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पश्चिमी पाकिस्तान

सूची पश्चिमी पाकिस्तान

पश्चिमी पाकिस्तान(مغربی پاکستان, मग़रिबी पाकिस्तान, পশ্চিম পাকিস্তান, पोश्चिम पाकिस्तान), एक इकाई व्यवस्था के तहत, तत्कालीन पाकिस्तान (पाकिस्तान अधिराज्य) की पश्चिमी इकाई थी, जो अब, (बांग्लादेश के अलग होने के बाद से) वर्तमान पाकिस्तान है। .

21 संबंधों: एक इकाई व्यवस्था, नजम सेठी, पश्चिमी पाकिस्तान, पंतनगर, पंजाब के मुख्यमंत्री (पाकिस्तान), पंजाब के राज्यपाल (पाकिस्तान), पूर्वी पाकिस्तान, पीरज़ादा अब्दुल सतर, बांग्लादेश मुक्ति युद्ध, बांग्लादेश की सर्वोच्च न्यायालय, भारत-बांग्लादेश संबंध, मुहम्मद खान जुनेजो, लाहौर उच्च न्यायालय, लियाक़त अली ख़ान, सिंध के मुख्यमंत्री, सिंध के राज्यपाल, ख़ैबर पख़्तूनख़्वा के राज्यपाल, आस्मा जहाँगीर, उद्देश्य संकल्प, छः बिन्दु आन्दोलन, १९६२ का पाकिस्तानी संविधान

एक इकाई व्यवस्था

एक इकाई व्यवस्था या नीति, (अथवा वन-यूनिट् सिस्टम्), पाकिस्तान की एक पुर्वतः परवर्तित प्रशासनिक व्यवस्था थी, जिसके अंतर्गत, तत्कालीन पाकिस्तानी भूमि के दोनों भिन्न टुकड़ों को "एक प्रशासनिक इकाई" के रूप में ही शासित किये जाने की योजना रखी गई थी। इस तरह की प्रशासनिक नीति को अपनाने का मुख्य कारण, सर्कार द्वारा, पाकिस्तानी अधिराज्य के दो विभक्त एवं पृथक भौगोलिक आंचलों की एक ही केंद्रीय व्यवस्था के अंतर्गत शासन में आने वाली घोर प्रशासनिक असुविधाएँ, एवं भौगोलिक कठिनाईयाँ बताई गई थी। अतः इस भौगोलिक व प्रशासनिक विषय के समाधान के रूप में, सरकार ने इन दो भौगोलीय हिस्सों को ही, एक महासंघीय ढांचे के अंतर्गत, पाकिस्तान के दो वाहिद प्रशासनिक इकाइयों के रूप में स्थापित करने की नीति बनाई गई। इस्के तहत, तत्कालीन मुमलिकात-ए-पाकिस्तान के, पूर्वी भाग में मौजूद स्थिति के अनुसार ही, पश्चिमी भाग के पाँचों प्रांतों व उनकी प्रांतीय सरकारों को भंग कर, एक प्रांत, पश्चिमी पाकिस्तान गठित किया गया, वहीं पूर्वी भाग (जो अब बांग्लादेश है) को पूर्वी पाकिस्तान कह कर गठित किया गया। तत्प्रकार, पाकिस्तान, एक इकाई योजना के तहत, महज दो प्रांतों में विभाजित एक राज्य बन गया। वन यूनिट योजना की घोषणा प्रधानमंत्री मोहम्मद अली बोगरा के शासनकाल के दौरान 22 नवंबर 1954 को की गई, और 14 अक्टूबर 1955 को देश के पश्चिमी भाग के सभी प्रांतों को एकीकृत कर, पश्चिमी पाकिस्तान प्रांत गठित किया गया, जिसमें, सभी प्रांतों के अलावा तत्कालीन, राजशाहियों और कबाइली इलाके भी शामिल थे। इस प्रांत में 12 प्रमंडल थे, और इसकी राजधानी लाहौर थी। दूसरी ओर पूर्वी बंगाल के प्रांत को पूर्वी पाकिस्तान का नाम दिया गया, जिसकी राजधानी ढाका थी। संघीय राजधानी(कार्यपालिका) को वर्ष 1959 में कराँची से रावलपिंडी स्थानांतरित किया गया, जहां सेना मुख्यालय था, और नई राजधानी, इस्लामाबाद के पूरा होने तक यहां मौजूद रहा जबकि संघीय विधानपालिका को ढाका में स्थापित किया गया। इस नीति का उद्देश्य बज़ाहिर प्रशासनिक सुधार लाना था लेकिन कई लिहाज से यह बहुत विनाशकारी कदम था। पश्चिमी पाकिस्तान में मौजूद बहुत सारी राज्यों ने इस आश्वासन पर विभाजन के समय पाकिस्तान में शामिल हो गए थे कि उनकी स्वायत्तता कायम रखी जाएगी लेकिन वन इकाई बना देने के फैसले से सभी स्थानीय राज्यों का अंत हो गया। इस संबंध में बहावलपुर, खीरिपोर और कलात के राज्य विशेषकर उल्लेखनीय हैं। मामले इस समय अधिक गंभीर समय 1958 ई। के तख्तापलट के बाद मुख्यमंत्री का पद समाप्त कर दिया गया और राष्ट्रपति ने पश्चिमी पाकिस्तान के विकल्प अपने पास रख लिए। राजनीतिक विशेषज्ञों यह भी समझते हैं कि पश्चिमी पाकिस्तान के सभी प्रांतों को एकजुट करने के उद्देश्य पूर्वी पाकिस्तान की भाषाई और राजनीतिक इकाई का जोर तोड़ना था। अंततः एक जुलाई 1970 को राष्ट्रपति याह्या खान ने एक इकाई का सफाया करते हुए पश्चिमी पाकिस्तान के सभी प्रांतों बहाल कर दिया। .

