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पिथौरागढ़ जिला

सूची पिथौरागढ़ जिला

पिथौरागढ़ भारतीय राज्य उत्तराखण्ड का एक जिला है। यह क्षेत्र 2,750 वर्ग मीटर में फैला हुआ है। 2011 के जनसंख्या गणना के अनुसार यहाँ कुल 4,85,993 लोग रहते हैं। जिले का मुख्यालय पिथौरागढ़ है। यहाँ आधिकारिक रूप से और शिक्षा के लिए हिन्दी भाषा का उपयोग किया जाता है। इसके अलावा यहाँ अधिक संख्या में कुमाऊँनी भाषा बोलने वाले लोग रहते हैं। 24 फरवरी 1960 को पिथौरागढ़ की 30 पट्टियां और अल्मोड़े की दो पट्टियों को मिलाकर पिथौरागढ़ जिले का गठन किया गया था। .

61 संबंधों: चम्पावत, चम्पावत का इतिहास, चौकोड़ी, डीडीहाट, डीडीहाट तहसील, डीडीहाट विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र, उत्तराखण्ड, तेजम, थल, धारचुला देहात, धारचूला, धारचूला तहसील, धारचूला विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र, उत्तराखण्ड, नाचनी, पप्पू कार्की, पाताल भुवनेश्वर, पिथौरागढ़, पिथौरागढ़ तहसील, पिथौरागढ़ जिला, पिथौरागढ़ विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र, उत्तराखण्ड, बागेश्वर तहसील, बागेश्वर जिला, बेरीनाग, बेरीनाग तहसील, भनोली तहसील, मुनस्यारी तहसील, मुनस्‍यारी, रामगंगा (पूर्वी), राईआगर, लोहाघाट, सरयू नदी (उत्तराखण्ड), सुनन्दा देवी, गणाई गंगोली, गंगोलीहाट, गंगोलीहाट तहसील, गंगोलीहाट विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र, उत्तराखण्ड, गोपाल दत्‍त ओझा, गोपाल राम दास, गोरी नदी, ओम पर्वत, कनालिछिना, कपकोट तहसील, काली नदी, उत्तराखण्ड, कांडा तहसील, कुमाऊँ मण्डल, कुमाऊँ विश्वविद्यालय से सम्बद्ध महाविद्यालयों की सूची, कुमाऊँनी भाषा, कुमाऊँनी लोग, अल्मोड़ा तहसील, अल्मोड़ा लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र, अल्मोड़ा जिला, ..., अल्मोड़ा के पर्यटन स्थल, अस्कोट, उत्तराखण्ड, उत्तराखण्ड मण्डल, उत्तराखण्ड में जिलावार विधानसभा सीटें, उत्तराखण्ड सूपर लीग, उत्तराखण्ड के नगरों की सूची, उत्तराखण्ड के मण्डल, उत्तराखण्ड के राज्य राजमार्गों की सूची, उत्तराखण्ड के जिले, उत्तराखण्ड के विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की सूची सूचकांक विस्तार (11 अधिक) »

चम्पावत

चम्पावत भारत के उत्तराखण्ड राज्य के चम्पावत जिले का मुख्यालय है। पहाड़ों और मैदानों के बीच से होकर बहती नदियाँ अद्भुत छटा बिखेरती हैं। चंपावत में पर्यटकों को वह सब कुछ मिलता है जो वह एक पर्वतीय स्थान से चाहते हैं। वन्यजीवों से लेकर हरे-भरे मैदानों तक और ट्रैकिंग की सुविधा, सभी कुछ यहाँ पर है। यह कस्बा समुद्र तल से १६१५ मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। चम्पावत कई वर्षों तक कुमाऊँ के शासकों की राजधानी रहा है। चन्द शासकों के किले के अवशेष आज भी चम्पावत में देखे जा सकते हैं। .

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चम्पावत का इतिहास

चम्पावत नगर का एक दृश्य चम्पावत उत्तराखण्ड राज्य के पूर्वी भाग में स्थित चम्पावत जनपद का मुख्यालय तथा एक प्रमुख नगर है। चम्पावत कई वर्षों तक कुमाऊँ के शासकों की राजधानी रहा है। चन्द शासकों के किले के अवशेष आज भी चम्पावत में देखे जा सकते हैं। .

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चौकोड़ी

चौकोरी एक छोटा सा पहाड़ी नगर है, जो पिथौरागढ़ जिले की बेरीनाग तहसील में स्थित है। समुद्र तल से २०१० मीटर की ऊंचाई पर स्थित चौकोड़ी से नंदा देवी, नंदा कोट, और पंचचूली पर्वत श्रंखलाओं के सुन्दर दृश्य देखे जा सकते हैं। यह राष्ट्रीय राजमार्ग ३०९ए पर बेरीनाग से १० किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। .

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डीडीहाट

डीडीहाट उत्तराखण्ड राज्य के पिथौरागढ़ जनपद में स्थित एक नगर है। यह कुमाऊँ मण्डल में आता है, और डीडीहाट तहसील का मुख्यालय है। २०११ की जनगणना के अनुसार डीडीहाट की जनसंख्या ६,५२२ है, और यह उत्तराखण्ड की राजधानी देहरादून से ५२० किमी (३२० मील) की दूरी पर स्थित है। डीडीहाट नाम दो कुमाउँनी शब्दों, 'डांडी' और 'हाट' से जुड़कर बना है, जिनका अर्थ क्रमशः 'छोटी पहाड़ी' और 'बाजार' होता है। डीडीहाट 'कैलाश मानसरोवर तीर्थयात्रा' के मार्ग पर पड़ता है। .

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डीडीहाट तहसील

डीडीहाट तहसील भारत के उत्तराखंड राज्य में पिथौरागढ़ जनपद में एक तहसील है। पिथौरागढ़ जनपद के पश्चिमी भाग में स्थित इस तहसील के मुख्यालय डीडीहाट नगर में स्थित हैं। इसके पूर्व में धारचूला तहसील, पश्चिम में बेरीनाग तहसील, उत्तर में मुनस्यारी तहसील तथा दक्षिण में पिथौरागढ़ तहसील है। तहसील के अधिकार क्षेत्र में कुल 363 गाँव आते हैं, और 2011 की जनगणना के अनुसार इसकी जनसंख्या 80411 है। .

