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मनोविकार

सूची मनोविकार

मनोविकार (Mental disorder) किसी व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य की वह स्थिति है जिसे किसी स्वस्थ व्यक्ति से तुलना करने पर 'सामान्य' नहीं कहा जाता। स्वस्थ व्यक्तियों की तुलना में मनोरोगों से ग्रस्त व्यक्तियों का व्यवहार असामान्‍य अथवा दुरनुकूली (मैल एडेप्टिव) निर्धारित किया जाता है और जिसमें महत्‍वपूर्ण व्‍यथा अथवा असमर्थता अन्‍तर्ग्रस्‍त होती है। इन्हें मनोरोग, मानसिक रोग, मानसिक बीमारी अथवा मानसिक विकार भी कहते हैं। मनोरोग मस्तिष्क में रासायनिक असंतुलन की वजह से पैदा होते हैं तथा इनके उपचार के लिए मनोरोग चिकित्सा की जरूरत होती है। .

41 संबंधों: चिकित्सालय, दुश्चिंता, द्विध्रुवी विकार, पराप्राकृतिक संवाद, परिवर्तन तनाव और नवाचार के प्रबंध, फोबिया, बहुव्यक्तित्व विकार, बाल यौन शोषण (पीडोफीलिया), बुद्धि लब्धि, बौद्धिक अशक्‍तता, मथुरा दास माथुर अस्पताल, मन, मनस्ताप, मनोरोग विज्ञान, मनोविदलता, मनोविज्ञान, मनोविकारविज्ञानी, मनोविकृतिविज्ञान, मानस शास्त्र, मानसिक चिकित्सालय, मानसिक रोगों की सूची, मानसिक स्वास्थ्य, मेकियावेलियनिस्म, मोटापा, रोगों की सूची, शार्लेट म्यू, शिथिलता, शव कामुकता, सनक (व्यवहार), संज्ञानात्मक विकार, संविभ्रम, घबड़ाहट के दौरे (पैनिक अटैक), विन्सेंट वैन गो, वृहत् अवसादी मनोविक्षिप्ति, कार्ल रोजर्स, अधकपारी, अपराधी रूपरेखा, अष्टाङ्गहृदयम्, असामान्य मनोविज्ञान, अंतराबंध, उन्माद

चिकित्सालय

चिकित्सालय या अस्पताल (hospital) स्वास्थ्य की देखभाल करने की संस्था है। इसमें विशिष्टताप्राप्त चिकित्सकों एवं अन्य स्टाफ के द्वारा तथा विभिन्न प्रकार के उपकरणों की सहायता से रोगियों का निदान एवं चिकित्सा की जाती है। .

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दुश्चिंता

दुश्चिंता (या, व्यग्रता विकार या घबराहट) (अंग्रेज़ी:Anxiety disorder) एक प्रकार का मनोरोग है। साधारण शब्दों में चिंता या घबराहट आने वाले समय में कुछ बुरा या खराब घटने की आशंका होना है जबकि इनका कोई वास्तविक आधार नहीं होता। थोड़ी-बहुत चिन्ता सभी को होती है और यह हमारे लक्ष्य की प्राप्ति या सफलता के लिए आवश्यक भी है। यदि चिंता बहुत बढ़ जाती है और इसके व्यापक दुष्प्रभाव व्यक्ति के पारिवारिक, सामाजिक और आर्थिक जीवन पर पड़ने लगता है तो हम इसे घबराहट और चिंता रोग (Anxiety Disorder) कहते हैं। .

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द्विध्रुवी विकार

द्रिध्रुवी विकार एक गंभीर प्रकार का मानसिक रोग है जो एक प्रकार का मनोदशा विकार है। इस रोग से ग्रसित रोगी की मनोदशा बारी-बारी से दो विपरीत अवस्थाओं में जाती रहती है। एक मनोदशा को सनक या उन्माद और दूसरी मनोदशा को अवसाद कहते हैं। सनक की मनोदशा में रोगी अति-आशावादी हो सकता है; अपने बारे मे बढ़ी-चढ़ी धारणा रख सकता है (जैसे मैं बहुत धनी, रचनाशील या शक्तिशाली हूँ); व्यक्ति अति-क्रियाशील हो सकता है (धड़ाधड़ भाषण, तेज गति से बदलते हुए विचार आदि); रोगी सोना नहीं चाहता या सोने को अनावश्यक कहता है आदि। दूसरी तरफ अवसाद की मनोदशा में रोगी उदास रहता है; उसको थकान लगती है; अपने को दोषी महसूस करता है या उसमें आशाहीनता दिखायी देती है। .

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पराप्राकृतिक संवाद

पराप्राकृतिक संवाद व्यक्ति का स्वयं, या किसी माध्यम द्वारा, चेतना की विशेष अवस्था में पराप्राकृतिक तत्वों, जैसे देवी-देवता, से मानसिक संपर्क में होने वाला अनुभव है, और इसका परिणाम ज्ञान प्राप्ति, समस्या समाधान या कोई विशेष अनुभूति देखा गया है। यह इलहाम या श्रुति का आधार है, और दुनिया के अनेक धर्मों में देखे गए हैं। इस अतार्किक (प्रतिभा या प्रज्ञामूलक) आयाम (देखें भारतीय दर्शन) को हिंदुओं में ज्ञान, इसाईयों में नौसिस, बौद्धों में प्रज्ञा, तथा इस्लाम में मारिफ नाम से जानते हैं। कुछ लोगों का मानना है कि पराप्राकृतिक तत्वों से संवाद की परम्परा लम्बे समय से रही है। मान्यता है कि यह संवाद, चेतना की विशेष अवस्थाओं, में संभव हैं, और चेतना की इन ऊँचाइयों में जाने की लालसा का प्रमाण तपस्या की अनेकों पद्धतियाँ हैं। पराप्राकृतिक संवाद का लोकहित में प्रसार करना देवकार्य माना गया। मनोवैज्ञानिक पिंकर सहज या अतार्किक मानसिक अनुभव को कोरा रूढ़ीवाद समझते हैं। पर ऐसे वैज्ञानिक भी हैं जिनके लिए यह मानसिक अनुभव चुनौती हैं। मन में ऐसे बदलाव का आधार संज्ञान की दो प्रणालियों, तार्किक और अतार्किक, में देखा जा सकता है। .

