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मध्य एशिया

सूची मध्य एशिया

मध्य एशिया एशिया के महाद्वीप का मध्य भाग है। यह पूर्व में चीन से पश्चिम में कैस्पियन सागर तक और उत्तर में रूस से दक्षिण में अफ़ग़ानिस्तान तक विस्तृत है। भूवैज्ञानिकों द्वारा मध्य एशिया की हर परिभाषा में भूतपूर्व सोवियत संघ के पाँच देश हमेशा गिने जाते हैं - काज़ाख़स्तान, किरगिज़स्तान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज़बेकिस्तान। इसके अलावा मंगोलिया, अफ़ग़ानिस्तान, उत्तरी पाकिस्तान, भारत के लद्दाख़ प्रदेश, चीन के शिनजियांग और तिब्बत क्षेत्रों और रूस के साइबेरिया क्षेत्र के दक्षिणी भाग को भी अक्सर मध्य एशिया का हिस्सा समझा जाता है। इतिहास में मध्य एशिया रेशम मार्ग के व्यापारिक और सांस्कृतिक महत्व के लिए जाना जाता है। चीन, भारतीय उपमहाद्वीप, ईरान, मध्य पूर्व और यूरोप के बीच लोग, माल, सेनाएँ और विचार मध्य एशिया से गुज़रकर ही आते-जाते थे। इस इलाक़े का बड़ा भाग एक स्तेपी वाला घास से ढका मैदान है हालाँकि तियान शान जैसी पर्वत शृंखलाएँ, काराकुम जैसे रेगिस्तान और अरल सागर जैसी बड़ी झीलें भी इस भूभाग में आती हैं। ऐतिहासिक रूप मध्य एशिया में ख़ानाबदोश जातियों का ज़ोर रहा है। पहले इसपर पूर्वी ईरानी भाषाएँ बोलने वाली स्किथी, बैक्ट्रियाई और सोग़दाई लोगों का बोलबाला था लेकिन समय के साथ-साथ काज़ाख़, उज़बेक, किरगिज़ और उईग़ुर जैसी तुर्की जातियाँ अधिक शक्तिशाली बन गई।Encyclopædia Iranica, "CENTRAL ASIA: The Islamic period up to the Mongols", C. Edmund Bosworth: "In early Islamic times Persians tended to identify all the lands to the northeast of Khorasan and lying beyond the Oxus with the region of Turan, which in the Shahnama of Ferdowsi is regarded as the land allotted to Fereydun's son Tur.

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अवस्ताई भाषा, अग्निशस्त्र, अकतोबे प्रांत, अकमोला प्रांत, अक्साई चिन, उचकुदुक, उत्तर भारत, उत्तर क़ज़ाख़स्तान प्रांत, उत्तरी रेशम मार्ग, उरगेन्च, उज़बेक, उज़बेक लोग, उज़्बेक भाषा, उइग़ुर सूचकांक विस्तार (310 अधिक) »

चानयू

चानयू (अंग्रेज़ी: Chanyu, चीनी भाषा: 單于, शियोंगनु भाषा: त्सनक) मध्य एशिया और चीन में शासन करने वाली बहुत-सी ख़ानाबदोश जातियों के साम्राज्यों के सर्वोच्च शासक की उपाधि हुआ करती थी। इस उपाधि का इस्तेमाल चीन के झोऊ राजवंश काल (१०४५ से २५६ ईसापूर्व) से आरम्भ होकर लगभग ८०० साल तक चला। चिन राजवंश और हान राजवंश के समकालीन शियोंगनु लोगों के लुआनदी राजपरिवार ने इसका बहुत प्रयोग किया और उस जाति में इसका प्रयोग करने वाला सर्वप्रथम शासक तूमन था। चानयू का प्रयोग समय के साथ-साथ कम अर्थ रखने लगा और छोटे-मोटे सरदार भी इसका प्रयोग करने लगे।, Sanping Chen, University of Pennsylvania Press, 2012, ISBN 978-0-8122-4370-3,...

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चिल्का झील

चिल्का झील चिल्का झील उड़ीसा प्रदेश के समुद्री अप्रवाही जल में बनी एक झील है। यह भारत की सबसे बड़ी एवं विश्व की दूसरी सबसे बड़ी समुद्री झील है। इसको चिलिका झील के नाम से भी जाना जाता है। यह एक अनूप है एवं उड़ीसा के तटीय भाग में नाशपाती की आकृति में पुरी जिले में स्थित है। यह 70 किलोमीटर लम्बी तथा 30 किलोमीटर चौड़ी है। यह समुद्र का ही एक भाग है जो महानदी द्वारा लायी गई मिट्टी के जमा हो जाने से समुद्र से अलग होकर एक छीछली झील के रूप में हो गया है। दिसम्बर से जून तक इस झील का जल खारा रहता है किन्तु वर्षा ऋतु में इसका जल मीठा हो जाता है। इसकी औसत गहराई 3 मीटर है। इस झील के पारिस्थितिक तंत्र में बेहद जैव विविधताएँ हैं। यह एक विशाल मछली पकड़ने की जगह है। यह झील 132 गाँवों में रह रहे 150,000 मछुआरों को आजीविका का साधन उपलब्ध कराती है। इस खाड़ी में लगभग 160 प्रजातियों के पछी पाए जाते हैं। कैस्पियन सागर, बैकाल झील, अरल सागर और रूस, मंगोलिया, लद्दाख, मध्य एशिया आदि विभिन्न दूर दराज़ के क्षेत्रों से यहाँ पछी उड़ कर आते हैं। ये पछी विशाल दूरियाँ तय करते हैं। प्रवासी पछी तो लगभग १२००० किमी से भी ज्यादा की दूरियाँ तय करके चिल्का झील पंहुचते हैं। 1981 में, चिल्का झील को रामसर घोषणापत्र के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय महत्व की आद्र भूमि के रूप में चुना गया। यह इस मह्त्व वाली पहली पहली भारतीय झील थी। एक सर्वेक्षण के मुताबिक यहाँ 45% पछी भूमि, 32% जलपक्षी और 23% बगुले हैं। यह झील 14 प्रकार के रैपटरों का भी निवास स्थान है। लगभग 152 संकटग्रस्त व रेयर इरावती डॉल्फ़िनों का भी ये घर है। इसके साथ ही यह झील 37 प्रकार के सरीसृपों और उभयचरों का भी निवास स्थान है। उच्च उत्पादकता वाली मत्स्य प्रणाली वाली चिल्का झील की पारिस्थिकी आसपास के लोगों व मछुआरों के लिये आजीविका उपलब्ध कराती है। मॉनसून व गर्मियों में झील में पानी का क्षेत्र क्रमश: 1165 से 906 किमी2 तक हो जाता है। एक 32 किमी लंबी, संकरी, बाहरी नहर इसे बंगाल की खाड़ी से जोड़ती है। सीडीए द्वारा हाल ही में एक नई नहर भी बनाई गयी है जिससे झील को एक और जीवनदान मिला है। लघु शैवाल, समुद्री घास, समुद्री बीज, मछलियाँ, झींगे, केकणे आदि चिल्का झील के खारे जल में फलते फूलते हैं। .

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चग़ताई भाषा

मुग़ल सम्राट बाबर की बाबरनामा नामक जीवनी चग़ताई तुर्की में ही लिखी गई थी चग़ताई भाषा (उज़बेक:, अंग्रेज़ी: Chagatai) एक विलुप्त तुर्की भाषा है जो कभी मध्य एशिया के विस्तृत क्षेत्र में बोली जाती थी। बीसवी सदी तक इसकी बोलचाल तो बंद हो चुकी थी लेकिन इसे एक साहित्यिक भाषा के रूप में फिर भी प्रयोग किया जा रहा था। भारतीय उपमहाद्वीप में मुग़ल साम्राज्य के शुरुआती सम्राटों की मातृभाषा भी चग़ताई तुर्की ही थी और बाबर ने अपनी प्रसिद्ध 'बाबरनामा' जीवनी इसी भाषा में लिखी थी।, Calum MacLeod, Bradley Mayhew, Odyssey, 2008, ISBN 978-962-217-795-6,...

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चग़ताई ख़ान

मंगोलिया में चग़ताई ख़ान का बुत, जो चंगेज़ ख़ान और बोरते का दूसरा पुत्र था चग़ताई ख़ान (मंगोल: Цагадай, त्सगदाई; फ़ारसी:, चग़ताई, अंग्रेजी: Chagtai;; जन्म: ११८३ ई अनुमानित; देहांत: १२४२ या १२४३ ई) मंगोल साम्राज्य के संस्थापक चंगेज़ ख़ान और उसकी मुख्य पत्नी बोरते का दूसरा पुत्र था। उसने अपने पिता के मध्य एशिया को मंगोल साम्राज्य के अधीन करने के अभियान में बहुत हिस्सा लिया। उसे एक क़ाबिल और सहासी सिपहसालार माना जाता है।, Leo de Hartog, Tauris Parke Paperbacks, 2004, ISBN 978-1-86064-972-1,...

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चग़ताई ख़ानत

१३वीं सदी में चग़ताई ख़ानत और उसके पड़ोसी चग़ताई ख़ानत (मंगोल: Цагадайн улс, त्सगदाई उल्स; अंग्रेज़ी: Chagatai Khanate) एक तुर्की-मंगोल ख़ानत थी जिसमें मध्य एशिया के वे क्षेत्र शामिल थे जिनपर चंगेज़ ख़ान के दूसरे बेटे चग़ताई ख़ान का और उसके वंशजों का राज था। आरम्भ में यह ख़ानत मंगोल साम्राज्य का हिस्सा मानी जाती थी लेकिन आगे चलकर पूरी तरह स्वतन्त्र हो गई। अपने चरम पर यह अरल सागर से दक्षिण में आमू दरिया से लेकर आधुनिक चीन और मंगोलिया की सरहद पर अल्ताई पर्वतों तक विस्तृत थी। यह सन् १२२५ से लेकर किसी-न-किसी रूप में १६८७ तक चली। इस ख़ानत के चग़ताई शासक कभी तो तैमूरी राजवंश से मित्रता करते थे और कभी उनसे लड़ते थे। १७वीं सदी में जाकर उइग़ुर नेता आफ़ाक़ ख़ोजा और उनके वंशजों ने पूरे चग़ताई इलाक़े पर क़ब्ज़ा कर के इस ख़ानत को समाप्त कर दिया।, Aisha Khan, The Rosen Publishing Group, 2003, ISBN 978-0-8239-3868-1,...

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चुय प्रांत

चुय नदी घाटी में खेत चुय प्रांत (किरगिज़: Чүй областы, अंग्रेज़ी: Chuy Province) मध्य एशिया के किर्गिज़स्तान देश का सबसे उत्तरतम प्रांत है। इस प्रांत का प्रशासनिक केंद्र बिश्केक है जो किर्गिज़स्तान की राष्ट्रीय राजधानी भी है, लेकिन सन् २००३ से मई २००६ तक तोकमोक शहर चुय प्रांत की राजधानी रहा था। बिश्केक भौगोलिक रूप से इस प्रांत के क्षेत्र में आता है हालाँकि प्रशासनिक दृष्टि से अलग है। इस प्रांत का नाम चुय नदी से आया है। किर्गिज़स्तान का अधिकतर क्षेत्र पहाड़ी है लेकिन चुय प्रांत का उत्तरी भाग मैदानी और बहुत उपजाऊ है, जिस से यहाँ कृषि विस्तृत ढंग से होती है।, Laurence Mitchell, pp.

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चीन का इतिहास

चीन के राजवंशों की राज्यसीमाएँ पुरातात्विक साक्ष्यों के आधार पर चीन में मानव बसाव लगभग साढ़े बाईस लाख (22.5 लाख) साल पुराना है। चीन की सभ्यता विश्व की पुरातनतम सभ्यताओं में से एक है। यह उन गिने-चुने सभ्यताओं में एक है जिन्होनें प्राचीन काल में अपना स्वतंत्र लेखन पद्धति का विकास किया। अन्य सभ्यताओं के नाम हैं - प्राचीन भारत (सिंधु घाटी सभ्यता), मेसोपोटामिया की सभ्यता, मिस्र सभ्यता और माया सभ्यता। चीनी लिपि अब भी चीन, जापान के साथ-साथ आंशिक रूप से कोरिया तथा वियतनाम में प्रयुक्त होती है। .

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टकलामकान

अंतरिक्ष से ली गई टकलामकान की एक तस्वीर टकलामकान रेगिस्तान का एक दृश्य नक़्शे में टकलामकान टकलामकान मरुस्थल (उइग़ुर:, तेकलीमाकान क़ुम्लुक़ी) मध्य एशिया में स्थित एक रेगिस्तान है। इसका अधिकाँश भाग चीन द्वारा नियंत्रित श़िंजियांग प्रांत में पड़ता है। यह दक्षिण से कुनलुन पर्वत शृंखला, पश्चिम से पामीर पर्वतमाला और उत्तर से तियन शान की पहाड़ियों द्वारा घिरा हुआ है। .

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ट्यूनिसएर एयरलाइन्स

ट्यूनिसएर ट्यूनईशिया की शासकीय एरलाइन्स है। १९४८ में स्थापित यह एरलाइन्स युरोप, आफ्रिका और मध्य एशिया के कई सारे गंतव्यों के लिए उड़ानों का संचालन करती है। इसका मुख्य आधार केंद्र ट्यूनिस-कारतेज इंटरनॅशनल एरपोर्ट है और इसका मुख्य कार्यालय ट्यूनिस एरपोर्ट के निकल स्थित ट्यूनिस नगर में है ट्यूनिसएर अरब एर कॅरियर्स ऑर्गनाइज़ेशन की सदस्य है। .

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एशिया की अर्थव्यवस्था

एशिया की अर्थव्यवस्था यूरोप के बाद विश्व की, क्रय शक्ति के आधार पर, दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। एशिया की अर्थव्यवस्था के अन्तर्गत लगभग ४ अरब लोग आते हैं, जो विश्व जनसंख्या का ६०% है। ये ४ अरब लोग एशिया के ४६ विभिन्न देशों में निवास करते है। छः अन्य देशों के कुछ भूभाग भी आंशिक रूप से एशिया में पड़ते हैं, लेकिन ये देश आर्थिक और राजनैतिक कारणों से अन्य क्षेत्रों में गिने जाते हैं। एशिया वर्तमान में विश्व का सबसे ते़ज़ी उन्नति करता हुआ क्षेत्र है और चीजग इस समय एशिया की सबसे बड़ी और विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है जो कई पूर्वानुमानों के अनुसार अगले कुछ वर्षों में विश्व की भी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होगी। विश्व के अन्य क्षेत्रों के समान ही, एशिया में भी सम्पत्ति का वितरण बहुत असमान है। इसके कई कारण हैं जैसे एशिया का आकार, जिसके कारण यहाँ बहुत अधिक सांस्कृतिक, पर्यावरणीय, एतिहासिक सम्बन्धों और शासन प्रणालियों में विविधता पाई जाती है। संज्ञात्मक और क्रय शक्ति दोनों ही आधार पर एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएँ इस प्रकार हैं: चीनी जनवादी गणराज्य, जापान, भारत, दक्षिण कोरिया और इण्डोनेशिया। सम्पत्ति को यदि प्रति व्यक्ति के आधार पर आँका जाए तो यह अधिकांशतः पूर्वी एशिया के राज्यक्षेत्रों में केन्द्रित है जैसे हाँगकाँग, जापान, सिंगापुर और ताइवान। इसके अतिरिक्त तेल-समृद्ध खाड़ी के देशों में जैसे ईरान, सउदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात में भी सम्पत्ति की उपलब्धता है। एशिया में वर्तमान में, जापान, दक्षिण कोरिया, ताइवान, हाँगकाँग और सिंगापुर को छोड़कर बहुत तेज़ी से वृद्धि और औद्योगिकरण हो रहा है जिसकी अगुआई चीन और बहुत हद तक भारत भी कर रहा है। पूर्वी एशिया और दक्षिणपूर्वी एशिया के देशों में वृद्धि विनिर्माण और व्यापार के द्वारा हो रही है और मध्यपूर्व के देशों में यह वृद्धि अधिकतर तेल के उत्पादन और निर्यात पर निर्भर है। पिछ्ले कई वर्षों में, तीव्र आर्थिक विकास और शेष विश्व के साथ विशाल व्यापार अधिशेष होने के कारण, एशिया के देशों में ४ खरब $ से अधिक का विदेशी मुद्रा भण्डार एकत्रित कर लिया है जो विश्व का आधे से भी अधिक है। .

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झ़ामबिल प्रांत

झ़ामबिल​ प्रांत (कज़ाख़: Жамбыл облысы, अंग्रेज़ी: Zhambyl या Jambyl Province) मध्य एशिया के क़ाज़ाख़स्तान देश का एक प्रांत है। इसकी राजधानी तलास नदी के किनारे स्थित ऐतिहासिक तराज़ शहर है, जो किरगिज़स्तान की सरहद के बहुत पास है। इस प्रांत का उत्तर पूर्वी कोना बलख़श झील के छोर पर तटस्थ है। राज्य से चुय नदी भी निकलती है जिसकी सिंचाई और कृषि में बहुत अहमियत है। काराताऊ शहर के पास फ़ॉसफ़ेट की खानें हैं। .

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तमग़ा

तातारों का पारम्परिक तमग़ा भारत के कुषाण सम्राट कनिष्क का तमग़ा तमग़ा (मंगोल: Тамга, अंग्रेजी: Tamgha) मध्य एशिया, मंगोलिया और उसके आसपास के इलाक़ों में बसने वाले प्राचीन ख़ानाबदोश क़बीलों की संस्कृति में विशेष मोहरों और चिह्नों को कहा जाता था। यही शब्द इन लोगों से सम्पर्क रखने वाली बहुत सी अन्य संस्कृतियों में प्रवेश कर गया, जिनमें भारतीय उपमहाद्वीप, ईरान, तुर्की और कुछ अन्य देश शामिल हैं। हिन्दी में 'तमग़ा' शब्द का मतलब प्रमाण के रूप में दिए जाने वाले किसी भी विशेष चिह्न के लिए प्रयोग होता है, मसलन खेल में जीतने पर प्रमाण के रूप में मिलने वाले पदक (मेडल) को अक्सर 'तमग़ा' कहा जाता है। पारम्परिक रूप से सरकारी शुल्क अदा करने पर या अन्य सरकारी दस्तावेज़ों पर लगने वाली मोहर को भी उत्तर भारत में 'तमग़ा' कहा जाता था।, John Shakespear, Parbury, Allen & Co, 1834,...

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तराना-ए-मिल्ली

इक़बाल तराना-ए-मिल्ली मुहम्मद इक़बाल द्वारा लिखी गई एक उर्दु शायरी है जिसमें उन्होंने नस्ली राष्ट्रवाद के बजाय मसलानों को बतौर मुस्लिम के रहने और इस पर गर्व होने का प्रदर्शन भी किया गया है। उन्होंने यह कविता तराना-ए-हिन्दी के जवाब में लिखी है, जब उन्होंने अपने दृष्टिकोण को बदलकर द्विराष्ट्र सिद्धांत को स्वीकार कर लिया। .

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तलास

तलास के पास मनास का गुम्बज़ (मक़बरा) तलास (किरगिज़: Талас, अंग्रेज़ी: Talas) मध्य एशिया के किर्गिज़स्तान देश में एक छोटा-सा शहर है और उस राष्ट्र के तलास प्रांत की राजधानी भी है। तलास शहर १८७७ में रूसी साम्राज्य के ज़माने में भेजे गए लोगों द्वारा तलास नदी की वादी में दो ऊँची पर्वत शृंखलाओं के बीच बसाया गया था। इस शहर के दक्षिण में बेश-ताश वादी है (बेश-ताश का मतलब किरगिज़ भाषा में 'पांच पत्थर' होता है)। .

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तलास नदी

काज़ाख़स्तान के तराज़ शहर के पास तलास नदी तलास नदी (किरगिज़: Талас дарыя, तलास दरिया; अंग्रेज़ी: Talas River) मध्य एशिया के किर्गिज़स्तान देश के तलास प्रांत से उत्पन्न होंकर पश्चिम में काज़ाख़स्तान में बहने वाली एक नदी है जो कराकोल नदी और उच-कोशोय नदी के संगम से बनती है। तलास नदी पर किर्गिज़स्तान के तलास प्रांत और तलास शहर का नाम पड़ा है। यह काज़ाख़स्तान के झ़ाम्बील​ प्रांत ('झ़' के उच्चारण पर ध्यान दें) के तराज़ शहर से गुज़रती है और आईदीन झील (Lake Aydyn) पहुँचने से पहले स्तेपी में धरती द्वारा सोख लेने से लुप्त हो जाती है। कुल मिलकर तलास नदी ६६१ किमी लम्बी है और इसका जलसम्भर क्षेत्र ५२,७०० वर्ग किमी है। तलास नदी स्तेपी की तीन सबसे महत्वपूर्ण नदियों में से एक है - अन्य दो चुय नदी और इली नदी हैं। .

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तलास प्रांत

तलास शहर के पास मनास का गुम्बज़ (मक़बरा) तलास प्रांत (किरगिज़: Талас областы, अंग्रेज़ी: Talas Province) मध्य एशिया के किर्गिज़स्तान देश के पश्चिमोत्तर में स्थित एक प्रांत है। इस प्रांत राजधानी का नाम भी तलास शहर है। इसकी सरहदें काज़ाख़स्तान और उज़बेकिस्तान से भी लगती हैं। इस प्रांत के उत्तर में किरगिज़ आला-तू के पर्वत हैं और मध्य भाग से तलास नदी निकलती है। .

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तलवाड़ा झील

तलवारा झील एक छोटी सी झील है जो राजस्थान के हनुमानगढ़ ज़िले में घग्गर-हकरा नदी के मार्ग में एक द्रोणी में पानी भर जाने से मानसून की बारिशों के दौरान बन जाती है।, Atlantic Publishers & Distri,...

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तातार भाषा

यान्या इमल्यै (विकसित अरबी लिपि) में लिखी तातार भाषा तातार भाषा (तातार: татар теле, तातार तेले; अंग्रेज़ी: Tatar language) रूस के तातारस्तान और बश्कोरतोस्तान के तातार लोगों द्वारा बोली जाने वाली एक तुर्की भाषा है। मध्य एशिया, युक्रेन, पोलैंड, तुर्की, फ़िनलैंड और चीन में भी कुछ तातार समुदाय इसे बोलते हैं। ध्यान दें कि युक्रेन के क्रीमिया क्षेत्र में एक 'क्रीमियाई तातार' नामक भाषा बोली जाती है जो इस तातार भाषा से भिन्न हैं, हालांकि दोनों भाषाएँ भाषावैज्ञानिक नज़रिए से सम्बन्ध रखती हैं। सन् २००२ में अनुमानित ६५ लाख लोग यह तातार भाषा बोलते थे।, Ethnologue Languages of the world .

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तातार लोग

दिनारा सफीना रूस के लिए टेनिस खेलती हैं और नस्ल से तातार हैं रुसलन चाग़ायेव उज़बेकिस्तान के लिए मुक्केबाज़ी करते हैं और एक तातार हैं तातार या ततार (तातार: ततरलार; रूसी: Татар; अंग्रेज़ी: Tatar) रूसी भाषा और तुर्की भाषाएँ बोलने वाली एक जाति है जो अधिकतर रूस में बसती है। दुनिया भर में इनकी आबादी ७० लाख अनुमानित की गई है, जिनमें से ५५ लाख रूस में रहते हैं। रूस के तातारस्तान प्रांत में २० लाख तातार रहते हैं। रूस के बाहर तातार समुदाय उज़बेकिस्तान, पोलैंड, काज़ाख़स्तान, युक्रेन, ताजिकिस्तान, किर्गिज़स्तान, तुर्कमेनिस्तान, चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका में पाए जाते हैं।, Global Vision Publishing Ho, 2005, ISBN 978-81-8220-062-3,...

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तारपान

फ़्रांस की एक ग़ुफ़ा में मिला तारपान-जैसे घोड़े का पुरापाषाण काल में बना चित्र आधुनिक हेक नस्ल का घोड़ा जिसका रंग-रूप तारपान से मिलता है तारपान या यूरेशियाई जंगली घोड़ा एक जंगली घोड़े की नस्ल थी जो विलुप्त हो चुकी है। विश्व का आखरी ज्ञात तारपान सन् १९०९ में रूस में मर गया। कुछ आधुनिक घोड़ों की नस्लें तारपान से मिलती जुलती हैं, जैसे की हेक घोड़ा। तारपान का रंग हल्का ख़ाकी होता था। जीव-वैज्ञानिक मानते हैं कि विश्व के पालतू घोड़े तारपान के ही विकसित वंशज हैं। .

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तारिम द्रोणी

तारिम द्रोणी अंतरिक्ष से तारिम द्रोणी की तस्वीर तारिम क्षेत्र में मिला खरोष्ठी में लिखा एक काग़ज़ का टुकड़ा (दूसरी से पाँचवी सदी ईसवी) तारिम द्रोणी या तारिम बेसिन मध्य एशिया में स्थित एक विशाल बंद जलसंभर इलाका है जिसका क्षेत्रफल ९०६,५०० वर्ग किमी है (यानि सम्पूर्ण भारत का लगभग एक-चौथाई क्षेत्रफल)। वर्तमान राजनैतिक व्यवस्था में तारिम द्रोणी चीनी जनवादी गणराज्य द्वारा नियंत्रित श़िंजियांग उइग़ुर स्वराजित प्रदेश नाम के राज्य में स्थित है। तारिम द्रोणी की उत्तरी सीमा तियाँ शान पर्वत श्रंखला है और दक्षिणी सीमा कुनलुन पर्वत श्रंखला है। कुनलुन पर्वत श्रंखला तारिम द्रोणी के इलाक़े को दक्षिण में स्थित तिब्बत के पठार से विभाजित करती है। तारिम द्रोणी का अधिकतर क्षेत्र रेगिस्तानी है और हलकी आबादी वाला है। यहाँ ज़्यादातर लोग उइग़ुर और अन्य तुर्की जातियों के हैं। .

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तारिम द्रोणी/आलेख

तारिम द्रोणी तारिम द्रोणी या तारिम बेसिन मध्य एशिया में स्थित एक विशाल बंद जलसंभर इलाका है जिसका क्षेत्रफल ९०६,५०० वर्ग किमी है (यानि सम्पूर्ण भारत का लगभग एक-चौथाई क्षेत्रफल)। वर्तमान राजनैतिक व्यवस्था में तारिम द्रोणी चीनी जनवादी गणराज्य द्वारा नियंत्रित श़िंजियांग उइग़ुर स्वराजित प्रदेश नाम के राज्य में स्थित है। तारिम द्रोणी की उत्तरी सीमा तियाँ शान पर्वत श्रंखला है और दक्षिणी सीमा कुनलुन पर्वत श्रंखला है। कुनलुन पर्वत श्रंखला तारिम द्रोणी के इलाक़े को दक्षिण में स्थित तिब्बत के पठार से विभाजित करती है। द्रोणी या जलसंभर उस भौगोलिक क्षेत्र को कहते हैं जहाँ वर्षा अथवा पिघलती बर्फ़ का पानी नदियों, नेहरों और नालों से बह कर एक ही स्थान पर एकत्रित हो जाता है। भारत में यमुना का जलसंभर वह क्षेत्र है जहाँ यमुना नदी में विलय हो जाने वाले सारे नदी नाले फैले हुए है और जिसके अंत से केवल यमुना नदी ही निकास करती है। बंद जलसंभर ऐसा जलसंभर होता है जिसमें वर्षा अथवा पिघलती बर्फ़ का पानी एकत्रित हो कर किसी नदी के ज़रिये समुद्र या महासागर में बहने की बजाय किसी सरोवर, दलदली क्षेत्र या शुष्क क्षेत्र में जाकर वहीँ रुक जाता है। अंग्रेज़ी में "द्रोणी" को "बेसिन" (basin), "जलसंभर" को "वॉटरशॅड" (watershed) या "कैचमेंट" (catchment) और बंद जलसंभर को "एनडोरहेइक बेसिन" (endorheic basin) कहा जाता है। तारिम द्रोणी का अधिकतर क्षेत्र रेगिस्तानी है और हलकी आबादी वाला है। यहाँ ज़्यादातर लोग उइग़ुर और अन्य तुर्की जातियों के हैं। इस क्षेत्र का उत्तर भारत और पाकिस्तान के साथ गहरा ऐतिहासिक और आनुवंशिकी (यानि जॅनॅटिक) सम्बन्ध है। यहाँ पर पाई गई लगभग सारी प्राचीन लिखाई खरोष्ठी लिपि में है, बोले जाने वाली प्राचीन भाषाएँ तुषारी भाषाएँ थीं जो भाषावैज्ञानिक दृष्टि से हिन्द-आर्य भाषाओं की बहनें मानी जाती हैं और जितने भी प्राचीन शव मिले हैं उनमें हर पुरुष का आनुवंशिकी पितृवंश समूह आर१ए१ए है जो उत्तर भारत के ३०-५०% पुरुषों में भी पाया जाता है, लेकिन पूर्वी एशिया की चीनी, जापानी और कोरियाई आबादियों में और पश्चिमी एशिया की अरब आबादियों में लगभग अनुपस्थित है। .

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तारिम नदी

तारिम नदी के जलसम्भर क्षेत्र का नक़्शा तारिम नदी (उईग़ुर:, तारिम दरियासी; चीनी: 塔里木河, तालीमु हे; अंग्रेजी: Tarim River) चीन के शिंजियांग प्रांत की मुख्य नदी है। इसी नदी के नाम पर महान तारिम द्रोणी का नाम पड़ा है, जो मध्य एशिया में कुनलुन पर्वतों और तियान शान पर्वतों के बीच और तिब्बत के पठार से उत्तर में स्थित है। १,३२१ किलोमीटर लम्बा यह दरिया चीन की सबसे लम्बी नदी है जो समुद्र में नहीं बहती, यानि जो एक बन्द जलसम्भर वाली नदी है।, Yue-man Yeung, Jianfa Shen, Chinese University Press, 2004, ISBN 978-962-996-157-2,...

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ताशक़ुरग़ान​

ताशक़ुरग़ान​ (सरिकोली:, तॉशक़ुरग़ॉन​; उइग़ुर:, ताशक़ूरग़ान बाज़िरी; चीनी: 塔什库尔干镇, ताशिकु'एरगन; अंग्रेज़ी: Tashkurgan) मध्य एशिया में चीन द्वारा नियंत्रित शिनजियांग प्रान्त के ताशक़ुरग़ान​ ताजिक स्वशासित ज़िले की राजधानी है। पाकिस्तान से पाक-अधिकृत कश्मीर के गिलगित-बल्तिस्तान क्षेत्र से आने वाले काराकोरम राजमार्ग पर यह पहला महत्वपूर्ण चीनी पड़ाव है। इस राजमार्ग पर सरहद पर स्थित ख़ुंजराब दर्रे की चीनी तरफ़ ताशक़ुरग़ान​ है और पाकिस्तानी तरफ़ सोस्त है।, Andrew Burke, pp.

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ताशकेंत प्रान्त

उज़बेकिस्तान के नक़्शे में ताशकेंत प्रान्त (लाल रंग में) ताशकेन्त प्रान्त (उज़बेक: Тошкент вилояти, तोश्केन्त विलोयती; अंग्रेज़ी: Tashkent Province) मध्य एशिया में स्थित उज़बेकिस्तान देश का एक विलायात (प्रान्त) है जो उस देश के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में स्थित है। यह सिर दरिया और तियन शान पर्वतों के बीच के इलाक़े में स्थित है। प्रान्त का कुल क्षेत्रफल १५,३०० वर्ग किमी है और २००५ में इसकी अनुमानित आबादी ४४,५०,००० थी। ताशकेंत प्रान्त की राजधानी ताशकेंत शहर है।, Нурислам Тухлиев, Алла Кременцова, Ozbekiston milliy ensiklopediasi, 2007 .

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ताजिक लोग

अफ़्ग़ान सांसद नीलोफ़र इब्राहिमी एक ताजिक हैं ताजिकिस्तान का एक परिवार ईद-उल-फ़ित्र की ख़ुशियाँ मनाते हुए ताजिक (ताजिक: Тоҷик, फ़ारसी:, तॉजिक) मध्य एशिया (विशेषकर ताजिकिस्तान, अफ़्ग़ानिस्तान, उज़बेकिस्तान और पश्चिमी चीन) में रहने वाले फ़ारसी-भाषियों के समुदायों को कहा जाता है। बहुत से अफ़्ग़ानिस्तान से आये ताजिक शरणार्थी ईरान और पाकिस्तान में भी रहते हैं। अपनी संस्कृति और भाषा के मामले में ताजिक लोगों का ईरान के लोगों से गहरा सम्बन्ध रहा है।, Olivier Roy, I.B.Tauris, 2000, ISBN 978-1-86064-278-4 चीन के ताजिक लोग अन्य ताजिक लोगों से ज़रा भिन्न होते हैं क्योंकि वे पूर्वी ईरानी भाषाएँ बोलते हैं जबकि अन्य ताजिक फ़ारसी बोलते हैं।, New World Press, 1989, ISBN 978-7-80005-078-7,...

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ताजिकिस्तान

अंतरिक्ष से ताजिकिस्तान का मंज़र ताज़िकिस्तान (ताजिक: Тоҷикистон,, तोजिकिस्तोन) मध्य एशिया मे स्थित एक देश है जो चारों ओर से ज़मीन से घिरा (स्थलवेष्ठित) है। यह पहले सोवियत संघ का हिस्सा था और उस देश के विघटन के बाद सन् १९९१ में एक स्वतंत्र देश बना। १९९२-९७ के काल में गृहयुद्धों की मार झेल चुके इस देश की कूटनीतिक-भौगोलिक स्थिति बहुत महत्वपूर्ण है। यह उज़बेकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान, किर्गिज़स्तान तथा चीन के मध्य स्थित है। इसके अलावा पाकिस्तान के उत्तरी इलाके से इसे केवल अफ़ग़ानिस्तान के बदख़्शान प्रान्त का पतला-सा वाख़ान गलियारा ही अलग करता है। ताजिकिस्तान की राजधानी दुशानबे शहर है और यहाँ की भाषा को ताजिक कहा जाता है जो फ़ारसी भाषा का एक रूप माना जाता है। इस भाषा को सीरीलिक अक्षरों में लिखा जाता है जिसमें रूसी तथा कुछ अन्य भाषाएँ भी लिखी जाती हैं। .

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ताजिकी भाषा

द्वार पर ताजिकी में सिरिलिक लिपि में लिखा है 'बाग़-ए उस्तोद रुदाकी' (उस्ताद रुदाकी का बाग़) ताजिकी या ताजिकी फ़ारसी (тоҷикӣ,, तोजिकी) मध्य एशिया में बोली जाने वाली आधुनिक फ़ारसी भाषा का एक रूप है। ताजिकी बोलने वाले ज़्यादातर ताजिकिस्तान और उज़बेकिस्तान में रहते हैं, हालांकि ताजिकी मातृभाषियों के कुछ समुदाय अफ़्ग़ानिस्तान, रूस और चीन के शिनजियांग प्रान्त में भी मिलते हैं। अनुमानित किया गया है कि कुल मिलकर सन् १९९१ में ताजिकी बोलने वालों की संख्या ४४.६ लाख थी। वैसे तो ताजिकी ईरान में बोली जाने वाली फ़ारसी से काफ़ी मिलती है लेकिन ईरानी फ़ारसी में अरबी भाषा का प्रभाव अधिक है जबकि ताजिकी में तुर्की भाषाओँ और कुछ हद तक उज़बेक भाषा का असर ज़्यादा दिखता है।, Raymond Hickey, John Wiley and Sons, 2010, ISBN 978-1-4051-7580-7,...

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तिएले लोग

तिएले (鐵勒, Tiele), चिले (敕勒, Chile) या गाओचे (高車, Gaoche) उत्तरी चीन और मध्य एशिया में चौथी से आठवीं शताब्दी ईसवी के काल में नौ तुर्की जातियों का परिसंघ था। ऐतिहासिक चीनी स्रोतों के अनुसार तिएले लोग प्राचीन दिंगलींग लोगों के वंशज थे और वे इस क्षेत्र में शियोंगनु साम्राज्य के पतन के बाद उभरे। समय के साथ गोएकतुर्क ख़ागानत ने इन्हें अपने अधीन कर लिया। जब गोएकतुर्कों का पतन हुआ तो तिएले का एक हिस्सा, जिन्हें उईग़ुर कहा जाता था, ७४४ ईसवी में अपनी अलग उईग़ुर ख़ागानत स्थापित करने में सफल हो गया। उसके बाद से इतिहास में 'तिएले' का नाम लिया जाना बंद हो गया और उन सबको 'उईग़ुर' नाम से ही बुलाया जाने लगा। .

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तिब्बत

तिब्बत का भूक्षेत्र (पीले व नारंगी रंगों में) तिब्बत के खम प्रदेश में बच्चे तिब्बत का पठार तिब्बत (Tibet) एशिया का एक क्षेत्र है जिसकी भूमि मुख्यतः उच्च पठारी है। इसे पारम्परिक रूप से बोड या भोट भी कहा जाता है। इसके प्रायः सम्पूर्ण भाग पर चीनी जनवादी गणराज्य का अधिकार है जबकि तिब्बत सदियों से एक पृथक देश के रूप में रहा है। यहाँ के लोगों का धर्म बौद्ध धर्म की तिब्बती बौद्ध शाखा है तथा इनकी भाषा तिब्बती है। चीन द्वारा तिब्बत पर चढ़ाई के समय (1955) वहाँ के राजनैतिक व धार्मिक नेता दलाई लामा ने भारत में आकर शरण ली और वे अब तक भारत में सुरक्षित हैं। .

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तिब्बत का पठार

तिब्बत का पठार हिमालय पर्वत शृंखला से लेकर उत्तर में टकलामकान रेगिस्तान तक फैला हुआ है तिब्बत का बहुत सा इलाक़ा शुष्क है तिब्बत का पठार (तिब्बती: བོད་ས་མཐོ།, बोड सा म्थो) मध्य एशिया में स्थित एक ऊँचाई वाला विशाल पठार है। यह दक्षिण में हिमालय पर्वत शृंखला से लेकर उत्तर में टकलामकान रेगिस्तान तक विस्तृत है। इसमें चीन द्वारा नियंत्रित बोड स्वायत्त क्षेत्र, चिंग हई, पश्चिमी सीश्वान, दक्षिण-पश्चिमी गांसू और उत्तरी यून्नान क्षेत्रों के साथ-साथ भारत का लद्दाख़ इलाक़ा आता है। उत्तर-से-दक्षिण तक यह पठार १,००० किलोमीटर लम्बा और पूर्व-से-पश्चिम तक २,५०० किलोमीटर चौड़ा है। यहाँ की औसत ऊँचाई समुद्र से ४,५०० मीटर (यानी १४,८०० फ़ुट) है और विशव के ८,००० मीटर (२६,००० फ़ुट) से ऊँचे सभी १४ पर्वत इसी क्षेत्र में या इसे इर्द-गिर्द पाए जाते हैं। इस इलाक़े को कभी-कभी "दुनिया की छत" कहा जाता है। तिब्बत के पठार का कुल क्षेत्रफल २५ लाख वर्ग किमी है, यानी भारत के क्षेत्रफल का ७५% और फ़्रांस के समूचे देश का चौगुना। .

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तिब्बत का इतिहास

तिब्बत का ऐतिहासिक मानचित्र 300px मध्य एशिया की उच्च पर्वत श्रेणियों, कुनलुन एवं हिमालय के मध्य स्थित 16000 फुट की ऊँचाई पर स्थित तिब्बत का ऐतिहासिक वृतांत लगभग 7वीं शताब्दी से मिलता है। 8वीं शताब्दी से ही यहाँ बौद्ध धर्म का प्रचार प्रांरभ हुआ। 1013 ई0 में नेपाल से धर्मपाल तथा अन्य बौद्ध विद्वान् तिब्बत गए। 1042 ई0 में दीपंकर श्रीज्ञान अतिशा तिब्बत पहुँचे और बौद्ध धर्म का प्रचार किया। शाक्यवंशियों का शासनकाल 1207 ई0 में प्रांरभ हुआ। मंगोलों का अंत 1720 ई0 में चीन के माँछु प्रशासन द्वारा हुआ। तत्कालीन साम्राज्यवादी अंग्रेंजों ने, जो दक्षिण पूर्व एशिया में अपना प्रभुत्व स्थापित करने में सफलता प्राप्त करते जा रहे थे, यहाँ भी अपनी सत्ता स्थापित करनी चाही, पर 1788-1792 ई0 के गुरखों के युद्ध के कारण उनके पैर यहाँ नहीं जम सके। परिणामस्वरूप 19वीं शताब्दी तक तिब्बत ने अपनी स्वतंत्र सत्ता स्थिर रखी यद्यपि इसी बीच लद्दाख़ पर कश्मीर के शासक ने तथा सिक्किम पर अंग्रेंजों ने आधिपत्य जमा लिया। अंग्रेंजों ने अपनी व्यापारिक चौकियों की स्थापना के लिये कई असफल प्रयत्न किया। इतिहास के अनुसार तिब्बत ने दक्षिण में नेपाल से भी कई बार युद्ध करना पड़ा और नेपाल ने इसको हराया। नेपाल और तिब्बत की सन्धि के मुताबिक तिब्बत ने हर साल नेपाल को ५००० नेपाली रुपये हरज़ाना भरना पड़ा। इससे आजित होकर नेपाल से युद्ध करने के लिये चीन से सहायता माँगी। चीन के सहायता से उसने नेपाल से छुटकारा तो पाया लेकिन इसके बाद 1906-7 ई0 में तिब्बत पर चीन ने अपना अधिकार बनाया और याटुंग ग्याड्से एवं गरटोक में अपनी चौकियाँ स्थापित की। 1912 ई0 में चीन से मांछु शासन अंत होने के साथ तिब्बत ने अपने को पुन: स्वतंत्र राष्ट्र घोषित कर दिया। सन् 1913-14 में चीन, भारत एवं तिब्बत के प्रतिनिधियों की बैठक शिमला में हुई जिसमें इस विशाल पठारी राज्य को भी दो भागों में विभाजित कर दिया गया.

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तिब्बताई भाषाएँ

तिब्बताई भाषाएँ (तिब्बती: བོད་སྐད།, अंग्रेज़ी: Tibetic languages) तिब्बती-बर्मी भाषाओं का एक समूह है जो पूर्वी मध्य एशिया के तिब्बत के पठार और भारतीय उपमहाद्वीप के कई उत्तरी क्षेत्रों में तिब्बती लोगों द्वारा बोली जाती हैं। यह चीन द्वारा नियंत्रित तिब्बत, चिंगहई, गान्सू और युन्नान प्रान्तों में, भारत के लद्दाख़, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम व उत्तरी अरुणाचल प्रदेश क्षेत्रों में, पाक-अधिकृत कश्मीर के गिलगित-बलतिस्तान क्षेत्र में तथा भूटान देश में बोली जाती हैं। .

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तिब्बती साम्राज्य

तिब्बती साम्राज्य (तिब्बती: བོད་, बोड) ७वीं से ९वीं सदी ईसवी तक चलने वाला एक साम्राज था। तिब्बत-नरेश द्वारा शासित यह साम्राज्य तिब्बत के पठार से कहीं अधिक विस्तृत क्षेत्रों पर फैला हुआ था। अपने चरम पर पश्चिम में आधुनिक अफ़ग़ानिस्तान, उज़बेकिस्तान, कश्मीर और हिमाचल प्रदेश से लेकर बंगाल और युन्नान प्रान्त के कई भाग इसके अधीन थे।, Saul Mullard, pp.

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तियाँ शान

सूर्यास्त के वक़्त ख़ान तेन्ग्री की चोटी तियान शान (अंग्रेज़ी: Tian Shan या Tien Shan; मंगोल: Тэнгэр уул, तेंगेर उउल; उइग़ुर:, तेन्ग्री ताग़; चीनी: 天山, तियान शान) मध्य एशिया का एक पहाड़ी सिलसिला है। .

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तिरमिज़

सुल्तान साओदात का महल तिरमिज़ (उज़बेक: Термиз, तेरमिज़; अंग्रेज़ी: Termez) मध्य एशिया के उज़बेकिस्तान देश के दक्षिणी भाग में स्थित सुरख़ानदरिया प्रान्त की राजधानी है। यह उज़बेकिस्तान की अफ़्ग़ानिस्तान के साथ सरहद के पास प्रसिद्ध आमू दरिया के किनारे बसा हुआ है। इसकी आबादी सन् २००५ में १,४०,४०४ थी। .

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तज़किरा

तज़किरा (फ़ारसी) भारतीय उपमहाद्वीप, ईरान और मध्य एशिया की बहुत-सी भाषाओँ में (जैसे कि उर्दू, फ़ारसी, उज़बेकी, पंजाबी) के साहित्य में किसी लेखक कि जीवनी को दर्शाने वाले उसकी कृतियों के एक संग्रह (यानि कुसुमावली) को कहते हैं। तज़किरे अधिकतर कवियों-शायरों के बनाए जाते हैं, हालांकि गद्य-लेखक का भी तज़किरा बनाना संभव है। कभी-कभी किसी व्यक्ति कि जीवनी या जीवन-सम्बन्धी कहानियों को भी 'तज़किरा' कह दिया जाता है।, Muzaffar Alam, Françoise Delvoye Nalini, Marc Gaborieau, Manohar Publishers & Distributors, 2000, ISBN 978-81-7304-210-2,...

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तुयुहुन राज्य

तुयुहुन राज्य (Tuyuhun Kingdom) या अझ़ा ('Azha, बिन्दुयुक्त 'झ़' के उच्चारण पर ध्यान दें) प्राचीनकाल में तिब्बत से पूर्वोत्तर कोको नूर नामक झील (आधुनिक काल में चिंगहई झील) के क्षेत्र में चिलियन पर्वतों और पीली नदी (ह्वांगहो) की ऊपरी घाटी के इलाक़ों में रहने वाले शियानबेई लोगों से सम्बन्धित ख़ानाबदोश क़बीलों द्वारा स्थापित एक राज्य का नाम था।, Barbara A. West, pp.

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तुरफ़ान

१४४ फ़ुट ऊंची एमीन मीनार अंगूर की लताओं से ढकी चलने की एक सड़क तुरफ़ान (अंग्रेज़ी: Turfan) या तुरपान (उईग़ुर:, अंग्रेज़ी: Turpan, चीनी: 吐魯番) चीन द्वारा नियंत्रित शिनजियांग प्रान्त के तुरफ़ान विभाग में स्थित एक ज़िले-स्तर का शहर है जो मध्य एशिया की प्रसिद्ध तुरफ़ान द्रोणी में स्थित एक नख़लिस्तान (ओएसिस) भी है। सन् २००३ में इसकी आबादी २,५४,९०० गिनी गई थी। यह शहर उत्तरी रेशम मार्ग पर एक महत्वपूर्ण पड़ाव हुआ करता था।, Julie Hill, AuthorHouse, 2006, ISBN 978-1-4259-7280-6,...

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तुरफ़ान द्रोणी

अंतरिक्ष से तुरफ़ान द्रोणी बोगदा पर्वत शृंखला के चरणों में दिखती है तुरफ़ान द्रोणी (अंग्रेज़ी: Turfan Depression) या तुरपान द्रोणी (उईग़ुर:, तुरपान ओयमानलीक़ी; अंग्रेज़ी: Turpan Depression) चीन द्वारा नियंत्रित मध्य एशिया के शिनजियांग क्षेत्र में स्थित ज़मीन में एक भ्रंश (फ़ॉल्ट​) के कारण बनी एक द्रोणी है। मृत सागर और जिबूती की असल झील के बाद तुरफ़ान द्रोणी में स्थित अयदिंग​ झील (Lake Ayding) पृथ्वी का तीसरा सब से निचला ज़मीनी क्षेत्र है।, www.nasa.gov, Accessed 2009-10-09 यह सूखी झील समुद्र ताल से १५४ मीटर नीचे स्थित है (यानि इसकी ऊँचाई -१५४ मीटर है)। कुछ मापों के हिसाब से यह चीन का सबसे गरम और शुष्क इलाक़ा भी है।, Shanghai Daily तुरफ़ान द्रोणी तुरफ़ान शहर के इर्द-गिर्द और उस से दक्षिण में विस्तृत है। .

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तुर्क लोग

तुर्क लोगों का वितरण वे देश और प्रदेश जहाँ तुर्की भाषाओँ को सरकारी मान्यता प्राप्त है तुर्क लोग (तुर्की भाषा: Türk halkları, अंग्रेज़ी: Turkic peoples) मध्य एशिया, मध्य पूर्व और उनके पड़ोसी इलाक़ों में रहने वाली उन जातियों को कहा जाता है जिनकी मातृभाषाएँ तुर्की भाषा-परिवार की सदस्य हैं। इनमें आधुनिक तुर्की देश के लोगों के अलावा, अज़रबैजान, कज़ाख़स्तान, किरगिज़स्तान, उज़बेकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान के ज़्यादातर लोग शामिल हैं। उत्तरी अफ़्ग़ानिस्तान, पश्चिमी चीन के उईग़ुर लोग, रूस के तातार और चुवाश लोग और बहुत से अन्य समुदाय भी तुर्क लोगों के परिवार में आते हैं। गोएकतुर्क और ख़ज़र जैसी प्राचीन जातियाँ भी तुर्क थीं और संभव है कि मध्य एशिया में किसी ज़माने में धाक रखने वाले शियोंगनु लोग और हूण लोग भी तुर्क रहें हों।, Encyclopædia Britannica, Online Academic Edition, 2010 .

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तुर्कमेन लोग

तुर्कमेन मध्य एशिया में बसने वाली एक तुर्की-भाषी जाति का नाम है। तुर्कमेन लोग मुख्य रूप से तुर्कमेनिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान, पूर्वोत्तरी ईरान, सीरिया, इराक़ और उत्तरी कॉकस क्षेत्र में रूस के स्ताव्रोपोल क्राय में रहते हैं। यह तुर्कमेन भाषा बोलते हैं जो तुर्की भाषा-परिवार की ओग़ुज़ शाखा की एक बोली है। कुछ तुर्कमेन लोग तुर्की, अज़ेरी, क़शक़ाई और गागाउज़ भाषाएँ भी बोलते हैं। .

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तुर्कमेनिस्तान

तुर्कमेनिस्तान (तुर्कमेनिया के नाम से भी जाना जाता है) मध्य एशिया में स्थित एक तुर्किक देश है। १९९१ तक तुर्कमेन सोवियत समाजवादी गणराज्य (तुर्कमेन SSR) के रूप में यह सोवियत संघ का एक घटक गणतंत्र था। इसकी सीमा दक्षिण पूर्व में अफ़ग़ानिस्तान, दक्षिण पश्चिम में ईरान, उत्तर पूर्व में उज़्बेकिस्तान, उत्तर पश्चिम में कज़ाख़िस्तान और पश्चिम में कैस्पियन सागर से मिलती है। 'तुर्कमेनिस्तान' नाम फारसी से आया है, जिसका अर्थ है, 'तुर्कों की भूमि'। देश की राजधानी अश्गाबात (अश्क़ाबाद) है। इसका हल्के तौर पर "प्यार का शहर" या "शहर जिसको मोहब्बत ने बनाया" के रूप में अनुवाद होता है। यह अरबी के शब्द 'इश्क़' और फारसी प्रत्यय 'आबाद' से मिलकर बना है।, Bradley Mayhew, Lonely Planet, 2007, ISBN 978-1-74104-614-4,...

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तुर्कमेनिस्तान के प्रान्त

तुर्कमेनिस्तान का प्रान्तीय नक़्शा (तालिका से संख्यांक मिलाएँ) तुर्कमेनिस्तान का एक और प्रान्तीय नक़्शा तुर्कमेनिस्तान के प्रान्त (तुर्कमेनी: Türkmenistanyň welaýatlary, तुअर्कमेनिस्तानिन विलायत्लरी) तुर्कमेनिस्तान के मुख्य प्रशासनिक विभाग हैं। मध्य एशिया के बहुत से अन्य देशों की तरह तुर्कमेनिस्तान में भी प्रान्तों को 'विलायत' बुलाया जाता है, मसलन बाल्क़ान प्रान्त का औपचारिक नाम 'बाल्क़ान विलायती' (Balkan welaýaty) है। हर प्रान्त के मुख्य प्रशासनिक अध्यक्ष को 'हाकिम' कहा जाता है और उसकी नियुक्ति तुर्कमेनिस्तान के राष्ट्रपति करते हैं। .

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तुर्किस्तान

सन् १९१४ के नक़्शे में रूसी तुर्किस्तान दर्शाया गया है तुर्किस्तान (अंग्रेज़ी: Turkistan या Turkestan, फ़ारसी) मध्य एशिया के एक बड़ा भूभाग का पारम्परिक नाम है जहाँ तुर्की भाषाएँ बोलने वाले तुर्क लोग रहते हैं। इस नाम द्वारा परिभाषित इलाक़े की सीमाएँ समय के साथ बदलती रहीं हैं और इसका प्रयोग भी तुर्किस्तान से बाहर रहने वाले लोग ही अधिक करते थे।, Anita Sengupta, Lexington Books, 2009, ISBN 978-0-7391-3606-5,...

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तुर्किस्तान शृंखला

तुर्किस्तान पर्वत शृंखला मध्य एशिया में स्थित एक पर्वत शृंखला है जो पामीर-अलाय पर्वत मंडल का एक भाग है। यह पर्वतों की कतार ज़रफ़शान पर्वत शृंखला से उत्तर में स्थित है और किर्गिज़स्तान और ताजिकिस्तान की सरहद पर अलाय पर्वत शृंखला से शुरू होकर पश्चिम में ३४० किमी दूर उज़्बेकिस्तान में समरक़ंद के नख़्लिस्तान (ओएसिस) पर ख़त्म होती है। .

