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तुर्की भाषा परिवार

सूची तुर्की भाषा परिवार

विश्व के देश (गाढ़े नीले रंग में) और प्रदेश (हलके नीले रंग में) जहाँ तुर्की भाषाओँ को सरकारी मान्यता प्राप्त है सन् 735 के लगभग तराशे गए एक ओरख़ोन शिलालेख का हिस्सा यूरेशिया में तुर्की भाषाओँ का फैलाव तुर्की भाषाएँ पैंतीस से भी अधिक भाषाओँ का एक भाषा-परिवार है। तुर्की भाषाएँ पूर्वी यूरोप और भूमध्य सागर से लेकर साईबेरिया और पश्चिमी चीन तक बोली जाती हैं। कुछ भाषावैज्ञानिक इन्हें अल्ताई भाषा परिवार की एक शाखा मानते हैं। विश्व में लगभग 16.5 से 18 करोड़ लोग तुर्की भाषाएँ अपनी मातृभाषा के रूप में बोलते हैं और अगर सभी तुर्की भाषाओँ को बोल सकने वालों की गणना की जाए तो क़रीब 25 करोड़ लोग इन्हें बोल सकते हैं। सब से अधिक बोली जाने वाली तुर्की भाषा का नाम भी तुर्की है, हालाँकि कभी-कभी इसे अनातोल्वी भी कहा जाता है (क्योंकि यह अनातोलिया में बोली जाती है)। .

104 संबंधों: चिंगहई, चग़ताई भाषा, चुवाश भाषा, चोलिस्तान, टकलामकान, तातार भाषा, तातार लोग, तारपान, ताशक़ुरग़ान​, ताशक़ुरग़ान​ ताजिक स्वशासित ज़िला, ताजिक लोग, ताजिकी भाषा, तिएले लोग, तुर्क लोग, तुर्कमेन लोग, तुर्कमेनिस्तान, तुर्किस्तान, तुर्की-मंगोल, तुर्कीयाई भाषा, तुषारी भाषाएँ, तुषारी लोग, तुंगुसी भाषा-परिवार, तूमन, तूवी भाषा, तेन्ग्री, तोकमोक, दिस्तग़िल सर, दिंगलींग लोग, दोन नदी, नायमन लोग, पुरानी तुर्की भाषा, पुरानी तुर्की लिपि, बलक़ानाबात, बालासगून, बासमाची विद्रोह, बिलगे ख़ागान, मध्य एशिया, महमूद काश्गरी, मंगोल साम्राज्य, मुग़ल साम्राज्य, याकूत लोग, यूरेशियाई आवार लोग, शियोंगनु लोग, शिंजियांग, सरी सू नदी, सलजूक़ साम्राज्य, साख़ा भाषा, साइबेरियाई तुर्की भाषाएँ, सुनहरा उर्दू, सुम (ज़िला), ..., स्वर सहयोग, सोग़दा, हफथाली लोग, हिन्द-यूरोपीय भाषा-परिवार, हज़ारगी भाषा, ख़ातून, ख़ान (उपाधि), ख़ागान, ख़ितानी भाषा, ख़ज़र लोग, ख़कास भाषा, ख़ीवा, ग़ज़नवी साम्राज्य, ग़ुलाम वंश, गागाउज़ भाषा, ओग़ुर भाषाएँ, ओग़ुज़ भाषाएँ, आक़्सू विभाग, इली नदी, क़शक़ाई भाषा, क़ाराक़ालपाक़ लोग, क़ाराक़ोरम दर्रा, क़ाजार राजवंश, कारलूक लोग, काराशहर, काराख़ानी ख़ानत, काराकाश नदी, काश्गर, किरगिज़ लोग, किर्गिज़ भाषा, किज़िल, किज़िल कुम रेगिस्तान, किज़िलओरदा प्रांत, कज़ाख़ भाषा, कज़ाख़ लोग, कुर्रम वादी, कोपेत दाग़, कोंगुर ताग़, अतिर​ऊ प्रांत, अन्दीझ़ान, अल्ताई पर्वत शृंखला, अल्ताई भाषा, अल्ताई भाषा-परिवार, अल्ताई लोग, अल्प तिगिन, अज़ेरी भाषा, अइमग, अक्साई चिन, उज़बेक, उज़बेक लोग, उज़्बेक भाषा, उईग़ुर ख़ागानत, उइग़ुर, उइगुर भाषा सूचकांक विस्तार (54 अधिक) »

चिंगहई

चिंगहई (चीनी: 青海; अंग्रेजी: Qinghai, मंगोल: Көкнуур, कोक नूर; तिब्बती: མཚོ་སྔོན་) जनवादी गणराज्य चीन के पश्चिमी भाग में स्थित एक प्रांत है। इसकी राजधानी शिनिंग शहर है। यह प्रांत अधिकतर तिब्बत के पठार पर स्थित है और परंपरागत रूप से तिब्बती लोग इसके अधिकतर भाग को तिब्बत का एक क्षेत्र समझते हैं जिसका तिब्बती नाम 'आमदो' है। इस प्रान्त का नाम चिंगहई झील पर पड़ा है। ऐतिहासिक रूप से यह इलाक़ा चीन का भाग नहीं था बल्कि इसपर कई जातियों में खींचातानी चलती थी, जिनमें तिबाती, हान चीनी, मंगोल और तुर्की लोग शामिल थे। चीन की एक महत्वपूर्ण नदी ह्वांग हो (उर्फ़ 'पीली नदी') इसी प्रान्त के दक्षिणी भाग में जन्म लेती है जबकि यांग्त्से नदी और मिकोंग नदी इसके दक्षिण-पश्चिमी भाग में जन्मती हैं।, Shelley Jiang, Shelley Cheung, Macmillan, 2004, ISBN 978-0-312-32005-8,...

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चग़ताई भाषा

मुग़ल सम्राट बाबर की बाबरनामा नामक जीवनी चग़ताई तुर्की में ही लिखी गई थी चग़ताई भाषा (उज़बेक:, अंग्रेज़ी: Chagatai) एक विलुप्त तुर्की भाषा है जो कभी मध्य एशिया के विस्तृत क्षेत्र में बोली जाती थी। बीसवी सदी तक इसकी बोलचाल तो बंद हो चुकी थी लेकिन इसे एक साहित्यिक भाषा के रूप में फिर भी प्रयोग किया जा रहा था। भारतीय उपमहाद्वीप में मुग़ल साम्राज्य के शुरुआती सम्राटों की मातृभाषा भी चग़ताई तुर्की ही थी और बाबर ने अपनी प्रसिद्ध 'बाबरनामा' जीवनी इसी भाषा में लिखी थी।, Calum MacLeod, Bradley Mayhew, Odyssey, 2008, ISBN 978-962-217-795-6,...

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चुवाश भाषा

चुवाशी लोगों पर जारी सोवियत संघ का एक पुराना डाक-टिकट चुवाशी (चुवाशी: Чӑвашла, चवाश्ला; अंग्रेज़ी: Chuvash) मध्य रूस में बोली जाने वाली एक तुर्की भाषा है। यह चुवाश गणतंत्र और उसके पड़ोसी इलाक़ों में बोली जाती है और तुर्की भाषा-परिवार की ओग़ुर शाखा की इकलौती जीवित भाषा है (बाक़ी विलुप्त हो चुकी हैं)। चुवाशी तुर्की परिवार में निराली है क्योंकि अपनी एक अलग शाख़ में होने के कारण इसमें और अन्य जीवित तुर्की भाषाओँ में बहुत अंतर है और उनको बोलने वाले चुवाशी नहीं समझ सकते। चुवाशी सिरिलिक लिपि में लिखी जाती है। इसे सन् २००२ की जनगणना में १६.४ लाख लोगों ने अपनी मातृभाषा बताया था।, Keith Brown, Sarah Ogilvie, Elsevier, 2008, ISBN 978-0-08-087774-7,...

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चोलिस्तान

चोलिस्तान, जिसे स्थानीय भाषा में रोही भी कहते हैं, पाकिस्तानी पंजाब और भारत व सिंध के कुछ पड़ोसी भागों में फैला हुआ एक रेगिस्तान व अर्ध-रेगिस्तानी क्षेत्र है। यह थर रेगिस्तान से जुड़ा हुआ है। यहाँ हकरा नदी का सुखा हुआ प्राचीन मार्ग है जिसके किनारे सिन्धु घाटी सभ्यता के बहुत से खंडहर मिलते हैं। ९वीं सदी में राय जज्जा भट्टी द्वारा बनाया गया देरावड़ क़िला भी चोलिस्तान के बहावलपुर क्षेत्र में खड़ा है। .

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टकलामकान

अंतरिक्ष से ली गई टकलामकान की एक तस्वीर टकलामकान रेगिस्तान का एक दृश्य नक़्शे में टकलामकान टकलामकान मरुस्थल (उइग़ुर:, तेकलीमाकान क़ुम्लुक़ी) मध्य एशिया में स्थित एक रेगिस्तान है। इसका अधिकाँश भाग चीन द्वारा नियंत्रित श़िंजियांग प्रांत में पड़ता है। यह दक्षिण से कुनलुन पर्वत शृंखला, पश्चिम से पामीर पर्वतमाला और उत्तर से तियन शान की पहाड़ियों द्वारा घिरा हुआ है। .

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तातार भाषा

यान्या इमल्यै (विकसित अरबी लिपि) में लिखी तातार भाषा तातार भाषा (तातार: татар теле, तातार तेले; अंग्रेज़ी: Tatar language) रूस के तातारस्तान और बश्कोरतोस्तान के तातार लोगों द्वारा बोली जाने वाली एक तुर्की भाषा है। मध्य एशिया, युक्रेन, पोलैंड, तुर्की, फ़िनलैंड और चीन में भी कुछ तातार समुदाय इसे बोलते हैं। ध्यान दें कि युक्रेन के क्रीमिया क्षेत्र में एक 'क्रीमियाई तातार' नामक भाषा बोली जाती है जो इस तातार भाषा से भिन्न हैं, हालांकि दोनों भाषाएँ भाषावैज्ञानिक नज़रिए से सम्बन्ध रखती हैं। सन् २००२ में अनुमानित ६५ लाख लोग यह तातार भाषा बोलते थे।, Ethnologue Languages of the world .

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तातार लोग

दिनारा सफीना रूस के लिए टेनिस खेलती हैं और नस्ल से तातार हैं रुसलन चाग़ायेव उज़बेकिस्तान के लिए मुक्केबाज़ी करते हैं और एक तातार हैं तातार या ततार (तातार: ततरलार; रूसी: Татар; अंग्रेज़ी: Tatar) रूसी भाषा और तुर्की भाषाएँ बोलने वाली एक जाति है जो अधिकतर रूस में बसती है। दुनिया भर में इनकी आबादी ७० लाख अनुमानित की गई है, जिनमें से ५५ लाख रूस में रहते हैं। रूस के तातारस्तान प्रांत में २० लाख तातार रहते हैं। रूस के बाहर तातार समुदाय उज़बेकिस्तान, पोलैंड, काज़ाख़स्तान, युक्रेन, ताजिकिस्तान, किर्गिज़स्तान, तुर्कमेनिस्तान, चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका में पाए जाते हैं।, Global Vision Publishing Ho, 2005, ISBN 978-81-8220-062-3,...

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तारपान

फ़्रांस की एक ग़ुफ़ा में मिला तारपान-जैसे घोड़े का पुरापाषाण काल में बना चित्र आधुनिक हेक नस्ल का घोड़ा जिसका रंग-रूप तारपान से मिलता है तारपान या यूरेशियाई जंगली घोड़ा एक जंगली घोड़े की नस्ल थी जो विलुप्त हो चुकी है। विश्व का आखरी ज्ञात तारपान सन् १९०९ में रूस में मर गया। कुछ आधुनिक घोड़ों की नस्लें तारपान से मिलती जुलती हैं, जैसे की हेक घोड़ा। तारपान का रंग हल्का ख़ाकी होता था। जीव-वैज्ञानिक मानते हैं कि विश्व के पालतू घोड़े तारपान के ही विकसित वंशज हैं। .

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ताशक़ुरग़ान​

ताशक़ुरग़ान​ (सरिकोली:, तॉशक़ुरग़ॉन​; उइग़ुर:, ताशक़ूरग़ान बाज़िरी; चीनी: 塔什库尔干镇, ताशिकु'एरगन; अंग्रेज़ी: Tashkurgan) मध्य एशिया में चीन द्वारा नियंत्रित शिनजियांग प्रान्त के ताशक़ुरग़ान​ ताजिक स्वशासित ज़िले की राजधानी है। पाकिस्तान से पाक-अधिकृत कश्मीर के गिलगित-बल्तिस्तान क्षेत्र से आने वाले काराकोरम राजमार्ग पर यह पहला महत्वपूर्ण चीनी पड़ाव है। इस राजमार्ग पर सरहद पर स्थित ख़ुंजराब दर्रे की चीनी तरफ़ ताशक़ुरग़ान​ है और पाकिस्तानी तरफ़ सोस्त है।, Andrew Burke, pp.

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ताशक़ुरग़ान​ ताजिक स्वशासित ज़िला

ताशक़ुरग़ान​ ताजिक स्वशासित ज़िला जनवादी गणतंत्र चीन द्वारा नियंत्रित शिंजियांग प्रान्त के काश्गर विभाग का एक ज़िला है। इसकी ८०% से अधिक आबादी ताजिक समुदाय की है। इस ज़िले की राजधानी ताशक़ुरग़ान​ शहर है जहाँ से पाक-अधिकृत कश्मीर से गुज़रकर पाकिस्तान व चीन को जोड़ने वाला काराकोरम राजमार्ग निकलता है।, Andrew Burke, pp.

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ताजिक लोग

अफ़्ग़ान सांसद नीलोफ़र इब्राहिमी एक ताजिक हैं ताजिकिस्तान का एक परिवार ईद-उल-फ़ित्र की ख़ुशियाँ मनाते हुए ताजिक (ताजिक: Тоҷик, फ़ारसी:, तॉजिक) मध्य एशिया (विशेषकर ताजिकिस्तान, अफ़्ग़ानिस्तान, उज़बेकिस्तान और पश्चिमी चीन) में रहने वाले फ़ारसी-भाषियों के समुदायों को कहा जाता है। बहुत से अफ़्ग़ानिस्तान से आये ताजिक शरणार्थी ईरान और पाकिस्तान में भी रहते हैं। अपनी संस्कृति और भाषा के मामले में ताजिक लोगों का ईरान के लोगों से गहरा सम्बन्ध रहा है।, Olivier Roy, I.B.Tauris, 2000, ISBN 978-1-86064-278-4 चीन के ताजिक लोग अन्य ताजिक लोगों से ज़रा भिन्न होते हैं क्योंकि वे पूर्वी ईरानी भाषाएँ बोलते हैं जबकि अन्य ताजिक फ़ारसी बोलते हैं।, New World Press, 1989, ISBN 978-7-80005-078-7,...

