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बांटू भाषा परिवार

सूची बांटू भाषा परिवार

अफ़्रीका के भाषा परिवार - बांटू भाषाओँ का क्षेत्र नारंगी रंग में है बांटू भाषाएँ (Bantu languages) नाइजर-कांगो भाषा परिवार की एक उपशाखा है जिसमें अफ़्रीका के महाद्वीप के दक्षिणी भाग में बोले जाने वाली लगभग २५० भाषाएँ हैं। यह सारी कैमरुन देश के पूर्व और दक्षिण में बोली जाती हैं। इस भाषा परिवार में स्वाहिली भाषा भी आती है जो आठ राष्ट्रों में ८ करोड़ से ज़्यादा लोग बोलते हैं। इस परिवार की अन्य भाषाओँ में शोना भाषा (१.४ करोड़ मातृभाषी), ज़ूलू भाषा (१ करोड़) और कोसा भाषा भी शामिल हैं। माना जाता है कि आज से २५००-३००० वर्ष पूर्व नाइजीरिया या कैमरून के इलाक़े में आदिम-बांटू भाषा बोली जाती थी। इसे बोलने वाले हज़ारों सालों में उप-सहारा अफ़्रीका में फैलकर बस गए और आदिम-बांटू की बहुत सी संतान भाषाएँ ही अब परिवार की भिन्न-भिन्न सदस्य हैं। .

19 संबंधों: दक्षिण अफ़्रीका, नाइजर-कांगो भाषा परिवार, न्गूनी भाषाएँ, मोज़ाम्बीक, रुआण्डा, रुआण्डा-रुण्डी भाषाएँ, सिसोथो भाषा, स्वाहिली भाषा, स्वाज़ी भाषा, सूतू-त्स्वाना भाषाएँ, ज़िम्बाब्वेई न्देबेले भाषा, ज़ुलु भाषा, खोई भाषाएँ, खोईसान भाषाएँ, खोइसान, किन्यारुआण्डा भाषा, किरुण्डी भाषा, कोसा भाषा, अफ़्रीकान्स भाषा

दक्षिण अफ़्रीका

दक्षिण अफ़्रीका (साउथ अफ़्रीका भी कहा जाता है, अंग्रेज़ी उच्चारण: साउथ् ऍफ़्रिक) अफ़्रीका महाद्वीप के दक्षिणी छोर पर स्थित एक गणराज्य है। इसकी सीमाएँ उत्तर में नामीबिया, बोत्सवाना और ज़िम्बाब्वे और उत्तर-पूर्व में मोज़ाम्बिक़ और स्वाज़ीलैंड के साथ लगती हैं, जबकि लेसूथो एक स्वतंत्र देश है, जो पूरी तरह से दक्षिण अफ़्रीका से घिरा हुआ है। आधुनिक मानव की बसाहट दक्षिण अफ़्रीका में एक लाख साल पुरानी है। यूरोपीय लोगों के आगमन के दौरान क्षेत्र में रहने वाले बहुसंख्यक स्थानीय लोग आदिवासी थे, जो अफ़्रीका के विभिन्न क्षेत्रों से हजार साल पहले आए थे। 4थी-5वीं सदी के दौरान बांतू भाषी आदिवासी दक्षिण को ओर बढ़े और दक्षिण अफ़्रीका के वास्तविक निवासियों, खोई सान लोगों, को विस्थापित करने के साथ-साथ उनके साथ शामिल भी हो गए। यूरोपीय लोगों के आगमन के दौरान कोसा और ज़ूलु दो बड़े समुदाय थे। केप समुद्री मार्ग की खोज के करीबन डेढ़ शताब्दी बाद 1962 में डच ईस्ट इंडिया कंपनी ने उस जगह पर खानपान केंद्र (रिफ्रेशमेंट सेंटर) की स्थापना की, जिसे आज केप टाउन के नाम से जाना जाता है। 1806 में केप टाउन ब्रिटिश कॉलोनी बन गया। 1820 के दौरान बुअर (डच, फ्लेमिश, जर्मन और फ्रेंच सेटलर्ज़) और ब्रिटिश लोगों के देश के पूर्वी और उत्तरी क्षेत्रों में बसने के साथ ही यूरोपीय बसाहट में वृद्धि हुई। इसके साथ ही क्षेत्र पर क़ब्ज़े के लिए कोसा, जुलू और अफ़्रिकानरों के बीच झड़पें भी बढ़ती गई। हीरे और बाद में सोने की खोज के साथ ही 19वीं सदी में द्वंद शुरू हो गया, जिसे अंग्रेज़-बुअर युद्ध के नाम से जाना जाता है। हालाँकि ब्रिटिश ने बुअरों पर युद्ध में जीत हासिल कर ली थी, लेकिन 1910 में दक्षिण अफ़्रीका को ब्रिटिश डोमिनियन के तौर पर सीमित स्वतंत्रता प्रदान की। 1961 में दक्षिण अफ़्रीका को गणराज्य का दर्जा मिला। देश के भीतर और बाहर विरोध के बावजूद सरकार ने रंगभेद की नीति को जारी रखा। 20वीं सदी में देश की दमनकारी नीतियों के विरोध में बहिष्कार करना शुरू किया। काले दक्षिण अफ़्रीकी और उनके सहयोगियों के सालों के अंदरुनी विरोध, कार्रवाई और प्रदर्शन के परिणामस्वरूप आख़िरकार 1990 में दक्षिण अफ़्रीकी सरकार ने वार्ता शुरू की, जिसकी परिणति भेदभाव वाली नीति के ख़त्म होने और 1994 में लोकतांत्रिक चुनाव से हुई। देश फिर से राष्ट्रकुल देशों में शामिल हुआ। दक्षिण अफ़्रीका, अफ़्रीका में जातीय रूप से सबसे ज़्यादा विविधताओं वाला देश है और यहाँ अफ़्रीका के किसी भी देश से ज़्यादा सफ़ेद लोग रहते हैं। अफ़्रीकी जनजातियों के अलावा यहाँ कई एशियाई देशों के लोग भी हैं जिनमे सबसे ज़्यादा भारत से आये लोगों की संख्या है। .

