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पनडुब्बी

सूची पनडुब्बी

सन् १९७८ में ''एल्विन'' प्रथम विश्व युद्ध में प्रयुक्त जर्मनी की यूसी-१ श्रेणी की पनडुब्बी पनडुब्बी(अंग्रेज़ी:सबमैरीन) एक प्रकार का जलयान (वॉटरक्राफ़्ट) है जो पानी के अन्दर रहकर काम कर सकता है। यह एक बहुत बड़ा, मानव-सहित, आत्मनिर्भर डिब्बा होता है। पनडुब्बियों के उपयोग ने विश्व का राजनैतिक मानचित्र बदलने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई है। पनडुब्बियों का सर्वाधिक उपयोग सेना में किया जाता रहा है और ये किसी भी देश की नौसेना का विशिष्ट हथियार बन गई हैं। यद्यपि पनडुब्बियाँ पहले भी बनायी गयीं थीं, किन्तु ये उन्नीसवीं शताब्दी में लोकप्रिय हुईं तथा सबसे पहले प्रथम विश्व युद्ध में इनका जमकर प्रयोग हुआ। विश्व की पहली पनडुब्बी एक डच वैज्ञानिक द्वारा सन १६०२ में और पहली सैनिक पनडुब्बी टर्टल १७७५ में बनाई गई। यह पानी के भीतर रहते हुए समस्त सैनिक कार्य करने में सक्षम थी और इसलिए इसके बनने के १ वर्ष बाद ही इसे अमेरिकी क्रान्ति में प्रयोग में लाया गया था। सन १६२० से लेकर अब तक पनडुब्बियों की तकनीक और निर्माण में आमूलचूल बदलाव आया। १९५० में परमाणु शक्ति से चलने वाली पनडुब्बियों ने डीज़ल चलित पनडुब्बियों का स्थान ले लिया। इसके बाद समुद्री जल से आक्सीजन ग्रहण करने वाली पनडुब्बियों का भी निर्माण कर लिया गया। इन दो महत्वपूर्ण आविष्कारों से पनडुब्बी निर्माण क्षेत्र में क्रांति सी आ गई। आधुनिक पनडुब्बियाँ कई सप्ताह या महिनों तक पानी के भीतर रहने में सक्षम हो गई है। द्वितीय विश्व युद्ध के समय भी पनडुब्बियों का उपयोग परिवहन के लिये सामान को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने के लिए किया जाता था। आजकल इनका प्रयोग पर्यटन के लिये भी किया जाने लगा है। कालपनिक साहित्य संसार और फंतासी चलचित्रों के लिये पनडुब्बियों का कच्चे माल के रूप मे प्रयोग किया गया है। पनडुब्बियों पर कई लेखकों ने पुस्तकें भी लिखी हैं। इन पर कई उपन्यास भी लिखे जा चुके हैं। पनडुब्बियों की दुनिया को छोटे परदे पर कई धारावाहिको में दिखाया गया है। हॉलीवुड के कुछ चलचित्रों जैसे आक्टोपस १, आक्टोपस २, द कोर में समुद्री दुनिया के मिथकों को दिखाने के लिये भी पनडुब्बियो को दिखाया गया है। .

41 संबंधों: चीन-पाक आर्थिक गलियारा, टॉरपीडो, एचएएल ध्रुव, नाभिकीय ऊर्जा, नाभिकीय पनडुब्बी, नौसेना, परमाणु भट्ठी, परिदर्शी, परिवहन की विधि, फ़िन, ब्रह्मोस प्रक्षेपास्त्र, भारतीय नौसेना, भारतीय नौसेना पोत विराट, भारतीय नौसेना की पनडुब्बियों की सूची, मिज़ूरी, युद्धपोत, यू-बोट, रूसी नौसेना, स्टर्लिंग इंजन, स्टेल्थ तकनीक, सोडियम, हाइड्रोजन पेरॉक्साइड, हाइब्रिड वाहन, जड़त्वीय संचालन प्रणाली, जलयान, वर्साय की सन्धि, विनाशक पोत, विलियम हेनरी ब्रैग, वैज्ञानिक यन्त्र, गुप्त लेखन, गैस संपीडक, गूगल धरती, आई एन एस अरिहंत, आईएनएस चक्र २, आईएनएस सिंधुराष्ट्र, आईएनएस सिंधुरक्षक, आईएनएस कलवरी (एस50), कलवरी-श्रेणी पनडुब्बी, क्यू जहाज, अरित्र, २००९

चीन-पाक आर्थिक गलियारा

नक़्शा चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा या उर्दू में पाकिस्तान-चीन इक़तिसादी राहदारी (चीनी: 中国 - 巴基斯坦 经济 走廊) एक बहुत बड़ी वाणिज्यिक परियोजना है, जिसका उद्देश्य दक्षिण-पश्चिमी पाकिस्तान से चीन के उत्तर-पश्चिमी स्वायत्त क्षेत्र शिंजियांग तक ग्वादर बंदरगाह, रेलवे और हाइवे के माध्यम से तेल और गैस की कम समय में वितरण करना है। आर्थिक गलियारा चीन-पाक संबंधों में केंद्रीय महत्व रखता है, गलियारा ग्वादर से काशगर तक लगभग 2442 किलोमीटर लंबा है। यह योजना को सम्पूर्ण होने में काफी समय लगेगा। इस योजना पर 46 बिलियन डॉलर लागत का अनुमान किया गया है। यह गलियारा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर, गिलगित-बाल्टिस्तान और बलूचिस्तान होते हुए जायेगा। विविध सूचनाओं के अनुसार ग्वादर बंदरगाह को इस तरह से विकसित किया जा रहा है, ताकि वह 19 मिलियन टन कच्चे तेल को चीन तक सीधे भेजने में सक्षम होगा। .

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टॉरपीडो

तॉरपीडो तारपीडो (Toropedo) एक स्वचलित विस्पोटक प्रक्षेपास्त्र है जिसे किसी पोत से जल की सतह के ऊपर या नीचे दागा जा सकता है। यह प्रक्षेपास्त्र जल सतह के नीचे ही चलता है। लक्ष्य से टकराने से अथवा समीप आने पर इसमे विस्पोट हो जाता है। तारपीडो अंतर्जलीय (.

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एचएएल ध्रुव

ध्रुव हैलीकॉप्टर हिंदुस्तान ऐरोनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा विकसित और निर्मित भारत का एक बहूद्देशीय हैलीकॉप्टर है। इसकी भारतीय सशस्त्र बलों को आपूर्ति की जा रही है और एक नागरिक संस्करण भी उपलब्ध है। इसे पहले नेपाल और इज़रायल को निर्यात किया गया था फिर सैन्य और वाणिज्यिक उपयोग के लिए कई अन्य देशों द्वारा मंगाया गया है। सैन्य संस्करण परिवहन, उपयोगिता, टोही और चिकित्सा निकास भूमिकाओं में उत्पादित किये जा रहे हैं। ध्रुव मंच के आधार पर, एच ए एल हल्का लड़ाकू हेलीकाप्टर, एक लड़ाकू हेलीकाप्टर और एचएएल लाइट अवलोकन हेलीकाप्टर, एक उपयोगिता और प्रेक्षण हेलिकॉप्टर विकसित किए गए है। .

