लोगो
यूनियनपीडिया
संचार
Google Play पर पाएं
नई! अपने एंड्रॉयड डिवाइस पर डाउनलोड यूनियनपीडिया!
डाउनलोड
ब्राउज़र की तुलना में तेजी से पहुँच!
 

मीनार

सूची मीनार

ईराक़ के सामर्रा शहर की मलवीया नामक मीनार मीनार (अरबी: या, मनारह; अर्थ: दीपगृह) ऊँचा स्तंभ-नुमा स्थापत्य होता है जो देखने में किसी आम बुर्ज से अधिक लम्बा और खिंचा हुआ दिखता है। सामान्यतः मीनार बेलनाकार, लम्बे और ऊपर प्याज़-नुमा मुकुट से सुसज्जित होते हैं। वे आसपास की इमारतों से अधिक ऊँचे होते हैं और अक्सर मुस्लिम मस्जिदों के साथ लगे हुए पाए जाते हैं। .

24 संबंधों: चारमीनार, ताजमहल, थलचिन्ह, दिल्ली, नराथिवात प्रान्त, बाबरी मस्जिद, बुर्ज, बेयतेरेक, भारत के सात आश्चर्य, मस्जिद, मस्जिद ए कबीर मध्य जावा, महान अल-नूरी मस्जिद, मीनार-ए-जाम, संतरी बुर्ज, हाजी अली की दरगाह, ख़ैबर दर्रा, ख़ीवा, गांधी हॉल, इन्दौर, ग्रैंड ट्रंक रोड, केथेड्रल डि सेगोविआ, कोन्या-उरगेन्च, कोस मीनार, अल असकरी मज़ार, अल असकरी मज़ार बम विस्फ़ोट, 2007

चारमीनार

चारमीनार (उर्दू: چار مینار) 1591) ई. में बनाया, हैदराबाद, भारत में स्थित एक ऐतिहासिक स्मारक है। दो शब्द उर्दू भाषा के चार मीनार जो यह चारमीनार (चार टावर्स अंग्रेजी) के रूप में जाना जाता है संयुक्त रहे हैं। ये चार अलंकृत मीनारों संलग्न और चार भव्य मेहराब के द्वारा समर्थित हैं, यह हैदराबाद की वैश्विक आइकन बन गया है और सबसे ज्यादा मान्यता प्राप्त India.चारमीनार की संरचनाओं मूसी नदी के पूर्वी तट पर है के बीच में सूचीबद्ध है। पूर्वोत्तर Laad बाज़ार झूठ और पश्चिम अंत में स्थित ग्रेनाइट बनाया बड़े पैमाने पर मक्का मस्जिद मंडित. चारमीनार .

नई!!: मीनार और चारमीनार · और देखें »

ताजमहल

ताजमहल (تاج محل) भारत के आगरा शहर में स्थित एक विश्व धरोहर मक़बरा है। इसका निर्माण मुग़ल सम्राट शाहजहाँ ने, अपनी पत्नी मुमताज़ महल की याद में करवाया था। ताजमहल मुग़ल वास्तुकला का उत्कृष्ट नमूना है। इसकी वास्तु शैली फ़ारसी, तुर्क, भारतीय और इस्लामी वास्तुकला के घटकों का अनोखा सम्मिलन है। सन् १९८३ में, ताजमहल युनेस्को विश्व धरोहर स्थल बना। इसके साथ ही इसे विश्व धरोहर के सर्वत्र प्रशंसा पाने वाली, अत्युत्तम मानवी कृतियों में से एक बताया गया। ताजमहल को भारत की इस्लामी कला का रत्न भी घोषित किया गया है। साधारणतया देखे गये संगमर्मर की सिल्लियों की बडी- बडी पर्तो से ढंक कर बनाई गई इमारतों की तरह न बनाकर इसका श्वेत गुम्बद एवं टाइल आकार में संगमर्मर से ढंका है। केन्द्र में बना मकबरा अपनी वास्तु श्रेष्ठता में सौन्दर्य के संयोजन का परिचय देते हैं। ताजमहल इमारत समूह की संरचना की खास बात है, कि यह पूर्णतया सममितीय है। इसका निर्माण सन् १६४८ के लगभग पूर्ण हुआ था। उस्ताद अहमद लाहौरी को प्रायः इसका प्रधान रूपांकनकर्ता माना जाता है। .

