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पश्तो भाषा

सूची पश्तो भाषा

कोई विवरण नहीं।

161 संबंधों: ऊपरी कोहिस्तान ज़िला, चारसद्दा ज़िला, चाइना रेडियो इण्टरनैशनल, चित्राल ज़िला, टांक ज़िला, ऐब्टाबाद, ऐब्टाबाद ज़िला, झ़ोब, झ़ोब नदी, झ़ोब ज़िला, डूरण्ड रेखा, तरीनकोट, तिराह, तोरवाली भाषा, तोरख़म, दरी फ़ारसी, दामेली भाषा, दक्षिण एशिया, दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन, दुर्रानी साम्राज्य, दोन नदी, दीवान (शायरी), ध्वनि (पाठ से वाक), नात ए शरीफ़, निचला कोहिस्तान, नंगरहार प्रान्त, नीमरूज़ प्रान्त, पठान, पश्तूनवाली, पाशाई भाषा, पाकिस्तान, पाकिस्तान की भाषाएँ, पिशीन, पख़्तूनिस्तान, पंजाब (पाकिस्तान), पकतिया प्रान्त, पकतीका प्रान्त, पुल-ए-आलम, पैशाची भाषा, पूर्वी ईरानी भाषाएँ, पेच नदी, पेशावर, पोठोहार, फ़रहाद दरया, फ़राह नदी, फ़राह प्रान्त, फ़राह, अफ़्ग़ानिस्तान, फ़ारसी साहित्य, फ़ारसी-अरबी लिपि, फ़ैज़ाबाद, बदख़्शान, ..., बट्टग्राम ज़िला, बदख़्शान प्रान्त, बन्नू ज़िला, बलूचिस्तान (पाकिस्तान), बादग़ीस प्रान्त, बाबर, बारकज़ई, बाश्गल नदी, बाख़्त्री भाषा, बंगश, बुज़कशी, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस, भारत के भाषाई परिवार, भाषा संस्थानों की सूची, मलाला युसुफ़ज़ई, मलालई जोया, महमूद-ए-राक़ी, मानसेहरा ज़िला, मुरग़ाब नदी, मैदान शहर, मेहतर लाम, मीर ज़फ़रुल्लाह ख़ान जमाली, यूसुफ़ज़ई, लश्कर गाह, लाल कुर्ती आन्दोलन, लाख, लग़मान प्रान्त, लक्की मरवत ज़िला, लोधी वंश, लोया पकतिया, लोगर प्रान्त, शरना, अफ़्ग़ानिस्तान, शुग़नी भाषा, शेर शाह सूरी, , सफ़ेद कोह, सरिकोली भाषा, सिबि ज़िला, संस्कृत भाषा का इतिहास, संगलाख़, सुलयमान पर्वत, स्वात नदी, सूरी साम्राज्य, हरिपुर ज़िला, हिन्द-ईरानी भाषाएँ, हज़ाराजात, हंगू ज़िला, हकीमुल्ला महसूद, हेरात, हेरात प्रान्त, हेलमंद नदी, हेलमंद प्रान्त, जलालाबाद, ज़रंज, ज़ियारत ज़िला, ईरानी भाषा परिवार, वटापूर ज़िला, वाख़ान, वॉयस ऑफ़ अमेरिका, ख़ान (उपाधि), ख़ुदा, ख़ुबानी, ख़ैबर एजेंसी, ख़ैबर पख़्तूनख़्वा, ख़ोस्त, ख़ोस्त प्रान्त, गरदेज़, ग़ज़नी प्रान्त, ग़ोर प्रान्त, गूगल खोज, गोजरी भाषा, ओरूज़्गान प्रान्त, ओसेती भाषा, आदिम हिन्द-ईरानी भाषा, इस्लामाबाद, करक ज़िला, कलकोटी भाषा, क़लन्दर मोमंद, क़ला-ए-नौ, अफ़्ग़ानिस्तान, क़लात, ज़ाबुल प्रान्त, क़िला अब्दुल्लाह ज़िला, कापीसा प्रान्त, काबुल एक्सप्रेस (2006 फ़िल्म), काबुल नदी, काबुल प्रान्त, कांधार प्रान्त, कुनर नदी, कुनर प्रान्त, कुर्रम नदी, कुर्रम वादी, कुंदुज़ प्रान्त, क्वेटा, क्वेटा ज़िला, कोहाट ज़िला, कोहिस्तान ज़िला (पाकिस्तान), कोहिस्तानी भाषा, कोकचा नदी, अफ़रीदी, अफ़ग़ानिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान के प्रांत, अफ़्गानिस्तान का राष्ट्रगान, अफगान हाउन्ड, अफगानिस्तान में हिन्दू धर्म, अब्दुर रहमान ख़ान, अर्नेस्ट ट्रम्प, असदाबाद, अफ़्ग़ानिस्तान, अहमद शहज़ाद, अवस्ताई भाषा, अइमाक़ लोग, PS, 2016 उड़ी हमला सूचकांक विस्तार (111 अधिक) »

ऊपरी कोहिस्तान ज़िला

ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रांत में पूर्व कोहिस्तान ज़िला (लाल रंग में) ऊपरी कोहिस्तान या अपर कोहिस्तान या कोहिस्तान बाल (उर्दू और पश्तो:, अंग्रेज़ी: Upper Kohistan) पाकिस्तान के ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रांत के पूर्वोत्तरी भाग में स्थित एक पूर्व ज़िला है। इसे वर्ष 2014 में कोहिस्तान जिले को द्विभाजित कर, बनाया गया था। .

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चारसद्दा ज़िला

ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रांत में चारसद्दा ज़िला (लाल रंग में) चारसद्दा का मशहूर चप्पल बाज़ार चारसद्दा (उर्दू:, पश्तो:, अंग्रेज़ी: Charsadda) पाकिस्तान के ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रांत के मध्य भाग में स्थित एक ज़िला है। इस ज़िले की राजधानी चारसद्दा नाम का ही शहर है। यह ज़िला पहले पेशावर महानगर का हिस्सा हुआ करता था। माना जाता है कि भारतीय उपमहाद्वीप की प्राचीन नगरी पुष्कलावती, जिसका रामायण में भी ज़िक्र आता है, इसी चारसद्दा ज़िले में स्थित थी।, Raj Kumar Pruthi, APH Publishing, 2004, ISBN 978-81-7648-581-4,...

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चाइना रेडियो इण्टरनैशनल

चाइना रेडियो इण्टरनैशनल (सी॰आर॰आई या सीआरआई) (चीनी: 中国国际广播电台), जिसका पुराना नाम रेडियो पेकिंग है, की स्थापना ३ दिसम्बर, १९४१ को हुई थी। चीन के एक मात्र अन्तर्राष्ट्रीय रेडियो के रूप में सीआरआई की स्थापना चीन व दुनिया के अन्य देशों की जनता के बीच मैत्री व पारस्परिक समझ बढ़ाने के उद्देश्य से की गई थी। अपनी स्थापना के आरम्भिक दिनों में सीआरआई, जापानी भाषा में प्रतिदिन १५ मिनटों का कार्यक्रम प्रसारित करता था। पर आज ७० वर्षों के बाद यह ५७ विदेशी भाषाओं व चीनी मानक भाषा व ४ बोलियों में दुनिया भर में प्रतिदिन २११ घण्टों की प्रसारण सेवा प्रदान करता है। इसके कार्यक्रमों में समाचार, सामयिक टिप्पणी के साथ साथ आर्थिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक व तकनीकी विषय सम्मिलित हैं। १९८४ से सीआरआई की घरेलू सेवा भी प्रारम्भ हुई। तब से सीआरआई अपने एफ़एम ८८.७ चैनल पर प्रति दिन ६ बजे से रात १२ बजे तक ९ भाषाओं में संगीत कार्यक्रम प्रसारित करता रहा है। और इस दौरान इसके एफफेम ९१.५ चैनल तथा एमडब्लू १२५१ किलोहर्ट्ज़ फ़्रीक्वेंसी पर अंग्रेज़ी भाषा के कार्यक्रम भी होते हैं। विदेशों में सीआरआई के २७ ब्यूरो खुले हैं और चीन के सभी प्रान्तों तथा हांगकांग व मकाउ समेत सभी बड़े नगरों में इसके कार्यालय काम कर रहे हैं। १९८७ से अब तक सीआरआई ने दुनिया के दस से अधिक रेडियो स्टेशनों के साथ सहयोग समझौता सम्पन्न किया है। इसके अतिरिक्त सीआरआई का बहुत से रेडियो व टीवी स्टेशनों के साथ कार्यक्रमों के आदान-प्रदान या अन्य सहयोग के लिये घनिष्ट सम्बन्ध भी हैं। सीआरआई को प्रतिवर्ष विभिन्न देशों के श्रोताओं से लाखों चिट्ठियां प्राप्त होती हैं। विदेशी लोगों में सीआरआई, चीन की जानकारी पाने का सब से सुगम और सुविधाजनक माध्यम होने के कारण भी प्रसिद्ध है। १९९८ में सीआरआई का आधिकारिक जालस्थल भी खोला गया। आज वह चीन के पांच मुख्य सरकारी प्रेस जालस्थलों सम्मिलित है। सीआरआई के अपने समाचारपत्र व टीवी कार्यक्रम भी हैं। .

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चित्राल ज़िला

चित्राल (उर्दू:, अंग्रेज़ी: Chitral) पाकिस्तान के ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रांत के सबसे उत्तरी भाग में स्थित एक ज़िला है। यह उस प्रान्त का सबसे बड़ा ज़िला है। इसका क्षेत्रफल १४,८५० वर्ग किमी है और १९९८ की जनगणना में इसकी आबादी ३,१८,६८९ थी। ७,७०८ मीटर ऊँचा तिरिच मीर, जो दुनिया के सबसे ऊंचे पहाड़ों में से है, इस ज़िले में स्थित है। चित्राल ज़िले की राजधानी चित्राल शहर है।, Sarina Singh, Lindsay Brown, Paul Clammer, Rodney Cocks, John Mock, Lonely Planet, 2008, ISBN 978-1-74104-542-0 .

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टांक ज़िला

ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रांत में टांक ज़िला (गाढ़े नारंगी रंग में) टांक (उर्दू:, टांक; पश्तो:, टक; सराइकी:, टंक; अंग्रेज़ी: Tank) पाकिस्तान के ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रांत का एक ज़िला है। यह पहले डेरा इस्माइल ख़ान ज़िले का हिस्सा हुआ करता था। .

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ऐब्टाबाद

शिमला पहाड़ी से ऐब्टाबाद का नज़ारा ऐब्टाबाद (उर्दू) या अबट्टाबाद या अबटाबाद पाकिस्तान के ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा राज्य के हज़ारा क्षेत्र में स्थित एक शहर है। यह नगर इस्लामाबाद से ५० किमी (३१ मील) उत्तर-पश्चिम और पेशावर से १५० किमी (९३ मील) पूर्व ओराश घाटी में ४,१२० फ़ुट (१,२६० मीटर) की ऊँचाई पर बसा हुआ है। ऐब्टाबाद शहर ऐब्टाबाद ज़िले की राजधानी है। यह शहर पूरे पाकिस्तान में अपने लुभावने मौसम, श्रेष्ठ विद्यापीठों और बहुत से फ़ौजी संस्थानों के लिए मशहूर है। .

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ऐब्टाबाद ज़िला

ऐब्टाबाद ज़िले की मुकेशपुरी पहाड़ी की बर्फ़ से आधी ढकी हुई चोटी ऐब्टाबाद ज़िले का प्रशासनिक नक़्शा - हरे इलाक़े हवेलियाँ तहसील में, लाल इलाक़े ऐब्टाबाद तहसील में और पीला इलाक़ा नवाँशहर में शामिल हैं ऐब्टाबाद ज़िला (उर्दू) पाकिस्तान के ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा राज्य के हज़ारा क्षेत्र में स्थित एक ज़िला है। इस ज़िले का क्षेत्रफल १,९६९ वर्ग किमी है और इसकी राजधानी ऐब्टाबाद शहर है। १९९८ में इसकी आबादी ८,८१,००० लोगों की थी। इस ज़िले की उत्तरी तरफ़ मानसेहरा ज़िला, पश्चिमी तरफ़ हरिपुर ज़िला, दक्षिणी तरफ़ पाकिस्तानी पंजाब का रावलपिंडी ज़िला और पूर्वी तरफ़ पाकिस्तान-नियंत्रित कश्मीर का मुज़फ्फराबाद ज़िला पड़ता है। बाक़ी हज़ारा की तरह ऐब्टाबाद ज़िला भी पहाड़ी इलाक़ा है। .

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झ़ोब

झ़ोब (पश्तो: ژوب, अंग्रेज़ी: Zhob) पाकिस्तान के बलोचिस्तान प्रान्त के झ़ोब ज़िले की राजधानी है। यह झ़ोब नदी के किनारे स्थित एक छोटा-सा शहर है। मूल रूप से यह पास में स्थित गाँव के नाम पर अप्पोज़ई (اپوزئی, Appozai) कहलाता था। ब्रिटिशकाल में इसका नाम बदलकर फ़ोर्ट सैन्डमैन (Fort Sandeman) रखा गया जिसे १९७६ में बदलकर झ़ोब कर दिया गया। .

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झ़ोब नदी

झ़ोब नदी (पश्तो: ژوب سيند, झ़ोब सीन्द; अंग्रेज़ी: Zhob River) पाकिस्तान के बलोचिस्तान और ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रान्तों में बहने वाली एक नदी है। ४१० किलोमीटर लम्बी यह नदी मुख्य रूप से पूर्वोत्तर दिशा में ही बहती है। इतिहासकारों का कहना है कि सम्भवतः यह ऋग्वेद में यव्यावति कहलाने वाली नदी है। .

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झ़ोब ज़िला

झ़ोब (पश्तो: ژوب‎, अंग्रेज़ी: Zhob) पाकिस्तान के बलोचिस्तान प्रान्त का उत्तरतम ज़िला है। .

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डूरण्ड रेखा

अफ़गानिस्तान -पाकिस्तान को बांटने वाली डूरण्ड रेखा अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच २४३० किमी॰ लम्बी अन्तराष्ट्रीय सीमा का नाम डूरण्ड रेखा (Durand Line; पश्तो: د ډیورنډ کرښه‎) है। यह 'रेखा' १८९६ में एक समझौते के द्वारा स्वीकार की गयी थी। यह रेखा पश्तून जनजातीय क्षेत्र से होकर दक्षिण में बलोचिस्तान से बीच से होकर गुजरती है। इस प्रकार यह रेखा पश्तूनों और बलूचों को दो देशों में बाँटते हुए निकलती है। भूराजनैतिक तथा भूरणनीति की दृष्टि से डूरण्ड रेखा को विश्व की सबसे खतरनाक सीमा माना जाता है। अफगानिस्तन इस सीमा को अस्वीकार करता रहा है। अफ़्गानिस्तान चारों ओर से जमीन से घिरा हुआ है और इसकी सबसे बड़ी सीमा पूर्व की ओर पाकिस्तान से लगी है, इसे डूरण्ड रेखा कहते हैं। यह 1893 में हिंदुकुश में स्थापित सीमा है, जो अफगानिस्तान और ब्रिटिश भारत के जनजातीय क्षेत्रों से उनके प्रभाव वाले क्षेत्रों को रेखांकित करती हुयी गुजरती थी। आधुनिक काल में यह अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच की सीमा रेखा है। .

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तरीनकोट

तरीनकोट (पश्तो:, अंग्रेज़ी: Tarinkot या Tarin Kowt) दक्षिणी अफ़ग़ानिस्तान के ओरूज़्गान प्रान्त की राजधानी है। इस शहर की आबादी सन् २०१२ में लगभग ६,३०० अनुमानित की गई थी। यह शहर वास्तव में एक छोटा सा क़स्बा है जिसके बाज़ार में लगभग २०० दुकाने हैं। प्रांत के राज्यपाल, जो २०१२ में असदउल्लाह हमदम थे, इसी बाज़ार से लगे एक दफ़्तर में काम करते हैं। .

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तिराह

तिराह क्षेत्र (पश्तो: تیراہ‎), जिसे तिराह घाटी (उर्दु: وادی تیراہ‎), भी कहा जाता है पाकिस्तान के संघ प्रशासित जनजातीय क्षेत्र खैबर, कुर्रम और ओराकज़इ एजेंसियों में स्थित है। इसका एक छोटा भाग अफगानिस्तान में नंगरहार प्रांत में भी फैला है। तिराह खैबर दर्रे और खांकी घाटी के बीच फैली है। यह पश्तूनों की अफरीदी, ओराकज़इ और शिनवारी जनजातियों का निवास स्थान है। .

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तोरवाली भाषा

तोरवाली (Torwali), जिसे तूरवाली भी कहते हैं, कोहिस्तानी उपशाखा की एक दार्दी भाषा है जो पाकिस्तान के ख़ैबर​-पख़्तूनख़्वा प्रान्त के कोहिस्तान और स्वात ज़िलों में बोली जाती है। इसे तोरवाली समुदाय के लोग बोलते हैं जो स्वात वादी में मदयान शहर के पश्तो बोलने वालों से ऊपरी ऊँचाइयों में छोटी पर्वतीय बस्तियों में बिखरे हुए हैं। यहाँ से यह समुदाय कालाम नामक शहर तक विस्तृत हैं जहाँ से आगे फिर कालामी भाषा बोली जाती है। तोरवाली बोली की दो उपभाषाएँ हैं - बहरेन और चैल।, Sir George Abraham Grierson, Sir Aurel Stein, Asian Educational Services, 1929, ISBN 978-81-206-1605-9 .

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तोरख़म

तोरख़म में पाकिस्तान-अफ़्ग़ानिस्तान अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर करते लोग तोरख़म या तूरख़म (पश्तो) पाकिस्तान के पश्चिमोत्तरी संघ-शासित जनजातीय क्षेत्र (फ़ाटा) की ख़ैबर एजेंसी में स्थित पाकिस्तान-अफ़्ग़ानिस्तान अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर एक छोटा सा सरहदी क़स्बा है। सीमा के उस पार अफ़्ग़ानिस्तान का नंगरहार प्रान्त है। यह बस्ती प्रसिद्ध ख़ैबर दर्रे से सिर्फ़ पाँच किलोमीटर पूर्व पर स्थित है और पाकिस्तान-अफ़्ग़ानिस्तान के दर्मियान यातायात और व्यापार का एक मुख्य पड़ाव है। तोरख़म और उसके इर्द-गिर्द के इलाक़ों में मुख्य रूप से पश्तून लोग बसते हैं।, United Nations, United Nations Publications, 2009, ISBN 978-92-1-130285-1,...

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दरी फ़ारसी

अंग्रेज़ी और दरी भाषाओँ में बामियान शहर का स्वागत चिह्न - सबसे ऊपर लिखा है 'बा शहर-ए-बास्तानी बामियान ख़ुश आमदीद' (बामियान के प्राचीन शहर में स्वागत) दरी या दरी फ़ारसी अफ़ग़ानिस्तान में प्रचलित आधुनिक फ़ारसी का एक रूप है। पश्तो के साथ-साथ यह अफ़ग़ानिस्तान की दो संवैधानिक राजभाषाओं में से एक है। यह अफ़ग़ानिस्तान के लगभग ५०% लोगों की मातृभाषा है और देश की सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा भी है। अफ़ग़ानिस्तान में अलग-अलग भाषाएँ बोलने वाले समुदायों के बीच में भी इसका सम्पर्क भाषा के रूप में इस्तेमाल होता है। ईरानी फ़ारसी और दरी फ़ारसी बोलने वाले एक दुसरे को आसानी से समझ पाते हैं और इनमें सिर्फ़ लहजे और कुछ शब्दों का अंतर है। बहुत से भाषावैज्ञानिकों के अनुसार दरी में पुरानी फ़ारसी के बहुत से ऐसे तत्व सुरक्षित हैं जो आधुनिक ईरानी फ़ारसी में खो गये हैं।, Shaista Wahab, Hippocrene Books, 2004, ISBN 978-0-7818-1012-8 .

