लोगो
यूनियनपीडिया
संचार
Google Play पर पाएं
नई! अपने एंड्रॉयड डिवाइस पर डाउनलोड यूनियनपीडिया!
इंस्टॉल करें
ब्राउज़र की तुलना में तेजी से पहुँच!
 

लावा

सूची लावा

लावा पिघली हुई चट्टान आर्थात मैग्मा का धरातल पर प्रकट होकर बहने वाला भाग है। यह ज्वालामुखी उद्गार द्वारा बाहर निकलता है और आग्नेय चट्टानों की रचना करता है। श्रेणी:भूविज्ञान श्रेणी:ज्वालामुखी श्रेणी:भू-आकृति विज्ञान श्रेणी:ज्वालामुखीयता.

34 संबंधों: त्वष्ट्र पैटरे, दैत्य सेतुक, नज्द, पिज़्ज़ा, प्राकृतिक आपदा, बहिर्भेदी शैल, बाढ़ बेसाल्ट, मध्य-महासागर पर्वतमाला, महादेव पहाड़ियाँ, मार्शेना (गैलापागोस), मिश्रित ज्वालामुखी, मैग्मा, यान मायेन, राबिदा द्वीप (गैलापागोस), लावा ट्यूब, लावा नहर, लावा लैंप, लोहड़ी, शुक्र, सांताक्रूज़ (गैलापागोस), संमिलन सीमा, ज्वालामुख-कुण्ड, ज्वालामुखी, ज्वालामुखी विज्ञान, ज्वालामुखीय चट्टान, ज्वालामुखीय चट्टानें, ज्वालामुखीयता, विदर छिद्र, गारामुखी, गैलापागोस द्वीपसमूह, आग्नेय शैल, इश्तार टेरा, अफ़्रीका की भू-प्रकृति, अरबी रेगिस्तान

त्वष्ट्र पैटरे

त्वष्ट्र पैटरे, जिसे त्वश्तर पैटरे (Tvashtar Paterae) भी उच्चारित करते हैं, बृहस्पति ग्रह के चंद्रमा आयो पर स्थित एक ज्वालामुखीय क्षेत्र है। यह उस चंद्रमा के उत्तरी ध्रुव के पास स्थित है और इसमें ज्वालामुखीय क्रेटरों की एक शृंखला मौजूद है। इसका नाम त्वष्ट्र नामक हिन्दू ऋग्वैदिक देवता पर रखा गया है जो लोहारों के अधिदेवता माने जाते हैं। गैलिलेयो (अंतरिक्ष यान) ने कई सालों तक इस क्षेत्र का अध्ययन किया था जिस दौरान यहाँ एक स्थल से एक २५ किलोमीटर चौड़ी दरार से लावा फटा जो सतह से १ से २ किमी की ऊँचाई तक पहुँच गया। देखने में यह एक २५ किमी चौड़े और १-२ किमी ऊँचे परदे जैसा लगा। कुछ समय बाद यहाँ एक गैस का फ़व्वारा फटा जो सतह से ३८५ किमी की ऊँचाई तक पहुँच गया और जिसकी सामग्री विस्फोट स्थल से ७०० किमी दूर तक के स्थानों को ढक गई। .

नई!!: लावा और त्वष्ट्र पैटरे · और देखें »

दैत्य सेतुक

दैत्य सेतुक, (अंग्रेजी: Giant's Causeway, आयरिश: Clochán an Aifir या Clochán na bhFomhórach और अल्स्टर स्कॉट:tha Giant's Causey) एक प्राचीन ज्वालामुखीय विस्फोट के परिणामस्वरूप अस्तित्व में आये लगभग 40,000 अन्त:पाशित (आपस में गुथे हुए) बेसाल्ट स्तंभों की संरचना वाला क्षेत्र है। यह उत्तरी आयरलैंड की अंटरिम काउंटी के उत्तरी-पूर्व तट पर स्थित है और बुशमिल्स नामक शहर के उत्तर पूर्व में तीन मील (4.8 किमी) की दूरी पर स्थित है। यूनेस्को ने इस क्षेत्र को 1986 में एक विश्व धरोहर स्थल घोषित किया था, जबकि उत्तरी आयरलैंड के पर्यावरण विभाग ने 1987 में इसे एक राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षित क्षेत्र घोषित किया। 2005 में रेडियो टाइम्स के पाठकों के बीच कराये गये एक सर्वेक्षण में, इस संरचना को संयुक्त राजशाही का चौथा सबसे बड़ा प्राकृतिक आश्चर्य चुना गया। सागर से उभरने वाले इन उर्ध्वाधर खड़े स्तभों के सिरे कमोबेश चपटे हैं। अधिकांश स्तंभ षटकोणीय हैं, हालांकि चार, पांच, सात और आठ पक्षों वाले स्तंभ भी उपस्थित हैं। सबसे लंबा स्तंभ 12 मीटर (39 फुट) ऊंचा है और चट्टानों में जमा लावा कई स्थानों पर 28 मीटर तक मोटा है। दैत्य सेतुक का प्रबंधन और स्वामित्व, राष्ट्रीय न्यास के हाथों में है और उत्तरी आयरलैंड में यह सबसे अधिक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है। .

नई!!: लावा और दैत्य सेतुक · और देखें »

नज्द

तुवइक़​ पहाड़ियाँ - क्षितिज के पार आधुनिक साउदी अरब की राजधानी रियाध है साउदी अरब (सफ़ेद रंग) के नक़्शे में नज्द क्षेत्र (लाल रंग में) नज्दी स्त्रियों की पारम्परिक पोशाक नज्द का एक और नज़ारा नज्द (अंग्रेज़ी: Najd, अरबी) अरबी प्रायद्वीप के मध्य भाग का नाम है। यह एक पठारी इलाक़ा है। .

नई!!: लावा और नज्द · और देखें »

पिज़्ज़ा

पिज़्ज़ा (इतालवी Pizza) भट्टी में बनाए जानी वाली चपटी ब्रेड होती है, जीसे मुख्यतः टमाटर की चटनी, चीज़ और अन्य विविध टॉपिंग के साथ परोसा जाता है। इसकी उत्पत्ती इटली में हुई और अब यह विश्वभर में लोकप्रिय है। .

नई!!: लावा और पिज़्ज़ा · और देखें »

प्राकृतिक आपदा

एक प्राकृतिक आपदा एक प्राकृतिक जोखिम (natural hazard) का परिणाम है (जैसे की ज्वालामुखी विस्फोट (volcanic eruption), भूकंप, या भूस्खलन (landslide) जो कि मानव गतिविधियों को प्रभावित करता है। मानव दुर्बलताओं को उचित योजना और आपातकालीन प्रबंधन (emergency management) का आभाव और बढ़ा देता है, जिसकी वजह से आर्थिक, मानवीय और पर्यावरण को नुकसान पहुँचता है। परिणाम स्वरुप होने वाली हानि निर्भर करती है जनसँख्या की आपदा को बढ़ावा देने या विरोध करने की क्षमता पर, अर्थात उनके लचीलेपन पर। ये समझ केंद्रित है इस विचार में: "जब जोखिम और दुर्बलता (vulnerability) का मिलन होता है तब दुर्घटनाएं घटती हैं". जिन इलाकों में दुर्बलताएं निहित न हों वहां पर एक प्राकृतिक जोखिम कभी भी एक प्राकृतिक आपदा में तब्दील नहीं हो सकता है, उदहारण स्वरुप, निर्जन प्रदेश में एक प्रबल भूकंप का आना.बिना मानव की भागीदारी के घटनाएँ अपने आप जोखिम या आपदा नहीं बनती हैं, इसके फलस्वरूप प्राकृतिक शब्द को विवादित बताया गया है। .

