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बांग्लादेश

सूची बांग्लादेश

बांग्लादेश गणतन्त्र (बांग्ला) ("गणप्रजातन्त्री बांग्लादेश") दक्षिण जंबूद्वीप का एक राष्ट्र है। देश की उत्तर, पूर्व और पश्चिम सीमाएँ भारत और दक्षिणपूर्व सीमा म्यान्मार देशों से मिलती है; दक्षिण में बंगाल की खाड़ी है। बांग्लादेश और भारतीय राज्य पश्चिम बंगाल एक बांग्लाभाषी अंचल, बंगाल हैं, जिसका ऐतिहासिक नाम “বঙ্গ” बंग या “বাংলা” बांग्ला है। इसकी सीमारेखा उस समय निर्धारित हुई जब 1947 में भारत के विभाजन के समय इसे पूर्वी पाकिस्तान के नाम से पाकिस्तान का पूर्वी भाग घोषित किया गया। पूर्व और पश्चिम पाकिस्तान के मध्य लगभग 1600 किमी (1000 मील) की भौगोलिक दूरी थी। पाकिस्तान के दोनों भागों की जनता का धर्म (इस्लाम) एक था, पर उनके बीच जाति और भाषागत काफ़ी दूरियाँ थीं। पश्चिम पाकिस्तान की तत्कालीन सरकार के अन्याय के विरुद्ध 1971 में भारत के सहयोग से एक रक्तरंजित युद्ध के बाद स्वाधीन राष्ट्र बांग्लादेश का उदभव हुआ। स्वाधीनता के बाद बांग्लादेश के कुछ प्रारंभिक वर्ष राजनैतिक अस्थिरता से परिपूर्ण थे, देश में 13 राष्ट्रशासक बदले गए और 4 सैन्य बगावतें हुई। विश्व के सबसे जनबहुल देशों में बांग्लादेश का स्थान आठवां है। किन्तु क्षेत्रफल की दृष्टि से बांग्लादेश विश्व में 93वाँ है। फलस्वरूप बांग्लादेश विश्व की सबसे घनी आबादी वाले देशों में से एक है। मुसलमान- सघन जनसंख्या वाले देशों में बांग्लादेश का स्थान 4था है, जबकि बांग्लादेश के मुसलमानों की संख्या भारत के अल्पसंख्यक मुसलमानों की संख्या से कम है। गंगा-ब्रह्मपुत्र के मुहाने पर स्थित यह देश, प्रतिवर्ष मौसमी उत्पात का शिकार होता है और चक्रवात भी बहुत सामान्य हैं। बांग्लादेश दक्षिण एशियाई आंचलिक सहयोग संस्था, सार्क और बिम्सटेक का प्रतिष्ठित सदस्य है। यह ओआइसी और डी-8 का भी सदस्य है।.

1249 संबंधों: चटगाँव (शहर), चटगाँव जिला, चट्टग्राम नगर निगम, चट्टग्राम पहाड़ी क्षेत्र, चट्टग्राम विभाग, चन्दनाईश उपज़िला, चर भद्रासन उपज़िला, चर राजीबपुर उपज़िला, चरफ्यासन उपज़िला, चाटमोहर उपज़िला, चाटखिल उपज़िला, चाँदपुर सदर उपज़िला, चानक, चान्दिना उपज़िला, चार दलीय गठबंधन, चारघाट उपज़िला, चांदी का वरक़, चिट्टागोंग, चितलमारी उपज़िला, चिन राज्य, चिरिरबन्दर उपज़िला, चिलमारी उपज़िला, चिंकारा, चिक्की, चकोरिय़ा उपज़िला, चुनारुघाट उपज़िला, चुय़ाडाङ्गा सदर उपज़िला, चौद्दग्राम उपज़िला, चौहाली उपज़िला, चौगाछा उपज़िला, चीतल, चीनी पैंगोलिन, चीज़ की सूची, टायो रोल्स, टाङाइल सदर उपज़िला, टङ्गीबाड़ी उपज़िला, टुङ्गिपाड़ा उपज़िला, टेस्ट क्रिकेट, टेकनाफ उपज़िला, टीवीएस कप 2003, ऍफ़ के ऍम मुनीम, ए टी ऍम अफजल, ए बी ऍम खैरुल हक, ए क्यू एम बदरुद्दोज़ा चौधरी, एम एम रुहुल अमीन, एशियाई टेस्ट चैंपियनशिप 1998-99, एशियाई भूरा बादल, एशियाई राजमार्ग १, एशियाई राजमार्ग २, एसोसिएशन ऑफ चार्टर्ड सर्टिफाइड एकाउंटेंट्स, ..., एसीसी इमर्जिंग टीम कप, एसीसी इमर्जिंग टीम कप 2017, एंड फ्लिक्स, एक इकाई व्यवस्था, एकतारा, ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम, ए॰ बी॰ बर्धन, ऐयाजुद्दीन अहमद, झपकी, झालोकाठी सदर उपज़िला, झिनाइदह सदर उपज़िला, झिनाइगाती उपज़िला, झिकरगाछा उपज़िला, ठाकुरगाँओ सदर उपज़िला, डामुड्या उपज़िला, डिमला उपज़िला, डिश टीवी, डुमुरिय़ा उपज़िला, डेरिल मिशेल, डेव वॉटमोर, डोमार उपज़िला, ढाका, ढाका डिवीजन क्रिकेट टीम, ढाका दक्षिण नगर निगम, ढाका नगर निगम, ढाका प्रीमियर डिवीज़न क्रिकेट लीग, ढाका प्रीमियर डिवीज़न क्रिकेट लीग 2017, ढाका मेट्रो रेल, ढाका मेट्रोपोलिस क्रिकेट टीम, ढाका विश्वविद्यालय, ढाका उत्तर नगर निगम, ढाका-खुलना राजमार्ग, ढाका-इस्तांबुल फ्रेट कॉरिडोर, ढाकेश्वरी मन्दिर, तन्चंग्या लोग, तनोर उपज़िला, तबला, तबलीग़ी जमात, तसलीमा नसरीन, ताड़ाश उपज़िला, ताड़ाइल उपज़िला, तापी गैस परियोजना, तारागञ्ज उपज़िला, ताराकान्दा उपज़िला, तालतली उपज़िला, ताला उपज़िला, ताहिरपुर उपज़िला, ताजमहल बांग्लादेश, ताजुद्दीन अहमद, तितालिया संधि, तितास उपज़िला, तिब्बत, तजमुद्दीन उपज़िला, तंत्रसाहित्य के विशिष्ट आचार्य, त्रिपुरा, त्रिपुरी लोग, त्रिशाल उपज़िला, त्रैलोक्यनाथ चक्रवर्ती, तेतुलिय़ा उपज़िला, तेरखादा उपज़िला, तीन बीघा 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मुण्डा भाषाएँ, मुद्रा चिह्न, मुन्सिगञ्ज सदर उपज़िला, मुरादनगर उपज़िला, मुलादी उपज़िला, मुशफिकुर रहीम, मुस्तफ़िज़ूर रहमान, मुस्तफा कमाल (न्यायाधीश), मुहम्मद हबीबुर रहमान, मुजिबनगर उपज़िला, मुग़ल साम्राज्य, मुंडारी भाषा, मुकसुदपुर उपज़िला, मुक्त व्यापार क्षेत्र, मुक्तागाछा उपज़िला, मुक्तिर गान, मुक्तिवाहिनी, म्यान्मार, म्हार भाषा, मौलवीबाजार सदर उपज़िला, मृणाल सेन, मैत्री एक्सप्रेस, मैं बोरिशाइल्ला, मेलानदह उपज़िला, मेहदी हसन (क्रिकेटर), मेहमान ख़ाना, मेहंदीगंज उपज़िला, मेहेरपुर सदर उपज़िला, मेघना नदी, मेघना उपज़िला, मेघनाद साहा, मेगावती सुकर्णोपुत्री, मोतीउर रहमान निज़ामी, मोरेलगञ्ज उपज़िला, मोल्लाहाट उपज़िला, मोहनपुर उपज़िला, मोहनगंज उपज़िला, मोहम्मद तफ़ज़्ज़ुल इस्लाम, मोहम्मद मिथुन, मोहम्मद मुज़म्मिल हुसैन, मोहम्मद मोहम्मदुल्लाह, मोहम्मद युनुस, मोहम्मद रुहुल अमीन, मोहम्मद हबीबुर्रहमान, मोहम्मद करीम फज़लुल, मोहाम्मदपुर उपज़िला, मीरपुर उपज़िला, मीरसराइ उपज़िला, यदुनाथ सरकार, यशोर सदर उपज़िला, याह्या ख़ान, युद्ध, युगाण्डा से भारतीयों का निष्कासन, यूटीसी+०६:००, यूएस-बांग्ला एयरलाइन्स, यूएस-बांग्ला एयरलाइन्स विमान दुर्घटना, येशोर, रबीन्द्रनाथ ठाकुर, रानीनगर उपज़िला, रानीशंकैल उपज़िला, रामपाल उपज़िला, रामसर सम्मेलन, रामानंद सेनगुप्ता, रामगञ्ज उपज़िला, रामगड़ उपज़िला, रामगति उपज़िला, रामु उपज़िला, राय़पुर उपज़िला, राय़पुरा उपज़िला, रायगंज उपज़िला, राष्ट्रभाषा, राष्ट्रगान, राष्ट्रीय ओलम्पिक समिति, राहुल वैद्य, राजनगर उपज़िला, राजबाड़ी सदर उपज़िला, राजबोंग्शी भाषा, राजशाही नगर निगम, राजशाही विभाग, राजशाही कॉलेज, राजस्थली उपज़िला, राजापुर उपज़िला, राजारहाट उपज़िला, राजैर उपज़िला, राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी, राखीगढ़ी, राउजान उपज़िला, राङ्गामाटि सदर उपज़िला, राङ्गुनिय़ा उपज़िला, रवि रामपॉल, रवींद्र संगीत, रखाइन राज्य, रंगपुर नगर निगम, रंगपुर सदर उपज़िला, रंगपुर विभाग, रंगबिरंगी उड़न गिलहरी, रंगीला रसूल, रङ्गबाली उपज़िला, रुमा उपज़िला, रौमारी उपज़िला, रैडक्लिफ़ अवार्ड, रैगिंग, रूना लैला, रूपसा उपज़िला, रूपगञ्ज उपज़िला, रूज़ा शरीफ, रेड लाइट एरिया, रेबा सोम, रेल गेज, रॉयगंज एम. एल. हाई स्कूल, रोय़ांछड़ि उपज़िला, रोहित शर्मा, रोहिंग्या भाषा, रोहिंग्या लोग, रोहू मछली, रोआनू चक्रवात, 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(मागुरा), श्रीबरदी उपज़िला, श्रीमंगल उपज़िला, श्रीवत्स गोस्वामी, शैलकूपा उपज़िला, शेर शाह सूरी, शेर सिंह राणा, शेर-ए-बांग्ला राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम, शेरपुर सदर उपज़िला, शेरपुर उपज़िला, शेरेबांग्ला नगर थाना, शेख मुजीबुर्रहमान, शेख मुजीबुर्रहमान का हत्याकाण्ड, शेख रज्जाक अली, शेख हसीना, शोनाडांगा थाना, सचिन तेंदुलकर, सदरपुर उपज़िला, सन्द्बीप उपज़िला, सफ़ेद गाल वाला तीतर, सब्बीर रहमान, सम्पर्क भाषा, समोसा, सरपंच, सरसों का तेल, सराइल उपज़िला, सरिशाबाड़ी उपज़िला, सर्पगन्धा, सर्बानन्द सोणोवाल, सरोजिनी साहू, सरीसृप, सलमा अख़्तर, साटुरिय़ा उपज़िला, साँथिय़ा उपज़िला, साँवा, सातकानिय़ा उपज़िला, सातक्षीरा सदर उपज़िला, सादुल्लापुर उपज़िला, सापाहार उपज़िला, साभार उपज़िला, सारिय़ाकान्दी उपजिला, सार्क, सार्क फाउंटेन, सालथा उपज़िला, साघाटा उपज़िला, सांसद, साउथ जोन क्रिकेट टीम (बांग्लादेश), सिन्धु-गंगा के मैदान, सिराजदीखान उपज़िला, सिराजगंज सदर उपज़िला, सिलहट विभाग, सिल्वर जुबली इंडिपेंडस कप 1997-98, सिलेट नगर निगम, सिलेट सदर उपज़िला, सिलेटी भाषा, सिलीगुड़ी, सिंड़ा उपज़िला, सिंह (पशु), सिङ्गाइर उपज़िला, सईद अनवर, सखिपुर उपज़िला, संथाली भाषा, संयुक्त भूयोजना एशिया के लिए, संज्ञेय अपराध, सुचित्रा सेन, सुनामगञ्ज सदर उपज़िला, सुन्दरवन, सुन्दरगञ्ज उपज़िला, सुनील गंगोपाध्याय, सुबर्ण चर उपज़िला, सुमात्रा गैंडा, सुर्मा नदी, सुरेन्द्र कुमार सिन्हा, सुरेन्द्रनाथ दासगुप्त, सुज़ुकी, सुजानगर उपज़िला, सुंजामुल इस्लाम, स्टुअर्ट बिन्नी, स्वतन्त्रता के बाद भारत का संक्षिप्त इतिहास, स्वतंत्रता दिवस (बांग्लादेश), स्वामी निगमानन्द परमहंस, स्वामी प्रणवानन्द, सैदपुर, सैन्य और अर्धसैनिक बलों की संख्या के आधार पर देशों की सूची, सैम मानेकशॉ, सैयद ए बी महमूद हुसैन, सैयद नज़रुल इस्लाम, सैयद रहीम जिल्लुर मुदस्सर हुसैन, सैय़दपुर उपज़िला, सूखा, सेनबाग उपज़िला, सोनाटोला उपज़िला, सोनारगाँव, सोनारगाँओ उपज़िला, सोनागाजी उपज़िला, सोनाइमुड़ि उपज़िला, सोमपुर महाविहार, सोहन पापड़ी, सीताकुण्ड उपज़िला, हनफ़ी पन्थ, हरिणाकुण्ड उपज़िला, हरिदास ठाकुर, हरिनटाना थाना, हरिपुर उपज़िला, हरिरामपुर उपज़िला, हर्शल गिब्स, हरी सिंह थापा, हलवा, हाटहाजारी उपज़िला, हातिबान्धा उपज़िला, हातिय़ा उपज़िला, हाबीगञ्ज सदर उपज़िला, हार्ट-स्पॉटेड कठफोड़वा, हालुआघाट उपज़िला, हाजीगञ्ज उपज़िला, हावड़ा, हाखा चिन भाषा, हाइमचर उपज़िला, हाकिमपुर उपज़िला, हाउर, हिन्द-यूरोपीय भाषा-परिवार, हिमसागर आम, हिल्सा, हिज़ला उपज़िला, हिंद महासागर तटीय क्षेत्रीय सहयोग संघ, हुमायुन आजाद, हुसैन मोहम्मद इर्शाद, हुसैन जिलुर रहमान, ह्मार लोग, हैना मॉन्टेना, हूलोक गिबन, हो भाषा, होमना उपज़िला, होसेनपुर उपज़िला, जनसंख्या घनत्व के अनुसार देशों की सूची, जमालपुर सदर उपज़िला, जमालगंज उपज़िला, जमुना नदी, बांग्लादेश, जयपुरहाट सदर उपज़िला, जलढाका उपज़िला, जलेबी, ज़मीरुद्दीन सरकार, ज़ारदा, ज़ाकीगंज उपज़िला, ज़िनेदिन जिदेन, ज़ियानगर उपज़िला, ज़ोरामथंगा, जातियो स्मृतीशोऊधो, जातीय पार्टी (मंजू), जातीय पार्टी (इरशाद), जातीय संसद भवन, जानजिरा उपज़िला, जियाउर्रहमान, जिल्लुर रहमान, जगदीश चन्द्र बसु, जगन्नाथपुर उपज़िला, जंगली तीतर, जुड़ी उपज़िला, जुराछड़ि उपज़िला, जुलाई २०१६ बगदाद आतंकी हमला, ज्योति बसु, ज्योतिन्द्र नाथ दीक्षित, ज्योतिर्मयी देवी, जैन्तापुर उपज़िला, जैक प्रेगेर, जेम्स पॅटिन्सन, जॉय बांग्ला, जोगेन्द्र नाथ मंडल, जी.बी रोड, नई दिल्ली, जीपीएस ऐडेड जियो ऑगमेंटिड नैविगेशन, जीबननगर उपज़िला, जीवनानंद दास, ईश्वरदी उपज़िला, ईश्वरगंज उपज़िला, ईश्वरी प्रसाद गुप्ता, ईस्ट जोन क्रिकेट टीम (बांग्लादेश), घाटाइल उपज़िला, घिओर उपज़िला, घोड़ाघाट उपज़िला, वनोन्मूलन, वरेन्द्र, वसन्त पञ्चमी, वार भाषा, विद्याधर चक्रवर्ती, विपिनचंद्र पाल, विमान (बहुविकल्पी), विलायत ख़ाँ, विल्स एशिया कप 1988, विश्व पर्यावरण दिवस, विश्व में बौद्ध धर्म, विश्व में इस्लाम धर्म, विश्व के देशों में शहरों की सूचियाँ, विश्व के सभी देश, विश्व की मुद्राएँ, विश्वमारी, विजया मुखोपाध्याय, विकिसम्मेलन भारत, वजीरपुर उपज़िला, वंगाला, वैदिक सभ्यता, वैश्वीकरण, वेस्ट्मिन्स्टर प्रणाली, खसिक भाषाएँ, खाड़ी युद्ध, खान जाहान अली थाना, खानसामा उपज़िला, खालिदा ज़िया, खालिय़ाजुड़ि उपज़िला, खालिशपुर थाना, खासी, खासी भाषा, खागड़ाछड़ि सदर उपज़िला, खांडकर मुश्ताक अहमद, खियांग, खंडकार महमूद हसन, खुलना नगर निगम, खुलना कोतवाली थाना, खेल जगत २०१०, खोरठा भाषा, खोकसा उपज़िला, गणभवन, गफरगाँओ उपज़िला, गम्भीरा, गलाचिपा उपज़िला, ग़रारा, गाबतली उपजिला, गारो, गारो भाषा, गाजीपुर नगर निगम, गाजीपुर सदर उपज़िला, गांनी उपज़िला, गाइबान्धा सदर उपज़िला, गिबन, गजारिय़ा उपज़िला, गंगा नदी, गंगा सूंस (डॉल्फिन), गंगा का आर्थिक महत्त्व, गंगा के बाँध एवं नदी परियोजनाएँ, गंगा की सहायक नदियाँ, गङ्गाछड़ा उपज़िला, गुनाहार, गुरुदासपुर उपज़िला, गुरुनाथ विद्यानिधि, ग्रैंड ट्रंक रोड, गौरनदी उपज़िला, गौरीपुर उपज़िला, गोदागारी उपज़िला, गोपालपुर उपज़िला, गोपालगञ्ज सदर उपज़िला, गोपीनाथ कविराज, गोबिन्दगञ्ज उपज़िला, गोमस्तपुर उपज़िला, गोय़ालन्द उपज़िला, गोय़ाइनघाट उपज़िला, गोरखा रेजिमेंट (भारत), गोलापगञ्ज उपज़िला, गोसाइरहाट उपज़िला, गोस्था पाल, गीता दत्त, आटपाड़ा उपज़िला, आटाइकुला उपज़िला, आटघरिय़ा उपज़िला, आटोय़ारी उपज़िला, आड़ाइहाजार उपज़िला, आत्राइ उपज़िला, आदमदिघी उपज़िला, आदितमारी उपज़िला, आदित्य बिड़ला समूह, आनवरा उपज़िला, आपातकाल (भारत), आम, आमतली उपज़िला, आमार शोनार बांग्ला, आर्चर ब्लड, आर्य वंश, आलफाडाङा उपज़िला, आलमडाङ्गा उपज़िला, आलिकदम उपज़िला, आलू के चिप्स, आशाशुनि उपज़िला, आशुगञ्ज उपज़िला, आईसीसी चैंपियन्स ट्रॉफ़ी, आईसीसी महिला ट्वेंटी-20 विश्व कप, आईसीसी महिला ट्वेंटी-20 विश्व कप क्वालीफायर 2013, आईसीसी क्रिकेट विश्व कप क्वालीफायर 2018, आखाउड़ा उपज़िला, आग्नेय भाषापरिवार, आगैलझाड़ा उपज़िला, आंबेडकर जयंती, आइएसओ ३१६६ - १, आक्केलपुर उपज़िला, इटना उपज़िला, इन्नोसेंस ऑफ़ मुस्लिम्स, इमरती, इयान बेल, इयाजुद्दीन अहमद, इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड, इस्लाम, इस्लामपुर उपज़िला, इस्लामिक टीवी, इस्लामी सहयोग संगठन, इस्लामी सैन्य गठबंधन, इंडियन एयरलाइंस, इंदिरा गांधी शांति पुरस्कार, कचुय़ा उपज़िला, कचुय़ा उपज़िला (बागेरहाट), कटिय़ादि उपज़िला, कट्ठा, कतला, कनाईपुर, कबड्डी, कबिट, कबिरहाट उपज़िला, कमरख, कमरखन्द उपज़िला, कमलनगर उपज़िला, कमलगञ्ज उपज़िला, कमालुद्दीन हुसैन, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ बांग्लादेश, कय़रा उपज़िला, कराची, करिमगञ्ज उपज़िला, कर्णफुली थाना, कर्णफुली नदी, कर्क रेखा, कलमाकान्दा उपज़िला, कला स्नातक, कलापाड़ा उपज़िला, कलारोय़ा उपज़िला, कसबा उपज़िला, क़व्वाली, काँठालिय़ा उपज़िला, काँस, कादम्बिनी गांगुली, कादिरी संप्रदाय, कानाइघाट उपज़िला, कापासिय़ा उपज़िला, काप्ताइ उपज़िला, कामरूप, कार्टून नेटवर्क (भारत), कालाई उपज़िला, कालिय़ा उपज़िला, कालिय़ाकैर उपज़िला, कालिहाति उपज़िला, कालिज, 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कीर्तनखोला नदी, अटल बिहारी वाजपेयी, अताउर रहमान खान, अदिति महसिन, अनमूल हक, अनिसा मोहम्मद, अनंत जलील, अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस, अन्तर्राष्ट्रीय मानकीकरण संगठन के सदस्य राष्ट्र, अनीता देसाई, अपवाह तन्त्र, अप्रैल 2015 नेपाल भूकम्प, अबुल फ़ज़ल मोहम्मद अहसानुद्दीन चौधरी, अब्दुर रज्जाक, अब्दुर्रहमान बिस्वास, अब्दुस्सत्तार, अबू सादात मोहम्मद सायेम, अबू सईद चौधरी, अभय़नगर उपज़िला, अभियान्त्रिकी में स्नातक, अरिसेन आहूबूडु, अरुणाचल प्रदेश, अरुंधति घोष, अली अक़बर ख़ाँ, अशोक, अशोक के अभिलेख, अष्टग्राम उपज़िला, असम, असम विश्वविद्यालय, असम आन्दोलन, असमिया भाषा, अहले सुन्नत वल जमात, अजमेरीगंज उपज़िला, अजॉय चक्रबर्ती, अवेंजर्स: एज ऑफ़ अल्ट्रॉन, अखण्ड भारत, अखिल असम छात्र संघ, अगरतला, अगस्त २०१०, अग्रहरि, अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन, अंग्रेज़ी भाषा, उत्तर बंगाल, उदय शंकर, उपमहाद्वीप, उपजिला निर्वाहि अधिकारी, उबला चावल, उराँव, उर्दू भाषा, उर्दू आन्दोलन, उर्वरक, उलिपुर उपज़िला, उल्लाहपाड़ा उपज़िला, उष्णकटिबंधीय चक्रवात, उस्ताद अली अकबर खां, उस्मानी नगर उपज़िला, उखिय़ा उपज़िला, ऋत्विक घटक, छातक उपज़िला, छागलनाइय़ा उपज़िला, छौंक, १ फ़रवरी, १ई+११ मी॰², १० जनवरी, ११ जनवरी, १३ मई २००८ जयपुर बम विस्फोट, १४ दलीय गठबंधन, १४ दिसम्बर, १५ दिसम्बर, १६ दिसम्बर, १७२५ तक क्रिकेट का इतिहास, १८ दलीय गठबंधन, १९२२, १९४३ का बंगाल का अकाल, १९४७ का भारत-पाक युद्ध, १९७१, १९७१ का भारत-पाक युद्ध, २००० एशिया कप, २००७, २००७ क्रिकेट विश्व कप, २००९, २०१०, २०११ क्रिकेट विश्व कप, २०१२ एशिया कप, २०१३ शाहबाग विरोध, २०१४ आईसीसी विश्व ट्वेन्टी २०, २०१५ क्रिकेट विश्व कप, २०१६ में आए भूकम्पों की सूची, २०१६ उत्तर-पूर्व भारत भूकम्प, २१ मार्च, २२ नवम्बर, ३ मार्च, ५ दिसम्बर, ७ अगस्त, 1978 एशियाई खेल, 1998 आईसीसी चैंपियन्स ट्रॉफ़ी, 2007 चटगाँव बाढ़, 2010 एशियाई खेल, 2010 एशियाई खेल पदक तालिका, 2014 आईसीसी विश्व ट्वेंटी20, 2016 गुलशन हमला, 2016 आईसीसी महिला विश्व ट्वेंटी-20, 2016 अंडर 19 क्रिकेट विश्व कप, 2016 उड़ी हमला, 2017 दक्षिण एशिया बाढ़ सूचकांक विस्तार (1199 अधिक) »

चटगाँव (शहर)

चटगाँव या चटगांव (बांग्ला: চট্টগ্রাম चट्टोग्राम), बांग्लादेश का एक प्रमुख बंदरगाह और दूसरा सबसे बड़ा शहर है। चटगांव एक गहरे पानी का प्राकृतिक बंदरगाह है। बंगाल की खाड़ी के पूर्वी तट और कर्णफुली नदी के मुहाने पर स्थित यह शहर, देश के दक्षिणी विभाग में पड़ता है। 2011 में इसकी अनुमानित जनसंख्या 65 लाख से अधिक थी। दक्षिण एशिया में यह वाणिज्य, उद्योग और जहाजरानी (शिपिंग) का एक प्रमुख केंद्र है। यह दुनिया के सबसे तेजी से विकसित होते महानगरों में से भी एक है। सदियों से चटगाँव के इस प्राचीन प्राकृतिक बंदरगाह ने बंगाल और बंगाल की खाड़ी के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों के लिए एक प्रवेश द्वार का कार्य किया है। इस बंदरगाह ने मध्य पूर्व, दक्षिण पूर्व एशिया, यूरोप और चीन के व्यापारियों को आकर्षित किया है। अरब अन्वेषक इब्न-बतूता, वेनिस के व्यापारी निकोलो डे' कोंटी और चीनी एडमिरल झेंग ही समेत कई ऐतिहासिक यात्री इस बंदरगाह से होकर गुजरे हैं। 16 वीं सदी के पुर्तगाली साम्राज्य में इसे पोर्टो ग्रांडे डी बेंगाला के नाम से जाना जाता था। ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने बंगाल के अंतिम स्वतंत्र नवाब को हराने के बाद 1760 में बंदरगाह का नियंत्रण प्राप्त किया। 19 वीं सदी में ब्रिटिश राज के तहत, आधुनिक चटगाँव बंदरगाह के विकास के लिए असम-बंगाल रेलवे का निर्माण किया गया। द्वितीय विश्व युद्ध में बर्मा अभियान के दौरान यह मित्र देशों की सेना के लिए एक महत्वपूर्ण आधार बना। 1947 में ब्रिटिश भारत के विभाजन के बाद, चटगाँव पूर्वी पाकिस्तान का हिस्सा बन गया। 1971 में बांग्लादेश मुक्ति युद्ध की शुरुआत में बांग्लादेश की स्वतंत्रता की घोषणा चटगाँव से की गयी। .

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चटगाँव जिला

चटगाँव जिला या चट्टग्राम जिला (চট্টগ্রাম জেলা) बांग्लादेश के दक्षिण-पूर्व अंचल के चट्टग्राम विभाग का एक प्रशासनिक अंचल है। पर्वत, समुद्र, उपत्यका, वन आदि के कारण चट्टग्राम जितना भौगोलिक वैचित्रय बांग्लादेश के किसी अन्य जिले में नहीं है। बांग्लादेश का दूसरा सबसे बड़ा नगर चट्टग्राम इसी जिले में स्थित है। यहां पर चट्टल भवानी (मां का दांयी भुजा गिरी थी) का मंदिर है जो 52 शक्तिपीठों में से एक है। यह मंदिर जिले के चन्द्रनाथ पर्वत शिखर पर स्थित है। श्रेणी:चटगाँव उपक्षेत्र के जिले.

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चट्टग्राम नगर निगम

चट्टग्राम सिटी कॉर्पोरेशन यानि चट्टग्राम नगर निगम, बांग्लादेश के चट्टग्राम नगर में आधारित एक स्वशासित पौरप्रशासन निकाय व निगम-ऐक्य है, जिसपर बांग्लादेश के चट्टग्राम नगर के प्रशासन और विकास तथा नागरिक सुविधाओं से संबंधित प्रभार निहित किये गए हैं। चट्टग्राम, बांग्लादेश के चट्टग्राम विभाग में स्थित, बांग्लादेश के बृहत्तम् नगरों में से एक है। इस निकाय की स्थापना चट्टग्राम के प्रशासन हेतु एक नगर पालिका के रूप में हुआ था, तत्पश्चात्, नगर के आकार और जनसंख्या में वृद्धि के मद्देनज़र इसे नगर निगम के स्तर पर उन्नतस्थ कर दिया गया। .

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चट्टग्राम पहाड़ी क्षेत्र

चट्टग्राम पहाड़ी क्षेत्र (अंग्रेज़ी: Chittagong Hill Tracts, बंगाली: পার্বত্য চট্টগ্রাম), जिसे ऐतिहासिक रूप से सी०ऍच०टी० (CHT) भी कहते थे, दक्षिणपूर्वी बांग्लादेश में बर्मा की सीमा के साथ स्थित एक क्षेत्र है। यह बांग्लादेश का एकमात्र पहाड़ी क्षेत्र है और उस देश का एकलौता क्षेत्र है जहाँ मूल रूप से बौद्ध धर्मियों व हिन्दुओं की बहुसंख्या है। सन् १९८४ तक यह एक ज़िला था लेकिन उस वर्ष में इसका तीन ज़िलों में विभाजन कर दिया गया: खग्रचारी, रंगमती और बंदरबन। प्रशासनिक दृष्टि से यह चट्टग्राम विभाग का हिस्सा है। यह चकमा समुदाय की मातृभूमि है। .

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चट्टग्राम विभाग

चटगाँव या चट्टग्राम विभाग, (बांग्ला: में চট্টগ্রাম, चॉट्टोग्राम) बांग्लादेश का एक उपक्षेत्र है। इसका मुख्यालय चटगाँव है। इस उप विभाग में ११ जिले हैं। बंदरबन, ब्राह्मनबरिआ, चाँदपुर, चटगाँव, कोमिला, कौक्सबाजार, फेनी, खग्रचारी, लक्ष्मीपुर, नोकाहाली, रंगमती श्रेणी:बांग्लादेश के विभाग श्रेणी:चट्टग्राम विभाग.

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चन्दनाईश उपज़िला

चन्दनाईश उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह चट्टग्राम विभाग के चट्टग्राम ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 22 उपज़िले हैं। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण-पूर्व की दिशा में चट्टग्राम नगर के निकट अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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चर भद्रासन उपज़िला

चर भद्रासन उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह ढाका विभाग के फरिदपुर ज़िले का एक उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका के निकट अवस्थित है। .

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चर राजीबपुर उपज़िला

चर राजीबपुर उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह रंगपुर विभाग के कुड़िग्राम ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 9 उपज़िले हैं, और मुख्यालय कुड़िग्राम सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उत्तर की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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चरफ्यासन उपज़िला

चरफ्यासन उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह बरिशाल विभाग के भोला ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 7 उपज़िले हैं, और मुख्यालय भोला सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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चाटमोहर उपज़िला

चाटमोहर उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह राजशाही विभाग के पाबना ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 10 उपज़िले हैं, और मुख्यालय पाबना सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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चाटखिल उपज़िला

चाटखिल उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह चट्टग्राम विभाग के नोय़ाखाली ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 9 उपज़िले हैं, और मुख्यालय नोय़ाखाली सदर उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण-पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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चाँदपुर सदर उपज़िला

चाँदपुर उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह चट्टग्राम विभाग के चाँदपुर ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 8 उपज़िले हैं, और मुख्यालय चाँदपुर सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण-पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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चानक

चानक या चीनी बटेर (Rain Quail या Black-breasted Quail) (Coturnix coromandelica) बटेर की एक जाति है जो भारतीय उपमहाद्वीप में पाई जाती है। यह जाति कंबोडिया, थाइलैंड, नेपाल, पाकिस्तान, बांग्लादेश, भारत, म्यानमार, वियतनाम और श्रीलंका की मूल निवासी है। .

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चान्दिना उपज़िला

चान्दिना उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह चट्टग्राम विभाग के कुमिल्ला ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 16 उपज़िले हैं। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण-पूर्व की दिशा में चट्टग्राम नगर के निकट अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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चार दलीय गठबंधन

चार दलीय गठबंधन, बांग्लादेश की एक पूर्व राष्ट्रीय राजनैतिक गठबंधन थी। जिसका नेतृत्व बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के हाथ में था। इसकी वर्त्तमान अनुयायी 18 दलीय गठबंधन है। .

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चारघाट उपज़िला

चारघाट उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह राजशाही विभाग के राजशाही ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 9 उपज़िले हैं। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से पूर्व की दिशा में अवस्थित है। .

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चांदी का वरक़

चांदी का वरक़ या सिर्फ वरक़, (अन्य नामः वरक या वरख या वर्क), चांदी अथवा शयोजकमांसर्क से बना एक पतरा (पर्ण) है और भारत और पड़ोसी देशों जैसे कि पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश आदि में इसका उपयोग मिठाईयों और व्यंजनों को सजाने के लिए किया जाता है। चांदी को खाया जा सकता है हालांकि, यह पूर्णतया स्वादविहीन होती है। चांदी तत्व का एक बड़ी मात्रा में सेवन अर्जीरिया का कारण बन सकता है, लेकिन वर्क में इसकी बहुत ही कम मात्रा होने के कारण इसे शरीर के लिए हानिकारक नहीं माना जाता। वरक़ बनाने के लिए चांदी को पीट पीट कर एक चादर में ढाला जाता है और इसकी मोटाई मात्र कुछ माइक्रोमीटर ही रह जाती है। इसे सहेजने के लिए इसे कागज की परतों के बीच रखा जाता है और इसे उपयोग से पहले इन कागजों मे से निकाला जाता है। यह बहुत ही नाज़ुक होता है और छूने पर छोटे छोटे टुकड़ों में टूट जाता है। शाकाहारी लोगों का दावा है कि, क्योंकि वरक़ बनाने के लिए चांदी को पशुओं की अति लचीली आंतों के बीच रख कर पीटा जाता है और इन आंतों का कुछ हिस्सा इस वर्क का भी हिस्सा बन जाता है इसलिए, वरक़ एक तरह से एक मांसाहारी उत्पाद है। .

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चिट्टागोंग

चिट्टागोंग एक भारतीय ऐतिहासिक युद्ध वाली फिल्म है, जिसका निर्माण बेबब्रता पैन ने किया है। इसमें मुख्य किरदार में मनोज बाजपई हैं। यह कहानी ब्रिटिश भारत के एक गाँव की है, जो अब बांग्लादेश में है। इसका प्रदर्शन सिनेमाघरों में 12 अक्टूबर 2012 में हुआ था। इसने कुल 31 लाख रुपये की कमाई की थी। इस फिल्म को पहले फिल्म के सर्वश्रेष्ठ निर्देशक हेतु राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला है। .

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चितलमारी उपज़िला

चितलमारी उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह खुलना विभाग के बगेरहाट ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल ९ उपज़िले हैं, और मुख्यालय बगेरहाट सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण-पश्चिम की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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चिन राज्य

चिन राज्य (बर्मी: ချင်းပြည်နယ်) बर्मा के मध्य-पश्चिम में स्थित एक राज्य है। इसके उत्तर में भारत का मणिपुर राज्य, पश्चिम में भारत का मीज़ोरम राज्य और दक्षिण-पश्चिम में बांग्लादेश है। .

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चिरिरबन्दर उपज़िला

चिरिरबन्दर उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह रंगपुर विभाग के दिनाजपुर ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल १३ उपज़िले हैं, और मुख्यालय दिनाजपुर सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उत्तर की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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चिलमारी उपज़िला

चिलमारी उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह रंगपुर विभाग के कुड़िग्राम ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 9 उपज़िले हैं, और मुख्यालय कुड़िग्राम सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उत्तर की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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चिंकारा

चिंकारा दक्षिण एशिया में पाया जाने वाला एक प्रकार का गज़ॅल है। यह भारत, बांग्लादेश के घास के मैदानों और मरुभूमि में तथा ईरान और पाकिस्तान के कुछ इलाकों में पाया जाता है। इसकी ऊँचाई कन्धे तक ६५ से.मी.

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चिक्की

चिक्की आम तौर पर मूंगफली और गुड़ से बनी पारंपरिक भारतीय मिठाई (भंगुर) है। चिक्की कई प्रकार की होती है, जो महाराष्ट्र में बहुत प्रसिद्ध है। चिक्की एक स्नैक अर्थात अल्पाहार की श्रेणी में आती है जिसे मुख्य रूप से मूंगफली और गुड़ द्वारा बनाई जाती है। उत्तर भारत, विशेष रूप से बिहार और उत्तर प्रदेश के क्षेत्रों में, इस मिठाई को लयिया पट्टी कहते है। भारत के सिंध और सिंधी क्षेत्रों में, इसे लेई या लाई और बांग्लादेश में कोटकोटी के नाम से जानी जाती है। .

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चकोरिय़ा उपज़िला

चकोरिय़ा उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह चट्टग्राम विभाग के काॅक्सबाजार ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 8 उपज़िले हैं, और मुख्यालय काॅक्सबाजार सदर उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण-पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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चुनारुघाट उपज़िला

चुनारुघाट उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह सिलेट विभाग के हाबीगंज ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल ८ उपज़िले हैं, और मुख्यालय हाबीगंज सदर उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उत्तर-पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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चुय़ाडाङ्गा सदर उपज़िला

चुय़ाडांगा सदर उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह उपज़िला चुय़ाडांगा जिला का ज़िला सदर यानी प्रशासनिक मुख्यालय है। यह खुलना विभाग के चुय़ाडांगा ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल ९ उपज़िले हैं, और मुख्यालय चुय़ाडांगा सदर उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण-पश्चिम की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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चौद्दग्राम उपज़िला

चौद्दग्राम उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह चट्टग्राम विभाग के कुमिल्ला ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 16 उपज़िले हैं। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण-पूर्व की दिशा में चट्टग्राम नगर के निकट अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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चौहाली उपज़िला

चौहाली उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह राजशाही विभाग के सिराजगंज ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल ५ उपज़िले हैं, और मुख्यालय सिराजगंज सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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चौगाछा उपज़िला

चौगाछा उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह खुलना विभाग के यशोर ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 8 उपज़िले हैं, और मुख्यालय यशोर सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण-पश्चिम की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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चीतल

चीतल, या चीतल मृग, या चित्तिदार हिरन हिरन के कुल का एक प्राणी है, जो कि श्री लंका, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, भारत में पाया जाता है। पाकिस्तान के भी कुछ इलाकों में भी बहुत कम पाया जाता है। अपनी प्रजाति का यह एकमात्र जीवित प्राणी है। .

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चीनी पैंगोलिन

चीनी पैंगोलिन (Chinese pangolin), जिसका वैज्ञानिक नाम मैनिस पेन्टाडैक्टाएला (Manis pentadactyla) है, पैंगोलिन की एक जीववैज्ञानिक जाति है जो उत्तरी भारत, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, बर्मा, उत्तरी हिन्दचीन, ताइवान और दक्षिणी चिन (जिसमें हाइनान द्वीप भी शामिल है) में पाया जाता है। यह पैंगोलिन की आठ जातियों में से एक है और अति-संकटग्रस्त माना जाता है। चीन व पूर्वी एशिया में इसके मांस को खाने से सम्बन्धित कई अन्धविश्वास हैं कि उस से कई रोग ठीक होते हैं हालाकि चिकित्सकों ने इस मान्यता को सरासर झूठ पाया है। अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ के अनुसार पिछ्ले १५ सालों में इसकी संख्या में ज़बरदस्त गिरावट हुई है। .

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चीज़ की सूची

यह उत्पत्ति स्थान के आधार पर चीज़ की सूची है। दुकान पर चीज़ काउंटर दुकान के कूलर में चीज़ थाली में परोसे हुए चीज़ों के विभिन्न प्रकार सुपरमार्केट में कई प्रकार की चीज़ .

