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बेरीनाग

सूची बेरीनाग

बेरीनाग, जिसे बेड़ीनाग या बेणीनाग भी कहा जाता है, भारत के उत्तराखण्ड राज्य के अन्तर्गत कुमाऊँ मण्डल के पिथौरागढ जिनपद का एक नगर तथा तहसील मख्यालय है। .

17 संबंधों: चौकोड़ी, थल, बागेश्वर, बेरी, बेरीनाग तहसील, भारत के शहरों की सूची, मुनस्यारी तहसील, मुनस्‍यारी, राईआगर, विजयपुर, उत्तराखंड, गणाई गंगोली, गंगोलीहाट तहसील, कुमाऊँ मोटर ओनर्स यूनियन लिमिटेड, कुमाऊँ विश्वविद्यालय से सम्बद्ध महाविद्यालयों की सूची, अल्मोड़ा, उत्तराखण्ड के नगरों की सूची, उत्तराखण्ड के राज्य राजमार्गों की सूची

चौकोड़ी

चौकोरी एक छोटा सा पहाड़ी नगर है, जो पिथौरागढ़ जिले की बेरीनाग तहसील में स्थित है। समुद्र तल से २०१० मीटर की ऊंचाई पर स्थित चौकोड़ी से नंदा देवी, नंदा कोट, और पंचचूली पर्वत श्रंखलाओं के सुन्दर दृश्य देखे जा सकते हैं। यह राष्ट्रीय राजमार्ग ३०९ए पर बेरीनाग से १० किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। .

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थल

थल उत्तराखंड राज्य के पिथौरागढ़ जनपद में रामगंगा नदी के तट पर स्थित एक छोटा सा नगर है। यहाँ १६वीं शताब्दी का एक शिव मंदिर है। १९५७ से १९६२ तक यह अल्मोड़ा जनपद का एक विकासखंड था। ३० सितम्बर २०१४ से यह पिथौरागढ़ जनपद की एक तहसील है। बेरीनाग तथा डीडीहाट तहसील के ११४ ग्रामों से इसका गठन किया गया। .

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बागेश्वर

बागेश्वर उत्तराखण्ड राज्य में सरयू और गोमती नदियों के संगम पर स्थित एक तीर्थ है। यह बागेश्वर जनपद का प्रशासनिक मुख्यालय भी है। यहाँ बागेश्वर नाथ का प्राचीन मंदिर है, जिसे स्थानीय जनता "बागनाथ" या "बाघनाथ" के नाम से जानती है। मकर संक्रांति के दिन यहाँ उत्तराखण्ड का सबसे बड़ा मेला लगता है। स्वतंत्रता संग्राम में भी बागेश्वर का बड़ा योगदान है। कुली-बेगार प्रथा के रजिस्टरों को सरयू की धारा में बहाकर यहाँ के लोगों ने अपने अंचल में गाँधी जी के असहयोग आन्दोलन शुरवात सन १९२० ई. में की। सरयू एवं गोमती नदी के संगम पर स्थित बागेश्वर मूलतः एक ठेठ पहाड़ी कस्बा है। परगना दानपुर के 473, खरही के 66, कमस्यार के 166, पुँगराऊ के 87 गाँवों का समेकन केन्द्र होने के कारण यह प्रशासनिक केन्द्र बन गया। मकर संक्रान्ति के दौरान लगभग महीने भर चलने वाले उत्तरायणी मेले की व्यापारिक गतिविधियों, स्थानीय लकड़ी के उत्पाद, चटाइयाँ एवं शौका तथा भोटिया व्यापारियों द्वारा तिब्बती ऊन, सुहागा, खाल तथा अन्यान्य उत्पादों के विनिमय ने इसको एक बड़ी मण्डी के रूप में प्रतिष्ठापित किया। 1950-60 के दशक तक लाल इमली तथा धारीवाल जैसी प्रतिष्ठित वस्त्र कम्पनियों द्वारा बागेश्वर मण्डी से कच्चा ऊन क्रय किया जाता था। .

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बेरी

बेरी निम्न में से एक हो सकता है: .