नई!!: लावा और प्राकृतिक आपदा · और देखें »

बहिर्भेदी शैल

बहिर्भेदी आग्नेय चट्टानें वे चट्टानें हैं जो मैग्मा के पृथ्वी कि सतह के ऊपर निकल कर लावा के रूप में आकर ठंढे होकर जमने से बनती हैं। चूँकि इस प्रकार के उद्भेदन को ज्वालामुखी उद्भेदन कहा जाता है, अतः ऐसी चट्टानों को ज्वालामुखीय चट्टानें भी कहते हैं। .

नई!!: लावा और बहिर्भेदी शैल · और देखें »

बाढ़ बेसाल्ट

बाढ़ बेसाल्ट (flood basalt) ऐसे भयानक ज्वालामुखीय विस्फोट या विस्फोटों की शृंखला का नतीजा होता है जो किसी समुद्री फ़र्श या घरती के विस्तृत क्षेत्र पर बेसाल्ट लावा फैला दे, यानि वहाँ लावा की बाढ़ फैलाकर उसे जमने पर बेसाल्ट की चट्टानों से ढक दे। बहुत ही बड़े बाढ़ बेसाल्ट के प्रदेशों को उद्भेदन (ट्रैप) कहा जाता है, जिसका एक महत्वपूर्ण उदाहरण भारत का दक्कन उद्भेदन है। पृथ्वी के पिछले २५ करोड़ वर्षों के इतिहास में बाढ़ बेसाल्ट की ग्यारह घटनाएँ रहीं हैं, जिन्होंने विश्व में कई पठार और पर्वतमालाएँ निर्मित की हैं। हमारे ग्रह के इतिहास की पाँच महाविलुप्ति घटनाओं के पीछे भी एसी बाढ़ बेसाल्ट घटनाओं के होने का सन्देह है और सम्भव है कि पृथ्वी पर क्षुद्रग्रह प्रहार से भी बाढ़ बेसाल्ट घटनाएँ बीत सकती हैं। .

नई!!: लावा और बाढ़ बेसाल्ट · और देखें »

मध्य-महासागर पर्वतमाला

मध्य-महासागर पर्वतमाला (mid-ocean ridge) किसी महासागर के जल के अंदर प्लेट विवर्तनिकी द्वारा बनी एक पर्वतमाला होती है। सामान्यतः इसमें कई पहाड़ शृंखलाओं में आयोजित होते हैं और इनके बीच में एक लम्बी रिफ़्ट नामक घाटी चलती है। इस रिफ़्ट के नीचे दो भौगोलिक तख़्तों की संमिलन सीमा होती है जहाँ दबाव और रगड़ के कारण भूप्रावार (मैन्टल) से पिघला हुआ मैग्मा उगलकर लावा के रूप में ऊपर आता है और नया सागर का फ़र्श बनाता है - इसे प्रक्रिया को सागर नितल प्रसरण (seafloor spreading) कहते हैं। .

नई!!: लावा और मध्य-महासागर पर्वतमाला · और देखें »

महादेव पहाड़ियाँ

महादेव पहाड़ियाँ भारत की नर्मदा और ताप्ती नदियों के बीच स्थित हैं। ये २,००० से ३,००० फुट तक की ऊँचाई वाले पठार हैं, जो दक्कन के लावा से ढँके हैं। ये पहाड़ियाँ आद्य महाकल्प (Archaean Era) तथा गोंडवाना काल के लाल बलुआ पत्थरों द्वारा निर्मित हुई हैं। महादेव पहाड़ी के दक्षिण की ढालों पर मैंगनीज़ तथा छिंदवाड़ा के निकट पेंच घाटी से कुछ कोयला प्राप्त होता है। वेनगंगा एवं पेंच घाटी के थोड़े से चौड़े मैदानों में गेहूँ, ज्वार तथा कपास पैदा किए जाते हैं। पश्चिम ओर बुरहानपुर दरार में थोड़ी कृषि की जाती है। यहाँ आदिवासी गोंड जाति निवास करती है। घासवाले क्षेत्रों में पशुचारण होता है। यहाँ का प्रसिद्ध पहाड़ी क्षेत्र पंचमढ़ी है। छिंदवाड़ा छोटा नगर है। श्रेणी:भारत की पहाड़ियाँ.

नई!!: लावा और महादेव पहाड़ियाँ · और देखें »

मार्शेना (गैलापागोस)

स्पैनिश संत फ्रेय एंटोनियो डी मार्शेना के नाम से नामित गैलापागोस द्वीपसमूह के द्वीप मार्शेना (पुराना अंग्रेजी नाम बिंडलॉ) का क्षेत्रफल 130 किमी2 और अधिकतम ऊंचाई 343 मीटर है। हालांकि इस द्वीप पर कोई आगंतुक स्थल नहीं हैं, पर इसके आसपास किसी आयोजित यात्रा के दौरान सागर में गोता लगाना संभव है। अधिकतर आगंतुक (पर्यटक) इसे केवल तभी देख पाते हैं जब वो जेनोवेसा या टॉवर द्वीप पर जाते समय ईसाबेला द्वीप के उत्तर से होकर गुजरते हैं। जेनोवेसा द्वीप जो इसका निकटतम पड़ोसी है इसके पश्चिम में 45 मील की दूरी पर स्थित है। गैलापागोस के कई ज्वालामुखियों की तरह मार्शेना पर भी एक ज्वालामुख-कुण्ड है। मार्शेना का ज्वालामुख-कुण्ड प्राय: अण्डाकार है। मार्शेना का ज्वालामुख-कुण्ड असामान्य है और यह लगभग पूरा ही नये लावे से भरा है, जिसमें से कुछ इसकी दीवारों से छलक कर इसकी ढलानों पर भी फिसल गया है। द्वीप पर मौजूद सबसे पुराना लावा लगभग 500000 साल पुराना है। मार्शेना के प्रसिद्ध होने का एक अन्य कारण भी है, हालांकि यह निर्जन है पर यह 'फ्लोरियाना रहस्य' में शामिल है। रुडोल्फ लोरेंज़ और उस जहाज के कप्तान का जिसमें वो सवार था, का मृत शरीर आश्चर्यजनक रूप से बह कर मार्शेना के तट पर आ पहुँचा और प्राकृतिक रूप से ममीकृत हो गया जिसका कारण द्वीप पर किसी प्राकृतिक परभक्षी का ना होना था। .