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टायो रोल्स

टायो रोल्स (पूर्व मे टाटा योडोगावा) टाटा इस्पात की सहायक कंपनी है जो कास्ट रोल, रोल जाली, विशेष कास्टिंग और ढलवां लोहे के निर्माण में शामिल है। यह भारत की टाटा स्टील और जापान के योडोगावा स्टील्स के बीच संयुक्त उद्यम है और इसका मुख्यालय जमशेदपुर, झारखंड (भारत) मे स्थित है। यह बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर 504961 कोड के साथ सूचीबद्ध है। टायो का भारत में एक व्यापक ग्राहक आधार मौजूद है। टायो ऑस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रिया, बांग्लादेश, बेल्जियम, कनाडा, मिस्र, जर्मनी, इंडोनेशिया, कजाकिस्तान, नेपाल, नार्वे, न्यूजीलैंड, ओमान, कतर, सऊदी अरब, स्वीडन, सिंगापुर, दक्षिण अफ्रीका, त्रिनिदाद, ताइवान, संयुक्त अरब अमीरात, रोमानिया, चेक गणराज्य और संयुक्त राज्य अमेरिका को रोल निर्यात करता है। श्रेणी:टाटा समूह.

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टाङाइल सदर उपज़िला

टाङाइल सदर उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह ढाका विभाग के टाङाइल ज़िले का एक उपजिला है। यह उपज़िला टाङाइल जिला का ज़िला सदर यानी प्रशासनिक मुख्यालय है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका के निकट अवस्थित है। .

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टङ्गीबाड़ी उपज़िला

टंगीबाड़ी उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह ढाका विभाग के नरसिंदी ज़िले का एक उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका के निकट अवस्थित है। .

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टुङ्गिपाड़ा उपज़िला

टुंगिपाड़ा उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह ढाका विभाग के गोपालगंज ज़िले का एक उपजिला है। यह उपज़िला गोपालगंज जिला का ज़िला सदर यानी प्रशासनिक मुख्यालय है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका के निकट अवस्थित है। .

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टेस्ट क्रिकेट

टेस्ट क्रिकेट, क्रिकेट का सबसे लम्बा स्वरूप होता है। इसे खिलाड़ियों की खेल क्षमता की वास्तविक परीक्षा माना गया है, हालाँकि आजकल इस खेल का एकदिवसीय स्वरूप अधिक लोकप्रिय है। .

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टेकनाफ उपज़िला

टेकनाफ उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह चट्टग्राम विभाग के काॅक्सबाजार ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 8 उपज़िले हैं, और मुख्यालय काॅक्सबाजार सदर उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण-पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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टीवीएस कप 2003

2003 टीवीएस कप एक वनडे अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट टूर्नामेंट था, जिसे बांग्लादेश में 11 से 21 अप्रैल 2003 को आयोजित किया गया था। टूर्नामेंट भारत, बांग्लादेश और दक्षिण अफ्रीका द्वारा खेला गया था। भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच फाइनल में दो बार धोया गया, जिसमें फाइनल में दोनों ने ट्रॉफी का हिस्सा रखा। .

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ऍफ़ के ऍम मुनीम

ऍफ़ के ऍम मुनीम एक बांग्लादेशी न्यायाधीश थे। वे बांग्लादेश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं, जोकी बांग्लादेश का सर्वोच्च न्यायिक पद है। उन्हें इस पद पर बांग्लादेश के राष्ट्रपति अहसानुद्दीन चौधरी द्वारा, परंपरानुसार, वरिष्ठता के आधार पर नियुक्ति किया गया था। .

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ए टी ऍम अफजल

ए टी ऍम अफजल एक बांग्लादेशी न्यायाधीश थे। वे बांग्लादेश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं, जोकी बांग्लादेश का सर्वोच्च न्यायिक पद है। उन्हें इस पद पर बांग्लादेश के राष्ट्रपति अब्दुर रहमान बिस्वास द्वारा, परंपरानुसार, वरिष्ठता के आधार पर नियुक्ति किया गया था। .

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ए बी ऍम खैरुल हक

ए बी ऍम खैरुल हक एक बांग्लादेशी न्यायाधीश थे। वे बांग्लादेश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं, जोकी बांग्लादेश का सर्वोच्च न्यायिक पद है। उन्हें इस पद पर बांग्लादेश के राष्ट्रपति जिल्लुर रहमान द्वारा, परंपरानुसार, वरिष्ठता के आधार पर नियुक्ति किया गया था। .

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ए क्यू एम बदरुद्दोज़ा चौधरी

ए क्यू एम बदरुद्दोज़ा चौधरी बांग्लादेश के राष्ट्रपति थे। इनका कार्यकाल १४ नवम्बर २००१ से २१ जून २००२ तक रहा। श्रेणी:बांग्लादेश के राष्ट्रपति.

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एम एम रुहुल अमीन

एम एम रुहुल अमीन एक बांग्लादेशी न्यायाधीश थे। वे बांग्लादेश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं, जोकी बांग्लादेश का सर्वोच्च न्यायिक पद है। उन्हें इस पद पर बांग्लादेश के राष्ट्रपति इयाजुद्दीन अहमद द्वारा, परंपरानुसार, वरिष्ठता के आधार पर नियुक्ति किया गया था। .

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एशियाई टेस्ट चैंपियनशिप 1998-99

एशियाई क्रिकेट परिषद द्वारा आयोजित पहली एशियाई टेस्ट चैम्पियनशिप 16 फरवरी और 16 मार्च 1999 के बीच आयोजित हुई थी। एशियन टेस्ट चैम्पियनशिप 14 फरवरी से 17 मार्च (24 दिसंबर 1998) 24 दिसंबर 1998 पीटर क्रिस्टी द्वारा भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका टूर्नामेंट में भाग लिया; बांग्लादेश प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकता क्योंकि आईसीसी ने उन्हें टेस्ट की स्थिति दी थी। इस टूर्नामेंट को टेस्ट क्रिकेट विश्व कप के पूर्ववर्ती माना गया था कि आईसीसी 9 सदस्य देशों की योजना बना रहा था। टूर्नामेंट लगभग दौरे के संघर्षों, टेलीविजन अधिकारों और सुरक्षा चिंताओं के कारण जनवरी 1999 में रद्द कर दिया गया था। तीन राउंड-रोबिन टूर्नामेंट मैचों का आयोजन प्रत्येक देश के साथ एक-दूसरे की बैठक के दौरान किया गया था और शीर्ष दो पक्ष अंतिम रूप से खेलते थे। एक जीत 12 अंकों के बराबर थी, एक टाई 6 अंक और ड्रॉ या नुकसान के लिए कोई अंक नहीं दिए गए थे। इसके अलावा, गेंदबाजी और बल्लेबाजी प्रदर्शन (स्कोरिंग सिस्टम देखें) के लिए टीमों को बोनस अंक दिए गए थे। तीनों देशों: भारत (कलकत्ता), श्रीलंका (कोलंबो) और पाकिस्तान (लाहौर) के बीच राउंड रॉबिन मैच के स्थान घूम रहे थे, जबकि फाइनल ढाका में बांग्लादेश में एक तटस्थ स्थल के रूप में आयोजित किया गया था। पाकिस्तान ने श्रीलंका को फाइनल में एक पारी और 175 रनों से हराकर पहले एशियाई टेस्ट चैंपियन बनने और पुरस्कार राशि में 250,000 अमेरिकी डॉलर का पुरस्कार प्राप्त किया। हारने वाले फाइनल में श्रीलंका को 145,000 अमेरिकी डॉलर और पहले दौर के हारे हुए भारत, 100,000 अमेरिकी डॉलर का पुरस्कार मिला। उद्घाटन एशियाई टेस्ट चैंपियनशिप 11 फरवरी 1999 सादी थॉफीक 'मैन ऑफ द सीरीज़', वसीम अकरम, 20,000 यूएस डॉलर, जबकि 'मैन ऑफ द मैच' विजेताओं को पुरस्कार राशि में 5000 अमेरिकी डॉलर मिले। .

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एशियाई भूरा बादल

दिसंबर 2001 में पूर्वी भारत और बांग्लादेश के ऊपर एयरोसौल एशियाई भूरा बादल, वायु प्रदूषकों द्वारा बारबार बनने वाला एक विशाल बादल अथवा परत है जिसकी मोटाई लगभग 3000 मी होती है और इसका विस्तार दक्षिण एशिया के कुछ हिस्सों तक होता है जिनमें उत्तरी हिंद महासागर, भारत और पाकिस्तान शामिल हैं। दुनिया के इस हिस्से में सर्दियों के चार महीने लगभग न के बराबर बारिश होती है, जिसके कारण आकाश में व्याप्त प्रदूषक और धूल के कण धुल नहीं पाते और समय के साथ इनकी सघनता बढ़ती रहती है। कभी कभी तो सूरज भी अस्पष्ट नज़र आता है। प्रदूषण की इस मोटी परत को दुनिया का सबसे बड़ा प्रदूषण माना जाता है। उपग्रह से प्राप्त तस्वीरों में यह बादल प्रति वर्ष जनवरी से मार्च के मध्य हवा में तैरते एक विशाल भूरा धब्बे के समान दिखाई देता है जो दक्षिण एशिया के अधिकांश और हिंद महासागर के उत्तरी भाग को ढके रहता है। यह विभिन्न कणों, एयरोसौल और जैविक सामग्री के दाहन, औद्योगिक उत्सर्जन और मोटर वाहनों द्वारा उत्सर्जित गैसीय प्रदूषकों के मिश्रण से बनता है। इसका एक उल्लेखनीय उदाहरण ग्रामीण भारत और बांग्लादेश में ईंधन के रूप में जलाया जाने वाला गोबर है। इन कणों से बना यह कुहासा विषैला होता है और वर्षा और धूप पर यह विपरीत प्रभाव डालता है। इसके प्रभावों के चलते प्रतिवर्ष लाखों लोग अपनी जान गंवाते है। .

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एशियाई राजमार्ग १

एशियाई राजमार्ग १ (ए एच १) एशियाई राजमार्ग जाल में सबसे लम्बा राजमार्ग है। इसकी कुल लम्बाई २०,५५७ किलोमीटर (१२,७७४ मील) है। यह टोक्यो, जापान से शुरू होकर कोरिया, चीन, हांगकांग, दक्षिण पूर्व एशिया, बांग्लादेश, भारत, पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और ईरान से होता हुआ तुर्की और बुल्गारिया तक जाता है। इस्तांबुल के पश्चिम में यह यूरोपीय ई८० मार्ग से मिल जाता है। .

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एशियाई राजमार्ग २

एशियाई राजमार्ग २ (ए एच २) एशियाई राजमार्ग जाल के अंतर्गत १३,१७७ किलोमीटर (८,१८८ मील) लम्बी एक सड़क है। यह इंडोनेशिया के देनपसार से शुरू होकर मेरक और सिंगापुर होते हुए ईरान के खोस्रावी नगर तक जाती है। .

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एसोसिएशन ऑफ चार्टर्ड सर्टिफाइड एकाउंटेंट्स

यह एक आउटडोर परिचय है एसोसिएशन ऑफ चार्टर्ड सर्टिफाइड एकाउंटेंट्स (Association of Chartered Certified Accountants) एक ब्रिटिश लेखा निकाय है जो दुनिया भर में चार्टर्ड सर्टिफाइड एकाउंटेंट (पहचान के अक्षर एसीसीए (ACCA) या एफसीसीए (FCCA)) की योग्यता प्रदान करता है। यह दुनिया के सबसे बड़े और सबसे तेजी से बढ़ते लेखा निकायों में से एक है जिसके पास 170 देशों में 140,000 सदस्य और 404,000 सहयोगी एवं छात्र हैं (अप्रैल 2010 के अनुसार).

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एसीसी इमर्जिंग टीम कप

एसीसी इमर्जिंग टीम कप एशियाई क्रिकेट परिषद (एसीसी) प्रणाली का हिस्सा है। उद्घाटन एसीसी इमर्जिंग टीम कप 2013 में आयोजित किया है, और आठ टीमों को चित्रित किया गया था। .

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एसीसी इमर्जिंग टीम कप 2017

2017 एसीसी उभरते राष्ट्रों के कप बांग्लादेश में आयोजित एक क्रिकेट टूर्नामेंट है। आठ टीमें टूर्नामेंट में भाग ले रही हैं जिसमें चार अंडर-23 आयु वर्ग के टेस्ट देशों की टीम और एशिया की चार शीर्ष एसोसिएट टीम शामिल हैं। यह प्रतियोगिता एसीसी (एशियन क्रिकेट काउंसिल) द्वारा आयोजित की जाती है। श्रेणी:क्रिकेट प्रतियोगितायें श्रेणी:२०१७ में क्रिकेट.

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एंड फ्लिक्स

एंड फ्लिक्स (&flix) एक अंग्रेजी फिल्मों का चैनल है, जिसे ज़ी मनोरंजन उद्योग ने 3 जून 2018 को ज़ी स्टूडियो के स्थान पर शुरू किया था। इसमें हर रविवार नए फिल्मों को दिखाया जाता है, जिसमें अधिकतर फिल्में सोनी पिक्चर्स की होती हैं, और अन्य फिल्में पैरामाउंट, डिज़्नी और अन्य स्टुडियो के होते हैं। ये चैनल एसडी और एचडी दोनों में उपलब्ध है। .

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एक इकाई व्यवस्था

एक इकाई व्यवस्था या नीति, (अथवा वन-यूनिट् सिस्टम्), पाकिस्तान की एक पुर्वतः परवर्तित प्रशासनिक व्यवस्था थी, जिसके अंतर्गत, तत्कालीन पाकिस्तानी भूमि के दोनों भिन्न टुकड़ों को "एक प्रशासनिक इकाई" के रूप में ही शासित किये जाने की योजना रखी गई थी। इस तरह की प्रशासनिक नीति को अपनाने का मुख्य कारण, सर्कार द्वारा, पाकिस्तानी अधिराज्य के दो विभक्त एवं पृथक भौगोलिक आंचलों की एक ही केंद्रीय व्यवस्था के अंतर्गत शासन में आने वाली घोर प्रशासनिक असुविधाएँ, एवं भौगोलिक कठिनाईयाँ बताई गई थी। अतः इस भौगोलिक व प्रशासनिक विषय के समाधान के रूप में, सरकार ने इन दो भौगोलीय हिस्सों को ही, एक महासंघीय ढांचे के अंतर्गत, पाकिस्तान के दो वाहिद प्रशासनिक इकाइयों के रूप में स्थापित करने की नीति बनाई गई। इस्के तहत, तत्कालीन मुमलिकात-ए-पाकिस्तान के, पूर्वी भाग में मौजूद स्थिति के अनुसार ही, पश्चिमी भाग के पाँचों प्रांतों व उनकी प्रांतीय सरकारों को भंग कर, एक प्रांत, पश्चिमी पाकिस्तान गठित किया गया, वहीं पूर्वी भाग (जो अब बांग्लादेश है) को पूर्वी पाकिस्तान कह कर गठित किया गया। तत्प्रकार, पाकिस्तान, एक इकाई योजना के तहत, महज दो प्रांतों में विभाजित एक राज्य बन गया। वन यूनिट योजना की घोषणा प्रधानमंत्री मोहम्मद अली बोगरा के शासनकाल के दौरान 22 नवंबर 1954 को की गई, और 14 अक्टूबर 1955 को देश के पश्चिमी भाग के सभी प्रांतों को एकीकृत कर, पश्चिमी पाकिस्तान प्रांत गठित किया गया, जिसमें, सभी प्रांतों के अलावा तत्कालीन, राजशाहियों और कबाइली इलाके भी शामिल थे। इस प्रांत में 12 प्रमंडल थे, और इसकी राजधानी लाहौर थी। दूसरी ओर पूर्वी बंगाल के प्रांत को पूर्वी पाकिस्तान का नाम दिया गया, जिसकी राजधानी ढाका थी। संघीय राजधानी(कार्यपालिका) को वर्ष 1959 में कराँची से रावलपिंडी स्थानांतरित किया गया, जहां सेना मुख्यालय था, और नई राजधानी, इस्लामाबाद के पूरा होने तक यहां मौजूद रहा जबकि संघीय विधानपालिका को ढाका में स्थापित किया गया। इस नीति का उद्देश्य बज़ाहिर प्रशासनिक सुधार लाना था लेकिन कई लिहाज से यह बहुत विनाशकारी कदम था। पश्चिमी पाकिस्तान में मौजूद बहुत सारी राज्यों ने इस आश्वासन पर विभाजन के समय पाकिस्तान में शामिल हो गए थे कि उनकी स्वायत्तता कायम रखी जाएगी लेकिन वन इकाई बना देने के फैसले से सभी स्थानीय राज्यों का अंत हो गया। इस संबंध में बहावलपुर, खीरिपोर और कलात के राज्य विशेषकर उल्लेखनीय हैं। मामले इस समय अधिक गंभीर समय 1958 ई। के तख्तापलट के बाद मुख्यमंत्री का पद समाप्त कर दिया गया और राष्ट्रपति ने पश्चिमी पाकिस्तान के विकल्प अपने पास रख लिए। राजनीतिक विशेषज्ञों यह भी समझते हैं कि पश्चिमी पाकिस्तान के सभी प्रांतों को एकजुट करने के उद्देश्य पूर्वी पाकिस्तान की भाषाई और राजनीतिक इकाई का जोर तोड़ना था। अंततः एक जुलाई 1970 को राष्ट्रपति याह्या खान ने एक इकाई का सफाया करते हुए पश्चिमी पाकिस्तान के सभी प्रांतों बहाल कर दिया। .

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एकतारा

एकतारा अथवा इकतारा भारतीय संगीत का लोकप्रिय तंतवाद्य यंत्र है जिसका प्रयोग भजन या सुगम संगीत में किया जाता है। इसमें एक ही तार लगा होता है। भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान और मिस्र के पारंपरिक संगीत में इसका प्रयोग होता है। इकतारा मूलतः भारतीय कवियों तथा घुमक्कड़ गवैयों द्वारा प्रयोग किया जाता था। निचला गुंजयमान यंत्र वे लौकी से बनाते थे, और ऊपर का गला बनाने के लिए बांस का प्रयोग करते थे। .

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ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम

अबुल पकिर जैनुलाअबदीन अब्दुल कलाम अथवा ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम (A P J Abdul Kalam), (15 अक्टूबर 1931 - 27 जुलाई 2015) जिन्हें मिसाइल मैन और जनता के राष्ट्रपति के नाम से जाना जाता है, भारतीय गणतंत्र के ग्यारहवें निर्वाचित राष्ट्रपति थे। वे भारत के पूर्व राष्ट्रपति, जानेमाने वैज्ञानिक और अभियंता (इंजीनियर) के रूप में विख्यात थे। इन्होंने मुख्य रूप से एक वैज्ञानिक और विज्ञान के व्यवस्थापक के रूप में चार दशकों तक रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) संभाला व भारत के नागरिक अंतरिक्ष कार्यक्रम और सैन्य मिसाइल के विकास के प्रयासों में भी शामिल रहे। इन्हें बैलेस्टिक मिसाइल और प्रक्षेपण यान प्रौद्योगिकी के विकास के कार्यों के लिए भारत में मिसाइल मैन के रूप में जाना जाने लगा। इन्होंने 1974 में भारत द्वारा पहले मूल परमाणु परीक्षण के बाद से दूसरी बार 1998 में भारत के पोखरान-द्वितीय परमाणु परीक्षण में एक निर्णायक, संगठनात्मक, तकनीकी और राजनैतिक भूमिका निभाई। कलाम सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी व विपक्षी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस दोनों के समर्थन के साथ 2002 में भारत के राष्ट्रपति चुने गए। पांच वर्ष की अवधि की सेवा के बाद, वह शिक्षा, लेखन और सार्वजनिक सेवा के अपने नागरिक जीवन में लौट आए। इन्होंने भारत रत्न, भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान सहित कई प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त किये। .

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ए॰ बी॰ बर्धन

अर्धेन्दु भूषण बर्धन (25 सितम्बर 1924 – 2 जनवरी 2016) अथवा ए॰बी॰ बर्धन भारत के सबसे पुराने राजनीतिक दलों में से एक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के भूतपूर्व महासचिव थे। वो ऑल इंडिया डिफ़ेन्स इम्पलॉइज़ एसोसिएशन के उपाध्यक्ष, महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी फ़ेडरेशन और ऑल इंडिया इलेक्ट्रिक इम्पलॉइज़ फ़ेडरेशन के अध्यक्ष रहे थे। .

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ऐयाजुद्दीन अहमद

ऐयाजुद्दीन अहमद बांग्लादेश के राष्ट्रपति थे। इनका कार्यकाल ६ सितंबर २००२ से १२ फ़रवरी २००९ तक रहा। श्रेणी:बांग्लादेश के राष्ट्रपति.

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झपकी

एक झपकी लेते हुए एक जवान औरत का चित्र.(झूला, गस्टेव कुर्बेट (1844).) झपकी दोपहर की शुरूआत, अक्सर दोपहर के भोजन के बाद थोड़ी देर के लिए उंघने को कहते हैं। नींद का इस तरह का समय कुछ देशों, खासकर जहां मौसम गर्म होता है, में एक आम परंपरा है। सियेस्ट शब्द लैटिन होरा सेक्सटा - "छठा घंटा" (भोर से दोपहर तक की गिनती, इसलिए दोपहर यानी "दोपहर का आराम").

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झालोकाठी सदर उपज़िला

झालोकाठी सदर उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह उपज़िला झालोकाठी जाला का ज़िला सदर यानी प्रशासनिक मुख्यालय है। यह बरिशाल विभाग के झालोकाठी ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल ६ उपज़िले हैं, और मुख्यालय झालोकाठी सदर उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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झिनाइदह सदर उपज़िला

झिनाइदह सदर उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह उपज़िला झिनाइदह जिला का ज़िला सदर यानी प्रशासनिक मुख्यालय है। यह खुलना विभाग के झिनाइदह ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल ९ उपज़िले हैं, और मुख्यालय झिनाइदह सदर उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण-पश्चिम की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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झिनाइगाती उपज़िला

झिनाइगाती उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह मय़मनसिंह विभाग के शेरपुर ज़िले का एक उपजिला है। इसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 5 उपज़िले हैं। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उत्तर की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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झिकरगाछा उपज़िला

झिकरगाछा उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह खुलना विभाग के यशोर ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 8 उपज़िले हैं, और मुख्यालय यशोर सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण-पश्चिम की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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ठाकुरगाँओ सदर उपज़िला

ठाकुरगाँओ सदर उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह उपज़िला ठाकुरगाँओ जिला का ज़िला सदर यानी प्रशासनिक मुख्यालय है। यह रंगपुर विभाग के ठाकुरगाँओ ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल १३ उपज़िले हैं, और मुख्यालय ठाकुरगाँओ सदर उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उत्तर की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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डामुड्या उपज़िला

डामुड्या उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह ढाका विभाग के शरिय़तपुर ज़िले का एक उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका के निकट अवस्थित है। .

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डिमला उपज़िला

डिमला उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह रंगपुर विभाग के निलफामारी ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 6 उपज़िले हैं, और मुख्यालय निलफामारी सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उत्तर की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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डिश टीवी

डिश टीवी भारत की पहली डीटीएच मनोरंजन सेवा है। इस पर डायरेक्ट-टू-होम (डीटीएच), पे-पर-वियु आदि सुविधाएँ उपलब्ध हैं। यह एमपेग-2 डिजिटल संपीड़न तकनीक की मदद से कर एनएसएस-6 उपग्रह के द्वारा अपनी सेवाएं संचारित करता है। 2011 में "भारत फॉर्च्यून 500" द्वारा प्रकाशित भारत के सबसे बड़े मीडिया कंपनियों की सूची में डिश टी० वी० इंडिया लिमिटेड को #437 और # 5 स्थान मिला था। एस्सेल समूह द्वारा प्रारम्भ की गई इस उपग्रह प्रसारण सेवा के उपभोगता भारत, श्रीलंका, नेपाल, बांग्लादेश, पाकिस्तान के अलावा दक्षिण-पूर्वी एशिया में भी हैं | वर्तमान में डिश टीवी के पास २८५ से भी ज़्यादा राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय चैनल्स और २५ रेडियो चैनल्स हैं | .

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डुमुरिय़ा उपज़िला

डुमुरिय़ा उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह खुलना विभाग के खुलना ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, कुल 15 उपज़िले हैं। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण-पश्चिम की दिशा में अवस्थित है। .

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डेरिल मिशेल

कोई विवरण नहीं।

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डेव वॉटमोर

डेवनल फ्रेड्ररिक वॉटमोर (जन्म 16 मार्च, 1954, कोलंबो, श्रीलंका) एक पूर्व अन्तर्राष्ट्रीय आस्ट्रेलियाई क्रिकेट खिलाड़ी है और वर्तमान समय में बांग्लादेश क्रिकेट टीम के कोच है। अपने छोटे अन्तर्राष्ट्रीय करियर में उन्होने मार्च 1979 से जनवरी 1980 तक 7 टेस्ट मैच और 1 एकदिवसीय मैच खेला। फर्स्ट क्लास क्रिकेट में उन्होने विक्टोरिया के लिए 6,000 से ज्यादा रन बनाए। अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट से 1988/89 में संयास लेने के बाद वे क्रिकेट कोच बन गए। उन्होने श्रीलंका की क्रिकेट टीम को दो अलग समय में कोच किया, जिसमे पहले समय में श्रीलंका की टीम ने 1996 क्रिकेट विश्व कप जीता। उन दो अंतराल के मध्य में उन्होने लैन्कशायर की टीम को कोच किया। जहाँ उनकी टीम ने 1998 और 1999 में नैशनल लीग और 1998 की नैट्वेस्ट ट्राफी जीती। 2003 से वे बांग्लादेश क्रिकेट टीम के कोच है। श्रेणी:ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट खिलाड़ी श्रेणी:श्रीलंका के लोग श्रेणी:1954 में जन्मे लोग.

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डोमार उपज़िला

डोमार उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह रंगपुर विभाग के निलफामारी ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 6 उपज़िले हैं, और मुख्यालय निलफामारी सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उत्तर की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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ढाका

ढाका (बांग्ला: ঢাকা) बांग्लादेश की राजधानी है। बूढ़ी गंगा नदी के तट पर स्थित यह देश का सबसे बड़ा शहर है। राजधानी होने के अलावा यह बांग्लादेश का औद्यौगिक और प्रशासनिक केन्द्र भी है। यहाँ पर धान, गन्ना और चाय का व्यापार होता है। ढाका की जनसंख्या लगभग 1.1 करोड़ है (२००१ की जनसंख्या: ९,०००,०२)) जो इसे दुनिया के ग्यारहवें सबसे बड़ी जनसंख्या वाले शहर का दर्जा भी दिलाता है। ढाका का अपना इतिहास रहा है और इसे दुनिया में मस्जिदों के शहर के नाम से जाना जाता है। मुगल सल्तनत के दौरान इस शहर को १७ वीं सदी में जहांगीर नगर के नाम से भी जाना जाता था, यह न सिर्फ प्रादेशिक राजधानी हुआ करती थी बल्कि यहाँ पर निर्मित होने वाले मलमल के व्यापार में इस शहर का पूरी दुनिया में दबदबा था। आधुनिक ढाका का निर्माण एवं विकास ब्रिटिश शासन के दौरान उन्नीसवीं शताब्दी में हुआ और जल्द ही यह कोलकाता के बाद पूरे बंगाल का दूसरा सबसे बड़ा शहर बन गया। भारत विभाजन के बाद १९४७ में ढाका पूर्वी पाकिस्तान की प्रशासनिक राजधानी बना तथा १९७२ में बांग्लादेश के स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में अस्तित्व में आने पर यह राष्ट्रीय राजधानी घोषित हुआ। आधुनिक ढाका देश की राजनीति, अर्थव्यवस्था, एवं संस्कृति का मुख्य केन्द्र है। ढाका न सिर्फ देश का सबसे साक्षर (६३%) शहर है- - बल्कि बांग्लादेश के शहरों में सबसे ज्यादा विविधता वाला शहर भी है। हालांकि आधुनिक ढाका का शहरी आधारभूत ढांचा देश में सबसे ज्यादा विकसित है परंतु प्रदूषण, यातायात कुव्यवस्था, गरीबी, अपराध जैसी समस्यायें इस शहर के लिए बड़ी चुनौतियां हैं। सारे देश से लोगों का ढाका की ओर पलायन भी सरकार के लिए एक बड़ी समस्या का रूप लेता जा रहा है। .

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ढाका डिवीजन क्रिकेट टीम

ढाका डिवीजन क्रिकेट टीम बांग्लादेश के सात प्रशासनिक क्षेत्रों में से एक ढाका डिवीजन का प्रतिनिधित्व करने वाली बांग्लादेशी प्रथम श्रेणी की टीम है। टीम नेशनल क्रिकेट लीग में प्रतिस्पर्धा करती है। वे ढाका में धनमंडी क्रिकेट स्टेडियम में अपने अधिकांश घरेलू खेल खेलते हैं। बांग्लादेश प्रीमियर लीग (बीपीएल) में समकक्ष टीम ढाका डायनामाइट्स है।.

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ढाका दक्षिण नगर निगम

ढाका दक्षिण सिटी कॉर्पोरेशन यानि ढाका दक्षिण नगर निगम, बांग्लादेश के ढाका नगर में आधारित एक स्वशासित पौरप्रशासन निकाय व निगम-ऐक्य है, जिसपर बांग्लादेश के ढाका नगर के दक्षिण भाग के प्रशासन और विकास तथा नागरिक सुविधाओं से संबंधित प्रभार निहित किये गए हैं। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका में कार्यशील, दो नगर निगमों में से एक है। इसकी स्थापना पूरे ढाका के प्रशासन के लिए जिम्मेदार, पूर्व ढाका नगर निगम के द्विभाजन के साथ हुआ था। इसकी स्थापना से पूर्व, पूरे ढाका के लिए केवल एक ही नगर निगम हुआ करता था तत्पश्चात्, नगर के आकार और जनसंख्या में वृद्धि के मद्देनज़र इसे नगर निगम को द्विभाजित कर दिया गया। .

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ढाका नगर निगम

ढाका सिटी कॉर्पोरेशन यानि ढाका नगर निगम, बांग्लादेश के ढाका नगर में पूर्वतः आधारित एक गतकालीन पौरप्रशासन निकाय व निगम-ऐक्य था, जिसपर बांग्लादेश के ढाका नगर के प्रशासन और विकास तथा नागरिक सुविधाओं से संबंधित प्रभार निहित किये गए थे। इसे दिसंबर 2011 में भंग कर दिया गया था और दो विभक्त निगम निकाय स्थापित किये गए: ढाका उत्तर नगर निगम और ढाका दक्षिण नगर निगम। जिनकी स्थापना से पूर्व, पूरे ढाका के लिए केवल एक ही नगर निगम हुआ करता था तत्पश्चात्, नगर के आकार और जनसंख्या में वृद्धि के मद्देनज़र इसे नगर निगम को द्विभाजित कर दिया गया। .

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ढाका प्रीमियर डिवीज़न क्रिकेट लीग

ढाका प्रीमियर डिवीजन क्रिकेट लीग में भी ढाका प्रीमियर लीग के रूप में जाना जाता है, एक क्लब लिस्ट ए क्रिकेट बांग्लादेश में टूर्नामेंट है। .

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ढाका प्रीमियर डिवीज़न क्रिकेट लीग 2017

2016-17 ढाका प्रीमियर डिवीजन क्रिकेट लीग ढाका प्रीमियर डिवीज़न क्रिकेट लीग का चौथा संस्करण है, वर्तमान में बांग्लादेश में होने वाली एक लिस्ट ए क्रिकेट प्रतियोगिता है। टूर्नामेंट 12 अप्रैल 2017 को शुरू हुआ। टूर्नामेंट के लिए खिलाड़ी का स्थानान्तरण 17 मार्च 2017 को शुरू हुआ। अबाहानी लिमिटेड मौजूदा चैंपियन हैं। .

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ढाका मेट्रो रेल

ढाका मेट्रो (Dhaka Metro) बांग्लादेश की राजधानी और सबसे बड़ा शहर ढाका में निर्माणाधीन एक अनुमोदित मेट्रो रेल प्रणाली है। यह सरकार की परिवहन समन्वय प्राधिकरण (डीटीसीए) द्वारा तैयार 20 साल की लंबी सामरिक परिवहन योजना (एसटीपी) का हिस्सा है। वर्तमान में मेट्रो रेल प्रणाली में एमआरटी (मास रैपिड ट्रांजिट) लाइन-6 के रूप में संदर्भित एक लाइन शामिल है, जिसमें भविष्य में अन्य मेट्रो रेल लाइनों को जोड़ा जाएगा। .

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ढाका मेट्रोपोलिस क्रिकेट टीम

ढाका मेट्रोपोलिस क्रिकेट टीम ढाका, बांग्लादेश में स्थित एक प्रथम श्रेणी क्रिकेट टीम है। टीम राष्ट्रीय क्रिकेट लीग में प्रतिस्पर्धा करती है।.

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ढाका विश्वविद्यालय

ढाका विश्वविद्यालय (बांग्ला: ঢাকা বিশ্ববিদ্যালয় ढाका बिश्शोबिद्दॅलॉय्) बांग्लादेश का एक प्रमुख विश्वविद्यालय है। यह विश्वविद्यालय ढाका में स्थित है। यह बांग्लादेश का प्राचीनतम विश्वविद्यालय है। इसकी स्थापना 1921 में हुई थी। .

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ढाका उत्तर नगर निगम

ढाका उत्तर सिटी कॉर्पोरेशन यानि ढाका उत्तर नगर निगम, बांग्लादेश के ढाका नगर में आधारित एक स्वशासित पौरप्रशासन निकाय व निगम-ऐक्य है, जिसपर बांग्लादेश के ढाका नगर के उत्तरी भाग के प्रशासन और विकास तथा नागरिक सुविधाओं से संबंधित प्रभार निहित किये गए हैं। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका में कार्यशील, दो नगर निगमों में से एक है। इसकी स्थापना पूरे ढाका के प्रशासन के लिए जिम्मेदार, पूर्व ढाका नगर निगम के द्विभाजन के साथ हुआ था। इसकी स्थापना से पूर्व, पूरे ढाका के लिए केवल एक ही नगर निगम हुआ करता था तत्पश्चात्, नगर के आकार और जनसंख्या में वृद्धि के मद्देनज़र इसे नगर निगम को द्विभाजित कर दिया गया। .

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ढाका-खुलना राजमार्ग

यह बाँग्लादेश में स्थित राजमार्ग है जो राजधानी ढाका को कनाईपुर होते हुए खुलना से जोड़ता है। .

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ढाका-इस्तांबुल फ्रेट कॉरिडोर

ढाका-इस्तांबुल फ्रेट कॉरिडोर एक अंतरराष्ट्रीय रेल मार्ग परियोजना है।यह रेल मार्ग परियोजना बांग्लादेश,भारत,पाकिस्तान,ईरान और तुर्की को जोड़ती है।http://www.business-standard.com/article/news-ians/india-to-trial-run-goods-train-on-dhaka-istanbul-freight-corridor-117030300947_1.htmlभारत का पूर्वी डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर इस कॉरिडोर का एक हिस्सा है। .

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ढाकेश्वरी मन्दिर

ढाकेश्वरी मन्दिर ढाका नगर का सबसे महत्वपूर्ण मन्दिर है। इन्हीं ढाकेश्वरी देवी के नाम पर ही ढाका का नामकरण हुआ है। भारत के विभाजन से पहले तक ढाकेश्वरी देवी मन्दिर सम्पूर्ण भारत के शक्तिपूजक समाज के लिए आस्था का बहुत बड़ा केन्द्र था। 12वीं शताब्दी में सेन राजवंश के बल्लाल सेन ने ढाकेश्वरी देवी मन्दिर का निर्माण करवाया था। ढाकेश्वरी पीठ की गिनती शक्तिपीठ में की जाती है क्योंकि यहां पर सती के आभूषण गिरे थे। ढाकेश्वरी मंदिर (१९०४ में; फ्रिज काप (Fritz Kapp) द्वारा लिया गया फोटो) .

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तन्चंग्या लोग

तन्चंग्या, बांग्लादेश के चीटगां हिल ट्रैक्ट्स (सी.एच.टी) में रहने वाले १३ जनजातियों में से एक हैं। .

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तनोर उपज़िला

तनोर उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह राजशाही विभाग के राजशाही ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 9 उपज़िले हैं। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से पूर्व की दिशा में अवस्थित है। .

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तबला

तबला भारतीय संगीत में प्रयोग होने वाला एक तालवाद्य है जो मुख्य रूप से दक्षिण एशियाई देशों में बहुत प्रचलित है। यह लकड़ी के दो ऊर्ध्वमुखी, बेलनाकार, चमड़ा मढ़े मुँह वाले हिस्सों के रूप में होता है, जिन्हें रख कर बजाये जाने की परंपरा के अनुसार "दायाँ" और "बायाँ" कहते हैं। यह तालवाद्य हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत में काफी महत्वपूर्ण है और अठारहवीं सदी के बाद से इसका प्रयोग शाष्त्रीय एवं उप शास्त्रीय गायन-वादन में लगभग अनिवार्य रूप से हो रहा है। इसके अतिरिक्त सुगम संगीत और हिंदी सिनेमा में भी इसका प्रयोग प्रमुखता से हुआ है। यह बाजा भारत, पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, और श्री लंका में प्रचलित है। एन्साइक्लोपीडिया ब्रिटैनिका पहले यह गायन-वादन-नृत्य इत्यादि में ताल देने के लिए सहयोगी वाद्य के रूप में ही बजाय जाता था, परन्तु बाद में कई तबला वादकों ने इसे एकल वादन का माध्यम बनाया और काफी प्रसिद्धि भी अर्जित की। नाम तबला की उत्पत्ति अरबी-फ़ारसी मूल के शब्द "तब्ल" से बतायी जाती है। हालाँकि, इस वाद्य की वास्तविक उत्पत्ति विवादित है - जहाँ कुछ विद्वान् इसे एक प्राचीन भारतीय परम्परा में ही उर्ध्वक आलिंग्यक वाद्यों का विकसित रूप मानते हैं वहीं कुछ इसकी उत्पत्ति बाद में पखावज से निर्मित मानते हैं और कुछ लोग इसकी उत्पत्ति का स्थान पच्छिमी एशिया भी बताते हैं। .

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तबलीग़ी जमात

तबलीगी जमाअत (Urdu: تبلیغی جماعت‎, Tablīghī Jamā‘at; Arabic: جماعة التبليغ‎, Jamā‘at at-Tablīgh; Bengali: তাবলীগ জামাত; Hindi: तबलीग़ी जमात; English: Society for spreading faith) विश्व की सतह पर सुन्नी इस्लामी धर्म प्रचार आंदोलन है, जो मुसलमानों को मूल इस्लामी पद्दतियों की तरफ़ बुलाता है।  खास तौर पर धार्मिक तरीके, वेशाभूश, वैयक्तिक गति विधियां। Rabasa, Angel (2004).

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तसलीमा नसरीन

तसलीमा नसरीन (जन्म: २५ अगस्त १९६२) बांग्ला लेखिका एवं भूतपूर्व चिकित्सक हैं जो १९९४ से बांग्लादेश से निर्वासित हैं। १९७० के दशक में एक कवि के रूप में उभरीं तसलीमा १९९० के दशक के आरम्भ में अत्यन्त प्रसिद्ध हो गयीं। वे अपने नारीवादी विचारों से युक्त लेखों तथा उपन्यासों एवं इस्लाम एवं अन्य नारीद्वेषी मजहबों की आलोचना के लिये जानी जाती हैं। बांग्लादेश में उनपर जारी फ़तवे के कारण आजकल वे कोलकाता में निर्वासित जीवन जी रही हैं। हालांकि कोलकाता में मुसलमानों के विरोध के बाद उन्हें कुछ समय के लिये दिल्ली और उसके बाद फिर स्वीडन में भी समय बिताना पड़ा लेकिन इसके बाद जनवरी २०१० में वे भारत लौट आईं। उन्होंने भारत में स्थाई नागरिकता के लिये आवेदन किया है लेकिन भारत सरकार की ओर से उस पर अब तक कोई निर्णय नहीं हो पाया है। यूरोप और अमेरिका में एक दशक से भी अधिक समय रहने के बाद, तस्लीमा 2005 में भारत चले गए, लेकिन 2008 में देश से हटा दिया गया, हालांकि वह दिल्ली में रह रही है, भारत में एक आवासीय परमिट के लिए दीर्घावधि, बहु- 2004 के बाद से प्रवेश या 'एक्स' वीज़ा। उसे स्वीडन की नागरिकता मिली है। स्त्री के स्वाभिमान और अधिकारों के लिए संघर्ष करते हुए तसलीमा नसरीन ने बहुत कुछ खोया। अपना भरापूरा परिवार, दाम्पत्य, नौकरी सब दांव पर लगा दिया। उसकी पराकाष्ठा थी देश निकाला। नसरीन को रियलिटी शो बिग बॉस 8 में भाग लेने के लिए कलर्स (टीवी चैनल) की तरफ से प्रस्ताव दिया गया है। तसलीमा ने इस शो में भाग लेने से मना कर दिया है। .

