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राजनीति

सूची राजनीति

नागरिक स्तर पर या व्यक्तिगत स्तर पर कोई विशेष प्रकार का सिद्धान्त एवं व्यवहार राजनीति (पॉलिटिक्स) कहलाती है। अधिक संकीर्ण रूप से कहें तो शासन में पद प्राप्त करना तथा सरकारी पद का उपयोग करना राजनीति है। राजनीति में बहुत से रास्ते अपनाये जाते हैं जैसे- राजनीतिक विचारों को आगे बढ़ाना, कानून बनाना, विरोधियों के विरुद्ध युद्ध आदि शक्तियों का प्रयोग करना। राजनीति बहुत से स्तरों पर हो सकती है- गाँव की परम्परागत राजनीति से लेकर, स्थानीय सरकार, सम्प्रभुत्वपूर्ण राज्य या अन्तराष्ट्रीय स्तर पर। .

402 संबंधों: चलित संस्कृति, चार्ली चैप्लिन, चित्र (पोर्ट्रेट), चिराग पासवान, चक्रवर्ती राजगोपालाचारी, चू युआन, चेन्नामनेनी विद्यासागर राव, चीनी बौद्ध धर्म, ऍच॰ जी॰ वेल्स, ए के बालन, एम एम जेकब, एमा स्मिथ डेवो, एमिल बोरेल, एयर बाल्टिक, एस वी कृष्णमूर्ति राव, एंजेला मर्केल, ऐलॅक्ज़ैण्डर हैमिलटन, डर, डाडावाद, डिम्पल यादव, डैनियल डेफॉ, डेविड ट्रिम्बल, डॉ० मदन मोहन झा, तान्या दुबाश, तारा चन्द, तारानगर, राजस्थान, तारिक अनवर, तेजपाल सिंह धामा, द अल्टीमेट वॉरियर, दयाल सिंह कॉलेज, करनाल, दर्शन लाल पुंशी, दिलीप सरकार, दिगम्बर सिंह, दंड, दक्षिणपन्थी राजनीति, देशभक्ति गीत, देविन्दर कुमार मंयाल, देवेन्द्र फडणवीस, देवेन्द्र कुमार मन्याल, दीनदयाल उपाध्याय, नरेश दाधीच (राजनीतिशास्त्री), नसीर अल्लाह बाबर, नानाजी देशमुख, नारा, नासिरा शर्मा, नागेन्द्र प्रताप सिंह पटेल, निर्दलीय (राजनेता), निर्मला भूरिया, निकोलो मैकियावेली, नवदीप बैंस, ..., नवजोत सिंह सिद्धू, नंदमुरी बालकृष्ण, नेतृत्व, नेल्सन मंडेला, नोआम चाम्सकी, नीति, पठेट लाओ, पदस्थ, परसराम मेघवाल, परसराम मोरदिया, पर्सी बिश शेली, परेश धानाणी, पशुपति शमशेर जंग बहादूर राणा, पश्चिमी संस्कृति, पहचान की राजनीति, पाटा, पापारात्सी, पाइथागोरस, पंकजा मुंडे, पुष्पेन्द्र नाथ पाठक, प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश, प्रदीप टम्टा, प्रभा ठाकुर, प्रभाष जोशी, प्रभूलाल सैनी, प्रमिला जयपाल, प्रियंका मेघवाल, प्रवीण कुमार निषाद, प्रेमचंद, प्रेयोक्ति, प्रेरणा के सिद्धांत, प्रेसिडेन्सी विश्वविद्यालय, कोलकाता, प्लेटो, पैट्रिक हॅनरी, पूर्व एवं वर्तमान भरतीय नारी: एक सामाजिक परिवजन्, पॉल वुल्फोवित्ज़, पी एल पुनिया, फ़ज़ल हक़, फ़ेला कुटी, फिदा मोहम्मद खान, फिदेल कास्त्रो, फ्रांसिस बेकन, फ्रांस्वा बर्नियर, फ्रेडरिक एंगेल्स, बनारसी दास गुप्ता, बनवारीलाल बैरवा, बनगाँव (बिहार ), बर्ट्रैंड रसल, बर्दिश चग्गर, बहुराष्ट्रीय कंपनियां, बाबूलाल वर्मा, बाहुबली: द बिगनिंग (2015), बांटो और राज करो, बांग्लादेश की राजनीति, बिंदास न्यूज़, बजरंग बहादुर सिंह, ब्राह्मण, बूटा सिंह, बूर्जुआ, बेगाराम चौहान, बे्रन्डा बुत्तनर, बीरबल राम, बी॰ टी॰ रणदिवे, भाऊराव देवाजी खोब्रागडे, भारतीय राष्ट्रवाद, भाई-भतीजावाद, भावना, भगत सिंह कोश्यारी, भंवरलाल मेघवाल, भीमराव आम्बेडकर, भीमराव अम्बेडकर (राजनीतिज्ञ), मदन भण्डारी, मदन कौर, मदनलाल सैनी, मदनलाल वर्मा 'क्रान्त', मनोहर लाल खट्टर, मनोज बाजपेयी, मरयम नवाज़, महाभोज, महारानी दिव्या सिंह, महाराज सिंह कॉलेज, सहारनपुर, महाराजा ईश्वरीसिंह, महाविद्यालय (कॉलेज), महेंद्र सिंह मेवाड़, माधव सदाशिव गोलवलकर, माया कोडनानी, माल्ती देवी, मिट रॉमनी, मिठूसेन, मित्रपक्ष, मिस्बाह-उल-हक़, मघा, मुद्रास्फीतिजनित मंदी (स्टैगफ्लेशन), मुर्ग़ी का खेल, मुला राम, मुलायम सिंह यादव, मुल्तानाराम बारुपाल, मुहम्मद ताहिर उल-क़ादरी, मूल्यमीमांसा, मेगाडेथ, मेकियावेलियनिस्म, मो. हारूण रशीद, मोनटेक सिंह आहलूवालिया, यूटोपिया, योगेन्द्र यादव, रत्ना भगवानदास चावला, रमनलाल वोरा, रमेश ठाकुर, रमेश कुमार वांकवानी, राणा चन्द्र सिंह, राधाबाई सुबरायण, राम दयाल मुंडा, राम नाईक, राम प्रसाद 'बिस्मिल', राम किशोर शुक्ल, रामस्वामी वेंकटरमण, रामगोविन्द चौधरी, राष्ट्रीय महिला आयोग, राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी, अमेरिका, राज कुमार सैनी, राजनय, राजनैतिक आन्दोलन, राजनेता, राजनीति (२०१० चलचित्र), राजनीति विज्ञान, राजनीतिक दर्शन, राजनीतिक वर्णक्रम, राजनीतिक आमूलवाद, राजनीतिक उदासीनता, राजिंदर सिंह राणा, राज्यतन्त्र, राजीव सैज़ल, राव राजेन्द्र सिंह, रजा परवेज़ अशरफ़, रेणु देवी, रोज केरकेट्टा, रीता ईश्वर, लाल चन्द, लखीराम अग्रवाल, लंदन, लक्ष्मी बारुपाल, लक्ष्मीप्रसाद देवकोटा, लोक प्रशासन का इतिहास, शत्रुघन सिन्हा, शरद यादव, शासन, शिया चंद्र, शिवचरण माथुर, शिवाजी, शंकर दयाल सिंह, शंकर पन्नू, शुक्रनीति, श्याम चरण गुप्ता, श्याम जाजू, श्यामाप्रसाद मुखर्जी, श्रेया नारायण, शेरलॉक होम्स, शोभा राम, शीला कौल, सचिन पायलट, सत्येन्द्र नारायण सिन्हा, समाजशास्त्र, सरिता सिंह, सर्वहारा, सर्वहित, सर्वेपल्लि राधाकृष्णन, सरोज पांडेय, साधु सिंह धर्मसोत, सामाजिक संघटन, सामाजिक विज्ञान, साहित्यिक आन्दोलन, साहिब सिंह वर्मा, सिद्धांत (थिअरी), सिन्धु-गंगा के मैदान, सिकन्दर बख्त, संदीप कुमार (राजनेता), संधि (बहुविकल्पी), संभ्रांत वर्ग, संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपिता, संस्कृत साहित्य, संघीय विधानसभा, संगम साहित्य, सुदीप्त कविराज, सुनील दत्त, सुनील शास्त्री, सुनील अम्बेकर, सुब्रमनियन स्वामी, सुभाष महरिया, सुमन पोखरेल, सुमन भगत, सुरज भान, सुरेश कुमार खन्ना, सुषमा स्वराज, स्मृति ईरानी, स्वराज कौशल, स्वाति सिंह, स्वामी सोमदेव, स्वामी कन्नू पिल्लै, स्वायत्तता, सैयद ग़ौस, सैयद अहमद, सूर्य देवता, हयात शियरपाउ, हरिभाऊ बागड़े, हलीमा याकूब, हिन्दुस्तान रिपब्लिकन ऐसोसिएशन, हिन्दू धर्म का विश्वकोश, हिमंता बिस्वा शर्मा, हुकम राम, हेरक्लिटस, हेकमत इ शिराज़ी, जनोत्तेजक, जमना देवी बारुपाल, जया बच्चन, जयाप्रदा, जयंत चौधरी, जल संसाधन, ज़ुल्फ़िक़ार अली भुट्टो, जानकी रामचंद्रन, जितेन्द्र कुमार गोठवाल, जगदीश प्रसाद माथुर, जङ्गबहादुर राणा, ज्ञानीचन्द, जैवनैतिकता, जैक प्रेगेर, जेफ़री आर्चर, जॉर्ज एनसोन, जॉर्ज कार्लिन, जोगेन्द्र नाथ मंडल, जीवन की गुणवत्ता, जी॰ परमेश्वर, ईएससीपी यूरोप, घनश्याम दास अरोड़ा, वयलर रामवर्मा, वर्णात्मक नीतिशास्त्र, वादानुवाद, वामपन्थी राजनीति, वायलेट अल्वा, वाल्मीकि रामायण, विदेश नीति, विधान सभा, विधानपालिका, विधि, विनय प्रभाकर सहस्रबुद्धे, विनोद खन्ना, विलियम ऑफ़ ओक्क्हम, विलियम काबेट, विश्वनाथ मेघवाल, विश्वविद्यालय, विष्णुकान्त शास्त्री, विजय बहादुर पाठक, विजय बहुगुणा, विजय जौली, विजय कुमार मलहोत्रा, विवेक धाकड़, विक्रमादित्य सिंह, वंदना टेटे, वुडरो विल्सन, व्यवहारवाद (राजनीति विज्ञान), व्यक्तिपन, वेटिंग फ़ॉर गोडोट, वेद प्रताप वैदिक, वी शशि, वीर सांघवी, खाटूमल जीवन, खिलाड़ी लाल बैरवा, खुर्शीद अली खान, ख्वाजा मोहम्मद अज़्हर खान, गणितीय मॉडल, गाटफ्रीड लैबनिट्ज़, गायत्री देवी, गिरिराज किशोर (राजनीतिज्ञ), गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, गुलाबो देवी, ग्राम पंचायत झोंपड़ा, सवाई माधोपुर, गोदे मुरहारी, गोरधन वर्मा, गोलमा देवी मीणा, गोविन्द सिंह डोटासरा, गीत बैठकी, ऑस्कर फर्नांडिस, ओम प्रकाश राजभर, ओ॰ पन्नीरसेल्वम, आचार्य रामदेव, आतंकवाद, आधुनिकतावाद, आनंद कुमार (समाजशास्त्री), आमिर गुलिस्तान जनजूआ, आय का परिपत्र प्रवाह, आरिफ बनगश, आलोक कुमार मेहता, आई आई एफ ए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता पुरस्कार, इन्द्र कुमार गुजराल, कमलेश्वर, कमसा मेघवाल, करणी सिंह, कर्मभूमि, कामन्दकीय नीतिसार, काव्य, किरातार्जुनीयम्, कुमार केतकर, क्लीशे, क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान,भुवनेश्वर, क्विज़, कौटिल्य पण्डित, कृषकवाद, कृष्ण लाल पंवार, कृष्ण कुमार यादव, कृष्णा राज, कृष्णा कोहली, कैलाश वर्मा, के रहमान खान, केन्द्रवाद, कॉमनवेल्थ, कीर्ति आजाद, कीर्ति कुमारी, अटल बिहारी वाजपेयी, अतिवाद, अथर्ववेद संहिता, अनिल शास्त्री, अनुच्छेद ३७०, अनुग्रह नारायण सिंह, अनीता भदेल, अपराध शास्त्र, अफसरशाही, अफ़्रीका, अब्दुल ग़फ़ूर ख़ान होती, अभिजात सिद्धान्त, अमरजीत सोही, अमित जोगी, अरस्तु, अर्थशास्त्र, अर्थशास्त्र (ग्रन्थ), अर्नोल्ड श्वार्ज़नेगर, अर्बाब सिकंदर खान, अल्बैर कामू, अल्वा म्यर्दल, अश्विनी कुमार चोपड़ा, अश्विनी कुमार पंकज, अश्क अली टांक, असलम खान खटक, अवसरवाद, अवामी नेशनल कांफ्रेंस, अविनाश राय खन्ना, अखिल भारतीय हिंदी साहित्य सम्मेलन, अग्निपुराण, अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंध, अंतोनियो ग्राम्शी, उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण, उदित राज, उमर अब्दुल्ला, ४चैन सूचकांक विस्तार (352 अधिक) »

चलित संस्कृति

चलित संस्कृति (अंग्रेज़ी: popular culture या pop culture) वह विचार, दृष्टिकोण, रुझान, चित्र, कठबोली और अन्य पहलू होते हैं जो किसी संस्कृति की मुख्यधारा में पाए जाए। इस पर टेलीविज़न, इंटरनेट और अन्य जनसंचार माध्यमों का गहरा प्रभाव होता है और विचारों का यह समूह समाज के दैनिक जीवन में फैला हुआ होता है। चलित संस्कृति की सबसे उल्लेखनीय श्रेणियाँ है: मनोरंजन (फ़िल्में, संगीत, टेलीविज़न), खेल, समाचार (यानि वह लोग, विषय और स्थान जो समाचार में हैं), राजनीति, फ़ैशन/वस्त्र, प्रौद्योगिकी और * श्रेणी:मीडिया अध्ययन श्रेणी:युवावस्था.

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चार्ली चैप्लिन

सर चार्ल्स स्पेन्सर चैप्लिन, KBE (16 अप्रैल 1889 - 25 दिसम्बर 1977) एक अंग्रेजी हास्य अभिनेता और फिल्म निर्देशक थे। चैप्लिन, सबसे प्रसिद्ध कलाकारों में से एक होने के अलावा अमेरिकी सिनेमा के क्लासिकल हॉलीवुड युग के प्रारंभिक से मध्य तक एक महत्वपूर्ण फिल्म निर्माता, संगीतकार और संगीतज्ञ थे। चैप्लिन, मूक फिल्म युग के सबसे रचनात्मक और प्रभावशाली व्यक्तित्वों में से एक थे जिन्होंने अपनी फिल्मों में अभिनय, निर्देशन, पटकथा, निर्माण और अंततः संगीत दिया। मनोरंजन के कार्य में उनके जीवन के 75 वर्ष बीते, विक्टोरियन मंच और यूनाइटेड किंगडम के संगीत कक्ष में एक शिशु कलाकार से लेकर 88 वर्ष की आयु में लगभग उनकी मृत्यु तक। उनकी उच्च-स्तरीय सार्वजनिक और निजी जिंदगी में अतिप्रशंसा और विवाद दोनों सम्मिलित हैं। 1919 में मेरी पिकफोर्ड, डगलस फेयरबैंक्स और डी.डब्ल्यू.ग्रिफ़िथ के साथ चैप्लिन ने यूनाइटेङ आर्टिस्टस की सह-स्थापना की। चैप्लिन: अ लाइफ (2008) किताब की समीक्षा में, मार्टिन सिएफ्फ़ ने लिखा की: "चैप्लिन सिर्फ 'बड़े' ही नहीं थे, वे विराट् थे। 1915 में, वे एक युद्ध प्रभावित विश्व में हास्य, हँसी और राहत का उपहार लाए जब यह प्रथम विश्व युद्ध के बाद बिखर रहा था। अगले 25 वर्षों में, महामंदी और हिटलर के उत्कर्ष के दौरान, वह अपना काम करते रहे। वह सबसे बड़े थे। यह संदिग्ध है की किसी व्यक्ति ने कभी भी इतने सारे मनुष्यों को इससे अधिक मनोरंजन, सुख और राहत दी हो जब उनको इसकी सबसे ज्यादा जरूरत थी।" .

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चित्र (पोर्ट्रेट)

रेम्ब्रांट पेले द्वारा थॉमस जेफरसन का पोर्ट्रेट, 1805 न्यूयॉर्क हिस्टोरिकल सोसायटी. एक युवा लड़के के अंतिम संस्कार का रोमन-मिस्र चित्र मोचे सिरेमिक पोर्ट्रेट. लार्को म्यूज़ियम संग्रहण.लीमा-पेरू चित्र (पोर्ट्रेट) एक व्यक्ति की पेंटिंग, छवि, मूर्ति, या अन्य कलात्मक अभिव्यक्ति होती है, जिसमें चेहरा और उसकी अभिव्यक्ति प्रमुख होती है। आशय, व्यक्ति के रूप, व्यक्तित्व और यहां तक कि उसकी मनोदशा को भी प्रदर्शित करना होता है। इस कारण से, फोटोग्राफी में एक चित्र आम तौर पर स्नैपशॉट नहीं होता है, बल्कि किसी व्यक्ति की एक स्थिर स्थिति में एक प्रकृतिस्थ छवि होती है। एक चित्र में अक्सर किसी व्यक्ति को चित्रकार या फोटोग्राफर की ओर सीधे देखते हुए दर्शाया जाता है, ताकि विषय (वह व्यक्ति) को सर्वाधिक सफलतापूर्वक दर्शक के साथ संलग्न किया जा सके। .

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चिराग पासवान

चिराग पासवान एक भारतीय राजनीतिज्ञ तथा लोक जनशक्ति पार्टी के राजनेता है। वे भारत के बिहार राज्य जमुई लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र से सांसद है। वे लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान के पुत्र है। .

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चक्रवर्ती राजगोपालाचारी

चक्रवर्ती राजगोपालाचारी (तमिल: சக்ரவர்தி ராஜகோபாலாச்சாரி) (दिसम्बर १०, १८७८ - दिसम्बर २५, १९७२), राजाजी नाम से भी जाने जाते हैं। वे वकील, लेखक, राजनीतिज्ञ और दार्शनिक थे। वे स्वतन्त्र भारत के द्वितीय गवर्नर जनरल और प्रथम भारतीय गवर्नर जनरल थे। १० अप्रैल १९५२ से १३ अप्रैल १९५४ तक वे मद्रास प्रांत के मुख्यमंत्री रहे। वे दक्षिण भारत के कांग्रेस के प्रमुख नेता थे, किन्तु बाद में वे कांग्रेस के प्रखर विरोधी बन गए तथा स्वतंत्र पार्टी की स्थापना की। वे गांधीजी के समधी थे। (राजाजी की पुत्री लक्ष्मी का विवाह गांधीजी के सबसे छोटे पुत्र देवदास गांधी से हुआ था।) उन्होंने दक्षिण भारत में हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिए बहुत कार्य किया। .

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चू युआन

चू युआन चू युआन (चीनी: 屈原, अंग्रेज़ी: Qu Yuan; जन्म: ३३९ ईसापूर्व; देहांत: २७८ ईसापूर्व) चीन के झगड़ते राज्यों के काल के एक प्रसिद्ध कवि थे। वह अपने 'चू-त्सि' (楚辭, Chu Ci) नामक कविता संग्रह के लिए मशहूर हैं ('चू-त्सि' का अर्थ 'दक्षिण के गीत' है)। उनके जीवन के बारे में बहुत कम तथ्य ज्ञात हैं और कुछ विद्वानों ने इस बात पर भी शक़ जतलाया है कि पूरा 'चू-त्सि' संग्रह वास्तव में उन्ही का लिखा हुआ है। फिर भी इस संग्रह की सबसे लोकप्रिय कविता, 'ली साओ' (離騷, Li Sao) को लगभग सभी उन्ही की कृति मानते हैं। उनके जीवन के बारे में कुछ सीमित जानकारी सीमा चियान के महान इतिहासकार के अभिलेख नामक इतिहास-ग्रन्थ से आधुनिक युग तक पहुँची है, हालाँकि उसके कुछ तथ्य एक-दूसरे से टकराते हैं।, Zong-qi Cai, Columbia University Press, 2008, ISBN 978-0-231-13941-0,...

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चेन्नामनेनी विद्यासागर राव

चेन्नामनेनी विद्यासागर राव एक भारतीय राजनीतिज्ञ है। वर्तमान में वे महाराष्ट्र के राज्यपाल हैं। वे भारतीय जनता पार्टी के राजनेता हैं। .

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चीनी बौद्ध धर्म

चीनी बौद्ध धर्म (हान चीनी बौद्ध धर्म) बौद्ध धर्म की चीनी शाखा है। बौद्ध धर्म की परम्पराओं ने तक़रीबन दो हज़ार वर्षों तक चीनी संस्कृति एवं सभ्यता पर एक गहरा प्रभाव छोड़ा, यह बौद्ध परम्पराएँ चीनी कला, राजनीति, साहित्य, दर्शन तथा चिकित्सा में देखी जा सकती हैं। दुनिया की 65% से अधिक बौद्ध आबादी चीन में रहती हैं। भारतीय बौद्ध धर्मग्रन्थों का चीनी भाषा में अनुवाद ने पूर्वी एशिया व दक्षिण पूर्व एशिया में बौद्ध धर्म को बहुत बढ़ावा दिया, इतना कि बौद्ध धर्म कोरिया, जापान, रयुक्यु द्वीपसमूह और वियतनाम तक पहुँच पाया था। चीनी बौद्ध धर्म में बहुत सारी ताओवादी और विभिन्न सांस्कृतिक चीनी परम्पराएँ मिश्रित हैं। .

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ऍच॰ जी॰ वेल्स

हर्बट जॉर्ज वेल्स (२१ सितंबर १८६६ - १३ अगस्त १९४६) - एॅच० जी० वेल्स से प्रचलित - बहुत सी विधाओं, जिनमें उपन्यास, इतिहास, राजनीति, सामाजिक टिप्पणी, पाठ्यपुस्तके, एवं युद्ध वाले खेलों के नियम सम्मिलित हैं, में निपुण अंग्रेजी के एक बहुप्रजनक लेखक थे। वेल्स अब सर्वश्रेष्ठ रूप से अपने काल्पनिक विज्ञान (सांइस फि़क्शन) उपन्यासों के लिए जाने जाते हैं और जूल्स वर्न एवं ह्यूगो गर्नस्बेक के साथ काल्पनिक विज्ञान शैली के पिता कहें जाते हैं। उनके सबसे उल्लेखनीय काल्पनिक विज्ञान लेखन कार्यों में 'दी टाइम मशीन (१८९५)', 'दी आईलैंड आॅफ़ डाॅक्टर मोरियो (१८९६)', 'दी इनविजी़बिल मैन (१८९७)' एवं 'दी वाॅर आॅफ़ दी वर्ल्डज़ (१८९८)' सम्मिलित हैं। उनका नाम साहित्य के नोबेल पुरस्कार के लिए चार बार नामांकित किया गया था। वेल्स का आरंभिक विशेषीकृत प्रशिक्षण जीवविज्ञान में हुआ, और नैतिक विषयों पर उनके विचार विनिर्दिष्ट एवं मौलिक रूप से डार्विन सन्दर्भ में संघटित हुए। वे शुरुआती दिनों से एक स्पष्टवादी समाजवादी भी थे, (पर हमेशा से नहीं, जैसे प्रथम विश्व युद्ध की शुरूआत में) जो अक्सर शांतिवादी विचारों का समर्थन करतें। उनके बाद के लेखन कार्य उत्तरोत्तर रूप से राजनीतिक एवं शिक्षाप्रद होते चले गए, और उन्होंने काल्पनिक विज्ञान शैली में थोड़ा ही लिखा, और इसी दौरान उन्होंनें कई बार औपचारिक लेख्य पत्रों में स्पष्ट भी किया कि उनका व्यवसाय एक पत्रकार का हैं। 'किप्स' और 'दी हिस्ट्री आॅफ़ मिस्टर पाॅली' जैसे उपन्यासों, जो निचले-मध्यम-वर्ग के जीवन का बखान करते हैं, ने छपने के बाद, इसी ओर संकेत किया, कि वेल्स,  चार्ल्स डिकेंस के सुयोग्य उत्तराधिकारी हैं, परंतु डिकेंस के विपरीत, वेल्स ने सामाजिक स्तरों का वर्णन विस्तारपूर्वक किया और 'टोनो-बंगे (१९०९)' में समूचे अंग्रेजी समाज का मूल्यांकन करने का भी प्रयास किया। एक मधुमेह रोगी, वेल्स ने १९३४ में 'दी डायबिटीज़ एसोसिएशन' (आज 'डायबिटीज़ यूके' से प्रचलित) की सह-संस्थापना की। .

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ए के बालन

ए के बालन एक भारतीय राजनीतिज्ञ तथा वर्तमान केरल सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं | .

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एम एम जेकब

मुंडक्कल मैथ्यू जेकब (या एम एम जेकब, जन्म ९ अगस्त १९२७) भारतीय राजनीतिज्ञ है। वे केरल राज्य से राज्य सभा के सदस्य रहे हैं और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेता है। वे २ फ़रवरी १९८६ से २२ अक्टूबर १९८६ तक राज्य सभा के उपाध्यक्ष थे और बाद में उन्होने इस्तीफा दे दिया। .

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एमा स्मिथ डेवो

एमा स्मिथ डेवो (२२ अगस्त,१८४८-सितम्बर ३,१९४७) बीसवी सदी के शुरूआती दौर में प्रमुख रूप से महिलाओं के मताधिकार के लिए काम करने वाली एक महिला हैं, जिन्होंने राजनीति जगत का चेहरा महिलाओं व पुरुषों दोनों के लिए बदल दिया। एमा को "महिलाओं के मताधिकारों की माता" के रूप में भी जाना जाता था। .

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एमिल बोरेल

फेलिक्स एडवर्ड जस्टिल एमिल बोरेल (७ जनवरी १८७१ – ३ फ़रवरी १९५६) फ्रांसीसी गणितज्ञ और राजनीतिज्ञ थे। गणितज्ञ के रूप में उन्होंने मापन सिद्धान्त और प्रायिकता के क्षेत्र में कार्य के लिए जाने जाते हैं। .

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एयर बाल्टिक

ए एस एयर बॉल्टिक कॉर्पोरेशन, एयर बाल्टिक के रूप मे संचालित, लॅट्विया की राजकीय विमान सेवा है.

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एस वी कृष्णमूर्ति राव

एस वी कृष्णमूर्ति राव (१५ नवम्बर १९०२ - १८ नवम्बर १९६८) भारत से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राजनीतिज्ञ थे। वे दो सत्रों तक राज्य सभा के सदस्य रहे; ३ अप्रैल १९५२ से २ अप्रैल १९५६ तक और फिर ३ अप्रैल १९५६ से १ मार्च १९६२ तक। वे ३१ मई १९५२ से २ अप्रैल १९५६ तक और फिर से २५ अप्रैल १९५६ से १ मार्च १९६२ तक राज्य सभा के उपाध्यक्ष रहे और बाद में लोकसभा के लिए चुने गए। .

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एंजेला मर्केल

एंजेला डोरोथी मर्केल (Angela Dorothea Merkel), ((जन्म:१९५४, हैम्बर्ग) जर्मनी की राजनीतिज्ञ और भूतपूर्व शोध वैज्ञानिक हैं जो २००५ से जर्मनी की चांसलर हैं। मर्केल वर्ष २००० से क्रिस्टियन डेमोक्रेटिक यूनियन (जर्मनी) का नेतृत्व कर रही हैं। वे जर्मनी की पहली महिला हैं जो इनमें से किसी भी पद का दायित्व संभाल रही हैं। फोर्ब्स द्वारा विश्व के सबसे प्रभावशाली लोगों की वर्ष २०१४ की सूची में मर्केल को महिलाओं में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ और २०१३ की संयुक्त सूची में पाँचवाँ स्थान प्राप्त हुआ है। २०१२ की जारी संयुक्त सूची में उन्हें दूसरा स्थान मिला था। .

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ऐलॅक्ज़ैण्डर हैमिलटन

ऐलॅक्ज़ैण्डर हैमिलटन (१७५५-१८०४), संयुक्त राज्य अमेरिका के पहले वित्त सचिव ऐलॅक्ज़ैण्डर हैमिलटन (अंग्रेज़ी: Alexander Hamilton, जन्म: ११ जनवरी १७५५, देहांत: १२ जुलाई १८०४) संयुक्त राज्य अमेरिका के पहले खज़ाने के सचिव (यानि वित्त सचिव) थे। वे एक अर्थशास्त्री और राजनीतिज्ञ भी थे और उन्हें संयुक्त राज्य की एक बुनियादी हस्ती भी माना जाता है। अमेरिकी क्रान्ति के दौर में वे अमेरिका के राष्ट्रपिता जार्ज वाशिंगटन के सहायक रहे और अमेरिका में संवैधानिक राज की मांग रखी.

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डर

डर एक नकारात्मक भावना है। डर संभावित खतरे के लिए एक सहज वृत्ति प्रतिक्रिया के रूप में सभी जानवरों और लोगों में पूर्व क्रमादेशित एक ऐसी भावना है। यह भावना हमेशा अनुकूली नहीं है। यह एक अच्छी भावना नहीं है; कोई आजादी, खुशी नहीं है। यह कई रूपों में प्रकट होता है। सबसे आम अभिव्यक्ति गुस्सा है। आपका जीवन डर के जीत के लिए एक संघर्ष है। डर के विपरीत, एकता के बारे में जागरूकता है। डर के सबसे शक्तिशाली जनरेटर मृत्यु की अवधारणा है। डर हम सब एक समय पर महसूस करते हैं। यह बच्चों के रूप में सबसे पहले अनुभव किया जाता है। ज्यादातर लोगों को डर एक अप्रिय भावना लगती है। खतरे की उपस्थिति या निकटस्थता की वजह से एक बहुत अप्रिय भावना को डर केहते हैं। भय, मानव प्रजाति द्वारा अनुभव किया जाता है, यह एक पूरी तरह से अपरिहार्य भावना है। भय की हद और सीमा व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में बदलता है, लेकिन भावना एक ही है। यह प्रत्याशा के कारण होता है। डर में कुछ आम चेहरे के भाव -- डरा हुआ चेहरा, बड़ी आंखें, खुला मुंह आदि। अंधविश्वासी, बुद्घिमान, और अनिश्चितता: भय के तीन अलग अलग प्रकार होते हैं। अंधविश्वासी डर काल्पनिक चीजों का एक भय है। बुद्घिमान डर बड़े हो जाने पर और उसके दुनिया का अधिक ज्ञान लाभ के रूप में आता है। अनिश्चितता के डर से एक के कार्रवाई के परिणाम का ना पता चलना होता है। डर एक खतरनाक प्रोत्साहन की उपस्थिति, या प्रत्याशा में एक भावनात्मक राज्य है। कुछ भय कंडीशनिंग प्रक्रिया के माध्यम से हासिल किया जाता है। कुछ माता पिता और भाई के भय के नकल के माध्यम से सीखा रहे जाता है। इन्सानों एवं जानवरों में एक एेसी भावना है जो अनुभूति द्वारा संग्राहक होती है। जब वस्तुओं या घटनाओं के लिए भय तर्कहीन हो जाता है तो उसे "फोबिया" कहा जाता है। डर इन्सानों मैं तब देखा जाता है जब उन्हें किसी वस्तु से किसी प्रकार का जोखिम महसूस होता हो। यह जोख़िम किसी भी प्रकार का हो सकता है- स्वास्थ्य,धन,निजी सुरक्षा,आदि। डर शब्द "फिर" से उत्पन्न हुआ जिसका अर्थ है आपदा या खतरा। अमेरिका में दस प्रकार के डर हैं-- आतंकवादी हमले, मकडियाँ, मौत,असफलता, युद्ध या आपराधिक हालात, अकेलापन, भविष्य या परमाणु युद्ध आदि। .

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डाडावाद

ट्रिस्टन ज़ारा द्वारा प्रकाशन डाडा के पहले संस्करण के कवर, ज्यूरिख, 1917. डाडा या डाडावाद एक सांस्कृतिक आन्दोलन है जो प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान ज्यूरिख, स्विटज़रलैंड में शुरू हुआ था और 1916 से 1922 के बीच अपनी पराकाष्ठा पर पहुंच गया था। यह आन्दोलन मुख्यतया दृश्य कला, साहित्य-कविता, कला प्रकाशन, कला सिद्धांत-रंगमंच और ग्राफिक डिजाइन को सम्मिलित करता है और इस आन्दोलन ने कला-विरोधी सांस्कृतिक कार्यक्रमों के द्वारा अपनी युद्ध विरोधी राजनीति को कला के वर्तमान मापदंडों को अस्वीकार करने के माध्यम से एकत्रित किया। इसका उद्देश्य आधुनिक जगत की उन बातों का उपहास करना था जिसे इसके प्रतिभागी अर्थहीनता समझते थे। युद्ध विरोधी होने के अतिरिक्त, डाडा आन्दोलन प्रकृति से पूंजीवाद विरोधी और राष्ट्रविप्लवकारी भी था। डाडा गतिविधियों के अंतर्गत सार्वजनिक सभाएं, प्रदर्शन और कला/साहित्यिक पत्रिकाओं का प्रकाशन होता था; इसके अंतर्गत विभिन्न संचार माध्यमों द्वारा कला, राजनीति और संस्कृति की भावनात्मक और विस्तृत सूचना आदि विषयों पर चर्चा की जाती थी। इस आन्दोलन ने उत्तरकालीन शैलियों जैसे को भी प्रभावित किया जैसे अवंत-गर्दे और शहर के व्यापारिक क्षेत्र में शुरू हुए संगीत आन्दोलन तथा इसने कुछ समूहों को भी प्रभावित किया जिसमें अतियथार्थवाद, नव यथार्थवाद, पॉप आर्ट, फ्लक्सस और पंक संगीत शामिल थे। डाडा अमूर्त कला और ध्वनिमय कविता का आधार कार्य है, यह कला प्रदर्शन का आरंभिक बिंदु है, पश्च आधुनिकतावाद की एक प्रस्तावना, पॉप आर्ट पर एक प्रभाव, कला विरोधियों का एक उत्सव जिसे बाद में 1960 के दशक में अराजक-राजनीतिक प्रयोग के लिए अंगीकार कर लिया गया था और यही वह आन्दोलन है जिसने अतियथार्थवाद की नींव रखी थी। मार्क लोवेन्थल, फ्रैंसिस पिकाबिया की आई एम ए ब्यूटीफुल मॉन्स्टर के लिए अनुवादक द्वारा दिया गया परिचय.

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डिम्पल यादव

डिम्पल यादव समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष, विधान मण्डल दल के नेता व उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमन्त्री अखिलेश यादव की धर्मपत्नी हैं जो कि कन्नौज से निर्विरोध सांसद चुनी गई हैं। उनके तीन बच्चे हैं-अदिति, टीना और अर्जुन। राजनीति में आने से पूर्व डिम्पल अपने परिवार के सदस्यों सहित आय से अधिक सम्पत्ति अर्जित करने के मामले में शामिल थीं। राजनीतिक क्षेत्र में पहला चुनाव वे हार गयीं लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। अन्तत: उनके पति अखिलेश यादव ने अपने द्वारा जीती गयी कन्नौज लोक सभा सीट उनके लिये खाली कर दी। डिम्पल ने इस सीट के लिये अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया। मुकाबले में कांग्रेस, भाजपा और बहुजन समाज पार्टी ने उनके खिलाफ अपना प्रत्याशी ही नहीं उतारा जबकि दो अन्य, दशरथ सिंह शंकवार (संयुक्त समाजवादी दल) और संजू कटियार (स्वतन्त्र उम्मीदवार) ने अपना नामांकन वापस ले लिया। जिसका परिणाम यह हुआ कि 2012 का लोक सभा उप-चुनाव उन्होंने निर्विरोध जीतकर उत्तर प्रदेश में एक कीर्तिमान स्थपित किया। डिम्पल से पूर्व पुरुषोत्तम दास टंडन ने उत्तर प्रदेश की इलाहाबाद पश्चिमी लोकसभा सीट सन् 1952 में एक पुरुष प्रत्याशी में रूप में निर्विरोध जीती थी। राजनीति में अपने पति का हाथ बटाने के लिये वे मुख्य मन्त्री अखिलेश यादव का ट्वीटर व फेसबुक अकाउण्ट स्वयं देखती हैं। सेलेब्रिटी सांसद बनीं डिंपल डिंपल यादव उत्तर प्रदेश में सेलेब्रिटी सांसद के रूप में भी जानी जाती हैं। हर बड़े बिजनेस घराने और संस्थान अपने कार्यक्रमों में श्रीमती यादव को आमंत्रित करने की होड़ में रहती हैं। .

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डैनियल डेफॉ

डैनियल डेफॉ या डैनियल डिफो, मूल नाम डैनियल फॉ (जन्म: 1659-1661 मृत्यु: 24 अप्रैल 1731), एक अंग्रेजी लेखक, पत्रकार, पैंफ्लेट लेखक तथा उपन्यासकार था, जिसने अपने उपन्यास रोबिंसन क्रूसो के लिए चिरस्थायी प्रसिद्धि प्राप्त की। ब्रिटेन में डैफो ने उपन्यास की विधा को लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कुछ लोग तो उसे अंग्रेजी उपन्यास के संस्थापकों में से एक मानते हैं। वह एक बहुसर्जक और बहुमुखी प्रतिभा का धनी लेखक था; उसने राजनीति, अपराध, धर्म, विवाह, मनोविज्ञान और परालौकिक सहित विभिन्न विषयों पर पाँच सौ से अधिक किताबें, लघुलेख और जर्नल लिखे थे। उसे आर्थिक मामलों की पत्रकारिता का अग्रदूत भी माना जाता है। डैनियल डिफो का मूल कुलनाम फो था, जो बाद में उसने डिफो कर लिया। उसका जन्म क्रिपलगेट में शायद १६६० ई० में हुआ था। मेरी टफले से उसका विवाह १६८४ ई० में हुआ। डिफो के माता पिता में परस्पर विशेष प्रेम नहीं था। उसकी शिक्षा दीक्षा बहुत कम हो पाई और बचपन से ही उसे जीवनसंघर्ष में जुट जाना पड़ा। उपन्यास आदि लिखना तो ६० वर्ष की उम्र में उसने शुरू किया। उससे पहले उसे पत्रकार के नाते बहुत कलमघिसाई करनी पड़ी। उसे राजनीति में बहुत रुचि थी। १७०१ ई० में उसने 'दि ट्रूबार्न इंग्लिशमैन' नामक एक कविता लिखी जो विलियम ऑव आरेंज के सिंहासन पर आने के संबंध में थी। इसमें उन लोगों पर व्यंग किया गया था जो राजा को विदेशी मानते थे। सन् १७०२ ई० में उसने 'दि शार्टेस्ट वे विथ डिस्सेंटर्स' में इंग्लैंड के चर्च पर शाब्दिक हमला किया। तब डिफो का खासा मजाक उड़ाया गया, उसे बंदी भी बनाया गया; परंतु वह सरकार का गुप्तचर बन गया। उसके बाद उसने कई लोगों के लिए छिपकर काम किए; और ऐसा भी कहा जाता है कि उसने दोनों पक्षों के लिए परस्पर विरोधी काम एक ही समय किए। १७०४ ई० से १७११ तक डिफो ने 'दि रिव्यू' नामक पत्र का संपादन किया जिसे बाद में ऐडिसन और स्टील ने चलाया। यद्यपि ६० वर्ष की आयु तक डिफो ने कई प्रकार का लेखन किया, तथापि उसकी मुख्य ख्याति उन प्रचार पुस्तिकाओं जैसे लेखन के कारण नहीं है। १७१९ में डिफो का एक उपन्यास 'राबिन्सन क्रूसो' प्रकाशित हुआ। यह अलैक्जैंडर सेलकर्क नामक व्यक्ति के जुआन फेर्नांदेज द्वीप पर १७०४ से १७०९ तक निर्वासन ओर एकांतवास की सत्य कथा पर आधारित उपन्यास था। इसमें एक ऐसे व्यक्ति की जीवनी है जो जहाज टूटने से अकेला एक अनजान द्वीप पर जा पहुँचता है, कुछ औज़ारों के सहारे अपनी झोपड़ी खुद बनाता है। फ्राइडे नामक सेवक एकमात्र उसका मित्र है। वहाँ उसे कैसे अद्भुत अनुभव प्राप्त होते हैं, इसका सब प्रामाणिक, ब्यौरेवार वर्णन डिफो ने प्रस्तुत किया है। यह उपन्यास छपते ही खूब बिका और अब तो विश्वसाहित्य में वह एक है। पुस्तक की सारी घटनाएँ और विवरण ऐसे सजीव हैं और मनुष्यस्वभाव का ऐसा मार्मिक वर्णन सहज प्रवाहमयी भाषा में किया गया है कि उस समय के नए नए साक्षर पाठकों के विशाल समुदाय ने पूरी कहानी को सच मान लिया। डिफो एक के बाद एक ऐसे कई औपन्यासिक वृत्त लिखने लगा। १७२० में साहसपूर्ण समुद्री डकैती पर आधारित कहानी कैप्टन सिंगलटन छपी। दो साल बाद मौल फ्लैंडर्स नामक चंचला स्त्री की जीवनी छपी, जो क्रमश: धनी और दरिद्र होते होते बुढ़ापे में जाकर अपनी प्रणयलीलाओं पर पछताती है। १७२२ ई० में छपा 'महामारी के वर्ष की दैनिकी' (जर्नल ऑव दि प्लेग ईयर) १६६५ ई० में लंदन में जो भयानक महामारी फैली थी उसका जीता जागता, आँखों देखा वर्णन डिफो ने कल्पना की आँखों से प्रस्तुत किया। कई आलोचक इसे डिफो की सर्वश्रेष्ठ कृति मानते हैं। १७२४ ई० में 'रुखसाना अथवा भाग्यवान प्रमिका' पुस्तक में फिर मौल फ्लैंडर्स जैसी चंचला स्त्री की कहानी है जो अपने सौंदर्य का जाल बिछाकर खूब संपत्ति कमाती रहती है। इन सब कथाकृतियों में क्रूसो का स्थान सर्वोपरि है। उसकी महत्ता आज भी अक्षुण्ण है। बच्चों के साहित्य में इस साहसकथा का सानी दूसरा नहीं। २५० कृतियाँ लिखकर भी डिफो की शैली प्रसन्न और स्वाभाविक प्रवाहमयी रही। डिफो भी सभी कथाओं का अंत नैतिक उपदेश के ढंग पर सत्य और न्याय की विजय और पाप की हार होता है। परन्तु कहानी के दौरान में वह पापी वेश्याओं, गुंडों, अपराधियों, समुद्री डाकुओं, साहसी नाविकों का चित्रण ऐसी यथार्थता के साथ करता जाता है कि उस समय के मध्यवर्गीय अंग्रेज पाठकों को उसकी कृतियों से बहुत आनन्द मिलता था। साहित्यगुणों में विशिष्ट या बहुत ऊँची न होने पर भी उसकी रचनाएँ अत्यधिक लोकप्रिय बनीं। इसका एक कारण यह था कि वह अपने पात्र और घटनाएँ प्रत्यक्ष जीवन की वास्तव पार्श्वभूमि से लेता था और उनमें आवश्यक मात्रा में कल्पना की मिलावट करता था। डिफो की मृत्यु मूरगेट में २६ अप्रैल, १७३१ ई० को हुई। .

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डेविड ट्रिम्बल

डेविड ट्रिम्बल (जन्म १५ अक्टूबर १९४४) एक ब्रिटिश राजनीतिज्ञ है जो १९९८ से २००२ तक उत्तरी आयरलैंड के पहले प्रथम मंत्री थे। .

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डॉ० मदन मोहन झा

डॉ० मदन मोहन झा (जन्म: १ अगस्त १९५६) एक भारतीय राजनेता और बिहार विधान परिषद् के सदस्य हैं। वो राजनीतिक पार्टी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य हैं । वो १९८५-१९९५ तक बिहार विधान सभा के सदस्य भी रह चुके है । .

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तान्या दुबाश

तान्या दुबाश (पूरा नाम: तान्या अरविंद दुबाश) एक भारतीय महिला उद्यमी हैं। वे गोदरेज समूह के कार्यकारी निदेशक और अध्यक्ष (विपणन) हैं, साथ ही वे भारतीय महिला बैंक के निदेशक मण्डल के सदस्य है। .

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तारा चन्द

तारा चन्द एक भारतीय राजनीतिज्ञ तथा जम्मू और कश्मीर के पूर्व उप मुख्यमंत्री है। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राजनेता है। वे जम्मू और कश्मीर विधानसभा के अध्यक्ष रह चुके है। .

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तारानगर, राजस्थान

तारानगर चुरू जिले के उतर दिशा में स्थित है तारानगर चुरू जिले का एक बड़ा भु-भाग घेरता है | तारानगर कि जलवायु उष्ण कटिबंधीय है | चारो और थार मरुस्थल है | यहाँ पर ग्रीष्म ऋतू में तापमान उचतम सतर पर 50` सेल्सियस रहता है और सर्दियों में तापमान 0` सेल्सियस तक पहुंच जाता है | जाट यहाँ कि बड़ी आबादी है और प्रमुखता से प्रत्येक सामजिक, राजनीतिक कार्यो में भाग लेते है | गोगाजी इस क्षेत्र में विशेष पूजनीय देवता है | तेजाजी महाराज कि भी सर्व समाज द्वारा पूजा जाता है | शिक्षा का सत्तर यहा काफी उच्च है, इस क्षेत्र में में शिक्षा प्रति रुझान है, शिक्षा के क्षेत्र में तारानगर ने पिछले कुछ समय में काफी तरकी कि है | आज राजस्थान के बड़े शिक्षा के क्षेत्रो में गिना जाता है | हर साल सरकारी व निजी सस्थानो द्वारा राज्य स्तर पर सेकड़ो मेरिट दी जाती है | आर्मी देश कि रीड कि हडी देश कि आर्मी में हजारो जवान सालाना जाते है | अपने देश कि रक्षा अपने तन मन धन पूर्ण रूप से करते है |देश के वीर जवानों कि प्रति यहा के लोगो में इज्जत है | हर साल शहीद दिवस मनाया जाता है | राजनीति में भी तारानगर काफी उच्च स्तर पर है, यहा से चुने हुए प्रतिनिधि कई बार सरकार में मंत्री पद पर स्थापित हो चुके है | खेल खेल में भी तारानगर से कई खिलाडी है | जो राज्य स्तर पर खेलते है |.

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तारिक अनवर

तरिक अनवर एक भारतीय राजनेता एवं वर्तमान लोकसभा (१६ मई २०१४ से) में वे बिहार राज्य की कटिहार लोकसभा सीट से सांसद हैं। वे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव हैं। वे पूर्व में महाराष्ट्र का प्रतिनिधित्व करने वाले राज्यसभा के सदस्य भी थे। वह कृषि और खाद्य प्रसंस्करण केंद्रीय मंत्री थे। वह कटिहार निर्वाचन क्षेत्र से कई बार लोकसभा के लिए चुने गए हैं। अनवर कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सीताराम केसरी के बेहद करीबी थे। .

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तेजपाल सिंह धामा

तेजपाल सिंह धामा (जन्म: 2 जनवरी 1971) हिन्दी के पत्रकार, लेखक एवं सामाजिक कार्यकर्ता हैं। हमारी विरासत (शोध-ग्रंथ) उनकी प्रसिद्ध रचना है। इन्हें अनेक साहित्यिक एवं सामाजिक पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं। इन्होंने हैदराबाद से प्रकाशित स्वतंत्र वार्ता एवं दिल्ली से प्रकाशित दैनिक विराट वैभव एवं वीर अर्जुन के संपादक विभागों में दशकों तक कार्य किया। उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के खेकड़ा शहर में जन्मे तेजपाल सिंह धामा मुख्यत: इतिहास पर लिखने वाले साहित्यकार हैं जिनकी इतिहास से सम्बन्धित अनेकों पुस्तकें छप चुकी हैं। शहीदों पर लिखने के कारण इन्हें 2017 में संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार ने संस्कृति मनीषी पुरस्कार से सम्मानित किया है, जिसमें डेढ लाख रुपए नगद एवं प्रशस्ति दी जाती है। .

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द अल्टीमेट वॉरियर

वॉरियर (जन्म जेम्स ब्रायन हेलविग; 16 जून 1959 - 8 अप्रैल 2014) एक सेवानिवृत अमेरिकी पेशेवर पहलवान थे। उन्हें मुख्य रूप से 1980 दशक के उत्तरार्ध और 1990 के दशक के प्रारम्भ में वर्ल्ड रेस्लिंग फेडेरेशन (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) में अल्टीमेट वॉरीयर के रूप में उनके प्रदर्शन के लिए जाना जाता था। उस दौरान उन्होंने रेसलमेनिया षष्टम् के मुख्य खेल में हल्क होगन को पिन करके डब्ल्यू डब्ल्यू एफ चैंपियनशिप जीती थी। हेलविग ने 1993 में कानूनी तौर पर अपना नाम बदल कर वॉरीयर रख लिया। उन्होंने हील और फेस, दोनों के रूप में कुश्ती की है। वो 1999 में वे पेशेवर कुश्ती से सेवानिवृत्त हुए और एक सार्वजनिक वक्ता के रूप में कैरियर की शुरूआत की। 25 जून 2008 में वे अपना आखिरी मैच खेलने के लिए लौटे और इतालवी नू-रेस्लिंग एवलुशन प्रोमोशन द्वारा बुक एक मैच में उन्होंने बार्सिलोना, स्पेन के ओरलांडो जोर्डन को परास्त किया। पेशेवर रेस्लिंग में वॉरिअर, पूर्व विश्व विजेता हैं और एक बार डबल्यूडबल्यूई चैम्पियनशिप जीता है। .

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दयाल सिंह कॉलेज, करनाल

दयाल सिंह कॉलेज, करनाल, हरियाणा में एक स्नातकोत्तर महाविद्यालय है। यह सरदार दयाल सिंह मजीठिया द्वारा १९१० में स्थापित किया गया था, जिन्होंने दयाल सिंह कालेज, लाहौर और दयाल सिंह कॉलेज, दिल्ली की भी स्थापना की थी। यह दयाल सिंह कॉलेज ट्रस्ट सोसाइटी दिल्ली द्वारा प्रबंधित है। .

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दर्शन लाल पुंशी

दर्शन लाल पुंशी एक पाकिस्तानी राजनीतिज्ञ तथा वर्तमान पाकिस्तान सरकार में मंत्री हैं। वे पाकिस्तान की राष्ट्रीय सभा के सांसद हैं। वे पाकिस्तान सरकार में एकमात्र हिन्दू मंत्री हैं | वे पाकिस्तान मुस्लिम लीग के राजनीतिज्ञ हैं। .

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दिलीप सरकार

दिलीप सरकार एक भारतीय राजनीतिज्ञ तथा वर्तमान त्रिपुरा विधानसभा मेें विधायक हैैं | .

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दिगम्बर सिंह

डॉ॰ दिगम्बर सिंह भारतीय राजनीतिज्ञ है। वे राजस्थान के पूर्व चिकित्सा मंत्री है तथा डीग-कुम्हेर विधानसभा से विधायक रह चुके हैं। .

