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मणिपुरी भाषा

सूची मणिपुरी भाषा

मणिपुरी (या मीतै भाषा, या मैतै भाषा) भारत के असम के निचले हिस्सों एवं मणिपुर प्रांत के लोगों द्वारा बोली जाने वाली प्रमुख भाषा है। इसकी कई उपभाषाएँ भी हैं। मणिपुरी भाषा, मेइतेइ मायेक लिपि में तथा पूर्वी नागरी लिपि में लिखी जाती है। मीतै लिपि में रचित एक पाण्डुलिपि .

125 संबंधों: चऻजिङ खॢनौ, चिंग ताम, चेक्ला पाइखरबंदा, चीङलोन अमदगी अमदा, ए. चित्रेश्वर शर्मा, ए. मीनकेतन सिंह, एच. गुनो सिंह, एन. ईबोबी सिंह, एन. कुंजमोहन सिंह, एम. नबकिशोर सिंह, एम॰के॰ बिनोदिनी देवी, एल. समरेन्द्र सिंह, तत्खवा पुन्सी–लैपुल, तोकंगा, तीर्थ यात्रा, थरोशंबी, थाङ्जम इबोपिशक सिंह, थौडौंग वाथोक, दक्षिण एशिया, धारीदार पूँछ वाला तीतर, नहरोल्गी थौडांग, नाबोङखाउ, नाम की व्युत्पत्ति के आधार पर भारत के राज्य, नाओरेम विद्यासागर सिंह, नाओरेम वीरेन्द्रजित सिंह, निंगताम लांपाओ, निङोम्बम सुनिता, नंगबु ङाइबदा, नुमित्ति असुम थेङजील्लकलि, नूंगशिबी ग्रीस, नॉथोम्बम बीरेन सिंह, नोडदी तरक–खिदरे, नीलवीर शर्मा शास्त्री, पर्वतीय बांस का तीतर, पाचा मेहताई, पांगल शोनबी ऐशे, पाओनिलखोल, पिष्टाल अमा कुंदलेई अमा, पुन्सीगी मरुद्यान, पुंशी, प्रल्लयगी मेरि रक्तगी, पोकनाफाम, बिष्णुप्रिया मणिपुरी, बी. एम. माइस्नाम्बा, भारत, भारत सारावली, भारत के राज्य तथा केन्द्र-शासित प्रदेश, भारत की भाषाएँ, भारत की आधिकारिक भाषाओं में भारत गणराज्य के नाम, भूत अमसुङमाखुम, ..., मणिपुर, मणिपुरी, मणिपुरी साहित्य, मथओ कनवा डि एन ए, मन्नाबा, मपाल नाइदबसिदा ऐ, ममांग लीकाई थंबाल शातले, ममाङ्थोङ् लोल्लबदि मीनथोङ्दा लाक्उदना, मयाई कारबा शामु, मातामगी याकैरोल, माखोनमनि मोङसाबा, मंगी इसेई, मैराङ, मे ममगेरा बुद्धि ममगेरा, मेइतेइ मायेक लिपि, मेइतेइ लोग, मोइराङ्थेम बरकन्या, मीयाम, यूमलेम्बम इबोमचा सिंह, राष्ट्रभाषा, राजकुमार भुवनस्ना, राजकुमार मणि सिंह, रघु लैशाङथेम, लमबम वीरमणि सिंह, लांथेङ्नरिब लान्मी, लांबुंग, लाइतोंजम प्रेमचाँद सिंह, लौक्ङला, लैइ खरा पुंसि खरा, लेपाकले, लोकटक झील, शरतचंद थियम, सानालैबाक, साहित्य अकादमी पुरस्कार मणिपुरी, सागोलसेम लनचेनबा मीतै, सांगै एक्सप्रेस, सुधीर नाउरेइबम, हि नङबू होन्देदा, हुयेन लांपाओ, जोध छी. सनसम, जी. सी. तोम्ब्रा, ई. दिनमणि सिंह, ई. नीलकांत सिंह, ई. रजनीकांत सिंह, ई. सोनामणि सिंह, ईस्टर्न पोस्ट, वीर टीकेन्द्रजित रोड, खुमनथेम प्रकाश सिंह, खुङ्गङ् अमसुङ् रिफ्यूजि, ख्रुंगङी चिठि, खोङजि मखोल, आठवीं अनुसूची, आर. के. मधुबीर, इदु निङ्थौ, इमासि नुराबी, इमागी फनेक मचेत, इलिसा आमागी महाओ, इंफ़ाल अमासुङ मागी नुङशित्की फिबम इशिंग, इंफाल फ्री प्रेस, कर्णगी ममा अमसुङ्कर्णगी अरोइबा याहिप, कालिज, कालेनथगी लीपकलेई, कांग्लापाओ, कांग्लीपाक्की मैरा, कंगला महल, कुकी भाषाएँ, कुकी-चिन-नागा भाषाएँ, क्षेत्रि वीर, क्षेत्री राजन, कीशम प्रियकुमार, अराम्बम ओंबी मेमचौबी, अरांबम बीरेन सिंह, अरांबम समरेन्द्र सिंह, अशैबगी नित्याइपोद, अहिङना येकशिल्लिबा मङ सूचकांक विस्तार (75 अधिक) »

चऻजिङ खॢनौ

Chajing Khunou एक छोटे से गांव के भीतर स्थित चुराचांदपुर जिले में भारतीय राज्य मणिपुरहै । यह स्थित है, के बारे में के दक्षिण इम्फाल.

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चिंग ताम

चिंग ताम भारत में प्रकाशित होने वाला मणिपुरी भाषा का एक समाचार पत्र (अखबार) है। .

