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मृत्युदंड

सूची मृत्युदंड

एशियाई विश्व में सबसे प्रचलित मृत्युदंड का रूप है फांसी मृत्युदण्ड (अंग्रेज़ी:''कैपिटल पनिश्मैन्ट''), किसी व्यक्ति को कानूनी तौर पर न्यायिक प्रक्रिया के फलस्वरूप किसी अपराध के परिणाम में प्राणांत का दण्ड देने को कहते हैं। अंग्रेज़ी में इसके लिये प्रयुक्त कैपिटल शब्द लैटिन के कैपिटलिस शब्द से आया है, जिसका शाब्दिक अर्थ है "सिर के संबंध में या से संबंधित" (लैटिन कैपुट)। इसके मूल में आरंभिक रूप में दिये जाने वाले मृत्युदण्ड का स्वरूप सिर को धड़ से अलग कर देने की प्रक्रिया में है। वर्तमान समय में एमनेस्टी इंटरनेशनल के आंकड़ों के अनुसार विश्व के 58 देशों में अभी मृत्युदंड दिया जाता है, जबकि अन्य देशों में या तो इस पर रोक लगा दी गई है, या गत दस वर्षो से किसी को फांसी नहीं दी गई है। यूरोपियाई संघ के सदस्य देशों में,चार्टर ऑफ फ़्ण्डामेण्टल राइट्स ऑफ द यूरोपियन यूनियन की धारा-2 मृत्युदण्ड को निषेध करती है। .

32 संबंधों: चर कार्य, डायजे़पाम, तारिक़ अज़ीज़, दण्डविधि, नीरो, पञ्चतन्त्र, परवेज़ मुशर्रफ़, पूनिया हत्याकांड, फ़्रान्सीसी क्रान्ति, बकिंघॅम पैलस, महाराजा रणजीत सिंह, मानव बलि, मानव हत्या, मानवतावाद, मिखाइल बाकूनिन, मुराद चतुर्थ, मृत्यु, शारीरिक दण्ड, सारा पॉलिन, सिकन्दरिया, स्टार स्क्रीन सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार, जाँनिसारी, जोसेफ फ्रैंकलिन, विद्युत मृत्यु, गिलोटिन, ग्रिगरी जिनव्येव, आधर्षण, आर्थर कॉनन डॉयल, अजमल क़साब, १८ दिसम्बर, १९६९, २०१३ में निधन

चर कार्य

चर कार्य या गुप्तचरी या खुफियागिरी या जासूसी अर्थात् भेद निकालने का कार्य गुप्तचरों और भेदियों द्वारा किया जाता है। विशेषकर युद्धकाल में सब देश अपने भेदियों को भेजकर दूसरे देशों की सेना, सरकार, उत्पादन, वैज्ञानिक उन्नति आदि के तथ्यों के विषय में सूचना प्राप्त करने का प्रयत्न करते हैं। चर कार्य नैतिकता की दृष्टि से आपत्तिजनक है और बहुधा ये लोग ही इस कार्य को सफलता से कर सकते हैं जिनको अच्छे बुरे का विचार न हो। .

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डायजे़पाम

डायज़ेपाम, जिसे सबसे पहले हाफमैन-ला रोश द्वारा वैलियम नाम से बाजार में उतारा गया था, एक बेंजोडायजापाइन अमौलिक दवा है। इसे सामान्यतः बेचैनी, अनिद्रा, अधिग्रहण स्टैटस एपिलेप्टिकस सहित मिरगी के दौरों, मांसपेशियों की अकड़न, बेचैन पैरों के रोगसमूह, अल्कोहल का सेवन और बोंजोडायजेपाइनों का सेवन बंद करने से उत्पन्न लक्षणों और मेनियर्स रोग के उपचार के काम में लाया जाता है। इसे कतिपय चिकित्सकीय प्रक्रियाओं (जैसे एंडोस्कोपी के समय) के पहले तनाव व चिंता को दूर करने के लिये और कुछ शल्यक्रियाओं में स्मृतिलोप उत्पन्न करने के लिये भी प्रयोग किया जाता है। इसमें चिंतानाशक, मिर्गी निरोधक, हिप्नोटिक, निद्राकारक, मांसपेशियों में शिथिलता लाने और स्मृतिलोपक गुण होते हैं। डायज़ेपाम की औषधिक क्रिया GABAA ग्राहक पर बेंजोडायजेपाइन साइट पर जुड़ कर न्यूरोट्रांसमिटर गाबा के प्रभाव को बढ़ा कर केन्द्रीय नाड़ी तंत्र को डिप्रेस करती है। डायज़ेपाम को मौज-मस्ती की दवा के रूप में भी प्रयोग किया जाता है। डायज़ेपाम के दुष्प्रभावों में घटनोत्तर स्मृतिलोप (खास तौर पर अधिक मात्राओं पर) और निद्रा व अनपेक्षित प्रभाव जैसे उत्तेजना, क्रोध या मिर्गी के रोगियों में दौरों को और बढ़ा देना शामिल हैं। बेंजोडायजापाइनों से अवसाद हो या बिगड़ भी सकता है। डायज़ेपाम जैसे बेजोडायजेपाइनों के लंबे अर्से के प्रभावों में सहिष्णुता, बेंजोडायजेपाइन पर निर्भरता व मात्रा में कमी करने पर बेजोडायजेपाइन विदड्राल सिंड्रोम शामिल हैं। इसके अलावा बेजोडायजेपाइनों को रोकने पर ज्ञान में विकार कम से कम 6 महीनों तक रह सकते हैं और पूरी तरह से सामान्य नहीं हो पाते.

