व, ५०४ ईसा पूर्व, ५०५ ईसा पूर्व, ५०६ ईसा पूर्व, ५०७ ईसा पूर्व, ५०८ ईसा पूर्व, ५०९ ईसा पूर्व, ५१ ईसा पूर्व, ५१० ईसा पूर्व, ५११ ईसा पूर्व, ५१२ ईसा पूर्व, ५१३ ईसा पूर्व, ५१४ ईसा पूर्व, ५१५ ईसा पूर्व, ५१६ ईसा पूर्व, ५१७ ईसा पूर्व, ५१८ ईसा पूर्व, ५१९ ईसा पूर्व, ५२ ईसा पूर्व, ५२० ईसा पूर्व, ५२१ ईसा पूर्व, ५२२ ईसा पूर्व, ५२३ ईसा पूर्व, ५२४ ईसा पूर्व, ५२५ ईसा पूर्व, ५२६ ईसा पूर्व, ५२७ ईसा पूर्व, ५२८ ईसा पूर्व, ५२९ ईसा पूर्व, ५३ ईसा पूर्व, ५३० ईसा पूर्व, ५३१ ईसा पूर्व, ५३२ ईसा पूर्व, ५३३ ईसा पूर्व, ५३४ ईसा पूर्व, ५३५ ईसा पूर्व, ५३६ ईसा पूर्व, ५३७ ईसा पूर्व, ५३८ ईसा पूर्व, ५३९ ईसा पूर्व, ५४ ईसा पूर्व, ५४० ईसा पूर्व, ५४१ ईसा पूर्व, ५४२ ईसा पूर्व, ५४३ ईसा पूर्व, ५४४ ईसा पूर्व, ५४५ ईसा पूर्व, ५४६ ईसा पूर्व, ५४७ ईसा पूर्व, ५४८ ईसा पूर्व, ५४९ ईसा पूर्व, ५५ ईसा पूर्व, ५५० ईसा पूर्व, ५५१ ईसा पूर्व, ५५२ ईसा पूर्व, ५५३ ईसा पूर्व, ५५४ ईसा पूर्व, ५५५ ईसा पूर्व, ५५६ ईसा पूर्व, ५५७ ईसा पूर्व, ५५८ ईसा पूर्व, ५५९ ईसा पूर्व, ५६ ईसा पूर्व, ५६० ईसा पूर्व, ५६१ ईसा पूर्व, ५६२ ईसा पूर्व, ५६३ ईसा पूर्व, ५६४ ईसा पूर्व, ५६५ ईसा पूर्व, ५६६ ईसा पूर्व, ५६७ ईसा पूर्व, ५६८ ईसा पूर्व, ५६९ ईसा पूर्व, ५७ ईसा पूर्व, ५७० ईसा पूर्व, ५७१ ईसा पूर्व, ५७२ ईसा पूर्व, ५७३ ईसा पूर्व, ५७४ ईसा पूर्व, ५७५ ईसा पूर्व, ५७६ ईसा पूर्व, ५७७ ईसा पूर्व, ५७८ ईसा पूर्व, ५७९ ईसा पूर्व, ५८ ईसा पूर्व, ५८० ईसा पूर्व, ५८१ ईसा पूर्व, ५८२ ईसा पूर्व, ५८३ ईसा पूर्व, ५८४ ईसा पूर्व, ५८५ ईसा पूर्व, ५८६ ईसा पूर्व, ५८७ ईसा पूर्व, ५८८ ईसा पूर्व, ५८९ ईसा पूर्व, ५९ ईसा पूर्व, ५९० ईसा पूर्व, ५९१ ईसा पूर्व, ५९२ ईसा पूर्व, ५९३ ईसा पूर्व, ५९४ ईसा पूर्व, ५९५ ईसा पूर्व, ५९६ ईसा पूर्व, ५९७ ईसा पूर्व, ५९८ ईसा पूर्व, ५९९ ईसा पूर्व, ६ ईसा पूर्व, ६० ईसा पूर्व, ६०० ईसा पूर्व, ६०१ ईसा पूर्व, ६०२ ईसा पूर्व, ६०३ ईसा पूर्व, ६०४ ईसा पूर्व, ६०५ ईसा पूर्व, ६०६ ईसा पूर्व, ६०७ ईसा पूर्व, ६०८ ईसा पूर्व, ६०९ ईसा पूर्व, ६१ ईसा पूर्व, ६१० ईसा पूर्व, ६११ ईसा पूर्व, ६१२ ईसा पूर्व, ६१३ ईसा पूर्व, ६१४ ईसा पूर्व, ६१५ ईसा पूर्व, ६१६ ईसा पूर्व, ६१७ ईसा पूर्व, ६१८ ईसा पूर्व, ६१९ ईसा पूर्व, ६२ ईसा पूर्व, ६२० ईसा पूर्व, ६२१ ईसा पूर्व, ६२२ ईसा पूर्व, ६२३ ईसा पूर्व, ६२४ ईसा पूर्व, ६२५ ईसा पूर्व, ६२६ ईसा पूर्व, ६२७ ईसा पूर्व, ६२८ ईसा पूर्व, ६२९ ईसा पूर्व, ६३ ईसा पूर्व, ६३० ईसा पूर्व, ६३१ ईसा पूर्व, ६३२ ईसा पूर्व, ६३३ ईसा पूर्व, ६३४ ईसा पूर्व, ६३५ ईसा पूर्व, ६३६ ईसा पूर्व, ६३७ ईसा पूर्व, ६३८ ईसा पूर्व, ६३९ ईसा पूर्व, ६४ ईसा पूर्व, ६४० ईसा पूर्व, ६४१ ईसा पूर्व, ६४२ ईसा पूर्व, ६४३ ईसा पूर्व, ६४४ ईसा पूर्व, ६४५ ईसा पूर्व, ६४६ ईसा पूर्व, ६४७ ईसा पूर्व, ६४८ ईसा पूर्व, ६४९ ईसा पूर्व, ६५ ईसा पूर्व, ६५० ईसा पूर्व, ६५१ ईसा पूर्व, ६५२ ईसा पूर्व, ६५३ ईसा पूर्व, ६५४ ईसा पूर्व, ६५५ ईसा पूर्व, ६५६ ईसा पूर्व, ६५७ ईसा पूर्व, ६५८ ईसा पूर्व, ६५९ ईसा पूर्व, ६६ ईसा पूर्व, ६६० ईसा पूर्व, ६६१ ईसा पूर्व, ६६२ ईसा पूर्व, ६६३ ईसा पूर्व, ६६४ ईसा पूर्व, ६६५ ईसा पूर्व, ६६६ ईसा पूर्व, ६६७ ईसा पूर्व, ६६८ ईसा पूर्व, ६६९ ईसा पूर्व, ६७ ईसा पूर्व, ६७० ईसा पूर्व, ६७१ ईसा पूर्व, ६७२ ईसा पूर्व, ६७३ ईसा पूर्व, ६७४ ईसा पूर्व, ६७५ ईसा पूर्व, ६७६ ईसा पूर्व, ६७७ ईसा पूर्व, ६७८ ईसा पूर्व, ६७९ ईसा पूर्व, ६८ ईसा पूर्व, ६८० ईसा पूर्व, ६८१ ईसा पूर्व, ६८२ ईसा पूर्व, ६८३ ईसा पूर्व, ६८४ ईसा पूर्व, ६८५ ईसा पूर्व, ६८६ ईसा पूर्व, ६८७ ईसा पूर्व, ६८८ ईसा पूर्व, ६८९ ईसा पूर्व, ६९ ईसा पूर्व, ६९० ईसा पूर्व, ६९१ ईसा पूर्व, ६९२ ईसा पूर्व, ६९३ ईसा पूर्व, ६९४ ईसा पूर्व, ६९५ ईसा पूर्व, ६९६ ईसा पूर्व, ६९७ ईसा पूर्व, ६९८ ईसा पूर्व, ६९९ ईसा पूर्व, ७ ईसा पूर्व, ७० ईसा पूर्व, ७०० ईसा पूर्व, ७०१ ईसा पूर्व, ७०२ ईसा पूर्व, ७०३ ईसा पूर्व, ७०४ ईसा पूर्व, ७०५ ईसा पूर्व, ७०६ ईसा पूर्व, ७०७ ईसा पूर्व, ७०८ ईसा पूर्व, ७०९ ईसा पूर्व, ७१ ईसा पूर्व, ७१० ईसा पूर्व, ७११ ईसा पूर्व, ७१२ ईसा पूर्व, ७१३ ईसा पूर्व, ७१४ ईसा पूर्व, ७१५ ईसा पूर्व, ७१६ ईसा पूर्व, ७१७ ईसा पूर्व, ७१८ ईसा पूर्व, ७१९ ईसा पूर्व, ७२ ईसा पूर्व, ७२० ईसा पूर्व, ७२१ ईसा पूर्व, ७२२ ईसा पूर्व, ७२३ ईसा पूर्व, ७२४ ईसा पूर्व, ७२५ ईसा पूर्व, ७२६ ईसा पूर्व, ७२७ ईसा पूर्व, ७२८ ईसा पूर्व, ७२९ ईसा पूर्व, ७३ ईसा पूर्व, ७३० ईसा पूर्व, ७३१ ईसा पूर्व, ७३२ ईसा पूर्व, ७३३ ईसा पूर्व, ७३४ ईसा पूर्व, ७३५ ईसा पूर्व, ७३६ ईसा पूर्व, ७३७ ईसा पूर्व, ७३८ ईसा पूर्व, ७३९ ईसा पूर्व, ७४ ईसा पूर्व, ७४० ईसा पूर्व, ७४१ ईसा पूर्व, ७४२ ईसा पूर्व, ७४३ ईसा पूर्व, ७४४ ईसा पूर्व, ७४५ ईसा पूर्व, ७४६ ईसा पूर्व, ७४७ ईसा पूर्व, ७४८ ईसा पूर्व, ७४९ ईसा पूर्व, ७५ ईसा पूर्व, ७५० ईसा पूर्व, ७५१ ईसा पूर्व, ७५२ ईसा पूर्व, ७५३ ईसा पूर्व, ७५४ ईसा पूर्व, ७५५ ईसा पूर्व, ७५६ ईसा पूर्व, ७५७ ईसा पूर्व, ७५८ ईसा पूर्व, ७५९ ईसा पूर्व, ७६ ईसा पूर्व, ७६० ईसा पूर्व, ७६१ ईसा पूर्व, ७६२ ईसा पूर्व, ७६३ ईसा पूर्व, ७६४ ईसा पूर्व, ७६५ ईसा पूर्व, ७६६ ईसा पूर्व, ७६७ ईसा पूर्व, ७६८ ईसा पूर्व, ७६९ ईसा पूर्व, ७७ ईसा पूर्व, ७७० ईसा पूर्व, ७७१ ईसा पूर्व, ७७२ ईसा पूर्व, ७७३ ईसा पूर्व, ७७४ ईसा पूर्व, ७७५ ईसा पूर्व, ७७६ ईसा पूर्व, ७७७ ईसा पूर्व, ७७८ ईसा पूर्व, ७७९ ईसा पूर्व, ७८ ईसा पूर्व, ७८० ईसा पूर्व, ७८१ ईसा पूर्व, ७८२ ईसा पूर्व, ७८३ ईसा पूर्व, ७८४ ईसा पूर्व, ७८५ ईसा पूर्व, ७८६ ईसा पूर्व, ७८७ ईसा पूर्व, ७८८ ईसा पूर्व, ७८९ ईसा पूर्व, ७९ ईसा पूर्व, ७९० ईसा पूर्व, ७९१ ईसा पूर्व, ७९२ ईसा पूर्व, ७९३ ईसा पूर्व, ७९४ ईसा पूर्व, ७९५ ईसा पूर्व, ७९६ ईसा पूर्व, ७९७ ईसा पूर्व, ७९८ ईसा पूर्व, ७९९ ईसा पूर्व, ८ ईसा पूर्व, ८० ईसा पूर्व, ८०१ ईसा पूर्व, ८०२ ईसा पूर्व, ८०३ ईसा पूर्व, ८०४ ईसा पूर्व, ८०५ ईसा पूर्व, ८०६ ईसा पूर्व, ८०७ ईसा पूर्व, ८०८ ईसा पूर्व, ८०९ ईसा पूर्व, ८१ ईसा पूर्व, ८१० ईसा पूर्व, ८११ ईसा पूर्व, ८१२ ईसा पूर्व, ८१३ ईसा पूर्व, ८१४ ईसा पूर्व, ८१५ ईसा पूर्व, ८१६ ईसा पूर्व, ८१७ ईसा पूर्व, ८१८ ईसा पूर्व, ८१९ ईसा पूर्व, ८२ ईसा पूर्व, ८२० ईसा पूर्व, ८२१ ईसा पूर्व, ८२२ ईसा पूर्व, ८२३ ईसा पूर्व, ८२४ ईसा पूर्व, ८२५ ईसा पूर्व, ८२६ ईसा पूर्व, ८२७ ईसा पूर्व, ८२८ ईसा पूर्व, ८२९ ईसा पूर्व, ८३ ईसा पूर्व, ८३० ईसा पूर्व, ८३१ ईसा पूर्व, ८३२ ईसा पूर्व, ८३३ ईसा पूर्व, ८३४ ईसा पूर्व, ८३५ ईसा पूर्व, ८३६ ईसा पूर्व, ८३७ ईसा पूर्व, ८३८ ईसा पूर्व, ८३९ ईसा पूर्व, ८४ ईसा पूर्व, ८४० ईसा पूर्व, ८४१ ईसा पूर्व, ८४२ ईसा पूर्व, ८४३ ईसा पूर्व, ८४४ ईसा पूर्व, ८४५ ईसा पूर्व, ८४६ ईसा पूर्व, ८४७ ईसा पूर्व, ८४८ ईसा पूर्व, ८४९ ईसा पूर्व, ८५ ईसा पूर्व, ८५० ईसा पूर्व, ८५१ ईसा पूर्व, ८५२ ईसा पूर्व, ८५३ ईसा पूर्व, ८५४ ईसा पूर्व, ८५५ ईसा पूर्व, ८५६ ईसा पूर्व, ८५७ ईसा पूर्व, ८५८ ईसा पूर्व, ८५९ ईसा पूर्व, ८६ ईसा पूर्व, ८६० ईसा पूर्व, ८६१ ईसा पूर्व, ८६२ ईसा पूर्व, ८६३ ईसा पूर्व, ८६४ ईसा पूर्व, ८६५ ईसा पूर्व, ८६६ ईसा पूर्व, ८६७ ईसा पूर्व, ८६८ ईसा पूर्व, ८६९ ईसा पूर्व, ८७ ईसा पूर्व, ८७० ईसा पूर्व, ८७१ ईसा पूर्व, ८७२ ईसा पूर्व, ८७३ ईसा पूर्व, ८७४ ईसा पूर्व, ८७५ ईसा पूर्व, ८७६ ईसा पूर्व, ८७७ ईसा पूर्व, ८७८ ईसा पूर्व, ८७९ ईसा पूर्व, ८८ ईसा पूर्व, ८८० ईसा पूर्व, ८८१ ईसा पूर्व, ८८२ ईसा पूर्व, ८८३ ईसा पूर्व, ८८४ ईसा पूर्व, ८८५ ईसा पूर्व, ८८६ ईसा पूर्व, ८८७ ईसा पूर्व, ८८८ ईसा पूर्व, ८८९ ईसा पूर्व, ८९ ईसा पूर्व, ८९० ईसा पूर्व, ८९१ ईसा पूर्व, ८९२ ईसा पूर्व, ८९३ ईसा पूर्व, ८९४ ईसा पूर्व, ८९५ ईसा पूर्व, ८९६ ईसा पूर्व, ८९७ ईसा पूर्व, ८९८ ईसा पूर्व, ८९९ ईसा पूर्व, ९ ईसा पूर्व, ९० ईसा पूर्व, ९०० ईसा पूर्व, ९०१ ईसा पूर्व, ९०२ ईसा पूर्व, ९०३ ईसा पूर्व, ९०४ ईसा पूर्व, ९०५ ईसा पूर्व, ९०६ ईसा पूर्व, ९०७ ईसा पूर्व, ९०८ ईसा पूर्व, ९०९ ईसा पूर्व, ९१ ईसा पूर्व, ९१० ईसा पूर्व, ९११ ईसा पूर्व, ९१२ ईसा पूर्व, ९१३ ईसा पूर्व, ९१४ ईसा पूर्व, ९१५ ईसा पूर्व, ९१६ ईसा पूर्व, ९१७ ईसा पूर्व, ९१८ ईसा पूर्व, ९१९ ईसा पूर्व, ९२ ईसा पूर्व, ९२० ईसा पूर्व, ९२१ ईसा पूर्व, ९२२ ईसा पूर्व, ९२३ ईसा पूर्व, ९२४ ईसा पूर्व, ९२५ ईसा पूर्व, ९२६ ईसा पूर्व, ९२७ ईसा पूर्व, ९२८ ईसा पूर्व, ९२९ ईसा पूर्व, ९३ ईसा पूर्व, ९३० ईसा पूर्व, ९३१ ईसा पूर्व, ९३२ ईसा पूर्व, ९३३ ईसा पूर्व, ९३४ ईसा पूर्व, ९३५ ईसा पूर्व, ९३६ ईसा पूर्व, ९३७ ईसा पूर्व, ९३८ ईसा पूर्व, ९३९ ईसा पूर्व, ९४ ईसा पूर्व, ९४० ईसा पूर्व, ९४१ ईसा पूर्व, ९४२ ईसा पूर्व, ९४३ ईसा पूर्व, ९४४ ईसा पूर्व, ९४५ ईसा पूर्व, ९४६ ईसा पूर्व, ९४७ ईसा पूर्व, ९४८ ईसा पूर्व, ९४९ ईसा पूर्व, ९५ ईसा पूर्व, ९५० ईसा पूर्व, ९५१ ईसा पूर्व, ९५२ ईसा पूर्व, ९५३ ईसा पूर्व, ९५४ ईसा पूर्व, ९५५ ईसा पूर्व, ९५६ ईसा पूर्व, ९५७ ईसा पूर्व, ९५८ ईसा पूर्व, ९५९ ईसा पूर्व, ९६ ईसा पूर्व, ९६० ईसा पूर्व, ९६१ ईसा पूर्व, ९६२ ईसा पूर्व, ९६३ ईसा पूर्व, ९६४ ईसा पूर्व, ९६५ ईसा पूर्व, ९६६ ईसा पूर्व, ९६७ ईसा पूर्व, ९६८ ईसा पूर्व, ९६९ ईसा पूर्व, ९७ ईसा पूर्व, ९७० ईसा पूर्व, ९७१ ईसा पूर्व, ९७२ ईसा पूर्व, ९७३ ईसा पूर्व, ९७४ ईसा पूर्व, ९७५ ईसा पूर्व, ९७६ ईसा पूर्व, ९७७ ईसा पूर्व, ९७८ ईसा पूर्व, ९७९ ईसा पूर्व, ९८ ईसा पूर्व, ९८० ईसा पूर्व, ९८१ ईसा पूर्व, ९८२ ईसा पूर्व, ९८३ ईसा पूर्व, ९८४ ईसा पूर्व, ९८५ ईसा पूर्व, ९८६ ईसा पूर्व, ९८७ ईसा पूर्व, ९८८ ईसा पूर्व, ९८९ ईसा पूर्व, ९९ ईसा पूर्व, ९९० ईसा पूर्व, ९९१ ईसा पूर्व, ९९२ ईसा पूर्व, ९९३ ईसा पूर्व, ९९४ ईसा पूर्व, ९९५ ईसा पूर्व, ९९६ ईसा पूर्व, ९९७ ईसा पूर्व, ९९८ ईसा पूर्व, ९९९ ईसा पूर्व सूचकांक विस्तार (3330 अधिक) »