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तुर्की-मंगोल

मुग़ल आक्रमणों से पूर्व का यूरेशिया, क़रीब १२०० ईसवी की स्थिति तुर्की-मंगोल (Turco-Mongol) मध्य एशिया के स्तेपी इलाक़े में रहने वाले विविध ख़ानाबदोश लोगों को दिया जाने वाला नाम था जो मंगोल साम्राज्य के अधीन थे। समय के साथ-साथ उनकी भाषा और पहचान में गहरी तुर्की छाप आ गई।, Reuven Amitai-Preiss, Cambridge University Press, 2005, ISBN 978-0-521-52290-8,...

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तुर्कीयाई भाषा

तुर्की-भाषी क्षेत्र: '''गहरा नीला''': वे क्षेत्र जहाँ तुर्की भाषा को राजभाषा का दर्जा प्राप्त है, '''हल्का नीला''': जहाँ तुर्की भाषा को अल्पसंख्यक भाषा की मान्यता प्राप्त है। तुर्की भाषा (Türkçe), आधुनिक तुर्की और साइप्रस की प्रमुख भाषा है। पूरे विश्व में कोई 6.3 करोड़ लोग इस मातृभाषा के रूप में बोलते हैं। यह तुर्क भाषा परिवार की सबसे व्यापक भाषा है जिसका मूल मध्य एशिया माना जाता है। बाबर, जो मूल रूप से मध्य एशिया (आधुनिक उज़्बेकिस्तान) का वासी था, चागताई भाषा बोलता था जो तुर्क भाषा परिवार में ही आती है। .

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तुषारी भाषाएँ

एक तख़्ती पर ब्राह्मी लिपि में लिखी हुई तुषारी 'बी' भाषा (कूचा, आक़्सू विभाग, शिनजियांग प्रान्त, चीन से मिली) तुषारी पांडुलिपि का अंश तुषारी या तुख़ारी (अंग्रेज़ी: Tocharian, टोचेरियन; यूनानी: Τόχαροι, तोख़ारोई) मध्य एशिया की तारिम द्रोणी में बसने वाले तुषारी लोगों द्वारा बोली जाने वाली हिन्द-यूरोपीय भाषा परिवार की भाषाएँ थीं जो समय के साथ विलुप्त हो गई। एक तुर्की ग्रन्थ में तुषारी को 'तुरफ़ानी भाषा' भी बुलाया गया था। इतिहासकारों का मानना है कि जब तुषारी-भाषी क्षेत्रों में तुर्की भाषाएँ बोलने वाली उईग़ुर लोगों का क़ब्ज़ा हुआ तो तुषारी भाषाएँ ख़त्म हो गई। तुषारी की लिपियाँ भारत की ब्राह्मी लिपि पर आधारित थीं और उन्हें तिरछी ब्राह्मी (Slanted Brahmi) कहा जाता है।, Florian Coulmas, Wiley-Blackwell, 1999, ISBN 978-0-631-21481-6,...

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तुषारी लोग

तारिम द्रोणी में स्थित क़िज़िल गुफ़ाओं में तुषारियों की छठी सदी में बनी तस्वीर - माना जाता है कि इनमें से बहुत के सुनहरे बाल और बिलौरी आँखें होती थीं तुषारी या तुख़ारी (अंग्रेज़ी: Tocharian, टोचेरियन) प्राचीन काल में मध्य एशिया में स्थित तारिम द्रोणी में बसने वाली एक जाति थी। यह हिन्द-यूरोपीय भाषाएँ बोलने वाले सब से पूर्वतम लोग थे। चीनी स्रोतों के अनुसार इनका युएझ़ी लोगों से गहरा सम्बन्ध था। इनकी उत्तरी शियोंगनु लोगों से बहुत झड़पें हुई, जिसके बाद इन्होनें तारिम द्रोणी का इलाक़ा छोड़ दिया। ८०० ईसवी के बाद इस क्षेत्र में इस क्षेत्र में उइग़ुर लोग के आकर बसने पर यहाँ हिन्द-यूरोपीय भाषाएँ विलुप्त हो गई और तुर्की भाषाएँ बोली जाने लगी। अफ़्ग़ानिस्तान के तख़ार प्रांत का नाम इसी जाति पर पड़ा है। इनका ज़िक्र संस्कृत ग्रंथों में बहुत होता है। अथर्ववेद में इन्हें शक लोगों और बैक्ट्रिया के लोगों से सम्बंधित बताया गया है।, Vasudev Sharan Agrawal, Prithvi Prakashan, 1963,...

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तैमूरी राजवंश

अपने चरम पर तैमूरी साम्राज्य तैमूरी राजवंश (फ़ारसी:, तैमूरियान), जो स्वयं को 'गुरकानी राजवंश' कहते थे, मध्य एशिया और उत्तरी भारतीय उपमहाद्वीप के विस्तृत इलाक़ों पर राज करने वाला तुर्की-मंगोल नस्ल का एक सुन्नी मुस्लिम वंश था। अपने चरम पर इसके साम्राज्य में समस्त ईरान, अफ़्ग़ानिस्तान और उज़बेकिस्तान के साथ-साथ पाकिस्तान, उत्तर भारत, आनातोलिया, कॉकस और मेसोपोटामिया के बड़े भूभाग शामिल थे। इस राजवंश की नीव १४वीं शताब्दी ईसवी में तैमूरलंग नामक आक्रामक और विजेता ने रखी थी।, Maria Subtelny, BRILL, 2007, ISBN 978-90-04-16031-6 १६वीं सदी में उज़बेकिस्तान की फ़रग़ना वादी से भारत पर आक्रमण करके मुग़ल सलतनत की स्थापना करने वाला बाबर भी इसी तैमूरी राजवंश का हिस्सा था। क्योंकि तैमूरलंग को अक्सर 'अमीर तैमूर' कहा जाता था इसलिए इस राजघराने के वंशज अपने नामों में अक्सर 'मिर्ज़ा' जोड़ लिया करते थे जो 'अमीरज़ादा' (यानि 'अमीर का पुत्र') का संक्षिप्त रूप है।, Mansura Haidar, Mukhtar Ahmad Ansari, Department of History, Jamia Millia Islamia (India), Aakar Books, 2003, ISBN 978-81-87879-11-4,...

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तूमन

तूमन या तोमान शब्द का अर्थ मंगोल भाषा और बहुत सी तुर्की भाषाओँ में 'दस हज़ार' की संख्या होता है और आधुनिक फ़ारसी में इसका अर्थ विस्तृत होकर 'असंख्य' या 'बहुत अधिक' भी हो गया है। इसका प्रयोग मध्य एशिया, मंगोलिया और ईरान में कई सन्दर्भों में मिलता है, जैसे कि -.

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तूमन चानयू

२०० ईसापूर्व में शियोंगनु साम्राज्य तूमन (चीनी: 頭曼, मंगोल: Түмэн, अंग्रेज़ी: Touman) मध्य एशिया और चीन पर प्राचीनकाल में अधिकार रखने वाले शियोंगनु लोगों का सबसे पहला चानयू (सम्राट) था। उसका शासनकाल २२० ईसापूर्व से २०९ ईसापूर्व अनुमानित किया गया है। इतिहासकारों का मानना है कि तूमन का नाम शब्द मंगोल भाषा के 'तुमेन' शब्द से लिया गया है, जिसका मतलब 'दस हज़ार' होता है। .

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तूवा

तूवा, जिसका सरकारी नाम तूवा गणतंत्र (तूवी: Тыва Республика तिवा रयिसपुब्लिका) है, मध्य एशिया के दक्षिणी साइबेरिया क्षेत्र में स्थित रूस का एक राज्य है जो रूस की संघ व्यवस्था में गणतंत्र की हैसियत रखता है। भौगोलिक दृष्टि से तूवा ठीक एशिया के महाद्वीप के भौगोलिक केंद्र में बैठता है। तूवा की सरहदें कुछ अन्य रूसी राज्यों से लगतीं हैं और दक्षिण की ओर मंगोलिया से लगतीं हैं। तूवा की राजधानी किज़िल है। इस राज्य में अधिकतर लोग तूवी भाषा बोलते हैं, हालांकि की रूसी भी कई लोगों द्वारा समझी और बोली जाती है। १९४४ तक तूवा एक तन्नू तूवा नाम का अलग राष्ट्र था, लेकिन १९४४ में इसका रूस और सोवियत संघ में विलय हो गया। .

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तेन्ग्री

यहाँ पुरानी तुर्की लिपि में 'तेन्ग्री' लिखा हुआ है गुयुक ख़ान द्वारा १२४६ ई में इसाई पोप को लिखे पत्र पर लगी मोहर में पहले चार शब्द है 'मोन्गके तेन्ग्री- यिन कुचुन्दुर' यानि 'सनातन आकाश की शक्ति के अधीन' ख़ान तेन्ग्री पर्वत तेन्ग्री (Tengri) प्राचीन तुर्क लोगों और मंगोल लोगों के धर्म के मुख्य देवता थे। इनकी मान्यता शियोंगनु और शियानबेई जैसे बहुत सी मंगोल और तुर्की समुदायों में थी और इनके नाम पर उन लोगों के धर्म को तेन्ग्री धर्म (Tengriism) बुलाया जाता है। तुर्की लोगों की सबसे पहली ख़ागानत ने, जिसका नाम गोएकतुर्क ख़ागानत था, भी इन्हें अपना राष्ट्रीय देवता ठहराया था और उसके ख़ागान भी अपनी गद्दी पर विराजमान होने का कारण 'तेन्ग्री की इच्छा' बताते थे। तेन्ग्री को 'आकाश का देवता' या 'नीले आकाश का पिता' कहा जाता था। अक्सर मंगोल शासक अपने राज के पीछे 'सनातन नीले आकाश की इच्छा' होने की बात किया करते थे।, Zachary Kent, Enslow Publishers, 2007, ISBN 978-0-7660-2715-2,...

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तेन्ग्री धर्म

काज़ाख़स्तान के राष्ट्रीय ध्वज की नीली पृष्ठभूमि 'सनातन नीले आकाश', यानि तेन्ग्री, का प्रतीक है तेन्ग्री धर्म (पुरानी तुर्की: 7px7px7px7px, मंगोल: Тэнгэр шүтлэг, अंग्रेज़ी: Tengrism) एक प्राचीन मध्य एशियाई धर्म है जिसमें ओझा प्रथा, सर्वात्मवाद, टोटम प्रथा और पूर्वज पूजा के तत्व शामिल थे। यह तुर्क लोगों और मंगोलों की मूल धार्मिक प्रथा थी। इसके केन्द्रीय देवता आकाश के प्रभु तेन्ग्री (Tengri) थे और इसमें आकाश के लिए बहुत श्रद्धा रखी जाती थी। आज भी मध्य एशिया और उत्तरी एशिया में तूवा और साइबेरिया में स्थित ख़कासिया जैसी जगहों पर तेन्ग्री धर्म के अनुयायी सक्रीय हैं।, Robert A. Saunders, Vlad Strukov, Scarecrow Press, 2010, ISBN 978-0-8108-5475-8,...

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तोकमोक

तोकमोक शहर के एक चौराहे पर मिग (MIG) हवाई जहाज़ स्मारक तोकमोक (किरगिज़: Токмок, अंग्रेज़ी: Tokmok) मध्य एशिया के किर्गिज़स्तान देश के चुय प्रांत में एक शहर है। यह किर्गिज़स्तान के उत्तर में राष्ट्रीय राजधानी बिश्केक से पूर्व में चुय नदी और काज़ाख़स्तान की सरहद के पास स्थित है। सन् २००४ से १९ अप्रैल २००६ तक यह चुय प्रांत की राजधानी भी रहा था। .

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दही (योगहर्ट या योगर्ट)

तुर्की दही एक तुर्की ठंडा भूख बढ़ाने वाला दही का किस्म दही (Yoghurt) एक दुग्ध-उत्पाद है जिसे दूध के जीवाण्विक किण्वन के द्वारा बनाया जाता है। लैक्टोज के किण्वन से लैक्टिक अम्ल बनता है, जो दूध के प्रोटीन पर कार्य करके इसे दही की बनावट और दही की लाक्षणिक खटास देता है। सोय दही, दही का एक गैर-डेयरी विकल्प है जिसे सोय दूध से बनाया जाता है। लोग कम से कम 4,500 साल से दही-बना रहे हैं-और खा रहे हैं। आज यह दुनिया भर में भोजन का एक आम घटक है। यह एक पोषक खाद्य है जो स्वास्थ्य के लिए अद्वितीय रूप से लाभकारी है। यह पोषण की दृष्टि से प्रोटीन, कैल्सियम, राइबोफ्लेविन, विटामिन B6 और विटामिन B12 में समृद्ध है। .

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दिंगलींग लोग

दिंगलींग (चीनी: 丁零, अंग्रेजी: Dingling, कोरियाई: जेओंग रयुंग) साइबेरिया में बसने वाली एक प्राचीन जाति थी। यह शुरू में बयकाल झील से पश्चिम में लेना नदी के किनारे बसा करते थे लेकिन समय के साथ दक्षिण की ओर जाकर मंगोलिया और उत्तरी चीन के क्षेत्र में जा बसे। महान इतिहासकार के अभिलेख नामक चीनी इतिहास-ग्रन्थ के अनुसार बाद में उन्हें शियोंगनु साम्राज्य के अधीन कर लिया गया हालांकि ७१ ईसापूर्व के बाद उन्होंने शियोंगनुओं के ख़िलाफ़ विद्रोह करा। तीसरी सदी ईसवी के बाद वे तिएले लोगों (鐵勒, Tiele) का भाग बन गए जो धीरे-धीरे पश्चिम की ओर मध्य एशिया में फैल गए। इन्ही तिएले लोगों का एक गुट हिन्द-यूरोपीयों से मिश्रित हो गया जिस से उईग़ुर जाति उत्पन्न हुई। दिंगलींग लोगों की एक दूसरी शाखा शियानबेई लोगों में जा मिली।, University of California, Berkeley.

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दक्षिण क़ज़ाख़स्तान प्रांत

दक्षिण क़ज़ाख़स्तान प्रांत (कज़ाख़: Оңтүстік Қазақстан облысы, अंग्रेज़ी: South Kazakhstan Province) मध्य एशिया के क़ज़ाख़स्तान देश का एक प्रांत है। इसकी राजधानी शिमकेंत (Shimkent) नाम का शहर है। इस प्रांत की दक्षिणी सरहद उज़बेकिस्तान से लगती है और उज़बेकिस्तान की राजधानी ताशकेंत इसके बहुत पास है। मध्य एशिया की प्रसिद्ध नदी सिर दरिया इस प्रांत से होते हुए अरल सागर की तरफ़ गुज़रती है। यहाँ से तुर्कमेनिस्तान के तुर्कमेनाबात शहर से रूस के ओम्स्क शहर तक जाने वाली तेल की एक महत्वपूर्ण पाइप-लाइन भी निकलती है। शिमकेंत में कच्चे खनिजों से तेल, सीसा और जस्ता (ज़िंक) के कई कारख़ाने हैं। .

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दुर्रानी साम्राज्य

दुर्रानी साम्राज्य (पश्तो:, द दुर्रानियानो वाकमन​ई) एक पश्तून साम्राज्य था जो अफ़्ग़ानिस्तान पर केन्द्रित था और पूर्वोत्तरी ईरान, पाकिस्तान और पश्चिमोत्तरी भारत पर विस्तृत था। इस १७४७ में कंदहार में अहमद शाह दुर्रानी (जिसे अहमद शाह अब्दाली भी कहा जाता है) ने स्थापित किया था जो अब्दाली कबीले का सरदार था और ईरान के नादिर शाह की फ़ौज में एक सिपहसलार था। १७७३ में अहमद शाह की मृत्यु के बाद राज्य उसके पुत्रों और फिर पुत्रों ने चलाया जिन्होने राजधानी को काबुल स्थानांतरित किया और पेशावर को अपनी शीतकालीन राजधानी बनाया। अहमद शाह दुर्रानी ने अपना साम्राज्य पश्चिम में ईरान के मशाद शहर से पूर्व में दिल्ली तक और उत्तर में आमू दरिया से दक्षिण में अरब सागर तक फैला दिया और उसे कभी-कभी आधुनिक अफ़्ग़ानिस्तान का राष्ट्रपिता माना जाता है।, Library of Congress Country Studies on Afghanistan, 1997, Accessed 2010-08-25 .

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दुर्गा बायरामोव

दुर्दी बायरामोव (रूसी: Дурды Байрамов, अप्रैल 14,1938 - फरवरी 14, 2014) एक शिक्षाविद् और कलाकार थे जिनको अपने देश के सर्वोच्च मानद उपाधि, “तुर्कमेनी जनता के कलाकार” से सम्मानित किया गया था। उनके तुर्कमेनी मूल निवासी भाषा में, दुर्दी बायरामोव का नाम केवल “दुर्दी बयरम” है (बिना स्लाव शैली; "ov" का प्रत्यय सोवियत युग के दौरान नामों का रूसिकरण करने के लिए जोड़ा गया) है। "बयरम " नाम तुर्कमेन भाषा में अर्थ “ उत्सव" है। .

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दुशान्बे

दुशान्बे दुशान्बे चिकित्सा-विज्ञान विश्वविद्यालय (दोनिशगोही दवलती तिब्बी तोजिकिस्तोन) दुशान्बे (ताजिकी: Душанбе,, Dushanbe) मध्य एशिया के देश ताजिकिस्तान की राजधानी और सबसे बड़ा शहर है। इसकी आबादी वर्ष २००८ में ६,७९,४०० अनुमानित की गई थी। शहर को १९२९ तक द्युशान्बे (Dyushanbe) के नाम से जाना जाता था और १९२९ से १९६१ तक इसका नाम स्तालिनाबाद (Сталинабад, Stalinabad) रहा। .

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द्रुह्यु लोग

द्रुह्यु बृहत भारतीय उपमहाद्वीप के पश्चिमोत्तर भाग में बसने वाले आर्य समुदाय का एक प्रमुख क़बीला था। इनका वर्णन ऋग्वेद में अनु समुदाय के साथ आता है। ऋग्वेद के सातवे मंडल में द्रुह्यु योद्धा पुरुओं द्वारा स्थापित उस मित्रपक्ष में थे जिन्होने दस राजाओं के युद्ध (दशराज्ञ युद्ध) में भारत क़बीले के राजा सुदास से जंग की थी जिसमें पुरुओं की हार हुई थी। .

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दूनहुआंग

दूनहुआंग में एक बाज़ार चीन के गांसू प्रान्त में दूनहुआंग शहर (गुलाबी रंग में) हान राजवंश काल के दौरान बने मिट्टी के संतरी बुर्ज के खंडहर नवचंद्र झील दूनहुआंग (चीनी: 敦煌, अंग्रेज़ी: Dunhuang) पश्चिमी चीन के गांसू प्रान्त में एक शहर है जो ऐतिहासिक रूप से रेशम मार्ग पर एक महत्वपूर्ण पड़ाव हुआ करता था। इसकी आबादी सन् २००० में १,८७,५७८ अनुमानित की गई थी। रेत के टीलों से घिरे इस रेगिस्तानी इलाक़े में दूनहुआंग एक नख़लिस्तान (ओएसिस) है, जिसमें 'नवचन्द्र झील' (Crescent Lake) पानी का एक अहम स्रोत है। प्राचीनकाल में इसे शाझोऊ (沙州, Shazhou), यानि 'रेत का शहर', के नाम से भी जाना जाता था। यहाँ पास में मोगाओ गुफ़ाएँ भी स्थित हैं जहाँ बौद्ध धर्म से सम्बन्धी ४९२ मंदिर हैं और जिनमें इस क्षेत्र की प्राचीन संस्कृति पर भारत का गहरा प्रभाव दिखता है।, Morning Glory Publishers, 2000, ISBN 978-7-5054-0715-2,...

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दोलमा

दोल्मा बाल्कन, काकेशस, रूस और मध्य एशिया के समेत मध्य पूर्व और आसपास के इलाक़ों में बनता आम सब्ज़ी वाला पकवान है। भराई सामग्री की आम सब्ज़ियों में टमाटर, मिर्च, प्याज़, शकरकन्द, बैंगन, और लहसुन शामिल हैं। भराई में गोश्त को शामिल करना ज़रूरी नहीं है। गोश्त दोमा को आम तौर पर गर्मा-गर्म अंडा-नींबू या लहसुन की चटनी से परोसा जाता है और बिना गोश्त वालों को ठण्डा परोसा जाता है। भराई सामग्री की सब्ज़ियों को इटालवी पकवान में ripieni "रिपिएनी" कहते है। अंगूर या गोभी पत्तों के पकवान जिसको भरत से भी लपेटा होता है, उसको दोलमा या यपर्क दोलमा (पत्तों का दोलमा) भी कहते है। .

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नमन्गान प्रान्त

उज़बेकिस्तान के नक़्शे में नमन्गान प्रान्त (लाल रंग में) नमन्गान प्रान्त (उज़बेक: Наманган вилояти, नमन्गान विलोयती; अंग्रेज़ी: Namangan Province) मध्य एशिया में स्थित उज़बेकिस्तान देश का एक विलायात (प्रान्त) है जो उस देश के सुदूर पूर्वी भाग की फ़रग़ना घाटी के दक्षिणी क्षेत्र में स्थित है। प्रान्त का कुल क्षेत्रफल ७,९०० वर्ग किमी है और २००५ में इसकी अनुमानित आबादी १९,७०,००० थी। इस सूबे के ६०% से अधिक लोग ग्रामीण इलाक़ों में रहते हैं। नमन्गान प्रान्त की राजधानी नमन्गान शहर है।, Нурислам Тухлиев, Алла Кременцова, Ozbekiston milliy ensiklopediasi, 2007 .

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नरभक्षण

हैंस स्टैडेन द्वारा कहा गया 1557 में नरभक्षण. लियोंहार्ड कर्ण द्वारा नरभक्षण, 1650 नरभक्षण (नरभक्षण) (नरभक्षण की आदत के लिए विख्यात वेस्ट इंडीज जनजाति कैरीब लोगों के लिए स्पेनिश नाम कैनिबलिस से) एक ऐसा कृत्य या अभ्यास है, जिसमें एक मनुष्य दूसरे मनुष्य का मांस खाया करता है। इसे आदमखोरी (anthropophagy) भी कहा जाता है। हालांकि "कैनिबलिज्म" (नरभक्षण) अभिव्यक्ति के मूल में मनुष्य द्वारा दूसरे मनुष्य के खाने का कृत्य है, लेकिन प्राणीशास्त्र में इसका विस्तार करते हुए किसी भी प्राणी द्वारा अपने वर्ग या प्रकार के सदस्यों के भक्षण के कृत्य को भी शामिल कर लिया गया है। इसमें अपने जोड़े का भक्षण भी शामिल है। एक संबंधित शब्द, "कैनिबलाइजेशन" (अंगोपयोग) के अनेक अर्थ हैं, जो लाक्षणिक रूप से कैनिबलिज्म से व्युत्पन्न हैं। विपणन में, एक उत्पाद के कारण उसी कंपनी के अन्य उत्पाद के बाजार के शेयर के नुकसान के सिलसिले में इसका उल्लेख किया जा सकता है। प्रकाशन में, इसका मतलब अन्य स्रोत से सामग्री लेना हो सकता है। विनिर्माण में, बचाए हुए माल के भागों के पुनःप्रयोग पर इसका उल्लेख हो सकता है। खासकर लाइबेरिया और कांगो में, अनेक युद्धों में हाल ही में नरभक्षण के अभ्यास और उसकी तीव्र निंदा दोनों ही देखी गयी। अतीत में दुनिया भर के मनुष्यों के बीच व्यापक रूप से नरभक्षण का प्रचलन रहा था, जो 19वीं शताब्दी तक कुछ अलग-थलग दक्षिण प्रशांत महासागरीय देशों की संस्कृति में जारी रहा; और, कुछ मामलों में द्वीपीय मेलेनेशिया में, जहां मूलरूप से मांस-बाजारों का अस्तित्व था। फिजी को कभी 'नरभक्षी द्वीप' ('Cannibal Isles') के नाम से जाना जाता था। माना जाता है कि निएंडरथल नरभक्षण किया करते थे, और हो सकता है कि आधुनिक मनुष्यों द्वारा उन्हें ही कैनिबलाइज्ड अर्थात् विलुप्त कर दिया गया हो। अकाल से पीड़ित लोगों के लिए कभी-कभी नरभक्षण अंतिम उपाय रहा है, जैसा कि अनुमान लगाया गया है कि ऐसा औपनिवेशिक रौनोक द्वीप में हुआ था। कभी-कभी यह आधुनिक समय में भी हुआ है। एक प्रसिद्ध उदाहरण है उरुग्वेयन एयर फ़ोर्स फ्लाइट 571 की दुर्घटना, जिसके बाद कुछ बचे हुए यात्रियों ने मृतकों को खाया.

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नायमन लोग

चंगेज़ ख़ान के मंगोल साम्राज्य से पहले १३वीं सदी में यूरेशिया के स्थिति - नायमन (Naiman) राज्य नक़्शे में दिख रहा है नायमन या नायमन तुर्क या नायमन मंगोल (मंगोल: Найман ханлиг, नायमन ख़ानलिग) मध्य एशिया के स्तेपी इलाक़े में बसने वाली एक जाति का मंगोल भाषा में नाम था, जिनके कारा-ख़ितान के साथ सम्बन्ध थे और जो सन् ११७७ तक उनके अधीन रहे। मंगोल नाम होने के बावजूद, नायमानों को एक मंगोल जाति नहीं बल्कि एक तुर्की जाति माना जाता है।, René Grousset, Rutgers University Press, 1970, ISBN 978-0-8135-1304-1,...

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नारोमुरार

नारोमुरार वारिसलीगंज प्रखण्ड के प्रशाशानिक क्षेत्र के अंतर्गत राष्ट्रीय राजमार्ग 31 से 10 KM और बिहार राजमार्ग 59 से 8 KM दूर बसा एकमात्र गाँव है जो बिहार के नवादा और नालंदा दोनों जिलों से सुगमता से अभिगम्य है। वस्तुतः नार का शाब्दिक अर्थ पानी और मुरार का शाब्दिक अर्थ कृष्ण, जिनका जन्म गरुड़ पुराण के अनुसार विष्णु के 8वें अवतार के रूप में द्वापर युग में हुआ, अर्थात नारोमुरार का शाब्दिक अर्थ विष्णुगृह - क्षीरसागर है। प्रकृति की गोद में बसा नारोमुरार गाँव, अपने अंदर असीम संस्कृति और परंपरा को समेटे हुए है। यह भारत के उन प्राचीनतम गांवो में से एक है जहाँ 400 वर्ष पूर्व निर्मित मर्यादा पुरुषोत्तम राम व् परमेश्वर शिव को समर्पित एक ठाकुर वाड़ी के साथ 1920 इसवी, भारत की स्वतंत्रता से 27 वर्ष पूर्व निर्मित राजकीयकृत मध्य विद्यालय और सन 1956 में निर्मित एक जनता पुस्तकालय भी है। पुस्तकालय का उद्घाटन श्रीकृष्ण सिंह के समय बिहार के शिक्षा मंत्री द्वारा की गयी थी। .

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नारीन

नारीन बाज़ार नारीन(किरगिज़: Нарын, अंग्रेज़ी: Naryn) मध्य एशिया के किर्गिज़स्तान देश का एक शहर है और उस राष्ट्र के नारीन प्रांत की राजधानी भी है। यह नारीन नदी के किनारे बसा हुआ है जो प्रसिद्ध सिर दरिया की एक प्रमुख उपनदी है और शहर से गुज़रते हुए एक आकर्षक तंग घाटी बनाती है। इस शहर में दो क्षेत्रीय संग्रहालय, एक आकर्षक मस्जिद, एक 'हाकिमयत' नामक सरकारी कार्यालय और कुछ यात्रियों के ठहरने के होटल हैं लेकिन इनके अलावा यह एक छोटा सा शहर है।, Bradley Mayhew, pp.

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नारीन नदी

किर्गिज़स्तान के नारीन शहर के पास नारीन नदी अंतरिक्ष से ली गई कारा दरिया और नारीन नदी के संगम क्षेत्र की तस्वीर, जिसके इर्द-गिर्द बहुत से खेत नज़र आ रहे हैं नारीन नदी (किरगिज़: Нарын, अंग्रेज़ी: Naryn) मध्य एशिया क्षेत्र में किर्गिज़स्तान और उज़बेकिस्तान में बहने वाली सिर दरिया नदी की एक प्रमुख उपनदी है। यह ८०७ किमी लम्बी नदी किर्गिज़स्तान के तियान शान पहाड़ों में उभरती है और पश्चिम में फ़रग़ना वादी और उज़्बेकिस्तान में दाख़िल होकर कारा दरिया से संगम करती है जिसके बाद इस मिश्रित धारा को मध्य एशिया की दूसरी सबसे बड़ी नदी, सिर दरिया, के नाम से जाना जाता है। नारीन नदी पर बहुत से बाँध हैं। इसके जलसम्भर का क्षेत्रफल ५९,१०० वर्ग किमी है।, James R. Penn, ABC-CLIO, 2001, ISBN 978-1-57607-042-0,...

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नारीन प्रांत

कोचकोर शहर में एक मस्जिद नारीन प्रांत (किरगिज़: Нарын областы, अंग्रेज़ी: Naryn Province) मध्य एशिया के किर्गिज़स्तान देश का एक प्रांत है। इस प्रांत की राजधानी भी नारीन नाम का ही शहर है। .

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नई दिल्ली

नई दिल्ली भारत की राजधानी है। यह भारत सरकार और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार के केंद्र के रूप में कार्य करता है। नई दिल्ली दिल्ली महानगर के भीतर स्थित है, और यह दिल्ली संघ राज्य क्षेत्र के ग्यारह ज़िलों में से एक है। भारत पर अंग्रेज शासनकाल के दौरान सन् 1911 तक भारत की राजधानी कलकत्ता (अब कोलकाता) था। अंग्रेज शासकों ने यह महसूस किया कि देश का शासन बेहतर तरीके से चलाने के लिए कलकत्ता की जगह यदि दिल्‍ली को राजधानी बनाया जाए तो बेहतर होगा क्‍योंकि य‍ह देश के उत्तर में है और यहां से शासन का संचालन अधिक प्रभावी होगा। इस पर विचार करने के बाद अंग्रेज महाराजा जॉर्ज पंचम ने देश की राजधानी को दिल्‍ली ले जाने के आदेश दे दिए। वर्ष 2011 में दिल्ली महानगर की जनसंख्या 22 लाख थी। दिल्ली की जनसंख्या उसे दुनिया में पाँचवीं सबसे अधिक आबादी वाला, और भारत का सबसे बड़ा महानगर बनाती है। क्षेत्रफल के अनुसार भी, दिल्ली दुनिया के बड़े महानगरों में से एक है। मुम्बई के बाद, वह देश का दूसरा सबसे अमीर शहर है, और दिल्ली का सकल घरेलू उत्पाद दक्षिण, पश्चिम और मध्य एशिया के शहरों में दूसरे नम्बर पर आता है। नई दिल्ली अपनी चौड़ी सड़कों, वृक्ष-अच्छादित मार्गों और देश के कई शीर्ष संस्थानो और स्थलचिह्नों के लिए जानी जाती है। 1911 के दिल्ली दरबार के दौरान, 15 दिसम्बर को शहर की नींव भारत के सम्राट, जॉर्ज पंचम ने रखी, और प्रमुख ब्रिटिश वास्तुकार सर एड्विन लुट्यन्स और सर हर्बर्ट बेकर ने इसकी रूपरेखा तैयार की। ब्रिटिश भारत के गवर्नर जनरल लॉर्ड इर्विन द्वारा 13 फ़रवरी 1931 को नई दिल्ली का उद्घाटन हुआ। बोलचाल की भाषा में हालाँकि दिल्ली और नयी दिल्ली यह दोनों नाम राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के अधिकार क्षेत्र को संदर्भित करने के लिए के प्रयोग किये जाते हैं, मगर यह दो अलग-अलग संस्था हैं और नयी दिल्ली, दिल्ली महानगर का छोटा सा हिस्सा है। .

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नई भूमि अभियान

सोवियत डाक टिकट जिसपर रूसी भाषा में 'नई भूमि पर विजय करने वालों को नमस्कार' लिखा हुआ है नई भूमि अभियान (रूसी: Освоение целины, ओस्वोएनिए त्सेलिन्य; अंग्रेज़ी: Virgin Lands Campaign) सोवियत संघ में १९५० और १९६० के दशकों में अन्न की सख़्त कमी से निबटने के लिए मध्य एशिया, उत्तरी कॉकस और पश्चिमी साइबेरिया के विशाल स्तेपी मैदानी क्षेत्रों में नए सिरे से कृषि शुरू करने की योजना का नाम था। इसका उद्घाटन १९५३ में उस समय के सोवियत नेता निकिता ख़्रुशचेव​ ने किया था। इसके अंतर्गत दसियों हज़ार वर्ग किमी क्षेत्रफल की ज़मीन पर सिंचाई और अनाज उगाने का काम आरम्भ किया गया। .

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नवपाषाण युग

अनेकों प्रकार की निओलिथिक कलाकृतियां जिनमें कंगन, कुल्हाड़ी का सिरा, छेनी और चमकाने वाले उपकरण शामिल हैं नियोलिथिक युग, काल, या अवधि, या नव पाषाण युग मानव प्रौद्योगिकी के विकास की एक अवधि थी जिसकी शुरुआत मध्य पूर्व: फस्ट फार्मर्स: दी ओरिजंस ऑफ एग्रीकल्चरल सोसाईटीज़ से, पीटर बेल्वुड द्वारा, 2004 में 9500 ई.पू.

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नवोई

नवोई (उज़बेक: Навоий, नवोईय; अंग्रेज़ी: Navoiy) उज़बेकिस्तान का एक शहर है और उस मध्य एशियाई देश के नवोई प्रान्त की राजधानी है। भौगोलिक निर्देशांकों के हिसाब से यह नगर ४०°५'४ उत्तर और ६५°२२'४५ पूर्व में स्थित है। सन् २००७ में इसकी आबादी १,२५,८०० अनुमानित की गई थी। यह शहर किज़िल कुम रेगिस्तान के क्षेत्र में पड़ता है।, Embassy of the Union of the Soviet Socialist Republics in the USA, 1968,...

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नवोई प्रान्त

उज़बेकिस्तान के नक़्शे में नवोई प्रान्त (लाल रंग में) नवोई प्रान्त (उज़बेक: Навоий вилояти, नवोईय विलोयती; अंग्रेज़ी: Navoiy Province) मध्य एशिया में स्थित उज़बेकिस्तान देश का एक विलायात (प्रान्त) है जो उस देश के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में स्थित है। प्रान्त का कुल क्षेत्रफल १,१०,८०० वर्ग किमी है और २००५ में इसकी अनुमानित आबादी ७,६७,५०० थी। इस सूबे के लगभग ६०% लोग ग्रामीण इलाक़ों में रहते हैं। नवोई प्रान्त की राजधानी नवोई शहर है।, Нурислам Тухлиев, Алла Кременцова, Ozbekiston milliy ensiklopediasi, 2007 .

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नूडल

ताइवान के लुकांग शहर में बनते हुए मीसुआ नूडल्ज़ नूड्ल्ज़ गेहूं, चावल, बाजरे या अन्य क़िस्म के आटे से बनाकर सुखाये गए पतले, लम्बे रेशे होते हैं जिन्हें उबलते हुए पाने या तेल में डालकर खाने के लिए पकाया जाता है। जब नूड्ल्ज़ सूखे होते हैं तो अक्सर तीली की तरह सख़्त होतें हैं लेकिन उबालने के बाद मुलायम पड़कर खाने योग्य हो जाते हैं। नूड्ल्ज़ के एक रेशे को "नूड्ल" कहा जाता है। .

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पशुधन

घरेलू भेड़ और एक गाय (बछिया) दक्षिण अफ्रीका में एक साथ चराई करते हुए एक या अधिक पशुओं के समूह को, जिन्हें कृषि सम्बन्धी परिवेश में भोजन, रेशे तथा श्रम आदि सामग्रियां प्राप्त करने के लिए पालतू बनाया जाता है, पशुधन के नाम से जाना जाता है। शब्द पशुधन, जैसा कि इस लेख में प्रयोग किया गया है, में मुर्गी पालन तथा मछली पालन सम्मिलित नहीं है; हालांकि इन्हें, विशेष रूप से मुर्गीपालन को, साधारण रूप से पशुधन में सम्मिलित किया जाता हैं। पशुधन आम तौर पर जीविका अथवा लाभ के लिए पाले जाते हैं। पशुओं को पालना (पशु-पालन) आधुनिक कृषि का एक महत्वपूर्ण भाग है। पशुपालन कई सभ्यताओं में किया जाता रहा है, यह शिकारी-संग्राहक से कृषि की ओर जीवनशैली के अवस्थांतर को दर्शाता है। .

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पश्चिम क़ज़ाख़स्तान प्रांत

पश्चिम क़ज़ाख़स्तान प्रांत (कज़ाख़: Батыс Қазақстан облысы, अंग्रेज़ी: West Kazakhstan Province) मध्य एशिया के क़ज़ाख़स्तान देश का एक प्रांत है। इसकी राजधानी ओराल (Oral) नाम का शहर है, जिसे 'उराल्स्क' (Uralsk) भी कहा जाता है। इस प्रांत की सरहदें रूस से लगती हैं और यह यूराल पहाड़ों के पास स्थित है। यूराल नदी प्रांत से गुज़रकर कैस्पियन सागर की तरफ़ जाती है। भौगोलिक रूप से इस प्रांत को अक्सर पूर्वी यूरोप में माना जाता है। पश्चिम क़ज़ाख़स्तान प्रदेश का पहला गठन सोवियत संघ के ज़माने में सन् १९३२ में किया गया। १९६२ में इसका नाम बदलकर उराल्स्क प्रदेश कर दिया गया लेकिन १९९२ में इसे फिर से 'पश्चिम क़ज़ाख़स्तान' का नाम दे दिया गया।, Paul Brummell, Bradt Travel Guides, 2012, ISBN 978-1-84162-369-6,...

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पश्चिमी एशिया

पश्चिमी एशिया, या दक्षिण पश्चिम एशिया, शब्दावली का प्रयोग एशिया के सुदूर पश्चिमी भाग का वर्णन करने के लिए किया जाता है। यह शब्द आंशिक रूप से मध्य पूर्व (Middle East) का समानार्थी ही है, जो कि (मध्य पूर्व) एशिया के भीतर अपनी स्थिति के बजाय पश्चिमी यूरोप के साथ भौगोलिक स्थिति के सम्बन्ध का वर्णन करता है। .

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पश्चिमी क्षेत्र

पहली सदी ईसा-पूर्व में चीनी दृष्टिकोण से पश्चिमी क्षेत्रों का नक़्शा पश्चिमी क्षेत्र या षीयू (चीनी भाषा: 西域) तीसरी सदी ईसा-पूर्व से आठवी सदी ईसवी तक लिखे गए चीनी ग्रंथों में मध्य एशिया को कहा जाता था। कभी-कभी भारतीय उपमहाद्वीप और मध्य पूर्व के क्षेत्र को भी इसमें शामिल किया जाता था। व्यापार के लिए ऐतिहासिक रेशम मार्ग इन्हीं क्षेत्रों से होकर गुज़रता था। चीन में तंग राजवंश के काल के दौरान प्रसिद्ध यात्री ह्वेन त्सांग इसी क्षेत्र में दाख़िल हुआ, जिसमें उसने भारत को भी सम्मिलित किया। अपनी वापसी पर उसने "पश्चिमी क्षेत्र का महान तंग वर्णन" नामक ग्रन्थ लिखा। .

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पामीर-अलाय

अज़नोब दर्रे के पास ज़रफ़शान शृंखला का नज़ारा पामीर-अलाय (रूसी: Памиро-Алай, अंग्रेज़ी: Pamir-Alay) मध्य एशिया में ताजिकिस्तान, किर्गिज़स्तान, उज़बेकिस्तान और पूर्वी तुर्कमेनिस्तान में पर्वत-शृंखलाओं का एक गुट है, जो पामीर पर्वतमाला का एक हिस्सा समझे जाते हैं। यह उत्तर में सिर दरिया (फ़रग़ना वादी) की वादी से लेकर दक्षिण में वख़्श नदी तक विस्तृत हैं। इन पर्वतों की सबसे ऊँची चोटी तुर्किस्तान शृंखला में स्थित ५६२१ लम्बा पिक स्कालिस्ती (пик Скалистый, Pik Skalisty) है, जिसका अर्थ 'पत्थरीला पर्वत' है।, Maria Shahgedanova, Oxford University Press, 2003, ISBN 978-0-19-823384-8, Chapter 16 .

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पाव्लोदार प्रांत

पाव्लोदार प्रांत (कज़ाख़: Павлодар облысы, अंग्रेज़ी: Pavlodar Province) मध्य एशिया के क़ाज़ाख़स्तान देश का एक प्रांत है। इसकी राजधानी भी पाव्लोदार नाम का शहर ही है। इस प्रांत की सरहदें उत्तर में रूस से लगती हैं। साइबेरिया की महत्वपूर्ण इरतिश नदी चीन द्वारा नियंत्रित अल्ताई पर्वतों के एक भाग से निकलकर इस प्रांत से गुज़रती है और उत्तर में रूस में निकल जाती है। कुछ समीक्षकों के अनुसार क़ाज़ाख़स्तान का यह भाग रहन-सहन और संस्कृति में साइबेरिया जैसा अधिक और मध्य एशिया जैसा कम लगता है।, Paul Brummell, Bradt Travel Guides, 2012, ISBN 978-1-84162-369-6,...

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पाकिस्तान में परिवहन

पाकिस्तान परिवहन नेटवर्क कराची में एक व्यस्त चौराहा, अन्य प्रकार के परिवहन दिखाते हुए पाकिस्तान में परिवहन विस्तृत और विविध प्रकार के हैं लेकिन यह अभी भी विकास की प्रक्रिया में है और 170 मिलियन से भी अधिक व्यक्तियों को सेवा प्रदान कर रहा है।پاکِستان نقل و حمل नए हवाई अड्डों, सड़कों और रेलवे मार्गों के निर्माण के फलस्वरूप देश में रोजगारों की संख्या में भी वृद्धि हुई है। पाकिस्तान का अधिकांश मार्ग तंत्र (राष्ट्रीय राजमार्ग) और रेलवे मार्ग तंत्र 1947 के पहले के बने हुए हैं, मुख्यतया ब्रिटिश राज के दौरान.

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पाकिस्तान रेल

पाकिस्तान के रेल नेटवर्क लाहौर रेलवे स्टेशन कराची कैंट से लाहौर के लिए काराकोरम एक्सप्रेस जा रहा है। स्टेशन पाकिस्तान रेलवे के पाकिस्तान के एक राष्ट्रीय स्वामित्व राज्य के रेल परिवहन सेवा है, लाहौर में मुख्यालय.

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पितृवंश समूह ऍल

दक्षिण एशिया और मध्य पूर्व में पितृवंश समूह ऍल का फैलाव - आंकड़े बताते हैं के उस इलाक़े के कितने प्रतिशत पुरुष इसके वंशज हैं मनुष्यों की आनुवंशिकी (यानि जॅनॅटिक्स) में पितृवंश समूह ऍल या वाए-डी॰एन॰ए॰ हैपलोग्रुप L एक पितृवंश समूह है। अनुमान है के जिस पुरुष से यह पितृवंश शुरू हुआ वह आज से २५,००० वर्ष पहले भारतीय उपमहाद्वीप का निवासी था। इस पितृवंश समूह के सदस्य पुरुष ज़्यादातर भारत और पाकिस्तान में पाए जाते हैं। मध्य एशिया, मध्य पूर्व और दक्षिण यूरोप के भी कुछ पुरुष इस पितृवंश के वंशज हैं। सारे भारतीय पुरुषों में से ७%-२०% इसके वंशज हैं। लगभग ७% पठान इसके वंशज हैं। सीरिया के एक अल राक्क़ाह नाम के शहर के तो ५१% पुरुष इसके वंशज पाए गएँ हैं।Mirvat El-Sibai et al."Geographical Structure of the Y-chromosomal Genetic Landscape of the Levant: A coastal-inland contrast"," 'Annals of Human Genetics (2009) .

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पितृवंश समूह एच

रोमा समुदाय के भी कुछ पुरुष पितृवंश समूह एच के वंशज हैं मनुष्यों की आनुवंशिकी (यानि जॅनॅटिक्स) में पितृवंश समूह एच या वाए-डी॰एन॰ए॰ हैपलोग्रुप H एक पितृवंश समूह है। यह पितृवंश स्वयं पितृवंश समूह ऍफ़ से उत्पन्न हुई एक शाखा है। इस पितृवंश के पुरुष अधिकतर भारतीय उपमहाद्वीप में ही मिलते हैं, हालाँकि यूरोप में रोमा समुदाय के भी कुछ पुरुष इसके वंशज हैं, क्योंकि उनमें से बहुत भारतीय मूल के हैं। भारत में यह आदिवासियों में २५-३५% पुरुषों में पाया जाता है और सुवर्ण समुदायों के लगभग १०% पुरुषों में। मध्य पूर्व और मध्य एशिया के कुर्द, ईरानी, ताजिक, उइग़ुर और अन्य समुदायों में भी यह १% से १२% पुरुषों में पाया गया है। माना जाता है के पितृवंश समूह एच जिस पुरुष के साथ आरम्भ हुआ वह आज से २०,०००-३०,००० साल पहले दक्षिण एशिया का रहने वाला था। .

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पितृवंश समूह जे

पितृवंश समूह जे का मध्य पूर्व और अरबी प्रायद्वीप में फैलाव। आंकड़े बता रहें हैं के इन इलाकों के कितने प्रतिशत पुरुष इस पितृवंश के वंशज हैं। भारत तक इसका हल्का फैलाव देखा जा सकता है। मनुष्यों की आनुवंशिकी (यानि जॅनॅटिक्स) में पितृवंश समूह जे या वाए-डी॰एन॰ए॰ हैपलोग्रुप J एक पितृवंश समूह है। यह पितृवंश स्वयं पितृवंश समूह आईजे से उत्पन्न हुई एक शाखा है। इस पितृवंश के पुरुष अधिकतर मध्य पूर्व और अरबी प्रायद्वीप में मिलते हैं, हालांकि भारतीय उपमहाद्वीप, मध्य एशिया और दक्षिण यूरोप के कुछ पुरुष भी इसके सदस्य हैं। अनुमान है के जिस पुरुष से यह पितृवंश शुरू हुआ वह आज से लगभग ३०,०००-५०,००० वर्ष पहले अरबी प्रायद्वीप में या उसके आस-पास रहता था। भारत में इसकी उपशाखा पितृवंश समूह जे२ के वंशज पुरुष अधिक मिलते हैं। ठीक यही उपशाखा भूमध्य सागर के इर्द-गिर्द के इलाक़ों में भी मिलती है। .

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पितृवंश समूह आर

दुनिया में पितृवंश समूह आर की उपशाखाओं का फैलाव - आंकड़े बता रहे हैं के किसी भी इलाक़े के कितने प्रतिशत पुरुष इसके वंशज हैं मनुष्यों की आनुवंशिकी (यानि जॅनॅटिक्स) में पितृवंश समूह आर या वाए-डी॰एन॰ए॰ हैपलोग्रुप R एक पितृवंश समूह है। यह पितृवंश स्वयं पितृवंश समूह पी से उत्पन्न हुई एक शाखा है। इस पितृवंश की आर१ए, आर१बी और आर२ उपशाखाओं के पुरुष ज़्यादातर यूरोप, मध्य एशिया, पूर्वी एशिया, पश्चिमी एशिया, उत्तर अमेरिका और दक्षिण एशिया में पाए जाते हैं। इसकी आर१ शाखा के पुरुष उत्तर अमेरिका के कुछ आदिवासी समुदायों में भी पाए जाते हैं और विचार है के इनके पूर्वज शायद चंद हज़ार साल पहले ही साइबेरिया से उत्तर अमेरिकी उपमहाद्वीप पहुंचे थे। माना जाता है के मूल पितृवंश समूह आर जिस पुरुष के साथ आरम्भ हुआ वह आज से ३५,०००-४०,००० साल पहले मध्य एशिया या मध्य पूर्व का रहने वाला था। .

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पितृवंश समूह आर१ए

पितृवंश समूह आर१ए का विस्तार पितृवंश समूह आर१ए या हैपलोग्रुप R1a मनुष्यों में वाए गुण सूत्र (Y-क्रोमोज़ोम) का एक वर्ग है, यानि की सभी पुरुष जिनमें इस वंश समूह के चिन्ह हैं एक ही ऐतिहासिक पुरुष की संतान हैं। अनुमान लगाया जाता है के यह पुरुष आज से १८,५०० साल पहले जीवित था। इस पितृवंश के पुरुष भारत, पाकिस्तान, मध्य एशिया, रूस, पूर्वी यूरोप और स्कैन्डिनेवियाई देशों में पाए जाते हैं। .

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पितृवंश समूह आई

पितृवंश समूह आई का यूरोप और तुर्की में फैलाव - आंकड़े बता रहें हैं के इन इलाकों के कितने प्रतिशत पुरुष इस पितृवंश के वंशज हैं मनुष्यों की आनुवंशिकी (यानि जॅनॅटिक्स) में पितृवंश समूह आई या वाए-डी॰एन॰ए॰ हैपलोग्रुप I एक पितृवंश समूह है। यह पितृवंश स्वयं पितृवंश समूह आईजे से उत्पन्न हुई एक शाखा है। इस पितृवंश के पुरुष अधिकतर यूरोप और तुर्की में ही मिलते हैं, हालांकि मध्य पूर्व और मध्य एशिया के कुछ पुरुष भी इसके सदस्य हैं। सारे यूरोपीय पुरुषों में से लगभग २०% पुरुष इसके वंशज हैं, लेकिन कुछ स्थानों पर यह तादाद ज़्यादा है, जैसे की बॉस्निया और हर्ज़ेगोविना के लगभग ६५% पुरुष इसके सदस्य हैं। अनुमान है के जिस पुरुष से यह पितृवंश शुरू हुआ वह आज से लगभग २५,०००-३०,००० वर्ष पहले यूरोप या तुर्की के अनातोलिया क्षेत्र में रहता था। .

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पितृवंश समूह क्यु

पितृवंश समूह क्यु का फैलाव। आंकड़े बता रहें हैं के इन इलाकों के कितने प्रतिशत पुरुष इस पितृवंश के वंशज हैं। मनुष्यों की आनुवंशिकी (यानि जॅनॅटिक्स) में पितृवंश समूह क्यु या वाए-डी॰एन॰ए॰ हैपलोग्रुप Q एक पितृवंश समूह है। यह पितृवंश स्वयं पितृवंश समूह पी से उत्पन्न हुई एक शाखा है। इस पितृवंश के पुरुष मध्य एशिया के सभी समुदायों में और उत्तरी एशिया, उत्तर अमेरिका और दक्षिण अमेरिका के आदिवासी समुदायों में पाए जाते हैं। अनुमान है के जिस पुरुष से यह पितृवंश शुरू हुआ वह आज से लगभग १७,०००-२२,००० वर्ष पहले जीवित था, लेकिन इस बात पर विवाद है के वह किस क्षेत्र का निवासी था। कुछ विशेषज्ञों का कहना है की वह मध्य एशिया में रहता था, लेकिन अन्य वैज्ञानिक भारतीय उपमहाद्वीप या साइबेरिया को उसका घर बताते हैं। भारत में इसकी एक अनूठी उपशाखा मिली है, लेकिन यह बहुत ही कम संख्या के भारतीय पुरुषों में पायी गयी है। .

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पितृवंश समूह के(ऍक्सऍलटी)

मनुष्यों की आनुवंशिकी (यानि जॅनॅटिक्स) में पितृवंश समूह के (ऍक्सऍलटी) या वाए-डी॰एन॰ए॰ हैपलोग्रुप K(xLT), जिसे पहले पितृवंश समूह ऍमऍनओपीऍस या वाए-डी॰एन॰ए॰ हैपलोग्रुप MNOPS बुलाया जाता था, एक पितृवंश समूह है।Jacques Chiaroni, Peter A. Underhill, and Luca L. Cavalli-Sforza, "Y chromosome diversity, human expansion, drift, and cultural evolution," PNAS published online before print November 17, 2009, doi: 10.1073/pnas.0910803106 यह पितृवंश स्वयं पितृवंश समूह के से उत्पन्न हुई एक शाखा है। विश्व में इसकी उपशाखाओं - ऍम, ऍनओ, पी और ऍस - के तो बहुत पुरुष मिलते हैं, लेकिन सीधा पितृवंश समूह के (ऍक्सऍलटी) का सदस्य आज तक कोई नहीं मिला है। फिर भी वैज्ञानिकों का मानना है के इसे समूह के वंशज कभी ज़रूर रहे होंगे। अनुमान है के जिस पुरुष से यह पितृवंश शुरू हुआ वह आज से लगभग ३५,०००-४५,००० वर्ष पहले मध्य एशिया या भारतीय उपमहाद्वीप में रहता था। .

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पंज नदी

अफ़्ग़ानिस्तान और ताजिकिस्तान की अंतर्राष्ट्रीय सीमा का एक बड़ा हिस्सा पांज नदी को माना जाता है पांज नदी या पंज नदी (ताजिकी: Панҷ) मध्य एशिया में स्थित एक नदी है जो आमू दरिया की एक उपनदी भी है। यह नदी १,१२५ किमी लम्बी है। अफ़्ग़ानिस्तान और ताजिकिस्तान की अंतर्राष्ट्रीय सीमा का एक बड़ा हिस्सा इसी नदी इसी नदी को माना जाता है। पांज नदी पूर्वी अफ़्ग़ानिस्तान में क़िला-ए-पंजेह गाँव के पास वाख़ान नदी और पामीर नदी के विलय से बनती है। फिर यह पश्चिम चलती है और आगे चलकर वख़्श नदी से मिल जाती है, जिसके बाद इन्हें अमु दरिया के नाम से जाना जाता है।, Reuel R. Hanks, ABC-CLIO, 2010, ISBN 978-0-313-35422-9,...

