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कला

सूची कला

राजा रवि वर्मा द्वारा चित्रित 'गोपिका' कला (आर्ट) शब्द इतना व्यापक है कि विभिन्न विद्वानों की परिभाषाएँ केवल एक विशेष पक्ष को छूकर रह जाती हैं। कला का अर्थ अभी तक निश्चित नहीं हो पाया है, यद्यपि इसकी हजारों परिभाषाएँ की गयी हैं। भारतीय परम्परा के अनुसार कला उन सारी क्रियाओं को कहते हैं जिनमें कौशल अपेक्षित हो। यूरोपीय शास्त्रियों ने भी कला में कौशल को महत्त्वपूर्ण माना है। कला एक प्रकार का कृत्रिम निर्माण है जिसमे शारीरिक और मानसिक कौशलों का प्रयोग होता है। .

351 संबंधों: चन्देल, चारकोल, चित्रण, चित्रशाला, चित्रकला, चिंतामणि कर, चिंतामन रघुनाथ व्यास, चिकन की कढ़ाई, चौसठ कलाएँ, चीनी बौद्ध धर्म, टेलर संग्रहालय, टोकि पोना, ए रामचंद्रन, एन एस राजहंस बालगंधर्व, एन राजम, एम एल वसंतकुमारी, एम बी एम अभियान्त्रिकी महाविद्यालय, एम॰ए॰, एलिस मार्ग्युराइट बोनर, एस बालाचंद्र, डाडावाद, डी पी राय चौधरी, तलत मंजूर अहमद, तिरुवलंगदु वेम्बु अइयर शंकरनारायणन, तुलनात्मक साहित्य, त्रिचूर वैद्यनाथ रामचंद्रन, त्रिप्पुनितुरा नारायण कृष्णन, तैयब मेहता, तीजनबाई, थोल. थिरुमावलवन, द ट्राइऐंगल (अख़बार), दिल्ली, दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, द्विजेन्द्रलाल राय, दृश्य कला, देशभक्ति गीत, देव आनन्द, देवहूति, देवव्रत चौधरी, धनुर्विद्या, धीरेंद्रनाथ गांगुली, नताशा स्तांकोविक, नतेसगनबडिगल रामास्वामी अइयर, नारायण श्रीधर बेंद्रे, निसार हुसैन खान, निखिल घोष, नौशाद अली वाहिद अली, नेपाल हिन्दी साहित्य परिषद, नेपाली वास्तुकला, पटना के पर्यटन स्थल, ..., पद्म श्री, पद्म विभूषण धारकों की सूची, पद्मा सुब्राह्मण्यम, पम्मल संबंद मुदलियार, परमसुख जे पांड्या, पश्चिमी संस्कृति, 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संग्रहालय, कटिंगरी कृष्ण हेब्बर, कदूर वेंकटलक्षमण, कन्नड साहित्य सम्मेलन, कमला (तमिल), कर्दम, कला (बहुविकल्पी), कला स्नातक, कलानिधि नारायणन, कलावाद, कलाकृति, कल्कि आर क्रिष्णमूर्ति, कारमल, इंडियाना, काला घोड़ा कला महोत्सव, कांतिलाल हस्तीमल संचेती, किशोरी रविंद्र अमोनकर, किंगडम ऑफ ड्रीम्स, कुदुवायूर शिवराम नारायण स्वामी, कुमार भास्कर वर्मा संस्कृत एवं पुरातन अध्ययन विश्वविद्यालय, कुमार गंधर्व, कृष्णाराव शंकर पंडित, कृष्णाराव गणेश फुलंबरीकर, के शंकर पिल्लई, के जी सुब्रह्मण्यम, के के बिड़ला फाउंडेशन, केरल की लोक क्रीड़ाएँ, केलुचरण महापात्र, केशवप्रसाद मिश्र, केसरबाई केरकर, के॰ जे॰ येशुदास, कोनिडाला चिरंजीवी, कोमल कोठारी, कोजो (प्रोग्रामन भाषा), कोवलम नारायण पणिकर, कोंगर जगैया, अटल बिहारी वाजपेयी हिन्दी विश्वविद्यालय, अतियथार्थवाद, अनुवाद, अन्नपूर्णा देवी, अब्दुल हलीम जाफ़र खान, अमरनाथ सहगल, अमिताभ बच्चन, अमजद अली ख़ान, अम्मानूर माधव चक्यार, अरस्तु का विरेचन सिद्धांत, अरस्तु का अनुकरण सिद्धांत, अर्थशास्त्र, अरैकुडी रामानुज अयंगार, अल-मुस्तसिरीया विश्वविद्यालय, अलारमेल वल्ली, अल्पना मिश्र, अल्बर्ट हॉल संग्रहालय, अश्‍लील ग्रंथ, अशोक आत्रेय, अशोक कुमार (अभिनेता), असद अली खान, अहमद जान थिरकवा खान, अंतोनियो ग्राम्शी, अक्किनेनी नागेश्वर राव, अकेलापन, उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, लखनऊ, उत्तर आधुनिकतावाद, उदय प्रताप कॉलिज, उबुद, उमयलपुरम काशीविश्वनाथ शिवरमण, उमा शर्मा, उस्ताद नसीर अमीनुद्दीन डागर, उस्ताद मुश्ताक हुसैन खान, उस्ताद हाफिज़ अली खाँ, उस्ताद खादिम हुसैन खां, उस्ताद अमीर खान, उस्ताद अलाउद्दीन खान, छायाचित्र, ४चैन सूचकांक विस्तार (301 अधिक) »

चन्देल

खजुराहो का कंदरीय महादेव मंदिर चन्देल वंश मध्यकालीन भारत का प्रसिद्ध राजवंश, जिसने 08वीं से 12वीं शताब्दी तक स्वतंत्र रूप से यमुना और नर्मदा के बीच, बुंदेलखंड तथा उत्तर प्रदेश के दक्षिणी-पश्चिमी भाग पर राज किया। चंदेल वंश के शासकों का बुंदेलखंड के इतिहास में विशेष योगदान रहा है। उन्‍होंने लगभग चार शताब्दियों तक बुंदेलखंड पर शासन किया। चन्देल शासक न केवल महान विजेता तथा सफल शासक थे, अपितु कला के प्रसार तथा संरक्षण में भी उनका महत्‍वपूर्ण योगदान रहा। चंदेलों का शासनकाल आमतौर पर बुंदेलखंड के शांति और समृद्धि के काल के रूप में याद किया जाता है। चंदेलकालीन स्‍थापत्‍य कला ने समूचे विश्‍व को प्रभावित किया उस दौरान वास्तुकला तथा मूर्तिकला अपने उत्‍कर्ष पर थी। इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं खजुराहो के मंदिर। .

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चारकोल

चारकोल लकड़ी का कोयला, या काठकोयला या चारकोल (Charcoal) काला-भूरा, सछिद्र, ठोस पदार्थ है जो लकड़ी, हड्डी आदि को आक्सीजन की अनुपस्थिति में गरम करके उसमें से जल एवं अन्य वाष्शील पदार्थों को निकालकर बनाया जाता है। इस क्रिया को "उष्माविघटन" (Pyrolysis) कहते हैं। चारकोल में कार्बन की उच्च मात्रा (लगभग ८०%) होती है। यह लकड़ी को ४०० °C से 700 °C तक हवा की अनुपस्थिति में गरम करके बनाया जाता है। इसका कैलोरीजनन मान (calorific value) 29,000 से 35,000 kJ/kg के बीच होता है जो कि लकड़ी के कैलोरीजनन मान (12,000 से 21,000 kJ/kg) से बहुत अधिक है। चारकोल का उपयोग धातुकर्म में ईंधन के रूप में, औद्योगिक ईंधन के रूप में, खाने बनाने के इंधन के रूप में, बारूद निर्माण के लिये, शुद्धीकरण और फिल्तरण के लिए, कलाकारी, चिकित्सा, आदि के लिये किया जाता है। .

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चित्रण

जेस्सी विकॉक्स स्मिथ के चित्रण. चित्रण रेखांकन, चित्रकारी, छायांकन या कला के अन्य कार्यों के रूप में प्रस्तुत प्रदर्शित मानसदर्शन का एक रूप है, जिसे ग्राफ़िक रूप से दृश्य प्रस्तुति देकर ऐन्द्रिक जानकारी (जैसे कहानी, कविता या समाचारपत्र लेख) की स्पष्ट व्याख्या करने या निर्धारित करने के लिए बनाया जाता है। .

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चित्रशाला

National Gallery of Art चित्रशाला में प्रदर्शित कलाकृतियाँ चित्रशाला उस विशेष भवन को कहते हैं जिसमें विभिन्न कलाकृतियाँ (चित्र तथा मूर्तियाँ आदि) संरक्षित तथा प्रदर्शित की जाती हैं। प्राय: कलासंग्रहालय (अंग्रेजी: म्यूजियम) का प्रयोग चित्रशाला के लिये होता रहा है किंतु इसके लिये चित्र संग्रहालय अथवा चित्रशाला (आर्ट म्यूजियम या आर्ट गैलरी) अधिक उपयुक्त शब्द है और यही अधिक प्रचलित है। .

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चित्रकला

राजा रवि वर्मा कृत 'संगीकार दीर्घा' (गैलेक्सी ऑफ म्यूजिसियन्स) चित्रकला एक द्विविमीय (two-dimensional) कला है। भारत में चित्रकला का एक प्राचीन स्रोत विष्णुधर्मोत्तर पुराण है। .

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चिंतामणि कर

चिंतामणि कर को कला के क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा सन १९७४ में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये पश्चिम बंगाल से हैं। श्रेणी:१९७४ पद्म भूषण.

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चिंतामन रघुनाथ व्यास

चिंतामन रघुनाथ व्यास भारत सरकार ने १९९२ में कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया था। ये महाराष्ट्र से हैं। श्रेणी:१९९२ पद्म भूषण.

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चिकन की कढ़ाई

सूती कुर्ते के उपर चिकन का काम चिकन लखनऊ की प्रसिद्ध शैली है कढाई और कशीदा कारी की। यह लखनऊ की कशीदाकारी का उत्कृष्ट नमूना है और लखनवी ज़रदोज़ी यहाँ का लघु उद्योग है जो कुर्ते और साड़ियों जैसे कपड़ों पर अपनी कलाकारी की छाप चढाते हैं। इस उद्योग का ज़्यादातर हिस्सा पुराने लखनऊ के चौक इलाके में फैला हुआ है। यहां के बाज़ार चिकन कशीदाकारी के दुकानों से भरे हुए हैं। मुर्रे, जाली, बखिया, टेप्ची, टप्पा आदि ३६ प्रकार के चिकन की शैलियां होती हैं। इसके माहिर एवं प्रसिद्ध कारीगरों में उस्ताद फ़याज़ खां और हसन मिर्ज़ा साहिब थे। इस हस्तशिल्प उद्योग का एक खास पहलू यह भी है कि उसमें 95 फीसदी महिलाएं हैं। ज्यादातर महिलाएं लखनऊ में गोमती नदी के पार के पुराने इलाकों में बसी हुई हैं। चिकन की कला, अब लखनऊ शहर तक ही सीमित नहीं है अपितु लखनऊ तथा आसपास के अंचलों के गांव-गांव तक फैल गई है। मुगलकाल से शुरू हुआ चिकनकारी का शानदार सफर सैंकड़ों देशों से होता हुआ आज भी बदस्तूर जारी है। चिकनकारी का एक खूबसूरत आर्ट पीस लंदन के रायल अल्बर्ट म्यूजियम में भी विश्वभर के पर्यटकों को अपनी गाथा सुना रहा है। .

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चौसठ कलाएँ

दण्डी ने काव्यादर्श में कला को 'कामार्थसंश्रयाः' कहा है (अर्थात् काम और अर्थ कला के ऊपर आश्रय पाते हैं।) - नृत्यगीतप्रभृतयः कलाः कामार्थसंश्रयाः। भारतीय साहित्य में कलाओं की अलग-अलग गणना दी गयी है। कामसूत्र में ६४ कलाओं का वर्णन है। इसके अतिरिक्त 'प्रबन्ध कोश' तथा 'शुक्रनीति सार' में भी कलाओं की संख्या ६४ ही है। 'ललितविस्तर' में तो ८६ कलाएँ गिनायी गयी हैं। शैव तन्त्रों में चौंसठ कलाओं का उल्लेख मिलता है। कामसूत्र में वर्णित ६४ कलायें निम्नलिखित हैं- 1- गानविद्या 2- वाद्य - भांति-भांति के बाजे बजाना 3- नृत्य 4- नाट्य 5- चित्रकारी 6- बेल-बूटे बनाना 7- चावल और पुष्पादि से पूजा के उपहार की रचना करना 8- फूलों की सेज बनान 9- दांत, वस्त्र और अंगों को रंगना 10- मणियों की फर्श बनाना 11- शय्या-रचना (बिस्तर की सज्जा) 12- जल को बांध देना 13- विचित्र सिद्धियाँ दिखलाना 14- हार-माला आदि बनाना 15- कान और चोटी के फूलों के गहने बनाना 16- कपड़े और गहने बनाना 17- फूलों के आभूषणों से श्रृंगार करना 18- कानों के पत्तों की रचना करना 19- सुगंध वस्तुएं-इत्र, तैल आदि बनाना 20- इंद्रजाल-जादूगरी 21- चाहे जैसा वेष धारण कर लेना 22- हाथ की फुती के काम 23- तरह-तरह खाने की वस्तुएं बनाना 24- तरह-तरह पीने के पदार्थ बनाना 25- सूई का काम 26- कठपुतली बनाना, नाचना 27- पहली 28- प्रतिमा आदि बनाना 29- कूटनीति 30- ग्रंथों के पढ़ाने की चातुरी 31- नाटक आख्यायिका आदि की रचना करना 32- समस्यापूर्ति करना 33- पट्टी, बेंत, बाण आदि बनाना 34- गलीचे, दरी आदि बनाना 35- बढ़ई की कारीगरी 36- गृह आदि बनाने की कारीगरी 37- सोने, चांदी आदि धातु तथा हीरे-पन्ने आदि रत्नों की परीक्षा 38- सोना-चांदी आदि बना लेना 39- मणियों के रंग को पहचानना 40- खानों की पहचान 41- वृक्षों की चिकित्सा 42- भेड़ा, मुर्गा, बटेर आदि को लड़ाने की रीति 43- तोता-मैना आदि की बोलियां बोलना 44- उच्चाटनकी विधि 45- केशों की सफाई का कौशल 46- मुट्ठी की चीज या मनकी बात बता देना 47- म्लेच्छित-कुतर्क-विकल्प 48- विभिन्न देशों की भाषा का ज्ञान 49- शकुन-अपशकुन जानना, प्रश्नों उत्तर में शुभाशुभ बतलाना 50- नाना प्रकार के मातृकायन्त्र बनाना 51- रत्नों को नाना प्रकार के आकारों में काटना 52- सांकेतिक भाषा बनाना 53- मनमें कटकरचना करना 54- नयी-नयी बातें निकालना 55- छल से काम निकालना 56- समस्त कोशों का ज्ञान 57- समस्त छन्दों का ज्ञान 58- वस्त्रों को छिपाने या बदलने की विद्या 59- द्यू्त क्रीड़ा 60- दूरके मनुष्य या वस्तुओं का आकर्षण 61- बालकों के खेल 62- मन्त्रविद्या 63- विजय प्राप्त कराने वाली विद्या 64- बेताल आदि को वश में रखने की विद्या वात्स्यायन ने जिन ६४ कलाओं की नामावली कामसूत्र में प्रस्तुत की है उन सभी कलाओं के नाम यजुर्वेद के तीसवें अध्याय में मिलते हैं। इस अध्याय में कुल २२ मन्त्र हैं जिनमें से चौथे मंत्र से लेकर बाईसवें मंत्र तक उन्हीं कलाओं और कलाकारों का उल्लेख है। .

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चीनी बौद्ध धर्म

चीनी बौद्ध धर्म (हान चीनी बौद्ध धर्म) बौद्ध धर्म की चीनी शाखा है। बौद्ध धर्म की परम्पराओं ने तक़रीबन दो हज़ार वर्षों तक चीनी संस्कृति एवं सभ्यता पर एक गहरा प्रभाव छोड़ा, यह बौद्ध परम्पराएँ चीनी कला, राजनीति, साहित्य, दर्शन तथा चिकित्सा में देखी जा सकती हैं। दुनिया की 65% से अधिक बौद्ध आबादी चीन में रहती हैं। भारतीय बौद्ध धर्मग्रन्थों का चीनी भाषा में अनुवाद ने पूर्वी एशिया व दक्षिण पूर्व एशिया में बौद्ध धर्म को बहुत बढ़ावा दिया, इतना कि बौद्ध धर्म कोरिया, जापान, रयुक्यु द्वीपसमूह और वियतनाम तक पहुँच पाया था। चीनी बौद्ध धर्म में बहुत सारी ताओवादी और विभिन्न सांस्कृतिक चीनी परम्पराएँ मिश्रित हैं। .

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टेलर संग्रहालय

हारलेम का '''टेलर म्यूजियम''' टेलर संग्रहालय (Teylers Museum; डच उच्चारण)नीदरलैण्ड के हारलेम नगर में स्थित कला, प्राकृतिक इतिहास तथा विज्ञान का संग्रहालय है। इसकी स्थापना १७७८ में हुई थी। मूलतः यह कला और विज्ञान के समसामयिक केन्द्र के रूप में स्थापित हुआ था। श्रेणी:नीदरलैण्ड श्रेणी:संग्रहालय.

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टोकि पोना

टोकि पोना भाषा का एक चिह्न। टोकि पोना एक निर्मित भाषा है। टोरंटो की सोन्जा एलिन किसा ने इस भाषा का निर्माण किया है। यह भाषा कुछ साधारण से विचारों और प्रतीकों पर आधारित है जो सभी संस्कृतियों को ज्ञात है या लगभग एक समान हैं। टोकि पोना एक न्यून्य भाषा है। इसमें केवल ११८ शब्द हैं। यह संजाल पर प्रथम बार २००१ की गर्मियों में प्रकाशित की गई थी। दाई ओर दिखाए गए चित्र का अर्थ है, हाँ यह सही है। यह शब्दों के स्थान पर हावभावों को ध्यान में रखकर निर्मित की गई है, अर्थात इसका स्वरूप जितना हो सके कम जटिल करके बनाया गया है। इस भाषा में मात्र १४ भाषा ध्वनियां और ११ शब्द हैं। इसे अंतर्राष्ट्रीय सहायक भाषा के रूप में नहीं बनाया गया, बल्कि यह ताओ दर्शन से प्रेरित है। इस भाषा को सीखने वाले शीघ्र ही सरल शब्दों से हावभावों को प्रकट करने की कला सीख जाते हैं। .

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ए रामचंद्रन

ए रामचंद्रन को भारत सरकार द्वारा सन २००५ में कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया था। ये दिल्ली राज्य से हैं। श्रेणी:२००५ पद्म भूषण.

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एन एस राजहंस बालगंधर्व

एन एस राजहंस बालगंधर्व को कला के क्षेत्र में सन १९६४ में भारत सरकार द्वारा, पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। ये महाराष्ट्र राज्य से हैं। श्रेणी:१९६४ पद्म भूषण.

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एन राजम

एन राजम को भारत सरकार द्वारा सन २००४ में कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये उत्तर प्रदेश राज्य से हैं। श्रेणी:२००४ पद्म भूषण.

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एम एल वसंतकुमारी

एम एल वसंतकुमारी को कला के क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा सन १९६७ में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये आंध्र प्रदेश राज्य से हैं। श्रेणी:१९६७ पद्म भूषण.

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एम बी एम अभियान्त्रिकी महाविद्यालय

एम॰बी॰एम॰ अभियांत्रिकी महाविद्यालय (MBM Engineering College; मगनीराम बांगड़ मैमोरियल इंजीनियरिंग कॉलेज; एमबीएम), जोधपुर भारत के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित अभियान्त्रिकी महाविद्यालयों में से एक है। इस कॉलेज की स्थापना राजस्थान सरकार द्वारा 15 अगस्त 1951 को की गई थी। यह महाविद्यालय अभियांत्रिकी के क्षेत्र में अपने उच्च शैक्षिक स्तर के कारण न केवल राजस्थान राज्य में ही, बल्कि पूरे देश में अग्रणी तकनीकी संस्थान के रूप में प्रतिष्ठित है। इस महाविद्यालय में अनेक तकनीकी विषयों में स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर की शिक्षा प्रदान की जाती है। शोधार्थी यहाँ स्नातकोत्तर शिक्षा के बाद पी.एचडी. डिग्री तथा स्नातकोत्तर डिप्लोमा के लिए भी अध्ययन करते हैं। सम्प्रति यह महाविद्यालय जुलाई 1962 से जोधपुर, राजस्थान के जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के अंतर्गत अभियांत्रिकी तथा स्थापत्यकला संकाय के रूप में मान्यता प्राप्त है। .

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एम॰ए॰

एम॰ए॰, साहित्य, संगीत एवं कला के विभिन्न विषयों व भाषाओं जैसे हिन्दी, अंग्रेजी, संस्कृत आदि में १६वीं की परीक्षा उत्तीर्ण करने के उपरान्त दी जाने वाली एक स्नातकोत्तर (परास्नातक) उपाधि या मास्टर्स डिग्री का नाम है। श्रेणी: शैक्षणिक उपाधियाँ.

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एलिस मार्ग्युराइट बोनर

एलिस मार्ग्युराइट बोनर को कला के क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा सन १९७४ में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये इटली से हैं। श्रेणी:१९७४ पद्म भूषण.

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एस बालाचंद्र

एस बालाचंद्र को भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में सन १९८२ में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये तमिलनाडु से हैं। श्रेणी:१९८२ पद्म भूषण.

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डाडावाद

ट्रिस्टन ज़ारा द्वारा प्रकाशन डाडा के पहले संस्करण के कवर, ज्यूरिख, 1917. डाडा या डाडावाद एक सांस्कृतिक आन्दोलन है जो प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान ज्यूरिख, स्विटज़रलैंड में शुरू हुआ था और 1916 से 1922 के बीच अपनी पराकाष्ठा पर पहुंच गया था। यह आन्दोलन मुख्यतया दृश्य कला, साहित्य-कविता, कला प्रकाशन, कला सिद्धांत-रंगमंच और ग्राफिक डिजाइन को सम्मिलित करता है और इस आन्दोलन ने कला-विरोधी सांस्कृतिक कार्यक्रमों के द्वारा अपनी युद्ध विरोधी राजनीति को कला के वर्तमान मापदंडों को अस्वीकार करने के माध्यम से एकत्रित किया। इसका उद्देश्य आधुनिक जगत की उन बातों का उपहास करना था जिसे इसके प्रतिभागी अर्थहीनता समझते थे। युद्ध विरोधी होने के अतिरिक्त, डाडा आन्दोलन प्रकृति से पूंजीवाद विरोधी और राष्ट्रविप्लवकारी भी था। डाडा गतिविधियों के अंतर्गत सार्वजनिक सभाएं, प्रदर्शन और कला/साहित्यिक पत्रिकाओं का प्रकाशन होता था; इसके अंतर्गत विभिन्न संचार माध्यमों द्वारा कला, राजनीति और संस्कृति की भावनात्मक और विस्तृत सूचना आदि विषयों पर चर्चा की जाती थी। इस आन्दोलन ने उत्तरकालीन शैलियों जैसे को भी प्रभावित किया जैसे अवंत-गर्दे और शहर के व्यापारिक क्षेत्र में शुरू हुए संगीत आन्दोलन तथा इसने कुछ समूहों को भी प्रभावित किया जिसमें अतियथार्थवाद, नव यथार्थवाद, पॉप आर्ट, फ्लक्सस और पंक संगीत शामिल थे। डाडा अमूर्त कला और ध्वनिमय कविता का आधार कार्य है, यह कला प्रदर्शन का आरंभिक बिंदु है, पश्च आधुनिकतावाद की एक प्रस्तावना, पॉप आर्ट पर एक प्रभाव, कला विरोधियों का एक उत्सव जिसे बाद में 1960 के दशक में अराजक-राजनीतिक प्रयोग के लिए अंगीकार कर लिया गया था और यही वह आन्दोलन है जिसने अतियथार्थवाद की नींव रखी थी। मार्क लोवेन्थल, फ्रैंसिस पिकाबिया की आई एम ए ब्यूटीफुल मॉन्स्टर के लिए अनुवादक द्वारा दिया गया परिचय.

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डी पी राय चौधरी

डी पी राय चौधरी को कला के क्षेत्र में सन १९५८ में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये पश्चिम बंगाल राज्य से हैं। श्रेणी:१९५८ पद्म भूषण.

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तलत मंजूर अहमद

तलत मंजूर अहमद भारत सरकार ने १९९२ में कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया था। ये महाराष्ट्र से हैं। श्रेणी:१९९२ पद्म भूषण.

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तिरुवलंगदु वेम्बु अइयर शंकरनारायणन

तिरुवलंगदु वेम्बु अइयर शंकरनारायणन को सन २००३ में भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया था। ये तमिलनाडु राज्य से हैं। श्रेणी:२००३ पद्म भूषण.

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तुलनात्मक साहित्य

तुलनात्मक साहित्य (Comparative literature) वह विद्या-शाखा है जिसमें दो या अधिक भिन्न भाषायी, राष्ट्रीय या सांस्कृतिक समूहों के साहित्य का अध्ययन किया जाता है। तुलना इस अध्ययन का मुख्य अंग है। साहित्य का तुलनात्मक अध्ययन व्यापक दृष्टि प्रदान करता है। संकीर्णता के विरोध में व्यापकता आज के विश्व-मनुष्य की आवश्यकता है। हेनरी एच.एच.रेमाक ने तुलनात्मक साहित्य की परिभाषा इस प्रकार की है- .

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त्रिचूर वैद्यनाथ रामचंद्रन

त्रिचूर वैद्यनाथ रामचंद्रन को सन २००३ में भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया था। ये तमिलनाडु राज्य से हैं। श्रेणी:२००३ पद्म भूषण.

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त्रिप्पुनितुरा नारायण कृष्णन

त्रिप्पुनितुरा नारायण कृष्णन टी एन कृष्णन भारत सरकार ने १९९२ में कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया था। ये तमिलनाडु से हैं। श्रेणी:१९९२ पद्म भूषण.

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तैयब मेहता

तैयब मेहता को सन २००७ में भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये महाराष्ट्र से हैं। .

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तीजनबाई

तीजनबाई (जन्म- २४ अप्रैल १९५६) भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के पंडवानी लोक गीत-नाट्य की पहली महिला कलाकार हैं। देश-विदेश में अपनी कला का प्रदर्शन करने वाली तीजनबाई को बिलासपुर विश्वविद्यालय द्वारा डी लिट की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया है। वे सन १९८८ में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री और २००३ में कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से अलंकृत की गयीं। उन्हें १९९५ में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार तथा २००७ में नृत्य शिरोमणि से भी सम्मानित किया जा चुका है। भिलाई के गाँव गनियारी में जन्मी इस कलाकार के पिता का नाम हुनुकलाल परधा और माता का नाम सुखवती था। नन्हीं तीजन अपने नाना ब्रजलाल को महाभारत की कहानियाँ गाते सुनाते देखतीं और धीरे धीरे उन्हें ये कहानियाँ याद होने लगीं। उनकी अद्भुत लगन और प्रतिभा को देखकर उमेद सिंह देशमुख ने उन्हें अनौपचारिक प्रशिक्षण भी दिया। १३ वर्ष की उम्र में उन्होंने अपना पहला मंच प्रदर्शन किया। उस समय में महिला पंडवानी गायिकाएँ केवल बैठकर गा सकती थीं जिसे वेदमती शैली कहा जाता है। पुरुष खड़े होकर कापालिक शैली में गाते थे। तीजनबाई वे पहली महिला थीं जो जिन्होंने कापालिक शैली में पंडवानी का प्रदर्शन किया।। देशबन्धु।६ अक्टूबर, २००९ एक दिन ऐसा भी आया जब प्रसिद्ध रंगकर्मी हबीब तनवीर ने उन्हें सुना और तबसे तीजनबाई का जीवन बदल गया। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी से लेकर अनेक अतिविशिष्ट लोगों के सामने देश-विदेश में उन्होंने अपनी कला का प्रदर्शन किया। प्रदेश और देश की सरकारी व गैरसरकारी अनेक संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत तीजनबाई मंच पर सम्मोहित कर देनेवाले अद्भुत नृत्य नाट्य का प्रदर्शन करती हैं। ज्यों ही प्रदर्शन आरंभ होता है, उनका रंगीन फुँदनों वाला तानपूरा अभिव्यक्ति के अलग अलग रूप ले लेता है। कभी दुःशासन की बाँह, कभी अर्जुन का रथ, कभी भीम की गदा तो कभी द्रौपदी के बाल में बदलकर यह तानपूरा श्रोताओं को इतिहास के उस समय में पहुँचा देता है जहाँ वे तीजन के साथ-साथ जोश, होश, क्रोध, दर्द, उत्साह, उमंग और छल-कपट की ऐतिहासिक संवेदना को महसूस करते हैं। उनकी ठोस लोकनाट्य वाली आवाज़ और अभिनय, नृत्य और संवाद उनकी कला के विशेष अंग हैं। भारत भवन भोपाल में पंडवानी प्रस्तुति के दौरान .

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थोल. थिरुमावलवन

तिरुमावलवन या तोल. तिरुमावलवन (तमिल: தொல்.திருமாவளவன், जन्म 17 अगस्त 1962), एक दलित कार्यकर्ता, 15वीं लोकसभा में संसद सदस्य और भारत के तमिलनाडु राज्य की एक दलित राजनीतिक पार्टी, विड़ूदलाई चिरुतैगल कच्ची (लिबरेशन पैंथर्स पार्टी) के मौजूदा अध्यक्ष हैं। वे 1990 के दशक में एक दलित नेता के रूप में प्रसिद्ध हुए और 1999 में उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया। उनका राजनीतिक आधार, दलितों के जाति आधारित उत्पीड़न को रोकने पर केन्द्रित है, जो उनके हिसाब से तमिल राष्ट्रवाद को पुनर्जीवित और पुनर्निर्देशित करने के माध्यम से ही हासिल किया जा सकता है। उन्होंने श्रीलंका सहित अन्य स्थानों में तमिल राष्ट्रवादी आंदोलनों और समूहों के लिए समर्थन भी व्यक्त किया है। .

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द ट्राइऐंगल (अख़बार)

द ट्राइऐंगल  पेनसिल्वेनिया में ड्रक्सेल यूनिवर्सिटी का स्वतंत्र छात्र समाचार पत्र है। कागज के संस्करण प्रत्येक शुक्रवार की सुबह जल्दी मुद्रित होते हैं। वे ड्रेक्सेल के परिसर में प्रस्तुत इमारतों और विश्वविद्यालय सिटी, फिलाडेल्फिया में चयनित स्थानों में वितरित किए जाते हैं। द ट्राइऐंगल को पहली बार १ फरवरी १९२६ को  केवल सलाह देने के लिए कार्य करने वाले विश्वविद्यालय सलाहकारों के साथ छात्रों की दिशा में प्रकाशित किया गया था। यह प्रकाशन अकादमिक स्कूल वर्ष के दौरान गर्मियों में बाई-साप्ताहिक प्रकाशन के साथ साप्ताहिक कार्यक्रम पर रहा है। दी ट्राइऐंगल २००४ की गर्मियों में रंग में प्रकाशित करना शुरू कर दिया २००७ की गर्मियों के दौरान अखबारों से ब्रॉडशीट प्रारूप में स्विच किया गया। समाचार, खेल, जनमत, कला और मनोरंजन, और शैली आदि धाराएं शामिल हैं।  द ट्राइऐंगल ने उत्कृष्टता पुरस्कार के कई मार्क जीते हैं जो सोसायटी ऑफ़ प्रोफेशनल पत्रकारों के छात्र पत्रकारिता में सर्वश्रेष्ठ का सम्मान करते हैं। संपादकीय लेखन (२०००), में पहली जगह, जनरल कॉलम लेखन (२०००), संपादकीय लेखन (२००१) में दूसरा स्थान, और खेल स्तंभ लेखन (२००१) में तीसरा स्थान। २००४ में महाविद्यालय के समाचार पत्रों में उत्कृष्टता के लिए दो राष्ट्रीय पेसमेकर पुरस्कार जीते हैं। चक बैरिस पेपर के सबसे उल्लेखनीय पूर्व कॉलमिस्ट्स में से एक हैं। ड्रेक्सल, बैरिस के एक १९५३ के स्नातक, द गोंग शो की मेजबानी की और मेजबानी की, फ्रेडी कैनन की १९६२ की हिट सिंगल "पलीसेड्स पार्क" ने लिखा था मूवी कन्फेशन्स ऑफ ए डेंजरस माइंड का विषय जॉन ग्रुबर, द्रियरिंग फ़ायरबॉल के निर्माता भी एक पूर्व स्तंभकार और पिछले संपादक-इन-चीफ थे।बोस्कोव डिपार्टमेंट स्टोर के चेयरमैन और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अल्बर्ट बोस्कोव १९४८ में एक खेल लेखक थे। .

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दिल्ली

दिल्ली (IPA), आधिकारिक तौर पर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (अंग्रेज़ी: National Capital Territory of Delhi) भारत का एक केंद्र-शासित प्रदेश और महानगर है। इसमें नई दिल्ली सम्मिलित है जो भारत की राजधानी है। दिल्ली राजधानी होने के नाते केंद्र सरकार की तीनों इकाइयों - कार्यपालिका, संसद और न्यायपालिका के मुख्यालय नई दिल्ली और दिल्ली में स्थापित हैं १४८३ वर्ग किलोमीटर में फैला दिल्ली जनसंख्या के तौर पर भारत का दूसरा सबसे बड़ा महानगर है। यहाँ की जनसंख्या लगभग १ करोड़ ७० लाख है। यहाँ बोली जाने वाली मुख्य भाषाएँ हैं: हिन्दी, पंजाबी, उर्दू और अंग्रेज़ी। भारत में दिल्ली का ऐतिहासिक महत्त्व है। इसके दक्षिण पश्चिम में अरावली पहाड़ियां और पूर्व में यमुना नदी है, जिसके किनारे यह बसा है। यह प्राचीन समय में गंगा के मैदान से होकर जाने वाले वाणिज्य पथों के रास्ते में पड़ने वाला मुख्य पड़ाव था। यमुना नदी के किनारे स्थित इस नगर का गौरवशाली पौराणिक इतिहास है। यह भारत का अति प्राचीन नगर है। इसके इतिहास का प्रारम्भ सिन्धु घाटी सभ्यता से जुड़ा हुआ है। हरियाणा के आसपास के क्षेत्रों में हुई खुदाई से इस बात के प्रमाण मिले हैं। महाभारत काल में इसका नाम इन्द्रप्रस्थ था। दिल्ली सल्तनत के उत्थान के साथ ही दिल्ली एक प्रमुख राजनैतिक, सांस्कृतिक एवं वाणिज्यिक शहर के रूप में उभरी। यहाँ कई प्राचीन एवं मध्यकालीन इमारतों तथा उनके अवशेषों को देखा जा सकता हैं। १६३९ में मुगल बादशाह शाहजहाँ ने दिल्ली में ही एक चारदीवारी से घिरे शहर का निर्माण करवाया जो १६७९ से १८५७ तक मुगल साम्राज्य की राजधानी रही। १८वीं एवं १९वीं शताब्दी में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने लगभग पूरे भारत को अपने कब्जे में ले लिया। इन लोगों ने कोलकाता को अपनी राजधानी बनाया। १९११ में अंग्रेजी सरकार ने फैसला किया कि राजधानी को वापस दिल्ली लाया जाए। इसके लिए पुरानी दिल्ली के दक्षिण में एक नए नगर नई दिल्ली का निर्माण प्रारम्भ हुआ। अंग्रेजों से १९४७ में स्वतंत्रता प्राप्त कर नई दिल्ली को भारत की राजधानी घोषित किया गया। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् दिल्ली में विभिन्न क्षेत्रों से लोगों का प्रवासन हुआ, इससे दिल्ली के स्वरूप में आमूल परिवर्तन हुआ। विभिन्न प्रान्तो, धर्मों एवं जातियों के लोगों के दिल्ली में बसने के कारण दिल्ली का शहरीकरण तो हुआ ही साथ ही यहाँ एक मिश्रित संस्कृति ने भी जन्म लिया। आज दिल्ली भारत का एक प्रमुख राजनैतिक, सांस्कृतिक एवं वाणिज्यिक केन्द्र है। .

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दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय

दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, (पुराना नाम: दिल्ली इंजीनियरिंग कॉलेज या पूर्व दिल्ली पॉलीटेक्निक)(अंग्रेजी:Delhi Technological University या DTU पूर्व में DCE) भारत का एक इंजीनियरिंग (अभियांत्रिकी) विश्वविद्यालय है। मूल रूप से इसे सन 1940 में दिल्ली पालीटेक्निक (बहुतकनीकी संस्थान) के रूप में स्थापित किया गया था और उस समय यह भारत सरकार के सीधे नियंत्रण में था। 1963 के बाद से यह दिल्ली की राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सरकार के नियंत्रण में है और 1952 से यह कॉलेज दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध है। दिल्ली सरकार की कैबिनेट समिति ने दिल्ली इंजीनियरिंग कॉलेज को डीम्ड-टू-बी विश्वविद्यालय दर्जा देने का प्रस्ताव पारित कर दिया है और अब यह प्रस्ताव स्वीकृति हेतु एआईसीटीई और भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय के समक्ष विचाराधीन है। .