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चेक्ला पाइखरबंदा

चेक्ला पाइखरबंदा मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार लमबम वीरमणि सिंह द्वारा रचित एक कहानी–संग्रह है जिसके लिये उन्हें सन् 1984 में मणिपुरी भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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चीङलोन अमदगी अमदा

चीङलोन अमदगी अमदा मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार माखोनमनि मोङसाबा द्वारा रचित एक यात्रा-वृत्‍तांत है जिसके लिये उन्हें सन् 2013 में मणिपुरी भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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ए. चित्रेश्वर शर्मा

ए. चित्रेश्वर शर्मा मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार हैं। इनके द्वारा रचित एक उपन्यास थरोशंबी के लिये उन्हें सन् 1992 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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ए. मीनकेतन सिंह

ए. मीनकेतन सिंह मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार हैं। इनके द्वारा रचित एक कविता–संग्रह अशैबगी नित्याइपोद के लिये उन्हें सन् 1977 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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एच. गुनो सिंह

एच.

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एन. ईबोबी सिंह

एन.

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एन. कुंजमोहन सिंह

एन.

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एम. नबकिशोर सिंह

एम.

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एम॰के॰ बिनोदिनी देवी

महाराज कुमारी बिनोदिनी देवी (6 फ़रवरी 1922 – 17 जनवरी 2011) मणिपुरी भाषा की भारतीय लेखिका थीं। वे दक्षिण पूर्व हिमालयी राज्य पूर्वोत्तर भारत और मणिपुर के पूर्व शाही परिवार की सदस्या थीं।उन्हें साहित्य और शिक्षा के लिए वर्ष 1976 में भारत सरकार के द्वारा पद्म श्री से सम्मानित किया गया। .

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एल. समरेन्द्र सिंह

एल.

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तत्खवा पुन्सी–लैपुल

तत्खवा पुन्सी–लैपुल मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार नीलवीर शर्मा शास्त्री द्वारा रचित एक कहानी–संग्रह है जिसके लिये उन्हें सन् 1989 में मणिपुरी भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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तोकंगा

तोकंगा भारत में प्रकाशित होने वाला मणिपुरी भाषा का एक समाचार पत्र (अखबार) है। .

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तीर्थ यात्रा

तीर्थ यात्रा मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार ई. नीलकांत सिंह द्वारा रचित एक कविता–संग्रह है जिसके लिये उन्हें सन् 1987 में मणिपुरी भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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थरोशंबी

थरोशंबी मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार ए. चित्रेश्वर शर्मा द्वारा रचित एक उपन्यास है जिसके लिये उन्हें सन् 1992 में मणिपुरी भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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थाङ्जम इबोपिशक सिंह

थांजम इबोपिशक सिंह मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार हैं। इनके द्वारा रचित एक कविता–संग्रह भूत अमसुङमाखुम के लिये उन्हें सन् 1997 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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थौडौंग वाथोक

थौडौंग वाथोक भारत में प्रकाशित होने वाला मणिपुरी भाषा का एक समाचार पत्र (अखबार) है। .

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दक्षिण एशिया

thumb दक्षिण एशिया एक अनौपचारिक शब्दावली है जिसका प्रयोग एशिया महाद्वीप के दक्षिणी हिस्से के लिये किया जाता है। सामान्यतः इस शब्द से आशय हिमालय के दक्षिणवर्ती देशों से होता है जिनमें कुछ अन्य अगल-बगल के देश भी जोड़ लिये जाते हैं। भारत, पाकिस्तान, श्री लंका और बांग्लादेश को दक्षिण एशिया के देश या भारतीय उपमहाद्वीप के देश कहा जाता है जिसमें नेपाल और भूटान को भी शामिल कर लिया जाता है। कभी कभी इसमें अफगानिस्तान और म्याँमार को भी जोड़ लेते हैं। दक्षिण एशिया के देशों का एक संगठन सार्क भी है जिसके सदस्य देश निम्नवत हैं.

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धारीदार पूँछ वाला तीतर

धारीदार पूँछ वाला तीतर (Mrs. Hume's pheasant) या (Hume's pheasant) या (bar-tailed pheasant) (Syrmaticus humiae) भारत के पूर्वोत्तर हिमालय तथा चीन, म्यानमार तथा थाइलैंड में पाया जाता है। .

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नहरोल्गी थौडांग

नहरोल्गी थौडांग भारत में प्रकाशित होने वाला मणिपुरी भाषा का एक समाचार पत्र (अखबार) है। .

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नाबोङखाउ

नाबोङखाउ मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार जी. सी. तोम्ब्रा द्वारा रचित एक नाटक है जिसके लिये उन्हें सन् 1978 में मणिपुरी भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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नाम की व्युत्पत्ति के आधार पर भारत के राज्य

भारतीय गणराज्य का १९४७ में राज्यों के संघ के रूप में गठन हुआ। राज्य पुनर्गठन अधिनियम, १९५६ के अनुसार राज्यीय सीमाओं को भाषाई आधार पर पुनर्व्यवस्थित किया गया, इसलिए कई राज्यों के नाम उनकी भाषाओं के अनुसार हैं और आमतौर पर तमिल नाडु (तमिल) और कर्णाटक (कन्नड़) को छोड़कर, इन नामों की उत्पत्ति संस्कृत से होती है। तथापि अन्य राज्यों के नाम उनकी भौगोलिक स्थिति, विशेष इतिहास या जनसंख्याओं और औपनिवेशिक प्रभावों पर पड़े हैं। .