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दंड

राजा, राज्य और छत्र की शक्ति और संप्रभुता का द्योतक और किसी अपराधी को उसके अपराध के निमित्त दी गयी सजा को दण्ड कहते हैं। एक दूसरे सन्दर्भ में, राजनीतिशास्त्र के चार उपायों - साम, दाम, दंड और भेद में एक उपाय। दण्ड का शाब्दिक अर्थ 'डण्डा' (छड़ी) है जिससे किसी को पीटा जाता है। .

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दक्षिणपन्थी राजनीति

अमेरिका में 'टी पार्टी' नामक दक्षिणपन्थी संगठन का एक जलसा राजनीति में दक्षिणपंथी राजनीति (right-wing politics या rightist politics) उस पक्ष या विचारधारा को कहते हैं जो सामाजिक स्तरीकरण या सामाजिक असमता को अपरिहार्य, प्राकृतिक, सामान्य या आवश्यक मानते हैं। वामपंथी विचारकों का मत है कि दक्षिणपंथी लोग समाज पारम्परिक व्यवस्था को कायम रखना चाहते हैं।, T. Alexander Smith, Raymond Tatalovich, University of Toronto Press, 2003, ISBN 978-1-55111-334-0, Norberto Bobbio, Allan Cameron, University of Chicago Press, 1996, ISBN 978-0-226-06245-7 आम तौर से इस पक्ष के समर्थक समाज की ऐतिहासिक भाषा, जातियता, अर्थ-व्यवस्था और धार्मिक पहचान को बानाए रखने की चेष्टा करते हैं। पारम्परिक समाजों में अक्सर लोगों में वर्गीकरण और श्रेणीकरण होता है और दाईं राजनीति में प्राकृतिक नियम की दलील देकर ऐसे वर्गीकरणों को जारी रखने का समर्थन किया जाता है। राजनीति के सन्दर्भ में 'बाएँ' और 'दाएँ' शब्दों का प्रयोग फ़्रान्सीसी क्रान्ति के दौरान शुरू हुआ। फ़्रांस में क्रान्ति से पूर्व की एस्तात झ़ेनेराल (Estates General) नामक संसद में सम्राट को हटाकर गणतंत्र लाना चाहने वाले और धर्मनिरपेक्षता चाहने वाले अक्सर बाई तरफ़ बैठते थे। आधुनिक काल में पूँजीवाद से सम्बंधित विचारधाराओं को अक्सर दाईं राजनीति में डाला जाता है।, Terence Ball, Richard Paul Bellamy, Cambridge University Press, 2003, ISBN 978-0-521-56354-3 .

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देशभक्ति गीत

देशभक्त देश गीत गा रहे हैं। देशभक्ति गीत ऐसे गीत हैं जिनमें राष्ट्रीयता की भावना का रस निहित हो। प्रायः देश पर विकट समस्या आने पर या राष्ट्रीय सुधारों के लिये इन गीतों का प्रयोग किया जाता है। इससे देशवासियों में राष्ट्रीयता की भावना जागृत होती है। राजनीति, खेल, अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम और राष्ट्र पर आधारित चलचित्र इत्यादि में इन गीतों का प्रयोग आम बात है। कई भारतीय कवियों ने देशभक्ति गीतों की रचना की है। सुमित्रानंदन पंत की जय जन भारत, कवि प्रदीप की ऐ मेरे वतन के लोगों, तथा गिरिजाकुमार माथुर की हम होंगे कामयाब उपकार (मेरे देश की धरती सोना उगले उगले हिरा मोती) इत्यादि प्रचलित हैं। .

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देविन्दर कुमार मंयाल

देविन्दर कुमार मंयाल एक भारतीय राजनीतिज्ञ है| वे जम्मू और कश्मीर राज्य की सांभा सीट से जम्मू और कश्मीर नेशनल पैंथर पार्टी के विधायक हैं। २०१४ के चुनावों में वे कांग्रेस के उम्मीदवार यशपाल को 22118 वोटों के अंतर से हराकर निर्वाचित हुए। .

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देवेन्द्र फडणवीस

देवेन्द्र फडणवीस एक भारतीय राजनेता हैं। वर्तमान में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री तथा राज्य के भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष तथा महाराष्ट्र विधानसभा में नागपुर दक्षिण पश्चिम से विधायक है। पूर्व में वे नागपुर नगर निगम के मेयर भी रह चुके हैं। .

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देवेन्द्र कुमार मन्याल

देवेन्द्र कुमार मन्याल एक भारतीय राजनीतिज्ञ तथा वर्तमान जम्मू और कश्मीर सरकार में मंत्री हैं। वे जम्मू और कश्मीर विधानसभा में सांभा से विधायक हैं। वे भारतीय जनता पार्टी के राजनीतिज्ञ हैं। .

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दीनदयाल उपाध्याय

पण्डित दीनदयाल उपाध्याय (जन्म: २५ सितम्बर १९१६–११ फ़रवरी १९६८) चिन्तक और संगठनकर्ता थे। वे भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष भी रहे। उन्होंने भारत की सनातन विचारधारा को युगानुकूल रूप में प्रस्तुत करते हुए देश को एकात्म मानववाद जैसी प्रगतिशील विचारधारा दी। उपाध्यायजी नितान्त सरल और सौम्य स्वभाव के व्यक्ति थे। राजनीति के अतिरिक्त साहित्य में भी उनकी गहरी अभिरुचि थी। उनके हिंदी और अंग्रेजी के लेख विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते थे। केवल एक बैठक में ही उन्होंने चन्द्रगुप्त नाटक लिख डाला था। .

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नरेश दाधीच (राजनीतिशास्त्री)

डॉ॰ नरेश दाधीच (जन्म: ३ जनवरी १९५७) वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय के उपकुलप्ति हैं। इसके पूर्व वे राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर में राजनीति शास्त्र के प्राध्यापक थे। वे गांधीवाद एवं शान्ति अध्ययन के प्रसिद्ध विद्वान हैं। उनके पीएचडी का विषय था - 'गाँधी और अस्तित्ववाद का तुलनात्मक अध्ययन'। यह गाँधीजी के ऊपर किए गये आरम्भिक तुलनात्मक अध्यनों में से एक है। .

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नसीर अल्लाह बाबर

वे एक पाकिस्तानी जनरल, राजनीतिज्ञ और पाकिस्तान के प्रांत, ख़ैबर पख़्तूनख़्वा के पूर्व राज्यपाल थे। .

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नानाजी देशमुख

नानाजी देशमुख (जन्म: ११ अक्टूबर १९१६, चंडिकादास अमृतराव देशमुख - मृत्यु: २७ फ़रवरी २०१०) एक भारतीय समाजसेवी थे। वे पूर्व में भारतीय जनसंघ के नेता थे। १९७७ में जब जनता पार्टी की सरकार बनी, तो उन्हें मोरारजी-मन्त्रिमण्डल में शामिल किया गया परन्तु उन्होंने यह कहकर कि ६० वर्ष से अधिक आयु के लोग सरकार से बाहर रहकर समाज सेवा का कार्य करें, मन्त्री-पद ठुकरा दिया। वे जीवन पर्यन्त दीनदयाल शोध संस्थान के अन्तर्गत चलने वाले विविध प्रकल्पों के विस्तार हेतु कार्य करते रहे। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने उन्हें राज्यसभा का सदस्य मनोनीत किया। अटलजी के कार्यकाल में ही भारत सरकार ने उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य व ग्रामीण स्वालम्बन के क्षेत्र में अनुकरणीय योगदान के लिये पद्म विभूषण भी प्रदान किया। .

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नारा

नारा, राजनैतिक, वाणिज्यिक, धार्मिक और अन्य संदर्भों में, किसी विचार या उद्देश्य को बारंबार अभिव्यक्त करने के लिए प्रयुक्त एक यादगार आदर्श-वाक्य या सूक्ति है। अंग्रेज़ी में नारे के लिए प्रयुक्त slogan शब्द, स्कॉटिश तथा आयरिश गैलिक sluagh-ghairm (sluagh "सेना", "मेजबान" + gairm "रोना") के अंग्रेज़ीकृत शब्द slogorn से व्युत्पन्न है।मरियम-वेबस्टर (2003), पृ.

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नासिरा शर्मा

नासिरा शर्मा (जन्म: १९४८) हिन्दी की प्रमुख लेखिका हैं। सृजनात्मक लेखन के साथ ही स्वतन्त्र पत्रकारिता में भी उन्होंने उल्लेखनीय कार्य किया है। वह ईरानी समाज और राजनीति के अतिरिक्त साहित्य कला व सांस्कृतिक विषयों की विशेषज्ञ हैं। वर्ष २०१६ का साहित्य अकादमी पुरस्कार उनके उपन्यास पारिजात के लिए दिया जायेगा। .

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नागेन्द्र प्रताप सिंह पटेल

नागेन्द्र प्रताप सिंह पटेल एक भारतीय राजनीतिज्ञ तथा वर्तमान फूलपुर से उपचुनाव में सांसद बने | वे समाजवादी पार्टी के राजनेता हैं |.

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निर्दलीय (राजनेता)

राजनीति में निर्दलीय अथवा निर्दल उम्मीदवार अथवा स्वतंत्र उम्मीदवार राजनीतिक दल असम्बद्ध व्यक्ति के लिए प्रयुक्त शब्द है। श्रेणी:राजनीतिक शब्दावली.

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निर्मला भूरिया

निर्मला भूरिया एक भारतीय राजनीतिज्ञ तथा मध्यप्रदेश सरकार में स्वास्थ्य राज्यमंत्री है। वे भारतीय जनता पार्टी की मध्यप्रदेश विधानसभा में पेटलावाड़ से विधायक है। भाजपा नेता दिलीप सिँह भूरिया की पुत्री है। .

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निकोलो मैकियावेली

मैकियावेली की प्रतिकृति निकोलो मैकियावेली (Niccolò di Bernardo dei Machiavelli) (३ मई १४६९ - २१ जून १५२७) इटली का राजनयिक एवं राजनैतिक दार्शनिक, संगीतज्ञ, कवि एवं नाटककार था। पुनर्जागरण काल के इटली का वह एक प्रमुख व्यक्तित्व था। वह फ्लोरेंस रिपब्लिक का कर्मचारी था। मैकियावेली की ख्याति (कुख्याति) उसकी रचना द प्रिंस के कारण है जो कि व्यावहारिक राजनीति का महान ग्रन्थ स्वीकार किया जाता है। मैकियावेली आधुनिक राजनीति विज्ञान के प्रमुख संस्थापकों में से एक माने जाते हैं। वे एक कूटनीतिज्ञ, राजनीतिक दार्शनिक, संगीतज्ञ, कवि और नाटककार थे। सबसे बड़ी बात कि वे फ्लोरिडा गणराज्य के नौकरशाह थे। 1498 में गिरोलामो सावोनारोला के निर्वासन और फांसी के बाद मैकियावेली को फ्लोरिडा चांसलेरी का सचिव चुना गया। लियानार्डो द विंसी की तरह, मैकियावेली पुनर्जागरण के पुरोधा माने जाते हैं। वे अपनी महान राजनीतिक रचना, द प्रिंस (राजनीतिक शास्त्र), द डिसकोर्स और द हिस्ट्री के लिए मशहूर हुए जिनका प्रकाशन उनकी मृत्यु (1532) के बाद हुआ, हालांकि उन्होंने निजी रूप इसे अपने दोस्तों में बांटा। एकमात्र रचना जो उनके जीवनकाल में छपी वो थी द आर्ट ऑफ वार.

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नवदीप बैंस

नवदीप बैंस एक कनाड़ाई राजनीतिज्ञ तथा वर्तमान में कनाड़ा सरकार में सांईस एवं इकॉनोमिक्स मंत्री है। वे भारतीय मूल के है। .

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नवजोत सिंह सिद्धू

नवजोत सिंह सिद्धू (अंग्रेजी: Navjot Singh Sidhu, पंजाबी: ਨਵਜੋਤ ਸਿੰਘ ਸਿੱਧੂ, जन्म: 20 अक्टूबर 1963, पटियाला) भारत के पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी (बल्लेबाज) एवं अमृतसर लोक सभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसद हैं। खेल से संन्यास लेने के बाद पहले उन्होंने दूरदर्शन पर क्रिकेट के लिये कमेंट्री करना आरम्भ किया उसके बाद राजनीति में सक्रिय रूप से भाग लेने लगे। राजनीति के अलावा उन्होंने टेलीविजन के छोटे पर्दे पर टी.वी.

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नंदमुरी बालकृष्ण

नंदमुरी बालकृष्ण एक भारतीय फिल्म अभिनेता और एक राजनीतिज्ञ है जो मुख्य रूप से तेलुगू सिनेमा में काम करते है। .

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नेतृत्व

नेतृत्व (leadership) की व्याख्या इस प्रकार दी गयी है "नेतृत्व एक प्रक्रिया है जिसमें कोई व्यक्ति सामाजिक प्रभाव के द्वारा अन्य लोगों की सहायता लेते हुए एक सर्वनिष्ट (कॉमन) कार्य सिद्ध करता है। एक और परिभाषा एलन कीथ गेनेंटेक ने दी जिसके अधिक अनुयायी थे "नेतृत्व वह है जो अंततः लोगों के लिए एक ऐसा मार्ग बनाना जिसमें लोग अपना योगदान दे कर कुछ असाधारण कर सकें.

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नेल्सन मंडेला

नेल्सन रोलीह्लला मंडेला (ख़ोसा: Nelson Rolihlahla Mandela; 18 जुलाई 1918 – 5 दिसम्बर 2013) दक्षिण अफ्रीका के प्रथम अश्वेत भूतपूर्व राष्ट्रपति थे। राष्ट्रपति बनने से पूर्व वे दक्षिण अफ्रीका में सदियों से चल रहे रंगभेद का विरोध करने वाले अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस और इसके सशस्त्र गुट उमखोंतो वे सिजवे के अध्यक्ष रहे। रंगभेद विरोधी संघर्ष के कारण उन्होंने 27 वर्ष रॉबेन द्वीप के कारागार में बिताये जहाँ उन्हें कोयला खनिक का काम करना पड़ा था। 1990 में श्वेत सरकार से हुए एक समझौते के बाद उन्होंने नये दक्षिण अफ्रीका का निर्माण किया। वे दक्षिण अफ्रीका एवं समूचे विश्व में रंगभेद का विरोध करने के प्रतीक बन गये। संयुक्त राष्ट्रसंघ ने उनके जन्म दिन को नेल्सन मंडेला अन्तर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया। .

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नोआम चाम्सकी

एवरम नोम चोम्स्की (हीब्रू: אברם נועם חומסקי) (जन्म 7 दिसंबर, 1928) एक प्रमुख भाषावैज्ञानिक, दार्शनिक, by Zoltán Gendler Szabó, in Dictionary of Modern American Philosophers, 1860–1960, ed.

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नीति

उचित समय और उचित स्थान पर उचित कार्य करने की कला को नीति (Policy) कहते हैं। नीति, सोचसमझकर बनाये गये सिद्धान्तों की प्रणाली है जो उचित निर्णय लेने और सम्यक परिणाम पाने में मदद करती है। नीति में अभिप्राय का स्पष्ट उल्लेख होता है। नीति को एक प्रक्रिया (procedure) या नयाचार (नय+आचार / protocol) की तरह लागू किया जाता है। .

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पठेट लाओ

पठेट लाओ (लाओ भाषा: ປະເທດລາວ, Pathet Lao), जिसका अर्थ "लाओ राष्ट्र" है, एक साम्यवादी राजनैतिक अभियान व संगठन था जिसकी स्थापना २०वीं शताब्दी के मध्य में दक्षिणपूर्वी एशिया के लाओस देश में हुई थी। लओस गृहयुद्ध के बाद, सन् १९७५ में यह संगठन लाओस पर अपना अधिकार जमाने में सफल हो गया। आरम्भ से ही पठेट लाओ पड़ोसी वियतनाम देश के साम्यवादी संगठन से सम्बन्धित रहा था और गृहयुद्ध के दौरान उन्होंने ही इसे संगठित करा और युद्ध के औज़ार दिए। कभी-कभी इसका नेतृत्व भी उत्तर वियतनाम की सेना ने किया। .

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पदस्थ

पदस्थ शब्द का प्रयोग राजनीति अथवा किसी अन्य सरकारी / गैर सरकारी विभाग या संस्था में कार्य कर रहे उस व्यक्ति के लिए किया जाता है जो सम्बंधित पद पर उस समय कार्यरत हो। यह पद सामान्यतः चुनावों के संबंध में काम में लिया जाता है, जिसमें पदस्थ और अपदस्थ के मध्य मुकाबला होता है। उदाहरण के लिए अमेरिका में २०१२ के राष्ट्रपति चुनाव में बराक ओबामा पदस्थ थे। श्रेणी:राजनीतिक शब्दावली.

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परसराम मेघवाल

परसराम मेघवाल एक भारतीय राजनीतिज्ञ तथा पूर्व जालौर से लोकसभा सांसद थे। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राजनेता है। .

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परसराम मोरदिया

परसराम मोरदिया एक भारतीय राजनीतिज्ञ है। वे राजस्थान आवासन मण्डल के पूर्व अध्यक्ष है तथा राजस्थान सरकार में राज्य मंत्री रह चुके है। वे लक्ष्मणगढ़ विधानसभा क्षेत्र (राजस्थान) से पांच बार राजस्थान विधानसभा के विधायक चुने गये। ये भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राजनेता है। .

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पर्सी बिश शेली

पर्सी बयसी शेली (१७९२-१८२२) अंग्रेजी स्वच्छंदतावाद कविता के महान कवि थे। उन्हें आलोचकों द्वारा अंग्रेजी कविता के सर्वेशेष्ठ गीत कवि के रूप मैं माना जाता है। उनकी कविता में तत्कालीन राजनैतिक और सामाजिक दृश्य देखे जा सकते हैं। शेली ने अपने जीवनकाल में अधिक प्रशिद्धि प्राप्त नहीं की लेकिन मृत्यु के बाद उनकी प्रशिद्धि काफी बढ़ गयी।Isadora Duncan, "My Life ", W. W. Norton & Co.,1996, pp.

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परेश धानाणी

परेश धनानी एक भारतीय राजनीतिज्ञ तथा वर्तमान गुजरात विधानसभा में विपक्ष के नेता हैं | वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राजनेता हैं | .

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पशुपति शमशेर जंग बहादूर राणा

पशुपति शमशेर जंग बहादूर राणा (पशुपति शम्शेर जङ्ग बहादुर राणा) एक नेपाली राजनीतिज्ञ तथा पूर्व नेपाल के विदेश मंत्री व वित्त मंत्री हैं | .

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पश्चिमी संस्कृति

पश्चिमी संस्कृति (जिसे कभी-कभी पश्चिमी सभ्यता या यूरोपीय सभ्यता के समान माना जाता है), यूरोपीय मूल की संस्कृतियों को सन्दर्भित करती है। यूनानियों के साथ शुरू होने वाली पश्चिमी संस्कृति का विस्तार और सुदृढ़ीकरण रोमनों द्वारा हुआ, पंद्रहवी सदी के पुनर्जागरण एवं सुधार के माध्यम से इसका सुधार और इसका आधुनिकीकरण हुआ और सोलहवीं सदी से लेकर बीसवीं सदी तक जीवन और शिक्षा के यूरोपीय तरीकों का प्रसार करने वाले उत्तरोत्तर यूरोपीय साम्राज्यों द्वारा इसका वैश्वीकरण हुआ। दर्शन, मध्ययुगीन मतवाद एवं रहस्यवाद, ईसाई एवं धर्मनिरपेक्ष मानवतावाद की एक जटिल श्रृंखला के साथ यूरोपीय संस्कृति का विकास हुआ। ज्ञानोदय, प्रकृतिवाद, स्वच्छंदतावाद (रोमेन्टिसिज्म), विज्ञान, लोकतंत्र और समाजवाद के प्रयोगों के साथ परिवर्तन एवं निर्माण के एक लंबे युग के माध्यम से तर्कसंगत विचारधारा विकसित हुई.

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पहचान की राजनीति

पहचान की राजनीति (identity politics) ऐसी राजनैतिक विचारधाराएँ और तर्क होते हैं जो किसी देश, राज्य या अन्य राजनैतिक इकाई के पूर्ण हित को छोड़कर उन समूहों के हितों और परिप्रेक्ष्यों को बढ़ावा देने पर बल दें जिसके लोग सदस्य हों। यह समूह जाति, धर्म, लिंग, विचारधारा, राष्ट्रीयता, संस्कृति, भाषा, इतिहास, व्यवसाय या अन्य किसी लक्षण पर आधारित हो सकते हैं। यह आवश्यक नहीं है कि जिस समूह के सन्दर्भ में पहचान की राजनीति की जा रही है उस समूह के सभी सदस्य ऐसी राजनैतिक गतिविधियों में भागीदार हों या उसका समर्थन करें। .

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पाटा

पाट (स्त्री० पाटी) अर्थात् बैठने के लिए प्रयुक्त पीढ़ा। प्रायः यह काठ का होता है किन्तु चाँदी आदि धातुओं के पात भी प्रयुक्त होते हैं। विवाह में कन्यादान के उपरांत वर के पीढ़े पर कन्या और कन्या के पीढ़े पर वर को बैठाया जाता है। .

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पापारात्सी

पापारात्सी शैली की फोटोकारी पापारात्सी (Paparazzi) उन स्वतन्त्र फोटोग्राफरों को कहते हैं जो खिलाड़ियों, अभिनेताओं, राजनेताओं, तथा अन्य प्रद्ध व्यक्तियों के फोटो लेते हैं। ये प्रायः उनके दैनिक जीवन के विभिन्न क्रियाकलापों के फोटो लेते हैं। बीसवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में अख़बारी फ़ोटोग्राफ़रों का यह बिल्कुल नया पेशा सामने आया। पापारात्सी राजनीति, खेल, फ़िल्म या किसी भी विभाग के प्रसिद्ध व्यक्ति का पीछा करते हैं और उनके दैनिक जीवन के ऐसे तथ्यों को अपने कैमरे में सुरक्षित कर लेते हैं जो देखने वालों के लिए अत्याधिक रोचक और सनसनी से भरी हो। पापारात्सी फ़ोटोग्राफ़र शो बिज़नेस की दुनिया में विशेष रूप से बदनाम हैं क्योंकि उन के जासूस कैमरों की आंखें कला जगत के विख्यात सितारों का पीछा करती रहती हैं और उन प्रसिद्ध कलाकारों के लिए तनहाई में एक छण भी बिताना मुशकिल हो जाता है। पापारात्सी (Paparazzi) इतालवी भाषा का शब्द है और इसका उच्चारण पापारात्सी है। पहली बार 50 के दशक में सुना गया था जब रोम के कुछ युवा फ़ोटोग्राफ़रों ने मिस्र के शाह फ़ारूक़ के कुछ निजी चित्र प्रकाशित करा दिए। लेकिन उस समय तक पापारात्सी शब्द चर्चित नहीं हुआ था बल्कि ऐसे लोगों की चर्चा स्ट्रीट फ़ोटोग्राफ़र (Street Photographer) जैसे अपमानजनक नाम से की जाती थी। इन लोगों के पेशे को लेकर उस समय काफ़ी आलोचना शुरू हो गई जब राजकुमारी डायना की एक दुर्घटना में मौत हुई। इस कार दुर्घटना के बारे में एक विचार यह था कि सब पापारात्सी फ़ोटोग्राफ़रों का किया धरा है जो कि राजकुमारी डायना और उनके प्रेमी की फ़ोटो लेने के लिए शिकारी कुत्तों की तरह उन का पीछा किया करते थे। .

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पाइथागोरस

सामोस के पाईथोगोरस (Ὁ Πυθαγόρας ὁ Σάμιος, ओ पुथागोरस ओ समिओस, "पाईथोगोरस दी समियन (Samian)," या साधारण रूप से; उनका जन्म 580 और 572 ई॰पू॰ के बीच हुआ और मृत्यु 500 और 490 ई॰पू॰ के बीच हुई), या फ़ीसाग़ोरस, एक अयोनिओयन (Ionian) ग्रीक (Greek)गणितज्ञ (mathematician) और दार्शनिक थे और पाईथोगोरियनवाद (Pythagoreanism) नामक धार्मिक आन्दोलन के संस्थापक थे। उन्हें अक्सर एक महान गणितज्ञ, रहस्यवादी (mystic) और वैज्ञानिक (scientist) के रूप में सम्मान दिया जाता है; हालाँकि कुछ लोग गणित और प्राकृतिक दर्शन में उनके योगदान की संभावनाओं पर सवाल उठाते हैं। हीरोडोट्स उन्हें "यूनानियों के बीच सबसे अधिक सक्षम दार्शनिक" मानते हैं। उनका नाम उन्हें पाइथिआ (Pythia) और अपोलो से जोड़ता है; एरिस्तिपस (Aristippus) ने उनके नाम को यह कह कर स्पष्ट किया कि "वे पाइथियन (पाइथ-) से कम सच (एगोर-) नहीं बोलते थे," और लम्ब्लिकास (Iamblichus) एक कहानी बताते हैं कि पाइथिआ ने भविष्यवाणी की कि उनकी गर्भवती माँ एक बहुत ही सुन्दर, बुद्धिमान बच्चे को जन्म देगी जो मानव जाती के लिए बहुत ही लाभकारी होगा। (The Savisier-) उन्हें मुख्यतः पाईथोगोरस की प्रमेय (Pythagorean theorem) के लिए जाना जाता है, जिसका नाम उनके नाम पर दिया गया है। पाइथोगोरस को "संख्या के जनक" के रूप में जाना जाता है, छठी शताब्दी ईसा पूर्व में धार्मिक शिक्षण और दर्शनमें उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। पूर्व सुकराती (pre-Socratic) काल के अन्य लोगों की तुलना में उनके कार्य ने कथा कहानियों को अधिक प्रभावित किया, उनके जीवन और शिक्षाओं के बारे में अधिक विश्वास के साथ कहा जा सकता है। हम जानते हैं कि पाइथोगोरस और उनके शिष्य मानते थे कि सब कुछ गणित से सम्बंधित है और संख्याओं में ही अंततः वास्तविकता है और गणित के माध्यम से हर चीज के बारे में भविष्यवाणी की जा सकती है तथा हर चीज को एक ताल बद्ध प्रतिरूप या चक्र के रूप में मापा जा सकता है। लम्बलीकस (Iamblichus) के अनुसार, पाइथोगोरस ने कहा कि "संख्या ही विचारों और रूपों का शासक है और देवताओं और राक्षसों का कारण है।" वो पहले आदमी थे जो अपने आप को एक दार्शनिक, या बुद्धि का प्रेमी कहते थे, और पाइथोगोरस के विचारों ने प्लेटो पर एक बहुत गहरा प्रभाव डाला। दुर्भाग्य से, पाइथोगोरस के बारे में बहुत कम तथ्य ज्ञात हैं, क्योंकि उन के लेखन में से बहुत कम ही बचे हैं। पाइथोगोरस की कई उपलब्धियां वास्तव में उनके सहयोगियों और उत्तराधिकारियों की उपलब्धियां हैं। पाईथोगोरस का जन्म सामोस (Samos) में हुआ, जो एशिया माइनर (Asia Minor) के किनारे पर, पूर्वी ईजियन में एक यूनानी द्वीप है। उनकी माँ पायथायस (समोस की निवासी) और पिता मनेसार्चस (टायर (Tyre) के एक फोनिसियन (Phoenicia) व्यापारी) थे। जब वे जवान थे तभी उन्होंने, अपने जन्म स्थान को छोड़ दिया और पोलिक्रेट्स (Polycrates) की अत्याचारी (tyrannical) सरकार से बच कर दक्षिणी इटलीमें क्रोटोन (Croton) केलेब्रिया (Calabria) में चले गए। लम्ब्लिकस (Iamblichus) के अनुसार थेल्स (Thales) उनकी क्षमताओं से बहुत अधिक प्रभावित था, उसने पाइथोगोरस को इजिप्त में मेम्फिस (Memphis) को चलने और वहाँ के पुजारियों के साथ अध्ययन करने की सलाह दी जो अपनी बुद्धि के लिए जाने जाते थे। वे फोनेशिया में टायर और बैब्लोस में शिष्य बन कर भी रहे। इजिप्ट में उन्होंने कुछ ज्यामितीय सिद्धांतों को सिखा जिससे प्रेरित होकर उन्होंने अंततः प्रमेय दी जो अब उनके नाम से जानी जाती है। यह संभव प्रेरणा बर्लिन पेपाइरस (Berlin Papyrus) में एक असाधारण समस्या के रूप में प्रस्तुत है। समोस से क्रोटोन (Croton), केलेब्रिया (Calabria), इटली, आने पर उन्होंने एक गुप्त धार्मिक समाज की स्थापना की जो प्रारंभिक ओर्फिक कल्ट (Orphic cult) से बहुत अधिक मिलती जुलती थी और संभवतः उससे प्रभावित भी थी। Vatican) पाइथोगोरस ने क्रोटन के सांस्कृतिक जीवन में सुधर लाने की कोशिश की, नागरिकों को सदाचार का पालन करने के लिए प्रेरित किया और अपने चारों और एक अनुयायियों का समूह स्थापित कर लिया जो पाइथोइगोरियन कहलाते हैं। इस सांस्कृतिक केन्द्र के संचालन के नियम बहुत ही सख्त थे। उसने लड़कों और लड़कियों दोनों के liye सामान रूप से अपना विद्यालय खोला.जिन लोगों ने पाइथोगोरस के सामाज के अंदरूनी हिस्से में भाग लिए वे अपने आप को मेथमेटकोई कहते थे। वे स्कूल में ही रहते थे, उनकी अपनी कोई निजी संपत्ति नहीं थी, उन्हें मुख्य रूप से शाकाहारी भोजन खाना होता था, (बलि दिया जाने वाला मांस खाने की अनुमति थी) अन्य विद्यार्थी जो आस पास के क्षेत्रों में रहते थे उन्हें भी पाइथोगोरस के स्कूल में भाग लेने की अनुमति थी। उन्हें अकउसमेटीकोई के नाम से जाना जाता था और उन्हें मांस खाने और अपनी निजी सम्पति रखने की अनुमति थी। रिचर्ड ब्लेक्मोर ने अपनी पुस्तक दी ले मोनेस्ट्री (१७१४) में पाइथोगोरियनो के धार्मिक प्रेक्षणों को बताया, "यह इतिहास में दर्ज संन्यासी जीवन का पहला उदाहरण था। लम्ब्लिकास (Iamblichus) के अनुसार, पाइथोगोरस ने धार्मिक शिक्षण, सामान्य भोजन, व्यायाम, पठन और दार्शनिक अध्ययन से युक्त जीवन का अनुसरण किया। संगीत इस जीवन का एक आवश्यक आयोजन कारक था: शिष्य अपोलो के लिए नियमित रूप से मिल जुल कर भजन गाते थे; वे आत्मा या शरीर की बीमारी का इलाज करने के लिए वीणा (lyre) का उपयोग करते थे; याद्दाश्त को बढ़ाने के लिए सोने से पहले और बाद में कविता पठन किया जाता था। फ्लेवियस जोजेफस (Flavius Josephus), एपियन के विरुद्ध (Against Apion), यहूदी धर्म की रक्षा में ग्रीक दर्शनशास्त्र (Greek philosophy) के खिलाफ कहा कि समयरना के हर्मिपस (Hermippus of Smyrna) के अनुसार पाइथोगोरस यहूदी विश्वासों से परिचित था, उसने उनमें से कुछ को अपने दर्शन में शामिल किया। जिंदगी के अंतिम चरण में उसके और उसके अनुयायियों के खिलाफ क्रोतों के एक कुलीन सैलों (Cylon) द्वारा रचित शाजिश की वजह से वह मेतापोंतुम (Metapontum) भाग गया। वह अज्ञात कारणों से मेटापोंटम म में ९० साल की उम्र में मर गया। बर्ट्रेंड रसेल, ने पश्चिमी दर्शन के इतिहास (History of Western Philosophy), में बताया कि पाइथोगोरस का प्लेटो और अन्य लोगों पर इतना अधिक प्रभाव था कि वह सभी पश्चिमी दार्शनिकों में सबसे ज्यादा प्रभावी माना जाता था। .

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पंकजा मुंडे

पंकजा मुंडे (पंकजा पालवे) एक भारतीय राजनीतिज्ञा तथा महाराष्ट्र सरकार में केबिनेट मंत्री है। वे महाराष्ट्र विधानसभा में परली से विधायिका है। .

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पुष्पेन्द्र नाथ पाठक

पुष्पेन्द्र नाथ पाठक मध्य प्रदेश विधान सभा के सदस्य हैं। वो मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव, २०१३ के लिए चुने गये। .

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प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश

प्रतापगढ़ भारतीय राज्य उत्तर प्रदेश का एक जिला है, इसे लोग बेल्हा भी कहते हैं, क्योंकि यहां बेल्हा देवी मंदिर है जो कि सई नदी के किनारे बना है। इस जिले को ऐतिहासिक दृष्टिकोण से काफी अहम माना जाता है। यहां के विधानसभा क्षेत्र पट्टी से ही देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं॰ जवाहर लाल नेहरू ने पदयात्रा के माध्यम से अपना राजनैतिक करियर शुरू किया था। इस धरती को रीतिकाल के श्रेष्ठ कवि आचार्य भिखारीदास और राष्ट्रीय कवि हरिवंश राय बच्चन की जन्मस्थली के नाम से भी जाना जाता है। यह जिला धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी कि जन्मभूमि और महात्मा बुद्ध की तपोस्थली है। .

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प्रदीप टम्टा

प्रदीप टम्टा एक भारतीय राजनीतिज्ञ तथा भारत के वरिष्ठ सदन राज्यसभा के सदस्य हैं। .

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प्रभा ठाकुर

प्रभा ठाकुर (जन्म 10 सितम्बर 1949) एक भारतीय राजनीतिज्ञ है वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी की सदस्या हैं। वह भारतीय संसद के ऊपरी सदन राज्य सभा में राजस्थान का प्रतिनिधित्व भारतीय संसद की सदस्य है। वह अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। ठाकुर बारहवीं लोकसभा की सदस्य अजमेर से राजस्थान के निर्वाचन क्षेत्र से 1998 से 1999 तक सदस्य रहे। 2009 में, वह वाम मोर्चा (पश्चिम बंगाल) के शासन का कहना है कि पिछले 33 वर्षों में महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह विधेयक भारतीय महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने में मदद करेगा। ठाकुर ने अन्य महिलाओं के मुद्दों पर बात की है, भारत में सख्त विरोधी बलात्कार प्रावधानों के लिए बुलाया है। उसने बलात्कार की घटनाओं से निपटने के लिए ड्रेस कोड को लागू करने के बारे में टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया दी और कहा, "सवाल ड्रेस कोड के बारे में नहीं है, लेकिन पुरुषों की मानसिकता। लड़कियों को क्या पहनना चाहिए लड़की की चिंता, उसके माता-पिता और उसके परिवार को ही। मुझे नहीं लगता कि कोई भी नींव है किसी और के लिए किसी लड़की को कैसे व्यवहार करना चाहिए, इसके बारे में कुछ भी कहना है। इसके बजाय, ठाकुर का मानना ​​है कि जितना अधिक महिला बलात्कारियों को "न्याय" का सामना करते हैं, उतने ही वे मानते हैं कि वे हमलावरों के खिलाफ मामला दर्ज कर सकते हैं। उसने पहले दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ हिंसक अपराध की मात्रा के बारे में बताया है। .

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प्रभाष जोशी

प्रभाष जोशी (जन्म १५ जुलाई १९३६- निधन ५ नवंबर २००९) हिन्दी पत्रकारिता के आधार स्तंभों में से एक थे। वे राजनीति तथा क्रिकेट पत्रकारिता के विशेषज्ञ भी माने जाते थे। दिल का दौरा पड़ने के कारण गुरुवार, ५ नवम्बर २००९ मध्यरात्रि के आसपास गाजियाबाद की वसुंधरा कॉलोनी स्थित उनके निवास पर उनकी मृत्यु हो गई। .

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प्रभूलाल सैनी

प्रभूलाल सैनी एक भारतीय राजनीतिज्ञ तथा वर्तमान राजस्थान सरकार में कृषि मंत्री हैं| वे राजस्थान विधान सभा में अंता से विधायक हैं | .

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प्रमिला जयपाल

प्रमिला जयपाल (जन्म: 21 सितम्बर 1965) वे भारतीय मूल की अमेरिकी राजनीतिज्ञ है तथा वांशिगठन के सातवीँ संसदीय सीट से सीनेट है। .

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प्रियंका मेघवाल

प्रियंका मेघवाल एक भारतीय राजनीतिज्ञ तथा राजस्थान के बाड़मेर जिले से जिला परिषद की जिला प्रमुख है। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के टिकट पर जिला प्रमुख चुनी गई। .

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प्रवीण कुमार निषाद

प्रवीण कुमार निषाद एक भारतीय राजनीतिज्ञ तथा वर्तमान गोरखपुर से उपचुनाव में सांसद बने | वे समाजवादी पार्टी के राजनेता हैं | .

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प्रेमचंद

प्रेमचंद (३१ जुलाई १८८० – ८ अक्टूबर १९३६) हिन्दी और उर्दू के महानतम भारतीय लेखकों में से एक हैं। मूल नाम धनपत राय प्रेमचंद को नवाब राय और मुंशी प्रेमचंद के नाम से भी जाना जाता है। उपन्यास के क्षेत्र में उनके योगदान को देखकर बंगाल के विख्यात उपन्यासकार शरतचंद्र चट्टोपाध्याय ने उन्हें उपन्यास सम्राट कहकर संबोधित किया था। प्रेमचंद ने हिन्दी कहानी और उपन्यास की एक ऐसी परंपरा का विकास किया जिसने पूरी सदी के साहित्य का मार्गदर्शन किया। आगामी एक पूरी पीढ़ी को गहराई तक प्रभावित कर प्रेमचंद ने साहित्य की यथार्थवादी परंपरा की नींव रखी। उनका लेखन हिन्दी साहित्य की एक ऐसी विरासत है जिसके बिना हिन्दी के विकास का अध्ययन अधूरा होगा। वे एक संवेदनशील लेखक, सचेत नागरिक, कुशल वक्ता तथा सुधी (विद्वान) संपादक थे। बीसवीं शती के पूर्वार्द्ध में, जब हिन्दी में तकनीकी सुविधाओं का अभाव था, उनका योगदान अतुलनीय है। प्रेमचंद के बाद जिन लोगों ने साहित्‍य को सामाजिक सरोकारों और प्रगतिशील मूल्‍यों के साथ आगे बढ़ाने का काम किया, उनमें यशपाल से लेकर मुक्तिबोध तक शामिल हैं। .

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प्रेयोक्ति

एक प्रेयोक्ति का अर्थ होता है, सुननेवाले को रुष्ट करने वाली या कोई अप्रिय अर्थ देने वाली अभिव्यक्ति को एक रुचिकर या कम अपमानजनक अभिव्यक्ति के साथ प्रतिस्थापित करना, या कहने वाले के लिए उसे कम कष्टकर बनाना, जैसा की द्विअर्थी के मामले में होता है। प्रेयोक्ति का परिनियोजन राजनीतिक विशुद्धता के सार्वजनिक उपयोग में केंद्रीय पहलू है। यह किसी वस्तु या किसी व्यक्ति के वर्णन को भी प्रतिस्थापित कर सकता है ताकि गोपनीय, पवित्र, या धार्मिक नामों को अयोग्य के समक्ष ज़ाहिर करने से बचा जा सके, या किसी वार्ता के विषय की पहचान को किसी संभावित प्रच्छ्न्न श्रोता से गुप्त रखा जा सके.

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प्रेरणा के सिद्धांत

प्रेरणा व्यवहार की व्याख्या करने के लिए इस्तेमाल एक सैद्धांतिक निर्माण है। यह लोगों कि कार्वाई, इच्छाओं और ज़रूरतों के लिए कारणों का प्रतिनिधित्व करता है। प्रेरणा भी व्यवहार करने की दिशा के रूप मे परिभाषित किया जा सकता है। एक मकसद एक निश्चित तरीके से कार्य करने के लिए व्यक्ति को संकेत देता है या कम से कम विशिष्ट व्यवहार के लिए एक झुकाव विकसित करता है। उदाह्ररण के लिए, जब कोई खाना खा के, अपनी भूख की ज़रुरत को पूरा करता है, या जब कोई छात्र अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए अपना सारा काम स्कूल में ही कर लेता है। दोनो उदाहरणों में हम क्या करते है और क्यों करते है इस में एक समानता पाई जाती है। मायर और मेयर के अनुसार, प्रेरणा शब्द लोकप्रिय संस्कृति का हिस्सा है जैसे अन्य मनोवैज्ञानिक अवधारणाओं रहें है। .

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प्रेसिडेन्सी विश्वविद्यालय, कोलकाता

प्रेसिडेंसी कॉलेज, कोलकाता (Presidency College; প্রেসিডেন্সি কলেজ) कोलकाता, पश्चिम बंगाल में कला, विज्ञान और मानविकी के क्षेत्रों में स्नातक तथा स्नातकोत्तर अध्ययन के लिए एक श्रेष्ठ भारतीय शिक्षा प्रतिष्ठान है। इस प्रतिष्ठान ने अनेक प्रसिद्ध भारतीय कलाकार, लेखक, वैज्ञानिक, राजनीतिज्ञ, दार्शनिक इत्यादि दिए है। .

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प्लेटो

प्लेटो (४२८/४२७ ईसापूर्व - ३४८/३४७ ईसापूर्व), या अफ़्लातून, यूनान का प्रसिद्ध दार्शनिक था। वह सुकरात (Socrates) का शिष्य तथा अरस्तू (Aristotle) का गुरू था। इन तीन दार्शनिकों की त्रयी ने ही पश्चिमी संस्कृति की दार्शनिक आधार तैयार किया। यूरोप में ध्वनियों के वर्गीकरण का श्रेय प्लेटो को ही है। .

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पैट्रिक हॅनरी

पैट्रिक हॅनरी (अंग्रेज़ी: Patrick Henry, जन्म: २९ मई १७३६, मृत्यु: ६ जून १७९९) संयुक्त राज्य अमेरिका के आरम्भिक दौर के एक राजनेता और वक्ता थे जिन्हें कभी-कभी उस देश के राष्ट्रपिताओं में भी गिना जाता है। उन्होंने अमेरिका के वर्जिनिया राज्य में ब्रिटेन के खिलाफ़ चलाये गए स्वतंत्रता संग्राम का नेतृत्व किया था और सन् १७७६ से १७७९ तक और फिर १७८४ से १७८६ तक के कालों में उस सूबे के राज्यपाल भी रहे थे। उन्हें अपने दिए गए "मुझे आज़ादी दो या मौत दो" (Give me Liberty, or give me Death) के नारे के लिए याद किया जाता है।Thad Tate, "Henry, Patrick", American National Biography Online, February 2000.

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पूर्व एवं वर्तमान भरतीय नारी: एक सामाजिक परिवजन्