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तारिक़ अज़ीज़

तारिक़ अज़ीज़ (जन्म मिखाइल यौहानन, Syriac: ܡܝܟܐܝܠ ܝܘܚܢܢ,, इसाई नाम मैनुयल क्रिस्टो; 28 अप्रैल 1936 – 5 जून 2015) इराक के विदेश मंत्री (1983–1991) और उप प्रधानमंत्री (1979–2003) और तत्कालीन राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन के सलाहकार थे। वो एक दूसरे के सहयोगी 1950 के दशक में हुये जब दोनों उस समय प्रतिबन्धित अरब समाजवादी बाथ पार्टी के कार्यकर्ता थे। हालांकि वो एक अरब राष्ट्रवादी थे एवं वो कलडीन थे और कलडीन कैथोलिक चर्च के सदस्य भी थे। सुरक्षा कारणों से सद्दाम हुसैन ने शायद ही कभी इराक़ छोड़ा हो अतः उच्च-स्तरीय राजनयिक शिखर सम्मेलनों में अज़ीज़ ही इराक़ का प्रतिनिधित्व करते थे। उनके अनुसार अमेरिका इराक में "शासन परिवर्तन" नहीं बल्कि "क्षेत्र परिवर्तन" चाहता था। उनके अनुसार बुश प्रशासन का युद्ध करने का कारण "तेल और इजरायल" थे। 24 अप्रैल 2003 को अमेरिकी सेना के सामने आत्मसमर्पण करने के बाद अज़ीज़ को पहले अमेरिकी सेना द्वारा जेल में रखा गया और उसके बाद इराकी सरकार द्वारा पश्चिमी बगदाद के कैम्प क्रोपर में बन्दी रखा गया। उन्हें 1 मार्च 2009 को कुछ अपराधों से मुक्त कर दिया गया लेकिन 11 मार्च 2009 को, 1992 में  42 व्यापारियों को प्राणदण्ड देने में दोषी पाये जाने के लिए 15 वर्षों की जेल की सजा तथा कुर्दों को स्थानान्तरित करने के लिए सात वर्ष जेल की सजा सुनायी गयी। 26 अक्टूबर 2010 को उन्हें इराक़ी उच्च न्यायालय ने मौत की सजा सुनाई जिसका क्षेत्रिय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर इराकी और गैर इराकी धर्माध्यक्षों ने निंदा की। इसके अतिरिक्त वेटिकन, संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोपीय यूनियन और मानवाधिकार संगठनों एमनेस्टी इण्टरनेशनल सहित रूस जैसी अन्य सरकारों ने भी मृत्युदण्ड का विरोध किया 28 अक्टूबर 2010 को प्रतिवेदित किया गया कि तारिक़ अज़ीज़ सहित उनके साथी अन्य 25 कैदी भी कुछ माँगों को लेकर भूख हड़ताल आरम्भ की। 17 नवम्बर 2010 को यह प्रतिवेदित किया गया कि इराक़ी राष्ट्रपति जलाल तालाबानी ने घोषित किया कि वो अज़ीज़ के प्राणदण्ड के आदेश पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे जिससे उनकी सजा जीवनभर कारावास में बदल जाये। अज़ीज़ का 5 जून 2015 को 79 वर्ष की आयु में नासिरियाह नगर की कारावास में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। .

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दण्डविधि

कानूनों के उस समूह को दंड विधि (Criminal law, या penal law या 'फौज़दारी कनून') कहते हैं जो अपराधों एवं उनके लिये निर्धारित सजाओं (दण्ड) से समबन्धित होते हैं। आपराधिक मामलों में दण्ड कई प्रकार का हो सकता है (जो कि अपराध की प्रकृति पर निर्भर करता है) - मृत्युदंड, आजीवन कारावास, साधारण कारावास, पेरोल, या अर्थदण्ड आदि। यह दीवानी कानून से अलग है। .