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दामेली भाषा

दामेली या दामेड़ी (Dameli) कुनर (कुनड़) शाखा की एक दार्दी भाषा है जो पाकिस्तान के चित्राल ज़िले की दोमेल वादी में बोली जाती है। इसे लगभग ५,००० लोग मातृभाषा के रूप में बोलते हैं। इनमें से पुरुष अक्सर पश्तो भी बोलना जानते हैं और बहुतों को खोवार और उर्दू भाषाएँ आती हैं। इसके बावजूद यह भाषा जीवित है और बच्चे भी इसे सीखते-बोलते हैं। .

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दक्षिण एशिया

thumb दक्षिण एशिया एक अनौपचारिक शब्दावली है जिसका प्रयोग एशिया महाद्वीप के दक्षिणी हिस्से के लिये किया जाता है। सामान्यतः इस शब्द से आशय हिमालय के दक्षिणवर्ती देशों से होता है जिनमें कुछ अन्य अगल-बगल के देश भी जोड़ लिये जाते हैं। भारत, पाकिस्तान, श्री लंका और बांग्लादेश को दक्षिण एशिया के देश या भारतीय उपमहाद्वीप के देश कहा जाता है जिसमें नेपाल और भूटान को भी शामिल कर लिया जाता है। कभी कभी इसमें अफगानिस्तान और म्याँमार को भी जोड़ लेते हैं। दक्षिण एशिया के देशों का एक संगठन सार्क भी है जिसके सदस्य देश निम्नवत हैं.

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दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन

दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) दक्षिण एशिया के आठ देशों का आर्थिक और राजनीतिक संगठन है। संगठन के सदस्य देशों की जनसंख्या (लगभग 1.5 अरब) को देखा जाए तो यह किसी भी क्षेत्रीय संगठन की तुलना में ज्यादा प्रभावशाली है। इसकी स्थापना ८ दिसम्बर १९८५ को भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, मालदीव और भूटान द्वारा मिलकर की गई थी। अप्रैल २००७ में संघ के 14 वें शिखर सम्मेलन में अफ़ग़ानिस्तान इसका आठवा सदस्य बन गया। .

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दुर्रानी साम्राज्य

दुर्रानी साम्राज्य (पश्तो:, द दुर्रानियानो वाकमन​ई) एक पश्तून साम्राज्य था जो अफ़्ग़ानिस्तान पर केन्द्रित था और पूर्वोत्तरी ईरान, पाकिस्तान और पश्चिमोत्तरी भारत पर विस्तृत था। इस १७४७ में कंदहार में अहमद शाह दुर्रानी (जिसे अहमद शाह अब्दाली भी कहा जाता है) ने स्थापित किया था जो अब्दाली कबीले का सरदार था और ईरान के नादिर शाह की फ़ौज में एक सिपहसलार था। १७७३ में अहमद शाह की मृत्यु के बाद राज्य उसके पुत्रों और फिर पुत्रों ने चलाया जिन्होने राजधानी को काबुल स्थानांतरित किया और पेशावर को अपनी शीतकालीन राजधानी बनाया। अहमद शाह दुर्रानी ने अपना साम्राज्य पश्चिम में ईरान के मशाद शहर से पूर्व में दिल्ली तक और उत्तर में आमू दरिया से दक्षिण में अरब सागर तक फैला दिया और उसे कभी-कभी आधुनिक अफ़्ग़ानिस्तान का राष्ट्रपिता माना जाता है।, Library of Congress Country Studies on Afghanistan, 1997, Accessed 2010-08-25 .

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दोन नदी

दोन नदी का नक़्शा रूस के रोस्तोव ओब्लास्त के किनारे बसा कालिनिन्सकी गाँव दोन नदी (रूसी भाषा: Дон, दोन), जिसे अंग्रेज़ी में डॉन नदी (Don, डॉन) भी उच्चारित किया जाता है, रूस की एक प्रमुख नदी है। यह मास्को से दक्षिण-पूर्व में स्थित नोवोमोस्कोव्स्क (Новомоско́вск, Novomoskovsk)​ शहर के पास शुरू होती है और १,९५० किलोमीटर बहकर आज़ोव सागर में जा मिलती है। इस नदी के किनारे बसा सब से बड़ा शहर रोस्तोव-दोन-किनारे है (रूसी में इसे रोस्तोव-ना-दोनू Ростов-на-Дону कहते हैं और अंग्रेज़ी में रोस्तोव-ऑन-डॉन Rostov-on-Don, ताकि इसे रूस में स्थित अन्य रोस्तोव नामक नगरों से अलग बताया जा सके)। एक दोनेत्स (Северский Донец, सेवेर्सकी दोनेत्स) नाम की नदी भी अपना पानी आगे जाकर दोन नदी में विलय कर देती है। .

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दीवान (शायरी)

अब्दुर रहमान चुग़तई द्वारा 1927 में संकलित दीवान-ए-ग़ालिब का एक पृष्ठ दीवान कविताओं के संग्रह को कहते हैं। अक्सर यह शब्द उर्दू, फ़ारसी, पश्तो, पंजाबी और उज़बेक भाषाओं के कविता संग्रह के लिए इस्तेमाल होता है। उदाहरण के लिए ग़ालिब की शायरी के संग्रह को 'दीवान-ए ग़ालिब' कहा जाता है। 'दीवान' मूल रूप से फ़ारसी का शब्द है और इसका मतलब सूची, बही या रजिस्टर होता है। इसी वजह से भारतीयf उपमहाद्वीप में किसी प्रशासन या व्यापार में हिसाब या बही-खाते रखने वाले व्यक्ति को भी 'दीवान जी' कहा जाता था। .

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ध्वनि (पाठ से वाक)

ध्वनि भारतीय भाषाओं हेतु एक पाठ से वाक प्रोग्राम है। यह एक स्क्रीनरीडर की तरह कार्य कर सकता है। इसे फॉस्स इण्डिया २००८ पुरुस्कार मिला है। इसका नवीनतम संस्करण ०.९४ है। यह विकास के चरण में है, वर्तमान में यह केवल लिनक्स प्लेटफॉर्म पर कार्य करता है। वर्तमान में ध्वनि निम्न भारतीय भाषाओं हेतु कार्य करता है।.

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नात ए शरीफ़

नात ए शरीफ़: (अरबी - نعت) उर्दू और फ़ारसी में नात ए शरीफ़ (نعت شریف): इस्लामी पद्य साहित्य में एक पद्य रूप है, जिस में पैगंबर हज़रत मुहम्मद साहब की तारीफ़ करते लिखी जाती है। इस पद्य रूप को बडे अदब से गाया भी जाता है। अक्सर नात ए शरीफ़ लिखने वाले आम शायर को नात गो शायर कहते हैं और गाने वाले को नात ख्वां कहते हैं। यह नात ख्वानी का रिवाज भारत, पाकिस्तान और बंगलादेश में आम है। भाशा अनुसार देखें तो, पश्तो, बंगाली, उर्दू और पंजाबी में नात ख्वानी आम है। नात ख्वां तुर्की, फ़ारसी, अरबी, उर्दू, बंगाली, पंजाबी, अंग्रेज़ी, कश्मीरी और सिंधी भाशाओं में आम है। .

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निचला कोहिस्तान

ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रांत में पूर्व कोहिस्तान ज़िला (लाल रंग में) निचला कोहिस्तान या लोवर कोहिस्तान या कोहिस्तान बाल (उर्दू और पश्तो:, अंग्रेज़ी: Upper Kohistan) पाकिस्तान के ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रांत के पूर्वोत्तरी भाग में स्थित एक ज़िला है। इसे वर्ष 2014 में कोहिस्तान जिले को द्विभाजित कर, बनाया गया था। .

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नंगरहार प्रान्त

अफ़्ग़ानिस्तान का नंगरहार प्रान्त (लाल रंग में) नंगरहार (पश्तो:, अंग्रेजी: Nangarhar) अफ़्ग़ानिस्तान का एक प्रांत है जो उस देश के पूर्व में स्थित है। इस प्रान्त का क्षेत्रफल ७,७२७ वर्ग किमी है और इसकी आबादी सन् २००९ में लगभग १३.३ लाख अनुमानित की गई थी।, Central Intelligence Agency (सी आइ ए), Accessed 27 दिसम्बर 2011 इस प्रान्त की राजधानी जलालाबाद शहर है। इस प्रान्त की पूर्वी और दक्षिणी सरहदें पाकिस्तान से लगती हैं। यहाँ के अधिकतर निवासी पश्तो बोलने वाले पठान हैं। .

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नीमरूज़ प्रान्त

अफ़्ग़ानिस्तान का नीमरूज़ प्रान्त (लाल रंग में) नीमरूज़ प्रान्त में शुष्क-पथरीली ज़मीन पर उगने वाला 'चश्त' नामक पौधा नीमरूज़ प्रान्त के चख़ानसूर ज़िले का एक नज़ारा नीमरूज़ (पश्तो:, अंग्रेजी: Nimruz) अफ़्ग़ानिस्तान का एक प्रांत है जो उस देश के पश्चिम में स्थित है। इस प्रान्त का क्षेत्रफल ४१,००५ वर्ग किमी है और इसकी आबादी सन् २००२ में लगभग १.५ लाख अनुमानित की गई थी।, Central Intelligence Agency (सी आइ ए), Accessed 27 दिसम्बर 2011 इस प्रान्त की राजधानी ज़रंज शहर है। इस प्रान्त की सरहदें ईरान और पाकिस्तान से लगती हैं। नीमरूज़ प्रान्त अफ़्ग़ानिस्तान की सब से कम घनी आबादी वाला सूबा है और इसका एक बड़ा भूभाग सीस्तान द्रोणी और दश्त-ए-मारगो के भयंकर रेगिस्तान में आता है। .

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पठान

अफ़्ग़ानिस्तान और पाकिस्तान के नक़्शे में पश्तून क्षेत्र (नारंगी रंग में) ख़ान अब्दुल ग़फ़्फ़ार ख़ान एक पश्तून थे अफ़्ग़ानिस्तान के ख़ोस्त प्रान्त में पश्तून बच्चे अमीर शेर अली ख़ान अपने पुत्र राजकुमार अब्दुल्लाह जान और सरदारों के साथ (सन् १८६९ ई में खींची गई) पश्तून, पख़्तून (पश्तो:, पश्ताना) या पठान (उर्दू) दक्षिण एशिया में बसने वाली एक लोक-जाति है। वे मुख्य रूप में अफ़्ग़ानिस्तान में हिन्दु कुश पर्वतों और पाकिस्तान में सिन्धु नदी के दरमियानी क्षेत्र में रहते हैं हालांकि पश्तून समुदाय अफ़्ग़ानिस्तान, पाकिस्तान और भारत के अन्य क्षेत्रों में भी रहते हैं। पश्तूनों की पहचान में पश्तो भाषा, पश्तूनवाली मर्यादा का पालन और किसी ज्ञात पश्तून क़बीले की सदस्यता शामिल हैं।, James William Spain, Mouton,...

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पश्तूनवाली

ख़ोस्त प्रान्त में एक पठान आदमी अपनी बेटी के साथ पश्तूनवाली (पश्तो) या पख़्तूनवाली दक्षिण एशिया के पश्तून समुदाय (पठान समुदाय) की संस्कृति की अलिखित मर्यादा परम्परा है। इसके कुछ तत्व उत्तर भारत और पाकिस्तान की इज़्ज़त मर्यादा से मिलते-जुलते हैं।, Anne L. Clunan, Harold A. Trinkunas, Stanford University Press, 2010, ISBN 978-0-8047-7013-2,...

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पाशाई भाषा

पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान की एक पाशाई भाषीय लड़की पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान का एक पाशाई भाषीय लड़का अफ़ग़ानिस्तान के ज़िलों का नक्शा - पाशाई भाषा पूर्वोत्तर में गुलाबी रंग वाले केवल चार ज़िलों में बोली जाती है पाशाई अफ़ग़ानिस्तान के पूर्वी नूरिस्तान, नंगरहार और कुनर राज्यों में बोली जाने वाली एक दार्दी भाषा है। अनुमान है के १९९८ में इसे २१६,८४२ लोग बोलते थे। पाशाई बोलने वालों को पाशाई समुदाय का सदस्य माना जाता है, जिसके अधिकतर लोग धर्म से मुसलमान हैं। २००३ से पहले पाशाई का कोई लिखित रूप नहीं था। बहुत से पाशाई बोलने वाले पश्तो भी बोलते हैं और उनमें साक्षरता का दर २५% है। .

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पाकिस्तान

इस्लामी जम्हूरिया पाकिस्तान या पाकिस्तान इस्लामी गणतंत्र या सिर्फ़ पाकिस्तान भारत के पश्चिम में स्थित एक इस्लामी गणराज्य है। 20 करोड़ की आबादी के साथ ये दुनिया का छठा बड़ी आबादी वाला देश है। यहाँ की प्रमुख भाषाएँ उर्दू, पंजाबी, सिंधी, बलूची और पश्तो हैं। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद और अन्य महत्वपूर्ण नगर कराची व लाहौर रावलपिंडी हैं। पाकिस्तान के चार सूबे हैं: पंजाब, सिंध, बलोचिस्तान और ख़ैबर​-पख़्तूनख़्वा। क़बाइली इलाक़े और इस्लामाबाद भी पाकिस्तान में शामिल हैं। इन के अलावा पाक अधिकृत कश्मीर (तथाकथित आज़ाद कश्मीर) और गिलगित-बल्तिस्तान भी पाकिस्तान द्वारा नियंत्रित हैं हालाँकि भारत इन्हें अपना भाग मानता है। पाकिस्तान का जन्म सन् 1947 में भारत के विभाजन के फलस्वरूप हुआ था। सर्वप्रथम सन् 1930 में कवि (शायर) मुहम्मद इक़बाल ने द्विराष्ट्र सिद्धान्त का ज़िक्र किया था। उन्होंने भारत के उत्तर-पश्चिम में सिंध, बलूचिस्तान, पंजाब तथा अफ़गान (सूबा-ए-सरहद) को मिलाकर एक नया राष्ट्र बनाने की बात की थी। सन् 1933 में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के छात्र चौधरी रहमत अली ने पंजाब, सिन्ध, कश्मीर तथा बलोचिस्तान के लोगों के लिए पाक्स्तान (जो बाद में पाकिस्तान बना) शब्द का सृजन किया। सन् 1947 से 1970 तक पाकिस्तान दो भागों में बंटा रहा - पूर्वी पाकिस्तान और पश्चिमी पाकिस्तान। दिसम्बर, सन् 1971 में भारत के साथ हुई लड़ाई के फलस्वरूप पूर्वी पाकिस्तान बांग्लादेश बना और पश्चिमी पाकिस्तान पाकिस्तान रह गया। .

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पाकिस्तान की भाषाएँ

पाकिस्तान में अनेक प्रकार की भाषाएँ एवं बोलिया बोली जाती हैं। जिन में से पश्तो, पंजाबी, सिंधी और बलूची प्रमुख भाषाएँ हैं। .

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पिशीन

पिशीन (Pishin) पाकिस्तान के पश्चिमी बलोचिस्तान सूबे के पिशीन ज़िले की राजधानी है। यह एक पश्तून बहुसंख्यक इलाक़ा है और यहाँ की आम-बोली पश्तो है। किसी ज़माने में यह अफ़्ग़ानिस्तान का हिस्सा हुआ करता था लेकिन प्रथम ब्रिटिश-अफ़्ग़ान युद्ध के बाद इसे ब्रिटिश हिन्दुस्तान में सम्मिलित कर लिया गया और भारत की आज़ादी और विभाजन के बाद यह पाकिस्तान में आ गया। पिशीन में बहुत गर्मी और सर्दी दोनों पड़ती हैं। गर्मियों में तापमान ४० सेंटीग्रेड से ज्यादा और सर्दियों में शुन्य से कम जाता है। पिशीन शहर इसी नाम की पिशीन वादी में स्थित है, जो एक बहुत ही शुष्क इलाक़ा है। यहाँ कुछ फलों के पेड़ों को छोड़कर बहुत कम वृक्ष हैं।, British Association for the Advancement of Science, J. Murray, 1879,...

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पख़्तूनिस्तान

दक्षिणी अफ़ग़ानिस्तान में जनजातीय एवं धार्मिक नेता पख़्तूनिस्तान का प्रस्तावित ध्वज पख़्तूनिस्तान या पठानिस्तान, शब्द "पठान" (पश्तून) और "स्तान" (जगह या क्षेत्र) के संयोजन है। इसका अर्थ संसार का वह ऐतिहासिक क्षेत्र जिसमें पठान लोगों की जनसंख्या सर्वाधिक है और जहाँ पश्तो भाषा बोली जाती है। पख़्तूनिस्तान का अधिक हिस्सा अफ़्ग़ानिस्तान और पाकिस्तान की भूमि में है लेकिन भारत और ईरान का भी छोटा सा हिस्सा शामिल है। पख़्तूनिस्तान शब्द का उपयोग अंग्रेज़ों ने तब किया जब वह भारत पर शासन कर रहे थे, ब्रिटिश राज ने पश्चिमी-उत्तरी क्षेत्रों को पख़्तूनिस्तान कहा करते थे और यही कारण से इस नाम संपूर्ण भारतीय उपमहाद्वीप में प्रसिद्ध हुआ और फिर इस क्षेत्र को पख़्तूनिस्तान कहा गया है। .

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पंजाब (पाकिस्तान)

पंजाब पंजाब पाकिस्तान का एक प्रान्त है। इसमें ३६ जिले हैं। पंजाब आबादी के अनुपात से पाकिस्तान का सब से बड़ा राज्य है। पंजाब में रहने वाले लोग पंजाबी कहलाते हैं। पंजाब की दक्षिण की तरफ़ सिंध, पश्चिम की तरफ़ ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा और बलोचिस्तान,‎‎‎ उत्तर की तरफ़ कश्मीर और इस्लामाबाद और पूर्व में हिन्दुस्तानी पंजाब और राजस्थान से मिलता है। पंजाब में बोली जाने वाली भाषा भी पंजाबी कहलाती है। पंजाबी के अलावा वहां उर्दु और सराइकी भी बोली जाती है। पंजाब की (राजधानी) लाहौर है। पंजाब फ़ारसी भाषा के दो शब्दों - 'पंज' यानि 'पांच' (५) और 'आब' यानि 'पानी' से मिल कर बना है। इन पांच दरियाओं के नाम हैं.

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पकतिया प्रान्त

अफ़्ग़ानिस्तान का पकतिया प्रान्त (लाल रंग में) पकतिया प्रान्त के बमोज़ई गाँव में पढ़ते बच्चे पकतिया (फ़ारसी:, अंग्रेजी: Paktia) अफ़्ग़ानिस्तान का एक प्रांत है जो उस देश के पूर्व में स्थित है। इस प्रान्त का क्षेत्रफल ६,४३२ वर्ग किमी है और इसकी आबादी सन् २००२ में लगभग ४.१५ लाख अनुमानित की गई थी।, Central Intelligence Agency (सी आइ ए), Accessed 27 दिसम्बर 2011 इस प्रान्त की राजधानी गरदेज़ शहर है। इस प्रान्त की सरहदें पाकिस्तान से लगती हैं। यहाँ के लगभग ९०% लोग पश्तून हैं और लगभग १०% फ़ारसी बोलने वाले ताजिक लोग हैं। .