परिचय अब भी जागो, सुर में रागो, भारत मां की संतानों! बिन बेटी के, बेटे वालों, किससे ब्याह रचाओगे? बहन न होगी, तिलक न होगा, किसके वीर कहलाओगे? भारत में नवरात्र पर्व के दौरान बाल कन्याओं को पूजने का रिवाज है। लेकिन यह बेहद शर्मनाक बात है कि जिन कन्याओं को यहां भगवान का रूप माना जाता है उसे लोग अपने घर में एक बोझ मानकर जन्म लेने से पहले ही मार देते हैं। हरियाणा और मध्यप्रदेश जैसे जगहों पर लोग कन्या भ्रूण हत्या (Girl Child Abortion) इज्जत और दहेज बचाने के लिए करते हैं तो भारत के शहरों में बेटों की चाह में बेटियों का गला दबा दिया जाता है और इसके दुष्परिणाम आज सबके सामने हैं। लैंसेट पत्रिका (Lancet journal) में छपे एक अध्ययन के निष्कर्षों के अनुसार वर्ष 1980 से 2010 के बीच इस तरह के गर्भपातों (Girl Child Abortion) की संख्या 42 लाख से एक करोड़ 21 लाख के बीच रही है। कन्याएं समाज का आधार होती हैं। यही मां, बहन, बेटी और बहू का किरदार निभाती हैं। लेकिन समाज के कई हिस्सों में इन्हीं कन्याओं को जन्म लेने से पहले ही मार दिया जाता है – वजह इनके बड़े होने पर इन्हें पालने, दहेज देने और इज्जत बचाने के लिए। आज 21वीं सदी में यह तर्क हमारी प्रगतिशील सोच पर एक काले कलंक की तरह हैं लेकिन यह पूरी तरह सच है। साथ ही ‘सेंटर फॉर सोशल रिसर्च’ का अनुमान है कि बीते 20 वर्ष में भारत में कन्या भ्रूण हत्या (Girl Child Abortion) के कारण एक करोड़ से अधिक बच्चियां जन्म नहीं ले सकीं। वर्ष 2001 की जनगणना कहती है कि दिल्ली में हर एक हजार पुरुषों पर महिलाओं की संख्या 865 थी। वहीं, हरियाणा के अंबाला में एक हजार पुरुषों पर 784 महिलाएं और कुरुक्षेत्र में एक हजार पुरुषों पर 770 महिलाएं थीं। पूरे विश्व में बाल कन्याओं और कन्या भ्रूण हत्याओं (Girl Child Abortion) की बढ़ती संख्या देखते हुए संयुक्त राष्ट्र ने 11 अक्टूबर को विश्व बाल कन्या दिवस के रूप में मनाने का निर्णय किया है। बाल कन्याओं और कन्या भ्रूण हत्याओं को रोकने के लिए इस दिन विश्व भर में चर्चा होती है और जरूरी कदम उठाए जाते हैं। क्या सिर्फ चर्चा से रुकेगा यह पाप कन्या भ्रूण हत्या (Girl Child Abortion) को पाप कहना गलत नहीं होगा। भारत में इस पाप को रोकने के लिए कानून में दंड तक का प्रावधान है लेकिन बेहद शर्मनाक है कि आज इस कानून का बुरी तरह से खंडन हो रहा है। कन्या भ्रूण हत्या (Girl Child Abortion) को रोकने के लिए सिर्फ कानून बना देने से क्या होता है? कानून के अनुपालन के लिए एक मशीनरी भी तो होनी चाहिए। साथ ही कन्या भ्रूण हत्याओं के बढ़ते मामलों का सबसे बड़ा दोषी भारतीय समाज का विभाजन है जहां पुरुषों और स्त्रियों के बीच जमीन-आसमान का अंतर रखा गया है। ऐसा हो तो शायद रुक जाए कन्याओं की हत्या कन्या भ्रूण हत्या जटिल मसला है। असल में इसके लिए सबसे ज्यादा जरूरी स्त्रियों की जागरूकता ही है, क्योंकि इस संदर्भ में निर्णय तो स्त्री को ही लेना होता है। दूसरी परेशानी कानून-व्यवस्था के स्तर पर है। यह जानते हुए भी कि भ्रूण का लिंग परीक्षण अपराध है, गली-मुहल्लों में ऐसे क्लिनिक चल रहे हैं जो लिंग परीक्षण और गर्भपात के लिए ही बदनाम हैं। जनता इनके बारे में जानती है, लेकिन सरकारी अमले आंखें मूंदे रहते हैं। भारत में इस समस्या से निबटना बहुत मुश्किल है, पर अगर स्त्रियां तय कर लें तो नामुमकिन तो नहीं ही है। साथ ही शिक्षा व्यवस्था ऐसी बनानी होगी कि बच्चों को लड़के-लड़की के बीच किसी तरह के भेदभाव का आभास न हो। वे एक-दूसरे को समान समझें और वैसा ही व्यवहार करें। महिला सशक्तिकरण महिला सशक्तिकरण के अंतर्गत महिलाओं से जुड़े सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक और कानूनी मुद्दों पर संवेदनशीलता और सरोकार व्यक्त किया जाता है। सशक्तिकरण की प्रक्रिया में समाज को पारंपरिक पितृसत्तात्मक दृष्टिकोण के प्रति जागरूक किया जाता है, जिसने महिलाओं की स्थिति को सदैव कमतर माना है। वैश्विक स्तर पर नारीवादी आंदोलनों औरयूएनडीपी आदि अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं ने महिलाओं के सामाजिक समता, स्वतंत्रता और न्याय के राजनीतिक अधिकारों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। महिला सशक्तिकरण, भौतिक या आध्यात्मिक, शारिरिक या मानसिक, सभी स्तर पर महिलाओं में आत्मविश्वास पैदा कर उन्हें सशक्त बनाने की प्रक्रिया है। महिला एवं बाल विकास विभाग, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा बच्चों के लिए राष्ट्रीय चार्टर पर जानकारी प्राप्त करें। प्रयोक्ता जीवन, अस्तित्व और स्वतंत्रता के अधिकार की तरह एक बच्चे के विभिन्न अधिकारों के बारे में पता लगा सकते हैं, खेलने और अवकाश, मुफ्त और अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा पाने के अधिकार, माता पिता की जिम्मेदारी के बारे में सूचना आदि, विकलांग बच्चों की सुरक्षा आदि के लिए भी सूचना प्रदान की गई है। महिला सशक्तिकरण की दिशा में हालांकि दुनिया के कई देश कई महत्वपूर्ण उपाय कांफी पहले कर चुके हैं। आश्चर्य की बात तो यह है कि हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी महिलाओं के लिए संसदीय सीटों में आरक्षण की व्यवस्था की जा चुकी है। लगता तो है कि अब भारतवर्ष में भी इस दिशा में कुछ रचनात्मक कदम उठाए जाने की तैयारी शुरु कर दी गई है। पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं को आरक्षण दिया जाना और वह भी राजनीति जैसे उस क्षेत्र में जहां कि आमतौर पर पुरुषों का ही वर्चस्व देखा जाता है वास्तव में एक आश्चर्य की बात है। परंतु पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी के इस सपने को साकार करने का जिस प्रकार कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मन बनाया है तथा अपने कांग्रेस सांसदों को महिला आरक्षण के पक्ष में मतदान करने की अनिवार्यता सुनिश्चित करने हेतु व्हिप जारी किया है उसे देखकर यह कहा जा सकता है कि कांग्रेस पार्टी के शीर्ष पुरुष नेता भले ही भीतर ही भीतर इस बिल के विरोधी क्यों न हों परंतु सोनिया गांधी की मंशा भांपने के बाद फिलहाल ऐसा नहीं लगता कि कांग्रेस का कोई नेता राज्यसभा में इस विधेयक के पारित हो जाने के बाद अब लोकसभा में इसके विरुध्द अपनी जुबान खोल सकेगा। बात जब देश की आधी आबादी के आरक्षण की हो तो भारतीय जनता पार्टी भी कांग्रेस से लाख मतभेद होने के बावजूद ख़ुद को महिला आरक्षण विधेयक से अलग नहीं रख सकती लिहाजा पार्टी में कई सांसदों से मतभेदों के बावजूद भाजपा भी फिलहाल इस विधेयक के पक्ष में खड़ी दिखाई दे रही है। हालांकि इसमें भी कोई दो राय नहीं है कि जिस प्रकार मनमोहन सिंह की पिछली सरकार के समय भारत अमेरिका के मध्य हुआ परमाणु क़रार मनमोहन सरकार के लिए एक बड़ी मुसीबत साबित हुआ था तथा उसी मुद्दे पर वामपंथी दलों ने यू पी ए सरकार से अपना समर्थन तक वापस ले लिया था। ठीक वैसी ही स्थिति महिला आरक्षण विधेयक को लेकर एक बार फिर देखी जा रही है। परंतु पिछली बार की ही तरह इस बार भी कांग्रेस के इरादे बिल्कुल सांफ हैं। ख़बर है कि एक वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री ने सोनिया गांधी से यह पूछा कि उन्हें लोकसभा में महिला आरक्षण की मंजूरी चाहिए या वे सरकार बचाना चाहेंगी। इस पर सोनिया गांधी ने भी स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें महिला आरक्षण की मंजूरी चाहिए। उक्त विधेयक को लेकर देश की संसद में पिछले दिनों क्या कुछ घटित हुआ यह भी पूरा देश व दुनिया देख रही है। रायसभा के 7 सांसदों को सभापति की मो पर चढ़ने तथा विधेयक की प्रति फाड़ने व सदन की गरिमा को आघात पहुंचाने के जुर्म में सदन से निलंबित तक होना पड़ा था। राष्ट्रीय जनता दल, समाजवादी पार्टी व लोक जनशक्ति पार्टी के इन सांसदों द्वारा महिला आरक्षण विधेयक के वर्तमान स्वरूप को लेकर जो हंगामा खड़ा किया जा रहा है वह भी हास्यास्पद है। इन दलों के नेता यह मांग कर रहे हैं कि 33 प्रतिशत महिला आरक्षण के कोटे में ही दलितों, पिछड़ी जातियों तथा अल्पसंख्यकों की महिलाओं हेतु आरक्षण किया जाना चाहिए। अब यह शगूफा मात्र शगूंफा ही है या फिर इन पार्टियों के इस कदम में कोई हंकींकत भी है यह जानने के लिए अतीत में भी झाकना णरूरी होगा। महिलाओं के 33 प्रतिशत सामान्य आरक्षण की वकालत करने वाले लालू यादव, मुलायम सिंह यादव, शरद यादव तथा रामविलास पासवान जैसे विधेयक के वर्तमान स्वरूप के विरोधियों से जब यह पूछते हैं कि आप लोग अपनी- अपनी पार्टियों के राजनैतिक अस्तित्व में आने के बाद से लेकर अब तक के किन्हीं पांच ऐसे सांसदों, विधायकों या विधान परिषद सदस्यों के नाम बताएं जिन्हें आप लोगों ने दलित, पिछड़ा तथा अल्पसंख्यक होने के नाते पार्टी प्रत्याशी के रूप में किसी सदन का सदस्य बनवाया हो। इसके जवाब में इन नेताओं के पास कहने को कुछ भी नहीं है। इसी से यह सांफ ज़ाहिर होता है कि दलितों, पिछड़ी जातियों तथा अल्पसंख्यक समुदाय की महिलाओं के नाम पर किया जाने वाला इनका हंगामा केवल हंगामा ही है हकीकत नहीं। दरअसल जो नेता महिला आरक्षण विधेयक का विरोध जाति के आधार पर कर रहे हैं उनकी मजबूरी यह है कि उनके हाथों से पिछड़ी जातियों व अल्पसंख्यकों के वह वोट बैंक तोी से खिसक रहे हैं जो उन्हें सत्ता मे लाने में सहयोगी हुआ करते थे। लिहाजा यह नेता पिछड़ों व अल्पसंख्यकों की महिलाओं को अतिरिक्त आरक्षण दिए जाने के नाम पर महिला आरक्षण विधेयक का जो विरोध कर रहे हैं वह वास्तव में एक तीर से दो शिकार खेलने जैसा ही है। इन जातियों के पक्ष में अपनी आवाज बुलंद कर यह नेता जहां अपने खिसकते जनाधार को पुन: बचाना चाह रहे हैं वहीं इनकी यह कोशिश भी है कि किसी प्रकार उनके विरोध व हंगामे के चलते यह विधेयक पारित ही न होने पाए। और इस प्रकार राजनीति में पुरुषों का वर्चस्व पूर्ववत् बना रहे। महिला आरक्षण विधेयक से जुड़ी तमाम और ऐसी सच्चाईयां हैं जिन्हें हम नजरअंदाज नहीं कर सकते। हालांकि महिलाओं द्वारा आमतौर पर इस विषय पर ख़ुशी का इजहार किया जा रहा है। आरक्षण की ख़बर ने देश की अधिकांश महिलाओं में जोश भर दिया है। परंतु इन्हीं में कुछ शिक्षित व सुधी महिलाएं ऐसी भी हैं जो महिला आरक्षण को ग़ैर जरूरी और शोशेबाजी मात्र बता रही हैं। ऐसी महिलाओं का तर्क है कि महिला सशक्तिकरण का उपाय मात्र आरक्षण ही नहीं है। इसके अतिरिक्त और भी तमाम उपाय ऐसे हो सकते हैं जिनसे कि महिलाओं को पुरुषों के समकक्ष लाया जा सकता है। उदाहरण के तौर पर महिलाओं हेतु नि:शुल्क अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान किया जाना चाहिए। महिलाओं पर होने वाले यौन उत्पीड़न संबंधी अपराध तथा दहेज संबंधी अपराधों में अविलंब एवं न्यायसंगत फैसले यथाशीघ्र आने चाहिएं तथा इसके लिए और सख्त कानून भी बनाए जाने चाहिए। कन्या भ्रुण हत्या को तत्काल पूरे देश में प्रतिबंधित किया जाना चाहिए तथा इसके लिए भी और सख्त कानून भी बनाए जाने की जरूरत है। खेलकूद में महिलाओं हेतु पुरुषों के बराबर की व्यवस्था की जानी चाहिए। सरकारी एवं गैर सरकारी नौकरियों में भी महिलाओं को आरक्षण दिया जाना चाहिए। और यह आरक्षण चूंकि देश की आधी आबादी के लिए दिया जाना है अत: इसे 33 प्रतिशत नहीं बल्कि 50 प्रतिशत किया जाना चाहिए। वृद्ध,बीमार तथा घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं की सहायता व इन्हें आश्रय दिये जाने की व्यवस्था होनी चाहिए। व्यवसाय हेतु महिलाओं को प्राथमिकता के आधार पर बैंक लोन मुहैया कराए जाने चाहिए। लिात पापड़ जैसी ग्राम उद्योग संस्था से सीख लेते हुए सरकार को भी इसी प्रकार के अनेक महिला प्रधान प्रतिष्ठान राष्ट्रीय स्तर पर संचालित करने चाहिए। रहा सवाल महिलाओं की सत्ता में भागीदारी हेतु संसद में महिला आरक्षण विधेयक प्रस्तुत किए जाने का तो इसमें भी शक नहीं कि राजनीति में महिलाओं की आरक्षित भागीदारी निश्चित रूप से राजनीति में फैले भ्रष्टाचार में कमी ला सकेगी। संसद व विधानसभाओं में आमतौर पर दिखाई देने वाले उपद्रवपूर्ण दृश्यों में भी लगभग 33 प्रतिशत कमी आने की संभावना है। संसद में नोट के बंडल भी पहले से कम उछाले जाऐंगे। परंतु यह सब तभी संभव हो सकेगा जबकि देश की लोकसभा में उक्त विधेयक पेश होने की नौबत आ सके और उसके पश्चात लोकसभा इस विधेयक को दो-तिहाई मतों से पारित भी कर दे। और चूंकि यह संविधान संशोधन विधेयक है इसलिए देश की आधी से अधिक अर्थात् लगभग 15 विधानसभाओं में भी इस विधेयक का पारित होना जरूरी होगा। चूंकि बात भारत में महिला सशक्तिकरण को लेकर की जा रही है इसलिए आज महिला आरक्षण के पक्ष में सबसे अधिक मुखरित दिखाई दे रही कांग्रेस व भारतीय जनता पार्टी से ही जुड़ी कुछ महिलाओं से संबंधित अतीत की ऐसी ही बातों का उल्लेख यहां करना संबध्द पक्षों को शायद बुरा तो बहुत लगेगा परंतु इतिहास ने समय के शिलालेख पर जो सच्चाई दर्ज कर दी है उससे भला कौन इंकार कर सकता है। याद कीजिए जब एक महिला अर्थात् सोनिया गांधी भारत की प्रधानमंत्री बनने के करीब थी उस समय सुषमा स्वराज व उमा भारती के क्या वक्तव्य थे। यह महिला नेत्रियां उस समय सोनिया गांधी के विरोध में अपने बाल मुंडवाने, भुने चने खाने व घर में चारपाई उल्टी कर देने जैसी बातें करती देखी जा रही थीं। आज भाजपा व कांग्रेस महिला आरक्षण के पक्ष में लगभग एकजुट दिखाई पड़ रहे हैं। इन दोनों ही पार्टियों को वे दिन भी नहीं भूलने चाहिए जबकि दिल्ली के सिख विरोधी दंगों के दौरान तथा गुजरात में नरेंद्र मोदी की सरकार के संरक्षण में हुए मुस्लिम विरोधी दंगों के दौरान न जाने कितनी औरतों के पेट फाड़कर उनके गर्भ से बच्चों को निकाल कर चिता में डाल दिया गया। अनेक महिलाओं को जीवित अग्नि के हवाले कर दिया गया। अनेकों के स्तन तलवारों से काट दिए गए। बड़े अफसोस की बात है कि महिलाओं पर यह अत्याचार भी इन्हीं राजनीति के विशेषज्ञों के इशारे पर किया गया था जो आज महिला सशक्तिकरण की बातें कर रहे हैं। और इसीलिए अविश्वसनीय से लगने वाले इस विधेयक को देखकर यह संदेह होना लाजमी है कि इसमें कितनी हकीकत है और कितना फसाना। बेटी बचाओ हमारा देस और समाज काफी प्रगति कर गया है और आगे कर भी रहा है लेकिन अभी भी स्त्रियो को जितना सम्मान मिलना चाहिए उतना नही मिलता है क्योकि उन्हें इतना महत्वपूर्ण नही समझा जाता है और इसी लिए गर्भ में ही उनकी हत्या कर दी जाती है लिंग परिक्षण करवाके लेकिन ऐसा नही करना चाहिए, यदि आप ऐसा सोचते है की बेटा होगा तो वह अधिक काम का होगा तो बहुत ही ग़लत सोचते है, बेटा हो या बेटी भगवान की इच्छा समझ के उसे ही स्वीकार कर लेना चाहिए, क्योकि पहेले से ही किसी बात का अंदाजा लगा लेना बहुत उचित नही कहा जा सकता है, इसी से सम्बंधित मैं एक प्रेरक प्रसंग प्रस्तुत कर रहा हूँ जिससे आप को ऐसा लगे की कोई किसी से कम नही बस आपने परवरिस कैसे की है, देखभाल कैसे की है, सबकुछ इस पर आधार रखता है। हमारे देस की सक्रिय राजनीती में अभी भी एक परिवार खूब ही सक्रिय रूप से जुडा हुआ है जिसे गाँधी नेहरू परिवार के नाम से जाना जाता है, अब आप समझ गए होंगे की मेरा इशारा किस ओर है, जवाहर लाल नेहरू हारे देस के प्रथम प्रधानमंत्री है, इनके पिता का नाम मोतीलाल नेहरू था जो बारिस्टर थे जवाहर लाल नेहरू की एक ही संतान थी जो की पुत्री थी लेकिन हमें इतिहास में कही भी ऐसा नही पता चलता है की जवाहर लाल नेहरू को कभी भी इस बात से कोई समस्या रही हो की कोई बेटा क्यो नही हुआ क्या वो चाहते तो कोई बेटा गोद नही ले सकते थे या फिर कोई दूसरी शादी नही कर सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा नही किया भगवन ने उन्हें जो दिया इस मामले

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पॉल वुल्फोवित्ज़

पॉल वुल्फोवित्ज़ पॉल वुल्फोवित्ज़ ने अमरीका और दुनिया के सार्वजनिक जीवन मे तीस से भी ज्यादा साल एक अध्यापक और अन्य दूसरे रूपों में गुज़ारे हैं जिसमें छ: अमरीकी राष्ट्रपतियों के अधीन चौबीस साल की सरकारी सेवा भी शामिल है। मार्च 2001 में एक बार फिर अमरीका के अट्ठाइसवें रक्षा सचिव के रूप में उनकी वापसी हुई। पेंटागन के इस दूसरे सबसे महत्वपूर्ण पद के लिये वुल्फोवित्ज़ डोनाल्ड रम्सफील्ड के साथ वे अमरीकी सेना के लिये महत्वपूर्ण नीति निर्माण की प्रक्रिया को अंज़ाम देते हैं। ग्यारह सितंबर के हमलों के बाद पॉल वुल्फोवित्ज़ ने पूरे विश्व में आतंकवाद के खिलाफ़ अमरीकी रणनीति तैयार करने से लेकर ईराक़ और अफ़गानिस्तान के हमलों के लिये नीति तैयार करने में अति विशिष्ट भूमिका निभाई है। 1989 में राष्ट्रपति बुश ने उन्हें पेंटागन में वापिस बुलाया और उन्होंने तत्कालीन रक्षा सचिव डिक चेनी को खाड़ी युद्ध के संचालन एवं उसके लिये पैसे का जुगाड़ करने में काफी मदद की। राष्ट्रपति रीगन के शासनकाल में वुल्फोवित्ज़ ने तीन साल तक इंडोनेशिया में अमरीका के राजदूत की भूमिका भी अदा की। इस दौरना श्री वुल्फोवित्ज़ की छवि काफी अच्छी रही थी और इस्लामी दुनिया से सार्थक संवाद में उन्होंने काफी अच्छी भूमिका निभाई। इंडोनेशिया जाने से पहले वुल्फोवित्ज़ केन्द्रीय सरकार के नीति निर्धाण एवं योजना कार्यान्वयन विभाग के प्रमुख पद पर तीन साल तक और लगभग ढाई साल तक पूर्वी एशिया और प्रशांत महासगरीय देशों के मामले के समीति के सचिव पद पर कार्य कर चुके थे। चीन के साथ अमरीका के संबंध सुधारने मे वुल्फोवित्ज़ काफी आगे रहे थे और जापान तथा कोरिया के मामलों में भी अमरीकी सरकार उनपर काफी निर्भ रही थी। कोरिया और फिलिपींस में लोकतंत्र संबंधी आंदोलोनों में भी वे काफी प्रभावी साबित हुये। पॉल वुल्फोवित्ज़ के सराकारी दायरों से बाहर की भूमिका मुख्य रूप से एक प्राध्यापक के रूप में रही है। 1994 से 2001 के बीच वे जान हापकिन्स विश्वविद्यालय में डीन एवं प्रोफ़ेसर के रूप में उन्होंने काम किया। प्राध्यापक के रूप में उन्होंने अमरीका की रक्षा नीति से संबंधित बहसों में जमकर भाग लिया और कई बहसों के आयोजक बने। इससे पहले श्री पॉल वुल्फोवित्ज़ येल विश्वविद्यालय में 1970 से 1973 के बीच राजनीति शास्त्र के प्राध्यापक भी रह चुके थे। श्री पॉल वुल्फोवित्ज़ ने सुरक्षा संबंधी मामलों पर काफी कुछ लिखा भी है। उन्होंने गणित में अपने स्नातक की उपाधि 1965 में कोर्नेल विश्वविद्यालय से प्राप्त की और 1972 में शिकागो विश्वविद्यालय से डाक्टरेट की उपाधि हासिल की। श्रेणी:अमेरीका के अर्थशास्त्री श्रेणी:आधार श्रेणी:व्यक्तिगत जीवन.

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पी एल पुनिया

पी एल पुनिया कांग्रेस से संबद्ध एक भारतीय राजनीतिज्ञ तथा वर्तमान में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष थे। वे उत्तर प्रदेश से राज्य सभा सांसद रहे हैं। .

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फ़ज़ल हक़

वे एक पाकिस्तानी जनरल, राजनीतिज्ञ और पाकिस्तान के प्रांत, ख़ैबर पख़्तूनख़्वा के पूर्व राज्यपाल थे। .

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फ़ेला कुटी

साल 1970 में फ़ेला कुटी फ़ेला अनिकुलापो कुटी (Fela Anikulapo Kuti, जन्म: 15 अक्तूबर 1938 अबोकुटा में; मृत्यु 2 अगस्त 1997 लागोस में) सुप्रसिद्ध नाइजीरियाई सैक्सोफ़ोनिस्ट तथा बैंड लीडर थे। वे एफ़्रॉबीट के मुख्य स्थापक को माने जाते हैं। .

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फिदा मोहम्मद खान

वे एक पाकिस्तानी राजनीतिज्ञ और पाकिस्तान के प्रांत, ख़ैबर पख़्तूनख़्वा के पूर्व राज्यपाल थे। .

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फिदेल कास्त्रो

फिदेल ऐलेजैंड्रो कास्त्रो रूज़ (जन्म: 13 अगस्त 1926 - मृत्यु: 25 नवंबर 2016) क्यूबा के एक राजनीतिज्ञ और क्यूबा की क्रांति के प्राथमिक नेताओं में से एक थे, जो फ़रवरी 1959 से दिसम्बर 1976 तक क्यूबा के प्रधानमंत्री और फिर क्यूबा की राज्य परिषद के अध्यक्ष (राष्ट्रपति) रहे, उन्होंने फरवरी 2008 में अपने पद से इस्तीफा दिया। फ़िलहाल वे क्यूबा की कम्युनिस्ट पार्टी के प्रथम सचिव थे। 25 नवंबर 2016 को उनका निधन हो गया। वे एक अमीर परिवार में पैदा हुए और कानून की डिग्री प्राप्त की। जबकि हवाना विश्वविद्यालय में अध्ययन करते हुए उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरूआत की और क्यूबा की राजनीति में एक मान्यता प्राप्त व्यक्ति बन गए। उनका राजनीतिक जीवन फुल्गेंकियो बतिस्ता शासन और संयुक्त राज्य अमेरिका का क्यूबा के राष्ट्रहित में राजनीतिक और कारपोरेट कंपनियों के प्रभाव के आलोचक रहा है। उन्हें एक उत्साही, लेकिन सीमित, समर्थक मिले और उन्होंने अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने मोंकाडा बैरकों पर 1953 में असफल हमले का नेतृत्व किया जिसके बाद वे गिरफ्तार हो गए, उन पर मुकदमा चला, वे जेल में रहे और बाद में रिहा कर दिए गए। इसके बाद बतिस्ता के क्यूबा पर हमले के लिए लोगों को संगठित और प्रशिक्षित करने के लिए वे मैक्सिको के लिए रवाना हुए.

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फ्रांसिस बेकन

फ्रांसिस बेकन (1561-1626) अंग्रेज राजनीतिज्ञ, दार्शनिक और लेखक था। रानी एलिज़बेथ के राज्य में उसके परिवार का बड़ा प्रभाव था। कैंब्रिज और ग्रेज़ इन में शिक्षा प्राप्त की। 1577 में वह फ्रांस स्थित अंग्रेजी दूतावास में नियुक्त हुआ, किंतु पिता सर निकोलस बेकन की मृत्यु के पश्चात् 1579 में वापस लौट आया। उसने वकालत का पेशा अपनाने के लिए कानून का अध्ययन किया। प्रारंभ से ही उसकी रुचि सक्रिय राजनीतिक जीवन में थी। 1584 में वह ब्रिटिश लोकसभा का सदस्य निर्वाचित हुआ। संसद की, जिसमें वह 1614 तक रहा, कार्यप्रणाली में उसका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। समय समय पर वह महत्वपूर्ण राजनीतिक प्रश्नों पर एलिज़बेथ को निष्पक्ष सम्मतियाँ देता रहा। कहते हैं, अगर उसकी सम्मतियाँ उस समय मान ली गई होतीं तो बाद में शाही और संसदीय अधिकारों के बीच होनेवाले विवाद उठे ही न होते। सब कुछ होते हुए भी उसकी योग्यता का ठीक ठीक मूल्यांकन नहीं हुआ। लार्ड बर्ले ने उसे अपने पुत्र के मार्ग में बाधक मानकर सदा उसका विरोध किया। रानी एलिज़ाबेथ ने भी उसका समर्थन नहीं किया क्योंकि उसने शाही आवश्यकता के लिए संसदीय धनानुदान का विरोध किया था। 1592 के लगभग वह अपने भाई एंथोनी के साथ अर्ल ऑव एसेक्स का राजनीतिक सलाहकार नियुक्त हुआ। किंतु 1601 में, जब एसेक्स ने लंदन की जनता को विद्रोह के लिए भड़काया तो बेकन ने रानी के वकील की हैसियत से एसेक्स को राजद्रोह के अपराध में दंड दिलाया। .

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फ्रांस्वा बर्नियर

फ्रांस्वा बर्नियर (अंग्रेजी:François Bernier) फ्रांस का निवासी था। वह एक चिकित्सक, राजनीतिक दार्शनिक तथा एक इतिहासकार था। वह मुगल काल में अवसरों की तलाश में १६५६ ई. भारत आया था। वह १६५६ ई. से १६६८ ई. तक भारत में बारह वर्ष तक रहा और मुग़ल-दरबार से घनिष्ठ सम्बन्ध बनाए रखे। प्रारम्भ में उसने मुग़ल सम्राट शाहजहाँ के ज्येष्ठ पुत्र दाराशिकोह के चिकित्सक के रूप में कार्य किया। बाद में एक मुग़ल अमीर दानिशमन्द खान के पास कार्य किया था। .

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फ्रेडरिक एंगेल्स

फ्रेडरिक एंगेल्स (२८ नवंबर, १८२० – ५ अगस्त, १८९५ एक जर्मन समाजशास्त्री एवं दार्शनिक थे1 एंगेल्स और उनके साथी साथी कार्ल मार्क्स मार्क्सवाद के सिद्धांत के प्रतिपादन का श्रेय प्राप्त है। एंगेल्स ने 1845 में इंग्लैंड के मजदूर वर्ग की स्थिति पर द कंडीशन ऑफ वर्किंग क्लास इन इंग्लैंड नामक पुस्तक लिखी। उन्होंने मार्क्स के साथ मिलकर 1848 में कम्युनिस्ट घोषणापत्र की रचना की और बाद में अभूतपूर्व पुस्तक "पूंजी" दास कैपिटल को लिखने के लिये मार्क्स की आर्थिक तौर पर मदद की। मार्क्स की मौत हो जाने के बाद एंगेल्स ने पूंजी के दूसरे और तीसरे खंड का संपादन भी किया। एंगेल्स ने अतिरिक्त पूंजी के नियम पर मार्क्स के लेखों को जमा करने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई और अंत में इसे पूंजी के चौथे खंड के तौर पर प्रकाशित किया गया। .

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बनारसी दास गुप्ता

बनारसी दास गुप्ता (जन्म- 5 नवम्बर 1917, हरियाणा; मृत्यु- 29 अगस्त 2007) एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, राजनीतिज्ञ, और समाज सेवी थे। वे 1 दिसम्बर 1975 से 30 अप्रैल 1977 तक तथा पुनः 22 मई 1990 से 12 जुलाई 1990 तक हरियाणा राज्य के मुख्यमंत्री रहे। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी होते हुए सामाजिक, राजनीतिक एवं सार्वजनिक जीवन को अपने अंदाज में जिया। बनारसी दास गुप्ता हिन्दी भाषा के पक्षधर और यथार्थवादी आदर्श जननायक थे। उन्होंने राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता को मजबूत बनाकर हरियाणा की प्रगति में अपना बहुमूल्य योगदान दिया था। आपनेने 'अपना देश', 'हरियाणा केसरी' और 'हरियाणा कांग्रेस पत्रिका' के द्वारा राजनैतिक जागृति तथा समाज सुधार के क्षेत्र में योगदान किया। .

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बनवारीलाल बैरवा

बनवारीलाल बैरवा एक भारतीय राजनीतिज्ञ तथा पूर्व राजस्थान के उप मुख्यमंत्री है। वे टोँक लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र से सांसद रह चुके है। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राजनेता है। .

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बनगाँव (बिहार )

बनगाँव भारत के बिहार राज्य के सहरसा जिले के पश्चिम मे अवस्थित एक गाँव है जिसकी पहचान सदियों से रही है। जनसँख्या और क्षेत्रफल के हिसाब से ये गाँव ना सिर्फ राज्य के बल्कि देश के सबसे बड़े गांवों मे एक हैं। २००१ की जनगणना के मुताबिक़ इस गाँव की आबादी ६०००० है हालांकि पिछले दशक जनसख्या मे बढोत्तरी को ध्यान मे रखते हुए ये संख्या वर्तमान मे ७००००-७५००० के मध्य मे हो सकती है। यह गाँव कोसी प्रमंडल के कहरा प्रखंड के अंतर्गत आता है। इस गाँव से तीन किलोमीटर पूर्व मे बरियाही बाजार, आठ किलोमीटर पश्चिम मे माँ उग्रतारा की पावन भूमि महिषी और उत्तर मे बिहरा गाँव अवस्थित है। इस गाँव मे तीन पंचायतें हैं। हर पंचायत के एक मुखिया हैं। सरकार द्वारा समय समय पर पंचायती चुनाव कराये जातें है। इन्ही चुनावों से हर पंचायत के सदस्यों का चुनाव किया जाता है। वक्त के हर पड़ाव पर इस गाँव का योगदान अपनी आंचलिक सीमा के पार राज्य, देश और दुनिया को मिलता रहा है। इन योगदानों मे लोक शासन, समाज सेवा, साहित्य, पत्रकारिता, राजनीति, देशसेवा और भक्ति मे योगदान प्रमुख हैं। भक्ति और समाजसेवा के ऐसे की एक स्तंभ, संत लक्ष्मीनाथ गोसाईं, जिन्होंने इस गाँव को अपनी कर्मभूमि बनाई, को लोग भगवान की तरह पूजते है। उनका मंदिर गाँव के प्रमुख दार्शनिक स्थलों मे से एक है। गाँव के बोलचाल की भाषा मैथिली है और यहाँ हिंदू तथा इस्लाम धर्मों को माननेवाले सदियों से आपसी सामंजस्य और धार्मिक सहिष्णुता से साथ रहते हैं। .

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बर्ट्रैंड रसल

बर्ट्रेंड रसेल बर्ट्रेंड रसेल (18 मई 1872 - 3 फ़रवरी 1970) अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त ब्रिटिश दार्शनिक, गणितज्ञ, वैज्ञानिक, शिक्षाशास्त्री, राजनीतिज्ञ, समाजशास्त्री तथा लेखक थे। .

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बर्दिश चग्गर

बर्दिश चग्गर (जन्म: 6 अप्रैल, 1980), एक भारतीय मूल की कनाडाई राजनीतिज्ञ हैं तथा वर्तमान में कनाड़ा सरकार में लघु उद्योग एवं पर्यटन मंत्री है। 19 अगस्त, 2016 को वे कनाडा के ‘हाउस ऑफ कामन्स’ में नई सरकार की सदन की नेता नामित हुईं। वे इस पद पर पहुंचने वाली पहली महिला हैं जो कि अल्पसंख्यक सिख समुदाय की सदस्य हैं। चग्गर ने सदन के नेता डोमिनिक लेब्लांक का स्थान लिया है। वे 19 भारतीयों में से एक हैं जिन्होंने गतवर्ष कनाडा में चुनाव जीते थे। वॉटरलू क्षेत्र में जन्मी और पली-बढ़ीं चग्गर ने युनिवर्सिटी ऑफ वॉटरलू से शिक्षा हासिल की है, जहां वह यंग लिबरल्स की अध्यक्ष भी रही थीं। उन्होने 2013 में टड्रो के चुनाव अभियान में स्वयंसेवक के रूप में भी काम किया था। .

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बहुराष्ट्रीय कंपनियां

बहुराष्ट्रिय कंपनियाँ/निगम यह हैं जो एक संगठन का मालिक हैं या अपने देश की तुलना मे एक या एक से अधिक देशों में अन्य वस्तुओं या सेवाओं के उत्पादन को नियंत्रित करता हैं। इसे अंतरराष्ट्रिय निगम या एक राज्यविहीन के रूप में भेजा जा सकता हैं। बहुराष्ट्रिय कंपनियँ अपने देश के अलावा कम से कम एक देश में अन्य सुविधाएँ और अन्य संपत्ति होती हैं। ऐसी कंपनियों के विभिन्न देशों में कार्यालयों या/और कारखानों हैं और आमतौर पर एक केंद्रीकृत प्रधान कार्यालय होता हैं जहाँ पर वे वैश्विक प्रबंधन का समन्वय करते हैं। .

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बाबूलाल वर्मा

बाबूलाल वर्मा एक भारतीय राजनीतिज्ञ तथा वर्तमान राजस्थान सरकार में खाद्य आपूर्ति, उपभोक्ता मामले मंत्री है। वे राजस्थान विधानसभा में केशोरायपाटन से विधायक है। वे भारतीय जनता पार्टी के राजनेता है। .

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बाहुबली: द बिगनिंग (2015)

बाहुबली तेलुगू और तमिल भाषाओं में बनी एक भारतीय फ़िल्म है। यह हिन्दी, मलयालम व कुछ विदेशी भाषाओं में भी बनी है तथा इसे 10 जुलाई 2015 को सिनेमाघरों में दिखाया गया। इसे एस॰एस॰ राजामौली ने निर्देशित किया है। प्रभास, राणा डग्गुबती, अनुष्का शेट्टी और तमन्ना ने मुख्य किरदार निभाए हैं। इसमे रम्या कृष्णन, सत्यराज, नासर, आदिवि सेश, तनिकेल्ल भरनी और सुदीप ने भी कार्य किया है। फ़िल्म की कुछ खास बातों में से एक रही इस फिल्म में चित्रित कालकेय कबीले द्वारा बोली जाने वाली किलिकिलि नामक एक कृत्रिम भाषा जिसका निर्माण मधन कर्की ने लगभग 750 शब्दों और 40 व्याकरण के नियमों द्वारा किया। भारतीय फ़िल्म के इतिहास में यह पहली बार हुआ है, जब किसी फ़िल्म के लिए एक नई भाषा का निर्माण किया गया हो। .

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बांटो और राज करो

राजनीति तथा समाजविज्ञान में 'बांटो और राज करो' (divide and rule जो लैटिन के divide et impera से व्युत्पन्न है) राजनैतिक, सैनिक एवं आर्थिक रणनीतियों का समुच्चय है जो शक्ति हासिल करने तथा उसे बनाए रखने के लिए प्रयोग की जाती हैं। इसे 'बांटो और जीतो' (divide and conquer) भी कहते हैं। इस नीति के तहत मौजूद शक्तियों को बांटकर छोटा करा दिया जाता है और इनको एक होने से रोकने के सतत प्रयत्न किये जाते हैं। अंग्रेजों ने भारत को गुलाम बनाने के लिए तथा तत्पश्चात लंबे समय तक गुलाम बनाये रखने के लिए इसका भरपूर उपयोग किया। इसके अलावा इतिहास में इस नीति के सफल क्रियान्वयन के उदाहरण भरे पड़े हैं। .

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बांग्लादेश की राजनीति

बांग्लादेश में राजनीति संविधान, में दिए गए संसदीय, प्रतिनिधित्व वादी लोकतांत्रिक, गणतांत्रिक प्रणाली के अंतर्गत होती है जिसके अनुसार: राष्ट्रपति बांग्लादेश के राष्ट्राध्यक्ष एवं बांग्लादेश के प्रधानमंत्री, सरकार एवं एक बहुदलीय जनतांत्रिक प्रणाली के प्रमुख होते हैं। कार्यकारी शक्तियाँ, बांग्लादेश की सरकार के अधिकारक्षेत्र के अंतर्गत आती हैं, एवं विधाई शक्तियां सरकार और संसद दोनों पर न्योछावर की गई हैं। इसके अलावा, बांग्लादेश में एक स्वतंत्र श्रेणीबद्ध न्यायपालिका भी है, जिसके शिखर पर बांग्लादेश की सर्वोच्च न्यायालय है। बांग्लादेश के संविधान को सन 1972 में लिखा गया था और तब से लेकर आज तक इसमें कुल 16 संशोधन किए गए हैं। .

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बिंदास न्यूज़

बिंदास न्यूज़ (Bindass News or Bindass.org) हिन्दी भाषा मे मध्य प्रदेश से प्रकाशित होने वाला एक ऑनलाइन और प्रिंट समाचार पत्र हैं। इस ऑनलाइन न्यूज़ पोर्टल पर देश-विदेश के विभिन्न प्रकार के खबरों का समावेश होता हैं, जिनमें व्यवसाय, राजनीति, खेल-जगत और मनोरंजन इत्यादि श्रेणियों की खबरों को प्रकाशन होता हैं। ये कम समय में ही मध्यप्रदेश का एक लोकप्रिय हिंदी समाचार पत्र के रूप में उभरा हैं। .

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बजरंग बहादुर सिंह

राजा बजरंग बहादुर सिंह (१९०५-१९७३) राजनीतिज्ञ एवं स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी थे। वे हिमाचल प्रदेश के उपराज्यपाल व अवध की तालुकदारी रियासत भदरी (वर्तमान में, प्रतापगढ़ जिला में) के राजा थे। वे महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन में सक्रिय रहे। .

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ब्राह्मण

ब्राह्मण का शब्द दो शब्दों से बना है। ब्रह्म+रमण। इसके दो अर्थ होते हैं, ब्रह्मा देश अर्थात वर्तमान वर्मा देशवासी,द्वितीय ब्रह्म में रमण करने वाला।यदि ऋग्वेद के अनुसार ब्रह्म अर्थात ईश्वर को रमण करने वाला ब्राहमण होता है। । स्कन्दपुराण में षोडशोपचार पूजन के अंतर्गत अष्टम उपचार में ब्रह्मा द्वारा नारद को द्विज की उत्त्पत्ति बताई गई है जन्मना जायते शूद्रः संस्कारात् द्विज उच्यते। शापानुग्रहसामर्थ्यं तथा क्रोधः प्रसन्नता। ब्राह्मण (आचार्य, विप्र, द्विज, द्विजोत्तम) यह वर्ण व्‍यवस्‍था का वर्ण है। एेतिहासिक रूप हिन्दु वर्ण व्‍यवस्‍था में चार वर्ण होते हैं। ब्राह्मण (ज्ञानी ओर आध्यात्मिकता के लिए उत्तरदायी), क्षत्रिय (धर्म रक्षक), वैश्य (व्यापारी) तथा शूद्र (सेवक, श्रमिक समाज)। यस्क मुनि की निरुक्त के अनुसार - ब्रह्म जानाति ब्राह्मण: -- ब्राह्मण वह है जो ब्रह्म (अंतिम सत्य, ईश्वर या परम ज्ञान) को जानता है। अतः ब्राह्मण का अर्थ है - "ईश्वर का ज्ञाता"। सन:' शब्द के भी तप, वेद विद्या अदि अर्थ है | निरंतारार्थक अनन्य में भी 'सना' शब्द का पाठ है | 'आढ्य' का अर्थ होता है धनी | फलतः जो तप, वेद, और विद्या के द्वारा निरंतर पूर्ण है, उसे ही "सनाढ्य" कहते है - 'सनेन तपसा वेदेन च सना निरंतरमाढ्य: पूर्ण सनाढ्य:' उपर्युक्त रीति से 'सनाढ्य' शब्द में ब्राह्मणत्व के सभी प्रकार अनुगत होने पर जो सनाढ्य है वे ब्राह्मण है और जो ब्राह्मण है वे सनाढ्य है | यह निर्विवाद सिद्ध है | अर्थात ऐसा कौन ब्राह्मण होगा, जो 'सनाढ्य' नहीं होना चाहेगा | भारतीय संस्कृति की महान धाराओं के निर्माण में सनाढ्यो का अप्रतिभ योगदान रहा है | वे अपने सुखो की उपेक्षा कर दीपबत्ती की तरह तिलतिल कर जल कर समाज के लिए मिटते रहे है | .

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बूटा सिंह

सरदार बूटा सिंह एक भारतीय राजनीतिज्ञ है। वे पूर्व में भारत के गृह मंत्री थे तथा बिहार के राज्यपाल के पद पर रह चुके है। वे भारत के राजस्थान राज्य के जालौर लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र से चार बार सांसद रहे। .

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बूर्जुआ

साम्यवाद विचारधारा के संस्थापक कार्ल मार्क्स ने समाज में बूर्ज़वाज़ी वर्ग की भूमिका पर बहुत लिखा बूर्जुआ (Bourgeoisie) समाजशास्त्र, राजनीति और अर्थशास्त्र में मध्य वर्ग से अधिक धनवान श्रेणी को कहा जाता है और इस शब्द का प्रयोग बाएँ की राजनीति के सन्दर्भ में अधिक होता है। यह मूल रूप से फ़्रांसीसी भाषा का शब्द है। यूरोप में १८वीं सदी में इस वर्ग को पूँजीपति और पूँजी से सम्बंधित संस्कृति पर नियंत्रण रखने वाला समझा जाता था। .

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बेगाराम चौहान

बेगाराम चौहान एक भारतीय राजनीतिज्ञ तथा पूर्व गंगानगर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से सांसद रह चुके थे। वे भारतीय जनता पार्टी के राजनेता थे। वो रायसिंहनगर विधानसभा क्षेत्र से विधायक भी रहे। .

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बे्रन्डा बुत्तनर

बे्रन्डा बुत्तनर (22 मई, 1961 – 20 फरवरी, 2017) एक वरिष्ठ व्यापार संवाददाता और बैल और भालू, फॉक्स समाचार चैनल पर मेजबान थीं । वह अक्सर यॉर वर्ल्ड विद नील कावुतो में भी  आती थीं।  बुत्तनर का जन्म सैन फ्रांसिस्को, कैलिफोर्निया में हुआ। उन्होंने हार्वर्ड विश्वविद्यालय से 1983 में एक स्नातक की डिग्री, सामाजिक अध्ययन में  स्नातक किया। उसके बाद उन्होंने रोड्स विद्वान की तरह बल्लीओल कॉलेज, ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय, इंग्लैंड में दो साल गुजारे, जहां पर उन्होंने उच्च सम्मान के साथ स्नातक की उपाधि प्राप्त की और एक बी. ए., राजनीति और अर्थशास्त्र में प्राप्त की।  अपनी पढ़ाई ऑक्सफोर्ड में पूरी करने के बाद, बुत्तनर रेनो, नेवादा में रहने के लिए चली गयीं, जहां उन्होंने अपना टीवी कैरियर, एनबीसी सहबद्ध KCRL-टीवी पर शुरू करा।  वह चक्र विश्व पत्रिका, एक उत्साही मोटर साइकिल प्रकाशन, में एक पूर्व फीचर संपादक थीं।  फॉक्स समाचार से पहले, बुत्तनर ने सीएनबीसी का पैसे क्लब  में मेज़बानी की हैऔर एक वाशिंगटन संवाददाता के रूप में 1990 से 1993 और सामान्य संवाददाता 1995 से 1998 केबल आउटलेट के लिए सेवा की है। उन्हें अपने काम के लिए कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया, जिनमें एक केबल इक्का पुरस्कार 1996 में सबसे अच्छा व्यापार प्रोग्रामिंग (द मनीक्लब)  के लिए , और एक राष्ट्रीय बिगुल पुरस्कार 1990 में सबसे अच्छा समाचार कहानी के लिए, भी शामिल हैं। इसके अलावा, उनके व्यक्तिगत वित्त में लिखे लेख लोकप्रिय प्रकाशनों जैस द न्यूयॉर्क टाइम्स और देवियों होम जर्नल  में प्रकाशित किये गए हैं। वह रिजवुड, न्यू जर्सी की निवासी थीं। उनकी 55 साल की उम्र में 20 फरवरी 2017 को, कैंसर से मृत्यू हुई। .

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बीरबल राम

बीरबल राम एक भारतीय राजनीतिज्ञ तथा पूर्व श्रीगंगानगर लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र से सांसद है। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस दल के राजनेता है। .

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बी॰ टी॰ रणदिवे

भालचंद्र त्र्यंबक रणदिवे (19 दिसम्बर 1904 - 6 अप्रैल, 1990), एक भारतीय राजनीतिज्ञ और कम्युनिस्ट लीडर थे। उन्होंने 1928 के बाद से, वह भारत की कम्युनिस्ट पार्टी से काम करना शुरू किया। मुंबई कपड़ा मिल वर्कर्स यूनियन और रेलवे कर्मचारियों के कार्यकर्ताओं के संघ के एक प्रमुख नेता थे। श्रेणी:भारतीय राजनीतिज्ञ श्रेणी:१९९० में निधन.

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भाऊराव देवाजी खोब्रागडे

भाऊराव देवाजी खोब्रागडे (२५ सितम्बर १९२५ - २३ अप्रैल १९८४) भारतीय भारतीय रिपब्लिकन पार्टी के राजनीतिज्ञ थे। वे महाराष्ट्र से थे और पहले पेशे से वकील थे। वे तीन सत्रों तक राज्य सभा के सदस्य रहे; ३ अप्रैल १९५८ से २ अप्रैल १९६४ तक, ३ अप्रैल १९६६ से २ अप्रैल १९७२ तक, और फिर ३ अप्रैल १९७८ से २ अप्रैल १९८४ तक। वे १७ दिसम्बर १९६९ से २ अप्रैल १९७२ तक राज्य सभा के उपाध्यक्ष रहे। .

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भारतीय राष्ट्रवाद

२६५ ईसापूर्व में मौर्य साम्राज्य भारतीय ध्वज (तिरंगा) मराठा साम्राज्य का ध्वज राष्ट्र की परिभाषा एक ऐसे जन समूह के रूप में की जा सकती है जो कि एक भौगोलिक सीमाओं में एक निश्चित देश में रहता हो, समान परम्परा, समान हितों तथा समान भावनाओं से बँधा हो और जिसमें एकता के सूत्र में बाँधने की उत्सुकता तथा समान राजनैतिक महत्त्वाकांक्षाएँ पाई जाती हों। राष्ट्रवाद के निर्णायक तत्वों मे राष्ट्रीयता की भावना सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण है। राष्ट्रीयता की भावना किसी राष्ट्र के सदस्यों में पायी जानेवाली सामुदायिक भावना है जो उनका संगठन सुदृढ़ करती है। भारत में अंग्रेजों के शासनकाल मे राष्ट्रीयता की भावना का विशेषरूप से विकास हुआ, इस विकास में विशिष्ट बौद्धिक वर्ग का महत्त्वपूर्ण योगदान है। भारत में अंग्रेजी शिक्षा के प्रसार से एक ऐसे विशिष्ट वर्ग का निर्माण हुआ जो स्वतन्त्रता को मूल अधिकार समझता था और जिसमें अपने देश को अन्य पाश्चात्य देशों के समकक्ष लाने की प्रेरणा थी। पाश्चात्य देशों का इतिहास पढ़कर उसमें राष्ट्रवादी भावना का विकास हुआ। इसका तात्पर्य यह नहीं है कि भारत के प्राचीन इतिहास से नई पीढ़ी को राष्ट्रवादी प्रेरणा नहीं मिली है किन्तु आधुनिक काल में नवोदित राष्ट्रवाद अधिकतर अंग्रेजी शिक्षा का परिणाम है। देश में अंग्रेजी शिक्षा प्राप्त किए हुए नवोदित विशिष्ट वर्ग ने ही राष्ट्रीयता का झण्डा उठाया। .

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भाई-भतीजावाद

भाई-भतीजावाद अथवा नेपोटिज़्म (Nepotism) दोस्तवाद के बाद आने वाली एक राजनीतिक शब्दावली है जिसमें योग्यता को नजर अन्दाज करके अयोग्य परिजनों को उच्च पदों पर आसीन कर दिया जाता है। नेप्टोइज्म शब्द की उत्पत्ति कैथोलिक पोप और बिशप द्वारा अपने परिजनों को उच्च पदों पर आसीन कर देने से हुई। बाद में इस धारणा को राजनीति, मनोरंजन,व्यवसाय और धर्म सम्बन्धी क्षेत्रों में भी बल मिलने लगा। .

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भावना

thumb भावना मूड, स्वभाव, व्यक्तित्व तथा ज़ज्बात और प्रेरणासे संबंधित है। अंग्रेजी शब्द 'emotion' की उत्पत्ति फ्रेंच शब्द émouvoir से हुई है। यह लैटिन शब्द emovere पर आधारित है जहां e- (ex - का प्रकार) का अर्थ है 'बाहर' और movere का अर्थ है 'चलना'.

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भगत सिंह कोश्यारी

भगत सिंह कोश्यारी भारत की राजनीति में उत्तर भारत का एक परिचित नाम है, जो भारतीय जनता पार्टी से सम्बधित एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं। वे उत्तराखण्ड राज्य के द्वितीय सफल मुख्यमन्त्री तथा उत्तराखण्ड विधानसभा में 2002 से 2007 तक विपक्ष के शीर्ष नेता रह चुके हैं। .

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भंवरलाल मेघवाल

भंवरलाल मेघवाल एक भारतीय राजनीतिज्ञ तथा राजस्थान सरकार के पूर्व शिक्षा मंत्री है। वे चुरु के सुजानगढ़ से विधायक रह चुके है। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राजनीतिज्ञ हैं। .

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भीमराव आम्बेडकर

भीमराव रामजी आम्बेडकर (१४ अप्रैल, १८९१ – ६ दिसंबर, १९५६) बाबासाहब आम्बेडकर के नाम से लोकप्रिय, भारतीय विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री, राजनीतिज्ञ और समाजसुधारक थे। उन्होंने दलित बौद्ध आंदोलन को प्रेरित किया और अछूतों (दलितों) के खिलाफ सामाजिक भेद भाव के विरुद्ध अभियान चलाया। श्रमिकों और महिलाओं के अधिकारों का समर्थन किया। वे स्वतंत्र भारत के प्रथम कानून मंत्री, भारतीय संविधान के प्रमुख वास्तुकार एवं भारत गणराज्य के निर्माताओं में से एक थे। आम्बेडकर विपुल प्रतिभा के छात्र थे। उन्होंने कोलंबिया विश्वविद्यालय और लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स दोनों ही विश्वविद्यालयों से अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट की उपाधियाँ प्राप्त की। उन्होंने विधि, अर्थशास्त्र और राजनीति विज्ञान के शोध कार्य में ख्याति प्राप्त की। जीवन के प्रारम्भिक करियर में वह अर्थशास्त्र के प्रोफेसर रहे एवम वकालत की। बाद का जीवन राजनीतिक गतिविधियों में बीता; वह भारत की स्वतंत्रता के लिए प्रचार और बातचीत में शामिल हो गए, पत्रिकाओं को प्रकाशित करने, राजनीतिक अधिकारों की वकालत करने और दलितों के लिए सामाजिक स्वतंत्रता की वकालत और भारत की स्थापना में उनका महत्वपूर्ण योगदान था। 1956 में उन्होंने बौद्ध धर्म अपना लिया। 1990 में, उन्हें भारत रत्न, भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से मरणोपरांत सम्मानित किया गया था। आम्बेडकर की विरासत में लोकप्रिय संस्कृति में कई स्मारक और चित्रण शामिल हैं। .

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भीमराव अम्बेडकर (राजनीतिज्ञ)

भीमराव अम्बेडकर एक भारतीय राजनीतिज्ञ तथा पूर्व उत्तर प्रदेश विधान सभा मे लखना सीट से विधायक हैं | वे बहुजन समाज पार्टी के राजनीतिज्ञ हैं | .

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मदन भण्डारी

मदन भंडारी (27 जून 1952 - 16 मई 1993) एक नेपाली राजनीतिज्ञ तथा कम्यूनिष्ठ पार्टी के नेता है। वे वर्तमान नेपाल की राष्ट्रपति श्रीमती बिद्या देवी भंडारी के पति है। .

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मदन कौर

मदन कौर एक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से संबन्ध राजनीतिज्ञ है। वे पूर्व राजस्थान सरकार में मंत्री तथा राजस्थान विधानसभा में पचपदरा से विधायक है। बाड़मेर की प्रथम महिला राजनेत्री का गौरव भी इन्हें प्राप्त है तथा बाड़मेर की जिला प्रमुख भी रह चुकी है। .

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मदनलाल सैनी

मदनलाल सैनी एक भारतीय राजनीतिज्ञ तथा वर्तमान राजस्थान से राज्यसभा सांसद और राजस्थान भाजपा प्रदेशाध्यक्ष है | वे पूर्व राजस्थान विधान सभा में उदयपुरवाटी से विधायक थे | वे भारतीय जनता पार्टी के राजनेता हैं | .

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मदनलाल वर्मा 'क्रान्त'

मदनलाल वर्मा 'क्रान्त' (जन्म: २० दिसम्बर १९४७, शाहजहाँपुर) मूलत: हिन्दी के कवि तथा लेखक हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने उर्दू, संस्कृत तथा अंग्रेजी में भी कविताएँ लिखी हैं। क्रान्तिकारी राम प्रसाद 'बिस्मिल' के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाशित "सरफरोशी की तमन्ना" उनकी उल्लेखनीय पुस्तक है। "क्रान्तिकारी हिन्दी साहित्य में राष्ट्रीय चेतना" विषय पर अतिविशिष्ट अनुसन्धान के लिये उन्हें भारत सरकार ने वर्ष २००४ में हिन्दी साहित्य की "सीनियर फैलोशिप" प्रदान की। .

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मनोहर लाल खट्टर

मनोहर लाल खट्टर (जन्म: 5 मई 1954) भारत के हरियाणा राज्य के मुख्यमंत्री निर्वाचित हुए हैं। 26 अक्टूबर 2014 को उन्होने हरियाणा के 10वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की। मनोहर लाल खट्टर हरियाणा के पहले ऐसे मुख्यमंत्री है जो गैर जाट समुदाय से आते हैं, 18 वर्ष बाद वे इस पद पर विराजमान होने वाले पहले गैर जाट नेता हैं। वे भारतीय जनता पार्टी के सदस्य हैं तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक रह चुके हैं। हरियाणा विधान सभा में वे करनाल का प्रतिनिधित्व करते हैं। 2014 के हरियाणा विधान सभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की विजय के पश्चात् विधायक दल द्वारा उन्हें नेता चुना गया तथा मुख्यमंत्री पद हेतु नामित किया गया। .

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मनोज बाजपेयी

मनोज बाजपेयी भारतीय हिन्दी फ़िल्म उद्योग बॉलीवुड के एक जाने माने अभिनेता हैं। मनोज को प्रयोगकर्मी अभिनेता के रूप में जाना जाता है। उन्होने अपना फ़िल्मी कैरियर १९९४ मे शेखर कपूर निर्देशित अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त फ़िल्म बैंडिट क्वीन से शुरु किया। बॉलीवुड मे उनकी पहचान १९९८ मे राम गोपाल वर्मा निर्देशित फ़िल्म सत्या से बनी। इस फ़िल्म ने मनोज को उस दौर के अभिनेताओं के समकक्ष ला खङा किया। इस फ़िल्म के लिये उनन्हे सर्वश्रेष्ठ सह-अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हुआ। .

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मरयम नवाज़

मरयम नवाज़ पाकिस्तान की एक कार्यकर्ता, राजनीतिज्ञ और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ की बेटी है। मरयम का जन्म लाहौर, पंजाब, पाकिस्तान में हुआ। अपनी शिक्षा भी उसने वहीं से ली और स्नातकोत्तर पंजाब विश्वविद्यालय, लाहौर से की। .

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महाभोज

महाभोज मन्नू भंडारी द्वारा लिखा गया एक हिंदी उपन्यास है। उन्यास में अपराध और राजनीति के गठजोड़ का यथार्थवादी चित्रण किया गया है। .