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डीडीहाट विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र, उत्तराखण्ड

डीडीहाट विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र उत्तराखण्ड के 70 निर्वाचन क्षेत्रों में से एक है। पिथौरागढ़ जिले में स्थित यह निर्वाचन क्षेत्र अनारक्षित है। 2012 में इस क्षेत्र में कुल 75,458 मतदाता थे। .

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तेजम

तेजम उत्तराखण्ड राज्य के पिथौरागढ़ जनपद में रामगंगा नदी के तट पर बसा एक छोटा सा नगर है। यह नगर उत्तराखण्ड राज्य राजमार्ग 11 तथा 31 के तिराहे पर स्थित है। तेजम का कुल क्षेत्रफल 2.277 वर्ग किलोमीटर है, तथा यह समुद्र तल से 1055 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। सितंबर 2016 में उत्तराखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री, हरीश रावत ने मुन्स्यारी के तल्ला जोहार क्षेत्र को तहसील का दर्जा देने की घोषणा की थी, जिसका मुख्यालय तेजम में तय किया गया। नवंबर 2016 में तहसील अस्तित्व में आई, तथा इसका नाम तेजम तहसील रख दिया गया। हालांकि दिसंबर 2017 तक भी यहां किसी अधिकारी की नियुक्ति नहीं हुई थी। 2011 की जनगणना के अनुसार तेजम में कुल 152 परिवार निवास करते हैं, और नगर की जनसंख्या 495 है, जिसमें से 234 पुरुष हैं तथा 261 महिलाएं हैं। 0-6 वर्ष के बच्चों की संख्या 76 है। तेजम का लिंगानुपात 1115 महिलाएं प्रति 1000 है; पुरुषों में साक्षरता दर 95.98 % है, जबकि महिलाओं में यह 68.18 % है। .

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थल

थल उत्तराखंड राज्य के पिथौरागढ़ जनपद में रामगंगा नदी के तट पर स्थित एक छोटा सा नगर है। यहाँ १६वीं शताब्दी का एक शिव मंदिर है। १९५७ से १९६२ तक यह अल्मोड़ा जनपद का एक विकासखंड था। ३० सितम्बर २०१४ से यह पिथौरागढ़ जनपद की एक तहसील है। बेरीनाग तथा डीडीहाट तहसील के ११४ ग्रामों से इसका गठन किया गया। .

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धारचुला देहात

धारचुला देहात, पिथौरागढ़ जिला, उत्तराखंड में स्थित एक क्षेत्र है। यह कुमाऊँ मण्डल में आता है। .

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धारचूला

धारचूला, पिथौरागढ़ जिला, उत्तराखंड में स्थित एक क्षेत्र है। यह कुमाऊँ मण्डल में आता है। .

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धारचूला तहसील

धारचूला तहसील भारत के उत्तराखंड राज्य में पिथौरागढ़ जनपद में एक तहसील है। पिथौरागढ़ जनपद के पूर्वी भाग में स्थित इस तहसील के मुख्यालय धारचूला नगर में स्थित हैं। इसके पूर्व में नेपाल, पश्चिम में मुनस्यारी तहसील, उत्तर में चीन तथा दक्षिण में डीडीहाट तहसील है। तहसील के अधिकार क्षेत्र में कुल 71 गाँव आते हैं, और 2011 की जनगणना के अनुसार इसकी जनसंख्या 65,689 है। .

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धारचूला विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र, उत्तराखण्ड

धारचूला विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र उत्तराखण्ड के 70 निर्वाचन क्षेत्रों में से एक है। पिथौरागढ़ जिले में स्थित यह निर्वाचन क्षेत्र अनारक्षित है। 2012 में इस क्षेत्र में कुल 72,755 मतदाता थे। .

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नाचनी

नाचनी उत्तराखण्ड राज्य के पिथौरागढ़ जनपद में रामगंगा तथा भुजगाड़ नदियों के तट पर बसा एक छोटा सा नगर है। यहां देवी को समर्पित एक मंदिर है, जिसे "होकारा मंदिर" कहा जाता है। यह नगर उत्तराखण्ड राज्य राजमार्ग 11 पर थल तथा तेजम के मध्य स्थित है। नाचनी से बाँसबगड़ के लिए एक सड़क निकलती है। यहां भुजगाड़ नदी पर वर्ष १९६० में एक मोटर पुल भी बनाया गया था। नाचनी का कुल क्षेत्रफल 1.0424 वर्ग किलोमीटर है, तथा यह समुद्र तल से 920 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। 2011 की जनगणना के अनुसार नाचनी में कुल 299 परिवार निवास करते हैं, और नगर की जनसंख्या 1109 है, जिसमें से 562 पुरुष हैं तथा 547 महिलाएं हैं। .

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पप्पू कार्की

प्रवेंद्र सिंह कार्की (३० जून १९८४ – ९ जून २०१८), जो पप्पू कार्की के नाम से प्रसिद्ध थे, उत्तराखण्ड के एक प्रसिद्ध कुमाऊँनी लोकगायक थे। .