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बेरीनाग तहसील

बेरीनाग तहसील भारत के उत्तराखंड राज्य में पिथौरागढ़ जनपद में एक तहसील है। पिथौरागढ़ जनपद के पश्चिमी भाग में स्थित इस तहसील के मुख्यालय बेरीनाग नगर में स्थित हैं। इसके पूर्व में डीडीहाट तहसील, पश्चिम में बागेश्वर जनपद की कांडा तहसील, उत्तर में मुनस्यारी तहसील तथा दक्षिण में गंगोलीहाट तहसील है। तहसील के अधिकार क्षेत्र में कुल 283 गाँव आते हैं, और 2011 की जनगणना के अनुसार इसकी जनसंख्या 52069 है। तहसील में कुल १५ पट्टियां हैं: चौकोड़ी, बेरीनाग, चौड़मन्या, गढ़ति, राईआगर, संगौड़, डुंगरी पंत, भुवनेश्वर, कालेटी, कालासीला, खितोली, त्रिपुरादेवी, लोहाथल, उप्राड़ा पाठक और पांखू। .

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भारत के शहरों की सूची

कोई विवरण नहीं।

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मुनस्यारी तहसील

मुनस्यारी तहसील भारत के उत्तराखंड राज्य में पिथौरागढ़ जनपद में एक तहसील है। पिथौरागढ़ जनपद के उत्तर-पश्चिमी भाग में स्थित इस तहसील के मुख्यालय मुनस्‍यारी नगर में स्थित हैं। इसके पूर्व में धारचूला तहसील, पश्चिम में बागेश्वर जनपद की कपकोट तहसील तथा चमोली जनपद की जोशीमठ तहसील, उत्तर में चीन तथा दक्षिण में डीडीहाट और बेरीनाग तहसील है। तहसील के अधिकार क्षेत्र में कुल 219 गाँव आते हैं, और 2011 की जनगणना के अनुसार इसकी जनसंख्या 46523 है। .

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मुनस्‍यारी

मुनस्‍यारी एक खूबसूरत पर्वतिय स्थल है। यह उत्‍तराखण्‍ड में जिला पिथौरागढ़ का सीमांत क्षेत्र है जो एक तरफ तिब्‍बत सीमा और दूसरी ओर नेपाल सीमा से लगा हुआ है। मुनस्‍यारी चारो ओर से पर्वतो से घिरा हुआ है। मुनस्‍यारी के सामने विशाल हिमालय पर्वत श्रंखला का विश्‍व प्रसिद्ध पंचचूली पर्वत (हिमालय की पांच चोटियां) जिसे किवदंतियो के अनुसार पांडवों के स्‍वर्गारोहण का प्रतीक माना जाता है, बाई तरफ नन्‍दा देवी और त्रिशूल पर्वत, दाई तरफ डानाधार जो एक खूबसूरत पिकनिक स्‍पॉट भी है और पीछे की ओर खलिया टॉप है। काठगोदाम, हल्‍द्वानी रेलवे स्‍टेशन से मुनस्‍यारी की दूरी लगभग 295 किलोमीटर है और नैनीताल से 265 किलोमीटर है। काठगोदाम से मुनस्‍यारी की यात्रा बस अथवा टैक्‍सी के माध्‍यम से की जा सकती है और रास्‍ते में कई खूबसूरत स्‍थल आते हैं। काठगोदाम से चलने पर भीमताल, जो कि नैनीताल से मात्र 10 किलोमीटर है, पड़ता है उसके बाद वर्ष भर ताजे फलों के लिए प्रसिद्ध भवाली है, अल्‍मोड़ा शहर और चितई मंदिर भी रास्‍ते में ही है। अल्‍मोड़ा से आगे प्रस्‍थान करने पर धौलछीना, सेराघाट, गणाई, बेरीनाग और चौकोड़ी है। बेरीनाग और चौकोड़ी अपनी खूबसूरती के लिए काफी प्रसिद्ध है। यहां से आगे चलने पर थल, नाचनी, टिमटिया, क्‍वीटी, डोर, गिरगॉव, रातापानी और कालामुनि आते हैं। कालामुनि पार करने के बाद आता है मुनस्‍यारी, जिसकी खूबसूरती अपने आप में निराली है। मुनस्‍यारी में ठहरने के लिए काफी होटल, लॉज और गेस्‍ट हाउस है। गर्मी के सीजन में यहां के होटल खचाखच भरे रहते है इसलिए इस मौसम में वहां जाने से पहले ठहरने के लिए कमरे की बुकिंग जरूर करा लेना चाहिए क्‍योंकि इस समय में यहां पर देसी और विदेशी पर्यटकों की भीड़ बहुत अधिक बढ़ जाती है। विदेशी पर्यटक यहां खासकर ट्रैकिंग और माउंटेनियरिंग के लिए आते हैं। लोग पहाड़ी (स्‍थानीय बोली) बोलते है और हिन्‍दी भाषा का प्रयोग भी करते हैं। यहां के अधिकतर लोग कृषि कार्य में लगे हुए है। .

