लोगो
यूनियनपीडिया
संचार
Google Play पर पाएं
नई! अपने एंड्रॉयड डिवाइस पर डाउनलोड यूनियनपीडिया!
डाउनलोड
ब्राउज़र की तुलना में तेजी से पहुँच!
 

चीन

सूची चीन

---- right चीन विश्व की प्राचीन सभ्यताओं में से एक है जो एशियाई महाद्वीप के पू‍र्व में स्थित है। चीन की सभ्यता एवं संस्कृति छठी शताब्दी से भी पुरानी है। चीन की लिखित भाषा प्रणाली विश्व की सबसे पुरानी है जो आज तक उपयोग में लायी जा रही है और जो कई आविष्कारों का स्रोत भी है। ब्रिटिश विद्वान और जीव-रसायन शास्त्री जोसफ नीधम ने प्राचीन चीन के चार महान अविष्कार बताये जो हैं:- कागज़, कम्पास, बारूद और मुद्रण। ऐतिहासिक रूप से चीनी संस्कृति का प्रभाव पूर्वी और दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों पर रहा है और चीनी धर्म, रिवाज़ और लेखन प्रणाली को इन देशों में अलग-अलग स्तर तक अपनाया गया है। चीन में प्रथम मानवीय उपस्थिति के प्रमाण झोऊ कोऊ दियन गुफा के समीप मिलते हैं और जो होमो इरेक्टस के प्रथम नमूने भी है जिसे हम 'पेकिंग मानव' के नाम से जानते हैं। अनुमान है कि ये इस क्षेत्र में ३,००,००० से ५,००,००० वर्ष पूर्व यहाँ रहते थे और कुछ शोधों से ये महत्वपूर्ण जानकारी भी मिली है कि पेकिंग मानव आग जलाने की और उसे नियंत्रित करने की कला जानते थे। चीन के गृह युद्ध के कारण इसके दो भाग हो गये - (१) जनवादी गणराज्य चीन जो मुख्य चीनी भूभाग पर स्थापित समाजवादी सरकार द्वारा शासित क्षेत्रों को कहते हैं। इसके अन्तर्गत चीन का बहुतायत भाग आता है। (२) चीनी गणराज्य - जो मुख्य भूमि से हटकर ताईवान सहित कुछ अन्य द्वीपों से बना देश है। इसका मुख्यालय ताइवान है। चीन की आबादी दुनिया में सर्वाधिक है। प्राचीन चीन मानव सभ्यता के सबसे पुरानी शरणस्थलियों में से एक है। वैज्ञानिक कार्बन डेटिंग के अनुसार यहाँ पर मानव २२ लाख से २५ लाख वर्ष पहले आये थे। .

1424 संबंधों: चन्द्रमा, चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य, चम्पा, चम्पा का इतिहास, ऊष्मायित्र (अंडा), चाँदनी चौक टू चाइना, चानयू, चामी भाषाएँ, चाय, चायख़ाना, चार्ल्स के काव, चांगपा, चांगबाई पर्वत, चांगशा, चांगआन, चाइना ईस्टर्न एयरलाइंस, चाइनासैट2सी, चिड़ियाघर, चित्रकला, चिन राजवंश, चिन राज्य (प्राचीन चीन), चिपोरसुन, चिलास, चिल्मिआ, चिहुआहुआ (कुत्ता), चिंग राजवंश, चिंगहई झील, चिआन पर्वत, चिआंग माई, चिआंग लोग, चिकित्सा विधान, चग़ताई ख़ानत, चंपक, चंगेज़ ख़ान, चक्रफूल, चुमार, चुम्बी घाटी, चुंबकत्व, चुआन, च्यांग काई शेक, चू युआन, चू राज्य (प्राचीन चीन), चेचक, चेंगदू, चॅक, चोल राजवंश, चोंग्तर कांगरी, चीता, चीन (बहुविकल्पी), चीन में हिन्दू धर्म, ..., चीन में हिन्दी, चीन में विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी का इतिहास, चीन जापान सम्बन्ध, चीन ओलंपिक विवरण, चीन का ध्वज, चीन का मैदान, चीन का शान्तिपूर्ण उत्थान, चीन का सम्राट, चीन का इतिहास, चीन का अंतरिक्ष कार्यक्रम, चीन के राजवंश, चीन के वैदेशिक सम्बन्ध, चीन की सभ्यता, चीन की साम्यवादी क्रांति, चीन की विशाल दीवार, चीन-नेपाल युद्ध, चीन-पाक आर्थिक गलियारा, चीन-पाकिस्तान समझौता, चीन-वियतनाम युद्ध, चीनी (चीन के निवासी), चीनी तीतर, चीनी नववर्ष, चीनी बौद्ध धर्म, चीनी भाषा, चीनी भाषा और साहित्य, चीनी भावचित्र, चीनी मार्शल आर्ट, चीनी मुद्रा, चीनी राष्ट्रीय अंतरिक्ष प्रशासन, चीनी शेषफल प्रमेय, चीनी साम्यवादी दल, चीनी व्यंजन, चीनी गणराज्य, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, टाइगर एयरवेज, टंगस्टन, टकलामकान, ट्यूलिप, ट्रांस काराकोरम ट्रैक्ट, टैंक मैन, टेम्परा चित्रण, टेराकोटा, टेराकोटा सेना, टॅमिन्क ट्रॅगोपॅन, टोटो भाषा, टोंकिन की खाड़ी, टोक्यो, टीकाकरण, एझोऊ, एनी बेसेन्ट, एबीबी एसिया ब्राउन बॉवेरी, एम. जी. एम. मकाऊ, एमएसएन, एयर चाइना, एयर ब्लू, एयरबस, एशिया, एशिया की संकटापन्न भाषाओं की सूची, एशियाई वित्तीय संकट, एशियाई इन्फ्रास्ट्रक्चर इनवेस्टमेंट बैंक, एस्‍टन मार्टिन, एसोसिएशन ऑफ चार्टर्ड सर्टिफाइड एकाउंटेंट्स, एसीसी महिला एशिया कप, एज़्निस एयरवेज़, एवरेस्ट बेस कैंप, एविक एजी600, एवेंक लोग, एक्नेस समूह, एक्यूपंक्चर, एक्यूप्रेशर, एकीकृत गाइडेड मिसाइल विकास कार्यक्रम, ऐ मेरे वतन के लोगों, ऐलिस इन वण्डरलैण्ड (२०१० चलचित्र), ऐंथ्रासाइट, झपकी, झियांगतान, झज्जर, झगड़ते राज्यों का काल, झुआंग लोग, झू मी (बैडमिंटन), झेन, झेंगझोऊ, झोऊ राजवंश, झी लिन झांग, ठाकुर गदाधर सिंह, डब्ल्यूयू-14, डाटदार पुल, डिस्को डांसर, डिजास्टर फ्लिक 2012, डवे, डंपिंग (मूल्य निर्धारण नीति), ड्रैगन नृत्य, डेंगू बुख़ार, डॉ. रेड्डीज लेबोरेटरीज, डॉ. जॉर्ज ग्रियर्सन पुरस्कार, डोकलाम, डोकलाम विवाद 2017, डी एफ-41, डी.वी. पलुस्कर, डीडी उर्दू, ढलवां लोहा, तबाशीर, तम्बाकू धूम्रपान, तलास नदी, तलास प्रांत, तातार भाषा, तातार लोग, तान्गूत लोग, ताम्रलिप्त, तारिम नदी, तारकनाथ दास, ताश, ताशक़ुरग़ान​, ताजमहल, ताजिक लोग, ताजिकिस्तान, ताजिकी भाषा, ताई पर्वत, ताई भाषाएँ, ताई लोग, ताई-कादाई भाषाएँ, तांग राजवंश, ताओ धर्म, ताओ-ते-चिंग, ताइपिंग विद्रोह, ताइयुआन उपग्रह प्रक्षेपण केंद्र, ताइहू झील, ताइवानी मापन इकाइयाँ, ताइवानी आदिवासी, तिएले लोग, तिब्बत (१९१२-५१), तिब्बत का पठार, तिब्बत का इतिहास, तिब्बत की संस्कृति, तिब्बताई भाषाएँ, तिब्बती तीतर, तिब्बती बौद्ध धर्म, तिब्बती भाषा, तिब्बती रामचकोर, तिब्बती लोग, तियाँ शान, तियांजिन धमाके २०१५, तिरमिज़, तिराना, तिल का तेल, तिआन्हे १, तिआंजिन, तंत्र साहित्य (भारतीय), तंग राज्य (प्राचीन चीन), तंगझोऊ, तंग्राम, तकिया, तुमैन, तुयुहुन राज्य, तुयेन क्वैंग प्रान्त, तुरफ़ान, तुरफ़ान द्रोणी, तुर्कमेनाबात, तुर्किस्तान, तुर्की भाषा परिवार, तुजिया भाषा, तुजिया लोग, तुंगुसी भाषा-परिवार, त्रिनिदाद और टोबैगो, त्सोचेन ज़िला, त्वरित संदेश प्रेषण (इंस्टेंट मेसेजिंग), तृतीय विश्व, तैमूरलंग, तू फू, तूफ़ान हैयान, तूफान फनापी, तूफान मेरान्ती, तूमन चानयू, तूमन नदी, तूवी भाषा, तेरम कांगरी, तोलुइ ख़ान, तोंगशानजिआबु, तोकमोक, तीतर जैसी पूंछ वाला जल-कपोत, तीन राजशाहियाँ, तीन अधिपति और पाँच सम्राट, तीस मीटर टेलीस्कोप, थाई लोग, थाईलैण्ड का इतिहास, थेरवाद, थोलिंग, थोक मूल्य सूचकांक, द फॉरबिडन किंगडम, द वंडर दैट वाज़ इण्डिया, द कराटे किड (2010 फ़िल्म), द किंग्स स्पीच, दमिश्क और होम्स पर अमेरिकी मिसाइल हमला - 2018, दा-वेन सन, दामोदर स्वरूप 'विद्रोही', दालचीनी, दाली शहर, दिंगलींग लोग, दिक्सूचक, दवा कंपनियों की सूची, दंत-क्षरण, दक्षिण पूर्वी एशियाई राष्ट्रों का संगठन, दक्षिण पूर्वी एशियाई राष्ट्रों का संगठन के सदस्य राष्ट्र, दक्षिण भारत, दक्षिण सूडान, दक्षिण कोरिया, दक्षिण कोरिया का इतिहास, दक्षिणी चीन सागर, द्रनंग ज़िला, द्वारकानाथ कोटणीस, द्वितीय चीन-जापान युद्ध, द्वितीय विश्व युद्घ, द्वितीय विश्वयुद्ध, द्वितीय अंतर्राष्ट्रीय वित्त केन्द्र, दौलत बेग ओल्दी, दूनहुआंग, देमचोक, देवनागरी, देंग शियाओ पिंग, दोनडुप वांग्मेय, दोंग नदी, दोंगतिंग झील, दोंगहु लोग, धन-निष्कासन सिद्धान्त, धर्मक्षेम, धारचूला तहसील, धारीदार पूँछ वाला तीतर, धूप के चश्मे, धूम्रपान, धीमा लोरिस, नरेन्द्र मोदी द्वारा किए गए अंतरराष्ट्रीय प्रधानमन्त्रीय यात्राओं की सूची, नरेन्द्र मोदी सरकार की विदेश नीति, नाथूला दर्रा, नानचांग, नानझाओ राज्य, नानजिंग, नानजींग विश्वविद्यालय, नाभिकीय आपूर्तिकर्ता समूह, नारोमुरार, नालन्दा महाविहार, नाशी भाषा, नाशी लोग, निम्नतापी रॉकेट इंजन, निरुपमा राव, निस्सिन फूड्स, निंग्बो, निकेरी जिला, निकोलस द्वितीय, नवचन्द्र झील, नवपाषाण युग, नवजीत ढिल्लों, नवंबर 2015 माली होटल हमला, नक्सलवाद, नुरहाची, न्यू डेवलपमेंट बैंक, नैनचांग क्यू-5, नैपोलियन तृतीय, नेदोंग ज़िला, नेपाल, नेपाल हिमालय, नेपाल का प्रशासनिक विभाजन, नेपाल का भूगोल, नेपाल का इतिहास, नेपाल के प्रदेश, नेपाली वास्तुकला, नॉर्दर्न ट्रस्ट, नोमास्कस, नोसू भाषा, नीबू, नीलगिरी (यूकलिप्टस), पटना, पटना का इतिहास, पटाख़ा, पतंग, पन्ना, परमाणु परीक्षण, परमाणु बम, परमाणु अप्रसार संधि, परमाणु अस्त्रों से युक्त देशों की सूची, परित्यक्त डेल्टा, पर्च, पर्यटन, पर्ल एस बक, पर्वतीय बांस का तीतर, पल्लव राजवंश, पशुधन, पश्चिम की यात्रा, पश्चिमाञ्चल विकास क्षेत्र, पश्चिमी झोऊ राजवंश, पश्चिमी शिया, पश्चिमी क्षेत्र, पहाड़ी मैना, पाढ़ा, पाताल का द्वार, पामीर पर्वतमाला, पामीरी भाषाएँ, पायथागॉरियन प्रमेय, पार-साइबेरियाई रेलमार्ग, पारा, पारिभाषिक शब्दावली, पारिस्थितिक पदचिह्न, पार्श्व न्यूमोनिया, पालक, पास्ता, पाव्लोदार प्रांत, पाइथागोरस प्रमेय, पाक अधिकृत कश्मीर, पितृवंश समूह ऍफ़, पिनांग, पियोरा, पवन ऊर्जा, पगोडा, पंचेन लामा, पंजाकॅन्त, पक्षी इन्फ्लूएंजा, पुरंग ज़िला, पुर्वांचल विकास क्षेत्र, पुल्लेला गोपीचंद, पुस्तकालय का इतिहास, प्युनिंग मंदिर, प्रताप सिंह कैरों, प्रतिमा पुहन, प्रतिरूपण, प्रथम चीन-जापान युद्ध, प्रदेश संख्या १, प्रमुख धार्मिक समूह, प्रशीतन, प्रस्तर, प्राचीन चीन, प्राचीन भारत, प्रांत, प्राकृतिक आपदा, प्रिमोर्स्की क्राय, प्रक्षेपास्त्र रोधी प्रणाली, प्रेम-प्रतिमा, प्लेस्टेशन २, पौष्टिक-औषध (न्यूट्रास्युटिकल), पैसिफ़िक रिम (फ़िल्म), पूरब से उत्पन्न पश्चिमी सभ्यता, पूर्व की ओर देखो (नीति), पूर्वकाल में विश्व के विभिन्न क्षेत्रों के सकल घरेलू उत्पाद, पूर्वोत्तर भारत, पूर्वी चीन सागर, पूर्वी एशिया, पूर्वी ईरानी भाषाएँ, पूर्वी वू राज्य (प्राचीन चीन), पेठा (सब्जी), पेकिंग विश्वाविद्यालय, पॉल वुल्फोवित्ज़, पॉस्सम, पोयांग झील, पोर्टलैंड, ऑरेगॉन, पोर्श पैनामेरा, पोस्त, पोखरण-2, पीने का पानी, पीपल, पीपल्स लिबरेशन आर्मी, पीर पंजाल रेल सुरंग, पीला सम्राट, पीला सागर, पीला-पेट रासू, पीली आंधी, पी॰वी॰ सिंधु, फ़ायरफ़्लाई, फ़ाहियान, फ़िलीपीन्स, फ़्रैंकफ़र्ट, फ़्रेंचाइज़िंग, फ़्रीडम २५१, फ़ूड एण्ड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन, फ़ूज्यान, फ़ॉर्मूला वन, फिएट, फिलीपींस का इतिहास, फुटबॉल, फुमी, फ्रांस की संस्कृति, फ्रांसिस ज़ेवियर, फूल (मिश्रधातु), फेंग शुई, फोंगसाली प्रान्त, बएकदू पर्वत, बड़ी इलायची, बदख़्शान प्रान्त, बमा लोग, बलि प्रथा, बसंत और शरद काल, बहुवार, बाटिक, बाँसुरी, बाँज, बादाम, बान्द्रा-वर्ली समुद्रसेतु, बाबा (बहुविकल्पी), बासमाची विद्रोह, बाजार विभाजन,लक्ष्य निर्धारण, और स्थिति निर्धारण, बाघ, बिन्तुरोंग, बियर, बिलगे ख़ागान, बंगाल की खाड़ी, बइ भाषा, बइ लोग, बुद्ध पूर्णिमा, बुद्धत्व, बुम ला, बुरज़िल दर्रा, बुज़कशी, बुक्क राय प्रथम, ब्यूरो 39, ब्रह्मपुत्र नदी, ब्राह्मिनी चील, ब्रिटिशकालीन भारत के रियासतों की सूची, ब्रिक, ब्रिक्स, ब्रूक्स-भगत रपट, ब्रॉड पीक, ब्लाइद ट्रॅगोपॅन, ब्लॉगर (सेवा), ब्लॉक मुद्रण, बौद्ध धर्म, बैंगन, बेदाऊ, बेसिक, बेई नदी, बेइजिंग कैपिटल अन्तर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र, बेकजे, बॉन त्योहार, बॉक्सर विद्रोह, बोड स्वायत्त क्षेत्र, बोधिधर्म बौद्धाचार्य, बोर्ड गेम, बी पी ओ, बीसवीं शताब्दी, बीजिंग मेट्रो, भरतपुर, भारत, भारत तिब्बत सीमा पुलिस, भारत में चीनी भाषा की पत्रकारिता, भारत में भ्रष्टाचार, भारत में मोटर वाहन उद्योग, भारत में आतंकवाद, भारत में आर्थिक सुधार, भारत में कुपोषण, भारत विकास परिषद, भारत का भूगोल, भारत का आर्थिक इतिहास, भारत के राष्ट्रपतियों की सूची, भारत के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सूची जनसंख्या अनुसार, भारत के लोग, भारत के सात आश्चर्य, भारत के वैदेशिक सम्बन्ध, भारत की संस्कृति, भारत-चीन युद्ध, भारत-चीन सम्बन्ध, भारत-म्यांमार सम्बन्ध, भारत-संयुक्त राज्य सम्बन्ध, भारतीय चुनाव, भारतीय परमाणु परीक्षण, भारतीय बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा कार्यक्रम, भारतीय राजनय का इतिहास, भारतीय सशस्‍त्र सेनाएँ, भारतीय सेही, भारतीय हाथी, भारतीय वस्त्र, भारतीय वायुसेना, भारतीय गणित का इतिहास, भारतीय गैण्डा, भारतीय इतिहास तिथिक्रम, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारतीय अर्थव्यवस्था, भारतीय अर्थव्यवस्था की समयरेखा, भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन, भाषा-परिवार, भविष्य विज्ञान, भृङ्गराज, भूटान, भूदृश्य वास्तुकला, भूमंडलीय ऊष्मीकरण, भूमंडलीय ऊष्मीकरण का प्रभाव, भूगोल का इतिहास, भोजन शिष्टाचार, भीतरी मंगोलिया, मधुमालती, मध्य एशिया, मध्य-पश्चिमाञ्चल विकास क्षेत्र, मध्यमाञ्चल विकास क्षेत्र, मनका, मनुस्मृति, मन्दारिन भाषा, मर्म, मर्सिडीज-बेंज एस-क्लास, मर्व, मरूद्यान, मलेरिया, मलेशिया, मलेशिया एयरलाइंस उड़ान 370, मसाला, मसूरी, महाद्वीप, महाभारत, महायान, महालंगूर हिमाल, महासंगणक, महेन्द्रा कुमारी, महोख, मा परिवार सेना, मातृवंश, मातृवंश समूह ऍफ़, मातृवंश समूह बी, मातृवंश समूह ज़ॅड, मादक पेय, माधव शुक्ल, मानसून, मानसेहरा ज़िला, माना दर्रा, मानव लिंग का आकार, मानवतावाद, मानविकी, मानववाद, मान्छु, माया वर्ग, मार्च-3ए, मार्शल आर्ट, मार्को पोलो, मालिश, माहजंग, मांचु लिपि, मांचु लोग, माओ से-तुंग, माउज़र पिस्तौल, मित्रपक्ष शक्तियाँ, मिनियापोलिस, मिन्या कोन्का, मिलानो, मिलियन, मिलुओ नदी, मिंग राजवंश, मज़ार-ए-क़ायद, मंचूरिया, मंगल ग्रह के मिशन की सूची, मंगोल, मंगोल भाषा, मंगोल भाषा-परिवार, मंगोल लिपि, मंगोलिया का पठार, मकालू, मक्का (अनाज), मुद्रण कला, मुद्रण का इतिहास, मुद्रणालय, मुद्रा (भाव भंगिमा), मुद्रा (संगीत), मुज़ताग़ टावर, मुआंग, म्यान्मा की संस्कृति, म्यान्मार, मृत्युदंड, मैमथ, मैसाचुसेट्स प्रौद्योगिकी संस्थान, मैग्नीसियम, मैंग फून, मैकमहोन रेखा, मेलाका, मेइजी पुनर्स्थापन, मोटर वाहन उद्योग, मोतियाबिंद शल्यक्रिया, मोती नदी, मोदू चानयू, मोमबत्ती, मोगादीशू, मोगाओ गुफ़ाएँ, मोंगके ख़ान, मीन दोंग भाषा, मीन भाषाएँ, मीकांग नदी, यति, यमद्रोक झील, यशोवर्मन (कन्नौज नरेश), यामेन, यारकन्द नदी, यारकन्द ज़िला, यालू नदी, यांग्त्सीक्यांग, यिंगहुओ-1, युएझ़ी लोग, युद्धपोत राजनय, युन्नान विश्वविद्यालय, युआन मेइ, युआन राजवंश, यू चीनी, यूयू तु, यूरेनियम खनन, यूरेशियाई वृक्ष गौरैया, यूरोकेन्द्रीयता, यूलोंग नाशी स्वशासित ज़िला, यूलोंग हिमपर्वत, यूक्रेन-संकट, योरुंगकाश नदी, योग, योगेंद्र दुर्यस्वामी, यी लोग, यीवू, रतन नवल टाटा, रबड़, रमादा एशिया-प्रशांत, रयुक्यु द्वीपसमूह, रशीद उद-दीन हमदानी, राम स्वरूप, राल्फ वाल्डो इमर्सन, राष्ट्रीय राजमार्ग २१९ (चीन), राष्ट्रीय राजमार्ग २२, राष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, राष्ट्रीय विनिर्माण नीति (भारत), रासायनिक तत्व, रासायनिक शस्त्र, राज कपूर, राजनयिक दूत, राजबहादुर 'विकल', राखीगढ़ी, रागाला वेंकट राहुल, रिचर्ड गेयर, रिसर्च एंड एनालिसिस विंग, रघु वीर, रवि त्रिपाठी, रवि पॉल, रंजना लिपि, रंगबिरंगी उड़न गिलहरी, रक्तदान, रुतोग ज़िला, रुपे, रैमी, रूस-जापान युद्ध, रेशम पथ, रेशम मार्ग, रेशम मार्ग से बौद्ध धर्म का प्रसार, रेशम कीट, रेशमकीट पालन, रेकी चिकित्सा, रॉकेट, रोनाल्डिन्हो, रोजर फ़ेडरर, रीगा, लद्दाख़, लम्बा कूच, लहसुन, लाचुंग, लानक दर्रा, लान्झू, लाल लिफ़ाफ़ा, लाल सिर वाला गिद्ध, लाल जंगली मुर्गा, लाल गले वाला तीतर, लालबहादुर शास्त्री, लास वेगास, लाहौर, लांग मार्च 1, लांग मार्च 11, लांग मार्च 2ए, लाओ-सू, लाउडस्पीकर, लिएम स्वी किंग, लिन डान, लिपि, लिपि के अनुसार भाषाओं की सूची, लिपुलेख ला, लियाओ नदी, लियाओ राजवंश, लियू यांग, लिजिआंग, युन्नान, लवा लोग, लंबाई के आधार पर नदियों की सूची, लुईस माउंटबेटन, बर्मा के पहले अर्ल माउंटबेटन, लुईस हैमिल्टन, लुओयांग, लुआनदी, लुअंग नम्था प्रान्त, ल्हात्से, ल्हासा, ल्होत्से, लौह अयस्क, लौंग, लैंग सोन प्रान्त, लू श्याबाओ, लेडो रोड, लेनिनवाद, लेशान के विशाल बुद्ध, लोएस पठार, लोप नुर, ली झुइरुई, ली नदी (गुआंगशी प्रान्त), ली बै, ली कचियांग, लीची, श चिंग, शतरंज, शनचो-९, शन्शी, शब्दकोशों का इतिहास, शराब का इतिहास, शहतूत, शहरी उपप्रान्त (चीन), शाद इब्न अबी बक्काश, शान राज्य, शान लोग, शानहाइगुआन, शानक्सी वाई-8, शानक्सी वाई-9, शायदुल्ला, शारीरिक शिक्षा, शासकीय यूआं, शाही जापानी सेना, शांग राजवंश, शांगझी, शाओलिन मन्दिर, शाओशान, शिन राजवंश, शिनिंग, शिया राजवंश, शियान वाई-20, शियान वाई-7, शियानबेई लोग, शियोंगनु लोग, शिल्का नदी, शिशापांगमा, शिगात्से, शिगेरू बान, शिआन, शिआंग नदी, शिक्षा दर्शन, शिक्षक दिवस, शंघाई पुडोंग अन्तर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र, शंघाई सहयोग संगठन, शंघाई गौरव, शकरकन्द, शक्सगाम नदी, शु हान राज्य (प्राचीन चीन), शुन हिंग स्क्वायर, श्रीलाल शुक्ल, श्रीविजय राजवंश, श्रीआई, श्वेत अश्व मंदिर, शैवाल, शून्य, शेनझोऊ-८, शेनयांग जे-16, शेफ़ील्ड, शेह्ज़होउ (अंतरिक्ष यान), शी नदी, शी योंगजिन, शी जिनपिंग, शीतयुद्ध, शीतयुद्ध की उत्पत्ति, शीतकालीन ओलम्पिक खेल, शीनिंग स्टेडियम, शीराज़, सचवान, सत्यम कम्प्यूटर सर्विसेज़, सफ़ेद गाल वाला तीतर, सफेद पुट्ठे वाली मुनिया, सबप्राइम मोर्टगेज क्राइसिस, समरक़न्द, समाचारपत्र, समान नागरिक संहिता, समाजवाद, समकालीन, सम्बन्ध, सरस्वती देवी, सरिकोली भाषा, सर्पगन्धा, सर्गी ब्रिन, सलाद, सामाजिक चक्र, साम्भर (हिरण), साम्यवाद, साम्राज्यवाद, सायबर युद्ध, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, सालवीन नदी, साल्सेट द्वीप, साल्ज़बर्ग, साओ वेई राज्य (प्राचीन चीन), साइट्रस, साइबेरिया, साइगा, साकेत बहुगुणा, सितंबर २०१०, सिन्धु नदी, सिन्हुआ, सियाचिन मुज़ताग़, सिलिकोन, सिल्ला, सिवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम, सिविल सेवा, सिंह (पशु), सिंघाड़ा, सिंघी कांगरी, सिंगापुर में पर्यटन, सिंगापुर का इतिहास, सिआ कांगरी, सिक्किम, सिक्किम का इतिहास, संचार उपग्रह, संत रविदास नगर जिला, संदीप कुमार, संयुक्त राष्ट्र, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य, संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक परिषद, संयुक्त राष्ट्र के महासचिव, संयुक्त राष्ट्र अधिकारपत्र, संयुक्त राज्य, संस्कृत मूल के अंग्रेज़ी शब्दों की सूची, संघाई सहयोग संगठन, संख्या, संगइ, संगीत का इतिहास, सुथनी, सुदूर-पश्चिमाञ्चल विकास क्षेत्र, सुन यात-सेन, सुनहरी मछली (गोल्डफिश), सुब्रह्मण्यम जयशंकर, सुभाष चन्द्र बोस, सुम (ज़िला), सुमात्रा गैंडा, सुम्गल, सुज़ुकी, सुई राजवंश, सुखोई एसयू-30एमकेके, सुखोई एसयू-३०, सुखोई एसयू-३० एमकेआई, सुंग जू यिंग, सुअर इन्फ्लूएंजा, स्टारबक्स, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, स्टेट ब्यूरो फ़ॉर लेटर्स एंड कॉल्स, स्टेपल्स, स्टेविया, स्तॅपी, स्नूकर, स्प्राट्ली द्वीप विवाद, स्प्रिंग टैम्पल बुद्ध, स्वतंत्रता दिवस, स्वन वू, स्कर्दू ज़िला, स्काइप, स्क्यांग कांगरी, स्क्लैटर मोनाल, सौ विचारधाराएँ, सौर ऊर्जा, सैन्य विज्ञान, सैन्य व्यय के अनुसार देशों की सूची, सैन्य और अर्धसैनिक बलों की संख्या के आधार पर देशों की सूची, सूर्य मंदिर, सूखा, सेतु, सोया दूध, सोवियत संघ, सोवियत संघ का विघटन, सोग़दा, सोंग यु, सी आई टी आई सी प्लाज़ा, सीरियाई भाषा, हथियारों का इतिहास, हनफ़ी पन्थ, हनोई, हफथाली लोग, हम्बनटोटा, हरबर्ट स्पेंसर, हरिपुर ज़िला, हर्बलिज्म (जड़ी-बूटी चिकित्सा), हरी चाय, हरी सिंह थापा, हस्तरेखा शास्त्र, हाथी सूंड पर्वत, हान चीनी, हान राजवंश, हायलोबेटीस, हार्बिन जेड-19, हार्बिन वाई-11, हार्बिन वाई-12, हागन दास, हांग कांग का हस्तांतरण, हिन्द-यूरोपीय भाषा-परिवार, हिन्दूताश दर्रा, हिम तेन्दुआ, हिम तीतर, हिम कमल, हिमालय, हिमालय का रामचकोर, हिमालयाई भाषा परियोजना, हिमालयी मोनाल, हिमालयी वन चिड़िया, हिस्ट्री (टीवी चैनल), हिंद महासागर तटीय क्षेत्रीय सहयोग संघ, हिंदचीन, हवा में खड़ा मंदिर, हु जिन्ताओ, हुन्ज़ा-नगर ज़िला, हुई लोग, हुआंग ज़ियान फांग, ह्मोंग लोग, ह्वेन त्सांग, है गिआंग प्रान्त, हैलोवीन, हूलोक गिबन, हेपेटाइटिस बी, हेफ़ेई, हेरमान बूरहावे, हेरात, हेशी गलियारा, हेंगदुआन पहाड़ियाँ, हेइहे, हेइहे-तेंगचोंग रेखा, होमो इरेक्टस, होक्का भाषा, जनसांख्यिकी, जनसंख्या, जनसंख्या घनत्व के अनुसार देशों की सूची, जनवरी 2016 जकार्ता में आतंकी हमला, जम्मू और कश्मीर, जरी, जल प्रदूषण, जलसर्प तारामंडल, ज़बायकाल्स्की क्राय, ज़हाइ ज़हीगांग, ज़ान्दा ज़िला, ज़िथर, ज़ुन्गार लोग, ज़ुन्गारिया, ज़ैतून, ज़ी यान, ज़ी यैन, जातीय समूह, जापान, जापान का इतिहास, जापान के नाम, जापान की आत्मरक्षा सेना, जापानी बटेर, जापानी मापन इकाइयाँ, जापानी साहित्य, जापानी संस्कृति, जासूसी दुनिया, जाजमऊ, जिन माओ टावर, जिन राजवंश, जिन्गपो भाषा, जिन्गपो लोग, जिन्को बाइलोबा, जियांगनान, जिउकुआन उपग्रह प्रक्षेपण केंद्र, जगत मेहता, जुरचेन लोग, जुलाई 2006, जुलाई 2009 के साइबर आक्रमण, ज्वाला गुट्टा, जैविक खाद्य पदार्थ, जू-जान ख़ागानत, जूजुत्सु, जेट ली, जेएफ-17 थंडर, जेन्गिश चोकुसु, जेम्स वोंग होवे, जॉन डेविस (अंग्रेज नाविक), जोसेफ नीधम, जोसेफ़ स्टालिन, जोहान्सबर्ग, जोंगसोंग पर्वत, जोकर (चित्रकथा), जी ज़ैंग, जीबी वाइरस सी, जीवनचरित, ईरानी परमाणु कार्यक्रम पर अंतरिम समझौता, ईसा मसीह सत्य गिरजाघर, घृत कुमारी, वनेडियम, वयलर रामवर्मा, वाणिज्यिक क्रांति, वास्तविक नियंत्रण रेखा, वाख़ान, वाख़ी भाषा, वांग झिन (बैडमिंटन), वांग यिहान, वितरणानुसार विश्व के समाचारपत्रों की सूची, विदेशी मुद्रा का आरक्षित भंडार, विधिकार, वियतनाम, वियतनाम का इतिहास, वियतनामी भाषा, वियतनामी सीका हिरण, विल्नुस विश्वविद्यालय का पुस्तकालय, विशालविविध देश, विशिष्ट अस्तित्वों की सूची जिन्हें अन्तरराष्ट्रीय समझौते द्वारा मान्यता प्राप्त हैं, विश्व धरोहर, विश्व मुक्केबाजी प्रतियोगिता, विश्व में बौद्ध धर्म, विश्व में इस्लाम धर्म, विश्व शांति, विश्व सुन्दरी, विश्व सुन्दरी 2017, विश्व आर्थिक मंच, विश्व का आर्थिक इतिहास, विश्व के देशों में शहरों की सूचियाँ, विश्व के देशों की सूची के अनुलग्नक, विश्व के सभी देश, विश्व के सर्वोच्च पर्वतों की सूची, विश्व के आश्चर्य, विश्वनाथ प्रसाद तिवारी, विश्वमारी, विश्वविद्यालय, विषाणु विज्ञान, विजयशंकर व्यास, विकिमेनिया, विकिसम्मेलन भारत, वुव भाषा, व्लादिवोस्तोक, वृहद भारत, वृक्ष सूर्यानुवर्त, वैरामुत्तु, वैलेंटाइन दिवस, वैश्विक मंदी, वैश्वीकरण, वैंकूवर दक्षिण, वू चीनी भाषाएँ, वू नदी (यांग्त्से नदी की उपनदी), वेन जियाबाओ, वेलोसिरैप्टर, वेशभूषा संहिता, वेस्म पर्वतमाला, वेई नदी (चीन), वॉनाक्राय रैनसमवेयर हमला, वोदका, वीटो, वीडियो गेम, वीवो मोबाइल, खनिज विज्ञान, ख़ान तेन्ग्री, ख़ाबारोव्स्क, ख़ितानी लोग, ख़ुंजराब दर्रा, ख़ोतान, ख़ोतान विभाग, खाकाबो राज़ी, खुली अर्थव्यवस्था, खैर (वृक्ष), खेल, गणराज्य, गणित का इतिहास, गन्ना, गर ज़िला, गलियारा, ग़िज़र ज़िला, गाय, गाशरब्रुम, गाशरब्रुम १, गाशरब्रुम २, गाशरब्रुम ३, गाशरब्रुम ४, गाशरब्रुम ५, गाशरब्रुम ६, गांसू, गिबन, गिलगित-बल्तिस्तान, गंडा सिंह, गंगखर पुनसुम, गुरला मन्धाता, गुल धावी, गुलदाउदी, गुवांगज़ोउ बाइयुन अन्तर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र, गुओमिनजन, गुओमिंदांग, गुआंगज़ौ एबगरआनद, गुइ नदी, ग्रेटर नोएडा प्रेस क्लब, ग्रेटर मध्य पूर्व, ग्रेगोरी कैलेंडर, ग्रीन कम्प्यूटिंग, ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेल, ग्वादर, ग्वांगझोउ एवगरपाञड, गूगल धरती, गूगल आन्सर्स, गेरज़े ज़िला, गेज्ञई ज़िला, गोपीनाथ बोरदोलोई, गोबी मरुस्थल, गोरामानसिंह, गोवा, ऑपरेशन मेघदूत, ऑस्ट्रेलिया का इतिहास, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, ओपेरा (गीतिनाटक), ओश प्रांत, ओगताई ख़ान, ओग़ुज़ भाषाएँ, ओइरत लोग, आठ हज़ारी, आड़ू, आदित्य बिड़ला समूह, आम, आरएलवी टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेशन प्रोग्राम, आरिक़ बोके, आर्थिक शिथिलता, आर्थिक स्वतंत्रता सूचकांक, आलू, आलू बुख़ारा, आहारीय सेलेनियम, आज़ाद हिन्द फ़ौज, आईपैड (चौथी पीढ़ी), आईसीआईसीआई बैंक, आगम, आगम (हिन्दू), आग्नेय भाषापरिवार, आंबेडकर जयंती, आइएसओ ३१६६ - १, आक़्सू विभाग, इत्सिंग, इब्न-बतूता, इरतिश नदी, इराक पर आक्रमण 2003, इली नदी, इसिक कुल प्रांत, इस्लाम, इस्लाम से पहले का अरब, इस्लाम का इतिहास, इस्लामी सैन्य गठबंधन, इंचेयन अन्तर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र, इंटरनेशनल मोबाइल सब्स्क्राइबर आईडेनटिटी, इंडोचायना, इंडोनेशिया, इंदिरा नुई, इंदिरा कोल, कथासाहित्य (संस्कृत), कन्फ़्यूशियस, कपास, कम्यून, कमोव केए-27, करनैल सिंह, करमा (वृक्ष), कराची, कर्क रेखा, कस्तूरी, कस्तूरी बिलाव, क़ारग़िलिक ज़िला, क़ारेह बुलाक़, क़ुरग़ोनतेप्पा, कापू (जाति), कामराज योजना, कारा-ख़ितान ख़ानत, काराशहर, काराख़ानी ख़ानत, काराकाश नदी, काराकोरम, काराकोरम राजमार्ग, काराकोल, कार्बन, कार्कोट राजवंश, काला जुनबगला, काश्गर, काश्गर विभाग, काशीपुर का इतिहास, काशीपुर, उत्तराखण्ड, कावालम माधव पणिक्कर, काग़ज़, काग़ज़ का आकार, कागज उद्योग, कांस्य कला, काकड़, काउण्टी, किबिथू, किरगिज़ लोग, किर्गिज़ भाषा, किर्गिज़स्तान, किंकरी देवी, कज़ाख़ भाषा, कज़ाख़ लोग, कज़ाख़िस्तान, कंबोडिया-वियतनाम युद्ध, कंगफू कांग, कुत्तों की नस्लों की सूची, कुनमिंग, कुनलुन देवी, कुनलुन पर्वत, कुन्फ़्यूशियसी धर्म, कुमाऊं रेजिमेंट, कुमारजीव, कुमांऊॅं, कुम्हड़ा, कुला कांगरी, क्योटो प्रोटोकॉल, क्रय-अभिक्रय, क्राउन पर्वत, क्रिकेट, क्रिकेट का इतिहास, कृष्णा पूनिया, कैटरीना कैफ़, कैनोला, कैलाश पर्वत, कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, लॉस एंजिल्स, कैसर विल्हेम द्वितीय (जर्मनी), कैंटोरिन भाषा, कैओ बांग प्रान्त, कूचा राज्य, कूहिस्तोनी-बदख़्शान स्वशासित प्रान्त, के संगणक, केन्द्रीय प्लाज़ा, केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल, केलाग-ब्रियाँ समझौता, केसर, के२, कॉग्निजेंट (Cognizant), कॉइन ऑप्रेटेड बेबीज़, कोयल (एशियाई), कोयला, कोरिया का इतिहास, कोरियाई युद्ध, कोलंबो, कोलकाता, कोलकाता की अर्थ व्यवस्था, कोशी अंचल, कोंगुर ताग़, कोकलास, कोकुर्यौ, कीनिया एयरवेज़ फ़्लाइट केक्यू 507, अचार बनाना, अझ़दहा, अन्तर्राष्ट्रीय मानकीकरण संगठन के सदस्य राष्ट्र, अन्तर्राष्ट्रीय विद्युततकनीकी आयोग, अन्शिफ अशरफ, अप्रैल 2015 नेपाल भूकम्प, अप्सरासस कांगरी, अफ़ग़ानिस्तान, अफ़्रीका, अफ़्रीका की अर्थव्यवस्था, अफ़ीम युद्ध, अभियान्त्रिकी में स्नातक, अमान्य देशों की सूची, अमान्य और आंशिक मानयता प्राप्त राष्ट्रों के ध्वजों की सूची, अमिताभ बुद्ध, अमूर नदी, अरण्डी, अरनिको, अरहई झील, अरविन्द अडिग, अरुणाचल प्रदेश, अरुणाचल स्काउट्स, अर्थशास्त्र, अर्नेस्ट हेमिंग्वे, अर्गुन नदी, अलमाती प्रांत, अलसी, अलाय वादी, अल्ताई पर्वत शृंखला, अल्ताई भाषा, अल्फाल्फा, अलेक्सान्द्र अब्रामोविच कबकोव, अलीबाबा समूह, अशोक, अष्टबाहु, अवतार (२००९ फ़िल्म), अवशेष, अखरोट, अगस्त २०१०, अग्निशस्त्र, अंतरराष्ट्रीय तापनाभिकीय प्रायोगिक संयंत्र, अंतरराष्ट्रीय व्यापार मशीन निगम, अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय, अंतरिक्ष अन्वेषण, अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस, अंगुलि छाप, अंक विद्या, अइमग, अइसिन गियोरो, अइज़ोल, अक्टूबर २०१०, अक्टूबर २०१५ हिन्दू कुश भूकंप, अक्षय ऊर्जा, अक्साई चिन, अक्साई चिन झील, उडोमसाए प्रान्त, उत्तर प्रदेश, उत्तर प्रदेश का इतिहास, उत्तरी युआन राजवंश, उत्तरी रेशम मार्ग, उत्तरी और दक्षिणी राजवंश, उत्कीर्णन, उदयभानु ध्वज, उपग्रह, उबर कप, उमाकान्त केशव आपटे, उरुमची, उरुमची विस्फोट – मई २०१४, उर्वरक, उलान बतोर, उशिकु दायबुत्सु बुद्ध प्रतिमा, उष्णकटिबंधीय चक्रवात, उसैन बोल्ट, उज़बेक लोग, उइगुर भाषा, १ नवंबर, १ अक्टूबर, १० दिसम्बर, ११ दिसम्बर, ११ फ़रवरी, ११ जनवरी, १२ दिसम्बर, १२ अगस्त, १२७१, १३ दिसम्बर, १३ जून, १५ सितम्बर, १५ जनवरी, १५ जुलाई, १६ जून, १७ जुलाई, १७ जून, १७ अगस्त, १८ दिसम्बर, १९११ की चीन की क्रांति, १९१५, १९२१, १९२२, १९२३, १९२४, १९२९, १९३७, १९४४, १९५९ का तिब्बती विद्रोह, १९७१ का भारत-पाक युद्ध, १९७८, १९९९, २००१, २००५ कश्मीर भूकम्प, २००६ एशियाई खेल, २००८, २००८ में पद्म भूषण धारक, २००८ ग्रीष्मकालीन ओलम्पिक में भारत, २००८ के मुंबई हमले, २००९, २०१०, २०१२, २०१३, २१ नवम्बर, २१ अगस्त, २२ जुलाई २००९ का सूर्यग्रहण, २२ अगस्त, २५ दिसम्बर, २९ सितम्बर, ३जी, ४ जुलाई, ५ दिसम्बर, ६ जनवरी, ८ दिसम्बर, ९ दिसम्बर, Y पीढ़ी (जनरेशन Y), 1980 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक, 1984 शीतकालीन ओलंपिक, 2000 के दशक के उत्तरार्द्ध की आर्थिक मंदी, 2007 चीनी एंटी-सेटेलाइट मिसाइल परीक्षण, 2007 के अरबपतियों की सूची, 2008 ग्रीष्मकालीन पैरालम्पिक में भारत, 2008 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में फ्रांस, 2008 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में ग्रेट ब्रिटेन, 2012 ब्रिक्स शिखर सम्मेलन, 2014 ब्रिक्स शिखर सम्मेलन, 2014 शीतकालीन ओलंपिक में चीन, 2014 शीतकालीन ओलंपिक में ताइपे, 2016 ब्रिक्स शिखर सम्मेलन, 2017 ब्रिक्स शिखर सम्मेलन, 2018 राष्ट्रमण्डल खेल, 2022 शीतकालीन पैरालम्पिक, 2022 शीतकालीन ओलम्पिक सूचकांक विस्तार (1374 अधिक) »

चन्द्रमा

कोई विवरण नहीं।

नई!!: चीन और चन्द्रमा · और देखें »

चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य

चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य (380-413) गुप्त राजवंश का राजा। चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य की मुद्रा चन्द्रगुप्त द्वितीय महान जिनको संस्कृत में विक्रमादित्य या चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य के नाम से जाना जाता है; गुप्त वंश के एक महान शक्तिशाली सम्राट थे। उनका राज्य 380-412 ई तक चला जिसमें गुप्त राजवंश ने अपना शिखर प्राप्त किया। गुप्त साम्राज्य का वह समय भारत का स्वर्णिम युग भी कहा जाता है। चन्द्रगुप्त द्वितीय महान अपने पूर्व राजा समुद्रगुप्त महान के पुत्र थे। उसने आक्रामक विस्तार की नीति एवं लाभदयक पारिग्रहण नीति का अनुसार करके सफलता प्राप्त की। .

नई!!: चीन और चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य · और देखें »

चम्पा

दक्षिण पूर्व एशिया, 1100 ईसवी, '''चम्पा''' हरे रंग में चम्पा दक्षिण पूर्व एशिया (पूर्वी हिन्दचीन (192-1832) में) स्थित एक प्राचीन हिन्दू राज्य था। यहाँ भारतीय संस्कृति का प्रचार प्रसार थाऔर इसके राजाओं के संस्कृत नाम थे। चम्पा के लोग और राजा शैव थे। अन्नम प्रांत के मध्य और दक्षिणी भाग में प्राचीन काल में जिस भारतीय राज्य की स्थापना हुई उसका नाम 'चंपा' था। नृजातीय तथा भाषायी दृष्टि से चम्पा के लोग चाम (मलय पॉलीनेशियन) थे। वर्तमान समय में चाम लोग वियतनाम और कम्बोडिया के सबसे बड़े अल्पसंख्यक हैं। इसके ५ प्रमुख विभाग थेः.

नई!!: चीन और चम्पा · और देखें »

चम्पा का इतिहास

भारतीयों के आगमन से पूर्व चम्पा के निवासी दो उपशाखाओं में विभक्त थे। जो भारतीयों के संपर्क में सभ्य हो गए वे कालांतर में चंपा के नाम पर ही चम के नाम से विख्यात हुए और जो बर्बर थे वे 'चमम्लेच्छ' और 'किरात' आदि कहलाए। चंपा का राजनीतिक प्रभुत्व कभी भी उसकी सीमाओं के बाहर नहीं फैला। यद्यपि उसके इतिहास में भी राजनीतिक दृष्टि से गौरव की कुछ घटनाएँ हैं, तथापि वह चीन के आधिपत्य में था और प्राय: उसके नरेश अपने अधिकार की रक्षा और स्वीकृति के लिये चीन के सम्राट् के पास दूतमंडल भेजते थे। समय समय पर उसे चीन, कंबुज और उत्तर में स्थित अन्नम लोगां के आक्रमणों से अपनी रक्षा का प्रयत्न करना पड़ता था। प्रारंभ में इस प्रदेश पर चीन का प्रभुत्व था किंतु दूसरी शताब्दी में भारतीयों के आगमन से चीन का अधिकार क्षीण होने लगा। १९२ ई. में किउ लिएन ने एक स्वतंत्र राज्य स्थापित किया। यही श्रीमार था जो चंपा का प्रथम ऐतिहासिक नरेश था। इसकी राजधानी चंपानगरी, चंपापुर अथवा चंपा कुअंग न-म के दक्षिण में वर्तमान किओ है। चंपा के प्रारंभिक नरेशों की नीति चीन के आधिपत्य में स्थित प्रदेशों को छीनकर उत्तर में सीमा का विस्तार करता था। ३३६ ई. में सेनापति फ़न वेन ने सिंहासन पर अधिकार कर लिया। इसी के समय में चंपा के राज्य का विस्तार इसकी सुदूर उत्तरी सीमा तक हुआ था। धर्म महाराज श्री भद्रवर्मन् जिसका नाम चीनी इतिहास में फन-हु-ता (३८०-४१३ ई.) मिलता है, चंपा के प्रसिद्ध सम्राटों में से है जिसने अपनी विजयों ओर सांस्कृतिक कार्यों से चंपा का गौरव बढ़ाया। किंतु उसके पुत्र गंगाराज ने सिंहासन का त्याग कर अपने जीवन के अंतिम दिन भारत में आकर गंगा के तट पर व्यतीत किए। फन यंग मै ने ४२० ई. में अव्यवस्था का अंत कर सिंहासन पर अधिकार कर लिया। यंग मै द्वितीय के राजकाल में चीन के साथ दीर्घकालीन युद्ध के अंत में चीनियों द्वारा चंपापुर का विध्वंस हुआ। इस वंश का अंतिम शसक विजयवर्मन् था जिसके बाद (५२९ ई.) गंगाराज का एक वंशज श्री रुद्रवम्रन् शासक बना। ६०५ ई. में चीनियों का फिर से विध्वंसकारी आक्रमण हुआ। अव्यवस्था का लाभ उठाकर राज्य की स्त्रीशाखा के लोगों ने ६४५ ई. में प्रभासधर्म और सभी पुरुषों की हत्या कर अंत में ६५७ ई. में ईशानवर्मन् को सिंहासन दिलाया जो कंबुजनरेश ईशानवर्मन् का दोहित्र था। ७५७ ई. में रुद्रवर्मन् द्वितीय की मृत्यु के साथ इस वंश के अधिकार का अंत हुआ। पृथिवींद्रवर्मन् के द्वारा स्थापित राजवंश की राजधानी चंपा ही बनी रही। इसकी शक्ति दक्षिण में केंद्रित थी और यह पांडुरंग अंश के नाम से प्रख्यात था। ८५४ ई. के बाद विक्रांतवर्मन् तृतीय के निस्संतान मरने पर सिंहासन भृगु अंश के अधिकार में चला गया जिसकी स्थापना इंद्रवर्मन् द्वितीय अथवा श्री जय इंद्रवर्मा महाराजाधिराज ने की थी। इस अंश के समय में वास्तविक राजधानी इंद्रपुर ही था। भद्रवर्मन् तृतीय के समय में विदेशों में भी चंपा का शक्तिशाली और महत्वपूर्ण राज्य के रूप में गौरव बढ़ा। उसके विद्वान् पुत्र इंद्रवर्मन् के राज्काल में ९४४ और ९४७ ई. के बीच कंबुज नरेश ने चंपा पर आक्रमण किया। ९७२ ई. में इंद्रवर्मन् की मृत्यु के बाद लगभग सौ वर्षो तक चंपा का इतिहास तिमिराच्छन्न है। इस काल में अन्नम ने, जिसने १०वीं शताब्दी में अपने को चीन के निंयत्रण से स्वतंत्र कर लिया था, चंपा पर कई आक्रमण किए जिनके कारण चंपा का आंतरिक शासन छिन्न भिन्न हो गया। ९८९ ई. में एक जननायक विजय श्री हरिवर्मन ने अव्यवस्था दूर कर विजय में अपना राज्य स्थापित किया था। उसके परवर्ती विजयश्री नाम के नरेश ने विजय को ही अपनी राजधानी बनाई जिसे अंत तक चंपा की राजधानी बने रहने का गौरव प्राप्त रहा। जयसिंहवर्मन् द्वितीय के राज्य में १०४४ ई. में द्वितीय अन्नम आक्रमण हुआ। किंतु छ: वर्षों के भीतर ही जय परमेश्वरवर्मदेव ईश्वरमूर्ति ने नए राजवंश की स्थापना कर ली। उसने संकट का साहसर्पूक सामना किया। पांडुरंग प्रांत में विद्रोह का दमन किया, कंबुज की सेना को पराजित किया, शांति और व्यवस्था स्थापित की और अव्यवस्था के काल में जिन धार्मिक संस्थाओं को क्षति पहुँची थी उनके पुनर्निर्माण की भी व्यवस्था की। किंतु रुद्रवर्मन् चतुर्थ को १०६९ ई. में अन्नम नरेश से पराजित होकर तथा चंपा के तीन उत्तरी जिलों को उसे देकर अपनी स्वतंत्रता लेनी पड़ी। चम इस पराजय का कभी भूल न सके और उनकी विजय के लिये कई बार प्रयत्न किया। अव्यवस्था का लाभ उठाकर हरिवर्मन् चतुर्थ ने अपना राज्य स्थापित किया। उसने आंतरिक शत्रुओं को पराजित कर दक्षिण में पांडुरंग को छोड़कर संपूर्ण चंपा पर अपना अधिकार कर लिया। उसने बाह्य शत्रुओं से भी देश की रक्षा की और अव्यवस्था के कारण हुई क्षति और विध्वंस की पूर्ति का भी सफल प्रयत्न किया। परम बोधिसत्व ने १०८५ ई. में पांडुरंग पर अधिकार कर चंपा की एकता फिर से स्थापित की। जय इंद्रवर्मन् पंचम के समय से चंपा के नरेशों ने अन्नम को नियमित रूप से कर देकर उनसे मित्रता बनाए रखी। जय इंद्रवर्मन् षष्ठ के समय में कंबुजनरेश सूर्यवर्मन् द्वितीय ने १०४५ ई. में चंपा पर आक्रमण कर विजय पर अधिकार कर लिया। दक्षिण में परम बोधिसत्व के वंशज रुद्रवर्मन् परमब्रह्मलोक ने अपने का चंपा का शासक घोषित किया। उसके पुत्र हरिवर्मन् षष्ठ ने कंबुजों और बर्बर किरातां को पराजित किया ओर आंतरिक कलहों तथा विद्रोहों को शांत किया। ११६२ ई. में, उसकी मृत्यु के एक वर्ष के बाद, ग्रामपुर विजय के निवासी श्री जयइंद्रवर्मन् सप्तम ने सिंहासन पर अधिकार कर लिया। उसने १०७७ ई. में कंबुज पर आक्रमण कर उसकी राजधानी को नष्ट किया। जयइंद्रवर्मन् अष्टम के राज्य में श्री सूर्यदेव ने, जो चंपा का ही निवसी था लेकिन जिसने कंबुज में शरण ली, कंबुज की ओर से ११९० ई. में चंपा की विजय की। चंपा विभाजित हुई, दक्षिणी भाग श्री सूर्यवर्मदेव को और उत्तरी कंबुजनरेश के साले जयसूर्यवर्मदेव को प्राप्त हुआ। किंतु शीघ्र ही एक स्थानीय विद्रोह के फलस्वरूप उत्तरी भाग पर से कंबुज का अधिकार समाप्त हो गया। श्री सूर्यवर्मदेव ने उत्तरी भाग को भी विजित कर अपने को कंबुजनरेश से स्वतंत्र घोषित किया किंतु उसके पितृव्य ने ही कंबुजनरेश की ओर से उसे पराजित किया। इस अवसर पर जयहरिवर्मनृ सप्तम के पुत्र जयपरमेश्वर वर्मदेव ने चंपा के सिंहासन को प्राप्त कर लिया। कंबुजों ने संघर्ष की निरर्थकता का समझकर चंपा छोड़ दी और १२२२ ई. में जयपरमेश्वरवर्मन् से संधि स्थापित की। श्री जयसिंहवर्मन्, के राज्यकाल में, जिसने सिंहासन प्राप्त करने के बाद अपना नाम इंद्रवर्मन् रखा, मंगोल विजेता कुब्ले खाँ ने १२८२ ई. में चंपा पर आक्रमण किया किंतु तीन वर्ष तक वीरतापूर्वक मंगोलों का सामना करके चंपा के राज्य से उसे संधि से संतुष्ट होने के लिय बाध्य किया। जयसिंहवर्मन् षष्ठ ने अन्नम की एक राजकुमारी से विवाह करन के लिये अपने राज्य के दो उत्तरी प्रांत अन्नम के नरेश का दे दिए। १३१२ ई. में अन्नम की सेना ने चंपा की राजधान पर अधिकार कर लिया। उत्तराधिकारी के अभाव में रुद्रवर्मन् परम ब्रह्मलोक द्वारा स्थापित राजवंश का अंत हुआ। अन्नम के नरेश ने १३१८ ई. में अपने एक सेनापति अन्नन को चंपा का राज्यपाल नियुक्त किया। अन्नन ने अन्नम की शक्तिहीनता देखकर अपनी स्वतंत्रता घोषित कर दी। चे बोंग त्गा ने कई बार अन्नम पर आक्रमण किया और अन्नम का चंपा का भय रहने लगा। किंतु १३९० ई. में चे बोंगां की मृत्यु के बाद उसके सेनापति ने श्री जयसिंहवर्मदेव पंचम के नाम से वृषु राज़वंश की स्थापना की। १४०२ ई. में अन्नम नरेश ने चंपा के उत्तरी प्रांत अमरावती को अपने राज्य में मिला लिया। चंपा के शासकों ने विजित प्रदेशों को फिर से अपने राज्य में मिलाने के कई प्रयत्न किए, किंतु उन्हें कोई स्थायी सफलता नहीं मिली। १४७१ ई. में अन्नम लोगों ने चंपा राज्य के मध्य स्थित विजय नामक प्रांत को भी जीत लिया। १६वीं शताब्दी के मध्य में अन्नम लोगों ने फरंग नदी तक का चंपा राज्य का प्रदेश अपने अधिकार में कर लिया। चंपा एक छोटा राज्य मात्र रह गया और उसकी राजधानी बल चनर बनी। १८वीं शताब्दी में अन्नम लोगों ने फरंग को भी जीत लिया। १८२२ ई. में अन्नम लागों के अत्याचार से पीड़ित होकर चंपा के अंतिम नरेश पो चोंग कंबुज में जाकर बसे। राजकुमारी पो बिअ राजधानी में ही राजकीय कोष की रक्षा के लिय रहीं। उनकी मृत्यु के साथ बृहत्तर भारत के एक अति गौरवपूर्ण इतिहास के एक महत्वपूर्ण अध्याय की समाप्ति होती है। चंपा के इतिहास का विशेष महत्व भारतीय संस्कृति के प्रसार की गहराई में है। नागरिक शासन के प्रमुख दो मुख्य मंत्री होते थे। सेनापति और रक्षकों के प्रधान प्रमुख सैनिक अधिकारी थे। धार्मिक विभाग में प्रमुख पुरोहित, ब्राह्मण, ज्योतिषी, पंडित और उत्सवों के प्रबंधक प्रधान थे। राज्य में तीन प्रांत थे - अमरावती, विजय और पांडुरंग। प्रांत जिलों और ग्रामों में विभक्त थे। भूमिकर, जो उपज का षष्ठांश होता था, राज्य की आय का मुख्य साधन था। राजा मंदिरों की व्यवस्था के लिये कभी कभी भूमिकर का दान दे देता था। न्यायव्यवस्था भारतीय सिद्धांतों पर आधारित थी। सेना में पैदल, अश्वारोही और हाथी होते थे। जलसेना की ओर भी विशेष ध्यान दिया जाता था। चीनी सेना द्वारा समय समय पर चंपा की लूट की राशि और चंपा द्वारा दूतों के हाथ भेजी गई भेंट के विवरण से उसकी समृद्धि का कुछ आभास मिलता है। श्रेणी:वियतनाम का इतिहास.

नई!!: चीन और चम्पा का इतिहास · और देखें »

ऊष्मायित्र (अंडा)

thumb अण्ड ऊष्मायित्र या डिंबौषक (Incubator) एक प्रकार का उपकरण है जिसके द्वारा कृत्रिम विधि से अंडों को सेआ जाता है और उनसे बच्चे उत्पन्न कराए जाते हैं। .

नई!!: चीन और ऊष्मायित्र (अंडा) · और देखें »

चाँदनी चौक टू चाइना

कोई विवरण नहीं।

नई!!: चीन और चाँदनी चौक टू चाइना · और देखें »

चानयू

चानयू (अंग्रेज़ी: Chanyu, चीनी भाषा: 單于, शियोंगनु भाषा: त्सनक) मध्य एशिया और चीन में शासन करने वाली बहुत-सी ख़ानाबदोश जातियों के साम्राज्यों के सर्वोच्च शासक की उपाधि हुआ करती थी। इस उपाधि का इस्तेमाल चीन के झोऊ राजवंश काल (१०४५ से २५६ ईसापूर्व) से आरम्भ होकर लगभग ८०० साल तक चला। चिन राजवंश और हान राजवंश के समकालीन शियोंगनु लोगों के लुआनदी राजपरिवार ने इसका बहुत प्रयोग किया और उस जाति में इसका प्रयोग करने वाला सर्वप्रथम शासक तूमन था। चानयू का प्रयोग समय के साथ-साथ कम अर्थ रखने लगा और छोटे-मोटे सरदार भी इसका प्रयोग करने लगे।, Sanping Chen, University of Pennsylvania Press, 2012, ISBN 978-0-8122-4370-3,...

नई!!: चीन और चानयू · और देखें »

चामी भाषाएँ

चामी भाषाएँ (Chamic languages) या आचेह-चामी भाषाएँ (Aceh–Chamic) दक्षिणपूर्वी एशिया के आचेह (जो इण्डोनेशिया के सुमात्रा द्वीप से सुदूर पश्चिम में स्थित एक राज्य है), कम्बोडिया, वियतनाम और हाइनान (चीन के दक्षिणपूर्व में स्थित एक द्वीप) में बोली जाने वाली कुछ भाषाओं का एक भाषा-परिवार है। इसका नाम चाम भाषा पर पड़ा है जो इस परिवार की सदस्य है। चामी भाषाएँ ऑस्ट्रोनीशियाई भाषा-परिवार की मलय-पोलेनीशियाई शाखा की एक उपशाखा है। .

नई!!: चीन और चामी भाषाएँ · और देखें »

चाय

चाय एक लोकप्रिय पेय है। यह चाय के पौधों की पत्तियों से बनता है।भारतीय.

नई!!: चीन और चाय · और देखें »

चायख़ाना

चीन के नानजिंग शहर में एक चायख़ाना चायख़ाना ऐसे स्थान को बोलते हैं जो ग्राहकों या अतिथियों को चाय पिलाने के कार्य पर केन्द्रित हो। भारतीय उपमहाद्वीप, ईरान, चीन, जापान और बहुत से अन्य समाजों में चायख़ाने लोक-संस्कृति और सामाजिक मिलन का पारम्परिक केंद्र भी हैं या ऐतिहासिक रूप से रह चुके हैं। अक्सर चायख़ानो में चाय के अलावा हलके-फुल्के नाश्ते भी परोसे जाते हैं। कुछ जगहों पर चायख़ानो में शतरंज, ताश, धूम्रपान (जैसे कि हुक्का) और अन्य हलकी सामूहिक क्रियाओं का भी बंदोबस्त किया जाता है।, C. J. Richards, Richards, 1976, ISBN 978-0-7223-0890-5,...

नई!!: चीन और चायख़ाना · और देखें »

चार्ल्स के काव

प्रोफेसर चार्ल्स कुएन काव (जन्म: 4 नवम्बर 1933) में दूरसंचार के क्षेत्र में फाइबर ऑप्टिक्स के प्रयोग के प्रणेता हैं। काव, को व्यापक रूप से, दूरसंचार के क्षेत्र मे प्रकाशीय तंतु के प्रयोग" का पिता माना जाता है, उन्हें 2009 का भौतिकी का नोबेल पुरस्कार उनके असाधारण कार्य 'प्रकाश का प्रकाशीय तंतु के द्वारा प्रकाशीय संचार हेतु संचरण' के लिए संयुक्त रूप से प्रदान किया गया है। .

नई!!: चीन और चार्ल्स के काव · और देखें »

चांगपा

चांगपा (Changpa) या चाम्पा तिब्बती मूल का एक बंजारा मानव समुदाय है जो भारत के जम्मू और कश्मीर राज्य के लद्दाख़ क्षेत्र के चांगथंग इलाके में बसते हैं। इनकी कुछ संख्या तिब्बत में आने वाले चांगथंग के भाग में भी रहती है जिनमें से कुछ को चीन की सरकार ने चांगथंग प्राकृतिक संरक्षित क्षेत्र की स्थापना पर ज़बरदस्ती अन्य इलाको में बसाया था। तिब्बती व लद्दाख़ी भाषाओं में "चांगपा" का अर्थ "चांग(थंग) के लोग" है। अनुमान है कि सन् १९८९ में चांगथंग में लगभग ५ लाख चांगपा रह रहे थे। .

नई!!: चीन और चांगपा · और देखें »

चांगबाई पर्वत

तिआन ची ज्वालामुखीय झील चांगबाई पर्वत शृंखला (Changbai Mountains) या जांगबाएक पर्वत शृंखला (Jangbaek Mountains) मंचूरिया क्षेत्र में चीन और उत्तर कोरिया की सरहद पर स्थित एक पर्वत शृंखला है। यह चीन को रूस के प्रिमोर्स्की क्राय प्रान्त से भी अलग करते हैं। इन्हें रूस में वोस्तोचनो-मान्चझ़ुर्स्कीए शृंखला (Vostochno-Manchzhurskie gory) कहते हैं। इस शृंखला का सबसे ऊंचा पहाड़ २,७४५ मीटर लम्बा 'बएकदू पर्वत' (Baekdu Mountain) नामक ज्वालामुखी है, जिसकी ढलानों से सोंगहुआ नदी, यालू नदी और तूमन नदी शुरू होती हैं। इन पहाड़ों में 'तिआन ची' (Tian Chi, अर्थ: स्वर्ग झील) नामक एक प्रसिद्ध बड़ी ज्वालामुखीय झील भी स्थित है।, David Leffman, Martin Zatko, Penguin, 2011, ISBN 978-1-4053-8908-2,...

नई!!: चीन और चांगबाई पर्वत · और देखें »

चांगशा

चांगशा शहर के कुछ नज़ारे चांगशा (长沙, Changsha) दक्षिणी-मध्य चीन के हूनान प्रांत की राजधानी है। यह शिआंग नदी पर स्थित है जो यांग्त्से नदी की एक शाखा है। सन् २०१० की जनगणना में चांगशा की आबादी ७०,४४,११८ थी। यह शहर चिन राजवंश (२२१-२०७ ईसापूर्व) के ज़माने से महत्वपूर्ण है और एक मुख्य व्यापारिक केंद्र हुआ करता था। सन् १६६४ ईसवी में चिंग राजवंश के काल में यह हूनान प्रान्त की राजधानी बना और चावल की एक मुख्य मंडी यहाँ स्थित थी। द्वितीय विश्वयुद्ध में जापानी फ़ौजों के इसपर कुछ देर के लिए क़ब्ज़ा कर लिया था और शहर बहुत तहस-नहस हुआ। वर्तमान काल में यह उद्योग और व्यापार का बड़ा केंद्र है और यहाँ एक मुख्य बंदरगाह भी है। जनवादी गणतंत्र चीन के संस्थापक माओ ज़ेदोंग का साम्यवाद (कोम्युनिज़म) में परिवर्तन यहीं हुआ था।, Shelley Jiang, Shelley Cheung, Macmillan, 2004, ISBN 978-0-312-32005-8 .