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पाताल भुवनेश्वर

पाताल भुवनेश्वर चूना पत्थर की एक प्राकृतिक गुफा है, जो उत्तराखण्ड के पिथौरागढ़ जिले में गंगोलीहाट नगर से १४ किमी दूरी पर स्थित है। इस गुफा में धार्मिक तथा ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण कई प्राकृतिक कलाकृतियां स्थित हैं। यह गुफा भूमि से ९० फ़ीट नीचे है, तथा लगभग १६० वर्ग मीटर क्षेत्र में विस्तृत है। इस गुफा की खोज राजा ऋतुपर्णा ने की थी, जो सूर्य वंश के राजा थे और त्रेता युग में अयोध्या पर शासन करते थे। स्कंदपुराण में वर्णन है कि स्वयं महादेव शिव पाताल भुवनेश्वर में विराजमान रहते हैं और अन्य देवी देवता उनकी स्तुति करने यहां आते हैं। यह भी वर्णन है कि राजा ऋतुपर्ण जब एक जंगली हिरण का पीछा करते हुए इस गुफा में प्रविष्ट हुए तो उन्होंने इस गुफा के भीतर महादेव शिव सहित ३३ कोटि देवताओं के साक्षात दर्शन किये थे। द्वापर युग में पाण्डवों ने यहां चौपड़ खेला और कलयुग में जगदगुरु आदि शंकराचार्य का ८२२ ई के आसपास इस गुफा से साक्षात्कार हुआ तो उन्होंने यहां तांबे का एक शिवलिंग स्थापित किया। गुफा के अंदर जाने के लिए लोहे की जंजीरों का सहारा लेना पड़ता है यह गुफा पत्थरों से बनी हुई है इसकी दीवारों से पानी रिस्ता रहता है जिसके कारण यहां के जाने का रास्ता बेहद चिकना है। गुफा में शेष नाग के आकर का पत्थर है उन्हें देखकर एेसा लगता है जैसे उन्होंने पृथ्वी को पकड़ रखा है। इस गुफा की सबसे खास बात तो यह है कि यहां एक शिवलिंग है जो लगातार बढ़ रहा है। यहां शिवलिंग को लेकर यह मान्यता है कि जब यह शिवलिंग गुफा की छत को छू लेगा, तब दुनिया खत्म हो जाएगी। संकरे रास्ते से होते हुए इस गुफा में प्रवेश किया जा सकता है। कुछ मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव ने क्रोध के आवेश में गजानन का जो मस्तक शरीर से अलग किया था, वह उन्होंने इस गुफा में रखा था। दीवारों पर हंस बने हुए हैं जिसके बारे में ये माना जाता है कि यह ब्रह्मा जी का हंस है। गुफा के अंदर एक हवन कुंड भी है। इस कुंड के बारे में कहा जाता है कि इसमें जनमेजय ने नाग यज्ञ किया था जिसमें सभी सांप जलकर भस्म हो गए थे। इस गुफा में एक हजार पैर वाला हाथी भी बना हुआ है। .

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पिथौरागढ़

पिथौरागढ़ भारत के उत्तराखण्ड राज्य का एक प्रमुख शहर है। पिथौरागढ़ का पुराना नाम सोरघाटी है। सोर शब्द का अर्थ होता है-- सरोवर। यहाँ पर माना जाता है कि पहले इस घाटी में सात सरोवर थे। दिन-प्रतिदिन सरोवरों का पानी सूखता चला गया और यहाँपर पठारी भूमि का जन्म हुआ। पठारी भूमी होने के कारण इसका नाम पिथौरा गढ़ पड़ा। पर अधिकांश लोगों का मानना है कि यहाँ राय पिथौरा (पृथ्वीराज_चौहान) की राजधानी थी। उन्हीं के नाम से इस जगह का नाम पिथौरागढ़ पड़ा। राय पिथौरा ने नेपाल से कई बार टक्कर ली थी। यही राजा पृथ्वीशाह के नाम से प्रसिद्ध हुआ। .

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पिथौरागढ़ तहसील

पिथौरागढ़ तहसील भारत के उत्तराखंड राज्य में पिथौरागढ़ जनपद में एक तहसील है। पिथौरागढ़ जनपद के दक्षिण-पूर्वी भाग में स्थित इस तहसील के मुख्यालय पिथौरागढ़ नगर में स्थित हैं। इसके पूर्व में नेपाल, पश्चिम में गंगोलीहाट तहसील, उत्तर में डीडीहाट तहसील तथा दक्षिण में चम्पावत जनपद की लोहाघाट तहसील है। तहसील के अधिकार क्षेत्र में कुल ३२४ गाँव आते हैं, और २०११ की जनगणना के अनुसार इसकी जनसंख्या १,६६,८०१ है। .

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पिथौरागढ़ जिला

पिथौरागढ़ भारतीय राज्य उत्तराखण्ड का एक जिला है। यह क्षेत्र 2,750 वर्ग मीटर में फैला हुआ है। 2011 के जनसंख्या गणना के अनुसार यहाँ कुल 4,85,993 लोग रहते हैं। जिले का मुख्यालय पिथौरागढ़ है। यहाँ आधिकारिक रूप से और शिक्षा के लिए हिन्दी भाषा का उपयोग किया जाता है। इसके अलावा यहाँ अधिक संख्या में कुमाऊँनी भाषा बोलने वाले लोग रहते हैं। 24 फरवरी 1960 को पिथौरागढ़ की 30 पट्टियां और अल्मोड़े की दो पट्टियों को मिलाकर पिथौरागढ़ जिले का गठन किया गया था। .

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पिथौरागढ़ विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र, उत्तराखण्ड

पिथौरागढ़ विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र उत्तराखण्ड के 70 निर्वाचन क्षेत्रों में से एक है। पिथौरागढ़ जिले में स्थित यह निर्वाचन क्षेत्र अनारक्षित है। 2012 में इस क्षेत्र में कुल 87,580 मतदाता थे। .

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बागेश्वर तहसील

बागेश्वर तहसील भारत के उत्तराखण्ड राज्य में बागेश्वर जनपद की सदर तहसील है। बागेश्वर जनपद के दक्षिणी भाग में स्थित इस तहसील के मुख्यालय बागेश्वर नगर में स्थित हैं। इसके पूर्व में कांडा और पिथौरागढ़ जनपद की गंगोलीहाट तहसील, पश्चिम में गरुड़ तहसील, उत्तर में कपकोट तहसील, तथा दक्षिण में अल्मोड़ा जनपद की सदर तहसील है। .

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बागेश्वर जिला

बागेश्वर भारत के उत्तराखण्ड राज्य का एक जिला है, जिसके मुख्यालय बागेश्वर नगर में स्थित हैं। इस जिले के उत्तर तथा पूर्व में पिथौरागढ़ जिला, पश्चिम में चमोली जिला, तथा दक्षिण में अल्मोड़ा जिला है। बागेश्वर जिले की स्थापना १५ सितंबर १९९७ को अल्मोड़ा के उत्तरी क्षेत्रों से की गयी थी। २०११ की जनगणना के अनुसार रुद्रप्रयाग तथा चम्पावत के बाद यह उत्तराखण्ड का तीसरा सबसे कम जनसंख्या वाला जिला है। यह जिला धार्मिक गाथाओं, पर्व आयोजनों और अत्याकर्षक प्राकृतिक दृश्यों के कारण प्रसिद्ध है। प्राचीन प्रमाणों के आधार पर बागेश्वर शब्द को ब्याघ्रेश्वर से विकसित माना गया है। यह शब्द प्राचीन भारतीय साहित्य में अधिक प्रसिद्ध है। बागनाथ मंदिर, कौसानी, बैजनाथ, विजयपुर आदि जिले के प्रमुख पर्यटन स्थल हैं। जिले में ही स्थित पिण्डारी, काफनी, सुन्दरढूंगा इत्यादि हिमनदों से पिण्डर तथा सरयू नदियों का उद्गम होता है। .