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महारानी दिव्या सिंह

महारानी दिव्या सिंह भरतपुर राजघराने की महारानी है । वे महाराजा विश्वेन्द्र सिंह की पत्नी हैं। वे पूर्व भरतपुर से लोक सभा सांसद रह चुकी है। .

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महाराज सिंह कॉलेज, सहारनपुर

महाराज सिंह कॉलेज, सहारनपुर, सहारनपुर उत्तर प्रदेश का एक प्रमुख स्नातकोत्तर महाविद्यालय है जिसका यह नाम इसके संस्थापक बाबू महाराज सिंह, एडवोकेट के नाम पर दिया गया है जिन्होंने वर्ष १९५७ में सहारनपुर में इस कॉलेज की स्थापना की। विज्ञान विषय की विभिन्न शाखाओं - यथा - भौतिकी, रसायनशास्त्र, जन्तु विज्ञान, जीव विज्ञान, पादप विज्ञान आदि की स्नातकोत्तर कक्षाओं के अतिरिक्त यहां पर हिन्दी, अंग्रेज़ी, राजनीति शास्त्र आदि विषय की भी कक्षायें चलती हैं। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ के आधीन चल रहे महाराज सिंह कॉलेज, सहारनपुर में लगभग ४००० छात्र एवं छात्रायें अध्ययनरत हैं। .

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महाराजा ईश्वरीसिंह

इनकी असामयिक मृत्यु मात्र ३० साल की उम्र में दिनांक 12.12.

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महाविद्यालय (कॉलेज)

सेंट एन्सेल्म कॉलेज, एक अमेरिकी कॉलेज. वर्तमान में कॉलेज (लैटिन: कॉलीजियम (collegium)) शब्द का संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रयोग डिग्री प्रदान करने वाले तृतीयक शैक्षणिक संस्थान के लिये किया जाता है एवं अन्य अंग्रेजी भाषी देशों में निजी शैक्षणिक प्रणाली में द्वितीयक या माध्यमिक स्कूल के लिये किया जाता है। अधिक विस्तृत रूप में, यह किसी भी कॉलेज समूह का नाम हो सकता है, उदाहरण के लिए एक निर्वाचन कॉलेज, हथियारों का कॉलेज, कार्डिनलों का कॉलेज.

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महेंद्र सिंह मेवाड़

महाराणा महेंद्र सिंह मेवाड़ (जन्म २४ फरवरी १९४१) एक भारतीय राजनीतिज्ञ है जो मेवाड़ से संबधित है इस कारण इनको महाराणा भी माना जाता है। इन्होंने चित्तौड़गढ़ से लोकसभा के चुनाव लड़ा था जिसमें १९०००० वोटों से जीत मिली थी। .

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माधव सदाशिव गोलवलकर

माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर उपाख्य श्री गुरूजी (मराठी: माधव सदाशिव गोळवलकर; जन्म: १९ फ़रवरी १९०६ - मृत्यु: ५ जून १९७३) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वितीय सरसंघचालक तथा महान विचारक थे। उन्हें जनसाधारण प्राय: 'गुरूजी' के ही नाम से अधिक जानते हैं। .

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माया कोडनानी

माया कोडनानी गुजरात के नरोदा विधानसभा क्षेत्र से १२वीं विधान सभा के लिए निर्वाचित विधायक थी। वो तत्कालीन गुजरात सरकार में महिला एवं बाल विकास मंत्री थी। वो प्रथम महिला एवं विधायक हैं जिन्हें गोदरा कांड के बाद के दंगों में अपराधी पाया गया। किन्तु 20 अप्रैल 2018 को गुजरात हाई कोर्ट ने उनको निर्दोष घोषित कर दिया। सन्दर्भ श्रेणी:जीवित लोग श्रेणी:भारतीय राजनीतिज्ञ श्रेणी:चित्र जोड़ें श्रेणी:2002 की गुजरात हिंसा.

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माल्ती देवी

माल्ती देवी (अगस्त 5, 1968 –सितम्बर 6, 1999) एक राजनीतिज्ञा और समाज-सेविका थी। वह बिहार के नवादा चुनाव क्षेत्र से राष्ट्रीय जनता दल का सांसद रह चुकी हैं। .

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मिट रॉमनी

मिट्ठू रोमनी मिट्ठू रोमनी (पूरा नाम विलार्ड मिट रोमनी) (जन्म 12 मार्च 1947) एक अमेरिकी व्यवसायी और राजनीतिज्ञ है। वह 2003 से 2007 तक मैसाचुसेट्स का 70वाँ राज्यपाल था। 2012 के राष्ट्रपति पद के नामांकन के लिए वह रिपब्लिकन पार्टी का एक उम्मीदवार है। .

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मिठूसेन

मिठूसेन एक नामी कलाकार है। उन्होंने शांति निकेतन और ग्लासगो स्कूल ऑफ़ आर्ट से कला की पढ़ाई की है। .

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मित्रपक्ष

उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) नामक सैनिक मित्रपक्ष के एक समारोह में सदस्य राष्ट्रों के झंडों का प्रदर्शन हाथी पर बैठा सिन्धु राज्य का नरेश जयद्रथ कौरव नहीं था, लेकिन उनका जीजा होने के नाते महाभारत के युद्ध में उनके साथ मित्रपक्ष में पांडवों के ख़िलाफ़ लड़ा मित्रपक्ष (अंग्रेज़ी: Allies, ऐलाइज़​) उन व्यक्तियों, दलों, संस्थाओं या राष्ट्रों को कहते हैं जो किसी सांझे ध्येय के लिए एक-दूसरे से सहयोग करते हैं। यह ज़रूरी नहीं है कि उनमें आपस में कोई लिखित समझौता हो या वे किसी विधि से आपसी सहयोग करने के लिए बद्ध हों।, रफ़्तार शब्दकोष, Accessed 01 जुलाई 2012,...

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मिस्बाह-उल-हक़

मिस्बाह-उल-हक़ (Misbah-ul-Haq Khan Niazi/مصباح الحق خان نیازی) (जन्म २८ मई १९७४,मिंयावाली,पंजाब,पाकिस्तान) एक पूर्व प्रोफेशनल क्रिकेट खिलाड़ी है जो पाकिस्तान क्रिकेट टीम की ओर से खेलते थे। साथ मिस्बाह वर्तमान में पाकिस्तान टीम के टेस्ट क्रिकेट प्रारूप में कप्तान भी है। इनके अलावा २०१५ क्रिकेट विश्व कप तक मिस्बाह टीम के एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय में भी कप्तान थे लेकिन बाद में क्रिकेट के अलविदा कह दिया और इनकी जगह टीम के वनडे के लिए अज़हर अली को कप्तान चुना गया। ये मध्यम क्रम (middle-order) के बल्लेबाज है साथ ही बड़े शॉट्स के लिए भी जाने जाते है,जब टीम को बड़े हिट्स की जरूरत होती है तो इनका बल्ला खूब बोलता है। मिस्बाह ने एक दिवसीय क्रिकेट में एक भी शतक नहीं लगाया था इस कारण इनके नाम यह एक अजीब रिकॉर्ड कायम है कि बिना शतक सबसे ज्यादा रन बनाए। हालांकि मिस्बाह के नाम सबसे तेज टेस्ट क्रिकेट में अर्द्धशतक लगाने का रिकॉर्ड है। मिस्बाह-उल-हक़ के पास एमबीए की डिग्री भी है यानी मिस्बाह ने यूनिवर्सिटी ऑफ़ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी लाहौर,पाकिस्तान से एमबीए (मास्टर ऑफ़ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेटर) की पढ़ाई की थी। मिस्बाह का सम्बंध पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेट कप्तान इमरान ख़ान से भी है जो कि अभी एक राजनेता है। द टेलीग्राफ.

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मघा

मघा मघा नक्षत्र सूर्य की सिंह राशि में आता है। नक्षत्र स्वामी केतु है, इसकी महादशा 7 वर्ष की होती है। केतु को राहु का धड़ माना गया है, जबकि वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो केतु पृथ्वी का दक्षिण छोर है। केतु प्रधान होने से ऐसे जातक जिद्दी स्वभाव के होते हैं। इनसे आदेशात्मक दृष्टि से कार्य नहीं निकाला जा सकता है। इन्हें प्रेम से कहा जाए तो ये हर कार्य कर सकते हैं। इस नक्षत्र में जन्मे जातकों पर सूर्य व केतु के साथ-साथ लग्नानुसार प्रभाव होता है। मेष लग्न हो तो रा‍शि पंचम भाव में होगी। राशि स्वामी सूर्य होगा। सूर्य के साथ केतु की युति यदि पंचम भाव में हो तो ऐसे जातक विद्या में तेज होते हैं। इनकी संतान जिद्दी स्वभाव की व ऑपरेशन से भी हो सकती है। ये जुबान के पक्के होते हैं। यदि सूर्य लग्न में हो व केतु भी लग्न में हो तो उत्तम सफलता पाते हैं। प्रशासक राज्यमंत्री भी बन जाते हैं। लेकिन दांपत्य सुख में कहीं ना कहीं बाधा रहती है। वृषभ लग्न में सूर्य की राशि सिंह चतुर्थ भाव में होने से यदि नक्षत्र स्वामी भी चतुर्थ में हुआ तो जनता के बीच प्रसिद्ध होते हैं, मकान भूमि, भवन, माता का सुख उत्तम मिलता है। स्थानीय राजनीति में अधिक सफल होते हैं। .

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मुद्रास्फीतिजनित मंदी (स्टैगफ्लेशन)

अर्थशास्त्र में, अंग्रेजी शब्द स्टैगफ्लेशन उस स्थिति को दर्शाता है जब मुद्रास्फीति की दर और बेरोजगारी दर दोनों ही उच्च रहते हैं। यह एक देश के लिए आर्थिक रूप से एक मुश्किल स्थिति होती है, चूंकि, इस समय दोनों ही मुद्रास्फीति और आर्थिक aस्थिरता की समस्या एक साथ उत्पन्न होती हैं और कोई भी व्यापक आर्थिक नीति एक ही समय में इन समस्याओं पर एक साथ ध्यान केन्द्रित नहीं कर सकती है। दो शब्दों की ध्वनियों से मिलकर बने शब्द स्टैगफ्लेशन की उत्पत्ति के लिए आम तौर पर ब्रिटिश राजनीतिज्ञ लेन मैकलीओड को जिम्मेदार ठहराया जाता है, जिन्होंने 1965 में इस शब्द को वहां की संसद में दिए गए अपने एक भाषण के दौरान गढ़ा.

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मुर्ग़ी का खेल

मुर्ग़ी का खेल (chicken), जिसे बाज़-बटेर खेल (hawk-dove game) या बर्फ़ के टीले का खेल (snow-drift game) भी कहा जाता है, खेल सिद्धांत में दो प्रतिद्वंदियों के बीच होने वाला एक प्रकार का संघर्ष है। इसमें दोनों के बीच में एक ऐसी प्रतियोगिता शुरू हो जाती है जिसमें दोनों में से कोई भी पीछे नहीं हटना चाहता लेकिन किसी के भी न हटने पर दोनों को भारी हानि होती है। इसमें 'मुर्ग़ी' का नाम उस खेल से आया है जिसमें दो वाहन-चालक तेज़ी से अपने-अपने वाहन एक-दूसरे की तरफ़ दौड़ते हैं। दोनों में से एक को हार मानकर अलग मुड़ना होगा, वरना टकराव में दोनों की मौत भी हो सकती है। लेकिन जो भी पहले हट गया वह 'मुर्ग़ी', यानि बुज़दिल या डरपोक, माना जाएगा। यह 'मुर्ग़ी का खेल' वाला नाम राजनीति और अर्थशास्त्र में अधिक प्रयोग होता है। मसलन अक्टूबर १९६२ में हुए क्यूबाई मिसाइल संकट में सोवियत संघ और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ता गया और अगर कोई पीछे न हटता हो परमाणु प्रलय हो सकता था, लेकिन उसमें सोवियत संघ ने पीछे पाँव खींच लिए।Russell (1959) p. 30.

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मुला राम

मुला राम एक राजनीतिज्ञ तथा पूर्व जम्मू और कश्मीर सरकार में कैबिनेट मंत्री थे | वे जम्मू और कश्मीर विधानसभा में रायपुर-दोमाना व मर्ह विधानसभा से विधायक रह चुके हैं | .

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मुलायम सिंह यादव

मुलायम सिंह यादव (जन्म:22 नवम्बर, 1939) एक भारतीय राजनेता हैं जो उत्तर प्रदेश के तीन बार मुख्यमंत्री व केंन्द्र सरकार में एक बार रक्षा मन्त्री रह चुके है। वर्तमान में यह भारत की समाजवादी पार्टी के मार्गदर्शक हैं। .

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मुल्तानाराम बारुपाल

मुल्तानाराम बारुपाल एक भारतीय राजनीतिज्ञ तथा राजस्थान के जैसलमेर विधानसभा से पूर्व विधायक है। .

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मुहम्मद ताहिर उल-क़ादरी

मुहम्मद ताहिर उल-क़ादरी (Muhammad Tahir-ul-Qadri) एक पाकिस्तानी सूफ़ी विद्वान हैं जो पंजाब विश्वविद्यालय (पाकिस्तान) में अन्तराष्ट्रीय संवैधानिक क़ानून के भूतपूर्व प्रोफ़ेसर रह चुके हैं। जनवरी २०१३ में उन्होंने पाकिस्तान में वहाँ की सरकार हटाने का अभियान छेड़ दिया हालांकि वह स्वयं कनाडा की नागरिकता रखते हैं। वे अपने २०१० में जारी किये गए फ़तवा के लिए भी जाने जाते हैं जिसमें उन्होंने ठहराया कि आतंकवाद और आत्मघाती हमले दुष्ट और इस्लाम-विरुद्ध हैं और इन्हें करने वाली काफ़िर हैं। यह घोषणा तालिबान और अल-क़ायदा जैसे संगठनों की विचारधाराओं के ख़िलाफ़ समझी गई है।, Douglas M. Johnston Jr., pp.

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मूल्यमीमांसा

मूल्यमीमांसा (Axiology) दर्शन की एक शाखा है। मूल्यमीमांसा अंग्रेजी शब्द "एग्जियोलॉजी" का हिंदी रूपांतर है। "एग्जियोलॉजी" शब्द "एक्सियस" शब्द यूनानी शब्द "एक्सियस" और "लागस" का अर्थ मूल्य या कीमत है तथा "लागस" का अर्थ तर्क, सिद्धांत या मीमांसा है। अत: "एग्जियोलॉजी" या मूल्यमोमांसा का तात्पर्य उस विज्ञान से है। जिसके अंतर्गत मूल्य स्वरूप, प्रकार और उसकी तात्विक सत्ता का अध्ययन या विवेचन किया जाता है। किसी वस्तु के दो पक्ष हो सकते है-तथ्य और उसका मूल्य। तथ्य पर विचार करना उस वस्तु का वर्णन कहलाएगा और उसके मूल्य का निरूपण उसका गुणादषारण। मूल्य विषयक निर्णय वस्तु की किसी आदर्श से तुलना करके किसी व्यक्ति द्वारा उपस्थित किया जाता है। हमारे सभी अनुभवों में मूल्यों मापदंड ही होते हैं। सौंदर्यशास्त्र में सुंदर-असुंदर का मूल्यांकन, संगीत, साहित्य और कला में माधुर्य और सरसता का मूल्यांकन और धर्म में मूल्यों के संरक्षण का प्रयत्न तो सभी को स्वीकृत है किंतु साथ ही यह भी ध्यान देने की बात है कि आचारशास्त्र, समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, राजनीति, विज्ञान आदि में भी मूल्यों की समस्याओं पर ही विचार किया जाता है। मूल्यमीमांसा के अंतर्गत इन सभी शास्त्रों और विज्ञानों के मूल्यों का अलग विवेचन नहीं किया जाता वरन् इन सर्वव्यापी मूल्यों के स्वरूप और प्रकृति पर विचार किया जाता है। इस प्रकार आधुनिक युग में मूल्यमीमांसा दर्शन की एक शाखा बनकर द्रुत गति से पल्लवित हो रही है। मूल्य का तात्पर्य किसी मूल्य का भाव हो सकता है या उसका अभाव हो सकता है। इसके अतिरिक्त भाव या अभाव न होकर कोई मूल्य तटस्थ भी हो सकता है। "मूल्य" शब्द का प्रयोग इनमें से किसी भी स्थिति के लिये हो सकता है। इसलिये मूल्यमीमांसा को मूल्य का विज्ञान कहना अधिक युक्तिसंगत नहीं हे। फिर भी सामान्य रूप से कहा जा सकता है कि जिस प्रकार आचार शास्त्र का विवेचन सही और गलत पर केंद्रित रहता है वैसे ही मूल्यमीमांसा का विवेचन प्राय: अच्छे और बुरे से संबंधित होता है। पश्चिमी दर्शन में प्लेटो के प्रत्यय सिद्धांत के साथ मूल्यमीमांसा का उदय हुआ और अरस्तू के आचारशास्त्र, राजनीति और तत्वविज्ञान में उसका विकास हुआ। स्टोइक और एपीक्यूरियन लोगों ने जीवन के उच्चादर्श खोजे। ईसाई दार्शनिकों ने अरस्तू के उच्चतम मूल्य का ईश्वर से तादात्म्य दिखाने का प्रयत्न किया। आधुनिक दार्शनिकों ने स्वतंत्र रूप से विभिन्न मूल्यों का स्वरूप निर्धारण किया। कांट ने सौंदर्य और धर्म विषयक मूल्यों की सबसे प्रथम गहन विवेचना की। हीगेल के अध्यात्मवाद में आचार, कला और धर्म सर्वोपरि मान्य ठहराए गए। इन्हीं के समन्वय से निरपेक्ष प्रत्यय की उद्भावना होती है। 19वीं शताब्दी के विकासवादी सिद्धांत, समाजशास्त्र, मनोविज्ञान और अर्थशास्त्र के अंतर्गत मूल्यों की व्यावहारिक विवेचना की जाने लगी। उसके तात्विक स्वरूप के निरूपण और एकत्व की ओर उतना ध्यान नहीं दिया गया। नीत्शे ने इस अभाव की पूर्ति का प्रयत्न किया। ब्रेंटानों प्रेम को ही एकमात्र मूल्य मानता था। डब्ल्यू0 एम0 अरबन ने 20वीं शताब्दी में सबसे पहले मूल्यमीमांसा पर एक व्यवस्थित ग्रंथ (वेलूएशन, 1909) लिखा। समकालीन प्रमुख रचनाएँ, बी0 बोसांके की "दि प्रिंसिपल ऑव इंडीविजुएलटी ऐंड वेल्यू" (1912); डब्ल्यू0 आर0 सरले की "मारल वेल्यूज" (1918) और "दि आइडिया ऑव गॉड" (1921), एस0 एलेक्जेंडर की "स्पेस, टाइम एण्ड डाइटी"(1920), एन0 ह्वाइटमैन की "एथिके" (1926), आर0 वी0 पेरी की "जनरल थ्योरी ऑव वेल्यू" (1926) और जे0 लेयर्ड की "दि आइडिया ऑफ वेल्यू" आदि पुस्तकें है। मूल्यमीमांसा के अंतर्गत मुख्यत: मूल्य का स्वरूप, मूल्य के प्रकार, मूल्य का भाव सिद्धांत और मूल्य के तात्विक संस्तरण का अध्ययन किया जाता है। दार्शनिकों ने मूल्य के स्वरूप की अवधारणा विभिन्न प्रकार से की है। स्पिनोजा आदि ने उसी को मूल्य माना है जिससे किसी इच्छा की तृप्ति होती है। एपीक्यूरस, बेंथम, मीनांग आदि सुखवादी दर्शनिक सुख को ही मूल्य मानते हैं। मूल्य का स्वरूप पैरी की दृष्टि में अभिरूचि, मार्टीन्यू के विचार से वरीयता (प्रिफेरेंस), स्टाइक, कांट और रायस के लिये शुद्ध तर्कसंगत इच्छा, टी0 एच0 ग्रीन के लिये व्यक्तित्व के एकत्व का सामान्य अनुभव है; नीत्शे और अन्य उत्क्रांतिवादी उसी अनुभव को मूल्य मानते हैं जो जीवन के विकास में किसी प्रकार सहायक हो। कुछ दार्शनिक जैसे स्पिनोजा, लोट्ज या डीवी आदि फलवादी मूल्य को व्यक्तिगत मानते हैं। उसकी स्वतंत्र सत्ता नहीं है। वह तो व्यक्ति की रूचि, अरूचि और उसकी मानसिक स्थिति तथा आवश्यकताओं पर निर्भर करता है। इसके विपरीत लेयर्ड, मूर आदि मनीषी मूल्य को रूप, रस, गंध की भँाति विषयगत मानते हैं। एलेक्जेंडर की स्थिति इन दोनों मतों के मध्य में हे। व्यक्ति, जो मूल्य का अनुभव करता है और वस्तु जिसके मूल्य का अनुभव किया जाता है, दोनों के संबंध में ही मूल्य का अस्तित्व है। व्यक्ति और वस्तु के संबंध से पृथक् अथवा स्वतंत्र रीति से दो में से किसी एक में मूल्य की उपलब्धि नहीं हो सकती। ए0 जी0 आयर को तार्किक भाववादी दृष्टिकोण है, इसलिये वे मूल्य को अर्थहीन कहते हैं। मूल्य विभिन्न प्रकार के होते हैं। उनका कई प्रकार से विभाजन किया जा सकता है। प्राय: दार्शनिक अंतर्वर्ती और बहिर्वर्ती मूल्यों का भेद करते है। अंतर्वर्ती मूल्य का स्वतंत्र रूप से अपने लिये ही मूल्य होता है। इन मूल्यों को पाने का प्रयत्न इसलिये नहीं किया जाता कि उनके द्वारा किसी दूसरे उद्देश्य की पूर्ति हो सकती है। वस्तुत: इन मूल्यों को पा लेना ही अंतिम लक्ष्य होता है। बाह्यमूल्य अंतर्वर्ती मूल्यों की प्राप्ति के लिये एक साधन या यंत्र मात्र होते हैं। एक ओर ऐसे वेदांती हैं जिनका विश्वास है कि निर्गुण बाह्यरूप में अंतर्वर्ती मूल्य की ही अंतिम सत्ता है, उसके अतिरिक्त सभी बहिर्वर्ती मूल्य हैं जो भ्रांति मात्र है। दूसरी ओर ऐसे फलवादी हैं जो यंत्रवादी सिद्धांत (इंस्टØ मेंटलिज्म) का समर्थन करते हैं और अंतर्वर्ती मूल्यों का खंडन करते हैं। द्वैतवादी मूल्यमीमांसक अंतर्वर्ती और बहिर्वर्ती दोनों प्रकार के मूल्यों का अस्तित्व मानते हैं। एक शाश्वत होते है और दूसरे नश्वर अधिकांश दार्शनिक इसी सिद्धांत को थोड़े बहुत हेर फेर से स्वीकार करते हैं। कुछ अंतर्वर्ती मूल्यों को प्रधानता देते है और बहिर्वर्ती मूल्यों को उनके अधीनस्थ मानते हैं। कुछ लोग बहिर्वर्ती मूल्यों को प्रधानता देते हैं और अंतर्वर्ती मूल्यों को बहिर्वर्ती मूल्यों की उत्पत्ति या परिणाम मानते हैं। कुछ दार्शनिक (बाहम) ऐसे भी हैं जो सभी वस्तुओं में दोनों प्रकार के मूल्य अपरिहार्य रूप से मानते हैं। वे यह नहीं अस्वीकार करते कि कहीं एक की प्रधानता होती है तो कहीं दूसरे की। किंतु ऐसी कोई वस्तु नहीं है जिसमें शुद्ध अंतर्वर्ती या बिल्कुल बहिर्वर्ती मूल्य ही हों। सामान्य रूप से शुभ, सत्य, शिव, सुंदर और पवित्र ही अंतर्वर्ती मूल्य माने जाते हैं। कुछ लोग इनके साथ दैहिक कल्याण, संबंध, कार्य और क्रीड़ा को भी अंतर्वर्ती मूल्य मान लेते हैं। मांटेग के विचार से सत्य को सही रूप में मूल्य नहीं माना जा सकता, क्योंकि कुछ सत्य मूल्यहीन होता है और कुछ तटस्थ अर्थात् उसमें मूल्य होने न होने का प्रश्न ही नहीं होता। धार्मिक मूल्यों के संबंध में भी दार्शनिकों में मतभेद है। कुछ लोग उसे एक विशिष्ट प्रकार का मूल्य मानते हैं और कुछ लोग अन्य मूल्यों के प्रति एक विशिष्ट प्रकार के दृष्टिकोण को ही धार्मिक मूल्य समझते हैं। मूल्य का माप सिद्धांत मनोवैज्ञानिक हो सकता है और तार्किक भी। सुखवादी दार्शनिक मूल्य की माप सुखानुभूति से करते हैं। एरेस्टीपस व्यक्ति के सुख और बेंथम समाज के सुख का मूल्य को मापदंड मानते हैं। बेंथम ने ऐसे सुखगणक की खोज की थी जिसमें सुख की गहनता, स्थायित्व, निश्चितता, निकटत्व, उपयोगिता, पवित्रता व्यापकत्व आदि के अंक निर्धारित कर सुख को मापा जा सकता है। यह मूल्य के मापन का मनोवैज्ञानिक प्रयास है। मारटेन्यू और ब्रेंटानों अंतदृष्टि से मूल्य की माप संभव समझते हैं। कुछ अध्यात्मवादियों ने वस्तुगत आदर्श निश्चित कर रखे हैं और उन्हीं से तुलना करके मूल्यों का मापन करते हैं। कुछ दार्शनिक समष्टि और सामंजस्य में ही मूल्य का गुणावधारण उचित बतलाते हैं। प्रकृतिवादी दार्शनिक जैविक विकास और वातावरण से समंजन को मूल्य की माप मानते हें। जिस वस्तु, क्रिया या परिस्थिति में जीव का विकास अधिक द्रुत गति से होता है उसका अधिक मूल्य है इसके विपरीत जिनसे जीवन में बाधा उपस्थित होती है, उनको मूल्य नहीं दिया जाता। मूल्य का तात्विक संस्तरण निर्धारित करते समय चरमतत्व से उसका संबंध निश्चित किया जाता है। यदि मूल तत्व सत् है तो मूल्य का उससे क्या संबंध है? इस संबंध में मुख्यत: तीन सिद्धांत हैं---व्यक्तिवादी, तार्किक वस्तुवादी और तात्विक वस्तुवादी। व्यक्तिवादी मूल्य को मानवी अनुभव से संबद्ध और आश्रित मानते हैं। मूल्य व्यक्ति के मन की ही उत्पत्ति है। वस्तु से उसका संबंध नहीं है। व्यक्ति अपनी परितृप्ति के अनुसार वस्तु में मूल्य का आरोपण करता है। ""प्रियो-प्रिय उपेक्ष्यश्चेत्याकारा मणिग्रास्य:, सृष्टा जीवैरीशसृष्टं रूपं साधारणां मिषु"" (पंचदशी,4122) प्रिय, अप्रिय और उपेक्षा करने योग्य मणि के तीन आकार जीवरचित हैं तथा उसका साधारण मणिरूप ईश्वर निर्मित है। प्रिय, अप्रिय और उपेक्षा भाव व्यक्ति व्यक्ति में भिन्न होने के कारण निश्चय ही व्यक्ति के मन की रचनाएँ हैं। सुखवादी, भाववादी और प्रकृतिवादी भी इसी से मिलते-जुलते मतों का समर्थन करते हें। वस्तुवादी इस सिद्धांत का खंडन करते हैं। वे मूल्य को मानसिक रचना मात्र नहीं मानते हैं। मूल्य का वस्तु में स्वतंत्र अस्तित्व है। व्यक्ति उस मूल्य को पहिचाने न पहिचाने, फिर भी वह अपना अस्तित्व सुरक्षित रखता है। सभी वस्तुवादियों का एक मत नहीं हैं। कुछ वस्तुवादी मूल्य का तार्किक विश्लेषण करते हैं और तार्किक वस्तुवादी कहलाते हैं। कुछ वस्तुवादी तात्विक दृष्टि से मूल्य का निर्धारण करते हैं। वे तात्विक वस्तुवादी (मेटाफिजीकल आब्जेक्टिविस्ट) कहे जा सकते हैं। तार्किक वस्तुवादी मूल्य को मानस रचना न मानने के कारण उसे एक सार या द्रव्य मानते हैं। वह वस्तु में रहते हुए भी कोई ऐसी स्वतंत्र सत्ता नहीं रखता जो वस्तु या सत् पर कोई प्रभाव डाल सके या परिवर्तन कर सके। यहाँ सत् और मूल्य में स्पष्ट भेद रखा जाता है। तात्विक वास्तुवादी मूल्य की तात्विक यथार्थता स्वीकार करते हें और उस सत् का ही एक अंग मानते हैं। श्रेणी:दर्शन की शाखाएँ.

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मेगाडेथ

मेगाडेथ, सन् 1983 में गठित कैलिफ़ोर्निया के लॉस एंजिलिस स्थित एक अमेरिकी हेवी मेटल बैंड है। गिटारवादक/गायक डेव मुस्टेन और बासवादक डेविड एलेफ़सन द्वारा इसकी स्थापना की गई और मेटालिका से मुस्टेन की विदाई के बाद से इस बैंड ने बारह स्टूडियो एल्बम, छः लाइव एल्बम, दो EPs, छब्बीस एकल, बत्तीस संगीत वीडियो और तीन संकलन रिलीज़ किए हैं। अमेरिकी थ्रैश मेटल के चलन के अग्रणी के रूप में, मेगाडेथ ने सन् 1980 के दशक में अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त की और मेटालिका, स्लेयर और एंथ्रेक्स के साथ इसे भी एक "बिग फ़ोर ऑफ़ थ्रैश" के रूप में श्रेणीत किया गया जो थ्रैश मेटल की उप-शैली को निर्मित करने, विकसित करने और उन्हें लोकप्रिय बनाने के लिए विख्यात थे। मेगाडेथ की सदस्य-मंडली में कई बार परिवर्तन हुआ है जिसका कारण कुछ हद तक बैंड के कुछ सदस्यों द्वारा नशीले पदार्थों के सेवन करने की बुरी लत भी थी। सन् 1983 से 2002 तक मुस्टेन और एलेफ़सन इस बैंड के एकमात्र अनवरत सदस्य थे। संयम प्राप्त करने और एक स्थायी सदस्य-मंडली की स्थापना होने के बाद मेगाडेथ, एक-के-बाद-एक प्लैटिनम और स्वर्ण एल्बमों को रिलीज़ करता चला गया जिनमें सन् 1990 की प्लैटिनम-बिक्री के लैंडमार्क वाला रस्ट इन पीस और सन् 1992 का ग्रेमी मनोनीत बहु-प्लैटिनम काउंटडाउन टु एक्सटिंक्शन भी शामिल था। मुस्टेन के बाएं हाथ की नस में बहुत गंभीर चोट लगने के बाद मेगाडेथ सन् 2002 में तितर-बितर हो गया। हालांकि, व्यापक भौतिक चिकित्सा के बाद मुस्टेन ने सन् 2004 में बैंड का पुनर्गठन किया और द सिस्टम हैज़ फेल्ड रिलीज़ किया और उसके बाद सन् 2007 में युनाइटेड ऐबोमिनेशंस को रिलीज़ किया; इन एल्बमों ने ''बिलबोर्ड'' टॉप 200 के चार्ट पर क्रमशः #18 और #8 पर शुरुआत की.

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मेकियावेलियनिस्म

निकोलो मेकियवेली ओक्सवोर्ड अंग्रेजी शब्दकोश के अनुसार मेकियावेलियनिस्म का अर्थ "शासन कला में या सामान्य आचरण में चालाक और कपट होना" है। यह इताल्वि रजनयिक निकोलो मेकियवेलि के प्रसिद्ध किताब "द प्रिंस" के मध्यम से प्राप्त हुआ है। इस शब्द का समान उपयोग आधुनिक मनोविज्ञान में भी किया जाता है, जहां यह अंधेरे त्रय हस्तियों का वर्णन करता है। जो विशेषता से निंदक विश्वासों और व्यावहारिक नैतिकता के साथ जुड़े एक duplicitous पारस्परिक शैली है। "मेकियावेलियनिस्म" एक शब्द के रूप में पहली बार १६२६ को ओक्स्वोर्ड अंग्रेजी शब्द्कोश में प्रकाशित हुआ था। .

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मो. हारूण रशीद

मो.

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मोनटेक सिंह आहलूवालिया

मोनटेक सिंह आहलूवालिया (जन्म 24 नवंबर 1943) एक भारतीय अर्थशास्त्री हैं और पूर्व यूपीए सरकार के समय वे भारतीय योजना आयोग के उपाध्यक्ष थे, यह दर्जा मंत्रिमंडल के एक मंत्री के बराबर है। .

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यूटोपिया

लेफ्ट पेनल (द अर्थली पैराडाइज, गार्डन ऑफ ईडन), हिरोनमस बॉश के द गार्डेन ऑफ अर्थली डिलाइट्स. यूटोपिया एक आदर्श समुदाय या समाज के लिए एक नाम है जो कि 1516 में सर थॉमस मोर द्वारा लिखी गयी पुस्तक ऑफ द बैस्ट स्टेट ऑफ ए रिपब्लिक एण्ड ऑफ द न्यू आइलैण्ड यूटोपिए से लिया गया है जिसमें अटलांटिक महासागर के एक काल्पनिक टापू के एक बिल्कुल उत्कृष्ट लगने वाले सामाजिक-राजनीतिक-कानूनी तंत्र का वर्णन किया गया है। इस पद को सुविचारित समुदायों जिन्होने एक आदर्श समाज बनाने की कोशिश की और साहित्य में चित्रित काल्पनिक समाज दोनों का वर्णन करने के लिए उपयोग किया जाता रहा है। इसने दूसरी अवधारणाओं को जन्म दिया, जिसमें सबसे प्रमुख है आतंक राज्य.

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योगेन्द्र यादव

योगेन्द्र सिंह यादव एक भारतीय सामाजिक वैज्ञानिक, चुनाव विश्लेषक हैं ये आम आदमी पार्टी के राजनीतिज्ञ रह चुके हैं। योगेन्द्र दिल्ली स्थित सीएसडीएस के वरिष्ठ शोध फेलो भी रहे हैं। .

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रत्ना भगवानदास चावला

रत्ना भगवानदास चावला एक पाकिस्तानी राजनीतिज्ञ तथा पूर्व पाकिस्तान की सेनेट की सीनेटर हैं | वे प्रथम हिन्दू महिला पाकिस्तान की सेनेट की सीनेटर थी | .

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रमनलाल वोरा

रमनलाल वोरा (जन्म 26 सितम्बर 1952) एक भारतीय राजनीतिज्ञ तथा वर्तमान गुजरात विधान सभा के अध्यक्ष हैं | वे भारतीय जनता पार्टी के राजनेता हैं | .

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रमेश ठाकुर

रमेश ठाकुर या रमेश ठाकुर पत्रकार (जन्म नाम रमेश सिंह) एक भारतीय वरिष्ठ पत्रकार, लेखक और ब्लॉगर है। जिनका जन्म १० अगस्त १९८३ को पीलीभीत, उत्तर प्रदेश, भारत में हुआ था। इन्होंने अपने पत्रकारिता कैरियर भारत के कई जाने माने समाचार पत्रों के लिए कार्य किया। .

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रमेश कुमार वांकवानी

रमेश कुमार वांकवानी एक पाकिस्तानी राजनीतिज्ञ है जो वर्तमान में पाकिस्तान की राष्ट्रीय सभा का सदस्य है, पाकिस्तान मुस्लिम लीग .

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राणा चन्द्र सिंह

राणा चन्द्र सिंह पाकिस्तान की अमरकोट रियासत के शासक थे | वे पाकिस्तानी राजनीतिज्ञ तथा पूर्व मंत्री भी रह चुके हैं | .

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राधाबाई सुबरायण

राधाबाई सुबरायण एक भारतीय राजनीतिज्ञ, महिला अधिकार कार्यकर्ता और समाज सुधारक थीं। उन्होंने अखिल भारतीय महिला सम्मेलन के एक सदस्य के रूप में भी काम किया। १९३० में राधाबाई सुबरायण ने भारतीय महिलाओं का प्रतिनिधित्व लंदन में प्रथम गोलमेज सम्मेलन में बेगम शाह नवाज के साथ किया। उन्होंने सेकंड रौंद टैबल कोन्फेरेंस में भी भाग लिया था। इसी के साथ साथ उन्होंने महिलाओं के लिए पांच प्रतिशत आरक्षण की मांग भी की। .

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राम दयाल मुंडा

आरडी मुंडा के नाम से पूरी दुनिया में लोकप्रिय राम दयाल मुंडा (23 अगस्त 1939-30 सितंबर 2011) भारत के एक प्रमुख बौद्धिक और सांस्कृतिक शख्सियत थे। आदिवासी अधिकारों के लिए रांची, पटना, दिल्ली से लेकर संयुक्त राष्ट्र संघ (यूएनओ) जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों तक उन्होंने आवाज उठायी, दुनिया के आदिवासी समुदायों को संगठित किया और देश व अपने गृहराज्य झारखंड में जमीनी सांस्कृतिक आंदोलनों को नेतृत्व प्रदान किया। 2007 में उन्हें संगीत नाटक अकादमी का सम्मान मिला, तो 22 मार्च 2010 में राज्यसभा के सांसद बनाए गए और 2010 में ही वे पद्मश्री से सम्मानित हुए। भारत सरकार ने बहुत उपेक्षा के बाद जब उन्हें सम्मान दिया तब तक कैंसर ने उन्हें जकड़ लिया था जिससे उनके सपने अधूरे रह गए। वे रांची विश्वविद्यालय, रांची के कुलपति भी रहे। उनका निधन कैंसर से 30 सितंबर शुक्रवार, 2011 को हुआ। .

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राम नाईक

राम नाईक एक भारतीय राजनीतिज्ञ तथा भाजपा के वरिष्ठ नेता रह चुके हैं उन्होनें जुलाई २०१४ से उत्तर प्रदेश के राज्यपाल का पदभार संभाल लिया है। वे प्रदेश के २८ वें राज्यपाल हैं। .

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राम प्रसाद 'बिस्मिल'

राम प्रसाद 'बिस्मिल' (११ जून १८९७-१९ दिसम्बर १९२७) भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की क्रान्तिकारी धारा के एक प्रमुख सेनानी थे, जिन्हें ३० वर्ष की आयु में ब्रिटिश सरकार ने फाँसी दे दी। वे मैनपुरी षड्यन्त्र व काकोरी-काण्ड जैसी कई घटनाओं में शामिल थे तथा हिन्दुस्तान रिपब्लिकन ऐसोसिएशन के सदस्य भी थे। राम प्रसाद एक कवि, शायर, अनुवादक, बहुभाषाभाषी, इतिहासकार व साहित्यकार भी थे। बिस्मिल उनका उर्दू तखल्लुस (उपनाम) था जिसका हिन्दी में अर्थ होता है आत्मिक रूप से आहत। बिस्मिल के अतिरिक्त वे राम और अज्ञात के नाम से भी लेख व कवितायें लिखते थे। ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी (निर्जला एकादशी) विक्रमी संवत् १९५४, शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर में जन्मे राम प्रसाद ३० वर्ष की आयु में पौष कृष्ण एकादशी (सफला एकादशी), सोमवार, विक्रमी संवत् १९८४ को शहीद हुए। उन्होंने सन् १९१६ में १९ वर्ष की आयु में क्रान्तिकारी मार्ग में कदम रखा था। ११ वर्ष के क्रान्तिकारी जीवन में उन्होंने कई पुस्तकें लिखीं और स्वयं ही उन्हें प्रकाशित किया। उन पुस्तकों को बेचकर जो पैसा मिला उससे उन्होंने हथियार खरीदे और उन हथियारों का उपयोग ब्रिटिश राज का विरोध करने के लिये किया। ११ पुस्तकें उनके जीवन काल में प्रकाशित हुईं, जिनमें से अधिकतर सरकार द्वारा ज़ब्त कर ली गयीं। --> बिस्मिल को तत्कालीन संयुक्त प्रान्त आगरा व अवध की लखनऊ सेण्ट्रल जेल की ११ नम्बर बैरक--> में रखा गया था। इसी जेल में उनके दल के अन्य साथियोँ को एक साथ रखकर उन सभी पर ब्रिटिश राज के विरुद्ध साजिश रचने का ऐतिहासिक मुकदमा चलाया गया था। --> .

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राम किशोर शुक्ल

पंडित राम किशोर शुक्ल (4 सितंबर सन 1923 से 11 दिसंबर 2003) एक भारतीय राजनीतिज्ञ एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे वह सोशलिस्ट पार्टी तथा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से MLA पद पर चुने गए थे। मध्य प्रदेश विधानसभा क्षेत्र के ब्यौहारी क्षेत्र से चुने गए तथा उन्होंने स्पीकर तथा डिप्टी स्पीकर पद पर भी अपना दायित्व निर्वहन किया कैबिनेट मंत्री के तौर पर उन्होंने वित्त मंत्रालय, कानून एवं विधाई मंत्री का राजस्व मंत्री का एवं संसदीय मामलों के मंत्री का दायित्व निभाया। .

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रामस्वामी वेंकटरमण

रामस्वामी वेंकटरमण, (रामास्वामी वेंकटरमन, रामास्वामी वेंकटरामण या रामास्वामी वेंकटरमण)(४ दिसंबर १९१०-२७ जनवरी २००९) भारत के ८वें राष्ट्रपति थे। वे १९८७ से १९९२ तक इस पद पर रहे। राष्ट्रपति बनने के पहले वे ४ वर्षों तक भारत के उपराष्ट्रपति रहे। मंगलवार को २७ जनवरी को लंबी बीमारी के बाद उनका निधन हो गया। वे ९८ वर्ष के थे। राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री समेत देश भर के अनेक राजनेताओं ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है। उन्होंने २:३० बजे दिल्ली में सेना के रिसर्च एंड रेफरल हॉस्पिटल में अंतिम साँस ली। उन्हें मूत्राशय में संक्रमण (यूरोसेप्सिस) की शिकायत के बाद विगत १२ जनवरी को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वे साँस संबंधी बीमारी से भी पीड़ित थे। उनका कार्यकाल १९८७ से १९९२ तक रहा। राष्ट्रपति पद पर आसीन होने से पूर्व वेंकटरमन करीब चार साल तक देश के उपराष्ट्रपति भी रहे। .

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रामगोविन्द चौधरी

राम गोविन्द चौधरी उत्तर प्रदेश के प्रख्यात समाजवादी नेता व २०१७ से उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता विपक्ष की भूमिका निभा रहे हैं। वह उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव के नेतृत्व में पिछली समाजवादी पार्टी सरकार में बेसिक शिक्षा मंत्री तथा बाल विकास व पोषण मंत्री रह चुके हैं। वह वर्तमान में उत्तर प्रदेश विधानसभा के बांसडीह निर्वाचन क्षेत्र से विधायक हैं। उनका जन्म बलिया में हुआ था तथा वे जयप्रकाश नारायण तथा पूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर के साथ कार्य कर चुके हैं। वह समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता मुलायम सिंह यादव के करीबी भी हैं। .

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राष्ट्रीय महिला आयोग

राष्ट्रीय महिला आयोग (अँग्रेजी: National Commission for Women, NCW) भारतीय संसद द्वारा 1990 में पारित अधिनियम के तहत जनवरी 1992 में गठित एक सांविधिक निकाय है।यह एक ऐसी इकाई है जो शिकायत या स्वतः संज्ञान के आधार पर महिलाओं के संवैधानिक हितों और उनके लिए कानूनी सुरक्षा उपायों को लागू कराती है। आयोग की पहली प्रमुख सुश्री जयंती पटनायक थीं। 17 सितंबर, 2014 को ममता शर्मा का कार्यकाल पूरा होने के पश्चात ललिता कुमारमंगलम को आयोग का प्रमुख बनाया गया है। .

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राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी, अमेरिका

राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनएसए) संयुक्त राज्य अमेरिका की केंद्रीय ख़ुफ़िया जानकारी एजेंसी है। अमेरिकी रक्षा विभाग के क्षेत्राधिकार के अंतर्गत आने वाली इस एजेंसी को कर्मियों और बजट के संदर्भ में अमेरिका का सबसे बड़ा खुफिया संगठन माना जाता है। एनएसए को मुख्य रूप से वैश्विक निगरानी एवं ख़ुफ़िया जानकारी का संग्रह, अनुवाद और विश्लेषण करने की ज़िम्मेदारी सौंपी गयी है। एनएसए का कार्य खुफिया संचार तक सीमित है, अथवा यह क्षेत्रीय या मानवीय गुप्तचर गतिविधियों में शामिल नहीं होता। कानून के अनुसार, एनएसए की खुफ़िया जानकारी विदेशी संचार तक ही सीमित है, हालांकि कई रिपोर्ट दर्शाते हैं कि एजेंसी हमेशा इन कानूनों का पालन नहीं करती। संगठन की गोपनीयता के कारण, एनएसए को समय-समय पर "नो सच एजेंसी" (ऐसी कोई एजेंसी नहीं है) या "नेवर से एनीथिंग" (कभी कुछ नहीं कहने वाली) भी कहा जाता है। एजेंसी में केंद्रीय सुरक्षा सेवा (सेंट्रल सिक्यूरिटी सर्विस) नामक संगठन भी है जिसे एनएसए और अन्य अमेरिकी सैन्य क्रिप्टएनालिसिस घटकों के बीच सहयोग के लिए बनाया गया था। एनएसए के निदेशक, जो अल्पतम लेफ्टिनेंट जनरल या उप एडमिरल रैंक के होते हैं, संयुक्त राज्य अमेरिका साइबर कमान के कमांडर और केंद्रीय सुरक्षा सेवा के चीफ का पद भी संभालते हैं। .

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राज कुमार सैनी

राजकुमार सैनी भारतीय राजनीतिज्ञ हैं। राजकुमार सैनी वर्तमान में संसद सदस्य हैं। वह हरियाणा राज्य के कुरुक्षेत्र लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं। वह मई 2014 में में सदस्य बने। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी से 2014 का लोकसभा चुनाव कुरुक्षेत्र से लड़ा और कांग्रेस पार्टी से दो बार लगातार सांसद रह चुके उद्योगपति नवीन जिंदल को भारी मतों से हराया। राजकुमार सैनी भारत के एकमात्र नेता है जिन्होंने लोकतंत्र के सबसे निचले सदन "पंचायत" से लेकर उच्च सदन "लोकसभा" तक के सभी चुनाव लड़े व जीते हैं। राजकुमार सैनी एक हैं, जो अपनी नीतियों और योजनाओं के बलबूते देश की सेवा करना चाहते हैं। .

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राजनय

न्यूयार्क स्थित संयुक्त राष्ट्रसंघ संसार का सबसे बडा राजनयिक संगठन है। राष्ट्रों अथवा समूहों के प्रतिनिधियों द्वारा किसी मुद्दे पर चर्चा एवं वार्ता करने की कला व अभ्यास (प्रैक्टिस) राजनय (डिप्लोमैसी) कहलाता है। आज के वैज्ञानिक युग में कोई देश अलग-अलग नहीं रह सकता। इन देशों में पारस्परिक सम्बन्ध जोड़ना आज के युग में आवश्यक हो गया है। इन सम्बन्धों को जोड़ने के लिए योग्य व्यक्ति एक देश से दूसरे देश में भेजे जाते हैं। ये व्यक्ति अपनी योग्यता, कुशलता और कूटनीति से दूसरे देश को प्रायः मित्र बना लेते हैं। प्राचीन काल में भी एक राज्य दूसरे राज्य से कूटनीतिक सम्बन्ध जोड़ने के लिए अपने कूटनीतिज्ञ भेजता था। पहले कूटनीति का अर्थ 'सौदे में या लेन देन में वाक्य चातुरी, छल-प्रपंच, धोखा-धड़ी' लगाया जाता था। जो व्यक्ति कम मूल्य देकर अधिकाधिक लाभ अपने देश के लिए प्राप्त करता था, कुशल कूटनीतिज्ञ कहलाता था। परन्तु आज छल-प्रपंच को कूटनीति नहीं कहा जाता है। वैज्ञानिक दृष्टि से आधुनिक काल में इस शब्द का प्रयोग दो राज्यों में शान्तिपूर्ण समझौते के लिए किया जाता है। डिप्लोमेसी के लिए हिन्दी में कूटनीति के स्थान पर राजनय शब्द का प्रयोग होने लगा है। अन्तर्राष्ट्रीय जगत एक परिवार के समान बन गया है। परिवार के सदस्यों में प्रेम, सहयोग, सद्भावना तथा मित्रता का सम्बन्ध जोड़ना एक कुशल राजनयज्ञ का काम है। .

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राजनैतिक आन्दोलन

उस सामाजिक आन्दोलन को राजनैतिक आन्दोलन (political movement) कहते हैं जिसका क्षेत्र और स्वरूप राजनीति हो। राजनैतिक आंदोलन किसी एक मुद्दे को लेकर चलाये जा सकते हैं या बहुत से मुद्दों को लेकर। राजनैतिक दल और राजनैतिक आन्दोलन में अन्तर यह है कि राजनैतिक आन्दोलन अपने सदस्यों को चुनकर सरकारी पद पर बैठाने के लिये नहीं किये जाते बल्कि इसका उद्देश्य यह होता है कि नागरिकों एवं सरकार को आन्दोलन के मुद्दों के पक्ष में कार्य करने के लिये राजी किया जाय। राजनैतिक आन्दोलन वस्तुतः किसी सामाजिक समूह द्वारा राजनैतिक लाभ प्राप्त करने एवं राजनैतिक 'जमीन' प्राप्त करने के लिये किये गये संघर्ष का नाम है। .

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राजनेता

राजनेता (अंग्रेजी: Statesman) उस व्यक्ति को कहते हैं जो मूलत: राजनीतिक दर्शन के आधार पर राजनीति के क्षेत्र में कभी भी नीतिगत सिद्धान्तों से समझौता नहीं करता। उदाहरण के लिए लाल बहादुर शास्त्री (कांग्रेस), अटल बिहारी वाजपेयी (भाजपा), राममनोहर लोहिया (प्रजा सोशलिस्ट पार्टी) और वर्तमान में नरेन्द्र मोदी।.

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राजनीति (२०१० चलचित्र)

राजनीति बालीवुड में जून, २०१० में प्रदर्शित भारतीय राजनीति पर बनायी गयी फिल्म है। इसके निर्माता एवं निर्देशक प्रकाश झा है जिन्होनें पूर्व में गंगाजल जैसी फिल्मों का निर्देशन एवं निर्माण किया है। इस फिल्म में कैटरीना कैफ, अजय देवगन, रणबीर कपूर, अर्जुन रामपाल, मनोज बाजपेयी एवं नाना पाटेकर मुख्य भूमिका में है। फिल्म का संगीत प्रसिद्ध संगीतकार प्रीतम चक्रवर्ती ने दिया है। इस फिल्म का प्रदर्शन भारत में में ४ जून, २०१० को आरंभ हुआ था। फिल्म का अधिकतर भाग भोपाल में फिल्माया गया है। कुछ क्षेपक मुंबई में जोड़े गए हैं, जिनमें कुछ गानों के फिल्मांकन के अलावा पार्श्व में उनको दृश्य से संबद्ध किया गया है। भरपूर दृश्यों के साथ इसका संपादन मुंबई के एडिटिंग स्टूडियो में किया गया है। इस चलचित्र के निर्देशक ने अपने व्यवसाय का आरंभ ही इस तरह के काम से किया था और बीच में नियमित सिनेमा की तरह एक दो फिल्में बनाकर शांत हो गए। प्रकाश झा ने जब अजय देवगन और काजोल को लेकर फिल्म:दिल क्या करे बनाई, तभी से उनको अपनी फिल्म के लिए एक स्थायी नायक मिला। गंगाजल और अपहरण के उनके अनुभव अजय देवगन के साथ बड़े अच्छे रहे और शायद यही कारण है कि राजनीति फिल्म का भी वे एक महत्त्वपूर्ण भाग हैं। फिल्म के साथ दिग्गज निर्देशक के रूप में प्रकाश झा का नाम जुड़ा होना ही बड़ी बात नहीं बल्कि फिल्म की पूरी चरित्र-सूची (स्टार कास्ट) पर दृष्टिपात करना फिल्म के बारे में अनुमान लगाने के लिये आवश्यक है। अपने जीवन का सबसे महत्वपूर्ण रोल कर रही अभिनेत्री कैटरीना कैफ का कायाल्प भी दर्शनीय है अब से पहले ग्लैमडॉल के रूप में जानी जाती रहीं कैटरीना इस बार हल्के रंगों वाली सूती साड़ी में दिखायी दी। .

