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निर्माण सामग्री

सूची निर्माण सामग्री

बहुत से प्राकृतिक पदार्थ (मिट्टी, बालू, लकड़ी, चट्टानें, पत्तियाँ, आदि) निर्माण के लिये प्रयुक्त होते रहे हैं। इसके अलावा अब अनेक प्रकार के कृत्रिम या मानव-निर्मित पदार्थ भी निर्माण के लिये प्रयोग किये जाने लगे हैं; जैसे सीमेंट, इस्पात, अलुमिनियम, आदि। .

7 संबंधों: पारिस्थितिक पदचिह्न, प्राचीन मिस्र, खपरैल और चौके, गाँव, गृहनिर्माण के सामान, केन्द्रीय मृदा एवं सामग्री अनुसंधानशाला, अदह

पारिस्थितिक पदचिह्न

पारिस्थितिक पदचिह्न, पृथ्वी के पारिस्थितिक तंत्रों पर मानवीय माँग का एक मापक है। यह इंसान की मांग की तुलना, पृथ्वी की पारिस्थितिकी के पुनरुत्पादन करने की क्षमता से करता है। यह मानव आबादी द्वारा उपभोग किए जाने वाले संसाधनों के पुनरुत्पादन और उससे उत्पन्न अपशिष्ट के अवशोषण और उसे हानिरहित बनाकर लौटाने के लिए ज़रूरी जैविक उत्पादक भूमि और समुद्री क्षेत्र की मात्रा को दर्शाता है। इसका प्रयोग करते हुए यह अनुमान लगाया जा सकता है कि अगर प्रत्येक व्यक्ति एक निश्चित जीवन शैली अपनाए, तो मानवता की सहायता के लिए पृथ्वी के कितने हिस्से (या कितने पृथ्वी ग्रह) की ज़रूरत होगी। 2006 के लिए मनुष्य जाति के कुल पारिस्थितिक पदचिन्ह को 1.4 पृथ्वी ग्रह अनुमानित किया गया था, अर्थात मानव जाति पारिस्थितिक सेवाओं का उपयोग पृथ्वी द्वारा उनके पुनर्सृजन की तुलना में 1.4 गुना तेज़ी से करती है। प्रति वर्ष इस संख्या की पुनर्गणना की जाती है – संयुक्त राष्ट्र को आधारभूत आंकड़े इकट्ठा करने और प्रकाशित करने में समय लगने के कारण यह तीन साल पीछे चलती है। जहां पारिस्थितिक पदचिह्न शब्द का व्यापक रूप से प्रयोग किया जाता है, वहीं इसके मापन के तरीके भिन्न होते हैं। हालांकि गणना के मानक अब ज्यादा तुलनात्मक और संगत परिणाम देने वाले बन कर उभर रहे हैं। .

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प्राचीन मिस्र

गीज़ा के पिरामिड, प्राचीन मिस्र की सभ्यता के सबसे ज़्यादा पहचाने जाने वाले प्रतीकों में से एक हैं। प्राचीन मिस्र का मानचित्र, प्रमुख शहरों और राजवंशीय अवधि के स्थलों को दर्शाता हुआ। (करीब 3150 ईसा पूर्व से 30 ई.पू.) प्राचीन मिस्र, नील नदी के निचले हिस्से के किनारे केन्द्रित पूर्व उत्तरी अफ्रीका की एक प्राचीन सभ्यता थी, जो अब आधुनिक देश मिस्र है। यह सभ्यता 3150 ई.पू.

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खपरैल और चौके

खपरैल से निर्मित छत खपरैल एवं चौके (टाइल) प्रायः छतों, फर्श, एवं दीवारों को ढकने के काम आते हैं। इन्हें किसी सिरैमिक, पत्थर, धातु या कांच जैसी कठिनाई से घिसने वाले पदार्थ से बनाया जाता है। .

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गाँव

मध्य भारत का एक गाँव कैसल नाला, विल्टशायर, इंग्लैंड के गाँव के मुख्य सड़क पर. Masouleh गाँव, Gilan प्रांत, ईरान. Saifi गाँव के केंद्र Ville, बेरूत, लेबनान में मुख्य चौराहे Lötschental घाटी, स्विट्जरलैंड में एक अल्पाइन गाँव. ग्राम या गाँव छोटी-छोटी मानव बस्तियों को कहते हैं जिनकी जनसंख्या कुछ सौ से लेकर कुछ हजार के बीच होती है। प्राय: गाँवों के लोग कृषि या कोई अन्य परम्परागत काम करते हैं। गाँवों में घर प्राय: बहुत पास-पास व अव्यवस्थित होते हैं। परम्परागत रूप से गाँवों में शहरों की अपेक्षा कम सुविधाएं (शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य आदि की) होती हैं।इसे संस्कृत में ग्राम, गुजराती में गाम(गुजराती:ગામ), पंजाबी में पिंड कहते हैं। .

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गृहनिर्माण के सामान

प्राचीन समय से ही संसार के अनेक भागों में विविध प्रकार की शिलाएँ भवननिर्माण के कार्यों में आती रहीं हैं। भारत भी उन कतिपय देशों में हे जो इस कार्य में सहस्रों वर्षों से निपुण रहे हैं और आज भी विभिन्न प्रकार के पत्थरों से निर्मित्त अनेक भवन हमारी सभ्यता और संस्कृति का संदेश दे रहे हैं। मध्यकाल एवं आधुनिक काल में भी अनेक भवन इन पत्थरों से बनाए गए, जो सुंदरता के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। भवननिर्माण में प्रयुक्त शिलाओं में कुछ विशेषताएँ होनी आवश्यक हैं, उदाहरणार्थ ऋतुक्षरण रोकने की क्षमता, खनन में सुगमता, वर्ण एवं सुंदरता आदि। निर्माणशिलाओं में निम्नांकित मुख्य है: .

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केन्द्रीय मृदा एवं सामग्री अनुसंधानशाला

केन्द्रीय मृदा एवं सामग्री अनुसंधानशाला(CSMRS) भारत सरकार के जल संसाधन मंत्रालय का संबद्ध कार्यालय है। नई दिल्ली स्थित भारत का यह प्रमुख संस्थान क्षेत्र तथा प्रयोगशाला अन्वेषण, भूयांत्रिकी, कंक्रीट प्रौद्योगिकी, निर्माण सामग्री की समस्याओं पर आधारभूत तथा प्रायोगिक अनुसंधान, तथा पर्यावरण मुद्दों के संबंध में कार्य करता है जिसका देश में सिंचाई संबंधित तथा ऊर्जा के विकास पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है। यह कार्यालय भारत तथा विदेश में विभिन्न परियोजनाओं तथा संगठनों के लिए उपर्युक्त क्षेत्रों में सलाहकार तथा परामर्शदाता के रूप में कार्य करता है। .

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अदह

एस्बेस्टस की चादरों का से बनी छत अदह (ऐस्बेस्टस) कई प्रकार के खनिज सिलीकेटों के समूह को, जो रेशेदार तथा अदह्य होते हैं, कहते हैं। इसके रेशे चमकदार होते हैं। इकट्ठा रहने पर उनका रंग सफेद, हरा, भूरा या नीला दिखाई पड़ता है, परंतु प्रत्येक अलग रेशे का रंग चमकीला सफेद ही होता है। इस पदार्थ में अनेक गुण हैं, जैसे रेशेदार बनावट, आततन बल, कड़ापन, विद्युत के प्रति असीम रोधशक्ति, अम्ल में न घुलना और अदहता। इन गुणों के कारण यह बहुत से उद्योंगों में काम आता है। .

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