नई!!: मीनार और ताजमहल · और देखें »

थलचिन्ह

थलचिन्ह (landmark) किसी ऐसी प्राकृतिक या कृत्रिम आकृति या वस्तु को कहा जाता है जिसका प्रयोग नौवहन (नैविगेशन) में स्थान बताने या समझने के लिये करा जाए। अक्सर यह कोई दूर से नज़र आने वाला और आसानी से पहचाना जाने वाला वृक्ष, स्थापत्य, पर्वत, झील, मीनार, इत्यादि हो सकता है। .

नई!!: मीनार और थलचिन्ह · और देखें »

दिल्ली

दिल्ली (IPA), आधिकारिक तौर पर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (अंग्रेज़ी: National Capital Territory of Delhi) भारत का एक केंद्र-शासित प्रदेश और महानगर है। इसमें नई दिल्ली सम्मिलित है जो भारत की राजधानी है। दिल्ली राजधानी होने के नाते केंद्र सरकार की तीनों इकाइयों - कार्यपालिका, संसद और न्यायपालिका के मुख्यालय नई दिल्ली और दिल्ली में स्थापित हैं १४८३ वर्ग किलोमीटर में फैला दिल्ली जनसंख्या के तौर पर भारत का दूसरा सबसे बड़ा महानगर है। यहाँ की जनसंख्या लगभग १ करोड़ ७० लाख है। यहाँ बोली जाने वाली मुख्य भाषाएँ हैं: हिन्दी, पंजाबी, उर्दू और अंग्रेज़ी। भारत में दिल्ली का ऐतिहासिक महत्त्व है। इसके दक्षिण पश्चिम में अरावली पहाड़ियां और पूर्व में यमुना नदी है, जिसके किनारे यह बसा है। यह प्राचीन समय में गंगा के मैदान से होकर जाने वाले वाणिज्य पथों के रास्ते में पड़ने वाला मुख्य पड़ाव था। यमुना नदी के किनारे स्थित इस नगर का गौरवशाली पौराणिक इतिहास है। यह भारत का अति प्राचीन नगर है। इसके इतिहास का प्रारम्भ सिन्धु घाटी सभ्यता से जुड़ा हुआ है। हरियाणा के आसपास के क्षेत्रों में हुई खुदाई से इस बात के प्रमाण मिले हैं। महाभारत काल में इसका नाम इन्द्रप्रस्थ था। दिल्ली सल्तनत के उत्थान के साथ ही दिल्ली एक प्रमुख राजनैतिक, सांस्कृतिक एवं वाणिज्यिक शहर के रूप में उभरी। यहाँ कई प्राचीन एवं मध्यकालीन इमारतों तथा उनके अवशेषों को देखा जा सकता हैं। १६३९ में मुगल बादशाह शाहजहाँ ने दिल्ली में ही एक चारदीवारी से घिरे शहर का निर्माण करवाया जो १६७९ से १८५७ तक मुगल साम्राज्य की राजधानी रही। १८वीं एवं १९वीं शताब्दी में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने लगभग पूरे भारत को अपने कब्जे में ले लिया। इन लोगों ने कोलकाता को अपनी राजधानी बनाया। १९११ में अंग्रेजी सरकार ने फैसला किया कि राजधानी को वापस दिल्ली लाया जाए। इसके लिए पुरानी दिल्ली के दक्षिण में एक नए नगर नई दिल्ली का निर्माण प्रारम्भ हुआ। अंग्रेजों से १९४७ में स्वतंत्रता प्राप्त कर नई दिल्ली को भारत की राजधानी घोषित किया गया। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् दिल्ली में विभिन्न क्षेत्रों से लोगों का प्रवासन हुआ, इससे दिल्ली के स्वरूप में आमूल परिवर्तन हुआ। विभिन्न प्रान्तो, धर्मों एवं जातियों के लोगों के दिल्ली में बसने के कारण दिल्ली का शहरीकरण तो हुआ ही साथ ही यहाँ एक मिश्रित संस्कृति ने भी जन्म लिया। आज दिल्ली भारत का एक प्रमुख राजनैतिक, सांस्कृतिक एवं वाणिज्यिक केन्द्र है। .

नई!!: मीनार और दिल्ली · और देखें »

नराथिवात प्रान्त

नराथिवात थाईलैण्ड का एक प्रान्त है। यह दक्षिणी थाईलैण्ड क्षेत्र में मलय प्रायद्वीप में स्थित है। दक्षिण में इसकी सीमाएँ मलेशिया के केलंतन राज्य से लगती हैं और पूर्व में यह थाईलैण्ड की खाड़ी से तटवर्ती है। .

