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प्राचीन मिस्र

सूची प्राचीन मिस्र

गीज़ा के पिरामिड, प्राचीन मिस्र की सभ्यता के सबसे ज़्यादा पहचाने जाने वाले प्रतीकों में से एक हैं। प्राचीन मिस्र का मानचित्र, प्रमुख शहरों और राजवंशीय अवधि के स्थलों को दर्शाता हुआ। (करीब 3150 ईसा पूर्व से 30 ई.पू.) प्राचीन मिस्र, नील नदी के निचले हिस्से के किनारे केन्द्रित पूर्व उत्तरी अफ्रीका की एक प्राचीन सभ्यता थी, जो अब आधुनिक देश मिस्र है। यह सभ्यता 3150 ई.पू.

69 संबंधों: चित्रलिपि, चीता, चीन का इतिहास, एज ऑफ माइथोलॉजी, डेल्फी, थुतमोस तृतीय, थोथ, दमा, दीवारकला, नुत, नेफ़्थिस, पश्चिमी संस्कृति, पिताह, प्रतिजैविक, प्राचीन थेब्स, पृथ्वी का इतिहास, पेपे मेंढक, फ़ीनिक्स (मिथक), फैरो की सूची, बाबा (बहुविकल्पी), बास्त, बिल्ली, भारत का इतिहास, मानस शास्त्र, मिन, मिरीनेथ, मिस्र, मिस्र साम्राज्य, मिस्र का इतिहास, मिस्री भाषा, मुक्केबाज़ी, मृत्युदंड, यूनानी अंधकार काल, रामेसेस द्वितीय, रेखीय ए लिपि, लाजवर्द, लिनेन, शारीरिक दण्ड, श्रीलंका का इतिहास, सर-ए-संग, सामंतवाद, सिविल इंजीनियरी, सिंडरेला, सिंधु घाटी सभ्यता, सिंह (पशु), सिकन्दरिया, सउदी अरब, स्वप्न व्याख्या, ईसप की दंतकथाएं, विश्व का इतिहास, ..., व्यावहारिक गणित, व्येरा लुदीकोवा, खतना, गणित का इतिहास, गुड़िया, ओसिरिस मिथक, आधुनिकतावाद, आर्य वंश, इतिहास, इंग्लिश विलो, कोकचा नदी, अतुम, अनूबिस, अफ़्रीका, अमुन, अमुन-रा, अरब का इतिहास, उच्च शिक्षा, १२ (संख्या) सूचकांक विस्तार (19 अधिक) »

चित्रलिपि

फ़्रांस में घुड़सवारी का यह भावचित्र एक सड़क-चिह्न है जापान में यह भावचित्र 'पानी' का अर्थ देता है भारत का स्वस्तिक भावचित्र 'शुभ' का अर्थ देता है चित्रलिपि ऐसी लिपि को कहा जाता है जिसमें ध्वनि प्रकट करने वाली अक्षरमाला की बजाए अर्थ प्रकट करने वाले भावचित्र (इडियोग्रैम) होते हैं। यह भावचित्र ऐसे चित्रालेख चिह्न होते हैं जो कोई विचार या अवधारणा (कॉन्सॅप्ट) व्यक्त करें। कुछ भावचित्र ऐसे होते हैं कि वह किसी चीज़ को ऐसे दर्शाते हैं कि उस भावचित्र से अपरिचित व्यक्ति भी उसका अर्थ पहचान सकता है, मसलन 'छाते' के लिए यूनीकोड में ☂ का चिह्न जिसे ऐसा कोई भी व्यक्ति पहचान सकता है जिसने छाता देखा हो। इसके विपरीत कुछ भावचित्रों का अर्थ केवल उनसे परिचित व्यक्ति ही पहचान पाते हैं, मसलन 'ॐ' का चिह्न 'ईश्वर' या 'धर्म' की अवधारणा व्यक्त करता है और '६' का चिह्न छह की संख्या की अवधारणा व्यक्त करता है। चीनी भाषा की लिपि और प्राचीन मिस्र की लिपि ऐसी चित्रलिपियों के उदाहरण हैं। .

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चीता

बिल्ली के कुल (विडाल) में आने वाला चीता (एसीनोनिक्स जुबेटस) अपनी अदभुत फूर्ती और रफ्तार के लिए पहचाना जाता है। यह एसीनोनिक्स प्रजाति के अंतर्गत रहने वाला एकमात्र जीवित सदस्य है, जो कि अपने पंजों की बनावट के रूपांतरण के कारण पहचाने जाते हैं। इसी कारण, यह इकलौता विडाल वंशी है जिसके पंजे बंद नहीं होते हैं और जिसकी वजह से इसकी पकड़ कमज़ोर रहती है (अतः वृक्षों में नहीं चढ़ सकता है हालांकि अपनी फुर्ती के कारण नीची टहनियों में चला जाता है)। ज़मीन पर रहने वाला ये सबसे तेज़ जानवर है जो एक छोटी सी छलांग में १२० कि॰मी॰ प्रति घंटे ऑलदो एकोर्डिंग टू चीता, ल्यूक हंटर और डेव हम्मन (स्ट्रुइक प्रकाशक, 2003), pp.

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चीन का इतिहास

चीन के राजवंशों की राज्यसीमाएँ पुरातात्विक साक्ष्यों के आधार पर चीन में मानव बसाव लगभग साढ़े बाईस लाख (22.5 लाख) साल पुराना है। चीन की सभ्यता विश्व की पुरातनतम सभ्यताओं में से एक है। यह उन गिने-चुने सभ्यताओं में एक है जिन्होनें प्राचीन काल में अपना स्वतंत्र लेखन पद्धति का विकास किया। अन्य सभ्यताओं के नाम हैं - प्राचीन भारत (सिंधु घाटी सभ्यता), मेसोपोटामिया की सभ्यता, मिस्र सभ्यता और माया सभ्यता। चीनी लिपि अब भी चीन, जापान के साथ-साथ आंशिक रूप से कोरिया तथा वियतनाम में प्रयुक्त होती है। .

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एज ऑफ माइथोलॉजी

एज ऑफ माइथोलॉजी (जिसे आमतौर पर AoM के रूप में संक्षिप्त किया जाता है), एक मिथकीय-आधारित समयोचित रणनीति वाला कंप्यूटर गेम है जिसका निर्माण एनसेम्बल स्टूडियो ने किया और प्रकाशन माइक्रोसॉफ्ट गेम स्टूडियों द्वारा किया गया है। इसे उत्तरी अमेरिका में 1 नवम्बर 2002 को जारी किया गया और एक हफ्ते बाद यूरोप में.

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डेल्फी

डेल्फी (ग्रीक) ग्रीस का एक पुरातात्विक स्थल व आधुनिक नगर दोनों है, जो फोसिस (Phocis) की घाटी में माउंट पर्नासस के दक्षिण-पश्चिमी पर्वत स्कंध पर स्थित है। डेल्फी ग्रीक पौराणिक कथाओं में, डेल्फी की ऑरेकल (Delphic Oracle), प्राचीन ग्रीक विश्व में सर्वाधिक महत्वपूर्ण ऑरेकल, का स्थान और देवता अपोलो, एक देवता, जिन्होंने वहां निवास किया और पृथ्वी की नाभि की रक्षा की, द्वारा अजगर का वध कर दिये जाने के बाद उनकी उपासना का एक मुख्य स्थल था। कुछ लोगों का दावा है कि इस स्थल का मूल नाम पाइथन (Python) (क्रिया पाइथीन (pythein), "सड़ना" से व्युत्पन्न) ही है, जो कि उस अजगर की पहचान है, जिसे अपोलो ने परास्त किया था (मिलर, 95)। होमेरिक हिम टू डेल्फिक अपोलो (Homeric Hymn to Delphic Apollo) याद दिलाती है कि इस स्थल का प्राचीन नाम क्रिसा (Krisa) था। डेल्फी में उनका पवित्र स्थान एक पैनहेलेनिक (panhellenic) गर्भगृह था, जहां 586 ई.पू.

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थुतमोस तृतीय

थुतमोस तृतीय (१४७९-१४२५ ईसापूर्व) प्राचीन मिस्र के नविन साम्राज्य के अठारहवें राजवंश का छठा फैरो था और मिस्र के इतिहास का सबसे महान फैरो भी| अपने शासन काल के पहले २२ वर्ष वह राज्याधिकारी के रूप में अपनी सौतेली माँ हत्शेप्सुत के साथ राज करता रहा| हत्शेप्सुत ने थुतमोस को अपना सेनापति नियुक्त किया था। हत्शेप्सुत की मृत्यु के बाद थुतमोस अगला फैरो बना, उसने लघभग १७ सैन्य अभियान किये और मिस्र का सबसे बड़ा साम्राज्य खड़ा किया जो उत्तर में फ़ोनीशिया और फ़रात नदी तक,पश्चिम में लीबिया तक और दक्षिण में नील नदी के चौथे जल-प्रपात तक यानि नुबिया तक था। उसका सम्पूर्ण शासन काल ५४ वर्ष का है, प्रतिशासक के रूप में २२ वर्ष मिलाकर| उसके नाम का अर्थ है "देवता थोथ ने जन्म लिया",यह संकेत है की वह देवता थोथ का उपासक था। श्रेणी:प्राचीन मिस्र श्रेणी:फैरो श्रेणी:मिस्र के शासक.

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थोथ

प्राचीन मिस्र के धर्म का एक देवता। थोथ महत्वपूर्ण देवता था जो रा का हृदय समान था। थोथ (Ramesseum, Luxor) श्रेणी:मिस्र का धर्म श्रेणी:मिस्र के देवी-देवता.

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दमा

अस्थमा (दमा) (ग्रीक शब्द ἅσθμα, ásthma, "panting" से) श्वसन मार्ग का एक आम जीर्ण सूजन disease वाला रोग है जिसे चर व आवर्ती लक्षणों, प्रतिवर्ती श्वसन बाधा और श्वसनी-आकर्षसे पहचाना जाता है। आम लक्षणों में घरघराहट, खांसी, सीने में जकड़न और श्वसन में समस्याशामिल हैं। दमा को आनुवांशिक और पर्यावरणीय कारकों का संयोजन माना जाता है।इसका निदान सामान्यतया लक्षणों के प्रतिरूप, समय के साथ उपचार के प्रति प्रतिक्रिया और स्पाइरोमेट्रीपर आधारित होता है। यह चिकित्सीय रूप से लक्षणों की आवृत्ति, एक सेकेन्ड में बलपूर्वक निःश्वसन मात्रा (FEV1) और शिखर निःश्वास प्रवाह दर के आधार पर वर्गीकृत है।दमे को अटॉपिक (वाह्य) या गैर-अटॉपिक (भीतरी) की तरह भी वर्गीकृत किया जाता है जहां पर अटॉपी को टाइप 1 अतिसंवेदनशीलता प्रतिक्रियाओं के विकास की ओर पहले से अनुकूलित रूप में सन्दर्भित किया गया है। गंभीर लक्षणों का उपचार आम तौर पर एक अंतःश्वसन वाली लघु अवधि मे काम करे वाली बीटा-2 एगोनिस्ट (जैसे कि सॉल्ब्यूटामॉल) और मौखिक कॉर्टिकोस्टरॉएड द्वारा किया जाता है। प्रत्येक गंभीर मामले में अंतःशिरा कॉर्टिकोस्टरॉएड, मैग्नीशियम सल्फेट और अस्पताल में भर्ती करना आवश्यक हो सकता है। लक्षणों को एलर्जी कारकों और तकलीफ कारकों जैसे उत्प्रेरकों से बचाव करके तथा कॉर्टिकोस्टरॉएड के उपयोग से रोका जा सकता है। यदि अस्थमा लक्षण अनियंत्रित रहते हैं तो लंबी अवधि से सक्रिय हठी बीटा (LABA) या ल्यूकोट्रीन प्रतिपक्षी को श्वसन किये जाने वाले कॉर्टिकोस्टरॉएड को उपयोग किया जा सकता है। 1970 के बाद से अस्थमा के लक्षण महत्वपूर्ण रूप से बढ़ गये हैं। 2011 तक, पूरे विश्व में 235-300 मिलियन लोग इससे प्रभावित थे, जिनमें लगभग 2,50,000 मौतें शामिल हैं। .

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दीवारकला

दीवारकला या ग्रफ़ीटी (graffiti) दीवारों पर बनी लिखाईयों और चित्रों को कहते हैं। यह एक प्रकार की जनकला है और अक्सर ग़ैर-क़ानूनी होती है। दीवारकला के उदहारण प्राचीन मिस्र के ज़माने से ही मिलते आ रहें हैं। दीवारकला चिह्नों और साधारण लिखाईयों से लेकर विस्तृत तस्वीरों का रूप ले सकती है।, Jackie Gaff, pp.