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नीरो

नीरो (लैटिन: Nero Claudius Caesar Augustus Germanicus; 15 दिसम्बर 37 – 9 जून 68) रोम का सम्राट् था। उसकी माता ऐग्रिप्पिना, जो रोम के प्रथम सम्राट् आगस्टस की प्रपौत्री थी, बड़ी ही महत्वाकांक्षिणी थी। उसने बाद में अपने मामा सम्राट् क्लाडिअस प्रथम से विवाह कर लिया और अपने नए पति को इस बात के लिए राजी कर लिया कि वह नीरो को अपना दत्तक पुत्र मान ले और उसे ही राज्य का उत्तराधिकारी घोषित कर दे। नीरो को शीघ्र ही गद्दी पर बैठाने के लिए ऐग्रिप्पिना उतावली हो उठी और उसने जहर दिलाकर क्लाडिअस की हत्या करा दी। रोम निवसियों ने पहले तो नीरो का स्वागत और समर्थन किया क्योंकि वह पितृ परंपरा से ही नहीं मातृ परंपरा से भी सम्राट् आगस्टस का वंशज था। शुरु में उसने अपने गुरु सेनेका से प्रभावित होकर राज्य का शासन भी अच्छी तरह से किया किंतु शीघ्र ही उसके दुर्गुण प्रकट होने लगे। सन्‌ 55 में उसने अपने प्रतिद्वंद्वी ब्रिटेनिकस को, जो क्लाडिअसका अपना पुत्र होने के कारण, राज्य का वास्तविक दावेदार था, जहर देकर मरवा डाला और चार वर्ष बाद खुद अपनी माता की भी हत्या करा दी। फिर उसने अनी पत्नी आक्टेविया को भी मरवा डाला और अपनी दूसरी स्त्री पापीया को क्रोधाविष्ट होकर मार डाला। उसने एक तीसरी स्त्री से विवाह करना चाहा पर उसने इनकार कर दिया और उसे भी मौत के घाट उतार दिया गया। इसके बाद नीरो ने एक और स्त्री के पति को मरवा डाला ताकि वह उसे अपनी पत्नी बना सके। धीरे धीरे उसके प्रति असंतोष बढ़ने लगा। एक षड़यंत्र का सुराग पाकर उसने अपने गुरु सेनेका को आत्महत्या करने का आदेश दिया। इसके सिवा और भी कई प्रसिद्ध पुरुषों को मृत्युदंड दे दिया गया। सन्‌ 64 में रोम नगर में अत्यंत रहस्यमय ढंग से आग की लपटें भड़क उठीं जिससे आधे से अधिक नगर जलकर खाक हो गया। जब आग धूधू कर के जल रही थी नीरो एक स्थान पर खड़े होकर उसकी विनाशलीला देख रहा था और सारंगी बजा रहा था। यद्यपि कुछ लोगों का ख्याल है कि आग स्वयं नीरो ने लगवाई थी पर ऐसा समझने के लिए वस्तुत: कोई आधार नहीं है। आग बुझ जाने के बाद नीरो ने नगर के पुनर्निमणि का कार्य आरंभ किया और अपने लिए 'स्वर्ण मंदिर' नामक एक भव्य प्रासाद बनवाया। असह्य करभार, शासन संबंधी बुराइयों तथा अनेक क्रूरताओं के कारण उसके विरुद्ध विद्रोह की भावना बढ़ती गई। स्पेन के रोमन गवर्नर ने अपनी फौजों के साथ रोम पर हमला बोल दिया जिसमें स्वयं नीरो को अंगरक्षक सेना भी शामिल हो गई। नीरो को राज्य से पलायन करना पड़ा। इसी बीच सिनेट ने उसे फाँसी पर चढ़ा देने का निर्णय किया। गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने आत्महत्या कर ली। .

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पञ्चतन्त्र

'''पंचतन्त्र''' का विश्व में प्रसार संस्कृत नीतिकथाओं में पंचतंत्र का पहला स्थान माना जाता है। यद्यपि यह पुस्तक अपने मूल रूप में नहीं रह गयी है, फिर भी उपलब्ध अनुवादों के आधार पर इसकी रचना तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व के आस- पास निर्धारित की गई है। इस ग्रंथ के रचयिता पं॰ विष्णु शर्मा है। उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर कहा जा सकता है कि जब इस ग्रंथ की रचना पूरी हुई, तब उनकी उम्र लगभग ८० वर्ष थी। पंचतंत्र को पाँच तंत्रों (भागों) में बाँटा गया है.

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परवेज़ मुशर्रफ़

परवेज़ मुशर्रफ़ परवेज़ मुशर्रफ़ (उर्दू: پرويز مشرف; जन्म अगस्त 11, 1943) पाकिस्तान के राष्ट्रपति और सेना प्रमुख रह चुके हैं। इन्होंने साल 1999 में नवाज़ शरीफ की लोकतान्त्रिक सरकार का तख्ता पलट कर पाकिस्तान की बागडोर संभाली और 20 जून, 2001 से 18 अगस्त 2008 तक पाकिस्तान के राष्ट्रपति रहे। .

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पूनिया हत्याकांड

पूनिया हत्याकान्ड (या रेलू राम पूनिया हत्या का मुकदमा) भारतीय राजनेता रेलू राम पूनिया और उनके परिवार के सात सदस्यों की सामूहिक हत्या का मामला है। संपत्ति के विवाद के चलते २३ अगस्त २००१ की रात को रेलू राम की बेटी सोनिया ने अपने पति संजीव कुमार के साथ इनकी हत्या कर दी थी। यह मामला न्यायालय में दायर किया गया था और सोनिया, संजीव और उनके परिवार के विभिन्न सदस्यों पर चलाया गया था। दंपति को हत्या के आरोपों से दोषी ठहराया गया था और जिला न्यायालय ने मौत की सजा सुनाई थी। पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने इस सजा को कम कर आजीवन कारावास दिया था लेकिन उच्चतम न्यायालय ने फिर से मौत की सजा बहाल की थी। भारत के संविधान के खंड ७२ (१) के तहत, इस दलील के दौरान दंपति ने राष्ट्रपति को दया याचिका उठाई थी। यह याचिका राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील के कार्यकाल के दौरान अनुत्तरित रही लेकिन उनके उत्तराधिकारी प्रणब मुखर्जी ने इसे खारिज कर दि थी। हालांकि, एक नागरिक अधिकार समूह "पीपल्स यूनियन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स" (पीयूडीआर) ने दया याचिका के निपटान में देरी का कारण देकर सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी, जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने जनवरी २०१४ में स्वीकार किया और दंपति की मौत की सजा वापस लौटा दी गई थी। .