नई!!: मीनार और नराथिवात प्रान्त · और देखें »

बाबरी मस्जिद

बाबरी मस्जिद उत्तर प्रदेश के फ़ैज़ाबाद ज़िले के अयोध्या शहर में रामकोट पहाड़ी ("राम का किला") पर एक मस्जिद थी। रैली के आयोजकों द्वारा मस्जिद को कोई नुकसान नहीं पहुंचाने देने की भारत के सर्वोच्च न्यायालय से वचनबद्धता के बावजूद, 1992 में 150,000 लोगों की एक हिंसक रैली.

नई!!: मीनार और बाबरी मस्जिद · और देखें »

बुर्ज

रूस के नालचिक शहर में सोसरुको बुर्ज बुर्ज (अंग्रेज़ी: tower) ऐसी ईमारत या ढाँचे को कहते हैं जिसकी ऊँचाई उसकी चौड़ाई से काफ़ी अधिक हो। अगर ढांचा ज़्यादा ऊंचा हो तो उसे मीनार (miraret) कहा जाता है, हालांकि साधारण बोलचाल में कभी-कभी 'बुर्ज' और 'मीनार' को पर्यायवाची शब्दों की तरह प्रयोग किया जाता है। बहुत ही कम चौड़ाई रखने वाले और खिचे से दिखने वाले ढांचों को 'बुर्ज' की बजाए 'खम्बा' या 'स्तम्भ' (pillar) कहा जाता है। बुर्जों का प्रयोग कई वजहों से किया जाता है, जिनमें अक्सर बुर्जों से दूर तक दिखाई दे सकने का लाभ उठाया जाता है, मसलन संतरी-बुर्जों (watchtowers) में, होटलों में और महलों में। मानव हज़ारों सालों से बुर्जों का निर्माण करते आ रहें हैं और इसमें ईंट, मिटटी, लकड़ी जैसी सामग्रियों का इस्तेमाल होता आया है। मध्य पूर्व के जेरिको (Jericho) शहर में ९,००० साल पुराने बुर्ज अस्तित्व में हैं।, Ivar Lissner, Putnam, 1962,...

नई!!: मीनार और बुर्ज · और देखें »

बेयतेरेक

बेयतेरेक (कज़ाख़: Бәйтерек, अंग्रेज़ी: Beyterek) मध्य एशिया के कज़ाख़स्तान देश की राजधानी अस्ताना में एक स्तंभ-नुमा मीनार है। कज़ाख़ भाषा में 'बेयतेरेक' का मतलब 'ऊँचा पोपलर (का वृक्ष)' होता है। यह मीनार सन् १९९७ में अस्ताना शहर को कज़ाख़स्तान की राजधानी का दर्जा मिलने के लिए बनाया गया एक यादगार है। इस से पहले अलमाती शहर देश की राजधानी हुआ करता था।, Graham Field, Troubador Publishing Ltd, 2012, ISBN 978-1-78088-088-4,...

नई!!: मीनार और बेयतेरेक · और देखें »

भारत के सात आश्चर्य

विश्व की सबसे शानदार मानव-निर्मित और प्राकृतिक चीजों को सूचीबद्ध करने के लिए विश्व के सात आश्चर्य की कई सूचियां बनाई गयी हैं। लेकिन टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) समाचार पत्र ने के पहचाने गए 20 प्राचीन तथा मध्यकालीन स्थलों में से सात महान आश्चर्यों के चुनाव के लिए 21 से 31 जुलाई 2007 के बीच एक Simple Mobile Massage मतदान करवाया.

नई!!: मीनार और भारत के सात आश्चर्य · और देखें »

मस्जिद

मुसलमानों की इबादत गाह को मस्जिद कहते हैं। इसे नमाज़ के लिए प्रयोग किया जाता है मुसलमानों के प्रारंभिक काल में मस्जिदे नबवी को विदेश से आने वाले ओफ़ोद से मुलाकात और चर्चा के लिए भी इस्तेमाल किया गया था। मस्जिद से मुसलमानों की पहली विश्वविद्यालयों (विश्वविद्यालयों) ने भी जन्म लिया है। इसके अलावा इस्लामी वास्तुकला भी मुख्य रूप से मस्जिदों से विकास हुई है। .