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प्रमुख धार्मिक समूह

दुनिया के प्रमुख धर्म और आध्यात्मिक परम्पराओं को कुछ छोटे प्रमुख समूहों में वर्गीकृत किया जा सकता है, हालांकि यह किसी भी प्रकार से एकरूप परिपाटी नहीं है। 18 वीं सदी में यह सिद्धांत इस लक्ष्य के साथ शुरू किया गया कि समाज में गैर यूरोपीय सभ्यता के स्तर की पहचान हो। धर्मों की और अधिक व्यापक सूची और उनके मूल रिश्तों की रूपरेखा के लिए, कृपया धर्मों की सूची लेख देखें.

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प्रयाग प्रशस्ति

प्रयाग प्रशस्ति गुप्त राजवंश के सम्राट समुद्रगुप्त के दरबारी कवि हरिषेण द्वारा रचित लेख था। इस लेख को समुद्रगुप्त द्वारा २०० ई में कौशाम्बी से लाये गए अशोक स्तंभ पर खुदवाया गया था। इसमें उन राज्यों का वर्णन है जिन्होंने समुद्रगुप्त से युद्ध किया और हार गये तथा उसके अधीन हो गये। इसके अलावा समुद्रगुप्त ने अलग अलग स्थानों पर एरण प्रशस्ति, गया ताम्र शासन लेख, आदि भी खुदवाये थे। इस प्रशस्ति के अनुसार समुद्रगुप्त ने अपने साम्राज्य का अच्छा विस्तार किया था। उसको क्रान्ति एवं विजय में आनन्द मिलता था। इलाहाबाद के अभिलेखों से पता चलता है कि समुद्रगुप्त ने अपनी विजय यात्रा का प्रारम्भ उत्तर भारत से किया एवं यहां के अनेक राजाओं पर विजय प्राप्त की। .

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प्राचीन ख़ुरासान

इस पुराने नक़्शे में ख़ोरासान नामकित है प्राचीन ख़ुरासान (फ़ारसी:, ख़ुरासान-ए-कहन) या प्राचीन ख़ोरासान मध्य एशिया का एक ऐतिहासिक क्षेत्र था जिसमें आधुनिक अफ़्ग़ानिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, उज़बेकिस्तान, ताजिकिस्तान और पूर्वी ईरान के बहुत से भाग शामिल थे। इसमें कभी-कभी सोग़दा और आमू-पार क्षेत्र शामिल किये जाते थे। ध्यान दीजिये कि आधुनिक ईरान में एक 'ख़ोरासान प्रांत' है जो इस ऐतिहासिक ख़ुरासान इलाक़े का केवल एक भाग है। .

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प्रागितिहास

आज से लगभग २७,००० साल पहले फ़्रान्स की एक गुफ़ा में एक प्रागैतिहासिक मानव ने अपने हाथ के इर्दगिर्द कालख लगाकर यह छाप छोड़ी प्रागैतिहासिक (Prehistory) इतिहास के उस काल को कहा जाता है जब मानव तो अस्तित्व में थे लेकिन जब लिखाई का आविष्कार न होने से उस काल का कोई लिखित वर्णन नहीं है।, Chris Gosden, pp.

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पूर्व तुर्किस्तान

पूर्वी तुर्किस्तान (उइग़ुर:, शर्क़ी तुर्किस्तान; अंग्रेज़ी: East Turkestan) मध्य एशिया का एक ऐतिहासिक इलाक़ा है जिसमें तारिम द्रोणी और उइग़ुर लोगों की पारम्परिक मातृभूमि के अन्य क्षेत्र सम्मिलित हैं।, G. Patrick March, pp.

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पूर्व क़ज़ाख़स्तान प्रांत

पूर्व क़ज़ाख़स्तान प्रांत (कज़ाख़: Шығыс Қазақстан облысы, अंग्रेज़ी: East Kazakhstan Province) मध्य एशिया के क़ज़ाख़स्तान देश का एक प्रांत है। इसकी राजधानी ओसकेमेन (Oskemen) नाम का शहर है, जिसे उस्त-कमेनोगोर्स्क (Ust-Kamenogorsk) भी कहा जाता है। इस प्रांत की उत्तरी सीमाएँ रूस से और पूर्वी सीमाएँ जनवादी गणतंत्र चीन के शिनजियांग प्रांत से लगती हैं। इसका सूदूर पूर्व छोर मंगोलिया से केवल ५० किमी दूर है लेकिन बीच में चीन और रूस का ज़रा से हिस्सा क़ज़ाख़स्तान और मंगोलिया के बीच आ जाता है। .

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फ़रग़ना प्रान्त

उज़बेकिस्तान के नक़्शे में फ़रग़ना प्रान्त (लाल रंग में) फ़रग़ना प्रान्त (उज़बेक: Фарғона вилояти, फ़रग़ोना विलोयती; अंग्रेज़ी: Fergana Province) मध्य एशिया में स्थित उज़बेकिस्तान देश का एक विलायात (प्रान्त) है जो उस देश के सुदूर पूर्वी भाग की फ़रग़ना घाटी में स्थित है। प्रान्त का कुल क्षेत्रफल ६,८०० वर्ग किमी है और २००५ में इसकी अनुमानित आबादी २५,९७,००० थी। इसकी राजधानी फ़रग़ना शहर है और इस राज्य में ऐतिहासिक ख़ोक़न्द शहर भी स्थित है।, Нурислам Тухлиев, Алла Кременцова, Ozbekiston milliy ensiklopediasi, 2007 .

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फ़रग़ना वादी

अंतरिक्ष से फ़रग़ना वादी का दृश्य उज़्बेकिस्तान में फ़रग़ना वादी में कुछ खेत-बाग़ान फ़रग़ना वादी का क्षेत्र उज़्बेकिस्तान, किर्गिज़स्तान और ताजिकिस्तान में बंटा हुआ है फ़रग़ना वादी या फ़रग़ना घाटी (फ़ारसी:, वादी-ए-फ़रग़ना; ताजिकी: водии Фарғона, वोदी-ए-फ़रग़ोना; अंग्रेजी: Fergana Valley) मध्य एशिया का एक क्षेत्र है जो पूर्वी उज़्बेकिस्तान, किर्गिज़स्तान और ताजिकिस्तान में विस्तृत है। मध्य एशिया का यह इलाक़ा वैसे तो काफ़ी शुष्क और रेगिस्तानी है, लेकिन इस त्रिकोण अकार की वादी में नरयिन नदी, कारा दरिया और उनके विलय से बनने वाले सिर दरिया की वजह से यह घाटी हरी-भरी और उपजाऊ है। फ़रग़ना वादी की मध्य एशिया और भारतीय उपमहाद्वीप के इतिहासों पर गहरी छाप है और मुग़ल साम्राज्य का पहला सम्राट बाबर इसी घाटी का एक उज़बेक निवासी था। फ़रग़ना वादी में बहुत भिन्न समुदायों के लोग रहते हैं। घाटी की कुल जनसँख्या १.२ करोड़ अनुमानित की गई है और यह मध्य एशिया की सबसे घनी आबादी वाला क्षेत्र है।, S. Frederick Starr, Baktybek Beshimov, Inomjon I. (CON) Bobokulov, M.E. Sharpe, 2011, ISBN 978-0-7656-2999-9,...

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फ़ारसी भाषा

फ़ारसी, एक भाषा है जो ईरान, ताजिकिस्तान, अफ़गानिस्तान और उज़बेकिस्तान में बोली जाती है। यह ईरान, अफ़ग़ानिस्तान, ताजिकिस्तान की राजभाषा है और इसे ७.५ करोड़ लोग बोलते हैं। भाषाई परिवार के लिहाज़ से यह हिन्द यूरोपीय परिवार की हिन्द ईरानी (इंडो ईरानियन) शाखा की ईरानी उपशाखा का सदस्य है और हिन्दी की तरह इसमें क्रिया वाक्य के अंत में आती है। फ़ारसी संस्कृत से क़ाफ़ी मिलती-जुलती है और उर्दू (और हिन्दी) में इसके कई शब्द प्रयुक्त होते हैं। ये अरबी-फ़ारसी लिपि में लिखी जाती है। अंग्रेज़ों के आगमन से पहले भारतीय उपमहाद्वीप में फ़ारसी भाषा का प्रयोग दरबारी कामों तथा लेखन की भाषा के रूप में होता है। दरबार में प्रयुक्त होने के कारण ही अफ़गानिस्तान में इस दारी कहा जाता है। .

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फ़ाहियान

फ़ाहियान के यात्रा-वृत्तान्त का पहला पन्ना फ़ाहियान या फ़ाशियान (चीनी: 法顯 या 法显, अंग्रेज़ी: Faxian या Fa Hien; जन्म: ३३७ ई; मृत्यु: ४२२ ई अनुमानित) एक चीनी बौद्ध भिक्षु, यात्री, लेखक एवं अनुवादक थे जो ३९९ ईसवी से लेकर ४१२ ईसवी तक भारत, श्रीलंका और आधुनिक नेपाल में स्थित गौतम बुद्ध के जन्मस्थल कपिलवस्तु धर्मयात्रा पर आए। उनका ध्येय यहाँ से बौद्ध ग्रन्थ एकत्रित करके उन्हें वापस चीन ले जाना था। उन्होंने अपनी यात्रा का वर्णन अपने वृत्तांत में लिखा जिसका नाम बौद्ध राज्यों का एक अभिलेख: चीनी भिक्षु फ़ा-शियान की बौद्ध अभ्यास-पुस्तकों की खोज में भारत और सीलोन की यात्रा था। उनकी यात्रा के समय भारत में गुप्त राजवंश के चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य का काल था और चीन में जिन राजवंश काल चल रहा था। फा सिएन पिंगगयांग का निवासी था जो वर्तमान शांसी प्रदेश में है। उसने छोटी उम्र में ही सन्यास ले लिया था। उसने बौद्ध धर्म के सद्विचारों के अनुपालन और संवर्धन में अपना जीवन बिताया। उसे प्रतीत हुआ कि विनयपिटक का प्राप्य अंश अपूर्ण है, इसलिए उसने भारत जाकर अन्य धार्मिक ग्रंथों की खोज करने का निश्चय किया। लगभग ६५ वर्ष की उम्र में कुछ अन्य बंधुओं के साथ, फाहिएन ने सन् ३९९ ई. में चीन से प्रस्थान किया। मध्य एशिया होते हुए सन् ४०२ में वह उत्तर भारत में पहुँचा। यात्रा के समय उसने उद्दियान, गांधार, तक्षशिला, उच्छ, मथुरा, वाराणसी, गया आदि का परिदर्शन किया। पाटलिपुत्र में तीन वर्ष तक अध्ययन करने के बाद दो वर्ष उसने ताम्रलिप्ति में भी बिताए। यहाँ वह धर्मसिद्धांतों की तथा चित्रों की प्रतिलिपि तैयार करता रहा। यहाँ से उसने सिंहल की यात्रा की और दो वर्ष वहाँ भी बिताए। फिर वह यवद्वीप (जावा) होते हुए ४१२ में शांतुंग प्रायद्वीप के चिंगचाऊ स्थान में उतरा। अत्यंत वृत्र हो जाने पर भी वह अपने पवित्र लक्ष्य की ओर अग्रसर होता रहा। चिएन कांग (नैनकिंग) पहुँचकर वह बौद्ध धर्मग्रंथों के अनुवाद के कार्य में संलग्न हो गा। अन्य विद्वानों के साथ मिलकर उसने कई ग्रंथों का अनुवाद किया, जिनमें से मुख्य हैं-परिनिर्वाणसूत्र और महासंगिका विनय के चीनी अनुवाद। 'फौ-कुओ थी' अर्थात् 'बौद्ध देशों का वृत्तांत' शीर्षक जो आत्मचरित् उसने लिखा है वह एशियाई देशों के इतिहास की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। विश्व की अनेक भाषाओं में इसका अनुवाद किया जा चुका है। .

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फ़ेदचेन्को हिमानी

सन् २००८ में अंतरिक्ष से ली गई फ़ेदचेन्को हिमानी की तस्वीर फ़ेदचेन्को हिमानी (रूसी: Федченко, अंग्रेज़ी: Fedchenko) मध्य एशिया के ताजिकिस्तान देश के कूहिस्तोनी-बदख़्शान स्वशासित प्रान्त में पामीर पर्वतों में एक बड़ी हिमानी (ग्लेशियर) है। यह एक पतली और लम्बी हिमानी है। ७७ किमी लम्बी और ७०० वर्ग किमी पर विस्तृत यह हिमानी पृथ्वी के ध्रुवीय क्षेत्रों से बहार स्थित सबसे लम्बी हिमानी है। अपनी सबसे मोटी जगह पर इसमें बर्फ़ की गहराई १,००० मीटर है। .

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बड़ा बटेर

बड़ा बटेर या घघुस बटेर (Common Quail) (Coturnix coturnix) फ़ीज़ैंट कुल का एक पक्षी है। यह उत्तरी यूरोप को छोड़कर लगभग पूरे यूरोप में, पूर्वी, पश्चिमी, मध्य तथा दक्षिणी अफ़्रीका में और पश्चिमोत्तर अफ़्रीका के कुछ इलाकों में, मध्य पूर्व, मध्य एशिया तथा दक्षिणी एशिया में व्यापक रूप से पाया जाता है। औसतन यह १८ से २२ से.मी.

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बदख़्शान

ताजिकिस्तान का कूहिस्तोनी-बदख़्शान स्वशासित प्रान्त अफ़ग़ानिस्तान का बदख़्शान प्रान्त अफ़ग़ानिस्तान में बदख़्शानी बच्चे बदख़्शान (फ़ारसी:, ताजिक: Бадахшон, अंग्रेजी: Badakhshan) पामीर पर्वतों के इलाक़े में स्थित मध्य एशिया का एक ऐतिहासिक क्षेत्र है जो आधुनिक अफ़ग़ानिस्तान के पूर्वोत्तरी और आधुनिक ताजिकिस्तान के दक्षिणपूर्वी भागों पर विस्तृत था। अफ़ग़ानिस्तान के सुदूर उत्तरपूर्वी बदख़्शान प्रान्त (जिसमें प्रसिद्ध वाख़ान गलियारा भी आता है) और ताजिकिस्तान के दक्षिणपूर्वी कूहिस्तोनी-बदख़्शान स्वशासित प्रान्त का नाम इसी पुराने नाम पर पड़ा है।, Svat Soucek, pp.

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बन्नू ज़िला

ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रांत में बन्नू ज़िला (लाल रंग में) बन्नू शहर का एक दृश्य बन्नू शहर में बन्नू (उर्दू और पश्तो:, अंग्रेज़ी: Bannu) पाकिस्तान के ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रांत का एक ज़िला है। यह करक ज़िले के दक्षिण में, लक्की मरवत ज़िले के उत्तर में और उत्तर वज़ीरिस्तान नामक क़बाइली क्षेत्र के पूर्व में स्थित है। इस ज़िले के मुख्य शहर का नाम भी बन्नू है। यहाँ बहुत-सी शुष्क पहाड़ियाँ हैं हालांकि वैसे इस ज़िले में बहुत हरियाली दिखाई देती है और यहाँ की धरती बहुत उपजाऊ है। ब्रिटिश राज के ज़माने में यहाँ के क़ुदरती सौन्दर्य से प्रभावित होकर बन्नू की 'स्वर्ग' से तुलना भी की जाती थी। .

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बरोग़िल दर्रा

बरोग़िल (Baroghil) या बोरोग़िल या ब्रोग़िल या ब्रोग़ोल (Broghol) हिन्दु कुश पर्वतमाला में स्थित एक पहाड़ी दर्रा है जो पाकिस्तान के ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रान्त के चित्राल क्षेत्र की मस्तुज वादी को अफ़ग़ानिस्तान के वाख़ान गलियारे से जोड़ता है। अन्य क्षेत्रीय दर्रों की तुलना में इसकी ऊँचाई कम है। साल में तीन महीने बर्फ़ग्रस्त होने से यह बन्द रहता है लेकिन बाक़ी के नौ महीने खुला होता है।, Royal Geographical Society (Great Britain), pp.

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बातकेन

बातकेन शहर के नज़दीक एक पाठशाला का द्वार बातकेन (किरगिज़: Баткен, अंग्रेज़ी: Batken) मध्य एशिया के किर्गिज़स्तान देश में एक छोटा सा शहर है। यह किर्गिज़स्तान के दक्षिण में प्रसिद्ध फ़रग़ना वादी में स्थित है और किर्गिज़स्तान के बातकेन प्रांत की राजधानी है। इस शहर का नाम प्राचीन सोग़दाई भाषा से आया है और इसका अर्थ 'हवाओं का शहर' है। बातकेन के क्षेत्र में १९९० के शतक के बाद चरमपंथी इस्लामी उग्रवाद शुरू हुआ जिसका असर पड़ोसी उज़्बेकिस्तान और ताजिकिस्तान पर भी था। इस कारणवश किर्गिज़स्तान की सरकार ने सन् १९९९ में ओश प्रांत को विभाजित करके बातकेन शहर पर केन्द्रित एक नया प्रांत बनाया ताकि प्रांतीय सरकार यहाँ की व्यवस्था पर पूरा ध्यान दे।, Laurence Mitchell, Bradt Travel Guides, 2008, ISBN 978-1-84162-221-7,...

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बातकेन प्रांत

बातकेन प्रांत (किरगिज़: Баткен областы, अंग्रेज़ी: Batken Province) मध्य एशिया के किर्गिज़स्तान देश का एक प्रांत है। इसकी राजधानी का नाम भी बातकेन शहर ही है। इस प्रांत का उत्तरी हिस्सा उपजाऊ फ़रग़ना वादी में आता है जबकि दक्षिण-पूर्व में अलाय पर्वत और दक्षिण-पश्चिम में तुर्किस्तान पर्वत स्थित हैं। २००९ की जनगणना के अनुसार इस प्रांत के ७६.५% लोग किरगिज़ समुदाय के, १४.७% उज़बेक समुदाय के और ६.९% ताजिक समुदाय के थे। यहाँ रूसी और तातार लोग भी रहते हैं। इस प्रांत की सरहदें पश्चिम और उत्तर में ताजिकिस्तान से और उत्तर-पूर्व में उज़बेकिस्तान से लगतीं हैं। .

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बाब -ए- ख़ैबर

पश्चिम मुख करते हुए बाब ए'ख़ैबर की तसवीर बाब ए'ख़ैबर (باب خیبر) (या बाब ए-ख़ैबर या बाब-ए-ख़ैबर) Naveed Hussain 22 January 2012 Express Tribune Retrieved 29 May 2014 एक स्मारकनुमा द्वारगाह है जो पाकिस्तान के फाटा(संध-शासित क़बाइली इलाक़े) सूबे में विख्यात ख़ैबर दर्रे के प्रवेश स्थान पर स्थित है। यह जमरूद के क़िले के पास, दक्षीण-पूर्व की ओर जी॰टी॰ रोड(तेरख़म राजमार्ग वाले हिस्से) पर पेशावर से तक़रीबन 20 कि॰मी॰ की दूरी पर जमरूद कस्बे में स्थित है। .

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बाबरनामा

मुग़ल सम्राट बाबर की बाबरनामा नामक जीवनी में एक गेंडे के शिकार का चित्रण बाबरनामा से एक दृश्य बाबरनामा (चग़ताई/फ़ारसी) या तुज़्क-ए-बाबरी मुग़ल साम्राज्य के पहले सम्राट बाबर की आत्मलिखित जीवनी है। यह उन्होंने अपनी मातृभाषा चग़ताई तुर्की में लिखी थी। इसमें उन्होंने अपना उज़्बेकिस्तान की फ़रग़ना वादी में गुज़ारा हुआ बचपन और यौवन, बाद में अफ़्ग़ानिस्तान और भारतीय उपमहाद्वीप पर आक्रमण और क़ब्ज़ा और अन्य घटनाओं का विवरण दिया है। उन्होंने हर क्षेत्र की भूमि, राजनीति, अर्थव्यवस्था, प्राकृतिक वातावरण, शहरों-इमारतों, फलों, जानवरों, इत्यादि का बखान किया है। इसमें कुछ फ़ारसी भाषा के छोटे-मोटे छंद भी आते हैं, हालांकि फ़ारसी बोलने वाले इसे समझने में अक्षम हैं। हालांकि चग़ताई भाषा विलुप्त हो चुकी है आधुनिक उज़बेक भाषा उसी की वंशज है और उसे बोलने वाले उज़बेक लोग बाबरनामा पढ़ सकते हैं। इस किताब को चग़ताई और उज़बेक भाषाओं के साहित्य का एक महत्वपूर्ण अंग माना जाता है।, Calum MacLeod, Bradley Mayhew, Odyssey, 2008, ISBN 978-962-217-795-6,...

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बायज़ीद प्रथम

बायज़ीद प्रथम, (بايزيد اول; 1.; उपनाम Yıldırım यिलदरम (उस्मानी तुर्कीयाई: یلدیرم), "बिजली, वज्र"; 1360 – 8 मार्च 1403) 1389 से 1402 तक उस्मानिया साम्राज्य के चौथे शासक रहे। उन्होंने अपने वालिद मुराद प्रथम के बाद राजकीय शक्ति संभाली जो प्रथम कोसोवो युद्ध में मारे गए थे। उनके साम्राज्य-विस्तार और सैन्य अभियानों की वजह से बायज़ीद को ख़िताब "सुल्तान-ए रूम" (रोम के सम्राट) हासिल था। .

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बायकोनूर

बायकोनूर का दृश्य बायकोनूर(कज़ाख़: Байқоңыр, अंग्रेज़ी: Baikonur) मध्य एशिया के कज़ाख़स्तान देश के किज़िलओरदा प्रांत में सिर दरिया के किनारे स्थित एक शहर है। रूस और कज़ाख़स्तान में एक आपसी समझौते के अंतर्गत यह शहर सन् २०५० तक रूस को किराए पर दिया गया है और इसका प्रशासन रूस करता है। यह शहर सोवियत संघ के ज़माने में उस देश के अंतरिक्ष-सम्बन्धी कार्यक्रम के लिए रॉकेट उड़ान केंद्र के रूप में विकसित किया गया था। अब वह केंद्र इस शहर के बीच स्थित है और शहर उसके इर्द-गिर्द ५७ वर्ग किमी के इलाक़े पर विस्तृत है।, Joseph N. Pelton, Ram Jakhu, Elsevier, 2010, ISBN 978-1-85617-752-8,...

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बालासगून

बुराना बुर्ज बालासगून (तुर्की: Balagasun, फ़ारसी:, अंग्रेज़ी: Balasagun) मध्य एशिया के किरगिज़स्तान क्षेत्र में एक प्राचीन सोग़दाई शहर था। यह चुय वादी में किरगिज़स्तान की आधुनिक राजधानी बिश्केक और इसिक कुल झील के बीच स्थित था। शुरू में यहाँ सोग़दाई भाषा बोली जाती थी, जो एक ईरानी भाषा थी। १०वीं सदी ईसवी के बाद यह काराख़ानी ख़ानत की राजधानी बना जो तुर्की भाषी था जिस से यहाँ की स्थानीय भाषा धीरे-धीरे बदलकर तुर्की हो गई। १२वीं सदी में इसपर कारा-ख़ितान ख़ानत का क़ब्ज़ा हो गया और फिर सन् १२१८ में फैलते हुए मंगोल साम्राज्य ने इस क्षेत्र पर अपना अधिकार कर लिया। मोंगोलों ने इसका नाम बदलकर गोबालिक (Gobalik) कर दिया, जिसका मतलब मंगोल भाषा में 'सुन्दर शहर' था। मंगोल जीत के बाद इस शहर का महत्व घटने लगा। अब यहाँ बहुत से खँडहर हैं जिन्हें देखने के लिए सैलानी आया करते हैं। यहाँ का बुराना बुर्ज (Burana Tower) मशहूर है, जो कभी १३८ फ़ुट (४६ मीटर) लम्बा था लेकिन भूकम्पों में इसके हिस्से गिरने से केवल ७९ फ़ुट (२४ मीटर) रह गया है। यहाँ नेस्टोरी शाखा के ईसाई भी रहते थे जिनका टूटता हुआ कब्रिस्तान भी यहीं मौजूद है। तुर्की भाषा के प्रसिद्ध 'कूतादगू बिलिग' (Kutadgu Bilig) नामक ग्रन्थ के रचियता, युसुप ख़ास हाजिब, भी बालासगून शहर में पैदा हुए थे।, Laurence Mitchell, pp.

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बाल्काश झील

बलख़श झील के जलसम्भर का नक़्शा अंतरिक्ष से बलख़श झील का नज़ारा बाल्काश झील (कज़ाख़: Балқаш Көлі, अंग्रेज़ी: Lake Balkhash) मध्य एशिया के क़ाज़ाख़स्तान देश में स्थित एक विशाल झील है। यह एशिया की सबसे बड़ी झीलों में से एक है। इसका कुल क्षेत्रफल १६,४०० किमी२ है, लेकिन इसमें पानी डालने वाली नदियों से सिंचाई के लिए पानी खिचने की वजह से इसका आकार घट रहा है। बीच में एक धरती की ऊँगली इसे दो हिस्सों में बांटती है - पश्चिमी भाग का पानी मीठा है जबकि पूर्वी भाग का पानी खारा है। पूर्वी भाग पश्चिमी भाग से अधिक गहरा है। इसका सबसे गहरा स्थान केवल २६ मीटर गहरा है।, Bradley Mayhew, Lonely Planet, 2007, ISBN 978-1-74104-614-4,...

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बासमाची विद्रोह

ऍनवर पाशा एक तुर्की सिपहसालार थे जिन्होंने बासमाची विद्रोहियों को अपने नेतृत्व में संगठित करने का असफल प्रयास किया बासमाची विद्रोह (रूसी: Басмачество, बासमाचेस्त्वो, Basmachi) सोवियत संघ और, सोवियत संघ के बनने से पहले, रूस की शाही सरकार के विरुद्ध मध्य एशिया में बसने वाले तुर्की भाषाएँ बोलने वाले मुस्लिम समुदायों के विद्रोहों के एक सिलसिले को कहते हैं जो सन् १९१६ से १९३१ तक चले। 'बासमाची' शब्द उज़बेक भाषा से लिया गया है, जिसमें इसका अर्थ 'डाकू' होता है और यह हिन्दी भाषा में पाए जाने वाले 'बदमाश' शब्द का एक रूप है।, Dilip Hiro, Penguin, 2009, ISBN 978-1-59020-221-0,...

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बाख़्त्री भाषा

कुषाण सम्राट कनिष्क का सन् १५० ईसवी के लगभग ज़र्ब किया गया सिक्का, जिसपर बाख़्त्री में लिखा है ' ϷΑΟΝΑΝΟϷΑΟ ΚΑΝΗϷΚΙ ΚΟϷΑΝΟ', शाओनानोशाओ कनिष्की कोशानो', यानि 'शहनशाह कनिष्क कुषाण' बाख़्त्री (फ़ारसी) या बैक्ट्रीयाई (अंग्रेज़ी: Bactrian) प्राचीनकाल में मध्य एशिया के बाख़्तर (बैक्ट्रीया) क्षेत्र में बोली जाने वाली एक पूर्वी ईरानी भाषा थी जो समय के साथ विलुप्त हो गई। भाषावैज्ञानिक नज़रिए से बाख़्त्री के पश्तो, यिदग़ा और मुंजी भाषाओँ के साथ गहरे सम्बन्ध हैं। यह प्राचीन सोग़दाई और पार्थी भाषाओं से भी मिलती-जुलती थी। बाख़्त्री को लिखने के लिया ज़्यादातर यूनानी लिपि इस्तेमाल की जाती थी, इसलिए इस कभी-कभी 'यूनानी-बाख़्त्री' (या 'ग्रेको-बाख़्त्री') भी कहा जाता है।, Vadim Mikhaĭlovich Masson, UNESCO, 1994, ISBN 978-92-3-102846-5,...

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बाकू आतेशगाह

آتش) यानि अग्नि का ज़िक्र करती है। बाकू आतेशगाह का मंदिर और उसके इर्द-गिर्द का क्षेत्र अज़रबैजानी डाक टिकट बाकू आतेशगाह या ज्वाला मंदिर अज़रबेजान की राजधानी बाकू के पास के सुराख़ानी शहर में स्थित एक मध्यकालीन हिन्दू धार्मिक स्थल है। इसमें एक पंचभुजा (पेंटागोन) अकार के अहाते के बीच में एक मंदिर है। बाहरी दीवारों के साथ कमरे बने हुए हैं जिनमें कभी उपासक रहा करते थे। बाकू आतेशगाह का निर्माण १७वीं और १८वीं शताब्दियों में हुआ था और १८८३ के बाद इसका इस्तेमाल तब बंद हो गया जब इसके इर्द-गिर्द ज़मीन से पेट्रोल और प्राकृतिक गैस निकालने का काम शुरू किया गया। १९७५ में इसे एक संग्राहलय बना दिया गया और अब इसे देखने हर वर्ष १५,००० सैलानी आते हैं। २००७ में अज़रबेजान के राष्ट्रपति के आदेश से इसे एक राष्ट्रीय ऐतिहासिक-वास्तुशिल्पीय आरक्षित क्षेत्र घोषित कर दिया गया। .

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बिश्केक

बिश्केक (किरगिज़: Бишкек), जिसे पहले पिश्पेक और फ़्रूनज़े के नामों से भी जाना जाता था, मध्य एशिया के किरगिज़स्तान देश की राजधानी और सबसे बड़ा शहर है। यह उस देश के चुय प्रांत की राजधानी भी है। .

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बकरी

बकरी और उसके बच्चे बकरी एक पालतू पशु है, जिसे दूध तथा मांस के लिये पाला जाता है। इसके अतिरिक्त इससे रेशा, चर्म, खाद एवं बाल प्राप्त होता है। विश्व में बकरियाँ पालतू व जंगली रूप में पाई जाती हैं और अनुमान है कि विश्वभर की पालतू बकरियाँ दक्षिणपश्चिमी एशिया व पूर्वी यूरोप की जंगली बकरी की एक वंशज उपजाति है। मानवों ने वरणात्मक प्रजनन से बकरियों को स्थान और प्रयोग के अनुसार अलग-अलग नस्लों में बना दिया गया है और आज दुनिया में लगभग ३०० नस्लें पाई जाती हैं। संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन के अनुसार सन् २०११ में दुनिया-भर में ९२.४ करोड़ से अधिक बकरियाँ थीं। .

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बुज़कशी

बल्ख़ प्रांत में बुज़कशी कज़ाख़ नाम) बुज़कशी (दरी फ़ारसी:, अंग्रेज़ी: Buzkashi) या कोक-बोरू (उज़बेक: kökbörü, अंग्रेज़ी: Kok-boru) या वुज़लोबा (पश्तो:, अंग्रेज़ी: Wuzloba) मध्य एशिया में घोड़ों पर सवार होकर खेले जाने वाला एक खेल है। यह अफ़्ग़ानिस्तान, उज़बेकिस्तान, ताजिकिस्तान, किरगिज़स्तान, तुर्कमेनिस्तान, कज़ाख़स्तान, पाकिस्तान के पठान इलाक़ों और चीन के उईग़ुर इलाक़ों में खेला जाता है। यह सदियों से स्तेपी के मैदानों पर रहने वाले क़बीलों द्वारा खेला जा रहा है जो घुड़सवारी में हुनरमंद होते हैं। इसमें खिलाड़ियों के दो गुट होते हैं और खेल के मैदान के बीच में एक सिर-कटा बकरा या बछड़ा रखा जाता है। खिलाड़ी अपने घोड़े दौड़ाते हुए उसे उठाने की कोशिश करते हैं। जो उसे उठा लेता है वह दुसरे गुट के खिलाड़ियों से बचकर उसे जीत की लकीर के पार फेंकने की कोशिश करता है, जबकि दूसरे खिलाड़ी उस लाश को उस से छीनने की कोशिश करते हैं।, Paul Connolly, Pier 9, 2011, ISBN 978-1-74266-513-9,...

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बुख़ारा

बुख़ारा के अमीर के महल का दरवाज़ा, यह यूनेस्को द्वारा पंजीकृत विश्व धरोहर स्थल है बुख़ारा में पाया गया यवन-बैक्ट्रियाई सम्राट युक्राटीडीस (१७०-१४५ ईसापूर्व) द्वारा ज़र्ब सिक्का जो प्राचीनकाल का सबसे बड़ा सोने का सिक्का है। इसका वज़न १६९.२ ग्राम और व्यास (डायामीटर) ५८ मिलीमीटर है। इसे फ़्रांसिसी सम्राट नेपोलियन तृतीय ने ले लिया था और अब यह पैरिस के एक संग्राहलय में है। अलीम ख़ान (१८८०-१९४४), बुख़ारा का अंतिम अमीर, जिसे १९२० में सिंहासन से हटा दिया गया कलाँ मीनार (यानि 'बड़ी मीनार') नादिर दीवान-बेग़ी मदरसे के दरवाज़े पर अमरपक्षी (काल्पनिक फ़ीनिक्स पक्षी), यह लब-ए-हौज़ स्थल का हिस्सा है बुख़ारा (रूसी: Бухара, फ़ारसी:, अंग्रेज़ी: Bokhara) मध्य एशिया में स्थित उज़बेकिस्तान देश के बुख़ारा प्रान्त की राजधानी है। यह उज़बेकिस्तान की पाँचवी सबसे बड़ी नगरी है। इसकी जनसंख्या २,३७,९०० है (सन् १९९९ अनुमानानुसार) और यह शहर लगभग पाँच हजार वर्षों से बसा हुआ है।, Europa Publications Limited, Taylor & Francis, 2002, ISBN 978-1-85743-137-7,...

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बुख़ारा प्रान्त

उज़बेकिस्तान के नक़्शे में बुख़ारा प्रान्त (लाल रंग में) बुख़ारा प्रान्त (उज़बेक: Бухоро вилояти, बुख़ोरो विलोयती) मध्य एशिया में स्थित उज़बेकिस्तान देश का एक विलायत (प्रान्त) है जो उस देश के दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। इस प्रान्त का एक बड़ा अंश किज़िल कुम रेगिस्तान में आता है। प्रान्त का कुल क्षेत्रफल ४०,३०० वर्ग किमी है और २००५ में इसकी अनुमानित आबादी १५,२५,९०० थी। मध्य एशिया का प्रसिद्ध बुख़ारा शहर इसी प्रान्त में स्थित है और इसकी राजधानी भी है।, Нурислам Тухлиев, Алла Кременцова, Ozbekiston milliy ensiklopediasi, 2007 .

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ब्राह्मी परिवार की लिपियाँ

ब्राह्मी परिवार उन लिपियों का परिवार हैं जिनकी पूर्वज ब्राह्मी लिपि है। इनका प्रयोग दक्षिण एशिया, दक्षिणपूर्व एशिया में होता है, तथा मध्य व पूर्व एशिया के कुछ भागों में भी होता है। इस परिवार की किसी लेखन प्रणाली को ब्राह्मी-आधारित लिपि या भारतीय लिपि कहा जा सकता है। इन लिपियों का प्रयोग कई भाषा परिवारों में होता था, उदाहरणार्थ इंडो-यूरोपियाई, चीनी-तिब्बती, मंगोलियाई, द्रविडीय, ऑस्ट्रो-एशियाई, ऑस्ट्रोनेशियाई, ताई और संभवतः कोरियाई में। इनका प्रभाव आधुनिक जापानी भाषा में प्रयुक्त अक्षर क्रमांकन पर भी दिखता है। .

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बैंक

जर्मनी के फ्रैंकफुर्त में डश-बैंक बैंक (Bank) उस वित्तीय संस्था को कहते हैं जो जनता से धनराशि जमा करने तथा जनता को ऋण देने का काम करती है। लोग अपनी अपनी बचत राशि को सुरक्षा की दृष्टि से अथवा ब्याज कमाने के हेतु इन संस्थाओं में जमा करते और आवश्यकतानुसार समय समय पर निकालते रहते हैं। बैंक इस प्रकार जमा से प्राप्त राशि को व्यापारियों एवं व्यवसायियों को ऋण देकर ब्याज कमाते हैं। आर्थिक आयोजन के वर्तमान युग में कृषि, उद्योग एवं व्यापार के विकास के लिए बैंक एवं बैंकिंग व्यवस्था एक अनिवार्य आवश्यकता मानी जाती है। राशि जमा रखने तथा ऋण प्रदान करने के अतिरिक्त बैंक अन्य काम भी करते हैं जैसे, सुरक्षा के लिए लोगों से उनके आभूषणादि बहुमूल्य वस्तुएँ जमा रखना, अपने ग्राहकों के लिए उनके चेकों का संग्रहण करना, व्यापारिक बिलों की कटौती करना, एजेंसी का काम करना, गुप्त रीति से ग्राहकों की आर्थिक स्थिति की जानकारी लेना देना। अत: बैंक केवल मुद्रा का लेन देन ही नहीं करते वरन् साख का व्यवहार भी करते हैं। इसीलिए बैंक को साख का सृजनकर्ता भी कहा जाता है। बैंक देश की बिखरी और निठल्ली संपत्ति को केंद्रित करके देश में उत्पादन के कार्यों में लगाते हैं जिससे पूँजी निर्माण को प्रोत्साहन मिलता है और उत्पादन की प्रगति में सहायता मिलती है। भारतीय बैंकिग कंपनी कानून, १९४९ के अंतर्गत बैंक की परिभाषा निम्न शब्दों में दी गई हैं: एक ही बैंक के लिए व्यापार, वाणिज्य, उद्योग तथा कृषि की समुचित वित्तव्यवस्था करना असंभव नहीं तो कठिन अवश्य होता है। अतएव विशिष्ट कार्यों के लिए अलग अलग बैंक स्थापित किए जाते हैं जैसे व्यापारिक बैंक, कृषि बैंक, औद्योगिक बैंक, विदेशी विनिमय बैंक तथा बचत बैंक। इन सब प्रकार के बैंकों को नियमपूर्वक चलाने तथा उनमें पारस्परिक तालमेल बनाए रखने के लिए केंद्रीय बैंक होता है जो देश भर की बैंकिंग व्यवस्था का संचालन करता है। समय के साथ कई अन्य वित्तीय गतिविधियाँ जुड़ गईं। उदाहरण के लिए बैंक वित्तीय बाजारों में महत्वपूर्ण खिलाडी हैं और निवेश फंड जैसे वित्तीय सेवाओं की पेशकश कर रहे हैं। कुछ देशों (जैसे जर्मनी) में बैंक औद्योगिक निगमों के प्राथमिक मालिक हैं, जबकि अन्य देशों (जैसे संयुक्त राज्य अमेरिका) में बैंक गैर वित्तीय कंपनियों स्वक्मित्व से निषिद्ध रहे हैं। जापान में बैंक को आमतौर पर पार शेयर होल्डिंग इकाई (ज़ाइबत्सू) के रूप में पहचाना जाता है। फ़्रांस में अधिकांश बैंक अपने ग्राहकों को बिमा सेवा प्रदान करते हैं। .

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बैक्ट्रिया

बैक्ट्रिया के प्राचीन शहर बैक्ट्रिया या बाख़्तर (संस्कृत: वाह्लिका, फ़ारसी: बाख़्तर, यूनानी: Βακτριανή बाक्त्रिआई), जिसे तुषारिस्तान, तुख़ारिस्तान और तुचारिस्तान भी कहा जाता है, मध्य एशिया के उस ऐतिहासिक क्षेत्र का प्राचीन नाम है जो हिन्दु कुश पर्वत श्रंखला और अमू दरिया के बीच पड़ता है। आधुनिक राजनितिक इकाइयों के अनुसार यह अफ़ग़ानिस्तान, ताजिकिस्तान और पाकिस्तान में बँटा हुआ है। .

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बेरिंजिया

हिमयुग अंत होने पर बेरिंग ज़मीनी पुल धीरे-धीरे समुद्र के नीचे डूब गया अपने चरम पर बेरिंजिया का क्षेत्र (हरे रंग की लकीर के अन्दर) काफ़ी विशाल था हाथी-नुमा मैमथ बेरिजिंया में रहते थे और उस के ज़रिये एशिया से उत्तर अमेरिका भी पहुँचे बेरिंग ज़मीनी पुल (Bering land bridge) या बेरिंजिया (Beringia) एक ज़मीनी पुल था जो एशिया के सुदूर पूर्वोत्तर के साइबेरिया क्षेत्र को उत्तर अमेरिका के सुदूर पश्चिमोत्तर अलास्का क्षेत्र से जोड़ता था। इस धरती के पट्टे की चौड़ाई उत्तर से दक्षिण तक लगभग १,६०० किमी (१,००० मील) थी यानि इसका क्षेत्रफल काफ़ी बड़ा था। पिछले हिमयुग के दौरान समुद्रों का बहुत सा पानी बर्फ़ के रूप में जमा हुआ होने से समुद्र-तल आज से नीचे था जिस वजह से बेरिंजिया एक ज़मीनी क्षेत्र था। हिमयुग समाप्त होने पर बहुत सी यह बर्फ़ पिघली, समुद्र-तल उठा और बेरिंजिया समुद्र के नीचे डूब गया। जब बेरिंजिया अस्तित्व में था तो क्षेत्रीय मौसम अनुकूल होने की वजह से यहाँ बर्फ़बारी कम होती थी और वातावरण मध्य एशिया के स्तेपी मैदानों जैसा था। इतिहासकारों का मानना है कि उस समय कुछ मानव समूह एशिया से आकर यहाँ बस गए। वह बेरिंजिया से आगे उत्तर अमेरिका में दाख़िल नहीं हो पाए क्योंकि आगे भीमकाय हिमानियाँ (ग्लेशियर) उनका रास्ता रोके हुए थीं। इसके बाद बेरिंजिया और एशिया के बीच भी एक बर्फ़ की दीवार खड़ी होने से बेरिंजिया पर चंद हज़ार मानव लगभग ५,००० सालों तक अन्य मानवों से बिना संपर्क के हिमयुग के भयंकर प्रकोप से बचे रहे। आज से क़रीब १६,५०० वर्ष पहले हिमानियाँ पिघलने लगी और वे उत्तर अमेरिका में प्रवेश कर गए। लगभग उसी समय के आसपास बेरिंजिया भी पानी में डूबने लगा और आज से क़रीब ६,००० वर्ष पहले तक तटों के रूप वैसे हो गए जैसे कि आधुनिक युग में देखे जाते हैं। .

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बोन धर्म

बोन धर्म या बॉन धर्म (བོན་, Bön) तिब्बत की प्राचीन और पारम्परिक धार्मिक प्रथा है। आधुनिक युग में इसमें बौद्ध धर्म और बौद्ध धर्म से पहले की तिब्बती संस्कृति में प्रचलित धार्मिक आस्थाएँ शामिल हैं। बहुत से ऐसी बौद्ध-पूर्व आस्थाएँ तिब्बती बौद्ध धर्म में भी सम्मिलित की जा चुकी हैं। कुछ इतिहासकारों के अनुसार बोन धर्म के तत्व सिर्फ़ तिब्बत तक ही सीमित नहीं थे बल्कि उनका ऐतिहासिक प्रभाव तिब्बत से दूर कई मध्य एशिया के क्षेत्रों तक भी मिलता था। इतिहासकार बोन धर्म को तिब्बती साम्राज्य से पहले आने वाले झ़ंगझ़ुंग राज्य से भी सम्बन्धित समझते है।, Gary McCue, pp.

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बोस्तेन झील

बोस्तेन झील (चीनी: 博斯騰湖, बोसितेंग हू, Bosten Lake) या बाग़राश झील (उईग़ुर:, बाग़राश कोली, Baghrash Lake) मध्य एशिया में जनवादी गणतंत्र चीन द्वारा नियंत्रित शिंजियांग प्रान्त के बायिनग़ोलिन मंगोल स्वशासित विभाग में स्थित मीठे पानी की एक झील है। यह तारिम द्रोणी के पूर्वोत्तरी छोर पर स्थित है और शिंजियांग प्रान्त की सबसे बड़ी झील है। बोस्तेन झील काराशहर (यान्ची) से २० किमी पूर्व में और बायिनग़ोलिन विभाग की प्रशासनिक राजधानी कोरला से ५७ किमी पूर्वोत्तर में स्थित है। काइदू नदी इस झील में पानी लाती है और झील में पहुँचने वाला ८३% जल इसी एक नदी से आता है। झील में बहुत-सी मछलियाँ रहती है और कुछ स्थानीय निवासी उन्हें व्यावसायिक रूप से पकड़ते हैं। .

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भारत

भारत (आधिकारिक नाम: भारत गणराज्य, Republic of India) दक्षिण एशिया में स्थित भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे बड़ा देश है। पूर्ण रूप से उत्तरी गोलार्ध में स्थित भारत, भौगोलिक दृष्टि से विश्व में सातवाँ सबसे बड़ा और जनसंख्या के दृष्टिकोण से दूसरा सबसे बड़ा देश है। भारत के पश्चिम में पाकिस्तान, उत्तर-पूर्व में चीन, नेपाल और भूटान, पूर्व में बांग्लादेश और म्यान्मार स्थित हैं। हिन्द महासागर में इसके दक्षिण पश्चिम में मालदीव, दक्षिण में श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व में इंडोनेशिया से भारत की सामुद्रिक सीमा लगती है। इसके उत्तर की भौतिक सीमा हिमालय पर्वत से और दक्षिण में हिन्द महासागर से लगी हुई है। पूर्व में बंगाल की खाड़ी है तथा पश्चिम में अरब सागर हैं। प्राचीन सिन्धु घाटी सभ्यता, व्यापार मार्गों और बड़े-बड़े साम्राज्यों का विकास-स्थान रहे भारतीय उपमहाद्वीप को इसके सांस्कृतिक और आर्थिक सफलता के लंबे इतिहास के लिये जाना जाता रहा है। चार प्रमुख संप्रदायों: हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख धर्मों का यहां उदय हुआ, पारसी, यहूदी, ईसाई, और मुस्लिम धर्म प्रथम सहस्राब्दी में यहां पहुचे और यहां की विविध संस्कृति को नया रूप दिया। क्रमिक विजयों के परिणामस्वरूप ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कंपनी ने १८वीं और १९वीं सदी में भारत के ज़्यादतर हिस्सों को अपने राज्य में मिला लिया। १८५७ के विफल विद्रोह के बाद भारत के प्रशासन का भार ब्रिटिश सरकार ने अपने ऊपर ले लिया। ब्रिटिश भारत के रूप में ब्रिटिश साम्राज्य के प्रमुख अंग भारत ने महात्मा गांधी के नेतृत्व में एक लम्बे और मुख्य रूप से अहिंसक स्वतन्त्रता संग्राम के बाद १५ अगस्त १९४७ को आज़ादी पाई। १९५० में लागू हुए नये संविधान में इसे सार्वजनिक वयस्क मताधिकार के आधार पर स्थापित संवैधानिक लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित कर दिया गया और युनाईटेड किंगडम की तर्ज़ पर वेस्टमिंस्टर शैली की संसदीय सरकार स्थापित की गयी। एक संघीय राष्ट्र, भारत को २९ राज्यों और ७ संघ शासित प्रदेशों में गठित किया गया है। लम्बे समय तक समाजवादी आर्थिक नीतियों का पालन करने के बाद 1991 के पश्चात् भारत ने उदारीकरण और वैश्वीकरण की नयी नीतियों के आधार पर सार्थक आर्थिक और सामाजिक प्रगति की है। ३३ लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल के साथ भारत भौगोलिक क्षेत्रफल के आधार पर विश्व का सातवाँ सबसे बड़ा राष्ट्र है। वर्तमान में भारतीय अर्थव्यवस्था क्रय शक्ति समता के आधार पर विश्व की तीसरी और मानक मूल्यों के आधार पर विश्व की दसवीं सबसे बडी अर्थव्यवस्था है। १९९१ के बाज़ार-आधारित सुधारों के बाद भारत विश्व की सबसे तेज़ विकसित होती बड़ी अर्थ-व्यवस्थाओं में से एक हो गया है और इसे एक नव-औद्योगिकृत राष्ट्र माना जाता है। परंतु भारत के सामने अभी भी गरीबी, भ्रष्टाचार, कुपोषण, अपर्याप्त सार्वजनिक स्वास्थ्य-सेवा और आतंकवाद की चुनौतियां हैं। आज भारत एक विविध, बहुभाषी, और बहु-जातीय समाज है और भारतीय सेना एक क्षेत्रीय शक्ति है। .

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भारत में इस्लाम

भारतीय गणतंत्र में हिन्दू धर्म के बाद इस्लाम दूसरा सर्वाधिक प्रचलित धर्म है, जो देश की जनसंख्या का 14.2% है (2011 की जनगणना के अनुसार 17.2 करोड़)। भारत में इस्लाम का आगमन करीब 7वीं शताब्दी में अरब के व्यापारियों के आने से हुआ था (629 ईसवी सन्‌) और तब से यह भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का एक अभिन्न अंग बन गया है। वर्षों से, सम्पूर्ण भारत में हिन्दू और मुस्लिम संस्कृतियों का एक अद्भुत मिलन होता आया है और भारत के आर्थिक उदय और सांस्कृतिक प्रभुत्व में मुसलमानों ने महती भूमिका निभाई है। हालांकि कुछ इतिहासकार ये दावा करते हैं कि मुसलमानों के शासनकाल में हिंदुओं पर क्रूरता किए गए। मंदिरों को तोड़ा गया। जबरन धर्मपरिवर्तन करा कर मुसलमान बनाया गया। ऐसा भी कहा जाता है कि एक मुसलमान शासक टीपू शुल्तान खुद ये दावा करता था कि उसने चार लाख हिंदुओं का धर्म परिवर्तन करवाया था। न्यूयॉर्क टाइम्स, प्रकाशित: 11 दिसम्बर 1992 विश्व में भारत एकमात्र ऐसा देश है जहां सरकार हज यात्रा के लिए विमान के किराया में सब्सिडी देती थी और २००७ के अनुसार प्रति यात्री 47454 खर्च करती थी। हालांकि 2018 से रियायत हटा ली गयी है। .

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भारत का इतिहास

भारत का इतिहास कई हजार साल पुराना माना जाता है। मेहरगढ़ पुरातात्विक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान है जहाँ नवपाषाण युग (७००० ईसा-पूर्व से २५०० ईसा-पूर्व) के बहुत से अवशेष मिले हैं। सिन्धु घाटी सभ्यता, जिसका आरंभ काल लगभग ३३०० ईसापूर्व से माना जाता है, प्राचीन मिस्र और सुमेर सभ्यता के साथ विश्व की प्राचीनतम सभ्यता में से एक हैं। इस सभ्यता की लिपि अब तक सफलता पूर्वक पढ़ी नहीं जा सकी है। सिंधु घाटी सभ्यता वर्तमान पाकिस्तान और उससे सटे भारतीय प्रदेशों में फैली थी। पुरातत्त्व प्रमाणों के आधार पर १९०० ईसापूर्व के आसपास इस सभ्यता का अक्स्मात पतन हो गया। १९वी शताब्दी के पाश्चात्य विद्वानों के प्रचलित दृष्टिकोणों के अनुसार आर्यों का एक वर्ग भारतीय उप महाद्वीप की सीमाओं पर २००० ईसा पूर्व के आसपास पहुंचा और पहले पंजाब में बस गया और यहीं ऋग्वेद की ऋचाओं की रचना की गई। आर्यों द्वारा उत्तर तथा मध्य भारत में एक विकसित सभ्यता का निर्माण किया गया, जिसे वैदिक सभ्यता भी कहते हैं। प्राचीन भारत के इतिहास में वैदिक सभ्यता सबसे प्रारंभिक सभ्यता है जिसका संबंध आर्यों के आगमन से है। इसका नामकरण आर्यों के प्रारम्भिक साहित्य वेदों के नाम पर किया गया है। आर्यों की भाषा संस्कृत थी और धर्म "वैदिक धर्म" या "सनातन धर्म" के नाम से प्रसिद्ध था, बाद में विदेशी आक्रांताओं द्वारा इस धर्म का नाम हिन्दू पड़ा। वैदिक सभ्यता सरस्वती नदी के तटीय क्षेत्र जिसमें आधुनिक भारत के पंजाब (भारत) और हरियाणा राज्य आते हैं, में विकसित हुई। आम तौर पर अधिकतर विद्वान वैदिक सभ्यता का काल २००० ईसा पूर्व से ६०० ईसा पूर्व के बीच में मानते है, परन्तु नए पुरातत्त्व उत्खननों से मिले अवशेषों में वैदिक सभ्यता से संबंधित कई अवशेष मिले है जिससे कुछ आधुनिक विद्वान यह मानने लगे हैं कि वैदिक सभ्यता भारत में ही शुरु हुई थी, आर्य भारतीय मूल के ही थे और ऋग्वेद का रचना काल ३००० ईसा पूर्व रहा होगा, क्योंकि आर्यो के भारत में आने का न तो कोई पुरातत्त्व उत्खननों पर अधारित प्रमाण मिला है और न ही डी एन ए अनुसन्धानों से कोई प्रमाण मिला है। हाल ही में भारतीय पुरातत्व परिषद् द्वारा की गयी सरस्वती नदी की खोज से वैदिक सभ्यता, हड़प्पा सभ्यता और आर्यों के बारे में एक नया दृष्टिकोण सामने आया है। हड़प्पा सभ्यता को सिन्धु-सरस्वती सभ्यता नाम दिया है, क्योंकि हड़प्पा सभ्यता की २६०० बस्तियों में से वर्तमान पाकिस्तान में सिन्धु तट पर मात्र २६५ बस्तियां थीं, जबकि शेष अधिकांश बस्तियां सरस्वती नदी के तट पर मिलती हैं, सरस्वती एक विशाल नदी थी। पहाड़ों को तोड़ती हुई निकलती थी और मैदानों से होती हुई समुद्र में जाकर विलीन हो जाती थी। इसका वर्णन ऋग्वेद में बार-बार आता है, यह आज से ४००० साल पूर्व भूगर्भी बदलाव की वजह से सूख गयी थी। ईसा पूर्व ७ वीं और शुरूआती ६ वीं शताब्दि सदी में जैन और बौद्ध धर्म सम्प्रदाय लोकप्रिय हुए। अशोक (ईसापूर्व २६५-२४१) इस काल का एक महत्वपूर्ण राजा था जिसका साम्राज्य अफगानिस्तान से मणिपुर तक और तक्षशिला से कर्नाटक तक फैल गया था। पर वो सम्पूर्ण दक्षिण तक नहीं जा सका। दक्षिण में चोल सबसे शक्तिशाली निकले। संगम साहित्य की शुरुआत भी दक्षिण में इसी समय हुई। भगवान गौतम बुद्ध के जीवनकाल में, ईसा पूर्व ७ वीं और शुरूआती ६ वीं शताब्दि के दौरान सोलह बड़ी शक्तियां (महाजनपद) विद्यमान थे। अति महत्‍वपूर्ण गणराज्‍यों में कपिलवस्‍तु के शाक्‍य और वैशाली के लिच्‍छवी गणराज्‍य थे। गणराज्‍यों के अलावा राजतंत्रीय राज्‍य भी थे, जिनमें से कौशाम्‍बी (वत्‍स), मगध, कोशल, कुरु, पान्चाल, चेदि और अवन्ति महत्‍वपूर्ण थे। इन राज्‍यों का शासन ऐसे शक्तिशाली व्‍यक्तियों के पास था, जिन्‍होंने राज्‍य विस्‍तार और पड़ोसी राज्‍यों को अपने में मिलाने की नीति अपना रखी थी। तथापि गणराज्‍यात्‍मक राज्‍यों के तब भी स्‍पष्‍ट संकेत थे जब राजाओं के अधीन राज्‍यों का विस्‍तार हो रहा था। इसके बाद भारत छोटे-छोटे साम्राज्यों में बंट गया। आठवीं सदी में सिन्ध पर अरबी अधिकार हो गाय। यह इस्लाम का प्रवेश माना जाता है। बारहवीं सदी के अन्त तक दिल्ली की गद्दी पर तुर्क दासों का शासन आ गया जिन्होंने अगले कई सालों तक राज किया। दक्षिण में हिन्दू विजयनगर और गोलकुंडा के राज्य थे। १५५६ में विजय नगर का पतन हो गया। सन् १५२६ में मध्य एशिया से निर्वासित राजकुमार बाबर ने काबुल में पनाह ली और भारत पर आक्रमण किया। उसने मुग़ल वंश की स्थापना की जो अगले ३०० सालों तक चला। इसी समय दक्षिण-पूर्वी तट से पुर्तगाल का समुद्री व्यापार शुरु हो गया था। बाबर का पोता अकबर धार्मिक सहिष्णुता के लिए विख्यात हुआ। उसने हिन्दुओं पर से जज़िया कर हटा लिया। १६५९ में औरंग़ज़ेब ने इसे फ़िर से लागू कर दिया। औरंग़ज़ेब ने कश्मीर में तथा अन्य स्थानों पर हिन्दुओं को बलात मुसलमान बनवाया। उसी समय केन्द्रीय और दक्षिण भारत में शिवाजी के नेतृत्व में मराठे शक्तिशाली हो रहे थे। औरंगज़ेब ने दक्षिण की ओर ध्यान लगाया तो उत्तर में सिखों का उदय हो गया। औरंग़ज़ेब के मरते ही (१७०७) मुगल साम्राज्य बिखर गया। अंग्रेज़ों ने डचों, पुर्तगालियों तथा फ्रांसिसियों को भगाकर भारत पर व्यापार का अधिकार सुनिश्चित किया और १८५७ के एक विद्रोह को कुचलने के बाद सत्ता पर काबिज़ हो गए। भारत को आज़ादी १९४७ में मिली जिसमें महात्मा गाँधी के अहिंसा आधारित आंदोलन का योगदान महत्वपूर्ण था। १९४७ के बाद से भारत में गणतांत्रिक शासन लागू है। आज़ादी के समय ही भारत का विभाजन हुआ जिससे पाकिस्तान का जन्म हुआ और दोनों देशों में कश्मीर सहित अन्य मुद्दों पर तनाव बना हुआ है। .