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राजनीति विज्ञान

राजनीति विज्ञान एक सामाजिक विज्ञान है जो सरकार और राजनीति के अध्ययन से सम्बन्धित है। राजनीति विज्ञान अध्ययन का एक विस्तृत विषय या क्षेत्र है। राजनीति विज्ञान में ये तमाम बातें शामिल हैं: राजनीतिक चिंतन, राजनीतिक सिद्धान्त, राजनीतिक दर्शन, राजनीतिक विचारधारा, संस्थागत या संरचनागत ढांचा, तुलनात्मक राजनीति, लोक प्रशासन, अंतर्राष्ट्रीय कानून और संगठन आदि। .

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राजनीतिक दर्शन

राजनीतिक दर्शन (Political philosophy) के अन्तर्गत राजनीति, स्वतंत्रता, न्याय, सम्पत्ति, अधिकार, कानून तथा सत्ता द्वारा कानून को लागू करने आदि विषयों से सम्बन्धित प्रश्नों पर चिन्तन किया जाता है: ये क्या हैं, उनकी आवश्यकता क्यों हैं, कौन सी वस्तु सरकार को 'वैध' बनाती है, किन अधिकारों और स्वतंत्रताओं की रक्षा करना सरकार का कर्तव्य है, विधि क्या है, किसी वैध सरकार के प्रति नागरिकों के क्या कर्त्तव्य हैं, कब किसी सरकार को उकाड़ फेंकना वैध है आदि। प्राचीन काल में सारा व्यवस्थित चिंतन दर्शन के अंतर्गत होता था, अतः सारी विद्याएं दर्शन के विचार क्षेत्र में आती थी। राजनीति सिद्धान्त के अन्तर्गत राजनीति के भिन्न भिन्न पक्षों का अध्ययन किया जाता हैं। राजनीति का संबंध मनुष्यों के सार्वजनिक जीवन से हैं। परम्परागत अध्ययन में चिन्तन मूलक पद्धति की प्रधानता थी जिसमें सभी तत्वों का निरीक्षण तो नहीं किया जाता हैं, परन्तु तर्क शक्ति के आधार पर उसके सारे संभावित पक्षों, परस्पर संबंधों प्रभावों और परिणामों पर विचार किया जाता हैं। .

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राजनीतिक वर्णक्रम

राजनीतिक वर्णक्रम (Political spectrum) विभिन्न राजनीतिक स्थितियों को एक या अनेक ज्यामितिक निर्देशांक अक्षों पर वगीकृत करने की एक प्रणाली हैं, जिसे में वे अक्ष स्वतन्त्र राजनीतिक आयामों का प्रतीक होते हैं। .

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राजनीतिक आमूलवाद

राजनीतिक आमूलवाद (Political radicalism) (या केवल, राजनीतिक विज्ञान में, आमूलवाद; Radicalism) उन राजनीतिक सिद्धान्तों को दर्शाता है जो क्रन्तिकारी माध्यमों से सामाजिक संरचनाओं को बदलने और मौलिक रूपों में मूल्य तन्त्रों को परिवर्तित करने पर केन्द्रित हैं। ऐतिहासिक रूप से, आमूलवाद का सन्दर्भ विशिष्ट रूप से आमूल वामपन्थ से रहा है (सिर्फ़ दूरस्थ-वामपन्थी राजनीति की एकलौती श्रेणी के अन्तर्गत), और दूरस्थ-दक्षिणपन्थी राजनीति को विरले ही अपने में समाविष्ट किया है, यद्यपि इनमें क्रन्तिकारी तत्त्व हो सकते हैं; एक प्रमुख अपवाद संयुक्त राज्य में है, जहाँ कुछ मानते हैं कि दोनों आमूल वामपन्थ और आमूल दक्षिणपन्थ के राजनीतिक चरम आमूलवाद में शामिल हैं। राजनीतिक विचारधारा के वर्णक्रम के पारम्परिक लेबलों में, राजनीतिक वर्णक्रम की "दाँई" (दक्षिण) ओर पर आमूल के विरोधी को प्रतिक्रियावादी कहा जाता हैं।.

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राजनीतिक उदासीनता

राजनीतिक उदासीनता (Political apathy) से अभिप्राय व्यक्ति की राजनीति के प्रति उदासीनता और राजनीतिक सहभागिता में ह्रास से लगाया जाता है। राजनीतिक उदासीनता वास्तव में अधिक व्यापक अवधारणा ‘राजनीतिक अलगाव’ का एक भाग है। राजनीतिक उदासीनता का अर्थ व्यक्ति में राजनीति के प्रति विकर्षण, शक्तिहीनता और राजनीतिक नेतृत्व पर से विश्वास उठ जाना है। राजनीतिक उदासीनता को समझने के लिए राजनीतिक अलगाव को समझना आवश्यक है। यद्यपि अलगाव एक प्राचीन अवधारणा है तथापि सामाजिक विज्ञानों में इसने महत्वपूर्ण स्थान पूंजीवादी समाजों के अध्ययन के परिणाम स्वरूप ही ग्रहण किया है। फ्रांसीसी भाषा में ‘एलीने’ (Aline) तथा स्पेनी भाषा में ‘एलिण्डो’ ऐसे शब्द हैं जिनका प्रयोग व्यक्ति की उन मानसिक दशाओं को व्यक्त करने के लिए किया जाता है जिसमें वह अपने आपको परदेशी समझने लगता है तथा अपने एवं अन्य व्यक्तियों के प्रति पृथक्करण अनुभव करने लगता है। वर्तमान समय में इस शब्द का प्रयोग चिन्ताग्रस्त मनोदशाओं अथवा असन्तुलित मनोदशाओं व प्रवृत्तियों के लिए किया जाता है जो व्यक्ति को समाज से पर्यावरण से और स्वयं से उदासीन बना देती हैं। राजनीतिक अलगाव में राजनीति या शक्ति के प्रति विकर्षण तथा राजनैतिक सहभागिता मे ह्रास व उदासीनता निहित है। इसमें व्यक्ति अपने आपको राष्टींय लक्ष्यों के प्रति उत्तरदायी एवं सम्बन्धित नहीं समझता। समकालीन विद्वान राजनीतिक अलगाव को आधुनिक औद्योगिक समाजों का ही लक्षण मानते हैं। समाजशास्त्रियों के अनुसार नगरीय-औद्योगिक अधिकारी-तन्त्रीय समाजों में शक्ति की जितनी दूरी आज है, उतनी पहले कभी नहीं रही। राजनीतिक उदासीनता हमें प्राचीन स्थितियों में भी देखने को मिलती है। उदाहरणार्थ, प्राचीन ग्रीक और रोमन प्रथा में जनता की अपने नेताओं के प्रति पूर्ण अधीनता इसी प्रवृत्ति का उदाहरण है। .

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राजिंदर सिंह राणा

राजिंदर सिंह राणा एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं और हिमाचल प्रदेश के सुजानपुर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हुए 13 वीं हिमाचल प्रदेश विधानसभा के सदस्य चुने गये हैं। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राजनेता हैं | उन्होंने भाजपा के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार प्रेम कुमार धूमल को 1919 वोटों के अंतर से हरा दिया है। .

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राज्यतन्त्र

राज्यतन्त्र (polity) किसी भी प्रकार की राजनैतिक इकाई को कहते हैं, यानि यह किन्ही भी लोगों का ऐसा समूह होता है जो सामूहिक पहचान रखें, संसाधनों को काबू करके उनका प्रयोग करने में सक्षम हों और आपस में किसी पदानुक्रम के आधार पर आदेश देने वालों और उन आदेशों का पालन करने वालों में संगठित हों। .

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राजीव सैज़ल

डॉ.

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राव राजेन्द्र सिंह

राव राजेन्द्र सिँह एक भारतीय राजनीतिज्ञ है। वर्तमान में वे राजस्थान विधानसभा के उपाध्यक्ष है। वे जयपुर के शाहपुरा विधानसभा क्षेत्र से विधायक है। .

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रजा परवेज़ अशरफ़

रजा परवेज़ अशरफ़ (अंग्रेजी: Raja Pervaiz Ashraf, उर्दू: راجا پرویز اشرف जन्म: 26 दिसम्बर 1950) पाकिस्तान के सत्रहवें एवं सम्प्रति वर्तमान प्रधान मन्त्री हैं। इससे पूर्व वे यूसुफ रजा गिलानी की कैबिनेट में मार्च 2008 से फरवरी 2011 तक जल एवं ऊर्जा मन्त्री के रूप में कार्य कर चुके हैं। अशरफ़ पाकिस्तान के रावलपिण्डी शहर से ताल्लुक रखते हैं। वे पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। गिलानी को जब पाकिस्तानी उच्चतम न्यायालय ने प्रधान मन्त्री पद के लिये अयोग्य करार दिया उसके बाद ही उन्होंने 22 जून 2012 को पदभार ग्रहण किया। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी द्वारा उन्हें पाकिस्तान के प्रधान मन्त्री पद के लिये प्रत्याशी बनाया। अशरफ़ ने यह चुनाव नेशनल असेम्बली में 89 के मुकाबले 211 मतों से जीत लिया और पाकिस्तान के प्रधान मन्त्री पद की बागडोर सम्हाली। अशरफ़ पाकिस्तान की राष्ट्रीय विधानसभा में पाकिस्तानी पंजाब के गूजर खान निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। - अभिगमन तिथि २२ जून २0१२ .

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रेणु देवी

रेणु देवी एक भारतीय राजनीतिज्ञ तथा वर्तमान भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं। वे पूर्व बिहार सरकार में मंत्री रह चुकी हैं। वे चार बार बेतिया से बिहार विधान सभा की सदस्य चुनी गई। .

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रोज केरकेट्टा

रोज केरकेट्टा (5 दिसंबर, 1940) आदिवासी भाषा खड़िया और हिन्दी की एक प्रमुख लेखिका, शिक्षाविद्, आंदोलनकारी और मानवाधिकारकर्मी हैं। आपका जन्म सिमडेगा (झारखंड) के कइसरा सुंदरा टोली गांव में खड़िया आदिवासी समुदाय में हुआ। झारखंड की आदि जिजीविषा और समाज के महत्वपूर्ण सवालों को सृजनशील अभिव्यक्ति देने के साथ ही जनांदोलनों को बौद्धिक नेतृत्व प्रदान करने तथा संघर्ष की हर राह में आप अग्रिम पंक्ति में रही हैं। आदिवासी भाषा-साहित्य, संस्कृति और स्त्री सवालों पर डा.

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रीता ईश्वर

रीता ईश्वर एक पाकिस्तानी राजनीतिज्ञ तथा वर्तमान पाकिस्तान की राष्ट्रीय सभा की सांसद हैं | वे प्रथम हिन्दू महिला पाकिस्तान की नेशनल असैंबली की सांसद हैं | .

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लाल चन्द

लाल चन्द एक पाकिस्तानी राजनीतिज्ञ है जो वर्तमान में पाकिस्तान की राष्ट्रीय सभा का सदस्य है, 2008 से। .

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लखीराम अग्रवाल

लखीराम अग्रवाल (13 फरवरी 1932 – 24 जनवरी 2009) भारत के एक राजनेता थे। वे १९९० से २००२ तक राज्यसभा के सदस्य रहे, पहले मध्य प्रदेश से और बाद में छत्तीसगढ़ से। १९९० से २०० तक वे मध्य प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष रहे। छत्तीसगढ बनने के बाद वे छत्तीसगढ भाजपा के अध्यक्ष बने। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लखीराम अग्रवाल को याद करना सही मायने में राजनीति की उस परंपरा का स्मरण है जो आज के समय में दुर्लभ हो गयी है। वे सही मायने में हमारे समय के एक ऐसे नायक हैं जिसने अपने मन, वाणी और कर्म से जिस विचारधारा का साथ किया, उसे ताजिंदगी निभाया। यह प्रतिबद्धता भी आज के युग में असाधारण नहीं है। .

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लंदन

लंदन (London) संयुक्त राजशाही और इंग्लैंड की राजधानी और सबसे अधिक आबादी वाला शहर है। ग्रेट ब्रिटेन द्वीप के दक्षिण पूर्व में थेम्स नदी के किनारे स्थित, लंदन पिछली दो सदियों से एक बड़ा व्यवस्थापन रहा है। लंदन राजनीति, शिक्षा, मनोरंजन, मीडिया, फ़ैशन और शिल्पी के क्षेत्र में वैश्विक शहर की स्थिति रखता है। इसे रोमनों ने लोंड़िनियम के नाम से बसाया था। लंदन का प्राचीन अंदरुनी केंद्र, लंदन शहर, का परिक्षेत्र 1.12 वर्ग मीटर (2.9 किमी2) है। 19वीं शताब्दी के बाद से "लंदन", इस अंदरुनी केंद्र के आसपास के क्षेत्रों को मिला कर एक महानगर के रूप में संदर्भित किया जाने लगा, जिनमें मिडलसेक्स, एसेक्स, सरे, केंट, और हर्टफोर्डशायर आदि शमिल है। जिसे आज ग्रेटर लंदन नाम से जानते है, एवं लंदन महापौर और लंदन विधानसभा द्वारा शासित किया जाता हैं। कला, वाणिज्य, शिक्षा, मनोरंजन, फैशन, वित्त, स्वास्थ्य देखभाल, मीडिया, पेशेवर सेवाओं, अनुसंधान और विकास, पर्यटन और परिवहन में लंदन एक प्रमुख वैश्विक शहर है। यह दुनिया का सबसे बड़ा वित्तीय केंद्र के रूप में ताज पहनाया गया है और दुनिया में पांचवां या छठा सबसे बड़ा महानगरीय क्षेत्र जीडीपी है। लंदन एक है विश्व सांस्कृतिक राजधानी। यह दुनिया का सबसे अधिक का दौरा किया जाने वाला शहर है, जो अंतरराष्ट्रीय आगमन द्वारा मापा जाता है और यात्री ट्रैफिक द्वारा मापा जाने वाला विश्व का सबसे बड़ा शहर हवाई अड्डा है। लंदन विश्व के अग्रणी निवेश गंतव्य है, किसी भी अन्य शहर की तुलना में अधिक अंतरराष्ट्रीय खुदरा विक्रेताओं और अल्ट्रा हाई-नेट-वर्थ वाले लोगों की मेजबानी यूरोप में लंदन के विश्वविद्यालय उच्च शिक्षा संस्थानों का सबसे बड़ा केंद्र बनते हैं। 2012 में, लंदन तीन बार आधुनिक ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों की मेजबानी करने वाला पहला शहर बन गया। लंदन में लोगों और संस्कृतियों की विविधता है, और इस क्षेत्र में 300 से अधिक भाषाएं बोली जाती हैं। इसकी 2015 कि अनुमानित नगरपालिका जनसंख्या (ग्रेटर लंदन के समरूपी) 8,673,713 थी, जो कि यूरोपीय संघ के किसी भी शहर से सबसे बड़ा, और संयुक्त राजशाही की आबादी का 12.5% ​​हिस्सा है। 2011 की जनगणना के अनुसार 9,787,426 की आबादी के साथ, लंदन का शहरी क्षेत्र, पेरिस के बाद यूरोपीय संघ में दूसरा सबसे अधिक आबादी वाला है। शहर का महानगरीय क्षेत्र यूरोपीय संघ में 13,879,757 जनसंख्या के साथ सबसे अधिक आबादी वाला है, जबकि ग्रेटर लंदन प्राधिकरण के अनुसार शहरी-क्षेत्र की आबादी के रूप में 22.7 मिलियन है। 1831 से 1925 तक लंदन विश्व के सबसे अधिक आबादी वाला शहर था। लंदन में चार विश्व धरोहर स्थल हैं: टॉवर ऑफ़ लंदन; किऊ गार्डन; वेस्टमिंस्टर पैलेस, वेस्ट्मिन्स्टर ऍबी और सेंट मार्गरेट्स चर्च क्षेत्र; और ग्रीनविच ग्रीनविच वेधशाला (जिसमें रॉयल वेधशाला, ग्रीनविच प्राइम मेरिडियन, 0 डिग्री रेखांकित, और जीएमटी को चिह्नित करता है)। अन्य प्रसिद्ध स्थलों में बकिंघम पैलेस, लंदन आई, पिकैडिली सर्कस, सेंट पॉल कैथेड्रल, टावर ब्रिज, ट्राफलगर स्क्वायर, और द शर्ड आदि शामिल हैं। लंदन में ब्रिटिश संग्रहालय, नेशनल गैलरी, प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय, टेट मॉडर्न, ब्रिटिश पुस्तकालय और वेस्ट एंड थिएटर सहित कई संग्रहालयों, दीर्घाओं, पुस्तकालयों, खेल आयोजनों और अन्य सांस्कृतिक संस्थानों का घर है। लंदन अंडरग्राउंड, दुनिया का सबसे पुराना भूमिगत रेलवे नेटवर्क है। .

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लक्ष्मी बारुपाल

लक्ष्मी बारुपाल एक भारतीय राजनीतिज्ञ तथा राजस्थान विधानसभा में देसूरी विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक है। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस सम्बंध राजनेत्री है। .

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लक्ष्मीप्रसाद देवकोटा

लक्ष्मीप्रसाद देवकोटा (जन्म १२ नवम्बर १९०९, मृत्यु १४ सितम्बर १९५९) नेपाली साहित्य के महाकवि हैं। देवकोटा नेपाली साहित्य के बिभिन्न विधाओं में कलम चलाने वाले बहुमुखी प्रतिभाशाली थे। उनके द्वारा लिखित कविता और निबन्ध उच्च कोटि के माने जाते हैं। उन्होंने मुनामदन, सुलोचना, शाकुन्तल जैसे अमर काव्य लिखे जिसके कारण नेपाली साहित्यको समृद्धि मिली। नेपाली साहित्य में मुनामदन सर्वोत्कृष्ट काव्य माना जाता है। .

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लोक प्रशासन का इतिहास

एक व्यवस्थित अध्ययन के रूप में लोक-प्रशासन का विकास अभी नया ही है। लोक-प्रशासन के शैक्षिक अध्ययन का प्रारम्भ करने का श्रेय वुडरो विल्सन को जाता है जिसने १८८७ में प्रकाशित अपने लेख ‘द स्टडी ऑफ ऐडमिनिस्ट्रेशन' में इस शास्त्र के वैज्ञानिक आधार को विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। इस लेख में राजनीति तथा प्रशासन के बीच स्पष्ट भिन्नता दिखाई गई और घोषित किया गया कि प्रशासन की राजनीति से दूर रहना चाहिए। इसी को तथाकथित ‘राजनीति-प्रशासन-द्विभाजन’ कहते हैं। लोक प्रशासन का इतिहास निम्नलिखित 5 चरणों में विभाज्य है- .

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शत्रुघन सिन्हा

शत्रुघन सिन्हा (जन्म: 15 जुलाई, 1946) एक हिन्दी फिल्म अभिनेता एवं भारतीय जनता पार्टी के राजनीतिज्ञ हैं। .

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शरद यादव

शरद यादव भारत की एक राजनीतिक पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष।हैं। उन्होंने बिहार प्रदेश के मधेपुरा लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र से चार बार लोक सभा का प्रतिनिधित्व किया। वर्तमान में वे राज्य सभा (उच्च सदन) के सांसद हैं। यादव राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के संयोजक थे परन्तु अभी हाल में ही उनकी पार्टी द्वारा गठबंधन से सम्बन्ध विच्छेद कर लेने के कारण उन्होंने संयोजक पद से त्याग पत्र दे दिया। राजनीतिक गठजोड़ के माहिर खिलाड़ी शरद यादव को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का बेहद करीबी भी माना जाता है। .

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शासन

शासन संचालन की गतिविधि को शासन कहते हैं, या दूसरे शब्दों में कहें तो, राज करने या राज चलाने को शासन कहा जाता है। इसका संबंध उन निर्णयों से है जो उम्मीदों को परिभाषित करते हैं, शक्ति देते हैं, या प्रदर्शन को प्रमाणित करते हैं। यह एक अलग प्रक्रिया भी हो सकती है या प्रबंधन अथवा नेतृत्व प्रक्रिया का एक खास हिस्सा भी हो सकती है। कभी कभी लोग इन प्रक्रियाओं और व्यवस्थाओं के संचालन के लिए सरकार की स्थापना करते हैं। किसी कारोबार अथवा गैर-लाभकारी संगठन के सन्दर्भ में, शासन का तात्पर्य अविरुद्ध प्रबंधन, एकीकृत नीतियों, मार्गदर्शन, प्रक्रियाओं और किसी दिए गए क्षेत्र के निर्णायक-अधिकारों से संबंधित है। उदाहरण के लिए, कॉर्पोरेट स्तर पर प्रबंधन के लिए गोपनीयता, आंतरिक निवेश, तथा आंकड़ों के प्रयोग संबंधी नीतियाँ बनाना शामिल हो सकता है। अगर सरकार और शासन शब्दों में अंतर किया जाए, तो जो निकलकर सामने आएगा वो यह है कि एक सरकार जो करती है वही शासन है। यह कोई भी भू-राजनीतिक सरकार (राष्ट्र-राज्य), कॉर्पोरेट सरकार (कारोबारी संस्था), सामाजिक-राजनीतिक सरकार (जाति, परिवार इत्यादि) या किसी भी अन्य प्रकार की सरकार हो सकती है। लेकिन शासन शक्ति और नीति के प्रबंधन की गतिज प्रक्रिया है, जबकि सरकार वह माध्यम (आमतौर पर सामूहिक) है जो इस प्रक्रिया को अंजाम देती है। वैसे सरकार शब्द का इस्तेमाल शासन के पर्यायवाची शब्द के तौर पर भी किया जाता है, जैसा कि कनाडाई नारे के तहत "शांति, व्यवस्था और अच्छी सरकार " है। 1947 ई. में जाकर अंग्रेजों का भारत पर शासन समाप्त हुआ। .

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शिया चंद्र

मध्य पूर्व में शिया चंद्र की भौगोलिक अवस्थिति का काल्पनिक मानचित्रशिया चंद्र (Shia Crescent), मध्य-पूर्व में शिया मुस्लिम अवस्थिति को व्याख्यायित करने वाली, एक भू-राजनैतिक अवधारणा है। इस पद का प्रयोग मध्य-पूर्व की राजनीति में शिया दृष्टिकोण से क्षेत्रीय सहयोग की क्षमता को दर्शाने के लिए किया जाता रहा है। जर्मनों में अवधारणा के तौर पर इस पद का प्रयोग आम है। जर्मन भाषा में इसे शिया अर्द्धचंद्र कहते हैं। शिया चंद्र नामक पद गढ़ने का श्रेय जॉर्डन के राजा अब्दुल्ला द्वितीय को जाता है, जिसके बाद यह शब्द राजनीतिक बहसों में लोकप्रिय हो गया। अज़रबेजान, ईरान, ईराक, बहरीन तथा लेबनान आदि देशों में शिया बहुसंख्यक हैं। सम्मिलित तौर पर इन देशों से एक अर्द्धचंद्राकार आकृति बनती है। तुर्की, यमन, अफ़गानिस्तान, कुवैत, पाकिस्तान, सउदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, भारत तथा सीरिया में भी शिया अल्पसंख्यकों की एक बड़ी मात्रा निवास करती है। .

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शिवचरण माथुर

शिवचरण माथुर एक भारतीय राजनेता है और राजस्थान के मुख्यमंत्री रह चुके है।शिव चरण माथुर (14 फरवरी 1926 - 25 जून 2009) एक भारतीय राजनीतिज्ञ थे। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के एक नेता, वह 1981 से 1985 तक राजस्थान का मुख्यमंत्री और फिर 1989 से 1989 तक; बाद में, वह 2008 से 2009 तक असम के राज्यपाल थे। माथुर 14 जुलाई 1981 को राजस्थान की मुख्यमंत्री बने और 23 फरवरी 1985 तक उस पद का आयोजन किया। इसके बाद वह फिर से 20 जनवरी 1988 से 4 दिसंबर 1989 तक मुख्यमंत्री बने। 2003 में उन्हें मंडालगढ़ (भीलवाड़ा) से विधायक के रूप में चुना गया। बड़े पैमाने पर अपील हासिल करने के बावजूद माथुर ने अपनी विशिष्ट योग्यता के माध्यम से उच्च पद प्राप्त किया और कांग्रेस पार्टी के आंतरिक पवित्र स्थान से महत्वपूर्ण समर्थन के साथ। 2008 में असम के राज्यपाल के रूप में नियुक्त किया गया, वह 25 जून 2009 को हृदय की से उनकी मृत्यु तक इस पद पर बने रहे।  .

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शिवाजी

छत्रपति शिवाजी महाराज या शिवाजी राजे भोसले (१६३० - १६८०) भारत के महान योद्धा एवं रणनीतिकार थे जिन्होंने १६७४ में पश्चिम भारत में मराठा साम्राज्य की नींव रखी। उन्होंने कई वर्ष औरंगज़ेब के मुगल साम्राज्य से संघर्ष किया। सन १६७४ में रायगढ़ में उनका राज्याभिषेक हुआ और छत्रपति बने। शिवाजी महाराज ने अपनी अनुशासित सेना एवं सुसंगठित प्रशासनिक इकाइयों की सहायता से एक योग्य एवं प्रगतिशील प्रशासन प्रदान किया। उन्होंने समर-विद्या में अनेक नवाचार किये तथा छापामार युद्ध (Gorilla War) की नयी शैली (शिवसूत्र) विकसित की। उन्होंने प्राचीन हिन्दू राजनीतिक प्रथाओं तथा दरबारी शिष्टाचारों को पुनर्जीवित किया और फारसी के स्थान पर मराठी एवं संस्कृत को राजकाज की भाषा बनाया। भारत के स्वतन्त्रता संग्राम में बहुत से लोगों ने शिवाजी के जीवनचरित से प्रेरणा लेकर भारत की स्वतन्त्रता के लिये अपना तन, मन धन न्यौछावर कर दिया। .

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शंकर दयाल सिंह

शंकर दयाल सिंह (२७ दिसम्बर,१९३७ - २७ नवम्बर १९९५) भारत के राजनेता तथा हिन्दी साहित्यकार थे। वे राजनीति व साहित्य दोनों क्षेत्रों में समान रूप से लोकप्रिय थे। उनकी असाधारण हिन्दी सेवा के लिये उन्हें सदैव स्मरण किया जाता रहेगा। उनके सदाबहार बहुआयामी व्यक्तित्व में ऊर्जा और आनन्द का अजस्र स्रोत छिपा हुआ था। उनका अधिकांश जीवन यात्राओं में ही बीता और यह भी एक विचित्र संयोग ही है कि उनकी मृत्यु यात्रा के दौरान उस समय हुई जब वे अपने निवास स्थान पटना से भारतीय संसद के शीतकालीन अधिवेशन में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने दिल्ली आ रहे थे। नई-दिल्ली रेलवे स्टेशन पर २७ नवम्बर १९९५ की सुबह ट्रेन से कहकहे लगाते हुए शंकर दयाल सिंह तो नहीं उतरे, अपितु बोझिल मन से उनके परिजनों ने उनके शव को उतारा। .

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शंकर पन्नू

शंकर पन्नू एक भारतीय राजनीतिज्ञ तथा पूर्व श्रीगंगानगर लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र से सांसद है। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस दल के राजनेता है। .

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शुक्रनीति

शुक्रनीति एक प्रसिद्ध नीतिग्रन्थ है। इसकी रचना करने वाले शुक्र का नाम महाभारत में 'शुक्राचार्य' के रूप में मिलता है। शुक्रनीति के रचनाकार और उनके काल के बारे में कुछ भी पता नहीं है। शुक्रनीति में २००० श्लोक हैं जो इसके चौथे अध्याय में उल्लिखित है। उसमें यह भी लिखा है कि इस नीतिसार का रात-दिन चिन्तन करने वाला राजा अपना राज्य-भार उठा सकने में सर्वथा समर्थ होता है। इसमें कहा गया है कि तीनों लोकों में शुक्रनीति के समान दूसरी कोई नीति नहीं है और व्यवहारी लोगों के लिये शुक्र की ही नीति है, शेष सब 'कुनीति' है। शुक्रनीति की सामग्री कामन्दकीय नीतिसार से भिन्न मिलती है। इसके चार अध्यायों में से प्रथम अध्याय में राजा, उसके महत्व और कर्तव्य, सामाजिक व्यवस्था, मन्त्री और युवराज सम्बन्धी विषयों का विवेचन किया गया है। .

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श्याम चरण गुप्ता

श्याम चरण गुप्ता (जन्म:९ फ़रवरी १९४५) एक प्रख्यात राजनीतिज्ञ एवं उद्योगपति है। श्याम चरण उत्तर प्रदेश के बाँदा लोकसभा क्षेत्र से २००४ में सांसद निर्वाचित हुए तथा १६ मई २०१४ से इलाहबाद के वर्तमान सांसद है। वे श्याम ग्रुप ऑफ़ कम्पनीज के संस्थापक एवं सी.एम.डी.

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श्याम जाजू

श्याम जाजू भारतीय राजनीतिज्ञ तथा वर्तमान भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं। वह महाराष्ट्र के राजनीतिज्ञ हैं। .

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श्यामाप्रसाद मुखर्जी

डॉ॰ श्यामाप्रसाद मुखर्जी (जन्म: 6 जुलाई 1901 - मृत्यु: 23 जून 1953) शिक्षाविद्, चिन्तक और भारतीय जनसंघ के संस्थापक थे। .

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श्रेया नारायण

श्रेया नारायण (जन्म २२ फरवरी १९८५) एक भारतीय फिल्म और टेलीविजन अभिनेत्री, मॉडल, लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता है। श्रेया नारायण का जन्म मुजफ्फरपुर, बिहार में हुआ था। वह भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद की भाई की लड़की है। २०११ में, श्रेया ने तिगुमानु धुलिया हिट फिल्म साहब बिवी और गैंगस्टर में महुआ के चित्रण के लिए आलोचकों की प्रशंसा कमाई। उन्होंने कई हिन्दी फिल्मों में अभिनय किया है जैसे नॉक आऊट, रॉकस्टार, सुखविंदर सिंह की कुचा करी, सुधांशु शेखर झा के प्रेममेयी मे भी। उन्होंने कोशी नदी के बाढ़ के दौरान प्रकाश झा के साथ बिहार बाढ़ राहत मिशन पर काम किया। श्रेया ने 'भारतीय अर्थशास्त्री' के लिए 'बॉलीवुड के एक आर्थिक मॉडल' पर एक ३ भाग का लेख भी लिखा था। .

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शेरलॉक होम्स

शेरलॉक होम्स उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्ध और बीसवीं सदी के पूर्वार्ध का एक काल्पनिक चरित्र है, जो पहली बार 1887 में प्रकाशन में उभरा। वह ब्रिटिश लेखक और चिकित्सक सर आर्थर कॉनन डॉयल की उपज है। लंदन का एक प्रतिभावान 'परामर्शदाता जासूस ", होम्स अपनी बौद्धिक कुशलता के लिए मशहूर है और मुश्किल मामलों को सुलझाने के लिए अपने चतुर अवलोकन, अनुमिति तर्क और निष्कर्ष के कुशल उपयोग के लिए प्रसिद्ध है। कोनन डॉयल ने चार उपन्यास और छप्पन लघु कथाएं लिखी हैं जिसमें होम्स को चित्रित किया गया है। पहली दो कथाएं (लघु उपन्यास) क्रमशः 1887 में बीटन्स क्रिसमस ऐनुअल में और 1890 में लिपिनकॉट्स मंथली मैग्जीन में आईं.

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शोभा राम

शोभा राम एक भारतीय राजनीतिज्ञ तथा पूर्व अलवर से लोकसभा सांसद हैं | .

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शीला कौल

शीला कौल (7 फ़रवरी 1915 – 13 जून 2015) राजनीतिज्ञ, सामाजिक कार्यकर्ता, समाज सुधारक, शिक्षाविद, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सामाजिक लोकतंत्रीय नेत्री, पूर्व केंद्रीय कैबिनेट मंत्री, स्वतंत्रता सेनानी और हिमाचल प्रदेश की पूर्व राज्यपाल रह चुकी हैं। वे भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के साले प्रोफेसर कैलाशनाथ कौल की पत्नी और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की मामी थी। .

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सचिन पायलट

लेफ्टिनेंट सचिन पायलट (जन्म ७ सितंबर १९७७) एक भारतीय राजनीतिज्ञ तथा भारत सरकार की पंद्रहवीं लोकसभा के मंत्रीमंडलमें संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री में मंत्री रहे है। ये चौदहवीं लोकसभा में राजस्थान के दौसा लोकसभा क्षेत्र का भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की ओर से प्रतिनिधित्व करते हैं। .

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सत्येन्द्र नारायण सिन्हा

सत्येन्द्र नारायण सिन्हा (12 जुलाई 1917 – 4 सितम्बर 2006) एक भारतीय राजनेता थे। वे बिहार के मुख्यमंत्री रहे। प्यार से लोग उन्हें छोटे साहब कहते थे। वे भारत के स्वतंत्रता सेनानी, राजनीतिज्ञ,सांसद, शिक्षामंत्री, जेपी आंदोलन के स्तम्भ तथा बिहार राज्य के मुख्यमंत्री रहे हैं। .

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समाजशास्त्र

समाजशास्त्र मानव समाज का अध्ययन है। यह सामाजिक विज्ञान की एक शाखा है, जो मानवीय सामाजिक संरचना और गतिविधियों से संबंधित जानकारी को परिष्कृत करने और उनका विकास करने के लिए, अनुभवजन्य विवेचनगिडेंस, एंथोनी, डनेर, मिशेल, एप्पल बाम, रिचर्ड.

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सरिता सिंह

सरिता सिंह एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं, जो छात्र युवा संघ समिति के पदाधिकारी हैं, आम आदमी पार्टी (छात्र) की छात्र शाखा। वह दिल्ली के छठी विधान सभा के सदस्य हैं। सिंह एक सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं। .

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सर्वहारा

रूमानिया का एक साम्यवादी क्रांतिकारी पोस्टर जिसमें ध्वज पर लिखा है 'विश्वभर के प्रोलितारियनों एक हो जाओ' सर्वहारा (प्रोलितारियत / प्रोलिटेरियट​ / Proletariat) समाजशास्त्र, राजनीति और अर्थशास्त्र में समाज की नीचे वाली श्रेणियों को कहा जाता है, जो अक्सर शारीरिक श्रम से जीवनी चलाते हैं। औद्योगिक समाजों में अक्सर कारख़ानों में काम करने वाले मज़दूरों को 'प्रोलिटेरियट​' कहा जाता था लेकिन कभी-कभी कृषकों और अन्य ग़रीब मेहनत करने वाले लोगों को भी इसमें शामिल किया जाता है। .

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सर्वहित

दर्शनशास्त्र, अर्थशास्त्र और राजनीति में सर्वहित (common good, common weal) किसी संगठन, समुदाय, राज्य, राष्ट्र या अन्य जन-समूह के सभी या अधिकांश सदस्यों की भलाई के ध्येय को कहते हैं, जिसे नागरिकता, सामूहिक प्रयास, सरकरी परियोजनाओं या अन्य विधियों द्वारा प्राप्त करने की कोशिश करी जाती है। सामाजिक जीवन में ऐसी कई परिस्थितियाँ होती हैं जिसमें अगर सभी लोग केवल अपने लाभ के लिए काम करे तो सभी को हानि पहुँचती है जबकि सर्वहित को ध्यान में रखकर काम करने से सभी के जीवनस्तर में सुधार होता है। मसलन किसी भी नागरिक के लिए कर (टैक्स) न देना उसके निजी फ़ायदे में माना जा सकता है लेकिन यही सर्वहित में सभी से कर न लिया जाए तो यातायात, रक्षा, शिक्षा, अपराध की रोकथाम, आपातकालीन सहायता, इत्यादि लगभग जीवन के सभी पहलुओं पर बुरा प्रभाव पड़ता है। .

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सर्वेपल्लि राधाकृष्णन

डॉ॰ सर्वपल्ली राधाकृष्णन (சர்வபள்ளி ராதாகிருஷ்ணன்; 5 सितम्बर 1888 – 17 अप्रैल 1975) भारत के प्रथम उप-राष्ट्रपति (1952 - 1962) और द्वितीय राष्ट्रपति रहे। वे भारतीय संस्कृति के संवाहक, प्रख्यात शिक्षाविद, महान दार्शनिक और एक आस्थावान हिन्दू विचारक थे। उनके इन्हीं गुणों के कारण सन् १९५४ में भारत सरकार ने उन्हें सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से अलंकृत किया था। उनका जन्मदिन (५ सितम्बर) भारत में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। .

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सरोज पांडेय

सरोज पांडेय एक भारतीय राजनीतिज्ञ तथा वर्तमान भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष हैं | वे पूर्व दुर्ग से लोकसभा सांसद हैं | वे पूर्व छत्तीसगढ़ विधान सभा में वैशाली नगर से विधायक रह चुकी हैं | बीजेपी की राष्ट्रीय महासचिव सरोज पांडे ने Mar 23, 2018 छत्तीसगढ़ में राज्यसभा की एकमात्र सीट पर हुए चुनाव में कांग्रेस प्रतिद्वंद्वी लेखराम साहू को हरा दिया .

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साधु सिंह धर्मसोत

साधु सिंह धर्मसोत वर्तमान पंजाब सरकार में मंत्री हैं। वे पंजाब विधान सभा केे नाभा विधानसभा क्षैत्र सेे निर्वाचित सदस्य हैैं। .

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सामाजिक संघटन

समाजशास्त्र में, सामाजिक संघटन एक सैद्धांतिक अवधारणा होती है जिसके अंतर्गत एक समाज या सामाजिक संरचना को एक "क्रियाशील संघटन" के रूप में देखते हैं। इस दृष्टिकोण से, आदर्शतः, सामाजिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए, सामाजिक विशेषताओं, जैसे कानून, परिवार, अपराध आदि, के संबंधों का निरीक्षण समाज के अन्य लक्षणों के साथ पारस्परिक क्रिया के दौरान किया जाता है। एक समाज या सामाजिक संघटन के सभी अवयवों का एक निश्चित प्रकार्य होता है जो उस संघटन के स्थायित्व और सामंजस्य को बनाये रखता है। .

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सामाजिक विज्ञान

सामाजिक विज्ञान (Social science) मानव समाज का अध्ययन करने वाली शैक्षिक विधा है। प्राकृतिक विज्ञानों के अतिरिक्त अन्य विषयों का एक सामूहिक नाम है 'सामाजिक विज्ञान'। इसमें नृविज्ञान, पुरातत्व, अर्थशास्त्र, भूगोल, इतिहास, विधि, भाषाविज्ञान, राजनीति शास्त्र, समाजशास्त्र, अंतरराष्ट्रीय अध्ययन और संचार आदि विषय सम्मिलित हैं। कभी-कभी मनोविज्ञान को भी इसमें शामिल कर लिया जाता है। .

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साहित्यिक आन्दोलन

साहित्यिक आन्दोलन उस विचारधारा का नाम जो किसी विशेष कारण से किसी विशेष काल के साहित्य को प्रभावित करते हैं। साहित्य को प्रभावित करने वाले ये विशेष कारण राजनैतिक, सामाजिक या धार्मिक हो सकते हैं। श्रेणी:साहित्यिक आंदोलन श्रेणी:साहित्य.

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साहिब सिंह वर्मा

साहिब सिंह वर्मा (अंग्रेजी: Sahib Singh Verma, जन्म:15 मार्च 1943 - मृत्यु: 30 जून 2007) भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष व तेरहवीं लोक सभा के सांसद (1999–2004) थे। 2002 में उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी ने अपनी सरकार में श्रम मन्त्री नियुक्त किया। इससे पूर्व साहब सिंह 1996 से 1998 तक दिल्ली प्रदेश के मुख्यमन्त्री भी रहे। 30 जून्, 2007 को जयपुर-दिल्ली हाईवे पर एक कार-दुर्घटना में अचानक उनका देहान्त हो गया। उस समय वे सीकर जिला से नीम का थाना में एक विद्यालय की आधारशिला रखकर वापस अपने घर दिल्ली आ रहे थे। .

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सिद्धांत (थिअरी)

सिद्धांत, सिद्धि का अंत है। यह वह धारणा है जिसे सिद्ध करने के लिए, जो कुछ हमें करना था वह हो चुका है और अब स्थिर मत अपनाने का समय आ गया है। धर्म, विज्ञान, दर्शन, नीति, राजनीति सभी सिद्धांत की अपेक्षा करते हैं। .

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सिन्धु-गंगा के मैदान

सिन्धु-गंगा मैदान का योजनामूलक मानचित्र सिन्धु-गंगा का मैदान, जिसे उत्तरी मैदानी क्षेत्र तथा उत्तर भारतीय नदी क्षेत्र भी कहा जाता है, एक विशाल एवं उपजाऊ मैदानी इलाका है। इसमें उत्तरी तथा पूर्वी भारत का अधिकांश भाग, पाकिस्तान के सर्वाधिक आबादी वाले भू-भाग, दक्षिणी नेपाल के कुछ भू-भाग तथा लगभग पूरा बांग्लादेश शामिल है। इस क्षेत्र का यह नाम इसे सींचने वाली सिन्धु तथा गंगा नामक दो नदियों के नाम पर पड़ा है। खेती के लिए उपजाऊ मिट्टी होने के कारण इस इलाके में जनसंख्या का घनत्व बहुत अधिक है। 7,00,000 वर्ग किमी (2,70,000 वर्ग मील) जगह पर लगभग 1 अरब लोगों (या लगभग पूरी दुनिया की आबादी का 1/7वां हिस्सा) का घर होने के कारण यह मैदानी इलाका धरती की सर्वाधिक जनसंख्या वाले क्षेत्रों में से एक है। सिन्धु-गंगा के मैदानों पर स्थित बड़े शहरों में अहमदाबाद, लुधियाना, अमृतसर, चंडीगढ़, दिल्ली, जयपुर, कानपुर, लखनऊ, इलाहाबाद, वाराणसी, पटना, कोलकाता, ढाका, लाहौर, फैसलाबाद, रावलपिंडी, इस्लामाबाद, मुल्तान, हैदराबाद और कराची शामिल है। इस क्षेत्र में, यह परिभाषित करना कठिन है कि एक महानगर कहां शुरू होता है और कहां समाप्त होता है। सिन्धु-गंगा के मैदान के उत्तरी छोर पर अचानक उठने वाले हिमालय के पर्वत हैं, जो इसकी कई नदियों को जल प्रदान करते हैं तथा दो नदियों के मिलन के कारण पूरे क्षेत्र में इकट्ठी होने वाली उपजाऊ जलोढ़ मिटटी के स्रोत हैं। इस मैदानी इलाके के दक्षिणी छोर पर विंध्य और सतपुड़ा पर्वत श्रृंखलाएं तथा छोटा नागपुर का पठार स्थित है। पश्चिम में ईरानी पठार स्थित है। .

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सिकन्दर बख्त

सिकन्दर बख्त(अंग्रेजी: Sikander Bakht, जन्म: 24 अगस्त 1918 – मृत्यु: 23 फ़रवरी 2004) भारत के राजनीतिज्ञ होने के साथ-साथ स्वतंत्रता सेनानी भी थे। उनकी गणना भारतीय जनता पार्टी के शीर्षस्थ राजनयिकों में की जाती थी। मोरारजी देसाई की जनता सरकार तथा अटल बिहारी वाजपेयी की एनडीए सरकार में वे केन्द्रीय मन्त्री रहे। जिस समय उनका निधन हुआ वे केरल के राज्यपाल पद पर आसीन थे। सन् 2000 में उन्हें पद्म विभूषण से नवाजा गया। .

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संदीप कुमार (राजनेता)

संदीप कुमार आम आदमी पार्टी के राजनेता हैं। वे दिल्ली सरकार में अनुसूचित जाति कल्याण के पद पर थे साथ ही महिला एवं बाल कल्याण मंत्री भी रहे। ये अपने कार्यकाल के दौरान केजरीवाल के मंत्रिमंडल में सबसे कम उम्र के मंत्री थे। उन्होंने दिल्ली की छठी विधान सभा में सुलतान पुर माजरा (विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र) का प्रतिनिधित्व किया। .

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संधि (बहुविकल्पी)

संधि संस्कृत का एक शब्द है जिसका सामान्य अर्थ होता जोड़, जुड़ाव, योजन इत्यादि। संधि का आधुनिक हिन्दी में कई अन्य अर्थों में भी प्रयोग होता है जिसमें समझौता या सुलह करना मुख्य है।.

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संभ्रांत वर्ग

संभ्रांत वर्ग या ऍलीट​ (elite) समाजशास्त्र और राजनीति में किसी समाज या समुदाय में उस छोटे से गुट को कहते हैं जो अपनी संख्या से कहीं ज़्यादा धन, राजनैतिक शक्ति या सामाजिक प्रभाव रखता है।, Yitzhak Sternberg, BRILL, 2002, ISBN 978-90-04-12873-6,...

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संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपिता

स्वतंत्रता घोषणापत्र के प्रारूप (ड्राफ़्ट) की प्रस्तुति सन् 1789 में अमेरिका के संविधान के लिए आयोजित हस्ताक्षर सभा का दृश्य संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपिता उन राजनैतिक नेताओं और अन्य हस्तियों को कहा जाता है जिन्होंने अमेरिकी क्रान्ति में अमेरिका के स्वतंत्रता घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किया हो, अमेरिकी संविधान को तैयार करने में योगदान दिया हो या कोई अन्य अहम भूमिका निभाई हो। अलग-अलग स्रोतों में इन राष्ट्रपिताओं के नाम भी अलग-अलग बताए जाते हैं। अमेरिकी इतिहासकार रिचर्ड मोरिस ने अपनी 1973 में छपी पुस्तक "वह सात जिन्होंने हमारी तकदीरें बनाई: राष्ट्रपिताओं का क्रन्तिकारी रूप" में सात व्यक्तियों के छोटे से समूह को अमेरिका के असली राष्ट्रपिताओं का दर्जा दिया है -.

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संस्कृत साहित्य

बिहार या नेपाल से प्राप्त देवीमाहात्म्य की यह पाण्डुलिपि संस्कृत की सबसे प्राचीन सुरक्षित बची पाण्डुलिपि है। (११वीं शताब्दी की) ऋग्वेदकाल से लेकर आज तक संस्कृत भाषा के माध्यम से सभी प्रकार के वाङ्मय का निर्माण होता आ रहा है। हिमालय से लेकर कन्याकुमारी के छोर तक किसी न किसी रूप में संस्कृत का अध्ययन अध्यापन अब तक होता चल रहा है। भारतीय संस्कृति और विचारधारा का माध्यम होकर भी यह भाषा अनेक दृष्टियों से धर्मनिरपेक्ष (सेक्यूलर) रही है। इस भाषा में धार्मिक, साहित्यिक, आध्यात्मिक, दार्शनिक, वैज्ञानिक और मानविकी (ह्यूमैनिटी) आदि प्राय: समस्त प्रकार के वाङ्मय की रचना हुई। संस्कृत भाषा का साहित्य अनेक अमूल्य ग्रंथरत्नों का सागर है, इतना समृद्ध साहित्य किसी भी दूसरी प्राचीन भाषा का नहीं है और न ही किसी अन्य भाषा की परम्परा अविच्छिन्न प्रवाह के रूप में इतने दीर्घ काल तक रहने पाई है। अति प्राचीन होने पर भी इस भाषा की सृजन-शक्ति कुण्ठित नहीं हुई, इसका धातुपाठ नित्य नये शब्दों को गढ़ने में समर्थ रहा है। संस्कृत साहित्य इतना विशाल और scientific है तो भारत से संस्कृत भाषा विलुप्तप्राय कैसे हो गया? .

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संघीय विधानसभा

राजनीति शास्त्र में संघीय विधानसभा का तात्पर्य ऐसी प्रतिनिधि सभा से है जो कई स्थानीय निकायों से मिलकर बनी होती है। उपरोक्त विचार ग़लत हो सकते हैं। विशेषज्ञों से अनुरोध है कि वे अपना योगदान दें। श्रेणी:राजनीति.

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संगम साहित्य

संगम संगम के अन्य अर्थों के लिये यहां जाएं - संगम (बहुविकल्पी) ---- ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी से लेकर ईसा के पश्चात दूसरी शताब्दी तक (लगभग) लिखे गए तमिल साहित्य को संगम साहित्य कहते हैं। लोककथाओं के अनुसार तमिल शासकों ने कुछ समयान्तरालों की अवधि में सम्मेलनों का आयोजन किया जिसमें लेखक अपने ज्ञान की चर्चा तर्क-वितर्क के रूप में करते थे। ऐसा करने से तमिल साहत्य का उत्तरोत्तर विकास हुआ। संगम साहित्य के अन्तर्गत ४७३ कवियों द्वारा रचित २३८१ पद्य हैं। इन कवियों में से कोई १०२ कवि अनाम हैं। दक्षिण भारत के प्राचीन इतिहास के लिये संगम साहित्य की उपयोगिता अनन्य है। इस साहित्य में उस समय के तीन राजवंशों का उल्लेख मिलता है: चोल, चेर और पाण्ड्य। संगम तमिल कवियों का संघ था जो पाण्ड्य शासको के संरक्षण में हुए थे। कुल तीन संगमों का जिक्र हुआ है।प्रथम संगम मदुरा में अगस्त्य ऋषि के अध्यक्षता में हुआ था। शिलप्पादिकारम, जीवक चिन्तामणि, तोल्क्पियम, मणिमेखले कुछ महत्वपूर्ण संगम महाकाव्य हैं। जैसा कि प्राचीन भारतीय इतिहास ग्रंथो में अतिशयोक्तिपूर्ण वर्णनों की भरमार मिलती है, संगम साहित्य भी इसका अपवाद नहीं है। इसलिए इन ग्रंथो को आधार मानकर इतिहास लिखना उचित नही माना गया है फिर भी दक्षिण भारत के प्राचीन समय के इतिहास की रुपरेखा जानने में यह बहुत सहायक है। .

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सुदीप्त कविराज

सुदीप्त कविराज दक्षिण एशियाई राजनीति व बौद्धिक इतिहास के एक विद्वान है जिनका नाम अक्सर पोस्टकोलोनियल और सबाल्टर्न अध्ययन के संबद्ध में लिया जाता है। ये वर्तमान में कोलम्बिया विश्वविद्यालय के मध्य पूर्वी, दक्षिण एशियाई और अफ्रीकी अध्ययन विभाग में शिक्षण कर रहे हैं। .