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परिवर्तन तनाव और नवाचार के प्रबंध

परिवर्तन एक संगठन के पर्यावरण, संरचना, प्रौद्योगिकी, या लोगों मे बद्लव् होता है। संगठनात्मक परिवर्तन तब होती है जब एक कंपनी एक संक्रमण से अपनी वर्तमान स्थिति के लिए कुछ वांछित भविष्य राज्य बनाता है। अगर परिव्रर्तन नही होता तो, प्रबंधक का काम आसान हो जाता। योजना करना आसान होता क्यूं कि आज और आने वाला कल मे कोई परिवर्तन नही होता। उसी तरह निर्णय लेना आसान हो क्यु कि अनिश्चितता नही होती। पर परिवर्तन तो हर संगठन कि सचाई है। परिवर्तन को संभालना हर प्रबंधक कि काम है। कर्मचारियों के लिए,परिवर्तन ही तनाव का कारण है। एक गतिशील और अनिश्चित माहौल से कर्मचारियों की बड़ी संख्या तनाव मे है। तनाव एक जटिल मुद्दा है। बाधाओं और मांगों के व्दारा तनाव कर्मचारियों मे बड रहा है। दबाव तनाव एक कारण है।इस संदर्भ में, शब्द 'तनाव' का केवल एक ही मतलब महत्वपूर्ण नकारात्मक परिणाम है, या संदर्भित संकट, हंस सेयेले(Hans Selye) के अनुसार जिसे वो युस्त्रेस्स् (eustress) कहता है, तनाव का परिणाम सहायक या अन्यथा सकारात्मक रहता है। तनाव कई शारीरिक और मानसिक लक्षण है जो प्रत्येक व्यक्ति की स्थिति के अनुसार बदलव् पैदा करता है। ये शारीरिक स्वास्थ्य गिरावट के रूप में अच्छी तरह से शामिल कर सकता है। तनाव प्रबंधन की प्रक्रिया आधुनिक समाज में एक खुश और सफल जीवन की कुंजी से एक के रूप में नामित किया गया है। नवाचार प्रबंधन नवाचार प्रक्रियाओं का प्रबंधन है। यह उत्पाद और संगठनात्मक दोनों का नवाचार है। नवाचार प्रबंधन एक प्रक्रिया हे जिस्मे रचनात्मक विचार को बदलकर एक उपयोगी उत्पाद,सेवा या आपरेशन की विधि बनाया जाता है। अभिनव प्रबंधन मे प्रबंधकों और इंजीनियरों के एक सामान्य समझ के साथ प्रक्रियाओं और लक्ष्यों को समज न चहिए। अभिनव प्रबंधन संगठन को बाहरी या आंतरिक अवसरों के लिए जवाब है, और अपनी रचनात्मकता का उपयोग विचारों, प्रक्रियाओं या उत्पादों नया पेश करने की अनुमति देता है। यह अनुसंधान एवं विकास में चलता नही है। यह एक कंपनी के उत्पाद विकास, विनिर्माण और विपणन के लिए रचनात्मक योगदान करने में हर स्तर पर कार्यकर्ताओं शामिल है।प्रबंधक को संगठन मे परिवर्तन लाने के लिए नवाचार लाना होता है। .

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फोबिया

दुर्भीति या फोबिया (Phobia) एक प्रकार का मनोविकार है जिसमें व्यक्ति को विशेष वस्तुओं, परिस्थितियों या क्रियाओं से डर लगने लगता है। यानि उनकी उपस्थिति में घबराहट होती है जबकि वे चीजें उस वक्त खतरनाक नहीं होती है। यह एक प्रकार की चिन्ता की बीमारी है। इस बीमारी में पीड़ित व्यक्ति को हल्के अनमनेपन से लेकर डर के भयावह दौरा तक पड़ सकता है। दुर्भीति की स्थिति में व्यक्ति का ध्यान कुछ एक लक्षणों पर केन्द्रित हो सकता है, जैसे-दिल का जोर-जोर से धड़कना या बेहोशी लगना। इन लक्षणों से जुड़े हुए कुछ डर होते है जैसे-मर जाने का भय, अपने उपर नियंत्रण खो देने या पागल हो जाने का डर। .

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बहुव्यक्तित्व विकार

बहुव्यक्तित्व विकार व्यक्तित्व की दो परस्परविरोधी अथवा सर्वथा भिन्न शैलियों का उसकी एक ही इकाई में अपनी पृथक्‌ सत्ता सुरक्षित रखते हुए, इकट्ठे रहने का बोध द्विव्यक्तित्व (Dual Personality) है। एक ही व्यक्ति के घेरे में रहकर भी ये अपने में सुसंबद्ध एवं व्यवस्थित होते हैं; एक दूसरे के प्रति तटस्थ एवं विस्मृत रहते हैं। जब एक व्यक्तित्व-खंड चेतना के धरातल पर सक्रिय रहता हैं तो दूसरे की स्मृति नहीं रहती, यद्यपि स्मृति के मामले में अपवाद भी होते हैं। अपने ही भिन्न स्वरूपबोधों की असंपृक्तता व्यवहार में प्रकट होकर लोगों को अचरज में डाल देती है। सर्वथा विरोधी आचरणों से उसके सामाजिक संबंध लगातार बाधित एवं व्यतिक्रमित होते हैं, टूट जाते हैं। द्विव्यक्तित्वधारी, मानसिक चिकित्सा का एक नैदानिक विषय (पैथालाजिकल केस) बन जाता है। ये व्यक्तित्व-खंड दो से ज्यादा भी होते है। इनके कई नाम भी चलते हैं- बहुव्यक्तित्व (मल्टिपुल पर्सनैलिटी), खंडित व्यक्तित्व (स्प्लिट पर्सनैलिटी); असंपृक्त व्यक्तित्व (Dissociative personality), एकांतरित तथा स्थानांतरित (आल्टर्नेंट तथा डिस्प्लेस्ड) व्यक्तित्व आदि। लोककथाओं तथ साहित्य में ऐसे व्यक्तित्व परिवर्तन के दृष्टांत मिलते हैं। राबर्ट लुई सटीवेंसन के प्रसिद्ध उपन्यास 'डॉ॰ जोकिल ऐंड मि.