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पकतीका प्रान्त

अफ़्ग़ानिस्तान का पकतीका प्रान्त (लाल रंग में) पकतीका प्रान्त में एक चरवाहा अपनी बकरियों के साथ पकतीका (फ़ारसी:, अंग्रेजी: Paktika) अफ़्ग़ानिस्तान का एक प्रांत है जो उस देश के पूर्व में स्थित है। इस प्रान्त का क्षेत्रफल १९,४८२ वर्ग किमी है और इसकी आबादी सन् २००९ में लगभग ४ लाख अनुमानित की गई थी।, Central Intelligence Agency (सी आइ ए), Accessed 27 दिसम्बर 2011 इस प्रान्त की राजधानी शरना शहर है। पकतीका की सरहदें पाकिस्तान से लगती हैं। यहाँ के लगभग ९६% लोग पश्तून हैं। यहाँ चंद हज़ार उज़बेक लोग भी रहते हैं जो आबादी के २% से भी कम हैं। .

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पुल-ए-आलम

पुल-ए-आलम का एक दृश्य पुल-ए-आलम (दरी फ़ारसी:, अंग्रेज़ी: Pul-i-Alam) पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान के लोगर प्रान्त की राजधानी है। यह शहर अफ़ग़ानिस्तान के गृह युद्ध में बहुत क्षतिग्रस्त हुस था और सन् २००१ में तालिबान के सत्ता से हटाए जाने के बाद यहाँ काफ़ी पुनर्निर्माण हुआ है। अपने शासन के दौरान तालिबान ने यहाँ सभी लड़कियों के स्कूल बंद कराने की कोशिश करी थी। सत्ता से हटाए जाने के बाद भी २ अक्टूबर २००६ को दस कट्टरपंथियों के दस्ते ने यहाँ एक लड़कियों की पाठशाला जलाने की कोशिश करी लेकिन नागरिकों ने एक दल ने उन्हें खदेड़ दिया।, Brendan O'Malley, pp.

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पैशाची भाषा

358x480px। पैशाची भाषा। https://commons.wikimedia.org/wiki/ पैशाची भाषा उस प्राकृत भाषा का नाम है जो प्राचीन काल में भारत के पश्चिमोत्तर प्रदेश में प्रचलित थी। पश्तो तथा उसके समीपवर्ती दरद भाषाएँ पैशाची से उत्पन्न एवं प्रभावित हुई पाई जाती हैं। .

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पूर्वी ईरानी भाषाएँ

पूर्वी ईरानी भाषाएँ ईरानी भाषा-परिवार की एक उपशाखा हैं जो मध्य ईरानी काल (लगभग चौथी शताब्दी ईसापूर्व) से उभरीं। अवस्ताई भाषा अक्सर इस शाखा की एक प्राचीनतम सदस्या मानी जाती है। आधुनिक काल में सब से ज़्यादा बोली जाने वाली पूर्वी ईरानी भाषा पश्तो है, जिसके दुनिया में लगभग ५ करोड़ मातृभाषी हैं। यह अफ़्ग़ानिस्तान और पश्चिमोत्तरी पाकिस्तान के ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रान्त में बोली जाती है। इसके अलावा पूर्वी ताजिकिस्तान के कूहिस्तोनी-बदख़्शान स्वशासित प्रान्त और चीन के सुदूर पश्चिमी शिनजियांग प्रान्त में भी पूर्वी ईरानी भाषाएँ बोली जाती हैं। प्राचीन सोग़दाई से विकसित हुई पश्चिमोत्तरी ताजिकिस्तान की यग़नोबी भाषा और स्किथी-सरमती से विकसित हुई कॉकस क्षेत्र की ओसेती भाषा भी दोनों पूर्वी ईरानी भाषाएँ मानी जाती हैं।, Thomas Albert Sebeok, Walter de Gruyter, 1970,...

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पेच नदी

पेच नदी (Pech River;, दरिया-ए-पेच) पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान में स्थित एक नदी है। यह नूरिस्तान प्रान्त के मध्य भाग में हिन्दु कुश पर्वतों की बर्फ़ और हिमानियों (ग्लेशियरों) से शुरु होकर दक्षिण-दक्षिणपूर्व दिशा में कुनर प्रान्त में प्रवेश करती है और प्रान्तीय राजधानी असदाबाद के पास कुनर नदी में विलय हो जाती है।, David B. Edwards, pp.

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पेशावर

पेशावर पाकिस्तान का एक शहर है। यह ख़ैबर पख़्तूनख़्वा प्रान्त की राजधानी है। पेशावर उल्लेख पुराने पुस्तकों में "पुरुषपुर" के नाम से मिलता है। इस उपमहाद्वीप के प्राचीन शहरों में से एक है। पेशावर पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत और कबायली इलाकों के वाणिज्यिक केंद्र है। पेशावर में पश्तो भाषा बोली जाती है लेकिन जब उर्दू पाकिस्तान की राष्ट्रीय भाषा है इसलिए उर्दू भी माना जाता है। .

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पोठोहार

अंतरिक्ष से खींची गई तस्वीर में पोठोहार पठार पोठोहार या पोठवार (या, Pothohar या Pothwar) पूर्वोत्तरी पाकिस्तान का एक पठार क्षेत्र है जो उत्तरी पंजाब और आज़ाद कश्मीर में विस्तृत है। यह सिंध सागर दोआब में स्थित है, जो पूर्व में झेलम नदी से पश्चिम में सिन्धु नदी के बीच का इलाका है। इसे उत्तर में काला चिट्टा और मारगल्ला पर्वत शृंखलाएँ है और दक्षिण में नमक कोह शृंखला है। नमक कोह का १,५२२ मीटर ऊँचा सकेसर पर्वत (Sakesar) इसका सबसे ऊँचा पहाड़ है। यहाँ के लोग पंजाबी भाषा की पोठवारी और हिन्दको उपभाषाएँ बोलते हैं और कुछ लोग पश्तो भी बोलते हैं। पोठोहार बहुत से पंजाबी हिन्दू और सिखों की भी पूर्वजभूमि है, मसलन 'अरोड़ा' का पारिवारिक नाम रखने वाले अक्सर मूल-रूप से पोठोहारी होते हैं। इस क्षेत्र में बहुत से मशहूर हिन्दू धार्मिक स्थल हैं, जिनमें शिवजी का प्रसिद्ध कटासराज मंदिर शामिल है। कहा जाता है कि सति कि मृत्यु पर जब शिव रोये तो उनके अश्रुओं का एक ताल राजस्थान में पुष्कर में बना और दूसरा पोठोहार में कटासराज में।, Edward Backhouse Eastwick, John Murray (Publisher), 1883,...

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फ़रहाद दरया

फ़रहाद दरया (जन्म १९६२) एक अफ़ग़ान गायक और संगीत रचनाकार हैं जिनके कार्यक्रम पश्तो, दारी (फ़ारसी), उज़्बेक और उर्दू में होते हैं। वो संयुक्त राष्ट्र के अफ़ागनिस्तान शांति दूत भी हैं। Category:अफ़ग़ानिस्तान के गायक.

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फ़राह नदी

अमेरिकी सैनिक इंजिनियर आधी-सूखी हुई फ़राह नदी का मुआइना करते हुए - इस स्थान पर बाद में तोग्ज पुल नाम सेतु बनाया गया था फ़राह नदी (अंग्रेज़ी: Farah river) या फ़राह रूद (फ़ारसी और पश्तो) पश्चिमी अफ़ग़ानिस्तान की एक ५६० किमी लम्बी नदी है जो बंद-ए-बायान पहाड़ों से उभरकर ईरान और अफ़ग़ानिस्तान की सरहद पर सीस्तान द्रोणी में स्थित हेलमंद नदी के नदीमुख (डेल्टा) क्षेत्र में जाकर ख़ाली हो जाती है। अफ़ग़ानिस्तान के फ़राह प्रान्त की राजधानी फ़राह शहर इसी नदी के किनारे बसी हुई है। फ़राह रूद एक मौसमी नदी है जिसका पानी कभी ज़्यादा और कभी बहुत ही कम हो जाता है।, Encyclopaedia Britannica, 1998, ISBN 978-0-85229-633-2,...

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फ़राह प्रान्त

अफ़्ग़ानिस्तान का फ़राह प्रांत (लाल रंग में) फ़राह (पश्तो:, अंग्रेजी: Farah) अफ़्ग़ानिस्तान का एक प्रांत है जो उस देश के पश्चिमी भाग में स्थित है। इस प्रान्त का क्षेत्रफल ४८,४७१ वर्ग किमी है और इसकी आबादी सन् २००६ में लगभग ९. ३ लाख अनुमानित की गई थी। यह ईरान की सरहद से लगा हुआ बहुत ही हलकी आबादी वाला इलाक़ा है।, Central Intelligence Agency (सी आइ ए), Accessed 27 दिसम्बर 2011 इस प्रान्त की राजधानी फ़राह नाम का ही शहर है। इस प्रान्त में बसने वाले अधिकतर लोग पश्तून हैं। फ़राह में बहुत से प्राचीन क़िलों के खँडहर मिलते हैं। इनमें एक मिटटी की ईंटों का बना क़िला जिसका नाम 'काफ़िर क़ला' (यानि 'काफ़िर का क़िला') प्रसिद्ध है, जिसके बारे में कहा जाता है कि इसे सिकंदर महान ने बनाया था।, Malalai Joya, Derrick O'Keefe, Simon and Schuster, 2009, ISBN 978-1-4391-0946-5,...

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फ़राह, अफ़्ग़ानिस्तान

कुछ अमेरिकी सैनिक फ़राह में 'सिकंदर का क़िला' कहलाए जाने वाले ढाँचे के सामने फ़राह (फ़ारसी और पश्तो:, अंग्रेजी: Farah) पश्चिमी अफ़्ग़ानिस्तान के फ़राह प्रान्त की राजधानी है। यह शहर फ़राह नदी के किनारे स्थित है और ईरान की सीमा के काफ़ी पास है। .

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फ़ारसी साहित्य

फारसी भाषा और साहित्य अपनी मधुरता के लिए प्रसिद्ध है। फारसी ईरान देश की भाषा है, परंतु उसका नाम फारसी इस कारण पड़ा कि फारस, जो वस्तुत: ईरान के एक प्रांत का नाम है, के निवासियों ने सबसे पहले राजनीतिक उन्नति की। इस कारण लोग सबसे पहले इसी प्रांत के निवासियों के संपर्क में आए अत: उन्होंने सारे देश का नाम 'पर्सिस' रख दिया, जिससे आजकल यूरोपीय भाषाओं में ईरान का नाम पर्शिया, पेर्स, प्रेज़ियन आदि पड़ गया। .

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फ़ारसी-अरबी लिपि

फ़ारसी-अरबी लिपि या सिर्फ़ फ़ारसी लिपि (अलिफ़बाई फ़ारसी) अरबी लिपि पर आधारित एक लिपि है जिसका प्रयोग फ़ारसी, उर्दू, सिन्धी, पंजाबी और अन्य भाषाओँ को लिखने के लिए किया जाता है। इसका इजाद मुख्य रूप से इसलिए हुआ क्योंकि फ़ारसी में कुछ ध्वनियाँ हैं जो अरबी भाषा में नहीं हैं इसलिए उन्हें दर्शाने के लिए अरबी लिपि में कुछ नए अक्षरों को जोड़ना पड़ा।, Guy Ankerl, INU PRESS, 2000, ISBN 978-2-88155-004-1,...

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फ़ैज़ाबाद, बदख़्शान

बदख़्शान प्रान्त की राजधानी फ़ैज़ाबाद​ का एक नज़ारा फ़ैज़ाबाद​ (फ़ारसी:, अंग्रेज़ी: Fayzabad) उत्तरी अफ़ग़ानिस्तान के बदख़्शान प्रान्त की राजधानी और सबसे बड़ा शहर है। १,२०० मीटर की ऊंचाई पर कोकचा नदी के किनारे स्थित यह शहर पामीर क्षेत्र का एक मुख्य व्यापारिक और प्रशासनिक केंद्र भी है। .

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बट्टग्राम ज़िला

बट्टग्राम (उर्दू:, पश्तो:, अंग्रेज़ी: Battagram), जिसे बट्टाग्राम भी उच्चारित किया जाता है, पाकिस्तान के ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रांत का एक ज़िला है। यह कोहिस्तान ज़िले के दक्षिण में, मनसेहरा ज़िले के उत्तर में और शांगला ज़िले के पूर्व में स्थित है। इसकी सरहदें तोर ग़र​ नामक ज़िले (जिसे 'काला ढाका' के नाम से भी जाना जाता है) से भी लगती हैं जो २८ जनवरी २०११ तक क़बाईली क्षेत्र हुआ करता था। .

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बदख़्शान प्रान्त

बदख़्शान (फ़ारसी) अफ़्ग़ानिस्तान का एक प्रांत है जो उस देश के उत्तर-पूर्वी भाग में हिन्दु कुश पर्वतों और आमू दरिया के बीच स्थित है। यह ऐतिहासिक बदख़्शान क्षेत्र का हिस्सा है। इसका क्षेत्रफल ४४,०५९ वग किमी है और इसकी आबादी सन् २०१२ में लगभग १० लाख अनुमानित की गई थी।, Central Intelligence Agency (सी आइ ए), Accessed 27 दिसम्बर 2011 अफ़्ग़ानिस्तान को चीन द्वारा नियंत्रित तिब्बत व शिंजियांग क्षेत्रों से जोड़ने वाला दुर्गम वाख़ान गलियारा भी इसी प्रान्त में आता है। .

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बन्नू ज़िला

ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रांत में बन्नू ज़िला (लाल रंग में) बन्नू शहर का एक दृश्य बन्नू शहर में बन्नू (उर्दू और पश्तो:, अंग्रेज़ी: Bannu) पाकिस्तान के ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रांत का एक ज़िला है। यह करक ज़िले के दक्षिण में, लक्की मरवत ज़िले के उत्तर में और उत्तर वज़ीरिस्तान नामक क़बाइली क्षेत्र के पूर्व में स्थित है। इस ज़िले के मुख्य शहर का नाम भी बन्नू है। यहाँ बहुत-सी शुष्क पहाड़ियाँ हैं हालांकि वैसे इस ज़िले में बहुत हरियाली दिखाई देती है और यहाँ की धरती बहुत उपजाऊ है। ब्रिटिश राज के ज़माने में यहाँ के क़ुदरती सौन्दर्य से प्रभावित होकर बन्नू की 'स्वर्ग' से तुलना भी की जाती थी। .

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बलूचिस्तान (पाकिस्तान)

बलूचिस्तान (उर्दू: بلوچستان) पाकिस्तान का पश्चिमी प्रांत है। बलूचिस्तान नाम का क्षेत्र बड़ा है और यह ईरान (सिस्तान व बलूचिस्तान प्रांत) तथा अफ़ग़ानिस्तान के सटे हुए क्षेत्रों में बँटा हुआ है। यहां की राजधानी क्वेटा है। यहाँ के लोगों की प्रमुख भाषा बलूच या बलूची के नाम से जानी जाती है। १९४४ में बलूचिस्तान के स्वतंत्रता का विचार जनरल मनी के विचार में आया था पर १९४७ में ब्रिटिश इशारे पर इसे पाकिस्तान में शामिल कर लिया गया। १९७० के दशक में एक बलूच राष्ट्रवाद का उदय हुआ जिसमें बलूचिस्तान को पाकिस्तान से स्वतंत्र करने की मांग उठी। यह प्रदेश पाकिस्तान के सबसे कम आबाद इलाकों में से एक है। .

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बादग़ीस प्रान्त

बादग़ीस (फ़ारसी) अफ़्ग़ानिस्तान का एक प्रांत है जो उस देश के उत्तर-पश्चिमी भाग में मुरग़ाब नदी और हरी नदी के बीच स्थित है और उत्तर में सरख़्स के रेगिस्तान के छोर से लगता है।। इसका क्षेत्रफल २०,५९१ वर्ग किमी है और इसकी आबादी सन् २०१० में लगभग ५ लाख अनुमानित की गई थी।, Central Intelligence Agency (सी आइ ए), Accessed 27 दिसम्बर 2011 बादग़ीस की राजधानी क़ला-ए-नौ नाम का शहर है। .

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बाबर

ज़हिर उद-दिन मुहम्मद बाबर (14 फ़रवरी 1483 - 26 दिसम्बर 1530) जो बाबर के नाम से प्रसिद्ध हुआ, एक मुगल शासक था, जिनका मूल मध्य एशिया था। वह भारत में मुगल वंश के संस्थापक था। वो तैमूर लंग के परपोते था, और विश्वास रखते था कि चंगेज़ ख़ान उनके वंश के पूर्वज था। मुबईयान नामक पद्य शैली का जन्मदाता बाबर को ही माना जाता है! .

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बारकज़ई

बारकज़ई (पश्तो: بارکزی‎, bārakzay) एक अफ़गान पश्तून समूह है जो उन्नीसवीं सदी में अफ़ग़ानिस्तान पर राज किया करते थे। बीसवीं सदी के प्रसिद्ध अफ़ग़ान शासक ज़हिर शाह भी इसी कबीले से थे। Category:पश्तून.

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बाश्गल नदी

बाश्गल नदी (दरी फ़ारसी:, दरिया-ए-बाश्गल​; अंग्रेज़ी: Bashgal River; पश्तो: लंड​ई सींद) पूर्वोत्तरी अफ़्ग़ानिस्तान के नूरिस्तान प्रान्त में बाश्गल वादी में बहने वाली एक नदी है। यह हिन्दू-कुश पर्वतों की दक्षिणी ढलानों से शुरू होकर दक्षिण और दक्षिण-पश्चिमी दिशा में बहती है।, Ludwig W. Adamec, pp.

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बाख़्त्री भाषा

कुषाण सम्राट कनिष्क का सन् १५० ईसवी के लगभग ज़र्ब किया गया सिक्का, जिसपर बाख़्त्री में लिखा है ' ϷΑΟΝΑΝΟϷΑΟ ΚΑΝΗϷΚΙ ΚΟϷΑΝΟ', शाओनानोशाओ कनिष्की कोशानो', यानि 'शहनशाह कनिष्क कुषाण' बाख़्त्री (फ़ारसी) या बैक्ट्रीयाई (अंग्रेज़ी: Bactrian) प्राचीनकाल में मध्य एशिया के बाख़्तर (बैक्ट्रीया) क्षेत्र में बोली जाने वाली एक पूर्वी ईरानी भाषा थी जो समय के साथ विलुप्त हो गई। भाषावैज्ञानिक नज़रिए से बाख़्त्री के पश्तो, यिदग़ा और मुंजी भाषाओँ के साथ गहरे सम्बन्ध हैं। यह प्राचीन सोग़दाई और पार्थी भाषाओं से भी मिलती-जुलती थी। बाख़्त्री को लिखने के लिया ज़्यादातर यूनानी लिपि इस्तेमाल की जाती थी, इसलिए इस कभी-कभी 'यूनानी-बाख़्त्री' (या 'ग्रेको-बाख़्त्री') भी कहा जाता है।, Vadim Mikhaĭlovich Masson, UNESCO, 1994, ISBN 978-92-3-102846-5,...