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नजम सेठी

नजम सेठी(उर्दू: نجم سیٹھی जन्म:1948), एक वरिष्ठ एवं मशहूर पाकिस्तानी पत्रकार हैं। वे २७ मार्च २०१३ से ७ जून २०१३ तक पाकिस्तान के प्रान्त पंजाब के पूर्व कार्यवाहक मुख्यमंत्री भी थे। वे एक काफी मशहूर एवं पुरस्कृत पत्रकार होने के साथ ही विवादास्पद हस्ती भी हैं। वे एक पत्रकार, संपादक, समीक्षक तथा एक पत्रकारी व्यक्तित्व भी हैं। वे लाहौर-आधारित राजनीतिक साप्ताहिक, द फ्राइडे टाइम्स के मुख्या संपादक है, एवं पूवतः डेली टाइम्स और डेली आजकल जैसे अखबारों के संपादक भी रह चुके हैं। वे पाकिस्तान के समाचार चैनल जीओ टीवी पर आपस की बात नामक एक साधारण ज्ञान एवं राजनीतिक टिप्पणिकारी कार्यक्रम चलते हैं। साथ ही, वे वैनगार्ड बुक्स नामक एक प्रकाशन एवं पुस्तक वेक्रेता चेन के मालिक भी हैं। उन्हें पाकिस्तानी राजनीति पर अपने बेबांक बोल और सम्बंधित आलोचनाओं और पत्रिकारिता के लिए जाना जाता है। वर्ष १९९९ में, उन्हें, पाकिस्तान की आईएसआई द्वारा, ब्रिटिश ब्राडकास्टिंग कॉर्पोरेशन को दिया गए सरकारी भ्रष्टाचार सम्बंधित अपने एक इंटरव्यू(साक्षात्कार) के लिए गिरफ्तार कर लिया गया था, और करीब एक महीने तक हिरासत में रखा गया था। १९९९ में उन्हें इंटरनेशनल प्रेस फ्रीडम अवार्ड (अनृर्राष्ट्रीय प्रेस स्वतंत्रता पुरस्कार) से भी नवाज़ गया था, और २००९ में उनको वर्ल्ड एसोसिएशन ऑफ़ न्यूस्पपेर्स द्वारा गोल्डन पेन ऑफ़ फ़्रीडम से पुरस्कृत किया गया था। २६ मार्च २०१३ को उन्हें शासक एवं विपक्षी दलों की स्वीकृति से पंजाब के अंतरिम कार्यवाहक मुख्यमंत्री के पद के लिए नामांकित किया गया था। उन्होंने २७ मार्च को शपथ दिलाई गयी, और वे इस पद पर ७ जून २०१३ तक थे। .