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ताजिकी भाषा

द्वार पर ताजिकी में सिरिलिक लिपि में लिखा है 'बाग़-ए उस्तोद रुदाकी' (उस्ताद रुदाकी का बाग़) ताजिकी या ताजिकी फ़ारसी (тоҷикӣ,, तोजिकी) मध्य एशिया में बोली जाने वाली आधुनिक फ़ारसी भाषा का एक रूप है। ताजिकी बोलने वाले ज़्यादातर ताजिकिस्तान और उज़बेकिस्तान में रहते हैं, हालांकि ताजिकी मातृभाषियों के कुछ समुदाय अफ़्ग़ानिस्तान, रूस और चीन के शिनजियांग प्रान्त में भी मिलते हैं। अनुमानित किया गया है कि कुल मिलकर सन् १९९१ में ताजिकी बोलने वालों की संख्या ४४.६ लाख थी। वैसे तो ताजिकी ईरान में बोली जाने वाली फ़ारसी से काफ़ी मिलती है लेकिन ईरानी फ़ारसी में अरबी भाषा का प्रभाव अधिक है जबकि ताजिकी में तुर्की भाषाओँ और कुछ हद तक उज़बेक भाषा का असर ज़्यादा दिखता है।, Raymond Hickey, John Wiley and Sons, 2010, ISBN 978-1-4051-7580-7,...

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तिएले लोग

तिएले (鐵勒, Tiele), चिले (敕勒, Chile) या गाओचे (高車, Gaoche) उत्तरी चीन और मध्य एशिया में चौथी से आठवीं शताब्दी ईसवी के काल में नौ तुर्की जातियों का परिसंघ था। ऐतिहासिक चीनी स्रोतों के अनुसार तिएले लोग प्राचीन दिंगलींग लोगों के वंशज थे और वे इस क्षेत्र में शियोंगनु साम्राज्य के पतन के बाद उभरे। समय के साथ गोएकतुर्क ख़ागानत ने इन्हें अपने अधीन कर लिया। जब गोएकतुर्कों का पतन हुआ तो तिएले का एक हिस्सा, जिन्हें उईग़ुर कहा जाता था, ७४४ ईसवी में अपनी अलग उईग़ुर ख़ागानत स्थापित करने में सफल हो गया। उसके बाद से इतिहास में 'तिएले' का नाम लिया जाना बंद हो गया और उन सबको 'उईग़ुर' नाम से ही बुलाया जाने लगा। .

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तुर्क लोग

तुर्क लोगों का वितरण वे देश और प्रदेश जहाँ तुर्की भाषाओँ को सरकारी मान्यता प्राप्त है तुर्क लोग (तुर्की भाषा: Türk halkları, अंग्रेज़ी: Turkic peoples) मध्य एशिया, मध्य पूर्व और उनके पड़ोसी इलाक़ों में रहने वाली उन जातियों को कहा जाता है जिनकी मातृभाषाएँ तुर्की भाषा-परिवार की सदस्य हैं। इनमें आधुनिक तुर्की देश के लोगों के अलावा, अज़रबैजान, कज़ाख़स्तान, किरगिज़स्तान, उज़बेकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान के ज़्यादातर लोग शामिल हैं। उत्तरी अफ़्ग़ानिस्तान, पश्चिमी चीन के उईग़ुर लोग, रूस के तातार और चुवाश लोग और बहुत से अन्य समुदाय भी तुर्क लोगों के परिवार में आते हैं। गोएकतुर्क और ख़ज़र जैसी प्राचीन जातियाँ भी तुर्क थीं और संभव है कि मध्य एशिया में किसी ज़माने में धाक रखने वाले शियोंगनु लोग और हूण लोग भी तुर्क रहें हों।, Encyclopædia Britannica, Online Academic Edition, 2010 .

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तुर्कमेन लोग

तुर्कमेन मध्य एशिया में बसने वाली एक तुर्की-भाषी जाति का नाम है। तुर्कमेन लोग मुख्य रूप से तुर्कमेनिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान, पूर्वोत्तरी ईरान, सीरिया, इराक़ और उत्तरी कॉकस क्षेत्र में रूस के स्ताव्रोपोल क्राय में रहते हैं। यह तुर्कमेन भाषा बोलते हैं जो तुर्की भाषा-परिवार की ओग़ुज़ शाखा की एक बोली है। कुछ तुर्कमेन लोग तुर्की, अज़ेरी, क़शक़ाई और गागाउज़ भाषाएँ भी बोलते हैं। .

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तुर्कमेनिस्तान

तुर्कमेनिस्तान (तुर्कमेनिया के नाम से भी जाना जाता है) मध्य एशिया में स्थित एक तुर्किक देश है। १९९१ तक तुर्कमेन सोवियत समाजवादी गणराज्य (तुर्कमेन SSR) के रूप में यह सोवियत संघ का एक घटक गणतंत्र था। इसकी सीमा दक्षिण पूर्व में अफ़ग़ानिस्तान, दक्षिण पश्चिम में ईरान, उत्तर पूर्व में उज़्बेकिस्तान, उत्तर पश्चिम में कज़ाख़िस्तान और पश्चिम में कैस्पियन सागर से मिलती है। 'तुर्कमेनिस्तान' नाम फारसी से आया है, जिसका अर्थ है, 'तुर्कों की भूमि'। देश की राजधानी अश्गाबात (अश्क़ाबाद) है। इसका हल्के तौर पर "प्यार का शहर" या "शहर जिसको मोहब्बत ने बनाया" के रूप में अनुवाद होता है। यह अरबी के शब्द 'इश्क़' और फारसी प्रत्यय 'आबाद' से मिलकर बना है।, Bradley Mayhew, Lonely Planet, 2007, ISBN 978-1-74104-614-4,...

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तुर्किस्तान

सन् १९१४ के नक़्शे में रूसी तुर्किस्तान दर्शाया गया है तुर्किस्तान (अंग्रेज़ी: Turkistan या Turkestan, फ़ारसी) मध्य एशिया के एक बड़ा भूभाग का पारम्परिक नाम है जहाँ तुर्की भाषाएँ बोलने वाले तुर्क लोग रहते हैं। इस नाम द्वारा परिभाषित इलाक़े की सीमाएँ समय के साथ बदलती रहीं हैं और इसका प्रयोग भी तुर्किस्तान से बाहर रहने वाले लोग ही अधिक करते थे।, Anita Sengupta, Lexington Books, 2009, ISBN 978-0-7391-3606-5,...

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तुर्की-मंगोल

मुग़ल आक्रमणों से पूर्व का यूरेशिया, क़रीब १२०० ईसवी की स्थिति तुर्की-मंगोल (Turco-Mongol) मध्य एशिया के स्तेपी इलाक़े में रहने वाले विविध ख़ानाबदोश लोगों को दिया जाने वाला नाम था जो मंगोल साम्राज्य के अधीन थे। समय के साथ-साथ उनकी भाषा और पहचान में गहरी तुर्की छाप आ गई।, Reuven Amitai-Preiss, Cambridge University Press, 2005, ISBN 978-0-521-52290-8,...

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तुर्कीयाई भाषा

तुर्की-भाषी क्षेत्र: '''गहरा नीला''': वे क्षेत्र जहाँ तुर्की भाषा को राजभाषा का दर्जा प्राप्त है, '''हल्का नीला''': जहाँ तुर्की भाषा को अल्पसंख्यक भाषा की मान्यता प्राप्त है। तुर्की भाषा (Türkçe), आधुनिक तुर्की और साइप्रस की प्रमुख भाषा है। पूरे विश्व में कोई 6.3 करोड़ लोग इस मातृभाषा के रूप में बोलते हैं। यह तुर्क भाषा परिवार की सबसे व्यापक भाषा है जिसका मूल मध्य एशिया माना जाता है। बाबर, जो मूल रूप से मध्य एशिया (आधुनिक उज़्बेकिस्तान) का वासी था, चागताई भाषा बोलता था जो तुर्क भाषा परिवार में ही आती है। .

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तुषारी भाषाएँ

एक तख़्ती पर ब्राह्मी लिपि में लिखी हुई तुषारी 'बी' भाषा (कूचा, आक़्सू विभाग, शिनजियांग प्रान्त, चीन से मिली) तुषारी पांडुलिपि का अंश तुषारी या तुख़ारी (अंग्रेज़ी: Tocharian, टोचेरियन; यूनानी: Τόχαροι, तोख़ारोई) मध्य एशिया की तारिम द्रोणी में बसने वाले तुषारी लोगों द्वारा बोली जाने वाली हिन्द-यूरोपीय भाषा परिवार की भाषाएँ थीं जो समय के साथ विलुप्त हो गई। एक तुर्की ग्रन्थ में तुषारी को 'तुरफ़ानी भाषा' भी बुलाया गया था। इतिहासकारों का मानना है कि जब तुषारी-भाषी क्षेत्रों में तुर्की भाषाएँ बोलने वाली उईग़ुर लोगों का क़ब्ज़ा हुआ तो तुषारी भाषाएँ ख़त्म हो गई। तुषारी की लिपियाँ भारत की ब्राह्मी लिपि पर आधारित थीं और उन्हें तिरछी ब्राह्मी (Slanted Brahmi) कहा जाता है।, Florian Coulmas, Wiley-Blackwell, 1999, ISBN 978-0-631-21481-6,...

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तुषारी लोग

तारिम द्रोणी में स्थित क़िज़िल गुफ़ाओं में तुषारियों की छठी सदी में बनी तस्वीर - माना जाता है कि इनमें से बहुत के सुनहरे बाल और बिलौरी आँखें होती थीं तुषारी या तुख़ारी (अंग्रेज़ी: Tocharian, टोचेरियन) प्राचीन काल में मध्य एशिया में स्थित तारिम द्रोणी में बसने वाली एक जाति थी। यह हिन्द-यूरोपीय भाषाएँ बोलने वाले सब से पूर्वतम लोग थे। चीनी स्रोतों के अनुसार इनका युएझ़ी लोगों से गहरा सम्बन्ध था। इनकी उत्तरी शियोंगनु लोगों से बहुत झड़पें हुई, जिसके बाद इन्होनें तारिम द्रोणी का इलाक़ा छोड़ दिया। ८०० ईसवी के बाद इस क्षेत्र में इस क्षेत्र में उइग़ुर लोग के आकर बसने पर यहाँ हिन्द-यूरोपीय भाषाएँ विलुप्त हो गई और तुर्की भाषाएँ बोली जाने लगी। अफ़्ग़ानिस्तान के तख़ार प्रांत का नाम इसी जाति पर पड़ा है। इनका ज़िक्र संस्कृत ग्रंथों में बहुत होता है। अथर्ववेद में इन्हें शक लोगों और बैक्ट्रिया के लोगों से सम्बंधित बताया गया है।, Vasudev Sharan Agrawal, Prithvi Prakashan, 1963,...

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तुंगुसी भाषा-परिवार

उत्तर-पूर्वी एशिया में तुंगुसी भाषाओं का विस्तार एवेंकी भाषा में कुछ लिखाई, जो साइबेरिया में बोली जाने वाली एक तुंगुसी भाषा है मांचु भाषा में, जो एक तुंगुसी भाषा है तुंगुसी भाषाएँ (अंग्रेज़ी: Tungusic languages, तुन्गुसिक लैग्वेजिज़) या मांचु-तुंगुसी भाषाएँ पूर्वी साइबेरिया और मंचूरिया में बोली जाने वाली भाषाओं का एक भाषा-परिवार है। इन भाषाओं को मातृभाषा के रूप में बोलने वालुए समुदायों को तुंगुसी लोग कहा जाता है। बहुत सी तुंगुसी बोलियाँ हमेशा के लिए विलुप्त होने के ख़तरे में हैं और भाषावैज्ञानिकों को डर है कि आने वाले समय में कहीं यह भाषा-परिवार पूरा या अधिकाँश रूप में ख़त्म ही न हो जाए। बहुत से विद्वानों के अनुसार तुंगुसी भाषाएँ अल्ताई भाषा-परिवार की एक उपशाखा है। ध्यान दीजिये कि मंगोल भाषाएँ और तुर्की भाषाएँ भी इस परिवार कि उपशाखाएँ मानी जाती हैं इसलिए, अगर यह सच है, तो तुंगुसी भाषाओँ का तुर्की, उज़बेक, उइग़ुर और मंगोल जैसी भाषाओं के साथ गहरा सम्बन्ध है और यह सभी किसी एक ही आदिम अल्ताई भाषा की संतानें हैं।, Martine Irma Robbeets, Otto Harrassowitz Verlag, 2005, ISBN 978-3-447-05247-4 तुंगुसी भाषाएँ बोलने वाली समुदायों को सामूहिक रूप से तुंगुसी लोग कहा जाता है। .

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तूमन

तूमन या तोमान शब्द का अर्थ मंगोल भाषा और बहुत सी तुर्की भाषाओँ में 'दस हज़ार' की संख्या होता है और आधुनिक फ़ारसी में इसका अर्थ विस्तृत होकर 'असंख्य' या 'बहुत अधिक' भी हो गया है। इसका प्रयोग मध्य एशिया, मंगोलिया और ईरान में कई सन्दर्भों में मिलता है, जैसे कि -.

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तूवी भाषा

तूवा की राजधानी किज़िल में तुर्की लिपि का एक प्राचीन शिलालेख तूवी भाषा (तूवी: тыва дыл, तूवा द्यिल; अंग्रेज़ी: Tuvan) रूस के तूवा गणराज्य में बोली जाने वाली एक तुर्की भाषा है। इसके मातृभाषी तूवा के आलावा चीन, मंगोलिया और रूस के अन्य भागों में भी पाए जाते हैं। इसे मातृभाषा बोलने वालों की संख्या लगभग २.५ लाख अनुमानित की गई है। हालांकि यह एक तुर्की भाषा है, इसमें मंगोल, तिब्बती और रूसी भाषाओं का काफ़ी प्रभाव भी दिखता है। अलग तूवी समुदायों में इसकी अलग-अलग उपभाषाएँ बोली जाती हैं।, Bayarma Khabtagaeva, Otto Harrassowitz Verlag, 2009, ISBN 978-3-447-06095-0,...