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राईआगर

राईआगर या रायागर उत्तराखण्ड राज्य के पिथौरागढ़ जनपद में स्थित एक छोटा सा कस्बा तथा बाजार है। बेरीनाग तहसील मुख्यालय से लगभग ५ किलोमीटर की दूरी पर स्थित राईआगर प्रमुखतः अपने तिराहे के लिए जाना जाता है, जहां से एक मार्ग गंगोलीहाट-पाताल भुवनेश्वर को ओर, दूसरा सेराघाट-अल्मोड़ा की ओर, तथा तीसरा बेरीनाग-उडियारी की ओर जाता है। तिराहे से कुछ १०० मीटर आगे एक अन्य मार्ग भी निकलता है, जो चौड़मन्या कस्बे तक जाता है। १८३८ में ब्रिटिश कप्तान एच ड्रमंड ने यहाँ परित्यक्त लौह खदानें ढूंढ निकाली थी। प्राचीन काल मे इसी क्षेत्र में तांबे की खानें होने का भी उल्लेख मिलता है। इसी से कयास लगाए जाते रहे हैं कि अंग्रेजों के आगमन से पूर्व यह स्थल कुमाऊँ के गिने-चुने उत्खनन स्थलों में से एक रहा होगा। कस्बे में एक औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई), तथा एक राजकीय इंटर कॉलेज है, जिसमें लगभग ५०० छात्र पढ़ते हैं। एक समय चौड़मन्या से पिथौरागढ़ के लिए रोडवेज की एक बस चलती थी, जो राईआगर में रुकती थी; यह पिछले कई वर्षों से बंद है। वर्तमान में क्षेत्र की परिवहन व्यवस्था केमू की कुछ बसों तथा टैक्सियों पर निर्भर है। .

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विजयपुर, उत्तराखंड

विजयपुर  भारत के उत्तराखंड राज्य के बागेश्वर जिले में स्थित एक पर्वतीय स्थल है। यह बागेश्वर-चौकोड़ी राजमार्ग पर बागेश्वर से 30 किमी और कांडा से 5 किमी की दूरी पर घने देवदार के जंगलों के मध्य  स्थित है। यह 2050 मी की ऊंचाई पर स्थित है, और बर्फ से ढकी हिमालय की चोटियों, जैसे त्रिशूल, नंदा देवी और नंदा कोट इत्यादि के मनोरम दृश्यों के लिए जाना जाता है। विजयपुर में स्थित धौलीनाग मंदिर कुमाऊँ के प्रसिद्ध नाग मंदिरों में से एक है। बेणीनाग, कालीनाग, फेणीनाग, बासुकीनाग, पिंगलनाग और हरीनाग अन्य प्रसिद्ध मंदिर हैं। .

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गणाई गंगोली

गणाई गंगोली भारत के उत्तराखण्ड राज्य के अन्तर्गत कुमाऊँ मण्डल के पिथौरागढ़ जनपद का एक गाँव तथा बाजार है, जो इसी नाम की तहसील का मुख्यालय भी है। अल्मोड़ा-बेरीनाग-डीडीहाट राज्य राजमार्ग ३ पर सेराघाट से १० किलोमीटर की दूरी पर स्थित गणाई गंगोली कुल्यूर नदी के किनारे बसा हुआ है। .

