लोगो
यूनियनपीडिया
संचार
Google Play पर पाएं
नई! अपने एंड्रॉयड डिवाइस पर डाउनलोड यूनियनपीडिया!
डाउनलोड
ब्राउज़र की तुलना में तेजी से पहुँच!
 

वन अनुसंधान संस्थान

सूची वन अनुसंधान संस्थान

वन अनुसंधान संस्थान, देहरादून, दूर से वन अनसंधान संस्थान, मुख्य द्वार वन अनुसंधान संस्थान (एफ़ आर आई), १९१७ देहरादून शहर में घंटाघर से ७ कि॰मी॰ दूर देहरादून-चकराता मोटर-योग्य मार्ग पर स्थित भारतीय वन अनुसंधान संस्थान भारत का सबसे बड़ा वन आधारित प्रशिक्षण संस्थान है। भारत के अधिकांश वन अधिकारी इसी संस्थान से आते हैं। वन अनुसंधान संस्थान का भवन बहुत शानदार है तथा इसमें एक संग्रहालय भी है। इसकी स्थापना १९०६ में इंपीरियल फोरेस्ट इंस्टीट्यूट के रूप में की गई थी। यह इंडियन काउंसिल ऑफ फोरेस्ट रिसर्च एंड एडूकेशन के अंतर्गत एक प्रमुख संस्थान है। इसकी शैली ग्रीक-रोमन वास्तुकला है और इसके मुख्य भवन को राष्ट्रीय विरासत घोषित किया जा चुका है। इसका उद्घघाटन १९२१ में किया गया था और यह वन से संबंधित हर प्रकार के अनुसंधान के लिए में प्रसिद्ध है। एशिया में अपनी तरह के इकलौते संस्थान के रूप में यह दुनिया भर में प्रख्यात है। २००० एकड़ में फैला एफआरआई का डिजाइन विलियम लुटयंस द्वारा किया गया था। इसमें ७ संग्रहालय हैं और तिब्बत से लेकर सिंगापुर तक सभी तरह के पेड़-पौधे यहां पर हैं। तभी तो इसे देहरादून की पहचान और गौरव कहा जाता है। .

7 संबंधों: एफ़आरआई और कॉलेज एरिया, देहरादून, देहरादून जिला, देहरादून की प्रमुख इमारतें, भारतीय वानिकी, भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद, रासबिहारी बोस

एफ़आरआई और कॉलेज एरिया

एफ़आरआई और कॉलेज एरिया एफ़आरआई का आवासीय क्षेत्र है, जो उत्तराखण्ड के देहरादून जिले में स्थित है। .

नई!!: वन अनुसंधान संस्थान और एफ़आरआई और कॉलेज एरिया · और देखें »

देहरादून

यह लेख देहरादून नगर पर है। विस्तार हेतु देखें देहरादून जिला। देहरादून (Dehradun), देहरादून जिले का मुख्यालय है जो भारत की राजधानी दिल्ली से २३० किलोमीटर दूर दून घाटी में बसा हुआ है। ९ नवंबर, २००० को उत्तर प्रदेश राज्य को विभाजित कर जब उत्तराखण्ड राज्य का गठन किया गया था, उस समय इसे उत्तराखण्ड (तब उत्तरांचल) की अंतरिम राजधानी बनाया गया। देहरादून नगर पर्यटन, शिक्षा, स्थापत्य, संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध है। इसका विस्तृत पौराणिक इतिहास है। .

नई!!: वन अनुसंधान संस्थान और देहरादून · और देखें »