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ताड़ाश उपज़िला

ताड़ाश उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह राजशाही विभाग के सिराजगंज ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल ५ उपज़िले हैं, और मुख्यालय सिराजगंज सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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ताड़ाइल उपज़िला

ताड़ाइल उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह ढाका विभाग के किशोरगंज ज़िले का एक उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका के निकट अवस्थित है। .

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तापी गैस परियोजना

तापी गैस परियोजना अंतर्राष्ट्रीय परियोजना है। तापी शब्द तुर्कमेनिस्तान,अफगानिस्तान,पाकिस्तान और इंडिया के आदि अक्षरों से मिलकर बना है। यह तापी शब्द उक्त चारों देशों को एक साथ व्यक्त करता है। त .

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तारागञ्ज उपज़िला

तारागंज उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह रंगपुर विभाग के रंगपुर ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 8 उपज़िले हैं, और मुख्यालय रंगपुर सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उत्तर की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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ताराकान्दा उपज़िला

ताराकान्दा उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह मय़मनसिंह विभाग के जमालपुर ज़िले का एक उपजिला है। इसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 7 उपज़िले हैं। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उत्तर की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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तालतली उपज़िला

तालतली उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह बरिशाल विभाग के बरगुना ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल ६ उपज़िले हैं, और मुख्यालय बरगुना सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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ताला उपज़िला

ताला उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह खुलना विभाग के सातक्षीरा ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 5 उपज़िले हैं, और मुख्यालय सातक्षीरा सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण-पश्चिम की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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ताहिरपुर उपज़िला

ताहिरपुर उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह सिलेट विभाग के सुनामगंज ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 11 उपज़िले हैं, और मुख्यालय सुनामगंज सदर उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उत्तर-पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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ताजमहल बांग्लादेश

पूर्ण ढाँचा निर्माणाधीन ताजमहल ताजमहल बांग्लादेश (बांग्ला: তাজ মহল বাংলাদেশ) मूल ताजमहल का एक प्रतिरूप है जो एक मुगल समाधि है और जो आगरा, भारत में स्थित है। यह प्रतिरूप बांग्लादेश की राजधानी ढाका से लगभग २९ किमी की दूरी पर स्थित एक स्थान सोनारगाँव में है। अपने मूल के विपरीत, इस भवन के निर्माण में केवल पाँच वर्ष लगे और कथित रूप इसके धनी मालिक ने इसपर ५.८ करोड़ डॉलर खर्च किए। अहसानुल्लाह मोनी, एक धनी बांग्लादेशी चलचित्र-निर्माता, ने यह बताया कि उन्होंने किस प्रकार यह प्रतिकृति बनाई ताकि उनके देश के निर्धन लोग पड़ोसी देश भारत के प्रसिद्ध स्मारक ताजमहल को देखने का अपना सपना पूरा कर सकें। इस प्रतिकृति के निर्माण का भारत में विरोध किया गया। बांग्लादेश स्थित भारतीय उच्चायोग का कहना है कि वह अहसानुल्लाह मोनी के विरूद्ध मूल भवन के कॉपीराइट के उल्लंघन का मुकदमा दायर करेगा। मूल भवन लगभग ३०० वर्ष पुराना है। मोनी का कहना है कि उन्होंने इटली से संगमरमर, बेल्जियम से हीरे और गुम्बद के लिए लगभग १६० किलो ताँबे का आयात किया है, पर कुछ लोगों का कहना है कि यह सम्पूर्ण प्रतिकृति नहीं है और यह उस सामान से नहीं बना है जिसका की दावा किया गया है। .

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ताजुद्दीन अहमद

ताजुद्दीन अहमद, (बांग्ला: তাজউদ্দীন আহমদ) (जुलाई 23, 1925 – नवंबर 3, 1975) एक बांग्लादेशी राजनयिक और स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्होंने बांग्लादेश के प्रथम प्रधानमंत्री के रूप में युद्धकालीन अंतरिम सरकार का मुक्ति युद्ध में निर्णायक नेतृत्व किया था। उन्हें बांग्लादेश के जन्म एवं स्वतंत्रता के सबसे प्रभावशाली, निर्णायक एवं सूत्रधारी शख़्सियतों में गिना जाता है। 1971 में अंतरिम सरकार के उनके नेतृत्व नें बांग्लादेशी राष्ट्रवादियों के विभिन्न राजनीतिक, सामरिक, जातिगत एवं सांस्कृतिक खेमों को एकजुट कर दिया था। .

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तितालिया संधि

तितालिया संधि सिक्किम के चोग्याल (राजा) और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कम्पनी के बीच हुआ था। इस संधि को कैप्टेन बर्रे लैटर ने फरवरी 1817 में निपटाया था, इस संधि के तहत ब्रिटिश ने सिक्किम कि सुरक्षा कि गारंटी दी और नेपाल द्वारा सदियों पहले सिक्किम का कब्जा किया हुआ भू-भाग सिक्किम को वापस दिलाया। इस भू-भाग के लिए ब्रिटिशों को नेपाल से 1814-16 में अंग्रेज-नेपाल युद्ध लड़ना पड़ा था। बदले में सिक्किम ने अंग्रेजों को व्यापार करने का अधिकार दिया और तिब्बत सिमा तक पहुंचने के लिए उनके रास्ते को प्रयोग करने का अधिकार दिया था। इस संधि पर तितालिया नामक स्थान पर हस्ताक्षर किया गया था, जो अब तेतुलिया उपजिला नाम से जाना जाता है। यह स्थान अब बांग्लादेश के रंगपुर जिले में पड़ता है। सिक्किम का राजपत्र, 1894 द्वारा एचएच रिसले, में यह लिखा हुआ था कि "तितालिया संधि के द्वारा, ब्रिटिश भारत ने सिक्किम का सर्वोपरि का पद प्राप्त कर लिया है और तब से यह साफ-जाहिर रहा है कि उस राज्य में ब्रिटिशों का हि प्रमुख प्रभाव रहा। .

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तितास उपज़िला

तितास उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह चट्टग्राम विभाग के कुमिल्ला ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 16 उपज़िले हैं। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण-पूर्व की दिशा में चट्टग्राम नगर के निकट अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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तिब्बत

तिब्बत का भूक्षेत्र (पीले व नारंगी रंगों में) तिब्बत के खम प्रदेश में बच्चे तिब्बत का पठार तिब्बत (Tibet) एशिया का एक क्षेत्र है जिसकी भूमि मुख्यतः उच्च पठारी है। इसे पारम्परिक रूप से बोड या भोट भी कहा जाता है। इसके प्रायः सम्पूर्ण भाग पर चीनी जनवादी गणराज्य का अधिकार है जबकि तिब्बत सदियों से एक पृथक देश के रूप में रहा है। यहाँ के लोगों का धर्म बौद्ध धर्म की तिब्बती बौद्ध शाखा है तथा इनकी भाषा तिब्बती है। चीन द्वारा तिब्बत पर चढ़ाई के समय (1955) वहाँ के राजनैतिक व धार्मिक नेता दलाई लामा ने भारत में आकर शरण ली और वे अब तक भारत में सुरक्षित हैं। .

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तजमुद्दीन उपज़िला

तजमुद्दीन उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह बरिशाल विभाग के भोला ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 7 उपज़िले हैं, और मुख्यालय भोला सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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तंत्रसाहित्य के विशिष्ट आचार्य

तन्त्र साहित्य अत्यन्त विशाल है। प्राचीन समय के दुर्वासा, अगस्त्य, विश्वामित्र, परशुराम, बृहस्पति, वशिष्ठ, नंदिकेश्वर, दत्तात्रेय आदि ऋषियों ने तन्त्र के अनेकों ग्रन्थों का प्रणयन किया, उनका विवरण देना यहाँ अनावश्यक है। ऐतिहासिक युग में शंंकराचार्य के परम गुरु गौडपादाचार्य का नाम उल्लेखयोग्य है। उनके द्वारा रचित 'सुभगोदय स्तुति' एवं 'श्रीविद्यारत्न सूत्र' प्रसिद्ध हैं। मध्ययुग में तांत्रिक साधना एवं साहित्य रचना में जितने विद्वानों का प्रवेश हुआ था उनमें से कुछ विशिष्ट आचार्यो का संक्षिप्त विवरण यहाँ दिया जा रहा है- लक्ष्मणदेशिक: ये शादातिलक, ताराप्रदीप आदि ग्रथों के रचयिता थे। इनके विषय में यह परिचय मिलता है कि ये उत्पल के शिष्य थे। आदि शंकराचार्य: वेदांगमार्ग के संस्थापक सुप्रसिद्ध भगवान शंकराचार्य वैदिक संप्रदाय के अनुरूप तांत्रिक संप्रदाय के भी उपदेशक थे। ऐतिहासिक दृष्टि से पंडितों ने तांत्रिक शंकर के विषय में नाना प्रकार की आलोचनाएं की हैं। कोई दोनों को अभिन्न मानते हैं और कोई नहीं मानते हैं। उसकी आलोचना यहाँ अनावश्यक है। परंपरा से प्रसिद्ध तांत्रिक शंकराचार्य के रचित ग्रंथ इस प्रकार हैं- किसी-किसी के मत में 'कालीकर्पूरस्तव' की टीका भी शंकराचार्य ने बनाई थी। पृथिवीधराचार्य अथवा 'पृथ्वीधराचार्य: यह शंकर के शिष्कोटि में थे। इन्होंने 'भुवनेश्वरी स्तोत्र' तथा 'भुवनेश्वरी रहस्य' की रचना की थी। भुवनेश्वरी स्तोत्र राजस्थान से प्रकाशित है। वेबर ने अपने कैलाग में इसका उल्लेख किया है। भुवनेश्वरी रहस्य वाराणसी में भी उपलब्ध है और उसका प्रकाशन भी हुआ है। पृथ्वीधराचार्य का भुवनेश्वरी-अर्चन-पद्धति नाम से एक तीसरा ग्रंथ भी प्रसिद्ध है। चरणस्वामी: वेदांत के इतिहास में एक प्रसिद्ध आचार्य हुए हैं। तंत्र में इन्होंने 'श्रीविद्यार्थदीपिका' की रचना की है। 'श्रीविद्यारत्न-सूत्र-दीपिका' नामक इनका ग्रंथ मद्रास लाइब्रेरी में उपलब्ध है। इनका 'प्रपंच-सार-संग्रह' भी अति प्रसिद्ध ग्रंथ है। सरस्वती तीर्थ: परमहंस परिब्राजकाचार्य वेदांतिक थे। यह संन्यासी थे। इन्होंने भी 'प्रपंचसार' की विशिष्ट टीका की रचना की। राधव भट्ट: 'शादातिलक' की 'पदार्थ आदर्श' नाम्नी टीका बनाकर प्रसिद्ध हुए थे। इस टीका का रचनाकाल सं॰ 1550 है। यह ग्रंथ प्रकाशित है। राधव ने 'कालीतत्व' नाम से एक और ग्रंथ लिखा था, परंतु उसका अभी प्रकाशन नहीं हुआ। पुण्यानंद: हादी विद्या के उपासक आचार्य पुण्यानंद ने 'कामकला विलास' नामक प्रसिद्ध ग्रंथ की रचना की थी। उसकी टीका 'चिद्वल्ली' नाम से नटनानंद ने बनाई थी। पुण्यानंद का दूसरा ग्रंथ 'तत्वविमर्शिनी' है। यह अभी तक प्रकाशित नहीं हुआ है। अमृतानंदनाथ: अमृतानदनाथ ने 'योगिनीहृदय' के ऊपर दीपिका नाम से टीकारचना की थी। इनका दूसरा ग्रंथ 'सौभाग्य सुभगोदय' विख्यात है। यह अमृतानंद पूर्ववर्णित पुणयानंद के शिष्य थे। त्रिपुरानंद नाथ: इस नाम से एक तांत्रिक आचार्य हुए थे जो ब्रह्मानंद परमहंस के गुरु थे। त्रिपुरानंद की व्यक्तिगत रचना का पता नहीं चलता। परंतु ब्रह्मानंद तथा उनके शिष्य पूर्णानंद के ग्रंथ प्रसिद्ध हैं। सुंदराचार्य या सच्चिदानंद: इस नाम से एक महापुरुष का आविर्भाव हुआ था। यह जालंधर में रहते थे। इनके शिष्य थे विद्यानंदनाथ। सुंदराचार्य अर्थात् सच्चिदानंदनाथ की 'ललितार्चन चंद्रिका' एवं 'लधुचंद्रिका पद्धति' प्रसिद्ध रचनाएँ हैं। विद्यानंदनाथ का पूर्वनाम श्रीनिवास भट्ट गोस्वामी था। यह कांची (दक्षिण भारत) के निवासी थे। इनके पूर्वपुरुष समरपुंगव दीक्षित अत्यंत विख्यात महापुरुष थे। श्रीनिवास तीर्थयात्रा के निमित जालंधर गए थे और उन्होंने सच्चिदानंदनाथ से दीक्षा ग्रहण कर विद्यानंद का नाम धारण किया। गुरु के आदेश से काशी आकर रहने लगे। उन्होंने बहुत से ग्रंथों की रचना की जिनमें से कुछ के नाम इस प्रकार हैं- 'शिवार्चन चंद्रिका', 'क्रमरत्नावली', 'भैरवार्चापारिजात', 'द्वितीयार्चन कल्पवल्ली', 'काली-सपर्या-क्रम-कल्पवल्ली', 'पंचमेय क्रमकल्पलता', 'सौभाग्य रत्नाकर' (36 तरंग में),'सौभग्य सुभगोदय', 'ज्ञानदीपिका' और 'चतु:शती टीका अर्थरत्नावली'। सौभाग्यरत्नाकर, ज्ञानदीपिका और अर्थरत्नावली सम्पूर्णानन्द विश्वविद्यालय, वाराणसी से प्रकाशित हुई हैं। नित्यानंदनाथ: इनका पूर्वनाम नाराणय भट्ट है। उन्होंने दुर्वासा के 'देवीमहिम्न स्तोत्र' की टीका की थी। यह तन्त्रसंग्रह में प्रकाशित है। तन्त्रसंग्रह सम्पूर्णानन्दविश्वविद्यालय से प्रकाशित है। उनका 'ताराकल्पलता पद्धति' नामक ग्रंथ भी मिलता है। सर्वानंदनाथ: इनका नाम उल्लेखनीय है। यह 'सर्वोल्लासतंत्र' के रचयिता थे। इनका जन्मस्थान मेहर प्रदेश (बांग्लादेश) था। ये सर्वविद्या (दस महाविद्याओं) के एक ही समय में साक्षात् करने वाले थे। इनका जीवनचरित् इनके पुत्र के लिखे 'सर्वानंद तरंगिणी' में मिलता है। जीवन के अंतिम काल में ये काशी आकर रहने लगे थे। प्रसिद्ध है कि यह बंगाली टोला के गणेश मोहल्ला के राजगुरु मठ में रहे। यह असाधारण सिद्धिसंपन्न महात्मा थे। निजानंद प्रकाशानंद मल्लिकार्जुन योगीभद्र: इस नाम से एक महान सिद्ध पुरुष का पता चलता है। यह 'श्रीक्रमोत्तम' नामक एक चार उल्लास से पूर्ण प्रसिद्ध ग्रंथ के रचयिता थे। श्रीक्रमोत्तम श्रीविद्या की प्रासादपरा पद्धति है। ब्रह्मानंद: इनका नाम पहले आ चुका है। प्रसिद्ध है कि यह पूर्णनंद परमहंस के पालक पिता थे। शिक्ष एवं दीक्षागुरु भी थे। 'शाक्तानंद तरंगिणी' और'तारा रहस्य' इनकी कृतियाँ हैं। पूर्णानंद: 'श्रीतत्त्वचिंतामणि' प्रभृति कई ग्रंथों के रचयिता थे। श्रीतत्वचिन्तामणि का रचनाकाल 1577 ई॰ है। 'श्यामा अथवा कालिका रहस्य', 'शाक्त क्रम', 'तत्वानंद तरंगिणी', 'षटकर्मील्लास' प्रभृति इनकी रचनाएँ हैं। प्रसिद्ध 'षट्चक्र निरूपण', 'श्रीतत्वचितामणि' का षष्ठ अध्याय है। देवनाथ ठाकुर तर्कपंचानन: ये 16वीं शताब्दी के प्रसिद्ध ग्रंथकार थे। इन्होंने 'कौमुदी' नाम से सात ग्रंथों की रचना की थी। ये पहले नैयायिक थे और इन्होंने 'तत्वचिंतामणि' की टीका आलोक पर परिशिष्ट लिखा था। यह कूचविहार के राजा मल्लदेव नारायण के सभापंडित थे। इनके रचित 'सप्तकौमुदी' में 'मंत्रकौमुदी' एवं 'तंत्र कौमुदी' तंत्रशास्त्र के ग्रंथ हैं। इन्होंने 'भुवनेश्वरी कल्पलता' नामक ग्रंथ की भी रचना की थी। गोरक्ष: प्रसिद्ध विद्वान् एवं सिद्ध महापुरुष थे। 'महार्थमंजरी' नामक ग्रंथरचना से इनकी ख्याति बढ़ गई थी। इनके ग्रंथों के नाम इस प्रकार हैं- "महार्थमंजरी' और उसकी टीका 'परिमल', 'संविदुल्लास', 'परास्तोत्र', 'पादुकोदय', 'महार्थोदय' इत्यादि। 'संवित्स्तोत्र' के नाम से गोरक्ष के गुरु का भी एक ग्रंथ था। गोरक्ष के गुरु ने 'ऋजु विमर्शिनी' और 'क्रमवासना' नामक ग्रंथों की भी रचना की थी। सुभगानंद नाथ और प्रकाशानंद नाथ: सुभगांनंद केरलीय थे। इनका पूर्वनाम श्रीकंठेश था। यह कश्मीर में जाकर वहाँ के राजगुरु बन गए थे। तीर्थ करने के लिये इन्होंने सेतुबंध की यात्रा भी की जहाँ कुछ समय नृसिंह राज्य के निकट तंत्र का अध्ययन किया। उसके बाद कादी मत का 'षोडशनित्या' अर्थात् तंत्रराज की मनोरमा टीका की रचना इन्होंने गुरु के आदेश से की। बाईस पटल तक रचना हो चुकी थी, बाकी चौदह पटल की टीका उनके शिष्य प्रकाशानंद नाथ ने पूरी की। यह सुभगानंद काशी में गंगातट पर वेद तथा तंत्र का अध्यापन करते थे। प्रकाशानंद का पहला ग्रंथ 'विद्योपास्तिमहानिधि' था। इसका रचनाकाल 1705 ई॰ है। इनका द्वितीय ग्रंथ गुरु कृत मनोरमा टीका की पूर्ति है। उसका काल 1730 ई॰ है। प्रकाशानंद का पूर्वनाम शिवराम था। उनका गोत्र 'कौशिक' था। पिता का नाम भट्टगोपाल था। ये त्र्यंबकेश्वर महादेव के मंदिर में प्राय: जाया करते थे। इन्होंने सुभगानंद से दीक्षा लेकर प्रकाशानंद नाम ग्रहण किया था। कृष्णानंद आगमबागीश: यह बंग देश के सुप्रसिद्ध तंत्र के विद्वान् थे जिनका प्रसिद्ध ग्रंथ 'तंत्रसार' है। किसी किसी के मतानुसार ये पूर्णनंद के शिष्य थे परंतु यह सर्वथा उचित प्रतीत नहीं होता। ये पश्वाश्रयी तांत्रिक थे। कृष्णानंद का तंत्रसार आचार एवं उपासना की दृष्टि से तंत्र का श्रेष्ठ ग्रंथ है। महीधर: काशी में वेदभाष्यकार महीधर तंत्रशास्त्र के प्रख्यात पंडित हुए हैं। उनके ग्रंथ 'मन्त्रमहोदधि' और उसकी टीका अतिप्रसिद्ध हैं (रचनाकाल 1588 ई॰)। नीलकंठ: महाभारत के टीकाकार रूप से महाराष्ट्र के सिद्ध ब्रह्मण ग्रंथकार। ये तांत्रिक भी थे। इनकी बनाई 'शिवतत्वामृत' टीका प्रसिद्ध हैं। इसका रचनाकाल 1680 ई॰ है। आगमाचार्य गौड़ीय शंकर: आगमाचार्य गौड़ीय शंकर का नाम भी इस प्रसंग में उल्लेखनीय है। इनके पिता का नाम कमलाकर और पितामह का लंबोदर था। इनके प्रसिद्ध ग्रंथ तारा-रहस्य-वृत्ति और शिवार्च(र्ध)न माहात्म्य (सात अध्याय में) हैं। इसके अतिरिक्त इनके द्वारा रचित और भी दो-तीन ग्रंथों का पता चलता है जिनकी प्रसिद्धि कम है। भास्कर राय: 18वीं शती में भास्कर राय एक सिद्ध पुरुष काशी में हो गए हैं जो सर्वतंत्र स्वतंत्र थे। इनकी अलौकिक शक्तियाँ थी। इनकी रचनाएँ इस प्रकार हैं- सौभाग्य भास्कर' (यह ललिता सहस्र-नाम की टीका है, रचनाकाल 1729 ई0) 'सौभाग्य चंद्रोदय' (यह सौभाग्यरत्नाकर की टीका है।) 'बरिबास्य रहस्य', 'बरिबास्यप्रकाश'; 'शांभवानंद कल्पलता'(भास्कर शाम्भवानन्दकल्पलता के अणुयायी थे - ऐसा भी मत है), 'सेतुबंध टीका' (यह नित्याषोडशिकार्णव पर टीका है, रचनाकाल 1733 ई॰); 'गुप्तवती टीका' (यह दुर्गा सप्तशती पर व्याख्यान है, रचनाकाल 1740 ई॰); 'रत्नालोक' (यह परशुराम 'कल्पसूत्र' पर टीका है); 'भावनोपनिषद्' पर भाष्य प्रसिद्ध है कि 'तंत्रराज' पर भी टीका लिखी थी। इसी प्रकार 'त्रिपुर उपनिषद्' पर भी उनकी टीका थी। भास्कर राय ने विभिन्न शास्त्रों पर अनेक ग्रंथ लिखे थे। प्रेमनिधि पंथ: इनका निवास कूर्माचल (कूमायूँ) था। यह घर छोड़कर काशी में बस गए थे। ये कार्तवीर्य के उपासक थे। थोड़ी अवस्था में उनकी स्त्री का देहांत हुआ। काशी आकर उन्होंने बराबर विद्यासाधना की। उनकी 'शिवतांडव तंत्र' की टीका काशी में समाप्त हुई। इस ग्रंथ से उन्हें बहुत अर्थलाभ हुआ। उन्होने तीन विवाह किए थे। तीसरी पत्नी प्राणमंजरी थीं। प्रसिद्व है कि प्राणमंजरी ने 'सुदर्शना' नाम से अपने पुत्र सुदर्शन के देहांत के स्मरणरूप से तंत्रग्रंथ लिखा था। यह तंत्रराज की टीका है। प्रेमनिधि ने 'शिवतांडव' टीका ' मल्लादर्श', 'पृथ्वीचंद्रोदय' और 'शारदातिलक' की टीकाएँ लिखी थीं। उनके नाम से 'भक्तितरंगिणी', 'दीक्षाप्रकाश' (सटीक) प्रसिद्ध है। कार्तवीर्य उपासना के विषय में उन्होंने 'दीपप्रकाश नामक' ग्रथ लिखा था। उनके 'पृथ्वीचंद्रोदय' का रचनाकाल 1736 ई॰ है। कार्तवीर्य पर 'प्रयोग रत्नाकर' नामक प्रसिद्ध ग्रंथ है। 'श्रीविद्या-नित्य-कर्मपद्धति-कमला' तंत्रराज से संबंध रखता है। वस्तुत: यह ग्रंथ भी प्राणमंजरी रचित है। उमानंद नाथ: यह भास्कर राय के शिष्य थे और चोलदेश के महाराष्ट्र राजा के सभापंडित थे। इनके दो ग्रंथ प्रसिद्ध हैं- 1.

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त्रिपुरा

त्रिपुरा उत्तर-पूर्वी सीमा पर स्थित भारत का एक राज्य है। यह भारत का तीसरा सबसे छोटा राज्य है जिसका क्षेत्रफल १०४९१ वर्ग किमी है। इसके उत्तर, पश्चिम और दक्षिण में बांग्लादेश स्थित है जबकि पूर्व में असम और मिजोरम स्थित हैं। सन २०११ में इस राज्य की जनसंख्या लगभग ३६ लाख ७१ हजार थी। अगरतला त्रिपुरा की राजधानी है। बंगाली और त्रिपुरी भाषा (कोक बोरोक) यहाँ की मुख्य भाषायें हैं। आधुनिक त्रिपुरा क्षेत्र पर कई शताब्दियों तक त्रिपुरी राजवंश ने राज किया। त्रिपुरा की स्थापना 14वीं शताब्दी में माणिक्य नामक इंडो-मंगोलियन आदिवासी मुखिया ने की थी, जिसने हिंदू धर्म अपनाया था। 1808 में इसे ब्रिटिश साम्राज्य ने जीता, यह स्व-शासित शाही राज्य बना। 1956 में यह भारतीय गणराज्य में शामिल हुआ और 1972 में इसे राज्य का दर्जा मिला। त्रिपुरा का आधे से अधिक भाग जंगलों से घिरा है, जो प्रकृति-प्रेमी पर्यटकों को आकर्षित करता है, किंतु दुर्भाग्यवश यहां कई आतंकवादी संगठन पनप चुके हैं जो अलग राज्य की मांग के लिए समय-समय पर राज्य प्रशासन से लड़ते रहते हैं। हैंडलूम बुनाई यहां का मुख्य उद्योग है। .

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त्रिपुरी लोग

त्रिपुरी लोग त्विप्र राज्य के मूल निवासी हैं जिसमें वर्तमान समय के पूर्वोत्तर भारत तथा बांग्लादेश के कुछ भाग आते थे। त्रिपुरी लोगों के देववर्मा नामक राजपरिवार ने २००० वर्षों तक त्रुरा राज्य पर शासन किया। १९४९ में यह राज्य भारत में सम्मिलित हो गया। श्रेणी:भारत के लोग.

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त्रिशाल उपज़िला

त्रिशाल उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह मय़मनसिंह विभाग के जमालपुर ज़िले का एक उपजिला है। इसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 7 उपज़िले हैं। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उत्तर की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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त्रैलोक्यनाथ चक्रवर्ती

त्रैलोक्यनाथ चक्रवर्ती (1888 - 1 अगस्त 1970) भारत के क्रान्तिकारी एवं स्वतंत्रता सेनानी थे। भारत को स्वतंत्र कराने के लिए उन्होने अपने जीवन के श्रेष्ठतम तीस वर्ष जेल की काल कोठरियों में बिताये। उनका संघर्षशील व्यक्तित्व, अन्याय, अनीति से जीवनपर्यन्त जूझने की प्रेरक कहानी है। त्रैलोक्य चक्रवर्ती को 'ढाका षडयंत्र केस' तथा 'बारीसाल षडयंत्र केस' का अभियुक्त बनाया गया था। आप 'महाराज' के नाम से प्रसिद्ध थे। .

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तेतुलिय़ा उपज़िला

तेतुलिय़ा उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह रंगपुर विभाग के पंचगड़ ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल १३ उपज़िले हैं, और मुख्यालय पंचगड़ सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उत्तर की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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तेरखादा उपज़िला

तेरखादा उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह खुलना विभाग के खुलना ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, कुल 15 उपज़िले हैं। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण-पश्चिम की दिशा में अवस्थित है। .

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तीन बीघा गलियारा

तीन बीघा गलियारा भारत और बांग्लादेश की सीमा पर स्थित एक भारत का भूभाग है जो सितम्बर २०११ में बंगलादेश को लीज पर दे दिया गया ताकि बांग्लादेश के दहग्राम-अंगरपोटा नामक अंतर्वेशों (छिटमहल/enclaves) को सीधे भूमार्ग से बंगलादेश से जोड़ा जा सके। .

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तीस्ता नदी

तिस्ता नदी भारत के सिक्किम तथा पश्चिम बंगाल राज्य तथा बांग्लादेश से होकर बहती है। यह सिक्किम और पश्चिम बंगाल के जलपाइगुड़ी विभाग की मुख्य नदी है। पश्चिम बंगाल में यह दार्जिलिङ जिले में बहती है। तिस्ता नदी को सिक्किम और उत्तरी बंगाल की जीवनरेखा कहा जाता है। सिक्किम और पश्चिम बंगाल से बहती हुई यह बांग्लादेश में प्रवेश करती है और ब्रह्मपुत्र नदी में मिल जाती है। इस नदी की पूरी लम्बाई ३१५ किमी है। भारत और बंग्ला देश के बीच संयुक्त रूप से प्रवाहित होने वाली यह नदी भारत के सिक्किम और पश्चिम बंगा होते हुए बंगला देश में प्रवेश करती है। बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली यह नदी भारत के साथ ही बंगला देश की समृद्धि की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण नदी है। हिन्दू पुराणों के अनुसार यह नदी देवी पार्वती के स्तन से निकली है। 'तिस्ता' का अर्थ 'त्रि-स्रोता' या 'तीन-प्रवाह' है। सिक्किम प्रान्त की जितनी लम्बाई है लगभग पूरी लम्बाई लेकर बहती यह नदी वरदान्त हिमालय का समसितोष्ण र नदी की घाटी से उष्णकटिबंध तापमान को काटकर ले जाती है। चमकिली हरे (emerald) रंग की यह नदी बांग्लादेश में ब्रह्मपुत्र नदी में मिलनेसे पूर्व सिक्किम और पश्चिम बंगाल की सीमा॑ओं के रूप में बहती है। .

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थानचि उपज़िला

थानचि उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह चट्टग्राम विभाग के बन्दरबान ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल ७ उपज़िले हैं, और मुख्यालय बन्दरबान सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण-पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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थाली (बर्तन)

स्टील की थाली एक खाना लगी भरी हुई थाली थाली (नेपाली: थाली, तमिल: தட்டு) भोजन करने के लिए एक बर्तन है जिसमें ज्यादातर भारत में ही प्रयोग की जाती है। साथ ही थाली का प्रयोग विशिष्ट खाने बनाने के लिए भी किया जाता है। यह भारत, नेपाल, बांग्लादेश, फिजी, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, श्रीलंका, मॉरीशस और सिंगापुर में भोजन करने के लिए लोकप्रिय है। .

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थेरवाद

थाई भिक्षु बर्मा के रंगून शहर में श्वेडागोन पगोडा थेरवाद या स्थविरवाद वर्तमान काल में बौद्ध धर्म की दो प्रमुख शाखाओं में से एक है। दूसरी शाखा का नाम महायान है। थेरवाद बौद्ध धर्म भारत से आरम्भ होकर दक्षिण और दक्षिण-पूर्व की ओर बहुत से अन्य एशियाई देशों में फैल गया, जैसे कि श्रीलंका, बर्मा, कम्बोडिया, वियतनाम, थाईलैंड और लाओस। यह एक रूढ़िवादी परम्परा है, अर्थात् प्राचीन बौद्ध धर्म जैसा था, उसी मार्ग पर चलने पर बल देता है। .

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दशमिना उपज़िला

दशमिना उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह बरिशाल विभाग के पटुय़ाखाली ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 8 उपज़िले हैं, और मुख्यालय पटुय़ाखाली सदर उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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दही (योगहर्ट या योगर्ट)

तुर्की दही एक तुर्की ठंडा भूख बढ़ाने वाला दही का किस्म दही (Yoghurt) एक दुग्ध-उत्पाद है जिसे दूध के जीवाण्विक किण्वन के द्वारा बनाया जाता है। लैक्टोज के किण्वन से लैक्टिक अम्ल बनता है, जो दूध के प्रोटीन पर कार्य करके इसे दही की बनावट और दही की लाक्षणिक खटास देता है। सोय दही, दही का एक गैर-डेयरी विकल्प है जिसे सोय दूध से बनाया जाता है। लोग कम से कम 4,500 साल से दही-बना रहे हैं-और खा रहे हैं। आज यह दुनिया भर में भोजन का एक आम घटक है। यह एक पोषक खाद्य है जो स्वास्थ्य के लिए अद्वितीय रूप से लाभकारी है। यह पोषण की दृष्टि से प्रोटीन, कैल्सियम, राइबोफ्लेविन, विटामिन B6 और विटामिन B12 में समृद्ध है। .

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दामुड़हुदा उपज़िला

दामुड़हुदा उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह खुलना विभाग के चुय़ाडांगा ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल ९ उपज़िले हैं, और मुख्यालय चुय़ाडांगा सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण-पश्चिम की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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दाल-भात

दाल-भात (दालभात, ডাল ভাত, દાળ ભાત, डाळ भात) भारतीय उपमहाद्वीप की लोकप्रिय भोजन है, इसे बांग्लादेश, नेपाल और भारत में दैनिक भोजन के रूप में बनाया जाता है। श्रेणी:उत्तर नेपाल का खाना.

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दागनभूँइय़ा उपज़िला

दागनभूँइय़ा उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह चट्टग्राम विभाग के फेनी ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 6 उपज़िले हैं, और मुख्यालय फेनी सदर उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण-पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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दाकोप उपज़िला

दाकोप उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह खुलना विभाग के खुलना ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, कुल 15 उपज़िले हैं। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण-पश्चिम की दिशा में अवस्थित है। .

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दाउदकान्दि उपज़िला

दाउदकान्दि उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह चट्टग्राम विभाग के कुमिल्ला ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 16 उपज़िले हैं। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण-पूर्व की दिशा में चट्टग्राम नगर के निकट अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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दिन-रात क्रिकेट

दिन-रात क्रिकेट मैच का एक दृश्य ट्रेंट ब्रीज का दिन-रात क्रिकेट (अंग्रेजी: Day/Night Cricket और Floodlight Cricket) जो कि आमतौर पर दिन और रात में खेले जाने वाले क्रिकेट मैचों को कहा जाता है। दिन - रात का पहला मैच प्रथम श्रेणी क्रिकेट के तहत १९९४ में खेला गया था। अभी वर्तमान में लगभग ७० से ८० प्रतिशत तक दिन-रात में ही मैच खेले जाते हैं। २०११ आईसीसी क्रिकेट विश्व कप जो कि भारत,बांग्लादेश तथा श्रीलंका में आयोजित किया गया था उनके लगभग आधे मैच दिन-रात में खेले गए थे। २०१५ में ऑस्ट्रेलिया तथा न्यूज़ीलैंड में आयोजित किया गया २०१५ आईसीसी क्रिकेट विश्व कप के मैच भी दिन-रात खेले गए थे। .

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दिनाजपुर सदर उपज़िला

दिनाजपुर सदर उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह उपज़िला दिनाजपुर जिला का ज़िला सदर यानी प्रशासनिक मुख्यालय है। यह रंगपुर विभाग के दिनाजपुर ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल १३ उपज़िले हैं, और मुख्यालय दिनाजपुर सदर उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उत्तर की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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दिनेश चन्द्र गुप्त

महान क्रान्तिकारी दिनेश चन्द्र गुप्त दिनेश चन्द्र गुप्त (6 दिसम्बर 1911 – 7 जुलाई 1931) भारत के क्रान्तिकारी थे जिन्होने भारत पर ब्रितानी उपनिवेश के विरुद्ध संघर्ष किया। दिनेश गुप्त का जन्म बंगाल के मुंशीगंज जिले के जोशोलांग गाँव में हुआ था जो अब बांग्लादेश में है। ८ दिसम्बर १९३० को यूरोपियन वेश में तीन युवा क्रांतिकारी दिनेश चन्द्र गुप्त, विनय बसु और बादल गुप्ता कोलकाता की राइटर्स बिल्डिंग में प्रवेश कर गए और जेलों में भारतीय कैदियों के साथ अमानवीय व्यवहार करने वाले इन्स्पेक्टर जनरल ऑफ़ प्रिजन एन.एस.

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दिनेश दासगुप्त

दिनेश दासगुप्त (५ नवम्बर १९११ - २३ अगस्त २००६) भारत के स्वतंत्रता आन्दोलन के महान क्रांतिकारी थे। अंग्रेजों ने उन्हें लकाले पानी की सजा दी थी। अगर सच्चे अर्थों में किसी को क्रांतिकारी समाजवादी कहा जा सकता है तो दिनेश दासगुप्त के नाम का स्मरण आयेगा ही.

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दिघलिय़ा उपज़िला

दिघलिय़ा उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह खुलना विभाग के खुलना ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, कुल 15 उपज़िले हैं। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण-पश्चिम की दिशा में अवस्थित है। .

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दवा कंपनियों की सूची

स्वास्थ्य सेवा राजस्व द्वारा श्रेणित 50 सबसे बड़ी दवा और जैव प्रौद्योगिकी कंपनियों की सूची निम्नलिखित है.

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दक्षिण एशिया वन्यजीव प्रवर्तन नेटवर्क

दक्षिण एशिया वन्यजीव प्रवर्तन नेटवर्क (South Asia Wildlife Enforcement Network (SAWEN/सावन)) दक्षिण एशियाई देशों की अन्त्र-सरकार संस्था है जो वन्यजीवों से सम्बन्धित कानूनों को कार्यान्वित करने का कार्य करती है। इसमें भारत, श्रीलंका, अफगानिस्तान, भूटान, नेपाल, बांग्लादेश, मालदीव तथा पाकिस्तान सम्मिलित हैं। इसका आरम्भ २०११ में भूटान से किया गया था। यह संस्था क्षेत्रीय सहयोग द्वारा वन्यजीवों से सम्बन्धित अपराधों को रोकने का कार्य करती है। इसका सचिवालय काठमाण्डू में है। .

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दक्षिण एशिया उपग्रह

दक्षिण एशिया उपग्रह (इंग्लिश: South Asia Satellite) जिसका नाम पहले सार्क उपग्रह (SAARC Satellite) था, दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) क्षेत्र के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा बनाया गया भू-समकालिक संचार और मौसम विज्ञान उपग्रह है। २०१४ में नेपाल में आयोजित १८वें सार्क शिखर सम्मेलन के दौरान, भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक उपग्रह सार्क के सदस्य देशों की आवश्यकताओं की सेवा का विचार रखा था। जो उनकी 'पहले पड़ोस' नीति का हिस्सा था। हालांकि उपग्रह सार्क क्षेत्र में सेवा करने का इरादा है, पाकिस्तान कार्यक्रम से बाहर निकल गया, जबकि अफगानिस्तान और बांग्लादेश ने अपनी वचनबद्धता देने का वायदा नहीं किया था।, Economic Times .

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दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र

दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र के बारे में दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन के बारहवें अधिवेशन में पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हुआ था। जिसमें भारत, पाकिस्तान, नेपाल, श्रीलंका, बांग्लादेश, भूटान एवं मालदीव के बीच 2016 तक मुक्त व्यापार क्षेत्र कायम करने का प्रस्ताव रखा गया। इसमें सार्क देशों के सारे विदेश मंत्री उपस्थित थे। इसमें साप्टा पर इन देशों के प्रतिनिधियों ने हस्ताक्षर किये थे। .

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दक्षिण एशियाई विश्वविद्यालय

दक्षिण एशियाई विश्वविद्यालय (एसएयू), दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) के आठ सदस्य राज्यों द्वारा प्रायोजित एक अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय है। आठ देश हैं: अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका। दक्षिण एशियाई विश्वविद्यालय ने अकबर भवन, भारत में अस्थायी परिसर में, 2010 में छात्रों को स्वीकार करना शुरू किया। इसका स्थायी परिसर भारत में दक्षिण दिल्ली, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (आईजीएनओयू) के बगल में मैदान गढ़ी में होगा। विश्वविद्यालय का पहला अकादमिक सत्र अगस्त 2010 में दो स्नातकोत्तर शैक्षणिक कार्यक्रमों के साथ अर्थशास्त्र और कंप्यूटर विज्ञान में शुरू हुआ था। 2014 के रूप में एसएयू ने गणित, जैव प्रौद्योगिकी, कंप्यूटर विज्ञान, विकास अर्थशास्त्र, अंतरराष्ट्रीय संबंधों, कानून और समाजशास्त्र में मास्टर और एमफिल / पीएचडी कार्यक्रमों की पेशकश की। 8 देशों के विदेश मंत्रियों द्वारा हस्ताक्षरित एक अंतर-सरकारी समझौते के अनुसार सार्क के सभी सदस्य राष्ट्रों द्वारा विश्वविद्यालय की डिग्री मान्यता प्राप्त है। दक्षिण एशियाई विश्वविद्यालय, प्रमुख रूप से सभी आठ सार्क देशों से छात्रों को आकर्षित करता है, हालांकि अन्य महाद्वीपों के छात्र भी भाग लेते हैं। छात्रों के प्रवेश के लिए कोटा प्रणाली है। हर साल एसएयू सभी 8 देशों में कई केन्द्रों में प्रवेश परीक्षा आयोजित करता है। .