नई!!: चीन और चांगशा · और देखें »

चांगआन

दक्षिण-पूर्वी चांग'आन में स्थित ६५२ ईसवी में बना महान जंगली बत्तख़ पगोडा चांग'आन (चीनी: 長安, अंग्रेज़ी: Chang'an) प्राचीन चीन में एक शहर था जो दस से भी अधिक राजवंशों कि राजधानी रहा। आधुनिक काल में इसका नाम शियान (西安, Xi'an) है और यह जनवादी गणतंत्र चीन के शान्शी प्रान्त में स्थित है। शास्त्रीय चीनी भाषा में चांग'आन का अर्थ 'अनंत शान्ति' है। सुई राजवंश के काल में इसका नाम दाशिंग था। मिंग राजवंश के दौरान इसका नाम 'पश्चिमी शान्ति' (शि'आन) रख दिया गया। इस नगर के क्षेत्र में नवपाषाण युग (नियोलिथिक) से लोग बसे हुए हैं। आठवी सदी में चांगआन पृथ्वी का सब से बड़ा शहर था और इसमें १० लाख से अधिक लोग रहते थे।, Steven Maddocks, Dale Anderson, Jane Bingham, Peter Chrisp, Christopher Gavett, Marshall Cavendish Corporation, 2006, ISBN 978-0-7614-7613-9,...

नई!!: चीन और चांगआन · और देखें »

चाइना ईस्टर्न एयरलाइंस

चाइना ईस्टर्न एयरलाइन्स कारपोरेशन लिमिटेड( (सरलीकृत चीनी: 中国东方航空公司; परंपरागत चीनी: 中國東方航空公司, बोलचाल की भाषा के रूप में 东, SSE: 600115 SEHK: 0670 NYSE: CEA) चाइना की एयरलाइन है, जिसका मुख्यालय चाइना ईस्टर्न एयरलाइन्स बिल्डिंग ऑफ़ शंघाई होन्गकीओ अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा चंगनिंग जिला, शंघाई, (चाइना) में स्थित है। यह चाइना की एक महत्वपूर्ण है जो अंतरराष्ट्रीय,घरेलु एवं प्रादेशिक रूट पर चलती है। यात्री परिवहन के आधार पर चाइना ईस्टर्न एयरलाइन्स, चाइना की दूसरी सबसे बड़ी एयरलाइन्स है। चाइना ईस्टर्न एवं इसकी अनुषंगी शंघाई एयरलाइन्स 21 जून 2011 को स्काई टीम का १४व सदस्य बने। 2014 में चाइना ईस्टर्न एयरलाइन्स ने घरेलु एवं अन्तराष्टिय उड़ानों के द्वारा 83.08 मिलियन यात्रियों का परिवहन किया। .

नई!!: चीन और चाइना ईस्टर्न एयरलाइंस · और देखें »

चाइनासैट2सी

चीन ने नए संचार उपग्रह चाइनासैट2सी का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया है। .

नई!!: चीन और चाइनासैट2सी · और देखें »

चिड़ियाघर

कैलिफोर्निया के सैन डिएगो चिड़ियाघर का प्रवेश द्वार, मई 2007. चिड़ियाघर या प्राणिउपवन (Zoological garden) वह संस्थान है जहाँ जीवित पशु पक्षियों को बहुत बड़ी संख्या में संग्रहीत कर रखा जाता है। लोग इन संग्रहित पशु पक्षियों को सुविधा और सुरक्षापूर्वक देख सकें इसकी भी व्यवस्था की जाती है। यहाँ उनके प्रजनन और चिकित्सा आदि की भी व्यवस्था होती है। दुनिया भर में आम जनता के लिए खोले गए प्रमुख पशु संग्रहालयों की संख्या अब 1,000 से भी अधिक है और उनमें से लगभग 80 प्रतिशत शहरों में हैं। जीवित पशु पक्षियों के संग्रह को रखने की परिपाटी बहुत प्राचीन है। ऐसे उपवनों के होने का सबसे पुराना उल्लेख चीन में ईसा के 1200 वर्ष पूर्व में मिलता है। चीन के चाऊ वंश के प्रथम शासक के पास उस समय ऐसा एक पशु पक्षियों का संग्रहालय था। ईसा के 2000 वर्ष पूर्व के मिस्रवासियों की कब्रों के आसपास पशुओं की हड्डियाँ पाई गई हैं, जिससे पता लगता है कि वे लोग आमोद प्रमोद के लिए अपने आसपास पशुओं को रखा करते थे। पीछे रोमन लोग भी पशुओं को पकड़कर अपने पास रखते थे। प्राचीन रोमनों और यूनानियों के पास ऐसे संग्रह थे जिनमें सिंह, बाघ, चीता, तेंदुए आदि रहते थे। ऐसा पता लगता है कि ईसा के 29 वर्ष पूर्व ऑगस्टस ऑक्टेवियस (Augustus Octavious) के पास 410 बाघ, 260 चीते और 600 अफ्रीकी जंतुओं का संग्रह था, जिसमें बाघ राइनोसिरस, हिपोपॉटैमस (दरियाई घोड़ा), भालू, हाथी, मकर, साँप, सील (seal), ईगल (उकाब) इत्यादि थे। पीछे जंतुओं के संग्रह की दिशा में उत्तरोत्तर वृद्धि हेती रही है और आज संसार के प्रत्येक देश और प्रत्येक बड़े-बड़े नगर में प्राणिउपवन विद्यमान हैं। .

नई!!: चीन और चिड़ियाघर · और देखें »

चित्रकला

राजा रवि वर्मा कृत 'संगीकार दीर्घा' (गैलेक्सी ऑफ म्यूजिसियन्स) चित्रकला एक द्विविमीय (two-dimensional) कला है। भारत में चित्रकला का एक प्राचीन स्रोत विष्णुधर्मोत्तर पुराण है। .

नई!!: चीन और चित्रकला · और देखें »

चिन राजवंश

२१० ईसापूर्व में चिन साम्राज्य का नक़्शा चिन शि हुआंग (秦始皇) जो झगड़ते राज्यों के काल में चिन राज्य (秦国) के शासक और फिर पूरे चीन के पहले चिन राजवंश के सम्राट बने चिन राजवंश (चीनी:秦朝, चिन चाओ; अंग्रेज़ी: Qin Dynasty) प्राचीन चीन का एक राजवंश था जिसने चीन में २२१ ईसापूर्व से २०७ ईसापूर्व तक राज किया। चिन वंश शान्शी प्रांत से उभर कर निकला और इसका नाम भी उसी प्रांत का परिवर्तित रूप है। जब चिन ने चीन पर क़ब्ज़ा करना शुरू किया तब चीन में झोऊ राजवंश का केवल नाम मात्र का नियंत्रण था और झगड़ते राज्यों का काल चल रहा था। चिन राजवंश उन्ही झगड़ते राज्यों में से एक, चिन राज्य (秦国, चिन गुओ), से आया था। सबसे पहले चिन ने कमज़ोर झोऊ वंश को समाप्त किया और फिर बाक़ी के छह राज्यों को नष्ट कर के चीन का एकीकरण किया।, William Scott Morton, Charlton M. Lewis, McGraw-Hill Professional, 2005, ISBN 978-0-07-141279-7,...

नई!!: चीन और चिन राजवंश · और देखें »

चिन राज्य (प्राचीन चीन)

चिन (Qin) राज्य झगड़ते राज्यों के काल के सात मुख्य राज्यों में से एक था और उन सब से पश्चिम में स्थित था चिन राज्य (चीनी भाषा: 秦国, चिन गुओ; अंग्रेज़ी: Qin) प्राचीन चीन के झोऊ राजवंश के अंतिम भाग में बसंत और शरद काल और झगड़ते राज्यों के काल के दौरान एक रियासत थी। यह ७७८ ईसापूर्व से २०७ ईसापूर्व तक चला। उस ज़माने में सात राज्य आपस में झगड़ रहे थे जिनमें से चिन राज्य सब से शक्तिशाली राज्यों में से एक बन कर उभरा। २२१ ईसापूर्व में चिन राज्य ने पूरे चीन को अपने अधीन कर लिया और चीन में चिन राजवंश का काल आरम्भ हुआ।, Zhengyuan Fu, Cambridge University Press, 1993, ISBN 978-0-521-44228-2 .

नई!!: चीन और चिन राज्य (प्राचीन चीन) · और देखें »

चिपोरसुन

चिपोरसुन (Chiporsun) या चपुरसन (Chapursan) पाक-अधिकृत कश्मीर के के गिलगित-बलतिस्तान क्षेत्र के हुन्ज़ा-नगर ज़िले की गोजाल तहसील में स्थित एक वादी है। इस घाटी में आठ गाँव हैं, जिनमें अधिकतर वाख़ी भाषा बोलने वाले इस्माइली शिया रहते हैं। यह इलाक़ा इर्शाद दर्रे द्वारा अफ़ग़ानिस्तान के वाख़ान गलियारे से जुड़ता है और चीन की सरहद के भी काफ़ी समीप है।, H. W. Tilman, pp.

नई!!: चीन और चिपोरसुन · और देखें »

चिलास

चिलास तक जाने के लिए पुल चिलास या चलास (उर्दू: چلاس), पाक-अधिकृत कश्मीर के गिलगित-बलतिस्तान क्षेत्र के दिआमेर ज़िले में स्थित एक छोटा-सा क़्स्बा है जो उस ज़िले की राजधानी भी है। यह काराकोरम राजमार्ग के द्वारा रेशम मार्ग से जुड़ता है साथ ही यह राजमार्ग इसे दक्षिण मे इस्लामाबाद से जोड़ता है। काराकोरम राजमार्ग पर चिलास से इस्लामाबाद के रास्ते में दासु, मनसेहरा, ऐबटाबाद और हरिपुर नगर आते हैं जबकि, इसके उत्तर में यह गिलगित और सोस्त के रास्ते चीनी शहरों कशगार और ताशकुरगन से जुड़ता है। .

नई!!: चीन और चिलास · और देखें »

चिल्मिआ

चिल्मिआ (Blood pheasant) (Ithaginis cruentus) फ़ीज़ॅन्ट कुल का पक्षी है जो अपनी प्रजाति का इकलौता पक्षी है। यह भूटान, चीन, भारत, म्यानमार तथा नेपाल में मूलत: पाया जाता है। .

नई!!: चीन और चिल्मिआ · और देखें »

चिहुआहुआ (कुत्ता)

कोई विवरण नहीं।

नई!!: चीन और चिहुआहुआ (कुत्ता) · और देखें »

चिंग राजवंश

अपने चरम पर चिंग राजवंश का साम्राज्य कांगशी सम्राट, जो चिंग राजवंश का चौथा सम्राट था चिंग राजवंश (चीनी: 大清帝國, दा चिंग दिगुओ, अर्थ: महान चिंग; अंग्रेज़ी: Qing dynasty, चिंग डायनॅस्टी) चीन का आख़री राजवंश था, जिसनें चीन पर सन् १६४४ से १९१२ तक राज किया। चिंग वंश के राजा वास्तव में चीनी नस्ल के नहीं थे, बल्कि उनसे बिलकुल भिन्न मान्छु जाति के थे जिन्होंने इस से पहले आये मिंग राजवंश को सत्ता से निकालकर चीन के सिंहासन पर क़ब्ज़ा कर लिया। चिंग चीन का आख़री राजवंश था और इसके बाद चीन गणतांत्रिक प्रणाली की ओर चला गया।, William T. Rowe, Harvard University Press, 2009, ISBN 978-0-674-03612-3 .

नई!!: चीन और चिंग राजवंश · और देखें »

चिंगहई झील

अंतरिक्ष से कोको नूर (उर्फ़ चिंगहई झील) झील पर एक परिंदों वाला द्वीप चिंगहई झील (चीनी भाषा: 青海湖, Qinghai), कोको नूर या कूकूनोर (मंगोल: Кукунор, Koko Nur) चीन के चिंगहई प्रान्त में स्थित एक खारे पानी की झील है जो चीन की सबसे बड़ी झील भी है। मंगोल भाषा में 'कोको नूर' का मतलब 'नीली झील' होता है और चीनी भाषा में 'चिंग हई' का अर्थ भी यही है, हालांकि इस झील का मूल नाम मंगोल-भाषा वाला ही था। चिंगहई झील चिंगहई की राजधानी शिनिंग से १०० किमी पश्चिम में तिब्बत के पठार पर ३,२०५ मीटर (१०,५१५ फ़ुट) की ऊँचाई पर एक द्रोणी में स्थित है। तिब्बती लोग इस क्षेत्र को आमदो (ཨ༌མདོ, Amdo) बुलाते हैं।, Ying Liu, China Intercontinental Press, 2007, ISBN 978-7-5085-1104-7,...

नई!!: चीन और चिंगहई झील · और देखें »

चिआन पर्वत

चिआनशान का एक नज़ारा चिआन पर्वत शृंखला (Qian Mountains) या चिआन शान (千山山脉, Qianshan) मंचूरिया क्षेत्र में चीन और उत्तर कोरिया की सरहद पर स्थित एक पर्वत शृंखला है जो चांगबाई पर्वत शृंखला की एक शाखा है। यह चीन के जीलिन प्रांत से शुरू होकर दक्षिण-पूर्व में लियाओनिंग प्रांत और लियाओदोंग प्रायद्वीप तक जाते हैं। यहाँ चीन की सरकार ने चिआनशान राष्ट्रीय उद्यान स्थापित किया है। 'चिआन' का अर्थ चीनी भाषा में 'हज़ार' और 'शान' का मतलब 'पर्वत' होता है, यानि 'चिआनशान' का मतलब 'हज़ार पहाड़' है। यह इलाक़ा घने वनों से ढका है और तंग राजवंश के ज़माने से ही एक धार्मिक महत्व का स्थल रहा है जहाँ मैत्रेय बुद्ध के मंदिर और पगोडा बने हुए हैं।, Akiko Yosano, Joshua A. Fogel, Columbia University Press, 2001, ISBN 978-0-231-12319-8,...

नई!!: चीन और चिआन पर्वत · और देखें »

चिआंग माई

चिआंग माई เชียงใหม่ लन्ना) जिसे कभी कभी "चिएंगमाई" अथवा "चियांगमाई" भी लिखा जाता है, उत्तरी थाईलैंड का सबसे बड़ा और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण शहर है और चिआंग माई प्रांत की राजधानी है। देश के सबसे ऊँचे पहाड़ों के बीच, यह बैंकॉक के उत्तर में पर स्थित है। यह शहर पिंग नदी के किनारे पर स्थित है, जो कि चाओ फ्राया नदी की एक मुख्य उपनदी है। हाल ही के वर्षों में, चिआंग माई तेजी से एक आधुनिक शहर के रूप में उभरा है और लगभग 1 मिलियन पर्यटकों को प्रत्येक वर्ष आकर्षित करता है। जब मई 2006 में आसियान देशों और "+3" देशों (चीन, जापान, और दक्षिण कोरिया के बीच में चिआंग माई पहल संपन्न हुई, तब चिआंग माई ने राजनीतिक क्षेत्र में प्रसिद्धि प्राप्त की। चिआंग माई का ऐतिहासिक महत्व इसके पिंग नदी जैसे महवपूर्ण स्थान पर स्थित होने की वजह से और प्रमुख व्यापारिक मार्गों से जुड़े रहने के कारण है। यह शहर दस्तकारी के सामान का, छातों का, गहनों (विशेषकर चांदी के गहनों का) और लकड़ी में नक्काशी के काम का काफी समय से एक प्रमुख केंद्र रहा है। हालांकि आधिकारिक तौर पर चिआंग माई का शहर (थेसबान नेकहोन) 150,000 की आबादी के साथ मुईआंग चिआंग माई जिले के अधिकांश भागों में ही पड़ता है परन्तु, शहर का फैलाव अब कई पड़ोसी जिलों में भी फ़ैल गया है। इस चिआंग माई मेट्रोपोलिटन एरिया की आबादी लगभग दस लाख है, जो कि चिआंग माई प्रांत की आबादी की आधे से अधिक है। शहर चार वार्डों में उपविभाजित है(ख्वाएंग): नाखों पिंग, श्रीविजय, मेंगारी और कवीला. इनमें से पहले तीन पिंग नदी के पश्चिमी तट पर हैं और कवीला पूर्वी तट पर स्थित है। शहर के उत्तर में नाखों पिंग जिला शामिल है। श्रीविजय, मेंगराई और कवीला क्रमशः पश्चिम, दक्षिण और पूर्व में स्थित है। शहर का केंद्र-शहर की चारदीवारी के भीतर-मुख्य रूप से श्रीविजय वार्ड के भीतर है। .

नई!!: चीन और चिआंग माई · और देखें »

चिआंग लोग

चिआंग स्त्रियाँ सिचुआन प्रान्त में एक चिआंग मीनार चिआंग (चीनी भाषा: 羌族, अंग्रेज़ी: Qiang) दक्षिणी चीन में बसने वाली एक जाति है। तिब्बती-बर्मी भाषा-परिवार की सदस्य चिआंग भाषाएँ बोलने वाले यह लोग अधिकतर सिचुआन प्रान्त के उत्तर-पश्चिमी भाग में रहते हैं। सन् २००० में इनकी जनसँख्या क़रीब २ लाख अनुमानित की गई थी। चिआंग लोग पहाड़ी इलाक़ों में झाई (寨, zhai) नामक गाँवों में रहते हैं। .

नई!!: चीन और चिआंग लोग · और देखें »

चिकित्सा विधान

चिकित्सा विधान (Medical law) कानून की वह शाखा है जो चिकित्सा व्यवसायियों के विशेषाधिकारों और उत्तरदायित्वों तथा रोगियों के अधिकारों से सम्बन्धित है। .

नई!!: चीन और चिकित्सा विधान · और देखें »

चग़ताई ख़ानत

१३वीं सदी में चग़ताई ख़ानत और उसके पड़ोसी चग़ताई ख़ानत (मंगोल: Цагадайн улс, त्सगदाई उल्स; अंग्रेज़ी: Chagatai Khanate) एक तुर्की-मंगोल ख़ानत थी जिसमें मध्य एशिया के वे क्षेत्र शामिल थे जिनपर चंगेज़ ख़ान के दूसरे बेटे चग़ताई ख़ान का और उसके वंशजों का राज था। आरम्भ में यह ख़ानत मंगोल साम्राज्य का हिस्सा मानी जाती थी लेकिन आगे चलकर पूरी तरह स्वतन्त्र हो गई। अपने चरम पर यह अरल सागर से दक्षिण में आमू दरिया से लेकर आधुनिक चीन और मंगोलिया की सरहद पर अल्ताई पर्वतों तक विस्तृत थी। यह सन् १२२५ से लेकर किसी-न-किसी रूप में १६८७ तक चली। इस ख़ानत के चग़ताई शासक कभी तो तैमूरी राजवंश से मित्रता करते थे और कभी उनसे लड़ते थे। १७वीं सदी में जाकर उइग़ुर नेता आफ़ाक़ ख़ोजा और उनके वंशजों ने पूरे चग़ताई इलाक़े पर क़ब्ज़ा कर के इस ख़ानत को समाप्त कर दिया।, Aisha Khan, The Rosen Publishing Group, 2003, ISBN 978-0-8239-3868-1,...

नई!!: चीन और चग़ताई ख़ानत · और देखें »

चंपक

चंपक चंपक (Michelia champaca) अथवा सोनचंपा, मैगनोलिएसिई (Magnoliaceae) कुल का पौधा है। माइचीलिया (चंपक) वर्ग के पौधे दक्षिण-पूर्वी एशिया (भारत, चीन तथा मलाया द्वीपसमूह) में पाए जाते हैं। चंपक का पेड़ आठ से लेकर दस मीटर तक ऊँचा होता है और इसका फूल सुनहले रंग का तथा सुगंधयुक्त होता है। ये पौधे बगीचों में सुगंध के लिये लगाए जाते हैं। चंपे का इत्र इसी के फूलों से बनाया जाता है। असम प्रदेश में चंपक की पत्तियाँ रेशम के कीड़ों को खिलाई जाती हैं और उन कीड़ों से 'चंपा रेशम' निकालते हैं। .

नई!!: चीन और चंपक · और देखें »

चंगेज़ ख़ान

चंगेज़ खान १२२७ में चंगेज खान का साम्राज्य चंगेज खान का मंदिर चंगेज़ ख़ान (मंगोलियाई: Чингис Хаан, चिंगिस खान, सन् 1162 – 18 अगस्त, 1227) एक मंगोल ख़ान (शासक) था जिसने मंगोल साम्राज्य के विस्तार में एक अहम भूमिका निभाई। वह अपनी संगठन शक्ति, बर्बरता तथा साम्राज्य विस्तार के लिए प्रसिद्ध हुआ। इससे पहले किसी भी यायावर जाति (यायावर जाति के लोग भेड़ बकरियां पालते जिन्हें गड़रिया कहा जाता है।) के व्यक्ति ने इतनी विजय यात्रा नहीं की थी। वह पूर्वोत्तर एशिया के कई घुमंतू जनजातियों को एकजुट करके सत्ता में आया। साम्राज्य की स्थापना के बाद और "चंगेज खान" की घोषणा करने के बाद, मंगोल आक्रमणों को शुरू किया गया, जिसने अधिकांश यूरेशिया पर विजय प्राप्त की। अपने जीवनकाल में शुरू किए गए अभियान क़रा खितई, काकेशस और ख्वारज़्मियान, पश्चिमी ज़िया और जीन राजवंशों के खिलाफ, शामिल हैं। मंगोल साम्राज्य ने मध्य एशिया और चीन के एक महत्वपूर्ण हिस्से पर कब्जा कर लिया। चंगेज खान की मृत्यु से पहले, उसने ओगदेई खान को अपन उत्तराधिकारी बनाया और अपने बेटों और पोते के बीच अपने साम्राज्य को खानतों में बांट दिया। पश्चिमी जिया को हराने के बाद 1227 में उसका निधन हो गया। वह मंगोलिया में किसी न किसी कब्र में दफनाया गया था।उसके वंशजो ने आधुनिक युग में चीन, कोरिया, काकेशस, मध्य एशिया, और पूर्वी यूरोप और दक्षिण पश्चिम एशिया के महत्वपूर्ण हिस्से में विजय प्राप्त करने वाले राज्यों को जीतने या बनाने के लिए अधिकांश यूरेशिया में मंगोल साम्राज्य का विस्तार किया। इन आक्रमणों में से कई स्थानों पर स्थानीय आबादी के बड़े पैमाने पर लगातार हत्यायेँ की। नतीजतन, चंगेज खान और उसके साम्राज्य का स्थानीय इतिहास में एक भयावय प्रतिष्ठा है। अपनी सैन्य उपलब्धियों से परे, चंगेज खान ने मंगोल साम्राज्य को अन्य तरीकों से भी उन्नत किया। उसने मंगोल साम्राज्य की लेखन प्रणाली के रूप में उईघुर लिपि को अपनाने की घोषणा की। उसने मंगोल साम्राज्य में धार्मिक सहिष्णुता को प्रोत्साहित किया, और पूर्वोत्तर एशिया की अन्य जनजातियों को एकजुट किया। वर्तमान मंगोलियाई लोग उसे मंगोलिया के 'संस्थापक पिता' के रूप में जानते हैं। यद्यपि अपने अभियानों की क्रूरता के लिए चंगेज़ खान को जाना जाता है और कई लोगों द्वारा एक नरसंहार शासक होने के लिए माना जाता है परंतु चंगेज खान को सिल्क रोड को एक एकत्रीय राजनीतिक वातावरण के रूप में लाने का श्रेय दिया जाता रहा है। यह रेशम मार्ग पूर्वोत्तर एशिया से मुस्लिम दक्षिण पश्चिम एशिया और ईसाई यूरोप में संचार और व्यापार लायी, इस तरह सभी तीन सांस्कृतिक क्षेत्रों के क्षितिज का विस्तार हुआ। .

नई!!: चीन और चंगेज़ ख़ान · और देखें »

चक्रफूल

चक्रफूल, जिसका वैज्ञानिक नाम Illicium verum है और जिसे अंग्रेज़ी में Star anise, star aniseed, या Chinese star anise के नाम से भी जाना जाता है, वियतनाम तथा दक्षिणी चीन में उगने वाला पौधा है जिसके फल को पकवानों में मसाले की तरह प्रयोग में लाते हैं और इसका स्वाद सौंफ से कुछ मिलता जुलता है लेकिन दोनों का आपस में कोई सम्बन्ध नहीं है। .

नई!!: चीन और चक्रफूल · और देखें »

चुमार

चुमार भारत के जम्मू और कश्मीर राज्य के दक्षिणी लद्दाख क्षेत्र में स्थित सीमा चौकसी चौकी है। भारतीय एवं चीनी सैनिकों के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा पर आदान-प्रदान के मामले में यह चौकी सबसे संवेदनशील एवं सक्रिय चौकियों में से एक रही है। यह लेह से १९० किमी दक्षिण-पूर्व में स्थित है। .

नई!!: चीन और चुमार · और देखें »

चुम्बी घाटी

चुम्बी घाटी तिब्बत के शिगात्से विभाग में स्थित एक घाटी है। यह उस स्थान पर स्थित है जहाँ भारत के सिक्किम राज्य, भूटान और तिब्बत तीनों की सीमाएँ मिलती हैं। हालांकि तिब्बत एक ठंडा प्रदेश है, चुम्बी वादी में गर्मियों में मौसम अच्छा होता है और स्थानीय वनस्पतियों में बहुत फूल आते हैं। कूटनीतिक दृष्टि से ३,००० मीटर पर स्थित चुम्बी घाटी का बहुत महत्व रहा है क्योंकि भारत पर तिब्बत से आक्रमण करने का यह एक आसान मार्ग है। १९०४ में भारत की ब्रिटिश सरकार ने तिब्बत पर चढ़ाई करके चुम्बी पर नौ महीने का क़ब्ज़ा कर लिया था। ब्रिटिश सरकार के अन्दर चुम्बी को औपचारिक रूप से भारत का भाग बनाने के लिये काफ़ी खीचातानी चली लेकिन अन्त में इसे तिब्बती सरकार के हवाले कर दिया गया।, Alex McKay, pp.

नई!!: चीन और चुम्बी घाटी · और देखें »

चुंबकत्व

चुंबकत्व प्रायोगिक चुंबकीय क्षेत्र के परमाणु या उप-परमाणु स्तर पर प्रतिक्रिया करने वाले तत्वों का गुण है। उदाहरण के लिए, चुंबकत्व का ज्ञात रूप है जो की लौह चुंबकत्व है, जहां कुछ लौह-चुंबकीय तत्व स्वयं अपना निरंतर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करते रहते हैं। हालांकि, सभी तत्व चुंबकीय क्षेत्र की उपस्थिति से कम या अधिक स्तर तक प्रभावित होते हैं। कुछ चुंबकीय क्षेत्र (अणुचंबकत्व) के प्रति आकर्षित होते हैं; अन्य चुंबकीय क्षेत्र (प्रति-चुंबकत्व) से विकर्षित होते हैं; जब कि दूसरों का प्रायोगिक चुंबकीय क्षेत्र के साथ और अधिक जटिल संबंध होता है। पदार्थ है कि चुंबकीय क्षेत्रों द्वारा नगण्य रूप से प्रभावित पदार्थ ग़ैर-चुंबकीय पदार्थ के रूप में जाने जाते हैं। इनमें शामिल हैं तांबा, एल्यूमिनियम, गैस और प्लास्टिक.

नई!!: चीन और चुंबकत्व · और देखें »

चुआन

यह चीन का एक प्रांत है। यहीं चीन का प्रक्षेपण केंद्र स्थित है। श्रेणी:चीन के प्रांत.

नई!!: चीन और चुआन · और देखें »

च्यांग काई शेक

च्यांग काई शेक च्यांग काई शेक (Chiang Kai-shek; १८८७-१९७५) चीन का राजनेता एवं सैनिक नेता था जिसने १९२७ से १९७५ तक चीनी गणराज्य का नेतृत्व किया। वह चीन की राष्ट्रवादी पार्टी कुओमितांग ((KMT) के प्रभावी नेता तथा सन यात-सेन के घनिष्ठ मित्र थे। बाद में वह साम्यवादियों का कट्टर शत्रु बन गया था। .

नई!!: चीन और च्यांग काई शेक · और देखें »

चू युआन

चू युआन चू युआन (चीनी: 屈原, अंग्रेज़ी: Qu Yuan; जन्म: ३३९ ईसापूर्व; देहांत: २७८ ईसापूर्व) चीन के झगड़ते राज्यों के काल के एक प्रसिद्ध कवि थे। वह अपने 'चू-त्सि' (楚辭, Chu Ci) नामक कविता संग्रह के लिए मशहूर हैं ('चू-त्सि' का अर्थ 'दक्षिण के गीत' है)। उनके जीवन के बारे में बहुत कम तथ्य ज्ञात हैं और कुछ विद्वानों ने इस बात पर भी शक़ जतलाया है कि पूरा 'चू-त्सि' संग्रह वास्तव में उन्ही का लिखा हुआ है। फिर भी इस संग्रह की सबसे लोकप्रिय कविता, 'ली साओ' (離騷, Li Sao) को लगभग सभी उन्ही की कृति मानते हैं। उनके जीवन के बारे में कुछ सीमित जानकारी सीमा चियान के महान इतिहासकार के अभिलेख नामक इतिहास-ग्रन्थ से आधुनिक युग तक पहुँची है, हालाँकि उसके कुछ तथ्य एक-दूसरे से टकराते हैं।, Zong-qi Cai, Columbia University Press, 2008, ISBN 978-0-231-13941-0,...

नई!!: चीन और चू युआन · और देखें »

चू राज्य (प्राचीन चीन)

चू (Chu) राज्य झगड़ते राज्यों के काल के सात मुख्य राज्यों में से एक था (हरे रंग में) चू राज्य (चीनी भाषा: 楚國, चू गुओ; अंग्रेज़ी: Chu) प्राचीन चीन के झोऊ राजवंश के दौरान एक रियासत थी। यह लगभग १०३० ईसापूर्व से २२३ ईसापूर्व तक चला। इस राज्य का नाम पहले जिंग (荆, Jing) था, फिर जिंगचू (荆楚, Jingchu) हुआ और अंत में केवल चू नाम रहा। अपने चरम पर इस राज्य में एक विशाल क्षेत्रफल शामिल था, जिसमें आधुनिक हूबेई और हूनान प्रान्त के पूर्ण इलाक़े और चोंगचिंग, गुइझोऊ, हेनान, जिआंगशी, जिआंगसू, झेजियांग और शंघाई के भी भाग शामिल थे। इसकी राजधानी पहले दानयांग (丹阳, Danyang) था लेकिन फिर यिंग (郢, Ying) बन गया। २२५ ईपू में झगड़ते राज्यों के काल के आख़िरी सालों में पड़ोसी चिन राज्य ने उसपर क़ब्ज़ा कर लिया। यही बड़ा राज्य आगे चलकर चिन राजवंश का आधार बन गया जिसने पूरे चीन को अपने राज्य में संगठित किया।, Zhengyuan Fu, Cambridge University Press, 1993, ISBN 978-0-521-44228-2 .

नई!!: चीन और चू राज्य (प्राचीन चीन) · और देखें »

चेचक

यह मनुष्य तीव्र रक्तश्राव वाली चेचक से पीडित है। चेचक (शीतला, बड़ी माता, small pox) यह रोग अत्यंत प्राचीन है। आयुर्वेद के ग्रंथों में इसका वर्णन मिलता है। मिस्र में १,२०० वर्ष ईसा पूर्व की एक ममी (mummy) पाई गई थी, जिसकी त्वचा पर चेचक के समान विस्फोट उपस्थित थे। विद्वानों ने उसका चेचेक माना। चीन में भी ईसा के कई शताब्दी पूर्व इस रोग का वर्णन पाया जाता है। छठी शताब्दी में यह रोग यूरोप में पहुँचा और १६वीं शताब्दी में स्पेन निवासियों द्वारा अमरीका में पहुँचाया गया। सन्‌ १७१८ में यूरोप में लेडी मेरी वोर्टले मौंटाग्यू ने पहली बार इसकी सुई (inoculation) प्रचलित की और सन्‌ १७९६ में जेनर ने इसके टीके का आविष्कार किया। चेचक विषाणु जनित रोग है, इसका प्रसार केवल मनुष्यों में होता है, इसके लिए दो विषाणु उत्तरदायी माने जाते है वायरोला मेजर और वायरोला माइनर. इस रोग के विषाणु त्वचा की लघु रक्त वाहिका, मुंह, गले में असर दिखाते है, मेजर विषाणु ज्यादा मारक होता है, इसकी म्रत्यु दर ३०-३५% रहती है, इसके चलते ही चेहरे पर दाग, अंधापन जैसी समस्या पैदा होती रही है, माइनर विषाणु से मौत बहुत कम होती है | यह रोग अत्यंत संक्रामक है। जब तब रोग की महामारी फैला करती है। कोई भी जाति और आयु इससे नहीं बची है। टीके के आविष्कार से पूर्व इस रोग से बहुत अधिक मृत्यु होती थी, यह रोग दस हजार इसा पूर्व से मानव जाति को पीड़ित कर रहा है, १८ वी सदी में हर साल युरोप में ही इस से ४ लाख लोग मरते थे, यह १/३ अंधेपन के मामले हेतु भी उत्तरदायी था, कुल संक्रमण में से २०-६०% तथा बच्चो में ८०% की म्रत्यु दर होती थी|बीसवी सदी में भी इस से ३०० से ५०० मिलियन मौते हुई मानी गयी है, १९५० के शुरू में ही इसके ५० मिलियन मामले होते थे, १९६७ में भी विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसके चलते प्रति वर्ष विश्व भर में २० लाख मौते होनी मानी थी, पूरी १९ वी तथा २० वी सदी में चले टीकाकरण अभियानों के चलते दिसम्बर 1979 में इस रोग का पूर्ण उन्मूलन हुआ, आज तक के इतिहास में केवल यही ऐसा संक्रामक रोग है जिसका पूर्ण उन्मूलन हुआ है | .

नई!!: चीन और चेचक · और देखें »

चेंगदू

चेंगदू (चीनी: 成都, अंग्रेजी: Chengdu दक्षिण-पश्चिमी चीन के सिचुआन प्रान्त की राजधानी है। इसमें १,४०,४७,६२५ लोग रहते हैं (२०१० जनगणना के अनुसार)। यह शहर आर्थिक, यातायात और उद्योग की दृष्टि से पश्चिमी चीन के सब में महत्वपूर्ण नगरों में से है। सन् २००७ में चीन में निवेश पर किए गए एक अध्ययन में चेंगदू निवेश के लिए १० सब से अच्छे शहरों में से एक था। चीनी अख़बार 'चाइना डेली' के अनुसार चेंगदू रहने के लिए चीन का चौथा सब से अच्छा नगर है। प्राचीनकाल में चेंगदू चीन का हिस्सा नहीं बल्कि संभवतः एक 'सानशिंगदुई' नामक कांस्य युग संस्कृति का केंद्र था। इसपर चीन के चिन राजवंश ने ३१६ ईसापूर्व में क़ब्ज़ा कर के अपने साम्राज्य का भाग बनाया। चेंगदू अपने चायख़ानों के लिए प्रसिद्ध है और एक कहावत है कि 'सिचुआन के चायख़ाने दुनिया में सब से अच्छे हैं और चेंगदू के चायख़ाने सिचुआन में सबसे अच्छे हैं'।, Jack Quian, AuthorHouse, 2006, ISBN 978-1-4259-7590-6,... 'The teahouses in Sichuan top the world, and those in Chengdu top Sichuan.' This widespread saying not only points out the status of Chengdu's teahouses but also the inseverable ties between Chengdu culture and tea... .

नई!!: चीन और चेंगदू · और देखें »

चॅक

चॅक (आम तौर पर) काग़ज़ का एक ऐसा टुकड़ा होता है जो धन के भुगतान का आदेश देता है। चॅक लिखने वाला व्यक्ति, जिसे निर्माता कहते हैं, उसका आम तौर पर एक जमा खाता होता है (एक "मांग खाता"), जहां उसका धन जमा होता है। चॅककर्ता, चॅक पर धनराशि, दिनांक और आदाता सहित कई विवरण लिखता है और यह आदेश देते हुए हस्ताक्षर करता है कि उल्लिखित धनराशि को इस व्यक्ति या कंपनी को उनके बैंक द्वारा भुगतान किया जाए. मूलतः, इसमें कोई बैंक शामिल नहीं होता था और प्राप्तकर्ता के लिए यह ज़रूरी था कि वह भुगतान पाने के लिए व्यक्तिगत रूप से चॅककर्ता को ढूंढ़ निकाले. बैंक का प्रयोजन चॅक की विश्वसनीयता को बढ़ाना था; फिर, आदाता को केवल उस बैंक को खोजने की जरुरत होती थी जिससे वह आहरित था। आधुनिक बैंक इलेक्ट्रॉनिक तौर पर जुड़े हैं, इसलिए कम से कम उसी देश में, कोई भी चॅक किसी भी बैंक में सुसंगत है। काग़ज़ी पैसे चॅकों से विकसित हुए, जो उसे कब्जे में रखने वाले व्यक्ति ("वाहक") को निश्चित राशि की अदायगी का आदेश है। तकनीकी रूप से, चॅक एक परक्राम्य लिखत हैहालांकि अधिकांश देशों में चॅकों को परक्राम्य लिखतों के रूप में विनियमित किया जाता है, कई देशों में वे वस्तुतः परक्राम्य नहीं हैं, अर्थात् आदाता अन्य पार्टी के पक्ष में चॅक का पृष्ठांकन नहीं कर सकता है। भुगतानकर्ता आम तौर पर एक चॅक को किसी नामित आदाता को देय के रूप में केवल चॅक के "रेखन" द्वारा अभिहित कर सकते हैं, तद्द्वारा उसे केवल आदाता के खाते में देय के रूप प्राधिकृत करते हैं, लेकिन वित्तीय अपराधों का मुकाबला करने के प्रयास में कई देशों ने क़ानून और विनियमन के संयोजन द्वारा प्रावधान है कि सभी चॅकों को रेखित या केवल खाते में देय के रूप में माना जाए और वे परक्राम्य नहीं हैं। जो वित्तीय संस्था को उस संस्था के पास चॅककर्ता/जमाकर्ता के नाम धारित विशिष्ट मांग खाते से विशिष्ट मुद्रा में भुगतान करने के लिए निर्दिष्ट करता है। दोनों, चॅककर्ता और आदाता प्राकृतिक व्यक्ति या क़ानूनी हस्ती हो सकते हैं। .

नई!!: चीन और चॅक · और देखें »

चोल राजवंश

चोल (तमिल - சோழர்) प्राचीन भारत का एक राजवंश था। दक्षिण भारत में और पास के अन्य देशों में तमिल चोल शासकों ने 9 वीं शताब्दी से 13 वीं शताब्दी के बीच एक अत्यंत शक्तिशाली हिन्दू साम्राज्य का निर्माण किया। 'चोल' शब्द की व्युत्पत्ति विभिन्न प्रकार से की जाती रही है। कर्नल जेरिनो ने चोल शब्द को संस्कृत "काल" एवं "कोल" से संबद्ध करते हुए इसे दक्षिण भारत के कृष्णवर्ण आर्य समुदाय का सूचक माना है। चोल शब्द को संस्कृत "चोर" तथा तमिल "चोलम्" से भी संबद्ध किया गया है किंतु इनमें से कोई मत ठीक नहीं है। आरंभिक काल से ही चोल शब्द का प्रयोग इसी नाम के राजवंश द्वारा शासित प्रजा और भूभाग के लिए व्यवहृत होता रहा है। संगमयुगीन मणिमेक्लै में चोलों को सूर्यवंशी कहा है। चोलों के अनेक प्रचलित नामों में शेंबियन् भी है। शेंबियन् के आधार पर उन्हें शिबि से उद्भूत सिद्ध करते हैं। 12वीं सदी के अनेक स्थानीय राजवंश अपने को करिकाल से उद्भत कश्यप गोत्रीय बताते हैं। चोलों के उल्लेख अत्यंत प्राचीन काल से ही प्राप्त होने लगते हैं। कात्यायन ने चोडों का उल्लेख किया है। अशोक के अभिलेखों में भी इसका उल्लेख उपलब्ध है। किंतु इन्होंने संगमयुग में ही दक्षिण भारतीय इतिहास को संभवत: प्रथम बार प्रभावित किया। संगमकाल के अनेक महत्वपूर्ण चोल सम्राटों में करिकाल अत्यधिक प्रसिद्ध हुए संगमयुग के पश्चात् का चोल इतिहास अज्ञात है। फिर भी चोल-वंश-परंपरा एकदम समाप्त नहीं हुई थी क्योंकि रेनंडु (जिला कुडाया) प्रदेश में चोल पल्लवों, चालुक्यों तथा राष्ट्रकूटों के अधीन शासन करते रहे। .

नई!!: चीन और चोल राजवंश · और देखें »

चोंग्तर कांगरी

चोंग्तर कांगरी (Chongtar Kangri) काराकोरम पर्वतमाला की बाल्तोरो मुज़ताग़ उपश्रेणी का एक ऊँचा पर्वत है। यह चीन द्वारा अधिकृत शक्सगाम घाटी क्षेत्र में आता है और पाक-अधिकृत कश्मीर के गिलगित-बल्तिस्तान क्षेत्र के समीप है। यह के२ से लगभग १० किमी दूर है। चीन इसे प्रशासनिक रूप से शिंजियांग प्रान्त में डालता है लकिन भारत के अनुसार यह क्षेत्र उसकी सम्प्रभुता में आता है। यह विश्व का ८१वाँ सर्वोच्च पर्वत है। .

नई!!: चीन और चोंग्तर कांगरी · और देखें »

चीता

बिल्ली के कुल (विडाल) में आने वाला चीता (एसीनोनिक्स जुबेटस) अपनी अदभुत फूर्ती और रफ्तार के लिए पहचाना जाता है। यह एसीनोनिक्स प्रजाति के अंतर्गत रहने वाला एकमात्र जीवित सदस्य है, जो कि अपने पंजों की बनावट के रूपांतरण के कारण पहचाने जाते हैं। इसी कारण, यह इकलौता विडाल वंशी है जिसके पंजे बंद नहीं होते हैं और जिसकी वजह से इसकी पकड़ कमज़ोर रहती है (अतः वृक्षों में नहीं चढ़ सकता है हालांकि अपनी फुर्ती के कारण नीची टहनियों में चला जाता है)। ज़मीन पर रहने वाला ये सबसे तेज़ जानवर है जो एक छोटी सी छलांग में १२० कि॰मी॰ प्रति घंटे ऑलदो एकोर्डिंग टू चीता, ल्यूक हंटर और डेव हम्मन (स्ट्रुइक प्रकाशक, 2003), pp.

नई!!: चीन और चीता · और देखें »

चीन (बहुविकल्पी)

कोई विवरण नहीं।

नई!!: चीन और चीन (बहुविकल्पी) · और देखें »

चीन में हिन्दू धर्म

हिन्दू उत्कीर्णन, च्वानजो संग्रहालय। ये चित्र होली के समारोह के लिए नरसिंह कथा वर्णन करता है। चीन में हिंदू धर्म का अभ्यास अल्पसंख्यक चीनी नागरिकों द्वारा होता है। आधुनिक चीनी मुख्यधारा में हिन्दू धर्म की उपस्थिति अपने आप में बहुत ही सीमित, परन्तु पुरातात्विक साक्ष्य से पता चलता है कि, मध्ययुगीन चीन के विभिन्न प्रांतों में हिंदू धर्म की उपस्थिति थी। Huang Xinchuan (1986), Hinduism and China, in Freedom, Progress, and Society (Editors: Balasubramanian et al. चीन के अपने इतिहास से अधिक बौद्ध धर्म के विस्तार से सम्पूर्ण देश में हिंदू प्रभाव अवशोषित हुआ। भारती की वैदिक काल से चली आ रही वास्तविक परम्परायें चीन में लोकप्रिय है, जैसे कि योग और ध्यान।  हिंदू समुदाय विशेष रूप से अय्यवोले और मनिग्रामम् के तमिल व्यापारी मंडली के माध्यम से, एक बार मध्यकालीन दक्षिण चीन में प्रतिष्ठित हुआ। इसका प्रमाण दक्षिण पूर्व चीन के च्वानजो और फ़ुज़ियान प्रांत के काई-यु-आन-मंदिर जैसे स्थानों में प्रात हो रहे हिन्दू रूपांकनों और मंदिरों से मिलता है।John Guy (2001), The Emporium of the World: Maritime Quanzhou 1000-1400 (Editor: Angela Schottenhammer), ISBN 978-9004117730, Brill Academic, pp. 294-308 हाँग काँग में हिन्दू आप्रवासीयों (immigrant) का छोटा समूदाय अस्तित्व में है। .

नई!!: चीन और चीन में हिन्दू धर्म · और देखें »

चीन में हिन्दी

चीन की विभिन्न संस्थाओं में लगभग 80 विदेशी भाषाएँ पढ़ाई जा रही हैं।http://www.ibnlive.com/news/india/hindi-set-to-make-debut-in-south-china-481952.html इनमें हाल के कुछ वर्षों में हिन्दी यहाँ की एक लोकप्रिय भाषा बनकर उभरी है। .

नई!!: चीन और चीन में हिन्दी · और देखें »

चीन में विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी का इतिहास

चीन में विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी का इतिहास बहुत पुराना एवं समृद्ध है। पुराने काल से ही विश्व के अन्य देशों एवं सभ्यताओं से स्वतंत्र रूप से चीन के दार्शनिकों ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी, गणित, खगोल आदि में उल्लेखनीय प्रगति की थी। पारम्परिक चीनी औषधि, एक्युपंचर तथा आयुर्वेदिक औषधियों का चीन में प्राचीन काल से प्रचलन है। चीनियों द्वारा विश्व के अन्य लोगों से पूर्व कॉमेट, सूर्य ग्रहण एवं सुपरनोवा रेकार्ड किये गये थे। .

नई!!: चीन और चीन में विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी का इतिहास · और देखें »

चीन जापान सम्बन्ध

चीन (हरा) तथा जापान (नारंगी) चीन और जापान भौगोलिक रूप से पूर्वी चीन सागर द्वारा विलगित हैं। जापान के ऊपर चीन की भाषा, वास्तु, संस्कृति, धर्म, दर्शन तथा विधि से काफी प्रभाव है। १९वीं शताब्दी के मध्य में जब युनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका आदि ने जापान को अपना व्यापार खोलने के लिये विवश कर दिया तो इसका परिणाम सकारात्मक हुआ और जापान तेजी से आधुनिकीकरण की ओर बढ़ा जिसे मीजी पुनःस्थापन (मीजी रिस्टोरेशन) कहते हैं। उसके बाद जापान चीन को ऐसा देश मानने लगा जो पिछड़ा तथा अपने आप को पश्चिमी देशों से रक्षा करने में असमर्थ है। .

नई!!: चीन और चीन जापान सम्बन्ध · और देखें »

चीन ओलंपिक विवरण

मूल रूप से 1932 से 1948 तक चीन गणराज्य के प्रतिनिधिमंडल के रूप में ओलंपिक में भाग लिया था, चीन ने 1952 में पहली बार ग्रीष्मकालीन खेलों में पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (PRC) के नाम से ओलंपिक खेलों में भाग लिया था हेलसिंकी, फिनलैंड में, हालांकि वे केवल एक घटना में भाग लेने के लिए समय पर पहुंचे। उस वर्ष, अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) ने पीआरसी और चीन गणराज्य (जो हाल ही में चीनी नागरिक युद्ध के बाद ताइवान को स्थानांतरित कर दिया गया था) की अनुमति दी थी, हालांकि बाद में विरोध में वापस ले लिया गया था। चीन की राजनीतिक स्थिति पर विवाद के कारण, संयुक्त राज्य अमेरिका के झील प्लेसिड में 1980 के शीतकालीन ओलंपिक तक पीआरसी ने ओलंपिक में फिर से भाग नहीं लिया। 1952 के बाद ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों में उनका पहला प्रदर्शन, 1984 के लॉस एंजिल्स में संयुक्त राज्य अमेरिका के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक था। चीनी ओलंपिक समिति ने अपने मौजूदा रूप में 1979 में मान्यता दी थी। चीनी गृहयुद्ध से पहले, एथलीटों ने ओलंपिक में चीन गणराज्य (ROC) के रूप में प्रतिस्पर्धा की। ROC ने 1952 से 1976 (शीतकालीन) से प्रतिस्पर्धा जारी रखी, लेकिन केवल ताइवान के द्वीप के एथलीटों का प्रतिनिधित्व करते हुए (हालांकि 1960 ओलंपिक खेलों में ROC के फुटबॉल टीम के सदस्य भारी हांग कांगर्स थे)। चीन के नाम के उपयोग पर विवाद ने इन वर्षों में पीआरसी खेलों का बहिष्कार किया। 1979 में, अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने ROC टीम के लिए चीनी ताइपे को नामित करने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया, और इसने PRC के लिए अंततः ओलंपिक आंदोलन में शामिल होने के लिए दरवाजा खोल दिया। 1950 के बाद से हांगकांग की एक विशिष्ट राष्ट्रीय ओलंपिक समिति रही है और 1952 के बाद से खेलों में हिस्सा लिया है। Sports Federation and Olympic Committee of Hong Kong, China क्षेत्र को पीआरसी में लौटा दिया गया था और हांगकांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र 1997 में बनाया गया था, इस व्यवस्था को जारी रखा गया है, हांगकांग हांगकांग, चीन के नाम के तहत बाकी देश से स्वतंत्र रूप से प्रतिस्पर्धा के साथ। .

नई!!: चीन और चीन ओलंपिक विवरण · और देखें »

चीन का ध्वज

चीन का ध्वज चीन का राष्ट्रीय ध्वज है। श्रेणी:चीन श्रेणी:ध्वज.

नई!!: चीन और चीन का ध्वज · और देखें »

चीन का मैदान

यह चीन में स्थित प्रमुख मैदान हैं। श्रेणी:विश्व के प्रमुख मैदान.

नई!!: चीन और चीन का मैदान · और देखें »

चीन का शान्तिपूर्ण उत्थान

चीन का शान्तिपूर्ण उत्थान (सरलीकृत चीनी: 中国和平崛起; पारम्परिक चीनी: 中國和平崛起) जिसे कभी-कभी "चीन का शान्तिपूर्ण विकास" नाम से भी निर्दिष्ट किया जाता है, हू जिन्ताओ के नेतृत्व में चीन की आधिकारिक नीति थी। इस शब्द का उपयोग "चीनी खतरा सिद्धान्त" का खण्डन करने के लिए लागू किया गया था। जैसे-जैसे चीन एक बड़ी राजनैतिक, आर्थिक और सैन्य शकित के रूप में उभरता गया, वह अन्य देशों को यह विश्वास दिलाना चाहता था कि उसका उत्थान अन्य देशों की शान्ति और सुरक्षा के लिए खतरा नहीं है। चीन इस नीति को आन्तरिक रूप से चीनी समाज में सद्भाव लाकर लागू करता है और बाहरी सूप से एक शान्तिपूर्ण अन्तर्राष्ट्रीय परिवेश को बढ़ावा देकर। इस नीति का उद्देश्य चीन को एक दायित्वपूर्ण विश्व नेता के रूप में चित्रित करना, नम्र-शक्ति पर बल देना और प्रतिज्ञा दिलाना है कि चीन वैश्विक मामलों में हस्तक्षेप करने से पहले अपने आन्तरिक मुद्दों और अपने लोगों के कल्याण सुधार के लिए प्रतिबद्ध है। यह शब्द यह सुझाता है कि चीन अनावश्यक अन्तर्राष्ट्रीय विवादों में टकरावों को टालना चाहता है। .

नई!!: चीन और चीन का शान्तिपूर्ण उत्थान · और देखें »

चीन का सम्राट

चीन का सम्राट (皇帝 huáng dì, हिंदी.

नई!!: चीन और चीन का सम्राट · और देखें »

चीन का इतिहास

चीन के राजवंशों की राज्यसीमाएँ पुरातात्विक साक्ष्यों के आधार पर चीन में मानव बसाव लगभग साढ़े बाईस लाख (22.5 लाख) साल पुराना है। चीन की सभ्यता विश्व की पुरातनतम सभ्यताओं में से एक है। यह उन गिने-चुने सभ्यताओं में एक है जिन्होनें प्राचीन काल में अपना स्वतंत्र लेखन पद्धति का विकास किया। अन्य सभ्यताओं के नाम हैं - प्राचीन भारत (सिंधु घाटी सभ्यता), मेसोपोटामिया की सभ्यता, मिस्र सभ्यता और माया सभ्यता। चीनी लिपि अब भी चीन, जापान के साथ-साथ आंशिक रूप से कोरिया तथा वियतनाम में प्रयुक्त होती है। .

नई!!: चीन और चीन का इतिहास · और देखें »

चीन का अंतरिक्ष कार्यक्रम

चीन के सिचांग (Xichang) उपग्रह केन्द्र से तिआनलिअन एक-०१ का प्रक्षेपण चीन का अंतरिक्ष कार्यक्रम 'चीनी राष्ट्रीय अंतरिक्ष प्रशासन' (China National Space Administration (CNSA)) द्वारा निर्देशित है। इसकी प्रौद्योगिकीय शुरूआत १९५० के दशक में हुई जब चीन ने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम आरम्भ किया। .

नई!!: चीन और चीन का अंतरिक्ष कार्यक्रम · और देखें »

चीन के राजवंश

इतिहास में चीन के विभिन्न राजवंशों द्वारा नियंत्रित क्षेत्र चीन में कई ऐतिहासिक राजवंश रहे हैं। कभी-कभी इनके वर्णनों में ऐसा प्रतीत होता है के चीन में एक राजवंश स्वयं ही समाप्त हो गया और नए राजवंश ने आगे बढ़कर शासन की बागडोर संभाल ली। वास्तव में ऐसा नहीं था। कोई भी राजवंश स्वेच्छा से ख़त्म नहीं हुआ। अक्सर ऐसा होता था के नया राजवंश शुरू तो हो जाता था लेकिन वह कुछ अरसे तक कम प्रभाव रखता था और पहले से स्थापित राजवंश से लड़ाइयाँ करता था। ऐसा भी होता था के कोई पराजित राजवंश हारने के बावजूद कुछ इलाक़ों में प्रभुत्व रखता था और चीन का सिंहासन वापस छीनने की कोशिश में जुटा रहता था। उदहारण के लिए सन् 1644 में मान्चु नस्ल वाले चिंग राजवंश ने बीजिंग पर क़ब्ज़ा जमा लिया और चीन को अपने अधीन कर लिया। लेकिन चिंग राजवंश सन् 1636 में ही शुरू हो चुका था और उस से भी पहले सन् 1616 में एक अन्य नाम ("उत्तरकालीन जिन राजवंश") के नाम से अस्तित्व में आ चुका था। मिंग राजवंश बीजिंग की राजसत्ता से तो 1644 में हाथ धो बैठा, लेकिन उनके वंशज 1662 तक सिंहासन पर अपना अधिकार जतलाते रहे और उसे वापस लेने के प्रयास करते रहे। .

नई!!: चीन और चीन के राजवंश · और देखें »

चीन के वैदेशिक सम्बन्ध

चीन के वैदेशिक संबंध से आशय उन विधियों और तौर-तरीकों से है जिनके माध्यम से चीन विश्व के देशों के साथ पेश आता है तथा अपने राजनैतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक शक्ति और कमजोरी को अभिव्यक्त करता है। आधिकारिक रूप से चीन का कहना है कि वह "शान्ति की विदेश नीति पर चलता है"। .

नई!!: चीन और चीन के वैदेशिक सम्बन्ध · और देखें »

चीन की सभ्यता

चीन की सभ्यता (चीनी: 中國文化) प्राचीनतम मानव सभ्यताओ मे से एक जो की ५ हजार से विद्यमान है एवं जटिल है। इस राष्ट्र की सान्स्क्रुतिक विविधता इस्की क्षेत्र के अनुसार विविध है। चीन मे कई समुदायो के लोग रह्ते है जिनमे से 'हान' की आबादी सर्वाधिक है। चीन मे अधिक्तर लोग नास्तिक है तथा कुछ बुध के अनुयायी है। मन्डारिन यहा की राष्ट्रिय भाषा है जो कि 'मिन्ग् सल्तनत' की है। पुरातात्विक साक्ष्यों के आधार पर चीन में मानव बसाव लगभग साढ़े बाईस लाख (22.5 लाख) साल पुराना है। चीन की सभ्यता विश्व की पुरातनतम सभ्यताओं में से एक है। यह उन गिने-चुने सभ्यताओं में एक है जिन्होनें प्राचीन काल में अपना स्वतंत्र लेखन पद्धति का विकास किया। अन्य सभ्यताओं के नाम हैं - प्राचीन भारत (सिंधु घाटी सभ्यता), मेसोपोटामिया की सभ्यता, मिस्र सभ्यता और माया सभ्यता। चीनी लिपि अब भी चीन, जापान के साथ-साथ आंशिक रूप से कोरिया तथा वियतनाम में प्रयुक्त होती है। श्रेणी:चीन श्रेणी:सभ्यता.

नई!!: चीन और चीन की सभ्यता · और देखें »

चीन की साम्यवादी क्रांति

माओ चीनी साम्यवादी दल की स्थापना १९२१ में हुई थी। सन १९४९ में चीनी साम्यवादी दल का चीन की सत्ता पर अधिकार करने की घटना चीनी साम्यवादी क्रांति कहलाती है। चीन में १९४६ से १९४९ तक गृहयुद्ध की स्थिति थी। इस गृहयुद्ध का द्वितीय चरण साम्यवादी क्रान्ति के रूप में सामने आया। चीन ने आधिकारिक तौर पर इस अवधि को 'मुक्ति संग्राम' (War of Liberation, सरल चीनी: 解放战争; परम्परागत चीनी: 國共內戰; फीनयिन: Jiěfàng Zhànzhēng) कहा जाता है। .

नई!!: चीन और चीन की साम्यवादी क्रांति · और देखें »

चीन की विशाल दीवार

चीन की विशाल दीवार मिट्टी और पत्थर से बनी एक किलेनुमा दीवार है जिसे चीन के विभिन्न शासको के द्वारा उत्तरी हमलावरों से रक्षा के लिए पाँचवीं शताब्दी ईसा पूर्व से लेकर सोलहवी शताब्दी तक बनवाया गया। इसकी विशालता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है की इस मानव निर्मित ढांचे को अन्तरिक्ष से भी देखा जा सकता है। यह दीवार ६,४०० किलोमीटर (१०,००० ली, चीनी लंबाई मापन इकाई) के क्षेत्र में फैली है। इसका विस्तार पूर्व में शानहाइगुआन से पश्चिम में लोप नुर तक है और कुल लंबाई लगभग ६७०० कि॰मी॰ (४१६० मील) है। हालांकि पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के हाल के सर्वेक्षण के अनुसार समग्र महान दीवार, अपनी सभी शाखाओं सहित तक फैली है। अपने उत्कर्ष पर मिंग वंश की सुरक्षा हेतु दस लाख से अधिक लोग नियुक्त थे। यह अनुमानित है, कि इस महान दीवार निर्माण परियोजना में लगभग २० से ३० लाख लोगों ने अपना जीवन लगा दिया था।डैमियन ज़िमर्मैन,, ICE केस स्टडीज़, दिसंबर, १९९७ चीन में राज्य की रक्षा करने के लिए दीवार बनाने की शुरुआत हुई आठवीं शताब्दी ईसापूर्व में जिस समय कुई (अंग्रेजी:Qi), यान (अंग्रेजी:Yan) और जाहो (अंग्रेजी:Zhao) राज्यों ने तीर एवं तलवारों के आक्रमण से बचने के लिए मिटटी और कंकड़ को सांचे में दबा कर बनाई गयी ईटों से दीवार का निर्माण किया। ईसा से २२१ वर्ष पूर्व चीन किन (अंग्रेजी:Qin) साम्राज्य के अनतर्गत आ गया। इस साम्राज्य ने सभी छोटे राज्यों को एक करके एक अखंड चीन की रचना की। किन साम्राज्य से शासको ने पूर्व में बनायी हुई विभिन्न दीवारों को एक कर दिया जो की चीन की उत्तरी सीमा बनी। पांचवीं शताब्दी से बहुत बाद तक ढेरों दीवारें बनीं, जिन्हें मिलाकर चीन की दीवार कहा गया। प्रसिद्धतम दीवारों में से एक २२०-२०६ ई.पू.

नई!!: चीन और चीन की विशाल दीवार · और देखें »

चीन-नेपाल युद्ध

चीन-नेपाल युद्ध या गोरखा-चीन युद्ध (चीनी: 平 定 廓 爾 喀, pacification of Gorkha) नेपालीयों द्वारा 1788-1792 में तिब्बत के ऊपर एक चढाई थी। यह युद्ध पुरी तरह नेपाली और तिब्बती आर्मीयों के बीच सिक्का के विवाद को लेकर लड़ा गया। नेपालीयों द्बारा सस्ते धातुओं के मिश्रण को ढालकर बनाये गये सिक्के जो लम्बे समय से तिब्बत के लिए परेशानी का सबब बना हुआ था। नेपालियों ने तिब्बतियों को वश में कर रखा था, जो चीन के अधिन थें। तिब्बत ने केरुङकि सन्धि की और शान्ति सम्झौता के अनुरूप वार्षिक सलामी देनेका वादा किया। बाद में तिब्बत ने झूठ बोला और चीन के राजा को न्यौता दिया। कमाण्डर फुकागन नेपालके बेत्रावती तक आगए लेकिन जबरदस्त काउन्टरअटैक के कारण चीन ने शान्ति सम्झौता के प्रस्ताव स्वीकार किया। .

नई!!: चीन और चीन-नेपाल युद्ध · और देखें »

चीन-पाक आर्थिक गलियारा

नक़्शा चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा या उर्दू में पाकिस्तान-चीन इक़तिसादी राहदारी (चीनी: 中国 - 巴基斯坦 经济 走廊) एक बहुत बड़ी वाणिज्यिक परियोजना है, जिसका उद्देश्य दक्षिण-पश्चिमी पाकिस्तान से चीन के उत्तर-पश्चिमी स्वायत्त क्षेत्र शिंजियांग तक ग्वादर बंदरगाह, रेलवे और हाइवे के माध्यम से तेल और गैस की कम समय में वितरण करना है। आर्थिक गलियारा चीन-पाक संबंधों में केंद्रीय महत्व रखता है, गलियारा ग्वादर से काशगर तक लगभग 2442 किलोमीटर लंबा है। यह योजना को सम्पूर्ण होने में काफी समय लगेगा। इस योजना पर 46 बिलियन डॉलर लागत का अनुमान किया गया है। यह गलियारा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर, गिलगित-बाल्टिस्तान और बलूचिस्तान होते हुए जायेगा। विविध सूचनाओं के अनुसार ग्वादर बंदरगाह को इस तरह से विकसित किया जा रहा है, ताकि वह 19 मिलियन टन कच्चे तेल को चीन तक सीधे भेजने में सक्षम होगा। .

नई!!: चीन और चीन-पाक आर्थिक गलियारा · और देखें »

चीन-पाकिस्तान समझौता

शक्स्गाम वादी कश्मीर के इस नक़्शे के मध्य उत्तर में देखी जा सकती है चीन-पाकिस्तान समझौता (Sino-Pakistan Agreement), जिसे चीन-पाकिस्तान सीमा समझौता (Sino-Pak Boundary Agreement) भी कहा जाता है, चीन और पाकिस्तान के बीच 1963 में हस्ताक्षरित करा गया एक दस्तावेज़ है जो उन दोनों देशों द्वारा कश्मीर में नियंत्रित क्षेत्रों के बीच की सीमा निर्धारित करता है। भारत इस समझौते का खण्डन करता है और उसके अनुसार पूरा जम्मू और कश्मीर राज्य भारत का अटूट अंग है और किसी भी अन्य देश को उसे बांटने का अधिकार नहीं। भारत के अनुसार पाकिस्तान और चीन में आधिकारिक रूप से कोई सीमा है ही नहीं क्योंकि भारतीय क्षेत्र बीच में आता है। .

नई!!: चीन और चीन-पाकिस्तान समझौता · और देखें »

चीन-वियतनाम युद्ध

चीन-वियतनमा युद्ध (17 फरवरी, 1979 से 16 मार्च, 1979 तक) चीन तथा वियतनाम के बीच १९७९ में सीमा पर लड़ा गया था। चीन ने वियतनाम पर आक्रमण किया था और इसका कारण १९७८ में वियतनाम द्वारा कम्बोडिया पर 'आक्रमण एवं अधिकार' बताया था। .

नई!!: चीन और चीन-वियतनाम युद्ध · और देखें »

चीनी (चीन के निवासी)

अंगूठाकार चीन देश के निवासियों को चीनी कहते हैं। चीनी लोग विभिन्न व्यक्ति या चीन के साथ जुड़े लोगों के समूह हैं, आम तौर पर वंश, जातीयता, राष्ट्रीयता, नागरिकता, या अन्य संबद्धता के माध्यम से। .

नई!!: चीन और चीनी (चीन के निवासी) · और देखें »

चीनी तीतर

चीनी तीतर (Chinese Francolin) (Francolinus pintadeanus) फ़्रैंकोलिन प्रजाति का एक पक्षी है। .

नई!!: चीन और चीनी तीतर · और देखें »

चीनी नववर्ष

चीनी नववर्ष (सरलीकृत चीनी: 春节; पारम्परिक चीनी: 春節; पिनयिन: Chūnjié) चीन का सबसे महत्वपूर्ण उत्सव है। चीन में नववर्ष को चन्द्रमा का नववर्ष कहा जाता है। यह त्योहार चीनी चन्द्र पर आधारित कालदर्श के पहले मास मे मनाया जाता है। यह १५ दिनों तक चलता है और इसके आखरी दिन को लालटेन त्योहार कहा जाता है। यह दिन पूरे चीन मे बडे ही जोरशोर से मनाया जाता है। श्रेणी:चीन की संस्कृति श्रेणी:चीनी नववर्ष.

