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नैनीताल जिला

सूची नैनीताल जिला

नैनीताल जिला भारतीय राज्य उत्तराखण्ड का एक जिला है। जिले का मूख्यालय नैनीताल है। नैनीताल जिला, कुमाऊँ मण्डल में स्थित है और इसके उत्तर में अल्मोड़ा जिला और दक्षिण में उधमसिंहनगर जिला है। हल्द्वानी इस जिले में सबसे बड़ा नगर है। .

82 संबंधों: चन्द राजवंश, चैती देवी मन्दिर, काशीपुर, थारू, देवेन्‍द्र सिंह, देवी दत्‍त छिम्‍वाल, धारी तहसील, नारायण दत्त तिवारी, नैनीताल, नैनीताल तहसील, नैनीताल विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र, उत्तराखण्ड, नैनीताल छावनी, नैनीताल-ऊधमसिंह नगर लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र, पप्पू कार्की, पाटी तहसील, पंतनगर, बाजपुर तहसील, बिन्दुखत्ता, बेतालघाट तहसील, भाभर, भिक्यासैंण तहसील, भवाली, भीमताल (नगर), भीमताल (बहुविकल्पी), भीमताल विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र, उत्तराखण्ड, महादेवी वर्मा, रानीखेत तहसील, रामदत्‍त, रामनगर तहसील, रामनगर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र, उत्तराखण्ड, रुद्रपुर, लालकुआँ, लालकुआँ तहसील, लालकुआँ विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र, उत्तराखण्ड, लक्ष्‍मण दत्‍त भट्ट, श्री पूर्णागिरी तहसील, सितारगंज तहसील, संयुक्त प्रान्त आगरा व अवध, हल्द्वानी, हल्द्वानी तहसील, हल्द्वानी में यातायात, हल्द्वानी रेलवे स्टेशन, हल्द्वानी विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र, उत्तराखण्ड, हल्द्वानी का इतिहास, हव्यक, जसपुर तहसील, जिम कॉर्बेट, जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान, ज्योलिकोट, जैंती तहसील, खैरना, ..., गदरपुर तहसील, गीत बैठकी, इन्‍द्रलाल, काठगोदाम, कालाढूँगी विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र, उत्तराखण्ड, कालाढूंगी, कालाढूंगी तहसील, काशीपुर तहसील, काशीपुर का भूगोल, काशीपुर, उत्तराखण्ड, किच्छा तहसील, कुमाऊँ मण्डल, कुमाऊँ राज्य, कुमाऊँ विश्वविद्यालय, कुमाऊँ विश्वविद्यालय से सम्बद्ध महाविद्यालयों की सूची, कुमाऊँनी भाषा, कुमाऊँनी लोग, कोटद्वार तहसील, कोश्याकुटौली तहसील, अल्मोड़ा तहसील, अल्मोड़ा जिला, अल्मोड़ा के पर्यटन स्थल, उत्तर प्रदेश राज्य राजमार्ग १२, उत्तराखण्ड, उत्तराखण्ड में जिलावार विधानसभा सीटें, उत्तराखण्ड सूपर लीग, उत्तराखण्ड का भूगोल, उत्तराखण्ड के नगरों की सूची, उत्तराखण्ड के मण्डल, उत्तराखण्ड के राज्य राजमार्गों की सूची, उत्तराखण्ड के जिले, उत्तराखण्ड के विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की सूची सूचकांक विस्तार (32 अधिक) »

चन्द राजवंश

कलि कुमाऊँ का किला और और राजधानी, चम्पावत, १८१५ चन्द राजवंश भारत के उत्तराखण्ड राज्य के कुमाऊँ मण्डल का एक मध्यकालीन रघुवंशी राजपूत राजवंश था, जिन्होंने इस क्षेत्र पर ११वीं शताब्दी में कत्यूरी राजवंश के ह्रास के बाद से और १८वीं शताब्दी में अंगेज़ो के आगमन तक शासन किया। .

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चैती देवी मन्दिर, काशीपुर

चैती देवी मन्दिर (जिसे माता बालासुन्दरी मन्दिर भी कहा जाता है) उत्तराखण्ड के नैनीताल जिले में काशीपुर कस्बेे में कुँडेश्वरी मार्ग पर स्थित है। यह स्थान महाभारत से भी सम्बन्धित रहा है और इक्यावन शक्तिपीठों में से एक है। यहां प्रतिवर्ष चैत्र मास की नवरात्रि में चैती मेला (जिसे चैती का मेला भी कहा जाता है) का आयोजन किया जाता है। यह धार्मिक एवं पौराणिक रूप से ऐतिहासिक स्थान है और पौराणिक काल में इसे गोविषाण नाम से जाना जाता था। मेले के अवसर पर दूर-दूर से यहाँ श्रद्धालु आते हैं। .

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थारू

परम्परागत वस्त्रों में थारू स्त्रियाँ थारू पुरुष मछली पकड़ने के लिये जातीं थारू स्त्रियाँ थारू, नेपाल और भारत के सीमावर्ती तराई क्षेत्र में पायी जाने वाली एक जनजाति है। नेपाल की सकल जनसंख्या का लगभग 6.6% लोग थारू हैं। भारत में बिहार के चम्पारन जिले में और उत्तराखण्ड के नैनीताल और ऊधम सिंह नगर में थारू पाये जाते हैं। थारुओं का मुख्य निवास स्थान जलोढ़ मिट्टी वाला हिमालय का संपूर्ण उपपर्वतीय भाग तथा उत्तर प्रदेश के उत्तरी जिले वाला तराई प्रदेश है। ये हिन्दू धर्म मानते हैं तथा हिन्दुओं के सभी त्योहार मनाते हैं। .

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देवेन्‍द्र सिंह

देवेन्‍द्र सिंह,भारत के उत्तर प्रदेश की तीसरी विधानसभा सभा में विधायक रहे। 1962 उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में इन्होंने उत्तर प्रदेश के नैनीताल जिले के 15 - नैनीताल विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस की ओर से चुनाव में भाग लिया। .

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देवी दत्‍त छिम्‍वाल

देवी दत्‍त छिम्‍वाल,भारत के उत्तर प्रदेश की तीसरी विधानसभा सभा में विधायक रहे। 1962 उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में इन्होंने उत्तर प्रदेश के नैनीताल जिले के 17 - काशीपुर विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस की ओर से चुनाव में भाग लिया। .

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धारी तहसील

धारी तहसील भारत के उत्तराखंड राज्य में नैनीताल जनपद की एक तहसील है। नैनीताल जनपद के पूर्वी भाग में स्थित इस तहसील के मुख्यालय धारी कस्बे में स्थित हैं। इसके पूर्व में चम्पावत जनपद की पाटी तहसील, पश्चिम में नैनीताल तहसील, उत्तर में अल्मोड़ा जनपद की जैंती तहसील, तथा दक्षिण में हल्द्वानी तहसील है। .

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नारायण दत्त तिवारी

नारायण दत्त तिवारी उत्तर प्रदेश और उत्तराखण्ड (तब उत्तरांचल) के भूतपूर्व मुख्यमन्त्री हैं। वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता हैं। .

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नैनीताल

नैनीताल भारत के उत्तराखण्ड राज्य का एक प्रमुख पर्यटन नगर है। यह नैनीताल जिले का मुख्यालय भी है। कुमाऊँ क्षेत्र में नैनीताल जिले का विशेष महत्व है। देश के प्रमुख क्षेत्रों में नैनीताल की गणना होती है। यह 'छखाता' परगने में आता है। 'छखाता' नाम 'षष्टिखात' से बना है। 'षष्टिखात' का तात्पर्य साठ तालों से है। इस अंचल में पहले साठ मनोरम ताल थे। इसीलिए इस क्षेत्र को 'षष्टिखात' कहा जाता था। आज इस अंचल को 'छखाता' नाम से अधिक जाना जाता है। आज भी नैनीताल जिले में सबसे अधिक ताल हैं। इसे भारत का लेक डिस्ट्रिक्ट कहा जाता है, क्योंकि यह पूरी जगह झीलों से घिरी हुई है। 'नैनी' शब्द का अर्थ है आँखें और 'ताल' का अर्थ है झील। झीलों का शहर नैनीताल उत्तराखंड का प्रसिद्ध पर्यटन स्‍थल है। बर्फ़ से ढ़के पहाड़ों के बीच बसा यह स्‍थान झीलों से घिरा हुआ है। इनमें से सबसे प्रमुख झील नैनी झील है जिसके नाम पर इस जगह का नाम नैनीताल पड़ा है। इसलिए इसे झीलों का शहर भी कहा जाता है। नैनीताल को जिधर से देखा जाए, यह बेहद ख़ूबसूरत है। .