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गंगोलीहाट तहसील

गंगोलीहाट तहसील भारत के उत्तराखंड राज्य में पिथौरागढ़ जनपद में एक तहसील है। पिथौरागढ़ जनपद के दक्षिण-पश्चिमी भाग में स्थित इस तहसील के मुख्यालय गंगोलीहाट नगर में स्थित हैं। इसके पूर्व में पिथौरागढ़ तहसील, पश्चिम में बागेश्वर जनपद की कांडा तहसील, उत्तर में बेरीनाग तहसील तथा दक्षिण में अल्मोड़ा जनपद की अल्मोड़ा तहसील है। तहसील के अधिकार क्षेत्र में कुल 312 गाँव आते हैं, और 2011 की जनगणना के अनुसार इसकी जनसंख्या 71946 है। .

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कुमाऊँ मोटर ओनर्स यूनियन लिमिटेड

हल्द्वानी के केमू स्टेशन में खड़ी बसें। कुमाऊँ मोटर ओनर्स यूनियन लिमिटेड (Kumaon Motor Owners Union Limited), जो अपने संक्षिप्त नाम के॰एम॰ओ॰यू॰ (K.M.O.U) या केमू से अधिक प्रसिद्ध है, उत्तराखण्ड के कुमाऊँ क्षेत्र में बस सेवा प्रदान करने वाली एक निजी कम्पनी है। १९३९ में १३ निजी कम्पनियों के विलय द्वारा अस्तित्व में आयी यह मोटर कम्पनी स्वतन्त्रता पूर्व कुमाऊँ क्षेत्र में बसें चलाने वाली एकमात्र बस कम्पनी थी। १९८७ तक यह इस क्षेत्र की सबसे बड़ी बस कम्पनी थी। .

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कुमाऊँ विश्वविद्यालय से सम्बद्ध महाविद्यालयों की सूची

कुमाऊं विश्वविद्यालय का प्रतीक चिह्न निम्नलिखित सूची कुमाऊं विश्वविद्यालय, नैनीताल से सम्बद्ध राजकीय महाविद्यालयों की है: .

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अल्मोड़ा

अल्मोड़ा भारतीय राज्य उत्तराखण्ड का एक महत्वपूर्ण नगर है। यह अल्मोड़ा जिले का मुख्यालय भी है। अल्मोड़ा दिल्ली से ३६५ किलोमीटर और देहरादून से ४१५ किलोमीटर की दूरी पर, कुमाऊँ हिमालय श्रंखला की एक पहाड़ी के दक्षिणी किनारे पर स्थित है। भारत की २०११ की जनगणना के अनुसार अल्मोड़ा की कुल जनसंख्या ३५,५१३ है। अल्मोड़ा की स्थापना राजा बालो कल्याण चंद ने १५६८ में की थी। महाभारत (८ वीं और ९वीं शताब्दी ईसा पूर्व) के समय से ही यहां की पहाड़ियों और आसपास के क्षेत्रों में मानव बस्तियों के विवरण मिलते हैं। अल्मोड़ा, कुमाऊं राज्य पर शासन करने वाले चंदवंशीय राजाओं की राजधानी थी। स्वतंत्रता की लड़ाई में तथा शिक्षा, कला एवं संस्कृति के उत्थान में अल्मोड़ा का विशेष हाथ रहा है। .

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उत्तराखण्ड के नगरों की सूची

उत्तराखण्ड के नगर नामक इस सूची में भारत के उत्तराखण्ड राज्य के सभी नगरों की ज़िलेवार सूची दी गई है, जो वर्णमालानुसार क्रमित है। .

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उत्तराखण्ड के राज्य राजमार्गों की सूची

निम्नलिखित सूची उत्तराखण्ड राज्य के राज्य राजमार्गों की है: .

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यहां पुनर्निर्देश करता है:

बेड़ीनाग, बेरीनाग, बेरीनाग तहसील

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