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बाल यौन शोषण (पीडोफीलिया)

एक चिकित्सा निदान के रूप में, बाल यौन शोषण पीडोफिलिया (या पेडोफिलिया), को आमतौर पर वयस्कों या बड़े उम्र के किशोरों (16 या उससे अधिक उम्र) में मानसिक विकार के रूप में परिभाषित किया जाता है, जो गैर-किशोर बच्चों (आमतौर पर 13 साल या उससे कम उम्र, हालांकि किशोरवय का समय भिन्न हो सकता है) के प्रति प्राथमिक या विशेष यौन रूचि द्वारा चरितार्थ होता है। 16 या उससे अधिक उम्र के किशोर शोषकों के मामले में बच्चे को कम से कम पांच साल छोटा होना चाहिए.

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बुद्धि लब्धि

एक बहुत बड़ी आबादी के IQs एक सामान्य वितरण के साथ मोडेल्ड किया जा सकता है। बुद्धि लब्धि या इंटेलिजेंस कोशेंट (Intelligence quotient / IQ) कई अलग मानकीकृत परीक्षणों से प्राप्त एक गणना है जिससे बुद्धि का आकलन किया जाता है। "IQ" पद की उत्पत्ति जर्मन शब्द Intelligenz-Quotient से हुई है जिसका पहली बार प्रयोग जर्मन मनोवैज्ञानिक विलियम स्टर्न ने 1912 में 20वीं सदी की शुरुआत में अल्फ्रेड बाईनेट और थेओडोर सिमोन द्वारा प्रस्तावित पद्धतियों के लिए किया, जो आधुनिक बच्चों के बौद्धिक परीक्षण के लिए अपनाया गया था। हालांकि "IQ" शब्द का उपयोग आमतौर पर अब भी होता है किन्तु, अब वेचस्लेर एडल्ट इंटेलिजेंस स्केल जैसी पद्धतियों का उपयोग आधुनिक बौद्धिक स्तर (IQ) परीक्षण में किया जाता है जो गौस्सियन बेल कर्व (Gaussian bell curve) किसी विषय के प्रति झुकाव पर नापे गये रैंक के आधार पर किया जाता है, जिसमें केन्द्रीय मान (औसत IQ)100 होता है और मानक विचलन 15 होता है। हालांकि विभिन्न परीक्षणों में मानक विचलन अलग-अलग हो सकते हैं। बौद्धिक स्तर (IQ) की गणना को रुग्णता और मृत्यु दर, अभिभावकों की सामाजिक स्थिति और काफी हद तक पैतृक बौद्धिक स्तर (IQ) जैसे कारकों के साथ जोड़कर देखा जाता है। जबकि उसकी विरासत लगभग एक सदी से जांची जा चुकी है फिर भी इस बात को लेकर विवाद बना हुआ है कि उसकी कितनी विरासत ग्राह्य है और विरासत के तंत्र अभी भी बहस के विषय बने हुए हैं.

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बौद्धिक अशक्‍तता

बौद्धिक अशक्‍तता (Intellectual disability) एक सामान्यीकृत मानसिक रोग है जिसमें व्यक्ति की संज्ञात्मक शक्ति (cognitive functioning) काफी हद तक न्यून होती है और दो या अधिक समायोजनात्मक व्यवहारों (adaptive behaviors) में कमी देखी जाती है। इसे पहले मानसिक मन्दता (Mental retardation) कहते थे। मानसिक मंदता विकास संबंधित एक मानसिक अवस्था है, जो की 02% तक लोगों में पाई जाती है। मानसिक मंदता किसी भी वर्ग, धर्म, जाति, या लिंग के व्यक्ति को हो सकती है। सामान्यतः इसके लक्षण बाल्यावस्था या 18 साल के पहले ही नजर आने लगते हैं। .

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मथुरा दास माथुर अस्पताल

श्रेणी:अस्पताल श्रेणी:चिकित्सालय.

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मन

मन मस्तिष्क की उस क्षमता को कहते हैं जो मनुष्य को चिंतन शक्ति, स्मरण-शक्ति, निर्णय शक्ति, बुद्धि, भाव, इंद्रियाग्राह्यता, एकाग्रता, व्यवहार, परिज्ञान (अंतर्दृष्टि), इत्यादि में सक्षम बनाती है।Dictionary.com, "mind": "1.

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मनस्ताप

मनस्ताप (Psychosis) मन की वह दशा है जिसमें मन संसार के साधारण व्यवहार करने में असमर्थ रहता है। मनोविक्षिप्ति और पागलपन दोनों शब्द असाधारण मनोदशा के बोधक है, परंतु जहाँ पागलपन एक साधारण प्रयोग का शब्द है, जिसका कानूनी उपयोग भी किया जाता है, वहाँ मनोविक्षिप्ति चिकित्साशास्त्र का शब्द है जिसका चिकित्सा में विशेष अर्थ है। पागल व्यक्ति को प्राय: अपने शरीर एवं कामों की सुध-बुध नहीं रहती। उसकी हिफाजत दूसरे लोगों को करनी पड़ती है। अतएव यदि वह कोई अपराध का काम कर डाले, तो उसे दंड का भागी नहीं माना जाता। इससे मिलता-जुलता, परंतु इससे पृथक, अर्थ मनोविक्षिप्ति का है। मनोविक्षिप्त व्यक्ति में साधारण असामान्यता से लेकर बिल्कुल पागलपन जैसे व्यवहार देखे जाते हैं। कुछ मनोविक्षिप्त व्यक्ति थोड़ी ही चिकित्सा से अच्छे हो जाते हैं। ये समाज में रहते हैं और समाज का कोई भी अहित नहीं करते। उनमें अपराध की प्रवृत्ति नहीं रहती। इसके विपरीत, कुछ मनोविक्षिप्त व्यक्तियों में प्रबल अपराध की प्रवृत्ति रहती है। वे अपने भीतरी मन में बदले की भावना रखते हैं, जिसे विक्षिप्त व्यवहारों में प्रकट करते हैं। कुछ ऐसे विक्षिप्त भी होते हैं जिनसे अच्छे और बुरे व्यवहार में अंतर समझने की क्षमता ही नहीं रहती। वे हँसते-हँसते किसी व्यक्ति का गला घोट दे सकते हैं, पर उन्हें ऐसा नहीं जान पड़ता कि उन्होंने कोई जघन्य अपराध का डाला है। इस तरह मनोविक्षिप्ति में पागलपन का समावेश होता है, परंतु सभी मनोविक्षिप्त व्यक्तियों को पागल नहीं कहा जा सकता है। .