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बेरीनाग

बेरीनाग, जिसे बेड़ीनाग या बेणीनाग भी कहा जाता है, भारत के उत्तराखण्ड राज्य के अन्तर्गत कुमाऊँ मण्डल के पिथौरागढ जिनपद का एक नगर तथा तहसील मख्यालय है। .

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बेरीनाग तहसील

बेरीनाग तहसील भारत के उत्तराखंड राज्य में पिथौरागढ़ जनपद में एक तहसील है। पिथौरागढ़ जनपद के पश्चिमी भाग में स्थित इस तहसील के मुख्यालय बेरीनाग नगर में स्थित हैं। इसके पूर्व में डीडीहाट तहसील, पश्चिम में बागेश्वर जनपद की कांडा तहसील, उत्तर में मुनस्यारी तहसील तथा दक्षिण में गंगोलीहाट तहसील है। तहसील के अधिकार क्षेत्र में कुल 283 गाँव आते हैं, और 2011 की जनगणना के अनुसार इसकी जनसंख्या 52069 है। तहसील में कुल १५ पट्टियां हैं: चौकोड़ी, बेरीनाग, चौड़मन्या, गढ़ति, राईआगर, संगौड़, डुंगरी पंत, भुवनेश्वर, कालेटी, कालासीला, खितोली, त्रिपुरादेवी, लोहाथल, उप्राड़ा पाठक और पांखू। .

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भनोली तहसील

भनोली तहसील भारत के उत्तराखण्ड राज्य में अल्मोड़ा जनपद की एक तहसील है। अल्मोड़ा जनपद के पूर्वी भाग में स्थित इस तहसील के मुख्यालय भनोली ग्राम में स्थित हैं। इसके पूर्व में चम्पावत जनपद की लोहाघाट तथा पाटी तहसील, पश्चिम में अल्मोड़ा तहसील, उत्तर में पिथौरागढ़ जनपद की गंगोलीहाट तहसील, तथा दक्षिण में जैंती तहसील है। .

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मुनस्यारी तहसील

मुनस्यारी तहसील भारत के उत्तराखंड राज्य में पिथौरागढ़ जनपद में एक तहसील है। पिथौरागढ़ जनपद के उत्तर-पश्चिमी भाग में स्थित इस तहसील के मुख्यालय मुनस्‍यारी नगर में स्थित हैं। इसके पूर्व में धारचूला तहसील, पश्चिम में बागेश्वर जनपद की कपकोट तहसील तथा चमोली जनपद की जोशीमठ तहसील, उत्तर में चीन तथा दक्षिण में डीडीहाट और बेरीनाग तहसील है। तहसील के अधिकार क्षेत्र में कुल 219 गाँव आते हैं, और 2011 की जनगणना के अनुसार इसकी जनसंख्या 46523 है। .

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मुनस्‍यारी

मुनस्‍यारी एक खूबसूरत पर्वतिय स्थल है। यह उत्‍तराखण्‍ड में जिला पिथौरागढ़ का सीमांत क्षेत्र है जो एक तरफ तिब्‍बत सीमा और दूसरी ओर नेपाल सीमा से लगा हुआ है। मुनस्‍यारी चारो ओर से पर्वतो से घिरा हुआ है। मुनस्‍यारी के सामने विशाल हिमालय पर्वत श्रंखला का विश्‍व प्रसिद्ध पंचचूली पर्वत (हिमालय की पांच चोटियां) जिसे किवदंतियो के अनुसार पांडवों के स्‍वर्गारोहण का प्रतीक माना जाता है, बाई तरफ नन्‍दा देवी और त्रिशूल पर्वत, दाई तरफ डानाधार जो एक खूबसूरत पिकनिक स्‍पॉट भी है और पीछे की ओर खलिया टॉप है। काठगोदाम, हल्‍द्वानी रेलवे स्‍टेशन से मुनस्‍यारी की दूरी लगभग 295 किलोमीटर है और नैनीताल से 265 किलोमीटर है। काठगोदाम से मुनस्‍यारी की यात्रा बस अथवा टैक्‍सी के माध्‍यम से की जा सकती है और रास्‍ते में कई खूबसूरत स्‍थल आते हैं। काठगोदाम से चलने पर भीमताल, जो कि नैनीताल से मात्र 10 किलोमीटर है, पड़ता है उसके बाद वर्ष भर ताजे फलों के लिए प्रसिद्ध भवाली है, अल्‍मोड़ा शहर और चितई मंदिर भी रास्‍ते में ही है। अल्‍मोड़ा से आगे प्रस्‍थान करने पर धौलछीना, सेराघाट, गणाई, बेरीनाग और चौकोड़ी है। बेरीनाग और चौकोड़ी अपनी खूबसूरती के लिए काफी प्रसिद्ध है। यहां से आगे चलने पर थल, नाचनी, टिमटिया, क्‍वीटी, डोर, गिरगॉव, रातापानी और कालामुनि आते हैं। कालामुनि पार करने के बाद आता है मुनस्‍यारी, जिसकी खूबसूरती अपने आप में निराली है। मुनस्‍यारी में ठहरने के लिए काफी होटल, लॉज और गेस्‍ट हाउस है। गर्मी के सीजन में यहां के होटल खचाखच भरे रहते है इसलिए इस मौसम में वहां जाने से पहले ठहरने के लिए कमरे की बुकिंग जरूर करा लेना चाहिए क्‍योंकि इस समय में यहां पर देसी और विदेशी पर्यटकों की भीड़ बहुत अधिक बढ़ जाती है। विदेशी पर्यटक यहां खासकर ट्रैकिंग और माउंटेनियरिंग के लिए आते हैं। लोग पहाड़ी (स्‍थानीय बोली) बोलते है और हिन्‍दी भाषा का प्रयोग भी करते हैं। यहां के अधिकतर लोग कृषि कार्य में लगे हुए है। .