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नाओरेम विद्यासागर सिंह

नाओरेम विद्यासागर सिंह मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार हैं। इनके द्वारा रचित एक कविता-संग्रह खुंगं अमसुं रिफ्यूजि के लिये उन्हें सन् 2014 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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नाओरेम वीरेन्द्रजित सिंह

नाओरेम वीरेन्द्रजित सिंह मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार हैं। इनके द्वारा रचित एक कविता–संग्रह लांथेंनरिब लान्मी के लिये उन्हें सन् 2004 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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निंगताम लांपाओ

निंगताम लांपाओ भारत में प्रकाशित होने वाला मणिपुरी भाषा का एक समाचार पत्र (अखबार) है। .

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निङोम्बम सुनिता

निङोम्बम सुनिता मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार हैं। इनके द्वारा रचित एक कहानी–संग्रह खोङजि मखोल के लिये उन्हें सन् 2001 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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नंगबु ङाइबदा

नंगबु ङाइबदा मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार क्षेत्रि वीर द्वारा रचित एक कविता–संग्रह है जिसके लिये उन्हें सन् 2011 में मणिपुरी भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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नुमित्ति असुम थेङजील्लकलि

नुमित्ति असुम थेङजील्लकलि मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार यूमलेम्बम इबोमचा सिंह द्वारा रचित एक कहानी–संग्रह है जिसके लिये उन्हें सन् 1991 में मणिपुरी भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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नूंगशिबी ग्रीस

नूंगशिबी ग्रीस मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार शरतचंद थियम द्वारा रचित एक यात्रा–संस्मरण है जिसके लिये उन्हें सन् 2006 में मणिपुरी भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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नॉथोम्बम बीरेन सिंह

नॉथोम्बम बीरेन सिंह मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार हैं। इनके द्वारा रचित एक कविता–संग्रह मपाल नाइदबसिदा ऐ के लिये उन्हें सन् 1990 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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नोडदी तरक–खिदरे

नोडदी तरक–खिदरे मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार कीशम प्रियकुमार द्वारा रचित एक कहानी–संग्रह है जिसके लिये उन्हें सन् 1998 में मणिपुरी भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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नीलवीर शर्मा शास्त्री

नीलवीर शर्मा शास्त्री मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार हैं। इनके द्वारा रचित एक कहानी–संग्रह तत्खवा पुन्सी–लैपुल के लिये उन्हें सन् 1989 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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पर्वतीय बांस का तीतर

पर्वतीय बांस का तीतर Mountain Bamboo Partridge (Bambusicola fytchii) तीतर के कुल का एक पक्षी है। .

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पाचा मेहताई

पाचा मेहताई मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार हैं। इनके द्वारा रचित एक उपन्यास इंफ़ाल अमासुङ मागी नुङशित्की फिबम इशिंग के लिये उन्हें सन् 1973 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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पांगल शोनबी ऐशे

पांगल शोनबी ऐशे मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार एम. नबकिशोर सिंह द्वारा रचित एक कहानी–संग्रह है जिसके लिये उन्हें सन् 2005 में मणिपुरी भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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पाओनिलखोल

पाओनिलखोल भारत में प्रकाशित होने वाला मणिपुरी भाषा का एक समाचार पत्र (अखबार) है। .

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पिष्टाल अमा कुंदलेई अमा

पिष्टाल अमा कुंदलेई अमा मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार ई. दिनमणि सिंह द्वारा रचित एक कहानी–संग्रह है जिसके लिये उन्हें सन् 1982 में मणिपुरी भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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पुन्सीगी मरुद्यान

पुन्सीगी मरुद्यान मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार अरांबम बीरेन सिंह द्वारा रचित एक उपन्यास है जिसके लिये उन्हें सन् 1993 में मणिपुरी भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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पुंशी

पुंशी भारत में प्रकाशित होने वाला मणिपुरी भाषा का एक समाचार पत्र (अखबार) है। .

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प्रल्लयगी मेरि रक्तगी

प्रल्लयगी मेरि रक्तगी मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार आर. के. मधुबीर द्वारा रचित एक कविता–संग्रह है जिसके लिये उन्हें सन् 1996 में मणिपुरी भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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पोकनाफाम

पोकनाफाम भारत में प्रकाशित होने वाला मणिपुरी भाषा का एक समाचार पत्र (अखबार) है। .

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बिष्णुप्रिया मणिपुरी

बिष्णुप्रिया मणिपुरी ये जाति महाभारत योग के मणिपुर राज्य के प्राचीन जाति के रूप में माने जाते हैं | बिष्णुपुरिया, बिष्णुप्रिया या बिष्णुप्रिया मणिपुरी भारत के मणिपुर, असम, त्रिपुरा तथा बांग्लादेश और म्यांमार के कुछ भागों में बोली जाने वाली भारत-आर्य कुल की भाषा है। यह कई इंडो-आर्यन भाषाओं जैसे मराठी, बंगाली, उड़िया, असमिया और वैदिक संस्कृत आदि से मिलता जुलता है। यह भाषा सर्व प्राचीन मणिपुर राज्य में उत्पन्न और विकसित हुई थी और मूल रूप से लोकताक नाम के झील के परिवेश तक ही सीमित थी सुरुवाती दौर में | कर्नल मैककुलक द्वारा मणिपूर की घाटी के एक खाते जैसे अन्य अधिकारियों ई.टी.

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बी. एम. माइस्नाम्बा

बी.