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नैनीताल तहसील

नैनीताल तहसील भारत के उत्तराखंड राज्य में नैनीताल जनपद की एक तहसील है। नैनीताल जनपद के मध्य में स्थित इस तहसील के मुख्यालय नैनीताल नगर में स्थित हैं। इसके पूर्व में धारी तहसील, पश्चिम में रामनगर तथा कालाढूंगी तहसील, उत्तर में बेतालघाट और कोश्याकुटौली तहसील, तथा दक्षिण में लालकुआँ और हल्द्वानी तहसील है। .

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नैनीताल विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र, उत्तराखण्ड

नैनीताल विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र उत्तराखण्ड के 70 निर्वाचन क्षेत्रों में से एक है। नैनीताल जिले में स्थित यह निर्वाचन क्षेत्र अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित है। 2012 में इस क्षेत्र में कुल 94,360 मतदाता थे। .

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नैनीताल छावनी

नैनीताल छावनी, नैनीताल जिला, उत्तराखंड में स्थित एक क्षेत्र है। यह कुमाऊँ मण्डल में आता है। .

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नैनीताल-ऊधमसिंह नगर लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र

नैनीताल-ऊधमसिंह नगर लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र भारत के उत्तराखण्ड राज्य का एक लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र है। श्री के.सी.सिंह बाबा वर्तमान लोकसभा में यहाँ से सांसद हैं। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से सदस्य हैं। श्रेणी:उत्तराखण्ड के लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र.

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पप्पू कार्की

प्रवेंद्र सिंह कार्की (३० जून १९८४ – ९ जून २०१८), जो पप्पू कार्की के नाम से प्रसिद्ध थे, उत्तराखण्ड के एक प्रसिद्ध कुमाऊँनी लोकगायक थे। .

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पाटी तहसील

पाटी तहसील भारत के उत्तराखंड राज्य में चम्पावत जनपद की एक तहसील है। चम्पावत जनपद के पश्चिमी भाग में स्थित इस तहसील के मुख्यालय पाटी गांव में स्थित हैं। १७ जनवरी २००४ को उत्तरांचल सरकार के शाशनादेश से चम्पावत तहसील के १४६ ग्रामों के साथ इसका गठन किया गया। इसके पूर्व में लोहाघाट और चम्पावत तहसील, पश्चिम में नैनीताल जनपद की धारी तहसील, उत्तर में अल्मोड़ा जनपद की भनोली तहसील, तथा दक्षिण में नैनीताल जनपद की हल्द्वानी तहसील है। .

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पंतनगर

पंतनगर भारत के उत्तराखण्ड राज्य के उधम सिंह नगर जनपद में स्थित एक नगर है। गोविन्द बल्लभ पन्त कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय तथा पंतनगर विमानक्षेत्र यहां ही स्थित हैं। उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री, गोविन्द बल्लभ पन्त के नाम पर ही इस नगर का नाम पंतनगर रखा गया है। .

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बाजपुर तहसील

बाजपुर तहसील भारत के उत्तराखंड राज्य में उधम सिंह नगर जनपद की एक तहसील है। उधम सिंह नगर जनपद के पश्चिमी भाग में स्थित इस तहसील के मुख्यालय बाजपुर नगर में स्थित हैं। इसके पूर्व में गदरपुर तहसील, पश्चिम में काशीपुर तहसील, उत्तर में नैनीताल जनपद की कालाढूंगी तहसील, तथा दक्षिण में उत्तर प्रदेश राज्य का रामपुर जिला है। .

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बिन्दुखत्ता

बिन्दुखत्ता उत्तराखण्ड राज्य के नैनीताल जनपद में स्थित एक कस्बा है। लालकुआँ तहसील में स्थित यह कस्बा तहसील मुख्यालय, लालकुआँ से ५ किमी की दूरी पर स्थित है। .

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बेतालघाट तहसील

बेतालघाट तहसील भारत के उत्तराखंड राज्य में नैनीताल जनपद की एक तहसील है। नैनीताल जनपद के उत्तरी भाग में स्थित इस तहसील के मुख्यालय बेतालघाट कस्बे में स्थित हैं। इसके पूर्व में अल्मोड़ा जनपद की सल्ट तहसील, पश्चिम में अल्मोड़ा जनपद की रानीखेत तहसील, उत्तर में अल्मोड़ा जनपद की भिक्यासैंण तहसील, तथा दक्षिण में नैनीताल और कोश्याकुटौली तहसील है। .

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भाभर

भाभर निम्न हिमालय और शिवालिक की पहाड़ियों के दक्षिणी ओर बसा एक क्षेत्र है जहाँ पर जलोढ़ ग्रेड हिन्द-गंगा क्षेत्र के मैदानों में विलीन हो जाती है। .

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भिक्यासैंण तहसील

भिक्यासैंण तहसील भारत के उत्तराखण्ड राज्य में अल्मोड़ा जनपद की एक तहसील है। अल्मोड़ा जनपद के पश्चिमी भाग में स्थित इस तहसील के मुख्यालय भिक्यासैंण नगर में स्थित हैं। इसके पूर्व में चौखुटिया, द्वाराहाट तथा रानीखेत तहसील, पश्चिम में सल्ट तहसील, उत्तर में चमोली जनपद की गैरसैंण तहसील, तथा दक्षिण में नैनीताल जनपद की बेतालघाट तहसील है। .

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भवाली

भवाली या भुवाली उत्तराखण्ड राज्य के नैनीताल जनपद में स्थित एक नगर है। यह कुमाऊँ मण्डल में आता है। शान्त वातावरण और खुली जगह होने के कारण 'भवाली' कुमाऊँ की एक शानदार नगरी है। यहाँ पर फलों की एक मण्डी है। यह एक ऐसा केन्द्र - बिन्दु है जहाँ से काठगोदाम हल्द्वानी और नैनीताल, अल्मोड़ा - रानीखेत भीमताल - सातताल और रामगढ़ - मुक्तेश्वर आदि स्थानों को अलग - अलग मोटर मार्ग जाते हैं। भवाली नगर अपने प्राचीन टीबी सैनिटोरियम के लिए विख्यात है, जिसकी स्थापना १९१२ में हुई थी। चीड़ के पेड़ों की हवा टी.

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भीमताल (नगर)

भीमताल उत्तराखण्ड राज्य के नैनीताल जनपद में स्थित एक नगर है। .

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भीमताल (बहुविकल्पी)

भीमताल उत्तराखण्ड राज्य के नैनीताल जनपद में स्थित एक प्रसिद्ध झील है, जिसके इर्द-गिर्द बसे नगर को भी इसी नाम से जाना जाता है। इससे संबंधित पृष्ठ निम्न हैं.

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भीमताल विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र, उत्तराखण्ड

भीमताल विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र उत्तराखण्ड के 70 निर्वाचन क्षेत्रों में से एक है। नैनीताल जिले में स्थित यह निर्वाचन क्षेत्र अनारक्षित है। यह क्षेत्र साल 2008 के विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र परिसीमन आदेश से अस्तित्व में आया। 2012 में इस क्षेत्र में कुल 86,901 मतदाता थे। .

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महादेवी वर्मा

महादेवी वर्मा (२६ मार्च १९०७ — ११ सितंबर १९८७) हिन्दी की सर्वाधिक प्रतिभावान कवयित्रियों में से हैं। वे हिन्दी साहित्य में छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक मानी जाती हैं। आधुनिक हिन्दी की सबसे सशक्त कवयित्रियों में से एक होने के कारण उन्हें आधुनिक मीरा के नाम से भी जाना जाता है। कवि निराला ने उन्हें “हिन्दी के विशाल मन्दिर की सरस्वती” भी कहा है। महादेवी ने स्वतंत्रता के पहले का भारत भी देखा और उसके बाद का भी। वे उन कवियों में से एक हैं जिन्होंने व्यापक समाज में काम करते हुए भारत के भीतर विद्यमान हाहाकार, रुदन को देखा, परखा और करुण होकर अन्धकार को दूर करने वाली दृष्टि देने की कोशिश की। न केवल उनका काव्य बल्कि उनके सामाजसुधार के कार्य और महिलाओं के प्रति चेतना भावना भी इस दृष्टि से प्रभावित रहे। उन्होंने मन की पीड़ा को इतने स्नेह और शृंगार से सजाया कि दीपशिखा में वह जन-जन की पीड़ा के रूप में स्थापित हुई और उसने केवल पाठकों को ही नहीं समीक्षकों को भी गहराई तक प्रभावित किया। उन्होंने खड़ी बोली हिन्दी की कविता में उस कोमल शब्दावली का विकास किया जो अभी तक केवल बृजभाषा में ही संभव मानी जाती थी। इसके लिए उन्होंने अपने समय के अनुकूल संस्कृत और बांग्ला के कोमल शब्दों को चुनकर हिन्दी का जामा पहनाया। संगीत की जानकार होने के कारण उनके गीतों का नाद-सौंदर्य और पैनी उक्तियों की व्यंजना शैली अन्यत्र दुर्लभ है। उन्होंने अध्यापन से अपने कार्यजीवन की शुरूआत की और अंतिम समय तक वे प्रयाग महिला विद्यापीठ की प्रधानाचार्या बनी रहीं। उनका बाल-विवाह हुआ परंतु उन्होंने अविवाहित की भांति जीवन-यापन किया। प्रतिभावान कवयित्री और गद्य लेखिका महादेवी वर्मा साहित्य और संगीत में निपुण होने के साथ-साथ कुशल चित्रकार और सृजनात्मक अनुवादक भी थीं। उन्हें हिन्दी साहित्य के सभी महत्त्वपूर्ण पुरस्कार प्राप्त करने का गौरव प्राप्त है। भारत के साहित्य आकाश में महादेवी वर्मा का नाम ध्रुव तारे की भांति प्रकाशमान है। गत शताब्दी की सर्वाधिक लोकप्रिय महिला साहित्यकार के रूप में वे जीवन भर पूजनीय बनी रहीं। वर्ष २००७ उनकी जन्म शताब्दी के रूप में मनाया गया।२७ अप्रैल १९८२ को भारतीय साहित्य में अतुलनीय योगदान के लिए ज्ञानपीठ पुरस्कार से इन्हें सम्मानित किया गया था। गूगल ने इस दिवस की याद में वर्ष २०१८ में गूगल डूडल के माध्यम से मनाया । .