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नाइजर-कांगो भाषा परिवार

नाइजर-कांगो भाषा समूह अफ़्रीका के उप-सहारा क्षेत्र में बोले जाने वाली भाषाओं का एक भाषा-परिवार है। यह विश्व के प्रमुख भाषा-परिवारों में से एक गिना जाता है और अफ़्रीका में मातृभाषियों की संख्या, भाषाओं की संख्या और विस्तार क्षेत्रफल के हिसाब से सबसे बड़ा है। मातृभाषियों के आधार पर इसकी सबसे विस्तृत भाषाएँ योरुबा, इग्बो, फ़ूला, शोना और ज़ूलू हैं। कुल बोलने वालों के अनुसार स्वाहिली बोलने वालों की संख्या सबसे अधिक है क्योंकि बहुत सी अन्य बोलियों के मातृभाषी इसे अपनी दूसरी भाषा के तौर पर प्रयोग करते हैं। .

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न्गूनी भाषाएँ

न्गूनी भाषाएँ या गूनी भाषाएँ (Nguni languages) दक्षिणी अफ़्रीका के न्गूनी लोगों द्वारा बोली जाने वाली भाषाओं का एक समूह है जो बांटू भाषा-परिवार की एक उपशाखा है। गूनी भाषाओं में कोसा, ज़ुलु, स्वाती, श्लूबी, फूथी, लाला और ह्लांगवीनी शामिल हैं। इनके अलावा तीन न्देबेले (देबेले) कहलाने वाली भाषाएँ भी न्गूनी भाषा-परिवार की सदस्या हैं: दक्षिणी त्रांसवाल न्देबेले, उत्तरी न्देबेले और सुमालेया न्देबेले। विभिन्न न्गूनी भाषाओं में आपस में उपभाषा सतति देखी जाती है, यानि पड़ोसी न्गूनी भाषाओं के बोलने वाले एक-दूसरे को समझने में सक्षम हैं। .

