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मूत्र मार्ग संक्रमण

सूची मूत्र मार्ग संक्रमण

मूत्र पथ का संक्रमण (यूटीआई) एक बैक्टीरिया जनित संक्रमण है जो मूत्रपथ के एक हिस्से को संक्रमित करता है। जब यह मूत्र पथ निचले हिस्से को प्रभावित करता है तो इसे सामान्य मूत्राशयशोध (मूत्राशय का संक्रमण) कहा जाता है और जब यह ऊपरी मूत्र पथ को प्रभावित करता है तो इसे वृक्कगोणिकाशोध (गुर्दे का संक्रमण) कहा जाता है। --> निचले मूत्र के लक्षणों में दर्द सहित मूत्र त्याग और बार-बार मूत्र त्याग या मूत्र त्याग की इच्छा (या दोनो) शामिल हैं जबकि वृक्कगोणिकाशोध में निचले यूटीआई के लक्षणों के साथ बुखार और कमर में तेज दर्द भी शामिल होते हैं। बुजुर्ग व बहुत युवा लोगों में लक्षण अस्पष्ट या गैर विशिष्ट हो सकते हैं। दोनो प्रकार के संक्रमणों के मुख्य कारक एजेंट एस्केरीशिया कॉली हैं, हलांकि अन्य दूसरे बैक्टीरिया, वायरस या फफूंद भी कभी कभार इसके कारण हो सकते हैं। मूत्र पथ के संक्रमण, पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक आम हैं, आधी महिलाओं को उनके जीवन में कम से कम एक बार संक्रमण होता है। संक्रमण का बार-बार होना आम बात है। जोखिम कारकों में महिला शरीर रचना विज्ञान, शारीरिक संबंध और परिवार का इतिहास शामिल है। यदि वृक्कगोणिकाशोध होता है तो इसके बाद मूत्राशय संक्रमण होता है जो कि रक्त जनित संक्रमण के परिणामस्वरूप हो सकता है। स्वस्थ युवा महिलाओं में निदान का आधार मात्र लक्षण भी हो सकते हैं। वे जिनमें अस्पष्ट लक्षण होते हैं, निदान कठिन हो सकता है क्योंकि बैक्टीरिया बिना संक्रमण हुये भी उपस्थित हो सकते हैं। जटिल मामलों में या उपचार के विफल होने पर, एक मूत्र कल्चर उपयोगी हो सकता है। नियमित संक्रमण वाले लोगों में, एंटीबायोटिक की हल्की खुराक को निवारक उपाय के रूप में उपयोग किया जा सकता है। गैर जटिल मामलों में, एंटीबायोटिक की हल्की खुराक से, मूत्र पथ संक्रमणों का उपचार आसानी से हो जाता है, हलांकि इस स्थिति में उपचार के लिये उपयोग किये जाने वाले कई एंटीबायोटिक के प्रति प्रतिरोध बढ़ रहा है। जटिल मामलों में, लंबी अवधि तक या अंतः शिरा एंटीबायोटिक के उपयोग की जरूरत पड़ सकती है और यदि लक्षण दो या तीन दिन में बेहतर नहीं होते हैं तो अतिरिक्त निदान परीक्षणों की जरूरत हो सकती है। महिलाओं में बैक्टीरिया जनित संक्रमणों के सबसे आम उदाहरण मूत्र पथ संक्रमण हैं, क्योंकि 10% महिलाओं में वार्षिक रूप से मूत्र पथ संक्रमण विकसित होते हैं। .

7 संबंधों: एटोरवास्टेटिन, शुक्राणुनाशक, सिस्टायटिस, सिस्टोस्कॉपी, सेफालेक्सिन, जठरांत्र शोथ, आंत में उपांत्र शोथ-एपेंडिसाइटिस

एटोरवास्टेटिन

(एटोरवास्टेटिन/0 (INN)), Lipitor के तहत व्यापार नाम फाइजर द्वारा बेच, रक्त कोलेस्ट्रॉलस्टेटिन के रूप मेंकम करने के लिए है एक वर्ग दवा सदस्य के ज्ञात थी। यह भी पट्टिका स्थिर और अन्य तंत्र के माध्यम से स्ट्रोक और रोकता है। स्‍टैटिन की तरह सभी, सीओए रिडक्टेस-एटोरवास्टेटिन काम करता है HMG, जिगरऊतक में पायाएक एंजाइमबाधक यकृत कोलेस्ट्रॉल के उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। एटोरवास्टेटिन1985 ब्रूस Roth द्वारा में पहली संश्लेषित) फाइजर Parke-डेविस वार्नर-Lambert कंपनी. के 2008 में यूएस में $ 12.4अरब की बिक्री, Lipitor सबसे अधिक दुनिया में ब्रांडेड दवा. जून 2011 में अमेरिका के पेटेंट संरक्षण समाप्त. हालांकि, अमेरिका में जेनेरिक प्रक्षेपण में देरी करने के लिए एक नवम्बर 2011 तकरैनबैक्सी लैबोरेटरीजफाइजर के साथ करार किया। .