नई!!: चीन और चीनी नववर्ष · और देखें »

चीनी बौद्ध धर्म

चीनी बौद्ध धर्म (हान चीनी बौद्ध धर्म) बौद्ध धर्म की चीनी शाखा है। बौद्ध धर्म की परम्पराओं ने तक़रीबन दो हज़ार वर्षों तक चीनी संस्कृति एवं सभ्यता पर एक गहरा प्रभाव छोड़ा, यह बौद्ध परम्पराएँ चीनी कला, राजनीति, साहित्य, दर्शन तथा चिकित्सा में देखी जा सकती हैं। दुनिया की 65% से अधिक बौद्ध आबादी चीन में रहती हैं। भारतीय बौद्ध धर्मग्रन्थों का चीनी भाषा में अनुवाद ने पूर्वी एशिया व दक्षिण पूर्व एशिया में बौद्ध धर्म को बहुत बढ़ावा दिया, इतना कि बौद्ध धर्म कोरिया, जापान, रयुक्यु द्वीपसमूह और वियतनाम तक पहुँच पाया था। चीनी बौद्ध धर्म में बहुत सारी ताओवादी और विभिन्न सांस्कृतिक चीनी परम्पराएँ मिश्रित हैं। .

नई!!: चीन और चीनी बौद्ध धर्म · और देखें »

चीनी भाषा

चीनी भाषा (अंग्रेजी: Chinese; 汉语/漢語, पिनयिन: Hànyǔ; 华语/華語, Huáyǔ; या 中文 हुआ-यू, Zhōngwén श़ोंग-वॅन) चीन देश की मुख्य भाषा और राजभाषा है। यह संसार में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। यह चीन एवं पूर्वी एशिया के कुछ देशों में बोली जाती है। चीनी भाषा चीनी-तिब्बती भाषा-परिवार में आती है और वास्तव में कई भाषाओं और बोलियों का समूह है। मानकीकृत चीनी असल में एक 'मन्दारिन' नामक भाषा है। इसमें एकाक्षरी शब्द या शब्द भाग ही होते हैं और ये चीनी भावचित्र में लिखी जाती है (परम्परागत चीनी लिपि या सरलीकृत चीनी लिपि में)। चीनी एक सुरभेदी भाषा है। .

नई!!: चीन और चीनी भाषा · और देखें »

चीनी भाषा और साहित्य

चीनी साहित्य अपनी प्राचीनता, विविधता और ऐतिहासिक उललेखों के लिये प्रख्यात है। चीन का प्राचीन साहित्य "पाँच क्लासिकल" के रूप में उपलब्ध होता है जिसके प्राचीनतम भाग का ईसा के पूर्व लगभग 15वीं शताब्दी माना जाता है। इसमें इतिहास (शू चिंग), प्रशस्तिगीत (शिह छिंग), परिवर्तन (ई चिंग), विधि विधान (लि चि) तथा कनफ्यूशियस (552-479 ई.पू.) द्वारा संग्रहित वसंत और शरद-विवरण (छुन छिउ) नामक तत्कालीन इतिहास शामिल हैं जो छिन राजवंशों के पूर्व का एकमात्र ऐतिहासिक संग्रह है। पूर्वकाल में शासनव्यवस्था चलाने के लिये राज्य के पदाधिकारियों को कनफ्यूशिअस धर्म में पारंगत होना आवश्यक था, इससे सरकारी परीक्षाओं के लिये इन ग्रंथों का अध्ययन अनिवार्य कर दिया गया था। कनफ्यूशिअस के अतिरिक्त चीन में लाओत्स, चुआंगत्स और मेन्शियस आदि अनेक दार्शनिक हो गए हैं जिनके साहित्य ने चीनी जनजीवन को प्रभावित किया है। .

नई!!: चीन और चीनी भाषा और साहित्य · और देखें »

चीनी भावचित्र

चीनी लिपि में 'आँख' के लिए भावचित्र 'आँख' के भावचित्र का हस्त-लिखित रूप शांग राजवंश काल में हड्डियों पर खरोंचे गए स्वर-अर्थ संयुक्त भावचित्र - इनसे भविष्यवानियाँ की जाती थीं सन् १४३६ में बनी चीनी भावचित्र सिखाने के लिए एक पुस्तक का पृष्ठ गाय के चित्र से कैसे उसका आधुनिक भावचित्र बदलावों के साथ उत्पन्न हुआ चीनी भावचित्रों में हर दिशा में खीची जाने वाली हर प्रकार की लकीर का एक भिन्न नाम है - हर भावचित्र में यह लकीरें अलग तरह से सम्मिलित होती हैं - यहाँ दिखाए गए भावचित्र 永 का मतलब 'हमेशा' या 'सनातन' है हानज़ी अथवा चीनी भावचित्र (अंग्रेज़ी: Chinese characters, चाइनीज़ कैरॅक्टर्ज़) चीनी भाषा और (कुछ हद तक) जापानी भाषा लिखने के लिए इस्तेमाल होने वाले भावचित्र होते हैं। इन्हें चीनी के लिए जब प्रयोग किया जाए तो यह हानज़ी(汉字/漢字, hanzi) कहलाते हैं और जब जापानी के लिए प्रयोग किया जाए तो कानजी (漢字, kanji) कहलाते हैं। पुराने ज़माने में इनका प्रयोग कोरियाई भाषा और वियतनामी भाषा के लिए भी होता था। चीनी भावचित्र दुनिया की सब से पुरानी चलती आ रही लिखने की विधि है।, Hans Jensen, Allen & Unwin, 1969,...

नई!!: चीन और चीनी भावचित्र · और देखें »

चीनी मार्शल आर्ट

चीनी मार्शल आर्ट, कभी-कभी मैंडरिन चीनी भाषा में वुशु कहलाता है, लेकिन '''कुंग फू''' (पिनयिन गोंगफू) के नाम से लोकप्रिय है, कई तरह की लड़ाई की शैलियां हैं, जिन्हें आज जो चीन कहलाता है, वहा पे सदियों से विकसित किया गया है। लड़ाई की ये शैलियां आमतौर पर सामान्य लक्षण के अनुसार वर्गीकृत किया जाते हैं, इनकी पहचान "परिवार" (家, जिया), "संप्रदायों" (派, पै) अथवा "स्कूलों" (門, मे) के मार्शल आर्ट के रूप में की जाती है। ऐसे लक्षणों के उदाहरणों में पशुओं का अनुकरण करते हुए शारीरिक व्यायाम करना, अथवा चीनी दर्शन, धर्म और किंवदंतियों से प्रेरित प्रशिक्षण तरीके शामिल हैं। शैलियां जो ची में हेरफेर पर केंद्रित है, कभी-कभी इन्हें आंतरिक (内家拳, नीजियाक्वान-nèijiāquán) लेबल का कहा जाता है, जबकि अन्य जो मांसपेशियों को उन्नत बनाने और हृदयवाहिका संबंधी फिटनेस पर केंद्रित होती है, वाह्य (外家拳, वैजियाक्वान-wàijiāquán) लेबल की बतायी जाती हैं। भौगोलिक स्थिति जैसे कि उत्तरी (北拳, बीक्वान-běiquán) और दक्षिणी (南拳, नैनक्वान -nánquán) भी वर्गीकरण का एक अन्य लोकप्रिय तरीका है। .

नई!!: चीन और चीनी मार्शल आर्ट · और देखें »

चीनी मुद्रा

हान राजवंश नकद सिक्का रॅन्मिन्बी चीनी जनवादी गणराज्य (PRC) की आधिकारिक मुद्रा है। यह मुख्य भूमि चीन में विधिमान्य मुद्रा है, लेकिन हांगकांग और मकाओ में नहीं। इसका संक्षिप्त रूप RMB है और रॅन्मिन्बी की इकाइयां हैं युआन (元), झाओ (角) और फ़ेन (分): 1 युआन .

नई!!: चीन और चीनी मुद्रा · और देखें »

चीनी राष्ट्रीय अंतरिक्ष प्रशासन

चीनी राष्ट्रीय अंतरिक्ष प्रशासन या चाइना नेशनल स्पेस एडमिनिसट्रेशन (सी एन एस ए) चीन की सरकारी अंतरिक्ष संस्था है जो की देश में अंतरिक्ष कार्यक्रमों का संचालन एवं विकास करती है। इसके वर्तमान स्वरूप का गठन सन १९९३ में हुआ था। इस संस्था की सबसे बड़ी उपलब्धि मानव को अंतरिक्ष में भेजना है। .

नई!!: चीन और चीनी राष्ट्रीय अंतरिक्ष प्रशासन · और देखें »

चीनी शेषफल प्रमेय

चीनी शेषफल प्रमेय (Chinese remainder theorem) को निम्नलिखित शब्दों में व्यक्त किया जा सकता है- यदि युग्मशः अभाज्य (pairwise coprime) हों यदि कोई पूर्णांक हैं, तो एक पूर्णांक ऐसा होगा कि, तथा कोई भी दो ऐसे पूर्णांक, सर्वसम मॉड्युलो होंगे।; उदाहरण ऐसा पूर्णांक x प्राप्त कीजिये जो निम्नलिखित शर्तों को सन्तुष्ट करती हो- x ≡ 3 (mod.5) x ≡ 5 (mod.13) x ≡ 7 (mod.29) x ≡ 1 (mod.41) X .

नई!!: चीन और चीनी शेषफल प्रमेय · और देखें »

चीनी साम्यवादी दल

चीनी साम्यवादी दल (Communist Party of China (CPC)) चीनी लोक गणराज्य (चीन) की संस्थापक तथा वर्तमान शासक दल है। श्रेणी:चीन.

नई!!: चीन और चीनी साम्यवादी दल · और देखें »

चीनी व्यंजन

चीनी व्यंजन चीन के प्रांतों में व्युत्पन्न खाद्य पदार्थों की विभिन्न शैलियों में से कोई भी है, जो विश्व के अन्य भागों में - एशिया से अमेरिकास, ऑस्ट्रेलिया, पश्चिमी यूरोप और दक्षिणी अफ़्रीका तक बहुत ही लोकप्रिय हो गए हैं। जहां ऐतिहासिक आप्रवासी चीनी आबादी बसी हों, वहीं भोजन की शैली विकसित हुई है - उदाहरण के लिए अमेरिकी चीनी व्यंजन और भारतीय चीनी व्यंजन चीनी व्यंजन के प्रमुख उदाहरण हैं, जिनका स्थानीय स्वाद के अनुरूप अनुकूलन किया गया है। हाल के वर्षों में, चीनी व्यंजन के क़द्रदान पूर्वी यूरोप और दक्षिण एशिया में भी उभरे हैं। पाक माइकेलिन गाइड ने भी अपने प्रकाशनों के हांगकांग और मकाओ संस्करण स्थापित करते हुए, चीनी व्यंजन में रुचि दर्शाई है। .

नई!!: चीन और चीनी व्यंजन · और देखें »

चीनी गणराज्य

चीनी गणराज्य या ताइवान (अंग्रेज़ी:Taiwan, चीनी:台灣) पूर्वी एशिया का एक देश है। यह ताइवान द्वीप तथा कुछ अन्य द्वीपों से मिलकर बना है। इसका प्रशासनिक मुख्यालय ताइवान द्वीप है। इसके पश्चिम में चीनी जनवादी गणराज्य (चीन), उत्तर-पूर्व में जापान, दक्षिण में फिलीपींस है। 1949 में चीन के गृहयुद्ध के बाद ताइवान चीन से अलग हो गया था लेकिन चीन अब भी इसे अपना ही एक असंतुष्ट राज्य कहता है और आज़ादी के ऐलान होने पर चीन ने हमले की धमकी दे रखी है। ताइवान वह देश है जो विश्व का सबसे अधिक जनसंख्या तथा सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक होते हुए भी संयुक्त राष्ट्र संघ का सदस्य नहीं है। यूं तो नाम से ऐसा प्रतीत होता है कि यह चीन का सरकारी नाम है पर वास्तव में ये चीन की लगभग सम्पूर्ण भूमि पर समाजवादियों के अधिपत्य हो जाने के बाद बचे शेष चीन का प्रशासनिक नाम है। यह चीन के वास्तविक भूभाग के बहुत कम भाग में फैला है और महज कुछ द्वीपों से मिलकर बना है। चीन के मुख्य भूभाग पर स्थपित प्रशासन का आधिकारिक नाम जनवादी गणराज्य चीन है और यह लगभग सम्पूर्ण चीन के अलावा तिब्बत, पूर्वी तुर्किस्तान तथा आंतरिक मंगोलिया पर भी शासन करता है तथा ताईवान पर भी अपना दावा करता है। .

नई!!: चीन और चीनी गणराज्य · और देखें »

टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज

टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेस लिमिटेड (टीसीएस) एक भारतीयबहुराष्ट्रीय कम्पनी सॉफ्टवेर सर्विसेस एवं कंसल्टिंग कंपनी है। यह दुनिया की सबसे बड़ी सूचना तकनीकी तथा बिज़नस प्रोसेस आउटसोर्सिंग सेवा प्रदाता कंपनियों में से है। साल २००७ में, इसे एशिया की सबसे बड़ी सूचना प्रोद्योगिकी कंपनी आँका गया। भारतीय आई टी कंपनियों की तुलना में टीसीएस के पास सबसे अधिक कर्मचारी हैं। टीसीएस के ४४ देशों में २,५४,००० कर्मचारी हैं। ३१ मार्च २०१२ को ख़त्म होने वाले वित्तीय वर्ष में कंपनी ने १०.१७ अरब अमेरिकी डॉलर का समेकित राजस्व हासिल किया। टीसीएस भारत के नेशनल स्टॉक एक्सचेंज तथा बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध कंपनी है। टीसीएस एशिया की सबसे बड़ी कंपनी समूह में से एक टाटा समूह का एक हिस्सा है। टाटा समूह ऊर्जा, दूरसंचार, वित्तीय सेवाओं, निर्माण, रसायन, इंजीनियरिंग एवं कई तरह के उत्पाद बनाता है। वित्त वर्ष 2009-10 में कंपनी का मुनाफा 33.19% बढ़कर 7,000.64 करोड़ रुपये हो गया। इस दौरान कंपनी की आमदनी करीब 8% बढ़कर 30,028.92 करोड़ रुपये हो गयी। अप्रैल 2018 में, टीसीएस बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में अपनी एम-कैप 6,79,332.81 करोड़ रुपये (102.6 अरब डॉलर) के बाद 100 अरब डॉलर के बाजार पूंजीकरण करने वाली पहली भारतीय आईटी कंपनी बन गई, और दूसरी भारतीय कंपनी (रिलायंस इंडस्ट्रीज ने 2007 में इसे हासिल करने के बाद)। .

नई!!: चीन और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज · और देखें »

टाइगर एयरवेज

टाइगर एयरवेज सिंगापुर पीटीई लिमिटेड, जिसे टाइगर एयर के नाम से जाना जाता हैं, एक कम लागत वाला (बजट) एयरलाइन है जिसका मुख्यालय सिंगापुर में हैं। यह मुख्य रूप से दक्षिण पूर्व एशिया, चीन और भारत जैसी क्षेत्रीय स्थलों को सेवा उपलब्ध कराती। इसे 2003 में एक स्वतंत्र एयरलाइन के रूप में स्थापित किया गया था, और 2010 में टाइगर एयरवेज होल्डिंग्स नाम के तहत सिंगापुर स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध किया। "." Civil Aviation Authority of Singapore.

नई!!: चीन और टाइगर एयरवेज · और देखें »

टंगस्टन

टंगस्टन से निर्मित फिलामेण्ट का आरम्भिक भाग टंगस्टन (Tungsten) अथवा वोल्फ्राम (Wolfram) आवर्त सारणी के छठे अंतर्वर्ती समूह (transition group) का तत्व है। प्राकृतिक अवस्था में इसके पाँच स्थायी समस्थानिक पाए जाते हैं, जिनकी द्रव्यमान संख्याएँ 180, 182, 183, 184 तथा 186 हैं। इनके अतिरिक्त 181, 185 तथा 187 द्रव्यमान संख्याओं के रेडियधर्मी समस्थानिक कृत्रिम साधनों द्वारा निर्मित हुए हैं। 18वी शताब्दी तक टंगस्टन के अयस्क टिन के ही यौगिक माने जाते थे। सन् 1781 में शेले (Scheele) नामक वैज्ञानिक ने यह सिद्ध किया कि इसके अयस्क में नवीन अम्ल वर्तमान है, जिसे उसने टंग्स्टिक अम्ल कहा। इसके बाद धातु द्वारा इस अम्ल के निर्माण की भी पुष्टि हुई। इस तत्व के दो मुख्य अयस्क हैं: शीलाइट (Scheelite) और वोल्फ्रमाइट (Wolframite)। शीलाइट अयस्क में प्रधानत:- कैल्सियम टंग्स्टेट, (Ca WO4), रहता है और वोल्फ्रेमाइट में लौह तथा मैंगनीज टंग्स्टेट, (FeWO4. Mn WO4), का संमिश्रण रहता है। टंग्स्टन के मुख्य उत्पादक बर्मा, चीन, जापान, बोलिविया, संयुक्त राज्य अमेरिका और आस्ट्रेलिया हैं। टंग्स्टन अयस्क को सांद्रित कर सोडियम कार्बोनेट, (Na2CO3), से मिलाकर परावर्तन भ्राष्ट्र में लगभग 1,0000 सें0 तक गरम करते हैं। इस क्रिया द्वारा सोडियम टंग्स्टेट, (Na2WO4), बनता है ओर लौह, मैंगनीज आदि अपने कार्वोनेटों में परिणत हो जाते हैं। सोडियम टंग्स्टेट गरम पानी में विलेय है और इस प्रकार सम्मिश्रण से अलग हो सकता है। तत्पश्चात उबलते हाइड्रोक्लोरिक अम्ल, हाक्लो (HCl), की क्रिया द्वारा टंग्स्टिक अम्ल अवक्षेपित हो जाता है, जिसे सुखाकर दहन करने पर पीले रंग का टंग्स्टन ऑक्साइड, (WO2), मिलता है। हाइड्रोजन द्वारा ऑक्साइड के अवकरण से टंग्स्टन धातु तैयार होती है। .

नई!!: चीन और टंगस्टन · और देखें »

टकलामकान

अंतरिक्ष से ली गई टकलामकान की एक तस्वीर टकलामकान रेगिस्तान का एक दृश्य नक़्शे में टकलामकान टकलामकान मरुस्थल (उइग़ुर:, तेकलीमाकान क़ुम्लुक़ी) मध्य एशिया में स्थित एक रेगिस्तान है। इसका अधिकाँश भाग चीन द्वारा नियंत्रित श़िंजियांग प्रांत में पड़ता है। यह दक्षिण से कुनलुन पर्वत शृंखला, पश्चिम से पामीर पर्वतमाला और उत्तर से तियन शान की पहाड़ियों द्वारा घिरा हुआ है। .

नई!!: चीन और टकलामकान · और देखें »

ट्यूलिप

ट्यूलिप के फूल ट्यूलिप (Tulip) वसंत ऋतु में फूलनेवाला पादप है। ट्यूलिप (Tulip) के नैसर्गिक वासस्थानों में एशिया माइनर, अफगानिस्तान, कश्मीर से कुमाऊँ तक के हिमालयी क्षेत्र, उत्तरी ईरान, टर्की, चीन, जापान, साइबीरिया तथा भूमध्य सागर के निकटवर्ती देश विशेषतया उल्लेखनीय हैं। वनस्पति विज्ञान के ट्यूलिया (Tulipa) वंश का पारिभाषिक उद्गम ईरानी भाषा के शब्द टोलिबन (अर्थात् पगड़ी) से इसलिये माना जाता है कि ट्यूलिप के फूलों को उलट देने से ये पगड़ी नामक शिरोवेश जैसे दिखाई देते हैं। ट्यूलिपा वंश के सहनशील पौधों का वानस्पतिक कुल लिलिएसिई (Liliaceae) है। टर्की से यह पौधा 1554 ई0 में ऑस्ट्रिया, 1571 ई0 में हॉलैंड और 1577 ई0 में इग्लैंड ले जाया गया। इस पौधे का सर्वप्रथम उल्लेख 1559 ई0 में गेसनर ने अपने लेखों और चित्रों में किया था और उसी के आधार पर ट्यूलिपा गेसेनेरियाना (Tulipa gesenereana) का नामकरण हुआ। अल्प काल में ही इसके मनमोहक फूलों के चित्ताकर्षक रूपरंग के कारण यह पौधा यूरोप भर में सर्वप्रिय होकर फैल गया है। ट्यूलिप के अंदर .

नई!!: चीन और ट्यूलिप · और देखें »

ट्रांस काराकोरम ट्रैक्ट

शक्स्गाम वादी कश्मीर के इस नक़्शे के मध्य उत्तर में देखी जा सकती है काराकोरम-पार क्षेत्र (अंग्रेज़ी: Trans-Karakoram Tract, ट्रांस काराकोरम ट्रैक्ट) या शक्सगाम वादी एक लगभग ५,८०० वर्ग किमी का इलाक़ा है जो कश्मीर के उत्तरी काराकोरम पर्वतों में शक्सगाम नदी के दोनों ओर फैला हुआ है। यह भारत के जम्मू और कश्मीर राज्य का हिस्सा हुआ करता था जिसे १९४८ में पाकिस्तान ने अपने नियंत्रण में ले लिया। १९६३ में एक सीमा समझौते के अंतर्गत पाकिस्तान ने इस क्षेत्र को चीन को भेंट कर दिया। पाकिस्तान की दलील थी कि इस से पाकिस्तान और चीन के बीच में मित्रता बन जाएगी और उनका कहना था की ऐतिहासिक रूप से इस इलाक़े में कभी अंतरराष्ट्रीय सीमा निर्धारित थी ही नहीं इसलिए इस ज़मीन को चीन के हवाले करने से पाकिस्तान का कोई नुक़सान नहीं हुआ। भारत इस बात का पुरज़ोर खंडन करता है और शक्सगाम को अपनी भूमि का अंग बताता है। उसके अनुसार यह पुरा क्षेत्र भारतीय जम्मू एवं कश्मीर राज्य का अभिन्न भाग है।, Routledge, 2009, ISBN 978-1-134-07956-8,...

नई!!: चीन और ट्रांस काराकोरम ट्रैक्ट · और देखें »

टैंक मैन

date .

नई!!: चीन और टैंक मैन · और देखें »

टेम्परा चित्रण

कानवास पर टेम्परा चित्रण: पीटर ब्रुघेल की 'The Misanthrope' नामक कृति, 1568 टेंपरा (Tempera) चित्र बनाने का एक परंपरागत विधान (टेकनीक) है और आज भी बहु प्रचलित है। टेंपरा चित्रण की मुख्य विशेषता यह है कि इसमें किसी प्रकार के संश्लेषयुक्त पदार्थ (बाइंर्डिग मैटीरियल) के साथ जलीय रंगों (वाटर कलर) का प्रयोग करते हैं। उक्त पदार्थ गोंद, अंडा केसिन आदि हो सकता है। इसमें रंगों का पारदर्शी रूप में प्रयोग नहीं होता। दूसरी ओर शुद्ध जलीय रंगविधान (वाटर कलर टेकनीक) में रंग पारदर्शी ही रही हैं परंतु यह विधान दो-ढाई सौ वर्षों से ही चला है। टेंपरा प्रणाली सभी देशों में प्रचलित है। इसके लिये दीवार, कपड़ा, काष्ठफलक, रेशम, कागज, भोजपत्र आदि कोई भी वस्तु आधार हो सकती है। उसपर टेंपरा प्रणाली से रंग लाकर चित्र बनाया जा सकता है। टेंपरा प्रणाली से भितिचित्रों के बनाने में उसपर एक विशेष प्रकार की जमीन तैयार करनी पड़ती है। उदाहरण के लिए अजंता में भीत को खुरदरा कर उसपर गोबर, कपड़े की महीन लुग्दी, छनी हुई मिट्टी, धान की भूसी और अलसी का लेप पलस्तर के रूप में किया गया। ऐसे कई स्तर एक के ऊपर एक करके लगाए गए कि वह शीशे के समान समतल हो गया। इस आधार या जमीन पर रंग लगाए गए, जो कुछ खनिज रंग थे जैसे गेरू, हिरौंजी, रामरज, कुछ पत्थरों को पीसकर बनाए गए जैसे लाजवर्द और दहने फिरंग, कुछ रासायनिक जैसे हरा ढाबा, आलतां, शंख या जस्ते से बना सफेदा आदि। भारत में इसी परंपरा का प्रयोग अन्य गुफाचित्रों में यथा बादामी, सित्तन्नवासल, तंजोर, कोचीन आदि में हुआ है। इसी प्रकार राजस्थानी, मुगल, पहाड़ी शैलियों में भी इसी का एक विभेद प्रयुक्त हुआ जिसे गुआश (Gouache) शैली कहते हैं। इसमें रंगों की कई तहें लगाते, परंतु प्रत्येक दो तहों के बीच सफेदे की एक तह (अस्तर) दे देते। इससे रंग में सोने जैसी चमक आ जाती और उसकी तह मोटी हो जाती। परंतु प्राय: सफेंद में गोंद अधिक होने से ये रंग तड़ककर टूट गए। चीन में चाऊ (Chou), तांग (Tang), सुंग (Sung), मिंग (Ming) आदि कालों में भी टेंपरा प्रणाली का उपयोग हुआ। यहाँ जमीन पर सरेस का अस्तर दिया जाता और कभी कभी फिटकरी के पानी का। जापान में भी इस विधान का प्रयोग हुआ, उदाहरणार्थ, होरियुजी (Horiyuji) मंदिर में चित्रित अवलोकितेश्वर की आकृति इसी प्रणाली में है। यूरोप में एत्रुस्कुल चित्र, माइकीनी ग्रीक चित्र या इजिप्त के पिरामडों के चित्र इसी प्रणाली में बने हैं। रेनेसां (Renaissance) युग के जिओत्तो (Giotto), मासाच्चिओ (Masaccio), पिअरो देला फ्रांचेस्का (Peiro della Francesca), माइकेल ऐंजेलो आदि के चित्र इसी विधान में बने। तैल-चित्र-विधान 500 वर्षों से ही चल रहा है, उसके पूर्व टेंपरा का विधान था। अब भी कुछ चित्रकार इस शैली को पसंद करते हैं क्योंकि इसमें तूलिका वे रोक टोक चलती है (रंगमाध्यम के कारण रुकती नहीं); रगों का भी अधिक सामंजस्य संभव है। .

नई!!: चीन और टेम्परा चित्रण · और देखें »

टेराकोटा

हनुमान जी का भारत का एक टैराकोटा मूर्ति। लाल रंग मिट्टी में लौह भस्म की अधिकता के कारण है। इसकी न्यूनता वाली मिट्टी से बना होने पर पकने पर हलका रंग भी हो सकता है। कांताजी मन्दिर के बाहर टैराकोटा रूपांकन। बीजिंग, चीन में एक टैराकोटा से अलंकृत इमारत। The Bell Edison Telephone Building, Birmingham, England. The Natural History Museum in London has an ornate terracotta facade typical of high Victorian architecture. The carvings represent the contents of the Museum. टैराकोटा (इतालवी भाषा: "पकी मिट्टी") एक सेरामिक है। इससे बर्तन, पाइप, सतह के अलंकरण जो कि इमारतोइं में होते हैं, आदि किये जाते हैं। .

नई!!: चीन और टेराकोटा · और देखें »

टेराकोटा सेना

टेराकोटा सैनिक टेराकोटा सेना या टेराकोटा योद्धा एवं अश्व टेराकोटा की मूर्तियाँ हैं जो चीन के प्रथम सम्राट किन शी हुआंग की सेना का निरूपण करतीं हैं। ये मूर्तियाँ २१०-२०९ ईसा पूर्व सम्राट के शव के साथ दफन की गयीं थीं। ये मूर्तियाँ, १९७४ में जल आपूर्ति सम्बन्धी निर्माण कार्य करते समय स्थानीय किसानों को प्राप्त हुइं थीं। इसमें ८ हजार से अधिक मूर्तियाँ सैनिक तथा अश्व वास्तिक आकार में हैं। १९८७ से यूनेस्को द्वारा विश्व विरासत सूची में सम्मिलित की गयीं हैं। .

नई!!: चीन और टेराकोटा सेना · और देखें »

टॅमिन्क ट्रॅगोपॅन

टॅमिन्क ट्रॅगोपॅन (Temminck's tragopan) (Tragopan temminckii) फ़ीज़ॅन्ट कुल के ट्रॅगोपॅन प्रजाति का पक्षी है। .

नई!!: चीन और टॅमिन्क ट्रॅगोपॅन · और देखें »

टोटो भाषा

टोटो एक चीनी-तिब्बती भाषा है जो भारत और भूटान की सीमा पर टोटो आदिवासियों द्वारा टोटोपारा में बोली जाती है। हिमालयाई भाषा परियोजना टोटो के व्याकरण के पहली तस्वीर बनाने का प्रयास कर रही है। टोटो भाषा यूनेस्को द्वारा गंभीर रूप से लुप्तप्राय भाषाओं की सूची मे शामिल है। एक अनुमान के अनुसार टोटो बोलने वालों की संख्या 1,000 है। अधिकांश परिवार इस भाषा का प्रयोग घर में करते हैं। हालांकि बच्चे इस भाषा का प्रयोग घर में सीखते हैं, परन्तु उन्हें स्कूल में बंगाली पढ़ाई जाती है। .

नई!!: चीन और टोटो भाषा · और देखें »

टोंकिन की खाड़ी

टोंकिन की खाड़ी (Gulf of Tonkin) दक्षिण चीन सागर के उत्तरी भाग में स्थित एक खाड़ी है जिसके पूर्व में उत्तरी वियतनाम, उत्तर में चीन का गुआंगशी प्रान्त और पश्चिम में चीन का हाइनान द्वीप तटवर्ती है। .

नई!!: चीन और टोंकिन की खाड़ी · और देखें »

टोक्यो

टोक्यो (जापानी: 東京, उच्चारणः तोउक्योउ) जापान की राजधानी और सबसे बड़ा नगर है। यह जापान के होन्शू द्वीप पर बसा हुआ है और इसकी जनसंख्या लगभग ८६ लाख है, जबकि टोक्यो क्षेत्र में १.२८ करोड़ और उपनगरीय क्षेत्रों को मिलाकर यहाँ अनुमानित ३.७ करोड़ लोग रहते हैं जो इसे दुनिया का सबसे अधिक जनसंख्या वाला महानगरीय क्षेत्र बनाता है। टोक्यो लगभग ८० किमी के क्षेत्र में फैला हुआ है और यह क्षेत्रफल की दृष्टि से भी विश्व का सबसे बड़ा नगरीय क्षेत्र है। टोक्यो को अक्सर एक शहर के रूप में जाना जाता हैं, लेकिन आधिकारिक तौर पर यह "महानगरीय प्रान्त" के रूप में जाना जाता हैं। टोक्यो महानगरीय प्रशासन, टोक्यो के 23 विशेष वार्डों (प्रत्येक वार्ड़ एक अलग शहर के रूप में शासित) का संचालन करती हैं। महानगरीय सरकार, प्रान्त के पश्चिमी भाग और दो बाहरी द्वीप श्रृंखलाएं के 39 नगरपालिका का भी प्रशासन करती हैं। विशेष वार्ड की आबादी 90 लाख मिलाकर, प्रान्त की कुल जनसंख्या 130 लाख से अधिक हैं। यह प्रान्त दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले महानगरीय क्षेत्र का हिस्सा है, जिसमें 37.8 मिलियन लोग और विश्व के सबसे बड़े शहरी ढांचे की अर्थव्यवस्था शामिल हैं। शहर की 51 कंपनी, फॉर्च्यून ग्लोबल 500 कंपनियों में आती हैं, जोकि दुनिया के किसी भी शहर की सबसे बड़ी संख्या हैं। अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय केंद्र विकास सूचकांक में टोक्यो का तीसरा स्थान हैं। यह शहर फ़ुजी टीवी, टोक्यो एमएक्स, टीवी टोक्यो, टीवी असाही, निप्पॉन टेलीविजन, एनएचके और टोक्यो ब्रॉडकास्टिंग सिस्टम जैसे विभिन्न टेलीविजन नेटवर्कों का घर भी हैं। ग्लोबल इकनॉमिक पावर इंडेक्स में टोक्यो पहले स्थान पर और ग्लोबल सिटीज इंडेक्स में चौथा स्थान पर हैं। जीएडब्ल्युसी की 2008 की सूची में इसे वैश्विक शहर बताया गया और 2014 में ट्रिपएडवियर्स के विश्व शहर सर्वेक्षण, टोक्यो को सबसे "सर्वश्रेष्ठ समग्र अनुभव" के रूप में सूचीबद्ध किया गया। मर्सर कंसल्टेंसी फर्म और अर्थशास्त्री इंटेलिजेंस यूनिट के क्रय शक्ति के आधार पर, 2015 में टोक्यो को 11वें सबसे महंगे शहर के रूप में स्थान दिया गया था। 2015 में, टोक्यो को मोनोकले पत्रिका द्वारा दुनिया में सर्वाधिक जीवंत शहर कहा गया।.

नई!!: चीन और टोक्यो · और देखें »

टीकाकरण

मुँह से पोलियो का टीका ग्रहण करता हुआ एक बच्चा किसी बीमारी के विरुद्ध प्रतिरोधात्मक क्षमता (immunity) विकसित करने के लिये जो दवा खिलायी/पिलायी या किसी अन्य रूप में दी जाती है उसे टीका (vaccine) कहते हैं तथा यह क्रिया टीकाकरण (Vaccination) कहलाती है। संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिये टीकाकरण सर्वाधिक प्रभावी एवं सबसे सस्ती विधि माना जाता है। टीके, एन्टिजनी (antigenic) पदार्थ होते हैं। टीके के रूप में दी जाने वाली दवा या तो रोगकारक जीवाणु या विषाणु की जीवित किन्तु क्षीण मात्रा होती है या फिर इनको मारकर या अप्रभावी करके या फिर कोई शुद्ध किया गया पदार्थ, जैसे - प्रोटीन आदि हो सकता है। सनसे पहले चेचक का टीका आजमाया गया जो कि भारत या चीन २०० इसा पूर्व हुआ। .

नई!!: चीन और टीकाकरण · और देखें »

एझोऊ

एझोऊ शहर के बीच में यान्गलान झील एझोऊ (चीनी: 鄂州, अंग्रेज़ी: Ezhou) चीन के हूबेई प्रान्त में स्थित एक विभाग-स्तर का शहर है। यह यांग्त्से नदी के दक्षिणी किनारे पर वूहान शहर से पूर्व में स्थित है।, New China pictures company, Beijing, Xinhua Pub.

नई!!: चीन और एझोऊ · और देखें »

एनी बेसेन्ट

डॉ एनी बेसेन्ट (१ अक्टूबर १८४७ - २० सितम्बर १९३३) अग्रणी आध्यात्मिक, थियोसोफिस्ट, महिला अधिकारों की समर्थक, लेखक, वक्ता एवं भारत-प्रेमी महिला थीं। सन १९१७ में वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्षा भी बनीं। .

नई!!: चीन और एनी बेसेन्ट · और देखें »

एबीबी एसिया ब्राउन बॉवेरी

ए॰बी॰बी, पूरा नाम ए॰एस॰ई॰ए ब्राउन बॉवेरी, मुख्यतः ऊर्जा और स्वचालन के क्षेत्रों में काम करने वाला एक स्विस-स्वीडिश बहुराष्ट्रीय निगम है। इसका मुख्यालय ज़्यूरिख़, स्विटज़रलैंड में है। एबीबी दुनिया की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग कंपनियों तथा सबसे बड़ी सामूहिक कंपनियों में से एक है। एबीबी विश्व के लगभग 100 देशों में कार्यरत है और इसमें तकरीबन 117,000 कर्मचारियों काम करते हैं। एबीबी ज़्यूरिक के सिक्स स्विस एक्सचेंज में, स्वीडेन के स्टॉकहोम स्टॉक एक्सचेंज में, तथा अमेरिका के न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध है। .

नई!!: चीन और एबीबी एसिया ब्राउन बॉवेरी · और देखें »

एम. जी. एम. मकाऊ

एम.

नई!!: चीन और एम. जी. एम. मकाऊ · और देखें »

एमएसएन

MSN (मूल रूप से Microsoft Network) इंटरनेट साइटों और माइक्रोसॉफ़्ट द्वारा प्रदान की गई सेवाओं का एक संग्रह है। Microsoft Network अगस्त 24, 95 विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम के रिलीज के साथ मेल खाना करने के लिए, 1995 पर एक ऑनलाइन सेवा और इंटरनेट सेवा प्रदाता के रूप में शुरू। MSN द्वारा की पेशकश की सेवाओं की रेंज 1995 में अपनी आरंभिक रिलीज के बाद से बदल गया है। MSN एक बार Windows 95, इंटरनेट और सबसे लोकप्रिय डायल-अप इंटरनेट सेवा प्रदाता एस में से एक पर इंटरैक्टिव मल्टीमीडिया सामग्री पर एक प्रारंभिक प्रयोग के लिए एक सरल ऑनलाइन सेवा थी। Microsoft MSN ब्रांड नाम 1990 के दशक में, सबसे विशेष रूप से Hotmail और मैसेन्जर, उनमें से कई को एक और ब्रांड नाम, Windows Live 2005 में reorganizing से पहले कई लोकप्रिय वेब-आधारित सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए इस्तेमाल किया। MSN इंटरनेट पोर्टल, MSN.com, अभी भी सामग्री का धन प्रदान करता है और वर्तमान में इंटरनेट पर 9 सबसे का दौरा किया डोमेन नाम है। .

नई!!: चीन और एमएसएन · और देखें »

एयर चाइना

Headquarters of Air China एयर चाइना लिमिटेड (abbreviated 国航) चीन की एक प्रमुख वायुयान सेवा हैं | .

नई!!: चीन और एयर चाइना · और देखें »

एयर ब्लू

एयर ब्लू लिमिटेड (जो की एयरब्लू के रूप में जाना जाता है) इस्लामाबाद, पाकिस्तान में इस्लामाबाद स्टॉक एक्सचेंज (आईएसई) टावर्स की १२वीं मंजिल पर अपने प्रधान कार्यालय के साथ एक निजी एयरलाइन है। यह पाकिस्तान की दूसरी सबसे बड़ी एयरलाइन है जिस्का २०% का बाजार में शेयर है। ऐरब्लू दुबई, अबू धाबी, शारजाह और मस्कट के लिए अंतरराष्ट्रीय सेवाओं के साथ चार घरेलू स्थलों इस्लामाबाद, लाहौर, कराची और पेशावर को भी जोड़ता है। यह ३० दैनिक सेवाओं के संचालन अनुसूचित उड़ानें संचालित करती है। इसका मुख्य अड्डा जिन्ना अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, कराची में स्थित है। .

नई!!: चीन और एयर ब्लू · और देखें »

एयरबस

एयरबस SAS (अंग्रेज़ी मेंचित्र:ltspkr.png, फ़्रांसीसी में /ɛʁbys/ और जर्मन में) एक यूरोपीय अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी कम्पनी EADS की एक वायुयान निर्माण सहायक कम्पनी है। ब्लैगनैक, फ़्रांस में ट्युलाउज़ के पास स्थित और पूरे यूरोप में महत्वपूर्ण गतिविधि वाली यह कम्पनी समस्त विश्व के जेट विमानों की कुल संख्या के लगभग आधे का उत्पादन करती है। एयरबस की शुरुआत अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी उत्पादकों के एक संघ के रूप में हुई। सदी के अंत के दौरान यूरोपीय सैन्य और अंतरिक्ष अनुसंधान कम्पनियों के एकीकरण ने 2001 में सरलीकृत संयुक्त स्टॉक कंपनी की स्थापना की अनुमति दी, जिसका स्वामित्व EADS (80%) और BAE सिस्टम्स (20%) के पास था। एक लंबी विक्रय प्रक्रिया के बाद 13 अक्टूबर 2006 को BAE ने अपनी हिस्सेदारी EADS को बेच दी। यूरोपीय संघ के चार देशों: जर्मनी, फ़्रांस, यूनाइटेड किंगडम और स्पेन, के सोलह स्थानों पर एयरबस के लगभग 57,000 कर्मचारी कार्य करते हैं। अंतिम असेम्बली उत्पादन ट्युलाउज़ (फ़्रांस), हैम्बर्ग (जर्मनी), सेविल (स्पेन) और, 2009 से, तियान्जिन (चीन) में होता है। संयुक्त राज्य अमरीका, जापान, चीन और भारत में एयरबस की सहायक कम्पनियां कार्यरत हैं। यह कम्पनी वाणिज्यिक रूप से व्यवहार्य पहले फ़्लाइ-बाइ-वायर (fly-by-wire) वायुयानों के उत्पादन और विपणन के लिये जानी जाती है। .

नई!!: चीन और एयरबस · और देखें »

एशिया

एशिया या जम्बुद्वीप आकार और जनसंख्या दोनों ही दृष्टि से विश्व का सबसे बड़ा महाद्वीप है, जो उत्तरी गोलार्द्ध में स्थित है। पश्चिम में इसकी सीमाएं यूरोप से मिलती हैं, हालाँकि इन दोनों के बीच कोई सर्वमान्य और स्पष्ट सीमा नहीं निर्धारित है। एशिया और यूरोप को मिलाकर कभी-कभी यूरेशिया भी कहा जाता है। एशियाई महाद्वीप भूमध्य सागर, अंध सागर, आर्कटिक महासागर, प्रशांत महासागर और हिन्द महासागर से घिरा हुआ है। काकेशस पर्वत शृंखला और यूराल पर्वत प्राकृतिक रूप से एशिया को यूरोप से अलग करते है। कुछ सबसे प्राचीन मानव सभ्यताओं का जन्म इसी महाद्वीप पर हुआ था जैसे सुमेर, भारतीय सभ्यता, चीनी सभ्यता इत्यादि। चीन और भारत विश्व के दो सर्वाधिक जनसंख्या वाले देश भी हैं। पश्चिम में स्थित एक लंबी भू सीमा यूरोप को एशिया से पृथक करती है। तह सीमा उत्तर-दक्षिण दिशा में नीचे की ओर रूस में यूराल पर्वत तक जाती है, यूराल नदी के किनारे-किनारे कैस्पियन सागर तक और फिर काकेशस पर्वतों से होते हुए अंध सागर तक। रूस का लगभग तीन चौथाई भूभाग एशिया में है और शेष यूरोप में। चार अन्य एशियाई देशों के कुछ भूभाग भी यूरोप की सीमा में आते हैं। विश्व के कुल भूभाग का लगभग ३/१०वां भाग या ३०% एशिया में है और इस महाद्वीप की जनसंख्या अन्य सभी महाद्वीपों की संयुक्त जनसंख्या से अधिक है, लगभग ३/५वां भाग या ६०%। उत्तर में बर्फ़ीले आर्कटिक से लेकर दक्षिण में ऊष्ण भूमध्य रेखा तक यह महाद्वीप लगभग ४,४५,७९,००० किमी क्षेत्र में फैला हुआ है और अपने में कुछ विशाल, खाली रेगिस्तानों, विश्व के सबसे ऊँचे पर्वतों और कुछ सबसे लंबी नदियों को समेटे हुए है। .

नई!!: चीन और एशिया · और देखें »

एशिया की संकटापन्न भाषाओं की सूची

संकटापन्न भाषा वह भाषा है जिसपर प्रयोगबाह्य होने का खतरा मँडरा रहा हो। इसका कारण प्रायः यह होता है कि इसके जीवित भाषियों की संख्या बहुत कम रह गयी हो। यदि किसी भाषा के सभी भाषी समाप्त हो चुके हों तो यह विलुप्त भाषा कहलाती है।.

नई!!: चीन और एशिया की संकटापन्न भाषाओं की सूची · और देखें »

एशियाई वित्तीय संकट

एशियाई वित्तीय संकट वित्तीय संकट की अवधि थी जो जुलाई 1 99 7 से शुरू हुए बहुत से पूर्व एशिया की मजबूती में थी और आर्थिक संभोग के चलते दुनिया भर में आर्थिक मंदी की आशंका को उठाया गया था। थाई सरकार के बाद थाई बहत के वित्तीय पतन के साथ थाईलैंड में शुरू हुआ संकट (थाईलैंड में टॉम यम गौग संकट के रूप में जाना जाता है; थाई: วิกฤต ต้มยำ กุ้ง) विदेशी मुद्रा की कमी के कारण थायी सरकार को बाँटने के लिए मजबूर किया गया था अमेरिकी डॉलर में खूंटी उस समय, थाईलैंड ने विदेशी कर्ज का बोझ हासिल कर लिया था जिसने देश को अपनी मुद्रा के पतन से पहले भी प्रभावी ढंग से दिवालिया बनाया था। जैसा कि संकट फैलता है, दक्षिण पूर्व एशिया और जापान के अधिकांश स्लिपिंग मुद्राएं, अवमूल्यन स्टॉक मार्केट और अन्य परिसंपत्ति की कीमतें, और निजी कर्ज में बढ़ोतरी देखी गई। इंडोनेशिया, दक्षिण कोरिया और थाईलैंड संकट से प्रभावित देशों थे। हांगकांग, लाओस, मलेशिया और फिलीपींस भी मंदी से चोट लगीं। ब्रुनेई, चीन, सिंगापुर, ताइवान और वियतनाम कम प्रभावित थे, हालांकि सभी को पूरे क्षेत्र में मांग और आत्मविश्वास से नुकसान उठाना पड़ा। 1993-96 में चार बड़े एसोसिएशन ऑफ साउथईश एशियन नेशंस (आसियान) अर्थव्यवस्थाओं में विदेशी ऋण-टू-जीडीपी अनुपात 100% से 167% तक बढ़ गया, फिर संकट के सबसे खराब दौरान 180% से ऊपर की वृद्धि हुई। दक्षिण कोरिया में, अनुपात 13% से बढ़कर 21% और उसके बाद के उच्चतम 40% हो गया, जबकि अन्य उत्तरी नवप्रवर्तनशील देशों ने बेहतर प्रदर्शन किया। केवल थाईलैंड और दक्षिण कोरिया में ऋण सेवा-से-निर्यात अनुपात में वृद्धि हुई है। यद्यपि एशिया की अधिकांश सरकार वित्तीय नीतियों को अच्छी तरह से देखती थी, लेकिन अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने दक्षिण कोरिया, थाईलैंड और इंडोनेशिया की मुद्राओं को स्थिर करने के लिए 40 अरब डॉलर का कार्यक्रम शुरू करने के लिए कदम बढ़ाया, विशेषकर संकट से प्रभावित अर्थव्यवस्थाएं। एक वैश्विक आर्थिक संकट को रोकने के प्रयासों ने इंडोनेशिया में घरेलू स्थिति को स्थिर करने के लिए कुछ नहीं किया, हालांकि। सत्ता में 30 वर्षों के बाद, राष्ट्रपति सुहार्टो को 21 मई 1998 को व्यापक दंगों के चलते गिरने के लिए मजबूर किया गया था, जिसने रुपिया के कठोर अवमूल्यन के कारण तेजी से बढ़ोतरी की। 1 99 8 के माध्यम से संकट का असर हुआ। 1998 में फिलीपींस की वृद्धि दर लगभग शून्य पर आई। केवल सिंगापुर और ताइवान ने ही सदमे से अपेक्षाकृत अछूता साबित कर दिया है, लेकिन दोनों पारित होने में गंभीर हिट हुए, पूर्व में इसके आकार और मलेशिया और इंडोनेशिया के बीच भौगोलिक स्थान के कारण हालांकि,1999 तक, विश्लेषकों ने संकेत दिए कि एशिया की अर्थव्यवस्थाओं को ठीक करना शुरू हो रहा है। 1997 एशियाई वित्तीय संकट के बाद, इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था वित्तीय पर्यवेक्षण पर वित्तीय स्थिरता की दिशा में काम कर रही है। 1 999 तक, एशिया ने विकासशील देशों में कुल पूंजी प्रवाह के लगभग आधे हिस्से को आकर्षित किया दक्षिण पूर्व एशिया की अर्थव्यवस्थाओं ने उच्च ब्याज दरों को विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षक बना दिया है जो उच्च दर की वापसी की तलाश में है। नतीजतन, इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्थाओं ने बड़े पैमाने पर धन प्राप्त किया और परिसंपत्ति की कीमतों में नाटकीय चलन का अनुभव किया। उसी समय, थाईलैंड, मलेशिया, इंडोनेशिया, सिंगापुर और दक्षिण कोरिया की क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं ने उच्च विकास दर, 8-12% जीडीपी,1980 के दशक के अंत में और 1993 के शुरूआती दौर में अनुभव किया था। यह उपलब्धि आईएमएफ और वित्तीय संस्थाओं सहित वित्तीय संस्थानों द्वारा व्यापक रूप से प्रशंसनीय थी। विश्व बैंक, और "एशियाई आर्थिक चमत्कार" के भाग के रूप में जाना जाता था। श्रेणी:वित्तीय समस्याएँ.

नई!!: चीन और एशियाई वित्तीय संकट · और देखें »

एशियाई इन्फ्रास्ट्रक्चर इनवेस्टमेंट बैंक

एशियाई इन्फ्रास्ट्रक्चर इनवेस्टमेंट बैंक अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्था है। जिसका उद्देश्य एशिया- प्रशांत क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के निर्माण का समर्थन करना है। बैंक चीन की सरकार द्वारा प्रस्तावित किया गया था .

नई!!: चीन और एशियाई इन्फ्रास्ट्रक्चर इनवेस्टमेंट बैंक · और देखें »

एस्‍टन मार्टिन

एस्टन मार्टिन लैगोंडा लिमिटेड (Aston Martin Lagonda Limited) वॉरविकशायर के गेडन में आधारित, लग्ज़री स्पोर्ट्स कारों का एक ब्रिटिश निर्माता है। कंपनी का नाम इस कंपनी के संस्थापकों में से एक, लायनेल मार्टिन, के नाम से और बकिंघमशायर में एस्टन क्लिंटन के पास एस्टन हिल स्‍पीड हिलक्‍लाइंब से लिया गया है। 1994 से 2007 तक एस्‍टन मार्टिन फोर्ड मोटर कंपनी (Ford Motor Company) का हिस्सा था जो 2000 में कंपनी के प्रीमियर ऑटोमोटिव ग्रुप का हिस्सा बना। 12 मार्च 2007 को एक संयुक्त उद्यम कंपनी ने इसे 479 मिलियन पाउंड में खरीद लिया जिसके प्रमुख डेविड रिचर्ड्स और सह-स्वामी कुवैत के इन्वेस्टमेंट डार (Investment Dar) एवं एडीम इन्वेस्टमेंट (Adeem Investment) और अंग्रेज़ व्यवसायी जॉन सिंडर्स थे। एस्‍टन मार्टिन (Aston Martin) की कीमत 925 मिलियन अमेरिकी डॉलर आंकने वाले फोर्ड (Ford) के पास इस कंपनी के 77 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य के शेयर थे। .

नई!!: चीन और एस्‍टन मार्टिन · और देखें »

एसोसिएशन ऑफ चार्टर्ड सर्टिफाइड एकाउंटेंट्स

यह एक आउटडोर परिचय है एसोसिएशन ऑफ चार्टर्ड सर्टिफाइड एकाउंटेंट्स (Association of Chartered Certified Accountants) एक ब्रिटिश लेखा निकाय है जो दुनिया भर में चार्टर्ड सर्टिफाइड एकाउंटेंट (पहचान के अक्षर एसीसीए (ACCA) या एफसीसीए (FCCA)) की योग्यता प्रदान करता है। यह दुनिया के सबसे बड़े और सबसे तेजी से बढ़ते लेखा निकायों में से एक है जिसके पास 170 देशों में 140,000 सदस्य और 404,000 सहयोगी एवं छात्र हैं (अप्रैल 2010 के अनुसार).

नई!!: चीन और एसोसिएशन ऑफ चार्टर्ड सर्टिफाइड एकाउंटेंट्स · और देखें »

एसीसी महिला एशिया कप

एसीसी महिला एशिया कप एक अंतरराष्ट्रीय एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय और ट्वेंटी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट टूर्नामेंट एशिया से महिला क्रिकेट टीमों से चुनाव लड़ा है। यह तिथि करने के लिए पांच बार खेला गया है। .

नई!!: चीन और एसीसी महिला एशिया कप · और देखें »

एज़्निस एयरवेज़

एज़्निस एयरवेज़ एल एल सी, उलन बटोर, मंगोलिया स्थित एक सूचीबद्ध और एक सनादी एयरलाइन थी। यह अपने समय में मंगोलिया की सबसे बड़ी घरेलू एयरलाइन थी और इसकी उड़ाने चीन और रशिया के लिए भी होती थीं। इसके पास उज़बेकिस्तान के लिए उड़ान की भी अनुमति थी पर इसने यह सेवा नहीं शुरू की। .

नई!!: चीन और एज़्निस एयरवेज़ · और देखें »

एवरेस्ट बेस कैंप

दुनिया की सबसे ऊँची चोटी माउंट एवरेस्ट नेपाल और तिब्बत की सीमा भी है। इस प्रकार इसके दो बेस कैंप हैं। एक दक्षिणी बेस कैंप जो कि नेपाल में स्थित है और दूसरा उत्तरी बेस कैंप जो कि तिब्बत में स्थित है। इन बेस कैंपों का प्रयोग पर्वतारोही माउंट एवरेस्ट के पर्वतारोहण के लिये आधार के तौर पर करते हैं। दक्षिणी बेस कैंप तक पहुँचने के लिये काफ़ी लंबे पैदल रास्ते का प्रयोग किया जाता है और भोजन-आपूर्ति आदि वहाँ के स्थानीय निवासी शेरपा उपलब्ध कराते हैं। दूसरी ओर, उत्तरी बेस कैंप तक सड़क बनी हुई है। बेस कैंपों पर पर्वतारोही कई-कई दिनों तक रुकते हैं ताकि वातावरण के अनुकूल हो सकें। .

नई!!: चीन और एवरेस्ट बेस कैंप · और देखें »

एविक एजी600

एविक एजी600 (AVIC AG600), कुनलांग (鲲 龙) नामक कोड, जिसे टीए-600 भी कहा जाता है, वर्तमान में उड़ने वाला सबसे बड़ा उभयचर विमान है। यह चीन विमानन उद्योग निगम (एविक) द्वारा डिजाइन किया गया है। हवाई जहाज ने 24 दिसंबर 2017 को झुहाई, गुआंग्डोंग में अपनी पहली उड़ान भरी। एजी600 चीन की तीन राज्य-अनुमोदित "बड़ी विमान परियोजनाओं" में से एक है। .

नई!!: चीन और एविक एजी600 · और देखें »

एवेंक लोग

सन् १९०० के आसपास साइबेरिया में खींची गई कुछ एवेंकियों की तस्वीर एक पारम्परिक एवेंक ओझा (जो पुजारी और हक़ीम दोनों का स्थान रखता था) की पोशाक एवेंक लोग (रूसी: Эвенки, एवेंकी; मंगोल: Хамниган, ख़ामनिगन; अंग्रेजी: Evenk) पूर्वोत्तरी एशिया के साइबेरिया, मंचूरिया और मंगोलिया क्षेत्रों में बसने वाली एक तुन्गुसी जाति का नाम है। रूस के साइबेरिया इलाक़े में सन् २००२ में ३५,५२७ एवेंकी थे और यह औपचारिक रूप से 'उत्तरी रूस की मूल जनजाति' की सूची में शामिल थे।, José Antonio Flores Farfán, Fernando F. Ramallo, John Benjamins Publishing Company, 2010, ISBN 978-90-272-0281-9,...

नई!!: चीन और एवेंक लोग · और देखें »

एक्नेस समूह

EXNESS वैश्विक वित्तीय बाजार में सक्रिय कंपनियों का एक समूह है। EXNESS समूह का प्राथमिक कार्य ऑनलाइन ट्रेडिंग के लिए अंतर्राष्ट्रीय विदेशी विनिमय बाजार में सेवाएं प्रदान करना है। .

नई!!: चीन और एक्नेस समूह · और देखें »

एक्यूपंक्चर

हुआ शउ से एक्यूपंक्चर चार्ट (fl. 1340 दशक, मिंग राजवंश). शि सी जिंग फ़ा हुई की छवि (चौदह मेरिडियन की अभिव्यक्ति). (टोक्यो: सुहाराया हेइसुके कंको, क्योहो गन 1716). एक्यूपंक्चर (Accupuncture) दर्द से राहत दिलाने या चिकित्सा प्रयोजनों के लिए शरीर के विभिन्न बिंदुओं में सुई चुभाने और हस्तकौशल की प्रक्रिया है।एक्यूपंक्चर: दर्द से राहत दिलाने, शल्यक बेहोशी और उपचारात्मक उद्देश्यों के लिए परिसरीय नसों के समानांतर शरीर के विशिष्ट भागों में बारीक सुईयां चुभाने का चीना अभ्यास.

नई!!: चीन और एक्यूपंक्चर · और देखें »

एक्यूप्रेशर

एक्यूप्रेशर शरीर के विभिन्न हिस्सों के महत्वपूर्ण बिंदुओं पर दबाव डालकर रोग के निदान करने की विधि है। चिकित्सा शास्त्र की इस शाखा का मानना है कि मानव शरीर पैर से लेकर सिर तक आपस में जुड़ा है। हजारों नसें, रक्त धमनियां, मांसपेशियां, स्नायु और हड्डियों के साथ अन्य कई चीजें आपस में मिलकर इस मशीन को बखूबी चलाती हैं। अत: किसी एक बिंदु पर दबाव डालने से उससे जुड़ा पूरा भाग प्रभावित होता है। यह चीन की चिकित्सा पद्धति है। इसके अंतर्गत लगातार अध्ययनों के बाद मानव शरीर में एक से दो हजार ऐसे बिंदु चिन्हित किए गए हैं, जिन्हें एक्यूप्वाइंट कहा जाता है। जिस जगह दबाव डालने से दर्द हो उस जगह दबने से सम्बन्धित बिनदु कि बीमारी दुर होती है।;सारसुत्र जिस जगह दबाव दालने से दर्द हो उस जगह दबाने से सम्बन्धित बिन्दु कि बीमारी दूर होती है। .

नई!!: चीन और एक्यूप्रेशर · और देखें »

एकीकृत गाइडेड मिसाइल विकास कार्यक्रम

एकीकृत गाइडेड मिसाइल विकास कार्यक्रम (अंग्रेज़ी: Integrated Guided Missile Develoment Program-IGMDP; इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम) घोषित परमाणु राज्यों (चीन, ब्रिटेन, फ़्रांस, रूस, और संयुक्त राज्य अमेरिका) के बाद के मिसाइल कार्यक्रमों में से एक है। भारत अपने परिष्कृत मिसाइल और अंतरिक्ष कार्यक्रमों के साथ, देश में ही लंबी दूरी की परमाणु मिसाइलों के विकास में तकनीकी रूप से सक्षम है। बैलिस्टिक मिसाइलों में भारत का अनुसंधान 1960 के दशक में शुरू हुआ। जुलाई 1983 में भारत ने स्वदेशी मिसाइल के बुनियादी ढांचे को विकसित करने के उद्देश्य के साथ समन्वित निर्देशित प्रक्षेपास्त्र विकास कार्यक्रम (इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम-IGMDP) की शुरुआत की। आईजीएमडीपी द्वारा देश में ही विकसित सबसे पहली मिसाइल पृथ्वी थी। भारत की दूसरी बैलिस्टिक मिसाइल प्रणाली अग्नि मिसाइलों की श्रृंखला है जिसकी मारक क्षमता पृथ्वी मिसाइलों से ज्यादा है। .

नई!!: चीन और एकीकृत गाइडेड मिसाइल विकास कार्यक्रम · और देखें »

ऐ मेरे वतन के लोगों

ऐ मेरे वतन के लोगो एक हिन्दी देशभक्ति गीत है जिसे कवि प्रदीप ने लिखा था और जिसे सी॰ रामचंद्र ने संगीत दिया था। ये गीत १९६२ के चीनी आक्रमण के समय मारे गए भारतीय सैनिकों को समर्पित था। यह गीत तब मशहूर हुआ जब लता मंगेशकर ने इसे नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस के अवसर पर रामलीला मैदान में तत्कालीन प्रधानमंत्री पं॰ जवाहरलाल नेहरू की उपस्थिति में गाया।। चीन से हुए युद्ध के बाद 27 जनवरी 1963 में डेल्ही नेशनल स्टेडियम में स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने दिया था। यह कहा जाता है इस गाने को सुनने के बाद नेहरु जी की ऑंखें भर आई थीं। .

नई!!: चीन और ऐ मेरे वतन के लोगों · और देखें »

ऐलिस इन वण्डरलैण्ड (२०१० चलचित्र)

ऐलिस इन वण्डरलैण्ड (Alice in Wonderland अर्थ: आश्चर्यलोक में ऐलिस) २०१० का कम्प्यूटर-ऐनिमेटिड/लाइव एक्शन फन्तासी युक्त एक अमेरिकी चलचित्र है जिसका निर्देश्न टिम बर्टन, लेखन लिण्डा वुल्वर्टन द्वारा किया गया था और वॉल्ट डिज़्नी पिक्चर्स द्वारा जारी किया गया था। चलचित्र में मुख्य भुमिका में मिआ वाशिकोफ़्स्का, जॉनी डॅप, हॅलॅना बॉन्हाम कार्टर, ऐनी हैथवे, क्रिस्पिन ग्लोवर, माइकल शीन, मैट लुकास और स्टीफ़न फ़्राइ हैं। यह चलचित्र लुइस कैरोल द्वारा १८८५ में लिखे फन्तासी उपन्यास ऐलिसेज़ एड्वैन्चर्स इन वण्डरलैण्ड और इसकी उत्तरकथा थ़्रू द लुकिंग ग्लास से प्रेरित है। वासिकोवा ने इस चलचित्र में उन्नीस वर्षीय ऐलिस की भुमिका निभाई है, जो वण्डरलैण्ड की अपनी पिछली यात्रा में तेरह वर्ष पहले आई थी। उसे यह बताया जाता है कि केवल वही एक है जो ड्रैगन जैसे जीव जैबरवॉकी को मार सकती है। जैबरवॉकी, रॅड क्वीन का पालतू जीव है जिसके दम पर वह अण्डरलैण्ड के निवासियों को डराती, धमकाती और प्रताड़ित करती रहती है। अगस्त २०१२ की स्थिति तक यह चलचित्र सर्वसामयिक सर्वाधिक कमाई करने वाले चलचित्रों की सूची में ग्यारहवें स्थान पर है। .

नई!!: चीन और ऐलिस इन वण्डरलैण्ड (२०१० चलचित्र) · और देखें »

ऐंथ्रासाइट

ऐंथ्रासाइट कोयला ऐंथ्रासाइट (Anthracite) कोयले की सबसे अच्छी किस्म का नाम है। इसका रंग काला होता है, पर हाथ में लेने पर उसे काला नहीं करता। इसकी चमक अधात्विक होती है। टूटने पर इसके नवीन पृष्ठों में से एक अवतल और दूसरा उत्तल दिखाई पड़ता है; इसे ही शंखाभ (कनकॉयडल) टूट कहते हैं। इसमें बहुधा विभंग समतल विद्यमान रहते हैं। इसकी कठोरता ०.५ से २.५ तक तथा आपेक्षिक घनत्व १.३६ से १.८४ तक होता है। .

नई!!: चीन और ऐंथ्रासाइट · और देखें »

झपकी

एक झपकी लेते हुए एक जवान औरत का चित्र.(झूला, गस्टेव कुर्बेट (1844).) झपकी दोपहर की शुरूआत, अक्सर दोपहर के भोजन के बाद थोड़ी देर के लिए उंघने को कहते हैं। नींद का इस तरह का समय कुछ देशों, खासकर जहां मौसम गर्म होता है, में एक आम परंपरा है। सियेस्ट शब्द लैटिन होरा सेक्सटा - "छठा घंटा" (भोर से दोपहर तक की गिनती, इसलिए दोपहर यानी "दोपहर का आराम").

नई!!: चीन और झपकी · और देखें »

झियांगतान

यह चीन के हुनान प्रांत में स्थित एक शहर है। यह अपनी कोयले की खानों के लिए प्रसिद्ध है। .

नई!!: चीन और झियांगतान · और देखें »

झज्जर

हरियाणा में स्थित झज्जर बहुत सुन्दर पर्यटन स्‍थल है। यह दिल्ली से लगभग 65 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। झज्‍जर की स्थापना छज्जु नाम के एक जाट ने की थी। पहले इसका नाम 'छज्जु नगर' था लेकिन बाद में यह झज्जर हो गया। हरियाण के दो मुख्य शहर बहादुरगढ़ और बेरी है। बहादुरगढ़ की स्थापना राठी जाटों ने की थी। पहले बहादुरगढ़ को सर्राफाबाद के नाम से जाना जाता था। पिछले दिनों बहादुरगढ़ का तेजी से औद्योगिकरण हुआ है। बेरी इसका दूसरा मुख्य शहर है। यहां भीमेश्वरी देवी का प्रसिद्ध मन्दिर है। इस मन्दिर में पूजा करने के लिए देश-विदेश से पर्यटक प्रतिवर्ष आते हैं। मन्दिरों के अलावा पर्यटक यहां पर भिंडावास पक्षी अभ्यारण घूमने भी जा सकते हैं। .

नई!!: चीन और झज्जर · और देखें »

झगड़ते राज्यों का काल

३५० ईसापूर्व में झगड़ते राज्यों की स्थिति झगड़ते राज्यों के काल से एक लोहे की और दो कांसे की तलवारें झगड़ते राज्यों का काल (चीनी:战国时代, झांगुओ शिदाई; अंग्रेज़ी: Warring States Period) प्राचीन चीन के पूर्वी झोऊ राजवंश काल के दुसरे भाग को कहते हैं, जो लौह युग में लगभग ४७५ ईसापूर्व से २२१ ईसापूर्व तक चला। पूर्वी झोऊ राजकाल में इस से पहले बसंत और शरद काल आया था। झगड़ते राज्यों के काल के बाद २२१ ईसापूर्व में चिन राजवंश का काल आया जिन्होनें चीन को फिर से एक व्यवस्था में संगठित किया। ध्यान रखने योग्य बात है कि पूर्वी झोऊ काल में वैसे तो झोऊ सम्राट को सर्वोच्च कहा जाता था, लेकिन यह सिर्फ़ नाम मात्र ही था - सारी शक्तियाँ वास्तव में भिन्न राज्यों के राजाओं-जागीरदारों के पास थीं। 'झगड़ते राज्यों के काल' का नाम हान राजवंश के दौरान लिखे गए 'झगड़ते राज्यों का अभिलेख' नामक इतिहास-ग्रन्थ से लिया गया है। इस बात पर विवाद है कि 'बसंत और शरद काल' किस समय ख़त्म हुआ और 'झगड़ते राज्यों का काल' कब शुरू हुआ, लेकिन बहुत से इतिहासकार जिन (Jìn) नामक राज्य के वहाँ की तीन शक्तिशाली परिवारों के बीच के विभाजन को इस काल की आरंभिक घटना मानते हैं और यह ४०३ ईसापूर्व में हुआ था।, P. J. Ivanhoe, Bryan William Van Norden, Hackett Publishing, 2005, ISBN 978-0-87220-780-6,...