चतुर्भुज सहाय

डॉ चतुर्भुज सहाय (Chaturbhuj Sahay);(1883 -1957) भारत के एक महान सन्त पुरुष एवं समर्थ गुरु थे जिन्होने अपने गुरु परम संत महात्मा रामचंद्र जी महाराज के नाम पर मथुरा में रामाश्रम सत्संग,मथुरा की स्थापना की। आपका यह कहना था कि - ईश्वर तो एक शक्ति (पावर) है, न उसका कोई नाम है न रूप। जिसने जो नाम रख लिया वही ठीक है। उसको प्राप्त करने के लिए गृहस्थी त्याग कर जंगल में भटकने की आवश्यकता नहीं,वह घर में रहने पर भी प्राप्त हो सकता है। .

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चैत्र शुक्ल चतुर्थी

चैत्र शुक्ल चतुर्थी भारतीय पंचांग के अनुसार प्रथम माह की चतुर्थ तिथि है, वर्षान्त में अभी ३५६ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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चैत्र शुक्ल चतुर्दशी

चैत्र शुक्ल चतुर्दशी भारतीय पंचांग के अनुसार प्रथम माह की चौदहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ३४६ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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चैत्र शुक्ल त्रयोदशी

चैत्र शुक्ल त्रयोदशी भारतीय पंचांग के अनुसार प्रथम माह की तेरहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ३४७ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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चैत्र शुक्ल तृतीया

चैत्र शुक्ल तृतीया भारतीय राष्ट्रीय पंचांग के अनुसार प्रथम माह की तृतीय तिथि है। सामान्य वर्षान्त में अभी ३५७ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। हिंदू काल गणना के अंतर्गत अमावस्यांत प्रणाली वाले पंचांग में यह चैत्र माह की तृतीय, तथा पूर्णिमांत प्रणाली के अनुसार चैत्र माह अठारहवीं तिथि है। बहुप्रचलित ग्रेगोरी कैलेण्डर के समकक्ष .

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चैत्र शुक्ल दशमी

चैत्र शुक्ल दशमी भारतीय पंचांग के अनुसार प्रथम माह की दसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ३५० तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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चैत्र शुक्ल द्वादशी

चैत्र शुक्ल द्वादशी भारतीय पंचांग के अनुसार प्रथम माह की बारहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ३४८ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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चैत्र शुक्ल नवमी

चैत्र शुक्ल नवमी भारतीय पंचांग के अनुसार प्रथम माह की नौवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ३५१ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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चैत्र शुक्ल पञ्चमी

चैत्र शुक्ल पंचमी भारतीय पंचांग के अनुसार प्रथम माह की पाँचवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ३५५ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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चैत्र शुक्ल प्रतिपदा

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा भारतीयपंचांग के अनुसार प्रथम माह की प्रथम तिथि है, वर्षान्त में अभी ३५९ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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चैत्र शुक्ल षष्ठी

चैत्र शुक्ल षष्ठी भारतीय पंचांग के अनुसार प्रथम माह की छठवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ३५४ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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चैत्र शुक्ल सप्तमी

चैत्र शुक्ल सप्तमी भारतीय पंचांग के अनुसार प्रथम माह की सातवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ३५३ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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चैत्र शुक्ल अष्टमी

चैत्र शुक्ल अष्टमी भारतीय पंचांग के अनुसार प्रथम माह की आठवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ३५२ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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चैत्र कृष्ण चतुर्थी

चैत्र कृष्ण चतुर्थी भारतीय पंचांग के अनुसार प्रथम माह की उन्नीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ३४१ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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चैत्र कृष्ण चतुर्दशी

चैत्र कृष्ण चतुर्दशी भारतीय पंचांग के अनुसार प्रथम माह की उनतीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ३३१ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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चैत्र कृष्ण एकादशी

चैत्र कृष्ण एकादशी भारतीय पंचांग के अनुसार प्रथम माह की छब्बीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ३३४ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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चैत्र कृष्ण त्रयोदशी

चैत्र कृष्ण त्रयोदशी भारतीय पंचांग के अनुसार प्रथम माह की अट्ठाइसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ३३२ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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चैत्र कृष्ण तृतीया

चैत्र कृष्ण तृतीया भारतीय पंचांग के अनुसार प्रथम माह की अट्ठारहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ३४२ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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चैत्र कृष्ण दशमी०

चैत्र कृष्ण दशमी भारतीय पंचांग के अनुसार प्रथम माह की पच्चीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ३३५ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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चैत्र कृष्ण द्वादशी

चैत्र कृष्ण द्वादशी भारतीय पंचांग के अनुसार प्रथम माह की सत्ताइसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ३३३ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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चैत्र कृष्ण द्वितीया

चैत्र कृष्ण द्वितीया भारतीय पंचांग के अनुसार प्रथम माह की सत्रहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ३४३ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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चैत्र कृष्ण नवमी

चैत्र कृष्ण नवमी भारतीय पंचांग के अनुसार प्रथम माह की चौबीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ३३६ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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चैत्र कृष्ण पञ्चमी

चैत्र कृष्ण पंचमी भारतीय पंचांग के अनुसार प्रथम माह की बीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ३४० तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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चैत्र कृष्ण प्रतिपदा

चैत्र कृष्ण प्रतिपदा भारतीय पंचांग के अनुसार प्रथम माह की सोलहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ३४४ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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चैत्र कृष्ण षष्ठी

चैत्र कृष्ण षष्ठी भारतीय पंचांग के अनुसार प्रथम माह की इक्कीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ३३९ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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चैत्र कृष्ण सप्तमी

चैत्र कृष्ण सप्तमी भारतीय पंचांग के अनुसार प्रथम माह की बाइसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ३३८ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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चैत्र कृष्ण अष्टमी

चैत्र कृष्ण अष्टमी भारतीय पंचांग के अनुसार प्रथम माह की तेइसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ३३७ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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चैत्र अमावास्या

चैत्र अमावास्या भारतीय पंचांग के अनुसार प्रथम माह की तीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ३३० तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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दिगंबर तेरापंथ

आचार्य Gyansagar'', एक आचार्य (सिर के मठवासी आदेश) के ''Digambara Terapanth'' Digambara Terapanth एक संप्रदायों के दिगम्बर जैन, दूसरे जा रहा है Bispanthi संप्रदाय है। इसे से बाहर का गठन मजबूत विपक्ष के लिए धार्मिक वर्चस्व के पारंपरिक धार्मिक नेताओं को बुलाया भट्टारक के दौरान 12-16 वीं सदी ए. डी, के लिए bhattarakas शुरू से हटने मूल/Mula जैन, सीमा शुल्क.

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देवनारायण

देवनारायण राजस्थान के लोकदेवता हैं। इनका प्रसिद्ध मंदिर भीलवाडा जिले में आसिंद में स्थित है। देवनारायण राजस्थान, भारत से गुर्जर योद्धा थे, जिन्होंने बैसेला कबीले की स्थापना की थी। पौराणिक कथाओं में यह कहा जाता है कि वह विष्णु का अवतार थें और उन्हें लोक देवता के रूप में पूजा की जाती है, ज्यादातर राजस्थान और उत्तर-पश्चिमी मध्य प्रदेश में। परंपरा के अनुसार, वह विक्रम संवत 968 (9 11 ईस्वी) में हिंदू कैलेंडर में माघ के महीने के उज्ज्वल आधे (शुक्ल सतपति) के सातवें दिन श्री सवाई भोज और साडू माता गुर्जरी के पैदा हुआ थें। एक दृश्य ऐतिहासिक देवनारायण विक्रम संवत की 10 वीं शताब्दी का थें, एक और विचार के अनुसार, वह 1200-1400 (विक्रम सांवत युग) के बीच रहता थें। पहला विचार कई विद्वानों द्वारा अनुमोदित है। इनका प्रसिद् मंदिर निम्न है 1.

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नेपाल का इतिहास

नेपाल का इतिहास भारतीय साम्राज्यों से प्रभावित हुआ पर यह दक्षिण एशिया का एकमात्र देश था जो ब्रिटिश उपनिवेशवाद से बचा रहा। हँलांकि अंग्रेजों से हुई लड़ाई (1814-16) और उसके परिणामस्वरूप हुई संधि में तत्कालीन नेपाली साम्राज्य के अर्धाधिक भूभाग ब्रिटिश इंडिया के तहत आ गए और आज भी ये भारतीय राज्य उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम और पश्चिम बंगाल के अंश हैं। .

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पञ्चाङ्गम्

वर्ष 1871-72 के हिन्दू पंचांग का एक पृष्ठ पञ्चाङ्गम् परम्परागत भारतीय कालदर्शक है जिसमें समय के हिन्दू ईकाइयों (वार, तिथि, नक्षत्र, करण, योग आदि) का उपयोग होता है। इसमें सारणी या तालिका के रूप में महत्वपूर्ण सूचनाएँ अंकित होतीं हैं जिनकी अपनी गणना पद्धति है। अपने भिन्न-भिन्न रूपों में यह लगभग पूरे नेपाल और भारत में माना जाता है। असम, बंगाल, उड़ीसा, में पञ्चाङ्गम् को 'पञ्जिका' कहते हैं। 'पञ्चाङ' का शाब्दिक अर्थ है, 'पाँच अङ्ग' (पञ्च + अङ्ग)। अर्थात पञ्चाङ्ग में वार, तिथि, नक्षत्र, करण, योग - इन पाँच चीजों का उल्लेख मुख्य रूप से होता है। इसके अलावा पञ्चाङ से प्रमुख त्यौहारों, घटनाओं (ग्रहण आदि) और शुभ मुहुर्त का भी जानकारी होती है। गणना के आधार पर हिंदू पंचांग की तीन धाराएँ हैं- पहली चंद्र आधारित, दूसरी नक्षत्र आधारित और तीसरी सूर्य आधारित कैलेंडर पद्धति। भिन्न-भिन्न रूप में यह पूरे भारत में माना जाता है। एक वर्ष में १२ महीने होते हैं। प्रत्येक महीने में १५ दिन के दो पक्ष होते हैं- शुक्ल और कृष्ण। प्रत्येक साल में दो अयन होते हैं। इन दो अयनों की राशियों में २७ नक्षत्र भ्रमण करते रहते हैं। १२ मास का एक वर्ष और ७ दिन का एक सप्ताह रखने का प्रचलन विक्रम संवत से शुरू हुआ। महीने का हिसाब सूर्य व चंद्रमा की गति पर रखा जाता है। यह १२ राशियाँ बारह सौर मास हैं। जिस दिन सूर्य जिस राशि में प्रवेश करता है उसी दिन की संक्रांति होती है। पूर्णिमा के दिन चंद्रमा जिस नक्षत्र में होता है उसी आधार पर महीनों का नामकरण हुआ है। चंद्र वर्ष, सौर वर्ष से ११ दिन ३ घड़ी ४८ पल छोटा है। इसीलिए हर ३ वर्ष में इसमे एक महीना जोड़ दिया जाता है जिसे अधिक मास कहते हैं। इसके अनुसार एक साल को बारह महीनों में बांटा गया है और प्रत्येक महीने में तीस दिन होते हैं। महीने को चंद्रमा की कलाओं के घटने और बढ़ने के आधार पर दो पक्षों यानी शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष में विभाजित किया गया है। एक पक्ष में लगभग पंद्रह दिन या दो सप्ताह होते हैं। एक सप्ताह में सात दिन होते हैं। एक दिन को तिथि कहा गया है जो पंचांग के आधार पर उन्नीस घंटे से लेकर चौबीस घंटे तक होती है। दिन को चौबीस घंटों के साथ-साथ आठ पहरों में भी बांटा गया है। एक प्रहर कोई तीन घंटे का होता है। एक घंटे में लगभग दो घड़ी होती हैं, एक पल लगभग आधा मिनट के बराबर होता है और एक पल में चौबीस क्षण होते हैं। पहर के अनुसार देखा जाए तो चार पहर का दिन और चार पहर की रात होती है। .

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प्राचीन सप्तर्षि संवत

प्राचीन सप्तर्षि भारत का प्राचीन संवत है जो ६६७६ ईपू से आरम्भ होता है। अन्य संवत.

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पौष शुक्ल चतुर्थी

पौष शुक्ल चतुर्थी भारतीय पंचांग के अनुसार दसवें माह की चतुर्थ तिथि है, वर्षान्त में अभी ८६ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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पौष शुक्ल एकादशी

पौष शुक्ल एकादशी भारतीय पंचांग के अनुसार दसवें माह की ग्यारहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ७९ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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पौष शुक्ल त्रयोदशी

पौष शुक्ल त्रयोदशी भारतीय पंचांग के अनुसार दसवें माह की तेरहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ७७ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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पौष शुक्ल तृतीया

पौष शुक्ल तृतीया भारतीय पंचांग के अनुसार दसवें माह की तृतीय तिथि है, वर्षान्त में अभी ८७ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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पौष शुक्ल दशमी

पौष शुक्ल दशमी भारतीय पंचांग के अनुसार दसवें माह की दसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ८० तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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पौष शुक्ल द्वादशी

पौष शुक्ल द्वादशी भारतीय पंचांग के अनुसार दसवें माह की बारहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ७८ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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पौष शुक्ल द्वितीया

पौष शुक्ल द्वितीया भारतीय पंचांग के अनुसार दसवें माह की द्वितीय तिथि है, वर्षान्त में अभी ८८ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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पौष शुक्ल नवमी

पौष शुक्ल नवमी भारतीय पंचांग के अनुसार दसवें माह की नौवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ८१ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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पौष शुक्ल पञ्चमी

पौष शुक्ल पंचमी भारतीय पंचांग के अनुसार दसवें माह की पाँचवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ८५ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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पौष शुक्ल प्रतिपदा

पौष शुक्ल प्रतिपदा भारतीय पंचांग के अनुसार दसवें माह की प्रथम तिथि है, वर्षान्त में अभी ८९ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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पौष शुक्ल षष्ठी

पौष शुक्ल षष्ठी भारतीय पंचांग के अनुसार दसवें माह की छठवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ८४ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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पौष शुक्ल सप्तमी

पौष शुक्ल सप्तमी भारतीय पंचांग के अनुसार दसवें माह की सातवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ८३ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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पौष शुक्ल अष्टमी

पौष शुक्ल अष्टमी भारतीय पंचांग के अनुसार दसवें माह की आठवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ८२ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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पौष कृष्ण चतुर्थी

पौष कृष्ण चतुर्थी भारतीय पंचांग के अनुसार दसवें माह की उन्नीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ७१ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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पौष कृष्ण चतुर्दशी

पौष कृष्ण चतुर्दशी भारतीय पंचांग के अनुसार दसवें माह की उनतीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ६१ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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पौष कृष्ण एकादशी

पौष कृष्ण एकादशी भारतीय पंचांग के अनुसार दसवें माह की छब्बीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ६४ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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पौष कृष्ण त्रयोदशी

पौष कृष्ण त्रयोदशी भारतीय पंचांग के अनुसार दसवें माह की अट्ठाइसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ६२ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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पौष कृष्ण तृतीया

पौष कृष्ण तृतीया भारतीय पंचांग के अनुसार दसवें माह की अट्ठारहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ७२ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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पौष कृष्ण दशमी

पौष कृष्ण दशमी भारतीय पंचांग के अनुसार दसवें माह की पच्चीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ६५ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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पौष कृष्ण द्वादशी

पौष कृष्ण द्वादशी भारतीय पंचांग के अनुसार दसवें माह की सत्ताइसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ६३ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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पौष कृष्ण द्वितीया

पौष कृष्ण द्वितीया भारतीय पंचांग के अनुसार दसवें माह की सत्रहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ७३ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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पौष कृष्ण नवमी

पौष कृष्ण नवमी भारतीय पंचांग के अनुसार दसवें माह की चौबीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ६६ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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पौष कृष्ण पञ्चमी