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नाभिकीय ऊर्जा

इकाटा परमाणु ऊर्जा संयंत्र, एक दबावयुक्त जल रिएक्टर जो समुद्र के साथ माध्यमिक शीतलक विनिमय द्वारा ठंडा करता है। सुसक्युहाना वाष्प विद्युत् केंद्र, एक उबलता जल रिएक्टर. रिएक्टर, शीतलक टावरों के सामने की ओर आयताकार रोकथाम इमारतों के अंदर स्थित हैं। परमाणु ऊर्जा चालित तीन जहाज, (ऊपर से नीचे) परमाणु क्रूजर USS बेनब्रिज और USS लोंग ब्रिज, USS इंटरप्राइज़ के साथ जो 1964 में पहला परमाणु संचालित विमान वाहक. चालक दल के सदस्य, उड़ान डेक पर आइंस्टीन के द्रव्यमान-ऊर्जा तुल्यता सूत्र को लिख रहे हैं E.

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नाभिकीय पनडुब्बी

नाभिकीय पनडुब्बी (nuclear submarine) वह पनडुब्बी है जिसको चलाने के लिए आवश्यक ऊर्जा उस पर लगे एक नाभिकीय रिएक्टर से मिलती है। परम्परागत पनडुब्बियों (जैसे डीजल-विद्युत चालित) की तुलना में नाभिकिय पनडुब्बियाँ कई मामलों में श्रेष्ठ होतीं हैं। उदाहरण के लिए, नाभिकिय पनडुब्बियों को कार्य करने के लिए वायु की आवश्यकता नहीं होती, अतः इन्हें हवा लेने के लिए बार-बार सतह पर आने की भी आवश्यकता नहीं होती। .

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नौसेना

भारतीय नौसेना का लोगोनौसेना (Navy) किसी देश की संगठित समुद्री सेना को कहते हैं। इसके अंतर्गत रणपोत, क्रूज़र (cruiser), वायुयानवाहक, ध्वंसक, सुरंगें बिछाने तथा उन्हें नष्ट करने आदि के साधन एवं सैनिकों के अतिरिक्त, समुद्रतट पर निर्माण, देखभाल, पूर्ति तथा प्रशासन, कमान, आयोजन और अनुसंधान संस्थान भी सम्मिलित हैं। इस प्रकार नौसेना सरकार के सीधे नियंत्रण में स्थित सैनिक संगठन है, जिसके प्रशासन के लिए सरकार पृथक् विभागों की स्थापना करती है। नौशक्ति का उद्देश्य सैनिक और वाणिज्य की दृष्टि से समुद्री मार्ग का नियंत्रण करना है। नौसेना ऐसा साधन है जिससे राष्ट्र समुद्र के उपयोग पर अपना अधिकार तो रखते हैं, परंतु शत्रु को इस उपयोग से वंचित रखते हैं। नौसेना में अब वायुयान और नियंत्रित प्रक्षेप्यास्त्रों (guided missiles) का समावेश हो गया है, जिनसे शत्रु के देश के सुदूर आंतरिक भूभाग पर भी प्रहार किया जा सकता है। .

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परमाणु भट्ठी

'''परमाणु भट्ठी''' का योजनामूलक (स्कीमैटिक) चित्र1 — नियन्त्रण छड़ें (कन्ट्रोल रॉड); 2 — शिल्डिंग; 3 — उष्मा अवरोधक (इंसुलेटर); 4 — मंदक (मॉडरेटर); 5 — नाभिकीय ईंधन; 6 — शीतलक (कूलैंट) परमाणु भट्ठी या 'न्यूक्लियर रिएक्टर' (nuclear reactor) वह युक्ति है जिसके अन्दर नाभिकीय शृंखला अभिक्रियाएँ आरम्भ की जाती हैं तथा उन्हें नियंत्रित करते हुए जारी रखा जाता है। .

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परिदर्शी

Zeiss submarine periscope optical design. Submarine monocular attack periscope. परिदर्शी (Periscope) एक प्रकाशिक यंत्र है जिसके द्वारा प्रेक्षक छिपा रहकर भी अपने चारों ओर के वातावरण को देख सकता है। इसका उपयोग पनडुब्बी, युद्धपोत, क्रूज़र युद्धक्षेत्र में छिपे सैनिकों द्वारा, एवं तोपखाने के तोपची अफसर द्वारा लक्ष्य को देखने और शत्रु की गतिविधि का ज्ञान करने के लिए होता है। प्रथम विश्वयुद्ध के समय में खाइयों से शत्रु पर नजर रखने के लिये इसका उपयोग हुआ था। कुछ प्रकार की बन्दूकों एवं तोपधारी गाड़ियों (armored vehicle) में भी इसका प्रयोग होता है। .

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परिवहन की विधि

परिवहन की विधि (या परिवहन के साधन या परिवहन प्रणाली या परिवहन का तरीका या परिवहन के रूप) वह शब्द हैं जो वस्तुत: परिवहन के अलग-अलग तरीकों के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। सबसे प्रमुख परिवहन के साधन हैं हवाई परिवहन, रेल परिवहन सड़क परिवहन और जल परिवहन, लेकिन अन्य तरीके भी उपलब्ध हैं जिनमें पाइप लाइन, केबल परिवहन, अंतरिक्ष परिवहन और ऑफ-रोड परिवहन भी शामिल हैं। मानव संचालित परिवहन और पशु चालित परिवहन अपने तरीके का परिवहन है, लेकिन यह सामान्य रूप से अन्य श्रेणियों में आते हैं। सभी परिवहन में कुछ माल परिवहन के लिए उपयुक्त हैं और कुछ लोगों के परिवहन के लिए उपयुक्त हैं। प्रत्येक परिवहन की विधि को मौलिक रूप से विभिन्न तकनीकी समाधान और कुछ अलग वातावरण की आवश्यकता होती है। प्रत्येक विधी की अपनी बुनियादी सुविधाएं, वाहन, कार्य और अक्सर विभिन्न विनियमन हैं। जो परिवहन एक से अधिक मोड का उपयोग करते हैं उन्हें इंटरमोडल के रूप में वर्णित किया जा सकता है। .

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फ़िन

तीरों के पीछे लगे हुए तीरपंख एक तरह के फ़िन होते हैं फ़िन एक ऐसे पंख को बोलते हैं जिसके ज़रिये हवा, पानी या किसी और द्रव या गैस में कोई जीव या मशीन अपने आप को धकेल सके या अधिक आसानी से बह सके। यह शब्द पहले मछलियों के पंखों के लिए ही इस्तेमाल होता था लेकिन अब दुसरे जानवरों और मशीनों में ऐसे पंखों के लिए भी प्रयोग होता है। फ़िन कई जगहों पर देखे जाते हैं -.

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ब्रह्मोस प्रक्षेपास्त्र

'''ब्रह्मोस''' विश्व की सबसे तीव्रगामी मिसाइल है। ब्रह्मोस एक कम दूरी की रैमजेट, सुपरसॉनिक क्रूज मिसाइल है। इसे पनडुब्बी से, पानी के जहाज से, विमान से या जमीन से भी छोड़ा जा सकता है। रूस की एनपीओ मशीनोस्ट्रोयेनिया (NPO Mashinostroeyenia) तथा भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने संयुक्त रूप से इसका विकास किया है। यह रूस की पी-800 ओंकिस क्रूज मिसाइल की प्रौद्योगिकी पर आधारित है। ब्रह्मोस के समुद्री तथा थल संस्करणों का पहले ही सफलतापूर्वक परीक्षण किया जा चुका है तथा भारतीय सेना एवं नौसेना को सौंपा जा चुका है। ब्रह्मोस भारत और रूस के द्वारा विकसित की गई अब तक की सबसे आधुनिक प्रक्षेपास्त्र प्रणाली है और इसने भारत को मिसाइल तकनीक में अग्रणी देश बना दिया है। .