नई!!: मीनार और मस्जिद · और देखें »

मस्जिद ए कबीर मध्य जावा

महान मस्जिद मध्य जावा : (इंडोनेशिया: मस्जिद अगुंग जावा टेंगाह) इन्डोनेशिया के मध्य जावा के शहर सेमरांग की एक मस्जिद है। .

नई!!: मीनार और मस्जिद ए कबीर मध्य जावा · और देखें »

महान अल-नूरी मस्जिद

महान अल-नूरी मस्जिद (अरबी: جامع النوري जामी अल-नूरी) मोसुल, इराक में एक मस्जिद थी। इसकी प्रसिद्धि इसकी झुकी हुई मीनार से थी, जिसने शहर को इसका उपनाम "कुबड़ा" (الحدباء अल-हब्दा) दिया था। माना जाता है कि इस मस्जिद को पहले पहल 12वीं शताब्दी के अंत में बनाया गया था, हालांकि इसके बाद इसका कई बार पुनर्निर्माण किया गया। अपने 850 वर्षों के इतिहास में इस मस्जिद ने शत्रु सेनाओं के बहुत सारे आक्रमण झेले लेकिन अंतत: 21 जून 2017 को इराक और लेवांत के इस्लामिक राष्ट्र (आईएसआईएल) ने मोसुल की लड़ाई के दौरान इसे नष्ट कर दिया। इराकी सैनिकों ने आईएसआईएस को इस मस्जिद के विनाश के लिए जिम्मेदार ठहराया है, क्योंकि उसने इसे अपने हाथ से जाने देने के बजाय बर्बाद करने का काम किया। इस मस्जिद का आईएसआईएस और उसके नेता अबू बक्र अल-बगदादी के लिए एक प्रतीकात्मक महत्त्व था, क्योंकि 2014 में आतंकवादियों ने इसका इस्तेमाल अपने "खलीफा" को घोषित करने के लिए किया था। जून 2014 में आतंकियों के इराक और सीरिया में आगे बढ़ने और एक विशाल इलाके को अपने कब्ज़े में लेने के बाद से आईएसआईएस का काला ध्वज इस मस्जिद की 45 मीटर मीनार ऊंची से फहरा रहा था, और उन्होंने दावा किया था कि अब उनका ध्वज कभी भी नीचे नहीं उतरेगा। आधिकारिक दस्तावेजों और स्थानीय मुस्लिम चश्मदीदों के विपरीत, आईएसआईएस ने इसे नष्ट करने का आरोप लगाया संयुक्त राज्य अमेरिका पर लगाया है, हालांकि आईएसआईएस का यह दावा साबित नहीं हुआ। इराकी प्रधान मंत्री हैदर अल-अबादी ने कहा कि आईएसआईएस द्वारा मस्जिद का विनाश किया जाना उनकी "हार की घोषणा" है, और "अल-हब्दा मीनार और अल-नूरी मस्जिद को विस्फोट से उड़ाना आईएसआईएस द्वारा हार की आधिकारिक स्वीकारोक्ति है।" .

नई!!: मीनार और महान अल-नूरी मस्जिद · और देखें »

मीनार-ए-जाम

मीनार-ए-जाम मीनार-ए-जाम (फ़ारसी) या जाम की मीनार (अंग्रेज़ी: Minaret of Jam) पश्चिमी अफ़ग़ानिस्तान के ग़ोर प्रांत के शहरक ज़िले में हरी नदी (हरीरूद) के किनारे खड़ी एक प्रसिद्ध ईंटों की बनी मीनार है। यह ६५ मीटर ऊँची मीनार दिल्ली के क़ुतुब मीनार के बाद दुनिया की दूसरी सबसे ऊँची मीनार है, हालांकि क़ुतुब मीनार वास्तव में इसी मीनार से प्रेरित होकर बनवाया गया था। मीनार-ए-जाम जाम नदी और हरी नदी के संगम के पास है और चारों तरफ़ से २,४०० मीटर ऊँचे पहुँचने वाले पहाड़ों से घिरी हुई है। सन् ११९० के दशक में बनी इस मीनार पर ईंट, गच पलस्तर (स्टक्को) और टाइलें लगी हुई हैं जिनपर क़ुरान की आयतें और आकर्षक लकीरें व आकृतियाँ बनी हुई हैं। .

