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रिफ़्ट (भूविज्ञान)

सूची रिफ़्ट (भूविज्ञान)

रिफ़्ट (अंग्रेज़ी: rift) भूविज्ञान में ऐसे क्षेत्र को कहते हैं जहाँ प्लेट विवर्तनिकी (भौगोलिक प्लेटों की चाल) के कारण पृथ्वी के भूपटल (क्रस्ट) और स्थलमंडल (लिथोस्फ़ेयर) खिचने से फटकर अलग हो रहा हो। इस से अक्सर धरती पर वहाँ भ्रंश बनते हैं और रिफ्ट घाटियाँ बन जाती हैं। इनमें अफ़्रीका व मध्य पूर्व की ग्रेट रिफ़्ट घाटी एक उदाहरण है जो अफ़्रीकी प्लेट के दो भागों में टूटकर अलग होने की प्रक्रिया से बन गई है।, pp.

9 संबंधों: तांगान्यीका झील, तुर्काना झील, पृथ्वी, पूर्व अफ़्रीकी रिफ़्ट, मध्य-महासागर पर्वतमाला, मलावी झील, ग्रेट रिफ़्ट घाटी, क्योगा झील, कीवू झील

तांगान्यीका झील

तांगान्यीका झील (अंग्रेज़ी: Lake Tanganyika) महान अफ़्रीकी झीलों में से एक है। घनफल (वोल्यूम) और गहराई के हिसाब से यह रूस की बयकाल झील के बाद दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी मीठे पानी की झील है। यह विश्व की सबसे लम्बी झील भी है। इसका क्षेत्रफल चार देशों में बंटा हुआ है - तान्ज़ानिया, कांगो लोकतान्त्रिक गणराज्य, बुरुन्डी और ज़ाम्बिया। झील के ४६% क्षेत्रफल पर तान्ज़ानिया और ४०% पर कांगो लोकतान्त्रिक गणराज्य का अधिकार है। इसका पानी बाहर कांगो नदी में बहता है जो आगे जाकर अन्ध महासागर में विलय हो जाती है।, Jean-Pierre Chrétien, Mit Press, 2006, ISBN 9781890951351 .

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तुर्काना झील

तुर्काना झील (अंग्रेज़ी: Lake Turkana), जिसे पहले रुडोल्फ़ झील (अंग्रेज़ी: Lake Rudolf) बुलाया जाता था, महान अफ़्रीकी झीलों में से एक है। यह कुछ-कुछ खारे पानी की झील घनफल (वोल्यूम) के हिसाब से कैस्पियन सागर, इसिक-कुल और वान झील के बाद दुनिया की चौथी सबसे बड़ी खारी झील है। अरल सागर इस से कभी बड़ा हुआ करता था लेकिन अधिकतर सूख जाने के कारण अब इस से छोटा है। तुर्काना एक रेगिस्तान-जैसे क्षेत्र में स्थित है और विश्व की सबसे बड़ी स्थाई रेगिस्तानी झील भी है। इसका अधिकतर भाग कीनिया में है लेकिन सुदूर उत्तरी छोर इथियोपिया में पड़ता है। .