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पश्चिमी पाकिस्तान

पश्चिमी पाकिस्तान(مغربی پاکستان, मग़रिबी पाकिस्तान, পশ্চিম পাকিস্তান, पोश्चिम पाकिस्तान), एक इकाई व्यवस्था के तहत, तत्कालीन पाकिस्तान (पाकिस्तान अधिराज्य) की पश्चिमी इकाई थी, जो अब, (बांग्लादेश के अलग होने के बाद से) वर्तमान पाकिस्तान है। .

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पंतनगर

पंतनगर भारत के उत्तराखण्ड राज्य के उधम सिंह नगर जनपद में स्थित एक नगर है। गोविन्द बल्लभ पन्त कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय तथा पंतनगर विमानक्षेत्र यहां ही स्थित हैं। उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री, गोविन्द बल्लभ पन्त के नाम पर ही इस नगर का नाम पंतनगर रखा गया है। .

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पंजाब के मुख्यमंत्री (पाकिस्तान)

पंजाब के मुख्यमंत्री, पाकिस्तान के प्रांत पंजाब की प्रांतीय सरकार का प्रमुख होता है। उनका चयन पंजाब विधानसभा करती है। पाकिस्तान पाकिस्तान की प्रशासन व्यवस्था वेस्टमिंस्टर प्रणाली पर आधारित है अतः राज्य के राज्यपाल, जिन्हें कथास्वरूप राज्य का प्रमुख होने का सौभाग्य प्राप्त है, को केवल पारंपरिक एवं नाममात्र की संवैधानिक अधिकार है जबकि आसल कार्यप्रणाली मुख्यमंत्री के नियंत्रण में होती है। पंजाब के मौजूदा मुख्यमंत्री मियां शाहबाज शरीफ हैं जिनका संबंध पाकिस्तान मुस्लिम लीग एन से है। वह 30 मार्च 2009 को मुख्यमंत्री पद पर बहाल हुए थे। उन्हें पंजाब की प्रांतीय विधानसभा के सदस्यों ने नेता सत्ता पक्ष चुना था लेकिन अदालती आदेश के कारण उन्हें पद से हटा दिया गया और राज्यपाल शासन लागू कर दिया गया। बाद में राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने राज्यपाल शासन हटाते हुए 30 मार्च को उन्हें पद पर बहाल किया। 30 मार्च 2009 के न्यायालय के निर्णय शाहबाज शरीफ को पुनह पद पर स्थापित कर दिया, जिसके बाद 26 मार्च 2013 से जून 2013 तक विख्यात पत्रकार एवं पत्रकारी हस्ती नजम सेठी को कार्यवाहक मुख्यमंत्री के तौर पर अस्थाई रूप से इस पद पर स्थापित किया गया। इसके बाद बनाया शहबाज शरीफ इस पद पर चुनाव द्वारा चुने गए। .

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पंजाब के राज्यपाल (पाकिस्तान)

पंजाब के राज्यपाल पंजाब, पाकिस्तान की प्रांतीय सरकार के आधिकारिक प्रमुख एवं सूबे के सर्वोच्च पदाधिकारी हैं। राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति पाकिस्तान, प्रधानमंत्री पाकिस्तान की परामर्श पर करते हैं और सामान्यतः यह एक औपचारिक पद होता है अर्थात् उसके पास अधिक संवैधानिक अधिकार नहीं होते हैं। हालांकि इतिहास में कई बार ऐसे अवसर आए हैं जब प्रांतीय गवर्नरों को अतिरिक्त व पूर्ण अधिकार मिलता रहा है, विशेषकर उन मामलों में जब प्रांतीय विधायिका भंग कर दी गई हो, तब प्रशासनिक अधिकार सीधे राज्यपाल के अधिकारक्षेत्र के अंतर्गत आ जाते हैं; जैसा कि 1958 के बाद से 1972 और 1977 से 1985 तक, सैन्य शासन और 1999 से 2002 तक के राज्यपाल शासन में हुआ था। पंजाब में 1949 से 1951 तक राज्यपाल शासन लागू रहा था। इसके अलावा, एक इकाई व्यवस्था के अंतर्गत 1955 से 1970 तक पंजाब प्रांत को स्थगित कर उस समय के पाकिस्तान के पश्चिमी भाग के सारे प्रांतों के संयोजन से, एक प्रांत, पश्चिमी पाकिस्तान बनाया गया था, इस बीच यह पद निलंबित रहा था। .