नई!!: मीनार और मीनार-ए-जाम · और देखें »

संतरी बुर्ज

जर्मनी में एक संतरी बुर्ज संतरी बुर्ज या पर्यवेक्षण बुर्ज (अंग्रेज़ी: watchtower) ऐसे बुर्ज को कहा जाता है जिसका प्रयोग आसपास के क्षेत्र पर निगरानी रखने के लिए किया जाता हो। अक्सर ऐसे संतरी बुर्जों का प्रयोग फ़ौजी या जेल सम्बन्धी कारणों से किया जाता है। जहाँ बहुत से साधारण बुर्ज किसी ईमारत के साथ जुड़े होते हैं, वहाँ संतरी बुर्ज अक्सर इमारतों से अलग खड़े होते हैं और उनका निर्माण कभी-कभी क़िलेनुमा होता है ताकि उनपर तैनात पहरेदार ऊपर से शत्रुओं पर हमला कर सके और अपने क्षेत्र पर हुए आक्रमण से रक्षा कर सकें।, Esther Ken Achua Gwan, WestBow Press, 2010, ISBN 978-1-4497-0210-6,...

नई!!: मीनार और संतरी बुर्ज · और देखें »

हाजी अली की दरगाह

हाजी अली की दरगाह हाजी अली की दरगाह मुंबई के वरली तट के निकट स्थित एक छोटे से टापू पर स्थित एक मस्जिद एवं दरगाह हैं। इसे सय्यद पीर हाजी अली शाह बुखारी की स्मृति में सन १४३१ में बनाया गया था। यह दरगाह मुस्लिम एवं हिन्दू दोनों समुदायों के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखती है। यह मुंबई का महत्वपूर्ण धार्मिक एवं पर्यटन स्थल भी है। दरगाह को सन १४३१ में सूफी संत सय्यद पीर हाजी अली शाह बुखारी की स्मृति में बनाया गया था। हाजी अली ट्रस्ट के अनुसार हाजी अली उज़्बेकिस्तान के बुखारा प्रान्त से सारी दुनिया का भ्रमण करते हुए भारत पहुँचे थे। .

नई!!: मीनार और हाजी अली की दरगाह · और देखें »