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पृथ्वी

पृथ्वी, (अंग्रेज़ी: "अर्थ"(Earth), लातिन:"टेरा"(Terra)) जिसे विश्व (The World) भी कहा जाता है, सूर्य से तीसरा ग्रह और ज्ञात ब्रह्माण्ड में एकमात्र ग्रह है जहाँ जीवन उपस्थित है। यह सौर मंडल में सबसे घना और चार स्थलीय ग्रहों में सबसे बड़ा ग्रह है। रेडियोधर्मी डेटिंग और साक्ष्य के अन्य स्रोतों के अनुसार, पृथ्वी की आयु लगभग 4.54 बिलियन साल हैं। पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण, अंतरिक्ष में अन्य पिण्ड के साथ परस्पर प्रभावित रहती है, विशेष रूप से सूर्य और चंद्रमा से, जोकि पृथ्वी का एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह हैं। सूर्य के चारों ओर परिक्रमण के दौरान, पृथ्वी अपनी कक्षा में 365 बार घूमती है; इस प्रकार, पृथ्वी का एक वर्ष लगभग 365.26 दिन लंबा होता है। पृथ्वी के परिक्रमण के दौरान इसके धुरी में झुकाव होता है, जिसके कारण ही ग्रह की सतह पर मौसमी विविधताये (ऋतुएँ) पाई जाती हैं। पृथ्वी और चंद्रमा के बीच गुरुत्वाकर्षण के कारण समुद्र में ज्वार-भाटे आते है, यह पृथ्वी को इसकी अपनी अक्ष पर स्थिर करता है, तथा इसकी परिक्रमण को धीमा कर देता है। पृथ्वी न केवल मानव (human) का अपितु अन्य लाखों प्रजातियों (species) का भी घर है और साथ ही ब्रह्मांड में एकमात्र वह स्थान है जहाँ जीवन (life) का अस्तित्व पाया जाता है। इसकी सतह पर जीवन का प्रस्फुटन लगभग एक अरब वर्ष पहले प्रकट हुआ। पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति के लिये आदर्श दशाएँ (जैसे सूर्य से सटीक दूरी इत्यादि) न केवल पहले से उपलब्ध थी बल्कि जीवन की उत्पत्ति के बाद से विकास क्रम में जीवधारियों ने इस ग्रह के वायुमंडल (the atmosphere) और अन्य अजैवकीय (abiotic) परिस्थितियों को भी बदला है और इसके पर्यावरण को वर्तमान रूप दिया है। पृथ्वी के वायुमंडल में आक्सीजन की वर्तमान प्रचुरता वस्तुतः जीवन की उत्पत्ति का कारण नहीं बल्कि परिणाम भी है। जीवधारी और वायुमंडल दोनों अन्योन्याश्रय के संबंध द्वारा विकसित हुए हैं। पृथ्वी पर श्वशनजीवी जीवों (aerobic organisms) के प्रसारण के साथ ओजोन परत (ozone layer) का निर्माण हुआ जो पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र (Earth's magnetic field) के साथ हानिकारक विकिरण को रोकने वाली दूसरी परत बनती है और इस प्रकार पृथ्वी पर जीवन की अनुमति देता है। पृथ्वी का भूपटल (outer surface) कई कठोर खंडों या विवर्तनिक प्लेटों में विभाजित है जो भूगर्भिक इतिहास (geological history) के दौरान एक स्थान से दूसरे स्थान को विस्थापित हुए हैं। क्षेत्रफल की दृष्टि से धरातल का करीब ७१% नमकीन जल (salt-water) के सागर से आच्छादित है, शेष में महाद्वीप और द्वीप; तथा मीठे पानी की झीलें इत्यादि अवस्थित हैं। पानी सभी ज्ञात जीवन के लिए आवश्यक है जिसका अन्य किसी ब्रह्मांडीय पिण्ड के सतह पर अस्तित्व ज्ञात नही है। पृथ्वी की आतंरिक रचना तीन प्रमुख परतों में हुई है भूपटल, भूप्रावार और क्रोड। इसमें से बाह्य क्रोड तरल अवस्था में है और एक ठोस लोहे और निकल के आतंरिक कोर (inner core) के साथ क्रिया करके पृथ्वी मे चुंबकत्व या चुंबकीय क्षेत्र को पैदा करता है। पृथ्वी बाह्य अंतरिक्ष (outer space), में सूर्य और चंद्रमा समेत अन्य वस्तुओं के साथ क्रिया करता है वर्तमान में, पृथ्वी मोटे तौर पर अपनी धुरी का करीब ३६६.२६ बार चक्कर काटती है यह समय की लंबाई एक नाक्षत्र वर्ष (sidereal year) है जो ३६५.२६ सौर दिवस (solar day) के बराबर है पृथ्वी की घूर्णन की धुरी इसके कक्षीय समतल (orbital plane) से लम्बवत (perpendicular) २३.४ की दूरी पर झुका (tilted) है जो एक उष्णकटिबंधीय वर्ष (tropical year) (३६५.२४ सौर दिनों में) की अवधी में ग्रह की सतह पर मौसमी विविधता पैदा करता है। पृथ्वी का एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह चंद्रमा (natural satellite) है, जिसने इसकी परिक्रमा ४.५३ बिलियन साल पहले शुरू की। यह अपनी आकर्षण शक्ति द्वारा समुद्री ज्वार पैदा करता है, धुरिय झुकाव को स्थिर रखता है और धीरे-धीरे पृथ्वी के घूर्णन को धीमा करता है। ग्रह के प्रारंभिक इतिहास के दौरान एक धूमकेतु की बमबारी ने महासागरों के गठन में भूमिका निभाया। बाद में छुद्रग्रह (asteroid) के प्रभाव ने सतह के पर्यावरण पर महत्वपूर्ण बदलाव किया। .

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पूर्व अफ़्रीकी रिफ़्ट

पूर्व अफ़्रीकी रिफ़्ट (अंग्रेज़ी: East African Rift) एक सक्रीय भूवैज्ञानिक रिफ़्ट है जो पूर्व अफ़्रीका में बढ़ रही है। इसे पहले ग्रेट रिफ़्ट घाटी का भाग माना जाता था लेकिन बहुत से भूवैज्ञानिक इसे अब एक अलग रिफ़्ट घाटी मानते हैं। यह अफ़्रीकी प्लेट के टूटकर दो भागों में बंटने की जारी प्रक्रिया के कारण बन गई है। .

