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इच्छाशक्ति

सूची इच्छाशक्ति

मनोविज्ञान के सन्दर्भ में इच्छाशक्ति या संकल्प (विल / Will या Volition) वह संज्ञानात्मक प्रक्रम है जिसके द्वारा व्यक्ति किसी कार्य को किसी विधि का अनुसरण करते हुए करने का प्रण करता है। संकल्प मानव की एक प्राथमिक मानसिक क्रिया है। इसके अलावा प्रभावन (affection), अभिप्रेरण (motivation), अभिज्ञान (cognition या thinking) भी मानव के प्राथमिक मानसिक क्रियाएँ हैं। इच्छाशक्ति या संकल्प संदिग्ध अभिधार्थ (अंबीग्युअस कॉनोटेशन) से संबंधित एक विवादास्पद शब्द है। युक्तिमूलक मनोविज्ञान (रेशनल साइकॉलॉजी) में इच्छाशक्ति एक केंद्रीय अवधारणा या प्रत्यय मानी जाती है। आमूल परिवर्तनवादी व्यवहारवाद अथवा आचरणवाद (रैडिकल बिहेवियरिज्म) में इसे सर्वाधिक शक्तिशाली उद्दीपन की संज्ञा दी गई है और दार्शनिक मनोविज्ञान में इसे मानसिक क्षमता बताया गया है। हालाँकि आधुनिक मनोविज्ञान में निर्यातवाद या संकल्पवाद (डिटरमिनिज्म) से महत्वपूर्ण आशय ग्रहण किया जाता है, तो भी अनेक समसामयिक मनोवैज्ञानिक इच्छाशक्ति किंवा संकल्प को मनोविज्ञान के क्षेत्र से बाहर मानते हैं क्योंकि अधुनातन शोध के आधार पर इच्छा नाम की शक्ति का अस्तित्व ही पूरी तरह नकार दिया गया है। इच्छाशक्ति से सम्बन्धित अधिकांश संकल्पनाएँ इच्छाशक्ति को क्रियाओं के एक सुविचारित नियन्त्रण की प्रक्रिया के रूप में समझते हैं और मानते हैं कि बाद में यह स्वतःस्फूर्त (automatized) हो जाती है। श्रेणी:मानसिक प्रक्रम.

2 संबंधों: संकल्प (हिन्दू मान्यता), अभिप्रेरणा

संकल्प (हिन्दू मान्यता)

संकल्प का अर्थ है किसी अच्छी बात को करने का दृढ निश्चय करना। संकल्प शक्ति (Resolution Power) से बढकर दूसरी कोई शक्ति नही होती| स्वामी रामतीर्थ एक कहानी सुनाया करते थे |एक बार चार देविया प्रथ्वी (Earth)पर भ्रमण (Excursion) कर रही थी | अचानक एक संत ने देवीये तेज़ से सम्पन्न उन देवयो को देखा, तो झुककर प्रणाम किया| चारो देवयो के बीच विवाद खड़ा हो गया कि सन्त ने चारो में से किसे प्रणाम किया है | उन्होंने ने सन्त विनम्रता से पूछा महात्मन आपने किसे प्रणाम क्या है| सन्त ने जबाब दिया,एक-एक कर आप अपना परिचय दीजिए | तब बताऊगा की मैंने किसे प्रणाम किया है| तब एक देवी बोली मैं विधाता की देवी हूँ सबका भाग्य लिखती हूँ मेरी खीचीं रेखाये मिटाई नहीं जा सकती | सन्त ने कहा मैंने आपको प्रणाम नही किया है| दूसरी देवी ने कहा मैं बुद्धि की देवी हूँ विवेक की स्वामिनी हूँ | सन्त ने कहा मैं जानता हूँ कि बुद्धि भ्रष्ट होते देर नही लगती है| कई बार मानव धनवान बन जाने के बाद अहंकार के वशीभूत होकर बुद्धि से काम लेना बन्द कर देता है| इसलिये मैं आपको प्रणाम क्यों करता| तीसरी देवी ने बताया मैं लक्ष्मी हूँ मनुष्य को धन-धान्ये से भरपूर कर देती हूँ | सन्त बोले मैं जानता हूँ कि धन –सम्पति क्षणिक होती है असीमित धन मिलते ही मानव अहंकार में भरकर विवेक खो बैठता है| इसलिये मैंने आपको भी प्रणाम नही किया| चौथीदेवी ने कहाँ महात्मन मैं संकल्प शक्ति की देवी हूँ मुझे धारण करने वाले के लिये कोई भी कार्य असंभव नही होता है |ये सुनकर सन्त उनके चरणों में माथा टेकते हुये कहा निश्चय ही संकल्पशील व्यक्ति के शब्दकोश में असंभव शब्द ही नही होता हैं| संकल्पशील व्यक्ति अपने परिश्रम से ज्ञान,धन प्राप्त कर अपने भाग्य को उज्वल कर सकता हैं इसलिये मैंने आपको ही प्रणाम किया है ये कहानी मेरी तरह आपको भी ज़रूर inspire करेगी .

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अभिप्रेरणा

अभिप्रेरणा लक्ष्य-आधारित व्यवहार का उत्प्रेरण या उर्जाकरण है। अभिप्रेरणा या प्रेरणा आंतरिक या बाह्य हो सकती है। इस शब्द का इस्तेमाल आमतौर पर इंसानों के लिए किया जाता है, लेकिन सैद्धांतिक रूप से, पशुओं के बर्ताव के कारणों की व्याख्या के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। इस आलेख का संदर्भ मानव अभिप्रेरणा है। विभिन्न सिद्धांतों के अनुसार, बुनियादी ज़रूरतों में शारीरिक दुःख-दर्द को कम करने और सुख को अधिकतम बनाने के मूल में अभिप्रेरणा हो सकती है, या इसमें भोजन और आराम जैसी खास ज़रूरतों को शामिल किया जा सकता है; या एक अभिलषित वस्तु, शौक, लक्ष्य, अस्तित्व की दशा, आदर्श, को शामिल किया जा सकता है, या इनसे भी कमतर कारणों जैसे परोपकारिता, नैतिकता, या म्रत्यु संख्या से बचने को भी इसमें आरोपित किया जा सकता है। .

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