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भारत

भारत (आधिकारिक नाम: भारत गणराज्य, Republic of India) दक्षिण एशिया में स्थित भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे बड़ा देश है। पूर्ण रूप से उत्तरी गोलार्ध में स्थित भारत, भौगोलिक दृष्टि से विश्व में सातवाँ सबसे बड़ा और जनसंख्या के दृष्टिकोण से दूसरा सबसे बड़ा देश है। भारत के पश्चिम में पाकिस्तान, उत्तर-पूर्व में चीन, नेपाल और भूटान, पूर्व में बांग्लादेश और म्यान्मार स्थित हैं। हिन्द महासागर में इसके दक्षिण पश्चिम में मालदीव, दक्षिण में श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व में इंडोनेशिया से भारत की सामुद्रिक सीमा लगती है। इसके उत्तर की भौतिक सीमा हिमालय पर्वत से और दक्षिण में हिन्द महासागर से लगी हुई है। पूर्व में बंगाल की खाड़ी है तथा पश्चिम में अरब सागर हैं। प्राचीन सिन्धु घाटी सभ्यता, व्यापार मार्गों और बड़े-बड़े साम्राज्यों का विकास-स्थान रहे भारतीय उपमहाद्वीप को इसके सांस्कृतिक और आर्थिक सफलता के लंबे इतिहास के लिये जाना जाता रहा है। चार प्रमुख संप्रदायों: हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख धर्मों का यहां उदय हुआ, पारसी, यहूदी, ईसाई, और मुस्लिम धर्म प्रथम सहस्राब्दी में यहां पहुचे और यहां की विविध संस्कृति को नया रूप दिया। क्रमिक विजयों के परिणामस्वरूप ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कंपनी ने १८वीं और १९वीं सदी में भारत के ज़्यादतर हिस्सों को अपने राज्य में मिला लिया। १८५७ के विफल विद्रोह के बाद भारत के प्रशासन का भार ब्रिटिश सरकार ने अपने ऊपर ले लिया। ब्रिटिश भारत के रूप में ब्रिटिश साम्राज्य के प्रमुख अंग भारत ने महात्मा गांधी के नेतृत्व में एक लम्बे और मुख्य रूप से अहिंसक स्वतन्त्रता संग्राम के बाद १५ अगस्त १९४७ को आज़ादी पाई। १९५० में लागू हुए नये संविधान में इसे सार्वजनिक वयस्क मताधिकार के आधार पर स्थापित संवैधानिक लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित कर दिया गया और युनाईटेड किंगडम की तर्ज़ पर वेस्टमिंस्टर शैली की संसदीय सरकार स्थापित की गयी। एक संघीय राष्ट्र, भारत को २९ राज्यों और ७ संघ शासित प्रदेशों में गठित किया गया है। लम्बे समय तक समाजवादी आर्थिक नीतियों का पालन करने के बाद 1991 के पश्चात् भारत ने उदारीकरण और वैश्वीकरण की नयी नीतियों के आधार पर सार्थक आर्थिक और सामाजिक प्रगति की है। ३३ लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल के साथ भारत भौगोलिक क्षेत्रफल के आधार पर विश्व का सातवाँ सबसे बड़ा राष्ट्र है। वर्तमान में भारतीय अर्थव्यवस्था क्रय शक्ति समता के आधार पर विश्व की तीसरी और मानक मूल्यों के आधार पर विश्व की दसवीं सबसे बडी अर्थव्यवस्था है। १९९१ के बाज़ार-आधारित सुधारों के बाद भारत विश्व की सबसे तेज़ विकसित होती बड़ी अर्थ-व्यवस्थाओं में से एक हो गया है और इसे एक नव-औद्योगिकृत राष्ट्र माना जाता है। परंतु भारत के सामने अभी भी गरीबी, भ्रष्टाचार, कुपोषण, अपर्याप्त सार्वजनिक स्वास्थ्य-सेवा और आतंकवाद की चुनौतियां हैं। आज भारत एक विविध, बहुभाषी, और बहु-जातीय समाज है और भारतीय सेना एक क्षेत्रीय शक्ति है। .

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भारत सारावली

भुवन में भारत भारतीय गणतंत्र दक्षिण एशिया में स्थित स्वतंत्र राष्ट्र है। यह विश्व का सातवाँ सबसे बड़ देश है। भारत की संस्कृति एवं सभ्यता विश्व की सबसे पुरानी संस्कृति एवं सभ्यताओं में से है।भारत, चार विश्व धर्मों-हिंदू धर्म, सिख धर्म, बौद्ध धर्म, जैन धर्म के जन्मस्थान है और प्राचीन सिंधु घाटी सभ्यता का घर है। मध्य २० शताब्दी तक भारत अंग्रेजों के प्रशासन के अधीन एक औपनिवेशिक राज्य था। अहिंसा के माध्यम से महात्मा गांधी जैसे नेताओं ने भारत देश को १९४७ में स्वतंत्र राष्ट्र बनाया। भारत, १२० करोड़ लोगों के साथ दुनिया का दूसरे सबसे अधिक आबादी वाला देश और दुनिया में सबसे अधिक आबादी वाला लोकतंत्र है। .

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भारत के राज्य तथा केन्द्र-शासित प्रदेश

भारत राज्यों का एक संघ है। इसमें उन्तीस राज्य और सात केन्द्र शासित प्रदेश हैं। ये राज्य और केन्द्र शासित प्रदेश पुनः जिलों और अन्य क्षेत्रों में बांटे गए हैं।.

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भारत की भाषाएँ

भारत बहुत सारी भाषाओं का देश है, लेकिन सरकारी कामकाज में व्यवहार में लायी जाने वाली दो भाषायें हैं, हिन्दी और अंग्रेज़ी। वृहद भारत के भाषा परिवार .

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भारत की आधिकारिक भाषाओं में भारत गणराज्य के नाम

निम्नलिखित सूची में भारत की सभी २३ आधिकारिक भाषाओं में भारत के नाम दिए गए है।.