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दक्षिण एशियाई खेल

दक्षिण एशिया ओलम्पिक परिषद चिह्न दक्षिण एशियाई खेल (जिन्हें सैफ़ खेल या सैग और पूर्व में दक्षिण एशियाई संघ खेलों के नाम से भी जाना जाता था) द्वि-वार्षिक बहु-क्रीड़ा प्रतियोगिता है, जिसमें दक्षिण एशियाई खिलाड़ी प्रतिभागी होते हैं। इन खेलों का शासी निकाय दक्षिण एशियाई खेल परिषद है, जिसकी स्थापना १९८३ में हुई थी। वर्तमान में सैग के आठ सदस्य हैं अफ़्गानिस्तान, नेपाल, पाकिस्तान, बांग्लादेश, भारत, भूटान, मालदीव और श्रीलंका। प्रथम सैफ़ खेल १९८४ में काठमांडु, नेपाल में आयोजित हुए थे और तबसे ये खेल प्रति दो वर्षों के अन्तराल पर आयोजित होते हैं, केवल कुछ अवसरों को छोड़कर। २००४ में दक्षिण एशियाई खेल परिषद की ३२वीं बैठक में यह निर्णय लिया गया की इन खेलों का नाम दक्षिण एशियाई संघ खेलों से बदलकर दक्षिण एशियाई खेल कर दिया जाए क्योंकि अधिकारियों का मानना था की संघ शब्द प्रतियोगिता पर कम बल दे रहा है और भीड़ आकर्षित करने में बाधक बन रहा है। इस खेलों को बहुधा दक्षिण एशिया ओलम्पिक खेलों के रूपान्तर के रूप में बढ़ाचढ़ा कर प्रस्तुत किया जाता है। .

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दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन

दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) दक्षिण एशिया के आठ देशों का आर्थिक और राजनीतिक संगठन है। संगठन के सदस्य देशों की जनसंख्या (लगभग 1.5 अरब) को देखा जाए तो यह किसी भी क्षेत्रीय संगठन की तुलना में ज्यादा प्रभावशाली है। इसकी स्थापना ८ दिसम्बर १९८५ को भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, मालदीव और भूटान द्वारा मिलकर की गई थी। अप्रैल २००७ में संघ के 14 वें शिखर सम्मेलन में अफ़ग़ानिस्तान इसका आठवा सदस्य बन गया। .

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दक्षिण पूर्वी एशियाई राष्ट्रों का संगठन के सदस्य राष्ट्र

दक्षिण पूर्वी एशियाई राष्ट्रों का संगठन (Association of Southeast Asian Nations) दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र का संगठन है जिसका लक्ष्य सदस्य राष्ट्रों के मध्य आर्थिक विकास, सामाजिक प्रगति, सांस्कृतिक विकास तथा क्षेत्रीय शांति को बढ़ावा देना है। आसियान के 10 सदस्य राष्ट्र, एक उम्मीद्वार राष्ट्र तथा एक पर्यवेक्षक राष्ट्र है। आसियान की स्थापना 8 अगस्त 1967 में पाँच सदस्यों के साथ की गयी थी: इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलिपीन्स, सिंगापुर तथा थाईलैंड। .

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दक्षिण सुनामगंज उपज़िला

दक्षिण सुनामगंज उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह सिलेट विभाग के सुनामगंज ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 11 उपज़िले हैं, और मुख्यालय सुनामगंज सदर उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उत्तर-पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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दक्षिण सुरमा उपज़िला

दक्षिण सुरमा उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह सिलेट विभाग के सिलेट ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 13 उपज़िले हैं, और मुख्यालय सिलेट सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उत्तर-पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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दक्षेस महासचिव

दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन महासचिव, सार्क सचिवालय का प्रमुख है, जिसका काठमांडू, नेपाल में मुख्यालय है। सार्क आठ दक्षिण एशियाई सदस्य देशों, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका के बीच एक आर्थिक और भू राजनीतिक संघ है। सदस्य-राज्यों के मंत्रियों की परिषद द्वारा चुनाव से तीन साल की अवधि के लिए महासचिव नियुक्त किया जाता है। 1987 को बांग्लादेशी राजनयिक अबुल अहसान ने अपने पहले महासचिव के रूप में काठमांडू में सार्क सचिवालय की स्थापना की थी और नेपाल के राजा बिरेंद्र बीर बिक्रम शाह ने उद्घाटन किया था। इसकी रचना के बाद से, इसके सदस्य देशों ने कुल 13 तेरह सचिवों को रूप में योगदान दिया है। पाकिस्तान के राजनयिक अमजद हुसैन बी सियाल 1 मार्च, 2017 को प्रभार संभालने वाले मौजूदा महासचिव हैं। .

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दक्षेस गान

दक्षेस गान जो आठ दक्षिण एशियाई देशों के लिए एक प्रस्तावित क्षेत्रीय गान है। अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका इस दक्षेस के सदस्य हैं। इस गान रचनाकार भारतीय राजनयिक और कवि अभय कुमार हैं। वें नेपाल स्थित भारतीय दूतावास में प्रथम सचिव (प्रेस, सूचना एवं संस्कृति) के रूप में तैनात हैं। अभय कुमार ने दक्षेस गान को मूलत: हिंदी में लिखा है लेकिन अब इसका अनुवाद सात अन्य दक्षेस राष्ट्रों की मातृभाषा में किया हैं। इस गान को लिखकर अभय कुमार ने दक्षेस देशों में परस्पर सहयोग की भावना को और पुष्ट करने की कोशिश की हैं। गान में दक्षेस के सभी आठ देशों- नेपाल, भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान, मालदीव, श्रीलंका और भूटान की भाषाओं का इस्तेमाल किया गया है। दक्षेस गान को सर्वप्रथम नेपाल से प्रकाशित हिन्दी मासिक ‘हिमालिनी’ नामक वेबसाइट पर प्रकाशित किया गया। .

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दुमकी उपज़िला

दुमकी उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह बरिशाल विभाग के पटुय़ाखाली ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 8 उपज़िले हैं, और मुख्यालय पटुय़ाखाली सदर उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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दुर्गा पूजा

दूर्गा पूजा (দুর্গাপূজা अथवा দুৰ্গা পূজা अथवा ଦୁର୍ଗା ପୂଜା, सुनें:, "माँ दूर्गा की पूजा"), जिसे दुर्गोत्सव (দুর্গোৎসব अथवा ଦୁର୍ଗୋତ୍ସବ, सुनें:, "दुर्गा का उत्सव" के नाम से भी जाना जाता है) अथवा शरदोत्सव दक्षिण एशिया में मनाया जाने वाला एक वार्षिक हिन्दू पर्व है जिसमें हिन्दू देवी दुर्गा की पूजा की जाती है। इसमें छः दिनों को महालय, षष्ठी, महा सप्तमी, महा अष्टमी, महा नवमी और विजयदशमी के रूप में मनाया जाता है। दुर्गा पूजा को मनाये जाने की तिथियाँ पारम्परिक हिन्दू पंचांग के अनुसार आता है तथा इस पर्व से सम्बंधित पखवाड़े को देवी पक्ष, देवी पखवाड़ा के नाम से जाना जाता है। दुर्गा पूजा का पर्व हिन्दू देवी दुर्गा की बुराई के प्रतीक राक्षस महिषासुर पर विजय के रूप में मनाया जाता है। अतः दुर्गा पूजा का पर्व बुराई पर भलाई की विजय के रूप में भी माना जाता है। दुर्गा पूजा भारतीय राज्यों असम, बिहार, झारखण्ड, मणिपुर, ओडिशा, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल में व्यापक रूप से मनाया जाता है जहाँ इस समय पांच-दिन की वार्षिक छुट्टी रहती है। बंगाली हिन्दू और आसामी हिन्दुओं का बाहुल्य वाले क्षेत्रों पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा में यह वर्ष का सबसे बड़ा उत्सव माना जाता है। यह न केवल सबसे बड़ा हिन्दू उत्सव है बल्कि यह बंगाली हिन्दू समाज में सामाजिक-सांस्कृतिक रूप से सबसे महत्त्वपूर्ण उत्सव भी है। पश्चिमी भारत के अतिरिक्त दुर्गा पूजा का उत्सव दिल्ली, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब, कश्मीर, आन्ध्र प्रदेश, कर्नाटक और केरल में भी मनाया जाता है। दुर्गा पूजा का उत्सव 91% हिन्दू आबादी वाले नेपाल और 8% हिन्दू आबादी वाले बांग्लादेश में भी बड़े त्यौंहार के रूप में मनाया जाता है। वर्तमान में विभिन्न प्रवासी आसामी और बंगाली सांस्कृतिक संगठन, संयुक्त राज्य अमेरीका, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, फ्रांस, नीदरलैण्ड, सिंगापुर और कुवैत सहित विभिन्न देशों में आयोजित करवाते हैं। वर्ष 2006 में ब्रिटिश संग्रहालय में विश्वाल दुर्गापूजा का उत्सव आयोजित किया गया। दुर्गा पूजा की ख्याति ब्रिटिश राज में बंगाल और भूतपूर्व असम में धीरे-धीरे बढ़ी। हिन्दू सुधारकों ने दुर्गा को भारत में पहचान दिलाई और इसे भारतीय स्वतंत्रता आंदोलनों का प्रतीक भी बनाया। .

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दुर्गापुर उपज़िला, नेत्रकोना

दुरगापुर उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह मय़मनसिंह विभाग के नेत्रकोना ज़िले का एक उपजिला है। इसमें, ज़िला सदर समेत, कुल १० उपज़िले हैं। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उत्तर की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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दुर्गापुर उपज़िला, राजशाही

दुर्गापुर उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह राजशाही विभाग के राजशाही ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 9 उपज़िले हैं। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से पूर्व की दिशा में अवस्थित है। .

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दौलतपुर थाना

दौलतपुर उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह खुलना विभाग के खुलना ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, कुल 15 उपज़िले हैं। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण-पश्चिम की दिशा में अवस्थित है। .

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दौलतपुर उपज़िला

दौलतपुर उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह खुलना विभाग के कुष्टिय़ा ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 6 उपज़िले हैं, और मुख्यालय कुष्टिय़ा सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण-पश्चिम की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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दौलतपुर उपज़िला (मानिकगञ्ज)

दौलतपुर उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह ढाका विभाग के मानिकगंज ज़िले का एक उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका के निकट अवस्थित है। .

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दौलतखान उपज़िला

दौलतखान उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह बरिशाल विभाग के भोला ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 7 उपज़िले हैं, और मुख्यालय भोला सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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देबहाटा उपज़िला

देबहाटा उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह खुलना विभाग के सातक्षीरा ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 5 उपज़िले हैं, और मुख्यालय सातक्षीरा सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण-पश्चिम की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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देबीद्बार उपज़िला

देबीद्बार उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह चट्टग्राम विभाग के कुमिल्ला ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 16 उपज़िले हैं। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण-पूर्व की दिशा में चट्टग्राम नगर के निकट अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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देबीगञ्ज उपज़िला

देबीगंज उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह रंगपुर विभाग के पंचगड़ ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल १३ उपज़िले हैं, और मुख्यालय पंचगड़ सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उत्तर की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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देराइ उपज़िला

देराइ उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह सिलेट विभाग के सुनामगंज ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 11 उपज़िले हैं, और मुख्यालय सुनामगंज सदर उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उत्तर-पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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देलदुय़ार उपज़िला

देलदुय़ार उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह ढाका विभाग के टाङाइल ज़िले का एक उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका के निकट अवस्थित है। .

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देशों के दूरभाष कूट की सूची

यह ITU-T की सिफारिश E.164 के अनुसार देशों की दूरभाष कुट सँख्या कि सुची है। .

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देशों के राजचिह्नों की सूची

This gallery of sovereign state coats of arms shows the coat of arms (or an emblem serving a similar purpose) of each of the sovereign states in the list of sovereign states.

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देशी भाषाओं में देशों और राजधानियों की सूची

निम्न चार्ट विश्व के देशों को सूचीबद्ध करता है (जैसा की यहां परिभाषित किया गया है), इसमें उनके राजधानीयों के नाम भी शामिल है, यह अंग्रेजी के साथ साथ उस देश की मूल भाषा और/या सरकारी भाषा में दी गयी है। ज टी की कोण नॉन en .

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देशीय कोड उच्चतम डोमेन

देशीय कोड उच्चतम डोमेन (Country code top-level domain) या सी॰सी॰टी॰ऍल॰डी॰ (ccTLD) किसी देश, राष्ट्र या अधीन क्षेत्र के लिए प्रयोग होने वाली या आरक्षित इंटरनेट उच्चतम डोमेन (Top-level domain) को कहते हैं। सभी आस्की (कम्प्यूटर में अंग्रेज़ी की रोमन लिपि) पर आधारित सीसीटीऍलडी दो अक्षरों के होते हैं, मसलन नेपाल का सीसीटीऍलडी '.np' और श्रीलंका का सीसीटीऍलडी '.lk' है।, Request for Comments, Jon Postel, Network Working Group, Accessed 2011-02-07,...

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दोय़ाराबाजार उपज़िला

दोय़ाराबाजार उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह सिलेट विभाग के सुनामगंज ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 11 उपज़िले हैं, और मुख्यालय सुनामगंज सदर उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उत्तर-पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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दोहार उपज़िला

दोहार उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह ढाका विभाग के ढाका ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, कुल ५ उपज़िले है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका के निकट अवस्थित है, और वृहत्तर ढाका महानगर क्षेत्र का अंश है। .

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दीघिनाला उपज़िला

दीघिनाला उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह चट्टग्राम विभाग के खागड़ाछड़ि ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 8 उपज़िले हैं, और मुख्यालय खागड़ाछड़ि सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण-पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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दीवानगंज उपज़िला

दीवानगंज उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह मय़मनसिंह विभाग के जमालपुर ज़िले का एक उपजिला है। इसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 7 उपज़िले हैं। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उत्तर की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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धनबाड़ी उपज़िला

धनबाड़ी उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह ढाका विभाग के टाङाइल ज़िले का एक उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका के निकट अवस्थित है। .

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धर्मपाशा उपज़िला

धर्मपाशा उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह सिलेट विभाग के सुनामगंज ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 11 उपज़िले हैं, और मुख्यालय सुनामगंज सदर उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उत्तर-पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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धानुक जाति

धानुक (अंग्रेजी: Dhanuk), एक जातीय समूह है जिसके सदस्य बांग्लादेश, भारत और नेपाल में पाए जाते हैं। भारत में धानुक दिल्ली, चंडीगढ़, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, झारखण्ड, बिहार, त्रिपुरा, गुजरात, राजस्थान, मध्यप्रदेश आदि राज्यों में पाए जाते हैं। उन्हें पिछड़े जाति का दर्जा प्रदान किया गया है । नेपाल मे वे सप्तरी, सिरहा और धनुषा के तराई जिलों में बसे हुए हैं। वे या तो क्षत्रिय या एक अल्पसंख्यक स्वदेशी लोग हैं। पूर्वी तराई के धानुक मंडल के रूप में भी जाना जाता है । और पश्चिमी तराई के धानुक 'पटेल' कहलाते हैं। बिहार में धानुक जसवाल कुर्मी के रूप में भी जाना जाता है। पूरे बिहार में इनके उपनाम सिंह, महतो, मंडल, राय, पटेल, विश्वास इत्यादि हैं। दोनों देशों में धानुक हिन्दू हैं, और इस तरह के भोजपुरी और अवधी के रूप में हिंदी के विभिन्न बोलियों, बोलते हैं। परंपरा के अनुसार, 'धनुक' संस्कृत शब्द 'धनुषकः' से लिया गया है जिसका अर्थ है धनुषधारी। धानुक जा‍ति‍ के लोग राजा महाराजा काल मे उनकी अग्रिम पंक्ति में धनुर्धर थे जो पहला आक्रमण करते थे किसी भी युद्ध मे, क्योंकि इनकी निशानेबाजी सभी जातियों में सबसे अच्छी थी। धानुक जो धनुष्क से उद्धरित हुआ है इसका मतलब ही धनुष चलाने वाला होता है जिसका उल्लेख मालिक मुहम्मद जायसी की किताब पद्मावत में भी उल्लेख है। आशीर्वादी लाल श्रीवास्तव की किताब दिल्ली सल्तनत में भी इसी बात का उल्लेख है। .

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धामराइ उपज़िला

धामराइ उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह ढाका विभाग के ढाका ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, कुल ५ उपज़िले है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका के निकट अवस्थित है। .

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धामुरहाट उपज़िला

धामुरहाट उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह राजशाही विभाग के नओगाँ ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 11 उपज़िले हैं, और मुख्यालय नओगाँ सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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धारीदार करैत

धारीदार करैत धारीदार करैत (Bungarus fasciatus) भारत, बांग्लादेश एवं दक्षिणपूर्व एशिया में पाया जाने वाला विषधर साँप है। यह एक जहरीला सांप है जो विषहीन सांपों का भक्षण कर उनकी संख्या को नियंत्रित रखते हुए जैव विविधता में महत्वपूर्ण योगदान देता है। .

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धालेश्वरी नदी

धालेश्वरी नदी धालेश्वरी नदी बांग्लादेश में बहनेवाली जमुना नदी की शाखा है। यह मुंशीगंज और मदनगंज होती हुई जूट और धान के सघन क्षेत्रों में प्रवाहित होती है। इसमें ब्रह्मपुत्र नदी की एक शाखा आकर ठीक नारायणगंज के पूर्व में मिल जाती है। इसकी उत्तरी शाखा का नाम 'बूढ़ी गंगा नदी' है, जिसपर प्रसिद्ध नगर ढाका स्थित है। .

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धुनट उपज़िला

धुनट उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह राजशाही विभाग के बगुड़ा ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 12 उपज़िले हैं, और मुख्यालय बगुड़ा सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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धुपचँचिय़ा उपजिला

धुपचँचिय़ा उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह राजशाही विभाग के बगुड़ा ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 12 उपज़िले हैं, और मुख्यालय बगुड़ा सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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धुबरी

धुबरी नगर, पश्चिमी असम राज्य, पूर्वोत्तर भारत में स्थित है। बांग्लादेश सीमा के ठीक पूर्व में ब्रह्मपुत्र नदी पर स्थित धुबुरी चावल, पटसन, मछली और अन्य उत्पादों का व्यापार केंद्र है। .

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धोबाउड़ा उपज़िला

धोबाउड़ा उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह मय़मनसिंह विभाग के जमालपुर ज़िले का एक उपजिला है। इसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 7 उपज़िले हैं। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उत्तर की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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नड़ागाति उपज़िला

नड़ागाति उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह खुलना विभाग के नड़ाइल ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 3 उपज़िले हैं, और मुख्यालय नड़ाइल सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण-पश्चिम की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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नड़ाइल सदर उपज़िला

नड़ाइल सदर उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह उपज़िला नड़ाइल जिला का ज़िला सदर यानी प्रशासनिक मुख्यालय है। यह खुलना विभाग के नड़ाइल ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 3 उपज़िले हैं, और मुख्यालय नड़ाइल सदर उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण-पश्चिम की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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नड़िय़ा उपज़िला

नड़िय़ा उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह ढाका विभाग के शरिय़तपुर ज़िले का एक उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका के निकट अवस्थित है। .

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नबाबगञ्ज उपज़िला

नबाबगंज उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह रंगपुर विभाग के दिनाजपुर ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल १३ उपज़िले हैं, और मुख्यालय दिनाजपुर सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उत्तर की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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नबीनगर उपज़िला

नबीनगर उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह चट्टग्राम विभाग के ब्राह्मणबाड़िय़ा ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 9 उपज़िले हैं, और मुख्यालय ब्राह्मणबाड़िय़ा सदर उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण-पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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नबीगंज उपज़िला

नबीगंज उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह सिलेट विभाग के हाबीगंज ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल ८ उपज़िले हैं, और मुख्यालय हाबीगंज सदर उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उत्तर-पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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नरसिंदी सदर उपज़िला

नरसिंदी सदर उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह ढाका विभाग के नरसिंदी ज़िले का एक उपजिला है। यह उपज़िला नरसिंदी जिला का ज़िला सदर यानी प्रशासनिक मुख्यालय है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका के निकट अवस्थित है। .

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नरेन्द्र मोदी द्वारा किए गए अंतरराष्ट्रीय प्रधानमन्त्रीय यात्राओं की सूची

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी मई २०१६ में तेहरान, ईरान में पधारते हुए। २०१४ के आम चुनाव के बाद नरेन्द्र मोदी भारत के प्रधान मंत्री बने। नरेन्द्र मोदी द्वारा की गयीं अन्तर्राष्ट्रीय प्रधानमन्त्रीय यात्राओं की सूची इस प्रकार है। .

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नरेन्द्र मोदी सरकार की विदेश नीति

नरेन्द्र मोदी सरकार की विदेश नीति को मोदी सिद्धान्त भी कहते हैं। २६ मई, २०१४ को सत्ता में आने के तुरन्त बाद से ही मोदी सरकार ने अन्य देशों के साथ सम्बन्धों को नया आयाम देने की दिशा में कार्य करना आरम्भ कर दिया। श्रीमती सुषमा स्वराज भारत की विदेश मंत्री हैं। दक्षिण एशिया के अपने पड़ोसियों से सम्बन्ध सुधारना मोदी की विदेश नीति के केन्द्र में है। इसके लिए उन्होने १०० दिन के अन्दर ही भूटान, नेपाल, जापान की यात्रा की। इसके बाद अमेरिका, म्यांमार, आस्ट्रेलिया और फिजी की यात्रा की। श्रीमती सुषमा स्वराज ने भी बांग्लादेश, भूटान, नेपाल, म्यांमार, सिंगापुर, वियतनाम, बहरीन, अफगानिस्तान, तजाकिस्तान, यूएसए, यूके, मॉरीसस, मालदीव, यूएईदक्षिण कोरिया, चीन, ओमान, और श्रीलंका की यात्रा की है। ९वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में विश्व नेताओं के साथ मोदी .

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नलछिटी उपज़िला

नलछिटी उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह बरिशाल विभाग के झालोकाठी ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 4 उपज़िले हैं, और मुख्यालय झालोकाठी सदर उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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नाचोल उपज़िला

नाचोल उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह राजशाही विभाग के नवाबगंज ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल ५ उपज़िले हैं, और मुख्यालय नवाबगंज सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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नाटोर सदर उपज़िला

नाटोर सदर उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह उपज़िला नाटोर जिला का ज़िला सदर यानी प्रशासनिक मुख्यालय है। यह राजशाही विभाग के नाटोर ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 7 उपज़िले हैं, और मुख्यालय नाटोर सदर उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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नात ए शरीफ़

नात ए शरीफ़: (अरबी - نعت) उर्दू और फ़ारसी में नात ए शरीफ़ (نعت شریف): इस्लामी पद्य साहित्य में एक पद्य रूप है, जिस में पैगंबर हज़रत मुहम्मद साहब की तारीफ़ करते लिखी जाती है। इस पद्य रूप को बडे अदब से गाया भी जाता है। अक्सर नात ए शरीफ़ लिखने वाले आम शायर को नात गो शायर कहते हैं और गाने वाले को नात ख्वां कहते हैं। यह नात ख्वानी का रिवाज भारत, पाकिस्तान और बंगलादेश में आम है। भाशा अनुसार देखें तो, पश्तो, बंगाली, उर्दू और पंजाबी में नात ख्वानी आम है। नात ख्वां तुर्की, फ़ारसी, अरबी, उर्दू, बंगाली, पंजाबी, अंग्रेज़ी, कश्मीरी और सिंधी भाशाओं में आम है। .

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नानिय़ाचर उपज़िला

नानिय़ाचर उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह चट्टग्राम विभाग के रांगामाटि ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 10 उपज़िले हैं, और मुख्यालय रांगामाटि सदर उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण-पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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नान्दाईल उपज़िला

नान्दाईल उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह मय़मनसिंह विभाग के जमालपुर ज़िले का एक उपजिला है। इसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 7 उपज़िले हैं। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उत्तर की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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नाराय़णगञ्ज नगर निगम

नाराय़णगंज सिटी कॉर्पोरेशन यानि नाराय़णगंज नगर निगम, बांग्लादेश के नाराय़णगंज नगर में आधारित एक स्वशासित पौरप्रशासन निकाय व निगम-ऐक्य है, जिसपर बांग्लादेश के नाराय़णगंज नगर के प्रशासन और विकास तथा नागरिक सुविधाओं से संबंधित प्रभार निहित किये गए हैं। नाराय़णगंज, बांग्लादेश के नाराय़णगंज विभाग में स्थित, बांग्लादेश के बृहत्तम् नगरों में से एक है। इस निकाय की स्थापना नाराय़णगंज के प्रशासन हेतु एक नगर पालिका के रूप में हुआ था, तत्पश्चात्, नगर के आकार और जनसंख्या में वृद्धि के मद्देनज़र इसे नगर निगम के स्तर पर उन्नतस्थ कर दिया गया। .

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नाराय़णगञ्ज सदर उपज़िला

नाराय़णगंज सदर उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह ढाका विभाग के नाराय़णगंज ज़िले का एक उपजिला है। यह उपज़िला नाराय़णगंज जिला का ज़िला सदर यानी प्रशासनिक मुख्यालय है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका के निकट अवस्थित है। .

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नालडांगा उपज़िला

नालडांगा उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह राजशाही विभाग के नाटोर ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 7 उपज़िले हैं, और मुख्यालय नाटोर सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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नालिताबाड़ी उपज़िला

नालिताबाड़ी उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह मय़मनसिंह विभाग के शेरपुर ज़िले का एक उपजिला है। इसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 5 उपज़िले हैं। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उत्तर की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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नासिर जमशेद

नासिर जमशेद (Nasir Jamshed) (ناصر جمشید; जन्म ०६ दिसम्बर १९८९) एक क्रिकेट के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर है जो पाकिस्तान क्रिकेट टीम की ओर से टेस्ट क्रिकेट,एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और ट्वेन्टी - ट्वेन्टी क्रिकेट खेलते है। नासिर जमशेद बांए हाथ के एक शुरुआती क्रम के बल्लेबाज है यानी टीम के ओपनर बल्लेबाज है। .

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नासिरनगर उपज़िला

नासिरनगर उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह चट्टग्राम विभाग के ब्राह्मणबाड़िय़ा ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 9 उपज़िले हैं, और मुख्यालय ब्राह्मणबाड़िय़ा सदर उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण-पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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नासिराबाद (स्वरूपकाठी) उपज़िला

नासिराबाद उपजिला या स्वरूपकाठी, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह बरिशाल विभाग के पिरोजपुर ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 7 उपज़िले हैं, और मुख्यालय पिरोजपुर सदर उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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नागरपुर उपज़िला

नागरपुर उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह ढाका विभाग के टाङाइल ज़िले का एक उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका के निकट अवस्थित है। .

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नागेश्वरी उपज़िला

नागेश्वरी उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह रंगपुर विभाग के कुड़िग्राम ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 9 उपज़िले हैं, और मुख्यालय कुड़िग्राम सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उत्तर की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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नाइक्ष्यंछड़ि उपज़िला

नाइक्ष्यंछड़ि उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह चट्टग्राम विभाग के बन्दरबान ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल ७ उपज़िले हैं, और मुख्यालय बन्दरबान सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण-पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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नितु कुंडु

The SAARC fountain, Dhaka नितु कुंडु (पुरा नाम: नित्य गोपाल कुंडु) का जन्म 3 दिसंबर 1935 को बंग्लादेश में हुआ था। ये एक शिल्पकार एंव कलाकार थें.

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निमतपुर उपज़िला

निमतपुर उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह राजशाही विभाग के नओगाँ ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 11 उपज़िले हैं, और मुख्यालय नओगाँ सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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निलफामारी सदर उपज़िला

निलफामारी सदर उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह उपज़िला निलफामारी जिला का ज़िला सदर यानी प्रशासनिक मुख्यालय है। यह रंगपुर विभाग के निलफामारी ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 6 उपज़िले हैं, और मुख्यालय निलफामारी सदर उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उत्तर की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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निलीना अब्राहम

निलीना अब्राहम (उर्फ़ दत्ता) (जन्म २७ जुलाई १९२५) भारत के केरल के लेखक और अनुवादक  हैं। इनका जन्म वे बांग्लादेश हुआ था। इन्होंने बंगाली भाषा, राजनीतिक विज्ञान और इतिहास में मास्टर की डिग्री हासिल करने के बाद, वे केरल के एर्नाकुलम क्षेत्र में वापस आने के बाद, महाराजा कॉलेज में बंगाली प्रोफेसर के रूप में और तिरुवनंतपुरम के द्रविड़ भाषा विज्ञानओं की इंटरनेशनल स्कूल में डॉ सुनीति कुमार चट्टर्जी बंगाली प्रोफेसर बनके कार्य पर रही। वे आठ से अधिक बंगाली किताबों को मलयालम एवं दस मलयालम किताबों को बंगाली में अनुवाद कर चुकी है। १९८९ में उन्होंने मलयालम मूल की, मिकों मोहम्मद बशीर द्वारा लिखी गई छोटे कहानियों का संकलन Pathummayude Adu और Balyakalasakhi को मलयालम में अनुवाद करने के लिए उनको  साहित्य अकादमी पुरस्कार से नवाज़ा गया। ये एर्नाकुलम वास करते हैं और इनके पति का नाम इब्राहीम ट्रॅन है। .

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निहारी

निहारी (نهاری) पाकिस्तान, भारत, But if there is one dish that migrated from Delhi to Karachi and became a roaring success then it is none other than nihari, a curry with lots of red meat, a sprinkling of bheja (brain) and garnished with thin slices of ginger.

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निकलोडियन भारत

निकलोडियन भारत (अंग्रेज़ी: Nickelodeon India) या निक (अंग्रेज़ी: Nick), बच्चों को समर्पित एक टेलीविजन चैनल है जिसका मुख्यालय भारत में मुंबई में स्थित है। यह वायाकॉम 18 का हिस्सा है। भारत में निकलोडियन चार भाषाओं क्रमश: अंग्रेजी, हिंदी, तमिल और तेलुगु में उपलब्ध है। इसे भारत में सन 1999 में वायाकॉम इंटरनेशनल द्वारा शुरु किया गया था जबकि आज इसका संचालन वायाकॉम 18 द्वारा किया जाता है। भारत में यह सभी प्रमुख केबल टीवी प्लेटफार्मों पर उपलब्ध है। निकलोडियन भारत को श्रीलंका और बांग्लादेश में सभी देय टीवी प्लेटफार्मों पर देखा जा सकता है। .

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निकली उपज़िला

निकली उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह ढाका विभाग के किशोरगंज ज़िले का एक उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका के निकट अवस्थित है। .

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नजीरपुर उपज़िला

नजीरपुर उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह बरिशाल विभाग के पिरोजपुर ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 7 उपज़िले हैं, और मुख्यालय पिरोजपुर सदर उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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नव वर्ष

भारतीय नववर्ष की विशेषता   - ग्रंथो में लिखा है कि जिस दिन सृष्टि का चक्र प्रथम बार विधाता ने प्रवर्तित किया, उस दिन चैत्र शुदी १ रविवार था। हमारे लिए आने वाला संवत्सर २०७५ बहुत ही भाग्यशाली होगा, क़्योंकि इस वर्ष भी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को रविवार है,   शुदी एवम  ‘शुक्ल पक्ष एक ही  है। चैत्र के महीने के शुक्ल पक्ष की प्रथम तिथि (प्रतिपद या प्रतिपदा) को सृष्टि का आरंभ हुआ था।हमारा नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को शरू होता है| इस दिन ग्रह और नक्षत्र मे परिवर्तन होता है | हिन्दी महीने की शुरूआत इसी दिन से होती है | पेड़-पोधों मे फूल,मंजर,कली इसी समय आना शुरू होते है,  वातावरण मे एक नया उल्लास होता है जो मन को आह्लादित कर देता है | जीवो में धर्म के प्रति आस्था बढ़ जाती है | इसी दिन ब्रह्मा जी  ने सृष्टि का निर्माण किया था | भगवान विष्णु जी का प्रथम अवतार भी इसी दिन हुआ था | नवरात्र की शुरुअात इसी दिन से होती है | जिसमे हमलोग उपवास एवं पवित्र रह कर नव वर्ष की शुरूआत करते है | परम पुरूष अपनी प्रकृति से मिलने जब आता है तो सदा चैत्र में ही आता है। इसीलिए सारी सृष्टि सबसे ज्यादा चैत्र में ही महक रही होती है। वैष्णव दर्शन में चैत्र मास भगवान नारायण का ही रूप है। चैत्र का आध्यात्मिक स्वरूप इतना उन्नत है कि इसने वैकुंठ में बसने वाले ईश्वर को भी धरती पर उतार दिया। न शीत न ग्रीष्म। पूरा पावन काल। ऎसे समय में सूर्य की चमकती किरणों की साक्षी में चरित्र और धर्म धरती पर स्वयं श्रीराम रूप धारण कर उतर आए,  श्रीराम का अवतार चैत्र शुक्ल नवमी को होता है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि  के ठीक नवे दिन भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था | आर्यसमाज की स्थापना इसी दिन हुई थी | यह दिन कल्प, सृष्टि, युगादि का प्रारंभिक दिन है | संसारव्यापी निर्मलता और कोमलता के बीच प्रकट होता है हमारा अपना नया साल *  *विक्रम संवत्सर विक्रम संवत का संबंध हमारे कालचक्र से ही नहीं, बल्कि हमारे सुदीर्घ साहित्य और जीवन जीने की विविधता से भी है। कहीं धूल-धक्कड़ नहीं, कुत्सित कीच नहीं, बाहर-भीतर जमीन-आसमान सर्वत्र स्नानोपरांत मन जैसी शुद्धता। पता नहीं किस महामना ऋषि ने चैत्र के इस दिव्य भाव को समझा होगा और किसान को सबसे ज्यादा सुहाती इस चैत मेे ही काल गणना की शुरूआत मानी होगी। चैत्र मास का वैदिक नाम है-मधु मास। मधु मास अर्थात आनंद बांटती वसंत का मास। यह वसंत आ तो जाता है फाल्गुन में ही, पर पूरी तरह से व्यक्त होता है चैत्र में। सारी वनस्पति और सृष्टि प्रस्फुटित होती है,  पके मीठे अन्न के दानों में, आम की मन को लुभाती खुशबू में, गणगौर पूजती कन्याओं और सुहागिन नारियों के हाथ की हरी-हरी दूब में तथा वसंतदूत कोयल की गूंजती स्वर लहरी में। चारों ओर पकी फसल का दर्शन,  आत्मबल और उत्साह को जन्म देता है। खेतों में हलचल, फसलों की कटाई, हंसिए का मंगलमय खर-खर करता स्वर और खेतों में डांट-डपट-मजाक करती आवाजें। जरा दृष्टि फैलाइए, भारत के आभा मंडल के चारों ओर। चैत्र क्या आया मानो खेतों में हंसी-खुशी की रौनक छा गई। नई फसल घर मे आने का समय भी यही है | इस समय प्रकृति मे उष्णता बढ्ने लगती है, जिससे पेड़ -पौधे, जीव-जन्तु मे नव जीवन आ जाता है | लोग इतने मदमस्त हो जाते है कि आनंद में मंगलमय  गीत गुनगुनाने लगते है | गौर और गणेश कि पूजा भी इसी दिन से तीन दिन तक राजस्थान मे कि जाती है | चैत शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा के दिन सूर्योदय के समय जो वार होता है वह ही वर्ष में संवत्सर का राजा कहा जाता है,  मेषार्क प्रवेश के दिन जो वार होता है वही संवत्सर का मंत्री होता है इस दिन सूर्य मेष राशि मे होता है | नये साल के अवसर पर फ़्लोरिडा में आतिशबाज़ी का एक दृश्य। नव वर्ष एक उत्सव की तरह पूरे विश्व में अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग तिथियों तथा विधियों से मनाया जाता है। विभिन्न सम्प्रदायों के नव वर्ष समारोह भिन्न-भिन्न होते हैं और इसके महत्त्व की भी विभिन्न संस्कृतियों में परस्पर भिन्नता है। .

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नवाबगञ्ज उपज़िला

नवाबगंज उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह ढाका विभाग के ढाका ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, कुल ५ उपज़िले है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका के निकट अवस्थित है, और वृहत्तर ढाका महानगर क्षेत्र का अंश है। .

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नवाबगंज सदर उपज़िला

नवाबगंज सदर उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह उपज़िला नवाबगंज जिला का ज़िला सदर यानी प्रशासनिक मुख्यालय है। यह राजशाही विभाग के नवाबगंज ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल ५ उपज़िले हैं, और मुख्यालय नवाबगंज सदर उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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नगरकान्दा उपज़िला

नगरकान्दा उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह ढाका विभाग के फरिदपुर ज़िले का एक उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका के निकट अवस्थित है। .

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नंदीग्राम उपजिला

नंदीग्राम उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह राजशाही विभाग के बगुड़ा ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 12 उपज़िले हैं, और मुख्यालय बगुड़ा सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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नओगाँ सदर उपज़िला

नओगाँ सदर उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह उपज़िला नओगाँ जिला का ज़िला सदर यानी प्रशासनिक मुख्यालय है। यह राजशाही विभाग के नओगाँ ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 11 उपज़िले हैं, और मुख्यालय नओगाँ सदर उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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नकला उपज़िला

नकला उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह मय़मनसिंह विभाग के शेरपुर ज़िले का एक उपजिला है। इसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 5 उपज़िले हैं। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उत्तर की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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नुक्‍कड़ नाटक

पुणे के एक पार्क में नुक्कड़-नाटक का दृश्य नुक्‍कड़ नाटक एक ऐसी नाट्य विधा है, जो परंपरागत रंगमंचीय नाटकों से भिन्‍न है। यह रंगमंच पर नहीं खेला जाता तथा आमतौर पर इसकी रचना किसी एक लेखक द्वारा नहीं की जाती, बल्कि सामाजिक परिस्थितियों और संदर्भों से उपजे विषयों को इनके द्वारा उठा लिया जाता है। जैसा कि नाम से जाहिर है इसे किसी सड़क, गली, चौराहे या किसी संस्‍थान के गेट अथवा किसी भी सार्वजनिक स्‍थल पर खेला जाता है। इसकी तुलना सड़क के किनारे मजमा लगा कर तमाशा दिखाने वाले मदारी के खेल से भी की जा सकती है। अंतर यह है कि यह मजमा बुद्धिजीवियों द्वारा किसी उद्देश्‍य को सामने रख कर लगाया जाता है। भारत में आधुनिक नुक्कड़ नाटक को लोकप्रिय बनाने का श्रेय सफ़दर हाशमी को जाता है। उनके जन्म दिवस १२ अप्रैल को देशभर में राष्ट्रीय नुक्कड़ नाटक दिवस के रूप में मनाया जाता है। .

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नेत्रकोना सदर उपज़िला

नेत्रकोना सदर उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह मयमनसिंह विभाग के नेत्रकोना ज़िले का एक उपजिला है। इसमें, ज़िला सदर समेत, कुल १० उपज़िले हैं। यह उपज़िला नेत्रकोना जिला का ज़िला सदर यानी प्रशासनिक मुख्यालय है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उत्तर की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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नेशनल क्रिकेट लीग

नॅशनल क्रिकेट लीग बांग्लादेश में सबसे पुराना घरेलू प्रथम श्रेणी क्रिकेट प्रतियोगिता है। .

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नेशनल क्रिकेट लीग 2017

2017-18 नॅशनल क्रिकेट लीग नॅशनल क्रिकेट लीग का उन्नीसवां संस्करण था, जो बांग्लादेश में आयोजित एक प्रथम श्रेणी क्रिकेट प्रतियोगिता थी। टूर्नामेंट 15 सितंबर, 2017 को शुरू हुआ, जिसमें आठ टीमों को दो स्तरों पर रखा गया। टियर 2 में शीर्ष टीम को अगले सीज़न के लिए टियर 1 में पदोन्नत किया गया था, साथ ही टीयर 1 में नीचे की टीम को टीयर 2 में स्थानांतरित किया गया था खुलना डिवीजन पूर्व चैंपियन है। टूर्नामेंट में दो महीने का ब्रेक था, जो अक्टूबर के मध्य में शुरू हुआ था, जबकि बांग्लादेश प्रीमियर लीग था। राजशाही डिवीजन को फाइनल राउंड के खेले जाने से पहले टियर 1 में पदोन्नत किया गया। अपने अंतिम मैच में ढाका डिवीजन को एक पारी और 49 रन से हराकर खुलना डिवीजन ने अपना खिताब बरकरार रखा। अगले सीजन के लिए ढाका डिवीजन को भी टियर 2 में स्थानांतरित किया गया था। .

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नेशनल क्रिकेट लीग २०१६-१७

2016-17 नॅशनल क्रिकेट लीग बांग्लादेश में आयोजित किया जा रहा है, नॅशनल क्रिकेट लीग प्रथम श्रेणी क्रिकेट प्रतियोगिता के अठारहवें संस्करण है। टूर्नामेंट 25 सितंबर 2016 को शुरू किया था। खुल्ना डिवीजन गत चैम्पियन हैं। भारी बारिश बारह एक ड्रॉ के अलावा किसी अन्य परिणाम में समाप्त होने से केवल दो मैचों के साथ मैच के पहले तीन राउंड प्रभावित। बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) ने घोषणा की है कि सभी मैचों में 14 अक्टूबर 2016 पर जगह लेने के लिए निर्धारित जब तक मौसम में सुधार देरी हो जाएगा। हालांकि, वहाँ के मौसम में कोई सुधार नहीं है और उन मैचों था और भविष्य जुड़नार आगामी बांग्लादेश प्रीमियर लीग (बीपीएल) की वजह से स्थगित कर दिया गया था। टूर्नामेंट को गरीबी रेखा से नीचे के समापन के बाद 20 दिसंबर 2016 को फिर से शुरू कर दिया गया। .