नई!!: चीन और झगड़ते राज्यों का काल · और देखें »

झुआंग लोग

गुआंगशी प्रांत के लोंगझोऊ ज़िले की कुछ महिला झुआंग कलाकार पिंग आन, एक झुआंग गाँव झुआंग (झुआंग: Bouxcuengh, चीनी: 壮族, अंग्रेज़ी: Zhuang) दक्षिणी चीन में बसने वाली एक मानव जाति का नाम है। यह अधिकतर चीन के गुआंगशी प्रांत में रहते हैं, जिस वजह से उसे 'गुआंगशी झुआंग स्वशासित प्रदेश' (Guangxi Zhuang Autonomous Region) भी कहा जाता है। इसके आलावा झुआंग समुदाय युन्नान, गुआंगदोंग, गुइझोऊ और हूनान प्रान्तों में भी मिलते हैं। कुल मिलाकर दुनिया भर में झुआंग लोगों की आबादी १.८ करोड़ है। हान चीनी लोगों के बाद यह चीन का दूसरा सबसे बड़ा जातीय समुदाय है। झुआंग भाषाएँ ताई-कादाई भाषा-परिवार की सदस्य हैं - इस परिवार की भाषाएँ पूर्वोत्तर भारत में भी मिलती हैं। .

नई!!: चीन और झुआंग लोग · और देखें »

झू मी (बैडमिंटन)

झोउ मी/झू मी (का जन्म फरवरी 18, 1979 को नानिंग, गुआंगशी) में हुआ था। मी चीन की एक महिला बैडमिंटन खिलाड़ी हैं। अपने अधिकांश पेशेवर जीवन में उन्होंने चीनी जनवादी गणराज्य का प्रतिनिधित्व किया लेकिन 2007 के बाद से वो हांग कांग के तरफ से खेल रही हैं। हांग कांग प्रशासनिक तौर पर चीन का हिस्सा होते हुए भी अपना अलग खेल कार्यक्रम चलाता है और चीन से अलग टीमें रखता है। 2010 में मी को ड्रग परीक्षण में अनुत्तीर्ण होने पर 2-वर्ष का प्रतिबंध झेलना पड़ा। .

नई!!: चीन और झू मी (बैडमिंटन) · और देखें »

झेन

झेन (अंग्रेजी: Zen) को ‘जेन’ भी कहा जाता है। इसका शाब्दिक अर्थ 'ध्यान' माना जाता है। यह महायान बौद्ध धर्म का सम्प्रदाय है, जो जापान के सेमुराई वर्ग का धर्म है। सेमुराई समाज यौद्धाओं का समाज है। इसे दुनिया की सर्वाधिक बहादुर कौम माना जाता था। झेन का विकास चीन में लगभग 500 ईस्वी में हुआ। चीन से यह 1200 ईस्वी में जापान में फैला। प्रारंभ में जापान में बौद्ध धर्म का कोई संप्रदाय नहीं था किंतु धीरे-धीरे वह बारह सम्प्रदायों में बँट गया जिसमें झेन भी एक था। ऐसा माना जाता है कि सेमुराई वर्ग को अधिक आज्ञापालक तथा शूरवीर बनाने के लिए ही जेन संप्रदाय का सूत्रपात हुआ था। दरअसल झेन संप्रदाय शिंतो और बौद्ध धर्म का समन्वय था। माना यह भी जाता है कि बौद्ध धर्म को जापान ने सैनिक रूप देने की चेष्ठा की थी, इसीलिए उन्होंने शिंतो धर्म के आज्ञापालक और देशभक्ति के सिद्धांत को भी इसमें शामिल कर सेमुराइयों को मजबूत किया। सेमुराई जापान का सैनिक वर्ग था। 1868 में उक्त सैनिकों के वर्ग का अंत हो गया। .

नई!!: चीन और झेन · और देखें »

झेंगझोऊ

झेंगझोऊ (郑州, Zhengzhou) मध्य चीन के हेनान प्रांत की राजधानी और सबसे बड़ा शहर है। यह एक उपप्रांत (प्रीफ़ेक्चर, दिजी) का दर्जा रखने वाला एक नगर है। प्राचीन चीन में यह नगर चीन की राजधानी रहा है। सन् २०१० की जनगणना में इसकी आबादी ८६,२६,५०५ अनुमानित की गई थी जिसमें से ३९,८०,२५० इसके शहरी क्षेत्र में रह रहे थे। अपने लम्बे इतिहास के कारण झेंगझोऊ में बहुत से पुरातन स्थल हैं। शहर से ५० मील दक्षिण-पश्चिम में शाओलिन मंदिर स्थित है जिसे सन् ४९५ ईसवी में भारत से आये बातुओ नामक भिक्षु के लिए निर्मित किया गया था। ५३७ ईसवी में यहाँ बोद्धिधर्म नाम का एक और भारतीय भिक्षु आकर शिक्षा देने लगा और उसने कुंग-फ़ू सिखाई।, Victoria Urubshurow, JBE Online Books, ISBN 978-0-9801633-0-8,...

नई!!: चीन और झेंगझोऊ · और देखें »

झोऊ राजवंश

चीन के झोऊ राजवंश का इलाक़ा (लाल रंग) पश्चिमी झोऊ युग में बना कांसे का एक समारोहिक बर्तन झोऊ राजवंश (चीनी: 周朝, झोऊ चाओ; पिनयिन अंग्रेज़ीकरण: Zhou dynasty) प्राचीन चीन में १०४६ ईसापूर्व से २५६ ईसापूर्व तक राज करने वाला एक राजवंश था। हालांकि झोऊ राजवंश का राज चीन के किसी भी अन्य राजवंश से लम्बे काल के लिए चला, वास्तव में झोऊ राजवंश के शाही परिवार ने, जिसका पारिवारिक नाम 'जी' (姬, Ji) था, चीन पर स्वयं राज केवल ७७१ ईसापूर्व तक किया। झोऊ राजवंश के इस १०४६ से ७७१ ईसापूर्व के काल को, जब जी परिवार का चीन पर निजी नियंत्रण था, पश्चिमी झोऊ राजवंश काल कहा जाता है। ७७१ ईसापूर्व के बाद के काल को पूर्वी झोऊ राजवंश काल कहा जाता है।, Dr John A.G. Roberts, Palgrave Macmillan, 2011, ISBN 978-0-230-34536-2,...

नई!!: चीन और झोऊ राजवंश · और देखें »

झी लिन झांग

झी लिन झांग चीन की एक फैशन मॉडल एवं सुन्दरी है जिसने वर्ष २००७ में मिस चाइना वर्ल्ड और चीन की प्रतियोगी के रूप में २००७ में विश्व सुन्दरी प्रतियोगिता का खिताब जीता। वो पूर्वी एशियाई मूल की प्रथम विश्व सुन्दरी हैं। .

नई!!: चीन और झी लिन झांग · और देखें »

ठाकुर गदाधर सिंह

ठाकुर गदाधर सिंह (1869 -- 1918) एक सैनिक एवं हिन्दी साहित्यकार थे। ठाकुर गदाधर सिंह का जन्म एक मध्यमवर्गीय राजपूत परिवार में हुआ था। आरंभ में इन्होंने एक सफल सैनिक का जीवन व्यतीत किया। बाद में यात्रावृत्तांतलेखन की ओर प्रवृत्त हुए। 1900 में इन्होंने एक सैनिक अधिकारी के रूप में चीन की यात्रा की। उसी समय चीन में 'बाक्सर विद्रोह' हुआ था। ब्रिटिश सरकार ने 'बाक्सर विद्रोह' का दमन करने के लिए राजपूत सेना की एक टुकड़ी चीन भेजी थी, ठाकुर साहब उसके एक विशिष्ट सदस्य थे। सम्राट् एडवर्ड के तिलकोत्सव के समारोह में आपको इंग्लैंड जाने का अवसर प्राप्त हुआ। वहाँ जाकर ठाकुर साहब ने जो कुछ देखा, उसे अपनी लेखनी द्वारा व्यक्त किया। ठाकुर साहब से पहले शायद ही किसी ने यात्रा संस्मरण लिखे हों। सन्‌ 1918 ई. में उनचास वर्ष की अल्पायु में इनका स्वर्गवास हो गया। .

नई!!: चीन और ठाकुर गदाधर सिंह · और देखें »

डब्ल्यूयू-14

डब्ल्यूयू-14 (WU-14) अमेरिकी रक्षा मन्त्रालय पेंटागन का एक चीनी प्रयोगात्मक हाइपरसोनिक मिसाइल के लिए कोड नाम था, जिसे अब डीएफ-जेडएफ कहा जाता है। .

नई!!: चीन और डब्ल्यूयू-14 · और देखें »

डाटदार पुल

डाटदार पुल (Arc Bridge) डाटदार पुल या चाप सेतु (arch bridge) ऐसा पुल होता है जिसमें दोनो सिरों पर सहारा देने वाले स्तम्भों के उपर एक चापनुमा संरचना होती है। .

नई!!: चीन और डाटदार पुल · और देखें »

डिस्को डांसर

डिस्को डांसर 1982 की एक भारतीय बॉलीवुड संगीत नाटक फिल्म है, जिसे राही मासुम रजा द्वारा लिखा एवं बब्बर सुभाष द्वारा निर्देशित किया गया। इसमें मिथुन चक्रवर्ती ने प्रमुख भूमिका अदा की है, इसके अलावा सहायक भूमिका में किम यशपाल और राजेश खन्ना हैं। यह फिल्म एक युवा नुक्कड़ कलाकार के "रंक से राजा" बनने की कहानी बताती है। यह फिल्म विशेष रूप से बप्पी लाहिड़ी द्वारा रचित फिल्मी डिस्को बॉलीवुड गाने और उस पर अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती के नृत्य के लिए प्रसिद्ध है। "आई एम ए डिस्को डांसर", "जिमी जिमी जिमी आजा" (पार्वती खान द्वारा गाया गया), "याद आ रहा है" (विजय बेनेडिक्ट और बप्पी लाहिड़ी द्वारा गाया गया) और "गोरो की ना कालो की" (सुरेश वाडेकर व उशा मंगेशकर द्वारा गाया गया) सहित गाने बहुत लोकप्रिय हो गए। इस फिल्म को विश्वव्यापी सफलता मिली, इसकी लोकप्रियता दक्षिणी/मध्य/पूर्वी एशिया, सोवियत संघ, पूर्वी यूरोप, चीन, मध्य पूर्व, तुर्की और पूर्वी/पश्चिमी अफ्रीका में फैली हुई थी। यह सोवियत संघ में हिन्दी की सबसे सफल फिल्मों में से एक थी, जहाँ इसने 60.9 मिलियन दर्शकों को आकर्षित किया। यह भारत की सबसे पहली 100 करोड़ रूपए वाली फिल्म थी, जिसें बाद में "हम आपके हैं कौन" (1994) ने पीछे छोड़ दिया। इस फिल्म ने मिथुन को दक्षिणी एशिया और सोवियत संघ में काफी लोकप्रिय बना दिया। चीन में, इसका संगीत काफी लोकप्रिय रहा और उसे गोल्ड अवार्ड भी दिया गया। .

नई!!: चीन और डिस्को डांसर · और देखें »

डिजास्टर फ्लिक 2012

नवंबर 2009 के दूसरे सप्ताह में जारी की गई इस फिल्म में एक अश्वेत अमेरिकी राष्ट्रपति को यह आभास होता है कि 2112 में इस दुनिया का अंत हो जाएगा। लेकिन जो वैज्ञानिक शोध दुनिया की रक्षा कर सकते हैं, वे शोध अमेरिका में नहीं, बल्कि हिंदुस्तान में हुए हैं। आवागमन की बड़ी-बड़ी नौकाएं जो लोगों को सुरक्षित ले जा सकती हैं, वे चीन में बनाई गई हैं। इस सारे काल्पनिक वैज्ञानिक तामझाम और दहलाने वाले सिनेमाई प्रभाव के साथ कहानी की मुख्य अंतर्वस्तु यह है कि 2012 में अमेरिका वैश्विक सत्ता का केंद्र नहीं रह गया है। ताकत का यह पांसा उलट गया है। .

नई!!: चीन और डिजास्टर फ्लिक 2012 · और देखें »

डवे

डवे (बर्मी: ထားဝယ်မြို့) बर्मा के तनीन्थार्यी मण्डल की राजधानी है। यह डवे नदी के किनारे अंडमान सागर पर स्थित एक बंदरगाह शहर है। डवे क्षेत्र अपने काजू और सुपारी उत्पादन के लिये जाना जाता है, जो बड़ी मात्रा में चीन, भारत और थाईलैण्ड निर्यात होते हैं। .

नई!!: चीन और डवे · और देखें »

डंपिंग (मूल्य निर्धारण नीति)

अर्थशास्त्र में "डंपिंग" का मतलब किसी भी प्रकार के अत्याधिक कम मूल्य निर्धारण से है। हालांकि, आम तौर पर यह शब्द अब केवल अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कानून के संदर्भ में ही प्रयोग किया जाता है जहाँ डंपिंग की परिभाषा किसी देश के एक निर्माता द्वारा किसी उत्पाद को या तो इसकी घरेलू कीमत से नीचे या इसकी उत्पादन लागत से कम कीमत पर किसी दूसरे देश में निर्यात करने के रूप में दी जाती है। इस शब्द का एक नकारात्मक संकेतार्थ है लेकिन मुक्त बाजार के पैरोकार "डंपिंग" को उपभोक्ताओं के लिए फायदेमंद रूप में देखते हैं और यह मानते हैं कि इसे रोकने के लिए संरक्षणवाद के कुल मिलाकर नकारात्मक परिणाम होंगे.

नई!!: चीन और डंपिंग (मूल्य निर्धारण नीति) · और देखें »

ड्रैगन नृत्य

ड्रैगन नृत्य चीनी संस्कृति में पारंपरिक नृत्य एवं प्रदर्शन का एक रूप है। सिंह नृत्य की तरह इसे भी सबसे ज्यादा उत्सव समारोह में देखा जाता है। कई चीनी लोग 1970 के दशक में शुरू होने वाले चलन के एक हिस्से के रूप में एक जातिगत पहचान के एक चिह्न के रूप में अक्सर "ड्रैगन के वंशज " (龍的傳人 या 龙的传人, lóng de chuán rén) शब्द का इस्तेमाल करते हैं। एक अन्य व्युत्पत्ति (農的傳人) अर्थात् शेनोंग के वंशज से हुई है जो चीनी लोगों का पहला पौराणिक राजा था जिसने उनलोगों कृषि, क़ानून और चिकित्सा, सभ्यता की नींव के बारे में बताया। नृत्य में, लोगों का एक दल खंभों पर ड्रैगन लिए रहता है - जो चीनी ड्रैगन की एक छवि है। एक ड्रैगन की रचना ज्यादा से ज्यादा 50 लोगों से की जा सकती है। नृत्य दल एक घुमावदार और लहरदार तरीके से इस नदी आत्मा की कल्पित गतिविधियों की नक़ल करता है। प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शित की जाने वाली गतिविधियां परंपरागत रूप से शक्ति और गरिमा का प्रदर्शन करने वाले ड्रैगन की ऐतिहासिक भूमिकाओं का प्रतीक हैं। ड्रैगन नृत्य दुनिया भर में चीनी नगरों में विश्वव्यापी स्टार पर आयोजित होने वाले चीनी नव वर्ष समारोह की एक विशिष्टता है। ऐसी मान्यता है कि ड्रैग लोगों के लिए सौभाग्य लेकर आता है जो उनकी गुणवत्ता में दिखाई देता है जिसमें महान शक्ति, गरिमा, प्रजनन (सेक्स), बुद्धि और कल्याण शामिल है। ड्रैगन का स्वरूप भयावह होने के साथ-साथ साहसी भी है लेकिन इसका एक उदार स्वाभाव है और इसलिए अंत में यह शाही अधिकारी का प्रतिनिधित्व करने वाला एक प्रतीक बन गया। .

नई!!: चीन और ड्रैगन नृत्य · और देखें »

डेंगू बुख़ार

डेंगू बुख़ार एक संक्रमण है जो डेंगू वायरस के कारण होता है। समय पर करना बहुत जरुरी होता हैं. मच्छर डेंगू वायरस को संचरित करते (या फैलाते) हैं। डेंगू बुख़ार को "हड्डीतोड़ बुख़ार" के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इससे पीड़ित लोगों को इतना अधिक दर्द हो सकता है कि जैसे उनकी हड्डियां टूट गयी हों। डेंगू बुख़ार के कुछ लक्षणों में बुखार; सिरदर्द; त्वचा पर चेचक जैसे लाल चकत्ते तथा मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द शामिल हैं। कुछ लोगों में, डेंगू बुख़ार एक या दो ऐसे रूपों में हो सकता है जो जीवन के लिये खतरा हो सकते हैं। पहला, डेंगू रक्तस्रावी बुख़ार है, जिसके कारण रक्त वाहिकाओं (रक्त ले जाने वाली नलिकाएं), में रक्तस्राव या रिसाव होता है तथा रक्त प्लेटलेट्स  (जिनके कारण रक्त जमता है) का स्तर कम होता है। दूसरा डेंगू शॉक सिंड्रोम है, जिससे खतरनाक रूप से निम्न रक्तचाप होता है। डेंगू वायरस चार भिन्न-भिन्न प्रकारों के होते हैं। यदि किसी व्यक्ति को इनमें से किसी एक प्रकार के वायरस का संक्रमण हो जाये तो आमतौर पर उसके पूरे जीवन में वह उस प्रकार के डेंगू वायरस से सुरक्षित रहता है। हलांकि बाकी के तीन प्रकारों से वह कुछ समय के लिये ही सुरक्षित रहता है। यदि उसको इन तीन में से किसी एक प्रकार के वायरस से संक्रमण हो तो उसे गंभीर समस्याएं होने की संभावना काफी अधिक होती है।  लोगों को डेंगू वायरस से बचाने के लिये कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। डेंगू बुख़ार से लोगों को बचाने के लिये कुछ उपाय हैं, जो किये जाने चाहिये। लोग अपने को मच्छरों से बचा सकते हैं तथा उनसे काटे जाने की संख्या को सीमित कर सकते हैं। वैज्ञानिक मच्छरों के पनपने की जगहों को छोटा तथा कम करने को कहते हैं। यदि किसी को डेंगू बुख़ार हो जाय तो वह आमतौर पर अपनी बीमारी के कम या सीमित होने तक पर्याप्त तरल पीकर ठीक हो सकता है। यदि व्यक्ति की स्थिति अधिक गंभीर है तो, उसे अंतः शिरा द्रव्य (सुई या नलिका का उपयोग करते हुये शिराओं में दिया जाने वाला द्रव्य) या रक्त आधान (किसी अन्य व्यक्ति द्वारा रक्त देना) की जरूरत हो सकती है। 1960 से, काफी लोग डेंगू बुख़ार से पीड़ित हो रहे हैं। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से यह बीमारी एक विश्वव्यापी समस्या हो गयी है। यह 110 देशों में आम है। प्रत्येक वर्ष लगभग 50-100 मिलियन लोग डेंगू बुख़ार से पीड़ित होते हैं। वायरस का प्रत्यक्ष उपचार करने के लिये लोग वैक्सीन तथा दवाओं पर काम कर रहे हैं। मच्छरों से मुक्ति पाने के लिये लोग, कई सारे अलग-अलग उपाय भी करते हैं।  डेंगू बुख़ार का पहला वर्णन 1779 में लिखा गया था। 20वीं शताब्दी की शुरुआत में वैज्ञानिकों ने यह जाना कि बीमारी डेंगू वायरस के कारण होती है तथा यह मच्छरों के माध्यम से संचरित होती (या फैलती) है। .

नई!!: चीन और डेंगू बुख़ार · और देखें »

डॉ. रेड्डीज लेबोरेटरीज

डॉ॰ रेड्डीज लेबोरेटरीज लिमिटेड (Dr. Reddy's Laboratories Ltd.), जिसे डॉ रेड्डीज के नाम से ट्रेड किया जाता है, आज भारत की दूसरी सबसे बड़ी औषधि कंपनी है। इसकी स्थापना 1984 में डॉक्टर के.

नई!!: चीन और डॉ. रेड्डीज लेबोरेटरीज · और देखें »

डॉ. जॉर्ज ग्रियर्सन पुरस्कार

डॉ॰ जॉर्ज ग्रियर्सन पुरस्कार केन्द्री हिन्दी संस्थान द्वारा किसी जाने माने विदेशी को उसकी हिन्दी सेवाओं के लिए प्रदान किया जाता है। इसे १९९४ में प्रारंभ किया गया था। अभी तक इसे प्राप्त करनेवाले प्रमुख हिन्दी विद्वान इस प्रकार हैं- .

नई!!: चीन और डॉ. जॉर्ज ग्रियर्सन पुरस्कार · और देखें »

डोकलाम

भूटान डोकलाम एक पठार है जो दोनों भूटान और चीन अपने क्षेत्र मानते हैं। डोकलाम भूटान के हा घाटी, भारत के पूर्व सिक्किम जिला, और चीन के यदोंग काउंटी के बीच में है। इन्द्रस्त्रा ग्लोबल में प्रकाशित नवीनतम लेख के अनुसार, चल रहे संघर्ष के दौरान, चीन भारत के विरूद्ध अपने अंतर्राष्ट्रीय मीडिया नेटवर्क का उपयोग जानबूझकर विभिन्न आधार-आधारित तथ्यों को छिपाने की कोशिश कर रहा है। .

नई!!: चीन और डोकलाम · और देखें »

डोकलाम विवाद 2017

२०१७ का डोकलाम विवाद, डोकलाम (चीनी: 洞朗) में एक सड़क निर्माण को लेकर, भारतीय सशस्त्र बलों और चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के बीच जारी सैन्य सीमा गतिरोध को संदर्भित करता है। 18 जून, 2017 को इस गतिरोध की शुरुआत हुई, जब करीब 300 से 270 भारतीय सैनिक दो बुलडोज़र्स के साथ भारत-चीन सीमा पार कर पीएलए को डोकलाम में सड़क बनाने से रोक दिया। 9 अगस्त, 2017 को, चीन ने दावा किया कि केवल 53 भारतीय सैनिक और एक बुलडोजर अभी भी डोकलाम में हैं। जबकि भारत ने इस दावे को नकारते हुये कहा है कि उसके अभी भी वहाँ करीब 300-350 सैनिक उपस्थित है। सितम्बर माह में प्रस्तावित ब्रिक्स शिख्स्र सम्मेलन से थोडा ही पहले २८ अगस्त २०१७ को दोनों देशों ने अपनी सेनाएं पीछे हटाने का निर्णय लिया। समस्या को सुलझाने के कुछ हफ्ते बाद, चीन ने 500 सैनिकों के साथ फिर से सड़क निर्माण शुरू कर दिया है। .

नई!!: चीन और डोकलाम विवाद 2017 · और देखें »

डी एफ-41

डोंगफेंग -41 (चीनी: 东风-41; शाब्दिक अर्थ: "पुरवाई -41") चीन में विकसित की जा रही एक मिसाइल है। यह ठोस ईंधन से चलने वाली, रोड-मोबाइल, अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक परमाणु मिसाइल हैं। डोंगफेंग-41 कई वारहेड ले जाने में सक्षम एक चीनी अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल है। डोंगफेंग-41 एक समय में 10 परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है। यह मिसाइल 12,000 से करीब 15,000 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम हैं। .

नई!!: चीन और डी एफ-41 · और देखें »

डी.वी. पलुस्कर

पंडित दत्तात्रेय विष्णु पलुस्कर (28 मई 28, 1921 – 25 अक्टूबर 25, 1955), हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के गायक थे। उन्हें एक विलक्षण बालक के तौर पर जाना जाता था। .

नई!!: चीन और डी.वी. पलुस्कर · और देखें »

डीडी उर्दू

डीडी उर्दू एक राज्य के स्वामित्व वाला टीवी चैनल है जो दिल्ली में दूरदर्शन केन्द्र से प्रसारित होता है। डीडी उर्दू चैनल का मुख्य उद्देश्य भारतीय नागरिकों के बीच उर्दू भाषा का प्रसार करने से है। डीडी उर्दू के प्रमुख कार्यालय मंडी हाउस मेट्रो स्टेशन के पास नई दिल्ली में है। डीडी उर्दू का प्रसारण की उपलब्धता भारत और एशिया, चीन और खाड़ी देशों के कुछ हिस्सों में है। .

नई!!: चीन और डीडी उर्दू · और देखें »

ढलवां लोहा

आयरन-सेमेंटाईट मेटा-स्टेबल डायग्राम. ढलवां लोहा (कास्ट आयरन) आम तौर पर धूसर रंग के लोहे को कहा जाता है लेकिन इसके साथ-साथ यह एक बड़े पुंज में लौह अयस्कों का मिश्रण भी है, जो एक गलनक्रांतिक तरीके से ठोस बन जाता है। किसी भी धातु की खंडित सतह को देखकर उसके मिश्र धातु होने का पता लगाया जा सकता है। सफेद ढलवां लोहे का नामकरण इसकी खंडित सफ़ेद सतह के आधार पर किया गया है क्योंकि इसमें कार्बाइड सम्बन्धी अशुद्धियां पाई जाती हैं जिसकी वजह से इसमें सीधी दरार पड़ती है। धूसर ढलवां लोहे का नामकरण इसकी खंडित धूसर सतह के आधार पर किया गया है, इसके खंडित होने का कारण यह है कि ग्रेफाइट की परतें पदार्थ के टूटने के दौरान पड़ने वाली दरार को विक्षेपित कर देती हैं जिससे अनगिनत नई दरारें पड़ने लगती हैं। मिश्र (अयस्क) धातु में पाए जाने वाले पदार्थों के वजन (wt%) में से 95% से भी अधिक लोहा (Fe) होता है जबकि अन्य मुख्य तत्वों में कार्बन (C) और सिलिकॉन (Si) शामिल हैं। ढलवां लोहे में कार्बन की मात्रा 2.1 से 4 wt% होती है। ढलवां लोहे में सिलिकॉन की पर्याप्त राशि, सामान्य रूप से 1 से 3 wt% होती है और इसके फलस्वरूप इन धातुओं को त्रिगुट Fe-C-Si (लोहा-कार्बन-सिलिकन) धातु माना जाना चाहिए। तथापि ढलवां लोहा घनीकरण का सिद्धांत द्विआधारी लोहा-कार्बन चरण आरेख से समझ आता है, जहां गलनक्रांतिक बिंदु और 4.3 wt% कार्बन के 4.3 % वजन (4.3 wt%) पर है। चूंकि ढलवां लोहे की संरचना का अनुमान इस तथ्य से ही लग जता है कि, इसका गलनांक (पिघलने का तापमान) शुद्ध लोहे के गलनांक से लगभग कम है। पिटवां ढलवां लोहे को छोड़कर, बाकि ढलवां लोहे भंगुर होते है। निम्न गलनांक (कम पिघलने वाले तापमान), अच्छी द्रवता, आकार देने की योग्यता, इच्छित आकार देने की उत्कृष्ट योग्यता, विरूपण करने के लिए प्रतिरोध और जीर्ण होने के प्रतिरोध के साथ ढलवां लोहा अनुप्रयोगों की व्यापक श्रेणी के साथ इंजीनियरिंग सामग्री बन गए हैं, पाइप और मशीनों और मोटर वाहन उद्योग के कुछ हिस्सों, जैसे सिलेंडर हेड्स (उपयोग में गिरावट), सिलेंडर ब्लॉक और गियरबॉक्स के डब्बे (केसेज)(उपयोग में गिरावट) में इसका प्रयोग किया जाता है। यह ऑक्सीकरण (जंग) के द्वारा क्षय होने और कमजोर हो जाने में प्रतिरोधी है। .

नई!!: चीन और ढलवां लोहा · और देखें »

तबाशीर

तबाशीर बाँस से आता है सन् १९१५ में छपी एक पुस्तक में तबाशीर के कुछ टुकड़ों का चित्र तबाशीर या बंसलोचन बांस की कुछ नस्लों के जोड़ों से मिलने वाला एक पारभासी (ट्रांसलूसॅन्ट) सफ़ेद पदार्थ होता है। यह मुख्य रूप से सिलिका और पानी और कम मात्रा में खार (पोटैश) और चूने का बना होता है। भारतीय उपमहाद्वीप की आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा प्रणालियों की दवा-सूचियों में इसका अहम स्थान है। पारम्परिक चीनी चिकित्सा के कई नुस्ख़ों में भी इसका प्रयोग होता है। .

नई!!: चीन और तबाशीर · और देखें »

तम्बाकू धूम्रपान

तम्बाकू धूम्रपान एक ऐसा अभ्यास है जिसमें तम्बाकू को जलाया जाता है और उसका धुआं या तो चखा जाता है या फिर उसे सांस में खींचा जाता है। इसका चलन 5000-3000 ई.पू.के प्रारम्भिक काल में शुरू हुआ। कई सभ्यताओं में धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान इसे सुगंध के तौर पर जलाया गया, जिसे बाद में आनंद प्राप्त करने के लिए या फिर एक सामाजिक उपकरण के रूप में अपनाया गया। पुरानी दुनिया में तम्बाकू 1500 के दशक के अंतिम दौर में प्रचलित हुआ जहां इसने साझा व्यापारिक मार्ग का अनुसरण किया। हालांकि यह पदार्थ अक्सर आलोचना का शिकार बनता रहा है, लेकिन इसके बावज़ूद वह लोकप्रिय हो गया। जर्मन वैज्ञानिकों ने औपचारिक रूप से देर से 1920 के दशक के अन्त में धूम्रपान और फेफड़े के कैंसर के बीच के संबंधों की पहचान की जिससे आधुनिक इतिहास में पहले धूम्रपान विरोधी अभियान की शुरुआत हुई। आंदोलन तथापि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान दुश्मनों की सीमा में पहुंचने में नाकाम रहा और उसके बाद जल्द ही अलोकप्रिय हो गया। 1950 में स्वास्थ्य अधिकारियों ने फिर से धूम्रपान और कैंसर के बीच के सम्बंध पर चर्चा शुरू की। वैज्ञानिक प्रमाण 1980 के दशक में प्राप्त हुए, जिसने इस अभ्यास के खिलाफ राजनीतिक कार्रवाई पर जोर दिया। 1965 से विकसित देशों में खपत या तो क्षीण हुई या फिर उसमें गिरावट आयी। हालांकि, विकासशील दुनिया में बढ़त जारी है। तम्बाकू के सेवन का सबसे आम तरीका धूम्रपान है और तम्बाकू धूम्रपान किया जाने वाला सबसे आम पदार्थ है। कृषि उत्पाद को अक्सर दूसरे योगज के साथ मिलाया जाता है और फिर सुलगाया जाता है। परिणामस्वरूप भाप को सांस के जरिये अंदर खींचा जाता है फिर सक्रिय पदार्थ को फेफड़ों के माध्यम से कोशिकाओं से अवशोषित कर लिया जाता है। सक्रिय पदार्थ तंत्रिका अंत में रासायनिक प्रतिक्रियाओं को शुरू करती है जिससे हृदय गति, स्मृति और सतर्कता और प्रतिक्रिया की अवधि बढ़ जाती है। डोपामाइन (Dopamine) और बाद में एंडोर्फिन(endorphin) का रिसाव होता है जो अक्सर आनंद से जुड़े हुए हैं। 2000 में धूम्रपान का सेवन कुछ 1.22 बिलियन लोग करते थे। पुरुषों में महिलाओं की तुलना में धूम्रपान की संभावना अधिक होती हैं तथापि छोटे आयु वर्ग में इस लैंगिक अंतर में गिरावट आती है। गरीबों में अमीरों की तुलना में और विकसित देशों के लोगों में अमीर देशों की तुलना में धूम्रपान की संभावना अधिक होती है। धूम्रपान करने वाले कई किशोरावस्था में या आरम्भिक युवावस्था के दौरान शुरू करते हैं। आम तौर पर प्रारंभिक अवस्था में धूम्रपान सुखद अनुभूतियां प्रदान करता है, सकारात्मक सुदृढीकरण के एक स्रोत के रूप में कार्य करता है। एक व्यक्ति में कई वर्षों के धूम्रपान के बाद परिहार के लक्षण और नकारात्मक सुदृढीकरण उसे जारी रखने का प्रमुख उत्प्रेरक बन जाता है। .

नई!!: चीन और तम्बाकू धूम्रपान · और देखें »

तलास नदी

काज़ाख़स्तान के तराज़ शहर के पास तलास नदी तलास नदी (किरगिज़: Талас дарыя, तलास दरिया; अंग्रेज़ी: Talas River) मध्य एशिया के किर्गिज़स्तान देश के तलास प्रांत से उत्पन्न होंकर पश्चिम में काज़ाख़स्तान में बहने वाली एक नदी है जो कराकोल नदी और उच-कोशोय नदी के संगम से बनती है। तलास नदी पर किर्गिज़स्तान के तलास प्रांत और तलास शहर का नाम पड़ा है। यह काज़ाख़स्तान के झ़ाम्बील​ प्रांत ('झ़' के उच्चारण पर ध्यान दें) के तराज़ शहर से गुज़रती है और आईदीन झील (Lake Aydyn) पहुँचने से पहले स्तेपी में धरती द्वारा सोख लेने से लुप्त हो जाती है। कुल मिलकर तलास नदी ६६१ किमी लम्बी है और इसका जलसम्भर क्षेत्र ५२,७०० वर्ग किमी है। तलास नदी स्तेपी की तीन सबसे महत्वपूर्ण नदियों में से एक है - अन्य दो चुय नदी और इली नदी हैं। .

नई!!: चीन और तलास नदी · और देखें »

तलास प्रांत

तलास शहर के पास मनास का गुम्बज़ (मक़बरा) तलास प्रांत (किरगिज़: Талас областы, अंग्रेज़ी: Talas Province) मध्य एशिया के किर्गिज़स्तान देश के पश्चिमोत्तर में स्थित एक प्रांत है। इस प्रांत राजधानी का नाम भी तलास शहर है। इसकी सरहदें काज़ाख़स्तान और उज़बेकिस्तान से भी लगती हैं। इस प्रांत के उत्तर में किरगिज़ आला-तू के पर्वत हैं और मध्य भाग से तलास नदी निकलती है। .

नई!!: चीन और तलास प्रांत · और देखें »

तातार भाषा

यान्या इमल्यै (विकसित अरबी लिपि) में लिखी तातार भाषा तातार भाषा (तातार: татар теле, तातार तेले; अंग्रेज़ी: Tatar language) रूस के तातारस्तान और बश्कोरतोस्तान के तातार लोगों द्वारा बोली जाने वाली एक तुर्की भाषा है। मध्य एशिया, युक्रेन, पोलैंड, तुर्की, फ़िनलैंड और चीन में भी कुछ तातार समुदाय इसे बोलते हैं। ध्यान दें कि युक्रेन के क्रीमिया क्षेत्र में एक 'क्रीमियाई तातार' नामक भाषा बोली जाती है जो इस तातार भाषा से भिन्न हैं, हालांकि दोनों भाषाएँ भाषावैज्ञानिक नज़रिए से सम्बन्ध रखती हैं। सन् २००२ में अनुमानित ६५ लाख लोग यह तातार भाषा बोलते थे।, Ethnologue Languages of the world .

नई!!: चीन और तातार भाषा · और देखें »

तातार लोग

दिनारा सफीना रूस के लिए टेनिस खेलती हैं और नस्ल से तातार हैं रुसलन चाग़ायेव उज़बेकिस्तान के लिए मुक्केबाज़ी करते हैं और एक तातार हैं तातार या ततार (तातार: ततरलार; रूसी: Татар; अंग्रेज़ी: Tatar) रूसी भाषा और तुर्की भाषाएँ बोलने वाली एक जाति है जो अधिकतर रूस में बसती है। दुनिया भर में इनकी आबादी ७० लाख अनुमानित की गई है, जिनमें से ५५ लाख रूस में रहते हैं। रूस के तातारस्तान प्रांत में २० लाख तातार रहते हैं। रूस के बाहर तातार समुदाय उज़बेकिस्तान, पोलैंड, काज़ाख़स्तान, युक्रेन, ताजिकिस्तान, किर्गिज़स्तान, तुर्कमेनिस्तान, चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका में पाए जाते हैं।, Global Vision Publishing Ho, 2005, ISBN 978-81-8220-062-3,...

नई!!: चीन और तातार लोग · और देखें »

तान्गूत लोग

चीन के निंगशिया प्रांत से १०वीं या ११वीं सदी में बनी एक तस्वीर जो शायद एक तान्गूत आदमी की है तान्गूत (चीनी भाषा: 党项, अंग्रेज़ी: Tangut) एक तिब्बती-बर्मी भाषा बोलने वाला समुदाय था जिसने प्राचीन चीन के पश्चिम में पश्चिमी शिया राज्य स्थापित किया। माना जाता है कि वे १०वीं सदी ईसवी से पहले उत्तर-पश्चिमी चीन में आ बसे थे। माना जाता है कि इनका तिब्बती लोगों से नसल का सम्बन्ध था लेकिन जहाँ ऐसी अन्य जातियाँ तिब्बती समुदाय में घुल गई वहाँ तान्गूत तिब्बत से दूर उत्तर में थे इसलिए इनकी अलग पहचान बनी रही।, Sam Van Schaik, Yale University Press, 2011, ISBN 978-0-300-15404-7,...

नई!!: चीन और तान्गूत लोग · और देखें »

ताम्रलिप्त

ताम्रलिप्त या ताम्रलिप्ति (তাম্রলিপ্ত) बंगाल की खाड़ी में स्थित एक प्राचीन नगर था। विद्वानों का मत है कि वर्तमान तामलुक ही प्राचीन ताम्रलिप्ति था। ऐसा माना जाता है कि मौर्य साम्राज्य के दक्षिण एशिया तथा दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए यह नगर व्यापारिक निकास बिन्दु था। पश्चिमी बंगाल के मिदनापुर जिले का आधुनिक तामलुक अथवा तमलुक जो कलकत्ता से ३३ मील दक्षिण पश्चिम में रूपनारायण नदी के पश्चिमी किनारे पर स्थित है। यद्यपि समुद्र से इसकी वर्तमान दूरी ६० मील है, प्राचीन और मध्यकालीन युग में १७वीं शताब्दी तक समुद्र उसको छूता था और वह भारतवर्ष के दक्षिण-पूर्वी तट का एक प्रसिद्ध बंदरगाह था। ताम्रलिप्ति, नगर की ही नहीं, एक विशाल जनपद की भी संज्ञा थी। उन दिनों गंगा नदी भी उसके नगर के पास से होकर ही बहती थी और उसके द्वारा समुद्र से मिले होने के कारण नगर का बहुत बड़ा व्यापारिक महत्व था। भारतवर्ष के संबंध में लिखनेवाला सुप्रसिद्ध भूगोलशास्त्री प्लिनी उसे 'तामलिटिज' की संज्ञा देता है। प्राचीन ताम्रलिप्ति नगर के खंडहर नदी की उपजाऊ घाटी में अब भी देखे जा सकते हैं। .

नई!!: चीन और ताम्रलिप्त · और देखें »

तारिम नदी

तारिम नदी के जलसम्भर क्षेत्र का नक़्शा तारिम नदी (उईग़ुर:, तारिम दरियासी; चीनी: 塔里木河, तालीमु हे; अंग्रेजी: Tarim River) चीन के शिंजियांग प्रांत की मुख्य नदी है। इसी नदी के नाम पर महान तारिम द्रोणी का नाम पड़ा है, जो मध्य एशिया में कुनलुन पर्वतों और तियान शान पर्वतों के बीच और तिब्बत के पठार से उत्तर में स्थित है। १,३२१ किलोमीटर लम्बा यह दरिया चीन की सबसे लम्बी नदी है जो समुद्र में नहीं बहती, यानि जो एक बन्द जलसम्भर वाली नदी है।, Yue-man Yeung, Jianfa Shen, Chinese University Press, 2004, ISBN 978-962-996-157-2,...

नई!!: चीन और तारिम नदी · और देखें »

तारकनाथ दास

तारकनाथ दास या तारक नाथ दास (बंगला: তারকানাথ দাস, 15 जून 1884 - 22 दिसम्बर 1958), एक ब्रिटिश-विरोधी भारतीय बंगाली क्रांतिकारी और अंतर्राष्ट्रवादी विद्वान थे। वे उत्तरी अमेरिका के पश्चमी तट में एक अग्रणी आप्रवासी थे और टॉल्स्टॉय के साथ अपनी योजनाओं के बारे में चर्चा किया करते थे, जबकि वे भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के पक्ष में एशियाई भारतीय आप्रवासियों को सुनियोजित कर रहे थे। वे कोलंबिया विश्वविद्यालय में राजनीतिक विज्ञान के प्रोफेसर थे और साथ ही कई अन्य विश्वविद्यालयों में अतिथि प्रोफेसर के रूप में भी कार्यरत थे। .

नई!!: चीन और तारकनाथ दास · और देखें »

ताश

साइकिल ब्रांड के कुछ विशिष्ट अंग्रेज़-अमेरिकी ताश के पत्ते ताश मोटे-भारी कागज़, पतले गत्ते, या पतले प्लास्टिक से विशेष रूप से बनी होती है; जिसमें पहचान के लिए अलग रूपांकन बने होते हैं और उनका इस्तेमाल ताश के खेल के लिए एक सेट के रूप में किया जाता है। खेल में सुविधा के लिए आमतौर पर ताश के पत्ते हथेली के आकार के होते हैं। ताश के एक पूरे सेट को पैक या डेक कहते हैं और एक खेल के दौरान एक बार में एक खिलाड़ी द्वारा उठाये गए पत्तों के सबसेट को सामान्यतः हैण्ड कहा जाता है। ताश के एक डेक से अनेक प्रकार के पत्ते के खेल खेले जा सकते हैं, उनमें से कुछ जुआ में भी शामिल हो सकते हैं। चूंकि ताश मानकीकृत हो चुके हैं और आम तौर पर उपलब्ध हैं, सो उनका अन्य इस्तेमाल भी होने लगा है, जैसे कि हाथ की सफाई, भविष्यवाणी, गूढ़लेखन, बोर्ड गेम, या ताश के घर बनाना.

नई!!: चीन और ताश · और देखें »

ताशक़ुरग़ान​

ताशक़ुरग़ान​ (सरिकोली:, तॉशक़ुरग़ॉन​; उइग़ुर:, ताशक़ूरग़ान बाज़िरी; चीनी: 塔什库尔干镇, ताशिकु'एरगन; अंग्रेज़ी: Tashkurgan) मध्य एशिया में चीन द्वारा नियंत्रित शिनजियांग प्रान्त के ताशक़ुरग़ान​ ताजिक स्वशासित ज़िले की राजधानी है। पाकिस्तान से पाक-अधिकृत कश्मीर के गिलगित-बल्तिस्तान क्षेत्र से आने वाले काराकोरम राजमार्ग पर यह पहला महत्वपूर्ण चीनी पड़ाव है। इस राजमार्ग पर सरहद पर स्थित ख़ुंजराब दर्रे की चीनी तरफ़ ताशक़ुरग़ान​ है और पाकिस्तानी तरफ़ सोस्त है।, Andrew Burke, pp.

नई!!: चीन और ताशक़ुरग़ान​ · और देखें »

ताजमहल

ताजमहल (تاج محل) भारत के आगरा शहर में स्थित एक विश्व धरोहर मक़बरा है। इसका निर्माण मुग़ल सम्राट शाहजहाँ ने, अपनी पत्नी मुमताज़ महल की याद में करवाया था। ताजमहल मुग़ल वास्तुकला का उत्कृष्ट नमूना है। इसकी वास्तु शैली फ़ारसी, तुर्क, भारतीय और इस्लामी वास्तुकला के घटकों का अनोखा सम्मिलन है। सन् १९८३ में, ताजमहल युनेस्को विश्व धरोहर स्थल बना। इसके साथ ही इसे विश्व धरोहर के सर्वत्र प्रशंसा पाने वाली, अत्युत्तम मानवी कृतियों में से एक बताया गया। ताजमहल को भारत की इस्लामी कला का रत्न भी घोषित किया गया है। साधारणतया देखे गये संगमर्मर की सिल्लियों की बडी- बडी पर्तो से ढंक कर बनाई गई इमारतों की तरह न बनाकर इसका श्वेत गुम्बद एवं टाइल आकार में संगमर्मर से ढंका है। केन्द्र में बना मकबरा अपनी वास्तु श्रेष्ठता में सौन्दर्य के संयोजन का परिचय देते हैं। ताजमहल इमारत समूह की संरचना की खास बात है, कि यह पूर्णतया सममितीय है। इसका निर्माण सन् १६४८ के लगभग पूर्ण हुआ था। उस्ताद अहमद लाहौरी को प्रायः इसका प्रधान रूपांकनकर्ता माना जाता है। .

नई!!: चीन और ताजमहल · और देखें »

ताजिक लोग

अफ़्ग़ान सांसद नीलोफ़र इब्राहिमी एक ताजिक हैं ताजिकिस्तान का एक परिवार ईद-उल-फ़ित्र की ख़ुशियाँ मनाते हुए ताजिक (ताजिक: Тоҷик, फ़ारसी:, तॉजिक) मध्य एशिया (विशेषकर ताजिकिस्तान, अफ़्ग़ानिस्तान, उज़बेकिस्तान और पश्चिमी चीन) में रहने वाले फ़ारसी-भाषियों के समुदायों को कहा जाता है। बहुत से अफ़्ग़ानिस्तान से आये ताजिक शरणार्थी ईरान और पाकिस्तान में भी रहते हैं। अपनी संस्कृति और भाषा के मामले में ताजिक लोगों का ईरान के लोगों से गहरा सम्बन्ध रहा है।, Olivier Roy, I.B.Tauris, 2000, ISBN 978-1-86064-278-4 चीन के ताजिक लोग अन्य ताजिक लोगों से ज़रा भिन्न होते हैं क्योंकि वे पूर्वी ईरानी भाषाएँ बोलते हैं जबकि अन्य ताजिक फ़ारसी बोलते हैं।, New World Press, 1989, ISBN 978-7-80005-078-7,...

नई!!: चीन और ताजिक लोग · और देखें »

ताजिकिस्तान

अंतरिक्ष से ताजिकिस्तान का मंज़र ताज़िकिस्तान (ताजिक: Тоҷикистон,, तोजिकिस्तोन) मध्य एशिया मे स्थित एक देश है जो चारों ओर से ज़मीन से घिरा (स्थलवेष्ठित) है। यह पहले सोवियत संघ का हिस्सा था और उस देश के विघटन के बाद सन् १९९१ में एक स्वतंत्र देश बना। १९९२-९७ के काल में गृहयुद्धों की मार झेल चुके इस देश की कूटनीतिक-भौगोलिक स्थिति बहुत महत्वपूर्ण है। यह उज़बेकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान, किर्गिज़स्तान तथा चीन के मध्य स्थित है। इसके अलावा पाकिस्तान के उत्तरी इलाके से इसे केवल अफ़ग़ानिस्तान के बदख़्शान प्रान्त का पतला-सा वाख़ान गलियारा ही अलग करता है। ताजिकिस्तान की राजधानी दुशानबे शहर है और यहाँ की भाषा को ताजिक कहा जाता है जो फ़ारसी भाषा का एक रूप माना जाता है। इस भाषा को सीरीलिक अक्षरों में लिखा जाता है जिसमें रूसी तथा कुछ अन्य भाषाएँ भी लिखी जाती हैं। .

नई!!: चीन और ताजिकिस्तान · और देखें »

ताजिकी भाषा

द्वार पर ताजिकी में सिरिलिक लिपि में लिखा है 'बाग़-ए उस्तोद रुदाकी' (उस्ताद रुदाकी का बाग़) ताजिकी या ताजिकी फ़ारसी (тоҷикӣ,, तोजिकी) मध्य एशिया में बोली जाने वाली आधुनिक फ़ारसी भाषा का एक रूप है। ताजिकी बोलने वाले ज़्यादातर ताजिकिस्तान और उज़बेकिस्तान में रहते हैं, हालांकि ताजिकी मातृभाषियों के कुछ समुदाय अफ़्ग़ानिस्तान, रूस और चीन के शिनजियांग प्रान्त में भी मिलते हैं। अनुमानित किया गया है कि कुल मिलकर सन् १९९१ में ताजिकी बोलने वालों की संख्या ४४.६ लाख थी। वैसे तो ताजिकी ईरान में बोली जाने वाली फ़ारसी से काफ़ी मिलती है लेकिन ईरानी फ़ारसी में अरबी भाषा का प्रभाव अधिक है जबकि ताजिकी में तुर्की भाषाओँ और कुछ हद तक उज़बेक भाषा का असर ज़्यादा दिखता है।, Raymond Hickey, John Wiley and Sons, 2010, ISBN 978-1-4051-7580-7,...

नई!!: चीन और ताजिकी भाषा · और देखें »

ताई पर्वत

ताई पर्वत की एक ढलान पर एक मंदिर का दृश्य ताई पर्वत (चीनी: 泰山, ताई शान; अंग्रेजी: Mount Tai) चीन के पूर्वी शानदोंग प्रान्त में ताईआन शहर के उत्तर में स्थित एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व वाला पहाड़ है। यह चीन के 'पांच सबसे पवित्र पर्वतों' में से एक है और ताओ धर्म में इसकी बहुत अहमियत है। कम-से-कम पिछले ३,००० वर्षों से इस पहाड़ पर पूजा की जा रही और और आज भी इसकी बहुत मान्यता है।, Shun-xun Nan, Nan Shunxun, Beverly Foit-Albert, Himalayan Institute Press, 2007, ISBN 978-0-89389-262-3,...

नई!!: चीन और ताई पर्वत · और देखें »

ताई भाषाएँ

ताई भाषाएँ (Tai languages) या झुआंग-ताई भाषाएँ (Zhuang–Tai languages), जो थाई भाषा में फासाथाय (ภาษาไท, अर्थ: भाषा-थाई) या फासाताय (ภาษาไต) कहलाती हैं, दक्षिणपूर्व एशिया की ताई-कादाई भाषा-परिवार की एक शाखा है। इसमें थाईलैण्ड की राष्ट्रभाषा, थाई, लाओस की राष्ट्रभाषा, लाओ भाषा, बर्मा की शान भाषा और चीन के गुआंगशी प्रान्त की झुआंग भाषा शामिल हैं। .

नई!!: चीन और ताई भाषाएँ · और देखें »

ताई लोग

ताई लोग (Tai) उन भिन्न समुदायों का सामूहिक नाम है जो आदि-ताई भाषा बोलने वाले प्राचीन लोगों के आधुनिक वंशज हैं। इनमें से कुछ ऐसे भी हैं जो अब ताई भाषाएँ नहीं बोलते। पूर्वोत्तर भारत के अहोम लोग जो अब हिन्द-आर्य भाषा-परिवार की असमिया भाषा बोलते हैं, चीन के युन्नान और अन्य दक्षिणी भागों के कुछ समुदाय, थाई लोग (जो थाईलैण्ड में बहुसंख्यक हैं), वियतनामी लोग, लाओस के लाओ समुदाय के लोग, बर्मा के शान लोग सभी इस विविध ताई महासमुदाय के सदस्य हैं। .

नई!!: चीन और ताई लोग · और देखें »

ताई-कादाई भाषाएँ

ताई-कादाई भाषाओँ का फैलाव ताई-कादाई भाषाएँ (Tai-Kadai), जिन्हें दाई, कादाई और क्रा-दाई भी कहा जाता है, पूर्वोत्तर भारत, दक्षिण चीन और दक्षिण-पूर्वी एशिया में बोली जाने वाली सुरभेदी भाषाओँ का एक समूह है। इनमें थाई भाषा (थाईलैंड की राष्ट्रभाषा) और लाओ भाषा (लाओस की राष्ट्रभाषा) शामिल है। दुनिया भर में लगभग १० करोड़ लोग ताई-कादाई भाषाएँ बोलते हैं। ऍथनोलॉग भाषा-सूची के मुताबिक़ विश्व में ९२ ताई-कादाई भाषाएँ बोली जाती हैं जिनमें से ७६ इस भाषा-परिवार की काम-ताई (Kam-Tai) शाखा की सदस्य हैं। दक्षिण-पूर्वी चीन के गुइझोऊ और हाइनान प्रान्तों में इन भाषाओँ की सबसे ज़्यादा विविधता मिलती है, जिस से भाषावैज्ञानिकों का अनुमान है कि शायद वही इस भाषा-परिवार की गृह-भूमि है जहाँ से यह आसपास के अन्य इलाक़ों में फैली।, Anthony Van Nostrand Diller, Psychology Press, 2008, ISBN 978-0-7007-1457-5,...

नई!!: चीन और ताई-कादाई भाषाएँ · और देखें »

तांग राजवंश

तांग राजवंश (चीनी: 唐朝, तांग चाओ) चीन का एक राजवंश था, जिसका शासनकाल सन् ६१८ ईसवी से सन्न ९०७ ईसवी तक चला। इनसे पहले सुई राजवंश का ज़ोर था और इनके बाद चीन में पाँच राजवंश और दस राजशाहियाँ नाम का दौर आया। तांग राजवंश की नीव 'ली' (李) नामक परिवार ने रखी जिन्होनें सुई साम्राज्य के पतनकाल में सत्ता पर क़ब्ज़ा कर लिए। इस राजवंश के शासन में लगभग १५ साल का एक अंतराल आया था, जो ८ अक्टूबर ६९० से ३ मार्च ७०५ तक चला, जिसमें दुसरे झऊ राजवंश की महारानी वू ज़ेतियाँ ने कुछ समय के लिए राजसिंहासन पर नियंत्रण हासिल कर लिया।, Tonia Eckfeld, Psychology Press, 2005, ISBN 978-0-415-30220-3, Dora Shu-fang Dien, Wu hou (Empress of China), Nova Science Publishers, 2003, ISBN 978-1-59033-804-9 तांग साम्राज्य ने शिआन के शहर को अपनी राजधानी बनाया और इस समय शिआन दुनिया का सब से बड़ा नगर था। इस दौर को चीनी सभ्यता की चरम सीमा माना जाता है। चीन में पूर्व के हान राजवंश को इतनी इज़्ज़त से याद किया जाता है कि उनके नाम पर चीनी जाति को हान चीनी बुलाया जाने लगा, लेकिन तांग राजवंश को उनके बराबर का या उनसे भी महान वंश समझा जाता है। ७वीं और ८वीं शताब्दियों में तांग साम्राज्य ने चीन में जनगणना करवाई और उन से पता चलता है कि उस समय चीन में लगभग ५ करोड़ नागरिकों के परिवार पंजीकृत थे। ९वीं शताब्दी में वे जनगणना पूरी तो नहीं करवा पाए लेकिन अनुमान लगाया जाता है कि देश में ख़ुशहाली होने से आबादी बढ़कर ८ करोड़ तक पहुँच चुकी थी। इस बड़ी जनसँख्या से तांग राजवंश लाखों सैनिकों की बड़ी फौजें खड़ी कर पाया, जिनसे मध्य एशिया के इलाक़ों में और रेशम मार्ग के बहुत मुनाफ़े वाले व्यापारिक रास्तों पर यह वंश अपनी धाक जमाने लगी। बहुत से क्षेत्रों के राजा तांग राजवंश को अपना मालिक मानने पर मजबूर हो गए और इस राजवंश का सांस्कृतिक प्रभाव दूर-दराज़ में कोरिया, जापान और वियतनाम पर भी महसूस किया जाने लगा। तांग दौर में सरकारी नौकरों को नियुक्त करने के लिए प्रशासनिक इम्तिहानों को आयोजित किया जाता था और उस आधार पर उन्हें सेवा में रखा जाता था। योग्य लोगों के आने से प्रशासन में बेहतरी आई। संस्कृति के क्षेत्र में इस समय को चीनी कविया का सुनहरा युग समझा जाता है, जिसमें चीन के दो सब से प्रसिद्ध कवियों - ली बाई और दू फ़ू - ने अपनी रचनाएँ रची। हान गान, झांग शुआन और झऊ फ़ंग जैसे जाने-माने चित्रकार भी तांग ज़माने में ही रहते थे। इस युग के विद्वानों ने कई ऐतिहासिक साहित्य की पुस्तकें, ज्ञानकोश और भूगोल-प्रकाश लिखे जो आज तक पढ़े जाते हैं। इसी दौरान बौद्ध धर्म भी चीन में बहुत फैला और विकसित हुआ।तांग राजवंश के काल में काफी विकास हुआ और स्थिरता आई चीन में, सिवाय अन लुशान विद्रोह और केन्द्रीय सत्ता के कमजोर होने के बाद जो के साम्राज्य के अंतिम वर्षो में हुआ। तांग शासकों ने जिएदूशी नाम के क्षेत्रीय सामंतो को नियुक्त किया अलग अलग प्रान्तों में पर ९वी सदी के अंत तक इन्होने तांग साम्राज्य के विरुद्ध युद्ध शुरू कर दिया और खुदके स्वतंत्र राज्य स्थापित किये। .

नई!!: चीन और तांग राजवंश · और देखें »

ताओ धर्म

ताओ धर्म (चीनी: 道教 दाओ-ज्याओ) चीन का एक मूल धर्म और दर्शन है। असल में पहले ताओ एक धर्म नहीं बल्कि एक दर्शन और जीवनशैली थी। बाद में बौद्ध धर्म के चीन पहुँचने के बाद ताओ ने बौद्धों से कई धारणाएँ उधार लीं और एक "धर्म" बन गया। बौद्ध धर्म और ताओ धर्म में आपस में समय समय पर अहिंसात्मक संघर्ष भी होता रहा है। अब कई चीनी बौद्ध तथा ताओ दोनों धर्मों को एकसात मानती है। एक सर्वेक्षण के अनुसार चीन में 50% से 80% आबादी बौद्ध धर्म को मानती है। इसमें 50% बौद्ध और 30% ताओ आबादी हो सकती है। ताओ धर्म और दर्शन, दोनो का स्रोत दार्शनिक लाओ-त्सी द्वारा रचित ग्रन्थ दाओ-दे-चिंग और ज़ुआंग-ज़ी है। хуй вам! र्म है। सर्वोच्च देवी और देवता यिन और यांग हैं। देवताओं की पूजा के लिये कर्मकाण्ड किये जाते हैं और पशुओं और अन्य चीज़ों की बलि दी जाती है। चीन से निकली ज़्यादातर चीज़ें, जैसे चीनी व्यंजन, चीनी रसायनविद्या, चीनी कुंग-फ़ू, फ़ेंग-शुई, चीनी दवाएँ, आदि किसी न किसी रूप से ताओ धर्म से सम्बन्धित रही हैं। क्योंकि ताओ धर्म एक संगठित धर्म नहीं है, इसलिये इसके अनुयायियों की संख्या पता करना मुश्किल है। .

नई!!: चीन और ताओ धर्म · और देखें »

ताओ-ते-चिंग

जापान में १७७० के दशक में प्रकाशित हुई 'ताओ ते चिंग' की एक प्रति 'ताओ' के लिए चीनी भावचित्र ताओ ते चिंग (道德經, Tao Te Ching) या दाओ दे जिंग (Dao De Jing) प्रसिद्ध चीनी दार्शनिक लाओ त्सू द्वारा रचित एक धर्म ग्रन्थ है जो ताओ धर्म का मुख्य ग्रन्थ भी माना जाता है। इसका नाम इसके दो विभागों के पहले शब्द को लेकर बनाया गया है - 'दाओ' (道, यानि 'मार्ग') और 'दे' (德, यानि 'गुण' या 'शक्ति') - जिनके अंत में 'जिंग' (經, यानि 'पुरातन' या 'शास्त्रीय') लगाया जाता है। पारंपरिक मान्यता के अनुसार लाओ त्सू चीन के झोऊ राजवंश काल में सरकारी अभिलेखि (सिरिश्तेदार या रिकॉर्ड​-कीपर) थे और उन्होंने इस ग्रन्थ को छठी सदी ईसापूर्व में लिखा था, हालांकि इसकी रचना की असलियत पर विवाद जारी है। इसकी सबसे प्राचीन पांडुलिपियाँ चौथी शताब्दी ईसापूर्व से मिली हैं।, Holmes Welch, Beacon Press, 1966, ISBN 978-0-8070-5973-9,...

नई!!: चीन और ताओ-ते-चिंग · और देखें »

ताइपिंग विद्रोह

ताइपिंग विद्रोह (Taiping Rebellion) दक्षिणी चीन में चला एक भयानक गृहयुद्ध था जो १८५० से १८६४ तक चला। यह विद्रोह मान्चू किंग वंश के विरुद्ध था। श्रेणी:चीन का इतिहास.

नई!!: चीन और ताइपिंग विद्रोह · और देखें »

ताइयुआन उपग्रह प्रक्षेपण केंद्र

ताइयुआन उपग्रह प्रक्षेपण केंद्र (Taiyuan Satellite Launch Center) शांक्सी (Shanxi) में स्थित चीन एक उपग्रह प्रक्षेपण केंद्र है। इसे बेस 25 के नाम से भी जाना जाता है। .

नई!!: चीन और ताइयुआन उपग्रह प्रक्षेपण केंद्र · और देखें »

ताइहू झील

ताइहू झील या ताई झील (太湖; Taihu Lake ("ग्रेट झील")) वूशी, चीन के यांग्त्ज़ी डेल्टा मैदान में स्थित एक बड़ी ताजे पानी की झील हैं। झील जिआंगसू से जुड़ा हैं, और इसका दक्षिणी तट झेजियांग की सीमा बनाता हैं। 2,250 वर्ग किलोमीटर (896 वर्ग मील) के क्षेत्र और 2 मीटर की औसत गहराई (6.6 फीट) के साथ, यह चीन में पोयांग और दोंगतिंग के बाद तीसरी सबसे बड़ी ताजे पानी की झील हैं। झील में 90 द्वीप हैं, जो कुछ वर्ग मीटर से लेकर कई वर्ग किलोमीटर तक के आकार के हैं। ताइहू झील, प्रसिद्ध ग्रैंड कैनाल से जुड़ा हुआ हैं, और सूझोऊ क्रीक सहित कई नदियों का उत्पत्ति स्थल हैं। हाल के वर्षों में, आसपास के क्षेत्र में तेजी से औद्योगिक विकास के कारण ताई झील प्रदूषण से ग्रस्त हैं। .

नई!!: चीन और ताइहू झील · और देखें »

ताइवानी मापन इकाइयाँ

ताइवानी मापन इकाइयाँ (मिन्नन: Tâi-chè) ताइवान की परंपरागत मापन इकाइयाँ हैं। कई इकाइयाँ जापानी मापन इकाइयों से ली गईं हैं और उनके नाम चीनी मापन इकाइयों के समान ही हैं, परंतु उनके अंतरण चीन और हांगकांग से भिन्न हैं। कई मामलों में यह इकाइयां SI इकाइयों के समान ही हैं और कई मामलों में पुर्णतया भिन्न और कई में मीट्रिक इकाइयों द्वारा विकल्पित हैं। भाषा की दृष्टि से, सभी ताइवानी इकाइयां, चीनी मापन शब्द ही हैं, जो संज्ञाओं को वर्गॊकृत करने हेतु प्रयोग होते हैं। कैट्टी (斤) में फ़ल बिकते हुए, ताइवानी हाट में .

नई!!: चीन और ताइवानी मापन इकाइयाँ · और देखें »

ताइवानी आदिवासी

ताइवानी आदिवासी (अंग्रेज़ी: Taiwanese aborigines, ताइवानीज़ अबोरिजीन्ज़; चीनी: 臺灣原住民, ताइवान युआनझूमिन) ताइवान के मूल निवासी हैं। वे एक ऑस्ट्रोनीशियाई समुदाय हैं और फ़िलिपीन्ज़, मलेशिया, इण्डोनेशिया, माडागास्कर तथा ओशिआनिया के अन्य ऑस्ट्रोनीशियाई भाषाएँ बोलने वाले समुदायों से अनुवांशिक (जेनेटिक) व भाषीय सम्बन्ध रखते हैं। ताइवानी आदिवासी चीन के हान चीनी लोगों से बिलकुल भिन्न हैं और इतिहासकारों का अनुमान है कि वे ताइवान पर पिछ्ले ८,००० वर्षों से बसे हुए हैं। इनकी मूल बोलियाँ फ़ोर्मोसी भाषाएँ कहलाती हैं। सन् २०१४ में ताइवान की सरकार ने इनकी कुल आबादी ५,३३,६०० अनुमानित की गई थी जो ताइवान की पूरी जनसंख्या का २.३% था। .

नई!!: चीन और ताइवानी आदिवासी · और देखें »

तिएले लोग

तिएले (鐵勒, Tiele), चिले (敕勒, Chile) या गाओचे (高車, Gaoche) उत्तरी चीन और मध्य एशिया में चौथी से आठवीं शताब्दी ईसवी के काल में नौ तुर्की जातियों का परिसंघ था। ऐतिहासिक चीनी स्रोतों के अनुसार तिएले लोग प्राचीन दिंगलींग लोगों के वंशज थे और वे इस क्षेत्र में शियोंगनु साम्राज्य के पतन के बाद उभरे। समय के साथ गोएकतुर्क ख़ागानत ने इन्हें अपने अधीन कर लिया। जब गोएकतुर्कों का पतन हुआ तो तिएले का एक हिस्सा, जिन्हें उईग़ुर कहा जाता था, ७४४ ईसवी में अपनी अलग उईग़ुर ख़ागानत स्थापित करने में सफल हो गया। उसके बाद से इतिहास में 'तिएले' का नाम लिया जाना बंद हो गया और उन सबको 'उईग़ुर' नाम से ही बुलाया जाने लगा। .

नई!!: चीन और तिएले लोग · और देखें »

तिब्बत (१९१२-५१)

१९१२ में चिंग राजवंश के पतन के बाद से लेकर १९५१ में तिब्बत को चीन में मिला लिये जाने तक का इतिहास इस लेख में वर्णित है। .