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फ़्रान्सीसी क्रान्ति

बेसिल दिवस: १४ जुलाई १७८९ फ्रांसीसी क्रांति (फ्रेंच: Révolution française / रेवोलुस्योँ फ़्राँसेज़; 1789-1799) फ्रांस के इतिहास की राजनैतिक और सामाजिक उथल-पुथल एवं आमूल परिवर्तन की अवधि थी जो 1789 से 1799 तक चली। बाद में, नेपोलियन बोनापार्ट ने फ्रांसीसी साम्राज्य के विस्तार द्वारा कुछ अंश तक इस क्रांति को आगे बढ़ाया। क्रांति के फलस्वरूप राजा को गद्दी से हटा दिया गया, एक गणतंत्र की स्थापना हुई, खूनी संघर्षों का दौर चला, और अन्ततः नेपोलियन की तानाशाही स्थापित हुई जिससे इस क्रांति के अनेकों मूल्यों का पश्चिमी यूरोप में तथा उसके बाहर प्रसार हुआ। इस क्रान्ति ने आधुनिक इतिहास की दिशा बदल दी। इससे विश्व भर में निरपेक्ष राजतन्त्र का ह्रास होना शुरू हुआ, नये गणतन्त्र एव्ं उदार प्रजातन्त्र बने। आधुनिक युग में जिन महापरिवर्तनों ने पाश्चात्य सभ्यता को हिला दिया उसमें फ्रांस की राज्यक्रांति सर्वाधिक नाटकीय और जटिल साबित हुई। इस क्रांति ने केवल फ्रांस को ही नहीं अपितु समस्त यूरोप के जन-जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया। फ्रांसीसी क्रांति को पूरे विश्व के इतिहास में मील का पत्थर कहा जाता है। इस क्रान्ति ने अन्य यूरोपीय देशों में भी स्वतन्त्रता की ललक कायम की और अन्य देश भी राजशाही से मुक्ति के लिए संघर्ष करने लगे। इसने यूरोपीय राष्ट्रों सहित एशियाई देशों में राजशाही और निरंकुशता के खिलाफ वातावरण तैयार किया। .

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बकिंघॅम पैलस

महारानी विक्टोरिया, बकिंघम पैलेस में रहने वाली पहली महारानी, 1837 में अपने राज्याभिषेक के बाद नए बने महल में रहने आ गयीं. बकिंघम पैलेस(Buckingham Palace, ब्रिटिश उच्चारण:बखिंग्हॅम् प़ॅलॆस्) ब्रिटिश राजशाही का लंदन स्थित आधिकारिक निवास है। वेस्टमिंस्टर शहर में स्थित यह राजमहल राजकीय आयोजनों और शाही आतिथ्य का केंद्र है। यह ब्रिटेन वासियों के लिये राष्ट्रीय हर्षोन्माद और संकट के समय चर्चा का विषय रहा है। मूलतः बकिंघम हाउस के रूप में जाना जाने वाला, यह भवन जो आज के महल का महत्वपूर्ण हिस्सा है, 1703 में बकिंघम के ड्यूक के लिये एक ऐसी जगह पर बनाया गया एक विशाल टाउन हाउस था, जो कम से कम 150 सालों तक निजी स्वामित्व के अधीन रहा था। बाद में 1761रॉबिन्सन, पी.