नई!!: लावा और मार्शेना (गैलापागोस) · और देखें »

मिश्रित ज्वालामुखी

मिश्रित ज्वालामुखी मिश्रित ज्वालामुखी की खड़ी काट फुजी पर्वत, एक सक्रिय मिश्रित ज्वालामुखी है इसका अंतिम उद्गार 1707–08 में हुआ था मिश्रित ज्वालामुखी, एक लंबा, शंक्वाकार ज्वालामुखी होता है, जिसका निर्माण जम कर ठोस हुए लावा, टेफ्रा, कुस्रन और ज्वालामुखीय राख की कई परतों (स्तर) द्वारा होता है। मिश्रित ज्वालामुखी को ऐसा इसलिए कहा जाता है क्योंकि, इनकी रचना ज्वालामुखीय उद्गार के समय निकले मिश्रित पदार्थों के विभिन्न स्तरों पर घनीभूत होने के फलस्वरूप होती है। ढाल ज्वालामुखी के विपरीत, तीखी ढलान और समय समय पर होने वाले विस्फोटक उद्गार इनकी विशेषतायें है। इन ज्वालामुखियों से निकला लावा, ढाल ज्वालामुखी से निकले लावे की तुलना में अधिक श्यान (गाढ़ा और चिपचिपा) होता है और आमतौर पर उद्गार के पश्चात दूर तक बहने से पहले ही ठंडा हो जाता है। इनके लावे की रचना करने वाला मैग्मा अक्सर फेल्सिक होता है जिसमें, सिलिका की मात्रा उच्च से लेकर मध्य स्तर तक की होती है और कम श्यानता वाले मैफिक मैग्मा की मात्रा कम होती है। फेल्सिक लावा का व्यापक (दूर तक) प्रवाह असामान्य है, लेकिन फिर भी इसे 15 किमी (9.3 मील) तक बहते देखा गया है। ढाल ज्वालामुखी (जो कम मिलते हैं) के विपरीत यह ज्वालामुखियों का सबसे सामान्य प्रकार हैं। दो प्रसिद्ध मिश्रित ज्वालामुखियों में से पहला क्राकाटोआ है, जिसको उसके 1883 के उद्गार के लिए जाना जाता है जबकि, दूसरा विसुवियस है जिसके उद्गार के कारण 79 ईस्वी में पॉम्पेई और हरकुलेनियम नामक दो इतालवी शहर पूरी तरह से नष्ट हो गये थे। .

नई!!: लावा और मिश्रित ज्वालामुखी · और देखें »

मैग्मा

मैग्मा चट्टानों का पिघला हुआ रूप है जिसकी रचना ठोस, आधी पिघली अथवा पूरी तरह पिघली चट्टानों के द्वारा होती है और जो पृथ्वी के सतह के नीचे निर्मित होता है। मैग्मा के बाहर निकलने वाले रूप को लावा कहते हैं। मैग्मा के शीतलन द्वारा आग्नेय चट्टानों का निर्माण होता है। जब मैग्मा ज़मीनी सतह के ऊपर आकर लावा के रूप में ठंडा होकर जमता है तो बहिर्भेदी और जब सतह के नीचे ही जम जाता है तो अंतर्भेदी आग्नेय चट्टानों का निर्माण होता है। सामान्यतः ज्वालामुखी विस्फोट में मैग्मा का लावा के रूप में निकलना एक प्रमुख भूवैज्ञानिक क्रिया के रूप में चिह्नित किया जाता है। .

नई!!: लावा और मैग्मा · और देखें »

यान मायेन

यान मायेन द्वीप (Jan Mayen) आर्कटिक महासागर में स्थित एक ज्वालामुखीय द्वीप है जो नोर्वे का अंग है। यान मायेन द्वीप आइसलैंड से 600 किमी पूर्वोत्तर, ग्रीनलैंड से 500 किमी पूर्व और नोर्वे के पश्चिमोत्तरी छोर से 1,000 किमी पश्चिम में स्थित है। इस पूर्वोत्तर-से-दक्षिणपश्चिम 55 किमी लम्बे और 373 वर्ग किमी क्षेत्रफल वाले द्वीप के कुछ भाग पर हिमानियाँ (ग्लेशियर) विस्तृत हैं। द्वीप के दो मुख्य भाग हैं: पूर्वोत्तर का बड़ा 'नॉर्द यान' (Nord-Jan) हिस्सा और दक्षिणपश्चिम का छोटा 'सोर-यान' (Sør-Jan) हिस्सा जो एक 2.5 किमी चौड़े भूडमरू (इस्थ्मस) से जुड़े हुए हैं। द्वीप के उत्तर में 2,277 मीटर (7,470 फ़ुट) ऊँचा बीरेनबर्ग​ (Beerenberg) ज्वालामुखी स्थित है। द्वीप के उत्तर और दक्षिणी हिस्से को जोड़ने वाले जलडमरू पर दो झीलें हैं जिन्हें नॉर्दलागूना (Nordlaguna, उत्तर झील) और सोरलागूना (Sørlaguna, दक्षिण झील) कहते हैं। इस टापू का निर्माण समुद्रतल में एक 'यान मायेन हॉटस्पॉट (गर्मछिद्र)' नामक ज्वालामुखीय दरार से लावा उगलने से हुआ था। .

नई!!: लावा और यान मायेन · और देखें »

राबिदा द्वीप (गैलापागोस)

एक जलसिंह माता और उसका शावक राबिदा परगैलापागोस द्वीपसमूह के राबिदा (जर्विस) द्वीपका नाम उस कॉन्वेंट के नाम पर आधारित है जहाँ कोलंबस ने अपनी प्रसिद्ध अमेरिका यात्रा पर निकलने से पहले अपने बेटे को छोड़ा था। 4.9 वर्ग किलोमीटर (1.9 वर्ग मील) क्षेत्रफल वाले इस द्वीप की अधिकतम ऊंचाई 367 मीटर (1,204 फुट) है। राबिदा पूर्वी प्रशांत महासागर में ईक्वाडोर के पश्चिमी तट से 965 किमी की दूरी पर स्थित है। राबिदा को ब्रिटिश एडमिरल जॉन जर्विस के नाम पर जर्विस द्वीप भी कहते हैं। राबिदा की रचना करने वाले लावा में निहित लोहे की उच्च मात्रा द्वीप को इसका विशिष्ट लाल रंग देता है। सफेद कपोलों वाली सुईपुच्छ बतख सागर तट के निकट एक नमकीन पानी के अनूप में रहती हैं। इसी अनूप के आसपास भूरे पेलिकन और बूबीपक्षी अपने घोंसले का निर्माण करते हैं। कुछ समय पहले तक राजहंस भी इस नमकीन पानी के अनूप के पास पाये जाते थे, लेकिन अब वो दूसरे द्वीपों पर चले गए है, जिसकी वजह राबिदा पर भोजन की कमी है। फिन्चेस की नौ प्रजातियां भी द्वीप पर पाई जाती हैं। .