नई!!: चीन और तिब्बत (१९१२-५१) · और देखें »

तिब्बत का पठार

तिब्बत का पठार हिमालय पर्वत शृंखला से लेकर उत्तर में टकलामकान रेगिस्तान तक फैला हुआ है तिब्बत का बहुत सा इलाक़ा शुष्क है तिब्बत का पठार (तिब्बती: བོད་ས་མཐོ།, बोड सा म्थो) मध्य एशिया में स्थित एक ऊँचाई वाला विशाल पठार है। यह दक्षिण में हिमालय पर्वत शृंखला से लेकर उत्तर में टकलामकान रेगिस्तान तक विस्तृत है। इसमें चीन द्वारा नियंत्रित बोड स्वायत्त क्षेत्र, चिंग हई, पश्चिमी सीश्वान, दक्षिण-पश्चिमी गांसू और उत्तरी यून्नान क्षेत्रों के साथ-साथ भारत का लद्दाख़ इलाक़ा आता है। उत्तर-से-दक्षिण तक यह पठार १,००० किलोमीटर लम्बा और पूर्व-से-पश्चिम तक २,५०० किलोमीटर चौड़ा है। यहाँ की औसत ऊँचाई समुद्र से ४,५०० मीटर (यानी १४,८०० फ़ुट) है और विशव के ८,००० मीटर (२६,००० फ़ुट) से ऊँचे सभी १४ पर्वत इसी क्षेत्र में या इसे इर्द-गिर्द पाए जाते हैं। इस इलाक़े को कभी-कभी "दुनिया की छत" कहा जाता है। तिब्बत के पठार का कुल क्षेत्रफल २५ लाख वर्ग किमी है, यानी भारत के क्षेत्रफल का ७५% और फ़्रांस के समूचे देश का चौगुना। .

नई!!: चीन और तिब्बत का पठार · और देखें »

तिब्बत का इतिहास

तिब्बत का ऐतिहासिक मानचित्र 300px मध्य एशिया की उच्च पर्वत श्रेणियों, कुनलुन एवं हिमालय के मध्य स्थित 16000 फुट की ऊँचाई पर स्थित तिब्बत का ऐतिहासिक वृतांत लगभग 7वीं शताब्दी से मिलता है। 8वीं शताब्दी से ही यहाँ बौद्ध धर्म का प्रचार प्रांरभ हुआ। 1013 ई0 में नेपाल से धर्मपाल तथा अन्य बौद्ध विद्वान् तिब्बत गए। 1042 ई0 में दीपंकर श्रीज्ञान अतिशा तिब्बत पहुँचे और बौद्ध धर्म का प्रचार किया। शाक्यवंशियों का शासनकाल 1207 ई0 में प्रांरभ हुआ। मंगोलों का अंत 1720 ई0 में चीन के माँछु प्रशासन द्वारा हुआ। तत्कालीन साम्राज्यवादी अंग्रेंजों ने, जो दक्षिण पूर्व एशिया में अपना प्रभुत्व स्थापित करने में सफलता प्राप्त करते जा रहे थे, यहाँ भी अपनी सत्ता स्थापित करनी चाही, पर 1788-1792 ई0 के गुरखों के युद्ध के कारण उनके पैर यहाँ नहीं जम सके। परिणामस्वरूप 19वीं शताब्दी तक तिब्बत ने अपनी स्वतंत्र सत्ता स्थिर रखी यद्यपि इसी बीच लद्दाख़ पर कश्मीर के शासक ने तथा सिक्किम पर अंग्रेंजों ने आधिपत्य जमा लिया। अंग्रेंजों ने अपनी व्यापारिक चौकियों की स्थापना के लिये कई असफल प्रयत्न किया। इतिहास के अनुसार तिब्बत ने दक्षिण में नेपाल से भी कई बार युद्ध करना पड़ा और नेपाल ने इसको हराया। नेपाल और तिब्बत की सन्धि के मुताबिक तिब्बत ने हर साल नेपाल को ५००० नेपाली रुपये हरज़ाना भरना पड़ा। इससे आजित होकर नेपाल से युद्ध करने के लिये चीन से सहायता माँगी। चीन के सहायता से उसने नेपाल से छुटकारा तो पाया लेकिन इसके बाद 1906-7 ई0 में तिब्बत पर चीन ने अपना अधिकार बनाया और याटुंग ग्याड्से एवं गरटोक में अपनी चौकियाँ स्थापित की। 1912 ई0 में चीन से मांछु शासन अंत होने के साथ तिब्बत ने अपने को पुन: स्वतंत्र राष्ट्र घोषित कर दिया। सन् 1913-14 में चीन, भारत एवं तिब्बत के प्रतिनिधियों की बैठक शिमला में हुई जिसमें इस विशाल पठारी राज्य को भी दो भागों में विभाजित कर दिया गया.

नई!!: चीन और तिब्बत का इतिहास · और देखें »

तिब्बत की संस्कृति

शो दुन उत्सव अपने भौगोलिक एवं जलवायु की विशिष्ट स्थितियों के कारण तिब्बत में एक विशिष्ट संस्कृति का विकास हुआ, यद्यपि इस पर नेपाल, भारत और चीन आदि पड़ोसी देशों की संस्कृतियों का प्रभाव है। .

नई!!: चीन और तिब्बत की संस्कृति · और देखें »

तिब्बताई भाषाएँ

तिब्बताई भाषाएँ (तिब्बती: བོད་སྐད།, अंग्रेज़ी: Tibetic languages) तिब्बती-बर्मी भाषाओं का एक समूह है जो पूर्वी मध्य एशिया के तिब्बत के पठार और भारतीय उपमहाद्वीप के कई उत्तरी क्षेत्रों में तिब्बती लोगों द्वारा बोली जाती हैं। यह चीन द्वारा नियंत्रित तिब्बत, चिंगहई, गान्सू और युन्नान प्रान्तों में, भारत के लद्दाख़, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम व उत्तरी अरुणाचल प्रदेश क्षेत्रों में, पाक-अधिकृत कश्मीर के गिलगित-बलतिस्तान क्षेत्र में तथा भूटान देश में बोली जाती हैं। .

नई!!: चीन और तिब्बताई भाषाएँ · और देखें »

तिब्बती तीतर

तिब्बती तीतर (तिब्बती:सकफा) (Tibetan Partridge) (Perdix hodgsoniae) फ़ीज़ैन्ट कुल का एक पक्षी है जो व्यापक रूप से तिब्बती पठार में पाया जाता है। इस पक्षी का आवासीय क्षेत्र बहुत विशाल है और इसी वजह से इसे संकट से बाहर की जाति माना गया है। इस पक्षी का मूल निवास चीन, भारत, भूटान और नेपाल है। .

नई!!: चीन और तिब्बती तीतर · और देखें »

तिब्बती बौद्ध धर्म

तिब्बती बौद्ध धर्म बौद्ध धर्म की महायान शाखा की एक उपशाखा है जो तिब्बत, मंगोलिया, भूटान, उत्तर नेपाल, उत्तर भारत के लद्दाख़, अरुणाचल प्रदेश, लाहौल व स्पीति ज़िले और सिक्किम क्षेत्रों, रूस के कालमिकिया, तूवा और बुर्यातिया क्षेत्रों और पूर्वोत्तरी चीन में प्रचलित है।An alternative term, "lamaism", and was used to distinguish Tibetan Buddhism from other buddhism.

नई!!: चीन और तिब्बती बौद्ध धर्म · और देखें »

तिब्बती भाषा

तिब्बती भाषा (तिब्बती लिपि में: བོད་སྐད་, ü kä), तिब्बत के लोगों की भाषा है और वहाँ की राजभाषा भी है। यह तिब्बती लिपि में लिखी जाती है। ल्हासा में बोली जाने वाली भाषा को मानक तिब्बती माना जाता है। .

नई!!: चीन और तिब्बती भाषा · और देखें »

तिब्बती रामचकोर

तिब्बती रामचकोर (Tibetan Snowcock) (Tetraogallus tibetanus) फ़ीज़ैन्ट कुल का एक पक्षी है जो पश्चिमी हिमालय तथा तिब्बती पठार के ऊँचाई वाले इलाकों में रहता है और हिमालय के कुछ इलाकों में यह हिमालय के रामचकोर के साथ इलाका बांटता है। .

नई!!: चीन और तिब्बती रामचकोर · और देखें »

तिब्बती लोग

तिब्बती लोग, जो तिब्बती भाषा में बोड पा (བོད་པ་) कहलाते हैं, तिब्बत और उसके आसपास के क्षेत्रों में मूल रूप से बसने वाले लोगों की मानव जाति है। यह तिब्बती भाषा और उस से सम्बन्धित अन्य तिब्बताई भाषाएँ बोलते हैं और अधिकतर तिब्बती बौद्ध धर्म के अनुयायी हैं। तिब्बत के अलावा इनके समुदाय चीन, भारत, भूटान व नेपाल के पड़ोसी इलाकों में भी रहते हैं। .

नई!!: चीन और तिब्बती लोग · और देखें »

तियाँ शान

सूर्यास्त के वक़्त ख़ान तेन्ग्री की चोटी तियान शान (अंग्रेज़ी: Tian Shan या Tien Shan; मंगोल: Тэнгэр уул, तेंगेर उउल; उइग़ुर:, तेन्ग्री ताग़; चीनी: 天山, तियान शान) मध्य एशिया का एक पहाड़ी सिलसिला है। .

नई!!: चीन और तियाँ शान · और देखें »

तियांजिन धमाके २०१५

चीन के उत्तरी शहर तियांजिन में १२ अगस्त २०१५ को ३० सैकण्ड के अन्तराल में कम से कम दो धमाके हुये। दोनों धमाके चीन के तियांजिन के बिन्हाई न्यू एरिया में खतरनाक और रासायनिक पदार्थों वाले एक गोदाम में हुआ। धमाके का कारण अभी तक ज्ञात नहीं हुआ है लेकिन प्रारम्भिक सूचनाओं के आधार पर इसे औद्योगिक दुर्घटना बताया गया है। चीनी राज्य मीडिया के मुताबिक पहला धमाका रुईहाई सैन्य संचालन के मालिकाना वाले जहाजो में रखे खतरनाक पदार्थों में हुआ। .

नई!!: चीन और तियांजिन धमाके २०१५ · और देखें »

तिरमिज़

सुल्तान साओदात का महल तिरमिज़ (उज़बेक: Термиз, तेरमिज़; अंग्रेज़ी: Termez) मध्य एशिया के उज़बेकिस्तान देश के दक्षिणी भाग में स्थित सुरख़ानदरिया प्रान्त की राजधानी है। यह उज़बेकिस्तान की अफ़्ग़ानिस्तान के साथ सरहद के पास प्रसिद्ध आमू दरिया के किनारे बसा हुआ है। इसकी आबादी सन् २००५ में १,४०,४०४ थी। .

नई!!: चीन और तिरमिज़ · और देखें »

तिराना

तिराना (अल्बानियाई: Tiranë) अल्बानिया की राजधानी और सबसे बड़ा नगर है। २००८ के अनुमान के अनुसार यहाँ की जनसंख्या लगभग ९ लाख है। तिराना की स्थापना सुलेज्मन पाशा द्वारा १६१४ में की गई थी और १९२० यह नगर अल्बानिया की राजधानी बना। यह नगर १६१४ में सुलेज्मान पाशा द्वारा स्थापित किया गया था और १९२० में अल्बानिया की राज्धानी बना। तिराना नगरपालिका इशेम नदी के किनारे स्थित है और तिराना जिले में स्थित है। तिराना समुद्र तल से १०० मीटर की ऊँचाई पर स्थित है और अधिकत ऊँचाई वाला बिन्दू १,८२८ मीटर पर स्थित है। इसके अतिरिक्त दो मुख्य नदियां यहाँ से होकर बहती हैं: लाने और तिराने। नगर में चार कृत्रिम झीले भी हैं: तिराना झील, कोदर-कामेज़ झील, फारका झील और टुफिना झील। यह नगर उसी समानान्तर पर स्थित है जिस पर नेपल्स, मैड्रिड और इस्तांबुल स्थित हैं और इसकी मध्याह्न रेखा वही है जो बुडापेस्ट और क्राकौव की है। .

नई!!: चीन और तिराना · और देखें »

तिल का तेल

तिल का तेल (यह जिन्जेल्ली तेल या तिल के तेल के रूप में भी जाना जाता है) तिल के बीजों से प्राप्त एक खाने योग्य वनस्पति तेल है। दक्षिण भारत में खाना पकाने के तेल के रूप में इस्तेमाल किये जाने के साथ ही इसका प्रयोग अक्सर चीनी, कोरियाई और कुछ हद तक दक्षिण पूर्व एशियाई भोजन में स्वाद बढ़ाने के लिए किया जाता है। पोषक तत्वों से समृद्ध बीज से प्राप्त तेल वैकल्पिक चिकित्सा - पारंपरिक मालिश और आधुनिक मनपसंद उपचार में लोकप्रिय है। प्राचीन भारतीय चिकित्सा प्रणालियों का मानना है कि तिल का तेल तनाव से संबंधित लक्षणों को शांत करता है और इस पर हो रहे अनुसंधान इंगित करते है कि तिल के तेल में मौजूद ऑक्सीकरण रोधक और बहु-असंतृप्त वसा रक्त-चाप को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं। यह तेल एशिया क्षेत्र में लोकप्रिय है और सबसे पहले से ज्ञात फसल आधारित तेलों में से एक है लेकिन तेल निकालने के लिए हाथ से की जाने वाली अक्षम कटाई प्रक्रिया की वजह से इसका दुनिया भर में व्यापक सामूहिक उत्पादन आज तक सीमित है। .

नई!!: चीन और तिल का तेल · और देखें »

तिआन्हे १

तिआन्हे १ जिसे हिंदी में आकाश गंगा प्रथम भी कह सकते हैं, चीन का एक महासंगणक है। इसकी क्षमता २.५ पेटाफ्लॉप है। यह महासंगणक लिनक्स आधारित संचालन प्रणाली का प्रयोग करता है। वर्तमान में जापान का के संगणक विश्व का सबसे शक्तिशाली महासंगणक है, जिसकी क्षमता ८.२ पेटाफ्लॉप है। .

नई!!: चीन और तिआन्हे १ · और देखें »

तिआंजिन

तिआंजिन (तिआंजिनी:; डाक नक़्शा हिज्जे: Tientsin) उत्तरी चीन का एक महानगर है और चीनी लोग गणराज्य के पाँच राष्ट्रीय केंद्रीय शहरों में से एक है। बोहायी आर्थिक रिम का हिस्सा होने के साथ-साथ यह उत्तरी चीन का सब से बड़ा तटवर्ती शहर है। श्रेणी:चीन के नगर.

नई!!: चीन और तिआंजिन · और देखें »

तंत्र साहित्य (भारतीय)

तंत्र भारतीय उपमहाद्वीप की एक वैविधतापूर्ण एवं सम्पन्न आध्यात्मिक परिपाटी है। तंत्र के अन्तर्गत विविध प्रकार के विचार एवं क्रियाकलाप आ जाते हैं। तन्यते विस्तारयते ज्ञानं अनेन् इति तन्त्रम् - अर्थात ज्ञान को इसके द्वारा तानकर विस्तारित किया जाता है, यही तंत्र है। इसका इतिहास बहुत पुराना है। समय के साथ यह परिपाटी अनेक परिवर्तनों से होकर गुजरी है और सम्प्रति अत्यन्त दकियानूसी विचारों से लेकर बहुत ही प्रगत विचारों का सम्मिश्रण है। तंत्र अपने विभिन्न रूपों में भारत, नेपाल, चीन, जापान, तिब्बत, कोरिया, कम्बोडिया, म्यांमार, इण्डोनेशिया और मंगोलिया में विद्यमान रहा है। भारतीय तंत्र साहित्य विशाल और वैचित्र्यमय साहित्य है। यह प्राचीन भी है तथा व्यापक भी। वैदिक वाङ्मय से भी किसी किसी अंश में इसकी विशालता अधिक है। चरणाव्यूह नामक ग्रंथ से वैदिक साहित्य का किंचित् परिचय मिलता है, परन्तु तन्त्र साहित्य की तुलना में उपलब्ध वैदिक साहित्य एक प्रकार से साधारण मालूम पड़ता है। तांत्रिक साहित्य का अति प्राचीन रूप लुप्त हो गया है। परन्तु उसके विस्तार का जो परिचय मिलता है उससे अनुमान किया जा सकता है कि प्राचीन काल में वैदिक साहित्य से भी इसकी विशालता अधिक थी और वैचित्र्य भी। संक्षेप में कहा जा सकता है कि परम अद्वैत विज्ञान का सूक्ष्मातिसूक्ष्म विश्लेषण और विवरण जैसा तंत्र ग्रंथों में है, वैसा किसी शास्त्र के ग्रंथों में नहीं है। साथ ही साथ यह भी सच है कि उच्चाटन, वशीकरण प्रभृति क्षुद्र विद्याओं का प्रयोग विषयक विवरण भी तंत्र में मिलता है। स्पष्टत: वर्तमान हिंदू समाज वेद-आश्रित होने पर भी व्यवहार-भूमि में विशेष रूप से तंत्र द्वारा ही नियंत्रित है। .

नई!!: चीन और तंत्र साहित्य (भारतीय) · और देखें »

तंग राज्य (प्राचीन चीन)

तंग राज्य (चीनी भाषा: 滕國, तंग गुओ; अंग्रेज़ी: Teng) प्राचीन चीन के झोऊ राजवंश के अंतिम भाग में बसंत और शरद काल और झगड़ते राज्यों के काल के दौरान एक रियासत थी। यह १०४६ ईसापूर्व से ४१४ ईसापूर्व तक चला। यह लू राज्य के अधीन था और आधुनिक शानदोंग प्रान्त के दक्षिण भाग में स्थित था। इसका क्षेत्र अब तंगझोऊ नामक शहरी-ज़िले में आता है।, Society for the Study of Early China (Berkeley, California), 1994,...

नई!!: चीन और तंग राज्य (प्राचीन चीन) · और देखें »

तंगझोऊ

तंगझोऊ में स्थित एक पगोडा तंगझोऊ (चीनी भाषा: 滕州, अंग्रेज़ी: Tengzhou) चीन के शानदोंग प्रान्त का एक शहरी-ज़िला है। चीनी इतिहास के झोऊ राजवंश के बसंत और शरद काल और झगड़ते राज्यों के काल के दौरान यह तंग राज्य नाम की एक रियासत थी।, Society for the Study of Early China (Berkeley, California), 1994,...

नई!!: चीन और तंगझोऊ · और देखें »

तंग्राम

तंग्राम से बनी एक मानव-जैसी आकृति तंग्राम की सात मूल आकृतियाँ (टुकड़े) तंग्राम (चीनी भाषा: 七巧板; पिन्यिन: qī qiǎo bǎn; शाब्दिक अर्थ: शलता के साथ बोर्ड) एक पहेली वाली खेल है जिसमें सात प्रकार की आकृतियों वाले बोर्ड होते हैं जिनको सटाकर जमाना होता है ताकि दी हुई आकृति बन जाय। चपटी आकृतियों को 'टैन' कहते हैं। जिस आकृति को बनाना होता है उसका केवल बाहरी सीमारेखा (आउटलाइन) ही दी गयी होती है और अपनी कल्पना-शक्ति का प्रयोग करके सभी सात टुकड़ों का प्रयोग करके हुए वह आकृति बनानी होती है। इसमें सीमारेखा के अन्दर कहीँ खाली स्थान नहीं बचना चाहिये या आकृतियाँ एक-दूसरे पर चढ़ी हुई नहीं हों। इस खेल का विकास मूलतः चीन में हुआ किंतु कब हुआ, यह ठीक-ठीक पता नहीं है। चीन से यह नवीं शती में व्यापारिक जहाजों के माध्यम से यूरोप पहुँची। यूरोप में कुछ काल के लिये यह बहुत लोकप्रिय हुई और बाद में प्रथम विश्वयुद्ध के समय में भी काफी लोकप्रिय रही। यह विश्व की अपने तरह की सर्वाधिक लोकप्रिय खेल है। .

नई!!: चीन और तंग्राम · और देखें »

तकिया

एक सजावटी तकिया तकिया सिर के लिये एक गुदगुदा आलंब या सहारा होता है, जिसका प्रयोग आमतौर पर सोते समय किया जाता है, या फिर इसे एक सोफे या कुर्सी पर बैठते समय शरीर को आराम देने के लिए किया जाता है। .

नई!!: चीन और तकिया · और देखें »

तुमैन

तुमैन चीन के तिब्बती स्वायत्त क्षेत्र का एक गाँव है। श्रेणी:तिब्बत.

नई!!: चीन और तुमैन · और देखें »

तुयुहुन राज्य

तुयुहुन राज्य (Tuyuhun Kingdom) या अझ़ा ('Azha, बिन्दुयुक्त 'झ़' के उच्चारण पर ध्यान दें) प्राचीनकाल में तिब्बत से पूर्वोत्तर कोको नूर नामक झील (आधुनिक काल में चिंगहई झील) के क्षेत्र में चिलियन पर्वतों और पीली नदी (ह्वांगहो) की ऊपरी घाटी के इलाक़ों में रहने वाले शियानबेई लोगों से सम्बन्धित ख़ानाबदोश क़बीलों द्वारा स्थापित एक राज्य का नाम था।, Barbara A. West, pp.

नई!!: चीन और तुयुहुन राज्य · और देखें »

तुयेन क्वैंग प्रान्त

तुयेन क्वैंग (वियतनामी: Tuyên Quang) दक्षिणपूर्वी एशिया के वियतनाम देश का एक प्रान्त है। यह देश के पूर्वोत्तर क्षेत्र में स्थित है। इसकी उत्तरी और पूर्वी सीमाएँ चीन के गुआंगशी प्रान्त के साथ लगती हैं। .

नई!!: चीन और तुयेन क्वैंग प्रान्त · और देखें »

तुरफ़ान

१४४ फ़ुट ऊंची एमीन मीनार अंगूर की लताओं से ढकी चलने की एक सड़क तुरफ़ान (अंग्रेज़ी: Turfan) या तुरपान (उईग़ुर:, अंग्रेज़ी: Turpan, चीनी: 吐魯番) चीन द्वारा नियंत्रित शिनजियांग प्रान्त के तुरफ़ान विभाग में स्थित एक ज़िले-स्तर का शहर है जो मध्य एशिया की प्रसिद्ध तुरफ़ान द्रोणी में स्थित एक नख़लिस्तान (ओएसिस) भी है। सन् २००३ में इसकी आबादी २,५४,९०० गिनी गई थी। यह शहर उत्तरी रेशम मार्ग पर एक महत्वपूर्ण पड़ाव हुआ करता था।, Julie Hill, AuthorHouse, 2006, ISBN 978-1-4259-7280-6,...

नई!!: चीन और तुरफ़ान · और देखें »

तुरफ़ान द्रोणी

अंतरिक्ष से तुरफ़ान द्रोणी बोगदा पर्वत शृंखला के चरणों में दिखती है तुरफ़ान द्रोणी (अंग्रेज़ी: Turfan Depression) या तुरपान द्रोणी (उईग़ुर:, तुरपान ओयमानलीक़ी; अंग्रेज़ी: Turpan Depression) चीन द्वारा नियंत्रित मध्य एशिया के शिनजियांग क्षेत्र में स्थित ज़मीन में एक भ्रंश (फ़ॉल्ट​) के कारण बनी एक द्रोणी है। मृत सागर और जिबूती की असल झील के बाद तुरफ़ान द्रोणी में स्थित अयदिंग​ झील (Lake Ayding) पृथ्वी का तीसरा सब से निचला ज़मीनी क्षेत्र है।, www.nasa.gov, Accessed 2009-10-09 यह सूखी झील समुद्र ताल से १५४ मीटर नीचे स्थित है (यानि इसकी ऊँचाई -१५४ मीटर है)। कुछ मापों के हिसाब से यह चीन का सबसे गरम और शुष्क इलाक़ा भी है।, Shanghai Daily तुरफ़ान द्रोणी तुरफ़ान शहर के इर्द-गिर्द और उस से दक्षिण में विस्तृत है। .

नई!!: चीन और तुरफ़ान द्रोणी · और देखें »

तुर्कमेनाबात

तुर्कमेनाबत का हवाई अड्डा तुर्कमेनाबत (तुर्कमेनी: Türkmenabat, रूसी: Түркменабат) तुर्कमेनिस्तान के लेबाप प्रांत की राजधानी है। सन् २००९ की जनगणना में इसकी आबादी लगभग २,५४,००० थी। इस शहर को पहले चारझ़ेव (Чәрҗев, Charzhew) या 'चारजू' बुलाया जाता था (जिसका अर्थ फ़ारसी में 'चार नदियाँ या नहरें' है, इसमें 'झ़' के उच्चारण पर ध्यान दें)। .

नई!!: चीन और तुर्कमेनाबात · और देखें »

तुर्किस्तान

सन् १९१४ के नक़्शे में रूसी तुर्किस्तान दर्शाया गया है तुर्किस्तान (अंग्रेज़ी: Turkistan या Turkestan, फ़ारसी) मध्य एशिया के एक बड़ा भूभाग का पारम्परिक नाम है जहाँ तुर्की भाषाएँ बोलने वाले तुर्क लोग रहते हैं। इस नाम द्वारा परिभाषित इलाक़े की सीमाएँ समय के साथ बदलती रहीं हैं और इसका प्रयोग भी तुर्किस्तान से बाहर रहने वाले लोग ही अधिक करते थे।, Anita Sengupta, Lexington Books, 2009, ISBN 978-0-7391-3606-5,...

नई!!: चीन और तुर्किस्तान · और देखें »

तुर्की भाषा परिवार

विश्व के देश (गाढ़े नीले रंग में) और प्रदेश (हलके नीले रंग में) जहाँ तुर्की भाषाओँ को सरकारी मान्यता प्राप्त है सन् 735 के लगभग तराशे गए एक ओरख़ोन शिलालेख का हिस्सा यूरेशिया में तुर्की भाषाओँ का फैलाव तुर्की भाषाएँ पैंतीस से भी अधिक भाषाओँ का एक भाषा-परिवार है। तुर्की भाषाएँ पूर्वी यूरोप और भूमध्य सागर से लेकर साईबेरिया और पश्चिमी चीन तक बोली जाती हैं। कुछ भाषावैज्ञानिक इन्हें अल्ताई भाषा परिवार की एक शाखा मानते हैं। विश्व में लगभग 16.5 से 18 करोड़ लोग तुर्की भाषाएँ अपनी मातृभाषा के रूप में बोलते हैं और अगर सभी तुर्की भाषाओँ को बोल सकने वालों की गणना की जाए तो क़रीब 25 करोड़ लोग इन्हें बोल सकते हैं। सब से अधिक बोली जाने वाली तुर्की भाषा का नाम भी तुर्की है, हालाँकि कभी-कभी इसे अनातोल्वी भी कहा जाता है (क्योंकि यह अनातोलिया में बोली जाती है)। .

नई!!: चीन और तुर्की भाषा परिवार · और देखें »

तुजिया भाषा

तुजिया चीन के मध्य के एक क्षेत्र (भूरा रंग) में बोली जाती है तुजिया भाषा (चीनी: 土家语, तुजियायु) मध्य चीन में बसने वाले तुजिया लोगों द्वारा बोले जानी वाली तिब्बती-बर्मी भाषा-परिवार की एक भाषा है। इसकी दो उपभाषाएँ हैं: उत्तरी और दक्षिणी। दोनों ही सुरभेदी भाषाएँ हैं, जिनमें बोलते समय लगाए गए सुर के अनुसार शब्दों का अर्थ अलग होता है। तुजिया ने अपने आस-पड़ोस की भाषाओँ से इतने शब्द लिए हैं की उसका तिब्बत-बर्मी परिवार में आगे ठीक से श्रेणीकरण करना मुमकिन नहीं हो सका है।, The Rosen Publishing Group, 2010, ISBN 978-1-61530-183-6,...

नई!!: चीन और तुजिया भाषा · और देखें »

तुजिया लोग

पारम्परिक वस्त्रों में कुछ तुजिया स्त्रियाँ तुजिया चीन के एक अल्पसंख्यक समुदाय का नाम है। चीन में इनकी आबादी लगभग ८० लाख की है और यह चीन का छठा सब से बड़ा अल्पसंख्यक गुट है। यह वूलिंग पर्वतों के वासी हैं, जो हूनान, हुबेई और गुइझोऊ प्रान्तों और चोंगकिंग ज़िले की सीमाओं पर विस्तृत हैं। इनकी अपनी एक तिब्बती और बर्मी से सम्बंधित तुजिया भाषा है जिसमें यह अपने समुदाय को 'बिज़िका' बुलाते हैं, जिसका अर्थ 'मूल निवासी' है। चीनी लोग इन्हें 'तुजिया' (चीनी: 土家族) बुलाते हैं जिसका मतलब 'स्थानीय लोग' (अंग्रेज़ी में 'लोकल') होता है।, The Rosen Publishing Group, 2010, ISBN 978-1-61530-183-6,...

नई!!: चीन और तुजिया लोग · और देखें »

तुंगुसी भाषा-परिवार

उत्तर-पूर्वी एशिया में तुंगुसी भाषाओं का विस्तार एवेंकी भाषा में कुछ लिखाई, जो साइबेरिया में बोली जाने वाली एक तुंगुसी भाषा है मांचु भाषा में, जो एक तुंगुसी भाषा है तुंगुसी भाषाएँ (अंग्रेज़ी: Tungusic languages, तुन्गुसिक लैग्वेजिज़) या मांचु-तुंगुसी भाषाएँ पूर्वी साइबेरिया और मंचूरिया में बोली जाने वाली भाषाओं का एक भाषा-परिवार है। इन भाषाओं को मातृभाषा के रूप में बोलने वालुए समुदायों को तुंगुसी लोग कहा जाता है। बहुत सी तुंगुसी बोलियाँ हमेशा के लिए विलुप्त होने के ख़तरे में हैं और भाषावैज्ञानिकों को डर है कि आने वाले समय में कहीं यह भाषा-परिवार पूरा या अधिकाँश रूप में ख़त्म ही न हो जाए। बहुत से विद्वानों के अनुसार तुंगुसी भाषाएँ अल्ताई भाषा-परिवार की एक उपशाखा है। ध्यान दीजिये कि मंगोल भाषाएँ और तुर्की भाषाएँ भी इस परिवार कि उपशाखाएँ मानी जाती हैं इसलिए, अगर यह सच है, तो तुंगुसी भाषाओँ का तुर्की, उज़बेक, उइग़ुर और मंगोल जैसी भाषाओं के साथ गहरा सम्बन्ध है और यह सभी किसी एक ही आदिम अल्ताई भाषा की संतानें हैं।, Martine Irma Robbeets, Otto Harrassowitz Verlag, 2005, ISBN 978-3-447-05247-4 तुंगुसी भाषाएँ बोलने वाली समुदायों को सामूहिक रूप से तुंगुसी लोग कहा जाता है। .

नई!!: चीन और तुंगुसी भाषा-परिवार · और देखें »

त्रिनिदाद और टोबैगो

त्रिनिदाद और टोबैगो आधिकारिक रूप से त्रिनिदाद और टोबैगो गणराज्य कैरिबियाई सागर में स्थित, पूरी तरह से द्विपों पर स्थित देश है। यह दक्षिण कैरिबिया में, वेनेज़ुएला के उत्तर-पूर्व में है। इसकी जलसीमा बारबाडोस से उत्तर-पूर्व में, गयाना से दक्षिण-पूर्व में तथा वेनेज़ुएला से दक्षिण और पश्चिम में जलसीमा साझा करती है। इस देश का क्षेत्रफल ५,१३० वर्ग किलोमीटर है। इस द्वीप समूह में दो मुख्य द्वीप है- त्रिनिदाद और टोबैगो। इन मुख्य द्वीपों के अलावा कई छोटे-छोटे द्वीप हैं। त्रिनिदाद, देश के ९४% क्षेत्र और ९६% आबादी के साथ, देश का सबसे बड़ा और सबसे ज्यादा जनसँख्या वाला द्वीप है। त्रिनिदाद द्वीप, १४९८ में कोलंबस के आगमन से लेकर १८ फ़रवरी १७९७ में स्पैनिश गवर्नर के ब्रिटेन को आत्मसमर्पण तक, स्पेन के अधीन था। इस दौरान टोबैगो द्वीप पर स्पैनिश, ब्रिटिश, फ्रेंच, डच, कौरलैंड का शासन रहा। सन १८०२ मई त्रिनिदाद और टोबैगो को एमिएन्ज़ की संधि के तहत ब्रिटेन को सौंप दिया गया था। १९६२ में इसे आज़ादी मिली और १९७६ में यह गणराज्य बना। इसकी अर्थव्यवस्था अन्य अंग्रेजी भाषी केरिबियन देशों से उलट मुख्यतः उद्योगों पर आधारित है। इस देश की सरकार ने देश का बहुत अच्छी तरह से आर्थिक विकास किया। २००३-२००८ के बीच देश की विकास दर ७% थी। यह कैरीबिया की आर्थिक शक्ति है। .

नई!!: चीन और त्रिनिदाद और टोबैगो · और देखें »

त्सोचेन ज़िला

त्सोचेन ज़िला (तिब्बती: མཚོ་ཆེན་རྫོང་, Coqên County या Tsochen County) तिब्बत का एक ज़िला है। तिब्बत पर चीन का क़ब्ज़ा होने के बाद यह चीनी प्रशासनिक प्रणाली में तिब्बत स्वशासित प्रदेश के न्गारी विभाग में पड़ता है। इस ज़िले की राजधानी का नाम भी त्सोचेन शहर ही है और इस क़स्बे की आबादी लगभग १,००० है।, Robert Kelly, John Vincent Bellezza, pp.

नई!!: चीन और त्सोचेन ज़िला · और देखें »

त्वरित संदेश प्रेषण (इंस्टेंट मेसेजिंग)

पिजिन 2.0 गनोम के तहत चल रहा है इंस्टेंट मेसेजिंग (आईएम) (त्वरित संदेश) साझा सॉफ्टवेयर ग्राहक के साथ-साथ वैयक्तिक (पर्सनल) कंप्यूटर या अन्य उपकरणों का प्रयोग करने वाले दो या अधिक लोगों के बीच समयोचित प्रत्यक्ष पाठ्य-आधारित संचार का एक रूप है। प्रयोक्ता के पाठ्य को एक नेटवर्क जैसे कि इंटरहनेट के माध्यम से भेजा जाता है। अधिक उन्नत त्वरित संदेश प्रेषण (इंस्टेंट मेसेजिंग) सॉफ्टवेयर ग्राहक संचार की परिष्कृत विधियों जैसे कि वॉयस या वीडियो कॉलिंग का उपयोग करने की अनुमति प्रदान करते हैं। .

नई!!: चीन और त्वरित संदेश प्रेषण (इंस्टेंट मेसेजिंग) · और देखें »

तृतीय विश्व

शीत युद्ध के समय के 'तीन विश्व' -तृतीय विश्व के देश निर्गुट एवं तटस्थ देश थे जिन्हें हरे में दिखाया गया है। तृतीय विश्व (Third World) की संकल्पना शीत युद्ध के समय में आयी। उन देशों के समूह को 'तृतीय विश्व' कहा गया जो न तो नाटो के साथ थे न ही सोवियत गुट के साथ। संयुक्त राज्य अमेरिका, पश्चिमी यूरोप के देश तथा उनके साथी देशों को 'प्रथम विश्व' कहते थे; सोवियत संघ, चीन, क्यूबा तथा उनके सहयोगियों को 'द्वितीय विश्व' कहते थे। श्रेणी:राजनैतिक शब्दावली.

नई!!: चीन और तृतीय विश्व · और देखें »

तैमूरलंग

तैमूर लंग (अर्थात तैमूर लंगड़ा) (जिसे 'तिमूर' (8 अप्रैल 1336 – 18 फ़रवरी 1405) चौदहवी शताब्दी का एक शासक था जिसने महान तैमूरी राजवंश की स्थापना की थी। उसका राज्य पश्चिम एशिया से लेकर मध्य एशिया होते हुए भारत तक फैला था। उसकी गणना संसार के महान्‌ और निष्ठुर विजेताओं में की जाती है। वह बरलस तुर्क खानदान में पैदा हुआ था। उसका पिता तुरगाई बरलस तुर्कों का नेता था। भारत के मुग़ल साम्राज्य का संस्थापक बाबर तिमूर का ही वंशज था। .

नई!!: चीन और तैमूरलंग · और देखें »

तू फू

तू फू, चीन के तंग राजवंश के महान कवियों में से एक थे। चीन के अन्य लोगों की तरह अं लुशान का उनके जीवन पर अधिक प्रभाव पड़ा था। दू फू के जीवन के आखिरी पंद्रह साल अत्याधिक अशांति से घिरे रहे। .

नई!!: चीन और तू फू · और देखें »

तूफ़ान हैयान

तूफ़ान हैयान() जिसे फ़िलीपीन्स में तूफ़ान योलान्डा के नाम से जाना जाता है, 195 मील प्रति घंटे की उच्चतम हवा गति के साथ अब तक का सबसे ताकतवर उष्णकटिबंधीय चक्रवात माना जा रहा है। .

नई!!: चीन और तूफ़ान हैयान · और देखें »

तूफान फनापी

तूफान फनापी जिसे फिलीपींस में तूफान इंडे के नाम से भी जाना जाता है, एक बहुत नुकसान करने वाला तूफान था। यह ताइवान और दक्षिणपूर्व चीन में सितम्बर 2010 में आया था। यह उस वर्ष का ग्यारहवाँ उष्णकटिबंधीय तूफान और उस ऋतु का चौथा तूफान था। यह फिलीपींस में 14 सितम्बर को बनना शुरू हुआ और उसके बाद धीरे धीरे कई दिनों में यह आगे बढ़ने लगा। यह जब उत्तर पूर्व से उत्तर में जाने लगा था, तब इसकी गति 175 किलोमीटर प्रति घंटे थी। इसके कारण पहली बार थल में बारिश 19 सितम्बर को ताइवान के हुयलेन शहर में हुआ था। अगस्त 2009 के बाद यह पहला तूफान था, जो इस द्वीप से टकराया था। इसके बाद अंत में यह चीन के फुज्जन शहर में बारिश करवाने के बाद 21 सितम्बर को दक्षिण चीन में समाप्त हो गया। ताइवान और चीन में इसके प्रभाव से पूर्व पहला प्रभाव दक्षिण जापान में भी पड़ा था। जिसके कारण मियाको द्वीप में वर्षा भी हुई। लेकिन यह चीन और ताइवान के मुक़ाबले बहुत कम था। फनापी के कारण ताइवान में बहुत अधिक बारिश हुई और यह 1,126 मिलीमीटर को पार कर गया। 1,50,000 लोगों को उनके घरों से हटाया गया। पिछले साल तूफान मोराकोट के विनाशकारी प्रभाव को देखने के बाद इस साल उससे कई अच्छी तरह तैयारी किया गया था। फिर भी भारी बारिश के कारण भूस्खलन, अत्यधिक मात्रा में फसल बर्बाद हुए और कई जगह बाढ़ भी आया। इसका सबसे अधिक प्रभाव कोहसीयूंग शहर में पड़ा था। जहाँ 506 मिलिमीटर बारिश दर्ज की गई थी। इसके कारण लगभग सौ करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। तूफान के जाते समय ताइवान में कुल पाँच लोग मर गए और नुकसान करीब पचास करोड़ का हुआ था। इसके बाद दक्षिण चीन में करीब 2,64,000 लोगों को उनके घरों से सुरक्षित हटाया गया। इस जगह में तूफान ने बहुत अधिक बारिश करवाया। गुयांगडोंग में यह 640 मिलिमीटर तक पहुँच गया। फनापी के कारण यहाँ भूस्खलन भी हुआ, जिसके कारण 75 लोगों की मौत हो गई। यहाँ इस तूफान के कारण सोलह हजार घर तबाह हो गए और डेढ़ लाख एकड़ फसल भी पूरी तरह नष्ट हो गया। इस प्रांत में लगभग पचास करोड़ का नुकसान हुआ। इसके बहुत अधिक नुकसान करने के बाद इस नाम को मुक्त कर दिया गया। .

नई!!: चीन और तूफान फनापी · और देखें »

तूफान मेरान्ती

तूफान मेरान्ती हाल ही में दर्ज किए सबसे मजबूत उष्णकटिबंधीय चक्रवाती तूफान है। ताइवान में पिछले 59 सालों में यह अब तक का सबसे तेज तूफान रहा है। इसकी रफ़्तार 370 किलोमीटर प्रति घंटे मापी गई है। इसके कारण पाँच लाख से अधिक परिवार प्रभावित हुए और 2.6 लाख से अधिक घरों की बिजली व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई। इसके कारण चीन के 6 राज्यों में चेतावनी जारी की गयी है। इससे दक्षिण चीन के तटीय इलाकों में 44 फीट तक ऊंची लहरें उठ सकती हैं। इसके कारण फिलीपींस, ताइवान और चीन में 30 लोगों की मौत हो चुकी है और कई लोग घायल हो चुके हैं। .

नई!!: चीन और तूफान मेरान्ती · और देखें »

तूमन चानयू

२०० ईसापूर्व में शियोंगनु साम्राज्य तूमन (चीनी: 頭曼, मंगोल: Түмэн, अंग्रेज़ी: Touman) मध्य एशिया और चीन पर प्राचीनकाल में अधिकार रखने वाले शियोंगनु लोगों का सबसे पहला चानयू (सम्राट) था। उसका शासनकाल २२० ईसापूर्व से २०९ ईसापूर्व अनुमानित किया गया है। इतिहासकारों का मानना है कि तूमन का नाम शब्द मंगोल भाषा के 'तुमेन' शब्द से लिया गया है, जिसका मतलब 'दस हज़ार' होता है। .

नई!!: चीन और तूमन चानयू · और देखें »

तूमन नदी

तूमन नदी तूमन नदी पर एक पुल तूमन नदी या तूमेन नदी एक ५२१ किमी लम्बी नदी है जो उत्तर कोरिया की रूस और चीन के साथ सीमाओं पर बहती है। यह चंगबाई पर्वत शृंखला के लगभग २,५०० मीटर ऊँचे बएकदू पर्वत से उत्पन्न होकर पूर्वी सागर (जापान सागर) की ओर बहकर उसमें मिल जाती है। इसका नाम मंगोल भाषा से लिया गया है, जिसमें इसका अर्थ "दस हज़ार" निकलता है। उत्तर कोरिया और चीन दोनों ने इसके किनारे बहुत से कारख़ाने बनाए हुए हैं, जिन से इस का पानी बहुत प्रदूषित रहता है। फिर भी यह एक पर्यटक स्थल है और चीन ने इसके किनारे कुछ टहलने-योग्य पर्यटक स्थल बनाए हैं जहाँ से लोग नदी के पार झाँक कर उत्तर कोरिया देख सकते हैं।, Paul Theroux and Jason Wilson, Houghton Mifflin Harcourt, 2001, ISBN 978-0-618-11878-6.

नई!!: चीन और तूमन नदी · और देखें »

तूवी भाषा

तूवा की राजधानी किज़िल में तुर्की लिपि का एक प्राचीन शिलालेख तूवी भाषा (तूवी: тыва дыл, तूवा द्यिल; अंग्रेज़ी: Tuvan) रूस के तूवा गणराज्य में बोली जाने वाली एक तुर्की भाषा है। इसके मातृभाषी तूवा के आलावा चीन, मंगोलिया और रूस के अन्य भागों में भी पाए जाते हैं। इसे मातृभाषा बोलने वालों की संख्या लगभग २.५ लाख अनुमानित की गई है। हालांकि यह एक तुर्की भाषा है, इसमें मंगोल, तिब्बती और रूसी भाषाओं का काफ़ी प्रभाव भी दिखता है। अलग तूवी समुदायों में इसकी अलग-अलग उपभाषाएँ बोली जाती हैं।, Bayarma Khabtagaeva, Otto Harrassowitz Verlag, 2009, ISBN 978-3-447-06095-0,...

नई!!: चीन और तूवी भाषा · और देखें »

तेरम कांगरी

तेरम कांगरी (Teram Kangri) काराकोरम की सियाचिन मुज़ताग़ उपश्रेणी में एक पर्वतीय पुंजक है। तेरम कांगरी १ इसका सर्वोच्च पर्वत है और यह विश्व का ५६वाँ सर्वोच्च पर्वत भी है। तेरम कांगरी भारत के जम्मू और कश्मीर राज्य में स्थित है और इसका कुछ भाग चीन के क़ब्ज़े वाली शक्सगाम घाटी में स्थित है जिसे चीन शिंजियांग प्रान्त के अधीन प्रशासित करता है। .

नई!!: चीन और तेरम कांगरी · और देखें »

तोलुइ ख़ान

तोलुइ ख़ान अपनी पत्नी सोरग़ोग़तानी के साथ तोलुइ ख़ान (मंगोल: Тулуй, फ़ारसी:, अंग्रेजी: Tolui;; जन्म: ११९२ ई; देहांत: १२३२ ई) मंगोल साम्राज्य के संस्थापक चंगेज़ ख़ान और उसकी मुख्य पत्नी बोरते का चौथा और सबसे छोटा पुत्र था। अपने पिता की वसीयत में उसे मंगोलिया का क्षेत्र मिला, जो मंगोलों की मातृभूमि थी। चंगेज़ ख़ान की मृत्यु के बाद जब ओगताई ख़ान को अगला सर्वोच्च ख़ान चुनने में थोड़ा विलम्ब हुआ तो उसी काल में तोलुइ ने एक निपुण प्रशासक की भूमिका निभाई। उस से पहले चीन और ईरान पर क़ब्ज़ा करने के चंगेज़ ख़ान के अभियान में उसने एक कुशल सिपहसलार होने का भी प्रमाण दिया। हालांकि तोलुइ ख़ान ने कभी भी सर्वोच्च ख़ान बनने का दावा नहीं किया, उसी के ही दो पुत्रों ने आगे चलकर ईरान के इलख़ानी साम्राज्य और चीन के युआन राजवंश की स्थापना की। उसकी पत्नी सोरग़ोग़तानी को मंगोल इतिहास की सबसे होशियार और सक्षम स्त्री कहा जाता है।, Kathy Sammis, Walch Publishing, 2002, ISBN 978-0-8251-4369-4,...

नई!!: चीन और तोलुइ ख़ान · और देखें »

तोंगशानजिआबु

तोंगशानजिआबु (Tongshanjiabu) या तेरी कांग (Teri Kang) हिमालय के लुनाना क्षेत्र में स्थित एक पर्वत है जो विश्व का 103वाँ सर्वोच्च पर्वत भी है। यह भूटान और तिब्बत की विवादित सीमा पर स्थित है। तिब्बत पर चीन का नियंत्रण है और उसके अनुसार यह सीमा पर है जबकि भूटान का दावा है कि यह पर्वत पूरी तरह उसके क्षेत्र में है। एक स्रोत के अनुसार "तेरी कांग" इस पर्वत की एक निचली चोटी का नाम है। .

नई!!: चीन और तोंगशानजिआबु · और देखें »

तोकमोक

तोकमोक शहर के एक चौराहे पर मिग (MIG) हवाई जहाज़ स्मारक तोकमोक (किरगिज़: Токмок, अंग्रेज़ी: Tokmok) मध्य एशिया के किर्गिज़स्तान देश के चुय प्रांत में एक शहर है। यह किर्गिज़स्तान के उत्तर में राष्ट्रीय राजधानी बिश्केक से पूर्व में चुय नदी और काज़ाख़स्तान की सरहद के पास स्थित है। सन् २००४ से १९ अप्रैल २००६ तक यह चुय प्रांत की राजधानी भी रहा था। .

नई!!: चीन और तोकमोक · और देखें »

तीतर जैसी पूंछ वाला जल-कपोत

भरतपुर, राजस्थान, भारत में गैर प्रजनन पंख. तीतर जैसी पूंछ वाला जल-कपोत (हाइड्रोफेसियानस चिरुरगस) एक प्रतिरुपी प्रजाति हाइड्रोफेसियानस में आनेवाला एक जल-कपोत है। जल-कपोत, जकानिडे परिवार के लम्बे पैरों वाले पक्षी (वेडर) हैं, जिन्हें इनके बड़े पंजों द्वारा पहचाना जाता है जो इन्हें अपने पसंदीदा प्राकृतिक वास, छिछली झीलों में तैरती हुई वनस्पतियों पर चलने में समर्थ बनाते हैं। तीतर जैसी पूंछ वाला जल-कपोत तैर भी सकता है, हालांकि सामान्यतया यह वनस्पतियों पर चलना ही पसंद करता है। इस प्रजाति की मादाएं, नर की अपेक्षा अधिक रंगबिरंगी होती हैं और बहुनरगामी होती हैं। जल-कपोत एक Linnæus' की ब्राजीलियाई पुर्तगाली जकाना (इस पक्षी के टूपी नाम से लिया गया) के लिए मिथ्या लैटिन गलत वर्तनी है जिसका उच्चारण लगभग जैसा होता है। .

नई!!: चीन और तीतर जैसी पूंछ वाला जल-कपोत · और देखें »

तीन राजशाहियाँ

शु हान राज्यों में बंटा हुआ चीन शु हान राज्य का सम्राट लिऊ बेई तीन राजशाहियाँ (चीनी: 三國時代, सान्गुओ शिदाई; अंग्रेज़ी: Three Kingdoms) प्राचीन चीन के एक काल को कहते हैं जो हान राजवंश के सन् २२० ईसवी में सत्ता-रहित होने के फ़ौरन बाद शुरू हुआ और जिन राजवंश की सन् २६५ ईसवी में स्थापना तक चला। इस काल में तीन बड़े राज्यों - साओ वेई, पूर्वी वू और शु हान - के बीच चीन पर नियंत्रण प्राप्त करने के लिए खींचातानी चली। कभी-कभी इन राज्यों को सिर्फ़ 'वेई', 'वू' और 'शु' भी बुलाया जाता है। कुछ इतिहासकारों के अनुसार इस काल की शुरुआत वेई राज्य की २२० ई में स्थापना से हुई और अंत पूर्वी वू राज्य पर जिन राजवंश की २८० में विजय से हुआ। बहुत से चीनी इतिहासकार इस काल की शुरुआत सन् १८४ में हुए 'पीली पगड़ी विद्रोह' से करते हैं जो हान राजवंश काल का एक किसान विद्रोह था जिसमें ताओ धर्म के अनुयायी भी गुप्त रूप से मिले हुए थे।, J. Michael Farmer, SUNY Press, 2008, ISBN 978-0-7914-7164-7, Wolfram Eberhard, Plain Label Books, 1967, ISBN 978-1-60303-420-3 हालांकि तीन राजशाहियों का काल छोटा था और इसमें काफ़ी उथल-पुथल रही, फिर भी चीनी साहित्य की बहुत सी कथाएँ इस काल में आधारित हैं। इसपर कई नाटक, उपन्यास, टेलिविज़न धारावाहिक और वीडियो खेल भी बने हैं। इस काल में चीन ने युद्धों में बहुत ख़ून-ख़राबा देखा। इस वातावरण में भी चीनी विज्ञान ने तरक्की करी और सिंचाई, वाहनों और हथियारों के क्षेत्र में नई चीज़ों का आविष्कार हुआ। एक ऐसा भी 'दक्षिण-मुखी रथ' नामक यंत्र बनाया गया जो बिना चुम्बक के दिशा बता सकता था - इसका मुख अगर एक बार दक्षिण को कर दिया जाए तो कहीं भी जाने पर स्वयं मुड़कर दक्षिण की ओर ही रहता था।, Kimberly Ann Besio, Constantine Tung, SUNY Press, 2007, ISBN 978-0-7914-7011-4, Lo Kuan-Chung, Guanzhong Luo, C. H. Brewitt-Taylor, Robert E. Hegel, Tuttle Publishing, 2002, ISBN 978-0-8048-3467-4 .

नई!!: चीन और तीन राजशाहियाँ · और देखें »

तीन अधिपति और पाँच सम्राट

पीला सम्राट (हुआंगदी/黃帝 उर्फ़ येलो ऍम्पेरर) 'तीन अधिपतियों और पांच सम्राटों' में से एक था जिसकी रानी ने चीनी संस्कृति को रेशम बनाने की कला सिखाई तीन अधिपति और पाँच सम्राट (चीनी: 三皇五帝, सानहुआंग वूदी; अंग्रेज़ी: Three Sovereigns and Five Emperors) प्राचीन चीन में २५०० ईसापूर्व से २१०० ईसापूर्व के काल के वे शासक थे जो चीनी इतिहास और मिथ्य-कथाओं के आधार पर उस देश के सर्वप्रथम शासक माने जाते हैं। उन्हें चीनी संस्कृति में बहुत इज़्ज़त से देखा जाता है लेकिन उनकी कथाओं में क्या सच है और क्या मिथ्या यह बताना मुश्किल है। कथाओं में अधिपतियों का स्थान और उनकी शक्तियाँ देवताओं जैसी बताई जाती हैं और सम्राटों को बहुत ही महात्मा और शक्तिशाली मनुष्य बताया गया है। इन सभी ने मानाव-कल्याण के लिए काम किया और लोगों को ज़रूरी कलाएँ और ज्ञान सिखाया। इनकी कहानी के बहुत से वर्णन हैं जो एक दुसरे से थोड़े भिन्न हैं। इन शासकों के बाद चीन में शिया राजवंश (夏朝, Xia dynasty) का दौर आया।, Victor Sōgen Hori, University of Hawaii Press, 2003, ISBN 978-0-8248-2284-2,...

नई!!: चीन और तीन अधिपति और पाँच सम्राट · और देखें »

तीस मीटर टेलीस्कोप

तीस मीटर टेलीस्कोप, माउना कीआ, हवाई मे स्थापित होने जा रहा दुनिया का सबसे बड़ा ऑप्टिकल टेलीस्कोप है | हवाई के बोर्ड ऑफ नेचुरल रिसोर्स (बीएलएनाआर) ने इसके निर्माण की मंजुरी दी है | अगली पीढ़ी के इस टेलीस्कोप में तीस मीटर का दर्पण लगा होगा | इसी कारण इसका नाम तीस मीटर टेलीस्कोप यानी टीएमटी रखा गया है | यह स्पष्ट तस्वीरों को लेने के लिए अल्ट्रावायलट इमेज को मिड-इंफ्रारेड वेवलैंथ की मदद से खिंचेगा | इसके निर्माण में 54 अरब रुपए खर्च होने का अनुमान है | टीएमटी 13 अरब प्रकाश वर्ष दूर स्थित आकाशीय पिंडो की तस्वीर ले सकने में सक्षम होगा | माना जाता है कि इससे कुछ अधिक दूरी पर ब्रह्मांड का दूसरा छोर है | टीएमटी मौजुदा ऑप्टिकल टेलीस्कोप की तुलना में नौ गुना बड़ा होगा और उससे तीन गुना अधिक स्पष्ट तस्वीरें ले सकेगा | यह परियोजना पांच देशों अमेरिका, कनाडा, जापान, चीन और भारत के शैक्षणिक संस्थानो और वैज्ञानिकों के बीच सहयोग का नतीजा है | टीएमटी 2021 तक अध्ययन करना शुरु कर देगा | .

नई!!: चीन और तीस मीटर टेलीस्कोप · और देखें »

थाई लोग

थाई लोग दक्षिणपूर्व एशिया के थाईलैण्ड देश की बहुसंख्यक जाति है। यह ताई लोगों का एक उपसमुदाय है जो कि पूर्वोत्तर भारत, दक्षिणी चीन और कई दक्षिणपूर्व एशियाई देशों पर विस्तृत हैं। वे अधिकतर थेरवाद बौद्ध धर्म के अनुयायी हैं और थाई भाषा व उसकी उपभाषाएँ बोलते हैं। .

नई!!: चीन और थाई लोग · और देखें »

थाईलैण्ड का इतिहास

वर्तमान थाईलैंड, पुरानी आयल चित्रण,मूर्तियों और मूर्तियां सियाम थाई लोग अपनी जातीय विशेषताओं में चीनियों के निकट हैं। इन लोगों ने चीन के दक्षिण भाग में नान चाऊ नामक एक शक्तिशाली राज्य स्थापित किया था। किंतु उत्तरी चीनियों और तिब्बतियों के दबाव तथा 1253 में कुबलई खाँ के आक्रमणों के कारण थाई लोगों को दक्षिणी पूर्वी एशिया की ओर हटना पड़ा। चाओ फ्राया (Chao Phraya) नदी की घाटी में पहुँच कर उन्होंने वहाँ के निवासियों को कम्बोडिया की ओर भगा दिया और थाईलैंड नामक देश बसाया। 17वीं शताब्दी तक थाईलैंड में सामंततंत्र स्थापित रहा। इन्हीं दिनों उसने डचों, पुर्तगालियों, फ्रांसीसियों और अंग्रेजों से व्यापार संबंध भी जोड़ लिए थे। 19वीं शताब्दी में मांकूट (Mongkut) (1851-68) और उसके पुत्र चूलालोंगकार्न (Chulalongkorn) (1868-1910) के शासनकाल में सामंतवाद की व्यवस्था शनै: शनै: समाप्त हुई और थाईलैंड का वर्तमान संसार में आगमन हुआ। सम्मतिदाताओं की एक समिति गठित हुई तथा ब्रिटेन (1855) संयुक्त राज्य अमरीका और फ्रांस (1856) से व्यापार संधियाँ हुई। पुराने सामंतों के अधिकार सीमित कर दिए गए और दास प्रथा बिल्कुल उठा दी गई। 1932 में रक्तहीन क्रांति द्वारा संवैधानिक राज्यतंत्र की स्थापना हुई। किंतु उसके बाद से भी थाईलैण्ड की राजनीति में स्थिरता नहीं आई। द्वितीय विश्वयुद्ध के आरंभ में थाईलेण्ड ने जापान से संधि की और ब्रिटेन और अमरीका के विरुद्ध युद्ध ठाना। लेकिन युद्ध के बाद उसने संयुक्तराज्य अमरीका से संधि की। 1962 में लाओस की ओर से साम्यवादी संकट से थाईलैंड की रक्षा के लिये संयुक्तराज्य की सैनिक टुकड़ियाँ भी वहाँ रहीं। .

नई!!: चीन और थाईलैण्ड का इतिहास · और देखें »

थेरवाद

थाई भिक्षु बर्मा के रंगून शहर में श्वेडागोन पगोडा थेरवाद या स्थविरवाद वर्तमान काल में बौद्ध धर्म की दो प्रमुख शाखाओं में से एक है। दूसरी शाखा का नाम महायान है। थेरवाद बौद्ध धर्म भारत से आरम्भ होकर दक्षिण और दक्षिण-पूर्व की ओर बहुत से अन्य एशियाई देशों में फैल गया, जैसे कि श्रीलंका, बर्मा, कम्बोडिया, वियतनाम, थाईलैंड और लाओस। यह एक रूढ़िवादी परम्परा है, अर्थात् प्राचीन बौद्ध धर्म जैसा था, उसी मार्ग पर चलने पर बल देता है। .

नई!!: चीन और थेरवाद · और देखें »

थोलिंग

थोलिंग (तिब्बती: མཐོ་ལྡིང་, अंग्रेज़ी: Tholing), जिसे चीन की सरकार ज़ान्दा (Zanda) बुलाती है, दक्षिण-पश्चिमी तिब्बत में भारत की सीमा के नज़दीक स्थित एक शहर है। ३,७२३ मीटर (१२,२१५ फ़ुट) की ऊँचाई पर स्थित यह नगर तिब्बत के न्गारी विभाग के ज़ान्दा ज़िले की प्रशासनिक राजधानी भी है। इतिहास में यह पश्चिमी तिब्बत के गूगे राज्य की राजधानी हुआ करता था। ९९७ में स्थापित थोलिंग गोम्पा (बौद्ध मठ) विश्व-प्रसिद्ध है और सतलुज नदी के किनारे खड़ा हुआ है। तिब्बत में यह नदी 'लंगचेन त्संगपो' के नाम से जानी जाती है। १९५० में तिब्बत पर जनवादी गणतंत्र चीन का क़ब्ज़ा होने के बाद चीन ने यहाँ भारी मात्रा में सैनिक तैनात कर दिए और अब शहर का बड़ा भाग एक छावनी का रूप लिये हुए है।, Gary McCue, The Mountaineers Books, Page 235, ISBN 978-1-59485-266-4, Accessed 3 जनवरी 2013, Karen Swenson, New York Times, Accessed 23 जनवरी 2013 .

नई!!: चीन और थोलिंग · और देखें »

थोक मूल्य सूचकांक

थोक मूल्य सूचकांक (Wholesale Price Index) एक मूल्य सूचकांक है जो कुछ चुनी हुई वस्तुओं के सामूहिक औसत मूल्य का प्रतिनिधित्व करता है। भारत और फिलीपिन्स आदि देश थोक मूल्य सूचकांक में परिवर्तन को महंगाई में परिवर्तन के सूचक के रूप में इस्तेमाल करते हैं। किन्तु भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका अब उत्पादक मूल्य सूचकांक (producer price index) का प्रयोग करने लगे हैं। .

नई!!: चीन और थोक मूल्य सूचकांक · और देखें »

द फॉरबिडन किंगडम

द फॉरबिडन किंगडम (Forbidden Kingdom) २००८ में बनी चीनी - अमेरिकी मार्शल आर्ट्स पर आधारित साहसिक व रोमांचकारी फ़िल्म है जिसका निर्माण द वेंस्टीन कंपनी व लायंसगेट द्वारा किया गया है। जॉन फुसेको द्वारा लिखित व रोब मिन्कोफ़ द्वारा निर्देशित इस फ़िल्म में पहली बार मार्शल आर्ट्स फ़िल्मों के लोकप्रिय कलाकार जैकी चैन और जेट ली एक साथ आए हैं। .

नई!!: चीन और द फॉरबिडन किंगडम · और देखें »

द वंडर दैट वाज़ इण्डिया

द वंडर दैट वाज़ इण्डिया: अ सर्वे ऑफ़ कल्चर ऑफ़ इण्डियन सब-कांटिनेंट बिफ़ोर द कमिंग ऑफ़ द मुस्लिम्स (The Wonder That Was India: A Survey of the Culture of the Indian Sub-Continent Before the Coming of the Muslims), भारतीय इतिहास से सम्बन्धित एक प्रसिद्ध पुस्तक है जिसकी रचना १९५४ में आर्थर लेवेलिन बाशम ने की थी। यह पुस्तक पशिमी जगत के पाठकों को लक्षित करके लिखी गयी थी। इस पुस्तक में बाशम ने अपने पूर्व के कुछ इतिहासकारों द्वारा खींची गयी भारतीय इतिहास की नकारात्मक छबि को ठीक करने का प्रयास किया है। इसका हिंदी अनुवाद "अद्भुत भारत" नाम से अनुदित और प्रकाशित हुआ। 'द वंडर दैट वाज़ इण्डिया' ने उन्हें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ऐसे भारतविद के तौर पर स्थापित किया जिसकी प्रतिष्ठा विलियम जोंस और मैक्समूलर जैसी है। इसी पुस्तक के कारण उनकी छवि आज भी भारतीय बौद्धिक मानस में अंकित है। मुख्यतः पश्चिम के पाठक वर्ग के लिए लिखी गयी इस पुस्तक की गणना आर.सी. मजूमदार द्वारा रचित बहुखण्डीय "हिस्ट्री ऐंड कल्चर ऑफ़ इण्डियन पीपुल" के साथ की जाती है। इससे पहले औपनिवेशिक इतिहासकारों का तर्क यह था कि अपने सम्पूर्ण इतिहास में भारत सबसे अधिक सुखी, समृद्ध और संतुष्ट अंग्रेजों के शासनकाल में ही रहा। बाशम और मजूमदार को श्रेय जाता है कि उन्होंने अपने-अपने तरीके से भारत के प्राचीन इतिहास का वि-औपनिवेशीकरण करते हुए जेम्स मिल, थॉमस मैकाले और विंसेंट स्मिथ द्वारा गढ़ी गयी नकारात्मक रूढ़ छवियों को ध्वस्त किया। समीक्षकों के अनुसार पुस्तक का सर्वाधिक सफल अध्याय राज्य, समाज-व्यवस्था और दैनंदिन जीवन से संबंधित है। बाशम अपनी इस विख्यात पुस्तक की शुरुआत 662 ईस्वी में लिखे गये एक कथन से करते हैं जो सीरियन ज्योतिषी और भिक्षु सेवेरस सेबोकीट का था: वस्तुतः इसी निष्पक्ष दृष्टि द्वारा प्राचीन भारतीय सभ्यता और संस्कृति पर किये गये उनके कार्यों ने आज भी बाशम को उन लोगों के लिए प्रासंगिक बना रखा है जिनकी थोड़ी सी भी रुचि भारत, भारतीय संस्कृति और सभ्यता में है। प्राचीन भारतीय सभ्यता और संस्कृति पर किये गये अपने इस कार्य को "द वंडर दैट वाज़ इण्डिया" जैसे अलंकृत शीर्षक के तहत प्रस्तुत करने के पीछे वे एडगर एलन पो का हाथ मानते हैं। पो की कविता ‘टु हेलेन’ की पंक्तियों ‘द ग्लोरी दैट वाज़ ग्रीस, ऐंड द ग्रैंडियर दैट वाज़ रोम’ की तर्ज़ पर प्रकाशकों ने इस पुस्तक का भड़कीला, अलंकृत किंतु आकर्षक नामकरण किया। यह ग्रंथ भारतीय उपमहाद्वीप की उस सभ्यता के आविर्भाव और विकासक्रम का प्रतिबिम्बन है जो प्रागैतिहासिक काल से शुरू हो मुसलमानों के आगमन के पूर्व तक यहाँ फली-फूली। दस अध्यायों में बँटी यह रचना मुख्यतः भारत संबंधी पाँच विषय-वस्तुओं को सम्बोधित है: इतिहास और प्राक्-इतिहास, राज्य-सामाजिक व्यवस्था-दैनंदिन जीवन, धर्म, कला और भाषा व साहित्य। प्राक्-इतिहास, प्राचीन साम्राज्यों का इतिहास, समाज, और ग्राम का दैनिक जीवन, धर्म और उसके सिद्धांत, वास्तुविद्या, मूर्तिकला, चित्रकला, संगीत और नृत्य, भाषा साहित्य, भारतीय विरासत और उसके प्रति विश्व का ऋण जैसे विषयों का संघटन इस पुस्तक को प्राचीन भारतीय सभ्यता का एक शुद्ध विश्वकोश बना देता है। इस पुस्तक ने भारतीय इतिहास और संस्कृति के विद्यार्थियों की एक पूरी पीढ़ी के लिए मूल पाठ का काम किया है। भारतीयों द्वारा विश्व को दिये गये सांस्कृतिक अवदान की चर्चा करते हुए बाशम ने इस कृति में दिखाया है कि कैसे सम्पूर्ण दक्षिण-पूर्व एशिया को अपनी अधिकांश संस्कृति भारत से प्राप्त हुई, जिसका प्रतिबिम्बन जावा के बोरोबुदूर के बौद्ध स्तूप और कम्बोडिया में अंग्कोरवाट के शैव मंदिर में परिलक्षित होता है। बृहत्तर भारत के संदर्भ में चर्चा करते हुए कुछ भारतीय राष्ट्रवादी इतिहासकार इस क्षेत्र में बौद्ध और ब्राह्मण धर्म के लक्षणों का सांस्कृतिक विस्तार पाते हैं। लेकिन बाशम ने दिखाया है कि यद्यपि दक्षिण-पूर्व एशिया की भाँति चीन ने भारतीय विचारों को उनकी संस्कृति के प्रत्येक रूप में आत्मसात नहीं किया, फिर भी सम्पूर्ण सुदूर-पूर्व बौद्ध धर्म के लिए भारत का ऋणी है। इसने चीन, कोरिया, जापान और तिब्बत की विशिष्ट सभ्यताओं के निर्माण में सहायता प्रदान की है। भारत ने बौद्ध धर्म के रूप में एशिया को विशेष उपहार देने के अलावा सारे संसार को जिन व्यवहारात्मक अवदानों द्वारा अभिसिंचित किया हैं, बाशम उन्हें, चावल, कपास, गन्ना, कुछ मसालों, कुक्कुट पालन, शतरंज का खेल और सबसे महत्त्वपूर्ण-संख्या संबंधी अंक-विद्या की दशमलव प्रणाली के रूप में चिह्नित करते हैं। दर्शन के क्षेत्र में प्राचीन बहसों में पड़े बिना बाशम ने पिछली दो शताब्दियों में युरोप और अमेरिका पर भारतीय अध्यात्म, धर्म-दर्शन और अहिंसा की नीति के प्रभाव को स्पष्ट रूप से दर्शाया है। इस पुस्तक के बारे में केनेथ बैलाचेट कहते हैं कि यह रचना भारतीय संस्कृति को सजीव और अनुप्राणित करने वाली बौद्धिक और उदार प्रवृत्ति के संश्लेषण का एक मास्टरपीस है। भारतीय महाद्वीप के बँटवारे के तुरंत बाद आयी यह सहानुभूति, और समभाव मूलभाव से अनुप्राणित औपनिवेशिकोत्तर काल की पांडित्यपूर्ण कृति साबित हुई। ब्रिटेन में अपने प्रकाशन के तुरन्त बाद इसका अमेरिका में ग्रोव प्रकाशन से पुनर्मुद्रण हुआ। इसके पेपरबैक संस्करणों ने इसे अमेरिकी बुकस्टोरों की शान बना दिया। फ्रेंच, पोलिश, तमिल, सिंहली और हिंदी में अनुवाद के साथ भारत और इंग्लैंड में भी इसके पेपरबैक संस्करण आये। मुख्यतः औपनिवेशिक ढंग से लिखे विंसेंट स्मिथ के ग्रंथ "ऑक्सफ़र्ड हिस्ट्री ऑफ़ इण्डिया" का संशोधित रूप में सम्पादन बाशम ने ही किया। इस पुस्तक में बाशम स्मिथ द्वारा भारतीय सभ्यता की प्रस्तुति में सहानुभूतिपरक दृष्टिकोण की आलोचना करते हुए बताते हैं की कैसे अलग-अलग संस्कृतियों में रुचि संबंधी मानदण्डों का भेद समझ पाने की अपनी असमर्थता के कारण स्मिथ इस निर्णय पर पहुँचते हैं कि राजपूत महाकाव्य रुक्ष और रसात्मक दृष्टि से निकृष्टतम है। इसके विपरीत बाशम ने सिद्ध किया कि वस्तुतः ऐसा नहीं है। .