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रानीखेत तहसील

रानीखेत तहसील भारत के उत्तराखण्ड राज्य में अल्मोड़ा जनपद की एक तहसील है। अल्मोड़ा जनपद के मध्य भाग में स्थित इस तहसील के मुख्यालय रानीखेत छावनी में स्थित हैं। इसके पूर्व में अल्मोड़ा तहसील, पश्चिम में भिक्यासैंण तहसील, उत्तर में द्वाराहाट तहसील, तथा दक्षिण में नैनीताल जनपद की कोश्याकुटौली तहसील है। .

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रामदत्‍त

रामदत्‍त,भारत के उत्तर प्रदेश की चौथी विधानसभा सभा में विधायक रहे। 1967 उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में इन्होंने उत्तर प्रदेश के नैनीताल जिले के 17 - काशीपुर विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र से प्रजा सोशलिस्‍ट पार्टी की ओर से चुनाव में भाग लिया। .

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रामनगर तहसील

रामनगर तहसील भारत के उत्तराखंड राज्य में नैनीताल जनपद की एक तहसील है। नैनीताल जनपद के पश्चिमी भाग में स्थित इस तहसील के मुख्यालय रामनगर नगर में स्थित हैं। इसके पूर्व में कालाढूंगी तहसील, पश्चिम में उत्तर प्रदेश राज्य का बिजनौर जिला, और गढ़वाल जनपद की कोटद्वार तहसील, उत्तर में नैनीताल और अल्मोड़ा जनपद की सल्ट तहसील, तथा दक्षिण में उधम सिंह नगर जनपद की जसपुर, और काशीपुर तहसील है। .

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रामनगर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र, उत्तराखण्ड

रामनगर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र उत्तराखण्ड के 70 निर्वाचन क्षेत्रों में से एक है। नैनीताल जिले में स्थित यह निर्वाचन क्षेत्र अनारक्षित है। 2012 में इस क्षेत्र में कुल 90,668 मतदाता थे। .

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रुद्रपुर

रुद्रपुर भारत के उत्तराखण्ड राज्य में उधम सिंह नगर जनपद का एक नगर है। जनसंख्या के आधार पर यह कुमाऊँ का दूसरा, जबकि उत्तराखण्ड का पांचवां सबसे बड़ा नगर है। इस नगर की स्थापना कुमाऊँ के राजा रुद्र चन्द ने सोलहवीं शताब्दी में की थी, और तब यह तराई क्षेत्र के लाट (अधिकारी) का निवास स्थल हुआ करता था। यह दिल्ली तथा देहरादून से २५० किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। रुद्रपुर उत्तराखण्ड का एक प्रमुख औद्योगिक और शैक्षणिक केंद्र होने के साथ साथ उधम सिंह नगर जनपद का मुख्यालय भी है। .

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लालकुआँ

लालकुआँ उत्तराखण्ड राज्य के नैनीताल जनपद में स्थित एक नगर है। यह कुमाऊँ मण्डल के अंतर्गत आता है। लालकुआँ बिड़ला समूह की एक बड़ी पेपर मिल (सेंचुरी पल्प एंड पेपर) के लिए प्रसिद्ध है। .

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लालकुआँ तहसील

लालकुआँ तहसील भारत के उत्तराखंड राज्य में नैनीताल जनपद की एक तहसील है। नैनीताल जनपद के दक्षिणी भाग में स्थित इस तहसील के मुख्यालय लालकुआँ नगर में स्थित हैं। यह तहसील पूर्व, पश्चिम, और उत्तर में तीन ओर से हल्द्वानी तहसील से घिरी हुई है, और इसके दक्षिण में उधम सिंह नगर जनपद की किच्छा तहसील है। .

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लालकुआँ विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र, उत्तराखण्ड

लालकुआँ विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र उत्तराखण्ड के 70 निर्वाचन क्षेत्रों में से एक है। नैनीताल जिले में स्थित यह निर्वाचन क्षेत्र अनारक्षित है। यह क्षेत्र साल 2008 के विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र परिसीमन आदेश से अस्तित्व में आया। 2012 में इस क्षेत्र में कुल 90,260 मतदाता थे। .

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लक्ष्‍मण दत्‍त भट्ट

लक्ष्‍मण दत्‍त भट्ट,भारत के उत्तर प्रदेश की दूसरी विधानसभा सभा में विधायक रहे। 1957 उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में इन्होंने उत्तर प्रदेश के नैनीताल जिले के 77 - काशीपुर विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस की ओर से चुनाव में भाग लिया। .

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श्री पूर्णागिरी तहसील

श्री पूर्णागिरी तहसील भारत के उत्तराखंड राज्य में चम्पावत जनपद की एक तहसील है। चम्पावत जनपद के दक्षिणी भाग में स्थित इस तहसील के मुख्यालय टनकपुर नगर में स्थित हैं। ३० अक्टूबर २००३ को उत्तरांचल सरकार के शाशनादेश से चम्पावत तहसील के ८१ ग्रामों के साथ इसका गठन किया गया। इसके पूर्व में नेपाल, पश्चिम में नैनीताल जनपद की हल्द्वानी तहसील, उत्तर में चम्पावत तहसील तथा दक्षिण में उधम सिंह नगर जनपद की खटीमा तहसील है। .

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सितारगंज तहसील

सितारगंज तहसील भारत के उत्तराखंड राज्य में उधम सिंह नगर जनपद की एक तहसील है। उधम सिंह नगर जनपद के पूर्वी भाग में स्थित इस तहसील के मुख्यालय सितारगंज नगर में स्थित हैं। इसके पूर्व में खटीमा तहसील, पश्चिम में किच्छा तहसील, उत्तर में नैनीताल जनपद की हल्द्वानी तहसील, तथा दक्षिण में उत्तर प्रदेश राज्य का पीलीभीत जिला है। .

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संयुक्त प्रान्त आगरा व अवध

संयुक्त प्रान्त आगरा व अवध (अंग्रेजी: United Provinces of Agra and Oudh; उच्चारण: यूनाईटेड प्राॅविन्सेज़ ऑफ ऐग्रा ऐण्ड औध) ब्रिटिश भारत में स्वाधीनता से पूर्व एकीकृत प्रान्त का नाम था जो 22 मार्च 1902 को आगरा व अवध नाम की दो प्रेसीडेंसी को मिलाकर बनाया गया था। उस समय सामान्यतः इसे संयुक्त प्रान्त (अंग्रेजी में यू॰पी॰) के नाम से भी जानते थे। यह संयुक्त प्रान्त लगभग एक शताब्दी 1856 से 1947 तक अस्तित्व में बना रहा। इसका कुल क्षेत्रफल वर्तमान भारतीय राज्यों उत्तर प्रदेश और उत्तराखण्ड के संयुक्त क्षेत्रफल के बराबर था। जिसे आजकल उत्तर प्रदेश या अंग्रेजी में यू॰पी॰ कहते हैं उसमें ब्रिटिश काल के दौरान रामपुर व टिहरी गढ़वाल जैसी स्वतन्त्र रियासतें भी शामिल थीं। 25 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान की घोषणा से एक दिन पूर्व सरदार बल्लभ भाई पटेल ने इन सभी रियासतों को मिलाकर इसे उत्तर प्रदेश नाम दिया था। 3 जनवरी 1921 को जो राज्य पूर्णत: ब्रिटिश भारत का अंग बन गया था उसे स्वतन्त्र भारत में 20वीं सदी के जाते-जाते सन् 2000 में पुन: विभाजित कर उत्तरांचल (और बाद में उत्तराखण्ड) राज्य को स्थापित किया गया। .