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बंगश

भारत के पद्म भूषण-सम्मानित मशहूर सरोद वादक अमजद अली ख़ान एक बंगश पश्तून हैं बंगश (पश्तो:, अंग्रेज़ी: Bangash) एक प्रमुख पश्तून क़बीले का नाम है। बंगश लोग पाकिस्तान के संघ-शासित क़बाईली क्षेत्र की कुर्रम एजेंसी और ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रान्त के हन्गू, कोहाट और पेशावर इलाक़ों में पाए जाते हैं। भारत में कुछ बंगश लोग उत्तर प्रदेश के फ़र्रूख़ाबाद ज़िले में भी बसे हुए हैं। फ़र्रूख़ाबाद के नवाबों ने वहाँ एक अलग अफ़्ग़ान मोहल्ला भी स्थापित किया हुआ था।, D. H. A. Kolff, Om Prakash, Brill, 2003, ISBN 978-90-04-13155-2,...

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बुज़कशी

बल्ख़ प्रांत में बुज़कशी कज़ाख़ नाम) बुज़कशी (दरी फ़ारसी:, अंग्रेज़ी: Buzkashi) या कोक-बोरू (उज़बेक: kökbörü, अंग्रेज़ी: Kok-boru) या वुज़लोबा (पश्तो:, अंग्रेज़ी: Wuzloba) मध्य एशिया में घोड़ों पर सवार होकर खेले जाने वाला एक खेल है। यह अफ़्ग़ानिस्तान, उज़बेकिस्तान, ताजिकिस्तान, किरगिज़स्तान, तुर्कमेनिस्तान, कज़ाख़स्तान, पाकिस्तान के पठान इलाक़ों और चीन के उईग़ुर इलाक़ों में खेला जाता है। यह सदियों से स्तेपी के मैदानों पर रहने वाले क़बीलों द्वारा खेला जा रहा है जो घुड़सवारी में हुनरमंद होते हैं। इसमें खिलाड़ियों के दो गुट होते हैं और खेल के मैदान के बीच में एक सिर-कटा बकरा या बछड़ा रखा जाता है। खिलाड़ी अपने घोड़े दौड़ाते हुए उसे उठाने की कोशिश करते हैं। जो उसे उठा लेता है वह दुसरे गुट के खिलाड़ियों से बचकर उसे जीत की लकीर के पार फेंकने की कोशिश करता है, जबकि दूसरे खिलाड़ी उस लाश को उस से छीनने की कोशिश करते हैं।, Paul Connolly, Pier 9, 2011, ISBN 978-1-74266-513-9,...

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बीबीसी वर्ल्ड सर्विस

बीबीसी वर्ल्ड सर्विस दुनिया का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय प्रसारक है,जो सादृश और अंकीय लघु तरंगों (एनालॉग एंड डिजिटल शार्टवेव), इंटरनेट स्ट्रीमिंग और पॉडकास्टिंग, उपग्रह, एफएम और एमडब्ल्यू प्रसारणों के जरिये दुनिया के कई हिस्सों में 32 भाषाओं में प्रसारण करता है। यह राजनीतिक रूप से स्वतंत्र, (बीबीसी के घोषणपत्र में उल्लिखित विषयों का ब्यौरा उपलब्ध कराने के समझौते के आदेश द्वारा) गैर-लाभकारी और वाणिज्यिक विज्ञापनों से मुक्त है। अंग्रेजी भाषा की सेवा हर दिन 24 घंटे प्रसारित होती है। जून 2009 में बीबीसी की रिपोर्ट है कि विश्व सेवा के साप्ताहिक श्रोताओं का औसत 188 मिलियन लोगों तक पहुंच गया। वर्ल्ड सर्विस के लिए ब्रिटिश सरकार विदेशी और राष्ट्रमंडल कार्यालय द्वारा अनुदान सहायता के माध्यम से वित्तपोषित करती है। 2014 से यह अनिवार्य बीबीसी लाइसेंस शुल्क से वित्तपोषित होगा, जो ब्रिटेन में टेलीविजन पर प्रसा‍रित कार्यक्रमों को देखने वाले हर घर पर लगाया जायेगा.

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भारत के भाषाई परिवार

वृहद भारत के भाषा परिवार भारत में विश्व के सबसे चार प्रमुख भाषा परिवारों की भाषाएँ बोली जाती है। सामान्यत: उत्तर भारत में बोली जाने वाली भारोपीय परि वार की भाषाओं को आर्य भाषा समूह, दक्षिण की भाषाओं को द्रविड़ भाषा समूह, ऑस्ट्रो-एशियाटिक परिवार की भाषाओं को भुंडारी भाषा समूह तथा पूर्वोत्तर में रहने वाले तिब्बती-बर्मी, नृजातीय भाषाओं को चीनी-तिब्बती (नाग भाषा समूह) के रूप में जाना जाता है। .

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भाषा संस्थानों की सूची

यहाँ भाषा-नियामक संस्थानों की सूची दी गई है जो मानक भाषाओं का नियमन करतीं हैं। इन्हें प्रायः 'भाषा अकादमी' कहा जाता है। भाषा अकादमियाँ भाषाई शुद्धता (linguistic purism) के उद्देश्य से काम करतीं हैं तथा भाषा से सम्बन्धित नीतियाँ बनाती एवं प्रकाशित करतीं हैं। .

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मलाला युसुफ़ज़ई

कैलाश सत्यार्थी मलाला युसुफ़ज़ई (पश्तो: ملاله یوسفزۍ जन्म: 12 जुलाई 1997) को बच्चों के अधिकारों की कार्यकर्ता होने के लिए जाना जाता है। वह पाकिस्तान के ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रान्त के स्वात जिले में स्थित मिंगोरा शहर की एक छात्रा है। 13 साल की उम्र में ही वह तहरीक-ए-तालिबान शासन के अत्याचारों के बारे में एक छद्म नाम के तहत बीबीसी के लिए ब्लॉगिंग द्वारा स्वात के लोगों में नायिका बन गयी। अक्टूबर 2012 में, मात्र 14 वर्ष की आयु में अपने उदारवादी प्रयासों के कारण वे आतंकवादियों के हमले का शिकार बनी, जिससे वे बुरी तरह घायल हो गई और अंतर्राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में आ गई।http://www.guardian.co.uk/world/2012/oct/09/pakistan-girl-shot-activism-swat-taliban .

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मलालई जोया

मलालई जोया (पश्तो ملالۍ جویا, जन्म: २५ अप्रैल १९७८) अफ़्ग़ानिस्तान से कार्यकर्ता, लेखिका, और एक पूर्व राजनेत्री हैं। .

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महमूद-ए-राक़ी

महमूद-ए-राक़ी (दरी फ़ारसी:, अंग्रेज़ी: Mahmud-i-Raqi), जिसे अक्सर सिर्फ़ महमूद राक़ी कहा जाता है, पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान के कापीसा प्रान्त की राजधानी है। .

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मानसेहरा ज़िला

मानसेहरा (उर्दू:, पश्तो:, अंग्रेज़ी: Mansehra) पाकिस्तान के ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रांत का एक ज़िला है। इसके उत्तर में शांगला, बट्टग्राम, कोहिस्तान ज़िले, दक्षिण में ऐब्टाबाद​ और हरिपुर ज़िले, पश्चिम में बुनेर ज़िला और पूर्व में जम्मू और कश्मीर पड़ते हैं। यह एक रमणीय पहाड़ी इलाक़ा है और इस ज़िले की काग़ान वादी पर्यटन के लिए लोकप्रीय है। चीन और पाकिस्तान के दरम्यान चलने वाला काराकोरम राजमार्ग भी इस ज़िले से गुज़रता है। .

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मुरग़ाब नदी

मुरग़ाब नदी पर सन् १९०९ में रूसी साम्राज्य द्वारा बनाया गया हिन्दू कुश जल-विद्युत् स्टेशन (Гиндукушская ГЭС) मुरग़ाब नदी (फ़ारसी/पश्तो:, अंग्रेज़ी: Murghab, रूसी: Мургаб) मध्य एशिया में एक ८५० किमी लम्बी नदी है। यह मध्य अफ़्ग़ानिस्तान में सफ़ेद कोह पर्वत-शृंखला में उत्पन्न होकर पश्चिमोत्तर दिशा में चलती है। यहाँ यह अफ़्ग़ानिस्तान के बादग़ीस प्रान्त के मुरग़ाब ज़िले से गुज़रती है जिसका नाम इसी नदी पर पड़ा है। वहाँ से यह तुर्कमेनिस्तान के काराकुम रेगिस्तान में जा पहुँचती है जहाँ मरी शहर के नख़लिस्तान (ओएसिस) में यह काराकुम नहर से जा मिलती है।, Andrew Petersen, Psychology Press, 1999, ISBN 978-0-415-21332-5,...

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मैदान शहर

मैदान शहर (दरी फ़ारसी), जिसे पश्तो लहजे में मैदान शार (पश्तो:, अंग्रेज़ी: Maidan Shar) कहते हैं, दक्षिण-पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान के मैदान वरदक प्रान्त की राजधानी है। .

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मेहतर लाम

मेहतर लाम या मिहतर लाम (पश्तो:, अंग्रेज़ी: Mihtarlam) दक्षिण-पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान के लग़मान प्रान्त की राजधानी है। यह उस प्रान्त का इकलौता बड़ा क़स्बा है। .

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मीर ज़फ़रुल्लाह ख़ान जमाली

मीर ज़फ़रुल्लाह खान जमाली पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री हैं। वह एक जनवरी 1944 को बलूचिस्तान के जिला नसीरआबाद के गांव रोझान जमाली में पैदा हुए। प्रारंभिक शिक्षा रोझान जमाली में ही प्राप्त की। बाद में सेंट लॉरेंस कॉलेज घोड़ा गली मरी, एलिसन कॉलेज लाहौर और 1965 में गवर्नमेंट कॉलेज लाहौर से इतिहास में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की। ज़फ़रुल्लाह जमाली प्रांत बलूचिस्तान द्वारा अब तक पाकिस्तान के एकमात्र प्रधानमंत्री हैं। ज़फ़रुल्लाह जमाली अंग्रेजी, उर्दू, सिंधी, बलोची, पंजाबी और पश्तो भाषा में महारत रखते हैं। .

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यूसुफ़ज़ई

यूसुफ़ज़ई पश्तून लोग का एक क़बीला है। यह लोग आम तौर पर पाकिस्तान के सूबे ख़ैबर पख़्तूनख़्वा और अफ़्ग़ानिस्तान के पूर्वी इलाक़ों में आबाद हैं, लेकिन इसके अतिरिक्त यह लोग भारत के ऐतिहासिक क्षेत्र रोहिलखंड और दक्कन में भी आबाद हैं। श्रेणी:पश्तून लोग.

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लश्कर गाह

लश्कर गाह मस्जिद लश्कर गाह (पश्तो:, फ़ारसी:, अंग्रेज़ी: Lashkar Gah), जिसे इतिहास में बोस्त (Bost) के नाम से भी जाना जाता था, दक्षिणी अफ़ग़ानिस्तान के हेलमंद प्रान्त की राजधानी है। हेलमंद नदी और अर्ग़नदाब नदी के बीच बसा यह शहर राजमार्ग द्वारा पूर्व में कंदहार से, पश्चिम में ज़रंज से और पश्चिमोत्तर में हेरात से जुड़ा हुआ है। .

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लाल कुर्ती आन्दोलन

ख़ान अब्दुल ग़फ़्फ़ार ख़ान (बायीं ओर) महात्मा गांधी (दायीं ओर) के साथ (1940 का चित्र) लाल कुर्ती आन्दोलन भारत में पश्चिमोत्तर सीमान्त प्रान्त में ख़ान अब्दुल ग़फ़्फ़ार ख़ान द्वारा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के समर्थन में खुदाई ख़िदमतगार के नाम से चलाया गया एक ऐतिहासिक आन्दोलन था। खुदाई खिदमतगार एक फारसी शब्द है जिसका हिन्दी में अर्थ होता है ईश्वर की बनायी हुई दुनिया के सेवक। .

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लाख

लाख (संस्कृत: लक्ष), (Lakh या lac), दक्षिण एशिया एवं कुछ अन्य देशों में प्रयुक्त एक संख्यात्मक इकाई है जो सौ हजार (१००,०००) के बराबर होती है। गणितीय पद्धति में इसे (105) भी लिखा जाता है। भारतीय संख्या पद्धति में इसे १,००,००० लिखा जाता है। आधिकारिक और अन्य प्रसंगों में लाख का प्रयोग भारत, बांग्लादेश, नेपाल, पाकिस्तान, म्यांमार तथा श्रीलंका आदि में बहुतायत में किया जाता है। .

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लग़मान प्रान्त

लग़मान प्रान्त का एक नज़ारा लग़मान (पश्तो:, अंग्रेजी: Laghman) अफ़्ग़ानिस्तान का एक प्रांत है जो उस देश के पूर्व में स्थित है। इस प्रान्त का क्षेत्रफल ३,८४३ वर्ग किमी है और इसकी आबादी सन् २००८ में लगभग ३.८ लाख अनुमानित की गई थी।, Central Intelligence Agency (सी आइ ए), Accessed 27 दिसम्बर 2011 इस प्रान्त की राजधानी मेहतर लाम शहर है। इस प्रान्त में पश्तून लोगों की बहुसंख्या है और वे कुल जनसँख्या का ५८% हैं। यहाँ नूरिस्तानी लोग और पाशाई लोग भी रहते हैं और कम संख्या में फ़ारसी-भाषी ताजिक लोगों के भी समुदाय हैं। लग़मान में अरामाई भाषा में लिखी अशोक के आदेश वाली दो शिलाएँ भी मौजूद हैं।, Niharranjan Ray, Brajadulal Chattopadhyaya, Orient Blackswan, 2000, ISBN 978-81-250-1871-1,...

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लक्की मरवत ज़िला

ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रांत में लक्की मरवत ज़िला (पीले रंग में) लक्की मरवत (उर्दू और पश्तो:, अंग्रेज़ी: Lakki Marwat) पाकिस्तान के ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रांत के दक्षिणी भाग में स्थित एक ज़िला है। यह कभी बन्नू ज़िले का हिस्सा हुआ करता था, लेकिन १ जुलाई १९९२ को इसे एक अलग ज़िले का दर्जा दे दिया गया। .

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लोधी वंश

लोदी वंश (पश्तो / उर्दु) खिलजी अफ़्गान लोगों की पश्तून जाति से बना था। इस वंश ने दिल्ली के सल्तनत पर उसके अंतिम चरण में शासन किया। इन्होंने 1451 से 1526 तक शासन किया। दिल्ली का प्रथम अफ़गान शासक परिवार लोदियों का था। वे एक अफ़गान कबीले के थे, जो सुलेमान पर्वत के पहाड़ी क्षेत्र में रहता था और अपने पड़ोसी सूर, नियाजी और नूहानी कबीलों की ही तरह गिल्ज़ाई कबीले से जुड़ा हुआ था। गिल्ज़ाइयों में ताजिक या तुर्क रक्त का सम्मिश्रण था। पूर्व में मुल्तान और पेशावर के बीच और पश्चिम में गजनी तक सुलेमान पर्वत क्षेत्र में जो पहाड़ी निवासी फैले हुए थे लगभग १४वीं शताब्दी तक उनकी बिल्कुल अज्ञात और निर्धनता की स्थिति थी। वे पशुपालन से अपनी जीविका चलाते थे और यदा कदा अपने संपन्न पड़ोसी क्षेत्र पर चढ़ाई करके लूटपाट करते रहते थे। उनके उच्छृंखल तथा लड़ाकू स्वभाव ने महमूद गजनवी का ध्यान अपनी ओर आकृष्ट किया और अल-उत्बी के अनुसार उसने उन्हें अपना अनुगामी बना लिया। गोरवंशीय प्रभुता के समय अफ़गान लोग दु:साहसी और पहाड़ी विद्रोही मात्र रहे। भारत के इलबरी शासकों ने अफ़गान सैनिकों का उपयोग अपनी चौकियों को मज़बूत करने और अपने विरोधी पहाड़ी क्षेत्रों पर कब्जा जमाने के लिए किया। यह स्थिति मुहम्मद तुगलक के शासन में आई। एक अफ़गान को सूबेदार बनाया गया और दौलताबाद में कुछ दिनों के लिए वह सुल्तान भी बना। फीरोज तुगलक के शासनकाल में अफ़गानों का प्रभाव बढ़ना शुरू हुआ और १३७९ ई. में मलिक वीर नामक एक अफ़गान बिहार का सूबेदार नियुक्त किया गया। दौलत खां शायद पहला अफ़गान था जिसने दिल्ली की सर्वोच्च सत्ता (१४१२-१४१४) प्राप्त की, यद्यपि उसने अपने को सुल्तान नहीं कहा। सैयदों के शासनकाल में कई प्रमुख प्रांत अफ़गानों के अधीन थे। बहलोल लोदी के समय दिल्ली की सुल्तानशाही में अफ़गानो का बोलबाला था। बहलोल लोदी मलिक काला का पुत्र और मलिक बहराम का पौत्र था। उसने सरकारी सेवा सरहिंद के शासक के रूप में शुरू की और पंजाब का सूबेदार बन गया। १४५१ ई. तक वह मुल्तान, लाहौर, दीपालपुर, समाना, सरहिंद, सुंनाम, हिसार फिरोज़ा और कतिपय अन्य परगनों का स्वामी बन चुका था। प्रथम अफ़गान शाह के रूप में वह सोमवार १९ अप्रैल १४५१ को अबू मुज़फ्फर बहलोल शाह के नाम से दिल्ली की गद्दी पर बैठा। गद्दी पर बैठने के बाद बहलोल लोदी को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ा। उसके सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी थे जौनपुर के शर्की सुल्तान किंतु वह विजित प्रदेशों में अपनी स्थिति दृढ़ करने और अपने साम्राज्य का विस्तार करने में सफल हुआ। बहलोल लोदी की मृत्यु १४८९ ई. में हुई। उसकी मृत्यु के समय तक लोदी साम्राज्य आज के पूर्वी और पश्चिमी पंजाब, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के एक भाग तक फैल चुका था। सुल्तान के रूप में बहलाल लोदी ने जो काम किए वे सिद्ध करते हैं कि वह बहुत बुद्धिमान तथा व्यवहारकुशल शासक था। अब वह लड़ाकू प्रवृत्ति का या युद्धप्रिय नहीं रह गया था। वह सहृदय था और शांति तथा व्यवस्था स्थापित करके, न्याय की प्रतिष्ठा द्वारा तथा अपनी प्रजा पर कर का भारी बोझ लादने से विरत रहकर जनकल्याण का संवर्धन करना चाहता था। वहलोल लोदी का पुत्र निजाम खाँ, जो उसकी हिंदू पत्नी तथा स्वर्णकार पुत्री हेमा के गर्भ से उत्पन्न हुआ था, १७ जुलाई १४८९ को सुल्तान सिकंदर शाह की उपाधि धारण करके दिल्ली के सिंहासन पर बैठा। अपने पिता से प्राप्त राज्य में सिकंदर लोदी ने वियाना, बिहार, तिरहुत, धोलपुर, मंदरैल, अर्वतगढ़, शिवपुर, नारवार, चंदेरी और नागर के क्षेत्र भी मिलाए। शर्की शासकों की शक्ति उसने एकदम नष्ट कर दी, ग्वालियर राज्य को बहुत कमजोर बना दिया और मालवा का राज्य तोड़ दिया। किंतु नीतिकुशल, रणकुशल कूटनीतिज्ञ और जननायक के रूप में सिकंदर लोदी अपने पिता बहलोल लोदी की तुलना में नहीं टिक पाया। सिकंदर लोदी २१ नवम्बर १५१७ को मरा। गद्दी के लिए उसके दोनों पुत्रों, इब्राहीम और जलाल में झगड़ा हुआ। अत: साम्राज्य दो भागों में बँट गया। किंतु इब्राहीम ने बँटा हुआ दूसरा भाग भी छीन लिया और लोदी साम्राज्य का एकाधिकारी बन गया। जलाल १५१८ में मौत के घाट उतार दिया गया। लोदी वंश का आखिरी शासक इब्राहीम लोदी उत्तर भारत के एकीकरण का काम और भी आगे बढ़ाने के लिए व्यग्र था। ग्वालियर को अपने अधीन करने में वह सफल हो गया और कुछ काल के लिए उसने राणा साँगा का आगे बढ़ना रोक दिया। किंतु अफगान सरकार की अंतर्निहित निर्बलताओं ने सुल्तान की निपुणताहीन कठोरता का संयोग पाकर, आंतरिक विद्रोह तथा बाहरी आक्रमण के लिए दरवाजा खोल दिया। जहीरुद्दीन मुहम्मद बाबर ने २० अप्रैल १५२६ ई. को पानीपत की लड़ाई में इब्राहीम को हरा और मौत के घाट उतारकर भारत में मुगल साम्राज्य की स्थापना की। तीनों लोदी राजाओं ने चौथाई शताब्दी तक शासन किया। इस प्रकार मुगलों के पूर्व के शाही वंशों में तुगलकों को छोड़कर उनका शासन सबसे लंबा था। दिल्ली के लोदी सुल्तानों ने एक नए वंश की स्थापना ही नहीं की; उन्होंने सुल्तानशारी की परंपराओं में कुछ परिवर्तन भी किए; हालाँकि उनकी सरकार का आम ढाँचा भी मुख्यत: वैसा ही था जैसा भारत में पिछले ढाई सौ वर्षों के तुर्क शासन में निर्मित हुआ था। हिंदुओं के साथ व्यवहार में वे अपने पूर्ववर्तियों से कहीं अधिक उदार थे और उन्होंने अपने आचरण का आधार धर्म के बजाय राजनीति को बनाया। फलस्वरूप उनके शासन का मूल बहुत गहराई तक जा चुका था। लोदियों ने हिंदू-मुस्लिम-सद्भाव का जो बीजारोपण किया वह मुगलशासन में खूब फलदायी हुआ। .