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नुत

प्राचीन मिस्र के धर्म की एक देवी। यह आकाश की देवी थी और इसे गउ के रूप में भी दिखाया जाता था। नुत गउ श्रेणी:मिस्र का धर्म श्रेणी:मिस्र के देवी-देवता ca:Llista de personatges de la mitologia egípcia#N.

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नेफ़्थिस

प्राचीन मिस्र के धर्म की एक देवी। मृत लोगों की देवी। श्रेणी:मिस्र का धर्म श्रेणी:धर्म श्रेणी:मिस्र के देवी-देवता.

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पश्चिमी संस्कृति

पश्चिमी संस्कृति (जिसे कभी-कभी पश्चिमी सभ्यता या यूरोपीय सभ्यता के समान माना जाता है), यूरोपीय मूल की संस्कृतियों को सन्दर्भित करती है। यूनानियों के साथ शुरू होने वाली पश्चिमी संस्कृति का विस्तार और सुदृढ़ीकरण रोमनों द्वारा हुआ, पंद्रहवी सदी के पुनर्जागरण एवं सुधार के माध्यम से इसका सुधार और इसका आधुनिकीकरण हुआ और सोलहवीं सदी से लेकर बीसवीं सदी तक जीवन और शिक्षा के यूरोपीय तरीकों का प्रसार करने वाले उत्तरोत्तर यूरोपीय साम्राज्यों द्वारा इसका वैश्वीकरण हुआ। दर्शन, मध्ययुगीन मतवाद एवं रहस्यवाद, ईसाई एवं धर्मनिरपेक्ष मानवतावाद की एक जटिल श्रृंखला के साथ यूरोपीय संस्कृति का विकास हुआ। ज्ञानोदय, प्रकृतिवाद, स्वच्छंदतावाद (रोमेन्टिसिज्म), विज्ञान, लोकतंत्र और समाजवाद के प्रयोगों के साथ परिवर्तन एवं निर्माण के एक लंबे युग के माध्यम से तर्कसंगत विचारधारा विकसित हुई.

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पिताह

पिताह प्राचीन मिस्र के देवताओं का पिता। उत्तरकालीन वह शिल्पियों का देवता माना गया। पिताह उसके नाम का मिस्री उच्चारण है।.

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प्रतिजैविक

किरबी-ब्यूअर डिस्क प्रसार विधि द्वारा स्टेफिलोकुकस एयूरेस एंटीबायोटिक दवाओं की संवेदनशीलता का परीक्षण.एंटीबायोटिक एंटीबायोटिक से बाहर फैलाना-डिस्क युक्त और एस अवरोध के क्षेत्र में जिसके परिणामस्वरूप aureus का विकास बाधित किया जाता है। आम उपयोग में, प्रतिजैविक या एंटीबायोटिक एक पदार्थ या यौगिक है, जो जीवाणु को मार डालता है या उसके विकास को रोकता है। एंटीबायोटिक रोगाणुरोधी यौगिकों का व्यापक समूह होता है, जिसका उपयोग कवक और प्रोटोजोआ सहित सूक्ष्मदर्शी द्वारा देखे जाने वाले जीवाणुओं के कारण हुए संक्रमण के इलाज के लिए होता है। "एंटीबायोटिक" शब्द का प्रयोग 1942 में सेलमैन वाक्समैन द्वारा किसी एक सूक्ष्म जीव द्वारा उत्पन्न किये गये ठोस या तरल पदार्थ के लिए किया गया, जो उच्च तनुकरण में अन्य सूक्ष्मजीवों के विकास के विरोधी होते हैं। इस मूल परिभाषा में प्राकृतिक रूप से प्राप्त होने वाले ठोस या तरल पदार्थ नहीं हैं, जो जीवाणुओं को मारने में सक्षम होते हैं, पर सूक्ष्मजीवों (जैसे गैस्ट्रिक रसऔर हाइड्रोजन पैराक्साइड) द्वारा उत्पन्न नहीं किये जाते और इनमें सल्फोनामाइड जैसे सिंथेटिक जीवाणुरोधी यौगिक भी नहीं होते हैं। कई एंटीबायोटिक्स अपेक्षाकृत छोटे अणु होते हैं, जिनका भार 2000 Da से भी कम होता हैं। औषधीय रसायन विज्ञान की प्रगति के साथ-साथ अब अधिकतर एंटीबायोटिक्ससेमी सिंथेटिकही हैं, जिन्हें प्रकृति में पाये जाने वाले मूल यौगिकों से रासायनिक रूप से संशोधित किया जाता है, जैसा कि बीटालैक्टम (जिसमें पेनसिलियम, सीफालॉसपोरिन औरकारबॉपेनम्स के कवक द्वारा उत्पादितपेनसिलिंस भी शामिल हैं) के मामले में होता है। कुछ एंटीबायोटिक दवाओं का उत्पादन अभी भी अमीनोग्लाइकोसाइडजैसे जीवित जीवों के जरिये होता है और उन्हें अलग-थलग रख्ना जाता है और अन्य पूरी तरह कृत्रिम तरीकों- जैसे सल्फोनामाइड्स,क्वीनोलोंसऔरऑक्साजोलाइडिनोंससे बनाये जाते हैं। उत्पत्ति पर आधारित इस वर्गीकरण- प्राकृतिक, सेमीसिंथेटिक और सिंथेटिक के अतिरिक्त सूक्ष्मजीवों पर उनके प्रभाव के अनुसार एंटीबायोटिक्स को मोटे तौर पर दो समूहों में विभाजित किया जा सकता हैं: एक तो वे, जो जीवाणुओं को मारते हैं, उन्हें जीवाणुनाशक एजेंट कहा जाता है और जो बैक्टीरिया के विकास को दुर्बल करते हैं, उन्हें बैक्टीरियोस्टेटिक एजेंट कहा जाता है। .

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प्राचीन थेब्स

प्राचीन थेब्स (प्राचीन ग्रीक: Θῆβαι, Thēbai),मिस्र मे स्थित एक विश्व धरोहर स्थल है। यह प्राचीन मिस्र के लोगों में वासेट के रूप में जाना जाने वाला, भूमध्यसागर से 800 किलोमीटर (500 मील) दक्षिण में नील के पूर्व में स्थित एक प्राचीन मिस्र का शहर था। इसके खंडहर आधुनिक मिस्र शहर लक्सर में देखे जा सकते है। थेब्स ऊपरी मिस्र के नोम (राजदंड नोम) का चौथा मुख्य शहर था और मुख्य रूप से मध्य साम्राज्य और नए साम्राज्य के दौरान मिस्र की राजधानी थी। यह अपने मूल्यवान खनिज संसाधनों और व्यापार मार्गों के साथ, नुबिया और पूर्वी रेगिस्तान के नजदीक था। यह अपने स्वर्णिम काल के दौरान एक पंथ केंद्र और प्राचीन मिस्र का सबसे सम्मानित शहर था। थेब्स के एतिहासिक स्थल नील नदी के दोनो तटों में फैला हुआ है जहाँ पूर्वी तट में कर्णक के मंदिर और आज का लक्सर शहर था; वहीं पश्चिमी किनारे में, बड़े निजी और शाही कब्रिस्तान और अंत्येष्टि परिसरों का एक नेक्रोपोलिस देखा जा सकता है। इसे विश्व धरोहर स्थल का दर्जा सन १९७९ मे मिला था। .

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पृथ्वी का इतिहास

पृथ्वी के इतिहास के युगों की सापेक्ष लंबाइयां प्रदर्शित करने वाले, भूगर्भीय घड़ी नामक एक चित्र में डाला गया भूवैज्ञानिक समय. पृथ्वी का इतिहास 4.6 बिलियन वर्ष पूर्व पृथ्वी ग्रह के निर्माण से लेकर आज तक के इसके विकास की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं और बुनियादी चरणों का वर्णन करता है। प्राकृतिक विज्ञान की लगभग सभी शाखाओं ने पृथ्वी के इतिहास की प्रमुख घटनाओं को स्पष्ट करने में अपना योगदान दिया है। पृथ्वी की आयु ब्रह्माण्ड की आयु की लगभग एक-तिहाई है। उस काल-खण्ड के दौरान व्यापक भूगर्भीय तथा जैविक परिवर्तन हुए हैं। .

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पेपे मेंढक

सांता क्लॉज़ एवं पेपे पेपे मेंढक एक अंतरजाल मीम है। पेपे को अक्सर एक हरे रंग के मानवरूपी मेंढक के रूप में चित्रित किया जाता है। प्राचीन काल से मानव सभ्यता में मेंढक को ईश्वर की अभिव्यक्ति माना जाता है। ऋग्वेद ७-१०३ में कहा गया है - "गवां मण्डूका ददतः शतानि सहस्रसावे पर तिरन्त आयुः"। प्राचीन मिस्र में भी मेंढकरूपी भगवान श्री केक की पूजा की जाती थी। वर्त्तमान काल में श्री मैट फ्यूरी ने २००५ में पेपे को रचकर मण्डूक-अर्चना का पुनर्स्थापन किया। २००८ में आर्थिक मंदी के समय पेपे ने माइस्पेस, गैया ऑनलाइन और ४चैन जैसे जालस्थलों पर लोकप्रियता प्राप्त की। २०१५ में टम्बलर पर यह विश्व के सर्वाधिक लोकप्रिय मीमों से एक बन गया। इसी वर्ष दुर्लभ पेपे चित्रों की बिक्री और नीलामी ई-बेय और क्रेगलिस्ट जैसे जालस्थलों पर होने लगी। पेपे की लोकप्रियता इतने बढ़ गयी कि न्यूजीलैंड सरकार के समक्ष पेपे वाले राष्ट्रीय ध्वज का प्रस्ताव रखा गया। भारतीय अंग्रेज़ी समाचार पत्र डेली न्यूज़ एण्ड एनालिसिस ने पेपे को २०१५ के सबसे महान मीमों की सूची में पांचवे स्थान पर शामिल किया। त्रिनिदाद कोकिला सुश्री निकी मिनाज एवं अमरीका-कोकिला सुश्री कैटी पेरी जैसी प्रसिद्ध हस्तियों ने अपनी भावनाओं को प्रकट करने के लिए पेपे का सहारा लिया है। २०१६ में संयुक्त राज्य अमेरिका के भावी राष्ट्रपति महामहिम श्रीमान डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने अभियान में पेपे को प्रयुक्त किया। इसके उत्तर में कुटिल हिलेरी ने पेपे को गोरी श्वेत राष्ट्रवाद का एक प्रतीक करार दे दिया। .

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फ़ीनिक्स (मिथक)

फ़ीनिक्स पक्षी का एक चित्रण फ़ीनिक्स या अमरपक्षी या मायापंछी (अंग्रेज़ी: Phoenix, यूनानी: Φοίνιξ, अर्मेनियाई: Փիւնիկ, फ़ारसी: ققنوس, अरबी: العنقاء أو طائر الفينيق, चीनी: 鳳凰 or 不死鳥, हिब्रू: פניקס) एक प्राचीन मृथक ज्वलन्त-पक्षी है जो अरब, ईरानी, यूनानी, रोमन, मिस्र, चीनी और भारतीय मृथकों व दंतकथाओं में पाया जाता है। फ़ीनिक्स एक बेहद रंगीन पक्षी है जिसकी दुम सुनहरी या बैंगनी होती है (कुछ कथाओं के अनुसार हरी या नीली).

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फैरो की सूची

इस लेख में प्राचीन मिस्र के सभी फैरोगण की सूची है। यह मिस्र का आरंभिक राजवंश काल जो लगभग ३००० ई.पू. था, से लेकर प्टॉल्मिक राजवंश तक, जब कि मिस्र ३० ई.पू. में अगस्तर सीज़र के अधीन प्राचीन रोम का एक प्रांत बना, तब तक की है। .

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बाबा (बहुविकल्पी)

बाबा और उस जैसे शब्दों का प्रयोग निम्नलिखित कारणों से किया जाता है: .

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बास्त

देवी बास्त की छवि बास्त प्राचीन मिस्र के धर्म की एक देवी है। प्राचीन मिस्र के द्वितीय राजवंश से लेकर इस देवी की पूजा की जा रही थी। वे परिवार, हिफ़ाज़त, ख़ुशी, नाच-गानों और बिल्लियों की देवी है। श्रेणी:मिस्र का धर्म श्रेणी:मिस्र के देवी-देवता.