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रामगंगा (पूर्वी)

रामगंगा नदी, जिसे पूर्वी रामगंगा भी कहते हैं, उत्तराखण्ड राज्य के पिथौरागढ़ जनपद में बहने वाली एक नदी है। इसका उद्गम मुनस्यारी तहसील में स्थित नमिक हिमनद से होता है। यह दक्षिण-पूर्व दिशा की ओर बहती है। कई छोटी नदियां इससे जुड़ती है। पिथौरागढ़ में घाट के पास रामेश्वर में यह सरयू नदी में मिल जाती है। इनके संगम से २० किलोमीटर आगे ही पंचेश्वर में सरयू नदी काली में मिल जाती है। .

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राईआगर

राईआगर या रायागर उत्तराखण्ड राज्य के पिथौरागढ़ जनपद में स्थित एक छोटा सा कस्बा तथा बाजार है। बेरीनाग तहसील मुख्यालय से लगभग ५ किलोमीटर की दूरी पर स्थित राईआगर प्रमुखतः अपने तिराहे के लिए जाना जाता है, जहां से एक मार्ग गंगोलीहाट-पाताल भुवनेश्वर को ओर, दूसरा सेराघाट-अल्मोड़ा की ओर, तथा तीसरा बेरीनाग-उडियारी की ओर जाता है। तिराहे से कुछ १०० मीटर आगे एक अन्य मार्ग भी निकलता है, जो चौड़मन्या कस्बे तक जाता है। १८३८ में ब्रिटिश कप्तान एच ड्रमंड ने यहाँ परित्यक्त लौह खदानें ढूंढ निकाली थी। प्राचीन काल मे इसी क्षेत्र में तांबे की खानें होने का भी उल्लेख मिलता है। इसी से कयास लगाए जाते रहे हैं कि अंग्रेजों के आगमन से पूर्व यह स्थल कुमाऊँ के गिने-चुने उत्खनन स्थलों में से एक रहा होगा। कस्बे में एक औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई), तथा एक राजकीय इंटर कॉलेज है, जिसमें लगभग ५०० छात्र पढ़ते हैं। एक समय चौड़मन्या से पिथौरागढ़ के लिए रोडवेज की एक बस चलती थी, जो राईआगर में रुकती थी; यह पिछले कई वर्षों से बंद है। वर्तमान में क्षेत्र की परिवहन व्यवस्था केमू की कुछ बसों तथा टैक्सियों पर निर्भर है। .

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लोहाघाट

लोहाघाट भारतीय राज्य उत्तराखण्ड के चम्पावत जनपद में स्थित एक प्रसिद्ध शहर, नगर पंचायत और हिल स्टेशन है। मनोरम प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण चारों ओर से छोटी-छोटी पहाड़ियों से घिरा यह नगर पौराणिक एवं ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण स्थान रहा है। जनपद मुख्यालय से 13 किमी उत्तर की ओर टनकपुर-तवाघाट राष्ट्रीय राजमार्ग में लोहावती नदी के किनारे देवीधार, फोर्ती, मायावती, एबटमाउंट, मानेश्वर, बाणासुर का किला, झूमाधूरी आदि विशेष धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों के मध्य स्थित होने से इस नगर की सुन्दरता और बढ़ जाती है। जनपद का यह मुख्य शहर जहां से ग्रामीण क्षेत्रों को आवागमन होता है, प्रमुख व्यापारिक स्थल भी है। इसलिए इसे जनपद चम्पावत का हृदयस्थल कहा जाता है। देवदार वनों से घिरे इस नगर की समुद्रतल से ऊँचाई लगभग ५५०० फ़ीट है। .

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सरयू नदी (उत्तराखण्ड)

सरयू नदी उत्तराखण्ड राज्य के मध्य कुमाऊं क्षेत्र की एक प्रमुख नदी है। यह काली नदी की सबसे बड़ी सहायक नदी भी है।Rawat, Forest Management in Kumaon Himalaya, pg-18 यह नदी पिथौरागढ़ और अल्मोड़ा जिलों के बीच दक्षिण-पूर्वी सीमा बनाती है। शीतोष्ण और उप-उष्णकटिबंधीय जंगल नदी के अपवाह क्षेत्र में पाये जाते हैं। .

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सुनन्दा देवी

सुनन्दा देवी (Sunanda Devi), जिसका पुराना नाम नन्दा देवी पूर्व (Nanda Devi East) था, गढ़वाल हिमालय में स्थित नन्दा देवी पर्वत के मुख्य शिखर के दो साथी शिखरों में से कम ऊँचाई वाले शिखर का नाम है। पर्वतीय सूचियों में ५०० मीटर से कम की स्थलाकृतिक उदग्रता रखने वाले शिखर स्वतंत्र पर्वत नहीं माने जाते बल्कि आसपास के अन्य पर्वतों के ही शिखर माने जाते हैं (पर्वतों के कई शिखर हो सकते हैं)। 7,434 मीटर (24,390 फ़ुट) ऊँचे सुनन्दा देवी का पर्वतीय शिखर यदी अकेला कहीं खड़ा होता तो वह विश्व का ६१वाँ सर्वोच्च पर्वत होता)। लेकिन क्योंकि सुनन्दा देवी की स्वतंत्र स्थलाकृतिक उदग्रता केवल 260 मीटर (850 फ़ुट) है, जो कि ५०० मीटर से कम है, इसलिए इसे नन्दा देवी की ही एक साथी चोटी माना जाता है। .

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गणाई गंगोली

गणाई गंगोली भारत के उत्तराखण्ड राज्य के अन्तर्गत कुमाऊँ मण्डल के पिथौरागढ़ जनपद का एक गाँव तथा बाजार है, जो इसी नाम की तहसील का मुख्यालय भी है। अल्मोड़ा-बेरीनाग-डीडीहाट राज्य राजमार्ग ३ पर सेराघाट से १० किलोमीटर की दूरी पर स्थित गणाई गंगोली कुल्यूर नदी के किनारे बसा हुआ है। .