पौष कृष्ण पंचमी भारतीय पंचांग के अनुसार दसवें माह की बीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ७० तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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पौष कृष्ण प्रतिपदा

पौष कृष्ण प्रतिपदा भारतीय पंचांग के अनुसार दसवें माह की सोलहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ७४ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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पौष कृष्ण षष्ठी

पौष कृष्ण षष्ठी भारतीय पंचांग के अनुसार दसवें माह की इक्कीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ६९ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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पौष कृष्ण सप्तमी

पौष कृष्ण सप्तमी भारतीय पंचांग के अनुसार दसवें माह की बाइसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ६८ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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पौष कृष्ण अष्टमी

पौष कृष्ण अष्टमी भारतीय पंचांग के अनुसार दसवें माह की तेइसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ६७ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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पौष अमावास्या

पौष अमावास्या भारतीय पंचांग के अनुसार दसवें माह की तीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ६० तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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पृथ्वीराज चौहान

पृथ्वीराज चौहान (भारतेश्वरः पृथ्वीराजः, Prithviraj Chavhan) (सन् 1178-1192) चौहान वंश के हिंदू क्षत्रिय राजा थे, जो उत्तर भारत में १२ वीं सदी के उत्तरार्ध में अजमेर (अजयमेरु) और दिल्ली पर राज्य करते थे। वे भारतेश्वर, पृथ्वीराजतृतीय, हिन्दूसम्राट्, सपादलक्षेश्वर, राय पिथौरा इत्यादि नाम से प्रसिद्ध हैं। भारत के अन्तिम हिन्दूराजा के रूप में प्रसिद्ध पृथ्वीराज १२३५ विक्रम संवत्सर में पंद्रह वर्ष (१५) की आयु में राज्य सिंहासन पर आरूढ हुए। पृथ्वीराज की तेरह रानीयाँ थी। उन में से संयोगिता प्रसिद्धतम मानी जाती है। पृथ्वीराज ने दिग्विजय अभियान में ११७७ वर्ष में भादानक देशीय को, ११८२ वर्ष में जेजाकभुक्ति शासक को और ११८३ वर्ष में चालुक्य वंशीय शासक को पराजित किया। इन्हीं वर्षों में भारत के उत्तरभाग में घोरी (ग़ोरी) नामक गौमांस भक्षण करने वाला योद्धा अपने शासन और धर्म के विस्तार की कामना से अनेक जनपदों को छल से या बल से पराजित कर रहा था। उसकी शासन विस्तार की और धर्म विस्तार की नीत के फलस्वरूप ११७५ वर्ष से पृथ्वीराज का घोरी के साथ सङ्घर्ष आरंभ हुआ। उसके पश्चात् अनेक लघु और मध्यम युद्ध पृथ्वीराज के और घोरी के मध्य हुए।विभिन्न ग्रन्थों में जो युद्ध सङ्ख्याएं मिलती है, वे सङ्ख्या ७, १७, २१ और २८ हैं। सभी युद्धों में पृथ्वीराज ने घोरी को बन्दी बनाया और उसको छोड़ दिया। परन्तु अन्तिम बार नरायन के द्वितीय युद्ध में पृथ्वीराज की पराजय के पश्चात् घोरी ने पृथ्वीराज को बन्दी बनाया और कुछ दिनों तक 'इस्लाम्'-धर्म का अङ्गीकार करवाने का प्रयास करता रहा। उस प्रयोस में पृथ्वीराज को शारीरक पीडाएँ दी गई। शरीरिक यातना देने के समय घोरी ने पृथ्वीराज को अन्धा कर दिया। अन्ध पृथ्वीराज ने शब्दवेध बाण से घोरी की हत्या करके अपनी पराजय का प्रतिशोध लेना चाहा। परन्तु देशद्रोह के कारण उनकी वो योजना भी विफल हो गई। एवं जब पृथ्वीराज के निश्चय को परिवर्तित करने में घोरी अक्षम हुआ, तब उसने अन्ध पृथ्वीराज की हत्या कर दी। अर्थात्, धर्म ही ऐसा मित्र है, जो मरणोत्तर भी साथ चलता है। अन्य सभी वस्तुएं शरीर के साथ ही नष्ट हो जाती हैं। इतिहासविद् डॉ.

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फलोदी

फलोदी राजस्थान के जोधपुर जिले में स्थित एक उपखंड,शहर,तहसील है। पोकरण,पीलवा,देचू,सांवरीज इत्यादि इनके पड़ौसी गाँव है। यहाँ का पिन कोड ३४२३०१ है। फलोदी में कई विद्यालय तथा महविद्यालय भी है। यह राजस्थान का सबसे शुष्क क्षेत्र है। .

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फाल्गुन शुक्ल चतुर्थी

फाल्गुन शुक्ल चतुर्थी भारतीय पंचांग के अनुसार बारहवें माह की चतुर्थ तिथि है, वर्षान्त में अभी २६ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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फाल्गुन शुक्ल चतुर्दशी

फाल्गुन शुक्ल चतुर्दशी भारतीय पंचांग के अनुसार बारहवें माह की चौदहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १६ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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फाल्गुन शुक्ल एकादशी

फाल्गुन शुक्ल एकादशी भारतीय पंचांग के अनुसार बारहवें माह की ग्यारहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १९ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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फाल्गुन शुक्ल त्रयोदशी

फाल्गुन शुक्ल त्रयोदशी भारतीय पंचांग के अनुसार बारहवें माह की तेरहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १७ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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फाल्गुन शुक्ल तृतीया

फाल्गुन शुक्ल तृतीया भारतीय पंचांग के अनुसार बारहवें माह की तृतीय तिथि है, वर्षान्त में अभी २७ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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फाल्गुन शुक्ल दशमी

फाल्गुन शुक्ल दशमी भारतीय पंचांग के अनुसार बारहवें माह की दसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २० तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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फाल्गुन शुक्ल द्वादशी

फाल्गुन शुक्ल द्वादशी भारतीय पंचांग के अनुसार बारहवें माह की बारहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १८ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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फाल्गुन शुक्ल द्वितीया

फाल्गुन शुक्ल द्वितीया भारतीय पंचांग के अनुसार बारहवें माह की द्वितीय तिथि है, वर्षान्त में अभी २८ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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फाल्गुन शुक्ल नवमी

फाल्गुन शुक्ल नवमी भारतीय पंचांग के अनुसार बारहवें माह की नौवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २१ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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फाल्गुन शुक्ल पञ्चमी

फाल्गुन शुक्ल पंचमी भारतीय पंचांग के अनुसार बारहवें माह की पाँचवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २५ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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फाल्गुन शुक्ल प्रतिपदा

फाल्गुन शुक्ल प्रतिपदा भारतीय पंचांग के अनुसार बारहवें माह की प्रथम तिथि है, वर्षान्त में अभी २९ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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फाल्गुन शुक्ल षष्ठी

फाल्गुन शुक्ल षष्ठी भारतीय पंचांग के अनुसार बारहवें माह की छठवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २४ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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फाल्गुन शुक्ल सप्तमी

फाल्गुन शुक्ल सप्तमी भारतीय पंचांग के अनुसार बारहवें माह की सातवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २३ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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फाल्गुन शुक्ल अष्टमी

फाल्गुन शुक्ल अष्टमी भारतीय पंचांग के अनुसार बारहवें माह की आठवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २२ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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फाल्गुन कृष्ण चतुर्थी

फाल्गुन कृष्ण चतुर्थी भारतीय पंचांग के अनुसार बारहवें माह की उन्नीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ११ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी

फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी भारतीय पंचांग के अनुसार बारहवें माह की उनतीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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फाल्गुन कृष्ण एकादशी

फाल्गुन कृष्ण एकादशी भारतीय पंचांग के अनुसार बारहवें माह की छब्बीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ४ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी

फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी भारतीय पंचांग के अनुसार बारहवें माह की अट्ठाइसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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फाल्गुन कृष्ण तृतीया

फाल्गुन कृष्ण तृतीया भारतीय पंचांग के अनुसार बारहवें माह की अट्ठारहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १२ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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फाल्गुन कृष्ण दशमी

फाल्गुन कृष्ण दशमी भारतीय पंचांग के अनुसार बारहवें माह की पच्चीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ५ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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फाल्गुन कृष्ण द्वादशी

फाल्गुन कृष्ण द्वादशी भारतीय पंचांग के अनुसार बारहवें माह की सत्ताइसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ३ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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फाल्गुन कृष्ण द्वितीया

फाल्गुन कृष्ण द्वितीया भारतीय पंचांग के अनुसार बारहवें माह की सत्रहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १३ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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फाल्गुन कृष्ण नवमी

फाल्गुन कृष्ण नवमी भारतीय पंचांग के अनुसार बारहवें माह की चौबीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ६ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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फाल्गुन कृष्ण पञ्चमी

फाल्गुन कृष्ण पंचमी भारतीय पंचांग के अनुसार बारहवें माह की बीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १० तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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फाल्गुन कृष्ण प्रतिपदा

फाल्गुन कृष्ण प्रतिपदा भारतीय पंचांग के अनुसार बारहवें माह की सोलहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १४ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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फाल्गुन कृष्ण षष्ठी

फाल्गुन कृष्ण षष्ठी भारतीय पंचांग के अनुसार बारहवें माह की इक्कीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ९ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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फाल्गुन कृष्ण सप्तमी

फाल्गुन कृष्ण सप्तमी भारतीय पंचांग के अनुसार बारहवें माह की बाइसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ८ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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फाल्गुन कृष्ण अष्टमी

फाल्गुन कृष्ण अष्टमी भारतीय पंचांग के अनुसार बारहवें माह की तेइसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ७ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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फाल्गुन अमावास्या

फाल्गुन अमावास्या भारतीय पंचांग के अनुसार बारहवें माह की तीसवी तिथि है, ये वर्ष की अन्तिम तिथि है। .

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बिलाड़ा

बिलाड़ा भारत के राजस्थान राज्य के जोधपुर ज़िले का एक शहर तथा नगरपालिका है यह बिलाड़ा तहसील में आता है यह मुख्य रूप से कृषि के लिए जाना जाता है ' बिलाड़ा अपनी मीठी वाणी के लिए तथा धार्मिक कार्यक्रमों के लिए भी जाना जाता है बिलाड़ा शहर में कई निजी होटल भी है जिसमे अच्छी खासी सुविधाएँ भी है यह एक राजस्थान के कश्मीर के रूप में भी जाना जाता है ' बिलाड़ा में ओर खेती भी खूब होती है बिलाडा बाजार में कपड़ो का मार्किट भी बहुत बड़ा है दिन भर भीड़ भाड़ बानी रहती है यहां पर कृषि मंडी भी बहुत ही बड़ी है यहां कपास गेहू सोप सरसो जीरा मुख्य फसल है यह आई माता जी का मंदिर भव्य मंदिर है ओर जीजीपाल मंदिर जोड़ रनिया हर्ष देवल सिद्धि विनायक मन्दिर मुख्य है .

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भट्ट मथुरानाथ शास्त्री

कवि शिरोमणि भट्ट श्री मथुरानाथ शास्त्री कविशिरोमणि भट्ट मथुरानाथ शास्त्री (23 मार्च 1889 - 4 जून 1964) बीसवीं सदी पूर्वार्द्ध के प्रख्यात संस्कृत कवि, मूर्धन्य विद्वान, संस्कृत सौन्दर्यशास्त्र के प्रतिपादक और युगपुरुष थे। उनका जन्म 23 मार्च 1889 (विक्रम संवत 1946 की आषाढ़ कृष्ण सप्तमी) को आंध्र के कृष्णयजुर्वेद की तैत्तरीय शाखा अनुयायी वेल्लनाडु ब्राह्मण विद्वानों के प्रसिद्ध देवर्षि परिवार में हुआ, जिन्हें सवाई जयसिंह द्वितीय ने ‘गुलाबी नगर’ जयपुर शहर की स्थापना के समय यहीं बसने के लिए आमंत्रित किया था। आपके पिता का नाम देवर्षि द्वारकानाथ, माता का नाम जानकी देवी, अग्रज का नाम देवर्षि रमानाथ शास्त्री और पितामह का नाम देवर्षि लक्ष्मीनाथ था। श्रीकृष्ण भट्ट कविकलानिधि, द्वारकानाथ भट्ट, जगदीश भट्ट, वासुदेव भट्ट, मण्डन भट्ट आदि प्रकाण्ड विद्वानों की इसी वंश परम्परा में भट्ट मथुरानाथ शास्त्री ने अपने विपुल साहित्य सर्जन की आभा से संस्कृत जगत् को प्रकाशमान किया। हिन्दी में जिस तरह भारतेन्दु हरिश्चंद्र युग, जयशंकर प्रसाद युग और महावीर प्रसाद द्विवेदी युग हैं, आधुनिक संस्कृत साहित्य के विकास के भी तीन युग - अप्पा शास्त्री राशिवडेकर युग (1890-1930), भट्ट मथुरानाथ शास्त्री युग (1930-1960) और वेंकट राघवन युग (1960-1980) माने जाते हैं। उनके द्वारा प्रणीत साहित्य एवं रचनात्मक संस्कृत लेखन इतना विपुल है कि इसका समुचित आकलन भी नहीं हो पाया है। अनुमानतः यह एक लाख पृष्ठों से भी अधिक है। राष्ट्रिय संस्कृत संस्थान, नई दिल्ली जैसे कई संस्थानों द्वारा उनके ग्रंथों का पुनः प्रकाशन किया गया है तथा कई अनुपलब्ध ग्रंथों का पुनर्मुद्रण भी हुआ है। भट्ट मथुरानाथ शास्त्री का देहावसान 75 वर्ष की आयु में हृदयाघात के कारण 4 जून 1964 को जयपुर में हुआ। .

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भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी

भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी भारतीय पंचांग के अनुसार छठवें माह की चतुर्थ तिथि है, वर्षान्त में अभी २०६ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी

भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी भारतीय पंचांग के अनुसार छठवें माह की चौदहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १९६ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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भाद्रपद शुक्ल एकादशी

भाद्रपद शुक्ल एकादशी भारतीय पंचांग के अनुसार छठवें माह की ग्यारहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १९९ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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भाद्रपद शुक्ल त्रयोदशी

भाद्रपद शुक्ल त्रयोदशी भारतीय पंचांग के अनुसार छठवें माह की तेरहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १९७ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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भाद्रपद शुक्ल तृतीया

भाद्रपद शुक्ल तृतीया भारतीय पंचांग के अनुसार छठवें माह की तृतीय तिथि है, वर्षान्त में अभी २०७ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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भाद्रपद शुक्ल दशमी

भाद्रपद शुक्ल दशमी भारतीय पंचांग के अनुसार छठवें माह की दसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २०० तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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भाद्रपद शुक्ल द्वादशी

भाद्रपद शुक्ल द्वादशी भारतीय पंचांग के अनुसार छठवें माह की बारहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १९८ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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भाद्रपद शुक्ल द्वितीया

भाद्रपद शुक्ल द्वितीया भारतीय पंचांग के अनुसार छठवें माह की द्वितीय तिथि है, वर्षान्त में अभी २०८ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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भाद्रपद शुक्ल नवमी

भाद्रपद शुक्ल नवमी भारतीय पंचांग के अनुसार छठवें माह की नौवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २०१ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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भाद्रपद शुक्ल पञ्चमी

भाद्रपद शुक्ल पंचमी भारतीय पंचांग के अनुसार छठवें माह की पाँचवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २०५ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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भाद्रपद शुक्ल प्रतिपदा

भाद्रपद शुक्ल प्रतिपदा भारतीय पंचांग के अनुसार छठवें माह की प्रथम तिथि है, वर्षान्त में अभी २०९ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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भाद्रपद शुक्ल षष्ठी

भाद्रपद शुक्ल षष्ठी भारतीय पंचांग के अनुसार छठवें माह की छठवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २०४ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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भाद्रपद शुक्ल सप्तमी

भाद्रपद शुक्ल सप्तमी भारतीय पंचांग के अनुसार छठवें माह की सातवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २०३ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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भाद्रपद शुक्ल अष्टमी

भाद्रपद शुक्ल अष्टमी भारतीय पंचांग के अनुसार छठवें माह की आठवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २०२ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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भाद्रपद कृष्ण चतुर्थी

भाद्रपद कृष्ण चतुर्थी भारतीय पंचांग के अनुसार छठवें माह की उन्नीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १९१ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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भाद्रपद कृष्ण चतुर्दशी

भाद्रपद कृष्ण चतुर्दशी भारतीय पंचांग के अनुसार छठवें माह की उनतीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १८१ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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भाद्रपद कृष्ण एकादशी

भाद्रपद कृष्ण एकादशी भारतीय पंचांग के अनुसार छठवें माह की छब्बीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १८४ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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भाद्रपद कृष्ण त्रयोदशी

भाद्रपद कृष्ण त्रयोदशी भारतीय पंचांग के अनुसार छठवें माह की अट्ठाइसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १८२ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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भाद्रपद कृष्ण तृतीया

भाद्रपद कृष्ण तृतीया भारतीय पंचांग के अनुसार छठवें माह की अट्ठारहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १९२ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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भाद्रपद कृष्ण दशमी

भाद्रपद कृष्ण दशमी भारतीय पंचांग के अनुसार छठवें माह की पच्चीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १८५ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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भाद्रपद कृष्ण द्वादशी

भाद्रपद कृष्ण द्वादशी भारतीय पंचांग के अनुसार छठवें माह की सत्ताइसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १८३ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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भाद्रपद कृष्ण द्वितीया

भाद्रपद कृष्ण द्वितीया भारतीय पंचांग के अनुसार छठवें माह की सत्रहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १९३ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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भाद्रपद कृष्ण नवमी

भाद्रपद कृष्ण नवमी भारतीय पंचांग के अनुसार छठवें माह की चौबीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १८६ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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भाद्रपद कृष्ण पञ्चमी

भाद्रपद कृष्ण पंचमी भारतीय पंचांग के अनुसार छठवें माह की बीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १९० तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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भाद्रपद कृष्ण प्रतिपदा

भाद्रपद कृष्ण प्रतिपदा भारतीय पंचांग के अनुसार छठवें माह की सोलहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १९४ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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भाद्रपद कृष्ण षष्ठी

भाद्रपद कृष्ण षष्ठी भारतीय पंचांग के अनुसार छठवें माह की इक्कीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १८९ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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भाद्रपद कृष्ण सप्तमी

भाद्रपद कृष्ण सप्तमी भारतीय पंचांग के अनुसार छठवें माह की बाइसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १८८ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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भाद्रपद कृष्ण अष्टमी

भाद्रपद कृष्ण अष्टमी भारतीय पंचांग के अनुसार छठवें माह की तेइसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १८७ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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भाद्रपद अमावास्या

भाद्रपद अमावास्या भारतीय पंचांग के अनुसार छठवें माह की तीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १८० तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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भारत का संक्षिप्त इतिहास (स्वतंत्रता-पूर्व)

कोई विवरण नहीं।

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भूचर मोरी

भूचर मोरी, गुजरात के ध्रोल नगर से २ किमी दूर स्थित एक ऐतिहासिक पठार है। यह राजकोट से लगभग ५० किमी दूर स्थित है। यह स्थान भूचर मोरी की लड़ाई और उस लड़ाई को समर्पित स्मारक के लिए जाना जाता है, जो सौराष्ट्र में लड़ी गयी सबसे बड़ी लड़ाई थी। भूचर मोरी की लड़ाई, मुग़ल साम्राज्य और काठियावाड़ी रियासतों की संयुक्त सेना के बीच इसी पठार पर लड़ा गया था। उसमें मुग़ल साम्राज्य की जीत हुई थी। यहाँ आज भी हर साल भूचर मोरी की लड़ाई की याद में जुलाई-अगस्त के दौरान आयोजन होते हैं, और मेले भी आयोजित होते हैं। .