देहरादून जिला

यह लेख देहरादून जिले के विषय में है। नगर हेतु देखें देहरादून। देहरादून, भारत के उत्तराखंड राज्य की राजधानी है इसका मुख्यालय देहरादून नगर में है। इस जिले में ६ तहसीलें, ६ सामुदायिक विकास खंड, १७ शहर और ७६४ आबाद गाँव हैं। इसके अतिरिक्त यहाँ १८ गाँव ऐसे भी हैं जहाँ कोई नहीं रहता। देश की राजधानी से २३० किलोमीटर दूर स्थित इस नगर का गौरवशाली पौराणिक इतिहास है। प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर यह नगर अनेक प्रसिद्ध शिक्षा संस्थानों के कारण भी जाना जाता है। यहाँ तेल एवं प्राकृतिक गैस आयोग, सर्वे ऑफ इंडिया, भारतीय पेट्रोलियम संस्थान आदि जैसे कई राष्ट्रीय संस्थान स्थित हैं। देहरादून में वन अनुसंधान संस्थान, भारतीय राष्ट्रीय मिलिटरी कालेज और इंडियन मिलिटरी एकेडमी जैसे कई शिक्षण संस्थान हैं। यह एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है। अपनी सुंदर दृश्यवाली के कारण देहरादून पर्यटकों, तीर्थयात्रियों और विभिन्न क्षेत्र के उत्साही व्यक्तियों को अपनी ओर आकर्षित करता है। विशिष्ट बासमती चावल, चाय और लीची के बाग इसकी प्रसिद्धि को और बढ़ाते हैं तथा शहर को सुंदरता प्रदान करते हैं। देहरादून दो शब्दों देहरा और दून से मिलकर बना है। इसमें देहरा शब्द को डेरा का अपभ्रंश माना गया है। जब सिख गुरु हर राय के पुत्र रामराय इस क्षेत्र में आए तो अपने तथा अनुयायियों के रहने के लिए उन्होंने यहाँ अपना डेरा स्थापित किया। www.sikhiwiki.org.

नई!!: वन अनुसंधान संस्थान और देहरादून जिला · और देखें »

देहरादून की प्रमुख इमारतें

Dehradun ghantaghar देहरादून का मशहूर घर। वन अनुसंधान संस्थान 1906 में इंम्पीरियल फोरेस्ट इंस्टीट्यूट के रूप में स्थापित यह इंडियन काउंसिल ऑफ फोरेस्ट्री रिसर्च एंड एडूकेशन के अंतर्गत एक प्रमुख संस्थान है। इसकी शैली ग्रीक रोमन वास्तुकला है। इसका मुख्य भवन राष्ट्रीय विरासत है जिसका उद्घघाटन 1921 में हुआ था। वन क्षेत्र में अपने शोध कार्य के लिए प्रसिद्ध इस संस्थान को एशिया में अपनी तरह के एक मात्र संस्थान होने का गौरव प्राप्त है। इंडियन मिलिटरी एकेडमी आईएमए की विशेषताओं में से एक है उसके चिटवुड भवन का स्थापत्य। १९३० में निर्मित इस भवन की डिजाइन आर टी रसेल ने तैयार की थी। यह भवन औपनिवेशिक और शुद्ध ब्रिटिश शैली का अनोखा उदाहरण है। इसके गलियारे काफी लंबे हैं और केंद्र में स्थित घंटाघर के साथ इसकी एकल छत है। ड्रिल स्क्वायर भवन के सामने है जो इसे एक तरह की पवित्रता प्रदान करने के साथ-साथ सैन्य संस्थान जैसी फिजा उपलब्ध कराता है। घंटाघर ईट और पत्थर से बना देहारादून का घंटा घर पलटन बाज़ार आनेवाले लोगों में आकर्षण का केंद्र है। इसमें एक मुख्य सीढ़ी है, जिसके सहारे सबसे ऊपरी तल पर पहुँचा जा सकता है। इसमें अर्द्ध गोलाकार खिड़कियाँ हैं। मीनार के शिखर पर सभी 6 आकृतियों में प्रत्येक पर घड़ी रखी हुई है। लाल और पीले रंग की संरचना वाली मीनार के सभी 6 भागों पर सीमेंट की जाली सजाई गई है। सभी 6 दरवाजों के ऊपर खूबसूरत झरोखे लगे हुए हैं। सीएनआई ब्यॉज इंटर कॉलेज ईंटों और पत्थरों की बनी इस संरचना में ईंटों का मुख्य तौर पर उपयोग किया गया है। बिल्डिंग की दीवारों को अंदर से प्लास्टर किया गया है तथा फर्श के लिए बलुआ पत्थर का उपयोग किया गया है। मॉरीसन मेमोरियल चर्च राजपुर रोड पर स्थित यह इस क्षेत्र के सबसे पुराने भवनों में से एक है। चर्च के अंदर और बाहर दोनों तरफ से प्लास्टर किया गया है। मुख्य हॉल की फर्श टेराजो की बनी है। छत से लगा खूबसूरत बोर्ड बिल्डिंग की शोभा को और अधिक बढ़ा देता है। छत के रिज पर कई सारे सजावटी बोर्ड हैं जो रिज से लगे हुए हैं। इंटीरियर यानी आंतरिक भाग में उभरा हुआ छततिकोन चर्च के सौन्दर्य को और अधिक बढ़ा देता है। इनामुल्लाह भवन यह एक संतुलित रैखिक गृह-मुख है जो माप के हिसाब से 66 फीट है। इसके केंद्र में एक बहुकोणीय आर्क गेटवे है। इसके ग्राउंड और ऊपर की मंजिल के सामने एक आर्क कोलोनाडो है। भवन के ऊपर बीच-बीच में टरेट ओरनेट पारापेट है। इस भवन का अंत दाईं ओर षडभुजाकार कक्ष के साथ होता है जो इसे सड़क के साथ इसे एक विशिष्टता प्रदान करता है। बाईं ओर अस्तित्व में नहीं है। जामा मस्जिद देहरादून के मुख्य वाणिज्यिक क्षेत्र में स्थित यह मस्जिद इस्लामिक वास्तुकला का एक शानदार उदाहरण है। आकार में आयताकार यह मस्जिद पूरब की ओर मुखातिब है। सिलिंडरनुमा बांसुरी के आकार के कॉलम के साथ सजावटी फूलदार डिजाइनों से मेहराब सजा हुआ है। आर्क वाली गैलरी और केंद्रीय स्थित के साथ यह संरचना शानदार भवन निर्माण कला का एक नमूना है। मस्जिद का आंतरिक कोरीडोर गुच्छानुमा आर्क और फूलों वाली डिजाइन तथा लटकती आकृति से युक्त है। आर्क युक्त गैलरी विभिन्न रंगों में रंगी है। श्रेणी:देहरादून श्रेणी:स्थापत्य.