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गंगोलीहाट

गंगोलीहाट उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित एक नगर और तहसील मुख्यालय है, जो हाट कलिका मंदिर नामक सिद्धपीठ के लिये प्रसिद्ध है। इस सिद्ध पीठ की स्थापना आदिगुरू शंकराचार्य द्वारा की गयी। हाट कलिका देवी रणभूमि में गए जवानों की रक्षक मानी जाती है। यह मंदिर जिला मुख्यालय से ७७ किलोमीटर की दूरी पर है तथा सड़क मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है। .

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गंगोलीहाट तहसील

गंगोलीहाट तहसील भारत के उत्तराखंड राज्य में पिथौरागढ़ जनपद में एक तहसील है। पिथौरागढ़ जनपद के दक्षिण-पश्चिमी भाग में स्थित इस तहसील के मुख्यालय गंगोलीहाट नगर में स्थित हैं। इसके पूर्व में पिथौरागढ़ तहसील, पश्चिम में बागेश्वर जनपद की कांडा तहसील, उत्तर में बेरीनाग तहसील तथा दक्षिण में अल्मोड़ा जनपद की अल्मोड़ा तहसील है। तहसील के अधिकार क्षेत्र में कुल 312 गाँव आते हैं, और 2011 की जनगणना के अनुसार इसकी जनसंख्या 71946 है। .

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गंगोलीहाट विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र, उत्तराखण्ड

गंगोलीहाट विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र उत्तराखण्ड के 70 निर्वाचन क्षेत्रों में से एक है। पिथौरागढ़ जिले में स्थित यह निर्वाचन क्षेत्र अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित है। 2012 में इस क्षेत्र में कुल 88,073 मतदाता थे। .

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गोपाल दत्‍त ओझा

गोपाल दत्‍त ओझा,भारत के उत्तर प्रदेश की चौथी विधानसभा सभा में विधायक रहे। 1967 उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में इन्होंने उत्तर प्रदेश के पिथौरागढ़ जिले के 9 - डीडीहाट विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस की ओर से चुनाव में भाग लिया। .

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गोपाल राम दास

गोपाल राम दास,भारत के उत्तर प्रदेश की चौथी विधानसभा सभा में विधायक रहे। 1967 उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में इन्होंने उत्तर प्रदेश के पिथौरागढ़ जिले के 12 - बागेश्‍वर विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस की ओर से चुनाव में भाग लिया। .

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गोरी नदी

गोरी नदी, जिसे गोरी गंगा या गोरी गाड़ भी कहा जाता है, भारत के उत्तराखण्ड राज्य में बहने वाली काली नदी की एक सहायक नदी है। .

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ओम पर्वत

ओम पर्वत, 6191 मीटर की ऊंचाई पर हिमालय पर्वत श्रृंखला के पहाड़ों में से एक है। इस पहाड़ को लिटिल कैलाश, आदि कैलाश, बाबा कैलाश और जोंगलिंगकोंग के नाम से भी जाना जाता है। ये स्थान भारतीय - तिब्बत सीमा के पास में स्थित है जो एक शानदार दृश्य प्रदान करता है। यहाँ आने वाले यात्री इस स्थान से अन्नपूर्णा की विशाल चोटियों को भी देख सकते हैं।यह स्थान धारचूला के निकट है।American Alpine Journal, 2003, pp.

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कनालिछिना

कनालिछिना, उत्तराखण्ड के पिथौरागढ़ जिले का एक विकासखण्ड (ब्लॉक) है। श्रेणी:उत्तराखण्ड.

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कपकोट तहसील

कपकोट तहसील भारत के उत्तराखण्ड राज्य में बागेश्वर जनपद की एक तहसील है। बागेश्वर जनपद के उत्तरी भाग में स्थित इस तहसील के मुख्यालय कपकोट नगर में स्थित हैं। इसके पूर्व में पिथौरागढ़ जनपद की बेरीनाग तहसील, पश्चिम में चमोली जनपद की जोशीमठ और थराली तहसील, उत्तर में पिथौरागढ़ जनपद की मुनस्यारी तहसील, तथा दक्षिण में कांडा, गरुड़ और बागेश्वर तहसील है। .

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काली नदी, उत्तराखण्ड

काली नदी, जिसे महाकाली, कालीगंगा या शारदा के नाम से भी जाना जाता है, भारत के उत्तराखण्ड राज्य में बहने वाली एक नदी है। इस नदी का उद्गम स्थान वृहद्तर हिमालय में ३,६०० मीटर की ऊँचाई पर स्थित कालापानी नामक स्थान पर है, जो उत्तराखण्ड राज्य के पिथौरागढ़ जिले में है। इस नदी का नाम काली माता के नाम पर पड़ा जिनका मंदिर कालापानी में लिपु-लीख दर्रे के निकट भारत और तिब्बत की सीमा पर स्थित है। अपने उपरी मार्ग पर यह नदी नेपाल के साथ भारत की निरंतर पूर्वी सीमा बनाती है, जहां इसे महाकाली कहा जाता है। यह नदी उत्तराखण्ड और उत्तर प्रदेश के मैदानी क्षेत्रों में पहुँचने पर शारदा नदी के नाम से भी जानी जाती है। काली नदी का झुकाव क्षेत्र लगभग १५,२६० वर्ग किलोमीटर है, जिसका एक बड़ा हिस्सा (लगभग ९,९४३ वर्ग किमी) उत्तराखण्ड में है, और शेष नेपाल में है। काली नदी उत्तराखण्ड राज्य की चार प्रमुख नदियों में एक है, और इस कारण इसे उत्तराखण्ड के राज्य-चिह्न पर भी दर्शाया गया है।यह नदी कालापानी में ३,६०० मीटर से उतरकर २०० मीटर ऊँचे तराई मैदानों में प्रवेश करती है, और इस कारण यह जल विद्युत उत्पादन के लिए अपार संभावना उपलब्ध कराती है। भारतीय नदियों को इंटर-लिंक करने की परियोजना के हिमालयी घटक में कई परियोजनाओं के लिए इस नदी को भी स्रोत के रूप में प्रस्तावित किया गया है। सरयू नदी काली की सबसे बड़ी सहायक नदी है। कूटी, धौलीगंगा, गोरी, चमेलिया, रामगुण, लढ़िया अन्य प्रमुख सहायक नदियां हैं। तवाघाट, धारचूला, जौलजीबी, झूलाघाट, पंचेश्वर, टनकपुर, बनबसा तथा महेन्द्रनगर इत्यादि नदी के तट पर बसे प्रमुख नगर हैं। .