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बिल्ली

बिल्ली एक मांसाहारी स्तनधारी जानवर है। इसकी सुनने और सुँघने की शक्ति प्रखर है और यह कम रोशनी, यहाँ तक कि रात में भी देख सकती हैं। लगभग 9500 वर्षों से बिल्ली मनुष्य के साथी के रूप में है। प्राकृतिक रूप से इनका जीवनकाल लगभग 15 वर्षों का होता है।, Louise A. Spilsbury, Louise Spilsbury, Richard Spilsbury, pp.

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भारत का इतिहास

भारत का इतिहास कई हजार साल पुराना माना जाता है। मेहरगढ़ पुरातात्विक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान है जहाँ नवपाषाण युग (७००० ईसा-पूर्व से २५०० ईसा-पूर्व) के बहुत से अवशेष मिले हैं। सिन्धु घाटी सभ्यता, जिसका आरंभ काल लगभग ३३०० ईसापूर्व से माना जाता है, प्राचीन मिस्र और सुमेर सभ्यता के साथ विश्व की प्राचीनतम सभ्यता में से एक हैं। इस सभ्यता की लिपि अब तक सफलता पूर्वक पढ़ी नहीं जा सकी है। सिंधु घाटी सभ्यता वर्तमान पाकिस्तान और उससे सटे भारतीय प्रदेशों में फैली थी। पुरातत्त्व प्रमाणों के आधार पर १९०० ईसापूर्व के आसपास इस सभ्यता का अक्स्मात पतन हो गया। १९वी शताब्दी के पाश्चात्य विद्वानों के प्रचलित दृष्टिकोणों के अनुसार आर्यों का एक वर्ग भारतीय उप महाद्वीप की सीमाओं पर २००० ईसा पूर्व के आसपास पहुंचा और पहले पंजाब में बस गया और यहीं ऋग्वेद की ऋचाओं की रचना की गई। आर्यों द्वारा उत्तर तथा मध्य भारत में एक विकसित सभ्यता का निर्माण किया गया, जिसे वैदिक सभ्यता भी कहते हैं। प्राचीन भारत के इतिहास में वैदिक सभ्यता सबसे प्रारंभिक सभ्यता है जिसका संबंध आर्यों के आगमन से है। इसका नामकरण आर्यों के प्रारम्भिक साहित्य वेदों के नाम पर किया गया है। आर्यों की भाषा संस्कृत थी और धर्म "वैदिक धर्म" या "सनातन धर्म" के नाम से प्रसिद्ध था, बाद में विदेशी आक्रांताओं द्वारा इस धर्म का नाम हिन्दू पड़ा। वैदिक सभ्यता सरस्वती नदी के तटीय क्षेत्र जिसमें आधुनिक भारत के पंजाब (भारत) और हरियाणा राज्य आते हैं, में विकसित हुई। आम तौर पर अधिकतर विद्वान वैदिक सभ्यता का काल २००० ईसा पूर्व से ६०० ईसा पूर्व के बीच में मानते है, परन्तु नए पुरातत्त्व उत्खननों से मिले अवशेषों में वैदिक सभ्यता से संबंधित कई अवशेष मिले है जिससे कुछ आधुनिक विद्वान यह मानने लगे हैं कि वैदिक सभ्यता भारत में ही शुरु हुई थी, आर्य भारतीय मूल के ही थे और ऋग्वेद का रचना काल ३००० ईसा पूर्व रहा होगा, क्योंकि आर्यो के भारत में आने का न तो कोई पुरातत्त्व उत्खननों पर अधारित प्रमाण मिला है और न ही डी एन ए अनुसन्धानों से कोई प्रमाण मिला है। हाल ही में भारतीय पुरातत्व परिषद् द्वारा की गयी सरस्वती नदी की खोज से वैदिक सभ्यता, हड़प्पा सभ्यता और आर्यों के बारे में एक नया दृष्टिकोण सामने आया है। हड़प्पा सभ्यता को सिन्धु-सरस्वती सभ्यता नाम दिया है, क्योंकि हड़प्पा सभ्यता की २६०० बस्तियों में से वर्तमान पाकिस्तान में सिन्धु तट पर मात्र २६५ बस्तियां थीं, जबकि शेष अधिकांश बस्तियां सरस्वती नदी के तट पर मिलती हैं, सरस्वती एक विशाल नदी थी। पहाड़ों को तोड़ती हुई निकलती थी और मैदानों से होती हुई समुद्र में जाकर विलीन हो जाती थी। इसका वर्णन ऋग्वेद में बार-बार आता है, यह आज से ४००० साल पूर्व भूगर्भी बदलाव की वजह से सूख गयी थी। ईसा पूर्व ७ वीं और शुरूआती ६ वीं शताब्दि सदी में जैन और बौद्ध धर्म सम्प्रदाय लोकप्रिय हुए। अशोक (ईसापूर्व २६५-२४१) इस काल का एक महत्वपूर्ण राजा था जिसका साम्राज्य अफगानिस्तान से मणिपुर तक और तक्षशिला से कर्नाटक तक फैल गया था। पर वो सम्पूर्ण दक्षिण तक नहीं जा सका। दक्षिण में चोल सबसे शक्तिशाली निकले। संगम साहित्य की शुरुआत भी दक्षिण में इसी समय हुई। भगवान गौतम बुद्ध के जीवनकाल में, ईसा पूर्व ७ वीं और शुरूआती ६ वीं शताब्दि के दौरान सोलह बड़ी शक्तियां (महाजनपद) विद्यमान थे। अति महत्‍वपूर्ण गणराज्‍यों में कपिलवस्‍तु के शाक्‍य और वैशाली के लिच्‍छवी गणराज्‍य थे। गणराज्‍यों के अलावा राजतंत्रीय राज्‍य भी थे, जिनमें से कौशाम्‍बी (वत्‍स), मगध, कोशल, कुरु, पान्चाल, चेदि और अवन्ति महत्‍वपूर्ण थे। इन राज्‍यों का शासन ऐसे शक्तिशाली व्‍यक्तियों के पास था, जिन्‍होंने राज्‍य विस्‍तार और पड़ोसी राज्‍यों को अपने में मिलाने की नीति अपना रखी थी। तथापि गणराज्‍यात्‍मक राज्‍यों के तब भी स्‍पष्‍ट संकेत थे जब राजाओं के अधीन राज्‍यों का विस्‍तार हो रहा था। इसके बाद भारत छोटे-छोटे साम्राज्यों में बंट गया। आठवीं सदी में सिन्ध पर अरबी अधिकार हो गाय। यह इस्लाम का प्रवेश माना जाता है। बारहवीं सदी के अन्त तक दिल्ली की गद्दी पर तुर्क दासों का शासन आ गया जिन्होंने अगले कई सालों तक राज किया। दक्षिण में हिन्दू विजयनगर और गोलकुंडा के राज्य थे। १५५६ में विजय नगर का पतन हो गया। सन् १५२६ में मध्य एशिया से निर्वासित राजकुमार बाबर ने काबुल में पनाह ली और भारत पर आक्रमण किया। उसने मुग़ल वंश की स्थापना की जो अगले ३०० सालों तक चला। इसी समय दक्षिण-पूर्वी तट से पुर्तगाल का समुद्री व्यापार शुरु हो गया था। बाबर का पोता अकबर धार्मिक सहिष्णुता के लिए विख्यात हुआ। उसने हिन्दुओं पर से जज़िया कर हटा लिया। १६५९ में औरंग़ज़ेब ने इसे फ़िर से लागू कर दिया। औरंग़ज़ेब ने कश्मीर में तथा अन्य स्थानों पर हिन्दुओं को बलात मुसलमान बनवाया। उसी समय केन्द्रीय और दक्षिण भारत में शिवाजी के नेतृत्व में मराठे शक्तिशाली हो रहे थे। औरंगज़ेब ने दक्षिण की ओर ध्यान लगाया तो उत्तर में सिखों का उदय हो गया। औरंग़ज़ेब के मरते ही (१७०७) मुगल साम्राज्य बिखर गया। अंग्रेज़ों ने डचों, पुर्तगालियों तथा फ्रांसिसियों को भगाकर भारत पर व्यापार का अधिकार सुनिश्चित किया और १८५७ के एक विद्रोह को कुचलने के बाद सत्ता पर काबिज़ हो गए। भारत को आज़ादी १९४७ में मिली जिसमें महात्मा गाँधी के अहिंसा आधारित आंदोलन का योगदान महत्वपूर्ण था। १९४७ के बाद से भारत में गणतांत्रिक शासन लागू है। आज़ादी के समय ही भारत का विभाजन हुआ जिससे पाकिस्तान का जन्म हुआ और दोनों देशों में कश्मीर सहित अन्य मुद्दों पर तनाव बना हुआ है। .

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मानस शास्त्र

साइकोलोजी या मनोविज्ञान (ग्रीक: Ψυχολογία, लिट."मस्तिष्क का अध्ययन",ψυχήसाइके"शवसन, आत्मा, जीव" और -λογία-लोजिया (-logia) "का अध्ययन ") एक अकादमिक (academic) और प्रयुक्त अनुशासन है जिसमें मानव के मानसिक कार्यों और व्यवहार (mental function) का वैज्ञानिक अध्ययन (behavior) शामिल है कभी कभी यह प्रतीकात्मक (symbol) व्याख्या (interpretation) और जटिल विश्लेषण (critical analysis) पर भी निर्भर करता है, हालाँकि ये परम्पराएँ अन्य सामाजिक विज्ञान (social science) जैसे समाजशास्त्र (sociology) की तुलना में कम स्पष्ट हैं। मनोवैज्ञानिक ऐसी घटनाओं को धारणा (perception), अनुभूति (cognition), भावना (emotion), व्यक्तित्व (personality), व्यवहार (behavior) और पारस्परिक संबंध (interpersonal relationships) के रूप में अध्ययन करते हैं। कुछ विशेष रूप से गहरे मनोवैज्ञानिक (depth psychologists) अचेत मस्तिष्क (unconscious mind) का भी अध्ययन करते हैं। मनोवैज्ञानिक ज्ञान मानव क्रिया (human activity) के भिन्न क्षेत्रों पर लागू होता है, जिसमें दैनिक जीवन के मुद्दे शामिल हैं और -; जैसे परिवार, शिक्षा (education) और रोजगार और - और मानसिक स्वास्थ्य (treatment) समस्याओं का उपचार (mental health).

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मिन

प्राचीन मिस्र के धर्म का एक देवता जिनके पंथ का उदय पूर्वअधिवंशीय काल (चौथी सहस्राब्दी ईसा पूर्व) में हुआ था। उन्हें अधिकतर मानव रूप में दर्शाया जाता है जिनके बाएँ हाथ में खड़ा हुआ लिंग व दाहिने हाथ में मूसल है। खेम या मिन के रूप में वे प्रजनन के देवता थे और ख्नुम के रूप में वे सबके रचैता थे जिन्हें "इंसानों व देवताओं के निर्माता" कहा जाता था। श्रेणी:मिस्र का धर्म श्रेणी:मिस्र के देवी-देवता.

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मिरीनेथ

('देवी की प्यारी निथ', जिसका नाम मेरैरे (री) एक प्राचीन मिस्र आइजन अधिकारी थे जो अमर्ना अवधि में था, लगभग 1350 ईसा पूर्व में। वह मुख्य रूप से 2001 में सैकरा में पाया गया कब्र से जाना जाता है। वह शायद एटेन के महायाजक के समान है, जो अपनी मारेरा के मकबरे अमरर्ना पर कब्र से जाना जाता ह। बहुत ज्यादा नहीं Meryneith परिवार पृष्ठभूमि के बारे में जाना जाता है वह शायद राजा अम्होहोपेश तृतीय के अंतर्गत जन्म लेते थे उनके पिता एक अधिकारी थे जिन्हें खौत कहा जाता था। उनकी मां का नाम ज्ञात नहीं है अपनी कब्र मेरिनिथ के सबसे पुराने हिस्सों में "एटेन मंदिर" के पद के शीर्षक "आईएमआई-आर पी एन पीआर-जेटीएन" और बाद में "मेम्फिस में एटेन के मंदिर के मुखिया" शीर्षक से मिलता है। इस कार्यालय मेरिनिथ राजा Akhenaten के शासनकाल की शुरुआत में हो सकता है। रेने वैन वॉल्सेम, में: मार्टन जे। रेवेन, रेने वैन वेल्सम: द कब्र ऑफ़ मेरनीथ एट सक्कारा, टर्नहाउट 2014,, 41, 47 शायद राजा अखातेतन के शासनकाल में 9 वर्ष के आसपास, मेरिनेथ ने अपना नाम मेर्री बदल दिया राजा अखातेतन के तहत केवल सूरज की पूजा की गई थी और मेरिनिथ को या तो अपने नाम को बदलने के लिए मजबूर किया गया था या नए शाही धार्मिक राजनीति को फिट करने के लिए स्वैच्छिक नाम बदल दिया था। सक्कारा में अपनी कब्र में, मरीनीथ नाम का नाम शिलालेख में बदलकर मारीर गया था। राजा अखातेटेन के ज़्यादातर होने की वजह से वह मेम्फिस और एटेन के सबसे महान व्यक्तियों में अख्ति-एटेन (और?) में एटेन के मंदिर के ' बाद का पद एटेन के महायाजक का खिताब है। वैन वल्सम, इन: रैवेन, वैन वॉल्सेम: द मबर ऑफ मेरनीथ ऐट सक्कारा, 44, 48 एटन के एक महायाजक अमरर्ना में उसी कब्र के नाम से ही जाना जाता है। यह संभव है कि दोनों मेर्री एक और एक ही व्यक्ति हैं। अपने करियर के अंत में, राजा तूतंकमुन के शासनकाल की शुरुआत में उन्होंने मेम्फिस में वापस चले गए और अपना नाम बदलकर मेरिनेथ कर दिया। वे अब नीथ का पहला पुजारी बन गए। वैन वॉल्सेम में: रेवेन, वैन वॉल्सेम: सैकरा में मरीनीथ का मकबरा 44, यह प्रतीत होता है कि शुरुआती वर्षों में मेरिनिथ का निधन हो गया था तुतेंकमान का शासनकाल उनकी कब्र के सजावट के अधिकांश भाग इन वर्षों में समाप्त हुए थे यह संभव है कि उन्हें अपमानित करने में अपने करियर के अंत में महसूस किया गया और उसकी कब्र में कभी दफन नहीं किया गया। उसकी कब्र के दफन कक्षों में उनके नाम के साथ अंतिम उपकरणों के किसी भी वस्तु का कोई हिस्सा नहीं मिला।.