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द्विजेन्द्रलाल राय

द्विजेन्द्रलाल राय द्विजेन्द्रलाल राय ((19 जुलाई 1863–17 मई 1913) बांग्ला के विशिष्ट नाटककार, कवि तथा संगीतकार थे। वे अपने पौराणिक एवं ऐतिहासिक राष्ट्रवादी नाटकों एवं ५०० से अधिक 'द्विजेन्द्रगीति' नामक गीतों के लिए प्रसिद्ध हैं। नाटक में कला तथा निस्पृह सौंदर्य की दृष्टि से, न कि भावुकता की दृष्टि से, वह कई बार रवींद्रनाथ से आगे निकल गए, ऐसा बहुत से समालोचक मानते हैं। रवींद्र के समसामयिक होते हुए भी उनकी शैली संपूर्ण रूप से रवींद्र के प्रभाव से मुक्त थी। उनका विख्यात गान "धनधान्ये पुष्पे भरा", "बंग आमार! जननी आमार! धात्री आमार! आमार देश" इत्यादि आज भी उतने ही लोकप्रिय हैं। उनके नाटक चार श्रेणियों में विन्यस्त हैं - प्रहसन, काव्यनाट्य, ऐतिहासिक नाटक और सामाजिक नाटक। उनके द्वारा रचित काव्यग्रन्थों में 'आर्यगाथा' (प्रथम और द्वितीय भाग) तथा 'मन्द्र' विख्यात हैं। द्बिजेन्द्रलाल राय के प्रसिद्ध नाटकों में उल्लेखनीय हैं- एकघरे, कल्कि-अबतार, बिरह, सीता, ताराबाई, दुर्गादास, राणा प्रतापसिंह, मेबार-पतन, नूरजाहान, साजाहान, चन्द्रगुप्त, सिंहल-बिजय़ इत्यादि। .

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दृश्य कला

दृश्य कला (visual arts), कला का वह रूप है जो मुख्यत: 'दृश्य' (visual) प्रकृति की होती हैं। जैसे - रेखाचित्र (ड्राइंग), चित्रकला, मूर्तिकला, वास्तुकला (architecture), फोटोग्राफी, विडियो, चलचित्र आदि। किन्तु आजकल दृष्यकला में ललित कलाएँ तथा हस्तकलाएँ शामिल मानी जातीं हैं। .

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देशभक्ति गीत

देशभक्त देश गीत गा रहे हैं। देशभक्ति गीत ऐसे गीत हैं जिनमें राष्ट्रीयता की भावना का रस निहित हो। प्रायः देश पर विकट समस्या आने पर या राष्ट्रीय सुधारों के लिये इन गीतों का प्रयोग किया जाता है। इससे देशवासियों में राष्ट्रीयता की भावना जागृत होती है। राजनीति, खेल, अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम और राष्ट्र पर आधारित चलचित्र इत्यादि में इन गीतों का प्रयोग आम बात है। कई भारतीय कवियों ने देशभक्ति गीतों की रचना की है। सुमित्रानंदन पंत की जय जन भारत, कवि प्रदीप की ऐ मेरे वतन के लोगों, तथा गिरिजाकुमार माथुर की हम होंगे कामयाब उपकार (मेरे देश की धरती सोना उगले उगले हिरा मोती) इत्यादि प्रचलित हैं। .

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देव आनन्द

देव आनन्द उर्फ़ धरमदेव पिशोरीमल आनंद (जन्म २६ सितंबर १९२३- मृत्यु ३ दिसम्बर २०११) हिन्दी फ़िल्मों के एक प्रसिद्ध अभिनेता थे। .

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देवहूति

देवहूति स्वयंभुव मनु की कन्या और प्रजापति कर्दम की पत्नी एवं भगवान कपिल की माता थी। देवहूति की माता का नाम शतरूपा था। स्वयंभुव मनु एवं शतरूपा के कुल पाँच सन्तानें थीं जिनमें से दो पुत्र प्रियव्रत एवं उत्तानपाद तथा तीन कन्यायें आकूति, देवहूति और प्रसूति थे। आकूति का विवाह रुचि प्रजापति के साथ और प्रसूति का विवाह दक्ष प्रजापति के साथ हुआ। हिंदू मिथकों के अनुसार इन्हीं तीन कन्याओं से संसार के मानवों में वृद्धि हुई। संसार समस्त जन की उत्पत्ति मनु की कन्याओं से होने के कारण वे मानव कहलाये। कर्दम ऋषि से विवाह के पश्चात देवहूति की नौ कन्यायें तथा एक पुत्र उत्पन्न हुये। कन्याओं के नाम कला, अनुसुइया, श्रद्धा, हविर्भू, गति, क्रिया, ख्याति, अरुन्धती और शान्ति थे तथा पुत्र का नाम कपिल था। कपिल के रूप में देवहूति के गर्भ से स्वयं भगवान विष्णु अवतरित हुये थे। श्रेणी:श्रीमद्भागवत श्रेणी:हिन्दू धर्म.

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देवव्रत चौधरी

देवव्रत चौधरी भारत सरकार ने १९९२ में कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया था। ये दिल्ली से हैं। श्रेणी:१९९२ पद्म भूषण.

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धनुर्विद्या

किसी निश्चित लक्ष्य पर धनुष की सहायता से बाण चलाने की कला को धनुर्विद्या (Archery) कहते हैं। विधिवत् युद्ध का यह सबसे प्राचीन तरीका माना जाता है। धनुर्विद्या का जन्मस्थान अनुमान का विषय है, लेकिन ऐतिहासिक सूत्रों से सिद्ध होता है कि इसका प्रयोग पूर्व देशों में बहुत प्राचीन काल में होता था। संभवत: भारत से ही यह विद्या ईरान होते हुए यूनान और अरब देशों में पहुँची थी। .

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धीरेंद्रनाथ गांगुली

धीरेंद्रनाथ गांगुली को कला के क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा सन १९७४ में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये पश्चिम बंगाल से हैं। श्रेणी:१९७४ पद्म भूषण.

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नताशा स्तांकोविक

नताशा स्तांकोविक भारतीय फ़िल्म उद्योग, बॉलीवुड में एक मॉडल, नर्तकी व अभिनेत्री हैं। इनका जन्म ४ मार्च, १९७७ को नोवि सैड, सर्बिया में हुआ था। यहाँ इन्होंने १७ वर्ष तक नृत्य विद्यालय में बैले नृत्य सीखा और फिर सर्बिया में मॉडलिंग शुरु की। रोमानिया में २००१ में इन्होंने कला व छायांकन में स्नातक तक की शिक्षा पूरी की। कला में ही परास्नातक की शिक्षा कला विश्वविद्यालय, बेलग्रेड, सर्बिया से पूरी की। २०१२ में मुंबई आने के पश्चात इन्होंने विज्ञापनों के लिये काम करना शुरु किया। जॉनसन & जॉनसन, ड्युरेक्स जैसे विभिन्न उत्पादों के विज्ञापनों में नजर आने के बाद इन्होंने फ़िल्मों का रूख किया। २१ सितम्बर, २०१४ को बिग बॉस में प्रतिभागी बनी। २०१४ की फ़िल्म हॉलीडे में अक्षय कुमार के साथ एक छोटे रोल, सत्याग्रह में एक नृत्य और बिगबॉस के आठवें श्रृंखला में अभिनय कर के इन्होंने बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाई। हिन्दी फ़िल्मों में टिके रहने और बिगबॉस के नियमों के लिये इन्होंने हिंदी भाषा सीखनी शुरु कर दी। .

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नतेसगनबडिगल रामास्वामी अइयर

नतेसगनबडिगल रामास्वामी अइयर को कला के क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा, सन १९७१ में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये तमिलनाडु राज्य से हैं। श्रेणी:१९७१ पद्म भूषण.

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नारायण श्रीधर बेंद्रे

नारायण श्रीधर बेंद्रे को भारत सरकार द्वारा सन १९९१ में कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया था। ये महाराष्ट्र से हैं। श्रेणी:१९९१ पद्म भूषण.

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निसार हुसैन खान

निसार हुसैन खान को कला के क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा, सन १९७१ में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये उत्तर प्रदेश राज्य से हैं। श्रेणी:१९७१ पद्म भूषण.

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निखिल घोष

निखिल घोष को भारत सरकार द्वारा सन १९९० में कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये महाराष्ट्र से हैं। श्रेणी:१९९० पद्म भूषण.

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नौशाद अली वाहिद अली

नौशाद अली वाहिद अली भारत सरकार ने १९९२ में कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया था। ये महाराष्ट्र से हैं। श्रेणी:१९९२ पद्म भूषण.

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नेपाल हिन्दी साहित्य परिषद

नेपाल कें अधिकांश क्षेत्र मे हिन्दी स्थानीय भाषा की तरह बोली जाती है और बहुसंख्य लोग हिन्दी बोल या समझ सकते हैं। इसके बावजूद हिन्दी का विकास यहाँ मात्र एक बोलचाल की भाषा के रूप में ही हो रहा है। ज्ञान-विज्ञान, साहित्य, संस्कृति और कला की समृद्ध भाषा के रूप में जो सम्मान उसे मिलना चाहिए था वह नहीं मिल पाया है। इन परिस्थितियो को देखते हुए, हिन्दी, भोजपुरी तथा संस्कृत के मनीषी एवं लेखक पँ.

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नेपाली वास्तुकला

काठमाण्डू की पारम्परिक वास्तु नेपाली वास्तुकला (Architecture of Nepal), कला और व्यवहारिकता का अद्वितीय समन्वय है। भारत, तिब्बत और चीन के व्यापारिक मार्गों के बीच स्थित होने के कारण इसकी वास्तु पर इन सभी क्षेत्रों की वास्तु का प्रभाव है। नेपाल के हिन्दू मन्दिरों की वास्तु पर पगोडा वास्तु का स्पष्ट प्रभाव है। श्रेणी:नेपाल.

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पटना के पर्यटन स्थल

वर्तमान बिहार राज्य की राजधानी पटना को ३००० वर्ष से लेकर अबतक भारत का गौरवशाली शहर होने का दर्जा प्राप्त है। यह प्राचीन नगर पवित्र गंगानदी के किनारे सोन और गंडक के संगम पर लंबी पट्टी के रूप में बसा हुआ है। इस शहर को ऐतिहासिक इमारतों के लिए भी जाना जाता है। पटना का इतिहास पाटलीपुत्र के नाम से छठी सदी ईसापूर्व में शुरू होता है। तीसरी सदी ईसापूर्व में पटना शक्तिशाली मगध राज्य की राजधानी बना। अजातशत्रु, चन्द्रगुप्त मौर्य, सम्राट अशोक, चंद्रगुप्त द्वितीय, समुद्रगुप्त यहाँ के महान शासक हुए। सम्राट अशोक के शासनकाल को भारत के इतिहास में अद्वितीय स्‍थान प्राप्‍त है। पटना एक ओर जहाँ शक्तिशाली राजवंशों के लिए जाना जाता है, वहीं दूसरी ओर ज्ञान और अध्‍यात्‍म के कारण भी यह काफी लोकप्रिय रहा है। यह शहर कई प्रबुद्ध यात्रियों जैसे मेगास्थनिज, फाह्यान, ह्वेनसांग के आगमन का भी साक्षी है। महानतम कूटनीतिज्ञ कौटिल्‍यने अर्थशास्‍त्र तथा विष्णुशर्मा ने पंचतंत्र की यहीं पर रचना की थी। वाणिज्यिक रूप से भी यह मौर्य-गुप्तकाल, मुगलों तथा अंग्रेजों के समय बिहार का एक प्रमुख शहर रहा है। बंगाल विभाजन के बाद 1912 में पटना संयुक्त बिहार-उड़ीसा तथा आजादी मिलने के बाद बिहार राज्‍य की राजधानी बना। शहर का बसाव को ऐतिहासिक क्रम के अनुसार तीन खंडों में बाँटा जा सकता है- मध्य-पूर्व भाग में कुम्रहार के आसपास मौर्य-गुप्त सम्राटाँ का महल, पूर्वी भाग में पटना सिटी के आसपास शेरशाह तथा मुगलों के काल का नगरक्षेत्र तथा बाँकीपुर और उसके पश्चिम में ब्रतानी हुकूमत के दौरान बसायी गयी नई राजधानी। पटना का भारतीय पर्यटन मानचित्र पर प्रमुख स्‍थान है। महात्‍मा गाँधी सेतु पटना को उत्तर बिहार तथा नेपाल के अन्‍य पर्यटन स्‍थल को सड़क माध्‍यम से जोड़ता है। पटना से चूँकि वैशाली, राजगीर, नालंदा, बोधगया, पावापुरी और वाराणसी के लिए मार्ग जाता है, इसलिए यह शहर हिंदू, बौद्ध और जैन धर्मावलंबियों के लिए पर्यटन गेटवे' के रूप में भी जाना जाता है। ईसाई धर्मावलंबियों के लिए भी पटना अतिमहत्वपूर्ण है। पटना सिटी में हरमंदिर, पादरी की हवेली, शेरशाह की मस्जिद, जलान म्यूजियम, अगमकुँआ, पटनदेवी; मध्यभाग में कुम्‍हरार परिसर, पत्थर की मस्जिद, गोलघर, पटना संग्रहालय तथा पश्चिमी भाग में जैविक उद्यान, सदाकत आश्रम आदि यहां के प्रमुख दर्शनीय स्‍थल हैं। मुख्य पर्यटन स्थलों इस प्रकार हैं: .

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पद्म श्री

पद्म श्री या पद्मश्री, भारत सरकार द्वारा आम तौर पर सिर्फ भारतीय नागरिकों को दिया जाने वाला सम्मान है जो जीवन के विभिन्न क्षेत्रों जैसे कि, कला, शिक्षा, उद्योग, साहित्य, विज्ञान, खेल, चिकित्सा, समाज सेवा और सार्वजनिक जीवन आदि में उनके विशिष्ट योगदान को मान्यता प्रदान करने के लिए दिया जाता है। भारत के नागरिक पुरस्कारों के पदानुक्रम में यह चौथा पुरस्कार है इससे पहले क्रमश: भारत रत्न, पद्म विभूषण और पद्म भूषण का स्थान है। इसके अग्रभाग पर, "पद्म" और "श्री" शब्द देवनागरी लिपि में अंकित रहते हैं। 2010 (आजतक) तक, 2336 व्यक्ति इस पुरस्कार को प्राप्त कर चुके हैं। .

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पद्म विभूषण धारकों की सूची

यह भारत सरकार द्वारा पद्म विभूषण से अलंकृत किए गए लोगों की सूची है: .

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पद्मा सुब्राह्मण्यम

पद्मा सुब्राह्मण्यम को सन २००३ में भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया था। ये तमिलनाडु राज्य से हैं। श्रेणी:२००३ पद्म भूषण.

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पम्मल संबंद मुदलियार

पम्मल संबंद मुदलियार को कला के क्षेत्र में सन १९५९ में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये तमिलनाडु राज्य से हैं। श्रेणी:१९५९ पद्म भूषण.

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परमसुख जे पांड्या

परमसुख जे पांड्या को सन १९७७ में भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये महाराष्ट्र से हैं। श्रेणी:१९७७ पद्म भूषण.

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पश्चिमी संस्कृति

पश्चिमी संस्कृति (जिसे कभी-कभी पश्चिमी सभ्यता या यूरोपीय सभ्यता के समान माना जाता है), यूरोपीय मूल की संस्कृतियों को सन्दर्भित करती है। यूनानियों के साथ शुरू होने वाली पश्चिमी संस्कृति का विस्तार और सुदृढ़ीकरण रोमनों द्वारा हुआ, पंद्रहवी सदी के पुनर्जागरण एवं सुधार के माध्यम से इसका सुधार और इसका आधुनिकीकरण हुआ और सोलहवीं सदी से लेकर बीसवीं सदी तक जीवन और शिक्षा के यूरोपीय तरीकों का प्रसार करने वाले उत्तरोत्तर यूरोपीय साम्राज्यों द्वारा इसका वैश्वीकरण हुआ। दर्शन, मध्ययुगीन मतवाद एवं रहस्यवाद, ईसाई एवं धर्मनिरपेक्ष मानवतावाद की एक जटिल श्रृंखला के साथ यूरोपीय संस्कृति का विकास हुआ। ज्ञानोदय, प्रकृतिवाद, स्वच्छंदतावाद (रोमेन्टिसिज्म), विज्ञान, लोकतंत्र और समाजवाद के प्रयोगों के साथ परिवर्तन एवं निर्माण के एक लंबे युग के माध्यम से तर्कसंगत विचारधारा विकसित हुई.

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पाठ्यचर्या

औपचारिक शिक्षा के क्षेत्र में पाठ्यचर्या या पाठ्यक्रम (करिकुलम) विद्यालय या विश्वविद्यालय में प्रदान किये जाने वाले पाठ्यक्रमों और उनकी सामग्री को कहते हैं। पाठ्यक्रम निर्देशात्मक होता है एवं अधिक सामान्य सिलेबस पर आधारित होता है जो केवल यह निर्दिष्ट करता है कि एक विशिष्ट ग्रेड या मानक प्राप्त करने के लिए किन विषयों को किस स्तर तक समझना आवश्यक है। .

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पापनाशन रमैया शिवम

पापनाशन रमैया शिवम को कला के क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा सन १९७२ में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये तमिलनाडु से हैं। श्रेणी:१९७२ पद्म भूषण.

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पालिवई भानुमति रामकृष्ण

पालिवई भानुमति रामकृष्ण को सन २००१ में भारत सरकार ने कला क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया था। ये तमिलनाडु से हैं। .

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पाश्चात्य काव्यशास्त्र

पाश्चात्य काव्यशास्त्र (वेस्टर्न पोएटिक्स) के उद्भव के साक्ष्य ईसा के आठ शताब्दी पूर्व से मिलने लगते हैं। होमर और हेसिओड जैसे महाकवियों के काव्य में पाश्चात्य काव्यशास्त्रीय चिंतन के प्रारम्भिक बिंदु मौजूद मिलते हैं। ईसापूर्व यूनान में वक्तृत्वशास्त्रियों का काफ़ी महत्त्व था। समीक्षा की दृष्टि से उस समय की फ़्राग्स तथा क्लाउड्स जैसी कुछ नाट्यकृतियाँ काफ़ी महत्त्वपूर्ण और उल्लेखनीय हैं। फ़्राग्स में कविता को लेकर यह प्रश्न किया गया है कि वह उत्कृष्ट क्यों मानी जाती है? काव्य समाज को उपयोगी प्रेरणा तथा मनोरंजन के कारण महत्त्वपूर्ण हैं या आनंद प्रदान करने तथा मनोरंजन के कारण? इस तरह से काव्यशास्त्रीय चिंतन-सूत्र यूनानी समाज में बहुत पहले मौजूद रहे और विधिवत काव्य-समीक्षा की शुरुआत प्लेटो से हुई। .

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पाक कला

भोजन तैयार करने, उसे पकाने, तथा प्रस्तुत करने की कला पाक कला (Culinary art) कहलाती है। .

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पिच सांबमूर्ति

पिच सांबमूर्ति को कला के क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा, सन १९७१ में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये तमिलनाडु राज्य से हैं। श्रेणी:१९७१ पद्म भूषण.

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पंजाबी भाषा आन्दोलन

पंजाबी भाषा आन्दोलन का ध्वज पंजाबी भाषा आन्दोलन (Punjabi Language Movement (PLM)) पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त में शुरू हुआ एक आन्दोलन है जिसका उद्देश्य पंजाबी भाषा, कला, संस्कृति और साहित्य को पुनर्जीवित करना है। पाकिस्तान में पंजाबियों की संख्या सबसे अधिक है फिर भी पंजाबी को सरकारी मान्यता नहीं है। उर्दू को राष्ट्रभाषा बना दिया गया है जबकि उर्दू पाकिस्तान के बहुत ही कम लोगों की मातृभाषा है। पंजाबी भाषा आन्दोलन, पंजाबी राष्ट्रवाद पर आधारित है। श्रेणी:पाकिस्तान के विघटनकारी आन्दोलन.

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पुनर्जागरण

फ्लोरेंस पुनर्जागरण का केन्द्र था पुनर्जागरण या रिनैंसा यूरोप में मध्यकाल में आये एक संस्कृतिक आन्दोलन को कहते हैं। यह आन्दोलन इटली से आरम्भ होकर पूरे यूरोप फैल गया। इस आन्दोलन का समय चौदहवीं शताब्दी से लेकर सत्रहवीं शताब्दी तक माना जाता है।.

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पुरुषोत्तम लक्ष्मण देशपांडे

पुरुषोत्तम लक्ष्मण देशपांडे पुरुषोत्तम लक्षमण देशपांडे (८ नवम्बर १९१९ – १२ जून २०००) लोकप्रिय मराठी लेखक, नाटककार, हास्यकार, अभिनेता, कथाकार व पटकथाकार, फिल्म निर्देशक और संगीतकार एवं गायक थे। उन्हें "महाराष्ट्राचे लाडके व्यक्तिमत्त्व" (महाराष्ट्र का लाड़ला व्यक्तित्व) कहा जाता है। महाराष्ट्र में उन्हें प्रेम से पु.

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पुलियर सुब्रह्मण्यम नारायणस्वामी

पुलियर सुब्रह्मण्यम नारायणस्वामी को सन २००३ में भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया था। ये तमिलनाडु राज्य से हैं। श्रेणी:२००३ पद्म भूषण.

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प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश

प्रतापगढ़ भारतीय राज्य उत्तर प्रदेश का एक जिला है, इसे लोग बेल्हा भी कहते हैं, क्योंकि यहां बेल्हा देवी मंदिर है जो कि सई नदी के किनारे बना है। इस जिले को ऐतिहासिक दृष्टिकोण से काफी अहम माना जाता है। यहां के विधानसभा क्षेत्र पट्टी से ही देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं॰ जवाहर लाल नेहरू ने पदयात्रा के माध्यम से अपना राजनैतिक करियर शुरू किया था। इस धरती को रीतिकाल के श्रेष्ठ कवि आचार्य भिखारीदास और राष्ट्रीय कवि हरिवंश राय बच्चन की जन्मस्थली के नाम से भी जाना जाता है। यह जिला धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी कि जन्मभूमि और महात्मा बुद्ध की तपोस्थली है। .

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प्रतिवर्तन

प्रकृति में प्रतिवर्तन प्रतिवर्तन (Recursion) का सामान्य अर्थ है - किसी वस्तु या कार्य का बार-बार उसी रूप में दोहराया जाना। अनेकों विधाओं में इस शब्द का प्रयोग होता है और उनमें इसके भिन्न-भिन्न अर्थ और परिभाषाएँ हैं। उदाहरण के लिए, गणित एवं कम्प्यूटर विज्ञान में जब किसी फलन की परिभाषा में उसी फलन का उपयोग हो तो इसे प्रतिवर्तन कहा जाता है। प्रतिवर्तन का सर्वाधिक उपयोग गणित में ही होता है। गणित तथा तथा संगणक विज्ञान के अतिरिक्त भाषाविज्ञान, तर्कशास्त्र, दर्शनशास्त्र, जीवविज्ञान, तथा कला में भी विविध रूपों में प्रतिवर्तन देखा जा सकता है।; प्रतिवर्तन के कुछ सामान्य उदाहरण.

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प्रभात पट्टन

प्रभात पट्टन भारत के मध्य प्रदेश राज्य के बैतूल जिले की प्रमुख तहसील है। इसका प्राचीन नाम प्रबलपुर है। इसके उत्तर में ताप्ती नदी का पवित्र उद्गम स्थल मुलताई है एवं दक्षिण में महाराष्ट्र राज्य का अमरावती जिले की वरूड तहसील स्थित है एवं पूर्व में पांडुरना तहसील स्थित है। यह प्राचीन काल से ही कला एवं संस्कृति का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां की कुल आबादी 20000 है। यहां पर अनेक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी होने के कारण इसे वीरों की नगरी भी कहा जाता है। यहां हिंदू तथा मुस्लिम धर्म के प्रमुख सांस्कृतिक एवं धार्मिक स्थल है। यहां बैतूल जिले की प्रमुख शिक्षा केंद्र डाइट एवं जवाहर नवोदय विद्यालय स्थित है। .

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प्राचीन भारत

मानव के उदय से लेकर दसवीं सदी तक के भारत का इतिहास प्राचीन भारत का इतिहास कहलाता है। .

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प्राचीन मिस्र

गीज़ा के पिरामिड, प्राचीन मिस्र की सभ्यता के सबसे ज़्यादा पहचाने जाने वाले प्रतीकों में से एक हैं। प्राचीन मिस्र का मानचित्र, प्रमुख शहरों और राजवंशीय अवधि के स्थलों को दर्शाता हुआ। (करीब 3150 ईसा पूर्व से 30 ई.पू.) प्राचीन मिस्र, नील नदी के निचले हिस्से के किनारे केन्द्रित पूर्व उत्तरी अफ्रीका की एक प्राचीन सभ्यता थी, जो अब आधुनिक देश मिस्र है। यह सभ्यता 3150 ई.पू.

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प्राण (अभिनेता)

प्राण (जन्म: 12 फ़रवरी 1920; मृत्यु: 12 जुलाई 2013) हिन्दी फ़िल्मों के एक प्रमुख चरित्र अभिनेता थे जो मुख्यतः अपनी खलनायक की भूमिका के लिये जाने जाते हैं। कई बार फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार तथा बंगाली फ़िल्म जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन अवार्ड्स जीतने वाले इस भारतीय अभिनेता ने हिन्दी सिनेमा में 1940 से 1990 के दशक तक दमदार खलनायक और नायक का अभिनय किया। उन्होंने प्रारम्भ में 1940 से 1947 तक नायक के रूप में फ़िल्मों में अभिनय किया। इसके अलावा खलनायक की भूमिका में अभिनय 1942 से 1991 तक जारी रखा। उन्होंने 1948 से 2007 तक सहायक अभिनेता की तर्ज पर भी काम किया। अपने उर्वर अभिनय काल के दौरान उन्होंने 350 से अधिक फ़िल्मों में काम किया। उन्होंने खानदान (1942), पिलपिली साहेब (1954) और हलाकू (1956) जैसी फ़िल्मों में मुख्य अभिनेता की भूमिका निभायी। उनका सर्वश्रेष्ठ अभिनय मधुमती (1958), जिस देश में गंगा बहती है (1960), उपकार (1967), शहीद (1965), आँसू बन गये फूल (1969), जॉनी मेरा नाम (1970), विक्टोरिया नम्बर २०३ (1972), बे-ईमान (1972), ज़ंजीर (1973), डॉन (1978) और दुनिया (1984) फ़िल्मों में माना जाता है। प्राण ने अपने कैरियर के दौरान विभिन्न पुरस्कार और सम्मान अपने नाम किये। उन्होंने 1967, 1969 और 1972 में फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता पुरस्कार और 1997 में फ़िल्मफेयर लाइफटाइम एचीवमेंट अवार्ड जीता। उन्हें सन् 2000 में स्टारडस्ट द्वारा 'मिलेनियम के खलनायक' द्वारा पुरस्कृत किया गया। 2001 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया और भारतीय सिनेमा में योगदान के लिये 2013 में दादा साहब फाल्के सम्मान से नवाजा गया। 2010 में सीएनएन की सर्वश्रेष्ठ 25 सर्वकालिक एशियाई अभिनेताओं में चुना गया। .

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प्रेम नज़ीर

अब्दुल खादिर (7 अप्रैल 1926 - 16 जनवरी 1989), जिन्हें उनके सिनेमाई नाम प्रेम नज़ीर (मलयालम: നസീര് പ്രേം) से बेहतर जाना जाता है, एक भारतीय फिल्म अभिनेता थे। इन्हें मलयालम सिनेमा के सबसे बड़े सितारों में से एक माना जाता है, साथ ही इन्हें नित्य हरित नायकन यानि सदाबहार नायक कह कर भी पुकारा जाता है। नज़ीर के नाम चार गिनीज रिकॉर्ड दर्ज है; पहला: 610 फिल्मों में नायक की भूमिका निभाने का कीर्तिमान, दूसरा: 107 फिल्मों में एक ही नायिका (शीला के साथ) नायक की भूमिका निभाने का कीर्तिमान, तीसरा: एक साल में प्रदर्शित अधिकतम फिल्मों का कीर्तिमान (1979 में उनतालीस फिल्में) और चौथा: 80 नायिकाओं के साथ नायक की भूमिका निभाने का कीर्तिमान। इन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे सफल अभिनेताओं में से एक माना जाता है। भारत सरकार द्वारा नज़ीर को उनके भारतीय सिनेमा में योगदान को देखते हुए तीसरे और चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान क्रमशः पद्म भूषण और पद्म श्री से सम्मानित किया गया है। .

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प्लेटो

प्लेटो (४२८/४२७ ईसापूर्व - ३४८/३४७ ईसापूर्व), या अफ़्लातून, यूनान का प्रसिद्ध दार्शनिक था। वह सुकरात (Socrates) का शिष्य तथा अरस्तू (Aristotle) का गुरू था। इन तीन दार्शनिकों की त्रयी ने ही पश्चिमी संस्कृति की दार्शनिक आधार तैयार किया। यूरोप में ध्वनियों के वर्गीकरण का श्रेय प्लेटो को ही है। .

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प्लेटो का अनुकरण सिद्धांत

ग्रीक दार्शनिक एवं विचारक प्लेटो ने अपनी पुस्तक रिपब्लिक में काव्य को मूल प्रत्यय के अनुकरण का अनुकरण कहा है। जैसे बढ़ई महान शिल्पी ईश्वर के द्वारा निर्मित मूल बिंब का अनुकरण करके पलंग बनाता है। चित्रकार इस पलंग का अनुकरण कर चित्र बनाता है। साहित्यकार भी उसी बढ़ई द्वारा बनाए गए अनुकरण को अपनी रचनाओं का विषय बनाता है। इस तरह कला और काव्य सत्य से तिहरी दूरी पर होते हैं। इसलिये उन्होंने कला और काव्य को महत्वपूर्ण नहीं माना है। श्रेणी:पाश्चात्य काव्यशास्त्र.

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पृथ्वीराज कपूर

पृथ्वीराज कपूर (3 नवंबर 1901 - 29 मई 1972) हिंदी सिनेमा जगत एवं भारतीय रंगमंच के प्रमुख स्तंभों में गिने जाते हैं। पृथ्वीराज ने बतौर अभिनेता मूक फ़िल्मो से अपना करियर शुरू किया। उन्हें भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) के संस्थापक सदस्यों में से एक होने का भी गौरव हासिल है। पृथ्वीराज ने सन् 1944 में मुंबई में पृथ्वी थिएटर की स्थापना की, जो देश भर में घूम-घूमकर नाटकों का प्रदर्शन करता था। इन्हीं से कपूर ख़ानदान की भी शुरुआत भारतीय सिनेमा जगत में होती है। 1972 में उनकी मृत्यु के पश्चात उन्हें दादा साहब फाल्के पुरस्कार से भी नवाज़ा गया। पृथ्वीराज कपूर को कला क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा सन १९६९ में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। पृथ्वीराज ने पेशावर पाकिस्तान के एडवर्ड कालेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने एक साल तक कानून की शिक्षा भी प्राप्त की जिसके बाद उनका थियेटर की दुनिया में प्रवेश हुआ। 1928 में उनका मुंबई आगमन हुआ। कुछ एक मूक फ़िल्मों में काम करने के बाद उन्होंने भारत की पहली बोलनेवाली फ़िल्म आलम आरा में मुख्य भूमिका निभाई। .

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पोइपिल्ली कुंजु कुरुप

पोइपिल्ली कुंजु कुरुप को कला के क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा, सन १९७१ में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये केरल राज्य से थे। श्रेणी:१९७१ पद्म भूषण श्रेणी:1881 में जन्मे लोग श्रेणी:१९७० में निधन.

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पी तिरुविल्वमलै शेषन एम अइयर

पी तिरुविल्वमलै शेषन एम अइयर को कला के क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा, सन १९७१ में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये तमिलनाडु राज्य से थे। श्रेणी:१९७१ पद्म भूषण श्रेणी:1912 में जन्मे लोग श्रेणी:१९८१ में निधन.

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पी सुशीला

पी सुशीला को सन २००८ में भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया था। ये तमिलनाडु से हैं। २००८ पद्म भूषण श्रेणी:२००८ पद्म भूषण.

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फलित ज्योतिष

फलित ज्योतिष उस विद्या को कहते हैं जिसमें मनुष्य तथा पृथ्वी पर, ग्रहों और तारों के शुभ तथा अशुभ प्रभावों का अध्ययन किया जाता है। ज्योतिष शब्द का यौगिक अर्थ ग्रह तथा नक्षत्रों से संबंध रखनेवाली विद्या है। इस शब्द से यद्यपि गणित (सिद्धांत) ज्योतिष का भी बोध होता है, तथापि साधारण लोग ज्योतिष विद्या से फलित विद्या का अर्थ ही लेते हैं। ग्रहों तथा तारों के रंग भिन्न-भिन्न प्रकार के दिखलाई पड़ते हैं, अतएव उनसे निकलनेवाली किरणों के भी भिन्न भिन्न प्रभाव हैं। इन्हीं किरणों के प्रभाव का भारत, बैबीलोनिया, खल्डिया, यूनान, मिस्र तथा चीन आदि देशों के विद्वानों ने प्राचीन काल से अध्ययन करके ग्रहों तथा तारों का स्वभाव ज्ञात किया। पृथ्वी सौर मंडल का एक ग्रह है। अतएव इसपर तथा इसके निवासियों पर मुख्यतया सूर्य तथा सौर मंडल के ग्रहों और चंद्रमा का ही विशेष प्रभाव पड़ता है। पृथ्वी विशेष कक्षा में चलती है जिसे क्रांतिवृत्त कहते हैं। पृथ्वी फलित ज्योतिष उस विद्या को कहते हैं जिसमें मनुष्य तथा पृथ्वी पर, ग्रहों और तारों के शुभ तथा अशुभ प्रभावों का अध्ययन किया जाता है। ज्योतिष शब्द का यौगिक अर्थ ग्रह तथा नक्षत्रों से संबंध रखनेवाली विद्या है। इस शब्द से यद्यपि गणित (सिद्धांत) ज्योतिष का निवासियों को सूर्य इसी में चलता दिखलाई पड़ता है। इस कक्षा के इर्द गिर्द कुछ तारामंडल हैं, जिन्हें राशियाँ कहते हैं। इनकी संख्या है। मेष राशि का प्रारंभ विषुवत् तथा क्रांतिवृत्त के संपातबिंदु से होता है। अयन की गति के कारण यह बिंदु स्थिर नहीं है। पाश्चात्य ज्योतिष में विषुवत् तथा क्रातिवृत्त के वर्तमान संपात को आरंभबिंदु मानकर, 30-30 अंश की 12 राशियों की कल्पना की जाती है। भारतीय ज्योतिष में सूर्यसिद्धांत आदि ग्रंथों से आनेवाले संपात बिंदु ही मेष आदि की गणना की जाती है। इस प्रकार पाश्चात्य गणनाप्रणाली तथा भारतीय गणनाप्रणाली में लगभग 23 अंशों का अंतर पड़ जाता है। भारतीय प्रणाली निरयण प्रणाली है। फलित के विद्वानों का मत है कि इससे फलित में अंतर नहीं पड़ता, क्योंकि इस विद्या के लिये विभिन्न देशों के विद्वानों ने ग्रहों तथा तारों के प्रभावों का अध्ययन अपनी अपनी गणनाप्रणाली से किया है। भारत में 12 राशियों के 27 विभाग किए गए हैं, जिन्हें नक्षत्र कहते हैं। ये हैं अश्विनी, भरणी आदि। फल के विचार के लिये चंद्रमा के नक्षत्र का विशेष उपयोग किया जाता है। .

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फुरिअर विश्लेषण

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में किसी फलन (फंक्शन) को छोटे-छोटे सरल फलनों के योग के रूप में व्यक्त करने को विश्लेषण कहा जाता है एवं इसकी उल्टी प्रक्रिया को संश्लेषण कहते हैं। हमें ज्ञात है कि फुरिअर श्रेणी के प्रयोग से किसी भी आवर्ती फलन को उचित आयाम, आवृत्ति एवं कला की साइन तरंगो (sine waves) के योग के रूप मे व्यक्त करना सम्भव है। इसके सामान्यीकरण के रूप में यह भी कह सकते हैं किं किसी भी समय के साथ परिवर्तनशील संकेत को उचित आयाम, आवृत्ति एवं कला की साइन तरंगो (sine waves) के योग के रूप में व्यक्त करना सम्भव है। फुरिअर विश्लेषण (Fourier analysis) वह तकनीक है जिसका प्रयोग करके बताया जा सकता है कि कोई संकेत (सिग्नल) किन साइन तरंगों से मिलकर बना हुआ है। फलनों (या अन्य वस्तुओं) को सरल टुकड़ों में तोडकर समझने का प्रयास फुरिअर विश्लेषण का सार है। आजकल फुरिअर विश्लेषण का विस्तार होकर यह एक अधिक सामान्य हार्मोनिक विश्लेषण के अंग के रूप में जाना जाने लगा है। .

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फुलकारी

फुलकारी एक तरहां की कढाई होती है जो चुनरी /दुपटो पर हाथों से की जाती है। फुलकारी शब्द "फूल" और "कारी" से बना है जिसका मतलब फूलों की कलाकारी। इंडियन कल्चर में पंजाब का योगदान शानदार संगीत, लाजवाब खाने और खूबसूरत रंगों से कहीं ज़्यादा है। पटियाला सलवार सूट और फुलकारी एम्ब्रॉएडरी के बिना इंडियन फैशन बेहद नीरस होता। इस कढ़ाई का जन्म प्राचीन भारत (अब पाकिस्तान) में हुआ था जिसमें बेहद कुशल कारीगरी की ज़रूरत होती है। पारंपरिक कारीगरों ने खूबसूरत फूलों के मोटिफ्स से इस कला को परफेक्ट बना लिया। शुरुआती दौर में फुलकारी हर तरह के कपड़ों पर की जाती थी लेकिन बाद में ये सिर्फ स्कार्व्स और शॉल्स तक ही सीमित हो गई और कभी-कभी शूज़, बेल्ट्स और बैग्स जैसी ऐक्सेसरीज़ पर भी.

