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तिब्बती-बर्मी भाषा-परिवार

सूची तिब्बती-बर्मी भाषा-परिवार

बर्मा के भाषा-परिवार भारतीय उपमहाद्वीप के भाषा-परिवार चीन के भाषा-परिवार तिब्बती-बर्मी भाषा परिवार पूर्वी एशिया, दक्षिण-पूर्वी एशिया के पहाड़ी इलाक़ों और भारतीय उपमहाद्वीप में बोली जाने वाली लगभग ४०० भाषाओं का एक भाषा-परिवार है। इसका नाम इस परिवार की दो सब से ज़्यादा बोली जाने वाली भाषाओं पर रखा गया है - तिब्बती भाषा (जो ८० लाख से अधिक लोग बोलते हैं) और बर्मी भाषा (जो ३.२ करोड़ से अधिक लोग बोलते हैं)। यह भाषा-परिवार चीनी-तिब्बती भाषा परिवार की एक उपशाखा है, लेकिन चीनी भाषा और इन भाषाओँ में बहुत अंतर है।, Austin Hale, Walter de Gruyter, 1982, ISBN 978-90-279-3379-9 .

52 संबंधों: चिआंग लोग, चीनी-तिब्बती भाषा-परिवार, डिमाश भाषा, तान्गूत भाषा, तान्गूत लोग, तानी भाषाएँ, तिब्बताई भाषाएँ, तुजिया भाषा, दिगारो भाषाएँ, देओरी भाषा, नाशी भाषा, नाशी लोग, नेपालभाषा, नोसू भाषा, पश्चिमी शिया, फ़लाम भाषा, बइ भाषा, ब्रह्मपुत्री भाषाएँ, बोड़ो भाषा, बोड़ो लोग, बोड़ो-कोच भाषाएँ, मिडज़ू भाषाएँ, म्हार भाषा, मेघालय, मेइतेइ लोग, युन्नान, यी लोग, रेंगमा भाषा, सुमी भाषा, सोपवोमा भाषा, हाखा चिन भाषा, ह्रूसो लोग, ज़ेमे भाषाएँ, जिन्गपो भाषा, गारो भाषा, आओ भाषाएँ, कमान भाषा, कमान मिश्मी, करेन भाषाएँ, कार्बी भाषा, कार्बी लोग, किन्नौरी भाषा, कछारी भाषा, कुकी भाषाएँ, कुकी-चिन-नागा भाषाएँ, कोच भाषा, कोनयाक भाषा, कोरो भाषा, कोक बोरोक भाषा, असम का इतिहास, ..., अंगामी भाषा, अंगामी-पोचुरी भाषाएँ सूचकांक विस्तार (2 अधिक) »

चिआंग लोग

चिआंग स्त्रियाँ सिचुआन प्रान्त में एक चिआंग मीनार चिआंग (चीनी भाषा: 羌族, अंग्रेज़ी: Qiang) दक्षिणी चीन में बसने वाली एक जाति है। तिब्बती-बर्मी भाषा-परिवार की सदस्य चिआंग भाषाएँ बोलने वाले यह लोग अधिकतर सिचुआन प्रान्त के उत्तर-पश्चिमी भाग में रहते हैं। सन् २००० में इनकी जनसँख्या क़रीब २ लाख अनुमानित की गई थी। चिआंग लोग पहाड़ी इलाक़ों में झाई (寨, zhai) नामक गाँवों में रहते हैं। .

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चीनी-तिब्बती भाषा-परिवार

चीनी-तिब्बती भाषा-परिवार अथवा चीनी भाषा-परिवार (अंग्रेज़ी: Sino-Tibetan languages) दक्षिण एशिया के कुछ भागों, पूर्वी एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया में बोली जाने वाली ४०० से अधिक भाषाओं का परिवार है। इसे बोलने वालों की मूल संख्या के आधार पर यह हिन्द-यूरोपीय भाषा-परिवार के बाद दूसरा सबसे बड़ा भाषा परिवार है। चीनी-तिब्बती भाषा के मुख्य मूल भाषी विभिन्न प्रकार की चीनी भाषा (1.2 बिलियन भाषक), बर्मी (33 मिलियन) और तिब्बती भाषा (8 मिलियन) है। विभिन्न चीनी-तिब्बती भाषायें सुदूर पर्वतीय क्षेत्रों में कुछ छोटे समुदायों द्वारा बोली जाती हैं जिसका प्रलेखन स्पष्ट नहीं है। .

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डिमाश भाषा

डिमासा भाषा, तिब्बती-बर्मी परिवार की एक भाषा है जो डिमासा लोगों द्वारा बोली जाती है जो भारत के उत्तर-पूर्वी राज्य असम में निवास करते हैं। कछार बर्मन और कछार होजाइ प्रथम भाषा के रूप में डिमासा बोलते हैं। .

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तान्गूत भाषा

बौद्ध सूत्र तान्गूत भाषा (Tangut) या शी शिया भाषा (西夏) एक प्राचीन उत्तरपूर्वी तिब्बती-बर्मी भाषा थी जो कभी पश्चिमी शिया साम्राज्य के तान्गूत लोगों द्वारा बोली जाती थी। इसे कभी-कभी तिब्बती-बर्मी भाषा-परिवार की चिआंगी उपशाखा (Qiangic) में वर्गीकृत किया जाता है।, James Matisoff, 2004.