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पूर्वी पाकिस्तान

पूर्वी पाकिस्तान(পূর্ব পাকিস্তান,; مشرقی پاکستان,; East Pakistan, ईस्ट पाकिस्तान), एक इकाई व्यवस्था के तहत, तत्कालीन पाकिस्तान की पूर्वी इकाई थी। यह वर्तमान बांग्लादेश के स्थान पर, १९५५ से १९७१ तक विद्यमान था। इसकी राजधनी ढाका थी, एवं राजभाषा बांग्ला थी। पूर्वी पाकिस्तान का कुल भूक्षेत्र, १,४७,५७० वर्ग की•मी• था। यह पूर्व, उत्तर व पश्चिम दिशाओं में भारत से घिरा हुआ था, और दक्षिण की ओर, बंगाल की खाड़ी के तट पर था। साथ ही पूर्व में यह एक छोटी सी सीमा रेखा, बर्मा के साथ साझा करता था। यह पाकिस्तान के सबसे बड़े प्रंशन में से एक रहा है, और अर्थव्यवस्था, राजनैतिक प्रतिनिधितिव व जनसंख्या के आधार पर, तत्कालीन पाकिस्तान का सबसे बड़ा राज्य था। अंत्यतः, १६ दिसंबर १९७१ को, नौ महीनों तक चले युद्ध के पश्चात्, पूर्वी पाकिस्तान ने बांग्लादेश के रूप में स्वतंत्रता घोषित कर दी। .

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पीरज़ादा अब्दुल सतर

पीरज़ादा अब्दुल सतर, पाकिस्तान के प्रान्त, सिंध के पूर्व मुख्यमंत्री थे। उनका कार्यकाल २२ मई १९५३ से ८ नवंबर १९५४ तक था। १९५४ में एक इकाई व्यवस्था के लागू होने से, उन्हें पद से बर्खास्त कर दिया गया था, एवं अन्य प्रांतों की तरह ही सिंध सरकार को भंग कर पश्चिमी पाकिस्तान में सम्मिलित कर दिया गया था। .

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बांग्लादेश मुक्ति युद्ध

बांग्लादेश का स्वतंत्रता संग्राम १९७१ में हुआ था, इसे 'मुक्ति संग्राम' भी कहते हैं। यह युद्ध वर्ष १९७१ में २५ मार्च से १६ दिसम्बर तक चला था। इस रक्तरंजित युद्ध के माध्यम सेे बांलादेश ने पाकिस्तान से स्वाधीनता प्राप्त की। 16 दिसम्बर सन् १९७१ को बांग्लादेश बना था। भारत की पाकिस्तान पर इस ऐतिहासिक जीत को विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है। पाकिस्तान पर यह जीत कई मायनों में ऐतिहासिक थी। भारत ने ९३ हजार पाकिस्तानी सैनिकों को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था। १९७१ के पहले बांलादेश, पाकिस्तान का एक प्रान्त था जिसका नाम 'पूर्वी पाकिस्तान' था जबकि वर्तमान पाकिस्तान को पश्चिमी पाकिस्तान कहते थे। कई सालों के संघर्ष और पाकिस्तान की सेना के अत्याचार और बांग्लाभाषियों के दमन के विरोध में पूर्वी पाकिस्तान के लोग सड़कों पर उतर आए थे। १९७१ में आज़ादी के आंदोलन को कुचलने के लिए पाकिस्तानी सेना ने पूर्वी पाकिस्तान के विद्रोह पर आमादा लोगों पर जमकर अत्याचार किए। लाखों लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया और अनगिनत महिलाओं की आबरू लूट ली गई। भारत ने पड़ोसी के नाते इस जुल्म का विरोध किया और क्रांतिकारियों की मदद की। इसका नतीजा यह हुआ कि भारत और पाकिस्तान के बीच सीधी जंग हुई। इस लड़ाई में भारत ने पाकिस्तान को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिए। इसके साथ ही दक्षिण एशिया में एक नए देश का उदय हुआ। .