नई!!: चीन और द वंडर दैट वाज़ इण्डिया · और देखें »

द कराटे किड (2010 फ़िल्म)

द कराटे किड (अंग्रेजी: The Karate Kid, सरलीकृत चीनी: 功夫梦, पारंपरिक चीनी: 功夫夢, पिनयिन: Gōngfu Mèng; शाब्दिक: द कुंग फू ड्रीम, भी ज्ञात के रूप में: द कराटे किड ५) एक २०१० है चीनी-अमेरिकी मार्शल आर्ट कार्रवाई नाटक फिल्म। यह एक ही नाम के १९८४ फिल्म की रीमेक है। यह के पांचवें किस्त है द कराटे किड सीरीज, एक रिबूट की सेवाै। .

नई!!: चीन और द कराटे किड (2010 फ़िल्म) · और देखें »

द किंग्स स्पीच

द किंग्स स्पीच (The King's Speech) 2010 की एक ब्रिटिश ऐतिहासिक ड्रामा फ़िल्म है जिसका निर्देशन टॉम हूपर ने किया और इसकी पटकथा डेविड सीडलर ने लिखा है। कॉलिन फर्थ ने किंग जॉर्ज VI की भूमिका निभाई है, जो अपनी हकलाने की समस्या को दूर करने के लिए एक ऑस्ट्रेलियाई भाषा चिकित्सक लायोनल लॉग से मिलता है, जिसकी भूमिका ज्योफ्री रश ने निभाई है। ये दोनों व्यक्ति साथ में काम करते-करते मित्र बन जाते हैं और अपने भाई के राजा के पद-त्याग के बाद, द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत में, नए राजा की सहायता लॉग उसका रेडियो प्रसारण बनाने में करते हैं। डेविड सीडलर ने अपनी युवावस्था के दौरान अपनी हकलाने की समस्या पर काबू करने के बाद जॉर्ज षष्ठम (VI) के बारे में पढ़ना शुरू किया और उन्होंने सूचित कल्पना का उपयोग करते हुए दोनों पुरुषों के संबंधों के बारे में लिखा। फ़िल्म बनाने से नौ हफ्ते पहले लॉग की पुस्तिकाओं को खोजा गया और इनमें से उद्धरणों को लेकर पटकथा में शामिल किया गया। फोटोग्राफी का काम मुख्य रूप से नवंबर 2009 और जनवरी 2010 में लन्दन और ब्रिटेन के अन्य स्थानों में किया गया। इस फ़िल्म को संयुक्त राज्य अमेरिका में 24 दिसम्बर 2010 को और संयुक्त राष्ट्र में 7 जनवरी 2011 को रिलीज़ किया गया। प्रारंभ में इसे ब्रिटेन में "15" की रेटिंग के साथ वर्गीकृत किया गया, क्योंकि भाषा चिकित्सा के सन्दर्भ में इसमें भाषा का प्रबल उपयोग किया गया था; इसके विरोध के पश्च्यात इसकी रेटिंग कम कर दी गई। द किंग्स स्पीच ब्रिटिश बॉक्स ऑफिस पर लगातार तीन सप्ताहांतों के लिए सबसे ज्यादा कमाई करने वाली एक फ़िल्म थी। आलोचकों ने दृश्य शैली, कला निर्देशन और अभिनय के लिए इस फ़िल्म की काफी सराहना की। अन्य टिप्पणीकारों ने इस फ़िल्म के द्वारा चित्रित की गयी ऐतिहासिक घटनाओं की गलत अभिव्यक्ति की चर्चा की, विशेष रूप से पद त्याग के लिए विंस्टन चर्चिल के विरोध के बारे में बात की गयी। फ़िल्म को कई पुरस्कार और नामांकन मिले, प्रमुख रूप से कॉलिन फर्थ को अपने अभिनय के लिए काफी पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। फ़िल्म में फर्थ को सात गोल्डन ग्लोब पुरस्कार, सर्वश्रेष्ठ अभिनेता-ड्रामा के लिए नामांकित किया गया। इसके अलावा, फ़िल्म को चौदह बाफ्टा के लिए भी नामांकित किया गया, इसमें सर्वश्रेष्ठ पिक्चर, फर्थ के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता और क्रमशः ज्योफ्री रश और हेलेना बोनहेम कार्टर के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता और सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री के पुरस्कार शामिल थे। फ़िल्म को बारह अकादमी पुरस्कारों के लिए भी नामांकित किया गया और अंत में इसने उत्तम श्रेणी के चार पुरस्कार जीते। इन पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ पिक्चर, टॉम हूपर के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशक, फर्थ के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता और डेविड सीडलर के लिए सर्वश्रेष्ठ मूल पटकथा के पुरस्कार शामिल थे। .

नई!!: चीन और द किंग्स स्पीच · और देखें »

दमिश्क और होम्स पर अमेरिकी मिसाइल हमला - 2018

4 अप्रैल, 2018, सीरियाई समयनुसार सुबह 04:00 (यूटीसी + 3), को संयुक्त राज्य अमेरिका, फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम सयुंक्त देशो ने मिलकर सीरिया की राजधानी दमिश्क और होम्स शहर पर भूमध्यसागर से मिसाइलो से हमले किये लेकिन सयुंक्त देशों ने हमलो का करण बताते हुए कहा 7 अप्रैल को सीरियाई सरकार ने नागरिकों के खिलाफ डौमा शहर में रासायनिक हमले किये थे जिसके जवाब में उन्होंने ऐसा किया, जिस पर उन्होंने सीरियाई सरकार को जिम्मेदार ठहराया। सीरियाई सरकार ने डौमा के हमलों में शामिल होने से इनकार किया। और सीरिया ने हवाई हमलों को अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया। सीरिया पर मिसाइल हमलो की ईरान तथा रूस ने कड़ी नाराज़गी जताई। .

नई!!: चीन और दमिश्क और होम्स पर अमेरिकी मिसाइल हमला - 2018 · और देखें »

दा-वेन सन

'''''दा-वेन सन''''' / 孫大文 / 孙大文 Da-Wen Sun @ UN FAO सन दावेन (अंग्रेजी: Da-Wen Sun; साधारणीकृत चीनी: 孙大文; पारंपरिक चीनी: 孫大文; हान्यू पिनयिन: Sūn Dàwén) (दा-वेन सन नाम से प्रसिद्ध), प्रोफ़ेसर, खाद्य एवं जैविक प्रणाली अभियांत्रिकी, यूनिवर्सिटी कॉलेज डब्लिन, नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ़ आयरलैण्ड.

नई!!: चीन और दा-वेन सन · और देखें »

दामोदर स्वरूप 'विद्रोही'

दामोदर स्वरूप 'विद्रोही' (जन्म:2 अक्टूबर 1928 - मृत्यु: 11 मई 2008) अमर शहीदों की धरती के लिये विख्यात शाहजहाँपुर जनपद के चहेते कवियों में थे। यहाँ के बच्चे-बच्चे की जुबान पर विद्रोही जी का नाम आज भी उतना ही है जितना कि तब था जब वे जीवित थे। विद्रोही की अग्निधर्मा कविताओं ने उन्हें कवि सम्मेलन के अखिल भारतीय मंचों पर स्थापित ही नहीं किया अपितु अपार लोकप्रियता भी प्रदान की। उनका एक मुक्तक तो सर्वाधिक लोकप्रिय हुआ: सम्पूर्ण हिन्दुस्तान में उनकी पहचान वीर रस के सिद्धहस्त कवि के रूप में भले ही हुई हो परन्तु यह भी एक सच्चाई है कि उनके हृदय में एक सुमधुर गीतकार भी छुपा हुआ था। गीत, गजल, मुक्तक और छन्द के विधान पर उनकी जबर्दस्त पकड़ थी। भ्रष्टाचार, शोषण, अत्याचार, छल और प्रवचन के समूल नाश के लिये वे ओजस्वी कविताओं का निरन्तर शंखनाद करते रहे। उन्होंने चीन व पाकिस्तान युद्ध और आपातकाल के दिनों में अपनी आग्नेय कविताओं की मेघ गर्जना से देशवासियों में अदम्य साहस का संचार किया। हिन्दी साहित्य के आकाश में स्वयं को सूर्य-पुत्र घोषित करने वाले यशस्वी वाणी के धनी विद्रोही जी भौतिक रूप से भले ही इस नश्वर संसार को छोड़ गये हों परन्तु अपनी कालजयी कविताओं के लिये उन्हें सदैव याद किया जायेगा। .

नई!!: चीन और दामोदर स्वरूप 'विद्रोही' · और देखें »

दालचीनी

दालचीनी (Cinnamomum verum, या C. zeylanicum) एक छोटा सदाबहार पेड़ है, जो कि 10–15 मी (32.8–49.2 फीट) ऊंचा होता है, यह लौरेसिई (Lauraceae) परिवार का है। यह श्रीलंका एवं दक्षिण भारत में बहुतायत में मिलता है। इसकी छाल मसाले की तरह प्रयोग होती है। इसमें एक अलग ही खुशबू होती है, जो कि इसे गरम मसालों की श्रेणी में रखती है। .

नई!!: चीन और दालचीनी · और देखें »

दाली शहर

दाली का वुहुआ बुर्ज दाली शहर(उज़बेक: 大理市, दाली शी; अंग्रेज़ी: Dali City) दक्षिण-पश्चिमी चीन के युन्नान प्रान्त के दाली बइ स्वशासित विभाग की राजधानी है और इसे चीन की प्रशासनिक प्रणाली में एक 'प्रांतीय-स्तर के नगर' का दर्जा मिला हुआ है। .

नई!!: चीन और दाली शहर · और देखें »

दिंगलींग लोग

दिंगलींग (चीनी: 丁零, अंग्रेजी: Dingling, कोरियाई: जेओंग रयुंग) साइबेरिया में बसने वाली एक प्राचीन जाति थी। यह शुरू में बयकाल झील से पश्चिम में लेना नदी के किनारे बसा करते थे लेकिन समय के साथ दक्षिण की ओर जाकर मंगोलिया और उत्तरी चीन के क्षेत्र में जा बसे। महान इतिहासकार के अभिलेख नामक चीनी इतिहास-ग्रन्थ के अनुसार बाद में उन्हें शियोंगनु साम्राज्य के अधीन कर लिया गया हालांकि ७१ ईसापूर्व के बाद उन्होंने शियोंगनुओं के ख़िलाफ़ विद्रोह करा। तीसरी सदी ईसवी के बाद वे तिएले लोगों (鐵勒, Tiele) का भाग बन गए जो धीरे-धीरे पश्चिम की ओर मध्य एशिया में फैल गए। इन्ही तिएले लोगों का एक गुट हिन्द-यूरोपीयों से मिश्रित हो गया जिस से उईग़ुर जाति उत्पन्न हुई। दिंगलींग लोगों की एक दूसरी शाखा शियानबेई लोगों में जा मिली।, University of California, Berkeley.

नई!!: चीन और दिंगलींग लोग · और देखें »

दिक्सूचक

तरल भरा दिक्सूचक। दिक्सूचक (Compass) या कुतुबनुमा दिशा का ज्ञान कराता है। चुम्बकीय दिक्सूचक उत्तरी ध्रुव की दिशा की ओर संकेत करता है। (ठीक-ठीक कहें तो चुम्बकीय उत्तरी ध्रुव)। दिक्सूचक महासागरों और मरुस्थलों में दिशानिर्देशन के बहुत काम आता है, या उन स्थानो पर भी जहाँ स्थानसूचकों की कमी है। सबसे पहले दिक्सूचक का आविष्कार चीन के हान राजवंश ने किया था। यह एक बड़ी चम्मच-जैसी चुम्बकीय वस्तु थी जो काँसे की तस्तरी पर मैग्नेटाइट अयस्क को बिठा कर बनाई गई थी। दिक्सूचक का प्राथमिक कार्य एक निर्देश दिशा की ओर संकेत करना है, जिससे अन्य दिशाएँ ज्ञात की जाती हैं। ज्योतिर्विदों और पर्यवेक्षकों के लिए सामान्य निर्देश दिशा दक्षिण है एवं अन्य व्यक्तियों के लिए निर्देश दिशा उत्तर है। .

नई!!: चीन और दिक्सूचक · और देखें »

दवा कंपनियों की सूची

स्वास्थ्य सेवा राजस्व द्वारा श्रेणित 50 सबसे बड़ी दवा और जैव प्रौद्योगिकी कंपनियों की सूची निम्नलिखित है.

नई!!: चीन और दवा कंपनियों की सूची · और देखें »

दंत-क्षरण

दंत क्षरण, जिसे दंत-अस्थिक्षय या छिद्र भी कहा जाता है, एक बीमारी है जिसमें जीवाण्विक प्रक्रियाएं दांत की सख्त संरचना (दन्तबल्क, दन्त-ऊतक और दंतमूल) को क्षतिग्रस्त कर देती हैं। ये ऊतक क्रमशः टूटने लगते हैं, जिससे दन्त-क्षय (छिद्र, दातों में छिद्र) उत्पन्न हो जाते हैं। दन्त-क्षय दो जीवाणुओं के कारण प्रारंभ होता है: स्ट्रेप्टोकॉकस म्युटान्स (Streptococcus mutans) और लैक्टोबैसिलस (Lactobacillus).

नई!!: चीन और दंत-क्षरण · और देखें »

दक्षिण पूर्वी एशियाई राष्ट्रों का संगठन

दक्षिण पूर्वी एशियाई राष्ट्रों का संगठन (अंग्रेज़ी:एसोसिएशन ऑफ साउथ ईस्ट एशियन नेशंस, लघु:आसियान) दस दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों का समूह है, जो आपस में आर्थिक विकास और समृद्धि को बढ़ावा देने और क्षेत्र में शांति और स्थिरता कायम करने के लिए भी कार्य करते हैं। इसका मुख्यालय इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में है। आसियान की स्थापना ८ अगस्त, १९६७ को थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में की गई थी। इसके संस्थापक सदस्य थाईलैंड, इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलिपींस और सिंगापुर थे। ब्रूनेई इस संगठन में १९८४ में शामिल हुआ और १९९५ में वियतनाम। इनके बाद १९९७ में लाओस और बर्मा इसके सदस्य बने। १९७६ में आसियान की पहली बैठक में बंधुत्व और सहयोग की संधि पर हस्ताक्षर किए गए। १९९४ में आसियान ने एशियाई क्षेत्रीय फोरम (एशियन रीजनल फोरम) (एआरएफ) की स्थापना की गई, जिसका उद्देश्य सुरक्षा को बढ़ावा देना था। अमेरिका, रूस, भारत, चीन, जापान और उत्तरी कोरिया सहित एआरएफ के २३ सदस्य हैं। अपने चार्टर में आसियान के उद्देश्य के बारे में बताया गया है। पहला उद्देश्य सदस्य देशों की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और स्वतंत्रता को कायम रखा जाए, इसके साथ ही झगड़ों का शांतिपूर्ण निपटारा हो। सेक्रेट्री जनरल, आसियान द्वारा पारित किए प्रस्तावों को लागू करवाने और कार्य में सहयोग प्रदान करने का काम करता है। इसका कार्यकाल पांच वर्ष का होता है। वर्तमान में थाईलैंड के सूरिन पिट्स्वान इसके सेक्रेट्री जनरल है। आसियान की निर्णायक बॉडी में राज्यों के प्रमुख होते हैं, इसकी वर्ष में एक बार बैठक होती है। भारत आसियान देशों से सहयोग करने और संपर्क रखने का सदा ही इच्छुक रहा है। हाल ही में १३ अगस्त,२००९को भारत ने आसियन के संग बैंगकॉक में सम्मेलन किया, जिसमें कई महत्त्वपूर्ण समझौते हुए थे। भारतीय अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार मेला 2008, नई दिल्ली में आसियान मुख्य केन्द्र बिन्दु रहा था। नई व्यापार ब्लॉक के तहत दस देशों की कंपनियों और कारोबारियों ने मेले में भाग लिया था। थाइलैंड, इंडोनेशिया, मलेशिया, म्यांमार, वियतनाम, फिलिपींस, ब्रुनेई, कंबोडिया और लाओस आसियान के सदस्य देश हैं, जिनके उत्पाद व्यापार मेले में खूब दिखे थे। आसियान भारत का चौथा सबसे बडा व्यापारिक भागीदार है। दोनों पक्षों के बीच २००८ में ४७ अरब डॉलर का व्यापार हुआ था। फिक्की के महासचिव अमित मित्रा के अनुसार भारत और आसियान के बीच हुआ समझौता दोनों पक्षों के लिए उत्तम होगा। समझौता जनवरी २००९ से लागू हुआ था। .

नई!!: चीन और दक्षिण पूर्वी एशियाई राष्ट्रों का संगठन · और देखें »

दक्षिण पूर्वी एशियाई राष्ट्रों का संगठन के सदस्य राष्ट्र

दक्षिण पूर्वी एशियाई राष्ट्रों का संगठन (Association of Southeast Asian Nations) दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र का संगठन है जिसका लक्ष्य सदस्य राष्ट्रों के मध्य आर्थिक विकास, सामाजिक प्रगति, सांस्कृतिक विकास तथा क्षेत्रीय शांति को बढ़ावा देना है। आसियान के 10 सदस्य राष्ट्र, एक उम्मीद्वार राष्ट्र तथा एक पर्यवेक्षक राष्ट्र है। आसियान की स्थापना 8 अगस्त 1967 में पाँच सदस्यों के साथ की गयी थी: इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलिपीन्स, सिंगापुर तथा थाईलैंड। .

नई!!: चीन और दक्षिण पूर्वी एशियाई राष्ट्रों का संगठन के सदस्य राष्ट्र · और देखें »

दक्षिण भारत

भारत के दक्षिणी भाग को दक्षिण भारत भी कहते हैं। अपनी संस्कृति, इतिहास तथा प्रजातीय मूल की भिन्नता के कारण यह शेष भारत से अलग पहचान बना चुका है। हलांकि इतना भिन्न होकर भी यह भारत की विविधता का एक अंगमात्र है। दक्षिण भारतीय लोग मुख्यतः द्रविड़ भाषा जैसे तेलुगू,तमिल, कन्नड़ और मलयालम बोलते हैं और मुख्यतः द्रविड़ मूल के हैं। .

नई!!: चीन और दक्षिण भारत · और देखें »

दक्षिण सूडान

दक्षिण सूडान या 'जनूब-उस-सूडान' (आधिकारिक तौर पर दक्षिणी सूडान गणतंत्र) उत्तर-पूर्व अफ़्रीका में स्थित स्थल-रुद्ध देश है। जुबा देश की वर्तमान राजधानी और सबसे बड़ा शहर भी है। देश के उत्तर में सूडान गणतंत्र, पूर्व में इथियोपिया, दक्षिण-पूर्व में केन्या, दक्षिण में युगान्डा, दक्षिण-पश्चिम में कांगो लोकतान्त्रिक गणराज्य और पश्चिम में मध्य अफ़्रीकी गणराज्य है। दक्षिण सूडान को 9 जुलाई 2011 को जनमत-संग्रह के पश्चात स्वतंत्रता प्राप्त हुई। इस जनमत-संग्रह में भारी संख्या (कुल मत का 98.83%) में देश की जनता ने सूडान से अलग एक नए राष्ट्र के निर्माण के लिए मत डाला। यह विश्व का 196वां स्वतंत्र देश, संयुक्त राष्ट्र का 193वां सदस्य तथा अफ्रीका का 55वां देश है। जुलाई 2012 में देश ने जिनेवा सम्मेलन पर हस्ताक्षर किए। अपनी आजादी के ठीक बाद से राष्ट्र को आंतरिक संघर्ष का सामना करना पड़ रहा है। .

नई!!: चीन और दक्षिण सूडान · और देखें »

दक्षिण कोरिया

दक्षिण कोरिया (कोरियाई: 대한민국 (देहान् मिन्गुक), 大韩民国 (हंजा)), पूर्वी एशिया में स्थित एक देश है जो कोरियाई प्रायद्वीप के दक्षिणी अर्धभाग को घेरे हुए है। 'शान्त सुबह की भूमि' के रूप में ख्यात इस देश के पश्चिम में चीन, पूर्व में जापान और उत्तर में उत्तर कोरिया स्थित है। देश की राजधानी सियोल दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा महानगरीय क्षेत्र और एक प्रमुख वैश्विक नगर है। यहां की आधिकारिक भाषा कोरियाई है जो हंगुल और हंजा दोनो लिपियों में लिखी जाती है। राष्ट्रीय मुद्रा वॉन है। उत्तर कोरिया, इस देश की सीमा से लगता एकमात्र देश है, जिसकी दक्षिण कोरिया के साथ २३८ किलिमीटर लम्बी सीमा है। दोनो कोरियाओं की सीमा विश्व की सबसे अधिक सैन्य जमावड़े वाली सीमा है। साथ ही दोनों देशों के बीच एक असैन्य क्षेत्र भी है। कोरियाई युद्ध की विभीषिका झेल चुका दक्षिण कोरिया वर्तमान में एक विकसित देश है और सकल घरेलू उत्पाद (क्रय शक्ति) के आधार पर विश्व की तेरहवीं और सकल घरेलू उत्पाद (संज्ञात्मक) के आधार पर पन्द्रहवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।कोरिया मे १५ अंतराष्ट्रीय बिमानस्थल है और करीब ५०० विश्वविद्यालय है लोग बिदेशो यहा अध्ययन करने आते है। यहा औद्योगिक विकास बहुत हुऐ है और कोरिया मे चीन सहित १५ देशो के लोग रोजगार अनुमति प्रणाली(EPS) के माध्यम से यहा काम करते है। जिसमे दक्षिण एशिया के ४ देशो नेपाल बांग्लादेश श्रीलंका पाकिस्तान है। .

नई!!: चीन और दक्षिण कोरिया · और देखें »

दक्षिण कोरिया का इतिहास

कोरिया में ई. पू.

नई!!: चीन और दक्षिण कोरिया का इतिहास · और देखें »

दक्षिणी चीन सागर

दक्षिणी चीन सागर का मानचित्र। दक्षिणी चीन सागर चीन के दक्षिण में स्थित एक सीमांत सागर है। यह प्रशांत महासागर का एक भाग है, जो सिंगापुर से लेकर ताईवान की खाड़ी लगभग ३५,००,००० वर्ग किमी में फैला हुआ है। पाँच महासागरों के बाद यह विश्व के सबसे बड़े जलक्षेत्रों में से एक है। इस सागर में बहुत से छोटे-छोटे द्वीप हैं, जिन्हें संयुक्त रूप से द्वीपसमूह कहा जाता है। सागर और इसके इन द्वीपों पर, इसके तट से लगते विभिन्न देशों का संप्रभुता की दावेदारी है। इन दावेदारियों को इन देशों द्वारा इन द्वीपों के लिए प्रयुक्त होने वाले नामों में भी दिखाई देती है।, Monique Chemillier-Gendreau, Martinus Nijhoff Publishers, 2000, ISBN 978-90-411-1381-8,...

नई!!: चीन और दक्षिणी चीन सागर · और देखें »

द्रनंग ज़िला

द्रनंग ज़िला (तिब्बती: གྲ་ནང་རྫོང་, Dranang County), जिसे चीन का प्रशासन चीनी लहजे में झनंग ज़िला (चीनी: 扎囊县, Zhanang County), तिब्बत का एक ज़िला है जो उस देश के दक्षिणपूर्वी हिस्से में स्थित है। तिब्बत पर चीन का क़ब्ज़ा होने के बाद यह चीनी प्रशासनिक प्रणाली में तिब्बत स्वशासित प्रदेश के ल्होखा विभाग में पड़ता है। इस ज़िले में प्रसिद्ध द्रनंग बौद्ध मठ स्थित है जो ११वीं सदी में निर्मित हुआ था।, Robert Kelly, John Vincent Bellezza, pp.

नई!!: चीन और द्रनंग ज़िला · और देखें »

द्वारकानाथ कोटणीस

चीन के शिजियाझुआंग में द्वारकानाथ की प्रतिमा डॉ द्वारकानाथ शान्ताराम कोटणीस (10 अक्टूबर 1910 - 9 दिसम्बर 1942) एक भारतीय चिकित्सक थे जिन्हें १९३८ के चीन-जापान युद्ध के समय अन्य चार चिकित्सकों के साथ चिकित्सकीय सहायता प्रदान करने के लिये चीन भेजा गया था। .

नई!!: चीन और द्वारकानाथ कोटणीस · और देखें »

द्वितीय चीन-जापान युद्ध

द्वितीय चीन-जापान युद्ध चीन तथा जापान के बीच 1937-45 के बीच लड़ा गया था। 1945 में अमेरिका द्वारा जापान पर परमाणु बम गिराने के साथ ही जापान ने समर्पण कर दिया और युद्ध की समाप्ति हो गई। इसके परिणामस्वरूप मंचूरिया तथा ताईवान चीन को वापस सौंप दिए गए जिसे जापान ने प्रथम चीन-जापान युद्ध में उससे लिया था। 1941 तक चीन इसमें अकेला रहा। 1941 में जापान द्वारा पर्ल हार्बर पर किए गए आक्रमण के बाद यह द्वितीय विश्व युद्ध का अंग बन गया। .

नई!!: चीन और द्वितीय चीन-जापान युद्ध · और देखें »

द्वितीय विश्व युद्घ

विश्व युद्ध II, अथवा द्वितीय विश्व युद्ध, (इसको संक्षेप में WWII या WW2 लिखते हैं), ये एक वैश्विक सैन्य संघर्ष था जिसमें, सभी महान शक्तियों समेत दुनिया के अधिकांश देश शामिल थे, जो दो परस्पर विरोधी सैन्य गठबन्धनों में संगठित थे: मित्र राष्ट्र एवं धुरी राष्ट्र.इस युद्ध में 10 करोड़ से ज्यादा सैन्य कर्मी शामिल थे, इस वजह से ये इतिहास का सबसे व्यापक युद्ध माना जाता है।"पूर्ण युद्ध" की अवस्था में, प्रमुख सहभागियों ने नागरिक और सैन्य संसाधनों के बीच के अंतर को मिटा कर युद्ध प्रयास की सेवा में अपनी पूरी औद्योगिक, आर्थिक और वैज्ञानिक क्षमताओं को झोक दिया। इसमें सात करोड़ से अधिक लोग मारे गए थे, जिनमें से अधिकांश साधारण नागरिक थे, इसलिए इसको मानव इतिहास का सबसे खूनी संघर्ष माना जाता है। युद्ध की शुरुआत को आम तौर पर 1 सितम्बर 1939 माना जाता है, जर्मनी के पोलैंड के ऊपर आक्रमण करने और परिणामस्वरूप ब्रिटिश साम्राज्य और राष्ट्रमंडल के अधिकांश देशों और फ्रांस द्वारा जर्मनी पर युद्ध की घोषणा के साथ.

नई!!: चीन और द्वितीय विश्व युद्घ · और देखें »

द्वितीय विश्वयुद्ध

द्वितीय विश्वयुद्ध १९३९ से १९४५ तक चलने वाला विश्व-स्तरीय युद्ध था। लगभग ७० देशों की थल-जल-वायु सेनाएँ इस युद्ध में सम्मलित थीं। इस युद्ध में विश्व दो भागों मे बँटा हुआ था - मित्र राष्ट्र और धुरी राष्ट्र। इस युद्ध के दौरान पूर्ण युद्ध का मनोभाव प्रचलन में आया क्योंकि इस युद्ध में लिप्त सारी महाशक्तियों ने अपनी आर्थिक, औद्योगिक तथा वैज्ञानिक क्षमता इस युद्ध में झोंक दी थी। इस युद्ध में विभिन्न राष्ट्रों के लगभग १० करोड़ सैनिकों ने हिस्सा लिया, तथा यह मानव इतिहास का सबसे ज़्यादा घातक युद्ध साबित हुआ। इस महायुद्ध में ५ से ७ करोड़ व्यक्तियों की जानें गईं क्योंकि इसके महत्वपूर्ण घटनाक्रम में असैनिक नागरिकों का नरसंहार- जिसमें होलोकॉस्ट भी शामिल है- तथा परमाणु हथियारों का एकमात्र इस्तेमाल शामिल है (जिसकी वजह से युद्ध के अंत मे मित्र राष्ट्रों की जीत हुई)। इसी कारण यह मानव इतिहास का सबसे भयंकर युद्ध था। हालांकि जापान चीन से सन् १९३७ ई. से युद्ध की अवस्था में था किन्तु अमूमन दूसरे विश्व युद्ध की शुरुआत ०१ सितम्बर १९३९ में जानी जाती है जब जर्मनी ने पोलैंड पर हमला बोला और उसके बाद जब फ्रांस ने जर्मनी पर युद्ध की घोषणा कर दी तथा इंग्लैंड और अन्य राष्ट्रमंडल देशों ने भी इसका अनुमोदन किया। जर्मनी ने १९३९ में यूरोप में एक बड़ा साम्राज्य बनाने के उद्देश्य से पोलैंड पर हमला बोल दिया। १९३९ के अंत से १९४१ की शुरुआत तक, अभियान तथा संधि की एक शृंखला में जर्मनी ने महाद्वीपीय यूरोप का बड़ा भाग या तो अपने अधीन कर लिया था या उसे जीत लिया था। नाट्सी-सोवियत समझौते के तहत सोवियत रूस अपने छः पड़ोसी मुल्कों, जिसमें पोलैंड भी शामिल था, पर क़ाबिज़ हो गया। फ़्रांस की हार के बाद युनाइटेड किंगडम और अन्य राष्ट्रमंडल देश ही धुरी राष्ट्रों से संघर्ष कर रहे थे, जिसमें उत्तरी अफ़्रीका की लड़ाइयाँ तथा लम्बी चली अटलांटिक की लड़ाई शामिल थे। जून १९४१ में युरोपीय धुरी राष्ट्रों ने सोवियत संघ पर हमला बोल दिया और इसने मानव इतिहास में ज़मीनी युद्ध के सबसे बड़े रणक्षेत्र को जन्म दिया। दिसंबर १९४१ को जापानी साम्राज्य भी धुरी राष्ट्रों की तरफ़ से इस युद्ध में कूद गया। दरअसल जापान का उद्देश्य पूर्वी एशिया तथा इंडोचायना में अपना प्रभुत्व स्थापित करने का था। उसने प्रशान्त महासागर में युरोपीय देशों के आधिपत्य वाले क्षेत्रों तथा संयुक्त राज्य अमेरीका के पर्ल हार्बर पर हमला बोल दिया और जल्द ही पश्चिमी प्रशान्त पर क़ब्ज़ा बना लिया। सन् १९४२ में आगे बढ़ती धुरी सेना पर लगाम तब लगी जब पहले तो जापान सिलसिलेवार कई नौसैनिक झड़पें हारा, युरोपीय धुरी ताकतें उत्तरी अफ़्रीका में हारीं और निर्णायक मोड़ तब आया जब उनको स्तालिनग्राड में हार का मुँह देखना पड़ा। सन् १९४३ में जर्मनी पूर्वी युरोप में कई झड़पें हारा, इटली में मित्र राष्ट्रों ने आक्रमण बोल दिया तथा अमेरिका ने प्रशान्त महासागर में जीत दर्ज करनी शुरु कर दी जिसके कारणवश धुरी राष्ट्रों को सारे मोर्चों पर सामरिक दृश्टि से पीछे हटने की रणनीति अपनाने को मजबूर होना पड़ा। सन् १९४४ में जहाँ एक ओर पश्चिमी मित्र देशों ने जर्मनी द्वारा क़ब्ज़ा किए हुए फ़्रांस पर आक्रमण किया वहीं दूसरी ओर से सोवियत संघ ने अपनी खोई हुयी ज़मीन वापस छीनने के बाद जर्मनी तथा उसके सहयोगी राष्ट्रों पर हमला बोल दिया। सन् १९४५ के अप्रैल-मई में सोवियत और पोलैंड की सेनाओं ने बर्लिन पर क़ब्ज़ा कर लिया और युरोप में दूसरे विश्वयुद्ध का अन्त ८ मई १९४५ को तब हुआ जब जर्मनी ने बिना शर्त आत्मसमर्पण कर दिया। सन् १९४४ और १९४५ के दौरान अमेरिका ने कई जगहों पर जापानी नौसेना को शिकस्त दी और पश्चिमी प्रशान्त के कई द्वीपों में अपना क़ब्ज़ा बना लिया। जब जापानी द्वीपसमूह पर आक्रमण करने का समय क़रीब आया तो अमेरिका ने जापान में दो परमाणु बम गिरा दिये। १५ अगस्त १९४५ को एशिया में भी दूसरा विश्वयुद्ध समाप्त हो गया जब जापानी साम्राज्य ने आत्मसमर्पण करना स्वीकार कर लिया। .

नई!!: चीन और द्वितीय विश्वयुद्ध · और देखें »

द्वितीय अंतर्राष्ट्रीय वित्त केन्द्र

द्वितीय अंतर्राष्ट्रीय वित्त केन्द्र हांग कांग, चीन में स्थित एक भवन-मीनार है इसकी ऊचाई ४१५ मी (१,३६२ फुट) है। यह ८८ मंजिल कि इमारत है, इसका निर्माण २००३ में हुआ था।द्वितीय अंतर्राष्ट्रीय वित्त केन्द्र एक गगनचुम्बी इमारत है। श्रेणी:सर्वोच्च गगनचुम्बी श्रेणी:गगनचुम्बी इमारतें.

नई!!: चीन और द्वितीय अंतर्राष्ट्रीय वित्त केन्द्र · और देखें »

दौलत बेग ओल्दी

दौलत बेग ओल्दी भारत के जम्मू व कश्मीर राज्य के लद्दाख़ प्रदेश में स्थित एक स्थान है। यहाँ भारत की एक सैनिक चौकी है और यह ऐतिहासिक रूप से भारत और पूर्वी तुर्किस्तान के बीच के व्यापारिक मार्ग पर एक पड़ाव हुआ करता था। इस से ठीक दक्षिण में पूर्व से पश्चिम बहने वाली चिपचप नदी गुज़रती है। दौलत बेग ओल्दी के नाम का परिवर्णी (ऐक्रोनिम) बनाकर इसे कभी-कभी डी॰बी॰ओ॰ भी कहा जाता है। .

नई!!: चीन और दौलत बेग ओल्दी · और देखें »

दूनहुआंग

दूनहुआंग में एक बाज़ार चीन के गांसू प्रान्त में दूनहुआंग शहर (गुलाबी रंग में) हान राजवंश काल के दौरान बने मिट्टी के संतरी बुर्ज के खंडहर नवचंद्र झील दूनहुआंग (चीनी: 敦煌, अंग्रेज़ी: Dunhuang) पश्चिमी चीन के गांसू प्रान्त में एक शहर है जो ऐतिहासिक रूप से रेशम मार्ग पर एक महत्वपूर्ण पड़ाव हुआ करता था। इसकी आबादी सन् २००० में १,८७,५७८ अनुमानित की गई थी। रेत के टीलों से घिरे इस रेगिस्तानी इलाक़े में दूनहुआंग एक नख़लिस्तान (ओएसिस) है, जिसमें 'नवचन्द्र झील' (Crescent Lake) पानी का एक अहम स्रोत है। प्राचीनकाल में इसे शाझोऊ (沙州, Shazhou), यानि 'रेत का शहर', के नाम से भी जाना जाता था। यहाँ पास में मोगाओ गुफ़ाएँ भी स्थित हैं जहाँ बौद्ध धर्म से सम्बन्धी ४९२ मंदिर हैं और जिनमें इस क्षेत्र की प्राचीन संस्कृति पर भारत का गहरा प्रभाव दिखता है।, Morning Glory Publishers, 2000, ISBN 978-7-5054-0715-2,...

नई!!: चीन और दूनहुआंग · और देखें »

देमचोक

देमचोक (लद्दाख़ी: ཌེམ་ཆོཀ་, Demchok) या देमजोक (Demjok) भारत के जम्मू और कश्मीर राज्य के लेह ज़िलेमें स्थित एक गाँव व सैनिक खेमा है। यह अक्साई चिन क्षेत्र से दक्षिण में स्थित है, जिसपर चीन का क़ब्ज़ा है। वास्तविक नियंत्रण रेखा इस ग्राम के दक्षिणपूर्वी भाग से निकलती है और पास से गुज़रने वाली सिन्धु नदी से जुड़ी एक घाटी में स्थित है। इस रेखा के पार लगभग १ किमी की दूरी पर चीन-अधिकृत क्षेत्र में देमचोग (पिनयिन शैली: Dêmqog) नामक बस्ती है जो कभी देमचोक ग्राम का हिस्सा थी। देमचोक गाँव लद्दाख़ को तिब्बत से जोड़ने वाले एक पुराने मार्ग पर है, जो फ़िलहाल बंद है। गाँव उकदुंग्ले नामक भारतीय सैनिक खेमे से ३६.५ किमी पूर्व में है। चीन इसका तिब्बत का भाग होने का दावा करता है, जिसका भारत खंडन करता है। यहाँ से तिब्बत में स्थित कैलाश-मानसरोवर तीर्थ लगभग ३०० किमी दूर है हालांकि देमचोक से वहाँ का मार्ग अधिकतर मैदानी है और इन दोनों स्थानों को सड़क से जोड़ने की मांग है। .

नई!!: चीन और देमचोक · और देखें »

देवनागरी

'''देवनागरी''' में लिखी ऋग्वेद की पाण्डुलिपि देवनागरी एक लिपि है जिसमें अनेक भारतीय भाषाएँ तथा कई विदेशी भाषाएं लिखीं जाती हैं। यह बायें से दायें लिखी जाती है। इसकी पहचान एक क्षैतिज रेखा से है जिसे 'शिरिरेखा' कहते हैं। संस्कृत, पालि, हिन्दी, मराठी, कोंकणी, सिन्धी, कश्मीरी, डोगरी, नेपाली, नेपाल भाषा (तथा अन्य नेपाली उपभाषाएँ), तामाङ भाषा, गढ़वाली, बोडो, अंगिका, मगही, भोजपुरी, मैथिली, संथाली आदि भाषाएँ देवनागरी में लिखी जाती हैं। इसके अतिरिक्त कुछ स्थितियों में गुजराती, पंजाबी, बिष्णुपुरिया मणिपुरी, रोमानी और उर्दू भाषाएं भी देवनागरी में लिखी जाती हैं। देवनागरी विश्व में सर्वाधिक प्रयुक्त लिपियों में से एक है। मेलबर्न ऑस्ट्रेलिया की एक ट्राम पर देवनागरी लिपि .

नई!!: चीन और देवनागरी · और देखें »

देंग शियाओ पिंग

१९७९ में देंग शियाओ पिंग देंग शियाओ पिंग (Deng Xiaoping; पिन्यिन: Dèng Xiǎopíng,; 22 अगस्त 1904 – 19 फ़रवरी 1997) चीन का राजनेता एवं सुधारक थे जो माओ जेडाँग की मृत्यु के बाद चीन को बाजारवादी अर्थव्यस्वथा की तरफ ले गये। यद्यपि देंग चीन के किसी भी उच्च पद पर आधिकारिक रूप से नहीं बैठे किन्तु १९७८ से १९९२ तक वे ही चीन के 'प्रधानतम नेता' थे। .

नई!!: चीन और देंग शियाओ पिंग · और देखें »

दोनडुप वांग्मेय

तिब्बत का एक वृतचित्र निर्माताजिन्हें चीन सरकार ने तिब्बत में अपने विचारों की अभिव्यक्ति और मानवाधिकार हनन पर वृतचित्र तैयार करने के कारण 26 मार्च, 2008 को गिरफ्तार कर नजरबंद कर दिया था। चीनी शासन के दमनकारी नीति से तंग आकर उनकी पत्नी भी तिब्बत से भाग कर अपने परिवार के साथ हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला चली गईं। .

नई!!: चीन और दोनडुप वांग्मेय · और देखें »

दोंग नदी

मोती नदी मंडल का नक़्शा, जिसमें दोंग नदी (Dong) देखी जा सकती है हेयुआन शहर में दोंग नदी दोंग नदी या दोंग जिआंग (东江, दोंग जिआंग; Dong River) दक्षिणी चीन की एक नदी है जो प्रसिद्ध मोती नदी की पूर्वी उपनदी है। चीनी भाषा में 'दोंग' (东, Dong) का मतलब 'पूर्वी' और 'जिआंग' (江, Jiang) का मतलब 'नदी' होता है। यह नदी है मोती नदीमुख मंडल में पहुँचकर अपना पानी दक्षिण चीन सागर में भेज देती है। मोती नदी की अन्य दो मुख्य उपनदियाँ बेई नदी (Xi River, यानि 'पश्चिमी नदी') और बेई नदी (Bei River, यानि 'उत्तरी नदी') हैं। हाँग काँग महानगर में इस्तेमाल होने वाले पानी का ७०% से ज़्यादा हिस्सा इसी नदी से आता है और हाँग काँग की सरकारें १९६५ से दोंग नदी का पानी गुआंगदोंग प्रांत से ख़रीदती चली आई हैं।, Yue-man Yeung, Jianfa Shen, Chinese University Press, 2008, ISBN 978-962-996-376-7,...

नई!!: चीन और दोंग नदी · और देखें »

दोंगतिंग झील

दोंगतिंग झील का एक नज़ारा दोंगतिंग झील और उसके आसपास का नक़्शा दोंगतिंग झील (चीनी: 洞庭湖, दोंगतिंग हू; अंग्रेज़ी: Dongting Lake) चीन के पूर्वोत्तरी हूनान प्रान्त में एक बड़ी लेकिन कम गहराई वाली झील है। यह यांग्त्से नदी की द्रोणी में स्थित है इसलिए इसका अकार मौसमों के साथ बढ़ता-घटता है। आमतौर पर इसका क्षेत्रफल २,८२० किमी२ होता है जो बाढ़ के मौसम में बढ़कर २०,००० किमी२ तक पहुँच जाता है। हूनान और हूबेई प्रान्तों का नाम इसी झील पर पड़ा है: 'हूनान' का मतलब 'झील से उत्तर' है और 'हूबेई' का 'झील से दक्षिण' है। चीनी सभ्यता में इस झील का ऐतिहासिक महत्व है क्योंकि यहीं सबसे पहले 'अज़दहा (ड्रैगन) नौकाओं' की दौड़ लगा करती थी।, James King, Peter Lang, 2010, ISBN 978-3-0343-0317-0,...

नई!!: चीन और दोंगतिंग झील · और देखें »

दोंगहु लोग

तीसरी सदी ईसापूर्व में चिन राजवंश के दौरान दोंगहु पूर्वोत्तर में बसते थे दोंगहु (चीनी भाषा: 東胡, अंग्रेज़ी: Donghu) प्राचीन चीन से उत्तर-पूर्व में बसने वाली एक मंगोल ख़ानाबदोश क़बीलों की जाति थी जिनका वर्णन सातवी शताब्दी ईसापूर्व से मिलता है। माना जाता है कि उनकी झड़पें शिओंगनु लोगों से हुई जिन्होनें १५० ईसापूर्व में उन्हें नष्ट कर दिया। आगे जाकर दोंगहु लोग वूहुआन (烏桓, Wuhuan) और शिआनबेई (鮮卑, Xianbei) गुटों में बंट गए। माना जाता है कि मंगोल जाति इन्ही की वंशज है। .

नई!!: चीन और दोंगहु लोग · और देखें »

धन-निष्कासन सिद्धान्त

भारत में ब्रितानी शासन के समय, भारतीय उत्पाद का वह हिस्सा जो जनता के उपभोग के लिये उपलब्ध नहीं था तथा राजनीतिक कारणों से जिसका प्रवाह इंग्लैण्ड की ओर हो रहा था, जिसके बदले में भारत को कुछ नहीं प्राप्त होता था, उसे आर्थिक निकास या धन-निष्कासन (Drain of Wealth) की संज्ञा दी गयी। धन की निकासी की अवधारणा वाणिज्यवादी सोच के क्रम में विकसित हुई। धन-निष्कासन के सिद्धान्त पर उस समय के अनेक आर्थिक इतिहासकारों ने अपने मत व्यक्त किए। इनमें दादा भाई नौरोजी ने अपनी पुस्तक “पावर्टी ऐन्ड अनब्रिटिश रूल इन इन्डिया” (Poverty and Un-British Rule in India) में सर्वप्रथम आर्थिक निकास की अवधारणा प्रस्तुत की। उन्होने धन-निष्कासन को सभी बुराइयों की बुराई (एविल ऑफ एविल्स) कहा है। १९०५ में उन्होने कहा था, धन का बहिर्गमन समस्त बुराइयों की जड़ है और भारतीय निर्धनता का मूल कारण। रमेश चन्द्र दत्त, महादेव गोविन्द रानाडे तथा गोपाल कृष्ण गोखले जैसे राष्ट्रवादी विचारकों ने भी धन के निष्कासन के इस प्रक्रिया के ऊपर प्रकाश डाला है। इनके अनुसार सरकार सिंचाई योजनाओं पर खर्च करने के स्थान पर एक ऐसे मद में व्यय करती है जो प्रत्यक्ष रुप से साम्राज्यवादी सरकार के हितों से जुड़ा हुआ है। आर्थिक निकास के प्रमुख तत्व थे- अंग्रेज प्रशासनिक एवं सैनिक अधिकारियों के वेतन एवं भत्ते, भारत द्वारा विदेशों से लिये गये ऋणों के ब्याज, नागरिक एवं सैन्य विभाग के लिये ब्रिटेन के भंडारों से खरीदी गयी वस्तुएं, नौवहन कंपनियों को की गयी अदायगी तथा विदेशी बैंकों तथा बीमा लाभांश। भारतीय धन के निकलकर इंग्लैण्ड जाने से भारत में पूंजी का निर्माण एवं संग्रहण नहीं हो सका, जबकि इसी धन से इंग्लैण्ड में औद्योगिक विकास के साधन तथा गति बहुत बढ़ गयी। ब्रिटिश अर्थव्यवस्था को इस धन से जो लाभांश प्राप्त होता था, उसे पुनः पूंजी के रूप में भारत में लगा दिया जाता था और इस प्रकार भारत का शोषण निरंतर बढ़ता जाता था। इस धन के निकास से भारत में रोजगार तथा आय की संभावनाओं पर अत्यधिक प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। धन का यह अपार निष्कासन भारत को अन्दर-ही-अन्दर कमजोर बनाते जा रहा था। .

नई!!: चीन और धन-निष्कासन सिद्धान्त · और देखें »

धर्मक्षेम

धर्मक्षेम (385 – 433 ई) एक बौद्ध भिक्षु थे जो भारत से चीन चले गये और वहाँ जाकर अनेकों संस्कृत ग्रन्थों का चीनी भाषा में अनुवाद किया। श्रेणी:बौद्ध भिक्षु.

नई!!: चीन और धर्मक्षेम · और देखें »

धारचूला तहसील

धारचूला तहसील भारत के उत्तराखंड राज्य में पिथौरागढ़ जनपद में एक तहसील है। पिथौरागढ़ जनपद के पूर्वी भाग में स्थित इस तहसील के मुख्यालय धारचूला नगर में स्थित हैं। इसके पूर्व में नेपाल, पश्चिम में मुनस्यारी तहसील, उत्तर में चीन तथा दक्षिण में डीडीहाट तहसील है। तहसील के अधिकार क्षेत्र में कुल 71 गाँव आते हैं, और 2011 की जनगणना के अनुसार इसकी जनसंख्या 65,689 है। .

नई!!: चीन और धारचूला तहसील · और देखें »

धारीदार पूँछ वाला तीतर

धारीदार पूँछ वाला तीतर (Mrs. Hume's pheasant) या (Hume's pheasant) या (bar-tailed pheasant) (Syrmaticus humiae) भारत के पूर्वोत्तर हिमालय तथा चीन, म्यानमार तथा थाइलैंड में पाया जाता है। .

नई!!: चीन और धारीदार पूँछ वाला तीतर · और देखें »

धूप के चश्मे

प्रत्यक्ष सूर्य के प्रकाश में धूप का चश्मा पहनना: बड़ा लेंस अच्छी सुरक्षा प्रदान करता है, लेकिन अगल-बगल से "अनचाहे प्रकाश" को रोकने के लिए चौड़ी बनावट वाले की ज़रूरत है। धूप के चश्मे एक प्रकार के सुरक्षात्मक नेत्र पहनावे हैं जिन्हें प्राथमिक रूप से आखों को सूरज की तेज़ रोशनी और उच्च-उर्जा वाले दृश्यमान प्रकाश के कारण होने वाली हानि या परेशानी से बचने के लिए डिजाइन किया गया है। वे कभी-कभी एक दृश्य सहायक के रूप में भी कार्य करते हैं, चूंकि विभिन्न नामों से ज्ञात चश्मे मौजूद हैं, जिनकी विशेषता यह होती है की उनका लेंस रंगीन, ध्रुवीकृत या गहरे रंग वाली होती है। 20वीं सदी के पूर्वार्ध में इन्हें सन चीटर्स के नाम से भी जाना जाता था (अमेरिकी अशिष्ट भाषा में चश्मो के लिए चीटर्स शब्द का इस्तेमाल किया जाता था).

नई!!: चीन और धूप के चश्मे · और देखें »

धूम्रपान

. इसे एक रिवाज के एक भाग के रूप में, समाधि में जाने के लिए प्रेरित करने और आध्यात्मिक ज्ञान को उत्पन्न करने में भी किया जा सकता है। वर्तमान में धूम्रपान की सबसे प्रचलित विधि सिगरेट है, जो मुख्य रूप से उद्योगों द्वारा निर्मित होती है किन्तु खुले तम्बाकू तथा कागज़ को हाथ से गोल करके भी बनाई जाती है। धूम्रपान के अन्य साधनों में पाइप, सिगार, हुक्का एवं बॉन्ग शामिल हैं। ऐसा बताया जाता है कि धूम्रपान से संबंधित बीमारियां सभी दीर्घकालिक धूम्रपान करने वालों में से आधों की जान ले लेती हैं किन्तु ये बीमारियां धूम्रपान न करने वालों को भी लग सकती हैं। 2007 की एक रिपोर्ट के अनुसार प्रत्येक वर्ष दुनिया भर में 4.9 मिलियन लोग धूम्रपान की वजह से मरते हैं। धूम्रपान मनोरंजक दवा का एक सबसे सामान्य रूप है। तंबाकू धूम्रपान वर्तमान धूम्रपान का सबसे लोकप्रिय प्रकार है और अधिकतर सभी मानव समाजों में एक बिलियन लोगों द्वारा किया जाता है। धूम्रपान के लिए कम प्रचलित नशीली दवाओं में भांग तथा अफीम शामिल है। कुछ पदार्थों को हानिकारक मादक पदार्थों के रूप में वर्गीकृत किया गया है जैसे कि हेरोइन, किन्तु इनका प्रयोग अत्यंत सीमित है क्योंकि अक्सर ये व्यवसायिक रूप से उपलब्ध नहीं होते.

नई!!: चीन और धूम्रपान · और देखें »

धीमा लोरिस

धीमा लोरिस (Slow loris) पूर्वोत्तर भारत, चीन के युन्नान प्रान्त, बर्मा, जावा द्वीप, फ़िलिपीन्स और दक्षिणपूर्वी एशिया के कई अन्य देशों में मिलने वाला लोरिस का एक वंश है। यह वंश निकटिसेबस (Nycticebus) कहलाता है। धीमे लोरिसों के हाथ-पाँव में विशेष नसें होती हैं जिनसे घंटो लटकने के बाद भी वह अंग सुन्न नहीं होते। .

नई!!: चीन और धीमा लोरिस · और देखें »

नरेन्द्र मोदी द्वारा किए गए अंतरराष्ट्रीय प्रधानमन्त्रीय यात्राओं की सूची

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी मई २०१६ में तेहरान, ईरान में पधारते हुए। २०१४ के आम चुनाव के बाद नरेन्द्र मोदी भारत के प्रधान मंत्री बने। नरेन्द्र मोदी द्वारा की गयीं अन्तर्राष्ट्रीय प्रधानमन्त्रीय यात्राओं की सूची इस प्रकार है। .

नई!!: चीन और नरेन्द्र मोदी द्वारा किए गए अंतरराष्ट्रीय प्रधानमन्त्रीय यात्राओं की सूची · और देखें »

नरेन्द्र मोदी सरकार की विदेश नीति

नरेन्द्र मोदी सरकार की विदेश नीति को मोदी सिद्धान्त भी कहते हैं। २६ मई, २०१४ को सत्ता में आने के तुरन्त बाद से ही मोदी सरकार ने अन्य देशों के साथ सम्बन्धों को नया आयाम देने की दिशा में कार्य करना आरम्भ कर दिया। श्रीमती सुषमा स्वराज भारत की विदेश मंत्री हैं। दक्षिण एशिया के अपने पड़ोसियों से सम्बन्ध सुधारना मोदी की विदेश नीति के केन्द्र में है। इसके लिए उन्होने १०० दिन के अन्दर ही भूटान, नेपाल, जापान की यात्रा की। इसके बाद अमेरिका, म्यांमार, आस्ट्रेलिया और फिजी की यात्रा की। श्रीमती सुषमा स्वराज ने भी बांग्लादेश, भूटान, नेपाल, म्यांमार, सिंगापुर, वियतनाम, बहरीन, अफगानिस्तान, तजाकिस्तान, यूएसए, यूके, मॉरीसस, मालदीव, यूएईदक्षिण कोरिया, चीन, ओमान, और श्रीलंका की यात्रा की है। ९वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में विश्व नेताओं के साथ मोदी .

नई!!: चीन और नरेन्द्र मोदी सरकार की विदेश नीति · और देखें »

नाथूला दर्रा

नाथूला हिमालय का एक पहाड़ी दर्रा है जो भारत के सिक्किम राज्य और दक्षिण तिब्बत में चुम्बी घाटी को जोड़ता है।, G. S. Bajpai, pp.

नई!!: चीन और नाथूला दर्रा · और देखें »

नानचांग

नानचांग शहर के बायी चौक का नज़ारा नानचांग (南昌, Nanchang) दक्षिणी-पूर्वी चीन के जिआंगशी प्रांत की राजधानी है। यह उस प्रांत के उत्तर-केन्द्रीय भाग में जिउलिंग पहाड़ों से पश्चिम में और पोयांग झील से पूर्व में स्थित है। नानचांग अपने सौंदर्य, इतिहास और सांस्कृतिक स्थलों के लिए प्रसिद्ध है। सन् २०१० की जनगणना में नानचांग की आबादी ५०,४२,५६५ थी। नानचांग एक चहल-पहल वाला व्यापारिक केंद्र है।, Shelley Jiang, Shelley Cheung, Macmillan, 2004, ISBN 978-0-312-32005-8,...

नई!!: चीन और नानचांग · और देखें »

नानझाओ राज्य

८०० ईसवी में एशिया का नक्शा, जिसमें नानझाओ और उसके पड़ोसी राज्य दिखाए गए हैं नानझाओ राज्य (चीनी: 南詔, अंग्रेज़ी: Kingdom of Nanzhao) ६५३ ईसवी से ९०२ ईसवी तक चलना वाला एक राज्य था जिसका विस्तार आधुनिक दक्षिणी चीन और दक्षिण पूर्वी एशिया पर था। यदि संगठित रूप से देखा जाए तो यह राज्य ७३७ ईसवी में स्थापित हुआ। हालांकि इसमें कई जातियाँ रहती थी, इनमें सबसे प्रमुख बइ लोग थे, इसलिए इसे कभी-कभी बइ लोगों का राज्य भी समझा जाता है, हालांकि इस राज्य का सर्वोच्च सामाजिक तबका नोसू भाषा बोलता था, जो आधुनिक यी लोग बोलते हैं।, Joe Cummings, Robert Storey, Lonely Planet Publications, Page 705, 1991, ISBN 0-86442-123-0, Accessed 15 मई 2011 इस राज्य की शुरुआत अरहई झील के किनारे हुई और इसका शहरी क्षेत्र और राजधानी आधुनिक युन्नान प्रान्त के दाली शहर के पास स्थित था। .

नई!!: चीन और नानझाओ राज्य · और देखें »

नानजिंग

नानजिंग के दृश्य, ऊपर-बाएँ से घड़ी की दिशा में घूमते हुए: चिनहुआई नदी, मिंग शियाओलिंग का मक़बरा, नानजिंग शहर, नानजिंग की शहरी दीवार, ज़ीफ़ेंग टावर इमारत नानजिंग (चीनी: 南京, अंग्रेज़ी: Nanjing या Nanking) चीन के जियांगसु राज्य की राजधानी है जिसका चीन के इतिहास और संस्कृति में एक बहुत महत्वपूर्ण किरदार रहा है। यह अतीत में कभी-कभी चीन की राष्ट्रीय राजधानी रही है और 'नानजिंग' शब्द का मतलब भी चीनी भाषा में 'दक्षिणी राजधानी' ही है। यह यांग्त्से नदी के अंतिम भाग में उस नदी की डेल्टा में स्थित है। सन् २००६ की जनगणना में नानजिंग की आबादी ५० लाख से अधिक थी और शन्घाई के बाद यह पूर्वी चीन सागर क्षेत्र का दूसरा सब से बड़ा आर्थिक केंद्र है।, Simon Foster, Jen Lin-Liu, Sharon Owyang, Sherisse Pham, Beth Reiber, Lee Wing-sze, John Wiley & Sons, 2010, ISBN 978-0-470-52658-3,...

नई!!: चीन और नानजिंग · और देखें »

नानजींग विश्वविद्यालय

नानजींग विश्वविद्यालय (南京大學, संक्षिप्त रूप "南大") है, चीन नानजींग स्थित, अच्छी तरह से उच्च शिक्षा संस्थान की स्थापना की। एक कृत्रिम नानजींग विश्वविद्यालयका अध्ययन विडवविद्यालय, एक चीनी सर्वाधिक प्रसिद्ध शीर्ष विडवविद्यालयों। 300px रवीन्द्रनाथ टैगोर नैनजिंग विश्वविद्यालय में अपने भाषण में कहा था:"चीन और भारत के सबसे कीमती सभ्यताओं है। आगे ले जाने के लिए उन्हें चीन के लिए महान सौभाग्य है, भारत और दुनिया के लिए कर रहे हैं।" (「近世文明,專尚物質,並不為貴。亞洲民族,中印兩國,自有最可貴之固有文明,發揚而光大之,實中印兩國之大幸,亦全世界之福。」) भारतीय कवि विक्रम सेठ में पढ़ाई नानजींग विश्वविद्यालय। .

नई!!: चीन और नानजींग विश्वविद्यालय · और देखें »

नाभिकीय आपूर्तिकर्ता समूह

भूरे (Gray) रंग के क्षेत्र एनएसजी के सदस्य देश हैं। नाभिकीय आपूर्तिकर्ता समूह (Nuclear Suppliers Group (NSG)) बहुत से देशों का एक समूह है जो नाभिकीय निरस्त्रीकरण (nuclear disarmament) के लिये प्रयासरत है। इस कार्य के लिये यह समूह नाभिकीय शस्त्र बनाने योग्य सामग्री के निर्यात एवं पुनः हस्तान्तरण को नियन्त्रित करता है। इसका वास्तविक लक्ष्य यह है कि जिन देशों के पास नाभिकीय क्षमता नहीं है वे इसे अर्जित न कर सकें। यह समूह ऐसे परमाणु उपकरण, सामग्री और टेक्नोलॉजी के निर्यात पर रोक लगाता है जिसका प्रयोग परमाणु हथियार बनाने में होना है और इस प्रकार यह परमाणु प्रसार को रोकता है। .

नई!!: चीन और नाभिकीय आपूर्तिकर्ता समूह · और देखें »

नारोमुरार

नारोमुरार वारिसलीगंज प्रखण्ड के प्रशाशानिक क्षेत्र के अंतर्गत राष्ट्रीय राजमार्ग 31 से 10 KM और बिहार राजमार्ग 59 से 8 KM दूर बसा एकमात्र गाँव है जो बिहार के नवादा और नालंदा दोनों जिलों से सुगमता से अभिगम्य है। वस्तुतः नार का शाब्दिक अर्थ पानी और मुरार का शाब्दिक अर्थ कृष्ण, जिनका जन्म गरुड़ पुराण के अनुसार विष्णु के 8वें अवतार के रूप में द्वापर युग में हुआ, अर्थात नारोमुरार का शाब्दिक अर्थ विष्णुगृह - क्षीरसागर है। प्रकृति की गोद में बसा नारोमुरार गाँव, अपने अंदर असीम संस्कृति और परंपरा को समेटे हुए है। यह भारत के उन प्राचीनतम गांवो में से एक है जहाँ 400 वर्ष पूर्व निर्मित मर्यादा पुरुषोत्तम राम व् परमेश्वर शिव को समर्पित एक ठाकुर वाड़ी के साथ 1920 इसवी, भारत की स्वतंत्रता से 27 वर्ष पूर्व निर्मित राजकीयकृत मध्य विद्यालय और सन 1956 में निर्मित एक जनता पुस्तकालय भी है। पुस्तकालय का उद्घाटन श्रीकृष्ण सिंह के समय बिहार के शिक्षा मंत्री द्वारा की गयी थी। .

नई!!: चीन और नारोमुरार · और देखें »

नालन्दा महाविहार

नालंदा के प्राचीन विश्वविद्यालय के अवशेष। यह प्राचीन भारत में उच्च शिक्षा का सर्वाधिक महत्वपूर्ण और विख्यात केन्द्र था। महायान बौद्ध धर्म के इस शिक्षा-केन्द्र में हीनयान बौद्ध-धर्म के साथ ही अन्य धर्मों के तथा अनेक देशों के छात्र पढ़ते थे। वर्तमान बिहार राज्य में पटना से ८८.५ किलोमीटर दक्षिण-पूर्व और राजगीर से ११.५ किलोमीटर उत्तर में एक गाँव के पास अलेक्जेंडर कनिंघम द्वारा खोजे गए इस महान बौद्ध विश्वविद्यालय के भग्नावशेष इसके प्राचीन वैभव का बहुत कुछ अंदाज़ करा देते हैं। अनेक पुराभिलेखों और सातवीं शताब्दी में भारत भ्रमण के लिए आये चीनी यात्री ह्वेनसांग तथा इत्सिंग के यात्रा विवरणों से इस विश्वविद्यालय के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त होती है। यहाँ १०,००० छात्रों को पढ़ाने के लिए २,००० शिक्षक थे। प्रसिद्ध चीनी यात्री ह्वेनसांग ने ७ वीं शताब्दी में यहाँ जीवन का महत्त्वपूर्ण एक वर्ष एक विद्यार्थी और एक शिक्षक के रूप में व्यतीत किया था। प्रसिद्ध 'बौद्ध सारिपुत्र' का जन्म यहीं पर हुआ था। .

नई!!: चीन और नालन्दा महाविहार · और देखें »

नाशी भाषा

गेबा लिपि में लिखी नाशी नाशी भाषा (अंग्रेज़ी: Naxi या Nakhi), जिसे लोमी, मोसो और मोसू भी कहा जाता है, दक्षिणी चीन में बसने वाले नाशी लोगों द्वारा बोली जाने वाली तिब्बती-बर्मी भाषा या भाषाओँ का समूह है। सन् २०१० में नाशी बोलने वालों की आबादी लगभग ३ लाख अनुमानित की गई थी।, Andrew Dalby, Columbia University Press, 2004, ISBN 978-0-231-11569-8,...