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भारतीय नौसेना

भारतीय नौसेना(Indian Navy) भारतीय सेना का सामुद्रिक अंग है जो कि ५६०० वर्षों के अपने गौरवशाली इतिहास के साथ न केवल भारतीय सामुद्रिक सीमाओं अपितु भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति की भी रक्षक है। ५५,००० नौसेनिकों से लैस यह विश्व की पाँचवी सबसे बड़ी नौसेना भारतीय सीमा की सुरक्षा को प्रमुखता से निभाते हुए विश्व के अन्य प्रमुख मित्र राष्ट्रों के साथ सैन्य अभ्यास में भी सम्मिलित होती है। पिछले कुछ वर्षों से लागातार आधुनिकीकरण के अपने प्रयास से यह विश्व की एक प्रमुख शक्ति बनने की भारत की महत्त्वाकांक्षा को सफल बनाने की दिशा में है। जून २०१६ से एडमिरल सुनील लांबा भारत के नौसेनाध्यक्ष हैं। .

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भारतीय नौसेना पोत विराट

भारतीय नौसेना पोत विराट (आई एन एस विराट) भारतीय नौसेना में सेंतौर श्रेणी का एक वायुयान वाहक पोत है। भारतीय सेना की अग्रिम पंक्ति (फ़्लेगशिप) का यह पोत लंबे समय से सेना की सेवा में है। १९९७ में भारतीय नौसेना पोत विक्रांत के सेवामुक्त कर दिए जाने के बाद इसी ने विक्रांत के रिक्त स्थान की पूर्ति की थी। इस समय यह हिंद महासागर में उपस्थित दो वायुयान वाहक पोतों में से एक है। इस पोत ने सन १९५९ रायल नेवी (ब्रिटिश नौसेना) के लिये कार्य करना शुरु किया एवं १९८५ तक वहाँ सक्रिय रहा। इस का प्रथम नाम एच एम एस हर्मस था। तदपश्चात १९८६ मे भारतीय नौसेना ने कई देशो के युद्ध पोतों की समीक्षा करने के बाद इसे रॉयल नेवी से खरीद लिया। इस सौदे के बाद इस पोत मे कई तकनीकी सुधार किये गए जिससे इसे अगले एक दशक तक कार्यशील रखा जा सके। ये तकनीकी सुधार एवं रखरखाव देवेनपोर्ट डॉकयार्ड पर हुए। १२ मई १९८७ को इसे भारतीय नौसेना में आधिकारिक रूप से सम्मलित कर लिया गया। विराट पर १२ डिग्री कोण वाला एक स्की जंप लगा है जो सी हैरीयर श्रेणी के लड़ाकु वायुयानों के उड़ान भरने में कारगर होता है। इस पोत पर एक साथ १८ लड़ाकू वायुयान रखे जा सकते है। पोत के बाहरी आवरण, मशीनों एवं मेगजीनों (तोप एवं अन्य शस्रगृह) को १.२ इंच मोटे कवच से बख्तर बंद किया गया है। यह मेगजीनें ८० से भी अधिक हल्के तॉरपीडो का एक बार मे भंडार कर सकती है। पोत पर ७५० लोगों के रहने की जगह तो है ही, चार छोटी नावें (लेंडिंग क्राफ़्ट) भी है जो पोत से तट तक सैनिकों को ले जा सकती हैं। पनडुब्बी की खबर रखने के लिए इसे सी किंग हैलीकॉप्टर से लैस किया जायेगा। इस पोत का अधिकतम जल विस्थापन क्षमता २८,५०० टन है तथा इसके भार को खींचने के लिये ७६,००० हार्स पावर क्षमता वाली भाप से चलने वली टरबाईन लगायी गई है। भारतीय नौसेना का नया वायुयान वाहक पोत विक्रमादित्य, विराट का उत्तराधिकारी है। इसे २०१२ से सेवा में ले लिया गया है। हाल मे हुये रखरखाव को देखते हुए विराट का सेवा काल २०१९ तक बढ़ा दिया गया है जो पहले २०१२ तक तय किया गया था। .

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भारतीय नौसेना की पनडुब्बियों की सूची

यह भारतीय नौसेना की पनडुब्बियों की सूची है जिसे उनके वर्गानुसार विभिन्न समूहों में रखा गया है साथ ही वर्गांतर्गत उन्हें उनकी पताका संख्या के अनुसार अनुक्रमित किया गया है। .

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मिज़ूरी

अमेरिका के मानचित्र पर मिज़ूरी (Missouri) आयोवा, इलिनॉय, केन्टकी, टेनेसी, अर्कन्सास, ओक्लाहोमा, केन्सास और नेब्रास्का से घिरा संयुक्त राज्य अमेरिका के मध्य-पश्चिम क्षेत्र का एक राज्य है। मिसौरी सबसे अधिक जनसंख्या वाला 18वां राज्य है जिसकी 2009 में अनुमानित जनसंख्या 5,987,580 थी। यह 114 प्रान्तों और एक स्वतंत्र शहर से मिलकर बना है। मिसौरी की राजधानी जेफ़रसन शहर है। तीन सबसे बड़े शहरी क्षेत्र सेंट लुई, कन्सास शहर और स्प्रिंगफील्ड हैं। मिसौरी को मूल रूप से लुइसियाना खरीद के भाग के रूप में फ्रांस से अधिग्रहण किया गया था। मिसौरी राज्य क्षेत्र के भाग को 10 अगस्त 1821 में 24वें राज्य के रूप में संघ में शामिल कर लिया गया। मिसौरी में राष्ट्र के जनसांख्यिकीय, आर्थिक और राजनैतिक क्षेत्र में शहरी और ग्रामीण संस्कृति का मिश्रण देखने को मिलता है। इसे लंबे समय से एक राजनीतिक कसौटी राज्य माना जाता रहा है। 1956 और 2008 को छोड़कर, मिसौरी के U.S. राष्ट्रपति के पद के चुनाव के परिणाम ने 1904 से प्रत्येक चुनाव में संयुक्त राज्य अमेरिका के अगले राष्ट्रपति की सही-सही भविष्यवाणी की है। यह मध्य पश्चिमी और दक्षिणी दोनों संस्कृतियों से प्रभावित है और अपने इतिहास में एक सीमा राज्य के रूप में प्रदर्शित है। यह पूर्वी और पश्चिमी संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच एक अवस्थांतर भी है क्योंकि सेंट लुई को अक्सर "सुदूर-पश्चिमी पूर्वी शहर" और कन्सास शहर को "सुदूर-पूर्वी पश्चिमी शहर" कहते हैं। मिसौरी के भूगोल में अत्यधिक विविधता है। राज्य का उत्तरी भाग विच्छेदित गोल मैदानों में पड़ता है जबकि दक्षिणी भाग ओज़ार्क पर्वतों (विच्छेदित पठार) में पड़ता है जिसे मिसोरी नदी दो भागों में बांटती है। मिसिसिपी और मिसौरी नदियों का संगम सेंट लुई के पास स्थित है। .