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बांग्लादेश की सर्वोच्च न्यायालय

बांग्लादेश की सर्वोच्च न्यायालय(बंगला: বাংলাদেশ সুপ্রীম কোর্ট, बांलादेश सूप्रीम कोर्ट), गणप्रजातंत्री बांग्लादेश की सर्वोच्च अदालत है और बांग्लादेश की न्यायिक व्यवस्था का शीर्षतम् निकाय है और देश की न्यायिक क्रम का शिखर बिंदू है। यह कानूनी और संवैधानिक मामलों में फैसला करने वाली अंतिम मध्यस्थ भी है। संविधान की धारा १०० के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय का आसन, राजधानी ढाका में अवस्थित है। इसे बांग्लादेश के संविधान की षष्ठम् भाग के चतुर्थ पाठ के द्वारा स्थापित किया गया था। सर्वोच्च न्यायालय, पाकिस्तान को कई संवैधानिक व न्यायिक विकल्प प्राप्त होते हैं, जिनकी व्याख्या बांग्लादेश के संविधान में की गई है। इस संसथान के दो "विभाग" है: अपीलीय विभाग और उच्च न्यायलय विभाग, तथा यह बांग्लादेश के मुख्य न्यायाधीश व अपीलीय विभाग व उच्च न्यायालय विभाग के न्यायाधीशों का भी स्थायी कार्यालय की भी मेज़बानी भी करता है। अप्रैल 2018 की स्थिति अनुसार, अपीलीय विभाग में 4 और उच्च न्यायालय विभाग में 80 न्यायाधीश हैं, जिनमें 80 स्थायी हैं। इस न्यायालय को सामान्य बोलचाल में अक्सर हाई कोर्ट भी कहा जाता है, क्योंकि स्वतंत्रता पूर्व, अर्थात् १९७१ से पहले तक, इस भवन में पूर्वी पाकिस्तान की उच्च न्यायालय वास करती थी। .

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भारत-बांग्लादेश संबंध

भारत और बांग्लादेश दक्षिण एशियाई पड़ोसी देश हैं और आमतौर पर उन दोनों के बीच संबंध मैत्रीपूर्ण रहे हैं, हालांकि कभी-कभी सीमा विवाद होते हैं। बांग्लादेश की सीमा तीन ओर से भारत द्वारा ही आच्छादित है। ये दोनो देश सार्क, बिम्सटेक, हिंद महासागर तटीय क्षेत्रीय सहयोग संघ और राष्ट्रकुल के सदस्य हैं। विशेष रूप से, बांग्लादेश और पूर्व भारतीय राज्य जैसे पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा बंगाली भाषा बोलने वाले प्रांत हैं। १९७१ में पूर्वी पाकिस्तान और पश्चिमी पाकिस्तान के बिच बांग्लादेश मुक्ति युद्ध शुरु हुआ और भारत ने पूर्वी पाकिस्तान की ओर से दिसंबर १९७१ में हस्तक्षेप किया। फलस्वरूप बांग्लादेश राज्य के रूप में पाकिस्तान से पूर्वी पाकिस्तान की स्वतंत्रता को सुरक्षित करने में भारत ने मदद की। .

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मुहम्मद खान जुनेजो

मोहम्मद खान जुनेजो, एक कद्दावर सिंधी राजनेता एवं पाकिस्तान के दसवें प्रधानमंत्री थे। वे 18 अगस्त 1932 को पैदा हुए। .

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लाहौर उच्च न्यायालय

लाहौर उच्च न्यायालय,(عدالت عالیہ لاہور, अदालत-ए आला, लाहौर) लाहौर में स्थित, पंजाब, पाकिस्तान का उच्च न्यायालय है। इसे, बतौर उच्च न्यायालय, 21 मार्च 1919 में स्थापित किया गया था। इसके पार पाकिस्तान के पंजाब सूबे पर न्यायिक अधिकार है। हालाँकि, इस न्यायालय का मुख्य आसन लाहौर है, परंतु साथ ही इसके तीन न्यायचौकियाँ रावलपिंडी, मुल्तान और बहावलपुर में भी स्थित हैं, एवं साथ ही फ़ैसलाबाद, सियालकोट, गुर्जनवाला व डी जी ख़ान में भी नई चौकियाँ खुलने की बात है। .

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लियाक़त अली ख़ान

नवबजादा लियाक़त अली ख़ान पाकिस्तान के प्रथम प्रधानमंत्री थे जिन्होंने पाकिस्तान आंदोलन के दौरान मुहम्मद अली जिन्ना के साथ कई दौरे किये। भारत के प्रथम वाणिज्य मंत्री भी थे (अंग्रेज़ो के अधीन भारत)। इनका परिवार अंग्रेजों से अच्छे संबंध रखता था। सन् १९५१ में रावलपिण्डी में इनका क़त्ल हो गया - जिसकी गुत्थी अभी तक नहीं सुलझी है। साद अकबर बाबरक नामक हत्यारा एक अफ़ग़ान था। यह पाकिस्तान के प्रथम रक्षा मंत्री भी रहे और पाकिस्तान के प्रथम विदेश मंत्री भी रहे | पाकिस्तान के प्रधान मन्त्री श्रेणी:पाकिस्तान के प्रधान मन्त्री श्रेणी:पाकिस्तानी राजनीतिज्ञ.