नई!!: चीन और नाशी भाषा · और देखें »

नाशी लोग

लिजिआंग (युन्नान) के पास एक गाँव में नाशी स्त्री नाशी (चीनी भाषा: 纳西族, अंग्रेज़ी: Nakhi) दक्षिणी चीन में हिमालय के छोटे पहाड़ों में बसने वाली एक जाति है। यह युन्नान प्रान्त के उत्तर-पश्चिमी भाग और सिचुआन प्रान्त के दक्षिण-पश्चिमी भाग में रहते हैं। युन्नान का लिजिआंग विभाग ख़ासकर इस समुदाय से सम्बंधित है। सन् २००० में इनकी आबादी लगभग ३ लाख अनुमानित की गई थी। माना जाता है कि नाशियों के पूर्वज तिब्बत से आये थे और ज़मानों से यह चीन के तिब्बत और भारत के व्यापार में अहम भूमिका निभाते आ रहे हैं। नाशी लोग तिब्बती-बर्मी भाषा-परिवार की नाशी भाषा बोलते हैं। यह समुदाय मोसुओ समुदाय से बहुत मिलता-जुलता है, हालांकि मोसुओ लोग अभी भी अपनी तिब्बतियों से मिलती हुई पहचान बनाए हुए हैं जबकि नाशी लोगों के चीनी सभ्यता के कुछ पहलुओं को अपना लिया है।, Andrew Dalby, Columbia University Press, 2004, ISBN 978-0-231-11569-8,...

नई!!: चीन और नाशी लोग · और देखें »

निम्नतापी रॉकेट इंजन

150px भूस्थिर उपग्रह प्रक्षेपण यान में प्रयुक्त होने वाली द्रव ईंधन चालित इंजन में ईंधन बहुत कम तापमान पर भरा जाता है, इसलिए ऐसे इंजन निम्नतापी रॉकेट इंजन या तुषारजनिक रॉकेट इंजन (अंग्रेज़ी:क्रायोजेनिक रॉकेट इंजिन) कहलाते हैं। इस तरह के रॉकेट इंजन में अत्यधिक ठंडी और द्रवीकृत गैसों को ईंधन और ऑक्सीकारक के रूप में प्रयोग किया जाता है। इस इंजन में हाइड्रोजन और ईंधन क्रमश: ईंधन और ऑक्सीकारक का कार्य करते हैं। ठोस ईंधन की अपेक्षा यह कई गुना शक्तिशाली सिद्ध होते हैं और रॉकेट को बूस्ट देते हैं। विशेषकर लंबी दूरी और भारी रॉकेटों के लिए यह तकनीक आवश्यक होती है।|हिन्दुस्तान लाईव। १८ अप्रैल २०१०। अनुराग मिश्र बढ़े कदम पा लेंगे मंजिल। हिन्दुस्तान लाईव। १८ अप्रैल २०१० क्रायोजेनिक इंजन के थ्रस्ट में तापमान बहुत ऊंचा (२००० डिग्री सेल्सियस से अधिक) होता है। अत: ऐसे में सर्वाधिक प्राथमिक कार्य अत्यंत विपरीत तापमानों पर इंजन व्यवस्था बनाए रखने की क्षमता अर्जित करना होता है। क्रायोजेनिक इंजनों में -२५३ डिग्री सेल्सियस से लेकर २००० डिग्री सेल्सियस तक का उतार-चढ़ाव होता है, इसलिए थ्रस्ट चैंबरों, टर्बाइनों और ईंधन के सिलेंडरों के लिए कुछ विशेष प्रकार की मिश्र-धातु की आवश्यकता होती है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने बहुत कम तापमान को आसानी से झेल सकने वाली मिश्रधातु विकसित कर ली है। .

नई!!: चीन और निम्नतापी रॉकेट इंजन · और देखें »

निरुपमा राव

निरुपमा मेनन राव (जन्म 6 दिसम्बर 1950) भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) की एक अधिकारी हैं, जिन्होने 31 जुलाई 2009 से 31 जुलाई 2011 तक विदेश मंत्रालय में भारतीय विदेश सचिव के रूप में कार्य कर चुकी हैं। भारतीय विदेश सेवा का इस सर्वोच्च पद पर पहुँचने वाली चोकिला अय्यर के बाद वे दूसरी महिला हैं। वे 1 अगस्त 2011 से 5 नवम्बर 2013 तक संयुक्त राज्य अमेरिका में भारत की राजदूत रह चुकी हैं। अपने करियर में वे कई पदों पर कार्य कर चुकी हैं जिनमे शामिल हैं - वॉशिंगटन में प्रेस मामलों की मंत्री, मास्को में मिशन की उप प्रमुख, विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव (पूर्व एशिया), (बाहरी प्रचार) जिसने उन्हें विदेश मंत्रालय की पहली महिला प्रवक्ता बनाया, कार्मिक प्रमुख, पेरू और चीन की राजदूत और श्रीलंका की उच्चायुक्त.

नई!!: चीन और निरुपमा राव · और देखें »

निस्सिन फूड्स

निस्सिन फूड्स (Nissin Foods) जापानी कम्पनी है जो त्वरित नूडल बनती है। इसकी स्थापना निस्सिन फ़ूड प्रोडक्ट्स कम्पनी, लिमिटेड ऑफ़ जापान (जापानी: 日清食品株式会社; हिन्दी: जापानी निस्सिन खाद्य उत्पाद लिमिटेड कंपनी) के तौर 4 सितम्बर 1948 के दिन मोमोफुकू एण्डो द्वारा की गई थी। स्थापना के दस वर्ष पश्चात कम्पनी ने अपना सबसे पहला त्वरित नूडल उत्पाद चिकिन रैमेन बाज़ार में उतारा। अमेरिकी गौण कम्पनी निस्सिन फूड्स की स्थापना 1970 में हुई और इसने त्वरित रैमेन नूडल उत्पाद को टॉप रैमेन नाम से बेचा। त्वरित नूडल (1958) और कप नूडल (1971) दोनों की ख़ोज मोमोफुकू एण्डो ने की। निस्सिन फूड्स का मुख्यालय योदोगावा, ओसाका में है। 1977 में नई इमारत के निर्माण के पश्चात कम्पनी अपने वर्तमान मुख्यालय में आई थी। निस्सिन फूड्स ने दुनिया के कई देशों में अपने कार्यालय और फैक्ट्रियाँ स्थापित की हैं, जैसे ब्राजील (1981 से), हॉन्ग कॉन्ग (1985 से), भारत (1992 से), जर्मनी (1993 से), थाइलैंड (1994 से), चीन (1995 से) और मैक्सिको (2000 से)। इनके उत्पाद फिलीपींस, ताइवान, सिंगापुर, कनाडा, स्वीडन, मलेशिया और ऑस्ट्रेलिया में भी बेचे जाते हैं। .

नई!!: चीन और निस्सिन फूड्स · और देखें »

निंग्बो

निंग्बो या निंगबो (चीनि:宁波市; अंग्रेजी: Ningbo), चीन का एक उप-प्रांतीय शहर है। .

नई!!: चीन और निंग्बो · और देखें »

निकेरी जिला

निकेरी सूरीनाम का जिला है, यह देश के उत्तर-पश्चिम में स्थित है। इसकी उत्तरी सीमा अटलांटिक महासागर, पूर्वी सीमा कोर्निये, दक्षिणी सीमा सिपेलिविनी तथा पश्चिमी सीमा गयाना के साथ लगती है। जिले की राजधानी नियूव-निकेरी है जो देश का दूसरा सबसे बड़ा शहर है। सूरीनाम और पड़ोसी राष्ट्र गयाना के सम्बंध हमेशा से ही तनावपूर्ण रहें हैं। निकेरी से गयाना की लगती सीमा पर दोनों देशो के बीच कभी-कभी छिटपुट लड़ाईयां भी हो जाती हैं। निकेरी की आबादी में हिंदुस्तानी, जावा, क्रियोल, चीनी और पुर्तगाली मूल के लोग शामिल हैं। 2004 में जनगणना के अनुसार जिले की आबादी 36,611 है। इसका कुल क्षेत्रफल 5,353 वर्ग किलोमीटर तथा घनत्व 6.8 प्रति वर्ग किलोमीटर है। आबादी के मामले में यह देश का तीसरा सबसे बड़ा तथा क्षेत्रफल अनुसार चौथा सबसे बड़ा जिला है। निकेरी में पाँच रिसॉर्ट हैं। श्रेणी:सूरीनाम के जिले.

नई!!: चीन और निकेरी जिला · और देखें »

निकोलस द्वितीय

निकोलस द्वितीय् निकोलस द्वितीय (रूसी: Николай II, Николай Александрович Романов, tr. Nikolai II, Nikolai Alexandrovich Romanov Nicholas II; 18 मई 1868 – 17 जुलाई 1918) रूस का अन्तिम सम्राट (ज़ार), फिनलैण्ड का ग्रैण्ड ड्यूक तथा पोलैण्ड का राजा था। उसकी औपचारिक लघु उपाधि थी: निकोलस द्वितीय, सम्पूर्ण रूस का सम्राट तथा आटोक्रैट। रूसी आर्थोडोक्स चर्च उसे करुणाधारी सन्त निकोलस कहता है। .

नई!!: चीन और निकोलस द्वितीय · और देखें »

नवचन्द्र झील

सन् २००९ की इस तस्वीर में आसपास के टीलों से नवचंद्र झील का नए चाँद जैसा अकार स्पष्ट है नवचंद्र झील (अंग्रेज़ी: Crescent Lake), जिसे चीनी भाषा में युएयाचुआन (月牙泉, Yueyaquan) कहते हैं, चीन के पश्चिमी गांसू प्रान्त में दूनहुआंग शहर से ६ किमी दक्षिण में रेगिस्तानी इलाक़े में एक नख़लिस्तान (ओएसिस) में एक नए चाँद की आकृति वाली एक झील है।, Fodor's, Random House Digital, Inc., 2009, ISBN 9781400008254,...

नई!!: चीन और नवचन्द्र झील · और देखें »

नवपाषाण युग

अनेकों प्रकार की निओलिथिक कलाकृतियां जिनमें कंगन, कुल्हाड़ी का सिरा, छेनी और चमकाने वाले उपकरण शामिल हैं नियोलिथिक युग, काल, या अवधि, या नव पाषाण युग मानव प्रौद्योगिकी के विकास की एक अवधि थी जिसकी शुरुआत मध्य पूर्व: फस्ट फार्मर्स: दी ओरिजंस ऑफ एग्रीकल्चरल सोसाईटीज़ से, पीटर बेल्वुड द्वारा, 2004 में 9500 ई.पू.

नई!!: चीन और नवपाषाण युग · और देखें »

नवजीत ढिल्लों

नवजीत कौर ढिल्लन एक भारतीय ट्रैक एण्ड फील्ड खिलाड़ी हैं जो कि चक्का फेक में भाग लेती हैं। वह 2018 राष्ट्रमण्डल खेलों की कांस्य पदक विजेता हैं और 2014 में एथलेटिक्स की विश्व जूनियर चैम्पियनशिप में पदक जीतने वाली दूसरी खिलाड़ी हैं। उनका सर्वश्रेष्ठ व्यक्तिगत प्रदर्शन है जो कि उन्होंने 2018 में बनाया था। .

नई!!: चीन और नवजीत ढिल्लों · और देखें »

नवंबर 2015 माली होटल हमला

20 नवम्बर 2015 को रैडिसन ब्लू,बमाको, माली में हुआ हमला, एक आतंकी हमला है। रैडिसन ब्लू यूएस ओन्ड होटल है जो विदेशी बिज़नस और एयरलाइन क्रू मेम्बर्स के बीच काफी प्रसिद्ध है। .

नई!!: चीन और नवंबर 2015 माली होटल हमला · और देखें »

नक्सलवाद

नक्सलवाद कम्युनिस्ट क्रांतिकारियों के उस आंदोलन का अनौपचारिक नाम है जो भारतीय कम्युनिस्ट आंदोलन के फलस्वरूप उत्पन्न हुआ। नक्सल शब्द की उत्पत्ति पश्चिम बंगाल के छोटे से गाँव नक्सलबाड़ी से हुई है जहाँ भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी के नेता चारू मजूमदार और कानू सान्याल ने 1967 मे सत्ता के खिलाफ़ एक सशस्त्र आंदोलन की शुरुआत की। मजूमदार चीन के कम्यूनिस्ट नेता माओत्से तुंग के बहुत बड़े प्रशंसकों में से थे और उनका मानना था कि भारतीय मज़दूरों और किसानों की दुर्दशा के लिये सरकारी नीतियाँ जिम्मेदार हैं जिसकी वजह से उच्च वर्गों का शासन तंत्र और फलस्वरुप कृषितंत्र पर वर्चस्व स्थापित हो गया है। इस न्यायहीन दमनकारी वर्चस्व को केवल सशस्त्र क्रांति से ही समाप्त किया जा सकता है। 1967 में "नक्सलवादियों" ने कम्युनिस्ट क्रांतिकारियों की एक अखिल भारतीय समन्वय समिति बनाई। इन विद्रोहियों ने औपचारिक तौर पर स्वयं को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से अलग कर लिया और सरकार के खिलाफ़ भूमिगत होकर सशस्त्र लड़ाई छेड़ दी। 1971 के आंतरिक विद्रोह (जिसके अगुआ सत्यनारायण सिंह थे) और मजूमदार की मृत्यु के बाद यह आंदोलन एकाधिक शाखाओं में विभक्त होकर कदाचित अपने लक्ष्य और विचारधारा से विचलित हो गया। आज कई नक्सली संगठन वैधानिक रूप से स्वीकृत राजनीतिक पार्टी बन गये हैं और संसदीय चुनावों में भाग भी लेते है। लेकिन बहुत से संगठन अब भी छद्म लड़ाई में लगे हुए हैं। नक्सलवाद के विचारधारात्मक विचलन की सबसे बड़ी मार आँध्र प्रदेश, छत्तीसगढ, उड़ीसा, झारखंड और बिहार को झेलनी पड़ रही है। .

नई!!: चीन और नक्सलवाद · और देखें »

नुरहाची

नुरहाची नुरहाची (मान्छु: 1 30px,nurgaci; चीनी: 努尔哈赤, अंग्रेज़ी: Nurhaci; जन्म: सन् १५५९; देहांत: ३० सितम्बर १६२६) एक प्रसिद्ध जुरचेन ख़ान (सरदार) था जिसने १६वीं शताब्दी के अंत में मंचूरिया के जुरचेन क़बीलो को एकत्रित किया और शक्तिशाली बनाया। अपने जीवनकाल में उसने आधुनिक चीन के उत्तर-पूर्वी लियाओनिंग प्रान्त के क्षेत्र पर क़ब्ज़ा कर लिया जहाँ से उसके वंशजों ने आगे चलकर पूरे चीन पर फैलकर चिंग राजवंश के नाम से अपना राज चलाया। नुरहाची अइसिन गियोरो परिवार का सदस्य था और उसने सन् १६१६ से १६२६ में अपनी मृत्यु तक शासन किया। मान्छु भाषा के लिए मान्छु लिपि को बनवाने का श्रेय भी नुरहाची को ही दिया जाता है।, Willard J. Peterson, Cambridge University Press, 2002, ISBN 978-0-521-24334-6,...

नई!!: चीन और नुरहाची · और देखें »

न्यू डेवलपमेंट बैंक

न्यू डेवलपमेंट बैंक जिसे पहले ब्रिक्स बैंक के अनौपचारिक नाम से भी जाना जाता था ब्रिक्स समूह के देशों द्वारा स्थापित किए गए एक नए विकास बैंक का आधिकारिक नाम है। 2014 के ब्रिक्स सम्मेलन में 100 अरब डॉलर की शुरुआती अधिकृत पूंजी के साथ नए विकास बैंक की स्थापना का निर्णय किया गया। माना जा रहा है कि इस बैंक और फंड को पश्चिमी देशों के वर्चस्व वाले विश्व बैंक और आईएमएफ जैसी संस्थाओं के टक्कर में खड़ा किया जा रहा है। बैंक पांच उभरते बाजारों के बीच अधिक से अधिक वित्तीय और विकास सहयोग को बढ़ावा के लिए बनाया गया है। साथ में, 2014 की गणनानुसार चार मूल ब्रिक देशों में 3 अरब लोग या दुनिया की आबादी का 41.4 प्रतिशत शामिल है, तीन महाद्वीपों में दुनिया की भूमि क्षेत्र के एक चौथाई से अधिक को घेरते हैं, और वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का 25 प्रतिशत से अधिक के लिए उत्तरदायी हैं। बैंक का मुख्यालय शंघाई, चीन में है। विश्व बैंक के विपरीत जिसमे पूंजी शेयर के आधार पर वोट प्रदान करता है ब्रिक्स बैंक में प्रत्येक भागीदार देश को एक वोट आवंटित किया जाएगा, और भागीदार देशों में से किसी के पास वीटो का अधिकार नहीं होगा। .

नई!!: चीन और न्यू डेवलपमेंट बैंक · और देखें »

नैनचांग क्यू-5

नांचांग क्यू-5 (Nanchang Q-5) (नाटो रिपोर्टिंग नाम: फंतान), जिसे अपने निर्यात संस्करणों में ए-5 में भी जाना जाता है, एक चीनी निर्मित जेट ग्राउंड-अटैक विमान है जो स्तरीय उड़ान में सुपरसोनिक गति पाने में सक्षम विमान है। जो अपने पूर्ववर्ती सोवियत मिग-19 के समान है। .

नई!!: चीन और नैनचांग क्यू-5 · और देखें »

नैपोलियन तृतीय

नैपोलियन तृतीय लुई नैपोलियन् बोनापार्ट (२० अप्रैल १८०८ - ९ जनवरी १८७३ ई.) फ्रांसीसी रिपब्लिक का प्रथम राष्ट्रपति तथा नैपोलियन तृतीय के रूप में द्वितीय फ्रांसीसी साम्राज्य का शासक था। वह नैपोलियन प्रथम का भतीजा तथा उत्तराधिकारी था। .

नई!!: चीन और नैपोलियन तृतीय · और देखें »

नेदोंग ज़िला

नेदोंग ज़िला (तिब्बती: སྣེ་གདོང་རྫོང་, Nêdong County) तिब्बत का एक ज़िला है जो उस देश के दक्षिणपूर्वी हिस्से में स्थित है। तिब्बत पर चीन का क़ब्ज़ा होने के बाद यह चीनी प्रशासनिक प्रणाली में तिब्बत स्वशासित प्रदेश के ल्होखा विभाग में पड़ता है। यरलुंग घाटी में स्थित प्राचीन त्राद्रुक मंदिर, जो तिब्बत-नरेश सोंगत्सन गम्पो (६१७-६४९ ईसवी) के काल में बना था, इसी ज़िले में स्थित है। तिब्बत के सर्वप्रथम ज्ञात सम्राट, न्यत्री त्सेन्पो (अनुमानित १२७ ईसापूर्व काल), का युम्बुलखंग नामक महल भी इसी ज़िले में स्थित है।, Robert Kelly, John Vincent Bellezza, pp.

नई!!: चीन और नेदोंग ज़िला · और देखें »

नेपाल

नेपाल, (आधिकारिक रूप में, संघीय लोकतान्त्रिक गणराज्य नेपाल) भारतीय उपमहाद्वीप में स्थित एक दक्षिण एशियाई स्थलरुद्ध हिमालयी राष्ट्र है। नेपाल के उत्तर मे चीन का स्वायत्तशासी प्रदेश तिब्बत है और दक्षिण, पूर्व व पश्चिम में भारत अवस्थित है। नेपाल के ८१ प्रतिशत नागरिक हिन्दू धर्मावलम्बी हैं। नेपाल विश्व का प्रतिशत आधार पर सबसे बड़ा हिन्दू धर्मावलम्बी राष्ट्र है। नेपाल की राजभाषा नेपाली है और नेपाल के लोगों को भी नेपाली कहा जाता है। एक छोटे से क्षेत्र के लिए नेपाल की भौगोलिक विविधता बहुत उल्लेखनीय है। यहाँ तराई के उष्ण फाँट से लेकर ठण्डे हिमालय की श्रृंखलाएं अवस्थित हैं। संसार का सबसे ऊँची १४ हिम श्रृंखलाओं में से आठ नेपाल में हैं जिसमें संसार का सर्वोच्च शिखर सागरमाथा एवरेस्ट (नेपाल और चीन की सीमा पर) भी एक है। नेपाल की राजधानी और सबसे बड़ा नगर काठमांडू है। काठमांडू उपत्यका के अन्दर ललीतपुर (पाटन), भक्तपुर, मध्यपुर और किर्तीपुर नाम के नगर भी हैं अन्य प्रमुख नगरों में पोखरा, विराटनगर, धरान, भरतपुर, वीरगंज, महेन्द्रनगर, बुटवल, हेटौडा, भैरहवा, जनकपुर, नेपालगंज, वीरेन्द्रनगर, त्रिभुवननगर आदि है। वर्तमान नेपाली भूभाग अठारहवीं सदी में गोरखा के शाह वंशीय राजा पृथ्वी नारायण शाह द्वारा संगठित नेपाल राज्य का एक अंश है। अंग्रेज़ों के साथ हुई संधियों में नेपाल को उस समय (१८१४ में) एक तिहाई नेपाली क्षेत्र ब्रिटिश इंडिया को देने पड़े, जो आज भारतीय राज्य हिमाचल प्रदेश, उत्तराखण्ड तथा पश्चिम बंगाल में विलय हो गये हैं। बींसवीं सदी में प्रारंभ हुए जनतांत्रिक आन्दोलनों में कई बार विराम आया जब राजशाही ने जनता और उनके प्रतिनिधियों को अधिकाधिक अधिकार दिए। अंततः २००८ में जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि माओवादी नेता प्रचण्ड के प्रधानमंत्री बनने से यह आन्दोलन समाप्त हुआ। लेकिन सेना अध्यक्ष के निष्कासन को लेकर राष्ट्रपति से हुए मतभेद और टीवी पर सेना में माओवादियों की नियुक्ति को लेकर वीडियो फुटेज के प्रसारण के बाद सरकार से सहयोगी दलों द्वारा समर्थन वापस लेने के बाद प्रचण्ड को इस्तीफा देना पड़ा। गौरतलब है कि माओवादियों के सत्ता में आने से पहले सन् २००६ में राजा के अधिकारों को अत्यंत सीमित कर दिया गया था। दक्षिण एशिया में नेपाल की सेना पांचवीं सबसे बड़ी सेना है और विशेषकर विश्व युद्धों के दौरान, अपने गोरखा इतिहास के लिए उल्लेखनीय रहे हैं और संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों के लिए महत्वपूर्ण योगदानकर्ता रही है। .

नई!!: चीन और नेपाल · और देखें »

नेपाल हिमालय

नेपाल हिमालय, हिमालय पर्वत श्रंखला के चार क्षैतिज विभाजनों में से एक है। काली नदी से तीस्ता नदी के बीच फैली लगभग ८०० किलोमीटर लम्बी हिमालय श्रंखला को ही नेपाल हिमालय कहा जाता है। नेपाल, तिब्बत तथा सिक्किम में स्थित इस पर्वत श्रंखला के पूर्व में असम हिमालय तथा पश्चिम में कुमाऊँ हिमालय स्थित हैं। नेपाल हिमालय चारों विभाजनों में सबसे बड़ा है। माउंट एवरेस्ट, कंचनजंघा, ल्होत्से, मकालू, चोयु, मनास्लु, धौलागिरी और अन्नपूर्णा इत्यादि नेपाल हिमालय की प्रमुख पर्वत चोटियां हैं। मेची, कोशी, बागमती, गंडक तथा कर्णाली नदियों का उद्गम नेपाल हिमालय में ही होता है। काठमांडू घाटी यहाँ की एक प्रसिद्ध घाटी है। .

नई!!: चीन और नेपाल हिमालय · और देखें »

नेपाल का प्रशासनिक विभाजन

संघीय लोकतान्त्रिक गणतन्त्र नेपाल एक छोटा देश है जो दक्षिण एशिया में भारत और चीन के बीच में स्थित है। यह देश पूरी तरह से स्थलरुद्ध है। .

नई!!: चीन और नेपाल का प्रशासनिक विभाजन · और देखें »

नेपाल का भूगोल

नेपाल के दो प्राकृतिक क्षेत्र हैं.

नई!!: चीन और नेपाल का भूगोल · और देखें »

नेपाल का इतिहास

नेपाल का इतिहास भारतीय साम्राज्यों से प्रभावित हुआ पर यह दक्षिण एशिया का एकमात्र देश था जो ब्रिटिश उपनिवेशवाद से बचा रहा। हँलांकि अंग्रेजों से हुई लड़ाई (1814-16) और उसके परिणामस्वरूप हुई संधि में तत्कालीन नेपाली साम्राज्य के अर्धाधिक भूभाग ब्रिटिश इंडिया के तहत आ गए और आज भी ये भारतीय राज्य उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम और पश्चिम बंगाल के अंश हैं। .

नई!!: चीन और नेपाल का इतिहास · और देखें »

नेपाल के प्रदेश

20 सितंबर 2015 के अनुसार नेपाल को भारतीय राज्य प्रणाली की तरह ही सात राज्यों (प्रदेशों) में विभाजित किया गया है। संविधान की धारा 295 (ख) के अनुसार प्रदेशों का नामाकरण सम्वन्धित प्रदेश के संसद (विधान सभा) में दो तिहाई बहुमत से होने का प्रावधान है। .

नई!!: चीन और नेपाल के प्रदेश · और देखें »

नेपाली वास्तुकला

काठमाण्डू की पारम्परिक वास्तु नेपाली वास्तुकला (Architecture of Nepal), कला और व्यवहारिकता का अद्वितीय समन्वय है। भारत, तिब्बत और चीन के व्यापारिक मार्गों के बीच स्थित होने के कारण इसकी वास्तु पर इन सभी क्षेत्रों की वास्तु का प्रभाव है। नेपाल के हिन्दू मन्दिरों की वास्तु पर पगोडा वास्तु का स्पष्ट प्रभाव है। श्रेणी:नेपाल.

नई!!: चीन और नेपाली वास्तुकला · और देखें »

नॉर्दर्न ट्रस्ट

शिकागो, इलिनोइस में नॉर्दर्न ट्रस्ट मुख्यालय.नॉर्दर्न ट्रस्ट कॉर्पोरेशन वित्तीय सेवाएं प्रदान करने वाली एक अंतर्राष्ट्रीय कंपनी है जिसका मुख्यालय शिकागो, इलिनोइस, अमेरिका में स्थित है। यह अमेरिका के 18 राज्यों तथा उत्तरी अमेरिका, यूरोप और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में स्थित 85 कार्यालयों के नेटवर्क के माध्यम से निवेश प्रबंधन, परिसंपत्ति व निधि प्रबंधन, वैश्वासिक व बैंकिंग सेवाएं प्रदान करती है। 31 अक्टूबर 2010 तक, नॉर्दर्न ट्रस्ट कॉर्पोरेशन के पास 81 बिलियन डॉलर की बैंकिंग परिसंपत्तियां, निगरानी के तहत 3.9 ट्रिलियन डॉलर की परिसंपत्तियां और प्रबंधन के तहत 657 बिलियन डॉलर की परिसंपत्तियां थीं। मार्च 2010 में, फॉर्च्यून पत्रिका ने उत्तम क्षेत्रीय बैंकों की श्रेणी में नॉर्दर्न ट्रस्ट को प्रथम स्थान दिया.

नई!!: चीन और नॉर्दर्न ट्रस्ट · और देखें »

नोमास्कस

नोमास्कस (Nomascus) गिबन के चार जीववैज्ञानिक वंशों में से एक है। यह दक्षिणी चीन के युन्नान प्रान्त से लेकर वियतनाम तक विस्तृत है और हाइनान द्वीप पर भी पाया जाता है। अन्य गिबन वंशों की तुलना में इस वंश में सर्वाधिक जीववैज्ञानिक जातियाँ हैं, हालांकि सभी विलुप्ति के संकट में हैं। .

नई!!: चीन और नोमास्कस · और देखें »

नोसू भाषा

सिचुआन में एक मार्गदर्शक जिसमें सबसे ऊपर नोसू (यी) में, उसके नीचे चीनी में और सबसे नीचे अंग्रेज़ी में लिखा हुआ है नोसू (नोसू: ꆈꌠ, अंग्रेज़ी: Nuosu), जिसे उत्तरी यी, लिआंगशान यी और सिचुआन यी भी कहा जाता है, दक्षिणी चीन में बसने वाले यी लोगों द्वारा बोली जाने वाली तिब्बती-बर्मी भाषाओँ की सदस्य यी भाषाओँ की मानक भाषा है। सारी यी बोलियों में यह अकेली है जिसे पाठशालाओं में लिखित रूप से पढ़ाया जाता है। दुनिया भर में ८० लाख की आबादी रखने वाले यी समुदाय में से २० लाख अब नोसू बोलते हैं और यह तादाद बढ़ रही है। तिब्बती-बर्मी भाषा परिवार में यी भाषाएँ बर्मी भाषा के करीब मानी जाती हैं।, Foong Ha Yap, Janick Wrona, Karen Grunow-harsta, John Benjamins Publishing Company, 2011, ISBN 978-90-272-0677-0,...

नई!!: चीन और नोसू भाषा · और देखें »

नीबू

नीबू का वृक्ष नीबू (Citrus limon, Linn.) छोटा पेड़ अथवा सघन झाड़ीदार पौधा है। इसकी शाखाएँ काँटेदार, पत्तियाँ छोटी, डंठल पतला तथा पत्तीदार होता है। फूल की कली छोटी और मामूली रंगीन या बिल्कुल सफेद होती है। प्रारूपिक (टिपिकल) नीबू गोल या अंडाकार होता है। छिलका पतला होता है, जो गूदे से भली भाँति चिपका रहता है। पकने पर यह पीले रंग का या हरापन लिए हुए होता है। गूदा पांडुर हरा, अम्लीय तथा सुगंधित होता है। कोष रसयुक्त, सुंदर एवं चमकदार होते हैं। नीबू अधिकांशत: उष्णदेशीय भागों में पाया जाता है। इसका आदिस्थान संभवत: भारत ही है। यह हिमालय की उष्ण घाटियों में जंगली रूप में उगता हुआ पाया जाता है तथा मैदानों में समुद्रतट से 4,000 फुट की ऊँचाई तक पैदा होता है। इसकी कई किस्में होती हैं, जो प्राय: प्रकंद के काम में आती हैं, उदाहरणार्थ फ्लोरिडा रफ़, करना या खट्टा नीबू, जंबीरी आदि। कागजी नीबू, कागजी कलाँ, गलगल तथा लाइम सिलहट ही अधिकतर घरेलू उपयोग में आते हैं। इनमें कागजी नीबू सबसे अधिक लोकप्रिय है। इसके उत्पादन के स्थान मद्रास, बंबई, बंगाल, पंजाब, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र हैदराबाद, दिल्ली, पटियाला, उत्तर प्रदेश, मैसूर तथा बड़ौदा हैं। नीबू की उपयोगिता जीवन में बहुत अधिक है। इसका प्रयोग अधिकतर भोज्य पदार्थों में किया जाता है। इससे विभिन्न प्रकार के पदार्थ, जैसे तेल, पेक्टिन, सिट्रिक अम्ल, रस, स्क्वाश तथा सार (essence) आदि तैयार किए जाते हैं। .

नई!!: चीन और नीबू · और देखें »

नीलगिरी (यूकलिप्टस)

नीलगिरी मर्टल परिवार, मर्टसिया प्रजाति के पुष्पित पेड़ों (और कुछ झाडि़यां) की एक भिन्न प्रजाति है। इस प्रजाति के सदस्य ऑस्ट्रेलिया के फूलदार वृक्षों में प्रमुख हैं। नीलगिरी की 700 से अधिक प्रजातियों में से ज्यादातर ऑस्ट्रेलिया मूल की हैं और इनमें से कुछ बहुत ही अल्प संख्या में न्यू गिनी और इंडोनेशिया के संलग्न हिस्से और सुदूर उत्तर में फिलपिंस द्वीप-समूहों में पाये जाते हैं। इसकी केवल 15 प्रजातियां ऑस्ट्रेलिया के बाहर पायी जाती हैं और केवल 9 प्रजातियां ऑस्ट्रेलिया में नहीं होतीं.

नई!!: चीन और नीलगिरी (यूकलिप्टस) · और देखें »

पटना

पटना (पटनम्) या पाटलिपुत्र भारत के बिहार राज्य की राजधानी एवं सबसे बड़ा नगर है। पटना का प्राचीन नाम पाटलिपुत्र था। आधुनिक पटना दुनिया के गिने-चुने उन विशेष प्राचीन नगरों में से एक है जो अति प्राचीन काल से आज तक आबाद है। अपने आप में इस शहर का ऐतिहासिक महत्व है। ईसा पूर्व मेगास्थनीज(350 ईपू-290 ईपू) ने अपने भारत भ्रमण के पश्चात लिखी अपनी पुस्तक इंडिका में इस नगर का उल्लेख किया है। पलिबोथ्रा (पाटलिपुत्र) जो गंगा और अरेन्नोवास (सोनभद्र-हिरण्यवाह) के संगम पर बसा था। उस पुस्तक के आकलनों के हिसाब से प्राचीन पटना (पलिबोथा) 9 मील (14.5 कि॰मी॰) लम्बा तथा 1.75 मील (2.8 कि॰मी॰) चौड़ा था। पटना बिहार राज्य की राजधानी है और गंगा नदी के दक्षिणी किनारे पर अवस्थित है। जहां पर गंगा घाघरा, सोन और गंडक जैसी सहायक नदियों से मिलती है। सोलह लाख (2011 की जनगणना के अनुसार 1,683,200) से भी अधिक आबादी वाला यह शहर, लगभग 15 कि॰मी॰ लम्बा और 7 कि॰मी॰ चौड़ा है। प्राचीन बौद्ध और जैन तीर्थस्थल वैशाली, राजगीर या राजगृह, नालन्दा, बोधगया और पावापुरी पटना शहर के आस पास ही अवस्थित हैं। पटना सिक्खों के लिये एक अत्यंत ही पवित्र स्थल है। सिक्खों के १०वें तथा अंतिम गुरु गुरू गोबिंद सिंह का जन्म पटना में हीं हुआ था। प्रति वर्ष देश-विदेश से लाखों सिक्ख श्रद्धालु पटना में हरमंदिर साहब के दर्शन करने आते हैं तथा मत्था टेकते हैं। पटना एवं इसके आसपास के प्राचीन भग्नावशेष/खंडहर नगर के ऐतिहासिक गौरव के मौन गवाह हैं तथा नगर की प्राचीन गरिमा को आज भी प्रदर्शित करते हैं। एतिहासिक और प्रशासनिक महत्व के अतिरिक्त, पटना शिक्षा और चिकित्सा का भी एक प्रमुख केंद्र है। दीवालों से घिरा नगर का पुराना क्षेत्र, जिसे पटना सिटी के नाम से जाना जाता है, एक प्रमुख वाणिज्यिक केन्द्र है। .

नई!!: चीन और पटना · और देखें »

पटना का इतिहास

लोककथाओं के अनुसार, राजा पत्रक को पटना का जनक कहा जाता है, जिसने अपनी रानी पाटलि के लिये जादू से इस नगर का निर्माण किया। इसी कारण नगर का नाम पाटलिग्राम पड़ा। पाटलिपुत्र नाम भी इसी के कारण पड़ा। संस्कृत में पुत्र का अर्थ पुत्र या बेटा तथा ग्राम का अर्थ गांव होता है। पुरातात्विक अनुसंधानो के अनुसार पटना का इतिहास 490 ईसा पूर्व से होता है जब हर्यक वन्श के शासक अजातशत्रु ने अपनी राजधानी राजगृह से बदलकर यहां स्थापित की, क्योंकि वैशाली के लिच्छवियों से संघर्ष में उपयुक्त होने के कारण पाटलिपुत्र राजगृह की अपेक्षा सामरिक दृष्टि से अधिक रणनीतिक स्थान पर था। उसने गंगा के किनारे यह स्थान चुना और अपमा दुर्ग स्थापित कर लिया। उस समय से ही इस नगर का लगातार इतिहास रहा है - ऐसा गौरव दुनिया के बहुत कम नगरों को हासिल है। बौद्ध धर्म के प्रवर्तक गौतम बुद्ध अपने अन्तिम दिनों में यहां से गुजरे थे। उन्होने ये भविष्यवाणी की थी कि नगर का भविष्य उज्जवल होगा, पर कभी बाढ़, आग या आपसी संघर्ष के कारण यह बर्बाद हो जाएगा। मौर्य साम्राज्य के उत्कर्ष के बाद पाटलिपुत्र सत्ता का केन्द्र बन गया। चन्द्रगुप्त मौर्य का साम्राज्य बंगाल की खाड़ी से अफ़ग़ानिस्तान तक फैल गया था। शुरूआती पाटलिपुत्र लकड़ियों से बना था, पर सम्राट अशोक ने नगर को शिलाओं की संरचना मे तब्दील किया। चीन के फाहियान ने, जो कि सन् 399-414 तक भारत यात्रा पर था, अपने यात्रा-वृतांत में यहां के शैल संरचनाओं का जीवन्त वर्णन किया है। मेगास्थनीज़, जो कि एक युनानी इतिहासकार और चन्द्रगुप्त मौर्य के दरबार में एक राजदूत के नाते आया था, ने पाटलिपुत्र नगर का प्रथम लिखित विवरण दिया। ज्ञान की खोज में, बाद में कई चीनी यात्री यहां आए और उन्होने भी यहां के बारे में, अपने यात्रा-वृतांतों में लिखा है। इसके पश्चात नगर पर कई राजवंशों का राज रहा। इन राजाओं ने यहीं से भारतीय उपमहाद्वीप पर शासन किया। गुप्त वंश के शासनकाल को प्राचीन भारत का स्वर्ण युग कहा जाता है। पर इसके बाद नगर को वह गैरव नहीं मिल पाया जो एक समय मौर्य वंश के समय प्राप्त था। गुप्त साम्राज्य के पतन के बाद पटना का भविष्य काफी अनिश्चित रहा। 12 वीं सदी में बख़्तियार खिलजी ने बिहार पर अपना अधिपत्य जमा लिया और कई आध्यात्मिक प्रतिष्ठानों को ध्वस्त कर डाला। पटना देश का सांस्कृतिक और राजनैतिक केन्द्र नहीं रहा। मुगलकाल में दिल्ली के सत्ताधारियों ने यहां अपना नियंत्रण बनाए रखा। इस काल में सबसे उत्कृष्ठ समय तब आया जब शेरसाह सूरी ने नगर को पुनर्जीवित करने की कोशिश की। उसने गंगा के तीर पर एक किला बनाने की सोची। उसका बनाया कोई दुर्ग तो अभी नहीं है, पर अफ़ग़ान शैली में बना एक मस्जिद अभी भी है। मुगल बादशाह अकबर 1574 में अफ़गान सरगना दाउद ख़ान को कुचलने पटना आया। अकबर के राज्य सचिव एवं आइने अकबरी के लेखक (अबुल फ़जल) ने इस जगह को कागज, पत्थर तथा शीशे का सम्पन्न औद्योगिक केन्द्र के रूप में वर्णित किया है। पटना राइस के नाम से यूरोप में प्रसिद्ध चावल के विभिन्न नस्लों की गुणवत्ता का उल्लेख भी इन विवरणों में मिलता है। मुगल बादशाह औरंगजेब ने अपने प्रिय पोते मुहम्मद अज़ीम के अनुरोध पर 1704 में, शहर का नाम अजीमाबाद कर दिया। अज़ीम उस समय पटना का सूबेदार था। पर इस कालखंड में, नाम के अतिरिक्त पटना में कुछ विशेष बदलाव नहीं आया। मुगल साम्राज्य के पतन के साथ ही पटना बंगाल के नबाबों के शासनाधीन हो गया जिन्होंने इस क्षेत्र पर भारी कर लगाया पर इसे वाणिज्यिक केन्द्र बने रहने की छूट दी। १७वीं शताब्दी में पटना अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का केन्द्र बन गया। अंग्रेज़ों ने 1620 में यहां रेशम तथा कैलिको के व्यापार के लिये यहां फैक्ट्री खोली। जल्द ही यह सॉल्ट पीटर (पोटेशियम नाइट्रेट) के व्यापार का केन्द्र बन गया जिसके कारण फ्रेंच और डच लोग से प्रतिस्पर्धा तेज हुई। बक्सर के निर्णायक युद्ध के बाद नगर इस्ट इंडिया कंपनी के अधीन चला गया और वाणिज्य का केन्द्र बना रहा। 1912, में बंगाल के विभाजन के बाद, पटना उड़ीसा तथा बिहार की राजधाान बना। It soon emerged as an important and strategic centre.

नई!!: चीन और पटना का इतिहास · और देखें »

पटाख़ा

फटता हुआ पटाख़ा पटाख़ा एक छोटी-सी विस्फोटक आतिशबाज़ी है जो मुख्यत: भारी आवाज या शोर उत्पन्न करने के उद्देश्य से बनायी जाती है। पटाख़ों का आविष्कार चीन में हुआ।, Eiichiro Ochiai, Springer, 2011, ISBN 978-3-642-20272-8,...

नई!!: चीन और पटाख़ा · और देखें »

पतंग

योकाइची विशाल पतंग महोत्सव्स, जो हर वर्ष मई के चौथे रविवार को जापान के हिगाशियोमी में मनाया जाता है। पतंग एक धागे के सहारे उड़ने वाली वस्तु है जो धागे पर पडने वाले तनाव पर निर्भर करती है। पतंग तब हवा में उठती है जब हवा (या कुछ मामलों में पानी) का प्रवाह पतंग के ऊपर और नीचे से होता है, जिससे पतंग के ऊपर कम दबाव और पतंग के नीचे अधिक दबाव बनता है। यह विक्षेपन हवा की दिशा के साथ क्षैतिज खींच भी उत्पन्न करता है। पतंग का लंगर बिंदु स्थिर या चलित हो सकता है। पतंग आमतौर पर हवा से भारी होती है, लेकिन हवा से हल्की पतंग भी होती है जिसे हैलिकाइट कहते है। ये पतंगें हवा में या हवा के बिना भी उड़ सकती हैं। हैलिकाइट पतंगे अन्य पतंगों की तुलना में एक अन्य स्थिरता सिद्धांत पर काम करती हैं क्योंकि हैलिकाइट हीलियम-स्थिर और हवा-स्थिर होती हैं। .

नई!!: चीन और पतंग · और देखें »

पन्ना

पन्ना, बेरिल (Be3Al2(SiO3)6) नामक खनिज का एक प्रकार है जो हरे रंग का होता है और जिसे क्रोमियम और कभी-कभी वैनेडियम की मात्रा से पहचाना जाता है।हर्ल्बट, कॉर्नेलियस एस.

नई!!: चीन और पन्ना · और देखें »

परमाणु परीक्षण

२७ मार्च, १९५४ को अमरीका द्वारा किये गये कैसल रोमियो नाभिकीय परीक्षण का चित्र "बेकर शॉट", संयुक्त राष्ट्र द्वारा किया गया ऑपरेशन क्रॉसरोड्स अभियान का एक भाग, १९४६ नाभिकीय अस्त्र परीक्षण (अंग्रेज़ी:Nuclear weapons tests) या परमाण परीक्षण उन प्रयोगों को कहते हैं जो डिजाइन एवं निर्मित किये गये नाभिकीय अस्त्रों के प्रभाविकता, उत्पादकता एवं विस्फोटक क्षमता की जाँच करने के लिये किये जाते हैं। परमाणु परीक्षणों से कई जानकारियाँ प्राप्त होतीं हैं; जैसे - ये नाभिकीय हथियार कैसा काम करते हैं; विभिन्न स्थितियों में ये किस प्रकार का परिणाम देते हैं; भवन एवं अन्य संरचनायें इन हथियारों के प्रयोग के बाद कैसा बर्ताव करतीं हं। सन् १९४५ के बाद बहुत से देशों ने परमाणु परीक्षण किये। इसके अलावा परमाणु परीक्षणों से वैज्ञानिक, तकनीकी एवं सैनिक शक्ति का प्रदर्शन करने की कोशिश भी की जाती है। .

नई!!: चीन और परमाणु परीक्षण · और देखें »

परमाणु बम

सन् १९४५ में जापान के नागासाकी पर गिराये बम से उत्पन्न कुकुरमुता के सदृश बादल - ये बादल बम के गिरने के स्थान से लगभग १८ किमी उपर तक उठे थे। नाभिकीय अस्त्र या परमाणु बम एक विस्फोटक युक्ति है जिसकी विध्वंसक शक्ति का आधार नाभिकीय अभिक्रिया होती है। यह नाभिकीय संलयन (Nuclear fusion) या नाभिकीय विखण्डन (nuclear fission) या इन दोनो प्रकार की नाभिकीय अभिक्रियों के सम्मिलन से बनाये जा सकते हैं। दोनो ही प्रकार की अभिक्रिया के परिणामस्वरूप थोड़े ही सामग्री से भारी मात्रा में ऊर्जा उत्पन्न होती है। आज का एक हजार किलो से थोड़ा बड़ा नाभिकीय हथियार इतनी ऊर्जा उत्पन्न कर सकता है जितनी कई अरब किलो के परम्परागत विस्फोटकों से ही उत्पन्न हो सकती है। नाभिकीय हथियार महाविनाशकारी हथियार (weapons of mass destruction) कहे जाते हैं। द्वितीय विश्वयुद्ध में सबसे अधिक शक्तिशाली विस्फोटक, जो प्रयुक्त हुआ था, उसका नाम 'ब्लॉकबस्टर' (blockbuster) था। इसके निर्माण में तब तक ज्ञात प्रबलतम विस्फोटक ट्राईनाइट्रोटोलुईन (TNT) का 11 टन प्रयुक्त हुआ था। इस विस्फोटक से 2000 गुना अधिक शक्तिशाली प्रथम परमाणु बम था जिसका विस्फोट टी.

नई!!: चीन और परमाणु बम · और देखें »

परमाणु अप्रसार संधि

परमाणु अप्रसार संधि (अंग्रेज़ी:नॉन प्रॉलिफरेशन ट्रीटी) को एनपीटी के नाम से जाना जाता है। इसका उद्देश्य विश्व भर में परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के साथ-साथ परमाणु परीक्षण पर अंकुश लगाना है। १ जुलाई १९६८ से इस समझौते पर हस्ताक्षर होना शुरू हुआ। अभी इस संधि पर हस्ताक्षर कर चुके देशों की संख्या १९0 है। जिसमें पांच के पास आण्विक हथियार हैं। ये देश हैं- अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और चीन। सिर्फ पांच संप्रभुता संपन्न देश इसके सदस्य नहीं हैं। ये हैं- भारत, इजरायल, पाकिस्तान द.सुदान और उत्तरी कोरिया। एनपीटी के तहत भारत को परमाणु संपन्न देश की मान्यता नहीं दी गई है। जो इसके दोहरे मापदंड को प्रदर्शित करती है। इस संधि का प्रस्ताव आयरलैंड ने रखा था और सबसे पहले हस्ताक्षर करने वाला राष्ट्र है फिनलैंड। इस संधि के तहत परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र उसे ही माना गया है जिसने १ जनवरी १९६७ से पहले परमाणु हथियारों का निर्माण और परीक्षण कर लिया हो। इस आधार पर ही भारत को यह दर्जा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नहीं प्राप्त है। क्योंकि भारत ने पहला परमाणु परीक्षण १९७४ में किया था। उत्तरी कोरिया ने इस सन्धि पर हस्ताक्षर किये, इसका उलंघन किया और फिर इससे बाहर आ गया। .

नई!!: चीन और परमाणु अप्रसार संधि · और देखें »

परमाणु अस्त्रों से युक्त देशों की सूची

दुनिया में आठ देश हैं जो परमाणु हथियारों को सफलतापूर्वक विस्फोट कर चुके हैं। इन में से पाच देश परमाणु अप्रसार संधि के अंतर्गत परमाणु-हथियार राज्य जाने जाते है; जो है अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस, और चीन। परमाणु अप्रसार संधि मे शामील न होने वाले तीन देश जिन्होंने सफलतापूर्वक परमाणु विस्फोट किया है वो है; भारत, उत्तर कोरिया, और पाकिस्तान। उत्तरी कोरिया पहले परमाणु अप्रसार संधि मे शामिल था लेकिन २००३ में वे हट गए। इज़राइल के पास भी परमाणु हथियार होने की व्यापक संभावना जताई जाती है, हालांकि यह इसके बारे में जानबूझकर अस्पष्टता की नीति बनाए रखता है और यह स्वीकार नहीं करता है। और इज़राइल किसी प्रकार के परमाणु परीक्षण आयोजित करने के लिए निश्चित रूप से ज्ञात नहीं है। .

नई!!: चीन और परमाणु अस्त्रों से युक्त देशों की सूची · और देखें »

परित्यक्त डेल्टा

जब किसी नदी दारा पहले से निर्मित डेल्टा को छोड़कर दूसरी जगह अलग डेल्टा का निर्माण कर किया जाता हैं, तब पहले वाला डेल्टा परित्यक्त डेल्टा कहलाता हैं। .

नई!!: चीन और परित्यक्त डेल्टा · और देखें »

पर्च

पर्च (perch) मीठे पानी में रहने वाली एक हड्डीदार मछली है जो विश्व के बहुत स्थानों में मिलती है। इसकी तीन जातियाँ हैं। किरण-फ़िन वाली हड्डीदार मछलियों के एक कुल को इन्ही मछलियों के नाम पर 'पर्सिडाए' (Percidae) कहा जाता है। बहुत सी ऐसी भी मछलियाँ हैं जो दिखने में पर्च जैसी लगती हैं इसलिए कभी-कभी उन्हें भी 'पर्च' कह दिया जाता हैं हालांकि उनका जीववैज्ञानिक कुल अलग होता है। ऐसी मछलियों को 'पर्सिफ़ोर्म' (Perciform) कहा जाता है। इनमें भारतीय उपमहाद्वीप में मिलने वाली 'कवई' मछली भी शामिल है जो पर्सिफ़ोर्म तो है लेकिन जीववैज्ञानिक दृष्टि से पर्च नहीं है।, Kamil Bulcke, pp.

नई!!: चीन और पर्च · और देखें »

पर्यटन

Cairo), मिस्र. Granada) (स्पेन) में है, यूरोप के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक है। Parthenon) जो एथेंस, में है ग्रीस यूरोप में एक ऐसा प्राचीन स्मारक है जिसे लोग सबसे ज्यादा देखने आते हैं। America) में दूसरा सबसे बड़ा देश है जहाँ लोग सबसे अधिक घूमने आते हैं, दुनिया में इसका १० वां स्थान है। क्रमशः ऐसे स्थान रहें है जहाँ लोग सबसे ज्यादा घूमने जाते हैं। वेटिकन सिटी, दुनिया के ऐसे स्थानों में से एक है जहाँ लोग सबसे ज्यादा घूमने जाते हैं। Niagara Falls), संयुक्त राज्य अमेरिका-कनाडा सीमा, दुनिया के ऐसे स्थानों में से एक है जहाँ लोग सबसे ज्यादा घूमने जाते हैं। Disneyland), टोक्यो, जापान, घूमने के लिए दुनिया के सबसे आकर्षक स्थानों में से एक है। Statue of Liberty), घूमने के लिए दुनिया के सबसे आकर्षक स्थानों में से एक है। लंदन, युरोमोनिटर के अनुसार २००६ में एक ऐसा शहर था जहाँ लोग सबसे ज्यादा घूमने जाते थे। पर्यटन एक ऐसी यात्रा (travel) है जो मनोरंजन (recreational) या फुरसत के क्षणों का आनंद (leisure) उठाने के उद्देश्यों से की जाती है। विश्व पर्यटन संगठन (World Tourism Organization) के अनुसार पर्यटक वे लोग हैं जो "यात्रा करके अपने सामान्य वातावरण से बाहर के स्थानों में रहने जाते हैं, यह दौरा ज्यादा से ज्यादा एक साल के लिए मनोरंजन, व्यापार, अन्य उद्देश्यों से किया जाता है, यह उस स्थान पर किसी ख़ास क्रिया से सम्बंधित नहीं होता है। पर्यटन दुनिया भर में एक आरामपूर्ण गतिविधि के रूप में लोकप्रिय हो गया है। २००७ में, ९०३ मिलियन से अधिक अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के आगमन के साथ, २००६ की तुलना में ६.६ % की वृद्धि दर्ज की गई। २००७ में अंतर्राष्ट्रीय पर्यटक प्राप्तियां USD ८५६ अरब थी।खंड ६ नं २ विश्व अर्थव्यवस्था में अनिश्चितताओं के बावजूद, २००८ के पहले चार महीनों में आगमन में ५ % की वृद्धि हुई, यह २००७ में समान अवधि में हुई वृद्धि के लगभग समान थी। कई देशों जैसे इजिप्ट, थाईलैंड और कई द्वीप राष्ट्रों जैसे फिजी के लिए पर्यटन बहुत महत्वपूर्ण है, क्यों कि अपने माल और सेवाओं के व्यापार से ये देश बहुत अधिक मात्रा में धन प्राप्त करते हैं और सेवा उद्योग (service industries) में रोजगार के अवसर पर्यटन से जुड़े हैं। इन सेवा उद्योगों में परिवहन (transport) सेवाएँ जैसे क्रूज पोत और टैक्सियाँ, निवास स्थान जैसे होटल और मनोरंजन स्थल और अन्य आतिथ्य उद्योग (hospitality industry) सेवाएँ जैसे रिज़ोर्ट शामिल हैं। .

नई!!: चीन और पर्यटन · और देखें »

पर्ल एस बक

पर्ल एस बक (जून 26, 1892 – मार्च 6, 1973) एक अमेरिकी लेखिका और उपन्यासकार थीं। बक एक मिशनरी की बेटी थीं और उन्होंने अपने पिता के साथ और उनके देहान्त के बाद भी जिंदगी का लंबा हिस्सा चीन के झेनझियांग में बिताया। चीन की सीमाजिक पृष्ठभूमि पर लिखा उनका उपन्यास द गुड अर्थ अमेरिका में 1931 और 1932 के बीच बेस्टसेलर रहा और इस उपन्यास को 1932 में पुलित्ज़र पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसी उपन्यास के लिए 1938 में उन्हें नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। .

नई!!: चीन और पर्ल एस बक · और देखें »

पर्वतीय बांस का तीतर

पर्वतीय बांस का तीतर Mountain Bamboo Partridge (Bambusicola fytchii) तीतर के कुल का एक पक्षी है। .

नई!!: चीन और पर्वतीय बांस का तीतर · और देखें »

पल्लव राजवंश

पल्लव राजवंश प्राचीन दक्षिण भारत का एक राजवंश था। चौथी शताब्दी में इसने कांचीपुरम में राज्य स्थापित किया और लगभग ६०० वर्ष तमिल और तेलुगु क्षेत्र में राज्य किया। बोधिधर्म इसी राजवंश का था जिसने ध्यान योग को चीन में फैलाया। यह राजा अपने आप को क्षत्रिय मानते थे। .

नई!!: चीन और पल्लव राजवंश · और देखें »

पशुधन

घरेलू भेड़ और एक गाय (बछिया) दक्षिण अफ्रीका में एक साथ चराई करते हुए एक या अधिक पशुओं के समूह को, जिन्हें कृषि सम्बन्धी परिवेश में भोजन, रेशे तथा श्रम आदि सामग्रियां प्राप्त करने के लिए पालतू बनाया जाता है, पशुधन के नाम से जाना जाता है। शब्द पशुधन, जैसा कि इस लेख में प्रयोग किया गया है, में मुर्गी पालन तथा मछली पालन सम्मिलित नहीं है; हालांकि इन्हें, विशेष रूप से मुर्गीपालन को, साधारण रूप से पशुधन में सम्मिलित किया जाता हैं। पशुधन आम तौर पर जीविका अथवा लाभ के लिए पाले जाते हैं। पशुओं को पालना (पशु-पालन) आधुनिक कृषि का एक महत्वपूर्ण भाग है। पशुपालन कई सभ्यताओं में किया जाता रहा है, यह शिकारी-संग्राहक से कृषि की ओर जीवनशैली के अवस्थांतर को दर्शाता है। .

नई!!: चीन और पशुधन · और देखें »

पश्चिम की यात्रा

वानर-राज सुन वुकौंग (उपन्यास की एक प्रति के चित्रण में) पश्चिम की यात्रा (चीनी: 西遊記) चीनी साहित्य के चार महान प्राचीन उपन्यासों में से एक है। इसका प्रकाशन मिंग राजवंश के काल में सन् 1590 के दशक में बेनाम तरीक़े से हुआ था। बीसवी सदी में इसकी लिखाई और अन्य तथ्यों की जाँच करी गई और इसे लिखने का श्रेय वू चॅन्गॅन (吴承恩, 1500-1582) नामक लेखक को दिया गया। इसकी कहानी प्रसिद्ध बौद्ध भिक्षु ह्वेन त्सांग की भारत की यात्रा पर आधारित है। ह्वेन त्सांग तंग राजवंश के काल के दौरान "पश्चिमी क्षेत्रों" (जिनमें भारत शामिल है) के दौरे पर बौद्ध सूत्र और ग्रन्थ लेने आये थे। इस उपन्यास में दिखाया गया है कि महात्मा बुद्ध के निर्देश पर गुआन यिन नामक बोधिसत्त्व (एक जागृत आत्मा) ने ह्वेन त्सांग को भारत से धार्मिक ग्रन्थ लाने का कार्य सौंपा। साथ ही उन्होंने ह्वेन त्सांग को शिष्यों के रूप में तीन रक्षक दिए: सुन वुकौंग (एक शक्तिशाली वानर), झू बाजिए (एक आधा इंसान - आधा सूअर जैसा प्राणी) और शा वुजिंग (एक भैंसे की प्रवृति वाला योद्धा)। इस उपन्यास का मुख्य पात्र सुन वुकौंग (वानर) है और कभी-कभी इस कहानी को "बन्दर की कहानी", "बन्दर देव की कहानी" या सिर्फ़ "बन्दर" भी कहा जाता है। बहुत से विद्वानों का मानना है कि सुन वुकौंग की प्रेरणा वास्तव में हनुमान के चरित्र से हुई है।Jenner, W.J.F. (1984).

नई!!: चीन और पश्चिम की यात्रा · और देखें »

पश्चिमाञ्चल विकास क्षेत्र

मध्यमांचल विकास क्षेत्र नेपाल का एक प्रान्त है जो नेपाल के पाँच विकास क्षेत्रों में से एक विकास क्षेत्र है। यह नेपाल के मध्य में स्थित है। इस के पूर्व में नेपाल का मध्यमांचल विकास क्षेत्र तथा पश्चिम में नेपाल का मध्य-पश्चिमांचल विकास क्षेत्र तथा उत्तर में चीन का तिब्बत तथा दक्षिण में भारत का उत्तर प्रदेश स्थित है। मध्यमांचल विकास क्षेत्र का मुख्यालय पोखरा में स्थित है। इस प्रान्त में ३ अंचल तथा १६ जिलें हैं। Category:नेपाल के पूर्व शासन प्रणाली.

नई!!: चीन और पश्चिमाञ्चल विकास क्षेत्र · और देखें »

पश्चिमी झोऊ राजवंश

पश्चिमी झोऊ काल की रियासतें - समय के साथ सम्राट से इनकी आज़ादी बढ़ती चली गई पहले झोऊ सम्राट, राजा वू (周武王, झोऊ वू वांग) पश्चिमी झोऊ राजवंश काल (चीनी:西周; पिनयिन अंग्रेज़ीकरण: Western Zhou) प्राचीन चीन के झोऊ राजवंश काल के पहले भाग को कहते हैं। .

नई!!: चीन और पश्चिमी झोऊ राजवंश · और देखें »

पश्चिमी शिया

सन् ११११ ईसवी में पश्चिमी शिया राजवंश का क्षेत्र (हरे रंग में) तान्गूत सरकार द्वारा जारी यह कांसे के अधिकारपत्र धारक को 'घोड़े जलाने' (यानि आपातकाल में सरकारी घोड़े तेज़ी से दोड़ाकर थका डालने) की अनुमति देते थे पश्चिमी शिया राजवंश (चीनी: 西夏, शी शिया; अंग्रेजी: Western Xia) जिसे तान्गूत साम्राज्य (Tangut Empire) भी कहा जाता है पूर्वी एशिया का एक साम्राज्य था जो आधुनिक चीन के निंगशिया, गांसू, उत्तरी शान्शी, पूर्वोत्तरी शिनजियांग, दक्षिण-पश्चिमी भीतरी मंगोलिया और दक्षिणी मंगोलिया पर सन् १०३८ से १२२७ ईसवी तक विस्तृत था। तान्गूत लोग तिब्बती लोगों से सम्बंधित माने जाते हैं और उन्होंने चीनी लोगों का पड़ोसी होने के बावजूद चीनी संस्कृति नहीं अपनाई। तिब्बती और तान्गूत लोग इस साम्राज्य को मिन्याक साम्राज्य (Mi-nyak) बुलाते थे। तान्गुतों ने कला, संगीत, साहित्य और भवन-निर्माण में बहुत तरक्की की थी। सैन्य क्षेत्र में भी वे सबल थे - वे शक्तिशाली लियाओ राजवंश, सोंग राजवंश और जिन राजवंश (१११५–१२३४) का पड़ोसी होते हुए भी डट सके क्योंकि उनका फ़ौजी बन्दोबस्त बढ़िया था। रथी, धनुर्धर, पैदल सिपाही, ऊँटों पर लदी तोपें और जल-थल दोनों पर जूझने को तैयार टुकड़ियाँ सभी उनकी सेना का अंग थीं और एक-साथ आयोजित तरीक़े से लड़ना जानती थीं।, David Hartill, Trafford Publishing, 2005, ISBN 978-1-4120-5466-9,...

नई!!: चीन और पश्चिमी शिया · और देखें »

पश्चिमी क्षेत्र

पहली सदी ईसा-पूर्व में चीनी दृष्टिकोण से पश्चिमी क्षेत्रों का नक़्शा पश्चिमी क्षेत्र या षीयू (चीनी भाषा: 西域) तीसरी सदी ईसा-पूर्व से आठवी सदी ईसवी तक लिखे गए चीनी ग्रंथों में मध्य एशिया को कहा जाता था। कभी-कभी भारतीय उपमहाद्वीप और मध्य पूर्व के क्षेत्र को भी इसमें शामिल किया जाता था। व्यापार के लिए ऐतिहासिक रेशम मार्ग इन्हीं क्षेत्रों से होकर गुज़रता था। चीन में तंग राजवंश के काल के दौरान प्रसिद्ध यात्री ह्वेन त्सांग इसी क्षेत्र में दाख़िल हुआ, जिसमें उसने भारत को भी सम्मिलित किया। अपनी वापसी पर उसने "पश्चिमी क्षेत्र का महान तंग वर्णन" नामक ग्रन्थ लिखा। .

नई!!: चीन और पश्चिमी क्षेत्र · और देखें »

पहाड़ी मैना

आम हिल Myna (सारिका), कभी - कभी "मैना" वर्तनी और पूर्व बस"हिल Myna रूप में जाना जाता", सबसे अधिक मैना पक्षी में देखा पक्षीपालन, जहां यह अक्सर बस बाद के दो नामों से करने के लिए भेजा.

नई!!: चीन और पहाड़ी मैना · और देखें »

पाढ़ा

पाढ़ा, जिसे अंग्रेज़ी में Hog Deer कहते हैं, एक छोटा सा हिरन है जिसका आवासीय क्षेत्र पाकिस्तान से लेकर उत्तरी भारत और मुख्य भूभागीय दक्षिण पूर्वी एशिया तक फैला है। इसकी दो उप-जातियाँ हैं:हायलाफ़स पॉरसिनस पॉरसिनस जो कि भारतीय प्रायद्वीप तथा चीन के दक्षिणी-पश्चिमी यूनान से लेकर पश्चिमी थाइलैंड तक के इलाके में पाया जाता है। हायलाफ़स पॉरसिनस अन्नॅमिटिकस जो कि थाइलैंड तथा इंडोचायना में पाया जाता है। प्रचलित की हुई आबादी अमेरिका, श्रीलंका तथा ऑस्ट्रेलिया में भी पायी जाती है। .

नई!!: चीन और पाढ़ा · और देखें »

पाताल का द्वार

देरवेज़े का 'पाताल का द्वार', सन् २०११ दूर से दृश्य पाताल का द्वार (अंग्रेज़ी: Door to Hell) तुर्कमेनिस्तान के आख़ाल प्रान्त के देरवेज़े गाँव में एक प्राकृतिक गैस का क्षेत्र है। यहाँ पर ज़मीन में बने एक बड़े छेद से निकलती हुई गैस सन् १९७१ से लगातार जल रही है। इससे पैदा होने वाली गंधक (सल्फ़र​) की गंध मीलों दूर तक पूरे क्षेत्र में फैली रहती है। .

नई!!: चीन और पाताल का द्वार · और देखें »

पामीर पर्वतमाला

पामीर (अंग्रेजी: Pamir Mountains, फ़ारसी), मध्य एशिया में स्थित एक प्रमुख पठार एवं पर्वत शृंखला है, जिसकी रचना हिमालय, तियन शान, काराकोरम, कुनलुन और हिन्दू कुश शृंखलाओं के संगम से हुआ है। पामीर विश्व के सबसे ऊँचे पहाड़ों में से हैं और १८वीं सदी से इन्हें 'विश्व की छत' कहा जाता है। इसके अलावा इन्हें इनके चीनी नाम 'कोंगलिंग' के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ उगने वाले जंगली प्याज़ के नाम पर इन्हें प्याज़ी पर्वत भी कहा जाता था।, John Navazio, pp.

नई!!: चीन और पामीर पर्वतमाला · और देखें »

पामीरी भाषाएँ

पामीरी भाषाएँ पामीर पर्वत क्षेत्र में बोली जाती हैं पामीरी भाषाएँ (फ़ारसी:, ज़बानहा-ए-पामीरी; अंग्रेज़ी: Pamir languages) पूर्वी ईरानी भाषा-परिवार की एक उपशाखा हैं जिसकी सदस्य भाषाएँ पामीर पर्वत क्षेत्र में बसने वाले बहुत से समुदाय बोलते हैं, विशेषकर वह समुदाय जो पंज नदी और उसकी उपनदियों के किनारे वास करते हैं। इसे बोलने वाले इलाक़ों में पूर्वोत्तरी अफ़्ग़ानिस्तान का बदख़्शान प्रान्त और पूर्वी ताजिकिस्तान के कूहिस्तोनी-बदख़्शान स्वशासित प्रान्त हैं। इनके अलावा एक सरिकोली नामक भाषा अफ़्ग़ानिस्तान और चीन के शिनजियांग प्रान्त के सीमावर्ती इलाक़ों में बोली जाती है। सरिकोली को चीन में 'ताजिकी भाषा' कहा जाता है लेकिन ध्यान दें कि यह ताजिकिस्तान में बोली जाने वाली ताजिकी भाषा से बिलकुल अलग है।, Frank Bliss, Psychology Press, 2006, ISBN 978-0-415-30806-9,...