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महाराजा रणजीत सिंह

महाराजा रणजीत सिंह (पंजाबी: ਮਹਾਰਾਜਾ ਰਣਜੀਤ ਸਿੰਘ) (१७८०-१८३९) सिख साम्राज्य के राजा थे। वे शेर-ए पंजाब के नाम से प्रसिद्ध हैं। जाट सिक्ख महाराजा रणजीत एक ऐसी व्यक्ति थे, जिन्होंने न केवल पंजाब को एक सशक्त सूबे के रूप में एकजुट रखा, बल्कि अपने जीते-जी अंग्रेजों को अपने साम्राज्य के पास भी नहीं भटकने दिया। रणजीत सिंह का जन्म सन 1780 में गुजरांवाला (अब पाकिस्तान) जाट सिक्ख महाराजा महां सिंह के घर हुआ था। उन दिनों पंजाब पर सिखों और अफगानों का राज चलता था जिन्होंने पूरे इलाके को कई मिसलों में बांट रखा था। रणजीत के पिता महा सिंह सुकरचकिया मिसल के कमांडर थे। पश्चिमी पंजाब में स्थित इस इलाके का मुख्यालय गुजरांवाला में था। छोटी सी उम्र में चेचक की वजह से महाराजा रणजीत सिंह की एक आंख की रोशनी जाती रही। महज 12 वर्ष के थे जब पिता चल बसे और राजपाट का सारा बोझ इन्हीं के कंधों पर आ गया। 12 अप्रैल 1801 को रणजीत ने महाराजा की उपाधि ग्रहण की। गुरु नानक के एक वंशज ने उनकी ताजपोशी संपन्न कराई। उन्होंने लाहौर को अपनी राजधानी बनाया और सन 1802 में अमृतसर की ओर रूख किया। महाराजा रणजीत ने अफगानों के खिलाफ कई लड़ाइयां लड़ीं और उन्हें पश्चिमी पंजाब की ओर खदेड़ दिया। अब पेशावर समेत पश्तून क्षेत्र पर उन्हीं का अधिकार हो गया। यह पहला मौका था जब पश्तूनों पर किसी गैर मुस्लिम ने राज किया। उसके बाद उन्होंने पेशावर, जम्मू कश्मीर और आनंदपुर पर भी अधिकार कर लिया। पहली आधुनिक भारतीय सेना - "सिख खालसा सेना" गठित करने का श्रेय भी उन्हीं को जाता है। उनकी सरपरस्ती में पंजाब अब बहुत शक्तिशाली सूबा था। इसी ताकतवर सेना ने लंबे अर्से तक ब्रिटेन को पंजाब हड़पने से रोके रखा। एक ऐसा मौका भी आया जब पंजाब ही एकमात्र ऐसा सूबा था, जिस पर अंग्रेजों का कब्जा नहीं था। ब्रिटिश इतिहासकार जे टी व्हीलर के मुताबिक, अगर वह एक पीढ़ी पुराने होते, तो पूरे हिंदूस्तान को ही फतह कर लेते। महाराजा रणजीत खुद अनपढ़ थे, लेकिन उन्होंने अपने राज्य में शिक्षा और कला को बहुत प्रोत्साहन दिया। उन्होंने पंजाब में कानून एवं व्यवस्था कायम की और कभी भी किसी को मृत्युदण्ड नहीं दी। उनका सूबा धर्मनिरपेक्ष था उन्होंने हिंदुओं और सिखों से वसूले जाने वाले जजिया पर भी रोक लगाई। कभी भी किसी को सिख धर्म अपनाने के लिए विवश नहीं किया। उन्होंने अमृतसर के हरिमन्दिर साहिब गुरूद्वारे में संगमरमर लगवाया और सोना मढ़वाया, तभी से उसे स्वर्ण मंदिर कहा जाने लगा। बेशकीमती हीरा कोहिनूर महाराजा रणजीत सिंह के खजाने की रौनक था। सन 1839 में महाराजा रणजीत का निधन हो गया। उनकी समाधि लाहौर में बनवाई गई, जो आज भी वहां कायम है। उनकी मौत के साथ ही अंग्रेजों का पंजाब पर शिकंजा कसना शुरू हो गया। अंग्रेज-सिख युद्ध के बाद 30 मार्च 1849 में पंजाब ब्रिटिश साम्राज्य का अंग बना लिया गया और कोहिनूर महारानी विक्टोरिया के हुजूर में पेश कर दिया गया। .

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मानव बलि

एचिलिस के कब्र पर नीओप्टोलेमस के हाथ से पॉलीजिना मर गया" (एक प्राचीन कैमिया के बाद 1900 सदी का चित्र) किसी धार्मिक अनुष्ठान के भाग (अनुष्ठान हत्या) के रूप में किसी मानव की हत्या करने को मानव बलि कहते हैं। इसके अनेक प्रकार पशुओं को धार्मिक रीतियों में काटा जाना (पशु बलि) तथा आम धार्मिक बलियों जैसे ही थे। इतिहास में विभिन्न संस्कृतियों में मानव बलि की प्रथा रही है। इसके शिकार व्यक्ति को रीति-रिवाजों के अनुसार ऐसे मारा जाता था जिससे कि देवता प्रसन्न अथवा संतुष्ट हों, उदाहरण के तौर पर मृत व्यक्ति की आत्मा को देवता को संतुष्ट करने के लिए भेंट किया जाता था अथवा राजा के अनुचरों की बलि दी जाती थी ताकि वे अगले जन्म में भी अपने स्वामी की सेवा करते रह सकें.

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मानव हत्या

मानव हत्या अथवा मानवहत्या (homicidium, homo मनुष्य + caedere को काटना, हत्या करना, संस्कृत: मानवहत्या .

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मानवतावाद

मानवतावाद मानव मूल्यों और चिंताओं पर ध्यान केंद्रित करने वाला अध्ययन, दर्शन या अभ्यास का एक दृष्टिकोण है। इस शब्द के कई मायने हो सकते हैं, उदाहरण के लिए.

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मिखाइल बाकूनिन

मिखाइल बाकूनिन मिखाइल अलेक्जेंद्रोविच बाकूनिन (रूसी: Михаил Александрович Бакунин; IPA.

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मुराद चतुर्थ

मुराद चतुर्थ (مراد رابع, मुराद-ए राबीʿ; 26/27 जुलाई 1612 – 8 फ़रवरी 1640) 1623 से 1640 तक उस्मानिया साम्राज्य के सुल्तान रहे। उन्होंने राज्य पर सुल्तान के शासन की पुनःस्थापना की थी और उन्हें अपने गतिविधियों की क्रूरता के लिए जाने जाते हैं। उनका जन्म क़ुस्तुंतुनिया में हुआ था। वे सुल्तान अहमद प्रथम (दौर: 1603–17) और यूनानी मूल की कौसम सुल्तान के पुत्र थे। उनके चाचा मुस्तफ़ा प्रथम (दौर: 1617–18, 1622–23) को सुल्तान के पद से निकालने की साज़िश कामयाब होने के बाद मुराद चतुर्थ तख़्त पर आसीन हुए। उस वक़्त उनकी उम्र सिर्फ़ 11 साल की थी। उनके दौर में उस्मानी-सफ़वी युद्ध (1623–39) हुआ, जिसके नतीजे में संपूर्ण क़फ़क़ाज़ क्षेत्र दोनों साम्राज्यों के दरमियान विभाजित हुआ। इस विभजन ने लगभग वर्तमान तुर्की-ईरान-इराक़ देशों की सरहदों की नींव रखी। .

