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कील

सूची कील

लोहे की बनी '''कीलें''' कांटी या कील (nail) इंजीनियरी, काष्ठकारी एवं निर्माण कार्य में उपयोग आने वाली पिन के आकार की वस्तु है। इसका उपयोग दो वस्तुओं को जो। दने के लिये किया जाता है। पहले कीलें रॉट आइरन की बनायी जातीं थी किन्तु आजकल इस्पात की एक मिश्रधातु से बनायी जातीं हैं तथा इनके ऊपर किसी धातु का लेप किया गया होता है। कील से जुड़े हुए दो भाग .

7 संबंधों: योक्ता, रम्भा (औज़ार), सुभाष चन्द्र बोस, हथौड़ा, हिन्दी पुस्तकों की सूची/क, वीनियर, छेदक

योक्ता

यांत्रिक संरचना के सन्दर्भ में, योक्ता (fastener) उन युक्तियों को कहते हैं जो दो या अधिक वस्तुओं को जोड़ते हें, जैसे- कील, कीलक आदि। सामान्यतः इनका उपयोग अस्थायी संधियां बनाने के लिए किया जाता है। वेल्डिंग के द्वारा जो जोड़ बनते हैं वे स्थायी प्रकृति के होते हैं, अतः यह योक्ता की श्रेणी में नहीं गिना जाता। .

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रम्भा (औज़ार)

कील निकालने का औजार - '''रम्भा''' रम्भा (कील-उच्छेदक) या क्रोबार एक हाथ का औज़ार है जो धंसी हुई कील आदि निकालने के काम आता है। रम्भा मजबूत लोहे का बनाहुआ होता है। लकड़ी के बक्सों में लगी कीलों को निकालकर उस बक्से को ढहाने (डिसमैंटिल करने) के लिये एवं अन्य इसी तरह के कार्यों के लिये इसका उपयोग होता है। इसमें किसी धातु की एक छड़ के सिरे पर वक्राकार सिरा होता है जो कील के सिर को पकड़ने के हिसाब से बनाया गया होता है। अंग्रेजी में इसे क्रोबार शायद इसलिये कहा जाता है क्योंकि इसका आकार कौवे (क्रो) के पैर या चोंच से मिलता-जुलता है। मोटी कील निकालने का '''रम्भा''' '''रम्भे''' की सहायता से तख्तियाँ उखाड़ता श्रमिक .

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सुभाष चन्द्र बोस

सुभाष चन्द्र बोस (बांग्ला: সুভাষ চন্দ্র বসু उच्चारण: शुभाष चॉन्द्रो बोशु, जन्म: 23 जनवरी 1897, मृत्यु: 18 अगस्त 1945) जो नेता जी के नाम से भी जाने जाते हैं, भारत के स्वतन्त्रता संग्राम के अग्रणी नेता थे। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान, अंग्रेज़ों के खिलाफ लड़ने के लिये, उन्होंने जापान के सहयोग से आज़ाद हिन्द फौज का गठन किया था। उनके द्वारा दिया गया जय हिन्द का नारा भारत का राष्ट्रीय नारा बन गया है। "तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आजादी दूंगा" का नारा भी उनका था जो उस समय अत्यधिक प्रचलन में आया। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि जब नेता जी ने जापान और जर्मनी से मदद लेने की कोशिश की थी तो ब्रिटिश सरकार ने अपने गुप्तचरों को 1941 में उन्हें ख़त्म करने का आदेश दिया था। नेता जी ने 5 जुलाई 1943 को सिंगापुर के टाउन हाल के सामने 'सुप्रीम कमाण्डर' के रूप में सेना को सम्बोधित करते हुए "दिल्ली चलो!" का नारा दिया और जापानी सेना के साथ मिलकर ब्रिटिश व कामनवेल्थ सेना से बर्मा सहित इम्फाल और कोहिमा में एक साथ जमकर मोर्चा लिया। 21 अक्टूबर 1943 को सुभाष बोस ने आजाद हिन्द फौज के सर्वोच्च सेनापति की हैसियत से स्वतन्त्र भारत की अस्थायी सरकार बनायी जिसे जर्मनी, जापान, फिलीपींस, कोरिया, चीन, इटली, मान्चुको और आयरलैंड ने मान्यता दी। जापान ने अंडमान व निकोबार द्वीप इस अस्थायी सरकार को दे दिये। सुभाष उन द्वीपों में गये और उनका नया नामकरण किया। 1944 को आजाद हिन्द फौज ने अंग्रेजों पर दोबारा आक्रमण किया और कुछ भारतीय प्रदेशों को अंग्रेजों से मुक्त भी करा लिया। कोहिमा का युद्ध 4 अप्रैल 1944 से 22 जून 1944 तक लड़ा गया एक भयंकर युद्ध था। इस युद्ध में जापानी सेना को पीछे हटना पड़ा था और यही एक महत्वपूर्ण मोड़ सिद्ध हुआ। 6 जुलाई 1944 को उन्होंने रंगून रेडियो स्टेशन से महात्मा गांधी के नाम एक प्रसारण जारी किया जिसमें उन्होंने इस निर्णायक युद्ध में विजय के लिये उनका आशीर्वाद और शुभकामनायें माँगीं। नेताजी की मृत्यु को लेकर आज भी विवाद है। जहाँ जापान में प्रतिवर्ष 18 अगस्त को उनका शहीद दिवस धूमधाम से मनाया जाता है वहीं भारत में रहने वाले उनके परिवार के लोगों का आज भी यह मानना है कि सुभाष की मौत 1945 में नहीं हुई। वे उसके बाद रूस में नज़रबन्द थे। यदि ऐसा नहीं है तो भारत सरकार ने उनकी मृत्यु से सम्बंधित दस्तावेज़ अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं किये? 16 जनवरी 2014 (गुरुवार) को कलकत्ता हाई कोर्ट ने नेताजी के लापता होने के रहस्य से जुड़े खुफिया दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की माँग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई के लिये स्पेशल बेंच के गठन का आदेश दिया। .