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लोया पकतिया

ख़ोस्त प्रान्त और कुछ पड़ोसी इलाक़े लोया पकतिया में शामिल माने जाते हैं लोया पकतिया (पश्तो:; अंग्रेज़ी: Loya Paktia), जिसका मतलब 'महा-पकतिया' होता है, अफ़्ग़ानिस्तान का एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक क्षेत्र है जिसमें उस देश के पकतिया, पकतीका और ख़ोस्त के सम्पूर्ण प्रान्त और लोगर और ग़ज़नी प्रान्तों के कुछ भाग शामिल हैं। इसमें कभी-कभी पाकिस्तान की कुर्रम एजेंसी भी शामिल की जाती है। लोया पकतिया के पश्तून क़बीलों की एक सांझी संस्कृति है जो उनकी वेशभूषा, पगड़ी की शैली और रंगों, पश्तो बोलने के लहजों और अन्य चीज़ों से प्रकट होती है। यहाँ मुख्यतर ग़िलज़​ई और करलानी गुटों के क़बीले रहते हैं जिनमें ख़रोटी, ज़ाज़ी, ज़दराण और सुलयमानख़ेल शामिल हैं। यहाँ ख़ानाबदोश कूची क़बीले भी रहते हैं।, Andrew Krepinevich, Random House Digital, Inc., 2010, ISBN 978-0-553-38472-7,...

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लोगर प्रान्त

अफ़्ग़ानिस्तान का लोगर प्रान्त (लाल रंग में) लोगर (पश्तो:, अंग्रेजी: Logar) अफ़्ग़ानिस्तान का एक प्रांत है जो उस देश के पूर्व में स्थित है। इस प्रान्त का क्षेत्रफल ३,८८० वर्ग किमी है और इसकी आबादी सन् २००८ में लगभग ३.३ से ५.५ लाख के बीच अनुमानित की गई थी (ठीक संख्या पर मतभेद है)।, Central Intelligence Agency (सी आइ ए), Accessed 27 दिसम्बर 2011 इस प्रान्त की राजधानी पुल-ए-आलम शहर है। इस प्रान्त के ६०% निवासी पश्तून और ४०% फ़ारसी-भाषी ताजिक लोग है। .

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शरना, अफ़्ग़ानिस्तान

शरना​ (पश्तो:, अंग्रेज़ी: Sharana) दक्षिणपूर्वी अफ़ग़ानिस्तान के पकतीका प्रान्त की राजधानी है। यह २,२०० मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। .

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शुग़नी भाषा

शुग़नी भाषा एक पामीरी भाषा-परिवार की बोली है जो मध्य एशिया में ताजिकिस्तान के कूहिस्तोनी-बदख़्शान स्वशासित प्रान्त और अफ़ग़ानिस्तान के बदख़्शान प्रान्त में बोली जाती है।Karamšoev, Dodchudo K. (1988-99).

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शेर शाह सूरी

शेरशाह सूरी (1472-22 मई 1545) (फारसी/पश्तो: فريد خان شير شاہ سوري, जन्म का नाम फ़रीद खाँ) भारत में जन्मे पठान थे, जिन्होनें हुमायूँ को 1540 में हराकर उत्तर भारत में सूरी साम्राज्य स्थापित किया था। शेरशाह सूरी ने पहले बाबर के लिये एक सैनिक के रूप में काम किया था जिन्होनें उन्हे पदोन्नति कर सेनापति बनाया और फिर बिहार का राज्यपाल नियुक्त किया। 1537 में, जब हुमायूँ कहीं सुदूर अभियान पर थे तब शेरशाह ने बंगाल पर कब्ज़ा कर सूरी वंश स्थापित किया था। सन् 1539 में, शेरशाह को चौसा की लड़ाई में हुमायूँ का सामना करना पड़ा जिसे शेरशाह ने जीत लिया। 1540 ई. में शेरशाह ने हुमायूँ को पुनः हराकर भारत छोड़ने पर मजबूर कर दिया और शेर खान की उपाधि लेकर सम्पूर्ण उत्तर भारत पर अपना साम्रज्य स्थापित कर दिया। एक शानदार रणनीतिकार, शेर शाह ने खुद को सक्षम सेनापति के साथ ही एक प्रतिभाशाली प्रशासक भी साबित किया। 1540-1545 के अपने पांच साल के शासन के दौरान उन्होंने नयी नगरीय और सैन्य प्रशासन की स्थापना की, पहला रुपया जारी किया है, भारत की डाक व्यवस्था को पुनः संगठित किया और अफ़गानिस्तान में काबुल से लेकर बांग्लादेश के चटगांव तक ग्रांड ट्रंक रोड को बढ़ाया। साम्राज्य के उसके पुनर्गठन ने बाद में मुगल सम्राटों के लिए एक मजबूत नीव रखी विशेषकर हुमायूँ के बेटे अकबर के लिये। .

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ष का संस्कृत उच्चारण सुनिए - यह श से थोड़ा भिन्न है श का उच्चारण सुनिए - हिंदी में ष इसी की तरह कहा जाता है, लेकिन संस्कृत का ष इस से भिन्न है ष देवनागरी लिपि का एक वर्ण है। संस्कृत से उत्पन्न कई शब्दों में इसका प्रयोग होता है, जैसे की षष्ठ, धनुष, सुष्मा, कृषि, षड्यंत्र, संघर्ष और कष्ट। अन्तर्राष्ट्रीय ध्वन्यात्मक वर्णमाला (अ॰ध॰व॰) में इसके संस्कृत उच्चारण को ʂ के चिन्ह से लिखा जाता है। संस्कृत में 'ष' और 'श' के उच्चारण में काफ़ी अंतर है, लेकिन हिंदी से 'ष' ध्वनि लगभग लुप्त हो चुकी है और इसे 'श' कि तरह उच्चारित किया जाता है, जिसका अ॰ध॰व॰ चिन्ह ʃ है। संस्कृत में 'क' और 'ष' का एक संयुक्त अक्षर 'क्ष' भी प्रयोग होता है। संस्कृत में 'क्ष' का उच्चारण भी 'क्श' से भिन्न है हालाँकि हिंदी में इनमें अंतर नहीं है। .

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सफ़ेद कोह

अफ़्ग़ानिस्तान के नंगरहार प्रान्त के ख़ोगयानी ज़िले से दक्षिण में स्थित सफ़ेद कोह पर्वतों का नज़ारा सफ़ेद कोह (Safed Koh), जिन्हें पश्तो में स्पीन ग़र कहते हैं और जिन्हें १९वीं सदी तक हिन्दुस्तानी पर्वत (Indian Caucasus) भी कहा जाता था, पूर्वी अफ़्ग़ानिस्तान और पाकिस्तान के पश्चिमोत्तरी संघ-शासित जनजातीय क्षेत्र के ख़ैबर और कुर्रम विभागों में स्थित एक पर्वत शृंखला है। हिन्दु कुश पर्वतों की इस उपशाखा का सबसे बुलंद शिखर ४,७६१ मीटर (१५,६२० फ़ुट) ऊँचा सिकराम पर्वत (Sikaram) है।, Asiatic Society of Bengal, The Society, 1879,...

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सरिकोली भाषा

शिंजियांग प्रान्त - हल्के नीले इलाक़ों में सरिकोली बोली जाती है सरिकोली भाषा, जिसे ताशक़ूरग़ानी भाषा भी कहते हैं, एक पामीरी भाषा-परिवार की बोली है जो चीन द्वारा नियंत्रित शिनजियांग प्रान्त के ताशक़ुरग़ान​ क्षेत्र में बोली जाती है। यह इलाक़े ताजिकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान के वाख़ान​ गलियारे और पाक-अधिकृत कश्मीर के गिलगित-बल्तिस्तान क्षेत्र के पास स्थित हैं। अन्य पामीरी भाषाओं की तरह यह भी एक पूर्वी ईरानी भाषा है। इसे चीन में अक्सर 'ताजिक भाषा' कहा जाता है हालांकि यह ताजीकिस्तान व अफ़ग़ानिस्तान में बोली जाने वाली ताजिक भाषा के काफ़ी भिन्न है। यह पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान की वाख़ी भाषा में मिलती-जुलती है हालांकि इन दोनों भाषाओं के बोलने वाले आसानी से एक-दूसरे को समझ नहीं पाते।Outline of the Tajik language (塔吉克语简志/Tǎjíkèyǔ Jiǎnzhì), Gawarjon (高尔锵/Gāo Ěrqiāng), Nationalities Publishing House, Beijing, 1985 .

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सिबि ज़िला

सिबि (उर्दू व बलोच: سبی, अंग्रेज़ी: Sibi) पाकिस्तान के बलोचिस्तान प्रान्त का एक ज़िला है। .

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संस्कृत भाषा का इतिहास

जिस प्रकार देवता अमर हैं उसी प्रकार सँस्कृत भाषा भी अपने विशाल-साहित्य, लोक हित की भावना,विभिन्न प्रयासों तथा उपसर्गो के द्वारा नवीन-नवीन शब्दों के निर्माण की क्षमता आदि के द्वारा अमर है। आधुनिक विद्वानों के अनुसार संस्कृत भाषा का अखंड प्रवाह पाँच सहस्र वर्षों से बहता चला आ रहा है। भारत में यह आर्यभाषा का सर्वाधिक महत्वशाली, व्यापक और संपन्न स्वरूप है। इसके माध्यम से भारत की उत्कृष्टतम मनीषा, प्रतिभा, अमूल्य चिंतन, मनन, विवेक, रचनात्मक, सर्जना और वैचारिक प्रज्ञा का अभिव्यंजन हुआ है। आज भी सभी क्षेत्रों में इस भाषा के द्वारा ग्रंथनिर्माण की क्षीण धारा अविच्छिन्न रूप से वह रही है। आज भी यह भाषा, अत्यंत सीमित क्षेत्र में ही सही, बोली जाती है। इसमें व्याख्यान होते हैं और भारत के विभिन्न प्रादेशिक भाषाभाषी पंडितजन इसका परस्पर वार्तालाप में प्रयोग करते हैं। हिंदुओं के सांस्कारिक कार्यों में आज भी यह प्रयुक्त होती है। इसी कारण ग्रीक और लैटिन आदि प्राचीन मृत भाषाओं (डेड लैंग्वेजेज़) से संस्कृत की स्थिति भिन्न है। यह मृतभाषा नहीं, अमरभाषा है। .

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संगलाख़

अफ़्ग़ानिस्तान के नक़्शे पर उनई दर्रा संगलाख़ (Sanglakh) हिन्दु कुश पर्वत शृंखला की एक शाखा है। इस से अफ़्ग़ानिस्तान की दो महत्वपूर्ण नदियाँ - हेलमंद नदी और काबुल नदी - उत्पन्न होती हैं। संगलाख़ शृंखला के सब से प्रमुख दर्रे का नाम 'उनई दर्रा' या 'उनई कोतल' है।, Cambridge University Press, 1911,...

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सुलयमान पर्वत

अंतरिक्ष से सुलयमान पर्वतों के एक अंश की तस्वीर इस तस्वीर में सुलयमान पर्वत नामांकित हैं सुलयमान पर्वत या कोह-ए-सुलयमान (फ़ारसी:; पश्तो:; अंग्रेज़ी: Sulaiman Mountains), जिन्हें केसई पर्वत (पश्तो:; अंग्रेज़ी: Kesai Mountains) भी कहा जाता है, दक्षिणपूर्वी अफ़्ग़ानिस्तान और पश्चिमी पाकिस्तान के बलोचिस्तान प्रान्त के उत्तर भाग में स्थित एक प्रमुख पर्वत शृंखला है। अफ़्ग़ानिस्तान में यह ज़ाबुल, लोया पकतिया और कंदहार (उत्तर-पूर्वी भाग) क्षेत्रों में विस्तृत हैं। सुलयमन पर्वत ईरान के पठार का पूर्वी छोर हैं और भौगोलिक रूप से उसे भारतीय उपमहाद्वीप से विभाजित करते हैं। इस शृंखला के सबसे प्रसिद्ध शिखर बलोचिस्तान में स्थित ३,४८७ मीटर ऊँचा तख़्त​-ए-सुलयमान, ३,४४४ मीटर ऊँचा केसई ग़र और क्वेटा के पास स्थित ३,५७८ मीटर ऊँचा ज़रग़ुन ग़र हैं।, William Wilson Hunter, Trubner & Co, London, 1881,...

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स्वात नदी

ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रान्त में बहने वाली स्वात नदी स्वात नदी (पश्तो:, द स्वात सीन्द; अंग्रेज़ी: Swat River) पाकिस्तान के पश्चिमोत्तरी ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रान्त में बहने वाली एक नदी है। इसका स्रोत हिन्दू-कुश पर्वतों में है जहाँ से निकलकर यह कालाम वादी और स्वात ज़िले से गुज़रती है। यहाँ से आगे यह मालाकंड ज़िले से निकलकर पेशावर वादी में चारसद्दा के पास काबुल नदी में मिल जाती है। स्वात नदी स्वात ज़िले के बहुत से इलाक़ों में सिंचाई के लिए बहुत महत्व रखती है और इसपर दो जल-विद्युत बाँध भी बने हुए हैं। इनसे पैदा होने वाली बिजली का स्थानीय इस्तेमाल किया जाता है। स्वात नदी एक रमणीय नज़ारा भी है जिसे देखने हर साल बहुत से सैलानी आते हैं। इसकी वादी के निचले हिस्से में बहुत से पुरातन स्थल हैं। .

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सूरी साम्राज्य

शेर शाह सूरी द्वारा ज़र्ब किया गया सिक्का, (बाई तरफ़) अरबी-फ़ारसी लिपि और देवनागरी के एक रूप में लिखा है 'सुलतान शेर शाह' दिल्ली के पुराने क़िले के आगे स्थित 'लाल दरवाज़ा' जिसे 'सूरी गेट' भी कहते हैं सूरी साम्राज्य (पश्तो:, द सूरियानो टोलवाकमन​ई) भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तरी भाग में स्थित पश्तून नस्ल के शेर शाह सूरी द्वारा स्थापित एक साम्राज्य था जो सन् १५४० से लेकर १५५७ तक चला। इस दौरान सूरी परिवार ने बाबर द्वारा स्थापित मुग़ल सल्तनत को भारत से बेदख़ल कर दिया और ईरान में शरण मांगने पर मजबूर कर दिया। शेर शाह ने दुसरे मुग़ल सम्राट हुमायूँ को २६ जून १५३९ में (पटना के क़रीब) चौसा के युद्ध में और फिर १७ मई १५४० में बिलग्राम के युद्ध में परास्त किया। सूरी साम्राज्य पश्चिमोत्तर में ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा से पूर्व में बंगाल तक विस्तृत था। .

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हरिपुर ज़िला

हरिपुर (उर्दू:, पश्तो:, अंग्रेज़ी: Mansehra) पाकिस्तान के ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रांत का एक ज़िला है। इसके पश्चिम में स्वाबी ज़िला, पश्चिमोत्तर में बुनेर ज़िला, उत्तर में मानसेहरा ज़िला, पूर्वोत्तर में ऐब्टाबाद ज़िला और दक्षिण में पंजाब प्रांत पड़ता है। हरिपुर ज़िला ऐतिहासिक हज़ारा क्षेत्र का हिस्सा है, जो ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा में होने के बावजूद एक पंजाबी प्रभावित क्षेत्र माना जाता है। .

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हिन्द-ईरानी भाषाएँ

हिन्द ईरानी शाखा हिन्द-यूरोपीय भाषा-परिवार की एक शाखा है। ये सातम वर्ग के अन्दर आती है। इसकी दो उपशाखाएँ हैं.

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हज़ाराजात

हज़ाराजात (फ़ारसी:, अंग्रेज़ी: Hazarajat, हज़ारगी), जिसे हज़ारिस्तान भी कहा जाता है, हज़ारा लोगों की मध्य अफ़ग़ानिस्तान में स्थित मातृभूमि है। यह हिन्दू कुश पर्वतों के पश्चिमी भाग में कोह-ए-बाबा श्रृंखला में विस्तृत है। उत्तर में बामयान द्रोणी, दक्षिण में हेलमंद नदी, पश्चिम में फिरूज़कुह पहाड़ और पूर्व में उनई दर्रा इसकी सरहदें मानी जाती हैं। पश्तून क़बीलों द्वारा हमलों के कारण इसकी सरहदें समय-समय पर बदलती रहीं हैं।, Arash Khazeni, Encyclopedia Iranica, Accessed September 15, 2011 बामयान और दायकुंदी प्रांत लगभग पूरे-के-पूरे हज़ाराजात में आते हैं, जबकि बग़लान, हेलमंद, ग़ज़नी, ग़ोर, ओरूज़्गान, परवान, समंगान, सर-ए-पोल और मैदान वरदक प्रान्तों के बड़े हिस्से भी इसका भाग माने जाते हैं।, Indiana University, 1997 .

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हंगू ज़िला

ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रांत में हंगू ज़िला (लाल रंग में) हंगू (उर्दू:, पश्तो:, अंग्रेज़ी: Hangu) पाकिस्तान के ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रांत का एक ज़िला है। यह कोहाट ज़िले के पश्चिम में और करक ज़िले के उत्तर-पश्चिम में स्थित है। इसकी उत्तरी सीमा ओरकज़​ई एजेंसी, पश्सिमोत्तरी सीमा कुर्रम एजेंसी और दक्षिणी सीमा उत्तरी वज़ीरिस्तान से लगती है जो तीनों पाकिस्तान के संघ शासित क़बाईली क्षेत्र में आते हैं। .