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मध्य-महासागर पर्वतमाला

मध्य-महासागर पर्वतमाला (mid-ocean ridge) किसी महासागर के जल के अंदर प्लेट विवर्तनिकी द्वारा बनी एक पर्वतमाला होती है। सामान्यतः इसमें कई पहाड़ शृंखलाओं में आयोजित होते हैं और इनके बीच में एक लम्बी रिफ़्ट नामक घाटी चलती है। इस रिफ़्ट के नीचे दो भौगोलिक तख़्तों की संमिलन सीमा होती है जहाँ दबाव और रगड़ के कारण भूप्रावार (मैन्टल) से पिघला हुआ मैग्मा उगलकर लावा के रूप में ऊपर आता है और नया सागर का फ़र्श बनाता है - इसे प्रक्रिया को सागर नितल प्रसरण (seafloor spreading) कहते हैं। .

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मलावी झील

मलावी झील (अंग्रेज़ी: Lake Malawi) या न्यासा झील (अंग्रेज़ी: Lake Nyasa) महान अफ़्रीकी झीलों में से एक है और पूर्वी अफ़्रीकी दरार की दक्षिणतम झील है। यह मलावी, मोज़ाम्बीक और तान्ज़ानिया के बीच स्थित है। यह अफ़्रीका की तीसरी सबसे बड़ी और दूसरी सबसे गहरी झील है। यह पूरे विश्व की नौवीं सबसे बड़ी झील है। कुछ स्रोतों के अनुसार इस झील में दुनिया की किसी भी अन्य झील से ज़्यादा मछलियों की जातियाँ रहती हैं। यहाँ १,००० से अधिक तो सिर्फ़ सिक्लिडों की ही जातियाँ रहती है। १० जून २०११ को मोज़ाम्बीक ने इसे संरक्षित क्षेत्र धोषित कर दिया।, Jean-Pierre Chrétien, Mit Press, 2006, ISBN 9781890951351 .

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ग्रेट रिफ़्ट घाटी

ग्रेट रिफ़्ट घाटी का नक़्शा (फ़्रांसिसी में) महान रिफ़्ट घाटी अथवा ग्रेट रिफ़्ट घाटी (एक भौगोलिक वादी है जो पूर्वी अफ़्रीका और मध्य पूर्व में उत्तर-दक्षिण दिशा में स्थित है। अलग-अलग स्रोत इसकी परिभाषा अलग तरह से करते हैं। कुछ के अनुसार यह उत्तर सीरिया से शुरू होकर लगातार 6,000 किमी तक चलकर पूर्वी अफ़्रीका के मोज़ाम्बीक देश में अंत होती है। साधारण प्रयोग में महान रिफ़्ट घाटी का नाम केवल इसके पूर्वी अफ़्रीका में स्थित हिस्से के लिए इस्तेमाल होता है जो अफ़ार द्रोणी से आरम्भ होकर मोज़ाम्बीक में ख़त्म होता है। यहाँ अफ़्रीकी प्लेट के दो भागों में टूटने से रिफ़्ट का निर्माण हुआ है। .

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क्योगा झील

क्योगा झील (अंग्रेज़ी: Lake Kyoga या Lake Kioga) अफ़्रीका के युगान्डा देश में स्थित एक बड़े आकार की लेकिन कम गहराई वाली झील है। १,७२० वर्ग किमी के क्षेत्रफल वाली यह झील १,०३४ मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। नील नदी की विक्टोरिया नील नामक ऊपरी शाखा विक्टोरिया झील से निकलती है और क्योगा झील से गुज़रती हुई ऐल्बर्ट झील तक जाती है। क्योगा झील वैसे तो पूर्वी अफ़्रीकी दरार में स्थित है और महान अफ़्रीकी झीलों के क्षेत्रमंडल में ही पड़ती है, लेकिन इसका आकार इतना विशाल नहीं है कि इसे स्वयं महान अफ़्रीकी झीलों में से एक गिना जाए।, Jean-Pierre Chrétien, Mit Press, 2006, ISBN 9781890951351 .

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कीवू झील

कीवू झील (अंग्रेज़ी: Lake Kivu) महान अफ़्रीकी झीलों में से एक है। यह कांगो लोकतान्त्रिक गणराज्य और रवाण्डा की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित है।, Jean-Pierre Chrétien, Mit Press, 2006, ISBN 9781890951351 .

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यहां पुनर्निर्देश करता है:

दरार (भूविज्ञान), भ्रंशद्रोणिका, भूवैज्ञानिक दरार, भूवैज्ञानिक रिफ़्ट, रिफ्ट (भूविज्ञान)

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