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हथौड़ा

तरह-तरह के हथौड़े हथौड़ा अनेक प्रकार के व्यवसायियों (प्रोफेशनल्स्) द्वारा उपयोग में लाया जाने वाला मूल उपकरण है। किसी वस्तु पर बलाघात (इम्पैक्ट) या क्षणिक किन्तु महान बल लगाने के लिये हथौड़े का उअप्योग किया जाता है। इसका उपयोग कील (नेल) धसाने, अलग-अलग भागों को जोडने, किसी वीज को तोडज्ञे, पीटकर बड़अ करने आदि के लिये किया जाता है। इसका उपयोग हथियार के रूप में भी किया जा सकता है। हथौड़े तरह-तरह के होते हैं एवं कार्य-विशेष के अनुरूप उनकी डिजाइन की जाती है (जैसा कार्य वैसी डिजाइन)। हथौड़े के मुख्यतः दो भाग होते हैं - हत्था (हैंडिल) एवं सिर (हेड्)। इसका अधिआंश भार इसके सिर में ही निहित होता है। हथौड़ा मुख्यतः मानव-हस्त-चालित ही होता है किन्तु कुछ मशीन द्वारा स्वतः-चालित हथौड़े भी हो सकते हैं। .

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हिन्दी पुस्तकों की सूची/क

कोई विवरण नहीं।

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वीनियर

वीनियर फर्नीचर के कार्य में लिया जाने वाली एक लकड़ी अर्थात प्लाइवुड जैसा होता है। इसका मोटापा 3 एमएम (1/8 इंच) होता है तथा यह ज्यादातर 4 फुट वाई 8 फुट की शीट में मिलता है। वीनियर कई तरह के आते है तथा काफी महंगे भी आते हैं। वीनियर को प्लाइवुड पर लगाया जाता है तथा इस पर कील को स्थायी रूप से नहीं मारा जाता है। वीनियर को सूखे पेपर से घिसा जाता है इससे यह काफी आकर्षक दिखता है। इनके अलावा वीनियर पर लेमिनेशन भी किया जाता है इससे यह काफी चमकदार हो जाता है। .

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छेदक

छेदक इसे अंग्रेजी में (Punch/पंच) कहा जाता है। छेदक का प्रयोग फर्नीचर तथा इत्यादि कामों में करते हैं। लोग फर्नीचर में कील की ऊपरी सतह को लकड़ी के अंदर दबाने के लिए छेदक का प्रयोग करते हैं। छेदक किसी कठोर धातु से विभिन्न प्रकार के बनाए जाते हैं। आज छेदक मशीनी वर्ज़न में भी उपलब्ध है। .

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