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फ्रेडरिक नीत्शे

फ्रेडरिक नीत्शे फ्रेडरिक नीत्शे (Friedrich Nietzsche) (15, अक्टू, 1844 से 25, अगस्त 1900) जर्मनी का दार्शनिक था। मनोविश्लेषणवाद, अस्तित्ववाद एवं परिघटनामूलक चिंतन (Phenomenalism) के विकास में नीत्शे की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। व्यक्तिवादी तथा राज्यवादी दोनों प्रकार के विचारकों ने उससे प्रेरणा ली है। हालाँकि नाज़ी तथा फासिस्ट राजनीतिज्ञों ने उसकी रचनाओं का दुरुपयोग भी किया। जर्मन कला तथा साहित्य पर नीत्शे का गहरा प्रभाव है। भारत में भी इक़बाल आदि कवियों की रचनाएँ नीत्शेवाद से प्रभावित हैं। .

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फ्रेडरिक महान्

फ्रेडरिक द्वितीय फ्रेडरिक द्वितीय महान् (Frederick II; जर्मन: Friedrich; १७१२ - १७८६ ई.) १७४० से १७८६ तक प्रशा का शासक था। वह अपने सैनिक विजयों, प्रशा की सेना की पुनर्रचना करने, प्रशा में कला और प्रबोध (इन्लाइटनेण्ट) को प्रोत्साहित करने और सप्तवर्षीय युद्ध में अनेकानेक कठिनाइयों के रहते हुए भी विजय प्राप्त करने के लिये प्रसिद्ध है। प्रशा की जनता उसे 'फ्रेडरिक महान (Friedrich der Große) कहने लगी और उसे 'डर अल्टे फ्रिट्ज' (Der Alte Fritz ("Old Fritz")) उपनाम दिया। .

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बलदेव राज चोपड़ा

बी आर चोपड़ा (22 अप्रैल 1914 – 5 नवम्बर 2008) हिन्दी फ़िल्मों के एक निर्देशक थे। .

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बसरा विश्वविद्यालय

बसरा विश्वविद्यालय (अरबी: جامعة البصرة जामीत अल बसरा) इराक के बसरा शहर में स्थित है। दक्षिणी इराक की जरूरतों को पूरा करने के लिए 1964 में स्थापित, बसरा विश्वविद्यालय पहले बगदाद विश्वविद्यालय से संबद्ध था, लेकिन 1964 में यह एक स्वतंत्र निकाय बन गया। आज विश्वविद्यालय में बसरा शहर के आसपास तीन परिसरों में स्थित चौदह कॉलेज शामिल हैं, जिसमें अनुसंधान सुविधाओं और निवास के छात्र हॉल (छात्रावास) हैं। विश्वविद्यालय बीए, बीएससी, उच्चतर डिप्लोमा, एमए, एमएससी और पीएचडी की डिग्री प्रदान करता है। .

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बसवराज राजगुरु

बसवराज राजगुरु को भारत सरकार द्वारा सन १९९१ में कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया था। ये कर्नाटक से हैं। श्रेणी:१९९१ पद्म भूषण श्रेणी:कर्नाटक के लोग.

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बही-खाता

बही-खाता या पुस्तपालन या बुककीपिंग एक ऐसी पद्धति है जिसमें किसी कम्पनी, गैर–लाभकारी संगठन या किसी व्यक्ति के वित्तीय लेनदेन के आंकड़ों का प्रतिदिन के आधार पर भंडारण, रिकॉर्डिंग और पुनर्प्राप्त करना, विश्लेषण और व्याख्या करने की प्रक्रिया शामिल होती है। इस प्रक्रिया में बिक्री, प्राप्तियां, लेनदेन में खरीद, और किसी व्यक्ति/निगम/संगठन द्वारा भुगतान आदि सम्मिलित किए जाते हैं। बुककीपिंग, एक बुककीपर द्वारा किया जाता है जो किसी व्यवसाय के प्रतिदिन के वित्तीय लेनदेन को रिकॉर्ड करता है। प्रक्रिया के लिए शुद्धता इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सुनिश्चित करता है कि व्यक्तिगत वित्तीय लेनदेन के रिकॉर्ड सही, व्यापक और अद्यतन (अप–टू–डेट) हैं। प्रत्येक लेनदेन, चाहे वह बिक्री हो या खरीद हो, दर्ज किया जाना चाहिए। बुक कीपिंग के लिए स्थापित संरचनाएं होती हैं जिन्हें ‘गुणवत्ता नियंत्रण‘ कहा जाता है। ये संरचनाएँ समय–समय पर वित्तीय लेनदेन के भंडारण, रिकॉर्डिंग और पुनर्प्राप्ति और सटीक रिकॉर्ड सुनिश्चित करने में सहायता करतीं हैं। 'बही-खाता' दो प्रविष्टियों वाली (डबल इंट्री) पुस्तपालन (बुककीपिंग) की भारतीय पद्धति है। प्रायः १४९४ में लिखित पिकौलीज समर (Pacioli's Summar) को अंकेक्षण का प्राचीनतम ग्रंथ माना जाता है किन्तु बही खाता का प्रचलन भारत में उससे भी पूर्व कई शताब्दियों से है। बही-खाता की पद्धति भारत में यूनानी एवं रोमन साम्राज्यों के पहले भी विद्यमान थी। इससे यही अनुमान लगाया जा सकता है कि भारतीय व्यवसायी अपने बही-खाता अपने साथ इटली ले गये और वहीं से द्विप्रविष्टि प्रणाली पूरे यूरोप में फैली। .

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बार्सिलोना

बार्सिलोना स्पेन का एक खुबसूरत शहर है। यह स्पेन में कॅटालोनिया के स्वायत्त समुदाय की राजधानी है और स्पेन का दूसरा सबसे अधिक आबादी वाला शहर है, प्रशासनिक सीमाओं के भीतर जिसकी आबादी 1.6 मिलियन है। बार्सिलोना दुनिया की के अग्रणी पर्यटन, आर्थिक, व्यापार मेला और सांस्कृतिक केंद्रों में से एक है, और वाणिज्य, शिक्षा, मनोरंजन, मीडिया, फैशन, विज्ञान, कला में इसका प्रभाव व योगदान इसे दुनिया के प्रमुख वैश्विक शहरों में से एक बनाता है। .

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बालसुब्रह्मण्य राजम अइयर

बालसुब्रह्मण्य राजम अइयर को सन २००३ में भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया था। ये तमिलनाडु राज्य से हैं। श्रेणी:२००३ पद्म भूषण.

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बाहुबली: द बिगनिंग (2015)

बाहुबली तेलुगू और तमिल भाषाओं में बनी एक भारतीय फ़िल्म है। यह हिन्दी, मलयालम व कुछ विदेशी भाषाओं में भी बनी है तथा इसे 10 जुलाई 2015 को सिनेमाघरों में दिखाया गया। इसे एस॰एस॰ राजामौली ने निर्देशित किया है। प्रभास, राणा डग्गुबती, अनुष्का शेट्टी और तमन्ना ने मुख्य किरदार निभाए हैं। इसमे रम्या कृष्णन, सत्यराज, नासर, आदिवि सेश, तनिकेल्ल भरनी और सुदीप ने भी कार्य किया है। फ़िल्म की कुछ खास बातों में से एक रही इस फिल्म में चित्रित कालकेय कबीले द्वारा बोली जाने वाली किलिकिलि नामक एक कृत्रिम भाषा जिसका निर्माण मधन कर्की ने लगभग 750 शब्दों और 40 व्याकरण के नियमों द्वारा किया। भारतीय फ़िल्म के इतिहास में यह पहली बार हुआ है, जब किसी फ़िल्म के लिए एक नई भाषा का निर्माण किया गया हो। .

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बिहार विधान परिषद्

बिहार विधान परिषद बिहार राज्य में लोकतंत्र की ऊपरी प्रतिनिधि सभा है। इसके सदस्य अप्रत्यक्ष चुनाव के द्वारा चुने जाते हैं। कुछ सदस्य राज्यपाल के द्वारा मनोनित किए जाते हैं। बिहार विधान परिषद विधानमंडल का अंग है। .

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बिग फ़ाइव व्यक्तित्व लक्षण

समकालीन मनोविज्ञान में, व्यक्तित्व के "बिग फ़ाइव" कारक हैं व्यक्तित्व के पांच व्यापक डोमेन या आयाम, जिनका मानव व्यक्तित्व को वर्णित करने के लिए उपयोग किया जाता है। बिग फ़ाइव कारक हैं खुलापन (Openness), कर्तव्यनिष्ठा (Conscientiousness), बहिर्मुखता (Extraversion), सहमतता (Agreeableness) और मनोविक्षुब्धता (Neuroticism) (यदि पुनर्व्यवस्थित किया जाए तो OCEAN, या CANOE).

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बंगलौर विश्वविद्यालय

बैंगलोर विश्वविद्यालय (BU) एक सार्वजनिक विश्वविद्यालय है, जो कर्नाटक राज्य, भारत के बैंगलोर शहर में स्थित है। यह विश्वविद्यालय भारत के पुराने विश्वविद्यालयों में से एक है जिसकी स्थापना सन 1886 में हुई थी तथा यह भारत के अग्रणी बड़े विश्वविद्यालयों में से एक है। विश्वविद्यालय, भारतीय विश्वविद्यालयों के संघ (AIU) का एक भाग है तथा 'उत्कृष्टता के लिये संभावित' (Potential for Excellence) की प्रतिष्ठा के नजदीक है जो कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के दिशा निर्देशों के अनुसार भारत के 10 शीर्ष विश्वविद्यालयों के लिये आरक्षित है। विश्वविद्यालय, प्रतिष्ठित विदेशी तथा स्थानीय विश्वविद्यालयों, संगठनों तथा संस्थाओं के साथ एमओयू के द्वारा शोध कार्य में संलग्न है। इसके कई विभाग उत्कृष्टता के केन्द्र के रूप में UGC द्वारा चिन्हित किये गये हैं। .

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बुंदेलखंड के शासक

' बुंदेलखंड के ज्ञात इतिहास के अनुसार यहां ३०० ई. प सौरभ तिवारी ब्राह्मण सासक मौर्य शासनकाल के साक्ष्‍य उपलब्‍ध है। इसके पश्‍चात वाकाटक और गुप्‍त शासनकाल, कलचुरी शासनकाल, चंदेल शासनकाल, खंगार1खंगार शासनकाल, बुंदेल शासनकाल (जिनमें ओरछा के बुंदेल भी शामिल थे), मराठा शासनकाल और अंग्रेजों के शासनकाल का उल्‍लेख मिलता है। .

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बौद्ध कला

बुद्ध के चरणचिह्न (प्रथम शताब्दी), गान्धार शैली बौद्ध कला से आशय बौद्ध धर्म से प्रभावित कलाओं से है। अन्य कलाओं के अतिरिक्त इसमें वे सभी कला माध्यम हैं जिनमें महात्मा बुद्ध, बोधिसत्व तथा अन्य का निरूपण है, उल्लेखनीय बौद्ध व्यक्तित्व, मण्डल, वज्र, घण्टे, स्तूप, तथा बौद्ध मंदिर शिल्प। बौद्ध कला का उद्भव भारतीय उपमहाद्वीप में हुआ। .

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बौद्धनाथ

बौद्धनाथ बौद्धनाथ काठमाण्डू के पूर्वी भाग में स्थित प्रसिद्ध बौद्ध स्तूप तथा तीर्थस्थल है। एसा माना जाता है कि यह विश्व के सबसे बड़े स्तूपों में से एक है। यह विश्‍व धरोहर में शामिल है। स्तूप 36 मीटर ऊंचा है और कला का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करता है। इस स्तूप के बारे में माना जाता है कि जब इसका निर्माण किया जा रहा था, तब क्षेत्र में भयंकर अकाल पड़ा था। इसलिए पानी न मिलने के कारण ओस की बूंदों से इसका निर्माण किया गया। .

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बैरप्पा सरोजा देवी श्री हर्षा

बैरप्पा सरोजा देवी श्री हर्षा भारत सरकार ने १९९२ में कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया था। ये कर्नाटक से हैं। श्रेणी:१९९२ पद्म भूषण.

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बेनेदेत्तो क्रोचे का अभिव्यंजनावाद

अभिव्यंजनावाद के प्रवर्तक बेनेदेत्तो क्रोचे (Benedetto Croce) मूलतः आत्मवादी दार्शनिक हैं। उनका उद्देश्य साहित्य में आत्मा की अन्तः सत्ता स्थापित करना था। इनसे पूर्व काण्ट ने मन तथा बाह्य जगत् के तादात्म्य और समन्वय का प्रतिपादन करते हुए दृश्य जगत् की उपेक्षा की और हीगेल ने काण्ट की मान्यता स्वीकार करते हुए दृश्य जगत् को भी महत्त्व प्रदान किया। इसके विपरीत क्रोचे ने केवल मानसिक प्रक्रिया को ही महत्त्व दिया है। उनकी दृष्टि में बाह्य उपकरण गौण साधन मात्र हैं। क्रोचे का अभिव्यंजनावाद कला के मूल तत्त्व की खोज का प्रयास है। कला का वास्तविक तत्त्व क्या है अथवा उसकी आत्मा क्या है? इस विषय में क्रोचे ने अपना गम्भीर विवेचन प्रस्तुत किया है, जो सूक्ष्म भी है। क्रोचे के समस्त सौन्दर्य-विवेचन में आत्म-तत्त्व प्रतिष्ठित है। यह आत्म-तत्त्व कलाकार की चेतना है। इस आत्म-तत्त्व को क्रोचे ने आन्तरिक अभिव्यक्ति कहा है, जो इस जगत् में मुख्य रूप से दो प्रकार की प्रतिक्रिया करता है। .

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बेज रंग

बेज रंग एक बहुत ही मद्धिम पीला ish - क्रीम रंग है। शब्द बेज रंग कपड़े, एक सूती कपड़े छोड़ दिया अपने प्राकृतिक रंग में से बनती है। यह बाद से प्रकाश रंग s अपने तटस्थ या अच्छा दिखने के लिए चुना की एक श्रृंखला के लिए इस्तेमाल किया जा करने के लिए आ गया है। 1920 के दशक के बाद से, इस बिंदु जहाँ इसे अब भी उपयोग पीला भूरे रंग, जो नीचे दिखाया गया है की अधिक उल्लेखनीय में से कुछ की एक विस्तृत श्रृंखला के लिए होता है के लिए शब्द बेज रंग का अर्थ का विस्तार किया।  .

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बेग़म अख़्तर

बेगम अख़्तर के नाम से प्रसिद्ध, अख़्तरी बाई फ़ैज़ाबादी (७ अक्टूबर १९१४- ३० अक्टूबर १९७४) भारत की प्रसिद्ध गायिका थीं, जिन्हें दादरा, ठुमरी व ग़ज़ल में महारत हासिल थी। उन्हें कला के क्षेत्र में भारत सरकार पहले पद्म श्री तथा सन १९७५ में मरणोपरांत पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। उन्हें "मल्लिका-ए-ग़ज़ल" के ख़िताब से नवाज़ा गया था। २०१४ की फ़िल्म डेढ़ इश्क़िया में विशाल भारद्वाज ने बेगम अख़्तर की प्रसिद्ध ठुमरी हमरी अटरिया पे का आधुनिक रीमिक्स रेखा भारद्वाज की आवाज में प्रस्तुत किया। .

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बी एन सरकार

बी एन सरकार को कला के क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा सन १९७२ में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये बिहार से थे। श्रेणी:१९७२ पद्म भूषण श्रेणी:1901 में जन्मे लोग श्रेणी:१९८० में निधन.

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बी नरसिंह रेड्डी

बी नरसिंह रेड्डी को कला के क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा सन १९७४ में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये आंध्र प्रदेश से हैं। श्रेणी:१९७४ पद्म भूषण.

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भट्टिकाव्य

भट्टिकाव्य महाकवि भट्टि द्वारा रचित महाकाव्य है। इसका वास्तविक नाम 'रावणवध' है। इसमें भगवान रामचंद्र की कथा जन्म से लगाकर लंकेश्वर रावण के संहार तक उपवर्णित है। यह महाकाव्य संस्कृत साहित्य के दो महान परम्पराओं - रामायण एवं पाणिनीय व्याकरण का मिश्रण होने के नाते कला और विज्ञान का समिश्रण जैसा है। अत: इसे साहित्य में एक नया और साहसपूर्ण प्रयोग माना जाता है। भट्टि ने स्वयं अपनी रचना का गौरव प्रकट करते हुए कहा है कि यह मेरी रचना व्याकरण के ज्ञान से हीन पाठकों के लिए नहीं है। यह काव्य टीका के सहारे ही समझा जा सकता है। यह मेधावी विद्वान के मनोविनोद के लिए रचा गया है, तथा सुबोध छात्र को प्रायोगिक पद्धति से व्याकरण के दुरूह नियमों से अवगत कराने के लिए। भट्टिकाव्य की प्रौढ़ता ने उसे कठिन होते हुए भी जनप्रिय एवं मान्य बनाया है। प्राचीन पठनपाठन की परिपाटी में भट्टिकाव्य को सुप्रसिद्ध पंचमहाकाव्य (रघुवंश, कुमारसंभव, किरातार्जुनीय, शिशुपालवध, नैषधचरित) के समान स्थान दिया गया है। लगभग 14 टीकाएँ जयमंगला, मल्लिनाथ की सर्वपथीन एवं जीवानंद कृत हैं। माधवीयधातुवृत्ति में आदि शंकराचार्य द्वारा भट्टिकाव्य पर प्रणीत टीका का उल्लेख मिलता है। .

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भारत मे जनजातीय स्थिति और विकासात्मक पहल

भारत में जनजातीय स्थिति और विकासात्मक पहल .

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भारत में संगीत-शिक्षण

१८ वीं शताब्दी में घराने एक प्रकार से औपचारिक संगीत-शिक्षा के केन्द्र थे परन्तु ब्रिटिश शासनकाल का आविर्भाव होने पर घरानों की रूपरेखा कुछ शिथिल होने लगी क्योंकि पाश्चात्य संस्कृति के व्यवस्थापक कला की अपेक्षा वैज्ञानिक प्रगति को अधिक मान्यता देते थे और आध्यात्म की अपेक्षा इस संस्कृति में भौतिकवाद प्रबल था। भारतीय संस्कृति की आध्यात्मिक पृष्ठभूमि के अन्तर्गत कला को जो पवित्रता एवं आस्था का स्थान प्राप्त था तथा जिसे कुछ मुसलमान शासकों ने भी प्रश्रय दिया और संगीत को मनोरंजन का उपकरण मानते हुए भी इसके साधना पक्ष को विस्मृत न करते हुए संगीतज्ञों तथा शास्त्रकारों को राज्य अथवा रियासतों की ओर से सहायता दे कर संगीत के विकासात्मक पक्ष को विस्मृत नहीं किया। परन्तु ब्रिटिश राज्य के व्यस्थापकों ने संगीत कला के प्रति भौतिकवादी दृष्टिकोण अपना कर उसे यद्यपि व्यक्तित्व के विकास का अंग माना परन्तु यह दृष्टिकोण आध्यात्मिकता के धरातल पर स्थित न था। उन्होंने अन्य विषयों के समान ही एक विषय के रूप में ही इसे स्वीकार किया, परन्तु वैज्ञानिक प्रगति की प्रभावशीलता के कारण यह विषय अन्य पाठ्य विषयों के बीच लगभग उपेक्षित ही रहा। .

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भारत में ज्वैलरी डिजाइन

ज्वैलरी डिजाइन कला या डिजाइन और आभूषण बनाने का पेशा है। यह सभ्यता की सजावट की जल्द से जल्द रूपों में से एक है, मेसोपोटामिया और मिस्र का सबसे पुराना ज्ञात मानव समाज के लिए कम से कम सात हजार साल पहले डेटिंग। कला परिष्कृत धातु और मणि काटने आधुनिक दिन में ज्ञात करने के लिए प्राचीन काल की साधारण पोत का कारचोबी से सदियों भर में कई रूपों ले लिया है। इससे पहले कि आभूषणों के एक लेख बनाई गई है, डिजाइन अवधारणाओं विस्तृत तकनीकी एक आभूषण डिजाइनर, जो सामग्री, निर्माण तकनीक, संरचना, पहनने और बाजार के रुझान के स्थापत्य और कार्यात्मक ज्ञान में प्रशिक्षित किया जाता है एक पेशेवर द्वारा उत्पन्न चित्र द्वारा पीछा किया गाया जाता है। पारंपरिक हाथ ड्राइंग और मसौदा तैयार करने के तरीकों अभी भी विशेष रूप से वैचारिक स्तर पर, आभूषण डिजाइन में उपयोग किया जाता है। हालांकि, एक पारी गैंडा 3 डी और मैट्रिक्स की तरह कंप्यूटर एडेड डिजाइन कार्यक्रमों के लिए हो रही है। जबकि परंपरागत रूप से हाथ से सचित्र गहना आम तौर पर एक कुशल शिल्पकार द्वारा मोम या धातु सीधे में अनुवाद किया है, एक सीएडी मॉडल आम तौर पर रबर मोल्डिंग में इस्तेमाल किया है या मोम खो दिया जा एक सीएनसी कट या 3 डी मुद्रित 'मोम' पैटर्न के लिए आधार के रूप में इस्तेमाल किया जाता है कास्टिंग प्रक्रियाओं। .

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भारत का लैंगिक इतिहास

खजुराहो में अप्सराओं का चित्रण सनातन धर्म में काम को चार पुरुषार्थों में स्थान प्राप्त है। सेक्स के इतिहास में भारत की भूमिका अति महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत में ही पहले ऐसे ग्रन्थ (कामसूत्र) की रचना हुई जिसमें संभोग को विज्ञान के रूप में देखा गया। यह भी कहा जा सकता है कि कला और साहित्य के माध्यम से यौन शिक्षा का अग्रदूत भारत ही था। इसी प्रकार, .

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भारतीय मूर्तिकला

एलोरा के कैलास मन्दिर में शिव की मूर्ति भारत की एक दीर्घ मूर्तिकला-परम्परा है जिसकी खोज नवपाषाणिक संस्कृतियों में की जा सकती है, हालांकि पुरातात्तिवक दृष्टि से विकास के निरन्तर लम्बे प्रक्षेप पथ को तीसरी शताब्दी र्इसापूर्व से आगे खोजा जा सकता है। भारतीय उपमहाद्वीप में कला को र्इश्वर की रचना माना जाता है और इसलिए कोर्इ भी कला एक-दूसरे से श्रेष्ठ नहीं है। जिस प्रकार शिव से नृत्य एवं संगीत का उद्भव हुआ, विष्णु से चित्रकला एवं मूर्तिकला उत्पन्न हुर्इ और रूद्र विश्वकर्मन से वास्तुकला उत्पन्न हुर्इ। यह कोर्इ आश्चर्य की बात नहीं है कि अधिकांश प्राचीन एवं मध्यकालीन कला सामाजिक-धार्मिक संदर्भ के अन्तर्गत उत्पन्न हुर्इ। देवताओं की विशेषताओं का आरंभिक उल्लेख वैदिक काल से मिलता है जहाँ हमें श्री सुक्त में श्री जैसे विभिन्न देवताओं के शब्द-चित्र मिले हैं, यद्यपि पुरातात्तिवक दृषिट से यह सिद्ध नहीं हुआ है। हालांकि छठी शताब्दी र्इसा पूर्व के व्याकरणाचार्य पाणिनि ने उनके असितत्त्व और किसी प्रकृति अथवा मूर्ति के इर्द-गिर्द अनुष्ठान का उल्लेख किया है। उसी प्रकार सौनक अपने सार-संग्रह वृहत देवता में दस आवश्यक तत्त्वों का उल्लेख करते है जो हमें किसी देवता को पहचानने, यथा रूप, सम्बन्ध, प्रतीक, वाहन, गुण, संकेत आदि में मदद करता है। .

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भारतीय सिन्धु विद्यापीठ

भारतीय सिन्धु विद्यापीठ या इण्डियन इंस्टीटयूट ऑफ सिन्धोलॉजी (I.I.S.) सिन्धी भाषा, साहित्य, संस्कृति, कला और शिक्षा के क्षेत्र में उन्नत अध्ययन एवं शोध का केन्द्र है। यह गुजरात के कच्छ के आदिपुर में स्थित है। इसकी स्थापना अक्टूबर, १९८९ में की गयी थी। सिन्धी समाज की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखना एवं उसका निरन्तर विकास करना ही इस संस्थान का प्रमुख लक्ष्य है। सिन्धोलॉजी में प्राचीन सिंधी साहित्य, कला संस्कृति के संरक्षण-संवर्धन के कार्य अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर सराहे जाते हैं। नारायण श्याम, शेख अयाज समान सिन्धी विद्वानों की आवाज में भी रचनाएं संरक्षित है। साथ ही पाठकों के लिए उपलब्ध करवाई गई हैं। .

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भारतीय कला

अजन्ता गुफा में चित्रित '''बोधि''' नृत्य करती हुई अप्सरा (१२वीं शताब्दी) भारतीय कला का एक नमूना - '''बनीठनी'''; किशनगढ़, जयपुर, राजस्थान कला, संस्कृति की वाहिका है। भारतीय संस्कृति के विविध आयामों में व्याप्त मानवीय एवं रसात्मक तत्व उसके कला-रूपों में प्रकट हुए हैं। कला का प्राण है रसात्मकता। रस अथवा आनन्द अथवा आस्वाद्य हमें स्थूल से चेतन सत्ता तक एकरूप कर देता है। मानवीय संबन्धों और स्थितियों की विविध भावलीलाओं और उसके माध्यम से चेतना को कला उजागार करती है। अस्तु चेतना का मूल ‘रस’ है। वही आस्वाद्य एवं आनन्द है, जिसे कला उद्घाटित करती है। भारतीय कला जहाँ एक ओर वैज्ञानिक और तकनीकी आधार रखती है, वहीं दूसरी ओर भाव एवं रस को सदैव प्राणतत्वण बनाकर रखती है। भारतीय कला को जानने के लिये उपवेद, शास्त्र, पुराण और पुरातत्त्व और प्राचीन साहित्य का सहारा लेना पड़ता है। .

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भावेश चंद्र सान्याल

भावेश चंद्र सान्याल को भारत सरकार द्वारा सन १९८४ में कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये मध्य प्रदेश राज्य से हैं। श्रेणी:१९८४ पद्म भूषण.

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भूदृश्य वास्तुकला

भूदृष्य वास्तुकला का एक उदाहरण - न्यूयार्क का केन्द्रीय पार्क भूदृश्य वास्तुकला (Landscape Architecture) स्थल को मानव उपयोग और आमोद के लिये सुव्यस्थित करने और उपयुक्त बनाने की सृजनात्मक कला है। इसका उद्देश्य संपूर्ण विन्यास के फलस्वरूप, मानव मस्तिष्क को अत्यधिक प्रभावित करना और स्थल या संरचना से संबद्ध भावनात्मक प्रेरणाओं को संतुष्ट करना है, ताकि लोग अत्यधिक प्रशंसा करें। इसके अतिरिक्त भूदृश्य वस्तुकला के अंतर्गत भूदृश्य इंजीनियरी, भूदृश्य उद्यानकर्म और भलीभाँति आकल्पित चित्र विचित्र पार्क भी भूदृश्य वास्तुकला में सम्मिलित हैं। .

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भूसुदर्शनीकरण

उन सभी कार्यों को भूसुदर्शनीकरण (Landscaping) कहते हैं जो किसी भू-क्षेत्र के दर्शनीयता को परिवर्तित करने में सहायक होते हैं। दर्शनीयता से सम्बन्धित अवयवों में शामिल हैं-.

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भीमसेन जोशी

पंडित भीमसेन गुरुराज जोशी (ಪಂಡಿತ ಭೀಮಸೇನ ಗುರುರಾಜ ಜೋಷಿ, जन्म: फरवरी ०४, १९२२) शास्त्रीय संगीत के हिन्दुस्तानी संगीत शैली के सबसे प्रमुख गायकों में से एक है। .

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मथुरा

मथुरा उत्तरप्रदेश प्रान्त का एक जिला है। मथुरा एक ऐतिहासिक एवं धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में प्रसिद्ध है। लंबे समय से मथुरा प्राचीन भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता का केंद्र रहा है। भारतीय धर्म,दर्शन कला एवं साहित्य के निर्माण तथा विकास में मथुरा का महत्त्वपूर्ण योगदान सदा से रहा है। आज भी महाकवि सूरदास, संगीत के आचार्य स्वामी हरिदास, स्वामी दयानंद के गुरु स्वामी विरजानंद, कवि रसखान आदि महान आत्माओं से इस नगरी का नाम जुड़ा हुआ है। मथुरा को श्रीकृष्ण जन्म भूमि के नाम से भी जाना जाता है। .

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मदुरई तिरुमलय नंबी शेषगोपालन

मदुरई तिरुमलय नंबी शेषगोपालन को भारत सरकार द्वारा सन २००४ में कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये तमिलनाडु राज्य से हैं। श्रेणी:२००४ पद्म भूषण.

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मदुरई नारायण कृष्णन

मदुरई नारायण कृष्णन को सन २००३ में भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया था। ये तमिलनाडु राज्य से हैं। श्रेणी:२००३ पद्म भूषण.

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मल्लिकार्जुन बी मंसूर

मल्लिकार्जुन भीमारयप्पा मंसूर (कन्नड़:ಮಲ್ಲಿಕಾರ್ಜುನ ಮನ್ಸೂರ್) (१९१०-१९९२) हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत में जयपुर-अतरौली घराने के खयाल शैली के गायक थे। इनको भारत सरकार द्वारा सन १९७६ में कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये कर्नाटक से हैं। .

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महाभारत

महाभारत हिन्दुओं का एक प्रमुख काव्य ग्रंथ है, जो स्मृति वर्ग में आता है। कभी कभी केवल "भारत" कहा जाने वाला यह काव्यग्रंथ भारत का अनुपम धार्मिक, पौराणिक, ऐतिहासिक और दार्शनिक ग्रंथ हैं। विश्व का सबसे लंबा यह साहित्यिक ग्रंथ और महाकाव्य, हिन्दू धर्म के मुख्यतम ग्रंथों में से एक है। इस ग्रन्थ को हिन्दू धर्म में पंचम वेद माना जाता है। यद्यपि इसे साहित्य की सबसे अनुपम कृतियों में से एक माना जाता है, किन्तु आज भी यह ग्रंथ प्रत्येक भारतीय के लिये एक अनुकरणीय स्रोत है। यह कृति प्राचीन भारत के इतिहास की एक गाथा है। इसी में हिन्दू धर्म का पवित्रतम ग्रंथ भगवद्गीता सन्निहित है। पूरे महाभारत में लगभग १,१०,००० श्लोक हैं, जो यूनानी काव्यों इलियड और ओडिसी से परिमाण में दस गुणा अधिक हैं। हिन्दू मान्यताओं, पौराणिक संदर्भो एवं स्वयं महाभारत के अनुसार इस काव्य का रचनाकार वेदव्यास जी को माना जाता है। इस काव्य के रचयिता वेदव्यास जी ने अपने इस अनुपम काव्य में वेदों, वेदांगों और उपनिषदों के गुह्यतम रहस्यों का निरुपण किया हैं। इसके अतिरिक्त इस काव्य में न्याय, शिक्षा, चिकित्सा, ज्योतिष, युद्धनीति, योगशास्त्र, अर्थशास्त्र, वास्तुशास्त्र, शिल्पशास्त्र, कामशास्त्र, खगोलविद्या तथा धर्मशास्त्र का भी विस्तार से वर्णन किया गया हैं। .

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महाभारत का रचना काल

सुत जी द्वारा महाभारत ऋषि मुनियो को सुनाना। वेदव्यास जी को महाभारत को पूरा रचने में ३ वर्ष लग गये थे, इसका कारण यह हो सकता है कि उस समय लेखन लिपी कला का इतना विकास नही हुआ था, संस्कृत ऋषियो की भाषा थी और ब्राह्मी आम बोल चाल की भाषा हुआ करती थी। यह सर्वमान्य है कि महाभारत का आधुनिक रूप कई अवस्थाओ से गुजर कर बना है, इसकी रचना की चार प्रारम्भिक अवस्थाए पहचानी गयी है- .

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महाराजा अग्रसेन कॉलेज, जगाधरी

महाराजा अग्रसेन कॉलेज कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से संलग्न कला और वाणिज्य का महाविद्यालय हैं, जो जगाधरी, हरियाणा में स्थित हैं। कॉलेज की स्थापना सन 1971 में 'महाराजा अग्रसेन सभा, जगाधरी' द्वारा किया गया था। .

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मानवतावाद

मानवतावाद मानव मूल्यों और चिंताओं पर ध्यान केंद्रित करने वाला अध्ययन, दर्शन या अभ्यास का एक दृष्टिकोण है। इस शब्द के कई मायने हो सकते हैं, उदाहरण के लिए.

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मानविकी

सिलानिओं द्वारा दार्शनिक प्लेटो का चित्र मानविकी वे शैक्षणिक विषय हैं जिनमें प्राकृतिक और सामाजिक विज्ञानों के मुख्यतः अनुभवजन्य दृष्टिकोणों के विपरीत, मुख्य रूप से विश्लेषणात्मक, आलोचनात्मक या काल्पनिक विधियों का इस्तेमाल कर मानवीय स्थिति का अध्ययन किया जाता है। प्राचीन और आधुनिक भाषाएं, साहित्य, कानून, इतिहास, दर्शन, धर्म और दृश्य एवं अभिनय कला (संगीत सहित) मानविकी संबंधी विषयों के उदाहरण हैं। मानविकी में कभी-कभी शामिल किये जाने वाले अतिरिक्त विषय हैं प्रौद्योगिकी (टेक्नोलॉजी), मानव-शास्त्र (एन्थ्रोपोलॉजी), क्षेत्र अध्ययन (एरिया स्टडीज), संचार अध्ययन (कम्युनिकेशन स्टडीज), सांस्कृतिक अध्ययन (कल्चरल स्टडीज) और भाषा विज्ञान (लिंग्विस्टिक्स), हालांकि इन्हें अक्सर सामाजिक विज्ञान (सोशल साइंस) के रूप में माना जाता है। मानविकी पर काम कर रहे विद्वानों का उल्लेख कभी-कभी "मानवतावादी (ह्यूमनिस्ट)" के रूप में भी किया जाता है। हालांकि यह शब्द मानवतावाद की दार्शनिक स्थिति का भी वर्णन करता है जिसे मानविकी के कुछ "मानवतावाद विरोधी" विद्वान अस्वीकार करते हैं। .

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मानवीकरण

मानवीकरण मनुष्य की गंभीर आवश्यकता है जिसमें व्यक्ति गैर-मानव वस्तु, घटना या संकल्पना को मानवीय गुण, विशेषता या आशय से रंग देता है। मानवीकरण या मानवत्वरोपण दैनिक जीवन के क्रिया-कलापों का महत्वपूर्ण भाग है। यह एक ऐसी मानसिक तथा सामाजिक प्रक्रिया है जो मनोविज्ञान, मानवशास्त्र, साहित्य, इतिहास और आध्यात्म के खोजकर्ताओं को मन की गहराईयों में ले जाती है। मानवीकरण से भाषा, कला और संस्कृति समृद्ध होती है। व्यक्ति के जीवन काल या समाज के सांस्कृतिक विकास के साथ मानवीकृत तत्वों या कारकों में नए कथानक जुड़ते जाते हैं। कुछ अवस्थाओं में यह मानवीकृत तत्व दो तरह के मानसिक परिवर्तन लाने में सक्षम पाए गए। एक श्रेणी तंत्रिका तंत्र के विघटन द्वारा अर्धचेतन अवस्था में देवता, भूत-प्रेत, या अन्य लोकातीत अनुभव, तथा दूसरी श्रेणी उपचार और स्वास्थ्य लाभ से संबंधित है, जैसे, पराप्राकृतिक संवाद। धार्मिक अनुष्ठान तथा नैतिकता द्वारा मानवीकरण गैर-बंधुओं में आपसी मेल-जोल बनाये रखता है। वैज्ञानिक खोज, विशेषकर जंतुओं के व्यवहार, में मानवीकरण वर्जित है, पर इसने दो नए क्षेत्रों को जन्म दिया, “थ्योरी ऑफ माइंड” और “दर्पण तंत्रिका तंत्र”। .

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मामूट्टी

मामूट्टी (मलयालम: മമ്മൂട്ടി) (जन्म नाम मोहम्मद कुट्टी, जन्म - 7 सितंबर,1948) एक पुरस्कृत भारतीय अभिनेता हैं जो मुख्य रूप से मलयालम सिनेमा में अभिनय करते हैं। अपने पच्चीस वर्षों से भी अधिक के कैरियर के दौरान, उन्होंने शीर्ष अभिनेता के रूप में 300 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया है और ^ MusicIndiaOnLine.com. 11 अप्रैल 2007.

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मार्टिन शोंगावर

मार्टिन शोंगावर की कृति: '''गुलाब बाग में मारिया''' मार्टिन शोंगावर (Martin Schongauer; १४४० - १४९१) जर्मनी का नक्काशीकार तथा चित्रकार था। उसके बनाये चित्र तथा उसकी ख्याति दूर-दूर तक पहुँची थी। इटली में वह 'बेल मार्टिनो' तथा मार्टिनो डी अन्वेर्सा (Martino d'Anversa) के नाम से जाना जाता था। .