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हल्द्वानी

हल्द्वानी, उत्तराखण्ड के नैनीताल ज़िले में स्थित एक नगर है जो काठगोदाम के साथ मिलकर हल्द्वानी-काठगोदाम नगर निगम बनाता है। हल्द्वानी उत्तराखण्ड के सर्वाधिक जनसँख्या वाले नगरों में से है और इसे "कुमाऊँ का प्रवेश द्वार" भी कहा जाता है। कुमाऊँनी भाषा में इसे "हल्द्वेणी" भी कहा जाता है क्योंकि यहाँ "हल्दू" (कदम्ब) प्रचुर मात्रा में मिलता था। सन् १८१६ में गोरखाओं को परास्त करने के बाद गार्डनर को कुमाऊँ का आयुक्त नियुक्त किया गया। बाद में जॉर्ज विलियम ट्रेल ने आयुक्त का पदभार संभाला और १८३४ में "हल्दु वनी" का नाम हल्द्वानी रखा। ब्रिटिश अभिलेखों से हमें ये ज्ञात होता है कि इस स्थान को १८३४ में एक मण्डी के रूप में उन लोगों के लिए बसाया गया था जो शीत ऋतु में भाभर आया करते थे। .

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हल्द्वानी तहसील

हल्द्वानी तहसील भारत के उत्तराखंड राज्य में नैनीताल जनपद की एक तहसील है। नैनीताल जनपद के दक्षिण-पूर्वी भाग में स्थित इस तहसील के मुख्यालय हल्द्वानी नगर में स्थित हैं। इसके पूर्व में चम्पावत जनपद की श्री पूर्णागिरी तहसील, पश्चिम में कालाढूंगी तहसील, उत्तर में नैनीताल और धारी तहसील, तथा दक्षिण में लालकुआँ तहसील और उधम सिंह नगर जनपद की गदरपुर, किच्छा, सितारगंज तथा खटीमा तहसील है। .

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हल्द्वानी में यातायात

कुमाऊँ का प्रवेश द्वार, हल्द्वानी उत्तराखण्ड के नैनीताल ज़िले में स्थित हल्द्वानी राज्य के सर्वाधिक जनसँख्या वाले नगरों में से है। इसे "कुमाऊँ का प्रवेश द्वार" भी कहा जाता है। नगर के यातायात साधनों में २ रेलवे स्टेशन, २ बस स्टेशन तथा एक अधिकृत टैक्सी स्टैंड है। इनके अतिरिक्त नगर से २८ किमी की दूरी पर एक घरेलू हवाई अड्डा स्थित है, और नगर में एक अंतर्राज्यीय बस अड्डा निर्माणाधीन है। .

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हल्द्वानी रेलवे स्टेशन

हल्द्वानी रेलवे स्टेशन उत्तराखंड राज्य में नैनीताल जनपद के हल्द्वानी नगर का मुख्य रेलवे स्टेशन है। रेलवे स्टेशन का स्टेशन कोड एच.डी.डब्ल्यू (HDW) है, और यह भारतीय रेलवे के पूर्वोत्तर रेलवे क्षेत्र के इज्जतनगर रेलवे डिवीजन के मुख्यालय से 99 किमी दूर है। स्टेशन पर 3 प्लेटफार्म हैं और इन पर डीजल इंजन, सिंगल ब्रॉड गेज रेलवे लाइन का उपयोग करते हैं। समुद्र तल से इसकी ऊंचाई 443 मीटर है तथा निकटतम हवाई अड्डा 28 किमी की दूरी पर पंतनगर में है। .

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हल्द्वानी विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र, उत्तराखण्ड

हल्द्वानी विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र उत्तराखण्ड के 70 निर्वाचन क्षेत्रों में से एक है। नैनीताल जिले में स्थित यह निर्वाचन क्षेत्र अनारक्षित है। 2012 में इस क्षेत्र में कुल 114,739 मतदाता थे। .

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हल्द्वानी का इतिहास

कुमाऊँ का प्रवेश द्वार, हल्द्वानी उत्तराखण्ड के नैनीताल ज़िले में स्थित हल्द्वानी राज्य के सर्वाधिक जनसँख्या वाले नगरों में से है। इसे "कुमाऊँ का प्रवेश द्वार" भी कहा जाता है। .

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हव्यक

हव्यक ब्राह्मण हिन्दु पंच द्राविड वैदिक ब्राह्मणों में एक है। इन्हे "हवीका", "हैगा" तथा "हवीगा" नाम से भी जाना जाता है। वर्तमान में अधिकांश हव्यक भारत का कर्नाटक राज्य के निवासी हैं। हव्यक, आदि शंकराचार्य द्वारा प्रतिपादित अद्वैत दर्शन को मान्ते हैं। .

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जसपुर तहसील

जसपुर तहसील भारत के उत्तराखंड राज्य में उधम सिंह नगर जनपद की एक तहसील है। उधम सिंह नगर जनपद के पश्चिमी भाग में स्थित इस तहसील के मुख्यालय जसपुर नगर में स्थित हैं। इसके पूर्व में काशीपुर तहसील, पश्चिम में उत्तर प्रदेश राज्य का बिजनौर जिला, उत्तर में नैनीताल जनपद की रामनगर तहसील, तथा दक्षिण में उत्तर प्रदेश राज्य का मुरादाबाद जिला है। .

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जिम कॉर्बेट

जेम्स ए. जिम कार्बेट (25 जुलाई 1875 - 19 अप्रैल 1955) आयरिश मूल के भारतीय लेखक व दार्शनिक थे। उन्होंने मानवीय अधिकारों के लिए संघर्ष किया तथा संरक्षित वनों के आंदोलन का भी प्रारंभ किया। उन्होंने नैनीताल के पास कालाढूंगी में आवास बनाया था। यह स्थान आज भी यहां आने वाले प्रर्यटकों को उस व्यक्ति के जीवन का ज्ञान कराता है जो न केवल एक शिकारी था बल्कि एक संरक्षक, चमड़े का कार्य करने वाला, जंगली जानवरों का फ़ोटो खीचने वाला तथा बढ़ई था। इन्होने उत्तराखण्ड के गढ़वाल जिले मे अनेक आदमखोर बाघों को मारा था जिनमें रुद्रप्रयाग का आदमखोर तेंदुआ भी शामिल था। मगर बाद मे उनके विचार पलटने से और बाघों की घटती संख्या देखकर इन्होने सिर्फ छायाचित्रकारिता ही अपनाई। जिम कार्बेट आजीवन अविवाहित रहे। उन्हीं की तरह उनकी बहन ने भी विवाह नहीं किया। दोनों भाई-बहन सदैव साथ-साथ रहे और एक दूसरे का दु:ख बाँटते रहे। कुमाऊँ तथा गढ़वाल में जब कोई आदमखोर शेर आ जाता था तो जिम कार्बेट को बुलाया जाता था। जिम कार्बेट वहाँ जाकर सबकी रक्षा कर और आदमखोर शेर को मारकर ही लौटते थे। जिम कार्बेट एक कुशल शिकारी थे। वे शिकार करनें में यहाँ दक्ष थे, वहीं एक अत्यन्त प्रभावशील लेखक भी थे। शिकार-कथाओं के कुशल लेखकों में जिम कार्बेट का नाम विश्व में अग्रणीय है। उनकी 'भाई इण्डिया' पुस्तक बहुत चर्चित है। भारत-प्रेम उनका इतना अधिक था कि वे उसके यशगान में लग रहते थे। कुमाऊँ और गढ़वाल उन्हें बहुत प्रिय था। ऐसे कुमाऊँ - गढ़वाल के हमदर्द व्यक्ति के नाम पर गढ़वाल-कुमाऊँ की धरती पर स्थापित पार्क का होना उन्हें श्रद्धा के फूल चढ़ाने के ही बराबर है। अत: जिम कार्बेट के नाम पर यह जो पार्क बना है, उससे हमारा राष्ट्र बी गौरान्वित हुआ है, जिम कार्बेट के प्रति यह कुमाऊँ-गढ़वाल और भारत की सच्ची श्रद्धांजलि है। इस लेखक ने भारत का नाम बढ़ाया है। आज विश्व में उनका नाम प्रसिद्ध शिकारी के रूप में आदर से लिया जाता है। .