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नोय़ाखाली सदर उपज़िला

नोय़ाखाली सदर उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह उपज़िला नोय़ाखाली जाला का ज़िला सदर यानी प्रशासनिक मुख्यालय है। यह चट्टग्राम विभाग के नोय़ाखाली ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 9 उपज़िले हैं, और मुख्यालय नोय़ाखाली सदर उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण-पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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नोवाखाली

250px नोवाखाली (Noakhali) या मैजदी (Maijdi) बांग्लादेश के चटगाँव (Chittagong) मंडल में एक जिला है। इस जिले में मुख्य गंगवार क्षेत्र के अतिरिक्त मेघना नदी के मुहाने के कई द्वीप सम्मिलित हैं। इसका उत्तरी एवं मध्य भाग मेघना नदी की सतह से नीचा है, इसलिए यहाँ मकानों की बाढ़ की सतह से ऊपर उठाना पड़ता है। अधिकांश पर छोटे छोटे परवों में बसे हुए हैं। धान, जूट, लाल मिर्च, प्याज और तिलहन यहाँ की मुख्य फसलें हैं। नारियल, दाल तथा गन्ने का भी उत्पादन पर्याप्त मात्रा में होता है। नारियल से तेल निकाला जाता है। पीतल के बरतल, सूती वस्त्र तथा इत्र भी यहाँ बनाए जाते हैं। यहाँ का औसत ताप २७ डिग्री सें.

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नीम

नीम भारतीय मूल का एक पूर्ण पतझड़ वृक्ष है। यह सदियों से समीपवर्ती देशों- पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, म्यानमार (बर्मा), थाईलैंड, इंडोनेशिया, श्रीलंका आदि देशों में पाया जाता रहा है। लेकिन विगत लगभग डेढ़ सौ वर्षों में यह वृक्ष भारतीय उपमहाद्वीप की भौगोलिक सीमा को लांघ कर अफ्रीका, आस्ट्रेलिया, दक्षिण पूर्व एशिया, दक्षिण एवं मध्य अमरीका तथा दक्षिणी प्रशान्त द्वीपसमूह के अनेक उष्ण और उप-उष्ण कटिबन्धीय देशों में भी पहुँच चुका है। इसका वानस्पतिक नाम ‘Melia azadirachta अथवा Azadiracta Indica’ है। .

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पटिय़ा उपज़िला

पटिय़ा उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह चट्टग्राम विभाग के चट्टग्राम ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 22 उपज़िले हैं। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण-पूर्व की दिशा में चट्टग्राम नगर के निकट अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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पटुय़ाखाली सदर उपज़िला

पटुय़ाखाली सदर उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह उपज़िला पटुय़ाखाली जाला का ज़िला सदर यानी प्रशासनिक मुख्यालय है। यह बरिशाल विभाग के पटुय़ाखाली ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल ६ उपज़िले हैं, और मुख्यालय पटुय़ाखाली सदर उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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पञ्चगड़ सदर उपज़िला

पंचगड़ सदर उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह उपज़िला पंचगड़ जिला का ज़िला सदर यानी प्रशासनिक मुख्यालय है। यह रंगपुर विभाग के पंचगड़ ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल १३ उपज़िले हैं, और मुख्यालय पंचगड़ सदर उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उत्तर की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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पत्थरघाटा उपज़िला

पत्थरघाटा उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह बरिशाल विभाग के बरगुना ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल ६ उपज़िले हैं, और मुख्यालय बरगुना सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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पत्नीतला उपज़िला

पत्नीतला उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह राजशाही विभाग के नओगाँ ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 11 उपज़िले हैं, और मुख्यालय नओगाँ सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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पद्मा

पद्मा (बांग्ला: পদ্মা) एक नदी है जो बांग्लादेश में गंगा की मुख्य धारा है। अर्थात् गंगा नदी बांग्लादेश में प्रवेश करते ही 'पद्मा' के नाम से जानी जाती है। राजमहल से ३० किमी पूर्व में गंगा की एक शाखा निकलकर मुर्शिदाबाद, बहरमपुर, नदिया, हुगली और कलकत्ता होती हुई पश्चिम-दक्षिण की ओर बंगाल की खाड़ी में गिर जाती है, जो 'भागीरथी' शाखा के नाम से प्रसिद्ध है। मूल नदी के संगम स्थान से गंगा, 'पद्मा' नाम धारण कर पबना और गोआलंद होती हुई गई है। गोआलंद के निकट ब्रह्मपुत्र नदी की शाखा, जो 'जमुना' नाम से प्रसिद्ध है, आकर इसमें गिरी है। इसके बाद मूल नदी ने ब्रह्मपुत्र के साथ मिलकर 'मेघना' नाम धारण किया है और नोआखाली के निकट समुद्र में मिल गई है। पद्मा नदी की कुल लबाई २२५ मील है। राजशाही, पश्चिमी बांग्लादेश में एक प्रमुख शहर, पद्मा के उत्तर तट पर स्थित है। श्रेणी:बांग्लादेश की नदियाँ श्रेणी:बांग्लादेश.

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पन्नालाल घोष

पण्डित पन्नालाल घोष (31 जुलाई १९११ - २० अप्रैल १९६०) भारत के प्रसिद्ध बांसुरीवादक थे। उनका मूल नाम 'अमल ज्योति घोष' था। वे अलाउद्दीन खान के शिष्य थे। उनका जन्म वर्तमान बांग्लादेश के बारासात में हुआ था। .

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पपीहा

पपीहा एक पक्षी है जो दक्षिण एशिया में बहुतायत में पाया जाता है। यह दिखने में शिकरा की तरह होता है। इसके उड़ने और बैठने का तरीका भी बिल्कुल शिकरा जैसा होता है। इसीलिए अंग्रेज़ी में इसको Common Hawk-Cuckoo कहते हैं। यह अपना घोंसला नहीं बनाता है और दूसरे चिड़ियों के घोंसलों में अपने अण्डे देता है। प्रजनन काल में नर तीन स्वर की आवाज़ दोहराता रहता है जिसमें दूसरा स्वर सबसे लंबा और ज़्यादा तीव्र होता है। यह स्वर धीरे-धीरे तेज होते जाते हैं और एकदम बन्द हो जाते हैं और काफ़ी देर तक चलता रहता है; पूरे दिन, शाम को देर तक और सवेरे पौं फटने तक। .

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पबना विद्रोह

१९वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में बंगाल के पबना नामक स्थान में किसानों ने जमींदारों द्वारा शोषण के विरुद्ध विद्रोह किया था, जिसे पबना विद्रोह कहते हैं। पबना, राजशाही राज की जमींदारी के अन्दर था और यह वर्धमान राज के बाद सबसे बड़ी जमींदारी थी। उस जमींदारी के संस्थापक राजा कामदेव राय थे। पबना विद्रोह जितना अधिक जमींदारों के खिलाफ था उतना सूदखोरों और महाजनों के विरुद्ध नहीं थ। 1870-80 के दशक के पूर्वी बंगाल (अभी का बांग्लादेश) के किसानों ने जमींदारों द्वारा बढ़ाए गए मनमाने करों के विरोध में विद्रोहस्वरूप रोष प्रकट किया। .

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पबा उपज़िला

पबा उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह राजशाही विभाग के राजशाही ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 9 उपज़िले हैं। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से पूर्व की दिशा में अवस्थित है। .

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परमेश्वर नारायण हक्सर

परमेश्वर नारायण हक्सर (1913–1998) स्वतंत्र भारत के राजनीतिक लोकतंत्र को प्राप्त करने की प्रक्रिया में एक रणनीतिकार थे। उनक महत्वपूर्ण कार्य इन्दिरा गांधी के राजनीतिक सलाहकार के रूप में था। वो केंद्रीकरण और समाजवाद के समर्थक थे। हक्सर ऑस्ट्रिया और नाइजीरिया में भारतीय राजनयिक थे जिन्होंने राजदूत के रूप में काम किया। .

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परशा उपज़िला

परशा उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह राजशाही विभाग के नओगाँ ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 11 उपज़िले हैं, और मुख्यालय नओगाँ सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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परशुराम उपज़िला

परशुराम उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह चट्टग्राम विभाग के फेनी ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 6 उपज़िले हैं, और मुख्यालय फेनी सदर उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण-पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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परवेज़ रसूल

परवेज़ ग़ुलाम रसूल ज़रगर (जन्म: २३ फ़रवरी १९८९) एक भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी हैं। वे घरेलू क्रिकेट में जम्मू और कश्मीर के लिए एक हरफ़नमौला के तौर पर खेलते हैं। रसूल दाहिने हाथ से ऑफ ब्रेक गेंदबाजी और दाहिने हाथ से ही बल्लेबाजी करते हैं। २0१४ में बांग्लादेश के खिलाफ खेलने के साथ ही वे भारत के लिए अंतर्राष्ट्रीय मैच खेलने वाले जम्मू कश्मीर के पहले क्रिकेटर बने। .

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पर्वतीय बांस का तीतर

पर्वतीय बांस का तीतर Mountain Bamboo Partridge (Bambusicola fytchii) तीतर के कुल का एक पक्षी है। .

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पलताना ऊर्जा परियोजना

पलताना ऊर्जा परियोजना (Palatana Power Project) भारत के त्रिपुरा राज्य के दक्षिणी भाग में प्रस्तावित एक गैस ऊर्जा परियोजना है। ७२६ मेगावाट क्षमता की यह परियोजना ओएनजीसी तथा त्रिपुरा पावर कॉरपोरेशन का एक संयुक्त उपक्रम है। यह परियोजना पर्यावरणीय कारणों से लंबित रही है। वर्तमान में इस परियोजना को केंद्र सरकार की अनुमति मिल गयी है। पलताना तक उपक्रम निर्माण हेतु संसाधनों की आपूर्ति एक प्रमुख समस्या रही है। इस दिशा में बांग्लादेश ने सहयोग कर स्थानीय साझेदारी का अच्छा उदाहरण प्रस्तुत किया है। परियोजना हेतु संयंत्र निर्माण की सामग्री बांग्लादेश के मार्ग से पलताना तक पहुँचायी गयी है। .

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पलाश उपज़िला

पलाश उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह ढाका विभाग के नरसिंदी ज़िले का एक उपजिला है। यह उपज़िला नरसिंदी जिला का ज़िला सदर यानी प्रशासनिक मुख्यालय है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका के निकट अवस्थित है। .

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पलाशबाड़ी उपज़िला

पलाशबाड़ी उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह रंगपुर विभाग के गाइबान्धा ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 7 उपज़िले हैं, और मुख्यालय गाइबान्धा सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उत्तर की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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पश्चिम त्रिपुरा जिला

त्रिपुरा राज्य के ४ जिले हैंपश्चिम त्रिपुरा भारतीय राज्य त्रिपुरा का एक जिला है। जिले का मुख्यालय अगरतला है जो राज्य की राजधानी भी है। पश्चिम त्रिपुरा जहां एक ओर मंदिरों के लिए जाना जाता है, वहीं दूसरी ओर यह जगह ऊंचे पर्वत, महल और झील आदि के लिए भी प्रसिद्ध है। ऐतिहासिक दृष्टि से भी यह काफी महत्वपूर्ण है। .

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पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल (भारतीय बंगाल) (बंगाली: পশ্চিমবঙ্গ) भारत के पूर्वी भाग में स्थित एक राज्य है। इसके पड़ोस में नेपाल, सिक्किम, भूटान, असम, बांग्लादेश, ओडिशा, झारखंड और बिहार हैं। इसकी राजधानी कोलकाता है। इस राज्य मे 23 ज़िले है। यहां की मुख्य भाषा बांग्ला है। .

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पश्चिम जयन्तिया हिल्स जिला

जयंतिया हिल्स भारतीय राज्य मेघालय का एक जिला है। जिले का मुख्यालय जोवाई है। २२ फ़रवरी १९७२ को जयन्तिया हिल जिला सृजित किया गया था। इसका कुल भौगोलिक क्षेत्रफ़ल है और यहां की जनसंख्या २,९५,६९२ है। यहां का जिला मुख्यालय जोवाई में स्थित है। जयन्तिया हिल्स जिला राज्य में कोयले का सबसे बड़ा उत्पादक जिला है। जिले भर में कोयले की खानें दिखाई देती हैं। इसके अलावा यहां चूनेपत्थर का खनन भी वृद्धि पर है क्योंकि सीमेण्ट उद्योग यहां जोरों पर है और उसमें चूनेपत्थर की ऊंची मांग है। हाल के कुछ वर्षों में ही एक बड़े जिले को दो छोटे जिलों: पश्चिम जयतिया एवं पूर्वी जयन्तिया हिल्स में बांट दिया गया था क्षेत्रफल - 3,819 वर्ग कि.मी.

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पश्चिमी पाकिस्तान

पश्चिमी पाकिस्तान(مغربی پاکستان, मग़रिबी पाकिस्तान, পশ্চিম পাকিস্তান, पोश्चिम पाकिस्तान), एक इकाई व्यवस्था के तहत, तत्कालीन पाकिस्तान (पाकिस्तान अधिराज्य) की पश्चिमी इकाई थी, जो अब, (बांग्लादेश के अलग होने के बाद से) वर्तमान पाकिस्तान है। .

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पहर

सामय् पहर भारत, पाकिस्तान, नेपाल और बंगलादेश में इस्तेमाल होने वाली समय की एक ईकाई है। भारत में यह उत्तर भारत के क्षेत्र में अधिक प्रयोग होती है।, Amir Khusro, W.H. Allen, 1882,...

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पहाड़ी मैना

आम हिल Myna (सारिका), कभी - कभी "मैना" वर्तनी और पूर्व बस"हिल Myna रूप में जाना जाता", सबसे अधिक मैना पक्षी में देखा पक्षीपालन, जहां यह अक्सर बस बाद के दो नामों से करने के लिए भेजा.

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पाटग्राम उपज़िला

पाटग्राम उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह रंगपुर विभाग के लालमनिरहाट ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 5 उपज़िले हैं, और मुख्यालय लालमनिरहाट सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उत्तर की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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पाँचबीबी उपज़िला

पाँचबीबी उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह राजशाही विभाग के जयपुरहाट ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल ५ उपज़िले हैं, और मुख्यालय जयपुरहाट सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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पानछड़ि उपज़िला

पानछड़ि उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह चट्टग्राम विभाग के खागड़ाछड़ि ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 8 उपज़िले हैं, और मुख्यालय खागड़ाछड़ि सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण-पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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पाबना सदर उपज़िला

पाबना सदर उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह उपज़िला पाबना जिला का ज़िला सदर यानी प्रशासनिक मुख्यालय है। यह राजशाही विभाग के पाबना ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 10 उपज़िले हैं, और मुख्यालय पाबना सदर उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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पारंपरिक संगीत

ग्रैमी अवार्ड्स की शब्दावली में अब पारंपरिक संगीत शब्द का प्रयोग "लोक संगीत " के स्थान पर किया जाता है। इस बदलाव का पूर्ण विवरण विश्व संगीत लेख के शब्दावली अनुभाग में पाया जा सकता है। अन्य संगठनों ने इसी तरह के परिवर्तन किए हैं, हालांकि गैर-शैक्षणिक हलकों में, तथा सीडी बेचने वाली कई वेबसाइटों पर, "लोक संगीत" वाक्यांश का प्रयोग बहुत सारे अर्थों में किया जाता है। .

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पार्बतीपुर उपज़िला

पार्बतीपुर उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह रंगपुर विभाग के दिनाजपुर ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल १३ उपज़िले हैं, और मुख्यालय दिनाजपुर सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उत्तर की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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पांशा उपज़िला

पांशा उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह ढाका विभाग के राजबाड़ी ज़िले का एक उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका के निकट अवस्थित है। .

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पाइकगाछा उपज़िला

पाइकगाछा उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह खुलना विभाग के खुलना ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, कुल 15 उपज़िले हैं। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण-पश्चिम की दिशा में अवस्थित है। .

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पाकिस्तान

इस्लामी जम्हूरिया पाकिस्तान या पाकिस्तान इस्लामी गणतंत्र या सिर्फ़ पाकिस्तान भारत के पश्चिम में स्थित एक इस्लामी गणराज्य है। 20 करोड़ की आबादी के साथ ये दुनिया का छठा बड़ी आबादी वाला देश है। यहाँ की प्रमुख भाषाएँ उर्दू, पंजाबी, सिंधी, बलूची और पश्तो हैं। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद और अन्य महत्वपूर्ण नगर कराची व लाहौर रावलपिंडी हैं। पाकिस्तान के चार सूबे हैं: पंजाब, सिंध, बलोचिस्तान और ख़ैबर​-पख़्तूनख़्वा। क़बाइली इलाक़े और इस्लामाबाद भी पाकिस्तान में शामिल हैं। इन के अलावा पाक अधिकृत कश्मीर (तथाकथित आज़ाद कश्मीर) और गिलगित-बल्तिस्तान भी पाकिस्तान द्वारा नियंत्रित हैं हालाँकि भारत इन्हें अपना भाग मानता है। पाकिस्तान का जन्म सन् 1947 में भारत के विभाजन के फलस्वरूप हुआ था। सर्वप्रथम सन् 1930 में कवि (शायर) मुहम्मद इक़बाल ने द्विराष्ट्र सिद्धान्त का ज़िक्र किया था। उन्होंने भारत के उत्तर-पश्चिम में सिंध, बलूचिस्तान, पंजाब तथा अफ़गान (सूबा-ए-सरहद) को मिलाकर एक नया राष्ट्र बनाने की बात की थी। सन् 1933 में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के छात्र चौधरी रहमत अली ने पंजाब, सिन्ध, कश्मीर तथा बलोचिस्तान के लोगों के लिए पाक्स्तान (जो बाद में पाकिस्तान बना) शब्द का सृजन किया। सन् 1947 से 1970 तक पाकिस्तान दो भागों में बंटा रहा - पूर्वी पाकिस्तान और पश्चिमी पाकिस्तान। दिसम्बर, सन् 1971 में भारत के साथ हुई लड़ाई के फलस्वरूप पूर्वी पाकिस्तान बांग्लादेश बना और पश्चिमी पाकिस्तान पाकिस्तान रह गया। .

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पाकिस्तान टेलिविज़न कॉरपोरेशन

अयूब ख़ान पाकिस्तान टेलिविज़न कॉरपोरेशन या पी॰टी॰वी॰ पाकिस्तान का सरकारी टेलिविज़न प्रसारक है। इसका सर्वप्रथम प्रसारण २६ नवम्बर १९६४ को लाहौर से किया गया था। सन् २००७ तक इसने छह चैनलों पर प्रसारण करना चालू कर दिया था। .

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पाकिस्तान में हिन्दू धर्म

पाकिस्तान में हिंदु धर्म का अनुसरण करने वाले कुल जनसंख्या के लगभग 2% है। पूर्वतन जनगणना के समय पाकिस्तानी हिंदुओं को जाति (1.6%) और अनुसूचित जाति (0.25%) में विभाजित किया गया।  पाकिस्तान को ब्रिटेन से स्वतन्त्रता 14 अगस्त, 1947 मिली उसके बाद 44 लाख हिंदुओं और सिखों ने आज के भारत की ओर स्थानान्तरण किया, जबकि भारत से 4.1 करोड़ मुसलमानों ने पाकिस्तान में रहने के लिये स्थानातरण किया।Boyle, Paul; Halfacre, Keith H.; Robinson, Vaughan (2014).

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पाकिस्तान का इतिहास

पाकिस्तान शब्द का जन्म सन् 1933 में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के छात्र चौधरी रहमत अली के द्वारा हुआ। इसके पहले सन् 1930 में शायर मुहम्मद इक़बाल ने भारत के उत्तर-पश्चिमी चार प्रान्तों -सिन्ध, बलूचिस्तान, पंजाब तथा अफ़गान (सूबा-ए-सरहद)- को मिलाकर एक अलग राष्ट्र का मांग की थी। 1947 अगस्त में भारत के विभाजन के फलस्वरूप पाकिस्तान का जन्म हुआ। उस समय पाकिस्तान में वर्तमान पाकिस्तान और बांग्लादेश दोनों सम्मिलित थे। सन् 1971 में भारत के साथ हुए युद्ध में पाकिस्तान का पूर्वी हिस्सा (जिसे उस समय तक पूर्वी पाकिस्तान कहा जाता था) बांग्लादेश के रूप में स्वतंत्र हो गया। आज का पाकिस्तानी भूभाग कई संस्कृतियों का गवाह रहा है। आज के पाकिस्तानी भूभाग में ईसा के 3000 साल पहले सिन्धुघाटी सभ्यता का जन्म हुआ। यह 1500 ईसापूर्व के आसपास नष्ट हो गई और 1200 ईसापूर्व के आसपास आर्यों की एक शाखा भारत आई। ईसापूर्व सन् 543 में यह फारस के हखामनी शासकों के साम्राज्य का अंग बना। सिकन्दर ने 330 ईसापूर्व के आसपास हखामनी शासक दारा तृतीय को हराकर उसके सम्पूर्ण साम्राज्य पर कब्जा कर लिया। उसके साम्राज्य को उसके सेनापतियों ने बाँट लिया और इस क्षेत्र मे एक अभूतपूर्व यूनानी-बैक्टियन संस्कृति का अंग बना। इसके बाद यह मौर्य साम्राज्य का अंग बना। इसके बाद शक (सीथियनों की भारतीय शाखा) और फिर कुषाणों की शाखा यहाँ आई। सन् 712 में फारस के एक अरब सेनापति मुहम्मद-बिन-क़ासिम ने सिन्ध के नरेश को हरा दिया। इसके बाद यहाँ इस्लाम का आगमन हुआ। इस क्षेत्र पर गजनवियों का अधिकार बारहवीं सदी में हुआ और 1206 में यह दिल्ली सल्तनत का अंग बन गया। सन् 1526 में दिल्ली की सत्ता पर मुगलों का अधिकार हो गया और 1857 के बाद यहाँ अंग्रेजों का शासन आया। 14 अगस्त 1947 को यह स्वतंत्र हुआ। .

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पाकिस्तान अधिराज्य

पाकिस्तानी अधिराज्य (ﻣﻤﻠﮑﺖِ ﭘﺎﮐﺴﺘﺎﻥ., मुम्लिक़ात्'ए पाकिस्तान; পাকিস্তান অধিরাজ্য, पाकिस्तान ओधिराज्जो) नवनिर्मित देश, पाकिस्तान की स्वायत्त्योपनिवेशिय अवस्था थी। इस शासनप्रणाली के तहत पाकिस्तान को भारत विभाजन के बाद, ब्रिटिश साम्राज्य का एक स्वशासित व स्वतंत्र इकाइ(अधिराज्य) के रूप मे स्थापित किया गया था। पाकिस्तानी अधिराज्य की स्थापना भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम १९४७ के तहत ब्रिटिश भारत के विभाजन के बाद तथाकथित तौर पर भारतिय उपमहाद्वीप की मुस्लिम आबादी के लिए हुआ था। एसकी कुल भूभाग मौजूदा इस्लामिक गणराज्य पाकिस्तान व बांग्लादेश के बराबर थी। 1956 में पाकिस्तान का पहला संविधान के लागू होने के साथ ही "पाकिस्तान अधिराज्य" की विस्थापना हो गई जब अधिराजकिय राजतांत्रिक व्यवस्था को इस्लामिक गणराज्य से बदल दिया गया। इस व्यवस्था के तहत पाकिस्तान ब्रिटिश हुक़ूमत से स्वतंत्र हो गया एवं ब्रिटिश राष्ट्रमंडल का हिस्सा होने के नाते अन्य ब्रिटिश स्वायत्त्योपनिवेशों की ही तरह, ब्रिटेन के राजा(ततकालीन जार्ज षष्ठम) को पाकिस्तान के राजा का प्रभार भी सौंप दिया गया, हालांकी, (तथ्यस्वरूप) पाकिस्तान के राजा का लग-भग सारा संवैधानिक व कार्याधिकार पाकिस्तान में उनके प्रतिनिधी पाकिस्तान के महाराज्यपाल (गवर्नर-जनरल) के अधिकार में था। ऐसी व्यवस्था सारे ब्रिटिश-स्वायत्त्योपनिवेशों में रहती है। पाकिस्तान अधिराज्य कुल 9 सालों तक, १९४७ से १९५६ तक अस्तित्व में रहा था, जिस बीच 4 महाराज्यपालों की नियुक्ती हुई थी। भारत विभाजन व स्वतंत्रता के बाद संयुक्त राष्ट्र में ब्रिटिश भारत की सदस्यता भारतीय अधिराज्य को दे दी गई जबकी पाकिस्तान ने नई सदस्यता प्राप्त की। .

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पाकिस्तान, भारत

पाकिस्तान پاکِستان नाम का यह गांव बिहार के उत्तर-पूर्व में स्थित पूर्णिया जिले के जिला मुख्यालय पूर्णिया शहर से करीब 30 किलोमीटर दूर श्रीनगर प्रखंड के सिंघिया पंचायत में आता है। गांव 'पाकिस्तान' में 250 से ज्यादा लोग निवास करते हैं और यहां 100 से अधिक मतदाता हैं। सबसे मजेदार यह है कि इस गांव में मुस्लिम समुदाय का एक भी घर नहीं है। सभी परिवार संथाल आदिवासियों के हैं। इस पाकिस्तान में एक भी मस्जिद नहीं है। सरकारी रिकार्ड में भी इस गांव का नाम पाकिस्तान है। 1947 में विभाजन के तुरंत बाद ही इसका नाम पाकिस्तान रख दिया गया था। इस गांव में रहने वाले अधिकांश मुस्लिमों ने बंटवारे के समय पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) जाना पसंद किया था, उनकी याद में इस गांव का नाम पाकिस्तान दे दिया। इस पाकिस्तान में गरीबी और निरक्षरता है। 31.51 प्रतिशत साक्षरता वाले पूर्णिया जिले के इस गांव में शायद ही कोई साक्षर मिल जाए। गांव तक न तो सड़क है न ही कोई स्कूल या अस्पताल। .

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पाकिस्तानी संविधान का पहला संशोधन

पाकिस्तान के संविधान का पहला संशोधन दस्तावेजों में आधिकारिक तौर पर संविधान (पहला संशोधन) अधिनियम, 1974 कहा जाता है। यह संशोधन 4 मई 1974 को लागू हुई। इस संशोधन की रो से संविधान पाकिस्तान के अनुच्छेद 1, 8, 17, 61, 101, 193, 199, 200, 209, 212, 250, 260 और 272 में जबकि संविधान पाकिस्तान के पहले कार्यक्रम में परिवर्तन की गईं। इस संशोधन के बाद पाकिस्तान सीमाओं ाज़सर नौ निर्धारित किया गया और पूर्वी पाकिस्तान के संदर्भ को पाकिस्तान से बांग्लादेश के रूप में स्वतंत्र राज्य स्वीकार करने के बाद हटा दिया गया। .

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पाकुन्दिय़ा उपज़िला

पाकुन्दिय़ा उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह ढाका विभाग के किशोरगंज ज़िले का एक उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका के निकट अवस्थित है। .

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पितृ दिवस

फादर्स डे पिताओं के सम्मान में एक व्यापक रूप से मनाया जाने वाला पर्व हैं जिसमे पितृत्व (फादरहुड), पितृत्व-बंधन तथा समाज में पिताओं के प्रभाव को समारोह पूर्वक मनाया जाता है। अनेक देशों में इसे जून के तीसरे रविवार, तथा बाकी देशों में अन्य दिन मनाया जाता है। यह माता के सम्मान हेतु मनाये जाने वाले मदर्स डे(मातृ-दिवस) का पूरक है। .

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पिरोजपुर सदर उपज़िला

पिरोजपुर सदर उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह उपज़िला पिरोजपुर जाला का ज़िला सदर यानी प्रशासनिक मुख्यालय है। यह बरिशाल विभाग के पिरोजपुर ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल ६ उपज़िले हैं, और मुख्यालय पिरोजपुर सदर उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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पुठिय़ा उपज़िला

पुठिय़ा उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह राजशाही विभाग के राजशाही ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 9 उपज़िले हैं। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से पूर्व की दिशा में अवस्थित है। .

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प्नार भाषा

प्नार (Pnar), पनार, जयंतिया (Jaintia) या सिन्तेंग (Synteng) भारत के पूर्वोत्तरी मेघालय राज्य व बांग्लादेश के कुछ पड़ोसी क्षेत्रों में बोली जाने वाली ऑस्ट्रो-एशियाई भाषा-परिवार की खसिक शाखा की एक भाषा है। माना जाता है कि यह आदि-खसी भाषा की सबसे समीपी जीवित भाषा है। .

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प्याज

हरीप्याज प्याज प्याज़ एक वनस्पति है जिसका कन्द सब्ज़ी के रूप में प्रयोग किया जाता है। भारत में महाराष्ट्र में प्याज़ की खेती सबसे ज्यादा होती है। यहाँ साल मे दो बार प्याज़ की फ़सल होती है - एक नवम्बर में और दूसरी मई के महीने के क़रीब होती है। प्याज़ भारत से कई देशों में निर्यात होता है, जैसे कि नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश, इत्यादि। प्याज़ की फ़सल कर्नाटक, गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल मध्य प्रदेश जैसी जगहों पर अलग-अलग समय पर तैयार होती है। विश्व में प्याज 1,789 हजार हेक्टर क्षेत्रफल में उगाई जाती हैं, जिससे 25,387 हजार मी.

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प्रतापादित्य

प्रतापादित्य (1561-1611 ई) येशोर (जेशोर) के राजा तथा भूस्वामी थे। उन्होने मुगलों के विरुद्ध युद्ध किया। अपने चरमोत्कर्ष के समय उनका राज्य वर्तमान पश्चिम बंगाल के नदिया, उत्तर चौबीस परगना और दक्षिण चौबीस परगना जिलों सहित वर्तमान बांग्लादेश में उत्तर में कुश्टिया जिले से लेकर पूर्व में बड़ीसाल, सुन्दरबन तथा दक्षिण में बंगाल की खाड़ी तक फैला हुआ था। .

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प्रधानमंत्री (टीवी सीरीज)

प्रधानमंत्री टीवी शो की 2013 में, शेखर कपूर ने एबीपी न्यूज़ पर मेजबानी की। इस कार्यक्रम में भारतीय की रियासतों के विलय से लेकर देश के अलग-अलग प्रधानमंत्री चुनने की पूरी कहानी है। यह 13 जुलाई, 2013 को प्रीमियर हुआ। इसका उद्देश्य भारतीय इतिहास के तथ्यों को कभी भी पहले कभी नहीं देखा गया है। साप्ताहिक कार्यक्रम भारत के इतिहास को 1 9 47 से वर्तमान दिन तक का इतिहास देता है। टीवी श्रृंखला प्रसिद्ध फिल्म निर्माता, अभिनेता और मेजबान शेखर कपूर द्वारा होस्ट की गई है और निर्देशित हैं पुनीत शर्मा। यह पिछले 65 वर्षों में 13 प्रधान मंत्रियों के कार्यकाल के दौरान देश में बदलाव पेश करने का एक अनूठा प्रयास है। प्रधानमंत्रियों ने हर शनिवार को 10 बजे प्रसारित किया। राखी पपिया जोशी और सोहन ठाकुर निर्देशक काट रहे हैं। श्रृंखला ने सलमा सुल्तान द्वारा दूरदर्शन पर इंदिरा गांधी की मौत के प्रसारण का प्रसारण प्रसारित किया। प्रारंभ में 23 एपिसोड के लिए संकल्पना की गयी, प्रधानमंत्रि को 4 जनवरी 2014 को प्रसारित अंतिम एपिसोड के साथ 26 एपिसोड में बढ़ा दिया गया था। इस शो को पहले आइडिया ऑफ़ इंडिया का अफवाह माना गया था। प्रधानमंत्रि अब बांग्ला में 14 दिसंबर 2013 को एबीपी आनंद पर फिर से प्रसारित किया गया है, जिसमें बंगाली अभिनेता धृतिमन चटर्जी द्वारा होस्ट किया गया है और एबीपी माहा पर मराठी भाषा में सिंहासन के नाम से दोबारा प्रसारण किया गया है और 23 नवम्बर 2013 को मराठी अभिनेता विक्रम गोखले द्वारा होस्ट किया गया। .

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प्रधानमंत्री कार्यालय (बांग्लादेश)

गणप्रजातंत्री बांग्लादेश का प्रधानमंत्री कर्यालय या सहजतः प्रधानमंत्री कार्यालय(প্রধানমন্ত্রীর কার্যালয়, उच्चारण:प्रोधानमोन्त्रीर् कार्एयालाॅयो, Prime Minister's Office (PMO), प्राइम मिनिस्टरस् ऑफिस (पीएमओ)), एक सरकारी प्रशासनिक कार्यालय है जो ढाका महानगर के व्यस्ततम् क्षेत्र तेजगाँव में स्थित है। यह बांग्लादेश के/की प्रधानमंत्री की व्यक्तिगत अधिकारिणी है, जिसे अकसर, कई मायनों में सरकार के एक मंत्रालय के रूप में भी देखा जाता है। इसकी जिम्मेदारी, सरकार के अन्य मंत्रालयी कार्यालयों के बीच विभिन्न मुद्दों पर समन्वयक संबंध बरकरार रखना। यह प्रधानमंत्री को कार्यकारिणी, सुरक्षा व अन्य प्रकार के सहयोग प्रदान करती है एवं प्रधानमंत्री को अपने दैनिक कार्यों में सहायता करती है। यह गुप्त मामलों (आसूचना) व गैर सरकारी संगठनों को नियंत्रित करता है, और प्रोटोकॉल(नवाचार) एवं समारोहों की व्यवस्था भी करता है। अन्य ऐसे भवनों के विरुद्ध, बांग्लादेश के/की प्रधानमंत्री का यह कार्यालय केवल कार्यालय ही है, उनका निवासी स्थान नहीं। प्रधानमंत्री का आधिकारिक निवास, ढाका के शेर-ए-बांग्ला नगर का गणभवन है। .

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प्रफुल्ल चाकी

प्रफुल्ल चाकी क्रांतिकारी प्रफुल्ल चाकी (बांग्ला: প্রফুল্ল চাকী) (१० दिसंबर १८८८ - १ मई १९०८) का नाम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में अत्यंत सम्मान के साथ लिया जाता है। प्रफुल्ल का जन्म उत्तरी बंगाल के बोगरा जिला (अब बांग्लादेश में स्थित) के बिहारी गाँव में हुआ था। जब प्रफुल्ल दो वर्ष के थे तभी उनके पिता जी का निधन हो गया। उनकी माता ने अत्यंत कठिनाई से प्रफुल्ल का पालन पोषण किया। विद्यार्थी जीवन में ही प्रफुल्ल का परिचय स्वामी महेश्वरानन्द द्वारा स्थापित गुप्त क्रांतिकारी संगठन से हुआ। प्रफुल्ल ने स्वामी विवेकानंद के साहित्य का अध्ययन किया और वे उससे बहुत प्रभावित हुए। अनेक क्रांतिकारियों के विचारों का भी प्रफुल्ल ने अध्ययन किया इससे उनके अन्दर देश को स्वतंत्र कराने की भावना बलवती हो गई। बंगाल विभाजन के समय अनेक लोग इसके विरोध में उठ खड़े हुए। अनेक विद्यार्थियों ने भी इस आन्दोलन में बढ़-चढ़कर भाग लिया। प्रफुल्ल ने भी इस आन्दोलन में भाग लिया। वे उस समय रंगपुर जिला स्कूल में कक्षा ९ के छात्र थे। प्रफुल्ल को आन्दोलन में भाग लेने के कारण उनके विद्यालय से निकाल दिया गया। इसके बाद प्रफुल्ल का सम्पर्क क्रांतिकारियों की युगान्तर पार्टी से हुआ। .

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प्राकृतिक चिकित्सा का इतिहास

प्राकृतिक चिकित्सा का इतिहास उतना ही पुराना है जितना स्वयं प्रकृति। यह चिकित्सा विज्ञान आज की सभी चिकित्सा प्राणालियों से पुराना है। अथवा यह भी कहा जा सकता है कि यह दूसरी चिकित्सा पद्धतियों कि जननी है। इसका वर्णन पौराणिक ग्रन्थों एवं वेदों में मिलता है, अर्थात वैदिक काल के बाद पौराणिक काल में भी यह पद्धति प्रचलित थी। आधुनिक युग में डॉ॰ ईसाक जेनिग्स (Dr. Isaac Jennings) ने अमेरिका में 1788 में प्राकृतिक चिकित्सा का उपयोग आरम्भ कर दिया था। जोहन बेस्पले ने भी ठण्डे पानी के स्नान एवं पानी पीने की विधियों से उपचार देना प्रारम्भ किया था। महाबग्ग नामक बोध ग्रन्थ में वर्णन आता है कि एक दिन भगवान बुद्ध के एक शिष्य को सांप ने काट लिया तो उस समय विष के नाश के लिए भगवान बुद्ध ने चिकनी मिट्टी, गोबर, मूत्र आदि को प्रयोग करवाया था और दूसरे भिक्षु के बीमार पड़ने पर भाप स्नान व उष्ण गर्म व ठण्डे जल के स्नान द्वारा निरोग किये जाने का वर्णन 2500 वर्ष पुरानी उपरोक्त घटना से सिद्ध होता है। प्राकृतिक चिकित्सा के साथ-2 योग एवं आसानों का प्रयोग शारीरिक एवं आध्यात्मिक सुधारों के लिये 5000 हजारों वर्षों से प्रचलन में आया है। पतंजलि का योगसूत्र इसका एक प्रामाणिक ग्रन्थ है इसका प्रचलन केवल भारत में ही नहीं अपितु विदेशों में भी है। प्राकृतिक चिकित्सा का विकास (अपने पुराने इतिहास के साथ) प्रायः लुप्त जैसा हो गया था। आधुनिक चिकित्सा प्राणालियों के आगमन के फलस्वरूप इस प्रणाली को भूलना स्वाभाविक भी था। इस प्राकृतिक चिकित्सा को दोबारा प्रतिष्ठित करने की मांग उठाने वाले मुख्य चिकित्सकों में बड़े नाम पाश्चातय देशों के एलोपैथिक चिकित्सकों का है। ये वो प्रभावशाली व्यक्ति थे जो औषधि विज्ञान का प्रयोग करते-2 थक चुके थे और स्वयं रोगी होने के बाद निरोग होने में असहाय होते जा रहे थे। उन्होने स्वयं पर प्राकृतिक चिकित्सा के प्रयोग करते हुए स्वयं को स्वस्थ किया और अपने शेष जीवन में इसी चिकित्सा पद्धति द्वारा अनेकों असाध्य रोगियों को उपचार करते हुए इस चिकित्सा पद्धति को दुबारा स्थापित करने की शुरूआत की। इन्होने जीवन यापन तथा रोग उपचार को अधिक तर्कसंगत विधियों द्वारा किये जाने का शुभारम्भ किया। प्राकृतिक चिकित्सा संसार मे प्रचलित सभी चिकित्सा प्रणाली से पुरानी है आदिकाल के ग्रंथों मे जल चिकित्सा व उपवास चिकित्सा का उल्लेख मिलता है पुराण काल मे (उपवास)को लोग अचूक चिकित्सा माना करते थे .

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प्राकृतिक आपदा

एक प्राकृतिक आपदा एक प्राकृतिक जोखिम (natural hazard) का परिणाम है (जैसे की ज्वालामुखी विस्फोट (volcanic eruption), भूकंप, या भूस्खलन (landslide) जो कि मानव गतिविधियों को प्रभावित करता है। मानव दुर्बलताओं को उचित योजना और आपातकालीन प्रबंधन (emergency management) का आभाव और बढ़ा देता है, जिसकी वजह से आर्थिक, मानवीय और पर्यावरण को नुकसान पहुँचता है। परिणाम स्वरुप होने वाली हानि निर्भर करती है जनसँख्या की आपदा को बढ़ावा देने या विरोध करने की क्षमता पर, अर्थात उनके लचीलेपन पर। ये समझ केंद्रित है इस विचार में: "जब जोखिम और दुर्बलता (vulnerability) का मिलन होता है तब दुर्घटनाएं घटती हैं". जिन इलाकों में दुर्बलताएं निहित न हों वहां पर एक प्राकृतिक जोखिम कभी भी एक प्राकृतिक आपदा में तब्दील नहीं हो सकता है, उदहारण स्वरुप, निर्जन प्रदेश में एक प्रबल भूकंप का आना.बिना मानव की भागीदारी के घटनाएँ अपने आप जोखिम या आपदा नहीं बनती हैं, इसके फलस्वरूप प्राकृतिक शब्द को विवादित बताया गया है। .

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प्रीतिलता वादेदार

प्रीतिलता वादेदार (बांग्ला: প্রীতিলতা ওয়াদ্দেদার) (5 मई 1911 – 23 सितम्बर 1932) भारतीय स्वतंत्रता संगाम की महान क्रान्तिकारिणी थीं। वे एक मेधावी छात्रा तथा निर्भीक लेखिका भी थी। वे निडर होकर लेख लिखती थी। .