नई!!: चीन और पामीरी भाषाएँ · और देखें »

पायथागॉरियन प्रमेय

पायथागॉरियन प्रमेय: दो वर्गों के क्षेत्रों का जोड़ (a और b) पैरों पर कर्ण पर वर्ग के क्षेत्र (c) बराबर होता है। गणित में, पायथागॉरियन प्रमेय (अमेरिकी अंग्रेजी) या पायथागॉरस' प्रमेय (ब्रिटिश अंग्रेजी) युक्लीडीयन ज्यामिति में एक समकोण त्रिकोण(समकोण त्रिकोण - ब्रिटिश अंग्रेजी) के तीन पार्श्वों के बीच एक रिश्ता है। इस प्रमेय को आमतौर पर एक समीकरण के रूप में लिखा जाता है: जहाँ c कर्ण की लंबाई को प्रतिनिधित्व करता है और a और b अन्य दो पार्श्वों की लंबाई को प्रतिनिधित्व करते हैं। शब्दों में:समकोण त्रिकोण के कर्ण का वर्ग अन्य दो पार्श्वों के वर्गों की राशि के बराबर है।पायथागॉरियन प्रमेय यूनानी गणितज्ञ पायथागॉरस के नाम पर रखा गया है, जिन्हें रिवाज से अपनी अपनी खोज और प्रमाण का श्रेय दिया जाता है,हेथ, ग्रंथ I,p.

नई!!: चीन और पायथागॉरियन प्रमेय · और देखें »

पार-साइबेरियाई रेलमार्ग

नाज़िवाएवस्काया स्टेशन पर अप्रैल के महीने में बर्फ़ से गुज़रती हुई रेल ट्रांस-साइबेरियाई रेलमार्ग एक प्रसिद्ध रेलमार्ग है जो रूस की राजधानी मास्को को रूस के साइबेरिया क्षेत्र से गुज़रते हुए सूदूर-पूर्वी शहर व्लादिवोस्तोक से जोड़ता है। इसकी शाखाएँ मंगोलिया से गुज़रती हुई चीन भी जाती हैं। यह एक 9,259 किमी लम्बा रेलमार्ग है और इसपर एक छोर से दुसरे छोर तक पूरा सफ़र करने में आठ दिन लग जाते हैं।, route No.

नई!!: चीन और पार-साइबेरियाई रेलमार्ग · और देखें »

पारा

साधारण ताप पर पारा द्रव रूप में होता है। पारे का अयस्क पारा या पारद (संकेत: Hg) आवर्त सारिणी के डी-ब्लॉक का अंतिम तत्व है। इसका परमाणु क्रमांक ८० है। इसके सात स्थिर समस्थानिक ज्ञात हैं, जिनकी द्रव्यमान संख्याएँ १९६, १९८, १९९, २००, २०१, २०२ और २०४ हैं। इनके अतिरिक्त तीन अस्थिर समस्थानिक, जिनकी द्रव्यमान संख्याएँ १९५, १९७ तथा २०५ हैं, कृत्रिम साधनों से निर्मित किए गए हैं। रासायनिक जगत् में केवल यही धातु साधारण ताप और दाब पर द्रव रूप होती है। .

नई!!: चीन और पारा · और देखें »

पारिभाषिक शब्दावली

पारिभाषिक शब्दावली या परिभाषा कोश, "ग्लासरी" (glossary) का प्रतिशब्द है। "ग्लासरी" मूलत: "ग्लॉस" शब्द से बना है। "ग्लॉस" ग्रीक भाषा का glossa है जिसका प्रारंभिक अर्थ "वाणी" था। बाद में यह "भाषा" या "बोली" का वाचक हो गया। आगे चलकर इसमें और भी अर्थपरिवर्तन हुए और इसका प्रयोग किसी भी प्रकार के शब्द (पारिभाषिक, सामान्य, क्षेत्रीय, प्राचीन, अप्रचलित आदि) के लिए होने लगा। ऐसे शब्दों का संग्रह ही "ग्लॉसरी" या "परिभाषा कोश" है। ज्ञान की किसी विशेष विधा (कार्य क्षेत्र) में प्रयोग किये जाने वाले शब्दों की उनकी परिभाषा सहित सूची पारिभाषिक शब्दावली (glossary) या पारिभाषिक शब्दकोश कहलाती है। उदाहरण के लिये गणित के अध्ययन में आने वाले शब्दों एवं उनकी परिभाषा को गणित की पारिभाषिक शब्दावली कहते हैं। पारिभाषिक शब्दों का प्रयोग जटिल विचारों की अभिव्यक्ति को सुचारु बनाता है। महावीराचार्य ने गणितसारसंग्रहः के 'संज्ञाधिकारः' नामक प्रथम अध्याय में कहा है- इसके बाद उन्होने लम्बाई, क्षेत्रफल, आयतन, समय, सोना, चाँदी एवं अन्य धातुओं के मापन की इकाइयों के नाम और उनकी परिभाषा (परिमाण) दिया है। इसके बाद गणितीय संक्रियाओं के नाम और परिभाषा दी है तथा अन्य गणितीय परिभाषाएँ दी है। द्विभाषिक शब्दावली में एक भाषा के शब्दों का दूसरी भाषा में समानार्थक शब्द दिया जाता है व उस शब्द की परिभाषा भी की जाती है। अर्थ की दृष्टि से किसी भाषा की शब्दावली दो प्रकार की होती है- सामान्य शब्दावली और पारिभाषिक शब्दावली। ऐसे शब्द जो किसी विशेष ज्ञान के क्षेत्र में एक निश्चित अर्थ में प्रयुक्त होते हैं, वह पारिभाषिक शब्द होते हैं और जो शब्द एक निश्चित अर्थ में प्रयुक्त नहीं होते वह सामान्य शब्द होते हैं। प्रसिद्ध विद्वान आचार्य रघुवीर बड़े ही सरल शब्दों में पारिभाषिक और साधारण शब्दों का अन्तर स्पष्ट करते हुए कहते हैं- पारिभाषिक शब्दों को स्पष्ट करने के लिए अनेक विद्वानों ने अनेक प्रकार से परिभाषाएं निश्चित करने का प्रयत्न किया है। डॉ॰ रघुवीर सिंह के अनुसार - डॉ॰ भोलानाथ तिवारी 'अनुवाद' के सम्पादकीय में इसे और स्पष्ट करते हुए कहते हैं- .

नई!!: चीन और पारिभाषिक शब्दावली · और देखें »

पारिस्थितिक पदचिह्न

पारिस्थितिक पदचिह्न, पृथ्वी के पारिस्थितिक तंत्रों पर मानवीय माँग का एक मापक है। यह इंसान की मांग की तुलना, पृथ्वी की पारिस्थितिकी के पुनरुत्पादन करने की क्षमता से करता है। यह मानव आबादी द्वारा उपभोग किए जाने वाले संसाधनों के पुनरुत्पादन और उससे उत्पन्न अपशिष्ट के अवशोषण और उसे हानिरहित बनाकर लौटाने के लिए ज़रूरी जैविक उत्पादक भूमि और समुद्री क्षेत्र की मात्रा को दर्शाता है। इसका प्रयोग करते हुए यह अनुमान लगाया जा सकता है कि अगर प्रत्येक व्यक्ति एक निश्चित जीवन शैली अपनाए, तो मानवता की सहायता के लिए पृथ्वी के कितने हिस्से (या कितने पृथ्वी ग्रह) की ज़रूरत होगी। 2006 के लिए मनुष्य जाति के कुल पारिस्थितिक पदचिन्ह को 1.4 पृथ्वी ग्रह अनुमानित किया गया था, अर्थात मानव जाति पारिस्थितिक सेवाओं का उपयोग पृथ्वी द्वारा उनके पुनर्सृजन की तुलना में 1.4 गुना तेज़ी से करती है। प्रति वर्ष इस संख्या की पुनर्गणना की जाती है – संयुक्त राष्ट्र को आधारभूत आंकड़े इकट्ठा करने और प्रकाशित करने में समय लगने के कारण यह तीन साल पीछे चलती है। जहां पारिस्थितिक पदचिह्न शब्द का व्यापक रूप से प्रयोग किया जाता है, वहीं इसके मापन के तरीके भिन्न होते हैं। हालांकि गणना के मानक अब ज्यादा तुलनात्मक और संगत परिणाम देने वाले बन कर उभर रहे हैं। .

नई!!: चीन और पारिस्थितिक पदचिह्न · और देखें »

पार्श्व न्यूमोनिया

पार्श्व न्युमोनिया या प्लूरोन्युमोनिया (Pleuro-pneumonia) ढोरों (cattle) में अधिक होने वाला उग्र स्पर्शज जीवाणु रोग है, जो मुख्यतः फुफ्फुस (lungs) तथा वक्ष की अस्तर कला (lining membrane) को आक्रांत करता है। यह भैंस, जेबू और याक को भी होता है। इसे सामान्यतः फुफ्फुस ताऊन (Lung Plague) भी कहते हैं। इसके फलस्वरूप एक विशेष प्रकार का खंड एवं खंडशोथ (lobar and lobular pneumonia) की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। गोजातीय पशु (bovine animals) के अतिरिक्त यह रोग अन्य पशुओं में प्रसारित नहीं होता। यह रोग अनेक देशों में, जैसे भारत, चीन, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया तथा यूरोप के बहुत से देशों में भी होता है। मनुष्यों को जब होता है तब शरीर-विकृति-विज्ञान (pathology) के अंतर्गत होनेवाले मुख्य परिवर्तनों में फुफ्फुस की आकृति संगमरमर के समान हो जाती है तथा फुफ्फुसावरण (pleura) में फाइब्रिनस विक्षेप (fibrinous deposit) हो जाता है। कभी-कभी वक्षगुहा (cavity of thorax) में अत्यधिक मात्रा में तरल पदार्थों का भी संचय हो जाता है। .

नई!!: चीन और पार्श्व न्यूमोनिया · और देखें »

पालक

पालक पालक (वानस्पतिक नाम: Spinacia oleracea) अमरन्थेसी कुल का फूलने वाला पादप है, जिसकी पत्तियाँ एवं तने शाक के रूप में खाये जाते हैं। पालक में खनिज लवण तथा विटामिन पर्याप्त रहते हैं, किंतु ऑक्ज़ैलिक अम्ल की उपस्थिति के कारण कैल्शियम उपलब्ध नहीं होता। यह ईरान तथा उसके आस पास के क्षेत्र का देशज है। ईसा के पूर्व के अभिलेख चीन में हैं, जिनसे ज्ञात होता है कि पालक चीन में नेपाल से गया था। 12वीं शताब्दी में यह अफ्रीका होता हुआ यूरोप पहुँचा।Victor R. Boswell, "Garden Peas and Spinach from the Middle East".

नई!!: चीन और पालक · और देखें »

पास्ता

सर्पिल पास्ता पास्ता (Pasta) इटली का व्यंजन है। यह यूरोप व अमेरिका के रेस्तराओं में खूब चलती है। पास्ता के अनेकों प्रकार उपलब्ध हैं। पास्ता की खूबी है कि इसे आप मिनटों में घर पर तैयार कर सकते हैं। यह काफी हद तक चीनी नूड्ल्स से मिलता है, क्योंकि यह आटे से तैयार किया जाता है। कई लोग तो पास्ता को सलाद या अल्पाहार (स्नैक्स) के तौर पर लेना पसंद करते हैं। यह स्वादिष्ट होने के साथ-साथ स्वास्थ्यकर भी होता है और यह कई विटामिनों का स्रोत भी हए। पास्ता को अमूमन जैतून के तेल में पकाया जाता है और इसमें गोभी, मटर व गाजर डाल कर भी तैयार कर सकते हैं। इसके अलावा कई लोग रसेदार पास्ता भी बनाते हैं, ताकि वह सर्दी में पास्ता को सूप के रूप में खा सकें। बाजार में पास्ता कई आकारों में उपलब्ध है, जिसमें नलिकाकार, गोलाकार व भरवां खास हैं। बच्चों को मसाला पास्ता व चीज पास्ता सबसे ज्यादा पसंद आते हैं। .

नई!!: चीन और पास्ता · और देखें »

पाव्लोदार प्रांत

पाव्लोदार प्रांत (कज़ाख़: Павлодар облысы, अंग्रेज़ी: Pavlodar Province) मध्य एशिया के क़ाज़ाख़स्तान देश का एक प्रांत है। इसकी राजधानी भी पाव्लोदार नाम का शहर ही है। इस प्रांत की सरहदें उत्तर में रूस से लगती हैं। साइबेरिया की महत्वपूर्ण इरतिश नदी चीन द्वारा नियंत्रित अल्ताई पर्वतों के एक भाग से निकलकर इस प्रांत से गुज़रती है और उत्तर में रूस में निकल जाती है। कुछ समीक्षकों के अनुसार क़ाज़ाख़स्तान का यह भाग रहन-सहन और संस्कृति में साइबेरिया जैसा अधिक और मध्य एशिया जैसा कम लगता है।, Paul Brummell, Bradt Travel Guides, 2012, ISBN 978-1-84162-369-6,...

नई!!: चीन और पाव्लोदार प्रांत · और देखें »

पाइथागोरस प्रमेय

'''बौधायन का प्रमेय''': समकोण त्रिभुज की दो भुजाओं की लम्बाइयों के वर्गों का योग कर्ण की लम्बाई के वर्ग के बराबर होता है। पाइथागोरस प्रमेय (या, बौधायन प्रमेय) यूक्लिडीय ज्यामिति में किसी समकोण त्रिभुज के तीनों भुजाओं के बीच एक सम्बन्ध बताने वाला प्रमेय है। इस प्रमेय को आमतौर पर एक समीकरण के रूप में निम्नलिखित तरीके से अभिव्यक्त किया जाता है- जहाँ c समकोण त्रिभुज के कर्ण की लंबाई है तथा a और b अन्य दो भुजाओं की लम्बाई है। पाइथागोरस यूनान के गणितज्ञ थे। परम्परानुसार उन्हें ही इस प्रमेय की खोज का श्रेय दिया जाता है,हेथ, ग्रंथ I,p.

नई!!: चीन और पाइथागोरस प्रमेय · और देखें »

पाक अधिकृत कश्मीर

भारतीय कश्मीर है और अकसाई चिन चीन के अधिकार में है। इस क्षेत्र का अधिकार चीन को पाकिस्तान द्वारा सौंपा गया था। पाक अधिकृत कश्मीर मूल कश्मीर का वह भाग है, जिस पर पाकिस्तान ने १९४७ में हमला कर अधिकार कर लिया था। यह भारत और पाकिस्तान के बीच विवादित क्षेत्र है। इसकी सीमाएं पाकिस्तानी पंजाब एवं उत्तर पश्चिमी सीमांत प्रांत से पश्चिम में, उत्तर पश्चिम में अफ़गानिस्तान के वाखान गलियारे से, चीन के ज़िन्जियांग उयघूर स्वायत्त क्षेत्र से उत्तर और भारतीय कश्मीर से पूर्व में लगती हैं। इस क्षेत्र के पूर्व कश्मीर राज्य के कुछ भाग, ट्रांस-काराकोरम ट्रैक्ट को पाकिस्तान द्वारा चीन को दे दिया गया था व शेष क्षेत्र को दो भागों में विलय किया गया था: उत्तरी क्षेत्र एवं आजाद कश्मीर। इस विषय पर पाकिस्तान और भारत के बीच १९४७ में युद्ध भी हुआ था। भारत द्वारा इस क्षेत्र को पाक अधिकृत कश्मीर (पी.ओ.के) कहा जाता है।रीडिफ, २३ मई २००६ संयुक्त राष्ट्र सहित अधिकांश अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं एम.एस.एफ़, एवं रेड क्रॉस द्वारा इस क्षेत्र को पाक-अधिकृत कश्मीर ही कहा जाता है। .

नई!!: चीन और पाक अधिकृत कश्मीर · और देखें »

पितृवंश समूह ऍफ़

पितृवंश समूह ऍफ़ की शुरुआत भारतीय उपमहाद्वीप या मध्य पूर्व में हुई और इस पितृवंश की शाखाओं आगे चलकर हर दिशा में फैल गयी - विश्व के ९०% पुरुष इसकी उपशाखाओं के ही वंशज हैं मनुष्यों की आनुवंशिकी (यानि जॅनॅटिक्स) में पितृवंश समूह ऍफ़ या वाए-डी॰एन॰ए॰ हैपलोग्रुप F एक पितृवंश समूह है। अनुमान है के जिस पुरुष से यह पितृवंश शुरू हुआ वह आज से लगभग ५०,००० वर्ष पहले भारतीय उपमहाद्वीप या मध्य पूर्व में रहता था। इस पितृवंश से आगे चलकर बहुत सी पितृवंश उपशाखाएँ बनी और विश्व के ९०% पुरुष इन्ही उपशाखाओं के वंशज हैं। क्योंकि यह पितृवंश मनुष्यों के अफ़्रीका से निकलने के बाद ही उत्पन्न हुआ इसलिए इस पितृवंश के पुरुष उप-सहारा अफ़्रीका के क्षेत्रों में बहुत कम ही मिलते हैं। बाक़ी विश्व में ऐसे पुरुष जो सीधा इस पितृवंश के सदस्य हैं (यानि की इसकी उपशाखाओं के नहीं बल्कि केवल पितृवंश समूह ऍफ़ के वंशज हैं) भारत, उत्तरी पुर्तगाल, चीन के यून्नान राज्य के पहाड़ी इलाकों और कोरिया में पाए जाते हैं। भारतीय पुरुषों में से १२.५% इसके सीधे सदस्य हैं, लेकिन भारतीय जनजातियों के पुरुषों में यह मात्र बढ़ कर १८.१% पर देखी गयी है। कोरियाई पुरुषों में से ८% इस पितृवंश समूह की संतति हैं। पुर्तगाल में इसकी ०.५% तक की हलकी मौजूदगी का कारण भारतीय पुरुषों के साथ संबंधों को माना जाता है, क्योंकि पुर्तगाल और भारत का ५०० वर्ष तक संपर्क रहा है। चीन में इसे ज़्यादातर युन्नान क्षेत्र की लाहू जनजाति में देखा गया है। .

नई!!: चीन और पितृवंश समूह ऍफ़ · और देखें »

पिनांग

पिनांग मलेशिया का एक राज्य है जो मलक्का के जलडमरुमध्य के साथ प्रायद्वीपीय मलेशिया के पश्चिमोत्तर तट पर स्थित है। क्षेत्र के हिसाब से पिनांग पेर्लिस के बाद मलेशिया का दूसरा सबसे छोटा और आठवां सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य है। पिनांग के निवासी को बोलचाल की भाषा में पेननगाइट के रूप में जाना जाता है। .

नई!!: चीन और पिनांग · और देखें »

पियोरा

पियोरा (Hill Partridge) (Arborophila torqueola) तीतर कुल का एक पक्षी है जो पूर्वोत्तर भारत से लेकर लगभग समूचे दक्षिण पूर्व एशिया में काफ़ी संख्या में पाया जाता है। .

नई!!: चीन और पियोरा · और देखें »

पवन ऊर्जा

बहती वायु से उत्पन्न की गई उर्जा को पवन ऊर्जा कहते हैं। वायु एक नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत है। पवन ऊर्जा बनाने के लिये हवादार जगहों पर पवन चक्कियों को लगाया जाता है, जिनके द्वारा वायु की गतिज उर्जा, यान्त्रिक उर्जा में परिवर्तित हो जाती है। इस यन्त्रिक ऊर्जा को जनित्र की मदद से विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित किया जा सकता है। पवन ऊर्जा (wind energy) का आशय वायु से गतिज ऊर्जा को लेकर उसे उपयोगी यांत्रिकी अथवा विद्युत ऊर्जा के रूप में परिवर्तित करना है। .

नई!!: चीन और पवन ऊर्जा · और देखें »

पगोडा

सातवीं शती में बना जापान का पांचमंजिला पगोडा पगोडा शब्द का प्रयोग नेपाल, भारत, वर्मा, इंडोनेशिया, थाइलैंड, चीन, जापान एवं अन्य पूर्वीय देशों में भगवान् बुद्ध अथवा किसी संत के अवशेषों पर निर्मित स्तंभाकृति मंदिरों के लिये किया जाता है। इन्हें स्तूप भी कहते हैं। एक अनुमान यह है कि पगोडा शब्द संस्कृत के "दगोबा" के अपभ्रंश रूप में प्रयुक्त हुआ होगा। बर्मी ग्रंथों में पगोडा लंका की भाषा सिंहली के शब्द "डगोबा" का विगड़ा रूप बताया गया है और डगोबा को संस्कृत के शब्द धातुगर्भा से संबंधित कहा गया है, जिसका अर्थ है "पुनीत अवशेषों की स्थापना का स्थल"। .

नई!!: चीन और पगोडा · और देखें »

पंचेन लामा

पंचेन लामा दलाई लामा के बाद तिब्बत के दूसरे सबसे प्रभावशाली धर्म गुरु हैं। ये चीन सरकार द्वारा निर्वासित नहीं किए गए हैं। इसलिए ये तिब्बत में ही रहते हैं। .

नई!!: चीन और पंचेन लामा · और देखें »

पंजाकॅन्त

पंजाकॅन्त का बाज़ार पंजाकॅन्त ज़िला ताजिकिस्तान के पश्चिमोत्तर में स्थित है पंजाकॅन्त का बाहर मिलने वाले प्राचीन खँडहर पंजाकॅन्त (ताजिकी: Панҷакент, फ़ारसी:, रूसी: Пенджикент, अंग्रेज़ी: Panjakent) उत्तर-पश्चिमी ताजिकिस्तान के सुग़्द प्रांत में ज़रफ़शान नदी के किनारे बसा हुआ एक शहर है। सन् २००० की जनगणना में यहाँ की आबादी ३३,००० थी। यह प्राचीनकाल में सोग़दा का एक प्रसिद्ध शहर हुआ करता था और उस पुरानी नगरी के खँडहर आधुनिक पंजाकॅन्त शहर के बाहरी इलाक़ों में देखे जा सकते हैं। .

नई!!: चीन और पंजाकॅन्त · और देखें »

पक्षी इन्फ्लूएंजा

बर्ड फ़्लू या पक्षी इन्फ्लूएंजा या पक्षी फ़्लू (एवियन इन्फ्लूएंजा) एक विषाणु जनित रोग है। यह विषाणु जिसे इन्फ्लूएंजा ए या टाइप ए विषाणु कहते हैं, आम तौर मे पक्षियों में पाया जाता है, लेकिन कभी कभी यह मानव सहित अन्य कई स्तनधारिओं को भी संक्रमित कर सकता है, जब यह मानव को संक्रमित करता है तो इसे इन्फ्लूएंजा (श्लेष्मिक ज्वर) कहा जाता है। .

नई!!: चीन और पक्षी इन्फ्लूएंजा · और देखें »

पुरंग ज़िला

पुरंग ज़िला (तिब्बती: སྤུ་ཧྲེང་རྫོང་, Purang County), जिसे चीनी लहजे में बुरंग ज़िला (चीनी: 普兰县, Burang County) कहते हैं, तिब्बत का एक ज़िला है जो उस देश के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में भारत और नेपाल की सीमा के साथ स्थित है। तिब्बत पर चीन का क़ब्ज़ा होने के बाद यह चीनी प्रशासनिक प्रणाली में तिब्बत स्वशासित प्रदेश के न्गारी विभाग में पड़ता है। रुतोग ज़िले की राजधानी पुरंग शहर है जिसे भारतीय और नेपाली लोग तकलाकोट के नाम से जानते आएँ हैं। हिन्दुओं के पवित्र मानसरोवर और कैलाश पर्वत तीर्थस्थल इसी ज़िले में स्थित हैं।, Robert Kelly, John Vincent Bellezza, pp.

नई!!: चीन और पुरंग ज़िला · और देखें »

पुर्वांचल विकास क्षेत्र

पूर्वांचल पूर्वांचल विकास क्षेत्र नेपाल का एक प्रान्त है जो नेपाल के पाँच विकास क्षेत्रों में से एक विकास क्षेत्र है। यह नेपाल के सबसे पूर्वी भाग है। इस के पूर्व में भारत का सिक्किम तथा पश्चिम बंगाल का दार्जिलिंग तथा पश्चिम में नेपाल का मध्यमांचल विकास क्षेत्र तथा उत्तर में चीन का तिब्बत तथा दक्षिण में भारत का बिहार स्थित है। पूर्वांचल का मुख्यालय धनकुटा में स्थित है। पूर्वांचल में ३ अंचल तथा १६ जिलें हैं। Category:नेपाल के पूर्व शासन प्रणाली.

नई!!: चीन और पुर्वांचल विकास क्षेत्र · और देखें »

पुल्लेला गोपीचंद

पुल्लेला गोपीचंद (పుల్లెల గోపీచంద్) (इनका जन्म 16 नवम्बर 1973 को आंध्र प्रदेश के प्रकाशम जिले के नगन्दला में हुआ) एक भारतीय बैडमिन्टन खिलाडी हैं। उन्होंने 2001 में चीन के चेन होंग को फाइनल में 15-12,15-6 से हराते हुए ऑल इंग्लैंड ओपन बैडमिंटन चैंपियनशिप में जीत हासिल की। इस तरह से प्रकाश पादुकोण के बाद इस जीत को हासिल करने वाले दूसरे भारतीय बन गए, जिन्होंने 1980 में जीत हासिल की थी। उन्हें वर्ष 2001 के लिए राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया। लेकिन बाद में, उनकी चोटों के कारण उनके खेल पर प्रभाव पड़ा और वर्ष 2003 में उनकी रैंकिंग गिर कर 126 पर आ गयी। 2005 में उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया गया। अब, वे गोपीचंद बैडमिन्टन अकादमी चलाते हैं। अब वे एक जाने माने कोच हैं जिन्हें द्रोणाचार्य पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। और सायना नेहवाल को एक बैडमिन्टन खिलाडी के रूप में उभारने में मुख्य हाथ उनका ही है। पुलेला गोपीचंद भारत के एक शीर्ष बैडमिंटन खिलाड़ी व कोच हैं। 2014 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। .

नई!!: चीन और पुल्लेला गोपीचंद · और देखें »

पुस्तकालय का इतिहास

आधुनिक भारत में पुस्तकालयों का विकास बड़ी धीमी गति से हुआ है। हमारा देश परतंत्र था और विदेशी शासन के कारण शिक्षा एवं पुस्तकालयों की ओर कोई ध्यान ही नहीं दिया गया। इसी से पुस्तकालय आंदोलन का स्वरूप राष्ट्रीय नहीं था और न इस आंदोलन को कोई कानूनी सहायता ही प्राप्त थीं। बड़ौदा राज्य का योगदान इस दिशा में प्रशंसनीय रहा है। यहाँ पर 1910 ई. में पुस्तकालय आंदोलन प्रारंभ किया गया। राज्य में एक पुस्तकालय विभाग खोला गया और पुस्तकालयों चार श्रेणियों में विभक्त किया गया- जिला पुस्तकालय, तहसील पुस्तकालय, नगर पुस्तकालय, एवं ग्राम पुस्तकालय आदि। पूरे राज्य में इनका जाल बिछा दिया गया था। भारत में सर्वप्रथम चल पुस्तकालय की स्थापना भी बड़ौदा राज्य में ही हुई। श्री डब्ल्यू.

नई!!: चीन और पुस्तकालय का इतिहास · और देखें »

प्युनिंग मंदिर

प्युनिंग मंदिर() जिसे वस्तुतः विशाल बुद्ध मंदिर कहा जाता है, बौद्ध चेंगडे हेबै प्रांत, चीन में मंदिर परिसर है। यह किंग राजवंश में क्वानानोंग सम्राट के शासनकाल के दौरान १७५५ में बनाया गया था। यह चेंग्डे माउंटेन रिज़ॉर्ट के पास है और पुटुओ ज़ोंगचेंग मंदिर के समान प्रसिद्ध है, प्युनिंग मंदिर चेंगडे के "आठ बाहरी मंदिरों" में से एक है। पिंगिंग मंदिर का सामे मठ के बाद, तिब्बत में पवित्र लामावादी स्थल ल्हासा में पोटोला पैलेस के बाद का पुटुओ ज़ोंगचेंग मंदिर का चित्रण किया गया था। सामने का मंदिर चीनी शैली में बनाया गया था, हालांकि मंदिर परिसर में चीनी और तिब्बती स्थापत्य शैली का प्रयोग किया गया हैं। प्युनिंग मंदिर में बोधिसत्व अवलोकितेश्वर (२२.२८ मीटर ऊंचा और ११० टन) की दुनिया की सबसे ऊंची लकड़ी की मूर्ति है।, इसलिए इसे अक्सर विशाल बुद्ध मंदिर नामक उपनाम दिया जाता है। मंदिर के जटिल वैशिष्टय इस प्रकार हैं - सभामण्डप, मंडप, मृदंग मीनार और घंटी मीनार। .

नई!!: चीन और प्युनिंग मंदिर · और देखें »

प्रताप सिंह कैरों

प्रताप सिंह कैरो (1901 - 1965 ई.) पंजाब के एक प्रमुख राजनीतिज्ञ और नेता थे। पंजाब के मुख्यमंत्री रहे। उस समय 'पंजाब' के अन्तर्गत हरियाणा और हिमाचल प्रदेश भी थे। .

नई!!: चीन और प्रताप सिंह कैरों · और देखें »

प्रतिमा पुहन

प्रतिमा पुहन ओडिशा से एक भारतीय रोवर है, जिनका जन्म २७ अगस्त १९९१ को कटक में उड़ीसा में हुआ था। २०१० के एशियाई खेलों में ओडिशा के प्रमिला प्रावाना मिन्ज के साथ उन्होंने महिला कोक्सलेस जोड़ी में कांस्य पदक जीतकर उन्होंने पहली भारतीय महिला बनकर रोइंग इतिहास लिखा। उन्होंने प्रमिला प्रावाना मिनज के साथ १९ नवंबर, २०१० को गुआंगज़ौ में चीन के सात मिनट और ४७.५० सेकेंड के समय में एक कांस्य पदक जीता था। .

नई!!: चीन और प्रतिमा पुहन · और देखें »

प्रतिरूपण

समुद्र एनेमोन, प्रतिरूपण की प्रक्रिया में अन्थोप्लयूरा एलेगंटिस्सिमा जीव-विज्ञान में प्रतिरूपण, आनुवांशिक रूप से समान प्राणियों की जनसंख्या उत्पन्न करने की प्रक्रिया है, जो प्रकृति में विभिन्न जीवों, जैसे बैक्टीरिया, कीट या पौधों द्वारा अलैंगिक रूप से प्रजनन करने पर घटित होती है। जैव-प्रौद्योगिकी में, प्रतिरूपण डीएनए खण्डों (आण्विक प्रतिरूपण), कोशिकाओं (सेल क्लोनिंग) या जीवों की प्रतिरूप निर्मित करने की प्रक्रिया को कहा जाता है। यह शब्द किसी उत्पाद, जैसे डिजिटल माध्यम या सॉफ्टवेयर की अनेक प्रतियां निर्मित करने की प्रक्रिया को भी सूचित करता है। क्लोन शब्द κλών से लिया गया है, "तना, शाखा" के लिये एक ग्रीक शब्द, जो उस प्रक्रिया को सूचित करता है, जिसके द्वारा एक टहनी से कोई नया पौधा निर्मित किया जा सकता है। उद्यानिकी में बीसवीं सदी तक clon वर्तनी का प्रयोग किया जाता था; अंतिम e का प्रयोग यह बताने के लिये शुरू हुआ कि यह स्वर एक "संक्षिप्त o" नहीं, वल्कि एक "दीर्घ o" है। चूंकि इस शब्द ने लोकप्रिय शब्दकोश में एक अधिक सामान्य संदर्भ के साथ प्रवेश किया, अतः वर्तनी clone का प्रयोग विशिष्ट रूप से किया जाता है। .

नई!!: चीन और प्रतिरूपण · और देखें »

प्रथम चीन-जापान युद्ध

चीन-जापान युद्ध 1894-95 के दौरान चीन और जापान के मध्य कोरिया पर प्रशासनिक तथा सैन्य नियंत्रण को लेकर लड़ा गया था। जापान की मेइजी सेना इसमें विजयी हुई थी और युद्ध के परिणाम स्वरूप कोरिया, मंचूरिया तथा ताईवान का नियंत्रण जापान के हाथ में चला गया। इस युद्ध में हारने के कारण चीन को जापान के आधुनिकीकरण का लाभ समझ में आया और बाद में चिंग राजवंश के खिलाफ़ 1911 मे क्रांति हुई। इसे प्रथम चीन-जापान युद्ध का नाम भी दिया जाता है। 1937-45 के मध्य लड़े गए युद्ध को द्वितीय चीन-जापान युद्ध कहा जाता है। .

नई!!: चीन और प्रथम चीन-जापान युद्ध · और देखें »

प्रदेश संख्या १

प्रदेश संख्या १ नेपाल के सात प्रदेशों में से एक है। २० सितम्बर २०१५ को लागू हुए संविधान में नए सात प्रदेशों का प्रावधान है। इस प्रदेश का नामांकन प्रदेश संसद (विधान परिषद) द्वारा किया जाएगा। इसकी राजधानी कहाँ होगी यह भी प्रदेश संसद द्वारा निर्धारित किया जाएगा। इस प्रदेश के पूर्व में भारत का सिक्किम राज्य है तथा साथ में पश्चिम बंगाल का उत्तरी हिस्सा दार्जीलिंग सटा हुआ है। उत्तर में हिमालय के उस पार तिब्बत स्थित है रही तो दक्षिण में भारत का बिहार स्थित है। २५,९०५ वर्ग किमी के क्षेत्रफल में ४४ निर्वाचन क्षेत्र फैले हुए हैं। १०,४३८ किमी२ का क्षेत्रफल पर्वतों से घिरा हुआ है, १०,७४९ किमी२ का क्षेत्रफल पहाड़ी है और पूर्वी तराई का फैलाव ४,७१८ किमी२ में है। निपआ.

नई!!: चीन और प्रदेश संख्या १ · और देखें »

प्रमुख धार्मिक समूह

दुनिया के प्रमुख धर्म और आध्यात्मिक परम्पराओं को कुछ छोटे प्रमुख समूहों में वर्गीकृत किया जा सकता है, हालांकि यह किसी भी प्रकार से एकरूप परिपाटी नहीं है। 18 वीं सदी में यह सिद्धांत इस लक्ष्य के साथ शुरू किया गया कि समाज में गैर यूरोपीय सभ्यता के स्तर की पहचान हो। धर्मों की और अधिक व्यापक सूची और उनके मूल रिश्तों की रूपरेखा के लिए, कृपया धर्मों की सूची लेख देखें.

नई!!: चीन और प्रमुख धार्मिक समूह · और देखें »

प्रशीतन

प्रशीतन करके भोजन को संरक्षित करने के लिये प्राय: बर्फ का प्रयोग किया जाता है। किसी स्थान, या पदार्थ, को उसके वातावरण के ताप के नीचे तक ठंढा करने की क्रिया को प्रशीतन (Refrigeration) कहते हैं। विगत शती में इन यांत्रिक विधियों का विस्तार बर्फ बनाने से लेकर खाद्य एवं पेय पदार्थो को शीतल रखने तथा अधिक समय तक इन्हें संरक्षित (preserve) रखने के हेतु किया गया और अब तो इनका प्रयोग बहुत बड़े व्यावसायिक पैमाने पर किया जाने लगा है। .

नई!!: चीन और प्रशीतन · और देखें »

प्रस्तर

प्रस्तर का अर्थ होता है पत्थर। .

नई!!: चीन और प्रस्तर · और देखें »

प्राचीन चीन

चीन का सबसे पुराना राजवंश है - शिया राजवंश। इनका अस्तित्व एक लोककथा लगता था पर हेनान में पुरातात्विक खुदाई के बाद इसके वजूद की सत्यता सामने आई। प्रथम प्रत्यक्ष राजवंश था -शांग राजवंश, जो पूर्वी चीन में 18वीं से 12 वीं सदी इसा पूर्व पीली नदी के किनारे बस गए। 12वीं सदी ईसा पूर्व में पश्चिम से झाऊ शासकों ने इनपर हमला किया और इनके क्षेत्रों पर अधिकार कर लिया। इन्होने 5वीं सदी ईसा पूर्व तक राज किया। इसके बाद चीन के छोटे राज्य आपसी संघर्ष में भिड़ गए। ईसा पूर्व 221 में किन राजाओं ने चीन का प्रथम बार एकीकरण किया। इन्होने राजा का कार्यालय स्थापित किया और चीनी भाषा का मानकीकरण किया। ईसा पूर्व 220 से 206 ई. तक हान राजवंश के शासकों ने चीन पर राज किया और चीन की संस्कृति पर अपनी अमिट छाप छोड़ी। य़ह प्रभाव अब तक विद्यमान है। इन्होने रेशम मार्ग की भी स्थापना रखी। हानों के पतन के बाद चीन में फिर से अराजकता का माहौल छा गया। सुई राजवंश ने 580 ईस्वी में चान का एकीकरण किया जिसके कुछ ही सालों बाद (614 ई.) इस राजवंश का पतन हो गया। .

नई!!: चीन और प्राचीन चीन · और देखें »

प्राचीन भारत

मानव के उदय से लेकर दसवीं सदी तक के भारत का इतिहास प्राचीन भारत का इतिहास कहलाता है। .

नई!!: चीन और प्राचीन भारत · और देखें »

प्रांत

प्रान्त एक प्रादेशिक इकाई है, जो कि लगभग हमेशा ही एक देश या राज्य के अंतर्गत एक प्रशासकीय खंड होता है। .

नई!!: चीन और प्रांत · और देखें »

प्राकृतिक आपदा

एक प्राकृतिक आपदा एक प्राकृतिक जोखिम (natural hazard) का परिणाम है (जैसे की ज्वालामुखी विस्फोट (volcanic eruption), भूकंप, या भूस्खलन (landslide) जो कि मानव गतिविधियों को प्रभावित करता है। मानव दुर्बलताओं को उचित योजना और आपातकालीन प्रबंधन (emergency management) का आभाव और बढ़ा देता है, जिसकी वजह से आर्थिक, मानवीय और पर्यावरण को नुकसान पहुँचता है। परिणाम स्वरुप होने वाली हानि निर्भर करती है जनसँख्या की आपदा को बढ़ावा देने या विरोध करने की क्षमता पर, अर्थात उनके लचीलेपन पर। ये समझ केंद्रित है इस विचार में: "जब जोखिम और दुर्बलता (vulnerability) का मिलन होता है तब दुर्घटनाएं घटती हैं". जिन इलाकों में दुर्बलताएं निहित न हों वहां पर एक प्राकृतिक जोखिम कभी भी एक प्राकृतिक आपदा में तब्दील नहीं हो सकता है, उदहारण स्वरुप, निर्जन प्रदेश में एक प्रबल भूकंप का आना.बिना मानव की भागीदारी के घटनाएँ अपने आप जोखिम या आपदा नहीं बनती हैं, इसके फलस्वरूप प्राकृतिक शब्द को विवादित बताया गया है। .

नई!!: चीन और प्राकृतिक आपदा · और देखें »

प्रिमोर्स्की क्राय

रूस में प्रिमोर्सकी क्राय का स्थान दुनिया के अधिकतर जंगली साइबेरियाई शेर प्रिमोर्सकी क्राय में रहते हैं प्रिमोर्स्की क्राय (रूसी: Примо́рский край), जिसे पहले प्रिमोर्ये (Примо́рье) भी कहा जाता था, रूस का एक संघीय खंड है जो क्राय का दर्जा रखता है। रूसी भाषा में 'प्रिमोर्सकी' का मतलब 'समुद्री' होता है इसलिए इस राज्य को कभी-कभी 'समुद्री प्रांत' या 'समुद्री क्षेत्र' भी कहा जाता है। इसका प्रशासनिक केंद्र और राजधानी व्लादिवोस्तोक का शहर है। प्रिमोर्सकी क्राय का क्षेत्रफल वर्ग १,६५,९०० किमी है और सन् २०१० की जनगणना में इस प्रांत की आबादी १९,५६,४२६ थी। .

नई!!: चीन और प्रिमोर्स्की क्राय · और देखें »

प्रक्षेपास्त्र रोधी प्रणाली

यह रडारों, कंप्यूटरों और प्रक्षेपास्त्रों की संयुक्त प्रणाली है जो शत्रु देश द्वारा प्रक्षेपास्त्र से हमला किए जाने पर उसे लक्ष्य तक पहुँचने से पूर्व ही खंडित कर देती है। इस तरह यह प्रणाली किसी देश को प्रक्षेपाश्त्र हमले के खतरे से दूर रखती है। इस प्रणाली का सर्वप्रथम परीक्षण अमेरिका द्वारा किया गया। अमेरिका के ताइवान को मिसाइल रोधी प्रणाली बेचने पर सहमति देने के बाद ११ जनवरी २०१० को चीन ने भी जमीन आधारित मध्यम दूरी की प्रक्षेपास्त्र रोधी प्रणाली का सफल परीक्षण किया। .

नई!!: चीन और प्रक्षेपास्त्र रोधी प्रणाली · और देखें »

प्रेम-प्रतिमा

प्रेम-प्रतिमा एक प्रकार का मानव-आकार कामोत्तेजक उपकरण होता है। लिंग, योनि एवं/अथवा गुदा युक्त इस साधन का प्रयोग स्वतःमैथुन के लिए किया जाता है। सामान्यतः प्रेम-प्रतिमा एक संपूर्ण देह-रुपी पुतली होती है, परन्तु कुछ पुतलियों में केवल धड़, शीर्ष या अन्य आंशिक अंग ही होते हैं। कुछ पुतलियों में विभिन्न भागों को निकाला या लगाया जा सकता हैं। .

नई!!: चीन और प्रेम-प्रतिमा · और देखें »

प्लेस्टेशन २

द प्लेस्टेशन २ या PS2 6ठीं पिढी का वीडियो गेम कन्सोल है जिसे सोनी ने प्लेस्टेशन श्रंखला के रूप में बनाया है। इसका विकास कार्य मार्च 1999 में शुरू किया गया था व 4 मार्च 2000 को जापान में पहली बार रिलिज़ किया गया। इसकी प्रतिस्पर्धा सेगा के ड्रिमकास्ट, माइक्रोसॉफ्ट के एक्सबॉक्स और निनटेंडो के गेम क्यूब से हुई। .

नई!!: चीन और प्लेस्टेशन २ · और देखें »

पौष्टिक-औषध (न्यूट्रास्युटिकल)

पौष्टिक-औषध (न्यूट्रास्युटिकल), जो "न्यूट्रिशन" (पोषण) और "फार्मास्युटिकल" (दवा/औषध) शब्दों से मिलकर बना है, एक खाद्य या खाद्य उत्पाद है जो बीमारी की रोकथाम एवं उपचार सहित स्वास्थ्य एवं चिकित्सीय लाभ प्रदान करता है। ऐसे उत्पाद पृथक्कृत पोषक तत्वों, आहार पूरकों और विशेष आहारों से लेकर आनुवंशिक रूप से तैयार किये गए खाद्य पदार्थ, जड़ी-बूटी संबंधी उत्पाद और अनाज, सूप, एवं पेय पदार्थ जैसे प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों हो सकते हैं। हाल ही में कोशिकीय-स्तरीय पौष्टिक-औषधीय पदार्थों के महत्वपूर्ण खोजों के माध्यम से शोधकर्ता, एवं चिकित्सक प्रशंसात्मक एवं वैकल्पिक चिकित्साओं के संबंध में नैदानिक अध्ययनों से प्राप्त जानकारी को उत्तरदायी चिकित्सा कार्यप्रणाली के रूप में संघटित करने और उसका मूल्यांकन करने के लिए नमूने विकसित कर रहे हैं। पौष्टिक-औषध (न्यूट्रास्युटिकल) शब्द को वास्तव में न्यू जर्सी के क्रॉफोर्ड स्थित फाउंडेशन ऑफ इन्नोवेशन मेडिसिन (एफआईएम (FIM)) के संस्थापक एवं अध्यक्ष डॉ॰ स्टीफन एल.

नई!!: चीन और पौष्टिक-औषध (न्यूट्रास्युटिकल) · और देखें »

पैसिफ़िक रिम (फ़िल्म)

पैसिफ़िक रिम (अंग्रेजी; Pacific Rim) वर्ष २०१३ में बनी अमेरिकी विज्ञान-फंतासी पर आधारित फ़िल्म है जिसका निर्देशन गुइलेर्मो डेल टोरो द्वारा किया गया है व लेखन कार्य टोरो और ट्रेविस बेचम द्वारा किया गया है, जो बेचम द्वारा मूल कहानी पर आधारित है। फ़िल्म में चार्ली हुन्नैम, इदरिस एल्बा, रिनको किकुची, चार्ली डे, राॅबर्ट केज़िनस्की, मैक्स मार्टिनी और रोन पर्लमैन मुख्य भूमिका में है। फ़िल्म २०२० के भविष्यकाल पर सेट है, जब पृथ्वीवासी कायज़स, नाम के विशालकाय दानवों से युद्धरत है जोकि प्रशांत महासागर की गहराई में प्रकट एक भिन्न आयाम के दरवाजे से प्रकट होता है। इन दानवों से निपटने के लिए, मानव समूह जैगेर्स, नाम के भीमकाय ह्युमैनाॅयड मैकास (मानवचलित मशीन) का विकास कर लेती है जिसे दो चालक कंट्रोल करते है, जो उनके न्युरल ब्रिज (तांत्रिक प्रणाली) के जरिए जुड़ी हुई है। युद्ध के आखिरी दिनों को याद करते हुए, यह कहानी जैगेर्स मशीन के चालक रैलिफ बैकेट, से शुरू होती है जिसे रिटायरमेंट से पूर्व एक नव-चालक माको मोरी के साथ कायज़स को हराने के लिए उन्हें खाई में धकेलने में मदद करता है। मुख्य फ़िल्मांकन के लिए टोरंटो में नवंबर 14, २०११ से शुरू कर अप्रैल २०१२ तक पूर्ण किया गया। फ़िल्म को बतौर निर्माता लिजेण्ड्री पिक्चर्स और बतौर वितरक वाॅर्नर ब्रदर्स पिक्चर्स ने पेश किया है। फ़िल्म को जुलाई १२, 2013 में त्रिआयामी और आइमैक्स थ्रीडी फाॅर्मेट के साथ रिलीज किया गया, जिनकी काफी सकारात्मक प्रतिक्रिया दी गयी; विशेषकर विजुवल इफैक्टस और एक्शन सीक्वेंस की जोरदार प्रशंसा की गई। हालाँकि युनाइटेड स्टेट के बाॅक्स-ऑफिस में निराशाजनक प्रदर्शन के बावजूद, यह अन्य प्रादेशिक देशों में काफी सफल रही। फ़िल्म ने वैश्विक स्तर पर कुल $411 करोड़, से ज्यादा कमाई की जिनमें अकेले चीन के बड़े बाजार में $114 करोड़ का कारोबार किया, जो आज की तारीख में डेल टोरो की सबसे अधिक व्यावसायिक फ़िल्म साबित हुई है। फिर वर्ष 2014 में मेलस्टाॅर्म शीर्षक नाम से इसके सिक्विल की घोषणा की गई, जिसकी रिलीज की तिथि युनिवर्सल स्टुडियोज ने अगस्त 04, 2017 तक की शेड्युल दी है। सितंबर 2015 में, इस सिक्विल के रिपोर्ट मुताबिक इसके "अनिश्चित रुकावट" होने की खबर दी गई; किसी तरह, डेल टोरो और युनिवर्सल स्टुडियोज ने इसके सिक्विल की देरी और भविष्य में जल्द काम शुरू होने की पुष्टि की। फरवरी 2016 में, यह घोषणा प्रचार की गई कि बतौर फ़िल्म निर्देशन की कमान स्टीवन एस.

नई!!: चीन और पैसिफ़िक रिम (फ़िल्म) · और देखें »

पूरब से उत्पन्न पश्चिमी सभ्यता

पूरब से उत्पन्न पश्चिमी सभ्यता (The Eastern Origins of Western Civilisation), जॉन एम हॉब्सन द्वारा सन २००४ में लिखित पुस्तक है जिसमें इस ऐतिहासिक सिद्धान्त के विरुद्ध तर्क दिया गया है कि पश्चिम का उदय सन १४९२ के बाद 'कुँवारी माँ' से हुआ। इस पुस्तक में यह दर्शाने का सफल प्रयत्न किया गया है कि पश्चिमी का उदय वस्तुतः उसके पूर्वी देशों के साथ अन्तःक्रिया (interactions) के कारण हुआ जो पश्चिम की तुलना में सामाजिक एवं प्रौद्योगिकीय दृष्टि से अधिक उन्नत थे। .

नई!!: चीन और पूरब से उत्पन्न पश्चिमी सभ्यता · और देखें »

पूर्व की ओर देखो (नीति)

पूर्व की ओर देखो नीति भारत द्वारा द॰ पू॰ एशिया के देशों के साथ बड़े पैमाने पर आर्थिक और सामरिक संबंधों को विस्तार देने, भारत को एक क्षेत्रीय शक्ति के रूप में स्थापित करने और इस इलाके में चीन के प्रभाव को संतुलित करने के उद्देश्यों से बनाई गई नीति है।अरोड़ा - (गूगल पुस्तक) वर्ष १९९१ में नरसिंह राव सरकार द्वारा शुरू की गयी इस नीति के साथ ही भारत के विदेश नीति के परिप्रेक्ष्यों में एक नई दिशा और नए अवसरों के रूप में देखा गया और वाजपेयी सरकार तथा मनमोहन सरकार ने भी इसे अपने कार्यकाल में लागू किया। वस्तुतः यह नीति शीत युद्ध की समाप्ति के बाद उभरे नए वैश्विक और क्षेत्रीय परिप्रेक्ष्यों, शक्ति संतुलन और भारत की नई आर्थिक नीतियों के साथ विदेश नीति के समन्वय की अवधारणा का परिणाम है जिसके मूल रूपरेखाकार के रूप में तत्कालीन वित्त मंत्री मनमोहन सिंह जी को देखा जाता है।- रेडियो जर्मनी, जून ०६, २०१३ (अभिगमन तिथि २६.०६.२०१४) यह इन क्षेत्रों के साथ नए रिश्ते बनाने की शुरुआत नहीं थी बल्कि प्राचीन काल के, किन्तु एक दीर्घअवधि से उपेक्षित, रिश्तों को पुनर्जीवित करने की कोशिश थी। हाल के नतीजों को देखा जाय तो इस बात को स्वीकार करने के कई कारण हैं कि भारत को इस नीति से लाभ हुआ है और वह इस नीति के द्वारा अपने संबंध इन पूर्वी देशों से मजबूत करने में सफल रहा है। जिस तरह भारत "पूर्व की ओर देखो" की नीति अपनाए हुए हैं उसी तरह थाईलैंड “पश्चिम की ओर देखो” की नीति अपनाए हुए हैं और ये दोनों नीतियां एक ही बिन्दु पर मिलती हैं। भारत ने चीन को भी बार-बार यह समझाने की कोशिश की है कि यह नीति चीन के कंटेंनमेंट के लिये नहीं है जैसा कि चीन इसे मानता है। .

नई!!: चीन और पूर्व की ओर देखो (नीति) · और देखें »

पूर्वकाल में विश्व के विभिन्न क्षेत्रों के सकल घरेलू उत्पाद

१००० ई से आजतक विश्व के विभिन्न भागों के सकल घरेलू आय का परिवर्तन .

नई!!: चीन और पूर्वकाल में विश्व के विभिन्न क्षेत्रों के सकल घरेलू उत्पाद · और देखें »

पूर्वोत्तर भारत

पूर्वोत्तर भारत से आशय भारत के सर्वाधिक पूर्वी क्षेत्रों से है जिसमें एक साथ जुड़े 'सात बहनों' के नाम से प्रसिद्ध राज्य, सिक्किम तथा उत्तरी बंगाल के कुछ भाग (दार्जीलिंग, जलपाईगुड़ी और कूच बिहार के जिले) शामिल हैं। पूर्वोत्तर भारत सांस्कृतिक दृष्टि से भारत के अन्य राज्यों से कुछ भिन्न है। भाषा की दृष्टि से यह क्षेत्र तिब्बती-बर्मी भाषाओँ के अधिक प्रचलन के कारण अलग से पहचाना जाता है। इस क्षेत्र में वह दृढ़ जातीय संस्कृति व्याप्त है जो संस्कृतीकरण के प्रभाव से बची रह गई थी। इसमें विशिष्ट श्रेणी के मान्यता प्राप्त आठ राज्य भी हैं। इन आठ राज्यों के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए 1971 में पूर्वोतर परिषद (नॉर्थ ईस्टर्न काउंसिल / NEC) का गठन एक केन्द्रीय संस्था के रूप में किया गया था। नॉर्थ ईस्टर्न डेवेलपमेंट फाइनेंस कारपोरेशन लिमिटेड (NEDFi) का गठन 9 अगस्त 1995 को किया गया था और उत्तरपूर्वीय क्षेत्र विकास मंत्रालय (DoNER) का गठन सितम्बर 2001 में किया गया था। उत्तरपूर्वीय राज्यों में सिक्किम 1947 में एक भारतीय संरक्षित राज्य और उसके बाद 1975 में एक पूर्ण राज्य बन गया। पश्चिम बंगाल में स्थित सिलीगुड़ी कॉरिडोर जिसकी औसत चौड़ाई 21 किलोमीटर से 40 किलोमीटर के बीच है, उत्तरपूर्वीय क्षेत्र को मुख्य भारतीय भू-भाग से जोड़ता है। इसकी सीमा का 2000 किलोमीटर से भी अधिक क्षेत्र अन्य देशों: नेपाल, चाइना, भूटान, बर्मा और बांग्लादेश के साथ लगती है। .

नई!!: चीन और पूर्वोत्तर भारत · और देखें »

पूर्वी चीन सागर

पूर्वी चीन सागर का नक़्शा जापान के क्यूशू द्वीप के नागासाकी प्रान्त में स्थित सासेबो शहर से पूर्वी चीन सागर में डूबता सूरज पूर्वी चीन सागर पूर्वी एशिया के पूर्व में स्थित एक समुद्र है। यह प्रशांत महासागर का हिस्सा है और इसका क्षेत्रफल क़रीब १२,४९,००० वर्ग किमी (यानि ७,५०,००० वर्ग मील) है। इसके पश्चिम में चीन है, पूर्व में जापान के क्यूशू और नानसेई द्वीप हैं और दक्षिण में ताईवान है। पूर्वी चीन सागर की सबसे अधिक गहराई लगभग ३,००० मीटर है। चीन की सबसे लम्बी नदी यांगत्सी क्यांग बहकर इसी सागर में मिल जाती है।, Michael Pollard, Evans Brothers, 2003, ISBN 978-0-237-52638-2 .

नई!!: चीन और पूर्वी चीन सागर · और देखें »

पूर्वी एशिया

श्रेणी:एशिया.

नई!!: चीन और पूर्वी एशिया · और देखें »

पूर्वी ईरानी भाषाएँ

पूर्वी ईरानी भाषाएँ ईरानी भाषा-परिवार की एक उपशाखा हैं जो मध्य ईरानी काल (लगभग चौथी शताब्दी ईसापूर्व) से उभरीं। अवस्ताई भाषा अक्सर इस शाखा की एक प्राचीनतम सदस्या मानी जाती है। आधुनिक काल में सब से ज़्यादा बोली जाने वाली पूर्वी ईरानी भाषा पश्तो है, जिसके दुनिया में लगभग ५ करोड़ मातृभाषी हैं। यह अफ़्ग़ानिस्तान और पश्चिमोत्तरी पाकिस्तान के ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रान्त में बोली जाती है। इसके अलावा पूर्वी ताजिकिस्तान के कूहिस्तोनी-बदख़्शान स्वशासित प्रान्त और चीन के सुदूर पश्चिमी शिनजियांग प्रान्त में भी पूर्वी ईरानी भाषाएँ बोली जाती हैं। प्राचीन सोग़दाई से विकसित हुई पश्चिमोत्तरी ताजिकिस्तान की यग़नोबी भाषा और स्किथी-सरमती से विकसित हुई कॉकस क्षेत्र की ओसेती भाषा भी दोनों पूर्वी ईरानी भाषाएँ मानी जाती हैं।, Thomas Albert Sebeok, Walter de Gruyter, 1970,...

नई!!: चीन और पूर्वी ईरानी भाषाएँ · और देखें »

पूर्वी वू राज्य (प्राचीन चीन)

सन् २६२ ईसवी में पूर्वी वू (Wu) राज्य के क्षेत्र (हरे रंग में) पूर्वी वू राज्य या सुन वू राज्य (चीनी भाषा: 吳, वू; अंग्रेज़ी: Eastern Wu) प्राचीन चीन के तीन राजशाहियों के काल में चीन पर नियंत्रण पाने के लिए जूझने वाला एक राज्य था। यह २२९ ईसवी से २८० ईसवी तक चला। यह यांग्त्से नदी की डेल्टा के जियांगनान क्षेत्र में स्थित था। इसकी राजधानी जिआनये (建業) थी, जो आधुनिक काल में जिआंगसु राज्य का नानजिंग शहर है लेकिन कभी-कभी राजधानी वुचंग (武昌) में भी हुआ करती थी, जो वर्तमान काल में हेबेई राज्य का एझोऊ शहर है। हान राजवंश के अंतिम समय में जियांगनान के वू-भाषी इलाक़े पर सुन चुआन (孫權, Sun Quan) नामक जागीरदार का क़ब्ज़ा था। नाम के लिए वह हान सम्राट शियान के अधीन था लेकिन असलियत में स्वतन्त्र था। उस काल में हान सम्राट पर साओ वेई राज्य के जागीरदारसाओ साओ का नियंत्रण था। जहाँ बाक़ी रियासतों के सरदार अपने आप को चीन का सम्राट बनाने की इच्छा रखते थे, वहाँ सुन चुआन को ऐसी कोई तमन्ना नहीं थी। फिर भी जबसाओ वेई के साओ पी और शु हान राज्य के लिऊ बेई अपने आपको सम्राट घोषित कर दिया तो सन् २२९ में सु चुआन ने भी वू राजवंश की स्थापना का ऐलान करते हुए अपने आप को सम्राट घोषित कर दिया।साओ वेई से बचने के लिए शु हान और वू राज्य ने संधि कर ली। वू कभी यांग्त्से नदी से उत्तर में कोई क्षेत्र नहीं ले पाया लेकिन न ही वेई यांग्त्से से दक्षिण में कोई इलाक़ा जीत पाया। सन् २८० में जिन राजवंश स्थापित हुआ जिसने वू पर क़ब्ज़ा कर लिया। इसके साथ-साथ तीन राजशाहियाँ ख़त्म हुईं और चीन फिर से संगठित हो गया।, Ann-ping Chin, Knopf, 1988, ISBN 978-0-394-57116-4,...

नई!!: चीन और पूर्वी वू राज्य (प्राचीन चीन) · और देखें »

पेठा (सब्जी)

पेठा या कुष्माण्ड (अंग्रेज़ी:winter melon; वानस्पतिक नाम: बेनिनकेसा हिस्पिडा (Benincasa hispida)), एक बेल पर लगने वाला फल है, जो सब्जी की तरह खाया जाता है। यह हल्के हरे वर्ण का होता है और बहुत बड़े आकार का हो सकता है। पूरा पकने पर यह सतही बालों को छोड़कर कुछ श्वेत धूल भरी सतह का हो जाता है। इसकी कुछ प्रजातियां १-२ मीटर तक के फल देती हैं। इसकी अधिकांश खेती भारत सहित दक्षिणी और दक्षिण-पूर्वी एशिया में होती है। इससे भारत में एक मिठाई भी बनती है, जिसे पेठा (मिठाई) ही कहते हैं। कुष्मांड या कूष्मांड का फल पेठा, भतुआ, कोंहड़ा आदि नामों से भी जाना जाता है। इसका लैटिन नाम 'बेनिनकेसा हिस्पिडा' (Benincasa hispida) है। यह लता वार्षिकी, कठिन श्वेत रोमों से आवृत 5-6 इंच व्यास के पत्तों वाली होती है। पुष्प के साथ अंडाकार फल लगते हैं। कच्चा फल हरा, पर पकने पर श्वेत, बृहदाकार होता है। यह वर्षा के प्रारंभ में बोया जाता है। शिशिर में फल पकता है। बीज चिपटे होते हैं। इसके एक भेद को क्षेत्रकुष्मांड, भतुआ या कोंहड़ा कहते हैं, जो कच्ची अवस्था में हरा, पर पकने पर पीला हो जाता है। कुष्मांड खेतों में बोया जाता अथवा छप्पर पर लता के रूप में चढ़ाया जाता है। कुष्मांड भारत में सर्वत्र उपजता है। .

नई!!: चीन और पेठा (सब्जी) · और देखें »

पेकिंग विश्वाविद्यालय

पेकिंग विश्वाविद्यालय या बेइडा विवि चीन का मुख्य अनुसंधान विश्वविद्यालय है, जो बीजिंग में स्थित है। यह चीन में स्थापित पहला आधुनिक राष्ट्रीय विश्वविद्यालय है। इसकी स्थापना वर्ष 1898 में हुई थी। .

नई!!: चीन और पेकिंग विश्वाविद्यालय · और देखें »

पॉल वुल्फोवित्ज़

पॉल वुल्फोवित्ज़ पॉल वुल्फोवित्ज़ ने अमरीका और दुनिया के सार्वजनिक जीवन मे तीस से भी ज्यादा साल एक अध्यापक और अन्य दूसरे रूपों में गुज़ारे हैं जिसमें छ: अमरीकी राष्ट्रपतियों के अधीन चौबीस साल की सरकारी सेवा भी शामिल है। मार्च 2001 में एक बार फिर अमरीका के अट्ठाइसवें रक्षा सचिव के रूप में उनकी वापसी हुई। पेंटागन के इस दूसरे सबसे महत्वपूर्ण पद के लिये वुल्फोवित्ज़ डोनाल्ड रम्सफील्ड के साथ वे अमरीकी सेना के लिये महत्वपूर्ण नीति निर्माण की प्रक्रिया को अंज़ाम देते हैं। ग्यारह सितंबर के हमलों के बाद पॉल वुल्फोवित्ज़ ने पूरे विश्व में आतंकवाद के खिलाफ़ अमरीकी रणनीति तैयार करने से लेकर ईराक़ और अफ़गानिस्तान के हमलों के लिये नीति तैयार करने में अति विशिष्ट भूमिका निभाई है। 1989 में राष्ट्रपति बुश ने उन्हें पेंटागन में वापिस बुलाया और उन्होंने तत्कालीन रक्षा सचिव डिक चेनी को खाड़ी युद्ध के संचालन एवं उसके लिये पैसे का जुगाड़ करने में काफी मदद की। राष्ट्रपति रीगन के शासनकाल में वुल्फोवित्ज़ ने तीन साल तक इंडोनेशिया में अमरीका के राजदूत की भूमिका भी अदा की। इस दौरना श्री वुल्फोवित्ज़ की छवि काफी अच्छी रही थी और इस्लामी दुनिया से सार्थक संवाद में उन्होंने काफी अच्छी भूमिका निभाई। इंडोनेशिया जाने से पहले वुल्फोवित्ज़ केन्द्रीय सरकार के नीति निर्धाण एवं योजना कार्यान्वयन विभाग के प्रमुख पद पर तीन साल तक और लगभग ढाई साल तक पूर्वी एशिया और प्रशांत महासगरीय देशों के मामले के समीति के सचिव पद पर कार्य कर चुके थे। चीन के साथ अमरीका के संबंध सुधारने मे वुल्फोवित्ज़ काफी आगे रहे थे और जापान तथा कोरिया के मामलों में भी अमरीकी सरकार उनपर काफी निर्भ रही थी। कोरिया और फिलिपींस में लोकतंत्र संबंधी आंदोलोनों में भी वे काफी प्रभावी साबित हुये। पॉल वुल्फोवित्ज़ के सराकारी दायरों से बाहर की भूमिका मुख्य रूप से एक प्राध्यापक के रूप में रही है। 1994 से 2001 के बीच वे जान हापकिन्स विश्वविद्यालय में डीन एवं प्रोफ़ेसर के रूप में उन्होंने काम किया। प्राध्यापक के रूप में उन्होंने अमरीका की रक्षा नीति से संबंधित बहसों में जमकर भाग लिया और कई बहसों के आयोजक बने। इससे पहले श्री पॉल वुल्फोवित्ज़ येल विश्वविद्यालय में 1970 से 1973 के बीच राजनीति शास्त्र के प्राध्यापक भी रह चुके थे। श्री पॉल वुल्फोवित्ज़ ने सुरक्षा संबंधी मामलों पर काफी कुछ लिखा भी है। उन्होंने गणित में अपने स्नातक की उपाधि 1965 में कोर्नेल विश्वविद्यालय से प्राप्त की और 1972 में शिकागो विश्वविद्यालय से डाक्टरेट की उपाधि हासिल की। श्रेणी:अमेरीका के अर्थशास्त्री श्रेणी:आधार श्रेणी:व्यक्तिगत जीवन.

नई!!: चीन और पॉल वुल्फोवित्ज़ · और देखें »

पॉस्सम

पॉस्सम (Possum) ऑस्ट्रेलिया, नया गिनी और सुलावेसी पर पाए जाने वाले ७० धानीप्राणी (मारसूपियल) जातियों के एक समूह का नाम है। आधुनिक युग में मानवीय गतिविधियों से यह न्यू ज़ीलैंड और चीन में भी विस्तृत हो गए हैं।, Mary Colson, pp.

नई!!: चीन और पॉस्सम · और देखें »

पोयांग झील

पोयांग झील (鄱阳湖/鄱陽湖; Poyang Lake) जिआंगशी प्रांत में स्थित, चीन की सबसे बड़ी ताजे पानी की झीलों में से एक हैं। इस झील में गन, एक्सिन और ज़िउ नदियाँ आकर मिलती हैं, जो एक नहर के माध्यम से यांग्त्ज़ी से जुड़ते हैं। पोयांग झील के क्षेत्रफल में नाटकीय रूप से बरसाती और सूखे मौसम के बीच में उतार चढ़ाव होता रहता हैं, लेकिन हाल के वर्षों में झील का कुल आकार घट गया हैं। एक सामान्य वर्ष में झील का क्षेत्रफल औसतन 3500 वर्ग किलोमीटर (1,400 वर्ग मील) होता हैं। 2012 की शुरुआत में, सूखा, रेत की खपत और थ्री गॉर्जस बांध में पानी के भंडारण के कारण झील के क्षेत्रफल लगभग 200 वर्ग किलोमीटर (77 वर्ग मील) पर पहुंच गया हैं। झील लाखों प्रवासी पक्षियों को आवास प्रदान करता हैं, और यह पक्षियों के मिलन के लिए एक पसंदीदा गंतव्य हैं। सर्दियों के दौरान, बड़ी संख्या में साइबेरियाई सारस, झील को अपना घर बनाती हैं, जहाँ वो अपना 90% सर्दियों का समय बिताती हैं। .

नई!!: चीन और पोय