नई!!: लावा और राबिदा द्वीप (गैलापागोस) · और देखें »

लावा ट्यूब

लावा ट्यूब (lava tube) एक प्राकृतिक रूप से बनी हुई पाइप, ट्यूब या सुरंग की आकृति का ढांचा होता है जो लावा बहाव से बन जाता है। यह किसी लावा नहर कि सतह पर ठंडे हुए लावा के जमकर ठोस हो जाने के बाद उसके नीचे लगातार लावा बहते रहने से निर्मित होता है। लावा ट्यूबें सक्रीय हो सकती हैं, यानि किसी ज्वालामुखी के विस्फोटों के समय उस से निकल रहे लावा को बहने का स्थान देती हैं या मृत हो सकती हैं, यानि लावा बहाव बहुत काल से समाप्त हो चुका है और वे ठंडी होकर एक लम्बी गुफ़ा-जैसी सुरंगें बन गई हैं। विश्व के कई स्थानों पर मृत लावा ट्यूबों में लोग सैर करने जाते हैं और वे पर्यटक स्थलों के रूप में जानी जाती हैं। .

नई!!: लावा और लावा ट्यूब · और देखें »

लावा नहर

लावा नहर (lava channel) लावा की एक चलती धारा होती है जो ठोस लावा के दो किनारों के बीच बहती है। आरम्भ में यह किनारे नहीं होते लेकिन किसी ढलान पर बहते-बहते लावा ठंडा होकर किनारे बना लेता है और फिर लावा उनके बीच के बने हुए नाले में बहने लगता है। कभी-कभी यदि बहते लावा की मात्रा अधिक हो तो वह किनारों के ऊपर निकल आता है और, जब वह ठंडा होकर ठोस बन जाता है, तो किनारों को अधिक ऊँचा कर देता है। लावा नहरों में बहने वाला लावा मुख्य रूप से बेसाल्टीय होता है। .

नई!!: लावा और लावा नहर · और देखें »

लावा लैंप

लावा लैंप एक सजावटी दीप है, जिसका आविष्कार 1963 में ब्रिटिश एकाउंटेंट एडवर्ड क्रेवेन-वाकर ने किया था। यह दीप रंगीन मोम की बूंदों से भरा होता है, जो की एक कांच के पोत के अंदर भरे साफ़ तरल में तैरते हैं। पोत के नीचे लगे एक उद्दीप्त दीपक के ताप से मोम के घनत्व में परिवर्तन आता है और वह ऊपर-नीचे चढ़ता और गिरता है। यह दीपक अनेक रूप-रंगों में तैयार किये जाते हैं। .

नई!!: लावा और लावा लैंप · और देखें »

लोहड़ी

गिद्धा में नाचने को उत्सुक पंजाबी युवती लोहड़ी उत्तर भारत का एक प्रसिद्ध त्योहार है। यह मकर संक्रान्ति के एक दिन पहले मनाया जाता है। मकर संक्रान्ति की पूर्वसंध्या पर इस त्यौहार का उल्लास रहता है। रात्रि में खुले स्थान में परिवार और आस-पड़ोस के लोग मिलकर आग के किनारे घेरा बना कर बैठते हैं। इस समय रेवड़ी, मूंगफली, लावा आदि खाए जाते हैं। .

नई!!: लावा और लोहड़ी · और देखें »

शुक्र

शुक्र (Venus), सूर्य से दूसरा ग्रह है और प्रत्येक 224.7 पृथ्वी दिनों मे सूर्य परिक्रमा करता है। ग्रह का नामकरण प्रेम और सौंदर्य की रोमन देवी पर हुआ है। चंद्रमा के बाद यह रात्रि आकाश में सबसे चमकीली प्राकृतिक वस्तु है। इसका आभासी परिमाण -4.6 के स्तर तक पहुँच जाता है और यह छाया डालने के लिए पर्याप्त उज्जवलता है। चूँकि शुक्र एक अवर ग्रह है इसलिए पृथ्वी से देखने पर यह कभी सूर्य से दूर नज़र नहीं आता है: इसका प्रसरकोण 47.8 डिग्री के अधिकतम तक पहुँचता है। शुक्र सूर्योदय से पहले या सूर्यास्त के बाद केवल थोड़ी देर के लए ही अपनी अधिकतम चमक पर पहुँचता है। यहीं कारण है जिसके लिए यह प्राचीन संस्कृतियों के द्वारा सुबह का तारा या शाम का तारा के रूप में संदर्भित किया गया है। शुक्र एक स्थलीय ग्रह के रूप में वर्गीकृत है और समान आकार, गुरुत्वाकर्षण और संरचना के कारण कभी कभी उसे पृथ्वी का "बहन ग्रह" कहा गया है। शुक्र आकार और दूरी दोनों मे पृथ्वी के निकटतम है। हालांकि अन्य मामलों में यह पृथ्वी से एकदम अलग नज़र आता है। शुक्र सल्फ्यूरिक एसिड युक्त अत्यधिक परावर्तक बादलों की एक अपारदर्शी परत से ढँका हुआ है। जिसने इसकी सतह को दृश्य प्रकाश में अंतरिक्ष से निहारने से बचा रखा है। इसका वायुमंडल चार स्थलीय ग्रहों मे सघनतम है और अधिकाँशतः कार्बन डाईऑक्साइड से बना है। ग्रह की सतह पर वायुमंडलीय दबाव पृथ्वी की तुलना मे 92 गुना है। 735° K (462°C,863°F) के औसत सतही तापमान के साथ शुक्र सौर मंडल मे अब तक का सबसे तप्त ग्रह है। कार्बन को चट्टानों और सतही भूआकृतियों में वापस जकड़ने के लिए यहाँ कोई कार्बन चक्र मौजूद नही है और ना ही ज़ीवद्रव्य को इसमे अवशोषित करने के लिए कोई कार्बनिक जीवन यहाँ नज़र आता है। शुक्र पर अतीत में महासागर हो सकते हैलेकिन अनवरत ग्रीनहाउस प्रभाव के कारण बढ़ते तापमान के साथ वह वाष्पीकृत होते गये होंगे |B.M. Jakosky, "Atmospheres of the Terrestrial Planets", in Beatty, Petersen and Chaikin (eds), The New Solar System, 4th edition 1999, Sky Publishing Company (Boston) and Cambridge University Press (Cambridge), pp.

नई!!: लावा और शुक्र · और देखें »

सांताक्रूज़ (गैलापागोस)

सांताक्रूज़ द्वीप गैलापागोस द्वीप समूह का सबसे अधिक जनसंख्या वाला द्वीप है। द्वीप का नाम स्पेनिश भाषा में पवित्र सलीब (क्रॉस) के नाम पर रखा गया है, अंग्रेजी में इसे ब्रिटिश पोत एचएमएस इंडिफैटिगेबल के नाम पर इंडिफैटिगेबल पुकारते हैं। द्वीप का क्षेत्रफल 986 वर्ग किलोमीटर है (381 वर्ग मील) और इसकी अधिकतम ऊंचाई 864 मीटर (2834 फुट) है। सांताक्रूज़ द्वीप समूह का सबसे अधिक जनसंख्या वाला द्वीप है और द्वीप की अधिकतर जनसंख्या द्वीप के नगर प्यूर्टो अयोरा में निवास करती है। चार्ल्स डार्विन अनुसंधान केन्द्र और गैलापागोस नेशनल पार्क सर्विस के मुख्यालय यहाँ स्थित हैं। चार्ल्स डार्विन अनुसंधान केन्द्र और गैलापागोस नेशनल पार्क सर्विस यहाँ एक कछुआ प्रजनन केंद्र चलाते हैं, जहां नन्हे कछुओं को अंडों से निकलने के बाद पाला जाता है और उन्हें उनके प्राकृतिक निवास स्थान पर छोड़ने के लिए तैयार किया जाता है। सांताक्रूज़ की उच्चभूमि घनी वनस्पति से आच्छादित हैं और यह स्थान लावा सुरंगों के लिए भी प्रसिद्ध है। यहाँ कछुओं की घनी आबादी पाई जाती है। काला कछुआ लघुनिवेशिका सदाबहार मैंग्रोव जंगलों से घिरी है जिसका प्रयोग समुद्री कछुए, शंकुश (रे) और छोटी हाँगर (शार्क) कभी कभी प्रजनन क्षेत्र के रूप में करते हैं। यहाँ सेरो ड्रैगन, जिसे इसके राजहंस अनूप के लिए जाना जाता है, भी स्थित है, साथ ही यहाँ पगडंडी पर चलते हुए स्थलीय गोह को चारा ढूंढते हुए देखा जा सकता है। .