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जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान

जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान भारत का सबसे पुराना राष्ट्रीय पार्क है और १९३६ में लुप्तप्राय बंगाल बाघ की रक्षा के लिए हैंली नेशनल पार्क के रूप में स्थापित किया गया था। यह उत्तराखण्ड के नैनीताल जिले में स्थित है और इसका नाम जिम कॉर्बेट के नाम पर रखा गया था जिन्होंने इसकी स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। बाघ परियोजना पहल के तहत आने वाला यह पहला पार्क था। यह एक गौरवशाली पशु विहार है। यह रामगंगा की पातलीदून घाटी में १३१८.५४ वर्ग किलोमीटर में बसा हुआ है जिसके अंतर्गत ८२१.९९ वर्ग किलोमीटर का जिम कॉर्बेट व्याघ्र संरक्षित क्षेत्र भी आता है। पार्क में उप-हिमालयन बेल्ट की भौगोलिक और पारिस्थितिक विशेषताएं हैं। यह एक इकोटोरिज़्म गंतव्य भी है और यहाँ पौधों की 488 प्रजातियां और जीवों की एक विविधता है। पर्यटन की गतिविधियों में वृद्धि और अन्य समस्याएं पार्क के पारिस्थितिक संतुलन के लिए एक गंभीर चुनौती पेश कर रहीं हैं। कॉर्बेट एक लंबे समय के लिए पर्यटकों और वन्यजीव प्रेमियों के लिए अड्डा रहा है। कोर्बेट टाइगर रिजर्व के चयनित क्षेत्रों में ही पर्यटन गतिविधि को अनुमति दी जाती है ताकि लोगों को इसके शानदार परिदृश्य और विविध वन्यजीव देखने का मौका मिले। हाल के वर्षों में यहां आने वाले लोगों की संख्या में नाटकीय रूप से वृद्धि हुई है। वर्तमान में, हर मौसम में ७०,००० से अधिक आगंतुक पार्क में आते हैं। कॉर्बेट नेशनल पार्क में ५२०.८ वर्ग किमी (२०१.१ वर्ग मील) में पहाड़ी, नदी के बेल्ट, दलदलीय गड्ढे, घास के मैदान और एक बड़ी झील शामिल है। ऊंचाई १,३०० से 4,००० फीट (४०० से १,२२० मीटर) तक होती है। यहाँ शीतकालीन रातें ठंडी होती हैं लेकिन दिन धूपदार और गरम होते हैं। यहाँ जुलाई से सितंबर तक बारिश होती है। घने नम पर्णपाती वन में मुख्य रूप से साल, हल्दु, पीपल, रोहिनी और आम के पेड़ होते हैं। जंगल पार्क का लगभग 73% हिस्सा घेरते हैं, इस क्षेत्र में 10% घास के मैदान होते हैं। यहाँ ११० पेड़ की पप्रजातियाँ, ५० स्तनधारियों की प्रजातियाँ, ५८० पक्षी प्रजातियां और २५ सरीसृप प्रजातियां हैं। .

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ज्योलिकोट

ज्योलिकोट उत्तराखण्ड के नैनीताल जिले में स्थित है। ज्योलिकोट की खुबसूरती पर्यटकों को अपनी तरफ आकर्षित करती है। यहां पर दिन के समय गर्मी और रात के समय ठंड पडती है। आसमान आमतौर पर साफ और रात तारों भरी होती है। कहा जाता है कि बहुत पहले श्री अरबिंदो और स्वामी विवेकानन्द भी यहां की यात्रा कर चुके हैं। पर्यटक यहां के गांवों के त्योहारों और उत्सवों का आनंद भी ले सकते हैं। यहां से कुछ ही दूरी पर कुमाऊं की झील, बिनसर, कौसानी, रानीखेत और कार्बेट नेशनल पार्क स्थित हैं। छोटी या एक दिन की यात्रा के लिए ज्योलिकोट सबसे आदर्श पर्यटन स्थल माना जाता है। ज्योलिकोट में अनेक पहाडियां हैं जो एक-दूसरे से जुडी हुई हैं। इन पहाडियों में अनेक गुप्त रास्ते हैं। ब्रिटिश राज के समय इन रास्तों का प्रयोग संदेशों के आदान-प्रदान के लिए किया जाता है। यहां पर अनेक हिल रिजार्ट भी हैं। इन रिजार्ट में ठहरने और पहाडों में घूमने के अलावा भी यहां पर करने के लिए बहुत कुछ है। ज्योलिकोट में भारत का सबसे पुराना 18 होल्स का गोल्फ कोर्स है। इसके अलावा नैनी झील और सत्तल में नौकायन का आनंद लिया जा सकता है। किलबरी में बर्फ की सुन्दर चोटियों को देखा जा सकता है। पंगोट, नोकचैतल और बिनसर में खूबसूरत पक्षियों को देखा जा सकता है। इन सब के अलावा कुमाऊं की पहाडियों में घूमना भी अच्छा विकल्प है। .

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जैंती तहसील

जैंती तहसील भारत के उत्तराखण्ड राज्य में अल्मोड़ा जनपद की एक तहसील है। अल्मोड़ा जनपद के पूर्वी भाग में स्थित इस तहसील के मुख्यालय जैंती ग्राम में स्थित हैं। इसके पूर्व में भनोली तथा चम्पावत जनपद की पाटी तहसील, पश्चिम में नैनीताल जनपद की नैनीताल तहसील, उत्तर में अल्मोड़ा तहसील, तथा दक्षिण में नैनीताल जनपद की धारी तहसील है। .

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खैरना

खैरना उत्तराखंड राज्य के नैनीताल जिले में एक छोटा सा नगर है, जो इसी नाम के पुल के दोनों ओर बस गया। खैरना पुल कोसी नदी पर ब्रिटिश काल के समय से ही स्थित है। खैरना मछिलयों के शिकार के लिए विख्यात है। .

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गदरपुर तहसील

गदरपुर तहसील भारत के उत्तराखंड राज्य में उधम सिंह नगर जनपद की एक तहसील है। उधम सिंह नगर जनपद के मध्य भाग में स्थित इस तहसील के मुख्यालय गदरपुर नगर में स्थित हैं। इसके पूर्व में किच्छा तहसील, पश्चिम में बाजपुर तहसील, उत्तर में नैनीताल जनपद की कालाढूंगी तहसील, तथा दक्षिण में उत्तर प्रदेश राज्य का रामपुर जिला है। .

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गीत बैठकी

गीत बैठकी खड़ी होली या गीत बैठकी उत्तराखंड के कुमाऊँ मंडल की सरोवर नगरी नैनीताल और अल्मोड़ा जिले में होली के अवसर पर आयोजित की जाती हैं। यहाँ नियत तिथि से काफी पहले ही होली की मस्ती और रंग छाने लगते हैं। इस रंग में सिर्फ अबीर-गुलाल का टीका ही नहीं होता बल्कि बैठकी होली और खड़ी होली गायन की शास्त्रीय परंपरा भी शामिल होती है। बरसाने की लठमार होली के बाद अपनी सांस्कृतिक विशेषता के लिए कुमाऊंनी होली को याद किया जाता है। वसंत के आगमन पर हर ओर खिले फूलों के रंगों और संगीत की तानों का ये अनोखा संगम दर्शनीय होता है। शाम के समय कुमाऊं के घर घर में बैठक होली की सुरीली महफिलें जमने लगती है। गीत बैठकी में होली पर आधारित गीत घर की बैठक में राग रागनियों के साथ हारमोनियम और तबले पर गाए जाते हैं। इन गीतों में मीराबाई से लेकर नज़ीर और बहादुर शाह ज़फ़र की रचनाएँ सुनने को मिलती हैं। गीत बैठकी में जब रंग छाने लगता है तो बारी बारी से हर कोई छोड़ी गई तान उठाता है और अगर साथ में भांग का रस भी छाया तो ये सिलसिला कभी कभी आधी रात तक तो कभी सुबह की पहली किरण फूटने तक चलता रहता है। होली की ये परंपरा मात्र संगीत सम्मेलन नहीं बल्कि एक संस्कार भी है। ये बैठकें आशीर्वाद के साथ संपूर्ण होती हैं जिसमें मुबारक हो मंजरी फूलों भरी...या ऐसी होली खेले जनाब अली...जैसी ठुमरियाँ गई जाती हैं। गीत बैठकी की महिला महफ़िलें भी होती हैं। पुरूष महफिलों में जहाँ ठुमरी और ख़याल गाए जाते हैं वहीं महिलाओं की महफिलों का रुझान लोक गीतों की ओर होता है। इनमें नृत्य संगीत तो होता ही है, वे स्वांग भी रचती हैं और हास्य की फुहारों, हंसी के ठहाकों और सुर लहरियों के साथ संस्कृति की इस विशिष्टता में नए रोचक और दिलकश रंग भरे जाते हैं। देवर भाभी के हंसी मज़ाक से जुड़े गी तो होते ही हैं राजनीति और प्रशासन पर व्यंग्य भी होता है। होली गाने की ये परंपरा सिर्फ कुमाऊं अंचल में ही देखने को मिलती है।” इसकी शुरूआत यहां कब और कैसे हुई इसका कोई ऐतिहासिक या लिखित लेखाजोखा नहीं है। कुमाऊं के प्रसिद्द जनकवि गिरीश गिर्दा ने होली बैठकी के सामाजिक शास्त्रीय संदर्भों और इस पर इस्लामी संस्कृति और उर्दू के असर के बारे में गहराई से अध्ययन किया है। वो कहते हैं कि “यहां की होली में अवध से लेकर दरभंगा तक की छाप है। राजे-रजवाड़ों का संदर्भ देखें तो जो राजकुमारियाँ यहाँ ब्याह कर आईं वे अपने साथ वहाँ के रीति रिवाज भी साथ लाईं। ये परंपरा वहां भले ही खत्म हो गई हो लेकिन यहां आज भी कायम हैं। यहां की बैठकी होली में तो आज़ादी के आंदोलन से लेकर उत्तराखंड आंदोलन तक के संदर्भ पाए जाते हैं।” .