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भूचर मोरी की लड़ाई

नवानगर रियासत के राजकीय कवी, मावदनजी भीमजी रतनु द्वारा रचित, यदुवंशप्रकाश में अंकित भूचर मोरी की लड़ाई का चित्र भूचर मोरी की लड़ाई, जिसे ध्रोल युद्ध भी कहा जाता है, जुलाई १५९१(विक्रम संवत १६४८) में, मुगल साम्राज्य की सेना, और नवानगर रियासत के नेतृत्व में, काठियावाड़ी राज्यों की संयुक्त सेना के बीच लगा गया एक युद्ध था। यह लड़ाई ध्रोल राज्य में भूचर मोरी नामक स्थान पर लड़ी गई थी। इसमें नवानगर और काठियावाड़ी सेना की हार हुई थी और मुग़ल सेना की निर्णायक जीत हुई थी, जसके कारणवश, काठियावाड़, मुग़ल साम्राज्य के अधीन आ गया था। .

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महाराजा ईश्वरीसिंह

इनकी असामयिक मृत्यु मात्र ३० साल की उम्र में दिनांक 12.12.

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माण्डू

माण्डू या माण्डवगढ़, धार जिले के माण्डव क्षेत्र में स्थित एक प्राचीन शहर है। यह भारत के पश्चिमी मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र में स्थित है। यह धार शहर से 35 किमी दूर स्थित है। यह 11 वीं शताब्दी में, माण्डू तारागंगा या तरंगा राज्य का उपभाग था। यहाँ परमारों के काल मे इसे प्रसिद्धि प्राप्त हुई और फिर १३ वीं शताब्दी में, यह क्षेत्र मुस्लिम शासकों के अंतर्गत आ गया, जहाँ से इसका स्वर्णकाल प्रारम्भ हो गया। विन्ध्याचल पर्वत शृंखला में स्थित होने के कारण इसका सुरक्षा कि दृस्टि से बहुत अधिक महत्व था। आज यह एक पर्यटक स्थल के रूप मे प्रशिद्ध है। जहाँ हजारों कि संख्या में सैलानी यहाँ के दर्शनीय स्थलों जैसे जहाज महल, हिन्डोला महल, शाही हमाम और वास्तुकला के उत्कृष्टतम उदाहरण आकर्षक नक्काशीदार गुम्बद को देखने आते है। इसकी इन्दौर शहर से दुरी १०० किमी है। .

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मार्गशीर्ष शुक्ल चतुर्थी

मार्गशीर्ष शुक्ल चतुर्थी भारतीय पंचांग के अनुसार नौवें माह की चतुर्थ तिथि है, वर्षान्त में अभी ११६ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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मार्गशीर्ष शुक्ल चतुर्दशी

मार्गशीर्ष शुक्ल चतुर्दशी भारतीय पंचांग के अनुसार नौवें माह की चौदहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १०६ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी

मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी भारतीय पंचांग के अनुसार नौवें माह की ग्यारहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १०९ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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मार्गशीर्ष शुक्ल त्रयोदशी

मार्गशीर्ष शुक्ल त्रयोदशी भारतीय पंचांग के अनुसार नौवें माह की तेरहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १०७ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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मार्गशीर्ष शुक्ल तृतीया

मार्गशीर्ष शुक्ल तृतीया भारतीय पंचांग के अनुसार नौवें माह की तृतीय तिथि है, वर्षान्त में अभी ११७ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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मार्गशीर्ष शुक्ल दशमी

मार्गशीर्ष शुक्ल दशमी भारतीय पंचांग के अनुसार नौवें माह की दसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ११० तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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मार्गशीर्ष शुक्ल द्वादशी

मार्गशीर्ष शुक्ल द्वादशी भारतीय पंचांग के अनुसार नौवें माह की बारहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १०८ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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मार्गशीर्ष शुक्ल द्वितीया

मार्गशीर्ष शुक्ल द्वितीया भारतीय पंचांग के अनुसार नौवें माह की द्वितीय तिथि है, वर्षान्त में अभी ११८ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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मार्गशीर्ष शुक्ल नवमी

मार्गशीर्ष शुक्ल नवमी भारतीय पंचांग के अनुसार नौवें माह की नौवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १११ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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मार्गशीर्ष शुक्ल पञ्चमी

मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी भारतीय पंचांग के अनुसार नौवें माह की पाँचवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ११५ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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मार्गशीर्ष शुक्ल प्रतिपदा

मार्गशीर्ष शुक्ल प्रतिपदा भारतीय पंचांग के अनुसार नौवें माह की प्रथम तिथि है, वर्षान्त में अभी ११९ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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मार्गशीर्ष शुक्ल षष्ठी

मार्गशीर्ष शुक्ल षष्ठी भारतीय पंचांग के अनुसार नौवें माह की छठवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ११४ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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मार्गशीर्ष शुक्ल सप्तमी

मार्गशीर्ष शुक्ल सप्तमी भारतीय पंचांग के अनुसार नौवें माह की सातवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ११३ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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मार्गशीर्ष शुक्ल अष्टमी

मार्गशीर्ष शुक्ल अष्टमी भारतीय पंचांग के अनुसार नौवें माह की आठवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ११२ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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मार्गशीर्ष कृष्ण चतुर्थी

मार्गशीर्ष कृष्ण चतुर्थी भारतीय पंचांग के अनुसार नौवें माह की उन्नीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १०१ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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मार्गशीर्ष कृष्ण चतुर्दशी

मार्गशीर्ष कृष्ण चतुर्दशी भारतीय पंचांग के अनुसार नौवें माह की उनतीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ९१ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी

मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी भारतीय पंचांग के अनुसार नौवें माह की छब्बीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ९४ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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मार्गशीर्ष कृष्ण त्रयोदशी

मार्गशीर्ष कृष्ण त्रयोदशी भारतीय पंचांग के अनुसार नौवें माह की अट्ठाइसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ९२ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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मार्गशीर्ष कृष्ण तृतीया

मार्गशीर्ष कृष्ण तृतीया भारतीय पंचांग के अनुसार नौवें माह की अट्ठारहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १०२ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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मार्गशीर्ष कृष्ण दशमी

मार्गशीर्ष कृष्ण दशमी भारतीय पंचांग के अनुसार नौवें माह की पच्चीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ९५ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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मार्गशीर्ष कृष्ण द्वादशी

मार्गशीर्ष कृष्ण द्वादशी भारतीय पंचांग के अनुसार नौवें माह की सत्ताइसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ९३ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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मार्गशीर्ष कृष्ण द्वितीया

मार्गशीर्ष कृष्ण द्वितीया भारतीय पंचांग के अनुसार नौवें माह की सत्रहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १०३ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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मार्गशीर्ष कृष्ण नवमी

मार्गशीर्ष कृष्ण नवमी भारतीय पंचांग के अनुसार नौवें माह की चौबीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ९६ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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मार्गशीर्ष कृष्ण पञ्चमी

मार्गशीर्ष कृष्ण पंचमी भारतीय पंचांग के अनुसार नौवें माह की बीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १०० तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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मार्गशीर्ष कृष्ण प्रतिपदा

मार्गशीर्ष कृष्ण प्रतिपदा भारतीय पंचांग के अनुसार नौवें माह की सोलहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १०४ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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मार्गशीर्ष कृष्ण षष्ठी

मार्गशीर्ष कृष्ण षष्ठी भारतीय पंचांग के अनुसार नौवें माह की इक्कीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ९९ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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मार्गशीर्ष कृष्ण सप्तमी

मार्गशीर्ष कृष्ण सप्तमी भारतीय पंचांग के अनुसार नौवें माह की बाइसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ९८ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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मार्गशीर्ष कृष्ण अष्टमी

मार्गशीर्ष कृष्ण अष्टमी भारतीय पंचांग के अनुसार नौवें माह की तेइसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ९७ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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मार्गशीर्ष अमावास्या

मार्गशीर्ष अमावास्या भारतीय पंचांग के अनुसार नौवें माह की तीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ९० तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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मालवगण

मालवगण प्राचीन भारत की एक जातिविशेष का संघ। महाभारत में मालवों के उल्लेख मिलते है। अपनी पड़ोसी जाति क्षुद्रकों की तरह मालव के उल्लेख मिलते हैं। अपनी पड़ोसी जाति क्षुद्रकों की तरह मालव भी महाभारत युद्ध में कौरवों की ओर से लड़े थे। वे पंजाब में निवास करते थे जहाँ उनकी तरह अंवष्ट, यौधेय आदि जनों का भी आवास था। तदनंतर कई शताब्दियों तक वे वही बने रहे। यूनानी सम्राट सिकन्दर के आक्रमण के समय मालवगण का राज्य मुख्यतया रावी और चिनाव के दोआब में था। क्षुद्रकों का राज्य मालवों के राज्य से लगा हुआ था। अतएव मालवों ने क्षुद्रकों के साथ सुदृढ़ ऐक्य स्थापित किया था। दोनों सेनाओं ने वीरता और दृढ़ता के साथ डटकर सिकन्दर का सामना किया। यूनानी इतिहासकार एरियन के अनुसार पंजाब में निवास कर रही भारतीय जातियों में मालव और क्षुद्रक संख्या में बहुत अधिक तथा सबसे अधिक युद्धकुशल थे। अत: उनकी सेनाओं का सामना करने से यूनानी सेना भी हिचकिचाने लगी थी, जिससे सिकंदर को स्वयं आगे बढ़ना पड़ा था और उस युद्ध में वह विशेष आहत भी हुआ था। अंत में मालव पराजित हुए और उन्हें हथियार डालने पड़े। पाणिनि के अनुसार मालवगण एक 'आयुधजीवी' संघ थे। युद्धविद्या में निपुणता प्राप्त करना इस संघ के प्रत्येक नागरिक का प्रधान कर्तव्य होता था, अत: वहाँ सभी निवासी योद्धा हुआ करते थे। मालवों का समाज अपनी पूर्ण और विकसित अवस्था को पहुँच चुका था। उसमें क्षत्रिय, ब्राह्मण आदि कई वर्ग होते थे। जो व्यक्ति क्षत्रिय या ब्राह्मण आदि कई वर्ग होते थे औरअन्य वर्गो के लोग 'मालव्य'कहलाते थे। मालवगणों का अधिकारक्षेत्र बहुत विस्तृत और संगठन अति बलशाली था जिससे उनको पराजित करना कठिन होता था। कात्यायन और पत्जांलि ने भी क्षुद्रक मालवी सेना का उल्लेख किया है। इसके बाद क्षुद्रकों का कहीं कोई उल्लेख नहीं मिलता, जिससे यही अनुमान होता है कि सिकंदर के आक्रमण के समय स्थापित 'मालव-क्षुद्रक ऐक्य' समय पाकर अधिकाधिक बढ़ता ही गया और अंत में क्षुद्रक मालवों में ही पूर्णतया समाविष्ट हो गए। मौर्य सम्राज्य के पतन के बाद बाख्त्री (बैक्ट्रियन) और पार्थव (पार्थियन) राजाओं ने जब पंजाब तथा सिंध पर आधिपत्य स्थापित कर लिया, तब अपनी स्वतंत्रता तथा स्वशासन को संकटापन्न देखकर ईसा पूर्व की दूसरी शताब्दी में मालवगण विवश हो पंजाब छोड़कर दक्षिण पूर्व की ओर बढ़े। सतलज पारकर पहले कुछ काल तक वे फिराजपुर, लुधियाना और भटिंडा के प्रदेश में रहे, जिससे वह क्षेत्र अब तक 'मालव' कहलाता है। किंतु यहाँ भी वे अधिक काल तक नहीं ठहर पाए और आगे बढ़ते हुए वे उसी शताब्दी में अजमेर से दक्षिण पूर्व में टोंक मेवाड़ के प्रदेश मे जा पहुँचे तथा वहाँ अपने स्वाधीन गणराज्य की स्थापना की। टोंक से कोई २५ मील दक्षिण में स्थित कर्कोट नागर नामक स्थान उनका मुख्य केंन्द्र रहा होगा, वहाँ मालवों के विभिन्न कालों के सैकड़ों सिक्के प्राप्त हुए हैं। कुषाण साम्राज्य के उत्थान के साथ ही गुजरात में उनके अधीन पश्चिमी क्षत्रपों ने उज्जैन को जीतकर मालवों पर भी अपना आधिपत्य स्थापित किया था। जैन ग्रंथों के अनुसार शकों को वहाँ लाने में कालकाचार्य का विशेष हाथ था। परंतु स्वातंत्रय प्रेमी मालव निरंतर विद्रोह करते रहते थे। उत्तम भद्रों के सहायतार्थ महाक्षत्रप नहपाण को उषवदात्त (ऋषिभदत्त) के नेतृत्व में मालवों के विरुद्ध सेना भेजनी पड़ी थी। अंत में मालवों के सहयोग से गौतमीपुत्र शातकणीं ने महाक्षत्रप नहपाण और उसके साथी शकों का पूर्ण संहार किया। नहपाण और गौतमीपुत्र शातकर्णी के सही सन् संवतों के बारे में इतिहासकार एकमत नहीं है। कुछ इतिहासकारों के अनुसार इससे भी पहिले मालवगणों की ही एक शाखा के प्रमुख, उज्जैन के पदच्युत अधिपति गर्दभिल्ल के पुत्र, विक्रम ने पराजित कर शकों को उस प्रदेश से निकाल बाहर किया था। यद्यपि बाद में शकों ने उनपर पुन: आधिपत्य स्थापित कर लिया था तथापि तीसरी शती के प्रारंभ में श्री सोम के नेतृत्व में उन्होंने फिर मालव गणराज्य की स्वाधीनता घोषित कर दी। मालवगण कार्कोट नगर से दक्षिण में उस सारे प्रदेश पर फैल गए, जो आगे चलकर उन्हीं के नाम से मालवा प्रदेश कहलाने लगा। मालवों के इस गणराज्य में शासन व्यवस्था उनके चुने हुए प्रमुख के हाथ में रहती थी। कई बार उत्तराधिकारी का चुनाव वंश परंपरागत भी हो जाता था। परंतु उनमें गणतंत्रीय परंपरा प्रबल रही। मालवों के कई सिक्के प्राप्त हुए हैं। ये प्राय छोटे होते थे। मालवों के सिक्के दो प्रकार के मिलते हैं। प्रथम प्रकार के सिक्कों पर मालवों ने अपनी महत्वपूर्ण विजय की स्मृति में ब्राह्यी लिपि में मालवानां जय: और मालवगणस्य जय: लेख अंकित किए थे। ईसा पूर्व की पहली शताब्दी से ईसा की तीसरी शताब्दी तक ये जारी किए गए होंगे। दूसरे प्रकार के सिक्कों पर मजुप, मपोजय, मगजस, मगोजय, मपक, पच, गजव, मरज, जमुक आदि शब्द अंकित हैं। इन शब्दों के सही अर्थ अथवा उनके संतोषजनक अभिप्राय के बारे में विद्वानों का मतैक्य नहीं हो पाया है। ईसा की चौथी शताब्दी के पूर्वार्ध में जब समुद्रगुप्त ने दिग्विजय कर अपने विस्तृत सम्राज्य की स्थापना की, उसने मालवों के गणराज्य को भी अपने अधीन कर लिया, तदंतर मालवों के इस गणराज्य की आतंरिक स्वाधीनता कुछ काल तक अवश्य बनी रही होगी। परंतु गुप्त साम्राज्य के पतन काल में बर्बर हूणों के आक्रमण प्रवाह में मालवगण का समूचा प्रदेश भी निमग्न हो गया। मालवों ने मालवा प्रदेश को एकता और महत्वपूर्ण परंपराएँ प्रदान कीं। यह प्रदेश पहले दो विभिन्न भागों में बँटा हुआ था, पश्चिमी भाग अवंतिका क्षेत्र कहलाता था और पूर्वी भाग आकर अथवा दशार्ण नाम से सुज्ञात था। वे दोनों अब मालवा प्रदेश में सम्मिलित होकर अभिन्न हो गए। मालवगण का स्वाधीनता प्रेम और जनतंत्रीय भावनाएँ इस प्रदेश की सांस्कृतिक विशेषताओं के साथ सम्मिलित हो गए। इस प्रकार जिस नई विस्तृत राजनीतिक तथा सांस्कृतिक इकाई का निर्माण हुआ, आगे चलकर उसका भारतीय इतिहास में सदैव विशेष महत्व रहता आया है। यशोधर्मन् मुंज और भोज उसी नवीन सम्मिलित परंपरा की प्रारंभिक कड़ियाँ थे। मालवगण की दूसरी देन राष्ट्रीय महत्व की है, वह है उनका मालव संवत् जो आगे चलकर विक्रम संवत् के रूप में भारत में सर्वत्र प्रचलित हुआ। मालवों के गणराज्य की स्वतंत्रताप्राप्ति की स्मृति में ही इस संवत् का प्रारंभ हुआ होगा। ईसा की तीसरी शती के पूर्वार्ध से ही राजस्थान, मालवा तथा उनके पड़ोसी प्रदेशों के शिलालेखों में 'कृत संवत्' के नाम से इस संवत् का उल्लेख मिलता है। ईसा की पाँचवी शती के बाद में शिलालेखों में कृत संवत् के साथ ही इसे 'मालव' या 'मालवेश' संवत् भी लिखा जाता रहा। ईसा की दसवीं शताब्दी के बाद यही संवत् 'विक्रम संवत्' के नाम से सुज्ञात हुआ। परंपरागत प्रवाद के अनुसार उज्जैन के प्रतापी शकारि राजा विक्रम की विजय के समय (ई० पू० ५७) से ही इस मालव अथवा विक्रम संवत् का प्रारंभ हुआ था। .