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मोज़ाम्बीक

मोज़ाम्बीक (अंग्रेजी: Mozambique, पुर्तगाली: Moçambique) दक्षिणपूर्वी अफ़्रीका में स्थित एक देश है जो पूर्व में हिन्द महासागर से, उत्तर में तंज़ानिया से, पश्चिमोत्तर में मालावी और ज़ाम्बिया से. पश्चिम में ज़िम्बाब्वे से और दक्षिण में स्वाज़ीलैंड और दक्षिण अफ़्रीका से बंधा हुआ है। पहली से पांचवी सदी ईसवी में यहाँ उत्तर और पश्चिम से बांटू-भाषी लोग आ बसे, जिसके बाद स्वाहिली-भाषी और फिर अरब लोगों का प्रभाव रहा। सन् १४९८ में पुर्तगाली खोजयात्री वास्को दा गामा जो अपनी नौकाएँ लेकर भारत जा रहा था रास्ते में यहाँ आ धमका। १५०५ में पुर्तगाल ने मोज़ाम्बीक पर अपना राज घोषित कर दिया और मोज़ाम्बीक उसका उपनिवेश (कोलोनी) बन गया। पुर्तगाली ज़माने में बहुत से भारतीय मूल के लोग भी मोज़ाम्बीक जा बसे और वे २००७ में आबादी का ०.०८% थे। १९७५ में मोज़ाम्बीक आज़ाद हुआ। १९७७ से १९९२ में यहाँ एक ज़बरदस्त गृह युद्ध चला। .

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रुआण्डा

रुआण्डा (Rwanda) मध्य-पूर्व अफ़्रीका में स्थित एक देश है। इसका क्षेत्रफल लगभग २६ हज़ार वर्ग किमी है, जो भारत के केरल राज्य से भी छोटा है। यह अफ़्रीका महाद्वीप की मुख्यभूमि पर स्थित सबसे छोटे देशों में से एक है। रुआण्डा पृथ्वी की भूमध्य रेखा (इक्वेटर) से ज़रा दक्षिण में स्थित है और महान अफ़्रीकी झीलों के क्षेत्र का भाग है। इसके पश्चिम में पहाड़ियाँ और पूर्व में घासभूमि है। .

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रुआण्डा-रुण्डी भाषाएँ

रुआण्डा-रुण्डी मध्य अफ़्रीका में बोली जाने वाली कुछ बांटू भाषाओं का समूह है जिसमें कई आपस में सम्बन्ध रखने वाली उपभाषाएँ हैं। सन् २००७ में लगे अनुमान के अनुसार इसकी सारी उपभाषाओं को लगभग २ करोड़ लोग बोलते थे। रुआण्डा-रुण्डी की अलग-अलग उपभाषाओं को बोलने वाले अगर समीप के गाँवों-बस्तियों के हों तो एक-दूसरे को समझने में सक्षम हैं लेकिन दूर रहने वालों को आपसी बातचीत समझने में कठीनाई होती है। रुआण्डा-रुण्डी की दो उपभाषाओं को अपने-अपने देशों में राजभाषा होने का दर्जा प्राप्त है: किन्यारुआण्डा भाषा रुआण्डा की एक राजभाषा है जबकि किरुण्डी उसके पड़ोसी देश बुरुण्डी की राजभाषा है। .

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सिसोथो भाषा

सेसोथो (सेसोथो, दक्षिणी सोथो, या दक्षिणी सेसोथो मुख्यतः दक्षिणी अफ्रीका में बोली जाने वाले वाली एक बंटू भाषा है, जो वहां के 11 आधिकारिक भाषाओं में से एक है। इसके अलावा यह लिसूतू में भी बोली जाती है, जहां की यह राष्ट्रीय भाषा है। यह एक मिश्रित भाषा है, जिसमें पूरे शब्द को बनाने के लिए कई उपसर्गों और विचलन और लचीला नियमों का उपयोग किया जाता है। श्रेणी:बांटू भाषाएँ श्रेणी:दक्षिण अफ़्रीका की भाषाएँ श्रेणी:लिसूतू की भाषाएँ.

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स्वाहिली भाषा

स्वाहिली (Kiswahili) विभिन्न जातीय समूहों द्वारा बोली जाने वाली भाषा है, जो हिंद महासागर तट से लगे दक्षिणी सोमालिया से लेकर कोमोरोस द्वीप सहित, उत्तरी मोजाम्बिक में रहती है। यद्यपि केवल एक करोड़ से लेकर ५० लाख तक की आबादी इस भाषा को मातृभाषा के रूप में प्रयुक्त करती है, लेकिन स्वाहिली चार देशों की राष्ट्रीय या आधिकारिक भाषा है, साथ ही अफ्रीकी संघ की आधिकारिक भाषाओं में अकेली अफ़्रीफी मूल की भाषा है। .