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मिस्र

मिस्र (अरबी; مصر, अंग्रेजी:Egypt), आधिकारिक तौर पर मिस्र अरब गणराज्य, एक देश है जिसका अधिकांश हालांकि उत्तरी अफ्रीका में स्थित है जबकि इसका सिनाई प्रायद्वीप, दक्षिणपश्चिम एशिया में एक स्थल पुल बनाता है। इस प्रकार मिस्र एक अंतरमहाद्वीपीय देश है, तथा अफ्रीका, भूमध्य क्षेत्र, मध्य पूर्व और इस्लामी दुनिया की यह एक प्रमुख शक्ति है। इसका क्षेत्रफल 1010000 वर्ग किलोमीटर है और इसके उत्तर में भूमध्य सागर, पूर्वोत्तर में गाजा पट्टी और इस्राइल, पूर्व में लाल सागर, दक्षिण में सूडान और पश्चिम में लीबिया स्थित है। मिस्र, अफ्रीका और मध्य पूर्व के सबसे अधिक जनसंख्या वाले देशों में से एक है। इसकी अनुमानित 7.90 करोड़ जनसंख्या का अधिकतर हिस्सा नील नदी के किनारे वाले हिस्से में रहता है। नील नदी का यह क्षेत्र लगभग 40000 वर्ग किलोमीटर (15000 वर्ग मील) का है और पूरे देश का सिर्फ इसी क्षेत्र में कृषि योग्य भूमि पायी जाती है। सहारा मरुस्थल के एक बड़े हिस्से में विरल जनसंख्या निवास करती है। मिस्र के लगभग आधे निवासी शहरों में वास करते हैं जिनमें नील नदी के मुहाने के क्षेत्र में बसे सघन जनसंख्या वाले शहर जैसे कि काहिरा, सिकन्दरिया आदि प्रमुख हैं। मिस्र की मान्यता उसकी प्राचीन सभ्यता के लिए है। गीज़ा पिरामिड परिसर और महान स्फिंक्स जैसे प्रसिद्ध स्मारक यहीं स्थित है। मिस्र के प्राचीन खंडहर जैसे कि मेम्फिस, थेबिस, करनाक और राजाओं की घाटी जो लक्सर के बाहर स्थित हैं, पुरातात्विक अध्ययन का एक महत्वपूर्ण केंद्र हैं। यहां के शासक को फारो नाम से जाना जाता था। इस पदवी का प्रयोग ईसाई और इस्लाम काल के पूर्व काल में होता था। इसे फारोह भी लिखते हैं। फारो को मिस्र के देवता होरसका पुनर्जन्म माना जाता था। होरस द्यौ (आकाश) का देवता था और इसे सूर्य भी माना जाता था। मिस्र की कार्यशक्ति का लगभग 12% हिस्सा पर्यटन और लाल सागर रिवेरा में कार्यरत है। मध्य पूर्व में, मिस्र की अर्थव्यवस्था सबसे अधिक विकसित और विविध अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। पर्यटन, कृषि, उद्योग और सेवा जैसे क्षेत्रों का उत्पादन स्तर लगभग एक समान है। 2011 के शुरूआत में मिस्र उस क्रांति का गवाह बना, जिसके द्वारा मिस्र से होस्नी मुबारक नाम के तानाशाह के 30 साल के शासन का खात्मा हुआ। .

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मिस्र साम्राज्य

१५वीं शताब्दी ईसापूर्व में मिस्र साम्राज्य अपने सर्वाधिक विस्तृत रूप में था। प्राचीन मिस्र के इतिहास के १६वीं शताब्दी ई॰पू॰ से ११ शताब्दी ई॰पू॰ की अवधि को मिस्र का नवीन साम्राज्य या मिस्र साम्राज्य कहा जाता है। इस समय मिस्र के अठारहवें, उन्नीसवें और बीसवें राजवंश ने शासन किया। रेडियोकार्बन तिथि निर्धारण पद्धति से इस साम्राज्य का यथार्थ उद्भव १५७०–१५४४ ई॰पू॰ प्राप्त होता है। इस काल में मिस्र अपने वैभव और शक्ति के शिखर पर था। .

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मिस्र का इतिहास

मिस्र का इतिहास कई भागों में बटा हुआ है। यहाँ प्राचीन सभ्यता विकसित हुई जिसके बाद ग्रीक, ईरानी, रोमन तथा अरब साम्राज्यों का अंश रहा था। .

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मिस्री भाषा

मिस्री भाषा मिस्र की सबसे प्राचीन ज्ञात भाषा है और सामी-हामी भाषा-परिवार (अफ़्रो-एशियाई भाषा-परिवार) की एक शाखा है। इसकी लिखाईयाँ ३४०० ईसापूर्व से ज्ञात हैं जिस आधार पर इसे विश्व की सबसे पुरानी लिखित भाषाओं में गिना जाता है। यह प्राचीन मिस्र की सभ्यता की भाषा हुआ करती थी लेकिन मिस्र पर मुस्लिम क़ब्ज़ा होने के बाद धीरे-धीरे अरबी भाषा ने इसका स्थान लेना आरम्भ कर दिया। इसकी वंशज कोप्ती भाषा १७वीं सदी तक कुछ समुदायों में दैनिक प्रयोग की भाषा थी लेकिन वह भी अब अरबी द्वारा हटाई जा चुकी है, हालांकि कोप्ती ईसाई धर्म में यह अभी भी धार्मिक कार्यों के लिए प्रयोग होती है। इसे सहजता से बोलने वाले अब कुछ ही वक्ता बचे हैं।.

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मुक्केबाज़ी

मुक्केबाज़ी लड़ाई का एक खेल और एक मार्शल कला है, जिसमें दो लोग अपनी मुट्ठियों का प्रयोग करके लड़ते हैं। विशिष्ट रूप से मुक्केबाज़ी का संचालन एक-से तीन-मिनटों के अंतरालों, जिन्हें चक्र (Rounds) कहा जाता है, की एक श्रृंखला के दौरान एक रेफरी के द्वारा किया जाता है, तथा मुक्केबाज़ सामान्यतः एक समान भार वाले होते हैं। जीतने के तीन तरीके हैं; यदि विरोधी को गिरा दिया जाए तथा वह रेफरी द्वारा दस सेकंड की गिनती किये जाने से पूर्व उठ पाने में सक्षम न हो सके (एक नॉक-आउट या KO) अथवा यदि यह प्रतीत हो कि विरोधी इतना अधिक घायल हो चुका है कि वह खेल जारी रख पाने में असमर्थ है (एक तकनीकी नॉक-आउट या TKO).

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मृत्युदंड

एशियाई विश्व में सबसे प्रचलित मृत्युदंड का रूप है फांसी मृत्युदण्ड (अंग्रेज़ी:''कैपिटल पनिश्मैन्ट''), किसी व्यक्ति को कानूनी तौर पर न्यायिक प्रक्रिया के फलस्वरूप किसी अपराध के परिणाम में प्राणांत का दण्ड देने को कहते हैं। अंग्रेज़ी में इसके लिये प्रयुक्त कैपिटल शब्द लैटिन के कैपिटलिस शब्द से आया है, जिसका शाब्दिक अर्थ है "सिर के संबंध में या से संबंधित" (लैटिन कैपुट)। इसके मूल में आरंभिक रूप में दिये जाने वाले मृत्युदण्ड का स्वरूप सिर को धड़ से अलग कर देने की प्रक्रिया में है। वर्तमान समय में एमनेस्टी इंटरनेशनल के आंकड़ों के अनुसार विश्व के 58 देशों में अभी मृत्युदंड दिया जाता है, जबकि अन्य देशों में या तो इस पर रोक लगा दी गई है, या गत दस वर्षो से किसी को फांसी नहीं दी गई है। यूरोपियाई संघ के सदस्य देशों में,चार्टर ऑफ फ़्ण्डामेण्टल राइट्स ऑफ द यूरोपियन यूनियन की धारा-2 मृत्युदण्ड को निषेध करती है। .

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यूनानी अंधकार काल

ज्यामितीय रेखाचित्र दिखते हैं अंधकार काल के यूनान का एक नक़्शा यूनानी अंधकार काल ग्रीस (यूनान) के इतिहास में १२०० ईसापूर्व से ८०० ईसापूर्व के काल को कहा जाता है जिस से सम्बंधित लेख इतिहासकारों को नहीं मिल पाए हैं। इस युग से पहले के रेखीय बी लिपि में लिखी माइसीनियाई यूनानी के बहुत से नमूने मिटटी के तख़्तो और बर्तनों पर और इमारतों पर मिले हैं। इस "अंधकार" काल के बाद इस उपभाषा का प्रयोग नहीं मिलता बल्कि शास्त्रीय यूनानी कहलाई जाने वाली उत्तरी उपभाषा की लिखाइयाँ ही मिलती हैं जिनमें आधुनिक यूनानी अक्षरमाला से मिलती-जुलती लिपि का प्रयोग है। माइसीनियाई युग में बर्तनों और अन्य वस्तुओं पर बहुत विस्तृत चित्रों (डिज़ाईनों) को देखा जाता था, लेकिन अंधकार युग में मिली वस्तुओं पर सादे रेखा-चित्रों को ही पाया गया, जिस से यह लगा कि एक कला-विकसित संस्कृति किसी वजह से गिरकर अविकसित हो गई। इन तथ्यों को समझने के लिए इतिहासकारों ने घटनाक्रम इस तरह से जोड़ा कि उसमें पहले माइसीनियाई यूनानी संस्कृति फल-फूल रही थी, फिर उत्तर से डोरियाई कहलाए जाने वाले लोगों का आक्रमण हुआ जिन्होनें इस सभ्यता का अंत कर दिया। लगभग ४०० सालों तक यूनान एक बर्बरता के अंधकार में रहा और इस काल की कोई लिखाई नहीं मिलती क्योंकि लिखाइयाँ बनी ही नहीं थीं। उसके बाद सभ्यता एक नई उपभाषा के साथ फिर जन्मी। इसके विपरीत वर्तमान के कुछ विद्वानों का मानना है कि ऐसा कोई अंधकार काल कभी था ही नहीं और इस काल के लेख इसलिए नहीं मिलें क्योंकि उन्हें ठीक से खोजा नहीं गया है। मतभेद जारी है। .

