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मकर रेखा

सूची मकर रेखा

विश्व के मानचित्र पर मकर रेखा मकर रेखा रेखा दक्षिणी गोलार्द्ध में भूमध्य रेखा‎ के समानान्तर २३ डिग्री २६' २२" पर, ग्लोब पर पश्चिम से पूरब की ओर खींची गई कल्पनिक रेखा हैं। २२ दिसम्बर को सूर्य मकर रेखा पर लम्बवत चमकता है। मकर रेखा या दक्षिणी गोलार्ध पाँच प्रमुख अक्षांश रेखाओं में से एक हैं जो पृथ्वी के मानचित्र पर परिलक्षित होती हैं। मकर रेखा पृथ्वी की दक्षिणतम अक्षांश रेखा हैं, जिसपर सूर्य दोपहर के समय लम्बवत चमकता हैं। यह घटना दिसंबर संक्रांति के समय होती हैं। जब दक्षिणी गोलार्ध सूर्य के समकक्ष अत्यधिक झुक जाता है। मकर रेखा की स्थिति स्थायी नहीं हैं वरन इसमें समय के अनुसार हेर फेर होता रहता है। उत्तरी गोलार्ध में कर्क रेखा उसी भाँति है, जैसे दक्षिणी गोलार्ध में मकर रेखा। मकर रेखा के दक्षिण में स्थित अक्षांश, दक्षिण तापमान क्षेत्र मे आते हैं। मकर रेखा के उत्तर तथा कर्क रेखा के दक्षिण मे स्थित क्षेत्र उष्णकटिबन्ध कहलाता है। .

22 संबंधों: ऊष्णकटिबन्ध, दक्षिण अमेरिका, दक्षिण अमेरिका की जलवायु, दक्षिणी गोलार्ध, प्रशान्त महासागर, पृथ्वी के ताप कटिबन्ध, पोंगल, भूमध्य रेखा, मानचित्र प्रक्षेप, लिम्पोपो नदी, लैटेराइट मृदा, शीतोष्ण कटिबन्ध, वर्षावन, आर्कटिक रेखा, आर्कटिक वृत्त, कर्क रेखा, अफ़्रीका, अंटार्कटिक रेखा, अंटार्कटिक वृत्त, अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन, अक्षांश रेखाएँ, उपोष्णकटिबन्ध

ऊष्णकटिबन्ध

विश्व मानचित्र अंतर ऊष्ण कटिबंध को लाल पट्टी से दर्शाते हुए। मौसमी क्षेत्र ऊष्णकटिबंध (Tropics) दुनिया का वह कटिबंध है जो भूमध्य रेखा से अक्षांश २३°२६'१६" उत्तर में कर्क रेखा और अक्षांश २३°२६'१६" दक्षिण में मकर रेखा तक सीमित है। यह अक्षांश पृथ्वी के अक्षीय झुकाव (Axial tilt) से संबन्धित है। कर्क और मकर रेखाओं में एक सौर्य वर्ष में एक बार और इनके बीच के पूरे क्षेत्र में एक सौर्य वर्ष में दो बार सूरज ठीक सिर के ऊपर होता है। विश्व की आबादी का एक बड़ा भाग (लगभग ४०%) इस क्षेत्र में रहता है और ऐसा अनुमानित है कि बढ़ती जनसंख्या के कारण यह आबादी और बढ़ती ही जायेगी। यह पृथ्वी का सबसे गर्म क्षेत्र है क्योंकि पृथ्वी के अक्षीय झुकाव के कारण सूर्य की अधिकतम ऊष्मा भूमध्य रेखा और उसके आस-पास के इलाके पर केन्द्रित होती है। .