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स्वाज़ी भाषा

स्वाज़ी भाषा या स्वाती भाषा (Swazi language) स्वाज़ीलैण्ड और दक्षिण अफ़्रीका में बोली जाने वाली बांटू भाषा-परिवार की न्गूनी शाखा की एक भाषा है। यह न्गूनी परिवार की तेकेला उपशाखा की सदस्या है और इसे लगभग २५ लाख लोग अपनी मातृभाषा के रूप में प्रयोग करते हैं। .

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सूतू-त्स्वाना भाषाएँ

सूतू-त्स्वाना भाषाएँ (Sotho-Tswana languages) दक्षिणी अफ्रीका में बोली जाने वाली बांटू भाषाओं की एक उपशाखा है। इसकी स्वयं दो उपशाखाएँ हैं: त्स्वाना भाषाएँ और सूतू भाषाएँ। कुल मिलाकर यह भाषाएँ दक्षिण अफ़्रीका, लिसूतू और बोत्स्वाना में बोली जाती हैं। .

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ज़िम्बाब्वेई न्देबेले भाषा

ज़िम्बाब्वेई न्देबेले (Zimbabwean Ndebele) या उत्तरी न्देबेले (Northern Ndebele) या इसिन्देबेले (isiNdebele) दक्षिणी अफ़्रीका क्षेत्र में उत्तरी न्देबेले समुदाय द्वारा बोली जाने वाली बांटू भाषा परिवार की न्गूनी शाखा की एक भाषा है। यह मुख्य रूप से ज़िम्बाब्वे देश में बोली जाती है। इस भाषा का दक्षिण अफ़्रीका में बोली जाने वाली ज़ुलु भाषा के साथ गहरा सम्बन्ध है। .

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ज़ुलु भाषा

ज़ुलु (Zulu) या इसिज़ुलु (isiZulu) अफ़्रीका के दक्षिणी भाग में लगभग १ करोड़ लोगो द्वारा बोली जाने वाली एक भाषा है। इसे बोलने वाले ९५% लोग दक्षिण अफ़्रीका देश में रहते हैं जहाँ यह लगभग २५% जनसंख्या की मातृभाषा है और जहाँ के लगभग ५०% लोग इसे समझ-बोल सकते हैं। सन् १९९४ में यह दक्षिण अफ़्रीका की ११ राजभाषाओं में से एक बन गई। .

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खोई भाषाएँ

खोई भाषाएँ (Khoe languages) अफ़्रीका के दक्षिणी हिस्से में बोली जाने वाली भाषाओं का वह सबसे बड़ा परिवार है जो बांटू भाषा-परिवार का सदस्य नहीं है। यह पहले खोईसान भाषाओं की एक शाखा मानी जाती थी और 'मध्य खोईसान' के नाम से जानी जाती थी, लेकिन आधुनिक काल में यह एक अलग परिवार समझा जाता है। खोई भाषाओं में से सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा नामा भाषा है जो नामीबिया में बोली जाती है। अन्य खोई भाषाएँ बोत्स्वाना में कालाहारी रेगिस्तान में बोली जाती हैं। खोई भाषाएँ अपने क्लिक व्यंजनो के लिये जानी जाती हैं।, Alan Barnard, pp.

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खोईसान भाषाएँ

अफ़्रीका के नक़्शे पर: खोईसान भाषाएँ पीले रंग वाले क्षेत्रों में बोली जाती हैं खोईसान भाषाएँ दक्षिण और पूर्वी अफ़्रीका में बोली जाने वाली वह भाषाएँ हैं जिनमें क्लिक व्यंजन होते हैं और जो किसी भी अन्य भाषा परिवार की सदस्य नहीं हैं। यह कभी काफ़ी विस्तृत क्षेत्र में बोली जाती थीं लेकिन अब केवल कालाहारी रेगिस्तान में और तंज़ानिया के छोटे से इलाक़े में बोली जाती हैं। दक्षिण अफ़्रीका में इन्हें खोई और बुशमैन (जिन्हें 'सान' भी कहते हैं) आदिवासी बोला करते हैं और तंज़ानिया में संडावे और हदज़ा लोग इनके मातृभाषी हैं। बहुत से भाषावैज्ञानिक इसे एक भाषा परिवार का दर्जा नहीं देते और समझते हैं की वास्तव में यह भाषाएँ एक-दुसरे से कोई गहरा सम्बन्ध नहीं रखती। बहुत सी खोईसान भाषाएँ ख़तरे में हैं या विलुप्त हो चुकी हैं। खोईखोई भाषा सब से अधिक बोले जाने वाली खोईसान भाषा है और इसे नमीबिया में लगभग २। ५ लाख लोग बोलते हैं। तंज़ानिया की संडावे भाषा को ४०,००० लोग और कालाहारी मरुस्थल के उत्तरी भाग में बोले जानी वाली जुउ भाषाओँ को ३०,००० लोग बोलते हैं। ऐतिहासिक रूप से यह दक्षिण अफ़्रीका से उत्तर में महान दरार घाटी तक बोली जाती थीं लेकिन बांटू भाषाओँ के फैलने से इनका प्रभाव सिकुड़ता रहा। .