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मनोरोग विज्ञान

मनोरोग विज्ञान या मनोरोग विद्या (Psychiatry) चिकित्सा क्षेत्र की एक विशेषज्ञता (specialty) है जो मनोविकारों का अध्ययन करती है। .

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मनोविदलता

मनोविदलता (Schizophrenia/स्किज़ोफ्रेनिया) एक मानसिक विकार है। इसकी विशेषताएँ हैं- असामान्य सामाजिक व्यवहार तथा वास्तविक को पहचान पाने में असमर्थता। लगभग 1% लोगो में यह विकार पाया जाता है। इस रोग में रोगी के विचार, संवेग तथा व्यवहार में आसामान्य बदलाव आ जाते हैं जिनके कारण वह कुछ समय लिए अपनी जिम्मेदारियों तथा अपनी देखभाल करने में असमर्थ हो जाता है। 'मनोविदलता' और 'स्किज़ोफ्रेनिया' दोनों का शाब्दिक अर्थ है - 'मन का टूटना'। .

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मनोविज्ञान

मनोविज्ञान (Psychology) वह शैक्षिक व अनुप्रयोगात्मक विद्या है जो प्राणी (मनुष्य, पशु आदि) के मानसिक प्रक्रियाओं (mental processes), अनुभवों तथा व्यक्त व अव्यक्त दाेनाें प्रकार के व्यवहाराें का एक क्रमबद्ध तथा वैज्ञानिक अध्ययन करती है। दूसरे शब्दों में यह कहा जा सकता है कि मनोविज्ञान एक ऐसा विज्ञान है जो क्रमबद्ध रूप से (systematically) प्रेक्षणीय व्यवहार (observable behaviour) का अध्ययन करता है तथा प्राणी के भीतर के मानसिक एवं दैहिक प्रक्रियाओं जैसे - चिन्तन, भाव आदि तथा वातावरण की घटनाओं के साथ उनका संबंध जोड़कर अध्ययन करता है। इस परिप्रेक्ष्य में मनोविज्ञान को व्यवहार एवं मानसिक प्रक्रियाओं के अध्ययन का विज्ञान कहा गया है। 'व्यवहार' में मानव व्यवहार तथा पशु व्यवहार दोनों ही सम्मिलित होते हैं। मानसिक प्रक्रियाओं के अन्तर्गत संवेदन (Sensation), अवधान (attention), प्रत्यक्षण (Perception), सीखना (अधिगम), स्मृति, चिन्तन आदि आते हैं। मनोविज्ञान अनुभव का विज्ञान है, इसका उद्देश्य चेतनावस्था की प्रक्रिया के तत्त्वों का विश्लेषण, उनके परस्पर संबंधों का स्वरूप तथा उन्हें निर्धारित करनेवाले नियमों का पता लगाना है। .

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मनोविकारविज्ञानी

मनोविज्ञानी एक ऐसा चिकित्सक होता है जो मनोरोग का विशेषज्ञ होता है और मानसिक विकारों के उपचार के लिए योग्य होता है।अमेरिकी मनोरोग एसोसिएशन.

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मनोविकृतिविज्ञान

मनोविकृतिविज्ञान (psychopathology) शब्द का कई अर्थों में उपयोग किय जाता है। इसमें से एक अर्थ यह है: मानसिक रोग, मानसिक विपत्ति (mental distress) तथा असामान्य/दुरनुकूलक व्यवहार का अध्ययन। इस अर्थ में 'साइकोपैथोलॉजी' शब्द का मनोरोगविज्ञान में प्रायः उपयोग होता है जहाँ 'पैथोलॉजी' का अर्थ 'रोग प्रक्रिया' से लिया जाता है। .

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मानस शास्त्र

साइकोलोजी या मनोविज्ञान (ग्रीक: Ψυχολογία, लिट."मस्तिष्क का अध्ययन",ψυχήसाइके"शवसन, आत्मा, जीव" और -λογία-लोजिया (-logia) "का अध्ययन ") एक अकादमिक (academic) और प्रयुक्त अनुशासन है जिसमें मानव के मानसिक कार्यों और व्यवहार (mental function) का वैज्ञानिक अध्ययन (behavior) शामिल है कभी कभी यह प्रतीकात्मक (symbol) व्याख्या (interpretation) और जटिल विश्लेषण (critical analysis) पर भी निर्भर करता है, हालाँकि ये परम्पराएँ अन्य सामाजिक विज्ञान (social science) जैसे समाजशास्त्र (sociology) की तुलना में कम स्पष्ट हैं। मनोवैज्ञानिक ऐसी घटनाओं को धारणा (perception), अनुभूति (cognition), भावना (emotion), व्यक्तित्व (personality), व्यवहार (behavior) और पारस्परिक संबंध (interpersonal relationships) के रूप में अध्ययन करते हैं। कुछ विशेष रूप से गहरे मनोवैज्ञानिक (depth psychologists) अचेत मस्तिष्क (unconscious mind) का भी अध्ययन करते हैं। मनोवैज्ञानिक ज्ञान मानव क्रिया (human activity) के भिन्न क्षेत्रों पर लागू होता है, जिसमें दैनिक जीवन के मुद्दे शामिल हैं और -; जैसे परिवार, शिक्षा (education) और रोजगार और - और मानसिक स्वास्थ्य (treatment) समस्याओं का उपचार (mental health).

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मानसिक चिकित्सालय

मानसिक चिकित्सालय (Psychiatric hospitals या mental hospitals) उन चिकित्सालयों को कहते हैं जहाँ गम्भीर मनोविकारों (जैसे द्विध्रुवी विकार, मनोविदालिता आदि) की चिकित्सा होती है। श्रेणी:चिकित्सा.