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रामेसेस द्वितीय

रामेसेस द्वितीय या रामेसेस महान (१३०३-१२१३ ईसापूर्व) प्राचीन मिस्र के नविन राज्य के उन्नीसवे वंश का तीसरा फैरो था। रामेसेस अपनी युद्ध निति और कई सफल सैन्य अभियानों के लिए प्रसिद्ध है। रामेसेस मिस्र को अपने चरम तक ले गया था और कानन और नुबिया पर विजय प्राप्त कर उसे अपने अधीन किया था। रामेसेस १४ वर्ष की उम्र में मिस्र का उत्तराधिकारी और युवराज बना, अपने बचपन में ही वह मिस्र के सिंहासन पर बैठा और ६६ वर्ष तक ९० की उम्र तक शासन करता रहा जो की अब तक का सबसे लंबा शासन काल है। अपने शासन काल की शुरुआत में उसने पहले स्मारक और मंदिर बनाने और नगर बसाने पर ध्यान दिया। उसने पी रामेसेस नाम का नगर बसाया और फिर उसे अपनी नई राजधानी बनाई ताकि सीरिया पर हमला किया जा सके। रामेसेस प्राचीन मिस्र का सबसे प्रसिद्ध और शक्तिशाली फैरो था, साथ ही मिस्र का आखिरी महान फैरो भी| उसकी मृत्यु के बाद मिस्र कमजोर पड़ गया और फिर विदेशी साम्राज्यों का प्रांत बन गया। रामेसेस द्वितीय के प्रताप के कारण लोग पिछले सभी महान फैरो जैसे सेती प्रथम और ठुतोमोस तृतीय की वीरता को भूल गए। रामेसेस द्वितीय के बाद के फैरो उसे महान पुरखा कहते, वह तुथंखमुन के बाद मिस्र का सबसे प्रसिद्ध फैरो माना जाता है। .

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रेखीय ए लिपि

क्रीत पर पाए गए एक बासन पर अंकित रेखीय ए के कुछ चिह्न यह रेखीय ए के चिह्न एक प्याले की अंदरी सतह पर लिखे हुए मिले थे रेखीय ए यूनान के क्रीत द्वीप पर प्राचीन काल में इस्तेमाल होने वाली एक लिपि थी जिसमें क्रीत की मिनोआई सभ्यता की भाषा लिखी जाती थी। क्रीत पर एक भावचित्रों पर आधारित लिपि भी प्रयोग होती थी। सरकारी और धार्मिक प्रयोगों में रेखीय ए और ठप्पों और मोहरों पर यह भावचित्र देखने को मिलते हैं। मिनोआई सभ्यता के पतन के बाद क्रीत पर माइसीनियाई यूनानी बोली जाने लगी जो रेखीय बी लिपि में लिखी जाती थी। इतिहासकार रेखीय बी की बहुत सी समझ रखते हैं और यह पाया गया है कि रेखीय ए और रेखीय बी में काफ़ी सामान अक्षर मिलते हैं। रेखीय बी लिपि रेखीय ए की संतान मानी जाती है। जब रेखीय बी से ध्वनियाँ लेकर रेखीय ए को पढ़ा जाता है तो ऐसे शब्द उत्पन्न होते हैं जो किसी भी ज्ञात भाषा से नहीं हैं। इसलिए अब यह माना जाता है कि मूल मिनोआई भाषा यूनानी भाषा से असम्बंधित थी और शायद हिन्द-यूरोपीय भाषा परिवार की सदस्य ही नहीं थी। यह भी संभव है कि रेखीय ए की ध्वनियाँ बिलकुल ही ग़लत पढ़ी जा रही हो क्योंकि मिनोआई भाषा बिलकुल ही अज्ञात है। खंडरों और शिलालेखों के आधार पर इतिहासकार मानते हैं कि रेखीय ए की अक्षर माला १९००-१८०० ईसापूर्व के काल तक पूरी कर ली गई थी। इसमें कुछ ऐसे भी चिह्न मिलते हैं जो प्राचीन मिस्र के २१००-१९०० ईसापूर्व में निर्मित कुछ पुरातन स्थलों पर पाए गए हैं। .

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लाजवर्द

लाजवर्द का एक नमूना - प्राचीन भारतीय सभ्यता में यह नवरत्नों में से एक था लाजवर्द या राजावर्त (अंग्रेज़ी: Lapis lazuli, लैपिस लैज़्यूली) एक मूल्यवान नीले रंग का पत्थर है जो प्राचीनकाल से अपने सुन्दर नीले रंग के लिए पसंद किया जाता है। कई स्रोतों के अनुसार प्राचीन भारतीय संस्कृति में जिन नवरत्नों को मान्यता दी गई थी उनमें से एक लाजवर्द था। भारतीय ज्योतिष शास्त्र के अनुसार लाजवर्द शुक्र ग्रह का प्रतीक है।, William Goonetilleke, pp.

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लिनेन

किनारों के आसपास धागा की कढ़ाई के साथ एक लिनन का रूमाल डेड सी के पास से बरामाद कोरान केव 1 से प्राप्त एक लेनिन का कपड़ा. लिनेन सन के पौधे लिनम यूज़ीटेटीसीमम के रेशों से बना एक कपड़ा है। लिनेन का निर्माण श्रम-साध्य है, लेकिन जब इसके वस्त्र तैयार हो जाते हैं तो गर्मियों के मौसम में इसकी असाधारण ठंडक एवं ताजगी के लिए इसकी गुणवत्ता बढ़ जाती है। लिनेन की बुनावट वाले कपड़ों को भी मोटे तौर पर "लिनेन" के रूप में संदर्भित किया जाता है, भले ही वे कपास, सन या सन के अतिरिक्त अन्यान्य रेशों से बने हों.

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शारीरिक दण्ड

शारीरिक दंड एक अपराध की सजा के रूप में, गलती करने वाले को अनुशासित करने के लिए या अस्वीकार्य प्रवृति या व्यवहार को रोकने हेतु दिया जाने वाला सुविचारित दण्ड है। यह शब्द क्रमबद्ध ढंग से आमतौर पर एक अपराधी को मारने के साथ संदर्भित है, चाहे न्यायिक, घरेलु या शैक्षणिक समायोजन हो। शारीरिक दंड को तीन मुख्य प्रकारों में विभाजित किया जा सकता है.

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श्रीलंका का इतिहास

इतिहासकारों में इस बात की आम धारणा थी कि श्रीलंका के आदिम निवासी और दक्षिण भारत के आदिम मानव एक ही थे। पर अभी ताजा खुदाई से पता चला है कि श्रीलंका के शुरुआती मानव का सम्बंध उत्तर भारत के लोगों से था। भाषिक विश्लेषणों से पता चलता है कि सिंहली भाषा, गुजराती और सिंधी से जुड़ी है। प्राचीन काल से ही श्रीलंका पर शाही सिंहला वंश का शासन रहा है। समय समय पर दक्षिण भारतीय राजवंशों का भी आक्रमण भी इसपर होता रहा है। तीसरी सदी इसा पूर्व में मौर्य सम्राट अशोक के पुत्र महेन्द्र के यहां आने पर बौद्ध धर्म का आगमन हुआ। इब्नबतूता ने चौदहवीं सदी में द्वीप का भ्रमण किया। .

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सर-ए-संग

सर-ए-संग (फ़ारसी:, अंग्रेज़ी: Sar-i Sang) उत्तरी अफ़ग़ानिस्तान के बदख़्शान प्रान्त के कूरान व मुन्जान ज़िले में कोकचा नदी की घाटी में स्थित एक बस्ती है। यह अपनी लाजवर्द (लैपिस लैज़्यूली) की खान के लिए मशहूर है जहाँ से हज़ारों सालों से यह मूल्यवान पत्थर निकाला जा रहा है। प्राचीन दुनिया में साइबेरिया की छोटी-मोटी दो-एक खानों को छोड़कर यह विश्व का एकमात्र लाजवर्द का स्रोत होता था। सर-ए-संग का लाजवर्द दुनिया का सब से उत्तम कोटि का लाजवर्द माना जाता है। २००० ईसापूर्व में अपने चरम पर सिन्धु घाटी सभ्यता ने भी यहाँ के शोरतुगई इलाक़े के पास एक व्यापारिक बस्ती बनाई थी जिसके ज़रिये लाजवर्द भारतीय उपमहाद्वीप के अलावा प्राचीन मिस्र और मेसोपोटामिया की सभ्यताओं तक भी पहुँचाया जाता था।, Peter Roger Moorey, Eisenbrauns, pp.

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सामंतवाद

अपने प्रतिज्ञाओं के लिए रोलाण्ड शारलेमेन; चेनसन डे गेस्टे, c.14th.c. की एक पांडुलिपि से सामंतवाद (Feudalism / फ्युडलिज्म) मध्यकालीन युग में इंग्लैंड और यूरोप की प्रथा थी। इन सामंतों की कई श्रेणियाँ थीं जिनके शीर्ष स्थान में राजा होता था। उसके नीचे विभिन्न कोटि के सामंत होते थे और सबसे निम्न स्तर में किसान या दास होते थे। यह रक्षक और अधीनस्थ लोगों का संगठन था। राजा समस्त भूमि का स्वामी माना जाता था। सामंतगण राजा के प्रति स्वामिभक्ति बरतते थे, उसकी रक्षा के लिए सेना सुसज्जित करते थे और बदले में राजा से भूमि पाते थे। सामंतगण भूमि के क्रय-विक्रय के अधिकारी नहीं थे। प्रारंभिक काल में सामंतवाद ने स्थानीय सुरक्षा, कृषि और न्याय की समुचित व्यवस्था करके समाज की प्रशंसनीय सेवा की। कालांतर में व्यक्तिगत युद्ध एवं व्यक्तिगत स्वार्थ ही सामंतों का उद्देश्य बन गया। साधन-संपन्न नए शहरों के उत्थान, बारूद के आविष्कार, तथा स्थानीय राजभक्ति के स्थान पर राष्ट्रभक्ति के उदय के कारण सामंतशाही का लोप हो गया।.

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सिविल इंजीनियरी

द पेट्रोनस ट्विन टावर्स, जिसे वास्तुकार सीज़र पेली और थोरनटन-टोमेसिटी और रेन हिल बरसेकुटू एस.डी. एन. बी. एच. डी. इंजीनियरों ने बनाया था। ये इमारत 1998-2004 तक दुनिया की सबसे ऊँची इमारत थी। सिविल इंजीनियरी, व्यावसायिक इंजीनियरिंग की एक शाखा है जो कि भौतिक और प्राकृतिक रूप से बने परिवेश में पुल, सड़क,नहरें, बाँध और भवनों आदि के डिजाइन, निर्माण और रखरखाव से जुड़ी है।सिविल इंजीनियरिंग, सैन्य अभियान्त्रिकी के बाद आने वाली इंजीनियरिंग की सबसे पुरानी शाखा है। इसे सैन्य इंजीनियरिंग से अलग करने के लिए 'असैनिक इंजीनियरिंग' (सिविल इंजीनियरी) के रूप में परिभाषित किया गया। परंपरागत रूप से इसे कई उप-शाखाओं में बांटा गया है, जिनमें -पर्यावरण इंजीनियरिंग, भू-तकनीक इंजीनियरिंग, संरचनात्मक इंजीनियरिंग, परिवहन इंजीनियरिंग, नगरपालिका या शहरी इंजीनियरिंग, जल संसाधन इंजीनियरिंग, पदार्थ इंजीनियरिंग, तटीय इंजीनियरिंग, सर्वेक्षण और निर्माण इंजीनियरिंग. सिविल इंजीनियरिंग हर स्तर पर होती है: सार्वजनिक क्षेत्र में नगरपालिका के क्षेत्र से संघीय स्तरों तक और निजी क्षेत्र में व्यक्तिगत घरों के मालिकों से अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों तक.

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सिंडरेला

सिंडरेला या, द लिटिल ग्लास स्लिपर (फ्रांसीसी: सेनड्रीलॉन, ओऊ ला पेटाईट पैनटोफल डी वेरे) एक विख्यात पारंपरिक लोक कथा है, जिसमें अन्याय का दमन/विजय रुपी एक मिथक तत्व का वर्णन है। दुनिया भर में इसके हज़ारों मित प्रचलित हैं। इसकी मुख्य चरित्र दुर्भाग्यपूर्ण परिस्थितियों में रहती एक युवा लड़की है, जिसकी किस्मत का सितारा अचानक बदल जाता है। "सिंडरेला" शब्द का तात्पर्य सादृश्य के आधार पर उस व्यक्ति से है जिसकी विशेषताओं को कोई मोल नहीं देता या वह जो एक अवधि तक दुःख और उपेक्षा भरा जीवन बिताने के बाद अनपेक्षित रूप से पहचान या सफलता हासिल कर लेती है। सिंडरेला की यह लोकप्रिय कहानी अभी भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय संस्कृतियों को प्रभावित करती है और विभिन्न प्रकार की मीडिया को कथानक के तत्व, प्रसंग, संकेत आदि उधार देती है। .