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दक्षिण अमेरिका

दक्षिण अमेरिका (स्पेनी: América del Sur; पुर्तगाली: América do Sul) उत्तर अमेरिका के दक्षिण पूर्व में स्थित पश्चिमी गोलार्द्ध का एक महाद्वीप है। दक्षिणी अमेरिका उत्तर में १३० उत्तरी अक्षांश (गैलिनस अन्तरीप) से दक्षिण में ५६० दक्षिणी अक्षांश (हार्न अन्तरीप) तक एवं पूर्व में ३५० पश्चिमी देशान्तर (रेशिको अन्तरीप) से पश्चिम में ८१० पश्चिमी देशान्तर (पारिना अन्तरीप) तक विस्तृत है। इसके उत्तर में कैरीबियन सागर तथा पनामा नहर, पूर्व तथा उत्तर-पूर्व में अन्ध महासागर, पश्चिम में प्रशान्त महासागर तथा दक्षिण में अण्टार्कटिक महासागर स्थित हैं। भूमध्य रेखा इस महाद्वीप के उत्तरी भाग से एवं मकर रेखा मध्य से गुजरती है जिसके कारण इसका अधिकांश भाग उष्ण कटिबन्ध में पड़ता है। दक्षिणी अमेरिका की उत्तर से दक्षिण लम्बाई लगभग ७,२०० किलोमीटर तथा पश्चिम से पूर्व चौड़ाई ५,१२० किलोमीटर है। विश्व का यह चौथा बड़ा महाद्वीप है, जो आकार में भारत से लगभग ६ गुना बड़ा है। पनामा नहर इसे पनामा भूडमरुमध्य पर उत्तरी अमरीका महाद्वीप से अलग करती है। किंतु पनामा देश उत्तरी अमरीका में आता है। ३२,००० किलोमीटर लम्बे समुद्रतट वाले इस महाद्वीप का समुद्री किनारा सीधा एवं सपाट है, तट पर द्वीप, प्रायद्वीप तथा खाड़ियाँ कम हैं जिससे अच्छे बन्दरगाहों का अभाव है। खनिज तथा प्राकृतिक सम्पदा में धनी यह महाद्वीप गर्म एवं नम जलवायु, पर्वतों, पठारों घने जंगलों तथा मरुस्थलों की उपस्थिति के कारण विकसित नहीं हो सका है। यहाँ विश्व की सबसे लम्बी पर्वत-श्रेणी एण्डीज पर्वतमाला एवं सबसे ऊँची टीटीकाका झील हैं। भूमध्यरेखा के समीप पेरू देश में चिम्बोरेजो तथा कोटोपैक्सी नामक विश्व के सबसे ऊँचे ज्वालामुखी पर्वत हैं जो लगभग ६,०९६ मीटर ऊँचे हैं। अमेजन, ओरीनिको, रियो डि ला प्लाटा यहाँ की प्रमुख नदियाँ हैं। दक्षिण अमेरिका की अन्य नदियाँ ब्राज़ील की साओ फ्रांसिस्को, कोलम्बिया की मैगडालेना तथा अर्जेण्टाइना की रायो कोलोरेडो हैं। इस महाद्वीप में ब्राज़ील, अर्जेंटीना, चिली, उरुग्वे, पैराग्वे, बोलिविया, पेरू, ईक्वाडोर, कोलोंबिया, वेनेज़ुएला, गुयाना (ब्रिटिश, डच, फ्रेंच) और फ़ाकलैंड द्वीप-समूह आदि देश हैं। .

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दक्षिण अमेरिका की जलवायु

दक्षिण अमेरिका का कोप्पेन मानचित्र भूमध्य रेखा दक्षिणी अमेरिका के उत्तरी भाग से होकर गुजरती है। इस महाद्वीप की सबसे अधिक चौड़ाई उत्तर में ही है। अतः दक्षिणी अमेरिका का अधिकांश भाग उष्ण कटिबन्ध में पड़ता है इसलिए यहाँ की जलवायु मोटे तौर पर गर्म एवं नम है। इसका अधिकांश भाग दक्षिणी गोलार्ध में पड़ने की वजह से यहाँ के ऋतुओं का क्रम उत्तरी गोलार्ध के विपरीत होता है। यहाँ जनवरी में गर्मी की ऋतु तथा जुलाई में जाड़े की ऋतु होती है। महाद्वीप के पश्चिम में उत्तर से दक्षिण दिशा में एण्डीज पर्वत स्थित है जो एक जलवायु सम्बंधी बाधा का कार्य करती है। उष्ण कटिबन्ध में स्थित होने पर भी एण्डीज पर्वत तथा ब्राज़ील एवं गायना के पठारी भागों पर अधिक ऊँचाई के कारण तापक्रम कम तथा आनन्दायक रहता है। एण्डीज पर्वत व्यापारिक हवाओं को पश्चिम की ओर जाने से रोकता है जिससे इसके पूर्वी भाग में तो खूब वर्षा होती है परन्तु पश्चिमी तटीय सँकरी पट्टी में बहुत कम वर्षा होती है। इसके विपरीत दक्षिणी अमेरिका के दक्षिणी भाग में स्थित पछुआ हवाओं की पेटी में पश्चिमी तटीय भाग में तो खूब वर्षा होती है परन्तु पूर्व की ओर जाने पर ये हवाएँ शुष्क हो जाती हैं जिससे एण्डीज पर्वत के पूर्वी भाग में बहुत कम वर्षा होती है। दक्षिणी भूमध्यरेखीय तथा ब्राज़ील की गर्म धाराओं के प्रभाव से दक्षिणी अमेरिका के उत्तरी भाग का तापक्रम ऊँचा रहता है। साथ ही इनके ऊपर से जाने वाली हवाएँ गर्म होकर अधिक जलवाष्प ग्रहण कर लेती हैं जिससे उनसे पर्याप्त वर्षा होती है। इसके विपरीत महाद्वीप के दक्षिणी भाग में पश्चिमी तट के समीप पीरू या हम्बोल्ट की ठण्डी धारा तथा पूर्वी तट के समीप फाकलैण्ड की ठण्डी धारा बहती है। इन धाराओं के प्रभाव से समीपवर्ती भाग की जलवायु ठण्डी एवं शुष्क रहती है। मकर रेखा के दक्षिण दक्षिणी अमेरिका की चौड़ाई अत्यन्त कम हो जाती है। अतः समुद्र की समीपता के कारण महाद्वीप के दक्षिणी भाग की जलवायु प्रायः सम रहती है। दक्षिण अमेरिका के अमेज़न नदी के बेसिन में वर्ष भर गर्म व नम जलवायु भूमध्यरेखीय जलवायु पाई जाती है। वार्षिक तापान्तर कम रहता है एवं ऋतुओं का अभाव होता है। जाड़े की ऋतु होती ही नहीं है। प्रतिदिन दिन के तीसरे पहर बिजली की चमक एवं बादलों की गड़गड़ाबट के साथ मुसलाधार वर्षा होती है। सवाना तुल्य जलवायु अमेज़न बेसिन के उत्तर में ओरीनिको नदी के बेसिन तथा दक्षिण में ब्राजील के पठारी भाग पर पाई जाती है। इस भाग पर तापक्रम तो ऊँचा रहता है परन्तु वर्षा केवल गर्मी के कुछ ही महीनों में तथा कम मात्रा में होती है। इस प्रकार यहाँ सवाना तुल्य जलवायु पाई जाती है। पूर्वी ब्राज़ील में व्यापारिक हवाओं के प्रभाव से केवल गर्मी में वर्षा होती है और जाड़े में ऋतु शुष्क होती है। यहाँ गर्मी में अधिक गर्मी तथा जाड़े में साधारण जाड़ा पड़ता है। इस प्रकार यहाँ भारत की तरह उष्ण मानसून जलवायु पाई जाती है। दक्षिण पीरू तथा उत्तरी चिली के कुछ भागों में उष्ण मरुस्थलीय जलवायु पाई जाती है। इस मरुस्थल को अटाकामा का मरुस्थल कहते हैं। यहाँ की जलवायु अत्यन्त विषम होती है तथा वर्षा नाममात्र को होती है। यहाँ कई वर्षों तक तो एक बूँद भी वर्षा नहीं होती है। अटाकामा मरुस्थल के दक्षिण मध्य चिली में भूमध्यसागरीय जलवायु पाई जाती है। इस भाग में केवल जाड़े में वर्षा होती है और गर्मी की ऋतु शुष्क होती है। गर्मी में साधारण गर्मी तथा जाड़े में साधारण जाड़ा पड़ता है। उत्तरी-पूर्वी अर्जेंटीना और पश्चिमी पराग्वे के मैदानी भाग में यान चाको एवं पंपास प्रदेश में ग्रीष्म ऋतु में कुछ वर्षा हो जाती है तथा शीत ऋतु सूखी रहती है। यहाँ गर्मी में काफी गर्मी पड़ती है तथा जाड़े में तापक्रम काफी कम हो जाता है। इस प्रकार यहाँ प्रेयरी तुल्य जलवायु पाई जाती है। उत्तरी अमेरिका के प्रेयरी प्रदेश की तुलना में इस भाग की जलवायु कम विषम है। महाद्वीप के सुदूर दक्षिण अर्थात् दक्षिणी चिली में पछुआ हवाओं से वर्ष भर वर्षा होती है। यह भाग समशीतोष्ण कटिबन्ध में स्थित है। इस प्रकार की जलवायु सामान्यतया शीत शीतोष्ण कटिबन्ध में महाद्वीपों के पश्चिमी भाग में पाई जाती है। इस जलवायु को पश्चिमी यूरोप तुल्य जलवायु या ब्रिटिश तुल्य जलवायु भी कहते हैं। पंपास प्रदेश के दक्षिण तथा एण्डीज पर्वतमाला के पूर्वी भाग पर पैटागोनिया का शीतोष्ण मरुस्थलीय भाग है। एण्डीज पर्वतों के वृष्टिछाया प्रदेशमें स्थित होने के कारण यहाँ की जलवायु अत्यन्त शुष्क है। एण्डीज के पर्वतीय भाग में ऊँचाई के कारण तापक्रम काफी कम रहता है। श्रेणी:दक्षिण अमेरिका.

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दक्षिणी गोलार्ध

अपोलो १७ से पृथ्वी के एक प्रसिद्ध तस्वीर में मूल रूप से शीर्ष पर दक्षिण ध्रुव था, हालांकि, यह परंपरागत दृष्टिकोण फिट करने के लिए ऊपर से नीचे कर दिया गया था दक्षिणी गोलार्ध पीले में दर्शित दक्षिणी गोलार्ध दक्षिणी ध्रुव के ऊपर से दक्षिणी गोलार्ध किसी ग्रह का वह आधा भाग होता है, जो उसकी विषुवत रेखा के नीचे (दक्षिणी ओर) होता है। गोलार्ध का शाब्दिक अर्थ है आधा गोला। हमारा ग्रह अक्षवत् दो भागों में बंटा है, जिन्हे उत्तरी गोलार्ध व दक्षिणी गोलार्ध कहते हैं। उत्तरी गोलार्ध का उत्तरी ‌छोर तथा दक्षिणी गोलार्ध का दक्षिणी ‌छोर बहुत ठंडे स्थान होने के कारण वहाँ बर्फ का साम्राज्य रहता है। दक्षिणी गोलार्ध के दक्षिणी ध्रुव पर तो बर्फ से बना विशाल महाद्वीप ही मौजूद है। दक्षिणी गोलार्ध में पांच महाद्वीप-आस्ट्रेलिया,नौ-दसवा दक्षिण अमेरिका,एक तिहाई अफ्रीका तथा एशिया के कुछ दक्षिणी द्वीपों मौजूद है। दक्षिण गोलार्द्ध चार महासागरों- हिन्द महासागर, अन्ध महासागर, दक्षिणध्रुवीय महासागर और प्रशान्त महासागर मौजूद है। पृथ्वी के अक्षीय झुकाव की वजह से उत्तरी गोलार्ध में ग्रीष्म ऋतु, दक्षिणायन (२२ दिसंबर के आसपास) से वसंत विषुव (लगभग २१ मार्च) तक चलता है और शीत ऋतु, उत्तरायण (२१ जून) से शरद विषुव (लगभग २३ सितंबर) तक चलता है। .

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प्रशान्त महासागर

श्रेणी:प्रशान्त महासागर प्रशान्त महासागरप्रशान्त महासागर अमेरिका और एशिया को पृथक करता है। यह विश्व का सबसे बड़ा तथा सबसे गहरा महासागर है। तुलनात्मक भौगौलिक अध्ययन से पता चलता है कि इस महासागर में पृथ्वी का भाग कम तथा जलीय क्षेत्र अधिक है। .

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पृथ्वी के ताप कटिबन्ध

शीतोष्ण कटिबन्ध शीत कटिबन्ध पृथ्वी के विभिन्न भागों का वार्षिक औसत तापमान का चित्र पृथ्वी को अनेक आधारों पर अलग-अलग क्षेत्रों में बाँटा जा सकता है (जलवायु, आर्थिक विकास, धर्म आदि)। औसत वार्षिक तापमान के आधार पर मोटे-तौर पर पृथ्वी को पाँच क्षेत्रों में बाँटा गया है। ये क्षेत्र भूमध्य रेखा से दूरी के अनुसार बाँटे जाते हैं क्योंकि पृथ्वी के विभिन्न क्षेत्रों में सूरज की किरणे कितनी लम्बवत गिरती हैं, यह उस स्थान की भूमध्य रेखा से दूरी पर निर्भर करता है। पृथ्वी के ये पाँच ताप कटिबन्ध निम्नलिखित हैं-.

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पोंगल

पोंगल (तमिळ - பொங்கல்) तमिल हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। यह प्रति वर्ष १४-१५ जनवरी को मनाया जाता है। इसकी तुलना नवान्न से की जा सकती है जो फसल की कटाई का उत्सव होता है (शस्योत्सव)। पोंगल का तमिल में अर्थ उफान या विप्लव होता है। पारम्परिक रूप से ये सम्पन्नता को समर्पित त्यौहार है जिसमें समृद्धि लाने के लिए वर्षा, धूप तथा खेतिहर मवेशियों की आराधना की जाती है। इस पर्व का इतिहास कम से कम १००० साल पुराना है तथा इसे तमिळनाडु के अलावा देश के अन्य भागों, श्रीलंका, मलेशिया, मॉरिशस, अमेरिका, कनाडा, सिंगापुर तथा अन्य कई स्थानों पर रहने वाले तमिलों द्वारा उत्साह से मनाया जाता है। तमिलनाडु के प्रायः सभी सरकारी संस्थानों में इस दिन अवकाश रहता है। .

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भूमध्य रेखा

विश्व के मानचित्र पर भूमध्य रेखा लाल रंग में गोलक का महानतम चक्र (घेरा) उसे ऊपरी और निचले गोलार्धों में बांटाता है। भूमध्य रेखा पृथ्वी की सतह पर उत्तरी ध्रुव एवं दक्षिणी ध्रुव से सामान दूरी पर स्थित एक काल्पनिक रेखा है। यह पृथ्वी को उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध में विभाजित करती है। दूसरे शब्दों में पृथ्वी के केंद्र से सर्वाधिक दूरस्थ भूमध्यरेखीय उभार पर स्थित बिन्दुओं को मिलाते हुए ग्लोब पर पश्चिम से पूर्व की ओर खींची गई कल्पनिक रेखा को भूमध्य या विषुवत रेखा कहते हैं। इस पर वर्ष भर दिन-रात बराबर होतें हैं, इसलिए इसे विषुवत रेखा भी कहते हैं। अन्य ग्रहों की विषुवत रेखा को भी सामान रूप से परिभाषित किया गया है। इस रेखा के उत्तरी ओर २३½° में कर्क रेखा है व दक्षिणी ओर २३½° में मकर रेखा है। .

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मानचित्र प्रक्षेप

विभिन्न प्रकार की भू-ग्रिड गोलाकार पृथ्वी अथवा पृथ्वी के किसी बड़े भू-भाग का समतल सतह पर मानचित्र बनाने के लिए प्रकाश अथवा ज्यामितीय विधियों के द्वारा निर्मित अक्षांस-देशान्तर रेखाओं के जाल या भू-ग्रिड को मानचित्र प्रक्षेप (map projection) कहा जाता हैं। मानचित्रकला (कार्टोग्राफी) के अंतर्गत ग्लोब की अक्षांश एवं देशांतर रेखाओं को समतल धरातल (कागज) पर स्थानांतरित करने की विधि को मानचित्र प्रक्षेप कहते हैं। इस प्रकार खींची हुई अक्षांश एवं देशांतर रेखाओं को "रेखाजाल" कहा जाता है। ग्लोब की अक्षांश एवं देशांतर रेखाओं को किसी समतल धरातल पर विशुद्ध रूप से स्थानांतरित करना संभव नहीं, क्योंकि ग्लोब के वक्र धरातल को बिना किसी अशुद्धि के समतल नहीं किया जा सकता। .

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लिम्पोपो नदी

लिम्पोपो नदी का प्रवाह क्षेत्र लिम्पोपो नदी दक्षिण मध्य अफ़्रीका की एक प्रमुख नदी है। यह नदी हिन्द महासागर मे समाप्त होती है। जेम्बेजी नदी के बाद यह दुसरी सबसे बड़ी अफ़्रीकी नदी है जो हिन्द महासागर मे गिरती है। लिम्पोपो नदी को 'घड़ियाल नदी' कहकर भी सम्बोधित किया जाता है। अफ़्रीका की यह नदी मकर रेखा को दो बार काटती है। .

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लैटेराइट मृदा

भारत के अंगदिपुरम में लैटेराइट की खुली खान लैटेराइट मृदा या 'लैटेराइट मिट्टी'(Laterite) का निर्माण ऐसे भागों में हुआ है, जहाँ शुष्क व तर मौसम बार-बारी से होता है। यह लेटेराइट चट्टानों की टूट-फूट से बनती है। यह मिट्टी चौरस उच्च भूमियों पर मिलती है। इस मिट्टी में लोहा, ऐल्युमिनियम और चूना अधिक होता है। गहरी लेटेराइट मिट्टी में लोहा ऑक्साइड और पोटाश की मात्रा अधिक होती है। लौह आक्साइड की उपस्थिति के कारण प्रायः सभी लैटराइट मृदाएँ जंग के रंग की या लालापन लिए हुए होती हैं। लैटराइट मिट्टी चावल, कपास, गेहूँ, दाल, मोटे अनाज, सिनकोना, चाय, कहवा आदि फसलों के लिए उपयोगी है। लैटराइट मिट्टी वाले क्षेत्र अधिकांशतः कर्क रेखा तथा मकर रेखा के बीच में स्थित हैं। भारत में लैटेराइट मिट्टी तमिलनाडु के पहाड़ी भागों और निचले क्षेत्रों, कर्नाटक के कुर्ग जिले, केरल राज्य के चौडे समुद्री तट, महाराष्ट्र के रत्नागिरि जिले, पश्चिमी बंगाल के बेसाइट और ग्रेनाइट पहाड़ियों के बीच तथा उड़ीसा के पठार के ऊपरी भागों में मिलती है। .

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शीतोष्ण कटिबन्ध

विश्व मानचित्र जिसमें समशीतोष्ण कटिबन्ध '''हरे रंग''' से दिखाया गया है। शीतोष्ण कटिबन्ध या समशीतोष्ण कटिबन्ध (temperate zone) ऊष्णकटिबन्ध और शीत कटिबन्ध के बीच का क्षेत्र कहलाता है। इस क्षेत्र की विशेषता यह है कि यहाँ गर्मी और सर्दी के मौसम के तापमान में अधिक अन्तर नहीं होता। लेकिन यहाँ के कुछ क्षेत्रों में, जैसे मध्य एशिया और मध्य उत्तरी अमेरिका, जो समुद्र से काफ़ी दूर हैं, तापमान में काफ़ी परिवर्तन होता है और इन इलाकों में महाद्वीपीय जलवायु पाया जाता है। समशीतोष्ण कटिबन्धीय मौसम ऊष्णकटिबन्ध के कुछ इलाकों में भी पाया जा सकता है, खासतौर पर ऊष्णकटिबन्ध के पहाड़ी इलाकों में, जैसे एन्डीज़ पर्वत शृंखला। उत्तरी समशीतोष्ण कटिबन्ध उत्तरी गोलार्द्ध में कर्क रेखा (तकरीबन २३.५° उ) से आर्कटिक रेखा (तकरीबन ६६.५° उ) तक तथा दक्षिणी समशीतोष्ण कटिबन्ध दक्षिणी गोलार्द्ध में मकर रेखा (तकरीबन २३.५° द) से अंटार्कटिक रेखा (तकरीबन ६६.५° द) तक का क्षेत्र होता है। विश्व की बहुत बड़ी जनसंख्या समशीतोष्ण कटिबन्ध में— खासतौर पर उत्तरी समशीतोष्ण कटिबन्ध में— रहती है क्योंकि इस इलाके में भूमि की बहुतायत है। .

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वर्षावन

ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड में डैनट्री वर्षावन. क्वींसलैंड, ऑस्ट्रेलिया में केर्न्स के पास डैनट्री वर्षावन. न्यू साउथ वेल्स, ऑस्ट्रेलिया में इल्लावारा ब्रश के भाग। वर्षावन वे जंगल हैं, जिनमें प्रचुर मात्रा में वर्षा होती है अर्थात जहां न्यूनतम सामान्य वार्षिक वर्षा 1750-2000 मि॰मी॰ (68-78 इंच) के बीच है। मानसूनी कम दबाव का क्षेत्र जिसे वैकल्पिक रूप से अंतर-उष्णकटिबंधीय संसृति क्षेत्र के नाम से जाना जाता है, की पृथ्वी पर वर्षावनों के निर्माण में उल्लेखनीय भूमिका है। विश्व के पशु-पौधों की सभी प्रजातियों का कुल 40 से 75% इन्हीं वर्षावनों का मूल प्रवासी है। यह अनुमान लगाया गया है कि पौधों, कीटों और सूक्ष्मजीवों की कई लाख प्रजातियां अभी तक खोजी नहीं गई हैं। उष्णकटिबंधीय वर्षावनों को पृथ्वी के आभूषण और संसार की सबसे बड़ी औषधशाला कहा गया है, क्योंकि एक चौथाई प्राकृतिक औषधियों की खोज यहीं हुई है। विश्व के कुल ऑक्सीजन प्राप्ति का 28% वर्षावनों से ही मिलता है, इसे अक्सर कार्बन डाई ऑक्साइड से प्रकाश संष्लेषण के द्वारा प्रसंस्करण कर जैविक अधिग्रहण के माध्यम से कार्बन के रूप में भंडारण करने वाले ऑक्सीजन उत्पादन के रूप में गलत समझ लिया जाता है। भूमि स्तर पर सूर्य का प्रकाश न पहुंच पाने के कारण वर्षावनों के कई क्षेत्रों में बड़े वृक्षों के नीचे छोटे पौधे और झाड़ियां बहुत कम उग पाती हैं। इस से जंगल में चल पाना संभव हो जाता है। यदि पत्तों के वितानावरण को काट दिया जाए या हलका कर दिया जाए, तो नीचे की जमीन जल्दी ही घनी उलझी हुई बेलों, झाड़ियों और छोटे-छोटे पेड़ों से भर जाएगी, जिसे जंगल कहा जाता है। दो प्रकार के वर्षावन होते हैं, उष्णकटिबंधीय वर्षावन तथा समशीतोष्ण वर्षावन। .

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आर्कटिक रेखा

विश्व का मानचित्र जिसमे आर्कटिक सर्कल लाल रंग से दर्शाया गया है। आर्कटिक का नक्शा जिसमे आर्कटिक सर्कल नीले से दर्शाया गया है। आर्कटिक रेखा पांच प्रमुख अक्षांश रेखाओं में से एक हैं जो पृथ्वी के मानचित्र पर परिलक्षित होती हैं, जो उत्तरी गोलार्द्ध में स्थित है। इस रेखा से उत्तरी ध्रुव तक का क्षेत्र शीत कटिबन्ध कहलाता हैं। .

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आर्कटिक वृत्त

आइसोथर्म में आर्कटिक वृत्त पृथ्वी के नक्शे में अक्षांश द्वारा चिह्नित पांच प्रमुख क्षेत्रों में सबसे उत्तरी क्षेत्र है।.

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कर्क रेखा

विश्व के मानचित्र पर कर्क रेखा कर्क रेखा उत्तरी गोलार्ध में भूमध्य रेखा‎ के समानान्तर पर, ग्लोब पर पश्चिम से पूर्व की ओर खींची गई कल्पनिक रेखा हैं। यह रेखा पृथ्वी पर उन पांच प्रमुख अक्षांश रेखाओं में से एक हैं जो पृथ्वी के मानचित्र पर परिलक्षित होती हैं। कर्क रेखा पृथ्वी की उत्तरतम अक्षांश रेखा हैं, जिसपर सूर्य दोपहर के समय लम्बवत चमकता हैं। यह घटना जून क्रांति के समय होती है, जब उत्तरी गोलार्ध सूर्य के समकक्ष अत्यधिक झुक जाता है। इस रेखा की स्थिति स्थायी नहीं हैं वरन इसमें समय के अनुसार हेर-फेर होता रहता है। २१ जून को जब सूर्य इस रेखा के एकदम ऊपर होता है, उत्तरी गोलार्ध में वह दिन सबसे लंबा व रात सबसे छोटी होती है। यहां इस दिन सबसे अधिक गर्मी होती है (स्थानीय मौसम को छोड़कर), क्योंकि सूर्य की किरणें यहां एकदम लंबवत पड़ती हैं। कर्क रेखा के सिवाय उत्तरी गोलार्ध के अन्य उत्तरतर क्षेत्रों में भी किरणें अधिकतम लंबवत होती हैं। याहू जागरण पर इस समय कर्क रेखा पर स्थित क्षेत्रों में परछाईं एकदम नीचे छिप जाती है या कहें कि नहीं बनती है। इस कारण इन क्षेत्रों को अंग्रेज़ी में नो शैडो ज़ोन कहा गया है। भास्कर पर इसी के समानान्तर दक्षिणी गोलार्ध में भी एक रेखा होती है जो मकर रेखा कहलाती हैं। भूमध्य रेखा इन दोनो के बीचो-बीच स्थित होती हैं। कर्क रेखा से मकर रेखा के बीच के स्थान को उष्णकटिबन्ध कहा जाता हैं। इस रेखा को कर्क रेखा इसलिए कहते हैं क्योंकि जून क्रांति के समय सूर्य की स्थिति कर्क राशि में होती हैं। सूर्य की स्थिति मकर रेखा से कर्क रेखा की ओर बढ़ने को उत्तरायण एवं कर्क रेखा से मकर रेखा को वापसी को दक्षिणायन कहते हैं। इस प्रकार वर्ष ६-६ माह के में दो अयन होते हैं। अभिव्यक्ति पर .

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अफ़्रीका

अफ़्रीका वा कालद्वीप, एशिया के बाद विश्व का सबसे बड़ा महाद्वीप है। यह 37°14' उत्तरी अक्षांश से 34°50' दक्षिणी अक्षांश एवं 17°33' पश्चिमी देशान्तर से 51°23' पूर्वी देशान्तर के मध्य स्थित है। अफ्रीका के उत्तर में भूमध्यसागर एवं यूरोप महाद्वीप, पश्चिम में अंध महासागर, दक्षिण में दक्षिण महासागर तथा पूर्व में अरब सागर एवं हिन्द महासागर हैं। पूर्व में स्वेज भूडमरूमध्य इसे एशिया से जोड़ता है तथा स्वेज नहर इसे एशिया से अलग करती है। जिब्राल्टर जलडमरूमध्य इसे उत्तर में यूरोप महाद्वीप से अलग करता है। इस महाद्वीप में विशाल मरुस्थल, अत्यन्त घने वन, विस्तृत घास के मैदान, बड़ी-बड़ी नदियाँ व झीलें तथा विचित्र जंगली जानवर हैं। मुख्य मध्याह्न रेखा (0°) अफ्रीका महाद्वीप के घाना देश की राजधानी अक्रा शहर से होकर गुजरती है। यहाँ सेरेनगेती और क्रुजर राष्‍ट्रीय उद्यान है तो जलप्रपात और वर्षावन भी हैं। एक ओर सहारा मरुस्‍थल है तो दूसरी ओर किलिमंजारो पर्वत भी है और सुषुप्‍त ज्वालामुखी भी है। युगांडा, तंजानिया और केन्या की सीमा पर स्थित विक्टोरिया झील अफ्रीका की सबसे बड़ी तथा सम्पूर्ण पृथ्वी पर मीठे पानी की दूसरी सबसे बड़ी झीलहै। यह झील दुनिया की सबसे लम्बी नदी नील के पानी का स्रोत भी है। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि इसी महाद्वीप में सबसे पहले मानव का जन्म व विकास हुआ और यहीं से जाकर वे दूसरे महाद्वीपों में बसे, इसलिए इसे मानव सभ्‍यता की जन्‍मभूमि माना जाता है। यहाँ विश्व की दो प्राचीन सभ्यताओं (मिस्र एवं कार्थेज) का भी विकास हुआ था। अफ्रीका के बहुत से देश द्वितीय विश्व युद्ध के बाद स्वतंत्र हुए हैं एवं सभी अपने आर्थिक विकास में लगे हुए हैं। अफ़्रीका अपनी बहुरंगी संस्कृति और जमीन से जुड़े साहित्य के कारण भी विश्व में जाना जाता है। .

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अंटार्कटिक रेखा

अंटार्कटिक रेखा पांच प्रमुख अक्षांश रेखाओं में से एक हैं जो पृथ्वी के मानचित्र पर परिलक्षित होती है, जो दक्षिणी गोलार्द्ध में स्थित है। इस रेखा से दक्षिणी ध्रुव तक का क्षेत्र शीत कटिबन्ध कहलाता हैं। .

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अंटार्कटिक वृत्त

''नक्शे में अंटार्कटिक के साथ अंटार्कटिक वृत्त, नीले रंग में। '' अंटार्कटिक वृत्त पृथ्वी के नक्शे में अक्षांश द्वारा चिह्नित पांच प्रमुख क्षेत्रों में सबसे दक्षिणी क्षेत्र है।.

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अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन

अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (en: International Solar Alliance, इंटरनैशनल सोलर अलायंस) (पुराना नाम:इंटरनेशनल एजेंसी फॉर सोलर टेक्नोलॉजीज़ एंड एप्लीकेशन्स, en: International Agency for Solar Technologies & Applications), (INSTA) सौर ऊर्जा पर आधारित १२१ देशों का एक सहयोग संगठन है जिसका शुभारंभ भारत व फ्राँस द्वारा 30 नवंबर 2015 को पैरिस में किया गया। यह भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई पहल का परिणाम है जिसकी घोषणा उन्नहोंने सर्वप्रथम लंदन के वेंबली स्टेडियम में अपने उद्बोधन के दौरान की थी। http://hindi.economictimes.indiatimes.com/business/business-news/global-solar-alliance-with-india-will-increase-step/articleshow/49972752.cms यह संगठन कर्क व मकर रेखा के बीच स्थित राष्ट्रों को एक मंच पर लाएगा। ऐसे राष्ट्रों में धूप की उपलब्धता बहुलता में है। इस संगठन में ये सभी देश सौर ऊर्जा के क्षेत्र में मिलकर काम करेंगे। इस प्रयास को वैश्विक स्तर पर ऊर्जा परिदृश्य में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। .

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अक्षांश रेखाएँ

ग्लोब पर भूमध्य रेखा के समान्तर खींची गई कल्पनिक रेखा। अक्षांश रेखाओं की कुल संख्या१८०+१ (भूमध्य रेखा सहित) है। प्रति १ डिग्री की अक्षांशीय दूरी लगभग १११ कि.

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उपोष्णकटिबन्ध

उपोष्णकटिबन्ध मौसम उपोष्णकटिबन्ध पृथ्वी के उष्णकटिबंधीय क्षेत्र के तुरंत उत्तर तथा दक्षिण से सटकर लगे हुए क्षेत्र को कहते हैं जो कि कर्क रेखा और मकर रेखा के क्रमशः उत्तर तथा दक्षिण का इलाका है। यह क्षेत्र अमूमन दोनों गोलार्धों में २३.५° से लेकर ४०° तक के अक्षांशों में पाया जाता है हालांकि यह मौसम अधिक ऊँचाई वाले क्षेत्रों में या उष्णकटिबंधीय इलाकों में भी पाया जा सकता है। .

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