नई!!: लावा और सांताक्रूज़ (गैलापागोस) · और देखें »

संमिलन सीमा

भूवैज्ञानिक प्लेट विवर्तनिकी में संमिलन सीमा (convergent boundary) वह सीमा होती है जहाँ पृथ्वी के स्थलमण्डल (लिथोस्फ़ीयर) के दो भौगोलिक तख़्ते (प्लेटें) एक दूसरे की ओर आकर टकराते हैं या आपस में घिसते हैं। ऐसे क्षेत्रों में दबाव और रगड़ से भूप्रावार (मैन्टल) का पत्थर पिघलने लगता है और ज्वालामुखी तथा भूकम्पन घटनाओं में से एक या दोनों मौजूद रहते हैं। संमिलन सीमाओं पर या तो एक तख़्ते का छोर दूसरे तख़्ते के नीचे दबने लगता है (इसे निम्नस्खलन या सबडक्शन कहते हैं) या फिर महाद्वीपीय टकराव होता है।Butler, Rob (October 2001).

नई!!: लावा और संमिलन सीमा · और देखें »

ज्वालामुख-कुण्ड

इर्टा एले के ज्वालामुख-कुण्ड में भरा लावाकिसी ज्वालामुखी के विस्फोट के परिणाम स्वरूप अस्तित्व में आई एक कुण्ड या पात्र सदृश रचना भूवैज्ञानिक भाषा में ज्वालामुख-कुण्ड कहलाती है। अंग्रेजी और अन्य यूरोपीय भाषायों मे इसे कैल्डेरा (Caldera) कहते हैं, जो एक स्पैनिश शब्द है पर इसका मूल लैटिन भाषा के कैल्डेरिया में निहित है जिसका अर्थ 'खाना पकाने का बर्तन' होता है।। .

नई!!: लावा और ज्वालामुख-कुण्ड · और देखें »

ज्वालामुखी

तवुर्वुर का एक सक्रिय ज्वालामुखी फटते हुए, राबाउल, पापुआ न्यू गिनिया ज्वालामुखी पृथ्वी की सतह पर उपस्थित ऐसी दरार या मुख होता है जिससे पृथ्वी के भीतर का गर्म लावा, गैस, राख आदि बाहर आते हैं। वस्तुतः यह पृथ्वी की ऊपरी परत में एक विभंग (rupture) होता है जिसके द्वारा अन्दर के पदार्थ बाहर निकलते हैं। ज्वालामुखी द्वारा निःसृत इन पदार्थों के जमा हो जाने से निर्मित शंक्वाकार स्थलरूप को ज्वालामुखी पर्वत कहा जाता है। ज्वालामुखी का सम्बंध प्लेट विवर्तनिकी से है क्योंकि यह पाया गया है कि बहुधा ये प्लेटों की सीमाओं के सहारे पाए जाते हैं क्योंकि प्लेट सीमाएँ पृथ्वी की ऊपरी परत में विभंग उत्पन्न होने हेतु कमजोर स्थल उपलब्ध करा देती हैं। इसके अलावा कुछ अन्य स्थलों पर भी ज्वालामुखी पाए जाते हैं जिनकी उत्पत्ति मैंटल प्लूम से मानी जाती है और ऐसे स्थलों को हॉटस्पॉट की संज्ञा दी जाती है। भू-आकृति विज्ञान में ज्वालामुखी को आकस्मिक घटना के रूप में देखा जाता है और पृथ्वी की सतह पर परिवर्तन लाने वाले बलों में इसे रचनात्मक बल के रूप में वर्गीकृत किया जाता है क्योंकि इनसे कई स्थलरूपों का निर्माण होता है। वहीं, दूसरी ओर पर्यावरण भूगोल इनका अध्ययन एक प्राकृतिक आपदा के रूप में करता है क्योंकि इससे पारितंत्र और जान-माल का नुकसान होता है। .

नई!!: लावा और ज्वालामुखी · और देखें »

ज्वालामुखी विज्ञान

ज्वालामुखी विज्ञान (volcanology या vulcanology) ज्वालामुखियों व उन से सम्बन्धित चीज़ों, जैसे कि मैग्मा, लावा और अन्य सम्बन्धित भूवैज्ञानिक, भूभौतिक और भूरसायनिक पहलुओं के अध्ययन को कहते हैं। ज्वालामुखी वैज्ञानिक का विशेष ध्यान ज्वालामुखियों के निर्माण, ऐतिहासिक अ आधुनिक विस्फोटों, जीवन-क्रमों, इत्यादि को समझने में लगता है। वे अक्सर जीवित, मूर्छित और मृत ज्वालामुखियों पर जाकर माप और नमूने लेते हैं और अन्य छानबीन करते हैं। ज्वालामुखी विज्ञान को भूविज्ञान की शाखा माना जाता है। .

नई!!: लावा और ज्वालामुखी विज्ञान · और देखें »

ज्वालामुखीय चट्टान

ज्वालामुखीय चट्टानें (अंग्रेज़ी::en:Volcanic rocks वे चट्टानें है जो पृथ्वीतल पर ज्वालामुखी के उद्भेदन द्वारा निकले लावा के ठंढे होकर चट्टान के रूप में जम जाने से बनी हैं। इन्हें तकनीकी भाषा में बहिर्भेदी आग्नेय चट्टानें भी कहा जाता है। प्रमुख उदाहरण हैं बेसाल्ट और रायोलाइट। .

नई!!: लावा और ज्वालामुखीय चट्टान · और देखें »

ज्वालामुखीय चट्टानें

ज्वालामुखीय चट्टान ऐसी आग्नेय चट्टान है जो ज्वालामुखी क्रिया द्वारा मैग्मा के लावा के रूप मे धरती कि सतह के ऊपर आकर जमने से बनती है। .