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तान्गूत लोग

चीन के निंगशिया प्रांत से १०वीं या ११वीं सदी में बनी एक तस्वीर जो शायद एक तान्गूत आदमी की है तान्गूत (चीनी भाषा: 党项, अंग्रेज़ी: Tangut) एक तिब्बती-बर्मी भाषा बोलने वाला समुदाय था जिसने प्राचीन चीन के पश्चिम में पश्चिमी शिया राज्य स्थापित किया। माना जाता है कि वे १०वीं सदी ईसवी से पहले उत्तर-पश्चिमी चीन में आ बसे थे। माना जाता है कि इनका तिब्बती लोगों से नसल का सम्बन्ध था लेकिन जहाँ ऐसी अन्य जातियाँ तिब्बती समुदाय में घुल गई वहाँ तान्गूत तिब्बत से दूर उत्तर में थे इसलिए इनकी अलग पहचान बनी रही।, Sam Van Schaik, Yale University Press, 2011, ISBN 978-0-300-15404-7,...

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तानी भाषाएँ

तानी भाषाएँ (Tani) या मिरिच भाषाएँ (Miric) पूर्वोत्तरी भारत में, विशेषकर अरुणाचल प्रदेश में, बोली जाने वाली तिब्बती-बर्मी भाषा परिवार की एक शाखा है। इस उपपरिवार की भिन्न बोलियाँ लगभग ६ लाख लोग बोलते हैं। .

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तिब्बताई भाषाएँ

तिब्बताई भाषाएँ (तिब्बती: བོད་སྐད།, अंग्रेज़ी: Tibetic languages) तिब्बती-बर्मी भाषाओं का एक समूह है जो पूर्वी मध्य एशिया के तिब्बत के पठार और भारतीय उपमहाद्वीप के कई उत्तरी क्षेत्रों में तिब्बती लोगों द्वारा बोली जाती हैं। यह चीन द्वारा नियंत्रित तिब्बत, चिंगहई, गान्सू और युन्नान प्रान्तों में, भारत के लद्दाख़, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम व उत्तरी अरुणाचल प्रदेश क्षेत्रों में, पाक-अधिकृत कश्मीर के गिलगित-बलतिस्तान क्षेत्र में तथा भूटान देश में बोली जाती हैं। .

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तुजिया भाषा

तुजिया चीन के मध्य के एक क्षेत्र (भूरा रंग) में बोली जाती है तुजिया भाषा (चीनी: 土家语, तुजियायु) मध्य चीन में बसने वाले तुजिया लोगों द्वारा बोले जानी वाली तिब्बती-बर्मी भाषा-परिवार की एक भाषा है। इसकी दो उपभाषाएँ हैं: उत्तरी और दक्षिणी। दोनों ही सुरभेदी भाषाएँ हैं, जिनमें बोलते समय लगाए गए सुर के अनुसार शब्दों का अर्थ अलग होता है। तुजिया ने अपने आस-पड़ोस की भाषाओँ से इतने शब्द लिए हैं की उसका तिब्बत-बर्मी परिवार में आगे ठीक से श्रेणीकरण करना मुमकिन नहीं हो सका है।, The Rosen Publishing Group, 2010, ISBN 978-1-61530-183-6,...

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दिगारो भाषाएँ

दिगारो भाषाएँ या दिगारू भाषाएँ या उत्तरी मिश्मी भाषाएँ भारत के अरुणाचल प्रदेश राज्य और तिब्बत में मिश्मी समुदाय द्वारा बोली जाने वाली कुछ भाषाओं का एक छोटा भाषा-परिवार है। इस बात पर विवाद है कि यह तिब्बती-बर्मी भाषा-परिवार की एक शाखा है या स्वयं एक स्वतंत्र भाषा-परिवार है। मिलते-जुलते नाम के बावजूद इनका दक्षिणी मिश्मी भाषाओं (मिडज़ू भाषाओं) से कोई समीपी सम्बन्ध नहीं है। .

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देओरी भाषा

देओरी (Deori) या जिमोसाया (Jimosaya) पूर्वोत्तर भारत के असम और अरुणाचल प्रदेश के देओरी समुदाय द्वारा बोली जाने वाली ब्रह्मपुत्री भाषा-परिवार की एक भाषा है। देओरी समाज में केवल दिबोंगिया उपसमुदाय ही अब इस भाषा को बोलता है और अन्य सभी ने असमिया भाषा बोलना आरम्भ कर दिया है। .

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नाशी भाषा

गेबा लिपि में लिखी नाशी नाशी भाषा (अंग्रेज़ी: Naxi या Nakhi), जिसे लोमी, मोसो और मोसू भी कहा जाता है, दक्षिणी चीन में बसने वाले नाशी लोगों द्वारा बोली जाने वाली तिब्बती-बर्मी भाषा या भाषाओँ का समूह है। सन् २०१० में नाशी बोलने वालों की आबादी लगभग ३ लाख अनुमानित की गई थी।, Andrew Dalby, Columbia University Press, 2004, ISBN 978-0-231-11569-8,...