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हकीमुल्ला महसूद

उत्तरी वज़ीरिस्तान हकीमुल्ला महसूद (हकिम उल्ला, हकीमुल्लाह) महसूद (पश्तो/उर्दू: حکیم‌الله محسود), (c. 1979 - 1 नवम्बर 2013), जिनका जन्म का नाम जमशेद महसूद (पश्तो/उर्दू: جمشید محسود) और जिन्हें ज़ुल्फ़िक़ार महसूद (पश्तो/उर्दू: ذو الفقار محسود) के नाम से जाना जाता था, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के अमीर थे। वो पूर्व कमांडर बैतुल्ला महसूद के सहायक और आतंकवादी संगठन फिदायीन अल-इस्लाम के एक प्रमुख नेता थे। .

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हेरात

हेरात हेरात (पश्तो:, अंग्रेजी: Herat) अफ़्ग़ानिस्तान का एक नगर है और हेरात प्रान्त की राजधानी भी है। यह देश के पश्चिम में है और ऐतिहासिक महत्व के शहर है। यह वृहत ख़ोरासान क्षेत्र का हिस्सा है और सबसे बड़ा शहर भी। रेशम मार्ग पर स्थित होने के कारण यह वाणिज्य का केन्द्र रहा है जहाँ से भारत और चीन से पश्चिमी देशों का व्यापार होता रहा है। पारसी ग्रंथ अवेस्ता में इसका ज़िक्र मिलता है। ईसा के पूर्व पाँचवीं सदी के हख़ामनी काल से ही यह एक संपन्न शहर रहा है। यहाँ इस्लाम सातवीं सदी के मध्य में आया जिसके बाद कई विद्रोह हुए। हेरात हरी नदी (हरीरूद) के किनारे बसा हुआ है। .

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हेरात प्रान्त

अफ़्ग़ानिस्तान का हेरात प्रान्त (लाल रंग में) हेरात प्रान्त में कुछ बच्चियाँ हेरात (पश्तो:, अंग्रेजी: Herat) अफ़्ग़ानिस्तान का एक प्रांत है जो उस देश के पश्चिम में स्थित है। इस प्रान्त का क्षेत्रफल ५४,७७८ वर्ग किमी है और इसकी आबादी सन् २००६ में लगभग १७.६ लाख अनुमानित की गई थी।, Central Intelligence Agency (सी आइ ए), Accessed 27 दिसम्बर 2011 इस प्रान्त की राजधानी ऐतिहासिक हेरात शहर है। अफ़्ग़ानिस्तान के अन्य प्रान्तों के अलावा, हेरात प्रान्त की सरहदें ईरान और तुर्कमेनिस्तान को भी लगती हैं। इस प्रान्त के लगभग ६०% लोग फ़ारसी-भाषी ताजिक समुदाय से हैं। यहाँ पश्तून लोग भी हैं, जिनमें से बहुत से ख़ानाबदोश चरवाहे हैं।, Neamatollah Nojumi, Dyan E. Mazurana, Elizabeth Stites, Rowman & Littlefield, 2009, ISBN 978-0-7425-4032-3,...

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हेलमंद नदी

हेलमंद नदी के मार्ग का मानचित्र अफ़ग़ानिस्तान के हेलमंद प्रान्त में हेलमंद नदी एक तंग घाटी से गुज़रती हुई हेलमंद नदी पर लगा कजकी बाँध हेलमंद नदी (पश्तो: हीरमंद दरिया या हेलमंद दरिया) अफ़्गानिस्तान की सबसे लम्बी नदी है.

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हेलमंद प्रान्त

अफ़्ग़ानिस्तान का हेलमंद प्रान्त (लाल रंग में) हेलमंद प्रान्त में कुछ बच्चे हेलमंद (पश्तो:, अंग्रेजी: Helmand) अफ़्ग़ानिस्तान का एक प्रांत है जो उस देश के दक्षिण-पश्चिमी भाग में स्थित है। इस प्रान्त का क्षेत्रफल ५८,५८४ वर्ग किमी है और इसकी आबादी सन् २००६ में लगभग १४.४ लाख अनुमानित की गई थी। हेलमंद के लगभग ९०% लोग पश्तून समुदाय के हैं।, Central Intelligence Agency (सी आइ ए), Accessed 27 दिसम्बर 2011 इस प्रान्त की राजधानी लश्कर गाह शहर है। वैसे तो यह इलाक़ा रेगिस्तानी है लेकिन हेलमंद नदी यहाँ से निकलती है और उसका पानी फ़सलों के लिए बहुत लाभदायक होता है। यह ग़ैर-क़ानूनी अफ़ीम की पैदावार का भी बहुत बड़ा केंद्र है और विश्व की ७५% अफ़ीम यहीं पैदा होती है। .

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जलालाबाद

जदीद जलाल आबाद की एक निशानी जलाल आबाद- मशरक़ी अफ़ग़ानिस्तान का एक शहर (अंग्रेज़ी: Jalal Abad, पश्तो:جلال ابادजलाल अब्बाद) ये शहर अफ़ग़ानिस्तान में दरयाऐ काबुल और दरयाऐ किनार या कन्नड़ के संगम पर वाक़िअ है। वादी लग़मान में ये शहर अफ़ग़ानिस्तान के सूबा ननिग्रहअर का सदर मुक़ाम भी है। जलाल आबाद काबुल से मशरिक़ की जानिब 95 मेल के फ़ासले पर वाक़िअ है, इतना ही फासला पिशावर (पाकिस्तान) से जलाल आबाद की तरफ़ मग़रिब की जानिब है। जलाल आबाद मशरक़ी अफ़ग़ानिस्तान में वाक़िअ सब से बड़ा शहर है और इसी लिहाज़ से इस इलाके का समाजी ओ- तिजारती मरकज़ भी है। काग़ज़ की सनअत, फलों की पैदावार, चावल और गिने की पैदावार के लिए ये शहर शौहरत रखता है। पाकिस्तान और भारत के साथ वुस़्त एशियाई रियासतों की तिजारत के लिए जलाल आबाद कलीदी एहमीयत रखता है। .

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ज़रंज

ईरान-अफ़ग़ानिस्तान सीमा के नज़दीक ज़रंज-देलाराम राजमार्ग पर ज़रंज (बलोच, पश्तो, फ़ारसी:, अंग्रेज़ी: Zaranj) दक्षिण-पश्चिमी अफ़ग़ानिस्तान के नीमरूज़ प्रान्त की राजधानी है। यह ईरान की सरहद के बहुत पास है और ईरान-अफ़ग़ानिस्तान सीमा पर एक महत्वपूर्ण चौकी है। यह राजमार्गों द्वारा पूर्व में लश्कर गाह से, उत्तर में फ़राह से और पश्चिम में ईरान के ज़ाबोल नगर से जुड़ा हुआ है। भारत ने अफ़ग़ानिस्तान के पुनर्निर्माण के लिए ज़रंज से देलाराम के बीच एक राजमार्ग बनाया था। .

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ज़ियारत ज़िला

ज़ियारत (उर्दू व बलोच: زیارت, अंग्रेज़ी: Ziarat) पाकिस्तान के बलोचिस्तान प्रान्त के उत्तरी भाग में स्थित एक ज़िला है। बलोचिस्तान एक पिछड़ा इलाक़ा है लेकिन ज़ियारत उसका सबसे विकसित भाग है। यह एक रमणीय पहाड़ी क्षेत्र है जहाँ बहुत पर्यटक आते हैं। यहाँ के हपुषा (ज्यूनिपर) वृक्षों के वन विश्व के सबसे प्राचीन माने जाते हैं। .

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ईरानी भाषा परिवार

ईरानी भाषाओँ का वृक्ष, जिसमें उसकी उपशाखाएँ दिखाई गई हैं आधुनिक ईरानी भाषाओँ का फैलाव ईरानी भाषाएँ हिन्द-ईरानी भाषा परिवार की एक उपशाखा हैं। ध्यान रहे कि हिन्द-ईरानी भाषाएँ स्वयं हिन्द-यूरोपीय भाषा परिवार की एक उपशाखा हैं। आधुनिक युग में विश्व में लगभग १५-२० करोड़ लोग किसी ईरानी भाषा को अपनी मातृभाषा के रूप में बोलते हैं और ऍथ़नॉलॉग भाषाकोष में सन् २०११ तक ८७ ईरानी भाषाएँ दर्ज थीं।, Gernot Windfuhr, Routledge, 2009, ISBN 978-0-7007-1131-4, Raymond Gordon, Jr.

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वटापूर ज़िला

वटापूर ज़िला या वोटापूर ज़िला (Watapur District) अफ़ग़ानिस्तान के कुनर प्रान्त के मध्य भाग में स्थित एक ज़िला है। इसका क्षेत्र कभी असदाबाद ज़िले का भाग हुआ करता था। .

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वाख़ान

वाख़ान का एक नज़ारा वाख़ान, स्थानीय नक़्शे में वाख़ान (पश्तो और फ़ारसी) सुदूर उत्तर-पूर्वी अफ़्ग़ानिस्तान में एक अत्यंत पर्वतीय और दुर्गम क्षेत्र है जहाँ काराकोरम और पामीर पर्वत शृंखलाएं आकर मिलती हैं। वाख़ान अफ़्ग़ानिस्तान के बदख़्शान प्रांत में एक ज़िले का नाम भी है। नक़्शे पर वाख़ान अफ़्ग़ानिस्तान के मुख्य भाग से एक ऊँगली की तरह पूर्व को निकलकर चीन के शिनजियांग प्रान्त को छूता है। यह तंग सा इलाका प्राचीनकाल में तारिम द्रोणी जाने वाले यात्रियों का मार्ग हुआ करता था। इसी क्षेत्र में उन धाराओं की भी शुरुआत होती है जो आगे चलकर मशहूर आमू दरिया बन जाती हैं।, David Loyn, Macmillan, 2009, ISBN 978-0-230-61403-1,...

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वॉयस ऑफ़ अमेरिका

वॉयस ऑफ़ अमेरिका (अंग्रेज़ी: Voice of America (VOA)) अमेरिकी सरकार की आधिकारिक मल्टीमीडिया प्रसारण सेवा है। यह एक अंतर्राष्ट्रीय प्रसारण सेवाओं में वॉयस आफ़ अमेरिका एक जाना-माना नाम है। अंग्रेज़ी के अतिरिक्त वीओए अन्य ४४ भाषाओं में भी प्रसारण करता है। इनमें से २५ भाषाओं पर दूरदर्शन पर भी प्रसारण होता है। आधिकारिक जालस्थल इस सेवा का मुख्य उद्देश्य दुनियाभर के लोगों को विश्व के बारे में अमेरिकी दृष्टिकोण से अवगत कराना है। इस सेवा के वांछित श्रोता मात्र अमेरिका में या अमेरिकी नागरिक ही नहीं है, वरन् पूरे विश्व में इस पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों को सुना जाता है। विश्व में इस सेवा के १२.५ करोड़ श्रोता/उपयोक्ता है। वीओए से प्रतिसप्ताह लगभग १५०० घंटे के समाचार, ज्ञानवर्धक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का प्रसारण किया जाता है। इस सेवा को उत्कृष्ट बनाने में १३०० कर्मचारियों का सहयोग होता है। वीओए का गठन १९४२ में युद्ध सूचना कार्यालय के अधीन किया गया था जिसका उद्देश्य उस समय यूरोप में चल रहे द्वितीय विश्व युद्ध के समाचारों का प्रसारण करना था। वीओए ने २१ फरवरी, १९४२ को प्रसारण आरम्भ किया। वीओए द्वारा लघुतरंग ट्रान्समीटर ट्रान्समीटरों से प्रसारण किया जाता है और वे कोलम्बिया बॉडकास्टिंग सिस्टम (सीबीएस) द्वारा उपयोग किये जाते हैं। वीओए ने १७ फरवरी, १९४७ को भूतपूर्व सोवियत संघ में भी रेडियो प्रसारण आरम्भ किया।शीत युद्ध के दौरान, वीओए को संयुक्त राज्य सूचना संस्था के अधीन रखा गया। १९८० के दशक में वीओए ने दूरदर्शन सेवा भी आरम्भ की और क्यूबा के लिए विशेष कार्यक्रमों का प्रसारण भी आरम्भ किया। वर्तमान में वीओए के २७ रेडियो प्रसारण स्टूडियो, ३३ प्रोडक्शन एवं रिकॉर्डिंग स्टूडियो, ३० व्यावसायिक मिक्सिंग एवं डबिंग स्टेशन, ४ दूरदर्शन स्टूडियो, २१ वीडियो संपादन सूट्स एवं मास्टर नियंत्रण, रिकॉर्डिंग, रीशिड्यूलिंग एवं फ़ीड इन्टेक की विभिन्न सुविधाएं हैं। इनका ३०,०००व र्ग फ़ीट का समाचार केन्द्र है जिसमें २४ घंटे, ३६५ दिन १५० से २०० समाचार रिपोर्टें प्रतिदिन सभी भाशाओं की सेवाओं एवं कार्यक्रमों के लिये कार्यरत हैं। यहां २२ अंतर्देशीय एवं १६ सूदूर संवाददातागण हैं, जिनके संग ९० अंशकालिक संवाददाता भी कार्यरत हैं, जिन्हें स्ट्रिंजर्स कहते हैं। वॉयस ऑफ अमेरिका की हिंदी सेवा को ५३ वर्षों की सेवा उपरांत ३० सितंबर २००८ को बंद कर दिया गया है। .

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ख़ान (उपाधि)

ओगदाई ख़ान, चंग़ेज़ ख़ान का तीसरा पुत्र ख़ान या ख़ाँ (मंगोल: хан, फ़ारसी:, तुर्की: Kağan) मूल रूप से एक अल्ताई उपाधि है तो शासकों और अत्यंत शक्तिशाली सिपहसालारों को दी जाती थी। यह समय के साथ तुर्की-मंगोल क़बीलों द्वारा पूरे मध्य एशिया में इस्तेमाल होने लगी। जब इस क्षेत्र के सैन्य बलों ने भारतीय उपमहाद्वीप, ईरान, अफ़्ग़ानिस्तान और अन्य क्षेत्रों पर क़ब्ज़ा कर के अपने साम्राज्य बनाने शुरू किये तो इसका प्रयोग इन क्षेत्रों की कई भाषाओँ में आ गया, जैसे कि हिन्दी-उर्दू, फ़ारसी, पश्तो, इत्यादि। इसका एक और रूप 'ख़ागान' है जिसका अर्थ है 'ख़ानों का ख़ान' या 'ख़ान-ए-ख़ाना', जो भारत में कभी प्रचलित नहीं हुआ। इसके बराबरी की स्त्रियों की उपाधियाँ ख़ानम और ख़ातून हैं।, Elena Vladimirovna Boĭkova, R. B. Rybakov, Otto Harrassowitz Verlag, 2006, ISBN 978-3-447-05416-4 .

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ख़ुदा

ख़ुदा ख़ुदा (फ़ारसी) बहुत सी भाषाओं में पाया जाने वाला 'ईश्वर' के लिए एक शब्द है। इसका अर्थ कभी-कभी 'मालिक' और 'मार्गदर्शक' भी निकाला जाता है। ये शब्द फारसी या पश्तून भाषा का है। ये मुख्य तौर पर ईस्लाम ओर पारसी धर्म में भगवान के लिये उपयोग होता है। .

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ख़ुबानी

ख़ुबानी एक गुठलीदार फल है। वनस्पति-विज्ञान के नज़रिए से ख़ुबानी, आलू बुख़ारा और आड़ू तीनों एक ही "प्रूनस" नाम के वनस्पति परिवार के फल हैं। उत्तर भारत और पाकिस्तान में यह बहुत ही महत्वपूर्ण फल समझा जाता है और कुछ विशेषज्ञों के अनुसार यह भारत में पिछले ५,००० साल से उगाया जा रहा है।Huxley, A., ed.

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ख़ैबर एजेंसी

खैबर (خیبر) एक पाकिस्तानी एजेंसी है, जो कि पाकिस्तान के फ़ाटा क्षेत्र में स्थित है। इसका क्षेत्रफ़ल है 2,576 कि.मी² और 1998 की जनगणना अनुसार, जनसंख्या है 546,730.

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ख़ैबर पख़्तूनख़्वा

मकरा चोटी ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा (पहले:उत्तर पश्चिम सीमांत प्रान्त) पाकिस्तान का एक प्रान्त या सूबा है। इसे सूबा-ए-सरहद के नाम से भी जाना जाता है जो अफ़ग़ानिस्तान की सीमा पर स्थित है। यहाँ पर पश्तूनों की आबादी अधिक है जिन्हें स्थानीय रूप से पख़्तून भी कहते हैं। इनकी मातृभाषा पश्तो है। इस प्रांत की जनसंख्या करीब 2 करोड़ है जिसमें अफ़ग़ानिस्तान से आए शरणार्थियों की 15 लाख की आबादी सम्मिलित नहीं है। .

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ख़ोस्त

ख़ोस्त मस्जिद ख़ोस्त (पश्तो:, अंग्रेजी: Khost) पूर्वी अफ़्ग़ानिस्तान का एक शहर है। यह ख़ोस्त प्रान्त की राजधानी भी है, जो पाकिस्तान के सीमा के नज़दीक एक पर्वतीय इलाक़ा है। ख़ोस्त शहर की आबादी लगभग १.६ लाख है और पूरे ख़ोस्त प्रान्त की जनसँख्या क़रीब १० लाख है। यहाँ के अधिकतर निवासी पश्तो भाषी पठान हैं और सामाजिक व्यवस्था क़बीलीयाई है। अफ़ग़ानिस्तान में सोवियत युद्ध के दौरान ख़ोस्त जुलाई १९८३ से नवम्बर १९८७ तक विद्रोही फौजों द्वारा घिरा रहा था।, David Rohde, Kristen Mulvihill, Penguin, 2010, ISBN 978-0-670-02223-6,...

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ख़ोस्त प्रान्त

अफ़्ग़ानिस्तान का ख़ोस्त प्रान्त (लाल रंग में) ख़ोस्त (पश्तो:, अंग्रेजी: Khost) अफ़्ग़ानिस्तान का एक प्रांत है जो उस देश के दक्षिण-पूर्व में स्थित है। इस प्रान्त का क्षेत्रफल ४,१५२ वर्ग किमी है और इसकी आबादी सन् २००९ में लगभग ६.४ लाख अनुमानित की गई थी।, Central Intelligence Agency (सी आइ ए), Accessed 27 दिसम्बर 2011 इस प्रान्त की राजधानी ख़ोस्त शहर है। इस प्रान्त में ज़्यादातर लोग पश्तो बोलने वाले पश्तून हैं। इसकी दक्षिणी और पूर्वी सीमा पाकिस्तान से लगती है। .