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कांडा तहसील

कांडा तहसील भारत के उत्तराखण्ड राज्य में बागेश्वर जनपद की एक तहसील है। बागेश्वर जनपद के पूर्वी भाग में स्थित इस तहसील के मुख्यालय कांडा कस्बे में स्थित हैं। इसके पूर्व में पिथौरागढ़ जनपद की बेरीनाग तहसील, पश्चिम में बागेश्वर तहसील, उत्तर में कपकोट तहसील, तथा दक्षिण में पिथौरागढ़ जनपद की गंगोलीहाट तहसील है। .

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कुमाऊँ मण्डल

यह लेख कुमाऊँ मण्डल पर है। अन्य कुमाऊँ लेखों के लिए देखें कुमांऊॅं उत्तराखण्ड के मण्डल कुमाऊँ मण्डल भारत के उत्तराखण्ड राज्य के दो प्रमुख मण्डलों में से एक हैं। अन्य मण्डल है गढ़वाल। कुमाऊँ मण्डल में निम्न जिले आते हैं:-.

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कुमाऊँ विश्वविद्यालय से सम्बद्ध महाविद्यालयों की सूची

कुमाऊं विश्वविद्यालय का प्रतीक चिह्न निम्नलिखित सूची कुमाऊं विश्वविद्यालय, नैनीताल से सम्बद्ध राजकीय महाविद्यालयों की है: .

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कुमाऊँनी भाषा

कुमांऊँनी भारत के उत्तराखण्ड राज्य के अन्तर्गत कुमाऊँ क्षेत्र में बोली जाने वाली एक बोली है। इस बोली को हिन्दी की सहायक पहाड़ी भाषाओं की श्रेणी में रखा जाता है। कुमांऊँनी भारत की ३२५ मान्यता प्राप्त भाषाओं में से एक है और २६,६०,००० (१९९८) से अधिक लोगों द्वारा बोली जाती है। उत्तराखण्ड के निम्नलिखित जिलों - अल्मोड़ा, नैनीताल, पिथौरागढ़, बागेश्वर, चम्पावत, ऊधमसिंह नगर के अतिरिक्त असम, बिहार, दिल्ली, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और पंजाब, तथा हिमाचल प्रदेश और नेपाल के कुछ क्षेत्रों में भी बोली जाती है। .

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कुमाऊँनी लोग

कुमाऊँनी लोग, भारतवर्ष के उत्तराखण्ड राज्य के अन्तर्गत कुमांऊॅं क्षेत्र के लोगों को कहते हैं। इनमें वे सभी लोग सम्मिलित हैं जो कुमाऊँनी भाषा या इससे सम्बन्धित उपभाषाएें बोलते हैं। कुमांऊँनी लोग उत्तराखण्ड प्रदेश के अल्मोड़ा, उधमसिंहनगर, चम्पावत, नैनीताल, पिथौरागढ़ और बागेश्वर जिलों के निवासी हैं। भारत की सशस्त्र सेनाएँ और केन्द्रीय पुलिस संगठन, कुमाऊँ के लोगों के लिए रोजगार का प्रमुख स्रोत रहे हैं। भारत की सीमाओं की रक्षा करने में कुमाऊँ रेजीमेंट की उन्नीस वाहिनियाँ कुमाऊँ के लोगों का स्पष्ट प्रतिनिधित्व करतीं हैं। .

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अल्मोड़ा तहसील

अल्मोड़ा तहसील भारत के उत्तराखण्ड राज्य में अल्मोड़ा जनपद की एक तहसील है। अल्मोड़ा जनपद के मध्य भाग में स्थित इस तहसील के मुख्यालय अल्मोड़ा नगर में स्थित हैं। इसके पूर्व में भनोली, जैंती तथा पिथौरागढ़ जनपद की गंगोलीहाट तहसील, पश्चिम में सोमेश्वर, द्वाराहाट तथा रानीखेत तहसील, उत्तर में बागेश्वर जनपद की बागेश्वर तहसील, तथा दक्षिण में नैनीताल जनपद की नैनीताल तहसील है। .

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अल्मोड़ा लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र

अल्मोड़ा लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र भारत के उत्तराखण्ड राज्य का एक लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र है। श्री अजय टम्‍टा वर्तमान लोकसभा में यहाँ से सांसद हैं। वे भारतीय जनता पार्टी से सदस्य हैं। .

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अल्मोड़ा जिला

अल्मोड़ा भारत के उत्तराखण्ड नामक राज्य में कुमांऊँ मण्डल के अन्तर्गत एक जिला है। इस जिले का मुख्यालय भी अल्मोड़ा में ही है। अल्मोड़ा अपनी सांस्कृतिक विरासत, हस्तकला, खानपान और ठेठ पहाड़ी सभ्यता व संस्कृति के लिए प्रसिद्ध है। .

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अल्मोड़ा के पर्यटन स्थल

अल्मोड़ा भारत के उत्तराखण्ड राज्य के कुमाऊँ मण्डल में स्थित एक नगर एवम् जनपद है। यह कुमाऊँ पर शासन करने वाले चन्दवंशीय राजाओं की राजधानी भी रहा है। इसके पूर्व में पिथौरागढ़ जनपद, पश्चिम में गढ़वाल क्षेत्र, उत्तर में बागेश्वर जनपद और दक्षिण में नैनीताल जनपद है। .

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अस्कोट

अस्कोट, पिथौरागढ़ जिला, उत्तराखंड में स्थित एक क्षेत्र है। यह कुमाऊँ मण्डल में आता है। .