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सिंध के मुख्यमंत्री

सिंध के मुख्यमंत्री, पाकिस्तान के प्रांत सिंध की प्रांतीय सरकार का प्रमुख होता है। उनका चयन सिंध विधानसभा करती है। पाकिस्तान पाकिस्तान की प्रशासन व्यवस्था वेस्टमिंस्टर प्रणाली पर आधारित है अतः राज्य के राज्यपाल, जिन्हें कथास्वरूप राज्य का प्रमुख होने का सौभाग्य प्राप्त है, को केवल पारंपरिक एवं नाममात्र की संवैधानिक अधिकार है जबकि आसल कार्यप्रणाली मुख्यमंत्री के नियंत्रण में होती है। .

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सिंध के राज्यपाल

सिंध के राज्यपाल पाकिस्तान के प्रांत, सिंध की प्रांतीय सरकार का प्रमुख होते हैं। इनकी नियुक्ति पाकिस्तान के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री की परामर्श पर करते हैं और, पाकिस्तान के अन्य प्रांतीय राज्यपाल पदों के समान ही, आमतौर पर यह भी एक औपचारिक पद है, यानी राज्यपाल पास बहुत अधिक अधिकार नहीं होते हैं। हालाँकि इतिहास में कई बार ऐसे अवसर आए हैं जब प्रांतीय गवर्नरों को अतिरिक्त व पूर्ण कार्याधिकार मिला है, खासकर इस मामले में जब प्रांतीय विधायिका भंग कर दी गई हो, तब प्रशासनिक विकल्प सीधे राज्यपाल के अधिकार-अंतर्गत आ जाते हैं। 1958 से 1972 और 1977 से 1985 तक सैन्य शासन और 1999 से 2002 के राज्यपाल शासन के दौरान राज्यपालों को जबरदस्त प्रशासनिक शक्ति मिलते रहे हैं। सिंध में दो बार सीधे राज्यपाल शासन रहा है जिनके दौरान 1951 से 1953 के दौरान मियां अमीन दीन और 1988 में रहीम दीन खान राज्यपाल थे। .

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ख़ैबर पख़्तूनख़्वा के राज्यपाल

राज्यपाल खैबर पख्तूनख्वा, प्रांत ख़ैबर पख़्तूनख़्वा, पाकिस्तान की प्रांतीय सरकार के प्रमुख एवं औप्चारिक तौरपर उच्चतम् पदाधिकारी हैं। इनकी नियुक्ति राष्ट्रपति पाकिस्तान, प्रधानमंत्री की परामर्श पर करते हैं और, पाकिस्तान के अन्य प्रांतीय राज्यपाल पदों के समान ही, आमतौर पर यह भी एक औपचारिक पद है, यानी राज्यपाल पास बहुत अधिक अधिकार नहीं होते हैं। हालांकि इतिहास में कई बार ऐसे अवसर आए हैं जब प्रांतीय गवर्नरों को अतिरिक्त व पूर्ण कार्याधिकार मिला है, खासकर इस मामले में जब प्रांतीय विधायिका भंग कर दी गई हो, तब प्रशासनिक विकल्प सीधे राज्यपाल के अधिकार-अंतर्गत आ जाते हैं जैसा 1958 से 1972 और 1977 से 1985 तक सैन्य शासन और 1999 से 2002 के राज्यपाल शासनों के दौरान राज्यपालों को जबरदस्त प्रशासनिक शक्ति मिलते रहे हैं। ख़ैबर पख़्तूनख़्वा में दो बार, 1975 और 1994 में, राज्यपाल शासन लागू किया जा चुका है, जब मुख्यमंत्री और विधानसभा को बर्खास्त कर दिया गया था। .