नई!!: लावा और ज्वालामुखीय चट्टानें · और देखें »

ज्वालामुखीयता

ज्वालामुखीयता (volcanism या vulcanism) पृथ्वी या अन्य किसी स्थलीय ग्रह या प्राकृतिक उपग्रह पर सबसी ऊपरी सतह में बनी दरार या छिद्र से नीचे से पिघले पत्थर या अन्य सामग्री के लावा और गैसों के रूप में उलगाव को कहते हैं। इनमें वह सारी परिघटनाएँ आती हैं जिनमें भूपर्पटी (क्रस्ट) और भूप्रावार (मैन्टल) से पिघली सामग्री उगल कर या विस्फोटक प्रक्रिया द्वारा ऊपर सतह पर आए और वहाँ जमकर ठोस रूप ले ले। .

नई!!: लावा और ज्वालामुखीयता · और देखें »

विदर छिद्र

विदर छिद्र (fissure vent) या ज्वालामुखीय विदर (volcanic fissure) लगभग एक रेखा के आकार का ज्वालामुखीय छिद्र होता है जिसमें से पृथ्वी के भीतर से लावा उगला जाता है। इसमें और ज्वालामुखी में एक बड़ा अंतर यह है कि विदर छिद्र से लावा बिना किसी विस्फोट के निकलता है। विदर छिद्र के रेखा-मुख कुछ मीटर से लेकर कुछ किलोमीटर लम्बा हो सकता है। विदर छिद्रों से बाढ़ बेसाल्ट बनता है जो पहले तो लावा नहरों में और फिर लावा ट्यूबों में चलता है। .

नई!!: लावा और विदर छिद्र · और देखें »

गारामुखी

अज़रबैजान के गोबुस्तान क्षेत्र में गारामुखियों की एक शृंखला गारामुखी (mud volcano, मड वॉल्केनो) या पंकमुखी या पंक ज्वालामुखी एक ऐसी प्राकृतिक रचना को कहते हैं जिसमें ज़मीन के नीचे से उभरते हुए गरम द्रवों और गैसों से एक टीला बन जाए जिसके ऊपर स्थित मुख से गीली मिट्टी और मलबा (यानि 'गारा') उगलता हो। एक तरह से यह ज्वालामुखी की तरह ही होता है हालांकि गारामुखी से लावा नहीं निकलता और इनका तापमान ज्वालामुखियों से बहुत कम होता है। पूरे विश्व में लगभग ७०० गारामुखी ज्ञात हैं और सबसे बड़ा वाला ७०० मीटर ऊँचा है और १० किमी का व्यास (डायामीटर) रखता है। गारामुखियों से निकलने वाली गैस का लगभग ८५% मीथेन होता है और इसके अतिरिक्त इसमें कार्बन डायोक्साइड और नाइट्रोजन भी होती हैं। इनमें से निकलने वाला द्रव अधिकतर गरम पानी होता है जिसमें महीन धुल और पत्तर के कण मिले होते हैं, हालांकि कुछ मात्रा हाइड्रोकार्बन द्रवों की भी होती है। अक्सर यह द्रव (लिक्विड) अम्लीय (एसिडिक) और नमकीन होता है। कुछ खगोलशास्त्रियों को मंगल ग्रह पर भी गारामुखियों के मौजूद होने का शक है।, BBC, Accessed 2009-03-27 .

नई!!: लावा और गारामुखी · और देखें »

गैलापागोस द्वीपसमूह

गैलापागोस द्वीप समूह (आधिकारिक नाम: Archipiélago de Colón; अन्य स्पेनिश नाम: Islas de Colón या Islas Galápagos) प्रशांत महासागर में भूमध्य रेखा के आसपास फैले ज्वालामुखी द्वीपों का एक द्वीपसमूह है, जो महाद्वीपीय ईक्वाडोर के 972 किमी पश्चिम में स्थित है। यह एक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है: वन्यजीवन इसकी सबसे प्रमुख विशेषता है। गैलापागोस द्वीप समूह ईक्वाडोर के गैलापागोस प्रांत का निर्माण करते हैं साथ ही यह देश की राष्ट्रीय उद्यान प्रणाली का हिस्सा हैं। इस द्वीप की प्रमुख भाषा स्पेनिश है। इस द्वीपों की जनसंख्या 40000 के आसपास है, जिसमें पिछले 50 वर्षों में 40 गुना वृद्धि हुई है। भौगोलिक रूप से यह द्वीपसमूह नये हैं और स्थानीय प्रजातियों की अपनी विशाल संख्या के लिए प्रसिद्ध है, जिनका चार्ल्स डार्विन ने अपने बीगल के खोजी अभियान के दौरान अध्ययन किया था। उनकी टिप्पणियों और संग्रह ने डार्विन के प्राकृतिक चयन द्वारा क्रम-विकास के सिद्धांत के प्रतिपादन में योगदान दिया। विश्व के नये सात आश्चर्य फाउंडेशन द्वारा गैलापागोस द्वीपसमूह को प्रकृति के सात नए आश्चर्यों में से एक के लिए एक उम्मीदवार के रूप में सूचीबद्ध किया गया था। फ़रवरी 2009 तक द्वीप की श्रेणी, समूह बी में द्वीपसमूह की वरीयता प्रथम थी। .

नई!!: लावा और गैलापागोस द्वीपसमूह · और देखें »

आग्नेय शैल

ग्रेनाइट (एक आग्नेय चट्टान) चेन्नई मे, भारत. आग्नेय चट्टान (जर्मन: Magmatisches Gestein) की रचना धरातल के नीचे स्थित तप्त एवं तरल चट्टानी पदार्थ, अर्थात् मैग्मा, के सतह के ऊपर आकार लावा प्रवाह के रूप में निकल कर अथवा ऊपर उठने के क्रम में बाहर निकल पाने से पहले ही, सतह के नीचे ही ठंढे होकर इन पिघले पदार्थों के ठोस रूप में जम जाने से होती है। अतः आग्नेय चट्टानें पिघले हुए चट्टानी पदार्थ के ठंढे होकर जम जाने से बनती हैं। ये रवेदार भी हो सकती है और बिना कणों या रवे के भी। ये चट्टानें पृथ्वी पर पायी जाने वाली अन्य दो प्रमुख चट्टानों, अवसादी और रूपांतरित के साथ मिलकर पृथ्वी पर पायी जाने वाली चट्टानों के तीन प्रमुख प्रकार बनाती हैं। पृथ्वी के धरातल की उत्पत्ति में सर्वप्रथम इनका निर्माण होने के कारण इन्हें 'प्राथमिक शैल' भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए भी कहा जाता है कि यही वे पहली चट्टानें हैं जो पिघले हुए चट्टानी पदार्थ से बनती हैंजबकि अवसादी या रूपांतरित चट्टानें इन आग्नेय चट्टानों के टूटने या ताप और दाब के प्रभाव आकार में बदलने से से बनती हैं। इनके दो मुख्य प्रकार हैं। ज्वालामुखी उदगार के समय भूगर्भ से निकालने वाला लावा जब धरातल पर जमकर ठंडा हो जाने के पश्चात आग्नेय चट्टानों में परिवर्तित हो जाता है तो इसे बहिर्भेदी या ज्वालामुखीय चट्टान कहा जाता है। इसके विपरीत जब ऊपर उठता हुआ मैग्मा धरातल की सतह पर आकर बाहर निकलने से पहले ही ज़मीन के अन्दर ही ठंडा होकर जम जाता है तो इस प्रकार अंतर्भेदी चट्टान कहते हैं। चूँकि, ज़मीनी सतह से नीचे बनने वाली आग्नेय चट्टानें धीरे-धीरे ठंडी होकर जमती है, ये रवेदार होती हैं, क्योंकि मैग्माई पदार्थ के अणुओं के एक दूसरे के साथ संयोजित होकर क्रिस्टल या रवे बनाने हेतु काफ़ी समय मिल जाता है। इसके ठीक उलट, जब मैग्मा लावा के रूप में ज्वालामुखी उदगार के समय बाहर निकल कर ठंढा होकर जमता है तो रवे बनने के लिये पर्याप्त समय नहीं मिलता और इस प्रकार बहिर्भेदी आग्नेय चट्टानें काँचीय या गैर-रवेदार (glassy) होती हैं। आग्नेय चट्टानों में परतों और जीवाश्मों का पूर्णतः अभाव पाया जाता है। अप्रवेश्यता अधिक होने के कारण इन पर रासायनिक अपक्षय का बहुत कम प्रभाव पड़ता है, लेकिन यांत्रिक एवं भौतिक अपक्षय के कारण इनका विघटन व वियोजन प्रारम्भ हो जाता है। ग्रेनाइट, बेसाल्ट, गैब्रो, ऑब्सीडियन, डायोराईट, डोलोराईट, एन्डेसाईट, पेरिड़ोटाईट, फेलसाईट, पिचस्टोन, प्युमाइस इत्यादि आग्नेय चट्टानों के प्रमुख उदाहरण है। .