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मृत्यु

मानव खोपड़ी मौत के लिए एक सार्वभौमिक प्रतीक है। किसी प्राणी के जीवन के अन्त को मृत्यु कहते हैं। मृत्यु सामान्यतः दुर्घटना, चोट, बीमारी, कुपोषण के परिणामस्वरूप होती है। आँख "अनन्त जीवन के लिए प्राचीन मिस्र के प्रतीक है।" वे और कई अन्य संस्कृतियों के बाद से एक पोर्टल के रूप में एक जीवन के बाद में जैविक मौत देखी है। .

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शारीरिक दण्ड

शारीरिक दंड एक अपराध की सजा के रूप में, गलती करने वाले को अनुशासित करने के लिए या अस्वीकार्य प्रवृति या व्यवहार को रोकने हेतु दिया जाने वाला सुविचारित दण्ड है। यह शब्द क्रमबद्ध ढंग से आमतौर पर एक अपराधी को मारने के साथ संदर्भित है, चाहे न्यायिक, घरेलु या शैक्षणिक समायोजन हो। शारीरिक दंड को तीन मुख्य प्रकारों में विभाजित किया जा सकता है.

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सारा पॉलिन

सारा लुईस पॉलिन (पूर्वकुलनाम - हीथ; जन्म - 11 फ़रवरी 1964) एक अमेरिकी राजनेत्री, लेखिका, वक्ता और राजनीतिक समाचारों की भाष्यकार हैं जो अलास्का की गवर्नर निर्वाचित होने वाली अब तक की सबसे युवा व्यक्ति और पहली महिला थी। उन्होंने 2006 से 2009 में इस्तीफ़ा देने तक गवर्नर के रूप में अपनी सेवा प्रदान की। अगस्त 2008 के राष्ट्रपति चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के राष्ट्रपति पद के प्रार्थी जॉन मैककेन द्वारा उसी वर्ष के राष्ट्रपति पद के चुनाव में उनके साथी उम्मीदवार के रूप में चुनी जाने वाली पॉलिन एक बहुमत पार्टी के राष्ट्रीय टिकट की पहली अलास्कन उमीदवार के साथ-साथ रिपब्लिकन पार्टी की तरफ से उप-राष्ट्रपति पद की पहली महिला उम्मीदवार थी। 3 जुलाई 2009 को पॉलिन ने घोषणा की कि वह गवर्नर के रूप में फिर से निर्वाचित होने की मांग नहीं करेगी और साथ में यह भी कहा कि अपने कार्यकाल के पूरे होने से अठारह महीने पहले 26 जुलाई 2009 को प्रभावी रूप से इस्तीफ़ा देने वाली है। उन्होंने नैतिकता की शिकायतों का उदाहरण प्रस्तुत किया जिसे जॉन मैककेन की साथी उम्मीदवार के रूप में उनके चुने जाने के बाद दायर किया गया था जो उनकी इस्तीफ़ा के कई कारणों में से एक कारण था, उन्होंने कहा कि राज्य का शासन-कार्य करने की उनकी क्षमता पर इस परिणामी जांच-पड़ताल का काफी असर पड़ा था। 2008 में मैककेन-पॉलिन टिकट की हार से पहले यह अटकलबाज़ी शुरू हो गई थी कि वह रिपब्लिकन पार्टी की तरफ से 2012 में राष्ट्रपति पद के नामांकन के लिए खड़ी होगी। फरवरी 2010 में उन्होंने अपने बयान में कहा कि वह इसकी सम्भावना का विकल्प खुला रखेंगी.

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सिकन्दरिया

सूर्यास्तकालीन सिकन्दरिया. सिकन्दरिया की सड़कें. सिकन्दरिया (अंग्रेजी:Alexandria; अरबी: الإسكندرية अल-इस्कंदरिया), मिस्र का दूसरा सबसे बड़ा शहर है। यहां की जनसंख्या 41 लाख है और यह देश का सबसे बड़ा समुद्री बंदरगाह है जहां मिस्र का लगभग 80% आयात और निर्यात कार्य संपन्न होता है। सिकन्दरिया एक महत्वपूर्ण पर्यटक स्थल भी है। सिकन्दरिया, उत्तर-मध्य मिस्र में भूमध्य सागर के तट के किनारे लगभग दूर तक फैला हुआ है। यह बिब्लियोथेका अलेक्जेंड्रिना (नया पुस्तकालय) का घर है। एक अन्य शहर, स्वेज, से अपने प्राकृतिक गैस और तेल की पाइपलाइनों की वजह से यह मिस्र का एक महत्वपूर्ण औद्योगिक केंद्र बन गया है। प्राचीन काल में, सिकन्दरिया दुनिया के सबसे प्रसिद्ध शहरों में से एक था। इसकी स्थापना सिकंदर महान (अलेक्जेंडर द ग्रेट) ने लगभग (c.) 331 ई.पू.

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स्टार स्क्रीन सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार

स्टार स्क्रीन सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार का चुनाव फ़िल्म उद्योम के एक विशिष्ट निर्णायक-मंडल द्वारा किया जाता है। विजेताओं की घोषणा जनवरी में होती है। सबसे पहले यह पुरस्कार माधुरी दीक्षित को 1994 में दिया गया। .