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सिंधु घाटी सभ्यता

सिंधु घाटी सभ्यता अपने शुरुआती काल में, 3250-2750 ईसापूर्व सिंधु घाटी सभ्यता (3300 ईसापूर्व से 1700 ईसापूर्व तक,परिपक्व काल: 2600 ई.पू. से 1900 ई.पू.) विश्व की प्राचीन नदी घाटी सभ्यताओं में से एक प्रमुख सभ्यता है। जो मुख्य रूप से दक्षिण एशिया के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्रों में, जो आज तक उत्तर पूर्व अफगानिस्तान,पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिम और उत्तर भारत में फैली है। प्राचीन मिस्र और मेसोपोटामिया की प्राचीन सभ्यता के साथ, यह प्राचीन दुनिया की सभ्यताओं के तीन शुरुआती कालक्रमों में से एक थी, और इन तीन में से, सबसे व्यापक तथा सबसे चर्चित। सम्मानित पत्रिका नेचर में प्रकाशित शोध के अनुसार यह सभ्यता कम से कम 8000 वर्ष पुरानी है। यह हड़प्पा सभ्यता और 'सिंधु-सरस्वती सभ्यता' के नाम से भी जानी जाती है। इसका विकास सिंधु और घघ्घर/हकड़ा (प्राचीन सरस्वती) के किनारे हुआ। मोहनजोदड़ो, कालीबंगा, लोथल, धोलावीरा, राखीगढ़ी और हड़प्पा इसके प्रमुख केन्द्र थे। दिसम्बर २०१४ में भिर्दाना को सिंधु घाटी सभ्यता का अब तक का खोजा गया सबसे प्राचीन नगर माना गया है। ब्रिटिश काल में हुई खुदाइयों के आधार पर पुरातत्ववेत्ता और इतिहासकारों का अनुमान है कि यह अत्यंत विकसित सभ्यता थी और ये शहर अनेक बार बसे और उजड़े हैं। 7वी शताब्दी में पहली बार जब लोगो ने पंजाब प्रांत में ईटो के लिए मिट्टी की खुदाई की तब उन्हें वहां से बनी बनाई इटे मिली जिसे लोगो ने भगवान का चमत्कार माना और उनका उपयोग घर बनाने में किया उसके बाद 1826 में चार्ल्स मैसेन ने पहली बार इस पुरानी सभ्यता को खोजा। कनिंघम ने 1856 में इस सभ्यता के बारे में सर्वेक्षण किया। 1856 में कराची से लाहौर के मध्य रेलवे लाइन के निर्माण के दौरान बर्टन बंधुओं द्वारा हड़प्पा स्थल की सूचना सरकार को दी। इसी क्रम में 1861 में एलेक्जेंडर कनिंघम के निर्देशन में भारतीय पुरातत्व विभाग की स्थापना की। 1904 में लार्ड कर्जन द्वारा जॉन मार्शल को भारतीय पुरातात्विक विभाग (ASI) का महानिदेशक बनाया गया। फ्लीट ने इस पुरानी सभ्यता के बारे में एक लेख लिखा। १९२१ में दयाराम साहनी ने हड़प्पा का उत्खनन किया। इस प्रकार इस सभ्यता का नाम हड़प्पा सभ्यता रखा गया व दयाराम साहनी को इसका खोजकर्ता माना गया। यह सभ्यता सिन्धु नदी घाटी में फैली हुई थी इसलिए इसका नाम सिन्धु घाटी सभ्यता रखा गया। प्रथम बार नगरों के उदय के कारण इसे प्रथम नगरीकरण भी कहा जाता है। प्रथम बार कांस्य के प्रयोग के कारण इसे कांस्य सभ्यता भी कहा जाता है। सिन्धु घाटी सभ्यता के १४०० केन्द्रों को खोजा जा सका है जिसमें से ९२५ केन्द्र भारत में है। ८० प्रतिशत स्थल सरस्वती नदी और उसकी सहायक नदियों के आस-पास है। अभी तक कुल खोजों में से ३ प्रतिशत स्थलों का ही उत्खनन हो पाया है। .

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सिंह (पशु)

सिंह (पेन्थेरा लियो) पेन्थेरा वंश की चार बड़ी बिल्लियों में से एक है और फेलिडे परिवार का सदस्य है। यह बाघ के बाद दूसरी सबसे बड़ी सजीव बिल्ली है, जिसके कुछ नरों का वजन २५० किलोग्राम से अधिक होता है। जंगली सिंह वर्तमान में उप सहारा अफ्रीका और एशिया में पाए जाते हैं। इसकी तेजी से विलुप्त होती बची खुची जनसंख्या उत्तर पश्चिमी भारत में पाई जाती है, ये ऐतिहासिक समय में उत्तरी अफ्रीका, मध्य पूर्व और पश्चिमी एशिया से गायब हो गए थे। प्लेइस्तोसेन के अंतिम समय तक, जो लगभग १०,००० वर्ष् पहले था, सिंह मानव के बाद सबसे अधिक व्यापक रूप से फैला हुआ बड़ा स्तनधारी, भूमि पर रहने वाला जानवर था। वे अफ्रीका के अधिकांश भाग में, पश्चिमी यूरोप से भारत तक अधिकांश यूरेशिया में और युकोन से पेरू तक अमेरिका में पाए जाते थे। सिंह जंगल में १०-१४ वर्ष तक रहते हैं, जबकि वे कैद मे २० वर्ष से भी अधिक जीवित रह सकते हैं। जंगल में, नर कभी-कभी ही दस वर्ष से अधिक जीवित रह पाते हैं, क्योंकि प्रतिद्वंद्वियों के साथ झगड़े में अक्सर उन्हें चोट पहुंचती है। वे आम तौर पर सवाना और चारागाह में रहते हैं, हालांकि वे झाड़ी या जंगल में भी रह सकते हैं। अन्य बिल्लियों की तुलना में सिंह आम तौर पर सामाजिक नहीं होते हैं। सिंहों के एक समूह जिसे अंग्रेजी मे प्राइड कहॉ जाता में सम्बन्धी मादाएं, बच्चे और छोटी संख्या में नर होते हैं। मादा सिंहों का समूह प्रारूपिक रूप से एक साथ शिकार करता है, जो अधिकांशतया बड़े अनग्युलेट पर शिकार करते हैं। सिंह शीर्ष का और कीस्टोन शिकारी है, हालांकि वे अवसर लगने पर मृतजीवी की तरह भी भोजन प्राप्त कर सकते हैं। सिंह आमतौर पर चयनात्मक रूप से मानव का शिकार नहीं करते हैं, फिर भी कुछ सिंहों को नर-भक्षी बनते हुए देखा गया है, जो मानव शिकार का भक्षण करना चाहते हैं। सिंह एक संवेदनशील प्रजाति है, इसकी अफ्रीकी रेंज में पिछले दो दशकों में इसकी आबादी में संभवतः ३० से ५० प्रतिशत की अपरिवर्तनीय गिरावट देखी गयी है। ^ डाटाबेस प्रवेश में एस बात का एक लंबा औचित्य सम्मिलित है कि यह प्रजाति संवेदनशील क्यों है। क्यों इस प्रजाति की दुर्दशा का एक भी सम्मिलित है सिंहों की संख्या नामित सरंक्षित क्षेत्रों और राष्ट्रीय उद्यानों के बहार अस्थिर है। हालांकि इस गिरावट का कारण पूरी तरह से समझा नहीं गया है, आवास की क्षति और मानव के साथ संघर्ष इसके सबसे बड़े कारण हैं। सिंहों को रोमन युग से पिंजरे में रखा जाता रहा है, यह एक मुख्य प्रजाति रही है जिसे अठारहवीं शताब्दी के अंत से पूरी दुनिया में चिडिया घर में प्रदर्शन के लिए रखा जाता रहा है। खतरे में आ गयी एशियाई उप प्रजातियों के लिए पूरी दुनिया के चिड़ियाघर प्रजनन कार्यक्रमों में सहयोग कर रहे हैं। दृश्य रूप से, एक नर सिंह अति विशिष्ट होता है और सरलता से अपने अयाल (गले पर बाल) द्वारा पहचाना जा सकता है। सिंह, विशेष रूप से नर सिंह का चेहरा, मानव संस्कृति में सबसे व्यापक ज्ञात जंतु प्रतीकों में से एक है। उच्च पाषाण काल की अवधि से ही इसके वर्णन मिलते हैं, जिनमें लॉसकाक्स और चौवेत गुफाओं की व नक्काशियां और चित्रकारियां सम्मिलित हैं, सभी प्राचीन और मध्य युगीन संस्कृतियों में इनके प्रमाण मिलते हैं, जहां ये ऐतिहासिक रूप से पाए गए। राष्ट्रीय ध्वजों पर, समकालीन फिल्मों और साहित्य में चित्रकला में, मूर्तिकला में और साहित्य में इसका व्यापक वर्णन पाया जाता है। .

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सिकन्दरिया

सूर्यास्तकालीन सिकन्दरिया. सिकन्दरिया की सड़कें. सिकन्दरिया (अंग्रेजी:Alexandria; अरबी: الإسكندرية अल-इस्कंदरिया), मिस्र का दूसरा सबसे बड़ा शहर है। यहां की जनसंख्या 41 लाख है और यह देश का सबसे बड़ा समुद्री बंदरगाह है जहां मिस्र का लगभग 80% आयात और निर्यात कार्य संपन्न होता है। सिकन्दरिया एक महत्वपूर्ण पर्यटक स्थल भी है। सिकन्दरिया, उत्तर-मध्य मिस्र में भूमध्य सागर के तट के किनारे लगभग दूर तक फैला हुआ है। यह बिब्लियोथेका अलेक्जेंड्रिना (नया पुस्तकालय) का घर है। एक अन्य शहर, स्वेज, से अपने प्राकृतिक गैस और तेल की पाइपलाइनों की वजह से यह मिस्र का एक महत्वपूर्ण औद्योगिक केंद्र बन गया है। प्राचीन काल में, सिकन्दरिया दुनिया के सबसे प्रसिद्ध शहरों में से एक था। इसकी स्थापना सिकंदर महान (अलेक्जेंडर द ग्रेट) ने लगभग (c.) 331 ई.पू.

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सउदी अरब

सउदी अरब मध्यपूर्व में स्थित एक सुन्नी मुस्लिम देश है। यह एक इस्लामी राजतंत्र है जिसकी स्थापना १७५० के आसपास सउद द्वारा की गई थी। यहाँ की धरती रेतीली है तथा जलवायु उष्णकटिबंधीय मरुस्थल। यह विश्व के अग्रणी तेल निर्यातक देशों में गिना जाता है। सउदी अरब के पश्चिम की ओर लाल सागर है और उसके पार मिस्र। दक्षिण की ओर ओमान और यमन हैं और उनके दक्षिण में हिन्द महासागर। उत्तर में इराक और ज़ॉर्डन की सीमा लगती है जबकि पूरब में फारस की खाड़ी और कुवैत तथा संयुक्त अरब अमीरात। इसरायल-फ़िलिस्तीन का क्षेत्र इसके उत्तर की दिशा में है और अरबों ने इसके इतिहास को बहुत प्रभावित किया है। यहाँ इस्लाम के प्रवर्तक मुहम्मद साहब का जन्म हुआ था और यहाँ इस्लाम के दो सबसे पवित्र स्थल मक्का और मदीना अवस्थित हैं। इस्लाम में हज का स्थान मक्का बताया गया है और दुनिया के सारे मुसलमान मक्का की ओर ही नमाज अदा करते हैं। यहाँ के मुसलमान मुख्यतः सुन्नी हैं और इस्लाम की राजनैतिक राजधानी के इस देश से बाहर रहने के बावजूद इस देश के लोगों ने इस्लाम धर्म पर अपनी अमिट छाप छोड़ी है। .

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स्वप्न व्याख्या

टॉम पेन सोये हुए एक बुरा स्वप्न देख रहे हैं स्वप्न व्याख्या सपनों को अर्थ देने की प्रक्रिया है। मिस्र और ग्रीस जैसे कई प्राचीन समाजों में, स्वप्न देखने को एक अलौकिक संचार या ईश्वरीय हस्तक्षेप माना जाता था जिसे वे ही सुलझा सकते थे जिनके पास निश्चित शक्तियां होती थीं। आधुनिक समय में, मनोविज्ञान की विभिन्न विचारधाराओं ने सपनों के अर्थ के बारे में सिद्धांत प्रस्तुत किए हैं। .

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ईसप की दंतकथाएं

हार्टमन शेडेल द्वारा नूर्नबर्ग क्रॉनिकल में एसोप.यहां वह 15वीं सदी के जर्मन कपड़े पहने दिखाए जा रहे हैं ईसप की दंतकथाएं या ईसपिका दंतकथाओं का एक संग्रह है जिसका श्रेय 620 ईपू से 520 ईपू के बीच प्राचीन यूनान में रहने वाले एक गुलाम और कथक ईसप को जाता है। उसकी दंतकथाएं विश्व की कुछ सर्वाधिक प्रसिद्ध दंतकथाओं में से हैं। ये दंतकथाएं अजकल के बच्चों के लिए नैतिक शिक्षा का लोकप्रिय विकल्प बनी हुई हैं। ईसप की दंतकथाओं में शामिल कई कहनियां, जैसे लोमड़ी और अंगूर (जिससे “अंगूर खट्टे हैं” मुहावरा निकला).