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मार्शल आर्ट

मार्शल आर्ट या लड़ाई की कलाएं विधिबद्ध अभ्यास की प्रणाली और बचाव के लिए प्रशिक्षण की परंपराएं हैं। सभी मार्शल आर्ट्स का एक समान उद्देश्य है: ख़ुद की या दूसरों की किसी शारीरिक ख़तरे से रक्षा । मार्शल आर्ट को विज्ञान और कला दोनों माना जाता है। इनमें से कई कलाओं का प्रतिस्पर्धात्मक अभ्यास भी किया जाता है, ज़्यादातर लड़ाई के खेल में, लेकिन ये नृत्य का रूप भी ले सकती हैं। मार्शल आर्ट्स का मतलब युद्ध की कला से है और ये लड़ाई की कला से जुड़ा पंद्रहवीं शताब्दी का यूरोपीय शब्द है जिसे आज एतिहासिक यूरोपीय मार्शल आर्ट्स के रूप में जाना जाता है। मार्शल आर्ट के एक कलाकार को मार्शल कलाकार के रूप में संदर्भित किया जाता है। मूल रूप से 1920 के दशक में रचा गया ये शब्द मार्शल आर्ट्स मुख्य तौर पर एशिया के युद्ध के तरीके के संदर्भ में था, विशेष तौर पर पूर्वी एशिया में जन्मे लड़ाई के तरीके के.

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मिठूसेन

मिठूसेन एक नामी कलाकार है। उन्होंने शांति निकेतन और ग्लासगो स्कूल ऑफ़ आर्ट से कला की पढ़ाई की है। .

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मिथुन चक्रवर्ती

मिथुन चक्रवर्ती (মিঠুন চক্রবর্তী) (बचपन का नाम गौरांग चक्रवर्ती) का जन्म जून 16, 1952 को हुआ। ये भारत के राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्राप्त कर चुके एक किवदंती फिल्म अभिनेता, सामाजिक कार्यकर्ता, उद्यमी और राज्यसभा के सांसद हैं। मिथुन ने अपने अभिनय की शुरुआत कला फिल्म मृगया (1976) से की, जिसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए पहला राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार प्राप्त हुआ। 1980 के दशक के अपने सुनहरे दौर में एक डांसिंग स्टार के रूप में उनके बहुत सारे प्रसंशक बने और खुद को उन्होंने भारत के सबसे लोकप्रिय प्रमुख अभिनेता के रूप में स्थापित किया, विशेष रूप से 1982 में बहुत बड़ी हिट फिल्म डिस्को डांसर में स्ट्रीट डांसर जिमी की भूमिका ने उन्हें लोकप्रिय बनाया। कुल मिलाकर बॉलीवुड की 350 से अधिक फिल्मों में अभिनय के अलावा उन्होंने बांग्ला, उड़िया और भोजपुरी में भी बहुत सारी फिल्में की। मिथुन मोनार्क ग्रुप के मालिक भी हैं जो होस्पिटालिटी सेक्टर में कार्यरत है। .

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मिलानो

मिलान (Milano,; पश्चिमी लोम्बार्ड: मिलान) इटली का एक शहर और लोम्बार्डी क्षेत्र और मिलान प्रान्त की राजधानी है। मूल शहर की जनसंख्या लगभग 1,300,000 है, जबकि शहरी क्षेत्र 4,300,000 की अनुमानित जनसंख्या के साथ यूरोपीय संघ में पांचवा सबसे बड़ा है। इटली में सबसे बड़े, मिलान महानगरीय क्षेत्र की आबादी, OECD द्वारा अनुमानित तौर पर 7,400,000 है। शहर की स्थापना मीडियोलेनम नाम के तहत केल्टिक लोग इनसबरेस द्वारा की गई थी। इसे बाद में ई.पू.

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मुकुट

मुकुट तथा ताज वह होता है जो राजा एवं रानियाँ तथा देव एवं देवी सिर पे पहनते हैं अपने शक्ति और राज के सत्य दिखाने के लिए। यह प्रायः बहुमूल्य धातु (जैसे सोना तथा चांदी) से बना होता है। कला में, देवदूत राजा को मुकुट पहनाते हुए अक्सर दिखाया जाता है। मुकुट पे प्रायः मणि लगाये होते हैं। श्रेणी:राजतन्त्र.

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म्लेच्छित विकल्प

म्लेच्छित विकल्प, वात्स्यायन के कामसूत्र में वर्णित ६४ कलाओं में से एक कला है। वस्तुतः यह बीजलेखन (क्रिप्टोग्राफी) और गुप्तसंचार की कला है। डेविड कान (David Kahn) ने १९६७ में रचित बीजलेखन से सम्बन्धित कोडब्रेकर्स नामक एक ग्रन्थ में यह मत व्यक्त किया है कि म्लेच्छित विकल्प इस बात का प्रमाण है कि प्राचीन भारत में बीजलेखन की विधियाँ बहुतायत में प्रचलित थीं। .

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मृणाल सेन

मृणाल सेन (बांग्ला: মৃণাল সেন मृणाल् शेन्) भारतीय फ़िल्मों के प्रसिद्ध निर्माता व निर्देशक हैं। इनकी अधिकतर फ़िल्में बांग्ला भाषा में हैं। उनका जन्म फरीदपुर नामक शहर में (जो अब बंगला देश में है) में १४ मई १९२३ में हुआ था। हाईस्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण करने बाद उन्होंने शहर छोड़ दिया और कोलकाता में पढ़ने के लिये आ गये। वह भौतिक शास्त्र के विद्यार्थी थे और उन्होंने अपनी शिक्षा स्कोटिश चर्च कॉलेज़ एवं कलकत्ता यूनिवर्सिटी से पूरी की। अपने विद्यार्थी जीवन में ही वे वह कम्युनिस्ट पार्टी के सांस्कृतिक विभाग से जुड़ गये। यद्यपि वे कभी इस पार्टी के सदस्य नहीं रहे पर इप्टा से जुड़े होने के कारण वे अनेक समान विचारों वाले सांस्कृतिक रुचि के लोगों के परिचय में आ गए | .

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मृणालिनी साराभाई

मृणालिनी साराभाई भारत सरकार ने १९९२ में कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया था। ये गुजरात से हैं। श्रेणी:१९९२ पद्म भूषण.

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मैसूर कन्कन्हहल्ली वासुदेवाचारी

मैसूर कन्कन्हहल्ली वासुदेवाचारी को कला के क्षेत्र में सन १९५९ में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये कर्नाटक राज्य से हैं। श्रेणी:१९५९ पद्म भूषण.

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मूर्ति कला

'''यक्षिणी''', पटना संग्रहालय में शिल्पकला (sculpture) कला का वह रूप है जो त्रिविमीय (three-dimensional) होती है। यह कठोर पदार्थ (जैसे पत्थर), मृदु पदार्थ (plastic material) एवं प्रकाश आदि से बनाये जा सकते हैं। मूर्तिकला एक अतिप्राचीन कला है। .

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मेसोअमेरिकी

350 पीएक्स (px) 350 पीएक्स (px) 350 पीएक्स (px) 350 पीएक्स (px) पैलेंकी के क्लासिक माया शहर का दृश्य, जो 6 और 7 सदियों में सुशोभित हुआ, मेसोअमेरिकी सभ्यता की उपलब्धियों के कई उदाहरणों में से एक है ट्युटिहुकन के मेसोअमेरिकी शहर का एक दृश्य, जो 200 ई. से 600 ई. तक सुशोभित हुआ और जो अमेरिका में दूसरी सबसे बड़ी पिरामिड की साइट है माया चित्रलिपि पत्रिका में अभिलेख, कई मेसोअमरिकी लेखन प्रणालियों में से एक शिलालेख.दुनिया में मेसोअमेरिका पांच स्थानों में से एक है जहां स्वतंत्र रूप से लेखन विकसित हुआ है मेसोअमेरिका या मेसो-अमेरिका (Mesoamérica) अमेरिका का एक क्षेत्र एवं सांस्कृतिक प्रान्त है, जो केन्द्रीय मैक्सिको से लगभग बेलाइज, ग्वाटेमाला, एल सल्वाडोर, हौंड्यूरॉस, निकारागुआ और कॉस्टा रिका तक फैला हुआ है, जिसके अन्दर 16वीं और 17वीं शताब्दी में, अमेरिका के स्पैनिश उपनिवेशवाद से पूर्व कई पूर्व कोलंबियाई समाज फलफूल रहे थे। इस क्षेत्र के प्रागैतिहासिक समूह, कृषि ग्रामों तथा बड़ी औपचारिक व राजनैतिक-धार्मिक राजधानियों द्वारा वर्णित हैं। यह सांस्कृतिक क्षेत्र अमेरिका की कुछ सर्वाधिक जटिल और उन्नत संस्कृतियों जैसे, ऑल्मेक, ज़ैपोटेक, टियोतिहुआकैन, माया, मिक्सटेक, टोटोनाक और एज़्टेक को शामिल करता है। .

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मोहिनीअट्टम

मोहिनीअट्टम (मलयालम: മോഹിനിയാട്ടം) भारत के केरल राज्य के दो शास्त्रीय नृत्यों में से एक है, जो अभी भी काफी लोकप्रिय है केरल की एक अन्य शास्त्रीय नृत्य कथकली भी है। मोहिनीअट्टम नृत्य शब्द मोहिनी के नाम से बना है, मोहिनी रूप हिन्दुओ के देव भगवान विष्णु ने धारण इसलिए किया था ताकि बुरी ताकतों के ऊपर अच्छी ताकत की जीत हो सके मोहिनीअट्टम की जड़ों, सभी शास्त्रीय भारतीय नृत्यों की तरह, नाट्य शास्त्र में हैं – यह एक प्राचीन हिंदू संस्कृत ग्रन्थ है जो शास्त्रीय कलाओ पर लिखी गयी हैं, Quote: "the Natyashastra remains the ultimate authority for any dance form that claims to be 'classical' dance, rather than 'folk' dance".

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मोगुभाई कुर्दीकर

मोगुभाई कुर्दीकर को कला के क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा सन १९७४ में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये महाराष्ट्र से हैं। श्रेणी:१९७४ पद्म भूषण.

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यामिनी कृष्णमूर्ति

यामिनी कृष्णमूर्ति को सन २००१ में भारत सरकार ने कला क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया था। ये दिल्ली से हैं। श्रेणी:२००१ पद्म भूषण.

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युन्नान विश्वविद्यालय

युन्नान विश्वविद्यालय चीन के युन्नान प्रान्त का सबसे बड़ा विश्वविद्यालय है। इसका मुख्य हिस्सा इस प्रान्त के कुनमिंग नामक शहर में है। यह इस प्रान्त का एक मात्र ऐसा विश्वविद्यालय है, जहाँ 17,000 विशेषज्ञ अलग अलग क्षेत्र में लोगों को सिखाते हैं। यह "परियोजना 211" में से ही एक चीन का विश्वविद्यालय है, जिसे केन्द्र सरकार द्वारा विशेष रूप से बनाया गया है। यह विश्वविद्यालय चीन के उत्तर भाग के निर्माण सूची में भी शामिल है। .

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युगबोध

युगबोधसमसामयिक परिस्थितियों के ज्ञान की अवधारणा है। समसामयिक परिस्थितियों में किसी काल की राजनितिक, आर्थिक, सामाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और आर्थिक स्थितियाँ शामिल मानी जाती हैं। युगबोध का सृजन प्रक्रिया से सीधा संबंध माना गया है। कलात्मक और साहित्यिक रचनाएं युगबोध से निर्मित होती हैं तथा उसका प्रकटन भी करती हैं। .

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यूरोप का इतिहास

एक '''सामी''' परिवार यूरोप में मानव ईसापूर्व 35,000 के आसपास आया। इसके बाद ७००० इस्वी पूर्व से संगठित बसाव यानि बस्तियों के प्रमाण मिलते हैं। काँस्य युगीन सभ्यता (३००० ईसा पूर्व) के समय यहाँ कुछ अधिक बसाव नहीं हुआ - भ़ासकर मिस्र, इराक, चीन और भारतीय सभ्यता के मुकाबले। लेकिन ५०० ईसापूर्व से रोमन और यूनानी साम्राज्यों का उदय हुआ जिसने यूरोप की संस्कृति को बहुत प्रभावित किया। सैन्य, कला और चिंतन के मामले में यूनानियों ने यूरोप के एक कोने में होते हुए भी पूरे यूरोप और बाद में विश्वभर में अपना प्रभाव जमाया। आज यूरोप के देश यूरोपीय संघ के सदस्य हैं जो एक मुद्रा यूरो चलाता है। मध्यकाल में यूरोप छोटे राज्यों में विभक्त हो गया था। विज्ञान और शोध के मामले में धार्मिक मान्यताओं ने अपना प्रभाव बना रखा था। पंद्रहवीं सदी के बाद यह पुनः विकसित हुआ। सैनिक इतिहास का एक छोटा ब्यौरा नीचे लिखा है, कृपया वहाँ देखें। यूरोप के इतिहास को समझने के लिए दक्षिणी (रोम, यूनान और स्पेन), पूर्वी (यानि स्लाविक) और उत्तरी क्षेत्र जिसनें जर्मन मूल की नौर्ड और वाइकिंग तथा केल्ट और गॉल को समझना आवश्यक है। .

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यूरोपेँ प्रेस फोटो एजेंसी

यूरोपेँ प्रेस फोटो एजेंसी, बी वी (European Pressphoto Agency B.V.) एक अन्तार्रश्त्रिये न्यूज़ फोटो एजेंसी है। विश्व के सभी भागो से समाचार, राजनीती, खेल, व्यापर, वित्त, ख़बरों के साथ साथ कला संस्कृति और मनोरंजन से संबंधीत छाया चित्र लगभग ४०० से भी अधिक व्यावसायिक फोतोग्रफेरों के विश्वव्यापी जाल या नेटवर्क द्वारा उपस्थित कराइ जाती है जो की ई पी ए की छाया चित्र समाचार सेवा में शामिल है! ई पी ए की छाया चित्र सवैएँ विश्व भर में फैले ई पी ए के स्टाफ फोतोग्रफेरों के विस्तृत जाल या नेटवर्क तथा इसकी सदस्य एजेंसीयों, जो अपने देशों के बाज़ार में मार्गदर्शक तथा अग्रणी है, दोनों के दैनिक उत्पादन पे आधारित हैं ! सभी छायाचित्र संपादन के उपरांत विष भर के सभी ग्राहकों व संझेदारों को फ्रैंकफर्ट ऍम मने जर्मनी स्थित मुख्या संपादन कार्यालय जो की प्रतिदिन चौबीस घंटे कार्यरत है, के द्वारा वितरित कर दिए जातें हैंhttp://www.epa.eu/products-and-services/epa-service .

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रमणकुट्टी नायर

रमणकुट्टी नायर को सन २००७ में भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये केरल से हैं। .

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रमनलाल सी मेहता

रमनलाल सी मेहता (३१ अक्टूबर १९१८ – १८ अक्टूबर २०१४) को सन २००९ में भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये गुजरात राज्य से हैं। १८ अक्टूबर २०१४ को उनका निधन हो गया। .

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रहीम फहीमुद्दीन डागर

रहीम फहीमुद्दीन डागर को सन २००८ में भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया था। ये दिल्ली से हैं। २००८ पद्म भूषण श्रेणी:२००८ पद्म भूषण stub.

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रहीम-उद्दीन खान डागर

रहीम-उद्दीन खान डागर को कला क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा सन १९६९ में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये दिल्ली से हैं। श्रेणी:पद्म भूषण.

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राधा रेड्डी

राधा रेड्डी को सन २००० में भारत सरकार ने कला क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया था। ये दिल्ली राज्य से हैं। .

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राधा कमल मुखर्जी

राधा कमल मुखर्जी (7 दिसम्बर 1889 - 24 अगस्त 1968) आधुनिक भारत के प्रसिद्ध चिन्तक एवं समाजविज्ञानी थे। वे लखनऊ विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र एवं समाजशास्त्र के प्राध्यापक तथा उपकुलपति रहे। उन्होने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। प्रोफेसर मुकर्जी के ही नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में सर्वप्रथम लखनऊ विश्वविद्यालय में 1921 में समाजशास्त्र का अध्ययन प्रारम्भ हुआ इसलिए वे उत्तर प्रदेश में समाजशास्त्र के प्रणेता के रूप में भी विख्यात हैं। प्रोफेसर मुकर्जी वे इतिहास के अत्यन्त मौलिक दार्शनिक थे। वे 20वीं सदी के कतिपय बहुविज्ञानी सामाजिक वैज्ञानिकों में से एक थे जिन्होंने विभिन्न विषयों- अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, मानवशास्त्र, परिस्थितिविज्ञान, दर्शनशास्त्र, मनोविज्ञान, साहित्य, समाजकार्य, संस्कृति, सभ्यता, कला, रहस्यवाद, संगीत, धर्मशास्त्र, अध्यात्म, आचारशास्त्र, मूल्य आदि विभिन्न अनुशासनों को अपना बहुमूल्य योगदान प्रदान किया है। इन समस्त क्षेत्रों में प्रोफेसर मुकर्जी की अद्वितीय देन उनके द्वारा प्रणयित 50 अमर कृतियों में स्पष्टतः दृष्टिगोचर होती है। भारत सरकार द्वारा उन्हें सन १९६२ में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। .

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रामकुमार (कलाकार)

रामकुमार (1924 – 2018) भारत के एक कलाकार और लेखक थे। भारत के सर्वश्रेष्ठ अमूर्त चित्रकारों में उनकी गणना होती है। .

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राज कपूर

राज कपूर (१९२४-१९८८) प्रसिद्ध अभिनेता, निर्माता एवं निर्देशक थे। नेहरूवादी समाजवाद से प्रेरित अपनी शुरूआती फ़िल्मों से लेकर प्रेम कहानियों को मादक अंदाज से परदे पर पेश करके उन्होंने हिंदी फ़िल्मों के लिए जो रास्ता तय किया, इस पर उनके बाद कई फ़िल्मकार चले। भारत में अपने समय के सबसे बड़े 'शोमैन' थे। सोवियत संघ और मध्य-पूर्व में राज कपूर की लोकप्रियता दंतकथा बन चुकी है। उनकी फ़िल्मों खासकर श्री ४२० में बंबई की जो मूल तस्वीर पेश की गई है, वह फ़िल्म निर्माताओं को अभी भी आकर्षित करती है। राज कपूर की फ़िल्मों की कहानियां आमतौर पर उनके जीवन से जुड़ी होती थीं और अपनी ज्यादातर फ़िल्मों के मुख्य नायक वे खुद होते थे। .

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राजन एवं साजन मिश्र

राजन मिश्र एवं साजन मिश्र को सन २००७ में भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये दिल्ली से हैं। .

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राजस्थान के पशु मेले

भारतीय राज्य राजस्थान में सभी जिलों और ग्रामीण स्तर पर लगभग 250 से अधिक पशु मेला का प्रतिवर्ष आयोजन किया जाता है। कला, संस्कृति, पशुपालन और पर्यटन की दृष्टि से यह मेले अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। देश विदेश के हजारों लाखों पर्यटक इसके माध्यम से लोक कला एवं ग्रामीण संस्कृति से रूबरू होते हैं। राज्य स्तरीय पशु मेलों के आयोजनों में नगरपालिका और ग्राम पंचायतों की ओर से पशुपालकों को पानी, बिजली पशु चिकित्सा व टीकाकरण की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। सरकार की ओर से इन मेलों में समय-समय पर प्रदर्शनी और अन्य ज्ञानवर्धक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जा रहा है। राजस्थान राज्य स्तरीय पशु मेला में अधिकांश मेले लोक देवी देवताओं एवं महान पुरुषों के नाम से जुड़े हुए हैं पशुपालन विभाग द्वारा आयोजित किए जाने वाले राज्य स्तरीय पशु मेले कुछ इस प्रकार है। .

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राजस्थान की चित्रकला

मारू गुर्जर चित्रकला राजस्थान का प्राचीन कला है जो ६ठी शताब्दी के आरम्भिक दिनों में राजस्थान और उसके आसपास के क्षेत्रों में विकसित हुई। .

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राजा रेड्डी

राजा रेड्डी को सन २००० में भारत सरकार ने कला क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया था। ये दिल्ली राज्य से हैं। .

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रजनीकान्त

रजनीकान्त;(मराठी:शिवाजीराव गायकवाड) एक तमिल एवं हिन्दी फिल्म अभिनेता हैं। इन्‍हे दक्षिण भारत मे भगवान की तरह पूजा जाता है। उन्होने अभिनेता के रूप में अपनी शुरुआत राष्ट्रीय फ़िल्म अवार्ड विजेता फ़िल्म अपूर्व रागंगल (१९७५) से की, जिसके निर्देशक के.

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रघुनाथ मोहपात्रा

रघुनाथ मोहपात्रा (२४ मार्च १९४३-२० अप्रैल २०१४) को सन २००१ में भारत सरकार ने कला क्षेत्र में पद्म भूषण और २०१३ में ६४वें गणतंत्र के मौके पर पद्म विभूषण से सम्मानित किया था। ये उड़ीसा से थे। .

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रुक्मिणी देवी अरुंडेल

रुक्मिणी देवी अरुंडेल रुक्मिणी देवी अरुंडेल (२९ फरवरी १९०४- २४ फरवरी १९८६) प्रसिद्ध भारतीय नृत्यांगना थीं। इन्होंने भरतनाट्यम में भक्तिभाव भरा तथा नृत्य की एक अपनी परंपरा आरम्भ की। इनको कला के क्षेत्र में १९५६ में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। 1920 के दशक में जब भरतनाट्यम को अच्छी नृत्य शैली नहीं माना जाता था और लोग इसका विरोध करते थे, तब भी उन्होंने न केवल इसका समर्थन किया बल्कि इस कला को अपनाया भी। नृत्य सीखने के साथ-साथ उन्होंने तमाम विरोधों के बावजूद इसे मंच पर प्रस्तुत भी किया। .

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रैडक्लिफ़ कॉलेज

रैडक्लिफ कॉलेज कैम्ब्रिज, मैसाचुसेट्स में एक महिला उदार कला महाविद्यालय था और सभी पुरुष हार्वर्ड कॉलेज के लिए महिला समन्वय संस्थान के रूप में काम किया। यह सात श्रमिकों कॉलेजों में से एक भी था, जिसमें से ब्रायन मॉर कॉलेज के साथ एक विशेष बौद्धिक, साहित्यिक और स्वतंत्र विचारधारा वाले छात्र शरीर होने की लोकप्रिय प्रतिष्ठा को साझा किया गया। रैडक्लिफ़ ने राडक्लिफ़ कॉलेज डिप्लोमा को अंडरग्रेजुएट और ग्रेजुएट छात्रों को अपने इतिहास के पहले 70 या इतने सालों के लिए और 1963 से शुरू होने वाले हार्वर्ड-रेडक्लिफ डिप्लोमा को सीधे अंडरग्रेजुएट्स को प्रदान किया। हार्वर्ड के साथ एक औपचारिक "गैर विलय विलय" 1997 में, हार्वर्ड के साथ पूर्ण एकीकरण 1999 में पूर्ण हुआ। आज, हार्वर्ड विश्वविद्यालय के भीतर, रैडक्लिफ के पूर्व प्रशासनिक परिसर (रैडक्लिफ यार्ड) रैडक्लिफ इंस्टीट्यूट फॉर एडवांस्ड स्टडी का घर है, और रैडक्लिफ़ क्वाड्रंगल (फोर्ब्ज़ेमर हाउस, काबोट हाउस, और क्यूरी हाउस) को हार्वर्ड कॉलेज हाउस सिस्टम में शामिल किया गया है। 1999 के समेकन की शर्तों के तहत, रैडक्लिफ यार्ड और रैडक्लिफ क्वाडरजले ने "रेडक्लिफ" नामांकन को कायम रखा।.

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लालगुडी गोपालइयर जयरमण

लालगुडी गोपालइयर जयरमण को सन २००१ में भारत सरकार ने कला क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया था। ये तमिलनाडु से हैं। श्रेणी:२००१ पद्म भूषण.

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लक्ष्मीनारायण सुब्रह्मण्यम

डॉ लक्ष्मीनारायण सुब्रह्मण्यम (जन्म: २३ जुलाई, १९४७) भारत के प्रसिद्ध वायलिनवादक हैं। उनको सन २००१ में भारत सरकार ने कला क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया था। ये कर्नाटक से हैं। श्रेणी:२००१ पद्म भूषण श्रेणी:कर्नाटक के लोग.

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लोक प्रशासन

लोक प्रशासन (Public administration) मोटे तौर पर शासकीय नीति (government policy) के विभिन्न पहलुओं का विकास, उन पर अमल एवं उनका अध्ययन है। प्रशासन का वह भाग जो सामान्य जनता के लाभ के लिये होता है, लोकप्रशासन कहलाता है। लोकप्रशासन का संबंध सामान्य नीतियों अथवा सार्वजनिक नीतियों से होता है। एक अनुशासन के रूप में इसका अर्थ वह जनसेवा है जिसे 'सरकार' कहे जाने वाले व्यक्तियों का एक संगठन करता है। इसका प्रमुख उद्देश्य और अस्तित्व का आधार 'सेवा' है। इस प्रकार की सेवा उठाने के लिए सरकार को जन का वित्तीय बोझ करों और महसूलों के रूप में राजस्व वसूल कर संसाधन जुटाने पड़ते हैं। जिनकी कुछ आय है उनसे कुछ लेकर सेवाओं के माध्यम से उसका समतापूर्ण वितरण करना इसका उद्देश्य है। किसी भी देश में लोक प्रशासन के उद्देश्य वहां की संस्थाओं, प्रक्रियाओं, कार्मिक-राजनीतिक व्यवस्था की संरचनाओं तथा उस देश के संविधान में व्यक्त शासन के सिद्धातों पर निर्भर होते हैं। प्रतिनिधित्व, उत्तरदायित्व, औचित्य और समता की दृष्टि से शासन का स्वरूप महत्व रखता है, लेकिन सरकार एक अच्छे प्रशासन के माध्यम से इन्हें साकार करने का प्रयास करती है। .

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लोक प्रशासन की प्रकृति

जिस प्रकार लोक प्रशासन की परिभाषा में कई दृष्टिकोण दिखाई देते हैं, उसी प्रकार इसकी प्रकृति के विषय में भी दो तरह के दृष्टिकोण हैं। प्रथम, व्यापक दृष्टिकोण जिसे 'पूर्ण विचार' अथवा 'एकीकृत विचार' कहा जाता है और दूसरा संकुचित दृष्टिकोण जिसे 'प्रबन्धकीय विचार' कहा जाता है। .

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लोक विरसा संग्रहालय

लोक विरसा संग्रहालय (لوک ورثہ عجائب گھر), पाकिस्तान के इस्लामाबाद में स्थित एक संग्रहालय है जो इतिहास, कला, और संस्कृति को समर्पित है। इसे नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फोक ऐण्ड ट्रेडिशनल हेरिटेज भी कहते हैं। http://lokvirsa.org.pk/history/ The museum opened in 1974 and became an autonomous institute in 2002 following the Lok Virsa Legal Status Ordinance, 2002.

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शन्नो खुराना

शन्नो खुराना को भारत सरकार द्वारा सन २००६ में कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये दिल्ली से हैं। .

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शमशाद बेगम

शमशाद बेगम (अप्रैल १४, १९१९ – अप्रैल २३, २०१३India Post, South Asia Bureau, August 1998) एक भारतीय गायिका थीं, जो हिन्दी सिनेमा उद्योग में आरंभिक पार्श्वगायिका के रूप में आयी थीं। शमशाद बेगम एक बहुमुखी कलाकारा थीं, जिन्होंने हिन्दी के अलावा बंगाली, मराठी, गुजराती, तमिल एवं पंजाबी भाषाओं में लगभग ६००० से अधिक गाने गाये थे। इन्हें सन २००९ में भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये महाराष्ट्र राज्य से हैं। .

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शांता धनंजय

शांता धनंजय को सन २००९ में भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये तमिलनाडु राज्य से हैं। .

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शांतिदेव घोष

शांतिदेव घोष को भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में सन १९८५ में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये पश्चिम बंगाल से हैं। श्रेणी:१९८५ पद्म भूषण.

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शिल्पशास्त्र

शिल्पशास्त्र वे प्राचीन हिन्दू ग्रन्थ हैं जिनमें विविध प्रकार की कलाओं तथा हस्तशिल्पों की डिजाइन और सिद्धान्त का विवेचन किया गया है। इस प्रकार की चौसठ कलाओं का उल्लेख मिलता है जिन्हे 'बाह्य-कला' कहते हैं। इनमें काष्ठकारी, स्थापत्य कला, आभूषण कला, नाट्यकला, संगीत, वैद्यक, नृत्य, काव्यशास्त्र आदि हैं। इनके अलावा चौसठ अभ्यन्तर कलाओं का भी उल्लेख मिलता है जो मुख्यतः 'काम' से सम्बन्धित हैं, जैसे चुम्बन, आलिंगन आदि। यद्यपि सभी विषय आपस में सम्बन्धित हैं किन्तु शिल्पशास्त्र में मुख्यतः मूर्तिकला और वास्तुशास्त्र में भवन, दुर्ग, मन्दिर, आवास आदि के निर्माण का वर्णन है। .

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शिशिर कुमार भादुड़ी

शिशिर कुमार भादुड़ी को कला के क्षेत्र में सन १९५९ में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये पश्चिम बंगाल राज्य से हैं। श्रेणी:१९५९ पद्म भूषण.

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शिवकर बापूजी तलपदे

शिवकर बापूजी तलपदे (१८६४ - १७ सितम्बर १९१७) कला एवं संस्कृत के विद्वान तथा आधुनिक समय के विमान के प्रथम आविष्कर्ता थे। .

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शुक्र

शुक्र (Venus), सूर्य से दूसरा ग्रह है और प्रत्येक 224.7 पृथ्वी दिनों मे सूर्य परिक्रमा करता है। ग्रह का नामकरण प्रेम और सौंदर्य की रोमन देवी पर हुआ है। चंद्रमा के बाद यह रात्रि आकाश में सबसे चमकीली प्राकृतिक वस्तु है। इसका आभासी परिमाण -4.6 के स्तर तक पहुँच जाता है और यह छाया डालने के लिए पर्याप्त उज्जवलता है। चूँकि शुक्र एक अवर ग्रह है इसलिए पृथ्वी से देखने पर यह कभी सूर्य से दूर नज़र नहीं आता है: इसका प्रसरकोण 47.8 डिग्री के अधिकतम तक पहुँचता है। शुक्र सूर्योदय से पहले या सूर्यास्त के बाद केवल थोड़ी देर के लए ही अपनी अधिकतम चमक पर पहुँचता है। यहीं कारण है जिसके लिए यह प्राचीन संस्कृतियों के द्वारा सुबह का तारा या शाम का तारा के रूप में संदर्भित किया गया है। शुक्र एक स्थलीय ग्रह के रूप में वर्गीकृत है और समान आकार, गुरुत्वाकर्षण और संरचना के कारण कभी कभी उसे पृथ्वी का "बहन ग्रह" कहा गया है। शुक्र आकार और दूरी दोनों मे पृथ्वी के निकटतम है। हालांकि अन्य मामलों में यह पृथ्वी से एकदम अलग नज़र आता है। शुक्र सल्फ्यूरिक एसिड युक्त अत्यधिक परावर्तक बादलों की एक अपारदर्शी परत से ढँका हुआ है। जिसने इसकी सतह को दृश्य प्रकाश में अंतरिक्ष से निहारने से बचा रखा है। इसका वायुमंडल चार स्थलीय ग्रहों मे सघनतम है और अधिकाँशतः कार्बन डाईऑक्साइड से बना है। ग्रह की सतह पर वायुमंडलीय दबाव पृथ्वी की तुलना मे 92 गुना है। 735° K (462°C,863°F) के औसत सतही तापमान के साथ शुक्र सौर मंडल मे अब तक का सबसे तप्त ग्रह है। कार्बन को चट्टानों और सतही भूआकृतियों में वापस जकड़ने के लिए यहाँ कोई कार्बन चक्र मौजूद नही है और ना ही ज़ीवद्रव्य को इसमे अवशोषित करने के लिए कोई कार्बनिक जीवन यहाँ नज़र आता है। शुक्र पर अतीत में महासागर हो सकते हैलेकिन अनवरत ग्रीनहाउस प्रभाव के कारण बढ़ते तापमान के साथ वह वाष्पीकृत होते गये होंगे |B.M. Jakosky, "Atmospheres of the Terrestrial Planets", in Beatty, Petersen and Chaikin (eds), The New Solar System, 4th edition 1999, Sky Publishing Company (Boston) and Cambridge University Press (Cambridge), pp.

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श्याम बेनेगल

श्याम बेनेगल (जन्म 14 दिसंबर, 1934) हिन्दी फिल्मों के एक प्रसिद्ध निर्देशक हैं। अंकुर, निशांत, मंथन और भूमिका जैसी फिल्मों के लिये चर्चित बेनेगल समानांतर सिनेमा के अग्रणी निर्देशकों में शुमार किये जाते हैं। श्याम को 1976 में पद्मश्री और 1961 में पद्मभूषण सम्मान दिये गये। 2007 में वे अपने योगदान के लिये भारतीय सिनेमा के सर्वोच्च पुरस्कार दादा साहब फाल्के पुरस्कार से नवाज़े गये। सर्वश्रेष्ठ हिन्दी फीचर फिल्म के लिये राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार पाँच बार जीतने वाले वे एकमात्र फिल्म निर्देशक हैं। श्याम बेनेगल को भारत सरकार द्वारा सन १९९१ में कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया था। ये महाराष्ट्र से हैं। .

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श्येनपालन

300px श्येनपालन (Falconry) एक कला है, जिसके द्वारा श्येनों और बाजों को शिकार के लिए साधा, या प्रशिक्षित, किया जाता है। मनुष्य को इस कला का ज्ञान ४,००० वर्षों से भी अधिक समय से है। भारत में इस कला का व्यवहार ईसा से ६०० वर्ष से होता आ रहा है। मुस्लिम शासनकाल में, विशेषत मुगलों के शासनकाल में, इस कला को पर्याप्त प्रोत्साहन मिला था। क्रीड़ा के रूप में, लड़ाकू जातियों में, श्येनपालन बराबर प्रचलित रहा है। राइफल और छोटी बंदूकों के व्यवहार में आने के बाद श्येनपालन में ह्रास शुरु हुआ। आज इसका प्रचार अधिक नहीं है। शौक के रूप में इसे चालू रखा जा सकता है, क्योंकि वस्तुत: यह सबसे कम खर्चीला शौक है। पक्षी वर्ग की कुछ चिड़ियाँ शिकारी होती हैं। कुछ तो शिकार को खा जाती हैं और कुछ उचित प्रशिक्षण से शिकार को पकड़कर पालक के पास ले आती है। ऐसे शिकार छोटी बड़ी चिड़ियाँ, खरहे और खरगोश सदृश छोटे छोटे जानवर भी होते हैं। शिकारी चिड़ियाँ पेड़ों पर रहनेवाले पक्षी हैं, जो हवा में पर्याप्त ऊँचाई तक उड़ लेते हैं। इनके नाखून बड़े नुकीले और टेढ़े होते हैं। इनकी चोंच टेढ़ी और मजबूत होती है। इनकी निगाह बड़ी तेज होती है। सभी मांसभक्षी चिड़ियों में से अधिकांश जिंदा शिकार करती हैं और कुछ मुर्दाखोर भी होती है। शिकारी पक्षियों की एक विशेषता यह है कि इनकी मादाएँ नरों से कद में बड़ी और अधिक साहसी होती हैं। शिकारी पक्षियों के तीन प्रमुख कुल हैं, पर साधारणतया इन्हें बड़े पंखवाली और छोटे पंखवाली चिड़ियों में विभक्त करते हैं। पहली किस्म को "स्याहचश्म' या काली आँखवाली और दूसरी किस्म को "गुलाबचश्म' या पीली आँखवाली कहते हैं। जो शिकारी चिड़ियाँ पाली जाती हैं, उनमें बाज, बहरी, शाहीन, तुरमती, चरग (या चरख), लगर, वासीन, वासा, शिकरा और शिकरचा, बीसरा, धूती तथा जुर्रा प्रमुख हैं (देखें श्येन)। .

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श्रीपाद पिनाकपाणि

श्रीपाद पिनाकपाणि को भारत सरकार द्वारा सन १९८४ में कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये आंध्र प्रदेश राज्य से हैं। श्रेणी:१९८४ पद्म भूषण श्रेणी:1913 में जन्मे लोग.

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श्रीकृष्ण एन रतनजानकर

श्रीकृष्ण एन रतनजानकर को कला के क्षेत्र में सन १९५७ में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। ये उत्तर प्रदेश राज्य से हैं। श्रेणी:१९५७ पद्म भूषण.

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शोभा गुर्टू

शोभा गुर्टू को सन २००२ में भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये महाराष्ट्र से थी। श्रेणी:पद्म भूषण श्रेणी:२००४ में निधन.