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तेन्ग्री

यहाँ पुरानी तुर्की लिपि में 'तेन्ग्री' लिखा हुआ है गुयुक ख़ान द्वारा १२४६ ई में इसाई पोप को लिखे पत्र पर लगी मोहर में पहले चार शब्द है 'मोन्गके तेन्ग्री- यिन कुचुन्दुर' यानि 'सनातन आकाश की शक्ति के अधीन' ख़ान तेन्ग्री पर्वत तेन्ग्री (Tengri) प्राचीन तुर्क लोगों और मंगोल लोगों के धर्म के मुख्य देवता थे। इनकी मान्यता शियोंगनु और शियानबेई जैसे बहुत सी मंगोल और तुर्की समुदायों में थी और इनके नाम पर उन लोगों के धर्म को तेन्ग्री धर्म (Tengriism) बुलाया जाता है। तुर्की लोगों की सबसे पहली ख़ागानत ने, जिसका नाम गोएकतुर्क ख़ागानत था, भी इन्हें अपना राष्ट्रीय देवता ठहराया था और उसके ख़ागान भी अपनी गद्दी पर विराजमान होने का कारण 'तेन्ग्री की इच्छा' बताते थे। तेन्ग्री को 'आकाश का देवता' या 'नीले आकाश का पिता' कहा जाता था। अक्सर मंगोल शासक अपने राज के पीछे 'सनातन नीले आकाश की इच्छा' होने की बात किया करते थे।, Zachary Kent, Enslow Publishers, 2007, ISBN 978-0-7660-2715-2,...

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तोकमोक

तोकमोक शहर के एक चौराहे पर मिग (MIG) हवाई जहाज़ स्मारक तोकमोक (किरगिज़: Токмок, अंग्रेज़ी: Tokmok) मध्य एशिया के किर्गिज़स्तान देश के चुय प्रांत में एक शहर है। यह किर्गिज़स्तान के उत्तर में राष्ट्रीय राजधानी बिश्केक से पूर्व में चुय नदी और काज़ाख़स्तान की सरहद के पास स्थित है। सन् २००४ से १९ अप्रैल २००६ तक यह चुय प्रांत की राजधानी भी रहा था। .

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दिस्तग़िल सर

दिस्तग़िल सर या दिस्तेग़िल सर काराकोरम पर्वत शृंखला की हिस्पर मुज़ताग़ उपशृंखला का सबसे ऊँचा पर्वत है। यह पाक-अधिकृत कश्मीर के गिलगित-बल्तिस्तान खंड के गोजल क्षेत्र में स्थित है। दिस्तग़िल सर विश्व का १९वाँ सबसे ऊँचा और पाकिस्तानी नियंत्रित क्षेत्रों का ७वाँ सबसे ऊँचा पर्वत है। इसके ऊपरी भाग में एक ३ किमी लम्बा और तंग क्षेत्र है जिसपर तीन मुख्य शिखर हैं। पश्चिम/पश्चिमोत्तर में ७,८८५ मी ऊँचा, मध्य में ७,७६० मी ऊँचा और पूर्व/पूर्वोत्तर में ७,६९६ मी ऊँचा। .

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दिंगलींग लोग

दिंगलींग (चीनी: 丁零, अंग्रेजी: Dingling, कोरियाई: जेओंग रयुंग) साइबेरिया में बसने वाली एक प्राचीन जाति थी। यह शुरू में बयकाल झील से पश्चिम में लेना नदी के किनारे बसा करते थे लेकिन समय के साथ दक्षिण की ओर जाकर मंगोलिया और उत्तरी चीन के क्षेत्र में जा बसे। महान इतिहासकार के अभिलेख नामक चीनी इतिहास-ग्रन्थ के अनुसार बाद में उन्हें शियोंगनु साम्राज्य के अधीन कर लिया गया हालांकि ७१ ईसापूर्व के बाद उन्होंने शियोंगनुओं के ख़िलाफ़ विद्रोह करा। तीसरी सदी ईसवी के बाद वे तिएले लोगों (鐵勒, Tiele) का भाग बन गए जो धीरे-धीरे पश्चिम की ओर मध्य एशिया में फैल गए। इन्ही तिएले लोगों का एक गुट हिन्द-यूरोपीयों से मिश्रित हो गया जिस से उईग़ुर जाति उत्पन्न हुई। दिंगलींग लोगों की एक दूसरी शाखा शियानबेई लोगों में जा मिली।, University of California, Berkeley.

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दोन नदी

दोन नदी का नक़्शा रूस के रोस्तोव ओब्लास्त के किनारे बसा कालिनिन्सकी गाँव दोन नदी (रूसी भाषा: Дон, दोन), जिसे अंग्रेज़ी में डॉन नदी (Don, डॉन) भी उच्चारित किया जाता है, रूस की एक प्रमुख नदी है। यह मास्को से दक्षिण-पूर्व में स्थित नोवोमोस्कोव्स्क (Новомоско́вск, Novomoskovsk)​ शहर के पास शुरू होती है और १,९५० किलोमीटर बहकर आज़ोव सागर में जा मिलती है। इस नदी के किनारे बसा सब से बड़ा शहर रोस्तोव-दोन-किनारे है (रूसी में इसे रोस्तोव-ना-दोनू Ростов-на-Дону कहते हैं और अंग्रेज़ी में रोस्तोव-ऑन-डॉन Rostov-on-Don, ताकि इसे रूस में स्थित अन्य रोस्तोव नामक नगरों से अलग बताया जा सके)। एक दोनेत्स (Северский Донец, सेवेर्सकी दोनेत्स) नाम की नदी भी अपना पानी आगे जाकर दोन नदी में विलय कर देती है। .

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नायमन लोग

चंगेज़ ख़ान के मंगोल साम्राज्य से पहले १३वीं सदी में यूरेशिया के स्थिति - नायमन (Naiman) राज्य नक़्शे में दिख रहा है नायमन या नायमन तुर्क या नायमन मंगोल (मंगोल: Найман ханлиг, नायमन ख़ानलिग) मध्य एशिया के स्तेपी इलाक़े में बसने वाली एक जाति का मंगोल भाषा में नाम था, जिनके कारा-ख़ितान के साथ सम्बन्ध थे और जो सन् ११७७ तक उनके अधीन रहे। मंगोल नाम होने के बावजूद, नायमानों को एक मंगोल जाति नहीं बल्कि एक तुर्की जाति माना जाता है।, René Grousset, Rutgers University Press, 1970, ISBN 978-0-8135-1304-1,...

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पुरानी तुर्की भाषा

पुरानी तुर्की भाषा में लिखे बिलगे ख़ागान के शिलालेखों की एक नक़ल जो तुर्की के ग़ाज़ी विश्वविद्यालय में रखी है पुरानी तुर्की भाषा (Old Turkic), जिसे ओरख़ोन तुर्की (Orkhon Turkic) और पुरानी उईग़ुर (Old Uyghur) भी कहते हैं, तुर्की भाषाओँ का सबसे पुराना प्रमाणित रूप है। यह ७वीं से १३वीं सदी ईसवी के गोएकतुर्क (Göktürk) और उईग़ुर लिखाइयों में मिलता है। यह तुर्की भाषाओँ में दक्षिणपूर्वी शाखा की सदस्य मानी जाती है जिसकी आधुनिक सदस्य उईग़ुर भाषा और चग़ताई भाषा हैं। यह बहुत सी लिपियों में लिखी जाती थी, जैसे की रूनी लिपि से देखने में मिलने वाली पुरानी तुर्की लिपि, भारत से उत्पन्न हुई ब्राह्मी लिपि, सोग़्दा से मिली एक लिपि से विकसित हुई प्राचीन उईग़ुर लिपि, इत्यादि।, Lars Johanson, Taylor & Francis, 1998, ISBN 978-0-415-08200-6,...

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पुरानी तुर्की लिपि

किज़िल में पुरानी तुर्की लिपि में तराशा हुआ एक शिलालेख विल्हेल्म तोमसेन द्वारा बनाई पुरानी तुर्की लिपि के वर्णों की फ़हरिस्त पुरानी तुर्की लिपि (Old Turkic script), जिसे ओरख़ोन लिपि (Orkhon script), ओरख़ोन-येनिसेय लिपि (Orkhon-Yenisey script) और गोएकतुर्क लिपि (Göktürk script) भी कहते हैं, गोएकतुर्क और अन्य तुर्की-भाषी ख़ानतों द्वारा पुरानी तुर्की भाषा को लिखने के लिए ८वीं से लेकर १०वीं सदी तक प्रयोग होने वाली एक वर्णमाला थी। इसे कभी-कभी रूनीनुमा तुर्की लिपि (Runiform Turkish script) भी कहते हैं क्योंकि दिखने में यह यूरोप की जर्मैनी भाषाएँ लिखने के लिए प्रयोग होने वाली रूनी लिपि जैसी थी, हालांकि इन दोनों लिपियों का वैसे कोई वास्तविक सम्बन्ध नहीं है। पुरानी तुर्की लिपि उर्दू और अरबी-फ़ारसी लिपि की तरह दाएँ से बाएँ पढ़ी जाती थी।, Wolfgang-Ekkehard Scharlipp, Kantzilaris Centre, 1994, ISBN 978-9963-8124-0-0 .

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बलक़ानाबात

बलक़ानाबात बलक़ान दाग़लरी नामक पर्वत शृंखला के समीप बसा हुआ है बलक़ानाबात (तुर्कमेनी: Балканабат; अंग्रेज़ी: Balkanabat; फ़ारसी:, बलख़ानाबाद), जिसका पुराना नाम 'नेबित दाग़' (Nebit Dag) था, तुर्कमेनिस्तान के बलक़ान प्रांत की राजधानी है। सन् २००६ की जनगणना में इसकी आबादी ८७,८२२ थी। यह शहर तुर्कमेनिस्तान के पश्चिम में उस देश की राष्ट्रीय राजधानी अश्क़ाबाद से गाड़ी द्वारा ४ घंटे की दूरी पर स्थित है। यह कैस्पियन सागर पर बसे तुर्कमेनबाशी बंदरगाह शहर से २ घंटे दूर है। .

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बालासगून

बुराना बुर्ज बालासगून (तुर्की: Balagasun, फ़ारसी:, अंग्रेज़ी: Balasagun) मध्य एशिया के किरगिज़स्तान क्षेत्र में एक प्राचीन सोग़दाई शहर था। यह चुय वादी में किरगिज़स्तान की आधुनिक राजधानी बिश्केक और इसिक कुल झील के बीच स्थित था। शुरू में यहाँ सोग़दाई भाषा बोली जाती थी, जो एक ईरानी भाषा थी। १०वीं सदी ईसवी के बाद यह काराख़ानी ख़ानत की राजधानी बना जो तुर्की भाषी था जिस से यहाँ की स्थानीय भाषा धीरे-धीरे बदलकर तुर्की हो गई। १२वीं सदी में इसपर कारा-ख़ितान ख़ानत का क़ब्ज़ा हो गया और फिर सन् १२१८ में फैलते हुए मंगोल साम्राज्य ने इस क्षेत्र पर अपना अधिकार कर लिया। मोंगोलों ने इसका नाम बदलकर गोबालिक (Gobalik) कर दिया, जिसका मतलब मंगोल भाषा में 'सुन्दर शहर' था। मंगोल जीत के बाद इस शहर का महत्व घटने लगा। अब यहाँ बहुत से खँडहर हैं जिन्हें देखने के लिए सैलानी आया करते हैं। यहाँ का बुराना बुर्ज (Burana Tower) मशहूर है, जो कभी १३८ फ़ुट (४६ मीटर) लम्बा था लेकिन भूकम्पों में इसके हिस्से गिरने से केवल ७९ फ़ुट (२४ मीटर) रह गया है। यहाँ नेस्टोरी शाखा के ईसाई भी रहते थे जिनका टूटता हुआ कब्रिस्तान भी यहीं मौजूद है। तुर्की भाषा के प्रसिद्ध 'कूतादगू बिलिग' (Kutadgu Bilig) नामक ग्रन्थ के रचियता, युसुप ख़ास हाजिब, भी बालासगून शहर में पैदा हुए थे।, Laurence Mitchell, pp.

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बासमाची विद्रोह

ऍनवर पाशा एक तुर्की सिपहसालार थे जिन्होंने बासमाची विद्रोहियों को अपने नेतृत्व में संगठित करने का असफल प्रयास किया बासमाची विद्रोह (रूसी: Басмачество, बासमाचेस्त्वो, Basmachi) सोवियत संघ और, सोवियत संघ के बनने से पहले, रूस की शाही सरकार के विरुद्ध मध्य एशिया में बसने वाले तुर्की भाषाएँ बोलने वाले मुस्लिम समुदायों के विद्रोहों के एक सिलसिले को कहते हैं जो सन् १९१६ से १९३१ तक चले। 'बासमाची' शब्द उज़बेक भाषा से लिया गया है, जिसमें इसका अर्थ 'डाकू' होता है और यह हिन्दी भाषा में पाए जाने वाले 'बदमाश' शब्द का एक रूप है।, Dilip Hiro, Penguin, 2009, ISBN 978-1-59020-221-0,...

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बिलगे ख़ागान

ओरख़ोन नदी के पास खड़ा की गई ऐसी शिलाएँ बिलगे ख़ागान के लिए स्मारक थीं और इनपर पुरानी तुर्की भाषा की सबसे प्राचीन ज्ञात लिखाई है बिलगे ख़ागान (Bilge Qaghan, जन्म: ६८३ या ६८४ ईसवी, मृत्यु: ७३४ ईसवी) गोएकतुर्क ख़ागानत का एक ख़ागान (सर्वोच्च ख़ान शासक) था। उसके कारनामों का बखान प्रसिद्ध ओरख़ोन शिलालेखों में मिलता है। .