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सुनील दत्त

सुनील दत्त (अंग्रेजी: Sunil Dutt, पंजाबी: ਸੁਨੀਲ ਦੱਤ, जन्म: 6 जून 1929, मृत्यु: 25 मई 2005), जिनका असली नाम बलराज दत्त था, भारतीय फिल्मों के विख्यात अभिनेता, निर्माता व निर्देशक थे, जिन्होंने कुछ पंजाबी फिल्मों में भी अभिनय किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने भारतीय राजनीति में भी सार्थक भूमिका निभायी। मनमोहन सिंह की सरकार में 2004 से 2005 तक वे खेल एवं युवा मामलों के कैबिनेट मन्त्री रहे। उनके पुत्र संजय दत्त भी फिल्म अभिनेता हैं। उन्होंने 1984 में कांग्रेस पार्टी के टिकट पर मुम्बई उत्तर पश्चिम लोक सभा सीट से चुनाव जीता और सांसद बने। वे यहाँ से लगातार पाँच बार चुने जाते रहे। उनकी मृत्यु के बाद उनकी बेटी प्रिया दत्त ने अपने पिता से विरासत में मिली वह सीट जीत ली। भारत सरकार ने 1968 में उन्हें पद्म श्री सम्मान प्रदान किया। इसके अतिरिक्त वे बम्बई के शेरिफ़ भी चुने गये। .

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सुनील शास्त्री

सुनील शास्त्री भारत के द्वितीय प्रधानमन्त्री लाल बहादुर शास्त्री के पुत्र हैं। उन्होंने अभी हाल में ही नरेन्द्र मोदी से प्रभावित होकर भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की है। जिन दिनों वे भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस के थे उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार में एक लम्बे समय तक मन्त्री पद का दायित्व दिया गया। बाद में काँग्रेस पार्टी से उनका मोहभंग हुआ और उन्होंने भाजपा ज्वाइन कर ली। अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमन्त्रित्व काल में भाजपा की केन्द्रीय कार्यकारिणी में राष्ट्रीय सचिव रह चुके सुनील शास्त्री एक राजनेता के अलावा कवि और लेखक भी हैं। उन्होंने अपने पिता के जीवन पर आधारित एक पुस्तक हिन्दी में लिखी है जिसका अंग्रेजी अनुवाद भी प्रकाशित हो चुका है। .

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सुनील अम्बेकर

सुनील आंबेकर एक प्रतिष्ठित समाज सेवी एवं छात्र कार्यकर्ता हैं। वर्तमान में ये अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के राष्ट्रीय संगठन मंत्री हैं। ये छात्र जीवन से ही परिषद् से जुड़े हैं और देश भर में संगठन कार्य हेतु प्रवास करते हैं। बडे ही सरल स्वभाव होने के साथ ही वे अविवाहित भी हैं तथा भारतीय राष्ट्रवाद और छात्र राजनीति पर इनका गहरा अध्ययन है। .

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सुब्रमनियन स्वामी

डॉ॰ सुब्रह्मण्यम् स्वामी (जन्म: 15 सितम्बर 1939 चेन्नई, तमिलनाडु, भारत) जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं। वे सांसद के अतिरिक्त 1990-91 में वाणिज्य, विधि एवं न्याय मन्त्री और बाद में अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार आयोग के अध्यक्ष भी रहे। 1994-96 के दौरान विश्व व्यापार संगठन के श्रमिक मानकों के निर्धारण में उन्होंने प्रभावी भूमिका निभायी। हार्वर्ड विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में डॉक्ट्रेट की उपाधि प्राप्त करने के बाद उन्होंने साइमन कुजनैट्स और पॉल सैमुअल्सन के साथ कई प्रोजेक्ट्स पर शोध कार्य किया और फिर पॉल सैमुअल्सन के साथ संयुक्त लेखक के रूप में इण्डैक्स नम्बर थ्यौरी का एकदम नवीन और पथ प्रदर्शक अध्ययन प्रस्तुत किया। वे हार्वर्ड विश्वविद्यालय के विजिटिंग फैकल्टी मैम्बर भी रहे हैं। वे ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने अपने आदर्शों के लिए निर्भीक होकर संघर्ष किया है। भारत में आपातकाल के दौरान संघर्ष, तिब्बत में कैलाश-मानसरोवर यात्री मार्ग खुलवाने में उनके प्रयास, भारत-चीन सम्बन्धों में सुधार, भारत द्वारा इजरायल की राजनैतिक स्वीकारोक्ति, आर्थिक सुधार और हिन्दू पुनरुस्थान आदि अनेक उल्लेखनीय कार्य उन्होंने किये हैं। स्वामी ने स्वेच्छा से राष्ट्रहित को सर्वोपरि समझते हुए अपनी पार्टी का विलय भारतीय जनता पार्टी में कर दिया। अब वे एकनिष्ठ होकर नरेन्द्र मोदी को भारत का प्रधानमन्त्री बनाने के लिये पूरे देश में प्रचार किया और भारी बहुमत से जीत हासिल किया और भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी, फिर नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद पुनः Z+ श्रेणी की सुरक्षा दे दिया गया। आजकल नेशनल हेराल्ड केस और अयोध्या राम मंदिर को लेकर चर्चा मे है। .

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सुभाष महरिया

सुभाष महरिया एक भारतीय राजनीतिज्ञ तथा पूर्व सीकर से भारतीय जनता पार्टी के सांसद हैं | .

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सुमन पोखरेल

सुमन पोखरेल (जन्म २१ सितम्बर, १९६७) नेपाली कवि, गीतकार, अनुवादक तथा कलाकार हैं। Ed.

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सुमन भगत

सुमन लता भगत एक राजनीतिज्ञ तथा पूर्व जम्मू और कश्मीर सरकार में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री रह चुकी हैं। वे जम्मू और कश्मीर विधानसभा में आर.

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सुरज भान

सुरज भान एक भारतीय राजनीतिज्ञ तथा पूर्व उत्तर प्रदेश, बिहार तथा हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल है। वे राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष रह चुके है। वे एक दलित नेता है। .

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सुरेश कुमार खन्ना

सुरेश कुमार खन्ना (अंग्रेजी: Suresh Kumar Khanna, जन्म: 1954) भारतीय जनता पार्टी के एकमात्र ऐसे राजनेता हैं जिन्होंने शाहजहाँपुर शहर से उत्तर प्रदेश विधानसभा का चुनाव 1989 से 2017 तक लगातार 8 बार जीता। शहर में उनकी लोकप्रियता को देखते हुए भाजपा ने उन्हें सन् 2004 में शाहजहाँपुर जिले से लोक सभा का चुनाव लड़ाया जिसमें उन्हें केवल 16.34% मत प्राप्त हुए। शाहजहाँपुर लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र से सन् 2004 में सांसद का चुनाव हारने के बाद उन्होंने विधायक के रूप में ही राजनीति में रहना पसन्द किया। वे सुरेश खन्ना के नाम से ही अधिक लोकप्रिय हैं। .

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सुषमा स्वराज

सुषमा स्वराज (जन्म: १४ फरवरी १९५२) एक भारतीय महिला राजनीतिज्ञ और भारत की विदेश मंत्री हैं। वे वर्ष २००९ में भारत की भारतीय जनता पार्टी द्वारा संसद में विपक्ष की नेता चुनी गयी थीं, इस नाते वे भारत की पन्द्रहवीं लोकसभा में प्रतिपक्ष की नेता रही हैं। इसके पहले भी वे केन्द्रीय मन्त्रिमण्डल में रह चुकी हैं तथा दिल्ली की मुख्यमन्त्री भी रही हैं। वे सन २००९ के लोकसभा चुनावों के लिये भाजपा के १९ सदस्यीय चुनाव-प्रचार-समिति की अध्यक्ष भी रहीं थीं। अम्बाला छावनी में जन्मी सुषमा स्वराज ने एस॰डी॰ कालेज अम्बाला छावनी से बी॰ए॰ तथा पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ से कानून की डिग्री ली। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने पहले जयप्रकाश नारायण के आन्दोलन में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। आपातकाल का पुरजोर विरोध करने के बाद वे सक्रिय राजनीति से जुड़ गयीं। वर्ष २०१४ में उन्हें भारत की पहली महिला विदेश मंत्री होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है, जबकि इसके पहले इंदिरा गांधी दो बार कार्यवाहक विदेश मंत्री रह चुकी हैं। कैबिनेट में उन्हे शामिल करके उनके कद और काबिलियत को स्वीकारा। वे दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री और देश में किसी राजनीतिक दल की पहली महिला प्रवक्ता बनने की उपलब्धि भी उन्हीं के नाम दर्ज है। .

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स्मृति ईरानी

स्मृति ज़ुबिन ईरानी (स्मृति मल्होत्रा, पंजाबी में ਸਮ੍ਰਿਤੀ ਜੁਬੀਨ ਇਰਾਨੀ,जन्म: 23 मार्च 1976) एक भारतीय टेलीविज़न अभिनेत्री, महिला राजनीतिज्ञ और भारत सरकार के अंतर्गत कपड़ा मंत्री हैं और इससे पूर्व वे मानव संसाधन विकास मंत्री रह चुकी हैं। .

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स्वराज कौशल

स्वराज कौशल भारतीय राजनीतिज्ञ तथा सर्वोच्च न्यायालय में वरिष्ठ वकील हैं। वे छह साल तक राज्यसभा में सांसद रहे साथ ही मिजोरम में राज्यपाल भी रहे। स्वराज कौशल अभी तक सबसे कम आयु में राज्यपाल का पद प्राप्त करने वाले व्यक्ति हैं। १९७५ में इनका विवाह सुषमा स्वराज के साथ में हुआ था। सुषमा स्वराज और उनके पति की उपलब्धियों के ये रिकार्ड लिमका बुक ऑफ व‌र्ल्ड रिकार्ड में दर्ज करते हुए उन्हें विशेष दंपत्ति का स्थान दिया गया है। स्वराज दंपत्ति की एक पुत्री है, जो वकालत कर रही हैं। श्रेणी:1952 में जन्मे लोग श्रेणी:हिमाचल प्रदेश के लोग.

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स्वाति सिंह

स्वाति सिंह एक भारतीय राजनीतिज्ञ और उत्तर प्रदेश सरकार में की एक मंत्री हैं। वे एनआरआई, बाढ़ नियंत्रण, कृषि आयात, कृषि विपणन, कृषि, विदेश व्यापार की मन्त्री तथा महिला कल्याण मंत्रालय, परिवार कल्याण, मातृत्व और बाल कल्याण मन्त्रालयों की राज्य मंत्री हैं। .

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स्वामी सोमदेव

स्वामी सोमदेव आर्य समाज के एक विद्वान धर्मोपदेशक थे। ब्रिटिश राज के दौरान पंजाब प्रान्त के लाहौर शहर में जन्मे सोमदेव का वास्तविक नाम ब्रजलाल चोपड़ा था। सन १९१५ में जिन दिनों वे स्वास्थ्य लाभ के लिये आर्य समाज शाहजहाँपुर आये थे उन्हीं दिनों समाज की ओर से राम प्रसाद 'बिस्मिल' को उनकी सेवा-सुश्रूषा में नियुक्त किया गया था। किशोरावस्था में स्वामी सोमदेव की सत्संगति पाकर बालक रामप्रसाद आगे चलकर 'बिस्मिल' जैसा बेजोड़ क्रान्तिकारी बन सका। रामप्रसाद बिस्मिल ने अपनी आत्मकथा में मेरे गुरुदेव शीर्षक से उनकी संक्षिप्त किन्तु सारगर्भित जीवनी लिखी है। सोमदेव जी उच्चकोटि के वक्‍ता तो थे ही, बहुत अच्छे लेखक भी थे। उनके लिखे हुए कुछ लेख तथा पुस्तकें उनके ही एक भक्‍त के पास थीं जो उसकी लापरवाही से नष्‍ट हो गयीं। उनके कुछ लेख प्रकाशित भी हुए थे। लगभग 57 वर्ष की आयु में उनका निधन हुआ। .

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स्वामी कन्नू पिल्लै

दीवान बहादुर लेविस डोमिनिक स्वामी कन्नू पिळ्ळै (L.D. SWAMIKANNU PILLAI) भारतीय राजनीतिज्ञ, इतिहासज्ञ, भाषाशास्त्री, गणितज्योतिषी एवं प्रशासक थे। .

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स्वायत्तता

विकास अथवा सदाचार, राजनैतिक और जैवनीति दर्शनशास्त्र में स्वायत्तता (autonomy) उस शक्ति को कहते हैं जिसमें किसी को अपना स्वयं पर फैसला लेने का अधिकार मिलता है। स्वायत्त संगठन अथवा संस्थायें स्वतंत्र और स्वयंशासी होती हैं। .

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सैयद ग़ौस

वे एक पाकिस्तानी जनरल, राजनीतिज्ञ और पाकिस्तान के प्रांत, ख़ैबर पख़्तूनख़्वा के पूर्व राज्यपाल थे। .

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सैयद अहमद

डॉ॰ सैयद अहमद (6 मार्च 1945-27 सितंबर 2015) एक भारतीय राजनीतिज्ञ, लेखक और कांग्रेस पार्टी के एक सदस्य थे। उन्होंने 16 मई, 2015 को मणिपुर के सोलहवें राज्यपाल के रूप में शपथ लिया था। वे 4 सितंबर, 2011 से 16 मई, 2015 के मध्य झारखंड के राज्यपाल भी रहे हैं। श्री अहमद वर्ष 1977 में कांग्रेस पार्टी में शामिल हुए तथा महाराष्ट्र विधानसभा के लिए पांच बार (वर्ष 1980,1985,1990,1999 एवं 2004) मुंबई के नागपाड़ा सीट से निर्वाचित हुए। पुस्तक ‘पगडंडी से शाहराह तक’ इनकी अपनी लिखी जीवनी है। 27 सितंबर, 2015 को उनका निधन मुंबई के लीलावती अस्पताल में कैंसर की बीमारी के कारण हुआ। .

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सूर्य देवता

कोई विवरण नहीं।

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हयात शियरपाउ

वे एक पाकिस्तानी राजनीतिज्ञ और पाकिस्तान के प्रांत, ख़ैबर पख़्तूनख़्वा के पूर्व राज्यपाल थे। .

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हरिभाऊ बागड़े

हरिभाऊ बागड़े एक भारतीय राजनीतिज्ञ तथा वर्तमान में महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष है। वे भारतीय जनता पार्टी के सदस्य है। .

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हलीमा याकूब

हलीमा बिंते याकूब (जन्म: 23 अगस्त 1954) सिंगापुर की एक मलय राजनीतिज्ञ और सिंगापुर की सत्तारूढ़ पीपुल्स एक्शन पार्टी की भारतीय मूल की सदस्या है। उन्हें 14 जनवरी, 2013 को सिंगापुर की संसद का अध्यक्ष चुना गया। सिंगापुर के गणतांत्रिक इतिहास में वह यह पद संभालने वाली वे प्रथम महिला हैं। हलीमा ने माइकल पाल्मर का स्थान लिया जिन्होने विवाहेत्तर सम्बन्धों के कारण 12 दिसंबर 2012 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इससे पूर्व वे सामुदायिक विकास, युवा और खेल मंत्रालय में राज्य मंत्री रह चुकी हैं। वे 2001 के बाद से लगातार सिंगापुर के जुरोंग समूह के प्रतिनिधित्व निर्वाचन क्षेत्र से सांसद हैं। .

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हिन्दुस्तान रिपब्लिकन ऐसोसिएशन

हिन्दुस्तान रिपब्लिकन ऐसोसिएशन, जिसे संक्षेप में एच॰आर॰ए॰ भी कहा जाता था, भारत की स्वतंत्रता से पहले उत्तर भारत की एक प्रमुख क्रान्तिकारी पार्टी थी जिसका गठन हिन्दुस्तान को अंग्रेजों के शासन से मुक्त कराने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश तथा बंगाल के कुछ क्रान्तिकारियों द्वारा सन् १९२४ में कानपुर में किया गया था। इसकी स्थापना में लाला हरदयाल की भी महत्वपूर्ण भूमिका थी। काकोरी काण्ड के पश्चात् जब चार क्रान्तिकारियों को फाँसी दी गई और एच०आर०ए० के सोलह प्रमुख क्रान्तिकारियों को चार वर्ष से लेकर उम्रकैद की सज़ा दी गई तो यह संगठन छिन्न-भिन्न हो गया। बाद में इसे चन्द्रशेखर आजाद ने भगत सिंह के साथ मिलकर पुनर्जीवित किया और एक नया नाम दिया हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन। सन् १९२४ से लेकर १९३१ तक लगभग आठ वर्ष इस संगठन का पूरे भारतवर्ष में दबदबा रहा जिसके परिणामस्वरूप न केवल ब्रिटिश सरकार अपितु अंग्रेजों की साँठ-गाँठ से १८८५ में स्थापित छियालिस साल पुरानी कांग्रेस पार्टी भी अपनी मूलभूत नीतियों में परिवर्तन करने पर विवश हो गयी। .

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हिन्दू धर्म का विश्वकोश

हिन्दू धर्म का विश्वकोश या इंसाइक्लोपीडिया ऑफ हिन्दुइज्म (Encyclopedia of Hinduism) हिन्दू धर्म एवं इससे सम्बन्धित अनेकानेक विषयों का विश्वकोश है। इसका प्रथम संस्करण २०१२ में निकला। यह ग्यारह भागों में है और अंग्रेजी भाषा में है। यह विश्वकोश ७१८४ पृष्टों में है जिसमें मन्दिरों, स्थानों, विचारकों, कर्मकाण्डों एवं त्यौहारों का विवरण रंगीन चित्रों के साथ दिया हुआ है। यह परियोजना परमार्थ निकेतन के स्वामी चिदानन्द सरस्वती की प्रेरणा से चली एवं फलीभूत हुई। २५ वर्षों के निरन्तर प्रयास तथा २००० से अधिक विद्वानों के योगदान से यह विश्वकोश निर्मित हुआ है। इसके सम्पादक डॉ कपिल कपूर हैं। यह विश्वकोश केवल हिन्दू धर्म तक ही सीमीति नहीं है बल्कि कला, इतिहास, भाषा, साहित्य, दर्शन, राजनीति, विज्ञान तथा नारी विषयों को भी इसमें स्थान दिया गया है। .

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हिमंता बिस्वा शर्मा

हिमांता बिस्वा सरमा एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं, जिन्होंने 2001 से 2015 तक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के टिकट से असम के जलकुबारी निर्वाचन क्षेत्र से विधानसभा के रूप में और मई 2016 तक भारतीय जनता पार्टी के सदस्य के रूप में विधायक के रूप में सेवा की है। .

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हुकम राम

हुकम राम मेघवाल एक भारतीय राजनीतिज्ञ तथा पूर्व में जालौर लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा सांसद है। वे जनता पार्टी दल के राजनेता है। .

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हेरक्लिटस

हेरक्लिटस(535 ईसा पूर्व -475 ईसा पूर्व) यूनानी दार्शनिक था। .

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हेकमत इ शिराज़ी

हेकमत इ शिराज़ी जो मिर्ज़ा अली असगर ख़ान के नाम से भी जाने जाते हैं ' हेकमत शिराज़ी (जन्म:१६ जून १८९२-मृत्यु:५ मार्च १९८०) एक ईरानी राजनीतिज्ञ,राजनयिक और लेखक थे ' ये ईरान के विदेश मामलों में विदेश मंत्री और न्याय मंत्री थे ' .

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जनोत्तेजक

जनोत्तेजक (demagogue) ऐसा राजनीतिक नेता होता है जो साधारण लोगों में पूर्वाग्रह और अनभिज्ञता के प्रयोग से उन्हें भावुक बनाकर या भड़का कर स्वयं को लोकप्रिय बनाये और सत्ता प्राप्त करने का सफल या असफल प्रयास करे। जनोत्तेजक लोगों में विवेचना (समझ-बूझकर विश्वास करने) पर रोक लगाते हैं और रातनीतिक व्यवहार के मान्य आचार का उल्लंघन करते हैं या उल्लंघन करने की धमकी देते हैं। वे अक्सर किसी गूढ़ राष्ट्रीय या सामाजिक समस्या पर तेज़ी से बलपूर्वक कदम उठाने की बात करते हैं और सूझबूझ से काम लेने वाले विरोधियों पर कमज़ोरी, गद्दारी या भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हैं। इतिहास में ऐसे नेताओं ने कई बार अपने देशों व समाजों को हानि पहुँचाई है। .

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जमना देवी बारुपाल

जमना देवी बारुपाल एक भारतीय राजनीतिज्ञ तथा राजस्थान राज्य से पूर्व राज्य सभा सांसद है। जो भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से सम्बंध राजनेत्री है। .

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जया बच्चन

जया बच्चन (जया भादुरी, विवाह पूर्व) हिन्दी फिल्मों की एक अभिनेत्री हैं। .

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जयाप्रदा

जयाप्रदा (జయప్రద) (जन्म 3 अप्रैल 1962) एक भारतीय फ़िल्म अभिनेत्री और राजनीतिज्ञ हैं। .

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जयंत चौधरी

जयन्त चौधरी (जन्म 27 दिसम्बर 1978) एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं। वो राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के जनरल सचिव और पंद्रहवी लोक सभा में उत्तर प्रदेश के मथुरा लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र से सांसद रहे हैं। वो पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के पौत्र एवं अजीत सिंह के पुत्र हैं। उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनोमिक्स से स्नातक की। .

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जल संसाधन

जल संसाधन पानी के वह स्रोत हैं जो मानव के लिए उपयोगी हों या जिनके उपयोग की संभावना हो। पानी के उपयोगों में शामिल हैं कृषि, औद्योगिक, घरेलू, मनोरंजन हेतु और पर्यावरणीय गतिविधियों में। वस्तुतः इन सभी मानवीय उपयोगों में से ज्यादातर में ताजे जल की आवश्यकता होती है। पृथ्वी पर पानी की कुल उपलब्ध मात्रा अथवा भण्डार को जलमण्डल कहते हैं। पृथ्वी के इस जलमण्डल का ९७.५% भाग समुद्रों में खारे जल के रूप में है और केवल २.५% ही मीठा पानी है, उसका भी दो तिहाई हिस्सा हिमनद और ध्रुवीय क्षेत्रों में हिम चादरों और हिम टोपियों के रूप में जमा है। शेष पिघला हुआ मीठा पानी मुख्यतः जल के रूप में पाया जाता है, जिस का केवल एक छोटा सा भाग भूमि के ऊपर धरातलीय जल के रूप में या हवा में वायुमण्डलीय जल के रूप में है। मीठा पानी एक नवीकरणीय संसाधन है क्योंकि जल चक्र में प्राकृतिक रूप से इसका शुद्धीकरण होता रहता है, फिर भी विश्व के स्वच्छ पानी की पर्याप्तता लगातार गिर रही है दुनिया के कई हिस्सों में पानी की मांग पहले से ही आपूर्ति से अधिक है और जैसे-जैसे विश्व में जनसंख्या में अभूतपूर्व दर से वृद्धि हो रही हैं, निकट भविष्य मैं इस असंतुलन का अनुभव बढ़ने की उम्मीद है। पानी के प्रयोक्ताओं के लिए जल संसाधनों के आवंटन के लिए फ्रेमवर्क (जहाँ इस तरह की एक फ्रेमवर्क मौजूद है) जल अधिकार के रूप में जाना जाता है। आज जल संसाधन की कमी, इसके अवनयन और इससे संबंधित तनाव और संघर्ष विश्वराजनीति और राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। जल विवाद राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण विषय बन चुके हैं। .

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ज़ुल्फ़िक़ार अली भुट्टो

ज़ुल्फ़िक़ार अली भुट्टो (उर्दू व सिंधी: ذوالفقار علی بھٹو, जन्म: 5 जनवरी 1928 - मौत: 4 अप्रैल 1979) पाकिस्तान के प्रधान मन्त्री थे। वे 1973 से 1977 तक प्रधानमंत्री रहे और इससे पहले अय्यूब ख़ान के शासनकाल में विदेश मंत्री रहे थे। लेकिन अय्यूब ख़ान से मतभेद होने के कारण उन्होंने अपनी नई पार्टी (पीपीपी) 1967 में बनाई। 1962 के भारत-चीन युद्ध, 65 और 71 के पाकिस्तान युद्ध, तीनों के समय वे महत्वपूर्ण पदों पर आसीन थे। 1965 के युद्ध के बाद उन्होंने ही पाकिस्तानी परमाणु कार्यक्रम का ढाँचा तैयार किया था। पूर्व पाकिस्तानी नेता बेनज़ीर भुट्टो इन्ही की बेटी थी। पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट के एक फ़ैसले पर उन्हें 1979 में फ़ाँसी पर लटका दिया गया था जिसमें सैन्य शासक ज़िया उल हक़ का हाथ समझा जाता है। श्रेणी:पाकिस्तानी राजनीतिज्ञ श्रेणी:पाकिस्तान के प्रधान मन्त्री.

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जानकी रामचंद्रन

जानकी रामचंद्रन (ജാനകി രാമചന്ദ്രന്‍;ஜானகி ராமச்சந்திரன்), वी एन जानकी के नाम से विख्यात (1923 – 19 मई 1996), एक तमिल अभिनेत्री और राजनीतिज्ञ थीं। .

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जितेन्द्र कुमार गोठवाल

जितेन्द्र कुमार गोठवाल एक भारतीय राजनीतिज्ञ तथा वर्तमान राजस्थान विधानसभा में खण्डार से विधायक हैं | वे भारतीय जनता पार्टी के राजनेता हैं | .

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जगदीश प्रसाद माथुर

जगदीश प्रसाद माथुर एक भारतीय राजनीतिज्ञ तथा पूर्व सीकर से जनता पार्टी के सांसद हैं | .

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जङ्गबहादुर राणा

महाराजा जंगबहादुर कुंवर राणाजी (1816-1877; जङ्गबहादुर राणा) जो जंगबहादुर राणा के नाम से प्रसिद्ध हैं, नेपाल के पहले राणा प्रधानमन्त्री तथा राणा राजवंश के संस्थापक थे। उनका वास्तविक नाम वीर नरसिंह कुँवर था। इनके शासनकाल में नेपाल ने अंग्रजो से लड़ाई में खोया हुआ जमीन का कुछ हिस्सा (बांके, बर्दिया, कैलाली, कंचनपुर) वापस हासिल किया। जंगबहादुर राणा के जन्म क्षत्रिय कुंवर भारदार परिवार के काजी बालनरसिंह कुँवर और थापा वंशके गणेश कुमारी के पुत्र के रूपमें हुआ । वे नेपाल के प्रसिद्ध मुख्तियार (प्रधानमंत्री) भीमसेन थापा के सहोदर भाइ काजी नैनसिंह थापा के भ्रातृपौत्र थे। उनकी नानी रणकुमारी पांडे नेपालके प्रसिद्ध भारदार पाँडे वंश के काजी रणजीत पांडे के पुत्री हैं । ये अपने पूर्वजों की अपेक्षा स्थायी शासन की स्थापना करने में सफल रहे। इन्हें अपने मामा माथवरसिंह थापा के मंत्रित्वकाल में सेनाध्यक्ष तथा प्रधानमंत्री का पद सौंपा गया किंतु शीघ्र ही उन्होंने रानी राज्य लक्ष्मी के आदेश में मामा माथवरसिंहकी छलपूर्वक हत्या कर दी और चौतारिया फत्तेजंग शाह ने नया मंत्रिमंडल बनाया । इस नए मंत्रिमंडल में इन्हें सैन्य विभाग सौंपा गया। दूसरे वर्ष 1846 ई. में शासन में एक संघर्ष छिड़ा। फलस्वरूप फतेहजंग और उनके साथ के 32 अन्य प्रधान व्यक्तियों की कुटिलतापूर्वक हत्या कर दी गई। महारानी द्वारा राणा की नियुक्ति सीधे प्रधान मंत्री पद पर की गई। शीघ्र ही महारानी का विचार परिवर्तित हुआ और उनकी हत्या के षड्यंत्र भी रचे गए। परंतु रानी की योजना असफल रही। फलत: राजा और रानी दोनों को ही भारत में शरण लेनी पड़ी। अब राणा के मार्ग से सारी बाधाएँ परे हट चुकी थीं। शासन को व्यवस्थित और नियंत्रित करने में इन्हें पूर्ण सफलता मिली। यहाँ तक कि जनवरी, 1850 में वे निश्चिंत होकर इंग्लैंड गए और 6 फ़रवरी 1851 तक वहीं रहे। लौटने पर इन्होंने अपने विरुद्ध रची गई हत्या की कुटिल योजनाओं को पूर्णत: विफल कर दिया। इसके बाद आप दंडसंहिता के सुधार कार्यों में तथा तिब्बत के साथ होनेवाले छिटपुट संघर्षों में उलझे रहे। इसी बीच उन्हें भारतीय सिपाही विद्रोह की सूचना मिली। राणा ने विद्रोहियों से किसी प्रकार की बातचीत का विरोध किया और जुलाई, 1857 को सेना की एक टुकड़ी गोरखपुर भेजी। यही नहीं, दिसंबर में इन्होंने 14,000 गोरखा सिपाहियों की एक सेना लखनऊ की ओर भी भेजी थी जिसने 11 मार्च 1858 को लखनऊ की घेरेबंदी में सहयोग दिया। जंगबहादुर राणा को इस कार्य के लिए जी.बी.सी.

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ज्ञानीचन्द

इंजि.

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जैवनैतिकता

जैवनैतिकता जीवविज्ञान एवं दवाईयों में हुई प्रगति के कारण पैदा हुए नैतिक विवादों का दार्शनिक अध्ययन है। जैवनैतिकता उन नैतिक प्रश्नों से जुड़ा हुआ है जो जीव विज्ञान, जैवप्रोद्यौगिकी, औषधि, राजनीति, कानून तथा दर्शन के संबंधों के मध्य उठते हैं। .

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जैक प्रेगेर

जैक प्रेगेर (जन्म 25 जुलाई 1930 को मैन्चेस्टर, इंग्लैंड के एक यहूदी परिवार में हुआ) एक ब्रिटिश डॉक्टर हैं जो चिकित्सा उपचार के साथ-साथ पेशेवर प्रशिक्षण सुविधा भारत के शहर कोलकाता और पश्चिमी बंगाल की गरीब जनता को 1972 से प्रदान करते आ रहे हैं। इसी लक्ष्य के तहत उन्होंने कोलकाता रेस्क्यू नामक संस्था भी बनाई है। जैक ने छोटी-सी उम्र में न्याय का अर्थ समझ लिया था जब बालक अवस्था में उन्होंने अपनी फ़्रांस में जन्मी मौसी को हिटलर की सेना के हाथों जान गवाँते देखा था। जैक ने सेंट एडमंड हॉल, ऑक्स्फ़ोर्ड से स्नतक की शिक्षा पूरी की। यहीं से स्नातकोत्तर में अन्होंने अर्थशास्त्र और राजनीति शास्त्र पढ़े। इसके पश्चात कुछ वर्षों के लिए वह वेल्स में किसान के रूप में काम करते रहे। फिर उन्होंने अपने खेत को बेचकर डॉक्टर बनने का निर्णय लिया। 1965 में उन्हें डबलिन के रॉयल कॉलेज ऑफ़ सरजिन्स में प्रवेश मिला। उस समय उनकी आयु 35 वर्ष की थी। .

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जेफ़री आर्चर

जेफ्रिआर्चर.

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जॉर्ज एनसोन

जॉर्ज अनसन (अंग्रेजी:George Anson) (१३ अक्टूबर १७९७ – २७ मई १८५७) एक ब्रिटिश सेना के ऑफिसर थे तथा राजनीतिज्ञ भी थे। .

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जॉर्ज कार्लिन

जॉर्ज डेनिस पैट्रिक कार्लिन (12 मई 1937 - 22 जून 2008) एक अमेरिकी मान्य हास्य अभिनेता, सामाजिक आलोचक, अभिनेता और लेखक थे, जिन्होंने अपने हास्य एल्बमों के लिए पांच ग्रैमी अवार्ड्स जीते.

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जोगेन्द्र नाथ मंडल

जोगेन्द्र नाथ मंडल पाकिस्तान के आधुनिक राज्य के मध्य और प्रमुख संस्थापक पिता में से एक थे, और देश के पहले कानून मंत्री और श्रमिक के रूप में सेवा करने वाले विधायक थे और यह राष्ट्रमंडल और कश्मीर मामलों के दूसरे मंत्री भी थे। एक भारतीय और बाद में पाकिस्तानी नेता जो पाकिस्तान में कानून और श्रम के पहले मंत्री थे। अनुसूचित जातियों (दलितों) के नेता के रूप में, जोगेंद्रनाथ ने मुस्लिम लीग के साथ पाकिस्तान के लिए अपनी मांग के साथ आम कारण बना दिया था, उम्मीद करते थे कि अनुसूचित जातियों को इसके लाभ मिलेगा और पाकिस्तान के पहले कैबिनेट में शामिल हो गए थे। कानून और श्रम पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमन्त्री लियाकत अली खान को अपना इस्तीफा देने के बाद पाकिस्तान के विभाजन के कुछ सालों बाद वह भारत में आकर चले गए, पाकिस्तानी प्रशासन के कथित हिंदू-विरोधी पूर्वाग्रह का हवाला देते हुए। .

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जीवन की गुणवत्ता

जीवन की गुणवत्ता (Quality of Life) (QOL) व्यक्तियों और समाज की सामान्य भलाई हैं, जो जीवन के नकारात्मक और सकारात्मक विशेषताओं को दर्शाती हैं। इस में जीवन की संतुष्टि देखने को मिलती हैं, जिस में शारीरिक स्वास्थ्य, परिवार, शिक्षा, रोजगार, धन, धार्मिक विश्वास, वित्त और पर्यावरण से लेकर सब शामिल हैं। जीवन की गुणवत्ता संदर्भों की एक विस्तृत श्रृंखला है, जिस में, अंतरराष्ट्रीय विकास, स्वास्थ्य सेवा, राजनीति और रोजगार के क्षेत्र भी शामिल हैं। यह महत्वपूर्ण हैं कि QOL की अवधारणा को बिलकुल हाल में ही बढ़ते स्वास्थ्य से संबंधित QOL (HRQOL) के क्षेत्र के साथ मिश्रित न करें। HRQOL का आकलन प्रभावी ढंग से QOL और उसके स्वास्थ्य के साथ अपने संबंध का मूल्यांकन हैं। जीवन की गुणवत्ता को जीवन स्तर की अवधारणा के साथ भ्रमित नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि जीवन स्तर मुख्य रूप से आय पर आधारित हैं। .

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जी॰ परमेश्वर

परमेश्वर गंगाधरैया (जन्म 6 अगस्त 1951), जो कि जी॰ परमेश्वर के नाम से भी जाने जाते हैं, एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं जो कि कर्नाटक के आठवें तथा वर्तमान उपमुख्यमंत्री हैं। वर्तमान में वे कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस समिति के अध्यक्ष भी हैं। वे 2015 से 2017 के मध्य कर्नाटक के गृह मंत्री भी रह चुके हैं। वे बौद्ध धर्म एवं दर्शन के अनुयायी हैं। .

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ईएससीपी यूरोप

ईएससीपी यूरोप (ESCP Europe) विश्व का एक प्रमुख बिजनेस स्कूल है जो पेरिस, लंदन, बर्लिन, मैड्रिड और टोरिनो में स्थित है। १८१९ में स्थापित किया गया ये संस्थान, दुनिया का सबसे पहला बिजनेस स्कूल माना जाता है यह यूरोप के सर्वश्रेष्ठ बिजनेस स्कूलों में से एक माना जाता है। यह अपने कार्यकारी व्यवसाय प्रबंध में स्नातकोत्तर (Executive MBA) के लिए 2009 QS ग्लोबल 200 बिजनेस स्कूल रिपोर्ट में विश्व रैंकिंग में 15 स्थान पर है। 2010 में, अपने मास्टर इन मैनेजमेंट (MiM) में फाइनेंशियल टाइम्स द्वारा दुनिया भर के 1 स्थान पर था। 2012 में यह दुसरे स्थान पर है। व्यापार और राजनीति के क्षेत्र में ईएससीपी यूरोप के उल्लेखनीय पूर्व छात्रों में शामिल हैं - सीईओ Hermès (पैट्रिक थॉमस), फ्रांस के पूर्व प्रधानमंत्री (Jean-Pierre Raffarin) और यूरोपीय संघ के आंतरिक बाजार और सेवा आयुक्त (Michel Barnier).अधिकांश छात्र अपनी स्नातकोत्तर की पढ़ाई के बाद विपणन, वित्त और प्रबंधन परामर्श के क्षेत्र में बड़ी कंपनियों में जिम्मेदारी के पदों के लिए भर्ती हो जाते हैं। .

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घनश्याम दास अरोड़ा

घनश्याम दास अरोड़ा (जन्म 13 अगस्त 1952) पिता का नाम श्री अर्जुन दास) अरोड़ा भारतीय जनता पार्टी के नेता हैं और वर्तमान में यमुनानगर निर्वाचन क्षेत्र से हरियाणा की 13 वीं विधानसभा के विधायक है। 2014 में उन्होंने 28245 वोटों के अंतर के साथ विधानसभा चुनाव जीता। वह 1967 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) में शामिल हुए और संघ के सक्रिय सदस्य बने। .

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वयलर रामवर्मा

वयलर रामवर्मा या वयलर राम वर्मा (25 मार्च 1928 – 27 अक्टूबर 1975) मलयालम भाषा के कवि थे। यह मुख्य रूप से वयलर के नाम से जाने जाते थे। कलम तलवार की अपेक्षा शक्ति- युक्त और तेज़ है। इसका उत्तम उदाहरण है- साहित्य। मलयालम साहित्य के एक युग पुरुष थे- वयलार रामवर्मा। वयलार रामवर्मा मलयालम के सुप्रसिद्ध गानरचयिता थे। उन्होंने मलयालम में अनेक मार्मिक कविताएँ लिखी है। वे कवि एवं समाज सुधारक थे। समाज में प्रचलित अधंविश्वासों और कुरीतियों को दूर करने के लिए सदा ही उन्होंने अपनी कलम चलाई थी। वे आज भी जन हृदय में निर्भर है। .

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वर्णात्मक नीतिशास्त्र

वर्णात्मक नीतिशास्त्र (descriptive ethics), जिसे तुलनात्मक नीतिशास्त्र (comparative ethics) भी कहा जाता हैं, नैतिकता के बारे में लोगो की आस्थाओं का अध्ययन हैं। वर्णात्मक नीतिशास्त्र निर्देशात्मक या मानदण्डक नीतिशास्त्र से अलग हैं, जो उन नीतिशास्त्रीय सिद्धान्तों का अध्ययन करता हैं, जो ये निर्देशित करते हैं कि लोगों को कैसे कार्य करना चाहिये। और, वर्णात्मक नीतिशास्त्र मेटा-नीतिशास्त्र से भी अलग हैं, जो इसका अध्ययन करता हैं कि नीतिशास्त्रीय शब्द और सिद्धान्त असल में किसे सन्दर्भित करते हैं। प्रत्येक क्षेत्र में माने हुएँ निम्न प्रश्नों के उदाहरण, क्षेत्रों के बीच के अन्तर को दर्शाते हैं.

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वादानुवाद

वादानुवाद (Controversy) ऐसी स्थिति होती है जिसमें किसी विषय पर दो या दो से अधिक मतों को लेकर किसी समुदाय में वाद-विवाद लम्बे अरसे तक चलता रहे। राजनीति, धर्म, दर्शनशास्त्र और कई अन्य बातों को लेकर अक्सर वादानुवाद जारी रहता है। .

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वामपन्थी राजनीति

चेक गणराज्य में श्रमिक संघों द्वारा आयोजित मजदूरों के हक़ों के समर्थन में एक बाईं-तरफ़ा जलूस वामपंथी राजनीति (left-wing politics या leftist politics) राजनीति में उस पक्ष या विचारधारा को कहते हैं जो समाज को बदलकर उसमें अधिक आर्थिक बराबारी लाना चाहते हैं।, T. Alexander Smith, Raymond Tatalovich, University of Toronto Press, 2003, ISBN 978-1-55111-334-0, p. 30, Norberto Bobbio, Allan Cameron, University of Chicago Press, 1996, ISBN 978-0-226-06245-7, p. 37 इस विचारधारा में समाज के उन लोगों के लिए सहानुभूति जतलाई जाती है जो किसी भी कारण से अन्य लोगों की तुलना में पिछड़ गए हों या शक्तिहीन हों। राजनीति के सन्दर्भ में 'बाएँ' और 'दाएँ' शब्दों का प्रयोग फ़्रान्सीसी क्रान्ति के दौरान शुरू हुआ। फ़्रांस में क्रान्ति से पूर्व की एस्टेट जनरल (Estates General) नामक संसद में सम्राट को हटाकर गणतंत्र लाना चाहने वाले और धर्मनिरपेक्षता चाहने वाले अक्सर बाई तरफ़ बैठते थे। आधुनिक काल में समाजवाद (सोशलिज़म) और साम्यवाद (कम्युनिजम) से सम्बंधित विचारधाराओं को बाईं राजनीति में डाला जाता है।, Terence Ball, Richard Paul Bellamy, Cambridge University Press, 2003, ISBN 978-0-521-56354-3 .

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वायलेट अल्वा

वायलेट अल्वा (२४ अप्रैल १९०८ – २० नवंबर १९६९) भारत से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की राजनीतिज्ञ थी। वे तीन सत्रों तक राज्य सभा के सदस्य रही; ३ अप्रैल १९५२ से २ अप्रैल १९६० तक, ३ अप्रैल १९६० से २ अप्रैल १९६६ तक, और फिर ३ अप्रैल १९६६ से उनकी मृत्यु तक। वे १९५७ से १९६२ तक केन्द्रीय उप गृह मंत्री रही। वे १९ अप्रैल १९६२ से २ अप्रैल १९६६ तक और फिर से ७ अप्रैल १९६६ से १६ नवम्बर १९६९ तक राज्य सभा की उपाध्यक्षा रही और बाद में उन्होने इस्तीफा दे दिया। .

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वाल्मीकि रामायण

वाल्मीकीय रामायण संस्कृत साहित्य का एक आरम्भिक महाकाव्य है जो संस्कृत भाषा में अनुष्टुप छन्दों में रचित है। इसमें श्रीराम के चरित्र का उत्तम एवं वृहद् विवरण काव्य रूप में उपस्थापित हुआ है। महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित होने के कारण इसे 'वाल्मीकीय रामायण' कहा जाता है। वर्तमान में राम के चरित्र पर आधारित जितने भी ग्रन्थ उपलब्ध हैं उन सभी का मूल महर्षि वाल्मीकि कृत 'वाल्मीकीय रामायण' ही है। 'वाल्मीकीय रामायण' के प्रणेता महर्षि वाल्मीकि को 'आदिकवि' माना जाता है और इसीलिए यह महाकाव्य 'आदिकाव्य' माना गया है। यह महाकाव्य भारतीय संस्कृति के महत्त्वपूर्ण आयामों को प्रतिबिम्बित करने वाला होने से साहित्य रूप में अक्षय निधि है। .

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विदेश नीति

किसी देश की विदेश नीति, जिसे विदेशी संबंधों की नीति भी कहा जाता है, अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने के लिए और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के वातावरण में अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए राज्य द्वारा चुनी गई स्वहितकारी रणनीतियों का समूह होती है। किसी देश की विदेश नीति दूसरे देशों के साथ आर्थिक, राजनैतिक, सामाजिक तथा सैनिक विषयों पर पालन की जाने वाली नीतियों का एक समुच्चय है। वैश्वीकरण और अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों में बढ़ते गहन स्तर की वजह से अब राज्यों को गैर-राज्य अभिनेताओं के साथ भी सहभागिता करनी पड़ेगी। .

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विधान सभा

विधान सभा या वैधानिक सभा जिसे भारत के विभिन्न राज्यों में निचला सदन(द्विसदनीय राज्यों में) या सोल हाउस (एक सदनीय राज्यों में) भी कहा जाता है। दिल्ली व पुडुचेरी नामक दो केंद्र शासित राज्यों में भी इसी नाम का प्रयोग निचले सदन के लिए किया जाता है। 7 द्विसदनीय राज्यों में ऊपरी सदन को विधान परिषद कहा जाता है। विधान सभा के सदस्य राज्यों के लोगों के प्रत्यक्ष प्रतिनिधि होते हैं क्योंकि उन्हें किसी एक राज्य के 18 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के नागरिकों द्वारा सीधे तौर पर चुना जाता है। इसके अधिकतम आकार को भारत के संविधान के द्वारा निर्धारित किया गया है जिसमें 500 से अधिक व् 60 से कम सदस्य नहीं हो सकते। हालाँकि विधान सभा का आकार 60 सदस्यों से कम हो सकता है संसद के एक अधिनियम के द्वारा: जैसे गोवा, सिक्किम, मिजोरम और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी। कुछ राज्यों में राज्यपाल 1 सदस्य को अल्पसंख्यकों का प्रतिनिधित्व करने के लिए नियुक्त कर सकता है, उदा० ऐंग्लो इंडियन समुदाय अगर उसे लगता है कि सदन में अल्पसंख्यकों को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। राज्यपाल के द्वारा चुने गए या नियुक्त को विधान सभा सदस्य या MLA कहा जाता है। प्रत्येक विधान सभा का कार्यकाल पाँच वर्षों का होता है जिसके बाद पुनः चुनाव होता है। आपातकाल के दौरान, इसके सत्र को बढ़ाया जा सकता है या इसे भंग किया जा सकता है। विधान सभा का एक सत्र वैसे तो पाँच वर्षों का होता है पर लेकिन मुख्यमंत्री के अनुरोध पर राज्यपाल द्वारा इसे पाँच साल से पहले भी भंग किया जा सकता है। विधानसभा का सत्र आपातकाल के दौरान बढ़ाया जा सकता है लेकिन एक समय में केवल छः महीनों के लिए। विधान सभा को बहुमत प्राप्त या गठबंधन सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित हो जाने पर भी भंग किया जा सकता है। .

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विधानपालिका

विधायिका (Legislature) या विधानमंडल किसी राजनैतिक व्यवस्था के उस संगठन या ईकाई को कहा जाता है जिसे क़ानून व जन-नीतियाँ बनाने, बदलने व हटाने का अधिकार हो। किसी विधायिका के सदस्यों को विधायक (legislators) कहा जाता है। आमतौर से विधायोकाओं में या तो एक या फिर दो सदन होते हैं। भारत में राष्ट्रीय स्तर पर दो-सदनीय विधायिका है जो संसद कहलाती है। .

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विधि

विधि (या, कानून) किसी नियमसंहिता को कहते हैं। विधि प्रायः भलीभांति लिखी हुई संसूचकों (इन्स्ट्रक्शन्स) के रूप में होती है। समाज को सम्यक ढंग से चलाने के लिये विधि अत्यन्त आवश्यक है। विधि मनुष्य का आचरण के वे सामान्य नियम होते है जो राज्य द्वारा स्वीकृत तथा लागू किये जाते है, जिनका पालन अनिवर्य होता है। पालन न करने पर न्यायपालिका दण्ड देता है। कानूनी प्रणाली कई तरह के अधिकारों और जिम्मेदारियों को विस्तार से बताती है। विधि शब्द अपने आप में ही विधाता से जुड़ा हुआ शब्द लगता है। आध्यात्मिक जगत में 'विधि के विधान' का आशय 'विधाता द्वारा बनाये हुए कानून' से है। जीवन एवं मृत्यु विधाता के द्वारा बनाया हुआ कानून है या विधि का ही विधान कह सकते है। सामान्य रूप से विधाता का कानून, प्रकृति का कानून, जीव-जगत का कानून एवं समाज का कानून। राज्य द्वारा निर्मित विधि से आज पूरी दुनिया प्रभावित हो रही है। राजनीति आज समाज का अनिवार्य अंग हो गया है। समाज का प्रत्येक जीव कानूनों द्वारा संचालित है। आज समाज में भी विधि के शासन के नाम पर दुनिया भर में सरकारें नागरिकों के लिये विधि का निर्माण करती है। विधि का उदेश्य समाज के आचरण को नियमित करना है। अधिकार एवं दायित्वों के लिये स्पष्ट व्याख्या करना भी है साथ ही समाज में हो रहे अनैकतिक कार्य या लोकनीति के विरूद्ध होने वाले कार्यो को अपराध घोषित करके अपराधियों में भय पैदा करना भी अपराध विधि का उदेश्य है। संयुक्त राष्ट्र संघ ने 1945 से लेकर आज तक अपने चार्टर के माध्यम से या अपने विभिन्न अनुसांगिक संगठनो के माध्यम से दुनिया के राज्यो को व नागरिकों को यह बताने का प्रयास किया कि बिना शांति के समाज का विकास संभव नहीं है परन्तु शांति के लिये सहअस्तित्व एवं न्यायपूर्ण दृष्टिकोण ही नहीं आचरण को जिंदा करना भी जरूरी है। न्यायपूर्ण समाज में ही शांति, सदभाव, मैत्री, सहअस्तित्व कायम हो पाता है। .

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विनय प्रभाकर सहस्रबुद्धे

विनय प्रभाकर सहस्रबुद्धे एक भारतीय राजनीतिज्ञ तथा वर्तमान भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं। महाराष्ट्र से वरिष्ठ सदन राज्यसभा के सदस्य हैं। .

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विनोद खन्ना

विनोद खन्ना (जन्म: रविवार, ६ अक्टूबर, १९४६ - निधन: गुरुवार, २७ अप्रैल २०१७) हिन्दी फ़िल्मों के एक अभिनेता थे जिनका जन्म पेशावर (ब्रितानी भारत) में हुआ था जबकि इनका लम्बे समय से कैंसर से पीड़ित रहने की वजह से २७ अप्रैल २०१७ को मुम्बई के एच एन रिलायंस अस्पताल में निधन हो गया । .

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विलियम ऑफ़ ओक्क्हम

विलियम ऑफ़ ओच्क्हम (also Occam, from; 1287 – 1347) एक अंग्रेजी दार्शनिक और थेअलोजियन था। ऐसा माना जाता है कि इनका जन्म ओच्क्हम में हुआ था जो की सरी में एक छोटा सा गाँव है। He is considered to be one of the major figures of medieval thought and was at the centre of the major intellectual and political controversies of the fourteenth century.