ख़ैबर दर्रा

ख़ैबर दर्रा ख़ैबर दर्रा ख़ैबर दर्रा या दर्र-ए-ख़ैबर (Khyber Pass) उत्तर-पश्चिमी पाकिस्तान की सीमा और अफगानिस्तान के काबुलिस्तान मैदान के बीच हिंदुकुश के सफेद कोह पर्वत शृंखला में स्थित एक प्रख्यात ऐतिहासिक दर्रा है। यह दर्रा ५० किमी लंबा है और इसका सबसे सँकरा भाग केवल १० फुट चौड़ा है। यह सँकरा मार्ग ६०० से १००० फुट की ऊँचाई पर बल खाता हुआ बृहदाकार पर्वतों के बीच खो सा जाता है। इस दर्रे के ज़रिये भारतीय उपमहाद्वीप और मध्य एशिया के बीच आया-जाया सकता है और इसने दोनों क्षेत्रों के इतिहास पर गहरी छाप छोड़ी है। ख़ैबर दर्रे का सबसे ऊँचा स्थान पाकिस्तान के संघ-शासित जनजातीय क्षेत्र की लंडी कोतल (لنڈی کوتل, Landi Kotal) नामक बस्ती के पास पड़ता है। इस दर्रे के इर्द-गिर्द पश्तून लोग बसते हैं। पेशावर से काबुल तक इस दर्रे से होकर अब एक सड़क बन गई है। यह सड़क चट्टानी ऊसर मैदान से होती हुई जमरूद से, जो अंग्रेजी सेना की छावनी थी और जहाँ अब पाकिस्तानी सेना रहती है, तीन मील आगे शादीबगियार के पास पहाड़ों में प्रवेश करती है और यहीं से खैबर दर्रा आरंभ होता है। कुछ दूर तक सड़क एक खड्ड में से होकर जाती है फिर बाई और शंगाई के पठार की ओर उठती है। इस स्थान से अली मसजिद दुर्ग दिखाई पड़ता है जो दर्रे के लगभग बीचोबीच ऊँचाई पर स्थित है। यह दुर्ग अनेक अभियानों का लक्ष्य रहा है। पश्चिम की ओर आगे बढ़ती हुई सड़क दाहिनी ओर घूमती है और टेढ़े-मेढ़े ढलान से होती हुई अली मसजिद की नदी में उतर कर उसके किनारे-किनारे चलती है। यहीं खैबर दर्रे का सँकरा भाग है जो केवल पंद्रह फुट चौड़ा है और ऊँचाई में २,००० फुट है। ५ किमी आगे बढ़ने पर घाटी चौड़ी होने लगती है। इस घाटी के दोनों और छोटे-छोटे गाँव और जक्काखेल अफ्रीदियों की लगभग साठ मीनारें है। इसके आगे लोआर्गी का पठार आता है जो १० किमी लंबा है और उसकी अधिकतम चौड़ाई तीन मील है। यह लंदी कोतल में जाकर समाप्त होता है। यहाँ अंगरेजों के काल का एक दुर्ग है। यहाँ से अफगानिस्तान का मैदानी भाग दिखाई देता है। लंदी कोतल से आगे सड़क छोटी पहाड़ियों के बीच से होती हुई काबुल नदी को चूमती डक्का पहुँचती है। यह मार्ग अब इतना प्रशस्त हो गया है कि छोटी लारियाँ और मोटरगाड़ियाँ काबुल तक सरलता से जा सकती हैं। इसके अतिरिक्त लंदी खाना तक, जिसे खैबर का पश्चिम कहा जाता है, रेलमार्ग भी बन गया है। इस रेलमार्ग का बनना १९२५ में आरंभ हुआ था। सामरिक दृष्टि में संसार भर में यह दर्रा सबसे अधिक महत्व का समझा जाता रहा है। भारत के 'प्रवेश द्वार' के रूप में इसके साथ अनेक स्मृतियाँ जुड़ी हुई हैं। समझा जाता है कि सिकन्दर के समय से लेकर बहुत बाद तक जितने भी आक्रामक शक-पल्लव, बाख्त्री, यवन, महमूद गजनी, चंगेज खाँ, तैमूर, बाबर आदि भारत आए उन्होंने इसी दर्रे के मार्ग से प्रवेश किया। किन्तु यह बात पूर्णतः सत्य नहीं है। दर्रे की दुर्गमता और इस प्रदेश के उद्दंड निविसियों के कारण इस मार्ग से सबके लिए बहुत साल तक प्रवेश सहज न था। भारत आनेवाले अधिकांश आक्रमणकारी या तो बलूचिस्तान होकर आए या 2 साँचा:पाकिस्तान के प्रमुख दर्रे श्रेणी:भारत का इतिहास श्रेणी:पाकिस्तान के पहाड़ी दर्रे श्रेणी:अफ़्गानिस्तान के पहाड़ी दर्रे श्रेणी:पश्तून लोग श्रेणी:ऐतिहासिक मार्ग.

नई!!: मीनार और ख़ैबर दर्रा · और देखें »

ख़ीवा

ख़ीवा के अन्दर इचान क़ला (इचान क़िला) की दीवारें खीवा(उज़बेक: Хива, अंग्रेज़ी: Khiva) मध्य एशिया के उज़बेकिस्तान देश के ख़ोरज़्म प्रान्त में स्थित एक ऐतिहासिक महत्व का शहर है। इस क्षेत्र में हजारों वर्षों से लोग बसते आये हैं लेकिन यह शहर तब मशहूर हुआ जब यह ख़्वारेज़्म और ख़ीवा ख़ानत की राजधानी बना।, Bradley Mayhew, pp.

नई!!: मीनार और ख़ीवा · और देखें »

गांधी हॉल, इन्दौर

महात्मा गांधी टाउन हॉल मध्य भारत के राज्य मध्य प्रदेश के नगर इन्दौर की एक ऐतिहासिक इमारत है। यह इमारत ब्रिटिश काल की है और तब समय बताने का कार्य भी करती थी और इसे घंटाघर भी कहते थे। इस इमारत में वर्ष पर्यन्त विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते रहते हैं। इस इमारत का निर्माण १९०४ में किया गया था और तब इसका नाम किंग एडवर्ड हॉल रखा गया था। सन् १९४७ में भारत के स्वतंत्र होने के बाद इसका नाम गांधी हाल कर दिया गया। हॉल में बच्चों के लिए पार्क और एक पुस्तकालय भी है। .