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इन्‍द्रलाल

इन्‍द्रलाल,भारत के उत्तर प्रदेश की चौथी विधानसभा सभा में विधायक रहे। 1967 उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में इन्होंने उत्तर प्रदेश के नैनीताल जिले के 16 - हलद्वानी विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस की ओर से चुनाव में भाग लिया। .

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काठगोदाम

काठगोदाम भारत के उत्तराखण्ड राज्य में स्थित हल्द्वानी नगर के अंतर्गत स्थित एक क्षेत्र है। इसे ऐतिहासिक तौर पर कुमाऊँ का द्वार कहा जाता रहा है। यह छोटा सा नगर पहाड़ के पाद प्रदेश में बसा है। गौला नदी इसके दायें से होकर हल्द्वानी बाजार की ओर बढ़ती है। पूर्वोतर रेलवे का यह अन्तिम स्टेशन है। यहाँ से बरेली, लखनऊ तथा आगरा के लिए छोटी लाइन की रेल चलती है। काठगोदाम से नैनीताल, अल्मोड़ा, रानीखेत और पिथौरागढ़ के लिए केएमओयू की बसें जाती है। कुमाऊँ के सभी अंचलों के लिए यहाँ से बसें जाती हैं। १९०१ में काठगोदाम ३७५ की जनसंख्या वाला एक छोटा सा गाँव था। १९०९ तक इसे रानीबाग़ के साथ जोड़कर नोटिफ़िएड एरिया घोषित कर दिया गया। काठगोदाम-रानीबाग़ १९४२ तक स्वतंत्र नगर के रूप में उपस्थित रहा, जिसके बाद इसे हल्द्वानी नोटिफ़िएड एरिया के साथ जोड़कर नगर पालिका परिषद् हल्द्वानी-काठगोदाम का गठन किया गया। २१ मई २०११ को हल्द्वानी-काठगोदाम को नगर पालिका परिषद से नगर निगम घोषित किया गया, और फिर इसके विस्तार को देखते हुए इसका नाम बदलकर नगर निगम हल्द्वानी कर दिया गया। .

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कालाढूँगी विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र, उत्तराखण्ड

कालाढूँगी विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र उत्तराखण्ड के 70 निर्वाचन क्षेत्रों में से एक है। नैनीताल जिले में स्थित यह निर्वाचन क्षेत्र अनारक्षित है। यह क्षेत्र साल 2008 के विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र परिसीमन आदेश से अस्तित्व में आया। 2012 में इस क्षेत्र में कुल 113,325 मतदाता थे। .

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कालाढूंगी

कालाढूंगी उत्तराखण्ड राज्य के नैनीताल जनपद में स्थित एक नगर है। यह नगर हल्द्वानी-रामनगर तथा बाजपुर-नैनीताल सड़कों के चौराहे पर हल्द्वानी से २६ किलोमीटर, नैनीताल से ३० किलोमीटर तथा बाजपुर से १९ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। कालाढूंगी नैनीताल जनपद की ८ तहसीलों में से एक भी है। कालाढूंगी जिम कार्बेट का शीतकालीन आवास भी था। अब उनके कालाढूंगी स्थित बंगले को म्यूजियम बना दिया गया है। उत्तराखंड के प्रसिद्ध शिकारी और बाद में जिम कार्बेट वन्य जीव अभ्यारण्य की स्थापना के हिमायती जिम कार्बेट ने अपनी पुस्तकों "कुमाऊं के आदमखोर" " रुद्रप्रयाग का आदमखोर तेंदुआ" "कहानी जंगल की" "माई इंडिया" आदि पुस्तकों में कालाढूंगी का विवरण दिया है। उनके विवरणों में लिखा है कि कालाढूंगी पर्वतीय ढालों के अंत में स्थित गांव था। जो कि नैनीताल की कठोर सर्दियों से बचने का उपयुक्त स्थान था, क्योंकि यहां की जलवायु तराई के इलाकों की भांति उष्ण थी। खेती हेतु पर्याप्त जमीन थी। चारों ओर घने जंगल थे। जो विविध वन्यजीवों से भरे थे। जहां अक्सर शिकारी अपने भोजन व मनोरंजन हेतु शिकार करने जाते थे। कभी कभी एक मील से भी पास कोई बाघ या तेंदुआ विचरण करता पाया जाता था। जो स्थानीय निवासियों को कोई हानि पहुंचाए बिना फिर जंगल में भाग जाते थे। .

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कालाढूंगी तहसील

कालाढूंगी तहसील भारत के उत्तराखंड राज्य में नैनीताल जनपद की एक तहसील है। नैनीताल जनपद के दक्षिण-पश्चिमी भाग में स्थित इस तहसील के मुख्यालय कालाढूंगी नगर में स्थित हैं। इसके पूर्व में हल्द्वानी तहसील, पश्चिम में रामनगर तहसील, उत्तर में नैनीताल, तथा दक्षिण में उधम सिंह नगर जनपद की गदरपुर, तथा बाजपुर तहसील है। .

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काशीपुर तहसील

काशीपुर तहसील भारत के उत्तराखंड राज्य में उधम सिंह नगर जनपद की एक तहसील है। उधम सिंह नगर जनपद के पश्चिमी भाग में स्थित इस तहसील के मुख्यालय काशीपुर नगर में स्थित हैं। इसके पूर्व में बाजपुर तहसील, पश्चिम में जसपुर तहसील, उत्तर में नैनीताल जनपद की रामनगर तहसील, तथा दक्षिण में उत्तर प्रदेश राज्य का मुरादाबाद जिला है। .

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काशीपुर का भूगोल

काशीपुर, भारत के उत्तराखण्ड राज्य के उधम सिंह नगर जनपद का एक महत्वपूर्ण पौराणिक एवं औद्योगिक शहर है। .

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काशीपुर, उत्तराखण्ड

काशीपुर भारत के उत्तराखण्ड राज्य के उधम सिंह नगर जनपद का एक महत्वपूर्ण पौराणिक एवं औद्योगिक शहर है। उधम सिंह नगर जनपद के पश्चिमी भाग में स्थित काशीपुर जनसंख्या के मामले में कुमाऊँ का तीसरा और उत्तराखण्ड का छठा सबसे बड़ा नगर है। भारत की २०११ की जनगणना के अनुसार काशीपुर नगर की जनसंख्या १,२१,६२३, जबकि काशीपुर तहसील की जनसंख्या २,८३,१३६ है। यह नगर भारत की राजधानी, नई दिल्ली से लगभग २४० किलोमीटर, और उत्तराखण्ड की अंतरिम राजधानी, देहरादून से लगभग २०० किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। काशीपुर को पुरातन काल से गोविषाण या उज्जयनी नगरी भी कहा जाता रहा है, और हर्ष के शासनकाल से पहले यह नगर कुनिन्दा, कुषाण, यादव, और गुप्त समेत कई राजवंशों के अधीन रहा है। इस जगह का नाम काशीपुर, चन्दवंशीय राजा देवी चन्द के एक पदाधिकारी काशीनाथ अधिकारी के नाम पर पड़ा, जिन्होंने इसे १६-१७ वीं शताब्दी में बसाया था। १८ वीं शताब्दी तक यह नगर कुमाऊँ राज्य में रहा, और फिर यह नन्द राम द्वारा स्थापित काशीपुर राज्य की राजधानी बन गया। १८०१ में यह नगर ब्रिटिश शासन के अंतर्गत आया, जिसके बाद इसने १८१४ के आंग्ल-गोरखा युद्ध में कुमाऊँ पर अंग्रेजों के कब्जे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। काशीपुर को बाद में कुमाऊँ मण्डल के तराई जिले का मुख्यालय बना दिया गया। ऐतिहासिक रूप से, इस क्षेत्र की अर्थव्यस्था कृषि तथा बहुत छोटे पैमाने पर लघु औद्योगिक गतिविधियों पर आधारित रही है। काशीपुर को कपड़े और धातु के बर्तनों का ऐतिहासिक व्यापार केंद्र भी माना जाता है। आजादी से पहले काशीपुर नगर में जापान से मखमल, चीन से रेशम व इंग्लैंड के मैनचेस्टर से सूती कपड़े आते थे, जिनका तिब्बत व पर्वतीय क्षेत्रों में व्यापार होता था। बाद में प्रशासनिक प्रोत्साहन और समर्थन के साथ काशीपुर शहर के आसपास तेजी से औद्योगिक विकास हुआ। वर्तमान में नगर के एस्कॉर्ट्स फार्म क्षेत्र में छोटी और मझोली औद्योगिक इकाइयों के लिए एक इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल एस्टेट निर्माणाधीन है। भौगोलिक रूप से काशीपुर कुमाऊँ के तराई क्षेत्र में स्थित है, जो पश्चिम में जसपुर तक तथा पूर्व में खटीमा तक फैला है। कोशी और रामगंगा नदियों के अपवाह क्षेत्र में स्थित काशीपुर ढेला नदी के तट पर बसा हुआ है। १८७२ में काशीपुर नगरपालिका की स्थापना हुई, और २०११ में इसे उच्चीकृत कर नगर निगम का दर्जा दिया गया। यह नगर अपने वार्षिक चैती मेले के लिए प्रसिद्ध है। महिषासुर मर्दिनी देवी, मोटेश्वर महादेव तथा मां बालासुन्दरी के मन्दिर, उज्जैन किला, द्रोण सागर, गिरिताल, तुमरिया बाँध तथा गुरुद्वारा श्री ननकाना साहिब काशीपुर के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल हैं। .

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किच्छा तहसील

किच्छा तहसील भारत के उत्तराखंड राज्य में उधम सिंह नगर जनपद की एक तहसील है। उधम सिंह नगर जनपद के मध्य भाग में स्थित इस तहसील के मुख्यालय किच्छा नगर में स्थित हैं। इसके पूर्व में सितारगंज तहसील, पश्चिम में गदरपुर तहसील, उत्तर में नैनीताल जनपद की लालकुआँ तथा हल्द्वानी तहसील, तथा दक्षिण में उत्तर प्रदेश राज्य का बरेली जिला है। .

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कुमाऊँ मण्डल

यह लेख कुमाऊँ मण्डल पर है। अन्य कुमाऊँ लेखों के लिए देखें कुमांऊॅं उत्तराखण्ड के मण्डल कुमाऊँ मण्डल भारत के उत्तराखण्ड राज्य के दो प्रमुख मण्डलों में से एक हैं। अन्य मण्डल है गढ़वाल। कुमाऊँ मण्डल में निम्न जिले आते हैं:-.

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कुमाऊँ राज्य

कुमाऊँ राज्य, जिसे कूर्मांचल भी कहा जाता था, चन्द राजवंश द्वारा शासित एक पर्वतीय राज्य था, जिसका विस्तार वर्तमान भारत के उत्तराखण्ड राज्य के कुमाऊँ क्षेत्र में था। राज्य की स्थापना ७०० में सोम चन्द ने की थी। प्रारम्भ में यह केवल वर्तमान चम्पावत जनपद तक ही सीमित था। उसके बाद सोम चन्द ने सुई पर आक्रमण कर उसे अपने राज्य में मिला लिया। सर्वप्रथम राजा त्रिलोक चन्द ने छखाता पर आक्रमण कर पश्चिम की ओर राज्य का विस्तार किया। उसके बाद गरुड़ ज्ञान चन्द ने तराई-भाभर, उद्यान चन्द ने चौगरखा, रत्न चन्द ने सोर और कीर्ति चन्द ने बारहमण्डल, पाली तथा फल्दाकोट क्षेत्रों को राज्य में मिला लिया। १५६३ में बालो कल्याण चन्द ने राजधानी चम्पावत से आलमनगर स्थानांतरित कर नगर का नाम अल्मोड़ा रखा, और गंगोली तथा दानपुर पर अधिकार स्थापित किया। उनके बाद उनके पुत्र रुद्र चन्द ने अस्कोट और सिरा को पराजित कर राज्य को उसके चरम पर पहुंचा दिया। सत्रहवीं शताब्दी में कुमाऊँ में चन्द शासन का स्वर्ण काल चला, परन्तु अट्ठारवीं शताब्दी आते आते उनकी शक्ति क्षीण होने लगी। १७४४ में रोहिल्लों के तथा १७७९ में गढ़वाल के हाथों पराजित होने के बाद चन्द राजाओं की शक्ति पूरी तरह बिखर गई थी। फलतः गोरखों ने अवसर का लाभ उठाकर हवालबाग के पास एक साधारण मुठभेड़ के बाद सन्‌ १७९० ई. में अल्मोड़ा पर अपना अधिकार कर लिया। .

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कुमाऊँ विश्वविद्यालय

कुमाऊँ विश्वविद्यालय नैनीताल, उत्तराखण्ड में स्थित है। विश्वविद्यालय की स्थापना १ मार्च १९७३ में उप्र राज्य अधिनियम के अन्तर्गत हुई थी। विश्वविद्यालय के दो कैम्पस है नैनीताल और अल्मोड़ा में और पूरे कुमाऊँ क्षेत्र में २७ महाविद्यालय इससे संबद्धीकृत हैं। भीमताल में एक और कैम्पस बनाया जा रहा है, जो व्यवसायिक, तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा की माँग को पूरा करेगा। उत्कृष्ट शिक्षण और उच्च गुणवत्ता शोध के साथ-साथ चौतरफा विकास इस विध्वविद्यालय का ध्येय है और मुख्य बल कुमाऊँ क्षेत्र पर है। .

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कुमाऊँ विश्वविद्यालय से सम्बद्ध महाविद्यालयों की सूची

कुमाऊं विश्वविद्यालय का प्रतीक चिह्न निम्नलिखित सूची कुमाऊं विश्वविद्यालय, नैनीताल से सम्बद्ध राजकीय महाविद्यालयों की है: .

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कुमाऊँनी भाषा

कुमांऊँनी भारत के उत्तराखण्ड राज्य के अन्तर्गत कुमाऊँ क्षेत्र में बोली जाने वाली एक बोली है। इस बोली को हिन्दी की सहायक पहाड़ी भाषाओं की श्रेणी में रखा जाता है। कुमांऊँनी भारत की ३२५ मान्यता प्राप्त भाषाओं में से एक है और २६,६०,००० (१९९८) से अधिक लोगों द्वारा बोली जाती है। उत्तराखण्ड के निम्नलिखित जिलों - अल्मोड़ा, नैनीताल, पिथौरागढ़, बागेश्वर, चम्पावत, ऊधमसिंह नगर के अतिरिक्त असम, बिहार, दिल्ली, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और पंजाब, तथा हिमाचल प्रदेश और नेपाल के कुछ क्षेत्रों में भी बोली जाती है। .

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कुमाऊँनी लोग

कुमाऊँनी लोग, भारतवर्ष के उत्तराखण्ड राज्य के अन्तर्गत कुमांऊॅं क्षेत्र के लोगों को कहते हैं। इनमें वे सभी लोग सम्मिलित हैं जो कुमाऊँनी भाषा या इससे सम्बन्धित उपभाषाएें बोलते हैं। कुमांऊँनी लोग उत्तराखण्ड प्रदेश के अल्मोड़ा, उधमसिंहनगर, चम्पावत, नैनीताल, पिथौरागढ़ और बागेश्वर जिलों के निवासी हैं। भारत की सशस्त्र सेनाएँ और केन्द्रीय पुलिस संगठन, कुमाऊँ के लोगों के लिए रोजगार का प्रमुख स्रोत रहे हैं। भारत की सीमाओं की रक्षा करने में कुमाऊँ रेजीमेंट की उन्नीस वाहिनियाँ कुमाऊँ के लोगों का स्पष्ट प्रतिनिधित्व करतीं हैं। .

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कोटद्वार तहसील

कोटद्वार तहसील भारत के उत्तराखंड राज्य में गढ़वाल जनपद की एक तहसील है। गढ़वाल जनपद के दक्षिणी भाग में स्थित इस तहसील के मुख्यालय कोटद्वार नगर में स्थित हैं। इसके पूर्व में नैनीताल जनपद की रामनगर तहसील तथा अल्मोड़ा जनपद की सल्ट तहसील, पश्चिम में हरिद्वार जनपद की लक्सर तहसील, उत्तर में लैंसडौन, सतपुली और धूमाकोट तहसील, तथा दक्षिण में उत्तर प्रदेश राज्य का बिजनौर जिला है। .

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कोश्याकुटौली तहसील

कोश्याकुटौली तहसील भारत के उत्तराखंड राज्य में नैनीताल जनपद की एक तहसील है। नैनीताल जनपद के उत्तरी भाग में स्थित इस तहसील के मुख्यालय कोश्याकुटौली कस्बे में स्थित हैं। इसके पूर्व तथा दक्षिण में नैनीताल, पश्चिम में अल्मोड़ा जनपद की रानीखेत तहसील, उत्तर में बेतालघाट, और अल्मोड़ा जनपद की अल्मोड़ा तहसील है। .