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विलियम काबेट

विलियम काबेट (William Cobbett; १७६२ - १८३५) इंग्लैण्ड के कृषक, पत्रकार और पम्फलेटिअर (pamphleteer) थे। 'रूरल राइड्स' उनकी प्रसिद्ध पुस्तक है। विलियम कॉबेट का संघर्षमय जीवन ऐसे काल में व्यतीत हुआ था, जो इंग्लैंड ही नहीं, समस्त पाश्चात्य श्वेत जाति के इतिहास में क्रांतिपूर्ण युग माना जाता है। इसी काल में अमरीका का स्वातंत्र्य संग्राम हुआ और फ्रांस में राजनीतिक क्रांति का विस्फोट; इसके बाद ही नेपोलियन का उदय हुआ और समस्त यूरोप में उसकी विजयवाहिनी ने आतंकपूर्ण वातावरण पैदा कर दिया। इन विप्लवात्मक परिवर्तनों का इंग्लैंड के राजनीतिक तथा सामाजिक जीवन पर गहरा असर पड़ा और इसके फलस्वरूप पार्लियामेंट संबंधी सुधारों का क्रम आरंभ हुआ। परंतु इससे अधिक महत्वपूर्ण वह आर्थिक तथा औद्योगिक क्रांति थी जो इंग्लैंड की परंपरागत ग्राम तथा कृषि व्यवस्था का कलेवर ही ध्वस्त करने पर उतारू थी। पूँजीपतियों की लोलुपता तथा कुचक्रों के फलस्वरूप भूस्वामियों, कृषकों तथा भूमिहीन श्रमिकों का ह्रास और औद्योगिक जमींदारियों का विस्तार हो रहा था। विलियम काबेट ने अपने लंबे जीवनकाल में इन घातक परिवर्तनों का भरपूर विरोध किया क्योंकि इससे राष्ट्रीय शक्ति के मूल स्रोतों का ही शोषण हो रहा था। वे स्वयं कृषक वर्ग के प्रतिनिधि थे। उनका जन्म सन् १७६२ में फार्नहैम गाँव के एक कृषक परिवार में हुआ था और उनका बचपन कृषि संबंधी परिश्रमों तथा मनोरंजनों के बीच व्यतीत हुआ। इसी समय उनके हृदय में प्रकृतिप्रेम का भी बीजारोपण हुआ जो उत्तरोत्तर बढ़ता हुआ उनके लेखों में काव्यमय होकर प्रस्फुटित हुआ। इनकी शिक्षा सुव्यवस्थित रूप से नहीं हो पाई परंतु विद्याप्रेम इनका जन्मजात गुण था और बचपन ही में अपने जेब की समस्त पूँजी स्विफ़्ट के प्रसिद्ध ग्रंथ 'ए टेल ऑव ए टब' पर लगाकार इन्होंने इसका आश्चर्यजनक परिचय दिया। स्वच्छंद स्वभाव का यह नवयुवक गाँव के संकीर्ण दायरे में बँधकर रहना पसंद न कर सका; इसलिए घर से भागकर यह सेना में भर्ती हुआ और कालांतर में अमरीका के संघर्षपूर्ण वातावरण का अंग बन गया। आठ वर्षों तक काबेट ने अमरीका में उदार तथा प्रगतिशील सिद्धांतों का निर्बाध रूप से प्रतिपादन किया, फलस्वरूप उन्हें 'पीटर पारक्युपाइन' का सार्थक उपनाम दिया गया। परंतु इसके साथ ही साथ वे अपने देश की राजनीतिक संस्थाओं का भी जोरदार समर्थन करते रहे। स्वदेश लौटने पर टोरी दल ने उनकी प्रतिभा को क्रय करने का भगीरथ प्रयत्न किया परंतु काबेट किसी भी मूल्य पर बिकने के लिए तैयार नहीं हुए। सन् १८०२ ई. में उन्होंने 'द पोलिटिकल रजिस्टर' नामक प्रसिद्ध पत्रिका का संपादन आरंभ किया और वैधानिक सुधारों के पक्ष में अपनी भावपूर्ण लेखनी को सर्वदा के लिए समर्पित कर दिया। सन् १८३२ में ओल्ढम क्षेत्र से वे पार्लियामेंट के सदस्य चुने गए और वहाँ के कृषकों तथा श्रमिकों का आजीवन समर्थन करते रहे। कई बार सरकार से लोहा लेकर वे उसके कोपभाजन भी बने पंरतु उनका उत्साह अदम्य था और कंटकाकीर्ण मार्ग पर चलने में वे काफी अभ्यस्त थे। सन् १८३५ में वे अस्वस्थ हुए परंतु मृत्यु काल तक लिखते तथा काम करते रहे। विलियम काबेट के लेखों का संग्रह ५० मोटी जिल्दों में हुआ है, जिनमें 'काटेज इकानोमी', 'ऐडवाइस टु यंग मेन', 'रूरल राइड्स' तथा 'लिगेसी टु वर्कर्स' विशेष उल्लेखनीय हैं। इन लेखों में विविध विषयों का समावेश है परंतु इनके दो केंद्रबिंदु हैं—राजनीति तथा ग्राम्य जीवन संबंधी प्रकृतिसौंदर्य। राजनीतिक लेखों में उन्होंने अन्याय तथा कुरीतियों के प्रति विदग्ध लेखनी का संचालन कर अपनी स्वाभाविक उग्रता तथा संघर्षप्रियता का परिचय दिया, परंतु 'रूरल राइड्स' के पृष्ठों में उनके प्रकृतिप्रेम तथा काव्यमयी प्रतिभा की सुखद अभिव्यक्ति हुई है। उनकी ख्याति का स्थायी आधारस्तंभ इन्हीं साहित्यिक लेखों में क्योंकि उनके राजनीतिक तथा सामजिक विचार ऐतिहासिक महत्व के ही रह गए हैं। समाजसुधारक के रूप में उनका दृष्टिकोण प्रगतिशील नहीं था। रस्किन तथा मारिस के समान वे मध्यकालीन समाजव्यवस्था के समर्थक थे, जिसमें समस्त गाँव एक कुटुंब के समान रहता था और पारिवारिक जीवन परिश्रमजन्य सुखसाधनों से संपन्न था। .

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विश्वनाथ मेघवाल

डॉ॰ विश्वनाथ मेघवाल एक भारतीय राजनीतिज्ञ है। वे राजस्थान विधानसभा में खाजूवाला से विधायक है। .

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विश्वविद्यालय

विश्वविद्यालय (युनिवर्सिटी) वह संस्था है जिसमें सभी प्रकार की विद्याओं की उच्च कोटि की शिक्षा दी जाती हो, परीक्षा ली जाती हो तथा लोगों को विद्या संबंधी उपाधियाँ आदि प्रदान की जाती हों। इसके अंतर्गत विश्वविद्यालय के मैदान, भवन, प्रभाग, तथा विद्यार्थियों का संगठन आदि भी सम्मिलित हैं। .

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विष्णुकान्त शास्त्री

जन्म - कोलकाता 2 मई 1929 निधन - 17 अप्रैल, 2005 शिक्षा - एम ए, एल एल बी - कोलकाता विश्वविद्यालय कार्यक्षेत्र - राजनीति, साहित्य एवं समाज सेवा। .

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विजय बहादुर पाठक

विजय बहादुर पाठक उत्तर प्रदेश के एक भारतीय राजनेता हैं। वे सम्प्रति भारतीय जनता पार्टी के राज्य महासचिव के रूप में कार्यरत हैं। वह उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य हैं। .

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विजय बहुगुणा

विजय बहुगुणा (जन्म: २८ फ़रवरी १९४७) एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं जो भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से हैं। २०१२ से २०१४ तक वह उत्तराखण्ड राज्य के सातवें मुख्यमंत्री रह चुके हैं। .

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विजय जौली

विजय जौली भारत की राजनीति में उत्तर भारत का एक परिचित नाम है, जो भारतीय जनता पार्टी से सम्बधित एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं। भारत की राजधानी दिल्ली के साकेत विधान सभा क्षेत्र से 2003 से 2008 तक विधायक रह चुके हैं। सन् 2008 में दिल्ली की तत्कालीन पदासीन मुख्यमन्त्री श्रीमती शीला दीक्षित के विरुद्ध चुनाव लड़ चुके प्रत्याशी हैं। .

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विजय कुमार मलहोत्रा

विजय कुमार मलहोत्रा विजय कुमार मलहोत्रा (जन्म: ३ दिसम्बर १९३१ लाहौर) भारत के एक राजनेता तथा शिक्षाविद हैं। वे लोक सभा सांसद, खेलकूद प्रशासक व शिक्षा जगत से सम्बद्ध प्रोफेसर हैं। लोग उन्हें प्रोफेसर विजय कुमार मलहोत्रा के नाम से भी जानते हैं। उन्होंने दिल्ली सदर व दक्षिणी दिल्ली से क्रमाश: ९वीं व १४वीं लोकसभा का प्रतिनिधित्व किया। कई संसदीय समितियों के सदस्य से लेकर अध्यक्ष रह चुके श्री मलहोत्रा आजकल ग्रेटर कैलाश नई दिल्ली से दिल्ली विधान सभा के सदस्य हैं। उनकी गणना भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ सदस्यों में की जाती है। .

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विवेक धाकड़

विवेक धाकड़ एक भारतीय राजनीतिज्ञ तथा वर्तमान राजस्थान विधानसभा में मांडलगढ़ से विधायक हैं | वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राजनेता हैं | .

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विक्रमादित्य सिंह

विक्रमादित्य सिंह एक भारतीय राजनीतिज्ञ तथा वर्तमान हिमाचल प्रदेश विधानसभा में शिमला ग्रामीण से विधायक हैं | वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राजनीतिज्ञ हैं| वे पूर्व हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के पुत्र हैं | .

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वंदना टेटे

वंदना टेटे (जन्मः 13 सितम्बर 1969) एक भारतीय आदिवासी लेखिका, कवि, प्रकाशक, एक्टिविस्ट और आदिवासी दर्शन ‘आदिवासियत’ की प्रबल पैरोकार हैं। सामुदायिक आदिवासी जीवनदर्शन एवं सौंदर्यबोध को अपने लेखन और देश भर के साहित्यिक व अकादमिक संगोष्ठियों में दिए गए वक्तव्यों के जरिए उन्होंने आदिवासी विमर्श को नया आवेग प्रदान किया है। आदिवासियत की वैचारिकी और सौंदर्यबोध को कलाभिव्यक्तियों का मूल तत्व मानते हुए उन्होंने आदिवासी साहित्य को ‘प्रतिरोध का साहित्य’ की बजाय ‘रचाव और बचाव’ का साहित्य कहा है। आदिवासी साहित्य की दार्शनिक अवधारणा प्रस्तुत करते हुए उनकी स्थापना है कि आदिवासियों की साहित्यिक परंपरा औपनिवेशिक और ब्राह्मणवादी शब्दावलियों और विचारों से बिल्कुल भिन्न है। आदिवासी जीवनदृष्टि पक्ष-प्रतिपक्ष को स्वीकार नहीं करता। आदिवासियों की दृष्टि समतामूलक है और उनके समुदायों में व्यक्ति केन्द्रित और शक्ति संरचना के किसी भी रूप का कोई स्थान नहीं है। वे आदिवासी साहित्य का ‘लोक’ और ‘शिष्ट’ साहित्य के रूप में विभाजन को भी नकारती हैं और कहती हैं कि आदिवासी समाज में समानता सर्वोपरि है, इसलिए उनका साहित्य भी विभाजित नहीं है। वह एक ही है। वे अपने साहित्य को ‘ऑरेचर’ कहती हैं। ऑरेचर अर्थात् ऑरल लिटरेचर। उनकी स्थापना है कि उनके आज का लिखित साहित्य भी उनकी वाचिक यानी पुरखा (लोक) साहित्य की परंपरा का ही साहित्य है। उनकी यह भी स्थापना है कि गैर-आदिवासियों द्वारा आदिवासियों पर रिसर्च करके लिखी जा रही रचनाएं शोध साहित्य है, आदिवासी साहित्य नहीं। आदिवासियत को नहीं समझने वाले हिंदी-अंग्रेजी के लेखक आदिवासी साहित्य लिख भी नहीं सकते। .

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वुडरो विल्सन

वुडरो विल्सन (Woodrow Wilson) (१८५६-१९२४) अमेरिका के २८ वें राष्ट्रपति थे। विल्सन को लोक प्रशासन के प्रकार्यों की व्याख्या करने वाले अकादमिक विद्वान, प्रशासक, इतिहासकार, विधिवेत्ता और राजनीतिज्ञ के रूप में जाना जाता है। .

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व्यवहारवाद (राजनीति विज्ञान)

राजनीति-विज्ञान में व्यवहारवाद (बिहेवियरलिज़म) एक ऐसा प्रभावशाली राजनीतिक सिद्धांत है जिसने राजनीतिक अध्ययन करने में मूल्यों को तरजीह देने का विरोध किया। यह राजनीति को प्राकृतिक विज्ञानों के तर्ज़ पर समझना चाहती है। व्यवहारवादी विद्वानों ने राजनीति को एक प्रणाली के रूप में देखा और गुणात्मक के बजाय मात्रात्मक विश्लेषण पर ज़ोर दे कर उसे एक विशुद्ध विज्ञान बनाने की कोशिश की। अमेरिकी वैज्ञानिक के अनुसार वाहयरवाद को कुछ भी नही किया .

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व्यक्तिपन

व्यक्तिपन (personhood) किसी जीव को व्यक्ति होने का दर्जा प्राप्त होने की स्थिति को कहते हैं। इसकी परिभाषा दर्शनशास्त्र और कानून में बहुत विवादास्पद रही है और न्याय व राजनीति में नागरिकता, न्याय की दृष्टि में हर मानव की समानता और स्वतंत्रता के सिद्धांतों से सम्बन्धित रही है। व्यक्तिपन का दर्जा प्राप्त होने का अर्थ है कि वह जीव अपने भला-बुरा सोचने में सक्षम, भविष्य-भूत की समझ रखने वाला और मूल्यों के आधार पर निर्णय करने वाला समझा जाता है, और उसे कानूनी रूप से कई अधिकार दिये जाते हैं। दासप्रथा की समाप्ति में व्यक्तिपन के सिद्धांतों का गहरा प्रयोग करा गया था। .

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वेटिंग फ़ॉर गोडोट

वेटिंग फॉर गोडोट शमूएल बेकेट द्वारा रचित एक बेतुका नाटक है, जिसमें दो मुख्य पात्र व्लादिमीर और एस्ट्रागन एक अन्य काल्पनिक पात्र गोडोट के आने की अंतहीन व निष्फल प्रतीक्षा करते हैं। इस नाटक के प्रीमियर से अब तक गोडोट की अनुपस्थिति व अन्य पहलुओं को लेकर अनेक व्याख्यायें की जा चुकी हैं। इसे "बीसवीं सदी का सबसे प्रभावशाली अंग्रेजी भाषा का नाटक" भी बुलाया जा चुका है। असल में वेटिंग फॉर गोडोट बेकेट के ही फ्रेंच नाटक एन अटेंडेंट गोडोट का उनके स्वयं के द्वारा ही किया गया अंग्रेजी अनुवाद है तथा अंग्रेजी में इसे दो भागों की त्रासदी-कॉमेडी का उप-शीर्षक दिया गया है".

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वेद प्रताप वैदिक

डॉ॰ वेद प्रताप वैदिक (जन्म: 30 दिसम्बर 1944, इंदौर, मध्य प्रदेश) भारतवर्ष के वरिष्ठ पत्रकार, राजनैतिक विश्लेषक, पटु वक्ता एवं हिन्दी प्रेमी हैं। हिन्दी को भारत और विश्व मंच पर स्थापित करने की दिशा में सदा प्रयत्नशील रहते हैं। भाषा के सवाल पर स्वामी दयानन्द सरस्वती, महात्मा गांधी और डॉ॰ राममनोहर लोहिया की परम्परा को आगे बढ़ाने वालों में डॉ॰ वैदिक का नाम अग्रणी है। वैदिक जी अनेक भारतीय व विदेशी शोध-संस्थानों एवं विश्वविद्यालयों में ‘विजिटिंग प्रोफेसर’ रहे हैं। भारतीय विदेश नीति के चिन्तन और संचालन में उनकी भूमिका उल्लेखनीय है। अपने पूरे जीवन काल में उन्होंने लगभग 80 देशों की यात्रायें की हैं। अंग्रेजी पत्रकारिता के मुकाबले हिन्दी में बेहतर पत्रकारिता का युग आरम्भ करने वालों में डॉ॰ वैदिक का नाम अग्रणी है। उन्होंने सन् 1958 से ही पत्रकारिता प्रारम्भ कर दी थी। नवभारत टाइम्स में पहले सह सम्पादक, बाद में विचार विभाग के सम्पादक भी रहे। उन्होंने हिन्दी समाचार एजेन्सी भाषा के संस्थापक सम्पादक के रूप में एक दशक तक प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया में काम किया। सम्प्रति भारतीय भाषा सम्मेलन के अध्यक्ष तथा नेटजाल डाट काम के सम्पादकीय निदेशक हैं। .

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वी शशि

वी शशि (मलयालम: വി. ശശി) एक राजनीतिज्ञ तथा केरल विधान सभा के उपाध्यक्ष हैं | .

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वीर सांघवी

वीर सांघवी (जन्म: 5 जुलाई 1956) भारतीय प्रिंट और टेलिविजन पत्रकार, स्तंभकार, और परिचर्चा कार्यक्रम के प्रस्तुतकर्ता हैं। वर्तमान में वह एच०टी० मीडिया (HT Media) में सलाहकार हैं। .

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खाटूमल जीवन

खाटूमल जीवन एक पाकिस्तानी राजनीतिज्ञ तथा पूर्व पाकिस्तान की सेनेट के सीनेटर हैं। वे पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के राजनीतिज्ञ हैं। .

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खिलाड़ी लाल बैरवा

खिलाड़ी लाल बैरवा एक भारतीय राजनीतिज्ञ तथा पूर्व करौली-धौलपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद थे | वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस दल के सदस्य हैं | .

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खुर्शीद अली खान

वे एक पाकिस्तानी जनरल, राजनीतिज्ञ और पाकिस्तान के प्रांत, ख़ैबर पख़्तूनख़्वा के पूर्व राज्यपाल थे। .

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ख्वाजा मोहम्मद अज़्हर खान

वे एक पाकिस्तानी जनरल, राजनीतिज्ञ और पाकिस्तान के प्रांत, ख़ैबर पख़्तूनख़्वा के पूर्व राज्यपाल थे। .

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गणितीय मॉडल

किसी भौतिक तंत्र (physical system) या प्रक्रम (process) या अमूर्त तंत्र (abstract system) के विभिन्न अवयवों के अन्तर्सम्बन्धों का गणित की भाषा में वर्णन उस तन्त्र का गणितीय प्रतिरूप या गणितीय मॉडल (mathematical model) कहलाता है। गणितीय मॉडल प्रायः संगत तंत्र के सरलीकृत रूप होते हैं। इससे उस तन्त्र की कार्यप्रणाली को आसानी से समझने में सुविधा होती है। इसकी सहायता से यह गणना की जा सकती है कि किस स्थिति में क्या होगा। गणितीय मॉडल की सहायता से ही उस भौतिक तन्त्र का नियन्त्रण भी किया जा सकता है। किसी तन्त्र को कम्प्यूटर द्वारा सिमुलेट (simulate) करने के लिये उस तन्त्र का गणितीय मॉडल बनाना पहली जरूरत है। गणितीय मॉडल का प्राकृतिक विज्ञानों एवं प्रौद्योगिकी में बहुतायत से उपयोग होता है। इसके अतिरिक्त इसका सामाजिक विज्ञानों, जैसे अर्थशास्त्र, समाज शास्त्र एवं राजनीति शास्त्र में भी उपयोग होता है। किसी तन्त्र या युक्ति के गणितीय मॉडल को जब किसी विद्युत परिपथ के रूप में निरुपित किया जाता है तो इस विद्युत परिपथ को तुल्य परिपथ (equivalent circuit) कहते हैं। उदाहरण के लिये किसी बैटरी को एक आदर्श वोल्टेज सोर्स एवं एक प्रतिरोध के श्रेणीक्रम (सिरीज) संयोजन के रूप में प्रदर्शित किया जा सकता है। .

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गाटफ्रीड लैबनिट्ज़

गाटफ्रीड विलहेल्म लाइबनिज (Gottfried Wilhelm von Leibniz / १ जुलाई १६४६ - १४ नवम्बर १७१६) जर्मनी के दार्शनिक, वैज्ञानिक, गणितज्ञ, राजनयिक, भौतिकविद्, इतिहासकार, राजनेता, विधिकार थे। उनका पूरा नाम 'गोतफ्रीत विल्हेल्म फोन लाइब्नित्स' था। गणित के इतिहास तथा दर्शन के इतिहास में उनका प्रमुख स्थान है। .

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गायत्री देवी

जयपुर के भूतपूर्व राजघराने की राजमाता गायत्री देवी का जन्म २३ मई १९१९ को लंदन में हुआ था। राजकुमारी गायत्री देवी के पिता राजकुमार जितेन्द्र नारायण कूचबिहार (बंगाल) के युवराज के छोटे भाई थे, वहीं माता बड़ौदा की राजकुमारी इंदिरा राजे थीं। पहले शांतिनिकेतन, फिर लंदन और स्विट्ज़रलैंड में शिक्षा ग्रहण करने के पश्चात इनका इनका विवाह जयपुर के महाराजा सवाई मानसिंह (द्वितीय) से हुआ। वॉग पत्रिका द्वारा कभी दुनिया की दस सुंदर महिलाओं में गिनी गईं राजमाता गायत्री देवी राजनीति में भी सक्रिय थीं। इन्होंने सन् १९६२ में चक्रवर्ती राजगोपालाचारी द्वारा स्थापित स्वतंत्र पार्टी की उम्मीदवार के रूप में जयपुर संसदीय क्षेत्र से समूचे देश में सर्वोच्च बहुमत से चुनाव में विजयी होने का गौरव प्राप्त किया। इसके बाद १९६७ और १९७१ के चुनावों में विजयी होकर लोकसभा सदस्य चुनी गईं। लेकिन राजनीतिक सफर में कष्ट भी सहने पड़े, जब आपातकाल के दौरान वे दिल्ली के तिहाड़ जेल में बंद रही। गायत्री देवी पर (ए प्रिंसेस रिमेम्बर्स) तथा (ए गवर्नमेंट्स गेट वे) नामक पुस्तकें अंग्रेजी में प्रकाशित हो चुकी हैं। 90 वर्ष की आयु में २९ जुलाई २००९ को इनका जयपुर में निधन हो गया। .

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गिरिराज किशोर (राजनीतिज्ञ)

आचार्य गिरिराज किशोर (4 फ़रवरी 1920 – 13 जुलाई 2014) विश्व हिन्दू परिषद के नेता थे। वे श्रीराम जन्मभूमि आन्दोलन के समय से ही परिषद् से जुड़े थे। गिरिराज किशोर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक रहे। श्रीराम जन्मभूमि आन्दोलन में उनकी प्रमुख भूमिका थी। नई दिल्ली स्थित विहिप मुख्यालय में उन्होंने लगभग 94 वर्ष की आयु में 13 जुलाई 2014 को प्राण त्यागे। आजीवन ब्रह्मचर्य का पालन करने वाले आचार्य गिरिराज किशोर ने देहदान का संकल्प बहुत पहले ही कर लिया था ताकि उनकी मृत्यु के बाद भी उनका शरीर किसी के काम आ सके। .

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गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय

गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय भारत के उत्तराखण्ड राज्य के हरिद्वार शहर में स्थित है। इसकी स्थापना सन् १९०२ में स्वामी श्रद्धानन्द ने की थी। भारत में लार्ड मैकाले द्वारा प्रतिपादित अंग्रेजी माध्यम की पाश्चात्य शिक्षा नीति के स्थान पर राष्ट्रीय विकल्प के रूप में राष्ट्रभाषा हिन्दी के माध्यम से भारतीय साहित्य, भारतीय दर्शन, भारतीय संस्कृति एवं साहित्य के साथ-साथ आधुनिक विषयों की उच्च शिक्षा के अध्ययन-अध्यापन तथा अनुसंधान के लिए यह विश्वविद्यालय स्थापित किया गया था। इस विश्वविद्यालय का प्रमुख उद्देश्य जाति और छुआ-छूत के भेदभाव के बिना गुरु-शिष्य परम्परा के अन्तर्गत् अध्यापकों एवं विद्यार्थियों के मध्य निरन्तर घनिष्ट सम्बन्ध स्थापित कर छात्र-छात्राओं को प्राचीन एवं आधुनिक विषयों की शिक्षा देकर उनका मानसिक और शारीरिक विकास कर चरित्रवान आदर्श नागरिक बनाना है। विश्वविद्यालय हरिद्वार रेलवे स्टेशन से लगभग 5 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है। जून 1962 में भारत सरकार ने इस शिक्षण संस्था के राष्ट्रीय स्वरूप तथा शिक्षा के क्षेत्र में इसके अप्रतिम् योगदान को दृष्टि में रखते हुए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के एक्ट 1956 की धारा 3 के अन्तर्गत् समविश्वविद्यालय (डीम्ड यूनिवर्सिटी) की मान्यता प्रदान की और वैदिक साहित्य, संस्कृत साहित्य, दर्शन, हिन्दी साहित्य, अंग्रेजी, मनोविज्ञान, गणित तथा प्राचीन भारतीय इतिहास संस्कृति एवं पुरातत्त्व विषयों में स्नातकोत्तर अध्ययन की व्यवस्था की गई। उपरोक्त विषयों के अतिरिक्त वर्तमान में विश्वविद्यालय में भौतिकी, रसायन विज्ञान, कम्प्यूटर विज्ञान, अभियांत्रिकी, आयुर्विज्ञान व प्रबन्धन के अध्ययन-अध्यापन की व्यवस्था है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा स्थापित स्वायत्तशासी संस्थान ‘राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद्’ (NACC) द्वारा मई 2002 में विश्वविद्यालय को चार सितारों (****) से अलंकृत किया गया था। परिषद् के सदस्यों ने विश्वविद्यालय की संस्तुति यहां के परिवेश, शैक्षिक वातावरण, शुद्ध पर्यावरण, बृहत् पुस्तकालय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर के संग्रहालय आदि से प्रभावित होकर की थी। विश्वविद्यालय की सभी उपाधियां भारत सरकार/विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा मान्य हैं। यह विश्वविद्यालय भारतीय विश्वविद्यालय संघ (A.I.U.) तथा कामनवैल्थ विश्वविद्यालय संघ का सदस्य है। .

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गुलाबो देवी

गुलाबो देवी एक भारतीय राजनीतिज्ञा तथा वर्तमान उत्तर प्रदेश सरकार में सामाजिक न्याय राज्यमंत्री है| वे भारतीय जनता पार्टी के राजनेत्री है| .

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ग्राम पंचायत झोंपड़ा, सवाई माधोपुर

झोंपड़ा गाँव राजस्थान राज्य के सवाई माधोपुर जिले की चौथ का बरवाड़ा तहसील में आने वाली प्रमुख ग्राम पंचायत है ! ग्राम पंचायत का सबसे बड़ा गाँव झोंपड़ा है जिसमें मीणा जनजाति का नारेड़ा गोत्र मुख्य रूप से निवास करता हैं। ग्राम पंचायत में झोंपड़ा, बगीना, सिरोही, नाहीखुर्द एवं झड़कुंड गाँव शामिल है। झोंपड़ा ग्राम पंचायत की कुल जनसंख्या 2011 की जनगणना के अनुसार 5184 है और ग्राम पंचायत में कुल घरों की संख्या 1080 है। ग्राम पंचायत की सबसे बड़ी नदी बनास नदी है वहीं पंचायत की सबसे लम्बी घाटी चढ़ाई बगीना गाँव में बनास नदी पर पड़ती है। ग्राम पंचायत का सबसे विशाल एवं प्राचीन वृक्ष धंड की पीपली है जो झोंपड़ा, बगीना एवं जगमोंदा गाँवों से लगभग बराबर दूरी पर पड़ती है। .

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गोदे मुरहारी

गोदे गंगाराजू मुरहारी (२० मई १९२६ - ६ अगस्त १९८२) भारतीय राजनीतिज्ञ थे। वे तीन सत्रों तक राज्य सभा के सदस्य रहे; ३ अप्रैल १९६२ से २ अप्रैल १९६८ तक, ३ अप्रैल १९६८ से २ अप्रैल १९७४ तक, और फिर ३ अप्रैल १९७४ से २० मार्च १९७७ तक। अपने राजनीतिक कारकिर्दगी में वे कभी निर्दलीय, कभी संयुक्त समाजवादी दल और कभी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रतिनिधि रहे। वे ४ अप्रैल १९७२ से २ अप्रैल १९७४ तक और फिर से २६ अप्रैल १९७४ से २० मार्च १९७७ तक राज्य सभा के उपाध्यक्ष रहे और बाद में लोकसभा के लिए चुने गए। .

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गोरधन वर्मा

गोरधन वर्मा (Gordhan Verma) एक भारतीय राजनीतिज्ञ तथा वर्तमान राजस्थान विधानसभा में धोद, सीकर से विधायक हैं। वे भारतीय जनता पार्टी के राजनीतिज्ञ हैं। .

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गोलमा देवी मीणा

गोलमा देवी मीणा एक भारतीय राजनीतिज्ञ तथा पूर्व राजस्थान सरकार में मंत्री थी | वे वर्तमान राजस्थान विधान सभा में राजगढ़-लक्ष्मणगढ़ से विधायक हैं | .

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गोविन्द सिंह डोटासरा

गोविन्द सिंह डोटासरा एक भारतीय राजनीतिज्ञ तथा वर्तमान राजस्थान विधानसभा में लक्ष्मणगढ़, सीकर से विधायक हैं। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राजनीतिज्ञ हैं। .

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गीत बैठकी

गीत बैठकी खड़ी होली या गीत बैठकी उत्तराखंड के कुमाऊँ मंडल की सरोवर नगरी नैनीताल और अल्मोड़ा जिले में होली के अवसर पर आयोजित की जाती हैं। यहाँ नियत तिथि से काफी पहले ही होली की मस्ती और रंग छाने लगते हैं। इस रंग में सिर्फ अबीर-गुलाल का टीका ही नहीं होता बल्कि बैठकी होली और खड़ी होली गायन की शास्त्रीय परंपरा भी शामिल होती है। बरसाने की लठमार होली के बाद अपनी सांस्कृतिक विशेषता के लिए कुमाऊंनी होली को याद किया जाता है। वसंत के आगमन पर हर ओर खिले फूलों के रंगों और संगीत की तानों का ये अनोखा संगम दर्शनीय होता है। शाम के समय कुमाऊं के घर घर में बैठक होली की सुरीली महफिलें जमने लगती है। गीत बैठकी में होली पर आधारित गीत घर की बैठक में राग रागनियों के साथ हारमोनियम और तबले पर गाए जाते हैं। इन गीतों में मीराबाई से लेकर नज़ीर और बहादुर शाह ज़फ़र की रचनाएँ सुनने को मिलती हैं। गीत बैठकी में जब रंग छाने लगता है तो बारी बारी से हर कोई छोड़ी गई तान उठाता है और अगर साथ में भांग का रस भी छाया तो ये सिलसिला कभी कभी आधी रात तक तो कभी सुबह की पहली किरण फूटने तक चलता रहता है। होली की ये परंपरा मात्र संगीत सम्मेलन नहीं बल्कि एक संस्कार भी है। ये बैठकें आशीर्वाद के साथ संपूर्ण होती हैं जिसमें मुबारक हो मंजरी फूलों भरी...या ऐसी होली खेले जनाब अली...जैसी ठुमरियाँ गई जाती हैं। गीत बैठकी की महिला महफ़िलें भी होती हैं। पुरूष महफिलों में जहाँ ठुमरी और ख़याल गाए जाते हैं वहीं महिलाओं की महफिलों का रुझान लोक गीतों की ओर होता है। इनमें नृत्य संगीत तो होता ही है, वे स्वांग भी रचती हैं और हास्य की फुहारों, हंसी के ठहाकों और सुर लहरियों के साथ संस्कृति की इस विशिष्टता में नए रोचक और दिलकश रंग भरे जाते हैं। देवर भाभी के हंसी मज़ाक से जुड़े गी तो होते ही हैं राजनीति और प्रशासन पर व्यंग्य भी होता है। होली गाने की ये परंपरा सिर्फ कुमाऊं अंचल में ही देखने को मिलती है।” इसकी शुरूआत यहां कब और कैसे हुई इसका कोई ऐतिहासिक या लिखित लेखाजोखा नहीं है। कुमाऊं के प्रसिद्द जनकवि गिरीश गिर्दा ने होली बैठकी के सामाजिक शास्त्रीय संदर्भों और इस पर इस्लामी संस्कृति और उर्दू के असर के बारे में गहराई से अध्ययन किया है। वो कहते हैं कि “यहां की होली में अवध से लेकर दरभंगा तक की छाप है। राजे-रजवाड़ों का संदर्भ देखें तो जो राजकुमारियाँ यहाँ ब्याह कर आईं वे अपने साथ वहाँ के रीति रिवाज भी साथ लाईं। ये परंपरा वहां भले ही खत्म हो गई हो लेकिन यहां आज भी कायम हैं। यहां की बैठकी होली में तो आज़ादी के आंदोलन से लेकर उत्तराखंड आंदोलन तक के संदर्भ पाए जाते हैं।” .

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ऑस्कर फर्नांडिस

ऑस्कर फर्नांडिस एक भारतीय राजनीतिज्ञ तथा पूर्व भारत सरकार के परिवहन मंत्री है | वे वर्तमान में राज्यसभा से सांसद हैं | .

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ओम प्रकाश राजभर

ओम प्रकाश राजभर एक भारतीय राजनीतिज्ञ और विधायक हैं। वर्तमान में वे उत्तर प्रदेश की भाजपा नेतृत्व वाली सरकार में पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री हैं। वर्तमान में वे सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी से विधायक और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री हैं। .

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ओ॰ पन्नीरसेल्वम

ओ॰ पन्नीरसेल्वम (जन्म 14 जनवरी 1951) एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं। वे वर्तमान में तमिल नाडु के मुख्यमंत्री हैं। पूर्व में तमिलनाडू सरकार में वित्त मंत्री थे। वे 6 दिसंबर 2016 को तीसरी बार तमिलनाडू के मुख्यमंत्री बने। इससे पहले वह 2001 से 2002 तक और फिर 2014 से 2015 तक मुख्यमंत्री पद पर रहे। .

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आचार्य रामदेव

आचार्य रामदेव (जन्म: ३१ जुलाई १८८१ - मृत्यु: ९ दिसम्बर १९३९) आर्यसमाज के नेता, शिक्षाशास्त्री, इतिहासकार, स्वतन्त्रता-संग्राम सेनानी एवं महान वक्ता थे। उन्होने भारतीय इतिहास के सम्बन्ध में मौलिक अनुसन्धान कर हिन्दी में अपना प्रसिद्ध ग्रन्थ भारतवर्ष का इतिहास प्रकाशित किया। आचार्य रामदेव जी ने १९२३ में देहरादून में कन्या गुरुकुल की स्थापना की जो 'कन्या गुरुकुल महाविद्यालय' नाम से जाना जाता है तथा गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय का भाग है। .

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आतंकवाद

विभाग राज्य Department of State) आतंकवाद एक प्रकार के erहौल को कहा जाता है। इसे एक प्रकार के हिंसात्मक गतिविधि के रूप में परिभाषित किया जाता है, जो कि अपने आर्थिक, धार्मिक, राजनीतिक एवं विचारात्मक लक्ष्यों की प्रतिपूर्ति के लिए गैर-सैनिक अर्थात नागरिकों की सुरक्षा को भी निशाना बनाते हैं। गैर-राज्य कारकों द्वारा किये गए राजनीतिक, वैचारिक या धार्मिक हिंसा को भी आतंकवाद की श्रेणी का ही समझा जाता है। अब इसके तहत गैर-क़ानूनी हिंसा और युद्ध को भी शामिल कर लिया गया है। अगर इसी तरह की गतिविधि आपराधिक संगठन द्वारा चलाने या को बढ़ावा देने के लिए करता है तो सामान्यतः उसे आतंकवाद नहीं माना जाता है, यद्यपि इन सभी कार्यों को आतंकवाद का नाम दिया जा सकता है। गैर-इस्लामी संगठनों या व्यक्तित्वों को नजरअंदाज करते हुए प्रायः इस्लामी या जिहादी के साथ आतंकवाद की अनुचित तुलना के लिए इसकी आलोचना भी की जाती है। .

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आधुनिकतावाद

हंस होफ्मन, "द गेट", 1959–1960, संग्रह: सोलोमन आर. गुगेन्हीम म्यूज़ियम होफ्मन केवल एक कलाकार के रूप में ही नहीं, बल्कि एक कला शिक्षक के रूप में भी मशहूर थे और वे अपने स्वदेश जर्मनी के साथ-साथ बाद में अमेरिका के भी एक आधुनिकतावादी सिद्धांतकार थे। 1930 के दशक के दौरान न्यूयॉर्क एवं कैलिफोर्निया में उन्होंने अमेरिकी कलाकारों की एक नई पीढ़ी के लिए आधुनिकतावाद एवं आधुनिकतावादी सिद्धांतों की शुरुआत की.ग्रीनविच गांव एवं मैसाचुसेट्स के प्रोविंसटाउन में स्थित अपने कला विद्यालयों में अपने शिक्षण एवं व्याख्यान के माध्यम से उन्होंने अमेरिका में आधुनिकतावाद के क्षेत्र का विस्तार किया।हंस होफ्मन की जीवनी, 30 जनवरी 2009 को उद्धृत आधुनिकतावाद, अपनी व्यापक परिभाषा में, आधुनिक सोच, चरित्र, या प्रथा है अधिक विशेष रूप से, यह शब्द उन्नीसवीं सदी के अंत और बीसवीं सदी के आरम्भ में मूल रूप से पश्चिमी समाज में व्यापक पैमाने पर और सुदूर परिवर्तनों से उत्पन्न होने वाली सांस्कृतिक प्रवृत्तियों के एक समूह एवं सम्बद्ध सांस्कृतिक आन्दोलनों की एक सरणी दोनों का वर्णन करता है। यह शब्द अपने भीतर उन लोगों की गतिविधियों और उत्पादन को समाहित करता है जो एक उभरते सम्पूर्ण औद्योगीकृत विश्व की नवीन आर्थिक, सामाजिक एवं राजनीतिक स्थितियों में पुराने होते जा रहे कला, वास्तुकला, साहित्य, धार्मिक विश्वास, सामाजिक संगठन और दैनिक जीवन के "पारंपरिक" रूपों को महसूस करते थे। आधुनिकतावाद ने ज्ञानोदय की सोच की विलंबकारी निश्चितता को और एक करुणामय, सर्वशक्तिशाली निर्माता के अस्तित्व को भी मानने से अस्वीकार कर दिया.

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आनंद कुमार (समाजशास्त्री)

आनंद कुमार एक भारतीय समाज वैज्ञानिक, राजनीति विश्लेषक और राजनीतिज्ञ हैं। आनंद कुमार आम आदमी पार्टी के संस्‍थापक सदस्‍य हैं। आनंद कुमार दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्‍वविद्यालय के सेवानिवृत्त प्रोफेसर हैं। इन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में लंबे समय तक समाजशास्‍त्र का अध्ययन और अध्यापन किया है। .

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आमिर गुलिस्तान जनजूआ

वे एक पाकिस्तानी जनरल, राजनीतिज्ञ और पाकिस्तान के प्रांत, ख़ैबर पख़्तूनख़्वा के पूर्व राज्यपाल थे। .

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आय का परिपत्र प्रवाह

आय का परिपत्र प्रवाह अर्थशास्त्र का एक मॉडल है। यह मॉडल अर्थव्यवस्था के प्रमुख बाजारों मे होने वाले लेन-देन को आर्थिक एजेंटों के बीच के पैसे एव्ं माल और सेवाओं के प्रवाह के रूप में दार्शाता है। एक क्लोज सर्किट में पैसे और माल के आदान-प्रदान का प्रवाह दिखाया जाता है जिसमे यह दो आर्थिक चरो का प्रवाह विपरीत दिशा में चलता हैं। परिपत्र प्रवाह विश्लेषण राष्ट्रीय खातों की, और इसलिए, मैक्रोइकॉनॉमिक्स का आधार है। परिपत्र प्रवाह का विचार पहले से ही रिचर्ड कैंटिलोन के कर्यो में मौजुद थे। फ़्राँस्वा क्युसने ने यह मॉडल विकसित किया जिसकी झांकी "économique" में मौजूद था। कार्ल मार्क्स के "प्रजनन योजनाओं" के दुसरे भाग मे क्युसने के विचारो को और विक्सित रूप में बताया गया है। इसके अभिन्न भाग है - राजनीतिक अर्थव्यवस्था की आलोचना, जॉन मेनार्ड कीन्स की "जनरल थ्योरी", ब्याज और पैसा, आदि। .

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आरिफ बनगश

वे एक पाकिस्तानी जनरल, राजनीतिज्ञ और पाकिस्तान के प्रांत, ख़ैबर पख़्तूनख़्वा के पूर्व राज्यपाल थे। .

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आलोक कुमार मेहता

श्री आलोक कुमार मेहता वर्तमान में बिहार विधान सभा के सदस्य एवं बिहार में महागठबंधन सरकार में सहकारिता मंत्री थे । श्री मेहता भारत के चौदहवीं लोकसभा के सदस्य थे, वे बिहार के समस्तीपुर लोकसभा क्षेत्र से चुनकर आये थे एवं संसद में राजद के प्रतिनिधि थे। .

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आई आई एफ ए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता पुरस्कार

आई आई एफ ए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता पुरस्कार दर्शकों द्वारा चुना जाता है और प्रति वर्ष अंतर्राष्ट्रीय भारतीय फ़िल्म अकादमी द्वारा आयोजित समारोह में दिया जाने वाला पुरस्कार है। यह हिन्दी फ़िल्म में बेहतर अभिनय के लिये फ़िल्म के सहायक अभिनेता को दिया जाता है। .

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इन्द्र कुमार गुजराल

इ Indra kumar raj Mistar sang m k न्द् र कुमार गुजराल (अंग्रेजी: I. K. Gujral जन्म: ४ दिसम्बर १९१९, झेलम - मृत्यु: ३० नवम्बर २०१२, गुड़गाँव) भारतीय गणराज्य के १३वें प्रधानमन्त्री थे। उन्होंने भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया था और १९४२ के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान वे जेल भी गये। अप्रैल १९९७ में भारत के प्रधानमंत्री बनने से पहले उन्होंने केन्द्रीय मन्त्रिमण्डल में विभिन्न पदों पर काम किया। वे संचार मन्त्री, संसदीय कार्य मन्त्री, सूचना प्रसारण मन्त्री, विदेश मन्त्री और आवास मन्त्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे। राजनीति में आने से पहले उन्होंने कुछ समय तक बीबीसी की हिन्दी सेवा में एक पत्रकार के रूप में भी काम किया था। १९७५ में जिन दिनों वे इन्दिरा गान्धी सरकार में सूचना एवं प्रसारण मन्त्री थे उसी समय यह बात सामने आयी थी कि १९७१ के चुनाव में इन्दिरा गान्धी ने चुनाव जीतने के लिये असंवैधानिक तरीकों का इस्तेमाल किया है। इन्दिरा गान्धी के बेटे संजय गांधी ने उत्तर प्रदेश से ट्रकों में भरकर अपनी माँ के समर्थन में प्रदर्शन करने के लिये दिल्ली में लोग इकट्ठे किये और इन्द्र कुमार गुजराल से दूरदर्शन द्वारा उसका कवरेज करवाने को कहा। गुजराल ने इसे मानने से इन्कार कर दिया क्योंकि संजय गांधी को कोई सरकारी ओहदा प्राप्त नहीं था। बेशक वे प्रधानमन्त्री के पुत्र थे। इस कारण से उन्हें सूचना एवं प्रसारण मन्त्रालय से हटा दिया गया और विद्याचरण शुक्ल को यह पद सौंप दिया गया। लेकिन बाद में उन्हीं इन्दिरा गान्धी की सरकार में मास्को में राजदूत के तौर पर गुजराल ने १९८० में सोवियत संघ के द्वारा अफ़गानिस्तान में हस्तक्षेप का विरोध किया। उस समय भारतीय विदेश नीति में यह एक बहुत बड़ा बदलाव था। उस घटना के बाद ही आगे चलकर भारत ने सोवियत संघ द्वारा हंगरी और चेकोस्लोवाकिया में राजनीतिक हस्तक्षेप का विरोध किया। .

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कमलेश्वर

कमलेश्वर (६ जनवरी१९३२-२७ जनवरी २००७) हिन्दी लेखक कमलेश्वर बीसवीं शती के सबसे सशक्त लेखकों में से एक समझे जाते हैं। कहानी, उपन्यास, पत्रकारिता, स्तंभ लेखन, फिल्म पटकथा जैसी अनेक विधाओं में उन्होंने अपनी लेखन प्रतिभा का परिचय दिया। कमलेश्वर का लेखन केवल गंभीर साहित्य से ही जुड़ा नहीं रहा बल्कि उनके लेखन के कई तरह के रंग देखने को मिलते हैं। उनका उपन्यास 'कितने पाकिस्तान' हो या फिर भारतीय राजनीति का एक चेहरा दिखाती फ़िल्म 'आंधी' हो, कमलेश्वर का काम एक मानक के तौर पर देखा जाता रहा है। उन्होंने मुंबई में जो टीवी पत्रकारिता की, वो बेहद मायने रखती है। 'कामगार विश्व’ नाम के कार्यक्रम में उन्होंने ग़रीबों, मज़दूरों की पीड़ा-उनकी दुनिया को अपनी आवाज़ दी। कमलेश्वर का जन्म ६ जनवरी १९३२ को उत्तरप्रदेश के मैनपुरी जिले में हुआ। उन्होंने १९५४ में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से हिन्दी साहित्य में एम.ए. किया। उन्होंने फिल्मों के लिए पटकथाएँ तो लिखी ही, उनके उपन्यासों पर फिल्में भी बनी। `आंधी', 'मौसम (फिल्म)', 'सारा आकाश', 'रजनीगंधा', 'छोटी सी बात', 'मिस्टर नटवरलाल', 'सौतन', 'लैला', 'रामबलराम' की पटकथाएँ उनकी कलम से ही लिखी गईं थीं। लोकप्रिय टीवी सीरियल 'चन्द्रकांता' के अलावा 'दर्पण' और 'एक कहानी' जैसे धारावाहिकों की पटकथा लिखने वाले भी कमलेश्वर ही थे। उन्होंने कई वृतचित्रों और कार्यक्रमों का निर्देशन भी किया। १९९५ में कमलेश्वर को 'पद्मभूषण' से नवाज़ा गया और २००३ में उन्हें 'कितने पाकिस्तान'(उपन्यास) के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वे 'सारिका' 'धर्मयुग', 'जागरण' और 'दैनिक भास्कर' जैसे प्रसिद्ध पत्र-पत्रिकाओं के संपादक भी रहे। उन्होंने दूरदर्शन के अतिरिक्त महानिदेशक जैसा महत्वपूर्ण दायित्व भी निभाया। कमलेश्वर ने अपने ७५ साल के जीवन में १२ उपन्यास, १७ कहानी संग्रह और क़रीब १०० फ़िल्मों की पटकथाएँ लिखीं। कमलेश्वर की अंतिम अधूरी रचना अंतिम सफर उपन्यास है, जिसे कमलेश्वर की पत्नी गायत्री कमलेश्वर के अनुरोध पर तेजपाल सिंह धामा ने पूरा किया और हिन्द पाकेट बुक्स ने उसे प्रकाशित किया और बेस्ट सेलर रहा। २७ जनवरी २००७ को उनका निधन हो गया। .

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कमसा मेघवाल

कमसा मेघवाल एक भारतीय राजनीतिज्ञ तथा राजस्थान सरकार में राज्यमंत्री है। वे राजस्थान विधानसभा में जोधपुर के भोपालगढ़ विधानसभा क्षेत्र (राजस्थान) से विधायक है। .

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करणी सिंह

महाराजा करणी सिंह (21 अप्रैल 1924 - 6 सितंबर 1988) भी डॉ.

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कर्मभूमि

कर्मभूमि प्रेमचन्द का राजनीतिक उपन्यास है जो पहली बार १९३२ में प्रकाशित हुआ। आज कई प्रकाशकों द्वारा इसके कई संस्करण निकल चुके हैं। इस उपन्यास में विभिन्न राजनीतिक समस्याओं को कुछ परिवारों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। ये परिवार यद्यपि अपनी पारिवारिक समस्याओं से जूझ रहे हैं तथापि तत्कालीन राजनीतिक आन्दोलन में भाग ले रहे हैं। .

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कामन्दकीय नीतिसार

कामंदकीय नीतिसार राज्यशास्त्र का एक संस्कृत ग्रंथ है। इसके रचयिता का नाम 'कामंदकि' अथवा 'कामंदक' है जिससे यह साधारणत: 'कामन्दकीय' नाम से प्रसिद्ध है। वास्तव में यह ग्रंथ कौटिल्य के अर्थशास्त्र के सारभूत सिद्धांतों (मुख्यत: राजनीति विद्या) का प्रतिपादन करता है। यह श्लोकों में रूप में है। इसकी भाषा अत्यन्त सरल है। नीतिसार के आरम्भ में ही विष्णुगुप्त चाणक्य की प्रशंशा की गयी है- वंशे विशालवंश्यानाम् ऋषीणामिव भूयसाम्। अप्रतिग्राहकाणां यो बभूव भुवि विश्रुतः ॥ जातवेदा इवार्चिष्मान् वेदान् वेदविदांवरः। योधीतवान् सुचतुरः चतुरोऽप्येकवेदवत् ॥ यस्याभिचारवज्रेण वज्रज्वलनतेजसः। पपात मूलतः श्रीमान् सुपर्वा नन्दपर्वतः ॥ एकाकी मन्त्रशक्त्या यः शक्त्या शक्तिधरोपमः। आजहार नृचन्द्राय चन्द्रगुप्ताय मेदिनीम्।। नीतिशास्त्रामृतं धीमान् अर्थशास्त्रमहोदधेः। समुद्दद्ध्रे नमस्तस्मै विष्णुगुप्ताय वेधसे ॥ इति ॥ .

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काव्य

काव्य, कविता या पद्य, साहित्य की वह विधा है जिसमें किसी कहानी या मनोभाव को कलात्मक रूप से किसी भाषा के द्वारा अभिव्यक्त किया जाता है। भारत में कविता का इतिहास और कविता का दर्शन बहुत पुराना है। इसका प्रारंभ भरतमुनि से समझा जा सकता है। कविता का शाब्दिक अर्थ है काव्यात्मक रचना या कवि की कृति, जो छन्दों की शृंखलाओं में विधिवत बांधी जाती है। काव्य वह वाक्य रचना है जिससे चित्त किसी रस या मनोवेग से पूर्ण हो। अर्थात् वहजिसमें चुने हुए शब्दों के द्वारा कल्पना और मनोवेगों का प्रभाव डाला जाता है। रसगंगाधर में 'रमणीय' अर्थ के प्रतिपादक शब्द को 'काव्य' कहा है। 'अर्थ की रमणीयता' के अंतर्गत शब्द की रमणीयता (शब्दलंकार) भी समझकर लोग इस लक्षण को स्वीकार करते हैं। पर 'अर्थ' की 'रमणीयता' कई प्रकार की हो सकती है। इससे यह लक्षण बहुत स्पष्ट नहीं है। साहित्य दर्पणाकार विश्वनाथ का लक्षण ही सबसे ठीक जँचता है। उसके अनुसार 'रसात्मक वाक्य ही काव्य है'। रस अर्थात् मनोवेगों का सुखद संचार की काव्य की आत्मा है। काव्यप्रकाश में काव्य तीन प्रकार के कहे गए हैं, ध्वनि, गुणीभूत व्यंग्य और चित्र। ध्वनि वह है जिस, में शब्दों से निकले हुए अर्थ (वाच्य) की अपेक्षा छिपा हुआ अभिप्राय (व्यंग्य) प्रधान हो। गुणीभूत ब्यंग्य वह है जिसमें गौण हो। चित्र या अलंकार वह है जिसमें बिना ब्यंग्य के चमत्कार हो। इन तीनों को क्रमशः उत्तम, मध्यम और अधम भी कहते हैं। काव्यप्रकाशकार का जोर छिपे हुए भाव पर अधिक जान पड़ता है, रस के उद्रेक पर नहीं। काव्य के दो और भेद किए गए हैं, महाकाव्य और खंड काव्य। महाकाव्य सर्गबद्ध और उसका नायक कोई देवता, राजा या धीरोदात्त गुंण संपन्न क्षत्रिय होना चाहिए। उसमें शृंगार, वीर या शांत रसों में से कोई रस प्रधान होना चाहिए। बीच बीच में करुणा; हास्य इत्यादि और रस तथा और और लोगों के प्रसंग भी आने चाहिए। कम से कम आठ सर्ग होने चाहिए। महाकाव्य में संध्या, सूर्य, चंद्र, रात्रि, प्रभात, मृगया, पर्वत, वन, ऋतु, सागर, संयोग, विप्रलम्भ, मुनि, पुर, यज्ञ, रणप्रयाण, विवाह आदि का यथास्थान सन्निवेश होना चाहिए। काव्य दो प्रकार का माना गया है, दृश्य और श्रव्य। दृश्य काव्य वह है जो अभिनय द्वारा दिखलाया जाय, जैसे, नाटक, प्रहसन, आदि जो पढ़ने और सुनेन योग्य हो, वह श्रव्य है। श्रव्य काव्य दो प्रकार का होता है, गद्य और पद्य। पद्य काव्य के महाकाव्य और खंडकाव्य दो भेद कहे जा चुके हैं। गद्य काव्य के भी दो भेद किए गए हैं- कथा और आख्यायिका। चंपू, विरुद और कारंभक तीन प्रकार के काव्य और माने गए है। .