नई!!: वन अनुसंधान संस्थान और देहरादून की प्रमुख इमारतें · और देखें »

भारतीय वानिकी

तेंदू पत्ता संग्रहण भारत में वानिकी एक प्रमुख ग्रामीण आर्थिक क्रिया, जनजातीय लोगों के जीवन से जुड़ा एक महत्वपूर्ण पहलू और एक ज्वलंत पर्यावरणीय और सामाजिक-राजनैतिक मुद्दा होने के साथ ही पर्यावरणीय प्रबंधन और धारणीय विकास हेतु अवसर उपलब्ध करने वाला क्षेत्र भी है। - इण्डिया वाटर पोर्टल खाद्य एवं कृषि संगठन (एफ॰ए॰ओ॰) के अनुसार वर्ष २००२ में भारत में वनों का क्षेत्रफल ६४ मिलियन हेक्टेयर था जो कुल क्षेत्रफल का लगभग १९% था FAO और मौजूदा आंकलनों के अनुसार भारत में वन और वृक्ष क्षेत्र 78.29 मिलियन हेक्टेयर है, जो देश के भैगोलिक क्षेत्र का 23.81 प्रतिशत है और 2009 के आंकलनों की तुलना में, व्याख्यात्मक बदलावों को ध्यान में रखने के पश्चात देश के वन क्षेत्र में 367 वर्ग कि॰मी॰ की कमी दर्ज की गई है।, पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, भारत सरकार उपरोक्त आँकड़ों के आधार पर भारत विश्व के दस सर्वाधिक वन क्षेत्र वाले देशों में से एक है लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था में वनों का योगदान काफी कम है और राष्ट्रीय आय में वनों का योगदान २००२ में मात्र १.७% था। साथ ही जनसंख्या के अनुपात में देखा जाए तो स्थिति और खराब नजर आती है क्योंकि भारत में इसी समय के आंकड़ों के अनुसार प्रति व्यक्ति वन क्षेत्र ०.०८ हेक्टेयर था जो विकासशील देशों के लिये औसत ०.५ हेक्टेयर है और पूरे विश्व के लिये ०.६४ हेक्टेयर है। आर्थिक योगदान के अलावा वन संसाधनों का महत्व इसलिए भी है कि ये हमें बहुत से प्राकृतिक सुविधाएँ प्रदान करते हैं जिनके लिये हम कोई मूल्य नहीं प्रदान करते और इसीलिए इन्हें गणना में नहीं रखते। उदाहरण के लिये हवा को शुद्ध करना और सांस लेने योग्य बनाना एक ऐसी प्राकृतिक सेवा है जो वन हमें मुफ़्त उपलब्ध करते हैं और जिसका कोई कृत्रिम विकल्प इतनी बड़ी जनसंख्या के लिये नहीं है। वनों के क्षय से जनजातियों और आदिवासियों का जीवन प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होता है और बाकी लोगों का अप्रत्यक्ष रूप से क्योंकि भारत में जनजातियों की पूरी जीवन शैली वनों पर आश्रित है। वनोपजों में सबसे निचले स्तर पर जलाने के लिये लकड़ी, औषधियाँ, लाख, गोंद और विविध फल इत्यादि आते हैं जिनका एकत्रण स्थानीय लोग करते हैं। उच्च स्तर के उपयोगों में इमारती लकड़ी या कागज उद्द्योग के लिये लकड़ी की व्यावसायिक और यांत्रिक कटाई आती है। एफ॰ए॰ओ॰ के अनुसार भारत जलावन की लकड़ी का विश्व में सबसे बड़ा उपयोगकर्ता है और यह वनों में लकड़ी के धारणीय पुनर्स्थापन के पाँच गुना अधिक है। वहीं भारतीय कागज़ उद्योग प्रतिवर्ष ३ मिलियन टन कागज का उत्पादन करता है जिसमें कितना कच्चा माल वनों से लकड़ी और बाँस के रूप में आता है यह ज्ञात नहीं। वानिकी के वर्तमान परिदृश्य जनजातियों और स्थानीय लोगों के जीवन, पर्यावरणीय सुरक्षा, संसाधन संरक्षण और विविध सामजिक राजनीतिक सरोकारों से जुड़े हुए हैं। चिपको आंदोलन से लेकर जल, जंगल और जमीन तथा वर्तमान में महान वनों को लेकर चलाया जा रहा आंदोलन इसी राजनैतिक और सामजिक संघर्ष का हिस्सा हैं जो वानिकी और उसकी नीतियों से जुड़ा हुआ है। वानिकी को भारत में एक संवेदनशील और रोचक अध्ययन क्षेत्र के रूप में भी देखा जा रहा है। .