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गरदेज़

गरदेज़ (पश्तो:, अंग्रेजी: Gardez) पूर्वी अफ़्ग़ानिस्तान का एक शहर है। यह पकतिया प्रान्त की राजधानी भी है और पाकिस्तान की सीमा के नज़दीक है। गरदेज़ शहर की सन् २००८ में आबादी लगभग ७०,००० अनुमानित की गई थी, जिनमें से अधिकतर पश्तो-भाषी पठान थे। यह शहर एक बड़ी वादी में स्थित है जिसके उत्तर, पूर्व और पश्चिम में हिन्दु कुश के पर्वत हैं। यह शहर २,३०० मीटर की ऊँचाई पर है और गुफ़ाओं और सुरंगों वाले प्रसिद्ध तोरा बोरा इलाक़े के पास है। शहर से रूद-ए-गरदेज़ (यानि गरदेज़ नदी) निकलती है जो आब-ए-इस्तादा नामक झील में जाकर ख़त्म हो जाती है। गरदेज़ ग़ज़नी से पाकिस्तान और काबुल से ख़ोस्त जाने वाले रास्तों के चौराहे पर स्थित है। इस वजह से यह पूर्वी अफ़्ग़ानिस्तान में व्यापार का केंद्र रहा है और इसने बहुत से आक्रामकों के हमले सहे हैं। दो हज़ार साल से भी अधिक पहले सिकंदर महान द्वारा आसपास की पहाड़ियों पर पहरे के लिए बनवाई गई पत्थर की चौकियाँ आज भी धीरे-धीरे टूट रहीं हैं। गरदेज़ के बीच में ऊँचाई पर बाला हिसार क़िला (Bala Hisar) है, जिसका मतलब 'ऊँचाई का क़िला' होता है।, Ken Scar, 7th Mobile Public Affairs Detachment, 22 Feb 2012,...

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ग़ज़नी प्रान्त

अफ़्ग़ानिस्तान का ग़ज़नी प्रान्त (लाल रंग में) ग़ज़नी (पश्तो:, अंग्रेजी: Ghazni) अफ़्ग़ानिस्तान का एक प्रांत है जो उस देश के दक्षिण-पूर्वी भाग में स्थित है। इस प्रान्त का क्षेत्रफल २२,९१५ वर्ग किमी है और इसकी आबादी सन् २००२ में लगभग ९.३ लाख अनुमानित की गई थी।, Central Intelligence Agency (सी आइ ए), Accessed 27 दिसम्बर 2011 इस प्रान्त की राजधानी ग़ज़नी शहर है। ग़ज़नी प्रान्त काबुल से कंदहार जाने वाले राजमार्ग पर आता है और इतिहास में उन दोनों के बीच एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र रहा है। इस प्रान्त में लगभग आधे लोग पश्तून हैं लेकिन यहाँ हज़ारा लोगों और ताजिक लोगों के भी बड़े समुदाय रहते हैं। .

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ग़ोर प्रान्त

अफ़्ग़ानिस्तान का ग़ोर प्रान्त (लाल रंग में) ग़ोर प्रान्त में स्थित जाम मीनार (मीनार-ए-जाम) ग़ोर (पश्तो:, अंग्रेजी: Ghor) अफ़्ग़ानिस्तान का एक प्रांत है जो उस देश के मध्य भाग में स्थित है। इस प्रान्त का क्षेत्रफल ३६,४७९ वर्ग किमी है और इसकी आबादी सन् २००६ में लगभग ६.३ लाख अनुमानित की गई थी।, Central Intelligence Agency (सी आइ ए), Accessed 27 दिसम्बर 2011 इस प्रान्त की राजधानी चग़चरान शहर है। ग़ोर क्षेत्र में बौद्ध धर्म और हिन्दु धर्म प्रचलित था। हरी रूद (हरी नदी) के किनारे पहाड़ी चट्टान में तराशकर बनाया गया एक बौद्ध मठ मिला है। सन् १०१० में महमूद ग़ज़नी ने ग़ोर पर आक्रमण किया और उसपर क़ब्ज़ा कर लिया। उसके बाद उसने यहाँ के निवासियों में इस्लामीकरण की नीति अपनाई। १३वीं शताब्दी तक ग़ज़नी की अधिकाँश जनता मुस्लिम बन चुकी थी, हालांकि एक अल्पसंख्यक हिन्दु समुदाय यहाँ जारी रहा। १२वीं और १३वीं शताब्दी में ग़ोर पर केन्द्रित ग़ोरी राजवंश ने एक बड़ा साम्राज्य चलाया जो दिल्ली से लेकर पूर्वी ईरान तक विस्तृत था। विश्व-प्रसिद्ध जाम मीनार इसी राजवंश ने ग़ोर प्रान्त में बनवाई। बाद में दिल्ली का क़ुतब मीनार उसी मीनार से प्रेरित होकर बनाया गया था।, Karl J. Khandalavala, Saryu Doshi, Marg Publications, 1983,...

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गूगल खोज

गूगल खोज या गूगल वेब खोज वेब पर खोज का एक इंजन है, जिसका स्वामित्व गूगल इंक के पास है और यह वेब पर सबसे ज्यादा उपयोग किया जाने वाला खोज इंजन है। अपनी विभिन्न सेवाओं के जरिये गूगल प्रति दिन कई सौ लाख विभिन्न प्रश्न प्राप्त करता है। गूगल खोज का मुख्य उद्देश्य अन्य सामग्रियों, जैसे गूगल चित्र खोज के मुकाबले वेबपृष्ठों से सामग्री की खोज करना है। मूलतः गूगल खोज का विकास 1997 में लैरी पेज और सेर्गेई ब्रिन ने किया। गूगल खोज मूल शब्द खोज क्षमता से परे कम से कम 22 विशेष सुविधाएं प्रदान करता है। इनमें समानार्थी शब्द, मौसम पूर्वानुमान, समय क्षेत्र, स्टॉक उद्धरण, मानचित्र, भूकंप डेटा, मूवी शोटाइम, हवाई अड्डा, होम लिस्टिंग और खेल स्कोर शामिल है। (नीचे देखें: विशेष सुविधाएं).

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गोजरी भाषा

गोजरी या गूजरी एक हिन्द-आर्य भाषा है जो उत्तर भारत व पाकिस्तान में गुर्जर समुदाय के कई सदस्यों द्वारा बोली जाती है। भारत में यह भाषा राजस्थान,हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू व कश्मीर, उत्तराखण्ड और पंजाब राज्यों में बोली जाती है। पाकिस्तान में यह पाक-अधिकृत कश्मीर और पंजाब (पाकिस्तान) में बोली जाती है। इस भाषा का मूल ढांचा और गहरी शब्दावली दोनों राजस्थानी भाषा की है लेकिन स्थानानुसार इसमें कई पंजाबी, डोगरी, कश्मीरी, गुजराती, हिन्दको और पश्तो प्रभाव देखे जाते हैं। जम्मू-कश्मीर राज्य में इसे आधिकारिक दर्जा प्राप्त है। .

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ओरूज़्गान प्रान्त

अफ़्ग़ानिस्तान का ओरूज़्गान प्रांत (लाल रंग में) ओरूज़्गान में गेंहू के खेत ओरूज़्गान या उरोज़्गान (पश्तो:, अंग्रेजी: Oruzgan) अफ़्ग़ानिस्तान का एक प्रांत है जो उस देश के मध्य भाग में स्थित है। इस प्रान्त का क्षेत्रफल २२,६९६ वर्ग किमी है और इसकी आबादी सन् २००६ में लगभग ३.१ लाख अनुमानित की गई थी।, Central Intelligence Agency (सी आइ ए), Accessed 27 दिसम्बर 2011 इस प्रान्त की राजधानी तरीनकोट शहर है। इस प्रान्त में बसने वाले अधिकतर लोग पश्तून हैं और सांस्कृतिक रूप से यह प्रान्त कंदहार के क्षेत्र से मिलता-जुलता है। .

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ओसेती भाषा

ओसेती भाषा (Ирон æвзаг, इरोन ऐवज़ग) कॉकस क्षेत्र के ओसेतिया भूखण्ड में बोली जाने वाली एक पूर्वी ईरानी भाषा है। इसे लगभग पांच लाख लोग बोलते हैं। .

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आदिम हिन्द-ईरानी भाषा

हिन्द-ईरानी भाषा आदिम हिन्द-ईरानी भाषा वह लुप्त भाषा थी जो हिन्द-ईरानी भाषा परिवार की सभी भाषाओँ की जननी थी, जिनमें संस्कृत, हिन्दी, कश्मीरी, सिन्धी, पंजाबी, असमिया, अवस्ताई, फ़ारसी, पश्तो, बलोची और कुर्दी भाषाएँ शामिल हैं। यह हिन्द-यूरोपी भाषा परिवार की एक भाषा थी और इस से ही हिन्द-ईरानी भाषा शाखा शुरू हुई। अनुमान किया जाता है के इसे बोलने वाले आदिम-हिन्दी-ईरानी लोग 2500 ईसा-पूर्व के आसपास के दौर में रहते थे। .

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इस्लामाबाद

इस्लामाबाद की फैज़ल मस्जिद इस्लामाबाद पाकिस्तान की राजधानी है। भारत विभाजन के पश्चात पाकिस्तान को एक राजधानी नगर की आवश्यकता थी। ना तो लाहौर और न ही कराची जैसे नगर इस हेतु सही पाए गए अंतः एक नए नगर की स्थापना का निर्णय लिया गया जो पूरी तरह से नियोजित हो। इस कार्य हेतु फ़्रांसीसी नगर नियोजक तथा वास्तुकार ली कार्बूजियर की सेवा ली गई। इन्हीं महोदय ने भारत में चंडीगढ़ की स्थापना की योजना बनाई थी। इस कारण ये दोनों नगर देखने में एक जैसे लगते हैं। २००९ के अनुमान अनुसार इस नगर की जनसंख्या ६,७३,७६६ है। .

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करक ज़िला

ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रांत में करक ज़िला (लाल रंग में) करक (उर्दू:, पश्तो:, अंग्रेज़ी: Karak) पाकिस्तान के ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रांत का एक ज़िला है। यह कोहाट ज़िले के दक्षिण में, बन्नू और लक्की मरवत ज़िलों के उत्तर में स्थित है। पेशावर से कराची जाने वाले सिन्धु राजमार्ग के रस्ते में आने वाला यह ज़िला ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा की राजधानी पेशावर से १२३ किलोमीटर की दूरी पर है। कहा जाता है कि करक पाकिस्तान का इकलौता ज़िला है जिसमें केवल एक ही पश्तून क़बीले के लोग रहते हैं और यह ख़टक कबीला है। .

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कलकोटी भाषा

कलकोटी (Kalkoti), जिसे तूरवाली भी कहते हैं, कोहिस्तानी उपशाखा की एक दार्दी भाषा है जो पाकिस्तान के ख़ैबर​-पख़्तूनख़्वा प्रान्त के ऊपरी दीर ज़िले के कोहिस्तानी (पहाड़ी) क्षेत्र के कलकोट गाँव के आसपास के क्षेत्र में बोली जाती है। इसके आसपास के विस्तृत ऊँचे इलाक़े को आमतौर से 'दीर कोहिस्तान' कहा जाता है (यह कोहिस्तान ज़िले से अलग है)। इसे बोलने वाले बहुत से लोग कालामी भाषा और पश्तो भाषा भी बोलते हैं हालांकि उनके मातृभाषियों को कलकोटी बोलनी नहीं आती।, pp.

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क़लन्दर मोमंद

साहबज़ादा हबीब-उर-रहमान क़लन्दर मोमंद, जिन्हें आमतौर पर केवल क़लन्दर मोमंद (पश्तो:, अंग्रेज़ी: Qalandar Momand) के नाम से जाना जाता है, एक पश्तून लेखक, कवि, समीक्षक और विद्वान थे। वे मज़दूर संघ के नेता, पश्तून राष्ट्रीयता के समर्थक, राजनैतिक कार्यकर्ता और पाकिस्तानी साम्यवादी पार्टी (कोम्युनिस्ट पार्टी) के सदस्य भी थे। धार्मिक दृष्टि से वे अहमदिया समुदाय के सदस्य थे। क़लन्दर मोमंद ने पश्तो भाषा में लिखाई और पत्रकारिता करी और पाकिस्तान की सरकार की तरफ़ से उन्हें कई इनाम भी दिए गए। उन्होंने अपना पत्रकार जीवन 'अल-हक़' समाचार पत्र के साथ शुरू किया और आगे जाकर कई अन्य अख़बारों में काम किया, जिनमें अंजाम, शहबाज़, बांग-ए-हरम, ख़ैबर​ मेल,​ पेशावर टाइम्ज़, फ़्रंटियर गार्डियन, नक़ीब, लार, रहबर, सरहद और मसावात शामिल थे। .

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क़ला-ए-नौ, अफ़्ग़ानिस्तान

बादग़ीस प्रान्त की राजधानी क़ला-ए-नौ​ का एक नज़ारा क़ला-ए-नौ​ (फ़ारसी:, अंग्रेज़ी: Qala i Naw) पश्चिमोत्तरी अफ़ग़ानिस्तान के बादग़ीस प्रान्त की राजधानी और सबसे बड़ा शहर है। जिस ज़िले में यह शहर पड़ता है उसका नाम भी क़ला-ए-नौ ज़िला है। इस ज़िले की ८०% आबादी ताजिक है और ताजिक भाषा ही यहाँ सबसे अधिक बोली जाती है हालांकि बहुत से लोगों को पश्तो भी आती है। क़ला-ए-नौ के आसपास का इलाक़ा अपने पिस्ते के वनों के लिए मशहूर है। .

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क़लात, ज़ाबुल प्रान्त

क़लात (पश्तो:, अंग्रेज़ी: Qalat) दक्षिणी अफ़ग़ानिस्तान के ज़ाबुल प्रान्त की राजधानी है। यह शहर यातायात के नज़रिए से राजमार्ग द्वारा पूर्व में कंदहार और पश्चिम में ग़ज़नी शहरों से जुड़ा हुआ है। क़लात लगभग ५,००० फ़ुट (१,५५० मीटर) की ऊंचाई पर स्थित है। .

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क़िला अब्दुल्लाह ज़िला

बलोचिस्तान प्रांत में क़िला अब्दुल्लाह ज़िला (लाल रंग में) क़िला अब्दुल्लाह (उर्दू:, अंग्रेज़ी: Killa Abdullah) पाकिस्तान के बलोचिस्तान प्रांत के उत्तर-पश्चिमी भाग में स्थित एक ज़िला है। इसका क्षेत्रफल ३,२९३ किमी२ है और सन् २००५ में इसकी आबादी ४ लाख से ज़्यादा अनुमानित की गई थी। यहाँ रहने वाले अधिकतर लोग पश्तून हैं और पश्तो यहाँ सबसे ज़्यादा बोली जाने वाली भाषा है। जून १९९३ तक यह पिशीन ज़िले (Pishin) का हिस्सा हुआ करता था लेकिन फिर इसे एक अलग ज़िले का दर्जा दिया गया। .

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कापीसा प्रान्त

अफ़्ग़ानिस्तान में कापीसा प्रान्त (लाल रंग में) कापीसा प्रान्त में एक प्राथमिक विद्यालय सर्दियों में कापीसा प्रांत में गश्त लगते अमेरिकी और अफ़्ग़ान सैनिक कापीसा (کاپيسا) अफ़्ग़ानिस्तान के ३४ प्रान्तों में से एक है। यह देश के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में स्थित है। कापीसा की राजधानी महमूद-ए-राक़ी नामक शहर है। इस प्रांत की आबादी ४,०६,२०० है और इसका क्षेत्रफल १,८४२ वर्ग किमी है। .

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काबुल एक्सप्रेस (2006 फ़िल्म)

काबुल एक्सप्रेस 2006 में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। .

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काबुल नदी

जलालाबाद में काबुल नदी के ऊपर बहसूद पुल बौद्ध शिल्पकारी से भरी गुफ़ाएँ काबुल नदी में साल के अधिकतर भाग में प्रवाह कम रहता है - नदी के एक अंश पर बना एक कच्चा पुल अफ़ग़ानिस्तान में काबुल नदी पर बना सरोबी जल-विद्युत बाँध काबुल नदी (पश्तो:, काबुल सीन्द; फ़ारसी:, दरिया-ए-काबुल; अंग्रेज़ी: Kabul River) एक ७०० किमी लम्बी नदी है जो अफ़ग़ानिस्तान में हिन्दु कुश पर्वतों की संगलाख़ शृंखला से शुरू होकर पाकिस्तान के अटक शहर के पास सिन्धु नदी में विलय हो जाती है। काबुल नदी पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान की मुख्य नदी है और इसका जलसम्भर हेलमंद नदी के जलसम्भर क्षेत्र से उनई दर्रे द्वारा विभाजित है। यह अफ़ग़ानिस्तान की काबुल, चहारबाग़​ और जलालाबाद शहरों से गुज़रकर तोरख़म से २५ किमी उत्तर में सरहद पार कर के पाकिस्तान में दाख़िल हो जाती है। अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल और उसके इर्द-गिर्द के काबुल प्रान्त का नाम इसी नदी पर पड़ा है।Cliffoed Edmund Bosworth, "Kabul".

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काबुल प्रान्त

अफ़्ग़ानिस्तान का काबुल प्रान्त (लाल रंग में) काबुल (फ़ारसी, पश्तो:, अंग्रेजी: Kabul) अफ़्ग़ानिस्तान का एक प्रांत है जो उस देश के पूर्व में स्थित है। इस प्रान्त का क्षेत्रफल ४,४६२ वर्ग किमी है और इसकी आबादी सन् २००९ में लगभग ३५.७ लाख अनुमानित की गई थी।, Central Intelligence Agency (सी आइ ए), Accessed 27 दिसम्बर 2011 इस प्रान्त की राजधानी काबुल शहर है जो पूरे अफ़्ग़ानिस्तान की भी राष्ट्रीय राजधानी है। इस प्रान्त के लगभग ८०% लोग काबुल के शहरी इलाक़े में रहते हैं। यहाँ पश्तो और दरी फ़ारसी बोली जाती है। प्रान्त का सबसे अहम जल-स्रोत काबुल नदी है, जिसके किनारे काबुल शहर बसा हुआ है। .

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कांधार प्रान्त

कांधार या क़ंदहार (पश्तो: या, अंग्रेजी: Kandahar या Qandahar) अफ़्ग़ानिस्तान का एक प्रांत है जो उस देश के दक्षिण में स्थित है। इस प्रान्त का क्षेत्रफल ५४,०२२ वर्ग किमी है और इसकी आबादी सन् २००९ में लगभग १० लाख अनुमानित की गई थी।, Central Intelligence Agency (सी आइ ए), Accessed 27 दिसम्बर 2011 इस प्रान्त की राजधानी ऐतिहासिक कांधार शहर है। यह प्रान्त पश्तो बोलने वाले पश्तून लोगों का क्षेत्र है। बहुत से इतिहासकार इसे तालिबान कट्टरवादी विचारधारा की जन्मभूमि मानते हैं। इसकी दक्षिणी सीमा पाकिस्तान से लगती है। .

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कुनर नदी

अफ़्ग़ानिस्तान के नंगरहार प्रान्त के बर कश्कोट गाँव से गुज़रती कुनर नदी कुनर नदी (पश्तो:, कूनड़ सींद; Kunar) पूर्वी अफ़्ग़ानिस्तान और उत्तर-पश्चिमी पाकिस्तान की एक ४८० किमी लम्बी नदी है। यह पाकिस्तान के ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रांत के चित्राल ज़िले में हिन्दु कुश पर्वतों की पिघलती हिमानियों (ग्लेशियरों) से शुरू होती है। यहाँ इसका नाम यरख़ुन नदी होता है और मस्तुज के बाद इसका विलय लुतख़ो नदी से होता है जिसके बाद इसे मस्तुज नदी के नाम से पुकारा जाता है। चित्राल शहर से गुजरने के बाद इसे चित्राल नदी बुलाया जाता है और फ़िर यह अफ़्ग़ानिस्तान की कुनर वादी में दाख़िल होती है, जहाँ बाश्गल नदी के साथ संगम के बाद इसका नाम कुनर नदी पड़ जाता है। फ़िर यह जलालाबाद शहर के पूर्व में काबुल नदी में विलय कर जाती है। यह नदी पूर्व में पाकिस्तान में दाख़िल होती है और इसका विलय अटक शहर के पास महान सिन्धु नदी में हो जाता है।, Sir Thomas Hungerford Holdich, Methuen and co., 1901,...