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मध्य एशिया

मध्य एशिया एशिया के महाद्वीप का मध्य भाग है। यह पूर्व में चीन से पश्चिम में कैस्पियन सागर तक और उत्तर में रूस से दक्षिण में अफ़ग़ानिस्तान तक विस्तृत है। भूवैज्ञानिकों द्वारा मध्य एशिया की हर परिभाषा में भूतपूर्व सोवियत संघ के पाँच देश हमेशा गिने जाते हैं - काज़ाख़स्तान, किरगिज़स्तान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज़बेकिस्तान। इसके अलावा मंगोलिया, अफ़ग़ानिस्तान, उत्तरी पाकिस्तान, भारत के लद्दाख़ प्रदेश, चीन के शिनजियांग और तिब्बत क्षेत्रों और रूस के साइबेरिया क्षेत्र के दक्षिणी भाग को भी अक्सर मध्य एशिया का हिस्सा समझा जाता है। इतिहास में मध्य एशिया रेशम मार्ग के व्यापारिक और सांस्कृतिक महत्व के लिए जाना जाता है। चीन, भारतीय उपमहाद्वीप, ईरान, मध्य पूर्व और यूरोप के बीच लोग, माल, सेनाएँ और विचार मध्य एशिया से गुज़रकर ही आते-जाते थे। इस इलाक़े का बड़ा भाग एक स्तेपी वाला घास से ढका मैदान है हालाँकि तियान शान जैसी पर्वत शृंखलाएँ, काराकुम जैसे रेगिस्तान और अरल सागर जैसी बड़ी झीलें भी इस भूभाग में आती हैं। ऐतिहासिक रूप मध्य एशिया में ख़ानाबदोश जातियों का ज़ोर रहा है। पहले इसपर पूर्वी ईरानी भाषाएँ बोलने वाली स्किथी, बैक्ट्रियाई और सोग़दाई लोगों का बोलबाला था लेकिन समय के साथ-साथ काज़ाख़, उज़बेक, किरगिज़ और उईग़ुर जैसी तुर्की जातियाँ अधिक शक्तिशाली बन गई।Encyclopædia Iranica, "CENTRAL ASIA: The Islamic period up to the Mongols", C. Edmund Bosworth: "In early Islamic times Persians tended to identify all the lands to the northeast of Khorasan and lying beyond the Oxus with the region of Turan, which in the Shahnama of Ferdowsi is regarded as the land allotted to Fereydun's son Tur.

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महमूद काश्गरी

महमूद काश्गरी (उईग़ुर:, अंग्रेज़ी: Mahmud al-Kashgari) ११वीं सदी ईसवी के काल में तुर्की भाषाओँ के एक विद्वान और कोशकर्मी (शब्दकोष निर्माता) थे। वे मध्य एशिया के काश्गर शहर के निवासी थे। उन्होंने १०७४ ईसवी में तुर्की भाषाओँ का पहला सम्पूर्ण शब्दकोश तैयार किया, जिसका नाम 'दीवान-उ-लुग़ात​-उत-तुर्क' था।, Misbah Islam, pp.

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मंगोल साम्राज्य

हलाकू (बायें), खलीफा अल-मुस्तसिम को भूख से मारने के लिये उसके खजाने में कैद करते हुए मांगके खान की मृत्यु के समय (१२५९ ई में) मंगोल साम्राज्य मंगोल साम्राज्य 13 वीं और 14 वीं शताब्दियों के दौरान एक विशाल साम्राज्य था। इस साम्राज्य का आरम्भ चंगेज खान द्वारा मंगोलिया के घूमन्तू जनजातियों के एकीकरण से हुआ। मध्य एशिया में शुरू यह राज्य अंततः पूर्व में यूरोप से लेकर पश्चिम में जापान के सागर तक और उत्तर में साइबेरिया से लेकर दक्षिण में भारतीय उपमहाद्वीप तक फैल गया। आमतौर पर इसे दुनिया के इतिहास में सबसे बड़ा सन्निहित साम्राज्य माना जाना जाता है। अपने शीर्ष पर यह 6000 मील (9700 किमी) तक फैला था और 33,000,000 वर्ग कि॰मी॰ (12,741,000 वर्ग मील) के क्षेत्र को कवर करता था। इस समय पृथ्वी के कुल भू क्षेत्रफल का 22% हिस्सा इसके कब्ज़े में था और इसकी आबादी 100 करोड़ थी। मंगोल शासक पहले बौद्ध थे, लेकिन बाद में धीरे-धीरे तुर्कों के सम्पर्क में आकर उन्होंने इस्लाम को अपना लिया। .

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मुग़ल साम्राज्य

मुग़ल साम्राज्य (फ़ारसी:, मुग़ल सलतनत-ए-हिंद; तुर्की: बाबर इम्परातोरलुग़ु), एक इस्लामी तुर्की-मंगोल साम्राज्य था जो 1526 में शुरू हुआ, जिसने 17 वीं शताब्दी के आखिर में और 18 वीं शताब्दी की शुरुआत तक भारतीय उपमहाद्वीप में शासन किया और 19 वीं शताब्दी के मध्य में समाप्त हुआ। मुग़ल सम्राट तुर्क-मंगोल पीढ़ी के तैमूरवंशी थे और इन्होंने अति परिष्कृत मिश्रित हिन्द-फारसी संस्कृति को विकसित किया। 1700 के आसपास, अपनी शक्ति की ऊँचाई पर, इसने भारतीय उपमहाद्वीप के अधिकांश भाग को नियंत्रित किया - इसका विस्तार पूर्व में वर्तमान बंगलादेश से पश्चिम में बलूचिस्तान तक और उत्तर में कश्मीर से दक्षिण में कावेरी घाटी तक था। उस समय 40 लाख किमी² (15 लाख मील²) के क्षेत्र पर फैले इस साम्राज्य की जनसंख्या का अनुमान 11 और 13 करोड़ के बीच लगाया गया था। 1725 के बाद इसकी शक्ति में तेज़ी से गिरावट आई। उत्तराधिकार के कलह, कृषि संकट की वजह से स्थानीय विद्रोह, धार्मिक असहिष्णुता का उत्कर्ष और ब्रिटिश उपनिवेशवाद से कमजोर हुए साम्राज्य का अंतिम सम्राट बहादुर ज़फ़र शाह था, जिसका शासन दिल्ली शहर तक सीमित रह गया था। अंग्रेजों ने उसे कैद में रखा और 1857 के भारतीय विद्रोह के बाद ब्रिटिश द्वारा म्यानमार निर्वासित कर दिया। 1556 में, जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर, जो महान अकबर के नाम से प्रसिद्ध हुआ, के पदग्रहण के साथ इस साम्राज्य का उत्कृष्ट काल शुरू हुआ और सम्राट औरंगज़ेब के निधन के साथ समाप्त हुआ, हालाँकि यह साम्राज्य और 150 साल तक चला। इस समय के दौरान, विभिन्न क्षेत्रों को जोड़ने में एक उच्च केंद्रीकृत प्रशासन निर्मित किया गया था। मुग़लों के सभी महत्वपूर्ण स्मारक, उनके ज्यादातर दृश्य विरासत, इस अवधि के हैं। .

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याकूत लोग

याकूत (अंग्रेज़ी: Yakut) या साख़ा (साख़ा: Саха) रूस के साइबेरिया क्षेत्र के मध्य-उत्तरी भाग में स्थित साख़ा गणतंत्र में बसने वाला तुर्क लोगों का एक समुदाय है। यह अपनी अलग साख़ा भाषा बोलते हैं जो तुर्की भाषाओं की साइबेरियाई शाखा की उत्तरी उपशाखा की एक बोली है। कुछ याकूत लोग साख़ा गणतंत्र से बाहर रूस के अमूर, मागादान व साख़ालिन क्षेत्रों में और तैमिर व एवेंक स्वशासित क्षेत्रों में भी रहते हैं। २००२ की जनगणना में इनकी लगभग साढ़े-चार लाख की आबादी साख़ा गणतंत्र में रह रही थी। सोवियत संघ के ज़माने में इनके इलाके में बहुत से रूसी लोग आ बसे जिस से इनका उन क्षेत्रों में प्रतिशत-हिस्सा घाट गया लेकिन सोवियत व्यवस्था टूटने के बाद यह ज़रा-बहुत बढ़ा है। भूगोल और अर्थव्यवस्था के हिसाब से याकूत लोग दो समूहों में बंटे हैं। उत्तरी याकूत शिकार, मछली पकड़ने और रेनडियर-पालन से जीवनी चलते हैं, जबकि दक्षिणी याकूत गाय और घोड़ों का मवेशी-पालन करते हैं।, Centre for Russian Studies, Accessed: 2006-10-26 .

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यूरेशियाई आवार लोग

सन् ६०० ईसवी में यूरोप का नक़्शा जिसके दक्षिण में आवारों का साम्राज्य देखा जा सकता है यूरेशियाई आवार (Eurasian Avar) या प्राचीन आवार मध्य एशिया के स्तेपी मैदानों की एक जाति थी जो आरम्भ में तो शायद जू-जान ख़ागानत की तुर्की मूल की थी लेकिन बाद में मिश्रित यूरेशियाई जातियों का परिसंघ बन गई। आवार एक ख़ागान द्वारा शासित परिसंघ था जिसके शक्ति के केंद्र में ख़ानाबदोश योद्धाओं का एक जत्था था। इन लोगों का वर्णन पाँचवी सदी के बाद इतिहासकारों द्वारा किया जाने लगा लेकिन मध्य और पूर्वी यूरोप पर इन्होनें अपना आवार ख़ागानत नाम का साम्राज्य मध्य छठी सदी में ही जा के क़ायम किया। इनका राज्य नवी शताब्दी के आरम्भ तक चला।, Gábor Hosszú, ISBN 978-963-88437-4-6,...

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शियोंगनु लोग

२५० ईसापूर्व में शियोंगनु क्षेत्र शियोंगनु (चीनी: 匈奴, अंग्रेज़ी: Xiongnu) एक प्राचीन ख़ानाबदोश क़बीलों की जाती थी जो चीन के हान राजवंश के काल में हान साम्राज्य से उत्तर में रहती थी। इतिहास में उनका वर्णन सीमित है, इसलिए यह ठीक से ज्ञात नहीं है कि उनकी नस्ल क्या थी। अलग-अलग इतिहासकार उन्हें तुर्की, मंगोली, ईरानी, तुन्गुसी और तुषारी जातियों का बताते हैं। उनके नामों और रीति-रिवाजों के बारे में जितना पता है वह प्राचीन चीनी सूत्रों से आता है। शियोंगनु भाषा हमेशा के लिए खोई जा चुकी है। यह संभव है कि 'शियोंगनु' शब्द 'हूण' के लिए एक सजातीय शब्द हो लेकिन इसका भी कोई पक्का प्रमाण नहीं है।, Valerie Hansen, Kenneth Curtis, Kenneth R. Curtis, Cengage Learning, 2008, ISBN 978-0-618-07723-6,...

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शिंजियांग

चीन का नक़्शा, शिंजियांग गहरे लाल रंग में शिन्जियांग में काराकोरम राजमार्ग के नज़दीक का दृश्य तियांची सरोवर बुरचिन ज़िले में एक नदी शिंजियांग (उइग़ुर:, अंग्रेज़ी: Xinjiang, चीनी: 新疆) जनवादी गणराज्य चीन का एक स्वायत्तशासी क्षेत्र है। ये एक रेगिस्तानी और शुष्क इलाक़ा है इसलिए इस की आबादी बहुत कम है। शिंजियांग की सरहदें दक्षिण में तिब्बत और भारत, दक्षिण-पूर्व में चिंग हई और गांसू, पूर्व में मंगोलिया, उत्तर में रूस और पश्चिम में क़ाज़क़स्तान, किरगिज़स्तान, ताजिकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान से मिलती हैं। भारत का अक्साई चिन का इलाका भी, जिसपर चीन का क़ब्ज़ा है, प्रशासनिक रूप से शिंजियांग में शामिल है।, S. Frederick Starr, M.E. Sharpe, 2004, ISBN 978-0-7656-1318-9 शिंजियांग की राजधानी उरुमची नाम का शहर है, जबकि इसका सबसे बड़ा नगर काश्गर है। .

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सरी सू नदी

सरी सू नदी या सरीसू नदी (काज़ाख़​: Сарысу, अंग्रेज़ी: Sary su River) मध्य काज़ाख़​स्तान में बहने वाली एक नदी है। यह काराग़ान्दी प्रांत में अतासू क्षेत्र में उत्पन्न होती है और पहले पश्चिम किज़िल-द्झ़ार​ की तरफ और फिर मुड़कर दक्षिणपश्चिम की ओर चलती है। बिरलेस्तिक और झ़ानाबास नामक बस्तियों के पास से गुज़रकर यह एक छोटी झीलों की शृंखला में अंत हो जाती है। इन झीलों को रूसी भाषा में ओज़ेरा सेगिज़ (यानि 'सेगिज़ झीलें') कहा जाता है लेकिन यह अक्सर सूखी हुई ही रहती हैं।, C. Hilary Fry, pp.

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सलजूक़ साम्राज्य

'बुर्ज तोग़रोल​' ईरान की राजधानी तेहरान के पास तुग़रिल बेग़​ के लिए १२वीं सदी में बना एक स्मारक बुर्ज है सलजूक़​ साम्राज्य या सेल्जूक साम्राज्य(तुर्की: Büyük Selçuklu Devleti; फ़ारसी:, दौलत-ए-सलजूक़ियान​; अंग्रेज़ी: Seljuq Empire) एक मध्यकालीन तुर्की साम्राज्य था जो सन् १०३७ से ११९४ ईसवी तक चला। यह एक बहुत बड़े क्षेत्र पर विस्तृत था जो पूर्व में हिन्दू कुश पर्वतों से पश्चिम में अनातोलिया तक और उत्तर में मध्य एशिया से दक्षिण में फ़ारस की खाड़ी तक फैला हुआ था। सलजूक़ लोग मध्य एशिया के स्तेपी क्षेत्र के तुर्की-भाषी लोगों की ओग़ुज़​ शाखा की क़िनिक़​ उपशाखा से उत्पन्न हुए थे। इनकी मूल मातृभूमि अरल सागर के पास थी जहाँ से इन्होनें पहले ख़ोरासान​, फिर ईरान और फिर अनातोलिया पर क़ब्ज़ा किया। सलजूक़ साम्राज्य की वजह से ईरान, उत्तरी अफ़्ग़ानिस्तान​, कॉकस और अन्य इलाक़ों में तुर्की संस्कृति का प्रभाव बना और एक मिश्रित ईरानी-तुर्की सांस्कृतिक परम्परा जन्मी।, Jamie Stokes, Anthony Gorman, pp.

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साख़ा भाषा

साख़ा (रूसी: Саха, अंग्रेज़ी: Sakha) या याकूती (Якутский, Yakut) रूस के साइबेरिया क्षेत्र में स्थित साख़ा गणतंत्र में साख़ा (याकूत) लोगों द्वारा बोली जाने वाली एक तुर्की भाषा है। यह एक अभिश्लेषण और स्वर सहयोग इस्तेमाल करने वाली भाषा है। साख़ा गणतंत्र के पास स्थित तैमिर प्रायद्वीप में बोली जाने वाली 'दोलगान भाषा' इसकी क़रीबी सम्बन्धी है। इस भाषा के एक-तिहाई शब्द तुर्की भाषाओं से हैं, एक तिहाई मंगोल भाषाओं से और एक-तिहाई साइबेरिया में पहले बसने वाली किसी अज्ञात जाति की भाषा से हैं जिन्हें साख़ा में जगह मिल गई है।, Martin Haspelmath, Uri Tadmor, pp.