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शुक्राणुनाशक

शुक्राणुनाशक गर्भ निरोधक पदार्थ है, जो संभोग से पूर्व, योनी में डालने से, शुक्राणु, को नाश करता है और इस तरह, यह गर्भावस्था को रोकता है। गर्भ निरोधक के प्रयोजन में, शुक्राणुनाशक अकेले भी इस्तेमाल किये जा सकते है। लेकिन, केवल शुक्रनुनाशक इस्तेमाल करने से, जोड़ों द्वारा गर्भावस्था की दर अधिक रहता है - अन्य विधियों की तुलना में.

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सिस्टायटिस

मूत्राशय सूजन को सिस्टायटिस कहते हैं। यह अलग संलक्षण या सिंड्रोम के किसी एक का परिणाम है। यह ज्यादातर जीवाणु संक्रमण होता है और इससे एक मूत्र पथ के संक्रमण के रूप में जाना जाता है। यह मूत्र पथ के संक्रमण है एक सबसे सामान्य कारण बैक्टीरिया द्वारा एक संक्रमण के रूप में संदर्भित किया जाता है जो मामले में यह है। .

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सिस्टोस्कॉपी

शल्य चिकित्सा कक्ष में रोगाणुमुक्त किया हुआ फ्लेक्सिबल सिस्टोस्कोप सिस्टोस्कॉपी (Cystoscopy) (si-ˈstäs-kə-pē) मूत्रमार्ग (urethra) के माध्यम से की जाने वाली, मूत्राशय (urinary bladder) की एंडोस्कोपी है। यह सिस्टोस्कोप की सहायता से की जाती है। नैदानिक सिस्टोस्कॉपी स्थानीय एनेस्थेसिया (local anaesthesia) के साथ की जाती है। शल्य-क्रियात्मक सिस्टोस्कॉपी प्रक्रिया के लिए कभी-कभी व्यापक एनेस्थेसिया (general anaesthesia) भी दिया जाता है। मूत्रमार्ग वह नली है जो मूत्र को मूत्राशय से शरीर के बाहर ले जाती है। सिस्टोस्कोप में दूरदर्शी (telescope) अथवा सूक्ष्मदर्शी (microscope) की तरह ही लेंस लगे होते हैं। ये लेंस चिकित्सक को मूत्रमार्ग की आतंरिक सतहों पर फोकस (संकेंद्रित) करने की सुविधा प्रदान करते हैं। कुछ सिस्टोस्कोप ऑप्टिकल फ़ाइबर (कांच का लचीला तार) का प्रयोग करते हैं जो उपकरण के अग्रभाग से छवि को दूसरे सिरे पर लगे व्यूइंग पीस (अवलोकन पीस) पर प्रदर्शित करते हैं। सिस्टोस्कोप एक पेन्सिल की मोटाई से लेकर 9 मिली मीटर तक मोटे होते हैं तथा इनके अग्रभाग पर प्रकाश स्रोत होता है। कई सिस्टोस्कोप में कुछ अतिरिक्त नलियां भी लगी होती हैं जो मूत्र सम्बन्धी समस्याओं के उपचार हेतु शल्य-क्रियात्मक प्रक्रियाओं के लिए आवश्यक उपकरणों का मार्ग-प्रदर्शन करती हैं। सिस्टोस्कॉपी दो प्रकार की होती हैं - फ्लेक्सिबल तथा रिजिड - यह सिस्टोस्कोप के लचीलेपन के अंतर पर आधारित होती है। फ्लेक्सिबल सिस्टोस्कॉपी दोनों लिंगों में स्थानीय एनेस्थेसिया की सहायता से की जाती है। आमतौर पर, एनेस्थेटिक के रूप में ज़ाईलोकेन जेल (xylocaine gel) (उदाहरण के लिए ब्रांड नाम इन्सटिलाजेल) का प्रयोग किया जाता है, इसे मूत्रमार्ग में डाला जाता है। रिजिड सिस्टोस्कॉपी भी सामान परिस्थितियों में की जा सकती है, परन्तु सामान्य रूप से यह व्यापक एनेस्थेसिया देकर, विशेष रूप से पुरुष मरीजों में प्रोब से होने वाले कष्ट के कारण, की जाती है। एक डॉक्टर निम्नलिखित स्थितियों में सिस्टोस्कॉपी की सलाह दे सकता है.