नई!!: लावा और आग्नेय शैल · और देखें »

इश्तार टेरा

इश्तार टेरा (Ishtar Terra), शुक्र ग्रह पर दो मुख्य उच्चभूम क्षेत्रों में से एक है। यह दो "महाद्वीपों" में छोटा है और उत्तरी ध्रुव के पास स्थित है। यह अकाडिनी देवी इश्तार पर नामित है। इश्तार टेरा का आकार मोटे तौर पर ऑस्ट्रेलिया और संयुक्त राज्य अमेरिका महाद्वीप के बीच है। इसके पूर्वी किनारे पर महान पर्वत श्रृंखला मैक्सवेल मोंटेस स्थित है जो 11 किमी ऊंची है, तुलना के लिए माउंट एवरेस्ट 8.8 किमी उंचा है। पर्वत श्रृंखला के एक तरफ लावा से भरा 100 किमी व्यास का प्रहार क्रेटर है। इश्तार टेरा शुक्र की चार मुख्य पर्वत श्रृंखलाएं शामिल करती है: पूर्वी तट पर मैक्सवेल मोंटेस, उत्तर में फ्रेज्या मोंटेस, अक्ना मोंटेस पश्चिमी तट पर और दक्षिणी क्षेत्र में दानु मोंटेस। ये इश्तार टेरा के निचले मैदान को घेरते हैं, जो कि लक्ष्मी प्लैनम से नामित है (हिंदू देवी लक्ष्मी के नाम पर)। इश्तार टेरा प्रसिद्ध महिलाओं पर नामित ज्वालामुखी भी शामिल करते हैं: साकाज़ाविया, कोलेट और क्लियोपेट्रा। श्रेणी:खगोलशास्त्र श्रेणी:शुक्र ग्रह श्रेणी:शुक्र की स्थलाकृति.

नई!!: लावा और इश्तार टेरा · और देखें »