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नाशी लोग

लिजिआंग (युन्नान) के पास एक गाँव में नाशी स्त्री नाशी (चीनी भाषा: 纳西族, अंग्रेज़ी: Nakhi) दक्षिणी चीन में हिमालय के छोटे पहाड़ों में बसने वाली एक जाति है। यह युन्नान प्रान्त के उत्तर-पश्चिमी भाग और सिचुआन प्रान्त के दक्षिण-पश्चिमी भाग में रहते हैं। युन्नान का लिजिआंग विभाग ख़ासकर इस समुदाय से सम्बंधित है। सन् २००० में इनकी आबादी लगभग ३ लाख अनुमानित की गई थी। माना जाता है कि नाशियों के पूर्वज तिब्बत से आये थे और ज़मानों से यह चीन के तिब्बत और भारत के व्यापार में अहम भूमिका निभाते आ रहे हैं। नाशी लोग तिब्बती-बर्मी भाषा-परिवार की नाशी भाषा बोलते हैं। यह समुदाय मोसुओ समुदाय से बहुत मिलता-जुलता है, हालांकि मोसुओ लोग अभी भी अपनी तिब्बतियों से मिलती हुई पहचान बनाए हुए हैं जबकि नाशी लोगों के चीनी सभ्यता के कुछ पहलुओं को अपना लिया है।, Andrew Dalby, Columbia University Press, 2004, ISBN 978-0-231-11569-8,...

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नेपालभाषा

नेपालभाषा, नेपाली भाषा से भिन्न भाषा है; इनमें भ्रमित न हों। ---- नेपाल भाषा ('नेवारी' अथवा 'नेपाल भाय्') नेपाल की एक प्रमुख भाषा है। यह भाषा चीनी-तिब्बती भाषा-परिवार के अन्तर्गत तिब्बती-बर्मेली समूह मे संयोजित है। यह देवनागरी लिपि मे भी लिखी जाने वाली एक मात्र चीनी-तिब्बती भाषा है। यह भाषा दक्षिण एशिया की सबसे प्राचीन इतिहास वाली तिब्बती-बर्मेली भाषा है और तिब्बती बर्मेली भाषा में चौथी सबसे प्राचीन काल से उपयोग में लाई जाने वाली भाषा। यह भाषा १४वीं शताब्दी से लेकर १८वीं शताब्दी के अन्त तक नेपाल की प्रशासनिक भाषा थी। .

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नोसू भाषा

सिचुआन में एक मार्गदर्शक जिसमें सबसे ऊपर नोसू (यी) में, उसके नीचे चीनी में और सबसे नीचे अंग्रेज़ी में लिखा हुआ है नोसू (नोसू: ꆈꌠ, अंग्रेज़ी: Nuosu), जिसे उत्तरी यी, लिआंगशान यी और सिचुआन यी भी कहा जाता है, दक्षिणी चीन में बसने वाले यी लोगों द्वारा बोली जाने वाली तिब्बती-बर्मी भाषाओँ की सदस्य यी भाषाओँ की मानक भाषा है। सारी यी बोलियों में यह अकेली है जिसे पाठशालाओं में लिखित रूप से पढ़ाया जाता है। दुनिया भर में ८० लाख की आबादी रखने वाले यी समुदाय में से २० लाख अब नोसू बोलते हैं और यह तादाद बढ़ रही है। तिब्बती-बर्मी भाषा परिवार में यी भाषाएँ बर्मी भाषा के करीब मानी जाती हैं।, Foong Ha Yap, Janick Wrona, Karen Grunow-harsta, John Benjamins Publishing Company, 2011, ISBN 978-90-272-0677-0,...

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पश्चिमी शिया

सन् ११११ ईसवी में पश्चिमी शिया राजवंश का क्षेत्र (हरे रंग में) तान्गूत सरकार द्वारा जारी यह कांसे के अधिकारपत्र धारक को 'घोड़े जलाने' (यानि आपातकाल में सरकारी घोड़े तेज़ी से दोड़ाकर थका डालने) की अनुमति देते थे पश्चिमी शिया राजवंश (चीनी: 西夏, शी शिया; अंग्रेजी: Western Xia) जिसे तान्गूत साम्राज्य (Tangut Empire) भी कहा जाता है पूर्वी एशिया का एक साम्राज्य था जो आधुनिक चीन के निंगशिया, गांसू, उत्तरी शान्शी, पूर्वोत्तरी शिनजियांग, दक्षिण-पश्चिमी भीतरी मंगोलिया और दक्षिणी मंगोलिया पर सन् १०३८ से १२२७ ईसवी तक विस्तृत था। तान्गूत लोग तिब्बती लोगों से सम्बंधित माने जाते हैं और उन्होंने चीनी लोगों का पड़ोसी होने के बावजूद चीनी संस्कृति नहीं अपनाई। तिब्बती और तान्गूत लोग इस साम्राज्य को मिन्याक साम्राज्य (Mi-nyak) बुलाते थे। तान्गुतों ने कला, संगीत, साहित्य और भवन-निर्माण में बहुत तरक्की की थी। सैन्य क्षेत्र में भी वे सबल थे - वे शक्तिशाली लियाओ राजवंश, सोंग राजवंश और जिन राजवंश (१११५–१२३४) का पड़ोसी होते हुए भी डट सके क्योंकि उनका फ़ौजी बन्दोबस्त बढ़िया था। रथी, धनुर्धर, पैदल सिपाही, ऊँटों पर लदी तोपें और जल-थल दोनों पर जूझने को तैयार टुकड़ियाँ सभी उनकी सेना का अंग थीं और एक-साथ आयोजित तरीक़े से लड़ना जानती थीं।, David Hartill, Trafford Publishing, 2005, ISBN 978-1-4120-5466-9,...