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खोइसान

एक ३३ वर्षीय सान पुरुष एक सान स्त्री खोईसान या खोइसान दक्षिण अफ़्रीका में रहने वाली दो अलग जातियों का सामूहिक नाम है जो खोईसान भाषाएँ बोलती हैं और अपने इर्द-गिर्द रहने वाले बहुसंख्यक बांटू भाषा बोलने वाली जातियों से भिन्न हैं। यह दो जातियाँ हैं: शिकारी-फ़रमर जीवनी बसर करने वाली सान जाति (जिन्हें बुशमैन भी कहा जाता है) और मवेशी-पालन करने वाली खोई जाति। यह दोनों समुदाय कालाहारी रेगिस्तान के क्षेत्र में रहते हैं। .

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किन्यारुआण्डा भाषा

किन्यारुआण्डा, जिसे कभी-कभी केवल रुआण्डा भी कहा जाता है और जो यूगांडा में फ़ुमबारी कहलाती है, मध्य अफ़्रीका में स्थित रुआण्डा देश की राजभाषा है। यह रुआण्डा-रुण्डी भाषा की एक उपभाषा है, जो स्वयं रुआण्डा, बुरुण्डी व युगांडा में लगभग २ करोड़ लोगों द्वारा बोली जाती है। रुआण्डा-रुण्डी भाषा की एक अन्य उपभाषा, किरुण्डी, बुरुण्डी की राजभाषा है। किन्यारुआण्डा और किरुण्डी बोलने वाले एक-दूसरे को समझ सकते हैं हालांकि दोनों उपभाषाओं में ज़रा अंतर है। .

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किरुण्डी भाषा

किरुण्डी, जिसे कभी-कभी केवल रुण्डी भी कहा जाता है, मध्य अफ़्रीका में स्थित बुरुण्डी देश की राजभाषा है। यह रुआण्डा-रुण्डी भाषा की एक उपभाषा है, जो स्वयं रुआण्डा, बुरुण्डी व युगांडा में लगभग २ करोड़ लोगों द्वारा बोली जाती है। रुआण्डा-रुण्डी भाषा की एक अन्य उपभाषा, किन्यारुआण्डा, रुआण्डा की राजभाषा है। किन्यारुआण्डा और किरुण्डी बोलने वाले एक-दूसरे को समझ सकते हैं हालांकि दोनों उपभाषाओं में ज़रा अंतर है। .

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कोसा भाषा

कोसा (ख़ोसा: isiXhosa isikǁʰóːsa) दक्षिण अफ़्रीका की आधिकारिक भाषाओं में से एक है। यह लगभग 76 लाख लोगों द्वारा बोली जाती है, अर्थात दक्षिण अफ़्रिका की आबादी के लगभग 18% लोग द्वारा। अधिकांश बाँतू भाषाओं की तरह कोसा एक ध्वन्यात्मक भाषा है। इस भाषा का सबसे विशेष लक्षण है कि इसमें टिकटिक या खटखट करने वाले व्यंजन; वास्तव में कोसा (Xhosa) शब्द ही एक टिक की ध्वनि से आरम्भ होता है। .

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अफ़्रीकान्स भाषा

अफ़्रीकांस भाषा स्मारक अफ़्रीकांस भाषा एक दक्षिणी फ़्रांकोनीयाई भाषा है जो दक्षिण अफ़्रीका में बोली जाती है। .

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