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भूत अमसुङमाखुम

भूत अमसुङमाखुम मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार थांजम इबोपिशक सिंह द्वारा रचित एक कविता–संग्रह है जिसके लिये उन्हें सन् 1997 में मणिपुरी भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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मणिपुर

मणिपुर भारत का एक राज्य है। इसकी राजधानी है इंफाल। मणिपुर के पड़ोसी राज्य हैं: उत्तर में नागालैंड और दक्षिण में मिज़ोरम, पश्चिम में असम; और पूर्व में इसकी सीमा म्यांमार से मिलती है। इसका क्षेत्रफल 22,347 वर्ग कि.मी (8,628 वर्ग मील) है। यहां के मूल निवासी मेइती जनजाति के लोग हैं, जो यहां के घाटी क्षेत्र में रहते हैं। इनकी भाषा मेइतिलोन है, जिसे मणिपुरी भाषा भी कहते हैं। यह भाषा १९९२ में भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में जोड़ी गई है और इस प्रकार इसे एक राष्ट्रीय भाषा का दर्जा प्राप्त हो गया है। यहां के पर्वतीय क्षेत्रों में नागा व कुकी जनजाति के लोग रहते हैं। मणिपुरी को एक संवेदनशील सीमावर्ती राज्य माना जाता है। .

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मणिपुरी

कोई विवरण नहीं।

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मणिपुरी साहित्य

बांग्ला लिपि में लिखी जाने वाली मणिपुरी को विष्णुप्रिया मणिपुरी भी कहा जाता है। मणिपुरी भाषा का साहित्य भी समृद्ध है। १९७३ से आज तक ३९ मणिपुरी साहित्यकारों को साहित्य अकादमी पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। मणिपुरी साहित्य में वैष्णव भक्ति तथा मणिपुर की कला / संस्कृति झलकती है। कहानी, उपन्यास, काव्य, प्रवास वर्णन, नाटक आदि सभी विधाओं में मणिपुरी साहित्य ने अपनी पहचान बनाई है। मखोनमनी मोंड्साबा, जोड़ छी सनसम, क्षेत्री वीर, एम्नव किशोर सिंह आदि मणिपुरी के प्रसिद्ध लेखक हैं। मणिपुरी साहित्य की यात्रा १९२५ में फाल्गुनी सिंह द्वारा मीताई तथा बिष्णुप्रिया मणिपुरी भाषा की द्बिभाषिक सामयिकी ”जागरन” के प्रकाशन के रूप में आरम्भ हुआ। इसी समय और भी कई द्बिभाषिक पत्रिकाएँ प्रकाशित हुईं। इनमें ”मेखली”(१९३३), ”मणिपुरी” (१९३८), क्षत्रियज्योति (१९४४) इत्यदि अन्यतम हैं। .

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मथओ कनवा डि एन ए

मथओ कनवा डि एन ए मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार जोध छी. सनसम द्वारा रचित एक उपन्यास है जिसके लिये उन्हें सन् 2012 में मणिपुरी भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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मन्नाबा

मन्नाबा भारत में प्रकाशित होने वाला मणिपुरी भाषा का एक समाचार पत्र (अखबार) है। .

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मपाल नाइदबसिदा ऐ

मपाल नाइदबसिदा ऐ मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार नॉथोम्बम बीरेन सिंह द्वारा रचित एक कविता–संग्रह है जिसके लिये उन्हें सन् 1990 में मणिपुरी भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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ममांग लीकाई थंबाल शातले

ममांग लीकाई थंबाल शातले मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार एल. समरेन्द्र सिंह द्वारा रचित एक कविता–संग्रह है जिसके लिये उन्हें सन् 1976 में मणिपुरी भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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ममाङ्थोङ् लोल्लबदि मीनथोङ्दा लाक्उदना

ममांथों लोल्लबदि मीनथोंदा लाक्उदना मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार ई. सोनामणि सिंह द्वारा रचित एक कहानी–संग्रह है जिसके लिये उन्हें सन् 1988 में मणिपुरी भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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मयाई कारबा शामु

मयाई कारबा शामु मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार राजकुमार मणि सिंह द्वारा रचित एक कहानी–संग्रह है जिसके लिये उन्हें सन् 1994 में मणिपुरी भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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मातामगी याकैरोल

मातामगी याकैरोल भारत में प्रकाशित होने वाला मणिपुरी भाषा का एक समाचार पत्र (अखबार) है। .

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माखोनमनि मोङसाबा

माखोनमनि मोङसाबा मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार हैं। इनके द्वारा रचित एक यात्रा-वृत्‍तांत चीङलोन अमदगी अमदा के लिये उन्हें सन् 2013 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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मंगी इसेई

मंगी इसेई मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार खुमनथेम प्रकाश सिंह द्वारा रचित एक कहानी–संग्रह है जिसके लिये उन्हें सन् 1986 में मणिपुरी भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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मैराङ

मैराङ (Moirang) भारत के मणिपुर राज्य के विष्णुपुर जनपद का एक नगर है। यह विष्णुपुर जनपद का सबसे बड़ा पर्यटन स्थल है। यह नगर मणिपुर की राजधानी इम्फाल के दक्षिण में ४७ किमी की दूरी पर स्थित है। मैरङ की लोकटक झील एशिया की सबसे बड़ी अलवण जल वाली झील है। श्रेणी:मणिपुर के नगर.