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फ़लाम भाषा

फ़लाम (Falam) एक कुकी-चिन भाषा है जो भारत के पूर्वोत्तर भाग और उसके पड़ोस में बर्मा के चिन राज्य में बोली जाती है। इसका हाखा चिन भाषा से सम्बन्ध है। .

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बइ भाषा

बइ भाषा या बइप भाषा (चीनी: 白語, बइ यु; अंग्रेज़ी: Bai या Baip language) चीन के युन्नान प्रान्त और उसके कुछ पड़ोसी क्षेत्रों, में बइ लोगों द्वारा बोली जाने वाली एक चीनी-तिब्बती भाषा-परिवार की एक बोली है। इसे सन् २००३ में लगभग १२,४०,००० लोग अपनी मातृभाषा के रूप में बोलते थे। अन्य चीनी-तिब्बती भाषाओं की तरह यह भी एक सुरभेदी भाषा है और इसमें आठ सुरों का प्रयोग होता है।, S. Robert Ramsey, pp.

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ब्रह्मपुत्री भाषाएँ

ब्रह्मपुत्री भाषाएँ (Brahmaputran languages) या साल भाषाएँ (Sal languages) तिब्बती-बर्मी भाषा-परिवार की एक उपशाखा की बोलियाँ हैं जो पूर्वी भारत और बर्मा व बंगलादेश के कुछ हिस्सों में बोली जाती हैं। .

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बोड़ो भाषा

बोड़ो या बड़ो एक तिब्बती-बर्मी भाषा है जिसे भारत के उत्तरपूर्व, नेपाल और बांग्लादेश मे रहने वाले बोडो लोग बोलते हैं। बोडो भाषा भारतीय राज्य असम की आधिकारिक भाषाओं में से एक है। भारत में यह विशेष संवैधानिक दर्जा प्राप्त २२ अनुसूचित भाषाओं में से एक है। बोडो भाषा आधिकारिक रूप से देवनागरी लिपि में लिखी जाती है। .

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बोड़ो लोग

बोड़ो (असमिया: বড়ো/बड़ो) पूर्वोत्तर भारत के असम राज्य के मूल निवासी हैं और भारत की एक महत्वपूर्ण जनजाति हैं। बोड़ो समुदाय स्वयं एक बृहत बोड़ो-कछारी समुदाय का हिस्सा माने जाते हैं। सन् २०११ की भारतीय राष्ट्रीय जनगणना में लगभग २० लाख भारतीयों ने स्वयं को बोड़ो बताया था जिसके अनुसार वे असम की कुल आबादी के ५.५% हैं। भारतीय संविधान की छठी धारा के तहत वे एक अनुसूचित जनजाति हैं। बोड़ो लोगों की मातृभाषा भी बोड़ो भाषा कहलाती है, जो एक ब्रह्मपुत्री भाषा है। ब्रह्मपुत्री भाषाएँ तिब्बती-बर्मी भाषा-परिवार की एक शाखा है। धार्मिक दृष्टि से २००१ की जनगणना में लगभग ९०% प्रतिशत बोड़ो हिन्दू थे।, pp.

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बोड़ो-कोच भाषाएँ

बोड़ो-कोच भाषाएँ (Bodo–Koch languages) पूर्वी भारत में बोली जाने वाली कुछ भाषाओं का एक परिवार है। यह तिब्बती-बर्मी भाषा-परिवार की एक शाखा है। इसकी स्वयं तीन शाखाएँ हैं: बोड़ो-गारो भाषाएँ, कोच भाषाएँ और देओरी भाषा। .

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मिडज़ू भाषाएँ

मिडज़ू भाषाएँ (Midzu languages) या दक्षिणी मिश्मी भाषाएँ तिब्बती-बर्मी भाषा-परिवार की एक प्रस्तावित शाखा है जिसकी बोलियों को अरुणाचल प्रदेश और दक्षिणपूर्वी तिब्बत के कमान मिश्मी समुदाय में बोला जाता है। इसकी दो मुख्य भाषाएँ हैं: कमान (मिडज़ू / मिजू) और ज़ेख्रिंग (मेयोर)। .