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युद्धपोत

विलियम वैन डे वेल्डे द यंगर द्वारा कैनन शॉट 17 वीं सदी के लाइन के डच जहाज़ को प्रदशित कर रहा है युद्धपोत एक ऐसा जलयान है जिसका निर्माण युद्ध करने के लिए किया गया हो। युद्धपोतों का निर्माण आमतौर पर व्यापारिक जलयानों से पूर्णतया भिन्न रूप से होता है। सशस्त्र होने के साथ ही साथ युद्धपोत की रचना उसको होने वाली क्षति को सहने के लिए भी की जाती है, साथ ही वे व्यापारिक जलयानों की तुलना में अधिक तेज तथा आसानी से मुड़ सकने वाले होते हैं। एक व्यापारिक जलयान के विपरीत, एक युद्धपोत आमतौर पर केवल अपने स्वयं के चालक दल के लिए हथियार, गोला बारूद, तथा आपूर्ति को ढोता है (न कि व्यापारिक माल).

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यू-बोट

यू-बोट जर्मन भाषा में यू-बूट का अंग्रेज़ीकरण है। यू-बूट ख़ुद जर्मन भाषा में अंटरसीबूट (unterseeboot) का संक्षिप्त रूप है जिसका अंग्रेज़ी में मतलब होता है समुद्र के अन्दर की नाव। यह जर्मनी की नौसेना क्रीक्समरीन द्वारा प्रथम तथा द्वितीय विश्वयुद्ध में इस्तेमाल में लाई जाने वाली पनडुब्बियाँ थीं। हालांकि यह दुश्मन की नौसेना के युद्धपोतों के ख़िलाफ़ भी काफ़ी कारगर थी लेकिन जर्मनी ने इसका क़ामयाबी के साथ उपयोग अटलांटिक की लड़ाई में किया जब उसने मित्र राष्ट्रों के विरुद्ध नौसैनिक नाकाबन्दी की और इससे काफ़ी मात्रा में दुश्मन के व्यापारिक जहाज़ डुबाये। श्रेणी:जर्मनी की पनडुब्बियाँ श्रेणी:द्वितीय विश्वयुद्ध.

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रूसी नौसेना

कोई विवरण नहीं।

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स्टर्लिंग इंजन

अल्फा प्रकार का स्टर्लिंग इंजन। एक विस्तारित सिलेंडर (लाल) को एक उच्च तापमान पर बनाए रखा गया है जबकि संपीड़न सिलेंडर (नीला) ठंडा है। दो सिलेंडरों के बीच पैसेज में पुनर्योजी शामिल हैं। स्टर्लिंग इंजिन एक ऐसा उष्मीय इंजिन है जो हवा, गैस या किसी तरल पदार्थ के भिन्न-भिन्न तापमानों में चक्रीय दबावों एवं फैलाव से इस तरह कार्यान्वित होती है कि वहां पर शुद्ध रूप में उष्मीय उर्जा का बदलाव यांत्रिक क्रिया में हो जाता है। यह इंजन एक भाप इंजन की तरह होता है जिसमें इंजन दीवार के माध्यम से पूर्ण ताप को स्थानांतरित किया जाता है। इसे परम्परागत रूप से आंतरिक दहन इंजन के विपरीत एक बाह्य दहन इंजन के रूप में जाना जाता है जहां कार्यरत तरल की राशी के भीतर ईंधन के दहन के द्वारा ताप इनपुट होता है। भाप इंजन द्वारा कार्यरत तरल के रूप में तरल और गैस, दोनों पदार्थों में पानी के इस्तेमाल के विपरीत स्टर्लिंग इंजन हवा या हीलियम जैसे गैसीय तरल की निश्चित मात्रा को स्थायी रूप से संलग्न करता है। जैसा कि सभी ताप इंजन में होता है, सामान्य चक्र में शामिल है ठंडी गैस का सम्पीड़न, गैस को गर्म करना, गर्म गैस का विस्तार करना और अंत में चक्र के दोहराव से पहले गैस को ठंडा करना। इसे भाप इंजन के प्रतिद्वंद्वी के रूप में मूलतः 1816 में एक औद्योगिक मुख्य चालक के रूप में विचारित किया गया था, इसका व्यावहारिक उपयोग एक बड़े पैमाने पर एक सदी से भी अधिक तक न्यून-बिजली घरेलू अनुप्रयोगों के लिए सीमित था। स्टर्लिंग इंजन को अपनी उच्च कार्यक्षमता (40% तक), निर्बाध संचालन और उस सुगमता के लिए जाना जाता है जिससे वह लगभग कोई भी ताप स्रोत का इस्तेमाल कर सकता है। वैकल्पिक और अक्षय ऊर्जा स्रोतों के साथ यह संगतता, पारम्परिक ईंधन की कीमत बढ़ने और जलवायु परिवर्तन और तेल के सीमित उत्पादन के मद्देनज़र तेज़ी से महत्वपूर्ण बन गई है। वर्तमान में यह इंजन, सूक्ष्म संयुक्त ताप और शक्ति (CHP) इकाई के मुख्य घटक के रूप में रूचि को बढ़ा रहा है, जिसमें यह एक तुलनीय भाप इंजन के मुकाबले अधिक कुशल और सुरक्षित है। अंतरिक्ष अनुसंधान में उपयोग के लिए स्टर्लिंग इंजन पर (विशेषकर मुक्त पिस्टन प्रकार) नासा द्वारा भी विचार किया जा रहा है। .

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स्टेल्थ तकनीक

एफ़-117 स्टेल्थ लड़ाकू विमान स्टेल्थ तकनीक (Stealth Technology) या जिसे एलओ तकनीक (low observable technology) भी कहते हैं, सैन्य योजनाओं का एक प्रकार है जिसमे व्यक्तियों, विमानों, जहाजों, पनडुब्बियों और क्षेप्नास्त्रों को कई तकनीकों का उपयोग करके उन्हें रडार, इन्फ्रारेड, सोनार और अन्य पकड़ने वाले तरीकों से लगभग अदृश्य बनाया जाता है। इसका विकास कार्य अमेरिका में १९५८ में हुआMerlin, P.W. "" 47th AIAA Aerospace Sciences Meeting Including The New Horizons Forum and Aerospace Exposition 5–8 जनवरी 2009, Orlando, Florida.

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सोडियम

सोडियम (Sodium; संकेत, Na) एक रासायनिक तत्त्व है। यह आवर्त सारणी के प्रथम मुख्य समूह का दूसरा तत्व है। इस समूह में में धातुगण विद्यमान हैं। इसके एक स्थिर समस्थानिक (द्रव्यमान संख्या २३) और चार रेडियोसक्रिय समस्थानिक (द्रव्यमन संख्या २१, २२, २४, २४) ज्ञात हैं। .