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माघ शुक्ल चतुर्थी

माघ शुक्ल चतुर्थी भारतीय पंचांग के अनुसार ग्यारहवें माह की चतुर्थ तिथि है, वर्षान्त में अभी ५६ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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माघ शुक्ल चतुर्दशी

माघ शुक्ल चतुर्दशी भारतीय पंचांग के अनुसार ग्यारहवें माह की चौदहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ४६ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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माघ शुक्ल एकादशी

माघ शुक्ल एकादशी भारतीय पंचांग के अनुसार ग्यारहवें माह की ग्यारहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ४९ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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माघ शुक्ल त्रयोदशी

माघ शुक्ल त्रयोदशी भारतीय पंचांग के अनुसार ग्यारहवें माह की तेरहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ४७ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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माघ शुक्ल तृतीया

माघ शुक्ल तृतीया भारतीय पंचांग के अनुसार ग्यारहवें माह की तृतीय तिथि है, वर्षान्त में अभी ५७ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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माघ शुक्ल दशमी

माघ शुक्ल दशमी भारतीय पंचांग के अनुसार ग्यारहवें माह की दसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ५० तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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माघ शुक्ल द्वादशी

माघ शुक्ल द्वादशी भारतीय पंचांग के अनुसार ग्यारहवें माह की बारहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ४८ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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माघ शुक्ल द्वितीया

माघ शुक्ल द्वितीया भारतीय पंचांग के अनुसार ग्यारहवें माह की द्वितीय तिथि है, वर्षान्त में अभी ५८ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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माघ शुक्ल नवमी

माघ शुक्ल नवमी भारतीय पंचांग के अनुसार ग्यारहवें माह की नौवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ५१ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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माघ शुक्ल पञ्चमी

माघ शुक्ल पंचमी भारतीय पंचांग के अनुसार ग्यारहवें माह की पाँचवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ५५ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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माघ शुक्ल प्रतिपदा

माघ शुक्ल प्रतिपदा भारतीय पंचांग के अनुसार ग्यारहवें माह की प्रथम तिथि है, वर्षान्त में अभी ५९ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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माघ शुक्ल षष्ठी

माघ शुक्ल षष्ठी भारतीय पंचांग के अनुसार ग्यारहवें माह की छठवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ५४ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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माघ शुक्ल सप्तमी

माघ शुक्ल सप्तमी भारतीय पंचांग के अनुसार ग्यारहवें माह की सातवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ५३ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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माघ शुक्ल अष्टमी

माघ शुक्ल अष्टमी भारतीय पंचांग के अनुसार ग्यारहवें माह की आठवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ५२ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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माघ कृष्ण चतुर्दशी

माघ कृष्ण चतुर्दशी भारतीय पंचांग के अनुसार ग्यारहवें माह की उनतीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ३१ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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माघ कृष्ण एकादशी

माघ कृष्ण एकादशी भारतीय पंचांग के अनुसार ग्यारहवें माह की छब्बीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ३४ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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माघ कृष्ण त्रयोदशी

माघ कृष्ण त्रयोदशी भारतीय पंचांग के अनुसार ग्यारहवें माह की अट्ठाइसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ३२ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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माघ कृष्ण दशमी

माघ कृष्ण दशमी भारतीय पंचांग के अनुसार ग्यारहवें माह की पच्चीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ३५ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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माघ कृष्ण द्वादशी

माघ कृष्ण द्वादशी भारतीय पंचांग के अनुसार ग्यारहवें माह की सत्ताइसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ३३ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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माघ कृष्ण द्वितीया

माघ कृष्ण द्वितीया भारतीय पंचांग के अनुसार ग्यारहवें माह की सत्रहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ४३ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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माघ कृष्ण नवमी

माघ कृष्ण नवमी भारतीय पंचांग के अनुसार ग्यारहवें माह की चौबीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ३६ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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माघ कृष्ण प्रतिपदा

माघ कृष्ण प्रतिपदा भारतीय पंचांग के अनुसार ग्यारहवें माह की सोलहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ४४ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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माघ कृष्ण सप्तमी

माघ कृष्ण सप्तमी भारतीय पंचांग के अनुसार ग्यारहवें माह की बाइसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ३८ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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माघ कृष्ण अष्टमी

माघ कृष्ण अष्टमी भारतीय पंचांग के अनुसार ग्यारहवें माह की तेइसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ३७ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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माघ अमावास्या

माघ अमावास्या भारतीय पंचांग के अनुसार ग्यारहवें माह की तीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ३० तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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युग (बुनियादी तिथि)

इस जापानी रेल पास में 'जापानी वर्ष' के ख़ाने में हेईसेई युग का वर्ष १८ लिखा गया है जो सन् २००७ के बराबर है कालक्रम विज्ञान में युग (epoch, ऍपक) समय के किसी ऐसे क्षण को कहते हैं जिस से किसी काल-निर्धारण करने वाली विधि का आरम्भ किया जाए। उदाहरण के लिए विक्रम संवत कैलेण्डर को ५६ ईसापूर्व में उज्जैन के राजा विक्रमादित्य ने शकों पर विजय पाने के अवसर पर शुरू किया, यानि विक्रम संवत के लिए ५६ ईपू ही 'युग' है जिसे शून्य मानकर समय मापा जाता है। .

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रणकपुर जैन मंदिर

भारत के राजस्थान राज्य में अरावली पर्वत की घाटियों के मध्य स्थित रणकपुर में ऋषभदेव का चतुर्मुखी जैन मंदिर है। चारों ओर जंगलों से घिरे इस मंदिर की भव्यता देखते ही बनती है। राजस्थान में अनेकों प्रसिद्ध भव्य स्मारक तथा भवन हैं। इनमें माउंट आबू तथा दिलवाड़ा के विख्यात जैन मंदिर भी शामिल हैं। रणकपुर मंदिर उदयपुर से 96 किलोमीटर की दूरी पर है। भारत के जैन मंदिरों में संभवतः इसकी इमारत सबसे भव्य तथा विशाल है। .

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शिवानन्द गोस्वामी

शिवानन्द गोस्वामी | शिरोमणि भट्ट (अनुमानित काल: संवत् १७१०-१७९७) तंत्र-मंत्र, साहित्य, काव्यशास्त्र, आयुर्वेद, सम्प्रदाय-ज्ञान, वेद-वेदांग, कर्मकांड, धर्मशास्त्र, खगोलशास्त्र-ज्योतिष, होरा शास्त्र, व्याकरण आदि अनेक विषयों के जाने-माने विद्वान थे। इनके पूर्वज मूलतः तेलंगाना के तेलगूभाषी उच्चकुलीन पंचद्रविड़ वेल्लनाडू ब्राह्मण थे, जो उत्तर भारतीय राजा-महाराजाओं के आग्रह और निमंत्रण पर राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तर भारत के अन्य प्रान्तों में आ कर कुलगुरु, राजगुरु, धर्मपीठ निर्देशक, आदि पदों पर आसीन हुए| शिवानन्द गोस्वामी त्रिपुर-सुन्दरी के अनन्य साधक और शक्ति-उपासक थे। एक चमत्कारिक मान्त्रिक और तांत्रिक के रूप में उनकी साधना और सिद्धियों की अनेक घटनाएँ उल्लेखनीय हैं। श्रीमद्भागवत के बाद सबसे विपुल ग्रन्थ सिंह-सिद्धांत-सिन्धु लिखने का श्रेय शिवानंद गोस्वामी को है।" .

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शक

सरमतिया मध्य एशिया का भौतिक मानचित्र, पश्चिमोत्तर में कॉकस से लेकर पूर्वोत्तर में मंगोलिया तक स्किथियों के सोने के अवशेष, बैक्ट्रिया की तिलिया तेपे पुरातन-स्थल से ३०० ईसापूर्व में मध्य एशिया के पज़ियरिक क्षेत्र से शक (स्किथी) घुड़सवार शक प्राचीन मध्य एशिया में रहने वाली स्किथी लोगों की एक जनजाति या जनजातियों का समूह था। इनकी सही नस्ल की पहचान करना कठिन रहा है क्योंकि प्राचीन भारतीय, ईरानी, यूनानी और चीनी स्रोत इनका अलग-अलग विवरण देते हैं। फिर भी अधिकतर इतिहासकार मानते हैं कि 'सभी शक स्किथी थे, लेकिन सभी स्किथी शक नहीं थे', यानि 'शक' स्किथी समुदाय के अन्दर के कुछ हिस्सों का जाति नाम था। स्किथी विश्व के भाग होने के नाते शक एक प्राचीन ईरानी भाषा-परिवार की बोली बोलते थे और इनका अन्य स्किथी-सरमती लोगों से सम्बन्ध था। शकों का भारत के इतिहास पर गहरा असर रहा है क्योंकि यह युएझ़ी लोगों के दबाव से भारतीय उपमहाद्वीप में घुस आये और उन्होंने यहाँ एक बड़ा साम्राज्य बनाया। आधुनिक भारतीय राष्ट्रीय कैलंडर 'शक संवत' कहलाता है। बहुत से इतिहासकार इनके दक्षिण एशियाई साम्राज्य को 'शकास्तान' कहने लगे हैं, जिसमें पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, सिंध, ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा और अफ़्ग़ानिस्तान शामिल थे।, Vesta Sarkhosh Curtis, Sarah Stewart, I.B.Tauris, 2007, ISBN 978-1-84511-406-0,...

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शक संवत

शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ७८ ई. से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। शक संवत्‌ के विषय में बुदुआ का मत है कि इसे उज्जयिनी के क्षत्रप चेष्टन ने प्रचलित किया। शक राज्यों को चंद्रगुप्त विक्रमादित्य ने समाप्त कर दिया पर उनका स्मारक शक संवत्‌ अभी तक भारतवर्ष में चल रहा है।;कुछ अन्य संवत.

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श्रावण शुक्ल चतुर्थी

श्रावण शुक्ल चतुर्थी भारतीय पंचांग के अनुसार पांचवे माह की चतुर्थ तिथि है, वर्षान्त में अभी २३६ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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श्रावण शुक्ल चतुर्दशी

श्रावण शुक्ल चतुर्दशी भारतीय पंचांग के अनुसार पांचवे माह की चौदहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २२६ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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श्रावण शुक्ल एकादशी

श्रावण शुक्ल एकादशी भारतीय पंचांग के अनुसार पांचवे माह की ग्यारहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २२९ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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श्रावण शुक्ल त्रयोदशी

श्रावण शुक्ल त्रयोदशी भारतीय पंचांग के अनुसार पांचवे माह की तेरहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २२७ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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श्रावण शुक्ल तृतीया

श्रावण शुक्ल तृतीया भारतीय पंचांग के अनुसार पांचवे माह की तृतीय तिथि है, वर्षान्त में अभी २३७ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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श्रावण शुक्ल दशमी

श्रावण शुक्ल दशमी भारतीय पंचांग के अनुसार पांचवे माह की दसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २३० तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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श्रावण शुक्ल द्वादशी

श्रावण शुक्ल द्वादशी भारतीय पंचांग के अनुसार पांचवे माह की बारहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २२८ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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श्रावण शुक्ल द्वितीया

श्रावण शुक्ल द्वितीया भारतीय पंचांग के अनुसार पांचवे माह की द्वितीय तिथि है, वर्षान्त में अभी २३८ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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श्रावण शुक्ल नवमी

श्रावण शुक्ल नवमी भारतीय पंचांग के अनुसार पांचवे माह की नौवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २३१ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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श्रावण शुक्ल पञ्चमी

श्रावण शुक्ल पंचमी भारतीय पंचांग के अनुसार पांचवे माह की पाँचवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २३५ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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श्रावण शुक्ल प्रतिपदा

श्रावण शुक्ल प्रतिपदा भारतीय पंचांग के अनुसार पांचवे माह की प्रथम तिथि है, वर्षान्त में अभी २३९ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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श्रावण शुक्ल षष्ठी

श्रावण शुक्ल षष्ठी भारतीय पंचांग के अनुसार पांचवे माह की छठवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २३४ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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श्रावण शुक्ल सप्तमी

श्रावण शुक्ल सप्तमी भारतीय पंचांग के अनुसार पांचवे माह की सातवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २३३ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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श्रावण शुक्ल अष्टमी

श्रावण शुक्ल अष्टमी भारतीय पंचांग के अनुसार पांचवे माह की आठवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २३२ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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श्रावण कृष्ण चतुर्थी

श्रावण कृष्ण चतुर्थी भारतीय पंचांग के अनुसार पांचवे माह की उन्नीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २२१ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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श्रावण कृष्ण चतुर्दशी

श्रावण कृष्ण चतुर्दशी भारतीय पंचांग के अनुसार पांचवे माह की उनतीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २११ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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श्रावण कृष्ण एकादशी

श्रावण कृष्ण एकादशी भारतीय पंचांग के अनुसार पांचवे माह की छब्बीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २१४ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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श्रावण कृष्ण त्रयोदशी

श्रावण कृष्ण त्रयोदशी भारतीय पंचांग के अनुसार पांचवे माह की अट्ठाइसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २१२ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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श्रावण कृष्ण तृतीया

श्रावण कृष्ण तृतीया भारतीय पंचांग के अनुसार पांचवे माह की अट्ठारहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २२२ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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श्रावण कृष्ण दशमी

श्रावण कृष्ण दशमी भारतीय पंचांग के अनुसार पांचवे माह की पच्चीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २१५ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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श्रावण कृष्ण द्वादशी

श्रावण कृष्ण द्वादशी भारतीय पंचांग के अनुसार पांचवे माह की सत्ताइसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २१३ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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श्रावण कृष्ण द्वितीया

श्रावण कृष्ण द्वितीया भारतीय पंचांग के अनुसार पांचवे माह की सत्रहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २२३ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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श्रावण कृष्ण नवमी

श्रावण कृष्ण नवमी भारतीय पंचांग के अनुसार पांचवे माह की चौबीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २१६ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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श्रावण कृष्ण पञ्चमी

श्रावण कृष्ण पंचमी भारतीय पंचांग के अनुसार पांचवे माह की बीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २२० तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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श्रावण कृष्ण प्रतिपदा

श्रावण कृष्ण प्रतिपदा भारतीय पंचांग के अनुसार पांचवे माह की सोलहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २२४ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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श्रावण कृष्ण षष्ठी

श्रावण कृष्ण षष्ठी भारतीय पंचांग के अनुसार पांचवे माह की इक्कीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २१९ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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श्रावण कृष्ण सप्तमी

श्रावण कृष्ण सप्तमी भारतीय पंचांग के अनुसार पांचवे माह की बाइसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २१८ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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श्रावण कृष्ण अष्टमी

श्रावण कृष्ण अष्टमी भारतीय पंचांग के अनुसार पांचवे माह की तेइसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २१७ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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श्रावण अमावास्या

श्रावण अमावास्या भारतीय पंचांग के अनुसार पांचवे माह की तीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २१० तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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श्रीरामचरितमानस

गीताप्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित श्रीरामचरितमानस का आवरण श्री राम चरित मानस अवधी भाषा में गोस्वामी तुलसीदास द्वारा १६वीं सदी में रचित एक महाकाव्य है। इस ग्रन्थ को हिंदी साहित्य की एक महान कृति माना जाता है। इसे सामान्यतः 'तुलसी रामायण' या 'तुलसीकृत रामायण' भी कहा जाता है। रामचरितमानस भारतीय संस्कृति में एक विशेष स्थान रखता है। उत्तर भारत में 'रामायण' के रूप में बहुत से लोगों द्वारा प्रतिदिन पढ़ा जाता है। शरद नवरात्रि में इसके सुन्दर काण्ड का पाठ पूरे नौ दिन किया जाता है। रामायण मण्डलों द्वारा शनिवार को इसके सुन्दरकाण्ड का पाठ किया जाता है। श्री रामचरित मानस के नायक राम हैं जिनको एक महाशक्ति के रूप में दर्शाया गया है जबकि महर्षि वाल्मीकि कृत रामायण में श्री राम को एक मानव के रूप में दिखाया गया है। तुलसी के प्रभु राम सर्वशक्तिमान होते हुए भी मर्यादा पुरुषोत्तम हैं। त्रेता युग में हुए ऐतिहासिक राम-रावण युद्ध पर आधारित और हिन्दी की ही एक लोकप्रिय भाषा अवधी में रचित रामचरितमानस को विश्व के १०० सर्वश्रेष्ठ लोकप्रिय काव्यों में ४६वाँ स्थान दिया गया। .