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म्हार भाषा

म्हार भाषा (जो भाषा के नाम का सही उच्चारण है) या ह्मार भाषा (Hmar language) तिब्बती-बर्मी भाषा-परिवार की कुकी भाषा शाखा की मिज़ो उपशाखा की एक भाषा है। इसे बोलने वाले भी ह्मार लोग कहलाते हैं। ह्मार पूर्वोत्तरी भारत में मिज़ोरम, मणिपुर, त्रिपुरा, असम व मेघालय में बिखरे समुदायों में बसे हुए हैं, लेकिन इतने विशाल भूक्षेत्र में फैले होने के बावजूद इनकी ह्मार उपभाषाएँ आपस में बख़ूबी बोली-समझी जा सकती हैं। कुछ हद तक यह अन्य कुकी भाषाओं को बोलने वालों के साथ भी समझी जा सकती है। बांग्लादेश के चटगाँव पहाड़ी क्षेत्र में भी कुछ ह्मार बोलने वाले रहते हैं। .

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मेघालय

मेघालय पूर्वोत्तर भारत का एक राज्य है। इसका अर्थ है बादलों का घर। २०१६ के अनुसार यहां की जनसंख्या ३२,११,४७४ है। मेघालय का विस्तार २२,४३० वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में है, जिसका लम्बाई से चौडाई अनुपात लगभग ३:१ का है। IBEF, India (2013) राज्य का दक्षिणी छोर मयमनसिंह एवं सिलहट बांग्लादेशी विभागों से लगता है, पश्चिमी ओर रंगपुर बांग्लादेशी भाग तथा उत्तर एवं पूर्वी ओर भारतीय राज्य असम से घिरा हुआ है। राज्य की राजधानी शिलांग है। भारत में ब्रिटिश राज के समय तत्कालीन ब्रिटिश शाही अधिकारियों द्वारा इसे "पूर्व का स्काटलैण्ड" की संज्ञा दी थी।Arnold P. Kaminsky and Roger D. Long (2011), India Today: An Encyclopedia of Life in the Republic,, pp.

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मेइतेइ लोग

मेइतेइ या मीतेइ पूर्वोत्तर भारत के मणिपुर राज्य का बहुसंख्यक समुदाय है। वे मणिपुर के मूल निवासी हैं इसलिए उन्हें कभी-कभी 'मणिपुरी' भी कहा जाता है। धर्मिक दृष्टि से अधिकतर मेइतेइ हिन्दू हैं।, N. Lokendra, pp.

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युन्नान

(云南, Yunnan) जनवादी गणराज्य चीन के दक्षिणी भाग में स्थित एक प्रांत है। इस प्रान्त की राजधानी कुनमिंग है। युन्नान की सरहदें बर्मा, लाओस और वियतनाम से लगती हैं और यहाँ पर बहुत से ग़ैर-चीनी समुदाय रहते हैं, जैसे की यी लोग, झुआंग लोग और मियाओ लोग। युन्नान एक पहाड़ी इलाक़ा है और प्रान्त की अधिकतर आबादी उसके पूर्वी भाग में रहती है। वनस्पति-विज्ञान की दृष्टि से यह एक भरपूर क्षेत्र है - चीन में मिलने वाली ३०,००० वनस्पति पेड़-पौधों की जातियों में से १७,००० युन्नान में मिलती हैं। इस प्रान्त में ज़मीन के नीचे मिलने वाले अलूमिनियम, सीसे, जस्ते (ज़िंक), ताम्बे और त्रपु (टिन) के भण्डार चीन में सबसे बड़े हैं। यहाँ सैंकड़ों झरने-तालाब हैं और इस प्रान्त के बेहतरीन मौसम को 'सदाबहार' बुलाया गया है।, Kah Joon Liow, SilkRoad Networks Inc., 2004, ISBN 978-0-9733492-1-4,...

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यी लोग

यी लोग यी या लोलो (नोसू: ꆈꌠ, वियतनामी: Lô Lô, थाई: โล-โล, अंग्रेजी: Yi या Lolo) चीन, वियतनाम और थाईलैंड में बसने वाली एक मानव जाति है। विश्व भर में इनकी जनसँख्या लगभग ८० लाख अनुमानित की गई है। यी लोग तिब्बती-बर्मी भाषा-परिवार की यी भाषाएँ बोलते हैं, जिसका एक मानक रूप नोसू भाषा है और जो बर्मी भाषा से काफ़ी मिलती-जुलती हैं। अधिकतर यी लोग कृषि या गाय, भेड़ और बकरियों के मवेशी-पालन में लगे हुए हैं। कुछ शिकार से भी अपनी ज़रूरतें पूरी करते हैं। चीन में यह युन्नान, सिचुआन, गुइझोऊ और गुआंगशी प्रान्तों के देहाती इलाक़ों में बसते हैं।, Peter Hays Gries, Stanley Rosen, Psychology Press, 2004, ISBN 978-0-415-33205-7,...

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रेंगमा भाषा

रेंगमा (Rengma), भारत के नागालैंड राज्य में बोली जाने वाले एक भाषा है। यह तिब्बती-बर्मी भाषा परिवार की अंगामी-पोचुरी शाखा की बोली है, और सम्भव है कि उस शाखा की पोचुरी उपशाखा की सदस्य है। .

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सुमी भाषा

सुमी भाषा या सेमा भाषा या सिमी भाषा तिब्बती-बर्मी भाषा-परिवार की अंगामी-पोचुरी शाखा एक भाषा है। यह पूर्वोत्तर भारत के नागालैण्ड राज्य के ज़ुन्हेबोटो ज़िले में सुमी लोगों की मातृभाषा है। .