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हाइड्रोजन पेरॉक्साइड

'हाइड्रोजन परॉक्साइड (H2O2) एक बहुत हल्का नीला, पानी से जरा सा अधिक गाढ़ा द्रव है जो पतले घोल में रंगहीन दिखता है। इसमें आक्सीकरण के प्रबल गुण होते हैं और यह एक शक्तिशाली विरंजक है। इसका इस्तेमाल एक विसंक्रामक, रोगाणुरोधक, आक्सीकारक और रॉकेट्री में प्रणोदक के रूप में किया जाता है। हाइड्रोजन परॉक्साइड की आक्सीकरण क्षमता इतनी प्रबल होती है कि इसे आक्सीजन की उच्च प्रतिक्रिया वाली जाति समझा जाता है। हाइड्रोजन परॉक्साइड जीवों में आक्सीकरण चयापचय के उपोत्पाद के रूप में प्राकृतिक रूप से उत्पन्न होता है। लगभग सभी जीवित वस्तुओं (विशेषकर, सभी आब्लिगेटिव और फेकल्टेटिव वातापेक्षी जीव) में परॉक्सिडेज नामक एन्ज़ाइम होते हैं जो बिना हानि पहुंचाए और उत्प्रेरण द्वारा उदजन परूजारक की छोटी मात्राओं को पानी और आक्सीजन में विघटित करते हैं। .

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हाइब्रिड वाहन

होंडा इनसाइट हाइब्रिड NYPD आवागमन प्रवर्तन द्वारा उपयोग किया जाने वाला प्रियूस एक हाइब्रिड वाहन एक ऐसा वाहन है, जो वाहन को चलाने के लिए दो या दो से अधिक भिन्न ऊर्जा स्रोतों का उपयोग करता है। यह शब्द सबसे अधिक हाइब्रिड इलेक्ट्रिक व़ीइकल्स अर्थात् संकर विद्युत वाहन (HEVs), के रूप में जाना जाता है, जिसमें एक आंतरिक दहन इंजन और एक या एक से अधिक विद्युत मोटर होते हैं। .

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जड़त्वीय संचालन प्रणाली

फ्रांस के मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल '''S3''' की जड़त्वीय संचालन इकाई संचालन प्रणाली की यथार्थता जड़त्वीय संचालन प्रणाली (Inertial navigation system / आईएनएस) एक प्रणाली है जो जलयान, वायुयान, पनडुब्बी, नियंत्रित मिसाइल, तथा अंतरिक्ष यान आदि के संचालन में सहायक है। यह कंप्यूटर, गति सेंसरों और रोटेशन सेंसर का उपयोग करते हुए, किसी बाहरी संदर्भ के बिना ही, किसी गतिशील वस्तु की स्थिति, अभिविन्यास और वेग की गणना कर लेती है। इस प्रणाली को 'जड़त्वीय मार्गदर्शन प्रणाली' (inertial guidance system), 'जड़त्वीय उपकरण' आदि अन्य नामों से भी जाना जाता है। .

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जलयान

न्यूयॉर्क पत्तन पर इटली का जलयान ''' अमेरिगो वेस्पुक्की''' (१९७६) जलयान या पानी का जहाज (ship), पानी पर तैरते हुए गति करने में सक्षम एक बहुत बडा डिब्बा होता है। जलयान, नाव (बोट) से इस मामले में भिन्न भिन्न है कि जलयान, नाव की तुलना में बहुत बडे होते हैं। जलयान झीलों, समुद्रों एवं नदियों में चलते हैं। इन्हें अनेक प्रकार से उपयोग में लाया जाता है; जैसे - लोगों को लाने-लेजाने के लिये, सामान ढोने के लिये, मछली पकडने के लिये, मनोरंजन के लिये, तटों की देखरेख एवं सुरक्षा के लिये तथा युद्ध के लिये। जहाज समुद्र के आवागमन तथा दूर देशों की यात्रा के लिये जिन बृहद् नौकाओं का उपयोग प्राचीनकाल से होता आया है उन्हें जहाज कहते है। पहले जहाज अपेक्षाकृत छोटे होते थे तथा लकड़ी के बनते थे। प्राविधिक तथा वैज्ञानिक उन्नति के आधुनिक काल में बहुत बड़े, मुख्यत: लोहे से बने तथा इंजनों से चलनेवाले जहाज बनते हैं। .

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वर्साय की सन्धि

वर्साय की सन्धि का इंगलिश कवर पेज वर्साय की सन्धि प्रथम विश्व युद्घ के अन्त में जर्मनी और गठबन्धन देशों (ब्रिटेन, फ्रान्स, अमेरिका, रूस आदि) के बीच में हुई थी। प्रथम विश्वयुद्ध के बाद पराजित जर्मनी ने 28 जून 1919 के दिन वर्साय की सन्धि पर हस्ताक्षर किये। इसकी वजह से जर्मनी को अपनी भूमि के एक बड़े हिस्से से हाथ धोना पड़ा, दूसरे राज्यों पर कब्जा करने की पाबन्दी लगा दी गयी, उनकी सेना का आकार सीमित कर दिया गया और भारी क्षतिपूर्ति थोप दी गयी। वर्साय की सन्धि को जर्मनी पर जबरदस्ती थोपा गया था। इस कारण एडोल्फ हिटलर और अन्य जर्मन लोग इसे अपमानजनक मानते थे और इस तरह से यह सन्धि द्वितीय विश्वयुद्ध के कारणों में से एक थी। .

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विनाशक पोत

जापानी नौसेना का विध्वंसक: '''कोताका''' (1887) विनाशक या ध्वसंक (अंग्रेज़ी: ''Destroyer'')- सामुद्रिक/नौसैनिक भाषा में विनाशक पोत तेजी से चल कर हमला करने वाले युद्ध पोतों को कहा जाता हैं। इनका आविष्कार २०वीं सदी के प्रारंभिक वर्षों में हुआ और तभी से नौसेनायुद्ध में इसक स्थान बेजोड़ रहा है। बहुमुखी और विश्वसनीय कार्यों का दायित्व सफलतापूर्वक वहन करने के कारण नौसेना के इतिहास में इसका स्थान बेजोड़ हो गया है। अत: इसका अतीत, वर्तमान और भविष्य अध्ययन करने योग्य है। .

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विलियम हेनरी ब्रैग

सर विलियम हेनरी ब्रैग (William Henry Bragg; 1862 - 1942), ब्रिटिश भौतिकीविद् थे तथा नोबेल पुरस्कार विजेता थे। इनका जन्म इंग्लैंड के कंबरलैंड काउंटी में स्थित विग्टन नामक ग्राम में हुआ था। आपकी शिक्षा केंब्रिज के ट्रिनिटी कॉलेज में पूर्ण हुई तथा आप ऐडिलेड (दक्षिणी ऑस्ट्रेलिया) में गणित तथा भौतिकी के प्रोफेसर नियुक्त हुए। यहाँ इन्होंने रेडियोऐक्टिवता पर अनुसंधान आरंभ किए। इन अनुसंधानों से ये प्रसिद्ध हो गए। सन् 1909 में आप लीड्स में कैवेंडिश प्रोफेसर तथा सन् 1915 में लंदन युनिवर्सिटी के क्वेन प्रोफेसर नियुक्त हुए। अपने पुत्र सर विलियम लॉरेंस ब्रैग के सहयोग से आपने एक्स-रे-स्पेक्ट्रोमीटर का विकास किया तथा इस यंत्र की सहायता से परमाणुओं और क्रिस्टलों के विन्यासों को स्पष्ट किया। सन् 1915 में इन्हें तथा इनके उपर्युक्त पुत्र को संयुक्त रूप से भौतिकी का नोबेल पुरस्कार और कोलंबिया विश्वविद्यालय का बारनर्ड स्वर्णपदक प्रदान किया गया। प्रथम विश्वयुद्ध के समय पनडुब्बी नावों का पता लगाने की समस्याओं के संबंध में ब्रिटिश नौसेना को आपने सहायता दी। आप सन् 1928-29 में ब्रिटिश ऐसोसिएशन फॉर दि ऐडवान्स्मेंट ऑव सायंस के तथा सन् 1935-40 तक रॉयल सोसायटी के प्रेसिडेंट थे। रेडियोऐक्टिविटी तथा क्रिस्टल विज्ञान पर अनेक प्रकाशनों के सिवाय ध्वनि, प्रकाश तथा प्रकृति संबंधी आपके अन्य ग्रंथ भी हैं। .

