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युद्धविराम

सूची युद्धविराम

सीनाई में इस्राइल और मिस्र के सिपहसालारों का मिलना युद्धविराम या अवहार या जंगबंदी (ceasefire या truce) किसी युद्ध में जूझ रहे पक्षों में आपसी समझौते से लड़ाई रोक देने को कहते हैं। जंग की यह रुकावट स्थाई या अस्थाई रूप से की गई हो सकती है। अक्सर युद्धविराम पक्षों में किसी औपचारिक संधि का हिस्सा होते है लेकिन यह अनौपचारिक रूप से बिना किसी समझौते पर हस्ताक्षर करे भी हो सकते हैं।, British Broadcasting Corporation Monitoring Service, British Broadcasting Corporation, 1986,...

6 संबंधों: माशेरब्रुम, युद्ध, संयुक्त राष्ट्र शांतिस्थापन, विल्सन के चौदह सिद्धान्त, विश्वयुद्धों के मध्य की अवधि, खाड़ी युद्ध

माशेरब्रुम

माशेरब्रुम पाक अधिकृत कश्मीर के बल्तिस्तान क्षेत्र में स्थित काराकोरम पर्वतों के माशेरब्रुम पर्वत समूह का सबसे ऊँचा पर्वत है। ७,८२१ मीटर (२५,६५९ फ़ुट) की बुलंदी के साथ यह विश्व का २२वाँ सबसे ऊँचा और पाकिस्तान-नियंत्रित क्षेत्रों का ९वाँ सबसे ऊँचा पहाड़ है। इसे के१ (K1) भी बुलाया जाता है क्योंकि १९वीं सदी में काराकोरम शृंखला के निरिक्षण के दौरान यह पहला मापा गया पर्वत था। माशेरब्रुम समूह बाल्तोरो हिमानी से दक्षिण में स्थित है। .

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युद्ध

वर्ष १९४५ में कोलोन युद्ध एक लंबे समय तक चलने वाला आक्रामक कृत्य है जो सामान्यतः राज्यों के बीच झगड़ों के आक्रामक और हथियारबंद लड़ाई में परिवर्तित होने से उत्पन्न होता है। .

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संयुक्त राष्ट्र शांतिस्थापन

इस लेख में संयुक्त राष्ट्र संघ ने अब तक जिन विवादों हल करने में सफलता पायी है, उनका वर्णन किया गया है। .

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विल्सन के चौदह सिद्धान्त

प्रथम विश्वयुद्ध में जर्मनी परास्त हो चुका था और फ्रांस विजेताओं की कतार में खड़ा था। युद्ध की समाप्ति पर युद्धविराम की संधियों पर हस्ताक्षर करने हेतु फ्रांस की राजधानी पेरिस में एक शांति सम्मेलन आयोजन किया गया। इस शांति सम्मेलन में भाग लेने के लिए 32 राज्यों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया। इस सम्मेलन में अमेरिका के राष्ट्रपति के अतिरिक्त 11 देशों के प्रधानमंत्री, 12 विदेश मंत्री एवं अन्य राज्यों के प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ एकत्रित हुए थे। चूँकि रूस में साम्यवादी क्रांति आंरभ हो गई थी और पश्चिमी राष्ट्र साम्यवाद के विरोधी थे अतः सोवियत रूस को इस सम्मेलन में आमंत्रित नहीं किया गया। इस सम्मेलन में पराजित राष्ट्रों - जर्मनी, आस्ट्रिया, तुर्की और बल्गारिया को भी स्थान नहीं दिया गया था। इस प्रकार इस सम्मेलन में 32 राज्यों के 70 प्रतिनिधि एकत्रित हुए। इस सम्मेलन में 5 पराजित राष्ट्रों के साथ पृथक-पृथक संधि की गयी जिसमें वर्साय की संधि प्रमुख है। अमेरिका के राष्ट्रपति वुड्रो विल्सन ने अपने 14 सूत्रों में से एक सूत्र में कहा था कि 'छोटे बड़े सभी राष्ट्रों को समान रूप से राजनीतिक स्वतंत्रता तथा प्रादेशित अखण्डता का आश्वासन देने के लिये राष्ट्र संघ की स्थापना की जाये।' इस प्रकार विल्सन महोदय ने विश्व शांति की स्थापना के लिये एक अंतर्राष्ट्रीय संस्था की स्थापना पर बल दिया था। वस्तुतः विल्सन के 14 सूत्रों के आधार पर ही प्रथम विश्व युद्ध में जर्मनी ने आत्म समर्पण किया था। इसी आधार पर 10 जनवरी 1920 ई. को राष्ट्र संघ की विधिवत् स्थापना हुई। .

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विश्वयुद्धों के मध्य की अवधि

१९२९ से १९३९ के बीच यूरोप का मानचित्र प्रथम विश्वयुद्ध 1919 ई. को समाप्त हुआ एवं इसके ठीक 20 वर्ष बाद 1939 ई. में द्वितीय विश्वयुद्ध आंरभ हो गया। इन दो विश्वयुद्धों के मध्य विश्व राजनीतिक का कई कटु अनुभवों से सामना हुआ। प्रथम विश्वयुद्ध की विभीषिका से यूरोपीय राजनीतिज्ञों ने कोई सबक नहीं सीखा। शांति की स्थापना हेतु आदर्शवादी बातें तो बहुत की गईं मगर व्यवहार में उनका पालन नहीं किया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति वुड्रो विल्सन के 14 सूत्रों से प्रतीत होता था कि, उन पर अमल कर विश्व शांति की स्थापन का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। पेरिस शांति सम्मेलन के दौरान जिस तरह फ्रांस के प्रधानमंत्री क्लीमेंशों ने विल्सन की आदर्शवादी बातों का उपहास उड़ाया, उससे पता चलता है कि पेरिस शांति सम्मेलन के प्रतिनिधि विश्व शांति की स्थापना को लेकर दृढ़ प्रतिज्ञ नहीं है। यही कारण था कि राष्ट्रसंघ की धज्जियाँ उड़ा दीं गयीं। इंग्लैण्ड एवं फ्रांस मूकदर्शक बने देखते रहे। प्रथम विश्वयुद्ध के पश्चात् विश्व राजनीतिज्ञों ने निःशस्रीकरण की दिशा में सराहनीय प्रयास किये। इसके अलावा भी शांति स्थापना की दिशा में पहल की। जर्मनी ने हिटलर का उदय विश्व इतिहास को प्रभावित करने वाली सर्वप्रमुख घटना थी। उसका उदय 1919 ई. की वार्साय की संधि द्वारा जर्मनी के हुए अपमान का बदला लेने के लिए ही हुआ था। वार्साय की संधि की अपमानजनक धाराओं को देखकर मार्शल फौच ने तो 1919 में ही भविष्यवाणी कर दी थी यह कोई शांति संधि नहीं यह तो 20 वर्ष के लिए युद्धविराम मात्र है। मार्शल फौच की उक्त भविष्यवाणी अंततः हिटलर ने सत्य सिद्ध करा दी। .

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खाड़ी युद्ध

कोई विवरण नहीं।

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