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मे ममगेरा बुद्धि ममगेरा

मे ममगेरा बुद्धि ममगेरा मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार राजकुमार भुवनस्ना द्वारा रचित एक कविता–संग्रह है जिसके लिये उन्हें सन् 2002 में मणिपुरी भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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मेइतेइ मायेक लिपि

मेइतेइ लिपि या मेइतेइ मायेक १८वीं सदी तक मणिपुरी भाषा के लिये इस्तेमाल होने वाली एक लिपि थी। धीरे-धीरे मणिपुरी लिखने के लिये इसका स्थान बंगाली लिपि ने ले लिया। २०वीं सदी के अन्त में इसे फिर से प्रयोग में लाने के लिये कुछ प्रयास किए जा रहे थे।, Pauthang Haokip, pp.

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मेइतेइ लोग

मेइतेइ या मीतेइ पूर्वोत्तर भारत के मणिपुर राज्य का बहुसंख्यक समुदाय है। वे मणिपुर के मूल निवासी हैं इसलिए उन्हें कभी-कभी 'मणिपुरी' भी कहा जाता है। धर्मिक दृष्टि से अधिकतर मेइतेइ हिन्दू हैं।, N. Lokendra, pp.

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मोइराङ्थेम बरकन्या

मोइरांथेम बरकन्या मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार हैं। इनके द्वारा रचित एक उपन्यास लौक्ङला के लिये उन्हें सन् 2010 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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मीयाम

मीयाम भारत में प्रकाशित होने वाला मणिपुरी भाषा का एक समाचार पत्र (अखबार) है। .

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यूमलेम्बम इबोमचा सिंह

यूमलेम्बम इबोमचा सिंह मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार हैं। इनके द्वारा रचित एक कहानी–संग्रह नुमित्ति असुम थेङजील्लकलि के लिये उन्हें सन् 1991 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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राष्ट्रभाषा

राष्ट्रभाषा एक देश की संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है, जिसे सम्पूर्ण राष्ट्र में भाषा कार्यों में (जैसे लिखना, पढ़ना और वार्तालाप) के लिए प्रमुखता से प्रयोग में लाया जाता है। वह भाषा जिसमें राष्ट्र के काम किए जायें। राष्ट्र के काम-धाम या सरकारी कामकाज के लिये स्वीकृत भाषा। .

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राजकुमार भुवनस्ना

राजकुमार भुवनस्ना मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार हैं। इनके द्वारा रचित एक कविता–संग्रह मे ममगेरा बुद्धि ममगेरा के लिये उन्हें सन् 2002 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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राजकुमार मणि सिंह

राजकुमार मणि सिंह मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार हैं। इनके द्वारा रचित एक कहानी–संग्रह मयाई कारबा शामु के लिये उन्हें सन् 1994 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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रघु लैशाङथेम

रघु लैशाङथेम मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार हैं। इनके द्वारा रचित एक कविता–संग्रह ख्रुंगङी चिठि के लिये उन्हें सन् 2009 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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लमबम वीरमणि सिंह

लमबम वीरमणि सिंह मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार हैं। इनके द्वारा रचित एक कहानी–संग्रह चेक्ला पाइखरबंदा के लिये उन्हें सन् 1984 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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लांथेङ्नरिब लान्मी

लांथेंनरिब लान्मी मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार नाओरेम वीरेन्द्रजित सिंह द्वारा रचित एक कविता–संग्रह है जिसके लिये उन्हें सन् 2004 में मणिपुरी भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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लांबुंग

लांबुंग भारत में प्रकाशित होने वाला मणिपुरी भाषा का एक समाचार पत्र (अखबार) है। .

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लाइतोंजम प्रेमचाँद सिंह

लाइतोंजम प्रेमचाँद सिंह मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार हैं। इनके द्वारा रचित एक कहानी–संग्रह इमागी फनेक मचेत के लिये उन्हें सन् 2000 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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लौक्ङला

लौक्ङला मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार मोइरांथेम बरकन्या द्वारा रचित एक उपन्यास है जिसके लिये उन्हें सन् 2010 में मणिपुरी भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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लैइ खरा पुंसि खरा

लैइ खरा पुंसि खरा मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार सुधीर नाउरेइबम द्वारा रचित एक कहानी–संग्रह है जिसके लिये उन्हें सन् 2003 में मणिपुरी भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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लेपाकले

लेपाकले मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार अरांबम समरेन्द्र सिंह द्वारा रचित एक नाटक है जिसके लिये उन्हें सन् 1995 में मणिपुरी भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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लोकटक झील

लोकटक झील भारत के पूर्वोत्तर भाग में स्थित मणिपुर राज्य की एक झील है। यह अपनी सतह पर तैरते हुए वनस्पति और मिट्टी से बने द्वीपों के लिये प्रसिद्ध है, जिन्हें "कुंदी" कहा जाता है। झील का कुल क्षेत्रफल लगभग २८० वर्ग किमी है। झील पर सबसे बड़ा तैरता द्वीप "केयबुल लामजाओ" कहलाता है और इसका क्षेत्रफल ४० वर्ग किमी है। यह संगइ हिरण का अंतिम घर है जो एक विलुप्तप्राय जाति है। इस फुमदी को केयबुल लामजाओ राष्ट्रीय उद्यान के नाम से भारत सरकार ने एक संरक्षित क्षेत्र घोषित कर दिया है और यह विश्व का एकमात्र तैरता हुआ राष्ट्रीय उद्यान है। लोकताक झील मणिपुर के लिये बहुत आर्थिक व सांस्कृतिक महत्व रखती है। इसका जल विद्युत उत्पादन, पीने और सिंचाई के लिये प्रयोग होता है। इसमें मछलियाँ भी पकड़ी जाती हैं। .

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शरतचंद थियम

शरतचंद थियम मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार हैं। इनके द्वारा रचित एक यात्रा–संस्मरण नूंगशिबी ग्रीस के लिये उन्हें सन् 2006 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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सानालैबाक

सानालैबाक भारत में प्रकाशित होने वाला मणिपुरी भाषा का एक समाचार पत्र (अखबार) है। .