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वैज्ञानिक यन्त्र

ऑल्टीमीटर - इससे विमानोँ की ऊँचाई नापी जाती हैं। अमीटर - इससे विद्युत धारा को नापा जाता हैं। एनिमोमीटर - इससे वायु की शक्ति तथा गति को नापा जाता हैं। आडियोमीटर - यह मनुष्य द्वारा ध्वनि के सुनने की क्षमता को मापने वाला यंत्र हैं। ओडियोफोन - इसे लोग सुनने में सहायता के लिए कान में लगाते हैं। बैरोग्राफ - यह वायुमण्डल के दाब में होने वाले परिवर्तन को नापता है और स्वतः ही इसका ग्राफ बना देता हैं। बाइनोकुलर्स - इससे दूर स्थित वस्तुयें स्पष्ट देखी जा सकती हैं। कैलीपर्स - इससे गोल वस्तुओँ के भीतरी तथा बाहरी व्यास नापा जा सकता है। इससे मोटाई भी नापी जा सकती हैं। कैलोरीमीटर - इससे ऊष्मा की मात्रा मापी जाती हैं। कारडियोग्राम - इससे हृदय रोग से ग्रसित व्यक्ति की हृदय गति की जाँच की जाती हैं। सिनेमोटोग्राफ - इस यंत्र के द्वारा छोटी-छोटी फिल्म के चित्रोँ को बड़ा करके दिखाया जाता हैं। इसमें अनेक लैंसोँ को इस प्रकार लगाया जाता है कि चित्र गतिमय दिखाई देते हैं। दिक्सूचक सुई (कम्पास नीडिल) - इसके द्वारा किसी स्थान की दिशा ज्ञात की जाती हैं। एपीडायस्कोप - इस यंत्र के द्वारा अपारदर्शक चित्र पर्दे पर दिखाये जा सकते हैं। यूडिओमीटर - इसके द्वारा गैसोँ में रासायनिक क्रिया के कारण होने वाले आयतन के परिवर्तनोँ को नापा जाता हैं। फेदोमीटर - इससे समुद्र की गहराई नापी जाती हैं। ग्रामोफोन - इस उपकरण के द्वारा रिकॉर्ड पर अंकित ध्वनि तंरगोँ को पुनः उत्पादित किया जा सकता है और सुना जा सकता हैं। ग्रेवोमीटर - इससे पानी की सतह पर तेल की उपस्थिति ज्ञात की जाती हैं। आर्द्रतामापी (हाइग्रोमीटर) - इससे वायुमण्डल में व्याप्त आर्द्रता नापी जाती हैं। हाइड्रोफोन - इससे पानी में ध्वनि को अंकित किया जाता हैं। लैक्टोमीटर - इससे दूध की शुद्धता ज्ञात की जाती हैं। मैनोमीटर - इससे गैसोँ का दाब ज्ञात करते हैं। सूक्षमदर्शी (माइक्रोस्कोप) - बहुत ही सूक्ष्म वस्तुओँ को इस उपकरण द्वारा आवर्धन करके (Magnify) देखा जाता हैं। माइक्रोटोम - इसे किसी वस्तु को बहुत पतले-पतले भागोँ में काटने के काम में लाया जाता हैं। ओडोमीटर - इससे मोटर गाड़ी की गति को ज्ञात किया जाता हैं। पैराशूट - यह छाते के समान उपकरण है जिससे युद्ध या आपात स्थिति के समय वायुयान से नीचे कूदा जा सकता हैं। परिदर्शी (पेरिस्कोप) - इसके द्वारा जब पनडुब्बी पानी के अंदर होती है तो पानी की सतह का अवलोकन कर सकती है और इसमें बैठे लोग बिना किसी के जाने हुए बिना किसी बाधा के बाहरी हलचल ज्ञात कर सकते हैं। फोनोग्राफ - इससे ध्वनि की तरगोँ को पुनः ध्वनि में परिवर्तित किया जाता हैं। फोटो कैमरा - इससे फोटोग्राफ लेकर कैमीकल्स की सहायता से इसे डेवलप किया जाता है ताकि सही चित्र बनकर निकलें। पिपेट - इसकी सहायता से द्रव की मापी गई मात्रा दूसरे बर्तन में डाली जा सकती हैं। विभवमापी (पोटेन्शियोमीटर) - इससे किसी सेल के विद्युत वाहक बल तथा तार के दो सिरोँ के विभवान्तर की नाप होती हैं। पायरोमीटर - उच्च तापोँ को मापने का उपकरण हैं। रेडियेटर - यह कारोँ तथा गाड़ियोँ के इंजनो को ठण्डा करने वाला उपकरण हैं। वर्षामापी (रेन गेज) - इससे किसी विशेष स्थान पर हुई वर्षा की मात्रा नापी जाती हैं। रेडियोमीटर - इस यंत्र द्वारा विकीर्ण ऊर्जा की तीव्रता को नापा जाता हैं। शर्करामापी - यह यंत्र किसी घोल में शक्कर की मात्रा नापने के काम आता हैं। भूकम्पमापी (सिस्मोग्राफ) - इस यंत्र से पृथ्वी सतह पर आने वाले भूकम्प के झटकोँ का स्वतः ही ग्राफ चित्रित होता हैं। स्पेक्ट्रोमीटर - इस यंत्र के माध्यम से स्पेक्ट्रम की उत्पत्ति की जाती है जिससे कि विभिन्न किरणोँ के तरंग दैर्ध्य को नापा जा सकें। वेगमापी (स्पीडोमीटर) - इससे किसी मोटर गाड़ी की चालन गति ज्ञात की जाती हैं। स्फैरोमीटर - इससे धरातल की वक्रता नापी जाती हैं। स्फिग्मोमेनोमीटर - इससे धमनियोँ में बहने वाले रक्त का दाब नापा जाता हैं। स्फिग्मोफोन - इससे नाड़ी धड़कन को तेज ध्वनि में सुना जा सकता हैं। स्टीरियोस्कोप - यह एक प्रकार का उत्तम वाइनोकुलर है। इससे किसी द्विविमीय चित्र को भली-भांति देखा जा सकता हैं। स्टेथिस्कोप - इससे हृदय तथा फेफड़ोँ की आवाज को सुना जा सकता है और रोग के लक्षण ज्ञात किये जा सकते हैं। स्टोप वॉच - इससे किसी कार्य या क्रिया की समय अवधि (यदि वह 30 मिनट से अधिक नहीं है) सही रूप में नापी जा सकती हैं। स्ट्रोवोस्कोप - इससे उन वस्तुओँ को जो तेज गति से घूम रही है रूकी हुई अवस्था में उनकी जाँच की जाती हैं। टैकोमीटर - इससे वायुयानोँ तथा मोटर वोटोँ की गति नापी जाती हैं। टेलीफोन - इसके द्वारा दो व्यक्ति, जो एक दूसरे से दूर होते हैं, आपस में बातचीत कर सकते हैं। दूरदर्शी (टेलिस्कोप) - इसकी सहायता से दूर स्थित वस्तुयें स्पष्ट देखी जा सकती हैं। टेलस्टार - 10 जुलाई 1962 को कैप कैनडी से छोड़ा गया यह अंतरिक्ष का संचार उपग्रह है इसके द्वारा एक देश के निवासी दूसरे देश के निवासियोँ से टेलिफोन द्वारा बातचीत कर सकते हैं इसके अतिरिक्त टेलिविजन संचार भी विभिन्न देशोँ में इसके द्वारा संभव हो सका हैं। थ्योडोलाइट - यह सर्वेक्षण करने का यंत्र है जो क्षैतिज तथा ऊर्ध्वाधर कोणोँ को नापकर दूरी को ज्ञात कराता हैं। तापयुग्म (थर्मोकपल) - जब भिन्न-भिन्न धातुओँ के तारोँ को सिरोँ पर जोड़ा जाय और उनमें से एक ओर के सिरोँ को गर्म किया जाये तथा दूसरी ओर के सिरोँ को एक कम स्थिर ताप पर रखा जाये तो परिपथ में एक विधुत धारा बहने लगती हैं इस प्रकार भिन्न धातुओँ के जोड़े को थर्मोकपल कहते हैं। थर्मोस्टेट - इस यंत्र के द्वारा उष्मा अपूर्ति पर नियंन्नण करके किसी वस्तु या पदार्थ का तापमान किसी बिन्दु पर नियत कर दिया जाता हैं। विस्कोमीटर - इस यंत्र से द्रवोँ की श्यानता नापी जाती हैं। लाइफ बोट तथा लाइफ वेस्ट - जब कोई जहाज डूबता है तो इनको उपयोग में लाकर यात्रियोँ को बचाया जाता हैं। .