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पैसा

पैसा भारत की राष्ट्रीय मुद्रा रुपया का सौवा हिस्सा है। यह नाम बांग्लादेश, पाकिस्तान, नेपाल में भी है। यह बांग्लादेश के अलावा सभी देशों में रुपये के भाग होता है। जबकि यह बांग्लादेश में टका इसके भाग का होता है। .

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पूड़ी

पूरी या वास्तविक नाम पूड़ी (बहुवचन: पूड़ियाँ) एक एशियाई अखमीरी रोटी है जिसे भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश समेत दक्षिण एशिया के कई देशों में नाश्ते या हल्के भोजन के रूप में खाया जाता है। पुड़ी को सबसे अधिक नाश्ते में परोसा जाता है, इसके अतिरिक्त यह विशेष या औपचारिक समारोहों में परोसी जाती है। कभी कभी प्रसाद के रूप में भी पूड़ियाँ बाँटी जाती हैं। जॉर्जियाई भाषा में रोटी को पूड़ी कहा जाता है। .

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पूनम यादव (क्रिकेटर)

पूनम यादव (जन्म 24 अगस्त 1 99 1) एक भारतीय क्रिकेटर है जो भारतीय महिला क्रिकेट टीम के लिए खेलती है।   उन्होंने 5 अप्रैल 2013 को बांग्लादेश के खिलाफ महिला ट्वेंटी -20 इंटरनेशनल (डब्ल्यूटी20आई) मैच में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपना पहला प्रदर्शन किया। वह घरेलू क्रिकेट में मध्य क्षेत्र, उत्तर प्रदेश और रेलवे के लिए खेलती हैं। .

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पूर्वधला उपज़िला

पूर्वधला उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह मय़मनसिंह विभाग के नेत्रकोना ज़िले का एक उपजिला है। इसमें, ज़िला सदर समेत, कुल १० उपज़िले हैं। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उत्तर की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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पूर्वोत्तर भारत

पूर्वोत्तर भारत से आशय भारत के सर्वाधिक पूर्वी क्षेत्रों से है जिसमें एक साथ जुड़े 'सात बहनों' के नाम से प्रसिद्ध राज्य, सिक्किम तथा उत्तरी बंगाल के कुछ भाग (दार्जीलिंग, जलपाईगुड़ी और कूच बिहार के जिले) शामिल हैं। पूर्वोत्तर भारत सांस्कृतिक दृष्टि से भारत के अन्य राज्यों से कुछ भिन्न है। भाषा की दृष्टि से यह क्षेत्र तिब्बती-बर्मी भाषाओँ के अधिक प्रचलन के कारण अलग से पहचाना जाता है। इस क्षेत्र में वह दृढ़ जातीय संस्कृति व्याप्त है जो संस्कृतीकरण के प्रभाव से बची रह गई थी। इसमें विशिष्ट श्रेणी के मान्यता प्राप्त आठ राज्य भी हैं। इन आठ राज्यों के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए 1971 में पूर्वोतर परिषद (नॉर्थ ईस्टर्न काउंसिल / NEC) का गठन एक केन्द्रीय संस्था के रूप में किया गया था। नॉर्थ ईस्टर्न डेवेलपमेंट फाइनेंस कारपोरेशन लिमिटेड (NEDFi) का गठन 9 अगस्त 1995 को किया गया था और उत्तरपूर्वीय क्षेत्र विकास मंत्रालय (DoNER) का गठन सितम्बर 2001 में किया गया था। उत्तरपूर्वीय राज्यों में सिक्किम 1947 में एक भारतीय संरक्षित राज्य और उसके बाद 1975 में एक पूर्ण राज्य बन गया। पश्चिम बंगाल में स्थित सिलीगुड़ी कॉरिडोर जिसकी औसत चौड़ाई 21 किलोमीटर से 40 किलोमीटर के बीच है, उत्तरपूर्वीय क्षेत्र को मुख्य भारतीय भू-भाग से जोड़ता है। इसकी सीमा का 2000 किलोमीटर से भी अधिक क्षेत्र अन्य देशों: नेपाल, चाइना, भूटान, बर्मा और बांग्लादेश के साथ लगती है। .

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पूर्वोत्तर सीमा रेलवे

पूर्वोत्तर सीमा रेलवे (Northeast Frontier Railway), रेलवे बोर्ड, मत्रांलय के अधीन कार्यरत 16 जोनल रेल में से एक है। जैसा कि नाम है “पूर्वोत्तर सीमा रेल” भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में स्थित सभी राज्य बिहार, पश्चिम बंगाल, असम, नगालैंड, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम तथा त्रिपुरा को स्पर्श करता है। पू0 सी0 रेल भारत की सेवा में समर्पित है और इस क्षेत्र की विशेष आवश्यकताओं को पूरा करने की सच्ची आश ने इस रेल के निष्पादन को सुधारने में काफी मदद की है। बंगलादेश के साथ अंर्तबदल सुविधा तथा नेपाल और भूटान के लिए रेल शीर्ष के रूप में कार्य करने के अलावा पू0 सी0 रेल कुल 10 राज्यों की सेवा करती है। .

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पूर्वी पाकिस्तान

पूर्वी पाकिस्तान(পূর্ব পাকিস্তান,; مشرقی پاکستان,; East Pakistan, ईस्ट पाकिस्तान), एक इकाई व्यवस्था के तहत, तत्कालीन पाकिस्तान की पूर्वी इकाई थी। यह वर्तमान बांग्लादेश के स्थान पर, १९५५ से १९७१ तक विद्यमान था। इसकी राजधनी ढाका थी, एवं राजभाषा बांग्ला थी। पूर्वी पाकिस्तान का कुल भूक्षेत्र, १,४७,५७० वर्ग की•मी• था। यह पूर्व, उत्तर व पश्चिम दिशाओं में भारत से घिरा हुआ था, और दक्षिण की ओर, बंगाल की खाड़ी के तट पर था। साथ ही पूर्व में यह एक छोटी सी सीमा रेखा, बर्मा के साथ साझा करता था। यह पाकिस्तान के सबसे बड़े प्रंशन में से एक रहा है, और अर्थव्यवस्था, राजनैतिक प्रतिनिधितिव व जनसंख्या के आधार पर, तत्कालीन पाकिस्तान का सबसे बड़ा राज्य था। अंत्यतः, १६ दिसंबर १९७१ को, नौ महीनों तक चले युद्ध के पश्चात्, पूर्वी पाकिस्तान ने बांग्लादेश के रूप में स्वतंत्रता घोषित कर दी। .

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पूर्वी बंगाल

पूर्वी बंगाल बंग भंग के समय बंगाल के पूर्वी भाग के लिए प्रयुक्त शब्द है। १९४७ में स्वतंत्रता के बाद यह भाग पाकिस्तान का भाग बना और वर्तमान में इसे बांग्लादेश के नाम से जाना जाता है। .

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पेकुय़ा उपज़िला

पेकुय़ा उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह चट्टग्राम विभाग के काॅक्सबाजार ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 8 उपज़िले हैं, और मुख्यालय काॅक्सबाजार सदर उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण-पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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पोद्दार

पोद्दार भारत और बांग्लादेश के मूल निवासी एक उपनाम है। ये मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल, बिहार, राजस्थान और पंजाब में पाए जाते है। बांग्लादेश में, पोद्दार मुस्लिम गुटों के होते हैं, आमतौर पर चौधरी मुसलमानों के रूप में निर्दिष्ट किया जाता है। श्रेणी:उपनाम श्रेणी:भारतीय उपनाम.

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पीठा

पीठा(बंगाली: পিঠে, ओडिया: ପିଠା, बंगाली-असमिया: পিঠা piṭha, संस्कृत: पिष्टा; अपूप) भारतीय उपमहाद्वीप के पूर्वी क्षेत्रों से चावल केक का एक प्रकार है, जिसमें बांग्लादेश है औरभारत में आम तौर पर ओडिशा, असम, पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार और पूर्वोत्तर क्षेत्र के पूर्वी राज्य भी शामिल है। पीठा आम तौर पर चावल के आटे से बने होते हैं, हालांकि गेहूं के आटे से भी पीठे बनाये जाते है। .

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पीरगञ्ज उपज़िला

पीरगंज उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह रंगपुर विभाग के रंगपुर ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 8 उपज़िले हैं, और मुख्यालय रंगपुर सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उत्तर की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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पीरगाछा उपज़िला

पीरगाछा उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह रंगपुर विभाग के रंगपुर ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 8 उपज़िले हैं, और मुख्यालय रंगपुर सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उत्तर की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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फटिकछड़ि उपज़िला

फटिकछड़ि उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह चट्टग्राम विभाग के चट्टग्राम ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 22 उपज़िले हैं। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण-पूर्व की दिशा में चट्टग्राम नगर के निकट अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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फरिदपुर सदर उपज़िला

फरिदपुर सदर उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह ढाका विभाग के फरिदपुर ज़िले का एक उपजिला है। यह उपज़िला फरिदपुर जिला का ज़िला सदर यानी प्रशासनिक मुख्यालय है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका के निकट अवस्थित है। .

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फरिदगञ्ज उपज़िला

फरिदगंज उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह चट्टग्राम विभाग के चाँदपुर ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 8 उपज़िले हैं, और मुख्यालय चाँदपुर सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण-पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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फरक्का परियोजना

यह भारत की एक प्रमुख नदी घाटी परियोजना हैं। गंगा के चरम उत्कर्ष रूप; फरक्का बैराज, जहां से एक धारा कोलकाता को हुगली बन कर जाती है। फ़रक्का बांध (बैराज) भारत के पश्चिम बंगाल प्रान्त में स्थित गंगा नदी पर बना एक बांध है। यह बांध बांगलादेश की सीमा से मात्र १० किलो मीटर की दूरी पर स्थित है। इस बांध को १९७४-७५ में हिन्दुस्तान कन्स्ट्रक्शन कंपनी ने बनाया था। इस बांध का निर्माण कोलकाता बंदरगाह को गाद (silt) से मुक्त कराने के लिये किया गया था जो की १९५० से १९६० तक इस बंदरगाह की प्रमुख समस्या थी। कोलकाता हुगली नदी पर स्थित एक प्रमुख बंदरगाह है। ग्रीष्म ऋतु में हुगली नदी के बहाव को निरंतर बनाये रखने के लिये गंगा नदी की के पानी के एक बड़े हिस्से को फ़रक्का बांध के द्वारा हुगली नदी में मोड़ दिया जाता है। इस पानी के वितरण के कारण बांगलादेश एवम भारत में लंबा विवाद चला। गंगा नदी के प्रवाह की कमी के कारण बांगलादेश जाने वाले पानी की लवणता बड़ जाती थी और मछ्ली पालन, पेयजल, स्वास्थ और नौकायान प्रभावित हो जाता था। मिट्टी में नमी की कमी के चलते बांगलादेश के एक बड़े क्षेत्र की भूमी बंजर हो गयी थी। इस विवाद को सुलझाने के लिये दोनो सरकारो ने आपस में समझौता करते हुए फ़रक्का जल संधि की रूप रेखा रखी। .

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फरीदपुर उपज़िला

फरीदपुर उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह राजशाही विभाग के पाबना ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 10 उपज़िले हैं, और मुख्यालय पाबना सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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फ़ख़रुद्दीन अहमद

फकरुद्दीन अहमद, (बांग्ला:ফাকরুদ্দীন আহমেদ, जन्म 1 मई 1940) एक बांग्लादेशी अर्थशास्त्री, नौकरशाह और बांग्लादेश बैंक (बांग्लादेश का केंद्रीय बैंक) के गवर्नर थे। 12 जनवरी 2007 को उन्हें, राजनीतिक संकट के बीच, निष्पक्ष अंतरिम सरकार का मुख्य सलाहकार नियुक्त किया गया था। वे इस पद पर तकरीबन 2 वर्ष तक विराजमान रहे, जोकि साधारण कार्यकाल से कहीं अधिक है। तत्पश्चात 29 दिसंबर 2008 को साधारण चुनाव घोषित किए गए और अवामी लीग सत्ता पर काबिज हुई। .

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फ़ेञ्चुगञ्ज उपज़िला

फ़ेंचुगंज उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह सिलेट विभाग के सिलेट ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 13 उपज़िले हैं, और मुख्यालय सिलेट सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उत्तर-पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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फालूदा

फालूदा भारतीय उपमहाद्वीप में एक ठंडी मिठाई के रूप में बहुत लोकप्रिय है। परंपरागत रूप से यह गुलाब सिरप, सेवई, मीठी तुलसी के बीज और दूध के साथ जेली के टुकड़ों को मिलाकर बनाया जाता है, जो अक्सर आइसक्रीम के एक स्कूप के साथ सबसे ऊपर रहता है। फालूदा की उत्पत्ति पारस में हुई थी और यह भारतीय उपमहाद्वीप में लोकप्रिय है। वहीं कहा जाता है कि यह मिठाई 16 वीं से 18 वीं शताब्दी में भारत में बसने वाले कई मुस्लिम व्यापारियों और राजवंशों के साथ भारत आई थी। इसे मुगल साम्राज्य ने काफी बढ़ावा दिया। .

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फजले कबीर

फजले कबीर (जन्म:4 जुलाई, 1955) बांग्लादेश के केंद्रीय बैंक ‘बांग्लादेश बैंक’ के गवर्नर हैं। इसके पूर्व वे सोनाली बैंक के निदेशक मंडल के अध्यक्ष थे। उन्हें बांग्लादेश बैंक के पूर्व गवर्नर अतिउर रहमान के पद से इस्तीफा देने के उपरांत बांग्लादेश बैंक का गवर्नर नियुक्त किया गया। न्यूयार्क स्थित फेडरल बैंक में बांग्लादेश बैंक के खाते से हैकर्स द्वारा लगभग 81 मिलियन की चोरी की घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अतिउर रहमान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। .

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फकिरहाट उपज़िला

फकिरहाट उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह खुलना विभाग के बगेरहाट ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल ९ उपज़िले हैं, और मुख्यालय बगेरहाट सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण-पश्चिम की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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फुलतला उपज़िला

फुलतला उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह खुलना विभाग के खुलना ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, कुल 15 उपज़िले हैं। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण-पश्चिम की दिशा में अवस्थित है। .

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फुलबाड़िय़ा उपज़िला

फुलबाड़िय़ा उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह मय़मनसिंह विभाग के जमालपुर ज़िले का एक उपजिला है। इसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 7 उपज़िले हैं। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उत्तर की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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फुलबाड़ी उपज़िला (दिनाजपुर)

फुलबाड़ी उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह रंगपुर विभाग के दिनाजपुर ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल १३ उपज़िले हैं, और मुख्यालय दिनाजपुर सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उत्तर की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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फुलबाड़ी उपज़िला (कुड़िग्राम)

फुलबाड़ी उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह रंगपुर विभाग के कुड़िग्राम ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 9 उपज़िले हैं, और मुख्यालय कुड़िग्राम सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उत्तर की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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फुलगाजी उपज़िला

फुलगाजी उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह चट्टग्राम विभाग के फेनी ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 6 उपज़िले हैं, और मुख्यालय फेनी सदर उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण-पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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फुलछड़ि उपज़िला

फुलछड़ि उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह रंगपुर विभाग के गाइबान्धा ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 7 उपज़िले हैं, और मुख्यालय गाइबान्धा सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उत्तर की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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फुजिता पैमाना

फुजिता पैमाना (एफ-स्केल) या फुजिता-पियर्सन स्केल बवंडरों के शक्ति मापन का एक रेटिंग पैमाना है। इसका आधार मानव निर्मित संरचनाओं व वनस्पति को हुई क्षति की जाँच है। फुजिता पैमाने की आधिकारिक श्रेणी का आकलन मौसमविद व इंजीनियर कई तथ्यों के अध्ययन के बाद करते हैं जैसे कि जमीनी व हवाई सर्वेक्षण तथा परिस्थितियों के अनुसार धरती पर पड़े बवंडर के घुमाव वृत्त, राडार द्वारा प्राप्त जानकारी प्रत्यक्षदर्शियों के साक्षात्कार मीडिया की ख़बरें व क्षति की स्थिर व वीडियो तस्वीरें आदि.

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फूलपुर उपज़िला

फूलपुर उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह मय़मनसिंह विभाग के जमालपुर ज़िले का एक उपजिला है। इसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 7 उपज़िले हैं। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उत्तर की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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फेनी सदर उपज़िला

फेनी सदर उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह उपज़िला फेनी जाला का ज़िला सदर यानी प्रशासनिक मुख्यालय है। यह चट्टग्राम विभाग के फेनी ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 6 उपज़िले हैं, और मुख्यालय फेनी सदर उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण-पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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बटिय़ाघाटा उपज़िला

बटिय़ाघाटा उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह खुलना विभाग के खुलना ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, कुल 15 उपज़िले हैं। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण-पश्चिम की दिशा में अवस्थित है। .

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बड़लेखा उपज़िला

बड़लेखा उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह सिलेट विभाग के मौलवीबाजार ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 7 उपज़िले हैं, और मुख्यालय मौलवीबाजार सदर उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उत्तर-पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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बदरगञ्ज उपज़िला

बदरगंज उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह रंगपुर विभाग के रंगपुर ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 8 उपज़िले हैं, और मुख्यालय रंगपुर सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उत्तर की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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बदलगाछी उपज़िला

बदलगाछी उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह राजशाही विभाग के नओगाँ ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 11 उपज़िले हैं, और मुख्यालय नओगाँ सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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बद्रुल हैदर चौधरी

बद्रुल हैदर चौधरी एक बांग्लादेशी न्यायाधीश थे। वे बांग्लादेश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं, जोकी बांग्लादेश का सर्वोच्च न्यायिक पद है। उन्हें इस पद पर बांग्लादेश के राष्ट्रपति हुसैन मुहम्मद इरशाद द्वारा, परंपरानुसार, वरिष्ठता के आधार पर नियुक्ति किया गया था। .

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बनारीपाड़ा उपज़िला

बनारीपाड़ा उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह बरिशाल विभाग के बरिशाल ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल ६ उपज़िले हैं, और मुख्यालय बरिशाल सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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बन्दर उपज़िला

बन्दर उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह ढाका विभाग के नाराय़णगंज ज़िले का एक उपजिला है। यह उपज़िला नाराय़णगंज जिला का ज़िला सदर यानी प्रशासनिक मुख्यालय है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका के निकट अवस्थित है। .

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बराइग्राम उपज़िला

बराइग्राम उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह राजशाही विभाग के नाटोर ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 7 उपज़िले हैं, और मुख्यालय नाटोर सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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बरिशाल नगर निगम

बरिशाल सिटी कॉर्पोरेशन यानि बरिशाल नगर निगम, बांग्लादेश के बरिशाल नगर में आधारित एक स्वशासित पौरप्रशासन निकाय व निगम-ऐक्य है, जिसपर बांग्लादेश के बरिशाल नगर के प्रशासन और विकास तथा नागरिक सुविधाओं से संबंधित प्रभार निहित किये गए हैं। बरिशाल, बांग्लादेश के बरिशाल विभाग में स्थित, बांग्लादेश के बृहत्तम् नगरों में से एक है। इस निकाय की स्थापना बरिशाल के प्रशासन हेतु एक नगर पालिका के रूप में हुआ था, तत्पश्चात्, नगर के आकार और जनसंख्या में वृद्धि के मद्देनज़र इसे नगर निगम के स्तर पर उन्नतस्थ कर दिया गया। .

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बरिशाल सदर उपज़िला

बरिशाल सदर उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह उपज़िला बरिशाल जाला का ज़िला सदर यानी प्रशासनिक मुख्यालय है। यह बरिशाल विभाग के बरिशाल ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल ६ उपज़िले हैं, और मुख्यालय बरिशाल सदर उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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बरिशाल विभाग

बारीसाल बांग्लादेश का एक विभाग है इसका मुख्यालय बारीसाल है। इस उपक्षेत्र या प्रान्त में ६ जिले हैं। बरगुना, बारीसाल, भोला, झालोकटी, पतुआखाली, पीरोजपुर श्रेणी:बांग्लादेश के विभाग *.

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बरगुना सदर उपज़िला

बरगुना सदर उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह उपज़िला बरगुना जाला का ज़िला सदर यानी प्रशासनिक मुख्यालय है। यह बरिशाल विभाग के बरगुना ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल ६ उपज़िले हैं, और मुख्यालय बरगुना सदर उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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बरकल उपज़िला

बरकल उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह चट्टग्राम विभाग के रांगामाटि ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 10 उपज़िले हैं, और मुख्यालय रांगामाटि सदर उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण-पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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बरुरा उपज़िला

बरुरा उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह चट्टग्राम विभाग के कुमिल्ला ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 16 उपज़िले हैं। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण-पूर्व की दिशा में चट्टग्राम नगर के निकट अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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बलदेव सिंह (रक्षामंत्री)

बलदेव सिंह (11 जुलाई, 1902 -- 29 जून, 1961) भारत के स्वतन्त्रता सेनानी एवं सिख नेता थे। वे भारत के प्रथम रक्षामन्त्री बने। सरदार बलदेव सिंह का जन्म 11 जुलाई, 1902 को जाट-सिख परिवार में हुआ था। बलदेव सिंह ने अपनी शिक्षा अम्बाला में पूरी करके अमृतसर में अपने पिताजी के साथ उनके काम में हाथ बंटाना शुरू किया। औद्यौगिक प्रतिष्ठान थे। 1930 में सरदार बलदेव सिंह ने राजनीति में प्रवेश किया। उनके पिता इंदर सिंह उस समय देश में स्टील किंग के तौर पर जाने जाते थे और उनका रुतबा अमीर पंजाबियों में शुमार था। उनके जमशेदपुर (अब झारखंड) और पूर्वी बंगाल (अब बांग्लादेश) में बलदेव सिंह भारत की राजनीति में सक्रिय रूप से भाग लेते रहे और लंदन सम्मेलन सहित अंग्रेजों के साथ सभी महत्वपूर्ण वार्ता में उन्होंने सिखों का प्रतिनिधित्व किया। वह जून 1942 से सितंबर 1946 तक आजादी से पहले संयुक्त पंजाब सरकार में विकास मंत्री थे। रक्षामंत्री के रूप में उन्होंने देश के विभाजन के समय महत्वपूर्ण भूमिका निभाई साथ ही अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं भारत और पाकिस्तान के बीच सशस्त्र बलों के विभाजन व कश्मीरी घुसपैठ को रोकने में भी भूमिका निभाई थी। उस समय सबसे बड़ा मुद्दा था बटवारे के बाद उजड़कर आए लोगों को बसाना। होशियारपुर शहर के जोधामल रोड के साथ साथ वर्तमान राम कालोनी कैंप में शरणार्थी शिविर बनाए गए थे। बलदेव सिंह बतौर लोकसभा सदस्य रहते लोकसभा में शरणार्थियों की समस्याएं जोर-शोर से उठाते थे। श्रेणी:भारतीय स्वतंत्रता सेनानी.

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बलि प्रथा

बलि प्रथा मानव जाति में वंशानुगत चली आ रही एक सामाजिक प्रथा अर्थात सामाजिक व्यवस्था है। इस पारम्परिक व्यवस्था में मानव जाति द्वारा मानव समेत कई निर्दोष प्राणियों की हत्या यानि कत्ल कर दिया जाता है। विश्व में अनेक धर्म ऐसे हैं, जिनमें इस प्रथा का प्रचलन पाया जाता है। यह मनुष्य जाति द्वारा मात्र स्वार्थसिद्ध की व्यवस्था है, जिसे बलि-प्रथा कहते है। .

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बाटिक

बाटिक कला अपाई एक कपड़े पर बाटिक भारत की प्रमुख लोककलाओं में से एक है। यह वस्त्रों की छपाई की अत्यंत प्राचीन कला है और आज भी यह सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि श्रीलंका, बांग्लादेश, चीन, ईरान, द फिलीपींस, मलेशिया एवं थाइलैंड सहित पूरी दुनिया में बेहद लोकप्रिय है। .

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बाञ्छारामपुर उपज़िला

बांछारामपुर उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह चट्टग्राम विभाग के ब्राह्मणबाड़िय़ा ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 9 उपज़िले हैं, और मुख्यालय ब्राह्मणबाड़िय़ा सदर उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण-पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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बाँशखाली उपज़िला

बाँशखाली उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह चट्टग्राम विभाग के चट्टग्राम ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 22 उपज़िले हैं। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण-पूर्व की दिशा में चट्टग्राम नगर के निकट अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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बानिय़ाचङ् उपज़िला

बानिय़ाचं उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह सिलेट विभाग के हाबीगंज ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल ८ उपज़िले हैं, और मुख्यालय हाबीगंज सदर उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उत्तर-पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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बान्दरबान सदर उपज़िला

बन्दरबान सदर उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह उपज़िला बन्दरबान जाला का ज़िला सदर यानी प्रशासनिक मुख्यालय है। यह चट्टग्राम विभाग के बन्दरबान ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल ७ उपज़िले हैं, और मुख्यालय बन्दरबान सदर उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण-पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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बाब -ए- ख़ैबर

पश्चिम मुख करते हुए बाब ए'ख़ैबर की तसवीर बाब ए'ख़ैबर (باب خیبر) (या बाब ए-ख़ैबर या बाब-ए-ख़ैबर) Naveed Hussain 22 January 2012 Express Tribune Retrieved 29 May 2014 एक स्मारकनुमा द्वारगाह है जो पाकिस्तान के फाटा(संध-शासित क़बाइली इलाक़े) सूबे में विख्यात ख़ैबर दर्रे के प्रवेश स्थान पर स्थित है। यह जमरूद के क़िले के पास, दक्षीण-पूर्व की ओर जी॰टी॰ रोड(तेरख़म राजमार्ग वाले हिस्से) पर पेशावर से तक़रीबन 20 कि॰मी॰ की दूरी पर जमरूद कस्बे में स्थित है। .

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बाबुगंज उपज़िला

बाबुगंज उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह बरिशाल विभाग के बरिशाल ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल ६ उपज़िले हैं, और मुख्यालय बरिशाल सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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बामना उपज़िला

बामना उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह बरिशाल विभाग के बरगुना ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल ६ उपज़िले हैं, और मुख्यालय बरगुना सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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बारहसिंगा

बारहसिंगा या दलदल का मृग (Rucervus duvaucelii) हिरन, या हरिण, या हिरण की एक जाति है जो कि उत्तरी और मध्य भारत में, दक्षिणी-पश्चिम नेपाल में पाया जाता है। यह पाकिस्तान तथा बांग्लादेश में विलुप्त हो गया है। बारहसिंगा का सबसे विलक्षण अंग है उसके सींग। वयस्क नर में इसकी सींग की १०-१४ शाखाएँ होती हैं, हालांकि कुछ की तो २० तक की शाखाएँ पायी गई हैं। इसका नाम इन्ही शाखाओं की वजह से पड़ा है जिसका अर्थ होता है बारह सींग वाला।Prater, S. H. (1948) The book of Indian animals.

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बारहाट्टा उपज़िला

बारहाट्टा उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह मय़मनसिंह विभाग के नेत्रकोना ज़िले का एक उपजिला है। इसमें, ज़िला सदर समेत, कुल १० उपज़िले हैं। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उत्तर की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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बारोवारी

बारोवारी (बंगाली: বারোয়ারি) पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश में त्योहारों के अवसर पर जनता से एकत्रित किए गए चंदे के साथ आयोजित सामूहिक पूजा और उत्सव को कहते हैं। दुर्गा पूजा के दिनों में बंगाल-भर में कई मोहल्लों में बारोवारियाँ संगठित होती हैं। .

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बारीसाल डिवीजन क्रिकेट टीम

बारीसाल डिवीजन क्रिकेट टीम या बारीसाल ब्लेज़र्स एक बांग्लादेशी प्रथम श्रेणी की टीम है जो बांग्लादेश के सात प्रशासनिक क्षेत्रों में से एक, बारीसाल डिवीजन का प्रतिनिधित्व करती है।.

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बाल-श्रम

बाल-श्रम का मतलब ऐसे कार्य से है जिसमे की कार्य करने वाला व्यक्ति कानून द्वारा निर्धारित आयु सीमा से छोटा होता है। इस प्रथा को कई देशों और अंतर्राष्ट्रीय संघटनों ने शोषित करने वाली प्रथा माना है। अतीत में बाल श्रम का कई प्रकार से उपयोग किया जाता था, लेकिन सार्वभौमिक स्कूली शिक्षा के साथ औद्योगीकरण, काम करने की स्थिति में परिवर्तन तथा कामगारों श्रम अधिकार और बच्चों अधिकार की अवधारणाओं के चलते इसमे जनविवाद प्रवेश कर गया। बाल श्रम अभी भी कुछ देशों में आम है। .

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बालागंज उपज़िला

बालागंज उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह सिलेट विभाग के सिलेट ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 13 उपज़िले हैं, और मुख्यालय सिलेट सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उत्तर-पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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बालिय़ाडाङ्गी उपज़िला

बालिय़ाडांगी उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह रंगपुर विभाग के ठाकुरगाँओ ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 5 उपज़िले हैं, और मुख्यालय ठाकुरगाँओ सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उत्तर की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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बालिय़ाकान्दि उपज़िला

बालिय़ाकान्दि उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह ढाका विभाग के राजबाड़ी ज़िले का एक उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका के निकट अवस्थित है। .

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बासमती चावल

लाल बासमती चावल बासमती (Basmati,, باسمتى) भारत की लम्बे चावल की एक उत्कृष्ट किस्म है। इसका वैज्ञानिक नाम है ओराय्ज़ा सैटिवा। यह अपने खास स्वाद और मोहक खुशबू के लिये प्रसिद्ध है। इसका नाम बासमती अर्थात खुशबू वाली किस्म होता है। इसका दूसरा अर्थ कोमल या मुलायम चावल भी होता है। भारत इस किस्म का सबसे बड़ा उत्पादक है, जिसके बाद पाकिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश आते हैं। पारंपरिक बासमती पौधे लम्बे और पतले होते हैं। इनका तना तेज हवाएं भी सह नहीं सकता है। इनमें अपेक्षाकृत कम, परंतु उच्च श्रेणी की पैदावार होती है। यह अन्तर्राष्ट्रीय और भारतीय दोनों ही बाजारों में ऊँचे दामों पर बिकता है। बासमती के दाने अन्य दानों से काफी लम्बे होते हैं। पकने के बाद, ये आपस में लेसदार होकर चिपकते नहीं, बल्कि बिखरे हुए रहते हैं। यह चावल दो प्रकार का होता है:- श्वेत और भूरा। के अनुसार, बासमती चावल में मध्यम ग्लाइसेमिक सूचकांक ५६ से ६९ के बीच होता है, जो कि इसे मधुमेह रोगियों के लिये अन्य अनाजों और श्वेत आटे की अपेक्षा अधिक श्रेयस्कर बनाता है। .

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बासाइल उपज़िला

बासाइल उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह ढाका विभाग के टाङाइल ज़िले का एक उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका के निकट अवस्थित है। .

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बाहुबल उपज़िला

बाहुबल उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह सिलेट विभाग के हाबीगंज ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल ८ उपज़िले हैं, और मुख्यालय हाबीगंज सदर उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उत्तर-पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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बाजार विभाजन,लक्ष्य निर्धारण, और स्थिति निर्धारण

भौगोलिक विभाजन निर्माता बाजार को भौगोलिक तरह से विभाजित कर सकता है जैसे राष्ट्र,राज्य,जलवायु,देश,शहर आदि। भौगोलिक विभाजन जनसांख्यिकीय और भौगोलिक दोनों की सुचना रखता जिससे कंपनी की रुरेखा अच्छी कर सकें। जैसे मौसम का हम उदहारण ले सकते है निर्माता बारिश के मौसम में छाता और बारिश से सुरक्षित होने योग्य वस्तुऐं बेच सकता है राज्य हर राज्य का रेहन सहन अलग होता है इसलिए उत्पादक को भी उनके जरुरत को नजर में रखतें हुए ही विभाजन करना चाहिए।.

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बाजितपुर उपज़िला

बाजितपुर उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह ढाका विभाग के किशोरगंज ज़िले का एक उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका के निकट अवस्थित है। .

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बाघ

बाघ जंगल में रहने वाला मांसाहारी स्तनपायी पशु है। यह अपनी प्रजाति में सबसे बड़ा और ताकतवर पशु है। यह तिब्बत, श्रीलंका और अंडमान निकोबार द्वीप-समूह को छोड़कर एशिया के अन्य सभी भागों में पाया जाता है। यह भारत, नेपाल, भूटान, कोरिया, अफगानिस्तान और इंडोनेशिया में अधिक संख्या में पाया जाता है। इसके शरीर का रंग लाल और पीला का मिश्रण है। इस पर काले रंग की पट्टी पायी जाती है। वक्ष के भीतरी भाग और पाँव का रंग सफेद होता है। बाघ १३ फीट लम्बा और ३०० किलो वजनी हो सकता है। बाघ का वैज्ञानिक नाम पेंथेरा टिग्रिस है। यह भारत का राष्ट्रीय पशु भी है। बाघ शब्द संस्कृत के व्याघ्र का तदभव रूप है। .

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बाघा उपज़िला

बाघा उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह राजशाही विभाग के राजशाही ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 9 उपज़िले हैं। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से पूर्व की दिशा में अवस्थित है। .

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बाघारपाड़ा उपज़िला

बाघारपाड़ा उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह खुलना विभाग के यशोर ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 8 उपज़िले हैं, और मुख्यालय यशोर सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण-पश्चिम की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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बाघाइछड़ि उपज़िला

बाघाइछड़ि उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह चट्टग्राम विभाग के रांगामाटि ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 10 उपज़िले हैं, और मुख्यालय रांगामाटि सदर उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण-पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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बागमारा उपज़िला

बागमारा उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह राजशाही विभाग के राजशाही ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 9 उपज़िले हैं। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से पूर्व की दिशा में अवस्थित है। .

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बागातिपाड़ा उपज़िला

बागातिपाड़ा उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह राजशाही विभाग के नाटोर ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 7 उपज़िले हैं, और मुख्यालय नाटोर सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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बागेरहाट सदर उपज़िला

बागेरहाट सदर उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह उपज़िला बागेरहाट जिला का ज़िला सदर यानी प्रशासनिक मुख्यालय है। यह खुलना विभाग के बागेरहाट ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल ९ उपज़िले हैं, और मुख्यालय बागेरहाट सदर उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण-पश्चिम की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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बांसी नदी

कोई विवरण नहीं।

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बांग्ला भाषा आन्दोलन

२१ फ़रवरी १९५२ को ढाका में आयोजित विशाल प्रदर्शन २१ फरवरी १९५३ को ढाका विश्वविद्यालय की छात्राएँ बांग्ला भाषा के लिये शान्तिपूर्ण मार्च करते हुए बांग्ला भाषा आन्दोलन (१९५२) तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बांग्लादेश) में संघटित एक सांस्कृतिक एवं राजनैतिक आन्दोलन था। इसे 'भाषा आन्दोलन' भी कहते हैं। आन्दोलन की मांग थी कि बांग्ला भाषा को पाकिस्तान की एक आधिकारिक भाषा की मान्यता दी जाय तथा इसका उपयोग सरकारी कामकाज में, शिक्षा के माध्यम के रूप में, संचार माध्यमों में, मुद्रा तथा मुहर आदि पर जारी रखी जाय। इसके अलावा यह भी मांग थी कि बांग्ला भाषा को बांग्ला लिपि में ही लिखना जारी रखा जाय। यह आन्दोलन अन्ततः बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में परिणित हो गया। १९७१ में इसी के चलते भारत और पाकिस्तान में युद्ध हुआ और बांग्लादेश मुक्त हुआ। बांग्लादेश में २१ फ़रवरी को 'भाषा आन्दोलन दिवस' के रूप में याद किया जाता है तथा इस दिन राष्ट्रीय अवकाश रहता है। इस आन्दोलन तथा इसके शहीदों की स्मृति में ढाका मेडिकल कॉलेज के निकट 'शहीद मिनार' का निर्माण किया गया। .

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बांग्ला शब्दभण्डार

बांग्ला भाषा का शब्दभण्डार का मूल एवं आदि उत्स पालि एवं प्राकृत भाषाएँ हैं। बाद में बांग्ला भाषा में संस्कृत, फारसी, अरबी एवं विभिन्न भाषाओं से शब्द लिए गये। .

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बांग्ला सिनेमा

बांग्ला सिनेमा जो ढाका, बांग्लादेश में स्थित बंगाली भाषा का फिल्म उद्योग है। यह अक्सर 1970 के दशक के आरंभ से एक महत्वपूर्ण फिल्म उद्योग रहा है और इसे अक्सर ढेलीवुड (बंगाली ঢালিউড) के रूप में जाना जाता है। .

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बांग्लादेश त्रिकोणी सीरीज 2009-10

2009-10 में बांग्लादेश में त्रिकोणीय श्रृंखला आईडिया कप के लिए एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट टूर्नामेंट थी, जिसे 4 जनवरी से 13 जनवरी 2010 तक बांग्लादेश में आयोजित किया गया था। टूर्नामेंट में भारत, श्रीलंका और बांग्लादेश की राष्ट्रीय टीम शामिल थी। टूर्नामेंट 13 जनवरी 2010 को आयोजित होने वाले फाइनल मैच में भारत को हराकर श्रीलंका ने जीता था। .

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बांग्लादेश त्रिकोणीय सीरीज 2018

2017-18 बांग्लादेश त्रि-राष्ट्र श्रृंखला एक आगामी क्रिकेट टूर्नामेंट है जिसे जनवरी 2018 में होना है। यह बांग्लादेश, श्रीलंका और ज़िम्बाब्वे के बीच एक त्रिकोणीय श्रृंखला होगी, जिसमें सभी मैचों एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय (वनडे) के रूप में खेले गए थे। शेर-ए-बांग्ला राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम सभी मैच की मेजबानी करेगा, दोपहर से शुरू होने वाले प्रत्येक मैच के साथ। त्रिकोणीय श्रृंखला के बाद, श्रीलंका बांग्लादेश के खिलाफ दो टेस्ट मैच और दो ट्वेंटी-20 अंतरराष्ट्रीय (टी20ई) खेलेंगे। श्रीलंका-जिम्बाब्वे का खेल 17 जनवरी को शेरे बांग्ला नेशनल स्टेडियम में आयोजित 100 वें वनडे होगा और स्टेडियम 100 वनडे की मेजबानी करने के लिए छठे स्थान पर होगा। .

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बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी

यह बांग्लादेश का एक राजनीतिक दल है। श्रेणी:बांग्लादेश के राजनीतिक दल.

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बांग्लादेश प्रीमियर लीग

बांग्लादेश प्रीमियर लीग (बीपीएल, बीपीएल भी BRB के रूप में जाना जाता है) एक पेशेवर बांग्लादेशी ट्वेंटी-20 क्रिकेट लीग मताधिकार है। लीग 2012 में बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) द्वारा स्थापित किया गया था और बांग्लादेश में पेशेवर टी-20 क्रिकेट का उच्चतम स्तर है। अक्टूबर 2016 के रूप में, लीग के तीन संस्करणों के दौरान टूर्नामेंट के नियमों के उल्लंघन और मैच फिक्सिंग के आरोपों के कारण खेला गया है, प्रतिस्पर्धा नहीं है कि सभी छह फ्रेंचाइजी के निलंबन के बाद 2013-14 और 2014-15 के सीजन में लड़ा जा रहा है साथ 2012-13 सीजन। 2016-17 संस्करण के रूप में, लीग सात फ्रेंचाइजी के होते हैं। हर मौसम के साथ चैम्पियनशिप खेल आम तौर पर विजय दिवस से पहले दिन पर आयोजित, लगभग तीन सप्ताह के लिए रहता नवंबर और दिसंबर के दौरान खेला खेल के साथ। बीपीएल 2015 के मौसम के दौरान प्रति मैच औसत भीड़ के संबंध में सभी क्रिकेट लीग के बीच तीसरे उच्चतम औसत उपस्थिति है। 2016 में, बीपीएल दुनिया में दूसरा सबसे पीछा क्रिकेट लीग, दूसरी इंडियन प्रीमियर लीग के रूप में पता चला था। बीपीएल के ब्रांड मूल्यांकन के आसपास $500 मिलियन होने का अनुमान है। अक्टूबर 2016 के रूप में, मुशफिकुर रहीम जबकि केवन कूपर सबसे कैरियर विकेट (49) है लीग के इतिहास में सर्वाधिक रन (819) रन बनाए हैं। दो बीपीएल चैंपियनशिप के साथ, ढाका ग्लेडियेटर्स समाप्त टूर्नामेंट के सबसे सफल टीम है। मौजूदा चैंपियन कोमिल्ला विक्टोरिया, जो हार रहे हैं बारीसाल बुल्स फाइनल की आखिरी गेंद पर तीन विकेट से 2015 अंतिम। .