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साइबेरियाई तुर्की भाषाएँ

साइबेरियाई तुर्की भाषाएँ (Siberian Turkic languages) या पूर्वोत्तरी तुर्की भाषाएँ (Northeastern Turkic languages) तुर्की भाषा-परिवार की छह शाखाओं में से एक हैं। .

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सुनहरा उर्दू

सन् १३०० ईसवी में सुनहरा उर्दू साम्राज्य (हरे रंग में) सुनहरा उर्दू या सुनहरा झुण्ड (मंगोल: Зүчийн улс, ज़ुची-इन उल्स; अंग्रेज़ी: Golden Horde) एक मंगोल ख़ानत थी जो १३वीं सदी में मंगोल साम्राज्य के पश्चिमोत्तरी क्षेत्र में शुरू हुई थी और जिसे इतिहासकार मंगोल साम्राज्य का हिस्सा मानते हैं। इसे किपचक ख़ानत और जोची का उलुस भी कहा जाता था। यह ख़ानत १२४० के दशक में स्थापित हुई और सन् १५०२ तक चली। यह अपने बाद के काल में तुर्की प्रभाव में आकर एक तुर्की-मंगोल साम्राज्य बन चला था। इस साम्राज्य की नीव जोची ख़ान के पुत्र (और चंगेज़ ख़ान के पोते) बातु ख़ान ने रखी थी। अपने चरम पर इस ख़ानत में पूर्वी यूरोप का अधिकतर भाग और पूर्व में साइबेरिया में काफ़ी दूर तक का इलाक़ा शामिल था। दक्षिण में यह कृष्ण सागर के तट और कॉकस क्षेत्र तक विस्तृत थी। इसकी दक्षिण सीमाएँ इलख़ानी साम्राज्य नाम की एक अन्य मंगोल ख़ानत से लगती थीं।, David Morgan, John Wiley & Sons, 2007, ISBN 978-1-4051-3539-9,...

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सुम (ज़िला)

मंगोलिया के अरख़ानगई प्रांत के सुम सुम (मंगोलियाई: ᠰᠤᠮᠤ या сум; अंग्रेजी: Sum), सुमु या सुमुन मंगोलियाई और तुर्की भाषाओँ में ज़िले का स्तर रखने वाले एक प्रशासनिक प्रभाग हो कहते हैं। यह ईकाई मंगोलिया में और चीन और रूस के मंगोल इलाक़ों में इस्तेमाल होती है। चीन में इसे भीतरी मंगोलिया में और रूस में इसे बुरयात गणतंत्र और तूवा में प्रयोग किया जाता है। .

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स्वर सहयोग

भाषाशास्त्र में स्वर सहयोग कुछ भाषाओं में देखे जाने वाले ऐसे नियमों को कहते हैं जो यह फ़ैसला करते हैं के कौन से स्वर एक​-दूसरे के पास पाए जा सकते हैं और कौन से नहीं। उदाहरण के लिए तुर्की भाषा में स्वरों को आगे के स्वर और पीछे के स्वरों में बाँटा जाता है और एक शब्द में केवल आगे के या पीछे के स्वर हो सकते है। इन्हें एक ही शब्द में मिलाए जाने पर पाबंदी है। "तुर्की (देश) में" को तुर्की भाषा में "तुऍर्कीये दे" (Türkiye'de) कहेंगे, लेकिन "जर्मनी में" को "अल्मान्या दा" (Almanya'da) कहना होगा, क्योंकि ई (i) और उऍ (ü) के स्वर आगे के हैं और इन्हें 'आ' (a) के साथ मिलाना वर्जित है क्योंकि वह एक पीछे का स्वर है। तुर्की भाषा के अलावा स्वर सहयोग तुर्की भाषा परिवार की क​ई भाषाओं में देखा जाता है, जैसे कि काज़ाख़, किर्ग़िज़ और उईग़ुर में। भारतीय भाषाओं में यह कुछ हद तक तेलुगु और तिब्बती में देखा जाता है। इनके अतिरिक्त यह हंगेरियाई, फ़िनी (फ़िनिश), मोंगोलियाई और कोरियाई में मिलता है। जापानी भाषा के बारे में विद्वानों मे मतभेद है, क्योंकि इसके पुराने ग्रन्थों को देखकर स्वर सहयोग के कुछ चिन्ह तो मिलते हैं लेकिन वे स्पष्ट नहीं हैं। .

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सोग़दा

३०० ईसापूर्व में सोग़दा का क्षेत्र एक चीनी शिल्प-वस्तु पर सोग़दाई लोगों का चित्रण सोग़दाई व्यापारी भगवान बुद्ध को भेंट देते हुए (बाएँ की तस्वीर के निचले हिस्से को दाई तरफ़ बड़ा कर के दिखाया गया है) सोग़दा, सोग़दिया या सोग़दियाना (ताजिक: Суғд, सुग़्द; तुर्की: Soğut, सोग़ुत) मध्य एशिया में स्थित एक प्राचीन सभ्यता थी। यह आधुनिक उज़्बेकिस्तान के समरक़न्द, बुख़ारा, ख़ुजन्द और शहर-ए-सब्ज़ के नगरों के इलाक़े में फैली हुई थी। सोग़दा के लोग एक सोग़दाई नामक भाषा बोलते थे जो पूर्वी ईरानी भाषा थी और समय के साथ विलुप्त हो गई। माना जाता है कि आधुनिक काल के ताजिक, पश्तून और यग़नोबी लोगों में से बहुत इन्ही सोग़दाई लोगों के वंशज हैं। .

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हफथाली लोग

५०० ईसवी के नक़्शे में हफथाली ख़ानत​ उद्यान के राजा लखन (लखन उदयादित्य) का सिक्का हफथाली (Hephthalites) मध्य एशिया में ५वीं और ६ठी सदी ईसवी में रहने वाली एक ख़ानाबदोश जाति थी। भारत में यह श्वेत हूण और तुरुष्क के नाम से भी जाने जाते थे। चीनी सूत्रों के हवाले से यह पहले चीन की महान दीवार से उत्तर में रहने वाले युएझ़ी लोग थे।, Encyclopaedia Britannica, 1973, ISBN 978-0-85229-173-3,...

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हिन्द-यूरोपीय भाषा-परिवार

हिन्द - यूरोपीय भाषाओं देश बोल रही हूँ. गाढ़े हरे रंग के देश में जो बहुमत भाषा हिन्द - यूरोपीय परिवार हैं, लाइट ग्रीन एक देश वह जिसका आधिकारिक भाषा हिंद- यूरोपीय है, लेकिन अल्पसंख्यकों में है। हिन्द-यूरोपीय (या भारोपीय) भाषा-परिवार संसार का सबसे बड़ा भाषा परिवार (यानी कि सम्बंधित भाषाओं का समूह) हैं। हिन्द-यूरोपीय (या भारोपीय) भाषा परिवार में विश्व की सैंकड़ों भाषाएँ और बोलियाँ सम्मिलित हैं। आधुनिक हिन्द यूरोपीय भाषाओं में से कुछ हैं: हिन्दी, उर्दू, अंग्रेज़ी, फ़्रांसिसी, जर्मन, पुर्तगाली, स्पैनिश, डच, फ़ारसी, बांग्ला, पंजाबी, रूसी, इत्यादि। ये सभी भाषाएँ एक ही आदिम भाषा से निकली है, उसे आदिम-हिन्द-यूरोपीय भाषा का नाम दे सकता है। यह संस्कृत से बहुत मिलती-जुलती थी, जैसे कि वह सांस्कृत का ही आदिम रूप हो। .

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हज़ारगी भाषा

हज़ारगी में हज़ारगी भाषा का नाम, जो 'आज़रगी' लिखा जाता है हज़ारगी अफ़ग़ानिस्तान में हज़ारा लोगों द्वारा बोली जाने वाली फ़ारसी भाषा का एक रूप है। यह सब से ज़्यादा मध्य अफ़ग़ानिस्तान के हज़ाराजात नामक क्षेत्र में बोली जाती है। हज़ारा लोग इस भाषा को आम तौर पर आज़रगी बोलते हैं। हज़ारगी बोलने वालों की संख्या १८ से २२ लाख अनुमानित की गई है।, Franz Schurmann, pp.

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ख़ातून

मंगोल सम्राट हुलागु ख़ाँ अपनी ईसाई पत्नी दोक़ुज़ ख़ातून के साथ ख़ातून (خاتون, Khātūn, Hatun) एक स्त्रियों को दी जाने वाली उपाधि है जो सब से पहले गोएकतुर्क साम्राज्य और मंगोल साम्राज्य में प्रयोग की गई थी। इनके क्षेत्रों में यह "रानी" और "महारानी" की बराबरी की उपाधि थी। समय के साथ-साथ यह भारतीय उपमहाद्वीप में "देवी" की तरह किसी भी महिला के लिए एक आदरपूर्ण ख़िताब बन गया। भारत में कई प्रसिद्ध औरतों के नाम से यह उपाधि जुड़ी हुई है, मसलन "हब्बा ख़ातून" कश्मीरी भाषा की एक प्रसिद्ध कवियित्री थीं। .

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ख़ान (उपाधि)

ओगदाई ख़ान, चंग़ेज़ ख़ान का तीसरा पुत्र ख़ान या ख़ाँ (मंगोल: хан, फ़ारसी:, तुर्की: Kağan) मूल रूप से एक अल्ताई उपाधि है तो शासकों और अत्यंत शक्तिशाली सिपहसालारों को दी जाती थी। यह समय के साथ तुर्की-मंगोल क़बीलों द्वारा पूरे मध्य एशिया में इस्तेमाल होने लगी। जब इस क्षेत्र के सैन्य बलों ने भारतीय उपमहाद्वीप, ईरान, अफ़्ग़ानिस्तान और अन्य क्षेत्रों पर क़ब्ज़ा कर के अपने साम्राज्य बनाने शुरू किये तो इसका प्रयोग इन क्षेत्रों की कई भाषाओँ में आ गया, जैसे कि हिन्दी-उर्दू, फ़ारसी, पश्तो, इत्यादि। इसका एक और रूप 'ख़ागान' है जिसका अर्थ है 'ख़ानों का ख़ान' या 'ख़ान-ए-ख़ाना', जो भारत में कभी प्रचलित नहीं हुआ। इसके बराबरी की स्त्रियों की उपाधियाँ ख़ानम और ख़ातून हैं।, Elena Vladimirovna Boĭkova, R. B. Rybakov, Otto Harrassowitz Verlag, 2006, ISBN 978-3-447-05416-4 .

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ख़ागान

कुबलई ख़ान मंगोल साम्राज्य का पाँचवा ख़ागान (सर्वोच्च ख़ान) था ख़ागान या ख़ाक़ान (मंगोल: хаган, फ़ारसी) मंगोलियाई और तुर्की भाषाओँ में 'सम्राट' के बराबर की एक शाही उपाधि थी। इसी तरह ख़ागानत इन्ही भाषाओँ में 'साम्राज्य' के लिए शब्द था। ख़ागान को कभी-कभी 'ख़ानों का ख़ान' या 'ख़ान-ए-ख़ाना' भी अनुवादित किया जाता है, जो 'महाराजाधिराज' (यानि 'राजाओं का राजा') या 'शहनशाह' (यानि 'शाहों का शाह') के बराबर है। जब मंगोल साम्राज्य विस्तृत हो गया था तो उसके भिन्न हिस्सों को अलग-अलग ख़ानों के सुपुर्द कर दिया था। इन सब ख़ानों से ऊपर के 'सर्वोच्च ख़ान' को 'ख़ागान' कहा जाता था।, Donald Ostrowski, Cambridge University Press, 2002, ISBN 978-0-521-89410-4,...

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ख़ितानी भाषा

कोरिया से मिला एक आइना जिसमें छोटी ख़ितानी लिपि में लिखावट है सन ९८६ की ऐक शिला जिसमें बड़ी ख़ितानी लिपि में लिखावट है ख़ितानी भाषा मध्य एशिया में बोले जाने वाली एक विलुप्त भाषा थी जिसे ख़ितानी लोग बोला करते थे। यह भाषा सन् ३८८ से सन् १२४३ तक ख़ितानी राज्य व्यवस्था के लिए प्रयोगित थी। भाषा-परिवार के नज़रिए से इसे मंगोल भाषा-परिवार का सदस्य माना जाता है, हालांकि जब यह बोली जाति थी तब आधुनिक मंगोल भाषा अस्तित्व में नहीं थी। यह भाषा पहले ख़ितानियों के लियाओ राजवंश और फिर कारा-ख़ितान की राजभाषा रही। किसी ज़माने में कुछ भाषावैज्ञानिक समझते थे कि इसका मंगोल भाषा होने कि बजाए एक तुन्गुसी भाषा होना अधिक संभव है, लेकिन वर्तमान युग में लगभग सभी विद्वान इस एक मंगोल भाषा मानते हैं। क्योंकि यह भाषा काफ़ी अरसे तक उईग़ुर जैसी तुर्की भाषाओँ के संपर्क में रही, इसलिए इनमें शब्दों का आपसी आदान-प्रदान होता रहा। .

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ख़ज़र लोग

सन् ६५० और ८५० के बीच ख़ज़र ख़ागानत ख़ज़र (रूसी:Хазары, ख़ाज़ारी; अंग्रेज़ी: Khazar) मध्यकालीन यूरेशिया की एक तुर्की जाति थी जिनका विशाल साम्राज्य आधुनिक रूस के यूरोपीय हिस्से, पश्चिमी कज़ाख़स्तान, पूर्वी युक्रेन, अज़रबेजान, उत्तरी कॉकस (चरकस्सिया, दाग़िस्तान), जोर्जिया, क्राइमिया और उत्तरपूर्वी तुर्की पर विस्तृत था। इनकी राजधानी वोल्गा नदी के किनारे बसा आतील शहर था। ख़ज़र लोगों की ख़ागानत सन् ४४८ से १०४८ तक चली। इसमें कई धर्मों के लोग और, तुर्की जातियों के अलावा, यूराली, स्लावी और अन्य जातियाँ भी रहती थीं। ख़ज़र ख़ागानत रेशम मार्ग पर एक महत्वपूर्ण पड़ाव था और दक्षिण-पश्चिमी एशिया को उत्तरी यूरोप से जोड़ने वाली एक मुख्य कड़ी थी।, David Christian, Wiley-Blackwell, 1998, ISBN 978-0-631-20814-3,...