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आस्मा जहाँगीर

आस्मा जहाँगीर (عاصمہ جہانگیر २७ जनवरी १९५२ – ११ फ़रवरी २०१८) पाकिस्तानी मानवाधिकार कार्यकर्ता, वकील और पाकिस्तानी मानवाधिकार आयोग की संस्थापक और प्रथम अध्यक्ष थीं। वे पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट में कार्यरत थीं। आसमा हाशिए पर पड़े बेबस लोगों के लिए आवाज बुलंद करने के लिए जानी जाती थीं। वे समाजसेविका थीं और मुख्यतः अल्पसंख्यक समुदाय व महिलाओं के लिए कार्य करती थीं। वे पहले सयुंक्त राष्ट्र की " आस्था की स्वतंत्रता " पर अगस्त २००४ वाचिका थी (पहले मानवाधिकार संघ तथा बाद में मानवाधिकार आयोग)। मृत्य से पहले वे पाकिस्तान के मानव अधिकार आयोग की अध्यक्ष थीं। आसमा को दुनिया भर के तमाम मंचों पर बोलने के लिए बुलाया जाता था। पाकिस्तान में वो उन गिनी-चुनी आवाज़ों में से एक थीं जो खुले तौर पर सैन्य शासन और सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलती थीं। .

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उद्देश्य संकल्प

उद्देश्य संकल्प(Objectives Resolution, ऑब्जेक्टिव्स् रेज़ोल्यूशन्; قرارداد مقاصد, क़रारदाद मक़ासद) एक संकल्प था जिसे पाकिस्तान की संविधान सभा ने 12 मार्च सन 1949 को पारित कर दिया। इस संकल्प 7 मार्च सन 1949 को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री लियाकत अली खान ने क़ौमी असेम्ब्ली(पाकिस्तान की विधायिका) में पेश की। इसे पाकिस्तानी रियासत व हुकूमत के नीती निर्देशक के रूप में पारित किया गया था। इसके अनुसार भविष्य में पाकिस्तान संविधान संरचना यूरोपीय शैली का कतई नहीं होगा, लेकिन इसके आधार इस्लामी लोकतंत्र और सिद्धांतों पर होगी। कहा जाता है कि इस बारे में पाकिस्तानियों ने भारतीयों की पैरवी की थी। पंडित जवाहरलाल नेहरू ने भारत की संविधान सभा में 13 दिसंबर 1946 में संकल्प लक्ष्य रखा था, जिसे सर्वसम्मति के साथ 22 जनवरी 1947 में स्वीकार कर लिया गया। इसमें दिये गए संकल्प पाकिस्तान को "कुरान और सुन्नत में दिये गए लोकतांत्रिक के आदर्शों" पर विकसित व खड़ा करने का संकल्प लेते हैं। साथ ही इसमें पाकिस्तान में मुसलमानों को कुरान और सुन्नत में दिये गए नियमों के अनुसार जीवन व्यतीत करने का अवसर देने की एवं अल्पसंख्यकों के धार्मिक, सामाजिक व अन्य वैध अधिकारों की रक्षा की भी बात की गई है। इसे कई माएनों में पाकिस्तान के सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज़ में मनाआ जाता है। साथ ही इसकी इस्लाम-प्रोत्साहक चरित्र के लिये, यह हमेशा से ही विवादास्पक भी रहा है और कई बार, गैर-मुसलमालों व कई बुद्धिजीवियों द्वारा इस्का विरोध होता रहा है। .

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छः बिन्दु आन्दोलन

१९६६ में लाहौर में छः बिन्दु आन्दोलन का आरम्भ करते हुए शेख मुजीबुर रहमान छः बिन्दु आन्दोलन (Six Point Movement) पूर्वी पाकिस्तान में शेख मुजीबुर्रहमान द्वारा आरम्भ किया गया एक आन्दोलन था जिसमें पूर्वी पाकिस्तान को अधिक स्वायत्तता देने की मांग की गयी थी। यह १९६६ में आरम्भ हुआ जिसमें बंगाली राष्ट्रवादी दलों ने मिलकर छः मांगे सामने रखी थी जिनका ध्येय पश्चिमी पाकिस्तान द्वारा पूर्वी पाकिस्तान के शोषण को समाप्त करना था।। श्रेणी:बांग्लादेश का इतिहास.

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१९६२ का पाकिस्तानी संविधान

1962 का पाकिस्तानी संविधान एक कानूनी दस्तावेज था, जिसे जून 1962 में लागू किया गया था। रह जून 1962 से मार्च 1969 तक पाकिस्तान की सर्वोच्च विधि संहिता थी। 1956 के संविधान की तरह इसे 1969 में निलंबित कर दिया गया था। अंत्यतः इसे 1973 के संविधान से बदल दिया गया, जो अब भी लागू है। .

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