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मानसिक रोगों की सूची

यहाँ मानसिक रोगों की सूची दी हुई है - .

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मानसिक स्वास्थ्य

मानसिक स्वास्थ्य या तो संज्ञानात्मक अथवा भावनात्मक सलामती के स्तर का वर्णन करता है या फिर किसी मानसिक विकार की अनुपस्थिति को दर्शाता है।About.com (2006, जुलाई 25).

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मेकियावेलियनिस्म

निकोलो मेकियवेली ओक्सवोर्ड अंग्रेजी शब्दकोश के अनुसार मेकियावेलियनिस्म का अर्थ "शासन कला में या सामान्य आचरण में चालाक और कपट होना" है। यह इताल्वि रजनयिक निकोलो मेकियवेलि के प्रसिद्ध किताब "द प्रिंस" के मध्यम से प्राप्त हुआ है। इस शब्द का समान उपयोग आधुनिक मनोविज्ञान में भी किया जाता है, जहां यह अंधेरे त्रय हस्तियों का वर्णन करता है। जो विशेषता से निंदक विश्वासों और व्यावहारिक नैतिकता के साथ जुड़े एक duplicitous पारस्परिक शैली है। "मेकियावेलियनिस्म" एक शब्द के रूप में पहली बार १६२६ को ओक्स्वोर्ड अंग्रेजी शब्द्कोश में प्रकाशित हुआ था। .

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मोटापा

मोटापा (अंग्रेज़ी: Obesity) वो स्थिति होती है, जब अत्यधिक शारीरिक वसा शरीर पर इस सीमा तक एकत्रित हो जाती है कि वो स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभाव डालने लगती है। यह आयु संभावना को भी घटा सकता है। शरीर भार सूचकांक (बी.एम.आई), मानव भार और लंबाई का अनुपात होता है, जब २५ कि.ग्रा./मी.

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रोगों की सूची

रोगों की इस सूची में रोगों के मुख्य वर्ग शामिल हैं।.

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शार्लेट म्यू

शार्लेट मेरी म्यू शार्लेट म्यू .

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शिथिलता

शिथिलता एक ऐसा व्यवहार है जिसे किन्हीं क्रियाओं या कार्यों को परवर्ती समय के लिए स्थगन द्वारा परिलक्ष्यित किया जाता है। मनोवैज्ञानिक प्रायः शिथिलता को किसी कार्य या फैसले के आरंभ या समाप्ति से जुड़ी चिंता के साथ मुकाबला करने की एक क्रियाविधि के रूप में उद्धृत करते हैं। मनोविज्ञान के शोधकर्ता भी शिथिलता को वर्गीकृत करने के लिए तीन मानदंडों का उपयोग करते हैं। किसी भी व्यवहार को शिथिलता के रूप में वर्गीकृत करने के लिए उसका उत्पादकविहीन, अनावश्यक तथा विलंबकारी होना अत्यंत आवश्यक है। शिथिलता के परिणामस्वरूप किसी भी व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारियों या वादों को पूरा नहीं कर पाने की स्थिति में तनाव, अपराध बोध, व्यक्तिगत उत्पादकता की हानि, संकट की सृष्टि और अन्य व्यक्तियों की असहमति का सामना करना पड़ सकता है। इन संयुक्त भावनाओं से शिथिलता को और अधिक प्रोत्साहन मिल सकता है। हालांकि लोगों के लिए कुछ हद तक शिथिलता दिखलाना सामान्य है, लेकिन यह उस समय एक समस्या का रूप धारण कर लेता है जब यह सामान्य क्रियाकलापों में बाधा उत्पन्न करने लगता है। दीर्घकालीन शिथिलता किसी अंतर्निहित मनोवैज्ञानिक विकार का एक संकेत हो सकता है। .

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शव कामुकता

1896 की इस इतालियन पेंटिंग में आप देख सकते हैं एक सरफिरे शवप्रेमी को शैतान नर तेगु मरी हुई मादा तेगु के साथ मज़े ले रहा है किसी शव के साथ सेक्स करने की इच्छा को शव कामुकता कहते हैं। रोज़्मैन और रेज़्निक नामक दो विद्वानों ने 1989 में इस मानसिक रोग के 34 मामलों का अध्धयन किया। उन्होंने पाया कि शवप्रेमी कई कारणों से लाश के साथ सेक्स करते हैं -.

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सनक (व्यवहार)

आम तौर पर सनक का सम्बन्ध एक व्यक्ति के "सामाजिक रूप से अनुपयुक्त" विचित्र या अनोखे व्यवहार से है। यह आवश्यक नहीं है की ऐसा व्यवहार प्रमाण्य रूप से अनुपयुक्त हो, परन्तु फिर भी इसे विचित्र या अनावश्यक माना जाएगा.

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संज्ञानात्मक विकार

संज्ञानात्मक विकार (Cognitive disorders) मनोविकारों की वह श्रेणी है जो व्यक्ति के अधिगम (सीखने), स्मृति, अवगम (perception), तथा समस्यापूर्ति (problem solving) आदि को प्रभावित करते हैं। श्रेणी:मनोविकार.

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संविभ्रम

संविभ्रम (Paranoia) एक गंभीर भावात्मक विकार है और तर्कसंगत, सुसंबद्ध, जटिल तथा प्राय: उत्पीड़क विभ्रमों या मिथ्या विश्वासों का उत्तरोत्तर बढ़ता हुआ सिलसिला इसका आंतरिक लक्षण है। संविभ्रमी व्यक्ति को अपनी योग्यता, प्रभुता, पद की वरिष्ठता, या निरंतर यातना का भ्रम होता है। यह उन्माद का ही एक रूप है, परंतु इसमें अन्य सभी मानसिक क्रियाएँ बहुधा स्वाभाविक अवस्था में रहती हैं। कमरे में किसी नए व्यक्ति के प्रविष्ट होते ही उपस्थित मित्रमंडली के एकाएक बातचीत बंद कर देने पर, व्यक्ति का यह समझना कि अभी उसकी की चर्चा हो रही थी, एक सामान्य प्रतिक्रिया है। किसी जनसंकुल होटल में घुसने पर सभी अपनी ओर देख रहे हैं यह समझना भी स्वाभविक प्रतिक्रिया है, किंतु संविभ्रमी प्रतिक्रिया में ये भाव स्थायी और व्यापक हो जाते हैं। .