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कुनर प्रान्त

अफ़्ग़ानिस्तान का कुनर प्रान्त (लाल रंग में) कुनर या कुनड़ (पश्तो:, फ़ारसी:, अंग्रेजी: Kunar) अफ़्ग़ानिस्तान का एक प्रांत है जो उस देश के पूर्व में स्थित है। इस प्रान्त का क्षेत्रफल ४,३३९ वर्ग किमी है और इसकी आबादी सन् २००९ में लगभग ४.१ लाख अनुमानित की गई थी।, Central Intelligence Agency (सी आइ ए), Accessed 27 दिसम्बर 2011 इस प्रान्त की राजधानी असदाबाद शहर है। इस प्रान्त में ज़्यादातर लोग पश्तो बोलने वाले पश्तून हैं। इसकी दक्षिणी और पूर्वी सीमा पाकिस्तान से लगती है। .

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कुर्रम नदी

कुर्रम नदी (पश्तो:, द कुर्रमी सींद; अंग्रेज़ी: Kurram River) अफ़्ग़ानिस्तान के पकतिया और ख़ोस्त प्रान्तों और पाकिस्तान के ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रांत में बहने वाली ३०० किमी से ज़रा लम्बी एक नदी है। इसे वैदिक संस्कृत में ऋग्वेद में क्रुमू नदी के नाम से वर्णित किया गया था। यह अफ़्ग़ानिस्तान की तरफ़ सफ़ेद कोह की पहाड़ियों से उतरकर जलालाबाद शहर के पास सीमा पार कर के पाकिस्तान में दाख़िल होती है। वहाँ आगे चलकर यह सिन्धु नदी में विलय हो जाती है।, George Erdösy, Walter de Gruyter, 1995, ISBN 978-3-11-014447-5,...

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कुर्रम वादी

अफ़्ग़ानिस्तान के पकतिया प्रान्त से दक्षिण की तरफ़ सरहद पार स्थित कुर्रम वादी का नज़ारा कुर्रम (पश्तो:, द कुर्रमा; अंग्रेज़ी: Kurram) पाकिस्तान के पश्चिमोत्तर में अफ़्ग़ानिस्तान से लगी हुई एक सुन्दर वादी है। प्राचीनकाल में इसे वैदिक संस्कृत में ऋग्वेद में क्रुमू कहते थे।, George Erdösy, Walter de Gruyter, 1995, ISBN 978-3-11-014447-5,...

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कुंदुज़ प्रान्त

अफ़्ग़ानिस्तान का कुंदुज़ प्रान्त (लाल रंग में) कुंदुज़ (पश्तो:, अंग्रेजी: Kunar) अफ़्ग़ानिस्तान का एक प्रांत है जो उस देश के उत्तर-पूर्व में स्थित है। इस प्रान्त का क्षेत्रफल ८,०४० वर्ग किमी है और इसकी आबादी सन् २००९ में लगभग ८.२ लाख अनुमानित की गई थी।, Central Intelligence Agency (सी आइ ए), Accessed 27 दिसम्बर 2011 इस प्रान्त की राजधानी कुंदुज़ शहर है। इस प्रान्त में ताजिक और पश्तून लोगों की बहुतायत है, लेकिन यहाँ बहुत उज़बेक लोग भी रहते हैं। इसकी उत्तरी सीमा ताजिकिस्तान से लगती है। कुंदुज़ नदी यहाँ का एक महत्वपूर्ण जल-स्रोत है और यह अमु दरिया की एक उपनदी है। यही अमु दरिया कुंदुज़ प्रान्त और उसके उत्तर में स्थित ताजिकिस्तान के बीच की अंतर्राष्ट्रीय सीमा भी है। कुंदुज़ प्रान्त पश्चिम में मज़ार-ए-शरीफ़ तथा दक्षिण में काबुल से सड़क द्वारा जुड़ा हुआ है। इसके अलावा यह ताजिकिस्तान से भी सड़क द्वारा संयुक्त है। .

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क्वेटा

क्वेटा (उर्दू: کوئٹہ, पश्तो: کوټه, बलोची: کویته), पाकिस्तान के प्रांत बलूचिस्तान की राजधानी है साथ ही यह पाकिस्तान का नौवां सबसे बड़ा शहर है। इस शहर को पाकिस्तान का 'फलों का बगीचा' भी कहा जाता है क्योंकि यह शहर चारों ओर से फलों के बगीचों से घिरा है और यहां फलों और सूखे मेवों का उत्पादन, बड़े पैमाने पर किया जाता है। अपनी सुंदरता और भौगोलिक स्थिति के कारण अतीत में इस शहर को 'छोटा पेरिस' के रूप से भी जाना जाता था। समुद्रतल से क्वेटा की औसत ऊंचाई 1,680 मीटर (5,510 फुट) है जिस कारण यह पाकिस्तान का उच्च ऊंचाई पर स्थित एकमात्र प्रमुख शहर है। अनुमानत: शहर की आबादी लगभग 1140000 है। पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा के निकट उत्तर पश्चिमी बलूचिस्तान में स्थित, क्वेटा दोनों देशों के बीच व्यापार और संचार का केन्द्र है। शहर बोलन दर्रे के मार्ग पर स्थित है जो अतीत में दक्षिण एशिया और मध्य एशिया के बीच एकमात्र प्रवेशद्वार था। समय समय पर होने वाले अफगानी संघर्ष में क्वेटा ने पाकिस्तानी सशस्त्र बलों के लिए सैन्य रूप में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। .

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क्वेटा ज़िला

क्वेटा (उर्दू: کوئٹہ‎, पश्तो: کوټه‎, अंग्रेज़ी: Quetta) पाकिस्तान के बलोचिस्तान प्रान्त का एक ज़िला है। प्रान्तीय राजधानी क्वेटा इसी ज़िले में स्थित है। .

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कोहाट ज़िला

ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रांत में कोहाट ज़िला (लाल रंग में) कोहाट (उर्दू:, पश्तो:, अंग्रेज़ी: Kohat) पाकिस्तान के ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रांत का एक ज़िला है। यह करक ज़िले के उत्तर में और फ़ाटा नाम के क़बीलाई इलाक़ों के दक्षिण में स्थित है। इसमें बहुत से पश्तून क़बीलों के लोग रहते हैं, जैसे कि अफ़रीदी, ख़टक, बन्गश और ओरकज़ई। इस पूरे क्षेत्र में पश्तो बोली जाती है। कोहाट दो तहसीलों में बँटा हुआ है - कोहाट तहसील और लाची तहसील। .

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कोहिस्तान ज़िला (पाकिस्तान)

ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रांत में कोहिस्तान ज़िला (लाल रंग में) कोहिस्तान (उर्दू और पश्तो:, अंग्रेज़ी: Kohistan) पाकिस्तान के ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रांत के पूर्वोत्तरी भाग में स्थित एक पूर्व ज़िला था। इस ज़िले की राजधानी दासू नामक बस्ती है। वर्ष 2014 में इसे द्विभाजित कर, ऊपरी कोहिस्तान ज़िला और निचला कोहिस्तान ज़िला बना दिया गया। .

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कोहिस्तानी भाषा

कोहिस्तानी भाषा ख़ैबर​-पख़्तूनख़्वा के कोहिस्तान ज़िले (लाल रंग) में बोली जाती है कोहिस्तानी या सिन्धु-कोहिस्तानी हिन्द-आर्य भाषा-परिवार की दार्दी भाषाओँ वाली शाखा की एक भाषा है जो पश्चिमोत्तरी पाकिस्तान के ख़ैबर​-पख़्तूनख़्वा राज्य के कोहिस्तान ज़िले में बोली जाती है। सन् १९९३ में इसे बोलने वालों की संख्या लगभग २,२०,००० अनुमानित की गई थी। .

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कोकचा नदी

सन् २००७ में फैज़ाबाद, बदख़्शान के शहर में कोकचा नदी पर पुल के लिए नीव डालने का काम जारी है कोकचा नदी (फ़ारसी और पश्तो:, अंग्रेज़ी: Kokcha) उत्तरी अफ़ग़ानिस्तान की एक नदी है। यह आमू दरिया की एक उपनदी है और बदख़्शान प्रान्त में हिन्दू कुश पहाड़ों में बहती है। बदख़्शान प्रान्त की राजधानी फैज़ाबाद इसी नदी के किनारे बसी हुई है। कोकचा नदी की घाटी में सर-ए-संग खान स्थित है जहाँ से हज़ारों सालों से लाजवर्द (लैपिस लैज़्यूली) निकाला जा रहा है।, Paul Clammer, Lonely Planet, 2007, ISBN 978-1-74059-642-8,...

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अफ़रीदी

सन् १८७८ में कुछ अफ़रीदी लड़ाके अफ़रीदी (Afridi) या आफ़रीदी, जो स्वयं को पश्तो में 'अपरीदी' बुलाते हैं, एक प्रमुख पश्तून क़बीले का नाम है। अफ़रीदी लोग अफ़्ग़ानिस्तान और पाकिस्तान में पूर्वी सफ़ेद कोह पर्वती-क्षेत्र, पश्चिमी पेशावर वादी और पूर्वी नंगरहार प्रान्त में बसते हैं। पाकिस्तान के संघ-शासित क़बाईली क्षेत्रों के ख़ैबर विभाग, पेशावर सरहदी क्षेत्र और कोहाट सरहदी क्षेत्र में भी अफ़रीदी विस्तृत हैं। वे इसी इलाके के प्रसिद्ध ख़ैबर दर्रे के दोनों तरफ़ रहते हैं। बहुत से अफ़रीदी भारत के उत्तर प्रदेश, बिहार और जम्मू व कश्मीर राज्यों में भी रहते हैं।, G. Tucker, Calcutta Central Press Company, 1884,...

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अफ़ग़ानिस्तान

अफ़ग़ानिस्तान इस्लामी गणराज्य दक्षिणी मध्य एशिया में अवस्थित देश है, जो चारो ओर से जमीन से घिरा हुआ है। प्रायः इसकी गिनती मध्य एशिया के देशों में होती है पर देश में लगातार चल रहे संघर्षों ने इसे कभी मध्य पूर्व तो कभी दक्षिण एशिया से जोड़ दिया है। इसके पूर्व में पाकिस्तान, उत्तर पूर्व में भारत तथा चीन, उत्तर में ताजिकिस्तान, कज़ाकस्तान तथा तुर्कमेनिस्तान तथा पश्चिम में ईरान है। अफ़ग़ानिस्तान रेशम मार्ग और मानव प्रवास का8 एक प्राचीन केन्द्र बिन्दु रहा है। पुरातत्वविदों को मध्य पाषाण काल ​​के मानव बस्ती के साक्ष्य मिले हैं। इस क्षेत्र में नगरीय सभ्यता की शुरुआत 3000 से 2,000 ई.पू.

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अफ़ग़ानिस्तान के प्रांत

अफ़्ग़ानिस्तान के प्रांत और स्वतन्त्र शहर (संख्यांक तालिका से मिलाएँ) अफ़्ग़ानिस्तान के प्रान्त अफ़्ग़ानिस्तान के मुख्य प्रशासनिक विभाग हैं। मध्य एशिया के बहुत से अन्य देशों की तरह अफ़्ग़ानिस्तान में भी प्रान्तों को 'विलायत' बुलाया जाता है, मसलन हेलमंद प्रान्त का औपचारिक नाम 'विलायत-ए-हेलमंद' है। सन् २००४ में अफ़्ग़ानिस्तान में चौंतीस प्रान्त थे। हर प्रान्त की अध्यक्षता एक राज्यपाल करता है और हर प्रान्त अफ़्ग़ान संसद के ऊपरी सदन में (जिसे पश्तो में 'मेशेरानो जिरगा', यानि 'बुज़ुर्गों की सभा' कहते हैं) दो सदस्य भेजता है। .

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अफ़्गानिस्तान का राष्ट्रगान

अफ़्गानिस्तान का राष्ट्रगानملی سرود - मिल्लि सुरूद; سرود ملی - "सुरूद-ए मिल्ली") आधिकारिक रूप से मई २००६ में पनाया गया था। अफ़्गानिस्तान के संविधान की धारा २० के अनुसार, "अफ़्गानिस्तान का राष्ट्रगान पश्तो में होगा" और जिसमें "ईश्वर महानतम है" और अफ़्गानिस्तान के नस्लीय समूहों का उल्लेख होगा। गीतिकाव्य अब्दुल बरी जहानी द्वारा लिखित और संगीतकार हैं जर्मन-अफ़्गान मूल के बाबरक वसा। .

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अफगान हाउन्ड

अफगान हाउन्ड कुत्ता अफगान हाउंड एक बहुत पुरानी कुत्ते की नसल हैं। इसकी पहचान इसके चमकीले और रेशमी बालों से होती हैं जो की काफी लम्बे होते हैं व पूरे शरीर को ढक देते है। यह नसल ख़ास तौर पे अफ़गानिस्तान के ठंडे पहाडों पे रह सकती है जहा की यह वास्तव में एक शिकारी प्रजाति के जैसे बर्ताव करती है। इसका मूल नाम साग ताज़ी पर्सियन में और ताजी स्पाई पश्तो भाषा में हैं। इस नसल के कुत्तों का उपयोग शोकियां तौर पर दौड़ लगवाने के लिए भी किया जाता हैं। .

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अफगानिस्तान में हिन्दू धर्म

एक मुखी लिंग (शिव लिंग के साथ एक मुख), अफगानिस्तान काबुल संग्रहालय मूर्ति अफगानिस्तान में हिन्दू धर्म  का अनुसरण करने वाले बहुत कम लोग हैं। इनकी संख्या कोई 1,000 अनुमानित है। ये लोग अधिकतर काबुल एवं अफगानिस्तान के अन्य प्रमुख नगरों में रहते हैं।, by Tony Cross.

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अब्दुर रहमान ख़ान

'अब्दुर रहमान ख़ान १८८० से १९०१ तक अफ़ग़ानिस्तान के अमीर थे अब्दुर रहमान ख़ान (पश्तो: عبد رحمان خان) सन १८८० से लेकर सन १९०१ तक अफ़ग़ानिस्तान के अमीर थे। इनका जन्म १८४० से १८४४ के बीच और मृत्यु १ अक्टूबर १९०१ में हुई। १८७८-१८८० के द्वितीय आंग्ल-अफ़ग़ान युद्ध की हार के बाद अफ़ग़ानिस्तान की जो केन्द्रीय सरकारी व्यवस्था चौपट हो गई थी उसे अब्दुर रहमान ख़ान ने फिर से बहाल किया। .

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अर्नेस्ट ट्रम्प

अर्नेस्ट ट्रम्प (Ernest Trumpp, 13 मार्च 1828 – 5 अप्रैल 1885) एक जर्मन भाषाविद और मिशनरी थे जो अंग्रेज़ी शासन के वक़्त पंजाब और सिंध क्षेत्रों में विचरते रहे थे। उन्होंने सिंधी भाषा की सबसे पहली व्याकरण पुस्तक लिखी जिसका शीर्षक था, "सिंधी अलफ़ाबैट एंड गरामर"। उन्होंने अफ़ग़ानी भाषा पश्तो की एक व्याकरण पुस्तक भी लिखी। इसके अलावा उन्होंने सिख धर्म की धार्मिक पुस्तक गुरु ग्रंथ साहिब का भी काफ़ी हिस्सा को अंग्रेज़ी भाषा में अनुवाद किया। .

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असदाबाद, अफ़्ग़ानिस्तान

असदाबाद (दरी फ़ारसी:, अंग्रेज़ी: Asadabad) दक्षिण-पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान के कुनर प्रान्त की राजधानी है। यह पाकिस्तान की सरहद से १३ किमी पश्चिमोत्तर में कुनर नदी और पेच नदी के संगम स्थल के पास एक वादी में स्थित है। .

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अहमद शहज़ाद

अहमद शहज़ाद (احمد شہزاد; जन्म 23 नवम्बर 1991) एक पाकिस्तानी क्रिकेट खिलाड़ी हैं। वो दायें हाथ के सलामी बल्लेबाज और अंशिकालिक लेग-ब्रेक गेंदबाज़ हैं। .

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अवस्ताई भाषा

अवस्ताई भाषा में अनुहावैती गाथा का यस्न 28.1 अवस्ताई एक पूर्वी ईरानी भाषा है जिसका ज्ञान आधुनिक युग में केवल पारसी धर्म के ग्रंथों, यानि अवस्ता, के द्वारा पहुँच पाया है। इतिहासकारों का मानना है के मध्य एशिया के बॅक्ट्रिया और मार्गु क्षेत्रों में स्थित याज़ संस्कृति में यह भाषा या इसकी उपभाषाएँ 1500-1100 ईसापूर्व के काल में बोली जाती थीं। क्योंकि यह एक धार्मिक भाषा बन गई, इसलिए इस भाषा के साधारण जीवन से लुप्त होने के पश्चात भी इसका प्रयोग नए ग्रंथों को लिखने के लिए होता रहा। .

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अइमाक़ लोग

अइमाक़​ (Aimaq) हेरात नगर से उत्तर में पश्चिम-मध्य अफ़्ग़ानिस्तान में और ईरान के ख़ोरासान प्रांत​ में विस्तृत कुछ ईरानी भाषाएँ बोलने वाले ख़ानाबदोश क़बीलों का सामूहिक नाम है। यह फ़ारसी की कई अइमाक़​ उपभाषाएँ बोलते हैं, हालांकि इनके तइमानी और मालेकी उपसमुदायों ने पश्तो भाषा और पश्तून संस्कृति अपना ली है। अफ़्ग़ानिस्तान के ग़ोर प्रान्त में अइमाक़ बहुसंख्यक समुदाय समझे जाते हैं। इसके अलावा यह बड़ी संख्या में हेरात और बादग़ीस प्रान्तों में और कम संख्या में फ़राह, फ़ारयाब, जोज़जान और सर-ए-पोल प्रान्तों में भी रहते हैं।, Willem Vogel, pp.

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PS

पत्रों में PS पोस्ट स्क्रिप्टम अथवा पोस्टस्क्रिप्ट (उपसंहार) का प्रतीक होता है। .

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2016 उड़ी हमला

उरी हमला 18 सितम्बर 2016 को जम्मू और कश्मीर के उरी सेक्टर में एलओसी के पास स्थित भारतीय सेना के स्थानीय मुख्यालय पर हुआ, एक आतंकी हमला है जिसमें 18 जवान शहीद हो गए। सैन्य बलों की कार्रवाई में सभी चार आतंकी मारे गए। यह भारतीय सेना पर किया गया, लगभग 20 सालों में सबसे बड़ा हमला है। उरी हमले में सीमा पार बैठे आतंकियों का हाथ बताया गया है। इनकी योजना के तहत ही सेना के कैंप पर फिदायीन हमला किया गया। हमलावरों के द्वारा निहत्थे और सोते हुए जवानों पर ताबड़तोड़ फायरिंग की गयी ताकि ज्यादा से ज्यादा जवानों को मारा जा सके। - एनडीटीवी - 19 सितम्बर 2016 अमेरिका ने उड़ी हमले को "आतंकवादी" हमला करार दिया। .

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