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रामसेतु

सूची रामसेतु

आकाश से रामसेतु का दृश्य रामसेतु (तमिल: இராமர் பாலம், मलयालम: രാമസേതു,, अंग्रेजी: Adam's Bridge; आदम का पुल), तमिलनाडु, भारत के दक्षिण पूर्वी तट के किनारे रामेश्वरम द्वीप तथा श्रीलंका के उत्तर पश्चिमी तट पर मन्नार द्वीप के मध्य चूना पत्थर से बनी एक शृंखला है। भौगोलिक प्रमाणों से पता चलता है कि किसी समय यह सेतु भारत तथा श्रीलंका को भू मार्ग से आपस में जोड़ता था। हिन्दू पुराणों की मान्यताओं के अनुसार इस सेतु का निर्माण अयोध्या के राजा राम श्रीराम की सेना के दो सैनिक जो की वानर थे, जिनका वर्णन प्रमुखतः नल-निल नाम से रामायण में मिलता है, द्वारा किये गया था, यह पुल ४८ किलोमीटर (३० मील) लम्बा है तथा मन्नार की खाड़ी (दक्षिण पश्चिम) को पाक जलडमरूमध्य (उत्तर पूर्व) से अलग करता है। कुछ रेतीले तट शुष्क हैं तथा इस क्षेत्र में समुद्र बहुत उथला है, कुछ स्थानों पर केवल ३ फुट से ३० फुट (१ मीटर से १० मीटर) जो नौगमन को मुश्किल बनाता है। यह कथित रूप से १५ शताब्दी तक पैदल पार करने योग्य था जब तक कि तूफानों ने इस वाहिक को गहरा नहीं कर दिया। मन्दिर के अभिलेखों के अनुसार रामसेतु पूरी तरह से सागर के जल से ऊपर स्थित था, जब तक कि इसे १४८० ई० में एक चक्रवात ने तोड़ नहीं दिया। .

10 संबंधों: नेल्लै कण्णन, पाक जलडमरूमध्य, बंगाल की खाड़ी, मन्नार की खाड़ी, शारदातनय, श्रीलंका का भूगोल, सेतुसमुद्रम जहाजरानी नहर परियोजना, ज़मीनी पुल, वैदा लोग, गीतरामायणम्

नेल्लै कण्णन

एन कण्णन एक प्रसिद्द तमिळ लेखक हैं जो प्रसिद्ध कांग्रेसी नेता कुमारस्वामी कामराज से प्रभावित हैं। इनका जन्म १७ जनवरी १९४५ को हुआ था। राम सेतु को तोड़ने के फ़ैसले के विरोधी सुरों में वो एक प्रमुख तमिळ लेखक थे (2009)। श्रेणी: तमिळ लेखक.

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पाक जलडमरूमध्य

मन्नार की खाड़ी, रामसेतु, पाक खाड़ी, पाक जलडमरूमध्य, बंगाल की खाड़ी पाक जलडमरूमध्य (अंग्रेजी: Palk Strait), भारत के राज्य तमिलनाडु और द्वीप राष्ट्र श्रीलंका के उत्तरी भाग के बीच स्थित एक जलसंयोगी है। यह बंगाल की खाड़ी को पूर्वोत्तर में पाक खाड़ी और दक्षिणपश्चिम में मन्नार की खाड़ी के साथ को जोड़ता है। इस जलडमरूमध्य की चौड़ाई 53-80 किमी (33-50 मील) है। इसमें कई नदियों विसर्जित होती हैं जिसमें तमिलनाडु के वैगई नदी प्रमुख है। इस जलडमरूमध्य का नाम रॉबर्ट पाक (अंग्रेजी: Robert Palk) जो ब्रिटिश राज के दौरान मद्रास प्रेसीडेंसी (1755-1763) का एक गवर्नर था, के नाम पर है। .

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बंगाल की खाड़ी

बंगाल की खाड़ी विश्व की सबसे बड़ी खाड़ी है और हिंद महासागर का पूर्वोत्तर भाग है। यह मोटे रूप में त्रिभुजाकार खाड़ी है जो पश्चिमी ओर से अधिकांशतः भारत एवं शेष श्रीलंका, उत्तर से बांग्लादेश एवं पूर्वी ओर से बर्मा (म्यांमार) तथा अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह से घिरी है। बंगाल की खाड़ी का क्षेत्रफल 2,172,000 किमी² है। प्राचीन हिन्दू ग्रन्थों के अन्सुआर इसे महोदधि कहा जाता था। बंगाल की खाड़ी 2,172,000 किमी² के क्षेत्रफ़ल में विस्तृत है, जिसमें सबसे बड़ी नदी गंगा तथा उसकी सहायक पद्मा एवं हुगली, ब्रह्मपुत्र एवं उसकी सहायक नदी जमुना एवं मेघना के अलावा अन्य नदियाँ जैसे इरावती, गोदावरी, महानदी, कृष्णा, कावेरी आदि नदियां सागर से संगम करती हैं। इसमें स्थित मुख्य बंदरगाहों में चेन्नई, चटगाँव, कोलकाता, मोंगला, पारादीप, तूतीकोरिन, विशाखापट्टनम एवं यानगॉन हैं। .