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ख़कास भाषा

ख़कास​ (रूसी: Хакас, अंग्रेज़ी: Khakas) रूस के साइबेरिया क्षेत्र में स्थित ख़कासिया गणतंत्र में ख़कास लोगों द्वारा बोली जाने वाली एक तुर्की भाषा है। ख़कास लोगों की आबादी लगभग ७५,००० है, जिनमें से २०,००० ख़कास​ भाषा बोलते हैं। सभी ख़कास​ बोलने वाले द्विभाषीय हैं और ख़कास​ के साथ-साथ रूसी भाषा भी बोलते हैं। पारम्परिक रूप से ख़कास​ कई उपभाषाओं में विभाजित है और वे अलग-अलग ख़कास​ क़बीलों द्वारा बोली जाती हैं, जैसे कि साग़य​, क़ाचा, क़िज़िल, कोयबल, बेल्तिर, इत्यादि​। केमेरोवो ओब्लास्त के शोर लोगों की शोर भाषा भी आजकल ख़कास​ की ही एक उपभाषा समजी जाती है। ख़कास​ बोलने वाले अक्सर अपने आप को 'तादार' या 'तातार' कहते हैं, लेकिन ध्यान दें कि इससे तात्पर्य साइबेरियाई तातार और साइबेरियाई तातार भाषाएँ है, जो तातार लोग और तातार भाषा से काफ़ी भिन्न है।, Robert A. Saunders, Vlad Strukov, pp.

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ख़ीवा

ख़ीवा के अन्दर इचान क़ला (इचान क़िला) की दीवारें खीवा(उज़बेक: Хива, अंग्रेज़ी: Khiva) मध्य एशिया के उज़बेकिस्तान देश के ख़ोरज़्म प्रान्त में स्थित एक ऐतिहासिक महत्व का शहर है। इस क्षेत्र में हजारों वर्षों से लोग बसते आये हैं लेकिन यह शहर तब मशहूर हुआ जब यह ख़्वारेज़्म और ख़ीवा ख़ानत की राजधानी बना।, Bradley Mayhew, pp.

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ग़ज़नवी साम्राज्य

ग़ज़नवी राजवंश (फ़ारसी:, अंग्रेज़ी: Ghaznavids) एक तुर्क मुस्लिम राजवंश था जिसने ९७५ ईसवी से ११८६ ईसवी काल में अधिकाँश ईरान, आमू पार क्षेत्रों और उत्तरी भारतीय उपमहाद्वीप पर राज किया। इसकी स्थापना सबुक तिगिन ने तब की थी जब उसे अपने ससुर अल्प तिगिन की मृत्यु पर ग़ज़ना (आधुनिक ग़ज़नी प्रांत) का राज मिला था। अल्प तिगिन स्वयं कभी ख़ुरासान के सामानी साम्राज्य का सिपहसालार हुआ करता था जिसने अपनी अलग रियासत कायम कर ली थी।, Martijn Theodoor Houtsma, pp.

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ग़ुलाम वंश

गुलाम वंश (سلسله غلامان) मध्यकालीन भारत का एक राजवंश था। इस वंश का पहला शासक कुतुबुद्दीन ऐबक था जिसे मोहम्मद ग़ौरी ने पृथ्वीराज चौहान को हराने के बाद नियुक्त किया था। इस वंश ने दिल्ली की सत्ता पर 1206-1290 ईस्वी तक राज किया। इस वंश के शासक या संस्थापक ग़ुलाम (दास) थे न कि राजा। इस लिए इसे राजवंश की बजाय सिर्फ़ वंश कहा जाता है। .

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गागाउज़ भाषा

गागाउज़ (Gagauz dili) एक तुर्की भाषा है जो मोल्दोवा के गागाउज़िया क्षेत्र की सरकारी भाषा है और जिसे मुख्य रूप से गागाउज़ समुदाय के लोग बोलते हैं। ध्यान दें कि एक अन्य 'बालकनी गागाउज़ तुर्की' नामक भाषा भी है लेकिन भाषावैज्ञानिक इन दोनों को भिन्न मानते हैं।, Ethnologue: Languages of the World, Lewis, M. Paul (ed.), SIL International, 2009, Accessed 2011-04-29 .

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ओग़ुर भाषाएँ

सन् १८०० के लगभग छपी विश्व की पहली चुवाश भाषा की किताब - चुवाश दुनिया की इकलौती जीवित ओग़ुर भाषा है ओग़ुर​ भाषाएँ (Oghur languages), जिन्हें बुल्गार भाषाएँ (Bulgar languages) भी कहा जाता है, तुर्की भाषा परिवार की एक उपशाखा हैं। यह दक्षिण-पूर्वी यूरोप के वोल्गा बुल्गारिया (Volga Bulgaria) नामक राज्य में बोली जाती थी लेकिन आधुनिक काल में इस शाखा की केवल एक ही भाषा, चुवाश भाषा, जीवित है। ऐतिहासिक नज़रिए से बहुत से ख़ज़र लोग और यूरेशियाई आवार लोग जैसे समुदाय भी ओग़ुर​ भाषाएँ बोलते थे लेकिन यह समय के साथ विलुप्त हो गई।, Arienne M. Dwyer, pp.

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ओग़ुज़ भाषाएँ

विभिन्न ओग़ुज़ तुर्की भाषाओँ का विस्तार ओग़ुज़​ भाषाएँ (Oghuz languages), जिन्हें दक्षिण-पश्चिमी तुर्की भाषाएँ (Southwest Turkic languages) भी कहा जाता है, तुर्की भाषा परिवार की एक प्रमुख उपशाखा हैं जो दक्षिण-पूर्व यूरोप के बाल्कन क्षेत्र से लेकर चीन तक लगभग १५ करोड़ लोगों द्वारा बोली जाती हैं। तुर्की भाषा और अज़रबेजानी भाषा दोनों ओग़ुज़​ भाषाएँ हैं।, Walter de Gruyter, pp.

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आक़्सू विभाग

चीन के शिंजियांग प्रांत (नारंगी रंग) में स्थित आक़्सू विभाग (लाल रंग) बाईचेंग (७) उचतुरपान (८) आवात (९) कालपिन आक़्सू विभाग (उईग़ुर:, आक़्सू विलायती; चीनी: 阿克苏地区, आकेसू दीचू; अंग्रेजी: Aksu Prefecture, आक्सू प्रीफ़ॅक्चर) चीन के शिंजियांग प्रांत का एक प्रशासनिक विभाग है। इस विभाग का कुल क्षेत्रफल १,३२,५०० वर्ग किमी है। सन् २००३ की जनगणना में इस विभाग की आबादी २१.९ लाख अनुमानित की गई थी। आक़्सू विभाग की राजधानी आक़्सू शहर है। .

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इली नदी

इली नदी का एक दृश्य बलख़श झील जलसम्भर क्षेत्र का नक़्शा जिसमें इली नदी और उसकी उपनदियाँ देखी जा सकती हैं इली नदी (कज़ाख़: Іле, इले; अंग्रेज़ी: Ili River) मध्य एशिया की एक नदी है जो चीन के शिनजियांग प्रांत के इली कज़ाख़ स्वशासित विभाग में तियान शान पहाड़ों से उत्पन्न होकर दक्षिणपूर्वी कज़ाख़स्तान के अलमाती प्रांत से गुज़रकर बलख़श झील के ख़ाली होती है। इसकी कुल लम्बाई १,४३९ किमी है जिसमें से ८१५ किमी कज़ाख़स्तान की भूमि में आता है। बलख़श झील से मिलते हुए इली नदी एक बड़ा नदीमुख (डेल्टा) क्षेत्र बनाती है जिसमें झीलें, दलदली ज़मीन और सरकंडों से भरपूर जलग्रस्त इलाक़े आते हैं। कुल मिलकर इली नदी का जलसम्भर क्षेत्र १,४०,००० वर्ग किमी है। इली नदी स्तेपी की तीन सबसे महत्वपूर्ण नदियों में से एक है - अन्य दो चुय नदी और तलास नदी हैं। .

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क़शक़ाई भाषा

क़शक़ाई (Qashqai) या ग़शग़ाई एक तुर्की भाषा है जो क़शक़ाई समुदाय के लोग बोलते हैं। यह समुदाय मुख्य रूप से ईरान के फ़ार्स क्षेत्र में बसा हुआ है। क़शक़ाई बोली अज़ेरी भाषा के बहुत क़रीब है और कभी-कभी उस भाषा की उपभाषा कहलाती है। अधिकतर क़शक़ाई लोग क़शक़ाई भाषा के साथ-साथ फ़ारसी भी लिख-बोल सकते हैं। .

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क़ाराक़ालपाक़ लोग

क़ाराक़ालपाक़ (क़ाराक़ालपाक़ भाषा: Qaraqalpaqlar, रूसी: Каракалпаки) उज़बेकिस्तान में बसने वाली एक तुर्की जाति है। यह समुदाय अमु दरिया के अंतिम भाग में और अरल सागर के दक्षिणी किनारे पर रहता है। विश्व भर में इनकी जनसँख्या लगभग ६.५ लाख अनुमानित की जाती है, जिनमें से ५ लाख उज़बेकिस्तान के क़ाराक़ालपाक़स्तान स्वशासित प्रान्त में रहते हैं। इस जाति का नाम तुर्की भाषा के दो शब्दों को जोड़कर बना है: 'क़ारा' (यानि 'काला') और 'क़ालपाक़' यानि (टोपी)। हालांकि इन लोगों का इलाक़ा उज़बेकिस्तान में आता है, इनकी संस्कृति वास्तव में काज़ाख़ समुदाय से ज़्यादा मिलती है। क़ाराक़ालपाक़ लोग अधिकतर सुन्नी इस्लाम की हनफ़ी शाखा के अनुयायी होते हैं।, Timothy L. Gall, Jeneen Hobby, Gale, 2009, ISBN 978-1-4144-4891-6,...

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क़ाराक़ोरम दर्रा

क़ाराक़ोरम दर्रा काराकोरम पर्वतमाला में भारत के जम्मू व कश्मीर राज्य और जनवादी गणतंत्र चीन द्वारा नियंत्रित शिंजियांग प्रदेश के बीच ४,६९३ मीटर (१५,३९७ फ़ुट) की ऊँचाई पर स्थित एक पहाड़ी दर्रा है। यह लद्दाख़ के लेह शहर और तारिम द्रोणी के यारकन्द क्षेत्र के बीच के प्राचीन व्यापिरिक मार्ग का सबसे ऊँचा स्थान है। .

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क़ाजार राजवंश

मुहम्मद ख़ान क़ाजार इस राजवंश के पहले शासक थे क़ाजार राजवंश (फ़ारसी:, सिलसिला क़ाजारिया) तुर्कियाई नस्ल का एक राजघराना था जिसने सन् १७८५ ई॰ से १९२५ ई॰ तक ईरान पर राज किया। इस परिवार ने ज़न्द राजवंश के अंतिम शासक, लोत्फ़ अली ख़ान, को सत्ता से हटाकर सन् १७९४ तक ईरान पर पूरा क़ब्ज़ा जमा लिया। १७९६ में मुहम्मद ख़ान क़ाजार ने औपचारिक रूप से ईरान के शाह का ताज पहन लिया। क़ाजारों के दौर में ईरान ने फिर से कॉकस के कई भागों पर हमला किया और उसे अपनी रियासत का हिस्सा बना लिया।Abbas Amanat, The Pivot of the Universe: Nasir Al-Din Shah Qajar and the Iranian Monarchy, 1831-1896, I.B.Tauris, pp 2-3; "In the 126 years between the fall of the Safavid state in 1722 and the accession of Nasir al-Din Shah, the Qajars evolved from a shepherd-warrior tribe with strongholds in northern Iran into a Persian dynasty.." .

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कारलूक लोग

६०० ईसवी के इस नक्शे में कारलूक क्षेत्र पश्चिमी गोएकतुर्क ख़ागानत के अधीन देखा जा सकता है कारलूक या क़ारलूक़ (पुरानी तुर्की: 7px 7px 7px 7px; अंग्रेजी: Karluk या Qarluq) एक ख़ानाबदोश तुर्की क़बीला था जो मध्य एशिया में अल्ताई पहाड़ों से पश्चिम में कारा-इरतिश और तरबगत​ई पर्वतों के क्षेत्र में बसा करता था। इन्हें चीनी लोग गेलोलू (葛邏祿, Gelolu) भी बुलाते थे। कारलूक समुदाय जातीयता के नज़रिए से उईग़ुर लोगों से सम्बंधित थे। तुर्की भाषाओं में एक कारलूक शाखा है, जिसका नाम इन्ही कारलूकों पर पड़ा और जिसमें उईग़ुर भाषा, उज़बेक भाषा और इली तुर्की भाषा शामिल हैं। .

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काराशहर

काराशहर (Karasahr, उईग़ुर) या यान्ची (Yanqi, चीनी: 焉耆), जिसे संस्कृत में अग्नि या अग्निदेश कहते थे, रेशम मार्ग पर स्थित एक प्राचीन शहर है। यह मध्य एशिया में जनवादी गणतंत्र चीन द्वारा नियंत्रित शिंजियांग प्रान्त के बायिनग़ोलिन मंगोल स्वशासित विभाग के यान्ची हुई स्वशासित ज़िले में स्थित है। काराशहर काइदू नदी के किनारे बसा हुआ है। .

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काराख़ानी ख़ानत

१००० ईसवी में काराख़ानी ख़ानत अर्सलान ख़ान द्वारा ११२७ में आज़ान के लिए बनवाई गई बुख़ारा की कलयन मीनार काराख़ानी ख़ानत (Kara-Khanid Khanate) मध्यकाल में एक तुर्की क़बीलों का परिसंघ था जिन्होंने मध्य एशिया के आमू-पार क्षेत्र और कुछ अन्य भूभाग में ८४० से १२१२ ईसवी तक अपनी ख़ानत (साम्राज्य) चलाई। इसमें कारलूक, यग़मा, चिग़िल​ और कुछ अन्य क़बीले शामिल थे जो पश्चिमी तियान शान और आधुनिक शिनजियांग इलाक़ों के रहने वाले थे। काराख़ानियों ने मध्य एशिया में ईरानी मूल के सामानी साम्राज्य का ख़ात्मा कर दिया और इसके बाद मध्य एशिया में तुर्की-भाषियों का अधिक बोलबाला रहा। काराख़ानी दौर में ही महमूद काश्गरी ने अपनी प्रसिद्ध 'दीवान-उ-लुग़ात​-उत-तुर्क' नामक तुर्की भाषा के कोष की रचना की।, Rafis Abazov, pp.

