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मारीशस के हिन्दी विद्वान

सूची मारीशस के हिन्दी विद्वान

मारीशस में २ नवंबर १८३४ में एटलस नामक जहाज़ में बिहार के छोटा नागपुर इलाके से पहली बार विधिवत गिरमिटियों को लाया गया था। १९२० तक मारीशस में साढ़े चार लाख भारतीय गिरमिटिए लाए गए, जिनमें अधिकतर भोजपुरी बोलने वाले थे। उन्नीसवीं सदी के अंत तक बोलचाल की भाषा के रूप में यहाँ भोजपुरी का विकास हो चुका था। १९०१ में बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी यहाँ आकर रहे और भारतीयों की दशा और कठिनाइयों को समझा। उन्हें कानूनी सलाह उपलब्ध कराने और सहायता करने के लिए उन्होंने १९०९ में एक योग्य बैरिस्टर मगनलाल मणिलाल को मारीशस भेजा। बैरिस्टर मगनलाल मणिलाल ने १५ मार्च १९०९ में एक साप्ताहिक पत्र का आरंभ किया जिसकी भाषा अँग्रेजी और गुजराती थी। बाद में गुजराती के स्थान पर यह पत्र हिंदी में प्रकाशित होने लगा क्यों कि आमतौर पर सभी भारतीय लोगों को हिंदी आसानी से समझ में आती थी। इसके बाद ही मारीशस में हिंदी का विकास हुआ। इस दृष्टि से वे मारीशस के पहले हिंदी विद्वान माने जाते हैं। इसके बाद अनेक लोगों ने अध्यापन, पत्रकारिता और लेखन द्वारा मारीशस में हिंदी का विकास किया। इन लोगों में प्रमुख नाम हैं- मुकेश्वर चुन्नी, पं. आत्माराम विश्वनाथ, पं. लक्ष्मीनारायण चतुर्वेदी रसपुंज, पं. रामावध शर्मा, पं. काशीनाथ किष्टो, पं. नरसिंहदास, श्री जयनारायण राय, प्रो॰ वासुदेव विष्णुदयाल, डॉ॰ सर शिवसागर रामगुलाम, प्रो॰ राम प्रकाश, बैरिस्टर सोमदत्त बखोरी, पं.मोहनलाल मोहित, आर्य रत्न, डॉ॰ ब्रज भारत, श्री सूर्यमंजर भगत, सर खेर जगतसिंह, स्वामी कृष्णानंद सरस्वती, श्री दुखी गंगा, श्री रामनाथ जीता, पं. रामदत्त महावीर, रामरेखा रति, पं. श्रीनिवास जगदत्त, पं. उमाशंकर जगदत्ता, पं. दौलत शर्मा, श्री दयानंदलाल वसंतराय, अभिमन्यु अनत आदि। .

2 संबंधों: हिन्दी प्रचारिणी सभा, मॉरीशस, हिन्दी संगठन

हिन्दी प्रचारिणी सभा, मॉरीशस

हिन्दी प्रचारिणी सभा की स्थापना मॉरीशस में १९२५ में हिन्दी की विधिवत शिक्षा के लिए हुई जिसके प्रथम अध्यक्ष मुक्ताराम चटर्जी थे। इस सभा ने हिन्दी के प्रचार-प्रसार में अहम भूमिका निभाई। सभा हिन्दी साहित्य सम्मेलन की साहित्यरत्न परीक्षाएँ भी आयेजित करती है। हिन्दी प्रचारिणी सभा एक शैक्षिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक संस्था है। यह लांग माउण्टेन (Long Mountain) में स्थित है। इसका ध्येयवाक्य है ‘भाषा गई तो संस्कृति गई'। इसकी स्थापना 12 जून 1926 को हुई थी। उस समय इसका नाम 'तिलक विद्यालय' था जो भारत के महान शिक्षाशास्त्री एवं स्वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक के नाम पर था। तिलक विद्यालय की स्थापना के पीछे मुक्तराम बोलराम चटर्जी और मुंगुर बंधु थे जिन्हें बाद में 'भगत' नाम से प्रसिद्धि मिलि। बाद में यही विद्यालय 'हिन्दी प्रचारिणी सभा' बना। कुछ समय बाद हिन्दी प्रचारिणी सभा ने क्रीव कूर (Creve Coeur) में 'सरस्वती पाठशाला' की स्थापना की। इसमें कन्याओं के लिए पूर्णकालोक हिन्दी कक्षाएँ लगने लगीं। श्री सूर्य प्रसाद मुंगुर भगत हिन्दी प्रचारिणी सभा द्वारा नियुक्त प्रथम अध्यापक थे। उनके बाद श्री नेमनारायण गुप्त अध्यापक नियुक्त हुए। .

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हिन्दी संगठन

हिन्दी संगठन या 'हिन्दी स्पीकिंग यूनियन' मॉरीशस का एक प्रमुख हिन्दीसेवी संस्था है। इसकी स्थापना संसद के विधेयक संख्या ३३ के तहत १२ दिसम्बर १९९४ को हुई थी। यह संस्था कला एवं संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से अपनी गतिविधियाँ आयोजित करती है। इसका कार्यालय आर्किड टॉवर, पोर्ट लूई में है। हिन्दी विद्वान, हिन्दी संस्थाएँ तथा हिन्दी साहित्यकार इसके सदस्य हैं। 'हिन्दी ज्ञान, हमारा मान' - इसका ध्येयवाक्य है। .

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