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मन्नार की खाड़ी

मन्नार की खाड़ी एक उथले पानी की खाड़ी है जो हिन्द महासागर में लक्षद्वीप सागर के एक भाग का निर्माण करती है। यह खाड़ी भारत के दक्षिणपूर्व सिरे और श्रीलंका के पश्चिमी तट के बीच स्थित है। भारत के रामेश्वरम द्वीप से लेकर श्रीलंका के मन्नार द्वीप तक चूना पत्थर से बने द्वीपों की रामसेतु नामक एक शृंख्ला, इस खाड़ी को पाक खाड़ी से पृथक करती है। दक्षिण भारत की तमिरबरणि नदी और श्रीलंका की अरुवी अरु नदी इसी खाड़ी में गिरती हैं। .

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शारदातनय

शारदातनय, नाट्यशास्त्र के आचार्य हैं जिन्होंने 'भावप्रकाशन' नामक संस्कृत ग्रंथ की रचना की। इस ग्रन्थ में कुल दस अधिकार (अध्याय) हैं जिनमें क्रमश: भाव, रसस्वरूप, रसभेद, नायक-नायिका निरूपण, नायिकाभेद, शब्दार्थसम्बन्ध, नाट्येतिहास, दशरूपक, नृत्यभेद एवं नाट्य-प्रयोगों का प्रतिपादन किया गया है। इस ग्रंथ में भोज के 'शृंगारप्रकाश' तथा आचार्य मम्मट द्वारा विरचित 'काव्यप्रकाश' से अनेक उद्धरण मिलते हैं। भावप्रकाशन में भारतवर्ष के बारे में आचार्य ने कहा है- श्रेणी:संस्कृत ग्रन्थ.

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श्रीलंका का भूगोल

हिन्द महासागर के उत्तरी भाग मे स्थित इस द्वीप राष्ट्र की भूमि केन्द्रीय पहाड़ो तथा तटीय मैदानो से मिलकर बनी है। वार्षिक वर्षा २५०० से ५००० मि.मी.

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सेतुसमुद्रम जहाजरानी नहर परियोजना

सेतुसमुद्रम जहाजरानी नहर परियोजना भारत एवं श्रीलंका के मध्य पाक जलडमरूमध्य और मन्नार की खाड़ी को जोड़ने का प्रस्ताव है। इसके द्वारा सेतुसमुद्रम क्षेत्र के छिछले सागर में एक जहाजरानी उपयुक्त नहर बनाकर भारतीय प्रायद्वीप की परिधि पर एक नौवहन मार्ग सुलभ होगा। अभी यह मार्ग छिछले सागर एवं उसमें स्थित द्वीपों एवं चट्टानों की शृंखल जिसे रामार पालम (तमिल: இராமர் பாலம் Rāmar pālam), रामसेतु और ऍडम्स ब्रिज कहा जाता है, के कारण यह मार्ग सुलभ नहीं है और जहाजों को श्रीलंका द्वीप का पूरा चक्कर लगाकर अनावश्यक लम्बा मार्ग तय करना पड़ता है। इस परियोजना में 44.9 नॉटिकल मील (83 कि.मी) लम्बा एक गहरा जल मार्ग खोदा जायेगा जिसके द्वारा पाक जलडमरुमध्य को मनार की खाड़ी से जोड़ दिया जायेगा। १८६० में अल्फ़्रेड डुन्डास टेलर द्वारा इसकी अभिकल्पना पहली बार की गयी थी, जिसे हाल ही के वर्षों में भारत सरकार द्वारा स्वीकृति मिली है। इस परियोजना के तहत रामसेतु के चूनापत्थर की शिलाओं को तोड़ा जायेगा, जिसके कारण कुछ संगठनों ने विरोध जताया है। उनका कहना है कि इससे हिन्दुओं की धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचेगी, साथ ही पर्यावरण और आर्थिक स्तर पर भी हानि होगी। इसके अलावा कुछ सुरक्षा कारण भि बताये गए हैं। इनमें से कई पार्टियां या संगठन इस परियोजना का कार्यान्वयन पहले दिये गए ५ वैकल्पिक तरीकों से करने का अनुमोदन करती हैं। इन वैकल्पिक तरीकों से श्रीरामसेतु को हानि भी नहीं पहुंचेगी जिससे उसे पवित्र मानने वाले हिन्दुओं की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचेगी। फ़िल्हाल निर्धारित परियोजना में एक मध्य मार्ग चुना गया है जिससे लघुतम मार्ग सुलभ होगा और साथ ही न्यूनतम रखरखाव एवं अनुरक्षण व्यय होगा। इससे पूर्व विश्व के अन्य जहाजरानी नहर परियोजनाएं जैसे स्वेज नहर एवं पनामा नहर भूमि स्थित नहर परियोजनाएं थी। .