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सोपवोमा भाषा

सोपवोमा (Sopvoma) या माओ (Mao), भारत के मणिपुर राज्य के सेनापति ज़िले और नागालैंड राज्य में बोली जाने वाले एक भाषा है, जो अंगामी भाषा से बहुत मिलती-जुलती है। यह तिब्बती-बर्मी भाषा परिवार की अंगामी-पोचुरी शाखा की बोली है, और उस शाखा की अंगामी उपशाखा की सदस्या है। .

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हाखा चिन भाषा

हाखा चिन (Hakha Chin), जिसे लई (Lai), बौन्गशे (Baungshe) और पावी (Pawi) भी कहते हैं। इसके मातृभाषी अधिकतर भारत के मिज़ोरम राज्य में और बर्मा के चिन राज्य में रहते हैं। लई बोलने वाले कम संख्या में बंग्लादेश के कुछ सीमावर्ती क्षेत्रों में भी मिलते हैं। वैसे तो बर्मा के चिन राज्य में औपचारिक रूप से कोई राजभाषा नहीं है लेकिन अधिकतर लोग वहाँ आपस में लई ही बोलते हैं और प्रान्तीय राजधानी हाखा में भी लई ही बोली जाती है। यह काफ़ी हद तक मिज़ो भाषा से भी सम्बन्धित है।, Ethnologue, 1983, 1991, 1996, 2000, access date August 9, 2008 .

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ह्रूसो लोग

ह्रूसो (Hruso) या आका (Aka) भारत के अरुणाचल प्रदेश राज्य में बासने वाले एक समुदाय का नाम है। वे एक तिब्बती-बर्मी भाषा बोलते हैं। इनका निवास पश्चिम सिआंग ज़िले के थ्रिज़िनो, भालुकपोंग, बुरागाँव, जमीरी, पलीज़ी और कुप्पी क्षेत्रों में है, हलांकि वे पूर्व सिआंग ज़िले के कुछ भागों में भी बसे हुए हैं।, Col Ved Prakash, pp.

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ज़ेमे भाषाएँ

ज़ेमे भाषाएँ (Zeme languages) पूर्वोत्तर भारत के मणिपुर राज्य के पश्चिमोत्तरी भाग में नागा समुदाय की एक शाखा द्वारा बोली जाने वाली भाषाओं का एक समूह है। यह तिब्बती-बर्मी भाषा परिवार की एक शाखा है लेकिन उस विशाल भाषा-परिवार के अंतर्गत इसका आगे का श्रेणीकरण अभी अज्ञात है। इन भाषाओं का अन्य नागा भाषाओं के साथ का भी सम्बन्ध अज्ञात है। .

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जिन्गपो भाषा

जिन्गपो (बर्मी: ကချင်ဘာသာ) तिब्बती-बर्मी भाषा-परिवार की ब्रह्मपुत्री शाखा (जो साल शाखा भी कहलाती है) की एक भाषा है। यह ज़्यादातर बर्मा के उत्तर में स्थित कचिन राज्य में रहने वाले जिन्गपो समुदाय द्वारा बोली जाती है, हालांकि इसके कुछ मातृभाषी भारत व चीन में भी रहते हैं। यह अधिकतर रोमन लिपि में लिखी जाती है हालांकि कुछ लोग इसे बर्मी लिपि में भी लिखते हैं। .

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गारो भाषा

गारो भाषा (Garo language) या आचिक भाषा (আ·চিক ভাষা) पूर्वोत्तर भारत के मेघालय राज्य के गारो पहाड़ियाँ ज़िले तथा असम व त्रिपुरा के कुछ भागों में बोली जाने वाली एक भाषा है। इसे बांग्लादेश के कुछ पड़ोसी क्षेत्रों में भी बोला जाता है। गारो भाषा का कोच एवं बोडो भाषाओ से, जो कि तिब्बती-बर्मी भाषा-परिवार की सदस्य हैं, इनसे निकट सामीप्य है। गारो भाषा अधिकांश जनसंख्या द्वारा बोली जाती है और इसकी कई बोलियां प्रचलित हैं, जैसे अबेंग या अम्बेंग, अटोंग, अकावे (या अवे), मात्ची दुआल, चोबोक, चिसक मेगम या लिंगंगम, रुगा, गारा-गञ्चिंग एवं माटाबेंग। .

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आओ भाषाएँ

आओ भाषाएँ (Ao languages) पूर्वोत्तर भारत के नागालैण्ड राज्य के उत्तर-मध्य भाग में आओ समुदाय द्वारा बोली जाने वाली भाषाओं का एक समूह है। यह तिब्बती-बर्मी भाषा परिवार की एक शाखा है लेकिन उस विशाल भाषा-परिवार के अंतर्गत इसका आगे का श्रेणीकरण अभी अज्ञात है। .