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जाँनिसारी

वियना युद्ध में जाँनिसारी सेना जाँनिसारी या यनीचरी (يڭيچرى, मतलब "नया सिपाही") कुलीन पैदल सेना इकाइयाँ थीं जो उस्मानी सुल्तान के घरेलू सिपाही, अंगरक्षक और यूरोप में सबसे पहली आधुनिक पैदल सेना थी। सुल्तान ओरख़ान ने सर्वप्रथम इसका संगठन 1330 में किया था। मुराद प्रथम ने इसकी उन्नति की और 1362 में इसके सिपाहियों की संख्या 10,000 हो गई। यह सेना, अपने रणकौशल और वीरतापूर्ण दक्षता के लिये प्रसिद्ध है। सिपाहियों का यह दावा था कि वे युद्ध से कभी विचलित नहीं हुए। यह तुर्की की बहुत बड़ी शक्ति थी। वैतनिक स्थायी सिपाहियों की संख्या एक समय 60,000 के लगभग थी। बाद में यह संख्या घटाकर 25,000 कर दी गई। इनके रहने के लिये क़ुस्तुंतुनिया और अन्य शहरों में बैरक बने हुए थे। अस्थायी सिपाहियों की संख्या 3,00,000 से 4,00,000 तक रहती थी। ये सिपाही राज्य के सभी शह्ररों में बिखरे हुए थे और शांति के समय पुलिस का कार्य करते थे। सुल्तान की अंगरक्षता में रहनेवाले जाँनिसारी धीरे-धीरे इनते उग्र हो गए कि वे कभी कभी विद्रोह भी करने लगे। लेकिन इन विद्रोहों का दमन भी किया जाता रहा। 1826 में जाँनिसारी सिपाहियों ने नई राष्ट्रीय सेना की स्थापना के प्रस्ताव पर विद्रोह कर दिया। इसपर महमूद द्वितीय ने प्रधान जाँनिसारी सेनापति की सहायता लेकर इन्हें बुरी तरह पराजित किया और उनकी बैरकें जला दीं।Kinross, pp.

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जोसेफ फ्रैंकलिन

जोसेफ पॉल फ्रैंकलिन (अप्रैल 13, 1950 – नवम्बर 20, 2013) एक अमेरिकी क्रमिक हत्यारा थे। उन्हें मृत्युदण्ड के अलावा सात और नस्ली नजरिए से प्रेरित हत्याओं के दोषी थे। उन्होंने १९७८ में एक पत्रिका प्रकाशक लैरी फ्ल्यन्ट और १९८० में नागरीक अधिकार कार्यकर्त्ता वेर्नन जोर्डन जूनियर जैसे प्रसिद्ध व्यक्तियों की हत्या भी स्वीकार की। फ्रैंकलिन १९७७ में गेराल्ड गोर्डन की हत्या के लिए १५ वर्ष पहले ही मौत की सजा पा चुके थे। .

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विद्युत मृत्यु

विद्युत आघात से जानबूझकर की गई मृत्यु या दुर्घटनावश हुई मृत्यु को विद्युन्मृत्यु या विद्युत मृत्यु (Electrocution) कहते हैं। 'एल्क्ट्रोक्यूशन' शब्द की तब सामने आया था जब १८९० में 'विद्युत कुर्सी' का उपयोग हुआ था। .

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गिलोटिन

गिलोटिन अथवा ऊर्ध्वाधर कर्तरी शिरश्छेदन (सिर छेदकर) मृत्युदण्ड देने के लिए कर्त्तन यन्त्र है। श्रेणी:धारवाले हथियार यह दो खंभो के बीच लटकता आरे वाला यंत्र है|.

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ग्रिगरी जिनव्येव

150px जिनव्येव ग्रिगरी एपिसएविच् (रूसी: Григо́рий Евсе́евич Зино́вьев, IPA:; वास्तविक उपाधि 'रादमीस्लस्कि'; १८८३ - १९३६) बोलशेविक क्रांतिकारी तथा सोवियत साम्यवादी दल के प्रमुख कार्यकर्ता तथा राजनेता थे। .

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आधर्षण

अंग्रेजी विधि प्रणाली में सामान्य कानून के अंतर्गत, मृत्यु दंडोदश के पश्चात्‌ जब यह प्रत्यक्ष हो जाता था कि अपराधी जीवित रहने योग्य नहीं है तब उसको 'अटेंड' कहा जाता था और इस कार्यवाही को अटेंडर (Attainder) कहते थे। अटेंडर का अर्थ है आर्धषण। आर्धषण की कार्यवाही मृत्युदंडादेश के पश्चात्‌ अथवा मृत्युदंडादेशतुल्य परिस्थिति में हुआ करती थी। निर्णय के बिना, केवल दोषसिद्धि के आधार पर, आधार्षण नहीं हो सकता था। आधर्षण के परिणामस्वरूप अपराधी की समस्त चल या अचल संपति का राज्य द्वारा अपहरण हो जाता था; वह संपति के उत्तराधिकार से स्वयं तो वंचित हो ही जाता था, उसके उत्तराधिकारी भी उसकी संपति नहीं पा सकते थे। इसको रक्तभ्रष्टता कहते थे। परंतु सन्‌ 1870 के 'फॉरफीचर ऐक्ट' के अंतर्गत आधर्षण अथवा संपतिअपहार या रक्तभ्रष्टता वर्जित हो गई और अब अटेंडर सिद्धांत का कोई विशेष महत्व नहीं रहा। .