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सत्यजित राय

सत्यजित राय (बंगाली: शॉत्तोजित् राय्) (२ मई १९२१–२३ अप्रैल १९९२) एक भारतीय फ़िल्म निर्देशक थे, जिन्हें २०वीं शताब्दी के सर्वोत्तम फ़िल्म निर्देशकों में गिना जाता है। इनका जन्म कला और साहित्य के जगत में जाने-माने कोलकाता (तब कलकत्ता) के एक बंगाली परिवार में हुआ था। इनकी शिक्षा प्रेसिडेंसी कॉलेज और विश्व-भारती विश्वविद्यालय में हुई। इन्होने अपने कैरियर की शुरुआत पेशेवर चित्रकार की तरह की। फ़्रांसिसी फ़िल्म निर्देशक ज़ाँ रन्वार से मिलने पर और लंदन में इतालवी फ़िल्म लाद्री दी बिसिक्लेत (Ladri di biciclette, बाइसिकल चोर) देखने के बाद फ़िल्म निर्देशन की ओर इनका रुझान हुआ। राय ने अपने जीवन में ३७ फ़िल्मों का निर्देशन किया, जिनमें फ़ीचर फ़िल्में, वृत्त चित्र और लघु फ़िल्में शामिल हैं। इनकी पहली फ़िल्म पथेर पांचाली (পথের পাঁচালী, पथ का गीत) को कान फ़िल्मोत्सव में मिले “सर्वोत्तम मानवीय प्रलेख” पुरस्कार को मिलाकर कुल ग्यारह अन्तरराष्ट्रीय पुरस्कार मिले। यह फ़िल्म अपराजितो (অপরাজিত) और अपुर संसार (অপুর সংসার, अपु का संसार) के साथ इनकी प्रसिद्ध अपु त्रयी में शामिल है। राय फ़िल्म निर्माण से सम्बन्धित कई काम ख़ुद ही करते थे — पटकथा लिखना, अभिनेता ढूंढना, पार्श्व संगीत लिखना, चलचित्रण, कला निर्देशन, संपादन और प्रचार सामग्री की रचना करना। फ़िल्में बनाने के अतिरिक्त वे कहानीकार, प्रकाशक, चित्रकार और फ़िल्म आलोचक भी थे। राय को जीवन में कई पुरस्कार मिले जिनमें अकादमी मानद पुरस्कार और भारत रत्न शामिल हैं। .

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सत्येन्द्र नारायण सिन्हा

सत्येन्द्र नारायण सिन्हा (12 जुलाई 1917 – 4 सितम्बर 2006) एक भारतीय राजनेता थे। वे बिहार के मुख्यमंत्री रहे। प्यार से लोग उन्हें छोटे साहब कहते थे। वे भारत के स्वतंत्रता सेनानी, राजनीतिज्ञ,सांसद, शिक्षामंत्री, जेपी आंदोलन के स्तम्भ तथा बिहार राज्य के मुख्यमंत्री रहे हैं। .

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समता प्रसाद

पंडित समता प्रसाद और शाहिद परवेज खान पण्डित समता प्रसाद (20 जुलाई 1921, – 1994) भारत के शास्त्रीय संगीतकार एवं तबलावादक थे। वे बनारस घराने के थे। उन्होने अनेकों हिन्दी फिल्मों में तबलावादन किया था। राहुल देव बर्मन उनके ही शिष्य थे। 'उनको भारत सरकार द्वारा सन १९९१ में कला के क्षेत्र में पद्मभूषण से सम्मानित किया था। श्रेणी:१९९१ पद्म भूषण श्रेणी:1921 में जन्मे लोग.

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समिश्र संख्या

किसी समिश्र संख्या का अर्गेन्ड आरेख पर प्रदर्शन गणित में समिश्र संख्याएँ (complex number) वास्तविक संख्याओं का विस्तार है। किसी वास्तविक संख्या में एक काल्पनिक भाग जोड़ देने से समिश्र संख्या बनती है। समिश्र संख्या के काल्पनिक भाग के साथ i जुड़ा होता है जो निम्नलिखित सम्बन्ध को संतुष्ट करती है: किसी भी समिश्र संख्या को a + bi, के रूप में व्यक्त किया जा सकता है जिसमें a और b दोनो ही वास्तविक संख्याएं हैं। a + bi में a को वास्तविक भाग तथा b को काल्पनिक भाग कहते हैं। उदाहरण: 3 + 4i एक समिश्र संख्या है। .

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सर रिचर्ड सैम्युअल एट्टेनबरो

सर रिचर्ड सैम्युअल एट्टेनबरो को सन १९८३ में भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये संयुक्त राजशाही से हैं। श्रेणी:१९८३ पद्म भूषण.

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सरल आवर्त गति

घर्षणरहित फर्श पर स्प्रिंग से जुड़े द्रव्यमान की गति 'सरल आवर्त गति' है। भौतिकी में सरल आवर्त गति (simple harmonic motion / SHM) उस गति को कहते हैं जिसमें वस्तु जिस बल के अन्तर्गत गति करती है उसकी दिशा सदा विस्थापन के विपरीत एवं परिमाण विस्थापन के समानुपाती होता है। उदाहरण - किसी स्प्रिंग से लटके द्रव्यमान की गति, किसी सरल लोलक की गति, किसी घर्षणरहित क्षैतिज तल पर किसी स्प्रिंग से बंधे द्रव्यमान की गति आदि। .

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साबरी खान

साबरी खान (उर्दू: استاد صابری خان‎; 21 मई 1927 – 1 दिसंबर 2015) एक भारतीय सारंगी वादक थे, जिन्होंने इस भारतीय वाद्य को संपूर्ण विश्व में लोकप्रिय बनाया। उनका जन्म 21 मई, 1927 में मुरादाबाद उत्तर प्रदेश में हुआ था। ये सैनिया घराना से संबंधित वादक थे। संगीत में उनके महत्त्वपूर्ण योगदान के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें वर्ष 1990 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार तथा भारत सरकार ने 1992 में पद्मश्री से सम्मानित किया था। भारत सरकार द्वारा सन २००६ में कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये दिल्ली से थे।1 दिसंबर, 2015 को उनका निधन सांस की बीमारी के कारण हो गया। .

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सिडनी ओपेरा हाउस

सिडनी ओपेरा हाउस, सिडनी, न्यू साउथ वेल्स, ऑस्ट्रेलिया में स्थित प्रदर्शन कलाओं का एक बहु-स्थलीय केंद्र है। इसकी कल्पना डैनिश वास्तुकार जॉर्न उत्ज़ॉन ने की थी साथ ही उन्होने इसका अधिकांश निर्माण भी करवाया था। जॉर्न उत्ज़ॉन को इसके लिए, 2003 में वास्तुकला का सर्वोच्च सम्मान पुलित्ज़र पुरस्कार प्रदान किया गया था। .

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सिंगनल्लूर पुट्टस्वामैया मुत्तुराज राजकुमार

सिंगनल्लूर पुट्टस्वामैया मुत्तुराज राजकुमार को सन १९८३ में भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये कर्नाटक से हैं। .

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सई परांजपे

सई परांजपे हिन्दी फ़िल्मों के एक निर्देशक हैं। .

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संस्कृत साहित्य

बिहार या नेपाल से प्राप्त देवीमाहात्म्य की यह पाण्डुलिपि संस्कृत की सबसे प्राचीन सुरक्षित बची पाण्डुलिपि है। (११वीं शताब्दी की) ऋग्वेदकाल से लेकर आज तक संस्कृत भाषा के माध्यम से सभी प्रकार के वाङ्मय का निर्माण होता आ रहा है। हिमालय से लेकर कन्याकुमारी के छोर तक किसी न किसी रूप में संस्कृत का अध्ययन अध्यापन अब तक होता चल रहा है। भारतीय संस्कृति और विचारधारा का माध्यम होकर भी यह भाषा अनेक दृष्टियों से धर्मनिरपेक्ष (सेक्यूलर) रही है। इस भाषा में धार्मिक, साहित्यिक, आध्यात्मिक, दार्शनिक, वैज्ञानिक और मानविकी (ह्यूमैनिटी) आदि प्राय: समस्त प्रकार के वाङ्मय की रचना हुई। संस्कृत भाषा का साहित्य अनेक अमूल्य ग्रंथरत्नों का सागर है, इतना समृद्ध साहित्य किसी भी दूसरी प्राचीन भाषा का नहीं है और न ही किसी अन्य भाषा की परम्परा अविच्छिन्न प्रवाह के रूप में इतने दीर्घ काल तक रहने पाई है। अति प्राचीन होने पर भी इस भाषा की सृजन-शक्ति कुण्ठित नहीं हुई, इसका धातुपाठ नित्य नये शब्दों को गढ़ने में समर्थ रहा है। संस्कृत साहित्य इतना विशाल और scientific है तो भारत से संस्कृत भाषा विलुप्तप्राय कैसे हो गया? .

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संस्कृति

संस्कृति किसी समाज में गहराई तक व्याप्त गुणों के समग्र रूप का नाम है, जो उस समाज के सोचने, विचारने, कार्य करने, खाने-पीने, बोलने, नृत्य, गायन, साहित्य, कला, वास्तु आदि में परिलक्षित होती है। संस्कृति का वर्तमान रूप किसी समाज के दीर्घ काल तक अपनायी गयी पद्धतियों का परिणाम होता है। ‘संस्कृति’ शब्द संस्कृत भाषा की धातु ‘कृ’ (करना) से बना है। इस धातु से तीन शब्द बनते हैं ‘प्रकृति’ (मूल स्थिति), ‘संस्कृति’ (परिष्कृत स्थिति) और ‘विकृति’ (अवनति स्थिति)। जब ‘प्रकृत’ या कच्चा माल परिष्कृत किया जाता है तो यह संस्कृत हो जाता है और जब यह बिगड़ जाता है तो ‘विकृत’ हो जाता है। अंग्रेजी में संस्कृति के लिये 'कल्चर' शब्द प्रयोग किया जाता है जो लैटिन भाषा के ‘कल्ट या कल्टस’ से लिया गया है, जिसका अर्थ है जोतना, विकसित करना या परिष्कृत करना और पूजा करना। संक्षेप में, किसी वस्तु को यहाँ तक संस्कारित और परिष्कृत करना कि इसका अंतिम उत्पाद हमारी प्रशंसा और सम्मान प्राप्त कर सके। यह ठीक उसी तरह है जैसे संस्कृत भाषा का शब्द ‘संस्कृति’। संस्कृति का शब्दार्थ है - उत्तम या सुधरी हुई स्थिति। मनुष्य स्वभावतः प्रगतिशील प्राणी है। यह बुद्धि के प्रयोग से अपने चारों ओर की प्राकृतिक परिस्थिति को निरन्तर सुधारता और उन्नत करता रहता है। ऐसी प्रत्येक जीवन-पद्धति, रीति-रिवाज रहन-सहन आचार-विचार नवीन अनुसन्धान और आविष्कार, जिससे मनुष्य पशुओं और जंगलियों के दर्जे से ऊँचा उठता है तथा सभ्य बनता है, सभ्यता और संस्कृति का अंग है। सभ्यता (Civilization) से मनुष्य के भौतिक क्षेत्र की प्रगति सूचित होती है जबकि संस्कृति (Culture) से मानसिक क्षेत्र की प्रगति सूचित होती है। मनुष्य केवल भौतिक परिस्थितियों में सुधार करके ही सन्तुष्ट नहीं हो जाता। वह भोजन से ही नहीं जीता, शरीर के साथ मन और आत्मा भी है। भौतिक उन्नति से शरीर की भूख मिट सकती है, किन्तु इसके बावजूद मन और आत्मा तो अतृप्त ही बने रहते हैं। इन्हें सन्तुष्ट करने के लिए मनुष्य अपना जो विकास और उन्नति करता है, उसे संस्कृति कहते हैं। मनुष्य की जिज्ञासा का परिणाम धर्म और दर्शन होते हैं। सौन्दर्य की खोज करते हुए वह संगीत, साहित्य, मूर्ति, चित्र और वास्तु आदि अनेक कलाओं को उन्नत करता है। सुखपूर्वक निवास के लिए सामाजिक और राजनीतिक संघटनों का निर्माण करता है। इस प्रकार मानसिक क्षेत्र में उन्नति की सूचक उसकी प्रत्येक सम्यक् कृति संस्कृति का अंग बनती है। इनमें प्रधान रूप से धर्म, दर्शन, सभी ज्ञान-विज्ञानों और कलाओं, सामाजिक तथा राजनीतिक संस्थाओं और प्रथाओं का समावेश होता है। .

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सुदर्शन पटनायक

सुदर्शन पटनायक सुदर्शन पटनायक द्वारा निर्मित बालू की एक मूर्ति सुदर्शन पटनायक (जन्म: १५ अप्रैल १९७७) भारत के ओडिशा के प्रसिद्ध रेत-कलाकार हैं। उनको कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2014 में भारत सरकार ने पद्मश्री से सम्मानित किया। वे ओडिशा राज्य से हैं। वे रेत से कलाकृतियाँ बनाते हैं। .

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सुनम्य कलाएँ

सुनम्य कलाएँ (Plastic arts) उन कलाओं की श्रेणी है जिनमें सुन्यता (plasticity) वाले पदार्थों से कलाकृतियाँ बनाई जाती हैं। इनमें मोल्डिंग (संचन) और शिल्पकला और मृतिकाशिल्प की कलाएँ शामिल हैं। सुनम्य कला में ऐसी सामग्रीयों का प्रयोग होता है जिन्हें आकार दिया जा सके, जैसे कि पत्थर, लकड़ी, कंक्रीट और धातु। हालांकि इन कलाओं का अंग्रेज़ी नाम "प्लास्टिक आर्ट्स" है, इनमें यह ज़रूरी नहीं है कि प्लास्टिक ही प्रयोग हो। .

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सुब्रह्मण्यम वासन श्रीनिवासन

सुब्रह्मण्यम वासन श्रीनिवासन को कला क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा सन १९६९ में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये तमिलनाडु से हैं। श्रेणी:पद्म भूषण.

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सुभाष काक

सुभाष काक सुभाष काक (जन्म 26 मार्च 1947) प्रमुख भारतीय-अमेरिकी कवि, दार्शनिक और वैज्ञानिक हैं। वे अमेरिका के ओक्लाहोमा प्रान्त में संगणक विज्ञान के प्रोफेसर हैं। उनके कई ग्रन्थ वेद, कला और इतिहास पर भी प्रकाशित हुए हैं। उनका जन्म श्रीनगर, कश्मीर में राम नाथ काक और सरोजिनी काक के यहाँ हुआ। उनकी शिक्षा कश्मीर और दिल्ली में हुई। .

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सुशील कुमार सक्सेना

सुशील कुमार सक्सेना को सन २००८ में भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया था। ये दिल्ली से हैं। २००८ पद्म भूषण श्रेणी:२००८ पद्म भूषण stub.

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सुविज्ञ शर्मा

सुविज्ञ शर्मा (जन्म २८ जुलाई, १९८३) एक भारतीय कलाकार, चित्रकार, फ़ैशन डिज़ाइनर और उद्यमी हैं, जिन्हें अपनी मिनिएचर पेंटिंग्स (लघु-चित्रों), तंजौर पेंटिंग, फ्रेस्को कला और सजीव चित्रों के लिए जाना जाता है। भारत के प्रसिद्ध वास्तुकला धरोहर स्थानों जैसे जयपुर में सिटी पैलेस एवं जामा मस्जिद सहित अनगिनत पुनर्नवीकरण और फ्रेस्को पेंटिंग प्रोजेक्ट्स का श्रेय इनको जाता है। इन्हें प्रतिष्ठित भारत गौरव सम्मान, २०१२ से सम्मानित किया गया है। इनकी कलाकृतियाँ भारत के कई प्रसिद्ध घरानों, जैसे कि बजाज, बिड़ला और सिंघानिया, अंबानी, पिरामल, मित्तल और बर्मन के निजी संग्रह में एक प्रतिष्ठित स्थान रखती हैं। वे भारत में लघु कला की विरासत को विकसित करने और बढ़ावा देने वाले एकमात्र कलाकार हैं। इनकी कलाकृतियाँ मारवाड़ इंडिया, सोसायटी, हैलो, सैवी, डीएनए, मिड डे, और टाइम्स ऑफ इंडिया आदि कई प्रतिष्ठित पत्रिकाओं और समाचार पत्रों में चित्रित की गई हैं। सुविज्ञ शर्मा की कलाकृतियों को कई रंग शालाओ और संग्रहालयों में प्रदर्शित किया जा चुका है, जिनमें सिंगापुर आर्ट म्युजियम, सिमरोज़ा आर्ट गैलरी, चित्रकूट आर्ट गैलरी, चेन्नई आर्ट गैलरी, अर्टिसन्स आर्ट गैलरी एवं इंडिया हैबिटैट सेन्टर सम्मलित हैं। सितंबर, २०१४ में, सुविज्ञ शर्मा ने २४ कैरेट सोने से अलंकृत औपनिवेशिक स्टांप पेपर चित्र प्रस्तुत करता हुआ अपना कलासंग्रह, एन आर्ट कलेक्टर्स पैराडाइज़, प्रदर्शित किया, जिसका अनावरण बॉलीवुड अभिनेत्री रानी मुखर्जी द्वारा किया गया है। १८ अक्टूबर २०१५ को, सुविज्ञ का नवीनतम कला संग्रह फॉरएवर इटरनल पिचवई, का अनावरण अभिनेत्री कंगना रनौत द्वारा किया गया। .

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स्व.पी लीला

स्व॰ पी लीला को भारत सरकार द्वारा सन २००६ में कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये तमिलनाडु से हैं। .

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स्वच्छन्दतावाद

स्वच्छन्दतावाद (Romanticism) कला, साहित्य तथा बौद्धिक क्षेत्र का एक आन्दोलन था जो यूरोप में अट्ठारहवीं शताब्दी के अन्त में आरम्भ हुआ। १८०० से १८५० तक के काल में यह आन्दोलन अपने चरमोत्कर्ष पर था। अट्ठारहवीं सदी से आज तक दर्शन, राजनीति, कला, साहित्य और संगीत को गहराई से प्रभावित करने वाले वैचारिक रुझान स्वच्छंदतावाद को एक या दो पंक्तियों में परिभाषित करना मुश्किल है। कुछ मानवीय प्रवृत्तियों का पूरी तरह से निषेध और कुछ को बेहद प्राथमिकता देने वाला यह विचार निर्गुण के ऊपर सगुण, अमूर्त के ऊपर मूर्त, सीमित के ऊपर असीमित, समरूपता के ऊपर विविधता, संस्कृति के ऊपर प्रकृति, यांत्रिक के ऊपर आंगिक, भौतिक और स्पष्ट के ऊपर आध्यात्मिक और रहस्यमय, वस्तुनिष्ठता के ऊपर आत्मनिष्ठता, बंधन के ऊपर स्वतंत्रता, औसत के ऊपर विलक्षण, दुनियादार किस्म की नेकी के ऊपर उन्मुक्त सृजनशील प्रतिभा और समग्र मानवता के ऊपर विशिष्ट समुदाय या राष्ट्र को तरजीह देता है। सामंती जकड़बंदी का मूलोच्छेद कर देने वाले फ़्रांसीसी क्रांति जैसे घटनाक्रम के पीछे भी स्वच्छंदतावादी प्रेरणाएँ ही थीं। फ़्रांसीसी क्रांति का युगप्रवर्तक नारा ‘समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व’ लम्बे अरसे तक स्वच्छंदतावादियों का प्रेरणा-स्रोत बना रहा। इस क्रांति के बौद्धिक नायक ज्याँ-ज़ाक रूसो को स्वच्छंदतावादी चिंतन की शुरुआत का श्रेय दिया जाता है। रूसो ने अपने ज़माने की सभ्यतामूलक उपलब्धियों पर आरोप लगाया था कि उनकी वज़ह से मानवता भ्रष्ट हो रही है। उनका विचार था कि अगर नेकी की दुनिया में लौटना है और भ्रष्टाचार से मुक्त जीवन की खोज करनी है तो प्रकृत- अवस्था की शरण में जाना होगा। 1761 में प्रकाशित रूसो की दीर्घ औपन्यासिक कृति ज़्यूली ऑर द न्यू हेलोइस और अपने ही जीवन का अनूठा अन्वेषण करने वाली उनकी आत्मकथा कनफ़ेशंस इस महान विचारक के स्वच्छंदतावादी नज़रिये का उदाहरण है। प्रेम संबंधों पर आधारित भावनाप्रवण कहानी ज़्यूली ने युरोपीय साहित्य में स्वच्छंदतावाद के परवर्ती विकास के लिए आधार का काम किया। अंग्रेज़ी भाषा में स्वच्छंदतावाद का साहित्यिक आंदोलन विकसित हुआ जिसके प्रमुख हस्ताक्षरों के रूप में ब्लैक, वर्ड्सवर्थ, कोलरिज, बायरन, शैली और कीट्स के नाम उल्लेखनीय हैं। स्वच्छंदतावाद के ही प्रभाव में जर्मन दार्शनिक हर्डर ने अपने विशिष्ट रोमांटिक नैशनलिज़म की संकल्पना की। यही प्रेरणाएँ हर्डर को ग़ैर-युरोपीय संस्कृतियों की तरफ़ ले गयीं और उन्होंने उन्हें युरोपीय सभ्यता की आदिम प्राक्-अवस्थाओं के बजाय अपनी विशिष्ट निजता, वैधता और तात्पर्यों से सम्पन्न संरचनाओं के रूप में देखा। जर्मन दार्शनिकों में आर्थर शॉपेनहॉर को स्वच्छंदतावाद की श्रेणी में रखा जाता है। उन्होंने कांट के बुद्धिवादी नीतिशास्त्र को नज़रअंदाज़ करते हुए उनकी ज्ञान-मीमांसा और सौंदर्यशास्त्र संबंधी विमर्श की पुनर्व्याख्या की। शॉपेनहाउर का लेखन जगत के प्रति निरुत्साह और हताशा से भरा हुआ है, पर उन्हें अभिलाषाओं के संसार में राहत मिलती है। शॉपेनहॉर का लेखन दर्शन रिचर्ड वागनर की संगीत-रचनाओं के लिए प्रेरक साबित हुआ। भारत में स्वच्छंदतावाद की पहली साहित्यिक अनुगूँज बांग्ला में सुनायी पड़ी। आधुनिक हिंदी साहित्य में स्वच्छंदतावाद की पहली सुसंगत अभिव्यक्ति छायावाद के रूप में मानी जाती है।  अपने प्रभावशाली राजनीतिक और दार्शनिक तात्पर्यों के अलावा स्वच्छंदतावाद की एक बहुत बड़ी उपलब्धि क्लासिकल भाषाओं को रचनाशीलता के केंद्र से विस्थापित करके जनप्रिय भाषाओं में लेखन की शुरुआत करने से जुड़ी है। एक ज़माने में केवल लैटिन में ही लेखन होता था, उसी के पाठक और प्रकाशक थे। लेकिन स्वच्छंदतावाद ने इस परम्परा का उल्लंघन करने की ज़मीन बनायी और पहले फ़्रांसीसी और फिर अंग्रेज़ी में लेखन करने का आग्रह बलवती हुआ। स्वच्छंदतावादी रचनाकारों ने मनोभावों पर नये सिरे से ज़ोर दे कर रचनाशीलता में क्लासिकीय अभिजनोन्मुखता को झटक दिया। इसका नतीजा केवल रोमानी प्रेम पर आधारित विषय-वस्तुओं में ही नहीं निकला, बल्कि साहित्य और कला ने मन के अँधेरों में छिपे भयों और दुखों की अनुभूति को भी स्पर्श करना शुरू कर दिया। स्वच्छंदतावाद की दूसरी महत्त्वपूर्ण उपलब्धि युरोपीय ज्ञानोदय द्वारा आरोपित बुद्धिवाद के ख़िलाफ़ विद्रोह के रूप में देखी जाती है। ज्ञानोदय के विचारक प्रकृति को तर्क-बुद्धि और व्यवस्थामूलक क्रम के उद्गम के तौर पर देखते थे। न्यूटन द्वारा प्रवर्तित मैकेनिक्स इसी की चरम अभिव्यक्ति है। लेकिन स्वच्छंदतावादियों ने प्रकृति को आंगिक विकास और विविधता के स्रोत के रूप में ग्रहण किया। वे प्राकृतिक और अलौकिक को अलग-अलग मानने के लिए तैयार नहीं थे। पार्थिव और अपार्थिव के द्विभाजन को नकारते हुए उन्होंने-उसे एक- दूसरे से गुँथे हुए की संज्ञा दी। ज्ञानोदय के विचार के लिए स्वच्छंदतावादियों का यह रवैया काफ़ी समस्याग्रस्त था। वे प्रकृति को भावप्रवण और आध्यात्मिक शक्ति के आदिम प्रवाह के रूप में देखने के लिए तैयार नहीं हो सकते थे। स्वच्छंदतावादियों ने क्लासिकल द्वारा रोमन और यूनानी मिथकों पर ज़ोर को नकारते हुए मध्ययुगीन और पागान सांस्कृतिक प्रवृत्तियों को अपनाया। इसका नतीजा गोथिक स्थापत्य के पुनरुद्धार में निकला। स्वच्छंदतावाद ने युरोपीय लोक-संस्कृति और कला के महत्त्व को स्वीकारा। फ़िनलैण्ड के महाकाव्यात्मक ग्रंथ कालेवाला का सृजन इसी रुझान की देन है। स्वच्छंदतावाद के विकास में फ़्रेड्रिख़ और ऑगस्त विल्हेम वॉन श्लेगल की भूमिका उल्लेखनीय है। अट्ठारहवीं और उन्नीसवीं सदी के संधिकाल पर सक्रिय इन विचारकों का कहना था कि रोमानी साहित्य और कला का स्वभाव तरल और खण्डित है। इसलिए सुसंगित और सम्पूर्णता प्राप्त करने की वह महत्त्वाकांक्षा उसमें नहीं होती जो क्लासिकल साहित्य और कला का मुख्य लक्षण है। जो रोमानी है वह व्याख्या की समस्याओं से ग्रस्त रहेगा ही। श्लेगल के अनुसार कला-कृतियाँ इसीलिए समझ के धरातल पर सौ फ़ीसदी बोधगम्य होने से इनकार करती हैं। ऑगस्त श्लेगल ने रोमानी विडम्बना की थीसिस का प्रतिपादन करते हुए कविता की विरोधाभासी प्रकृति को रेखांकित किया। इसका मतलब यह था कि किसी वस्तुनिष्ठ या सुनिश्चित तात्पर्य की उपलब्धि न कराना कविता का स्वभाव है। स्वच्छंदतावादियों ने शेक्सपियर की सराहना इसलिए की कि उनमें अपने नाटकों के पात्रों के प्रति एक विडम्बनात्मक विरक्ति है। इसीलिए वे अंतर्विरोधी स्थितियों और मुद्राओं के सफल चितेरे बन पाये हैं और इसीलिए उनके नाटक किसी एक दृष्टिकोण के पक्ष में उपसंहार नहीं करते। हिंदी में स्वच्छंदतावाद का प्रभाव बीसवीं सदी के दूसरे दशक में छायावादी कविता के रूप में सामने आया। हिंदी आलोचना की पारिभाषिक शब्दावली के रचनाकार डॉ॰ अमरनाथ के अनुसार हिंदी में स्वच्छंदतावाद का ज़िक्र सबसे पहले रामचंद्र शुक्ल के विख्यात ग्रंथ हिंदी साहित्य का इतिहास में मिलता है जहाँ उन्होंने श्रीधर पाठक को स्वच्छंदतावाद का प्रवर्त्तक करार दिया है। अमरनाथ के अनुसार छायावाद और स्वच्छंदतावाद में गहरा साम्य है। दोनों में प्रकृति-प्रेम, मानवीय दृष्टिकोण, आत्माभिव्यंजना, रहस्यभावना, वैयक्तिक प्रेमाभिव्यक्ति, प्राचीन संस्कृति के प्रति व्यामोह, प्रतीक-योजना, निराशा, पलायन, अहं के उदात्तीकरण आदि के दर्शन होते हैं। .

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स्वप्नसुंदरी

स्वप्नसुंदरी को सन २००३ में भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया था। ये दिल्ली राज्य से हैं। श्रेणी:२००३ पद्म भूषण.

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स्वामी चिन्मयानंद

स्वामी चिन्मयानन्द स्वामी चिन्मयानन्द (8 मई 1916 - 3 अगस्त 1993) हिन्दू धर्म और संस्कृति के मूलभूत सिद्धान्त वेदान्त दर्शन के एक महान प्रवक्ता थे। उन्होंने सारे भारत में भ्रमण करते हुए देखा कि देश में धर्म संबंधी अनेक भ्रांतियां फैली हैं। उनका निवारण कर शुद्ध धर्म की स्थापना करने के लिए उन्होंने गीता ज्ञान-यज्ञ प्रारम्भ किया और 1953 ई में चिन्मय मिशन की स्थापना की। स्वामी जी के प्रवचन बड़े ही तर्कसंगत और प्रेरणादायी होते थे। उनको सुनने के लिए हजारों लोग आने लगे। उन्होंने सैकड़ों संन्यासी और ब्रह्मचारी प्रशिक्षित किये। हजारों स्वाध्याय मंडल स्थापित किये। बहुत से सामाजिक सेवा के कार्य प्रारम्भ किये, जैसे विद्यालय, अस्पताल आदि। स्वामी जी ने उपनिषद्, गीता और आदि शंकराचार्य के 35 से अधिक ग्रंथों पर व्याख्यायें लिखीं। गीता पर लिखा उनका भाष्य सर्वोत्तम माना जाता है। .

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स्वामी विवेकानन्द

स्वामी विवेकानन्द(স্বামী বিবেকানন্দ) (जन्म: १२ जनवरी,१८६३ - मृत्यु: ४ जुलाई,१९०२) वेदान्त के विख्यात और प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरु थे। उनका वास्तविक नाम नरेन्द्र नाथ दत्त था। उन्होंने अमेरिका स्थित शिकागो में सन् १८९३ में आयोजित विश्व धर्म महासभा में भारत की ओर से सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व किया था। भारत का आध्यात्मिकता से परिपूर्ण वेदान्त दर्शन अमेरिका और यूरोप के हर एक देश में स्वामी विवेकानन्द की वक्तृता के कारण ही पहुँचा। उन्होंने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की थी जो आज भी अपना काम कर रहा है। वे रामकृष्ण परमहंस के सुयोग्य शिष्य थे। उन्हें प्रमुख रूप से उनके भाषण की शुरुआत "मेरे अमरीकी भाइयो एवं बहनों" के साथ करने के लिये जाना जाता है। उनके संबोधन के इस प्रथम वाक्य ने सबका दिल जीत लिया था। कलकत्ता के एक कुलीन बंगाली परिवार में जन्मे विवेकानंद आध्यात्मिकता की ओर झुके हुए थे। वे अपने गुरु रामकृष्ण देव से काफी प्रभावित थे जिनसे उन्होंने सीखा कि सारे जीव स्वयं परमात्मा का ही एक अवतार हैं; इसलिए मानव जाति की सेवा द्वारा परमात्मा की भी सेवा की जा सकती है। रामकृष्ण की मृत्यु के बाद विवेकानंद ने बड़े पैमाने पर भारतीय उपमहाद्वीप का दौरा किया और ब्रिटिश भारत में मौजूदा स्थितियों का पहले हाथ ज्ञान हासिल किया। बाद में विश्व धर्म संसद 1893 में भारत का प्रतिनिधित्व करने, संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए कूच की। विवेकानंद के संयुक्त राज्य अमेरिका, इंग्लैंड और यूरोप में हिंदू दर्शन के सिद्धांतों का प्रसार किया, सैकड़ों सार्वजनिक और निजी व्याख्यानों का आयोजन किया। भारत में, विवेकानंद को एक देशभक्त संत के रूप में माना जाता है और इनके जन्मदिन को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। .

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स्वेतोस्लैव रोएरिख

स्वेतोस्लैव रोएरिख को कला के क्षेत्र में सन १९६१ में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये से हैं। श्रेणी:१९६१ पद्म भूषण.

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सौन्दर्यशास्त्र

प्रकृति में सर्वत्र सौन्दर्य विद्यमान है। सौंदर्यशास्त्र (Aesthetics) संवेदनात्म-भावनात्मक गुण-धर्म और मूल्यों का अध्ययन है। कला, संस्कृति और प्रकृति का प्रतिअंकन ही सौंदर्यशास्त्र है। सौंदर्यशास्त्र, दर्शनशास्त्र का एक अंग है। इसे सौन्दर्यमीमांसा ताथा आनन्दमीमांसा भी कहते हैं। सौन्दर्यशास्त्र वह शास्त्र है जिसमें कलात्मक कृतियों, रचनाओं आदि से अभिव्यक्त होने वाला अथवा उनमें निहित रहने वाले सौंदर्य का तात्विक, दार्शनिक और मार्मिक विवेचन होता है। किसी सुंदर वस्तु को देखकर हमारे मन में जो आनन्ददायिनी अनुभूति होती है उसके स्वभाव और स्वरूप का विवेचन तथा जीवन की अन्यान्य अनुभूतियों के साथ उसका समन्वय स्थापित करना इनका मुख्य उद्देश्य होता है। .

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सौमित्र चटर्जी

सौमित्र चटर्जी बांग्ला फ़िल्मों के एक प्रसिद्ध अभिनेता हैं। .

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सृजनात्मकता

सृजनात्मकता सर्जनात्मकता अथवा रचनात्मकता किसी वस्तु, विचार, कला, साहित्य से संबद्ध किसी समस्या का समाधान निकालने आदि के क्षेत्र में कुछ नया रचने, आविष्कृत करने या पुनर्सृजित करने की प्रक्रिया है। यह एक मानसिक संक्रिया है जो भौतिक परिवर्तनों को जन्म देती है। सृजनात्मकता के संदर्भ में वैयक्तिक क्षमता और प्रशिक्षण का आनुपातिक संबन्ध है। काव्यशास्त्र में सृजनात्मकता प्रतिभा, व्युत्पत्ति और अभ्यास के सहसंबंधों की परिणति के रूप में व्यवहृत किया जाता है। .

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सैयद हैदर रज़ा

सैयद हैदर रज़ा को सन २००७ में भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये फ्रांस से हैं। .

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सूरजकुण्ड हस्तशिल्प मेला

उत्तराखंड राज के थीम पर बना बद्रीनाथ मंदिर की तरह का मेले का प्रवेशद्वार सूरजकुंड हस्तशिल्प मेला, भारत की एवं शिल्पियों की हस्तकला का १५ दिन चलने वाला मेला लोगों को ग्रामीण माहौल और ग्रामीण संस्कृति का परिचय देता है। यह मेला हरियाणा राज्य के फरीदाबाद शहर के दिल्ली के निकटवर्ती सीमा से लगे सूरजकुंड क्षेत्र में प्रतिवर्ष लगता है। यह मेला लगभग ढाई दशक से आयोजित होता आ रहा है। वर्तमान में इस मेले में हस्तशिल्पी और हथकरघा कारीगरों के अलावा विविध अंचलों की वस्त्र परंपरा, लोक कला, लोक व्यंजनों के अतिरिक्त लोक संगीत और लोक नृत्यों का भी संगम होता है।। हिन्दुस्तान लाइव। २८ जनवरी २०१० इस मेले में हर वर्ष किसी एक राज्य को थीम बना कर उसकी कला, संस्कृति, सामाजिक परिवेश और परंपराओं को प्रदर्शित किया जाता है। वर्ष २०१० में राजस्थान थीम राज्य है। इसे दूसरी बार यह गौरव प्राप्त हुआ है। मेले में लगे स्टॉल हर क्षेत्र की कला से परिचित कराते हैं। सार्क देशों एवं थाईलैंड, तजाकिस्तान और मिस्र के कलाशिल्पी भी यहां आते हैं। पश्चिम बंगाल और असम के बांस और बेंत की वस्तुएं, पूर्वोत्तर राज्यों के वस्त्र, छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश से लोहे व अन्य धातु की वस्तुएं, उड़ीसा एवं तमिलनाडु के अनोखे हस्तशिल्प, मध्य प्रदेश, गुजरात, पंजाब और कश्मीर के आकर्षक परिधान और शिल्प, सिक्किम की थंका चित्रकला, मुरादाबाद के पीतल के बर्तन और शो पीस, दक्षिण भारत के रोजवुड और चंदन की लकड़ी के हस्तशिल्प भी यहां प्रदर्शित हैं। यहां अनेक राज्यों के खास व्यंजनों के साथ ही विदेशी खानपान का स्वाद भी मिलता है। मेला परिसर में चौपाल और नाट्यशाला नामक खुले मंच पर सारे दिन विभिन्न राज्यों के लोक कलाकार अपनी अनूठी प्रस्तुतियों से समा बांधते हैं। शाम के समय विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं। दर्शक भगोरिया डांस, बीन डांस, बिहू, भांगड़ा, चरकुला डांस, कालबेलिया नृत्य, पंथी नृत्य, संबलपुरी नृत्य और सिद्घी गोमा नृत्य आदि का आनंद लेते हैं। विदेशों की सांस्कृतिक मंडलियां भी प्रस्तुति देती हैं। .

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सेंट स्टीफ़न कॉलेज

सेंट स्टीफ़न कॉलेज (उर्दू: سینٹ سٹیفنس کالج دلھ, अंग्रेज़ी:St. Stephen's College) दिल्ली विश्वविद्यालय के अधीनस्थ दिल्ली में स्थित एक कॉलेज है। यह भारत के प्रसिद्ध शैक्षिक संस्थानों में से एक है, जहां कला एवं विज्ञान की उपाधियां दी जाती हैं।इस कॉलेज के कई पुराछात्र काफ़ी प्रसिद्द रहे हैं और कॉलेज के छात्रों को स्टेफेनियन कहा जाता है। .

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सोनल मानसिंह

सोनल मानसिंह भारत सरकार ने १९९२ में कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया था। ये दिल्ली से हैं। सोनल मानसिंह (जन्म ३० अप्रैल, १९४४) एक भारतीय शास्त्रीय नर्तक और गुरु भरतनाट्यम और ओडिसी नृत्य शैली हैं; जो अन्य भारतीय शास्त्रीय नृत्य शैली में भी कुशल है। सोनल मानसिंह का जन्म मुंबई में हुआ, तीन बच्चों में से तीन अरविंद और पूर्णिमा पाकवास, गुजरात के एक प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और २००४ में पद्म विभूषण विजेता थे। उनके दादा एक स्वतंत्रता सेनानी मंगल दास पाकवास थे, और भारत के पहले पांच गवर्नरों में से एक था।। उन्होंने चार साल की उम्र में मणिपुरी नृत्य, नागपुर के एक शिक्षक से अपनी बड़ी बहन के साथ सीखना शुरू कर दिया, फिर सात साल की उम्र में उन्होंने पांडानल्लुर स्कूल के विभिन्न गुरूओं से भरतनाट्यम सीखना शुरू किया, बॉम्बे में कुमार जयकर सहित। उन्होंने भारतीय विद्या भवन और बीए से संस्कृत में "प्रवीण" और "कोविद" डिग्री दी है। एलफिन्स्टन कॉलेज, बॉम्बे से जर्मन साहित्य में(ऑनर्स)डिग्री हालांकि, १८ साल की उम्र में, अपने परिवार के विरोध के बावजूद, वह १८ साल की उम्र में, प्रोफेसर अमेरिकी कृष्ण राव और चंद्रभागा देवी से भरतनाट्यम जानने के लिए, मैलेपुर गौरी अम्मल और बाद में १९६५ में गुरु केलूचरण महापात्रा से ओडिसी सीखना शुरू किया। .