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उत्तराखण्ड

उत्तराखण्ड (पूर्व नाम उत्तरांचल), उत्तर भारत में स्थित एक राज्य है जिसका निर्माण ९ नवम्बर २००० को कई वर्षों के आन्दोलन के पश्चात भारत गणराज्य के सत्ताइसवें राज्य के रूप में किया गया था। सन २००० से २००६ तक यह उत्तरांचल के नाम से जाना जाता था। जनवरी २००७ में स्थानीय लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए राज्य का आधिकारिक नाम बदलकर उत्तराखण्ड कर दिया गया। राज्य की सीमाएँ उत्तर में तिब्बत और पूर्व में नेपाल से लगी हैं। पश्चिम में हिमाचल प्रदेश और दक्षिण में उत्तर प्रदेश इसकी सीमा से लगे राज्य हैं। सन २००० में अपने गठन से पूर्व यह उत्तर प्रदेश का एक भाग था। पारम्परिक हिन्दू ग्रन्थों और प्राचीन साहित्य में इस क्षेत्र का उल्लेख उत्तराखण्ड के रूप में किया गया है। हिन्दी और संस्कृत में उत्तराखण्ड का अर्थ उत्तरी क्षेत्र या भाग होता है। राज्य में हिन्दू धर्म की पवित्रतम और भारत की सबसे बड़ी नदियों गंगा और यमुना के उद्गम स्थल क्रमशः गंगोत्री और यमुनोत्री तथा इनके तटों पर बसे वैदिक संस्कृति के कई महत्त्वपूर्ण तीर्थस्थान हैं। देहरादून, उत्तराखण्ड की अन्तरिम राजधानी होने के साथ इस राज्य का सबसे बड़ा नगर है। गैरसैण नामक एक छोटे से कस्बे को इसकी भौगोलिक स्थिति को देखते हुए भविष्य की राजधानी के रूप में प्रस्तावित किया गया है किन्तु विवादों और संसाधनों के अभाव के चलते अभी भी देहरादून अस्थाई राजधानी बना हुआ है। राज्य का उच्च न्यायालय नैनीताल में है। राज्य सरकार ने हाल ही में हस्तशिल्प और हथकरघा उद्योगों को बढ़ावा देने के लिये कुछ पहल की हैं। साथ ही बढ़ते पर्यटन व्यापार तथा उच्च तकनीकी वाले उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए आकर्षक कर योजनायें प्रस्तुत की हैं। राज्य में कुछ विवादास्पद किन्तु वृहत बाँध परियोजनाएँ भी हैं जिनकी पूरे देश में कई बार आलोचनाएँ भी की जाती रही हैं, जिनमें विशेष है भागीरथी-भीलांगना नदियों पर बनने वाली टिहरी बाँध परियोजना। इस परियोजना की कल्पना १९५३ मे की गई थी और यह अन्ततः २००७ में बनकर तैयार हुआ। उत्तराखण्ड, चिपको आन्दोलन के जन्मस्थान के नाम से भी जाना जाता है। .

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उत्तराखण्ड मण्डल

उत्तर प्रदेश का तत्कालीन मानचित्र।उत्तराखण्ड मण्डल में राज्य के तीन उत्तरी जिले: उत्तरकाशी, चमोली तथा पिथौरागढ़ शामिल थे। उत्तराखण्ड मण्डल वर्ष १९६० से १९६८ तक उत्तर प्रदेश राज्य का एक मण्डल था। इस मण्डल का गठन १९६२ के भारत-चीन युद्ध की पृष्ठभूमि में सीमान्त क्षेत्रों के विकास की दृष्टि से २४ फरवरी १९६० को राज्य के तीन सीमान्त जिलों, उत्तरकाशी, चमोली व पिथौरागढ़ को कुमाऊँ मण्डल से निकालकर किया गया था। २० दिसम्बर १९६८ को इस मण्डल को भंग कर दिया गया, और फिर १९६९ में उत्तर प्रदेश के इन पहाड़ी जिलों को फिर से २ मण्डलों में पुनर्व्यवस्थित कर नवीन गढ़वाल मण्डल का गठन किया गया। .

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उत्तराखण्ड में जिलावार विधानसभा सीटें

उत्तराखण्ड में जिलावार विधानसभा सीटें उत्तराखण्ड के जिलों के अन्तर्गत आने वाली विधानसभा सीटें हैं। इस सूची में जिला और उस जिले में उत्तराखण्ड विधानसभा की कौन-कौन सी सीटें हैं दिया गया है। भारतीय चुनाव आयोग द्वारा विर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन किए जाए से उत्तराखण्ड में भी सीटों में बदलाव आया है। इस सूची में भूतपूर्व सीटें किसी भी जिले में नहीं दी गई हैं। .

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उत्तराखण्ड सूपर लीग

उत्तराखंड सुपर लीग (यू.एस.एल.) एक अर्द्ध-पेशेवर फुटबॉल लीग है, जिसे अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ और उत्तराखंड राज्य फुटबॉल एसोसिएशन दोनों द्वारा स्वीकृति प्रदान है। इंडियन सुपर लीग पर आधारित इस लीग का आयोजन पूरे उत्तराखंड राज्य में फुटबॉल को बढ़ावा देने के लक्ष्य के साथ 'उत्तराखंड एडवेंचर स्पोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड' द्वारा किया जाता है। लीग की शुरुआत जुलाई २०१६ में चौदह टीमों के साथ हुई। .

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उत्तराखण्ड के नगरों की सूची

उत्तराखण्ड के नगर नामक इस सूची में भारत के उत्तराखण्ड राज्य के सभी नगरों की ज़िलेवार सूची दी गई है, जो वर्णमालानुसार क्रमित है। .

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उत्तराखण्ड के मण्डल

उत्तराखण्ड के मण्डल भारत के उत्तराखण्ड राज्य के दो मण्डलों को कहते हैं। उत्तराखण्ड में दो मण्डल है: कुमाऊँ और गढ़वाल जो क्रमशः राज्य के पूर्वी और पश्चिमी भाग में हैं। .

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उत्तराखण्ड के राज्य राजमार्गों की सूची

निम्नलिखित सूची उत्तराखण्ड राज्य के राज्य राजमार्गों की है: .

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उत्तराखण्ड के जिले

उत्तराखण्ड के जिले इस सूची में उत्तराखण्ड के जिले और उनकी जनसंख्या, जिला मुख्यालय, क्षेत्रफल और घनत्व की सूचना है। .

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उत्तराखण्ड के विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की सूची

2008 में विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन के बाद, उत्तराखण्ड विधानसभा के निर्वाचन क्षेत्रों की सूची निम्नलिखित है। .

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यहां पुनर्निर्देश करता है:

पिथौरागढ जिला

निवर्तमानआने वाली
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