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सप्तर्षि संवत

सप्तर्षि संवत् भारत का प्राचीन संवत है जो ३०७६ ईपू से आरम्भ होता है। महाभारत काल तक इस संवत् का प्रयोग हुआ था। बाद में यह धीरे-धीरे विस्मृत हो गया। एक समय था जब सप्तर्षि-संवत् विलुप्ति की कगार पर पहुंचने ही वाला था, बच गया। इसको बचाने का श्रेय कश्मीर और हिमाचल प्रदेश को है। उल्लेखनीय है कि कश्मीर में सप्तर्षि संवत् को 'लौकिक संवत्' कहते हैं और हिमाचल प्रदेश में 'शास्त्र संवत्'। .

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संवत

संवत्‌, समयगणना का भारतीय मापदंड। भारतीय समाज में अनेक प्रचलित संवत्‌ हैं। मुख्य रूप से दो संवत्‌ चल रहे हैं, प्रथम विक्रम संवत्‌ तथा दूसरा शक संवत्‌। विक्रम संवत्‌ ई. पू.

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हरियाणा

हरियाणा उत्तर भारत का एक राज्य है जिसकी राजधानी चण्डीगढ़ है। इसकी सीमायें उत्तर में हिमाचल प्रदेश, दक्षिण एवं पश्चिम में राजस्थान से जुड़ी हुई हैं। यमुना नदी इसके उत्तराखण्ड और उत्तर प्रदेश राज्यों के साथ पूर्वी सीमा को परिभाषित करती है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली हरियाणा से तीन ओर से घिरी हुई है और फलस्वरूप हरियाणा का दक्षिणी क्षेत्र नियोजित विकास के उद्देश्य से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में शामिल है। यह राज्य वैदिक सभ्यता और सिंधु घाटी सभ्यता का मुख्य निवास स्थान है। इस क्षेत्र में विभिन्न निर्णायक लड़ाइयाँ भी हुई हैं जिसमें भारत का अधिकत्तर इतिहास समाहित है। इसमें महाभारत का महाकाव्य युद्ध भी शामिल है। हिन्दू मतों के अनुसार महाभारत का युद्ध कुरुक्षेत्र में हुआ (इसमें भगवान कृष्ण ने भागवत गीता का वादन किया)। इसके अलावा यहाँ तीन पानीपत की लड़ाइयाँ हुई। ब्रितानी भारत में हरियाणा पंजाब राज्य का अंग था जिसे १९६६ में भारत के १७वें राज्य के रूप में पहचान मिली। वर्तमान में खाद्यान और दुध उत्पादन में हरियाणा देश में प्रमुख राज्य है। इस राज्य के निवासियों का प्रमुख व्यवसाय कृषि है। समतल कृषि भूमि निमज्जक कुओं (समर्सिबल पंप) और नहर से सिंचित की जाती है। १९६० के दशक की हरित क्रान्ति में हरियाणा का भारी योगदान रहा जिससे देश खाद्यान सम्पन्न हुआ। हरियाणा, भारत के अमीर राज्यों में से एक है और प्रति व्यक्ति आय के आधार पर यह देश का दूसरा सबसे धनी राज्य है। वर्ष २०१२-१३ में देश में इसकी प्रति-व्यक्ति १,१९,१५८ (अर्थव्यवस्था के आकार के आधार पर भारत के राज्य देखें) और वर्ष २०१३-१४ में १,३२,०८९ रही। इसके अतिरिक्त भारत में सबसे अधिक ग्रामीण करोड़पति भी इसी राज्य में हैं। हरियाणा आर्थिक रूप से दक्षिण एशिया का सबसे विकसित क्षेत्र है और यहाँ कृषि एवं विनिर्माण उद्योग ने १९७० के दशक से निरंतर वृद्धि का प्राप्त की है। भारत में हरियाणा यात्रि कारों, द्विचक्र वाहनों और ट्रैक्टरों के निर्माण में सर्वोपरी राज्य है। भारत में प्रति व्यक्ति निवेश के आधार पर वर्ष २००० से राज्य सर्वोपरी स्थान पर रहा है। .

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हिन्दू पंचांग

हिन्दू पञ्चाङ्ग से आशय उन सभी प्रकार के पञ्चाङ्गों से है जो परम्परागत रूप प्राचीन काल से भारत में प्रयुक्त होते आ रहे हैं। ये चान्द्रसौर प्रकृति के होते हैं। सभी हिन्दू पञ्चाङ्ग, कालगणना की समान संकल्पनाओं और विधियों पर आधारित होते हैं किन्तु मासों के नाम, वर्ष का आरम्भ (वर्षप्रतिपदा) आदि की दृष्टि से अलग होते हैं। भारत में प्रयुक्त होने वाले प्रमुख क्षेत्रीय पञ्चाङ्ग ये हैं-.

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जमरूद किला

जमरूद किला ख़ैबर दर्रे के मुख पर स्थित बाब-ए-ख़ैबर के पास स्थित एक क़िला है। प्रशासनिक रूप से यह पाकिस्तान के ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा के संघ-शासित जनजातीय क्षेत्र में पड़ता है। .

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जम्मू

जम्मू (جموں, पंजाबी: ਜੰਮੂ), भारत के उत्तरतम राज्य जम्मू एवं कश्मीर में तीन में से एक प्रशासनिक खण्ड है। यह क्षेत्र अपने आप में एक राज्य नहीं वरन जम्मू एवं कश्मीर राज्य का एक भाग है। क्षेत्र के प्रमुख जिलों में डोडा, कठुआ, उधमपुर, राजौरी, रामबन, रियासी, सांबा, किश्तवार एवं पुंछ आते हैं। क्षेत्र की अधिकांश भूमि पहाड़ी या पथरीली है। इसमें ही पीर पंजाल रेंज भी आता है जो कश्मीर घाटी को वृहत हिमालय से पूर्वी जिलों डोडा और किश्तवार में पृथक करता है। यहाम की प्रधान नदी चेनाब (चंद्रभागा) है। जम्मू शहर, जिसे आधिकारिक रूप से जम्मू-तवी भी कहते हैं, इस प्रभाग का सबसे बड़ा नगर है और जम्मू एवं कश्मीर राज्य की शीतकालीन राजधानी भी है। नगर के बीच से तवी नदी निकलती है, जिसके कारण इस नगर को यह आधिकारिक नाम मिला है। जम्मू नगर को "मन्दिरों का शहर" भी कहा जाता है, क्योंकि यहां ढेरों मन्दिर एवं तीर्थ हैं जिनके चमकते शिखर एवं दमकते कलश नगर की क्षितिजरेखा पर सुवर्ण बिन्दुओं जैसे दिखाई देते हैं और एक पवित्र एवं शांतिपूर्ण हिन्दू नगर का वातावरण प्रस्तुत करते हैं। यहां कुछ प्रसिद्ध हिन्दू तीर्थ भी हैं, जैसे वैष्णो देवी, आदि जिनके कारण जम्मू हिन्दू तीर्थ नगरों में गिना जाता है। यहाम की अधिकांश जनसंख्या हिन्दू ही है। हालांकि दूसरे स्थान पर यहां सिख धर्म ही आता है। वृहत अवसंरचना के कारण जम्मू इस राज्य का प्रमुख आर्थिक केन्द्र बनकर उभरा है। .

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ज्येष्ठ शुक्ल चतुर्थी

ज्येष्ठ शुक्ल चतुर्थी भारतीय पंचांग के अनुसार तृतीय माह की चतुर्थ तिथि है, वर्षान्त में अभी २९६ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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ज्येष्ठ शुक्ल चतुर्दशी

ज्येष्ठ शुक्ल चतुर्दशी भारतीय पंचांग के अनुसार तृतीय माह की चौदहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २८६ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी

ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी भारतीय पंचांग के अनुसार तृतीय माह की ग्यारहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २८९ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी

ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी भारतीय पंचांग के अनुसार तृतीय माह की तेरहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २८७ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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ज्येष्ठ शुक्ल तृतीया

ज्येष्ठ शुक्ल तृतीया भारतीय पंचांग के अनुसार तृतीय माह की तृतीय तिथि है, वर्षान्त में अभी २९७ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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ज्येष्ठ शुक्ल दशमी

ज्येष्ठ शुक्ल दशमी भारतीय पंचांग के अनुसार तृतीय माह की दसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २९० तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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ज्येष्ठ शुक्ल द्वादशी

ज्येष्ठ शुक्ल द्वादशी भारतीय पंचांग के अनुसार तृतीय माह की बारहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २८८ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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ज्येष्ठ शुक्ल द्वितीया

ज्येष्ठ शुक्ल द्वितीया भारतीय पंचांग के अनुसार तृतीय माह की द्वितीय तिथि है, वर्षान्त में अभी २९८ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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ज्येष्ठ शुक्ल नवमी

ज्येष्ठ शुक्ल नवमी भारतीय पंचांग के अनुसार तृतीय माह की नौवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २९१ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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ज्येष्ठ शुक्ल पञ्चमी

ज्येष्ठ शुक्ल पंचमी भारतीय पंचांग के अनुसार तृतीय माह की पाँचवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २९५ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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ज्येष्ठ शुक्ल प्रतिपदा

ज्येष्ठ शुक्ल प्रतिपदा भारतीय पंचांग के अनुसार तृतीय माह की प्रथम तिथि है, वर्षान्त में अभी २९९ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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ज्येष्ठ शुक्ल षष्ठी

ज्येष्ठ शुक्ल षष्ठी भारतीय पंचांग के अनुसार तृतीय माह की छठवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २९४ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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ज्येष्ठ शुक्ल सप्तमी

ज्येष्ठ शुक्ल सप्तमी भारतीय पंचांग के अनुसार तृतीय माह की सातवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २९३ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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ज्येष्ठ शुक्ल अष्टमी

ज्येष्ठ शुक्ल अष्टमी भारतीय पंचांग के अनुसार तृतीय माह की आठवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २९२ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्थी

ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्थी भारतीय पंचांग के अनुसार तृतीय माह की उन्नीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २८१ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्दशी

ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्दशी भारतीय पंचांग के अनुसार तृतीय माह की उनतीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २७१ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी

ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी भारतीय पंचांग के अनुसार तृतीय माह की छब्बीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २७४ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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ज्येष्ठ कृष्ण त्रयोदशी

ज्येष्ठ कृष्ण त्रयोदशी भारतीय पंचांग के अनुसार तृतीय माह की अट्ठाइसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २७२ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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ज्येष्ठ कृष्ण तृतीया

ज्येष्ठ कृष्ण तृतीया भारतीय पंचांग के अनुसार तृतीय माह की अट्ठारहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २८२ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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ज्येष्ठ कृष्ण दशमी

ज्येष्ठ कृष्ण दशमी भारतीय पंचांग के अनुसार तृतीय माह की पच्चीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २७५ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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ज्येष्ठ कृष्ण द्वादशी

ज्येष्ठ कृष्ण द्वादशी भारतीय पंचांग के अनुसार तृतीय माह की सत्ताइसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २७३ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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ज्येष्ठ कृष्ण द्वितीया

ज्येष्ठ कृष्ण द्वितीया भारतीय पंचांग के अनुसार तृतीय माह की सत्रहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २८३ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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ज्येष्ठ कृष्ण नवमी

ज्येष्ठ कृष्ण नवमी भारतीय पंचांग के अनुसार तृतीय माह की चौबीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २७६ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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ज्येष्ठ कृष्ण पञ्चमी

ज्येष्ठ कृष्ण पंचमी भारतीय पंचांग के अनुसार तृतीय माह की बीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २८० तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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ज्येष्ठ कृष्ण प्रतिपदा

ज्येष्ठ कृष्ण प्रतिपदा भारतीय पंचांग के अनुसार तृतीय माह की सोलहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २८४ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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ज्येष्ठ कृष्ण षष्ठी

ज्येष्ठ कृष्ण षष्ठी भारतीय पंचांग के अनुसार तृतीय माह की इक्कीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २७९ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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ज्येष्ठ कृष्ण सप्तमी

ज्येष्ठ कृष्ण सप्तमी भारतीय पंचांग के अनुसार तृतीय माह की बाइसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २७८ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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ज्येष्ठ कृष्ण अष्टमी

ज्येष्ठ कृष्ण अष्टमी भारतीय पंचांग के अनुसार तृतीय माह की तेइसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २७७ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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ज्येष्ठ अमावास्या

ज्येष्ठ अमावास्या भारतीय पंचांग के अनुसार तृतीय माह की तीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २७० तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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विद्याधर चक्रवर्ती

विद्याधर चक्रवर्ती। विद्याधर भट्टाचार्य (?)। विद्याधर (१६९३-१७५१) भारत के नगर-नियोजन के पुरोधा थे। आज से 286 साल पहले जयपुर जैसा सुव्यवस्थित और आधुनिक नगर बसाने के आमेर महाराजा सवाई जयसिंह के सपने को साकार करने में उनकी भूमिका सबसे निर्णायक और महत्वपूर्ण रही। गणित, शिल्पशास्त्र, ज्योतिष और संस्कृत आदि विषयों में उनकी असाधारण गति थी। विद्याधर बंगाल मूल के एक गौड़-ब्राह्मण थे, जिनके दस वैदिक ब्राह्मण पूर्वज आमेर-राज्य की कुलदेवी दुर्गा शिलादेवी की शिला खुलना-उपक्षेत्र के जैसोर (तब पूर्व बंगाल), अब बांग्लादेश) से लाने के समय जयपुर आये थे। उन्हीं में से एक के वंशज विद्याधर थे। .

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विजयानन्दसूरी

आचार्य विजयानन्द सूरी (1837–1896) जिन्हें आत्माराम के नाम से भी जाना जाता है, आधुनिक समय में आचार्य शीर्षक पाने वाले प्रथम श्वेताम्बर मूर्तिपुजक जैन साधु थे। .

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विक्रम संवत २०६६

विक्रम संवत २०६६, विक्रम संवत के अनुसार २०६६वाँ वर्ष है, ग्रीगेरियन कैलेंडर के अनुसार यह २७ मार्च २००७ ई को प्रारम्भ हुआ।.

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विक्रमादित्य

विक्रमादित्य उज्जैन के अनुश्रुत राजा थे, जो अपने ज्ञान, वीरता और उदारशीलता के लिए प्रसिद्ध थे। "विक्रमादित्य" की उपाधि भारतीय इतिहास में बाद के कई अन्य राजाओं ने प्राप्त की थी, जिनमें गुप्त सम्राट चन्द्रगुप्त द्वितीय और सम्राट हेमचन्द्र विक्रमादित्य (जो हेमु के नाम से प्रसिद्ध थे) उल्लेखनीय हैं। राजा विक्रमादित्य नाम, 'विक्रम' और 'आदित्य' के समास से बना है जिसका अर्थ 'पराक्रम का सूर्य' या 'सूर्य के समान पराक्रमी' है।उन्हें विक्रम या विक्रमार्क (विक्रम + अर्क) भी कहा जाता है (संस्कृत में अर्क का अर्थ सूर्य है)। हिन्दू शिशुओं में 'विक्रम' नामकरण के बढ़ते प्रचलन का श्रेय आंशिक रूप से विक्रमादित्य की लोकप्रियता और उनके जीवन के बारे में लोकप्रिय लोक कथाओं की दो श्रृंखलाओं को दिया जा सकता है। .