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गुप्त लेखन

गुप्त लेखन संवाद लिखने की ऐसी पद्धति जिसे व्यक्तिविशेष के सिवाय दूसरा न समझ सके। गुप्त लेखन दृश्य तथा अदृश्य दो प्रकार का होता है। गुप्त लेखन में संवाद बीजांक (Cipher) या कूट (Code) द्वारा प्रेषित किया जाता है। कूट पद्धति में प्रेषक तथा आदाता कूट पुस्तक का प्रयोग करते हैं। पुस्तक के द्वारा अक्षरों के समूह या किसी शब्द से गुप्त संवाद जान लिया जाता है। संदेश को यथासंभव छोटा बनाने के लिये तार या केबुल तार में प्राय: कूट का प्रयोग किया जाता है। व्यापारिक संस्थाएँ, जिनकी शाखाएँ विदेशों में फैली होती हैं, प्राय: निजी कूट पुस्तक का उपयोग करती हैं। कूट पुस्तक का सेना में बड़ा महत्व है। यदि सैनिक अधिकारी कूट का प्रयोग न कर दमक ज्योति, ध्वजसंकेत या शाब्दिक संदेश भेजे तो वह असुरक्षित तथा बिलंबगामी हो जायगा। कूट को रहस्य बनाए रखने के लिये आवश्यक है कि कूट पुस्तक कुछ ही अत्यंत विशवासपात्र व्यक्तियों के पास हो। किंतु कूट को बीजांकित करने से रहस्य प्रकट नहीं होता। संदेश को बीजांकित करने का अभिप्राय है संदेश को दूसरे अक्षरों या संकेत में लिखना, या अक्षरों के क्रम में परिवर्तन करना। बीजांकित संदेश पढ़ने के लिए कुंजी आवश्यक है। बीजांकन की सरलतम पद्धति प्रतिस्थापन सारणी है। वर्णमाला का प्रत्येक अक्षर किसी दूसरे अक्षर से व्यक्त किया जाता है। प्रेषक यदि चाहे तो आदाता को पहले से सूचित कर सारणी में हेर फेर कर सकता है। बीजांकप्रतिस्थापन की एक और सरल पद्धति प्लेफेयर (Playfair) है, जिनमें प्रेषक तथा आदाता को संकेत शब्द का ज्ञान होना ही संवाद समझने के लिए पर्याप्त होता है। .

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गैस संपीडक

गैस संपीडक (gas compressor) एक यांत्रिक युक्ति है जो गैस का आयतन घटाकर उसका दाब बढ़ा देती है। कम्प्रेसर और पम्प में समानता है - दोनो ही किसी तरल का दाब बढ़ाते हैं और दोनो ही किसी पाइप से तरल को ला-लेजा (यातायात) सकते हैं। चूंकि गैसें संपीड्य (compressible) हैं इसलिये गैस संपीडक गैस का आयतन भी कम करता है जबकि द्रव अपेक्षाकृत बहुत कम संपीड्य होने कारण पम्प द्रव का आयतन बहुत ही कम बदल पाते हैं। (अर्थात, पम्प का मुख्य काम दाबढ़ाना है, न कि आयतन कम करना) .

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गूगल धरती

गूगल अर्थ वास्तविक भूमंडल (virtual globe) चित्रण का एक ऐसा कार्यक्रम है जिसे प्रारम्भ में अर्थ व्यूअर नाम दिया गया, तथा इसे कीहोल, इंक (Keyhole, Inc) द्वारा तैयार किया गया है, जो 2004 में गूगल द्वारा अधिगृहीत की गई एक कंपनी है। यह कार्यक्रम उपग्रह चित्रावली (satellite imagery), हवाई छायांकन (aerial photography) तथा भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) त्रि आयामी (3D) भूमंडल से प्राप्त चित्रों का अध्यारोपण (superimposition) करते हुए धरती का चित्रण करता है। यह तीन विभिन्न अनुज्ञप्तियों के अधीन उपलब्ध है: गूगल अर्थ, सीमित कार्यात्मकता के साथ एक मुक्त संस्करण; गूगल अर्थ प्लस ($ २० प्रति वर्ष), जो अतिरिक्त विशेषताओं से युक्त है तथा गूगल अर्थ प्रो ($ ४०० प्रति वर्ष), जो कि वाणिज्यिक कार्यों में उपयोग हेतु तैयार किया गया है। २००६ में इस उत्पाद का नाम बदलकर गूगल अर्थ कर दिया गया, जो कि वर्तमान में माइक्रोसॉफ्ट विन्डोज़ (Microsoft Windows) २००० (2000), एक्स पी अथवा विस्ता, मैक ओएस एक्स (Mac OS X) १०.३.९ तथा उससे अधिक, लिनुक्स(१२ जून, २००६ को जारी) तथा फ्री BSD (FreeBSD) से युक्त निजी कंप्यूटरों (personal computer) पर उपयोग के लिए उपलब्ध है। गूगल अर्थ फायरफॉक्स, आई ई 6 (IE6) अथवा आई ई 7 (IE7) के लिए एक ब्राउज़र प्लगइन (02 जून, 2008 को जारी) के रूप में भी उपलब्ध है। एक अद्यतन कीहोल आधारित क्लाइंट को जारी करने के साथ, गूगल ने अपने वेब आधारित प्रतिचित्रण सॉफ़्टवेयर में अर्थ डेटाबेस की चित्रावली भी शामिल की है। वर्ष २००६ के मध्य जनता के लिए गूगल अर्थ जारी होने के साथ २००६ तथा २००७ के बीच आभासी भूमंडल (virtual globes) पर मीडिया कवरेज में दस गुना से भी अधिक की वृद्धि हुई तथा भूस्थानिक (geospatial) तकनीकों तथा अनुप्रयोगों में जनता की रूचि बढ़ गई। .