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काराकाश नदी

तिब्बत-शिंजियांग राजमार्ग से पश्चिमी कुनलुन पर्वतों में काराकाश नदी का नज़ारा काराकाश नदी भारत के अक्साई चिन क्षेत्र के कराकोरम पर्वतों में सुम्दे इलाक़े से उत्पन्न होकर चीन के शिंजियांग प्रांत की कुनलुन पहाड़ी क्षेत्र से गुज़रकर टकलामकान रेगिस्तान में जाने वाली एक नदी का नाम है। वर्तमान में अक्साई चिन पर चीन का क़ब्ज़ा है इसलिए वह इस पूरी नदी को अपना ही मानता है। इस नदी में हरे और सफ़ेद रंग के हरिताश्म (जेड) के मूल्यवान पत्थर मिलते हैं, जिस से इसका नाम भी पड़ा है। कुछ दूरी पर इसके साथ-साथ एक योरुंगकाश नाम की अन्य नदी भी चलती है। यह दोनों नदियाँ प्रसिद्ध ख़ोतान नगर के लिए मुख्य पानी का स्रोत हैं।, Sir Aurel Stein, Archaeological Survey of India, Clarendon Press, 1907,...

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काश्गर

ईद गाह मस्जिद, काशगर काश्गर, कशगार, काशगुर या काशी (उईगुर:, चीनी: 喀什, फारसी) मध्य एशिया में चीन के शिनजियांग प्रांत के पश्चिमी भाग में स्थित एक नख़लिस्तान (ओएसिस) शहर है, जिसकी जनसंख्या लगभग ३,५०,००० है। काश्गर शहर काश्गर विभाग का प्रशासनिक केंद्र है जिसका क्षेत्रफल १,६२,००० किमी² और जनसंख्या लगभग ३५ लाख है। काश्गर शहर का क्षेत्रफल १५ किमी² है और यह समुद्र तल से १,२८९.५ मीटर (४,२८२ फ़ुट) की औसत ऊँचाई पर स्थित है। यह शहर चीन के पश्चिमतम क्षेत्र में स्थित है और तरीम बेसिन और तकलामकान रेगिस्तान दोनों का भाग है, जिस वजह से इसकी जलवायु चरम शुष्क है।, S. Frederick Starr, M.E. Sharpe, 2004, ISBN 978-0-7656-1318-9 पुराकाल से ही काश्गर व्यापार तथा राजनीति का केंद्र रहा है और इसके भारत से गहरे सांस्कृतिक, धार्मिक और व्यापारिक सम्बन्ध रहे हैं। भारत से शिनजियांग का व्यापार मार्ग लद्दाख़ के रस्ते से काश्गर जाया करता था।, Prakash Charan Prasad, Abhinav Publications, 1977, ISBN 978-81-7017-053-2 ऐतिहासिक रेशम मार्ग की एक शाखा भी, जिसके ज़रिये मध्य पूर्व, यूरोप और पूर्वी एशिया के बीच व्यापार चलता था, काश्गर से होकर जाती थी। काश्गर अमू दरिया वादी से खोकंद, समरकंद, अलमाटी, अक्सू, और खोतान मार्गो के बीच स्थित है। .

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किरगिज़ लोग

काराकोल में एक मनासची कथाकार पारम्परिक किरगिज़ वेशभूषा में एक किरगिज़ परिवार किरगिज़ मध्य एशिया में बसने वाली एक तुर्की-भाषी जाति का नाम है। किरगिज़ लोग मुख्य रूप से किर्गिज़स्तान में रहते हैं हालाँकि कुछ किरगिज़ समुदाय इसके पड़ौसी देशों में भी मिलते हैं, जैसे कि उज़्बेकिस्तान, चीन, ताजिकिस्तान, अफ़्ग़ानिस्तान और रूस। .

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किर्गिज़ भाषा

किर्गिज़ एक तुर्की भाषा है और रूसी भाषा के अतिरिक्त यह किर्गिज़स्तान की आधिकारिक भाषा है। कुल के हिसाब से यह अल्तेय से बहुत निकट से और कज़ाख से दूर से जुड़ती है। हालाँकि वर्तमान समय में भाषीय सम्मिलन की वजह से किर्गिज़ और कज़ाख के बीच ज्यादा निकटता नजर आती है। किर्गिज़ भाषा किर्गिज़स्तान, चीन, अफ़गानिस्तान, कज़ाख़िस्तान, ताजिकिस्तान, तुर्की, उज़्बेकिस्तान, पाकिस्तान और रूस में करीबन 40 लाख लोगों द्वारा बोली जाती है। किर्गिज़ २०वीं शताब्दी तक मूलतः संशोधित अरबी-फ़ारसी लिपि में लिखी जाती थी, जिसके बाद कुछ समय के लिए रोमन लिपि का इस्तेमाल किया जाने लगा। बाद में सोवियत संघ के प्रभाव की वजह से सिरिलिक वर्णमाला मानक बन गई और आज तक चलन में है। हालाँकि कुछ लोग आज भी अरबी लिपि का उपयोग करते हैं। सोवियत संघ के 1991 में विघटन और देश के स्वतंत्र होने के बाद से किर्गिज़ भाषा को पुनः रोमन लिपि में कुछ किर्गिज राजनीतिज्ञ बात कह रहे हैं, लेकिन इस योजना को मूर्त रूप नहीं दिया जा सका। आजकल, यह अभी भी मुख्य भाषा मुख्य शहरों में, इस तरह के रूप में बिश्केक जबकि किरगिज़ जारी है जमीन खोने विशेष रूप से युवा पीढ़ी के बीच। .

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किज़िल

किज़िल में 'एशिया का केंद्र' स्तंभ किज़िल शहर का 'संगीत और नाटक केंद्र' किज़िल (तूवी: Кызы́л, अंग्रेज़ी: Kyzyl) रूस के तूवा गणराज्य प्रांत की राजधानी है। तूवा साइबेरिया क्षेत्र में स्थित है और एशिया के महाद्वीप के ठीक बीच में (यानी भौगोलिक केंद्र) में होने के लिए मशहूर है।, Bertie Charles Forbes, Forbes Inc., 2005,...

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किज़िल कुम रेगिस्तान

उज़बेकिस्तान में किज़िल कुम में एक बस्ती से निकलती सड़क अंतरिक्ष से किज़िल कुम - तस्वीर में मध्य में नीचे की तरफ - दाएँ में कैस्पियन सागर है और उस से ज़रा बाएँ में अधिकतर सूखा हुआ अरल सागर, किज़िल कुम दो नदियों की रेखाओं (आमू दरिया और सिर दरिया) के बीच का इलाक़ा है किज़िल कुम में रेत का टीला किज़िल कुम या क़िज़िल क़ुम (उज़बेक: Qizilqum; कज़ाख़: Қызылқұм; अंग्रेज़ी: Kyzyl Kum) मध्य एशिया में स्थित एक रेगिस्तान है। इसका क्षेत्रफल २,९८,००० वर्ग किमी (१,१५,००० वर्ग मील) है और यह दुनिया का ११वाँ सबसे बड़ा रेगिस्तान है। यह आमू दरिया और सिर दरिया के बीच के दोआब में स्थित है। इसका अधिकाँश हिस्सा कज़ाख़स्तान और उज़बेकिस्तान में आता है, हालांकि एक छोटा भाग तुर्कमेनिस्तान में भी पड़ता है। तुर्की भाषाओँ में 'किज़िल कुम' का मतलब 'लाल रेत' है और इस रेगिस्तान की रेतों में मिश्रित पदार्थ बहुत से स्थानों में इसे एक लालिमा देते हैं। इस से दक्षिण-पश्चिम में आमू दरिया के पार काराकुम रेगिस्तान पड़ता है जिसके नाम का अर्थ 'काली रेत' है।, R. Lal, Psychology Press, 2007, ISBN 978-0-415-42235-2,...

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किज़िलओरदा प्रांत

किज़िलओरदा प्रांत (कज़ाख़: Қызылорда облысы, अंग्रेज़ी: Kyzylorda Province) मध्य एशिया के क़ाज़ाख़स्तान देश का एक प्रांत है। इसकी राजधानी का नाम भी किज़िलओरदा शहर ही है। मध्य एशिया की महत्वपूर्ण नदी, सिर दरिया पूर्व में तियान शान पहाड़ियों से उत्पन्न होकर इस प्रांत से गुज़रकर अरल सागर जाती हैं। इस प्रान्त में अरल्स्क शहर है, जिसे अरल शहर भी कहते हैं, जो अरल सागर पर एक बंदरगाह हुआ करती थी लेकिन अरल के अधिकाँश हिस्से के सूखने से अब अरल सागर के बचे-कुचे अंश से १२ किमी दूर है। तुर्की भाषाओँ के मशहूर प्राचीन कवि कोरकुत अता (Korkut Ata) ९वीं सदी ईसवी में इसी प्रांत में पैदा हुए माने जाते हैं।, Paul Brummell, Bradt Travel Guides, 2012, ISBN 978-1-84162-369-6,...

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कज़ाख़ भाषा

कज़ाख़स्तान में कज़ाख़ भाषा को बढ़ावा देने का सिरिलिक लिपि में एक विज्ञापन: '(एक) कज़ाख़ को (दूसरे) कज़ाख़ से कज़ाख़ (भाषा) में बात करने दो कज़ाख़ (Қазақ тілі,, क़ाज़ाक़ तिलि) भाषा मध्य एशिया में कज़ाख़ लोगों द्वारा बोली जाने वाली एक तुर्की भाषा है। यह तुर्की भाषा-परिवार की पश्चिमी या किपचक शाखा की भाषा है और क़ाराक़ालपाक़ और नोगाई भाषाओँ से मिलती-जुलती है। २००९ की जनगणना के अनुसार इसे कज़ाख़स्तान में लगभग १ करोड़ लोग बोलते हैं और २००० में इसे कज़ाख़स्तान से बाहर बोलने वालों की संख्या ३० लाख अनुमानित की गई थी। कज़ाख़ को कज़ाख़स्तन में राष्ट्रभाषा होने का दर्जा हासिल है। कज़ाख़स्तान के अलावा इसे चीन, मंगोलिया, अफ़्ग़ानिस्तान, ताजिकिस्तान, तुर्की, तुर्कमेनिस्तान, युक्रेन, रूस और ईरान के कुछ समुदाय भी बोलते हैं। भौगोलिक दृष्टि से कज़ाख़ तियन शान पर्वतों से लेकर कैस्पियन सागर तक के विशाल क्षेत्र में बोली जाती है। .

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कज़ाख़ लोग

चीन के शिनजियांग प्रांत में एक कज़ाख़ परिवार कज़ाख़ मध्य एशिया के उत्तरी भाग में बसने वाली एक तुर्की-भाषी जाति का नाम है। कज़ाख़स्तान की अधिकाँश आबादी इसी नस्ल की है, हालाँकि कज़ाख़ समुदाय बहुत से अन्य देशों में भी मिलते हैं, जैसे कि उज़बेकिस्तान, मंगोलिया, रूस और चीन के शिनजियांग प्रान्त में। विश्व भर में १.३ से लेकर १.५ करोड़ कज़ाख़ लोग हैं और इनमें से अधिकतर की मातृभाषा कज़ाख़ भाषा है। कज़ाख़ लोग बहुत से प्राचीन तुर्की जातियों के वंशज हैं, जैसे कि अरग़िन, ख़ज़र, कारलुक, किपचक और कुमन। माना जाता है कि इनमें कुछ हद तक मध्य एशिया की कुछ ईरानी भाषाएँ बोलने वाली जातियाँ (जैसे कि शक, स्किथाई और सरमती) भी शामिल हो गई। कज़ाख़ लोग साइबेरिया से लेकर कृष्ण सागर तक फैले हुए थे और जब इस क्षेत्र में तुर्की-मंगोल लोगों का राज चला तब भी वे मध्य एशिया में ही बसे रहे। .

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कुर्रम वादी

अफ़्ग़ानिस्तान के पकतिया प्रान्त से दक्षिण की तरफ़ सरहद पार स्थित कुर्रम वादी का नज़ारा कुर्रम (पश्तो:, द कुर्रमा; अंग्रेज़ी: Kurram) पाकिस्तान के पश्चिमोत्तर में अफ़्ग़ानिस्तान से लगी हुई एक सुन्दर वादी है। प्राचीनकाल में इसे वैदिक संस्कृत में ऋग्वेद में क्रुमू कहते थे।, George Erdösy, Walter de Gruyter, 1995, ISBN 978-3-11-014447-5,...

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कोपेत दाग़

आख़ाल मैदान से कोपेत दाग़ का नज़ारा कोपेत दाग़ ईरान और तुर्कमेनिस्तान की सीमा पर स्थित हैं कोपेत दाग़ या कोपे दाग़ (तुर्कमेनी: Köpetdag, फ़ारसी:, अंग्रेज़ी: Kopet Dag), जिसे तुर्कमेन-ख़ोरासान पर्वत-शृंखला भी कहा जाता है, तुर्कमेनिस्तान और ईरान की सरहद पर ६५० किमी तक चलने वाली एक पर्वत शृंखला है। यह कैस्पियन सागर से पूर्व में स्थित है और तुर्कमेनिस्तान में इस शृंखला का सबसे बुलंद शिखर २,९४० मीटर ऊंचा एक पहाड़ है जो तुर्कमेनिस्तान की राजधानी अश्क़ाबाद के दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। ईरान की ज़मीन पर इस पहाड़ी सिलसिले का सबसे ऊंचा शिखर ३,१९१ मीटर ऊंचा है। .

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कोंगुर ताग़

कोंगुर ताग़ का नज़ारा कोंगुर ताग़ (उइग़ुर:, मंगोल: Хонгор Таг, अंग्रेज़ी: Kongur Tagh) कुनलुन शान पर्वतमाला का सबसे ऊँचा पहाड़ है। वैसे तो यह ७,६४९ मीटर (२५,०९५ फ़ुट) ऊँचा पर्वत अपने समीपी मुज़ताग़ अता पहाड़ (जो कुनलुन शान का दूसरा सबसे ऊँचा पहाड़ है) के बहुत पास है, लेकिन अधिक दुर्गम स्थल में होने से कम जाना जाता है। आधुनिक काल में काराकोरम राजमार्ग के बन जाने से अब कोंगुर ताग़ तक पहुँचना आसान हो गया है। यह चीन के शिनजियांग प्रांत का सबसे ऊँचा पर्वत भी है। पामीर पर्वतों के नज़दीक होने से कोंगुर ताग़ को कभी-कभी उस पर्वतमाला का हिस्सा भी माना जाता है।, Gyurme Dorje, Footprint Travel Guides, 1999, ISBN 978-1-900949-33-0,...