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घबड़ाहट के दौरे (पैनिक अटैक)

पैनिक अटैक (घबड़ाहट के दौरे), तीव्र भय या घबड़ाहट के दौरों को कहते हैं जो अचानक पैदा होते हैं और अपेक्षाकृत छोटी अवधि के होते हैं। घबड़ाहट के दौरे आम तौर पर अचानक शुरू होते हैं, 10 मिनट के अंदर चरम अवस्था तक पहुँच जाते हैं और मुख्यतः 30 मिनट के डीएसएम-IV के अंदर ख़त्म हो जाते हैं। घबड़ाहट के दौरे 15 सेकण्ड की अल्पावधि से लेकर कभी-कभी घंटों तक जारी रहने वाले या आवर्ती (साइक्लिक) भी हो सकते हैं। अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन के अनुसार, उन परिस्थितियों में जहाँ पहले भी दौरे पड़ चुके हैं, पीड़ित व्यक्ति अक्सर दौरों के बीच गंभीर पूर्वाभासी आशंका और सीमित लक्षण वाले दौरों का अनुभव करते हैं। घबड़ाहट के दौरों के प्रभावों में भिन्नता होती है। कुछ, विशेष रूप से पहली-बार के पीड़ितों को आपातकालीन सेवाओं की आवश्यकता पड़ सकती है। घबड़ाहट के दौरे का अनुभव करने वाले कई लोगों को, ज्यादातर पहली बार के दौरे में दिल के दौरे या तंत्रिका अवरोध (नर्वस ब्रेकडाउन) का डर लगा रहता है। कहा जाता है कि घबड़ाहट के दौरे का अनुभव, किसी व्यक्ति की जिंदगी के सबसे भयावह, कष्टप्रद और असहज अनुभवों में से एक होता है। .

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विन्सेंट वैन गो

विन्सेंट विलेम वैन गो (डच: Vincent Willem van Gogh, ३० मार्च १८५३ – २९ जुलाई १८९०) नीदरलैण्ड के अत्यंत प्रतिभावान चित्रकार थे जिनकी पर-प्रभाववादी चित्रकारी ने २०वीं शताब्दी की आधुनिक कला पर अमिट छाप छोड़ी है। इनके चित्र विशद रंगों और संवेदनाओं से भरे हैं। जीवनभर इन्हें कोई सम्मान नहीं मिला, बल्कि मानसिक रोगों से लड़ते रहे, अपना कान तक काट डाला और अंततः ३७ वर्ष की आयु में गोली मार कर आत्महत्या कर ली। मृत्योपरांत इनकी ख्याति बढ़ती ही गई और आज इन्हें संसार के महानतम चित्रकारों में गिना जाता है और आधुनिक कला के संस्थापकों में से एक माना जाता है। वैन गो ने २८ वर्ष की आयु में चित्रकारी करना शुरु किया और जीवन के अंतिम दो वर्षों में अपनी सबसे महत्त्वपूर्ण रचनाएं बनाईं। ९ साल के समय में इन्होंने २००० से अधिक चित्र बनाए जिनमें लगभग ९०० तैल-चित्र शामिल हैं। इनके द्वारा रचित स्वयं-चित्र, परिदृश्य, छवियाँ और सूरजमुखी विश्व की सबसे प्रसिद्ध और महंगी कलाकृतियों में शामिल हैं। वैन गो ने अपने वयस्क जीवन की शुरुआत की कलाकृतियों के व्यापारियों के साथ काम करते हुए और द हेग, लंदन और पैरिस के बीच काफी घूमे। इसके बाद इन्होंने इंग्लैण्ड में कुछ समय पढ़ाया भी। इनकी कामना थी पादरी बनने की और इसी मकसद से इन्होंने १८७९ से बेल्जियम की एक खान में मिशनरी का काम करना शुरु किया। इसी दौरान इन्होंने आस-पास के लोगों के चित्र बनाना शुरु किया और १८८५ में अपनी पहली मुख्य रचना आलूहारी (The Potato Eaters, द पोटेटो ईटर्स) बनाई। उस समय ये अपने चित्रों में मलिन रंगों का उपयोग करते थे। मार्च १८८६ में ये कलाकार बनने का ध्येय लेकर पैरिस पहुंचे और इनका सामना हुआ फ्रांसीसी प्रभाववादी कलाकारों से। कुछ समय बाद विन्सेंट वैन गो दक्षिणी फ्रांस पहुंचे, जहाँ की चकाचौंध धूप इन्हें बहुत सुहाई। तबसे इनके चित्रों में चमकीले रंगों का प्रयोग बढ़ना शुरु हुआ। आर्ल में रहते हुए इन्होंने अपनी निराली शैली विकसित की जिससे आज इनकी पहचान होती है। इनके मानसिक रोगों का इनकी कला पर क्या प्रभाव डाला इसपर बहुत चर्चा हुई है। आजकल यह माना जाता है कि ये परिपूर्ण कलाकार थे जो अपने रोग के कारण नष्ट हुए समय को लेकर निराश रहते थे। .

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वृहत् अवसादी मनोविक्षिप्ति

वृहत् अवसादी मनोविक्षिप्ति या वृहत् अवसादी रोग (Major depressive disorder (MDD)) एक मानसिक रोग है जिसमें बहुत अधिक अवसाद होता है जिससे व्यक्ति के आत्म सम्मान में कमी आती है और वह सामान्य रुचि की गतिविधियों में भी आनन्द नहीं आता। यह सामान्य अवसाद से अलग है और इसमें व्यक्ति एक प्रकार से अक्षम बनाने वाला मनोरोग है जो व्यक्ति के परिवार, कार्य, स्कूल, सोने एवं खाने की आदतों तथा सामान्य स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित करता है। इससे ग्रस्त बहुत से लोग आत्महत्या कर लेते हैं। .