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कमान भाषा

कमान भाषा (Kaman language) या मिजू भाषाएँ (Miju language) या गेमान भाषा (Geman language) भारत के अरुणाचल प्रदेश और दक्षिणपूर्वी तिब्बत के कमान मिश्मी समुदाय द्वारा बोली जाने वाली एक भाषा है। भाषावैज्ञानिकों में विवाद है कि यह तिब्बती-बर्मी भाषा-परिवार की सदस्य है या एक भाषा वियोजक है। यह प्रस्ताव है कि ज़ेख्रिंग भाषा (मेयोर) के साथ यह मिडज़ू भाषा-परिवार की सदस्य है जो स्वयं सम्भव है कि तिब्बती-बर्मी भाषा-परिवार की एक छोटी शाखा हो। .

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कमान मिश्मी

कमान मिश्मी या मिजू मिश्मी, तिब्बत और अरुणाचल प्रदेश के मिश्मी लोगों की तीन जनजातियों में से एक हैं। भारत में इस समुदाय के सदस्य अंजॉ और लोहित ज़िलों में स्थित हैं। मिजू गुट का दावा है कि वे बर्मा के कचिन क्षेत्र से आए हैं। वे तिब्बती-बर्मी भाषा-परिवार की मिडज़ू शाखा (Midzu) की भाषाएँ बोलते हैं। .

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करेन भाषाएँ

करेन भाषाएँ (Karen languages) बर्मा में लगभग ७० लाख लोगों द्वारा बोली जाने वाली सुरभेदी भाषाओं का एक समूह है। यह औपचारिक रूप से चीनी-तिब्बती भाषा-परिवार की एक उपशाखा हैं लेकिन इनमें उस परिवार से बहुत अंतर हैं। कुछ भाषावैज्ञानिकों के अनुसार यह पड़ोस में बोली जाने वाली मोन और ताई-कादाई भाषाओं का प्रभाव है। .

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कार्बी भाषा

कार्बी भाषा (असमिया: কাৰ্বি, अंग्रेज़ी: Karbi), जो मिकिर भाषा और आरलेंग भाषा भी कहलाया करती थी, पूर्वोत्तर भारत में असम, मेघालय व अरुणाचल प्रदेश राज्यों में कार्बी समुदाय द्वारा बोली जाने वाली एक भाषा है। यह तिब्बती-बर्मी भाषा-परिवार की सदस्या है लेकिन इस विशाल परिवार के अंदर इसका आगे का वर्गीकरण अस्पष्ट है। इसे अधिकतर असमिया लिपि में लिखा जाता है, हालांकि कुछ हद तक रोमन लिपि भी प्रयोगित है। इसकी एक प्रमुख उपभाषा है, आम्री, जो साधारण कार्बी बोली से काफ़ी अलग है और कभी-कभी एक भिन्न भाषा भी मानी जाती है। .

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कार्बी लोग

कार्बी (असमिया: কাৰ্বি, अंग्रेज़ी: Karbi) पूर्वोत्तरी भारत के असम राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों में बसने वाला एक समुदाय है। इन्हें कुछ सरकारी दस्तावेज़ों में "मिकिर" कहा जाता था लेकिन यह शब्द अब प्रयोग नहीं होता और कई कार्बियों द्वारा अपमानजनक माना जाता है। कार्बी लोग तिब्बती-बर्मी भाषा परिवार की कार्बी भाषा बोलते हैं और अधिकतर हिन्दू हैं, जिसमें सर्वात्मवाद के तत्व सम्मिलित हैं। .

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किन्नौरी भाषा

किन्नौरी भाषा भारत के हिमाचल प्रदेश राज्य के किन्नौर ज़िले में बोली जाने वाली एक तिब्बती-बर्मी भाषा है। यह हिमाचल से भी बाहर कुछ क्षेत्रों में बोली जाती है। .

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कछारी भाषा

कछारी (असमिया: কছাৰী, अंग्रेज़ी: Kachari या Cachari) भारत के असम राज्य के कुछ भागों में बोली जाने वाली एक ब्रह्मपुत्री भाषा है। मूल रूप से यह कछारी लोगों की मातृभाषा है लेकिन वर्तमानकाल में ३०% से कम कछारी लोग इसका दैनिक प्रयोग करते हैं, जबकि उनमें आजकल असमिया भाषा प्रचलित है। माना जाता है कि आधुनिक असमिया भाषा पर भी कछारी भाषा का गहरा प्रभाव रहा है।, pp.

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कुकी भाषाएँ

कुकी भाषाएँ (Kukish languages) या कुकी-चिन भाषाएँ (Kuki-Chin languages) पूर्वोत्तरी भारत, पश्चिमी बर्मा और पूर्वी बंग्लादेश में बोली जाने वाली लगभग ५० तिब्बती-बर्मी भाषाओं का समूह है। इसमें मिज़ो भाषा व हाखा चिन भाषा शामिल हैं। .

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कुकी-चिन-नागा भाषाएँ

कुकी-चिन-नागा भाषाएँ (Kuki-Chin–Naga) भारत के मिज़ो व नागा लोग तथा बर्मा के चिन लोग द्वारा बोली जाने वाली भाषाओं का एक समूह है। यह सभी तिब्बती-बर्मी भाषा-परिवार की सदस्य हैं लेकिन इनका आपसी सम्बन्ध अभी ज्ञात नहीं है। मिज़ो भाषा सर्वाधिक मातृभाषी रखने वाली कुकी-चिन-नागा भाषा है और भारत में सन् 2001 में इसके 6,74,756 वक्ता थे। इसके अलावा थाडो भाषा (1,50,000 वक्ता) और आओ शाखा की मोंगसेन आओ (1,40,000 वक्ता) भी एक लाख से अधिक लोगों द्वारा बोली जाती हैं। .