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भारत के राजनयिक मिशनों की सूची

यह भारत के राजनयिक मिशनों की सूची है। भारत का आपेक्षित रूप से एक विशाल राजनयिक समाज (तंत्र) है जो इसके विश्व में सम्बंधों को दर्शाता है और विशेष रूप से पड़ोसी क्षेत्रों: मध्य एशिया, मध्य पूर्व, पूर्वी अफ्रीका, दक्षिण पूर्व एशिया और भारतीय उपमहाद्वीप में सम्बंधों को प्रतिबिम्बित करता है। इसके अलावा कैरिबियाई और प्रशान्त महासागरीय क्षेत्रों में भी जहाँ ऐतिहासिक रूप से प्रवासी भारतीय रहते हैं, भारत के मिशन मौजूद हैं। राष्ट्रमण्डल देश के रूप में, अन्य राष्ट्रकुल सदस्य राष्ट्रों की राजधानियों में भी भारतीय राजनयिक मिशन उच्च आयोगों के रूप में स्थापित हैं। राष्ट्रकुल देशों के अन्य नगरों में स्थित अपने वाणिज्य दूतावासों को भारत में "सहायक उच्च आयोग" कहा जाता है। .

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भारतीय सेही

भारतीय सेही एक कृंतक जानवर है। इसका फैलाव तुर्की, भूमध्य सागर से लेकर दक्षिण-पश्चिम तथा मध्य एशिया (अफ़गानिस्तान और तुर्कमेनिस्तान सहित) एवं दक्षिण एशिया (पाकिस्तान, भारत, नेपाल तथा श्रीलंका) और चीन तक में है। हिमालय में यह २,४०० मी.

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भारतीय इतिहास की समयरेखा

पाकिस्तान, बांग्लादेश एवं भारत एक साझा इतिहास के भागीदार हैं इसलिए भारतीय इतिहास की इस समय रेखा में सम्पूर्ण भारतीय उपमहाद्वीप के इतिहास की झलक है। .

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भूमंडलीय ऊष्मीकरण का प्रभाव

extreme weather). (Third Assessment Report) इस के अंतर पैनल तौर पर जलवायु परिवर्तन (Intergovernmental Panel on Climate Change)। इस भविष्यवाणी की प्रभावों के ग्लोबल वार्मिंग इस पर पर्यावरण (environment) और के लिए मानव जीवन (human life) कई हैं और विविध.यह आम तौर पर लंबे समय तक कारणों के लिए विशिष्ट प्राकृतिक घटनाएं विशेषता है, लेकिन मुश्किल है के कुछ प्रभावों का हाल जलवायु परिवर्तन (climate change) पहले से ही होने जा सकता है।Raising sea levels (Raising sea levels), glacier retreat (glacier retreat), Arctic shrinkage (Arctic shrinkage), and altered patterns of agriculture (agriculture) are cited as direct consequences, but predictions for secondary and regional effects include extreme weather (extreme weather) events, an expansion of tropical diseases (tropical diseases), changes in the timing of seasonal patterns in ecosystems (changes in the timing of seasonal patterns in ecosystems), and drastic economic impact (economic impact)। चिंताओं का नेतृत्व करने के लिए हैं राजनीतिक (political) सक्रियता प्रस्तावों की वकालत करने के लिए कम (mitigate), समाप्त (eliminate), या अनुकूलित (adapt) यह करने के लिए। 2007 चौथी मूल्यांकन रिपोर्ट (Fourth Assessment Report) के द्वारा अंतर पैनल तौर पर जलवायु परिवर्तन (Intergovernmental Panel on Climate Change) (आईपीसीसी) ने उम्मीद प्रभावों का सार भी शामिल है। .

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मध्यकालीन चीन

सुई राजवंश के बाद तंग राजवंश और सोंग राजवंश काकाल आया। इनके शासन के दौरान चीन की संस्कृति और विज्ञान अपने चरम पर पहुंच गया। सातवीं से चौदहवीं सदी तक चीन विश्व का सबसे संस्कृत देश बना रहा। 1271 में मंगोल सरदार कुबलय खां ने युआन रादवंश की स्थापना की जिसने 1279 तक सोंग वंश को सत्ता से हटाकर अपना अधिपत्य कायम किया। एक किसान ने 1368 में मंगोलों को भगा दिया और मिंग राजवंश की स्थापना की जो 1664 तक चला। मंचू लोगों के द्वारा स्थापित क्विंग राजवंश ने चीन पर 1911 तक राज किया जो चीन का अंतिम वंश था। चीन का सबसे पुराना राजवंश है - शिया राजवंश। इनका अस्तित्व एक लोककथा लगता था पर हेनान में पुरातात्विक खुदाई के बाद इसके वजूद की सत्यता सामने आई। प्रथम प्रत्यक्ष राजवंश था - शांग राजवंश, जो पूर्वी चीन में 18वीं से 12 वीं सदी इसा पूर्व पीली नदी के किनारे बस गए। 12वीं सदी ईसा पूर्व में पश्चिम से झोऊ शासकों ने इनपर हमला किया और इनके क्षेत्रों पर अधिकार कर लिया। इन्होने 5वीं सदी ईसा पूर्व तक राज किया। इसके बाद चीन के छोटे राज्य आपसी संघर्ष में भिड़ गए। ईसा पूर्व 221 में चिन राजवंश ने चीन का प्रथम बार एकीकरण किया। इन्होने राजा का कार्यालय स्थापित किया और चीनी भाषा का मानकीकरण किया। ईसा पूर्व 220 से 206 ई. तक हान राजवंश के शासकों ने चीन पर राज किया और चीन की संस्कृति पर अपनी अमिट छाप छोड़ी। य़ह प्रभाव अब तक विद्यमान है। इन्होने रेशम मार्ग की भी स्थापना रखी। हानों के पतन के बाद चीन में फिर से अराजकता का माहौल छा गया। सुई राजवंश ने 580 ईस्वी में चान का एकीकरण किया जिसके कुछ ही सालों बाद (614 ई.) इस राजवंश का पतन हो गया। युद्ध कला में मध्य एशियाई देशों से आगे निकल जाने के कारण चीन ने मध्य एशिया पर अपना प्रभुत्व जमा लिया, पर साथ ही साथ वह यूरोपीय शक्तियों के समक्ष कमजोर पड़ने लगा। चीन शेष विश्व के प्रति सतर्क हुआ और उसने यूरोपीय देशो के साथ व्यापार का रास्ता खोल दिया। ब्रिटिश भारत तथा जापान के साथ हुए युद्धों तथा गृहयुद्धो ने क्विंग राजवंश को कमजोर कर डाला। अंततः 1912 में चीन में गणतंत्र की स्थापना हुई। युद्ध कला में मध्य एशियाई देशों से आगे निकल जाने के कारण चीन ने मध्य एशिया पर अपना प्रभुत्व जमा लिया, पर साथ ही साथ वह यूरोपीय शक्तियों के समक्ष कमजोर पड़ने लगा। चीन शेष विश्व के प्रति सतर्क हुआ और उसने यूरोपीय देशो के साथ व्यापार का रास्ता खोल दिया। ब्रिटिश भारत तथा जापान के साथ हुए युद्धों तथा गृहयुद्धो ने क्विंग राजवंश को कमजोर कर डाला। अंततः 1912 में चीन में गणतंत्र की स्थापना हुई। चीन की विशाल दीवार मिट्टी और पत्थर से बनी एक किलेनुमा दीवार है जिसे चीन के विभिन्न शासको के द्वारा उत्तरी हमलावरों से रक्षा के लिए पाँचवीं शताब्दी ईसा पूर्व से लेकर सोलहवी शताब्दी तक बनवाया गया। इसकी विशालता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है की इस मानव निर्मित ढांचे को अन्तरिक्ष से भी देखा जा सकता है। यह दीवार ६,४०० किलोमीटर (१०,००० ली, चीनी लंबाई मापन इकाई) के क्षेत्र में फैली है। इसका विस्तार पूर्व में शानहाइगुआन से पश्चिम में लोप नुर तक है और कुल लंबाई लगभग ६७०० कि॰मी॰ (४१६० मील) है। हालांकि पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के हाल के सर्वेक्षण के अनुसार समग्र महान दीवार, अपनी सभी शाखाओं सहित ८,८५१.८ कि॰मी॰ (५,५००.३ मील) तक फैली है। अपने उत्कर्ष पर मिंग वंश की सुरक्षा हेतु दस लाख से अधिक लोग नियुक्त थे। यह अनुमानित है, कि इस महान दीवार निर्माण परियोजना में लगभग २० से ३० लाख लोगों ने अपना जीवन लगा दिया था। चीन में राज्य की रक्षा करने के लिए दीवार बनाने की शुरुआत हुई आठवीं शताब्दी ईसापूर्व में जिस समय कुई (अंग्रेजी:Qi), यान (अंग्रेजी:Yan) और जाहो (अंग्रेजी:Zhao) राज्यों ने तीर एवं तलवारों के आक्रमण से बचने के लिए मिटटी और कंकड़ को सांचे में दबा कर बनाई गयी ईटों से दीवार का निर्माण किया। ईसा से २२१ वर्ष पूर्व चीन किन (अंग्रेजी:Qin) साम्राज्य के अनतर्गत आ गया। इस साम्राज्य ने सभी छोटे राज्यों को एक करके एक अखंड चीन की रचना की। किन साम्राज्य से शासको ने पूर्व में बनायी हुई विभिन्न दीवारों को एक कर दिया जो की चीन की उत्तरी सीमा बनी। पांचवीं शताब्दी से बहुत बाद तक ढेरों दीवारें बनीं, जिन्हें मिलाकर चीन की दीवार कहा गया। प्रसिद्धतम दीवारों में से एक २२०-२०६ ई.पू.

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मनास की दास्तान

किरगिज़ मनासची मनास की दास्तान (किरगिज़: Манас дастаны, मनास दास्तानी; अंग्रेज़ी: Epic of Manas) मध्य एशिया के किरगिज़ लोगों की एक शौर्य काव्य-गाथा है। यह १८वीं सदी में लिखी गई थी लेकिन हो सकता है कि इसकी कहानी उस से पहले से प्रचलित हो। मनास किरगिज़ लोगों का एक ऐतिहासिक महानायक था। मनास कथा में उसे बहुत बहादुर बताया गया है और बतलाया जाता है कि कैसे उसने किरगिज़ लोगों के बहुत दुश्मनों से टक्कर लेकर उन्हें हराया, जैसे कि ख़ितानी, ओइरत लोग, उईग़ुर और अफ़ग़ान​। मनास-दास्तान किरगिज़ भाषा की सब से महत्वपूर्ण साहित्य-कृति मानी जाती है। किर्गिज़स्तान में यह वीर-कथा रस्मी रूप से गाकर सुनाई जाती है और मनास-दास्तान सुनाने वाले को 'मनासची' (Манасчы, Manaschi) कहा जाता है। मनास गाथा में क़रीब ५ लाख पंक्तियाँ हैं जो महाभारत से ढाई गुना है (हालाँकि महाभारत शब्दों के हिसाब से अधिक लम्बी है)। इस कथा के कुछ रूपों में मनास को नोगाई ख़ान बताया गया है। १९९५ में किर्गिज़स्तान की सरकार ने मनास की १००० वीं जन्म जयंती का राष्ट्रोत्सव मनाया।, Dilip Hiro, Penguin, 2009, ISBN 978-1-59020-221-0,...

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मर्व

मर्व के प्राचीन खँडहर सुलतान संजर का मक़बरा मर्व (अंग्रेज़ी: Merv, फ़ारसी:, रूसी: Мерв) मध्य एशिया में ऐतिहासिक रेशम मार्ग पर स्थित एक महत्वपूर्ण नख़लिस्तान (ओएसिस) में स्थित शहर था। यह तुर्कमेनिस्तान के आधुनिक मरी नगर के पास था। भौगोलिक दृष्टि से यह काराकुम रेगिस्तान में मुरग़ाब नदी के किनारे स्थित है। कुछ स्रोतों के अनुसार १२वीं शताब्दी में थोड़े से समय के लिए मर्व दुनिया का सबसे बड़ा शहर था। प्राचीन मर्व के स्थल को यूनेस्को ने एक विश्व धरोहर घोषित कर दिया है। .

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मसागती लोग

मसागती (यूनानी: Μασσαγέται, अंग्रेज़ी: Massagetae) प्राचीनकाल में मध्य एशिया में बसने वाली ख़ानाबदोश क़बीलों की एक जनजाति थी। वे एक पूर्वी ईरानी भाषा बोला करते थे। उन्हें मुख्य-रूप से यूनानी इतिहासकार हेरोदोतस की लिखाईयों से जाना जाता है। सम्भव है कि वे स्किथी लोगों से सम्बन्धित हों।Karasulas, Antony.

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महमूद काश्गरी

महमूद काश्गरी (उईग़ुर:, अंग्रेज़ी: Mahmud al-Kashgari) ११वीं सदी ईसवी के काल में तुर्की भाषाओँ के एक विद्वान और कोशकर्मी (शब्दकोष निर्माता) थे। वे मध्य एशिया के काश्गर शहर के निवासी थे। उन्होंने १०७४ ईसवी में तुर्की भाषाओँ का पहला सम्पूर्ण शब्दकोश तैयार किया, जिसका नाम 'दीवान-उ-लुग़ात​-उत-तुर्क' था।, Misbah Islam, pp.

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महान एयर

महान एयरलाइंस, जो महाण एयर, (هواپیمایی ماهان) नाम से संचालन करती है, तेहरान में आधारित ईरान की एक वायुसेवा है। यह सेवा अन्तर्देशीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय गंतव्यों को अनुसूचित उड़ानें संचालित करती है। ये गंतव्य सुदूर पूर्व, मध्य पूर्व, मध्य एशिया, यूरोप आदि में हैं। इस कंपनी का प्रमुख आधार बेस इमाम खोमैनी अन्तर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र, तेहरान ईरान में स्थित है। .

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मातृवंश समूह ए

बहुत से एस्किमो लोग मातृवंश समूह ए के वंशज होते हैं मनुष्यों की आनुवंशिकी (यानि जॅनॅटिक्स) में मातृवंश समूह ए या माइटोकांड्रिया-डी॰एन॰ए॰ हैपलोग्रुप A एक मातृवंश समूह है। यह मातृवंश मूल अमेरिकी आदिवासी समुदायों, पूर्वी साइबेरिया के लोगों और कुछ पूर्वोत्तर एशिया के लोगों में पाया जाता है। चुकची, एस्किमो और अमेरिका की ना-देने जनजातियों में यह सब से आम मातृवंश है। ७.५% जापानी और २% तुर्की लोगों में भी यह पाया जाता है। अनुमान लगाया जाता है के जिस स्त्री के साथ इस मातृवंश की शुरुआत हुई वह आज से लगभग ५०,००० साल पहले पूर्वी एशिया या मध्य एशिया की निवासी थी। ध्यान दें के कभी-कभी मातृवंशों और पितृवंशों के नाम मिलते-जुलते होते हैं (जैसे की पितृवंश समूह ए और मातृवंश समूह ए), लेकिन यह केवल एक इत्तेफ़ाक ही है - इनका आपस में कोई सम्बन्ध नहीं है। .

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मातृवंश समूह एच

लगभग १०% पंजाबी लोग मातृवंश समूह एच के वंशज होते हैं मनुष्यों की आनुवंशिकी (यानि जॅनॅटिक्स) में मातृवंश समूह एच या माइटोकांड्रिया-डी॰एन॰ए॰ हैपलोग्रुप H एक मातृवंश समूह है। यूरोप में यह सब से अधिक पाया जाने वाले मातृवंश है। यूरोप के ५०%, मध्य पूर्व और कॉकस के २०%, ईरान के १७% और पाकिस्तान, उत्तर भारत और मध्य एशिया के १०% से ज़रा कम लोग इस मातृवंश के वंशज हैं। फ़ारस की खाड़ी के इर्द-गिर्द के इलाक़ों में भी १०% से ज़रा कम लोग इसके वंशज हैं। वैज्ञानिकों की मान्यता है के जिस स्त्री के साथ इस मातृवंश की शुरुआत हुई वह आज से क़रीब २५,००० से ३०,००० साल पहले मध्य पूर्व में कहीं रहती थी। .

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मातृवंश समूह डी

साइबेरिया की याकूत जनजाति के लोग अक्सर मातृवंश समूह डी के वंशज होते हैं मनुष्यों की आनुवंशिकी (यानि जॅनॅटिक्स) में मातृवंश समूह डी या माइटोकांड्रिया-डी॰एन॰ए॰ हैपलोग्रुप D एक मातृवंश समूह है। इस मातृवंश के लोग ज़्यादातर पूर्वोत्तर एशिया (ख़ासकर साइबेरिया), मूल अमेरिकी आदिवासी समुदायों, मध्य एशिया और कोरिया में भारी संख्या में और पूर्वोत्तर यूरोप और मध्य पूर्व के दक्षिण-पश्चिमी एशियाई इलाक़ों में हलकी संख्या में मिलते हैं। वैज्ञानिकों की मान्यता है के जिस स्त्री के साथ इस मातृवंश की शुरुआत हुई वह आज से क़रीब ४८,००० साल पहले पूर्व एशिया में कहीं रहती थी। ध्यान दें के कभी-कभी मातृवंशों और पितृवंशों के नाम मिलते-जुलते होते हैं (जैसे की पितृवंश समूह डी और मातृवंश समूह डी), लेकिन यह केवल एक इत्तेफ़ाक ही है - इनका आपस में कोई सम्बन्ध नहीं है। .

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मातृवंश समूह सी

साइबेरिया की चुकची जनजाति के ११% लोग मातृवंश समूह सी के वंशज होते हैं मनुष्यों की आनुवंशिकी (यानि जॅनॅटिक्स) में मातृवंश समूह सी या माइटोकांड्रिया-डी॰एन॰ए॰ हैपलोग्रुप C एक मातृवंश समूह है। यह मातृवंश समूह सीज़ॅड की एक उपशाखा है। इस मातृवंश के लोग ज़्यादातर पूर्वोत्तर एशिया (ख़ासकर साइबेरिया) और अमेरिका के आदिवासियों में पाए जाते हैं, लेकिन हाल ही में यह पश्चिमी यूरोप के आइसलैण्ड राष्ट्र में भी पाए गाये हैं। साइबेरिया की चुकची जनजाति के ११% लोग मातृवंश समूह सी के वंशज होते हैं। वैज्ञानिकों की मान्यता है के जिस स्त्री के साथ इस मातृवंश की शुरुआत हुई वह आज से लगभग ६०,००० साल पहले मध्य एशिया में कैस्पियन सागर और बेकाल झील के दरमियानी क्षेत्र में कहीं रहती थी। ध्यान दें के कभी-कभी मातृवंशों और पितृवंशों के नाम मिलते-जुलते होते हैं (जैसे की पितृवंश समूह डी और मातृवंश समूह डी), लेकिन यह केवल एक इत्तेफ़ाक ही है - इनका आपस में कोई सम्बन्ध नहीं है। .

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मातृवंश समूह ज़ॅड

फिनलैंड की सामी जनजाति के लोग अक्सर मातृवंश समूह ज़ॅड के वंशज होते हैं मनुष्यों की आनुवंशिकी (यानि जॅनॅटिक्स) में मातृवंश समूह ज़ॅड या माइटोकांड्रिया-डी॰एन॰ए॰ हैपलोग्रुप Z एक मातृवंश समूह है। यह मातृवंश समूह सीज़ॅड की एक उपशाखा है। इस मातृवंश के लोग ज़्यादातर रूस, फिनलैंड के सामी समुदाय, उत्तर चीन, मध्य एशिया और कोरिया में मिलते हैं। वैज्ञानिकों की मान्यता है के जिस स्त्री के साथ इस मातृवंश की शुरुआत हुई वह आज से हज़ारों साल पहले मध्य एशिया में कहीं रहती थी। .

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मातृवंश समूह जी

साइबेरिया की जनजातियों के लोग अक्सर मातृवंश समूह जी के वंशज होते हैं मनुष्यों की आनुवंशिकी (यानि जॅनॅटिक्स) में मातृवंश समूह जी या माइटोकांड्रिया-डी॰एन॰ए॰ हैपलोग्रुप G एक मातृवंश समूह है। इस मातृवंश के लोग ज़्यादातर पूर्वोत्तर साइबेरिया में होते हैं, जहाँ की कोरिआक और इतेलमेन जनजातियों में यह मातृवंश आम है। कम संख्या में इसके वंशज पूर्वी एशिया, मध्य एशिया और नेपाल में भी मिलते हैं। आम तौर पर जो मातृवंश साइबेरिया के पूर्वोत्तर में मिलते हैं वे मूल अमेरिकी आदिवासी समुदायों में भी मिलते हैं क्योंकि माना जाता है के साइबेरिया के लोग उत्तरी अमेरिका में मनुष्यों की पहली आबादियों के स्रोत थे। इसलिए वैज्ञानिकों को आश्चर्य हुआ के मातृवंश समूह जी मूल अमेरिकी आदिवासियों में कभी नहीं पाया गया है, लेकिन अब सोच यह है के इसकी शुरुआत पूर्वी एशिया में हुई और फिर यह साइबेरिया में फैल गया। वैज्ञानिकों अनुमान लगाते हैं के जिस स्त्री के साथ इस मातृवंश की शुरुआत हुई वह आज से लगभग ३५,७०० साल पहले पूर्वी एशिया में कहीं रहती थी। .

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मातृवंश समूह वी

तुनिशिया के कुछ बर्बर समुदायों में १६% से अधिक लोग मातृवंश समूह वी के वंशज होते हैं मनुष्यों की आनुवंशिकी (यानि जॅनॅटिक्स) में मातृवंश समूह वी या माइटोकांड्रिया-डी॰एन॰ए॰ हैपलोग्रुप V एक मातृवंश समूह है। यूरोप में यह सब से ज़्यादा मात्रा (१०.४%) में उत्तरी स्कैन्डिनेविया की सामी जनजाति के लोगों में और स्पेन-फ्रांस के सीमावर्ती इलाक़ों में बसने वाले बास्क लोगों में मिलता है। उत्तरी अफ़्रीका में यह तुनिशिया के मतमाता शहर में रहने वाले बर्बर समुदाय के १६.३% लोगों में मिलता है। इस मातृवंश के लोग हलकी मात्राओं में पूरे यूरोप, मध्य पूर्व और मध्य एशिया में मिलते हैं। वैज्ञानिकों की मान्यता है के जिस स्त्री के साथ इस मातृवंश की शुरुआत हुई वह आज से क़रीब १३,६०० से ३०,००० साल पहले भू मध्य सागर के पश्चिमी भाग के इर्द-गिर्द के इलाक़ों (जिनमें स्पेन, दक्षिणी फ्रांस, लीबिया, तुनिशिया, वग़ैराह शामिल हैं) में कहीं रहती थी। .

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मान्गीस्तऊ प्रांत

मान्गीस्त​ऊ प्रांत (कज़ाख़: Маңғыстау облысы, अंग्रेज़ी: Mangystau Province) मध्य एशिया के क़ाज़ाख़स्तान देश का एक प्रांत है। इसकी राजधानी कैस्पियन सागर के किनारे स्थित अकतऊ शहर है, जो क़ाज़ाख़स्तान की सबसे बड़ी बंदरगाह भी है। इस प्रांत की दक्षिणी सीमा तुर्कमेनिस्तान के बलक़ान प्रान्त से और पूर्वी सीमा उज़बेकिस्तान के क़ाराक़ालपाक़स्तान प्रान्त से लगती हैं। .

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मानी

मानी मानी (सीरियाई: ܡܐܢܝ ܚܝܐ, मानी हय्या, अर्थ: जीवित मानी; अंग्रेज़ी: Mani; यूनानी: Μάνης, मानेश; जन्म: २१६ ईसवी अनुमानित; मृत्यु: २७६ ईसवी) एक ईरानी मूल का धर्म-संस्थापक था जिसने मानी धर्म की स्थापना करी। यह धर्म किसी ज़माने में मध्य एशिया, ईरान और अन्य क्षेत्रों में बहुत फैला हुआ था लेकिन समय के साथ-साथ पूरी तरह ख़त्म हो गया। मानी का जन्म पार्थिया के अधीन असुरिस्तान (असीरिया) क्षेत्र में हुआ था और मृत्यु सासानी साम्राज्य के गुंद-ए-शापूर (Gundeshapur) शहर में हुई। उसने सीरियाई भाषा में छह प्रमुख धार्मिक रचनाएँ लिखी और एक शापूरगान नामक कृति ईरान के शाह, शापूर प्रथम, को समर्पित करते हुए मध्य फ़ारसी में लिखी।, Gale Research, 1998, ISBN 978-0-7876-2550-4,...

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मानी धर्म

तारिम द्रोणी में मिली इस पांडुलिपि में मानी धर्म के पुजारी अपने मेज़ों पर बैठे लिख रहे हैं मानी धर्म (फ़ारसी:, आईन-ए-मानी; अंग्रेजी: Manichaeism) एक प्राचीन धर्म था जो ईरान के सासानी साम्राज्य के अधीन बेबीलोनिया क्षेत्र में शुरू होकर मध्य एशिया और उसके इर्द-गिर्द के इलाक़ों में बहुत विस्तृत हो गया। इसकी स्थापना मानी (२१६-२७६ ईसवी अनुमानित) नामक एक मसीहा ने की थी और इसमें बौद्ध धर्म, ज़रथुष्टी धर्म और ईसाई धर्म के बहुत से तत्वों का मिश्रण था। मानी की लिखाईयाँ पूर्ण रूप से तो नहीं बची लेकिन उनके बहुत से अंश और भाषांतरित प्रतियाँ अभी भी उपलब्ध हैं। यह धर्म तीसरी से सातवी शताब्दी ईसवी तक चला और अपने चरम पर विश्व के सबसे मुख्य धर्मों में से एक था। उस समय यह चीन से लेकर रोम तक विस्तृत था।, Michel Tardieu, University of Illinois Press, 2009, ISBN 978-0-252-03278-3,...

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मंसूर अल हल्लाज

मंसूर अल हल्लाज को फांसी दिये जाने का चित्रण मंसूर अल हल्लाज (858 – मार्च 26, 922) एक कवि और तसव्वुफ़ (सूफ़ी) के प्रवर्तक विचारकों में से एक थे जिनको सन ९२२ में अब्बासी ख़लीफ़ा अल मुक़्तदर के आदेश पर बहुत पड़ताल करने के बाद फ़ांसी पर लटका दिया गया था। इनको अन अल हक़्क़ (मैं सच हूँ) के नारे के लिए भी जाना जाता है जो भारतीय अद्वैत सिद्धांत के अहं ब्रह्मास्मि के बहुत क़रीब है। .

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मंगोल

चंगेज़ ख़ान एक पारम्परिक मंगोल घर, जिसे यर्त कहते हैं मंगोल मध्य एशिया और पूर्वी एशिया में रहने वाली एक जाति है, जिसका विश्व इतिहास पर गहरा प्रभाव रहा है। भारतीय उपमहाद्वीप में इस जाति को मुग़ल के नाम से जाना जाता था, जिस से मुग़ल राजवंश का नाम भी पड़ा। आधुनिक युग में मंगोल लोग मंगोलिया, चीन और रूस में वास करते हैं। विश्व भर में लगभग १ करोड़ मंगोल लोग हैं। शुरु-शुरु में यह जाति अर्गुन नदी के पूर्व के इलाकों में रहा करती थी, बाद में वह वाह्य ख़िन्गन पर्वत शृंखला और अल्ताई पर्वत शृंखला के बीच स्थित मंगोलिया पठार के आर-पार फैल गई। मंगोल जाति के लोग ख़ानाबदोशों का जीवन व्यतीत करते थे और शिकार, तीरंदाजी व घुड़सवारी में बहुत कुशल थे। १२वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में इसके मुखिया तेमूचीन ने तमाम मंगोल कबीलों को एक किया। .

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मंगोल भाषा-परिवार

मोंगोल भाषाओँ का विस्तार मंगोल भाषाएँ (अंग्रेज़ी: Mongolic languages, मोंगोलिक लैग्वेजिज़) पूर्वी एशिया और मध्य एशिया में बोली जाने वाली भाषाओँ का एक भाषा-परिवार है। इसकी सब से नुमाया भाषा मंगोल भाषा है, जो मंगोलिया और चीन के भीतरी मंगोलिया प्रान्त के मंगोल समुदाय कि प्रमुख भाषा है और जिसे लगभग ५२ लाख लोग बोलते हैं। कुछ भाषावैज्ञानिकों के हिसाब से मंगोल भाषाएँ अल्ताई भाषा-परिवार की एक उपशाखा है। मंगोल के अलावा मंगोल भाषा-परिवार में कई अन्य भाषाएँ भी आती हैं, जैसे कि रूस के साइबेरिया क्षेत्र में बोली जाने वाली बुर्यात भाषा, चीन के चिंग हई प्रान्त में बोली जाने वाली कन्गजिआ भाषा और चीन के ही शिनजियांग प्रान्त में बोली जाने वाली दोंगशियांग भाषा।, Juha Janhunen, Psychology Press, 2003, ISBN 978-0-7007-1133-8 .

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मंगोल साम्राज्य

हलाकू (बायें), खलीफा अल-मुस्तसिम को भूख से मारने के लिये उसके खजाने में कैद करते हुए मांगके खान की मृत्यु के समय (१२५९ ई में) मंगोल साम्राज्य मंगोल साम्राज्य 13 वीं और 14 वीं शताब्दियों के दौरान एक विशाल साम्राज्य था। इस साम्राज्य का आरम्भ चंगेज खान द्वारा मंगोलिया के घूमन्तू जनजातियों के एकीकरण से हुआ। मध्य एशिया में शुरू यह राज्य अंततः पूर्व में यूरोप से लेकर पश्चिम में जापान के सागर तक और उत्तर में साइबेरिया से लेकर दक्षिण में भारतीय उपमहाद्वीप तक फैल गया। आमतौर पर इसे दुनिया के इतिहास में सबसे बड़ा सन्निहित साम्राज्य माना जाना जाता है। अपने शीर्ष पर यह 6000 मील (9700 किमी) तक फैला था और 33,000,000 वर्ग कि॰मी॰ (12,741,000 वर्ग मील) के क्षेत्र को कवर करता था। इस समय पृथ्वी के कुल भू क्षेत्रफल का 22% हिस्सा इसके कब्ज़े में था और इसकी आबादी 100 करोड़ थी। मंगोल शासक पहले बौद्ध थे, लेकिन बाद में धीरे-धीरे तुर्कों के सम्पर्क में आकर उन्होंने इस्लाम को अपना लिया। .

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मंगोलिया का पठार

मंगोलिया का पठार मंगोलिया का पठार मध्य एशिया में स्थित एक विशाल पठार इलाक़ा है जिसका कुल क्षेत्रफल लगभग २६ लाख वर्ग किलोमीटर है। आधुनिक युग में यह उत्तर में मंगोलिया और दक्षिण में चीन के भीतरी मंगोलिया राज्य के दरमियान बंटा हुआ है। इसमें गोबी रेगिस्तान और स्तेपी के घास के मैदानों का कुछ क्षेत्र भी सम्मिलित है। इसकी ऊंचाई ९०० से १,५०० मीटर के दरमियान है। .

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मुरग़ाब नदी

मुरग़ाब नदी पर सन् १९०९ में रूसी साम्राज्य द्वारा बनाया गया हिन्दू कुश जल-विद्युत् स्टेशन (Гиндукушская ГЭС) मुरग़ाब नदी (फ़ारसी/पश्तो:, अंग्रेज़ी: Murghab, रूसी: Мургаб) मध्य एशिया में एक ८५० किमी लम्बी नदी है। यह मध्य अफ़्ग़ानिस्तान में सफ़ेद कोह पर्वत-शृंखला में उत्पन्न होकर पश्चिमोत्तर दिशा में चलती है। यहाँ यह अफ़्ग़ानिस्तान के बादग़ीस प्रान्त के मुरग़ाब ज़िले से गुज़रती है जिसका नाम इसी नदी पर पड़ा है। वहाँ से यह तुर्कमेनिस्तान के काराकुम रेगिस्तान में जा पहुँचती है जहाँ मरी शहर के नख़लिस्तान (ओएसिस) में यह काराकुम नहर से जा मिलती है।, Andrew Petersen, Psychology Press, 1999, ISBN 978-0-415-21332-5,...

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मुग़ल साम्राज्य

मुग़ल साम्राज्य (फ़ारसी:, मुग़ल सलतनत-ए-हिंद; तुर्की: बाबर इम्परातोरलुग़ु), एक इस्लामी तुर्की-मंगोल साम्राज्य था जो 1526 में शुरू हुआ, जिसने 17 वीं शताब्दी के आखिर में और 18 वीं शताब्दी की शुरुआत तक भारतीय उपमहाद्वीप में शासन किया और 19 वीं शताब्दी के मध्य में समाप्त हुआ। मुग़ल सम्राट तुर्क-मंगोल पीढ़ी के तैमूरवंशी थे और इन्होंने अति परिष्कृत मिश्रित हिन्द-फारसी संस्कृति को विकसित किया। 1700 के आसपास, अपनी शक्ति की ऊँचाई पर, इसने भारतीय उपमहाद्वीप के अधिकांश भाग को नियंत्रित किया - इसका विस्तार पूर्व में वर्तमान बंगलादेश से पश्चिम में बलूचिस्तान तक और उत्तर में कश्मीर से दक्षिण में कावेरी घाटी तक था। उस समय 40 लाख किमी² (15 लाख मील²) के क्षेत्र पर फैले इस साम्राज्य की जनसंख्या का अनुमान 11 और 13 करोड़ के बीच लगाया गया था। 1725 के बाद इसकी शक्ति में तेज़ी से गिरावट आई। उत्तराधिकार के कलह, कृषि संकट की वजह से स्थानीय विद्रोह, धार्मिक असहिष्णुता का उत्कर्ष और ब्रिटिश उपनिवेशवाद से कमजोर हुए साम्राज्य का अंतिम सम्राट बहादुर ज़फ़र शाह था, जिसका शासन दिल्ली शहर तक सीमित रह गया था। अंग्रेजों ने उसे कैद में रखा और 1857 के भारतीय विद्रोह के बाद ब्रिटिश द्वारा म्यानमार निर्वासित कर दिया। 1556 में, जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर, जो महान अकबर के नाम से प्रसिद्ध हुआ, के पदग्रहण के साथ इस साम्राज्य का उत्कृष्ट काल शुरू हुआ और सम्राट औरंगज़ेब के निधन के साथ समाप्त हुआ, हालाँकि यह साम्राज्य और 150 साल तक चला। इस समय के दौरान, विभिन्न क्षेत्रों को जोड़ने में एक उच्च केंद्रीकृत प्रशासन निर्मित किया गया था। मुग़लों के सभी महत्वपूर्ण स्मारक, उनके ज्यादातर दृश्य विरासत, इस अवधि के हैं। .

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मोदू चानयू

मोदू के शासनकाल के आरम्भ में शियोंगनु साम्राज्य का विस्तार मोदू चानयू (चीनी: 冒頓單于, मंगोल: Модун шаньюй, अंग्रेज़ी: Modu Chanyu) मध्य एशिया, मंगोलिया और उत्तरी चीन के कई इलाक़ों पर प्राचीनकाल में अधिकार रखने वाले शियोंगनु लोगों का एक चानयू (सम्राट) था। मोदू को शियोंगनु साम्राज्य का निर्माता भी कहा जाता है और उसका शासनकाल २०९ ईसापूर्व से १७४ ईसापूर्व तक चला। मोदू ने अपने अधीन मंगोलिया के स्तेपी क्षेत्र के ख़ानाबदोश क़बीलों को संगठित किया और चीन के चिन राजवंश के लिए ख़तरा बन गया। उसका शियोंगनु साम्राज्य पूर्व में लियाओ नदी से लेकर पश्चिम में पामीर पर्वतों तक और उत्तर में साइबेरिया की बायकल झील तक विस्तृत था। .

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यारकन्द नदी

तारिम नदी के जलसम्भर क्षेत्र का नक़्शा जिसमें यारकन्द नदी नज़र आ रही है यारकन्द नदी (उईग़ुर:, चीनी: 叶尔羌河, अंग्रेजी: Yarkand River) मध्य एशिया में चीन के शिनजियांग प्रांत में बहने वाली एक नदी है। यह शिनजियांग के काश्गर विभाग में काराकोरम पहाड़ों में उत्पन्न होती है। कुछ दूरी में इसमें शक्सगाम नदी (जिसे केलेचिन नदी और मुज़ताग़ नदी के नामों से भी जाना जाता है) आकर विलय करती है। यहाँ के स्थानीय किरगिज़ लोग इस इलाक़े की यारकन्द नदी को रस्काम नदी के नाम से जानते हैं। आगे चलकर यह नदी तारिम नदी में विलय हो जाती है। अपनी शुरुआत से तारिम नदी में विलय तक यारकन्द नदी लगभग ९७० किमी (६०० मील) लम्बी है।, Jun Ma, EastBridge, 2004, ISBN 978-1-891936-27-2,...

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यासीन वादी

यासीन (Yasin) या वोरशीगूम (Worshigum) पाक-अधिकृत कश्मीर के गिलगित-बलतिस्तान क्षेत्र के ग़िज़र ज़िले की एक घाटी है। प्रशासनिक दृष्टि से यह ग़िज़र ज़िले की एक तहसील भी है। यासीन वादी हिन्दु कुश पर्वतों में स्थित है और यहाँ से पूर्व में इश्कोमन वादी पहुँचने के लिए असम्बर दर्रे नामक एक पर्वतीय दर्रे से गुज़रना पड़ता है।, Robert W. Bradnock, Trade & Travel Publications, 1994,...

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यांगियेर

यांगियेर शहर का द्वार यांगियेर (उज़बेक: Янгиер, अंग्रेज़ी: Yangiyer) मध्य एशिया के उज़बेकिस्तान देश के पूर्वी भाग में स्थित सिरदरिया प्रान्त का एक शहर है। इस शहर की स्थापना सन् १९५७ में की गई थी जब सोवियत संघ ने गोलोदनाया स्तेपी के शुष्क रेगिस्तानी क्षेत्र को नहरों के द्वारा सींच कर उपजाऊ बनाया था।, G. Philip, 1965,...

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युएझ़ी लोग

समय के साथ मध्य एशिया में युएझ़ी लोगों का विस्तार, १७६ ईसापूर्व से ३० ईसवी तक यूइची (Yue-Tche) या युएझ़ी, युएज़ी या रुझ़ी (अंग्रेज़ी: Yuezhi, चीनी: 月支, 'झ़' के उच्चारण पर ध्यान दें, यह 'झ' से भिन्न है) प्राचीन काल में मध्य एशिया में बसने वाली एक जाति थी। माना जाता है कि यह एक हिन्द-यूरोपीय लोग थे जो शायद तुषारी लोगों से सम्बंधित रहें हों। शुरू में यह तारिम द्रोणी के पूर्व के शुष्क घास के मैदानी स्तेपी इलाक़े के वासी थे, जो आधुनिक काल में चीन के शिंजियांग और गांसू प्रान्तों में पड़ता है। समय के साथ वे मध्य एशिया के अन्य इलाक़ों, बैक्ट्रिया और भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तरी क्षेत्रों में फैल गए। संभव है कि भारत के कुशान साम्राज्य की स्थापना में भी उनका हाथ रहा हो।, Madathil Mammen Ninan, 2008, ISBN 978-1-4382-2820-4,...

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युर्त

युर्त (रूसी: Юрта) या यर्ट (अंग्रेज़ी: Yurt) या गेर (मंगोली: гэр) एक प्रकार का गोल-आधार वाला तम्बू होता है जिसे पशुओं की खाल से ढका जाता है और जो मध्य एशिया के स्तेपी क्षेत्र के बंजारा जातियों द्वारा आवास के लिए प्रयोग होता है। .

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युक्रेन

युक्रेन पूर्वी यूरोप में स्थित एक देश है। इसकी सीमा पूर्व में रूस, उत्तर में बेलारूस, पोलैंड, स्लोवाकिया, पश्चिम में हंगरी, दक्षिणपश्चिम में रोमानिया और माल्दोवा और दक्षिण में काला सागर और अजोव सागर से मिलती है। देश की राजधानी होने के साथ-साथ सबसे बड़ा शहर भी कीव है। युक्रेन का आधुनिक इतिहास 9वीं शताब्दी से शुरू होता है, जब कीवियन रुस के नाम से एक बड़ा और शक्तिशाली राज्य बनकर यह खड़ा हुआ, लेकिन 12 वीं शताब्दी में यह महान उत्तरी लड़ाई के बाद क्षेत्रीय शक्तियों में विभाजित हो गया। 19वीं शताब्दी में इसका बड़ा हिस्सा रूसी साम्राज्य का और बाकी का हिस्सा आस्ट्रो-हंगेरियन नियंत्रण में आ गया। बीच के कुछ सालों के उथल-पुथल के बाद 1922 में सोवियत संघ के संस्थापक सदस्यों में से एक बना। 1945 में यूक्रेनियाई एसएसआर संयुक्त राष्ट्रसंघ का सह-संस्थापक सदस्य बना। सोवियत संघ के विघटन के बाद युक्रेन फिर से स्वतंत्र देश बना। .

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यूनाइटेड किंगडम में यूरोपीय संघ पर जनमत संग्रह

यूनाइटेड किंगडम में यूरोपीय संघ पर जनमत संग्रह जिसे यूके में ईयू जनमत संग्रह के नाम से जाना जाता है, 23 जून 2016 को यूनाइटेड किंगडम में हुआ एक जनमत संग्रह है।इसका उद्देश्य यह पता लगाना था कि यूके को यूरोपीय संघ में आगे बने रहना चाहिए या इसे छोड़ देना चाहिए। ईयू की सदस्यता यूके में सन् 1973 में इसके यूरोपीय आर्थिक समुदाय में शामिल होने के बाद से ही बहस का मुद्दा रही है। यूके की कंज़र्वेटिव पार्टी के चुनावी घोषणापत्र के अनुसार हाउस ऑफ़ कॉमन्स (यूके की संसद) ने यूरोपोय संघ जनमत संग्रह कानून 2015 के तहत ईयू के सदस्य बने या ना बने रहने के लिये देश में एक जनमत संग्रह कराने की कानूनी घोषणा की। यूके के लोगों से यूरोपीय संघ की सदस्यता के लिये मत देने के लिये दूसरी बार कहा गया। इसके पहले सन् 1975 में इसमें शामिल होने के लिये जनमत संग्रह कराया गया था जिसमें 67% लोगों ने इसके पक्ष में मतदान किया था। पूर्वोत्तर इंग्लैंड, वेल्स और मिडलैंड्स में से ज्यादातर मतदाताओं ने यूरोपीय संघ से अलग होना पसंद किया जबकि लंदन, स्कॉटलैंड और नॉर्दन आयरलैंड के ज्यादातर मतदाता यूरोपीय संघ के साथ ही रहना चाहते थे। जनमत संग्रह के नतीजे का ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था और राजनीति पर नाटकीय असर हो सकता है। ये असर यूरोप और अन्य देशों को भी अपने दायरे में ले सकता है। .

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यूरेशियाई आवार लोग

सन् ६०० ईसवी में यूरोप का नक़्शा जिसके दक्षिण में आवारों का साम्राज्य देखा जा सकता है यूरेशियाई आवार (Eurasian Avar) या प्राचीन आवार मध्य एशिया के स्तेपी मैदानों की एक जाति थी जो आरम्भ में तो शायद जू-जान ख़ागानत की तुर्की मूल की थी लेकिन बाद में मिश्रित यूरेशियाई जातियों का परिसंघ बन गई। आवार एक ख़ागान द्वारा शासित परिसंघ था जिसके शक्ति के केंद्र में ख़ानाबदोश योद्धाओं का एक जत्था था। इन लोगों का वर्णन पाँचवी सदी के बाद इतिहासकारों द्वारा किया जाने लगा लेकिन मध्य और पूर्वी यूरोप पर इन्होनें अपना आवार ख़ागानत नाम का साम्राज्य मध्य छठी सदी में ही जा के क़ायम किया। इनका राज्य नवी शताब्दी के आरम्भ तक चला।, Gábor Hosszú, ISBN 978-963-88437-4-6,...

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राजस्थान की झीलें

प्राचीन काल से ही राजस्थान में अनेक प्राकृतिक झीलें विद्यमान है। मध्य काल तथा आधुनिक काल में रियासतों के राजाओं ने भी अनेक झीलों का निर्माण करवाया। राजस्थान में मीठे और खारे पानी की झीलें हैं जिनमें सर्वाधिक झीलें मीठे पानी की है। .

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रूस का इतिहास

आधुनिक रूस का इतिहास पूर्वी स्लाव जाति से शुरू होता है। स्लाव जाति जो आज पूर्वी यूरोप में बसती है का सबसे पुराना गढ़ कीव था जहाँ ९वीं सदी में स्थापित कीवी रुस साम्राज्य आधुनिक रूस की आधारशिला के रूप में माना जाता है। हाँलांकि उस क्षेत्र में इससे पहले भी साम्राज्य रहे थे पर वे दूसरी जातियों के थे और उन जातियों के लोग आज भी रूस में रहते हैं - ख़ज़र और अन्य तुर्क लोग। कीवि रुसों को मंगोलों के महाभियान में १२३० के आसपास परास्त किया गया लेकिन १३८० के दशक में मंगोलों का पतन आरंभ हुआ और मॉस्को (रूसी भाषा में मॉस्कवा) का उदय एक सैन्य राजधानी के रूप में हुआ। १७वीं से १९वीं सदी के मध्य में रूसी साम्रज्य का अत्यधिक विस्तार हुआ। यह प्रशांत महासागर से लेकर बाल्टिक सागर और मध्य एशिया तक फैल गया। प्रथम विश्वयुद्ध में रूस को ख़ासी आंतरिक कठिनाइयों का समना करना पड़ा और १९१७ की बोल्शेविक क्रांति के बाद रूस युद्ध से अलग हो गया। द्वितीय विश्वयुद्ध में अपराजेय लगने वाली जर्मन सेना के ख़िलाफ अप्रत्याशित अवरोध तथा अन्ततः विजय प्रदर्शित करन के बाद रूस तथा वहाँ के साम्यवादी नायक जोसेफ स्टालिन की धाक दुनिया की राजनीति में बढ़ी। उद्योगों की उत्पादक क्षमता और देश की आर्थिक स्थिति में उतार चढ़ाव आते रहे। १९३० के दशके में ही साम्यवादी गणराज्यों के समूह सोवियत रूस का जन्म हुआ था। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद शीत युद्ध के काल के गुजरे इस संघ का विघटन १९९१ में हो गया। .

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रेड लाइट एरिया

दुनिया भर में वेश्यावृत्ति और वेश्यालयों की वैधता: हरे रंग की देशों और क्षेत्रों के स्थानों पर जहां वेश्यावृत्ति कानूनी और विनियमित है, नीले देशों और क्षेत्रों में जहां वेश्यावृत्ति कानूनी है लेकिन अनियमित है। और वेश्यालयों के रूप में संगठित गतिविधियों अवैध रूप से कर रहे हैं, लाल देश जहां पर वेश्यावृत्ति अवैध है। सभ्यता और संस्कृति के विकास के साथ वेश्यावृत्ति का भी पूरी दुनिया में चरम उभार हो चुका है। पोस्ट मॉडर्न सोसाइटी में वेश्यावृत्ति के अलग-अलग रूप भी सामने आए हैं। रेड लाइट इलाकों से निकल कर वेश्यावृत्ति अब मसाज पार्लरों एवं एस्कार्ट सर्विस के रूप में भी फल-फूल रही है। देह का धंधा कमाई का चोखा जरिया बन चुका है। गरीब और विकासशील देशों जैसे भारत, थाइलैंड, श्रीलंका, बांग्लादेश आदि में सेक्स पर्यटन का चलन शुरू हो चुका है। जिस्मफरोशी दुनिया के पुराने धंधों में से एक है। बेबीलोन के मंदिरों से लेकर भारत के मंदिरों में देवदासी प्रथा वेश्यावृत्ति का आदिम रूप है। गुलाम व्यवस्था में गुलामों के मालिक वेश्याएं रखते थे। उन्होंने वेश्यालय भी खोले। तब वेश्याएं संपदा और शक्ति की प्रतीक मानी जाती थीं। मुगलों के हरम में सैकड़ों औरतें रहती थीं। जब अंग्रेजों ने भारत पर अधिकार किया तो इस धंधे का स्वरूप बदलने लगा। राजाओं ने अंग्रेजों को खुश करने के लिए तवायफों को तोहफे के रूप में पेश करना शुरू किया। पुराने वक्त के कोठों से निकल कर देह व्यापार का धंधा अब वेबसाइटों तक पहुंच गया है। इन्फॉरमेशन टेक्नोलॉजी के मामले में पिछड़ी पुलिस के लिए इस नेटवर्क को भेदना खासा कठिन है। सिर्फ नेट पर अपनी जरूरत लिखकर सर्च करने से ऐसी दर्जनों साइट्स के लिंक मिल जाएंगे जहां हाईप्रोफाइल वेश्याओं के फोटो, फोन नंबर और रेट तक लिखे होते हैं। इन पर कालेज छात्राएं, मॉडल्स और टीवी-फिल्मों की नायिकाएं तक उपलब्ध कराने के दावे किए जाते हैं। .