नई!!: मीनार और गांधी हॉल, इन्दौर · और देखें »

ग्रैंड ट्रंक रोड

ग्रैंड ट्रंक रोड, दक्षिण एशिया के सबसे पुराने एवं सबसे लम्बे मार्गों में से एक है। दो सदियों से अधिक काल के लिए इस मार्ग ने भारतीय उपमहाद्वीप के पूर्वी एवं पश्चिमी भागों को जोड़ा है। यह हावड़ा के पश्चिम में स्थित बांगलादेश के चटगाँव से प्रारंभ होता है और लाहौर (पाकिस्तान) से होते हुए अफ़ग़ानिस्तान में काबुल तक जाता है। पुराने समय में इसे, उत्तरपथ,शाह राह-ए-आजम,सड़क-ए-आजम और बादशाही सड़क के नामों से भी जाना जाता था। यह मार्ग, मौर्य साम्राज्य के दौरान अस्तित्व में था और इसका फैलाव गंगा के मुँह से होकर साम्राज्य के उत्तर-पश्चिमी सीमा तक हुआ करता था। आधुनिक सड़क की पूर्ववर्ती का पुनःनिर्माण शेर शाह सूरी द्वारा किया गया था। सड़क का काफी हिस्सा १८३३-१८६० के बीच ब्रिटिशों द्वारा उन्नत बनाया गया था। .

नई!!: मीनार और ग्रैंड ट्रंक रोड · और देखें »

केथेड्रल डि सेगोविआ

केथेड्रल डि सेगोविआ केथेड्रल डि सेगोविआ स्पेन के सेगोविआ नगर के मध्य प्लाज़ा मेयर के पास स्थित एक प्रसिद्ध रोमन कैथोलिक गिरजाघर है। नगर की सबसे ऊँची चोटी, समुद्रतल से १००६ मीटर की ऊँचाई पर स्थित स्थापत्य का यह शिल्प अत्यंत प्रभावशाली दिखाई देता है। यही कारण है कि इसको स्पेन के गिरजाघरों की रानी ('La dama de las catedrales españolas') कहा जाता है। स्टेन ग्लास की दस खिड़कियों, गायकों के लिए बारीक नक्काशी वाले क्वायर स्टालों और १६वी-१७वीं शती की चित्रों से सजे इस गिरजाघर की वेदी पर जुआन डि जूनी नामक प्रसिद्ध कलाकार द्वारा बनाई गई प्रसिद्ध कलाकृति है जिसमें ईसा मसीह को क्रास से उतारते हुए दिखाया गया है। मुख्य प्रतिमा वर्जिन मेरी की है जिसे संगमरमर के ऊँचे चबूतरे पर चौदहवीं शती के मूर्तिशिल्प वर्जिन डि ला पाज़ को स्थान मिला है। बारीक नक्काशी वाली दीवारों के १०० मीटर ऊँचे भवन की केंद्रीय मीनार पर छत्र और उसके ऊपर प्रकाशकक्ष की स्थापना की गई है। पीले पत्थरों से बने इस गिरजाघर के, १५२० में सांप्रदायिक युद्ध के अग्निकांड में नष्ट हो जाने के बाद, तत्कालीन शासक कार्लोस पंचम ने इसके पुनर्निमाण के आदेश दिए। उत्तर गॉथिक शैली में निर्मित यह गिरजाघर पहले रोमन शैली में बनाया गया था। वर्जिन मेरी को समर्पित इस गिरजाघर का निर्माण १५२५ से १५२७ के मध्य आर्किटेक्ट ट्रांसमेरन मेसन और जुवान गिल डि हॉनटेनॉन ने प्रारंभ किया पर हॉनटेनॉन की मृत्यु के बाद उसके पुत्र रॉड्रिओ गिल डि हॉनटेनॉन ने इस पर अपना काम जारी रखा। इसकी पहली मंजिल पर तीन मध्य भाग हैं, पार्श्व प्रार्थनालय, अर्थवृत्ताकार गर्भगृह और संलग्न आच्छादित मार्ग। प्रमुख भवन में तीन प्रवेशद्वार हैं। मुख्यद्वार के अतिरिक्त दो दक्षिण द्वार हैं। संपूर्ण भवन १०५ मीटरलंबा और ५० मीटर चौड़ा तथा मध्य भाग में ३३ मीटर ऊँचा है। मुख्यवेदी संगमरमर, जास्पर और ताँबे की बनी है। यह १७६८ में बनकर तैयार हुआ था। .