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कोच भाषा

कोच एक तिब्बती-बर्मी भाषा-परिवार की ब्रह्मपुत्रीय शाखा की एक भाषा है जिसे भारत के उत्तरपूर्व, नेपाल और बांग्लादेश में रहने वाले कोच राजबोंग्शी लोग बोलते हैं। कोच बोलने वाले अक्सर राजबोंग्शी भाषा भी जानते हैं। .

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कोनयाक भाषा

कोन्यक भाषाएँ दक्षिण-पूर्वी अरूणाचल प्रदेश तथा उत्तर-पूर्वी नागालैण्ड के क्षेत्रों में बोली जाने वाली भाषाएँ हैं, जिन्हें कोनयाक नागा समुदाय के लोग बोलते हैं। इन्हें 'उत्तरी नागा भाषाएँ' भी कहते हैं। ये भाषाएँ तिब्बती-बर्मी भाषा-परिवार की हैं। इसमें कोई छः भाषाएँ आतीं हैं जिनमें कोनयाक तथा नॉक्टे (Nocte) प्रमुख हैं। .

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कोरो भाषा

कोरो (Koro) भारत के उत्तर-पूर्वी राज्य अरुणाचल प्रदेश के पूर्व कमेंग ज़िले में बोली जाने वाली एक भाषा है। इसे बोलने वाले अधिकतर २० वर्ष से अधिक आयु के हैं, यानि नई पीढ़ी द्वारा कम बोली जाने के कारण यह संकटग्रस्त मानी जाती है। भाषावैज्ञानिकों के अनुसार यह सम्भवत: तिब्बती-बर्मी भाषा-परिवार कि सदस्य है, हालांकि यह पक्का नहीं है और सम्भव है कि यह किसी भी अन्य भाषा से सम्बन्धित न हो। कोरो-भाषी लोग आका (ह्रूसो) नामक समुदाय के साथ रहते हैं लेकिन इन दोनो की मातृभाषाएँ अलग हैं और उनके गिनती, शरीर के अंगो और अन्य प्रयोगों के बुनियादी शब्द तक एक-दूसरे से भिन्न हैं। कोरो और आका में शब्द-समानता केवल ९% की मापी गई है।Morrison, Dan.

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कोक बोरोक भाषा

कोक बोरोक या तिप्राकक भाषा या त्रिपुरी भाषा भारत के त्रिपुरा राज्य के त्रिपुरी समुदाय और बंगलादेश के कुछ पड़ोसी क्षेत्रों में बोली जाने वाली भाषाएँ हैं। 'कोक' का अर्थ 'भाषा' और 'बोरोक' का अर्थ 'लोग' होता है। यहाँ बोरोक शब्द से अर्थ त्रिपुरी लोग है। कोक बोरोक तिब्बती-बर्मी भाषा-परिवार की सदस्य है और असम में बोली जाने वाली बोड़ो भाषा और दिमासा भाषा की निकट सम्बन्धी है।, Pauthang Haokip, pp.

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असम का इतिहास

असम का इतिहास भारतीय आर्य, तिब्बता-बर्मी और ऑस्ट्रो एशियाई संस्कृति के एक अच्छे मिश्रण की कहानी है। .

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अंगामी भाषा

अंगामी (Angami), भारत के नागालैंड की सोलह बोलियों में से एक बोली तथा राज्य की प्रमुख भाषा है। यह तिब्बती-बर्मी भाषा परिवार की अंगामी-पोचुरी शाखा की अंगामी उपशाखा की एक भाषा है। राज्य के निवासियों के बीच यह संपर्क भाषा के रूप में विकसित हो चुकी हैं। देश की 1652 भाषाओं एवं बोलियों में से एक है। इसके बोलने वालों की संख्या एक लाख से ज़रा अधिक है। यह चीनी-तिब्बती परिवार की असमी-बर्मी-शाखा की एक टोनिम (Toneme) प्रधान भाषा है, जिनमें तान के चढ़ाव-उतार से किसी-किसी शब्द में आठ अर्थों तक का बोध होता है। इसे रोमन लिपि में लिखा जाने लगा है। नागरी लिपि में भी भाषा और साहित्य को लिखित रूप देने का प्रयास हो रहा है। .

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अंगामी-पोचुरी भाषाएँ

अंगामी-पोचुरी भाषाएँ (Angami–Pochuri languages) पूर्वोत्तर भारत के नागालैण्ड राज्य के दक्षिणी भाग में नागा समुदाय की एक शाखा द्वारा बोली जाने वाली भाषाओं का एक समूह है। यह तिब्बती-बर्मी भाषा परिवार की एक शाखा है लेकिन उस विशाल भाषा-परिवार के अंतर्गत इसका आगे का श्रेणीकरण अभी अज्ञात है। इन भाषाओं का अन्य नागा भाषाओं के साथ का भी सम्बन्ध अज्ञात है। .

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