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अल्मोड़ा तहसील

अल्मोड़ा तहसील भारत के उत्तराखण्ड राज्य में अल्मोड़ा जनपद की एक तहसील है। अल्मोड़ा जनपद के मध्य भाग में स्थित इस तहसील के मुख्यालय अल्मोड़ा नगर में स्थित हैं। इसके पूर्व में भनोली, जैंती तथा पिथौरागढ़ जनपद की गंगोलीहाट तहसील, पश्चिम में सोमेश्वर, द्वाराहाट तथा रानीखेत तहसील, उत्तर में बागेश्वर जनपद की बागेश्वर तहसील, तथा दक्षिण में नैनीताल जनपद की नैनीताल तहसील है। .

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अल्मोड़ा जिला

अल्मोड़ा भारत के उत्तराखण्ड नामक राज्य में कुमांऊँ मण्डल के अन्तर्गत एक जिला है। इस जिले का मुख्यालय भी अल्मोड़ा में ही है। अल्मोड़ा अपनी सांस्कृतिक विरासत, हस्तकला, खानपान और ठेठ पहाड़ी सभ्यता व संस्कृति के लिए प्रसिद्ध है। .

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अल्मोड़ा के पर्यटन स्थल

अल्मोड़ा भारत के उत्तराखण्ड राज्य के कुमाऊँ मण्डल में स्थित एक नगर एवम् जनपद है। यह कुमाऊँ पर शासन करने वाले चन्दवंशीय राजाओं की राजधानी भी रहा है। इसके पूर्व में पिथौरागढ़ जनपद, पश्चिम में गढ़वाल क्षेत्र, उत्तर में बागेश्वर जनपद और दक्षिण में नैनीताल जनपद है। .

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उत्तर प्रदेश राज्य राजमार्ग १२

उत्तर प्रदेश राज्य राजमार्ग १२ भारत के उत्तर प्रदेश राज्य का एक राज्य राजमार्ग है। १४६.९८ किलोमीटर लम्बा यह राजमार्ग कैराना से शुरू होकर रेहर तक जाता है। इसे पानीपत-खटीमा मार्ग भी कहा जाता है। यह मुज़फ़्फ़र नगर और बिजनौर जिलों से होकर गुजरता है। सन् २००० में उत्तर प्रदेश के विभाजन से पहले यह राजमार्ग रेहर से आगे नैनीताल जिले के खटीमा नगर तक जाता था। .

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उत्तराखण्ड

उत्तराखण्ड (पूर्व नाम उत्तरांचल), उत्तर भारत में स्थित एक राज्य है जिसका निर्माण ९ नवम्बर २००० को कई वर्षों के आन्दोलन के पश्चात भारत गणराज्य के सत्ताइसवें राज्य के रूप में किया गया था। सन २००० से २००६ तक यह उत्तरांचल के नाम से जाना जाता था। जनवरी २००७ में स्थानीय लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए राज्य का आधिकारिक नाम बदलकर उत्तराखण्ड कर दिया गया। राज्य की सीमाएँ उत्तर में तिब्बत और पूर्व में नेपाल से लगी हैं। पश्चिम में हिमाचल प्रदेश और दक्षिण में उत्तर प्रदेश इसकी सीमा से लगे राज्य हैं। सन २००० में अपने गठन से पूर्व यह उत्तर प्रदेश का एक भाग था। पारम्परिक हिन्दू ग्रन्थों और प्राचीन साहित्य में इस क्षेत्र का उल्लेख उत्तराखण्ड के रूप में किया गया है। हिन्दी और संस्कृत में उत्तराखण्ड का अर्थ उत्तरी क्षेत्र या भाग होता है। राज्य में हिन्दू धर्म की पवित्रतम और भारत की सबसे बड़ी नदियों गंगा और यमुना के उद्गम स्थल क्रमशः गंगोत्री और यमुनोत्री तथा इनके तटों पर बसे वैदिक संस्कृति के कई महत्त्वपूर्ण तीर्थस्थान हैं। देहरादून, उत्तराखण्ड की अन्तरिम राजधानी होने के साथ इस राज्य का सबसे बड़ा नगर है। गैरसैण नामक एक छोटे से कस्बे को इसकी भौगोलिक स्थिति को देखते हुए भविष्य की राजधानी के रूप में प्रस्तावित किया गया है किन्तु विवादों और संसाधनों के अभाव के चलते अभी भी देहरादून अस्थाई राजधानी बना हुआ है। राज्य का उच्च न्यायालय नैनीताल में है। राज्य सरकार ने हाल ही में हस्तशिल्प और हथकरघा उद्योगों को बढ़ावा देने के लिये कुछ पहल की हैं। साथ ही बढ़ते पर्यटन व्यापार तथा उच्च तकनीकी वाले उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए आकर्षक कर योजनायें प्रस्तुत की हैं। राज्य में कुछ विवादास्पद किन्तु वृहत बाँध परियोजनाएँ भी हैं जिनकी पूरे देश में कई बार आलोचनाएँ भी की जाती रही हैं, जिनमें विशेष है भागीरथी-भीलांगना नदियों पर बनने वाली टिहरी बाँध परियोजना। इस परियोजना की कल्पना १९५३ मे की गई थी और यह अन्ततः २००७ में बनकर तैयार हुआ। उत्तराखण्ड, चिपको आन्दोलन के जन्मस्थान के नाम से भी जाना जाता है। .

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उत्तराखण्ड में जिलावार विधानसभा सीटें

उत्तराखण्ड में जिलावार विधानसभा सीटें उत्तराखण्ड के जिलों के अन्तर्गत आने वाली विधानसभा सीटें हैं। इस सूची में जिला और उस जिले में उत्तराखण्ड विधानसभा की कौन-कौन सी सीटें हैं दिया गया है। भारतीय चुनाव आयोग द्वारा विर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन किए जाए से उत्तराखण्ड में भी सीटों में बदलाव आया है। इस सूची में भूतपूर्व सीटें किसी भी जिले में नहीं दी गई हैं। .

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उत्तराखण्ड सूपर लीग

उत्तराखंड सुपर लीग (यू.एस.एल.) एक अर्द्ध-पेशेवर फुटबॉल लीग है, जिसे अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ और उत्तराखंड राज्य फुटबॉल एसोसिएशन दोनों द्वारा स्वीकृति प्रदान है। इंडियन सुपर लीग पर आधारित इस लीग का आयोजन पूरे उत्तराखंड राज्य में फुटबॉल को बढ़ावा देने के लक्ष्य के साथ 'उत्तराखंड एडवेंचर स्पोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड' द्वारा किया जाता है। लीग की शुरुआत जुलाई २०१६ में चौदह टीमों के साथ हुई। .

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उत्तराखण्ड का भूगोल

उत्तराखण्ड भौगोलिक रूप से भारत के उत्तर में ३०० २०' उत्तरी अक्षांश ७८० ०४' पूर्वी रेखांश से लेकर ३०० ३३' उत्तरी अक्षांश ७८० ०६' पूर्वी रेखांश पर है। इसके पूर्व में नेपाल और उत्तर में तिब्बत(चीन) है। देश के भीतर उत्तर प्रदेश दक्षिण में और हिमाचल प्रदेश उत्तर पश्चिम में इसके पड़ोसी हैं। उत्तराखण्ड के दो मण्डल हैं: कुमाऊँ और गढ़वाल। .

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उत्तराखण्ड के नगरों की सूची

उत्तराखण्ड के नगर नामक इस सूची में भारत के उत्तराखण्ड राज्य के सभी नगरों की ज़िलेवार सूची दी गई है, जो वर्णमालानुसार क्रमित है। .

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उत्तराखण्ड के मण्डल

उत्तराखण्ड के मण्डल भारत के उत्तराखण्ड राज्य के दो मण्डलों को कहते हैं। उत्तराखण्ड में दो मण्डल है: कुमाऊँ और गढ़वाल जो क्रमशः राज्य के पूर्वी और पश्चिमी भाग में हैं। .

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उत्तराखण्ड के राज्य राजमार्गों की सूची

निम्नलिखित सूची उत्तराखण्ड राज्य के राज्य राजमार्गों की है: .

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उत्तराखण्ड के जिले

उत्तराखण्ड के जिले इस सूची में उत्तराखण्ड के जिले और उनकी जनसंख्या, जिला मुख्यालय, क्षेत्रफल और घनत्व की सूचना है। .

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उत्तराखण्ड के विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की सूची

2008 में विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन के बाद, उत्तराखण्ड विधानसभा के निर्वाचन क्षेत्रों की सूची निम्नलिखित है। .

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