नई!!: मीनार और केथेड्रल डि सेगोविआ · और देखें »

कोन्या-उरगेन्च

सोल्तान तेकेश मक़बरा गुतलुक-तेमिर मीनार कोन्या उरगेन्च या कोन्ये उरगेन्च (तुर्कमेन: Köneürgenç, अंग्रेज़ी: Konye-Urgench) मध्य एशिया के तुर्कमेनिस्तान देश के पूर्वोत्तरी भाग में उज़बेकिस्तान की सरहद के पास स्थित एक बस्ती है। यह उरगेन्च की प्राचीन नगरी का स्थल है जिसमें १२वीं सदी के ख़्वारेज़्म क्षेत्र की राजधानी के खँडहर मौजूद हैं। २००५ में यूनेस्को ने इन खँडहरों को एक विश्व धरोहर स्थल घोषित कर दिया।, UNESCO World Heritage Center, UNESCO, Accessed 19 फ़रवरी 2011 .

नई!!: मीनार और कोन्या-उरगेन्च · और देखें »

कोस मीनार

कोस मीनार का प्रयोग शेर शाह सूरी के जमाने में सड़कों को नियमित अंतराल पर चिन्हित करने के लिए किया जाता था।। ग्रैंड ट्रंक रोड के किनारे हर कोस पर मीनारें बनवाई गई थीं। अधिकतर इन्हें १५५६-१७०७ के बीच बनाया गया था। कई मीनारें आज भी सुरक्षित हैं तथा इन्हें दिल्ली-अंबाला राजमार्ग पर देखा जा सकता है। पुरातत्व विभाग के अनुसार भारत के हरियाणा राज्य में कुल ४९ कोस मीनारे है जिनमें फरीदाबाद में १७, सोनीपत में ७, पानीपत में ५, करनाल में १०, कुरुक्षेत्र और अम्बाला में ९ एवं रोहतक में १ मीनार हैं। आजकल इन्हें सुरक्षित स्मारक घोषित किया गया है तथा पुरातत्व विभाग इनकी देखरेख करता है। File:Mughal milestone.jpg|उत्तर प्रदेश में स्थित एक कोस मीनार File:Mughal-era Kos Minar in the Delhi National Zoo.jpg | दिल्ली चिड़ियाघर स्थित कोस मीनार File:Kos minar,tirawadi,karnal.JPG|हरियाणा के तरावड़ी (जिला करनाल) स्थित कोस मीनार File:One Kos Minar, Lahore.JPG|लाहौर (वर्तमान पाकिस्तान) स्थित कोस मीनार .

नई!!: मीनार और कोस मीनार · और देखें »

अल असकरी मज़ार

मस्जिद अगले और प्रथम बम विस्फ़ोट के बाद। अल असकरी या असकरिय्या मज़ार/मस्जिद (अरबी:, मर्क़द अल-इमामाय्न `अली ल-हादी वा अल-हस्सन अल-`अस्करी) एक शिया मुस्लिम धर्मात्मा मस्जिद है जो बग़दाद से 125 कीमी दूर इराक़ी शहर सामर्रा में है। यह एक विश्व के सबसे महत्वपूर्ण शिया मस्जिद है, जिसका निर्माण सन् 944 ई में हुआ। इसका एक गुम्बज़ 2006 में एक बम विस्फ़ोट में नष्ट हो गया और इसकी दो शेष मीनारें जून 2007 में एक अन्य बम विस्फ़ोट में नष्ट हुई, जिस से शिया मुसलमानों में व्यापक अप्रसन्नता हुई। .

नई!!: मीनार और अल असकरी मज़ार · और देखें »

अल असकरी मज़ार बम विस्फ़ोट, 2007

2007 अल असकरी मज़ार बम विस्फ़ोट 13 जून, 2007 में था, लगभग 9 पूर्वाह्न स्थानीय समय, शिया इस्लाम का एक सबसे धर्मात्मक स्थान में, अल असकरी मज़ार और इराक़ में अल-क़ायदा या इराक़ी बाथ पार्टी से श्रेय देंगा। जब कोई घायल या मृत्यु प्रतिवेदित नहीं है, मस्जीद की दो दस मंज़िल मीनारें से गिर गई है आक्रमणों में। यह मस्जिद का दूसरा बम विस्फ़ोट है; पहला बम विस्फ़ोट 22 फरवरी 2006 में होगे और मस्जिद का गुंबज से नष्ट करा। .

नई!!: मीनार और अल असकरी मज़ार बम विस्फ़ोट, 2007 · और देखें »

निवर्तमानआने वाली
अरे! अब हम फेसबुक पर हैं! »