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ज़मीनी पुल

बेरिंग ज़मीनी पुल साइबेरिया और अलास्का को जोड़ता था और उसपर चलकर मानव एशिया से उत्तर अमेरिका पहुँच गए - हिमयुग की समाप्ति पर यह क्षेत्र समुद्र के नीचे डूब गया ज़मीनी पुल (अंग्रेज़ी: land bridge, लैंड ब्रिज) ऐसे भूडमरू (इस्थमस) या उस से चौड़े धरती के अंश को कहते हैं जिसके ज़रिये समुद्र द्वारा अलग किये हुए धरती के दो बड़े क्षेत्रों के बीच में जानवर आ-जा सकें और वृक्ष-पौधे फैल सकें। हिमयुगों (आइस एज) के दौरान ऐसे ज़मीनी पुल अक्सर उभर आते हैं क्योंकि तब समुद्र के पानी का कुछ अंश बर्फ़ में जमा हुआ होने से समुद्र-तल थोड़ा नीचे होता है। इसका एक बड़ा उदाहरण भारत को श्रीलंका से जोड़ने वाला रामसेतु है। यह हिमयुगों में पूरी तरह समुद्र-तल के ऊपर उभरी हुई ज़मीन की एक पट्टी होती थी जिसपर इतिहास में जानवर चलकर भारत से श्रीलंका पहुँचे थे और भारत से बहुत से पेड़-पौधे भी श्रीलंका में विस्तृत हुए थे। माना जाता है कि आज से लगभग २०,००० साल पहले श्रीलंका के वैदा आदिवासियों के पूर्वज भी इसी ज़मीनी पुल पर चलकर भारत से श्रीलंका पैदल पहुँचे। आधुनिक युग में भारत और श्रीलंका के बीच ४० मील का खुला समुद्र है, John C. Avise, Cambridge University Press, 2006, ISBN 978-0-521-85753-6,...

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वैदा लोग

सन् १८९० में ली गई कुछ वैदाओं की तस्वीर तीर्थयात्रा कर रही एक वैदा महिला एक वैदा परिवार वैदा (सिंहली: වැද්දා, तमिल: வேடுவர், अंग्रेज़ी: Vedda) या वैद्दा श्रीलंका की एक आदिवासी जनजाति है। इतिहासकारों का मानना है कि वे श्रीलंका के सबसे पहले मानव निवासी थे। पारम्परिक तौर से वैदा श्रीलंका के जंगलों के भीतर रहा करते थे। उनकी अपनी अलग वैदा भाषा थी, जिसकी मूल जड़ें अज्ञात हैं और जो अब विलुप्त हो चुकी है। सिंहली भाषा में वैदाओं को वन्नियल ऐत्तो (වන්නියලෑත්තන්, Wanniyala Aetto) भी कहते हैं, जिसका मतलब 'वन के लोग' है। .

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गीतरामायणम्

गीतरामायणम् (२०११), शब्दार्थ: गीतों में रामायण, जगद्गुरु रामभद्राचार्य (१९५०-) द्वारा २००९ और २०१० ई में रचित गीतकाव्य शैली का एक संस्कृत महाकाव्य है। इसमें संस्कृत के १००८ गीत हैं जो कि सात कांडों में विभाजित हैं - प्रत्येक कांड एक अथवा अधिक सर्गों में पुनः विभाजित है। कुल मिलाकर काव्य में २८ सर्ग हैं और प्रत्येक सर्ग में ३६-३६ गीत हैं। इस महाकाव्य के गीत भारतीय लोक संगीत और शास्त्रीय संगीत के विभिन्न गीतों की ढाल, लय, धुन अथवा राग पर आधारित हैं। प्रत्येक गीत रामायण के एक या एकाधिक पात्र अथवा कवि द्वारा गाया गया है। गीत एकालाप और संवादों के माध्यम से क्रमानुसार रामायण की कथा सुनाते हैं। गीतों के बीच में कुछ संस्कृत छंद हैं, जो कथा को आगे ले जाते हैं। काव्य की एक प्रतिलिपि कवि की हिन्दी टीका के साथ जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय, चित्रकूट, उत्तर प्रदेश द्वारा प्रकाशित की गई थी। पुस्तक का विमोचन संस्कृत कवि अभिराज राजेंद्र मिश्र द्वारा जनवरी १४, २०११ को मकर संक्रांति के दिन किया गया था। .

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