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सेफालेक्सिन

सेफालेक्सिन (Cefalexin) (INN, BAN) या सेफालेक्सिन (cephalexin) (USAN, AAN) एक ऐसा ऐंटीबायोटिक है जो अनेक प्रकार के बैक्टीरिया जनित संक्रमणों के उपचार के लिए उपयोगी है। इसे मुंह से लिया जाता है और यह ग्राम-सकारात्मक बैक्टीरिया और कुछ ग्राम-नकारात्मक बैक्टीरिया.के विरुद्ध सक्रिय होता है। यह पहली पीढ़ी के सेफालोस्पोरिन्स के वर्ग का होता है, cefazolin इस समूह के भीतर दूसरे β-लैक्टम ऐंटीबायोटिक्स के समान गतिविधियों वाला होता है जिसमें अंतःशरीय एजेंट सेफाज़ोलिन शामिल होता है। सेफालेक्सिन को अनेक प्रकार के संक्रमणों के उपचार में उपयोग किया जाता है जैसे: मध्य कान का संक्रमण, गले का संक्रमण, हड्डी और जोड़ के संक्रमण, निमोनिया, त्वचा संक्रमण और मूत्र मार्ग संक्रमण। यह बैक्टीरिया जनित अन्तर्हृद्शोथ की रोकथाम में उपयोग किया जा सकता है। यह मेथिसिलिन-प्रतिरोधी स्टेफिलोकोकस ऑरियस (MRSA) के खिलाफ प्रभावी नहीं है। यह पेनिसिलिन से हल्की या मध्यम एलर्जी वाले लोगों के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन जिन लोगों में गंभीर एलर्जी है, यह उनके लिए अनुशंसित नहीं है। अन्य एंटीबायोटिक दवाओं की तरह यह वायरल संक्रमणों जैसे आम सर्दी या गंभीर ब्रोंकाइटिस के विरुद्ध प्रभावी नहीं है। संभव पक्ष प्रभाव में एलर्जी, पेट और आंतों की परेशानी और क्लोस्ट्रीडियम बेलगाम  दस्त शामिल हैं। गर्भावस्था के दौरान इस्तेमाल किए जाने पर किसी प्रकार की हानि का कोई साक्ष्य नहीं मिला है। स्तनपान के दौरान इसका उपयोग आम तौर पर सुरक्षित है। यह बच्चों और 65 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए उपयुक्त है। गुर्दे की समस्याओं से पीड़ित लोगों में खुराक कम करने की जरूरत हो सकती है। 2012 में, सेफालेक्सिन संयुक्त राज्य अमेरिका में शीर्ष 100 सबसे अधिक नियत दवाओं में शामिल थी। ऑस्ट्रेलिया में, यह 15 सबसे अधिक नियत दवाओं में शामिल है। यह 1967 में विकसित किया गया था और 1969 व 1970 में अनेक कंपनियों द्वारा मार्केट किया गया था जिनमें, ग्लैक्सो वेलकम और एली लिली एंड कंपनी शामिल थीं, इनकी दवाओं में अन्य नामों के साथ काफलेक्स और सेपोरेक्स शामिल थी। यह जेनेरिक दवा के रूप में कई अन्य व्यापारिक नामों से उपलब्ध है और यह बहुत महंगी नहीं है। यह विश्व स्वास्थ्य संगठन की आवश्यक दवाओं की सूची में शामिल है जो किसी स्वास्थ्य प्रणाली में सबसे जरूरी दवाओं की सूची है। .

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जठरांत्र शोथ

जठरांत्र शोथ (गैस्ट्रोएन्टराइटिस) एक ऐसी चिकित्सीय स्थिति है जिसे जठरांत्र संबंधी मार्ग ("-इटिस") की सूजन द्वारा पहचाना जाता है जिसमें पेट ("गैस्ट्रो"-) तथा छोटी आंत ("इन्टरो"-) दोनो शामिल हैं, जिसके परिणास्वरूप कुछ लोगों को दस्त, उल्टी तथा पेट में दर्द और ऐंठन की सामूहिक समस्या होती है। जठरांत्र शोथ को आंत्रशोथ, स्टमक बग तथा पेट के वायरस के रूप में भी संदर्भित किया जाता है। हलांकि यह इन्फ्लूएंजा से संबंधित नहीं है फिर भी इसे पेट का फ्लू और गैस्ट्रिक फ्लू भी कहा जाता है। वैश्विक स्तर पर, बच्चों में ज्यादातर मामलों में रोटावायरस ही इसका मुख्य कारण हैं। वयस्कों में नोरोवायरस और कंपाइलोबैक्टर अधिक आम है। कम आम कारणों में अन्य बैक्टीरिया (या उनके जहर) और परजीवी शामिल हैं। इसका संचारण अनुचित तरीके से तैयार खाद्य पदार्थों या दूषित पानी की खपत या संक्रामक व्यक्तियों के साथ निकट संपर्क के कारण से हो सकता है। प्रबंधन का आधार पर्याप्त जलयोजन है। हल्के या मध्यम मामलों के लिए, इसे आम तौर पर मौखिक पुनर्जलीकरण घोल के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है। अधिक गंभीर मामलों के लिए, नसों के माध्यम से दिये जाने वाले तरल पदार्थ की जरूरत हो सकती है। जठरांत्र शोथ प्राथमिक रूप से बच्चों और विकासशील दुनिया के लोगों को प्रभावित करता है। .

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आंत में उपांत्र शोथ-एपेंडिसाइटिस

उपांत्र शोथ एपेंडिक्स की सूजन की अव्स्था है। यह एक आपातकालीन चिकित्सा के रूप में वर्गीकृत है और कई मामलों में सूजन को हटाने या तोलेप्रोस्कोपी लेप्रोटोमी द्वारा, की आवश्यकता होती है। अनुपचारित, मृत्यु दर, मुख्य रूप से सदमे और पेरिटोनिटिस.

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