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साहित्य अकादमी पुरस्कार मणिपुरी

साहित्य अकादमी पुरस्कार एक साहित्यिक सम्मान है जो कुल २४ भाषाओं में प्रदान किया जाता हैं और मणिपुरी भाषा इन में से एक भाषा हैं। अकादमी ने १९७३ से इस भाषा के लिए पुरस्कारों को पेश किया। .

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सागोलसेम लनचेनबा मीतै

सागोलसेम लनचेनबा मीतै मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार हैं। इनके द्वारा रचित एक कविता–संग्रह हि नङबू होन्देदा के लिये उन्हें सन् 1999 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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सांगै एक्सप्रेस

सांगै एक्सप्रेस भारत में प्रकाशित होने वाला मणिपुरी भाषा का एक समाचार पत्र (अखबार) है। .

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सुधीर नाउरेइबम

सुधीर नाउरेइबम मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार हैं। इनके द्वारा रचित एक कहानी–संग्रह लैइ खरा पुंसि खरा के लिये उन्हें सन् 2003 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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हि नङबू होन्देदा

हि नङबू होन्देदा मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार सागोलसेम लनचेनबा मीतै द्वारा रचित एक कविता–संग्रह है जिसके लिये उन्हें सन् 1999 में मणिपुरी भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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हुयेन लांपाओ

हुयेन लांपाओ भारत में प्रकाशित होने वाला मणिपुरी भाषा का एक समाचार पत्र (अखबार) है। .

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जोध छी. सनसम

जोध छी.

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जी. सी. तोम्ब्रा

जी.

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ई. दिनमणि सिंह

ई. दिनमणि सिंह मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार हैं। इनके द्वारा रचित एक कहानी–संग्रह पिष्टाल अमा कुंदलेई अमा के लिये उन्हें सन् 1982 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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ई. नीलकांत सिंह

ई. नीलकांत सिंह मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार हैं। इनके द्वारा रचित एक कविता–संग्रह तीर्थ यात्रा के लिये उन्हें सन् 1987 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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ई. रजनीकांत सिंह

ई. रजनीकांत सिंह मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार हैं। इनके द्वारा रचित एक कहानी–संग्रह कालेनथगी लीपकलेई के लिये उन्हें सन् 1981 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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ई. सोनामणि सिंह

ई. सोनामणि सिंह मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार हैं। इनके द्वारा रचित एक कहानी–संग्रह ममांथों लोल्लबदि मीनथोंदा लाक्उदना के लिये उन्हें सन् 1988 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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ईस्टर्न पोस्ट

ईस्टर्न पोस्ट भारत में प्रकाशित होने वाला मणिपुरी भाषा का एक समाचार पत्र (अखबार) है। .

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वीर टीकेन्द्रजित रोड

वीर टीकेन्द्रजित रोड मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार एच. गुनो सिंह द्वारा रचित एक उपन्यास है जिसके लिये उन्हें सन् 1985 में मणिपुरी भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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खुमनथेम प्रकाश सिंह

खुमनथेम प्रकाश सिंह मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार हैं। इनके द्वारा रचित एक कहानी–संग्रह मंगी इसेई के लिये उन्हें सन् 1986 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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खुङ्गङ् अमसुङ् रिफ्यूजि

खुंगं अमसुं रिफ्यूजि मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार नाओरेम विद्यासागर सिंह द्वारा रचित एक कविता-संग्रह है जिसके लिये उन्हें सन् 2014 में मणिपुरी भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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ख्रुंगङी चिठि

ख्रुंगङी चिठि मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार रघु लैशाङथेम द्वारा रचित एक कविता–संग्रह है जिसके लिये उन्हें सन् 2009 में मणिपुरी भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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खोङजि मखोल

खोङजि मखोल मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार निङोम्बम सुनिता द्वारा रचित एक कहानी–संग्रह है जिसके लिये उन्हें सन् 2001 में मणिपुरी भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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आठवीं अनुसूची

भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची भारत की भाषाओं से संबंधित है। इस अनुसूची में २२ भारतीय भाषाओं को शामिल किया गया है। इनमें से १४ भाषाओं को संविधान में शामिल किया गया था। सन १९६७ में, सिन्धी भाषा को अनुसूची में जोड़ा गया। इसके बाद, कोंकणी भाषा, मणिपुरी भाषा, और नेपाली भाषा को १९९२ में जोड़ा गया। हाल में २००४ में बोड़ो भाषा, डोगरी भाषा, मैथिली भाषा, और संथाली भाषा शामिल किए गए। .

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आर. के. मधुबीर

आर.

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इदु निङ्थौ

इदु निंथौ मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार अराम्बम ओंबी मेमचौबी द्वारा रचित एक कविता–संग्रह है जिसके लिये उन्हें सन् 2008 में मणिपुरी भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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इमासि नुराबी

इमासि नुराबी मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार बी. एम. माइस्नाम्बा द्वारा रचित एक उपन्यास है जिसके लिये उन्हें सन् 2007 में मणिपुरी भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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इमागी फनेक मचेत

इमागी फनेक मचेत मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार लाइतोंजम प्रेमचाँद सिंह द्वारा रचित एक कहानी–संग्रह है जिसके लिये उन्हें सन् 2000 में मणिपुरी भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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इलिसा आमागी महाओ

इलिसा आमागी महाओ मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार एन. कुंजमोहन सिंह द्वारा रचित एक कहानी–संग्रह है जिसके लिये उन्हें सन् 1974 में मणिपुरी भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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इंफ़ाल अमासुङ मागी नुङशित्की फिबम इशिंग

इंफ़ाल अमासुङ मागी नुङशित्की फिबम इशिंग मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार पाचा मेहताई द्वारा रचित एक उपन्यास है जिसके लिये उन्हें सन् 1973 में मणिपुरी भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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इंफाल फ्री प्रेस

इंफाल फ्री प्रेस भारत में प्रकाशित होने वाला मणिपुरी भाषा का एक समाचार पत्र (अखबार) है। .