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सोमनाथ होरे

सोमनाथ होरे को सन २००७ में भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये पश्चिम बंगाल से हैं। .

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सोमांगुडी राधा के श्रीनिवास अइयर

सोमांगुडी राधा के श्रीनिवास अइयर को कला क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा सन १९६९ में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये तमिलनाडु से हैं। श्रेणी:पद्म भूषण.

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सोंभु मित्रा

सोंभु मित्रा को कला के क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा सन १९७० में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये पश्चिम बंगाल राज्य से थे। श्रेणी:१९७० पद्म भूषण श्रेणी:1915 में जन्मे लोग श्रेणी:१९९७ में निधन.

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सी वैद्यनाथ भगवतार

सी वैद्यनाथ भगवतार को कला के क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा सन १९७३ में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये केरल से हैं। श्रेणी:१९७३ पद्म भूषण श्रेणी:1896 में जन्मे लोग श्रेणी:१९७४ में निधन.

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हाथियों की बुद्धिमत्ता

मानव, पायलट व्हेल और हाथी का दिमाग पैमाने पर (1)-प्रमस्तिष्क (सेरीब्रम) (1 क)-टेम्पोरल लोब और (2)-सेरिबैलम (अनुमस्तिष्क) हाथी दुनिया की सबसे बुद्धिमान प्रजातियों में से एक हैं। 5 किलोग्राम से अधिक वज़न का हाथी का मस्तिष्क (दिमाग) किसी भी स्थलीय जानवर की तुलना में बड़ा होता है। हालांकि सबसे बड़े आकार की व्हेल के शरीर का वज़न एक प्रारूपिक हाथी की तुलना में 20 गुना अधिक होता है, व्हेल के मस्तिष्क का वज़न एक हाथी के मस्तिष्क की तुलना में दोगुना होता है। सरंचना और जटिलता के आधार पर हाथी का मस्तिष्क मनुष्य के मस्तिष्क से समानता रखता है- जैसे एक हाथी के वल्कुट (cortex) में उतने ही न्यूरोन (तंत्रिका कोशिकाएं) होते हैं, जितने की मानव मस्तिष्क में, जो संसृत विकास (convergent evolution) को दर्शाता है। हाथी कई प्रकार के व्यवहार प्रदर्शित करते हैं, इनमें दुःख, सीखना, मातृत्व, अनुकरण (मिमिक्री या नक़ल करना), कला, खेल, हास्य, परोपकारिता, उपकरणों का उपयोग, करुणा और सहयोग इत्यादि भावनाएं शामिल हैं। इन व्यवहारों में आत्म जागरूकता, स्मृति और संभवतया भाषा भी शामिल हो सकती है। इनमें अत्यधिक बुद्धिमान प्रजातियों के वे सभी गुण पाए जाते हैं जिन्हें केटाशियन और प्राइमेट्स के समतुल्य माना जाता है। हाथियों की उच्च बुद्धिमत्ता और प्रबल पारिवारिक संबंधों के कारण, कुछ शोधकर्ता तर्क देते हैं कि मनुष्यों के लिए उन्हें चुनना नैतिक रूप से गलत है। अरस्तू ने एक बार कहा था कि हाथी "वे जानवर हैं जो मन और बुद्धि की दृष्टि से सभी अन्य जानवरों को पीछे छोड़ देते हैं".

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हिन्दू देवी देवताओं की सूची

यह हिन्दू देवी देवताओं की सूची है। हिन्दू लेखों के अनुसार, धर्म में तैंतीस कोटि (कोटि के अर्थ-प्रकार और करोड़) देवी-देवता बताये गये हैं। इनमें स्थानीय व क्षेत्रीय देवी-देवता भी शामिल हैं)। वे सभी तो यहां सम्मिलित नहीं किये जा सकते हैं। फिर भी इस सूची में तीन सौ से अधिक संख्या सम्मिलित है। .

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हिन्दू धर्म का विश्वकोश

हिन्दू धर्म का विश्वकोश या इंसाइक्लोपीडिया ऑफ हिन्दुइज्म (Encyclopedia of Hinduism) हिन्दू धर्म एवं इससे सम्बन्धित अनेकानेक विषयों का विश्वकोश है। इसका प्रथम संस्करण २०१२ में निकला। यह ग्यारह भागों में है और अंग्रेजी भाषा में है। यह विश्वकोश ७१८४ पृष्टों में है जिसमें मन्दिरों, स्थानों, विचारकों, कर्मकाण्डों एवं त्यौहारों का विवरण रंगीन चित्रों के साथ दिया हुआ है। यह परियोजना परमार्थ निकेतन के स्वामी चिदानन्द सरस्वती की प्रेरणा से चली एवं फलीभूत हुई। २५ वर्षों के निरन्तर प्रयास तथा २००० से अधिक विद्वानों के योगदान से यह विश्वकोश निर्मित हुआ है। इसके सम्पादक डॉ कपिल कपूर हैं। यह विश्वकोश केवल हिन्दू धर्म तक ही सीमीति नहीं है बल्कि कला, इतिहास, भाषा, साहित्य, दर्शन, राजनीति, विज्ञान तथा नारी विषयों को भी इसमें स्थान दिया गया है। .

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हैदराबाद के निज़ाम

आसफ़ जाह I हैदराबाद के निज़ाम-उल-मुल्क (उर्दू:نظام - ال - ملک وف حیدرآبا, तेलुगु: నిజాం - ఉల్ - ముల్క్ అఫ్ హైదరాబాద్, मराठी: निझाम-उल-मुल्क ऑफ हैदराबाद, कन्नड़: ನಿಜ್ಯಮ್ - ಉಲ್ - ಮುಲ್ಕ್ ಆಫ್ ಹೈದರಾಬಾದ್), हैदराबाद स्टेट की एक पूर्व राजशाही थी, जिसका विस्तार तीन वर्तमान भारतीय राज्यों आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र में था। निज़ाम-उल-मुल्क जिसे अक्सर संक्षेप में सिर्फ निज़ाम ही कहा जाता है और जिसका अर्थ उर्दू भाषा में क्षेत्र का प्रशासक होता है, हैदराबाद रियासत के स्थानीय संप्रभु शासकों की पदवी को कहा जाता था। निज़ाम 1719 से हैदराबाद रियासत के शासक थे और आसफ़ जाही राजवंश से संबंधित थे। इस राजवंश की स्थापना मीर क़मर-उद-दीन सिद्दीकी, ने की थी जो 1713 से 1721 के बीच मुग़ल साम्राज्य के दक्कन क्षेत्र का सूबेदार था। क़मर-उद-दीन सिद्दीकी ने असंतत रूप से 1724 में आसफ जाह के खिताब के तहत हैदराबाद पर शासन किया और 1707 में औरंगजेब की मृत्यु के बाद जब मुगल साम्राज्य कमज़ोर हो गया तो युवा आसफ जाह ने खुद को स्वतंत्र घोषित कर दिया। 1798 से हैदराबाद, ब्रिटिश भारत की रियासतों में से एक था, लेकिन उसने अपने आंतरिक मामलों पर अपना नियंत्रण बनाए रखा था। सात निजामों ने लगभग दो शताब्दियों यानि 1947 में भारत की स्वतंत्रता तक हैदराबाद पर शासन किया। आसफ जाही शासक साहित्य, कला, वास्तुकला, संस्कृति, जवाहरात संग्रह और उत्तम भोजन के बड़े संरक्षक थे। निजाम ने हैदराबाद पर 17 सितम्बर 1948 तक शासन किया, जब इन्होने भारतीय बलों के समक्ष आत्मसमर्पण किया और इनके द्वारा शासित क्षेत्र को भारतीय संघ में एकीकृत किया गया। .

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हैरोल्ड लॉस्की

हैरोल्ड जोसेफ लॉस्की (सन १९३६ में) हैरोल्ड जोसेफ लॉस्की (Laski, Harold Joseph) (30 जून 1893 – 24 मार्च 1950) ब्रिटेन के राजनीतिक सिद्धान्तकार, अर्थशास्त्री, लेखक एवं प्रवक्ता थे। वे राजनीति में सक्रिय रहे तथा १९४५-४६ में ब्रिटेन के मजदूर दल (लेबर पार्टी) के अध्यक्ष रहे। वे १९२६ से १९५० तक लन्दन अर्थशास्त्र स्कूल में प्राध्यापक रहे। .

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हीराभाई बादोडेकर

हीराभाई बादोडेकर को कला के क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा सन १९७० में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये महाराष्ट्र राज्य से थीं। श्रेणी:१९७० पद्म भूषण श्रेणी:1905 में जन्मे लोग श्रेणी:१९८९ में निधन.

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जनकला

जनकला (public art) किसी भी माध्यम में रची हुई कला की उन कृतियों को बोलते हैं जिन्हें ऐसे खुले वातावरण में प्रदर्शित करने की नियत से बनाया गया हो जहाँ जन-साधारण का बहुत आना-जाना रहे, मसलन किसी नगर का कोई मार्ग, चौराहा या चौक। इसमें मूर्तिकला व ग्रफ़ीटी जैसी कलाएँ शामिल हैं। अक्सर संग्रहालय में रखी हुई कला-कृतियों के विपरीत जनता को जनकला की कृतियों को छूने और पास से देखने के लिये प्रोत्साहित किया जाता है।, John Steil, Aileen Stalker, pg.

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जयशंकर प्रसाद

जयशंकर प्रसाद (30 जनवरी 1890 - 15 नवम्बर 1937)अंतरंग संस्मरणों में जयशंकर 'प्रसाद', सं०-पुरुषोत्तमदास मोदी, विश्वविद्यालय प्रकाशन, वाराणसी; संस्करण-2001ई०,पृ०-2(तिथि एवं संवत् के लिए)।(क)हिंदी साहित्य का बृहत् इतिहास, भाग-10, नागरी प्रचारिणी सभा, वाराणसी; संस्करण-1971ई०, पृ०-145(तारीख एवं ईस्वी के लिए)। (ख)www.drikpanchang.com (30.1.1890 का पंचांग; तिथ्यादि से अंग्रेजी तारीख आदि के मिलान के लिए)।, हिन्दी कवि, नाटककार, कहानीकार, उपन्यासकार तथा निबन्धकार थे। वे हिन्दी के छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक हैं। उन्होंने हिंदी काव्य में एक तरह से छायावाद की स्थापना की जिसके द्वारा खड़ी बोली के काव्य में न केवल कमनीय माधुर्य की रससिद्ध धारा प्रवाहित हुई, बल्कि जीवन के सूक्ष्म एवं व्यापक आयामों के चित्रण की शक्ति भी संचित हुई और कामायनी तक पहुँचकर वह काव्य प्रेरक शक्तिकाव्य के रूप में भी प्रतिष्ठित हो गया। बाद के प्रगतिशील एवं नयी कविता दोनों धाराओं के प्रमुख आलोचकों ने उसकी इस शक्तिमत्ता को स्वीकृति दी। इसका एक अतिरिक्त प्रभाव यह भी हुआ कि खड़ीबोली हिन्दी काव्य की निर्विवाद सिद्ध भाषा बन गयी। आधुनिक हिन्दी साहित्य के इतिहास में इनके कृतित्व का गौरव अक्षुण्ण है। वे एक युगप्रवर्तक लेखक थे जिन्होंने एक ही साथ कविता, नाटक, कहानी और उपन्यास के क्षेत्र में हिंदी को गौरवान्वित होने योग्य कृतियाँ दीं। कवि के रूप में वे निराला, पन्त, महादेवी के साथ छायावाद के प्रमुख स्तंभ के रूप में प्रतिष्ठित हुए हैं; नाटक लेखन में भारतेंदु के बाद वे एक अलग धारा बहाने वाले युगप्रवर्तक नाटककार रहे जिनके नाटक आज भी पाठक न केवल चाव से पढ़ते हैं, बल्कि उनकी अर्थगर्भिता तथा रंगमंचीय प्रासंगिकता भी दिनानुदिन बढ़ती ही गयी है। इस दृष्टि से उनकी महत्ता पहचानने एवं स्थापित करने में वीरेन्द्र नारायण, शांता गाँधी, सत्येन्द्र तनेजा एवं अब कई दृष्टियों से सबसे बढ़कर महेश आनन्द का प्रशंसनीय ऐतिहासिक योगदान रहा है। इसके अलावा कहानी और उपन्यास के क्षेत्र में भी उन्होंने कई यादगार कृतियाँ दीं। विविध रचनाओं के माध्यम से मानवीय करुणा और भारतीय मनीषा के अनेकानेक गौरवपूर्ण पक्षों का उद्घाटन। ४८ वर्षो के छोटे से जीवन में कविता, कहानी, नाटक, उपन्यास और आलोचनात्मक निबंध आदि विभिन्न विधाओं में रचनाएँ की। उन्हें 'कामायनी' पर मंगलाप्रसाद पारितोषिक प्राप्त हुआ था। उन्होंने जीवन में कभी साहित्य को अर्जन का माध्यम नहीं बनाया, अपितु वे साधना समझकर ही साहित्य की रचना करते रहे। कुल मिलाकर ऐसी बहुआयामी प्रतिभा का साहित्यकार हिंदी में कम ही मिलेगा जिसने साहित्य के सभी अंगों को अपनी कृतियों से न केवल समृद्ध किया हो, बल्कि उन सभी विधाओं में काफी ऊँचा स्थान भी रखता हो। .

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जसराज

जसराज को भारत सरकार द्वारा सन १९९० में कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये महाराष्ट्र से हैं। श्रेणी:१९९० पद्म भूषण.

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ज़ाकिर हुसैन (संगीतकार)

उस्ताद ज़ाकिर हुसैन (जन्म 9 मार्च 1951) भारत के सबसे प्रसिद्ध तबला वादक हैं। ज़ाकिर हुसैन तबला वादक उस्ताद अल्ला रखा के बेटे हैं। Zakir Hussain, 2001 ज़ाकिर हुसैन को सन २००२ (2002) में भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये महाराष्ट्र से हैं। .

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ज़ुबिन मेहता

ज़ुबिन मेहता ज़ुबिन मेहता को कला के क्षेत्र में सन १९६६ में भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। दुनिया नापने वाले इस ऑर्केस्ट्रा संचालक ने पाश्चात्य शास्त्रीय संगीत को युद्धरत देशों के बीच संवाद का कारगर माध्यम बनाया। श्रेणी:१९६६ पद्म भूषण.

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जगजीत सिंह

जगजीत सिंह (८ फ़रवरी १९४१ - १० अक्टूबर २०११) का नाम बेहद लोकप्रिय ग़ज़ल गायकों में शुमार हैं। उनका संगीत अंत्यंत मधुर है और उनकी आवाज़ संगीत के साथ खूबसूरती से घुल-मिल जाती है। खालिस उर्दू जानने वालों की मिल्कियत समझी जाने वाली, नवाबों-रक्कासाओं की दुनिया में झनकती और शायरों की महफ़िलों में वाह-वाह की दाद पर इतराती ग़ज़लों को आम आदमी तक पहुंचाने का श्रेय अगर किसी को पहले पहल दिया जाना हो तो जगजीत सिंह का ही नाम ज़ुबां पर आता है। उनकी ग़ज़लों ने न सिर्फ़ उर्दू के कम जानकारों के बीच शेरो-शायरी की समझ में इज़ाफ़ा किया बल्कि ग़ालिब, मीर, मजाज़, जोश और फ़िराक़ जैसे शायरों से भी उनका परिचय कराया। जगजीत सिंह को सन २००३ में भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। फरवरी २०१४ में आपके सम्मान व स्मृति में दो डाक टिकट भी जारी किए गए। .

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ज्ञानप्रकाश घोष

पंडित ज्ञानप्रकाश घोष को भारत सरकार द्वारा सन १९८४ में कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये पश्चिम बंगाल राज्य से हैं। श्रेणी:१९८४ पद्म भूषण.

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जैव संरक्षण

जैव संरक्षण, प्रजातियां, उनके प्राकृतिक वास और पारिस्थितिक तंत्र को विलोपन से बचाने के उद्देश्य से प्रकृति और पृथ्वी की जैव विविधता के स्तरों का वैज्ञानिक अध्ययन है। यह विज्ञान, अर्थशास्त्र और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन के व्यवहार से आहरित अंतरनियंत्रित विषय है। शब्द कन्सर्वेशन बॉयोलोजी को जीव-विज्ञानी ब्रूस विलकॉक्स और माइकल सूले द्वारा 1978 में ला जोला, कैलिफ़ोर्निया स्थित कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय में आयोजित सम्मेलन में शीर्षक के तौर पर प्रवर्तित किया गया। बैठक वैज्ञानिकों के बीच उष्णकटिबंधीय वनों की कटाई, लुप्त होने वाली प्रजातियों और प्रजातियों के भीतर क्षतिग्रस्त आनुवंशिक विविधता पर चिंता से उभरी.

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जे भुधारदास भोजक

जे भुधारदास भोजक को कला के क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा, सन १९७१ में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये गुजरात राज्य से हैं। श्रेणी:१९७१ पद्म भूषण.

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जी शिवरामकृष्णमूर्ति

जी शिवरामकृष्णमूर्ति को सन २००९ में भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये आंध्र प्रदेश राज्य से हैं। .

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वाद-विवाद

वाद-विवाद या बहस, संवादात्मक और प्रतिनिधित्ववादी तर्क की एक औपचारिक विधि है। वाद-विवाद, तार्किक तर्क की तुलना में तर्क का एक व्यापक रूप है, जो केवल स्वयंसिद्ध और तथ्यात्मक तर्क से स्थिरता की परख करता है, जो सिर्फ यह जांचता है कि मामला या वाक्पटुता, जो अनुनय की एक तकनीक है क्या है या क्या नहीं है। यद्यपि, तार्किक स्थिरता, तथ्यात्मक सटीकता और दर्शकों के साथ कुछ हद तक भा ghanta वनात्मक अपील अनुनय की कला के महत्वपूर्ण तत्व हैं; वाद-विवाद में अक्सर एक पक्ष मुद्दे का बेहतर "संदर्भ" और/या ढांचा प्रस्तुत करके दूसरे पक्ष पर छाया रहता है, जो कहीं अधिक सूक्ष्म और सामरिक है। एक औपचारिक वाद-विवाद प्रतियोगिता में, मतभेदों पर चर्चा और फैसला करने लिए लोगों के लिए नियम होते हैं, एक ढांचे के भीतर जो यह परिभाषित करता है कि वे कैसे बातचीत करेंगे। अनौपचारिक वाद-विवाद एक आम घटना है, एक वाद-विवाद की गुणवत्ता और गहराई उसमें हिस्सा ले रहे विवादकर्ताओं के ज्ञान और कौशल के साथ बढ़ जाती है। विमर्शी निकाय जैसे, संसद, विधान सभाएं और सभी प्रकार की बैठकें वाद-विवाद में संलग्न होती हैं। एक वाद-विवाद के नतीजे को दर्शकों के मतदान या निर्णायकों या फिर इन दोनों के संयोजन द्वारा निर्णित किया जा सकता है। हालांकि इसका यह मतलब है कि तथ्य, आम सहमति पर आधारित होते हैं, जो तथ्यात्मक नहीं है। निर्वाचित कार्यालय के लिए उम्मीदवारों के बीच औपचारिक वाद-विवाद, जैसे नेताओं का वाद-विवाद और अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव वाद-विवाद, लोकतंत्र में आम हैं। एक विधि या कला के रूप में वाद-विवाद के अध्ययन का प्रमुख लक्ष्य है किसी भी पक्ष से समान सहजता के साथ शिरकत करने में एक व्यक्ति की क्षमता का विकास.

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वासुदेव शरण अग्रवाल

वासुदेव शरण अग्रवाल (1904 - 1966) भारत के इतिहास, संस्कृति, कला एवं साहित्य के विद्वान थे। वे साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत हिन्दी गद्यकार हैं। .

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वाजिद खान

वाजिद खान (जन्म: १० मार्च १९८१, मंदसौर,मध्य प्रदेश, भारत) एक अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त आयरन नेल आर्टिस्ट (कलाकार), चित्रकार, पेटेंट धारक, व अविष्कारक हैं। .

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विधा

विधा (फ्रेंच: जीनर / genre) का साधारण अर्थ प्रकार, किस्म, वर्ग या श्रेणी है। यह शब्द विविध प्रकार की रचनाओं को वर्ग या श्रेणी में बांटने से उस विधा के गुणधर्मो को समझने में सुविधा होती है। यह वैसे ही है जैसे जीवविज्ञान में जीवों का वर्गीकरण किया जाता है। साहित्य एवं भाषण में विधा शब्द का प्रयोग एक वर्गकारक (CATEGORIZER) के रूप में किया जाता है। किन्तु सामान्य रूप से यह किसी भी कला के लिये प्रयुक्त किया जा सकता है। विधाओं की उपविधाएँ भी होती हैं। उदाहरण के लिये हम कहते हैं कि निबन्ध, गद्य की एक विधा है।. विधाएँ अस्पष्ट (vague) श्रेणीयाँ हैं और इनकी कोई निश्चित सीमा-रेखा नहीं होती। ये समय के साथ कुछ मान्यताओं के आधार पर इनकिइ पहचान निर्मित हो जाती है। .

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विधान परिषद

विधान परिषद कुछ भारतीय राज्यों में लोकतंत्र की ऊपरी प्रतिनिधि सभा है। इसके सदस्य अप्रत्यक्ष चुनाव के द्वारा चुने जाते हैं। कुछ सदस्य राज्यपाल के द्वारा मनोनित किए जाते हैं। विधान परिषद विधानमंडल का अंग है। आंध्र प्रदेश, बिहार, जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश के रूप में, (उन्तीस में से) सात राज्यों में विधान परिषद है। इसके अलावा, राजस्थान और असम को भारत की संसद ने अपने स्वयं के विधान परिषद बनाने की मंजूरी दे दी है। .

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विनायकराव पटवर्धन

विनायकराव पटवर्धन को कला के क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा सन १९७२ में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये महाराष्ट्र से हैं। श्रेणी:१९७२ पद्म भूषण.

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विल्नुस विश्वविद्यालय का पुस्तकालय

श्रेणी:पुस्तकालय विल्नुस विश्वविद्यालय का पुस्तकालय (VUB) - सब से पुराना पुस्तकालय लिथुआनिया में है। वह जेशूइट के द्वारा स्थापित किया गया था। पुस्तकालय विल्नुस विश्वविद्यालय से पुराना है - पुस्तकालय १५७० में और विश्वविद्यालय १५७९ में स्थापित किया गया था। कहने तो लायक है कि अभी तक पुस्तकालय समान निर्माण में रहा है।पहले पुस्तकालय वर्तमान भाषाशास्त्र (फ़िलोलोजी) के वाचनालय में रहा था। आज पुस्तकालय में लगभग ५४ लाख दस्तावेज रखे हैं। ताक़ों की लम्बाई - १६६ किलोमीटर ।अभी पुस्तकालय के २९ हज़ार प्रयोक्ते हैं। १७५३ में यहाँ लिथुआनिया की प्रथम वेधशाला स्थापित की गयी थी। प्रतिवर्ष विल्नुस विश्वविद्यालय के पुस्तकालय में बहुत पर्यटक आते हैं - न केवल लिथुआनिया से बल्कि भारत, स्पेन, चीन, अमरीका से, वगैरह। विल्नुस विश्वविद्यालय के पुस्तकालय में प्रसिद्ध व्यक्तित्व भी आते हैं। उदाहरण के लिये - राष्ट्रपति, पोप, दलाई लामा, वगैरह। विल्नुस विश्वविद्यालय के पुस्तकालय का सदर मकान उनिवेर्सितेतो ३ में, राष्ट्रपति भवन के पास स्थापित किया गया है। यहाँ १३ वाचनालय और ३ समूहों के कमरे हैं। दूसरे विल्नुस के स्थानों में अन्य पुस्तकालय के भाग मिलते हैं। .

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विल्लुपुरम चिन्नैया गणेशन

शिवाजी गणेशन (சிவாஜி கணேசன்) (जन्म:विल्लुपुरम चिन्नैया पिल्लई गणेशन, १ अक्टूबर, १९२८ - २१ जुलाई, २००१)) एक भारतीय फिल्म अभिनेता थे। ये बीसवीं शताब्दी के परार्ध में सक्रिय रहे। इनको भारत सरकार द्वारा सन १९८४ में कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये तमिलनाडु राज्य से हैं। .

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विशाखा उत्सव

विशाखा उत्सव एक हिन्दू त्यौहार हैं। अन्य त्योहारों की नसों मे, विशाख उत्सव एक और त्योहार है जो आंध्र प्रदेश पर्यटन विकास निगम द्वारा आयोजित किया जाता है, ताकि राज्य मे पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सके। यह त्योहार सबसे विशिष्ट घटना है, जो कला, शिल्प, संगीत, नृत्य और कई सांसकृतिक के कार्यक्रमों के रूप मे परंपराओं और संस्कृति को मनाता है। विशाखापत्तनम, बंदरगाह शहर, इस भव्य चार दिवसीय त्योहार के लिये महान स्थल बनाता है। विशाख उत्सव में भाग लेते हुए आंध्र प्रदेश की सांसकृतिक विरासत की एक पूरी झलक देखने का एक आदर्श तरीका है। देश के सभी हिस्सो और दुनिया के लोग विशाखा के त्योहार का आनंद लेते हैं। श्रेणी:संस्कृति श्रेणी:हिन्दू त्यौहार श्रेणी:धार्मिक त्यौहार .

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विश्व के प्रसिद्ध वैज्ञानिक और उनके अविष्कारों का संक्षिप्त वर्णन

अंग्रेज भौतिकविद विलियम हेनरी ब्रेग (१८६२-१९४२) और उनके पुत्र विलियम लॉरेन्स ब्रेग ने खोज की कि जब क्ष-किरण क्रिस्टल में से होकर गुजरती है तो वो फोटोग्रफिक फिल्म पर बिन्दुओ की विशिष्ट प्रतिकृति बनाती है। यह प्रतिकृति क्रिस्टल के भीतर मौजुद परमाणुओ कि विशिष्ट व्यवस्था को दर्शाती है। श्रेणी:वैज्ञानिक.

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विश्व-भारती विश्वविद्यालय

विश्वभारती विश्वविद्यालय की स्थापना 1921 में रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने पश्चिम बंगाल के शान्तिनिकेतन नगर में की। यह भारत के केन्द्रीय विश्वविद्यालयों में से एक है। अनेक स्नातक और परास्नातक संस्थान इससे संबद्ध हैं। शान्ति निकेतन के संस्थापक रवीन्द्रनाथ टैगोर का जन्म १८६१ ई में कलकत्ता में एक सम्पन्न परिवार में हुआ था। इनके पिता महर्षि देवेन्द्रनाथ ठाकुर ने १८६३ ई में अपनी साधना हेतु कलकत्ते के निकट बोलपुर नामक ग्राम में एक आश्रम की स्थापना की जिसका नाम `शांति-निकेतन' रखा गया। जिस स्थान पर वे साधना किया करते थे वहां एक संगमरमर की शिला पर बंगला भाषा में अंकित है--`तिनि आमार प्राणेद आराम, मनेर आनन्द, आत्मार शांति।' १९०१ ई में गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर ने इसी स्थान पर बालकों की शिक्षा हेतु एक प्रयोगात्मक विद्यालय स्थापित किया जो प्रारम्भ में `ब्रह्म विद्यालय,' बाद में `शान्ति निकेतन' तथा १९२१ ई। `विश्व भारती' विश्वविद्यालय के नाम से प्रख्यात हुआ। टैगोर बहुमुखी प्रतिभा के व्यक्ति थे। .

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विश्वज्ञानकोश

विश्वज्ञानकोश, विश्वकोश या ज्ञानकोश (Encyclopedia) ऐसी पुस्तक को कहते हैं जिसमें विश्वभर की तरह तरह की जानने लायक बातों को समावेश होता है। विश्वकोश का अर्थ है विश्व के समस्त ज्ञान का भंडार। अत: विश्वकोश वह कृति है जिसमें ज्ञान की सभी शाखाओं का सन्निवेश होता है। इसमें वर्णानुक्रमिक रूप में व्यवस्थित अन्यान्य विषयों पर संक्षिप्त किंतु तथ्यपूर्ण निबंधों का संकलन रहता है। यह संसार के समस्त सिद्धांतों की पाठ्यसामग्री है। विश्वकोश अंग्रेजी शब्द "इनसाइक्लोपीडिया" का समानार्थी है, जो ग्रीक शब्द इनसाइक्लियॉस (एन .

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विश्वविद्यालय

विश्वविद्यालय (युनिवर्सिटी) वह संस्था है जिसमें सभी प्रकार की विद्याओं की उच्च कोटि की शिक्षा दी जाती हो, परीक्षा ली जाती हो तथा लोगों को विद्या संबंधी उपाधियाँ आदि प्रदान की जाती हों। इसके अंतर्गत विश्वविद्यालय के मैदान, भवन, प्रभाग, तथा विद्यार्थियों का संगठन आदि भी सम्मिलित हैं। .

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विष्णु गोविंद जोग

पंडित विष्णु गोविंद जोग को सन १९८३ में भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये पश्चिम बंगाल से हैं। श्रेणी:१९८३ पद्म भूषण.

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विजय तेंडुलकर

विजय तेंडुलकर विजय तेंडुलकर (६ जनवरी १९२८ - १९ मई २००८) प्रसिद्ध मराठी नाटककार, लेखक, निबंधकार, फिल्म व टीवी पठकथालेखक, राजनैतिक पत्रकार और सामाजिक टीपकार थे। भारतीय नाट्य व साहित्य जगत में उनका उच्च स्थान रहा है। वे सिनेमा और टेलीविजन की दुनिया में पटकथा लेखक के रूप में भी पहचाने जाते हैं। .

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विज्ञान के नियम

उन भौतिक नियमों को विज्ञान के नियम कहा जाता है जो सार्वत्रिक (universal) समझे जाते हैं तथा जो भौतिक जगत के अपरिवर्तनशील तथ्य हैं। किन्तु फिर भी, यदि कोई नया तथ्य या साक्ष्य मिलता है जो इस नियम के विरुद्ध हो तो विज्ञान के नियम असत्य सिद्ध हो सकते हैं। "नियम", परिकल्पना (hypotheses), सिद्धान्त (theories), अभिगृहीत (postulates), प्रिंसिपल (principle) आदि से इस मामले में अलग है कि नियम विश्लेषणात्मक कथन (analytic statement) होता है जिसमें प्राय: प्रयोग द्वारा कोई नियतांक प्राप्त किया गया होता है। किसी सिद्धान्त में कई नियम हो सकते हैं या वह सिद्धान्त किसी नियम से इंगित होता हो सकता है। .

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वक्रोक्ति सिद्धान्त

वक्रोक्ति दो शब्दों 'वक्र' और 'उक्ति' की संधि से निर्मित शब्द है। इसका शाब्दिक अर्थ है- ऐसी उक्ति जो सामान्य से अलग हो। भामह ने वक्रोक्ति को एक अलंकार माना था। उनके परवर्ती कुंतक ने वक्रोक्ति को एक संपूर्ण सिद्धांत के रूप में विकसित कर काव्य के समस्त अंगों को इसमें समाविष्ट कर लिया। इसलिए कुंतक को वक्रोक्ति संप्रदाय का प्रवर्तक आचार्य माना जाता है। .

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वृंदावनलाल वर्मा

वृन्दावनलाल वर्मा (०९ जनवरी, १८८९ - २३ फरवरी, १९६९) हिन्दी नाटककार तथा उपन्यासकार थे। हिन्दी उपन्यास के विकास में उनका योगदान महत्त्वपूर्ण है। उन्होंने एक तरफ प्रेमचंद की सामाजिक परंपरा को आगे बढ़ाया है तो दूसरी तरफ हिन्दी में ऐतिहासिक उपन्यास की धारा को उत्कर्ष तक पहुँचाया है। इतिहास, कला, पुरातत्व, मनोविज्ञान, मूर्तिकला और चित्रकला में भी इनकी विशेष रुचि रही। 'अपनी कहानी' में आपने अपने संघर्षमय जीवन की गाथा कही है। .

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वैद्यनाथन गणपति स्थपति

वैद्यनाथन गणपति स्थपति को सन २००९ में भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये तमिलनाडु राज्य से हैं। .

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वैद्युत तथा एलेक्ट्रानिक मापक यंत्र

नीचे वैद्युत तथा एलेक्ट्रॉनिक मापक यंत्रों की सूची दी गयी है: श्रेणी:मापन उपकरण श्रेणी:विद्युत उपकरण श्रेणी:चित्र जोड़ें.

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वेमपति चिन्ना सत्यम

वेमपति चिन्ना सत्यम को कला के क्षेत्र में सन १९९८ में भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये तमिलनाडु से हैं। १९९८ पद्म भूषण श्रेणी:१९९८ पद्म भूषण stub.

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वॅस्टर्न (शैली)

१९५६ में निर्मित वॅस्टर्न फ़िल्म 'द सरचर्स' में मशहूर अभिनेता जॉन वेन वॅस्टर्न (अंग्रेज़ी: Western), जिसका हिन्दी में अर्थ 'पश्चिमी' है, कला की एक शैली या विधा है, जो अक्सर रेडियो, टेलीविज़न, सिनेमा, साहित्य सहित अनेक रूपों में अपनायी जाती है। वॅस्टर्न शैली की कहानियां अक्सर उन्नीसवीं सदी के अंतिम वर्षों में संयुक्त राज्य अमेरिका के पश्चिमी भाग के माहौल पर आधारित होती हैं। .

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वी दुरैस्वामी अयंगार

वी दुरैस्वामी अयंगार को सन १९८३ में भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये कर्नाटक से हैं। श्रेणी:१९८३ पद्म भूषण श्रेणी:कर्नाटक के लोग.

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वी पी धनंजय

वी पी धनंजय को सन २००९ में भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये तमिलनाडु राज्य से हैं। .

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खजुराहो

खजुराहो भारत के मध्य प्रदेश प्रान्त में स्थित एक प्रमुख शहर है जो अपने प्राचीन एवं मध्यकालीन मंदिरों के लिये विश्वविख्यात है। यह मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित है। खजुराहो को प्राचीन काल में खजूरपुरा और खजूर वाहिका के नाम से भी जाना जाता था। यहां बहुत बड़ी संख्या में प्राचीन हिन्दू और जैन मंदिर हैं। मंदिरों का शहर खजुराहो पूरे विश्व में मुड़े हुए पत्थरों से निर्मित मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। खजुराहो को इसके अलंकृत मंदिरों की वजह से जाना जाता है जो कि देश के सर्वोत्कृष्ठ मध्यकालीन स्मारक हैं। भारत के अलावा दुनिया भर के आगन्तुक और पर्यटक प्रेम के इस अप्रतिम सौंदर्य के प्रतीक को देखने के लिए निरंतर आते रहते है। हिन्दू कला और संस्कृति को शिल्पियों ने इस शहर के पत्थरों पर मध्यकाल में उत्कीर्ण किया था। संभोग की विभिन्न कलाओं को इन मंदिरों में बेहद खूबसूरती के उभारा गया है। .

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खेल

बचपन का खेल.एसोसिएशन फुटबॉल, ऊपर दिखाया गया है, एक टीम खेल है जो सामाजिक कार्यों को भी प्रदान करता है। खेल, कई नियमों एवं रिवाजों द्वारा संचालित होने वाली एक प्रतियोगी गतिविधि है। खेल सामान्य अर्थ में उन गतिविधियों को कहा जाता है, जहाँ प्रतियोगी की शारीरिक क्षमता खेल के परिणाम (जीत या हार) का एकमात्र अथवा प्राथमिक निर्धारक होती है, लेकिन यह शब्द दिमागी खेल (कुछ कार्ड खेलों और बोर्ड खेलों का सामान्य नाम, जिनमें भाग्य का तत्व बहुत थोड़ा या नहीं के बराबर होता है) और मशीनी खेल जैसी गतिविधियों के लिए भी प्रयोग किया जाता है, जिसमें मानसिक तीक्ष्णता एवं उपकरण संबंधी गुणवत्ता बड़े तत्व होते हैं। सामान्यतः खेल को एक संगठित, प्रतिस्पर्धात्मक और प्रशिक्षित शारीरिक गतिविधि के रूप में परिभाषित किया गया है, जिसमें प्रतिबद्धता तथा निष्पक्षता होती है। कुछ देखे जाने वाले खेल इस तरह के गेम से अलग होते है, क्योंकि खेल में उच्च संगठनात्मक स्तर एवं लाभ (जरूरी नहीं कि वह मौद्रिक ही हो) शामिल होता है। उच्चतम स्तर पर अधिकतर खेलों का सही विवरण रखा जाता है और साथ ही उनका अद्यतन भी किया जाता है, जबकि खेल खबरों में विफलताओं और उपलब्धियों की व्यापक रूप से घोषणा की जाती है। जिन खेलों का निर्णय निजी पसंद के आधार पर किया जाता है, वे सौंदर्य प्रतियोगिताओं और शरीर सौष्ठव कार्यक्रमों जैसे अन्य निर्णयमूलक गतिविधियों से अलग होते हैं, खेल की गतिविधि के प्रदर्शन का प्राथमिक केंद्र मूल्यांकन होता है, न कि प्रतियोगी की शारीरिक विशेषता। (हालाँकि दोनों गतिविधियों में "प्रस्तुति" या "उपस्थिति" भी निर्णायक हो सकती हैं)। खेल अक्सर केवल मनोरंजन या इसके पीछे आम तथ्य को उजागर करता है कि लोगों को शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए व्यायाम करने की आवश्यकता है। हालाँकि वे हमेशा सफल नहीं होते है। खेल प्रतियोगियों से खेल भावना का प्रदर्शन करने और विरोधियों एवं अधिकारियों को सम्मान देने व हारने पर विजेता को बधाई देने जैसे व्यवहार के मानदंड के पालन की उम्मीद की जाती है। .