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विश्व का इतिहास

अंकोरवाट मंदिर विश्व के इतिहास से आशय अतीत से लेकर आजतक पृथ्वी के सभी स्थानों की मानवजाति के इतिहास से है। इसमें गैरमानव इतिहास जैसे प्राकृतिक इतिहास और भूवैज्ञानिक इतिहास शामिल नहीं हैं। .

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व्यावहारिक गणित

वाहन को शहर में एक स्थान से दूसरे स्थान पर कम से कम समय में ले जाने के लिए गणित का उपयोग करना पड़ सकता है। इसके लिए सांयोगिक इष्टतमीकरण (combinatorial optimization) तथा पूर्णांक प्रोग्रामन (integer programming) का उपयोग करना पड़ सकता है। व्यावहारिक गणित (अनुप्रयुक्त गणित या प्रायोगिक गणित), गणित की वह शाखा है जो ज्ञान की अन्य विधाओं की समस्याओं को गणित के जुगाड़ों (तकनीकों) के प्रयोग से हल करने से सम्बन्ध रखती है। ऐतिहास दृष्टि से देखें तो भौतिक विज्ञानों (physical sciences) की आवश्यकताओं ने गणित की विभिन्न शाखाओं के विकास में महती भूमिका निभायी। उदाहरण के लिये तरल यांत्रिकी में गणित का उपयोग करने से एक हल्का एवं कम ऊर्जा से की खपत करने वाला वायुयान की डिजाइन की जा सकती है। बहुत पुरातन काल से ही विषयों में गणित सर्वाधिक उपयोगी रहा है। यूनानी लोग गणित को न केवल संख्याओं और दिक् (स्पेस) का बल्कि खगोलविज्ञान और संगीत का भी अध्ययन मानते थे। गणितसारसंग्रह के 'संज्ञाधिकार' में मंगलाचरण के पश्चात महान प्राचीन भारतीय गणितज्ञ महावीराचार्य ने बड़े ही मार्मिक ढंग से गणित की प्रशंशा की है और गणित के अनेकानेक उपयोगों को गिनाया है- आज के 4000 वर्ष पहले बेबीलोन तथा मिस्र सभ्यताएँ गणित का इस्तेमाल पंचांग (कैलेंडर) बनाने के लिए किया करती थीं जिससे उन्हें पूर्व जानकारी रहती थी कि कब फसल की बुआई की जानी चाहिए या कब नील नदी में बाढ़ आएगी। अंकगणित का प्रयोग व्यापार में रुपयों-पैसों और वस्तुओं के विनिमय या हिसाब-किताब रखने के लिए किया जाता था। ज्यामिति का इस्तेमाल खेतों के चारों तरफ की सीमाओं के निर्धारण तथा पिरामिड जैसे स्मारकों के निर्माण में होता था। अपने दैनिक जीवन में रोजाना ही हम गणित का इस्तेमाल करते हैं-उस वक्त जब समय जानने के लिए हम घड़ी देखते हैं, अपने खरीदे गए सामान या खरीदारी के बाद बचने वाली रेजगारी का हिसाब जोड़ते हैं या फिर फुटबाल टेनिस या क्रिकेट खेलते समय बनने वाले स्कोर का लेखा-जोखा रखते हैं। व्यवसाय और उद्योगों से जुड़ी लेखा संबंधी संक्रियाएं गणित पर ही आधारित हैं। बीमा (इंश्योरेंस) संबंधी गणनाएं तो अधिकांशतया ब्याज की चक्रवृद्धि दर पर ही निर्भर है। जलयान या विमान का चालक मार्ग के दिशा-निर्धारण के लिए ज्यामिति का प्रयोग करता है। सर्वेक्षण का तो अधिकांश कार्य ही त्रिकोणमिति पर आधारित होता है। यहां तक कि किसी चित्रकार के आरेखण कार्य में भी गणित मददगार होता है, जैसे कि संदर्भ (पर्सपेक्टिव) में जिसमें कि चित्रकार को त्रिविमीय दुनिया में जिस तरह से इंसान और वस्तुएं असल में दिखाई पड़ते हैं, उन्हीं का तदनुरूप चित्रण वह समतल धरातल पर करता है। संगीत में स्वरग्राम तथा संनादी (हार्मोनी) और प्रतिबिंदु (काउंटरपाइंट) के सिद्धांत गणित पर ही आश्रित होते हैं। गणित का विज्ञान में इतना महत्व है तथा विज्ञान की इतनी शाखाओं में इसकी उपयोगिता है कि गणितज्ञ एरिक टेम्पल बेल ने इसे ‘विज्ञान की साम्राज्ञी और सेविका’ की संज्ञा दी है। किसी भौतिकविज्ञानी के लिए अनुमापन तथा गणित का विभिन्न तरीकों का बड़ा महत्व होता है। रसायनविज्ञानी किसी वस्तु की अम्लीयता को सूचित करने वाले पी एच (pH) मान के आकलन के लिए लघुगणक का इस्तेमाल करते हैं। कोणों और क्षेत्रफलों के अनुमापन द्वारा ही खगोलविज्ञानी सूर्य, तारों, चंद्र और ग्रहों आदि की गति की गणना करते हैं। प्राणीविज्ञान में कुछ जीव-जन्तुओं के वृद्धि-पैटर्नों के विश्लेषण के लिए विमीय विश्लेषण की मदद ली जाती है। जैसे-जैसे खगोलीय तथा काल मापन संबंधी गणनाओं की प्रामाणिकता में वृद्धि होती गई, वैसे-वैसे नौसंचालन भी आसान होता गया तथा क्रिस्टोफर कोलम्बस और उसके परवर्ती काल से मानव सुदूरगामी नए प्रदेशों की खोज में घर से निकल पड़ा। साथ ही, आगे के मार्ग का नक्शा भी वह बनाता गया। गणित का उपयोग बेहतर किस्म के समुद्री जहाज, रेल के इंजन, मोटर कारों से लेकर हवाई जहाजों के निर्माण तक में हुआ है। राडार प्रणालियों की अभिकल्पना तथा चांद और ग्रहों आदि तक अन्तरिक्ष यान भेजने में भी गणित से काम लिया गया है। .

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व्येरा लुदीकोवा

व्येरा लुदीकोवा (चेक भाषा में Věra Ludíková) चेक कवि है। उसका जन्म १६ जून १९४३ हुआ। वह आध्यात्मिक काव्य लिखती है। उसकी कविताओं का बहुत-सी भाषाओं में अनुवाद किया गया है। अक्सर कविताओं का एस्पेरांतो भाषा में अनुवाद किया गया है। कुछ उसकी कविताएँ हिंदी में भी उपलब्ध हैं। जिन पुस्तकों में हिंदी में लिखा हुआ काव्य मौजूद है उनके नाम नीचे दिये जाते हैं। .

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खतना

मध्य एशिया (तुर्कमेनिस्तान की अधिकांश सम्भावना) में खतना किया जा रहा है, लगभग1865-1872.अंडे की सफ़ेदी के निशान को बहाल रखा गया। खतना खतना पुरूषों का खतना उनके शिश्न की अग्र-त्वचा(खाल) को पूरी तरह या आंशिक रूप से हटा देने की प्रक्रिया है। “खतना (circumcision)" लैटिन भाषा का शब्द है circum (अर्थात “आस-पास”) और cædere (अर्थात “काटना”).

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गणित का इतिहास

ब्राह्मी अंक, पहली शताब्दी के आसपास अध्ययन का क्षेत्र जो गणित के इतिहास के रूप में जाना जाता है, प्रारंभिक रूप से गणित में अविष्कारों की उत्पत्ति में एक जांच है और कुछ हद तक, अतीत के अंकन और गणितीय विधियों की एक जांच है। आधुनिक युग और ज्ञान के विश्व स्तरीय प्रसार से पहले, कुछ ही स्थलों में नए गणितीय विकास के लिखित उदाहरण प्रकाश में आये हैं। सबसे प्राचीन उपलब्ध गणितीय ग्रन्थ हैं, प्लिमपटन ३२२ (Plimpton 322)(बेबीलोन का गणित (Babylonian mathematics) सी.१९०० ई.पू.) मास्को गणितीय पेपाइरस (Moscow Mathematical Papyrus)(इजिप्ट का गणित (Egyptian mathematics) सी.१८५० ई.पू.) रहिंद गणितीय पेपाइरस (Rhind Mathematical Papyrus)(इजिप्ट का गणित सी.१६५० ई.पू.) और शुल्बा के सूत्र (Shulba Sutras)(भारतीय गणित सी. ८०० ई.पू.)। ये सभी ग्रन्थ तथाकथित पाईथोगोरस की प्रमेय (Pythagorean theorem) से सम्बंधित हैं, जो मूल अंकगणितीय और ज्यामिति के बाद गणितीय विकास में सबसे प्राचीन और व्यापक प्रतीत होती है। बाद में ग्रीक और हेल्लेनिस्टिक गणित (Greek and Hellenistic mathematics) में इजिप्त और बेबीलोन के गणित का विकास हुआ, जिसने विधियों को परिष्कृत किया (विशेष रूप से प्रमाणों (mathematical rigor) में गणितीय निठरता (proofs) का परिचय) और गणित को विषय के रूप में विस्तृत किया। इसी क्रम में, इस्लामी गणित (Islamic mathematics) ने गणित का विकास और विस्तार किया जो इन प्राचीन सभ्यताओं में ज्ञात थी। फिर गणित पर कई ग्रीक और अरबी ग्रंथों कालैटिन में अनुवाद (translated into Latin) किया गया, जिसके परिणाम स्वरुप मध्यकालीन यूरोप (medieval Europe) में गणित का आगे विकास हुआ। प्राचीन काल से मध्य युग (Middle Ages) के दौरान, गणितीय रचनात्मकता के अचानक उत्पन्न होने के कारण सदियों में ठहराव आ गया। १६ वीं शताब्दी में, इटली में पुनर् जागरण की शुरुआत में, नए गणितीय विकास हुए.

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गुड़िया

गुड़िया एक प्रकार की मनुष्याकृति होती है। गुड़ि‍या का अस्तित्व मानव सभ्यता के प्रारंभ से ही रहा है और विभिन्न पदार्थों जैसे पत्थर, मिट्टी, लकड़ी, हड्डी, कपड़े और कागज से लेकर पोर्सलि‍न, चीनी मिट्टी, रबर और प्लास्टिक तक से इसका निर्माण होता रहा है। यद्यपि पारंपरिक रूप से गुड़ि‍या बच्चों का खिलौना रही है परंतु वयस्क भी गृह-विरही महत्व, सुंदरता, ऐतिहासिक महत्व या आर्थिक महत्व के कारण अपने संग्रह करते हैं। प्राचीन काल में, गुड़ि‍यों का उपयोग देव रूप में किया जाता था और धार्मिक उत्स‍वों, तथा धार्मिक अनुष्ठानों में इसकी मुख्य भूमिका हुआ करती थी। सजीव दिखने वाली या शरीर-रचना की दृष्टि से सही गुड़ि‍या का उपयोग स्वास्थ्यकर्मियों, चिकित्सकीय विद्यालयों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के द्वारा विभिन्न स्वास्थ्य प्रक्रियाओं या चिकित्सकों को प्रशिक्षण देने में या बच्चों के साथ हुए यौन दुराचारों के मामलों की छानबीन करने में किया जाता है। कभी-कभी कलाकार इसका उपयोग मानव आकृति बनाने के लिए करते हैं। गतिशील (एक्शन) शारीरिक आकृतियां सुपरहीरोज और उनके पूर्ववर्तियों का प्रतिनिधित्व करती हैं, एक्शन गुड़िया खास तौर पर लड़कों में लोकप्रिय होती हैं। .

