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क्रमचय

सूची क्रमचय

गणित में, क्रमचय (परमुटेशन) की संकल्पना को सूक्ष्म रूप से विभिन्न अर्थों में प्रयोग किया जाता है, सभी अर्थ वस्तुओं या मूल्य के क्रमपरिवर्तन (क्रमबद्ध रूप से पुनर्व्यवस्थित करना) की कार्रवाई से संबंधित हैं। अनौपचारिक रूप से, कुछ मानों (values) के एक सेट को विशेष क्रम में व्यवस्थित करना क्रमचय है। इस प्रकार सेट (1, 2, 3) के छह क्रमचय हैं अर्थात्,,,, और.

4 संबंधों: महावीर (गणितज्ञ), संचय (गणित), क्रमचय-संचय, अपविन्यास

महावीर (गणितज्ञ)

महावीर (या महावीराचार्य) नौवीं शती के भारत के प्रसिद्ध ज्योतिषविद् और गणितज्ञ थे। वे गुलबर्ग के निवासी थे। वे जैन धर्म के अनुयायी थे। उन्होने क्रमचय-संचय (कम्बिनेटोरिक्स) पर बहुत उल्लेखनीय कार्य किये तथा विश्व में सबसे पहले क्रमचयों एवं संचयों (कंबिनेशन्स) की संख्या निकालने का सामान्यीकृत सूत्र प्रस्तुत किया। वे अमोघवर्ष प्रथम नामक महान राष्ट्रकूट राजा के आश्रय में रहे। उन्होने गणितसारसंग्रह नामक गणित ग्रन्थ की रचना की जिसमें बीजगणित एवं ज्यामिति के बहुत से विषयों (टॉपिक्स) की चर्चा है। उनके इस ग्रंथ का पावुलूरि मल्लन ने तेलुगू में 'सारसंग्रह गणितम्' नाम से अनुवाद किया। महावीर ने गणित के महत्व के बारे में कितनी महान बात कही है- .

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संचय (गणित)

गणित में किसी समुच्चय (समूह) से कुछ वस्तुओं का चयन करने के तरीकों का अध्ययन एवं उनकी की संख्या संचय या कंबिनेशन कहलाती है। संचय में चयन की गयी वस्तुओं के क्रम का महत्व नहीं होता अथवा चयनित वस्तुओं के क्रमपरिवर्तन से बनी नयी 'चीज' कार्यात्मक रूप से बिल्कुल वही होती है जो क्रमपरिवर्तन के पहले थी। दूसरे शब्दों में, यदि कुछ वस्तुएं दी गई हैं तो उन वस्तुओ में से कुछ या सभी वस्तुओ को एक साथ लेकर बनाए जाने वाले विभिन्न समूहों को संचय कहते हैं। छोटी संख्याओं से संबन्धित संचयों की संख्या की गिनती करना संभव है। उदाहरण के लिये तीन फल - आम, पपीता और केला दिये हो तो इनसे कोई दो फल चुनने के तीन तरीके हैं (आम और पपीता; पपीता और केला; आम और केला) किन्तु बड़ी संख्याओं के होने की स्थिति में निम्नलिखित सूत्र प्रयोग किया जाता है-.

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क्रमचय-संचय

दोहराव के साथ क्रमपरिवर्तन। क्रमचय-संचय (Combinatorics) गणित की शाखा है जिसमें गिनने योग्य विवर्त (discrete) संरचनाओं (structures) का अध्ययन किया जाता है। शुद्ध गणित, बीजगणित, प्रायिकता सिद्धांत, टोपोलोजी तथा ज्यामिति आदि गणित के विभिन्न क्षेत्रों में क्रमचय-संचय से संबन्धित समस्याये पैदा होतीं हैं। इसके अलावा क्रमचय-संचय का उपयोग इष्टतमीकरण (आप्टिमाइजेशन), संगणक विज्ञान, एर्गोडिक सिद्धांत (ergodic theory) तथा सांख्यिकीय भौतिकी में भी होता है। ग्राफ सिद्धांत, क्रमचय-संचय के सबसे पुराने एवं सर्वाधिक प्रयुक्त भागों में से है। ऐतिहासिक रूप से क्रमचय-संचय के बहुत से प्रश्न विलगित रूप में उठते रहे थे और उनके तदर्थ हल प्रस्तुत किये जाते रहे। किन्तु बीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में शक्तिशाली एवं सामान्य सैद्धांतिक विधियाँ विकसित हुईं और क्रमचय-संचय गणित की स्वतंत्र शाखा बनकर उभरा। .

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अपविन्यास

क्रमचय-संचय गणित में अपविन्यास (Derangement) समुच्चय के उस क्रमचय को कहते हैं जिसमें कोई भी अवयव अपनी मूल अवस्था में प्रदर्शित नहीं होता। इन संख्याओं को !n द्वारा लिखा जाता है। श्रेणी:क्रमचय.

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यहां पुनर्निर्देश करता है:

क्रमपरिवर्तन

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