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वैशाख शुक्ल चतुर्थी

वैशाख शुक्ल चतुर्थी भारतीय पंचांग के अनुसार द्वितीय माह की चतुर्थ तिथि है, वर्षान्त में अभी ३२६ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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वैशाख शुक्ल चतुर्दशी

वैशाख शुक्ल चतुर्दशी भारतीय पंचांग के अनुसार द्वितीय माह की चौदहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ३१६ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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वैशाख शुक्ल एकादशी

वैशाख शुक्ल एकादशी भारतीय पंचांग के अनुसार द्वितीय माह की ग्यारहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ३१९ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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वैशाख शुक्ल त्रयोदशी

वैशाख शुक्ल त्रयोदशी भारतीय पंचांग के अनुसार द्वितीय माह की तेरहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ३१७ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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वैशाख शुक्ल तृतीया

वैशाख शुक्ल तृतीया भारतीय पंचांग के अनुसार द्वितीय माह की तृतीय तिथि है, वर्षान्त में अभी ३२७ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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वैशाख शुक्ल दशमी

वैशाख शुक्ल दशमी भारतीय पंचांग के अनुसार द्वितीय माह की दसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ३२० तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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वैशाख शुक्ल द्वादशी

वैशाख शुक्ल द्वादशी भारतीय पंचांग के अनुसार द्वितीय माह की बारहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ३१८ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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वैशाख शुक्ल द्वितीया

वैशाख शुक्ल द्वितीया भारतीय पंचांग के अनुसार द्वितीय माह की द्वितीय तिथि है, वर्षान्त में अभी ३२८ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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वैशाख शुक्ल नवमी

वैशाख शुक्ल नवमी भारतीय पंचांग के अनुसार द्वितीय माह की नौवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ३२१ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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वैशाख शुक्ल पञ्चमी

वैशाख शुक्ल पंचमी भारतीय पंचांग के अनुसार द्वितीय माह की पाँचवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ३२५ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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वैशाख शुक्ल प्रतिपदा

वैशाख शुक्ल प्रतिपदा भारतीय पंचांग के अनुसार द्वितीय माह की प्रथम तिथि है, वर्षान्त में अभी ३२९ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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वैशाख शुक्ल षष्ठी

वैशाख शुक्ल षष्ठी भारतीय पंचांग के अनुसार द्वितीय माह की छठवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ३२४ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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वैशाख शुक्ल सप्तमी

वैशाख शुक्ल सप्तमी भारतीय पंचांग के अनुसार द्वितीय माह की सातवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ३२३ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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वैशाख शुक्ल अष्टमी

वैशाख शुक्ल अष्टमी भारतीय पंचांग के अनुसार द्वितीय माह की आठवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ३२२ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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वैशाख कृष्ण चतुर्थी

वैशाख कृष्ण चतुर्थी भारतीय पंचांग के अनुसार द्वितीय माह की उन्नीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ३११ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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वैशाख कृष्ण चतुर्दशी

वैशाख कृष्ण चतुर्दशी भारतीय पंचांग के अनुसार द्वितीय माह की उनतीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ३०१ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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वैशाख कृष्ण एकादशी

वैशाख कृष्ण एकादशी भारतीय पंचांग के अनुसार द्वितीय माह की छब्बीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ३०४ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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वैशाख कृष्ण त्रयोदशी

वैशाख कृष्ण त्रयोदशी भारतीय पंचांग के अनुसार द्वितीय माह की अट्ठाइसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ३०२ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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वैशाख कृष्ण तृतीया

वैशाख कृष्ण तृतीया भारतीय पंचांग के अनुसार द्वितीय माह की अट्ठारहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ३१२ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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वैशाख कृष्ण दशमी

वैशाख कृष्ण दशमी भारतीय पंचांग के अनुसार द्वितीय माह की पच्चीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ३०५ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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वैशाख कृष्ण द्वादशी

वैशाख कृष्ण द्वादशी भारतीय पंचांग के अनुसार द्वितीय माह की सत्ताइसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ३०३ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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वैशाख कृष्ण द्वितीया

वैशाख कृष्ण द्वितीया भारतीय पंचांग के अनुसार द्वितीय माह की सत्रहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ३१३ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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वैशाख कृष्ण नवमी

वैशाख कृष्ण नवमी भारतीय पंचांग के अनुसार द्वितीय माह की चौबीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ३०६ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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वैशाख कृष्ण पञ्चमी

वैशाख कृष्ण पंचमी भारतीय पंचांग के अनुसार द्वितीय माह की बीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ३१० तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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वैशाख कृष्ण प्रतिपदा

वैशाख कृष्ण प्रतिपदा भारतीय पंचांग के अनुसार द्वितीय माह की सोलहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ३१४ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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वैशाख कृष्ण षष्ठी

वैशाख कृष्ण षष्ठी भारतीय पंचांग के अनुसार द्वितीय माह की इक्कीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ३०९ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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वैशाख कृष्ण सप्तमी

वैशाख कृष्ण सप्तमी भारतीय पंचांग के अनुसार द्वितीय माह की बाइसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ३०८ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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वैशाख कृष्ण अष्टमी

वैशाख कृष्ण अष्टमी भारतीय पंचांग के अनुसार द्वितीय माह की तेइसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ३०७ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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वैशाख अमावास्या

वैशाख अमावास्या भारतीय पंचांग के अनुसार द्वितीय माह की तीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ३०० तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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खुडाला मन्दिर, पाली

खुडाला मन्दिर जो भारत,राजस्थान राज्य के पाली ज़िले खुडाला गांव में स्थित है। इस मन्दिर का निर्माण विक्रम संवत १२४३ में सोराशाह के बेटे रामदेव ने करवाया था। .

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गुड़ी पड़वा

गुड़ी पड़वा (मराठी-पाडवा) के दिन हिन्दू नव संवत्सरारम्भ माना जाता है। चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा को गुड़ी पड़वा या वर्ष प्रतिपदा या उगादि (युगादि) कहा जाता है। इस दिन हिन्दु नववर्ष का आरम्भ होता है। 'गुड़ी' का अर्थ 'विजय पताका' होता है। कहते हैं शालिवाहन नामक एक कुम्हार-पुत्र ने मिट्टी के सैनिकों की सेना से प्रभावी शत्रुओं का पराभव किया। इस विजय के प्रतीक रूप में शालिवाहन शक का प्रारंभ इसी दिन से होता है। ‘युग‘ और ‘आदि‘ शब्दों की संधि से बना है ‘युगादि‘। आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में ‘उगादि‘ और महाराष्ट्र में यह पर्व 'ग़ुड़ी पड़वा' के रूप में मनाया जाता है।इसी दिन चैत्र नवरात्रि का प्रारम्भ होता है। .

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गुरु जम्भेश्वर

अंगूठाकार श्री गुरू जम्भेश्वर बिश्नोई संप्रदाय के संस्थापक थे। ये जाम्भोजी के नाम से भी जाने जाते है। इन्होंने 1485 में बिश्नोई पंथ की स्थापना की। 'हरि' नाम का वाचन किया करते थे। हरि भगवान विष्णु का एक नाम हैं। बिश्नोई शब्द मूल रूप से वैष्णवी शब्द से निकला है, जिसका अर्थ है:- विष्णु से सम्बंधित अथवा विष्णु के उपासक। गुरु जम्भेश्वर का मानना था कि भगवान सर्वत्र है। वे हमेशा पेड़ पौधों की तथा जानवरों की रक्षा करने का संदेश देते थे। इन्होंने समराथल धोरा पर विक्रम संवत के अनुसार कार्तिक माह में 8 दिन तक बैठ कर तपस्या की थी। इनका जन्म राजस्थान के नागौर परगने के पीपासर गांव में सन् 1451 में हुआ था। .

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गेंदालाल दीक्षित

गेंदालाल दीक्षित (१८८८-१९२०) पं॰ गेंदालाल दीक्षित (अंग्रेजी:Pt. Genda Lal Dixit जन्म:१८८८, मृत्यु:१९२०) भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अप्रतिम योद्धा, महान क्रान्तिकारी व उत्कट राष्ट्रभक्त थे जिन्होंने आम आदमी की बात तो दूर, डाकुओं तक को संगठित करके ब्रिटिश साम्राज्य के विरुद्ध खडा करने का दुस्साहस किया। दीक्षित जी उत्तर भारत के क्रान्तिकारियों के द्रोणाचार्य कहे जाते थे। उन्हें मैनपुरी षड्यन्त्र का सूत्रधार समझ कर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया किन्तु वे अपनी सूझबूझ और प्रत्युत्पन्न मति से जेल से निकल भागे। साथ में एक सरकारी गवाह को भी ले उड़े। सबसे मजे की बात यह कि पुलिस ने सारे हथकण्डे अपना लिये परन्तु उन्हें अन्त तक खोज नहीं पायी। आखिर में कोर्ट को उन्हें फरार घोषित करके मुकदमे का फैसला सुनाना पड़ा। .

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आमेर दुर्ग

आमेर दुर्ग (जिसे आमेर का किला या आंबेर का किला नाम से भी जाना जाता है) भारत के राजस्थान राज्य की राजधानी जयपुर के आमेर क्षेत्र में एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित एक पर्वतीय दुर्ग है। यह जयपुर नगर का प्रधान पर्यटक आकर्षण है। आमेर का कस्बा मूल रूप से स्थानीय मीणाओं द्वारा बसाया गया था, जिस पर कालांतर में कछवाहा राजपूत मान सिंह प्रथम ने राज किया व इस दुर्ग का निर्माण करवाया। यह दुर्ग व महल अपने कलात्मक विशुद्ध हिन्दू वास्तु शैली के घटकों के लिये भी जाना जाता है। दुर्ग की विशाल प्राचीरों, द्वारों की शृंखलाओं एवं पत्थर के बने रास्तों से भरा ये दुर्ग पहाड़ी के ठीक नीचे बने मावठा सरोवर को देखता हुआ प्रतीत होता है। लाल बलुआ पत्थर एवं संगमर्मर से निर्मित यह आकर्षक एवं भव्य दुर्ग पहाड़ी के चार स्तरों पर बना हुआ है, जिसमें से प्रत्येक में विशाल प्रांगण हैं। इसमें दीवान-ए-आम अर्थात जन साधारण का प्रांगण, दीवान-ए-खास अर्थात विशिष्ट प्रांगण, शीश महल या जय मन्दिर एवं सुख निवास आदि भाग हैं। सुख निवास भाग में जल धाराओं से कृत्रिम रूप से बना शीतल वातावरण यहां की भीषण ग्रीष्म-ऋतु में अत्यानन्ददायक होता था। यह महल कछवाहा राजपूत महाराजाओं एवं उनके परिवारों का निवास स्थान हुआ करता था। दुर्ग के भीतर महल के मुख्य प्रवेश द्वार के निकट ही इनकी आराध्या चैतन्य पंथ की देवी शिला को समर्पित एक मन्दिर बना है। आमेर एवं जयगढ़ दुर्ग अरावली पर्वतमाला के एक पर्वत के ऊपर ही बने हुए हैं व एक गुप्त पहाड़ी सुरंग के मार्ग से जुड़े हुए हैं। फ्नोम पेन्ह, कम्बोडिया में वर्ष २०१३ में आयोजित हुए विश्व धरोहर समिति के ३७वें सत्र में राजस्थान के पांच अन्य दर्गों सहित आमेर दुर्ग को राजस्थान के पर्वतीय दुर्गों के भाग के रूप में युनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया है। .

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आश्विन शुक्ल चतुर्थी

आश्विन शुक्ल चतुर्थी भारतीय पंचांग के अनुसार सातवें माह की चतुर्थ तिथि है, वर्षान्त में अभी १७६ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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आश्विन शुक्ल चतुर्दशी

आश्विन शुक्ल चतुर्दशी भारतीय पंचांग के अनुसार सातवें माह की चौदहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १६६ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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आश्विन शुक्ल एकादशी

आश्विन शुक्ल एकादशी भारतीय पंचांग के अनुसार सातवें माह की ग्यारहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १६९ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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आश्विन शुक्ल त्रयोदशी

आश्विन शुक्ल त्रयोदशी भारतीय पंचांग के अनुसार सातवें माह की तेरहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १६७ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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आश्विन शुक्ल तृतीया

आश्विन शुक्ल तृतीया भारतीय पंचांग के अनुसार सातवें माह की तृतीय तिथि है, वर्षान्त में अभी १७७ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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आश्विन शुक्ल दशमी

आश्विन शुक्ल दशमी भारतीय पंचांग के अनुसार सातवें माह की दसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १७० तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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आश्विन शुक्ल द्वादशी

आश्विन शुक्ल द्वादशी भारतीय पंचांग के अनुसार सातवें माह की बारहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १६८ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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आश्विन शुक्ल द्वितीया

आश्विन शुक्ल द्वितीया भारतीय पंचांग के अनुसार सातवें माह की द्वितीय तिथि है, वर्षान्त में अभी १७८ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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आश्विन शुक्ल नवमी

आश्विन शुक्ल नवमी भारतीय पंचांग के अनुसार सातवें माह की नौवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १७१ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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आश्विन शुक्ल पञ्चमी

आश्विन शुक्ल पंचमी भारतीय पंचांग के अनुसार सातवें माह की पाँचवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १७५ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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आश्विन शुक्ल प्रतिपदा

आश्विन शुक्ल प्रतिपदा भारतीय पंचांग के अनुसार सातवें माह की प्रथम तिथि है, वर्षान्त में अभी १७९ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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आश्विन शुक्ल षष्ठी

आश्विन शुक्ल षष्ठी भारतीय पंचांग के अनुसार सातवें माह की छठवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १७४ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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आश्विन शुक्ल सप्तमी

आश्विन शुक्ल सप्तमी भारतीय पंचांग के अनुसार सातवें माह की सातवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १७३ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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आश्विन शुक्ल अष्टमी

आश्विन शुक्ल अष्टमी भारतीय पंचांग के अनुसार सातवें माह की आठवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १७२ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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आश्विन कृष्ण चतुर्थी

आश्विन कृष्ण चतुर्थी भारतीय पंचांग के अनुसार सातवें माह की उन्नीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १६१ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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आश्विन कृष्ण चतुर्दशी

आश्विन कृष्ण चतुर्दशी भारतीय पंचांग के अनुसार सातवें माह की उनतीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १५१ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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आश्विन कृष्ण एकादशी

आश्विन कृष्ण एकादशी भारतीय पंचांग के अनुसार सातवें माह की छब्बीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १५४ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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आश्विन कृष्ण त्रयोदशी

आश्विन कृष्ण त्रयोदशी भारतीय पंचांग के अनुसार सातवें माह की अट्ठाइसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १५२ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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आश्विन कृष्ण तृतीया

आश्विन कृष्ण तृतीया भारतीय पंचांग के अनुसार सातवें माह की अट्ठारहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १६२ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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आश्विन कृष्ण दशमी

आश्विन कृष्ण दशमी भारतीय पंचांग के अनुसार सातवें माह की पच्चीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १५५ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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आश्विन कृष्ण द्वादशी

आश्विन कृष्ण द्वादशी भारतीय पंचांग के अनुसार सातवें माह की सत्ताइसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १५३ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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आश्विन कृष्ण द्वितीया

आश्विन कृष्ण द्वितीया भारतीय पंचांग के अनुसार सातवें माह की सत्रहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १६३ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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आश्विन कृष्ण नवमी

आश्विन कृष्ण नवमी भारतीय पंचांग के अनुसार सातवें माह की चौबीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १५६ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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आश्विन कृष्ण पञ्चमी

आश्विन कृष्ण पंचमी भारतीय पंचांग के अनुसार सातवें माह की बीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १६० तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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आश्विन कृष्ण प्रतिपदा

आश्विन कृष्ण प्रतिपदा भारतीय पंचांग के अनुसार सातवें माह की सोलहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १६४ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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आश्विन कृष्ण षष्ठी

आश्विन कृष्ण षष्ठी भारतीय पंचांग के अनुसार सातवें माह की इक्कीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १५९ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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आश्विन कृष्ण सप्तमी

आश्विन कृष्ण सप्तमी भारतीय पंचांग के अनुसार सातवें माह की बाइसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १५८ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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आश्विन कृष्ण अष्टमी

आश्विन कृष्ण अष्टमी भारतीय पंचांग के अनुसार सातवें माह की तेइसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १५७ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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आश्विन अमावास्या

आश्विन अमावास्या भारतीय पंचांग के अनुसार सातवें माह की तीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १५० तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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आषाढ शुक्ल चतुर्थी

आषाढ शुक्ल चतुर्थी भारतीय पंचांग के अनुसार चतुर्थ माह की चतुर्थ तिथि है, वर्षान्त में अभी २६६ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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आषाढ शुक्ल चतुर्दशी

आषाढ शुक्ल चतुर्दशी भारतीय पंचांग के अनुसार चतुर्थ माह की चौदहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २५६ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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आषाढ शुक्ल एकादशी

आषाढ शुक्ल एकादशी भारतीय पंचांग के अनुसार चतुर्थ माह की ग्यारहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २५९ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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आषाढ शुक्ल त्रयोदशी

आषाढ शुक्ल त्रयोदशी भारतीय पंचांग के अनुसार चतुर्थ माह की तेरहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २५७ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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आषाढ शुक्ल तृतीया

आषाढ शुक्ल तृतीया भारतीय पंचांग के अनुसार चतुर्थ माह की तृतीय तिथि है, वर्षान्त में अभी २६७ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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आषाढ शुक्ल दशमी

आषाढ शुक्ल दशमी भारतीय पंचांग के अनुसार चतुर्थ माह की दसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २६० तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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आषाढ शुक्ल द्वादशी

आषाढ शुक्ल द्वादशी भारतीय पंचांग के अनुसार चतुर्थ माह की बारहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २५८ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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आषाढ शुक्ल द्वितीया

आषाढ शुक्ल द्वितीया भारतीय पंचांग के अनुसार चतुर्थ माह की द्वितीय तिथि है, वर्षान्त में अभी २६८ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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आषाढ शुक्ल नवमी

आषाढ शुक्ल नवमी भारतीय पंचांग के अनुसार चतुर्थ माह की नौवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २६१ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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आषाढ शुक्ल पञ्चमी

आषाढ शुक्ल पंचमी भारतीय पंचांग के अनुसार चतुर्थ माह की पाँचवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २६५ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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आषाढ शुक्ल प्रतिपदा

आषाढ शुक्ल प्रतिपदा भारतीय पंचांग के अनुसार चतुर्थ माह की प्रथम तिथि है, वर्षान्त में अभी २६९ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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आषाढ शुक्ल पूर्णिमा

आषाढ शुक्ल पूर्णिमा भारतीय पंचांग के अनुसार चतुर्थ माह की पन्द्रहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २५५ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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आषाढ शुक्ल षष्ठी

आषाढ शुक्ल षष्ठी भारतीय पंचांग के अनुसार चतुर्थ माह की छठवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २६४ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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आषाढ शुक्ल सप्तमी

आषाढ शुक्ल सप्तमी भारतीय पंचांग के अनुसार चतुर्थ माह की सातवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २६३ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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आषाढ शुक्ल अष्टमी

आषाढ शुक्ल अष्टमी भारतीय पंचांग के अनुसार चतुर्थ माह की आठवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २६२ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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आषाढ कृष्ण चतुर्थी

आषाढ कृष्ण चतुर्थी भारतीय पंचांग के अनुसार चतुर्थ माह की उन्नीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २५१ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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आषाढ कृष्ण चतुर्दशी

आषाढ कृष्ण चतुर्दशी भारतीय पंचांग के अनुसार चतुर्थ माह की उनतीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २४१ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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आषाढ कृष्ण एकादशी

आषाढ कृष्ण एकादशी भारतीय पंचांग के अनुसार चतुर्थ माह की छब्बीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २४४ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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आषाढ कृष्ण त्रयोदशी

आषाढ कृष्ण त्रयोदशी भारतीय पंचांग के अनुसार चतुर्थ माह की अट्ठाइसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २४२ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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आषाढ कृष्ण तृतीया

आषाढ कृष्ण तृतीया भारतीय पंचांग के अनुसार चतुर्थ माह की अट्ठारहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २५२ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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आषाढ कृष्ण दशमी

आषाढ कृष्ण दशमी भारतीय पंचांग के अनुसार चतुर्थ माह की पच्चीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २४५ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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आषाढ कृष्ण द्वादशी

आषाढ कृष्ण द्वादशी भारतीय पंचांग के अनुसार चतुर्थ माह की सत्ताइसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २४३ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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आषाढ कृष्ण द्वितीया

आषाढ कृष्ण द्वितीया भारतीय पंचांग के अनुसार चतुर्थ माह की सत्रहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २५३ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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आषाढ कृष्ण नवमी

आषाढ कृष्ण नवमी भारतीय पंचांग के अनुसार चतुर्थ माह की चौबीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २४६ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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आषाढ कृष्ण पञ्चमी

आषाढ कृष्ण पंचमी भारतीय पंचांग के अनुसार चतुर्थ माह की बीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २५० तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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आषाढ कृष्ण प्रतिपदा

आषाढ कृष्ण प्रतिपदा भारतीय पंचांग के अनुसार चतुर्थ माह की सोलहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २५४ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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आषाढ कृष्ण षष्ठी

आषाढ कृष्ण षष्ठी भारतीय पंचांग के अनुसार चतुर्थ माह की इक्कीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २४९ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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आषाढ कृष्ण सप्तमी

आषाढ कृष्ण सप्तमी भारतीय पंचांग के अनुसार चतुर्थ माह की बाइसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २४८ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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आषाढ कृष्ण अष्टमी

आषाढ कृष्ण अष्टमी भारतीय पंचांग के अनुसार चतुर्थ माह की तेइसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २४७ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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आषाढ अमावास्या

आषाढ अमावास्या भारतीय पंचांग के अनुसार चतुर्थ माह की तीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी २४० तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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कलि संवत

कलियुग संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ३१०२ ईपू से आरम्भ होता है। इस संवत की शुरुआत पांडवो के द्वारा अर्जुन के पुत्र को सिँहासनारुढ़ करके स्वयं हिमालय की और प्रस्थान करने एंव भगवान श्रीकृष्ण के वैकुण्ठ जाने से मानी जाती है। अन्य संवत.

