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निम्नस्खलन

सूची निम्नस्खलन

भूविज्ञान में निम्नस्खलन या सबडक्शन (subduction) उस प्रक्रिया को कहते हैं जिसमें दो भौगोलिक तख़्तों की संमिलन सीमा पर एक तख़्ता दूसरे के नीचे फिसलकर दबने लगता है, यानि कि उसका दूसरे तख़्ते के नीचे स्खलन होने लगता है। निम्नस्खलन क्षेत्र (सबडक्शन ज़ोन, subduction zone) पृथ्वी के वे इलाक़े होते हैं जहाँ यह निम्नस्खलन चल रहा हो। अक्सर इन निम्नस्खलन क्षेत्रों में ज्वालामुखी, पर्वतमालाएँ, या (यदि यह समुद्री क्षेत्र में हो) महासागरीय गर्त (खाईयाँ या ट्रेन्च) बन जाते हैं। निम्नस्खलन की प्रक्रिया की गति चंद सेन्टीमीटर प्रति वर्ष ही होती है। एक तख़्ता दूसरे तख़्ते के नीचे दो से आठ सेमी प्रति वर्ष के औसत दर से खिसकता है। भारतीय उपमहाद्वीप में भारतीय प्लेट के यूरेशियाई प्लेट की संमिलन सीमा पर भारतीय प्लेट के निम्नस्खलन से ही हिमालय व तिब्बत के पठार की उच्चभूमि का निर्माण हुआ है। .

8 संबंधों: फ़िलिपीन गर्त, भूरासायनिक चक्र, भूकम्प, महासागरीय द्रोणी, लघुतर सुन्दा द्वीपसमूह, संमिलन सीमा, ज्वालामुखीय चाप, अतल मैदान

फ़िलिपीन गर्त

फ़िलिपीन गर्त (Philippine Trench), जो कभी-कभी मिन्दनाओ गर्त (Mindanao Trench) भी कहलाता है, पश्चिमी प्रशांत महासागर के फ़िलिपीन सागर भाग में स्थित एक १,३२० किमी तक चलने वाला एक महासागरीय गर्त है। इस गर्त की चौड़ाई लगभग ३० किमी है और इसका सबसे गहरा बिन्दु (जो गालाथेआ गहराई कहलाता है) समुद्रतल से लगभग १०,५४० मीटर (३४,५८० फ़ुट) नीचे है। यह पृथ्वी का तीसरा सबसे निचला स्थान है। .

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भूरासायनिक चक्र

भूविज्ञानों के अन्तर्गत, धरती के तल पर तथा भूगर्भ में स्थित रासायनिक तत्त्व परिवर्तन का जो मार्ग अपनाते हैं उसे भूरासायनिक चक्र (geochemical cycle) कहते हैं। इसमें सभी भूवैज्ञानिक (जिओलोजिकल) तथा रासायनिक कारक सम्मिलित किये जाते हैं। गर्म तथा दाबित रासायनिक तत्त्वों (जैसे सिलिकन, अलुमिनियम तथा अल्कली धातुएं) का निम्नस्खलन (subduction) एवं ज्वालामुख (volcanism) द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाना (माइग्रेशन) ही भूरासायनिक चक्र है। श्रेणी:भूरसायन.

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भूकम्प

भूकम्प या भूचाल पृथ्वी की सतह के हिलने को कहते हैं। यह पृथ्वी के स्थलमण्डल (लिथोस्फ़ीयर) में ऊर्जा के अचानक मुक्त हो जाने के कारण उत्पन्न होने वाली भूकम्पीय तरंगों की वजह से होता है। भूकम्प बहुत हिंसात्मक हो सकते हैं और कुछ ही क्षणों में लोगों को गिराकर चोट पहुँचाने से लेकर पूरे नगर को ध्वस्त कर सकने की इसमें क्षमता होती है। भूकंप का मापन भूकम्पमापी यंत्रों (सीस्मोमीटर) के साथ करा जाता है, जो सीस्मोग्राफ भी कहलाता है। एक भूकंप का आघूर्ण परिमाण मापक्रम पारंपरिक रूप से नापा जाता है, या सम्बंधित और अप्रचलित रिक्टर परिमाण लिया जाता है। ३ या उस से कम रिक्टर परिमाण की तीव्रता का भूकंप अक्सर अगोचर होता है, जबकि ७ रिक्टर की तीव्रता का भूकंप बड़े क्षेत्रों में गंभीर क्षति का कारण होता है। झटकों की तीव्रता का मापन विकसित मरकैली पैमाने पर किया जाता है। पृथ्वी की सतह पर, भूकंप अपने आप को, भूमि को हिलाकर या विस्थापित कर के प्रकट करता है। जब एक बड़ा भूकंप उपरिकेंद्र अपतटीय स्थति में होता है, यह समुद्र के किनारे पर पर्याप्त मात्रा में विस्थापन का कारण बनता है, जो सूनामी का कारण है। भूकंप के झटके कभी-कभी भूस्खलन और ज्वालामुखी गतिविधियों को भी पैदा कर सकते हैं। सर्वाधिक सामान्य अर्थ में, किसी भी सीस्मिक घटना का वर्णन करने के लिए भूकंप शब्द का प्रयोग किया जाता है, एक प्राकृतिक घटना) या मनुष्यों के कारण हुई कोई घटना -जो सीस्मिक तरंगों) को उत्पन्न करती है। अक्सर भूकंप भूगर्भीय दोषों के कारण आते हैं, भारी मात्रा में गैस प्रवास, पृथ्वी के भीतर मुख्यतः गहरी मीथेन, ज्वालामुखी, भूस्खलन और नाभिकीय परिक्षण ऐसे मुख्य दोष हैं। भूकंप के उत्पन्न होने का प्रारंभिक बिन्दु केन्द्र या हाईपो सेंटर कहलाता है। शब्द उपरिकेंद्र का अर्थ है, भूमि के स्तर पर ठीक इसके ऊपर का बिन्दु। San Andreas faultके मामले में, बहुत से भूकंप प्लेट सीमा से दूर उत्पन्न होते हैं और विरूपण के व्यापक क्षेत्र में विकसित तनाव से सम्बंधित होते हैं, यह विरूपण दोष क्षेत्र (उदा. “बिग बंद ” क्षेत्र) में प्रमुख अनियमितताओं के कारण होते हैं। Northridge भूकंप ऐसे ही एक क्षेत्र में अंध दबाव गति से सम्बंधित था। एक अन्य उदाहरण है अरब और यूरेशियन प्लेट के बीच तिर्यक अभिकेंद्रित प्लेट सीमा जहाँ यह ज़ाग्रोस पहाड़ों के पश्चिमोत्तर हिस्से से होकर जाती है। इस प्लेट सीमा से सम्बंधित विरूपण, एक बड़े पश्चिम-दक्षिण सीमा के लम्बवत लगभग शुद्ध दबाव गति तथा वास्तविक प्लेट सीमा के नजदीक हाल ही में हुए मुख्य दोष के किनारे हुए लगभग शुद्ध स्ट्रीक-स्लिप गति में विभाजित है। इसका प्रदर्शन भूकंप की केन्द्रीय क्रियाविधि के द्वारा किया जाता है। सभी टेक्टोनिक प्लेट्स में आंतरिक दबाव क्षेत्र होते हैं जो अपनी पड़ोसी प्लेटों के साथ अंतर्क्रिया के कारण या तलछटी लदान या उतराई के कारण होते हैं। (जैसे deglaciation).ये तनाव उपस्थित दोष सतहों के किनारे विफलता का पर्याप्त कारण हो सकते हैं, ये अन्तःप्लेट भूकंप को जन्म देते हैं। .