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रेशम मार्ग

रेशम मार्ग का मानचित्र - भूमार्ग लाल रंग में हैं और समुद्री मार्ग नीले रंग में रेशम मार्ग प्राचीनकाल और मध्यकाल में ऐतिहासिक व्यापारिक-सांस्कृतिक मार्गों का एक समूह था जिसके माध्यम से एशिया, यूरोप और अफ्रीका जुड़े हुए थे। इसका सबसे जाना-माना हिस्सा उत्तरी रेशम मार्ग है जो चीन से होकर पश्चिम की ओर पहले मध्य एशिया में और फिर यूरोप में जाता था और जिस से निकलती एक शाखा भारत की ओर जाती थी। रेशम मार्ग का जमीनी हिस्सा ६,५०० किमी लम्बा था और इसका नाम चीन के रेशम के नाम पर पड़ा जिसका व्यापार इस मार्ग की मुख्य विशेषता थी। इसके माध्यम मध्य एशिया, यूरोप, भारत और ईरान में चीन के हान राजवंश काल में पहुँचना शुरू हुआ। रेशम मार्ग का चीन, भारत, मिस्र, ईरान, अरब और प्राचीन रोम की महान सभ्यताओं के विकास पर गहरा असर पड़ा। इस मार्ग के द्वारा व्यापार के आलावा, ज्ञान, धर्म, संस्कृति, भाषाएँ, विचारधाराएँ, भिक्षु, तीर्थयात्री, सैनिक, घूमन्तू जातियाँ, और बीमारियाँ भी फैलीं। व्यापारिक नज़रिए से चीन रेशम, चाय और चीनी मिटटी के बर्तन भेजता था, भारत मसाले, हाथीदांत, कपड़े, काली मिर्च और कीमती पत्थर भेजता था और रोम से सोना, चांदी, शीशे की वस्तुएँ, शराब, कालीन और गहने आते थे। हालांकि 'रेशम मार्ग' के नाम से लगता है कि यह एक ही रास्ता था वास्तव में बहुत कम लोग इसके पूरे विस्तार पर यात्रा करते थे। अधिकतर व्यापारी इसके हिस्सों में एक शहर से दूसरे शहर सामान पहुँचाकर अन्य व्यापारियों को बेच देते थे और इस तरह सामान हाथ बदल-बदलकर हजारों मील दूर तक चला जाता था। शुरू में रेशम मार्ग पर व्यापारी अधिकतर भारतीय और बैक्ट्रियाई थे, फिर सोग़दाई हुए और मध्यकाल में ईरानी और अरब ज़्यादा थे। रेशम मार्ग से समुदायों के मिश्रण भी पैदा हुए, मसलन तारिम द्रोणी में बैक्ट्रियाई, भारतीय और सोग़दाई लोगों के मिश्रण के सुराग मिले हैं।, Susan Whitfield, British Library, pp.

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रॉबर्ट श्लागिंटवाईट

रॉबर्ट श्लागिंटवाईट​ (Robert Schlagintweit, जन्म: २४ अक्टूबर १८३३, देहांत: ६ जून १८८५) एक जर्मन खोजयात्री था जिसने १९वीं सदी में ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कम्पनी के लिए मध्य एशिया में कई यात्राएँ करीं और अपने संयुक्त राज्य अमेरिका के दौरों के बारे में भी लिखा। .

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ललितादित्य मुक्तपीड

जम्मू-कश्मीर का मार्तण्ड मंदिर का दृष्य; यह चित्र सन् १८६८ में जॉन बर्क ने लिया था ललितादित्य मुक्तापीड (राज्यकाल 724-761 ई) कश्मीर के कर्कोटा वंश के हिन्दू सम्राट थे। उनके काल में कश्मीर का विस्तार मध्य एशिया और बंगाल तक पहुंच गया। उन्होने अरब के मुसलमान आक्रान्ताओं को सफलतापूर्वक दबाया तथा तिब्बती सेनाओं को भी पीछे धकेला। उन्होने राजा यशोवर्मन को भी हराया जो हर्ष का एक उत्तराधिकारी था। उनका राज्‍य पूर्व में बंगाल तक, दक्षिण में कोंकण तक पश्चिम में तुर्किस्‍तान और उत्‍तर-पूर्व में तिब्‍बत तक फैला था। उन्होने अनेक भव्‍य भवनों का निर्माण किया। कार्कोट राजवंश की स्थापना दुर्र्लभवर्धन ने की थी। दुर्र्लभवर्धन गोन्दडिया वंश के अंतिम राजा बालादित्य के राज्य में अधिकारी थे। बलादित्य ने अपनी बेटी अनांगलेखा का विवाह कायस्थ जाति के एक सुन्दर लेकिन गैर-शाही व्यक्ति दुर्र्लभवर्धन के साथ किया। कार्कोटा एक नाग का नाम है ये नागवंशी कर्कोटक क्षत्रिय थे। प्रसिद्ध इतिहासकार आर सी मजुमदार के अनुसार ललितादित्य ने दक्षिण की महत्वपूर्ण विजयों के पश्चात अपना ध्यान उत्तर की तरफ लगाया जिससे उनका साम्राज्य काराकोरम पर्वत शृंखला के सूदूरवर्ती कोने तक जा पहुँचा। साहस और पराक्रम की प्रतिमूर्ति सम्राट ललितादित्य मुक्तापीड का नाम कश्मीर के इतिहास में सर्वोच्च स्थान पर है। उसका सैंतीस वर्ष का राज्य उसके सफल सैनिक अभियानों, उसके अद्भुत कला-कौशल-प्रेम और विश्व विजेता बनने की उसकी चाह से पहचाना जाता है। लगातार बिना थके युद्धों में व्यस्त रहना और रणक्षेत्र में अपने अनूठे सैन्य कौशल से विजय प्राप्त करना उसके स्वभाव का साक्षात्कार है। ललितादित्य ने पीकिंग को भी जीता और 12 वर्ष के पश्चात् कश्मीर लौटा। कश्मीर उस समय सबसे शक्तिशाली राज्य था। उत्तर में तिब्बत से लेकर द्वारिका और उड़ीसा के सागर तट और दक्षिण तक, पूर्व में बंगाल, पश्चिम में विदिशा और मध्य एशिया तक कश्मीर का राज्य फैला हुआ था जिसकी राजधानी प्रकरसेन नगर थी। ललितादित्य की सेना की पदचाप अरण्यक (ईरान) तक पहुंच गई थी। .

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लाल हिरण

डेनमार्क का एक नर लाल हिरण लाल हिरण या मराल, जिसका वैज्ञानिक नाम "सॅर्वस ऍलाफस" (Cervus elaphus) है, हिरणों की एक जाती है, जिसके हिरण आकर में सबसे बड़े माने जाते हैं। यह हिरण यूरोप, कॉकस पर्वत श्रंखला, अनातोलिया, मध्य पूर्व और मध्य एशिया में पाए जाते हैं। भारत में इसकी एक कश्मीरी हंगुल नाम की जाती पायी जाती है। उत्तर अफ़्रीका में मोरक्को और ट्यूनिशिया के एटलस पर्वत में भी यह पाए जाते हैं। दुनिया के कई हिस्सों में लाल हिरणों का मांस खाया जाता है। .

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लिपि

लिपि या लेखन प्रणाली का अर्थ होता है किसी भी भाषा की लिखावट या लिखने का ढंग। ध्वनियों को लिखने के लिए जिन चिह्नों का प्रयोग किया जाता है, वही लिपि कहलाती है। लिपि और भाषा दो अलग अलग चीज़ें होती हैं। भाषा वो चीज़ होती है जो बोली जाती है, लिखने को तो उसे किसी भी लिपि में लिख सकते हैं। किसी एक भाषा को उसकी सामान्य लिपि से दूसरी लिपि में लिखना, इस तरह कि वास्तविक अनुवाद न हुआ हो, इसे लिप्यन्तरण कहते हैं। चीनी लिपि (चित्रलिपि) यद्यपि संसार भर में प्रयोग हो रही भाषाओं की संख्या अब भी हजारों में है, तथापि इस समय इन भाषाओं को लिखने के लिये केवल लगभग दो दर्जन लिपियों का ही प्रयोग हो रहा है। और भी गहराई में जाने पर पता चलता है कि संसार में केवल तीन प्रकार की ही मूल लिपियाँ (या लिपि परिवार) है-.

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लियाओ राजवंश

सन् ११११ ईसवी में लियाओ राजवंश का क्षेत्र (गुलाबी रंग में) लियाओ राजवंश (चीनी: 遼朝, लियाओ चाओ; ख़ितानी: मोस जैलुत; अंग्रेजी: Liao Dynasty) जिसे ख़ितानी साम्राज्य (契丹國, चिदान गुओ, Khitan Empire) भी कहा जाता है पूर्वी एशिया का एक साम्राज्य था जो मंगोलिया, कज़ाख़स्तान के कुछ भागों, रूस के सुदूर पूर्वी भागों और उत्तरी चीन पर विस्तृत था। इसकी स्थापना चीन में तंग राजवंश के पतन के दौरान ख़ितानी लोगों के महान ख़ान अबाओजी ने की थी। यह साम्राज्य ९०७ ईसवी से ११२५ ईसवी तक चला। सन् ११२५ ई में जुरचेन लोगों के जिन राजवंश (१११५–१२३४) ने लियाओ राजवंश का नाश कर दिया।, Frederick W. Mote, Harvard University Press, 2003, ISBN 978-0-674-01212-7,...

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लुआनदी

२०० ईसापूर्व में शियोंगनु साम्राज्य लुआनदी (अंग्रेज़ी: Luandi) या लुआनती (चीनी भाषा: 攣鞮) या शूलिआनदी (虛連題, Xuliandi) तीसरी सदी ईसापूर्व से चौथी सदी ईसवी तक आधुनिक मध्य एशिया और चीन के क्षेत्र में शासन करने वाली प्राचीन शियोंगनु लोगों का एक राजवंश था। इनका ज़िक्र महान इतिहासकार के अभिलेख, हान ग्रन्थ और अन्य प्राचीन चीनी इतिहास-ग्रन्थों में मिलता है। इस परिवार के लोग शियोंगनु समाज और प्रशासन में सर्वोच्च ओहदों पर पाए जाते थे और चानयू की उपाधियाँ भी रखते थे। लुआनदी परिवार का सबसे प्राचीन ज्ञात चानयू तूमन था।, International Arts and Sciences Press, International Arts and Sciences Press, 1991,...

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लॉर्ड लिटन

लॉर्ड लिटन लार्ड लिटन भारत का वाइसराय था। उसको ब्रिटिश भारत का सबसे अधिक प्रतिक्रियावादी गवर्नर जनरल माना गया है। उसका उद्देश्य उभरती भारतीय राष्ट्रवाद की भावना का दमन करना था। .

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शाह

भारत के मुग़ल शहनशाह शाह जहान ईरान के अंतिम शहनशाह मुहम्मद रेज़ा पहलवी (१९४१-१९७९) शाह (फ़ारसी:, अंग्रेज़ी: shah) ईरान, मध्य एशिया और भारतीय उपमहाद्वीप में 'राजा' के लिए प्रयोग होने वाला एक और शब्द है। यह फ़ारसी भाषा से लिया गया है और पुरानी फ़ारसी में इसका रूप 'ख़्शायथ़ीय​' (xšathiya) था। .

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शियोंगनु लोग

२५० ईसापूर्व में शियोंगनु क्षेत्र शियोंगनु (चीनी: 匈奴, अंग्रेज़ी: Xiongnu) एक प्राचीन ख़ानाबदोश क़बीलों की जाती थी जो चीन के हान राजवंश के काल में हान साम्राज्य से उत्तर में रहती थी। इतिहास में उनका वर्णन सीमित है, इसलिए यह ठीक से ज्ञात नहीं है कि उनकी नस्ल क्या थी। अलग-अलग इतिहासकार उन्हें तुर्की, मंगोली, ईरानी, तुन्गुसी और तुषारी जातियों का बताते हैं। उनके नामों और रीति-रिवाजों के बारे में जितना पता है वह प्राचीन चीनी सूत्रों से आता है। शियोंगनु भाषा हमेशा के लिए खोई जा चुकी है। यह संभव है कि 'शियोंगनु' शब्द 'हूण' के लिए एक सजातीय शब्द हो लेकिन इसका भी कोई पक्का प्रमाण नहीं है।, Valerie Hansen, Kenneth Curtis, Kenneth R. Curtis, Cengage Learning, 2008, ISBN 978-0-618-07723-6,...

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शक

सरमतिया मध्य एशिया का भौतिक मानचित्र, पश्चिमोत्तर में कॉकस से लेकर पूर्वोत्तर में मंगोलिया तक स्किथियों के सोने के अवशेष, बैक्ट्रिया की तिलिया तेपे पुरातन-स्थल से ३०० ईसापूर्व में मध्य एशिया के पज़ियरिक क्षेत्र से शक (स्किथी) घुड़सवार शक प्राचीन मध्य एशिया में रहने वाली स्किथी लोगों की एक जनजाति या जनजातियों का समूह था। इनकी सही नस्ल की पहचान करना कठिन रहा है क्योंकि प्राचीन भारतीय, ईरानी, यूनानी और चीनी स्रोत इनका अलग-अलग विवरण देते हैं। फिर भी अधिकतर इतिहासकार मानते हैं कि 'सभी शक स्किथी थे, लेकिन सभी स्किथी शक नहीं थे', यानि 'शक' स्किथी समुदाय के अन्दर के कुछ हिस्सों का जाति नाम था। स्किथी विश्व के भाग होने के नाते शक एक प्राचीन ईरानी भाषा-परिवार की बोली बोलते थे और इनका अन्य स्किथी-सरमती लोगों से सम्बन्ध था। शकों का भारत के इतिहास पर गहरा असर रहा है क्योंकि यह युएझ़ी लोगों के दबाव से भारतीय उपमहाद्वीप में घुस आये और उन्होंने यहाँ एक बड़ा साम्राज्य बनाया। आधुनिक भारतीय राष्ट्रीय कैलंडर 'शक संवत' कहलाता है। बहुत से इतिहासकार इनके दक्षिण एशियाई साम्राज्य को 'शकास्तान' कहने लगे हैं, जिसमें पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, सिंध, ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा और अफ़्ग़ानिस्तान शामिल थे।, Vesta Sarkhosh Curtis, Sarah Stewart, I.B.Tauris, 2007, ISBN 978-1-84511-406-0,...

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शुग़नी भाषा

शुग़नी भाषा एक पामीरी भाषा-परिवार की बोली है जो मध्य एशिया में ताजिकिस्तान के कूहिस्तोनी-बदख़्शान स्वशासित प्रान्त और अफ़ग़ानिस्तान के बदख़्शान प्रान्त में बोली जाती है।Karamšoev, Dodchudo K. (1988-99).

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शोरतुग़ई

शोरतुग़​ई (फ़ारसी:, अंग्रेज़ी: Shortugai) उत्तरी अफ़ग़ानिस्तान के बदख़्शान प्रान्त में कोकचा नदी और आमू दरिया के विलय क्षेत्र के पास २००० ईसापूर्व में स्थापित सिन्धु घाटी सभ्यता की एक व्यापारिक बस्ती थी। यह पास में स्थित सर-ए-संग की खानों से लाजवर्द (लैपिस लैज़्यूली) आगे पहुँचाने के लिए स्थापित की गई थी। इतिहासकार समझते हैं कि इसमें वह सभी चिह्न हैं जो सिन्धु घाटी के सम्बंधित बस्तियों में हुआ करते हैं।, Jane McIntosh, pp.

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शीतोष्ण कटिबन्ध

विश्व मानचित्र जिसमें समशीतोष्ण कटिबन्ध '''हरे रंग''' से दिखाया गया है। शीतोष्ण कटिबन्ध या समशीतोष्ण कटिबन्ध (temperate zone) ऊष्णकटिबन्ध और शीत कटिबन्ध के बीच का क्षेत्र कहलाता है। इस क्षेत्र की विशेषता यह है कि यहाँ गर्मी और सर्दी के मौसम के तापमान में अधिक अन्तर नहीं होता। लेकिन यहाँ के कुछ क्षेत्रों में, जैसे मध्य एशिया और मध्य उत्तरी अमेरिका, जो समुद्र से काफ़ी दूर हैं, तापमान में काफ़ी परिवर्तन होता है और इन इलाकों में महाद्वीपीय जलवायु पाया जाता है। समशीतोष्ण कटिबन्धीय मौसम ऊष्णकटिबन्ध के कुछ इलाकों में भी पाया जा सकता है, खासतौर पर ऊष्णकटिबन्ध के पहाड़ी इलाकों में, जैसे एन्डीज़ पर्वत शृंखला। उत्तरी समशीतोष्ण कटिबन्ध उत्तरी गोलार्द्ध में कर्क रेखा (तकरीबन २३.५° उ) से आर्कटिक रेखा (तकरीबन ६६.५° उ) तक तथा दक्षिणी समशीतोष्ण कटिबन्ध दक्षिणी गोलार्द्ध में मकर रेखा (तकरीबन २३.५° द) से अंटार्कटिक रेखा (तकरीबन ६६.५° द) तक का क्षेत्र होता है। विश्व की बहुत बड़ी जनसंख्या समशीतोष्ण कटिबन्ध में— खासतौर पर उत्तरी समशीतोष्ण कटिबन्ध में— रहती है क्योंकि इस इलाके में भूमि की बहुतायत है। .

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शीर ख़ुर्मा

शीर ख़ुर्मा या शीर खोरमा (फ़ारसी / उर्दू - شیر خرما) फारसी में "सेवियों के साथ दूध", ईद उल-फ़ित्र और ईद अल-अज़हा के दिन अफ़गानिस्तान में मुस्लिमों द्वारा तैयार एक सेवियों का पकवान (व्यंजन) है। भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और मध्य एशिया के कुछ हिस्सों में यह एक पारंपरिक मुस्लिम त्यौहार का नाश्ता, और समारोह के लिए मिठाई है। यह पकवान सूखे खजूरों से बना है। ईद की नमाज़ के बाद परिवार में नाश्ते के दौरान सभी अतिथि मेहमानों के लिए यह विशेष पकवान परोसा जाता है। यह दक्षिण एशिया और मध्य एशिया में बहुत लोकप्रिय है। .

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सबुक तिगिन

सुबुक तिगिन (फ़ारसी - ابو منصور سبکتگین, अबु मंसूर सबक़तग़िन) ख़ोरासान के गज़नवी साम्राज्य का स्थापक था और भारत पर अपने आक्रमणों के लिए प्रसिद्ध महमूद गज़नवी का पिता। अल्प तिगिन, सामानी साम्राज्य का एक सूबेदार था जो ख़ोरासान (उत्तरी अफ़गानिस्तान, पूर्वोत्तर ईरान और सटा हुआ मध्य-एशिया) के शासक के रूप में काम करता था। सुबुकतिगिन उसका गुलाम था। जब अल्प तिगिन ने सामानी शासकों के खिलाफ विद्रोह किया जो उसने सुबुकतिगिन को ग़ज़नी का प्रभारी बना दिया और अपनी बेटी की शादी उससे कर दी। सुबुकतिगिन ने अलप्तिगिन के दो परवर्ती शासकों के अन्दर भी एक ग़ुलाम के रूप में शासन का कार्यभार देखा और सन् 977 में वो ग़ज़नी का सुल्तान बना। सन् 997 में उसकी मृत्यु के बाद सुबुकतिगिन का छोटा बेटा ईस्माईल शासक बना पर उसके बड़े भाई महमूद ने ईस्माइल के ख़िलाफ़ विद्रोह कर दिया और ख़ुद ग़ज़नी का सुल्तान बन बैठा। श्रेणी:ग़ज़नवी साम्राज्य.

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समरक़न्द

समरक़न्द शहर का 'रेगिस्तान' नामक पुरातन स्थल समरक़न्द (Samarqand, Самарқанд, سمرقند) उज़बेकिस्तान का दूसरा सबसे बड़ा नगर है। मध्य एशिया में स्थित यह नगर ऐतिहासिक और भौगोलिक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण शहर रहा है। इस नगर का महत्व रेशम मार्ग पर पश्चिम और चीन के मध्य स्थित होने के कारण बहुत अधिक है। भारत के इतिहास में भी इस नगर का महत्व है क्योंकि बाबर इसी स्थान के शासक बनने की चेष्टा करता रहा था। बाद में जब वह विफल हो गया तो भागकर काबुल आया था जिसके बाद वो दिल्ली पर कब्ज़ा करने में कामयाब हो गया था। 'बीबी ख़ानिम की मस्जिद' इस शहर की सबसे प्रसिद्ध इमारत है। २००१ में यूनेस्को ने इस २७५० साल पुरान शहर को विश्व धरोहर स्थलों की सूची में शामिल किया। इसका उस सूची में नाम है: 'समरकन्द - संस्कृति का चौराहा'। .

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समरक़न्द प्रान्त

उज़बेकिस्तान के नक़्शे में समरक़न्द प्रान्त (लाल रंग में) समरक़न्द प्रान्त (उज़बेक: Самарқанд вилояти, समरक़न्द विलोयती; अंग्रेज़ी: Samarqand Province) मध्य एशिया में स्थित उज़बेकिस्तान देश का एक विलायात (प्रान्त) है जो उस देश के मध्य भाग में ज़रफ़शान नदी के जलसम्भर क्षेत्र में स्थित है। प्रान्त का कुल क्षेत्रफल १६,४०० वर्ग किमी है और २००५ में इसकी अनुमानित आबादी २३,२२,००० थी। इस सूबे के क़रीब ७५% लोग ग्रामीण इलाक़ों में रहते हैं। समरक़न्द प्रान्त की राजधानी ऐतिहासिक समरक़न्द शहर है।, Нурислам Тухлиев, Алла Кременцова, Ozbekiston milliy ensiklopediasi, 2007 .

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सम्पर्क भाषा

उस भाषा को सम्पर्क भाषा (lingua franca) कहते हैं जो किसी क्षेत्र में सामान्य रूप से किसी भी दो ऐसे व्यक्तियों के बीच प्रयोग हो जिनकी मातृभाषाएँ अलग हैं। इसे कई भाषाओं में 'लिंगुआ फ़्रैंका' (lingua franca) कहते हैं। इसे सेतु-भाषा, व्यापार भाज़ा, सामान्य भाषा या वाहन-भाषा भी कहते हैं। मानव इतिहास में सम्पर्क भाषाएँ उभरती रही हैं। .

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समोसा

समोसा एक तला हुआ या बेक किया हुआ भरवां अल्पाहार व्यंजन है। इसमें प्रायः मसालेदार भुने या पके हुए सूखे आलू, या इसके अलावा मटर, प्याज, दाल, कहीम कहीं मांसा भी भरा हो सकता है। इसका आकार प्रायः तिकोना होता है किन्तु आकार और नाप भिन्न-भिन्न स्थानों पर बदल सकता है। अधिकतर ये चटनी के संग परोसे जाते हैं। ये अल्पाहार या नाश्ते के रूप में भारतीय उपमहाद्वीप, दक्षिण पूर्व एशिया, मध्य एशिया, दक्षिण पश्चिम एशिया, अरब प्रायद्वीप, भूमध्य सागर क्षेत्र, अफ़्रीका का सींग, उत्तर अफ़्रीका एवं दक्षिण अफ़्रीका में प्रचलित हैं। .

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सलजूक़ साम्राज्य

'बुर्ज तोग़रोल​' ईरान की राजधानी तेहरान के पास तुग़रिल बेग़​ के लिए १२वीं सदी में बना एक स्मारक बुर्ज है सलजूक़​ साम्राज्य या सेल्जूक साम्राज्य(तुर्की: Büyük Selçuklu Devleti; फ़ारसी:, दौलत-ए-सलजूक़ियान​; अंग्रेज़ी: Seljuq Empire) एक मध्यकालीन तुर्की साम्राज्य था जो सन् १०३७ से ११९४ ईसवी तक चला। यह एक बहुत बड़े क्षेत्र पर विस्तृत था जो पूर्व में हिन्दू कुश पर्वतों से पश्चिम में अनातोलिया तक और उत्तर में मध्य एशिया से दक्षिण में फ़ारस की खाड़ी तक फैला हुआ था। सलजूक़ लोग मध्य एशिया के स्तेपी क्षेत्र के तुर्की-भाषी लोगों की ओग़ुज़​ शाखा की क़िनिक़​ उपशाखा से उत्पन्न हुए थे। इनकी मूल मातृभूमि अरल सागर के पास थी जहाँ से इन्होनें पहले ख़ोरासान​, फिर ईरान और फिर अनातोलिया पर क़ब्ज़ा किया। सलजूक़ साम्राज्य की वजह से ईरान, उत्तरी अफ़्ग़ानिस्तान​, कॉकस और अन्य इलाक़ों में तुर्की संस्कृति का प्रभाव बना और एक मिश्रित ईरानी-तुर्की सांस्कृतिक परम्परा जन्मी।, Jamie Stokes, Anthony Gorman, pp.

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साख़ा गणतंत्र

साख़ा (याकूतिया) गणतंत्र (रूसी: Республика Саха (Якутия), रेसपूब्लिका साख़ा (याकूतिया); साख़ा: Саха Өрөспүүбүлүкэтэ; अंग्रेज़ी: Sakha (Yakutia) Republic) रूस का एक संघीय खंड है जो उस देश की शासन प्रणाली में गणतंत्र का दर्जा रखता है। यह पूर्वोत्तर साइबेरिया क्षेत्र में स्थित है और आकार में लगभग भारत से ज़रा छोटा ही है। यह दुनिया में किसी भी राष्ट्रीय उपखंड (जैसे कि प्रान्त, प्रदेश, आदि) से बड़ा है - कहा जा सकता है कि यह विश्व का सबसे बड़ा प्रांत है। यह इतना बड़ा है कि इसके अन्दर तीन समय क्षेत्र आते हैं। अगर साख़ा गणतंत्र एक स्वतन्त्र देश होता तो वह विश्व का आठवाँ सबसे बड़ा देश होता (भारत के बाद और आरजेन्टीना से पहले)। इसकी राजधानी याकूत्स्क​ शहर (Якутск, Yakutsk) है।, Natalia Yakovleva, pp.

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सिर दरिया

तियन शान पर्वतों से अरल सागर तक सिर दरिया का मार्ग ख़ुजन्द, ताजिकिस्तान से गुज़रता हुआ सिर दरिया सिर दरिया (फ़ारसी:, ताजिकी: Сирдарё, अंग्रेज़ी: Syr Darya) मध्य एशिया की एक बड़ी नदी है। यह २,२१२ किलोमीटर लम्बी नदी किर्गिज़स्तान, ताजिकिस्तान, उज़बेकिस्तान और काज़ाख़स्तान के देशों से निकलती है। आमू दरिया और सिर दरिया को मध्य एशिया की दो सब से महत्वपूर्ण नदियाँ माना जाता है, हालांकि आमू दरिया में सिर दरिया से कहीं ज़्यादा पानी बहता है।, Michael Kort, Infobase Publishing, 2004, ISBN 978-0-8160-5074-1,...

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सिरदरिया प्रान्त

उज़बेकिस्तान के नक़्शे में सिरदरिया प्रान्त (लाल रंग में) सिरदरिया प्रान्त (उज़बेक: Сирдарё вилояти, सिरदरयो विलोयती; अंग्रेज़ी: Sirdaryo Province) मध्य एशिया में स्थित उज़बेकिस्तान देश का एक विलायात (प्रान्त) है जो उस देश के मध्य भाग में प्रसिद्ध सिर दरिया के बाएँ किनारे पर स्थित है। प्रान्त का कुल क्षेत्रफल ५,१०० वर्ग किमी है और २००५ में इसकी अनुमानित आबादी ६,४८,१०० थी। इस सूबे का अधिकतर हिस्सा रेगिस्तान है। सिरदरिया प्रान्त की राजधानी गुलिस्तोन शहर है, जो उज़बेक भाषा में 'गुलिस्तान' उच्चारित करने का लहजा है।, Нурислам Тухлиев, Алла Кременцова, Ozbekiston milliy ensiklopediasi, 2007 .

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संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन

एफ़.ए.ओ मुख्यालय, रोम खाद्य एवं कृषि संगठन (अंग्रेज़ी:फूड एंड एग्रीकल्चरल ऑर्गेनाइजेशन, एफ़.ए.ओ) एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन है, जो कृषि उत्पादन, वानिकी और कृषि विपणन संबंधी शोध विषय का अध्ययन करता है। यह संगठन खाद्य एवं कृषि संबंधी ज्ञान और जानकारियों के आदान-प्रदान करने का मंच भी है। इसके साथ-साथ यह इन क्षेत्रों में विभिन्न देशों के अधिकारियों के प्रशिक्षण की व्यवस्था भी करता है। विकासशील देशों में कृषि के विकास में इसकी भूमिका महत्वपूर्ण है। एफ़.ए.ओ विकासशील देशों को बदलती तकनीक जैसे कृषि, पर्यावरण, पोषक तत्व और खाद्य सुरक्षा के बारे में जानकारी देता है। यह संगठन संयुक्त राष्ट्र संघ की एक विशिष्ट संस्था है और उसी के अन्तर्गत्त कार्य करता है। इस संगठन की स्थापना १६ अक्टूबर, १९४५ को क्यूबेक शहर, कनाडा में हुई थी। १९५१ में इसका मुख्यालय वाशिंग्टन से रोम स्थानांतरित किया गया। वर्तमान में १९१ राष्ट्र इसके सदस्य हैं, जिसमें यूरोपियाई समुदाय एवं फैरो द्वीपसमूह भी सम्मिलित हैं, जो एसोसियेट सदस्य हैं।.

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सुरख़ानदरिया प्रान्त

बोयसुन शहर में सुरख़ानदरिया प्रान्त (उज़बेक: Сурхондарё вилояти, सुरख़ोनदरयो विलोयती; अंग्रेज़ी: Surxondaryo Province) मध्य एशिया में स्थित उज़बेकिस्तान देश का एक विलायात (प्रान्त) है जो उस देश के सुदूर दक्षिण-पूर्व क्षेत्र में स्थित है। प्रान्त का कुल क्षेत्रफल २०,१०० वर्ग किमी है और २००५ में इसकी अनुमानित आबादी १९,२५,१०० थी। इस सूबे के क़रीब ८०% लोग ग्रामीण इलाक़ों में रहते हैं। सुरख़ानदरिया प्रान्त की राजधानी तिरमिज़ शहर है जिसमें आमू दरिया पर एक बंदरगाह भी बनी हुई है जो की मध्य एशिया की इकलौती नदी-बंदरगाह है।, Нурислам Тухлиев, Алла Кременцова, Ozbekiston milliy ensiklopediasi, 2007 .

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सुलयमान पहाड़

किर्गिज़स्तान का सुलयमान पर्वत सुलयमान पर्वत पर मुग़ल सम्राट बाबर द्वारा १५१०ई में बनवाई मस्जिद पर्वत से ओश शहर का नज़ारा सुलयमान पहाड़ (किरगिज़: Сулайман Тоо, सुलईमान तू; अंग्रेज़ी: Sulaymaan Mountain), जिसे तख़्त​-ए-सुलयमान और सुलयमान चट्टान भी कहते हैं, किर्गिज़स्तान के ओश शहर के पास स्थित एक पहाड़ है। यह मध्य एशिया की मशहूर फ़रग़ना वादी के मैदानी इलाक़े में दूर तक इकलौता पहाड़ होने से और भी महान दिखता है। हज़ारों साल से यह पहाड़ पूज्य रहा है और आज यह एक मान्य विश्व धरोहर स्थल है। .

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सुग़्द प्रान्त

सुग़्द प्रान्त (ख़ाक़ी रंग में) ताजिकिस्तान के उत्तर में स्थित है ख़ुजन्द में स्थित सुग़्द ऐतिहासिक संग्राहलय सुग़्द (ताजिकी: Суғд) या विलोयत-इ-सुग़्द ताजिकिस्तान की एक विलायत (प्रान्त) है। यह मध्य एशिया के प्राचीन सोग़दा क्षेत्र में स्थित है जिस से इस प्रान्त का नाम भी पड़ा है। सुग़्द प्रान्त ताजिकिस्तान के उत्तर-पश्चिम में स्थित है। इसका कुल क्षेत्रफल २५,४०० वर्ग किमी है और सन् २००८ में इसकी आबादी १८.७ लाख अनुमानित कि गई थी। ताजिकिस्तान के ३०% लोग इस प्रान्त में रहते हैं। सुग़्द प्रान्त की राजधानी ख़ुजन्द शहर है।, Bradley Mayhew, Greg Bloom, Paul Clammer, Lonely Planet, 2010, ISBN 978-1-74179-148-8 .

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स्तॅपी

मंगोलिया में स्तॅपी पर लगे खेमे बसंत के मौसम में रूस के इलोवलिंसकी ज़िले में स्तॅपी की घास में खिले जंगली फूल मंगोलियाई स्तॅपी में अश्वधावन स्तॅप, स्तॅपी या स्टेपी (अंग्रेज़ी: steppe, रूसी: степь) यूरेशिया के समशीतोष्ण (यानि टॅम्प्रेट) क्षेत्र में स्थित विशाल घास के मैदानों को कहा जाता है। यहाँ पर वनस्पति जीवन घास, फूस और छोटी झाड़ों के रूप में अधिक और पेड़ों के रूप में कम देखने को मिलता है। यह पूर्वी यूरोप में युक्रेन से लेकर मध्य एशिया तक फैले हुए हैं। स्तॅपी क्षेत्र का भारत और यूरेशिया के अन्य देशों के इतिहास पर बहुत गहरा प्रभाव रहा है। ऐसे घासदार मैदान दुनिया में अन्य स्थानों में भी मिलते हैं: इन्हें यूरेशिया में "स्तॅपी", उत्तरी अमेरिका में "प्रेरी" (prairie), दक्षिण अमेरिका में "पाम्पा" (pampa) और दक्षिण अफ़्रीका में "वॅल्ड" (veld) कहा जाता है। स्तॅपी में तापमान ग्रीष्मऋतु में मध्यम से गरम और शीतऋतु में ठंडा रहता है। गर्मियों में दोपहर में तापमान ४० °सेंटीग्रेड और सर्दियों में रात को तापमान -४० °सेंटीग्रेड तक जा सकता है। कुछ क्षेत्रों में दिन और रात के तापमान में भी बहुत अंतर होता है: मंगोलिया में एक ही दिन में सुबह के समय ३० °सेंटीग्रेड और रात के समय शून्य °सेंटीग्रेड तक तापमान जा सकता है। अलग-अलग स्तॅपी इलाक़ों में भिन्न मात्राओं में बर्फ़ और बारिश पड़ती है। कुछ क्षेत्र बड़े शुष्क हैं जबकि अन्य भागों में सर्दियों में भारी बर्फ़ पड़ती है। .

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स्वतंत्रता स्मारक (अश्गाबात)

तुर्कमेनिस्तान का स्वतंत्रता स्मारक(Garaşsyzlyk binasy; गाराशसीज़लिक बिनासी) तुर्कमेनिस्तान की राजधानी अश्गाबात में स्थित, सोवियत संघ-बंध-तुर्कमेनिस्तान की सोवियत संघ से मुक्ती और आज़ादी के औप्चारिक ऐलान के उपलक्ष्य की पुण्यस्भृती में बना एक स्मारक एवं वास्तुपरिसर है। राष्ट्रपति सपरमुरात नियाज़ोव, जिन्होंने अपने शासनकाल के दौरान अनेक शहरी नवीकरण कार्य केया था, के आदेश पर बनी यह ११८ मीटर ऊंची संरचना अश्गाबात शहर की सर्वोच्चतम स्मारक है। .

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सेंटूर

सेंटूर (यूनानी: Κένταυρος, लातिन: centaurus), जिसे हिप्पोसेंटूर भी कहा जाता है, यूनानी पुराण का एक काल्पनिक जीव है जिसके शरीर का ऊपरी हिस्सा एक मनुष्य का और निचला हिस्सा एक घोड़े का है। कहा जाता है कि सेंटूरौं को जन्म इक्सिओन और नेफेले ने दिया था। एक दूसरे कहानी के अनुसार, वे सेंटूरस नामक व्यक्ति के पुत्र हैं, जिसने मैग्नीशिया के घोड़ियों के साथ समागम किया था। सेंटूरस स्वयं इक्सिओन और नेफेले का पुत्र था, या अपोलो और स्टिलबे (नदी देव पेन्यूस की पुत्री) का। इस कहानी में, सेंटूरस का जुड़वाँ भाई था लापिथेस, जो लापिथ समुदाय का पूर्वज था, अर्थात् आपस में लड़ने वाले सेंटूर और लापिथ दरअसल भाई थे।  कहा जाता था कि सेंटूर थेस्सालिया के मैग्नीशिया और पेलिओन चोटी, एलिस के फ़ोलोई के बाँज के जंगल और दक्षिण लाकोनिया के मालेया प्रायद्वीप में रहते थे।   सेंटूर के एक और जनजाति साइप्रस में रहती थी, ऐसा कहा जाता है। नोन्नोस के अनुसार, उनकी परवरिश ज़्यूस ने की थी, जब ऐफ़्रोडाइटी ने उन्हें धोखा दिया था। साइप्रस के सेंटूर के सींग हुआ करते थे। रोमन पुराण में सेंटूर के अनेक उल्लेख हैं, और मध्यकालीन दंतकथाओं में वे आम तौर पर दिखते थे। आधुनिक विलक्षण साहित्य में भी वे हमेशा दिखाई देते हैं। उनके आधे-मनुष्य और आधे-घोड़े के बनावट के कारण, कई लेखक उन्हें अवसीमीय जीव मानते हैं, जो दो विपरीत प्रवृत्तियों के बीच में फँसे हैं, जिनका चित्रण दोनों तरह से होता है - पहला है, जंगली और खूँखार, जब उन्होंने अपने भाइयों यानि लापिथ से युद्ध किया था, और दूसरा है, सभ्य और शिक्षक की तरह, जैसे काइरोन था।  .

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सोग़दा

३०० ईसापूर्व में सोग़दा का क्षेत्र एक चीनी शिल्प-वस्तु पर सोग़दाई लोगों का चित्रण सोग़दाई व्यापारी भगवान बुद्ध को भेंट देते हुए (बाएँ की तस्वीर के निचले हिस्से को दाई तरफ़ बड़ा कर के दिखाया गया है) सोग़दा, सोग़दिया या सोग़दियाना (ताजिक: Суғд, सुग़्द; तुर्की: Soğut, सोग़ुत) मध्य एशिया में स्थित एक प्राचीन सभ्यता थी। यह आधुनिक उज़्बेकिस्तान के समरक़न्द, बुख़ारा, ख़ुजन्द और शहर-ए-सब्ज़ के नगरों के इलाक़े में फैली हुई थी। सोग़दा के लोग एक सोग़दाई नामक भाषा बोलते थे जो पूर्वी ईरानी भाषा थी और समय के साथ विलुप्त हो गई। माना जाता है कि आधुनिक काल के ताजिक, पश्तून और यग़नोबी लोगों में से बहुत इन्ही सोग़दाई लोगों के वंशज हैं। .

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सोग़दाई भाषा

मानी धर्म से सम्बंधित एक सोग़दाई में लिखा पृष्ठ सोग़दाई या सोग़दी (फ़ारसी:, अंग्रेज़ी: Sogdian) एक पूर्वी ईरानी भाषा थी जो प्राचीनकाल में मध्य एशिया के सोग़दा क्षेत्र में बोली जाती थी। यह क्षेत्र आधुनिक उज़्बेकिस्तान और ताजिकिस्तान में स्थित है। ९वीं सदी तक यह भाषा लुप्त हो चुकी थी, हालांकि आधुनिक काल में यग़नोबी नामक एक पूर्वी ईरानी भाषा जीवित है जो सोग़दाई भाषा की वंशज है। तुरफ़ान और दूनहुआंग में मिली लिखाईयों में सोग़दाई लिखाईयाँ भी मिली हैं, जिनमें कई बौद्ध धर्म, मानी धर्म और ईसाई धर्म से सम्बंधित हैं।, Anton Baumstark, Liturgical Press, 2011, ISBN 978-0-8146-6096-6,...

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सीमुर्ग़

बुख़ारा के नादिर दीवान-बेग़ी मदरसे के बाहर सीमुर्ग़ का एक चित्रण सीमुर्ग़ सासानी साम्राज्य का एक राजचिह्न था सीमुर्ग़​ (फ़ारसी) या अनक़ा (फ़ारसी) ईरान की प्राचीन मिथ्य -कथाओं में एक ऐसे भीमकाय उड़ने वाले मादा प्राणी का नाम था जो अपनी दया, उदारता और ज्ञान के लिए जाना जाती थी। इसके पंखों से हर रोग और चोट ठीक हो जाती थी और इसके प्रभाव से भूमि, जल, आकाश और प्राणी-जगत में शान्ति फैलती थी। इसी पक्षी को मध्य एशिया के तुर्की लोग द्वारा और भारत के कुछ भागों में भी माना जाता था।, George Clifford Whitworth, pp.

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सीरिलिक लिपि

सीरिलिक लिपि (या, सीरिलीय लिपि / Cyrillic) पूर्वी यूरोप और मध्य एशिया के क्षेत्र की कई भाषओं को लिखने में प्रयुक्त होती है। इसे अज़्बुका भी कहते हैं, जो इस लिपि की वर्णमाला के शुरुआती दो अक्षरों के पुराने नामों को मिलाकर बनाया गया है, जैसे कि यूनानी वर्णमाला के दो शुरुआती अक्षरों - अल्फ़ा और बीटा - को मिलाकर अल्फ़ाबेट (Alphabet) यानि वर्णमाला बनता है। इस लिपि के वर्णों से जिन भाषओं को लिखा जाता है उसमें रूसी भाषा प्रमुख है। सोवियत संघ के पूर्व सदस्य ताजिकिस्तान में फ़ारसी भाषा का स्थानीय रूप (यानि ताजिक भाषा) भी इसी लिपि में लिखा जाता है। इसके अलावा बुल्गारियन, सर्बियन, कज़ाख़, मैसीडोनियाई, उज़बेक, यूक्रेनी तथा मंगोलियाई भाषा भी मुख्यतः इसी लिपि में लिखी जाती है। इस वर्णमाला को यूरोपीय संघ में आधिकारिक मान्यता प्राप्त है जहाँ केवल रोमन तथा यूनानी लिपि ही अन्य आधिकारिक लिपियाँ हैं। .

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हफथाली लोग

५०० ईसवी के नक़्शे में हफथाली ख़ानत​ उद्यान के राजा लखन (लखन उदयादित्य) का सिक्का हफथाली (Hephthalites) मध्य एशिया में ५वीं और ६ठी सदी ईसवी में रहने वाली एक ख़ानाबदोश जाति थी। भारत में यह श्वेत हूण और तुरुष्क के नाम से भी जाने जाते थे। चीनी सूत्रों के हवाले से यह पहले चीन की महान दीवार से उत्तर में रहने वाले युएझ़ी लोग थे।, Encyclopaedia Britannica, 1973, ISBN 978-0-85229-173-3,...

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हरीरूद

हरीरूद के किनारे खड़ी जाम की मीनार हेरात शहर में हरीरूद पर बने पुल से नदी में नहाते लोगों का दृश्य हरीरूद (फ़ारसी) या हरी नदी (अंग्रेज़ी: Hari River) मध्य एशिया की एक महत्वपूर्ण नदी है। यह १,१०० किमी लम्बी नदी मध्य अफ़ग़ानिस्तान के पहाड़ों से शुरू होकर तुर्कमेनिस्तान जाती है जहाँ यह काराकुम रेगिस्तान की रेतों में जाकर सोख ली जाती है। तुर्कमेनिस्तान में इसे तेजेन या तेदझ़ेन के नाम से जाना जाता है (इसमें बिंदु-वाले 'झ़' के उच्चारण पर ध्यान दें क्योंकि यह टेलिविझ़न के 'झ़' जैसा है)। .

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हलवा

पिस्ता के साथ बाल्कन शैली में ताहिनी आधारित हलवा हलवा (या हलावा, हलेवेह, हेलवा, हलवाह, हालवा, हेलावा, हेलवा, हलवा, अलुवा, चालवा, चलवा) कई प्रकार की घनी, मीठी मिठाई को संदर्भित करता है, जिसे पूरे मध्य पूर्व, दक्षिण एशिया, मध्य एशिया, पश्चिम एशिया, उत्तरी अफ्रीका, अफ्रीका का सींग, बाल्कन, पूर्वी यूरोप, माल्टा और यहूदी जगत में खाने के लिए पेश किया जाता है। शब्द हलवा (अरबी हलवा حلوى से) का प्रयोग दो प्रकार की मिठाई के वर्णन के लिए किया जाता है.

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हान राजवंश

चीन में हान साम्राज्य का नक़्शा एक मकबरे में मिला हानवंश के शासनकाल में निर्मित लैम्प हान काल में जारी किया गया एक वुशु (五銖) नाम का सिक्का हान काल में बना कांसे के गियर (दांतदार पहिये) बनाने का एक साँचा हान राजवंश (चीनी: 漢朝, हान चाओ; अंग्रेज़ी: Han Dynasty) प्राचीन चीन का एक राजवंश था जिसने चीन में २०६ ईसापूर्व से २२० ईसवी तक राज किया। हान राजवंश अपने से पहले आने वाले चिन राजवंश (राजकाल २२१-२०७ ईसापूर्व) को सत्ता से बेदख़ल करके चीन के सिंहासन पर विराजमान हुआ और उसके शासनकाल के बाद तीन राजशाहियों (२२०-२८० ईसवी) का दौर आया। हान राजवंश की नीव लिऊ बांग नाम के विद्रोही नेता ने रखी थी, जिसका मृत्यु के बाद औपचारिक नाम बदलकर सम्राट गाओज़ू रखा गया। हान काल के बीच में, ९ ईसवी से २३ ईसवी तक, शीन राजवंश ने सत्ता हथिया ली थी, लेकिन उसके बाद हान वंश फिर से सत्ता पकड़ने में सफल रहा। शीन राजवंश से पहले के हान काल को पश्चिमी हान राजवंश कहा जाता है और इसके बाद के हान काल को पूर्वी हान राजवंश कहा जाता है। ४०० से अधिक वर्षों का हान काल चीनी सभ्यता का सुनहरा दौर माना जाता है। आज तक भी चीनी नसल अपने आप को 'हान के लोग' या 'हान के बेटे' बुलाती है और हान चीनी के नाम से जानी जाती है। इसी तरह चीनी लिपि के भावचित्रों को 'हानज़ी' (यानि 'हान के भावचित्र') बुलाया जाता है।, Xiaoxiang Li, LiPing Yang, Asiapac Books Pte Ltd, 2005, ISBN 978-981-229-394-7,...

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हिन्द-पहलव साम्राज्य

हिन्द-पहलव साम्राज्य (Indo-Parthian Kingdom) गॉन्डोफर्नी वंश तथा अन्य शासकों, जो कि मुख्यतः मध्य एशिया के शासकों का समूह था, द्वारा प्रथम शताब्दी ईस्वी में शासित एक साम्राज्य था। इस साम्राज्य का विस्तार क्षेत्र वर्तमान में उत्तर-पश्चिमी भारत, पाकिस्तान तथा अफ़ग़ानिस्तान के हिस्सों में था। गॉन्डोफर्नी राजाओं ने अधिकांश समय तक्षशिला को अपनी राजधानी बनाया, मगर शासन के अंतिम समय में उनकी राजधानी काबुल व पेशावर के मध्य स्थानांतरित हो गयी। इनके सिक्के पहलवी साम्राज्य से प्रभावित थे इस कारण से इन्हें हिन्द-पहलव नाम से जाना गया। .

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हिन्द-आर्य भाषाएँ

हिन्द-आर्य भाषाएँ हिन्द-यूरोपीय भाषाओं की हिन्द-ईरानी शाखा की एक उपशाखा हैं, जिसे 'भारतीय उपशाखा' भी कहा जाता है। इनमें से अधिकतर भाषाएँ संस्कृत से जन्मी हैं। हिन्द-आर्य भाषाओं में आदि-हिन्द-यूरोपीय भाषा के 'घ', 'ध' और 'फ' जैसे व्यंजन परिरक्षित हैं, जो अन्य शाखाओं में लुप्त हो गये हैं। इस समूह में यह भाषाएँ आती हैं: संस्कृत, हिन्दी, उर्दू, बांग्ला, कश्मीरी, सिन्धी, पंजाबी, नेपाली, रोमानी, असमिया, गुजराती, मराठी, इत्यादि। .

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हिन्दू धर्म का इतिहास

हिन्दू धर्म का इतिहास अति प्राचीन है। इस धर्म को वेदकाल से भी पूर्व का माना जाता है, क्योंकि वैदिक काल और वेदों की रचना का काल अलग-अलग माना जाता है। यहां शताब्दियों से मौखिक परंपरा चलती रही, जिसके द्वारा इसका इतिहास व ग्रन्थ आगे बढ़ते रहे। उसके बाद इसे लिपिबद्ध करने का काल भी बहुत लंबा रहा है। हिन्दू धर्म के सर्वपूज्य ग्रन्थ हैं वेद। वेदों की रचना किसी एक काल में नहीं हुई। विद्वानों ने वेदों के रचनाकाल का आरंभ 2000 ई.पू.

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हिन्दूताश दर्रा

अंतरिक्ष से ली गई इस तस्वीर में कंगशेवार​ बस्ती को पूषा बस्ती से जोड़ता हुआ हिन्दूताश दर्रा दर्शाया गया है सन् १८७३ के इस नक्शे में हिन्दूताग़ दर्रा दिखाया गया है हिन्दूताश दर्रा (अंग्रेजी: Hindutash Pass) या हिन्दूताग़​ दर्रा मध्य एशिया में चीन द्वारा नियंत्रित शिनजियांग क्षेत्र में स्थित कुनलुन पर्वतों का एक ऐतिहासिक पहाड़ी दर्रा है। यह काराकाश नदी की घाटी में स्थित कंगशेवार​ नामक एक उजड़ी हुई बस्ती को योरुंगकाश नदी की घाटी में स्थित पूषा नामक शहर से जोड़ता है और आगे चलकर यही सड़क महत्वपूर्ण ख़ोतान तक जाती है।, Sir Aurel Stein, Archaeological Survey of India, B. Blom, 1968,...

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हिम तेन्दुआ

हिम तेन्दुआ (Uncia uncia) एक विडाल प्रजाति है जो मध्य एशिया में रहती है। यद्यपि हिम तेन्दुए के नाम में "तेन्दुआ" है लेकिन यह एक छोटे तेन्दुए के समान दिखता है और इनमें आपसी सम्बन्ध नहीं है। .

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हिमालय

हिमालय पर्वत की अवस्थिति का एक सरलीकृत निरूपण हिमालय एक पर्वत तन्त्र है जो भारतीय उपमहाद्वीप को मध्य एशिया और तिब्बत से अलग करता है। यह पर्वत तन्त्र मुख्य रूप से तीन समानांतर श्रेणियों- महान हिमालय, मध्य हिमालय और शिवालिक से मिलकर बना है जो पश्चिम से पूर्व की ओर एक चाप की आकृति में लगभग 2400 कि॰मी॰ की लम्बाई में फैली हैं। इस चाप का उभार दक्षिण की ओर अर्थात उत्तरी भारत के मैदान की ओर है और केन्द्र तिब्बत के पठार की ओर। इन तीन मुख्य श्रेणियों के आलावा चौथी और सबसे उत्तरी श्रेणी को परा हिमालय या ट्रांस हिमालय कहा जाता है जिसमें कराकोरम तथा कैलाश श्रेणियाँ शामिल है। हिमालय पर्वत पाँच देशों की सीमाओं में फैला हैं। ये देश हैं- पाकिस्तान, भारत, नेपाल, भूटान और चीन। अन्तरिक्ष से लिया गया हिमालय का चित्र संसार की अधिकांश ऊँची पर्वत चोटियाँ हिमालय में ही स्थित हैं। विश्व के 100 सर्वोच्च शिखरों में हिमालय की अनेक चोटियाँ हैं। विश्व का सर्वोच्च शिखर माउंट एवरेस्ट हिमालय का ही एक शिखर है। हिमालय में 100 से ज्यादा पर्वत शिखर हैं जो 7200 मीटर से ऊँचे हैं। हिमालय के कुछ प्रमुख शिखरों में सबसे महत्वपूर्ण सागरमाथा हिमाल, अन्नपूर्णा, गणेय, लांगतंग, मानसलू, रॊलवालिंग, जुगल, गौरीशंकर, कुंभू, धौलागिरी और कंचनजंघा है। हिमालय श्रेणी में 15 हजार से ज्यादा हिमनद हैं जो 12 हजार वर्ग किलॊमीटर में फैले हुए हैं। 72 किलोमीटर लंबा सियाचिन हिमनद विश्व का दूसरा सबसे लंबा हिमनद है। हिमालय की कुछ प्रमुख नदियों में शामिल हैं - सिंधु, गंगा, ब्रह्मपुत्र और यांगतेज। भूनिर्माण के सिद्धांतों के अनुसार यह भारत-आस्ट्र प्लेटों के एशियाई प्लेट में टकराने से बना है। हिमालय के निर्माण में प्रथम उत्थान 650 लाख वर्ष पूर्व हुआ था और मध्य हिमालय का उत्थान 450 लाख वर्ष पूर्व हिमालय में कुछ महत्त्वपूर्ण धार्मिक स्थल भी है। इनमें हरिद्वार, बद्रीनाथ, केदारनाथ, गोमुख, देव प्रयाग, ऋषिकेश, कैलाश, मानसरोवर तथा अमरनाथ प्रमुख हैं। भारतीय ग्रंथ गीता में भी इसका उल्लेख मिलता है (गीता:10.25)। .

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हज़ारा लोग

हज़ारा (Hazara) मध्य अफ़्ग़ानिस्तान में बसने वाला और दरी फ़ारसी की हज़ारगी उपभाषा बोलने वाला एक समुदाय है। यह लगभग सारे शिया इस्लाम के अनुयायी होते हैं और अफ़्ग़ानिस्तान का तीसरा सबसे बड़ा समुदाय हैं। अफ़्ग़ानिस्तान में इनकी जनसँख्या को लेकर विवाद है और यह २६ लाख से ५४ लाख के बीच में मानी जाती है। कुल मिलकर यह अफ़्ग़ानिस्तान की कुल आबादी का लगभग १८% हिस्सा हैं। पड़ोस के ईरान और पाकिस्तान देशों में भी इनके पाँच-पाँच लाख लोग बसे हुए हैं। पाकिस्तान में यह अधिकतर शरणार्थी के रूप में जाने पर मजबूर हो गए थे और अधिकतर क्वेट्टा शहर में बसे हुए हैं। जब अफ़्ग़ानिस्तान में तालिबान सत्ता में थी तो उन्होने हज़ारा लोगों पर उनके शिया होने की वजह से बड़ी कठोरता से शासन किया था, जिस से बामियान प्रान्त और दायकुंदी प्रान्त जैसे हज़ारा-प्रधान क्षेत्रों में भुखमरी और अन्य विपदाएँ फैली थीं।, Tom Lansford, Ashgate Publishing, Ltd., 2003, ISBN 978-0-7546-3615-1,...

