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दतिया

सूची दतिया

इतिहास महाभारत कालीन दंतवक्र के नाम के आधार पर दतिया नाम हुआ। जिसके प्रमाण स्वरूप दतिया पीताम्बरा पीठ में स्थित वनखंडेश्वर मंदिर महाभारत कालीन हैं। पीताम्बरा पीठ का मुख्य द्वार दतिया भारत के मध्य प्रदेशके बुंदेलखंड प्रांत का एक शहर है। ग्वालियर के निकट उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित दतिया मध्य प्रदेश का लोकप्रिय तीर्थस्थल है। पहले यह मध्यप्रेदश राज्य में देशी रियासत थी पर अब यह स्वतंत्र जिला है। यह उत्तर में भिंड, एवं जालौन, दक्षिण में शिवपुरी एवं झाँसी, पूर्व में समथर एवं झाँसी तथा पश्चिम में ग्वालियर से घिरा है। सिंध एवं पहूज जिले की प्रमुख नदियाँ हैं। यहाँ की अधिकांश मिट्टी अनुपजाऊ है। दलहन, गेहूँ, ज्वार, कपास आदि की यहाँ कृषि की जाती है। दतिया नगर झाँसी से 16 मील दूर, झाँसी-ग्वालियर सड़क पर स्थित है। पुराने समय से ही यहाँ के क्षत्रिय प्रसिद्ध रहे हैं। यहाँ कई प्राचीन महल, डाक बँगला, अस्पताल, कारागृह एवं अनेक शिक्षा संस्थाएँ हैं। दतिया का पुराना कस्बा चारों ओर से पत्थर की दीवार से घिरा हुआ है, जिसमें बहुत से महल और उद्यान बने हुए हैं। 17वीं शताब्दी में बना बीर सिंह महल उत्तर भारत के सबसे बेहतरीन इमारतों में माना जाता है। यहां का पीताम्बरा देवी शक्तिपीठ भारत के श्रेष्ठतम और महत्वपूर्ण शक्तिपीठों में एक है। प्रतिवर्ष यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को आवागमन लगा रहता है। .

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झेलम एक्स्प्रेस १०७७

झेलम एक्स्प्रेस झेलम एक्स्प्रेस १०७७ भारतीय रेल द्वारा संचालित एक मेल एक्स्प्रेस ट्रेन है। यह ट्रेन पुणे जंक्शन रेलवे स्टेशन (स्टेशन कोड:PUNE) से ०५:२०PM बजे छूटती है और जम्मू तवी रेलवे स्टेशन (स्टेशन कोड:JAT) पर ०८:५५AM बजे पहुंचती है। इसकी यात्रा अवधि है ३९ घंटे ३५ मिनट। झेलम एक्सप्रेस भारतीय रेल पर एक दैनिक ट्रेन है। यह पुणे से, जो महाराष्ट्र की सांस्कृतिक राजधानी है से लेकर जम्मू तवी, जम्मू-कश्मीर की शीतकालीन राजधानी से उत्तर भारत मे चलती है। इसके अलावा, यह ट्रेन सामरिक रूप से महत्वपूर्ण है; क्युंकि यह भारतीय सेना के मुख्यालय के दक्षिण कमान, पुणे को एक महत्त्वपूर्ण सीमा स्थित शहर से जोड़ता है। यह ट्रेन कुल मिलाकर ६५ स्टेशनों पर रूकती हैl यह ट्रैन कुल मिलाकर जम्मू तवी और पुणे के बीच २१७३ किलोमीटर का फासला तय करती हैl .

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दतिया महल

दतिया महल, जिसे बीर सिंह महल या बीरसिंह देव महल भी कहा जाता है, मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर से लगभग 75 किमी दूर स्थित है। यह महल ७ मंजिला है। वर्तमान में यहाँ पर शाही परिवार का कोई सदस्य नहीं रहता है। बुंदेलखंड में दतिया साम्राज्य के संस्थापक - महाराज बीरसिंह देओ ने देश भर में ऐसे 52 स्मारक बनवाये थे। दतिया के महल या सतखंडा महल को दतिया महल भी कहा जाता है, साथ इसे ही पुराण महल या "पुराना महल" भी इसे कहते है। इतिहासकार अब्दुल हामिद लाहोरी, शाहजहाँ के साथ 19 नवंबर 1635 इस शहर में आए थे। यह महल लगभग 80 मीटर लंबा और बहुत ही व्यापक है। यह बहुत ही सुंदर और मजबूत महलों मे से एक माना जाता है। यह महल के निर्माण में नौ साल और 35 लाख रुपये (78 हजार अमेरिकी डॉलर) की लागत आई थी। यह दतिया शहर के पश्चिमी किनारे पर एक अलग चट्टान पर स्थित है। यह राजपूत वास्तुकला के साथ मुगल वास्तुकला का प्रतिनिधित्व करती है। यह राजा बिरिसिंग देव द्वारा निर्मित सभी 52 महलों में से सबसे बड़ा और सबसे प्रसिद्ध है और इसे आसानी से दूर से भी देखा जा सकता है। श्रेणी:मध्य प्रदेश का पर्यटन.