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कल्ला जी राठौड़

कल्ला जी राठौड़ जसोल,मेहवा के रावल मेघराज के ज्येष्ठ पुत्र थे,इनकी मृत्यू तीसरे साका युद्ध (विक्रम संवत 1624) में चितौड़गढ में अकबर से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हो गये थे ' ये मेवाड़ के लिये महाराणा प्रताप के साथ अकबर से युद्ध किया था ' .

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कार्तिक शुक्ल चतुर्थी

कार्तिक शुक्ल चतुर्थी भारतीय पंचांग के अनुसार आठवें माह की चतुर्थ तिथि है, वर्षान्त में अभी १४६ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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कार्तिक शुक्ल एकादशी

कार्तिक शुक्ल एकादशी भारतीय पंचांग के अनुसार आठवें माह की ग्यारहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १३९ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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कार्तिक शुक्ल त्रयोदशी

कार्तिक शुक्ल त्रयोदशी भारतीय पंचांग के अनुसार आठवें माह की तेरहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १३७ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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कार्तिक शुक्ल तृतीया

कार्तिक शुक्ल तृतीया भारतीय पंचांग के अनुसार आठवें माह की तृतीय तिथि है, वर्षान्त में अभी १४७ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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कार्तिक शुक्ल दशमी

कार्तिक शुक्ल दशमी भारतीय पंचांग के अनुसार आठवें माह की दसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १४० तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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कार्तिक शुक्ल द्वादशी

कार्तिक शुक्ल द्वादशी भारतीय पंचांग के अनुसार आठवें माह की बारहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १३८ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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कार्तिक शुक्ल द्वितीया

कार्तिक शुक्ल द्वितीया भारतीय पंचांग के अनुसार आठवें माह की द्वितीय तिथि है, वर्षान्त में अभी १४८ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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कार्तिक शुक्ल नवमी

कार्तिक शुक्ल नवमी भारतीय पंचांग के अनुसार आठवें माह की नौवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १४१ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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कार्तिक शुक्ल पञ्चमी

कार्तिक शुक्ल पंचमी भारतीय पंचांग के अनुसार आठवें माह की पाँचवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १४५ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा

कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा भारतीय पंचांग के अनुसार आठवें माह की प्रथम तिथि है, वर्षान्त में अभी १४९ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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कार्तिक शुक्ल षष्ठी

कार्तिक शुक्ल षष्ठी भारतीय पंचांग के अनुसार आठवें माह की छठवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १४४ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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कार्तिक शुक्ल सप्तमी

कार्तिक शुक्ल सप्तमी भारतीय पंचांग के अनुसार आठवें माह की सातवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १४३ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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कार्तिक कृष्ण चतुर्थी

कार्तिक कृष्ण चतुर्थी भारतीय पंचांग के अनुसार आठवें माह की उन्नीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १३१ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी

कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी भारतीय पंचांग के अनुसार आठवें माह की उनतीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १२१ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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कार्तिक कृष्ण एकादशी

कार्तिक कृष्ण एकादशी भारतीय पंचांग के अनुसार आठवें माह की छब्बीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १२४ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी

कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी भारतीय पंचांग के अनुसार आठवें माह की अट्ठाइसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १२२ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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कार्तिक कृष्ण तृतीया

कार्तिक कृष्ण तृतीया भारतीय पंचांग के अनुसार आठवें माह की अट्ठारहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १३२ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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कार्तिक कृष्ण दशमी

कार्तिक कृष्ण दशमी भारतीय पंचांग के अनुसार आठवें माह की पच्चीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १२५ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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कार्तिक कृष्ण द्वादशी

कार्तिक कृष्ण द्वादशी भारतीय पंचांग के अनुसार आठवें माह की सत्ताइसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १२३ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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कार्तिक कृष्ण द्वितीया

कार्तिक कृष्ण द्वितीया भारतीय पंचांग के अनुसार आठवें माह की सत्रहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १३३ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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कार्तिक कृष्ण नवमी

कार्तिक कृष्ण नवमी भारतीय पंचांग के अनुसार आठवें माह की चौबीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १२६ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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कार्तिक कृष्ण पञ्चमी

कार्तिक कृष्ण पंचमी भारतीय पंचांग के अनुसार आठवें माह की बीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १३० तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा

कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा भारतीय पंचांग के अनुसार आठवें माह की सोलहवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १३४ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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कार्तिक कृष्ण षष्ठी

कार्तिक कृष्ण षष्ठी भारतीय पंचांग के अनुसार आठवें माह की इक्कीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १२९ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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कार्तिक कृष्ण सप्तमी

कार्तिक कृष्ण सप्तमी भारतीय पंचांग के अनुसार आठवें माह की बाइसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १२८ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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कार्तिक कृष्ण अष्टमी

कार्तिक कृष्ण अष्टमी भारतीय पंचांग के अनुसार आठवें माह की तेइसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १२७ तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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कार्तिक अमावास्या

कार्तिक अमावास्या भारतीय पंचांग के अनुसार आठवें माह की तीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी १२० तिथियाँ अवशिष्ट हैं। .

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अटल बिहारी वाजपेयी हिन्दी विश्वविद्यालय

अटल बि‍हारी वाजपेयी हि‍न्‍दी वि‍श्‍ववि‍द्यालय भोपाल में स्थित एक विश्वविद्यालय है। 6 जून 2013 में भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी ने इसकी की आधारशि‍ला रखी। यह विश्वविद्यालय तकनीकी, चिकित्सा, कला और वाणिज्य से जुड़े विषयों की शिक्षा प्रदान करेगा। मध्यप्रदेश और भारतवासियों के स्वभाषा और सुभाषा के माध्यम से ज्ञान की परम्परागत और आधुनिक विधाओं में शिक्षण-प्रशिक्षण की व्यवस्था और हिन्दी को गौरवपूर्ण स्थान दिलाने के लिये मध्य प्रदेश सरकार द्वारा इसकी स्थापना 19 दिसम्बर 2011 को की गयी। भारत के पूर्व प्रधानमन्त्री अटल बिहारी वाजपेयी राष्ट्रभाषा हिन्दी के प्रबल पक्षधर रहे हैं। इसीलिये इस विश्वविद्यालय का नाम उनके नाम पर रखा गया। भोपाल चूँकि भारतवर्ष के केन्द्र में स्थित है अत: इस विश्वविद्यालय को वहाँ स्थापित किया गया। इस विश्वविद्यालय का प्रमुख उद्देश्य हिन्दी भाषा को अध्यापन, प्रशिक्षण, ज्ञान की वृद्धि और प्रसार के लिये तथा विज्ञान, साहित्य, कला और अन्य विधाओं में उच्चस्तरीय गवेषणा हेतु शिक्षण का माध्यम बनाना है। यह विश्वविद्यालय मध्य प्रदेश में हिन्दी माध्यम से ज्ञान के सभी अनुशासनों में अध्ययन, अध्यापन एवं शोध कराने वाला प्रथम विश्वविद्यालय है। यहाँ विद्यार्थियों के लिये प्रशिक्षण, प्रमाण‍-‍‍पत्र, पत्रोपाधि, स्नातक, स्नातकोत्तर, एम॰फिल॰, पीएच॰डी॰, डी॰लिट॰ व डी॰एससी॰ जैसे अनेक उपाधि कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। 30 जून 2012 को प्रो॰ मोहनलाल छीपा इस विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलपति नियुक्त किये गये। इससे पूर्व वे महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर के कुलपति थे। भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने 6 जून 2013 को भोपाल के ग्राम मुगालिया कोट में विश्वविद्यालय भवन का शिलान्यास किया। विश्वविद्यालय का भवन 50 एकड़ में बनेगा। अगस्त 2013 से विश्वविद्यालय ने शिक्षण कार्य प्रारम्भ भी कर दिया है। वर्तमान में प्रो.रामदेव भारद्वाज इस विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति हैं दिनांक 8/03/2017 को अंतरराष्ट्रिय महिला दिवस के मौके पर विकिपीडिया की टीम के द्वारा कार्य शाला का आयोजन किया गया। .

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अम्बामाता मन्दिर

अम्बामाता मन्दिर एक हिन्दू मन्दिर है जो भारतीय राज्य राजस्थान के उदयपुर जिले में है। यह उदयपुर ज़िले का एक मुख्य मन्दिर है इस मन्दिर का निर्माण महाराणा राज सिंह ने करवाया था। यह माना जाता है कि महाराणा राज सिंह प्रथम देवी के निर्देश पर इस मंदिर का निर्माण करवाया था। .

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अष्टमंगल

शंख, चक्र, मीन (मछली) आदि अष्टमंगल तीर्थंकर आदिनाथ की प्रतिमा और उसके आगे रखे अष्टमंगल अष्टमांगालिक चिह्नों के समुदाय को अष्टमंगल कहा गया है। आठ प्रकार के मंगल द्रव्य और शुभकारक वस्तुओं को अष्टमंगल के रूप में जाना जाता है। सांची के स्तूप के तोरणास्तंभ पर उत्कीर्ण शिल्प में मांगलिक चिहों से बनी हुई दो मालाएँ अंकित हैं। एक में 11 चिह्न हैं - सूर्य, चक्र, पद्यसर, अंकुश, वैजयंती, कमल, दर्पण, परशु, श्रीवत्स, मीनमिथुन और श्रीवृक्ष। दूसरी माला में कमल, अंकुश, कल्पवृक्ष, दर्पण, श्रीवत्स, वैजयंती, मीनयुगल, परशु पुष्पदाम, तालवृक्ष तथा श्रीवृक्ष हैं। इनसे ज्ञात होता है कि लोक में अनेक प्रकार के मांगालिक चिह्नों की मान्यता थी। विक्रम संवत् के आरंभ के लगभग मथुरा की जैन कला में अष्टमांगलिक चिहों की संख्या और स्वरूप निश्चित हो गए। कुषाणकालीन आयागपटों पर अंकित ये चिह्न इस प्रकार है: मीनमिथुन, देवविमानगृह, श्रीवत्स, वर्धमान या शराव, संपुट, त्रिरत्न, पुप्पदाम, इंद्रयष्टि या वैजयंती ओर पूर्णघट। इन आठ मांगलिक चिह्नों की आकृति के ठीकरों से बना आभूषण अष्टमांगलिक माला कहलाता था। कुषाणकालीन जैन ग्रंथ अंगाविज्जा, गुप्तकालीन बौद्धग्रंथ महाव्युत्पत्ति ओर बाणकृत हर्षचरित में अष्टमांगलिक माला आभूषण का उल्लेख हुआ है। बाद के साहित्य और लोकजीवन में भी इन चिहों की मान्यता और पूजा सुरक्षित रही, किंतु इनके नामों में परिवर्तन भी देखा जाता है। शब्दकल्पद्रुम में उद्धृत एक प्रमाण के अनुसार सिंह, वृषभ, गज, कलश, व्यजन, वैजयंती, दीपक और दुंदुभी, ये अष्टमंगल थे।.

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१ ईसा पूर्व

१ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचांग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१० ईसा पूर्व

१० ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १० ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०० ईसा पूर्व

१०० ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०० ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१००० ईसा पूर्व

१००० ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १००० ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१००१ ईसा पूर्व

१००१ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १००१ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१००२ ईसा पूर्व

१००२ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १००२ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१००३ ईसा पूर्व

१००३ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १००३ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१००४ ईसा पूर्व

१००४ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १००४ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१००५ ईसा पूर्व

१००५ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १००५ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१००६ ईसा पूर्व

१००६ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १००६ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१००७ ईसा पूर्व

१००७ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १००७ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१००८ ईसा पूर्व

१००८ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १००८ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१००९ ईसा पूर्व

१००९ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १००९ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०१ ईसा पूर्व

१०१ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०१ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचांग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०१० ईसा पूर्व

१०१० ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०१० ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०११ ईसा पूर्व

१०११ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०११ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०१२ ईसा पूर्व

१०१२ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०१२ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०१३ ईसा पूर्व

१०१३ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०१३ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कैलेण्डर पर आधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०१४ ईसा पूर्व

१०१४ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०१४ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०१५ ईसा पूर्व

१०१५ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०१५ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०१६ ईसा पूर्व

१०१६ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०१६ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०१७ ईसा पूर्व

१०१७ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०१७ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०१८ ईसा पूर्व

१०१८ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०१८ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०१९ ईसा पूर्व

१०१९ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०१९ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०२ ईसा पूर्व

१०२ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०२ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०२० ईसा पूर्व

१०२० ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०२० ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०२१ ईसा पूर्व

१०२१ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०२१ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०२२ ईसा पूर्व

१०२२ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०२२ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०२३ ईसा पूर्व

१०२३ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०२३ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०२४ ईसा पूर्व

१०२४ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०२४ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०२५ ईसा पूर्व

१०२५ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०२५ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०२६ ईसा पूर्व

१०२६ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०२६ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०२७ ईसा पूर्व

१०२७ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०२७ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०२८ ईसा पूर्व

१०२८ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०२८ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०२९ ईसा पूर्व

१०२९ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०२९ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०३ ईसा पूर्व

१०३ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०३ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०३० ईसा पूर्व

१०३० ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०३० ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०३१ ईसा पूर्व

१०३१ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०३१ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०३२ ईसा पूर्व

१०३२ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०३२ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०३३ ईसा पूर्व

१०३३ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०३३ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०३४ ईसा पूर्व

१०३४ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०३४ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०३५ ईसा पूर्व

१०३५ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०३५ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०३६ ईसा पूर्व

१०३६ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०३६ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०३७ ईसा पूर्व

१०३७ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०३७ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०३८ ईसा पूर्व

१०३८ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०३८ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०३९ ईसा पूर्व

१०३९ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०३९ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०४ ईसा पूर्व

१०४ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०४ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०४० ईसा पूर्व

१०४० ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०४० ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०४१ ईसा पूर्व

१०४१ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०४१ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०४२ ईसा पूर्व

१०४२ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०४२ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०४३ ईसा पूर्व

१०४३ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०४३ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०४४ ईसा पूर्व

१०४४ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०४४ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०४५ ईसा पूर्व

१०४५ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०४५ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०४६ ईसा पूर्व

१०४६ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०४६ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०४७ ईसा पूर्व

१०४७ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०४७ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०४८ ईसा पूर्व

१०४८ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०४८ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०४९ ईसा पूर्व

१०४९ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०४९ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०५ ईसा पूर्व

१०५ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०५ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०५० ईसा पूर्व

१०५० ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०५० ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०५१ ईसा पूर्व

१०५१ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को आधार मानकर उसके जन्म से १०५१ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कैलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध हैं, जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०५२ ईसा पूर्व

१०५२ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०५२ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०५३ ईसा पूर्व

१०५३ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०५३ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०५४ ईसा पूर्व

१०५४ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०५४ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०५५ ईसा पूर्व

१०५५ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०५५ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०५६ ईसा पूर्व

१०५६ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०५६ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०५७ ईसा पूर्व

१०५७ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०५७ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०५८ ईसा पूर्व

१०५८ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०५८ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०५९ ईसा पूर्व

१०५९ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०५९ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०६ ईसा पूर्व

१०६ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०६ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०६० ईसा पूर्व

१०६० ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०६० ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०६१ ईसा पूर्व

१०६१ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०६१ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०६२ ईसा पूर्व

१०६२ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०६२ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०६३ ईसा पूर्व

१०६३ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०६३ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०६४ ईसा पूर्व

१०६४ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०६४ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०६५ ईसा पूर्व

१०६५ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०६५ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०६६ ईसा पूर्व

१०६६ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०६६ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०६७ ईसा पूर्व

१०६७ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०६७ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०६८ ईसा पूर्व

१०६८ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०६८ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०६९ ईसा पूर्व

१०६९ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०६९ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०७ ईसा पूर्व

१०७ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०७ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०७० ईसा पूर्व

१०७० ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०७० ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०७१ ईसा पूर्व

१०७१ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०७१ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०७२ ईसा पूर्व

१०७२ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०७२ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०७३ ईसा पूर्व

१०७३ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०७३ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०७४ ईसा पूर्व

१०७४ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०७४ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। .

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१०७५ ईसा पूर्व

१०७५ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०७५ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन