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मंगल ग्रह

सूची मंगल ग्रह

मंगल सौरमंडल में सूर्य से चौथा ग्रह है। पृथ्वी से इसकी आभा रक्तिम दिखती है, जिस वजह से इसे "लाल ग्रह" के नाम से भी जाना जाता है। सौरमंडल के ग्रह दो तरह के होते हैं - "स्थलीय ग्रह" जिनमें ज़मीन होती है और "गैसीय ग्रह" जिनमें अधिकतर गैस ही गैस है। पृथ्वी की तरह, मंगल भी एक स्थलीय धरातल वाला ग्रह है। इसका वातावरण विरल है। इसकी सतह देखने पर चंद्रमा के गर्त और पृथ्वी के ज्वालामुखियों, घाटियों, रेगिस्तान और ध्रुवीय बर्फीली चोटियों की याद दिलाती है। हमारे सौरमंडल का सबसे अधिक ऊँचा पर्वत, ओलम्पस मोन्स मंगल पर ही स्थित है। साथ ही विशालतम कैन्यन वैलेस मैरीनेरिस भी यहीं पर स्थित है। अपनी भौगोलिक विशेषताओं के अलावा, मंगल का घूर्णन काल और मौसमी चक्र पृथ्वी के समान हैं। इस गृह पर जीवन होने की संभावना है। 1965 में मेरिनर ४ के द्वारा की पहली मंगल उडान से पहले तक यह माना जाता था कि ग्रह की सतह पर तरल अवस्था में जल हो सकता है। यह हल्के और गहरे रंग के धब्बों की आवर्तिक सूचनाओं पर आधारित था विशेष तौर पर, ध्रुवीय अक्षांशों, जो लंबे होने पर समुद्र और महाद्वीपों की तरह दिखते हैं, काले striations की व्याख्या कुछ प्रेक्षकों द्वारा पानी की सिंचाई नहरों के रूप में की गयी है। इन् सीधी रेखाओं की मौजूदगी बाद में सिद्ध नहीं हो पायी और ये माना गया कि ये रेखायें मात्र प्रकाशीय भ्रम के अलावा कुछ और नहीं हैं। फिर भी, सौर मंडल के सभी ग्रहों में हमारी पृथ्वी के अलावा, मंगल ग्रह पर जीवन और पानी होने की संभावना सबसे अधिक है। वर्तमान में मंगल ग्रह की परिक्रमा तीन कार्यशील अंतरिक्ष यान मार्स ओडिसी, मार्स एक्सप्रेस और टोही मार्स ओर्बिटर है, यह सौर मंडल में पृथ्वी को छोड़कर किसी भी अन्य ग्रह से अधिक है। मंगल पर दो अन्वेषण रोवर्स (स्पिरिट और् ओप्रुच्युनिटी), लैंडर फ़ीनिक्स, के साथ ही कई निष्क्रिय रोवर्स और लैंडर हैं जो या तो असफल हो गये हैं या उनका अभियान पूरा हो गया है। इनके या इनके पूर्ववर्ती अभियानो द्वारा जुटाये गये भूवैज्ञानिक सबूत इस ओर इंगित करते हैं कि कभी मंगल ग्रह पर बडे़ पैमाने पर पानी की उपस्थिति थी साथ ही इन्होने ये संकेत भी दिये हैं कि हाल के वर्षों में छोटे गर्म पानी के फव्वारे यहाँ फूटे हैं। नासा के मार्स ग्लोबल सर्वेयर की खोजों द्वारा इस बात के प्रमाण मिले हैं कि दक्षिणी ध्रुवीय बर्फीली चोटियाँ घट रही हैं। मंगल के दो चन्द्रमा, फो़बोस और डिमोज़ हैं, जो छोटे और अनियमित आकार के हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि यह 5261 यूरेका के समान, क्षुद्रग्रह है जो मंगल के गुरुत्व के कारण यहाँ फंस गये हैं। मंगल को पृथ्वी से नंगी आँखों से देखा जा सकता है। इसका आभासी परिमाण -2.9, तक पहुँच सकता है और यह् चमक सिर्फ शुक्र, चन्द्रमा और सूर्य के द्वारा ही पार की जा सकती है, यद्यपि अधिकांश समय बृहस्पति, मंगल की तुलना में नंगी आँखों को अधिक उज्जवल दिखाई देता है। .

96 संबंधों: ट्रैपिस्ट-१, एरिडेनीया चतुष्कोण, एलीसियम चतुष्कोण, ऐल्वारेज़ की परिकल्पना, डायक्रिया चतुष्कोण, डूम 3, डेमोस, थर्सिस चतुष्कोण, थाउमेसिया चतुष्कोण, थिया (ग्रह), द मार्शियन (फ़िल्म), नवग्रह, न्यू होराइज़न्स, नोआकीस चतुष्कोण, पर्यावरण संरक्षण, प्लैनम बोरेयम, प्लैनम ऑस्ट्राले, पृथ्वी का इतिहास, फाएथोंटीस चतुष्कोण, फोनीसिस लैकस चतुष्कोण, फोबोस, बज़ एल्ड्रिन, भारतीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का इतिहास, भू-आकृति विज्ञान, मार्स एक्सप्रेस, मार्स ओडिसी, मार्गेरिटाइफर साइनस चतुष्कोण, मावेन, मंगल, मंगल (बहुविकल्पी), मंगल (ज्योतिष), मंगल 2022 ऑर्बिटर, मंगल हो (फ़िल्म), मंगल विज्ञान प्रयोगशाला, मंगल का उपनिवेशण, मंगल के चतुष्कोणों की सूची, मंगल की टेराफॉर्मिंग, मंगलयान, मेम्नोनिया चतुष्कोण, मेयर टेरिनम चतुष्कोण, मेयर एसिडेलीयम चतुष्कोण, मेयर बोरियम चतुष्कोण, मेयर ऑस्ट्रेल चतुष्कोण, मेरिनर ९, मेसोअमेरिकी, रानी फ़ाबिओला पर्वत, रोवर (अंतरिक्ष यान), लूने पैलस चतुष्कोण, शुक्र, सायर्टिस मेजर प्लैनम, ..., साइनस सेबेयस चतुष्कोण, सिनस मेरिडियन, स्टायरिस मेजर चतुष्कोण, स्क्यापारेल्ली क्रेटर (मंगल ग्रह), सीबीएस, हेलेस चतुष्कोण, जलतापीय छिद्र, जेम्स कैमरून, जॉन कार्टर, वातज स्थलरूप, विकिरण दाब, खगोलशास्त्र से सम्बन्धित शब्दावली, गारामुखी, ग्रह, गूगल मानचित्र, गेल क्रेटर, ऑक्सिया पैलस चतुष्कोण, ओपल, ओलम्पस मोन्स, आयपिज़ीया चतुष्कोण, आरगायरे चतुष्कोण, आर्केडिया चतुष्कोण, आईज़ैक असिमोव, इयोलीस चतुष्कोण, इस्मेनियस लैकस चतुष्कोण, काकोरी, काकोरी (बहुविकल्पी), काकोरी (मंगल ग्रह), कैब्रेनिया चतुष्कोण, कैसियस चतुष्कोण, कोप्रेट्स चतुष्कोण, अन्तर्ग्रहीय अंतरिक्ष उड़ान, अप्रैल फूल दिवस, अमेज़ोनिस चतुष्कोण, अमेंथीस चतुष्कोण, अरेबिया चतुष्कोण, अंतरिक्ष विज्ञान, अंतरिक्ष अन्वेषण, उपसौर और अपसौर, १० हायजीया, १३ नवम्बर, २४ सितम्बर, २६ नवम्बर, ४ दिसम्बर, D-श्रेणी क्षुद्रग्रह, 3753 क्रुथने सूचकांक विस्तार (46 अधिक) »

ट्रैपिस्ट-१

ट्रैपिस्ट-१ (TRAPPIST-1), जिसे 2MASS J23062928-0502285 भी नामांकित करा जाता है, कुम्भ तारामंडल के क्षेत्र में स्थित एक अतिशीतल बौना तारा है जो हमारे सौर मंडल के बृहस्पति ग्रह से ज़रा बड़ा है। यह सूरज से लगभग 39.5 प्रकाश-वर्ष की दूरी पर स्थित है। इसके इर्द-गिर्द एक ग्रहीय मंडल है और फ़रवरी 2017 तक इस मंडल में सात स्थलीय ग्रह इस तारे की परिक्रमा करते पाए गए थे जो किसी भी अन्य ज्ञात ग्रहीय मंडल से अधिक हैं। .

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एरिडेनीया चतुष्कोण

एरिडेनीया चतुष्कोण (Eridania quadrangle), संयुक्त राज्य भूगर्भ सर्वेक्षण (यूएसजीएस), खगोलभूविज्ञान अनुसंधान कार्यक्रम द्वारा इस्तेमाल के लिए मंगल ग्रह की 30 चतुष्कोणिय नक्शों की श्रृंखला में से एक है। एरिडेनीया चतुष्कोण को MC-29 (मार्स चार्ट-29) के रूप में भी जाना जाता है। श्रेणी:खगोलशास्त्र श्रेणी:मंगल ग्रह श्रेणी:मई २०१३ के लेख जिनमें स्रोत नहीं हैं.

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एलीसियम चतुष्कोण

एलीसियम चतुष्कोण (Elysium quadrangle), संयुक्त राज्य भूगर्भ सर्वेक्षण (यूएसजीएस), खगोलभूविज्ञान अनुसंधान कार्यक्रम द्वारा इस्तेमाल के लिए मंगल ग्रह की 30 चतुष्कोणिय नक्शों की श्रृंखला में से एक है। एलीसियम चतुष्कोण को MC-15 (मार्स चार्ट-15) के रूप में भी जाना जाता है। श्रेणी:खगोलशास्त्र श्रेणी:मंगल ग्रह श्रेणी:मई २०१३ के लेख जिनमें स्रोत नहीं हैं.

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ऐल्वारेज़ की परिकल्पना

ऐल्वारेज़ की परिकल्पना यह कहती है कि डैनासोरों और तमाम अन्य पुरातन जीवों का सामूहिक नाश ६.५ करोड़ वर्ष पहले पृथ्वी से एक बहुत विशाल क्षुद्रग्रह (एस्टेरॉएड) के टकराने की वजह से हुआ था जिसे क्रिटैशियस-पैलियोजीन विलुप्ति घटना कहते हैं। सबूत यह दर्शाते हैं की क्षुद्रग्रह मेक्सिको के चिकशुलूब में स्थित युकातान प्रायद्वीप में गिरा था। इस परिकल्पना का नाम वैज्ञानिक पिता पुत्र लुईस वाल्टर एल्वारेज़ और वाल्टर एल्वारेज़ के नाम पर पड़ा है जिन्होंने पहली बार १९८० में एक सामूहिक वैज्ञानिक अनुसंधान के बाद इसकी घोषणा की थी। मार्च २०१० में शीर्ष वैज्ञानिकों के एक अंतर्राष्ट्रीय दल ने इस परिकल्पना जिसमें कहा गया था कि चिकशुलूब में क्षुद्रग्रह के प्रहार से तमाम जीव जन्तु विलुप्त हो गए को समर्थन दिया। ४१ वैज्ञानिकों के एक समूह ने २० वर्षों के वैज्ञानिक साहित्य का विस्तार से अध्धयन करने के बाद विनाश के अन्य परिकल्पनाओं जैसे ज्वालामुखी फटना को खारिज़ कर दिया। उन्होने पाया कि जितना बडा एक खगोलीय चट्टान चिकशुलूब में धरती से टकराई थी। चट्टान का आकार मंगल ग्रह के चंद्रमा दिमोस के आकार (त्रिज्या 6.2 किमी) का रहा होगा। टक्कर से जितनी ऊर्जा निकली होगी जो हिरोशिमा नागासाकी पर गिराए गए परमाणु बम की शक्ति से १ अरब गुना ज्यादा है। .

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डायक्रिया चतुष्कोण

डायक्रिया चतुष्कोण (Diacria quadrangle), संयुक्त राज्य भूगर्भ सर्वेक्षण (यूएसजीएस), खगोलभूविज्ञान अनुसंधान कार्यक्रम द्वारा इस्तेमाल के लिए मंगल ग्रह की 30 चतुष्कोणिय नक्शों की एक श्रृंखला में से एक है। डायक्रिया चतुष्कोण को MC-2(मार्स चार्ट-2) के रूप में भी जाना जाता है। श्रेणी:खगोलशास्त्र श्रेणी:मंगल ग्रह.

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डूम 3

Splash DamageVicarious VisionsAspyr Media | publisher .

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डेमोस

डिमोज़ (अंग्रेज़ी: ''Deimos'') मंगल ग्रह के दो प्राकृतिक उपग्रहों में से एक है और यह सौर मंडल का सबसे छोटा उपग्रह है। मंगल का दूसरा उपग्रह फोबोस है। .

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थर्सिस चतुष्कोण

थर्सिस चतुष्कोण (Tharsis quadrangle), संयुक्त राज्य भूगर्भ सर्वेक्षण (यूएसजीएस), खगोलभूविज्ञान अनुसंधान कार्यक्रम द्वारा इस्तेमाल के लिए मंगल ग्रह की 30 चतुष्कोणिय नक्शों की श्रृंखला में से एक है। थर्सिस चतुष्कोण को MC-9 (मार्स चार्ट-9) के रूप में भी जाना जाता है। श्रेणी:खगोलशास्त्र श्रेणी:मंगल ग्रह श्रेणी:मई २०१३ के लेख जिनमें स्रोत नहीं हैं.

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थाउमेसिया चतुष्कोण

कोप्रेट्स चतुष्कोण (Thaumasia quadrangle), संयुक्त राज्य भूगर्भ सर्वेक्षण (यूएसजीएस), खगोलभूविज्ञान अनुसंधान कार्यक्रम द्वारा इस्तेमाल के लिए मंगल ग्रह की 30 चतुष्कोणिय नक्शों की श्रृंखला में से एक है। कोप्रेट्स चतुष्कोण को MC-25 (मार्स चार्ट-25) के रूप में भी जाना जाता है। श्रेणी:खगोलशास्त्र श्रेणी:मंगल ग्रह श्रेणी:मई २०१३ के लेख जिनमें स्रोत नहीं हैं.

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थिया (ग्रह)

थिया (अंग्रेजी: Theia, यूनानी: Θεία), प्रारंभिक सौर प्रणाली में, एक अनुमानित प्राचीन ग्रह-द्रव्यमान वस्तु है, जो कि भीमकाय टक्कर परिकल्पना के अनुसार, 4.5 अरब साल पहले एक अन्य ग्रह-द्रव्यमान वस्तु गाया (प्रारंभिक पृथ्वी) के साथ टकराई थी। परिकल्पना के अनुसार थीया, मंगल ग्रह के आकार का एक पिंड था, जिसका व्यास लगभग 6,102 किमी (3,792 मील) था। कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय, लॉस एंजिल्स के भूगर्भ वैज्ञानिक एडवर्ड यंग ने अपोलो मिशनों 12, 15, और 17 द्वारा एकत्रित चट्टानों के विश्लेषण पर चित्रण करते हुए प्रस्तावित किया कि थिया, पृथ्वी के साथ टकराया था, जो एक पिछले सिद्धांत चमकदार प्रभाव के विपरीत है। टक्कर के मॉडल प्रकट करते हैं कि प्रारंभिक चंद्रमा के निर्माण के लिए, थिया का मलबा पृथ्वी के चारों ओर इकट्ठा हो गया था। टक्कर के बाद, थिया के मलबे से पृथ्वी के चारों ओर चमकीले वलय बन गए थे, जो वर्तमान में शनि ग्रह के वलय के समान प्रतीत होते थे। कुछ समय पश्चात, ये वलय पृथ्वी की रोश सीमा से बाहर निकाल गए तथा वलय में उपस्थित पिंडों के संगठन से चंद्रमा का निर्माण हुआ। कुछ वैज्ञानिकों का मानना ​है कि कक्षा में उपस्थित मलबे से मूल रूप से दो चंद्रमाओं का गठन हुआ था जो बाद में एक ही चंद्रमा को बनाने के लिए विलय हो गए थे जिसे हम आज जानते हैं। थिया परिकल्पना यह भी बताती है कि चंद्रमा की अपेक्षा पृथ्वी का कोर क्यों बड़ा होगा: परिकल्पना के अनुसार, थिया की कोर और मैंटल, पृथ्वी की कोर के साथ मिश्रित है। .

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द मार्शियन (फ़िल्म)

द मार्शियन (हिन्दी: मंगल ग्रह का वासी The Martian) वर्ष 2015 की अमेरिकी साइंस-फिक्शन आधारित फिल्म है जिसे रिड्ली स्काॅट ने निर्देशित किया है और अभिनेता मैट डैमन ने मुख्य भूमिका की है। फिल्म 2011 को एण्डी विएर की उपन्यास के नाम का समानारूपांतरण है, जिसके आधार पर ड्रयु गोडेर्ड ने पटकथा लिखी है। डैमन एक एस्ट्राॅनाॅट की भूमिका में हैं, जिनके मंगल अभियान में दुर्घटनावश मृत मान लिया था। पर जल्द ही बचने के जद्दोजहद नजर आने पर, उन्हें वापस लाने की कोशिशें की जाती हैं। फिल्म में उनके सहयोगी अदाकारों में जेसिका चेसटेन, क्रिस्टन वीग, जेफ़ डेनियल्स, माइकल पेऩा, केट मारा, सिन बिन, स्बेस्चियन स्टेन, एक्सेल हेऩी, डाॅनाल्ड ग्लोवर, मैक़ेन्ज़ी डेविस और च्वेटेल इज़्योफाॅर आदि शामिल हैं। निर्माता सिमाॅन किनबर्ग, 20th सेंचुरी फाॅक्स द्वारा मार्च 2013 में उपन्यास के विकल्प चुनाव के बाद ही इसके विकास में जुट चुके थे। ड्रयु गोडेर्ड ने मूल उपन्यास को पटकथा में रुपांतरण करने बाद फिल्म निर्देशन करना चाहते थे, पर इससे आगे कोई बात नहीं बढ़ी। स्काॅट को गोडेर्ड के जिम्मे पर स्थानांतरित किया गया और डेमन को मुख्य भूमिका में जगह दी गई, जिससे निर्माण के कार्य को हरी झंडी मिल गई। नवंबर 2014 को फिल्मांकन का शुरू किया गया कार्य, आखिर के 70 दिनों बाद संपन्न हुआ। हंगरी देश के बुडापेस्ट राज्य में, तकरीबन 20 बड़े विश्वस्तरीय साउन्ड स्टुडियो तैयार किए गए। वहीं व्यावहारिक पृष्ठभूमि के लिए जाॅर्डन के "वादी रम" को चुना गया। फिल्म का प्रिमियर 2015 को टोरांटो अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में सितम्बर 11, 2015 में किया गया। फिर 20th सेंचुरी फाॅक्स द्वारा अक्टूबर 2, 2015 को संयुक्त राष्ट्र के थियटरों में प्रदर्शित किया गया। फिल्म को 2D, 3D, IMAX 3D और 4DX वर्जन में रिलीज किया गया। फ़िल्म को काफी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली और वैश्विक तौर पर $624 करोड़ का कारोबार कर, स्काॅट की अब तक सबसे ज्यादा कमाई करनेवाली फ़िल्म के रूप में जानी गई, तो वहीं यह साल 2015 की सर्वाधिक कमाई वाली फ़िल्म की कतार में 10वें पायदान पर रही। फ़िल्म को काफी सारे पुरस्कारों, जिनमें गोल्डन ग्लोब अवार्ड की ओर से सर्वश्रेष्ठ मोशन पिक्चर - संगीतमय और हास्यप्रधान के खिताब से नवाजे जाने साथ और अकादमी अवार्ड की ओर से अन्य सात श्रेणियों में भी नामांकित रही, जिनमें सर्वश्रेष्ठ पिक्चर और गोडेर्ड की सर्वश्रेष्ठ रूपांतरित पटकथा शामिल रही। अभिनेता मैट डेमन भी कई पुरस्कारों के लिए नामांकित रहे, जिनमें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए अकादमी अवार्ड, सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए बाफ्टा अवार्ड, सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए क्रिटिक च्वाइस अवार्ड और फिर उन्हें गोल्डन ग्लोब की ओर से सर्वश्रेष्ठ संगीतमय एवं हास्यप्रधान अभिनेता की उपाधि से नवाजा गया। .

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नवग्रह

ग्रह (संस्कृत के ग्रह से - पकड़ना, कब्जे में करना) माता भूमिदेवी (पृथ्वी) के प्राणियों पर एक 'ब्रह्मांडीय प्रभावकारी' है। हिन्दू ज्योतिष में नवग्रह (संस्कृत: नवग्रह, नौ ग्रह या नौ प्रभावकारी) इन प्रमुख प्रभावकारियों में से हैं। राशि चक्र में स्थिर सितारों की पृष्ठभूमि के संबंध में सभी नवग्रह की सापेक्ष गतिविधि होती है। इसमें ग्रह भी शामिल हैं: मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, और शनि, सूर्य, चंद्रमा, और साथ ही साथ आकाश में अवस्थितियां, राहू (उत्तर या आरोही चंद्र आसंधि) और केतु (दक्षिण या अवरोही चंद्र आसंधि).

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न्यू होराइज़न्स

न्यू होराइज़न्स (अंग्रेज़ी: New Horizons, हिंदी अर्थ: "नए क्षितिज") अमेरिकी अंतरिक्ष अनुसन्धान संस्था नासा का एक अंतरिक्ष शोध यान है जो हमारे सौर मंडल के बाहरी बौने ग्रह यम (प्लूटो) के अध्ययन के लिये छोड़ा गया था। इस यान का प्रक्षेपण 19 जनवरी 2006 किया गया था जो नौ वर्षों के बाद 14 जुलाई 2015 को प्लूटो के सबसे नजदीक से होकर गुजरा। यह प्लूटो और उसके पांचों ज्ञात उपग्रहों - शैरन, निक्स, हाएड्रा, स्टायक्स और ऍस/२०११ पी १ (S/2011 P 1) के आँकड़े भेजेगा। इसके बाद अगर कोई अन्य काइपर घेरे की वस्तु देखने योग्य मिलती है तो संभव है की इस यान के द्वारा उसके पास से भी निकलकर जानकारी और तस्वीरें हासिल की जा सकें। न्यू होराइजन्स यान को रॉकेट के ऊपर लगाकर १९ जनवरी २००६ को छोड़ा गया था। ७ अप्रैल २००६ को इसने मंगल ग्रह की कक्षा (ऑरबिट) पार की, २८ फ़रवरी २००७ को बृहस्पति ग्रह की, ८ जून २००८ को शनि ग्रह की और १८ मार्च २०११ को अरुण ग्रह (यूरेनस) की। इसे छोड़ने की गति किसी भी मानव कृत वस्तु से अधिक रही थी - अपने आखरी रॉकेट के बंद होने तक इसकी रफ़्तार १६.२६ किलोमीटर प्रति सैकिंड पहुँच चुकी थी। .

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नोआकीस चतुष्कोण

नोआकीस चतुष्कोण (Noachis quadrangle), संयुक्त राज्य भूगर्भ सर्वेक्षण (यूएसजीएस), खगोलभूविज्ञान अनुसंधान कार्यक्रम द्वारा इस्तेमाल के लिए मंगल ग्रह की 30 चतुष्कोणिय नक्शों की श्रृंखला में से एक है। नोआकीस चतुष्कोण को MC-27 (मार्स चार्ट-27) के रूप में भी जाना जाता है। श्रेणी:खगोलशास्त्र श्रेणी:मंगल ग्रह श्रेणी:मई २०१३ के लेख जिनमें स्रोत नहीं हैं.

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पर्यावरण संरक्षण

पर्यावरण शब्द परि+आवरण के संयोग से बना है। 'परि' का आशय चारों ओर तथा 'आवरण' का आशय परिवेश है। दूसरे शब्दों में कहें तो पर्यावरण अर्थात वनस्पतियों,प्राणियों,और मानव जाति सहित सभी सजीवों और उनके साथ संबंधित भौतिक परिसर को पर्यावरण कहतें हैं वास्तव में पर्यावरण में वायु,जल,भूमि,पेड़-पौधे, जीव-जन्तु,मानव और उसकी विविध गतिविधियों के परिणाम आदि सभी का समावेश होता हैं। .

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प्लैनम बोरेयम

प्लैनम बोरेयम और उसके परिवेश की वाइकिंग चित्रकारी I प्लैनम बोरेयम (Planum Boreum) (लैटिन: "उत्तरी मैदान"), मंगल ग्रह पर एक उत्तरी ध्रुवीय मैदान है | यह लगभग ८०° उत्तर की ओर फैला हुआ है और पर केंद्रित है | यह उच्च ध्रुवीय मैदान से घिरा एक सपाट और आकृतिविहीन तराई मैदान है, वेस्टिटस बोरीयालिस कहलाता है, जो लगभग १५०० कि.मी.तक दक्षिण की ओर फैला है और उत्तरी गोलार्द्ध पर छाया हुआ है | १९९९ में, हबल अंतरिक्ष दूरदर्शी ने इस क्षेत्र में एक चक्रवाती तूफान को कैद किया | इस तूफ़ान का व्यास लगभग १७५० कि॰मी॰ था | .

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प्लैनम ऑस्ट्राले

प्लैनम ऑस्ट्राले, मार्स ग्लोबल सर्वेयर द्वारा लिया गया I प्लैनम ऑस्ट्राले (Planum Australe) (लैटिन: "दक्षिणी मैदान"), मंगल ग्रह पर एक दक्षिणी ध्रुवीय मैदान है | यह लगभग ७५° दक्षिण की ओर फैला हुआ है और पर केंद्रित है | इस क्षेत्र के भूविज्ञान का अन्वेषण नासा के विफल अभियान मार्स पोलर लैंडर द्वारा होना था | जिसने मंगल के वातावरण में प्रवेश करने के साथ ही संपर्क खो दिया | श्रेणी:Plains on Mars.

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पृथ्वी का इतिहास

पृथ्वी के इतिहास के युगों की सापेक्ष लंबाइयां प्रदर्शित करने वाले, भूगर्भीय घड़ी नामक एक चित्र में डाला गया भूवैज्ञानिक समय. पृथ्वी का इतिहास 4.6 बिलियन वर्ष पूर्व पृथ्वी ग्रह के निर्माण से लेकर आज तक के इसके विकास की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं और बुनियादी चरणों का वर्णन करता है। प्राकृतिक विज्ञान की लगभग सभी शाखाओं ने पृथ्वी के इतिहास की प्रमुख घटनाओं को स्पष्ट करने में अपना योगदान दिया है। पृथ्वी की आयु ब्रह्माण्ड की आयु की लगभग एक-तिहाई है। उस काल-खण्ड के दौरान व्यापक भूगर्भीय तथा जैविक परिवर्तन हुए हैं। .

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फाएथोंटीस चतुष्कोण

फाएथोंटीस चतुष्कोण (Phaethontis quadrangle), संयुक्त राज्य भूगर्भ सर्वेक्षण (यूएसजीएस), खगोलभूविज्ञान अनुसंधान कार्यक्रम द्वारा इस्तेमाल के लिए मंगल ग्रह की 30 चतुष्कोणिय नक्शों की श्रृंखला में से एक है। फाएथोंटीस चतुष्कोण को MC-24 (मार्स चार्ट-24) के रूप में भी जाना जाता है। श्रेणी:खगोलशास्त्र श्रेणी:मंगल ग्रह श्रेणी:मई २०१३ के लेख जिनमें स्रोत नहीं हैं.

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फोनीसिस लैकस चतुष्कोण

फोनीसिस लैकस चतुष्कोण (Phoenicis Lacus quadrangle), संयुक्त राज्य भूगर्भ सर्वेक्षण (यूएसजीएस), खगोलभूविज्ञान अनुसंधान कार्यक्रम द्वारा इस्तेमाल के लिए मंगल ग्रह की 30 चतुष्कोणिय नक्शों की श्रृंखला में से एक है। फोनीसिस लैकस चतुष्कोण को MC-17 (मार्स चार्ट-17) के रूप में भी जाना जाता है। श्रेणी:खगोलशास्त्र श्रेणी:मंगल ग्रह श्रेणी:मई २०१३ के लेख जिनमें स्रोत नहीं हैं.

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फोबोस

फ़ोबस (Phobos) मंगल ग्रह के दो प्राकृतिक उपग्रहों में से सबसे बड़ा व नज़दीकी उपग्रह है। यह दूसरे उपग्रह डीमोस से से ७.२४ गुना बड़ा है। इसका नाम यूनानी देवता फ़ोबस (अर्थात "डर") के नाम पर रखा गया है जो एरिस का बेटा था। दोनों चंद्रमाओं की खोज १८७७ में हुई थी। एक छोटा, बेढंगे आकार का ग्रह फ़ोबस मंगल के केन्द्र बिंदु से ९,४०० किलोमीटर दूर, या मंगल की सतह से ६,००० किलोमीटर दूर घूमता है। .

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बज़ एल्ड्रिन

बज़ एल्ड्रिन (जन्म जनवरी 20, 1930) एक अमेरिकी यांत्रिक इंजीनियर हैं, वे संयुक्त राज्य की एयर फ़ोर्स के सेवानिवृत्त पायलट हैं। साथ ही वे एक अन्तरिक्ष यात्री भी थे। वे अपोलो 11 के ल्यूनर मोड्यूल पायलट थे। यह अन्तरिक्ष यात्रा के इतिहास का पहला यान था जिसने मानव के साथ चांद पर कदम रखा। 20 जुलाई 1969 को वे दूसरे इंसान थे जिन्होंने चांद की धरती पर कदम रखा। उनसे पहले मिशन के कमांडर नील आर्मस्ट्रांग ने चांद की धरती पर कदम रखा था। .

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भारतीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का इतिहास

भारत की विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की विकास-यात्रा प्रागैतिहासिक काल से आरम्भ होती है। भारत का अतीत ज्ञान से परिपूर्ण था और भारतीय संसार का नेतृत्व करते थे। सबसे प्राचीन वैज्ञानिक एवं तकनीकी मानवीय क्रियाकलाप मेहरगढ़ में पाये गये हैं जो अब पाकिस्तान में है। सिन्धु घाटी की सभ्यता से होते हुए यह यात्रा राज्यों एवं साम्राज्यों तक आती है। यह यात्रा मध्यकालीन भारत में भी आगे बढ़ती रही; ब्रिटिश राज में भी भारत में विज्ञान एवं तकनीकी की पर्याप्त प्रगति हुई तथा स्वतंत्रता की प्राप्ति के बाद भारत विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के सभी क्षेत्रों में तेजी से प्रगति कर रहा है। सन् २००९ में चन्द्रमा पर यान भेजकर एवं वहाँ पानी की प्राप्ति का नया खोज करके इस क्षेत्र में भारत ने अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज की है। चार शताब्दियों पूर्व प्रारंभ हुई पश्चिमी विज्ञान व प्रौद्योगिकी संबंधी क्रांति में भारत क्यों शामिल नहीं हो पाया ? इसके अनेक कारणों में मौखिक शिक्षा पद्धति, लिखित पांडुलिपियों का अभाव आदि हैं। .

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भू-आकृति विज्ञान

धरती की सतह भू-आकृति विज्ञान (Geomorphology) (ग्रीक: γῆ, ge, "पृथ्वी"; μορφή, morfé, "आकृति"; और λόγος, लोगोस, "अध्ययन") भू-आकृतियों और उनको आकार देने वाली प्रक्रियाओं का वैज्ञानिक अध्ययन है; तथा अधिक व्यापक रूप में, उन प्रक्रियाओं का अध्ययन है जो किसी भी ग्रह के उच्चावच और स्थलरूपों को नियंत्रित करती हैं। भू-आकृति वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश करते हैं कि भू-दृश्य जैसे दिखते हैं वैसा दिखने के पीछे कारण क्या है, वे भू-आकृतियों के इतिहास और उनकी गतिकी को जानने का प्रयास करते हैं और भूमि अवलोकन, भौतिक परीक्षण और संख्यात्मक मॉडलिंग के एक संयोजन के माध्यम से भविष्य के बदलावों का पूर्वानुमान करते हैं। भू-आकृति विज्ञान का अध्ययन भूगोल, भूविज्ञान, भूगणित, इंजीनियरिंग भूविज्ञान, पुरातत्व और भू-तकनीकी इंजीनियरिंग में किया जाता है और रूचि का यह व्यापक आधार इस विषय के तहत अनुसंधान शैली और रुचियों की व्यापक विविधता को उत्पन्न करता है। पृथ्वी की सतह, प्राकृतिक और मानवोद्भव विज्ञान सम्बन्धी प्रक्रियाओं के संयोजन की प्रतिक्रिया स्वरूप विकास करती है और सामग्री जोड़ने वाली और उसे हटाने वाली प्रक्रियाओं के बीच संतुलन के साथ जवाब देती है। ऐसी प्रक्रियाएं स्थान और समय के विभिन्न पैमानों पर कार्य कर सकती हैं। सर्वाधिक व्यापक पैमाने पर, भू-दृश्य का निर्माण विवर्तनिक उत्थान और ज्वालामुखी के माध्यम से होता है। अनाच्छादन, कटाव और व्यापक बर्बादी से होता है, जो ऐसे तलछट का निर्माण करता है जिसका परिवहन और जमाव भू-दृश्य के भीतर या तट से दूर कहीं अन्य स्थान पर हो जाता है। उत्तरोत्तर छोटे पैमाने पर, इसी तरह की अवधारणा लागू होती है, जहां इकाई भू-आकृतियां योगशील (विवर्तनिक या तलछटी) और घटाव प्रक्रियाओं (कटाव) के संतुलन के जवाब में विकसित होती हैं। आधुनिक भू-आकृति विज्ञान, किसी ग्रह के सतह पर सामग्री के प्रवाह के अपसरण का अध्ययन है और इसलिए तलछट विज्ञान के साथ निकट रूप से संबद्ध है, जिसे समान रूप से उस प्रवाह के अभिसरण के रूप में देखा जा सकता है। भू-आकृतिक प्रक्रियाएं विवर्तनिकी, जलवायु, पारिस्थितिकी, और मानव गतिविधियों से प्रभावित होती हैं और समान रूप से इनमें से कई कारक धरती की सतह पर चल रहे विकास से प्रभावित हो सकते हैं, उदाहरण के लिए, आइसोस्टेसी या पर्वतीय वर्षण के माध्यम से। कई भू-आकृति विज्ञानी, भू-आकृतिक प्रक्रियाओं की मध्यस्थता वाले जलवायु और विवर्तनिकी के बीच प्रतिपुष्टि की संभावना में विशेष रुचि लेते हैं। भू-आकृति विज्ञान के व्यावहारिक अनुप्रयोग में शामिल है संकट आकलन जिसमें शामिल है भूस्खलन पूर्वानुमान और शमन, नदी नियंत्रण और पुनर्स्थापना और तटीय संरक्षण। .

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मार्स एक्सप्रेस

मार्स एक्सप्रेस (Mars Express), एक अंतरिक्ष अन्वेषण अभियान है जिसे यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (इसा) के द्वारा संचालित किया जा रहा है। यह अभियान मंगल का अन्वेषण कर रहा है और इस एजेंसी द्वारा प्रयासरत पहला ग्रहीय अभियान है। "एक्सप्रेस" मूल रूप से गति और दक्षता को निर्दिष्ट करता है जिसके अनुसार अंतरिक्ष यान की रचना की गई और बनाया गया। बहरहाल "एक्सप्रेस" अंतरिक्ष यान की अपेक्षाकृत छोटी ग्रहीय यात्रा का भी वर्णन करता है, नतीजतन इसका प्रक्षेपण तब हुआ जब पृथ्वी और मंगल की कक्षा ने अपने को इतना करीब ला दिया, जितना वें लगभग ६०,००० वर्षों में हुई थी। .

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मार्स ओडिसी

मार्स ओडिसी या २००१ मार्स ओडिसी (2001 Mars Odyssey) मंगल ग्रह की परिक्रमा करने वाला एक रोबोटिक अंतरिक्ष यान है। इस परियोजना को नासा द्वारा विकसित किया गया था। .

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मार्गेरिटाइफर साइनस चतुष्कोण

मार्गेरिटाइफर साइनस चतुष्कोण (Margaritifer Sinus quadrangle), संयुक्त राज्य भूगर्भ सर्वेक्षण (यूएसजीएस), खगोलभूविज्ञान अनुसंधान कार्यक्रम द्वारा इस्तेमाल के लिए मंगल ग्रह की 30 चतुष्कोणिय नक्शों की श्रृंखला में से एक है। मार्गेरिटाइफर साइनस चतुष्कोण को MC-19 (मार्स चार्ट-19) के रूप में भी जाना जाता है। श्रेणी:खगोलशास्त्र श्रेणी:मंगल ग्रह श्रेणी:मई २०१३ के लेख जिनमें स्रोत नहीं हैं.

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मावेन

मार्स एटमोस्फेयर एंड वोलेटाइल एवोल्युसन (Mars Atmosphere and Volatile EvolutioN (MAVEN)) अर्थात मावेन मंगल ग्रह के परिवेश का अध्ययन के लिए बनाया गया अंतरिक्ष शोध यान है जो मंगल की कक्षा में परिक्रमा करता है। इसका लक्ष्य मंगल के वायुमण्डल और जल का पता लगाना है जिसके बारे में परिकल्पित है कि वहाँ पहले कुछ हुआ करता था जो समय के साथ खो गया।.

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मंगल

यदि आपका मतलब कुछ और था तो यहां जाएं -मंगल (बहुविकल्पी) मंगल का अर्थ होता है शुभ, पावन, कुशल इत्यादि। .

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मंगल (बहुविकल्पी)

मंगल के कई अर्थ हो सकते हैं -.

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मंगल (ज्योतिष)

भारतीय ज्योतिष में मंगल इसी नाम के ग्रह के लिये प्रयोग किया जाता है। इस ग्रह को अंगारक (यानि अंगारे जैसा रक्त वर्ण), भौम (यानि भूमि पुत्र) भी कहा जाता है। मंगल युद्ध का देवता कहलाता है और कुंवारा है। यह ग्रह मेष एवं वृश्चिक राशियों का स्वामी कहलाता है। मंगल रुचक महापुरुष योग या मनोगत विज्ञान का प्रदाता माना जाता है। इसे रक्त या लाल वर्ण में दिखाया जाता है एवं यह त्रिशूल, गदा, पद्म और भाला या शूल धारण किये दर्शाया जाता है। इसका वाहन भेड़ होता है एवं सप्तवारों में यह मंगलवार का शासक कहलाता है। .

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मंगल 2022 ऑर्बिटर

मंगल 2022 ऑर्बिटर (Mars 2022 orbiter) एक प्रस्तावित नासा का मंगल संचार उपग्रह है जिसमे उच्च-रिज़ॉल्यूशन इमेजिंग पेलोड और दो सौर-इलेक्ट्रिक आयन थ्रस्टर शामिल हैं। ऑर्बिटर को सितंबर 2022 में लॉन्च किए जाने की उम्मीद है यह उपग्रह लैंडर्स को ग्राउंड कंट्रोलर्स से जोड़ने में काम आयेगा। क्योकि मंगल रिकोन्सेंस ऑर्बिटर और मार्स ओडिसी 2020 तक काम करना बन्द कर सकते है। .

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मंगल हो (फ़िल्म)

मंगल हो एक आगामी भारतीय विज्ञान-फाई कॉमेडी फिल्म है। यह प्रीतिश चक्रवर्ती के लेखक के रूप में दूसरी हिन्दी फीचर फिल्म है जिसे उन्होंने ही निर्देशित व निर्मित किया है। इस हिंदी फिल्म में एक अभिनेता के रूप में प्रीतिश चक्रवर्ती की पहली बार अभिनय करेंगे। फिल्म एसेंट प्राइवेट लिमिटेड और अभिनेता अनु कपूर द्वारा निर्मित है। जबकि बहुमुखी संजय मिश्रा एक दुख बंगाली व्यवसायी की भूमिका में है जो इस फ़िल्म में एक सनकी प्रतिभा वैज्ञानिक की भूमिका निभा रहे है। मंगल ग्रह पर प्रचलित भारतीय सभ्यता के बारे में एक पूरा हंसी-दंगा हो जाएगा और यही से कहानी आगे बढ़ती बढ़ती है। एक एनसेंबल कलाकारों के साथ फिल्म वर्तमान में उत्पादन के अंतर्गत है और फिल्मों की 'मंगल हो' श्रृंखला के पहले है। फिल्म के संगीत संगीत लेबल टी-सीरीज़ द्वारा अधिग्रहीत है। .

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मंगल विज्ञान प्रयोगशाला

मंगल विज्ञान प्रयोगशाला (अंग्रेज़ी: Mars Science Laboratory, मार्ज़ साइन्स लबोरेटोरी) अमेरिकी अंतरिक्ष अनुसन्धान परिषद्, नासा, की एक योजना है जिसके अंतर्गत मंगल ग्रह पर एक पहियों पर घूमने-फिरने वाला यान उतारा जाएगा जो उस ग्रह पर छानबीन करके पृथ्वी पर बैठे वैज्ञानिकों को तस्वीरें और जानकारी भेजेगा। किसी अन्य ग्रह पर ऐसे घूमने वाले यान को अंग्रेज़ी में "रोवर" (rover) कहा जाता है और इस योजना में भेजे गए रोवर का नाम "क्युरियौसिटि" (Curiosity), यानी "जिज्ञासा" है। यह २६ नवम्बर २०११ को पृथ्वी से राकेट पर मंगल की ओर रवाना हुआ था और अगस्त २०१२ में मंगल पर गेल क्रेटर नाम के क्रेटर की तह में उतरेगा। क्युरियौसिटि यान वहाँ पर मिटटी और पत्थरों की जाँच कर के वैज्ञानिकों को यह अंदाज़ा लगाने में मदद करेगा की क्या मंगल पर कभी भी जीवन पनपने के लिए अनुकूल वातावरण मौजूद था या नहीं। अकार में यह रोवर एक आम गाड़ी से ज़रा बड़ा है। मंगल विज्ञान प्रयोगशाला योजना का कुल ख़र्चा २.५ अरब अमेरिकी डालर अनुमानित किया गया है। .

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मंगल का उपनिवेशण

मंगल उपनिवेशण की एक कला अवधारणा. मानव द्वारा मंगल का उपनिवेशण, अटकल और गंभीर अध्ययन का एक केंद्र बिंदु है, क्योंकि उसकी सतही परिस्थितियाँ और जल की उपलब्धता यकीनन मंगल ग्रह को सौरमंडल में पृथ्वी के अलावा अन्य सबसे अधिक मेहमाननवाज ग्रह बनाता है| चंद्रमा को मानव उपनिवेशण के लिए पहले स्थान के रूप में प्रस्तावित किया गया है, लेकिन मंगल ग्रह के पास एक पतला वायुमंडल है, जो इसे मानव और अन्य जैविक जीवन की मेजबानी के लिए सामर्थ्य क्षमता देता है | संभावित उपनिवेशण स्थलों के रूप में, मंगल और चाँद दोनों के साथ नीचे गहरे गुरुत्वीय कूपों में उतरने के साथ साथ लागत और जोखिम का नुकसान भी जुडा है, जो क्षुद्रग्रहों को सौरमंडल में मानव के प्रारंभिक विस्तार के लिए एक और विकल्प बना सकता है| .

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मंगल के चतुष्कोणों की सूची

मंगल ग्रह के भूपृष्ठ को संयुक्त राज्य भूगर्भ सर्वेक्षण द्वारा 30 चतुष्कोणों में विभाजित किया गया है, ऐसा नाम इसलिए क्योंकि उनकी सीमाएं अक्षांश और देशांतर रेखाओं के साथ-साथ स्थित है, इसलिए नक्शे आयताकार दिखाई देते हैं। मंगल चतुष्कोणों के नाम स्थानीय भूआकृतियों पर रखे गए है, और "मार्स चार्ट" के लिए उपसर्ग "MC" के साथ क्रमांकित है। पश्चिम देशांतर का प्रयोग किया जाता है। .

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मंगल की टेराफॉर्मिंग

मंगल की टेराफॉर्मिंग एक परिकल्पित प्रक्रिया है जिसके द्वारा मंगल ग्रह की जलवायु और सतह को जानबूझ परिवर्तित करके गृह के बड़े हिस्सों को मनुष्य के रहने के लायक बनाया जाएगा। श्रेणी:मंगल ग्रह श्रेणी:अंतरिक्ष उपनिवेशण.

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मंगलयान

मंगलयान, (औपचारिक नाम- मंगल कक्षित्र मिशन, Mars Orbiter Mission; मार्स ऑर्बिटर मिशन), भारत का प्रथम मंगल अभियान है। यह भारत की प्रथम ग्रहों के बीच का मिशन है। वस्तुत: यह भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की एक महत्वाकांक्षी अन्तरिक्ष परियोजना है। इस परियोजना के अन्तर्गत 5 नवम्बर 2013 को 2 बजकर 38 मिनट पर मंगल ग्रह की परिक्रमा करने हेतु छोड़ा गया एक उपग्रह आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसऍलवी) सी-25 के द्वारा सफलतापूर्वक छोड़ा गया। इसके साथ ही भारत भी अब उन देशों में शामिल हो गया है जिन्होंने मंगल पर अपने यान भेजे हैं। वैसे अब तक मंगल को जानने के लिये शुरू किये गये दो तिहाई अभियान असफल भी रहे हैं परन्तु 24 सितंबर 2014 को मंगल पर पहुँचने के साथ ही भारत विश्व में अपने प्रथम प्रयास में ही सफल होने वाला पहला देश तथा सोवियत रूस, नासा और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के बाद दुनिया का चौथा देश बन गया है। इसके अतिरिक्त ये मंगल पर भेजा गया सबसे सस्ता मिशन भी है। भारत एशिया का भी ऐसा करने वाला प्रथम पहला देश बन गया। क्योंकि इससे पहले चीन और जापान अपने मंगल अभियान में असफल रहे थे। वस्तुतः यह एक प्रौद्योगिकी प्रदर्शन परियोजना है जिसका लक्ष्य अन्तरग्रहीय अन्तरिक्ष मिशनों के लिये आवश्यक डिजाइन, नियोजन, प्रबन्धन तथा क्रियान्वयन का विकास करना है। ऑर्बिटर अपने पांच उपकरणों के साथ मंगल की परिक्रमा करता रहेगा तथा वैज्ञानिक उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए आंकड़े व तस्वीरें पृथ्वी पर भेजेगा। अंतरिक्ष यान पर वर्तमान में इसरो टेलीमेट्री, ट्रैकिंग और कमांड नेटवर्क (इस्ट्रैक),बंगलौर के अंतरिक्षयान नियंत्रण केंद्र से भारतीय डीप स्पेस नेटवर्क एंटीना की सहायता से नजर रखी जा रही है प्रतिष्ठित 'टाइम' पत्रिका ने मंगलयान को 2014 के सर्वश्रेष्ठ आविष्कारों में शामिल किया। .

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मेम्नोनिया चतुष्कोण

मेम्नोनिया चतुष्कोण (Memnonia quadrangle), संयुक्त राज्य भूगर्भ सर्वेक्षण (यूएसजीएस), खगोलभूविज्ञान अनुसंधान कार्यक्रम द्वारा इस्तेमाल के लिए मंगल ग्रह की 30 चतुष्कोणिय नक्शों की श्रृंखला में से एक है। मेम्नोनिया चतुष्कोण को MC-16 (मार्स चार्ट-16) के रूप में भी जाना जाता है। श्रेणी:खगोलशास्त्र श्रेणी:मंगल ग्रह श्रेणी:मई २०१३ के लेख जिनमें स्रोत नहीं हैं.

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मेयर टेरिनम चतुष्कोण

मेयर टेरिनम चतुष्कोण (Mare Tyrrhenum quadrangle), संयुक्त राज्य भूगर्भ सर्वेक्षण (यूएसजीएस), खगोलभूविज्ञान अनुसंधान कार्यक्रम द्वारा इस्तेमाल के लिए मंगल ग्रह की 30 चतुष्कोणिय नक्शों की श्रृंखला में से एक है। मेयर टेरिनम चतुष्कोण को MC-22 (मार्स चार्ट-22) के रूप में भी जाना जाता है। श्रेणी:खगोलशास्त्र श्रेणी:मंगल ग्रह श्रेणी:मई २०१३ के लेख जिनमें स्रोत नहीं हैं.

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मेयर एसिडेलीयम चतुष्कोण

मेयर एसिडेलीयम चतुष्कोण मेयर एसिडेलीयम चतुष्कोण (Mare Acidalium quadrangle), संयुक्त राज्य भूगर्भ सर्वेक्षण (यूएसजीएस), खगोलभूविज्ञान अनुसंधान कार्यक्रम द्वारा इस्तेमाल के लिए मंगल ग्रह की 30 चतुष्कोणिय नक्शों की श्रृंखला में से एक है। मेयर एसिडेलीयम चतुष्कोण को MC-4(मार्स चार्ट-4) के रूप में भी जाना जाता है। श्रेणी:खगोलशास्त्र श्रेणी:मंगल ग्रह.

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मेयर बोरियम चतुष्कोण

मेयर बोरियम चतुष्कोण (Mare Boreum quadrangle), संयुक्त राज्य भूगर्भ सर्वेक्षण (यूएसजीएस), खगोलभूविज्ञान अनुसंधान कार्यक्रम द्वारा इस्तेमाल के लिए मंगल ग्रह की 30 चतुष्कोण नक्शे की एक श्रृंखला में से एक है। मेयर बोरियम चतुष्कोण को MC-1(मार्स चार्ट-1) के रूप में भी जाना जाता है। इसका नाम इसी आकृति के पुराने नाम से व्युत्पन्न हुआ है जो कि अब प्लैनम बोरियम कहलाता है। प्लैनम बोरियम एक बड़ा मैदान है जो ध्रुवीय टोपी से घिरा हुआ है। .

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मेयर ऑस्ट्रेल चतुष्कोण

मेयर ऑस्ट्रेल चतुष्कोण (Mare Australe quadrangle), संयुक्त राज्य भूगर्भ सर्वेक्षण (यूएसजीएस), खगोलभूविज्ञान अनुसंधान कार्यक्रम द्वारा इस्तेमाल के लिए मंगल ग्रह की 30 चतुष्कोणिय नक्शों की श्रृंखला में से एक है। मेयर ऑस्ट्रेल चतुष्कोण को MC-30 (मार्स चार्ट-30) के रूप में भी जाना जाता है। श्रेणी:खगोलशास्त्र श्रेणी:मंगल ग्रह श्रेणी:मई २०१३ के लेख जिनमें स्रोत नहीं हैं.

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मेरिनर ९

श्रेणी:अंतरिक्ष यान.

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मेसोअमेरिकी

350 पीएक्स (px) 350 पीएक्स (px) 350 पीएक्स (px) 350 पीएक्स (px) पैलेंकी के क्लासिक माया शहर का दृश्य, जो 6 और 7 सदियों में सुशोभित हुआ, मेसोअमेरिकी सभ्यता की उपलब्धियों के कई उदाहरणों में से एक है ट्युटिहुकन के मेसोअमेरिकी शहर का एक दृश्य, जो 200 ई. से 600 ई. तक सुशोभित हुआ और जो अमेरिका में दूसरी सबसे बड़ी पिरामिड की साइट है माया चित्रलिपि पत्रिका में अभिलेख, कई मेसोअमरिकी लेखन प्रणालियों में से एक शिलालेख.दुनिया में मेसोअमेरिका पांच स्थानों में से एक है जहां स्वतंत्र रूप से लेखन विकसित हुआ है मेसोअमेरिका या मेसो-अमेरिका (Mesoamérica) अमेरिका का एक क्षेत्र एवं सांस्कृतिक प्रान्त है, जो केन्द्रीय मैक्सिको से लगभग बेलाइज, ग्वाटेमाला, एल सल्वाडोर, हौंड्यूरॉस, निकारागुआ और कॉस्टा रिका तक फैला हुआ है, जिसके अन्दर 16वीं और 17वीं शताब्दी में, अमेरिका के स्पैनिश उपनिवेशवाद से पूर्व कई पूर्व कोलंबियाई समाज फलफूल रहे थे। इस क्षेत्र के प्रागैतिहासिक समूह, कृषि ग्रामों तथा बड़ी औपचारिक व राजनैतिक-धार्मिक राजधानियों द्वारा वर्णित हैं। यह सांस्कृतिक क्षेत्र अमेरिका की कुछ सर्वाधिक जटिल और उन्नत संस्कृतियों जैसे, ऑल्मेक, ज़ैपोटेक, टियोतिहुआकैन, माया, मिक्सटेक, टोटोनाक और एज़्टेक को शामिल करता है। .

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रानी फ़ाबिओला पर्वत

रानी फ़ाबिओला पर्वत (Queen Fabiola Mountains) पूर्वी अंटार्कटिका के रानी मौड धरती क्षेत्र में स्थित पर्वतों का एक समूह है। यह ५० किमी लम्बी कतार लुटज़ो-होल्म खाड़ी से १४० किमी दक्षिण-पश्चिम में स्थित हैं। इसका सबसे ऊँचा पहाड़ २,७४० मीटर ऊँचा फ़ुकुशीमा पर्वत (Mount Fukushima) है। यामातो हिमानी (Yamato Glacier) इन्हीं पर्वतों में स्थित है और यहाँ सन् २००० में एक १३.७ किलोग्राम का एक उल्का पाया गया जो बनावट परखने पर मंगल ग्रह से आया ज्ञात हुआ। इसे यामातो ०००५९३ (Yamato 000593) का नामांकन मिला और यह पृथ्वी पर गिरा दूसरा सबसे बड़ा ज्ञात मंगल-ग्रहीय उल्का है। .

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रोवर (अंतरिक्ष यान)

अमेरिकी अपोलो १५ मिशन के तहत चन्द्रमा पर भेजा गया "लूनर रोवर" जिसपर दो आदमी सवारी कर सकते थे रोवर (अंग्रेज़ी: rover) ऐसे वाहन को कहते हैं जो किसी अन्य ग्रह या खगोलीय वस्तु पर घूमने-फिरने की क्षमता रखता हो। कुछ रोवर रोबोट होते हैं और बिना किसी व्यक्ति की मौजूदगी के चलते हैं और कुछ मनुष्यों को स्थान-से-स्थान ले जाने के लिए बने होते हैं। आम तौर पर रोवर किसी ग्रह पर किसी अन्य यान के अन्दर ले जाए जाते हैं जो उस ग्रह की सतह पर उतरता हो। उदहारण के लिए नवम्बर २०१० में मंगल विज्ञान प्रयोगशाला योजना के अंतर्गत एक "क्युरियौसिटि" (Curiosity) नाम का रोवर मंगल ग्रह के लिए रवाना किया गया। .

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लूने पैलस चतुष्कोण

लूने पैलस चतुष्कोण (Lunae Palus quadrangle), संयुक्त राज्य भूगर्भ सर्वेक्षण (यूएसजीएस), खगोलभूविज्ञान अनुसंधान कार्यक्रम द्वारा इस्तेमाल के लिए मंगल ग्रह की 30 चतुष्कोणिय नक्शों की श्रृंखला में से एक है। लूने पैलस चतुष्कोण को MC-10 (मार्स चार्ट-10) के रूप में भी जाना जाता है। श्रेणी:खगोलशास्त्र श्रेणी:मंगल ग्रह श्रेणी:मई २०१३ के लेख जिनमें स्रोत नहीं हैं.

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शुक्र

शुक्र (Venus), सूर्य से दूसरा ग्रह है और प्रत्येक 224.7 पृथ्वी दिनों मे सूर्य परिक्रमा करता है। ग्रह का नामकरण प्रेम और सौंदर्य की रोमन देवी पर हुआ है। चंद्रमा के बाद यह रात्रि आकाश में सबसे चमकीली प्राकृतिक वस्तु है। इसका आभासी परिमाण -4.6 के स्तर तक पहुँच जाता है और यह छाया डालने के लिए पर्याप्त उज्जवलता है। चूँकि शुक्र एक अवर ग्रह है इसलिए पृथ्वी से देखने पर यह कभी सूर्य से दूर नज़र नहीं आता है: इसका प्रसरकोण 47.8 डिग्री के अधिकतम तक पहुँचता है। शुक्र सूर्योदय से पहले या सूर्यास्त के बाद केवल थोड़ी देर के लए ही अपनी अधिकतम चमक पर पहुँचता है। यहीं कारण है जिसके लिए यह प्राचीन संस्कृतियों के द्वारा सुबह का तारा या शाम का तारा के रूप में संदर्भित किया गया है। शुक्र एक स्थलीय ग्रह के रूप में वर्गीकृत है और समान आकार, गुरुत्वाकर्षण और संरचना के कारण कभी कभी उसे पृथ्वी का "बहन ग्रह" कहा गया है। शुक्र आकार और दूरी दोनों मे पृथ्वी के निकटतम है। हालांकि अन्य मामलों में यह पृथ्वी से एकदम अलग नज़र आता है। शुक्र सल्फ्यूरिक एसिड युक्त अत्यधिक परावर्तक बादलों की एक अपारदर्शी परत से ढँका हुआ है। जिसने इसकी सतह को दृश्य प्रकाश में अंतरिक्ष से निहारने से बचा रखा है। इसका वायुमंडल चार स्थलीय ग्रहों मे सघनतम है और अधिकाँशतः कार्बन डाईऑक्साइड से बना है। ग्रह की सतह पर वायुमंडलीय दबाव पृथ्वी की तुलना मे 92 गुना है। 735° K (462°C,863°F) के औसत सतही तापमान के साथ शुक्र सौर मंडल मे अब तक का सबसे तप्त ग्रह है। कार्बन को चट्टानों और सतही भूआकृतियों में वापस जकड़ने के लिए यहाँ कोई कार्बन चक्र मौजूद नही है और ना ही ज़ीवद्रव्य को इसमे अवशोषित करने के लिए कोई कार्बनिक जीवन यहाँ नज़र आता है। शुक्र पर अतीत में महासागर हो सकते हैलेकिन अनवरत ग्रीनहाउस प्रभाव के कारण बढ़ते तापमान के साथ वह वाष्पीकृत होते गये होंगे |B.M. Jakosky, "Atmospheres of the Terrestrial Planets", in Beatty, Petersen and Chaikin (eds), The New Solar System, 4th edition 1999, Sky Publishing Company (Boston) and Cambridge University Press (Cambridge), pp.

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सायर्टिस मेजर प्लैनम

सायर्टिस मेजर प्लैनम (Syrtis Major Planum), एक "श्याम धब्बा' (एक एल्बिडो आकृति) है जो मंगल ग्रह के उत्तरी तराई और दक्षिणी उच्च भूमि के बीच की सीमा में स्थित है | यह मार्स ग्लोबल सर्वेयर से प्राप्त आंकड़ो के आधार पर खोजा गया था, जो एक निम्न- उभार ढाल ज्वालामुखी होना पाया गया था, लेकिन पहले इसे एक मैदान होना माना गया था और सायर्टिस मेजर प्लेनिटिया के रूप में जाना जाता था | इसका श्याम रंग क्षेत्र की बेसाल्टी ज्वालामुखी चट्टान और सम्बंधित क्षेत्र में धूल की कमी से आता हैं | सायर्टिस मेजर ८.४° उ० ६९.५° पू० के करीब केंद्रित है, कुछ ग्रह की भूमध्य रेखा से १५०० कि॰मी॰ (९३० मील) उत्तर की ओर विस्तारित है और १,००० कि॰मी॰ (६२० मील) पश्चिम से पूर्व तक फैला है | यह एक सायर्टिस मेजर चतुष्कोण में स्थित है | .

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साइनस सेबेयस चतुष्कोण

साइनस सेबेयस (Sinus Sabaeus quadrangle), संयुक्त राज्य भूगर्भ सर्वेक्षण (यूएसजीएस), खगोलभूविज्ञान अनुसंधान कार्यक्रम द्वारा इस्तेमाल के लिए मंगल ग्रह की 30 चतुष्कोणिय नक्शों की श्रृंखला में से एक है। साइनस सेबेयस को MC-20 (मार्स चार्ट-20) के रूप में भी जाना जाता है। श्रेणी:खगोलशास्त्र श्रेणी:मंगल ग्रह श्रेणी:मई २०१३ के लेख जिनमें स्रोत नहीं हैं.

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सिनस मेरिडियन

यह छवि टेरा मेरिडियन में एक चापाकार टीले को दिखा रही है I सिनस मेरिडियन (Sinus Meridiani), मंगल ग्रह पर एक एल्बिडो आकृति के लिए एक आकृतीय नाम है जो उस ग्रह की भूमध्य रेखा के बिलकुल दक्षिण पर पूरब-पश्चिम फैला हुआ है | इसे फ्रांसीसी खगोलशास्त्री केमिली फ्लंमारियन द्वारा १८७० के दशक के आखिर में नामित किया गया था | इसका व्यास १६२२ कि॰मी॰ है और केंद्र ७.१२° द० ४.०° पू० पर स्थित है | .

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स्टायरिस मेजर चतुष्कोण

स्टायरिस मेजर (Syrtis Major quadrangle), संयुक्त राज्य भूगर्भ सर्वेक्षण (यूएसजीएस), खगोलभूविज्ञान अनुसंधान कार्यक्रम द्वारा इस्तेमाल के लिए मंगल ग्रह की 30 चतुष्कोणिय नक्शों की श्रृंखला में से एक है। स्टायरिस मेजर को MC-13 (मार्स चार्ट-13) के रूप में भी जाना जाता है। श्रेणी:खगोलशास्त्र श्रेणी:मंगल ग्रह श्रेणी:मई २०१३ के लेख जिनमें स्रोत नहीं हैं.

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स्क्यापारेल्ली क्रेटर (मंगल ग्रह)

मार्स ग्लोबल सर्वेयर द्वारा खींचा गया स्क्यापारेल्ली क्रेटर का चित्र स्क्यापारेल्ली (अंग्रेज़ी: Schiaparelli) मंगल ग्रह पर स्थित एक प्रहार क्रेटर है। लगभग गोल-आकार रखने वाला यह क्रेटर मंगल ग्रह की भूमध्य रेखा के पास साइनस सेबेयस चतुष्कोण नामक क्षेत्र में स्थित है और ४६१ किमी (२८६ मील) के व्यास (डायामीटर) का है। इस क्रेटर के अंदर कई परते देखी जा सकती हैं। खगोलशास्त्री अनुमान लगाते हैं कि क्रेटर बनने के बाद पानी, वायू और ज्वालामुखीय क्रियाओं ने इन परतों को बनाया है। परतों के नियमित क्रमों को देखते हुए यह भी अंदाज़ा लगाया जाता है कि इन्हें बनाने में मौसमों के क्रम का भी हाथ अवश्य होगा। स्क्यापारेल्ली क्रेटर इतना प्राचीन है कि इसके बनने के बाद वायु और जल ने कुछ हद तक इसे मलबे से भर दिया और उसके बाद इसके अंदर और भी प्रहार हुए। इस कारणवश स्वयं इस क्रेटर के अंदर भी कई सारे छोटे क्रेटर मौजूद हैं। .

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सीबीएस

सीबीएस ब्रोडकास्टिंग इंक (सीबीएस ब्रोडकास्टिंग इंक.(सीबीएस) एक मुख्य अमरीकी टेलीविजन नेटवर्क है, जिसकी शुरुआत रेडियो नेटवर्क के रूप में हुई. इस नाम की उत्पत्ति इसके पूर्व नेटवर्क कोलंबिया ब्रोडकास्टिंग सिस्टम के प्रारम्भिक वर्णों से हुई है। कंपनी के लोगो के सन्दर्भ में नेटवर्क का उल्लेख कभी-कभी "आई नेटवर्क" के रूप में भी किया जाता है। इसे "टीफ्फनी नेटवर्क" भी कहा जाता है, जो हमें सीबीएस की ऊंची गुणवत्ता की प्रोग्रामिंग का अनुभव कराता है जिसे इसके संस्थापक विलियम एस.पाले (1901-90) के कार्यकाल के दौरान किया गया था। यह सीबीएस के रंगीन टेलीविजन के कुछ आरंभिक प्रदर्शन को भी संदर्भित कर सकता है, जिसका आयोजन 1950 में न्यूयार्क सिटी में पूर्व टिफनी एंड कम्पनी भवन में किया गया था, जिसके बाद इसका नाम "कलर ब्रोडकास्टिंग सिस्टम" पड़ा. नेटवर्क का मूल, यूनाइटेड इंडिपेनडेंट ब्रोडकास्टर इंक में है। जो कि 16 रेडियो स्टेशन का संग्रह है, जिसे 1928 में विलियम एस. पाले द्वारा खरीदा गया और इसका पुनः नामकरण किया गया. पाले के मार्गदर्शन के अंतर्गत, संयुक्त राज्य अमेरिका में सीबीएस सबसे बड़ा रेडियो नेटवर्क बना और उसके बाद तीन बड़ी अमेरिकी प्रसारण टेलीविजन नेटवर्क में से एक बना. 1974 में सीबीएस ने अपने पूर्ण नाम को समाप्त कर केवल सीबीएस, इंक रखा. वेस्टिंगहाउस इलेक्ट्रिक कॉरपोरेशन ने 1995 में इस नेटवर्क को अधिगृहीत किया और फलस्वरूप जिस कंपनी को इसने खरीदा उसका नाम अपना लिया जिससे यह सीबीएस कॉरपोरेशन बन गया. 2000 में सीबीएस को वायाकॉम के तहत नियंत्रित किया गया, जो संयोगवश 1971 में सीबीएस के एक हिस्से के रूप में शुरू हुआ था। 2005 के अंत में, वायाकॉम ने अपने आप को विभाजित कर लिया और प्रमुख रूप से इसके सीबीएस टेलीविजन नेटवर्क के साथ सीबीएस कॉरपोरेशन को पुनर्स्थापित किया गया. सीबीएस कॉरपोरेशन और न्यू वायाकॉम का संचालन नेशनल एम्यूजमेंट के माध्यम से समनर रेडस्टोन के द्वारा किया गया, जो की दोनों कंपनियों की मूल कंपनी है। .

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हेलेस चतुष्कोण

हेलेस चतुष्कोण (Hellas quadrangle), संयुक्त राज्य भूगर्भ सर्वेक्षण (यूएसजीएस), खगोलभूविज्ञान अनुसंधान कार्यक्रम द्वारा इस्तेमाल के लिए मंगल ग्रह की 30 चतुष्कोणिय नक्शों की श्रृंखला में से एक है। हेलेस चतुष्कोण को MC-28 (मार्स चार्ट-28) के रूप में भी जाना जाता है। श्रेणी:खगोलशास्त्र श्रेणी:मंगल ग्रह श्रेणी:मई २०१३ के लेख जिनमें स्रोत नहीं हैं.

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जलतापीय छिद्र

जलतापीय छिद्र (hydrothermal vents) पृथ्वी या अन्य किसी ग्रह पर उपस्थित ऐसा विदर छिद्र होता है जिस से भूतापीय स्रोतों से गरम किया गया जल उगलता है। यह अक्सर सक्रीय ज्वालामुखीय क्षेत्रों, भौगोलिक तख़्तो के अलग होने वाले स्थानों और महासागर द्रोणियों जैसे स्थानों पर मिलते हैं। जलतापीय छिद्रों के अस्तित्व का मूल कारण पृथ्वी की भूवैज्ञानिक सक्रीयता और उसकी सतह व भीतरी भागों में पानी की भारी मात्रा में उपस्थिति है। जब जलतापीय छिद्र भूमि पर होते हैं तो उन्हें गरम चश्मों, फ़ूमारोलों और उष्णोत्सों के रूप में देखा जाता है। जब वे महासागरों के फ़र्श पर होते हैं तो उन्हें काले धुआँदारी (black smokers) और श्वेत धुआँदारी (white smokers) के रूप में पाया जाता है। गहरे समुद्र के बाक़ि क्षेत्र की तुलना में काले धुआँदारियों के आसपास अक्सर बैक्टीरिया और आर्किया जैसे सूक्ष्मजीवों की भरमार होती है। यह जीव इन छिद्रों में से निकल रहे रसायनों को खाकर ऊर्जा बनाते हैं और जीवित रहते हैं और फिर आगे ऐसे जीवों को ग्रास बनाने वाले अन्य जीवों के समूह भी यहाँ पनपते हैं। माना जाता है कि बृहस्पति ग्रह के यूरोपा चंद्रमा और शनि ग्रह के एनसेलेडस चंद्रमा पर भी सक्रीय जलतापीय छिद्र मौजूद हैं और अति-प्राचीनकाल में यह सम्भवतः मंगल ग्रह पर भी रहे हों। .

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जेम्स कैमरून

जेम्स फ्रांसिस कैमरूनस्पेस फाउंडेशन.

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जॉन कार्टर

जॉन कार्टर (John Carter) २०१२ में बनी अमरीकी काल्पनिक विज्ञान पर आधारित फ़िल्म है जिसमे एडगर राइस बरोज द्वारा लिखी बर्सूम शृंखला के मुख्य किरदार जॉन कार्टर को पहली बार बड़े पर्दे पर लाया गया है। पूर्व कांफेडरेट कैप्टन जॉन कार्टर अनजान तरीके से मंगल पर पहुँच जाता है जहा व मंगल (बार्सूम) की भिन्न प्रजातियों में चल रहे युद्ध का हिस्सा बन जाता है। कार्टर बार्सूम और उसकी जनता को बचने का ज़िम्मा खुद पर लेलेता है। फ़िल्म को ९ मार्च २०१२ को भारत सहित विश्वभर में रिलीज़ किया गया है। .

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वातज स्थलरूप

वातज स्थलरूप (Aeolian landforms) पृथ्वी की सतह पर वह स्थलरूप होते हैं जो वायु प्रवाह द्वारा निर्मित हों। ऐसे स्थलरूप पृथ्वी के अलावा मंगल जैसे अन्य ग्रहों पर भी देखे गए हैं। बालुका स्तूप (ड्यून, अर्ग, लोयस, इत्यादि इसी वातज श्रेणी में आते हैं। .

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विकिरण दाब

विकिरण दाब (radiation pressure) किसी सतह पर विद्युतचुंबकीय विकिरण पड़ने से पैदा होने वाले दाब को कहते हैं। यह दाब भिन्न प्रकार की वस्तुओं पर विकिरण के अवशोषण, परावर्तन या इनके मिले-जुले प्रभाव के कारण उत्पन्न होता है। क्योंकि प्रकाश भी एक प्रकार का विद्युतचुंबकीय विकिरण है, इसलिए किसी वस्तु पर प्रकाश के गिरने से भी उस वस्तु पर दबाव पड़ता है। दैनिक जीवन में यह दाब कम बलवान होने के कारण प्रतीत नहीं होता लेकिन लम्बें अंतराल पर इसका प्रभाव काफ़ी हो सकता है। अनुमान लगाया गया है कि यदि संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा मंगल ग्रह भेजे गये वाइकिंग-१ और वाइकिंग-२ अंतरिक्ष यानों पर सौर किरणों द्वारा बनने वाले विकिरण दाब का हिसाब लगाकर यान की उड़ान को अनुकूल न किया जाता तो यह यान मंगल ग्रह पहुँचने की बजाय उस से १५,००० किलोमीटर की दूरी पर आगे अंतरिक्ष में निकल जाते। .

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खगोलशास्त्र से सम्बन्धित शब्दावली

यह पृष्ठ खगोलशास्त्र की शब्दावली है। खगोलशास्त्र वह वैज्ञानिक अध्ययन है जिसका सबंध पृथ्वी के वातावरण के बाहर उत्पन्न होने वाले खगोलीय पिंडों और घटनाओं से होता है। .

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गारामुखी

अज़रबैजान के गोबुस्तान क्षेत्र में गारामुखियों की एक शृंखला गारामुखी (mud volcano, मड वॉल्केनो) या पंकमुखी या पंक ज्वालामुखी एक ऐसी प्राकृतिक रचना को कहते हैं जिसमें ज़मीन के नीचे से उभरते हुए गरम द्रवों और गैसों से एक टीला बन जाए जिसके ऊपर स्थित मुख से गीली मिट्टी और मलबा (यानि 'गारा') उगलता हो। एक तरह से यह ज्वालामुखी की तरह ही होता है हालांकि गारामुखी से लावा नहीं निकलता और इनका तापमान ज्वालामुखियों से बहुत कम होता है। पूरे विश्व में लगभग ७०० गारामुखी ज्ञात हैं और सबसे बड़ा वाला ७०० मीटर ऊँचा है और १० किमी का व्यास (डायामीटर) रखता है। गारामुखियों से निकलने वाली गैस का लगभग ८५% मीथेन होता है और इसके अतिरिक्त इसमें कार्बन डायोक्साइड और नाइट्रोजन भी होती हैं। इनमें से निकलने वाला द्रव अधिकतर गरम पानी होता है जिसमें महीन धुल और पत्तर के कण मिले होते हैं, हालांकि कुछ मात्रा हाइड्रोकार्बन द्रवों की भी होती है। अक्सर यह द्रव (लिक्विड) अम्लीय (एसिडिक) और नमकीन होता है। कुछ खगोलशास्त्रियों को मंगल ग्रह पर भी गारामुखियों के मौजूद होने का शक है।, BBC, Accessed 2009-03-27 .

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ग्रह

हमारे सौरमण्डल के ग्रह - दायें से बाएं - बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, युरेनस और नेप्चून सौर मंडल के ग्रहों, सूर्य और अन्य पिंडों के तुलनात्मक चित्र सूर्य या किसी अन्य तारे के चारों ओर परिक्रमा करने वाले खगोल पिण्डों को ग्रह कहते हैं। अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ के अनुसार हमारे सौर मंडल में आठ ग्रह हैं - बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, युरेनस और नेप्चून। इनके अतिरिक्त तीन बौने ग्रह और हैं - सीरीस, प्लूटो और एरीस। प्राचीन खगोलशास्त्रियों ने तारों और ग्रहों के बीच में अन्तर इस तरह किया- रात में आकाश में चमकने वाले अधिकतर पिण्ड हमेशा पूरब की दिशा से उठते हैं, एक निश्चित गति प्राप्त करते हैं और पश्चिम की दिशा में अस्त होते हैं। इन पिण्डों का आपस में एक दूसरे के सापेक्ष भी कोई परिवर्तन नहीं होता है। इन पिण्डों को तारा कहा गया। पर कुछ ऐसे भी पिण्ड हैं जो बाकी पिण्डों के सापेक्ष में कभी आगे जाते थे और कभी पीछे - यानी कि वे घुमक्कड़ थे। Planet एक लैटिन का शब्द है, जिसका अर्थ होता है इधर-उधर घूमने वाला। इसलिये इन पिण्डों का नाम Planet और हिन्दी में ग्रह रख दिया गया। शनि के परे के ग्रह दूरबीन के बिना नहीं दिखाई देते हैं, इसलिए प्राचीन वैज्ञानिकों को केवल पाँच ग्रहों का ज्ञान था, पृथ्वी को उस समय ग्रह नहीं माना जाता था। ज्योतिष के अनुसार ग्रह की परिभाषा अलग है। भारतीय ज्योतिष और पौराणिक कथाओं में नौ ग्रह गिने जाते हैं, सूर्य, चन्द्रमा, बुध, शुक्र, मंगल, गुरु, शनि, राहु और केतु। .

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गूगल मानचित्र

गूगल मानचित्र (Google Maps) (पूर्व में गूगल लोकल) गूगल द्वारा निःशुल्क रूप से प्रदत्त (गैर-व्यावसायिक उपयोग के लिए) एक वेब मैपिंग सर्विस एप्लिकेशन और तकनीक है जिसके द्वारा गूगल मानचित्र वेबसाइट, गूगल राइड फाइंडर, गूगल ट्रांजिट और गूगल मानचित्र एपीआई के माध्यम से तीसरे पक्ष की वेबसाइटों में सन्निहित मानचित्रों सहित कई मानचित्र-आधारित सेवाएं संचालित होती हैं। यह दुनिया भर के अनेकों देशों के लिए सड़कों के नक़्शे उपलब्ध कराता है जो पैदल, कार या सार्वजनिक वाहन से यात्रा करने वालों और शहर में व्यवसायों की खोज करने वालों के लिए मार्ग योजनाकार का काम करता है। गूगल मानचित्र के उपग्रह से लिए गए चित्र वास्तविक समय को नहीं दर्शाते हैं; ये कई महीनों या वर्षों पुराने होते हैं। गूगल मानचित्र मर्केटर प्रोजेक्शन के एक करीबी संस्करण का उपयोग करते हैं, इसलिए यह ध्रुवों के आसपास के क्षेत्रों को नहीं दिखा सकते हैं। इसका एक संबंधित उत्पाद गूगल अर्थ अकेला ऐसा प्रोग्राम है जो ध्रुवीय क्षेत्रों सहित ग्लोब को दिखाता है और साथ ही कई सुविधाएं भी प्रदान करता है। .

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गेल क्रेटर

गेल क्रेटर का नक़्शा (रंग नकली हैं) गेल (अंग्रेज़ी: Gale) मंगल ग्रह पर स्थित एक क्रेटर है। यह आइलीज़ियम पलैनिटिया (Elysium Planitia) नाम के इलाके के निचले हिस्से में स्थित है। इसका गोल आकार है और इसका व्यास (डायामीटर) लगभग १५४ किलोमीटर है। माना जाता है कि यह आज से ३.५ से ३.८ अरब साल पहले हुए एक प्रहार से बना था। इसका नाम वॉल्टर फ़्रेडेरिक गेल नाम के खगोलशास्त्री पर रखा गया था जिसने १९वीं सदी ईसवी में मंगल पर काफ़ी अनुसंधान किया था। नवम्बर २०११ में अमेरिका ने एक क्युरियौसिटि नामक शोध यान मंगल की तरफ़ भेजा। अगर यह प्रयास कामयाब रहा तो अगस्त २०१२ में यह गेल क्रेटर में उतरेगा और उस क्रेटर के बारे में बहुत सी जानकारी पृथ्वी की ओर भेजेगा। .

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ऑक्सिया पैलस चतुष्कोण

ऑक्सिया पैलस चतुष्कोण (Oxia Palus quadrangle), संयुक्त राज्य भूगर्भ सर्वेक्षण (यूएसजीएस), खगोलभूविज्ञान अनुसंधान कार्यक्रम द्वारा इस्तेमाल के लिए मंगल ग्रह की 30 चतुष्कोणिय नक्शों की श्रृंखला में से एक है। ऑक्सिया पैलस चतुष्कोण को MC-11 (मार्स चार्ट-11) के रूप में भी जाना जाता है। श्रेणी:खगोलशास्त्र श्रेणी:मंगल ग्रह श्रेणी:मई २०१३ के लेख जिनमें स्रोत नहीं हैं.

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ओपल

ओपल या दूधिया पत्थर धातु से बना जैल है जो बहुत कम तापमान पर किसी भी प्रकार के चट्टान की दरारों में जमा हो जाता है, आमतौर पर चूना पत्थर, बलुआ पत्थर, आग्नेय चट्टान, मार्ल और बेसाल्ट के बीच पाया जा सकता है। ओपल शब्द की उत्पत्ति लैटिन शब्द ओपलस और यूनानी शब्द ओपैलियस से हुई है। पानी की मात्रा अक्सर तीन और दस प्रतिशत के बीच होती है लेकिन बहुत ऊंची बीस प्रतिशत तक हो सकती है। ओपल धवल से सफेद, भूरे, लाल, नारंगी, पीले, हरे, नीले, बैंगनी, गुलाबी, स्लेटी, ऑलिव, बादामी और काले रंगों में पाई जाती हैं। इन विविध रंगों में, काले रंग के खिलाफ लाल सबसे अधिक दुर्लभ है जबकि सफेद और हरा सबसे आम है। इन रंगों में भिन्नता लाल और अवरक्त तरंगदैर्घ्य के आकार और विकास के कारण आती है। ओपल ऑस्ट्रेलिया का राष्ट्रीय रत्न है। .

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ओलम्पस मोन्स

ओलम्पस मोन्स (Olympus Mons) (लैटिन: माउंट ओलम्पस), मंगल ग्रह पर एक बड़ा ज्वालामुखी पहाड़ है। करीबन २२ कि॰मी॰ (१४ मील) की उंचाई के साथ,Plescia, J. B. (2004).

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आयपिज़ीया चतुष्कोण

आयपिज़ीया चतुष्कोण (Iapygia quadrangle), संयुक्त राज्य भूगर्भ सर्वेक्षण (यूएसजीएस), खगोलभूविज्ञान अनुसंधान कार्यक्रम द्वारा इस्तेमाल के लिए मंगल ग्रह की 30 चतुष्कोणिय नक्शों की श्रृंखला में से एक है। आयपिज़ीया चतुष्कोण को MC-21 (मार्स चार्ट-21) के रूप में भी जाना जाता है। श्रेणी:खगोलशास्त्र श्रेणी:मंगल ग्रह श्रेणी:मई २०१३ के लेख जिनमें स्रोत नहीं हैं.

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आरगायरे चतुष्कोण

आरगायरे चतुष्कोण (Argyre quadrangle), संयुक्त राज्य भूगर्भ सर्वेक्षण (यूएसजीएस), खगोलभूविज्ञान अनुसंधान कार्यक्रम द्वारा इस्तेमाल के लिए मंगल ग्रह की 30 चतुष्कोणिय नक्शों की श्रृंखला में से एक है। आरगायरे चतुष्कोण को MC-26 (मार्स चार्ट-26) के रूप में भी जाना जाता है। श्रेणी:खगोलशास्त्र श्रेणी:मंगल ग्रह श्रेणी:मई २०१३ के लेख जिनमें स्रोत नहीं हैं.

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आर्केडिया चतुष्कोण

आर्केडिया चतुष्कोण (Arcadia quadrangle), संयुक्त राज्य भूगर्भ सर्वेक्षण (यूएसजीएस), खगोलभूविज्ञान अनुसंधान कार्यक्रम द्वारा इस्तेमाल के लिए मंगल ग्रह की 30 चतुष्कोणिय नक्शों की श्रृंखला में से एक है। आर्केडिया चतुष्कोण को MC-3(मार्स चार्ट-3) के रूप में भी जाना जाता है। श्रेणी:खगोलशास्त्र श्रेणी:मंगल ग्रह.

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आईज़ैक असिमोव

आईज़ैक असिमोव (Айзек Азимов; जन्मतः आईज़ैक युडोविच ओज़िमोव, Исаак Юдович Озимов 2 जनवरी 1920 - 6 अप्रैल 1992), एक अमेरिकी लेखक और बोस्टन विश्वविद्यालय में जैव-रसायन (बायोकेमिस्ट्री) के प्रोफेसर थे जिन्हें अपने साइंस फिक्शन से संबंधित कार्यों तथा साइंस की लोकप्रिय किताबों के लिए जाना जाता है। असिमोव, लेखन के क्षेत्र में अब तक सर्वाधिक कार्य करने वाले लेखकों में से एक हैं जिन्होंने 500 से अधिक पुस्तकों तथा अनुमानतः 9000 पत्रों और पोस्टकार्डों को लिखा अथवा सम्पादित किया है। उनके कार्यों को ड्यूवी डेसिमल सिस्टम की दस में से नौ श्रेणियों में प्रकाशित किया जा चुका है (100s: फिलोसोफी एंड साइकोलोजी इसका एकमात्र अपवाद है).

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इयोलीस चतुष्कोण

इयोलीस चतुष्कोण (Aeolis quadrangle), संयुक्त राज्य भूगर्भ सर्वेक्षण (यूएसजीएस), खगोलभूविज्ञान अनुसंधान कार्यक्रम द्वारा इस्तेमाल के लिए मंगल ग्रह की 30 चतुष्कोणिय नक्शों की श्रृंखला में से एक है। इयोलीस चतुष्कोण को MC-23 (मार्स चार्ट-23) के रूप में भी जाना जाता है। श्रेणी:खगोलशास्त्र श्रेणी:मंगल ग्रह श्रेणी:मई २०१३ के लेख जिनमें स्रोत नहीं हैं.

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इस्मेनियस लैकस चतुष्कोण

इस्मेनियस लैकस चतुष्कोण (Ismenius Lacus quadrangle), संयुक्त राज्य भूगर्भ सर्वेक्षण (यूएसजीएस), खगोलभूविज्ञान अनुसंधान कार्यक्रम द्वारा इस्तेमाल के लिए मंगल ग्रह की 30 चतुष्कोणिय नक्शों की श्रृंखला में से एक है। इस्मेनियस लैकस चतुष्कोण को MC-5(मार्स चार्ट-5) के रूप में भी जाना जाता है। श्रेणी:खगोलशास्त्र श्रेणी:मंगल ग्रह.

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काकोरी

काकोरी उत्तर प्रदेश में लखनऊ जिले का शहर और नगर पंचायत है। यह जगह भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के दौरान क्रान्तिकारी काकोरी काण्ड के लिए जानी जाती है। यहाँ पर काकोरी शहीदों की स्मृति में एक स्मारक भी है। इस शहर के स्मृति को अक्षुण्ण बनाये रखने के लिये मंगल ग्रह के एक प्रमुख क्रेटर का नाम भी काकोरी ही रखा गया है। .

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काकोरी (बहुविकल्पी)

* काकोरी, भारतवर्ष का एक ऐतिहासिक शहर।.

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काकोरी (मंगल ग्रह)

काकोरी (मंगल ग्रह) पृथ्वी से करोड़ों मील दूर मंगल ग्रह पर स्थित एक क्रेटर का नाम है। इसका व्यास 29.7 किलोमीटर है और यह मंगल ग्रह के अक्षांश 41.8 व देशांतर 29.9 पर स्थित है। सन् 1976 में इसका नामकरण भारत के एक ऐतिहासिक शहर काकोरी के नाम पर किया गया था। .

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कैब्रेनिया चतुष्कोण

कैब्रेनिया चतुष्कोण (Cebrenia quadrangle), संयुक्त राज्य भूगर्भ सर्वेक्षण (यूएसजीएस), खगोलभूविज्ञान अनुसंधान कार्यक्रम द्वारा इस्तेमाल के लिए मंगल ग्रह की 30 चतुष्कोणिय नक्शों की श्रृंखला में से एक है। कैब्रेनिया चतुष्कोण को MC-7 (मार्स चार्ट-7) के रूप में भी जाना जाता है। श्रेणी:खगोलशास्त्र श्रेणी:मंगल ग्रह.

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कैसियस चतुष्कोण

कैसियस चतुष्कोण (Casius quadrangle), संयुक्त राज्य भूगर्भ सर्वेक्षण (यूएसजीएस), खगोलभूविज्ञान अनुसंधान कार्यक्रम द्वारा इस्तेमाल के लिए मंगल ग्रह की 30 चतुष्कोणिय नक्शों की श्रृंखला में से एक है। कैसियस चतुष्कोण को MC-6 (मार्स चार्ट-6) के रूप में भी जाना जाता है। श्रेणी:खगोलशास्त्र श्रेणी:मंगल ग्रह.

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कोप्रेट्स चतुष्कोण

कोप्रेट्स चतुष्कोण (Coprates quadrangle), संयुक्त राज्य भूगर्भ सर्वेक्षण (यूएसजीएस), खगोलभूविज्ञान अनुसंधान कार्यक्रम द्वारा इस्तेमाल के लिए मंगल ग्रह की 30 चतुष्कोणिय नक्शों की श्रृंखला में से एक है। कोप्रेट्स चतुष्कोण को MC-18 (मार्स चार्ट-18) के रूप में भी जाना जाता है। श्रेणी:खगोलशास्त्र श्रेणी:मंगल ग्रह श्रेणी:मई २०१३ के लेख जिनमें स्रोत नहीं हैं.

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अन्तर्ग्रहीय अंतरिक्ष उड़ान

अन्तर्ग्रहीय अंतरिक्ष उड़ान (interplanetary spaceflight) या अन्तर्ग्रहीय यात्रा (interplanetary travel) ग्रहों के बीच किसी यान की अंतरिक्ष उड़ान को कहते हैं। यह वास्तविक या काल्पनिक हो सकती है, हालांकि आमतौर पर "अन्तर्ग्रहीय" शब्द एक ही ग्रहीय मण्डल के दो ग्रहों के बीच की यात्रा को कहा जाता है। भारत के मंगलयान की पृथ्वी से मंगल ग्रह की यात्रा इसका एक उदाहरण है। दो अलग तारों या उनके ग्रहों के बीच की यात्रा को अंतरतारकीय अंतरिक्ष उड़ान (interstellar spaceflight) कहते हैं, हालांकि ऐसी यात्राएँ अभी तक केवल काल्पनिक ही हैं। .

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अप्रैल फूल दिवस

अप्रैल फूल दिवस पश्चिमी देशों में हर साल पहली अप्रैल को मनाया जाता है। कभी-कभी ऑल फूल्स डे के रूप में जाना जाने वाला यह दिन, 1 अप्रैल एक आधिकारिक छुट्टी का दिन नहीं है लेकिन इसे व्यापक रूप से एक ऐसे दिन के रूप में जाना और मनाया जाता है जब एक दूसरे के साथ व्यावाहारिक मजाक और सामान्य तौर पर मूर्खतापूर्ण हरकतें की जाती हैं। इस दिन दोस्तों, परिजनों, शिक्षकों, पड़ोसियों, सहकर्मियों आदि के साथ अनेक प्रकार की शरारतपूर्ण हरकतें और अन्य व्यावहारिक मजाक किए जाते हैं, जिनका उद्देश्य होता है बेवकूफ और अनाड़ी लोगों को शर्मिंदा करना। पारंपरिक तौर पर कुछ देशों जैसे न्यूजीलैंड, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका में इस तरह के मजाक केवल दोपहर तक ही किये जाते हैं और अगर कोई दोपहर के बाद किसी तरह की कोशिश करता है तो उसे "अप्रैल फूल" कहा जाता है। ऐसा इसीलिये किया जाता है क्योंकि ब्रिटेन के अखबार जो अप्रैल फूल पर मुख्य पृष्ठ निकालते हैं वे ऐसा सिर्फ पहले (सुबह के) एडिशन के लिए ही करते हैं। इसके अलावा फ्रांस, आयरलैंड, इटली, दक्षिण कोरिया, जापान रूस, नीदरलैंड, जर्मनी, ब्राजील, कनाडा और अमेरिका में जोक्स का सिलसिला दिन भर चलता रहता है। 1 अप्रैल और मूर्खता के बीच सबसे पहला दर्ज किया गया संबंध चॉसर के कैंटरबरी टेल्स (1392) में पाया जाता है। कई लेखक यह बताते हैं कि 16वीं सदी में एक जनवरी को न्यू ईयर्स डे के रूप में मनाये जाने का चलन एक छुट्टी का दिन निकालने के लिए शुरू किया गया था, लेकिन यह सिद्धांत पुराने संदर्भों का उल्लेख नहीं करता है। .

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अमेज़ोनिस चतुष्कोण

अमेज़ोनिस चतुष्कोण (Amazonis quadrangle), संयुक्त राज्य भूगर्भ सर्वेक्षण (यूएसजीएस), खगोलभूविज्ञान अनुसंधान कार्यक्रम द्वारा इस्तेमाल के लिए मंगल ग्रह की 30 चतुष्कोणिय नक्शों की श्रृंखला में से एक है। अमेज़ोनिस चतुष्कोण को MC-8 (मार्स चार्ट-8) के रूप में भी जाना जाता है। श्रेणी:खगोलशास्त्र श्रेणी:मंगल ग्रह श्रेणी:मई २०१३ के लेख जिनमें स्रोत नहीं हैं.

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अमेंथीस चतुष्कोण

अमेंथीस चतुष्कोण (Amenthes quadrangle), संयुक्त राज्य भूगर्भ सर्वेक्षण (यूएसजीएस), खगोलभूविज्ञान अनुसंधान कार्यक्रम द्वारा इस्तेमाल के लिए मंगल ग्रह की 30 चतुष्कोणिय नक्शों की श्रृंखला में से एक है। अमेंथीस चतुष्कोण को MC-14 (मार्स चार्ट-14) के रूप में भी जाना जाता है। श्रेणी:खगोलशास्त्र श्रेणी:मंगल ग्रह श्रेणी:मई २०१३ के लेख जिनमें स्रोत नहीं हैं.

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अरेबिया चतुष्कोण

अरेबिया चतुष्कोण (Arabia quadrangle), संयुक्त राज्य भूगर्भ सर्वेक्षण (यूएसजीएस), खगोलभूविज्ञान अनुसंधान कार्यक्रम द्वारा इस्तेमाल के लिए मंगल ग्रह की 30 चतुष्कोणिय नक्शों की श्रृंखला में से एक है। अरेबिया चतुष्कोण को MC-12 (मार्स चार्ट-12) के रूप में भी जाना जाता है। श्रेणी:खगोलशास्त्र श्रेणी:मंगल ग्रह श्रेणी:मई २०१३ के लेख जिनमें स्रोत नहीं हैं.

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अंतरिक्ष विज्ञान

गैलेक्सी के एक भाग को प्रदर्शित करता हुआ एक तस्वीर अंतरिक्ष विज्ञान एक व्यापक शब्द है जो ब्रह्मांड के अध्ययन से जुड़े विभिन्न विज्ञान क्षेत्रों का वर्णन करता है तथा सामान्य तौर पर इसका अर्थ "पृथ्वी के अतिरिक्त" तथा "पृथ्वी के वातावरण से बाहर" भी है। मूलतः, इन सभी क्षेत्रों को खगोल विज्ञान का हिस्सा माना गया था। हालांकि, हाल के वर्षों में खगोल के कुछ क्षेत्रों, जैसे कि खगोल भौतिकी, का इतना विस्तार हुआ है कि अब इन्हें अपनी तरह का एक अलग क्षेत्र माना जाता है। कुल मिला कर आठ श्रेणियाँ हैं, जिनका वर्णन अलग से किया जा सकता है; खगोल भौतिकी, गैलेक्सी विज्ञान, तारकीय विज्ञान, पृथ्वी से असंबंधित ग्रह विज्ञान, अन्य ग्रहों का जीव विज्ञान, एस्ट्रोनॉटिक्स/ अंतरिक्ष यात्रा, अंतरिक्ष औपनिवेशीकरण और अंतरिक्ष रक्षा.

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अंतरिक्ष अन्वेषण

सैटर्न V रॉकेट जिसका उपयोग अमेरिकी चंग्रमा अभियानों पर किया जाता है अंतरिक्ष यात्रा या अंतरिक्ष अन्वेषण ब्रह्माण्ड की खोज और उसका अन्वेषण अंतरिक्ष की तकनीकों का उपयोग करके करने को कहते हैं। अंतरिक्ष का शारीरिक तौर पर अन्वेषण मानवीय अंतरिक्ष उड़ानों व रोबोटिक अंतरिक्ष यानो द्वारा किया जाता है। हालाँकि खगोलविज्ञान के ज़रिए हम अंतरिक्ष में मौजूद वस्तुओं का निरिक्षण मानव इतिहास में लंबे समय से करते आ रहे हैं परन्तु २०वि सदी की शुरुआत में बड़े व कारगर रॉकेटों के कारण हमने अंतरिक्ष अन्वेषण को एक सत्य बना दिया है। अंतरिक्ष अन्वेषण में आधुकिन वैज्ञानिक अनुसन्धान, कई राष्ट्रों को एक जुट करना, मानवता का भविष्य में जीवित रहना पक्का करना और अन्य देशों के खिलाफ़ सैन्य व सैन्य तकनीकों का विकास करना शामिल है। कई बार अंतरिक्ष अन्वेषण पर अलग-अलग तरह से टिका की गई है। अंतरिक्ष अन्वेषण का उपयोग शीत युद्ध जैसे कालों में अपना कौशल व वर्चस्व सिद्ध करने के लिए अक्सर होता आया है। अंतरिक्ष अन्वेषण की शुरुआत सोवियत संघ और अमेरिका के बिच शुरू हुई "अंतरिक्ष होड़" से हुई जब सोवियत संघ ने ४ अक्टूबर १९५७ को मानव-निर्मित पहली वस्तु, स्पुतनिक 1 पृथ्वी की कक्षा में प्रक्षेपित किया था और इसके बाद अमेरिकी अपोलो ११ अंतरिक्ष यान को चंद्रमा पर २० जुलाई १९६९ को उतारा गया था। इन दोनों घटनाओं को अपने काल की बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जाता है। सोवित अंतरिक्ष कार्यक्रम ने कई शुरूआती उपलब्धियां हासिल की जिनमे १९५७ में पहले जीवित प्राणी को कक्षा में भेजना, १९६१ में पहली मानवीय अंतरिक्ष उड़ान (यूरी गगारिन वोस्तोक 1 में), १९६५ में पहला अंतरिक्ष में कदम (एलेक्सी लेओनोव द्वारा), १९६६ में किसी बाह्य अंतरिक्ष वस्तु पर पहली स्वयंचलित लैंडिंग और १९७१ में पहला अंतरिक्ष स्टेशन (सल्यूट 1) भेजना शामिल है। अन्वेषण व खोज के पहले २० वर्षों बाद एक-तरफा उड़ानों से ध्यान पुनः उपयोग में लाए जा सकने वाले स्रोतों की ओर मुड़ा जिनमे स्पेस शटल कार्यक्रम शामिल है और होड़ से मिलजुल कर काम करने पर केंद्रित हुआ जिसका परिणाम अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) है। २००० में पीपल्स रिपब्लिक ऑफ़ चाइना ने एक सफल मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम की शुरुआत की। इसके साथ ही युओपीय संघ, जापान और भारत ने भी भविष्य में मानवी अंतरिक्ष मिशनों की योजना बनाई है। चीन, रूस, जापान और भारत ने २१वि सदी में चंद्रमा पर मानव अभियानों की शुरुआत ककी है और युओपीय संघ ने चंद्रमा और मंगल, दोनों पर मानव अभियानों की शुरुआत करने का निर्णय लिया है। १९९० के बाद से कई निजी कंपनियों ने अंतरिक्ष पर्यटन को बढ़ावा देना शुरू किया है और इसके बाद चंद्रमा का निजी अन्वेषण भी करने की मांग की है। श्रेणी:अंतरिक्ष.

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उपसौर और अपसौर

'''1'''- ग्रह अपसौर पर, '''2'''- ग्रह उपसौर पर, '''3'''- सूर्य उपसौर और अपसौर (Perihelion and Aphelion), किसी ग्रह, क्षुद्रग्रह या धूमकेतु की अपनी कक्षा पर सूर्य से क्रमशः न्यूनतम और अधिकतम दूरी है। सौरमंडल में ग्रह सूर्य की परिक्रमा करते है, कुछ ग्रहों की कक्षाएं करीब-करीब पूर्ण वृत्ताकार होती है, लेकिन कुछ की नहीं।| कुछ कक्षाओं के आकार अंडाकार जैसे ज्यादा है या इसे हम एक खींचा या तना हुआ वृत्त भी कह सकते है। वैज्ञानिक इस अंडाकार आकार को "दीर्घवृत्त" कहते है। यदि एक ग्रह की कक्षा वृत्त है, तो सूर्य उस वृत्त के केंद्र पर है। यदि, इसके बजाय, कक्षा दीर्घवृत्त है, तो सूर्य उस बिंदु पर है जिसे दीर्घवृत्त की "नाभि" कहा जाता है, यह इसके केंद्र से थोड़ा अलग है। एक दीर्घवृत्त में दो नाभीयां होती है। चूँकि सूर्य दीर्घवृत्त कक्षा के केंद्र पर नहीं है, ग्रह जब सूर्य का चक्कर लगाते है, कभी सूर्य की तरफ करीब चले आते है तो कभी उससे परे दूर चले जाते है। वह स्थान जहां से ग्रह सूर्य से सबसे नजदीक होता है उपसौर कहलाता है। जब ग्रह सूर्य से परे सबसे दूर होता है, यह अपसौर पर होता है। जब पृथ्वी उपसौर पर होती है, यह सूर्य से लगभग १४.७ करोड़ कि॰मी॰(3janwari) (९.१ करोड़ मील) दूर होती है। जब अपसौर पर होती है, सूर्य से १५.२ करोड़ कि॰मी॰ (९.५ करोड़ मिल) दूर होती है। पृथ्वी, अपसौर (4jun)पर उपसौर पर की अपेक्षा सूर्य से ५० लाख कि॰मी॰ (३० लाख मील) ज्यादा दूर होती है।उपसौर की स्थिति 3जनवरी को होती है। .

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१० हायजीया

१० हायजीया की परिक्रमा कक्षा (नीले रंग) में मंगल ग्रह और बृहस्पति ग्रह (सबसे बाहरी लाल) की कक्षाओं के बीच है १० हायजीया (10 Hygiea) हमारे सौर मंडल का चौथा सबसे बड़ा क्षुद्रग्रह है। यह क्षुद्रग्रह घेरे में स्थित है और ३५०-५०० किमी के लगभग अंडाकार आकार के साथ इसमें क्षुद्रग्रह घेरे के कुल द्रव्यमान (मास) का क़रीब २.९% इसी एक क्षुद्रग्रह में निहित है। यह C-श्रेणी क्षुद्रग्रहों का सबसे बड़ा सदस्य है और एक गाढ़े रंग की कार्बनयुक्त सतह रखता है। अपने गहरे रंग के कारण इसे अपने बड़े आकार के बावजूद पृथ्वी से देखना कठिन है। .

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१३ नवम्बर

१३ नवंबर ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का ३१७वॉ (लीप वर्ष मे ३१८ वॉ) दिन है। साल मे अभी और ४८ दिन बाकी है। .

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२४ सितम्बर

24 सितंबर ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का 267वॉ (लीप वर्ष मे 268 वॉ) दिन है। साल मे अभी और 98 दिन बाकी है। .

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२६ नवम्बर

२६ नवंबर ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का ३३०वाँ (लीप वर्ष मे ३३१वाँ) दिन है। वर्ष मे अभी और ३५ दिन बाकी है। .

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४ दिसम्बर

4 दिसंबर ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का 338वॉ (लीप वर्ष में 339 वॉ) दिन है। साल में अभी और 27 दिन बाकी है। .

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D-श्रेणी क्षुद्रग्रह

D-श्रेणी क्षुद्रग्रह (D-type asteroid) क्षुद्रग्रहों की एक श्रेणी है। इसके सदस्यों का ऐल्बीडो (चमकीलापन) बहुत कम (०.१ से कम) होता है और जिनका उत्सर्जन वर्णक्रम (एमिशन स्पेक्ट्रम) बिना किसी ख़ास अवशोषण बैंड (absorption band) के सिर्फ़ एक लालिमा दिखाता है। D-श्रेणी के क्षुद्रग्रह क्षुद्रग्रह घेरे के बाहरी भाग में और उस से भी आगे पाए जाते हैं। कुछ खगोलशास्त्रियों का विचार है कि इस श्रेणी के क्षुद्रग्रह सौर मंडल के दूर-दराज़ कायपर घेरे में उत्पन्न हुए थे। सम्भव है कि सन् २००० में कनाडा में गिरा टगिश झील उल्का एक D-श्रेणी क्षुद्रग्रह का अंश रहा हो। यह भी संकेत है कि मंगल ग्रह का फ़ोबोस उपग्रह भी एक D-श्रेणी क्षुद्रग्रह रहा हो जो मंगल के गुरुत्वाकर्षण द्वारा फंसा लिया गया हो और उसके इर्द-गिर्द परिक्रमा करने लगा। .

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3753 क्रुथने

1:1 का कक्षीय अनुनाद होने के कारण क्रुथने और पृथ्वी एक दूसरे का पीछा करते हूए प्रतित होते है। पृथ्वी के नजरिए से देखे तो क्रुथने की कक्षा मुंगफल्ली का आकार बनाती हुई नजर आती है। 3753 क्रुथने (3753 Cruithne) (अंग्रेजी: /ˈkruəθnɪ/ or), सूर्य के ईर्दगिर्द की कक्षा मे एक क्षुद्रग्रह है। पृथ्वी के साथ इसका 1:1 का कक्षीय अनुनाद है। इसे गलत रूप में "पृथ्वी का दूसरा चांद" भी कहा गया है।For instance, on the British television show Q.I. (Season 1; aired 11 Sept 2003).

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यहां पुनर्निर्देश करता है:

मंगल देवता, मङ्गल, मङ्गल ग्रह

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