नई!!: वन अनुसंधान संस्थान और भारतीय वानिकी · और देखें »

भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद

भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद्, भारत की वानिकी अनुसंधान तंत्र में एक शीर्ष संस्था है। यह वानिकी के सभी पहलुओं पर अनुसंधान, शिक्षा और विस्तार की आवश्यकता आधारित आयोजना, प्रोत्साहन, संचालन एवं समन्वयन करके वानिकी अनुसंधान का वास्तविक विकास कर रही है। परिषद् विश्व चिंताओं जैसे जलवायु परिवर्तन, जैवविविधता का संरक्षण, रेगिस्तानीकरण को रोकना और संसाधनों का पोषणीय प्रबंध एवं विकास सहित इस सेक्टर में उभर रहे विषयों के अनुरूप समाधान आधारित वानिकी अनुसंधान करती है। परिषद् द्वारा सामयिक अनुसंधान प्राकृतिक संसाधन प्रबंध से संबंधित चुनौतियों का सफलतापूर्वक संचालन करने के लिए, वन प्रबंधकों एवं शोधार्थियों की क्षमता में लोगों के विश्वास को बढ़ाता है। .

नई!!: वन अनुसंधान संस्थान और भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद · और देखें »

रासबिहारी बोस

रासबिहारी बोस (बांग्ला: রাসবিহারী বসু, जन्म:२५ मई १८८६ - मृत्यु: २१ जनवरी १९४५) भारत के एक क्रान्तिकारी नेता थे जिन्होने ब्रिटिश राज के विरुद्ध गदर षडयंत्र एवं आजाद हिन्द फौज के संगठन का कार्य किया। इन्होंने न केवल भारत में कई क्रान्तिकारी गतिविधियों का संचालन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी, अपितु विदेश में रहकर भी वह भारत को स्वतन्त्रता दिलाने के प्रयास में आजीवन लगे रहे। दिल्ली में तत्कालीन वायसराय लार्ड चार्ल्स हार्डिंग पर बम फेंकने की योजना बनाने, गदर की साजिश रचने और बाद में जापान जाकर इंडियन इंडिपेंडेस लीग और आजाद हिंद फौज की स्थापना करने में रासबिहारी बोस की महत्वपूर्ण भूमिका रही। यद्यपि देश को स्वतन्त्र कराने के लिये किये गये उनके ये प्रयास सफल नहीं हो पाये, तथापि स्वतन्त्रता संग्राम में उनकी भूमिका का महत्व बहुत ऊँचा है। .

नई!!: वन अनुसंधान संस्थान और रासबिहारी बोस · और देखें »

यहां पुनर्निर्देश करता है:

वन शोध संस्थान

निवर्तमानआने वाली
अरे! अब हम फेसबुक पर हैं! »