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हेशी गलियारा

इस नक़्शे में चीन का आधुनिक गांसू प्रांत लाल रंग में है; इस प्रांत के मध्य और पश्चिमी हिस्से ऐतिहासिक हेशी गलियारे के हिस्से थे हेशी गलियारा या गांसू गलियारा (चीनी: 河西走廊, हेशी ज़ोऊलांग; अंग्रेजी: Hexi Corridor) आधुनिक चीन के गांसू प्रांत में स्थित एक ऐतिहासिक मार्ग है जो उत्तरी रेशम मार्ग में उत्तरी चीन को तारिम द्रोणी और मध्य एशिया से जोड़ता था। इस मार्ग के दक्षिण में बहुत ऊँचा और वीरान तिब्बत का पठार है और इसके उत्तर में गोबी रेगिस्तान और फिर मंगोलिया के इस क्षेत्र के शुष्क पहाड़ हैं। इस गलियारे में एक के बाद एक नख़लिस्तानों (ओएसिस) की कड़ियाँ मिलती हैं जहाँ छोटे-छोटे क़स्बे हुआ करते थे। यहाँ से गुज़रते व्यापारी और अन्य यात्री इन जगहों पर अपने और अपने घोड़े-ऊँटों के लिए दाना-पानी प्राप्त करते थे और ठहर भी सकते थे।, David Leffman, Simon Lewis, Jeremy Atiyah, Mark South, Penguin, 2008, ISBN 978-1-84353-872-1,...

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जलालाबाद (किर्गिज़स्तान)

जलालाबाद शहर का रेवोल्यूत्योन मैदानी (क्रांती मैदान) जलालाबाद, जिसे किरगिज़ भाषा में जलालाबात (किरगिज़: Жалалабат, अंग्रेज़ी: Jalalabat) कहते हैं, मध्य एशिया के किर्गिज़स्तान देश का तीसरा सबसे बड़ा शहर है। यह किर्गिज़स्तान के पश्चिम में जलालाबाद प्रांत की राजधानी है और उज़बेकिस्तान के साथ लगी सरहद के पास प्रसिद्ध फ़रग़ना वादी के पूर्वोत्तरी छोर पर स्थित है। जलालाबाद अपने पानी के चश्मों के लिए मशहूर है। कहा जाता है कि इनका पानी पीने से और उसमें स्नान करने से बहुत सी बीमारियाँ ठीक हो जाती हैं। सोवियत संघ के ज़माने में यहाँ बहुत से हस्पताल बनाए गए थे और यहाँ से पानी बोतलों में किर्गिज़स्तान के अन्य हिस्सों में और दुनिया के अन्य भागों में निर्यात होता है। जलालाबाद के अधिकतर लोग उज़बेक समुदाय के हैं।, Laurence Mitchell, Bradt Travel Guides, 2008, ISBN 978-1-84162-221-7,...

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जलालाबाद प्रांत (किर्गिज़स्तान)

ताश कोमुर शहर का नज़ारा ('मगरमच्छ पहाड़ी' से) जलालाबाद प्रांत (किरगिज़: Жалалабат областы, अंग्रेज़ी: Jalal-Abad Province) मध्य एशिया के किर्गिज़स्तान देश का एक प्रांत है। इस प्रांत की राजधानी भी जलालाबाद नाम का ही शहर है। .

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ज़रफ़शान

ज़रफ़शान शहर की एक ईमारत ज़रफ़शान (उज़बेक: Зарафшон, ज़रफ़शोन; अंग्रेज़ी: Zarafshan) मध्य एशिया के उज़बेकिस्तान देश के नवोई प्रान्त का एक शहर है। भौगोलिक निर्देशांकों के हिसाब से यह नगर ४१°३६'२९ उत्तर और ६४°१३'३५ पूर्व में स्थित है। सन् २००७ में इसकी आबादी ६५,००० से थोड़ी ज़्यादा अनुमानित की गई थी। यह शहर किज़िल कुम रेगिस्तान के क्षेत्र में पड़ता है लेकिन इसके लिए पानी का प्रबंध आमू दरिया से आने वाली एक २२० किमी लम्बी पाइप-लाइन से किया जाता है। ज़रफ़शान को 'उज़बेकिस्तानी सोने की राजधानी' कहा जाता है क्योंकि यहाँ पर नज़दीकी मुरुताऊ सोने की खान से सम्बंधित व्यापारिक कार्यालय हैं। ज़रफ़शान एक नया शहर है जिसकी स्थापना सोना निकालने के उद्योग की वजह से हुई और, उज़बेकिस्तान में स्थित होने के बावजूद, यहाँ रूसी लोगों की आबादी उज़बेक लोगों से अधिक हैं।, V.H. Winston & Son, Inc., 1992,...

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ज़रफ़शान नदी

ताजिकिस्तान के अइनी ज़िले में ज़रफ़शान नदी का एक नज़ारा ज़रफ़शान नदी के मार्ग का नक़्शा ज़रफ़शान नदी (ताजिकी: Дарёи Зарафшон, दरिया-ए-ज़रफ़शान; अंग्रेज़ी: Zeravshan River, ज़ेरवशान रिवर) मध्य एशिया की एक नदी है। यह ताजिकिस्तान में पामीर पर्वतमाला में शुरू होती है और ३०० किमी पश्चिम की और ताजिकिस्तान के अन्दर ही बहती है। ताजिकिस्तान के पंजाकॅन्त (Панҷакент) शहर से गुज़रती हुई फिर यह उज़बेकिस्तान में दाख़िल होती है और उत्तर-पश्चिम की तरफ़ बहती है। फिर यह समरक़न्द की प्रसिद्ध नगरी के पास से निकलती है, जो पूरी तरह इस नदी द्वारा बनाए गए नख़लिस्तान (ओएसिस) पर निर्भर है (बिना इस नदी के यह एक मरूभूमी होता)। समरक़न्द से आगे चलकर उज़बेकिस्तान के नवोइ (Навоий) और बुख़ारा के शहरों से गुज़रकर क़ाराकुल शहर पहुँचती है और फिर आगे के रेगिस्तान की रेतों में ओझल हो जाती है। किसी ज़माने में यह और भी आगे चलकर अपने पानी को आमू दरिया में मिला देती थी, लेकिन वर्तमान में उस तक पहुँचने से पहले ही रेगिस्तान इसे सोख लेता है। इस बदलाव का मुख्य कारण यह है कि ज़रफ़शान का बहुत सा पानी अब सिंचाई के लिए खींच लिया जाता है जिस से इसके आगे के हिस्से में पानी का बहाव बहुत ही कम हो चुका है। .

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ज़रफ़शान शृंखला

अन्ज़ोब दर्रे के पास ज़रफ़शान पर्वत ज़रफ़शान पर्वत शृंखला (रूसी: Зеравшанский хребет, ज़ेरवशान्स्की ख़्रेबेत​; अंग्रेज़ी: Zarafshan Range) मध्य एशिया में ताजिकिस्तान और उज़्बेकिस्तान की एक पर्वत शृंखला है जो पामीर-अलाय पर्वत मंडल का एक भाग है। यह ३७० किमी लम्बी शृंखला ज़रफ़शान नदी से दक्षिण में विस्तृत हैं और पूर्व-पश्चिम दिशा में ताजिकिस्तान के सुग़्द प्रान्त के दक्षिण हिस्से से गुज़रती है। ज़रफ़शान पर्वतों का सबसे ऊँचा पहाड़ ५,४८९ मीटर ऊँचा चिमतर्गा पर्वत (Чимтарга, Chimtarga) है। सुग़्द प्रान्त के पंजाकॅन्त शहर से आगे यह शृंखला उज़्बेकिस्तान में दाख़िल हो जाती है जहाँ इसके पहाड़ों की ऊँचाई १,५०० से २,००० मीटर तक कम होती जाती है। उज़्बेकिस्तान में ज़रफ़शान पर्वत समरक़न्द प्रान्त और सुरख़ानदरिया प्रान्त के बीच की प्रांतीय सरहद माने जाते हैं। यहाँ से आगे जाकर यह पहाड़ धीरे-धीरे समरक़न्द से दक्षिण-पश्चिम के रेगिस्तानी क्षेत्र में लुप्त हो जाते हैं। .

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ज़ुन्गारिया

चीन के शिनजियांग प्रांत का उत्तरी भाग (लाल रंग) ऐतिहासिक ज़ुन्गारिया क्षेत्र का अधिकाँश भाग था; नीला भाग तारिम द्रोणी का क्षेत्र है ज़ुन्गारिया (Dzungaria या Zungaria) मध्य एशिया का एक ऐतिहासिक क्षेत्र है जिसमें चीन द्वारा नियंत्रित शिनजियांग प्रांत का उत्तरी भाग, मंगोलिया का कुछ पश्चिमी अंश और काज़ाख़स्तान का थोड़ा पूर्वी हिस्सा शामिल है। कुल मिलकर ऐतिहासिक ज़ुन्गारिया का क्षेत्रफल लगभग ७,७७,००० वर्ग किमी है। .

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ज़ोरकुल सरोवर

थोमस एडवर्ड गार्डन द्वारा १८७४ में बनाया गया ज़ोरकुल सरोवर का एक दृश्य ज़ोरकुल सरोवर, जिसे सर-ए-कोल सरोवर भी कहते हैं, पामीर पर्वतमाला में अफ़्गानिस्तान और ताजिकिस्तान की अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर स्थित एक झील है। पूर्व से पश्चिम तक फैली इस झील की लम्बाई लगभग २५ किमी है। मध्य एशिया की प्रसिद्ध नदी आमू दरिया इसी सरोवर से शुरू होती है।, Lev Semenovich Berg, Macmillan, 1950,...

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जिन राजवंश (१११५–१२३४)

सन् ११४१ ईसवी में जिन राजवंश के साम्राज्य का नक़्शा (आसमानी नीले रंग में) जिन राजवंश (जुरचेन: अइसिन गुरून; चीनी: 金朝, जिन चाओ; अंग्रेजी: Jin Dynasty), जिसे जुरचेन राजवंश भी कहा जाता है, जुरचेन लोगों के वानयान (完顏, Wanyan) परिवार द्वारा स्थापित एक राजवंश था जिसने उत्तरी चीन और उसके कुछ पड़ोसी इलाक़ों पर सन् १११५ ईसवी से १२३४ ईसवी तक शासन किया। यह जुरचेन लोग उन्ही मान्छु लोगों के पूर्वज थे जिन्होनें ५०० वर्षों बाद चीन पर चिंग राजवंश के रूप में राज किया। ध्यान दीजिये की इस जिन राजवंश से पहले एक और जिन राजवंश आया था जिनका इस वंश से कोई सम्बन्ध नहीं है। .

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जिज़ाख़ प्रान्त

उज़बेकिस्तान के नक़्शे में जिज़ाख़ प्रान्त (लाल रंग में) जिज़ाख़ प्रान्त या झ़िज़ाख़ प्रान्त (उज़बेक: Жиззах вилояти, झ़िज़ाख़ विलोयती; अंग्रेज़ी: Jizzax Province) मध्य एशिया में स्थित उज़बेकिस्तान देश का एक विलायात (प्रान्त) है जो उस देश के मध्य भाग में स्थित है। प्रान्त का कुल क्षेत्रफल २०,५०० वर्ग किमी है और २००५ में इसकी अनुमानित आबादी ९,१०,५०० थी। इसकी ८०% जनसंख्या ग्रामीण इलाक़ों में रहती है। जिज़ाख़ प्रान्त की राजधानी जिज़ाख़ शहर है। यह प्रान्त पहले सिरदरिया प्रान्त का हिस्सा हुआ करता था लेकिन १९७३ में इसे एक अलग सूबे का दर्जा दे दिया गया।, Нурислам Тухлиев, Алла Кременцова, Ozbekiston milliy ensiklopediasi, 2007 .

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जेन्गिश चोकुसु

जेन्गिश चोकुसु जेन्गिश चोकुसु (Jengish Chokusu; किरगिज़: Жеңиш чокусу, झ़ेन्गिश चोकुसु; रूसी: Пик победы, पीक पोबेदी; उइग़ुर: तोमुर) तियान शान पर्वत शृंखला का सबसे ऊँचा पर्वत है। यह मध्य एशिया में किर्गिज़स्तान और चीन कि सीमा पर इसिक कुल झील से दक्षिण में स्थित है। इसके शिखर की ऊँचाई ७,४३९ मीटर (२४,४०६ फ़ुट) है। हर भाषा में इसके नाम का अर्थ 'विजय शिखर' है और इसलिए इसे कभी-कभी अंग्रेज़ी में भी 'विक्ट्री पीक' (Victory Peak) कहा जाता है।, Laurence Mitchell, Bradt Travel Guides, 2008, ISBN 978-1-84162-221-7,...

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जोची ख़ान

मंगोलिया में जोची ख़ान का बुत, जो चंगेज़ ख़ान और बोरते का पहला पुत्र था जोची ख़ान (मंगोल: Зүчи, ज़ूची; फ़ारसी:, जोजी, अंग्रेजी: Jochi;; जन्म: ११८१ ई अनुमानित; देहांत: १२२७ ई) मंगोल साम्राज्य के संस्थापक चंगेज़ ख़ान और उसकी मुख्य पत्नी बोरते का पहला पुत्र था। उसने अपने पिता के मध्य एशिया को मंगोल साम्राज्य के अधीन करने के अभियान में बहुत हिस्सा लिया। उसे एक क़ाबिल और सहासी सिपहसालार माना जाता है।, Leo de Hartog, Tauris Parke Paperbacks, 2004, ISBN 978-1-86064-972-1,...

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ईदगाह मस्जिद, काशगर

काश्गर की ईदगाह मस्जिद ईदगाह मस्जिद (उइग़ुर:, हेतगाह मॅसचिती; अंग्रेज़ी: Id Kah Mosque, ईद काह मॉस्क) पश्चिमी जनवादी गणतंत्र चीन के शिन्जियांग प्रान्त के काश्गर शहर में स्थित एक मस्जिद है। यह चीन की सबसे बड़ी मस्जिद है, जिसमें १०,००० से २०,००० नमाज़ी समा सकते हैं। रमज़ान के दौरान यहाँ कभी-कभी १ लाख लोगों तक का जमावड़ा हो जाता है। इसका निर्माण सन् १४४२ (अनुमानित) में शक़सिज़ मिर्ज़ा ने करवाया, जो उस समय काश्गर के शासक थे।, Eugene Law, China Intercontinental Press, 2004, ISBN 978-7-5085-0429-2 यहाँ पहले से सन् ९९६ से बने हुए कुछ हिस्से थे जिन्हें मस्जिद में शामिल कर लिया गया। .

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ईरान में यूरोपीय हस्तक्षेप

ईरान में यूरोपीय हस्तक्षेप सत्रहवीं से लेकर बीसवीं सदी तक के ऐसे घटनाक्रम को कहते हैं जिसमें किसी यूरोपीय देश ने ईरान की सत्ता पर कब्जा तो नहीं किया पर उसकी विदेश, व्यापार और सैनिक नीति में बहुत दख़ल डाला। औपनिवेशिक ताकत ब्रिटेन और रूस ने इसमें मुख्य सक्रिय भूमिका निभाई और फ्रांस, जर्मनी, अमेरिका तथा स्वीडन भी इसमें शामिल रहा। ये सभी हस्तक्षेप और सरकार (शाह) के ये सब हो जाने देने वाली नीति को देखकर 1905-11 तथा 1979 में जनता का विद्रोह भड़का। इस दौरान कई बार ईरानी शासकों ने एक यूरोपीय शक्ति का सहयोग इस लिए लिया ताकि दूसरी शक्तियों से बचा जा सके। ब्रिटेन तथा रूस दोनों मध्य एशिया तथा अफ़ग़ानिस्तान पर एक दूसरे के डर से अधिकार चाहते थे। ब्रिटेन मध्य एशिया में फैल रहे रूसी साम्राज्य को भारत की तरफ बढ़ता क़दम की तरह देखते थे जबकि रूसी ब्रिटेन को मध्य एशिया में हस्तक्षेप करने से रोकना चाहते थे। अंग्रेज़ी में ब्रिटेन तथा रूस की इस औपनिवेशिक द्वंद्व को ग्रेट गेम के नाम से जाना जाता था जो द्वितीय विश्वयुद्ध तक ही चला। इस नाम को प्रथमतया प्रयुक्त करने का श्रेय आर्थर कॉनेली को जाता है जिसको बाद में रुडयार्ड किपलिंग ने अपने उपन्यास किम में इस्तेमाल किया। .

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ईरान का पठार

ईरान का पठार पश्चिमी एशिया और मध्य एशिया का एक भौगोलिक क्षेत्र है। यह पठार अरबी प्लेट और भारतीय प्लेट के बीच में स्थित यूरेशियाई प्लेट के एक कोने पर स्थित है। इसके पश्चिम में ज़ाग्रोस पर्वत, उत्तर में कैस्पियन सागर व कोपेत दाग़ (पर्वतमाला), पश्चिमोत्तर में आर्मेनियाई उच्चभूमि व कॉकस पर्वतमाला, दक्षिण में होरमुज़ जलसन्धि व फ़ारस की खाड़ी और पूर्व में सिन्धु नदी है। पश्चिमोत्तर में कैस्पियन सागर से लेकर दक्षिणपश्चिम में बलोचिस्तान तक ईरान का पठार लगभग २,००० किमी तक विस्तृत है। ईरान व अफ़्ग़ानिस्तान का अधिकतर भाग और पाकिस्तान का सिन्धु नदी से पश्चिम का भाग इसी पठार का हिस्सा है। पठार को एक चकोर के रूप में देखा जाये तो तबरेज़, शिराज़, पेशावर और क्वेटा उसके चार कोनों पर हैं और इसमें कुल मिलाकर ३७,००,००० वर्ग किमी क्षेत्रफल है। पठार कहलाये जाने के बावजूद इस पठार पर वास्तव में कई पर्वतमालाएँ हैं जिनका सबसे ऊँचा शिखर अल्बोर्ज़ पर्वतमाला का ५,६१० मीटर लम्बा दामावन्द पर्वत है और सब्से निचला बिन्दु मध्य ईरान में कर्मान नगर से पूर्व लूत द्रोणी में ३०० मीटर से नीचे स्थित है। .

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विम कडफिसेस

विम कडफिसेस (बाख़्त्री में Οοημο Καδφισης) लगभग 90-100 सी.ई. में कुषाण वंश का शासक था। रबातक शिलालेख के अनुसार वह विम ताकतू का पुत्र तथा कनिष्क का पिता था। उसे कडफिसेस द्वितीय भी कहा जाता है। .

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विलायत (प्रशासनिक विभाग)

ولایت यानि प्रान्त) विलायत (फ़ारसी), विलायाह (अरबी) या विलोयती (उज़बेक: вилояти) अरब और मध्य एशिया के देशों में प्रान्त या ज़िले के स्तर के प्रशासनिक विभाग को कहते हैं। यह अरबी भाषा के 'वली' शब्द से लिया गया है जिसका अर्थ है 'देखरेख या प्रशासन करने वाला'।, Miangul Jahanzeb, Fredrik Barth, Columbia University Press, 1985, ISBN 978-0-231-06162-9,...

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विश्व में बौद्ध धर्म

बौद्ध धर्म विश्व के प्रमुख धर्मों में से एक है, और इसके संस्थापक गौतम बुद्ध (ईसवी पूर्व ५६३ - ईसवी पूर्व ४८३) थे। विश्व में करीब १९२ करोड़ (२८.७८%) लोक बौद्ध धर्म को माननेवाले है। दुसरे सर्वेक्षण के अनुसार १.६ अरब से १.८ अरब लोक (२३% से २५%) प्रतिनिधित्व बौद्ध करते है। बौद्ध धर्म एक धर्म और दर्शन है। संसार में ईसाई धर्म धर्म के बाद सबसे अधिक बौद्ध धर्म के ही अनुयायि पाये जाते। हालांकि कुछ सर्वेक्षणों के अनुसार बौद्ध धर्म आबादी ४८.८ करोड़ से ५३.५ करोड़ (विश्व की जनसंख्या में ९% से १०%) भी बताई जाती है। विश्व के सभी महाद्विपों में बौद्ध धर्म के अनुयायि रहते है। बौद्ध धर्म दुनिया का पहला विश्व धर्म है, जो अपने जन्मस्थान से निकलकर विश्व में दूर दूर तक फैला। आज दुनिया में बौद्ध धर्म की आबादी हिन्दू धर्म से अधिक और इस्लाम धर्म के बराबर या इस्लाम धर्म से भी अधिक है। भारत में बौद्ध धर्म अल्पसंख्यक है, जबकि भारत में इस विश्व धर्म का उदय हुआ था। परंतु एशिया में बौद्ध धर्म प्रमुख धर्म बना रहा। २०१० में १.०७ अरब से १.२२ अरब जनसंख्या के साथ चीन बौद्धों की सबसे बड़ी आबादी वाला देश है, चीन की कुल आबादी में ८०% से ९१% बौद्ध अनुयायि है। ज्यादातर चीनी बौद्ध महायान सम्प्रदाय के अनुयायि है। दुनिया की ६५% से ७०% बौद्ध आबादी चीन में रहती है। .

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विश्व में हिन्दू धर्म

विश्व की कुल आबादी में लगभग 23% हिन्दू धर्म के अनुयायी लोग हैं। जनसंख्या प्रतिशत के आधार पर नेपाल पहले स्थान पर है और उसके बाद भारत और मॉरिशस का स्थान आता है। .

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विश्व में ईसाई धर्म

ईसाई धर्म; में लगभग 2.4 अरब अनुयायी हैं, जो कि लगभग 7.2 अरब लोगों में से हैं।.

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विश्व में इस्लाम धर्म

इस्लाम; दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा धार्मिक समूह है। 2010 के एक अध्ययन के अनुसार जनवरी 2011 में जारी किया गया था, इस्लाम के पास 1.6 अरब अनुयायी हैं, जो विश्व की आबादी का 23% हिस्सा बनाता हैं। 2015 में एक और अध्ययन के अनुसार इस्लाम में 1.7 बिलियन अनुयायी हैं। अधिकांश मुस्लिम दो संप्रदायों में हैं: सुन्नी (80-90%, करीब 1.5 अरब लोग) या शिया (20-30%, लगभग 340-510 मिलियन लोग)। मध्य पूर्व, उत्तरी अफ्रीका, अफ्रीका का हॉर्न, सहारा, मध्य एशिया और एशिया के कुछ अन्य हिस्सों में इस्लाम प्रमुख धर्म है। मुस्लिमों के बड़े समुदाय भी चीन, बाल्कन, भारत और रूस में पाए जाते हैं। दुनिया के अन्य बड़े हिस्सो में मुस्लिम आप्रवासी समुदायों की मेजबानी करते हैं; पश्चिमी यूरोप में, उदाहरण के लिए, ईसाई धर्म के बाद इस्लाम धर्म दूसरा सबसे बड़ा धर्म है, जहां यह कुल आबादी का 6% या 24 मिलियन लोगों का प्रतिनिधित्व करता है। .

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विश्व के सर्वोच्च पर्वतों की सूची

पृथ्वी पर कम-से-कम 109 पर्वत हैं जिनकि ऊँचाई समुद्रतल से 7,200 मीटर (23,622 फ़ुट) से अधिक है। इनमें से अधिकांश भारतीय उपमहाद्वीप और तिब्बत की सीमा पर स्थित हैं, और कुछ मध्य एशिया में हैं। इस सूचि में केवल ऐसे ही शिखर सम्मिलित हैं जिन्हें अकेला खड़ा पर्वत माना जा सकता है, यानि एक ही पर्वत के अलग-अलग शिखरों को नहीं गिना गया है। .

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विकीर्णन (डायसपोरा)

विकीर्णन या डायस्पोरा (diaspora) से आशय है -किसी भौगोलिक क्षेत्र के मूल वासियों का किसी अन्य बहुगोलिक क्षेत्र में प्रवास करना (विकीर्ण होना)। किन्तु डायसपोरा का विशेष अर्थ ऐतिहासिक अनैच्छिक प्रकृति के बड़े पैमाने वाले विकीर्ण, जैसे जुडा से यहूदियों का निष्कासन। .

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वख़्श नदी

वख़्श नदी (नीले रंग में) ताजिकिस्तान में नुरेक बाँध के पीछे वख़्श नदी एक सरोवर बना देती है वख़्श नदी, जिसे सुरख़ोब नदी और किज़िल सूउ भी कहा जाता है, मध्य एशिया में स्थित एक नदी है जो आमू दरिया की एक उपनदी भी है। यह ताजिकिस्तान की मुख्य नदियों में से एक है।, Food & Agriculture Org., 1999, ISBN 978-92-5-104309-7,...

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वृहद भारत

'''वृहद भारत''': केसरिया - भारतीय उपमहाद्वीप; हल्का केसरिया: वे क्षेत्र जहाँ हिन्दू धर्म फैला; पीला - वे क्षेत्र जिनमें बौद्ध धर्म का प्रसार हुआ वृहद भारत (Greater India) से अभिप्राय भारत सहित उन अन्य देशों से है जिनमें ऐतिहासिक रूप से भारतीय संस्कृति का प्रभाव है। इसमें दक्षिणपूर्व एशिया के भारतीकृत राज्य मुख्य रूप से शामिल है जिनमें ५वीं से १५वीं सदी तक हिन्दू धर्म का प्रसार हुआ था। वृहद भारत में मध्य एशिया एवं चीन के वे वे भूभाग भी सम्मिलित किये जा सकते हैं जिनमे भारत में उद्भूत बौद्ध धर्म का प्रसार हुआ था। इस प्रकार पश्चिम में वृहद भारत कीघा सीमा वृहद फारस की सीमा में हिन्दुकुश एवं पामीर पर्वतों तक जायेगी। भारत का सांस्कृतिक प्रभाव क्षेत्र .

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वैदिक धर्म

वैदिक रीति से होता यज्ञ वैदिक धर्म वैदिक सभ्यता का मूल धर्म था, जो भारतीय उपमहाद्वीप और मध्य एशिया में हज़ारों वर्षों से चलता आ रहा है। वैदिक सनातन वर्णाश्रम धर्म अथवा आधुनिक हिन्दू धर्म इसी धार्मिक व्यवस्था पर आधारित हैं। वैदिक संस्कृत में लिखे चार वेद इसकी धार्मिक किताबें हैं। हिन्दू मान्यता के अनुसार ऋग्वेद और अन्य वेदों के मन्त्र ईश्वर द्वारा ऋषियों को प्रकट किये गए थे। इसलिए वेदों को 'श्रुति' (यानि, 'जो सुना गया है') कहा जाता है, जबकि श्रुतिग्रन्थौके अनुशरण कर वेदज्ञद्वारा रचा गया वेदांगादि सूत्र ग्रन्थ स्मृति कहलाता है। वेदांग अन्तर्गत के धर्मसूत्र पर ही आधार करके वेदज्ञ मनु,अत्रि,याज्ञावल्क्य आदि द्वारा रचित अनुस्मतिृको भी स्मृति ही माना जाता है।ईसके वाद वेद-वेदांगौंके व्याखाके रुपमे रामायण महाभारतरुपमे ईतिहासखण्ड और पुराणखण्डको वाल्मीकि और वेदव्यासद्वारा रचागया जिसके नीब पर वैदिक सनातन वर्णाश्रम धर्म,विभिन्न वैष्णवादि मतसम्बद्ध हिन्दूधर्म,और अर्वाचीन वैदिक मत आर्यसमाजी,आदि सभीका व्यवहार का आधार रहा है। कहा जाता है। वेदों को 'अपौरुषय' (यानि 'जीवपुरुषकृत नहीं') भी कहा जाता है, जिसका तात्पर्य है कि उनकी कृति दिव्य है। अतःश्रुति मानवसम्बद्ध प्रमादादि दोषमुक्त है।"प्राचीन वैदिक सनातन वर्णाश्रम धर्म"का सारा धार्मिक व्यवहार विभन्न वेद शाखा सम्बद्ध कल्पसूत्र,श्रौतसूत्र,गृह्यसूत्र,धर्मसूत्र आदि ग्रन्थौंके आधारमे चलता है। इसके अलावा अर्वाचीन वैदिक (आर्य समाज) केवल वेदौंके संहिताखण्डको ही वेद स्वीकारते है। यही इन् दोनोमें विसंगति है। वैदिक धर्म और सभ्यता की जड़ में सन्सारके सभी सभ्यता किसी न किसी रूपमे दिखाई देता है। आदिम हिन्द-ईरानी धर्म और उस से भी प्राचीन आदिम हिन्द-यूरोपीय धर्म तक पहुँचती हैं, जिनके कारण बहुत से वैदिक देवी-देवता यूरोप, मध्य एशिया और ईरान के प्राचीन धर्मों में भी किसी-न-किसी रूप में मान्य थे, जैसे ब्रह्मयज्ञमे जिनका आदर कीया जाता है उन ब्रह्मा,विष्णु,रुद्र,सविता,मित्र, वरुण,और बृहस्पति (द्यौस-पितृ), वायु-वात, सरस्वती,आदि। इसी तरह बहुत से वैदिकशब्दों के प्रभाव सजातीय शब्द पारसी धर्म और प्राचीन यूरोपीय धर्मों में पाए जाते हैं, जैसे कि सोम (फ़ारसी: होम), यज्ञ (फ़ारसी: यस्न), पितर- फादर,मातर-मादर,भ्रातर-ब्रदर स्वासार-स्विष्टर नक्त-नाइट् इत्यादि।, Forgotten Books, ISBN 978-1-4400-8579-6 .

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वेई नदी (चीन)

वेई नदी का जलसम्भर क्षेत्र पश्चिमी झोऊ राजवंश (१०५०-७७१ ईपू) के ज़माने में चीनी आबादियाँ - इसमें वेई के किनारे लोगों के बसेरे साफ़ दिखते हैं वेई नदी या वेई हो (渭河, वेई हो; We River) चीन के गांसू और शान्शी प्रान्तों में बहने वाली ८१८ की लम्बी एक नदी है जो प्रसिद्ध पीली नदी (ह्वांग हो) की सबे बड़ी उपनदी भी है। वेई नदी का स्रोत गांसू प्रांत के वेईयुआन ज़िले (Weiyuan) में है - दरसल चीनी भाषा में 'वेई युआन' का मतलब ही 'वेई का स्रोत' है। वेई नदी का कुल जलसम्भर क्षेत्रफल १,३५,००० वर्ग किमी है। इसकी मुख्य उपनदियाँ लुओ नदी, जिंग नदी और चिशुई नदी हैं।, Tetsuya Kusuda, World Scientific, 2010, ISBN 978-981-4280-95-2,...

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ख़ातून

मंगोल सम्राट हुलागु ख़ाँ अपनी ईसाई पत्नी दोक़ुज़ ख़ातून के साथ ख़ातून (خاتون, Khātūn, Hatun) एक स्त्रियों को दी जाने वाली उपाधि है जो सब से पहले गोएकतुर्क साम्राज्य और मंगोल साम्राज्य में प्रयोग की गई थी। इनके क्षेत्रों में यह "रानी" और "महारानी" की बराबरी की उपाधि थी। समय के साथ-साथ यह भारतीय उपमहाद्वीप में "देवी" की तरह किसी भी महिला के लिए एक आदरपूर्ण ख़िताब बन गया। भारत में कई प्रसिद्ध औरतों के नाम से यह उपाधि जुड़ी हुई है, मसलन "हब्बा ख़ातून" कश्मीरी भाषा की एक प्रसिद्ध कवियित्री थीं। .

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ख़ान (उपाधि)

ओगदाई ख़ान, चंग़ेज़ ख़ान का तीसरा पुत्र ख़ान या ख़ाँ (मंगोल: хан, फ़ारसी:, तुर्की: Kağan) मूल रूप से एक अल्ताई उपाधि है तो शासकों और अत्यंत शक्तिशाली सिपहसालारों को दी जाती थी। यह समय के साथ तुर्की-मंगोल क़बीलों द्वारा पूरे मध्य एशिया में इस्तेमाल होने लगी। जब इस क्षेत्र के सैन्य बलों ने भारतीय उपमहाद्वीप, ईरान, अफ़्ग़ानिस्तान और अन्य क्षेत्रों पर क़ब्ज़ा कर के अपने साम्राज्य बनाने शुरू किये तो इसका प्रयोग इन क्षेत्रों की कई भाषाओँ में आ गया, जैसे कि हिन्दी-उर्दू, फ़ारसी, पश्तो, इत्यादि। इसका एक और रूप 'ख़ागान' है जिसका अर्थ है 'ख़ानों का ख़ान' या 'ख़ान-ए-ख़ाना', जो भारत में कभी प्रचलित नहीं हुआ। इसके बराबरी की स्त्रियों की उपाधियाँ ख़ानम और ख़ातून हैं।, Elena Vladimirovna Boĭkova, R. B. Rybakov, Otto Harrassowitz Verlag, 2006, ISBN 978-3-447-05416-4 .

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ख़ान तेन्ग्री

सूर्यास्त पर ख़ान तेन्ग्री ख़ान तेंग्री (Khan Tengri; किरगिज़: Хан-Теңири) तियान शान पर्वत शृंखला का दूसरा सबसे ऊँचा पर्वत है। यह मध्य एशिया में क़ाज़ाक़स्तान, किर्गिज़स्तान और चीन की सीमा पर इसिक कुल झील से पूर्व में स्थित है। इसके शिखर की ऊँचाई ६,९९५ मीटर (२२,९४९ फ़ुट) है। उइग़ुर भाषा में इसके नाम का अर्थ 'आकाश ख़ान (राजा)' है। प्राचीनकाल में तुर्की लोगों के मूल धर्म में तेन्ग्री आकाश के देवता का नाम था। पर्वतारोहन करने वालों में ७,००० मीटर से अधिक ऊँचे पहाड़ों की ख़ास मान्यता होती है। ख़ान तेंग्री पर हिमानी की वजह से इसका बर्फ़-समेत शिखर ७,०१० मीटर तक उठ जाता है इसलिए बहुत से लोग इसे एक 'सात-हज़ारी पर्वत' मानते हैं हालांकि मूल रूप से इसकी ऊँचाई उस से कुछ ५ मीटर कम है। तियान शान शृंखला में केवल ७,४३९ मीटर का जेन्गिश चोकुसु ही इस से अधिक ऊँचा है।, Paul Brummell, Bradt Travel Guides, 2008, ISBN 978-1-84162-234-7,...

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ख़ितानी भाषा

कोरिया से मिला एक आइना जिसमें छोटी ख़ितानी लिपि में लिखावट है सन ९८६ की ऐक शिला जिसमें बड़ी ख़ितानी लिपि में लिखावट है ख़ितानी भाषा मध्य एशिया में बोले जाने वाली एक विलुप्त भाषा थी जिसे ख़ितानी लोग बोला करते थे। यह भाषा सन् ३८८ से सन् १२४३ तक ख़ितानी राज्य व्यवस्था के लिए प्रयोगित थी। भाषा-परिवार के नज़रिए से इसे मंगोल भाषा-परिवार का सदस्य माना जाता है, हालांकि जब यह बोली जाति थी तब आधुनिक मंगोल भाषा अस्तित्व में नहीं थी। यह भाषा पहले ख़ितानियों के लियाओ राजवंश और फिर कारा-ख़ितान की राजभाषा रही। किसी ज़माने में कुछ भाषावैज्ञानिक समझते थे कि इसका मंगोल भाषा होने कि बजाए एक तुन्गुसी भाषा होना अधिक संभव है, लेकिन वर्तमान युग में लगभग सभी विद्वान इस एक मंगोल भाषा मानते हैं। क्योंकि यह भाषा काफ़ी अरसे तक उईग़ुर जैसी तुर्की भाषाओँ के संपर्क में रही, इसलिए इनमें शब्दों का आपसी आदान-प्रदान होता रहा। .

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ख़ज़रेत सुलतान

ख़ज़रेत​ सुलतान या हज़रत सुलतान (अंग्रेज़ी: Khazret Sultan) मध्य एशिया का एक ४,६४३ मीटर (१५,२३३ फ़ुट​) ऊँचा पर्वत है जो उज़बेकिस्तान देश का सबसे ऊँचा पर्वत भी है। यह पामीर-अलाय पर्वत मंडल की गिस्सार पर्वत शृंखला में ताजिकिस्तान की सीमा के नज़दीक स्थित है। जब उज़बेकिस्तान सोवियत संघ का भाग था तो यह पहाड़ साम्यवादी पार्टी की २२वीं महासभा का पर्वत (бывший Пик им. ХХII съезда КПСС, Peak of the 22nd Congress of the Communist Party) के नाम से जाना जाता था।, Gustave Gintzburger, pp.

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ख़कासिया

180px ख़कासिया गणतंत्र (रूसी: Респу́блика Хака́сия, रॅस्पुब्लिका ख़कासिया; ख़कास: Хакасия Республиказы, अंग्रेज़ी: Khakassia) गणतंत्र का दर्जा रखने वाला रूस का एक राज्य है। यह दक्षिण-मध्य साइबेरिया क्षेत्र में स्थित है। इसकी राजधानी अबाकान (Абака́н, Abakan) नामक शहर है। इस गणतंत्र का नाम ख़कास नामक तुर्की जाति पर पड़ा है और यहाँ रूसी भाषा के साथ-साथ ख़कास भाषा को भी सरकारी मान्यता प्राप्त है। खाकास स्वशासित प्रदेश जिसकी स्थापना १९३० में की गई थी। यह मध्य साइबेरिया में क्रास्नायार्स्क प्रदेश के आगे उत्तरपूर्व स्थित २३,९७३ वर्गमील का भूभाग है। केमेरोवा और ओरियो के स्वशासित प्रदेश इसके दक्षिण ओर केमेरोवा प्रदेश पश्चिम में हैं। इसमें येनिसे नदी की सहायिका अबाकान नदी बहती है और आगे चल कर भिनुसिंस्क काठे से गुजरती हुई इसकी पूर्वी सीमा निर्धारित करती है। इस प्रदेश का ६० प्रतिशत भूभाग टैगा वन्य प्रदेश है। लकड़ी नदी द्वारा बहाकर अबाकान पहुँचाया जाता है वहाँ अनेक आरा मिलें हैं। काँठे के भीतर भेंड़ और दुग्ध पशुपालन होता है। पहले भिनुसिंस्क के काँठे में घोड़े आदि पशु स्वतंत्र विचरण किया करते थे। किंतु अब वहाँ गेहूँ, जौ और जई की खेती होती है। यहाँ के ५२ प्रतिशत तुर्क-मंगोल संकर जाति के खाकासी लोग हैं जो किसी समय घुमंतू थे। .

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ख़ुजन्द

ख़ुजन्द में स्थित सुग़्द ऐतिहासिक संग्राहलय ख़ुजन्द चौक ख़ुजन्द (ताजिकी: Хуҷанд,, ख़ुजन्द; रूसी: Худжанд, ख़ुदझ़न्द), जो १९३६ तक ख़ोदजेंद के नाम से और १९९१ तक लेनिनाबाद (Ленинобод) के नाम से भी जाना जाता था, मध्य एशिया के ताजिकिस्तान देश का दूसरा सबसे बड़ा शहर और उस राष्ट्र के सुग़्द प्रान्त की राजधानी है। यह नगर सिर दरिया के किनारे फ़रग़ना वादी के मुख पर स्थित है। ख़ुजन्द की आबादी १९८९ की जनगणना में १.६ लाख थी लेकिन २०१० में घटकर १.४९ लाख हो गई। यहाँ के अधितर लोग ताजिक समुदाय से हैं और ताजिकी फ़ारसी बोलते हैं। .

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ख़्वारेज़्म

ख़्वारेज़्म​ और उसके पड़ोसी क्षेत्रों की अंतरिक्ष से ली गई तस्वीर ख्वारज्म साम्राज्य, ११९० से १२२० के मध्य ख़्वारेज़्म​, ख़्वारज़्म​ या ख़्वारिज़्म​ (फ़ारसी:, अंग्रेजी: Khwarezm) मध्य एशिया में आमू दरिया के नदीमुख (डेल्टा) में स्थित एक नख़लिस्तान (ओएसिस) क्षेत्र है। इसके उत्तर में अरल सागर, पूर्व में किज़िल कुम रेगिस्तान, दक्षिण में काराकुम रेगिस्तान और पश्चिम में उस्तयुर्त पठार है। ख़्वारेज़्म​ प्राचीनकाल में बहुत सी ख़्वारेज़्मी संस्कृतियों का केंद्र रहा है जिनकी राजधानियाँ इस इलाक़े में कोनये-उरगेंच और ख़ीवा जैसे शहरों में रहीं हैं। आधुनिक काल में ख़्वारेज़्म का क्षेत्र उज्बेकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान के राष्ट्रों के बीच बंटा हुआ है।, Rafis Abazov, Macmillan, 2008, ISBN 978-1-4039-7542-3,...

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ख़ैबर दर्रा

ख़ैबर दर्रा ख़ैबर दर्रा ख़ैबर दर्रा या दर्र-ए-ख़ैबर (Khyber Pass) उत्तर-पश्चिमी पाकिस्तान की सीमा और अफगानिस्तान के काबुलिस्तान मैदान के बीच हिंदुकुश के सफेद कोह पर्वत शृंखला में स्थित एक प्रख्यात ऐतिहासिक दर्रा है। यह दर्रा ५० किमी लंबा है और इसका सबसे सँकरा भाग केवल १० फुट चौड़ा है। यह सँकरा मार्ग ६०० से १००० फुट की ऊँचाई पर बल खाता हुआ बृहदाकार पर्वतों के बीच खो सा जाता है। इस दर्रे के ज़रिये भारतीय उपमहाद्वीप और मध्य एशिया के बीच आया-जाया सकता है और इसने दोनों क्षेत्रों के इतिहास पर गहरी छाप छोड़ी है। ख़ैबर दर्रे का सबसे ऊँचा स्थान पाकिस्तान के संघ-शासित जनजातीय क्षेत्र की लंडी कोतल (لنڈی کوتل, Landi Kotal) नामक बस्ती के पास पड़ता है। इस दर्रे के इर्द-गिर्द पश्तून लोग बसते हैं। पेशावर से काबुल तक इस दर्रे से होकर अब एक सड़क बन गई है। यह सड़क चट्टानी ऊसर मैदान से होती हुई जमरूद से, जो अंग्रेजी सेना की छावनी थी और जहाँ अब पाकिस्तानी सेना रहती है, तीन मील आगे शादीबगियार के पास पहाड़ों में प्रवेश करती है और यहीं से खैबर दर्रा आरंभ होता है। कुछ दूर तक सड़क एक खड्ड में से होकर जाती है फिर बाई और शंगाई के पठार की ओर उठती है। इस स्थान से अली मसजिद दुर्ग दिखाई पड़ता है जो दर्रे के लगभग बीचोबीच ऊँचाई पर स्थित है। यह दुर्ग अनेक अभियानों का लक्ष्य रहा है। पश्चिम की ओर आगे बढ़ती हुई सड़क दाहिनी ओर घूमती है और टेढ़े-मेढ़े ढलान से होती हुई अली मसजिद की नदी में उतर कर उसके किनारे-किनारे चलती है। यहीं खैबर दर्रे का सँकरा भाग है जो केवल पंद्रह फुट चौड़ा है और ऊँचाई में २,००० फुट है। ५ किमी आगे बढ़ने पर घाटी चौड़ी होने लगती है। इस घाटी के दोनों और छोटे-छोटे गाँव और जक्काखेल अफ्रीदियों की लगभग साठ मीनारें है। इसके आगे लोआर्गी का पठार आता है जो १० किमी लंबा है और उसकी अधिकतम चौड़ाई तीन मील है। यह लंदी कोतल में जाकर समाप्त होता है। यहाँ अंगरेजों के काल का एक दुर्ग है। यहाँ से अफगानिस्तान का मैदानी भाग दिखाई देता है। लंदी कोतल से आगे सड़क छोटी पहाड़ियों के बीच से होती हुई काबुल नदी को चूमती डक्का पहुँचती है। यह मार्ग अब इतना प्रशस्त हो गया है कि छोटी लारियाँ और मोटरगाड़ियाँ काबुल तक सरलता से जा सकती हैं। इसके अतिरिक्त लंदी खाना तक, जिसे खैबर का पश्चिम कहा जाता है, रेलमार्ग भी बन गया है। इस रेलमार्ग का बनना १९२५ में आरंभ हुआ था। सामरिक दृष्टि में संसार भर में यह दर्रा सबसे अधिक महत्व का समझा जाता रहा है। भारत के 'प्रवेश द्वार' के रूप में इसके साथ अनेक स्मृतियाँ जुड़ी हुई हैं। समझा जाता है कि सिकन्दर के समय से लेकर बहुत बाद तक जितने भी आक्रामक शक-पल्लव, बाख्त्री, यवन, महमूद गजनी, चंगेज खाँ, तैमूर, बाबर आदि भारत आए उन्होंने इसी दर्रे के मार्ग से प्रवेश किया। किन्तु यह बात पूर्णतः सत्य नहीं है। दर्रे की दुर्गमता और इस प्रदेश के उद्दंड निविसियों के कारण इस मार्ग से सबके लिए बहुत साल तक प्रवेश सहज न था। भारत आनेवाले अधिकांश आक्रमणकारी या तो बलूचिस्तान होकर आए या 2 साँचा:पाकिस्तान के प्रमुख दर्रे श्रेणी:भारत का इतिहास श्रेणी:पाकिस्तान के पहाड़ी दर्रे श्रेणी:अफ़्गानिस्तान के पहाड़ी दर्रे श्रेणी:पश्तून लोग श्रेणी:ऐतिहासिक मार्ग.

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ख़ोतान

ख़ोतान मस्जिद के सामने का नज़ारा ख़ोतान या होतान (उईग़ुर:, ख़ोतेन; चीनी: 和田, हेतियान; अंग्रेजी: Hotan या Khotan) मध्य एशिया में चीन के शिनजियांग प्रांत के दक्षिण-पश्चिमी भाग में स्थित एक शहर है जो ख़ोतान विभाग की राजधानी भी है। इसकी आबादी सन् २००६ में १,१४,००० अनुमानित की गई थी। ख़ोतान तारिम द्रोणी में कुनलुन पर्वतों से ठीक उत्तर में स्थित है। कुनलुन शृंखला में ख़ोतान पहुँचने के लिए तीन प्रमुख पहाड़ी दर्रे हैं - संजु दर्रा, हिन्दु-ताग़ दर्रा और इल्ची दर्रा - जिनके ज़रिये ख़ोतान हज़ारों सालों से भारत के लद्दाख़ क्षेत्र से व्यापारिक और सांस्कृतिक सम्बन्ध बनाए हुए था।, James Bell, A. Fullarton and co., 1831,...

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ख़ोरासान

मूल खुरासान प्रान्त अलियाबा टॉवर (Aliabad Tower) ख़ोरासान या ख़ुरासान ईरान के उत्तर पूर्व का एक क्षेत्र है। इसमें रज़वी ख़ोरासान, उत्तर ख़ोरासान और दक्षिण ख़ोरासान प्रांत आते हैं। वृहत्तर ख़ोरासान में अफ़गानिस्तान के सटे क्षेत्रों के अलावा ताज़िकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज़्बेकिस्तान के निकटवर्ती प्रदेश सम्मिलित हैं। .

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ख़ोरज़्म प्रान्त

उज़बेकिस्तान के नक़्शे में ख़ोरज़्म प्रान्त (लाल रंग में) ख़ोरज़्म प्रान्त (उज़बेक: Хоразм вилояти, ख़ोरज़्म विलोयती; अंग्रेज़ी: Xorazm Province या Khorezm Province) मध्य एशिया में स्थित उज़बेकिस्तान देश का एक विलायात (प्रान्त) है जो उस देश के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में स्थित है। यह अमु दरिया के अंत वाले इलाक़े में स्थित है (यानि अरल सागर के पास)। प्रान्त का कुल क्षेत्रफल ६,३०० वर्ग किमी है और २००५ में इसकी अनुमानित आबादी १२,००,००० थी। ख़ोरज़्म प्रान्त की राजधानी उरगेंच शहर है।, Нурислам Тухлиев, Алла Кременцова, Ozbekiston milliy ensiklopediasi, 2007 यहाँ मुहम्मद इब्न् मूसा अल्-ख़्वारिज़्मी नामक मशहूर मध्यकालीन गणितज्ञ पैदा हुए थे जिन्होनें भारतीय अंकों और दशमलव पद्दति पर ग्रन्थ लिखे थे। इन ग्रंथों का बाद में लातिनी भाषा में अनुवाद हुआ जिस से यह भारतीय आविष्कार यूरोप में प्रचलित हो गए। .

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ख़ोरूग़​

ख़ोरूग़​ (ताजिक: Хоруғ,, Khorugh) मध्य एशिया के ताजिकिस्तान देश के कूहिस्तोनी-बदख़्शान स्वशासित प्रान्त की राजधानी है। यह उस प्रान्त के शुग़नोन​ ज़िले की प्रशासनिक राजधानी भी है। पामीर पर्वतों में २,२०० मीटर की ऊँचाई पर पंज नदी और ग़ुन्द​ नदी के संगम-स्थल पर स्थित यह शहर अपने मनोहर पर्वतीय वातावरण के लिए जाना जाता है। .

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ख़ोक़न्द

ख़ोक़न्द में ख़ान का महल ख़ोक़न्द (उज़बेक: Қўқон, ताजिकी: Хӯқанд, फ़ारसी:, अंग्रेज़ी: Kokand) मध्य एशिया में पूर्वी उज़्बेकिस्तान के फ़रग़ना प्रान्त में स्थित एक शहर है। यह फ़रग़ना वादी के दक्षिण-पश्चिमी छोर पर क़ायम है। ख़ोक़न्द उबेकिस्तान की राजधानी ताशकंद से २२८ किमी दक्षिण-पूर्व में, अन्दीझ़ान शहर से ११५ किमी पश्चिम में और फ़रग़ना शहर से ८८ किमी पश्चिम में स्थित है। इसे कभी-कभी 'हवाओं का शहर' या 'जंगली सूअर का शहर' भी बुलाया जाता है। ख़ोक़न्द कुछ बहुत ही ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण व्यापर मार्गों पर स्थित है। एक तो यहाँ से पहाड़ों से होता हुआ पश्चिमोत्तर में ताशकंद को जाता है और दूसरा पश्चिम में ख़ुजन्द की ओर। फ़रग़ना वादी में यातायात का यह एक मुख्य पड़ाव है। सन् १९९९ की जनगणना में इसकी आबादी १,९२,५०० अनुमानित की गई थी।, Bradley Mayhew, Lonely Planet, 2007, ISBN 978-1-74104-614-4,...

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ख़ीवा

ख़ीवा के अन्दर इचान क़ला (इचान क़िला) की दीवारें खीवा(उज़बेक: Хива, अंग्रेज़ी: Khiva) मध्य एशिया के उज़बेकिस्तान देश के ख़ोरज़्म प्रान्त में स्थित एक ऐतिहासिक महत्व का शहर है। इस क्षेत्र में हजारों वर्षों से लोग बसते आये हैं लेकिन यह शहर तब मशहूर हुआ जब यह ख़्वारेज़्म और ख़ीवा ख़ानत की राजधानी बना।, Bradley Mayhew, pp.

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ख़ीवा ख़ानत

ख़ीवा ख़ानत​ (उज़बेक:, ख़ीवा ख़ानलीगी; अंग्रेज़ी: Khanate of Khiva) मध्य एशिया के ख़्वारेज़्म क्षेत्र में स्थित १५११ से १९२० तक चलने वाली एक उज़बेक ख़ानत​ थी। इसके ख़ान (शासक) मंगोल साम्राज्य के संस्थापक चंगेज़ ख़ान के ज्येष्ठ पुत्र जोची ख़ान के पाँचवे बेटे शेयबान के वंशज थे और उनके राज में केवल १७४०-१७४६ काल में खलल पड़ा जब ईरान के तुर्क-मूल के अफ़शारी राजवंश के नादिर शाह ने आकर यहाँ ६ वर्षों के अन्तराल के लिए क़ब्ज़ा कर लिया। .