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गायत्री चक्रवर्ती स्पीवाक

गायत्री चक्रवर्ती स्पीवाक (जन्म २४ फ़रवरी १९४२) एक भारतीय साहित्यिक विचारक, दार्शनिक और कोलंबिया विश्वविद्यालय में विश्वविद्यालय प्राध्यापिका है, जहां ये तुलनात्मक साहित्य और समाज संस्थान की एक संस्थापक सदस्य है। वर्ष २०१२ मे उन्हे कला और दर्शनशास्र में क्योटो पुरस्कार से सम्मानित किया गया। २०१३ में उन्हें भारत गणराज्य के द्वारा दिए गए तीसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म विभूषण से नवाज़ा गया। स्पीवाक उनकी समकालीन सांस्कृतिक और "उपनिवेशवाद की विरासत" को चुनौती देने वाली आलोचनात्मक सिद्धांतों के लिए प्रसिद्ध है। ये पाठकों के साहित्य और संस्कृति के साथ संलग्न पर भी चिंतन करना चाहती है। ये ज्यादातर उन लोगों के सांस्कृतिक ग्रंथों पर अपना ध्यान केंद्रित करती है जो प्रमुख पश्चिमी संस्कृति द्वारा अधिकारहीन किये गए हो: श्रमिक वर्ग, औरत, नए आप्रवासी सबाल्टर्न के अन्य स्थान। .

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गार्गी महाविद्यालय दिल्ली

गार्गी महाविद्यालय दिल्ली स्थित एक महिला महाविद्यालय है। यह दिल्ली विश्वविद्यालय से सम्बद्ध है। इसकी स्थापना 967 में हुई थी। गार्गी महाविद्यालय कला, मानविकी, वाणिज्य, विज्ञान तथा शिक्षा में शिक्षा प्रदान करता है। .

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गिरिजा देवी

गिरिजा देवी (8 मई 1929 - 24 अक्टूबर 2017) सेनिया और बनारस घरानों की एक प्रसिद्ध भारतीय शास्त्रीय गायिका थीं। वे शास्त्रीय और उप-शास्त्रीय संगीत का गायन करतीं थीं। ठुमरी गायन को परिष्कृत करने तथा इसे लोकप्रिय बनाने में इनका बहुत बड़ा योगदान है। गिरिजा देवी को सन २०१६ में पद्म विभूषण एवं १९८९ में भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। .

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गुलाम मुस्तफ़ा खान

गुलाम मुस्तफ़ा खान को भारत सरकार द्वारा सन २००६ में कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये महाराष्ट्र से हैं। .

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गुलज़ार (गीतकार)

ग़ुलज़ार नाम से प्रसिद्ध सम्पूर्ण सिंह कालरा (जन्म-१८ अगस्त १९३६) हिन्दी फिल्मों के एक प्रसिद्ध गीतकार हैं। इसके अतिरिक्त वे एक कवि, पटकथा लेखक, फ़िल्म निर्देशक तथा नाटककार हैं। उनकी रचनाए मुख्यतः हिन्दी, उर्दू तथा पंजाबी में हैं, परन्तु ब्रज भाषा, खङी बोली, मारवाड़ी और हरियाणवी में भी इन्होने रचनाये की। गुलजार को वर्ष २००२ में सहित्य अकादमी पुरस्कार और वर्ष २००४ में भारत सरकार द्वारा दिया जाने वाला तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्ष २००९ में डैनी बॉयल निर्देशित फिल्म स्लम्डाग मिलियनेयर में उनके द्वारा लिखे गीत जय हो के लिये उन्हे सर्वश्रेष्ठ गीत का ऑस्कर पुरस्कार पुरस्कार मिल चुका है। इसी गीत के लिये उन्हे ग्रैमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। .

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गोविन्द चन्द्र पाण्डेय

डॉ॰ गोविन्द चन्द्र पाण्डेय (30 जुलाई 1923 - 21 मई 2011) संस्कृत, लेटिन और हिब्रू आदि अनेक भाषाओँ के असाधारण विद्वान, कई पुस्तकों के यशस्वी लेखक, हिन्दी कवि, हिन्दुस्तानी अकादमी इलाहबाद के सदस्य राजस्थान विश्वविद्यालय के कुलपति और सन २०१० में पद्मश्री सम्मान प्राप्त, बीसवीं सदी के जाने-माने चिन्तक, इतिहासवेत्ता, सौन्दर्यशास्त्री और संस्कृतज्ञ थे। .

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ओड़िशा का इतिहास

प्राचीन काल से मध्यकाल तक ओडिशा राज्य को कलिंग, उत्कल, उत्करात, ओड्र, ओद्र, ओड्रदेश, ओड, ओड्रराष्ट्र, त्रिकलिंग, दक्षिण कोशल, कंगोद, तोषाली, छेदि तथा मत्स आदि नामों से जाना जाता था। परन्तु इनमें से कोई भी नाम सम्पूर्ण ओडिशा को इंगित नहीं करता था। अपितु यह नाम समय-समय पर ओडिशा राज्य के कुछ भाग को ही प्रस्तुत करते थे। वर्तमान नाम ओडिशा से पूर्व इस राज्य को मध्यकाल से 'उड़ीसा' नाम से जाना जाता था, जिसे अधिकारिक रूप से 04 नवम्बर, 2011 को 'ओडिशा' नाम में परिवर्तित कर दिया गया। ओडिशा नाम की उत्पत्ति संस्कृत के शब्द 'ओड्र' से हुई है। इस राज्य की स्थापना भागीरथ वंश के राजा ओड ने की थी, जिन्होने अपने नाम के आधार पर नवीन ओड-वंश व ओड्र राज्य की स्थापना की। समय विचरण के साथ तीसरी सदी ई०पू० से ओड्र राज्य पर महामेघवाहन वंश, माठर वंश, नल वंश, विग्रह एवं मुदगल वंश, शैलोदभव वंश, भौमकर वंश, नंदोद्भव वंश, सोम वंश, गंग वंश व सूर्य वंश आदि सल्तनतों का आधिपत्य भी रहा। प्राचीन काल में ओडिशा राज्य का वृहद भाग कलिंग नाम से जाना जाता था। सम्राट अशोक ने 261 ई०पू० कलिंग पर चढ़ाई कर विजय प्राप्त की। कर्मकाण्ड से क्षुब्द हो सम्राट अशोक ने युद्ध त्यागकर बौद्ध मत को अपनाया व उनका प्रचार व प्रसार किया। बौद्ध धर्म के साथ ही सम्राट अशोक ने विभिन्न स्थानों पर शिलालेख गुदवाये तथा धौली व जगौदा गुफाओं (ओडिशा) में धार्मिक सिद्धान्तों से सम्बन्धित लेखों को गुदवाया। सम्राट अशोक, कला के माध्यम से बौद्ध धर्म का प्रचार करना चाहते थे इसलिए सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म को और अधिक विकसित करने हेतु ललितगिरि, उदयगिरि, रत्नागिरि व लगुन्डी (ओडिशा) में बोधिसत्व व अवलोकेतेश्वर की मूर्तियाँ बहुतायत में बनवायीं। 232 ई०पू० सम्राट अशोक की मृत्यु के पश्चात् कुछ समय तक मौर्य साम्राज्य स्थापित रहा परन्तु 185 ई०पू० से कलिंग पर चेदि वंश का आधिपत्य हो गया था। चेदि वंश के तृतीय शासक राजा खारवेल 49 ई० में राजगद्दी पर बैठा तथा अपने शासन काल में जैन धर्म को विभिन्न माध्यमों से विस्तृत किया, जिसमें से एक ओडिशा की उदयगिरि व खण्डगिरि गुफाऐं भी हैं। इसमें जैन धर्म से सम्बन्धित मूर्तियाँ व शिलालेख प्राप्त हुए हैं। चेदि वंश के पश्चात् ओडिशा (कलिंग) पर सातवाहन राजाओं ने राज्य किया। 498 ई० में माठर वंश ने कलिंग पर अपना राज्य कर लिया था। माठर वंश के बाद 500 ई० में नल वंश का शासन आरम्भ हो गया। नल वंश के दौरान भगवान विष्णु को अधिक पूजा जाता था इसलिए नल वंश के राजा व विष्णुपूजक स्कन्दवर्मन ने ओडिशा में पोडागोड़ा स्थान पर विष्णुविहार का निर्माण करवाया। नल वंश के बाद विग्रह एवं मुदगल वंश, शैलोद्भव वंश और भौमकर वंश ने कलिंग पर राज्य किया। भौमकर वंश के सम्राट शिवाकर देव द्वितीय की रानी मोहिनी देवी ने भुवनेश्वर में मोहिनी मन्दिर का निर्माण करवाया। वहीं शिवाकर देव द्वितीय के भाई शान्तिकर प्रथम के शासन काल में उदयगिरी-खण्डगिरी पहाड़ियों पर स्थित गणेश गुफा (उदयगिरी) को पुनः निर्मित कराया गया तथा साथ ही धौलिगिरी पहाड़ियों पर अर्द्यकवर्ती मठ (बौद्ध मठ) को निर्मित करवाया। यही नहीं, राजा शान्तिकर प्रथम की रानी हीरा महादेवी द्वारा 8वीं ई० हीरापुर नामक स्थान पर चौंसठ योगनियों का मन्दिर निर्मित करवाया गया। 6वीं-7वीं शती कलिंग राज्य में स्थापत्य कला के लिए उत्कृष्ट मानी गयी। चूँकि इस सदी के दौरान राजाओं ने समय-समय पर स्वर्णाजलेश्वर, रामेश्वर, लक्ष्मणेश्वर, भरतेश्वर व शत्रुघनेश्वर मन्दिरों (6वीं सदी) व परशुरामेश्वर (7वीं सदी) में निर्माण करवाया। मध्यकाल के प्रारम्भ होने से कलिंग पर सोमवंशी राजा महाशिव गुप्त ययाति द्वितीय सन् 931 ई० में गद्दी पर बैठा तथा कलिंग के इतिहास को गौरवमयी बनाने हेतु ओडिशा में भगवान जगन्नाथ के मुक्तेश्वर, सिद्धेश्वर, वरूणेश्वर, केदारेश्वर, वेताल, सिसरेश्वर, मारकण्डेश्वर, बराही व खिच्चाकेश्वरी आदि मन्दिरों सहित कुल 38 मन्दिरों का निर्माण करवाया। 15वीं शती के अन्त तक जो गंग वंश हल्का पड़ने लगा था उसने सन् 1038 ई० में सोमवंशीयों को हराकर पुनः कलिंग पर वर्चस्व स्थापित कर लिया तथा 11वीं शती में लिंगराज मन्दिर, राजारानी मन्दिर, ब्रह्मेश्वर, लोकनाथ व गुन्डिचा सहित कई छोटे व बड़े मन्दिरों का निर्माण करवाया। गंग वंश ने तीन शताब्दियों तक कलिंग पर अपना राज्य किया तथा राजकाल के दौरान 12वीं-13वीं शती में भास्करेश्वर, मेघेश्वर, यमेश्वर, कोटी तीर्थेश्वर, सारी देउल, अनन्त वासुदेव, चित्रकर्णी, निआली माधव, सोभनेश्वर, दक्क्षा-प्रजापति, सोमनाथ, जगन्नाथ, सूर्य (काष्ठ मन्दिर) बिराजा आदि मन्दिरों को निर्मित करवाया जो कि वास्तव में कलिंग के स्थापत्य इतिहास में अहम भूमिका का निर्वाह करते हैं। गंग वंश के शासन काल पश्चात् 1361 ई० में तुगलक सुल्तान फिरोजशाह तुगलक ने कलिंग पर राज्य किया। यह वह दौर था जब कलिंग में कला का वर्चस्व कम होते-होते लगभग समाप्त ही हो चुका था। चूँकि तुगलक शासक कला-विरोधी रहे इसलिए किसी भी प्रकार के मन्दिर या मठ का निर्माण नहीं हुअा। 18वीं शती के आधुनिक काल में ईस्ट इण्डिया कम्पनी का सम्पूर्ण भारत पर अधिकार हो गया था परन्तु 20वीं शती के मध्य में अंग्रेजों के निगमन से भारत देश स्वतन्त्र हुआ। जिसके फलस्वरूप सम्पूर्ण भारत कई राज्यों में विभक्त हो गया, जिसमें से भारत के पूर्व में स्थित ओडिशा (पूर्व कलिंग) भी एक राज्य बना। .

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आदुसुमल्ली राधाकृष्णन

आदुसुमल्ली राधाकृष्णन भारत सरकार ने १९९२ में कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया था। ये आंध्र प्रदेश से हैं। श्रेणी:१९९२ पद्म भूषण.

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आधुनिकता

आधुनिकता शब्द आमतौर पर उत्तर-पारंपरिक, उत्तर-मध्ययुगीन ऐतिहासिक अवधि को संदर्भित करता है, जो सामंतवाद (भू-वितरणवाद) से पूंजीवाद, औद्योगीकरण धर्मनिरपेक्षवाद, युक्तिकरण, राष्ट्र-राज्य और उसकी घटक संस्थाओं तथा निगरानी के प्रकारों की ओर कदम बढ़ाने से चिह्नित होता है (बार्कर 2005, 444).

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आधुनिकतावाद

हंस होफ्मन, "द गेट", 1959–1960, संग्रह: सोलोमन आर. गुगेन्हीम म्यूज़ियम होफ्मन केवल एक कलाकार के रूप में ही नहीं, बल्कि एक कला शिक्षक के रूप में भी मशहूर थे और वे अपने स्वदेश जर्मनी के साथ-साथ बाद में अमेरिका के भी एक आधुनिकतावादी सिद्धांतकार थे। 1930 के दशक के दौरान न्यूयॉर्क एवं कैलिफोर्निया में उन्होंने अमेरिकी कलाकारों की एक नई पीढ़ी के लिए आधुनिकतावाद एवं आधुनिकतावादी सिद्धांतों की शुरुआत की.ग्रीनविच गांव एवं मैसाचुसेट्स के प्रोविंसटाउन में स्थित अपने कला विद्यालयों में अपने शिक्षण एवं व्याख्यान के माध्यम से उन्होंने अमेरिका में आधुनिकतावाद के क्षेत्र का विस्तार किया।हंस होफ्मन की जीवनी, 30 जनवरी 2009 को उद्धृत आधुनिकतावाद, अपनी व्यापक परिभाषा में, आधुनिक सोच, चरित्र, या प्रथा है अधिक विशेष रूप से, यह शब्द उन्नीसवीं सदी के अंत और बीसवीं सदी के आरम्भ में मूल रूप से पश्चिमी समाज में व्यापक पैमाने पर और सुदूर परिवर्तनों से उत्पन्न होने वाली सांस्कृतिक प्रवृत्तियों के एक समूह एवं सम्बद्ध सांस्कृतिक आन्दोलनों की एक सरणी दोनों का वर्णन करता है। यह शब्द अपने भीतर उन लोगों की गतिविधियों और उत्पादन को समाहित करता है जो एक उभरते सम्पूर्ण औद्योगीकृत विश्व की नवीन आर्थिक, सामाजिक एवं राजनीतिक स्थितियों में पुराने होते जा रहे कला, वास्तुकला, साहित्य, धार्मिक विश्वास, सामाजिक संगठन और दैनिक जीवन के "पारंपरिक" रूपों को महसूस करते थे। आधुनिकतावाद ने ज्ञानोदय की सोच की विलंबकारी निश्चितता को और एक करुणामय, सर्वशक्तिशाली निर्माता के अस्तित्व को भी मानने से अस्वीकार कर दिया.

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आनन्द

आनंद उस व्यापक मानसिक स्थितियों की व्याख्या करता है जिसका अनुभव मनुष्य और अन्य जंतु सकारात्मक, मनोरंजक और तलाश योग्य मानसिक स्थिति के रूप में करते हैं। इसमें विशिष्ट मानसिक स्थिति जैसे सुख, मनोरंजन, ख़ुशी, परमानंद और उल्लासोन्माद भी शामिल है। मनोविज्ञान में, आनंद सिद्धांत के तहत आनंद का वर्णन सकारात्मक पुर्नभरण क्रियाविधि के रूप में किया गया है जो जीव को भविष्य में ठीक वैसी स्थिति निर्माण करने के लिए उत्साहित करती है जिसे उसने अभी आनंदमय अनुभव किया। इस सिद्धांत के अनुसार, इस प्रकार जीव उन स्थितियों की पुनरावृत्ति नहीं करने के लिए प्रोत्साहित होते हैं जिससे उन्हें भूतकाल में किसी प्रकार का संताप हुआ हो.

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आनन्‍द केंटिश कुमारस्‍वामी

आनन्द कुमारस्वामी आनन्‍द कुमारस्‍वामी (तमिल:ஆனந்த குமாரசுவாமி; १८७७-१९४७) श्री लंका के सुविख्यात कलामर्मज्ञ एवं भारत-चिन्तक तमिल थे। .

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आयुर्वेद

आयुर्वेद के देवता '''भगवान धन्वन्तरि''' आयुर्वेद (आयुः + वेद .

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आर्थर शोपेनहावर

आर्थर शोपेनहावर आर्थर शोपेनहावर (Arthur Schopenhauer) (२२ फ़रवरी १७८८ - २१ सितम्बर १८६०) जर्मनी के प्रसिद्ध दार्शनिक थे। वे अपने 'नास्तिक निराशावाद' के दर्शन के लिये प्रसिद्ध हैं। उन्होने २५ वर्ष की आयु में अपना शोधपत्र पर्याप्त तर्क के चार मूल (On the Fourfold Root of the Principle of Sufficient Reason) प्रस्तुत किया जिसमें इस बात की मीमांसा की गयी थी कि क्या केवल तर्क (reason) संसार के गूढ रहस्यों से पर्दा उठा सकता है? बौद्ध दर्शन की भांति शोपेनहावर भी कि इच्च्हाओं (will) के शमन की आवश्यकता पर बल दिया है। .

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आकर ज्ञान

आकर ज्ञान विभिन्न प्रकार की खानों की विद्या का ज्ञान रखना एक कला है। यह कला चौंसठ कलाओं में से एक महत्त्वपूर्ण कला है। श्रेणी:ज्ञान.

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इटली का इतिहास

प्राचीन रोम की प्रतीक मादा भेड़िया इटली का इतिहास ईसा पूर्व ९वीं शताब्दी से आरम्भ होता है। इसी समय वर्तमान इटली के केन्द्रीय भाग में इतालवी जनजातियों के अस्तित्व के प्रमाण मिलते हैं। भाषाई रूप से वे मुख्यतः तीन भाषाएँ बोलते थे- ओस्कान (Oscan), अम्ब्रिआन (Umbrian) तथा लातिन (Latin)। कालान्तर में ३५० ईसापूर्व जब रोम शक्तिशाली नगर-राज्य के रूप में उभरा तो लातिन संस्कृति का वर्चस्व स्थापित होता गया। रोमन पूर्व काल में ८वीं शती ईसापूर्व वृहत यूनान (Magna Graecia) नामक सभ्यता भी थी जब यूनानी लोग इटली के दक्षिणी भागों में बसने लगे थे। बाद में रोमन साम्राज्य का पूरे पश्चिमी योरप तथा भूमध्य क्षेत्र पर कई शताब्दियों तक वर्चस्व रहा। ४७६ ई के आसपास जब रोमन साम्राज्य का पतन हुआ तो इटली लगभग एक हजार वर्षों तक छोटे-छोटे नगर-राज्याँ के रूप में बिखरा रहा और अन्ततः विभिन्न विदेशी शक्तियों के अधीन आ गया। इटली के कुछ भागों पर स्पेनियों का अधिकार हो गया, कुछ पर आस्ट्रियाई तथा दूसरे विश्वयुद्ध में इटली ने धुरीराष्ट्रों का साथ दिया। मित्रराष्ट्रों की विजय के पश्चात् इटली से फासिस्त सत्ता का अंत हुआ। .

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इतालवी एकीकरण

इतालवी एकीकरण को दर्शाता हुआ नक़्शा, जिसमें विभिन्न राज्यों के संगठित इतालवी साम्राज्य में सम्मिलित होने के वर्ष दिए गए हैं इतालवी एकीकरण, जिसे इतालवी भाषा में इल रिसोरजिमेंतो (Il Risorgimento, अर्थ: पुनरुत्थान) कहते हैं, १९वीं सदी में इटली में एक राजनैतिक और सामाजिक अभियान था जिसने इतालवी प्रायद्वीप के विभिन्न राज्यों को संगठित करके एक इतालवी राष्ट्र बना दिया। इस अभियान की शुरुआत और अंत की तिथियों पर इतिहासकारों में विवाद है लेकिन अधिकतर के मत में यह सन् १८१५ में इटली पर नेपोलियन बोनापार्ट के राज के अंत पर होने वाले वियना सम्मलेन के साथ आरम्भ हुआ और १८७० में राजा वित्तोरियो इमानुएले की सेनाओं द्वारा रोम पर क़ब्ज़ा होने तक चला।, Jeffrey Thompson Schnapp, Olivia E. Sears, Maria G. Stampino, pp.

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इब्राहिम अल्काज़ी

इब्राहिम अल्काज़ी को भारत सरकार द्वारा सन १९९१ में कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया था। ये दिल्ली से हैं। श्रेणी:१९९१ पद्म भूषण.

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इमेज स्कैनर

इमेज स्कैनर. कम्प्यूटर जगत में, एक स्कैनर एक ऐसा उपकरण है, जो चित्रों, मुद्रित पाठ्य-सामग्री, हस्तलेखन या किसी वस्तु को प्रकाशीय रूप से स्कैन करता है और इसे एक डिजिटल चित्र में रूपांतरित करता है। कार्यालयों में पाये जाने वाले आम उदाहरणों में विभिन्न प्रकार के डेस्कटॉप (या फ्लैटबेड) स्कैनर शामिल हैं, जिनमें दस्तावेज को स्कैनिंग के लिये कांच की एक सतह पर रखा जाता है। हैण्ड-हेल्ड स्कैनर्स (Hand-held scanners), जिनमें उपकरण को हाथ से हिलाया जाता है, का विकास पाठ्य-सामाग्री को स्कैन करनेवाली "छड़ियों" से लेकर औद्योगिक डिज़ाइन, रिवर्स इंजीनियरिंग, परीक्षण और मापन, ऑर्थोटिक्स (Orthotics), खेलों और अन्य अनुप्रयोगों के लिये प्रयुक्त 3D स्कैनर्स तक हुआ है। यांत्रिक रूप से संचालित होने वाले स्कैनर्स, जो दस्तावेज को घुमाते हैं, का प्रयोग सामान्यतः बड़े-प्रारूप वाले दस्तावेजों के लिये किया जाता है, जहां फ्लैट-बेड का प्रयोग अव्यावहारिक होगा। आधुनिक स्कैनर्स में चित्र संवेदक के रूप में विशिष्ट तौर पर एक चार्ज-कपल्ड डिवाइस (charge-coupled device) (CCD) या एक कॉन्टैक्ट इमेज सेंसर (Contact Image Sensor) (CIS) का प्रयोग किया जाता है, जबकि पुराने ड्रम स्कैनर चित्र संवेदक के रूप में एक फोटोमल्टीप्लायर ट्यूब (Photomultiplier Tube) का प्रयोग करते हैं। एक रोटरी स्कैनर, जिसका प्रयोग उच्च-गति से दस्तावेज की स्कैनिंग करने के लिये किया जाता है, ड्रम स्कैनर का एक अन्य प्रकार है, जिसमें फोटोमल्टिप्लायर के स्थान पर एक CCD की एक श्रृंखला का प्रयोग होता है। प्लैनेटरी स्कैनर, जो पुस्तकों और दस्तावेजों के चित्र लेते हैं, तथा 3D स्कैनर, जिनका प्रयोग वस्तुओं के त्रि-आयामी मॉडल बनाने के लिये किया जाता है, स्कैनर्स के अन्य प्रकार हैं। स्कैनर की एक अन्य श्रेणी में डिजिटल कैमरा स्कैनर शामिल हैं, जो रेप्रोग्राफिक (Reprographic) कैमरा की संकल्पना पर आधारित होते हैं। लगातार बढ़ते रेज़ॉल्युशन और कम्पन-प्रतिरोध जैसी नई विशेषताओं के कारण, डिजिटल कैमरे सामान्य स्कैनर्स के एक आकर्षक विकल्प बन गये हैं। यद्यपि पारंपरिक स्कैनर्स की तुलना में अभी भी इनमें कुछ कमियां (जैसे विरूपण, परावर्तन, छाया, निम्न कॉन्ट्रास्ट) उपस्थित हैं, तथापि, डिजिटल कैमरे कुछ लाभ भी प्रदान करते हैं, जैसे गति, सुवाह्यता और किसी पुस्तक के जोड़ (Spine) को हानि पहुंचाए बिना मोटे दस्तावेजों का सौम्य अंकीकरण करना। नई प्रौद्योगिकियां 3D स्कैनर्स को डिजिटल कैमरों के साथ संयोजित करके वस्तुओं के पूर्ण-रंगीन, प्रकाश-यथार्थवादी 3D प्रतिमान निर्मित करती हैं। जैव-चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में, DNA सूक्ष्म-श्रृंखलाओं की पहचान के लिये प्रयुक्त उपकरणों को भी स्कैनर कहा जाता है। ये स्कैनर सूक्ष्मदर्शियों के समान उच्च-रेज़ॉल्युशन (1 1 µm/पिक्सेल तक) वाले सिस्टम होते हैं। पहचान का कार्य CCD या एक फोटोमल्टिप्लायर ट्यूब (PMT) के माध्यम से किया जाता है। .

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इस्माइल मर्चेंट

इस्माइल मर्चेंट को सन २००२ में भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये महाराष्ट्र से हैं। श्रेणी:पद्म भूषण.

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इस्लामी संस्कृति

दुनिया भर के मुसलमानों में पाए जाने वाले आम ऐतिहासिक रीति रवाजों को व्यक्त करने वाली शब्द ही इस्लामी संस्कृति 'है। इस्लामी संस्कृति, संयुक्त रूप से अरबी, ईरानी, तुर्की, मंगोलिया, भारत, मलाईयाई और इंडोनेशियन संस्कृतियों का मरकि है। .

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इज़राइल संग्रहालय

इसराइल संग्रहालय, यरूशलेम (हिब्रू | מוזיאון ישראל, ירושלים या "Muze'on Yisrael, Yerushalayim") की स्थापना 1965 में इसराइल के राष्ट्रीय संग्रहालय के रूप में हुई थी। यह येरुसलम के गीवत राम नामक स्थान पर एक पहाड़ी के ऊपर स्थित है। यहीं पास में बाइबल लंड्स संग्रहालय, नेसेट (Knesset), इजराइल का सर्वोच्च न्यायालय तथा हिब्रू विश्वविद्यालय भी स्थित हैं। संग्रहालय की स्थापना के पीछे यरूशलेम के महापौर टेड्डी कोलेक का प्रमुख हाथ था। यह विश्व के प्रमुख कला एवं पुरातत्व संग्रहालयों में से एक है। संग्रहालय में बाइबिल पुरातत्व, जूदाईका, नृवंशविज्ञान, कला अफ्रीका, उत्तरी और दक्षिण अमेरिका, ओशिनिया और सुदूर पूर्व, दुर्लभ पांडुलिपियों से, कलाकृतियों, प्राचीन ग्लास और मूर्तिकला का व्यापक संग्रह है। संग्रहालय के आधार पर एक विशिष्ट रूप से डिजाइन निर्माण,, घरों, मृत सागर स्क्रॉल और कलाकृतियों पर खोज Masada। संग्रहालय में कोई 500,000 वस्तुओं शामिल हैं जिनमें से 7,000 वस्तुएं आनलाइन देखने के लिये भी उपलन्ध हैं। .

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कटिंगरी कृष्ण हेब्बर

कटिंगरी कृष्ण हेब्बर को सन १९८९ में भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये महाराष्ट्र से हैं। श्रेणी:१९८९ पद्म भूषण.

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कदूर वेंकटलक्षमण

कदूर वेंकटलक्षमण भारत सरकार ने १९९२ में कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया था। ये कर्नाटक से हैं। श्रेणी:१९९२ पद्म भूषण श्रेणी:कर्नाटक के लोग.

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कन्नड साहित्य सम्मेलन

कन्नड साहित्य सम्मेलन कन्नड साहित्यकारों, लेखकों तथा कननाडिगारु लोगों का सम्मेलन है। इसका लक्षय कन्नड भाषा, कन्नड साहित्य, कला, संगीत और संस्कृति का विकास करना है। इसका आरम्भ १९१५ में एच वी नान्जुनैया ने किया था। पहला सम्मेलन बंगलुरु में हुआ था। १९४८ तक इसका उद्घाटन किसी सुप्रसिद्ध कवि या लेखक द्वारा किया जाता था कि्न्तु १९४८ के बाद से कर्नाटक के मुख्यमंत्री इसका उद्घाटन करते हैं। इस सम्मेलन का आयोजन कन्नड साहित्य परिषद करती है। .

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कमला (तमिल)

कमला (तमिल) को कला के क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा सन १९७० में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये तमिलनाडु राज्य से हैं। श्रेणी:१९७० पद्म भूषण श्रेणी:1934 में जन्मे लोग.

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कर्दम

कर्दम ऋषि की उत्पत्ति सृष्टि की रचना के समय ब्रह्मा जी की छाया से हुई थी। ब्रह्मा जी ने उन्हें प्रजा में वृद्धि करने की आज्ञा दी। उनके आदेश का पालन करने के लिये कर्दम ऋषि ने स्वयंभुव मनु के द्वितीय कन्या देवहूति से विवाह कर नौ कन्याओं तथा एक पुत्र की उत्पत्ति की। कन्याओं के नाम कला, अनुसुइया, श्रद्धा, हविर्भू, गति, क्रिया, ख्याति, अरुन्धती और शान्ति थे तथा पुत्र का नाम कपिल था। कपिल के रूप में देवहूति के गर्भ से स्वयं भगवान विष्णु अवतरित हुये थे। श्रेणी:श्रीमद्भागवत.

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कला (बहुविकल्पी)

कोई विवरण नहीं।

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कला स्नातक

बैचलर ऑफ आर्ट, बी.ए. (baccalaureus artium, B.A.,BA,A.B., या AB) कला में एक शैक्षणिक उपाधि है।बैचलर ऑफ आर्ट एक स्नातक का विषय जो तीन या चार सालों में पूर्ण किया जाता है। इसमें कई विषय होते हैं - अंग्रेजी,विज्ञान,सामाजिक तथा इतिहास इत्यादि। इन देशों में 3 सालों का पाठ्यक्रम उपलब्ध है - यूरोपियन यूनियन, ऑस्ट्रेलिया, अल्बानिया, हर्जगोविनीया, बोसिना,भारत, न्यूज़ीलैण्ड, ईजराइल,आईलैण्ड,नार्वे,सिंगापुर,दक्षिण अफ्रिका, वेस्ट इंडिज़, स्विटर्जलैण्ड तथा कनाडा। इन देशों में 4 सालों का कोर्स उपलब्ध है - अफ़ग़ानिस्तान, लेबनान, अरमेनिया, यूनान, बांग्लादेश, अज़रबैजान, इजिप्ट, ईरान, जापान, नाईजीरिया, सर्बिया, पाकिस्तान, फ़िलीपिंस, थाईलैण्ड, रूस,आयरलैण्ड, ईराक,दक्षिण कोरिया, तुनुसिया, कुवैत तथा तुर्की। .

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कलानिधि नारायणन

कलानिधि नारायणन को भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में सन १९८५ में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये तमिलनाडु से हैं। श्रेणी:१९८५ पद्म भूषण.

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कलावाद

कलावाद 'कला कला के लिए' (Art for art's sake) मान्यता पर आधारित कला के प्रति एक दृष्टिकोणविशेष जिसे लेकर 19वीं शताब्दी के दौरान यूरोप में व्यापक वादविवाद छिड़ गया था। कलावाद को साहित्य एवं कला के क्षेत्र में उपयोगितावाद के विलोम के रूप में जाना जाता है। इस सिद्धांत का प्रतिपादन विक्टर कूजे ने 1818 में किया। इसके अनुसार कला का उद्देश्य किसी नैतिक या धार्मिक उद्देश्य की प्राप्ति नहीं बल्कि स्वंय अपने पूर्णता की तलाश है। कला सौन्दर्यानुभूति का वाहक है इसलिये इसे उपयोगिता की कसौटी पर नहीं परखा जाना चाहिये। समाज, नीति, धर्म, दर्शन आदि के नियमों का पालन कला की स्वच्छंद तथा स्वतः स्फूर्त अभिव्यक्ति में बाधक होते हैं। .

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कलाकृति

कलाकृति (work of art या artwork) ऐसी भौतिक वस्तु को कहते हैं जिनका कला या सौन्दर्य की दृष्टि से मूल्य हो। यह आमतौर पर मानव-कृत होती हैं। चित्रकला, शिल्पकला, आभूषण, आंतरिक डिज़ाइन की वस्तुएँ, इत्यादि सभी कलाकृति के उदाहरण हैं। .

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कल्कि आर क्रिष्णमूर्ति

कल्कि (तमिल:கல்கி), आर.क्रिष्णमूर्ति (९ सितंबर १८९९- ५ दिसंबर १९५४) का उपनाम था, जो एक प्रसिद्ध तमिल स्वतंत्रता सेनानी, सामाजिक कार्यकर्ता, उपन्यासकार, कहानीकार,व्यंग्यकार, पत्रकार, ठिठोलिया, कथानक-लेखक, यात्रा लेखक, कवि, फिल्म और संगीत समीक्षकार अथवा तमिलनाडु का कला विशेषज्ञ थे। उनका उपनाम अपनी पत्नी (कल्याणि) और अपना (क्रिष्णमूर्ति) नामों का प्रत्ययों से लिया गया है- जिससे हमे 'कल्कि' नाम मिलता है, हिन्दु भगवान विष्णु का दसवें और अंतिम अवतार। उनका लेखन मे १२० से भी अधिक छोटी कहानियाँ, १० लघु उपन्यास, ५ उपन्यास, तीन ऐतिहासिक रोमान्स,अनेक संपादकीय और राजनीतिक लेखन तथा सैकड़ो फिल्म और संगीत समीक्षाऍ शामिल है। .

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कारमल, इंडियाना

कार्मेल हैमिल्टन काउंटी, इंडियाना, संयुक्त राज्य अमेरिका में एक उपनगरीय शहर तुरंत इंडियानापोलिस के उत्तर में स्थित है। यह देश में सबसे तेजी से बढ़ते समुदायों में से एक हो गया है। 2012 में, कार्मेल बेस्ट सीएनएन मनी पत्रिका ने संयुक्त राज्य अमेरिका में रहने के लिए जगह का चयन किया गया। जनसंख्या 2014 में 85,927 अनुमान लगाया गया था अमेरिकी जनगणना ब्यूरो द्वारा, यह इंडियाना में पांचवां सबसे बड़ा शहर बन गया है। कार्मेल, इंडियाना .

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काला घोड़ा कला महोत्सव

काला घोड़ा कला महोत्सव, मुंबई में आयोजित होने वाला एक वार्षिक कला महोत्सव हैं.

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कांतिलाल हस्तीमल संचेती

तीजनबाई को सन २००३ में भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया था। ये छत्तीसगढ़ राज्य से हैं। संचेती, कांतिलाल हस्तीमल.

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किशोरी रविंद्र अमोनकर

किशोरी रविंद्र अमोनकर को १९८६ में भारत सरकार ने कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया था। ये महाराष्ट्र राज्य से हैं। श्रेणी:१९८६ पद्म भूषण.

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किंगडम ऑफ ड्रीम्स

किंगडम ऑफ ड्रीम्स, ग्रेट इंडिया नौटंकी कंपनी जो कि विज़क्राफ्ट इंटरनेशनल एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड और अपरा ग्रुप ऑफ कम्पनीज़ का एक संयुक्त उद्यम है, द्वारा स्थापित और संचालित एक गीत-नाट्य रंगमंच (ओपेरा थियेटर) है। किंगडम ऑफ ड्रीम्स का उद्घाटन हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने २९ जनवरी २०१० को किया था। ग्रेट इंडिया नौटंकी कंपनी की स्थापना भारत में मनोरंजन के परिदृश्य में उपस्थित खालीपन को भरने के साथ ही इसके द्वारा दुनिया भर में भारतीय संस्कृति और कला को बढ़ावा देने के लिए और भारतीयों को विश्व स्तर का उत्कृष्ट मनोरंजन प्रदान करने के लिए की गयी है। किंगडम ऑफ ड्रीम्स, भारत के राज्य हरियाणा के शहर गुड़गांव के सेक्टर २९ में स्थित है। .

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कुदुवायूर शिवराम नारायण स्वामी

कुदुवायूर शिवराम नारायण स्वामी को सन १९७७ में भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये महाराष्ट्र से हैं। .