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कार्ल रोजर्स

कार्ल रोजर्स (Carl Ransom Rogers) (8 जनवरी 1902 – 4 फ़रवरी 1987) अमेरिका के प्रसिद्ध मनश्चिकित्सक थे। मनश्चिकित्सा में मानवीय संवेदना को स्थान देने के लिये प्रसीध हैं। उपचारार्थी केंद्रित मनश्चिकित्सा नामक मानसिक रोगों के निवारण की एक मनोवैज्ञानिक विधि कार्ल रोजर्स द्वारा प्रतिपादित की गई है। रोजर्स का स्व-वाद प्रसिद्ध है जो अधिकांशत: उपचार प्रक्रिया या परिस्थितियों से उद्भूत प्रदत्तों पर अवलंबित है। रोजर्स की मूल कल्पनाएँ स्वविकास, स्वज्ञान, स्वसंचालन, बाह्य तथा आंतरिक अनुभूतियों के साथ परिचय, सूझ का विकास करना, भावों की वास्तविक रूप में स्वीकृति इत्यादि संबंधी हैं। वस्तुत: व्यक्ति में वृद्धिविकास, अभियोजन एवं स्वास्थ्यलाभ तथा स्वस्फुटन की स्वाभाविक वृत्ति होती है। मानसिक संघर्ष तथा संवेगात्मक क्षोभ इस प्रकार की अनुभूति में बाधक होते हैं। इन अवरोधों का निवारण भावों के प्रकाशन और उनको अंगीकार करने से सूझ के उदय होने से हो जाता है। इस विधि में ऐसा वातावरण उपस्थित किया जाता है कि रोगी अधिक से अधिक सक्रिय रहे। वह स्वतंत्र होकर उपचारक के सम्मुख अपने भावों, इच्छाओं तथा तनाव संबंधी अनुभूतियों का अभिव्यक्तीकरण करे, उद्देश्य, प्रयोजन को समझे और संरक्षण के लिए दूसरे पर आश्रित न रह जाए। इसमें स्वसंरक्षण अथवा अपनी स्वयं देख देख आवश्यक होती है। उपचारक परोक्ष रूप से, बिना हस्तक्षेप के रोगी को वस्तुस्थिति की चेतना में केवल सहायता देता है जिससे उसके भावात्मक, ज्ञानात्मक क्षेत्र में प्रौढ़ता आए। वह निर्देश नहीं देता, न तो स्थिति की व्याख्या ही करता है। .

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अधकपारी

अधकपारी या माइग्रेन एक जटिल विकार है जिसमें बार-बार मध्यम से गंभीर सिरदर्द होता है और अक्सर इसके साथ कई स्वैच्छिक तंत्रिका तंत्र से संबंधित लक्षण भी होते हैं। आमतौर पर सिरदर्द एक हिस्से को प्रभावित करता है और इसकी प्रकृति धुकधुकी जैसी होती है जो 2 से लेकर 72 घंटों तक बना रहता है। संबंधित लक्षणों में मितली, उल्टी, फोटोफोबिया (प्रकाश के प्रति अतिरिक्त संवेदनशीलता), फोनोफोबिया (ध्वनि के प्रति अतिरिक्त संवेदनशीलता) शामिल हैं और दर्द सामान्य तौर पर शारीरिक गतिविधियों से बढ़ता है। माइग्रेन सिरदर्द से पीड़ित एक तिहाई लोगों को ऑरा के माध्यम इसका पूर्वाभास हो जाता है, जो कि क्षणिक दृष्य, संवेदन, भाषा या मोटर (गति पैदा करने वाली नसें) अवरोध होता है और यह संकेत देता है कि शीघ्र ही सिरदर्द होने वाला है। माना जाता है कि माइग्रेन पर्यावरणीय और आनुवांशिकीय कारकों के मिश्रण से होते हैं। लगभग दो तिहाई मामले पारिवारिक ही होते हैं। अस्थिर हार्मोन स्तर भी एक भूमिका निभा सकते हैं: माइग्रेन यौवन पूर्व की उम्र वाली लड़कियों को लड़कों की अपेक्षा थोड़ा अधिक प्रभावित करता है लेकिन पुरुषों की तुलना में महिलाओं को दो से तीन गुना अधिक प्रभावित करता है। आम तौर पर गर्भावस्था के दौरान माइग्रेन की प्रवृत्ति कम होती है।माइग्रेन की सटीक क्रियाविधि की जानकारी नहीं है। हलांकि इसको न्यूरोवेस्कुलर विकार माना जाता है। प्राथमिक सिद्धांत सेरेब्रल कॉर्टेक्स (प्रमस्तिष्कीय आवरण) की बढ़ी हुयी उत्तेजना तथा ब्रेनस्टेम(रीढ़ के पास का मस्तिष्क का हिस्सा) के ट्राइगेमिनल न्यूक्लियस (त्रिपृष्ठी नाभिक) में न्यूरॉन्स दर्द के असमान्य नियंत्रण से संबंधित है। आरंभिक अनुशंसित प्रबंधन में, सिरदर्द के लिये सामान्य दर्दनाशक दवाएं जैसे आइब्युप्रोफेन और एसिटामिनोफेन, मितली और शुरुआती समस्याओं के लिये मितलीरोधी दवायें दी जाती हैं। जहां पर सामान्य दर्दनाशक दवायें प्रभावी नहीं होती हैं वहां पर विशिष्ट एजेन्ट जैसे ट्रिप्टन्स या एरगोटामाइन्स का उपयोग किया जा सकता है। आयुर्वेद में इसे अर्धावभेदक कहा गया है। अर्धावभेदक का वर्णन आयुर्वेद शास्त्र के चरक संहिता में किया गया है जो कि इस प्रकार है - .