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कर्णगी ममा अमसुङ्कर्णगी अरोइबा याहिप

कर्णगी ममा अमसुंकर्णगी अरोइबा याहिप मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार एन. ईबोबी सिंह द्वारा रचित एक नाटक है जिसके लिये उन्हें सन् 1983 में मणिपुरी भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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कालिज

कालिज (Kalij pheasant) (वैज्ञानिक नाम: Lophura leucomelanos) फ़ीज़ॅन्ट कुल का एक पक्षी है जो हिमालय के निचले स्थानों में पाया जाता है। .

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कालेनथगी लीपकलेई

कालेनथगी लीपकलेई मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार ई. रजनीकांत सिंह द्वारा रचित एक कहानी–संग्रह है जिसके लिये उन्हें सन् 1981 में मणिपुरी भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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कांग्लापाओ

कांग्लापाओ भारत में प्रकाशित होने वाला मणिपुरी भाषा का एक समाचार पत्र (अखबार) है। .

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कांग्लीपाक्की मैरा

कांग्लीपाक्की मैरा भारत में प्रकाशित होने वाला मणिपुरी भाषा का एक समाचार पत्र (अखबार) है। .

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कंगला महल

कंगला महल (Kangla Palace) मणिपुर की राजधानी इम्फाल में स्थित एक पुराना महल है। यह इम्फाल नदी के दोनों (पूर्वी और पश्चिमी) किनारों पर विस्तृत है लेकिन अब इसके अधिकतर भाग के खंडहर ही बचे हैं। मणिपुरी भाषा में 'कंगला' का अर्थ 'सूखी भूमि' होता है और यह महल प्राचीनकाल में मणिपुर के मेइतेइ राजाओं का निवास हुआ करता था। मणिपुर के प्राचीन इतिहास-ग्रंथ 'चेइथारोल कुम्माबा' के अनुसार इस स्थान पर महल ३३ ईसवी काल से खड़ा था हालांकि यहाँ समय के साथ-साथ नए निर्माण होते रहे। .

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कुकी भाषाएँ

कुकी भाषाएँ (Kukish languages) या कुकी-चिन भाषाएँ (Kuki-Chin languages) पूर्वोत्तरी भारत, पश्चिमी बर्मा और पूर्वी बंग्लादेश में बोली जाने वाली लगभग ५० तिब्बती-बर्मी भाषाओं का समूह है। इसमें मिज़ो भाषा व हाखा चिन भाषा शामिल हैं। .

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कुकी-चिन-नागा भाषाएँ

कुकी-चिन-नागा भाषाएँ (Kuki-Chin–Naga) भारत के मिज़ो व नागा लोग तथा बर्मा के चिन लोग द्वारा बोली जाने वाली भाषाओं का एक समूह है। यह सभी तिब्बती-बर्मी भाषा-परिवार की सदस्य हैं लेकिन इनका आपसी सम्बन्ध अभी ज्ञात नहीं है। मिज़ो भाषा सर्वाधिक मातृभाषी रखने वाली कुकी-चिन-नागा भाषा है और भारत में सन् 2001 में इसके 6,74,756 वक्ता थे। इसके अलावा थाडो भाषा (1,50,000 वक्ता) और आओ शाखा की मोंगसेन आओ (1,40,000 वक्ता) भी एक लाख से अधिक लोगों द्वारा बोली जाती हैं। .

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क्षेत्रि वीर

क्षेत्रि वीर मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार हैं। इनके द्वारा रचित एक कविता–संग्रह नंगबु ङाइबदा के लिये उन्हें सन् 2011 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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क्षेत्री राजन

क्षेत्री राजन मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार हैं। इनके द्वारा रचित एक कविता अहिङना येकशिल्लिबा मङ के लिये उन्हें सन् 2015 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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कीशम प्रियकुमार

कीशम प्रियकुमार मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार हैं। इनके द्वारा रचित एक कहानी–संग्रह नोडदी तरक–खिदरे के लिये उन्हें सन् 1998 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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अराम्बम ओंबी मेमचौबी

अराम्बम ओंबी मेमचौबी मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार हैं। इनके द्वारा रचित एक कविता–संग्रह इदु निंथौ के लिये उन्हें सन् 2008 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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अरांबम बीरेन सिंह

अरांबम बीरेन सिंह मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार हैं। इनके द्वारा रचित एक उपन्यास पुन्सीगी मरुद्यान के लिये उन्हें सन् 1993 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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अरांबम समरेन्द्र सिंह

अरांबम समरेन्द्र सिंह मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार हैं। इनके द्वारा रचित एक नाटक लेपाकले के लिये उन्हें सन् 1995 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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अशैबगी नित्याइपोद

अशैबगी नित्याइपोद मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार ए. मीनकेतन सिंह द्वारा रचित एक कविता–संग्रह है जिसके लिये उन्हें सन् 1977 में मणिपुरी भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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अहिङना येकशिल्लिबा मङ

अहिङना येकशिल्लिबा मङ मणिपुरी भाषा के विख्यात साहित्यकार क्षेत्री राजन द्वारा रचित एक कविता है जिसके लिये उन्हें सन् 2015 में मणिपुरी भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

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