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कुमार भास्कर वर्मा संस्कृत एवं पुरातन अध्ययन विश्वविद्यालय

श्री कुमार भास्कर वर्मा संस्कृत एवं पुरातन अध्ययन विश्वविद्यालय असम के नलबाडी में स्थित एक संस्कृत विश्वविद्यालय है। इसकी स्थापना २०११ में हुई थी। इसकी स्थापना का मुख्य उद्देश्य संस्कृत भाषा एवं कामरूप के इतिहास का अध्ययन करना है। इसके अलावा इसमें कला, मानविकी एवं व्यावसायिक पाठ्यक्रम भी संचालित हैं। .

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कुमार गंधर्व

कुमार गंधर्व के नाम से प्रसिद्ध शिवपुत्र सिद्धराम कोमकाली को सन १९७७ में भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। वह मध्य प्रदेश से हैं। .

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कृष्णाराव शंकर पंडित

कृष्णाराव शंकर पंडित को कला के क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा सन १९७३ में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये मध्य प्रदेश से हैं। श्रेणी:१९७३ पद्म भूषण.

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कृष्णाराव गणेश फुलंबरीकर

कृष्णाराव गणेश फुलंबरीकर को कला के क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा, सन १९७१ में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये महाराष्ट्र राज्य से हैं। श्रेणी:१९७१ पद्म भूषण.

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के शंकर पिल्लई

के शंकर पिल्लई (मलयालम: കെ ശങ്കര് പിള്ള.) (1902-31 जुलाई 1989 26 दिसंबर), बेहतर शंकर के रूप में जाना, एक भारतीय कार्टूनिस्ट था। उन्होंने भारत में राजनीतिक cartooning के पिता के रूप में माना जाता है। उन्होंने 1948 में शंकर वीकली, भारत पंच स्थापना, Utara भी अबू अब्राहम, रंगा और कुट्टी तरह कार्टूनिस्टों उत्पादित, वह नीचे 1975 में पत्रिका बंद होने के कारण इमरजेंसी को फिर पर वह बच्चों के काम पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित.

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के जी सुब्रह्मण्यम

के जी सुब्रह्मण्यम को भारत सरकार द्वारा सन २००६ में कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये पश्चिम बंगाल से हैं। .

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के के बिड़ला फाउंडेशन

के के बिड़ला फाउंडेशन की स्थापना सन् १९९१ में कृष्णकुमार बिड़ला ने की थी। इसका उद्देश्य साहित्य (विशेष रूप से हिन्दी साहित्य) और कलाओं के विकास को प्रोत्साहित करना है। इसके साथ ही यह शिक्षा एवं सामाजिक कार्य के क्षेत्र में भी काम करता है। इस फाउन्डेशन द्वारा कई पुरस्कार प्रदान किये जाते हैं जिसमें से प्रमुख हैं-.

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केरल की लोक क्रीड़ाएँ

केरल की ग्रामीण संस्कृति के प्रतिरूप हैं लोक क्रीडाएँ। केरल के आचार कला, साहित्य, जाति - व्यवस्था इत्यादि से ये लोक क्रीडाएँ जुडी हुई हैं। लोक क्रीडाओं का लक्ष्य विजयी का चयन करना मात्र नहीं था, इनमें गान, नृत्य, पुराकथा संदर्भों का स्मरण, सहभागिता सभी भाव अन्तर्निहित थे। इस कारण बहुत सी लोक क्रीडाएँ ऐसी होती है जिनमें कोई भी विजयी नहीं माना जाता है। राष्ट्रीय लक्ष्यों को सिद्ध करने के लिए भी लोक क्रीडा आयोजित की जाती थीं। इसका एक उदाहरण है मुर्गों की लडाई। मध्यकालीन केरल में मुर्गा भिंडत से रियासतों के अधिपतियों के बीच के वाद - विवाद का समाधान ढूँढा जाता था। यदि उससे समाधान न होता तो वे 'आळंकम्' याने मानव द्वन्द्व युद्ध के लिए तैयार हो जाते थे। मुर्गों की लडाई आज कल प्रचलित नहीं है। किन्तु 'कोष़िप्पोरू' नामक भिंडत का आयोजन किया जाता है जिसमें मुर्गों को परस्पर लड़ने दिया जाता है, लेकिन किसी को जान नहीं खोनी पड़ती। यह क्रीडा आज भी उत्तरी मलबार में प्रचलित है। .

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केलुचरण महापात्र

गुरु केलुचरण महापात्र (1926-2004) ने ओड़िसीका पुनर्विस्तार किया। ओड़िसी ओड़िसा प्रान्त की एक शास्त्रीय नृत्य शैली है। केलुचरण मोहपात्रा को सन १९८८ में भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये उड़ीसा राज्य से हैं। .

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केशवप्रसाद मिश्र

केशवप्रसाद मिश्र (चैत्र कृष्ण सप्तमी, विक्रम संवत् १९४२ - चैत्र ७, संवत् २००८) शिक्षाविद तथा हिन्दी साहित्यकार थे। .

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केसरबाई केरकर

केसरबाई केरकर को कला क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा सन १९६९ में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये महाराष्ट्र से हैं। केरकर, केसरबाई.

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के॰ जे॰ येशुदास

के.

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कोनिडाला चिरंजीवी

कोनिडाला चिरंजीवी को भारत सरकार द्वारा सन २००६ में कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये आंध्र प्रदेश से हैं। .

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कोमल कोठारी

कोमल कोठारी (१९२९ -- २००४) या कोमल दा ने लोक कलाओं को संरक्षित करने में अपूर्व योगदान दिया था। उन्होने राजस्थान की लोक कलाओं, लोक संगीत और वाद्यों के संरक्षण, लुप्त हो रही कलाओं की खोज आदि के लिए बोरूंदा में रूपायन संस्था की स्थापना की थी। भारत सरकार द्वारा सन २००४ में उन्हें कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। .

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कोजो (प्रोग्रामन भाषा)

कोजो (Kojo) एक प्रोग्रामन तथा अधिगम (learning) का मुक्त स्रोत सॉफ्टवेयर है। इसमें ऐसी सुविधाएं हैं जिससे खेलने, खोजने, सृजन करने और सीखने में मदद मिलती है। इससे कम्प्यूटर प्रोग्रामन, मानसिक कौशल, गणित, ग्राफिक्स, कला, संगीत, विज्ञान, एनिमेशन, खेल और इलेक्ट्रॉनिकी सीखने में मदद मिलती है। कोजो भाषा ने लोगो (Logo) और प्रोसेसिंग (Processing) भाषाओं से कई विचार ग्रहण किये हैं। कोजो मुक्तस्रोत सॉफ्टवेयर है। इसका विकास देहरादून के कम्प्यूटर प्रोग्रामर तथा अध्यापक ललित पन्त ने किया है। कोजो एक आईडीई (IDE) भी है। .

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कोवलम नारायण पणिकर

कोवलम नारायण पणिकर (28.04.1928- 26.06.2016), केरल से कवि, नाटककार, रंगमंच निर्देशक, गीतकार थे। उन्होने लगभग 25 से अधिक नाटकों का लेखन किया। जिनमें से बहुत सारे नाटक संस्कृत से मलयालम में अनुकूलित किए गये थे। उन्हें सन २००७ में भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। वे केरल से थे। केरल के राज्य फिल्म पुरस्कार से उन्हें दो बार वर्ष 1978 एवं 1982 में सर्वश्रेष्ठ गीत के लिए सम्मानित किया गया था। 26 जून, 2016 को 88 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। .

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कोंगर जगैया

कोंगर जगैया भारत सरकार ने १९९२ में कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया था। ये तमिलनाडु से हैं। श्रेणी:१९९२ पद्म भूषण.

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अटल बिहारी वाजपेयी हिन्दी विश्वविद्यालय

अटल बि‍हारी वाजपेयी हि‍न्‍दी वि‍श्‍ववि‍द्यालय भोपाल में स्थित एक विश्वविद्यालय है। 6 जून 2013 में भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी ने इसकी की आधारशि‍ला रखी। यह विश्वविद्यालय तकनीकी, चिकित्सा, कला और वाणिज्य से जुड़े विषयों की शिक्षा प्रदान करेगा। मध्यप्रदेश और भारतवासियों के स्वभाषा और सुभाषा के माध्यम से ज्ञान की परम्परागत और आधुनिक विधाओं में शिक्षण-प्रशिक्षण की व्यवस्था और हिन्दी को गौरवपूर्ण स्थान दिलाने के लिये मध्य प्रदेश सरकार द्वारा इसकी स्थापना 19 दिसम्बर 2011 को की गयी। भारत के पूर्व प्रधानमन्त्री अटल बिहारी वाजपेयी राष्ट्रभाषा हिन्दी के प्रबल पक्षधर रहे हैं। इसीलिये इस विश्वविद्यालय का नाम उनके नाम पर रखा गया। भोपाल चूँकि भारतवर्ष के केन्द्र में स्थित है अत: इस विश्वविद्यालय को वहाँ स्थापित किया गया। इस विश्वविद्यालय का प्रमुख उद्देश्य हिन्दी भाषा को अध्यापन, प्रशिक्षण, ज्ञान की वृद्धि और प्रसार के लिये तथा विज्ञान, साहित्य, कला और अन्य विधाओं में उच्चस्तरीय गवेषणा हेतु शिक्षण का माध्यम बनाना है। यह विश्वविद्यालय मध्य प्रदेश में हिन्दी माध्यम से ज्ञान के सभी अनुशासनों में अध्ययन, अध्यापन एवं शोध कराने वाला प्रथम विश्वविद्यालय है। यहाँ विद्यार्थियों के लिये प्रशिक्षण, प्रमाण‍-‍‍पत्र, पत्रोपाधि, स्नातक, स्नातकोत्तर, एम॰फिल॰, पीएच॰डी॰, डी॰लिट॰ व डी॰एससी॰ जैसे अनेक उपाधि कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। 30 जून 2012 को प्रो॰ मोहनलाल छीपा इस विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलपति नियुक्त किये गये। इससे पूर्व वे महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर के कुलपति थे। भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने 6 जून 2013 को भोपाल के ग्राम मुगालिया कोट में विश्वविद्यालय भवन का शिलान्यास किया। विश्वविद्यालय का भवन 50 एकड़ में बनेगा। अगस्त 2013 से विश्वविद्यालय ने शिक्षण कार्य प्रारम्भ भी कर दिया है। वर्तमान में प्रो.रामदेव भारद्वाज इस विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति हैं दिनांक 8/03/2017 को अंतरराष्ट्रिय महिला दिवस के मौके पर विकिपीडिया की टीम के द्वारा कार्य शाला का आयोजन किया गया। .

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अतियथार्थवाद

मैक्स अर्न्स्ट की रचना - 'द एलिफैण्ट सेलिबिस' (सन् १९२१) अतियथार्थवाद (सर्रियलिज्म / Surrealism), कला और साहित्य के क्षेत्र में प्रथम महायुद्ध के लगभग प्रचलित होने वाली शैली और आंदोलन था। चित्रण और मूर्तिकला में तो (चित्रपट के चित्रों में भी) यह आधुनिकतम शैली और तकनीक हैं। इसके प्रचारकों और कलाकारों में चिरिको, दालों, मोरो, आर्प, ब्रेतों, मासं आदि प्रधान हैं। कला में इस सृष्टि का दार्शनिक निरूपण 1924 में आंद्रे ब्रेतों ने अपनी अतियथार्थवादी घोषणा (सर्रियलिस्ट मैनिफेस्टो) में किया। अतियथार्थवाद कला की, सामाजिक यथार्थवाद के अतिरिक्त, नवीनतम शैली है और इधर, मनोविज्ञान की प्रगति से प्रभावित, प्रभूत लोकप्रिय हुई है। .

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अनुवाद

किसी भाषा में कही या लिखी गयी बात का किसी दूसरी भाषा में सार्थक परिवर्तन अनुवाद (Translation) कहलाता है। अनुवाद का कार्य बहुत पुराने समय से होता आया है। संस्कृत में 'अनुवाद' शब्द का उपयोग शिष्य द्वारा गुरु की बात के दुहराए जाने, पुनः कथन, समर्थन के लिए प्रयुक्त कथन, आवृत्ति जैसे कई संदर्भों में किया गया है। संस्कृत के ’वद्‘ धातु से ’अनुवाद‘ शब्द का निर्माण हुआ है। ’वद्‘ का अर्थ है बोलना। ’वद्‘ धातु में 'अ' प्रत्यय जोड़ देने पर भाववाचक संज्ञा में इसका परिवर्तित रूप है 'वाद' जिसका अर्थ है- 'कहने की क्रिया' या 'कही हुई बात'। 'वाद' में 'अनु' उपसर्ग उपसर्ग जोड़कर 'अनुवाद' शब्द बना है, जिसका अर्थ है, प्राप्त कथन को पुनः कहना। इसका प्रयोग पहली बार मोनियर विलियम्स ने अँग्रेजी शब्द टांंसलेशन (translation) के पर्याय के रूप में किया। इसके बाद ही 'अनुवाद' शब्द का प्रयोग एक भाषा में किसी के द्वारा प्रस्तुत की गई सामग्री की दूसरी भाषा में पुनः प्रस्तुति के संदर्भ में किया गया। वास्तव में अनुवाद भाषा के इन्द्रधनुषी रूप की पहचान का समर्थतम मार्ग है। अनुवाद की अनिवार्यता को किसी भाषा की समृद्धि का शोर मचा कर टाला नहीं जा सकता और न अनुवाद की बहुकोणीय उपयोगिता से इन्कार किया जा सकता है। ज्त्।छैस्।ज्प्व्छ के पर्यायस्वरूप ’अनुवाद‘ शब्द का स्वीकृत अर्थ है, एक भाषा की विचार सामग्री को दूसरी भाषा में पहुँचना। अनुवाद के लिए हिंदी में 'उल्था' का प्रचलन भी है।अँग्रेजी में TRANSLATION के साथ ही TRANSCRIPTION का प्रचलन भी है, जिसे हिंदी में 'लिप्यन्तरण' कहा जाता है। अनुवाद और लिप्यंतरण का अंतर इस उदाहरण से स्पष्ट है- इससे स्पष्ट है कि 'अनुवाद' में हिंदी वाक्य को अँग्रेजी में प्रस्तुत किया गया है जबकि लिप्यंतरण में नागरी लिपि में लिखी गयी बात को मात्र रोमन लिपि में रख दिया गया है। अनुवाद के लिए 'भाषांतर' और 'रूपांतर' का प्रयोग भी किया जाता रहा है। लेकिन अब इन दोनों ही शब्दों के नए अर्थ और उपयोग प्रचलित हैं। 'भाषांतर' और 'रूपांतर' का प्रयोग अँग्रेजी के INTERPRETATION शब्द के पर्याय-स्वरूप होता है, जिसका अर्थ है दो व्यक्तियों के बीच भाषिक संपर्क स्थापित करना। कन्नडभाषी व्यक्ति और असमियाभाषी व्यक्ति के बीच की भाषिक दूरी को भाषांतरण के द्वारा ही दूर किया जाता है। 'रूपांतर' शब्द इन दिनों प्रायः किसी एक विधा की रचना की अन्य विधा में प्रस्तुति के लिए प्रयुक्त है। जैस, प्रेमचन्द के उपन्यास 'गोदान' का रूपांतरण 'होरी' नाटक के रूप में किया गया है। किसी भाषा में अभिव्यक्त विचारों को दूसरी भाषा में यथावत् प्रस्तुत करना अनुवाद है। इस विशेष अर्थ में ही 'अनुवाद' शब्द का अभिप्राय सुनिश्चित है। जिस भाषा से अनुवाद किया जाता है, वह मूलभाषा या स्रोतभाषा है। उससे जिस नई भाषा में अनुवाद करना है, वह 'प्रस्तुत भाषा' या 'लक्ष्य भाषा' है। इस तरह, स्रोत भाषा में प्रस्तुत भाव या विचार को बिना किसी परिवर्तन के लक्ष्यभाषा में प्रस्तुत करना ही अनुवाद है।ज .

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अन्नपूर्णा देवी

---- अन्नपूर्णा देवी (जन्म: २३ अप्रैल, १९२७) भारत की एक प्रमुख संगीतकार हैं। वे अलाउद्दीन खान की बेटी और शिष्या हैं। उनको को सन १९७७ में भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये उत्तर प्रदेश से हैं। १९४१ से १९६२ तक उनका विवाह पण्डित रवि शंकर से हुआ था जो स्वयं उनके पिता के शिष्य थे। विवाह-विच्छेद के पश्चात उन्होने सार्वजनिक रूप से कभी भी अपने संगीत का प्रदर्शन नहीं किया, मुम्बई आकर वे वहाँ शिक्षण कार्य करने लगीं। उनके प्रमुख शिष्य हैं-हरिप्रसाद चौरसिया, निखिल बनर्जी, अमित भट्टाचार्य, प्रदीप बरोत, सरस्वती शाह (सितार)। .

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अब्दुल हलीम जाफ़र खान

अब्दुल हलीम जाफ़र खान को भारत सरकार द्वारा सन २००६ में कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये महाराष्ट्र से हैं। .

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अमरनाथ सहगल

अमरनाथ सहगल को सन २००८ में भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में सहगल, अमरनाथ श्रेणी:चित्र जोड़ें stub.

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अमिताभ बच्चन

अमिताभ बच्चन (जन्म-११ अक्टूबर, १९४२) बॉलीवुड के सबसे लोकप्रिय अभिनेता हैं। १९७० के दशक के दौरान उन्होंने बड़ी लोकप्रियता प्राप्त की और तब से भारतीय सिनेमा के इतिहास में सबसे प्रमुख व्यक्तित्व बन गए हैं। बच्चन ने अपने करियर में कई पुरस्कार जीते हैं, जिनमें तीन राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार और बारह फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार शामिल हैं। उनके नाम सर्वाधिक सर्वश्रेष्ठ अभिनेता फ़िल्मफेयर अवार्ड का रिकार्ड है। अभिनय के अलावा बच्चन ने पार्श्वगायक, फ़िल्म निर्माता और टीवी प्रस्तोता और भारतीय संसद के एक निर्वाचित सदस्य के रूप में १९८४ से १९८७ तक भूमिका की हैं। इन्होंने प्रसिद्द टी.वी.

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अमजद अली ख़ान

अमजद अली खान एक प्रसिद्ध सरोद वादक हैं जिनको भारत सरकार द्वारा सन १९९१ में कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया था। ये दिल्ली से हैं। .

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अम्मानूर माधव चक्यार

अम्मानूर माधव चक्यार को सन २००३ में भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया था। ये केरल राज्य से हैं। श्रेणी:२००३ पद्म भूषण श्रेणी:चित्र जोड़ें.

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अरस्तु का विरेचन सिद्धांत

विरेचन सिद्धांत (Catharsis / कैथार्सिस) द्वारा अरस्तु ने प्रतिपादित किया कि कला और साहित्य के द्वारा हमारे दूषित मनोविकारों का उचित रूप से विरेचन हो जाता है। सफल त्रासदी विरेचन द्वारा करुणा और त्रास के भावों को उद्बुद करती है, उनका सामंजन करती है और इस प्रकार आनंद की भूमिका प्रस्तुत करती है। विरेचन से भावात्मक विश्रांति ही नहीं होती, भावात्मक परिष्कार भी होता है। इस तरह अरस्तु ने कला और काव्य को प्रशंसनीय, ग्राह्य और सायास रक्षनीय सिद्ध किया है। अरस्तु ने इस सिद्धांत के द्वारा कला और काव्य की महत्ता को पुनर्प्रतिष्ठित करने का सफल प्रयास किया। अरस्तु के गुरु प्लेटो ने कवियों और कलाकारों को अपने आदर्श राज्य के बाहर रखने की सिफारिश की थी। उनका मानना था कि काव्य हमारी वासनाओं को पोषित करने और भड़काने में सहायक है इसलिए निंदनीय और त्याज्य है। धार्मिक और उच्च कोटि का नैतिक साहित्य इसका अपवाद है किंतु अधिकांश साहित्य इस आदर्श श्रेणी में नहीं आता है। विरेचन सिद्धान्त का महत्त्व बहुविध है। प्रथम तो यह है कि उसने प्लेटो द्वारा काव्य पर लगाए गए आक्षेप का निराकरण किया और दूसरा यह कि उसने गत कितने ही वर्षों के काव्यशास्त्रीय चिन्तन को किसी-न-किसी रूप में अवश्य ही प्रभावित किया। .

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अरस्तु का अनुकरण सिद्धांत

अरस्तु का अनुकरण सिद्धांत एक स्तर पर प्लेटो का अनुकरण सिद्धांत की प्रतिक्रिया है और दूसरे स्तर पर उसका विकास भी। महान दार्शनिक प्लेटो ने कला और काव्य को सत्य से तिहरी दूरी पर कहकर उसका महत्व बहुत कम कर दिया था। उसके शिष्य अरस्तु ने अनुकरण में पुनर्रचना का समावेश किया। उनके अनुसार अनुकरण हूबहू नकल नहीं है बल्कि पुनः प्रस्तुतिकरण है जिसमें पुनर्रचना भी शामिल होती है। अनुकरण के द्वारा कलाकार सार्वभौम को पहचानकर उसे सरल तथा इन्द्रीय रूप से पुनः रूपागत करने का प्रयत्न करता है। कवि प्रतियमान संभाव्य अथवा आदर्श तीनों में से किसी का भी अनुकरण करने के लिये स्वतंत्र है। वह संवेदना, ज्ञान, कल्पना, आदर्श आदि द्वारा अपूर्ण को पूर्ण बनाता है। .

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अर्थशास्त्र

---- विश्व के विभिन्न देशों की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर (सन २०१४) अर्थशास्त्र सामाजिक विज्ञान की वह शाखा है, जिसके अन्तर्गत वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन, वितरण, विनिमय और उपभोग का अध्ययन किया जाता है। 'अर्थशास्त्र' शब्द संस्कृत शब्दों अर्थ (धन) और शास्त्र की संधि से बना है, जिसका शाब्दिक अर्थ है - 'धन का अध्ययन'। किसी विषय के संबंध में मनुष्यों के कार्यो के क्रमबद्ध ज्ञान को उस विषय का शास्त्र कहते हैं, इसलिए अर्थशास्त्र में मनुष्यों के अर्थसंबंधी कायों का क्रमबद्ध ज्ञान होना आवश्यक है। अर्थशास्त्र का प्रयोग यह समझने के लिये भी किया जाता है कि अर्थव्यवस्था किस तरह से कार्य करती है और समाज में विभिन्न वर्गों का आर्थिक सम्बन्ध कैसा है। अर्थशास्त्रीय विवेचना का प्रयोग समाज से सम्बन्धित विभिन्न क्षेत्रों में किया जाता है, जैसे:- अपराध, शिक्षा, परिवार, स्वास्थ्य, कानून, राजनीति, धर्म, सामाजिक संस्थान और युद्ध इत्यदि। प्रो.

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अरैकुडी रामानुज अयंगार

अरैकुडी रामानुज अयंगार को कला के क्षेत्र में सन १९५८ में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये तमिलनाडु राज्य से हैं। श्रेणी:१९५८ पद्म भूषण श्रेणी:चित्र जोड़ें.

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अल-मुस्तसिरीया विश्वविद्यालय

अल-मुस्तसिरीया विश्वविद्यालय (अरबी: الجامعة المستنصرية) इराक के बगदाद में एक विश्वविद्यालय है। मूल मस्तानिरिया मदरसा, 1227 ईस्वी में स्थापित किया गया था जिसे अब्बासिद खलीफ अल-मुस्तसिरं ने बनबाया था ये दुनिया के सबसे पुराने विश्वविद्यालयों में से एक है। .

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अलारमेल वल्ली

अलारमेल वल्ली को भारत सरकार द्वारा सन २००४ में कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये तमिलनाडु राज्य से हैं। वल्ली, अलारमेल श्रेणी:चित्र जोड़ें.

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अल्पना मिश्र

अल्पना मिश्र हिंदी कथा साहित्य की प्रमुख हस्ताक्षर हैं। उनकी पहली कहानी 'ऐ अहिल्या ' 'हंस' पत्रिका के अक्तूबर १९९६ अंक में प्रकाशित हुई थी। उनकी भाषा की ताज़गी, विलक्षणता और साथ ही लोक रंग की उपस्थिति उनकी भाषा को सबसे अलग पहचान देती है। विशिष्ट शिल्प प्रयोगों तथा गहरे सामाजिक सरोकारों के कारण अल्पना मिश्र ने हिंदी कथा जगत को नई ऊँचाई दी है। उन्हें हिंदी का ' अनकन्वेंशनल राईटर' माना जाता है। उनकी प्रसिद्द कहानियों में 'उपस्थिति',' 'मुक्ति प्रसंग', ' मिड डे मील', 'कथा के गैर जरूरी प्रदेश में', 'बेदखल',' इस जहाँ में हम','स्याही में सुरखाब के पंख' 'गैर हाजिरी में हाज़िर' आदि हैं। उनकी लिखी 'छावनी में बेघर' कहानी हिंदी कथा जगत में सैन्य जीवन पर लिखी लगभग अकेली कहानी है जो बेहतरीन तरीके से सैनिक जीवन का परिचय कराती है। गया है। उनके कहानी संग्रह: भीतर का वक्त्त,छावनी में बेघर, कब्र भी कैद औ जंजीरे भी,' स्याही में सुरखाब के पंख', के साथ ही उपन्यास:'अन्हियारे तलछट में चमका' पाठकों के बीच में अपना महत्वपूर्ण स्थान बना चुके हैं। वह हिंदी की महान लेखकों में से एक है और उन्होंने हिन्दी के कला क्षेत्र को और खूबसूरत बनाने में अपना अच्छा योगदान दिया हैं। उनकी कहानियो का अनेक भारतीय और विदेशी भाषाओँ में अनुवाद हो चुका है। उन्हें अनेक सम्मानों से भी सम्मानित किआ गया। .

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अल्बर्ट हॉल संग्रहालय

अल्बर्ट हॉल संग्रहालय (अंग्रेजी:Albert Hall Museum) भारत के राजस्थान राज्य के जयपुर ज़िले में स्थित एक संग्रहालय है। यह राजस्थान का सबसे पुराना संग्रहालय है। यह संग्रहालय "राम निवास उद्यान" के बाहरी ओर सीटी वॉल के नये द्वार के सामने है। यह "भारत-अरबी शैली" में बनाई गयी एक बिल्डिंग है। इसकी डिजाइन सर सैम्युल स्विंटन जैकब ने की थी तथा यह पब्लिक संग्रहालय के रूप में 1887 में खुला था। .

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अश्‍लील ग्रंथ

जीन अगीलू (Jean Agélou) विरचित फर्नांडी (1910–1917) कला, साहित्य, फोटोग्राफी, फिल्म, मूर्तिकला, चित्रकला आदि का वह रूप जो कामोत्तेजक हों, अश्लील साहित्य या इरोटिका (Erotica) कहलाते हैं। वर्तमान काल में यह मानव-शरीर-रचना एवं कामुकता का उच्च कला के माध्यम से निरूपण है। इस मामले में यह 'पोर्नोग्राफी' से भिन्न है। .

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अशोक आत्रेय

अशोक आत्रेय बहुमुखी प्रतिभा के संस्कृतिकर्मी सातवें दशक के जाने माने वरिष्ठ हिन्दी-कथाकार और (सेवानिवृत्त) पत्रकार हैं | मूलतः कहानीकार होने के अलावा यह कवि, चित्रकार, कला-समीक्षक, रंगकर्मी-निर्देशक, नाटककार, फिल्म-निर्माता, उपन्यासकार और स्तम्भ-लेखक भी हें| .

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अशोक कुमार (अभिनेता)

अशोक कुमार (অশোক কুমার; १३ अक्टूबर १९११, भागलपुर, कुमुद कुमार गांगुली - १० दिसम्बर २००१, मुंबई) हिन्दी फ़िल्मों के एक अभिनेता थे। सन् १९९९ में भारत सरकार ने उन्हें कला के क्षेत्र में उनके योगदानों के लिए पद्म भूषण से सम्मानित किया। ये महाराष्ट्र राज्य से थे। .

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असद अली खान

असद अली खान को सन २००८ में भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया था। ये दिल्ली से हैं। खान, असद अली श्रेणी:1937 में जन्मे लोग श्रेणी:जीवित लोग.

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अहमद जान थिरकवा खान

अहमद जान थिरकवा खान को कला के क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा सन १९७० में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये उत्तर प्रदेश राज्य से हैं। खान, अहमद जान थिरकवा.

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अंतोनियो ग्राम्शी

अंतोनियो ग्राम्शी (१८९१- १९३७) इटली की कम्युनिस्ट पार्टी के संस्थापक, मार्क्सवाद के सिद्धांतकार तथा प्रचारक थे। बीसवीं सदी के आरंभिक चार दशकों के दौरान दक्षिणपंथी फ़ासीवादी विचारधारा से जूझने और साम्यवाद की पक्षधरता के लिए विख्यात हैं। .

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अक्किनेनी नागेश्वर राव

अक्किनेनी नागेश्वर राव (प्रचलित नाम एएनआर 20 सितम्बर 1923 – 22 जनवरी 2014) मुख्य रूप से तेलुगू सिनेमा में काम करने वाले भारतीय फ़िल्म अभिनेता एवं निर्माता थे। उन्हें मुख्यतः उनके नायिका के अभिनय के लिए जाना जाता था क्योंकि उस समय महिलाओं का फ़िल्मों में अभिनय करना निषिद्ध था। उन्हें भारतीय सिनेमा में उनके योगदान के लिए सन् १९८८ में भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। .

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अकेलापन

अकेलापन एक ऐसी भावना है जिसमें लोग बहुत तीव्रता से खालीपन और एकान्त का अनुभव करते हैं। अकेलेपन की तुलना अक्सर खाली, अवांछित और महत्वहीन महसूस करने से की जाती है। अकेले व्यक्ति को मजबूत पारस्परिक संबंध बनाने में कठिनाई होती है। "अकेला" शब्द का पहले पहल दर्ज उपयोग विलियम शेक्सपियर की कॉरिओलेनस में मिलता है, "Though I go alone, like a lonely dragon..." .

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उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, लखनऊ

उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, लखनऊ का भवन उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, हिन्दी के प्रचार प्रसार के लिये कार्यरत प्रमुख संस्था है। यह उत्तर प्रदेश शासन के भाषा विभाग के अधीन है। अन्य कार्यक्रमों के अलावा हिन्दी के प्रचार प्रसार हेतु विभिन्न क्षेत्रों में योगदान के लिये साहित्यकारों को यह कई पुरस्कार भी प्रदान करती है। प्रदेश का मुख्य मन्त्री इसका पदेन अध्यक्ष होता है। वही कार्यकारी अध्यक्ष व निदेशक की नियुक्ति करता है। .

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उत्तर आधुनिकतावाद

उत्तर आधुनिकतावाद (Postmodernism) २०वीं शताब्दी के दूसरे भाग में दर्शनशास्त्र, कला, वास्तुशास्त्र और आलोचना के क्षेत्रों में फैला एक सांस्कृतिक आंदोलन था जिसने अपने से पहले प्रचलित आधुनिकतावाद को चुनौती दी और सांस्कृतिक वातावरण बदल डाला। इस नई विचारशैली में विचारधाराओं, एक निर्धारित दिशा वाले सामाजिक विकास और वस्तुनिष्ठावाद के विरुद्ध, और संशयवाद, व्यक्तिपरकता (subjectivity) और व्यंगोक्ति की ओर रुझान प्रचलित हो गया। .

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उदय प्रताप कॉलिज

उदय प्रताप कॉलेज वाराणसी शहर में स्थित यूजीसी का एक स्वायत्त महाविद्यालय है। इस कॉलेज की स्थापना १९०९ में राजर्षि उदय प्रताप सिंह ने की थी। आरंभ में इसे एक हाई स्कूल के रूप में चलाया गया था, किन्तु १९४९ से इसे स्नातकोत्तर महाविद्यालय बनाया ग्या और कॉलिज डिग्रियाँ भी देने लगा। यहाँ कला, मानविकी, विज्ञान एवं प्रबंधन से संबंधित विषय और पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। .

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उबुद

उबुद का सरस्वती मंदिर उबुद (Ubud), display.

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उमयलपुरम काशीविश्वनाथ शिवरमण

उमयलपुरम काशीविश्वनाथ शिवरमण को सन २००३ में भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया था। ये तमिलनाडु राज्य से हैं। श्रेणी:२००३ पद्म भूषण.

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उमा शर्मा

उमा शर्मा को सन २००१ में भारत सरकार ने कला क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया था। ये दिल्ली से हैं। श्रेणी:२००१ पद्म भूषण.

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उस्ताद नसीर अमीनुद्दीन डागर

उस्ताद नसीर अमीनुद्दीन डागर को भारत सरकार ने कला के क्षेत्र में सन १९८६ में पद्म भूषण से सम्मानित किया था। ये पश्चिम बंगाल से हैं। श्रेणी:पद्म भूषण.

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उस्ताद मुश्ताक हुसैन खान

उस्ताद मुश्ताक हुसैन खान को कला के क्षेत्र में सन १९५७ में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। ये मध्य प्रदेश राज्य से हैं। श्रेणी:१९५७ पद्म भूषण.

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उस्ताद हाफिज़ अली खाँ

उस्ताद हाफिज़ अली खाँ को कला के क्षेत्र में सन १९६० में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये मध्य प्रदेश राज्य से थे। श्रेणी:१९६० पद्म भूषण.

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उस्ताद खादिम हुसैन खां

उस्ताद खादिम हुसैन खां को भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में सन १९८२ में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये महाराष्ट्र से हैं। श्रेणी:१९८२ पद्म भूषण.

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उस्ताद अमीर खान

उस्ताद अमीर खान को कला के क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा, सन १९७१ में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये मध्य प्रदेश राज्य से हैं। श्रेणी:१९७१ पद्म भूषण श्रेणी:1912 में जन्मे लोग श्रेणी:१९७४ में निधन.

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उस्ताद अलाउद्दीन खान

उस्ताद अलाउद्दीन खान उस्ताद अलाउद्दीन खाँ (1862-6सितम्बर 1972) एक बहुप्रसिद्ध सरोद वादक थे साथ ही अन्य वाद्य यंत्रों को बजाने में भी पारंगत थे। वह एक अतुलनीय संगीतकार और बीसवीं सदी के सबसे महान संगीत शिक्षकों में से एक माने जाते हैं। सन् 1935 में पंडित उदय शंकर के बैले समूह के साथ खाँ साहब ने यूरोप का दौरा किया और इसके बाद काफी लंबे समय तक उत्तराखंड के अल्मोड़ा मे स्थित 'उदय शंकर इण्डिया कल्चर सेंटर' से भी जुड़े रहे। अपने जीनन काल में उन्होंने कई रागों की रचना की और विश्व संगीत जगत में विख्यात मैहर घराने की नींव रखी। उनकी सबसे खास रिकॉर्डिंग्स में से ऑल इण्डिया रेडियोके साथ 1950-60 के दशक में की गई उनकी रिकॉर्डिंग सबसे अधिक प्रसिद्ध हैं। अलाउद्दीन खाँ साहब मशहूर सरोद वादक अली अकबर खाँ और अन्नपूर्णा देवी के पिता हैं, साथ ही राजा हुसैन खाँ के चाचा भी। इतना ही नहीं बाबा अलाउद्दीन खाँ पंडित रवि शंकर, निखिल बनर्जी, पन्नालाल घोष, वसंत राय, बहादुर राय आदि सफल संगीतकारों के गुरु भी रहे। उन्होंने स्वयं गोपाल चंद्र बनर्जी, लोलो और मुन्ने खाँ जैसे संगीत के महारथियों से संगीत की दीक्षा ली। इतना ही नहीं उन्होंने कड़ी मेहनत के बाद मशहूर वीणावादक रामपुर के वज़ीर खाँ साहब से भी संगीत के गुर सीखे। उसताद अलाउद्दीन खान को कला के क्षेत्र में सन १९५८ में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। इससे पहले उन्हें साल 1954 में संगीत नाट्य अकादमी ने अपने सबसे बड़े सम्मान 'संगीत नाट्य अकादमी फैलोशिप ' से नवाज़ा। ये उत्तर प्रदेश राज्य से हैं। .

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छायाचित्र

किसी भौतिक वस्तु से निकलने वाले विकिरण को किसी संवेदनशील माध्यम (जैसे फोटोग्राफी की फिल्म, एलेक्ट्रानिक सेंसर आदि) के उपर रेकार्ड करके जब कोई स्थिर या चलायमान छबि (तस्वीर) बनायी जाती है तो उसे छायाचित्र (फोटोग्रफ) कहते हैं। छायाचित्रण (फोटोग्राफी) की प्रकिया कुछ सीमा तक कला भी है। इस कार्य के लिये यो युक्ति प्रयोग की जाती है उसे कैमरा कहते हैं। व्यापार, विज्ञान, कला एवं मनोरंजन आदि में छायाचित्रकारी के बहुत से उपयोग हैं। thumb SLR. Nikon F of 1959 — the first 35mm film system camera. Late Production Minox B camera with later style "honeycomb" selenium light meter .

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४चैन

४चैन ४चैन एक अंतरजाल-स्थित विचार-विमर्श मंच, जो विश्व के सबसे लोकप्रिय जालस्थलों से एक है। यहाँ पर चर्चा आंग्ल भाषा में होती है, हालांकि विश्वभर के बुद्धिजीवी यहाँ एकत्रित होते हैं। कर्मचारियों के सिवाय यहाँ कोई पंजीकृत सदस्य नहीं है - ४चैन पर बुद्धिजीवी प्रायः अज्ञात नाम से अपने विचार व्यक्त करते हैं। यह विश्व के सबसे अधिक अराजकतावादी और प्रभावशाली जालस्थलों में से एक है। ४चैन की स्थापना वि.

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