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किरातार्जुनीयम्

अर्जुन शिव को पहचान जाते हैं और नतमस्तक हो जाते हैं। (राजा रवि वर्मा द्वारा१९वीं शती में चित्रित) किरातार्जुनीयम् महाकवि भारवि द्वारा सातवीं शती ई. में रचित महाकाव्य है जिसे संस्कृत साहित्य में महाकाव्यों की 'वृहत्त्रयी' में स्थान प्राप्त है। महाभारत में वर्णित किरातवेशी शिव के साथ अर्जुन के युद्ध की लघु कथा को आधार बनाकर कवि ने राजनीति, धर्मनीति, कूटनीति, समाजनीति, युद्धनीति, जनजीवन आदि का मनोरम वर्णन किया है। यह काव्य विभिन्न रसों से ओतप्रोत है किन्तु यह मुख्यतः वीर रस प्रधान रचना है। संस्कृत के छ: प्रसिद्ध महाकाव्य हैं – बृहत्त्रयी और लघुत्रयी। किरातार्जनुयीयम्‌ (भारवि), शिशुपालवधम्‌ (माघ) और नैषधीयचरितम्‌ (श्रीहर्ष)– बृहत्त्रयी कहलाते हैं। कुमारसम्भवम्‌, रघुवंशम् और मेघदूतम् (तीनों कालिदास द्वारा रचित) - लघुत्रयी कहलाते हैं। किरातार्जुनीयम्‌ भारवि की एकमात्र उपलब्ध कृति है, जिसने एक सांगोपांग महाकाव्य का मार्ग प्रशस्त किया। माघ-जैसे कवियों ने उसी का अनुगमन करते हुए संस्कृत साहित्य भण्डार को इस विधा से समृद्ध किया और इसे नई ऊँचाई प्रदान की। कालिदास की लघुत्रयी और अश्वघोष के बुद्धचरितम्‌ में महाकाव्य की जिस धारा का दर्शन होता है, अपने विशिष्ट गुणों के होते हुए भी उसमें वह विषदता और समग्रता नहीं है, जिसका सूत्रपात भारवि ने किया। संस्कृत में किरातार्जुनीयम्‌ की कम से कम 37 टीकाएँ हुई हैं, जिनमें मल्लिनाथ की टीका घंटापथ सर्वश्रेष्ठ है। सन 1912 में कार्ल कैप्पलर ने हारवर्ड ओरियेंटल सीरीज के अंतर्गत किरातार्जुनीयम् का जर्मन अनुवाद किया। अंग्रेजी में भी इसके भिन्न-भिन्न भागों के छ: से अधिक अनुवाद हो चुके हैं। .

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कुमार केतकर

कुमार केतकर एक भारतीय पत्रकार तथा राजनीतिज्ञ हैं | वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राजनेता हैं | .

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क्लीशे

क्लीशे या घिसा-पिटा या पिष्टोक्ति एक ऐसा वाक्य, विचार, या कला का तत्व होता है जो बहुत अधिक प्रयोग होने की वजह से अपना मूल अर्थ खो चूका हुआ। अक्सर यह ऐसी चीजें होती हैं जो आरम्भ में बहुत अर्थपूर्ण, नवीन या नाज़ुक समझी जाती हों। उदहारण के लिए एक प्रेमी का अपनी प्रेमिका से कहना के "मै तुम्हारे लिए तारे तोड़ लाऊँगा" किसी ज़माने में बहुत अर्थ रखता था लेकिन अब एक क्लिशे बनकर अर्थहीन हो चुका है। इसी तरह भारतीय राजनीति में "हमारा उद्देश्य ग़रीबों की मदद करना है" एक घिसा-पिटा नारा बन चुका है। कला में ऐसे तत्वों का इस्तेमाल करना नौसिखिये या मध्यम-स्तरीय होने की निशानी माना जाता है। यह ज़रूरी नहीं है के क्लिशे का प्रयोग हमेशा झूँठ या धूर्तता दिखलाता है - यह सच्चाई और इमानदारी से भी प्रयोग हो सकता है। लेकिन सुनने या देखने वाले के लिए घिसी-पिटी चीज़ में आश्चर्य या भावुकता नहीं उत्पन्न होती। उदहारण के लिए किसी फ़िल्म में "मैं तुम्हारे बच्चे की माँ बनने वाली हूँ" का वाक्य सच्चाई से भी कहा जाए तो भी उपहास का विषय बन चुका है। .

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क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान,भुवनेश्वर

क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान,भुवनेश्वर, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद का संघटक ईकाईयो में से एक हँ, जो कि पूर्वी क्षेत्र के अध्यापको की शैक्षिक जरुरतें (पुर्व सेवा और सेवारत शिक्षा) पूरी करता हँ। इसका पूर्व नाम 'क्षेत्रीय शिक्षा महाविद्यालय' (Regional College of Education) था। यह ओडिशा,बिहार,झारखण्ड,पश्चिम बंगाल,असम,अरुणाचल प्रदेश,त्रिपुरा, नागालैण्ड,मिज़ोरम,मेघालय,सिक्किम, मणिपुर राज्यो और संघ राज्य प्रदेश अण्डमान और निकोबार द्वीपसमूह में विद्यालयी शिक्षा के सभी क्षेत्रों, विशेश रूप से स्कूली शिक्षा के संसाधन केन्द्र के रूप में कार्य करता हैं। .

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क्विज़

क्विज़ एक प्रकार का खेल अथवा दिमागी कसरत है जिसमें खिलाड़ी (अकेले या टीम में) सवालों के सही उत्तर देने का प्रयास करते हैं। क्विज़ एक प्रकार के संक्षिप्त मूल्यांकन को भी कहते हैं जिसका प्रयोग शिक्षा या इसी प्रकार के अन्य क्षेत्रों में ज्ञान, योग्यता और/या कौशल में वृद्धि को मापने के लिए किया जाता है। आमतौर पर प्रश्नोत्तारियों में उत्तरों के लिए अंक दिए जाते हैं और कई प्रश्नोत्तरियों का उद्देश्य प्रतिभागियों के एक समूह में से सबसे ज्यादा अंक पाने वाले विजेता का चुनाव करना होता है। .

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कौटिल्य पण्डित

कौटिल्य पण्डित (अंग्रेजी: Kautilya Pandit, जन्म: 24 दिसम्बर 2007) भारत में हरियाणा प्रान्त के करनाल जिले के कोहँड़ गाँव में जन्मा एक असाधारण प्रतिभासम्पन्न बच्चा है जिसने महज 5 वर्ष 10 महीने की आयु में ही विश्व भूगोल, प्रति व्यक्ति आय, घरेलू उत्पाद व राजनीति जैसे विभिन्न विषयों से सम्बन्धित प्रश्नों के चुटकी बजाते उत्तर देकर सबको आश्चर्यचकित कर दिया है। जहाँ इस उम्र में बच्चे एबीसी, कखग और नर्सरी कवितायें रटते है वहाँ इस बच्चे ने असाधारण रूप से अपने मानव मष्तिष्क की क्षमता में कम्प्यूटर को भी मात दे दी है। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ मनोवैज्ञानिक उसकी स्मृति क्षमता (बुद्धि लब्धि) का अध्ययन कर रहे हैं। 4 अक्टूबर 2013 को हरियाणा के मुख्यमन्त्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने विलक्षण प्रतिभावान कौटिल्य को 10 लाख रुपये का चेक व प्रशस्ति पत्र प्रदान किया। 14 अक्टूबर 2013 को कौन बनेगा करोड़पति (केबीसी) जैसे लोकप्रिय टीवी कार्यक्रम में अमिताभ बच्चन के सामने हॉटसीट पर पहुँचकर कौटिल्य ने अपनी तीक्ष्ण बुद्धि और हाजिरजवाबी का परिचय दिया। कौटिल्य अपने दादा जयकृष्ण शर्मा को अपना सर्वश्रेष्ठ मित्र व गुरु मानता है। उसके पिता सतीश शर्मा चाहते हैं कि कौटिल्य अपनी रुचि के विषय में दक्षता के साथ अपनी शिक्षा पूर्ण करे। विभिन्न टीवी चैनलों पर उसके कार्यक्रम देखकर लोगबाग उसे गूगल बॉय (गूगल बच्चा) तक कहने लगे हैं। .

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कृषकवाद

कृषकवाद (agrarianism) एक सामाजिक और राजनैतिक दार्शनिक दृष्टिकोण है जिसमें ग्रामीण समाज को नगरीय समाज से ऊँचा ठहराया जाता है। इस विचारधारा के अनुसार स्वतंत्र कृषक किसी आय लेने वाली व्यवसायी नौकर से अधिक महान है और कृषि की जीवन-पद्धति द्वारा ही आदर्श सामाजिक मूल्यों की प्राप्ति हो सकती है। यह गाँव के सरल जीवन पर ज़ोर देती है और शहरों की हलचल और संकुल जीवनी की निन्दा। .

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कृष्ण लाल पंवार

कृष्ण लाल पंवार वर्तमान हरियाणा सरकार में परिवहन मंत्री हैं| वे हरियाणा विधानसभा में इसराना से विधायक हैं तथा भारतीय जनता पार्टी के राजनेता हैं | .

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कृष्ण कुमार यादव

कृष्ण कुमार यादव (अंग्रेज़ी: Krishna Kumar Yadav, जन्म:10 अगस्त 1977) 2001 बैच के भारतीय डाक सेवा के अधिकारी हैं। साथ हीं सामाजिक, साहित्यिक और समसामयिक मुद्दों से सम्बंधित विषयों पर प्रमुखता से लेखन करने वाले वे साहित्यकार, विचारक और ब्लॉगर भी हैं। उनकी विभिन्न विधाओं में सात पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। वर्तमान में वे राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर में निदेशक डाक सेवाएँ पद पर कार्यरत हैं। .

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कृष्णा राज

कृष्णा राज भारत की सोलहवीं लोकसभा में सांसद हैं। 2014 के चुनावों में इन्होंने उत्तर प्रदेश की शाहजहाँपुर सीट से भारतीय जनता पार्टी की ओर से भाग लिया। .

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कृष्णा कोहली

कृष्णा कुमारी कोहली, (ڪرشنا ڪماري ڪوهلي) पाकिस्तानी राजनीतिज्ञ तथा वर्तमान पाकिस्तान की सेनेट की सीनेटर हैं। वे प्रथम दलित हिन्दू महिला पाकिस्तान की सेनेट की सेनेटर हैं। .

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कैलाश वर्मा

डॉ॰ कैलाश वर्मा वर्तमान राजस्थान विधानसभा में बगरू से विधायक हैं। वे भारतीय जनता पार्टी के राजनेता हैं। .

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के रहमान खान

के रहमान खान (जन्म ५ अप्रैल १९३९) भारतीय राजनीतिज्ञ है। वे कर्नाटक राज्य से राज्य सभा के सदस्य रहे हैं और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेता है। वे २२ जुलाई २००४ से २ अप्रैल २००६ तक और फिर १२ मई २००६ से २ अप्रैल २०१२ तक राज्य सभा के उपाध्यक्ष थे। .

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केन्द्रवाद

राजनीति में, केन्द्रवाद या केन्द्र एक राजनीतिक दृष्टिकोण या विशिष्ट स्थिति हैं, जिस में, सामाजिक समानता के एक स्तर और सामाजिक पदक्रम के एक स्तर के संतुलन का स्वीकार या समर्थन होता हैं, व साथ ही, ऐसे राजनीतिक परिवर्तनों का विरोध किया जाता हैं, जिनसे समाज प्रबलतापूर्वक या तो वामपन्थी या दक्षिणपन्थी हो जायें। केन्द्र-वामपन्थी और केन्द्र-दक्षिणपन्थी राजनीतियाँ दोनों केन्द्रवाद के साथ एक सामान्यरूप से संबद्ध होती हैं, तथा, दोनों का झुकाव वर्णक्रम के क्रमशः पक्षों की ओर होता हैं। .

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कॉमनवेल्थ

कॉमनवेल्थ (Commonwealth) ब्रिटेन के इतिहास में उन राजनैतिक इकाईयों को कहा जाता था जो राजाओं-सम्राटों की बजाय साधारण नाकरिकों के सर्वहित के नाम पर स्थापित हुई हो। इसमें अंग्रेज़ी गृहयुद्ध के बाद 1649–53 और 1659–60 काल में ऑलिवर क्रॉमवेल और उसके पुत्र व उत्तराधिकारी के नेतृत्व में स्थापित "इंगलैंड का कॉमनवेल्थ" भी एक उदाहरण था। आधुनिक काल में यह "गणतंत्र" के बराबर माना जाता है। वर्तमान में तीन देशों के औपचारिक नाम में यह शब्द पाया जाता है: ऑस्ट्रेलिया कॉमनवेल्थ, बाहामास कॉमनवेल्थ और दोमिनिका कॉमनवेल्थ। कुछ अंग्रेज़ीभाषी देशों के राज्यों के सरकारी नामों में भी यह शब्द मिलता है, मसलन संयुक्त राज्य अमेरिका के पेनसिलवेनिया राज्य का औपचारिक नाम "पेनसिलवेनिया का कॉमनवेल्थ" (Commonwealth of Pennsylvania) है। .

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कीर्ति आजाद

कीर्तिवर्धन भागवत झा आजाद (जन्म 2 जनवरी 1959, पूर्णिया, बिहार, भारत) एक पूर्व भारतीय क्रिकेटर और राजनीतिज्ञ है, जिन्होंने 7 टेस्ट और 25 वनडे खेले हैं। श्री आजाद बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री भागवत झा आजाद के पुत्र है। वह एक आक्रामक दाएँ हाथ के बल्लेबाज और एक ऑफ स्पिनर है। श्री झा 1983 विश्व कप जितने वाली भारतीय टीम का हिस्सा थे। वे वर्त्तमान में लोक सभा के सदस्य है। उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव में दरभंगा, बिहार से जीत दर्ज की है । .

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कीर्ति कुमारी

कीर्ति कुमारी (13 अगस्त 1967 - 28 अगस्त 2017) भारतीय जनता पार्टी से एक भारतीय राजनीतिज्ञ और राजस्थान विधानसभा की सदस्य थी, जो राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के मांडलगढ़ विधानसभा क्षेत्र में प्रतिनिधित्व करती थी। 28 अगस्त 2017 को कुमारी की मृत्यु स्वाइन फ्लू से हुई थी। वह पचास वर्ष की थी | .

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अटल बिहारी वाजपेयी

अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpeyee), (जन्म: २५ दिसंबर, १९२४) भारत के पूर्व प्रधानमंत्री हैं। वे पहले १६ मई से १ जून १९९६ तथा फिर १९ मार्च १९९८ से २२ मई २००४ तक भारत के प्रधानमंत्री रहे। वे हिन्दी कवि, पत्रकार व प्रखर वक्ता भी हैं। वे भारतीय जनसंघ की स्थापना करने वाले महापुरुषों में से एक हैं और १९६८ से १९७३ तक उसके अध्यक्ष भी रहे। वे जीवन भर भारतीय राजनीति में सक्रिय रहे। उन्होंने लम्बे समय तक राष्ट्रधर्म, पाञ्चजन्य और वीर अर्जुन आदि राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत अनेक पत्र-पत्रिकाओं का सम्पादन भी किया। उन्होंने अपना जीवन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में आजीवन अविवाहित रहने का संकल्प लेकर प्रारम्भ किया था और देश के सर्वोच्च पद पर पहुँचने तक उस संकल्प को पूरी निष्ठा से निभाया। वाजपेयी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के पहले प्रधानमन्त्री थे जिन्होंने गैर काँग्रेसी प्रधानमन्त्री पद के 5 साल बिना किसी समस्या के पूरे किए। उन्होंने 24 दलों के गठबंधन से सरकार बनाई थी जिसमें 81 मन्त्री थे। कभी किसी दल ने आनाकानी नहीं की। इससे उनकी नेतृत्व क्षमता का पता चलता है। सम्प्रति वे राजनीति से संन्यास ले चुके हैं और नई दिल्ली में ६-ए कृष्णामेनन मार्ग स्थित सरकारी आवास में रहते हैं। .

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अतिवाद

अतिवाद या चरमवाद का शाब्दिक अर्थ है अति तक (किसी चीज को) ले जाना। इस शब्द का प्रयोग धार्मिक और राजनीतिक विषय में ऐसी विचारधारा के लिये होता है जो मुख्यधारा समाज के नजरिए में स्वीकार्य नहीं है। चरमवाद या चरमपन्थ या उग्रवाद (extremism) का अक्षरशः अर्थ हैं "(किसी को) परिसीमा तक, चरम तक ले जाना" या "चरम होने की गुणवत्ता या अवस्था, चरम उपायों या विचारों की वक़ालत करना"। आजकल, इस शब्द का ज़्यादातर प्रयोग राजनीतिक या धार्मिक अर्थ में उस विचारधारा के लिये होता हैं, जो (वक्ता या किसी अन्तर्निहित साझी सामाजिक सहमति द्वारा) समाज की स्वीकार्य मुख्य धारा की अभिवृत्तियों से काफ़ी दूर मानी जाती हैं। .

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अथर्ववेद संहिता

अथर्ववेद संहिता हिन्दू धर्म के पवित्रतम और सर्वोच्च धर्मग्रन्थ वेदों में से चौथे वेद अथर्ववेद की संहिता अर्थात मन्त्र भाग है। इसमें देवताओं की स्तुति के साथ जादू, चमत्कार, चिकित्सा, विज्ञान और दर्शन के भी मन्त्र हैं। अथर्ववेद संहिता के बारे में कहा गया है कि जिस राजा के रज्य में अथर्ववेद जानने वाला विद्वान् शान्तिस्थापन के कर्म में निरत रहता है, वह राष्ट्र उपद्रवरहित होकर निरन्तर उन्नति करता जाता हैः अथर्ववेद के रचियता श्री ऋषि अथर्व हैं और उनके इस वेद को प्रमाणिकता स्वंम महादेव शिव की है, ऋषि अथर्व पिछले जन्म मैं एक असुर हरिन्य थे और उन्होंने प्रलय काल मैं जब ब्रह्मा निद्रा मैं थे तो उनके मुख से वेद निकल रहे थे तो असुर हरिन्य ने ब्रम्ह लोक जाकर वेदपान कर लिया था, यह देखकर देवताओं ने हरिन्य की हत्या करने की सोची| हरिन्य ने डरकर भगवान् महादेव की शरण ली, भगवन महादेव ने उसे अगले अगले जन्म मैं ऋषि अथर्व बनकर एक नए वेद लिखने का वरदान दिया था इसी कारण अथर्ववेद के रचियता श्री ऋषि अथर्व हुए| .

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अनिल शास्त्री

अनिल शास्त्री के पिता उनका विवाह मंजू श्रीवास्तव से 24 फ़रवरी 1973 को हुआ जिनसे उनके तीन बेटे हैं - आदर्श, लगन और मुदित। दो बेटे गुड़गाँव में सर्विस करते हैं तथा सबसे छोटा मुंबई में एक रिटेल शॉप का काम देखता है। स्वयं अनिल शास्त्री ने भी स्नातक करने के बाद पूरे सत्रह साल एक कॉरपोरेट ऑफिस में काम किया। वहाँ से त्यागपत्र देकर वे राजनीति में आ गये।.एक बार कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा का चुनाव जीता और दो साल तक मन्त्री भी रहे। इस समय वे अपने परिवार सहित नोएडा में स्थायी रूप से रह रहे हैं। .

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अनुच्छेद ३७०

भारतीय संविधान का राष्ट्रचिन्ह धारा ३७० भारतीय संविधान का एक विशेष अनुच्छेद (धारा) है जिसके द्वारा जम्मू एवं कश्मीर राज्य को सम्पूर्ण भारत में अन्य राज्यों के मुकाबले विशेष अधिकार अथवा (विशेष दर्ज़ा) प्राप्त है। देश को आज़ादी मिलने के बाद से लेकर अब तक यह धारा भारतीय राजनीति में बहुत विवादित रही है। भारतीय जनता पार्टी एवं कई राष्ट्रवादी दल इसे जम्मू एवं कश्मीर में व्याप्त अलगाववाद के लिये जिम्मेदार मानते हैं तथा इसे समाप्त करने की माँग करते रहे हैं। भारतीय संविधान में अस्थायी, संक्रमणकालीन और विशेष उपबन्ध सम्बन्धी भाग २१ का अनुच्छेद ३७० जवाहरलाल नेहरू के विशेष हस्तक्षेप से तैयार किया गया था। स्वतन्त्र भारत के लिये कश्मीर का मुद्दा आज तक समस्या बना हुआ है। .

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अनुग्रह नारायण सिंह

डा अनुग्रह नारायण सिंह एक भारतीय राजनेता और बिहार के पहले उप मुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री (1946-1957) थे। अनुग्रह बाबू (1887-1957) भारत के स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षक तथा राजनीतिज्ञ रहे हैं।उन्होंने महात्मा गांधी एवं डॉ॰ राजेन्द्र प्रसाद के साथ चंपारण सत्याग्रह में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभायी। वे आधुनिक बिहार के निर्माताओं में से एक थे। लोकप्रियता के कारण उन्हें बिहार विभूति के रूप में जाना जाता था। उनका सौभ्य, स्निग्ध, शीतल, परोपकारी, अहंकारहीन और दर्पोदीप्त शख़्सियत बिहार के जन गण मन पर अधिकार किए हुए था।वे देश के स्वाधीनता-संग्राम के महान नायकों में एक और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के पद चिह्नों पर चलने वाले उनके प्रिय अनुयायी थे। .

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अनीता भदेल

अनीता भदेल एक भारतीय राजनीतिज्ञ तथा वर्तमान राजस्थान सरकार में महिला एवं बाल विकास मंत्री हैं | वे राजस्थान विधानसभा में अजमेर दक्षिण से विधायक हैं | वे भारतीय जनता पार्टी की राजनेत्री हैं| .

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अपराध शास्त्र

अपराध, अपराधी, आपराधिक स्वभाव तथा अपराधियों के सुधार का वैज्ञानिक अध्ययन अपराध शास्त्र (Criminology) के अन्तर्गत किया जाता है। इसके अन्तर्गत अपराध के प्रति समाज के रवैया, अपराध के कारण, अपराध के परिणाम, अपराध के प्रकार एवं अपराध की रोकथाम का भी अध्ययन किया जाता है। .

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अफसरशाही

प्राचीन चीन की नौकरशाही में स्थान पाने के लिये विद्यार्थियों में स्पर्धा होती थी। किसी बड़ी संस्था या सरकार के परिचालन के लिये निर्धारित की गयी संरचनाओं एवं नियमों को समग्र रूप से अफसरशाही या ब्यूरोक्रैसी (Bureaucracy) कहते हैं। तदर्थशाही (adhocracy) के विपरीत इस तंत्र में सभी प्रक्रियाओं के लिये मानक विधियाँ निर्धारित की गयी होती हैं और उसी के अनुसार कार्यों का निष्पादन अपेक्षित होता है। शक्ति का औपचारिक रूप से विभाजन एवं पदानुक्रम (hierarchy) इसके अन्य लक्षण है। यह समाजशास्त्र का प्रमुख परिकल्पना (कांसेप्ट) है। अफरशाही की प्रमुख विशेषताएँ ये हैं-.

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अफ़्रीका

अफ़्रीका वा कालद्वीप, एशिया के बाद विश्व का सबसे बड़ा महाद्वीप है। यह 37°14' उत्तरी अक्षांश से 34°50' दक्षिणी अक्षांश एवं 17°33' पश्चिमी देशान्तर से 51°23' पूर्वी देशान्तर के मध्य स्थित है। अफ्रीका के उत्तर में भूमध्यसागर एवं यूरोप महाद्वीप, पश्चिम में अंध महासागर, दक्षिण में दक्षिण महासागर तथा पूर्व में अरब सागर एवं हिन्द महासागर हैं। पूर्व में स्वेज भूडमरूमध्य इसे एशिया से जोड़ता है तथा स्वेज नहर इसे एशिया से अलग करती है। जिब्राल्टर जलडमरूमध्य इसे उत्तर में यूरोप महाद्वीप से अलग करता है। इस महाद्वीप में विशाल मरुस्थल, अत्यन्त घने वन, विस्तृत घास के मैदान, बड़ी-बड़ी नदियाँ व झीलें तथा विचित्र जंगली जानवर हैं। मुख्य मध्याह्न रेखा (0°) अफ्रीका महाद्वीप के घाना देश की राजधानी अक्रा शहर से होकर गुजरती है। यहाँ सेरेनगेती और क्रुजर राष्‍ट्रीय उद्यान है तो जलप्रपात और वर्षावन भी हैं। एक ओर सहारा मरुस्‍थल है तो दूसरी ओर किलिमंजारो पर्वत भी है और सुषुप्‍त ज्वालामुखी भी है। युगांडा, तंजानिया और केन्या की सीमा पर स्थित विक्टोरिया झील अफ्रीका की सबसे बड़ी तथा सम्पूर्ण पृथ्वी पर मीठे पानी की दूसरी सबसे बड़ी झीलहै। यह झील दुनिया की सबसे लम्बी नदी नील के पानी का स्रोत भी है। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि इसी महाद्वीप में सबसे पहले मानव का जन्म व विकास हुआ और यहीं से जाकर वे दूसरे महाद्वीपों में बसे, इसलिए इसे मानव सभ्‍यता की जन्‍मभूमि माना जाता है। यहाँ विश्व की दो प्राचीन सभ्यताओं (मिस्र एवं कार्थेज) का भी विकास हुआ था। अफ्रीका के बहुत से देश द्वितीय विश्व युद्ध के बाद स्वतंत्र हुए हैं एवं सभी अपने आर्थिक विकास में लगे हुए हैं। अफ़्रीका अपनी बहुरंगी संस्कृति और जमीन से जुड़े साहित्य के कारण भी विश्व में जाना जाता है। .

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अब्दुल ग़फ़ूर ख़ान होती

वे एक पाकिस्तानी राजनीतिज्ञ और पाकिस्तान के प्रांत, ख़ैबर पख़्तूनख़्वा के पूर्व राज्यपाल थे। .

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अभिजात सिद्धान्त

‘शक्ति’ एवं ‘सत्ता’ की अवधारणा समाजशास्त्र, राजनीतिक समाजशास्त्र और राजनीति शास्त्र की मूल अवधारणा है। मानव के सार्वजनिक और राजनीतिक व्यवहार को समझने में इस अवधारणा का अतुलनीय महत्व है। यद्यपि इन दोनों का प्रयोग पर्यायवाची की तरह किया जाता है पर राजनीतिक समाजशास्त्र में इनका विशिष्ट अर्थ है। प्रत्येक राजनीतिक व्यवस्था में शक्ति केवल कुछ लोगों अथवा अल्पसंख्यक समूह में ही केन्द्रित होती है। यह किस प्रकार होता है? राजनीतिक समाजशास्त्र में इन प्रश्न का उत्तर ढूँढने के प्रयासों के परिणाम-स्वरूप ही अभिजन (संभ्रांतजन या श्रेष्ठजन) सम्बन्धी सिद्धान्तों का विकास हुआ है। अभिजात सिद्धान्त इस तथ्य पर आधारित हैं कि प्रत्येक समाज में मोटे तौर पर दो भिन्न वर्ग पाये जाते हैं- एक, थोड़े या अल्पसंख्यक लोगों का वर्ग जो अपनी क्षमता के आधार पर समाज को सर्वोच्च नेतृत्व प्रदान करता है तथा शासन करता है, तथा दूसरा, जन-समूह या असंख्य साधारणजनों का वर्ग, जिसके भाग्य में शासित होना लिखा है। प्रथम वर्ग को अभिजन वर्ग (एलीट) और दूसरे को जनसमूह (मासेस) कहा जाता है। अभिजन की अवधारणा को पहले केवल राजनीतिक दृष्टि से ही देखा जाता था तथा केवल शासक वर्ग एवं शक्तिशाली अभिजनों की ओर ध्यान दिया जाता था, परन्तु आज ऐसा नहीं हैं। आज अभिजनों में शक्तिशाली अभिजन वर्ग, पूँजीपति वर्ग, सैनिक अभिजन, शासक-वर्ग, बुद्धिजीवी वर्ग, नौकरशाहों तथा प्रबन्धकों को भी सम्मिलित किया जाता है। शक्ति के असमान वितरण के अतिरिक्त सामाजिक स्तरीकरण के अध्ययनों ने भी अभिजन सिद्धान्तों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। आज अभिजन का संप्रत्यय राजनीति शास्त्र, समाजशास्त्र एवं राजनीतिक समाजशास्त्र में एक मौलिक संप्रत्यय माना जाता है। यह संप्रत्यय सामाजिक-राजनीतिक यथार्थ को समझने में काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रत्येक समाज में किसी न किसी प्रकार का सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक संस्तरण पाया जाता है। .

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अमरजीत सोही

अमरजीत सोही (जन्म ८ मार्च, १९६४) एक कनाड़ाई राजनीतिज्ञ तथा वर्तमान कनाड़ा सरकार में इन्फ्राटस्कर एवं कम्यूनीकल मंत्री है। वे भारतीय मूल के है। १९६४ में उनका जन्म भारत के पंजाब में हुआ था। उनके ज्येष्ठ भ्राता के कहने पर १९८१ में कनाड़ा गये थे। .

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अमित जोगी

अमित जोगी एक भारतीय राजनीतिज्ञ तथा छत्तीसगढ़ विधानसभा के सदस्य हैं | वे पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र हैं | .

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अरस्तु

अरस्तु अरस्तु (384 ईपू – 322 ईपू) यूनानी दार्शनिक थे। वे प्लेटो के शिष्य व सिकंदर के गुरु थे। उनका जन्म स्टेगेरिया नामक नगर में हुआ था ।  अरस्तु ने भौतिकी, आध्यात्म, कविता, नाटक, संगीत, तर्कशास्त्र, राजनीति शास्त्र, नीतिशास्त्र, जीव विज्ञान सहित कई विषयों पर रचना की। अरस्तु ने अपने गुरु प्लेटो के कार्य को आगे बढ़ाया। प्लेटो, सुकरात और अरस्तु पश्चिमी दर्शनशास्त्र के सबसे महान दार्शनिकों में एक थे।  उन्होंने पश्चिमी दर्शनशास्त्र पर पहली व्यापक रचना की, जिसमें नीति, तर्क, विज्ञान, राजनीति और आध्यात्म का मेलजोल था।  भौतिक विज्ञान पर अरस्तु के विचार ने मध्ययुगीन शिक्षा पर व्यापक प्रभाव डाला और इसका प्रभाव पुनर्जागरण पर भी पड़ा।  अंतिम रूप से न्यूटन के भौतिकवाद ने इसकी जगह ले लिया। जीव विज्ञान उनके कुछ संकल्पनाओं की पुष्टि उन्नीसवीं सदी में हुई।  उनके तर्कशास्त्र आज भी प्रासांगिक हैं।  उनकी आध्यात्मिक रचनाओं ने मध्ययुग में इस्लामिक और यहूदी विचारधारा को प्रभावित किया और वे आज भी क्रिश्चियन, खासकर रोमन कैथोलिक चर्च को प्रभावित कर रही हैं।  उनके दर्शन आज भी उच्च कक्षाओं में पढ़ाये जाते हैं।  अरस्तु ने अनेक रचनाएं की थी, जिसमें कई नष्ट हो गई। अरस्तु का राजनीति पर प्रसिद्ध ग्रंथ पोलिटिक्स है। .

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अर्थशास्त्र

---- विश्व के विभिन्न देशों की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर (सन २०१४) अर्थशास्त्र सामाजिक विज्ञान की वह शाखा है, जिसके अन्तर्गत वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन, वितरण, विनिमय और उपभोग का अध्ययन किया जाता है। 'अर्थशास्त्र' शब्द संस्कृत शब्दों अर्थ (धन) और शास्त्र की संधि से बना है, जिसका शाब्दिक अर्थ है - 'धन का अध्ययन'। किसी विषय के संबंध में मनुष्यों के कार्यो के क्रमबद्ध ज्ञान को उस विषय का शास्त्र कहते हैं, इसलिए अर्थशास्त्र में मनुष्यों के अर्थसंबंधी कायों का क्रमबद्ध ज्ञान होना आवश्यक है। अर्थशास्त्र का प्रयोग यह समझने के लिये भी किया जाता है कि अर्थव्यवस्था किस तरह से कार्य करती है और समाज में विभिन्न वर्गों का आर्थिक सम्बन्ध कैसा है। अर्थशास्त्रीय विवेचना का प्रयोग समाज से सम्बन्धित विभिन्न क्षेत्रों में किया जाता है, जैसे:- अपराध, शिक्षा, परिवार, स्वास्थ्य, कानून, राजनीति, धर्म, सामाजिक संस्थान और युद्ध इत्यदि। प्रो.

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अर्थशास्त्र (ग्रन्थ)

अर्थशास्त्र, कौटिल्य या चाणक्य (चौथी शती ईसापूर्व) द्वारा रचित संस्कृत का एक ग्रन्थ है। इसमें राज्यव्यवस्था, कृषि, न्याय एवं राजनीति आदि के विभिन्न पहलुओं पर विचार किया गया है। अपने तरह का (राज्य-प्रबन्धन विषयक) यह प्राचीनतम ग्रन्थ है। इसकी शैली उपदेशात्मक और सलाहात्मक (instructional) है। यह प्राचीन भारतीय राजनीति का प्रसिद्ध ग्रंथ है। इसके रचनाकार का व्यक्तिनाम विष्णुगुप्त, गोत्रनाम कौटिल्य (कुटिल से व्युत्पत्र) और स्थानीय नाम चाणक्य (पिता का नाम चणक होने से) था। अर्थशास्त्र (15.431) में लेखक का स्पष्ट कथन है: चाणक्य सम्राट् चंद्रगुप्त मौर्य (321-298 ई.पू.) के महामंत्री थे। उन्होंने चंद्रगुप्त के प्रशासकीय उपयोग के लिए इस ग्रंथ की रचना की थी। यह मुख्यत: सूत्रशैली में लिखा हुआ है और संस्कृत के सूत्रसाहित्य के काल और परंपरा में रखा जा सकता है। यह शास्त्र अनावश्यक विस्तार से रहित, समझने और ग्रहण करने में सरल एवं कौटिल्य द्वारा उन शब्दों में रचा गया है जिनका अर्थ सुनिश्चित हो चुका है। (अर्थशास्त्र, 15.6)' अर्थशास्त्र में समसामयिक राजनीति, अर्थनीति, विधि, समाजनीति, तथा धर्मादि पर पर्याप्त प्रकाश पड़ता है। इस विषय के जितने ग्रंथ अभी तक उपलब्ध हैं उनमें से वास्तविक जीवन का चित्रण करने के कारण यह सबसे अधिक मूल्यवान् है। इस शास्त्र के प्रकाश में न केवल धर्म, अर्थ और काम का प्रणयन और पालन होता है अपितु अधर्म, अनर्थ तथा अवांछनीय का शमन भी होता है (अर्थशास्त्र, 15.431)। इस ग्रंथ की महत्ता को देखते हुए कई विद्वानों ने इसके पाठ, भाषांतर, व्याख्या और विवेचन पर बड़े परिश्रम के साथ बहुमूल्य कार्य किया है। शाम शास्त्री और गणपति शास्त्री का उल्लेख किया जा चुका है। इनके अतिरिक्त यूरोपीय विद्वानों में हर्मान जाकोबी (ऑन दि अथॉरिटी ऑव कौटिलीय, इं.ए., 1918), ए. हिलेब्रांड्ट, डॉ॰ जॉली, प्रो॰ए.बी.

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अर्नोल्ड श्वार्ज़नेगर

अर्नोल्ड अलोइस श्वार्ज़नेगर (जन्म 30 जुलाई 1947) एक ऑस्ट्रियन अमेरिकी बॉडीबिल्डर, अभिनेता, मॉडेल, व्यवसायी और राजनेता, वर्तमान में कैलिफोर्निया राज्य के 38वें गवर्नर के रूप में सेवारत हैं। श्वार्ज़नेगर ने पंद्रह वर्ष की आयु में भारोत्तोलन का प्रशिक्षण लेना शुरू किया। 22 साल की उम्र में उन्हें मि. यूनिवर्स (Mr. Universe) की उपाधि से सम्मानित किया गया और उन्होंने मि. ओलम्पिया (Mr. Olympia) प्रतियोगिता में कुल सात बार जीत हासिल की। अपनी सेवानिवृत्ति के बहुत समय बाद भी श्वार्जनेगर बॉडीबिल्डिंग के खेल में एक प्रमुख चेहरा बने हुए हैं और उन्होंने खेल पर कई पुस्तकें और अनेक लेख लिखे हैं। कॉनन द बर्बरियन (Conan the Barbarian) और द टर्मिनेटर (The Terminator) जैसी फ़िल्मों में अपनी उल्लेखनीय मुख्य भूमिका के कारण श्वार्जनेगर ने हॉलीवुड की एक्शन फि़ल्म के प्रतीक के रूप में दुनिया भर में ख्याति प्राप्त की। अपने बॉडीबिल्डिंग के दिनों में उन्हें "ऑस्ट्रियन ओक" और "स्टायरियन ओक" उपनाम दिया गया था, अपने अभिनय कॅरियर के दौरान "अर्नोल्ड बलिष्ठ" और "फौलादी" हैं और एकदम हाल ही में "गवर्नेटर" - गवर्नर बने हैं (गवर्नर और टर्मिनेटर-उनकी एक फिल्म की भूमिका, दोनों शब्दों को मिलाकर बना नया शब्द).

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अर्बाब सिकंदर खान

वे एक पाकिस्तानी राजनीतिज्ञ और पाकिस्तान के प्रांत, ख़ैबर पख़्तूनख़्वा के पूर्व राज्यपाल थे। .

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अल्बैर कामू

अल्बैर कामू (१९१३-१९६०) एक फ्रेंच लेखक थे जिन्हें 1957 में नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। .

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अल्वा म्यर्दल

अल्वा म्यर्दल अल्वा रेइमेर म्यर्दल (३१ जनवरी १९०२ - १ फ़रवरी १९८६) एक स्वीडिश समाजशास्त्री और राजनीतिज्ञ थीं। वह १९८२ में नोबेल शांति पुरस्कार मिला। इन्होंने १९२४ में गुन्नार म्यर्दल से शादी की। उप्साला में जन्मी अल्वा १९३० के दशक में पहली बार लोगों की निगाह में आईं। अल्वा ने स्वीडन कल्याणकारी राज्य के निर्माण में अहम भूमिका अदा की थी। अपने पति गुन्नार म्यर्दल के साथ मिलकर १९३४ में जनसंख्या से जुड़े सवाल पर 'Crisis in the Population Question' नामक किताब लिखी, जिसमें लोगों के व्यक्तिगत उत्थान के लिए सामाजिक सुधार पर जोर दिया गया था। इन्हें वर्ष १९८१ में इनके पति गुन्नार म्यर्दल के साथ जवाहर लाल नेहरू पुरस्कार प्रदान किया गया। श्रेणी:समाजशास्त्री श्रेणी:राजनीतिज्ञ श्रेणी:नोबल शांति पुरस्कार के प्राप्तकर्ता.

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अश्विनी कुमार चोपड़ा

अश्विनी कुमार चोपड़ा भारत की सोलहवीं लोक सभा के सांसद हैं। २०१४ के चुनावों में वे हरियाणा के करनाल से निर्वाचित हुए। वे भारतीय जनता पार्टी से संबद्ध हैं। वे भारत के प्रमुख हिंदी दैनिक समाचारपत्र पंजाब केसरी के निदेशक एवं संपादक हैं। .

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अश्विनी कुमार पंकज

अश्विनी कुमार पंकज (जन्मः 9 अगस्त 1965) एक भारतीय कवि, कथाकार, उपन्यासकार, पत्रकार, नाटककार, रंगकर्मी और आंदोलनकारी संस्कृतिकर्मी हैं। वे हिन्दी और झारखंड की देशज भाषा नागपुरी में लिखते हैं और रंगमंच एवं प्रदर्श्यकारी कलाओं की त्रैमासिक पत्रिका ‘रंगवार्ता’ और नागपुरी मासिक पत्रिका ‘जोहार सहिया’ का संपादन तथा बहुभाषिक आदिवासी-देशज समाचार पत्र पाक्षिक ‘जोहार दिसुम खबर’ के प्रकाशक-संपादक हैं। मूलतः बिहार के रहने वाले पंकज बचपन से रांची में रहते हैं और आरंभिक एवं माध्यमिक शिक्षा रांची में प्राप्त की है तथा रांची विश्वविद्यालय, रांची से ही हिन्दी में स्नातकोत्तर किया है। डॉ॰ एम.

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अश्क अली टांक

अश्क अली टांक एक भारतीय राजनीतिज्ञ तथा पूर्व राजस्थान राज्य से राज्यसभा के सांसद हैं | वे पूर्व राजस्थान विधान सभा में फतेहपुर से विधायक रह चुके हैं | .

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असलम खान खटक

वे एक पाकिस्तानी राजनीतिज्ञ और पाकिस्तान के प्रांत, ख़ैबर पख़्तूनख़्वा के पूर्व राज्यपाल थे। .

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अवसरवाद

अवसरवाद या मौक़ापरस्ती असूलों के खिलाफ जाकर या दूसरों की परवाह किये बिना परिस्थितियों का लाभ उठाकर स्वार्थी निर्णय लेना होता है। अवसरवाद या "अवसरवादिता" जीव विज्ञान, खेल सिद्धांत, नैतिकता, मनोविज्ञान, समाजशास्त्र और राजनीति के अध्ययन के क्षेत्रों में एक महत्वपूर्ण अवधारणा है। .

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अवामी नेशनल कांफ्रेंस

अवामी नेशनल कांफ्रेंस जम्मू और कश्मीर का एक राजनीतिक दल हैं। इस दल से जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री ग़ुलाम मोहम्मद शाह बने। .

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अविनाश राय खन्ना

अविनाश राय खन्ना एक भारतीय राजनीतिज्ञ तथा भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं | वे वर्तमान राज्यसभा सांसद हैं | वे पूर्व होशियारपुर से लोकसभा सांसद हैं | .

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अखिल भारतीय हिंदी साहित्य सम्मेलन

अखिल भारतीय हिन्दी साहित्य सम्मेलन, हिन्दी भाषा एवं साहित्य तथा देवनागरी का प्रचार-प्रसार को समर्पित एक प्रमुख सार्वजनिक संस्था है। इसका मुख्यालय प्रयाग (इलाहाबाद) में है जिसमें छापाखाना, पुस्तकालय, संग्रहालय एवं प्रशासनिक भवन हैं। हिंदी साहित्य सम्मेलन ने ही सर्वप्रथम हिंदी लेखकों को प्रोत्साहित करने के लिए उनकी रचनाओं पर पुरस्कारों आदि की योजना चलाई। उसके मंगलाप्रसाद पारितोषिक की हिंदी जगत् में पर्याप्त प्रतिष्ठा है। सम्मेलन द्वारा महिला लेखकों के प्रोत्साहन का भी कार्य हुआ। इसके लिए उसने सेकसरिया महिला पारितोषिक चलाया। सम्मेलन के द्वारा हिंदी की अनेक उच्च कोटि की पाठ्य एवं साहित्यिक पुस्तकों, पारिभाषिक शब्दकोशों एवं संदर्भग्रंथों का भी प्रकाशन हुआ है जिनकी संख्या डेढ़-दो सौ के करीब है। सम्मेलन के हिंदी संग्रहालय में हिंदी की हस्तलिखित पांडुलिपियों का भी संग्रह है। इतिहास के विद्वान् मेजर वामनदास वसु की बहुमूल्य पुस्तकों का संग्रह भी सम्मेलन के संग्रहालय में है, जिसमें पाँच हजार के करीब दुर्लभ पुस्तकें संगृहीत हैं। .

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अग्निपुराण

अग्निपुराण पुराण साहित्य में अपनी व्यापक दृष्टि तथा विशाल ज्ञान भंडार के कारण विशिष्ट स्थान रखता है। विषय की विविधता एवं लोकोपयोगिता की दृष्टि से इस पुराण का विशेष महत्त्व है। अनेक विद्वानों ने विषयवस्‍तु के आधार पर इसे 'भारतीय संस्‍कृति का विश्‍वकोश' कहा है। अग्निपुराण में त्रिदेवों – ब्रह्मा, विष्‍णु एवं शिव तथा सूर्य की पूजा-उपासना का वर्णन किया गया है। इसमें परा-अपरा विद्याओं का वर्णन, महाभारत के सभी पर्वों की संक्षिप्त कथा, रामायण की संक्षिप्त कथा, मत्स्य, कूर्म आदि अवतारों की कथाएँ, सृष्टि-वर्णन, दीक्षा-विधि, वास्तु-पूजा, विभिन्न देवताओं के मन्त्र आदि अनेक उपयोगी विषयों का अत्यन्त सुन्दर प्रतिपादन किया गया है। इस पुराण के वक्‍ता भगवान अग्निदेव हैं, अतः यह 'अग्निपुराण' कहलाता है। अत्‍यंत लघु आकार होने पर भी इस पुराण में सभी विद्याओं का समावेश किया गया है। इस दृष्टि से अन्‍य पुराणों की अपेक्षा यह और भी विशिष्‍ट तथा महत्‍वपूर्ण हो जाता है। पद्म पुराण में भगवान् विष्‍णु के पुराणमय स्‍वरूप का वर्णन किया गया है और अठारह पुराण भगवान के 18 अंग कहे गए हैं। उसी पुराणमय वर्णन के अनुसार ‘अग्नि पुराण’ को भगवान विष्‍णु का बायां चरण कहा गया है। .

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अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंध

अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंध (International sanctions) किसी देश, क्षेत्र या संगठन के सम्बन्ध में किसी अन्य देश, संगठन या मित्रपक्ष द्वारा लिये गये ऐसे राजनैतिक या आर्थिक निर्णय होते हैं जिनके अन्तर्गत उनकी कुछ आर्थिक, व्यापारिक, कूटनीतिक, सांस्कृतिक या अन्य गतिविधियों पर रोक लगा दी जाती है। अक्सर इन प्रतिबंधों का ध्येय किसी सुरक्षा, राजनैतिक या अर्थिक लक्ष्य की प्राप्ति होता है। मसलन अपार्थाइड काल में दक्षिण अफ़्रीका पर अंतर्राष्ट्रीय खेलों में हिस्सा लेने पर प्रतिबंध लगा हुआ था, ताकि वहाँ के नस्लवाद सत्ताधारी लोग स्वयं को विश्व में अकेला महसूस करें और उनका मनोबल कमज़ोर हो। .

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अंतोनियो ग्राम्शी

अंतोनियो ग्राम्शी (१८९१- १९३७) इटली की कम्युनिस्ट पार्टी के संस्थापक, मार्क्सवाद के सिद्धांतकार तथा प्रचारक थे। बीसवीं सदी के आरंभिक चार दशकों के दौरान दक्षिणपंथी फ़ासीवादी विचारधारा से जूझने और साम्यवाद की पक्षधरता के लिए विख्यात हैं। .

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उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण

१९९० का दशक भारत की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव लेकर आया था। आर्थिक सुधारों के इस नए मॉडल को सामान्यतः उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण मॉडल (एलपीजी मॉडल) के रूप में जाना जाता है। इस मॉडल का मुख्य उद्देश्य दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के साथ भारत की अर्थव्यवस्था को तेजी से विकसित अर्थव्यवस्था बनाना तथा दूसरी अर्थव्यवस्थाओं को निकट पहुंचना या उनसे आगे निकलना था। एक अधिक कुशल स्तर करने के लिए देश की अर्थव्यवस्था को उठाने पर लक्षित व्यापार, विनिर्माण करने का संबंध है, और वित्तीय सेवाओं के उद्योगों के साथ जगह ले ली है कि सुधारों की श्रृंखला। इन आर्थिक सुधारों को एक महत्वपूर्ण तरीके से देश के समग्र आर्थिक विकास को प्रभावित किया था।;उदारीकरण: उदारीकरण सरकार के नियमों की कमी आई बताई को दर्शाता है। भारत में आर्थिक उदारीकरण के 24 जुलाई 1991 के बाद से शुरू हुआ जो जारी रखने के वित्तीय सुधारों को दर्शाता है।;निजीकरण और वैश्वीकरण: निजीकरण के रूप में अच्छी तरह से निजी क्षेत्र के लिए व्यापार और सेवाओं और सार्वजनिक क्षेत्र (या सरकार) से स्वामित्व के हस्तांतरण में निजी संस्थाओं की भागीदारी को दर्शाता है। वैश्वीकरण की दुनिया के विभिन्न अर्थव्यवस्थाओं के समेकन के लिए खड़ा है। .

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उदित राज

डॉ.

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उमर अब्दुल्ला

उमर अब्दुल्ला (मार्च 1970 --) एक भारतीय कश्मीरी नेता और कश्मीर के 'प्रथम परिवार' के वंशज हैं। उनका जन्म ब्रिटेन में हुआ। उनके पिता फारूक अब्दुल्ला हैं। उमर जम्मू और कश्मीर के अब तक के सबसे युवा और प्रदेश के 11 वें मुख्यमंत्री रह चुके हैं। उमर अब्दुल्ला ने कांग्रेस पार्टी के साथ मिलकर 5 जनवरी 2009 को गठबंधन सरकार बनाई। 2014 के विधानसभा चुनावों में में उनकी पार्टी की हार हुई। उन्होंने सोनवार तथा बीरवाह सीटों से चुनाव लड़ा। सोनवार सीट से वे हार गए लेकिन बीरवाह सीट से वे विधायक निर्वाचित हुए। वह लोक सभा के भी सदस्य रह चुके हैं। .

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४चैन

४चैन ४चैन एक अंतरजाल-स्थित विचार-विमर्श मंच, जो विश्व के सबसे लोकप्रिय जालस्थलों से एक है। यहाँ पर चर्चा आंग्ल भाषा में होती है, हालांकि विश्वभर के बुद्धिजीवी यहाँ एकत्रित होते हैं। कर्मचारियों के सिवाय यहाँ कोई पंजीकृत सदस्य नहीं है - ४चैन पर बुद्धिजीवी प्रायः अज्ञात नाम से अपने विचार व्यक्त करते हैं। यह विश्व के सबसे अधिक अराजकतावादी और प्रभावशाली जालस्थलों में से एक है। ४चैन की स्थापना वि.

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