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बांग्लादेश बैंक

बांग्लादेश बैंक (বাংলাদেশ ব্যাংক) बांग्लादेश का केंद्रीय बैंक है और एशियाई क्लियरिंग यूनियन के सदस्य है। पिछले दिनों हैकरों ने इस बैंक से 8.1 करोड़ डॉलर यानी करीब 543 करोड़ रुपए की राशि निकाल ली थी। दुनिया में किसी बैंक से उड़ाई गई यह अब तक की सबसे बड़ी रकम है। इस घटना के बाद बांग्‍लादेश के केंद्रीय बैंक के प्रमुख अतीउर रहमान और उनके दो सहयोगियों ने अपने पद से इस्‍तीफा दे दिया था। यह चोरी न्‍यूयॉर्क स्थित फेडरल रिजर्व के अकाउंट से हुई है। यह राशि फॉरेन एक्‍सचेंज रिजर्व के तौर पर रखी गई थी। बांग्‍लादेश के पास मौजूदा समय में 27 अरब डॉलर का फॉरेन एक्‍सचेंज रिजर्व है। अतीउर रहमान के इस्तीफे के बाद फजले कबीर को नए गवर्नर के रूप में नियुक्त किया गया है। .

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बांग्लादेश मुक्ति युद्ध

बांग्लादेश का स्वतंत्रता संग्राम १९७१ में हुआ था, इसे 'मुक्ति संग्राम' भी कहते हैं। यह युद्ध वर्ष १९७१ में २५ मार्च से १६ दिसम्बर तक चला था। इस रक्तरंजित युद्ध के माध्यम सेे बांलादेश ने पाकिस्तान से स्वाधीनता प्राप्त की। 16 दिसम्बर सन् १९७१ को बांग्लादेश बना था। भारत की पाकिस्तान पर इस ऐतिहासिक जीत को विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है। पाकिस्तान पर यह जीत कई मायनों में ऐतिहासिक थी। भारत ने ९३ हजार पाकिस्तानी सैनिकों को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था। १९७१ के पहले बांलादेश, पाकिस्तान का एक प्रान्त था जिसका नाम 'पूर्वी पाकिस्तान' था जबकि वर्तमान पाकिस्तान को पश्चिमी पाकिस्तान कहते थे। कई सालों के संघर्ष और पाकिस्तान की सेना के अत्याचार और बांग्लाभाषियों के दमन के विरोध में पूर्वी पाकिस्तान के लोग सड़कों पर उतर आए थे। १९७१ में आज़ादी के आंदोलन को कुचलने के लिए पाकिस्तानी सेना ने पूर्वी पाकिस्तान के विद्रोह पर आमादा लोगों पर जमकर अत्याचार किए। लाखों लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया और अनगिनत महिलाओं की आबरू लूट ली गई। भारत ने पड़ोसी के नाते इस जुल्म का विरोध किया और क्रांतिकारियों की मदद की। इसका नतीजा यह हुआ कि भारत और पाकिस्तान के बीच सीधी जंग हुई। इस लड़ाई में भारत ने पाकिस्तान को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिए। इसके साथ ही दक्षिण एशिया में एक नए देश का उदय हुआ। .

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बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के समय महिलाओं के साथ बलात्कार

सन १९७१ के बांग्लादेश मुक्ति युद्ध के समय पाकिस्तान की सेना जमात ए इस्लामी के बंगाली रजकरों ने बांग्लादेश की २ से ४ लाख स्त्रियों के साथ बलात्कार किया। इसके लिये विधिवत उच्चस्तरीय योजना बनायी गयी थी और फतवा जारी किया गया था। श्रेणी:बांग्लादेश का इतिहास.

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बांग्लादेश में धर्म-निरपेक्षतावादियों पर हमले

2013 से बांग्लादेश में कई धर्म-निरपेक्षतावादी लेखकों, ब्लॉगरों और प्रकाशकों की हत्या हुई है, और कई हमलों में गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इन हमलों के लिए इस्लामी चरमपंथियों को ज़िम्मेदार माना जा रहा है। श्रेणी:बांग्लादेश श्रेणी:नास्तिकों का उत्पीड़न श्रेणी:मानवाधिकार हनन.

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बांग्लादेश में शहरों की सूची

बांग्लादेश में कुल चार मेट्रो शहर हैं और १०४ नगर निगम या म्युनिसिपैलिटी वाले शहर, जिन्हें वहाँ तीन श्रेणियों में विभाजित किया जाता है। बांग्लादेश के प्रमुख शहरों और कस्बों की सूची निम्नवत है: .

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बांग्लादेश में स्थानीय प्रशासन

बांग्लादेश में स्थानीय प्रशासन, तीन स्तरों में विभाजित है: ज़िला स्तर, उपज़िला स्तर तथा यूनियन स्तर, जिनमें प्रत्येक स्तर पर एक निस्वचित परिषद् तथा संबंधित निकाय स्थापित होते हैं। प्रत्येक निकेस पर स्थानीय प्रशासन से संबधित शक्तियां निहित होती है। .

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बांग्लादेश में कराधान

बांग्लादेश में कराधान, बांग्लादेश सरकार द्वारा, संविधान द्वारा सरकार को दिए गए अधिकार के हक से, आयत की जाती है। संविधान का अनुअनुच्छ 83 के अनुसार, कोई भी कर, संसदीय अधिनियम के गैर अंतर्गत नहीं लगाई जा सकती है। अतः बांग्लादेश में प्रत्येक करों की संसदीय स्वीकृति प्रति होना अनिवार्य है। .

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बांग्लादेश सरकार

बांग्लादेश सरकार(বাংলাদেশ সরকার, बांलादेश सरकार), बांग्लादेश के संविधान द्वारा स्थापित, बांग्लादेश की प्रशासनिक एवं नियंत्रक प्राधिकारिणी है। यह, संपूर्ण बांग्लादेशी भूमि के शासन पर अपनी प्रभुसत्ता का दावा रखती है। संविधान के अनुसार, देश को लोकतांत्रिक, गणतांत्रिक व्यवस्था के अंतर्गत्, एक स्वतंत्र न्यायपालिका के साथ, परिचालित किये जाने की बात की गई है। संविधान के अनुसार, राष्ट्रपति बांग्लादेश के राष्ट्राध्यक्ष हैं, जबकि सरकार, प्रधानमंत्री व उनके द्वारा नामांकित मंत्रियों के नियंत्रण में कार्य करती है। प्रधानमंत्री और अन्य मंत्री मिलकर बांग्लादेश की उच्चतम् शासनिक एवं निर्णयात्मक निकाय का गठन करते हैं, जिसे बांग्लादेशी लहजे में, मंत्रिसभा(মন্ত্রিসভা) या कैबिनेट कहते हैं। 1971 के अस्थायी सरकार के गठन एवं अंतरिम संविधान के परवर्तन पश्चात् से बांग्लादेश की सरकारी व्यवस्था न्यूनतम् पाँचबार बदली जा चुकी है। बांग्लादेश की वर्तमान सरकारी व्यवस्था बहुदलीय संसदीय प्रणाली पर आधारित है। वरतमान व्यवस्था में प्रधानमंत्री को सरकार प्रमुख का दर्जा प्राप्त है, एवं बहुदलीय लोकतांत्रिक ढाँचे में, सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के सिद्धांतों पर राष्ट्रीय संसद के सदस्यगण निर्वाचित होते हैं। कार्यपालिका पूर्णतः सरकार के नियंत्रण में होती है, जिसे प्रधानमंत्री व मंत्रिसभा के अन्य सदस्यगण परिचालित करते हैं। सरकार व सरकार के समस्त मंत्रियों की, संसद के प्रति उत्तरदेही है, और राष्ट्रीय संसद में सरकार के कीसी भी निर्णय, कार्य, कदम या योजना पर प्रश्न किया जा सकता है। इसके अलावा, संविधान संशोधन, महाभियोग व कानूनी फेरबदल जैसे कार्य भी संसदीय बहुमत द्वारा किया जाता है। न्यायपालिका और विधानपालिका के अलाव बांग्लादेश में एक स्वतंत्र श्रेणीबद्ध न्यायपालिका भी स्थापित है, जो न्यायिक मामलों को देखती है। .

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बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी

यह बांग्लादेश का एक राजनीतिक दल है। .

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बांग्लादेश जातीय पार्टी

बांग्लादेश जातीय पार्टी बांग्लादेश का एक राजनीतिक दल है जो लेफ्टिनेंट जनरल हुसैन मोहम्मद इरशाद द्वारा गठित मूल जातीय पार्टी से विलग होकर अस्तित्व में आयी। इसका पुराना नाम जातीय पार्टी (नाजिउर) था। ले॰ जनरल इरशाद द्वारा जातीय पार्टी का गठन वर्ष १९८५ में किया गया था। इस मूल पार्टी को अ़ब जातीय पार्टी (इरशाद) के नाम से जाना जाता है। .

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बांग्लादेश आब्जर्वर

यह् एक प्रमुख दैनिक समाचार पत्र है। .

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बांग्लादेश का ध्वज

बांग्लादेश का ध्वज (बांग्ला: বাংলাদেশের জাতীয় পতাকা) बांग्लादेश का राष्ट्रीय ध्वज है, जिसे १७ जनवरी १९७२ में अपनाया गया था। ध्वज में एक हरे पृष्ठभूमि पर एक लाल गोला है जो उत्तोलक के ओर है, ताकि फहराते समय केंद्रित दिखाई दे। लाल गोला बांग्लादेश पर सूर्योदय को दर्शाता है और स्वतंत्रता संग्राम में शहीद हुए लोगों के बहाए गए खून का प्रतीक है। हरा पृष्ठभूमि बांग्लादेश के हरे-भरे ज़मीन का प्रतीक है। ध्वज १९७१ के बांग्लादेश के स्वतंत्रा युद्ध के दौरान उपयोग किए गए ध्वद पर आधारित है, जिसमें लाल गोले के अंदर पीले रंग का मानचित्र था। १९७२ में इसे हटा दिया गया क्योंकि मानचित्र को ध्वज के दोनों ओर दर्शाना कठिन था। .

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बांग्लादेश का प्रशासनिक भूगोल

बांग्लादेश एक एकात्मक राज्य है, अतः उसकी शासन प्रणाली किसी एकमेव शक्ति के रूप में सुनियोजित है, जिसमें केन्द्रीय सरकार अन्ततः सर्वोच्च है, तथा सारी उपराष्ट्रीय इकाइयाँ और उनको प्राप्त होने वाले अधिकार केन्द्रीय सरकार के पूर्णतः अधीन हैं और केन्द्रीय सरकार के अंतर्गत् कार्य करती हैं(जोकि भारत या अमेरिका जैसे संघात्मक देशों के विरुद्ध है, जहाँ राज्य सरकारें संघीय सरकार से स्वतंत्र रूप से कार्य करती हैं)। अतः बांग्लादेश के उपराष्ट्रीय इकाइयाँ पूर्णतः प्रशासनिक निकाय हैं, और इनका राष्ट्रीय राजनीती में कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं होती है। .

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बांग्लादेश का संविधान

गणप्रजातंत्र बांग्लादेश का संविधान(গণপ্রজাতন্ত্রী বাংলাদেশের সংবিধান, सीधा लिप्यांतरण:गणप्रजातंत्री बांलादेशेर संविधान, उच्चारण:गाॅनोप्रोजातोन्त्री बांलादेशेर् शाॅम्बिधान्) स्वतंत्र, स्वतः स्वाधीन व सर्वसंप्रभुतासम्पन्न बांग्लादेशी राष्ट्र की सर्वोच्च विधि संहिता है। यह एक लिखित दस्तावेज़ है। सन १९७२ के नवंबर मास की 8 तारीख को बांग्लादेश की राष्ट्रीय संसद में यह संविधान अपनी गई एवं उसी वर्ष के १६ दिसंबर को अर्थात् बांग्लादेश की विजय दिवस की प्रथम वर्षगाँठ होते यह कार्यान्वित हुई। मूल संविधान अंग्रेज़ी भाषा में रचित है एवं इसका बंगाली में अनुवाद कराया गया है। तभी यह बांग्ला व अंग्रेज़ी दोनो भाषाओं में विद्यमान है। अंग्रेज़ी व बंगाली के मध्य अर्थगत विरोध दृश्यमान होने पर बंगाली संस्करण अनुसरणीय होगी। १७ सितंबर; वर्ष २०१४ के सोलहवें संशोधन सहित यह संविधान सर्वमत १६ बार संशोधित हुई है। यह संविधान के संशोधन हेतु राष्ट्रीय संसदीय सदस्यों की कुल संख्या की दो तिहाई भाग के मतों का प्रावधान है। हालाँकि, तेरहवें संशोधन रद्द करने के आदेश में बांग्लादेश की सर्वोच्च न्यायालय ने यह निर्णय दिया है की, संविधान की मूल ढाँचा परिवर्तित हो, ऐसी संशोधन नहीं किया जाएगा; लाने पर यह अधिकार क्षेत्र से परे होगा अतः अमान्य होगा। बांग्लादेश का संविधान केवल बांग्लादेश की सर्वोच्च विधि संहिता ही नहीं है; संविधान में बांग्लादेश की नामक राष्ट्रीय चरित्र वर्णित की गई है। इसमें बांग्लादेश की भौगोलिक सीमारेखा विस्तृत है। इस संविधान में दिये गए मूल ढाँचे के अनुसार: देश प्रजातांत्रिक होगा, गणतंत्र होगी इसकी प्रशासनिक नींव, जनगणन होंगे देश के सर्व शक्तियों के स्रोत और न्यायपालिका स्वतंत्रत होगी। गनगण सर्व शक्तियों के स्रोत होने पर भी देश में विधि शासन(कानून का शासन होगा)। बांग्लादेश के संविधान में राष्ट्रवाद, समाजवाद, गणतंत्र व धर्मनिरपेक्षता को राष्ट्र परिचालन के मूल सिद्धांतों के रूप में अपनाया गया है। .

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बांग्लादेश क्रिकेट टीम

बांग्लादेश क्रिकेट टीम बांग्लादेश की राष्ट्रीय क्रिकेट टीम है। श्रेणी:राष्ट्रीय क्रिकेट टीम श्रेणी:क्रिकेट टीम.

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बांग्लादेश क्रिकेट लीग

बांग्लादेश क्रिकेट लीग के एक वार्षिक प्रथम श्रेणी क्रिकेट टूर्नामेंट है कि वर्ष 2012-13 के सत्र में बांग्लादेश में शुरू हुआ है। .

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बांग्लादेश क्रिकेट लीग 2017

बांग्लादेश क्रिकेट लीग 2016-17 बांग्लादेश क्रिकेट लीग, एक प्रथम श्रेणी क्रिकेट प्रतियोगिता के पांचवें संस्करण है। यह वर्तमान में 28 जनवरी से 7 मार्च 2017 को बांग्लादेश में आयोजित किया जा रहा है। टूर्नामेंट बांग्लादेश में अन्य प्रथम श्रेणी प्रतियोगिता, नॅशनल क्रिकेट लीग 2016-17 के समापन के बाद खेला जाता है। सेंट्रल जोन गत चैम्पियन हैं। प्रतियोगिता में अपना पहला खिताब हासिल करने वाले नॉर्थ जोन ने टूर्नामेंट जीता। .

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बांग्लादेश क्रिकेट लीग 2018

2017-18 बांग्लादेश क्रिकेट लीग बांग्लादेश क्रिकेट लीग का छठा संस्करण है, ये एक प्रथम श्रेणी क्रिकेट प्रतियोगिता है। यह बांग्लादेश में आयोजित किया जा रहा है, और 6 जनवरी 2018 को शुरू किया गया। नॉर्थ ज़ोन मौजूदा चैंपियन हैं .

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बांग्लादेश के नगर निगमों की सूची

सिटी कॉर्पोरेशन बांग्लादेश में नगर निगम को कहा जाता है, जोकि बांग्लादेश के बड़े महानगरों के प्रशासनिक निययों को कहा जाता है। ये निगम, विभिन्न नागरिक सेवाओं और महानगरों के अन्य प्रशासनिक कार्यों के लिए ज़िम्मेदार होती है। वर्त्तमान समय में बांग्लादेश में कुल ११ सिटी कॉर्पोरेशन हैं। .

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बांग्लादेश के प्रधानमंत्री

गणप्रजातंत्र बांग्लादेश के प्रधानमंत्री (बांग्ला:বাংলাদেশের প্রধানমন্ত্রী, बाड़्ग्लादेशेर प्रोधानमोन्त्री), बांग्लादेश के राजप्रमुख के तौर पर स्थापित एक राजनैतिक पद है। बांग्लादेश की मंत्रीपरिषद शासित अथवा संसदीय सरकारी व्यवस्था में बांग्लादेश के राष्ट्रप्रमुख बांग्लादेश के राष्ट्रपति, राष्ट्रप्रमुख, वहीं, प्रधानमंत्री, सरकार प्रमुख अथवा राजप्रमुख होते हैं। प्रधानमंत्री व मंत्री परिषद सम्मिलित रूप से देश को प्रशासित एवं सरकारी तंत्र को नियंत्रित करते हैं। प्रधानमंत्री, मंत्रीपरिषद के प्रमुख होते हैं जो मिलकर सरकार की नीति निर्धारित करती है एवं राष्ट्रीय संसद के समक्ष निर्वाचित सरकार की नीतियों को प्रस्तुत करती है। साथ ही, समस्त मंत्रीपरिषद, सदन में सरकार की योजना व नीतियों की प्रस्तुति बचाव के लिए जिम्मेदार होते हैं। प्रधानमंत्री बांग्लादेश की एकसदनीय राष्ट्रीय संसद में बहुमत दल के नेता एवं सदन में सत्तापक्ष के नेता भी हैं। प्रधानमंत्री को कार्यकाल की शपथ बांग्लादेश के राष्ट्रपति द्वारा दिलाई जाती है। .

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बांग्लादेश के प्रधानमंत्रीगण की सूची

बांग्लादेश के प्रधानमंत्री की पूरी सूची में वे लोग शामिल हैं जिन्होंने 1971 में बांग्लादेश के गठन के बाद प्रधानमंत्री बांग्लादेश के पद की शपथ ली। .

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बांग्लादेश के मुख्य न्यायाधीश

बांग्लादेश के मुख्या न्यायाधीश या प्रधान विचारपति(বাংলাদেশের প্রধান বিচারপতি), बांग्लादेश का सर्वोच्च न्यायिक पद है। वे देश की न्यायिक प्रणाली के प्रमुख एवं बांग्लादेश की उच्चतम न्यायालय के प्रमुख होते हैं। वे सर्वोच्च न्यायालय के तमाम न्यायाधीशों के प्रमुख होने के साथ साथ, बांग्लादेश की पूरी न्यायिक व्यवस्थापिका एवं तमाम अधिनस्त न्यायालयों के भी प्रमुख होते हैं। उन्हें बांग्लादेश के राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किया जाता है। परम्परानुसार, सर्वोच्च अदालत के वरिष्ठताम् पदस्थ न्यायाधीश पर यह पद निहित किया जाता है। सर्वोच्च न्यायालय के मुखिया होने के नाते वे, न्यायलय के कार्यों में अहम् भूमिका निभाते हैं। न्यायाधीशों की नियुक्ति तथा पदोन्नति एवं न्यायलय के अन्य प्रशासनिक कार्यों में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। उच्च न्यायालय विभाग के अस्थायी न्यायाधीशों की नियुक्ति तथा उनकी स्थायी रूप से नियुक्ति एवं उच्च न्यायालय विभाग से अपीलीय विभाग में पदोन्नति, राष्ट्रपति द्वारा, मुख्यन्यायाधीश की सलाह पर होता है। वे बांग्लादेश की सर्वोच्च न्यायालय के अपीलीय विभाग में मुकदमों की सुनवाई के लिए बैठते हैं। .

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बांग्लादेश के मुख्य न्यायाधीशगण की सूची

बांग्लादेश के मुख्य न्यायाधीश का पद, बांग्लादेश सर्वोच्च न्यायिक पद है। इस पद पर विराजमान होने वाले पहले पदाधिकारी न्यायमूर्ति अब सादात मोहम्मह खान सयम थे, जोकि १६ दिसंबर १९७२ से नवंबर १९७५ तक इस पद पर रहे थे। तत्पश्चात, जनवरी २०१५ तक इस पद पर कुल २१ लोग विराजमान हो चुके हैं। वर्तमान मुख्य न्यायाधीश सुरेन्द्र कुमार सिन्हा इस पद पर १७ जनवरी २०१५ विराजमान हैं। वे हिन्दू धर्म के अनुयायी हैं, तथा बिष्णुप्रिय मणिपुरी समुदाय से आते हैं, तथा वे बांग्लादेश में किसी भी अल्पसंख्यक जातीय समूहों से नियुक्त पहली मुख्य न्यायाधीश है। न्यायमूर्ति भावनी प्रसाद सिन्हा भी एक ही समुदाय से हैं। न्यायमूर्ति महौदय नाज़मन आरा सुल्ताना इस पद को सुशोभित करने वाली पहली महिला न्यायाधीश थीं, और मैडम जस्टिस कृष्णा देबनाथ बांग्लादेश की पहली महिला हिंदू न्यायाधीश है। वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में छह महिला न्यायाधीशों रहे हैं। बांग्लादेश में सैन्य शासनके के दौरान, १९७३ से १९७५ के बीच, सर्वोच्च न्यायालय को द्विभाजित कर, दो भिन्न, उच्च न्यायालय व सर्वोच्च न्यायालय स्थापित किये गए थे। इस बीच, न्यायमूर्ति रूहुल इस्लाम उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश थे, और सैयद महमूद हुसैन सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश थे। निम्न तालिका बांग्लादेश के सारे मुख्य न्यायाधीशों को सूचित करती है। .

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बांग्लादेश के यूनियन परिषद्

यूनियन परिषद्, बांग्लादेश में स्थानीय प्रशासन के हीनतम् ग्राम्य प्रशासन निकाय हैं। प्रत्येक यूनियन ९ "वार्डों" के सम्मिलन से बनता है, जिनमे सामान्यतः एक ग्राम को ही एक वार्ड के रूप में अंकित किया जाता है। प्रत्येक परिषद् १२ पार्षदों द्वारा रचित होता है, जिनमे से ३ सदस्य महिला होतीं हैं।यह परिषद् एक अध्यक्ष को चुनती है, जो इस पडिसह का प्रमुख होता है। प्रत्येक यूनियन की भौगोलिक सीमाएँ, जिले के उपायुक्त(डिप्टी कमिश्नर) निर्धारित करते हैं। यह निकाय संबंधित यूनियन में कृषि, औद्योदिक तथा सामाजिक विकास के किये जिम्मेदार, प्रमुख निकाय है। इन परिषदों को आमने कर्तव्यों की आपूर्ति हेतु विभिन्न अधिकार तथा वित्तीय स्रोत प्रदान किये गए हैं। .

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बांग्लादेश के राष्ट्रपति

बांग्लादेश के राष्ट्रपति का पद गणप्रजातंत्री बांग्लादेश का सर्वोच्च संवैधानिक पद है। वर्तमान नियमों के अनुसार, राष्ट्रपति को बांग्लादेश की राष्ट्रीय संसद द्वारा, खुले चुनाव प्रक्रिया द्वारा निर्वाचित होते हैं। राष्ट्रपति, बांग्लादेश की कार्यपालिका न्यायपालिका एवं विधानपालिका के सर्व शाखाओं के, पारंपरिक, प्रमुख एवं बांग्लादेश के सारे सशस्त्र बलों के सर्वादिनायक हैं। इस पद पर नियुक्त प्रत्येक राष्ट्रपति का कार्यकाल 5 वर्ष होता है। संसदीय बहुमत द्वारा निर्वाचित होने के कारण इस पद पर साधारण तौर पर शासक दल के प्रतिनिधि ही चुने जाते हैं। हालाँकि, एक बार निर्वाचित हो चुके पदाधिकारी चुनाव में पुनः खड़े होने के लिए मुक्त होते हैं। वर्ष 1991 में संसदीय गणतंत्र की शुरुआत से पूर्व, राष्ट्रपति का चुनाव जनता के मतों द्वारा होता था। संसदीय प्रणाली के पुनर्स्थापन के पश्चात से यह पद मूलतः एक पारंपरिक पद रह गया है, जिसकी, विशेषतः कोई सार्थक कार्यकारी शक्तियाँ नहीं हैं। प्रत्येक संसदीय साधारण चुनाव के पश्चात संसद की प्रथम अधिवेशन में राष्ट्रपति अपना उद्घाधाटनी अभिभाषण देते हैं। प्रत्येक वर्ष के प्रथम संसदीय अधिवेशन में भी राष्ट्रपति अपना उद्घाटनी अभिभाषण देते हैं। इसके अतिरिक्त, संसद में पारित हुई किसी भी अधिनियम को कानून बनने के लिए राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त करना आवश्यक होता है। इसके अलावा राष्ट्रपति अपने विवेक पर क्षमादान भी दे सकते हैं। सन 1956 में संसद में नए कानून पारित किए, जिनके द्वारा राष्ट्रपति की, संसद के भंग होने के बाद की कार्यकारी शक्तियों को, संवैधानिक प्रावधानों के अंतर्गत बढ़ाया गया था। बांग्लादेश के राष्ट्रपति आधिकारिक तौर पर ढाका के बंगभवन में निवास करते हैं। कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी वह अपने पद पर तब तक विराजमान रहते हैं जब तक उनका उत्तराधिकारी पद पर स्थापित नहीं हो जाता। .

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बांग्लादेश के राष्ट्रपतिगण की सूची

बांग्लादेश के राष्ट्रपतियों की सूची .

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बांग्लादेश के राजनैतिक दल

बांग्लादेश, संवैधानिक रूप से एक बहुदलीय लोकतांत्रिक गणराज्य है, अर्थात्, सैद्धान्तिक रूप से बांग्लादेश में असंख्य राजनैतिक दल बनाये जा सकते हैं, तथा लोकतांत्रिक प्रक्रियानुसार राष्ट्रीय संसद में बहुमत प्राप्त करने वाले किसी भी दल या गठबंधन का, परवर्ती चुनाव तक, बांग्लादेश पर "शासन" करने का अधिकार होता है। बहरहाल, वर्त्तमान स्थिति में, बांग्लादेश एक "निकष्ट" द्विदलीय लोकतंत्र विकसित हो उठी है, जिसमें, दो प्रमुख राजनैतिक दल हैं, अवामी लीग और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी। इसके अलावा अनेक छोटे दल भी हैं, जो यदा दोनों दलों से स्वतंत्र हैं, या दोनों में से किसी एक दल के साथ गठबंधन में हैं। .

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बांग्लादेश के जिले

बांग्लादेश में जिले,(জেলা, उच्चारण:जेला) विभागों के अधीनस्थ, बांग्लादेश के द्वितीय स्तर के प्रशासनिक उपविभाजन हैं। बांग्लादेश को ऐसे, कुल ६४ जनपदों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक जिलों को कई उपजिलों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक जिले में औसतन ८ से १५ उपजिले होते हैं। जबकि न्यूनतम ४ और अधिक्तम् २२ उपजिले हैं। २०१६ की स्थितिनुसार, बांग्लादेश में कुल ४९३ उपजिले हैं। जिलों का नाम, सामान्यतः संभंधित जनपदीय मुख्यालय के नाम पर रखा जाता है, जिन्हें जिला सदर कहा जाता है। प्रत्येक जिले में, एक जिला आयुक्त नियुक्त किया जाता है, जोकि जिले का सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी होता है। तथा सरे जिलों में एक जिला परिषद् होती है, जोकि जिले की मुख्य प्रशासनिक निकाय होती है। .

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बांग्लादेश के जिलों की सूची

बांग्लादेश में जिले,(জেলা, उच्चारण:जेला) विभागों के अधीनस्थ, बांग्लादेश के द्वितीय स्तर के प्रशासनिक उपविभाजन हैं। बांग्लादेश को ऐसे, कुल ६४ जनपदों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक जिलों को कई उपजिलों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक जिले में औसतन ८ से १५ उपजिले होते हैं। जबकि न्यूनतम ४ और अधिक्तम् २२ उपजिले हैं। २०१६ की स्थितिनुसार, बांग्लादेश में कुल ४९३ उपजिले हैं। .

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बांग्लादेश के विभाग

बांग्लादेश के विभाग(বিভাগ, उच्चारण:बिभाग्/बीभाग्), बांग्लादेश के सबसे बड़े उपराष्ट्रीय-स्तरीन प्रशासनिक उपविभाजन हैं। बांग्लादेश को ऐसे, कुल ८ प्रशासनिक अंचलों में संयोजित किया गया है, जिन्हें विभाग कहा जाता है। प्रत्येक विभाग के अंतर्गत अधिक्तम् १३ (ढाका विभाग) और न्यूनतम् ४ (सिलेट विभाग) ज़िले आते हैं। इन विभागों का नाम, संभंधित विभागीय मुख्यालय के नाम पर रखा गया है। .

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बांग्लादेश के उपजिले

बांग्लादेश में उपजिले,(উপজেলা, उच्चारण:उपोजेला) जिलों के अधीनस्थ, बांग्लादेश के तृतीय स्तर के प्रशासनिक अंचल हैं। बांग्लादेश को ऐसे, कुल १९० प्रशासनिक अंचलों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक उपज़िले में अनेक यूनियन परिषद्, नगर पालिकाएँ और मोहल्ले और पाड़ाएँ होते है। प्रत्येक जिले में औसतन ८ से १५ उपजिले होते हैं, जबकि न्यूनतम ४ और अधिक्तम् २२ उपजिले हैं। इन उपजिलों को पूर्वतः "थाना" कहा जाता था। उपजिलों का नाम, सामान्यतः संभंधित जनपदीय मुख्यालय के नाम पर रखा जाता है। प्रत्येक उपजिले में, एक उपजिला निर्वाहि अधिकारी नियुक्त किया जाता है, जोकि उस उपजिले का सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी होता है। तथा सरे उपजिलों में एक उपजिला परिषद् होती है, जोकि उपजिले की मुख्य प्रशासनिक निकाय होती है। .

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बांग्लादेश के उपजिलों की सूची

बांग्लादेश में उपजिले,(উপজেলা, उच्चारण:उपोजेला) जिलों के अधीनस्थ, बांग्लादेश के तृतीय स्तर के प्रशासनिक अञ्चल हैं। बांग्लादेश को ऐसे, कुल १९० प्रशासनिक अञ्चलों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक उपज़िले में अनेक यूनियन परिषद्, नगर पालिकाएँ और मोहल्ले और पाड़ाएँ होते है। प्रत्येक जिले में औसतन ८ से १५ उपजिले होते हैं, जबकि न्यूनतम ४ और अधिक्तम् २२ उपजिले हैं। .

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बांग्लादेश को शामिल युद्धों के संपादन की सूची

इस सैन्य लड़ाई और शामिल है और बांग्लादेश, या बंगाल और इतिहास में विभिन्न अवधियों के दौरान बंगाल के लोगों में होने वाले युद्धों की एक सूची है। बंगाल की आधुनिक क्षेत्र अलग साम्राज्य के अधीन था जब लड़ाइयों और युद्ध का सबसे विशेष रूप से बंगाली के अधिकांश ब्रिटिश भारतीय सेना में सैन्य सेवा दे दिया और ब्रिटिश साम्राज्य के रूप में युद्ध लड़े, आई। .

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बांग्लादेश की न्यायपालिका

बांग्लादेश के न्यायिक व्यस्था, बांग्लादेशी भूमि पर निवास करने वाले लोगों को सामान्य तथा आपराधिक मामलों में न्याय प्रदान करने की व्यस्था है। इसका मूल ढांचा बांग्लादेश के संविधान के भाग ५ में दिया गया है। बांग्लादेश की न्यायपालिका के दो भाग हैं: सर्वोच्च न्यायालय और अधीनस्थ न्यायपालिका। श्रेष्ठतर न्यायपालिका, बांग्लादेश की सर्वोच्च न्यायालय द्वारा रचित है, जिसके दो विभाग हैं, उच्च न्यायालय विभाग और अपीलीय विभाग, तथा अधीनस्थ न्यायपालिका में जिला न्यायालय इत्यादि जैसे सारे निम्नस्थ न्यायालय व न्यायाधिकरण आते हैं। .

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बांग्लादेश की मंत्रिसभा

बांग्लादेश की मंत्रीमंडल अथवा बांग्लादेश की मंत्रिसभा(বাংলাদেশের মন্ত্রিসভা, सटीक उच्चारण:बाड़्लादेशेर मोन्त्रीशाॅभा), बांग्लादेश की उच्चतम् शासनिक एवं निर्णयात्मक निकाय हैं। इसे बांग्लादेशी लहजे में, मंत्रिसभा(মন্ত্রিসভা) या कैबिनेट कहते हैं। प्रधानमंत्री व मंत्री परिषद सम्मिलित रूप से देश को प्रशासित एवं सरकारी तंत्र को नियंत्रित करते हैं। प्रधानमंत्री, मंत्रीपरिषद के प्रमुख होते हैं जो सम्मिलित रूप से शासन का परिचालन व सरकार की नीति निर्धारित करती है। इसके अतिरिक्त, सरकार के मंत्री, राष्ट्रीय संसद के समक्ष निर्वाचित सरकार की नीतियों की प्रस्तुती एवं सदन में सरकार की योजना व नीतियों के बचाव के लिए भी जिम्मेदार होती है। .

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बांग्लादेश की राजनीति

बांग्लादेश में राजनीति संविधान, में दिए गए संसदीय, प्रतिनिधित्व वादी लोकतांत्रिक, गणतांत्रिक प्रणाली के अंतर्गत होती है जिसके अनुसार: राष्ट्रपति बांग्लादेश के राष्ट्राध्यक्ष एवं बांग्लादेश के प्रधानमंत्री, सरकार एवं एक बहुदलीय जनतांत्रिक प्रणाली के प्रमुख होते हैं। कार्यकारी शक्तियाँ, बांग्लादेश की सरकार के अधिकारक्षेत्र के अंतर्गत आती हैं, एवं विधाई शक्तियां सरकार और संसद दोनों पर न्योछावर की गई हैं। इसके अलावा, बांग्लादेश में एक स्वतंत्र श्रेणीबद्ध न्यायपालिका भी है, जिसके शिखर पर बांग्लादेश की सर्वोच्च न्यायालय है। बांग्लादेश के संविधान को सन 1972 में लिखा गया था और तब से लेकर आज तक इसमें कुल 16 संशोधन किए गए हैं। .

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बांग्लादेश की सर्वोच्च न्यायालय

बांग्लादेश की सर्वोच्च न्यायालय(बंगला: বাংলাদেশ সুপ্রীম কোর্ট, बांलादेश सूप्रीम कोर्ट), गणप्रजातंत्री बांग्लादेश की सर्वोच्च अदालत है और बांग्लादेश की न्यायिक व्यवस्था का शीर्षतम् निकाय है और देश की न्यायिक क्रम का शिखर बिंदू है। यह कानूनी और संवैधानिक मामलों में फैसला करने वाली अंतिम मध्यस्थ भी है। संविधान की धारा १०० के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय का आसन, राजधानी ढाका में अवस्थित है। इसे बांग्लादेश के संविधान की षष्ठम् भाग के चतुर्थ पाठ के द्वारा स्थापित किया गया था। सर्वोच्च न्यायालय, पाकिस्तान को कई संवैधानिक व न्यायिक विकल्प प्राप्त होते हैं, जिनकी व्याख्या बांग्लादेश के संविधान में की गई है। इस संसथान के दो "विभाग" है: अपीलीय विभाग और उच्च न्यायलय विभाग, तथा यह बांग्लादेश के मुख्य न्यायाधीश व अपीलीय विभाग व उच्च न्यायालय विभाग के न्यायाधीशों का भी स्थायी कार्यालय की भी मेज़बानी भी करता है। अप्रैल 2018 की स्थिति अनुसार, अपीलीय विभाग में 4 और उच्च न्यायालय विभाग में 80 न्यायाधीश हैं, जिनमें 80 स्थायी हैं। इस न्यायालय को सामान्य बोलचाल में अक्सर हाई कोर्ट भी कहा जाता है, क्योंकि स्वतंत्रता पूर्व, अर्थात् १९७१ से पहले तक, इस भवन में पूर्वी पाकिस्तान की उच्च न्यायालय वास करती थी। .

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बांग्लादेश की संसद

राष्ट्रीय संसद या जातीय संसद(জাতীয় সংসদ., जातीयो शॉंशोद्), है जनप्रजातंत्र बांग्लादेश की सर्वोच्च विधाई सदन। इस एकसदनीय विधायिका के सदस्यों की कुल संख्या है 350। जिनमें 300 आसन जनता द्वारा प्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित सांसदों के लिए होते हैं एवं अवशिष्ट 50 आसन महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। आरक्षित आसनो के नारी सदस्यगण, पूर्वकथित 300 निर्वाचित सांसदों के मतों द्वारा परोक्ष निर्वाचन पद्धति से निर्वाचित होते हैं। निर्वाचित होती संसद की कार्यअवधि 5 वर्ष है। .

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बांग्लादेश अवामी लीग

बांग्लादेश अवामी लीग (बांग्ला: বাংলাদেশ আওয়ামী লীগ: उर्दु से शाब्दिक अनुवाद) बांग्लादेश की मुख्यधारा का एक प्रमुख धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक दल है। यह 1971 के बांग्ला असंतोष और विद्रोह का एक महत्वपूर्ण राजनीतिक उत्प्रेरक रहा है। 1984 के बाद से दल का नेतृत्व स्वर्गीय शेख मुजीबुर्रहमान की बेटी शेख हसीना करती हैं। 16 दिसम्बर 1971 को एक स्वतंत्र बांग्लादेश के अस्तित्व मे आने के बाद से, अवामी लीग चार बार सत्ता मे आयी है और इसने लगभग साढ़े आठ तक बांग्लादेश पर शासन किया है। दिसंबर 2008 में हुये संसदीय चुनावों में, अवामी लीग के नेतृत्व मे बने विशाल गठबंधन जो चार राजनीतिक द्वारा मिल कर बनाया गया था, ने जीत हासिल की है। अवामी लीग ने संसदीय सीटों में से 87% सीटों पर विजय प्राप्त की है और साढ़े सात साल के बाद पार्टी एक बार फिर से सत्तासीन हुई है। .

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बांग्लादेशी टका

बांग्लादेशी टका (बंगाली: টাকা, प्रतीक: ৳ या Tk, मुद्रा कूट: BDT) बांग्लादेश गणतन्त्र की आधिकारिक मुद्रा है। ৳10 या इससे अधिक मूल्य के बैंक नोटों को बांग्लादेश बैंक द्वारा जारी और नियंत्रित किया जाता है जबकि ৳1, ৳2 और ৳5 के बैंक नोटों को जारी करने की जिम्मेदारी बांग्लादेश सरकार के वित्त मंत्रालय की है। ৳1 को 100 पोइशा (पैसा) में विभाजित किया गया है। .

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बांग्लादेशी संविधान में संशोधनों की सूची

बांग्लादेश के संविधान, बांग्लादेश की सर्वोच्च न्यायि संहिता है। इसे 4 नवंबर 1972 को पारित किया गया था। इसमें कुल 11 भाग, 153 अनुच्छेद और 27 अनुसूचियां हैं। इस संविधान में संशोधन का भी प्रावधान भी दिया गया है। संविधान का भाग 10- अनुच्छेद 142, संविधान में संशोधनों से संबंधित विषय को विस्तृत रूप से अंकित करता है। संविधान के प्रावधानों के अनुसार संविधान में संशोधन के लिए राष्ट्रीय संसद के सदस्यसमूह के दो तिहाई संख्या के सकारात्मक मत की आवश्यक बताई गई है। अर्थात्, संविधान में संशोधन तभी लाया जा सकता है जब राष्ट्रीय संसद की दो तिहाई बहुमत इसके पक्ष में अपना मत दे। 2016 की स्थिति अनुसार बांग्लादेश के संविधान में कुल 16 बार संशोधन किए गए हैं। .

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बांग्लादेशी संविधान की प्रस्तावना

बांग्लादेश के संविधान की प्रस्तावना संविधान की उद्देशिका है, इसमें बांग्लादेशी राष्ट्र की मूल नीतियाँ व वैचारिक नींव को अंकित किया गया है। हालाँकि, यह बांग्लादेशी संविधान का अंश है, परंतु यह एक न्यायिक लेख नहीं है, अतः किसी भी कानून या अन्य वस्तु को उद्देशिका में लिखी बातों के आधार पर न्यायिक चुनौती नहीं दी जा सकती है। इस संविधान में दिये गए मूल ढाँचे के अनुसार: देश प्रजातांत्रिक होगा, गणतंत्र होगी इसकी प्रशासनिक नींव, बांग्लादेश के जनगणन होंगे देश के सर्व शक्तियों के स्रोत और न्यायपालिका स्वतंत्रत होगी। जनता सर्व शक्तियों के स्रोत होने पर भी देश में कानून का शासन होगा। उद्देशिका में राष्ट्रवाद, समाजवाद, गणतंत्र व धर्मनिरपेक्षता को राष्ट्र परिचालन के मूल सिद्धांतों के रूप में अपनाया गया है। इसके लेख में बांग्लेदेश के संविधान-निर्माताओं ने आलेवाली सरकारों, विधी निर्माताओं व पीढ़ियों से संविधान व उनके बांग्लादेश की कल्पना के संदर्भ में, उनके विचार, मूल सिद्धांतों व संविधान सचना की मूल नीतियों को अंकित किया है। .