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महासागरीय द्रोणी

महासागरीय द्रोणी (oceanic basin) महासागरों के सागरतह पर स्थित बड़ी द्रोणियाँ होती हैं। यह भूवैज्ञानिक आकृतियाँ कई भागों की बनी होती हैं, जिनमें अतल मैदान शामिल होते हैं। भूवैज्ञानिक रूप से सक्रीय महासागरीय द्रोणियों में महासागरीय गर्त और निम्नस्खलन क्षेत्र भी सम्मिलित होते हैं। यह भी कहा जा सकता है कि महाद्वीपीय ताक, मध्य-महासागर पर्वतमालाओं और महासागरीय गर्तों के बीच के क्षेत्रों में महासागरीय द्रोणियाँ फैली होती हैं। .

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लघुतर सुन्दा द्वीपसमूह

लघुतर सुन्दा द्वीपसमूह (Lesser Sunda Islands) दक्षिणपूर्व एशिया में ऑस्ट्रेलिया से उत्तर में स्थित द्वीपों का एक समूह है। बृहत्तर सुन्दा द्वीपसमूह के साथ यह सुन्दा द्वीपसमूह बनाते हैं। लघुतर सुन्दा द्वीप सुन्दा चाप नामक एक ज्वालामुखीय चाप का भाग हैं जो जावा सागर में एक भौगोलिक तख़्ते के दूसरे के नीचे निम्नस्खलन (सबडक्शन) द्वारा बना है। .

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संमिलन सीमा

भूवैज्ञानिक प्लेट विवर्तनिकी में संमिलन सीमा (convergent boundary) वह सीमा होती है जहाँ पृथ्वी के स्थलमण्डल (लिथोस्फ़ीयर) के दो भौगोलिक तख़्ते (प्लेटें) एक दूसरे की ओर आकर टकराते हैं या आपस में घिसते हैं। ऐसे क्षेत्रों में दबाव और रगड़ से भूप्रावार (मैन्टल) का पत्थर पिघलने लगता है और ज्वालामुखी तथा भूकम्पन घटनाओं में से एक या दोनों मौजूद रहते हैं। संमिलन सीमाओं पर या तो एक तख़्ते का छोर दूसरे तख़्ते के नीचे दबने लगता है (इसे निम्नस्खलन या सबडक्शन कहते हैं) या फिर महाद्वीपीय टकराव होता है।Butler, Rob (October 2001).

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ज्वालामुखीय चाप

ज्वालामुखीय चाप (volcanic arc) ज्वालामुखियों की एक शृंखला होती है जो दो भौगोलिक तख़्तों की संमिलन सीमा में निम्नस्खलित तख़्ते (subducting plate) के ऊपर बन जाती है। ऊपर से देखने पर ज्वालामुखियों की यह शृंखला एक चाप (आर्क) के आकार में नज़र आती है। यदि यह किसी महासागर में स्थित हो तो अक्सर यह ज्वालामुखी समुद्र सतह से ऊपर निकलकर ज्वालामुखीय द्वीप बना देते हैं और यह शृंखला एक द्वीप चाप के रूप में नज़र आती है। अक्सर इन द्वीपों से सामानांतर एक महासागरीय गर्त (ट्रेन्च) भी स्थित होता है। .

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अतल मैदान

अतल मैदान (abyssal plain) महासागरों की गहराईयों में सागरतह का विस्तृत मैदानी क्षेत्र होता है, जिसकी गहराई आमतौर पर 3,000 मीटर (9,800 फ़ुट) और 6,000 मीटर (20,000 फ़ुट) के बीच होती है। यह महाद्वीपीय चढ़ाव और मध्य-महासागर पर्वतमाला के बीच का क्षेत्र होता है और ऐसे मैदान पृथ्वी के लगभग 50% क्षेत्र पर फैले हुए हैं। यह विश्व के सबसे चपटे और सबसे कम अध्ययन करे गए क्षेत्रों में से हैं। अतल मैदान महासागरीय द्रोणियों के महत्वपूर्ण भाग होते हैं और इन द्रोणियों में इन मैदानों के अलावा एक महासागरीय गर्त और निम्नस्खलन क्षेत्र भी होते है। .

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