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अतिर​ऊ प्रांत

अतिरऊ प्रांत (कज़ाख़: Атырау облысы, अंग्रेज़ी: Atyrau Province) मध्य एशिया के क़ाज़ाख़स्तान देश का एक प्रांत है। इसकी राजधानी भी अतिरऊ नाम का शहर ही है। अतिरऊ प्रांत देश के पश्चिमी हिस्से में कैस्पियन सागर के पूर्वोत्तरी किनारे पर स्थित है। .

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अन्दीझ़ान

अन्दीझ़ान। अन्दीझ़ान या अन्दीजान (उज़बेक: Андижон, रूसी: Андижан, चग़ताई:, अंग्रेज़ी: Andijan) मध्य एशिया के उज़्बेकिस्तान देश का चौथा सबसे बड़ा शहर है और उस देश के अन्दीझ़ान प्रान्त की राजधानी है। यह फ़रग़ना वादी में उज़्बेकिस्तान की किर्गिज़स्तान की सीमा के साथ स्थित है। सन् १९९९ की जनगणना में इसकी आबादी ३,२३,९०० अनुमानित की गई थी। यह भारत के मुग़ल साम्राज्य के संस्थापक और पहले सम्राट बाबर का जन्मस्थल भी है।, Jl Mehta, Sterling Publishers Pvt.

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अल्ताई पर्वत शृंखला

अल्ताई पर्वत शृंखला का नक़्शा अल्ताई पर्वत शृंखला मध्य एशिया की एक बड़ी पर्वत शृंखला है जो उस क्षेत्र से गुज़रती है जहाँ रूस, चीन, कज़ाख़िस्तान और मंगोलिया मिलते हैं। मध्य एशिया की दो महत्वपूर्ण नदियाँ- इरतिश और ओब - इन्ही पहाड़ों से शुरू होती हैं। अल्ताई पर्वत क्षेत्र को ही तुर्की भाषा परिवार और भाषावैज्ञानिकों द्वारा प्रस्तावित अल्ताई भाषा परिवार की जन्मभूमि बताया जाता है। अल्ताई पर्वत पश्चिमोत्तर में साइबेरिया की सायन पर्वत शृंखला से आरम्भ होते हैं और दक्षिण-पूर्व में धीरे-धीरे छोटे होकर गोबी के ऊंचे रेगिस्तानी पठार में जा मिलते हैं। तुर्की भाषाओँ में "अल्ताई" शब्द का अर्थ "सोने के पहाड़" है और यह दो शब्दों को जोड़कर बनता है - "अल" (जिसका मतलब "सोना" है) और ताऊ (यानि "पहाड़").

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अल्ताई भाषा

२०वीं सदी की शुरुआत में कुछ अल्ताई लोग अल्ताई भाषा (रूसी: Горно-алтайские языки, अंग्रेज़ी: Altay language) रूस के साइबेरिया क्षेत्र के अल्ताई गणतंत्र और अल्ताई क्राय विभागों में बसने वाले अल्ताई लोगों की मातृभाषा हैं जो तुर्की भाषा-परिवार की सदस्य है। सन् १९९२ में इसे मातृभाषा के रूप में बोलने वालों की संख्या २०,००० अनुमानित की गई थी जबकि सन् २००२ में इसे मातृभाषा या अन्य रूप में जानने वालों की संख्या ७०,००० गिनी गई। इसकी दो मुख्य उपभाषाएँ हैं - उत्तरी अल्ताई और दक्षिणी अल्ताई। इस भाषा को मुख्यतः सिरिलिक लिपि के प्रयोग से लिखा जाता है। रूस के अलावा यह मंगोलिया और चीन के कुछ पड़ोसी इलाक़ों में भी बोली जाती है।, Barbara A. West, pp.

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अल्ताई भाषा-परिवार

अल्ताई भाषा परिवार का फैलाव अल्ताई पर्वत क्षेत्र में शुरू हुईं अल्ताई (अंग्रेज़ी: Altaic languages, ऑल्टेइक लैन्गवेजिज़) एक भाषा-परिवार है जिसमें तुर्की भाषाएँ, मंगोल भाषाएँ, तुन्गुसी भाषाएँ, जापानी भाषाएँ और कोरियाई भाषा आती हैं। अल्ताई भाषाएँ यूरेशिया के बहुत ही विस्तृत क्षेत्र में बोली जाती हैं जो पूर्वी यूरोप से लेकर मध्य एशिया से होता हुआ सीधा जापान तक जाता है। इस परिवार में कुल मिलकर लगभग ७० जीवित भाषाएँ आती हैं और इन्हें बोलने वालों की तादाद वर्तमान विश्व में लगभग ५० करोड़ है। .

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अल्ताई लोग

२०वीं सदी की शुरुआत में कुछ अल्ताई लोग अल्ताई (रूसी: Алтайцы, अंग्रेज़ी: Altay people) रूस के साइबेरिया क्षेत्र के अल्ताई गणतंत्र और अल्ताई क्राय विभागों में बसने वाले तुर्क लोग हैं। सन् २०१० में इनकी कुल आबादी ३,६७,००० अनुमानित की गई थी। इस समुदाय की अल्ताई भाषा नामक अपनी अलग तुर्की भाषा है। .

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अल्प तिगिन

अल्प तिगिन या अल्प तेगिन (फ़ारसी:, अंग्रेज़ी: Alp Tigin) ९६१ ईसवी से ९६३ ईसवी तक आधुनिक अफ़ग़ानिस्तान के ग़ज़नी क्षेत्र का राजा था। तुर्क जाति का यह राजा पहले बुख़ारा और ख़ुरासान के सामानी साम्राज्य का एक सिपहसालार हुआ करता था जिसने उनसे अलग होकर ग़ज़नी की स्थानीय लवीक (Lawik) नामक शासक को हटाकर स्वयं सत्ता ले ली। इस से उसने ग़ज़नवी साम्राज्य की स्थापना करी जो आगे चलकर उसके वंशजों द्वारा आमू दरिया से लेकर सिन्धु नदी क्षेत्र तक और दक्षिण में अरब सागर तक विस्तृत हुआ। .

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अज़ेरी भाषा

अज़ेरी भाषा बोलने वाले क्षेत्र अज़रबैजानी, अज़ेरी या (कभी-कभी) तोर्की (अज़ेरी: आज़रबेयचांचा, आज़रबेयचान तुर्कचसी, आज़रबेयचान दिलि) अज़रबैजान और पश्चिमोत्तरी ईरान में अज़रबैजानी लोगों द्वारा बोली जाने वाली एक तुर्की भाषा है। यह तुर्की भाषा-परिवार की ओग़ुज़ शाखा की एक भाषा है और तुर्की, क़शक़ाई और तुर्कमेन भाषा से काफ़ी समानताएँ रखती है। विश्व भर में अज़ेरी बोलने वालों की संख्या २.५ से ३.५ करोड़ अनुमानित की गई है।, Peter Austin, University of California Press, 2008, ISBN 978-0-520-25560-9,...

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अइमग

मंगोलिया के अइमग सुख़बातर अइमग का राजचिह्न अइमग (मंगोलियाई: Аймаг, 14px) मंगोलियाई और तुर्की भाषाओँ में 'क़बीले' के लिए एक शब्द होता है। आधुनिक मंगोलिया और चीन के कुछ हिस्सों में यह 'प्रान्त' के लिए भी एक शब्द है। .

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अक्साई चिन

अक्साई चिन या अक्सेचिन (उईग़ुर:, सरलीकृत चीनी: 阿克赛钦, आकेसैचिन) चीन, पाकिस्तान और भारत के संयोजन में तिब्बती पठार के उत्तरपश्चिम में स्थित एक विवादित क्षेत्र है। यह कुनलुन पर्वतों के ठीक नीचे स्थित है। ऐतिहासिक रूप से अक्साई चिन भारत को रेशम मार्ग से जोड़ने का ज़रिया था और भारत और हज़ारों साल से मध्य एशिया के पूर्वी इलाकों (जिन्हें तुर्किस्तान भी कहा जाता है) और भारत के बीच संस्कृति, भाषा और व्यापार का रास्ता रहा है। भारत से तुर्किस्तान का व्यापार मार्ग लद्दाख़ और अक्साई चिन के रास्ते से होते हुए काश्गर शहर जाया करता था।, Prakash Charan Prasad, Abhinav Publications, 1977, ISBN 978-81-7017-053-2 १९५० के दशक से यह क्षेत्र चीन क़ब्ज़े में है पर भारत इस पर अपना दावा जताता है और इसे जम्मू और कश्मीर राज्य का उत्तर पूर्वी हिस्सा मानता है। अक्साई चिन जम्मू और कश्मीर के कुल क्षेत्रफल के पांचवें भाग के बराबर है। चीन ने इसे प्रशासनिक रूप से शिनजियांग प्रांत के काश्गर विभाग के कार्गिलिक ज़िले का हिस्सा बनाया है। .

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उज़बेक

उज़बेक एक बहुविकल्पी शब्द है, जिसके कई अर्थ हो सकते हैं.

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उज़बेक लोग

दो उज़बेक बच्चे उज़बेक मध्य एशिया में बसने वाली एक तुर्की-भाषी जाति का नाम है। उज़बेकिस्तान की अधिकाँश आबादी इसी नसल की है, हालाँकि उज़बेक समुदाय बहुत से अन्य देशों में भी मिलते हैं, जैसे कि अफ़्ग़ानिस्तान, ताजिकिस्तान, किर्गिज़स्तान, तुर्कमेनिस्तान, काज़ाख़स्तान, रूस, पाकिस्तान, मंगोलिया और चीन के शिनजियांग प्रान्त में। विश्व भर में लगभग २.३ करोड़ उज़बेक लोग हैं और यह पूरे विश्व की मनुष्य आबादी का लगभग ०.३% हैं। भारत में मुग़ल सलतनत की स्थापना करने वाला बाबर भी नसल से उज़बेक जाति का ही था।, Suryakant Nijanand Bal, Lancer Publishers, 2004, ISBN 978-81-7062-273-4,...

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उज़्बेक भाषा

लहजा साफ़ दिखता है - 'नादिरा' को 'नोदिरा' (НОДИРА) और 'उज़बेकिस्तान' को 'उज़बेकिस्तोन' (Ўзбекистон) लिखा जाता है उज़बेक भाषा (उज़बेक: Ўзбек тили, उज़बेक तिलि; अरबी-फ़ारसी) मध्य एशिया में और विशेषकर उज़बेकिस्तान में, उज़बेक लोगों द्वारा बोली जाने वाली एक तुर्की भाषा है। सन् १९९५ में इसे मातृभाषा के रूप में बोलने वालों की संख्या लगभग २ करोड़ अनुमानित की गई थी। हालाँकि यह एक तुर्की भाषा है, फिर भी इसमें फ़ारसी, अरबी और रूसी भाषा का प्रभाव मिलता है। उज़बेक और उइग़ुर भाषा में बहुत समानताएँ हैं, लेकिन उइग़ुर की तुलना में उज़बेक पर फ़ारसी का प्रभाव ज़्यादा गहरा है। सन् १९२७ तक उज़बेक को लिखने के लिए अरबी-फ़ारसी वर्णमाला का प्रयोग किया जाता था, लेकिन उसके बाद उज़बेकिस्तान का सोवियत संघ में विलय होने से वहाँ सिरिलिक लिपि इस्तेमाल करने पर ज़ोर दिया गया। चीन के उज़बेक समुदाय अभी भी अरबी-फ़ारसी लिपि में उज़बेक लिखते हैं। सोवियत संघ का अंत होने के बाद उज़बेकिस्तान में कुछ लोग सन् १९९२ के उपरान्त लैटिन वर्णमाला का भी प्रयोग करने लगे।, Reinhard F. Hahn, Ablahat Ibrahim, University of Washington Press, 2006, ISBN 978-0-295-98651-7 .

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उईग़ुर ख़ागानत

उइग़ुर ख़ागानत ८२० ईसवी में दुनिया के नक़्शे पर उइग़ुर ख़ागानत (ऊपर-दाई तरफ़ ख़ाकी रंग में) उइग़ुर ख़ागानत (उइग़ुर:, उरख़ुन उइग़ुर ख़ानलिक़ी; मंगोल: Уйгурын хаант улс, उइग़ुरिन ख़ान्त उल्स; चीनी: 回鶻, हुइहु; अंग्रेज़ी: Uyghur Khaganate), जिसे तोक़ुज़ ओग़ुज़ देश (Toquz Oghuz Country) भी कहा जाता था, एक तुर्की ख़ागानत (साम्राज्य) था जो ७४४ ईसवी से ८४८ ईसवी (यानि लगभग एक शताब्दी) तक चला। यह ओरख़ोन उइग़ुर क़बीले के सरदारों के अधीन एक क़बीलों का परिसंघ था। .

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उइग़ुर

एक उइग़ुर युवती उइग़ुर (उइग़ुर: ‎) पूर्वी और मध्य एशिया में बसने वाले तुर्की जाति की एक जनजाति है। वर्तमान में उइग़ुर लोग अधिकतर चीनी जनवादी गणराज्य द्वारा नियंत्रित श़िंजियांग उइग़ुर स्वायत्त प्रदेश नाम के राज्य में बसते हैं। इनमें से लगभग ८० प्रतिशत इस क्षेत्र के दक्षिण-पश्चिम में स्थित तारिम घाटी में रहते हैं। उइग़ुर लोग उइग़ुर भाषा बोलते हैं जो तुर्की भाषा परिवार की एक बोली है। .

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उइगुर भाषा

मान्छु में लिखा हुआ है - इसमें उइग़ुर लिखाई 'रोशन अवतरादाक़ी दारवाज़ा' कह रही है, यानि 'रोशन सुन्दर दरवाज़ा' - हिंदी और उइग़ुर में बहुत से समान शब्द मिलते हैं उइग़ुर, जिसे उइग़ुर में उइग़ुर तिलि या उइग़ुरचे कहा जाता है, चीन का शिंच्यांग प्रांत की एक प्रमुख भाषा है, जिसे उइग़ुर समुदाय के लोग अपनी मातृभाषा के रूप में बोलते हैं। उइग़ुर भाषा और उसकी प्राचीन लिपि पूरे मध्य एशिया में और कुछ हद तक भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तरी भाग में भी, बहुत प्रभावशाली रहे हैं। सन् २००५ में अनुमानित किया गया था कि उइग़ुर मातृभाषियों कि संख्या लगभग १ से २ करोड़ के बीच है।, Peter Austin, University of California Press, 2008, ISBN 978-0-520-25560-9,...

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