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आई एन एस अरिहंत

भारतीय नौसेना पोत (आई एन एस) अरिहंत (अरि: शत्रु हंतः मारना अर्थात शत्रु को मारने वाला) परमाणु शक्ति चालित भारत की प्रथम पनडुब्बी है। इस 6000 टन के पोत का निर्माण उन्नत प्रौद्योगिकी पोत (ATV) परियोजना के अंतर्गत पोत निर्माण केंद्र विशाखापत्तनम में 2.9 अरब अमेरिका डॉलर की लागत से किया गया है। इसको बनाने के बाद भारत वह छठा देश बन गया जिनके पास इस तरह की पनडुब्बियां है। अन्य पाँच देश हैं, अमेरिका (71), रूस (50), चीन (7), ब्रिटेन (6) और फ्रांस (5) (कोष्ठक में पनडुब्बियों की संख्या दी गई है)। अरिहंत का प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और उनकी पत्नी गुरशरण कौर द्वारा 26 जुलाई 2009 को जलावतरण किया गया यह दिन इसलिए भी चुना गया क्योंकि यह कारगिल युद्ध में विजय की सालगिरह भी थी और इस दिन को कारगिल विजय दिवस या विजय दिवस)http://www.dnaindia.com/india/report_india-reaches-milestone-with-launch-of-n-powered-submarine_1277227 रूप में मनाया जाता है। भारतीय नौसेना के बेड़े में 2011 में शामिल होने से पहले अरिहंत को गहन बंदरगाह और समुद्री परीक्षणों से गुजरना पड़ेगा। .

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आईएनएस चक्र २

भारतीय नौसेना की नाभिकीय पनडुब्बी - 'आईएनएस चक्र' आईएनएस चक्र-२ (INS Chakra II या К-152 Nerpa) भारतीय नौसेना की नाभिकीय शक्ति से चलने वाली पनडुब्बी है। यह 8,140-टन वाली आक्रमणकारी पनडुब्बी है। इसे 4 अप्रैल 2012 को विशाखापत्तनम में भारतीय सेना को सुपुर्द किया गया। .

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आईएनएस सिंधुराष्ट्र

आईएनएस सिंधुराष्ट्र एस६५ भारतीय नौसेना की शत्रु विनाशक पनडुब्बी है। यह भारत की सर्वप्रथम मिसाईल से लैस पनडुब्बी है। .

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आईएनएस सिंधुरक्षक

आईएनएस सिंधुरक्षक (एस६३) भारतीय नौसेना की सिंधुघोष वर्ग की दस डीजल-विद्युत पनडुब्बियों में से एक थी। 4 जून 2010 को भारतीय रक्षा मंत्रालय और ज़्वेजदोच्का शिपयार्ड के मध्य पनडुब्बी के उन्नयन और जीर्णोद्धार के लिए अमेरिकी $8 करोड़ ($80 मिलियन) का समझौता हुआ था। पनडुब्बी ने दो आग की घटनाओं का सामना किया था, प्रथम लघु घटना 2010 में और द्वितीय 14 अगस्त 2013 को मुम्बई के नौसेनिक डॉकयार्ड में हुई जिसमें यह डुब गयी। .

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आईएनएस कलवरी (एस50)

आईएनएस कलवरी एस50 (INS Kalvari S50) भारतीय नौसेना के छह कलवरी श्रेणी की पनडुब्बियों में पहली पनडुब्बी है जिसका निर्माण भारत में हो रहा है। यह एक डीजल-इलेक्ट्रिक अटैक वाली पनडुब्बी है जिसे डीसीएनएस (फ्रांसीसी नौसैनिक रक्षा और ऊर्जा कंपनी) द्वारा डिजाइन किया गया है और इसे मुंबई में माझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड में निर्मित किया गया है। सितम्बर २०१७ में पहली कलवरी नौसेना को मिली। .

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कलवरी-श्रेणी पनडुब्बी

कलवरी-श्रेणी की पनडुब्बियाँ भारतीय नौसेना के लिए बनायी जा रही स्कार्पीन-श्रेणी की पनडुब्बियाँ हैं। ये डीजल-विद्युत से चालित आक्रमणकारी पनडुब्बियाँ हैं। इनकी डिजाइन फ्रांस की डीसेन एस नामक कम्पनी ने किया है तथा इनका निर्माण मुम्बई के माझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है। .

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क्यू जहाज

क्यू-जहाज, जिन्हें क्यू-नावों, प्रलोभन-नावों, विशेष सेवा-जहाजों या रहस्यमय जहाजों, के नाम से भी जाना जाता है, छुपे हुए हथियारों से लैस ऐसे व्यापारी जहाज थे, जो पनडुब्बियों को सतही हमले करने के लिये मजबूर करने का कार्य करते थे। इससे क्यू-जहाज को गोली-बारी करने और उन्हें डुबा देने का अवसर मिल जाता था। हर क्यू-जहाज का बुनियादी सिद्धांत भेड़ के कपड़े पहने एक भेड़िये के समान था। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश शाही नौसेना (आरएन (RN)) तथा आरएन (RN) और संयुक्त राज्य अमेरिका की नौसेना, दोनों के द्वारा द्वितीय विश्व युद्ध (1939-1945) के दौरान उनका इस्तेमाल जर्मन यू-नौकाओं और जापानी पनडुब्बियों के खिलाफ जवाबी उपाय के रूप में किया गया। .

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अरित्र

वायुयान का '''अरित्र''' तथा '''दिशा-परिवर्तन''' में उसकी भूमिका अरित्र या रडर एक सरल युक्ति है जो जलयान, नौका, पनडुब्बी, होवरक्राफ्ट, वायुयान आदि को वांछित दिशा में मोड़ने के काम आता है। स्टीरिंग घुमाकर अरित्र के घूमाने की मेकेनिज्म श्रेणी:वायुयान नियंत्रण श्रेणी:जलयान अंश श्रेणी:चित्र जोड़ें.

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२००९

२००९ ग्रेगोरी कैलंडर का एक साधारण वर्ष है। वर्ष २००९ बृहस्पतिवार से प्रारम्भ होने वाला वर्ष है। संयुक्त राष्ट्र संघ, यूनेस्को एवं आइएयू ने १६०९ में गैलीलियो गैलिली द्वारा खगोलीय प्रेक्षण आरंभ करने की घटना की ४००वीं जयंती के उपलक्ष्य में इसे अंतर्राष्ट्रीय खगोलिकी वर्ष घोषित किया है। .

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