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खुतन राज्य

खुतन से प्राप्त कनिष्क काल का कांसे का सिक्का खुतन राज्य (The Kingdom of Khotan) रेशम पथ पर स्थित प्राचीन बौद्ध राज्य था। ख़ुतन (ख़ोतन, ख़ोतान) मध्य एशिया में चीनी तुर्किस्तान (सिंकियांग) की मरुभूमि (तकलामकान) के दक्षिणी सिरे पर स्थित नखलिस्तान के एक नगर (स्थिति: ३७० १८’ उ., ८०० २’ पूर्व)। जिस नखलिस्तान में यह स्थित है, वह यारकंद से २०० मील दक्षिण पूर्व है और अति प्राचीन काल से ही तारिम उपत्यका के दक्षिणी किनारे वाले नखलिस्तान में सबसे बड़ा है। खुतन जिले को स्थानीय लोग 'इल्वी' कहते हैं तथा इस नखलिस्तान के दो अन्य नगर युरुंगकाश और काराकाश तीनों एक ४० मील हरियाली लंबी पट्टी के रूप में कुन-लुन पर्वत के उत्तरी पेटे में हैं। इसकी हरियाली के साधन भुरुंगकाश और काराकाश नदियाँ हैं जो मिलकर खुतन नदी का रूप ले लेती है। खुतन नाम के संबंध में कहा जाता है कि वह कुस्तन (भूमि है स्तन जिसका) के नाम पर पड़ा है जिसे मातृभूमि से निर्वासित हो कर धरती माता के सहारे जीवनयापन करना पड़ा था। खुतन पूर्ववर्ती हनवंश के काल में एक सामान्य सा राज्य था। किंतु प्रथम शती ई. के उत्तरार्ध में, जिस समय चीन तारिम उपत्यका पर अधिकर करने के लिए जोर लगा रहा था, अपनी भौगोलिक स्थिति-अर्थात्‌ सबसे बड़ा नखलिस्तान होने तथा पश्चिम जाने वाले दो मार्गों में अधिक दक्षिणी मार्ग पर स्थित होने के कारण मध्य एशिया और भारत के बीच एक जोड़नेवाली कड़ी के रूप में इसे विशेष महत्व प्राप्त हुआ। भारत के साथ इसका अत्यंत घनिष्ठ संबंध बहुत दिनों तक बना रहा। खुतन के मार्ग से ही बौद्ध धर्म चीन पहुँचा। एक समय खुतन बौद्ध धर्म की शिक्षा का बहुत बड़ा केंद्र था। वहाँ भारतीय लिपि तथा प्राकृत भाषा प्रचलित थी। वहाँ गुप्तकालीन अनेक बौद्ध विहार मिले हैं जिनकी भित्ति पर अजंता शैली से मिलती जुलती शैली के चित्र पाए गए हैं। काशगर से चीन तथा चीन से भारत आनेवाले सार्थवाह, व्यापारी खुतन होकर ही आते जाते थे। फाह्यान, सुंगयुन, युवानच्वांग और मार्कोपालो ने इसी मार्ग का अनुसरण किया था। यह सुप्रसिद्ध बौद्ध विद्वान्‌ बुद्धसेना का निवासस्थान था। अपनी समृद्धि और अनेक व्यापार मार्गों का केंद्र होने के कारण इस नगर को अनेक प्रकार के उत्थान पतन का सामना करना पड़ा। ७० ई. में सेनापति पानचाउ ने इसे विजित किया। और उत्तरवर्ती हनवंश के अधीन रहा। उसके बाद पुन: सातवीं शती में टांग वंश का इसपर अधिकार था। आठवीं शती में पश्चिमी तुर्किस्तान से आनेवाले अरबों ने और दसवीं शती में काशगरवासियों ने इसपर अधिकार किया। १३वीं शती में चंगेज खाँ ने उसपर कब्जा किया। पश्चात्‌ वह मध्य एशिया में मंगोलों के अधीन हुआ। इसी काल में मार्कोपोलो इस मार्ग से गुजरा था और उसने यहाँ की खेती, विशेष रूप से कपास की खेती तथा इसके व्यापारिक महत्व और निवासियों के वीर चरित्र की चर्चा की है। हाल की शताब्दियों में यह चीनी मध्य एशिया में मुस्लिम सक्रियता का केंद्र रहा और १८६४-६५ में चीन के विरुद्ध हुए डंगन विद्रोह में इस नगर की प्रमुख भूमिका थी। १८७८ में काशगर और खुतन ने प्रख्यात कृषि सेना को आत्मसमर्पण किया। फलस्वरूप वह पुन: चीन के अधिकार में चला गया। आजकल सिंकियांग प्रांत के अंतर्गत हैं। यह क्षेत्र आज भी कृषि की दृष्टि से अपना महत्व रखता है। गेहूँ, चावल, जई, बाजरा और मक्का की यहाँ खेती होती है। कपास भी काफी मात्रा में उपजता है। फलों, में जैतुन, लूकाट, नाशपाती और सेब होते हैं। मेवे का भी काफी मात्रा में निर्यात होता है। रेशम के उद्योग के आनुषंगिक साधन के रूप में शहतूत की भी खेती की जाती है। इसके अतिरिक्त यहाँ कालीन और नमदे का भी उद्योग है। नदियों से लोग सोना छानते हैं। बहुत दिनों तक खुतन के यशद भी बहुत प्रसिद्ध थे। .

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खोतानी रामायण

खोतानी रामायण मध्य एशिया के खोतान प्रदेश में प्रचलित रामकथा जिसकी रचना संभवत: 9वीं शती ई. में हुई थी। कदाचित यह तिब्बत में प्रचलित किसी रामायण का प्रतिसंस्करण है। एशिया के पश्चिमोत्तर सीमा पर स्थित तुर्किस्तान के पूर्वी भाग को 'खोतान' कहा जाता है जिसकी भाषा 'खोतानी' है। इसमें गौतम बुद्ध की आत्मकथा के रूप में कथा आरंभ होती है। इसमें राम की बुद्ध और लक्ष्मण को मैत्रेय बताया गया है और सीता, राम और लक्ष्मण दोनों की पत्नी हैं। यह कदाचित मध्य एशिया की कतिपय प्राचीन जातियों में प्रचलित बहुपति प्रथा से प्रभावित है। इसमें रावण के वध का कोई प्रसंग नहीं है। सहस्रबाहु (सहस्रार्जुन) को दशरथ का पुत्र कहा गया है। राम-लक्ष्मण इस सहस्रबाहु के पुत्र थे। उनकी माँ ने उन्हें बारह वर्ष तक भूमि में छिपा कर रखा था। परशुराम के पिता की गाय का सहस्रबाहु ने अपहरण कर लिया था। इस कारण परशुराम ने सहस्रबाहु का वध किया। राम ने पृथ्वी से वर प्राप्त कर परशुराम को मारा। .

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गणित का इतिहास

ब्राह्मी अंक, पहली शताब्दी के आसपास अध्ययन का क्षेत्र जो गणित के इतिहास के रूप में जाना जाता है, प्रारंभिक रूप से गणित में अविष्कारों की उत्पत्ति में एक जांच है और कुछ हद तक, अतीत के अंकन और गणितीय विधियों की एक जांच है। आधुनिक युग और ज्ञान के विश्व स्तरीय प्रसार से पहले, कुछ ही स्थलों में नए गणितीय विकास के लिखित उदाहरण प्रकाश में आये हैं। सबसे प्राचीन उपलब्ध गणितीय ग्रन्थ हैं, प्लिमपटन ३२२ (Plimpton 322)(बेबीलोन का गणित (Babylonian mathematics) सी.१९०० ई.पू.) मास्को गणितीय पेपाइरस (Moscow Mathematical Papyrus)(इजिप्ट का गणित (Egyptian mathematics) सी.१८५० ई.पू.) रहिंद गणितीय पेपाइरस (Rhind Mathematical Papyrus)(इजिप्ट का गणित सी.१६५० ई.पू.) और शुल्बा के सूत्र (Shulba Sutras)(भारतीय गणित सी. ८०० ई.पू.)। ये सभी ग्रन्थ तथाकथित पाईथोगोरस की प्रमेय (Pythagorean theorem) से सम्बंधित हैं, जो मूल अंकगणितीय और ज्यामिति के बाद गणितीय विकास में सबसे प्राचीन और व्यापक प्रतीत होती है। बाद में ग्रीक और हेल्लेनिस्टिक गणित (Greek and Hellenistic mathematics) में इजिप्त और बेबीलोन के गणित का विकास हुआ, जिसने विधियों को परिष्कृत किया (विशेष रूप से प्रमाणों (mathematical rigor) में गणितीय निठरता (proofs) का परिचय) और गणित को विषय के रूप में विस्तृत किया। इसी क्रम में, इस्लामी गणित (Islamic mathematics) ने गणित का विकास और विस्तार किया जो इन प्राचीन सभ्यताओं में ज्ञात थी। फिर गणित पर कई ग्रीक और अरबी ग्रंथों कालैटिन में अनुवाद (translated into Latin) किया गया, जिसके परिणाम स्वरुप मध्यकालीन यूरोप (medieval Europe) में गणित का आगे विकास हुआ। प्राचीन काल से मध्य युग (Middle Ages) के दौरान, गणितीय रचनात्मकता के अचानक उत्पन्न होने के कारण सदियों में ठहराव आ गया। १६ वीं शताब्दी में, इटली में पुनर् जागरण की शुरुआत में, नए गणितीय विकास हुए.

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गाँजा

मादा भांग के पधे के फूल, आसपास की पत्तियों एवं तने को सुखाकर बनाया गया '''गांजा''' गांजा (Cannabis या marijuana), एक मादक पदार्थ (ड्रग) है जो गांजे के पौधे से भिन्न-भिन्न विधियों से बनाया जाता है। इसका उपयोग मनोसक्रिय मादक (psychoactive drug) के रूप में किया जाता है। मादा भांग के पौधे के फूल, आसपास की पत्तियाँ एवं तनों को सुखाकर बनने वाला गांजा सबसे सामान्य (कॉमन) है। .

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गिस्सार पर्वत

गिस्सार या हिस्सार (रूसी: Гиссарский хребет, अंग्रेज़ी: Gissar Range) मध्य एशिया की एक पर्वत शृंखला का नाम है जो पामीर-अलाय पर्वत मंडल के पश्चिमी भाग में ताजिकिस्तान और उज़बेकिस्तान में विस्तृत हैं। २०० किमी तक चलने वाली यह पर्वतमाला ज़रफ़शान शृंखला से दक्षिण में है। यह ताजीकिस्तान की राजधानी दुशान्बे से शुरू होकर, हिस्सार ज़िले से गुज़रते हुए, उज़बेकिस्तान के सुरख़ानदरिया प्रान्त के उत्तरी छोर पर अंत होती है। गिस्सार शृंखला का सबसे ऊँचा पहाड़ ४,६४३ मीटर (१५,२३३ फ़ुट​) ऊँचा ख़ज़रेत​ सुलतान (हज़रत सुलतान) है, जो उज़बेकिस्तान का सबसे ऊँचा बिन्दु भी है। यह ताजिक सीमा के पास दुशान्बे के पश्चिमोत्तर में स्थित है।, Gustave Gintzburger, pp.

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गुर्जर

सम्राट मिहिर भोज की मूर्ति:भारत उपवन, अक्षरधाम मन्दिर, नई दिल्ली गुर्जर समाज, प्राचीन एवं प्रतिष्ठित समाज में से एक है। यह समुदाय गुज्जर, गूजर, गोजर, गुर्जर, गूर्जर और वीर गुर्जर नाम से भी जाना जाता है। गुर्जर मुख्यत: उत्तर भारत, पाकिस्तान और अफ़्ग़ानिस्तान में बसे हैं। इस जाति का नाम अफ़्ग़ानिस्तान के राष्ट्रगान में भी आता है। गुर्जरों के ऐतिहासिक प्रभाव के कारण उत्तर भारत और पाकिस्तान के बहुत से स्थान गुर्जर जाति के नाम पर रखे गए हैं, जैसे कि भारत का गुजरात राज्य, पाकिस्तानी पंजाब का गुजरात ज़िला और गुजराँवाला ज़िला और रावलपिंडी ज़िले का गूजर ख़ान शहर।; आधुनिक स्थिति प्राचीन काल में युद्ध कला में निपुण रहे गुर्जर मुख्य रूप से खेती और पशुपालन के व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। गुर्जर अच्छे योद्धा माने जाते थे और इसीलिए भारतीय सेना में अभी भी इनकी अच्छी ख़ासी संख्या है| गुर्जर महाराष्ट्र (जलगाँव जिला), दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर जैसे राज्यों में फैले हुए हैं। राजस्थान में सारे गुर्जर हिंदू हैं। सामान्यत: गुर्जर हिन्दू, सिख, मुस्लिम आदि सभी धर्मो में देखे जा सकते हैं। मुस्लिम तथा सिख गुर्जर, हिन्दू गुर्जरो से ही परिवर्तित हुए थे। पाकिस्तान में गुजरावालां, फैसलाबाद और लाहौर के आसपास इनकी अच्छी ख़ासी संख्या है। .

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गुलिस्तोन

गुलिस्तोन (उज़बेक: Гулистон, अंग्रेज़ी: Guliston) मध्य एशिया के उज़बेकिस्तान देश के पूर्वी भाग में स्थित सिरदरिया प्रान्त की राजधानी है। यह मिर्ज़ाचुल स्तेपी क्षेत्र में स्थित है, जिसे गोलोदनाया स्तेपी भी कहा जाता है और उस इलाक़े के अन्य भागों की तरह यहाँ का मुख्य कारोबार भी कपास की खेती है। गुलिस्तोन शहर उज़बेकिस्तान की राजधानी ताशकंत से १२० किमी दक्षिण-पश्चिम में स्थित है।, Encyclopaedia Britannica, 2002, ISBN 978-0-85229-787-2,...

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ग्वादर

ग्वादर शहर ग्वादर बंदरगाह ग्वादर (बलोच व उर्दु) पाकिस्तान से सुदूर दक्षिण-पश्चिमी भाग में बलोचिस्तान प्रान्त में अरब सागर के किनारे पर स्थित एक बंदरगाही शहर है। यह ग्वादर ज़िले का केंद्र है और सन् २०११ में इसे बलोचिस्तान की शीतकालीन राजधानी घोषित कर दिया गया था। ग्वादर शहर एक ६० किमी चौड़ी तटवर्ती पट्टी पर स्थित है जिसे अक्सर मकरान कहा जाता है। ईरान तथा फ़ारस की खाड़ी के देशों के बहुत पास होने के कारण इस शहर का बहुत सैन्य और राजनैतिक महत्व है। पाकिस्तान प्रयास कर रहा है कि इस बंदरगाह के ज़रिये न केवल पाकिस्तान बल्कि चीन, अफ़ग़ानिस्तान व मध्य एशिया के देशों का भी आयात-निर्यात चले। .

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गूगूश

गूगूश (फ़ारसी:, Googoosh), जिनका असली नाम फ़ाएग़ेह आतशीन (फ़ारसी:, Faegheh Atashin) है, एक प्रसिद्ध ईरानी गायिका व अभिनेत्री हैं। वे ईरानी पॉप संगीत में अपने दिए योगदानों के लिए जानी जाती हैं लेकिन उन्होनें १९५०-१९८० काल में कई ईरानी फ़िल्मों में भी अदाकारी की थी। वे ईरान और मध्य एशिया की सबसे मशहूर गायिका मानी जाती हैं और इस पूरे प्रदेश में अफ़ग़ानिस्तान तक उनकी ख्याति फैली हुई है। १९७९ की ईरानी क्रान्ती के बाद महिला गायिकाओं पर पाबंदी लग गई थी लेकिन उन्होनें फिर भी ईरान न छोड़ा, हालांकि उसके बाद वहाँ प्रदर्शन करना बंद कर दिया। इसके बावजूद उनकी प्रसिद्धी बढ़ती रही है। वर्तमान में वे 'गूगूश म्यूज़िक अकैडमी' नामक फ़ारसी भाषा का टेलिविज़न संगीत मुक़ाबला चलाती हैं। मूल रूप से उनका परिवार अज़रबैजान से था। .

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गोएकतुर्क

अपने शुरुआती काल में गोएकतुर्क ख़ागानत गोएकतुर्क (पुरानी तुर्की: 7px7px7px7px 7px7px7px, कोक तुरुक; अंग्रेजी: Göktürk) मध्य एशिया और उत्तरपूर्वी एशिया में एक मध्यकालीन ख़ानाबदोश क़बीलों का परिसंघ था जिन्होंने ५५२ ईसवी से ७४४ ईसवी तक अपना गोएकतुर्क ख़ागानत (Göktürk Khaganate) नाम का साम्राज्य चलाया। इन्होनें यहाँ पर अपने से पहले सत्ताधारी जू-जान ख़ागानत को हटाकर रेशम मार्ग पर चल रहे व्यापार को अपने नियंत्रण में कर लिया। 'गोएक' (gök) का अर्थ तुर्की भाषा में 'आकाश' होता है और 'गोएकतुर्क' का मतलब 'आसमानी तुर्क' है। यह इतिहास का पहला साम्राज्य था जिसने अपने आप को 'तुर्क' बुलाया। इस से पहले 'तुर्क' या 'तुरुक' निपुण लोहार माने जाते थे लेकिन राजा-महाराजा नहीं।, Barbara A. West, Infobase Publishing, 2009, ISBN 978-1-4381-1913-7,...

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ऑरिल स्टाइन

सर ऑरिल स्टाइन (Aurel Stein, 1862 - 1943) ब्रिटिश पुरातत्वज्ञ थे। उनका जन्म बुडापेस्ट (हंगरी) तथा मृत्यु काबुल (अफगानिस्तान) में हुई। इनकी शिक्षा प्रारंभ में वियना तथा तुविंगेन विश्वविद्यालयों में हुई किंतु उच्च शिक्षा ऑक्सफोर्ड तथा लंदन विश्वविद्यालयों में संपन्न हुई। शिक्षोपरांत वे भारत चले आए। सन् १८८९ से सन् १८९९ तक पंजाब विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार तथा लाहौर स्थित ओरिएंटल कालेज के प्रधानाचार्य के रूप में कार्य किया। भारत सरकार ने पुरातात्विक अनुसंधान एवं खोज के लिए इन्हें १९०० ई. में चीनी तुर्किस्तान भेज दिया। इस क्षेत्र में इन्होंने प्राचीन अवशेषों तथा बस्ती के स्थलों (settlement sites) का प्रचुर अनुसंधान किया। पुन: सन् १९०६ से १९०८ तक इन्होंने मध्य एशिया तथा पश्चिमी चीन के विभिन्न भागों में महत्वपूर्ण पुरातात्विक खोज की। इनके अनुसंधानों से मध्य एशिया तथा समीपवर्ती भागों में मनुष्य के प्रारंभिक जीवन के विषय पर महत्वपूर्ण प्रकाश पड़ा और जलवायु परिवर्तन संबंधी संभावनाओं के भी कुछ तथ्य सामने आए। १९०९ ई. में इन्हें भारतीय पुरातत्व विभाग में सुपरिंटेंडेंट नियुक्त किया गया। १९१३-१६ ई. में वे ईरान तथा मध्य एशिया गए और पुरातात्विक एवं भौगोलिक खोज की। इन यात्राओं तथा अनुसंधानों एवं प्राप्त तथ्यों का वर्णन उन्होंने लंदन से प्रकाशित जियोग्रैफिकल जर्नल के १९१६ ई. वाले अंक में किया है। पुरातात्विक एवं भौगोलिक अनुसंधानों के लिए लंदन की रायल जियोग्रैफिकल सोसायटी ने इन्हें स्वर्णपदक से विभूषित किया। .

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ओझा

ख़कास जाति की एक स्त्री ओझा की सन् १९०८ में ली गई तस्वीर ओझा (अंग्रेज़ी: shaman, शेमन या शामन) पारम्परिक समाजों में ऐसे व्यक्ति को कहा जाता है जिनके बारे में यह विश्वास हो कि उनमें प्रत्यक्ष दुनिया से बाहर किसी रूहानी दुनिया, आत्माओं, देवी-देवताओं या ऐसे अन्य ग़ैर-सांसारिक तत्वों से सम्पर्क रखने या उनकी शक्तियों से लाभ उठाने की क्षमता है। ओझाओं के बारे में यह धारणा होती है कि वे अच्छी और बुरी आत्माओं तक पहुँचकर उनपर प्रभाव डाल सकते हैं और अक्सर ऐसा करते हुए वे किसी विशेष चेतना की अवस्था में होते हैं। ऐसी अवस्था को अक्सर किसी देवी-देवता या आत्मा का 'चढ़ना' या 'हावी हो जाना' कहतें हैं। पारम्परिक समाजों में अक्सर चिकित्सा के उपचार भी ओझा ही जाना करते थे। अक्सर जनजातियों या पारम्परिक क़बीलों में ओझाओं का प्रभाव ज़्यादा होता है और उन्हें धर्म और चिकित्सा दोनों का स्रोत माना जाता है।, Michael Harner, Michael J. Harner, HarperCollins, 1990, ISBN 978-0-06-250373-2,...

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ओश

ओश और उसके पीछे के पर्वतों का नज़ारा ओश बाज़ार में ख़ुश्क मेवे की दुकानें ओश (किरगिज़:, अंग्रेज़ी: Osh) मध्य एशिया के किर्गिज़स्तान देश का दूसरा सबे बड़ा शहर है। यह किर्गिज़स्तान के दक्षिण में प्रसिद्ध फ़रग़ना वादी में स्थित है और इसे कभी-कभी 'किर्गिज़स्तान की दक्षिणी राजधानी' भी कहा जाता है। माना जाता है कि ओश शहर कम-से-कम ३,००० सालों से बसा हुआ है और यह शहर सन् १९३९ से किर्गिज़स्तान के ओश प्रांत की राजधानी भी है। फ़रग़ना वादी में बहुत से जाति-समुदाय रहते हैं और ठीक यही ओश में भी देखा जाता है - यहाँ किरगिज़ लोग, उज़बेक लोग, रूसी लोग, ताजिक लोग और अन्य समुदाय बसते हैं। .

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ओगताई ख़ान

ओगताई ख़ान, जो मंगोल साम्राज्य का दूसरा ख़ागान (सर्वोच्च ख़ान) और चंगेज़ ख़ान और बोरते का तीसरा पुत्र था ओगताई ख़ान (मंगोल: Өгэдэй, ओगदेई; फ़ारसी:, ओगताई, अंग्रेजी: Ögedei;; जन्म: ११८६ ई अनुमानित; देहांत: ११ दिसम्बर १२४१ ई) मंगोल साम्राज्य के संस्थापक चंगेज़ ख़ान और उसकी मुख्य पत्नी बोरते का तीसरा पुत्र था और पूरे साम्राज्य का दूसरा ख़ागान (सर्वोच्च ख़ान) था। उसने अपने पिता के ईरान, चीन और मध्य एशिया को मंगोल साम्राज्य के अधीन करने के अभियान में बहुत हिस्सा लिया। उसे एक क़ाबिल और सहासी सिपहसालार माना जाता है। कहा जाता है कि ओगताई अपने पिता का सब से प्रिय बेटा था। उसमें किसी भी बहस में लोगों का मत जीत लेने की क्षमता थी। बड़े कद-बुत और शक्तिशाली व्यक्तित्व वाला ओगताई हँसमुख और बुद्धिमान भी माना जाता था।, Leo de Hartog, Tauris Parke Paperbacks, 2004, ISBN 978-1-86064-972-1,...

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ओइरत लोग

ल्हाबज़ंग ख़ान एक ख़ोशूत​ ओइरत था जिसने १६९७-१७१७ काल में तिब्बत पर राज किया ओइरत (मंगोल: Ойрад, अंग्रेज़ी: Oirat) मंगोल लोगों का सबसे पश्चिमतम समुदाय है जो पश्चिमी मंगोलिया के अल्ताई पर्वत क्षेत्र में वास करते हैं। कई क़बीलों के एकीकरण से बनी यह जाति मध्य एशिया के पूर्वी भाग में उत्पन्न हुई थी लेकिन अब इनका सबसे बड़ा गुट रूस के काल्मिकिया गणतंत्र में मिलता है जहाँ इन्हें काल्मिक लोग कहा जाता है। काल्मिकी १७वीं सदी के शुरूआती दौर में ज़ुन्गारिया से रूसी साम्राज्य के दक्षिण-पूर्वी यूरोपी भाग में आ बसे थे।, Barbara A. West, Infobase Publishing, 2010, ISBN 978-1-4381-1913-7,...

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औरोक्स

औरोक्स का १६वी शताब्दी में बना एक चित्र औरोक्स की उपनस्लों का फैलाव भेड़ियों से लड़ता हुआ एक यूरेशियाई औरोक्स (कल्पित चित्र) औरोक्स आधुनिक पालतू गाय की पूर्वज नस्ल थी। यह एक बड़े अकार की जंगली गाय थी जो एशिया, यूरोप और उत्तर अफ़्रीका में रहा करती थी लेकिन विलुप्त हो गई। यूरोप में यह सन् १६२७ तक पाई गई थी। इस नस्ल के सांड के कंधे ज़मीन से १.८ मीटर (५ फ़ुट १० इंच) तक ऊँचे होते थे और गाय १.५ मीटर (४ फ़ुट ११ इंच) ऊँची होती थी। माना जाता है कि विश्व की सभी पालतू गाय औरोक्स के ही वंशज हैं। .

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आदिम-हिन्द-यूरोपीय लोग

पितृवंश समूह आर१ए का विस्तार आदिम-हिन्द-यूरोपीय लोगों के फैलाव के साथ सम्बंधित माना जाता है आदिम-हिन्द-यूरोपीय यूरेशिया में बसने वाले उन प्राचीन लोगों को कहा जाता है जो आदिम-हिन्द-यूरोपीय भाषा बोलते थे। इनके बारे में जानकारी भाषावैज्ञानिक तकनीकों से और कुछ हद तक पुरातत्व-विज्ञान (आर्कियोलोजी) से आई है। आधुनिक युग में अनुवांशिकी (जेनेटिक्स) के ज़रिये भी इनकी जातीयता के बारे में जानकारी मिल रही है। बहुत से इतिहासकारों का मानना है कि यह लोग ४००० ईसापूर्व के काल में पोंटिक-कैस्पियाई स्तेपी क्षेत्र में बसा करते थे और २,००० ईसापूर्व तक अनातोलिया, पश्चिमी यूरोप, मध्य एशिया और दक्षिणी साइबेरिया तक विस्तृत हो चुके थे।, J. P. Mallory, Taylor & Francis, 1997, ISBN 978-1-884964-98-5 आनुवंशिकी नज़रिए से बहुत से विद्वान अब इन्हें पितृवंश समूह आर१ए का वंशज मानते हैं।, Carlos Quiles, Fernando López-Menchero, Indo-European Association, 2009, ISBN 978-1-4486-8206-5,...

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आमू दरिया

आमू दरिया अफ़ग़ानिस्तान की उत्तरी सीमा के साथ-साथ चलकर फिर उत्तर की तरफ़ अरल सागर में विलीन होती है आमू दरिया (संस्कृत: वक्शु नदी, फ़ारसी: आमू दरिया, अरबी: ‎ जिहोन) मध्य एशिया की एक बड़ी नदी है जो वख़्श और पंज नदियों के संगम से बनती है।, Food & Agriculture Org., 1999, ISBN 978-92-5-104309-7,...

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आमू-पार

मध्य एशिया के इस नक़्शे में ट्रांसऑक्सेनिया (आमू-पार) क्षेत्र नामांकित है आमू-पार या ट्रांसऑक्सेनिया (अंग्रेजी: Transoxania) या फ़रा-रूद (फारसी) मध्य एशिया का वह इलाक़ा है जो आमू दरिया और सिर दरिया के बीच में स्थित है। इसके फ़ारसी नाम 'फ़रा-रूद' का मतलब है 'रूद' (नदी, यानी आमू नदी) से 'फ़रा' (पार)। इस इलाक़े में ख़ानाबदोश क़बीले रहा करते थे, जिनका भारत के इतिहास पर भी गहरा प्रभाव है। यह क्षेत्र उत्तरी रेशम मार्ग पर स्थित होने से हजारों सालों से संस्कृति और व्यापार की धारा में रहा है। यहाँ ईरान के सासानी साम्राज्य की एक सात्रापी थी और बाद में मंगोलों और तुर्की-मंगोलों का क्षेत्र रहा है। इसके मुख्य नगर ज़रफ़शान नदी के किनारे पर बसे बुख़ारा और समरक़न्द शहर हैं। आधुनिक राजनैतिक सीमाओं के हिसाब से आमू-पार क्षेत्र में उज़बेकिस्तान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, किरगिज़स्तान और काज़ाख़स्तान​ के कुछ इलाक़े आते हैं।, Svatopluk Soucek, Cambridge University Press, 2000, ISBN 978-0-521-65704-4,...

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आस्त्राख़ान

आस्त्राख़ान के मध्यकालीन भारतीय व्यापारियों के केंद्र का रूसी भाषा में स्मारक (Индийское торговое подворье, इन्दिस्कोए तोरगोवोए पोदवोरए) आस्त्राख़ान (रूसी: Астрахань, अंग्रेज़ी: Astrakhan) रूस के यूरोपीय हिस्से के दक्षिणी भाग में वोल्गा नदी के किनारे स्थित एक शहर है जो रूस के आस्त्राख़ान ओब्लास्त (प्रांत) का प्रशासनिक केंद्र भी है। यह वोल्गा नदी के कैस्पियन सागर में विलय हो जाने वाले स्थान के काफ़ी पास है। .

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आइनू लोग

अपने परम्परागत परिधान में कुछ आइनू लोग एक आइनू पुरुष (सन् 1880 में खींची गई तस्वीर) आइनू (जापानी: アイヌ) जापान के उत्तरी भाग और रूस के सुदूर पूर्वी भाग में बसने वाली एक जनजाति है। यह होक्काइडो द्वीप, कुरिल द्वीपसमूह और साख़ालिन द्वीप पर रहते हैं। समय के साथ-साथ इन्होने जापानी लोगों से शादियाँ कर लीं हैं और उनमें मिश्रित हो चुके हैं। इस वजह से इनकी संख्या का सही अनुमान लगा पाना कठिन है। अंदाज़ा लगाया जाता है कि विश्व में 25,000 से 2,00,000 के बीच आइनू रहते हैं।Poisson, B. 2002, The Ainu of Japan, Lerner Publications, Minneapolis, p.5.

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इली नदी

इली नदी का एक दृश्य बलख़श झील जलसम्भर क्षेत्र का नक़्शा जिसमें इली नदी और उसकी उपनदियाँ देखी जा सकती हैं इली नदी (कज़ाख़: Іле, इले; अंग्रेज़ी: Ili River) मध्य एशिया की एक नदी है जो चीन के शिनजियांग प्रांत के इली कज़ाख़ स्वशासित विभाग में तियान शान पहाड़ों से उत्पन्न होकर दक्षिणपूर्वी कज़ाख़स्तान के अलमाती प्रांत से गुज़रकर बलख़श झील के ख़ाली होती है। इसकी कुल लम्बाई १,४३९ किमी है जिसमें से ८१५ किमी कज़ाख़स्तान की भूमि में आता है। बलख़श झील से मिलते हुए इली नदी एक बड़ा नदीमुख (डेल्टा) क्षेत्र बनाती है जिसमें झीलें, दलदली ज़मीन और सरकंडों से भरपूर जलग्रस्त इलाक़े आते हैं। कुल मिलकर इली नदी का जलसम्भर क्षेत्र १,४०,००० वर्ग किमी है। इली नदी स्तेपी की तीन सबसे महत्वपूर्ण नदियों में से एक है - अन्य दो चुय नदी और तलास नदी हैं। .

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इसिक कुल प्रांत

सूर्यास्त के वक़्त इसिक कुल झील इसिक कुल प्रांत (किरगिज़: Ысык-Көл областы, अंग्रेज़ी: Issyk Kul Province) मध्य एशिया के किर्गिज़स्तान देश का पूर्वतम प्रांत है। इस प्रांत राजधानी काराकोल शहर है। इसिक कुल प्रांत का नाम प्रसिद्ध इसिक कुल झील पर पड़ा है। इस प्रांत की सीमाएँ काज़ाख़स्तान से और चीन के शिनजियांग प्रांत से लगती हैं। .

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इस्माइल सामानी पर्वत

इस्माइल सामानी (ताजिक भाषा: Қуллаи Исмоили Сомонӣ, क़ुल्लई इस्मोइलि सोमोनी; अंग्रेज़ी: Ismoil Somoni Peak) ताजिकिस्तान का सबसे ऊँचा पर्वत है। जब ताजिकिस्तान रूसी साम्राज्य और फिर सोवियत संघ का हिस्सा था, जब यह पर्वत उन देशों का भी सबसे ऊँचा पहाड़ हुआ करता था। यह पूरे मध्य एशिया और पूरी पामीर पर्वतमाला का भी सबसे बुलंद पर्वत है। इसका नाम सामानी राजवंश के पूर्वज इस्माइल सामानी पर रखा गया है। सोवियत संघ के ज़माने में १९३३ में इसका नाम पहले सोवियत तानाशाह जोसेफ़ स्टालिन के सम्मान में स्टालिन पर्वत और फिर, १९६२ में, साम्यवादी विचारधारा के सम्मान में कोम्युनिज़म पर्वत रख दिया गया। सोवियत संघ के टूटने और ताजिकिस्तान के आज़ाद होने के बाद १९९८ में इसका नाम परिवर्तित करके 'इस्माइल सामानी पर्वत' कर दिया गया।, Ali Aldosari, pp.

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इस्लाम

इस्लाम (अरबी: الإسلام) एक एकेश्वरवादी धर्म है, जो इसके अनुयायियों के अनुसार, अल्लाह के अंतिम रसूल और नबी, मुहम्मद द्वारा मनुष्यों तक पहुंचाई गई अंतिम ईश्वरीय पुस्तक क़ुरआन की शिक्षा पर आधारित है। कुरान अरबी भाषा में रची गई और इसी भाषा में विश्व की कुल जनसंख्या के 25% हिस्से, यानी लगभग 1.6 से 1.8 अरब लोगों, द्वारा पढ़ी जाती है; इनमें से (स्रोतों के अनुसार) लगभग 20 से 30 करोड़ लोगों की यह मातृभाषा है। हजरत मुहम्मद साहब के मुँह से कथित होकर लिखी जाने वाली पुस्तक और पुस्तक का पालन करने के निर्देश प्रदान करने वाली शरीयत ही दो ऐसे संसाधन हैं जो इस्लाम की जानकारी स्रोत को सही करार दिये जाते हैं। .

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इस्लामी दुनिया

विश्व में मुस्लिम आबादी का प्रतिशत. इस्लामी दुनिया; Islamic World or Muslim World): और मुस्लिम विश्व सामान्यतः इस्लामी समुदाय (उम्मत) का उल्लेख करता है, जिसमें वह सभी शामिल हैं जो इस्लाम धर्म का पालन करते हैं, या उस समाज के लिए जहां इस्लाम का अभ्यास होता है। एक आधुनिक भू- राजनीतिक अर्थ में, ये शब्द उन देशों का उल्लेख करता हैं जहां इस्लाम व्यापक है, हालांकि इसमें शामिल होने के लिए कोई मान्य मानदंड नहीं है। मुस्लिम दुनिया का इतिहास लगभग 1400 वर्ष पूराना है और इसमें विभिन्न सामाजिक- राजनीतिक विकास शामिल हैं, साथ ही कला, विज्ञान, दर्शन और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अग्रिम, विशेषकर इस्लामी स्वर्ण युग के दौरान। सभी मुसलमान कुरान के मार्गदर्शन की तलाश करते हैं और हजरत मुहम्मद सहाब की बातो में विश्वास करते हैं, लेकिन अन्य मामलों पर असहमति ने इस्लाम के भीतर विभिन्न धार्मिक स्कूलों और शाखाओं का प्रदर्शन किया है। आधुनिक युग में, अधिकांश मुस्लिम दुनिया यूरोपीय शक्तियों के प्रभाव या औपनिवेशिक वर्चस्व में आई थी। इतिहास बताता है कि औपनिवेशिक युग के बाद उभरे विभिन्न राजनीतिक और आर्थिक मॉडलों को अपनाया है, और वे धर्मनिरपेक्ष और धार्मिक प्रवृत्तियों से प्रभावित हुए हैं। .

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करज़ोक

करज़ोक या कोरज़ोक (Korzok) भारत के जम्मू और कश्मीर राज्य के लद्दाख़ क्षेत्र के लेह ज़िले की लेह तहसील में स्थित एक गाँव है। यह रुपशू पठार पर त्सो मोरीरी (झील) के किनारे बसा हुआ है। इसकी ऊँचाई अलग स्रोतों में समुद्रतल से 15,075 फ़ुट (4,595 मीटर) से लेकर 14,995 फ़ुट (4,570 मीटर) ऊपर बताई जाती है, लेकिन किसी भी माप के अनुसार यह विश्व की उच्चतम मानव बस्तियों में से एक है। यहाँ करज़ोक मठ भी स्थित है जो द्रुकपा बौद्ध समुदाय से सम्बन्धित है। .

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क़श्क़ादरिया प्रान्त

उज़बेकिस्तान के नक़्शे में क़श्क़ादरिया प्रान्त (लाल रंग में) क़श्क़ादरिया प्रान्त (उज़बेक: Қашқадарё вилояти, क़श्क़ादरयो विलोयती; अंग्रेज़ी: QashqadaryoProvince) मध्य एशिया में स्थित उज़बेकिस्तान देश का एक विलायात (प्रान्त) है जो उस देश के दक्षिणी क्षेत्र में स्थित है। यह क़श्क़ादरिया नदी के जलसम्भर क्षेत्र में और पामीर पर्वतों की पश्चिमी ढलानों में स्थित है। प्रान्त का कुल क्षेत्रफल २८,४०० वर्ग किमी है और २००७ में इसकी अनुमानित आबादी २०,६७,००० थी। इस सूबे के ७०% से अधिक लोग ग्रामीण इलाक़ों में रहते हैं। क़श्क़ादरिया प्रान्त की राजधानी क़रशी शहर है।, Нурислам Тухлиев, Алла Кременцова, Ozbekiston milliy ensiklopediasi, 2007 .

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क़ाराक़ालपाक़स्तान

उज़बेकिस्तान के नक़्शे में क़ाराक़ालपाक़स्तान (जामुनी रंग में) क़ाराक़ालपाक़स्तान (उज़बेक: Қоракалпоғистон Республикаси, क़ोराक़ालपोग़िस्तान रेस्पुब्लिकासी; अंग्रेज़ी: Republic Karakalpakstan), जिसका औपचारिक नाम क़ाराक़ालपाक़स्तान गणतंत्र है, मध्य एशिया में स्थित उज़बेकिस्तान देश का एक स्वशासित प्रान्त है। उज़्बेकिस्तान का पूरा पश्चिमी भाग इसी प्रांत में आता है। क़ाराक़ालपाक़स्तान का कुल क्षेत्रफल १,६०,००० वर्ग किमी है और २००७ में इसकी अनुमानित आबादी १५,७१,८०० थी। इनमें से लगभग ५,००,००० क़ाराक़ालपाक़ जाति के हैं, जिनके नाम पर इस प्रांत का नाम पड़ा है। इनके आलावा यहाँ लगभग ४,००,००० उज़बेक नस्ल के और ३,००,००० कज़ाख़ नस्ल के हैं। क़ाराक़ालपाक़स्तान की राजधानी नुकुस शहर है।, Нурислам Тухлиев, Алла Кременцова, Ozbekiston milliy ensiklopediasi, 2007 .

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क़ुरग़ोनतेप्पा

क़ुरग़ोनतेप्पा (ताजिक: Қурғонтеппа,, Qurghonteppa), जिसे सोवियत संघ के ज़माने में कुर्गान-त्युबे (ताजिक: Курган-Тюбе, Kurgan-Tyube) कहा जाता था, दक्षिणपश्चिमी ताजिकिस्तान में स्थित एक शहर है जो उस देश के ख़तलोन प्रान्त की राजधानी भी है। यह ताजिकिस्तान की राष्ट्रीय राजधानी दूशान्बे से १०० किमी दूर वख़्श नदी के किनारे बसा हुआ है। क़ुरग़ोनतेप्पा ताजिकिस्तान का चौथा सबसे बड़ा नगर है और एक आधुनिक ओद्योगिक केन्द्र है।, Rafis Abazov, pp.

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कारलूक लोग

६०० ईसवी के इस नक्शे में कारलूक क्षेत्र पश्चिमी गोएकतुर्क ख़ागानत के अधीन देखा जा सकता है कारलूक या क़ारलूक़ (पुरानी तुर्की: 7px 7px 7px 7px; अंग्रेजी: Karluk या Qarluq) एक ख़ानाबदोश तुर्की क़बीला था जो मध्य एशिया में अल्ताई पहाड़ों से पश्चिम में कारा-इरतिश और तरबगत​ई पर्वतों के क्षेत्र में बसा करता था। इन्हें चीनी लोग गेलोलू (葛邏祿, Gelolu) भी बुलाते थे। कारलूक समुदाय जातीयता के नज़रिए से उईग़ुर लोगों से सम्बंधित थे। तुर्की भाषाओं में एक कारलूक शाखा है, जिसका नाम इन्ही कारलूकों पर पड़ा और जिसमें उईग़ुर भाषा, उज़बेक भाषा और इली तुर्की भाषा शामिल हैं। .

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कारा दरिया

अंतरिक्ष से ली गई कारा दरिया और नारीन नदी के संगम क्षेत्र की तस्वीर, जिसके इर्द-गिर्द बहुत से खेत नज़र आ रहे हैं। कारा दरिया (किरगिज़: Кара-Дарыя, अंग्रेज़ी: Kara Darya), जिसे कभी-कभी क़ारादरियो (Qaradaryo) भी उच्चारित किया जाता है, मध्य एशिया क्षेत्र में किर्गिज़स्तान और पूर्वी उज़बेकिस्तान में बहने वाली सिर दरिया नदी की एक प्रमुख उपनदी है। .

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कारा-ख़ितान ख़ानत

सन् १२०० में कारा-ख़ितान ख़ानत (हरे रंग में) कारा-ख़ितान ख़ानत (मंगोल: Хар Хятан, ख़ार ख़ितान; चीनी: 西遼, शी लियाओ; अंग्रेजी: Kara-Khitan Khanate), जिसे पश्चिमी लियाओ साम्राज्य भी कहा जाता है, मध्य एशिया में स्थित ख़ितानी लोगों का एक साम्राज्य था जो सन् ११२४ ईसवी से १२१८ ईसवी तक चला। ख़ितानियों का लियाओ राजवंश उत्तरी चीन पर राज करा करता था लेकिन जुरचेन लोगों के आक्रमण से वे पश्चिम की ओर चले गए और वहाँ लियाओ राजघराने के वंशज येलू दाशी (耶律達實, Yelü Dashi) ने कारा-ख़ितान नाम की ख़ानत शुरू करी।, Barbara A. West, Infobase Publishing, 2009, ISBN 978-0-8160-7109-8,...

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काराशहर

काराशहर (Karasahr, उईग़ुर) या यान्ची (Yanqi, चीनी: 焉耆), जिसे संस्कृत में अग्नि या अग्निदेश कहते थे, रेशम मार्ग पर स्थित एक प्राचीन शहर है। यह मध्य एशिया में जनवादी गणतंत्र चीन द्वारा नियंत्रित शिंजियांग प्रान्त के बायिनग़ोलिन मंगोल स्वशासित विभाग के यान्ची हुई स्वशासित ज़िले में स्थित है। काराशहर काइदू नदी के किनारे बसा हुआ है। .

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काराख़ानी ख़ानत

१००० ईसवी में काराख़ानी ख़ानत अर्सलान ख़ान द्वारा ११२७ में आज़ान के लिए बनवाई गई बुख़ारा की कलयन मीनार काराख़ानी ख़ानत (Kara-Khanid Khanate) मध्यकाल में एक तुर्की क़बीलों का परिसंघ था जिन्होंने मध्य एशिया के आमू-पार क्षेत्र और कुछ अन्य भूभाग में ८४० से १२१२ ईसवी तक अपनी ख़ानत (साम्राज्य) चलाई। इसमें कारलूक, यग़मा, चिग़िल​ और कुछ अन्य क़बीले शामिल थे जो पश्चिमी तियान शान और आधुनिक शिनजियांग इलाक़ों के रहने वाले थे। काराख़ानियों ने मध्य एशिया में ईरानी मूल के सामानी साम्राज्य का ख़ात्मा कर दिया और इसके बाद मध्य एशिया में तुर्की-भाषियों का अधिक बोलबाला रहा। काराख़ानी दौर में ही महमूद काश्गरी ने अपनी प्रसिद्ध 'दीवान-उ-लुग़ात​-उत-तुर्क' नामक तुर्की भाषा के कोष की रचना की।, Rafis Abazov, pp.

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काराग़ान्दी प्रांत

काराग़ान्दी प्रांत (कज़ाख़: Қарағанды облысы, अंग्रेज़ी: Karagandy Province) मध्य एशिया के क़ाज़ाख़स्तान देश का एक प्रांत है। इसकी राजधानी भी काराग़ान्दी नाम का शहर ही है लेकिन इस नगर को आमतौर पर रूसी-लहजे में काराग़ान्दा बुलाया जाता है। काराग़ान्दी क़ाज़ाख़स्तान का सबसे बड़ा प्रांत है और देश के मध्य में स्थित है। .

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काराकुम रेगिस्तान

अंतरिक्ष से काराकुम रेगिस्तान - दाएँ में कैस्पियन सागर नज़र आ रहा है और चित्र के बाएँ ऊपर में आमू दरिया की रेखा तुर्कमेनिस्तान में काराकुम का एक नज़ारा पीला रंग हुआ इलाक़ा काराकुम है काराकुम रेगिस्तान (तुर्कमेन: Garagum; रूसी: Каракумы; अंग्रेज़ी: Karakum) मध्य एशिया में स्थित एक रेगिस्तान है। तुर्कमेनिस्तान देश का ७०% इलाक़ा इसी रेगिस्तान के क्षेत्र में आता है। 'काराकुम' शब्द का अर्थ 'काली रेत' होता है। यहाँ आबादी बहुत कम घनी है और औसतन हर ६.५ वर्ग किमी में एक व्यक्ति मिलता है। यहाँ बारिश औसत रूप से १० वर्षों में एक दफ़ा गिरती है। यह विश्व के सब से बड़े रेतीले रेगिस्तानों में से एक है।, R. Lal, Psychology Press, 2007, ISBN 978-0-415-42235-2,...

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काराकोल

काराकोल शहर का रूसी ओरथोडोक्स गिरजा काराकोल(किरगिज़: Каракол, अंग्रेज़ी: Karakol), जिसका एक पुराना नाम प्रझ़ेवाल्स्क (Пржевальск, Przhevalsk) भी था, मध्य एशिया के किर्गिज़स्तान देश का चौथा सबसे बड़ा शहर है और उस राष्ट्र के इसिक कुल प्रांत की राजधानी भी है। यह प्रसिद्ध इसिक कुल झील के पूर्वी छोर पर चीन की सरहद से १५० किमी दूर स्थित है। 'प्रझ़ेवाल्स्क' शब्द में बिंदु-वाले 'झ़' अक्षर के उच्चारण पर ध्यान दें क्योंकि यह 'झ', 'ज' और 'ज़' से अलग है और अंग्रेज़ी के 'टेलिविझ़न' और 'मेझ़र' शब्दों के आने वाली ध्वनि से मिलता है। .

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कारेज़

कारेज़ (फ़ारसी:, karez), कारीज़ या क़नात (अरबी:, qanat) शुष्क या अर्ध-शुष्क और गरम इलाक़ों में नियमित रूप से लगातार पानी उपलब्ध कराने की एक व्यवस्था है। .

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कालमिकिया

कालमिकिया (रूसी: Республика Калмыкия, रेसपूब्लिका कालमिकिया; कालमिक: Хальмг Таңһч; अंग्रेज़ी: Republic of Kalmykia) रूस का एक संघीय खंड है जो उस देश की शासन प्रणाली में गणतंत्र का दर्जा रखता है। (2010 All-Russian Population Census, vol. 1).

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काश्गर

ईद गाह मस्जिद, काशगर काश्गर, कशगार, काशगुर या काशी (उईगुर:, चीनी: 喀什, फारसी) मध्य एशिया में चीन के शिनजियांग प्रांत के पश्चिमी भाग में स्थित एक नख़लिस्तान (ओएसिस) शहर है, जिसकी जनसंख्या लगभग ३,५०,००० है। काश्गर शहर काश्गर विभाग का प्रशासनिक केंद्र है जिसका क्षेत्रफल १,६२,००० किमी² और जनसंख्या लगभग ३५ लाख है। काश्गर शहर का क्षेत्रफल १५ किमी² है और यह समुद्र तल से १,२८९.५ मीटर (४,२८२ फ़ुट) की औसत ऊँचाई पर स्थित है। यह शहर चीन के पश्चिमतम क्षेत्र में स्थित है और तरीम बेसिन और तकलामकान रेगिस्तान दोनों का भाग है, जिस वजह से इसकी जलवायु चरम शुष्क है।, S. Frederick Starr, M.E. Sharpe, 2004, ISBN 978-0-7656-1318-9 पुराकाल से ही काश्गर व्यापार तथा राजनीति का केंद्र रहा है और इसके भारत से गहरे सांस्कृतिक, धार्मिक और व्यापारिक सम्बन्ध रहे हैं। भारत से शिनजियांग का व्यापार मार्ग लद्दाख़ के रस्ते से काश्गर जाया करता था।, Prakash Charan Prasad, Abhinav Publications, 1977, ISBN 978-81-7017-053-2 ऐतिहासिक रेशम मार्ग की एक शाखा भी, जिसके ज़रिये मध्य पूर्व, यूरोप और पूर्वी एशिया के बीच व्यापार चलता था, काश्गर से होकर जाती थी। काश्गर अमू दरिया वादी से खोकंद, समरकंद, अलमाटी, अक्सू, और खोतान मार्गो के बीच स्थित है। .

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काइदू नदी

काइदू नदी (चीनी: 开都河, अंग्रेज़ी: Kaidu River) मध्य एशिया में जनवादी गणतंत्र चीन द्वारा नियंत्रित शिंजियांग प्रान्त की एक नदी है। यह नदी तियान शान पर्वतमाला की दक्षिण-मध्य ढलानों में युल्दुज़ द्रोणी से उत्पन्न होती है और यान्ची द्रोणी से होती हुई बोस्तेन झील में विलय हो जाती है। झील का ८३% जल इसी नदी से आता है। झील से फिर यह नदी 'कोन्ची दरिया' के नाम से निकलती है और लौह द्वार दर्रे से होती हुई तारिम द्रोणी में चली जाती है। ऐतिहासिक रेशम मार्ग पर स्थित काराशहर इसी नदी के किनारे बसा हुआ है। .

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किरांत राज्य

नेपाल के इतिहास कि शुरुआत प्रमाणिक तौर पर किराँत काल से ही मानी जाती है। देखा जाय तो किराँत काल से भी पहले का इतिहास है परन्तु उनका अभी तक कोई प्रमाण नहीं मिल पाया है। किराँत काल से पहले गोपाल, महिषपाल जैसे अन्य जातिय राज्य थें। इस काल के प्रथम राजा यलम्बर को किराँत काल के प्रथम राजा माना गया है। काठमांडु में पाये गये नि‍योलि‍थि‍क उपकरणों से पाया गया है कि नेपाल में मानव का आगमन कम से कम ९ हजार वर्ष पहले से है परन्तु किराँत जाति के लोग लगभग २५०० वर्ष पहले से यहाँ रहते आ रहे हैं। किराँती जंगली और पहाडीहयों का एक जनजाति हैं, जो मध्य एशिया, भारत और हिमालय पार करते हुए यहाँ आकर बस गयें। .

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किरगिज़ लोग

काराकोल में एक मनासची कथाकार पारम्परिक किरगिज़ वेशभूषा में एक किरगिज़ परिवार किरगिज़ मध्य एशिया में बसने वाली एक तुर्की-भाषी जाति का नाम है। किरगिज़ लोग मुख्य रूप से किर्गिज़स्तान में रहते हैं हालाँकि कुछ किरगिज़ समुदाय इसके पड़ौसी देशों में भी मिलते हैं, जैसे कि उज़्बेकिस्तान, चीन, ताजिकिस्तान, अफ़्ग़ानिस्तान और रूस। .

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किज़िल कुम रेगिस्तान

उज़बेकिस्तान में किज़िल कुम में एक बस्ती से निकलती सड़क अंतरिक्ष से किज़िल कुम - तस्वीर में मध्य में नीचे की तरफ - दाएँ में कैस्पियन सागर है और उस से ज़रा बाएँ में अधिकतर सूखा हुआ अरल सागर, किज़िल कुम दो नदियों की रेखाओं (आमू दरिया और सिर दरिया) के बीच का इलाक़ा है किज़िल कुम में रेत का टीला किज़िल कुम या क़िज़िल क़ुम (उज़बेक: Qizilqum; कज़ाख़: Қызылқұм; अंग्रेज़ी: Kyzyl Kum) मध्य एशिया में स्थित एक रेगिस्तान है। इसका क्षेत्रफल २,९८,००० वर्ग किमी (१,१५,००० वर्ग मील) है और यह दुनिया का ११वाँ सबसे बड़ा रेगिस्तान है। यह आमू दरिया और सिर दरिया के बीच के दोआब में स्थित है। इसका अधिकाँश हिस्सा कज़ाख़स्तान और उज़बेकिस्तान में आता है, हालांकि एक छोटा भाग तुर्कमेनिस्तान में भी पड़ता है। तुर्की भाषाओँ में 'किज़िल कुम' का मतलब 'लाल रेत' है और इस रेगिस्तान की रेतों में मिश्रित पदार्थ बहुत से स्थानों में इसे एक लालिमा देते हैं। इस से दक्षिण-पश्चिम में आमू दरिया के पार काराकुम रेगिस्तान पड़ता है जिसके नाम का अर्थ 'काली रेत' है।, R. Lal, Psychology Press, 2007, ISBN 978-0-415-42235-2,...

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किज़िलओरदा प्रांत

किज़िलओरदा प्रांत (कज़ाख़: Қызылорда облысы, अंग्रेज़ी: Kyzylorda Province) मध्य एशिया के क़ाज़ाख़स्तान देश का एक प्रांत है। इसकी राजधानी का नाम भी किज़िलओरदा शहर ही है। मध्य एशिया की महत्वपूर्ण नदी, सिर दरिया पूर्व में तियान शान पहाड़ियों से उत्पन्न होकर इस प्रांत से गुज़रकर अरल सागर जाती हैं। इस प्रान्त में अरल्स्क शहर है, जिसे अरल शहर भी कहते हैं, जो अरल सागर पर एक बंदरगाह हुआ करती थी लेकिन अरल के अधिकाँश हिस्से के सूखने से अब अरल सागर के बचे-कुचे अंश से १२ किमी दूर है। तुर्की भाषाओँ के मशहूर प्राचीन कवि कोरकुत अता (Korkut Ata) ९वीं सदी ईसवी में इसी प्रांत में पैदा हुए माने जाते हैं।, Paul Brummell, Bradt Travel Guides, 2012, ISBN 978-1-84162-369-6,...

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कज़ाख़ भाषा

कज़ाख़स्तान में कज़ाख़ भाषा को बढ़ावा देने का सिरिलिक लिपि में एक विज्ञापन: '(एक) कज़ाख़ को (दूसरे) कज़ाख़ से कज़ाख़ (भाषा) में बात करने दो कज़ाख़ (Қазақ тілі,, क़ाज़ाक़ तिलि) भाषा मध्य एशिया में कज़ाख़ लोगों द्वारा बोली जाने वाली एक तुर्की भाषा है। यह तुर्की भाषा-परिवार की पश्चिमी या किपचक शाखा की भाषा है और क़ाराक़ालपाक़ और नोगाई भाषाओँ से मिलती-जुलती है। २००९ की जनगणना के अनुसार इसे कज़ाख़स्तान में लगभग १ करोड़ लोग बोलते हैं और २००० में इसे कज़ाख़स्तान से बाहर बोलने वालों की संख्या ३० लाख अनुमानित की गई थी। कज़ाख़ को कज़ाख़स्तन में राष्ट्रभाषा होने का दर्जा हासिल है। कज़ाख़स्तान के अलावा इसे चीन, मंगोलिया, अफ़्ग़ानिस्तान, ताजिकिस्तान, तुर्की, तुर्कमेनिस्तान, युक्रेन, रूस और ईरान के कुछ समुदाय भी बोलते हैं। भौगोलिक दृष्टि से कज़ाख़ तियन शान पर्वतों से लेकर कैस्पियन सागर तक के विशाल क्षेत्र में बोली जाती है। .