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आर्थर कॉनन डॉयल

सर आर्थर इग्नाशियस कॉनन डॉयल, डीएल (22 मई 1859 - जुलाई 7, 1930) एक स्कॉटिश चिकित्सक और लेखक थे जिन्हें अधिकतर जासूस शरलॉक होम्स की उनकी कहानियों (इन कहानियों को आम तौर पर काल्पनिक अपराध कथा के क्षेत्र में एक प्रमुख नवप्रवर्तन के तौर पर देखा जाता है) और प्रोफ़ेसर चैलेंजर के साहसिक कारनामों के लिए जाना जाता है। वह विज्ञान कल्पना कथाएँ, ऐतिहासिक उपन्यासों, नाटकों और रोमांस, कविता और विभिन्न कल्पना साहित्य के एक विपुल लेखक थे। वे एक सफल लेखक थे जिनकी अन्य रचनाओं में काल्पनिक विज्ञान कथाएं, ऐतिहासिक उपन्यास, नाटक एवं रोमांस, कविता और गैर-काल्पनिक कहानियां शामिल हैं। .

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अजमल क़साब

अजमल क़साब (पाकिस्तानी आतंकवादी) अजमल क़साब (पूरा नाम: मुहम्मद अजमल आमिर क़साब, उर्दू: محمد اجمل امیر قصاب‎, जन्म: १३ जुलाई १९८७ ग्राम: फरीदकोट, पाकिस्तान - फांसी: २१ नवम्बर २०१२ यरवदा जेल, पुणे) २६/११/२००८ को ताज़ होटल मुंबई पर वीभत्स हमला करने वाला एक पाकिस्तानी आतंकवादी था। मुहम्मद आमिर क़साब उसके बाप का नाम था। वह कसाई जाति का मुसलमान था। "क़साब" (قصاب‎) शब्द अरबी भाषा का है जिसका हिन्दी में अर्थ कसाई या पशुओं की हत्या करने वाला होता है। साधारणतया लोगबाग उसे अजमल क़साब के नाम से ही जानते थे। क़साब पाकिस्तान में पंजाब प्रान्त के ओकरा जिला स्थित फरीदकोट गाँव का मूल निवासी था और पिछले कुछ साल से आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त था। हमलों के बाद चलाये गये सेना के एक अभियान के दौरान यही एक मात्र ऐसा आतंकी था जो जिन्दा पुलिस के हत्थे चढ़ गया। इस अभियान में इसके सभी नौ अन्य साथी मारे गये थे। इसने और इसके साथियों ने इन हमलों में कुल १६६ निहत्थे लोगों की बर्बरतापूर्ण हत्या कर दी थी। पाकिस्तान सरकार ने पहले तो इस बात से इनकार किया कि क़साब पाकिस्तानी नागरिक है किन्तु जब भारत सरकार द्वारा सबूत पेश किये गये तो जनवरी २००९ में उसने स्वीकार कर लिया कि हाँ वह पाकिस्तान का ही मूल निवासी है। ३ मई २०१० को भारतीय न्यायालय ने उसे सामूहिक ह्त्याओं, भारत के विरुद्ध युद्ध करने तथा विस्फोटक सामग्री रखने जैसे अनेक आरोपों का दोषी ठहराया। ६ मई २०१० को उसी न्यायालय ने साक्ष्यों के आधार पर मृत्यु दण्ड की सजा सुनायी। २६-११-२००८ को मुम्बई में ताज़ होटल पर हुए हमले में ९ आतंकवादियों के साथ कुल १६६ निरपराध लोगों की हत्या में उसके विरुद्ध एक मामले में ४ और दूसरे मामले में ५ हत्याओं का दोषी होना सिद्ध हुआ था। इसके अतिरिक्त नार्को टेस्ट में उसने ८० मामलों में अपनी संलिप्तता भी स्वीकार की थी। २१ फ़रवरी २०११ को मुम्बई उच्च न्यायालय ने उसकी फाँसी की सजा पर मोहर लगा दी। २९ अगस्त २०१२ को भारत के उच्चतम न्यायालय ने भी उसके मृत्यु दण्ड की पुष्टि कर दी। बाद में गृह मंत्रालय, भारत सरकार के माध्यम से उसकी दया याचिका राष्ट्रपति के पास भिजवायी गयी। राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी द्वारा उसे अस्वीकार करने के बाद पुणे की यरवदा केन्द्रीय कारागार में २१ नवम्बर २०१२ को प्रात: ७ बजकर ३० मिनट पर उसे फाँसी दे दी गयी। .

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१८ दिसम्बर

18 दिसंबर ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का 352वॉ (लीप वर्ष मे 353 वॉ) दिन है। साल में अभी और 13 दिन बाकी है। .

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१९६९

१९६९ ग्रेगोरी कैलंडर का एक साधारण वर्ष है। .

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२०१३ में निधन

निम्नलिखित सूची २०१३ में निधन हो गये लोगों की है। यहाँ पर सभी दिनांक के क्रमानुसार हैं और एक दिन की दो या अधिक प्रविष्टियाँ होने पर उनके मूल नाम को वर्णक्रमानुसार में दिया गया है। यहाँ लिखने का अनुक्रम निम्न है.

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यहां पुनर्निर्देश करता है:

मृत्यदण्ड, मृत्युदण्ड

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