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ओसिरिस मिथक

दाएँ से बाएँ: ईसिस, उनका पति ओसिरिस, और उनका बेटा होरस, बाइसवें राजवंश की प्रतिमा में ओसिरिस मिथक के मुख्य पात्र ओसिरिस मिथक प्राचीन मिस्र के पौराणिक कथाओं में सबसे व्यापक और प्रभावशाली कहानी हैं। यह भगवान ओसिरिस, मिस्र के एक आदिम राजा, और उनकी हत्या के परिणामों से संबंधित है। ओसिरिस के कातिल, उसके भाई सेत, उनका सिंहासन हड़प लेता हैं। इस बीच, ओसिरिस की पत्नी ईसिस अपने पति के शरीर को पुनर्स्थापित करती है व मरणोपरांत उससे एक बेटा गर्भ धारण करती है।  कहानी का शेष हिस्सा होरस पर केंद्रित रहता हैं, जो ओसिरिस और ईसिस के संगम का परिणाम हैं, और जो प्रथम तो अपनी माँ द्वारा संरक्षित कमज़ोर बालक रहता हैं, परन्तु बाद में सिंहासन के लिए सेत का प्रतिद्वंद्वी बनता हैं। उनके अक्सर हिंसक संघर्ष, होरस  की जीत के साथ समाप्त होते हैं, जो सेत के महरूम शासनकाल के बाद, मिस्र में व्यवस्था पुनर्स्थापित करते हैं और ओसिरिस के पुनस्र्ज्जीवन की प्रक्रिया पूर्ण करते हैं। अपने जटिल प्रतीकों के साथ, यह मिथक शाशन और उत्तराधिकार की, व्यवस्था और अव्यवस्था के संघर्ष की, तथा विशेष रूप से मृत्यु और पुनर्जन्म की मिस्र की धारणाओं का अभिन्न हिस्सा हैं। इसके मध्य के चारों देवताओं में से प्रत्येक का आवश्यक स्वरुप यह व्यक्त करता हैं, और प्राचीन मिस्र के धर्म में उनकी पूजा के कई तत्त्व इस मिथक से लिए गए हैं।  .

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आधुनिकतावाद

हंस होफ्मन, "द गेट", 1959–1960, संग्रह: सोलोमन आर. गुगेन्हीम म्यूज़ियम होफ्मन केवल एक कलाकार के रूप में ही नहीं, बल्कि एक कला शिक्षक के रूप में भी मशहूर थे और वे अपने स्वदेश जर्मनी के साथ-साथ बाद में अमेरिका के भी एक आधुनिकतावादी सिद्धांतकार थे। 1930 के दशक के दौरान न्यूयॉर्क एवं कैलिफोर्निया में उन्होंने अमेरिकी कलाकारों की एक नई पीढ़ी के लिए आधुनिकतावाद एवं आधुनिकतावादी सिद्धांतों की शुरुआत की.ग्रीनविच गांव एवं मैसाचुसेट्स के प्रोविंसटाउन में स्थित अपने कला विद्यालयों में अपने शिक्षण एवं व्याख्यान के माध्यम से उन्होंने अमेरिका में आधुनिकतावाद के क्षेत्र का विस्तार किया।हंस होफ्मन की जीवनी, 30 जनवरी 2009 को उद्धृत आधुनिकतावाद, अपनी व्यापक परिभाषा में, आधुनिक सोच, चरित्र, या प्रथा है अधिक विशेष रूप से, यह शब्द उन्नीसवीं सदी के अंत और बीसवीं सदी के आरम्भ में मूल रूप से पश्चिमी समाज में व्यापक पैमाने पर और सुदूर परिवर्तनों से उत्पन्न होने वाली सांस्कृतिक प्रवृत्तियों के एक समूह एवं सम्बद्ध सांस्कृतिक आन्दोलनों की एक सरणी दोनों का वर्णन करता है। यह शब्द अपने भीतर उन लोगों की गतिविधियों और उत्पादन को समाहित करता है जो एक उभरते सम्पूर्ण औद्योगीकृत विश्व की नवीन आर्थिक, सामाजिक एवं राजनीतिक स्थितियों में पुराने होते जा रहे कला, वास्तुकला, साहित्य, धार्मिक विश्वास, सामाजिक संगठन और दैनिक जीवन के "पारंपरिक" रूपों को महसूस करते थे। आधुनिकतावाद ने ज्ञानोदय की सोच की विलंबकारी निश्चितता को और एक करुणामय, सर्वशक्तिशाली निर्माता के अस्तित्व को भी मानने से अस्वीकार कर दिया.

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आर्य वंश

आर्य वंश ऐतिहासिक रूप से 19वीं शताब्दी के अंत और 20वीं शताब्दी के आरम्भ में पश्चिमी सभ्यता में आर्यवंशी काफी प्रभावशाली लोग हुआ करते थे। माना जाता है कि इस विचार से यह व्यूत्पन्न है कि हिंद युरोपीय भाषा के बोलने वाले मूल लोगों और उनके वंशजों ने विशिष्ट जाति या वृहद श्वेत नस्ल की स्थापना की। ऐसा माना जाता है कि कभी-कभी आर्यन जाति से ही आर्यवाद अस्तित्व में आया। आरम्भ में इसे मात्र भाषाई आधार पर जाना जाता था लेकिन नाज़ी और नव-नाज़ी में जातिवाद की उत्पत्ति के बाद सैधांतिक रूप से इसका प्रयोग जादू-टोना और श्वेत प्रतिष्ठा को स्थापित करने के लिए किया जाने लगा। .

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इतिहास

बोधिसत्व पद्मपनी, अजंता, भारत। इतिहास(History) का प्रयोग विशेषत: दो अर्थों में किया जाता है। एक है प्राचीन अथवा विगत काल की घटनाएँ और दूसरा उन घटनाओं के विषय में धारणा। इतिहास शब्द (इति + ह + आस; अस् धातु, लिट् लकार अन्य पुरुष तथा एक वचन) का तात्पर्य है "यह निश्चय था"। ग्रीस के लोग इतिहास के लिए "हिस्तरी" (history) शब्द का प्रयोग करते थे। "हिस्तरी" का शाब्दिक अर्थ "बुनना" था। अनुमान होता है कि ज्ञात घटनाओं को व्यवस्थित ढंग से बुनकर ऐसा चित्र उपस्थित करने की कोशिश की जाती थी जो सार्थक और सुसंबद्ध हो। इस प्रकार इतिहास शब्द का अर्थ है - परंपरा से प्राप्त उपाख्यान समूह (जैसे कि लोक कथाएँ), वीरगाथा (जैसे कि महाभारत) या ऐतिहासिक साक्ष्य। इतिहास के अंतर्गत हम जिस विषय का अध्ययन करते हैं उसमें अब तक घटित घटनाओं या उससे संबंध रखनेवाली घटनाओं का कालक्रमानुसार वर्णन होता है। दूसरे शब्दों में मानव की विशिष्ट घटनाओं का नाम ही इतिहास है। या फिर प्राचीनता से नवीनता की ओर आने वाली, मानवजाति से संबंधित घटनाओं का वर्णन इतिहास है।Whitney, W. D. (1889).

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इंग्लिश विलो

सेलिक्स अल्बा (व्हाइट विलो), विलो की एक प्रजाति है जो यूरोप और पश्चिमी और मध्य एशिया की देशज है।मेक्ले, आरडी (1984).

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कोकचा नदी

सन् २००७ में फैज़ाबाद, बदख़्शान के शहर में कोकचा नदी पर पुल के लिए नीव डालने का काम जारी है कोकचा नदी (फ़ारसी और पश्तो:, अंग्रेज़ी: Kokcha) उत्तरी अफ़ग़ानिस्तान की एक नदी है। यह आमू दरिया की एक उपनदी है और बदख़्शान प्रान्त में हिन्दू कुश पहाड़ों में बहती है। बदख़्शान प्रान्त की राजधानी फैज़ाबाद इसी नदी के किनारे बसी हुई है। कोकचा नदी की घाटी में सर-ए-संग खान स्थित है जहाँ से हज़ारों सालों से लाजवर्द (लैपिस लैज़्यूली) निकाला जा रहा है।, Paul Clammer, Lonely Planet, 2007, ISBN 978-1-74059-642-8,...

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अतुम

प्राचीन मिस्र के धर्म का एक देवता। अतुम अतुम श्रेणी:चित्र जोड़ें ca:Llista de personatges de la mitologia egípcia#S.

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अनूबिस

अनूबिस यमदूत और यमरक्षक था। प्राचीन मिस्र के धर्म का एक देवता। अनूबिस श्रेणी:मिस्र का धर्म श्रेणी:धर्म श्रेणी:मिस्र के देवी-देवता.

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अफ़्रीका

अफ़्रीका वा कालद्वीप, एशिया के बाद विश्व का सबसे बड़ा महाद्वीप है। यह 37°14' उत्तरी अक्षांश से 34°50' दक्षिणी अक्षांश एवं 17°33' पश्चिमी देशान्तर से 51°23' पूर्वी देशान्तर के मध्य स्थित है। अफ्रीका के उत्तर में भूमध्यसागर एवं यूरोप महाद्वीप, पश्चिम में अंध महासागर, दक्षिण में दक्षिण महासागर तथा पूर्व में अरब सागर एवं हिन्द महासागर हैं। पूर्व में स्वेज भूडमरूमध्य इसे एशिया से जोड़ता है तथा स्वेज नहर इसे एशिया से अलग करती है। जिब्राल्टर जलडमरूमध्य इसे उत्तर में यूरोप महाद्वीप से अलग करता है। इस महाद्वीप में विशाल मरुस्थल, अत्यन्त घने वन, विस्तृत घास के मैदान, बड़ी-बड़ी नदियाँ व झीलें तथा विचित्र जंगली जानवर हैं। मुख्य मध्याह्न रेखा (0°) अफ्रीका महाद्वीप के घाना देश की राजधानी अक्रा शहर से होकर गुजरती है। यहाँ सेरेनगेती और क्रुजर राष्‍ट्रीय उद्यान है तो जलप्रपात और वर्षावन भी हैं। एक ओर सहारा मरुस्‍थल है तो दूसरी ओर किलिमंजारो पर्वत भी है और सुषुप्‍त ज्वालामुखी भी है। युगांडा, तंजानिया और केन्या की सीमा पर स्थित विक्टोरिया झील अफ्रीका की सबसे बड़ी तथा सम्पूर्ण पृथ्वी पर मीठे पानी की दूसरी सबसे बड़ी झीलहै। यह झील दुनिया की सबसे लम्बी नदी नील के पानी का स्रोत भी है। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि इसी महाद्वीप में सबसे पहले मानव का जन्म व विकास हुआ और यहीं से जाकर वे दूसरे महाद्वीपों में बसे, इसलिए इसे मानव सभ्‍यता की जन्‍मभूमि माना जाता है। यहाँ विश्व की दो प्राचीन सभ्यताओं (मिस्र एवं कार्थेज) का भी विकास हुआ था। अफ्रीका के बहुत से देश द्वितीय विश्व युद्ध के बाद स्वतंत्र हुए हैं एवं सभी अपने आर्थिक विकास में लगे हुए हैं। अफ़्रीका अपनी बहुरंगी संस्कृति और जमीन से जुड़े साहित्य के कारण भी विश्व में जाना जाता है। .

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अमुन

प्राचीन मिस्र के धर्म का एक देवता। thumb श्रेणी:मिस्र का धर्म श्रेणी:धर्म श्रेणी:मिस्र के देवी-देवता.

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अमुन-रा

प्राचीन मिस्र के धर्म का एक देवता। श्रेणी:मिस्र का धर्म श्रेणी:धर्म श्रेणी:मिस्र के देवी-देवता श्रेणी:चित्र जोड़ें en:Amun-Ra.

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अरब का इतिहास

अरबी प्रायद्वीप की सबसे बड़ी घटना है इस्लाम का जन्म। यह सातवीं सदी के पूर्वार्ध में हुआ था जिसके पहले का इतिहास तथाज्ञात नहीं है। .

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उच्च शिक्षा

एक उच्चतर शिक्षा संस्थान में गणित का शिक्षण उच्च शिक्षा (higher education) उच्च शिक्षा का अर्थ है सामान्य रूप से सबको दी जानेवाली शिक्षा से ऊपर किसी विशेष विषय या विषयों में विशेष, विशद तथा शूक्ष्म शिक्षा। यह शिक्षा के उस स्तर का नाम है जो विश्वविद्यालयों, व्यावसायिक विश्वविद्यालयों, कम्युनिटी महाविद्यालयों, लिबरल आर्ट कालेजों एवं प्रौद्योगिकी संस्थानों आदि के द्वारा दी जाती है। प्राथमिक एवं माध्यमिक के बाद यह शिक्षा का तृतीय स्तर है जो प्राय: ऐच्छिक (non-compulsory) होता है। इसके अन्तर्गत स्नातक, परास्नातक (postgraduate education) एवं व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण आदि आते हैं। .

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१२ (संख्या)

१२ ((उच्चारण: बारह) एक प्राकृतिक संख्या है। इससे पूर्व ११ और इसके पश्चात् १३ आता है अर्थात् ग्यारह ११ से एक अधिक होता है एवं १३ में से एक कम करने पर बारह प्राप्त होता है। इसे शब्दों में बारह से लिखा जाता है। छः और पुनः छः का योग बारह होता है। .

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