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दतिया ज़िला

दातिया भारतीय राज्य मध्य प्रदेश का एक जिला है। यह पीताम्बरा देवी के शहर के नाम से मशहूर है। दतिया जिला उत्तर की ओर से भिंड, पश्चिम की ओर ग्वालियर से, दक्षिण की ओर शिवपुरी से एवं पूर्व की ओर से उप्र के झांसी जिले से घिरा हुआ है। यह जिला ग्वालियर संभाग में आता है। इस जिले से झांसी एवं ग्वालियर के मध्य पश्चिम-मध्य रेलवे द्वारा यात्रा की जी सकती है। .

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दतिया विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र

दतिया विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र, २३० विधानसभा, का एक निर्वाचन क्षेत्र है.

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पद्माकर

रीति काल के ब्रजभाषा कवियों में पद्माकर (1753-1833) का महत्त्वपूर्ण स्थान है। वे हिंदी साहित्य के रीतिकालीन कवियों में अंतिम चरण के सुप्रसिद्ध और विशेष सम्मानित कवि थे। मूलतः हिन्दीभाषी न होते हुए भी पद्माकर जैसे आन्ध्र के अनगिनत तैलंग-ब्राह्मणों ने हिन्दी और संस्कृत साहित्य की श्रीवृद्धि में जितना योगदान दिया है वैसा अकादमिक उदाहरण अन्यत्र दुर्लभ है। .

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बुन्देलखण्ड

बुन्देलखण्ड मध्य भारत का एक प्राचीन क्षेत्र है।इसका प्राचीन नाम जेजाकभुक्ति है.

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भारत में राष्ट्रीय राजमार्गों की सूची - प्रदेश अनुसार

भारत में राष्ट्रीय राजमार्गों का संजाल भारत में राष्ट्रीय राजमार्गों की सूची भारतीय राजमार्ग के क्षेत्र में एक व्यापक सूची देता है, द्वारा अनुरक्षित सड़कों के एक वर्ग भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण। ये लंबे मुख्य में दूरी roadways हैं भारत और के अत्यधिक उपयोग का मतलब है एक परिवहन भारत में। वे में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा भारतीय अर्थव्यवस्था। राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 2 laned (प्रत्येक दिशा में एक), के बारे में 65,000 किमी की एक कुल, जिनमें से 5,840 किमी बदल सकता है गठन में "स्वर्ण Chathuspatha" या स्वर्णिम चतुर्भुज, एक प्रतिष्ठित परियोजना राजग सरकार द्वारा शुरू की श्री अटल बिहारी वाजपेयी.

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भारत में स्मार्ट नगर

भारत में स्मार्ट नगर की कल्पना प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की है जिन्होंने देश के १०० नगरों को स्मार्ट नगरों के रूप में विकसित करने का संकल्प किया है। सरकार ने २७ अगस्त २०१५ को ९८ प्रस्तावित स्मार्ट नगरों की सूची जारी कर दी। .

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भारत के शहरों की सूची

कोई विवरण नहीं।

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मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश भारत का एक राज्य है, इसकी राजधानी भोपाल है। मध्य प्रदेश १ नवंबर, २००० तक क्षेत्रफल के आधार पर भारत का सबसे बड़ा राज्य था। इस दिन एवं मध्यप्रदेश के कई नगर उस से हटा कर छत्तीसगढ़ की स्थापना हुई थी। मध्य प्रदेश की सीमाऐं पांच राज्यों की सीमाओं से मिलती है। इसके उत्तर में उत्तर प्रदेश, पूर्व में छत्तीसगढ़, दक्षिण में महाराष्ट्र, पश्चिम में गुजरात, तथा उत्तर-पश्चिम में राजस्थान है। हाल के वर्षों में राज्य के सकल घरेलू उत्पाद की विकास दर राष्ट्रीय औसत से ऊपर हो गया है। खनिज संसाधनों से समृद्ध, मध्य प्रदेश हीरे और तांबे का सबसे बड़ा भंडार है। अपने क्षेत्र की 30% से अधिक वन क्षेत्र के अधीन है। इसके पर्यटन उद्योग में काफी वृद्धि हुई है। राज्य में वर्ष 2010-11 राष्ट्रीय पर्यटन पुरस्कार जीत लिया। .

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मध्य प्रदेश भगदड़ २०१३

13 अक्टूबर 2013 को, हिन्दू पर्व नवरात्रि के दौरान, भारतीय राज्य मध्य प्रदेश के दतिया जिले के रतनगढ़ माता मन्दिर में के पास बने पुल के टुटने की अपवाह फैल गई जिससे भगदड़ मच गई। भगदड़ में ११५ लोग मारे गये एवं सैकड़ों घायल हो गये। .