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कज़ाख़ लोग

चीन के शिनजियांग प्रांत में एक कज़ाख़ परिवार कज़ाख़ मध्य एशिया के उत्तरी भाग में बसने वाली एक तुर्की-भाषी जाति का नाम है। कज़ाख़स्तान की अधिकाँश आबादी इसी नस्ल की है, हालाँकि कज़ाख़ समुदाय बहुत से अन्य देशों में भी मिलते हैं, जैसे कि उज़बेकिस्तान, मंगोलिया, रूस और चीन के शिनजियांग प्रान्त में। विश्व भर में १.३ से लेकर १.५ करोड़ कज़ाख़ लोग हैं और इनमें से अधिकतर की मातृभाषा कज़ाख़ भाषा है। कज़ाख़ लोग बहुत से प्राचीन तुर्की जातियों के वंशज हैं, जैसे कि अरग़िन, ख़ज़र, कारलुक, किपचक और कुमन। माना जाता है कि इनमें कुछ हद तक मध्य एशिया की कुछ ईरानी भाषाएँ बोलने वाली जातियाँ (जैसे कि शक, स्किथाई और सरमती) भी शामिल हो गई। कज़ाख़ लोग साइबेरिया से लेकर कृष्ण सागर तक फैले हुए थे और जब इस क्षेत्र में तुर्की-मंगोल लोगों का राज चला तब भी वे मध्य एशिया में ही बसे रहे। .

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कुनलुन देवी

कुनलुन शान शृंखला के पश्चिमी भाग में स्थित है कुनलुन देवी (अंग्रेज़ी: Kunlun Goddess, कुनलुन गॉडॅस), जिसे चीनी भाषा में लिउशी शान भी कहा जाता है मध्य एशिया की कुनलुन पर्वत शृंखला का सब से ऊँचा पर्वत है। यह चीन द्वारा नियंत्रित तिब्बत और शिंजियांग प्रान्तों की सीमा पर स्थित है। कुनलुन देवी की ऊँचाई ७,१६७ मीटर (२३,५१४ फ़ुट) है।http://www.peakbagger.com/peak.aspx?pid.

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कुनलुन पर्वत

तिब्बत-शिंजियांग राजमार्ग से पश्चिमी कुनलुन पर्वतों में काराकाश नदी का नज़ारा चिंग हई प्रांत में दूर से कुनलुन पर्वतों का दृश्य कुनलुन पर्वत शृंखला (चीनी: 昆仑山, कुनलुन शान; मंगोलियाई: Хөндлөн Уулс, ख़ोन्दलोन ऊल्स) मध्य एशिया में स्थित एक पर्वत शृंखला है। ३,००० किलोमीटर से अधिक चलने वाली यह शृंखला एशिया की सब से लम्बी पर्वतमालाओं में से एक गिनी जाती है। कुनलुन पर्वत तिब्बत के पठार के उत्तर में स्थित हैं और उसके और तारिम द्रोणी के बीच एक दीवार बनकर खड़े हैं। पूर्व में यह उत्तर चीन के मैदानों में वेई नदी के दक्षिण-पूर्व में जाकर ख़त्म हो जाते हैं। कुनलुन पर्वत भारत के अक्साई चिन इलाक़े को भी तारिम द्रोणी से अलग करते हैं, हालांकि वर्तमान में अक्साई चिन क्षेत्र चीन के क़ब्ज़े में है। इस पर्वतमाला में कुछ ज्वालामुखी भी स्थित हैं। .

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कुमारजीव

कुमारजीव (344 ई – 413 ई) एक भारतीय बौद्ध भिक्षु थे जो चीन में जाकर बस गये, जहाँ उन्होंने संस्कृत के बौद्ध ग्रन्थों का चीनी भाषा में अनुवाद किया। .

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कुषाण राजवंश

कुषाण प्राचीन भारत के राजवंशों में से एक था। कुछ इतिहासकार इस वंश को चीन से आए युएझ़ी लोगों के मूल का मानते हैं। कुछ विद्वानो इनका सम्बन्ध रबातक शिलालेख पर अन्कित शब्द गुसुर के जरिये गुर्जरो से भी बताते हैं। सर्वाधिक प्रमाणिकता के आधार पर कुषाण वन्श को चीन से आया हुआ माना गया है। लगभग दूसरी शताब्दी ईपू के मध्य में सीमांत चीन में युएझ़ी नामक कबीलों की एक जाति हुआ करती थी जो कि खानाबदोशों की तरह जीवन व्यतीत किया करती थी। इसका सामना ह्युगनु कबीलों से हुआ जिसने इन्हें इनके क्षेत्र से खदेड़ दिया। ह्युगनु के राजा ने ह्यूची के राजा की हत्या कर दी। ह्यूची राजा की रानी के नेतृत्व में ह्यूची वहां से ये पश्चिम दिशा में नये चरागाहों की तलाश में चले। रास्ते में ईली नदी के तट पर इनका सामना व्ह्सुन नामक कबीलों से हुआ। व्ह्सुन इनके भारी संख्या के सामने टिक न सके और परास्त हुए। ह्यूची ने उनके चरागाहों पर अपना अधिकार कर लिया। यहां से ह्यूची दो भागों में बंट गये, ह्यूची का जो भाग यहां रुक गया वो लघु ह्यूची कहलाया और जो भाग यहां से और पश्चिम दिशा में बढा वो महान ह्यूची कहलाया। महान ह्यूची का सामना शकों से भी हुआ। शकों को इन्होंने परास्त कर दिया और वे नये निवासों की तलाश में उत्तर के दर्रों से भारत आ गये। ह्यूची पश्चिम दिशा में चलते हुए अकसास नदी की घाटी में पहुँचे और वहां के शान्तिप्रिय निवासिओं पर अपना अधिकार कर लिया। सम्भवतः इनका अधिकार बैक्ट्रिया पर भी रहा होगा। इस क्ष्रेत्र में वे लगभग १० वर्ष ईपू तक शान्ति से रहे। चीनी लेखक फान-ये ने लिखा है कि यहां पर महान ह्यूची ५ हिस्सों में विभक्त हो गये - स्यूमी, कुई-शुआंग, सुआग्म,,। बाद में कुई-शुआंग ने क्यु-तिसी-क्यो के नेतृत्व में अन्य चार भागों पर विजय पा लिया और क्यु-तिसी-क्यो को राजा बना दिया गया। क्यु-तिसी-क्यो ने करीब ८० साल तक शासन किया। उसके बाद उसके पुत्र येन-काओ-ट्चेन ने शासन सम्भाला। उसने भारतीय प्रान्त तक्षशिला पर विजय प्राप्त किया। चीनी साहित्य में ऐसा विवरण मिलता है कि, येन-काओ-ट्चेन ने ह्येन-चाओ (चीनी भाषा में जिसका अभिप्राय है - बड़ी नदी के किनारे का प्रदेश जो सम्भवतः तक्षशिला ही रहा होगा)। यहां से कुई-शुआंग की क्षमता बहुत बढ़ गयी और कालान्तर में उन्हें कुषाण कहा गया। .

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कुषाण कला

कुषाण कला कुषाण वंश के काल में लगभग पहली शताब्दी के अंत से तीसरी शताब्दी तक उस क्षेत्र में सृजित कला का नाम है, जो अब मध्य एशिया, उत्तरी भारत, पाकिस्तान और अफ़्गानिस्तान के कुछ भागों को समाहित करता है। कुषाणों ने एक मिश्रित संस्कृति को बढ़ावा दिया, जो उनके सिक्कों पर बने विभिन्न देवी देवताओं, यूनानी-रोमन, ईरानी और भारतीय, के द्वारा सबसे अच्छी तरह समझी जा सकती है। उस काल की कलाकृतियों के बीच कम से कम दो मुख्य शैलीगत विविधताएँ देखी जा सकती हैं: ईरानी उत्पत्ति की शाही कला और यूनानी रोमन तथा भारतीय स्ट्रोटोन से मिश्रित बौद्ध कला। ईरानी उत्पत्ति की शाही कला के सर्वश्रेष्ठ उदाहरण सात कुषाण राजाओं द्वारा जारी स्वर्ण मुद्राएं, शाही कुषाण प्रतिकृतियाँ (उदाहरण: कनिष्क की प्रतिमा) और अफगानिस्तान में सुर्ख कोतल में प्राप्त राजसी प्रतिकृतियाँ हैं। कुषाण कलाकृतियों की शैली कठिन, पुरोहितवादी और प्रत्यक्ष है और वह व्यक्ति की आंतरिक शक्ति व गुणों को रेखांकित करती है। इसमें मानव शरीर अथवा वस्त्रलंकार के यथार्थवादी चित्रण के प्रति कम अथवा लगभग कोई रुचि नहीं है। यह उस दूसरी शैली के विपरीत है जो कुषाण कला की गांधार व मथुरा शैलियों की विशेषता है। .

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क्रीमिया

युक्रेन में क्रीमिया प्रायद्वीप की स्थिति (लाल रंग में) right ख़ान का महल क्रीमिया या क्राईमिया (अंग्रेज़ी: Crimea, क्राईमिया; रूसी: Крым, क्र्यिम; यूक्रेनी: Крим, क्रिम) पूर्वी यूरोप में युक्रेन देश का एक स्वशासित अंग है जो उस राष्ट्र की प्रशासन प्रणाली में एक 'स्वशासित गणराज्य' का दर्जा रखता है। यह कृष्ण सागर के उत्तरी तट पर स्थित एक प्रायद्वीप (पेनिनसुला) है। इस क्षेत्र के इतिहास में क्रीमिया का महत्व रहा है और बहुत से देशों और जातियों में इस पर क़ब्ज़े को लेकर झड़पें हुई हैं। 18 मार्च 2014 को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन क्रीमिया को रूसी संघ में मिलाने के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर दिए। इसके साथ ही क्रीमिया रूसी संघ का हिस्सा बन गया है। .

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क्वेटा

क्वेटा (उर्दू: کوئٹہ, पश्तो: کوټه, बलोची: کویته), पाकिस्तान के प्रांत बलूचिस्तान की राजधानी है साथ ही यह पाकिस्तान का नौवां सबसे बड़ा शहर है। इस शहर को पाकिस्तान का 'फलों का बगीचा' भी कहा जाता है क्योंकि यह शहर चारों ओर से फलों के बगीचों से घिरा है और यहां फलों और सूखे मेवों का उत्पादन, बड़े पैमाने पर किया जाता है। अपनी सुंदरता और भौगोलिक स्थिति के कारण अतीत में इस शहर को 'छोटा पेरिस' के रूप से भी जाना जाता था। समुद्रतल से क्वेटा की औसत ऊंचाई 1,680 मीटर (5,510 फुट) है जिस कारण यह पाकिस्तान का उच्च ऊंचाई पर स्थित एकमात्र प्रमुख शहर है। अनुमानत: शहर की आबादी लगभग 1140000 है। पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा के निकट उत्तर पश्चिमी बलूचिस्तान में स्थित, क्वेटा दोनों देशों के बीच व्यापार और संचार का केन्द्र है। शहर बोलन दर्रे के मार्ग पर स्थित है जो अतीत में दक्षिण एशिया और मध्य एशिया के बीच एकमात्र प्रवेशद्वार था। समय समय पर होने वाले अफगानी संघर्ष में क्वेटा ने पाकिस्तानी सशस्त्र बलों के लिए सैन्य रूप में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। .

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कैस्पियन सागर

कैस्पियन सागर (फ़ारसी:, दरया-ए-माज़ंदरान), एशिया की एक झील है जिसे अपने वृहत आकार के कारण सागर कहा जाता है। मध्य एशिया में स्थित यह झील क्षेत्रफल के हिसाब से विश्व की सबसे बड़ी झील है। इसका क्षेत्रफल ४,३०,००० वर्ग किलोमीटर तथा आयतन ७८,२०० घन किलोमीटर है। इसका कोई बाह्यगमन नहीं है और पानी सिर्फ़ वाष्पीकरण के द्वारा बाहर जाता है। ऐतिहासिक रूप से यह काला सागर के द्वारा बोस्फ़ोरस, ईजियन सागर और इस तरह भूमध्य सागर से जुड़ा हुआ माना जाता है जिसके कारण इसे ज्यरचना के आधार पर इसे झील कहना उचित नहीं है। इसका खारापन १.२ प्रतिशत है जो विश्व के सभी समुद्रों के कुल खारेपन का एक-तिहाई है। .

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कूचा राज्य

कूचा (Kucha या Kuqa) या कूचे या कूचार या (संस्कृत में) कूचीन मध्य एशिया की तारिम द्रोणी में तकलामकान रेगिस्तान के उत्तरी छोर पर और मुज़ात नदी से दक्षिण में स्थित एक प्राचीन राज्य का नाम था जो ९वीं शताब्दी ईसवी तक चला। यह तुषारी लोगों का राज्य था जो बौद्ध धर्म के अनुयायी थे और हिन्द-यूरोपी भाषा-परिवार की तुषारी भाषाएँ बोलते थे। कूचा रेशम मार्ग की एक शाखा पर स्थित था जहाँ से इसपर भारत, सोग़्दा, बैक्ट्रिया, चीन, ईरान व अन्य क्षेत्रों का बहुत प्रभाव पड़ा। आगे चलकर यह क्षेत्र तुर्की-मूल की उईग़ुर ख़ागानत के क़ब्ज़े में आ गया और कूचा राज्य नष्ट हो गया। .

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कूमीस

रूस में कूमीस की एक बोतल और गिलास कूमीस (किरगिज़: Кымыз, अंग्रेज़ी: Kumis) घोड़ी के दूध को किण्वित (फ़रमॅन्ट​) करके बनाए जाने वाले मध्य एशिया के स्तेपी क्षेत्र के एक पारम्परिक पेय को कहते हैं। किण्वन की वजह से घोड़ी के दूध में प्राकृतिक रूप से मौजूद लैक्टोस चीनी की कुछ मात्रा शराब में बदल जाती है और इस प्रक्रिया में कुछ कार्बन डाई-ऑक्साइड बनने से दूध में गैस के बुदबुदे भी बन जाते हैं। कूमीस को मंगोलिया में ऐरग (Айраг, Airag) कहा जाता है। अन्य शराबों की तुलना में कूमीस कम नशीली होती है और इसमें केवल २% शराब होती है।, Iain Gately, Penguin, 2009, ISBN 978-1-59240-464-3,...

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कोड गीअस

, अक्सर बस कोड गीअस के रूप में ही संदर्भित किया जाने वाला, सनराइज़ निर्मित, गोरो तानिगुची द्वारा निर्देशित तथा इकिरो ओकोउंची लिखित, क्लैम्प द्वारा डिज़ाइन किए गए, चरित्रों (पात्रों) सहित, एक जापानी एनिमेशन सिरीज़ है। कोड गीअस पहली बार जापान में एमबीएस (MBS) पर 5 अक्टूबर 2006 से 28 जुलाई 2007 तक प्रदर्शित किया गया। इस सीरिज की अगली कड़ी एमबीएस (MBS) और टीबीएस (TBS) पर 6 अप्रैल 2008 से 28 सितम्बर 2008 तक प्रदर्शित की गई। दोनों ही सत्रों में इसने टोक्यो इंटरनैशनल एनिमे फेयर (Tokyo International Anime Fair), एनिमेज एनिमे ग्रैंडस प्रिक्स (Animage Anime Grand Prix) तथा एनिमेशन कोब कार्यक्रमों में कई पुरस्कार जीते। .

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कोन्या-उरगेन्च

सोल्तान तेकेश मक़बरा गुतलुक-तेमिर मीनार कोन्या उरगेन्च या कोन्ये उरगेन्च (तुर्कमेन: Köneürgenç, अंग्रेज़ी: Konye-Urgench) मध्य एशिया के तुर्कमेनिस्तान देश के पूर्वोत्तरी भाग में उज़बेकिस्तान की सरहद के पास स्थित एक बस्ती है। यह उरगेन्च की प्राचीन नगरी का स्थल है जिसमें १२वीं सदी के ख़्वारेज़्म क्षेत्र की राजधानी के खँडहर मौजूद हैं। २००५ में यूनेस्को ने इन खँडहरों को एक विश्व धरोहर स्थल घोषित कर दिया।, UNESCO World Heritage Center, UNESCO, Accessed 19 फ़रवरी 2011 .

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कोयतेनदाग़ शृंखला

कोयतेनदाग़ (तुर्कमेनी: Köýtendag), जिन्हें कुगितांगताऊ (Kugitangtau) भी कहते हैं, मध्य एशिया में दक्षिण-पूर्वी तुर्कमेनिस्तान में स्थित पामीर-अलाय पर्वतों की एक शाखा है। यह तुर्कमेनिस्तान की उज़बेकिस्तान के सुरख़ानदरिया प्रान्त के साथ लगी सरहद पर स्थित हैं। इस शृंखला का सबसे ऊँचा पहाड़ ३,१३९ मीटर लम्बा 'अयिरिबाबा' (Aýrybaba) है, जो पूरे तुर्कमेनिस्तान का सबसे ऊँचा पर्वत भी है। कोयतेनदाग़ प्राकृतिक आरक्षित क्षेत्र भी इन्ही पर्वतों के इलाक़े में स्थित है। .

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कोस्तानय प्रांत

कोस्तानय​ शहर का एक दृश्य कोस्तानय​ प्रांत (कज़ाख़: Қостанай облысы, अंग्रेज़ी: Kostanay Province या Qostanay Province) मध्य एशिया के क़ाज़ाख़स्तान देश का एक प्रांत है। इसकी राजधानी भी कोस्तानय​ नाम का शहर ही है। इसके अलावा रुदनीय (Рудный, Rudniy) भी इस राज्य का एक अन्य प्रमुख शहर है। .

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अतिर​ऊ प्रांत

अतिरऊ प्रांत (कज़ाख़: Атырау облысы, अंग्रेज़ी: Atyrau Province) मध्य एशिया के क़ाज़ाख़स्तान देश का एक प्रांत है। इसकी राजधानी भी अतिरऊ नाम का शहर ही है। अतिरऊ प्रांत देश के पश्चिमी हिस्से में कैस्पियन सागर के पूर्वोत्तरी किनारे पर स्थित है। .

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अन्दीझ़ान

अन्दीझ़ान। अन्दीझ़ान या अन्दीजान (उज़बेक: Андижон, रूसी: Андижан, चग़ताई:, अंग्रेज़ी: Andijan) मध्य एशिया के उज़्बेकिस्तान देश का चौथा सबसे बड़ा शहर है और उस देश के अन्दीझ़ान प्रान्त की राजधानी है। यह फ़रग़ना वादी में उज़्बेकिस्तान की किर्गिज़स्तान की सीमा के साथ स्थित है। सन् १९९९ की जनगणना में इसकी आबादी ३,२३,९०० अनुमानित की गई थी। यह भारत के मुग़ल साम्राज्य के संस्थापक और पहले सम्राट बाबर का जन्मस्थल भी है।, Jl Mehta, Sterling Publishers Pvt.

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अन्दीझ़ान प्रान्त

उज़बेकिस्तान के नक़्शे में अन्दीझ़ोन प्रान्त (लाल रंग में) अन्दीझ़ान प्रान्त (उज़बेक: Андижон вилояти, अन्दीझ़ोन विलोयती; अंग्रेज़ी: Andijan Province) मध्य एशिया में स्थित उज़बेकिस्तान देश का एक विलायात (प्रान्त) है जो उस देश के सुदूर पूर्वी भाग की फ़रग़ना घाटी में स्थित है। प्रान्त का कुल क्षेत्रफल ४,२०० वर्ग किमी है और २००५ में इसकी अनुमानित आबादी १८,९९,००० थी। यह उज़बेकिस्तान का सबसे घनी आबादी वाला राज्य है। इसकी राजधानी अन्दीझ़ान शहर है।, Нурислам Тухлиев, Алла Кременцова, Ozbekiston milliy ensiklopediasi, 2007 .

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अफ़शारी राजवंश

अफ़शारी राजवंश (سلسله افشاریان, सिलसिला अफ़शारियान) १८वीं सदी ईसवी में तुर्क-मूल का ईरान में केन्द्रित राजवंश था। इसके शासक मध्य एशिया के ऐतिहासिक ख़ोरासान क्षेत्र से आये अफ़शार तुर्की क़बीले के सदस्य थे। अफ़शारी राजवंश की स्थापना सन् १७३६ ई में युद्ध में निपुण नादिर शाह ने करी जिसनें उस समय राज कर रहे सफ़वी राजवंश से सत्ता छीन ली और स्वयं को शहनशाह-ए-ईरान घोषित कर लिया हालांकि वह ईरानी मूल का नहीं था। उसके राज में ईरान सासानी साम्राज्य के बाद के अपने सबसे बड़े विस्तार पर पहुँचा। उसका राज उत्तर भारत से लेकर जॉर्जिया तक फैला हुआ था। .

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अफ़ग़ानिस्तान

अफ़ग़ानिस्तान इस्लामी गणराज्य दक्षिणी मध्य एशिया में अवस्थित देश है, जो चारो ओर से जमीन से घिरा हुआ है। प्रायः इसकी गिनती मध्य एशिया के देशों में होती है पर देश में लगातार चल रहे संघर्षों ने इसे कभी मध्य पूर्व तो कभी दक्षिण एशिया से जोड़ दिया है। इसके पूर्व में पाकिस्तान, उत्तर पूर्व में भारत तथा चीन, उत्तर में ताजिकिस्तान, कज़ाकस्तान तथा तुर्कमेनिस्तान तथा पश्चिम में ईरान है। अफ़ग़ानिस्तान रेशम मार्ग और मानव प्रवास का8 एक प्राचीन केन्द्र बिन्दु रहा है। पुरातत्वविदों को मध्य पाषाण काल ​​के मानव बस्ती के साक्ष्य मिले हैं। इस क्षेत्र में नगरीय सभ्यता की शुरुआत 3000 से 2,000 ई.पू.

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अफ़ग़ानिस्तान के प्रांत

अफ़्ग़ानिस्तान के प्रांत और स्वतन्त्र शहर (संख्यांक तालिका से मिलाएँ) अफ़्ग़ानिस्तान के प्रान्त अफ़्ग़ानिस्तान के मुख्य प्रशासनिक विभाग हैं। मध्य एशिया के बहुत से अन्य देशों की तरह अफ़्ग़ानिस्तान में भी प्रान्तों को 'विलायत' बुलाया जाता है, मसलन हेलमंद प्रान्त का औपचारिक नाम 'विलायत-ए-हेलमंद' है। सन् २००४ में अफ़्ग़ानिस्तान में चौंतीस प्रान्त थे। हर प्रान्त की अध्यक्षता एक राज्यपाल करता है और हर प्रान्त अफ़्ग़ान संसद के ऊपरी सदन में (जिसे पश्तो में 'मेशेरानो जिरगा', यानि 'बुज़ुर्गों की सभा' कहते हैं) दो सदस्य भेजता है। .

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अब्द अल-मालिक बिन मरवान

अब्द अल-मलिक बिन मरवान (अरबी:, अंग्रेज़ी: ‘Abd al-Malik ibn Marwān) इस्लाम के शुरूआती काल में उमय्यद ख़िलाफ़त का एक ख़लीफ़ा था। वह अपने पिता मरवान प्रथम के देहांत होने पर ख़लीफ़ा बना। अब्द अल-मलिक एक शिक्षित और निपुण शासक था, हालांकि उसके दौर में बहुत सी राजनीतिक मुश्किलें बनी रहीं। १४वीं सदी के मुस्लिम इतिहासकार इब्न ख़लदून के अनुसार 'अब्द अल-मलिक बिन मरवान सबसे महान अरब और मुस्लिम ख़लीफाओं में से एक है। राजकीय मामलों को सुव्यवस्थित करने के लिए वह मोमिनों के सरदार उमर बिन अल-ख़त्ताब के नक़्श-ए-क़दम पर चला।' .

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अरबी प्रायद्वीप

अरबी प्रायद्वीप अरबी प्रायद्वीप (अरबी: شبه الجزيرة العربية सिब्ह अल-जजी़रा अल-अरबिया या جزيرة العرب जजी़रत अल-अरब) दक्षिण पश्चिम एशिया का एक प्रायद्वीप है। यह एशिया एवं अफ्रीका की संधि पर है। यह मुख्यतः रेगिस्तान है। यह मध्य एशिया का एक महत्वपूर्ण भाग है, एवं अपने खनिज तेल एवं प्राकृतिक गैस के विशाल भण्डार के कारण महत्वपूर्ण राजनैतिक भूमिका निभाता है। प्रायद्वीप के तट, पश्चिम छोर पर लाल सागर एवं अकाबा की खाडी़, दक्षिण-पश्चिम में अरब सागर (हिंद महासागर का भाग), उत्तर-पश्चिम में ओमान की खाडी़ एवं हॉर्मज़ जलडमरुमध्य तथा फारस की खाडी़ हैं। इसकी उत्तरी सीमा ज़गरोस कोलीजज्ञ जो़न है, जहाँ अरबी प्लेट एवं एशिया के बीच संयोजन/टक्कर होने से महाद्वीपीय उठाव है। यह सीरियाई रेगिस्तान से जा मिलता है, बिना किसी रेखांकित सीमा के। भौगोलिक दृष्टि से अरबी प्रायद्वीप में ईराक एवं सीरिया के भाग आते हैं। राजनैतिक रूप से प्रायद्वीप को शेष एशिया से अलग करता है उत्तरी सीमाएं। ये उत्तरी सीमाएं कुवैत एवं सऊदी अरब की सीमाएं। निम्न राष्ट्र इस प्रायद्वीप के भाग माने जाते हैं.

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अरल सागर

1960 में झील का आकार, इस मानचित्र में वर्तमान देशों की राजनैतिक सीमाएं दिखाई गई हैं। वे देश जिनसे भूमि द्वारा विसर्जित पानी इसमें आता है पीले रंग में दिखाए गए हैं। अरल सागर या अराल सागर (कज़ाख़: Арал Теңізі, उज़बेक: Orol dengizi, रूसी: Аральскοе мοре, ताजिक/फ़ारसी: दरिय (ओचा)-ए-खवारज़्म) मध्य एशिया में स्थित एक झील है जिसके बड़े आकार के कारण इसे सागर कहा जाता है, पर अब दिनोदिन इसका आकार घटता जा रहा है। स्थानीय भाषाओं में इसका शाब्दिक अर्थ है 'द्वीपों की झील', जो इस झील में एक समय पर दिखने वाले लगभग १५०० टापुओं के आधार पर नामांकित थी। सन् १९६० में सोवियत प्रशासन ने इसमें विसर्जित होने वाली दो नदियों - आमू दरिया और सिर दरिया को मरुभूमि सिंचाई के लिए विमार्गित करने का निर्णय लिया, जिसके बाद से अरल सागर घटा और तीन अलग-अलग भागों में बंट गया। इसके फलस्वरूप आने वाले ४० सालों में अराल सागर का ९० प्रतिशत जल खत्म हो गया तथा ७४ प्रतिशत से अधिक सतह सिकुड़ गई और इसका आकार १९६० के इसके आकार का सिर्फ १० प्रतिशत ही रह गया है। .

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अलमाती

अलमाती(कज़ाख़: Алматы, अंग्रेज़ी: Almaty) मध्य एशिया के कज़ाख़स्तान देश की भूतपूर्व राजधानी और उस देश का सबसे बड़ा शहर है। कज़ाख़ भाषा में 'अलमाती' शब्द का मतलब 'सेबों का शहर' होता है। सोवियत संघ के ज़माने में सन् १९२९ से १९९१ तक यह शहर 'अल्मा अता' (Alma Ata, अर्थ: 'सेब का पिता') के नाम से उसे राष्ट्र के 'कज़ाख़ सोवियत समाजवादी गणतंत्र' (Kazakh SSR) विभाग की राजधानी हुआ करता था। कज़ाख़स्तान की आज़ादी के बाद १९९१ से १९९७ तक यह उस देश की राजधानी रहा लेकिन १९९७ में अस्ताना कज़ाख़स्तान की नई राजधानी बना। इसके बावजूद अलमाती देश का आर्थिक केंद्र है और इसमें पूरे राष्ट्र की ९% आबादी बसती है। अलमाती दक्षिणी कज़ाख़स्तान में किरगिज़स्तान की सीमा के पास के पहाड़ी इलाक़े में स्थित है। रूसी साम्राज्य के दौर में १८६७ से १९२१ तक इसे विएरनी (Верный, Vierny) के नाम से जाना जाता था, जिसका अर्थ रूसी भाषा में 'वफ़ादार' होता है।, Bradley Mayhew, Lonely Planet, 2007, ISBN 978-1-74104-614-4,...

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अलमाती प्रांत

अलमाती प्रांत (कज़ाख़: Алматы облысы, अंग्रेज़ी: Almaty Province) मध्य एशिया के क़ाज़ाख़स्तान देश का एक प्रांत है। इसकी राजधानी तालदीकोरग़ान नाम का शहर है। अलमाती प्रांत का क्षेत्र क़ाज़ाख़स्तान की राष्ट्रीय राजधानी अलमाती को घेरे हुए है। .

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अलाय पर्वत शृंखला

इस नक़्शे में अलाय (Alai) पर्वत देखे जा सकते हैं अलाय पर्वत शृंखला (किरगिज़: Алай тоо кыркасы, अंग्रेज़ी: Alay Mountains) मध्य एशिया में किर्गिज़स्तान के तियान शान पर्वतों से पश्चिम में ताजिकिस्तान तक ३५० किमी की लम्बाई तय करने वाली पामीर-अलाय पर्वतों की एक शाखा है। इस शृंखला का सबसे ऊँचा पहाड़ ५,५४४ मीटर लम्बा 'पिक तन्दिकूल' (пик Тандыкуль, Pik Tandykul) है। इस शृंखला की दक्षिणी ढलानों से कई नदी-झरने वख़्श नदी में एकत्रित होते हैं जो आमू दरिया की एक उपनदी है। इसकी उत्तरी ढलानों से उभरने वाले झरनों का पानी फरग़ना वादी की तरफ़ उतरता है और सिर दरिया की उपनदियों को जल देता है। .

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अलाय वादी

अलाय वादी और अलाय-पार पर्वत अलाय वादी (किरगिज़: Алай өрөөнү, अंग्रेज़ी: Alay Valley) मध्य एशिया के किर्गिज़स्तान देश के ओश प्रांत के दक्षिणी भाग में पूर्व से पश्चिम दिशा में विस्तृत एक चौड़ी और शुष्क वादी है। यह घाटी पूर्व-पश्चिम दिशा में १८० किमी लम्बी और उत्तर-दक्षिण दिशा में ४० किमी चौड़ी है और इसकी औसत ऊँचाई २५००-३००० मीटर है। घाटी के उत्तर में अलाय पर्वत हैं जिनकी ढलानें फ़रग़ना वादी पर अंत होती हैं। अलाय वादी के दक्षिण में अलाय-पार पर्वत हैं जो ताजिकिस्तान के साथ लगी सरहद पर स्थित हैं। पूर्व में ताउनमुरुन दर्रा (Taunmurun Pass) है जहाँ से चीन की सरहद पर स्थित इरकेश्तम (Irkeshtam) नाम की आख़री किरगिज़ बस्ती है। अलाय वादी की परिस्थितियाँ यहाँ बसने वालों के लिए काफ़ी कठिन हैं। यहाँ से गुज़रे एक यात्री ने इस वादी का ब्यौरा देते हुए कहा कि 'बिना नौकरियों के, कठोर सर्दियों और खेती के लिए ख़राब हालत में यहाँ जीवन बहुत मुश्किल है और यहाँ के अधिकतर पुरुष अन्य जगहों पर काम ढूँढने जा चुके हैं'।, Laurence Mitchell, pp.

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अलाय-पार पर्वत शृंखला

अलाय वादी और अलाय-पार पर्वत अलाय-पार पर्वत शृंखला (किरगिज़: Чоң Алай кырка тоосу, अंग्रेज़ी: Trans-Alay Mountains) मध्य एशिया में पामीर पर्वतों की उत्तरतम शाखा है। यह उस स्थान पर स्थित हैं जहाँ पामीर पहाड़ और तियान शान के पर्वत आकर मिलते हैं। अलाय-पार पर्वत किर्गिज़स्तान के ओश प्रांत और ताजिकिस्तान के कूहिस्तोनी-बदख़्शान स्वशासित प्रांत के बीच की सरहद पर खड़े हैं। इनसे उत्तर में अलाय वादी और दक्षिण में मुस्कु नदी है। यह अलाई पर्वत से ५,००० फुट ऊँचा है तथा लाल बलुआ पत्थर का बना है। इसकी चोटियों में माउंट स्टालिन (२४,५८९ फुट) एवं माउंट लेनिन (२३,३८३ फुट) उल्लेखनीय हैं। अलाय-पार शृंखला का सबसे ऊँचा पहाड़ ७,१३४ मीटर (२३,४०६ फ़ुट) ऊँचा लेनिन पर्वत (Lenin Peak) है।Ошская область:Энциклопедия, Chief Editorial Board of Kyrgyz Soviet Encyclopedia, Page 448, 1987 यह पर्वत अत्यधिक हिमाच्छादित रहता है। इसके दक्षिण और पामीर का पठार है। इस वर्ग की अन्य श्रेणियों की तरह यह भी तृतीय कल्प (tertiary period) का माना जाता है, परंतु वास्तव में ये सभी श्रेणियाँ बहुत पहले की निर्मित हैं जो बाद में क्षरण के कारण प्राय: समभूमि अवस्था में पहुँच गई और अंत में अल्पाइन उत्थान के समय ऊपर उठ गईं। .

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अल्ताई पर्वत शृंखला

अल्ताई पर्वत शृंखला का नक़्शा अल्ताई पर्वत शृंखला मध्य एशिया की एक बड़ी पर्वत शृंखला है जो उस क्षेत्र से गुज़रती है जहाँ रूस, चीन, कज़ाख़िस्तान और मंगोलिया मिलते हैं। मध्य एशिया की दो महत्वपूर्ण नदियाँ- इरतिश और ओब - इन्ही पहाड़ों से शुरू होती हैं। अल्ताई पर्वत क्षेत्र को ही तुर्की भाषा परिवार और भाषावैज्ञानिकों द्वारा प्रस्तावित अल्ताई भाषा परिवार की जन्मभूमि बताया जाता है। अल्ताई पर्वत पश्चिमोत्तर में साइबेरिया की सायन पर्वत शृंखला से आरम्भ होते हैं और दक्षिण-पूर्व में धीरे-धीरे छोटे होकर गोबी के ऊंचे रेगिस्तानी पठार में जा मिलते हैं। तुर्की भाषाओँ में "अल्ताई" शब्द का अर्थ "सोने के पहाड़" है और यह दो शब्दों को जोड़कर बनता है - "अल" (जिसका मतलब "सोना" है) और ताऊ (यानि "पहाड़").

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अल्ताई भाषा-परिवार

अल्ताई भाषा परिवार का फैलाव अल्ताई पर्वत क्षेत्र में शुरू हुईं अल्ताई (अंग्रेज़ी: Altaic languages, ऑल्टेइक लैन्गवेजिज़) एक भाषा-परिवार है जिसमें तुर्की भाषाएँ, मंगोल भाषाएँ, तुन्गुसी भाषाएँ, जापानी भाषाएँ और कोरियाई भाषा आती हैं। अल्ताई भाषाएँ यूरेशिया के बहुत ही विस्तृत क्षेत्र में बोली जाती हैं जो पूर्वी यूरोप से लेकर मध्य एशिया से होता हुआ सीधा जापान तक जाता है। इस परिवार में कुल मिलकर लगभग ७० जीवित भाषाएँ आती हैं और इन्हें बोलने वालों की तादाद वर्तमान विश्व में लगभग ५० करोड़ है। .

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अलेक्सांदर द्वितीय

रूस का ज़ार अलेक्सान्दर द्वितीय अलेक्सांदर द्वितीय (रूसी: Алекса́ндр II Никола́евич; १८१२ - १८८१) रूस का ज़ार (१८५५ से ८१) था। वह निकोलस प्रथम का ज्येष्ठ पुत्र था। .

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अश्क़ाबाद

अश्क़ाबाद या अश्गाबात (तुर्कमेन: Aşgabat, फ़ारसी:; रूसी: Ашхабад, अंग्रेज़ी: Ashgabat) मध्य एशिया के तुर्कमेनिस्तान राष्ट्र की राजधानी और सबसे बड़ी नगरी है। २००१ की जनगणना में इसकी आबादी ६,९५,३०० थी और २००९ में इसकी अनुमानित आबादी १० लाख थी। अश्क़ाबाद काराकुम रेगिस्तान और कोपेत दाग़ पर्वत शृंखला के बीच में स्थित है। इसमें रहने वाले ज्यादातर लोग तुर्कमेन जाति के हैं हालाँकि यहाँ रूसी, अर्मेनियाई और अज़ेरियों के समुदाय भी रहते हैं। इस नगर का नाम फ़ारसी के 'इश्क़' और 'आबाद' शब्दों को मिलकर बना है और इसका अर्थ 'इश्क़ का शहर' है।, Bradley Mayhew, Lonely Planet, 2007, ISBN 978-1-74104-614-4,...

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अशोक के अभिलेख

अशोक के शिलालेख पूरे भारतीय उपमहाद्वीप और अफ़्ग़ानिस्तान में मिलें हैं ब्रिटिश संग्राहलय में छठे शिलालेख का एक हिस्सा अरामाई का द्विभाषीय शिलालेख सारनाथ के स्तम्भ पर ब्राह्मी लिपि में शिलालेख मौर्य राजवंश के सम्राट अशोक द्वारा प्रवर्तित कुल ३३ अभिलेख प्राप्त हुए हैं जिन्हें अशोक ने स्तंभों, चट्टानों और गुफ़ाओं की दीवारों में अपने २६९ ईसापूर्व से २३१ ईसापूर्व चलने वाले शासनकाल में खुदवाए। ये आधुनिक बंगलादेश, भारत, अफ़्ग़ानिस्तान, पाकिस्तान और नेपाल में जगह-जगह पर मिलते हैं और बौद्ध धर्म के अस्तित्व के सबसे प्राचीन प्रमाणों में से हैं। इन शिलालेखों के अनुसार अशोक के बौद्ध धर्म फैलाने के प्रयास भूमध्य सागर के क्षेत्र तक सक्रिय थे और सम्राट मिस्र और यूनान तक की राजनैतिक परिस्थितियों से भलीभाँति परिचित थे। इनमें बौद्ध धर्म की बारीकियों पर ज़ोर कम और मनुष्यों को आदर्श जीवन जीने की सीखें अधिक मिलती हैं। पूर्वी क्षेत्रों में यह आदेश प्राचीन मगधी भाषा में ब्राह्मी लिपि के प्रयोग से लिखे गए थे। पश्चिमी क्षेत्रों के शिलालेखों में खरोष्ठी लिपि का प्रयोग किया गया। एक शिलालेख में यूनानी भाषा प्रयोग की गई है, जबकि एक अन्य में यूनानी और अरामाई भाषा में द्विभाषीय आदेश दर्ज है। इन शिलालेखों में सम्राट अपने आप को "प्रियदर्शी" (प्राकृत में "पियदस्सी") और देवानाम्प्रिय (यानि देवों को प्रिय, प्राकृत में "देवानम्पिय") की उपाधि से बुलाते हैं। .

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अस्ताना

बेयतेरेक मीनार, जो अस्ताना शहर की निशानी है अंतरिक्ष से अस्ताना का दृश्य अस्ताना(कज़ाख़: Астана, अंग्रेज़ी: Astana) मध्य एशिया के कज़ाख़स्तान देश की राजधानी और उस देश का दूसरा सबसे बड़ा शहर है। इसे सोवियत संघ के ज़माने में सन् १९६१ तक अकमोलिंस्क (Акмолинск, Akmolinsk) और उसके बाद सन् १९९२ तक त्सेलिनोग्राद​ (Целиноград, Tselinograd) बुलाया जाता था। कज़ाख़स्तान की आज़ादी के बाद इसे सन् १९९८ तक अकमोला (Ақмола, Akmola) बुलाया गया। यह शहर पूरी तरह अकमोला प्रांत से घिरा हुआ है लेकिन प्रशासनिक रूप से इसे एक अलग संघीय शहर का दर्जा मिला हुआ है। .

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अवस्ताई भाषा

अवस्ताई भाषा में अनुहावैती गाथा का यस्न 28.1 अवस्ताई एक पूर्वी ईरानी भाषा है जिसका ज्ञान आधुनिक युग में केवल पारसी धर्म के ग्रंथों, यानि अवस्ता, के द्वारा पहुँच पाया है। इतिहासकारों का मानना है के मध्य एशिया के बॅक्ट्रिया और मार्गु क्षेत्रों में स्थित याज़ संस्कृति में यह भाषा या इसकी उपभाषाएँ 1500-1100 ईसापूर्व के काल में बोली जाती थीं। क्योंकि यह एक धार्मिक भाषा बन गई, इसलिए इस भाषा के साधारण जीवन से लुप्त होने के पश्चात भी इसका प्रयोग नए ग्रंथों को लिखने के लिए होता रहा। .

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अग्निशस्त्र

अग्निशस्त्र (firearm, फ़ायर-आर्म) हाथों में उठाकर चला सकने वाली बन्दूक को कहते हैं। यह एक नलीदार शस्त्र होता है जो धमाके के साथ एक या एक से अधिक गोलियाँ या अन्य प्रक्षेप्य (प्रोजेक्टाइल) किसी मनचाहे निशाने की ओर तीव्र गति से चला देता है। अग्निशस्त्रों का आविष्कार १३वीं शताब्दी ईसवी में चीन में हुआ था लेकिन वे धीरे-धीरे पूर्वी एशिया, भारतीय उपमहाद्वीप, मध्य एशिया, मध्य पूर्व और यूरोप में फैल गये। पुराने ज़माने में काले रंग का बारूद नोदक के लिये प्रयोग होता था लेकिन आधुनिक काल में बिना धुएँ वाले विस्फोटक पाउडर प्रयोग होने लगे। .

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अकतोबे प्रांत

अकतोबे प्रांत (कज़ाख़: Ақтөбе облысы, अंग्रेज़ी: Aktobe Province) मध्य एशिया के क़ाज़ाख़स्तान देश का एक प्रांत है। इसकी राजधानी भी अकतोबे नाम का शहर ही है। इस प्रांत से इलेक नदी (Ilek river) निकलती है जो यूराल नदी की एक महत्त्वपूर्ण उपनदी है। इस प्रान्त में तेल की खाने हैं और उनसे प्रांत को अच्छी आमदनी हो जाती है। सोवियत संघ के ज़माने में यहाँ की आलिया मोल्दागुलोवा (Али́я Молдагу́лова, Aliya Moldagulova) नामक स्त्री सोवियत लाल सेना में एक मशहूर निशानेबाज़ थी और प्रांत में जगह-जगह उसके नाम के स्मारक हैं।, Paul Brummell, Bradt Travel Guides, 2012, ISBN 978-1-84162-369-6,...

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अकमोला प्रांत

अंगूठाकार अकमोला प्रांत (कज़ाख़: Ақмола облысы, अंग्रेज़ी: Akmola Province) मध्य एशिया के क़ाज़ाख़स्तान देश का एक प्रांत है। इसकी राजधानी कोकशेताऊ शहर है। क़ाज़ाख़स्तान की राष्ट्रीय राजधानी, अस्ताना, पूरी तरह अकमोला के अन्दर आती है लेकिन प्रशासनिक रूप से वह इस राज्य का भाग नहीं है। इस प्रान्त में सोना और कोयला ज़मीन से निकालने का काम चलता है। सन् २००९ की जनगणना में इस प्रांत के ४३.५% लोग कज़ाख़ समुदाय के थे जबकि ३६.५% लोग रूसी समुदाय के थे। .

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अक्साई चिन

अक्साई चिन या अक्सेचिन (उईग़ुर:, सरलीकृत चीनी: 阿克赛钦, आकेसैचिन) चीन, पाकिस्तान और भारत के संयोजन में तिब्बती पठार के उत्तरपश्चिम में स्थित एक विवादित क्षेत्र है। यह कुनलुन पर्वतों के ठीक नीचे स्थित है। ऐतिहासिक रूप से अक्साई चिन भारत को रेशम मार्ग से जोड़ने का ज़रिया था और भारत और हज़ारों साल से मध्य एशिया के पूर्वी इलाकों (जिन्हें तुर्किस्तान भी कहा जाता है) और भारत के बीच संस्कृति, भाषा और व्यापार का रास्ता रहा है। भारत से तुर्किस्तान का व्यापार मार्ग लद्दाख़ और अक्साई चिन के रास्ते से होते हुए काश्गर शहर जाया करता था।, Prakash Charan Prasad, Abhinav Publications, 1977, ISBN 978-81-7017-053-2 १९५० के दशक से यह क्षेत्र चीन क़ब्ज़े में है पर भारत इस पर अपना दावा जताता है और इसे जम्मू और कश्मीर राज्य का उत्तर पूर्वी हिस्सा मानता है। अक्साई चिन जम्मू और कश्मीर के कुल क्षेत्रफल के पांचवें भाग के बराबर है। चीन ने इसे प्रशासनिक रूप से शिनजियांग प्रांत के काश्गर विभाग के कार्गिलिक ज़िले का हिस्सा बनाया है। .

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उचकुदुक

उचकुदुक (उज़बेक: Учқудуқ, उचक़ुदुक़; अंग्रेज़ी: Uchkuduk) मध्य एशिया के उज़बेकिस्तान देश के नवोई प्रान्त का एक शहर है। भौगोलिक निर्देशांकों के हिसाब से यह नगर ४२°९'२४ उत्तर और ६३°३३'२० पूर्व में स्थित है। सन् २००७ में इसकी आबादी २७,००० से थोड़ी ज़्यादा अनुमानित की गई थी। यह शहर किज़िल कुम रेगिस्तान के बीच में पड़ता है। सोवियत संघ के ज़माने में यह एक 'बंद शहर' था (यानि बहार वालों को यहाँ आने पर पाबंदी थी) क्योंकि यहाँ से सोवियत संघ के परमाणु हथियारों के लिए युरेनियम की खाने चलाई जाती थी।, OECD Nuclear Energy Agency, OECD Publishing, 2006, ISBN 978-92-64-02806-7,...

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उत्तर भारत

उत्तरी भारत में अनेक भौगोलिक क्षेत्र आते हैं। इसमें मैदान, पर्वत, मरुस्थल आदि सभी मिलते हैं। यह भारत का उत्तरी क्षेत्र है। प्रधान भौगोलिक अंगों में गंगा के मैदान और हिमालय पर्वतमाला आती है। यही पर्वतमाला भारत को तिब्बत और मध्य एशिया के भागों से पृथक करती है। उत्तरी भारत मौर्य, गुप्त, मुगल एवं ब्रिटिश साम्राज्यों का ऐतिहासिक केन्द्र रहा है। यहां बहुत से हिन्दू तीर्थ जैसे पर्वतों में गंगोत्री से लेकर मैदानों में वाराणासी तक हैं, तो मुस्लिम तीर्थ जैसे अजमेर.

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उत्तर क़ज़ाख़स्तान प्रांत

उत्तर क़ज़ाख़स्तान प्रांत (कज़ाख़: Солтүстік Қазақстан облысы, अंग्रेज़ी: North Kazakhstan Province) मध्य एशिया के क़ाज़ाख़स्तान देश का एक प्रांत है। इसकी राजधानी पेत्रोपाव्ल (Petropavl) नाम का शहर है। इस प्रांत की उत्तरी सीमाएँ रूस से लगती हैं। इशिम नदी (उर्फ़ एसिल नदी), जो इरतिश नदी की एक महत्वपूर्ण उपनदी है, दक्षिण में काराग़ान्दी प्रांत से उत्पन्न होने के बाद इस प्रांत से होती हुई रूस में चली जाती है। कुछ समीक्षकों के अनुसार क़ज़ाख़स्तान का यह भाग रहन-सहन और संस्कृति में साइबेरिया जैसा अधिक और मध्य एशिया जैसा कम लगता है।, Paul Brummell, Bradt Travel Guides, 2012, ISBN 978-1-84162-369-6,...

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उत्तरी रेशम मार्ग

टकलामकान रेगिस्तान उत्तरी रेशम मार्ग (Northern Silk Road) वर्तमान जनवादी गणतंत्र चीन के उत्तरी क्षेत्र में स्थित एक ऐतिहासिक मार्ग है जो चीन की प्राचीन राजधानी शिआन से पश्चिम की ओर जाते हुए टकलामकान रेगिस्तान से उत्तर निकलकर मध्य एशिया के प्राचीन बैक्ट्रिया और पार्थिया राज्य और फिर और भी आगे ईरान और प्राचीन रोम पहुँचता था। यह मशहूर रेशम मार्ग की उत्तरतम शाखा है और इसपर हज़ारों सालों से चीन और मध्य एशिया के बीच व्यापारिक, फ़ौजी और सांस्कृतिक गतिविधियाँ होती रहीं हैं। पहली सहस्राब्दी (यानि हज़ार साल) ईसापूर्व में चीन के हान राजवंश ने इस मार्ग को चीनी व्यापारियों और सैनिकों के लिए सुरक्षित बनाने के लिए यहाँ पर सक्रीय जातियों के खिलाफ़ बहुत अभियान चलाए जिस से इस मार्ग का प्रयोग और विस्तृत हुआ। चीनी सम्राटों ने विशेषकर शियोंगनु लोगों के प्रभाव को कम करने के बहुत प्रयास किये।, Frances Wood, University of California Press, 2004, ISBN 978-0-520-24340-8,...

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उरगेन्च

उरगेन्च का आमू दरिया पर पुल उरगेन्च (उज़बेक: Урганч, अंग्रेज़ी: Urgench) मध्य एशिया के उज़बेकिस्तान देश के ख़ोरज़्म प्रान्त की राजधानी है। यह प्रसिद्ध बुख़ारा शहर से ४५० किमी पश्चिम में किज़िल कुम रेगिस्तान के पार आमू दरिया और शवत नहर के किनारे बसा हुआ है। .

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उज़बेक

उज़बेक एक बहुविकल्पी शब्द है, जिसके कई अर्थ हो सकते हैं.

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उज़बेक लोग

दो उज़बेक बच्चे उज़बेक मध्य एशिया में बसने वाली एक तुर्की-भाषी जाति का नाम है। उज़बेकिस्तान की अधिकाँश आबादी इसी नसल की है, हालाँकि उज़बेक समुदाय बहुत से अन्य देशों में भी मिलते हैं, जैसे कि अफ़्ग़ानिस्तान, ताजिकिस्तान, किर्गिज़स्तान, तुर्कमेनिस्तान, काज़ाख़स्तान, रूस, पाकिस्तान, मंगोलिया और चीन के शिनजियांग प्रान्त में। विश्व भर में लगभग २.३ करोड़ उज़बेक लोग हैं और यह पूरे विश्व की मनुष्य आबादी का लगभग ०.३% हैं। भारत में मुग़ल सलतनत की स्थापना करने वाला बाबर भी नसल से उज़बेक जाति का ही था।, Suryakant Nijanand Bal, Lancer Publishers, 2004, ISBN 978-81-7062-273-4,...

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उज़्बेक भाषा

लहजा साफ़ दिखता है - 'नादिरा' को 'नोदिरा' (НОДИРА) और 'उज़बेकिस्तान' को 'उज़बेकिस्तोन' (Ўзбекистон) लिखा जाता है उज़बेक भाषा (उज़बेक: Ўзбек тили, उज़बेक तिलि; अरबी-फ़ारसी) मध्य एशिया में और विशेषकर उज़बेकिस्तान में, उज़बेक लोगों द्वारा बोली जाने वाली एक तुर्की भाषा है। सन् १९९५ में इसे मातृभाषा के रूप में बोलने वालों की संख्या लगभग २ करोड़ अनुमानित की गई थी। हालाँकि यह एक तुर्की भाषा है, फिर भी इसमें फ़ारसी, अरबी और रूसी भाषा का प्रभाव मिलता है। उज़बेक और उइग़ुर भाषा में बहुत समानताएँ हैं, लेकिन उइग़ुर की तुलना में उज़बेक पर फ़ारसी का प्रभाव ज़्यादा गहरा है। सन् १९२७ तक उज़बेक को लिखने के लिए अरबी-फ़ारसी वर्णमाला का प्रयोग किया जाता था, लेकिन उसके बाद उज़बेकिस्तान का सोवियत संघ में विलय होने से वहाँ सिरिलिक लिपि इस्तेमाल करने पर ज़ोर दिया गया। चीन के उज़बेक समुदाय अभी भी अरबी-फ़ारसी लिपि में उज़बेक लिखते हैं। सोवियत संघ का अंत होने के बाद उज़बेकिस्तान में कुछ लोग सन् १९९२ के उपरान्त लैटिन वर्णमाला का भी प्रयोग करने लगे।, Reinhard F. Hahn, Ablahat Ibrahim, University of Washington Press, 2006, ISBN 978-0-295-98651-7 .

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उइग़ुर

एक उइग़ुर युवती उइग़ुर (उइग़ुर: ‎) पूर्वी और मध्य एशिया में बसने वाले तुर्की जाति की एक जनजाति है। वर्तमान में उइग़ुर लोग अधिकतर चीनी जनवादी गणराज्य द्वारा नियंत्रित श़िंजियांग उइग़ुर स्वायत्त प्रदेश नाम के राज्य में बसते हैं। इनमें से लगभग ८० प्रतिशत इस क्षेत्र के दक्षिण-पश्चिम में स्थित तारिम घाटी में रहते हैं। उइग़ुर लोग उइग़ुर भाषा बोलते हैं जो तुर्की भाषा परिवार की एक बोली है। .

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यहां पुनर्निर्देश करता है:

मध्य एशियाई, मध्य-एशिया, वुस्त एशिया

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