अफ़्रीका की भू-प्रकृति

अफ्रीका का भौतिक मानचित्र ड्रेकेन्सबर्ग पर्वत इथियोपिया का पठार अफ्रीका ऊँचे पठारों का महाद्वीप है, इसका निर्माण अत्यन्त प्राचीन एवं कठोर चट्टानों से हुआ है। इस लावा निर्मित पठार को ढाल (शील्ड) कहते हैं। जर्मनी के प्रसिद्ध जलवायुवेत्ता तथा भूशास्त्रवेत्ता अल्फ्रेड वेगनर ने पूर्व जलवायु शास्त्र, पूर्व वनस्पति शास्त्र, भूशास्त्र तथा भूगर्भशास्त्र के प्रमाणों के आधार पर यह प्रमाणित किया कि एक अरब वर्ष पहले समस्त स्थल भाग एक स्थल भाग के रूप में संलग्न था एवं इस स्थलपिण्ड का नामकरण पैंजिया (पूर्ण पृथ्वी) किया। कार्बन युग में पैंजिया के दो टुकड़े हो गये जिनमें से एक उत्तर तथा दूसरा दक्षिण में चला गया। पैंजिया का उत्तरी भाग लारेशिया तथा दक्षिणी भाग गोंडवाना लैंड को प्रदर्शित करता था।अफ्रीका महादेश का धरातल प्राचीन गोंडवाना लैंड का ही एक भाग है। बड़े पठारों के बीच अनेक छोटे-छोटे पठार विभिन्न ढाल वाले हैं। इसके उत्तर में विश्व का बृहत्तम शुष्क मरुस्थल सहारा उपस्थित है। इसके नदी बेसिनों का मानव सभ्यता के विकास में उल्लेखनीय योगदान रहा है, जिसमें नील नदी बेसिन का विशेष स्थान है। समुद्रतटीय मैदानों को छोड़कर किसी भी भाग की ऊँचाई ३२५ मीटर से कम नहीं है। महाद्वीप के उत्तरी-पश्चिमी भाग तथा सुदूर दक्षिण में मोड़दार पर्वत मिलते हैं। अफ्रीका के उत्तर-पश्चिम में एटलस पर्वत की श्रेणियाँ हैं, जो यूरोप के आल्प्स पर्वतमाला की ही एक शाखा है। ये पर्वत दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व दिशा में फैले हुए हैं और उत्तर की अपेक्षा दक्षिण में अधिक ऊँचे हैं। इसकी सबसे ऊँची चोटी जेबेल टूबकल है जिसकी ऊँचाई ४,१६७ मीटर है। यहाँ खारे पानी की कई झीलें हैं जिन्हें शॉट कहते हैं। मध्य का निम्न पठार भूमध्य रेखा के उत्तर पश्चिम में अन्ध महासागर तट से पूर्व में नील नदी की घाटी तक फैला हुआ है। इसकी ऊँचाई ३०० से ६०० मीटर है। यह एक पठार केवल मरुस्थल है जो सहारा तथा लीबिया के नाम से प्रसिद्ध है। यह एक प्राचीन पठार है तथा नाइजर, कांगो (जायरे), बहर एल गजल तथा चाड नदियों की घाटियों द्वारा कट-फट गया है। इस पठार के मध्य भाग में अहगर एवं टिबेस्टी के उच्च भाग हैं जबकि पूर्वी भाग में कैमरून, निम्बा एवं फूटा जालौन के उच्च भाग हैं। कैमरून के पठार पर स्थित कैमरून (४,०६९ मीटर) पश्चिमी अफ्रीका की सबसे ऊँचा चोटी है। कैमरून गिनि खाड़ी के समानान्तर स्थित एक शांत ज्वालामुखी है। पठार के पूर्वी किनारे पर ड्रेकेन्सबर्ग पर्वत है जो समुद्र तट की ओर एक दीवार की भाँति खड़ा है। ड्रेकेन्सबर्ग का स्थानीय नाम क्वाथालम्बा है एवं यह ३,००० मीटर तक ऊँचा है। केप प्रान्त में यह पठार दक्षिण की ओर चबूतरे के रूप में समुद्र तक नीचे उतरता है। इन चबूतरों को कारू कहते हैं। इनमें उत्तरी चबूतरे को महान कारू तथा दक्षिणी चबूतरे को लघु कारू कहते हैं। दक्षिणी-पश्चिमी भाग में कालाहारी का मरूस्थल है। पूर्व एवं दक्षिण का उच्च पठार भूमध्य रेखा के पूर्व तथा दक्षिण में स्थित है तथा अपेक्षाकृत अधिक ऊँचा है। प्राचीन समय में यह पठार दक्षिण भारत के पठार से मिला था। बाद में बीच की भूमि के धँसने के कारण यह हिन्द महासागर द्वारा अलग हो गया। इस पठार का एक भाग अबीसिनिया में लाल सागर के तटीय भाग से होकर मिस्र देश तक पहुँचती है। इसमें इथोपिया, पूर्वी अफ्रीका एवं दक्षिणी अफ्रीका के पठार सम्मिलित हैं। अफ्रीका के उत्तर-पश्चिम में इथोपिया का पठार है। इस पठार का अधिकांश भाग २,४०० मीटर से ऊँचा है तथा प्राचीनकालीन ज्वालामुखी के उद्गार से निकले हुए लावा से निर्मित है। इसी पठार से नील नदी की सहायक नीली नील नदी निकलती है। नील नदी की कई सहायक नदियों ने इस पठार को काट कर घाटियाँ बना दी हैं। इथोपिया की पर्वतीय गाँठ से कई उच्च श्रेणियाँ निकलकर पूर्वी अफ्रीका के झील प्रदेश से होती हुई दक्षिण की ओर जाती हैं। इथोपिया की उच्च भूमि के दक्षिण में पूर्वी अफ्रीका की उच्च भूमि है। इस पठार का निर्माण भी ज्वालामुखी की क्रिया द्वारा हुआ है। इस श्रेणी में किलिमांजारो (५,८९५ मीटर), रोबेनजारो (५,१८० मीटर) और केनिया (५,४९० मीटर) की बर्फीली चोटियाँ भूमध्यरेखा के समीप पायी जाती हैं। ये तीनों ज्वालामुखी पर्वत हैं। केनिया तथा किलिमांजारो गुटका पर्वत भी हैं। किलिमंजारो अफ्रीका का सबसे ऊँचा पर्वत एवं चोटी है। अफ्रीका के दरार घाटी की कुछ झीलों का आकाशीय दृश्य दक्षिण अफ्रीका के तट का उपग्रह से खींचा गया चित्र अफ्रीका महाद्वीप की एक मुख्य भौतिक विशेषता पृथ्वी की आन्तरिक हलचलों के कारण अफ्रीका के पठार के पूर्वी भाग में भ्रंश घाटियों की उपस्थिति है। यह दरार घाटी पूर्वी अफ्रीका की महान दरार घाटी के नाम से प्रसिद्ध है तथा उत्तर से दक्षिण फैली है। भ्रंश घाटी एक लम्बी, संकरी एवं गहरी घाटी है जिसके किनारे के ढाल खड़े हैं। प्राचीन काल में पृथ्वी की आन्तरिक शक्तियों के कारण इस पठार पर दो विपरीत दिशाओं से दबाव पड़ा जिससे उसमें कई समानान्तर दरारें पड़ गयीं। जब दो समानान्तर दरारों के बीच का भाग नीचे धँस गया तो उस धँसे भाग को दरार घाटी कहते हैं। इनके दोनों किनारे दीवार की तरह ढाल वाले होते हैं। यह विश्व की सबसे लम्बी दरार घाटी है तथा ४,८०० किलोमीटर लम्बी है। अफ्रीका की महान दरार घाटी की दो शाखाएँ हैं- पूर्वी एवं पश्चिमी। पूर्वी शाखा दक्षिण में मलावी झील से रूडाल्फ झील तथा लाल सागर होती हुई सहारा तक फैली हुई है तथा पश्चिमी शाखा मलावी झील से न्यासा झील एवं टांगानिका झील होती हुई एलबर्ट झील तक चली गयी है। भ्रंश घाटियों में अनेक गहरी झीलें हैं। रुकवा, कियू, एडवर्ड, अलबर्ट, टाना व न्यासा झीलें भ्रंश घाटी में स्थित हैं। अफ्रीका महाद्वीप के चारो ओर संकरे तटीय मैदान हैं जिनकी ऊँचाई १८० मीटर से भी कम है। भूमध्य सागर एवं अन्ध महासागर के तटों के समीप अपेक्षाकृत चौड़े मैदान हैं। अफ्रीका महाद्वीप में तटवर्ती प्रदेश सीमित एवं अनुपयोगी हैं क्योंकि अधिकांश भागों में पठारी कगार तट तक आ गये हैं और शेष में तट में दलदली एवं प्रवाल भित्ति से प्रभावित हैं। मॉरीतानिया और सेनेगल का तटवर्ती प्रदेश काफी विस्तृत है, गिनी की खाड़ी का तट दलदली एवं अनूप झीलों से प्रभावित है। जगह-जगह पर रेतीले टीले हैं तथा अच्छे पोताश्रयों का अभाव है। पश्चिमी अफ्रीका का तट की सामान्यतः गिनी तट के समान है जिसमें लैगून एवं दलदलों की अधिकता है। दक्षिणी अफ्रीका में पठार एवं तट में बहुत ही कम अन्तर है। पूर्वी अफ्रीका में प्रवालभित्तियों की अधिकता है। अफ्रीका में निम्न मैदानों का अभाव है। केवल कांगो, जेम्बेजी, ओरेंज, नाइजर तथा नील नदियों के संकरे बेसिन हैं। .

नई!!: लावा और अफ़्रीका की भू-प्रकृति · और देखें »

अरबी रेगिस्तान

अरबी रेगिस्तान (अंग्रेज़ी: Arabian Desert; अरबी:, अस-सहरा अल-अरबीया) पश्चिमी एशिया में स्थित एक विशाल रेगिस्तान है जो दक्षिण में यमन से लेकर उत्तर में फ़ारस की खाड़ी तक और पूर्व में ओमान से लेकर पश्चिम में जोर्डन और इराक़ तक फैला हुआ है। अरबी प्रायद्वीप का अधिकाँश भाग इस रेगिस्तान में आता है और इस मरुस्थल का कुल क्षेत्रफल २३.३ लाख किमी२ है, यानि पूरे भारत के क्षेत्रफल का लगभग ७०%। इसके बीच में रुब अल-ख़ाली नाम का इलाक़ा है जो विश्व का सबसे विस्तृत रेतीला क्षेत्र है।, Professor Julie J Laity, pp.

नई!!: लावा और अरबी रेगिस्तान · और देखें »

निवर्तमानआने वाली
अरे! अब हम फेसबुक पर हैं! »