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अपराधी रूपरेखा

यह भी आपराधिक रूपरेखा के रूप में जाना अपराधी रूपरेखा, सही भविष्यवाणी और अज्ञात आपराधिक विषयों या अपराधियों की विशेषताओं प्रोफ़ाइल करने के लिए जांचकर्ताओं की मदद करने का इरादा है कि एक व्यवहार और खोजी उपकरण है। अपराधी रूपरेखा भी आपराधिक रूपरेखा, आपराधिक व्यक्तित्व की रूपरेखा के रूप में जाना जाता है, क्रिमिनोलोजिकल प्रोफाइलिंग, व्यवहार की रूपरेखा या आपराधिक जांच विश्लेषण। ज्योग्राफिक प्रोफाइलिंग एक अपराधी प्रोफ़ाइल करने के लिए एक और तरीका है। पीपिंग टॉम होम्स और होम्स (२००२) आपराधिक रूपरेखा के तीन मुख्य लक्ष्यों की रूपरेखा.

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अष्टाङ्गहृदयम्

अष्टाङ्गहृदयम्, आयुर्वेद का प्रसिद्ध ग्रंथ है। इसके रचयिता वाग्भट हैं। इसका रचनाकाल ५०० ईसापूर्व से लेकर २५० ईसापूर्व तक अनुमानित है। इस ग्रन्थ में ग्रन्थ औषधि (मेडिसिन) और शल्यचिकित्सा दोनो का समावेश है। चरकसंहिता, सुश्रुतसंहिता और अष्टाङ्गहृदयम् को सम्मिलित रूप से वृहत्त्रयी कहते हैं। अष्टांगहृदय में आयुर्वेद के सम्पूर्ण विषय- काय, शल्य, शालाक्य आदि आठों अंगों का वर्णन है। उन्होंने अपने ग्रन्थ के विषय में स्वयं ही कहा है कि, यह ग्रन्थ शरीर रूपी आयुर्वेद के हृदय के समान है। जैसे- शरीर में हृदय की प्रधानता है, उसी प्रकार आयुर्वेद वाङ्मय में अष्टांगहृदय, हृदय के समान है। अपनी विशेषताओं के कारण यह ग्रन्थ अत्यन्त लोकप्रिय हुआ। .

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असामान्य मनोविज्ञान

आसामान्य मनोविज्ञान (Abnormal Psychology) मनोविज्ञान की वह शाखा है जो मनुष्यों के असाधारण व्यवहारों, विचारों, ज्ञान, भावनाओं और क्रियाओं का वैज्ञानिक अध्ययन करती है। असामान्य या असाधारण व्यवहार वह है जो सामान्य या साधारण व्यवहार से भिन्न हो। साधारण व्यवहार वह है जो बहुधा देखा जाता है और जिसको देखकर कोई आश्चर्य नहीं होता और न उसके लिए कोई चिंता ही होती है। वैसे तो सभी मनुष्यों के व्यवहार में कुछ न कुछ विशेषता और भिन्नता होती है जो एक व्यक्ति को दूसरे से भिन्न बतलाती है, फिर भी जबतक वह विशेषता अति अद्भुत न हो, कोई उससे उद्विग्न नहीं होता, उसकी ओर किसी का विशेष ध्यान नहीं जाता। पर जब किसी व्यक्ति का व्यवहार, ज्ञान, भावना, या क्रिया दूसरे व्यक्तियों से विशेष मात्रा और विशेष प्रकार से भिन्न हो और इतना भिन्न होकि दूसरे लोगों को विचित्र जान पड़े तो उस क्रिया या व्यवहार को असामान्य या असाधारण कहते हैं। इसका विषय-वस्तु मूलतः अनाभियोजित व्यवहारों (maladaptive behaviour), व्यक्तित्व अशांति (Personality disturbances) एवं विघटित व्यक्तित्व (disorganized personality) का अध्ययन करने तथा उनके उपचार (treatment) के तरीकों पर विचार करने से संबंधित है। असामान्य मनोविज्ञान के अन्तर्गत के अन्तर्गत आने वाले कुछ महत्त्वपूर्ण विषय हैं-.

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अंतराबंध

मनोविदलिता या अंतराबंध (स्किज़ोफ़्रीनीया / Schizophrenia) कई मानसिक रोगों का समूह है जिनमें बाह्य परिस्थितियों से व्यक्ति का संबंध असाधारण हो जाता है। कुछ समय पूर्व लक्षणों के थोड़ा-बहुत विभिन्न होते हुए भी रोग का मौलिक कारण एक ही माना जाता था। किंतु अब प्रायः सभी सहमत हैं कि अंतराबंध जीवन की दशाओं की प्रतिक्रिया से उत्पन्न हुए कई प्रकार के मानसिक विकारों का समूह है। अंतराबंध को अंग्रेजी में डिमेंशिया प्रीकॉक्स (Dementia praecox) भी कहते हैं। अंतराबंध की गणना बड़े मनोविकारों में की जाती है। मानसिक रोगों के अस्पतालों में 55 प्रतिशत इस रोग के रोगी पाए जाते हैं और प्रथम बार आने वालों में ऐसे रोगी 25 प्रतिशत से कम नहीं होते। इस रोग की चिकित्सा में बहुत समय लगने से इस रोग के रोगियों की संख्या अस्पतालों में उत्तरोत्तर बढ़ती रहती है। यह अनुमान लगाया गया है कि साधारण जनता में से दो से तीन प्रतिशत व्यक्ति इस रोग से ग्रस्त होते हैं। पुरुषों में 20 से 24 वर्ष तक और स्त्रियों में 35 से 39 वर्ष तक की आयु में यह रोग सबसे अधिक होता है। अस्पतालों में भर्ती हुए रोगियों में से 40 प्रतिशत शीघ्र ही नीरोग हो जाते हैं। शेष 60 को जीवनपर्यंत या बहुत वर्षों तक अस्पताल ही में रहना पड़ता है। .

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उन्माद

उन्माद (mania/मेनिया) एक प्रकार का मानसिक रोग है जिसको मनस्ताप के अंतर्गत वर्गीकृत किया जाता है। इसमे व्यक्ति की भावनाओं तथा संवेग में कुछ समय के लिए असामान्य परिवर्तन आ जाते है, जिनका प्रभाव उसके व्यवहार, सोच, निद्रा, तथा सामाजिक मेल जोल पर पड़ने लगता है। यदि इस बीमारी का उपचार नहीं कराया जाए तो इसके बार-बार होने की संभावना बहुत हो जाती है। .

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यहां पुनर्निर्देश करता है:

मनोरोग, मानस रोग, मानसिक बीमारी, मानसिक रोग

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