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बांग्लापीडिया

बांग्लापीडिया या बांग्लादेश का राष्ट्रीय विश्वकोश, एशियाटिक सोसाइटी बांग्लादेश द्वारा प्रकाशित एक द्विभाषी और पहला बांग्लादेशी विश्वकोश है। यह बांग्ला और अंग्रेजी भाषाओं में उपलब्ध है। इसे प्रथम बार 2003 में 500 पृष्ठों वाले 10 खण्डों में प्रकाशित किया गया था। इसमें लगभग 6000 आलेख हैं। मुद्रित और आनलाइन संस्करण के अलावा यह सीडी रोम पर भी उपलब्ध है। इसका प्रस्तावित अद्यतन प्रति 2 वर्षों पश्चात होना तय पाया गया है। बांग्लापीडिया के प्रधान सम्पादक सिराजुल इस्लाम थे। लगभग 1200 बंग्लादेशी और विदेशी लेखकों ने इस विश्वकोश में उपलब्ध लेखों को लिखा है। इस परियोजना का वित्त-पोषण बंग्लादेशी सरकार, निजी क्षेत्र के संगठनों, शैक्षिक संस्थानों और यूनेस्को द्वारा किया गया है। इस परियोजना का मूल बजट 800,000 टका था, पर अंत में इस परियोजना पर एशियाटिक सोसाइटी को लगभग 8 करोड़ टका खर्च करना पड़ा। बांग्लादेश मुक्ति युद्ध और स्वदेशी लोगों पर की गयीं विवादास्पद प्रविष्टियों के बावजूद, दोनों बांग्ला और अंग्रेजी संस्करण प्रकाशन के समय से ही पर पाठकों के बीच लोकप्रिय हैं। बांग्लापीडिया एक सामान्य विश्वकोश न होकर, बांग्लादेश से संबंधित विषयों पर आधारित एक विशेष विश्वकोश है। विश्वकोश के प्रयोजनों के लिए, बांग्लादेश को एक ऐसे क्षेत्र के रूप में परिभाषित किया गया है जो ऐतिहासिक रूप से क्रमश: प्राचीन पूर्वी भारत, सूबा बांग्ला, शाही बंगलाह, मुगल सूबा बंगला, बंगाल प्रेसीडेंसी, बंगाल प्रांत, पूर्वी बंगाल, पूर्वी पाकिस्तान और स्वतंत्र बांग्लादेश के रूप में अस्तित्व में आया। .

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बाकेरगंज उपज़िला

बाकेरगंज उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह बरिशाल विभाग के बरिशाल ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल ६ उपज़िले हैं, और मुख्यालय बरिशाल सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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बाउफल उपज़िला

बाउफल उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह बरिशाल विभाग के पटुय़ाखाली ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 8 उपज़िले हैं, और मुख्यालय पटुय़ाखाली सदर उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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बाङ्ला भाषा

बाङ्ला भाषा अथवा बंगाली भाषा (बाङ्ला लिपि में: বাংলা ভাষা / बाङ्ला), बांग्लादेश और भारत के पश्चिम बंगाल और उत्तर-पूर्वी भारत के त्रिपुरा तथा असम राज्यों के कुछ प्रान्तों में बोली जानेवाली एक प्रमुख भाषा है। भाषाई परिवार की दृष्टि से यह हिन्द यूरोपीय भाषा परिवार का सदस्य है। इस परिवार की अन्य प्रमुख भाषाओं में हिन्दी, नेपाली, पंजाबी, गुजराती, असमिया, ओड़िया, मैथिली इत्यादी भाषाएँ हैं। बंगाली बोलने वालों की सँख्या लगभग २३ करोड़ है और यह विश्व की छठी सबसे बड़ी भाषा है। इसके बोलने वाले बांग्लादेश और भारत के अलावा विश्व के बहुत से अन्य देशों में भी फ़ैले हैं। .

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बिन्तुरोंग

बिन्तुरोंग, जिसे भालूबिल्ली, एशियाई भालूबिल्ली या पालावान भालूबिल्ली भी कहते हैं, विवराइडे (Viverridae) परिवार का एक स्तनधारी जानवर है। इसके "भालूबिल्ली" बुलाए जाने के बावजूद यह न तो बिल्ली है और न ही भालू। इसका नाम ("बिन्तुरोंग") एक विलुप्त हो चुकी मलेशियाई भाषा से आया है और इस शब्द का अर्थ अज्ञात है। यह पशु वनों की ऊंची शाखों में रहना पसंद करता है और पूर्वोत्तर भारत के जंगलों में पाया जाता है। भारत से बाहर यह बंगलादेश, भूटान, बर्मा, कम्बोडिया, इंडोनीशिया, लाओस, मलेशिया, चीन, फ़िलीपीन्स, थाईलैंड और वियतनाम में मिलता है। यह एक निशाचरी जानवर है और रात को सक्रीय रहता है। बिन्तुरोंग अधिकतर फल खाते हैं, लेकिन अंडे, टहनियाँ, पत्ते, छोटे जानवर और चिड़ियाँ सभी इसकी ख़ुराक में सम्मिलित हैं। इसके प्राकृतिक वास-क्षेत्र में वनों के कट जाने से इसकी संख्या बहुत घाट गई है। अगर इसका पीछा करा जाए और इसे लगे की भागने का कोई उपाय नहीं है, तो बिन्तुरोंग बहुत ख़ुँख़ार तरह से लड़ सकता है। साधारण स्थितियों में यह हलकी हँसने जैसी आवाज़ करता है लेकिन क्रोध या डर में ऊँची और पतली चीखें निकालता है। चिड़ियाघरों में इसकी आयु २०-२५ साल तक देखी गई है। .

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बिप्लब कुमार देब

बिप्लब कुमार देब (जन्म 25 नवम्बर 1969) भारतीय राज्य त्रिपुरा के राजनीतिज्ञ हैं। वें 7 जनवरी 2016 से त्रिपुरा में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हैं। वे 2018 में हुए त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में भाजपा के जीत के सूत्रधार हैं। उन्होंने 9 मार्च 2018 को त्रिपुरा के दसवें मुख्यमन्त्री के रूप में शपथ ली। .

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बिमल राय

बिमल राय (बांग्ला: বিমল রায়) (जन्म: 12 जुलाई, 1909 निधन: 7 जनवरी, 1966) हिन्दी फ़िल्मों का एक प्रसिद्ध फ़िल्म निर्देशक थे। .

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बिमान बांग्लादेश एयरलाइंस

बिमान बांग्लादेश एयरलाइंस (বিমান বাংলাদেশ এয়ারলাইন্স),.

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बिम्सटेक

बिम्सटेक (BIMSTEC), जिसका पूरा रूप बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग उपक्रम (Bay of Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation) है, बंगाल की खाड़ी से तटवर्ती या समीपी देशों का एक अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक सहयोग संगठन है। इसमें नवम्बर २०१६ में बांग्लादेश, भारत, बर्मा, श्रीलंका, थाईलैण्ड, भूटान और नेपाल सदस्य थे। .

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बिय़ानीबजार उपज़िला

बिय़ानीबजार उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह सिलेट विभाग के सिलेट ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 13 उपज़िले हैं, और मुख्यालय सिलेट सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उत्तर-पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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बिरल उपज़िला

बिरल उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह रंगपुर विभाग के दिनाजपुर ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल १३ उपज़िले हैं, और मुख्यालय दिनाजपुर सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उत्तर की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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बिरामपुर उपज़िला

बिरामपुर उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह रंगपुर विभाग के दिनाजपुर ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल १३ उपज़िले हैं, और मुख्यालय दिनाजपुर सदर उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उत्तर की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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बिलाइछड़ि उपज़िला

बिलाइछड़ि उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह चट्टग्राम विभाग के रांगामाटि ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 10 उपज़िले हैं, और मुख्यालय रांगामाटि सदर उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण-पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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बिल्व

बिल्व, बेल या बेलपत्थर, भारत में होने वाला एक फल का पेड़ है। इसे रोगों को नष्ट करने की क्षमता के कारण बेल को बिल्व कहा गया है। इसके अन्य नाम हैं-शाण्डिल्रू (पीड़ा निवारक), श्री फल, सदाफल इत्यादि। इसका गूदा या मज्जा बल्वकर्कटी कहलाता है तथा सूखा गूदा बेलगिरी। बेल के वृक्ष सारे भारत में, विशेषतः हिमालय की तराई में, सूखे पहाड़ी क्षेत्रों में ४००० फीट की ऊँचाई तक पाये जाते हैं।।अभिव्यक्ति पर। दीपिका जोशी मध्य व दक्षिण भारत में बेल जंगल के रूप में फैला पाया जाता है। इसके पेड़ प्राकृतिक रूप से भारत के अलावा दक्षिणी नेपाल, श्रीलंका, म्यांमार, पाकिस्तान, बांग्लादेश, वियतनाम, लाओस, कंबोडिया एवं थाईलैंड में उगते हैं। इसके अलाव इसकी खेती पूरे भारत के साथ श्रीलंका, उत्तरी मलय प्रायद्वीप, जावा एवं फिलीपींस तथा फीजी द्वीपसमूह में की जाती है।। वेबग्रीन पर धार्मिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण होने के कारण इसे मंदिरों के पास लगाया जाता है। हिन्दू धर्म में इसे भगवान शिव का रूप ही माना जाता है व मान्यता है कि इसके मूल यानि जड़ में महादेव का वास है तथा इनके तीन पत्तों को जो एक साथ होते हैं उन्हे त्रिदेव का स्वरूप मानते हैं परंतु पाँच पत्तों के समूह वाले को अधिक शुभ माना जाता है, अतः पूज्य होता है। धर्मग्रंथों में भी इसका उल्लेख मिलता है।।अखिल विश्व गायत्री परिवार इसके वृक्ष १५-३० फीट ऊँचे कँटीले एवं मौसम में फलों से लदे रहते हैं। इसके पत्ते संयुक्त विपत्रक व गंध युक्त होते हैं तथा स्वाद में तीखे होते हैं। गर्मियों में पत्ते गिर जाते हैं तथा मई में नए पुष्प आ जाते हैं। फल मार्च से मई के बीच आ जाते हैं। बेल के फूल हरी आभा लिए सफेद रंग के होते हैं व इनकी सुगंध भीनी व मनभावनी होती है। .

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बिश्वनाथ उपज़िला

बिश्वनाथ उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह सिलेट विभाग के सिलेट ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 13 उपज़िले हैं, और मुख्यालय सिलेट सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उत्तर-पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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बिश्वम्भरपुर उपज़िला

बिश्वम्भरपुर उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह सिलेट विभाग के सुनामगंज ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 11 उपज़िले हैं, और मुख्यालय सुनामगंज सदर उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उत्तर-पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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बिष्णुप्रिया मणिपुरी

बिष्णुप्रिया मणिपुरी ये जाति महाभारत योग के मणिपुर राज्य के प्राचीन जाति के रूप में माने जाते हैं | बिष्णुपुरिया, बिष्णुप्रिया या बिष्णुप्रिया मणिपुरी भारत के मणिपुर, असम, त्रिपुरा तथा बांग्लादेश और म्यांमार के कुछ भागों में बोली जाने वाली भारत-आर्य कुल की भाषा है। यह कई इंडो-आर्यन भाषाओं जैसे मराठी, बंगाली, उड़िया, असमिया और वैदिक संस्कृत आदि से मिलता जुलता है। यह भाषा सर्व प्राचीन मणिपुर राज्य में उत्पन्न और विकसित हुई थी और मूल रूप से लोकताक नाम के झील के परिवेश तक ही सीमित थी सुरुवाती दौर में | कर्नल मैककुलक द्वारा मणिपूर की घाटी के एक खाते जैसे अन्य अधिकारियों ई.टी.

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बिजय़नगर उपज़िला

बिजय़नगर उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह चट्टग्राम विभाग के ब्राह्मणबाड़िय़ा ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 9 उपज़िले हैं, और मुख्यालय ब्राह्मणबाड़िय़ा सदर उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण-पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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बगुड़ा सदर उपज़िला

बगुड़ा सदर उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह उपज़िला बगुड़ा जिला का ज़िला सदर यानी प्रशासनिक मुख्यालय है। यह राजशाही विभाग के बगुड़ा ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 12 उपज़िले हैं, और मुख्यालय बगुड़ा सदर उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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बंगभवन

बंगभवन (বঙ্গভবন बाॅड़्गोभाॅबोन, बंग(बंगाल) का भवन), बांग्लादेश की राजधानी ढाका में स्थित, बांग्लादेश के राष्ट्रपति का आधिकारिक निवास है। यह ढाका के केंद्र में, बंगभवन रोड, दिलखुशा एॅवेन्यू पर अवस्थित है। यह हर दिशा में बंगभवन उद्यान से घिरा हुआ है (पूर्व में नवाब दिलखुशा उद्यान)। ब्रिटिश राज के समय यह स्थल, दिलखुशा गवर्नमेंट हाउस की मेज़बानी किया करता था, जिसे किसी समय भारत के राजप्रतिनिधि वाइसराॅय एवं बंगाल के ब्रिटिशकालीन राज्यपाल उपयोगित किया करते थे। भारत विभाजन पश्चात् यह पूर्वी पाकिस्तान का राज्यपाल भवन बन गया। राष्ट्रपति अबू सईद चौधरी, 12 जनवरी 1972 को शपथ-ग्रहण पश्चात्, बतौर राष्ट्रपति, इस भवन में निवास कर इसकी शोभा बढ़ाने वाले प्रथम बांग्लादेशी राष्ट्रपति बने। .

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बंगलादेश के सैनिक विद्रोह

१९७१ में पाकिस्तान से स्वाधीन होने से लेकर अब तक बंगलादेश में अनेक बार सैनिक विद्रोह हो चुका है। .

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बंगाल

बंगाल (बांग्ला: বঙ্গ बॉंगो, বাংলা बांला, বঙ্গদেশ बॉंगोदेश या বাংলাদেশ बांलादेश, संस्कृत: अंग, वंग) उत्तरपूर्वी दक्षिण एशिया में एक क्षेत्र है। आज बंगाल एक स्वाधीन राष्ट्र, बांग्लादेश (पूर्वी बंगाल) और भारतीय संघीय प्रजातन्त्र का अंगभूत राज्य पश्चिम बंगाल के बीच में सहभाजी है, यद्यपि पहले बंगाली राज्य (स्थानीय राज्य का ढंग और ब्रिटिश के समय में) के कुछ क्षेत्र अब पड़ोसी भारतीय राज्य बिहार, त्रिपुरा और उड़ीसा में है। बंगाल में बहुमत में बंगाली लोग रहते हैं। इनकी मातृभाषा बांग्ला है। .

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बंगाल प्रेसीडेंसी

बंगाल प्रेसीडेंसी ब्रिटिश भारत का एक उपनिवेशित क्षेत्र था; यह क्षेत्र अविभाजित बंगाल से बना था। बंगाल के ये क्षेत्र आज बांग्लादेश और भारत के निम्न राज्यों में विभाजित हैं.

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बंगाल का विभाजन (1905)

पूर्वी बंगाल और असम प्रांत के मानचित्र बंगाल विभाजन के निर्णय की घोषणा 19 जुलाई 1905 को भारत के तत्कालीन वाइसराय लॉर्ड कर्ज़न द्वारा की गयी थी। विभाजन 16 अक्टूबर 1905 से प्रभावी हुआ। विभाजन के कारण उत्पन्न उच्च स्तरीय राजनीतिक अशांति के कारण 1911 में दोनो तरफ की भारतीय जनता के दबाव की वजह से बंगाल के पूर्वी एवं पश्चिमी हिस्से पुनः एक हो गए। .

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बंगाल की खाड़ी

बंगाल की खाड़ी विश्व की सबसे बड़ी खाड़ी है और हिंद महासागर का पूर्वोत्तर भाग है। यह मोटे रूप में त्रिभुजाकार खाड़ी है जो पश्चिमी ओर से अधिकांशतः भारत एवं शेष श्रीलंका, उत्तर से बांग्लादेश एवं पूर्वी ओर से बर्मा (म्यांमार) तथा अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह से घिरी है। बंगाल की खाड़ी का क्षेत्रफल 2,172,000 किमी² है। प्राचीन हिन्दू ग्रन्थों के अन्सुआर इसे महोदधि कहा जाता था। बंगाल की खाड़ी 2,172,000 किमी² के क्षेत्रफ़ल में विस्तृत है, जिसमें सबसे बड़ी नदी गंगा तथा उसकी सहायक पद्मा एवं हुगली, ब्रह्मपुत्र एवं उसकी सहायक नदी जमुना एवं मेघना के अलावा अन्य नदियाँ जैसे इरावती, गोदावरी, महानदी, कृष्णा, कावेरी आदि नदियां सागर से संगम करती हैं। इसमें स्थित मुख्य बंदरगाहों में चेन्नई, चटगाँव, कोलकाता, मोंगला, पारादीप, तूतीकोरिन, विशाखापट्टनम एवं यानगॉन हैं। .

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बंगाली थियेटर

बांग्ला रंगमंच मुख्य रूप से बंगाली भाषा में थिएटर को कहते हैं। बंगाली थिएटर मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल, और बांग्लादेश में चलता है। शब्द कुछ हिंदी थियेटरों का उल्लेख करने के लिए भी हो सकता है जो बंगाली लोगों को स्वीकार हों। बांग्ला रंगमंच का मूल ब्रिटिश भारत है। यह 19 वीं सदी के आरंभ में निजी मनोरंजन के रूप में शुरू हुआ।Kundu, Pranay K. Development of Stage and Theatre Music in Bengal. आजादी के पूर्व बंगाली थिएटर ने ब्रिटिश राज के प्रति नापसंदगी प्रकट करने में एक निर्णायक भूमिका निभाई। 1947 में भारत की आजादी के बाद, वामपंथी आंदोलनों ने पश्चिम बंगाल में सामाजिक जागरूकता के एक उपकरण के  रूप में थिएटर को इस्तेमाल किया। इस ने कला के इस रूप में कुछ अनूठी विशेषताओं को जोड़ा जिस का अभी भी मजबूत प्रभाव पड़ता है। यह समूह खुद को वाणिज्यिक बंगाली रंगमंच से वैचारिक रूप से अलग स्थापत करते हैं। [प्रशस्ति पत्र की जरूरत] .

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बंगाली साहित्य

बँगला भाषा का साहित्य स्थूल रूप से तीन भागों में बाँटा जा सकता है - 1.

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बक्शीगंज उपज़िला

बक्शीगंज उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह मय़मनसिंह विभाग के जमालपुर ज़िले का एक उपजिला है। इसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 7 उपज़िले हैं। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उत्तर की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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बक्सर का युद्ध

बक्सर का युद्ध २२ अक्टूबर १७६४ में बक्सर नगर के आसपास ईस्ट इंडिया कंपनी के हैक्टर मुनरो और मुगल तथा नबाबों की सेनाओं के बीच लड़ा गया था। बंगाल के नबाब मीर कासिम, अवध के नबाब शुजाउद्दौला, तथा मुगल बादशाह शाह आलम द्वितीय की संयुक्त सेना अंग्रेज कंपनी से लड़ रही थी। लड़ाई में अंग्रेजों की जीत हुई और इसके परिणामस्वरूप पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, उड़ीसा और बांग्लादेश का दीवानी और राजस्व अधिकार अंग्रेज कंपनी के हाथ चला गया। .

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बुड़िचं उपज़िला

बुड़िचं उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह चट्टग्राम विभाग के कुमिल्ला ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 16 उपज़िले हैं। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण-पूर्व की दिशा में चट्टग्राम नगर के निकट अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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बुरहानुद्दीन उपज़िला

बुरहानुद्दीन उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह बरिशाल विभाग के भोला ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 7 उपज़िले हैं, और मुख्यालय भोला सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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ब्रह्मपुत्र नदी

सुक्लेश्वर घाट से खींचा गया ब्रह्मपुत्र का तस्वीर ब्रह्मपुत्र (असमिया - ব্ৰহ্মপুত্ৰ, बांग्ला - ব্রহ্মপুত্র) एक नदी है। यह तिब्बत, भारत तथा बांग्लादेश से होकर बहती है। ब्रह्मपुत्र का उद्गम तिब्बत के दक्षिण में मानसरोवर के निकट चेमायुंग दुंग नामक हिमवाह से हुआ है।ब्रह्मपुत्र की लंबाई लगभग 2900 किलोमीटर है। ब्रह्मपुत्र का नाम तिब्बत में सांपो, अरुणाचल में डिहं तथा असम में ब्रह्मपुत्र है। ब्रह्मपुत्र नदी बांग्लादेश की सीमा में जमुना के नाम से दक्षिण में बहती हुई गंगा की मूल शाखा पद्मा के साथ मिलकर बंगाल की खाड़ी में जाकर मिलती है। सुवनश्री, तिस्ता, तोर्सा, लोहित, बराक आदि ब्रह्मपुत्र की उपनदियां हैं। ब्रह्मपुत्र के किनारे स्थित शहरों में डिब्रूगढ़, तेजपुर एंव गुवाहाटी प्रमुख हैं प्रायः भारतीय नदियों के नाम स्त्रीलिंग में होते हैं पर ब्रह्मपुत्र एक अपवाद है। संस्कृत में ब्रह्मपुत्र का शाब्दिक अर्थ ब्रह्मा का पुत्र होता है। .

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ब्रह्मपुत्री भाषाएँ

ब्रह्मपुत्री भाषाएँ (Brahmaputran languages) या साल भाषाएँ (Sal languages) तिब्बती-बर्मी भाषा-परिवार की एक उपशाखा की बोलियाँ हैं जो पूर्वी भारत और बर्मा व बंगलादेश के कुछ हिस्सों में बोली जाती हैं। .

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ब्राह्मणपाड़ा उपज़िला

ब्राह्मणपाड़ा उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह चट्टग्राम विभाग के कुमिल्ला ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 16 उपज़िले हैं। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण-पूर्व की दिशा में चट्टग्राम नगर के निकट अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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ब्राह्मणबाड़िय़ा सदर उपज़िला

ब्राह्मणबाड़िय़ा सदर उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह चट्टग्राम विभाग के ब्राह्मणबाड़िय़ा ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 9 उपज़िले हैं, और मुख्यालय ब्राह्मणबाड़िय़ा सदर उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण-पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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ब्राह्मिनी चील

ब्राह्मिनी चील (वैज्ञानिक नाम: हैलीऐस्टर इंडस; अन्य नाम: खेमकरी या क्षेमकरी) चील जाति का एक प्रसिद्ध पक्षी है जो मुख्य रूप से भारतीय पक्षी है किंतु थाइलैंड, मलय, चीन से लेकर आस्ट्रेलिया तक पाया जाता है और पानी के आस-पास रहता है। यह बंदरगाहों के आसपास काफी संख्या में पाया जाता है और जहाज के मस्तूलों पर बैठा देखा जा सकता है। यह सड़ी-गली चीजें खाता और पानी के सतह पर पड़े कूड़े कर्कट को अपने पंजों में उठा लेता है। यह धान के खेतों के आसपास भी उड़ता देखा जाता है और मेढकों और टिड्डियों को पकड़ कर अपना पेट भरता है। यह 19 इंच लंबा पक्षी है जिसका रंग कत्थई, डैने के सिरे काले और सिर तथा सीने का रंग सफेद होता है। चोंच लंबी, दबी दबी और नीचे की ओर झुकी हुई होती है। इसकी बोली अत्यंत कर्कश होती है। यह अपना घोंसला पानी के निकट ही पेड़ की दोफ की डाल के बीच काफी ऊँचाई पर लगाता है। एक बार में मादा दो या तीन अंडे देती है। इसे लाल पीठ वाला समुद्री बाज भी कहा जाता है, एक माध्यम आकार की शिकारी पक्षी है, यह एक्सीपाईट्राइड परिवार की सदस्य है जिसमें कई अन्य दैनिक शिकारी पक्षी जैसे बाज, गिद्ध तथा हैरियर आदि भी आते हैं। ये भारतीय उपमहाद्वीप, दक्षिण पूर्व एशिया तथा ऑस्ट्रेलिया में पायी जाती हैं। ये मुख्य रूप से समुद्र तट पर और अंतर्देशीय झीलों में पायी जाती हैं, जहां वे मृत मछली और अन्य शिकार को खाती हैं। वयस्क पक्षी में लाल भूरे पंख तथा विरोधाभासी रंग में एक सफ़ेद रंग का सर तथा छाती होते हैं जिनको देख कर इन्हें अन्य शिकारी पक्षियों से अलग आसानी से पहचाना जा सकता है। .

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ब्रिटिश भारतीय सेना

भारतीय मुसलमान सैनिकों का एक समूह जिसे वॉली फायरिंग के आदेश दिए गए। ~1895 ब्रिटिश भारतीय सेना 1947 में भारत के विभाजन से पहले भारत में ब्रिटिश राज की प्रमुख सेना थी। इसे अक्सर ब्रिटिश भारतीय सेना के रूप में निर्दिष्ट नहीं किया जाता था बल्कि भारतीय सेना कहा जाता था और जब इस शब्द का उपयोग एक स्पष्ट ऐतिहासिक सन्दर्भ में किसी लेख या पुस्तक में किया जाता है, तो इसे अक्सर भारतीय सेना ही कहा जाता है। ब्रिटिश शासन के दिनों में, विशेष रूप से प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, भारतीय सेना न केवल भारत में बल्कि अन्य स्थानों में भी ब्रिटिश बलों के लिए अत्यधिक सहायक सिद्ध हुई। भारत में, यह प्रत्यक्ष ब्रिटिश प्रशासन (भारतीय प्रान्त, अथवा, ब्रिटिश भारत) और ब्रिटिश आधिपत्य (सामंती राज्य) के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए उत्तरदायी थी। पहली सेना जिसे अधिकारिक रूप से "भारतीय सेना" कहा जाता था, उसे 1895 में भारत सरकार के द्वारा स्थापित किया गया था, इसके साथ ही ब्रिटिश भारत की प्रेसीडेंसियों की तीन प्रेसिडेंसी सेनाएं (बंगाल सेना, मद्रास सेना और बम्बई सेना) भी मौजूद थीं। हालांकि, 1903 में इन तीनों सेनाओं को भारतीय सेना में मिला दिया गया। शब्द "भारतीय सेना" का उपयोग कभी कभी अनौपचारिक रूप से पूर्व प्रेसिडेंसी सेनाओं के सामूहिक विवरण के लिए भी किया जाता था, विशेष रूप से भारतीय विद्रोह के बाद.

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ब्रिटिश राज

ब्रिटिश राज 1858 और 1947 के बीच भारतीय उपमहाद्वीप पर ब्रिटिश द्वारा शासन था। क्षेत्र जो सीधे ब्रिटेन के नियंत्रण में था जिसे आम तौर पर समकालीन उपयोग में "इंडिया" कहा जाता था‌- उसमें वो क्षेत्र शामिल थे जिन पर ब्रिटेन का सीधा प्रशासन था (समकालीन, "ब्रिटिश इंडिया") और वो रियासतें जिन पर व्यक्तिगत शासक राज करते थे पर उन पर ब्रिटिश क्राउन की सर्वोपरिता थी। .

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ब्रिटिश राज का इतिहास

ब्रिटिश राज का इतिहास, 1947 और 1858 के बीच भारतीय उपमहाद्वीप पर ब्रिटिश शासन की अवधि को संदर्भित करता है। शासन प्रणाली को 1858 में स्थापित किया गया था जब ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सत्ता को महारानी विक्टोरिया के हाथों में सौंपते हुए राजशाही के अधीन कर दिया गया (और विक्टोरिया को 1876 में भारत की महारानी घोषित किया गया).

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ब्रिटिश काउंसिल

लंदन में ब्रिटिश काउंसिल भवन ढाका, बांग्लादेश में ब्रिटिश काउंसिल कार्यालय ब्रिटिश काउंसिल, यूनाइटेड किंगडम में आधारित एक लघु निकाय है जो अंतरराष्ट्रीय शैक्षिक और सांस्कृतिक अवसर प्रदान करने में विशेषज्ञ है। यह शाही चार्टर द्वारा निगमित किया गया है और इंग्लैंड और वेल्स दोनों जगहों और स्कॉटलैंड में एक धर्मार्थ संस्था के रूप में पंजीकृत है। 1934 में स्थापित, इसे 1940 में किंग जॉर्ज VI द्वारा एक शाही चार्टर प्रदान किया गया। यूनाइटेड किंगडम सरकार में इसके 'प्रायोजित विभाग', विदेश और राष्ट्रमंडल कार्यालय है, हालांकि इसे अपने रोज़ के परिचालन में स्वतंत्रता प्राप्त है। अप्रैल 2007 को, मार्टिन डेविडसन को इसका मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया गया। .

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ब्रेट ली

ब्रेट ली (जन्म 8 नवम्बर 1976 को वॉलोन्गॉन्ग, न्यू साउथ वेल्स में) एक ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट खिलाड़ी हैं। ऑस्ट्रेलियाई टेस्ट टीम में शामिल होने के बाद, ली को विश्व क्रिकेट में सबसे तेज गेंदबाजों में से एक के रूप में मान्यता मिली। अपने पहले दो वर्षों में से प्रत्येक में उन्होंने गेंद के साथ 20 से कम का औसत पाया, लेकिन उसके बाद से ज़्यादातर प्रारंभिक 30 अंक हासिल किया। वे एक पुष्ट क्षेत्ररक्षक हैं और उपयोगी निचले-क्रम के बल्लेबाज़, जिनका टेस्ट क्रिकेट में औसत 20 से अधिक रहा है। माइक हसी के साथ मिल कर, उन्होंने 2005-06 के बाद से एकदिवसीय मैचों में ऑस्ट्रेलिया के लिए सबसे अधिक 7वें विकेट की भागीदारी (123) का रिकॉर्ड संभाल रखा है। .

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ब्रेंडन मैकुलम

ब्रेंडन बैरी मैकुलम (जन्म; २७ सितंबर १९८१), जिन्हें "बैज" के नाम से भी जाना जाता है एक पूर्व न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खिलाड़ी है, जिन्होंने अपने कैरियर में सभी स्वरूपों में एक साथ क्रिकेट खेला है साथ ही ये सभी प्रारूपों में पूर्व कप्तान भी रह चुके है। मैकुलम के नाम टेस्ट मैचों में सबसे तेजी से रन बनाने वालों में भी एक है विशेषकर सभी समय का सबसे तेज टेस्ट शतक भी इनके नाम है इस कारण इन्हें न्यूजीलैंड क्रिकेट के सबसे सफल बल्लेबाजों और कप्तानों में से एक माना जाता है। मैकुलम वर्तमान में ट्वेन्टी-२० अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले पहले खिलाड़ी हैं और ट्वेन्टी-२० अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में दो ट्वेन्टी-20 अंतरराष्ट्रीय शतक और २००० रन बनाने वाले पहले और अब तक के एकमात्र खिलाड़ी हैं। इन्होंने १८ फरवरी २०१४ को भारतीय टीम के खिलाफ ३०२ रन बनाकर एक नया कीर्तिमान बना गए और वह टेस्ट मैचों में तिहरे शतक बनाने वाले न्यूजीलैंड के पहले क्रिकेट खिलाड़ी बन गए। इसके अलावा २०१४ में, वह कैलेंडर ईयर (११६४ रनों के साथ) में १००० टेस्ट रनों का स्कोर करने वाले न्यूजीलैंड के पहले खिलाड़ी भी बन गये। इसके बाद इनका यह रिकॉर्ड केन विलियमसन ने २०१५ में ११८२ रन बनाकर तोड़ दिया। २० फरवरी २०१६ को इन्होंने अपने आखिरी टेस्ट मैच में ५४ गेंदों में सबसे तेज़ टेस्ट शतक बनाकर एक नया कीर्तिमान बना दिया। इसी के साथ इन्होंने विवियन रिचर्ड्स और मिस्बाह-उल-हक़ का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया। मैकुलम ट्वेन्टी-२० अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में (२०१२ में बांग्लादेश के खिलाफ १२३) और ट्वेन्टी - २० क्रिकेट में सर्वाधिक व्यक्तिगत स्कोर (२००८ में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के खिलाफ कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए १५८ रन) में सबसे अधिक व्यक्तिगत स्कोर के रूप में पिछले रिकॉर्ड धारी रहे है लेकिन बाद में आईपीएल के २०१३ के संस्करण में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के लिए क्रिस गेल ने १७५ रनों की पारी पुणे वॉयियर्स इंडिया के खिलाफ खेलकर इनको पीछे छोड़ दिया।इन्होंने २००८-२०१० तक इंडियन प्रीमियर लीग में कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए खेले और फिर से २०१२-२०१३ तक खेले। जबकि बीच में उन्होंने कोच्चि टस्कर्स केरल के लिए भी खेले। इसके बाद मैकुलम २०१४-२०१५ में चेन्नई सुपर किंग्स के लिए खेले थे जबकि २०१६-२०१७ के आईपीएल में गुजरात लॉयन्स के लिए खेलने का मौका मिला। .

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बौद्ध धर्म

बौद्ध धर्म भारत की श्रमण परम्परा से निकला धर्म और महान दर्शन है। इसा पूर्व 6 वी शताब्धी में बौद्ध धर्म की स्थापना हुई है। बौद्ध धर्म के संस्थापक गौतम बुद्ध है। भगवान बुद्ध का जन्म 563 ईसा पूर्व में लुंबिनी, नेपाल और महापरिनिर्वाण 483 ईसा पूर्व कुशीनगर, भारत में हुआ था। उनके महापरिनिर्वाण के अगले पाँच शताब्दियों में, बौद्ध धर्म पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में फैला और अगले दो हजार वर्षों में मध्य, पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी जम्बू महाद्वीप में भी फैल गया। आज, हालाँकि बौद्ध धर्म में चार प्रमुख सम्प्रदाय हैं: हीनयान/ थेरवाद, महायान, वज्रयान और नवयान, परन्तु बौद्ध धर्म एक ही है किन्तु सभी बौद्ध सम्प्रदाय बुद्ध के सिद्धान्त ही मानते है। बौद्ध धर्म दुनिया का चौथा सबसे बड़ा धर्म है।आज पूरे विश्व में लगभग ५४ करोड़ लोग बौद्ध धर्म के अनुयायी है, जो दुनिया की आबादी का ७वाँ हिस्सा है। आज चीन, जापान, वियतनाम, थाईलैण्ड, म्यान्मार, भूटान, श्रीलंका, कम्बोडिया, मंगोलिया, तिब्बत, लाओस, हांगकांग, ताइवान, मकाउ, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया एवं उत्तर कोरिया समेत कुल 18 देशों में बौद्ध धर्म 'प्रमुख धर्म' धर्म है। भारत, नेपाल, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, रूस, ब्रुनेई, मलेशिया आदि देशों में भी लाखों और करोडों बौद्ध हैं। .

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बैसाखी

बैसाखी नाम वैशाख से बना है। पंजाब और हरियाणा के किसान सर्दियों की फसल काट लेने के बाद नए साल की खुशियाँ मनाते हैं। इसीलिए बैसाखी पंजाब और आसपास के प्रदेशों का सबसे बड़ा त्योहार है। यह रबी की फसल के पकने की खुशी का प्रतीक है। इसी दिन, 13 अप्रैल 1699 को दसवें गुरु गोविंद सिंहजी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी। सिख इस त्योहार को सामूहिक जन्मदिवस के रूप में मनाते हैं। .

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बैकस्ट्रीट बॉयज़

बैकस्ट्रीट बॉयज़ एक अमरीकी वोकल दल है, जिसे कई बार ग्रैमी के लिए नामांकित किया जा चुका है। इसकी स्थापना ऑरलैंडो फ्लोरिडा में हुई, जिसे बॉय बैंड के निर्माता लू पर्लमैन ने ढूंढा एवं ये 1993 से एक साथ काम कर रहे हैं। बिलबोर्ड हॉट 100 के टॉप 40 लोकप्रिय गानों में उनके 14 गाने हैं एवं उन्होंने दुनिया भर में 130 मिलियन एल्बम बेच कर अपने आप को आज तक का दुनिया का सर्वाधिक बिकने वाला कलाकार एवं बॉय बैंड/संगीत का दल बना लिया है। अमरीकी बिलबोर्ड 200 के मुताबिक, साडे के बाद बैकस्ट्रीट बॉयज़ ही पहले ऐसे कलाकार हैं, जिनके शुरूआती सातों एल्बम चार्ट के सर्वश्रेष्ठ 10 में पहुंच गए हैं। उनके शुरुआती गाने अभी भी बहुत लोकप्रिय हैं। जब वे 2005 में पॉप जगत में लौटे, तो मात्र लाइव वाद्य यन्त्र (इनमें से कुछ तो वे खुद बजाते थे) एवं एक गिटार व पियानो से निकलती पॉप-रॉक ध्वनि के इस्तेमाल के साथ उनकी आवाज़ में काफी बदलाव आ गया था। 2005-2006 के दौरे के बाद, मूल सदस्य केविन रिचर्डसन ने 23 जून 2006 में दल छोड़ दिया,People.com (2006).

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बेड़ा उपज़िला

बेड़ा उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह राजशाही विभाग के पाबना ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 10 उपज़िले हैं, और मुख्यालय पाबना सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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बेतागी उपज़िला

बेतागी उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह बरिशाल विभाग के बरगुना ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल ६ उपज़िले हैं, और मुख्यालय बरगुना सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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बेलाबो उपज़िला

बेलाबो उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह ढाका विभाग के नरसिंदी ज़िले का एक उपजिला है। यह उपज़िला नरसिंदी जिला का ज़िला सदर यानी प्रशासनिक मुख्यालय है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका के निकट अवस्थित है। .

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बेलकुचि उपज़िला

बेलकुचि उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह राजशाही विभाग के सिराजगंज ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल ५ उपज़िले हैं, और मुख्यालय सिराजगंज सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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बेसन

चना दाल के पिसे आटे को बेसन कहते हैं। इसका उपयोग बहुत से देशों में होता है किन्तु भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश में भोजन के घटक के रूप बहुतायत में प्रयोग किया जाता है। इसके अलावा इसका जल या दही के साथ पेस्ट बनाकर चेहरे पर भी पोतते हैं। .

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बेगमगञ्ज उपज़िला

बेगमगंज उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह चट्टग्राम विभाग के नोय़ाखाली ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 9 उपज़िले हैं, और मुख्यालय नोय़ाखाली सदर उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण-पूर्व की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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बोचागञ्ज उपज़िला

बोचागंज उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह रंगपुर विभाग के दिनाजपुर ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल १३ उपज़िले हैं, और मुख्यालय दिनाजपुर सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उत्तर की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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बोड़ो भाषा

बोड़ो या बड़ो एक तिब्बती-बर्मी भाषा है जिसे भारत के उत्तरपूर्व, नेपाल और बांग्लादेश मे रहने वाले बोडो लोग बोलते हैं। बोडो भाषा भारतीय राज्य असम की आधिकारिक भाषाओं में से एक है। भारत में यह विशेष संवैधानिक दर्जा प्राप्त २२ अनुसूचित भाषाओं में से एक है। बोडो भाषा आधिकारिक रूप से देवनागरी लिपि में लिखी जाती है। .

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बोदा उपज़िला

बोदा उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह रंगपुर विभाग के पंचगड़ ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल १३ उपज़िले हैं, और मुख्यालय पंचगड़ सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उत्तर की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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बोय़ालमारी उपज़िला

बोय़ालमारी उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह ढाका विभाग के फरिदपुर ज़िले का एक उपजिला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका के निकट अवस्थित है। .

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बोय़ालखाली उपज़िला

बोय़ालखाली उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह चट्टग्राम विभाग के चट्टग्राम ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल 22 उपज़िले हैं। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से दक्षिण-पूर्व की दिशा में चट्टग्राम नगर के निकट अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र है, और अधिकांश आबादी ग्राम्य इलाकों में रहती है। .

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बोगरा का युद्ध

बोगरा का युद्ध भारत पाक युद्ध १९७१ का भाग था, जो वर्तमान बांग्लादेश में हुआ था। इस युद्ध में पाकिस्तानी सेना ने भारत की सेना का जम कर मुकाबला किया था जिस के चलते भारी क्षति उठाने के बाद भी भारत युद्ध जीत नहीं पाया था। लेकिन भारतीय सेना की ज़बरदस्त नाकेबंदी से त्रस्त होकर पाक सेना ने ढाका में आत्म समर्पण कर दिया और इस प्रकार युद्ध समाप्त हुआ। श्रेणी:भारत-पाक युद्ध श्रेणी:१९७१ का भारत-पाक युद्ध.

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बीरगञ्ज उपज़िला

बीरगंज उपजिला, बांग्लादेश का एक उपज़िला है, जोकी बांग्लादेश में तृतीय स्तर का प्रशासनिक अंचल होता है (ज़िले की अधीन)। यह रंगपुर विभाग के दिनाजपुर ज़िले का एक उपजिला है, जिसमें, ज़िला सदर समेत, कुल १३ उपज़िले हैं, और मुख्यालय दिनाजपुर सदर उपज़िला है। यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उत्तर की दिशा में अवस्थित है। यह मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र