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मध्य प्रदेश के शहरों की सूची

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महेंद्र भटनागर

डॉ महेंद्र भटनागर (Mahendra Bhatnagar जन्म 26 जून,1926) भारतीय समाजार्थिक-राष्ट्रीय-राजनीतिक चेतना-सम्पन्न द्वि-भाषिक (हिन्दी एवं अंग्रेजी) कवि एवं लेखक हैं। ये सन् 1946 से प्रगतिवादी काव्यान्दोलन से सक्रिय रूप से सम्बद्ध प्रगतिशील हिन्दी कविता के द्वितीय उत्थान के चर्चित हस्ताक्षरों में से एक हैं। .

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रानी लक्ष्मीबाई

रानी लक्ष्मीबाई (जन्म: 19 नवम्बर 1828 के अनुसार रानी लक्ष्मीबाई की जन्मतिथि 19 नवम्बर 1835 है – मृत्यु: 18 जून 1858) मराठा शासित झाँसी राज्य की रानी और 1857 के प्रथम भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम की वीरांगना थीं। उन्होंने सिर्फ़ 23 साल की उम्र में अंग्रेज़ साम्राज्य की सेना से जद्दोजहद की और रणभूमि में उनकी मौत हुई थी। .

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रुद्रावतार

रुद्रावतार भगवान् शिव (रूद्र) के अवतारों को कहा जाता है। शास्त्र अनुसार महादेव के २८ अवतार हुए थे उनमें भी १० प्रमुख है । .

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सेवड़ा विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र

सेवड़ा विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र, २३० विधानसभा, का एक निर्वाचन क्षेत्र है.

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सोनागिरि

सोनागिरि, ग्वालियर से 60.किमी दूर जिला दतिया मध्य प्रदेश में स्थित है । यह स्थान मुख्यतः जैन तीर्थ है। सोनागिरि में 57 मंदिर हैं, जिनमे क्रमांक 57वा मंदिर मुख्य है। इस मंदिर मे भगवन चंद्रप्रभु की 11फिट ऊँची मूर्ति स्थापित है, तथा यहाँ एक विशाल हॉल है जहाँ ध्यान किया जाता है, और पास ही एक महास्तम्भ स्थापित है, जिसकी ऊंचाई 43 फिट है। सोनागिरि मे ही आचार्य शुभचन्द्र तथा ऋषि भ्रतृरिहरी ने निर्वाण पाया एवं अनेक ग्रंथो की रचना की। श्रेणी:जैन तीर्थ.

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विंध्य क्षेत्र

विन्ध्य प्रदेश, भारत का एक भूतपूर्व प्रदेश था जिसका क्षेत्रफल 23,603 वर्ग मील था। भारत की स्वतन्त्रता के बाद सेन्ट्रल इण्डिया एजेन्सी के पूर्वी भाग के रियासतों को मिलाकर १९४८ में इस राज्य का निर्माण किया गया था। इस राज्य की राजधानी रीवा थी। इसके उत्तर में उत्तर प्रदेश एवं दक्षिण में मध्य प्रदेश था। विंध्य क्षेत्र पारंपरिक रूप से विंध्याचल पर्वत के आसपास का पठारी भाग को कहा जाता है। .

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ग्वालियर संभाग

ग्वालियर डिवीजन एक प्रशासनिक उपखंड के मध्य प्रदेश राज्य, मध्य भारत मेंहै। यह भी शामिल है के जिले अशोकनगर, दतिया, गुना, ग्वालियरऔर शिवपुरी.

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इन्दिरा दाँगी

इन्दिरा दाँगी (अंग्रेजी:Indira Dangi (जन्म १३ फरबरी १९८०)) हिंदी भाषा की लेखिका हैं। वे साहित्य अकादमी द्वारा सन् २०१५ के युवा पुरस्कार से सम्मानित हैं। .

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अक्षर अनन्य

अक्षर अनन्य एक सन्तकवि एवं दार्शनिक थे। ये ज्ञानयोग, विज्ञानयोग, ध्यानयोग, विवेकदीपिका, ब्रह्मज्ञान, अनन्य प्रकाश, राजयोग, सिद्धांतबोध आदि ग्रंथों के ये प्रणेता माने जाते हैं। इनमें अद्वैत वेदांत के गूढ़ रहस्यों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया है। दुर्गा सप्तशती का हिंदी पद्यानुवाद भी इन्होंने किया है। ये संत कवि माने जाते हैं लेकिन संतों की सभी प्रवृतियाँ इनमें नहीं मिलतीं। इनके ग्रंथों में वैष्णव धर्म के साधारण देवताओं के प्रति आस्था के साथ-साथ कर्मकांड के प्रति झुकाव भी मिलता है। इनके काव्य ग्रंथों में दोहा, चौपाई, पद्धरि इत्यादि छंदों का प्रयोग हुआ है। इनके विषय में प्रसिद्ध है कि ये सेनुहरा (दतिया) के महाराज पृथ्वीचंद के दीवान थे। हिंदी साहित्य के इतिहास लेखकों के अनुसार इनका जन्म सन् १७१० वि.

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